Sunday, July 26, 2026

गर्भावस्था के दौरान ये 5 काम बदल देंगे बच्चे का भविष्य | Garbh Sanskar Explained @GSCbyDrVishnuMane​

गर्भावस्था के दौरान ये 5 काम बदल देंगे बच्चे का भविष्य | Garbh Sanskar Explained @GSCbyDrVishnuMane​

Author Name:Naagru Vikaas

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Youtube Video URL:https://www.youtube.com/watch?v=iTyw8WbpkrY



Transcript:
(00:00) हर घर में ना कहानी गाई जाएगी अभिमन्यु की। अभिमन्यु मां के गर्भ में डिजाइन हो गया था। उसको सब कुछ पता लग गया था। लेकिन लास्ट में उन पे मां जाग गई थी। तो उसको ये नहीं पता था कि चक्करों से बाहर ना आना चाहिए। बेसिक गलतियां एज अ पेरेंट जो नई जनरेशन जो पेरेंट बन रही है जो भी 25 26 [संगीत] साल का जो आपको देख रहा है वो क्या करते हैं? जैसे मैंने अभी बताया कि 45 बेबीज हैं जो वर्ल्ड रिकॉर्ड दर्ज करते हैं। जो फ्यूचर पेरेंट्स होने वाले हैं उनको क्या ऐसी पांच हैबिट्स अपनी लाइफ में रखनी चाहिए ताकि वो एक अच्छे पेरेंट्स बन पाए।
(00:35) अगर बीज शुद्ध है तो फल भी बहुत अच्छा मिलता है। यहां पे एक एग्जांपल देना चाहूंगा। छत्रपति शिवाजी महाराज जी प्रेगनेंसी के दौरान मां खुद तलवार लेकर प्रैक्टिस किया करती थी। 36 स्किल आइडेंटिफाई किए थे। ये मुझे मेरे बेबी को देना है। बच्चा सात साल का हो गया। और डॉक्टर ये कह रहे हैं कि उसका ब्रेन टू इयर्स जितना है। एडीएचडी साइकोलॉजिकल डिसऑर्डर्स 10 में से छह बच्चे आज कुछ ना कुछ प्रॉब्लमिक बन रहे हैं। स्पेशली माएं सीरियल देख रहे हैं जहां क्राइम पेट्रोल टाइप के सोशल मीडिया पे रील्स देख रही हैं। उसका इंपैक्ट क्या पड़ता है भाई? तो मां प्रेगनेंसी के दौरान
(01:12) यदि त्राटक विधि कर रही है तो मां का आईसाइट स्ट्रांग बन रहा है और मां की वजह से बेबी का आईसाइट स्ट्रांग बन रहा है। 150 से भी अधिक फ्लैश कार्ड आइडेंटिफाई करने के लिए उस बेटी का दो वर्ल्ड रिकॉर्ड बना फोर्थ मंथ में। मैंने अगर सही सुना है तो 3 महीने तक का बच्चा तो प्रॉपर्ली देख भी नहीं पाता है। नमस्कार दोस्तों, कैसे हैं आप सब? आप सबका फिर से स्वागत है योर ओन ग्रोथ यानी कि आपका अपना विकास में। हम लाखों करोड़ों रुपए खर्च करते हैं अपने घर को सजाने के लिए। आर्किटेक्ट हायर करते हैं। एक बात पूछूं उससे तो घर सजेगा। जिसके दम पर हम
(01:50) आगे जाने वाले हैं। हम बात करते हैं अपनी सात पुश्तों की। हम बात करते हैं अपने भारत की भारत एक विश्व गुरु बनेगा। कैसे बनेगा? वो बनेगा जब हमारी संतान, हमारे बच्चे ऐसे होंगे। क्या आपने कभी ऐसा सोचा है वो बच्चे ऐसे कैसे होंगे? कैसे इतने जीनियस बच्चे पैदा होंगे? कैसे स्वामी विवेकानंद आ सकते हैं? कैसे भगत सिंह दोबारा आ सकते हैं? कैसे छत्रपति महाराज शिवाजी वापस आ सकते हैं? कैसे महाराणा प्रताप जैसे इतने बलशाली इतने लॉन्ग टर्म विज़न वाले कैसे महाराजा रंजीत सिंह जैसे व्यक्ति वापस आ सकते हैं। कैसे वैसा दिमाग आ सकता है? यह सब संभव है। गर्भाधारण
(02:24) संस्कार के द्वारा। यहां पर हमें ना एकदम परफेक्ट बेबी की प्लानिंग नहीं करनी है। मुझे लगता है कि हमें सिर्फ प्रिपयर्ड पेरेंट बनना है। हमें सिर्फ अवेयर पेरेंट बनना है। अगर हम इतना कर गए ना भारत को विश्व गुरु बनाने से कोई नहीं रोक सकता। और आज इसीलिए हमारे साथ जो व्यक्ति हैं वो बाय प्रोफेशन तो मैकेनिकल इंजीनियर हैं। लेकिन जिस मिशन पे वो काम कर रहे हैं वो मेरे दिल के बहुत करीब है। वो है गर्भाधन संस्कार। आज हमारे साथ हैं बहुत सारी माताओं को हेल्प करने वाले और बहुत अच्छे काम को करने वाले जो कि बहुत जरूरी भी है जो भारत निर्माण में काम कर रहा है वो हैं
(03:00) विष्णु माणिकी जी। सर आपका बहुत-बहुत स्वागत है। नमस्ते सर। सर एक बात कही जाती है कि बच्चे हमारे देश का भविष्य है। लेकिन इन बच्चों का भविष्य कब तय होता है? मैं हमेशा कहता आया हूं कि जन्म के बाद का जो सक्सेस है, भविष्य है, वह जन्म के पहले के 9 महीने में डिजाइन किया जाता है। और वो डिजाइन करने वाली मां जो होती है, मां डिजाइनर है। मां डिजाइनर है। जो खाएंगे, पिएंगे, जो सोचेंगे, जो बोला जाता है वैसा का वैसा बच्चा डिजाइन हो जाएगा। और लेकिन आज की जो जैसे मेरी मेरी जब मदर होंगी प्रेग्नेंट मेरे टाइम पर तब तो इतना टीवी का चलन ही
(03:38) नहीं था। बिल्कुल नहीं था। इवन लाइफस्टाइल भी कहां आज के जैसा था। हम उस वक्त मां जब घर में थी तो वो अनेक क्रियाएं कर किया करती थी। उसको पता नहीं था कि इसका असर मेरे बेबी के ऊपर क्या हो रहा है। बट ऐसे हमारे जो कल्चरर्स थे हमारा जो लाइफस्टाइल था उस वक्त का वो बहुत ही अच्छी तरह से डिजाइन किया हुआ था और उसका बहुत अच्छा असर को के संतान के अंदर होता था। मैं एक एग्जांपल इसके रिलेटेड आपको दे सकता हूं। 40-50 साल पहले की मांओं को हम देखेंगे तो वो माएं वर्किंग नहीं थी। यानी कोई स्ट्रेस नहीं था उनके ऊपर इतना अच्छा इतना ज्यादा जैसे
(04:12) आज वर्किंग महिलाओं के ऊपर है और दूसरी बात जैसे कि कई सारी एक्टिविटीज किया करती थी मैं बात किया उसमें एक एक्टिविटी मतलब याद रहेगी आपको जो 40-50 साल पहले वाली माई थी वो माएं जब भी समय मिलता था वो मार्केट से जो उल लेके आया करती थी उस उल का स्वेटर बनाना थी तो जस्ट इमेजिन कीजिए जो मां प्रेग्नेंट है और आने वाले उस बेबी के लिए स्वेटर बुन रही है वो तो स्वेटर बुनते वक्त किसका ख्याल किसका रहेगा उसके मन में? बहुत सही बात बोली। बहुत सही बात बोली। बच्चे का ही ध्यान रहेगा। एक्सैक्टली। और वो एक बार नहीं दिन में घर के काम करते-करते जब भी उसको खाली समय
(04:52) मिलता था वो हाथ में लेकर बेटी बुनने के लिए। तो वहां पे क्या होता था? साइकोलॉजिकली वो इमोशंस, वो लव, वो कनेक्शन, वो बॉन्डिंग क्रिएट होता था। आज की मां को जो मां सुबह से ले शाम तक खुद की जिम्मेदारी, हस्बैंड की जिम्मेदारी, घर की जिम्मेदारी, ऑफिस की जिम्मेदारी इन सारी जिम्मेदारियों में उलझी हुई है। उस मां को नेचर ने दी हुई जो एक जिम्मेदारी है वोक के अंदर बेबी को डिजाइन करने की जिम्मेदारी मतलब वो जिम्मेदारी कहीं तो इन सारी जिम्मेदारियों में दब चुकी है या उसका जो मतलब ध्यान कहीं तो कम हो चुका है। वाओ आप बहुत बात करते हैं गर्भाधन
(05:31) संस्कार पर तो एक बार ऑडियंस को बताएं नाम से समझ में आ रहा है लेकिन क्या होता है एग्जैक्टली उसे पूरा ढंग से एक बार क्लियर कर दीजिए जरूर जरूर जरूर सी क्या होता है कि एग्जांपल के माध्यम से हम थोड़ा सा समझने की कोशिश करेंगे क्योंकि एग्जांपल्स क्या है कि हमें याद रहता है और रिलेट करते हैं। सो जैसे किसान हम देखते हैं किसान क्या करता है? जिस तरह जिस तरह का अनाज उसको चाहिए वही बीज बोता है। करेक्ट। उसको अगर मतलब गेहूं चाहिए तो वह गेहूं बोता है। और गेहूं कैसा बोता है? अच्छा बीज। बीज कैसा चुनता है? अच्छा बीज। जमीन कैसे बनाता है? वो उपजाऊ जमीन बनाता
(06:08) है। उपजाऊ जमीन चुनता है और उस जमीन के अंदर एक अच्छा बीज बोता है। अभी जमीन को भारत में हम क्या कहते हैं? भूमाता। ये धरती मां कहते हैं। तो किसान क्या करता है? बीज बोता है तो कहां पे बोता है? भूगर्भ में बोता है। पिता भी जब बीज देता है वो स्त्री गर्भ में बोता है। सो किसान ने जो बीज बोया है वो बीज अभी भूगर्भ में जाता है। जैसे ही वो भूगर्भ में जाएगा वो पहले कहां पे उगेगा? जमीन के अंदर या जमीन के बाहर? पहले तो जमीन के अंदर होगा। एक्सैक्टली। तो वो क्या होता है? भूगर्भ से पहले जैसे ही जाता है भूगर्भ से जुड़ जाता है। भूगर्भ से जुड़ने के बाद भूगर्भ
(06:46) के अंदर जो एनवायरमेंट उसको मिलता है यानी पानी मिलता है जो भी फर्टिलाइज़र्स मिलते हैं जो न्यूट्रिशन उस रूट्स को मिलता है उस बेसिस पे निर्भर होता है कि यह पौधा जमीन के बाहर सफल होगा या नहीं होगा। सो जमीन के बाहर की उस बीज की जो ग्रोथ है वो ग्रोथ पूरी तरह से जमीन के अंदर भूगर्भ के अंदर बीज के रूट को मिले हुए एनवायरमेंट के ऊपर निर्भर करती है। यस और नो। सो एग्जजेक्टली पिता क्या करता है? पिता बीज देने का कार्य करता है। पिता से आया हुआ बीज स्त्री गर्भ में जाता है। स्त्री गर्भ में वह वहां पे कनेक्ट हो जाता है प्लेसेंटा से और कनेक्ट होने के बाद में 9
(07:23) महीने के लिए वहां पर रुक जाता है। तो उस 9 महीने में सोचिए एक छोटा सा बीज पिता से आया हुआ है। उस छोटे सा छोटे से बीज का पूरी तरह से रूपांतर मतलब ट्रांसफॉर्मेशन किसने किस में होता है? एक पूरे व्यक्तित्व में होता है। एक बच्चे में होता है। मतलब पांव के नाखून से ले सिर के बालों तक पूरा शरीर उस बीज से निर्माण होता है। और वो कहां पे हो रहा है? स्त्री गर्भ के अंदर। सो पूरा बच्चा ही उस कोख के अंदर बन रहा है। आंखें मतलब हृदय, ब्रेन सारी चीजें कोख के अंदर ही बन रही है। वो ट्रांसफॉर्मेशन जो है एक छोटे से बीज से एक व्यक्तिमत्व में रूपांतर करने का
(08:00) ट्रांसफॉर्म करने का काम यह मां कर रही है। और कब कर रही है? 9 महीने के प्रोसेस के दौरान कर रही है। तो यह 9 महीने का जो समय है, यह जो प्रोसेस है, उस प्रोसेस को आप कैसे मतलब कैरी करते हैं? इग्नोरर्ड वे में से मतलब जैसे कि आपने ध्यान नहीं दिया तो बच्चा बढ़ने वाला नहीं है। ऐसा नहीं है। एटोनॉमस सिस्टम जो है हमारा सबकॉन्शियस माइंड है वो स्त्री गर्भ में बच्चे को बढ़ाएगा। लेकिन अगर फोकस करके यदि आप बढ़ाते हैं, इमोशनली कनेक्ट होकर बढ़ाते हैं तो डेफिनेटली उसके अंदर कुछ बहुत अच्छे परिवर्तन हो जाते हैं। सो जैसे हम हमेशा एग्जांपल देते हैं कि आप एग्जाम दे रहे
(08:38) पढ़ाई करके एग्जाम में जाएंगे तो रिजल्ट्स कैसे आएंगे? अच्छे आएंगे। और बिना पढ़ाई करके आप एग्जाम को जाएंगे तो रिजल्ट्स कैसे आएंगे? भरोसे मतलब रिजल्ट्स तो ही लगने ही वाले हैं बट पढ़ाई करके यदि आप एग्जाम को जाते हैं तो आने वाला रिजल्ट्स अलग होता है। वैसे ही गर्भ संस्कार करके इस गर्भाधन प्रोसेस को फॉलो करके यदि आप बच्चे को जन्म देते हैं तो इस 9 महीने के दौरान जो गुण जो क्वालिटी जो कैपेसिटी जो बौद्धिक क्षमताएं आप प्राप्त करना चाहते हैं बेबी के अंदर वो लाने के लिए कुछ प्रयास जरूर कर सकते हैं और एक बेहतर संतान को आप जीवन दे सकते
(09:14) हैं और एक संतान अगर सही निकल जाए तो कहा जाता है कि आपकी सात पुश्तें सुधर जाएंगी। एक घर में अगर कोई आईपीएस आ जाए, एक घर में डॉक्टर आ जाए या एक ऐसी जीवात्मा आ जाए जो आपके घर के मतलब फाइनेंशियल, मेंटल, फिजिकल हर तरह की प्रॉब्लम्स को सॉल्व करने की ताकत रखता है। जैसे मैं भी अभी पेरेंट बना हूं। तो जब मुझे पता लगा गर्भतन संस्कार के बारे में तो जब हमने सर्च करना शुरू किया ना बहुत सारी चीजें आ रही थी। कोई कह रहा था कि पहले महीने से शुरू होता है। कोई कह रहा था सातवें महीने से शुरू होता है। कोई कह रहा था उससे पहले। ये कंसीविंग से पहले
(09:44) शुरू होता है। तो एक क्लेरिटी नहीं थी। तो क्या इसका सही समय है? कहते हैं कि ऐसा कहा जाता है कि अगर बीज शुद्ध है तो फल भी बहुत अच्छा मिलता है। सो बीज शुद्धि नाम का एक एक्टिविटी आता है जो गर्भधारण से पहले ही किया जाता है। एटलीस्ट तीन महीने पहले यदि पतिप्नी अपने आप को डिटॉक्स कर लेते हैं जिसे हम फिजिकल डिटॉक्स और मेंटल डिटॉक्स कहते हैं। हम सो फिजिकली मेंटली डिटॉक्स करके पपसफुली उस बेबी को जन्म देने के लिए अगर तैयार होते हैं तो आगे जाके कुछ कॉम्प्लिकेशंस घटने की होने की संभावना बहुत कम होती है क्योंकि माता-पिता मेंटली और फिजिकली
(10:24) प्रिपयर्ड है और प्रिपयर्ड है तो मिसकैरजेस या बेबी के अंदर कुछ तकलीफें प्रॉब्लम्स अह फिजिकल डेवलपमेंट में कुछ इशूज़ ये इशूज़ आने की संभावना बहुत कम होती है। मिसकैरजेस होने की संभावना कम होती है। तो शुरुआत एक्चुअली यहां से होनी चाहिए। बट हमारे यहां पे वो अवेयरनेस है नहीं। आज की जो जनरेशन है वो जनरेशन मतलब मैं अभी इतने सारे लोग लाखों लोग हमारे साथ में जुड़ चुके हैं। जब हम डिस्कस करते हैं तब पता चलता है कि नॉर्मली जो कंसीव हुआ है वो ऐसे ही मतलब बाय चांस हो चुका है। और अभी उसमें पहले तीन चार महीने तक तो ये कपल कंफ्यूज्ड देखा जाता है कि करें आगे
(11:01) कंटिन्यू करें या रुके या क्या करें। मतलब वो कंफ्यूजन में प्रेगनेंसी जा रही है। अभी वो कंफर्म नहीं है। मतलब करना ही है। आगे लेकर बढ़ना ही है। और ऐसे कंफ्यूज्ड कंडीशन में अगर आप ये सारी चीजें आगे हो रही है तो वो बेबी भी उस तरह से उस हर उस कंफ्यूजन का उस स्ट्रेस का बेबी के ऊपर बहुत बुरा असर हो रहा है कोख के अंदर और ऐसे कंफ्यूजन में नहीं जाना चाहिए। सो जो लोग अभी कंसीव किए जैसे कि आज आप मुझे सुन रहे हैं या किसी भी इस गर्भ संस्कार के प्रोसेस को सुन रहे हैं। सुनने के बाद में आज आपको क्लेरिटी मिल रहा है कि गर्भ संस्कार इंपॉर्टेंट है। तो आज से आपने
(11:36) शुरुआत करनी है क्योंकि क्या होता है कुछ लोगों को जैसे कि आठवां महीना शुरू है और आज पता चल रहा है कि यार यह बहुत इंपॉर्टेंट प्रोसेस है। 9 महीने बेबी के लिए सबसे इंपॉर्टेंट है। हम तो मैं उन हर मां को उस हर कपल को बताता हूं कि आज पता चला है ना तो आज अभी भी दो महीने आपके हाथ में है। 60 दिन है क्योंकि एक बार डिलीवरी हो गई ना तो 1 मिनट भी आप वापस बच्चे को कोख में नहीं ला सकते। एक बार उस कॉर्ड को कट कर दिया तो बच्चा जीवन भर के लिए कभी भी आपके यूट्रस में वापस नहीं आने वाला है। सो जब तक यूट्रस में है तब तक परिवर्तन कर सकते हैं। चेंजेस बदलाव
(12:11) ला सकते हैं। उसका अच्छा असर हो सकता है। यदि कुछ घटनाएं घटी है। यदि कुछ इश्यूज हुए हैं तो उसको रिकवर करने का अभी भी चांस है। मैं यहां पे एक बात बताना चाहूंगा। ऐसे अनेक लोग हमारे साथ में जुड़ते हैं जब सेमिनार्स होते हैं, वेबिनार्स मतलब अवेयरनेस प्रोग्राम देते हैं। वैसे तो ऐप बेस्ट ये सारी ऐप में से हम सारा नर्चर करते हैं हर मां को। बट जब आते हैं सुनने के लिए तब एक मां है मतलब अलग-अलग मंथ के लोग आते हैं। हमारे पास में हरियाणा से एक मां थी स्वाति मेंडेड उनका नाम कमर्शियल पायलट है वो। तो वो मां जब जुड़ी तो आठवां महीना शुरू था। हम्
(12:46) जब मुझे सुना यह उनको क्लेरिटी आई कि यार यह बहुत समय इंपॉर्टेंट है और अभी जो बचा हुआ समय है वह मैं मेरे बेबी को दूंगी हम मैं वसूल करने की कोशिश करूंगी जितना है मैक्सिमम समय देकर मैं मेरे बेबी को जन्म के बाद नहीं जन्म के पहले ही बहुत कुछ देने की कोशिश करूंगी। उस्मान ने लास्ट दो मंथ पांचप छह घंटे अनेक एक्टिविटीज जो हम करवाते हैं ऐप में से दी है लाइव होती है उन सारी एक्टिविटी को वो पूरे दो महीने लगन से किया डिलीवरी हो गई डिलीवरी के बाद में तीसरे महीने माता को पता चला कि बेबी में कुछ यूनिकनेस है। वो कई बार माता-पिता
(13:23) बेबी को फ्लैश कार्ड्स दिखाते हैं। मतलब डिलीवरी के बाद फर्स्ट मंथ से दिखाना शुरू हो जाता है। सो ग्रास्पिंग कैपेसिटी का वहां एहसास हुआ। मां को एहसास हुआ कि तीसरे महीने की ये बच्ची जो भी बताया हुआ है पिक्चर्स बताती है ये लोरी है ये एरोप्लेन है ये टमाटर है व्हाटएवर जो भी है तो जो पिक्चर बताया वो हर एक पिक्चर याद रखा है उन्होंने 150 से भी अधिक फ्लैश कार्ड आइडेंटिफाई करने के लिए उस बेटी का दो वर्ल्ड रिकॉर्ड बना फोर्थ मंथ में फोर्थ मंथ में चार महीने की बच्ची फ्लैश कार्ड आइडेंटिफाई 150 से भी अधिक फ्लैश कार्ड आइडेंटिफाई कर
(13:55) रही क्योंकि आपने उसको उस प्रोसेस में दिखाए थे क्या नहीं डिलीवरी के बाद दिखाते बट उनका जो ग्रास्पिंग कैपेसिटी बना हुआ है ना जो फोकस बनाया बना हुआ है वो गर्भ संस्कार की वजह से अर्ली स्टेज वो लास्ट दो महीने में ही बहुत बेहतर बनाया मां ने प्रयास करके लेकिन अगर मैं मैंने अगर सही सुना है तो तीन महीने तक का बच्चा तो प्रॉपर्ली देख भी नहीं पाता है नो पहले महीने तक तो बच्चे का ब्लर होता रहता है विज़न होता है जो विज़न ब्लर होता है विज़न की बात कर रहा हूं हां विज़ ज्यादातर ज्यादा जैसे कि त्राटक जैसी एक विधि हम करवाते त्राटक क्यों करना
(14:29) है त्राटक हमारा आईसाइट क्या है कि वो सेंसरी ऑर्गन है। कंप्यूटर के लैंग्वेज में इनपुट डिवाइस है। [गला साफ़ करने की आवाज़] जन्म के साथ कोई भी बच्चा ज्ञान लेकर नहीं आता है। वो ज्ञानेंद्रिय लेकर आता है। ज्ञान लेने की कैपेसिटीज को लेकर आता है। सो मां प्रेगनेंसी के दौरान यदि त्राटक विधि कर रही है तो मां का आईसाइट स्ट्रांग बन रहा है और मां की वजह से बेबी का आईसाइट स्ट्रांग बन रहा है। वो फोकस आप अगर मेरे पास में कई सारी वीडियोस हैं। हम दिखा सकते हैं कि जस्ट न्यूबर्न बेबी भी पिता को इतनी अच्छी तरह से ऑब्जर्व कर रहा है।
(15:01) मां को इतनी तरह से ऑब्जर्व कर रहा है। 3 महीने के मेरे पास में एक वीडियो है। 2 मंथ 23 डेज का एक बेबी है। और पिता से इतने अच्छी तरह से कनेक्टेड है। पिता ओम बोलने के लिए बोल रहा है और वो बेबी ओम कह रहा है। 2 महीने का बच्चा। 2 महीने 23 डेज का बच्चा। यहां चैलेंज ये आ रहे हैं कि मैं तो चलो पेरेंट बना ही हूं। हमारा तो बच्चा प्री टाइम हुआ है उस पे आएंगे हम लेकिन जो अब हम लोग काउंसलिंग्स के अंदर हैं तो बहुत बार हमारे पास जो केसेस आ रहे हैं बच्चा चार साल का हो गया पता लग रहा है ऑटिस्टिक है एक्सक्ट्ली बच्चा सात साल का हो गया अभी कल ही हमारे
(15:37) पास एक केस था बच्चा सात साल का हो गया और डॉक्टर ये कह रहे हैं कि उसका ब्रेन टू इयर्स जितना है उसका तो ठीक है एक और केस आया जिसके अंदर उसके जो बोथ हेमिस्फयरस हैं लेफ्ट और राइट में उसके बीच में एक बाल जितना गैप है। ठीक है? और एक गैप उसके प्रीफ्रंटल कॉर्टेक्स और पीछे वाले ब्रेन में भी है। तो उतना गैप है। उसकी वजह से उसका डेवलपमेंट नहीं हो रहा। तो यह चैलेंजेस अब ऐसा लग रहा है कि या तो देखो सोशल मीडिया आगे सुनने को ज्यादा मिलते हैं या सच में इस तरह केसेस बढ़ गए हैं। सच [नाक से की जाने वाली आवाज़] में बढ़ गए। आप भी उसी क्षेत्र में काम करते हैं। आज
(16:09) अगर देखेंगे स्कूल में जाएंगे अगर अलग-अलग मतलब स्टेट में स्टेट वाइज भी हम अगर देखेंगे तो ऑटिज्म एडीएचडी साइकोलॉजिकल डिसऑर्डर्स ग्रस्पिंग कैपेसिटी रिलेटेड इशूज़ बच्चों में बहुत ज्यादा देखने के लिए मिल रहे हैं। हमारी एक माता है जो पीडिएट्रिशियन है। निकिता बोदाडे बोल के उनका नाम है। खुद एमडी पीडिएट्रिक है वो तो उनको भी कंसीव नहीं हो रहा था। शुरुआत में ही इश्यूज थे तो प्रेगनेंसी प्लानिंग से हमारे साथ में जुड़ गए और उनको कंसीव हुआ ट्विंस हुए। ट्विंस होने के बाद में लगभग बेबी एक साल का होने के बाद में वो मां जस्ट शेयरिंग
(16:50) के लिए आई थी और उस मां ने बताया कि सर आज अगर देखेंगे मैं खुद पीडिएट्रिक हूं। दिन भर अनेक बच्चों को चेक करती रहती हूं। 10 में से छह बच्चे आज कुछ ना कुछ प्रॉब्लमेटिक बन रहे हैं। एडीएचडी है, ऑट ऑटिज्म है। ऐसे कुछ ना कुछ इश्यूज है। हाइपर एक्टिव बेबीज तो बहुत ज्यादा देखने के लिए मिलते हैं। और जो गर्भ संस्कार वाले बेबीज हैं, मैं मेरे बेबी से कंपेयर करती हूं। मैंने गर्भ संस्कार किया है। मेरे बेबी को कंपेयर करती हूं। मेरे बेबी में मतलब इतना एडवांस ये बेबीज दिखते हैं। जो WHO माइलस्टोन चार्ट देता है वो माइलस्टोनस ये बेबीज
(17:25) बहुत जल्दी पूर्ण कर रहे हैं। WHO क्या माइलस्टोन चार्ट देता है? कैसे होता है कि WHO ने एक माइलस्टोन ग्रोथ का चार्ट दिया हुआ है। सो वो चार्ट में क्या है कि कौन से महीने में कौन सी एक्टिविटीज बेबी करना चाहिए। अगर वो नहीं कर रहा है उस मंथ तक जैसे कि बात कब करनी चाहिए? वो क्रोलिंग कब करना चाहिए? वो टर्न कब करना चाहिए? वो वॉकिंग कब करना चाहिए? वो बात कब करने चाहिए? मतलब ऐसा उनका यह माइलस्टोनस है उनके जीवन का। तो यह माइलस्टोन उनके उस माइलस्टोन चार्ट के मुताबिक होना चाहिए। अगर वो डिलेड है तो जल्दी आपने थोड़ा सलाह लेना
(18:02) है और देखना है कि सच में कुछ प्रॉब्लम तो नहीं है बेबी के अंदर। क्योंकि बच्चे को पता नहीं है ना। बच्चा तो बोल नहीं पा रहा है। अगर उसमें कुछ इशूज़ है तो पैरेंट ऑब्जर्व करना चाहिए। जैसे अभी आपको न्यूबर्न बेबी हुआ है वो मॉनिटर करना चाहिए क्योंकि पता नहीं लगता कुछ इश्यूज है तो तो वो माइलस्टोन कंपैरिजन के लिए दिया हुआ है बट अभी जिन्होंने गर्भ संस्कार किए वो सारे बेबीज में इतना अच्छा फर्क दिखता है कि वो बेबीज जो छ महीने में करना चाहिए जैसे कि मैंने अभी कहा मैं सैकड़ों बच्चे दिखा सकता हूं उनके वीडियोस दिखा सकता हूं जो बेबीज
(18:36) तीन-4 मंथ की उम्र में बात कर पा रहे जैसे अभी आपने बोला था कि चार साल हो गए बेबी अभी भी बात नहीं कर रहा। रीजन क्या है? और और एक एग्जांपल आपने बताया कि सात साल का है लेकिन ब्रेन तो दो साल का ही डेवलप हो गया है। सो मैं यह बताना चाहता हूं सारे ऑडियंस को और सब हर किसी को ब्रेन बनता कहां पे है? ब्रेन का मेजर डेवलपमेंट कहां पे हो रहा है? मां के घर में ही हो रहा है। सो जिस ब्रेन की वजह से बच्चा या वो पर्सनालिटी जीवन में आने के बाद कुछ बहुत बड़े मुकाम को हासिल करेगी। वो किस बेसिस पे? उसी ब्रेन के बेसिस पे। वो ब्रेन बन
(19:11) कहां रहा है? कोख में बन रहा है। लोग मतलब सिर्फ ब्रेन ही नहीं ये फाइव सेंसरी ऑर्गन जो ग्रास्पिंग कैपेसिटी के लिए जिम्मेदार है। वो फाइव सेंसरी ऑर्गन कहां पे बन रहे हैं? मां के गर्भ में बन रहे हैं। इनफैक्ट पैर के नाखून से सिर के बालों तक क्या चीज बनती है ताकि हमें जर्नी समझ में आए। जब कंसीविंग हो गई उसके बाद क्या क्या होता क्या है? अभी वो डेवलपमेंट माइक्रो डेवलपमेंट है। जैसे कि 13 वीक से ब्रेन का डेवलपमेंट शुरू हो जाता है। आईसाइड साइमलटेनियसली जो सेंसरी ऑर्गन्स है उनका डेवलपमेंट होता रहता है। और मेडिकलली मैं इसमें ज्यादा घुसना नहीं चाहता। ज्यादा
(19:48) पढ़ना नहीं चाहता क्योंकि वो आज हर जगह पे इंटरनेट पे भी हर किसी को अवेलेबल है कि कौन से वीक में कौन सा ऑर्गन का डेवलपमेंट स्टार्ट हो रहा है। जैसे हृदय का डेवलपमेंट हो रहा है शुरुआत में ही। तो वो प्रोसेस डीप है या इजी भी है अवेलेबल है सब जगह पे। तो उसके ऊपर मैं नहीं जाना चाहता हूं। लेकिन मैं यह बताना चाहता हूं कि पैर के नाखून से ले सिर के बालों तक पूरा बेबी ही कोक में बन रहा है। 80% ब्रेन आपके बेबी का कोक में ही बन रहा है। और हमारी आज की मां काम कब कर रही है? मैटरनिटी लव का इस्तेमाल कब ले रही है? ओ डिलीवरी के बाद।
(20:24) डिलीवरी के बाद फायदा क्या? खाना किचन में बन रहा है और आप टेबल पर बैठे हुए कि यहां आएगा तो हम खाएंगे लेकिन किचन में खाना ही नहीं बना तो आप टेबल पे खा सकते हैं। हम ये तो बहुत इंपॉर्टेंट पॉइंट है जिस पे मुझे लगता है शायद सोचा ही नहीं होगा इस एंगल से। बिल्कुल नहीं सोचते यार। मैं इसी चीज को आज घर-घर तक उस हर मां तक पहुंचाना चाहता हूं। इवन आपका अभी-अभी बेबी हुआ। आपने भी बहुत सारे सपने देखे होंगे बेबी आएगा तो स्कूल में डालेंगे ये करेंगे ऐसा खिलौना देंगे वो करेंगे मतलब खिलौने के ऊपर हम खर्चा करते हैं कपड़ों के ऊपर खर्चा करते
(21:00) हैं ए बी सी डी अल्फाबेट्स जो सीखते हैं प्राइमरी स्कूल्स में वहां [नाक से की जाने वाली आवाज़] पे भी हम लाखों रुपीस की फीस भरते हैं सो जन्म के बाद में आपने जो कुछ भी सोचा है ना कि यह खिलौना देंगे प्रॉपर्टी देंगे बंगलो देंगे बेस्ट स्कूल बेस्ट टीचर बेस्ट ट्यूशन दुनिया का सारा बेस्ट देंगे लेकिन डिलीवरी के बाद वो वो बच्चा अगर मेंटली रिटायर्ड है, गतिमंद है, मतिमंद है, तो क्या करेंगे? कुछ कर सकते हैं। लाइफ चेंज हो जाएगी। लेकिन वो मेंटली रिटायर्ड हो या ना हो यह कब तय हो रहा है? मां के गर्भ में। और वहां पे ये हमारा ध्यान नहीं है।
(21:36) तो ऐसा इसके पीछे का रूट कोज़ क्या है? आपने इतने केसेस देखे हैं। तो ये केसेस बड़े क्यों हैं? सिर्फ लाइफस्टाइल की वजह से। लाइफस्टाइल अभी बहुत सारी जैसे कि हाई फ्रीक्वेंसीज में मां है। कई सारे रिसर्च पेपर्स हैं। और रिसर्च पेपर्स बताते हैं कि जैसे कि 60 साल की उम्र में अगर किसी इंसान को डायबिटीज हो रहा है तो रिसर्चर्स बताते हैं कि उसका रूट जब वो इंसान मां की कोख में था गर्भावस्था में था। तब मां को जो स्ट्रेस निर्माण हुआ वो स्ट्रेस की वजह से 60 साल की उम्र में उस इंसान को अभी डायबिटीज हो रहा है। 60 साल की उम्र में हुआ तो उसका रूट कॉज
(22:10) है मां के गर्भ के अंदर ही वो डिजाइन हुआ है। एक्सक्ट्ली जो डीएनए बन रहा है। डीएनए बन रहा है। सो कहते हैं ना कि जैसे रूट वैसे फ्रूट। सो रूट क्या है? रूट है मां का गर्भ। बड़ा इंटरेस्टिंग है। एक एक और मिथ है। फिर उसके बाद हम और टॉपिक पे चलेंगे। मिथ है या सच है वो तो आप बताना। बहुत बार हमारे पास पेरेंट्स आते हैं कि पहला बच्चा स्पेशली एबल्ड है या चैलेंजेस हैं उसको कुछ। फिर दूसरे बच्चे के लिए डॉक्टर मना कर देते हैं। बहुत सारे उसके फिर प्रिकॉशंस भी या कि भ दूसरे बच्चे के अंदर भी चांसेस हैं। तो क्या गर्भाधरण संस्कार से वो चांसेस को
(22:43) बढ़ाया जा सकता है? वैसे कुछ केसेस हमारे पास में हैं। जैसे कि जेनेटिक डिसऑर्डर्स कहते हैं कि अगर पहले बच्चे में क्रोमोजोनल इश्यूज कहते हैं उसे। तो पहले बच्चे में अगर कुछ इश्यूज आए हैं तो पॉसिबिलिटी है कि सेकंड बच्चे में भी आने के चांसेस बढ़ते हैं। हमारे यहां पे ऐसा ही एक कपल आया था। उनके पहले बेबी में इश्यूज था। अभी बेबी पहला ऑलमोस्ट 10 साल का हो चुका है। और कंसीव तो करना है। पहला बेबी है वो भी ऐसा है और दूसरा बेबी करना है। बट डॉक्टरों ने ऑलरेडी बताया कि पॉसिबिलिटीज आर देयर कि ऐसा हो सकता है। लेकिन आपको इस पूरा
(23:20) स्टडीज वगैरह करके करना होगा। तो उन्होंने कंसीव किया। और कंसीव करने के बाद मन में तो वह लिटिल वाइज था ही कि शायद कुछ गड़बड़ तो नहीं होगा, कुछ प्रॉब्लम तो नहीं होगा। तो इसलिए उन्हें उन्होंने जॉइ किया। इन पूरे प्रोसेस को हमने उनको ये किया। सो जब पहला वाला कुछ टेस्ट हुआ उस टेस्ट के दौरान भी डॉक्टर ने कहा कि थोड़ा बहुत सिम्टम दिखता है बट हमें अगला टेस्ट करके देखना पड़ेगा। हम सो जब ऐसा बताया तब जाके उन्होंने यह गर्भ संस्कार के प्रोसेस को शुरू किया क्योंकि लोगों का कैसा है कि प्रॉब्लम आने के बाद बहुत कुछ करने के लिए तैयार होते हैं बट
(23:53) प्रॉब्लम ही ना आए इसलिए लोग पहले से प्रिकॉशंस नहीं लेते हैं। तो उन्होंने फिर जॉइन किया कुछ प्रोसेस जैसे कि विजुअलाइजेशन का प्रोसेस है। बिकॉज़ आई बिलीव कि जो शरीर शरीर के अंदर शरीर बना रहा है ना वो शरीर शरीर के अंदर शरीर को हील भी कर रहा है। बहुत सो सेल्फ हीलिंग की जो बात है तो वो मां को मां जॉइ हो गई उनको सारा प्रोसेस बता दिया सारी जो एक्टिविटीज हम करवाते हैं वो सारी एक्टिविटीज मां करना शुरू की और बाद में जब क्रोमोजोनल उनका जो भी टेस्ट हुआ तो वहां पे इंडिकेट हुआ कि उनका जो क्रोमोजोनल इश्यूज थे वो रिवर्स हो चुके थे। प्रेगनेंसी बेबी एकदम नॉर्मल
(24:33) था। प्रेगनेंसी कंटिन्यू हुई। उनकी डिलीवरी भी हो गई। वो कपल रिपोर्ट्स लेके मेरे पास में आए थे कि सर थैंक यू सो मच। मतलब वो रिस्क था और वह रिस्क कंप्लीट एलिमिनेट हो गया। एंड नाउ वी आर रियली थैंक यू सर। और ऐसे अनेक केसेस है। एक बहुत बढ़िया जो किस्सा है कि मैं सेल्फी लिंक का जो अभी बात निकली है तो उसके ऊपर मैं बताता हूं। चंडीगढ़ से चारू नाम की एक मैडम हमारे साथ में जुड़ी थी 2022 में। 18th वीक में उन्होंने ज्वाइन किया था। मतलब फिफ्थ मंथ शुरू हो चुका था जस्ट और पांचव महीने में वो पहला एनिमल स्कैनिंग होता है। एक तो बहुत सालों के बाद में
(25:10) कंसीव हुए थे। लेट कंसीव था। सो क्यूरियस थे। पहली प्रेगनेंसी है। बेबी के लिए बहुत एक्साइटेड थे। क्यूरियस थे। लेकिन पांचव महीने का ये एनमली स्कैनिंग हुआ और स्कैनिंग होने के बाद में रिपोर्ट आए। 7 अक्टूबर 2022 को पहला रिपोर्ट किया और रिपोर्ट मिले तो रिपोर्ट में आए कि बेबी के ब्रेन में इश्यूज है। स्वेलिंग लाइक कुछ स्वेलिंग था। फ्लूइड थे। टेक्निकल मेडिकल वर्ड है उसका बट वो मुझे याद नहीं है। बट स्वेलिंग और वो फ्लूइड्स थे। तो डॉक्टरों ने मना किया है कि बेबी के ब्रेन में इशू है तो क मतलब कंटिन्यू करके फायदा क्या? हम तो डॉक्टरों ने कहा रिपोर्ट देख के कि
(25:47) मैडम प्रॉब्लम है और ब्रेन कोई इशू है तो आपको मतलब अबोर्ट करना होगा। अभी इतने साल के बाद में कंसीव किया है। मां एक्साइटेड है। चार महीने बेबी को कोक में संभाला हुआ है। और अभी डॉक्टर बोल रहे हैं कि आपको अब करना होगा। कोई भी मां गिव अप करने के लिए रेडी नहीं होती। मां को लगा कि शायद रिपोर्ट में गलती होगी। 8 अक्टूबर 2022 को वापस रिटेस्ट किए। रिटेस्ट करने के बाद में जो रिपोर्ट आया वो सेम बेबी के ब्रेन में प्रॉब्लम है। मां रोने लगी। मां ने मुझे कांटेक्ट किया कि सर ऐसे-ऐसे प्रॉब्लम आया और क्या करें? अभी रोते-रोते फोन किया था। मैंने कहा कि
(26:21) मैडम [नाक से की जाने वाली आवाज़] मेडिकल कंडीशंस को हम डिनाई नहीं कर सकते। जो रिपोर्ट्स है वो सच है और हमें उन्हें डिनाई नहीं करना चाहिए और ब्रेन में इशू है। डॉक्टर बोल रहे हैं वो सही बात है। लेकिन आपके पास में एक चांस है। चांस क्या है कि अबॉर्शन करना है या नहीं करना है यह डिसाइड करने के लिए आपको कुछ टाइम लिमिट होता है। तो आज भी आपको वो डिसीजन लेने के लिए कुछ दिनों का समय है आपके हाथ में। फॉर्चूनेटली उन्होंने 18th वीक में ही उनका यह एनिमली स्कैनिंग हुआ था और 22 वीक तक वो समय है। आपके पास में दो-तीन वीक है। मां को कहा
(26:55) कि आई बिलीव कि यह हील हो सकता है। मां ने कहा कि सर आप जो बोलेंगे मैं करने के लिए तैयार हूं। अगले 20 दिन तक लगातार उस मां ने विजुअलाइजेशन अफमेशंस और हमारे जो कुछ ट्रांसोशन ट्रांस इन सारी चीजों को कुछ एक्टिविटीज मैंने उनको सिखाई उतना ही फोकस किया रिगरसली उस मां ने सारी चीजें फॉलो की एज डिसाइडेड 21 डे आया 21 डे पे रिटेस्ट करवाया और रिटेस्ट के जो रिपोर्ट आए रिपोर्ट अब्सोलुटली नॉर्मल प्रेगनेंसी कंटिन्यू हो गई आज वो बेटी पौने चार साल की है दैट्स दैट्स ग्रेट वंडरफुल मतलब कुछ भी प्रॉब्लम नहीं है। कुछ भी प्रॉब्लम नहीं। और ऐसे एक नहीं
(27:37) हजारों केस स्टडीज मेरे पास में है। रिपोर्ट्स भी मैं शेयर कर सकता हूं। आज जब हम बात कर रहे हैं ना तो म्यूच्यूल फंड में इन्वेस्टमेंट करना हो, गोल्ड में इन्वेस्टमेंट करना हो, प्रॉपर्टी में इन्वेस्टमेंट करना हो, बहुत लेवल पे चल रहा है। इवन फिटनेस पे इन्वेस्टमेंट करना हो, जिम पे अच्छा खासा पैसा खर्च हो रहा है। लोग योगा भी कर रहे हैं। लेकिन जब क्योंकि मैं भी इसी फील्ड से बिलोंग करता हूं। दो यू आर इनू समथिंग एल्स विद। लेकिन हमारा कोर एक ही है। मेंटल फिट बनाना। तो मेंटल फिटनेस पे अभी भी मुझे लगता है अवेयरनेस ही नहीं है। काम
(28:06) ही नहीं हो रहा। और जो आपने बात छेड़ी ना यह बहुत इंटरेस्टिंग है कि कोख के बाद क्या कर लोगे? जो डिजाइनिंग जब उस कोख में होनी है, बच्चा डिज़ाइन उसमें हो रहा है। उसके बाद आप क्या ही कर लोगे? और ये बात मैं भी कह सकता हूं क्योंकि हमारी जब प्रेगनेंसी रही है ना तो आसान नहीं थी। क्योंकि दैट इज़ अ अगेन अब कह सकते हो यार तुम भी ऐसे करो। हमारी अनप्लान थी वो। ठीक है ना? क्योंकि एक्सपेक्टेड ही नहीं था ऐसा कुछ। एक्सक्ट्ली अब तो 40 में भाई अब तो सोचा भी नहीं ऐसा तो उसके बाद हमें 15-20 दिन लगे कि यार ये हुआ क्या है मतलब हम लोग ना मतलब इस
(28:38) प्रेजेंट मोमेंट में आने में हमें 15-20 दिन लग गए फिर हो गया तो उसके बाद जो चैलेंजेस थे ऐज वाइज जो आने थे वो चैलेंजेस आए वो हमने फेस किए और बहुत सारी चीजें थी क्योंकि अब नई टेक्नोलॉजी है तो डॉक्टर बहुत सारी चीजें बताते हैं तो सारे टेस्ट हुए और हर टेस्ट में हमारा दिल ना ऐसे धक धक धक करता था पता नहीं क्या निकाल के देंगे तो पेरेंट तो देखो वो अच्छा करना चाहता है लेकिन जहां से बात शुरू हुई है मेंटल वेलनेस पर जब बात नहीं हो रही आप कैसे देखते हो आप क्या क्या बोलते हो अपने ऑडियंस से कैसे क्या बोलते हो उन्हें नहीं बहुत अच्छा पॉइंट आपने पूछा जरूरी
(29:12) पॉइंट आपने डिस्कस करना चाहा हमारे इंडिया में ना प्रेगनेंसी कंसीव होने के बाद में अवेयरनेस है बट अवेयरनेस फिजिकल डेवलपमेंट के लिए है मतलब फिजिकल डेवलपमेंट के लिए जैसे कि कंसीव हो जाता है कंसीव होने के बाद में मां आपका अगर पहला कुछ बदलता है तो डाइट डाइट बदलता है। डाइट क्या कर रहा है? मां के और बेबी के फिजिकल डेवलपमेंट के लिए सपोर्ट कर रहा है। वो हेल्थ बेटर बनाने के लिए सपोर्ट कर रहा है। हम डॉक्टरों को दिखाते हैं। सप्लीमेंट्स लेते हैं, न्यूट्रिशंस लेते हैं। वो टेबलेट्स लेते हैं ताकि जो भी न्यूट्रिएंट की कमी है वो भरे
(29:48) और बेबी का मां का हेल्थ अच्छा बने। हम स्कैनिंग करवा रहे हैं। स्कैनिंग करवा के हम क्या चेक कर रहे हैं? बेबी का ग्रोथ सही हो रहा है। हार्ट बन रहा है, ब्रेन बन रहा है, हाथ पैर बन रहे हैं, आंखें बन रही है। मतलब फिजिकल हेल्थ ही देख रहे हैं ना हम। हम हम हमारा फोकस कहां पे है? हमारा फोकस सिर्फ और सिर्फ फिजिकल डेवलपमेंट के ऊपर ही है। तो मेरा सवाल होता है कि क्या बच्चा सिर्फ शरीर लेकर जन्म ले रहा है। हम [नाक से की जाने वाली आवाज़] शरीर के अंदर का सॉफ्टवेयर भी आ रहा है ना? ओएस ऑपरेटिंग सिस्टम आ रहा है पूरा। वो कोख के अंदर ही बन रहा है ना। उस बेबी
(30:21) का हम कहते हैं कि स्वभाव स्वरूप संस्कार और कैपेसिटी का वरदान लेकर यह बेबी आ रहा है। सो कोक के अंदर क्या बन रहा है? शरीर बन रहा है। वह स्वभाव बन रहा है। वो सॉफ्टवेयर बन रहा है। वो कैपेसिटी ग्रास्पिंग कैपेसिटी बन रही है। वो सारा अंदर बन रहा है। और यह बनते वक्त हम ध्यान नहीं दे रहे। तो जैसे आपने अभी पूछा कि यह सारी चीजें जहां पे हो रही है वहां पे आज के लोगों को मालूम ही नहीं कि यह सब कुछ यहां पे हो रहा है। कई तो मीडिया जैसे कि हम वेस्टर्न कल्चर के लिए अट्रैक्टेड रहते हैं। हम तो हमारा आज का कल्चर क्या है कि हम मैटरनिटी फोटो शूट करेंगे। जैसे ही कंसी
(31:00) होता है बंप आता है तो हम उसके लिए टाइम निकालेंगे। उसके लिए खर्चा भी करेंगे। उसके लिए सारी चीजें करेंगे। वो समय देंगे। तो मेरा सवाल यह होता है कि आप मैटरनिटी फोटोशूट पे जो खर्चा करते हैं जो समय देते हैं उसका कोक में बढ़ रहे बेबी को क्या फायदा? पर्पस वही है। सोशल मीडिया का इंपैक्ट इतना है कि मुझे दिखाना है। आई एम नॉट डिनाइंग कि वो आपकी चॉइस है। करो ना करो। लेकिन आपको कम से कम ये तो देखना पड़ेगा ना वैल्यू कहां क्रिएट हो रही है। और विष्णु सर इसमें बड़ा इंटरेस्टिंग है। हर मां को हर घर में ना कहानी गाई जाएगी अभिमन्यु की।
(31:34) अभिमन्यु मां के गर्भ में डिजाइन हो गया था। उसको सब कुछ पता लग गया था। लेकिन लास्ट में उन पे मां जाग गई तो उसको ये नहीं पता था कि चक्रव्यूह से बाहर घुस जाना है। तो अगर आपको ये पता है तो आप अपने बच्चे क्यों क्यों नहीं डिजाइन कर रहे? आप अपने बच्चों को क्यों नहीं कर रहे? यह बड़ा इंटरेस्टिंग फैक्टर है क्योंकि क्या हुआ कि मैं बोर में था तो वहां पर श्री श्री रविशंकर जी ऐसे पूरा सेशन ले रहे थे। तो ऐसी बात चली के बच्चा अगर करना है ध्यान करके करो। अच्छी जनरेशन लेके आओ। जैसी जनरेशन लेके आओगे वैसा आपका भारत देश बनेगा। तो ये गर्भाधरण संस्कार
(32:08) मुझे लगता है एक वो कड़ी है जो हमने कहीं ना कहीं मिस कर दी। मिस कर दी है। एक्सैक्टली। सो इसमें एक बात आई थी अभी आप बात कर रहे थे ना कि डिजाइन कोख में हो रहा है। मैं इसके ऊपर एक एग्जांपल देना चाहता हूं कि आज अनेक कारें रोड के ऊपर घूम रही है। हम करेक्ट हम [नाक से की जाने वाली आवाज़] Tata का एग्जांपल लेते हैं। तो जो कार टाटा की अभी रोड के ऊपर बहुत धूम मचा रही है। बहुत लोग उसके लिए क्रेजी है। अभी होशियार आ रही है। ये रोड पे आने के बाद तभी अट्रैक्ट करेगी जब इसका परफॉर्मेंस अच्छा रहेगा। सच में ये परफॉर्मेंस बेटर रहेगा। जो जो Tata ने
(32:43) क्लेम किया है या जो भी जिस कंपनी में क्लेम किया है वैसा सारा परफॉर्मेंस इनका अच्छा रहेगा। सो फिजिकली रोड के ऊपर आने के बाद उसका जो परफॉर्मेंस है वो रियल परफॉर्मेंस रियलिटी में कहां पे बना हुआ है? इंजीनियरिंग रिसर्च सेंटर में बना हुआ है। सो फिजिकली जो रियलिटी में आने वाला है वह ऑलरेडी मेंटालिटी में बन चुका है। सो ईआरसी में इंजीनियरिंग रिसर्च सेंटर में पहले डिजाइनिंग के दौरान कार अच्छी बनती है। डिजाइन अच्छा होगा तो ही आपकी कार रोड के ऊपर आकर फिल नहीं होगी। उसका बोनेट खोल के आपको इंजन के ऊपर काम करना नहीं पड़ेगा। सो डिजाइनिंग अगर बेहतर होगा तो
(33:25) ही लोग उसे एक्सेप्ट करेंगे या वो आने के बाद में लोग क्रेजी होंगे उनके लिए या वो अपना परफॉर्मेंस दिखाएगी। मतलब पहले जब आप बच्चे के बारे में सोच रहे हो प्लान कर रहे हो तो आपका थॉट्स एक्सक्ट्ली फिर उसके बाद डिजाइनिंग उसके बाद जब आप कंसीविंग कर रहे हो तो उस समय आपका माइंडसेट कैसा है? एक्सैक्टली फिर सर एक बात बताइए अक्सर ना माएं स्पेशली माएं यह एक कमेंट करती हैं काउंटर में कि तो हम अपने मन को बहलाने के लिए क्या करें? हम भी तो बोर हो जाते हैं। कई बार खाने को लेके बोलते थे खाने की देखिए क्रेविंग है तो उस समय खाने का तो ऐसा दिया नहीं जा सकता। कंटेंट भी
(33:59) ऐसा नहीं दिया जा सकता। तो ऐसे में अगर वो कोई हॉरर मूवीज देख रही हैं या ऐसे सीरियल सीरियल देख रहे हैं जहां पर हर रिश्ते के ऊपर कोई ना कोई क्वेश्चन उठाया जा रहा है। ठीक है ना? क्राइम पेट्रोल टाइप के या इस तरह का कोई सोशल मीडिया पर रील्स देख रही हैं तो उसका इंपैक्ट क्या पड़ता है ब्रेन पर? सर इसका बहुत गलत असर होता है। पहली बात तो क्या करें? ये जो मां के मन का सवाल है ना तो उसका है कि आप जीएससी ज्वाइन करें। मैं कहूंगा जीएस यानी गर्भ संस्कार का जो कोर्सर्सेस है वो पहला जॉइ करो। उसका रीज़न ऐसा है कोर्स क्यों? मतलब लोगों को कोर्स
(34:32) ज्वाइन करें। ये जब हम कहते हैं ना कि लोगों के दिमाग में कुछ पॉप अप आता है [नाक से की जाने वाली आवाज़] या फीस या कुछ भी आता रहेगा। सो मुझे सब लोगों को यह बताना है कि कोर्स यानी क्या है कि आपको इस प्रेगनेंसी के दौरान वो नर्चर करने वाला, वो केयर करने वाला, वो सपोर्ट करने वाला, वो एक्टिविटीज देने वाला, वह टास्क देने वाला जो आपको सुने ऐसा कोई तो चाहिए ताकि आपका जो मूड स्विंग्स है, आपको जो फ्लक्चुएशनंस हो रहा है, वह स्टेबलाइज हो। और यह स्टेबिलिटी के लिए आपको ऐसा कोई ना कोई तो एक प्लेटफार्म चाहिए। जैसे हम कहते हैं ना कि मैं कर्जे
(35:09) में हूं और मुझे आप मिले और आपने कहा कि मैं भी कर्जे में हूं। तो मेरा दर्द मतलब कम हो जाता है। मेरा कुछ गया है और आपका भी गया है तो मेरा मुझे क्या लगता है? अरे चलो हम सेम है थोड़ा सा रिलीफ मिलता है। [नाक से की जाने वाली आवाज़] सो सिमिलर वे कोई भी चीज ग्रुप में होती है। जैसे कि सारी माएं आप प्रेग्नेंट है और आपके जैसे हजार लोग प्रेग्नेंट है और वो हजार लोग आपके संग है इस जर्नी में और हर कोई अपने बेबी को बेहतर बनाने के लिए ब्रेन को बेहतर बनाने के लिए क्रस्टिंग कैपेसिटीज को बेहतर बनाने के लिए जैसे मेंटल इमोशनल एंड इंटेलेक्चुअल डेवलपमेंट
(35:42) को बेहतर बनाने के लिए काम कर रहे हैं। तो यह जो काम होता है यह विशेष काम है। ये अगर काम करते हैं ग्रुप के संग काम करते हैं तो नेगेटिविटी आने का सवाल ही नहीं होता। जैसे पानी का एक बोतल है। इन मांओं के सवाल प्रश्न आपने प्रश्न सही पूछा क्योंकि ये मां के दिमाग का सवाल है। क्योंकि मांओं को लगता है कि मेरे मन में सर आपको बोलने में क्या जाता है? मेरे मन में इतना ये इश्यूज है। मेरे घर में ऐसे इश्यूज है। तो मैं कैसे टैकल कर सकते हैं? कैसे टैकल कर सकते हैं? तो यहां पे जब आप कुछ एक्टिविटीज में बिजी हो जाते हैं, कुछ पर्पस देखकर बेबी को बेहतर बनाने के
(36:20) लिए आप जब एक्टिविटीज में इन्वॉल्व हो जाते हैं तो अपने आप आप नेगेटिविटीज को भूल जाते हैं। जैसे मैं हमेशा एक एग्जांपल देता रहता हूं कि ये पानी की बोतल है। इस बोतल में पानी भरेंगे तो हवा अपने आप बाहर जाएगी। सही बात है। और पानी निकालेंगे तो हवा अपने आप आ जाएगी। तो हवा हमें डालनी भी नहीं पड़ती है और निकालनी भी नहीं पड़ती है। हम्म। सो हवा तो अपने आप प्रेजेंस है। अच्छा। ठीक है? तो नेगेटिविटीज तो जीवन का यह हवा जैसा काम है। वो तो रहने ही वाली है। हमें जो कुछ चाहिए उसके ऊपर फोकस करो। क्या बात? बहुत सही एग्जांपल दिया आपने।
(36:50) एकदम सटीक एग्जांपल दिया ये बात। तो प्रेगनेंसी में गर्भ संस्कार की इस विधि में इन्वॉल्व हो जाते हैं तो पानी जैसे आप जो चाहिए उसके ऊपर फोकस कर रहे हैं। नेगेटिविटी जो नहीं चाहिए अपने आप जाएगा। उसको अलग से कुछ करने की जरूरत नहीं है। तो इस तरह से इस प्रोसेस में इन्वॉल्व होंगे तो ये सारी चीजें बहुत अच्छी तरह से होंगी। और और एक एग्जांपल जैसे मैंने अभी कहा कि हम जो बात कर रहे थे कि फिजिकल डेवलपमेंट के ऊपर हमारा गवर्नमेंट भी काम कर रहा है। हर मां भी काम कर रही है। लेकिन जो सॉफ्टवेयर है जो मेंटल इमोशनल एंड इंटेलेक्चुअल डेवलपमेंट
(37:20) है उस डेवलपमेंट के लिए हमारी माएं क्या कर रही है? ये तो सवाल अभी अधूरा है। आर वी डूइंग एनीथिंग फॉर दैट? आज देखेंगे तो हमारा गवर्नमेंट भी इंडिया में फिजिकल हेल्थ के डेवलपमेंट के लिए सपोर्ट कर योगा डे बना दिया उन्होंने। बहुत कुछ कर दिया लेकिन मेंटल वेल वो न्यूट्रिशन देते हैं, हॉस्पिटल्स देते हैं। सारी चीजें देते हैं। बट मेंटली, इमोशनली और इंटेलेक्चुअली बेबी अच्छा बने। इसके लिए कौन सा ऐसा उपक्रम शुरू है? ये उपक्रम जो हम कह रहे हैं गर्भ संस्कारों का ये प्रोसेस तो मैं नहीं बता रहा हूं। हजारों साल पहले से ये इस प्रोसेस को बताया हुआ है।
(37:58) अनेक हजारों साल पहले से ये इसका उल्लेख मिलता है। मैं जैसे कि इसको हम अगर देखेंगे साउथ के कुछ मंदिरों में हजार साल पहले स्टोन के ऊपर यह प्रोसेस जो है कि बीज कैसे वो फलित होता है। बेबी का जो ग्रोथ कैसे हो रहा है। कौन से मंथ में कैसे उनका वृद्धि हो रहा है। वह सारा क्र स्टोन के ऊपर कार्विंग किया हुआ हमें दिखा मतलब वो एविडेंसेस में मुझे ध्यान आ रहा है मैंने भी एक कंटेंट देखा था इसके ऊपर कि उन्होंने तो पूरा स्पर्म का भी बनाया हुआ था फिर कोक का भी बनाया हुआ था फिर बच्चा बच्चे का हेड नीचे की तरफ नीचे की तरफ होता है वो भी पूरा उन्होंने
(38:36) मतलब बिना स्कैनिंग के बना रखा था बिना स्कैनिंग के बना के रखा हुआ है सो ये सारा विधि था ये सारा प्रोसेस था बट जाने अनजाने में इस प्रोसेस को लोग आज के भूल गए और यही रीजन है कि भारत देश में ही हम अगर देखेंगे तो हमारी आबादी कम नहीं है लेकिन देश आबाद नहीं हो रहा है। क्यों? क्योंकि यहां पे सिर्फ क्वांटिटी बढ़ रही है। क्वालिटी का क्या क्वालिटी नहीं क्वालिटी नहीं। बिल्कुल सही। और यही रीज़न है कि जब हम ओलंपिक में जाते हैं तो पता चलता है कि हम कहां पे हैं। ₹146 करोड़ की आबादी है। लेकिन ओलंपिक में एक मेडल लाने के लिए भी हमें बहुत पसीने
(39:11) हैं। आपने यह बात छेड़ी है तो मैं मतलब ऑडियंस के लिए बता देता हूं। आपको तो खैर सबको मालूम ही है। भ जिस देश के साथ हमारा कंपटीशन रहता है लाइक हम यूएसए की बात करते हैं या चाइना की बात करते हैं जो सबसे ज्यादा ओलंपिक मेडल्स लेके आते हैं वन ऑफ द कंट्रीज में से वहां काम ही सर डेढ़ 2 साल ढाई साल तीन साल की उम्र में हो जाता है तो यानी कि आपको अगर बड़ा अचीव करना है तो आपको अर्ली तो काम शुरू करना ही पड़ेगा हम तो कई बार मजाक में बोलते भी हैं सर अपने सेशंस के अंदर भी भाई आपने टायर में हवा भराई नहीं क्योंकि आपको आलस आ रहा था या
(39:42) आपको ₹10 दिख रहे थे ₹10 उसको देने पड़ेंगे बाद में वही टायर फट गया अब उसके ₹ ₹100 ज़ आपको देने पड़ेंगे। तो आप तय कर लीजिए। हां। तो मुझे ऐसा वो लगता है कि हम उस वे में शायद मुझे मेरा पर्सनल एक्सपीरियंस ये रहा है। बहुत सारे लोग उस वे में सोचते ही नहीं है कि बिय्ड 9 मंथ क्या होने वाला है। भाई ये वो व्यक्ति है जो आपके घर में आ रहा है जो आप जो हमारे भारत में तो बोला जाता है ना भारत के अंदर कि ये मेरे बुढ़ापे का सहारा है। ऐसा है वैसा है। तो भाई उसके सहारा तो स्ट्रांग बनाओ। तो उसके लिए तो वो मां की कोख में काम होगा या उससे पहले काम होगा?
(40:18) आज काम नहीं करेंगे तो सहारे को ही सहारा देना पड़ेगा। हां थोड़ा सा तो अवेयरनेस पे काम होगा। अच्छा आपने क्या नोट किया आपके एक्सपीरियंस में? बेसिक गलतियां हम एज अ पेरेंट जो जो नई जनरेशन जो पेरेंट बन रही है जो 25 26 साल का जो आपको देख रहा है वो क्या करते हैं? एक्चुअली पहली बात तो जैसे मैंने पहली बार भी कहा कि आज की जो मां है खुद की जिम्मेदारी, पति की जिम्मेदारी, घर की जिम्मेदारी, जॉब की जिम्मेदारी इन सारी जिम्मेदारियों में भूल चुकी है। नेचर ने दी हुई जिम्मेदारी। उन्होंने वो नेचर ने दिया हुआ 9 महीने का समय किसी को बेचा है।
(40:50) मतलब आज उसके पास में बेबी को देने के लिए समय नहीं है। और वही वजह है कि वो बॉन्डिंग नहीं बन रहे। वो अटैचमेंट जैसे जो पेरेंट्स सोचते हैं ना कि ये बुढ़ापे का सहारा बुढ़ापे में इनको फिर वृद्धाश्रम में जाना पड़ता है क्योंकि वो बॉन्डिंग ही नहीं बन रहा है। एंड सेकंड थिंग अभी का जनरेशन में क्या है कि एडिकशंस बहुत ज्यादा हो रहे हैं। जैसे कि आज एडिकशंस भी है और न्यूक्लियर फैमिलीज भी है। न्यूक्लियर फैमिली की वजह से क्या होता है कि पहले जमाने में वह [नाक से की जाने वाली आवाज़] आया रहती थी जो पूरा केयर किया करती थी। जैसे प्रेगनेंसी में घर के बूढ़े बुजुर्ग
(41:25) लोग रहते वह पूरा केयर करते रहते थे। वह बहुत कुछ सिखाते रहते थे। तो एक वहां पे एक फीलिंग यहां पे क्या होता है कि मां की फीलिंग बहुत इंपॉर्टेंट है बेबी के लिए। तो वो फीलिंग जो है वो फीलिंग अच्छे रहने में मदद होती थी और ऑटोमेटिकली उसका असर कोख के संतान के अंदर हो ही रहा है। आज क्या हो रहा है कि लोनलीनेस और ये ऐसे जो जो लाइफस्टाइल बनी हुई है खाने से लेके मतलब आप क्या खाते हैं, क्या देखते हैं, क्या सुनते हैं, क्या पढ़ते हैं? किस माहौल में रहते रहते हैं। यह सारी चीजों का इंपैक्ट मां के ऊपर और मां की वजह से कोक के संतान के ऊपर हो रहा है।
(42:02) एक कोई केस स्टडी शेयर कीजिए जिससे पता लगे डिफरेंस जो आपने करवाया जिस जिन्होंने आपसे डे जीरो से लेके डे एंड तक आपके साथ रहे तो जैसे आपने दो तीन केसेस बताए अभी से ही दो बच्चे ऐसे भी हैं जो 4 महीने के ऐज के अंदर इतना कुछ कर रहे हैं। तो ऐसे कुछ केस स्टडीज बताइए ताकि अनेक केस स्टडीज हम बता सकते हैं कि जिन्होंने गर्भ संस्कार किए हैं। जैसे मैंने अभी बताया कि 45 बेबीज है जो वर्ल्ड रिकॉर्ड दर्ज कर चुके हैं। 45 45 बेबीज जिन मांओं ने गर्भ संस्कार किए उनमें से ये कुछ बेबीज है जिन्होंने वर्ल्ड रिकॉर्ड दर्ज किए। अभी मेरे पास
(42:36) में एक वीडियो एक मां ने शेयर किया 13 मंथ का बेबी है। 13 महीने का बेबी है। और 13 मंथ की उम्र में वो सारी चीजें सब कुछ एक्सप्रेस कर रहा है। मां महाराष्ट्र से है। मा अंग्रेजी में बेबी को कुछ सजेशंस दे रही है। और वो बेबी वो बेटा अंग्रेजी में सारी चीजें फॉलो कर रहा है। सारी चीजें मतलब आप वीडियो देखेंगे तो आपको बिलीव नहीं होगा कि यार इतना 13 महीने का बेबी है और ये सब कुछ मतलब सारे एक्सप्रेशनंस बहुत अच्छी तरह से कर रहा है। ये कैसे मुमकिन है? इतना कम उम्र में तो ये गर्भ संस्कारों का असर है। और जैसे आज मैं आ रहा था जैसे इधर पडकास्ट के लिए निकल रहा
(43:14) था तो अभी थोड़ी देर पहले मुझे WhatsApp पे एक मैसेज मिला आज मैंने स्टेटस पे भी रखा हुआ है कि 4 साल के बाद में एक मां आज मैसेज करके बोलती है कि सर थैंक यू सो मच। मेरे बेबी के अंदर जो कुन और टैलेंट दिख रहा है ना सारा मोहल्ला सारी बिल्डिंग सारे लोग जो भी मिलते हैं हर कोई इंप्रेस है मेरे बेबी से कि क्या किया था। हर कोई आकर मुझे पूछता है कि यह इतना टैलेंटेड कैसा है? और ऐसा यह तो आज का किस्सा हुआ बट ऐसे हर रोज मुझे मैसेजेस आते हैं। हर रोज मैसेजेस आते हैं। कैसा लगता है सर? बहुत ग्रेट फील होता है। बहुत ग्रेट फील होता है। क्योंकि और स्टेटस में मैंने
(43:51) जो आज लिखा है वो क्या लिखा है कि पीढ़ी बदल रही है। देश बदल रहा है। क्या बात है। क्या बात है। अच्छा सर एक बात बताइए जिन जो फ्यूचर पेरेंट्स होने वाले हैं उनको क्या ऐसी पांच हैबिट्स अपनी लाइफ में रखनी चाहिए ताकि वो एक अच्छे पेरेंट्स बन पाए। अच्छी कंसीविंग कर पाएं। पहली बात तो पतिप के अंदर का जो केमिस्ट्री है वह बहुत अच्छा होना चाहिए कंसीव करने से पहले। ओके? थॉट प्रोसेस क्लियर होनी चाहिए। प्लानिंग इज द मोस्टेंट थिंग बिकॉज़ प्लान कहते हैं ना कि अगर आप प्लान करेंगे तो अचीव भी करेंगे। प्लान ही नहीं करेंगे तो अचीव करने का सवाल ही नहीं आता है।
(44:26) तो प्लानिंग पतिपत्नी ने बहुत अच्छी तरह से करनी जरूरी है। और प्लान करके अगर कंसीव करते हैं। [नाक से की जाने वाली आवाज़] सो मैं यहां पे एग्जांपल देना चाहूंगा छत्रपति शिवाजी महाराज जी का। ओके। कैसे? तो थ्री स्टेजेस है। पहला स्टेज है दैट इज संकल्प यानी प्लान। प्लान संकल्प यानी पर्पस ढूंढा उन्होंने। मां को बेटा चाहिए था। मतलब बेबी चाहिए था। बेबी किस लिए चाहिए था? तो हिंदवी स्वराज्य के लिए। अभी ये पर्पस मां को कैसे मिला? क्यों डिसाइड किया मां ने कि मुझे हिंदवी स्वराज ऑलरेडी पहले बेटे थे एक। बट फिर भी मां को लगा कि मुझे और एक संतान
(45:01) चाहिए। तो दूसरी संतान मां ने जब मांगी तब क्यों मांगी और कब मांगी? जब मां ने देखा कि हमारा कोई साम्राज्य नहीं है। हमारा खुद का कोई राजा नहीं है। हमारे सारे लोग जो है वो किसी ना किसी के अंदर काम कर रहे हैं। लड़ लड़ाई कर रहे हैं। अपना ही खून अपने ही खून को मार रहा है। अपने ही लोग अपने ही लोगों को मार रहे हैं। तो ये देखा क्योंकि राष्ट्रमाता जिजाऊ मां साहब के पिताजी लखोजीराव जाधव और जिजाऊ मां साहब के पति शाहजी राजे दोनों एक दूसरे से लड़ने लगे। इन्होंने इनके भाई को मारा। इन्होंने इनके देवर को मारा। ये सारी चीजें ऐसी चल रही थी और तब जाके मां ने
(45:37) सोचा कि ऐसा क्यों हो रहा है आज अपने ही लोग अपने ही लोगों को मार रहे हैं। इसका कारण कि लोक जाधव जो है वो निजामों की ओर से थे और निजाम जिस तरह से बोल रहे हैं वैसे वो लड़ रहे थे। उन्होंने नहीं देखा कि मेरा जमाई है मेरी बेटी है। तो ये सारा हो रहा था। तो उस ये जो पेन था कि अपने ही लोग अपने ही लोगों के खिलाफ लड़ रहे। इवन निजामों के दरबार में ही लखुजी राव जाधव जी को कत्ल किया गया। तो वो जो पेन था पिता को मारा जिस निजाम के कहने पे अपने जवाई के ऊपर उन्होंने आक्रमण किया उन्हीं को उन्हीं दरबार में उनके निजाम के दरबार में ही उनको मार दिया जाता है तो
(46:15) मां को क्या फील होगा तो वो जो क्रोध था मां का वो जो पेन था उस पेन से मां ने सोचा कि यस मुझे संतान चाहिए और किस लिए चाहिए तो हिंदवी स्वराज्य के लिए चाहिए तो हिंदवी स्वराज्य के लिए मेरी संतान आ रही है डेस्टिनेशन फिक्स हुआ किस लिए आ रही है हिंदवी स्वराज्य बच्चे के लिए मेरी संतान रही। संकल्प हो गया। संकल्प हो गया। कहां जाना है वह तय हो गया। किस लिए चाहिए वो तय हो गया। अभी वो कैसे लानी है? तो माने सेकंड फज़ में प्लान किया। माता-पिता ने प्लान किया। अपनी संतान किस लिए आ रही है? एक राजा बनने के लिए आ रही है। एक हिंदवी स्वराज्य निर्माण
(46:48) करने के लिए आ रही है। तो प्लानिंग फज़ में उन्होंने मॉडल किया हम कि एक ग्रेट राजा कौन है? मां को लगा कि प्रभु रामचंद्र ग्रेट राजा है। हम तो उनके गुण और क्वालिटीज को मॉडल किया। जो जो गुण एक राजा बेस्ट होने के लिए बेबी के अंदर मां को चाहिए थे उन सारी पर्सनालिटीज को भीम को मॉडल किया। सो उन क्वालिटीज को मॉडल किया। मतलब कहते थे ना कि अभी प्रेग्नेंट है तो रामायण पढ़ो। वो रामायण पढ़ने से नहीं उनकी अंदर जो गुण और क्वालिटीज है उन कैरेक्टर्स को मॉडल करने के लिए बताया जाता है। सिर्फ हम किताब पढ़ रहे हैं और कुछ दिमाग में नहीं आ रहा है
(47:22) या वहां से कुछ हम रिलेट नहीं कर रहे वैसा कुछ फील नहीं कर रहे तो वो पढ़ने का भी कुछ सवाल नहीं है। मतलब फायदा नहीं है। तो इस तरह से उन्होंने वो मोरल किया तो प्लान किया कि मुझे क्या चाहिए? मुझे कौन-कौन से गुण क्वालिटीज मेरे बेबी के अंदर चाहिए उसका प्लानिंग किया और थर्ड स्टेज में जो प्लान किया है वैसा ही बने उसके लिए उन्होंने एक्टिविटीज की प्रेगनेंसी के दौरान उस तरह जैसे कि मां खुद तलवार लेके 9 महीने के दौरान वो प्रैक्टिस किया करती थी ताकि मेरा बेबी आकर लड़ना है उसे राजा बनना है उसको आना चाहिए तो पहले ही वो मां ने वो सारी
(47:55) प्रैक्टिससेस की एक्शन किया और इतना ही डिलीवरी के बाद भी पता था कि बेबी किस लिए आया है तो बेबी के अंदर अंदर कौन से गुण क्वालिटी स्किल होने चाहिए तो वैसे ही स्किल उनको आए इसलिए क्योंकि डेस्टिनेशन पता था तो उन्होंने फिर वैसे ही कोचेस को मतलब गुरुओं को उन्होंने चॉइस किया चूज़ किया और छत्रपति शिवाजी महाराज जी को लगभग 2 साल की उम्र से 10 साल की 12 साल की उम्र तक 10 साल घर से बाहर रखा अलग-अलग कोचेस के पास में भेजा गया जैसे कि राजनीति युद्ध तंत्र जो भी है तलवारबाजी गुड़वारी जो भी स्किल सीखने लगभग जो कहीं पढ़ने में मेरे
(48:32) आया आया था कि 36 स्किल आइडेंटिफाई किए थे माता-पिता ने पहले ही बेबी के अंदर। यह मुझे मेरे बेबी को देना है क्योंकि उसको किंगडम बनाना है। क्या बात? तो ये प्लानिंग होता है। इट्स अ लॉन्ग टर्म प्रोजेक्ट। अबब्सोलुटली आज मतलब चंद्रयान चंद्र के ऊपर जा रहा है तो आज दिमाग में आया और कल छोड़ा ऐसा नहीं हुआ। उसके ऊपर प्लान हुआ है और कोई भी चीज प्लान करते हो तो अचीव करते हैं। तो ये संतान जिसके लिए हम कहते हैं ना कभी भी पेरेंट को पूछा जाता है किस लिए कर रहे हैं? आपको पूछेंगे किस लिए कर रहे हैं? लाइक अल्टीमेटली पैरेंट का गोल क्या है कि हम अपनी पीढ़ी के लिए कर रहे
(49:05) हैं। हमारे आगे ले जाए नाम आगे ले जाए। मेरा बेटा या बेटी के लिए करें। अगर बेटा या बेटी के लिए कर रहे हैं ना तो क्या इतना आस हम समय वो प्लानिंग के लिए नहीं दे सकते। नहीं आपने जो फार्मूला दिया ना स्पा मैं तो मैंने तो उसको देखा स्पा फार्मूला बन गया। संकल्प प्लानिंग एंड एक्टिविटी से क्या बात है। बहुत बढ़िया। मतलब सही बात है ना? उस मां ने पूरा संकल्प लिया। इतना कुछ सोचा और उस हिसाब से जब बच्चे के लिए एक्टिविटी भी की यह वैसा ही है जो आज के नए टर्म में जो एक टर्म चला है मैनिफेस्टेशन भ आप खाली सोच लोगे तो थोड़ी ना हो जाएगा एक्शन तो साथ में लगेगा
(49:40) एक्सक्ट्ली बहुत सुंदर है ये मतलब और सोचो ना कि आज 396 ईयर हो गए हम छत्रपति शिवाजी महाराज जी को सो 396 साल पहले सिचुएशंस कैसे रहेंगे माहौल कैसा रहेगा टेक्नोलॉजी आज के जैसे नहीं थे आज के जैसे फैसिलिटीज नहीं थी उस वक्त उस वक्त भी अगर मां और पिता सोचते हैं, प्रयास और परिश्रम करते हैं और अपनी सोच के मुताबिक अपनी संतान को बनाते हैं तो मेरा सवाल है आज की मां और पिता क्यों नहीं बना पाएंगे? ओके। क्या आज हम उस मतलब उस उस सोच तक हम जा भी रहे हैं। नहीं जा रहे ना? तो यही फार्मूला है और वही मैं आज लोगों को बताने की कोशिश कर रहा हूं कि जन्म के बाद नहीं जन्म के
(50:21) पहले ही जो कुछ करना है करो। आज वह अपॉर्चुनिटी है। एक बार वह कॉर्ड को काट दिया तो हम सिर्फ बता सकते हैं। क्योंकि मैं हमेशा बताता आया हूं कि जब पिता से यह बीज आया मां के प्लेसेंटा से जब तक जुड़ा है ना तब तक वो मां के शरीर का हिस्सा है। वो कहीं इंडिपेंडेंट पर्सनालिटी नहीं है। जिस दिन कॉर्ड काटेंगे उस दिन वो इंडिपेंडेंट पर्सनालिटी बन जाएगी। और इंडिपेंडेंट पर्सनालिटी को हम सिर्फ बता सकते हैं कि ऐसा मत करो, वैसा मत करो। बदल नहीं सकते। बदलना या नहीं बदलना उस पर्सनालिटी का इंडिपेंडेंट डिसीजन है। लेकिन कॉड जब तक जुड़ी है तब तक वो संतान
(50:55) मां के शरीर का हिस्सा है। मां जो कुछ भी खा रही है, मां जो कुछ भी सोच रही है, मां जो कुछ भी कर रहे हैं वो डायरेक्टली उस बेबी को मिल रहा है। सो बेबी को जो कुछ भी आज कोख के अंदर मिल रहा है ना उसका सोर्स कौन है? उसका सोर्स है मां। अभी हमारे साथ भी क्या हुआ कि प्रीम बेबी हुआ। एथ मंथ में ही हो गया वो। तो हमारे साथ डॉक्टर आयुष हैं। बहुत ही हंबल व्यक्ति हैं जो हमारे सोसाइटी में ही रहते हैं। तो बैठे थे हम बात कर रहे थे। कहते भाई जो काम पहले वो बच्चा पॉटी करना है, सुसु करना है, खाना खाना है, हवा लेनी है, सांस लेनी है। सब अपने आप हो रहा था
(51:32) क्योंकि मां के गर्भ में था। उसको कोई लेना देना नहीं था। एक्स्ट्रा एफर्ट उसको कुछ भी नहीं लगाना। अब वो बच्चा बाहर आ गया। अब उसको हर चीज खुद करनी है। तो इसको एफर्ट लगेगा। उसका वजन कम होगा। वजन बढ़ने में समय लगेगा। तो वो चीजों में बहुत बड़ा अंतर है। बहुत बड़ा अंतर है। और तब हम कुछ नहीं कर सकते। हम सिर्फ क्या कर सकते हैं? ज्यादा से ज्यादा केयर कर सकते हैं। उसकी इम्युनिटी पे ध्यान दे लें। थोड़ा सा और ज्यादा हाइजीन रखें। यही कर सकते हैं। लेकिन जब तक वो मां के गर्भ में था हमें कुछ नहीं करना। सिर्फ मां को चलते फिरते अच्छा खाना खाना है। अच्छी सोच
(52:04) रखनी है। मतलब बाद में बहुत टफ हो जाता है। ये मैं अपने एक्सपीरियंस से बता रहा हूं। [हंसी] हालत खराब हो जाती है। बिल्कुल सही कह रहे हैं। अच्छा एक बात बताइए सर नींद बहुत कॉम्प्रोमाइज हो गई है। क्या असर पड़ता है एक बच्चे के डेवलपमेंट पर नींद का? एक मां और पिता। अच्छा ये एक और बात है। सारा सारा इल्जाम मां पे है। हम इसमें पिता का रोल नहीं है क्या? है। मैं दोनों आपके प्रश्न का उत्तर बहुत अच्छी तरह से दूंगा। पहला प्रश्न जो पूछा नींद बहुत अच्छा सवाल है। देखिए नींद मतलब इंसान को क्यों दी गई है? नेचर ने इंसान को डिजाइन किया बिकॉज़ हमारा भी डिजाइनिंग
(52:46) है ना मतलब पूरा सिस्टम है ये पूरा। हम तो नींद क्यों मिली है? नींद क्या है? तो नींद है हीलिंग का समय। हम दिन भर जब जागते हैं, दिन भर जो भी उथल-पुथल जो कुछ भी काम कर रहे हैं, उसमें जो हमारा सेल्स जो मतलब डिग्रेड हो रहा है, [नाक से की जाने वाली आवाज़] लॉस हो रहा है, उसका रिपेयर करने का काम इस नींद के दौरान होता है। सो रीजेनरेशन जो कहते हैं, रिफॉर्म जो कहते हैं तो वो पूरा नींद के दौरान होता है। जिस किसी इंसान को नींद नहीं हो रही है उसकी पूरी तो वो जल्दी एज््ड होगा, जल्दी बीमार पड़ेगा, जल्दी उसका बॉडी का डिटोरेशन होगा और कम उम्र
(53:22) में ही मतलब पॉसिबिलिटीज है। तो वो नींद बहुत इंपॉर्टेंट फैक्टर है इंसान के लिए। प्रेगनेंसी में भी यह बहुत सारा इशूज़ हमने देखा है कि कई सारी माएं हैं जो देर रात तक सो ही नहीं रही है। अगर लेट नाइट तक आप जाग रहे हैं। आपको नींद का इशूज़ है तो डेफिनेटली बेबी के ग्रोथ में बहुत सारे इशूज़ होते हैं। प्रॉब्लम क्या होता है कि बेबी का भी ग्रोथ मोस्टली अगर हम देखेंगे मतलब सेल्स का निर्माण कब हो रहा है? दिन भर आप इधर-उधर भागदौड़ कर रहे हो तो पूरा बॉडी पूरा सिस्टम आपका उस उसको सारा सपोर्ट देने में पीछे पड़ा हुआ है। जब रात को सोया हुआ है तब बॉडी रिलैक्स है तब
(53:59) जाके वो रिपेयर करने का मेंटेनेंस करने का काम कर रहा है पूरे बॉडी में जहां-जहां कुछ प्रॉब्लम्स हुआ है उसको तो यूट्रस में जब बेबी का ग्रोथ हो रहा है तो कुछ सेल्स बन रही है। बनी हुई सेल्स में से कुछ सेल्स जाकर बेबी के शरीर को जुड़ रही है। वह पूरा प्रोसेस हर दिन हो रहा है। हर दिन हो रहा है। 9 महीने हर रोज हो रहा है। अभी इसमें आपको बीच में नींद ही नहीं है। तो वह जो प्रोसेस बेबी बनाने के लिए जो कुछ भी चाहिए वह बन ही नहीं रहा है बनने क्योंकि बनने से पहले आप जाग रहे हैं। आप जाग मतलब बड़ी पूरा सिस्टम वापस इस्तेमाल कर रहे हैं। तो वो जैसे बनना चाहिए। मान
(54:34) लीजिए कि आप घर अपना बना रहे हैं। सो घर बनाने के लिए आपने चार लोगों को काम पर लगाया है। वो चार लोगों को आपने मतलब दो लोगों को बीच में ही निकाल दिया। जितने दिन में वह जैसा बनना चाहिए बनेगा। नहीं बनेगा। क्योंकि वह समय ही नहीं मिला तो कैसे बनेगा? सही बात है। तो वही बात है कि नींद बहुत इंपॉर्टेंट होती है और नींद ना होने की वजह से कई सारे प्रॉब्लम्स आज अगर साइकोलॉजिकल डिसऑर्डर्स का यह पहला सिम्टम है। नींद ना होना आपका लेस नींद है तो कहीं ना कहीं गड़बड़ है। नींद अच्छी होनी हर किसी के लिए जरूरी है। प्रेगनेंसी में भी जरूरी
(55:09) है। नॉर्मल लाइफ में भी जरूरी है और उसके लिए इसी वजह से केसेस बढ़ रहे हैं। इसी वजह से आज लाइट लाइफ तो सबकी हो रही है धीरे-धीरे। यस। रात को बैठ के ओटीटी देख लिया, लेट सोए क्योंकि टिए वन में और मेट्रोस में तो ये कल्चर धीरे-धीरे आ चुका है। या तो इसलिए मैं प्रेग्नेंट माओं को तो कहता हूं कि स्ट्रिक्टली 10 मैक्सिमम 10 बंद और सो जाना है। भले जल्दी आप सुबह उठेंगे क्या होता है कि यह शट डाउन हो जाता है। प्रोसेसर शट डाउन हो जाता है। ठंडा हो जाता है। मॉर्निंग जब भी आंख खुलती है भले जल्दी आप वेक अप हो गए बट उस वक्त आपके दिमाग में कुछ नहीं है। उस वक्त
(55:43) आप मेडिटेट करो। कुछ बाकी सारी एक्टिविटीज जो प्रेगनेंसी में की जाती है वह करो। वह समय बेबी के लिए इस्तेमाल करो। फिर देखो कैसा असर होता है। आपके लाइफ में भी और बेबी के लाइफ में भी। तो ये नींद बहुत इंपॉर्टेंट है। और दूसरा सवाल आपने बहुत अच्छा सवाल किया। बहुत बार यह सवाल पूछा जाता है कि सर पिता का रोल क्या? सो पिता के दो रोल है। पहला रोल है वो है डायरेक्ट रोल जो कि बीज देने का रोल। अच्छा बीज अगर पिता से जाएगा तो ही वो ग्रो हो पाएगा। अच्छा बीज नहीं दिया तो शायद वह अबॉट हो जाएगा, प्रॉब्लम हो जाएगा। तो अच्छा बीज देना यह पिता का पहला
(56:18) और डायरेक्ट रोल है। दूसरा रोल है वो है इनडायरेक्ट रोल। जैसे मैंने किसान का एक एग्जांपल दिया। किसान ने बीज बोया और छोड़ा नहीं। किसान ने बीज बोने के बाद में पानी भी दिया। वो फर्टिलाइज़र्स भी दिए। उसको केयर भी किया। मतलब भूगर्भ का केयर किया ना तब जाके भूगर्भ ने उस पौधे को बनाया। हम हम सो जिस मां को आपने बीज दिया हुआ है उस मां का केयर करना भी तो आपका ही काम है। जो एनवायरमेंट है मां अगर मां मतलब ऐसा एक वीडियो है मतलब स्कैनिंग चल रहा है प्रेगनेंसी में बेबी का स्कैनिंग चल रहा है और उस वक्त कुछ पतिप में तनाव निर्माण
(56:58) हो जाता है। एक दूसरे से लाउडली वो बोलते हैं और झगड़ा हो जाता है और जैसे ही मतलब झगड़ा झगड़ते हैं तो कोख के अंदर का वो बेबी इमीडिएटली हम मतलब बेबी के ऊपर का यस वो इंपैक्ट वहां पे कैच हुआ है स्कैनिंग के अंदर स्कैनिंग के अंदर तो इसका मतलब क्या है कि आपका जो [नाक से की जाने वाली आवाज़] एनवायरमेंट है पति की वजह से इनलॉज़ की वजह से सोसाइटी की वजह से जो एनवायरमेंट उस गर्भवती को जा रहा है वो एनवायरमेंट का बहुत बुरा असर बेबी के ऊपर हो रहा है। बेबी का जो हम कहते हैं ना कि बौद्धिक क्षमता है। बौद्धिक क्षमताएं के क्षमताओं के लिए यह एनवायरमेंट बहुत इंपॉर्टेंट है।
(57:37) आजकल एपिजेनेटिक्स के ऊपर बात करते हैं। एपिजेनेटिक्स क्या है? पहले ऐसा माना जाता है कि माता-पिता अगर होशियार है तो डेफिनेटली बेबी भी होशियार ही होगा। हम बट वैसा नहीं है। रिसर्च पेपर 1997 में पीटर्सबर्ग यूनिवर्सिटी में एक रिसर्च हुआ और उस रिसर्च में बताया गया रिसर्च के माध्यम से ऐसा पता चला कि बेबी के बौद्धिक क्षमताओं के लिए मां और पिता का सिर्फ 34% कंट्रीब्यूशन है उनके डीएनए का। 34% ओनली 34% रेस्ट 66% केम फ्रॉम एनवायरमेंट। सो एनवायरमेंट कौन सा? जो मां प्रेगनेंसी के दौरान मां को मिल रहा है और मां की वजह से संतान को मिल रहा है और यही है सेकंड
(58:18) रोल जो मैं बता रहा था पिता का क्या है तो यह एनवायरमेंट देना तो हर किसी से यह उस गर्भवती मां को इस तरह का एनवायरमेंट मिला तो वो बेबी के ऊपर अच्छा आप मतलब परिणाम हमें देखने के लिए मिलते हैं और इसीलिए कि आजकल अगर हम मेजरली देखेंगे तो क्या होता है कि घर में वैसा एनवायरमेंट नहीं है। झगड़े हैं ये है वो तो उसका भी इंपैक्ट हो रहा है। ऑफिस [नाक से की जाने वाली आवाज़] में जा रहे हैं तो वहां का प्रेशर है। वहां पे एनवायरमेंट नहीं है। और यही एक वजह है कि गर्भ संस्कार के किसी कोचिंग क्लासेस से आप जुड़ते हैं या हमारे संग जीएस के संग जुड़ते हैं तो यहां पे क्या
(58:53) होता है कि पूरा वो एनवायरमेंट आपको दिया जाता है। घर में कोई आपको सपोर्ट कर रहा है नहीं कर रहा है। नॉट एन इशू। बट यहां पे इतनी अच्छी तरह से आपको हैंड होल्डिंग वो एनवायरमेंट प्रोवाइड किया जाता है। तो यह एनवायरमेंट पिता ने देना चाहिए। इन लॉस ने देना चाहिए। इवन सोसाइटी ने भी इस गर्भवती मां को अच्छा एनवायरमेंट देना चाहिए और नहीं मिल रहा है तो भी गर्भ संस्कार के माध्यम से जब किसी कोचेस के संग आप जुड़ते हैं तो वहां से भी वह एनवायरमेंट आपको मिलना मतलब मिल सकता है। इसलिए यह एनवायरमेंट देना यह पिता का दूसरा और एकदम इंपॉर्टेंट काम है। सो
(59:29) बौद्धिक क्षमताओं के लिए बेबी के फ्यूचर के डेवलपमेंट के लिए सिर्फ़ मां ही जिम्मेदार है। ऐसा नहीं है। मां के संग वांट अंदरूनी उन सारी कैपेसिटीज के लिए पिता का भी रोल इंपॉर्टेंट है। ओके अगर मैं एक आम ऑडियंस के लिए समझना चाहूं गर्भ संस्कार का मतलब क्या? मतलब ये है कि उसमें करवाते क्या हैं? एग्जैक्टली या गर्भ संस्कार का मतलब मैं मतलब मेरा एक डेफिनेशन मैं बताता रहता हूं कि गर्भ संस्कार यानी क्या है? गर्भ संस्कार यानी उस गर्भवती माता का 9 महीने के लिए हैप्पी, एक्टिव, क्रिएटिव, एनर्जेटिक, पीसफुल, स्टेबल, पॉजिटिव और कंसिस्टेंट
(1:00:03) होना। यानी गर्भ संस्कार है। अभी जितने भी ये शब्द मैंने यूज़ किए ये अगर है क्या? तो ये है साइकोलॉजी। मतलब ये इमोशंस से रिलेटेड का ऐसा ये रिलेटेड ये थिंग्स है। जैसे कि फिजिकल बॉडी के लिए काम कर रहे हैं। अंदरूनी मेंटल इमोशनल एंड इंटेलेक्चुअल डेवलपमेंट के लिए मां की साइकोलॉजी अच्छी बना के रखना। यह गर्भ संस्कार में आता है और साइकोलॉजी अच्छा बनाने के लिए हमें उनको एंगेज करना है। जैसे आज ब्रेन बन रहा है। ब्रेन साइंस हम जानते हैं कि ब्रेन न्यूरॉन से बना है। ऐसा देखा गया है या कहा जाता है कि पर सेकंड ढाई लाख न्यूरॉन्स निर्माण हो रहे हैं।
(1:00:39) सो ये न्यूरॉन जब बन रहे हैं। मां जब अगर अपने ब्रेन का इस्तेमाल कर रही है। अपना ब्रेन एक्टिव रख रही है। तब जाके मां का हर एक सेल एक्टिव बना हुआ है। तब जाके उसका असर उस कोक के अंदर के बेबी के ब्रेन के लिए भी अच्छा होने वाला है। सो इस तरह से मतलब मां अपना हर वो कैपेसिटी कितना इस्तेमाल कर रही है। मां अगर गिव अप किए, रोती बैठी हुई है या आलस में बैठी हुई है, स्ट्रेस में बैठी है, चिंता में बैठी है तो बेबी के अंदर कैसा क्या आएगा? वही आएगा ना जो मां के अंदर है। अलग कुछ तो नहीं आने वाला है। तो मैक्सिमम ऐसी चीजें जैसे कि मान लीजिए ब्रेन बन रहा है।
(1:01:16) हम बार-बार कह रहे हैं। सो ब्रेन के दो हिस्से हैं। दो हेमिस्फयर है। एक राइट ब्रेन है, लेफ्ट ब्रेन है, राइट ब्रेन क्रिएटिव ब्रेन है, लेफ्ट ब्रेन लॉजिकल ब्रेन है। तो मां अगर अपने राइट ब्रेन का इस्तेमाल कर रही है तो क्रिएटिविटीज उस 9 महीने के दौरान कर रही है तो वो राइट ब्रेन के डेवलपमेंट में सपोर्टिव रहता है। मां जब अगर लेब्रेन का इस्तेमाल कर रही है, लॉजिकल एक्टिविटीज कर रही है तो लॉजिकल ब्रेन के डेवलपमेंट में सपोर्ट होता है। जब मैं इजराइल का एक रिसर्च पढ़ रहा था। डॉक्टर स्टफन रिपेन इन जी का एक रिसर्च है। इजराइल अगर आज हम देखेंगे तो
(1:01:49) भारत की तुलना में मात्र 1% जनसंख्या रहने वाला देश है। लेकिन आज इजराइल पूरे विश्व में भारी है। मतलब एकदम बेस्ट है। किस बेसिस पे? तो उनकी टेक्नोलॉजी, उनकी बौद्धिक क्षमताएं, उनका टैलेंट, उनकी खोज। तो ये कैसे आया उनके पास में? तो उसके बेसिस पे डॉक्टर स्टीफन जी का रिसर्च है जो कहते हैं कि आज इजराइल बौद्धिक क्षमताओं से या इंटेलिजेंस के बेसिस पे बहुत बेहतर है। क्यों? क्योंकि यहां पे जन्म लेने वाली हर एक संतान जन्म के साथ में ही ब्रिलियंट और इंटेलिजेंट बनवाकर जन्म दिया जा रहा है। क्यों? क्योंकि यहां पे हर मां 9 महीने के
(1:02:24) लिए प्रीनेटल डेवलपमेंट का प्रोटोकॉल फॉलो कर रही है। अभी ये प्रीनेटल डेवलपमेंट का प्रोटोकॉल यानी क्या है? हमारी लैंग्वेज में वह गर्भ संस्कार कर रही है। वहां पर सोसाइटी में वैसा कल्चर है। प्रेगनेंसी की गुड न्यूज़ मिलते ही वो मां जैसे हम लॉकडाउन में क्वारंटीन हुए थे वैसे ही वो एक पॉजिटिव एनवायरमेंट में क्वारंटाइन रहती है। वो मैथ सॉल्व करती है। पजल सॉल्व करती है। यह क्रिएटिव टास्क करती है। और उसी का असर आज उस देश में हर हर उस इंसान के हर उस व्यक्तमित्व के अंदर हमें देखने के लिए मिलता है। और हमारे यहां पे ये एक्टिविटी नहीं हो रही। सो जैसे ब्रेन के
(1:02:59) लिए एक्टिविटी किया जैसे मैं सेंसरी ऑर्गन का डेवलपमेंट सेंसरी ऑर्गन यानी क्या है कि ग्रहण क्षमता ग्रास्पिंग कैपेसिटीज तो आइज बन रही है स्किन्स बन रही है हमारे टेस्ट बन रही है कान बन रहे हैं तो इनकी कैपेसिटीज बढ़ाने के लिए मां अगर इनसेंसरी ऑर्गन का अच्छा कॉशियसली इस्तेमाल अपने सेंसरी ऑर्गन का करती है जैसे कि म्यूजिक सुन रही है जैसे कि कुछ अच्छा देख रही है ऑब्जरवेशंस कर रही है त्राटक कर रही है तो उनका अच्छा असर बेबी के डेवलपमेंट में हमने देखा है। अनेक बेबीज में वो देखने के लिए मिलता है। सो इस तरह की कई एक्टिविटीज है जैसे
(1:03:36) ब्रेंजिम एक्टिविटी हम कहते हैं। राइट ब्रेन लेफ्ट ब्रेन दोनों का इस्तेमाल कर रहे हैं। तो उससे क्या होने वाला है? शार्पनेस। जैसे कि राइट ब्रेन का न्यूरल फ्लेक्स लेफ्ट ब्रेन का न्यूरल फ्लेक्स जब कनेक्ट होगा तो क्या बनेगा? न्यूरल पाथ। सो दोनों ब्रेन के बीच में जब ये न्यूरल कनेक्शंस बनेंगे। न्यूरल पाथवे जितना ब्रॉडर बनेगा उतना राइट टू लेफ्ट लेफ्ट टू राइट का कम्युनिकेशन स्पीड बढ़ेगा। यानी जैसे हम चतुर बीरबल कहते हैं। ब्रेन क्या है? प्रोसेसर है। वो प्रोसेसिंग स्पीड बढ़ाएगा। वो चतुरता बढ़ाएगा। आपके बेबी के अंदर की वो
(1:04:05) शार्पनेस बढ़ने में आपको मदद हो सकती है। और इसलिए ये ब्रिंजिम जैसी एक्टिविटीज ऐसे अनेक एक्टिविटीज जहां पे मेंटली, इमोशनली, इंटेलेक्चुअली, बेबी के सपोर्ट में, मां के सपोर्ट में, मां के हैप्पीनेस में, मां के एनर्जी में, मां के कंसिस्टेंसी में यह सारी परिवर्तन हम लाते हैं। ब्रेन लाइक दिस वन। यस यस यस। वह सारी एक्टिविटी जैसे दोनों ब्रेनिंग का इस्तेमाल दोनों हाथ में दो पेन लिए और दोनों हाथ से आप सर्कल ड्रॉ कर रहे हैं। आप दोनों हाथ से कुछ लिख रहे तो यह ब्रज जहां पे दोनों ब्रेन का इस्तेमाल हो रहा है। इस्तेमाल हो रहा है। ग्रेट क्योंकि हम भी
(1:04:38) जब फिंगरप्रिंट से इसको देखते हैं ना तो हमने बहुत बार ऐसा देखा है कि ऐसे कोई एक फिंगरप्रिंट बनते हैं। एक आर्क करके बनता है। आर्क बनता है। अब आर्क नॉर्मली तब बनता है जब माता स्ट्रेस में रही हो। ठीक है? तो हम रिकंफर्म करते हैं फिर कि ये स्ट्रेस वो नहीं है ये जो प्रेगनेंसी का जो नॉर्मल स्ट्रेस होता है ये वो स्ट्रेस होता है जब वो एक्सट्रीम पे होती है चाहे वो फाइनेंसियल हो चाहे वो फिजिकल हो चाहे वो इमोशनल हो वो उस पैटर्न में हमेशा हमने आर्च देखे हैं हमने और आर्च को नर्चर करने में फिर उतना एफर्ट अपने आप में अलग लगता
(1:05:07) है तो फिंगरप्रिंट्स इवन जब आपने बात करी कि अब सेंसरी ऑर्गन्स की तो हमने बहुत बार ऐसा देखा है जो हमारा लेफ्ट ऑसिपेटल लोप है जो नेचुरलिस्टिक इंटेलिजेंस के लिए रिस्पांसिबल है। तो अगर कोई ऐसी माता है जो गार्डनिंग करती है, नंगे पांव जमीन पर चलती है, कुकिंग करती है तो वह बच्चे में ट्रेड्स पाए जाते हैं। यस अब्सोलुटली। तो वो देखा है हमने। तो दैट्स अब्सोलुटली ट्रू कि आप क्या डिजाइन करने वाले हो और मतलब इजराइल जैसी छोटी सी जो एक कंट्री है जो इतनी पावरफुल है वो वहां पर इस तरह का पूरा एक एनवायरमेंट दे रहे हैं। और जो चीज भारत से निकली है वो भारत में
(1:05:43) तो कम से कम तरीके से होनी चाहिए। और और इतिहास के कई सारे उदाहरण है। एक उदाहरण जो हम लेंगे नाम लेंगे वो स्वामी विवेकानंद जी का ओके सो उनकी माता तो भुवनेश्वरी देवी वो माता ने क्या किया 9 महीने के दौरान वो पीस ऑफ स्टेबिलिटी की अवस्था में रहे मेडिटेट किया गर्भ संस्कार की प्रोसेस को फॉलो किया और वही वजह है कि आज स्वामी जी मतलब कैसे बने डिफरेंट व्यक्तिमत्व ऐसे कहा जाता है कि मात्र 1% बेबीज जो बनते हैं जो बनते हैं उनमें से मात्र 1% है जो सबसे अधिक इंटेलिजेंट बनते बनते हैं मात्र 1% बाकी तो बन रही है बेबी तो बने ही रहे हैं
(1:06:20) बट वो उस 1% में या उस ग्रेट लेवल पे लेके जाने के लिए हमें ग्रेट एफर्ट्स करने पड़ेंगे। सो वैसा अगर करते हैं तो उसका डेफिनेटली अच्छा ही असर होने वाला है। यहां पे बुरा असर होने का सवाल ही नहीं पड़ता है। तो इतनी अच्छी जो प्रोसेस है जैसे कि आजकल हम देखते हैं कई सारे वीडियोस आते हैं सोशल मीडिया पे कि डिलीवरी हो गई। बेबी को कुछ तकलीफ है, प्रॉब्लम है। फिर मां-पिता तकलीफ में है, फिर रो रहे हैं, हेल्प मांग रहे हैं। ये सो व्हाई? वो जो आगे इवन जैसे अभी भी आपको भी मतलब इशूज़ है आपने भी अभी-अभी बेबी को जन्म दिया है। हम सो डिलीवरी के टाइम मतलब कंसीव का कंसीव
(1:06:59) होने का न्यूज़ मिलने के बाद में गुड मतलब गुड न्यूज़ मिलने के बाद में हर कोई एक्साइटेड है। बट डिलीवरी के बाद में अगर वही बच्चा क्रैंकी है हम कुछ प्रॉब्लमेटिक है तो माता-पिता सफर कर रहे हैं। माता-पिता तो करते ही करते हैं। बट एक सबसे बेहतर मतलब जो सबसे अधिक सफरिंग हो रहा है वह जीवन भर के लिए बेबी का सफरिंग हो रहा है। बिल्कुल हो रहा है। सो आज आप 9 महीने का समय ना देकर बेबी को जीवन भर का सफरिंग दे रहे हैं। और 9 महीने में यह अगर इस तरह से आपका एनवायरमेंट इस तरह से आप पूरा अपनी इन एक्टिविटीज में अपने आप को बिजी कर रख रहे हैं। कॉसियसली
(1:07:34) उस बेबी के ऊपर कुछ काम कर रहे हैं तो डेफिनेटली उसका बहुत अच्छा असर जो जीवन भर के लिए बेबी के ऊपर रहना है। जो स्वामी विवेकानंद जी का मैंने एग्जांपल दिया। मां को पहले ही पता था कि मेरा बेबी जो मां ने जो दिया है मां को पता था। मेरा बेबी जो है भारत परिक्रमा के लिए जाए या शिकागो परिषद में जाए। जहां जाएगा वहां अपना छवि छोड़कर आएगा। देश का और माता-पिता का नाम रोशन करेगा। यह पता था इतिहास का और एक उदाहरण लेते हैं हम। उदाहरण कौन सा? भक्त प्रह्लाद जी का। भक्त प्रह्लाद जी के पिता कौन? हिरण्यकश्यप यानी राक्षस का बीज। सो राक्षस का बीज स्त्री गर्भ में आया।
(1:08:10) मां ने क्या किया? मां ने 9 महीने के लिए एनवायरमेंट चेंज किया। मां साधु संतों के आश्रों में स्थाई हो गई। और वो सारा एनवायरमेंट 9 महीने में कोख के अंदर बेबी को दिया। और असर क्या हुआ? बेबी कौन बना? भगवान स्वरूप भक्त प्रह्लाद। ये ट्रांसफॉर्मेशन कब बना? इन 9 महीने के दौरान बनाया। और इसीलिए मैं मैं कहता हूं कि स्कूल क्या स्कूल के बाहर खड़े रहकर भी इतिहास निर्माण कर सकता है आपका बेटा भी या बेटी आपकी संतान डॉक्टर बाबा साहब अंबेडकर का विश्व रत्न डॉक्टर बाबासाहेब आंबेडकर जी का उदाहरण है आप बाय बर्थ वो कैपेसिटीज है बाय बर्थ टैलेंट अगर है तो
(1:08:47) स्कूल क्या स्कूल के बाहर खड़े रहकर भी आपके संतान आपका और आपके देश का नाम रोशन करेगी और इसलिए वो बाय बर्थ कैपेसिटी के ऊपर हर किसी पैरेंट ने हर किसी मां ने फोकस करना जरूरी है। वंडरफुल। अगर थोड़ा सा और इसके पीछे लेके चलते हैं। अ स्पर्म क्वालिटी एक फादर की वो कैसे इंप्रूव हो क्योंकि उसके बाद ही तो कंसी होंगे। डेफिनेटली बीज बीज तो अच्छा होना ही चाहिए और बीज अच्छा नहीं है तो डेफिनेटली प्रॉब्लम हो सकते हैं। प्रॉब्लम बड़ी मेजर प्रॉब्लम है। और उसका मेजर रीजन है एडिकशंस। इवन मां भी प्रेगनेंसी के दौरान बिकॉज़ आजकल की जो फीमेल्स है वह भी कई बार
(1:09:29) एडिक्शनंस करती रहती है। तो रिसर्चेस बताते हैं ओनली एडिकशंस ही नहीं एडिक्शन का तो होता ही होता है। रिसर्चर्स बताते हैं कि डायरेक्टली बौद्धिक क्षमताओं के लिए मिसकैरजेस, अबॉर्शंस और बाकी बेबी के ग्रोथ रुकने के लिए यह एडिक्शंस मतलब उनकी वजह से यह ग्रोथ रुक जाता है या बौद्धिक क्षमताओं पे डायरेक्टली परिणाम होता है। इवन [नाक से की जाने वाली आवाज़] आप प्रिजर्वेटिव्स ऐड किए हुए फ़ूड खा रहे हैं। जैसे मैगी है और बहुत सारे कुछ प्रिजर्वेटिव फ्रेश फूड नहीं आप कंज्यूम कर रहे प्रिजर्वेटिव ऐड किए हुए आप अगर फूड ले रहे हैं तो [नाक से की जाने वाली आवाज़] उसका भी
(1:10:04) डायरेक्टली बौद्धिक क्षमताओं के ऊपर असर हो रहा है। यानी 9 महीने आप अपने आप के ऊपर कंट्रोलोल्ड नहीं है। मतलब बस जो चल रहा है चल रहा है। प्रेगनेंसी के पहले जैसा जीवन चल रहा है वैसा ही जीवन अगर चल रहा है तो उसका असर बेबी के ऊपर होने वाला है। उसका असर आपके स्पर्म क्वालिटी के ऊपर हो रहा है। आज एक्सरसाइज नहीं कर रहे। टेस्टोस्टरॉन नहीं है। आपके अंदर हैप्पी हॉर्मोंस नहीं है। आपके अंदर वह एनर्जी नहीं है। सेकंड थिंग कि अह जो एज है हम एज भी बढ़ रहा है। मतलब पहले एक फर्टिलिटी के लिए अच्छा एज माना जाता है। वो 28 लेस दैन 28 इयर्स
(1:10:37) लेस देन 28 यस मैक्सिमम 30 बट उस वक्त आज कंसीव नहीं हो रहा है। मतलब शादी ही नहीं हो रही इससे। शादी नहीं हो रही इस साल। अच्छा कर लेते तो उनको लगता है तीन चार साल पहले तो हम एंजॉय करेंगे। एक्सक्टली और इसी वजह से फिर प्रॉब्लम्स होता है। लेकिन जो फिट है हमारे यहां पे अनेक एग्जांपल है। 46 इयर्स की अनेक मां है। लक्ष्मी समंत्रा नाम की हमारी एक मां है जीएससी मॉम बेंगलुरु से साइंटिस्ट सीज तो लिटरली मिरेकल मतलब पहले तो वो अमेरिका में स्थित थे। पहली बेटी है। दूसरे बेबी के लिए उन्होंने प्रयास किया। नेचुरली नहीं हो रहा था। इश्यूज थे। उन्होंने अपने
(1:11:12) ऊपर काम किया। गर्भ संस्कार की इस प्रोसेस को प्लानिंग से जॉइ किया और उसका इतना अच्छा रिजल्ट्स मिला। उन्होंने लिटरली अपना एज रिवर्स किया है। हम कहते कह सकते हैं एट द एज ऑफ़ 46 नेचुरली कंसीव करके बेबी को जन्म दिया है बेबी गर्ल को और कुछ भी इश्यूज नहीं है। यह तो छोड़िए। शीला सिंह नाम की हमारी एक जीएससी मॉम है। एट द एज ऑफ़ 48 बेबी गर्ल को जन्म दिया है। कुछ भी इशू नहीं है। 48 एज। क्या बात है। बहुत ही बढ़िया। तो यह कैसे हो रहा है? तो हमें अपने ऊपर काम करना होगा। स्पर्म क्वालिटी अच्छी नहीं है तो डेफिनेटली प्रॉब्लम होने ही
(1:11:50) वाले हैं। तो दोनों का रोल है। मदर का भी, फादर का फादर का भी रोल है। अच्छा जब हम मेंटल वेल बीइंग की बात करते हैं तो मेंटल वेल बीइंग में ना इमोशनल हीलिंग हो गई, ग्रेटट्यूड हो गया, फॉरगिवनेस हो गई। क्योंकि देखिए इंपल्सिवनेस तो बढ़ रही है। करेक्ट? एक्सपेक्टेशन बढ़ रही है और एक्सपेक्टेशन मतलब हम तो देसी भाषा में बोलते हैं मां है मिसअंडरस्टैंडिंग की। ठीक है? तो इस चीज में ना हम जो बेसिक थे हमारी चीजें भूल गए। माफ़ कर देना, थैंक यू रखना, एक दूसरे के प्रति विनम्रता रखना, रिस्पेक्ट रखना। तो अब जहां कपल में सुबह झगड़ा हो रहा है, रात को वो सेक्स कर रहे
(1:12:27) हैं। अब उस समय अगर वो कंसीव कर भी रहे हैं, तो क्वालिटी ऑफ़ स्पर्म शायद अच्छा भी होगा, लेकिन जो कंसीव कर रहा होगा, जो हिट कर रहा होगा, वो कैसे पता लगेगा? तो इसका कितना इंपैक्ट पड़ता है ये मतलब आप एग्जांपल्स के साथ बताना क्योंकि आपके पास में बहुत सारे एग्जांपल्स हैं या हम पेरेंट्स को तो कई बार बोलते हैं जो नए जो हमारे पास रिलेशनशिप काउंसिल्स के लिए भी आते हैं तो हम उनको गाइड भी करते हैं लेकिन फिर भी उस तरह सोच ही नहीं रहे हैं तो एक हमें लगता है गैप है वहां पर तो इसीलिए वो बीज शुद्धि का जो प्रोग्राम कहा हमने कि वहां पे पहले प्रिपेयर करवाया
(1:13:01) जाता है। आप झगड़ रहे हैं और फिर बेबी के बारे में जा रहे तो फिर डेफिनेटली कुछ मतलब बेबी लाकर भी फायदा नहीं है क्योंकि बेबी तकलीफ में जीने वाला है जीवन भर बेबी को तकलीफ आप देने वाले मतलब इतना एक्साइटेड ये मोमेंट है लाइफ का मतलब कहते हैं ना कि एक स्त्री का जो भविष्य है स्त्री जो है स्त्री का जीवन जो है स्त्री का जीवन मातृत्व के अलावा अपूर्ण कहा जाता है। हम्। सो, स्त्री पूर्णता पाने के लिए उनके जीवन का पिता का भी जीवन जो है मतलब पितृत्व प्राप्त करने के बाद में जो एक्सपीरियंस है वो डेफिनेटली ब्यूटीफुल है। बहुत सुंदर
(1:13:38) है। मतलब सिर्फ संतान बोल के बेबी को नहीं लाना है। बल्कि एक व्यक्तिमत्व बोलकर सोचना है कि एक व्यक्तिमत्व हम अगर इस दुनिया में हम अगर कल जॉब पे कोई एक पर्सन हायर कर रहे हैं तो भी हम 10 चीजें चेक करते हैं। वो क्वालीफाई है कि नहीं। तो आपके प्यार की निशानी हम कहते हैं पतिप्नी के प्यार की निशानी वो निशानी अगर जन्म लेने जा रही है तो क्या ऐसे ही हम इग्नोरेंस में चलो मतलब पता नहीं एडिकशंस कर रहे हैं वो अल्कोहल लिया है उस वक्त भी शायद मतलब कंसीव हो रहा है तो वो क्या इंप्लिकेशंस उसके हो सकते हैं सिर्फ [नाक से की जाने वाली आवाज़] ये नेचर का
(1:14:13) अगर नेचर को हम फॉलो करेंगे ना तो नेचर हमें बहुत कुछ सिखा रहा है जो मैंने किसान का एग्जांपल दिया वहां पे ही हमें पता चलता है किसान अगर उस बीज की केयर नहीं करता है। अच्छा बीज नहीं बोता है। तो क्या होता है वो हर किसी को पता है। मतलब फाइनली डोंट बी ए एक्सीडेंटल पेरेंट बी अवेयरली अवेयर्ड पेरेंट कॉन्शियस कंसीव कहते हैं। कॉन्शियस कंसीव होना चाहिए। बाय चांस नहीं बाय चॉइस कंसीव होना चाहिए। हां पहले ऐसा सिस्टम होता था। मैंने पढ़ा भी है जब ऋषि मुनि जब बेबी प्लान करते थे तो उनका प्रोसेस होता था। पूरा प्रोसेस होता था। पूजा पाठ करके नहा धोकर अपना पूरा एकदम
(1:14:51) प्रोसेस था। अह ऐसे मैंने भी पढ़ा है, सुना है कि मतलब वह मुहूर्त देखकर मतलब कंसीव करने के लिए करते थे। तो इतना चीजों को इसलिए देखते हैं कि क्योंकि उनके लिए ना एक जीव वो जीव नहीं है। वो वो मतलब आगे सात पुश्तें वो डिसाइड करने वाला है। एक्जेक्टली एक्जेक्टली। ये जो ये जो आपने अभी थॉट रखा ना वो बहुत मायने रखता है। वो उस थॉट से वो दिमाग में है ही नहीं है। बस एंजॉयमेंट में हम कंसीव कर रहे हैं और एंजॉयमेंट में अगर वो आस्पेक्ट से हो रहा है तो आने वाली पीढ़ी कैसे होगी? हमने सर एक पॉडकास्ट किया था डॉक्टर अंशुमान सिंह है जो कैंसर सर्जन है। तो
(1:15:25) बड़ी इंटरेस्टिंग बात चल रही थी। कहते यार विकास प्रॉब्लम इस बात पे आ रही है कि मान लो किसी ने अपने लाइफस्टाइल को बिगाड़ लिया। डायबिटीज हो गई। अब वो डायबिटीज आपको हुई है या आपने आगे वाली जनरेशन को गिफ्ट में दे दिया। अब एग्जैक्टली जेनेटिकली ट्रांसफर हो रहा है। ट्रांसफर होगा वो। तो आपने एक तो उसके अंदर डाल दिया ऐसा तो आप अपना अगर केयर नहीं कर रहे हो और ऊपर से किसी और को इनवाइट कर रहे हो अपने गर्भ में, अपनी फैमिली में तो आप इनकंप्लीट हो और साथ में एक प्रॉब्लम और क्रिएट कर रहे हो। तो या तो अपना खुद का ध्यान रखना इसलिए भी जरूरी
(1:16:01) है। उसका जो कंसीविंग कर रहे हो उसलिए भी जरूरी हो जाता है। एक्सक्ट्ली। इसलिए मैं एक अच्छा एग्जांपल देना चाहूंगा कि जैसे मोबाइल फोन है हम अभी एक मोबाइल फोन बना या 100 बने फिजिकल बॉडी देखकर हम मोबाइल फोन नहीं खरीदते हम क्या खरीदते हैं उसके अंदर की कैपेसिटी देखकर उसके अंदर का जो प्रोसेसर है उस प्रोसेसर को देखकर खरीदते हैं उसके अंदर का जो ओएस है ऑपरेटिंग सिस्टम है उसको देखकर हम खरीदते हैं। मान लीजिए कि एक कंपनी है उसने ओएस बनाया ऑपरेटिंग सिस्टम बनाया और उस ऑपरेटिंग सिस्टम में क्या है कि बग्स है प्रॉब्लम्स है तो अभी एक
(1:16:35) मोबाइल या 100 मोबाइल वही सॉफ्टवेयर इसी मोबाइल का जो सॉफ्टवेयर है वही कॉपी होकर दूसरे में जाएगा तीसरे में जाएगा चौथे में जाएगा वही सॉफ्टवेयर जा रहा है तो सॉफ्टवेयर सेम जा रहा है तो मतलब इसके अंदर बग है तो उसके अंदर भी बग जाने वाले सो जेनेटिकली ट्रांसफर जो हम प्रेगनेंसी में कहते हैं वो जींस यानी क्या है जैसे कि हम अभी भी बैठे हैं। गप्पे मार रहे हैं। चर्चा कर रहे हैं। हम बात करते समय हमारे अंदर ब्लड सर्कुलेट भी हो रहा है। डाइजेशन भी हो रहा है। मतलब पैर के नाखून से ले सिर के बाल तक बालों तक लाखों ग्रंथियां काम कर रही है। अंदर
(1:17:08) कुछ ना कुछ सिस्टम काम कर रहा है। वो कौन करवा रहा है? वो ऑटोनॉमस सिस्टम है। उसे कहते हैं ओएस। कंप्यूटर के लैंग्वेज में हम कहेंगे ओएस। अभी ये ओएस कहां से आया? ऑपरेटिंग सिस्टम कहां से आया? माता-पिता से आया। माता-पिता का जो सॉफ्टवेयर है, आपने जो बात कही कि मां को अगर डायबिटीज है, डायबिटीज है यानी क्या? मां के अंदर की जो पनक्रियाज है, इंसुलिन निर्माण करने वाली ग्रंथियां है, वो अभी डिस्टर्ब हो चुकी है। उनका प्रोग्रामिंग गड़बड़ हो चुका है। वो अभी बैलेंस नहीं है। जितना जरूरत है उतना प्रोड्यूस नहीं कर रहा है। वो गड़बड़
(1:17:38) हो गया है। वो फैक्ट्री अभी बंद है अंदर की इंसुलिन निर्माण करने वाली। अभी यही बंद फैक्ट्री वाला वो जो प्रोग्रामिंग है वो कॉपी हुआ। वो बच्चे के अंदर उस नेक्स्ट आने वाले इसमें उसमें वो ऑपरेटिंग सिस्टम कॉपी पेस्ट हो गया। तो इनके अंदर नहीं है तो उनके अंदर भी नहीं है। और इसीलिए कहा जाता है कि जेनेटिक डिसऑर्डर्स प्रेगनेंसी में कैरी फॉरवर्ड होते हैं। और वो जेनेटिक डिसऑर्डर्स अगर नहीं देने हैं मतलब गिफ्ट नहीं करने हैं प्रॉब्लम्स बेबी को तो प्रेगनेंसी के पहले से आपको केयर करना होगा। मिनिमम ऐसा कहा जा सकता है कि 90 डेज में हमारी बॉडी में बहुत सारे चेंजेस
(1:18:15) आ जाते हैं। एटलीस्ट मिनिमम 90 डेज आप कुछ रिचुअल्स फॉलो करते हैं। हेल्दी लाइफस्टाइल फॉलो करते हैं। तो डेफिनेटली मैंने कई बार देखा है हमारे कम्युनिटी में आप देखेंगे ना तो 10-10 साल जिन्होंने दो-दो पांचप बार आईयूआई आईवीएफ करके भी जो लोग कंसीव नहीं हुए ऐसे लोग नेचुरली कंसीव हुए हैं। एक इंदौर की मां है। इंदौर से बिलोंग करती है। ज्योति मालवीय उनका नाम है। YouTube पर उनका वीडियो मैंने रख दिया है हमारे चैनल पे। तो वो मां मतलब पति उनके दिल्ली में है। काम बैंक में है। उन्होंने जो शेयर किया वो मैं बता रहा हूं कि उनका एक फॉलोपियन ट्यूब ब्लॉक था। वो
(1:18:57) निकालना पड़ा। कुछ प्रॉब्लम्स हुए। एक ही फॉलोपियन ट्यूब था। फिर भी वो कंसीव नहीं हो रहा था। 32 ईयर का एक डॉक्टरों का एक्सपीरियंस है बोल के उन्होंने बोर में आईवीएफ किया ताकि वह एक्सपीरियंस है और फिर जल्दी हो जाएगा बोल के वहां पे भी नहीं हुआ बहुत सारा प्रयास किया कि नहीं हो रहा डॉक्टर बोले कि अभी नेचुरली तो कंसीव पॉसिबल ही नहीं है आपको बट आपको अभी डोनर लेकर कंसीव करना होगा अच्छा बिकॉज़ वो फर्टिलाइज कर कर फिर हमें ये करना होगा इन बिटवीन वो मां आई ऑनलाइन पे मुझे सुना और सुनने के बाद में उनको कहीं तो अभी कैसे होता है कि 10 जगह जाके इतने पैसे
(1:19:38) खर्च करके जब इतना सारा पेन होता है तो लोग हर जगह पे मतलब होप्स दिखता है तो इमीडिएटली जाते हैं। तो मां को थोड़ा बहुत होप दिखा कि चलो ये भी करके देखते हैं। बोल के मां ने प्रेगनेंसी प्लानिंग से हमारे कोर्स में एनरोल किया। एनरोल करने के बाद में ये तीन महीने का जो बीज शुद्धि का प्रैक्टिस है जिसमें हेल्दी लाइफस्टाइल और कई सारी एक्टिविटीज वाटर एंड बहुत सारी मेडिटेशंस जो मेरे ट्रांस है ऑटोशन ट्रांस वो ये सारी चीजें पतिपत्नी दोनों को हम देते हैं तो दोनों ने फॉलो किया और ऐसा हुआ कि कुछ ही दिन में दो महीने के बाद वो नेचुरली
(1:20:10) कंसीव जो कि डॉक्टरों ने कहा था कि आपको नेचुरली कंसीव होना पॉसिबल ही नहीं है। ऐसे सिचुएशन में वह मां नेचुरली कंसीव भी हो गई। नौ महीने कंप्लीट भी किए। उनको बेबी बॉय हुआ। वह बेबी को लेकर पुणे में हमें मिलने के लिए आए। सर मतलब दिस इज मिरेकल फॉर अस। सो ऐसे अनेक एग्जांपल है। 48 ऐज में जॉइ हुई यस शीला सिंह मैडम है। उनका भी ऐसा ही किस्सा है कि पहली वाली उनकी बेटी थी। बड़ी बेटी का कुछ तो प्रॉब्लम हुआ। डेथ हुई उनकी। मां अकेली है हम और वह मतलब सह नहीं पाई। उनको तो अभी अकेली है। हस्बैंड नहीं है। हम
(1:20:53) लेकिन मां को बेबी वापस चाहिए था। अभी इमोशंस रहते हैं। 18 साल की बेटी उनकी गई। रहते हैं। क्यों नहीं रहते? तो मां ने धैर्य दिखाया। मां बोली कि नहीं मुझे चाहिए। मैं मेरी बेटी को वापस लाऊंगी। और 48 एज में वह आती है यह प्रोग्राम और वह मोटिवेट कहां पर हो गई कि जब हमारा यह प्रोग्राम देखा अवेयरनेस प्रोग्राम जो हमारा रहता है वो देखा और वो देखने के बाद में मां के अंदर होप्स जागृत होया मां बोली कि नहीं मुझे चाहिए बेबी और फिर उन्होंने डोनर लेकर कंसीव किया आज उनकी बेटी है 48 में कुछ भी प्रॉब्लम नहीं एवरीथिंग इज नॉर्मल और बहुत ब्रिलियंट
(1:21:30) बहुत होशियार ऐसी बेटी नागपुर जब हम जाते हैं हर टाइम समय वह बेटी को लेकर मिलने के लिए आते हैं [नाक से की जाने वाली आवाज़] क्या बात है और इस केस में मुझे लगता है आपको आपको भी सोचने पर मजबूर किया होगा कि एवरीथिंग इज पॉसिबल सर मेरा मतलब यह प्रोसेस मैं खुद के बारे में बताना चाहूंगा कि मुझे लगता है कि मैं इस प्रोसेस के लिए मतलब इसके लिए इस कार्य के लिए मुझे चुना गया है। नहीं तो एक मैकेनिकल इंजीनियर आज गर्भ संस्कार करने का सवाल ही नहीं उठता है। मैं 13 साल टाटा मोटर्स में जॉब किया हूं। जो मैं मेरा पैशन रहा है हिप्नोसिस सबकॉन्शियस माइंड
(1:22:04) ट्रेनिंग ये अनेक लोगों को स्ट्रेस के ऊपर मैं काम करवाता था। सो हुआ क्या जब आप फिंगरप्रिंट के बारे में बता रहे थे तो मुझे मेरा मैं 13 साल बच्चों के ट्रेनिंग के लिए काम किया। मतलब अलग-अलग बच्चों को गाइड करते थे और बहुत सारी चीजें करते थे। तो ऐसा ही हुआ कि क्यों आज ये कार्य क्यों कर रहा हूं? उसके पीछे की एक वजह मैं बताना चाहूंगा कि अनेक कपल्स आते थे। हम्म। ऐसे ही एक कपल आया था अपने बच्चों बच्चे के कंप्लेंट ले बेटा बेटा था उनका बेटे के कंप्लेंट ले सामने बैठे थे हमारा डिस्कशन चल रहा था नॉर्मली हम माता-पिता से अलग बात करते थे बच्चे से अलग बात करते
(1:22:38) थे काउंसलिंग के दौरान तो माता-पिता बोलने लगे मतलब ये इशू है वो इश्यूज है सारे इश्यूज बताने लगे उनके एकेडमिक्स को लेके इश्यूज थे तो पिता का फोन बजा पिता ने कहा कि सर एक इंपॉर्टेंट फोन है मैं बोला ठीक है वो पिता फोन लेके बाहर गए और सामने बैठी हुई मां रो पड़ी। मुझे समझ में नहीं आया कि यह अचानक से रो क्यों रहे हैं? मैंने पूछा मैडम क्या हुआ? तो मां ने बताया कि सर आज मेरे बेटे को लेकर जो सारे इश्यूज हम फेस कर रहे हैं शायद इसके लिए मैं ही जिम्मेदार हूं। मैं बोला क्यों? तो मां ने कहा कि सर प्रेगनेंसी के दौरान यह जब मेरे कोख में
(1:23:15) था उस वक्त जो इश्यूज थे जो हमारा एनवायरमेंट था जो हमारे घर में जो चल रहे थे झगड़े और ये सारा जो प्रॉब्लम्स थे शायद उसी वजह से मुझे ऐसी संतान मिली है। मां बोलकर चली गई। लेकिन उस रात मेरे दिमाग में यही सोच रहा कि सच में 9 महीने के इस प्रेगनेंसी के 9 महीने का असर जन्म के बाद के व्यक्तित्व के ऊपर हो रहा है। और वहां से मुझे लगा कि यह टॉपिक के ऊपर हमें रिसर्च करना चाहिए और तब जाकर जब हमने अलग-अलग ये गर्भ संस्कार क्या होता है? अलग-अलग कंट्रीज में क्या किया जाता है? तब इजराइल के बारे में पता चला और तब रियलाइज हुआ कि हां जन्म के बाद का जीवन
(1:23:56) जन्म के पहले के 9 महीने के ऊपर ही निर्भर करता है। और तब जाके मुझे रियलाइज हुआ कि यह जो कार्य है यह इंपॉर्टेंट कार्य है। आज का पीढ़ी में आज के मतलब मां क्या कर सकती है? इस दुनिया में अगर कोई ग्रेट है ना पिता बीज दे रहा है लेकिन पिता से आए हुए बीज को स्वभाव स्वरूप संस्कार और कैपेसिटी का वरदान देने का कार्य मां कर रही है। मां डिजाइनर है और इसलिए दुनिया में अगर कोई ग्रेट है वो है स्त्री क्योंकि आने वाला बच्चा बेटा हो या बेटी हो उनको संस्कार देने का कार्य उनको वो क्वालिटीज देने का कार्य मां कर रही है और इसलिए मां
(1:24:28) अगर चाहेगी सोचेगी निर्णय और निश्चय करेगी तो परिवर्तन ला सकती है। मां विश्व को जन्म दे रही है। सिर्फ बेटा या बेटी को जन्म नहीं दे रही और वहां पे मुझे रियलाइज हुआ और वहां से मैं हर मां को बताते आया हूं कि आपके कोख में सिर्फ आपका बेटा या बेटी नहीं है। आपके कोख में एक भारत रत्न पल रहा है। और वो सोच रखते हुए आपको आगे बढ़ना है। मुझे मेरे लाइफ को उस दिन पर्पस मिला। क्यों? क्योंकि मेरे जीवन में हमेशा रिग्रेट रहा है। मैं अपनी मां को नहीं देख पाया हूं। मैं सेवंथ मंथ का था। तभी मेरी माताजी गुजर गई और आज तक मुझे पता नहीं वो
(1:25:02) कैसे दिखती थी। ना फोटोग्राफ है ना कहीं ना कहीं कभी मैंने देखा ही नहीं। और उस वजह से मन में जो हमेशा रिग्रेट रहा करता था कि मैं अपनी मां के लिए कुछ नहीं कर पाया। जिस दिन ये मुझे सामने ये टॉपिक मेरे सामने आया उस दिन अंदर से आवाज मिली कि तू अपनी मां की सेवा नहीं कर पाया तो क्या इस कार्य के माध्यम से तू इस विश्व की इस भारत की हर मां को मदद कर सकता है और बस उसी एक हेतु से मैंने डाटा मोटर्स को रेजिग्नेशन दिया और कहते हैं ना कि जब ऐसे अंदर से कुछ आता है हम कार्य करना शुरू कर देते हैं कारवा अपने आप बनते जाता है छ साल में इतने लाखों लोग जुड़ गए 30
(1:25:35) से भी अधिक कंट्रीज से जुड़े और बेस्ट पार्ट क्या है कि आज लगभग भग 200 से भी अधिक एमबीबीएस गयनेकोलॉजिस्ट उनकी प्रेगनेंसी में हमारे साथ में जुड़े इस कोर्स को फॉलो कर इस प्रोसेस को फॉलो कर और ये जब आपके पास स्ट्रांग इमोशन होते हैं ना या तो डायरेक्शन अपने आप अपने आप मिल जाती बहुत अच्छा फास्ट होती है ग्रोथ उसके बाद भी सर हमने ना एक पडकास्ट किया था ग्रेटट्यूड के ऊपर एक मोनिका सिंघल जी हैं उनके साथ ओके बड़ी बात चल रही थी ग्रेटट्यूड के ऊपर आभार कितना इतना असर डालता है आपके पूरे शरीर पर, आपके पूरे व्यक्तित्व पर। तो उन्होंने एग्जांपल दिया कि आपका पूरा जो
(1:26:16) बॉडी है वो सेल से बना हुआ है। या इसमें 36 लाख करोड़ के आसपास सेल्स हैं। हर सेल की अपनी एक मेमोरी है। या अपनी-अपनी मेमोरी है। उसका अपना एक थॉट प्रोसेस है। उसका अपना एक ब्रह्मांड है। या जैसे हम पृथ्वी में रहते हैं। पृथ्वी का अपना एक पूरा सौरमंडल है तो हर सेलर का अपना एक सौरमंडल है। सौरमंडल। तो कहते हैं जब 36 लाख करोड़ अणुओं के अंदर से अगर ये निकल रहा हो कि आभार हूं। मैं विनम्रता में हूं। मुझे बहुत अच्छा लग रहा है। थैंक यू। तो आपकी बॉडी वैसे वाइब्रेट करेगी वैसे आपको और आनंद अब्सोलुटली। तो ये पूरा प्रोसेस किसी भी एक पेरेंट के
(1:26:47) लिए या जो अपकमिंग पेरेंट्स हैं, एस्पायरिंग पेरेंट्स हैं उनके लिए कैसा है? सर कैसा है कि कहा जाता है कि व्हेयर यू फोकस थिंग्स स्टार्ट ग्रोइंग। मतलब आप जहां पे फोकस करते हैं, वही चीजें आपके जीवन में ग्रो हो रही है। सो आप जब ग्रेटट्यूड दे रहे हैं तो आप क्या फोकस कर रहे हैं? अच्छे चीजों को ग्रेटट्यूड किस लिए दिया जाता है? इसलिए कुछ मान लो कि किसी ने आपको थप्पड़ मारा फिर भी आपने कहा कि धन्यवाद थैंक यू मतलब थप्पड़ मारने के बाद में आपके मन में क्या है क्रोध की भावना नहीं है आपके मन में क्या है कि शायद रहेगा उसके उसको कुछ प्रॉब्लम रहेगा
(1:27:22) शायद कुछ तो इसके इशूज़ रहेंगे तो आप उसको गलत नहीं दे ले रहे उस आप उसको पॉजिटिव ले रहे मतलब सिर्फ पॉजिटिविटीज ही आप सोच रहे तो एक-एक सेल रिचार्ज हो जाता है जब हम अमेशंस करते हैं ग्रेट एटीट्यूड देते हैं। सो हमारा फोकस पूरी तरह से पॉजिटिविटी के ऊपर बना हुआ है। तो नेगेटिविटीज आने का सवाल ही नहीं होता है। और ग्रेटट्यूड में वही तो हम कर रहे हैं। हमारा फोकस पूरा पॉजिटिविटी पे है। और जब पॉजिटिविटी हमारे अंदर आती है तो एक-एक सेल जैसे हर सेल की मेमोरी है। अगर सेल बायोलॉजी को अगर हम देखेंगे तो सेल बायोलॉजी में क्या बताया
(1:27:58) कि कैसे हमारा शरीर का निर्माण कैसे हुआ है। हमारे हर एक सेल का अपना-अपना एक जीवन है। हर अपने सेल की एक अपनी-अपनी लाइफ है। ये जब इंडिविजुअल सेल्स थे सेल्स को पता चला कि हम इंडिविजुअल रहेंगे तो हमारा लाइफ बहुत कम है। तो सेल्स ने ऐसा डिसाइड किया कि एक सर्टेन पैटर्न में बिहेव करने वाली सेल्स एक साथ जुड़ गई। कम्युनिटी इज द पावर। तो उनको लगा सेल्स को लगा कि हमारी कम्युनिटी बननी चाहिए। इंसान या ये नेचर सृष्टि कैसे बनी? जो मैंने सेल बायोलॉजी के ऊपर मेरा जो पढ़ाई है, मैंने जो पढ़ा है उस बेसिस पे मैं बता रहा हूं। तो इस सेल्स को लगा कि हमें एक
(1:28:35) साथ रहना चाहिए। ये झुंड में रहेंगे तो हमारा पावर बढ़ेगा। तो फिर सर्टन पैटर्न वाली सेल्स एक साथ आ गई और उन्होंने एक साथ रहना चालू किया। जब एक साथ रहना शुरू किया तब उनको रियलाइज हुआ कि हम एक साथ तो रह रहे हैं लेकिन हमारा कोई तो मुखिया होना चाहिए। हमें कोई तो मॉनिटर करने वाला रहना चाहिए। हमें कोई तो वो हर चीज मतलब प्रॉपर उस टाइम पे करना करवाने वाला चाहिए। तो फिर उस सेल्स ने मिलाकर हमारा ब्रेन निर्माण किया। उसको कंट्रोल दिया कि तुम हमें ऑपरेट करो। हम बट यह निर्माण किसने किया? सेल्स ने ही तो किया। और यही बात मैं प्रेगनेंसी में भी
(1:29:10) बताता रहता हूं कि आज एक मां है। बेबी एक दिन में बन रहा है क्या? आज कंसीव किया, कल डिलीवरी हुआ है। ऐसा हो सकता है? नहीं होता है। तो बेबी बनने के लिए 9 महीने का पूरा प्रोसेस है। तो इस 9 महीने के प्रोसेस में हर रोज मां के शरीर में क्या हो रहा है? लाखों सेल्स निर्माण हो रही है। हम जो सेल्स बन रही है। मान लीजिए कि आज आपके शरीर में सेल्स बन रही है। आज आप क्या है? बहुत क्रोधित है। बहुत दुखी है। बहुत फ्रस्ट्रेटेड है। बहुत प्रॉब्लम में है। तो जब आप दुख में हैं, गिव अप किए हुए हैं, स्ट्रेस में है, प्रॉब्लम में है, फियर में है। ऐसे वक्त ऐसे इमोशंस में जब
(1:29:46) नई सेल्स बनेंग तो उस नए सेल्स के इमोशंस क्या रहेंगे? पॉजिटिव या नेगेटिव? नेगेटिव ही रहेंगी। और वही जो सेल्स बनी है, मान लो कि 2 लाख सेल बनी है। अभी बेबी को कौन बना रहा है? यूट्रस में जो बेबी बन रहा है, बाहर से कोई आकर बना रहा है? नहीं बेबी कैसे बन रहा है? कैसे ग्रो हो रहा है? सेल से बन रहा है। और वो उस बेबी के शरीर को जुड़ने वाली हर एक सेल कहां से आ रही है? वहीं से। मां के शरीर से आ रही है। मतलब जो सेल्स मां के अंदर बन रही है उन्हीं में से कुछ सेल जाकर बेबी को जुड़ रही है और बेबी का शरीर बन रहा है। और 9 महीने मां अगर ऐसे
(1:30:20) ही फ्रस्ट्रेशन, स्ट्रेस, ए्जायटी, डिप्रेशन, प्रॉब्लम में रहेगी, दुख में रहेगी तो बेबी कैसा बनेगा? सिंपल सा साइंस। मतलब मुझे तो बात याद आ रही है जो भगवत गीता में कही गई आप जो भी हैं अपने कर्मों की वजह से हैं। आपके कर्म ठीक कर लीजिए तो आपकी आने वाली संतान ठीक हो जाएगी। तो कर्म यानी क्या है कि आज का आपका आज जो आप कर रहे हैं वही तो कर्म है। सो 9 महीने में मां क्या कर रही है? और मां पिता का कर्म अच्छा नहीं है तो वो कर्म मतलब उस संतान के रूप में शायद वापस आ रहे हैं। बहुत ही बढ़िया। सो जो देंगे वही वापस मिलेगा ना। विष्णु
(1:31:00) सर आज मुझे लगता है कि आज हमारी ऑडियंस को ये बहुत सारी चीजें ऐसी पता लगी होंगी कि अनअवेयर होने से अच्छा है अवेयर होना और अवेयर होने से और भी बेहतर है कॉन्शियस होकर अपने उन कामों के लिए पूरा ध्यान लगाना जो आपके आने वाले पीढ़ी दर पीढ़ी को सब कुछ चेंज कर सकता है। एक्साक्ट्ली हम मतलब एक ₹1000 का शिप करते हैं ना तो भी चार लोगों को फोन करते हैं। इस सिप इस जगह कर लूं क्या? सेफ रहेगा क्या? कोई दिक्कत तो नहीं है ना? या कहीं पे भी पैसा लगाते हैं तो कितनी बार मतलब एक घर लेते हैं जब तो घर के लिए अड़ोसपड़ोस चेक करते हैं। बिल्डर कैसा है ये चेक करते हैं कि
(1:31:36) हर चीज चेक करते हैं। आप अपने घर में किसी को बुला रहे हो कम से कम बैठो तो सही बात तो करो। आज मुझे बहुत मजा आया। हां ये जरूर है। पहले क्यों नहीं मिले? [हंसी] पहले क्यों नहीं मिले? यही बात है। लेकिन मुझे बहुत अच्छा लगा। मुझे लगता है ऑडियंस को भी आज बहुत नॉलेज मिली होगी। थैंक यू सो मच। इतने ही वैल्यूुएबल टॉपिक पर बात कर बात करने के लिए लोग बोलते हैं मैनिफेस्टेशन पूरा होता है नहीं होता मेरा होता है क्योंकि ये गर्भधारण संस्कार मेरे मन में बहुत समय से टॉपिक था और ये तब आया जब मेरे घर में जब मुझे पता लगा पहली बार जरूर याद रखना मैं हूं [हंसी] सर
(1:32:11) अब दो हो गए और इस 40ज के अंदर दो बहुत है अभी एक ने [हंसी] ही बता रखा नहीं ऐसा नहीं है सर मैं ऑडियंस को एक बात बताना चाहता हूं कि पहले के जमाने में 10-12 संतानों को जन्म दिया जाता है होती आज हम एक या दो संतान को जन्म दे रहे हैं। तो मेरा हर मां-पिता से जिक्र रहता है कि एक या दो संतान जो भी लाने जा रहे हैं वो फोकस करके कॉन्शियसली जागरूकता से गर्भ संस्कार के प्रोसेस को फॉलो करके इस तरह से अगर लाएंगे तो जरूरी नहीं 10 संतान होने की। वो एक ही संतान जो दुनिया में आपका और इस देश का नाम रोशन करेगी। बहुत ही बढ़िया। हम कई बार मजाक में कहते
(1:32:49) हैं सर जैसे पहले 10 संतान होती थी। भगवान ने 100 ग्राम दिमाग देना था तो 10 में बैठ गया। और जैसे मां-बाप जो कंप्लेन करते हैं ना कि मेरा बच्चा ऐसा है इतना हाइपरिव है या इतना शरारती है सुनता नहीं है। मैं कहा 100 ग्राम अब दो जनों में आ गया या एक जने में आ गया। तो अब हम पेरेंट 10 ग्राम वाले [हंसी] बच्चा 100 ग्राम वाला तो इसलिए वो देयर इज़ अ डिफरेंस। लेकिन थैंक यू सो मच। मुझे लगता है इसमें बहुत और बहुत सारी बातें हो सकती हैं। ये ऑडियंस बताएंगी। ऑडियंस कमेंट करेंगे तो हम दोबारा मैं मिलना जरूर। जरूर जरूर इस मैं ऑडियंस को
(1:33:17) भी सर मतलब बताना चाहता हूं कि जरूर आपको आज का ये हमारा डिस्कशन और थैंक्स कि आपका जो ज्ञान है मतलब मनोविज्ञान के ऊपर आप भी बहुत सारे ब्रॉडकास्ट करते हैं और आपका खुद का उसके ऊपर नॉलेज है। तो ये जुगलबंदी अच्छी रही। बहुत अच्छे-अच्छे प्रश्न आपने मुझे किए और उस वजह से शायद यह प्रश्न सिर्फ मतलब आपके नहीं थे। यू आर रिप्रेजेंटिंग द ऑडियंस बिकॉज़ अभी-अभी आप पापा बने हैं तो आपने वह सारा एक्सपीरियंस किया है। तो एक्सपीरियंस से आया हुआ है। यह अनेक सारे प्रश्न थे और इसीलिए शायद बहुत अच्छे-अच्छे सवाल आपने किए। आपको ऑडियंस को मैं पूछना चाहता हूं। आपको यह
(1:33:56) पडकास्ट कैसा लगा? कमेंट में जरूर लिखिए और साथ ही साथ यह जो प्रोसेस जो है यह प्रोसेस हर घर तक पहुंचनी जरूरी है। हर मां बदलनी चाहिए। मैं हमेशा कहता आया हूं कि अगर देश को बेहतर बनाना है तो पहले इस देश की हर गर्भवती मां को बेहतर बनना होगा और छत्रपति शिवाजी महाराज जी जैसी ग्रेट संतान को पाना है तो पहले हर मां को जिजा मां बनना होगा क्योंकि जब तक यह जिजा मां नहीं बनेगी तब तक शिवबा नहीं आ सकते वैसी संतान नहीं आ सकती हर घर की मां जिजामां जैसी बननी चाहिए सो ग्रेट मां बननी जरूरी है और उस मांओं को मदद करने के लिए मुझे लगता है कि यह टॉपिक बहुत इंपॉर्टेंट है
(1:34:33) यह 9 महीने इंपॉर्टेंट है वो किसी कीमत पे वापस नहीं आते हैं। तो इसलिए मैं चाहता हूं कि आपके पहचान में यदि कोई आपकी फ्रेंड है, बहन है, भाभी है, कोई भी है जो प्रेगनेंसी प्लान कर रहे हैं। अभी भी शादी हुई है या अभी प्रेग्नेंट है, तुरंत उनको यह पडकास्ट शेयर कीजिए। शायद आपका एक शेयरिंग आने वाले भारत की पीढ़ी को बदलेगा। सो जरूर मैं सभी को अपील करता हूं कि आप आप इसे शेयर करें। थैंक यू सो मच। मुझे बहुत मजा आया और आप सर को फॉलो कर सकते हैं Instagram पर, आप फॉलो कर सकते हैं YouTube पर और बहुत सारी चीजें सीख सकते हैं। और अगर अभी तक हमें
(1:35:13) सब्सक्राइब नहीं किया है तो देर किस बात की? अभी सब्सक्राइब कर लो। बहुत वैल्यूुएबल कंटेंट मिलेगा आपको। मिलते हैं आपसे नेक्स्ट एपिसोड में। जय हिंद, जय भारत।

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