Should You Really Stop Eating Fruits? | Truth About Metabolism & Diabetes | ft @metabolicdr.k1650
Author Name:Nitesh Narrates
Youtube Channel Url:https://www.youtube.com/@niteshnarrates
Youtube Video URL:https://www.youtube.com/watch?v=IOH4k3GFVlg
Transcript:
(00:00) प्लांट्स को खाकर हम न्यूट्रिशन गेन नहीं कर सकते हैं। यही मेरा पॉइंट है। आप बोल रहे थे कि जब अन्नप्राशन हो बच्चे का तब आप मटन खिलाओ। एक्सक्लूसिव ब्रेस्ट फीड से बेबी बाहर आया। अब आप उसे कॉम्प्लीमेंट्री फूड में सबसे पहले उसी चीज को ऐड करो। ये दलिया और ओट्स क्यों आ जाता है हर जगह। ये सब खाना है? डॉक्टर को तो हम वार्ड मानते हैं। अभी आपको लगता है कि ये टर्म चेंज करना चाहिए। वो सिस्टम के एम्प्लई है वो। वो मेरी तरह सेल्फ एंप्लॉयड नहीं है। काफी लोग मॉर्निंग में ना जूस लेते हैं किसी फ्रूट का। वो फायदेमंद है या नुकसानदायक है?
(00:30) एक्चुअली नुकसानदायक क्योंकि फ्रूट्स इन जनरल हेल्दी नहीं होता कभी भी। मुझे नहीं लगता वीगन रहते हुए कोई बहुत हेल्दी रहता है। पॉसिबल ही नहीं है। प्रोफेशनल जितने भी बॉडी बिल्डर्स हैं मैं उनको हेल्दी तो मानता ही नहीं हूं। मैं ये कहता हूं कि उनके पास बस मसल ही मस है। मेरे पास 20 साल 22 साल के लड़के आ रहे हैं इरेक्टाइल डिसफंक्शन ले। अगर आप अंडा और मीट नहीं खिलाओगे तो यही हाल होगा। मेरी जो डाइट है उसमें ऑलमोस्ट 200 टू 250 ग्राम ऑफ़ फैट होता है और 200 टू 250 ग्राम्स ऑफ़ प्रोटीन होता है। सिंगल मील मुझे नहीं लगता इंडिया में कोई इस तरह से
(00:57) खा रहा है। गवर्नमेंट पब्लिक हेल्थ के लिए थोड़ी ना सोचती है। गवर्नमेंट को तो इसलिए बना के रखना है। काफी लोग बोलते हैं कि पानी पियो ज्यादा से ज्यादा 4 लीटर, 5 लीटर दिन का। बड़ा डेंजरस होता है ये। कई बार आप आईसीयू में भी जा सकते हो ये सब चक्कर में। हम हर रोज अपने बॉडी को कंट्रोल करने की कोशिश करते हैं। कभी कम खाना खाते हैं, कभी ज्यादा वर्कआउट करते हैं, कभी नया डाइट स्टार्ट करते हैं। फिर भी कोई चेंजेस देखने को नहीं मिलता। पता है प्रॉब्लम आपके एफर्ट में बिल्कुल नहीं है। हो सकता है आपका मेटाबॉलिज्म ही सही ना हो। तो आज
(01:26) हम इसी चीज को डिकोड करने वाले हैं आज के एपिसोड में। आज हमारे साथ गेस्ट है डॉक्टर किसले। वेलकम सर। नमस्कार। थैंक यू सो मच फॉर हैविंग। कैसे हो आप? मैं बहुत अच्छा हूं। आप हर रोज नए-नए पेशेंट्स, नए-नए लोगों के साथ डील करते हो। हम सबसे ज्यादा पेशेंट किस टाइप के आते हैं? क्या प्रॉब्लम लेके आते हैं? सभी की समस्या मोर और लेस एक जैसी ही होती है। जैसे अभी तो हमें पता ही है कि अभी सबसे ज्यादा अगर कोई बीमारी है तो वो ओबेसिटी, डायबिटीज, हाइपरटेंशन, फैटी लिवर, हम गाउट हम ये सारे बीमारियां ज्यादा है। अभी बहुत ज्यादा है। हम और सारे लोगों को ये प्रॉब्लम है। इवन
(02:03) खराटा जो हम कहते हैं स्नोरिंग ओके। ऑब्ट्रक्टिव स्लीप एपनिया बोलते हैं उसे हम। तो ये सारी प्रॉब्लम्स है। रात को नींद नहीं आती है अच्छे से। इंसोमिया का इंसोमिया की प्रॉब्लम है लोगों को। फिर थकान कमजोरी पूरे दिन लगती है। एनर्जी लेवल नहीं है। मूड लो रहता है। तो इस तरह की जो प्रॉब्लम है वो सभी में है। मतलब सो कॉल्ड जो अपेरेंटली जो हेल्दी इंडिविजुअल हैं उनमें भी ये सारी प्रॉब्लम है। बिल्कुल है। है ना? राइट। तो आपके हिसाब से सबसे बेसिक रीज़ क्या है इन सारे प्रॉब्लम का? जो दो तीन रूट कॉज जो आप बता पाओ। रूट कॉज तो मैं एक ही बोलता हूं हमेशा दो
(02:35) तीन तो खैर वो तो नहीं बोलता हूं मैं रूट कॉज है आपकी डाइट राइट क्योंकि योर डाइट जो है वो सबसे ज्यादा मैटर करती है और दैट इज योर पिलर ऑफ योर हेल्थ ओके मोस्टेंट पिलर ओके तो अगर आप डाइट को फिक्स करते हो तब जाकर के आपकी सारी चीजें ठीक होती हैं देन रेस्ट ऑफ द थिंग्स यू कैन मींस यू कैन डू सो मेनी थिंग्स अपार्ट फ्रॉम योर डाइट बट दैट इज दी फाउंडेशन एक्चुअली ओके राइट एज एन इंडियन हमारा डाइट तो बहुत ही बेसिक है मतलब चावल दाल रोटी सब्जी या मैं तो खुद बिहार से हूं वहां तो ऑब्वियस सी बात है कि चावल तो हम दो-तीन टाइम खा लेते हैं हम
(03:14) उसके साथ दाल जो अचार होता है तेल में डूबा हुआ जो आम का अचार उसको लेते हैं साथ में उसको बोलते हैं एज अ डाइजेस्टिव कि ये डाइजेशन करने में हेल्प करेगा या या तो ये चीज जो रेगुलर बेसिस पे हम ले रहे हैं हम उसका नुकसान क्या हो सकता है बॉडी में लॉन्ग टर्म लॉन्ग टर्म में नुकसान यह है कि जैसा कि मैं हमेशा बताता हूं कि ह्यूमन बीइंग्स जो हैं हम इस अमाउंट ऑफ कार्बोहाइड्रेट को लेने के योग्य नहीं है। डिजाइन नहीं है हम उस तरह से। तो जिस अमाउंट में हम कार्बोहाइड्रेट ले रहे हैं अपनी डाइट में जैसे 60 टू 70% लेते हैं हम अपनी डाइट में
(03:49) कार्बोहाइड्रेट। और कार्बोहाइड्रेट मैं बता दूं ऑडियंस को जिनको नहीं पता है कार्बोहाइड्रेट कहां से आता है तो प्राइमरीली वो हमारे सीरियल से आ रहा है जो राइस रोटी रागी मिलेट बार्ली जो भी है हम जितने भी अब फैंसी टर्म अभी तो बहुत सारे फैंसी सीरियल्स आ गए हैं जिसको लोग प्रमोट कर रहे हैं कि मिलेट खा लो ये कर लो बट वो अल्टीमेटली सोर्स है कार्बोहाइड्रेट का और वो फाइनली ग्लूकोस में कन्वर्ट होगा आपके ब्लड में शुगर को बढ़ाएगा उसे ब्लड शुगर को मैनेज करने के लिए पनक्रियाज इंसुलिन को सिक्रेट करेगा हम राइट? और वही होता है ओवर द इयर्स क्या
(04:22) होता है कि आपकी बॉडी इंसुलिन बनाते बनाते काइंड ऑफ सेलुलर लेवल पे एक डिफेक्ट आता है जिसको हम इंसुलिन रेजिस्टेंस बोलते हैं। ओके? क्योंकि ये सालों का प्रॉब्लम है। ऐसा नहीं है कि आज हमने कार्बोहाइड्रेट लिया और कल से प्रॉब्लम शुरू हो जाएगी। हम क्योंकि हमारी बॉडी इस तरह से कार्बोहाइड्रेट को इंजेस्ट करने के लिए हम डिजाइन नहीं है। तो जब हम सालों साल इस तरह से करते आ रहे हैं तो ये प्रॉब्लम आता है सेलुलर लेवल पे जिसको हम मेटाबॉलिक डिस्फंक्शन बोलते हैं और माइटोकांड्रियल डिस्फंक्शन बोलते हैं टू बी मोर प्रिसाइज और उसकी वजह से जब माइटोकांड्रिया का
(04:53) प्रॉब्लम आता है जो बेसिकली एटीपी क्रिएट कर रहा है हमारे लिए एनर्जी है एनर्जी करेंसी है हमारी बॉडी का वो हमारे सेल [गला साफ़ करने की आवाज़] का एटीपी तो उसके प्रोडक्शन में प्रॉब्लम आती है जिसकी वजह से आप को लो एनर्जी फील होती है मूड लो रहता है सब कुछ फिर आपका खराब हो जाता है तो इसलिए अल्टीमेटली ये जो डाइट डाइट का जो हमारा स्ट्रक्चर है जब तक हम उसे फिक्स नहीं करेंगे हम बहुत ज्यादा कुछ हेल्थ को लेकर के अपने आप को इंप्रूव नहीं कर पाएंगे। आप योगा कर लो, मेडिटेशन कर लो। मैं हमेशा बोलता हूं इन चीजों को। आप जॉगिंग कर लो, कार्डियो,
(05:25) वेट ट्रेनिंग कुछ भी आप कर लो। आप गलत डाइट पे रह करके कभी भी अपने हेल्थ को आप ऑप्टिमाइज नहीं कर सकते हो। दैट इज नॉट पॉसिबल। तो फिर हम खाए क्या? बिकॉज़ आपने बोला कि चावल मत खाओ, रोटी मत खाओ, सब्जी मत खाओ। हम तो खाए क्या? नहीं सब्जी को मैं मना नहीं करता हूं खाने से बट मैं यह कहता हूं कि आप उसे अपने डाइट का फाउंडेशन नहीं बना सकते हो। ओके डाइट का जो फाउंडेशन होगा वो हमेशा एनिमल फूड से होगा आपका एनिमल फूड लाइक मिल्क मिल्क डेरी मैं नहीं बोलता हूं उसे फाउंडेशन बनाने को मैं मीट एंड एग्स को बोलता हूं प्राइमरीली और जब आपकी डाइट में मीट होगा एग्स होगा
(06:02) तो आपकी डाइट में प्रोटीन भी होगा एनफ फैट भी इनफ होगा और बायो अवेलेबल फॉर्म में होगा बायो अवेलेबल कहने का मतलब होता है कि आपकी बॉडी उसे ज्यादा से ज्यादा यूज कर सकती है यूटिलाइज कर सकती है ओके ज्यादा अब्सॉर्ब होगा वो बॉडी के अंदर हम हम ओके तो ये जो फाउंडेशन है हमारा प्रोटीन एंड फैट का इसे हमें बनाना है तैयार करना है अपने डाइट के लिए और जब आप इसको अपना फाउंडेशन बनाते हो तो आपका डाइटरी कार्ब्स जो है वो ऑटोमेटिकली [नाक से की जाने वाली आवाज़] कम हो जाता है और जब वो कम हो जाएगा तो जितने भी डाउनस्ट्रीम इफेक्ट हैं आई कार्ब डाइट के
(06:33) वो आपको नहीं मिलते हैं फिर बिल्कुल सो आपने एक टर्म बताया था एफटीपी एटीपी एटीपी सॉरी एटीपी यस वो होता क्या है एक्चुअली एटीपी तो हमारे हमारी बॉडी का जो एनर्जी करेंसी होता है जैसे कोई भी सेल जो परफॉर्म कर रहा है अपने काम को कर पा रहा है वो उसी एटीपी की वजह से है। तो बायोकेमिस्ट्री में पढ़ना होता है ये एटीपी एडिनोसिन ट्राई फास्फेट बोलते हैं इसे। तो ये बायोकेमिस्ट्री की बात है। सिंपली हम ये समझेंगे कि वो हमारे लिए एक काइंड ऑफ़ बैटरी है। ओके? राइट? और वो बैटरी जो है अगर वो बेसिकली बैटरी अगर डिस्चार्ज हो रहा है, अगर काम नहीं कर रहा है अच्छे से।
(07:08) तो आप लो एनर्जी रहेगा। आपके सेल्स जो हैं अच्छे से काम नहीं करेंगे। तो सारे सिस्टम अफेक्ट होता है। आपका नर्वस सिस्टम हो, कार्डियोवस्कुलर सिस्टम हो, हम किडनी हो, कोई भी सिस्टम हो वो सारा कुछ अफेक्ट होगा। क्योंकि हर एक सेल में माइटोकांड्रिया है। और जब भी आपकी बॉडी अफेक्ट होती है तो किसी एक सिस्टम के सेल्स अफेक्ट नहीं होते हैं। हम एंटायर बॉडी के सेल्स अफेक्ट होते हैं। और क्योंकि हर एक सेल में माइटोकांड्रिया है। तो आपकी ओवरऑल इसलिए जब भी हेल्थ कॉम्प्रोमाइज होती है ना तो किसी एक सिस्टम की हेल्थ कॉम्प्रोमाइज नहीं होती
(07:37) है। वो एंटायर सिस्टम की हेल्थ आपकी कॉम्प्रोमाइज होती है। हर एक सिस्टम इन्वॉल्व होता है। बट प्रीडमिनेंटली कई बार क्या होता है? किसी एक सिस्टम के साइन सिम्टम्स ज्यादा होते हैं। जिसकी वजह से फिर आपको लोग बोलते हैं कि यार मेंटल इश्यूज है। ओके? या फिर आपका आपको सांस की तकलीफ हो रही है तो कार्डियोवस्कुलर इशू है जो भी है। बट ऐसा है नहीं कि कार्डियोवस्कुलर डिजीज के जो पेशेंट्स हैं उनका बस हार्ट कॉम्प्रोमाइज्ड है। उनके बाकी ऑर्गन्स भी कॉम्प्रोमाइज्ड हैं टू सम एक्सटेंट। बट लार्जली उनका हार्ट कॉम्प्रोमाइज है। इसलिए सिम्टम्स जो हैं प्रीडमिनेंटली उनका
(08:08) हार्ट रिलेटेड है या फिर चेस्ट रिलेटेड सिम्टम्स हैं जिसमें ब्रीथिंग डिफिकल्टी, सांस का फूलना ये सब ज्यादा देखा जाता है। तो इसलिए जब भी हमें हमारी बॉडी कॉम्प्रोमाइज होती है मेटाबॉलिकली तो वो एंटायर बॉडी कॉम्प्रोमाइज होती है। ओके? उसमें डाइजेशन भी आ सकता है। सब कुछ सब कुछ। कुछ एंटायर मेटाबॉलिज्म तो हमारा वहीं से शुरू ही होता है जो हम खाते हैं जिस तरह से वो डाइजेस्ट होता है केमिकली [नाक से की जाने वाली आवाज़] और फिर वो मेटाबोलाइज होता है सेल तक पहुंचता है जिसे हम एसिमिलेशन बोलते हैं तो ये पूरा एंटायर वो पूरा प्रोसेस है
(08:36) मेटाबॉलिज्म का ही सो हमने सेवन एथ क्लास में ही पढ़ा है डाइजेशन के बारे में है ना बट फिर भी हम आज उस प्रोसेस को भूल चुके हैं जब भी हम कुछ खाते हैं उसके बाद बॉडी में क्या-क्या चीजें होती है सपोज दैट मैंने एक रोटी खाया हम तो क्या होगा उसके बाद बॉडी में उसके बाद यही होगा कि कि जब हम कार्बोहाइड्रेट खाते हैं बेसिकली रोटी से कार्बोहाइड्रेट मिल रहा है हमें और एक चपाती में ऑलमोस्ट 15 से 20 ग्राम कार्बोहाइड्रेट होता है। मींस ग्लूकोस होता है। तो एक चपाती जब भी हम खाएंगे तो डेफिनेटली ग्लूकोस बढ़ेगा। ओके? अब ग्लूकोस बढ़ेगा तो उसको रेगुलेट करने
(09:08) के लिए हमारी बॉडी पनक्रियाज जो है हमारी बॉडी में वो इंसुलिन को सिक्रेट कर रही है। प्रोड्यूस कर रही है। ओके? तो इंसुलिन आएगा उस ब्लड शुगर को नॉर्मल करेगा। हम राइट? तो जो भी ब्लड शुगर स्पाइक होता है चपाती खाने से उसको आप अवॉयड नहीं कर सकते हो। वो होगा ही होगा क्योंकि आपने कार्ब्स खाया। इंसुलिन [नाक से की जाने वाली आवाज़] तो बाद में आता है। तो इसलिए आप ये नहीं एक्सपेक्ट कर सकते हो कि जब अगर आपकी बॉडी में इंसुलिन रेजिस्टेंस नहीं है तो आप कार्बोहाइड्रेट खाते हुए ब्लड शुगर स्पाइक को आप अवॉइड कर पाओगे। यह पॉसिबल नहीं है। वो स्पाइक होगा ही होगा और हो
(09:40) सकता है आधे घंटे के लिए रहे या एक घंटे पर आए वो स्पाइक लेकिन वो स्पाइक का इवेंट होना ही होना है और उसे हमें अवॉइड करना होता है। जब हम उसको अवॉइड करते हैं तो जितने भी जो ग्लूकोस की वजह से एक्स्ट्रा ग्लूकोस की वजह से जो डैमेज होता है सेलर लेवल पे वो डैमेज हमारा नहीं होता है वो अवॉइड करने से जिसको हम ग्लाइकेशन बोलते हैं। हम और वो ग्लाइकेटिव डैमेज जो है वो काफी ज्यादा डैमेज होता है और वो इररिवर्सिबल होता है काइंड ऑफ हम उसे आप रिवर्स नहीं कर सकते हो और ये ओवर द इयर्स आप करते आ रहे हो ना सालों साल करते आ रहे हो रेगुलर डाइट में हुआ है
(10:12) यस और इसलिए एजिंग और ये सारा कुछ जो है मसल लॉस ये सब देखा जाता है या विज़न जो है वो कंप्रोमाइज होता है बहुत सारी चीजें हैं मेमोरीज मेमोरीज का इशू होता है फिर प्रॉपर ओरिएंटेशन नहीं होता है टाइम प्लेस पर्सन के लिए हम है ना कहीं पे कहां बैठे हुए हैं क्या कौन सा दिन है बहुत लोग थोड़ा डिसओरिएंटेड रहते हैं आजकल है ना हां भूल जाते हुए फील करते हैं या सामान कहां पे रखा मैंने अभी याद नहीं आ रहा याद नहीं आ रहा थोड़ी देर पहले ही रखा था कहीं पे तो ये सारा इशू जो है ये चल रहा होता है सभी के हो सकता है उनको डायबिटीज ना हो सकता है हाइपरटेंशन ना हो
(10:42) बट ये प्रॉब्लम्स है उनके साथ ओके सो डायबिटीज का मेन रूट कॉज यही है बेसिकली जो हम कार्ब्स ले रहे हैं रेगुलरली या ट्रूली मैं तो इसी में बिलीव करता हूं इसको ही बिलीव करता हूं कि भाई डाइट का कार्ब्स आपका इतना ज्यादा है हम अगर आप इसको कम करते हो तो डेफिनेटली जब शुगर बढ़ेगा नहीं क्योंकि कार्ब्स खाते हो तभी शुगर बढ़ता हम तो जब आप नहीं खा रहे हो तो शुगर बढ़ेगा नहीं तो डायग्नोस कैसे करोगे आप डायबिटीज को पॉसिबल है डायबिटीज का डायग्नोसिस तो बढ़े हुए ब्लड शुगर को देख के ही आप करते हो हम और जब आप खाना ऐसा खा रहे हो कि ब्लड शुगर
(11:12) आपका नहीं बढ़ रहा है हम तो आप कैसे डायग्नोस करोगे तो स्पेशली टाइप टू डायबिटीज की जो डॉक्टर्स जो मेडिसिन देते हैं बोलते हैं कि ये खाओ डायबिटीज कंट्रोल होगा तो क्या उससे 100% क्योर होता है या फिर मैनेज होता है डायबिटीज वो मैनेज ही हो रहा है ना हां आई मीन मिसमनेजमेंट हो रहा है मिसमनेजमेंट मिसमनेजमेंट मैं बोलता हूं उसको। तो आपके डॉक्टर जो है मिस मैनेजमेंट गुरु हैं। अच्छा है ना? हां। तो एक्चुअली उसमें क्या हो रहा है कि आप जब जाते हो डॉक्टर के पास तो ये मान के चलते हो कि अब मेरी कंडीशन बेटर होगी। बेटर होगी। शायद डॉक्टर्स मुझे राइट एडवाइस देगा।
(11:44) हम डाइटरी एडवाइस सही देगा या फिर मुझे कोई ऐसी मेडिसिन देगा जिसकी वजह से मेरा ब्लड शुगर नॉर्मल हो जाएगा। कंट्रोल तो होगा लेकिन नॉर्मल नहीं हो पाएगा कभी। वो पॉसिबल नहीं है। तो जब तक नॉर्मल नहीं हो सकता आपका ब्लड शुगर तब तक आपको डायबिटीज के कॉम्प्लिकेशंस होने के चांसेस रहेंगे। वो होगा ही होगा। अब नॉर्मल करने का जो अप्रोच है वो आपके कन्वेंशनल मेडिकल डॉक्टर के पास नहीं है। वो उस तरह से सोच ही नहीं रहे हैं आपकी बीमारी को कि आपको नॉर्मल कर देंगे। आपका ब्लड शुगर को मैं नॉर्मल कर दूंगा। उनका मेन फोकस मेन गोल क्या होता है?
(12:17) मेन गोल ये होता है कि आपका ब्लड शुगर जो है पूरी तरह से नॉर्मल ना हो। आप मेंटेन करो उस बीमारी को। आप रेगुलर आते रहो हॉस्पिटल हां रेगुलर आते रहो क्योंकि कस्टमर हो ना आप डॉक्टर है वो डॉक्टर या को तो हम गॉड मानते हैं अपने देश में बोलते हैं कि ही इज अ गॉड हम जो लोगों का जान बचाता है बट अभी आपको लगता है कि ये टर्म चेंज करना चाहिए मुझे ऐसा लगता है कि गॉड आप मानते हो पहले तो गॉड क्या है मैं इसी में बिलीव नहीं करता हूं है ना आप एक फॉर्म को आप मानते हो कि भाई जो प्योर हो जिसका इंटेंट बहुत क्लियर हो साफ सुथरा हो उसको आप गॉड मानते
(12:52) हो या गडलीनेस उसमें आता है या फिर जो भी है तो मेरा ऐसा मानना है कि कोई भी इंसान कोई भी काम कर रहा है वो अपनी ऑनेस्टी के साथ काम कर रहा है तो आप उसे एक गॉड का दर्जा देते हो राइट उस वो एक आउट ऑफ रेस्पेक्ट आता है वो कि चलो ठीक है ये बंदा ईमानदारी से काम कर रहा है चीट नहीं करता है गलत एडवाइस नहीं दे रहा है मिसलीड नहीं कर रहा है लोगों को है ना उसके लिए आप कहते हो डॉक्टर को गॉड और ये मान लेते हो कि सारे डॉक्टर्स वैसे होंगे बट ऐसा होता नहीं है अब प्रॉब्लम क्या है कि डॉक्टर डॉक्टर्स जो है वो एंप्लॉयड है बेसिकली सिस्टम के
(13:24) द्वारा। वो सिस्टम के एम्प्लई है वो। हम अब डॉक्टर वही करेगा जो सिस्टम बोलेगा आपको करने को। वो मेरी तरह सेल्फ एंप्लॉयड नहीं है। ये फर्क है। तो मैं वो चाहता हूं जो मैं वही करता हूं जो मैं चाहता हूं। डॉक्टर के साथ ये चीज नहीं है। डॉक्टर जो है वो फंसे हुए हैं। उसमें गाइडलाइंस और प्रोटोकॉल को फॉलो करने में। आप आप इससे कैसे निकले? जैसे आप बोले कि आप फंसे हुए हो। आप इस सर्कल से निकले कैसे बाहर? वो तो मैं कैपेबल हूं इसलिए मैं निकल पाया ना। अच्छा वो तो क्रेडिबल हूं इस तरह से कि मैं जानता हूं कि मैं अपने आराम से अपने लिविंग को मैं सपोर्ट कर सकता हूं इस तरह
(13:58) काम करके। तो मुझे जरूरत नहीं है ना स्लेव बन के रहने की। मैं क्यों स्लेव बनके रहूंगा हेल्थ केयर इंडस्ट्री का सो कॉल्ड हेल्थ केयर इंडस्ट्री या फार्मा इंडस्ट्री। मुझे जरूरत ही नहीं है। किसी कोई एमआर मेरे पास आए ना आए मेरा कोई सर्किल हो ना हो मेरे पास काम है और वो काम मिलेगा मुझे। डेफिनेटली क्योंकि मेरे पास लोग आएंगे ही आएंगे क्योंकि हर को अपने हेल्थ को ठीक करना है ना। तो मेरे से आप मेरा सोशल सर्किल रहे ना रहे उससे क्या फर्क पड़ता है? एक बीमार इंसान अपने बीमारी का सशन ढूंढ रहा है। वो ये नहीं सोच रहा है कि भाई ये डॉक्टर
(14:31) का कोई सर्किल नहीं है। ये डॉक्टर अकेला रहता है। हम है ना? उसको इससे कोई लेना देना नहीं है। हम और मुझे भी बस इसी से लेना देना है कि आपकी बीमारी है तो मैं उसे ठीक करूंगा। हम ठीक है। अब मैं पर्सनल लाइफ में मैं क्या हूं? कितना एंटीसोशल हूं, अनसोशल हूं। इससे आपको क्या लेना देना है? हां मेरा सोलशन होना चाहिए। या पेशेंट को बस मतलब इससे है कि बीमारी जो है वह मेरी बेटर हो जाए। पूरी तरह से रिवर्स हो ना हो। एटलीस्ट मेरी कंडीशन इस बेस लाइन सिचुएशन से बेटर हो जाए [नाक से की जाने वाली आवाज़] और वो तभी बेटर होगी जब आपका डॉक्टर मेरी तरह
(14:59) सोचेगा। दैट्स इट। अदरवाइज तो कभी सोचते ही नहीं है। लाइक मैं अपना एग्जांपल देता हूं। मुझे एक छोटा सा गैस हो गया था। बेसिकली रात को 3:00 बजे पेट दुखने लगा। हम और मैं पास के हॉस्पिटल में चला गया। हॉस्पिटल का नाम नहीं लूंगा। ओके। सो वहां जाने के बाद उन लोगों ने मुझे पूरा मतलब शाम रात को गया था पूरे दिन रखा मुझे हम छोटे से गैस पर वो ठीक भी हो गया था मुझे लग रहा था आई एम फीलिंग बेटर आई हैव टू गो नाउ उन्होंने बोला नहीं आपको दो दिन और रुकना पड़ेगा और भी टेस्ट्स हैं ये वो दिस दैट दो तीन टेस्ट किए जिसमें वो पाइप को डाला मुंह में वो देखा कैमरे लगा के कि पेट में
(15:32) क्या एंडोस्कोपी एंडोस्कोपी आई डोंट नो दैट टर्म सो काफी सारे टेस्ट किए मेरा बिल लगभग 50 60000 का आ गया सिर्फ गैस प्रॉब्लम के लिए या घर पे आने के बाद आई फील चीटेड हम मतलब वहां पे तो लगा कि चलो ठीक है सही कर रहे हैं शायद हो सकता है हम बट घर पे आने के बाद आई फील चीटेड और ये बहुत सारे पेशेंट्स के साथ होता है यस यस एक्सक्ट्ली या तो जो आप बोल रहे हो ना कि ये एक पूरा का पूरा सर्कल है जिसमें वो फंस जा रहे हैं लोग इनोसेंट लोग या तो ये एक्चुअली में मैंने फील किया है पर्सनल लेवल के या तो सवाल यही है कि बाहर तो आप निकल गए उससे से बट स्टिल कुछ लोग आते होंगे कि
(16:14) कोई दवा लिख दो मुझे मेरे लिए कोई मेडिसिन बता दो जिससे कि मैं ठीक हो जाऊं। उनको आप क्या बोलते हो? मेरे पास कोई मेडिसिन को लेकर के आते नहीं है। इसलिए नहीं आते हैं क्योंकि वो मेडिसिन खाकर थक चुके हैं ऑलरेडी। ओके। हां। बट अगर वो उसके बाद मेरे पास आते हैं और उनको मेडिसिन की जरूरत पड़ती है तो मैं ऐसा नहीं है कि मैं कहता हूं कि नहीं मेडिसिन क्यों खाना है आपको? मैं कंप्लीटली एंटी नहीं हूं मेडिसिन के। मैं मेडिसिन का हेल्प लेता हूं हर एक पेशेंट के लिए। अगर किसी को वोमिटिंग हो जाती है या किसी को नज़िया जैसा फील हो रहा है तो डेफिनेटली मैं ड्रग दूंगा। लूज मोशन
(16:44) हो रहा है तो मैं बोलूंगा कि हां आप यह मेडिसिन ले लो, अभी ये मेडिसिन ले लो। तो मैं यूज़ करता हूं मेडिसिन। बहुत ही रैशन यूज़ करता हूं मेडिसिन का मैं। ऐसा नहीं है कि बस सिंपली पेशेंट आया और मैं मेडिसिन दे दूंगा। और स्पेशली ब्लड शुगर को जहां तक ब्लड शुगर की बात है। तो ब्लड शुगर अगर किसी पेशेंट का बढ़ा हुआ है। राइट? तो अगर [नाक से की जाने वाली आवाज़] वैसे पेशेंट मेरे पास आ रहे हैं तो मैं ये बोलूंगा कि भाई आप कार्बोहाइड्रेट अपना कम करो। हम क्योंकि कार्बोहाइड्रेट खाते हुए ही आपका ब्लड शुगर बढ़ता है। और फिर आप ड्रग लेते हो हम।
(17:13) तो आप सबसे पहले मेरे पास आओगे तो मैं बोलूंगा कार्बोहाइड्रेट कम करो। हम तो जब आप वो कम करते हो तो आपका एक दिन के अंदर ही ब्लड शुगर कम हो जाता है या नॉर्मल की तरफ भी आ जाता है कई बार। तो जब एक दिन के अंदर आपका वो हो ही जा रहा है तो मैं मेडिसिन क्यों दूंगा उसके लिए आपको? बेसिकली अब रूट कॉज बताते हैं और उसको बोलते हैं फिक्स करो। सिंपल सी बात है। रूट कॉज क्या है? आपका गलत खाना। गलत खाना। कार्बोहाइड्रेट का खाना ही रूट कॉज है। हम तो आप उसको खाना बंद कर दो। हम वो सही हो जाएगा आपका सब कुछ। बिल्कुल सही बात है। यस। ओके। सो जो जो आपने पढ़ा मेडिकल कॉलेजेस
(17:46) में जो चीजें आपने सीखी हम आप जब प्रैक्टिकल लाइफ में आए तो वो आज भी रेलेवेंट है या फिर आपने खुद से कुछ रिसर्च किया, कुछ समझा, अपने बॉडी पे एक्सपेरिमेंट किया। कैसे किया आपने? मेडिकल सिस्टम में जो भी हम पढ़ते हैं हम है ना एकेडमिक्स में जो भी हमें पढ़ाया जाता है वो एंटायरली गलत नहीं है। सही चीज पढ़ते हैं हम। बट प्रॉब्लम ये है क्योंकि डाइट जैसा कि मैंने बताया अपने हेल्थ का फाउंडेशन होता है। हम तो वो फाउंडेशन ही पूरा ना फ्रॉम द ग्राउंड अप पूरी तरह से गलत है। हम तो जब आप गलत बेसिक ही आपका पूरा हिला हुआ है कि भाई मुझे करना क्या है?
(18:23) फर्स्ट प्लेस पे खाने में मुझे क्या सबसे ज्यादा लेना है? यही आप बचपन से गलत पढ़ते आ रहे हो तो आप उसके बाद कितना भी हायर एजुकेशन ले लो वो चीजें ठीक नहीं हो सकती कभी हम तो जो भी ट्रीटमेंट प्रोटोकॉल है हम गाइडलाइंस है वो एक्यूट इमरजेंसी कंडीशन के लिए परफेक्ट है कोई प्रॉब्लम नहीं है हम उसको यूज़ किया जाना चाहिए और जब भी आप वैसे सिचुएशन में जाते हो डेफिनेटली इमरजेंसी है आईसीयू है हम वहां पे आपकी जान बचाई जाती है लेकिन प्रॉब्लम ये है कि क्रॉनिक डिजीज को लेकर जब आप इतना परेशान हो और उसका सशन बहुत सिंपल है। घर बैठे आप कर सकते हो
(18:58) जब मैं गाइड कर रहा हूं लोगों को। मैं भी घर बैठा रहता हूं। आप भी घर बैठे रहो। है ना? मैं भी बिलीव नहीं करता हूं कि आप जो लोग इस पॉडकास्ट को देख रहे हैं उनको तो फ्री में गाइड मिलने वाला है। वैसे तो आप लोग पेड करते होंगे। या स्पॉडकास्ट के थ्रू मतलब फ्री में गाइड मिलेगा। एक्सक्ट्ली इस पॉडकास्ट के थ्रू मिलेगा। फिर इस पॉडकास्ट को देखते हुए लोग मेरे चैनल पे आएंगे। डेफिनेटली उसके वीडियोस को देखेंगे। पर्सनल कंसलटेंट चाहिए तो देन दे कैन रीच यू। या बिल्कुल। ऑफ कोर्स तो वही मैं कह रहा था कि जो भी चीजें हमने पढ़ी वो सही है बट डाइट को लेकर के न्यूट्रिशन को लेके
(19:31) जहां तक बात आती है तो वो हम बचपन से ही पढ़ते आ रहे हैं गलत ऐसा नहीं है कि हमें मेडिकल सिस्टम ने गलत पढ़ाया वो हमारा प्राइमरी एजुकेशन से ही हम गलत पढ़ते आ रहे हैं। अच्छा क्लास 10थ आई मीन सिक्स सेवंथ से हम फूड पिरामिड पढ़ते हैं ना हम फूड पिरामिड में बेस में कार्बोहाइड्रेट होता है। प्रोटीन होता है। बैलेंस डाइट पढ़ते हैं हम लोग। तो वो तो बचपन से ही गलत पढ़ रहे हैं। तो फिर इसके लिए मेडिकल एजुकेशन को आप बहुत ज्यादा ब्लेम नहीं कर सकते हो क्योंकि वो फाउंडेशन ही हमारा पूरा गलत है। इवन मतलब मैंने एक वीडियो देखा वीडियो क्या रेगुलर लाइफ में हम देखते हैं
(20:04) हम आजकल के जो मदर्स है ना अपने बच्चे को मैगी दे रही है पैक करके लंच में। या वो कुछ वैसा दे रही है। चिप्स दे रही हैं। कुछ ऐसा डाइट दे रही है लंच में खाने के लिए। वो बिल्कुल मेहनत नहीं करना चाहती। पैकेज्ड फूड दे रही है। कितना खतरनाक हो सकता है एक बच्चे के लिए ये? बहुत ही ज्यादा खतरनाक है। जैसा कि मैंने बताया कि जो भी आप दे रहे हो वो क्या दे रहे हो? फिर से कार्बोहाइड्रेट ही दे रहे हो। तो कोई भी खाना जो आपके बच्चे को अच्छा लगता है जो आपको बहुत अच्छा लगता है वो कभी भी प्रोटीन और फैट नहीं होता। वो कार्बोहाइड्रेट ही होता है।
(20:36) हम कंफर्ट फूड है। है ना? कंफर्टेबल फील करते हो उसको खाते हुए। आराम से पैकेज में कहीं भी मिल जाता है वो। ईजीली एक्सेसिबल है। कहीं भी आप जाओ कभी भी भूख लगी हुई है। आपको पैकेट वाले जितने फूड हैं वो प्रोटीन एंड फैट रिच नहीं होते। वो कार्ब्स प्लस फैट रिच होते हैं। राइट? कुछ तो मैंने देखा है काफी सारे एड्स लोग चलाते हैं कि इसमें प्रोटीन है। प्रोटीन इसमें मिलेगा। चॉकलेट काफी सारे आ रहे हैं। प्रोटीन बेस्ड। या वो सही है या फिर ये सिर्फ एक ब्रांडिंग है। फेक ब्रांडिंग टाइप। ठीक है। मार्केटिंग गेमिक है वो एक तरह से क्योंकि प्रोटीन आपको ये भी बताया जा रहा है,
(21:11) अवेयर किया जा रहा है कि प्रोटीन डेफिशिएंट है हम एज एन कंट्री। हम प्रोटीन डेफिशिएंट है तो आपको प्रोटीन लेना चाहिए। अब प्रोटीन लेना चाहिए तो क्या बाहर प्रोटीन बाहर खाना चाहिए? नहीं है ना? आपको खाना खाना पड़ेगा। और खाने में आता है अंडा और मीट। तो मैं बोलता हूं कि प्रोटीन की कमी है तो प्रोटीन बाहर क्यों खा रहे हो? हम वो तो रिप्लेसमेंट हो सकता है ना। प्रोटीन का रिप्लेसमेंट हो सकता है। आप फूड को रिप्लेस नहीं कर सकते हो प्रोटीन बात से। तो जब भी आप मीट एग्स खाते हो तो सिर्फ प्रोटीन के लिए नहीं खाते हो। पूरे एंटायर न्यूट्रिशन के लिए आप खाते
(21:42) हो। उसमें माइक्रोोनट्रिएंट्स, सारे विटामिंस, मिनरल्स, फैट्स, हेल्दी फैट्स, प्रोटीन सब कुछ आ रहा है उसमें। तो आप जब भी फूड लेते हो अपना तो आप सब कुछ अपना नीड को आप पूरा कर रहे हो। लेकिन प्रोटीन बाहर से आप सिर्फ प्रोटीन को पूरा कर रहे हो। गॉट इट? तो वो पॉसिबल नहीं है। वो सब कोई बार-बार अंडा और मीट का बात कर रहे हो। ठीक है? हम इसके बिना क्या हम प्रोटीन इंटेक को पूरा नहीं कर सकते? प्रोटीन इंटेक को आप पूरा कर सकते हो। डेफिनेटली मैं कभी भी यह नहीं कहता हूं कि प्रोटीन इंटेक को पूरा करने के लिए आपको कार्निवो डाइट करने की जरूरत है
(22:14) या एनिमल बेस्ड फूड पे ही रहना है आपको। आप प्रोटीन इंटेक को पूरा कर सकते हो। मैं कह रहा हूं होलिस्टिकली होलिस्टिकली अपनी ह्यूमन बॉडी को जो न्यूट्रिशन चाहिए जिस तरह से हम वो कभी भी प्लांट बेस्ड फूड पे आप अवेल नहीं कर सकते हो। ऑप्टिमली पॉसिबल ही नहीं है वो क्योंकि डिजाइन नहीं है ना हमारा वैसा प्लांट्स को खाकर हम न्यूट्रिशन गेन नहीं कर सकते हैं। यही मेरा पॉइंट है। तो प्रोटीन आप पूरा कर सकते हो लेकिन उस प्रोटीन को पूरा करने में बहुत सारी अननेसेसरी चीजें भी आप खाते हो जिसकी वजह से आपको बहुत सारी प्रॉब्लम होती है। जैसे ब्लोटिंग, गैस,
(22:49) कॉन्स्टिपेशन। क्यों? क्योंकि आपने राजमा बढ़ा लिया, छोले बढ़ा लिए, चिक पीस और भी बहुत सारे ऐसे प्लांट बेस्ड फूड आइटम बढ़ा लिया कि प्रोटीन तो बढ़ा आपका। उसके साथ-साथ फाइबर बढ़ा। बहुत सारे ऐसे एंटी न्यूट्रिएंट्स भी बढ़े आपके डाइट में जो आपके ग को डैमेज करता है। बट फाइबर जरूरी नहीं है क्या बॉडी के लिए? नहीं [नाक से की जाने वाली आवाज़] नहीं है जरूरी। पर लोग तो काफी बोलते हैं कि फाइबर लेना चाहिए डाइट में। सैलेड खाओ, ये खाओ, वो खाओ। तो इसलिए बोलते हैं क्योंकि अब कुछ लोग अगर रिफाइंड फूड पे होंगे हम तो उससे बेटर सिचुएशन होता है कि अगर आप
(23:20) थोड़ा सा फाइब्रस फूड खा रहे हो। तो फाइब्रस फूड खाने से क्या होगा? आपका जो रिफाइंड जो जंक फूड है वो थोड़ा कम हो जाएगा। टू सम एक्सटेंट थोड़ी साइटटी आ जाती है या फिर रिफाइंड फूड की वजह से जो आपका ब्लड शुगर स्पाइक होता है उसको आप कहीं ना कहीं थोड़ा कम कर पाते हो फाइबर लेकर तो उस पॉइंट ऑफ व्यू से फाइबर थोड़ा बेटर है लेकिन आपकी डाइट में अगर एनिमल फूड होगा प्रीडमिनेंटली तो फाइबर की कोई जरूरत नहीं है तो चिकन में फाइबर नहीं होता मसल फाइबर होता है प्लांट फाइबर नहीं होता है जिस फाइबर की हम बात करते हैं कि 20 से 40 ग्राम आपका डाइटरी फाइबर होना
(23:54) चाहिए टोटल हम मतलब डेली बेसिस जिसप आपको 20 टू 40 ग्राम्स लेने हैं। हम वो मसल मीट में तो नहीं है ना। हम मीट फाइबर की बात ही नहीं कर रहे हैं। मसल फाइबर की। हम बात कर रहे हैं प्लांट फाइबर की। दोनों का फीचर तो सेम ही होगा ना। लाइक बॉडी में जाने के बाद तो काम तो सेम ही करेगा ना। नहीं नहीं करेगा ना। मसल फाइबर है वो प्रोटीन इन नेचर है। ओके? और ये जो प्लांट है प्लांट का फाइबर है। ये सेलुलोज़ है। हम हम बेसिकली ये सेलुलोज़ है जो इनडाइजेस्टेबल है। हम हम और ये जो इनडाइजेस्टेबल कार्व होता है इसे हम फाइबर बोलते हैं। ओके। ओके वो जो फाइबर है वो मसल फाइबर है
(24:27) वो तो डाइजेस्टेबल है हम वो अमाइनो एसिड में कन्वर्ट हो जाएगा डाइजेस्ट होकर काफी सारे सेलेब्स हैं जो विगन डाइट फॉलो कर रहे हैं हम और उनकी बॉडी काफी फिट भी है हम काफी स्पोर्ट्स पर्सन भी है लाइक विराट कोहली हम हम और आप बोल रहे हो कि मतलब पॉसिबल नहीं है मतलब बहुत मुश्किल होगा हम हम तो वो तो कर रहे हैं। देखिए मेरा हमेशा यही कहना होता है कि कोई भी सेलिब्रिटी है हम वो कैमरा पे जो है वो रियल लाइफ में वो नहीं होता। ये पॉसिबल नहीं है। ठीक है? तो आप सेलिब्रिटी को अगर आप पूजते हो तो वो जिस काम को कर रहा है जिस प्रोफेशन में आप उसके लिए पूजते हो ना।
(25:03) हम लेकिन एक्चुअल में उसका कैरेक्टर आइडेंटिटी क्या है? वो आप उसके जॉब प्रोफाइल से डिसाइड नहीं कर सकते हो। वो बढ़िया क्रिकेट खेल रहा है। अच्छा क्रिकेटर है। कोई डाउट नहीं है। उस पॉइंट ऑफ व्यू से मुझे भी अच्छा लगता है। लेकिन इसका यह मतलब नहीं है कि उसकी सारी चीजें मुझे अच्छी लगने लगे। मैं अंधभक्त नहीं हो सकता हूं किसी का। अगर पहली बात तो वो वीगन नहीं है। विराट कोहली मैं बता दूं एग्स खाता है वो बंदा। अच्छा। है ना? तो जब कोई एग्स खाता है तो एग्स खाते हुए कोई वीगन नहीं कह सकता खुद को। आप वेजिटेरियन कह सकते हो। ओके। बेसिकली जो
(25:34) और मैं मान भी लेता हूं। अगर मैं मान लेता हूं कि वो वीगन है भी। हम तो आप वीगन हो तो ठीक है आप विगन रहो लेकिन मुझे नहीं लगता वीगन रहते हुए कोई बहुत हेल्दी रहता है पॉसिबल ही नहीं है वह आप बहुत से बहुत क्या कर सकते हो आप मेरी ऐड्स ऑफ सप्लीमेंट्स ले सकते हो बहुत सारे सप्लीमेंट्स आप ले सकते हो 10 एंड टर्न्स ऑफ़ सप्लीमेंट्स और वो भी वही लोग कर सकते हैं जो उस लेवल पे ऑलरेडी हैं जहां पे वो उतना अेल कर सकते हैं उतना अफोर्ड कर सकते हैं क्योंकि वीगन डाइट पे जिस लेवल का सप्लीमेंटेशन चाहिए वो एक एवरेज इंडिविजुअल की बस की बात नहीं
(26:06) है काफी कॉस्टली ली होगी। बहुत कॉस्टली होता है और वो बजट फ्रेंडली नहीं है। तो मिडिल क्लास के लिए कार्नवो डाइट करना ज्यादा आसान है एज कंपेयर टू डूइंग वेजिटेरियन डाइट। आई मीन वीगन डाइट। हम इवन वेजिटेरियन डाइट भी वेजिटेरियन वेजिटेरियन डाइट भी मुझे ऐसा लगता है कि वो कॉस्टली पड़ता है। कॉस्टली है। लॉन्ग रेंज में कॉस्टली पड़ता है। एक्सैक्ट्ली क्योंकि आप बीमार होते हो। उसके बाद जो आपका फाइनेंसियल बर्डन आता है आप पे उस बीमारी का वो कैसे सॉल्व होता है? हम फिर वैसे ही लोग आते हैं लगाते हैं। काफी ज्यादा खर्च होते हैं। वैसे ही लोग मेरे पास आते हैं और फिर
(26:36) बोलते हैं कि नहीं उसके बाद जब मेरे पास आते हैं कहते हैं अरे सर बहुत ज्यादा फीस ले रहे हो आप। है ना? तो वो भी एक प्रॉब्लम है। तो मेरा ऐसा कहना है कि भाई आप मुझे जब दोगे ना तो बस एक ही बार दोगे। उसके बाद तो आप दोगे नहीं मुझे कभी। क्योंकि मैं एक एप्रोच बता रहा हूं और उस एप्रोच के लिए मैं आपको चार्ज कर रहा हूं। अगर आप ये एप्रोच सीख लेते हो तो आप बार-बार थोड़ी ना मुझे हजारोंज़ देते रहोगे। हम वो तो आप आपने सीख लिया ना कि आपको कैसे डाइट करनी है। अब उसके बाद आप नहीं कर पा रहे हो हम तो उसमें मेरी प्रॉब्लम वो है नहीं और ना
(27:05) ही करने के लिए आप फिर दोबारा आओगे मेरे पास क्योंकि पता है कि यह डॉक्टर के पास जाऊंगा फिर वो मीट अंडे खाने को बोलेगा हम तो दोबारा कोई मुझे क्यों पे करेगा उस चीज के लिए तो अगर आपका अपना ही मोटिवेशन नहीं है उस लेवल पे आप नहीं चल पा रहे हो तो फिर वो आप उसके लिए जिम्मेवार हो टोटली मैं क्या कर सकता हूं उसमें फिर हम आप क्या खाते हो डेली मैं तो डेली अंडे खाता हूं मीट खाता हूं बस और खाता हूं और कुछ नहीं खाता हूं मैं थोड़ा बहुत कर्ड खा लेता हूं। हां, स्माल अमाउंट में वेजिटेबल्स मेरा इंटेक है। जब मैं एग्स का खाता हूं, ऑमलेट लेता हूं,
(27:36) तो स्माल अमाउंट में मेरा वेजिटेबल्स होता है। कोई भी सब्जी बनी होती है वो खा लेता हूं स्माल अमाउंट में। ओके। अ अगर कोई मीट खाए रेगुलर वेस्टेज पे तो उसको कोई दिक्कत नहीं हुई डाइजेशन की। क्यों होगी? दिक्कत डाइजेशन की दिक्कत ठीक हो रही है। गठ का प्रॉब्लम जो है ठीक होता है मीट खाने से। हम बट उसमें भी एक कंडीशन है कि आप जब मीट खा रहे हो तो बस मीट ही आपको खाना है। फिर रोटी, चावल और यह सब नहीं खाना है। उसके साथ उसके साथ में कुछ नहीं लेना। हां मिक्स नहीं करना है आपको। ओके। मिक्स करने से भी प्रॉब्लम होती है। अच्छा गॉट इट। सो जो लोग चिकन खा रहे हैं रेगुलर
(28:10) बेसिस पे हम है ना? तो उनके अंदर इंप्रूवमेंट क्या-क्या होती है? एकदम से सपोज दैट मैं बहुत फैटी हूं। है ना? चेस्ट फैट है, बेली फैट है। तो क्या वो डाउन होना शुरू हो जाएंगे? कम होना शुरू हो जाएंगे? हां वो तो खैर दिखेगा ही कुछ दिनों में तीन चार दिनों में, पांच दिनों में, एक हफ्ते में वो जब भी दिखे मैं बॉडी वेट के लिए बहुत ज्यादा मैं बोलता नहीं हूं कि आप बहुत ज्यादा आप उसको कंसर्न मत रहो आप बॉडी वेट को लेकर। वो अपने आप कम हो जाएगा। मैं ये कहता हूं कि जब भी आप इस डाइट को करते हो तो इमीडिएट जो इफेक्ट मिलता है आपको वो किस वे में आपको मिलता है मैं बता
(28:42) रहा हूं। [नाक से की जाने वाली आवाज़] जैसे ही आप डाइट में प्लांट्स का लोड कम करोगे मतलब सीरियल्स, ग्रेंस प्लस वेजिटेबल्स इवन फ्रूट्स तो आपकी जो ब्लोटिंग है वो ड्रास्टिकली इंप्रूव करती है। मतलब आपकी ब्लोटिंग ठीक हो जाती है। गैस बनना बंद हो जाता है कंप्लीटली क्योंकि मोस्ट ऑफ़ द लोगों को ये प्रॉब्लम है आज की डेट में। गैस ब्लोटिंग बहुत ज्यादा है, कॉन्स्टिपेशन है। तो अगर एक्चुअली आपको इन चीजों में तुरंत इमीडिएट इफेक्ट पाना है किसी भी डाइटरी चेंज पे तो वो इसी कार्नवो डाइट पे देखने को मिलता है। बेसिकली कार्नवर्स डाइट में शिफ्ट हो जाओ
(29:12) एंड यू विल सी द चेंजेस इन योर बॉडी। एक दो दिनों में पता लग जाएगा आपको। हाई एनर्जी फील होगी। एनर्जी का वो तो थोड़ा सा वेरिएबल होता है रिस्पांस। कुछ लोगों में एनर्जी अच्छा फील होता है। कुछ लोगों को थोड़ा लो फील होता है इनिशियली। क्योंकि जब आप ट्रांजिशन कर रहे हो तो थोड़ा सा आप लो करोगे फील इनिशियली। बट वो फिर आपको टाइम देना होता है दो से तीन महीनों का टाइम देना होता है और बॉडी फिर इवेंचुअली अप्ट कर जाती है उस डाइट पे हम देन यू स्टार्ट फीलिंग बेटर गॉट इट एनर्जी वाइज काफी इंडियंस का मानना है कि दाल में काफी प्रोटीन होता है उसको लेना चाहिए
(29:44) हम आपका क्या कहना है इसमें दाल में प्रोटीन तो होता है बट इतना नहीं होता कि आपकी बॉडी को वो लॉन्ग टर्म हेल्थ या फिर मसल्स इन चीजों को सपोर्ट कर सके राइट क्योंकि जब आप दाल लेते हो तो सिर्फ दाल ले रहे हो नहीं आप चावल भी खाते हो। तो आप एक कुछ अमाइनो एसिड्स होते हैं जो दाल में मिसिंग हैं। कुछ अमाइनो एसिड जो राइस में मिसिंग है। तो जब भी आप दोनों को मिक्स करते हो तो एक अमाइनो एसिड की प्रोफाइलिंग थोड़ी बेटर हो जाती है। हम क्योंकि एक अमाइनो एसिड जो राइस में मिसिंग है वो दाल में मिल जाएगा और जो दाल में मिसिंग है वो राइस में मिल जाएगा।
(30:17) तो इसलिए आप दाल चावल खाते हो। हम हम तो दाल चावल खा करके आप कंप्लीट करने की कोशिश करते हो। हालांकि उस तरह से कभी भी कंप्लीट हो नहीं पाता वो। हम क्योंकि बायोलॉजिकल जो नीड है वो कभी भी इस तरह से मिक्स करने से पूरा नहीं होता। वो एक पर्टिकुलर फूड के थ्रू ही आपको पाना है और वो मीट में अवेलेबल है। तो जब भी आप मीट खाते हो तो सिर्फ प्रोटीन के लिए नहीं खा रहे हो। लेकिन जब आप दाल खाते हो सिर्फ प्रोटीन के लिए खाते हो। राइट? तो मीट से आपको सारे न्यूट्रिएंट्स मिलते हैं। लेकिन दाल आप जब भी प्रायोरिटाइज करते हो तो सिर्फ प्रोटीन के
(30:46) लिए प्रायोरिटाइज करते हो। तो आपको सिंपली बैठ के मीट खा लेना है। तो जैसे ही आप मीट खा लोगे सारे न्यूट्रिएंट्स जो रिक्वायर्ड है वो पूरे हो जाएंगे। वो पूरे हो जाएंगे तो आपका हंगर जो है वो कंट्रोल हो जाएगा। आपको बार-बार भूख नहीं लगेगी। क्योंकि आप मीट खा रहे हो तो मीट सिर्फ मीट नहीं खाना है। लीन मीट नहीं होना चाहिए। फैट भी इनफ होना चाहिए उसके साथ। अगर हम मीट खाना शुरू करें शुगर क्रेविंग कम नहीं होगी। बहुत कम हो जाती है। शुगर क्रेविंग बहुत ज्यादा कम हो जाती है। हम तो कार्ब एडिक्शन का ट्रीटमेंट होता है कार्निवोडाइट। अगर आप कार्बोहाइड्रेट के
(31:14) लिए एडिक्टेड हो तो वो कम हो जाएगी काफी ज्यादा। गॉट इट। काफी लोग मॉर्निंग में ना उठते ही वो जूस लेते हैं किसी फ्रूट का तो वो फायदेमंद है या नुकसानदायक है? वो एक्चुअली नुकसानदायक है। फायदेमंद तो नहीं है क्योंकि फ्रूट्स इन जनरल हेल्दी नहीं होता कभी भी। अच्छा हां फ्रूट्स हेल्दी होता ही है। मोस्टली डॉक्टर्स तो यही बोलते हैं कि फ्रूट्स कहां बहुत हेल्दी है। डॉक्टर्स का तो डॉक्टर्स की बातों को कभी सीरियसली नहीं लेना होता है। जब भी न्यूट्रिशन की बात आती है ना तो डॉक्टर्स की बातों को सीरियसली नहीं लेना है। ओके? क्योंकि जो भी डॉक्टर आपको
(31:46) न्यूट्रिशन की एडवाइस दे रहा है, सबसे पहले उस डॉक्टर को देखना है कि वो कैसा दिखता है। ओके? उसके बाद आंसर मिल जाएगा कि इस डॉक्टर को सुनना है या नहीं सुनना है। तो फ्रूट की जहां तक बात है तो फ्रूट में फ्रुक्टोज़ होता है जो जिसे हम फ्रूट शुगर भी बोलते हैं। अब ये जो फ्रुक्टोज़ है बेसिकली ये डायरेक्टली फैट में कन्वर्ट होता है। ट्राईग्लिसराइड में कन्वर्ट होता है। और ये फ्रुक्टोज़ हमें डायरेक्टली एनर्जी देता भी नहीं है। ये एक्चुअली सेल्यूलर लेवल पे ये एटीपी के लेवल को ड्रॉप कराता है। ओके? जब भी हम फ्रुक्टोज़ लेंगे तो सेलर लेवल पे एटीपी का रिडक्शन होगा
(32:23) हम और एटीपी जब भी कम होगा और तो आप अच्छा फील नहीं करोगे इसलिए हंगर प्रमोट होता है जब भी आप फ्रुक्टोज़ कंटेनिंग डाइट लेते हो कभी भी आप फ्रूट्स खाओ सिर्फ फ्रूट सैलेड खाओ आप हम बहुत जबरदस्त भूख लगती है उसे खाकर वो [नाक से की जाने वाली आवाज़] तो है है ना एक से दो घंटे बाद बहुत भूख लगती है तेज फल खाने के बाद हम तो ये अच्छी चीज नहीं है। एटीपी का लेवल ड्रॉप कर रहा है। ये बायोकेमिस्ट्री की बात है। अब कोई भी आ जाएंगे हम जिनको कोई न्यूट्रिशन का नॉलेज नहीं है आके मुझे ट्रोल करेंगे इस चीज के लिए लेकिन बैकग्राउंड जिनके पास नहीं है उनको
(32:52) कमेंट नहीं करना चाहिए क्योंकि एटीपी का लेवल जब भी ड्रॉप होगा आप हंग्री फील करोगे और डिनोवो लाइपोजेनेसिस का जो पाथवे है जिसको हम कहते हैं कि आप खा रहे हो शुगर लेकिन वो शुगर कन्वर्ट हो रहा है फैट में ओके तो वो पाथवे भी एक्टिवेट होता है फ्रुक्टोज़ ज्यादा लेने पे तो इसलिए फ्रुक्टोज़ डायरेक्टली हमें एनर्जी दे नहीं रहा है ये ड्रेन कर रहा है हमें हम हम एक्चुअली एनर्जी दे रहा है कौन? ग्लूकोज़। अब फ्रूट जब हम खाते हैं तो उसमें ग्लूकोज़ ही नहीं है। फ्रुक्टोज़ भी है। तो फ्रुक्टोज़ कंपोनेंट है वह हमारी एनर्जी को ड्रेन कर रहा है।
(33:24) और डायरेक्टली फ्रुक्टोज़ से यूरिक एसिड का भी प्रोडक्शन बढ़ता है। तो जब भी गाउट का कोई पेशेंट होता है तो सबसे पहला जो एडवाइस होना चाहिए उस पेशेंट के लिए वो ये होना चाहिए कि फल खाना बंद करो। ओके? मीट नहीं हम अंडा नहीं फल सबसे पहले। तो जब भी आप फ्रूट खाना बंद करोगे आपका यूरिक एसिड का लेवल ड्रॉप करेगा। हमने देखा हुआ है कि जब भी कोई हॉस्पिटल में होता है ना तो हम फ्रूट्स लेके ही जाते हैं एज अ गिफ्ट वो एक कल्चर बना हुआ है। सबको लगता है बहुत हेल्दी है। फ्रूट देना चाहिए पेशेंट्स को। या और आपके हिसाब से सबसे ज्यादा अनहेल्दी।
(33:58) यस। वो तो हम उसके इमोशन को ध्यान में रखते हुए हम उसे देते हैं कि अच्छा फील करेगा। हालांकि हम ये भी इस पर्सेक्टिव से देते हैं कि कहीं उसकी हेल्थ अच्छी हो जाए क्योंकि फ्रूट्स बहुत हेल्दी होता है। तो वो भी एक दिमाग में एक है आईडिया हमें कि भाई फल देंगे तो बहुत एनर्जीाइज हो जाएगा हमारा पेशेंट हमारा रिलेटिव। बट [नाक से की जाने वाली आवाज़] ऐसा कुछ होता नहीं है। हां साइकोलॉजिकली आप अच्छा फील करते हो क्योंकि मीठा चीज है और जब भी आप मीठा चीज लोगे तो आपका ब्रेन जो है वो एक्टिवेट होता है। मतलब उसे हम कहते हैं ना कि यूफोरिया
(34:27) काइंड ऑफ ओके वाली फीलिंग आती है। फील गुड वाली फील गुड वाली सिचुएशन हां वो आप फील करते हो वो मोमेंट होता है आपके लिए। तो आप साइकोलॉजिकली बस अच्छा फील कर रहे हो। फिजियोलॉजिकली वो अच्छी चीज है नहीं। पल खाना बिल्कुल नहीं है। ओके गॉट इट। आप ट्रोलिंग का बात कर रहे थे। जब आप स्टार्टिंग में ये सारी चीजें जब बोलना स्टार्ट किए सोशल मीडिया पे काफी लोग बैड कमेंट्स भी करते होंगे। हम हम बिल्कुल। आप कैसे हैंडल किए वो स्टार्टिंग में? हैंडल? मतलब मैं बहुत ज्यादा सीरियसली नहीं लेता हूं इन कमेंट्स को और कभी भी दिल से नहीं दिल पे नहीं लेके बैठता हूं
(34:58) कि अरे यार इतनी मुझे गालियां पड़ रही है ये पड़ रहा है। मुझे ऐसा लगता है आप जब काम अपना कर रहे हो आपके अपने काम आपको अपने काम पे कॉन्फिडेंस है तो मुझे ऐसा लगता है कि जो भीड़ होती है ना हम उनके पास आवाज होगी हम है ना और उनको कोई पहचानता नहीं है हम है ना भीड़ के पास आवाज होती है पहचान नहीं होती उनकी कुछ और मेरी पहचान है तो मुझे उन आवाज के लिए मैं फिक्र नहीं करता हूं कि क्या लोग मेरे बारे में बोल रहे हैं क्या लिख रहे हैं बस मैं रिप्लाई जरूर कर देता हूं कि भाई मेरे YouTube चैनल को सब्सक्राइब करो हम थोड़ा सा ज्ञानी बनोगे
(35:27) आईक्यू लेवल बढ़ेगा और फिर चीजों को जब समझो समझोगे तो आज ना कल मेरी बातों को तुम्हें एक्सेप्ट करोगे ही वो करना ही पड़ेगा। कोई ऑप्शन नहीं है आपके पास। वो भले ही कल्चर के अगेंस्ट हो, ट्रेडिशन के अगेंस्ट हो लेकिन मेरी बातें ही सही है। मानना पड़ेगा आपको। बीमारी वरना आपके पास है। मैं तो नहीं हूं ना बीमार। हम तो जो बीमार है वह सोच ले कि उसे कल्चर फॉलो करना है या डॉक्टर के को फॉलो करना है। हम कोई ऐसा पेशेंट आया जिसका ट्रांसफॉर्मेशन देखकर आप भी शॉक्ड हो गए कि भाई मेरे बात को फॉलो करके इसने काफी अच्छा ट्रांसफॉर्मेशन किया।
(36:00) हम हां बहुत सारे हैं ऐसे अब तो केसेस बट मैं बहुत ज्यादा ऐसे ना पब्लिसाइज नहीं करता हूं। ओके है ना उसको जाके एडवर्टाइज जरूरी है ना टेस्टिमोनियल्स वगैरह टेस्टिमोनियल हां मतलब मैं ना बहुत फ्री रहना चाहता हूं और सामने वाला भी अगर फ्रीली अगर मेरे साथ वो करना चाहेगा सेशन तो वो करते हैं जो लाइव सेशन अदरवाइज मैं उसको बहुत ज्यादा वो एक मार्केटिंग का जो एक होता है ना एक टूल नहीं बनाता हूं। मुझे ऐसा लगता है जो आपका काम है वो आज ना कल सभी लोग जानेंगे। वर्ड ऑफ़ माउथ से ही ना आपके काम को पहचाना जाएगा अल्टीमेटली। कोई पेशेंट ठीक होता है तो डेफिनेटली
(36:30) [नाक से की जाने वाली आवाज़] वो भी चाहेगा कि मैं भी बताऊं किसी को कि भाई मैं अगर ठीक हो सकती हूं या हो सकता हूं तो सामने वाले को वो बताएगा जो उसके नियर डियर वंस होंगे तो वो अपने आप पता लग जाता है ये सब चीज छिप नहीं सकता मैं हाईलाइट नहीं करता हूं इन चीजों को बहुत ज्यादा हम मेरा ध्यान ही नहीं रहता ना इन चीजों पे मेरा बस ध्यान रहता है अपने काम को करने में क्या पढ़ना है क्या मुझे लाइव सेशन में अपने चैनल पे एजुकेट करना है लोगों को मैं उसी में खुश रहता हूं बस और उसके बाद वो सारा कुछ जो मेरे पास आता है वो बाय प्रोडक्ट है। ओके।
(36:57) मैं कभी भी इसको बिजनेस मॉडल की तरह मैं इसको कभी भी मैंने बनाया ही नहीं है इस तरह अपने काम को। हम वो बिनेस आ जाएगा मेरे पास। वो मुझे पता है। हम लेकिन कभी भी उस मॉडल को मैंने क्रिएट नहीं किया जो एज अ होता है ना कि आप लेकर आते हो मार्केट में एक मॉडल बनाकर। हां। राइट? मेरा वो मॉडल है ही नहीं कभी। बड़ा सिंपल है। आप मुझे डायरेक्टली कनेक्ट करते हो WhatsApp पे। मैं सिंपली आपसे बात करता हूं। आप फिर प्लान के लिए मेरे से आप एनरोल करते हो प्लान में। देन मैं आपको गाइडेंस देता हूं। हम है ना? डे टू डे बेसिस पे मैं तो मेरे को तो हंसी आता है। काफी लोग
(37:29) होते हैं। काफी लोगों को मैंने देखा हुआ है सोशल मीडिया पे पोस्ट करते हुए मोमोज खा के अपना फैट लॉस कर लो। ये खा के वो खा के या उसको कैसे देखते हो आप? इस मेरा ऐसा मानना है कि आप वजन तो कुछ भी खाते हुए लूज़ कर सकते हो। हां। है ना? अब कोई इंसान मोमोज खा रहा है हम तो वो क्या सिर्फ मोमोज खा रहा है? नहीं बाकी चीजें भी खा रहा है जो हो सकता है कुछ अच्छी चीजें भी कर रहा हो साथ-साथ मोमोज़ के साथ-साथ वो कुछ अच्छी चीजें भी कर रहा है जो उसके वेट लॉस जर्नी में उसे सपोर्ट कर रहा है। सपोर्ट कर रहा है। राइट पॉजिटिवली हम तो अगर आप बाकी चीजें बहुत अच्छा कर रहे
(38:03) हो और एक कुछ मोमोज़ खा ले रहे हो कभी-कभी हम कहीं ना कहीं इससे आप ये मैसेज दे रहे हो कि वेट लॉस इज़ ऑल अबाउट कैलोरी डेफिसिट। ओके। यह आप मैसेज देना चाहते हो यह कहकर कि आपको किसी भी चीज को ना आपको खुद को डिप्राइव करने की जरूरत नहीं है। आप हर कुछ खा सकते हो लेकिन वजन घटता है अगर आप कम खाओगे। हम राइट? मेरा ये कहना है कि आपको कम नहीं खाना चाहिए। हम आप कम खा के वजन मत घटाओ। आप उतना ही खाओ जितनी बॉडी आपको डिमांड करती है। बट कुछ लोग तो फास्टिंग रखते हैं। इंटरमीडिएट फास्टिंग तरह-तरह के तरीके से वो सुबह का खाना स्किप करते हैं नाश्ता। हम
(38:39) कितना ये मतलब शरीर के लिए हानिकारक है या फिर प्रॉफिटेबल है? हानिकारक तो मैं नहीं बोल सकता हूं लेकिन ये लॉन्ग टर्म में सस्टेनेबल नहीं होता कभी भी। अगर आप इस पैटर्न पे चल रहे हो कि मुझे मॉर्निंग का ब्रेकफास्ट तो खाना ही नहीं है। हम तो मुझे ऐसा लगता है कि ये कितने दिनों तक कर पाओगे आप? आपको अपनी बॉडी को कुछ इस तरह प्रिपेयर करना है, तैयार करना है कि आपका मील जो है पर्पसफुली आपको करना ना पड़े कि मुझे ये स्किप करना है। वो बस हो जाए। ओके। क्योंकि मुझे भूख नहीं लग रही है। लेकिन आज की डेट में जितने लोग इंटरमिटेंट फास्टिंग कर रहे हैं वो पर्पसफुली कर रहे
(39:14) हैं कि भाई मुझे 16 घंटे नहीं खाने हैं और 8 घंटे में ही खाना है। या 20 घंटे नहीं खाने चार घंटे विंडो में ही खाना है। हम तो ये जो पर्पसफुली आप कर रहे हो हम हम ये पर्पसफुली आप बहुत दिनों तक कर नहीं पाओगे। ये मेरा कहना होता है। क्योंकि डाइट का जो स्ट्रक्चर है उसमें आप बहुत ज्यादा आपने काम किया नहीं है उस पे। आपका फाउंडेशन स्टिल कार्ब्स है। हम है ना? हैवी कार्ब्स है आपकी डाइट में। तो इस वजह से आपको इंटरमिटेंट फास्टिंग लॉन्ग रन में वर्क नहीं करेगा। आप छोड़ दोगे इंटरमिटेंट फास्टिंग करना। हम तो आपकी फास्टिंग जो है वो एक्चुअली कितने
(39:47) अच्छे से आप कर पाओगे लंबे समय तक हम वो सब डिपेंड करता है कि आपकी डाइट का स्ट्रक्चर क्या है। अगर डाइट के स्ट्रक्चर में प्रोटीन और फैट नहीं है हम प्रीडमिनेंटली तब तक इंटरमिटेंट फास्टिंग कभी भी आपका लाइफस्टाइल नहीं बन सकता है। एक फैट बन सकता है। कुछ महीनों के लिए आप कर सकते हो। हम तो इसलिए मोमोज खाना, मैगी खाना कुछ भी खाओ वजन घट जाएगा तुम्हारा। लेकिन वो एक कोई मुझे ऐसा लगता है कि वो कोई सशन तो नहीं है ना ऑप्टिमाइज करने का, हेल्थ को ऑप्टिमाइज करने का कोई एक तरीका नहीं है वो। तरीका नहीं है वो। वो तो सही तरीका नहीं है ना? आप वजन तो
(40:17) घटा ही सकते हो। क्या वजन घटाने से आप हेल्दी होगे? नहीं होगे। आप हेल्थ को गेन करते हुए आप वेट लूज़ करते हो। वजन घटा करके कोई हेल्दी नहीं हो सकता। राइट? जब आप हेल्दी होने के रास्ते पे चलोगे तो उसी रास्ते पे आपको फैट लॉस का एक बाय प्रोडक्ट एज अ बाय प्रोडक्ट वो मिलेगा। तो फैट लॉस और वेट लूस करना वो दोनों अलग-अलग टर्म है। हां टर्म अलग है और मीनिंग भी डिफरेंट है। हम वेट लॉस में तो कुछ भी लॉस हो सकता है। हम है ना? बोन लॉस हो सकता है। मसल लॉस हो सकता है। हम वाटर लॉस हो सकता है। हम वो सारे लॉस होंगे तो वेट लॉस हो जाएगा। इवन फैट लॉस भी होगा तो भी वेट लॉस होगा।
(40:54) लेकिन जब भी हम फैट लॉस की बात करते हैं तो हम यह कह रहे होते हैं कि भाई बाकी चीजें हम रिटेन करेंगे लेकिन हम जो एक्स्ट्रा फैट मास है उसे हम कम करेंगे। गॉट इट। तो वो जो स्ट्रेटजी आपका वेट लॉस के अराउंड होना चाहिए। कभी भी फैट स्ट्रेटजी आपका फैट लॉस के अराउंड होना चाहिए। कभी भी वेट लॉस के अराउंड नहीं होना चाहिए। हम वेट लॉस बहुत तरीके से किया जाता है। ओके। सो काफी लोग बोलते हैं कि पानी पियो ज्यादा से ज्यादा। 4 लीटर, 5 लीटर दिन का। हम आपका इस पे क्या अटैक है? ज्यादा पियो, कम पियो, यह तो बड़ा मतलब सब्जेक्टिव चीज है ना। अब ज्यादा चाहिए,
(41:28) किसी को नहीं चाहिए यह आप कैसे डिसाइड करोगे? अगर किसी को प्यास ज्यादा लगेगी तो वो खुद ही पी लेगा। है ना? अब ये तो वही बात हो गई कि आप बाथरूम ज्यादा जाया करो। अरे भाई किसी को ज्यादा लगेगा तो वो अपने आप जाएगा। तो उसी तरह से प्यास भी जब जितनी बार लगेगी, जितना पानी पीना होगा, वह पी लेगा पानी। लेकिन आप अगर यह कह रहे हो कि आपको इतना लीटर तो पानी डेली चाहिए। हां, ऐसा तो यह गलत है। है ना? मैं इसके खिलाफ हूं। हम ऐसा कुछ नहीं होता है। आपका वाटर का रिक्वायरमेंट भी बहुत वैरी करता है। पर्सन टू पर्सन उसमें भी डाइट का बहुत इंपॉर्टेंट रोल है।
(41:59) हम तो अगर आपके डाइट में बहुत ज्यादा कार्बोहाइड्रेट है हम जंक फूड है, रिफाइंड फूड है, प्लस सीड ऑयल भी होता है जो रिफाइंड ऑइल बोलते हैं हम उसे। हम तो वो सब अगर बहुत ज्यादा है तो आपको प्यास लगती है ज्यादा। हम तो उस कॉन्टेक्स्ट में आप देखोगे तो वाटर इंटेक आपका बढ़ जाएगा। हम लेकिन उसके बाद भी अगर कोई प्रॉब्लम है आपको फैट लॉस नहीं हो रहा है, वेट लॉस नहीं हो रहा है तो आपका जो एक्सपर्ट जो गुरु है वो कहता है कि तुम पानी कम पी रहे हो डिटॉक्स नहीं हो पा रहा है। राइट? तो अब वहां से वो बंदा क्या करता है? 3 लीटर से वो चार पांच लीटर चला जाता है।
(42:29) उसमें चला जाता है। फिर पता चलता है कि भाई उसका क्या है? अब सोडियम लेवल ड्रॉप करना शुरू हो गया। ओके? क्योंकि पानी ज्यादा पी गया। तो ब्लड में जो सोडियम है वो ड्रॉप कर जाता है। हम जिसे हम हाइपोनट्रीमिया बोलते हैं। ओके? सोडियम को हमने डाइल्यूट कर दिया। हम राइट? तो सोडियम अब कम हो गया क्योंकि पानी बढ़ा दिया हमने हम तो वाटर इंटेक ज्यादा करने से सबसे बड़ी प्रॉब्लम होती है हाइपोनट्रीमिया ओके और उसके बाद लोगों को नजिया वोमिटिंग चक्कर ये सब आना शुरू हो जाता है हम हम बड़ा डेंजरस होता है ये कई बार आप आईसीयू में भी जा सकते हो ये सब चक्कर में
(43:02) खतरनाक कैसे हो सकता है पानी ज्यादा पीना आपने बोला कि पानी पीने से आपका सोडियम का ड्रॉप कर गया ना हां ड्रॉप कर गया सोडियम इससे बीमारी क्या हो जाती है प्रॉब्लम बीमारी नहीं होगी एक्यूट इमरजेंसी कंडीशन है वो ओके है ना जैसा मैंने बोला नज़िया वोमिटिंग अब वोमिटिंग होगी तो क्या होगा? डिहाइड्रेशन होगा फर्दर है ना फिर आपको आईवी ड्रिप चढ़ाना पड़ेगा हम और ब्रेन के लेवल पे भी बहुत सीरियस प्रॉब्लम हो जाती है हम जैसे ब्लड में अगर सोडियम हमारा कम हो रहा है हम राइट पानी ज्यादा पीने से तो जो सेल्यूलर सेल के अंदर जो सोडियम है हमारा अब उस
(43:35) उसमें क्या होगा कि कंसंट्रेशन ग्रेडियंट के अकॉर्डिंग ये सब सारा कुछ चल रहा होता है। ओके राइट तो अब जो सोडियम है ब्रेन सेल के अंदर वो भी हमारा शिफ्ट करने लगता है ब्लड की तरफ। ओके? राइट? मेंटेन करने के लिए उस इलेक्ट्रो न्यूट्रलिटी को। हम हम तो उसकी वजह से बहुत सारे प्रॉब्लम्स आते हैं फिर। ओके? सो बेसिकली ये मिथ है पूरी तरह कि आप चारप लीटर पानी पियो। प्योर मिथ। प्योर मिथ। कंप्लीट मिथ। काफी सारे लोग होते हैं जो दिखते तो हेल्दी हैं। बट कहीं ना कहीं कुछ तो प्रॉब्लम होता है उनके बॉडी में। वह वीकनेस फील करते हैं। वो थोड़ा सा लगता है
(44:15) कि भाई एनर्जी नहीं है मेरे अंदर। तो वो कैसे मतलब फिक्स किया जा सकता है? मुझे ऐसा लगता है कि जो हेल्दी दिखता है हम वो एक्चुअली में हेल्दी होता है। राइट? हम और जो वो डिपेंड करता है देखने वाला कौन है। है ना? अगर मेरी नजर पड़े और कोई मुझे हेल्दी दिख रहा है तो वह हेल्दी है इसलिए हेल्दी दिख रहा है। प्रॉब्लम यह है कि मेरे नजरिए से देखने वाले लोग हैं कहां? कितने ही लोग हैं? है नहीं। तो अगर मुझे कोई हेल्दी दिख रहा है तो वो डेफिनेटली हेल्दी होगा। अगर मुझे कोई हेल्दी नहीं दिख रहा है तो वो डेफिनेटली हेल्दी नहीं है। कैसे आइडेंटिफाई आप करते हो ये अनहेल्ी है
(44:52) बंदा? वो तो पता लग जाता है चेहरे पे ही। हां। वो जिस तरह से बात करता है, जिस तरह से कम्युनिकेट करता है, हावभाव, ओवरऑल पर्सनालिटी, चलने का ढंग, बैठने का ढंग बहुत कुछ होता है ना। आप किस तरह कैरी करते हो खुद को? हम आपका जो जेस्चर है वो सब कैसा है? हम तो वो सब मैं पढ़ लेता हूं। राइट? फिर आपका फिजिकल अपीयरेंस। हम फिजिकल अपीयरेंस में भी आप देखोगे चेहरे पे एक स्लगिशनेस रहता है कुछ लोगों के। हम डल सा रहता है। डल लुक आता है एक अपीयरेंस। तो यह सब अगर रहेगा तो कोई हेल्दी इंसान कैसे मुझे लग सकता है? कोई वो हेल वो इंसान कैसे मुझे हेल्दी लगेगा?
(45:35) मैं तो देख रहा हूं उसके। मैं बात कर रहा हूं इन टर्न ऑफ इन टर्म ऑफ कि जो बॉडी बिल्डर है जो मसल्स जिनका अच्छा है, बढ़िया है स्टिल वो इस टाइप के प्रॉब्लम को फेस करते हैं। बॉडी बिल्डर्स को तो प्रोफेशनल जितने भी बॉडी बिल्डर्स हैं मैं उनको हेल्दी तो मानता ही नहीं हूं। अब प्रॉब्लम यह है कि आप बाकी लोग जो हैं वह बस मसल मास को देख के हेल्दी मानते हैं। हम मैं यह कहता हूं कि उनके पास बस मसल ही मास है। अच्छा है ना? और किसी चीज में कुछ भी उनका हेल्थ सही नहीं है। क्योंकि जिस तरह से उन्होंने मसल्स को बिल्ड किया है हम वो अप्रोच बहुत गलत है। बहुत ही डेडली है।
(46:08) बहुत ही डेंजरस है। हम है ना? एब्नॉर्मल वे में आपने मसल को ग्रो किया। जो नॉर्मली बॉडी उतना मसल्स को अटेन नहीं कर सकती उस मसल मास को। राइट? तो वो हेल अनहेल्दी हो गया ना। अब अनहेल्दी अप्रोच को करते हुए आप हेल्दी कैसे हो सकते हो? ठीक है? आपके पास मसल मास है। आप कैमरा पे अच्छा दिख सकते हो। लेकिन हेल्दी नहीं रह सकते आप। तो किसी भी प्रोफेशन बॉडी बिल्डर को देख के जिनके पास मसल मास बहुत ज्यादा है उस तरह से वो कभी भी हेल्दी नहीं है। स्पेशली प्रोफेशनल्स क्योंकि वो ड्रग्स लेते ही लेते हैं। डेफिनेटली। तो वो हेल्दी कैसे लेते हैं कई तरीके।
(46:42) तो वो हेल्दी नहीं है वो। हम बस जब तक वो जिंदा है आप मान लेते हो कि वो हेल्दी हैं। ओके। और आज मान रहे हो कि वो हेल्दी है। कल ही डेथ हो गई उसकी। हां। ऐसा ही होता है। काफी केसेस में है। देखिए एक्सरसाइज करते हुए वो तो इसलिए वो भ्रम टूट जाता है। फिर हम तो भ्रम में नहीं रहना है किसी को। ये बात है। हां बट जो यूथ है वो तो देखते हैं ना उनको कि मेरे को भी इनके जैसा बॉडी बनाना है। हां। तो सिर्फ बॉडी बन सकती है। वैसे हेल्थ नहीं हो सकता। हां। है ना? बॉडी बनाना वो हेल्थ के बराबर नहीं होता है। जब भी हम कोई मेडिसिन लेते हैं डायबिटीज
(47:14) के लिए तो वो काम कैसे करता है? जैसे कि हमने कोई मेडिसिन ले लिया मुझे डायबिटीज है। यस बट हम रेगुलर डाइट वही फॉलो कर रहे हैं। तो उस कंडीशन में वो मेडिसिन कैसे काम करेगा? मेडिसिन जो डिफरेंट क्लास ऑफ़ ड्रग्स है ना उसमें डिफरेंट-डिफरेंट मैकेनिज्म ऑफ़ एक्शन है। एक मेडिसिन आती है। एक क्लास ऑफ़ ड्रग होता है जो इंसुलिन के प्रोडक्शन को बढ़ाता है। ओके? इसको सल्फोनाइल यूरियास बोलते हैं। इवन एक क्लास और है मेग्लिटिनाइड बोलते हैं। रेपाग्लिनाइड यह सब नेग्लिनाइड आता है। [नाक से की जाने वाली आवाज़] और एक आता है सल्फोनाइल यूरिया जो मैंने
(47:47) बोला जिसमें ग्लिमेपेराइड, ग्लिलाजाइड, ग्लिपिजाइड ये सारे ड्रग्स आते हैं। अब ये क्या कर रहा है? इंसुलिन के प्रोडक्शन को बढ़ा रहा है। और इंसुलिन के प्रोडक्शन को बढ़ा रहा है। तो अब इससे क्या होगा कि जो भी एक्स्ट्रा ग्लूकोस है उसको वो मैनेज कर लेगा। नॉर्मली क्या हो रहा है कि इंसुलिन अब उतना पैनक्रियाज बना नहीं पा रहा है इंसुलिन। हम हम तो अब ड्रग्स के हेल्प से अब हम एक्स्ट्रा इंसुलिन को प्रोड्यूस कर पा रहे हैं जो नॉर्मली बॉडी हमारी नहीं कर पा रही थी पहले हम तो जैसे ही ड्रग्स लेते हैं डाइट में कार्बोहाइड्रेट तो चल ही रहा है
(48:17) तो अब उस कार्बोहाइड्रेट इंटेक के लिए बॉडी इनफ इंसुलिन नहीं बना पा रही है तो इसलिए अब हम ड्रग्स का हेल्प लेते हैं ताकि ज्यादा से ज्यादा इंसुलिन यस और एक्स्ट्रा ग्लूकोस जो है वो मैनेज हो जाए ब्लड में हम हम तो एक तो ये मैकेनिज्म हो गया कि इंसुलिन के प्रोडक्शन को आपने बढ़ा दिया ड्रग्स लेकर हम एक दूसरा मैकेनिज्म होता है जिसमें में जो ब्लड में जो शुगर है एक्स्ट्रा उससे वो यूरिन के थ्रू आप पी आउट करते हो हम तो एक्स्ट्रा ग्लूकोस आपका यूरिन के थ्रू फ्लश आउट होता है और उसमें एक ड्रग है बड़ा पॉपुलर जिसको हम डेपाग्लिफ्लोजीन एमपाग्लिफ्लोजीन
(48:49) हम कुछ इंजेक्शंस भी तो होते हैं जो रेगुलर बेसिस पे उसके बारे में मैं बताऊंगा हम यस तो ये जो डेपाग्लिफोन एमाग्लिफ्लोजीन हो गया ये एसजीएलटी2 इनबिटर्स कहलाता है हम तो आप यूरिन के थ्रू ग्लूकोस को बाहर कर रहे हो कैसे ग्लूकोस को जो एक्स्ट्रा था आपके ब्लड में वो ब्लड में एक्स्ट्रा कैसे हुआ? क्योंकि डाइट में कार्ब्स था। अगर डाइट में कार्ब्स नहीं होता तो ब्लड में एक्स्ट्रा नहीं होता और ब्लड में एक्स्ट्रा नहीं होता तो एसजीएलटी टू इनबिबिबिटर्स की जरूरत नहीं होती यूरिन में ग्लूकोस को मतलब यूरिन के थ्रू ग्लूकोस को बाहर करने के लिए। उसकी जरूरत नहीं पड़ती
(49:22) आपको। हम तो एक यूरिन से फिर बाहर हो गया। फिर एक और क्लास ऑफ़ ड्रग होता है जो बेसिकली करता ये है कि आपके ग्लूकोस को फैट सेल्स में पुश करता है। ओके? तो फैट सेल्स में जब ग्लूकोस पुश होगा तो वो वहां पर जाकर के फैट में कन्वर्ट हो जाता है। ग्लूकोस। तो एक्स्ट्रा ग्लूकोस को आपने डंप कर दिया और वो फैट के फॉर्म में कन्वर्ट हो जाता है। स्टोर हो जाता है। तो इसलिए कुछ मेडिसिंस लेने के बाद वेट बढ़ता है पेशेंट का। राइट? है ना? और उसमें एक क्लास ऑफ़ ड्रग आता है जिसको हम बोलते हैं बायोग्लिटाजोन। हम हम तो इसको हम सो कॉल्ड इंसुलिन सेंसिटाइजर
(49:56) भी बोलते हैं। हम हम और ये इंसुलिन सेंसिटाइजर है। बट ये तो लूप हो जाएगा ना जब आप वही डाइट रहे हो। या तो वैसा ही या एक्स्ट्रा ग्लूकोस कहां से आ रहा है? डाइटरी कार्ब से। अब उसी ग्लूकोस को डंप कर रहा है वह फैट टिश्यू में वो ड्रग और वहां पे वो फैट में उसे कन्वर्ट कर दे रहा है। तो ब्लड से तो कम हो गया लेकिन वो फैट मास आपकी बॉडी में बढ़ा रहा है। हम तो ये सारे डिफरेंट-डिफरेंट मैकेनिज्म है। फिर बहुत सारे अभी तो रिसेंटली अभी मुंजारो ओजंपिक ये सब बड़ा पॉपुलर हो रखा है अभी। हम हम मार्केट में। तो इसका अपना एक मैकेनिज्म है कि आपकी भूख को ये कम कर देता है।
(50:30) ओके। तो हंगर कम हो जाता है तो आप कम खाते हो। कम खाओगे तो डेफिनेटली शुगर भी कम बढ़ेगा। जब आप कम खाओगे तो कार्बोहाइड्रेट भी कम खाओगे। राइट? हम बट ये ये इस ड्रग को तो लोग नॉर्मली भी लेते हैं। लाइक फैट फैट लॉस करना है, वेट लॉस करना है। वही मैं कह रहा हूं ना भूख कम क्योंकि फैट लॉस वेट लॉस प्रोग्राम में आपको क्या बताया जा रहा है कि आप ज्यादा खाते हो इसलिए वेट गेन हो रहा है आपका। मैं कहता हूं ज्यादा नहीं खाते हो आप। अगर आप खा भी रहे हो ज्यादा क्योंकि सारे लोग ज्यादा नहीं खा रहे हैं। कुछ लोग कम खाते हुए भी गेन कर रहे हैं।
(50:57) हम तो आप जो खा रहे हो वह गलत है और गलत चीजों को आप ज्यादा करोगे। हम तो इसलिए वो गलत चीज को आप हटाओ। तो आप अपने आप उस चीज को नॉर्मलाइज कर लोगे कि आपको जितना चाहिए होगा आप उतना ही खाओगे। हम हम तो ये जो आपका रिक्वायर्ड इंटेक [गला साफ़ करने की आवाज़] से आप ज्यादा लेते हो हम वो इसलिए लेते हो क्योंकि आपकी आपका जो फूड सेक्शन है वो गलत है। ओके। वो प्लांट हैवी है। ओके कार्बोहाइड्रेट हैवी है वो इसलिए आप ज्यादा कर रहे हो ओके तो इसलिए फिर आप उसको कंट्रोल और मॉडरेट आप पूरी जिंदगी नहीं कर पाओगे आप दो-ती महीनों के लिए करोगे कम फिर से घूम फिर के
(51:31) आप फिर उससे ज्यादा खाने लगोगे आलू का पराठा कोई खाते हुए पूरी जिंदगी कम नहीं खाएगा ना वो दो-ती महीने तक कम खाएगा डाइटिशियन के प्लान में जब रहेगा तो और जैसे ही डाइटिशियन का प्लान खत्म होगा उसका फिर से आलू पराठा बढ़ जाएगा उसका फिर हो जाएगा बढ़ेगी फिर से यस तो आपने साइकोलॉजी को चेंज नहीं किया हम साइकोलॉजी को इसलिए चेंज नहीं किया क्योंकि डाइट में आपका जो स्ट्रक्चर था मेन जो कंपोज़शन था वो वैसा ही था जो पहले आप कर रहे थे। बस अमाउंट को आपने कम किया। तो जब तक आप डाइट के स्ट्रक्चर को आप नहीं बदलोगे आपकी साइकोलॉजी चेंज नहीं होगी कभी
(52:00) भी। तो साइकोलॉजी को बदलने का काम होता है पूरा फाउंडेशन को चेंज करना, फ्लिप कर देना। जहां पे बेस में आपका 70 टू 80% कार्ब्स है तो आप 70 टू 80% आपको फैट एंड प्रोटीन रखना होगा। आई मीन 70% फैट रखना होगा और रिमेनिंग 30% आपको प्रोटीन रखना होगा। ओके? जिसको जिस पेशेंट को 100% डायबिटीज क्योर करना हो उसको कौन-कौन से स्टेप्स लेने चाहिए? मुझे ऐसा लगता है कि द बिगेस्ट लेबर यू कैन पुल टू इंप्रूव ब्लड शुगर कंट्रोल इज रिड्यूसिंग कार्बोहाइड्रेट ड्रास्टिकली टू नियर ज़ीरो। तो आपको अल्टीमेटली करना ये है कि कार्बोहाइड्रेट को ऑलमोस्ट खत्म कर देना
(52:44) है। ये फर्स्ट और लास्ट स्टेप होता है। इसके अलावा कुछ नहीं करना। इसके अलावा उसके बाद आप जो भी करोगे फर्दर इंप्रूवमेंट के लिए करोगे। ओके? लेकिन एट लार्ज इसी चीज को करने से ही रिजल्ट मिल जाता है आपको। ओके? जैसा कि मैंने बताया ना ब्लड में शुगर तभी बढ़ता है जब हम कार्ब्स खाते हैं या फिर स्ट्रेस मोड में जाते हैं। तो नॉर्मली हर पेशेंट उस तरह से स्ट्रेस मोड में नहीं है। तो उसका कैसे बढ़ रहा है? जब वो कार्ब्स खा रहा है। तो बंद कर दो ना उसको। क्यों खा रहे हो? कार्ब्स। कार्ब्स खाने से ही बढ़ रहा है तुम्हारा ब्लड शुगर। यह डॉक्टर रियलाइज नहीं करवा
(53:16) रहे हैं अपने पेशेंट्स को कि आपका जो ब्लड में एक्स्ट्रा शुगर है वो आपके डाइट की वजह से ही है। वो मिलेट खाने से, रागी खाने से नहीं ठीक होगा। हम वो सबको हटा देना होगा आपको। चिया सीड्स वगैरह भी लोग लेते हैं और काफी सारी चीज़ वो तो इसलिए लेते हैं क्योंकि डाइट में कार्ब्स है तो उनको ऐसा लगता है फाइबर बढ़ाने से बात बनेगी। लेकिन कुछ हो नहीं रहा ना वैसा। हम फिर पता चलता है कि चिया सीड्स और फ्लैक्स सीड खाने से उनको कॉन्स्टिपेशन हो गया। वो अलग प्रॉब्लम आ जाता है। फिर पता चला शुगर इंप्रूव करने चले थे। अब यहां पे मेरा जो है वो
(53:46) वही जाम हो गया। आपने बताया कि 100% क्योर हो सकता है डायबिटीज। जस्ट आपको कार्बोहाइड्रेट्स जो है वो जीरो करना है। हम नियर टू जीरो। यस। बट काफी लोग तो इसको फॉलो ही नहीं कर पाते। या और काफी पेशेंट्स को मैंने देखा है। मतलब मेरे ही फैमिली रिलेटिव में काफी लोग हैं जो डॉक्टर्स चेंज करते हैं यार इनसे ठीक नहीं हो रहा। या या उनसे करा लेते हैं। हो सकता है उनको ज्यादा नॉलेज है। हम हम है ना? और वो डॉक्टर्स भी सिर्फ मेडिसिंस ही देते हैं। या वो बताते नहीं है कि आप कार्ब्स जीरो कर लो। आप दाल चावल छोड़ दो, रोटी छोड़ दो। इस पे शिफ्ट हो जाओ।
(54:24) जब आप ये चीज किसी को गाइड करते हो हम तो उनका रिएक्शन क्या होता है? वो मानते हैं इस फॉलो करते हैं कि भाई या फिर बोलते हैं कि नहीं ये तो डंप सा सजेशन है। या नहीं ऐसा मुझे कोई नहीं बोलता है क्योंकि मेरे पास डम लोग नहीं आते ना। राइट तो मुझे डंप कैसे कोई कह सकता है? [हंसी] तो मैं मेरे पास जो लोग आते हैं ना बहुत समझदार लोग आते हैं। हां। सेंसिबल लोग आते हैं और नहीं भी होते हैं तो वो बन जाते हैं मेरे वीडियोस को देखकर। और जब आप समझदार हो जाओगे तो जब भी आप आओगे मेरे पास तो उस तरह से आप बिहेव नहीं करोगे। हम तो वो कब आते हैं? जब वो मेरे वीडियोस को
(55:00) बेंच वॉच कर लेते हैं। ऑलमोस्ट सारे वीडियोस देख लेते हैं। अच्छे से कन्विंस हो जाते हैं कि नहीं बात तो सही है। मैंने सारा कुछ कर लिया है अभी तक बट कुछ हो नहीं रहा है। तो चलो ये जो डॉक्टर कह रहा है ना इसकी बात में दम भी है और करके भी देखते हैं। तब वो मेरे पास आते हैं। तो इसलिए मुझे ये सब झेलने का मौका ही नहीं मिलता है कभी कि कोई ये कहता है कि क्या बात करते हो यार चावल रोटी कैसे बंद हो जाएगी? कैसे कोई बंद कर सकता है? हम मैं खुद फॉलो कर रहा हूं क्योंकि मैंने आपके वीडियोस काफी टाइम पहले देखा था। या या तो मैं खुद फॉलो कर रहा हूं। बट एक चीज़
(55:30) मेरे से नहीं कंट्रोल हो रहा है जो कि राइस मैं थोड़ा सा राइस ले ही लेता हूं चिकन के साथ। हम हालांकि चिकन मैं रेगुलर खाता हूं। डेली हम सुबह मैं अंडे खाता हूं। दोपहर में चिकन शाम को चिकन हम हम यस। और ज्यादा चिकन का अमाउंट अभी स्टार्टिंग में मैं नहीं ले पा रहा हूं। हम क्योंकि उतनी कैपेसिटी नहीं है। 250 ग्राम काफी है मेरे लिए। बढ़िया। 250 ग्राम भी बुरा नहीं है। हां। डेली 250 ग्राम। हम तो अह चावल मुझे कंप्लीटली रिमूव कर देना चाहिए या फिर इसको धीरे-धीरे कम करना चाहिए? धीरे-धीरे कम करना चाहिए आइडियली है ना। ओके। फिर वहां पे भी कार्ब्स विड्रॉल के
(56:02) सिम्टम्स आते हैं। हम जैसे हेडेक होता है। रात को नींद नहीं आती है। हम हम तो हफ्ते दर हफ्ते कार्ब्स को कम करेंगे। चावल को कम करेंगे और एक महीने बाद हम कार्ब्स फ्री हो जाएंगे। हम आप चिकन कुक कैसे करते हो? लाइक ये मेरे को काफी टाइम से जानना था। हम हम मैं कुक करता हूं। मैं मेरे को थोड़ा तो ऑयल डालना ही पड़ता है उसको अच्छे से पकाने के लिए। है ना? या फिर पानी डालकर उसको अच्छे से बॉईल करके आप कैसे करते हो? पहली बात तो मैं चिकन बहुत ज्यादा खाता नहीं हूं। हां। और चिकन खाता हूं तो सिर्फ लेग पीस खाता हूं। ड्रमस्टिक जिसे बोलते हैं।
(56:36) ओके। और ड्रमस्टिक लेने का कारण ये है कि ड्रमस्टिक थोड़ा फैट होता है उसमें। ड्रम स्टिक में। बाकी जो पार्ट्स हैं चिकन के वो बहुत लीन होते हैं। तो लीन चिकन खाकर पेट नहीं भरता किसी का। मैं चिकन ब्रेस्ट खाता हूं ज्यादातर। हां। तो वो सही चीज इसलिए चावल खाने का मन करता है। हां। है ना? वो भी एक रीजन है। हम तो अगर स्वीट क्रेविंग या कार्ब्स क्रेविंग है हम तो आप अगर लीन प्रोटीन खाओगे तो वो कभी फिक्स नहीं होगा। ओके। तो उसको सेटल करने के लिए हमें फैटी प्रोटीन खाना पड़ेगा। और फैटी प्रोटीन होता है लेग पीस चिकन का। वो भी बहुत ज्यादा फैटी नहीं होता बट स्टिल फार फार
(57:09) बेटर होता है बाकी पार्ट्स से। तो जब भी हम फैटी लेग पीस लेंगे हम तो हमारा सेटाइटटी जो है बेटर हो जाएगा और फिर राइस खाने का उतना मन नहीं करता है। तो सिंपली करना यह होता है अगर आप चिकन खा रहे हो तो लेग पीस ड्रमस्टिक खा दो चार पांच छ जितना आपको भूख है जितना आप खा सकते हो उसे आप रोस्ट कर लो घर पे एयर फ्रायर में हम और खा लो फैट के साथ ओके बटर के साथ खा लो हम या फिर आप घी ले लो उसके साथ हम या फिर मैं ये बोलता हूं मैं मेरे लिए हमेशा बेस्ट होता है या इवन सभी के लिए बेस्ट है कि आप जो गोट का फैट होता है हम उसका आप घी बना लो वो कैसे बनता है आप कैसे
(57:47) सिंपली मेल्ट करना होता है कढ़ाई में डाल फैट उससे मेल्ट हो जाएगा और उसको आप जार में स्टोर कर लो हम वो घी की तरह हो जाता है पूरा सॉलिड होता है वो ओके रूम टेंपरेचर पे और उस फैट को आप स्कूप आउट कर करके आप खाते रहो दो-तीन स्कूप कर लिया बाहर निकाल लिया दो-तीन चम्मच और चिकन लेग पीस के साथ खा लिया सिंपली ग्रेट तो ग्रेवी वाला खाने की जरूरत नहीं है ना आपको आप बाहर रेस्टोरेंट में जाते हो हम आप स्टार्टर आइटम लेते हो हां तो स्टार्टर आइटम की तरह खाओ पेट भर जाएगा उससे फैट इनफ लोगे तो ओके मैं जो बनाता हूं मैं ग्रेवी वाली बनाता हूं।
(58:22) हम हम तो वो तो ग्रेवी वाली बनाने का कारण होता है। उसके साथ चावल रोटी खाने का मन करता है लोगों को। राइट? है ना? तो वही तो खत्म करने का तरीका है कि ग्रेवी वाला बनाना ही नहीं है। हम ड्राई आइटम बनाना है ताकि रोटी चावल पे ध्यान ही ना जाए हमारा। फिर अमाउंट बढ़ाना पड़ेगा चीज। फिर अमाउंट बढ़ाना पड़ेगा। धीरे-धीरे बढ़ जाएगा। हम अपने आप बढ़ जाता है वो। तो जो बंदा जो कोई है जो कार्नवोरस जो डाइट है उसको रेगुलर बेसिस पे फॉलो कर रहा है। हम तो क्या कोई लॉन्ग टर्म में उसको कुछ दिक्कत हो सकता है। मेरा ऐसा मानना है कि लॉन्ग टर्म में जो
(58:53) प्रॉब्लम कर रहा है आप उस पे क्वेश्चन क्यों नहीं कर रहे हो? राइट? है ना? लॉन्ग टर्म में अगर कोई डाइट प्रॉब्लम कर रही है तो वो कौन सी डाइट कर रही है? स्टैंडर्ड वही चावल बैलेंस डाइट। बैलेंस डाइट। राइट? है ना? तो लॉन्ग टर्म हेल्थ आउटकम तो हमें पता लग रहा है उस डाइट को लेकर के। कि क्या होगा हमारे साथ? हम हम तो जब भी हम उस कंडीशन से बाहर निकल पाते हैं इस कार्निवो डाइट को करके हम तो हमारा शॉर्ट टर्म में हेल्थ फिक्स हो जाता है। हम राइट शॉर्ट टर्म में हेल्थ फिक्स हो गया। अब वैसा क्रॉनिक प्रॉब्लम जब शॉर्ट टर्म में फिक्स हो गया तो अब उसी डाइट पे आपको
(59:29) लॉन्ग टर्म हेल्थ का कोई रिस्क नहीं है। ओके? नहीं होगा वो। ये कॉमन सेंस वाली बात है। हम क्योंकि जब इतनी जटिल समस्या जो आपका कोई डॉक्टर ठीक नहीं कर पा रहा है और वो सिंपली एक डाइट को लेने से ठीक हो जाती है जिसमें मीट और एग्स आता है मोस्टली हम तो अब उस पे आप ये मत सोचो कि मुझे आने वाले समय में हार्ट डिजीज हो जाएगा या कैंसर हो जाएगा क्योंकि किसी भी बीमारी को होने के लिए मल्टीपल फैक्टर्स होते हैं। राइट? तो [नाक से की जाने वाली आवाज़] ऐसा नहीं है कि किसी को भी बीमारी हो रही है तो वो सिर्फ और सिर्फ डाइट की वजह से हो रही है।
(59:55) हम बहुत सारे फैक्टर्स हैं जिसकी वजह से किसी को बीमारी हो रही है। हम हम तो लेकिन डाइट इंपॉर्टेंट रोल प्ले करता है डेफिनेटली। तो जिस डाइट पर आपको कैंसर हार्ट डिजीज हो रहा है हम उस पे तो आप क्वेश्चन नहीं करते हो कि भाई ये हाई कार्बोहाइड्रेट डाइट पे इतना ज्यादा अभी कैंसर और ये सब कैंसर का इंसिडेंस बढ़ता जा रहा है। डायबिटीज का इंसिडेंस बढ़ता जा रहा है। तो क्यों ना हम डाइट के बारे में कुछ सोचे। जैसे ही मैं आपको कुछ उल्टा करने को बोलता हूं तो अब आपको वहां पे लॉन्ग टर्म हेल्थ के बारे में आप परेशान हो जाते हो कि लॉन्ग [नाक से की जाने वाली आवाज़]
(1:00:23) टर्म कोई हेल्थ रिस्क तो नहीं है। सही बात है। तो अभी आप शॉर्ट टर्म में अभी अपनी हालत अभी की हालत सही नहीं है। लॉन्ग टर्म के लिए क्यों सोच रहे हो यार? राइट तो शॉर्ट टर्म में फिक्स कर लो और उसके बाद बिंदास जियो कुछ भी नहीं होगा लॉन्ग टर्म में भी हम नहीं काफी काफी लोगों के कमेंट्स आते हैं आप ही के कमेंट सेक्शन में हम कि लॉन्ग टर्म में ये सही नहीं है डाइजेशन का इशू हो सकता है और हो सकता है वो तो बेसिकली एजमशन है हम है ना वो स्पेकुलेशन है हम हम बस करते रहो बैठ के मुझे नहीं करना है मुझे पता है कि ये इससे अगर शॉर्ट टर्म में मेरा हेल्थ फिक्स हो
(1:00:56) गया हम सालों की प्रॉब्लम जो आप दो से तीन महीने में ठीक कर ले रहे हो किसी डाइट पे। मैं उस डाइट पे क्यों डाउट करूं? ओके। मेरा ये मानना है हमारे बॉडी को जो न्यूट्रिएंट्स चाहिए, जो मिनरल्स चाहिए वो सब कुछ अवेलेबल है मीट में। सब कुछ और जो मीट में अवेलेबल नहीं है वो नहीं चाहिए हमें इसलिए उसमें नहीं है। ओके। [हंसी] दैट्स टू द पॉइंट। या ओके। अब जो बिगिनर है जैसे स्टार्टिंग में भी हमने बात किया कि काफी लोगों को स्टार्टिंग में दिक्कत होगी शिफ्ट होने में कार्नवोरस डाइट में। तो आप उनको क्या सजेशन देना चाहोगे? कैसे धीरे-धीरे शिफ्ट करें वो?
(1:01:33) धीरे-धीरे शिफ्ट करने का मेरा जो एप्रोच होता है वो यही होता है कि आप अपने डाइट में जितने भी मील्स ले रहे हो हम हम सबसे पहले आप स्नैक्स लेना बंद करो। स्नैक्स लेना बंद करो। उसमें भी वो तरीका होता है कि आप जब भी प्रॉपर मील लेते हो अपने ब्रेकफास्ट, लंच एंड डिनर हम तो उसमें हर मील में आपका कार्बोहाइड्रेट होता है। राइट? वो तो होता ही होता है। प्रोटीन रहे ना रहे। हम अब उस कार्बोहाइड्रेट को कम करना है हम बाय 20 25% हम तो हर एक वीक अगर आप 20 से 25% आप कार्ब्स कम करोगे हम तो बाय द एंड ऑफ़ फाइव और सिक्स वीक्स आपका कार्ब्स पूरा चला जाएगा
(1:02:05) डाइट से। हम और जब कार्ब्स आप कम कर रहे हो तो साथ ही साथ प्रोटीन को बढ़ाना है। हम फैट को भी बढ़ाना है इक्वली। हम तो अगर आप 20 ग्राम प्रोटीन आपने ऐड किया तो 20 ग्राम फैट ऐड कर लो आप कार्ब्स के रिडक्शन के साथ-साथ। हम तो यह अप्रोच लेते हुए आपको सिंपली कार्निवो डाइट की तरफ स्विच करना होता है। फुल ब्लोन कार्निवो डाइट। आजकल ना जितने भी इन्फ्लुएंसरर हैं वो कैलोरीज पे बहुत ध्यान देते हैं। हम कितनी कैलोरीज आपको लेनी है, कितनी बर्न आउट करनी है। है ना कि कुछ भी खाओ पर बर्न करो उसको। हम तो ये सही अप्रोच है या गलत है? नहीं गलत है ये अप्रोच। एक्चुअली कुछ
(1:02:40) लोगों के लिए वर्क कर जाता है। हम क्योंकि अगर आप ये मानते हो कि मैं सरप्लस में हूं हम एनर्जी सरप्लस में हूं या कैलोरी सरप्लस में हो तो आप उसे कम करते हो। तो जब आप कम करोगे तो डेफिनेटली मास के टर्म्स में आप देखोगे कि आपका बॉडी मास कम होना शुरू होगा। हम राइट? लेकिन प्रॉब्लम क्या है कि सारे लोगों पे ये सी को काम नहीं करता। ओके? कैलोरी इन कैलोरी आउट। बहुत सारे ऐसे लोग हैं जो डेफिसिट पे भी वेट लूज़ नहीं कर पा रहे हैं। इसका यह मतलब नहीं है वह डेफिसिट में नहीं है या कैलकुलेशन गलत हो रहा है। हम क्योंकि ये जो कैलकुलेशन का जो इशू है वो
(1:03:14) तब लोग बोलते हैं कि जब आप डेफिसिट में जाने के बाद भी आप वेट लूज़ नहीं कर पा रहे हो तब वो मान लेते हैं कि जरूर डेफिसिट जो तुम कैलकुलेट कर रहे हो ना अपनी उसमें कहीं एरर है। तुम डेफिसिट में हो नहीं इसलिए लूज़ नहीं हो रहा है। लेकिन वो ऑलरेडी है डेफिसिट में। ओके। अब प्रॉब्लम क्या है कि वैसे लोग क्या करते हैं? फिर ग्रेवी के अमाउंट को भी कैलोरी में लेने लगते हैं। तो एक-एक चीज वो हटाना शुरू करते हैं। तो मेरा ऐसा मानना है कि अगर आप डेफिसिट क्रिएट कर रहे हो हम और वेट लूज नहीं हो रहा है हम तो इसका मतलब प्रॉब्लम कहीं और है। अब इसका ये मतलब नहीं है कि आप फिर से
(1:03:44) फर्दर आप डेफिसिट क्रिएट करोगे और तो जब उस सर्टेन डेफिसिट पे आपके पास रिजल्ट नहीं आता तो फर्दर आप डेफिसिट क्रिएट करते हो। हम और उसकी वजह से क्या होता है कि आपके पास हंगर जो है वो अनकंट्रोल्ड हंगर डेवलप होना शुरू होता है। राइट? और उसके बाद बेंज ईटिंग करते हो आप। सही बात है। तो यहां से डिसऑर्डर्ड ईटिंग बिहेवियर को आप जन्म देते हो जो पहले नहीं था। पहले तो सिर्फ मोटापा था। हम अब इस वेट लॉस जर्नी में आपके साथ क्या होगा कि इरेटिक पैटर्न ऑफ ईटिंग स्टार्ट होगी आपको। मतलब कुछ भी खा लोगे सडनली। क्योंकि एक डेफिसिट क्रिएट किया
(1:04:17) हम हम और बॉडी काइंड ऑफ़ स्टार हो रही थी। हम अब जैसे ही उसकी भूख बढ़ेगी डेफिसिट की वजह से। हम तो सडनली वो क्या करेगा कि वो 10 गुलाब जामुन खा लेगा हम या पूरा ब्रेड का स्लाइसेस लेके बैठ जाएगा बटर के साथ हम तो इस तरह से ओवरडू करने लगते हैं और फिर से वेट उनका बढ़ जाता है राइट तो मतलब ना वो कम कंप्लीटली वो ट्रैक पे रह नहीं पाते हम अब मुश्किल भी होता है मुश्किल होता है फॉलो करना बिल्कुल वो नहीं हो पाएगा आउट कैलोरीज इन ये सब हां कब तक आप पूरी जिंदगी कैसे ये सब कैलकुलेट क्यों करना है यार या सिंपली आप अपने हंगर और सटाइटटी क्यूस को आप फॉलो करो भूख लगेगी तो खाएंगे।
(1:04:55) नहीं लगेगी तो नहीं खाएंगे। हम और भूख ही इतनी ज्यादा लगती है इस हाई कार्ब डाइट पे। अब ज्यादा भूख पे डेफिनेटली आपको फिर कंट्रोल करने की जरूरत पड़ेगी। हम जितनी बार भूख लगेगी आप सोचोगे कि चलो इतना अभी भूख लगी है तो अभी इतना ही खाते हैं वरना सरप्लस में चले जाएंगे। हम तो ये सब मॉडल क्यों बनाया हो अपने लिए? क्यों इतना कॉम्प्लिकेट कर रहे हो न्यूट्रिशन को? जब आपकी बॉडी एक बार खाकर मैक्सिमम दो बार खाते हुए पूरे दिन शांत रह सकती है। स्टेबल रह सकती है एनर्जी वाइज। तो क्यों ये सब कर रहे हो काम? और क्यों अपने डाइटिशियन को और हेल्थ
(1:05:25) कोच को ढाई हजार का 33000 का उसको प्लान के लिए फीस पे करते हो। घटिया सा डाइट शर्ट देता है वो लोग। सही बात है। है ना? इतना सस्ता इतना घटिया काम कर रहा है ये लोग। उसकी वजह से जैसे ही मेरे पास आते हैं बोलते हैं कि अरे यार बहुत ज्यादा चार्ज करते हो डॉक्टर आप तो। मैं कहता हूं बहुत घटिया सर्विस तुम ले रहे हो सालों से। फेक प्रूव्स बन चुके हैं बहुत सारे लोग। चैट जेपीटी से जनरेट कर लेते हैं। एक्सक्ट्ली या या वही चिपका देते हैं। वही चिपका देते हैं सारे पेशेंट्स में। हम तो उसमें होता क्या है कि इतना सस्ता और ऑफर भी निकाल देते हैं। ₹500 का डाइट
(1:05:55) प्लान था। अब दशहरा आ गया, दिवाली आ गई तो लो 50% डिस्काउंट। सेल करने तो उसमें क्या होता है कि लेने वाले लोग बढ़ गए। हम क्लाइंट्स बढ़ गए। उससे पैसा तो बन जाता है उनका। लेकिन लार्ज स्केल पे आप देखोगे हेल्थ किसी का कुछ बेटर हो नहीं रहा। ना ही रिजल्ट मिल रहा है। अब जैसे ही ऐसे लोग मेरे पास आते हैं तो वो कंपेयर करने लगते हैं उनसे। कि उनका चार्ज इतना है। आपका चार्ज इतना है। मैं कहता हूं कि ये तो सब्जेक्टिव वे में आप कंपेयर करो। ये तो बड़ा रिलेटिव चीज है। हम बहुत लोग फ्री में भी एडवाइस दे रहे हैं। हम तो अब आप उससे क्यों कंपेयर कर रहे हो
(1:06:24) मुझे? जब आप मेरे पास आए हो तो मेरे सर्विस को आपको समझना पड़ेगा कि मैं क्या दे रहा हूं। और जब तक वो आप समझोगे नहीं तब तक मेरे चार्ज को लेकर के आप ऐसे ही मुझे बोलते रहोगे। क्रिटिसाइज करते रहोगे कि बहुत हैवी चार्ज करता है। ये डॉक्टर ये करता है वो करता है। क्योंकि मैं जितना मैंने इन्वेस्ट किया है इस चीज में इस चीज को गेन करने में। अगर आप पूरे एंटायर उस इन्वेस्टमेंट को आप समझोगे तो आपको लगेगा कि यार इस डॉक्टर को तो सिंपली ऐसे ही दे दो। हम या 50 दिनों बाद कंसल्टेशन करे या 60 दिनों बाद करे या पैसा यह रख भी ले खुशी-खुशी दे दो यार।
(1:06:54) इतना मत सोचो। है ना? क्योंकि जो मिलने वाला है तुम्हें ये सालों का जो मैंने जो कंसोलिडेट किया है नॉलेज को एक्सपीरियंस को वो मैं तुम्हें 1 घंटे में परोस के दूंगा। राइट? तो उसके लिए तुम पे कर रहे हो। ये कोई 1 घंटे का वो बस टाइम पीरियड के लिए तुम मुझे पे नहीं कर रहे हो। हम मैं अपना एक्सपीरियंस तुम्हें बता रहा हूं। हम जो कोई नहीं बता रहा है। काफी लोग ये भी सजेस्ट करते हैं कि ज्यादा वर्कआउट करो। है ना? ज्यादा वर्कउ करोगे तो ज्यादा बर्न होगा। कैलोरीज वगैरह जो भी है। है ना? मैं तीन दिन जाता हूं जिम आते। है ना? मेरे को लगता है काफी है ये।
(1:07:27) मतलब रेगुलर जाने की जरूरत नहीं है। क्यों इतना थकाना है बॉडी को? हम हम और आपको क्या लगता है? स्ट्रेंथ ट्रेनिंग जो हम करते हैं वो कैसे बैलेंस करना चाहिए? किस तरीके से करना चाहिए? स्ट्रेंथ ट्रेनिंग हमेशा ऐसा कुछ होना चाहिए कि जब भी हम अपने बॉडी को ट्रेन करें हम तो वो स्प्लिट हमेशा कुछ ऐसा होना चाहिए कि आपकी एंटायर बॉडी हिट हो। राइट? ऐसा नहीं है कि आज जा रहे हैं बस बाईसेप्स और ट्राइसेप्स करके आ जाएंगे। हम है ना? क्योंकि स्मॉल मसल ग्रुप को टारगेट कभी नहीं करना होता है। जब भी आप वर्कआउट करते हो तो आप टारगेट रखो कि लार्जर मसल
(1:08:02) ग्रुप को आप हिट करो। और लार्ज मसल ग्रुप को जब आप हिट करोगे तो स्माल मसल ग्रुप अपने आप इंगेज हो जाता है वो तो अलग से उस पे एफर्ट नहीं लेना है बहुत ज्यादा जैसे बाईसेप्स पे ट्राइसेप्स पे हम हम 10 मिनट बहुत होता है अगर आप बाईसेप्स और ट्राइसेप्स सोच रहे हो तो उससे ज्यादा देना ही नहीं है आप बाकी मसल पार्ट को ट्रेन करो हम अच्छा खासा एक्टिवेशन हो जाता है इस स्मॉल मसल ग्रुप का भी हम हम तो इसलिए मेरा ये मानना है कि आप कभी भी ट्रेन करते हो तो एंटायर बॉडी को आप हिट करो हम बाय वे ऑफ डूइंग सम कंपाउंड मूवमेंट्स जैसे डेडलिफ्ट आ गया स्क्वाड आ गया
(1:08:34) और क्योंकि आपको अल्टरनेट डे करना है तो 48 आवर्स का एक रेस्ट भी मिल रहा है हर एक मसल को। अगर हम उसे नेक्स्ट डे भी उस मसल को करेंगे तब भी हमें 48 आवर्स का रेस्ट चाहिए। रेस्ट मिल रहा है। हम राइट? तो तीन दिन करते हुए भी आप एंटायर बॉडी को हिट करते हुए इनफ रेस्ट पीरियड दे रहे हो। हम तभी मसल ग्रो करती है। और हाइपरट्रोफी ट्रेनिंग का मतलब होता है कि आपकी इंटेंसिटी हाई रहेगी। वॉल्यूम कम रहेगा। कम वॉल्यूम का मतलब है रेप्स आपका 10 से ज्यादा नहीं होना चाहिए किसी भी कीमत पे। हम और नंबर ऑफ सेट्स भी बहुत ज्यादा नहीं होना चाहिए। क्योंकि एक-एक वेरिएशन आप
(1:09:03) करते हो किसी एक मसल ग्रुप के लिए तो चार सेट्स करते हो। हम उस चार सेट्स में भी कुछ लोग 16 से 20 रेप्स का करते हैं। हम सेट ये सब काम नहीं करना है। अगर आपको एक मसल ट्रेन करना है तो उसके चार वेरिएशन को लो। दो-दो सेट्स करो और दो-दो सेट्स में मैक्सिमम एट टू 10 रेप्स जाओ हर एक सेट में। हम तो ये एनफ होता है। ओके। आपके हिसाब से स्ट्रेंथ ट्रेनिंग बेटर है या फिर वाकिंग और रनिंग? वॉकिंग तो मतलब ये कोई ट्रेनिंग का प्रोटोकॉल है नहीं। नहीं वो तो ट्रेनिंग है ही नहीं ना क्योंकि वॉकिंग से आपकी बॉडी में स्ट्रेस नहीं आता है। ट्रेन आप करते हो बॉडी को स्ट्रेस देने के
(1:09:37) लिए हम और बॉडी जब उस स्ट्रेस से रिकवर करती है तो ट्रेनिंग का बेनिफिट मिलता है। ओके तो वॉकिंग क्योंकि स्ट्रेसफुल नहीं है हमारे लिए तो इसलिए उसका कोई हेल्थ बेनिफिट नहीं है। जिस हेल्थ बेनिफिट के लिए हम एक्सरसाइज या ट्रेनिंग करते हैं। तो वॉकिंग सिंपली आपको एक एक्टिव रखने का एक तरीका है कि पूरे दिन आप बैठे हुए हो तो वॉक कर लो। थोड़ा बहुत ब्लड सर्कुलेशन इंप्रूव कर जाएगा। हम मेंटली आप अच्छा फील करते हो थोड़ा वॉक करते हो तो हम वह उस पर्पस के लिए है। ओके। वो कोई हेल्थ बेनिफिट नहीं दे रहा है आपको उस तरह से। क्योंकि हेल्थ बेनिफिट आता है
(1:10:07) जब आप ट्रेन करते हो हम हाई इंटेंसिटी पे ट्रेन करते हो। जहां पे आप बॉडी को स्ट्रेस देते हो हम और उससे रिकवर करने के लिए बॉडी फिर कोप अप करती है। हम हम वहां से बेनिफिट आ रहा है ट्रेनिंग का। तो वो ना ही कार्डियो से आपको मिलता है ना ही वॉकिंग से मिलता है। वो एक्चुअली स्ट्रेंथ ट्रेनिंग से मिलता है या कोई भी वैसा इंटेंस वर्कआउट हम जो आपके लिए स्ट्रेनस है बहुत ज्यादा। ओके। तो कार्डियो भी स्ट्रेनस नहीं होता। हम हम वो आपकी बॉडी में फटीग लाता है। स्टनवर्स का मतलब होता है कि आप शॉर्ट पीरियड के लिए कोई वर्कआउट करोगे और आप थक जाओगे।
(1:10:37) आप कंटिन्यू नहीं कर सकते उसे 10 से 15 मिनट 20 मिनट तक। ओके? जैसे कोई भी हैवी वेट हम करते हैं तो उसमें क्या होता है? दो से तीन रेप्स कर पाते हैं मैक्सिमम। बहुत हैवी करते हैं तो हम तो वो हाई इंटेंसिटी ट्रेनिंग होती है। ओके? कार्डियो क्या हो रहा है कि 20-2 मिनट तक आधे घंटे तक हम भागते जा रहे हैं ट्रेड पे। हम तब भी बॉडी थक नहीं रही है। हम तो इससे क्या हो हमारा एक्यूमुलेटिव फटीग तैयार होता है। हम थक रहे हैं। लेकिन प्रॉब्लम क्या है कि हम बहुत लंबे समय ले रहे हैं बॉडी को थक थकाने के लिए। उस तरह से थकाना नहीं है। हमें बॉडी को
(1:11:09) टॉर्चर करना है और देन रिकवर होने के लिए अलऊ करना है। ओके? तो ये फटीग का फॉर्म हम देते हैं जब हम कार्डियो करते हैं तो। ओके? ये गलत है। हम हम और ह्यूमन बीइंग्स कार्डियो करने के लिए नहीं बना है। राइट? लॉन्ग डिस्टेंस रनर्स नहीं है ह्यूमन बीइंग्स। हम ह्यूमन बींग स्प्रिंटर्स हैं। तो जब भी आप स्प्रिंट करते हो तो वो भी हाई इंटेंसिटी है क्योंकि क्योंकि 100 मीटर रेस है ना इस तरह का जो रनिंग होता है वो हाई इंटेंसिटी होता है। ओके तो ये अच्छा होता है। हम कब कभी भी कार्डियो या मैराथन रनिंग ये सब हेल्दी नहीं है। कभी भी नहीं। साइकिलिंग वगैरह भी नहीं।
(1:11:40) नहीं कुछ भी नहीं है सब। ओके। क्योंकि सारा कुछ ये सब मॉडरेट लो टू मॉडरेट इंटेंसिटी पे आप कर रहे हो। ये हाई इंटेंसिटी नहीं है। अगर हाई इंटेंसिटी होता तो आप एक-ए घंटे तक नहीं कर रहे होते उस काम को। हम हम हाई इंटेंसिटी का डेफिनेशन यह है कि आप सस्टेन ही नहीं कर पाओगे लंबे समय तक। दोती मिनट में आप खत्म हो गया। हम स्प्रिंट आप भाग सकते हो 1 कि.मी.
(1:12:01) कंटीन्यूअसली? नहीं। नहीं नहीं स्प्रंटिंग नहीं हो सकता ना। रनिंग हो सकता है। पूरी इंटेंसिटी पे रनिंग करके आप नहीं भाग सकते। स्प्रिंट फॉर्मेट पे आप 1 कि.मी. नहीं भाग सकते हो। आप मैराथन फॉर्मेट पे आप भाग सकते हो। 10 कि.मी. 20 कि.मी. जो सही है नहीं ह्यूमन बॉडी के लिए। मसल लॉस होता है। कार्डियोवस्कुलर हेल्थ कॉम्प्रोमाइज होता है आपका। हम मैराथन रनिंग से तो ये सारे इशज़ हैं। आप कार्डियो हेल्थ के लिए आप करते हो मैराथन। एक्चुअली आपका कार्डियो हेल्थ खराब हो रहा है। ओके। मैराथन करने से। स्विमिंग एज अ एक्सरसाइज बेटर है। एक्सरसाइज नहीं वो तो सिंपली एक
(1:12:35) मैं ये कह सकता हूं कि खुद को एक्टिव रखने का तरीका है। स्विमिंग में भी फिर वो है ना कि आप किस तरह की स्विमिंग कर रहे हो। ओके? कॉम्पिटिटिव वे में कर रहे हो या सिंपली जाके ऐसे ही तैर रहे हो स्विमिंग पूल में। तो वो सब कोई ट्रेनिंग तो नहीं है ना। अब स्विमिंग आप करते हो कॉम्पिटिटिव वे में तो वो फिर हाई इंटेंसिटी हो जाता है। लोगों के काफी सारे ऐसे भी डाउट आते हैं कि यार अगर मैं मीट खाने लगा रेगुलर हम तो कोलेस्ट्रॉल तो नहीं बढ़ जाएगा। हां तो ऐसा होता है क्या? मुझे ऐसा लगता है कि अगर कोलेस्ट्रॉल का डर है हम तो सबसे पहले तो उस डर को खत्म करना होगा।
(1:13:05) हम क्योंकि इसको खाने से यूजुअली बढ़ता ही है कोलेस्ट्रॉल सभी का। हम लगभग हम हम तो आपको सबसे पहले यह समझना पड़ेगा कि कोलेस्ट्रॉल का जो साइंस है हम एक्चुअली कोई साइंस है नहीं हमारे पास और कोलेस्ट्रॉल से कोई हार्ट डिजीज नहीं हो रहा है। कोई प्रॉब्लम नहीं हो रही है। हम तो अगर ये बढ़ता भी है तो हमारे लिए प्रॉब्लम नहीं है। तो उससे डरने की जरूरत नहीं है। मीट खाने से कोलेस्ट्रॉल बढ़ रहा है तो बढ़ने दो। हम उससे कोई प्रॉब्लम नहीं होगी। किसी को भी नहीं। कोलेस्ट्रॉल कोई मतलब बीमारी नहीं है। कोलेस्ट्रॉल की कोई बीमारी नहीं होती ही
(1:13:35) नहीं है। एक्चुअली कोलेस्ट्रॉल से हार्ट डिजीज नहीं होता। हम अगर हार्ट डिजीज किसी को हो रहा है हम वो इसलिए हो रहा है क्योंकि वह मेटाबॉलिकली सिक है इसलिए हार्ट डिजीज हो रहा है। तो मेटाबॉलिकली सिक लोगों का जो कोलेस्ट्रॉल है कई बार नॉर्मल भी हो सकता है। लो भी हो सकता है। हाई भी हो सकता है। तो अगर वो मेटाबॉलिकली सिक है तो किसी भी कोलेस्ट्रॉल के लेवल पे उसको हार्ट डिजीज हो जाएगा। हम अगर होना होगा तो अगर उसके पास वो जेनेटिक्स है तो हार्ट डिजीज वाला हम हम तब वो हो ही जाएगा। उसका कोलेस्ट्रॉल आप कम कितना भी कर लो वो बच नहीं बचा नहीं
(1:14:06) सकते हो आप उसे। हम हम कोलेस्ट्रॉल को कम करके आप हार्ट डिजीज को नहीं बचा सकते हो। अगर वो मेटाबॉलिक डिस्फंक्शन को आपने ठीक नहीं किया और क्योंकि उसके पास अगर जेनेटिक्स भी है तो आप प्रिवेंट नहीं कर सकते हो उस हार्ट डिजीज को। वो उसे होगा ही होगा। हम इसलिए जो एक्चुअल जो चीज है जिसको आपको फिक्स करना है वो है मेटाबॉलिक डिस्फंक्शन। ओके। और वो ठीक कैसे होगा? हाई फैट हाई प्रोटीन डाइट। कार्निवो डाइट। हम वो ये सब कोलेस्ट्रॉल को कम करना और कॉम्प्लेक्स कार्ब्स खाना ये सब से रिजल्ट। कुछ लोग तो ये भी मतलब बोलते हैं कि यार हाई फैट लेंगे तो वेट बढ़ जाएगा।
(1:14:38) कहां बढ़ रहा है? मेरा तो नहीं बढ़ रहा। मतलब ना ये मिसकसेप्शन है ना लोगों का? जैसे मेरा मेरी जो डाइट है हम उसमें ऑलमोस्ट 200 टू 250 ग्राम्स ऑफ़ फैट होता है वन मील में हम और 200 टू 250 ग्राम्स ऑफ़ प्रोटीन होता है सिंगल मील में। हम हम राइट? ओके। तो इतने ग्राम ऑफ प्रोटीन, इतने ग्राम ऑफ़ फैट खा रहा हूं मैं। हम इतना तो मुझे नहीं लगता इंडिया में कोई इस तरह से खा रहा है। हम मुझे नहीं लगता है। तो और यह करते हुए मुझे 5 साल हो गए। हम उसके 5 साल पहले से मैं लो कार डाइट कर रहा हूं। तो ये पूरा लो कार्ब डाइट करते हुए मुझे हो गए हैं 10 साल। अब
(1:15:13) हम हम कोई प्रॉब्लम हो नहीं रही है। वेट बढ़ नहीं रहा है ना ही घट रहा है। हम तो लास्ट 10 इयर्स से मेरा 80 kg है बॉडी वेट। हम हम कोई प्रॉब्लम नहीं है। कहां वेट मेरा स्टेबल बढ़ रहा है। स्टेबल है। वर्कआउट नहीं भी करता हूं तो भी वजन बढ़ता नहीं है मेरा क्योंकि खाना मेरा सही है। हम ओके। सो [नाक से की जाने वाली आवाज़] कुछ लोगों को ना फूड एडिक्शन भी होता है किसी-किसी फूड का स्पेसिफिक फूड का। जैसे कोल्ड ड्रिंक हो गया। हम है ना? या फिर कुछ लोग तो यह भी बोलते हैं कि जीरो जो शुगर वाली जो कोल्ड ड्रिंक होती है उसमें कोई दिक्कत नहीं है। हम
(1:15:46) या फिर कुछ लोग डाइट को पीते हैं। हम तो आपके हिसाब से ये मतलब सही अप्रोच है या फिर इसमें भी दिक्कत होती है। नहीं आपको अगर किसी ये सब चीजों को करने का मन कर रहा है तो कहीं ना कहीं वो जो बिहेवियर है मेरे लिए वो एक्सेप्टेबल नहीं है। हम है ना? अगर आपको यह मन करता है कि मैं यह पी लेता हूं या यह खा लेता हूं थोड़ा सा तो कहीं ना कहीं आप उसी एडिक्शन वाले साइकिल में हो अभी भी। ओके। आप उससे बाहर आपको निकलना है। और उससे बाहर निकलने का ही तरीका मैं बता रहा हूं। कार्नवो [गला साफ़ करने की आवाज़] डाइट। ओके। तो अगर आपकी डाइट अच्छी नहीं है तो
(1:16:22) डेफिनेटली आप वो सब चीज क्रेव करोगे। हम क्योंकि [गला साफ़ करने की आवाज़] जिस डाइट पे आपको न्यूट्रिशनल डेफिशिएंसी होती है हम। उसी न्यूट्रिशनल डेफिशिएंसी की सेटिंग में हम आपको ये सारी क्रेविंग्स आती है। ओके? तो अगर आप डाइट ही ठीक नहीं करोगे तो न्यूट्रिशनल डेफिशिएंसी बनी रहेगी। हम और न्यूट्रिशनल डेफिशिएंसी में स्पेशली जो आयरन है हम प्लस विटामिन बी12 ये दोनों की अगर डेफिशिएंसी होगी आपको तो क्रेविंग बहुत ज्यादा होती है ऐसे लोगों में। ओके इसलिए मैं आयरन को लेकर के ना बहुत ही ज्यादा फोकस्ड रहता हूं कि भाई अपने आयरन लेवल्स को आप चेक करते रहो।
(1:16:56) ओके? क्योंकि आयरन लेवल अगर आपका अब सही नहीं होगा और मैं अपने YouTube वीडियोस में भी आयरन पे ना काफी सीरीज मैंने बनाया है वीडियोस। हम तो मेरे चैनल पे जो लोग भी आएंगे वो देख सकते हैं। आयन पे मेरा सेपरेट एक सेशन है। हम बहुत सारे मल्टीपल सीरीज एवरेज आयन लेवल कितना होना चाहिए? आयन वो तो देखना पड़ेगा। अगर फेरेटिन की हम बात कर रहे हैं। उसमें एक फेरेटिन होता है पैरामीटर हम तो वो फेरेटिन डेफिनेटली मैं बोलता हूं 100 से ऊपर होना चाहिए। ओके? कम से कम हम और वो भी इन द एब्सेंस ऑफ़ इनफ्लेमेशन। तो बहुत सारा ट्रिकी हो जाता है। इतना डिटेल
(1:17:28) में मैं जाऊंगा नहीं। हम मुझे ऐसा लगता है कि वह मेरे चैनल पे जब लोग जाएंगे वही समझ पाएंगे ज्यादा बेटर इस आयरन को। तो अगर आपकी बॉडी में इनफ्लेमेशन नहीं है हम तो उस एब्सेंस में आपका फेरेटिन 100 या उसके ऊपर होना चाहिए। हम अगर इनफ्लेमेशन है तो हो सकता है आपका आयन कम होते हुए भी वो दिखाएगा। बहुत ज्यादा है। कम होते हुए मतलब ब्लड में कम अवेलेबल बायो अवेलेबल फॉर्म नहीं रहेगा वो। हम वो टिश्यू में बस एक जगह कनफाइन रहेगा। ओके? राइट? और इनफ्लेमेशन जब भी होता है तो इसलिए आपका फेरेटिन का लेवल हाई हो जाता है। हम लेकिन वो आयन काम का नहीं है क्योंकि वो
(1:18:07) फेरेटिन मॉलिक्यूल में ना लॉक्ड है। ओके? आयन। तो वो डिफरेंट पार्ट्स ऑफ द बॉडी को मिल नहीं पा रहा है। तो उसमें भी फेरेटिन हाई दिखाता है। लेकिन वो आयन क्योंकि हमें बॉडी को मिल नहीं पाता। इसलिए वो काम का कुछ है नहीं। इसलिए जब तक इनफ्लेमेशन कम नहीं होगा वो आयन रिलीज नहीं होगा उस फेरेटिन से। और डिफरेंट पार्ट्स और सेल्स में वो डिस्ट्रीब्यूट नहीं हो पाएगा। ओके? तो इसलिए उसमें बड़ा ट्रिकी है वो आयरन पैनल। उसमें डिटेल में समझने के लिए मेरे YouTube पे जो जाएंगे वही समझ पाएंगे। तो इसलिए आयरन की कमी और विटामिन बी12 की कमी हमेशा क्रेविंग देता है।
(1:18:40) डिप्रेशन देता है। लो मूड देता है। लो एनर्जी होती है। तो ये सारा कुछ को फिक्स करने के लिए कार्निवोडाइट होता है। विटामिन बी12 इनफ मिल जाएगा आपको। आयन इनफ मिल जाएगा। हम वरना यह सप्लीमेंटेशन वगैरह करने से कोई फायदा नहीं है। आपके जो जितने भी व्यूज आपने दिए कुछ लोगों को हो सकता है कंट्रोवर्शियल लग सकता है। हम जो रिलीजियस बिलीव्स लगते हैं। है ना या तो कोई ऐसा कुछ बैड कमेंट्स या फिर बैड मैसेज नहीं आते कि ये सब प्रमोट करना बंद कर दो या ऐसा कुछ हां बहुत कुछ आता है। कॉल कॉल भी आ जाता है कभी-कभी कि तुम्हारा मैं एड्रेस पता करा रहा हूं।
(1:19:14) ओके है ना पता करता हूं कहां रहते हो तुम। हम् यह सब इस तरह का भी आता रहता है। इस कंट्री में अगर आप मीट प्रमोट कर रहे हो हम है ना तो कुछ लोगों के रिलीजियस बिलीफ्स को हर्ट पहुंचता है या है ना हम और आप हमेशा बोल रहे हो कि भाई कार्नवोरस खाना चाहिए यस और आप इसको साइंटिफिक भी मानते हो हम हम बिल्कुल है ना तो उस कंडीशन में कुछ लोगों को हर्ट फील होगा तो अगर मैं देखूं मेरा काम बड़ा इसलिए हो पा रहा है क्योंकि मैं लोगों को हर्ट कर पा रहा हूं। ओके है ना मुझे उस चीज का शौक ही नहीं है कि मेरी बातों से कोई बहुत ज्यादा सम्मोहित हो जाए या लोग अपना प्यार बरसाने लगे हम
(1:19:55) मेरी बातों पे हम वो सब मेरा कभी टारगेट नहीं होता है मुझे वही चीज बोलना अच्छा लगता है जो सच होता है ओके और उस चीज को जब आप बोलोगे तो मासेस को अच्छा नहीं लगेगा कभी राइट है ना तो भीड़ जो है हम वो इस तरह की बातों को सुनने के लिए तैयार नहीं होती है हम और मुझे भीड़ को भड़काने में मजा आता है हम है ना तो मैं भड़का भड़का कर अपनी ब्रांडिंग कर रहा हूं अगर मैं ये कहूं तो ओके तो एक छोटा सा रैपिड फायर टाइप है है ना अब इसके बाद हम थोड़ा सा एंड करते हैं राइट है ना हालांकि आपके साथ बात करके बहुत मजा आया बहुत कुछ नया जानने को मिला हम है ना
(1:20:33) तो कुछ मैं फूड आइटम का नाम लूंगा उसको आपको रेट करना है आउट ऑफ 10 हम आजकल लोग ओट्स बहुत खाते हैं डाइट में लेते हैं तो उसको क्या रेट करना चाहोगे अगर फूड होता तो मैं रेट करता। फ़ूड नहीं है। वो तो फूड ही नहीं है। अब जबरदस्ती आप बोलोगे कि भाई कुछ भी रेटिंग दे दो तो हां अगर सर्वाइवल स्टैंड पॉइंट से अगर मैं बोल दूं कि हां कुछ दे दो तो मैं एक दो वैसे ही कुछ दे दूंगा कि चलो उसको खा के तुम जीवित तो रह ही सकते हो। [हंसी] ब्राउन राइस ये भी सेम डील वन टू वो लोग बोलते हैं इसको हेल्दी है। ब्राउन हेल्दी हेल्दी कब आप कहते हो? हेल्दी आप
(1:21:06) तब कहते हो जब आप मैदा खा रहे हो पहले। बट इन कंपैरिजन टू टू नॉर्मल राइस। जंक फूड जब आप चिप्स खा रहे हो, बिस्किट खा रहे हो तो वहां से फिर वो थोड़ा हेल्दी हो जाता है ना। ब्राउन राइस आपने ऐड कर लिया आप डाइट में। फैंसी लगता है सुनने में। बस लेकिन ऐसा कुछ नहीं है ना। ब्राउन राइस हेल्दी नहीं है ना? हम ओके दही दही ठीक है। डेरी प्रोडक्ट है। एनिमल प्रोडक्ट है तो मैं बोलूंगा हां बट क्योंकि ये डाइट का आपका बेस नहीं हो सकता स्टिल। तो मैं फाइव सिक्स ऐसे ही कुछ दूंगा। ओके। स्वीट पोटैटो। स्वीट पोटैटो अगेन थ्री ओके घी घी कोई रेटिंग मैं इसको दे नहीं सकता हूं
(1:21:47) क्योंकि घी जो है ना एक कंसंट्रेटेड फैट है कोई फूड नहीं है ये हमारा ओके एक मैकस है बेसिकली एक फैट है ये हम तो अगर हां एंड अगर मैं फैट के सारे अमंग डिफरेंट फैट अगर मैं देखूं हम तो सैचुरेटेड फैट बेस्ट होता है हम तो उस पॉइंट ऑफ व्यू से अगर फैट में हम देखें हां फैट फैट कैटेगरी में फैट कैटेगरी में अगर हम देखें ऑइल से तो मैं घी को बोलूंगा कि हां नाइन के अराउंड बोलूंगा 10 तो हमेशा एनिमल फैट होता है जो टैलो मैं बोलता हूं जो मटन का फैट है या फिर बीफ का फैट है उसका आप घी बना के रखो तो वो 10 ऑन 10 है। बाकी घी और बटर ये सब एट नाइन उस तरह से जाएगा।
(1:22:25) ओके कुछ आउट ऑफ फूड आइटम्स हैं लाइक प्रोटीन पाउडर। प्रोटीन पाउडर अगेन वो डिपेंड करता है वो कि मैं वेजिटेरियन के लिए रेट करूं या नॉन वेजिटेरियन के लिए। तो अगर नॉन वेजिटेरियन है तो मैं प्रोटीन पाउडर को बोलूंगा जीरो। जरूरत ही नहीं है उसकी। जरूरत ही नहीं है। हम अगर कोई वेजिटेरियन है तो मैं बोलूंगा ठीक है। आप ले लो। इसकी तो जरूरत है ही। 8 न या ओके। तो हर चीज का कॉन्टेक्स्ट होता है। कभी भी कुछ भी यूनिवर्सल या जनरलाइज नहीं होता। हम हम फ्रूट्स फ्रूट्स [नाक से की जाने वाली आवाज़] अगेन फाइव ओके फिश फिश मैं सेवन दूंगा ओके मटन
(1:23:09) मटन 10 ओके चिकन चिकन एट ओके मिल्क मिल्क अगेन सिक्स फाइव सिक्स कह रहा हूं मिल्क को तो बहुत लोग रिकमेंड करते हैं कि पियो पियो कैल्शियम होता है उसमें आपको वही मैंने बताया ना डेरी है वो स्टिल तो डेरी आपकी डाइट का बेस हो नहीं सकता कभी ये होना नहीं चाहिए आई मीन तो इसलिए उसको मैं ज्यादा स्कोर दे नहीं सकता हूं मैं स्कोर उसी को ज्यादा दूंगा कि जिसको खा करके आपको ऐसा लगे कि आपका ऑलमोस्ट पूरा न्यूट्रिशनल नीड पूरा हो जाए ओके उसी को मैं स्कोर दे सकता हूं ज्यादा राइट जो हमने बात किया कोल्ड ड्रिंक्स का उसको क्या रेट करोगे वो तो माइनस माइनस में ले लो आप [हंसी]
(1:23:54) डाइट कोक डाइट कोक जीरो ओके मतलब इसकी भी जरूरत नहीं है। जीरो शुगर जीरो स्कोर ओके आपने कहीं स्टेटमेंट दिया था किसी अदर जगह या फिर किसी वीडियोस में मैंने देखा था हम कि आप बोल रहे थे कि जब अनप्रासन हो बच्चे का तब आप चिकन ही खिलाओ हम हमने मटन बोला था वैसे सॉरी मटन खिलाओ जो भी है मीट खिलाओ या मीट खिलाओ या है ना तो और काफी लोग इस पे मतलब भड़के भी थे मैं कमेंट भी देखा था कि यार ये क्या बोल रहे हो ये तो हिंदू धर्म का एक रिचुअल है इसका नाम कैसे ले सकते हो? वो तो मैंने बताया ना कि मैं पर्पसफुली ही करता हूं। मैं भड़काने के लिए ही बोलता हूं इस तरह का
(1:24:36) बयान और क्योंकि वो सच होता है। ऐसा भी नहीं कि सिर्फ मुझे भड़का देना है। जो मैं बात कर रहा हूं वो सच है। हम बुरा लगेगा। हर्ट हो गए, डिसपॉइंट हो गए। हम हम और वही तरीका है मेरा काम करने का। मैं वैसे ही ऑपरेट करता हूं। हम तो जो सही है वो सही है। आपको खिलाना पड़ेगा। हम वही तरीका है खाना खाने का। एक्सक्लूसिव ब्रेस्ट फीड से बेबी बाहर आया। हम अब आप उसे कॉम्प्लीमेंट्री फूड में सबसे पहले उसी चीज को ऐड करोगे। चिकन, मटन। हां बिल्कुल खाना है। खिलाना है भाई। ये दलिया और ओट्स क्यों आ जाता है हर जगह खिचड़ी? ये सब खाना है। वही खिलाते हैं बच्चों को।
(1:25:12) हां। तो बच्चों को छोटा बच्चा है ये लोग। देखो ना अभी देखो क्या हालत हो रही है। मेरे पास 20 साल 22 साल के लड़के आ रहे हैं इरेक्टाइल डेस्टिनेशन लेकर। हम है ना? अभी से प्रॉब्लम है इन लोगों को। तो क्या हालत हो रही है? अगर आप अंडा और मीट नहीं खिलाओगे तो यही हाल होगा। 20 22 साल वालों का भी वही हाल है। जो 50 60 में उनको भी इरिटाइल डिस्फंक्शन है। मतलब लेबिडो है ही नहीं। पर गवर्नमेंट भी तो प्रमोट नहीं कर रहा। पहले तो करता था। पहले तो ऐड भी आते थे मंडे वगैरह के कि संडे हो या मंडे रोज खवंडे ये सब आता था पहले। गवर्नमेंट पब्लिक हेल्थ के लिए थोड़ी ना
(1:25:47) सोचती है। गवर्नमेंट को तो इसलिए बना के रखना है। उनका वोट बैंक बना रहे। हम धार्मिक बातें करेंगी हम कि वो लड़ाई लड़वाएंगी ये हिंदू को मुस्लिम से लड़वाएंगी मुस्लिम को हिंदू से लड़वाएगी उनका मतलब नहीं है आप हेल्दी रहोगे हां गवर्नमेंट का यही काम है बस अपना वोट बैंक तैयार करते हैं ये सब काम करके और जो बेवकूफ लोग हैं वो उन्हीं लोगों के पीछे लगे रहते हैं हम अरे चलो ये जो सरकार है ये प्रो हिंदू है हम ये सरकार है ये हमारे लिए सोचती है हां हमारे लिए सोचती है हम तो आप एंटायर ह्यूमैनिटी के बारे में नहीं सोच रहे हो ना आप अपने धर्म, अपने कास्ट
(1:26:22) के बारे में सोच रहे हो। देखिए [नाक से की जाने वाली आवाज़] आप इंडिया के सारे लोगों का हेल्थ सही कर दो। अपने आप बेटर हो जाएगा। एक्सक्टली। अगर आपका हेल्थ अच्छा है, आप अच्छा सोचते हो तो आपको क्या मतलब है? कोई मुस्लिम है, हिंदू है। आपके आपके अंदर कोई फीलिंग नहीं आएगी ना। किसी के प्रति आप क्यों ऐसा सोचोगे कि वो मुस्लिम है तो वो उसको मैं अच्छे से ट्रीट नहीं करूंगा या कोई हिंदू है तो अच्छे से मैं उसको ट्रीट नहीं करूंगा। ऐसी फीलिंग आती ही इसलिए क्योंकि आप बीमार हो मेंटली। राइट? और मेंटल सिकनेस जो है वो मेटाबॉलिक सिकनेस से ही रिलेटेड है। तो आप इस तरह से
(1:26:52) दलिया, खिचड़ी और मैगी नूडल्स और अक्का नूडल्स और यह सब करोगे हम तो यही हाल होगा। तो मेरा लास्ट क्वेश्चन ये रहेगा हम कि अगर आपको कोई सजेशन देना हो जितने भी इंडियंस हैं हम क्योंकि इंडियंस का ही डाइट सबसे बेकार है। मुझे तो ये ऐसा ही लगता है। एक्सक्ट्ली है ना? या तो आप क्या बोलोगे कि क्या आपको चेंज करना चाहिए? क्या चीजें हैं जो किचन से बिल्कुल हटा देना चाहिए। है ना? आपको हेल्दी रहना है तो हम मुझे मेरा ऐसा मानना है क्योंकि पापुलेशन बहुत बड़ी है हम तो मैं ये कभी नहीं बोलूंगा कि कंप्लीटली ये हटा दो हम आपको ये मानना पड़ेगा कि आपकी डाइट में
(1:27:29) सबसे ज्यादा क्या होना चाहिए। ओके तो आपको अपना राशन ना उस पे काम करना पड़ेगा कि जब भी आप किराने के स्टोर पे जाते हो हम तो किराने के स्टोर पे आप क्या लेते हो? पैकेज्ड फूड लेते हो। फूड बिस्किट मिक्सचर स्नैक्स के लिए कुछ-कुछ चीजें लेते हो प्लस आटा हम राइस यही सब चीजें लेते हो तो ये सारी चीजें अगर आप हटा नहीं रहे हो एटलीस्ट कम कर दे रहे हो इसके इंटेक को हम ठीक है पूरी तरह से कंप्लीटली हटा करके रहना और जीना सभी के बस का नहीं है मेरी तरह सब लोग नहीं खा के जी सकते हैं मेरा एक्सट्रीम एप्रोच है मैं हूं ही एक्सट्रीमिस्ट बाय नेचर
(1:28:05) तो अब इस तरह से तो कोई कर नहीं सकता तो मैं इतना कह सकता हूं कि भाई आप अपने इंटेक को कम करो हम रोटी को, राइस को ये सारे इंटेक आप कम करोगे तो डेफिनेटली आपकी हेल्थ बेटर हो जाएगी। ठीक है? मेरी तरह आप नहीं हो सकते हो। हम लेकिन एटलीस्ट इतना तो हो जाओगे कि आपको मेरी जरूरत ना पड़े। राइट? है ना? तो मेरा वही कहना है कि आप अपने डाइट में कार्बोहाइड्रेट के इंटेक को कम करो और वो रोटी चावल से सबसे ज्यादा आ रहा है। उसको आप कम करोगे तो कंप्लीटली बंद करने की कोई चीज जरूरत नहीं है। आप ओकेजनली कभी खा लेते हो। कभी खिचड़ी मन कर गया खाने का। आप खा लो बना लो। कोई
(1:28:37) दिक्कत नहीं है। लेकिन आप उसे अपनी डाइट का बेस मत बनाओ कि डेली बेसिस पे आप राइस खा रहे हो। डेली बेसिस पे आप 10 121 चपाती खा रहे हो। यह गलत है। बिल्कुल। तो उसको आपको ठीक करना है। दैट्स इट। बस जंक फूड नहीं खाना है। पैकेज फूड नहीं लेना है। कोई भी बॉटल में जो आ रहा है केचप्स हो गया या कुछ भी सॉसेस हो गए हम हम वो सब भी कंज्यूम नहीं करने की जरूरत है आपको। हम हम बस यही है। ओके। बहुत-बहुत थैंक। आप जब तक अपने एप्रोच को चेंज नहीं करोगे, सरकार आपके लिए डायरेक्टली कुछ नहीं करेगी। आप बंद कर दो ना लेना। गेहूं चावल ये सब कम कर दो। सरकार को लगेगा अरे बिक ही नहीं
(1:29:08) रहा है ये सब। वो तो राशन में देते हैं लोगों को। फ्री में देते हैं। तो एडिक्शन को तो वो बढ़ावा देते हैं। चावल चीनी चीनी यस चीनी भी तो एडिक्शन को बढ़ावा दे रहे हैं वो फ्री। वो आपको एडिक्ट रखना चाहते हैं। हम तो यही तो प्रॉब्लम बीमार रखना चाहते हैं आपको। तो अवेयरनेस मैं फैला रहा हूं। तो आप मुझे गाली दे रहे हो। लेकिन जो सच्चाई है वो वही है जो मैं बोलता हूं। हम सही बात है। सो थैंक यू आपका आने के लिए। बहुत-बहुत शुक्रिया। आप इतने दूर से आए यहां पे। तो इसके लिए बहुत-बहुत थैंक यू। है ना? जी। एंड बहुत कुछ सीखा मैंने। बहुत कुछ नया
(1:29:45) जाना कार्नवोरस के बारे में और भी बाकी चीजें है ना कि कैसे हम अपने मेटाबॉलिज्म को फिक्स फिक्स कर सकते हैं। तो जितने भी व्यूअर्स हैं वो भी काफी कुछ सीखेंगे इस वीडियो के थ्रू। सो थैंक यू। थैंक यू। थैंक यू सो मच। थैंक यू।
No comments:
Post a Comment