Audio Book || "ప్రవక్త" (Telugu translation of Kahlil Gibran's "The Prophet"
Author Name:Venkata Suryanarayana
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Youtube Video URL:https://www.youtube.com/watch?v=7ZG1p3SbofI
Transcript:
(00:03) प्रवक्ता कहलील जिब्रान रासन द प्रोफेट अने पुस्तका की स्वेच्छा अनुवादम अनुव दिच चदन वारु एमवी सूर्यनारायण नौक आगमनम श्रेष्ठ प्रेमा स्पद तन जीवित काल लो अरुण ज्योति वले लगिन अल मुस्तफा तन तन जन्म स्थला चेरचे नाव राक कोसम आर्फ नगरमलो पुष्कर काल रक्ष चाड 12 संवत्सर लो पंट कोतल लूल मासम लो एडो रोजुना ए कट्टल आवरणा लेनी ंड मद केकी समुद्रम दिश चूसी दूराना पग मचलो नंची पव राकन गम
(00:48) निचा अप तनी हृदय कवाल तेच कोनी आनंद उत्साहा समुद्रम लोनिक वेता अतन क मूसक निशब्दा अंतरंग प्रार्थना कोंड दिग तो ने मनसु व्याकुल मई ई विध आलो चिंचा ए दुखम लकुंडा प्रशांत इक नंची एला डम काद आत्म की गायम काकुंडा इ नगरानी विचि वेलेन इकड़ गोडल मध्य अनुभव वेदन तो पगलु ंटर तन तो रात्र सुदीर घंग गड़ चाई इत सुदीरमन वेदन ंची ंट ं परताप पका एवर निष्क्रमण
(01:41) कोंडल चंगु चंगु गंतु वेसे ंदर पिलन वेच वेच मरी चूसी आनंदिनी वीट नंची बरु बाध लेंडा नकी मरली पोलेन इ ंट मद बट्ट टगा काका ना ततो नेने ना चमा लचक बाध ंद ने वदल वेन ज्ञपका काद आकली दल तो माधुर ंदने हृदयाना इला ं कालम लेन अ वस्तु नलो आहवा सागर न पिल ने पव नेपद इक रात्र घंटल की ंट कग पोना ई प्रवासम गड्ड कटिन कोलो नितन पड़ डम वं नातो पाट इं पवा उना एला साध्यम नोट नं
(02:32) वन माट तनक रक्ल पेदल नालन तन पाट न पगल अद रिगा शून्य लो प्रयाण चाल सिंद गद्दा तन टिनी मोस पो कुंडा ने सूर्यन की अभिमुख ंट गाने एरत पो कोंड पादा चेरिन अत मरक सार समुद्रम वंक तिग नौका शया रबोन पवन ा मद अ डागा रगना तन ऊरी नाविक चूसा अंतरात्मा वारी साहिन के घोषि तुगा अतन अना ना मोल पुटम मुद्दू बिडला समुद्र तरंगा प स्वारी चेतू मीर एन्नी सर्ल ना
(03:18) कललो की वरो कानी इ ना जाग्रत वस्लो वास्तविक ममल चूना ना कटलो प्रगा मनद इ उत्साह रचा गालि वाटक ए दुर चू नेन बय देर सिद्ध उन इंका ई स्तंभन लिनी ओ सार पचुनी वन ओसार प्रेम चूसनी नाविक नाविक मी सरसन ं चुन नदी नदाल स्वेन प्रशांत अनुग्रहित गुस गुसला तरवाता एक कट्ट लेनी ई बिंदु अनंत सागर लालन रतु अतन नड बोत अंत दूराना पलम टलो पनु
(04:09) विचि पेटी पुरुषु स्त्री नगर दवार वैप परग कुं राडम गमड पड वन संगति रकर ककल वेसी डम तन पेर बिरगा पिडम अतन विनाड नलो इला अनकड ना महाभिनिष्क्रमण महाजन सम्मेलन दिन मा ना सायम संध वातवा ना लि संध्या नुन नागनी नड मर चक्रा अलाग व दिले परग परगना न चेरु वारिक नेम इव गलन वार अंदर की कोसी पंचे को ना हृदयम फलाल तो निन महा वृक्षम कावा वारी पात्र निंप को ना कोरिकल ट बावला पंगला नेन सृष्टिकर्ता हस्तम मेटो वेना आत
(04:57) ऊपर वेणु ना सदा मौन कां नेन ना मौन लो य निधु संपन निरंग वीर इंदक दिनम ना पं ति ंद अनक क्षेत्र ने सेद चेन गुर्क रानी रलो णा ने ना चेतिलो नि लांतर नेति चूस कुंटे अंद लुनद ना ज्वाल काद खाली निस्तेज दीपानी मात्रे ने तिते निधि पालक दानि चमर तो निंप वेस्ड क वीनी माटल अत पलि काड कानी चेवल सिंद चाला हृदयम लोने उडि पोइ ंद कंटे तन नि गूढ
(05:42) रहस्यालु याड अत नगरमलो प्रवेश गाने प्रजल अंदरू अतन कलसेक वच्ची उद्वेग भरत ओके गंतो अट बिरगा येदो नार नगर पेदल अतन ए दुरगा लब अनार मम न वड़ पोक मा सायम सजलो मिट मध्यान तेज पुंज ला प्रवेश चाव नी यवन उत्साह कनेक माक कलन प्रसाद चिंद माक नीव अपरिचित काव अतिथि काव अत्यंत प्रियतम मा कुमार नी दर्शना तिरस्कर मा कल्क बाध कलग चक इंका अक पजार पजार इला अनार सागर तरंगा मां नि वेर चेय नीव मातो
(06:32) गपन संवत् सरान ज्ञपकालु मार्च वेनिक ओ चैतन्य मूर्ति ला मा मध नचिना नी डलो मा मुखा प्रकाश वंत निन अंतगा प्रेमिम मा प्रेमा निब्द मुसुगुलो नक दाग ंद इना कानी इ वे तुकल तो अद नी कोसम घोषि सुंद आच्छादन नंडी बट्ट बैल नी मु लचंद प्रेमा तन लोत तान तेलस कुने द एड बाट समयम लोने कदा मगता वारु व अत प्रादिर कानी अतन समाधानम लेद तलव चुकनी मात्रे लनाड अतन समीपम नचन वारु अत कन्नीर
(07:19) वक्षस्थल प जाल वारण गमर अप अनि तो कलसी प्रजल अंदरू आलय प्रांगण लो पद मैदाना रकना अंत आलय मठन लो नंची अलमित्र अने स्त्री बैटक वंद आमे ओ योगिनी आम वैप अतन अत्यंत बलगा चूड ंद अतन अक वन लि रोजे अत तिची नाट नंडी अनी पटल परिपूर्ण विश्वासम कलिग यंद आमे आमे अत प्रस्तुति इला अनद दैव प्रवक्ता मदान कंचे नी नाव राकन रक्षत ं दूरा नी प्रयाण चाव इ अद वंद कनका नीव वेवल सिंद नी ज्ञपकालु आकांक्षा समम
(08:08) मातृभूमि क नी अपेक्षा प्रगाढ़ मनद मा आश बंधन गानी अवसरा निर्बंध गानी नीक उव ते माम विचि वे मंद नी सत्या डिचम कोरम दानि मेम मा संताना की वारु वारी संताना की इच कुंटू अद न शिच कुंडा कापा कुं नी एकांतम लो मा पग व्याप कालन गम चाव निशि जागरूक निद्रा वस्लो मा रोधन नवलन विना कनक इ ममल माके तेलम चेसी जनन मरणा मध्य दलो नीव चसन दंता माक विंचु अतन विध समाधानम इचाड आर् फलिस प्रजला ई क्षण लो क मी अंतरा चैतन्यम कदल
(08:56) दनी कंटे तगा मीम चप गलन प्रेमा अलमित्र अडिग प्रेम गुरिंची चपनी अ अतन लेती जनम वंक चूसा ओसारी अंता निशब्द मंद गंभीर मन कंठ तो अतन इटला अना प्रेम आह्वान क्लिष्ट मना रुड मार्गा ना सरे दाने अनु सरिच पंडी तन बाहु चाच नप सम्मति लंगी प रेलो दागिन अनी कति ु कुना सरे अतन माटन आ गंतु पुष्प फल भत उद्याना चत्त कुला मार्च गलगे उत्तर गाल वं तीव्र
(09:42) गलना सरे माटल विश्व सिंच ंद कंटे प्रेम मीक किरीट पेड़ता अलाग सिलुवा ताड अतन मम पचे वाड अद ततो तुचे वाड सूर्यकांति लो मिलमिला मरसे मी शिखर तरल पनी मृदुल हस्त लालि किक दिग मी चु तव पीकी मी वे कंट मट दुपता न कंक कट कटिन अत ममल मरगा उंचे पोग चेस्ड ममल लिप लिप दिगर चेस्ड रालीन मी नंची पल्लन वेर चेस्ड मर स्वच्छ तेल दनम पदे विसरी विसरी पिस्ता म मृदु कोमल अला मर्ता अप त पगलो
(10:30) कालची भगवंत निवेदन गान मिम्मालनी रगा तयार चस्ता मी हृदय रहस्यालु म लकनी आ ज्ञान सहाय विश्व हृदयमलो मी स्वल्पा मशम अंद प्रेमा इव मीक चेस्ड कानी भयं चेत मी प्रेम यक्क शांतिनी सौख्या मात्र मेंे अभिल सिस्ते अप मर मी नगवानी कपनी प्रेम मम्म दिव्य निवेदन को सिद्ध य कुंडा ने ए तु पर मले प्रपंच लो की नच पवम मंच अक मी नवलो हर्षो लासा उव मी खलो असस शविच प्रेम नने इच कुंद तन नचे तीस कुंद देनी स्वाधीन परच कोद तान स्वाधीन काद
(11:17) एंटे प्रेमक साटी प्रेम म प्रेम स्न ना हृदयमलो भगवंत उनाड अ काका ने भगवंत हृदयमलो उन अको प्रेम की दिशा निर्देश य गलम ंपरा ंद मी अर्न कुं प्रेम मी दिशा निर्देश ंद तन तान परिपूर्ण चेस कोवाद तपते प्रेमक मरे कोरिकल उव कानी म प्रेम स्त कोरिकल क कलिग उान कुंटे आ कोरिकल इ कावाली निशब्द निलो तन मधुर संगीता विन पिंचे अमृत जलाल ओट पायला करगी प्रव चालनी अलाद करम सौ कुमार्य लोनी काठिया ग्रंच
(12:03) गलगा प्रेम विषयम मीक अवगाहन वलन कलिगे यप रक्त स्रवा इष्ट पड़ संतोषम तो रिं चालनी प्रति उदया की कोंगर रेकल डगन हृदयं तो मरो रोजु प्रेम अवकाशा प्रसाद चिंदक धन्यवादालु चलनी मध्यानम विश्रांति तीस कुने ंट सेप प्रेम लो तन्मय ध्या निस्त उंडालनी सूर्यास्त वे कृतज्ञ हदय इरालनी मयु रात्रि मर प्रेम वानी पेदल प्रं सिगा वारी योग शेमाल के प्रार्थिनी विवाह अलमित्र मल्ली अडिग विवाह संगति
(12:52) एमटी प्रभु समाधान अत त जत जन्मचा जगाने उंट तेलनी रेकल मृत्यु मी साहित चदर गट वरक जगाने उंडाली भगवत ध्यान मौन लो कड़ा म जत पडे उंडाली कानी मी साहित्य लो डम उंच दानी गुंडा दिव्य लोकाल मलय समरा धगा नर्च निव नकर प्रेमचंद कानी पालन अलुको कंड प्रेमा मी इरु आत्मने समुद्र तीरा मध्या जीवो तरंगा यग पडे समुद्रम ला उंडाली प्रेमा मृत तो री पात्र र निंप कुं उंड कानी ओ पात्र चे दानी तागे
(13:40) कंड रिकर आहार इच कोंड कानी ओके पलो नंची तीस तिने कंड पाड आड उल्लासंगा उंड कानी प्रति रू एकांतंगा वेर वेरगा उंड अन्नी कलसी सुस्व संगीतम पलिक वनलो तीव मात्र देनिक अद वेरगा उ हृदयालु रिकर अर्पिको कानी स्वाधीन परप कंडी ंद कंटे सृष्टि योक दिव्य हस्तम मी हृदयाला तन अधीन लो उंच कोगल मरी दग का काका कलसी लव आलय स्तंभ विडि विडि गाने मतंग लचन लगा मरि महा वृक्षा वेर वेगाने तपा ओ दानी डन मरक मन लेनी
(14:28) विध संतान अप वक्षा की शिशुवन अदम कन स्त्री ओकाम अंदी संतान गुरिंची माक चप अत चपा मी संतान मी काद तन शाश्वत मनु कोसम प्रगा आरा पड़े जीव चैतन्य यका पुत्रुलु पुत्र कलन वार मी द्वारा वचन वार गानी मी नंची वन वार का मयु मीने निव टकी मीक चिन वार का वारिक मी प्रेमनगर गानी आलोचना काद वारी संत आलोचना वारिक उनाई मी आश्रयम पंदेरी शरीरा कानी आत्म काव
(15:16) एंटे वारी आत्म मर कललो क दर्श चलेने भविष्य आश्र चुकने उं वारीला उक म प्रयास पड गानी मीला उम वार कोरव कारणं ब्रक वनक नवद गतम तो अं कागद मेर संतान मने चैतन्य सितम रालन विल वरिंचे धनु मात्रे अधिश्वर विलका अनंत विश्व लो आन वालन र्ची तन राल वागा सुदूर दूस पोय विध तन शक्ति तो मिलन संधि वलता अट मेट विलका तिलो मी वंप शुभ संतोषा एं अतन परते अने काका वा लचे थिरम धन को
(16:08) प्रेमीस्ता दानम अप धनिक अना दानम इम गुरिंची ं अत इला चपा नी वस्तु संपद इचिन पु न अति स्वल्प नम चेनल नि नी परिपूर्ण समर्पिंचू कु नी निज इचिन वाताव ंद कंटे रेप अने रोजन येम अवसरम वस् बेंतो कबे आहार निल कापला काचक काका वस्तु संपद मरम तीर्थ यात्र को पोए भक्तुला वस्त तिग ने तमक आन मिग ार ं त भम पाति पेक अति जाग्रत पर कुक्क रेने रोजन एम
(16:56) ंद पैगा दारिद्र्य भय कना दरिद्रम ंद पुष्कल त्राग नीर उप क दाहा गुरिंची बंग पडे वाद एटकी रनी दमे कदा ंदर तमक अधिक संपद नंची ं गानी नगुलो पेरु प्रतिष्ठा कोसम इचिन दाचन ई कोरिक वलना आ दानम लो परिपूर्णता लेंडा पो मरी कंदरू तमक उद स्वल्प मना अंता इचि वेस्ता इट वार जीवितम पै परिपूर्ण विश्वासम कलिग उे वारु मरयु वारी खजाना एटकी ंड कोद ंदर इलो आनंदम पतार आनंदमे वारी दाना के प्रतिफल
(17:40) इंदर बाध तो इस्ता वारिक आ बाधे प्रायश्चित स्नान मरी कंदर ये बाधा पड़ कुंडा एवं आनंदानी कोरको कुंडा अद धर्म कार्यम स् को लेंडा इस्ता नंदन मन लो कदंब वृक्षम तन परिसरा दिव्य सुगंध परमल भरत चेसन अट वारी हस्ता दवारा परमेश्वर पलता वारी क वनक नंची मंद हासन तो सृष्टि वस्त उं अडिग नप इ वडम मंच दे कानी अड कुंडा अर्धम चेसक इ वडम उत्तम मनद निरंतर दाना रक्त धर्मात्मा की इट कन्ना अद स्वीकर वारिकन अन्वेषण मंत उल्लासा कलिगिंदी
(18:27) इका देनी दा चुक मी प्रयत्नम ो ना सर्वम इवेल सिंद कनक इड़े इव अला चस्ते वास्तविक वर्तमान लो इचिन आनंदम मी अंद मी वारसल काका तरु मंटू उं नेन इस्तान गानी अरलक मात्रे अनी कानी मी उद्यान वनलो वृक्षा गानी मी पंम वरिंचे पशु पक्षा गानी अला अनम लेद कारण ब्रक परमार्थ इमे पोग चेस कोवम पोग कोनि के जीविद पव रात्र मात्रे कलिगन वान की मिगलिन वनी मी नंची तीस कुने अर्हता
(19:11) नद जीवन सागर लो अमृत पाना अर्न प्रति वाड नीदन अमृत धार नंडी तन पात्र निंप कोन अर्ह दान स्वीक योक धैर्यम विश्वासम इंका चपाल उदारता कना योग्यतम नद अट वार तम चक्का चिंपी मी परिशीलन कोसम तम योगत अभिमाना निर्लज बट बल चेको वालनी अडिग को मीर एवर मुंदर दात गान धर्मा चरण साधन न अंद को अरलो काद चूस कोंड वास्तवाया को केवलम ओ साक्षी मात्र
(19:58) मेंे मयु दान ग्रहीता मीर अंता ए रकम कृतज्ञता कलिग राद अला चेसन पक्षम लो मीर मी मेड मद काका दात मेड मद बरु काडी वेसक दानी बदल दात तो समान अतन इचिन नाने रेकल अधि रोहिना वानि वले अनि तो समान वृद्धि ंद कारण स्वीकन बहु कृत गुरिंची मरद रुण पडि पोया मनी अद पनि मनो व्याकुल चंदन मीर अतन उदार शली न भू मातन तल्ली गान परमात्मने ंडी गान कलिगन दाता य तृत्व संदेही चिनल अंद आहार पानी याल अप पोट कूट निर्वाह कुडैना वृधु अना
(20:48) आहार पानी याल गुरिंची ं अतन इला अड गरिक मक्क वले मेर कड़ा भूमि यक सुगंधा लेलेता सूर्य किरल मात्र ग्रंच जीविंचा गलते बाने उे कानी मी आकली तीर चंद को इंको प्राण ल राडम दाहो पमना ओ नवजात शिशु नोट मुली पालन लाक पल राडम व आ चरल क भगवता आराधन ला चपट मयु ओ पवित्र बलि पीठम पई अरल यंद दली मैदाना यली अत्यंत अयक प्राणु वानि कना एनो रेट पवित्रम अ मायकम अ मान हदम दानि बलि का
(21:32) विच पशु पक्षा दुलन नाल वचे संदर्भा वातो विध हृदयमलो ं नि सं हरिन शक्ति लोने ने को सं हरिच बतान निन ना हस्तगत कांचन न्याय सूत्रम न मंत बलिष्ठ हस्त परविंद म निदरी रक्तम दिव्यलोक महा वृक्षा को अमृत सारंग मारे गानी वृधा पोद मयु फलानी पतो रुकन हृदयमलो ई विध ं नी वितना ना शरीरं जीविंचा ु गाका नी रेप ना हृदयमलो विक सिंच अभिवृद्धि गाच गाका नी सुगंध ना ऊपर आ विध मदरम अन्य तुव ंद आनंदम तो जी विस्ता
(22:19) गाका आक राल काल लो टल नंडी मध्य मरलो वेसी नल गंद ते पोग चेसन द्राक्ष कोसम हृदयमलो विध अन नेन ओ द्राक्ष टने मरि रसम कोसम ना नंची क फलाल स्कं बताय त्त मध्यम वले नेन कोड़ा अनसम पात्र िप चेय बडव सनद चलि कालम लो मधु पात्र तीस कोनी भांड मधुवन यनी सविट प्रति गुक कोसम हृदयमलो गेया शिशिरा की द्राक्ष टक मरि मध्य मरक मधुर ज्ञाप कम चेला आल पिंच श्रमा अप व्यवसाय दार
(23:05) अड़गा श्रम गुरिंची चप अतन समाधानम इचाड ए विरामम लेका निरंतरम परि भ्रम स्तु भूमि गमना आत्मन अनुसत नीव को पनि चस्त उंडाली ंद कंटे सृष्टि चक्रम लो निष्क्रिया परल दशा दिशा लेनी अपरिचित अनंत विश्व चैतन्य मंद गर्व ची मौन गंभीर सागे महा जन प्रवाह नंची वेर पड़ पतार पनि नप नीवे ओ वेणु ला नी हृदयमलो नंची मौन नचे पनि गं दिव्य स्वरालु पलि किस्ई मगता अंदरू मुक्त कंठ तो आलगा केवलम वायद मेटला मोग निब्द मगिलि पोय मीलो एवर
(23:58) श्रम दर्भागुडेम लीनम वारु जीविता निज प्रेम वानी श्रम द्वारा जीविता प्रेमिम अ अति गुह्य सृष्टि रहस्य तो साहित्यम कलिग डम ने अं मी बाध जनन धमनी देह निर्वहन नद पै यब शपम भा विस्ते दानि ना समाधानम नद रातन सद गलगे आ नद पट्टिना चटे जीवितम अटे अंध काम अनि को मीक ार अलस
(24:45) उन मर अलसन वारी वाने अप चपता नेन अनान परम गम्यम लेनी जीवितम अंध काम ज्ञान प्रकाशम कानी गम्यम अधम श्रम तो चरने ज्ञानम अर्थम प्रेम लेनी श्रमा अंपू मी प्रेम तो पनि चेसे मी निज तत्वा तोन रिकर तोन मरि भगवंत तोन अनुसंधान कुं श्रम प्रेमिम अ मीक अत्यंत प्रेमा स्पद धरि स्तानी मी हृदय तंत्र दार पोगल चेसी अपूर्व वस्त्रा नेयम वार उंटर कड जाग्रत तो अत्यंत वास योग्य भवंति निर्मम वार ं नी अ दलन मेलक वहि आहारा
(25:32) पंची ु कोवम वं पलो मी चूपे श्रद्ध मयु गतिचिन महनीय अंदरू मन प्रति कलिकन गमतु नारने स्पहन अपमान कलिगी मी प्रति दैनंदिन चरन मुक्क बड़ला काका श्रद्धापूर्वक आत्म शक्ति तो निर्व चडम तरु मीर निद्रलो अलगा अंडम विं पालरा शिल्पी तन आत्म स्वरूपा आ राति आविष्कर गल गडम वलना अत भूमि दुन्ने वानि कंटे अधिक अलाग इंद्रधनु लोनी वर्ण सौंदर्या डिसी प् वस्त्रम मी परची मानव हृदयानी चूर वाड मानव पालक ल डिगे वारी कन्ना अधिक अ नेन अं अदनी निद्रलो काका प्रचंड
(26:20) माध्यामिक भानु तेजस समान तेल विडि तो वासंती सीरम महा वृक्षा तो मात्र मधुरंग मातला गरिक पो चलन लकन चद अट गाली सामान्य प्रसारा तन प्रेम तरंगा तो संगीत संपन्न चेसी मंत वनी कलग जय वाडे गोवाड़ द्र गोचर कानी प्रेमक दृश्य रूपमे श्रम मी श्रम लो प्रेम काका अयता मात्रे उंच गोरते मी आ पनि विचि पटटी निरंत प्रेमा रक्तो पनि चेसने वारी कार्यस्थल मेटल मद भिक्षम तुको मेल एंदुरा रुचि हीनम आर्नी अर्धा कलि मात्रे रस्तु मध्य पु मरलो द्राक्षासवा तीन मी
(27:09) मनसु ईर्ष द्वेषा लां उं अ आ पानीम लो की विषम ला प्रवेश मेर सु स्वरंगा अप्सरा गान में चेसन पटकी आप पनि प्रेमिम पगलु रात्र कर्ण कठोर विन पिंचे बट शब्दा मी नम तोड विने वारी चेवल मेप वदल सुख दुखाल ओ स्त्री अडिग सुख दुखाल गुरिंची चप अत समाधानम इचाड सुखमनी मीर भाविन दितम दुखमे य बावी नं ते मी हर्षो लासा उपत यो अद तर चुगा खावतो ं ट लेकंटे ला
(27:59) खम मी हृदयानी यंत लोत लस्तु अंत एक्व आनंदानी म रिंच गलता नेड विलासवन्ना मधु पात्र ओप कुमरी कोलिम हिंच बड मन्य कदा अमृत भरत मग संगीता वलक विंदु चेसे वण पन कतो लच बड चक्क कादा अमिता नंद उन णा ओसारी हृदय गाढा अंतरा लो की ंगी चस्ते मीरे क ार मीप खा इंद इ हर्ष नी अलाग विषदम कम्मन क चस्ते मरला ग्रहिता इ देनी कोरक लप सुनारो अद मीक ओप मदानंदपुरम र वधि अरग मद वेटे रव मी पड़ गदलो निद ंद
(29:05) रं मध्या त्रास सिबे वले तगला मीरे हृदयम य भावा लेका शून्यम पोनप मात्रे त्रासु तगस ले कुंडा लकड उे कोषाधिकारी तन स्वर्ण रजता ूच कुने ममल कपत पोनप मी आनंद विषदा कोड़ा त अनुग लेची दिग उई इल्ल ओ मेस्त्री मंदक व अड़गा माक इल्ल गुरिंची ं अत ड नगरम मध्यलो इल्ल कटु कोडन मुंदर जना टलो ओ आह्लाद करम पदं अल्लुकोणी संज वेक मी टिक रिनल गाने लकड लेनी सुदूरा
(29:52) ं प्रया चेतू पोय मी अंतरंगम लो ऊहा विहारी ा गूड रको उ मी गृह मी स्थूल शरीर अदि सूर्य गमना अनुसरी वृद्धि नंद निधि निश्चल निद पो दानि की कलवानी अनको कंड मी गृह कललो कदु कंटू कंटू नगरानी वली उद्याना लोनो पर्वता ग्राल लोनो विहर चद ने मी टनी टलो ती सुकनी क्षेत्र वितना चलि वाटिनी अरण्या लो की मैदाना मद की वेजल गिते सुवि शलम लोयले मी वधु कनु चूप मेर वितरिचे पचक बय वाकिल नित्य फल भरता
(30:40) द्राक्ष टलो म इरगु पगई भूमिलो सहज सुगंध मी वस्त्राल परिमल भारतम चस्त उं ं बांडे कानी इनी एला साध्य पड़ता वार कोंडे भयाल वलना मी पूर्वी कुल मिलनी मरी दग दरगा ककट आ भयम इंको कालम उे लागे उंदी अंत वरक मी पलान की पय की मध्या अड गडल नगर प्रकारा ाल सिंद ंड आर् फलिस प्रजला इलो मी कोसम उन्न मिटी गडिल बिंची देनी रक्षु कुनार मी शक्ति प्रकट निब्द कांक्षा शांति उन्नाया अतम लोचन शिरा ग्राना आर्चर लाग
(31:26) स्थिर कर्च ज्ञाप नाया हृदयानी कृत्रिम दारु शिला कट्टल मध्य नंची पावन निश्चल पर्वता ग्रम वैप न पिंच कलगे सौंदर्यम उदा चप मी इलो वीट म कलिग नारा लेका मु अतिला व तरवाता गृहस्थ मारी क्रम मी मद पतन चला इंचे यजमान रूपांतर चंदे इंद्रिय सुखाल अ चालनी मरि निट कोसम ए दुर चूप मात्र मेना र्च कोंड अद कोडान अंकुशा चेब महो दत्तम म जीविता सयान तान ला आस्ते अला आडे कील बमला मर्चे दानी ति डगल पट वले मृदु वैना हृदयम
(32:15) पाषाणम शरीर सुखम परमावतार को लवले विध मुटु कुंटे पगलि पोय पच्ची मट्टी कुंडला चेसी वले सुंद विषय भोगे आत्म जिज्ञास परि मार्च उत्तर क्रियाल को दगी जर पिंची मरी अक नंची निष्क्रमण महाकाश पु बिडला विश्रांति लो कड़ा व्याकुल पड़े मेर चिक्क पड़ राद लोंग दिय बड राद गृहम जीवन नौक को गमना इचे तेर चाप कावा गानी बंध लंगर काक अद पुंड कपिन पारदर्शक चर्म पोरला
(33:04) काका नेत्रा संरक्षण रेवले उा लपल टुं यं तुल मुच कोनी चूरु तुनी तलव पनी गडल बटल तायनी गट्टिगा ऊपिरी क तीनी गहाल मीक तग जी विंची न वारी कोसम गतिचिन वार निर्मिन समाध वं गलो म निव सिपक त ऐश्वर्या डंबरा तो मुट पड़ कटकट मी गृह मी रहस गानी दनी पटल मी वे अपक्ष गानी सतम चेको राद एंदले मी अंत शक्ति शाश्वत निवासम प्रभात वच दवारा निधि तेलिया मधुर नाल मौन केटा गवाक्षा कलिग उना अनंत आकाश र्म लो अ
(33:54) ग्रंच दुल नेत पनि अगा रिचे तुल गुरिंची ं अ दानि कत मीर रिंच तुल मी अंदानी चाला मटक कप गगना मी अं विकत कपि उंच तुलो म व्यक्तिगत गोपन आनंदिता गानी तुल मीक डग बड लुला बरु गु्रप नुला उन कनकं मे सूर्य प्रकाश वायु प्रसारा नंडी एक्व प्रयोजना बाह्य वशन ंची काका मी सहजन चर्म द्वारा ने ग्रंच गलते बागन कारण सृष्टि प्राण शक्ति सूर्यकांति लोन क्रिया शक्ति गालि कटा लोन कदा उे
(34:41) द मीलो कंदर अटार मन दुलन उत्तर गाले कदा ने सिंदी अ नेन अं नि जमे अद उत्तर गाले सिगने मगम मीदा बिग तग रातो अतन वीट नेड पनि पूतने अत नि ट परिहास नकना पावत सहज लज्ज ष भू इष्टम क नंड रक्षण कोरके मरुवक मरयु अट दोषम लेन लज्ज अटे मनसु मद पवे सुकन श्रंखला मनसु अं मले कदा पुड़ म आच्छादन लेनी मी पादा तोन मलय पवनालू तेलिया मी कुरल तोन आड कोडान की तहत चता मात्र
(35:27) मरुवक क्रयम वि क्रयम ओ वर्तक अगा कोगो अकाल गुरिंची को ं दानि अत समाधान अना भूम तन फलाल उदार मीक सकंद मीक लिल्ला वाट दोच कोमे आते मात्र मी वाटनी रुकोम तद भूम नंडी पंदन न सरि वेर इस्तु सृष्टि समृद्धि पि संतृप्ति अंद गलर अट इचि पु चु कोवम लो प्रेमा नयम लो पिस्ते अदि कंदर राशा पलन चेसी कंदर आकली तो माडु सुंद समुद्रम लो पोलम लो पंडल टलो मी श्रम
(36:13) धार पोय वारा मीर नेत पनि वानी कुमरी पनि वारल सुगंध द्रव सेकच वानी सतलो कलक सृष्टि अतन नपं आत्म शक्ति मी इवरी मध गला तनिक त्रास की आहवा विलक समान लवप वार की अनुग्रह चालगा प्रार्थिनी मयु तिलो ये सरक लेंडा केवलम मी श्रम तम माटलो लांच वानी नंपक वातो ई विध अन मातो कलसी लोक गानी मा सदरुल तो कसी समुद्रम लो गानी रंड पुड म कडली मातो समान मिम अनुग्रहित इंका अकड़ की पाडे वारु आडे वार मुर वाच
(36:58) वारु वस्ते वार इचे को वारी नंड तीसको मी वलने वारु क फल सौरभा सदम चेयु वारे मरयु अवि कललचेन्नई संतन वदल पेटे मंद ए रू उत्त चेल तो इंटकी तिग पोकुंडा चड़ एंटे मीनी अतिरिक्त अवसरा रन पक्षम रात्रि विश्वात्मा प्रशांत विश्रम लेड गुत पटुको नेर मु मरयु शिक्षा ओ न्यायाधिकरण मु शिक्ष गुरिंची ं अत समाधान
(37:44) अना आत्मा मिम ली गालि मेद शिकार पोनप ओंट वार मरि रक्षण लेनी वार इतल को त दवारा मीक मीर डन रिस्ता अंद प्रति पो कोसम अ लचे इंटी तलप तट ओ किंत सेप वेच ाल ंद मलोनी दिव्या अनंत सागर वांट अद ल्ल कालम अकलम उ गलगुंद आकाश वले अद एरे सामर्थ इगल गानी अद रेकल कलिगन वारिक मात्रे इंद इंका मी दिव्या आत्मा सूर्यन वले क भा सिस्तु दानि की चच पोए मार्गम गुरिंची गानी विष सर्प े चोट गुरिंची गानी एमी
(38:29) तेलियदु ते मी दिव्या टे मी शरीरं लो प्रतिष्ठित उद मीलो चाला मटक मनि शिगा तयार इना इंका कंत भागम अपरिपक्व दश लोने उंडी दार कानरा दरल वडी निद्रलो नस्त तन परिपूर्ण जागृति का निरीक्षे स्त ंद वनलो मनि शिगा रूपांतर चिन मीक इ चब नान ंद अट दिव्या गान इट अपरिपक्व दलो संचर वानि गान काका मनि शिगा मारिन मीके ई नेर मु शिक्ष गुरिंची लिसी ंद तर चुगा म अनकोड विन्न तप चेसन व्यक्ति मीलो नि वाड कानी मी सत् प्रपंच लोनिक रबन अपरिचित कानी नेन अं ंतत मन्नत धर्मात्मा
(39:19) कड़ा मीलो प्रति वालोनी अत्य दशक ए लेटले एंट कपट लहीन क मीलो वालोनी अधम दशक दिग जार लेर चेट यक्क निशब्द रुक लेंडा दानि लोनी ओ आक को पच बार टल मीलो ए डू मी अंदरी अंतर्ली समष्टि चित्त संकल्पम लेंडा तप चेय लेड पेद्दा रेगम पुगा मीर अंदरू मी मी दिव्या आत्म दिशका पोतनार मीरे मार्गम मीरे मार्गा अन्वेषक अ प्रस्थान एना काल जार पड अद नक अनुस व वारिक दार उ राति रिंचन हेरिका अला पन वारु वड़ वड़ गान ट पाट लेंडा पोगल पटकी दलो राय तिची नी लग चालने
(40:08) बातन वि स्मच प तन मुंदरी कोसम ताम पड माट इंका गुंडे को बरु वैना इ कोड़ा विन तु तन चावक तान बाध काक पड सोम पोन वान की तन सोम लिंच पापम लो भागम उकंडा उद दुर्जन पाप कार्याल लो सज्जन पूर्ति निरपराध कारु सत्पुरुष पातक रिंचन पापम येमी अनंत परिशुद्ध काड अवन नेरगा तर चुगा तन बाध बाध मरी तर चुगा शिक्ष पड वाड निष्कलंक निर्दोष राने मोतु ड मीर अन्याय नंची न्याया कुटिल नंची मं चिनी वेर चेलेर लप नल राला कलतला अ प वेलो
(40:58) टगा कसे निच वीट नदार तेग पोइन पुड़ नेत काड मोत्तम वस्त्रा अवलोक मग्गा परीक्ष कोवा मी कट तन भार्य न्याय मंद लबे अकं अद न्याय तक्ड लो आमे भर्त हृदयानी अंतरात्मा कोड़ा निश्चित तूच दोषिण कोरडा देबल कोटवानी आ दोषी आत्म लोनिक चूड़ निव धर्मम पे पाप वृक्षा नरक सिद्ध पन वारु नी वे परीक्ष तनि सरिगा वा वेलो मंच चडल फल काकम मरि फलना सकम अन्नी भू हृदय निब्द क्षेत्रम लो ओदानी तो ट अभेद अल्ल कोनि डम गम
(41:45) निस्तार न्याय बुलक न्यायाधिकरण निती परन वानि की मीर वेय शिक्ष एमिटी बहिरंग हत्य का विंची अंतर रंगलो अंतक रेट हत्य गा विंच बड़ वान की मी सगे दंड एमटी बहिरंग लो वंच कुड निरंकुश अ अंतरंगम लो बाध बलाक न वानी मीर विध विचार स्तार तम पापं कना अधिक पश्चाताप पंदन वानी मीर विध दं सतार पश्चाताप मेंे कदा मी सगे अन्नी शिक्ष परमाद अट पश्चाताप निंद पड़नी वारिक म कलग गरा निंद पन वारी हद ंड तीसी वेय
(42:30) गरा एव पिव कुंडा अद रात्र वस्तु मनुल मेल कांची तमन ताम परीक्ष चूसने यब पलन पट्ट पग वेलो चड़ लेन मीक नयम रिंचन पूर्ण प्रज्ञ एला सकरंद अला चड़ गलगन पुड़ मीक लस्तु लब वारु ंद पड वार कड़ा मी लोनी दिव्या मरि मरगुज्जू दस अलिक लचन ओके व्यक्ति अनि मयु मी मंदिर पु गोपुर पु शिला दानी अड पुनादी राय कंटे उन्नत मनद कानी न्याय सूत्राल ओ न्यायवादी अड़गा मेम रास कुं न्याय सूत्राल माटे मट
(43:19) गुरुवर्य अत चड मीक न्याय सूत्राल रास कोवम सरदा ते वाटनी अति क्रमम इंका सरदा चि पिल समुद्रम वन इसक ग श्रद्ध कट मल्ली वाट केरिल त नट म ग कड सेप समुद्रम मी इसकन इतने ंद कटिन गन तोक्की मी गंतु नप समुद्रम को मी तो पाटे गंतु वेतु समुद्रम अ मायकल ने कसी ए नवत ंद कानी एव कैते जीवितम समुद्रम काका गट्टी लयो मानव निर्मित न्याय सूत्राल इसुका गोल्ड काका तो कटप चकन शिला शासना वारी संगति एमटी गंतु वेसे वार द्वेष चुकने अविटी
(44:04) व्यक्ति गुरिंची एमटी तन मेड मद काने प्रेम स्त स्वेगा चंगु चंगु एरे जिंक कजन चूसी र दमर नकने ए संगति एमटी वृद्धाप्य व तन कुबूसम विडव लेद अला यु सरपाल चूसी लज्जा हीनल दिगंबर अ भाविंस पाम संगति एमटी पे विंदु की अंदर कंटे मुगा व पट्ट पगिलेला तिनी भक्ता यास तो इं दार पट्टी ई विंदु प्रकृति विरुद्ध अ तिने वार चट्ट व्यतिरेक अ भांवा संगति एमटी इट वं वारी गुरिंची एमन ली वार सूर्यकांति लोने टकी सूर्यन की वीप लब वाने काक
(44:50) पोते वारु चूसे द तम डलने मरि तम डले वारी न्याय सूत्राल वारिक सूर्युडु नीडल सृष्टि वाने कदा कनब वार न्याय सूत्राल अनु सरिच अटे एमटी नेल प कूचनी नीड कोसम डम कोवम काका अला काका सूर्यन ए दुरगा नस्त पोय मीलो नि वानी य यल पट्टी बंप गल गालितो प्रयाण मीक ए रेक पुंज चूपे गालि वाटप अवसरम उंदी मनुल ै गडल मद मेड मद कानी स्वेगा विसरी कोटिन मीक मानव निर्मित सूत्राल वति स्ता इंका एवरी बंधन गलस कालि तगल कुंडा नर्च मीक य चट्टा भयम ंद उपल डगा लची एवरी
(45:41) दार की अड्डन रानी विध पारवे मीक व्यतिरेक र्प एवर चप गलर आर् फलिस प्रजला महा ते म डंका चर्मम ओड़ती गलर वण ती गलन वदल चेय गलर कानी आकाश लो स्वेगा वि हरस्त दिगंता तन सुमधुर गान तो सम्मोहन परचे कोयल नोट की ताम वेय गरा स्वेच्छा ओ वक्त अड़गा स्वेच्छा गुरिंची माक चप अत समाधानम इड इलोन इं बैटा क मी मी दैन दना स्वे मु मोकर ने चन तमन अत संह बोट निरंकुश मु मोकली प्रस्तुति बानि प्रजल लागा
(46:28) देवालय गर्भम लोन कोट बुर्ज छाय लोन मीलो अधिक स्वेच्छा जीवम अनु कुने वारु तम स्वेन मेड मद काडिला संकल बंधना पैन वेस कोवम को चूसा अंतराल लो ना हृदयम रक्ताने सवि चिंद एंद्र कावान कुने अभिलाष कुड़ा मधि लो प्रवेश नप स्वेन जीवित लक्ष्य परमा विधि मरविच मानु कोन मात्रे निज म स्वेन पिन पग समयाल लो दिनम ला गड सुंदनी गानी रात्र तीर कोरिकल मगे समस्य अधिगम चडम एला अ गानी इसु मं तैना स्पृह ले कुंडा निज ई रें काला वस्ल लोन ममल तीव्र आंदोलन पड़
(47:17) वेसे परिस्थिति उन पटकी वाट नंची ए रोजु का रोजु स्वच्छ ए बंधना को कटु बकंडा निश्चिंत य बादर बंदी लेंडा रागग नाड मीक निज स्वेच्छा लभ चिनल ते ज्ञानम प्रवेश दलो मीक मरगा तग कुन संके म छेदन वरक कबंध हस्ता प्रत्यक्ष नालन रात्र दाट पैक राडम ला निजा की स्वेच्छा अ म अनुकंटू दे अत्यंत बलम संखला अद सूर्यकांति तत मरस्त कक मिर मिट लप पटकी इंका चपाल वस्ते स्वेच्छा अ एमिटी ममल आवच उन कत्र मवानी सकल शकला रालु कोवम
(48:06) तस्ते अद निर्मूलना अर्हम न्याय सूत्रम अनुकुंटे दानी मीक मीरे मी नुदर प रास कुनार धर्म ग्रंथा दगदम चेयम द्वारा न्यायाधिपथी वानी पदयाल अनुक मुंदगांव स्वाभिमान न एला अण दरकता वारी स्वे निरंकुश वारी स्वाभिमान लो मान हीनता लेनी पक्षम लो इंका मी पै रिक गला अजमाई पवानी अभिल सिस्ते अ अजमा मी मद बलवंत रुद्ध बनल काका
(48:55) मीक मरगा तग लको मरयु अदि मी पटा पंचल चेद्दाम अनु कुने भयम ते अट भयानक निवासम मी हृदयं लोने उंदी गानी भय पेटे वाडी तुलो काद यदार्था अनी विषयालु मी अंतरात्मा लोने रसी अर्ध भागा चट्टा पट्टा रगत ई प्रीति लपद भीति कोलपे आशिंचेड़ी द्वंद प्रवृत मी लोने लगु डला पेन वेसक विहत उई ओ नीड करग पई मायम अंतरंगा अं पेकन लग इंको लग को डगा
(49:40) मारतु विध अन् बंधना तचक मी स्वेच्छा इंका अधिकम स्वेच्छा को प्रतिबंधक अवतु विवेक आवेशम योगिनी मल्ली अडिग विवेक आवेशा गुरिंची चप अतन समाधानम इचाड मी अंतरात्मा तरू मोहा वेशा तो संघर्ष चे बुद्धि विवेका रण क्षेत्रम वंट ओ शांति प्रदाता का नाक शक्ति उं आ इरु पक्षा समन्वय परची गुणाल समरानी सुस्व संगीत मर्चे वानी कानी मी मटुक मी शांति कामक कान इंका ल मी अन्नी स्वभावा ओ विध प्रेम चलेने पु
(50:30) नाक अद एला साध्यम विवेक मी जीवित नौक को चुकानी ते मोहा वेशम तेर चाप वंट रटलो येद विग पोना गमनम डकल तोन लेका सागर मध्यलो लच पवम जगतु कारण बुद्धि टे शासन अद मिम गीत दाट रवल गा अद पुलो लेनी मोहा वेशम प्रचंड ज्वाल तो अविनाश करंग परणम स्तु मोहा वेशालु यंत तुक एगिस पड नायो तन विवेका क आ स्थाई की अंतरात्मा यदग निचे पक्षम लो अद एवं आंदोलन को लोन काका आह्लाद करंग पाड कुंद प्रति दिनम पुनर जीवितम अवत फीनिक्स
(51:16) पक्षी तन बूट नंची ताने आविर्भव मरि त तुक एरिनल मी मोहा वेशालु ा विवेक नपं चिनल नस्त नित्य नूतन कावा मी विवेचन आकांक्षा म सरि समान इंटलो इदर प्रिय अधुल वले गौरं चाली ए ओकनी मरकरी कंटे एव मन्न सेयरा ंद उ अपेन ओकरी पैना पच कुंटे मीक इवरी अपेक्षा दरम अंद पर्वत शिखर मी मंच कुरसे चलनी नीड निच टल कि कूचनी अक शांति निर्मल त्वा तो दूर पचन तिवा लां प मैदाना चसन मी हृदयम इ सृष्टिकर्ता विवेक पूर्णा नुग्रह अ
(52:04) भाविन चल रेग पेनगा मीक नीड िन टलन ककट वेतो पेग उमल मेरुल आकाश आधिपत्य प्रलय भकर प्रकट आश्चर्य तो मी हृदयम इ भगवंत आवेश भरत नर्तन अ ग्र चाली मरयु म भगवंत नि सृष्टि शक्ति लो ओ ऊपर अनी अरण्य महा वृक्षा उम चेता मीर कड़ा विवेक लो विश्रम स्तू आवेशम लो नति चाली बाध ओ स्त्री अडिग बाध गुरिंची ं अत अना मी ज्ञानानी आवच कुन आच्छादन विडव मेंे बाध अंटे शिला समान फल हृदयम सूर्यकांति लो
(52:50) निलचे एला पगो अद विध अवस्था मीर बाध अर्धम प्रति नित्यम कलिगे अदभुता आश्चर्य तो तिलकं चंदक मी हृदयम सिद्ध उन बाध कुा आनंदा ये विध तीसी पोन अद्भुत अस्तु पंट पोलाल संबंध वरक ऋतु चक्रा यंत सहज आमोद स्तार हृदय क्षेत्र ऋतु मापन कड़ा अंते सहज स्वीक अप मी विषाद पु हेमंता अत्यंत निर्मल तो वक्ष स्तार मी बाध लो अधिक भागम मीर एंपिक चेसक दे अट विषाद मने चेदु मात्र ने मीलो वैद्युडु मी
(53:35) आत्मक चिकित्स चेस्ड कनुका अत विश्वस्त अत इचे मंदन निब्द प्रशांत स्कच एंदुरा न पटकी दानि नपं मात्र अदृश्य रूपम लोनी अति मृदु अमृत हस्तम अत इचिन मंद पात्र गाने मी पेदल मना दानि रूपन मट्टी मात्र सृष्टिकर्ता पवित्र दिव्या सुरल च मेत परच बड आत्म ज्ञानम ओ व्यक्ति अड़गा माक आत्म ज्ञानम गुरिंची
(54:20) ं अत मी हृदयालु अति निशब्द दिवा रात्र रहस तेलस कुं कानी मी चेवल हृदय ज्ञान बोधक रंच कुं आलोचना म रिगन दनी माटल रूपलो क मर लको गलर मी स्वप्ना नगन शरीरा मी वेतो स्पिन गलर इ रुक मंच दे आत्म उप अद पोरली गुस गुस प्रव समुद्रा रवल सिंद अप मीलो लोत लिय अनंत मी कमंद प्रदर्शित मताई कानी अं पट्टनी मी अंतराल तुलन कोल चंदक साधना लवी
(55:06) उक ओ कोलब तोन शब्द वेध परिकर तोन दा लव प्रयत्न चक कारण आत्मा परिमिति लेनी कोलवा साध्यम कानी महा समुद्रम नेन सत्या लसकना अ बदल ओ निजा लसकना अ मात्रे अन अगे आत्म य मार्गम कनान अनक ना दार आत्म नच पगा कगन अन कारण आत्मा अन् मार्लोन रिंच गल अ निर् दुष्ट रेख वडी पोद ओ रेल मक्क पगन परगद दिव्य कमलम तन लेक ले रेकन टे वि कुंटल आत्मा तन तान आविष्कर
(55:53) कुंद बोधना अ उपाध्याय अगा बोधन गुरिंची चप अत चेड मी लोने अर्ध निलित निद्रलो कां चुटक सिद्ध उन दनी कंटे इतम ज्ञानानी मी एव बोधि लेर मी प्रार्थना मंदिराला नीडल तन शिष्य गण संचर स्त उ रुव तनक ज्ञानानी काका तन विश्वासा प्रेम मात्र मेंे मीक बोधि गल अत विवेक शली ते ममन तन ज्ञान मंदिर लो आहवा बदल मी स्वंत ज्ञान मंदिर बाटलो की ममल डको ताड ओ खगोल शास्त्रज्ञ रोदसी गुरिंची मी तो ताडे गानी तन ज्ञानानी मीक अंद
(56:39) चले ओ संगीतज्ञ विश्वा वण संगीतम लो ुति लय नम चेस्ड गानी अट लय पटने चेवल गानी आ स्वरानी प्रतिध्वनि कंठा गानी मीक इलेड अकेलो प्राविण्य कलिगन वाड दूर भारा मितुल वर्ण गल कानी मरगा वाटनी अन्वय चुगला नैप इलेड ंद री भावना शक्ति वेरोक की गमना लेद मयु भगवत ज्ञानम लो मीर अंदरू निल चुनी उन्ना रिक वारे सृष्टिकर्ता रिंचन गानी सृष्ट रिंचन गानी ज्ञान लो मीक मरगा अर्थम चेसक विधानम लो एकाक स्नेह
(57:27) ओ युवक अगा माक स्नेह गुरिंची ं अत समाधानम इचाड मी अवसरा को लभ चिन समाधानमे मी स्नेहित स्नेह क्षेत्रम लो प्रेम वित्ती सागु चस्ते कृतज्ञता अर्पणम लमगा पतार अत मी भोजनशाला वंट गदलो अग्निहोत्रम मी आकली तीरें को शांतिनी पेंदु को अत मीर आश्रय स्तार मी मित्र मालाड मी मलोनी काद लेदु ला रिंचन भयम नी अवन सरे लन दच कोवाल आवश्यकता गानी मीक उव अत निशब्द उन क अत हृदयानी मी हृदयम आल किस्ने
(58:13) ंद एंदले नि स्नेह लो अन्नी आलोचना अभिलाष आकांक्षा एरू कोड़ा ना दनी चपनी आनंदा अनुभव उद्विता पंचुक बताई मित्र नंडी वेर पनप खचक ुक अतन म अत्यधिक प्रेम द अनी परोक्ष लोने मैदान नं चसन पर्वता रोह ंड बागा कनि पिंचन मंत स्पष्ट अस्तु इंका आत्म बंधानी मरि पट परच कोवम मिन स्नेहा की मरी इतर परमावतार काका इतम ये दैना प्रेम काद अद पन्न वल वंट अंद निरर्थक चक
(59:02) पडता मी र सगग अति श्रेष्ठ मी स्नेहिल के चली मी तरंगा क्षया अत रिग उं वाट उद्र क अतन की च चूप मित्र े द घंटल घंटल काल हरण कोसम काद आ घंटल लो जीवनो साह निंप कोसम अत मी अवसरा रचे वाडे गानी मी न्यानी भर्ती चे वा का स्नेह माधुर्य नवलन विर भं चाली सुखाल पंच कोवाली ंद कंटे चिन्न चिन्न आनंदा मंच तुषार लो हृदयम तन शुभो दयानी चूसनी सातवन पंतु संभाषण ओ पंडित अड़गा मालाड गुरिंची
(59:52) ं समाधान अत अना आलोचना तो समाधान पडले नप मी मालाड तार हृदयं य एकांत प्रशांत जीविंचा शब्द इचे उबस पोका काल शेपाल कोसम पेदल आश्रयम पतार इंका चाला मटक संभाषण आलोचना सगं चंद एंटे आलोचना विश्वात विहर विहंगम कागा माटल पंजर दानि बंदी चेसन रेकल अल्ला चंदे गानी एगर लेद मीलो कंदर ओंट तनप भयं तो माटल पोगल आश्रय स्तार एकांत प्रशांत वारी वारी स्व
(1:00:37) स्वभावा वारिक वडी चे सुंद काब दानी नंची तच कुं इंदर धम ज्ञानम पूर्वाना लेंडा मालाड मालाड अवे मिटो तमके अवगत नी सत्याल यलांग ार वित ार मरिंदर लो सत्या कलिग ना माट लो दानी व्यक्त परच इट वारी आंतर यालो विश्वात्मा लयबद्ध में निशब्द रूपम लो निक्षित म ंद दार लोनो बजार लोनो मी स्नेहित कलिस नप मी अंतराला लोनी जीवात्मा मी पेदल को जीवक ए माटल पलका निर्देश चाली मी गंतु लोप गंतु अत चेबल लोनी लो मालाड ंद कं अनी
(1:01:24) आत्मा मी हृदयमलो सत्या अ रंग पात्र आकार मध नंची रिग पोना मधु रुचि मात्र तलप मुद्र ब पटल कालम ओ खगोल शास्त्रज्ञ अड़गा गुरुवर्य कालम माट एमटी अत समाधानम इड कोलत कंद लव वल लेनी कालानी मीर कोलवा यस्त उंट मी नवनी इंका मी आत्म गमनी कड़ा ल ऋतुल को अनुग सचेस कुं ार कालानी वागला पंची डन कर्च दानी प्रवाहा गम निस्त उंट कानी मीलो नित्यम शाश्वतम अ यद नद अद
(1:02:11) काल नित्यम रिंचन रुकन इंका वर्तमान की गतम ज्ञाप कम भविष्यत स्वप्नम अने रुकन कलिग उंट मीलो नम चेद योचना समर्थ नद इटकी नक्षत्र रासु विश्वात लो चिम ट् लि क्ण अवध लोने निव मी प्रेम शक्ति अपरिमित अनको वा मीलो एव नार इंका अट प्रेम अवध लेनिना ओ प्रेम योचना नंची वेरोक दन की अलाग ओ प्रेम पूर्वक ष्ठ नंची इंको दन गंतु वेय कुंडा मी अस्तित्व केंद्र बिंदु लोने ओद नदनी मीलो अनुकन वार मरयु कालम को प्रेम वलने अविभाज्य गमन रहित कदा
(1:02:57) कानी मी तल पुललो कालानी तुलगा कोचे पक्षम लो अंद प्रति ओ तुव अ तुवन अटनी परवे चाली अलाग वर्तमान परिंग गतम ज्ञापन भविष्य आकांक्षा ओदगी पोवा मंची डु नगर पदलो अडिग मंच चड गुरिंची चप अत चपा मलोनी मंच गुरिंची माता नी चड गुरिंची काद ंद कंटे चड अ एमटी आकली दल चे बात मक मंच काका नि जमे मंच आकन चकट लो आहारा क आवरा वर मू ंद दप्प मृत जलाल नना
(1:03:45) ताग मीर मी आत्म तो ममम पट दश मंच अ भांचा कानी आ विध कान अ चड मात्र काद इंटलो नि वारी मध पपल नं मात्रा आ इंट दंगल रागा चम कदा अद अभिप्राय भेल तो लिन मनुष इल्ल अंते अलाग चुक्का लेने नावा दशा दिशा लकुंडा इष्ट सारम प्रमाद करर द्वीप कल्पा चक्कल टव गाका कानी दानी वल्ला पड़वा मुनि पोय समुद्रम अडन पोद कदा स्वार्थ परित्याग कोसम प्रयास पनप मी मंच अच कुं अलाग स्वार्थ प्रयोजना कोसम श्रम नप अ चड कान ले मी गम्यम गुरिंची साह सोपे मग कार्य
(1:04:31) साधना सहायम स्पष्ट माटन अद मंचे ते मी प्रयत्नम तड़ बाट कलिगन कुंट नटक ते दानी डुगा नकर लेद कुंट तू पोना मुके गानी वनकी पोर कदा कानी मी बलवंत चक चका अडल वेय समर्थ नप निज कुंवार वारी मु मी अडल डबड कुंडा चूको अद वारी पटल दय चपट अंद म मंचीगा उद को अनेक मार्गा नाई अला लेत मात्रा डगा उन्नी काका अल सत्व तोन दिशा निर्देश लेकन बाध पनार मात्रे ग्रंच ते दुर दृष्ट वशा जिंकल ताबे को वेगम नेप लेव
(1:05:16) कदा मी आत्म यक विराट रूप साक्षात्कार कोसम तपच लो मी मंच ंद तपना मी अंदर लोन उंदी ते कंदर लो अदि पूर्ति ट तो प्रव पर्वत सानु अरण्य जीवन रागाला रहस्यालु अमत मग शक्ति तो समुद्रा रवे गा इंदर अद पि कावला प्रव मलकल तोन मिट पल्लन वेगम क्षीण चडम तो लहीन पड़ समुद्र रम अंत दूर उगाने आर् चुक पो ते बलो तो तपच वारु लहीन तम साट वार चूसी मीलो ड़ लोप उंदी मी नत नक अड कल ब पवन कारण एमटी अ अरा ुक वास्तविक मंच कलग
(1:06:04) उे वा निर्वस्त्र चूची नी बट्ट अ कानी इल्ल वाकली ले न चूसी नी इ मंद अ कानी प्रश् पर कदा प्रार्थना ओ पूजारी अडिग माक प्रार्थना गुरिंची चप समाध अत खम लोन लेम लोन म प्रार्थिनी मी आनंद उन सिरी संपद तो तुत प्रधि चाली मी आत्मन विश्वात्मा लो विस्तर कोवम काका प्रार्थना मरे मिटी सांत्वन पंदन को मलोनी ची कटनी म विश्वात्मा विलीनम चस्त टार अद विध मी हृदय प्रकाशा कोड़ा चेते
(1:06:53) अदि मीक परमानंद करम कदा आत्मा ममल प्रार्थना को प्रे पिंचन मीक खम मात्रे वस्त टे अद मरला मरला अंद प्रेप स्ने उं मी डप आगी निर्मल हृदयमलो ंची नव रबू सेत वरक मर प्रार्थना चेप सरिगा अद समयानिकी तम प्राथन क विश्वात्मक समर्पिंचू वानी कलस कुं महत्तम इटी कलय प्रार्थना समयमलो तपा मरन साध्य पद अकनी कंटक कनब विश्वाल लोन की धम पनम तन्मय कोसम माटल कंद मधुर साहित्यम कोसम मात्रे सागा आलयम लो की अभ्यर्थना तो प्रवेश स्ने
(1:07:39) अडिग इव बताई मरि अंद की मीर विनम्र अंद प्रवेश ममल एव भुजा पट लेव दियर लेका एवरी कोसम भिक्षम कोरक प्रवेश मरद एवर विनर केवलम अ निब्द म प्रवेश अंते चालन माटलो एला प्रार्थने मीक चपलेन भगवंत तान मी पेदल द्वारा पलि किंच माटल तपा मी पलके मरे विन नेन मीक समुद्राला अरला पर्वता प्रार्थना कुा बोधि लेन कानी पर्वता अरण्या सागरा बिडल मीर अ चेयु प्राथन मी मी हृदयाला
(1:08:24) विं मीर कनका निधि निब्द लो चवी रिंची विनगल गिते अ ई विध अनम ग्रस्ता माक चलन रूपम परमात्मा मेम संकल्प द मालो नीव उं चिना नी संकल्पम मेम आकांक्षी नीव मालो पं पचन नी आकांक्षया नी प्रेप ने नीवन मा रात्र नीवे ना मा पगु मारना नी कोरक डगम एं मा अवसरा मा नंदे नी लस्ताई क नीव तका माक मरे अवसरम लेद नी साध्या मरी कोंचम अनुग्रहित माक अवसरम वनी मेम पिन
(1:09:12) आनंदम ड कोमार नगरा चेसे साधु पुंग यन मु अगा आनंदम गुरिंची माक चप अत समाधानम मस्त ड आनंदम स्वेच्छा कानी अंग स्वे काद अद पुष्पन मी कोरकल लिय जसे नी वानी फलम काद अद ओ तुन तन लोनिक आहवा निचे ओ लोत कानी तनक तागा अ लोत काद नद काद अ रेकल डक पंजर लोनी प्राणम कानी विश्वात आवण काद वास्तविक आनंदम अने स्वेच्छा गीतिक दानी हृदय पूर्वक आल पिच कोवाल ममन ने कोरना कानी अ गान पवस लो मी हृदयाला मर कोलपो
(1:10:01) कुद मीलो पच वार कों मंदी आनंदमे सर्वस मनी दाने सदा अभिल शिस्त उ मगता वारु वानी तप पटटी मंद स्त टार ने वा तप पटन मलिन अन्वे कोन स्तान वा आनंदानी तका पली कानी अद दने काद आनंदानी की रु अक्क चले कानी वारीलो अति हीनम क आनंदम कंटे सुंदरम दे कंद मलाल कोसम भूमि तत निधि निक्षेपन पिन नी गुरिंची मीर विनी नार क इंका मीलो वयो ंदर आनंदा ताग मैक रिंचन ि दलगा र् पेटुक बाध पडत
(1:10:45) टार कानी बाध पडल सनद अजाना वतम मनसु गुंचे गानी अद वेसन तप टलन काद व संगलो तिन पं चकट वार तम आनंदा कृतज्ञ तो र्च कोवा ओवे वाटनी तल चुकनी बाध पडलो मीक सांत्वन लस्ते अट्टी सांत्वन लो सेध तीर मीलो मरिंदर प्रगा कां कलिगन पच वारु कारु र् चेसक बाध पडे वारु कारु कांक्षा पश्चाताप रिंचन भयं वारु आनंदा तिरस्कर कुं र दश आत्मन निराक चडम आत्मा पचार अ भांब ई विध वार को येदो निधि लस्तु एंटे
(1:11:32) वणिक तुल तो नैना वार को तव कुनार कदा कानी ं आत्म को अचार एवर अनरिच गलर निषध पाडे चकरम निश यो निशब्द गानी मरसे मगुर निंगी लोनी रल गानी अचार चेय गलता इंका मीर लिगं ज्वाला कानी दानी पग कानी गालि की भारम ताया आत्मा निश्चलम नीट मडग लागा ति करतो अंद अलज कलिगन गानी म अनुक नारा तर चुगा मी तिरस्कर चु कुन कोरकल आनंदा मी अस्तित्व नि गूढ अरल लो की पोय कर्च एवर चगल नेड वदल कुद रेप तगल कोद मी देहान को दानी वार सत्व न्याय बद्ध हक्कल
(1:12:21) गुरिंची लसु वाटनी निराक दानि मोस पुचले कनि पिंचे देहम अने वेण नुंडे कनि पिंचानी आत्मा पाड ंद अद पलिक सुस्व संगीता ना लेका अपभ्रंश कठोर शब्दा अनद निर्णय चु कोवलन मीरे इ मलो ई प्रश्न वेस कुं आनंदा मंच वाटनी चड वाट नंड वेर चेयम एला अ पलालो की उद्यान वना लो की वे अ म लस कुं पल नंड मकरंद लडम तेने टीगल ला आनंद वाट तम मधुवन तृप्ति त्राग इम पलक अंते आनंददायक मनी तेने टीग को पुष्पम जीवधारी ग प्रेम मोस कोचे देव दूता पु
(1:13:10) कोवम लो आनंदम री जीविता अवसरा रिस्ते इमलो आनंदम इंकर की आनंद पवस प्रसाद आर्फ प्रजला मी आनंदा मी पव तुममला जीच सौंदर्यम ओ कवि अड़गा सौंदर्यम गुरिंची माक चप अत समाधानम इचाड सौंदर्यम तनक तान मी मार्गदर्शन चेते तपा दानी म एकने वेकता एकड़ कगार मयु मी माटल आमे अल्ल कुंटे आमे गुरिंची मीम मालाड आर्थ तत्र अार सौंदर्यम दया सौ कुमारन कग यन तल्ली वले आमे कंत लज्जा
(1:13:57) भारतो तन दन दिव्य तेजस तो मन मध चरि स्तु अ उद्र हदय मात्र काद सौंदर्यम शक्ति कलिग भीति कोलिप प्रचंड उपला आमे मन का कि भूमि शिरस पै आकाशा कका विकल गा विंद अ अलसी सोमसन वार अं सौंदर्यम सनी गुगल वंट आमे मन आत्म संभा निब्द प्रपंचा लोब आमे गंतु नीक भय पड़ वण के सन्नी दीप सिखला मंद्र पलक अ कानी अशांति पर अार आमे पर्वत सानु बिरगा अरवड मेम विम आमे केकल तो पाटे र्र डेकल शब्दा रेकला चिन सडल सिंह गर्जन को नव
(1:14:46) अ रात्र नगर कावली वार अं सौंदर्यम उदयम तर्प उदय अ अपराहन वे चिर व्यापार बाट सारल अार आमे सूर्यास्त मयप गवाक्षा नंची भूमि वैप वंग मेम चूम अ शीता काल लो मंच दार पोय वार अं आमे वसंत काल लो ंड कोनल दाट कुंटू वंदनी ववि वेम पं कोसे वार अं आमे शिशिर राले आकल तो कसी नर्ड मेम चूम आमे कुलो कोनी मच धार क उनाई अ इ रकान मी सौंदर्यम गुरिंची चत वर कानी वास्तव मी चिंद सौंदर्यम गुरिंची काका रनी
(1:15:32) कोरिकल गुरिंची सौंदर्यम ओ जीविता अवसरम काद ओ उद्वेग भरत तन्मय अद दाहा तो पिच कटिन नोर काद देही अनि चाच बड खाली य काद अद प्रचंड तेजस तो ज्वयं अमिता ंद भारतम आमान अद मीर कतो चूसे स्वरूपम काद चेवल तो विने नम का कल मसकना चूड़ गलगे स्वरूपम चेवल मसकना विन गलगे नमन अलाग अद मक्क ट नंची रे रसम काद तीक्षण गोटिक अनुबंध उन पक्षी रक्का काद अद सदा विकस गुबा उद्यान वनम अलु पेरक कुंडा रेकल नाची ए गुरत रिचे देवता
(1:16:17) समूहम आर्फ प्रजला जीवितम लो सौंदर्यम वेद जीवितम तन मुसु लगि तन पवित्र स्वरूपा प्रदर्श चन ते मीरे जीवितम मीरे दनी मुखा दनम को सौंदर्यम अटे अनंत शाश्वतम नतान अदम चूडम मरि मीरे अ शाश्वतम मीरे मम चचन अदम कोडा मत धर्मम ओ वृद्ध अर्चक अड़गा माक मतम गुरिंची चप अत चपा रो मी तो ने तुं मरे मटी मतम मन बहिरंग चेसे क्रियल अंतरंगम लो चेसे योचना ले कदा अलाग अट क्रिया रूपम काका इट योचना
(1:17:05) रूपम काका ओ पक्का तुल राति तुना बटन तुना मदलो निरंतरम पलके आश्चर्य उत्सुक ले कदा री चरल नंडी विश्वासा वारी वृति पनल नंडी नम्मकालु वेर चया एव की साध्यम एवर तम कालानी मु पर चुकनी भागम भगव की इ नाक इ ना आत्मक इ शरीरा की अ पंप काल चेय गलर मी काल मान डियल विश्वम लोनी ओ आत्म नंडी वेरोक दन एगर टकने रेले नैतिक नियमा तन आच्छादन चेसी रिंच वाड दिगंबर उट मेल वायु कानी सूर्युडु कानी अनी चर्म रंधल यव कदा एते तम नवनी नीति सूत्राल
(1:17:53) आधार निर्व चिच कुं अत तन गान कोकन पंजर लो बंदी चेसन अत्यंत स्वेच्छा पूर्वक नम चुवल संधु निची ती गल मध्य नंची राद इंका एते देवता राधना टकीला भांची इष्ट सारम मस्त रस्त उंट वारु सूर्योदयम नंची सूर्योदयम वरक तेर चुकने उे गवाक्षा गला तम आत्म मंदिरा असल दर्शने लेद माटा मी दिनचर्य मी मंदिर मतम अंद ए प्रवेश चिना मी तो पाट मी सर्व स्वानी मोस पंडी मी जीवनाधारा काडी कोलिम सुती बादल तो पाट आह्लाद करम वणन को तीस प एकांतम लो
(1:18:40) प्रशांत मनसन मर मर साधि चिन विजया कंटे तुक गानी च चचन वफल कंटे दिगुवा गानी पलेर इंका मी तो पाट मी साठी वानी को तीस पी एंटे धनलो मी वारी आसल कंटे तुक एगर लेर वारी नैरास कंटे दिगु वक पतन कालेर इंका मी भगवंत एरिग टे समस्या पूर वं मी मांसल तो कालम वर्थम यका मम्म म बागा पिलिच चूस कुंटे मी पिल तो आड कुने सृष्ट कर्तन सरिगा चड़ गलता अद विध लेती अनंत न्य लोक चड मेघालो अत नस्त कनि पिस्ता चाच तु विद का वर्ष
(1:19:26) धार पाट नेल दित इंका म विक पुष्पा नवतन वृक्ष खलो तुल तन उना अनिनी तका चस्ता मरणम अप अलमित्र अडिग इ मरण गुरिंची लगा कोरुना अत चपा मर मरण रहस तेलस कोवलन दे ते जीवन हदलो अन्वे द एनी कगार चकट अलवा पड़ पग वेलो ड गुडल गव क कांति रहस चेय लेव कदा मरण रहस्य रिंचन परिपूर्ण अवगाहन कलिग ाल मी हृदयानी जीवन परिमाणम अंत मेरा विस्तर चेय ुक जीवन मरणा
(1:20:15) नदी सागरा वले ओ दनी नंची वेरोक अभे मी आला अभिलाष ला गंभीरता लो परम गुरिंची निब्द ज्ञानम निगम ंद मंच दिबल कि वितना कल कनट मी हृदयम क अ ज्ञानो दवम गुरिंची कल कंद कलन विश्व सिंच एं वाट लोने शाश्वत दार दाग उं मरणम रिंचन मी भयम तन सन्मा चे चान भूम चूची पश कापरी पिवा भय पड वंट दे आ कापरी कुर्र वानी वक किं तान पंदरा समाना रिंचन आनंदम ंद कदा अलाग तन वण रिंचन स्पृह अतन ंद
(1:21:02) कदा ंद कंटे मरणम अने गालि केरेटा मध्य नगन लब सूर्यलोक करग पवम कदा ऊपिरी लेम अपट वरक अद अनुभव व्याकुल पूरत आट पटल नंडी विदल चेसी ए बादर बंदील लेंडा स्वेगा भगवंत दि सगा साग पनि वमे कदा मर निब्द नद नीर तान पुड़ नोट नंडी पाट बटक वंद पर्वत खरा ग्रनी रिन पुड़ पर्वतारोहण प्रारंभ प्रकृति मी अवयवा टनी स्वाधीन चेसक नलो कलिप कुन पुड़े निज नर्च गलर वीड कोल सायंत्रम इंदी योगिनी अलमित्र अनद ई
(1:21:49) दिनम ई प्रदेशम कड़ा मी आत्मा यक दिव्य वाकल तो पवित्रम अत नाड मालाड मना नेन श्रोत कडा कदा अत आलय मेटल दिग नगा प्रजल अत अनुसरी अत तन नौकन चेरी नी कप मद लचना प्रजल चस्त अत गंतु पची मल्ली इला अना आर्ली प्रजला मम वि लगा गाली न प्रेप नं ंदर नाक लेद गानी ने वेक तद मनम अंता संचार लम एकांत मार्गा अन्वे शिच कुंटू पता य ओ दिना अंतक मंद रोजु मुगन स्थानम नंची
(1:22:34) प्रारंभम य सूर्योदयम दानी मुद सूर्यास्त मयम वद पिन स्थानम लो मनन कगन लेद भूमि निद्रा मन प्रयाणम सागत ंद मनम अं ओ महा वृक्ष वित्तलम हृदयम परिपूर्णम परिपक्व मप गालि मनन सक अ लोन ंद बहु कोद कालम ने मतो उन बहु कोद माटल मतो पलन कानी ना गंतु मी चेलो सगन ना प्रेम मी तलप मायम ने मल्ली वस्तान व मंत उत्तम हृदय आत्मक चेरत स्पष्ट मालाड गगन पेदल ने मतो म संभा
(1:23:20) शिस्ता अवन सागर करल मीगा ने मल्ली वस्तान मरणम नन दाचे सना दानी अनंत निब्द न आ वंचना मी विवेक ज्ञानानी तुक कुंटू वस्तान अटना अभिलाषा वृधा काद नेन सत्यम तपा मरद प्रव चिंचन इते अट सत्यम मंत स्पष्ट कंठ स्वरम मी तलप तो सादृश्य कलिगन माटलो तन तान व ंद आर् फलिस प्रजला ने गालितो पोन कानी ंद निरर्थक शून्य लो का मी अवसरा ना प्रेम रोजु साकार चेसी उक पोते अ साकार मंद इंको रोजु वरक अद वागन लच
(1:24:07) ाली मनिष अवसरा मारव गानी अत प्रेम गानी अट प्रेम अनी अवसरा र्प गल ाने अभिलाष गानी मारव अंदुकु नेन मल्ली वस्तान र् पटुको अपट वरक टला पचक पग मंच लिस रातो तुषार बिंदु मात्र पोलाल ली न पगरी मेघ रूपानी संतर चुकनी वर्ष कुरंद नेन कड़ा अव पग मंच कंटे भिन्न कान निधु निशब्द ने मी धुलो पड़ नन ना आत्मा मी इलो प्रवेश चगा मी हृदय स्पंदन नाव मी ऊपर ना मुखा ताक तुगा ने मिम अंदर एरिग
(1:24:53) नान अन ने मी आनंदा लकन मी बालन लकन निद मीर क कलने नेन क कनान अनेक सर्ल ने पर्वत सानु मध्या सरस वले मी मध्य उंडी मी न्नत खरा वपन वालन ंप ं पुलगा एरे मी तलप बारन कोरकल समू हालन नालो प्रतिबिंब चान ना निब्द लोक मी चिन्नाला बोसी नवल पिकाल पच वारी विरत कंठल नदी प्रवाहा परव तोई ना अगाधा अ नितु पटकी वारी केरिल ये मात्र तग लेद कानी नवल कंटे मधुरम प्रिय निरीक्षण कंटे मिन्न नाक लभ
(1:25:41) चाई अवि मीलो परिमिति लेवी लेन एवरी विराट व्यक्ति लो मीर अंता जीव कणा नाडी तंत्र अत एवरी मंत्रोच्चारण लो मी नालनी शब्द रहित टुं यो अत अट विराट पुरुषु लो ु वलना मीर क मन्नत मयु अनिनी तद कंग वीं आराध द्वारा नेन मिम नंदर कड़ा चस्त प्रेम गलिन महा वरणा अधिगम प्रेम चेर गलगे दूराम उनाई य कल्पना शक्त ये प्रतीक्षा गमना दाट एगर गल ंड फल पुष्पाल जीव चैतन्य तो विलस महा वृक्षम वले विराट पुरुषु मी अंदर लोन उनाड अत नि शक्ति ममन भूमि पै लपु ंद अनी दिव्य
(1:26:28) परिमल मिम विश्वात लो परि भ्रम पचे सुंद अत शाश्वत लो मंता अमरलता मीर गलस लोनी बलहीनता लंके अंत बहीन मी तो ंदर ि उना कानी इ सत्यम लो सगम मीर अंद नि अति बलम लंक अंत बलवंत क मी अधम लक्षणा प्रमाण मम्म निर्णय चडम महा समुद्र शक्ति दानि मद तेल नरग कण प्रमाण निर्णय चडम वंट दे ममन मी वैफ प्रमाण गणि चडम काला गुंग वचे मार्लक ऋतुवन निंद चडम वंट दे इंका मीर महासागर वं वार डन भारी नौक ताम कदले को मी अलल कोसम निरीन पटकी
(1:27:16) समुद्रम वले मीर क मी रंगान ंदर पलेर अलाग मी ऋतुल वले शीता कालम लो वसंत राव कट चेना वसंतम मी प भरोसा ं मात्र ननका तन निद कतो चिलास नंद अत म मेकना अत मलो मचने चूसा अ रिकर डम कोसम ने विध मालानी अनको नेन माटल व्यक्त पचन मी आलोचना मीर रिगन दे पैगा माटल तो डिन ज्ञानम अ एमटी माटल लेनी ज्ञान नीड काका मी लपल ना पलक मद गता स्मृत पुड़क मन गुरिंची नी तन गुरिंची कानी रुक लेनी पात
(1:28:03) रोजुल दान ो गंदर गो भावन कलगन रात्र िप चेसक ष पेट नं तरंगा मालिक तम ज्ञान संपद मीक प्रसाद चन विजल इक अवतर मी ज्ञान संपद तीस पवन ने वन कानी अ ज्ञानम अधिकम नीनी ने लसकना अद मीलो प्रज्वलित तन नंची तान निरंग पपि चुकु आत्म ज्योति कागा दानी निरंतर विस्तृत एरका मर गति स्ना मी कालानी गुरिंची वग सुनार अद समाध को भय पडना शरीरा उटू तन तान अन्वे शिच कुं जीव चैतन्यम इ समाध लेव ई पर्वत सानु मैदाना
(1:28:52) यल उन्नति की दोहद प सोपा नालन मी पूर्वी कुन शाश्वत विश्रांति लो उं चिन क्षेत्रा पक्का नंडी पोत वाटनी परीक्ष चचन यते मी मी पिल य चे कलिप नर्च क चस्ता मीक लिंडने मी उल्लास करमना प्रसन्नन पतार इतर मी वद को वच्ची मी विश्वासा पतिगा बंगार वागदा गा मी वारिक संदलन अधिकारा कीर्ति इर िन वागन कंटे तवे ना म ना पटला विशेष तृत्वम चूप म नाक जीवितम पटल प्रगा तृष्ण करणं निजा की तन आकांक्षा तृष्ण तो पिचक
(1:29:39) पोइन पेव गान जीविता आ तृष्ण रचे नीट बुगन चेयम कंटे ए मनिष लव बहुमति अं येदी उद नाक दक्कन गौरवम लभ चिन बहुमानम ये मं जलधार ने वना नाक धार दाहा उनि पिंचे ने द ग्रोल अ न ग्रले नाक गर्वम अनी बहुमाना स्वीकन वल मालिन बिडियम मर भांचा नि जमे गर्विष्ठ नेन वेतना अंद कोनेक सिद्ध मेंे गानी बहुमन काद म न मतो भोजन चेसे आह्वा चिना अकड़ा दरकिन का कस रक तिनी
(1:30:28) मदानंदपुरम निदिन पटकी ने तिद ना नोटिक हित ना निद्रलो मधुर कल्पन तो संपन्न मया दानी कारण मी ना दिवा रात्र साफी गडम कोसम प्रेमा नुर क्तु तो निरंतरम योचने कदा दनक गान मीक ना आशीर्वाद मं इना इम य मी ले तन तान अद मेुने तृत्वम शिला सदृश अंद सत्कार लचन प्रंस शाला पालक जन्म निस्ता मीलो कंदर न एका किनी ंट तनानी आस्वाद गड पुता ननी इंका इला अनार अत चट पुल तो समालोचन चेस्ड गानी मनुल तो काद अ
(1:31:16) ंड कुम मी कर्च नगरम मी चूड अ निम ने कोंडल नेन निर्जन प्रदेशा संचन सुदूर ंची काका मिम्मालनी स्पष्ट एला चूड़ गलन दूरस्थ कानी वार दग डम एला इंदर न माटलो काका इला अनार परदेशी परदेशी एलेनी तुलन एकत गदल ग कटने चोटलो ंद ंव अंदरा दनक ंद अरल चस्व नी लो ए तुफान डि पटवानी आकाश लो ए अदृश्य विहंगा टाड दमनी रा व मालो का दिगी मा रोटेल तो नी आकली मा मधु तो नी दाहा र्च को तम आत्म प्रशांत वार विध अनार कानी
(1:32:06) वारी प्रशांत मंत प्रगा मते वारिक लसे मी आनंद विषदा रहस्यालु ने अन्वे स्नान निंग पै निचे मी आत्म विराट रूपाल ने वब वटाना कानी टगा वेटा बता क ना धन एन्नो रालक ना वक्ष मेंे गुरी इंका एरे वाड प्राक वाड कड़ा ंद कंटे ना रेकल सूर्यन ए दुरगा विपक भूमि मद पन वाट नीड पाके ताबे लागे अनि पिं चिंद अंते काका ने विश्वास संशमनी कोड़ा एंदला विश्वासम मी गुरिंची ना अवगाहन मंत वृद्धि चडम कोसम ना गाया ना वेने रेप
(1:32:52) कुंटू रिचे वानी अ विश्वासम अवगाहन तो नागलन म मी शरीराचे आवच बन वार नी इल्क पोलाल को परमम वार कानी काद मी निज स्वभाव पर्वता कंटे तुगा लिलो वि हरिचे अ वेधन कोसम एंड लो की देक पोद काद रक्षण कोसम गुं तकनी दाने क काद अद परिपूर्ण स्वच्छ कद पुड़ मंतन आवच आकाश परि भ्रम नाय माटल अस्पष्ट उं वाटिनी विशद करं चमनी कोरक विषयालु काद ना रिंचन रुकन आरंभ लो उन पट दगा कलिग उक जीवितम गानी जीव गानी पोग मंच मसक लोने
(1:33:42) आविर्भव सताय गानी स्फटिक पु स्पष्टता लो कादु एवर रुदुर स्टम पग मंच क्षीण दश अनि न ज्ञाप कम मुं चुकने वा विया ज्ञाप कचुको मीलो दुर्बल अगोचर अ मर अनु कुने निजा की शक्ति वंत निश्चित मुन मी एमकल स्थिर समुन्नत लपद मी ऊपरे कदा इंका मी नगरानी निर्मिन द दानी लोनी सर्व स्वान की रूप कल्पन चेसन क मीके गुर्ले म कन्ना ट स्वप्नम कदा ऊपिरी उच्छवास श्वासा चूड़ गलते म इ देनी चूर मरि स्वपन गुस गुस विन गलते मरे शब्दा
(1:34:28) विनर कानी म चूले विन लेर अवन मरी मी कन कपिन मुसन ा नेसन वारी हस्तम पैता मरि नगन द विन कुंडा मी लो डिन बंक मटनी दानी अक तिन वारे तव लगि चाली अपड़े मर चस्ता विं ना मी इ गतना असच कोराद इ चमन तल वव राद अ अस्तित्व परमा म एगन म कांति प्रकाशा प्रंट चकट चिक्क दना कोनि आडत ई विषयालु वारिक चपी अत तन चट्टू चूसा ओड सरंग नौका ग्रम मद नंची पूर्ति तबन तेर चापल वंका तदरी सुदूर सागर मार्गम
(1:35:16) वंका चूना अत चपा ओरिमी विपरीत ओरिमी ना पव सरंग को गालि टी तो वस्तो तेर चापल अशांति तो टुनाई चुक्का क सर दिश को तिम अभि ना ना सरंग ना मौन कोसम निरीक्षे एड महासागर तरंगा खर गाना विं मिगलिन नाविक क ना वाकल ओपिक तो विनार इ वारु रक्ष चले ने सिद्ध उन वागु सागरा चेरिंदी मरक सारी आ चलनी तल्ली तन कुमार हृदयानिकी तु कुंद आर् फलिस प्रजला मीक शुभम कलग गाका ई रोजु गडि चिंद कलुवा तन रपट कोसम मुच कुंटल अद क
(1:36:05) मूस कुंद इ मनक लबिन दनी म पर रक्षु कोवा अद चालन पिस्ते मनम मरला दग डिगा दानि प्रसाद दात वैप तुल चाचा ने मल्ली वस्तान विषयम मरुवक इंकों कालम ड़ते ना अपेल मसी पट पोई इंको देह लोक परगल पेड़ता इं कोद कालम निरीक्षण न्य ं कालम प्रतीक्षा अनंतरम नाक इंको स्त्री मूर्ति तन गर्भम लो आश्रयम इस्तु मीक मी तो गडि पिन मधुर क्लक इ वड कोल निन्न निन्ने मन स्वप्न लो कलस कुंद ना एकांतम लो मी नातो आडी पाड मीकन अपक्ष तो ने आकाश लो हरमल कटकना कानी आ निद्रा
(1:36:52) चद पोइ स्नम पूर्त राबोदी इ लि पद काद अपराहन पद मन नेति मद िंद मगत मनम संजम चेराम इ एड बाट तपन सरी ओवे ज्ञपका सायम संध मम कलस कोटू जगते अंदरम मनसु विी मालाड कुं अप ना कोसम मीर इंका गंभीर मना नम चयाली मरो स्वप्न मन तुल कलक अंदरम आकाश इंको पद सौधा निर्मम इला चेपी अत ना विकुल को संज चेड वेंटने वार लंगर नेत्ती स्तंभा को कटिन ओड़ता लिंची र्प दिश साग पयार ओ पेटना ओके गंतु नंड वनट ओ रोधन अ प्रजा समूह नंडी
(1:37:41) लव अद सायम संध पैक लेची सागर तलम मद सुस्व भेरी नादला प्रतिध्वनि चिंद अलमित्र निशब्द निल बड़ नाव पग मचलो अदृश्य अंत वरक चूसिंदी अंता अक नंची वे पोया क आमे अडे ओंट लब सागर कुड तक चस्त अत अन् ई माटल हदलो मनन चेस कुंद इं कोद कालम निरीक्षण शून्यं लो कंत कालम प्रतीक्षा अनंतरम नाक इंको स्त्री मूर्ति तन गर्भम लो आश्रयम इस्तु
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