Are the biggest Myths about Female Body finally exposed? | Dr Nidhi Ji | #TVTVoice | Ep - 175
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Title: Are the biggest Myths about Female Body finally exposed? | Dr Nidhi Ji | #TVTVoice | Ep - 175
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Transcript:
(00:00) नॉर्मल पीरियड जो है वह हर महीने आपको अह 22 डज़ से लेके 35 डज़ के गैप में अगर आता है तो इट इज फाइन। ये बहुत बड़ा मिसकंसेप्शन है कि पीरियड हमेशा एक ही डेट पे आना चाहिए। देखिए सम अमाउंट ऑफ पीरियड पेन जो है वो नॉर्मल है। ठीक है? क्योंकि उसका जो तरीका है वही इस ऐसा है कि उसमें पेन हो सकता है। अगर आपको पीरियड एक बार दो तारीख को आया और अगली बार 28 या 29 तारीख को आया तो दोनों पीरियड के बीच का जो गैप है वो इट इज मोर देन 22 डेज। तो इसका मतलब वो पीरियड नॉर्मल है। एक चीज जो बहुत इंपॉर्टेंट है कंडोम कैसे यूज करना है। कैसे स्टोर करना
(00:42) है और कैसे डिस्कार्ड करना है। यह बताना मैं बहुत जरूरी समझूंगी। चाइल्डहुड ओबेसिटी को प्रिवेंट करिए और लाइफस्टाइल मॉडिफिकेशन कर करिए। हर सफलता के पीछे एक कहानी होती है। हर आवाज के पीछे एक अनुभव। टीवीटी वॉइस [संगीत] उन लोगों की बात करता है जो सोचते हैं अलग। करते हैं बड़ा और जीते हैं मकसद के साथ। यहां जुड़ते हैं एंटरप्रेन्यर्स, डॉक्टर्स, फाउंडर्स, लाइफ कोचेस, हेल्थ एक्सपर्ट्स और वो सभी जो दूसरों की जिंदगी में परिवर्तन लाना चाहते हैं। हम बात करते हैं ग्रोथ, [संगीत] माइंडसेट, पर्पस और इंपैक्ट की उन जर्नीज की जो इंस्पायर करते
(01:20) हैं और उन वॉइसेस की जो दुनिया को एक नया नजरिया देते हैं। टीवीटी वॉइस जहां हर बात बनाए एक सोच, हर वॉइस, एक प्रेरणा। टीवीटी वॉइस, द साउंड ऑफ चेंज। कांटेक्ट अस ऑन 84801064 हेलो एवरीवन वेलकम टू अनदर स्पेशल एपिसोड ऑफ़ टीवीटी। सो टुडे वी आर हियर विद अ स्पेशल गेस्ट हु इज़ अ प्रोफेशनल एंड अ रनाउंड कॉस्मेटिक गायनकोलॉजिस्ट एंड आल्सो शी इज़ एन इनफर्टिलिटी एक्सपर्ट बेस्ड इन साउथ दिल्ली। सो टुडे वी विल बी टॉकिंग अबाउट सो मेनी टॉपिक्स। सो मेनी थिंग्स सच एस डीबंकिंग द मिथ्स अबाउट फीमेल हेल्थ,
(02:05) फीमेल हाइजीन एंड आल्सो वी विल बी टॉकिंग अबाउट दैट हाउ कैन वी मेंटेन आवर सेक्सुअल हेल्थ। सो दिस एपिसोड इज गोइंग टू बी वेरी इंटरेस्टिंग। सो वाच इट टिल दी एंड। सो टुडे वी वेलकम आवर गेस्ट ऑफ़ ऑनर डॉ. निधि। सो लेट्स वेलकम हर। हेलो मैम। हेलो। थैंक यू वेरी मच फॉर इनवाइटिंग मी फॉर द वंडरफुल एपिसोड एंड वी हैव टॉक्ड सो मच अबाउट फीमेल हेल्थ एंड सेक्सुअल हेल्थ एंड फीमेल वेलनेस। सो होप दिस हेल्प्स आवर ऑडियंस एंड थैंक यू वेरी मच फॉर कॉलिंग। सो डॉक्टर निधि एस वी नो दैट यू आर अ प्रोफेशनल गननेकोलॉजिस्ट एंड एन आईवीएफ एक्सपर्ट। सो सबसे पहले मैं आपसे ये पूछना
(02:42) चाहूंगी कि आपकी जर्नी कैसे स्टार्ट हुई? लाइक कोई इसके पीछे मोटिवेशन था? आपका कोई ऐसा बेसिक रीज़न था जिसकी वजह से आपने स्टार्ट किया? अ आई ऑलवेज वांटेड मैं चाहती थी कि मैं एक सर्जन बनूं। अ बट ये चेंज ऐसे हुआ कि एक बार ऐसे हुआ हमारी ओपीडी में इमरजेंसी में एक पेशेंट आई उसके ऑलरेडी दो बच्चे थे और वो कमजोरी कमजोरी और ब्लीडिंग लेकर आई ब्लीडिंग लेकर आई जब हमने हमने सोचा ऐसे ही कमजोरी हो गया बहुत दिनों से ब्लीड कर रही होगी तो तो देखते हैं क्या है व्हेन वी स्टार्टेड एग्जामिनिंग तो एग्जामिनेशन में ही हमें दिखा कि उसके सर्विक्स से अब जो बच्चेदानी
(03:26) का मुंह होता है वहां से एक मांस निकल रहा था और जब इन्वेस्टिगेट किया तो पता चला कि वो सर्वाइकल कैंसर है। ओके तो उसके बाद हमें पता चला कि ये सारे सिम्टम्स जो होते हैं उसको सेक्स के बाद ब्लीडिंग उसको इंटरमेंस्ट्रुअल ब्लीडिंग बीच-बीच में पेन फाउल स्मेलिंग डिस्चार्ज मतलब वजाइनल डिस्चार्ज आ रहा था जो स्मेली था। यह सारी चीजें उसको दोती साल से हो रही थी और सबने बोला है बच्चा हुआ है छोटा है इस वजह से यह सारी चीजें हो रही हैं और उसको कभी भी डॉक्टर के पास नहीं ले जाया गया उसको वो भी बहुत कीन नहीं थी कि डॉक्टर के पास ही ले जाया जाए कभी उसका पेप्समियर नहीं हुआ
(04:09) था जबकि उसकी दो डिलीवरी हुई थी हां जी तो वो अस्पताल तो आई होगी लेकिन उसका कभी पैप्सम्मियर नहीं हुआ था और अर्ली साइंस जानने का उसके पास कोई तरीका नहीं था, कोई अवेयरनेस नहीं था और फाइनली वी कुड सेव हर बट बहुत बड़ी सर्जरी के बाद और कीमो रेडियोथरेपी के बाद तो वो एक पॉइंट था जब मुझे लगा नहीं हम आवर फीमेल नीड्स मोर अवेयरनेस। फीमेल मोर डॉक्टर्स जो फीमेल हेल्थ इशज़ है वो बहुत प्रिवेलेंट है और अवेयरनेस नहीं है। सो दैट वाज़ द डे जब मैंने डिसाइड किया कि नहीं सर्जरी नहीं आई हैव टू गो फॉर गायनी और गायनी का एक सबसे गायनेकोलॉजी ऑब्सन
(04:53) गायनी का एक बहुत बड़ा पार्ट है कि यू आप सर्जरी भी करते हैं। हम जो आप मेडिसिन के डॉक्टर की तरह देखते भी हैं और इलाज भी करते हैं और उसके साथ आप सर्जरीज भी करते हैं बहुत सारे। एक्सक्ट। सो दैट मेड माय जर्नी। परफेक्ट। परफेक्ट डॉक्टर निधि। सो डॉक्टर निधि व्हाट डू यू थिंक कि आपके पास काफी क्लाइंट्स आते हैं एंड सबके अलग-अलग इश्यूज होते हैं। राइट? सो अगर मैं आपसे पूछूं कि सबसे उनका मेजर इशू कौन सा होता है? तो वो क्या रहेगा? आजकल ये ना वेरिएशन होता रहता है। आजकल जो सबसे ज्यादा देखने को मिल रहा है वो है पीरियड इर्रेगुलरिटी का इशू।
(05:32) पीसीओएस, हाइपोथायरॉइड और इन सब की वजह से जो पीरियड इर्रेगुलरिटी होती है, एक्सेसिव वेट गेन करने से जो पीरियड इर्रेगुलरिटी होती है, उनका इशू बहुत ज्यादा आ रहा है। और दूसरा इनफर्टिलिटी इनफर्टिलिटी इज ऑन द ऑल टाइम हाई। रीज़ कि शादी का ज्यादा हो गया है। शादी के बाद भी प्लान करने का जो एज है वो शादी के बाद भी पीपल नीड टू टेक टाइम टू एडजस्ट इन देयर मैरिज। तो उन सब वजह से क्या हो गया है कि शादी कीज और बच्चा पैदा करने की बढ़ गई है। स्मोकिंग है उसकी वजह से भी इनफर्टिलिटी काफी बढ़ गया है। तो पीरियड आई वुड से कि पीरियड इर्रेगुलरिटी एंड इनफर्टिलिटी जो
(06:18) सबसे कॉमन जो हमारे पास पेशेंट्स आते हैं वो ये देखा गया है। ओके गॉट इट। सो जैसे कि अभी आप पीरियड्स के बारे में बात कर रहे हैं। हमारी मेंुअल साइकिल के बारे में बात कर रहे हैं। सो आपको क्या लगता है कि आपके अकॉर्डिंग ऐसी कैसी चीजें मतलब जो हम पीरियड्स के दौरान ऐसी चीज को नेगलेक्ट करते हैं जो हमें नहीं करनी चाहिए। बट स्टिल हम कर रहे हैं। देखिए नेगलेक्ट करने की जब तक बात होती है तो बहुत सारी चीजें हैं। एक तो हम पीरियड इर्रेगुलरिटी को बहुत नेगलेक्ट करते हैं। इर्रेगुलरिटी को नेगलेक्ट करना मतलब पहले तो सबसे इंपॉर्टेंट उसके लिए यह जानना है
(06:53) कि रेगुलर पीरियड और नॉर्मल पीरियड क्या है? नॉर्मल पीरियड जो है वो हर महीने आपको 22 डेज से ले 35 डेज के गैप में अगर आता है तो इट इज फाइन। यह बहुत बड़ी मिसकंसेप्शन है कि पीरियड हमेशा एक ही डेट पे आना चाहिए। जरूरी नहीं है आपका जो पीरियड लास्ट आया था उससे एक हफ्ते पहले या एक हफ्ते बाद तक भी आपका पीरियड आता है देन इट इज नॉर्मल। सम अमाउंट ऑफ पेन इन द पीरियड इज नॉर्मल। बट वह पेन एक्सेसिव है तो वह नॉर्मल नहीं है। एक पीरियड जो होता है वह दो दिन किसी को दो दिन का हो सकता है और मैक्सिमम किसी को 7 दिन तक हो सकता है। किसी का पीरियड अगर दो दिन से कम का होता
(07:36) है या 7 दिन से ज्यादा का होता है तो वो नॉर्मल नहीं है। तीसरी पॉइंट तीसरा पॉइंट कि आप दिन में तीन से चार पैड बदलते हैं दैट इज नॉर्मल। एक्सेसिव पीरियड तब कहते हैं जब आपको हर एकद घंटे पर अपना पैड चेंज करना पड़े। सैनिटरी नैपकिन चेंज करना पड़े या रात में उठ के आपको सैनिरी नैपकिन चेंज करना पड़े या आपको बड़े-बड़े क्लॉट्स पास हो रहे हैं पीरियड्स के ब्लड के साथ तो वो एब्नॉर्मल है। एक्सेसिव ब्लीडिंग है। इसमें आपको डॉक्टर से मिलना चाहिए। कभी कबभार ऐसा होता है स्कटी पीरियड्स होते हैं। स्कटी पीरियड मतलब कि आप मुश्किल से स्पॉटिंग हो
(08:19) रही है। थोड़ा बहुत आपके पैड पे कोई ब्लड दिख रहा है या एक ही पैड आपने पूरे दिन में भी वो सोक नहीं हुआ तो दैट इज दैट लुक्स लाइक स्कटी पीरियड। और इन सब केसेस को इग्नोर नहीं करना चाहिए। वो आपको अपने डॉक्टर से जाके मिलना चाहिए। अगर आपका पीरियड 21 दिन से पहले आ जाता है या 35 डेज के बाद आता है। तो भी आपको अपने डॉक्टर से मिलने की जरूरत है। ओके। ओके। जैसे कि अगर हम बात करें कि वन मंथ पे किसी को दो बार पीरियड्स आ रहे हैं। हां ये तो बहुत ही टिपिकल क्वेश्चन है। अब जैसा कि मैंने समझाया पीरियड किसी को 22 दिन से ले 35 दिन के बीच में अगर आता है
(09:00) तो वो नॉर्मल है। तो अगर मैंने 22 दिन की बात की या 23 दिन की बात की तो उसमें क्या होता है कि एक पीरियड अगर किसी को दो तारीख को आया है और अगला पीरियड अगर 28 तारीख को आता है तो हम उसको एबनॉर्मल नहीं बोलेंगे। ओके। बट अगर किसी को वही पीरियड दो तारीख को आता है और फिर 20 तारीख को आता है तो फिर हम उसको एबनॉर्मल कहेंगे क्योंकि दोनों पीरियड का गैप ओनली 18 डेज का है। तो यह जानना बहुत जरूरी है कि एक महीने में भी दो बार पीरियड आ सकता है। इट कैन बी नॉर्मल बट उनके बीच का गैप जो है वो कम से कम 22 टू 23 डेज होना चाहिए। हम गॉट इट। सो डॉक्टर निधि जैसे कि अभी आप
(09:41) पहले पीरियड्स के बारे में बात कर रहे थे। सो अगर मैं आपसे पूछूं कि जैसे कि अगर हम बात करें कि में्रुअल साइकिल के दौरान अगर आप यह बता सकते हैं कि ऐसी कौन-कौन सी चीज है जो कि हम नेगलेक्ट करते हैं एज वुमेन तो वो क्या रहेंगी? देखिए जो सबसे ज्यादा हम नेगलेक्ट करते हैं वो है इर्रेगुलर पीरियड और पीरियड पेन। तो इर्रेगुलर पीरियड तो मैंने बता दिया बट उसके लिए पहले रेगुलर पीरियड जानना जरूरी है। तो रेगुलर पीरियड जो होता है वो आपके दो पीरियड का गैप जो होना होता है वो 21 दिन से लेके 35 दिन के बीच में होना चाहिए। ठीक है? अगर 21 दिन से पहले पीरियड आ रहा
(10:17) है या 35 दिन के बाद आ रहा है तो वो एबनॉर्मल है। ठीक है? एक पीरियड जो होना चाहिए वह कम से कम दो दिन या ज्यादा से ज्यादा 7 दिन तक आपको ब्लीड करना चाहिए। अगर आपका आपकी ब्लीडिंग जो है वो दो दिन से कम हो रही है या आपका जो पीरियड है वो सात दिन से ज्यादा हो रहा है तो वो एबनॉर्मल है। अब बात करेंगे ब्लीडिंग कितनी होनी चाहिए? अगर ब्लीडिंग आप दिन में तीन से चार पैड चेंज कर रहे हो तो वो नॉर्मल है। ठीक है? एबनॉर्मल हम उसको तब बोलेंगे अगर आपको हर दो-ती घंटे पर पैड चेंज करना पड़ा है या रात में उठ के पैड चेंज करना पड़ा है या आप पीरियड के
(11:01) ब्लड के साथ बहुत सारा ब्लड क्लॉट पास कर रहे हो तो वो एब्नॉर्मल है मतलब कि वो एक्सेसिव ब्लीडिंग है। एक होता है स्केंटी ब्लीडिंग। स्कैंटी ब्लीडिंग मतलब कि आपको पूरे दिन एक ही पैड आपने सैनिटरी नैपकिन लगाया हुआ है और उसमें स्लाइटली कोई ब्लीडिंग है। पूरे दिन में भी एक पैड सूख नहीं हुआ। तो वो भी एब्नॉर्मल है। तो यह हुए इर्रेगुलर पीरियड्स इसको इससे अगर कुछ भी डिफरेंट है तो आपको डॉक्टर के पास जाने की जरूरत है। दूसरी बात हुई कि जो होता है पीरियड पेन देखिए सम अमाउंट ऑफ पीरियड पेन जो है वो नॉर्मल है। ठीक है? क्योंकि उसका जो तरीका है वही ऐसा
(11:42) है कि उसमें पेन हो सकता है। बट अगर कोई भी पेन ऐसा हो जो पेन किलर खाने के बाद भी आपके लाइफस्ट को डिस्टरप्ट कर रहा हो। आपके वह तीन-चार दिन की प्रोडक्टिविटी घटा रहा हो। इतना पेन हो रहा हो आपको तो वह नॉर्मल नहीं है। उसमें आपको अलग-अलग तरह की प्रॉब्लम्स हो सकती हैं। हो सकता है कि एंडोमेट्रियोसिस हो। हो सकता है कि पीसीओडी हो। हो सकता है कोई फाइब्रॉइड हो। तो इन सब केसेस में आपको डॉक्टर से मिलने की जरूरत है। हम अभी जैसे डॉक्टर निधि आप कह रहे हैं कि अगर किसी को फॉर एग्जांपल अनबेरेबल पेन हो तो उस टाइम पर कुछ लोग ये भी करते हैं कि
(12:19) वो मेडिसिंस लेते हैं अलग-अलग तो आपको क्या लगता है कि उस टाइम पे मेडिसिनस लेना सेफ रहता है हमारे लिए। देखिए पेन जैसा कि मैंने कहा सम अमाउंट ऑफ पेन जो है वह पीरियड में होता है। अगर आपको उससे ज्यादा पेन है तो आप पेन किलर ले सकते हैं। बट वो पेन किलर आप डॉक्टर की एडवाइस पे लेंगे। ठीक है? बिना डॉक्टर के एडवाइस के कोई कुछ भी कोई भी दवा जो होती है वो बिना डॉक्टर के एडवाइस के नहीं लेना चाहिए। अगर डॉक्टर ने आपको पेन किलर दिया है और जिससे आपको दिन में एक या दो खाने से आपका पीरियड का पेन कम हो जाता है एंड यू आर एबल टू डू
(12:55) योर डे टू डे थिंग्स तब वो नॉर्मल है। अगर इससे बहुत ज्यादा होता है तो यू शुड बी इन्वेस्टिगेटेड। आपका अल्ट्रासाउंड होने की जरूरत है। आपका एग्जामिनेशन होने की जरूरत है। आपको बेसिकली डॉक्टर के पास जाना पड़ेगा। गॉट इट। ओके। सो जैसे कि अभी आप बता रहे थे कि अगर मान लीजिए फॉर एग्जांपल कि किसी को वन मंथ में दो बार पीरियड्स हो रहे हैं तो उस टाइम पर ये चीज मतलब अबनॉर्मल होगी तब भी देखिए मंथ में दो बार पीरियड ये बहुत ही कॉमनली पूछा गया सवाल है। मंथ में दो बार पीरियड का मतलब होता है कि अगर अगर आपको पीरियड दो एक बार दो तारीख को आया और अगली
(13:33) बार 28 या 29 तारीख को आया तो दोनों पीरियड के बीच का जो गैप है वो इट इज मोर देन 22 डेज। तो इसका मतलब वो पीरियड नॉर्मल है। अगर वही आपको 2 तारीख को आया और फिर 18 तारीख को आ गया तो दोनों पीरियड के बीच का गैप जो है वो 16 दिन ही है। इसका मतलब कि वो एबनॉर्मल है। तो कभी भी ऐसा हो कि पीरियड में गैप जो है वो 21 दिन का से कम हो तो वो एबनॉर्मल है। अगर उससे ज्यादा है और एक ही महीने में वो दोनों पीरियड आ रहे हैं तो वो नॉर्मल है। ओके गॉट इट। सो डॉक्टर निधि अगर जैसे कि मैं पूछूं कि बहुत सारे ऐसे वुमेन है जो कि पीसीओडी पीसीओएस से भी सफर करते हैं।
(14:16) राइट? सो ऐसे कौन से हमारे मेजर फैक्टर्स रहते हैं जो कि इन चीजों को ट्रिगर करते हैं तो वो क्या होंगे हमारे? देखिए पीसीओडी पीसीओएस अगर आप पूछे तो पिछले 10 साल में उसका इंसिडेंस बहुत ज्यादा बढ़ा है। और अब लगभग ऐसा हो गया है कि अराउंड 30% इंसिडेंस हो गया। 30% मतलब हर तीन में से एक महिला को या गर्ल को पीसीएस होने के चांसेस हैं। अब इसका इंसिडेंस क्यों बढ़ा है? सबसे ज्यादा जो बढ़ा है रीजन है वो है लाइफस्टाइल फैक्टर। चाइल्डहुड ओबेसिटी बहुत ज्यादा है। बाद में भी प्यूबर्टी के टाइम पे बढ़ने वाला भी वेट जो है वो भी बहुत ज्यादा हो गया है।
(14:57) तो ये पहला फैक्टर है जो लाइफस्टाइल डिस्टरबेंस जो कि बचपन में ही जंक फूड और इसकी जो हैबिट है वो काफी ज्यादा देखने को प्रिपयर्ड फूड और इसकी मात्रा काफी बढ़ गई है। लैक ऑफ एक्सरसाइज हो गया है। तो एक्सरसाइज की कमी काफी बढ़ गई है। स्क्रीन पे आप अभी देख रहे हैं पोल्यूशन में ऑनलाइन क्लासेस हो रहे हैं। तो बच्चे स्कूल सिर्फ क्लासेस करने तो नहीं जाते वहां खेलते हैं और बहुत सारी एक्टिविटीज करते हैं। तो उस तरह की चीजें जो है वो काफी बढ़ गई हैं। तो एक तो लाइफस्टाइल फैक्टर और ओबेसिटी है। दूसरा जो बहुत इंपॉर्टेंट फैक्टर है वो यह है कि
(15:38) फैमिली हिस्ट्री ऑफ़ डायबिटीज। हम अगर किसी के पेरेंट्स को डायबिटीज है या फैमिली में डायबिटीज है या उनकी मदद को पीसीओएस या डायबिटीज रहा हुआ है तो बच्चे में इसके आने के चांसेस काफी बढ़ जाते हैं। ऐसा जरूरी नहीं है कि हर उस फीमेल को पीसीओएस हो जिसकी मदर को डायबिटीज या पीसीओएस है। बट यस अगर उनकी मदर को या फैमिली में किसी और को डायबिटीज है और उनके मदर को पीसीओएस रहा है या मदर ओबीज रही है तो बच्चे में या उस उनके डॉटर में होने के चांसेस काफी बढ़ जाते हैं। बट इट कैन बी कंट्रोलोल्ड अगर बचपन से उसको मॉडिफाई लाइफस्टाइल फैक्टर से अगर इंप्रूव
(16:20) किया जाए तो जरूरी नहीं है कि उनमें होगा। तो ये दो फैक्टर्स बहुत ज्यादाेंट है। ओके ओके एंड डॉक्टर निधि आल्सो मैं आपसे क्वेश्चन जरूर पूछना चाहूंगी कि आपको क्या लगता है कि जैसे कि अगर हम अपनी लाइफ स्टाइल के बारे में बात करें तो उसमें ऐसे क्या चेंजेस होने चाहिए या फिर उसमें ऐसा क्या लूप होल है जिससे हमारी अगर इन फ्यूचर जो फर्टिलिटी है उसको भी काफी हार्म पहुंचा सकता है। काफी इश्यूज आ सकते हैं। देखिए लाइफस्टाइल फैक्टर जैसे एक ऑप्टिमम वेट मेंटेन करना एक ऑप्टिमम बीएमआई मेंटेन मेंटेन करना बहुत ज्यादा जरूरी है जो जिसके लिए कोई दवा नहीं चाहिए
(16:58) जी ठीक है तो बचपन से ये और एवरीथिंग स्टार्ट्स इन द अर्ली एज वो आपको ज्यादा दिन तक आपके साथ रहता है और वो हैबिट्स लाइफ लॉन्ग आपके साथ रहती है। तो जो एक है जो नॉर्मल इंडियन फूड हुआ करता था जब हम छोटे थे तो वो कांसेप्ट कि घर का खाना खाना है। कार्बोहाइड्रेट का अमाउंट कम रखना है। प्रोटीन और विटामिंस और मिनरल्स का अमाउंट जो है वो थोड़ा बढ़ा के रखना है। फैट का अमाउंट कम रखना है। कम से कम मिनिमम कुछ एक्सरसाइज हैं जो हमें करने हैं। बचपन में बच्चों को खेलना लेस स्क्रीन टाइम। स्क्रीन टाइम एक बहुत बड़ा फैक्टर हो गया है आजकल के ऐज में।
(17:40) जो वो होता है कि टीवी देख के खाना या मोबाइल देख देख के खिलाना बच्चों को वो आई नो कि बहुत डिफिकल्ट हो गया है आजकल पेरेंटिंग और बहुत डिफिकल्ट हो गया है बच्चों को पालना बिकॉज़ ऑफ लॉट्स ऑफ एक्सपोज़र पेरेंट्स जो दोनों होते हैं मोस्ट ऑफ द टाइम वर्किंग होते हैं। बट देखिए जो नीव आप आज बचपन में डाल रहे हैं उसी पे आपके बच्चे की बिल्डिंग बनेगी। तो वह बहुत ज्यादा जरूरी है किेंस ऑफ वर्कउ बचपन में बच्चों को तो आप वर्कउ करने के लिए नहीं खेलोगे कहोगे तो उनको आउटडोर एक्सपर्ट स्पोर्ट्स में डालना बहुत ज्यादा जरूरी है। आउटडोर स्पोर्ट्स में
(18:18) डालिए। बच्चों को रोज शाम को नीचे जहां भी आपका प्लेग्राउंड है उसमें खेलने जाने के लिए एनकरेज करिए। तो यह सारी चीजें आपको बचपन से डालनी पड़ेंगी। फिर जो जंक फूड या आउटसाइड फूड है आप कंप्लीटली उसको रिप्लेस नहीं कर सकते क्योंकि तब बच्चे को बहुत बार फील होने लगता है कि हमारे ही पेरेंट्स बहुत स्ट्रिक्ट हैं तो उसका वे है आप उनके सब्स्टट्यूट्स अपने घर में बनाना सीखिए जैसे नूडल्स है तो आप आटा नूडल्स यूज कर सकते हैं या अब अब तो YouTube के जमाने में यह बहुत अच्छा ऑप्शन हो गया है। यू कैन फाइंड हेल्थियर ऑप्शंस ऑफ़ सिमिलर थिंग्स। अगर आप किसी मैगी ही की
(18:56) बात कर रहे हैं तो आप मैगी का मसाला यूज़ कर लीजिए और नूडल कुछ और यूज़ कर लीजिए। तो इस तरीके से आप बैलेंस कर सकते हैं। आप चीजें हैं जो अपनी तरफ से इन्वेंट कर सकते हैं। थोड़ी और वो बहुत मुश्किल नहीं है। आपके बच्चों को यह फील नहीं होगा कि हम पे यह थोपा जा रहा है। कुछ भी आप बनाते हैं। अगर आप नूडल्स ही बना रहे हैं या आई एम जस्ट गिविंग पास्ता ही बना रहे हैं। तो पास्ता के भी अब आटा का पास्ता आता है। मतलब मिलने लगा है। कुछ आप घर पे भी बना सकते हैं। तो ऐसी चीजें चीज के बदले आप किसी और चीज जहां पर आप सैंडविच में चीज यूज कर रहे हैं या बटर यूज कर रहे हैं आप
(19:32) हंग कर्ड यूज कर सकते हैं। तो हर चीज का हेल्थियर ऑप्शन अवेलेबल है। आपको उसके बारे में ध्यान देना चाहिए। और हमारे प्रधानमंत्री ने भी कहा है कि आप 10% जो अपना कुकिंग ऑयल है कुकिंग ऑयल का अमाउंट जो आप दाल में, सब्जी में और इसमें यूज करते हैं उसको अगर आप 10% भी उनकी बात मान के भी कम करेंगे तो भी बहुत ज्यादा ओबेसिटी का जो इंसिडेंस है इंडिया में वो कम हो जाएगा। ठीक है? तो एक तो ये हो गया। उसके बाद अब अगर हम इनफर्टिलिटी की बात करें तो इनफर्टिलिटी में एक स्मोकिंग का इंसिडेंस बहुत बढ़ गया है। जो फीमेल स्मोकिंग पहले उतना नहीं देखा
(20:10) जाता था। देखिए मेल और फीमेल दोनों ही स्मोकिंग इंपॉर्टेंट है। बट फीमेल स्मोकिंग देखा गया है इन द लॉन्ग रन जो है वो ज्यादा हैंपर करती है। बिकॉज़ वी आर बोर्न विद फिक्स नंबर ऑफ एग्स। वो अगर डैमेज होते हैं तो वो फिर रिप्लेस नहीं होते। जो मेल के स्पर्म की साइकिल होती है वह तीन महीने में हर बार वो रिप्लनिश होता रहता है। फिर नया स्पर्म बनता है। बट फीमेल्स आर बोर्न विद फिक्स्ड नंबर ऑफ एग्स। तो ऐसे में यह होता है कि उनके एग्स पे वो ज्यादा हार्मफुल होता है। ऐसा मैं प्रमोट नहीं करती कि मेल में स्मोकिंग होना चाहिए। बट वी शुड थिंक ऑफ वाइल स्टार्टिंग
(20:49) स्मोकिंग। और जो अवेयरनेस है यह बहुत ज्यादा फैलने की जरूरत है। और स्मोकिंग से और भी बहुत सारी चीजें होती है। आपकी एजिंग जल्दी होती है। आपका मेनोपॉज जल्दी आता है। तो ये सब हमारे बच्चों को नहीं पढ़ाया जाता है। नहीं सिखाया जाता है। तो ये दो चीजें हैं लाइफ स्टाइल स्ट्रेस जो लेट नाइट सोना। हम रात सोने के लिए बनाया गया है और दिन जागने के लिए बनाया गया है। अगर हम उसको फॉलो नहीं करते हैं तो मेलाटोनिन करके एक हॉर्मोन होती है हमारी बैड बॉडी में जो डिसररप्ट होने लगती है और वो बहुत सारे हॉर्मोनल इमंबैलेंसेस कॉज करती है। तो वो
(21:24) भी लाइफस्टाइल मॉडिफिकेशन में ही आता है। गॉट इट। एंड आल्सो डॉक्टर निधि मैं ये भी चाहूंगी कि आप हमारी ऑडियंस को कोई टिप्स दें जिनकी मदद से वो अपनी हाइजीन को अपनी वजाइनल हेल्थ को मेंटेन कर सके। सो वो क्या टिप्स रहेंगी? देखिए वजाइनल हाइजीन के बारे में दो जो इंपॉर्टेंट चीजें हैं। पहला तो ये है कि कोई इंटिमेट वॉश या कोई फ्रग फ्रेगरेंस वाली जो हजीन वॉश सो कॉल्ड हाइजीन वॉश है उसका इस्तेमाल ना करें। जो इंपॉर्टेंट है आपका वाइना इज अ सेल्फ क्लींजिंग ऑर्गन। उसके अंदर गुड बैक्टीरियास होते हैं जो उसके हाइजीन का टेक केयर करते हैं। तो आपको अंदर में
(22:09) सिर्फ नॉर्मल पानी से वॉश करना है। वो भी बहुत ज्यादा नहीं करना है। देखा गया है कि डशिंग का इंसिडेंस बहुत बढ़ गया। लशिंग मतलब जो आपका हेल्थ होता है उससे हम वाइना को अंदर की तरफ भी वाइना के अंदर भी बहुत क्लीनिंग करते हैं। उस क्लीनिंग की जरूरत नहीं है। वहां पे बहुत सारे गुड बैक्टीरिया होते हैं जो आपके वाइना का पीएच एसिडिक पीएच मेंटेन करते हैं जो कि वाजाइनल इंफेक्शन के प्रिवेंशन में बहुत इंपॉर्टेंट फैक्टर है। जब आप वो डशिंग करते हैं या बार-बार वाइना के अंदर क्लीन करते हैं तो वह बैक्टीरिया वाश आउट हो जाते हैं। तो पहला पॉइंट तो वाइना के अंदर
(22:47) कुछ क्लीन नहीं करना है। बाहर आप जो बाहर का लेबिया और जो एक्सटर्नल जेिटेलिया हम कहते हैं उसको आप नॉर्मल पानी से साफ कर सकते हैं और माइल्ड बेबी सोप वगैरह आप यूज कर सकते हैं। सो दैट इज फाइन। और सिर्फ बाहर करना है। अंदर नहीं करना है। एक्स्ट्रा टिप कोई इंटिमेट हाइजीन के लिए आपको। आपको हां अंडरगारमेंट्स आपको लगता है कभी कि थोड़ा ज्यादा डिस्चार्ज हो रहा है तो आप अपने अंडर गारमेंट्स इवनिंग में भी एक बार चेंज कर लें। जैसे ह्यूमिडिटी होती है, बारिश का मौसम होता है या गर्मी का मौसम होता है। तो ह्यूमिडिटी की वजह से जो होता है
(23:25) वो नीचे काफी पसीना आ जाता है तो और कभी डिस्चार्ज भी ज्यादा हो जाता तो उन सब टाइम पे आप एक बार इवनिंग में भी अपना अंडरगारमेंट चेंज करें और ब्रीदेबल अंडरगारमेंट्स कॉटन वेयरिंग कॉटन अंडरवेयर्स आर वेरी वेरीेंट या गॉट इट परफेक्ट। काफी अच्छी टिप्स थी। आई होप हमारी ऑडियंस के लिए भी इतनी हेल्पफुल हो टिप्स। सो डॉक्टर रिधि आजकल हम सोशल मीडिया पर बहुत सारा कंटेंट कंज्यूम कर रहे हैं। सो उसमें कई सारी चीजें दिखाते हैं। जैसे कि सेक्सुअल हेल्थ की भी अगर हम बात करें तो कई सारी रील्स हम देखते हैं। तो अगर मैं आपसे पूछूं कि आप भी सोशल मीडिया देखते
(24:00) होंगे कभी-कभी जब आपको टाइम मिलता होगा। नहीं नहीं मैं तो सोशल मीडिया पे बहुत रेगुलर हूं। आई कैन नॉट कॉल मसेल्फ एन इन्फ्लुएंसरर। बट अगर सेमी इनफ्लुएंसरर टाइप की कोई टर्मिनोलॉजी होगी तो आई ट्राई टू गिव दैट गिव दोस कंटेंट। एक्सक्टली एक्सक्टली। सो डॉक्टर निधि जैसे कि अभी हम सोशल मीडिया के पहले बारे में बात कर रहे थे तो वहां पे हम जैसे कि कई सारी चीजें सुनते हैं कि अगर हम बात करें सेक्सुअल हेल्थ की या फिर अगर सेक्स रिलेटेड टॉपिक के बारे में बात करें तो हम यह सुनते हैं कि जो कंडोम्स होते हैं वो हमें इतना प्लेजर नहीं दे पाते। अगर हम जैसे कि
(24:35) अनप्रोटेक्टेड सेक्स करें उस टाइम पर तो वो हमें ज्यादा प्लेजर देगा। तो आपको क्या लगता है कि ये चीज सही है कि नहीं? देखिए ये तो आपने काफी पुराने जमाने वाली बात कर दी। अब देयर आर डिफरेंट काइंड्स ऑफ कंडोम जो बहुत थिन कंडोम्स आते हैं। उसके अलावा डॉटेड कंडोम्स आते हैं और बहुत तरह के कंडोम आते हैं। वो इक्वली प्लेजर देते हैं एंड ज्यादा भी दे सकते हैं। अब देखिए कंडोम इज नॉट अ रिप्लेसिबल थिंग। हम यह बहुत इंपॉर्टेंट चीज है जो आपको सेक्सुअली ट्रांस सिर्फ प्रेगनेंसी से नहीं सेक्सुअली ट्रांसमिटेड डिजीजसेस से बचाता है। सो व्हनेवर यू आर नॉट इन अ फिक्स्ड रिलेशन
(25:17) या फिक्स्ड रिलेशन में भी इफ यू आर यू आर नॉट मैरिड या आप दोनों ही चीजों में या तो आप प्रेगनेंसी नहीं चाहते हैं या आप सेक्सुअली ट्रांसमिटेड डिजीज नहीं चाहते हैं तो आपको कंडोम यूज़ करने की जरूरत है। अ जो कंडोम नहीं लगाने से आपको बीमारियां हो सकती हैं। इसके बारे में काफी कम लोग बात करते हैं। उसमें जो सबसे बड़ी बीमारी है जिसके नाम से सब डर जाते हैं। दैट इज एचआईवी और एड्स। जो जानलेवा हो सकता है। हेपेटाइटिस बी हो सकता है। आपको हेपेटाइटिस सी हो सकता है आपको। यह सारी जानलेवा बीमारियां हैं। उसके अलावा आपको सिफलिस हो सकता है। आपको
(25:58) गोरिया हो सकता है। बहुत सारी बीमारियां आपको इवन सर्वाइकल कैंसर या पेनाइल कैंसर पेनिस का कैंसर हो सकता है। ये बातें जानना बहुत जरूरी है इससे पहले कि हम प्लेजर के बारे में जाने। सो ऑल आवर टीनएजर्स, ऑल आवर यंग पपुलेशन शुड बी टॉट दिस। और धीरे-धीरे हम लोग बात भी कर रहे हैं जो सेक्स एजुकेशन की सेक्स एजुकेशन की बात स्कूलों में शुरू हो गई और बहुत अच्छी चल रही है। बट उसको करिकुलम में अभी भी इंक्लूड नहीं किया गया है। दे कॉल एजुकेटर्स फॉर काउंसिलिंग। अलग हम भी जाते हैं काउंसिलिंग के लिए। लेकिन अभी तक करिकुलम में नहीं आया। तो हमारे बच्चों को बहुत
(26:40) यंग एज से यह बताना बहुत जरूरी है कि कंडोम या एक बैरियर जो है वह बहुत ज्यादा जरूरी है। बिकॉज़ जो जेाइटल फ्लूइड्स होते हैं, बॉडी फ्लूइड्स होते हैं वो बहुत डेंजरस बीमारियां कराते हैं। और यस प्लेजर कम नहीं होता है। यू नीड टू एक्सप्लोर मोर। और एक चीज जो बहुत इंपॉर्टेंट है कंडोम कैसे यूज करना है, कैसे स्टोर करना है और कैसे डिस्कार करना है, यह बताना मैं बहुत जरूरी समझूंगी। कभी भी कंडोम यूज करने से पहले उसकी एक्सपायरी डेट देख लें। कंडोम जनरली जो बॉयज होते हैं वह वॉलेट में कैरी करते हैं। वॉलेट में बहुत फ्रिक्शन होता है। वह
(27:23) पूरे टाइम आपके पॉकेट में निकलता है, बाहर होता है। तो बहुत दिनों तक स्टर्ड जो उसमें रहता है वह बहुत सेफ नहीं रहता है। फ्रजाइल हो सकता है, फट सकता है। दूसरी बात जब आप कंडोम सेक्स करते हैं, तो इट शुड बी कंडोम शुड बी इंसर्टेड एट द स्टार्टिंग ऑफ द सेक्स। क्योंकि आपका जो होता है बॉडी फ्लूइड का एक्सचेंज शुरू से ही हो जाता है स्टार्ट। तो वह एक इंपॉर्टेंट फैक्टर है। और दूसरा जब आप एसटीडी के बारे में नहीं प्रेगनेंसी के बारे में सोच रहे हो तब यह भी जानना इंपॉर्टेंट है कि प्रीकम मतलब जो सेक्स के पहले जो सीमेन से पहले जो लिक्विड आता है
(28:03) उसमें भी कुछ स्पर्म रह सकते हैं। दूसरा पूरा एक्ट ऑफ सेक्स में आप कंडोम को पहन के रखें। यूज करके रखें। एंड जब आपका एक्ट ऑफ सेक्स खत्म हो जाता है और एक्ट ऑफ क्वइटस खत्म हो जाता है तब उसको जेंटली निकालें और उसको लीकेज के लिए चेक करें। ठीक है? लीकेज चेक करना एक बहुत इंपॉर्टेंट फैक्टर होता है और उसके बाद डिस्कार्ड करने की भी पद्धति लोगों को बहुत ज्यादा नहीं पता है। उसको सिंपल यूज्ड कंडोम को एक नैपकिन में आप रोल करके और उसको अपने किसी भी रेगुलर डस्टबिन में डाल सकते हैं। या परफेक्ट। काफी डिटेल में आपने बताया काफी अच्छे से। सो यह आपने काफी से मतलब
(28:45) काफी अच्छे से बताई यह चीज। अब इसके अलावा जैसे कि हम डॉक्टर निधि आजकल एग फ्रीजिंग का भी ट्रेंड काफी देख रहे हैं। सो आपको क्या लगता है कि वो हमारे लिए सेफेस्ट ऑप्शन है क्या? देखिए एग फ्रीजिंग इज अ पंडोरा ऑफ़ बॉक्स। बीइंग एन इनफर्टिलिटी एक्सपर्ट मैं बहुत कुछ बात कर सकती हूं। लेकिन मैं इंपॉर्टेंट चीजें बताती हूं। जैसा कि मैंने शुरू में ही कहा था कि जो एज ऑफ़ मैरिज बढ़ गया है, एज ऑफ़ कंसीविंग बेबी बढ़ गया है। ये रीजन क्या है? वी ऑल आर एकेडमिकली ओरिएंटेड, वर्क ओरिएंटेड जो डेमोग्राफी ही चेंज हुई है। सारी फीमेल्स जो है वो आगे बढ़ने के की कोशिश कर रही
(29:25) हैं। व्हिच इज अ गुड थिंग टू डू। तो आपको अगर लगता है कि आप बहुत अर्ली बहुत जल्दी मां बनने के लिए तैयार नहीं है तो उन फीमेल्स के लिए है एग फ्रीजिंग। तो एग फ्रीजिंग किसको करवाना चाहिए? अगर आप अपने लेट 20ज में है और अर्ली 30ज में है और आपको लगता है मैरिज इज नॉट ऑन कार्ड्स। अभी मैं तैयार नहीं हूं। मुझे कोई पढ़ाई पूरी करनी है या कोई एग्जाम देना है या कोई कोई जॉब में कुछ अचीव करना है तो वो उन फीमेल्स के लिए बहुत इंपॉर्टेंट है। अगर आप लेट 20ज में है तो आप अपना एग फ्रीज करा लीजिए। अर्ली 30ज में है तो आप अपना एग फ्रीज करा लीजिए।
(30:05) बहुत बार ऐसा होता है कि शादी ही 35 में हुई है। तो मैं यह नहीं कह सकती कि आप उन्होंने सोचा था कि पहले कर लेंगे लेकिन अब नहीं कर पा रहे। तो आपको जब याद आए जब आपने डिसाइड किया कि नहीं अभी बच्चा नहीं चाहिए। आप उस टाइम पे फ्रीज करवा लीजिए। यह जानना बहुत जरूरी है। हम क्यों कहते हैं बहुत अर्ली एज में मत कराओ क्योंकि ऐसे में क्या होता है कि बहुत खुद ही बहुत लोग खुद ही प्रेग्नेंट हो जाते हैं। बहुत लेट में मत कराओ इसलिए बोलते हैं क्योंकि एग की क्वालिटी और क्वांटिटी जो होती है वो कम हो जाती है। हम अब अगला सवाल जो लोगों के दिमाग में रहता
(30:40) है कि वो एग जब हमने फ्रीज कर लिया तो हम उसको कितने साल तक रख सकते हैं? ऑफिशियली हम 10 साल तक तो उसको रख ही सकते हैं। उसके बाद रिन्यूल के साथ आप आगे भी रख सकते हैं गवर्नमेंट को बता के कि हम और ज्यादा स्टोर करना चाहते हैं। और फिर जब आप तैयार हैं और आपका पार्टनर तैयार है तो उसी एग को स्पर्म के साथ फ्रीज करा के एम्ब्रियो बनाते हैं और आपके यूट्रस में डाल देते हैं। तो आईवीएफ का प्रोसेस कंप्लीट होता है। गॉट इट। सो डॉक्टर निधि आजकल हम कॉस्मेटिक गनेकोलॉजी का भी ट्रेंड काफी सुन रहे हैं। तो इसके बारे में आप थोड़ा हमें बता सकते
(31:14) हैं होता क्या है? कैसे काम करता है ये? देखिए कॉस्मेटिक गायनेकोलॉजी को जब हम डिटेल में बात करें तो हम कहते हैं इसको एस्थेटिक फंक्शनल एंड रीजनरेटिव गायनेकोलॉजी। यह एक सुपर स्पेशलिटी है या सब स्पेशलिटी है गनेकोलॉजी का जो बहुत ही अपकमिंग है जो बहुत देर से आया है ये उनमें इन चीजों को कंसीडर किया गया जो चीजें पहले हमें जनरल गननेकोलॉजी में कॉलेजेस में नहीं पढ़ाई जाती थी जैसे कि आपको यूरिन लीकेज है जो माइल्ड यूरिन लीकेज लोगों को होता है। लैक्स वाइना का ट्रीटमेंट जो आपका इंटिमेट एरिया है उसका थोड़ी बहुत जो ज्यादा सुंदर लगे उसको
(31:58) बनाने के लिए भी किया जाता है और जो मेनोपॉज के बाद सिम्टम होने लगते हैं जैसे कि ड्राइनेस ऑफ वाइना हो जाता है। बहुत बार लीकिंग ऑफ यूरिन हो जाता है। रेकरेंट वजाइनल इंफेक्शन मतलब कि बार-बार वाइना में इनफेक्शन हो रहा है और उसको वो दवाइयों से ट्रीटमेंट नहीं हो रहा है। आपको यूरिनरी ट्रैक्ट इनफेक्शन हो रहा है जो दवाइयों से ट्रीट नहीं हो पा रहा है। तो उन सबके लिए एक नई एक सब स्पेशलिटी और सुपर स्पेशलिटी आई है जिसको कि कॉस्मेटिक गायनेकोलॉजी कहते हैं और जो उनको करने वाले डॉक्टर्स होते हैं उनको कॉस्मेटिक गनेकोलॉजिस्ट कहते हैं एंड आई एम वन ऑफ
(32:35) देम। वाओ दैट्स ग्रेट। ओके। सो डॉक्टर निधि लास्टली आई वुड लाइक टू आस्क कि अगर आपको हमारी ऑडियंस को एक पीस ऑफ एडवाइस देनी हो चाहे वो वुमेन हेल्थ केयर रिगार्डिंग हो या फिर कोई भी एडवाइस हो तो वो आप क्या देना चाहेंगे? पीस ऑफ एडवाइस एक नहीं है। बहुत सारे हैं। लेकिन आई विल ट्राई कि कम से कम टाइम में बता पाऊं। सबसे पहले चाइल्डहुड ओबेसिटी को प्रिवेंट करिए और लाइफस्टाइल मॉडिफिकेशन करिए। चाइल्डहुड अबेस्टिटी मतलब सुबह बचपन से जंक फूड नहीं खाना है। कम खाना है। अपने लाइफ स्टाइल को बेटर रखना है। एक हेल्दी एक्सरसाइज अडप्ट करना है। यह कुछ
(33:14) चीजें हैं। उसके बाद स्मोकिंग नहीं करनी है। आपको हर फीमेल को नाइन इयर्स से लेके 45 इयर्स की एज के बीच में सर्वाइकल कैंसर की वैक्सीन लगनी है। वह आप सब लगवा सकते हैं। पैप्सियर हर फीमेल जो कि मोर दैन 22 इयर्स ऑफ़ एज है उसका पैप्सियर होना चाहिए हर 3 साल से 5 साल के गैप पे और एव्री फीमेल हैज़ एटलीस्ट वन गायनी एग्जामिनेशन जो आप साल में एक बार कराएं। तो यह सारी चीजें बहुत ज्यादा इंपॉर्टेंट है। अपने इंटिमेट हेल्थ का ख्याल रखिए। अपने पीरियड्स अगर इर्रेगुलर या बहुत पेनफुल होते हैं तो अपने डॉक्टर से मिलिए। परफेक्ट। थैंक यू वेरी मच फॉर वाचिंग द
(33:57) वीडियो। होप यू हैव एंजॉयड इट एंड यू हैव अंडरस्टुड सो मेनी मिथ्स एंड फैक्ट्स। एंड इफ यू स्टिल हैव सम क्वेश्चंस, द डिटेल आर गिवेन इन द लिंक एंड ऑन द स्क्रीन। सो डू डायल अस, डू कॉल अस एंड लेट अस नो व्हाट आर योर कंसर्न्स। थैंक यू।
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Title: Are the biggest Myths about Female Body finally exposed? | Dr Nidhi Ji | #TVTVoice | Ep - 175
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(00:00) नॉर्मल पीरियड जो है वह हर महीने आपको अह 22 डज़ से लेके 35 डज़ के गैप में अगर आता है तो इट इज फाइन। ये बहुत बड़ा मिसकंसेप्शन है कि पीरियड हमेशा एक ही डेट पे आना चाहिए। देखिए सम अमाउंट ऑफ पीरियड पेन जो है वो नॉर्मल है। ठीक है? क्योंकि उसका जो तरीका है वही इस ऐसा है कि उसमें पेन हो सकता है। अगर आपको पीरियड एक बार दो तारीख को आया और अगली बार 28 या 29 तारीख को आया तो दोनों पीरियड के बीच का जो गैप है वो इट इज मोर देन 22 डेज। तो इसका मतलब वो पीरियड नॉर्मल है। एक चीज जो बहुत इंपॉर्टेंट है कंडोम कैसे यूज करना है। कैसे स्टोर करना
(00:42) है और कैसे डिस्कार्ड करना है। यह बताना मैं बहुत जरूरी समझूंगी। चाइल्डहुड ओबेसिटी को प्रिवेंट करिए और लाइफस्टाइल मॉडिफिकेशन कर करिए। हर सफलता के पीछे एक कहानी होती है। हर आवाज के पीछे एक अनुभव। टीवीटी वॉइस [संगीत] उन लोगों की बात करता है जो सोचते हैं अलग। करते हैं बड़ा और जीते हैं मकसद के साथ। यहां जुड़ते हैं एंटरप्रेन्यर्स, डॉक्टर्स, फाउंडर्स, लाइफ कोचेस, हेल्थ एक्सपर्ट्स और वो सभी जो दूसरों की जिंदगी में परिवर्तन लाना चाहते हैं। हम बात करते हैं ग्रोथ, [संगीत] माइंडसेट, पर्पस और इंपैक्ट की उन जर्नीज की जो इंस्पायर करते
(01:20) हैं और उन वॉइसेस की जो दुनिया को एक नया नजरिया देते हैं। टीवीटी वॉइस जहां हर बात बनाए एक सोच, हर वॉइस, एक प्रेरणा। टीवीटी वॉइस, द साउंड ऑफ चेंज। कांटेक्ट अस ऑन 84801064 हेलो एवरीवन वेलकम टू अनदर स्पेशल एपिसोड ऑफ़ टीवीटी। सो टुडे वी आर हियर विद अ स्पेशल गेस्ट हु इज़ अ प्रोफेशनल एंड अ रनाउंड कॉस्मेटिक गायनकोलॉजिस्ट एंड आल्सो शी इज़ एन इनफर्टिलिटी एक्सपर्ट बेस्ड इन साउथ दिल्ली। सो टुडे वी विल बी टॉकिंग अबाउट सो मेनी टॉपिक्स। सो मेनी थिंग्स सच एस डीबंकिंग द मिथ्स अबाउट फीमेल हेल्थ,
(02:05) फीमेल हाइजीन एंड आल्सो वी विल बी टॉकिंग अबाउट दैट हाउ कैन वी मेंटेन आवर सेक्सुअल हेल्थ। सो दिस एपिसोड इज गोइंग टू बी वेरी इंटरेस्टिंग। सो वाच इट टिल दी एंड। सो टुडे वी वेलकम आवर गेस्ट ऑफ़ ऑनर डॉ. निधि। सो लेट्स वेलकम हर। हेलो मैम। हेलो। थैंक यू वेरी मच फॉर इनवाइटिंग मी फॉर द वंडरफुल एपिसोड एंड वी हैव टॉक्ड सो मच अबाउट फीमेल हेल्थ एंड सेक्सुअल हेल्थ एंड फीमेल वेलनेस। सो होप दिस हेल्प्स आवर ऑडियंस एंड थैंक यू वेरी मच फॉर कॉलिंग। सो डॉक्टर निधि एस वी नो दैट यू आर अ प्रोफेशनल गननेकोलॉजिस्ट एंड एन आईवीएफ एक्सपर्ट। सो सबसे पहले मैं आपसे ये पूछना
(02:42) चाहूंगी कि आपकी जर्नी कैसे स्टार्ट हुई? लाइक कोई इसके पीछे मोटिवेशन था? आपका कोई ऐसा बेसिक रीज़न था जिसकी वजह से आपने स्टार्ट किया? अ आई ऑलवेज वांटेड मैं चाहती थी कि मैं एक सर्जन बनूं। अ बट ये चेंज ऐसे हुआ कि एक बार ऐसे हुआ हमारी ओपीडी में इमरजेंसी में एक पेशेंट आई उसके ऑलरेडी दो बच्चे थे और वो कमजोरी कमजोरी और ब्लीडिंग लेकर आई ब्लीडिंग लेकर आई जब हमने हमने सोचा ऐसे ही कमजोरी हो गया बहुत दिनों से ब्लीड कर रही होगी तो तो देखते हैं क्या है व्हेन वी स्टार्टेड एग्जामिनिंग तो एग्जामिनेशन में ही हमें दिखा कि उसके सर्विक्स से अब जो बच्चेदानी
(03:26) का मुंह होता है वहां से एक मांस निकल रहा था और जब इन्वेस्टिगेट किया तो पता चला कि वो सर्वाइकल कैंसर है। ओके तो उसके बाद हमें पता चला कि ये सारे सिम्टम्स जो होते हैं उसको सेक्स के बाद ब्लीडिंग उसको इंटरमेंस्ट्रुअल ब्लीडिंग बीच-बीच में पेन फाउल स्मेलिंग डिस्चार्ज मतलब वजाइनल डिस्चार्ज आ रहा था जो स्मेली था। यह सारी चीजें उसको दोती साल से हो रही थी और सबने बोला है बच्चा हुआ है छोटा है इस वजह से यह सारी चीजें हो रही हैं और उसको कभी भी डॉक्टर के पास नहीं ले जाया गया उसको वो भी बहुत कीन नहीं थी कि डॉक्टर के पास ही ले जाया जाए कभी उसका पेप्समियर नहीं हुआ
(04:09) था जबकि उसकी दो डिलीवरी हुई थी हां जी तो वो अस्पताल तो आई होगी लेकिन उसका कभी पैप्सम्मियर नहीं हुआ था और अर्ली साइंस जानने का उसके पास कोई तरीका नहीं था, कोई अवेयरनेस नहीं था और फाइनली वी कुड सेव हर बट बहुत बड़ी सर्जरी के बाद और कीमो रेडियोथरेपी के बाद तो वो एक पॉइंट था जब मुझे लगा नहीं हम आवर फीमेल नीड्स मोर अवेयरनेस। फीमेल मोर डॉक्टर्स जो फीमेल हेल्थ इशज़ है वो बहुत प्रिवेलेंट है और अवेयरनेस नहीं है। सो दैट वाज़ द डे जब मैंने डिसाइड किया कि नहीं सर्जरी नहीं आई हैव टू गो फॉर गायनी और गायनी का एक सबसे गायनेकोलॉजी ऑब्सन
(04:53) गायनी का एक बहुत बड़ा पार्ट है कि यू आप सर्जरी भी करते हैं। हम जो आप मेडिसिन के डॉक्टर की तरह देखते भी हैं और इलाज भी करते हैं और उसके साथ आप सर्जरीज भी करते हैं बहुत सारे। एक्सक्ट। सो दैट मेड माय जर्नी। परफेक्ट। परफेक्ट डॉक्टर निधि। सो डॉक्टर निधि व्हाट डू यू थिंक कि आपके पास काफी क्लाइंट्स आते हैं एंड सबके अलग-अलग इश्यूज होते हैं। राइट? सो अगर मैं आपसे पूछूं कि सबसे उनका मेजर इशू कौन सा होता है? तो वो क्या रहेगा? आजकल ये ना वेरिएशन होता रहता है। आजकल जो सबसे ज्यादा देखने को मिल रहा है वो है पीरियड इर्रेगुलरिटी का इशू।
(05:32) पीसीओएस, हाइपोथायरॉइड और इन सब की वजह से जो पीरियड इर्रेगुलरिटी होती है, एक्सेसिव वेट गेन करने से जो पीरियड इर्रेगुलरिटी होती है, उनका इशू बहुत ज्यादा आ रहा है। और दूसरा इनफर्टिलिटी इनफर्टिलिटी इज ऑन द ऑल टाइम हाई। रीज़ कि शादी का ज्यादा हो गया है। शादी के बाद भी प्लान करने का जो एज है वो शादी के बाद भी पीपल नीड टू टेक टाइम टू एडजस्ट इन देयर मैरिज। तो उन सब वजह से क्या हो गया है कि शादी कीज और बच्चा पैदा करने की बढ़ गई है। स्मोकिंग है उसकी वजह से भी इनफर्टिलिटी काफी बढ़ गया है। तो पीरियड आई वुड से कि पीरियड इर्रेगुलरिटी एंड इनफर्टिलिटी जो
(06:18) सबसे कॉमन जो हमारे पास पेशेंट्स आते हैं वो ये देखा गया है। ओके गॉट इट। सो जैसे कि अभी आप पीरियड्स के बारे में बात कर रहे हैं। हमारी मेंुअल साइकिल के बारे में बात कर रहे हैं। सो आपको क्या लगता है कि आपके अकॉर्डिंग ऐसी कैसी चीजें मतलब जो हम पीरियड्स के दौरान ऐसी चीज को नेगलेक्ट करते हैं जो हमें नहीं करनी चाहिए। बट स्टिल हम कर रहे हैं। देखिए नेगलेक्ट करने की जब तक बात होती है तो बहुत सारी चीजें हैं। एक तो हम पीरियड इर्रेगुलरिटी को बहुत नेगलेक्ट करते हैं। इर्रेगुलरिटी को नेगलेक्ट करना मतलब पहले तो सबसे इंपॉर्टेंट उसके लिए यह जानना है
(06:53) कि रेगुलर पीरियड और नॉर्मल पीरियड क्या है? नॉर्मल पीरियड जो है वो हर महीने आपको 22 डेज से ले 35 डेज के गैप में अगर आता है तो इट इज फाइन। यह बहुत बड़ी मिसकंसेप्शन है कि पीरियड हमेशा एक ही डेट पे आना चाहिए। जरूरी नहीं है आपका जो पीरियड लास्ट आया था उससे एक हफ्ते पहले या एक हफ्ते बाद तक भी आपका पीरियड आता है देन इट इज नॉर्मल। सम अमाउंट ऑफ पेन इन द पीरियड इज नॉर्मल। बट वह पेन एक्सेसिव है तो वह नॉर्मल नहीं है। एक पीरियड जो होता है वह दो दिन किसी को दो दिन का हो सकता है और मैक्सिमम किसी को 7 दिन तक हो सकता है। किसी का पीरियड अगर दो दिन से कम का होता
(07:36) है या 7 दिन से ज्यादा का होता है तो वो नॉर्मल नहीं है। तीसरी पॉइंट तीसरा पॉइंट कि आप दिन में तीन से चार पैड बदलते हैं दैट इज नॉर्मल। एक्सेसिव पीरियड तब कहते हैं जब आपको हर एकद घंटे पर अपना पैड चेंज करना पड़े। सैनिटरी नैपकिन चेंज करना पड़े या रात में उठ के आपको सैनिरी नैपकिन चेंज करना पड़े या आपको बड़े-बड़े क्लॉट्स पास हो रहे हैं पीरियड्स के ब्लड के साथ तो वो एब्नॉर्मल है। एक्सेसिव ब्लीडिंग है। इसमें आपको डॉक्टर से मिलना चाहिए। कभी कबभार ऐसा होता है स्कटी पीरियड्स होते हैं। स्कटी पीरियड मतलब कि आप मुश्किल से स्पॉटिंग हो
(08:19) रही है। थोड़ा बहुत आपके पैड पे कोई ब्लड दिख रहा है या एक ही पैड आपने पूरे दिन में भी वो सोक नहीं हुआ तो दैट इज दैट लुक्स लाइक स्कटी पीरियड। और इन सब केसेस को इग्नोर नहीं करना चाहिए। वो आपको अपने डॉक्टर से जाके मिलना चाहिए। अगर आपका पीरियड 21 दिन से पहले आ जाता है या 35 डेज के बाद आता है। तो भी आपको अपने डॉक्टर से मिलने की जरूरत है। ओके। ओके। जैसे कि अगर हम बात करें कि वन मंथ पे किसी को दो बार पीरियड्स आ रहे हैं। हां ये तो बहुत ही टिपिकल क्वेश्चन है। अब जैसा कि मैंने समझाया पीरियड किसी को 22 दिन से ले 35 दिन के बीच में अगर आता है
(09:00) तो वो नॉर्मल है। तो अगर मैंने 22 दिन की बात की या 23 दिन की बात की तो उसमें क्या होता है कि एक पीरियड अगर किसी को दो तारीख को आया है और अगला पीरियड अगर 28 तारीख को आता है तो हम उसको एबनॉर्मल नहीं बोलेंगे। ओके। बट अगर किसी को वही पीरियड दो तारीख को आता है और फिर 20 तारीख को आता है तो फिर हम उसको एबनॉर्मल कहेंगे क्योंकि दोनों पीरियड का गैप ओनली 18 डेज का है। तो यह जानना बहुत जरूरी है कि एक महीने में भी दो बार पीरियड आ सकता है। इट कैन बी नॉर्मल बट उनके बीच का गैप जो है वो कम से कम 22 टू 23 डेज होना चाहिए। हम गॉट इट। सो डॉक्टर निधि जैसे कि अभी आप
(09:41) पहले पीरियड्स के बारे में बात कर रहे थे। सो अगर मैं आपसे पूछूं कि जैसे कि अगर हम बात करें कि में्रुअल साइकिल के दौरान अगर आप यह बता सकते हैं कि ऐसी कौन-कौन सी चीज है जो कि हम नेगलेक्ट करते हैं एज वुमेन तो वो क्या रहेंगी? देखिए जो सबसे ज्यादा हम नेगलेक्ट करते हैं वो है इर्रेगुलर पीरियड और पीरियड पेन। तो इर्रेगुलर पीरियड तो मैंने बता दिया बट उसके लिए पहले रेगुलर पीरियड जानना जरूरी है। तो रेगुलर पीरियड जो होता है वो आपके दो पीरियड का गैप जो होना होता है वो 21 दिन से लेके 35 दिन के बीच में होना चाहिए। ठीक है? अगर 21 दिन से पहले पीरियड आ रहा
(10:17) है या 35 दिन के बाद आ रहा है तो वो एबनॉर्मल है। ठीक है? एक पीरियड जो होना चाहिए वह कम से कम दो दिन या ज्यादा से ज्यादा 7 दिन तक आपको ब्लीड करना चाहिए। अगर आपका आपकी ब्लीडिंग जो है वो दो दिन से कम हो रही है या आपका जो पीरियड है वो सात दिन से ज्यादा हो रहा है तो वो एबनॉर्मल है। अब बात करेंगे ब्लीडिंग कितनी होनी चाहिए? अगर ब्लीडिंग आप दिन में तीन से चार पैड चेंज कर रहे हो तो वो नॉर्मल है। ठीक है? एबनॉर्मल हम उसको तब बोलेंगे अगर आपको हर दो-ती घंटे पर पैड चेंज करना पड़ा है या रात में उठ के पैड चेंज करना पड़ा है या आप पीरियड के
(11:01) ब्लड के साथ बहुत सारा ब्लड क्लॉट पास कर रहे हो तो वो एब्नॉर्मल है मतलब कि वो एक्सेसिव ब्लीडिंग है। एक होता है स्केंटी ब्लीडिंग। स्कैंटी ब्लीडिंग मतलब कि आपको पूरे दिन एक ही पैड आपने सैनिटरी नैपकिन लगाया हुआ है और उसमें स्लाइटली कोई ब्लीडिंग है। पूरे दिन में भी एक पैड सूख नहीं हुआ। तो वो भी एब्नॉर्मल है। तो यह हुए इर्रेगुलर पीरियड्स इसको इससे अगर कुछ भी डिफरेंट है तो आपको डॉक्टर के पास जाने की जरूरत है। दूसरी बात हुई कि जो होता है पीरियड पेन देखिए सम अमाउंट ऑफ पीरियड पेन जो है वो नॉर्मल है। ठीक है? क्योंकि उसका जो तरीका है वही ऐसा
(11:42) है कि उसमें पेन हो सकता है। बट अगर कोई भी पेन ऐसा हो जो पेन किलर खाने के बाद भी आपके लाइफस्ट को डिस्टरप्ट कर रहा हो। आपके वह तीन-चार दिन की प्रोडक्टिविटी घटा रहा हो। इतना पेन हो रहा हो आपको तो वह नॉर्मल नहीं है। उसमें आपको अलग-अलग तरह की प्रॉब्लम्स हो सकती हैं। हो सकता है कि एंडोमेट्रियोसिस हो। हो सकता है कि पीसीओडी हो। हो सकता है कोई फाइब्रॉइड हो। तो इन सब केसेस में आपको डॉक्टर से मिलने की जरूरत है। हम अभी जैसे डॉक्टर निधि आप कह रहे हैं कि अगर किसी को फॉर एग्जांपल अनबेरेबल पेन हो तो उस टाइम पर कुछ लोग ये भी करते हैं कि
(12:19) वो मेडिसिंस लेते हैं अलग-अलग तो आपको क्या लगता है कि उस टाइम पे मेडिसिनस लेना सेफ रहता है हमारे लिए। देखिए पेन जैसा कि मैंने कहा सम अमाउंट ऑफ पेन जो है वह पीरियड में होता है। अगर आपको उससे ज्यादा पेन है तो आप पेन किलर ले सकते हैं। बट वो पेन किलर आप डॉक्टर की एडवाइस पे लेंगे। ठीक है? बिना डॉक्टर के एडवाइस के कोई कुछ भी कोई भी दवा जो होती है वो बिना डॉक्टर के एडवाइस के नहीं लेना चाहिए। अगर डॉक्टर ने आपको पेन किलर दिया है और जिससे आपको दिन में एक या दो खाने से आपका पीरियड का पेन कम हो जाता है एंड यू आर एबल टू डू
(12:55) योर डे टू डे थिंग्स तब वो नॉर्मल है। अगर इससे बहुत ज्यादा होता है तो यू शुड बी इन्वेस्टिगेटेड। आपका अल्ट्रासाउंड होने की जरूरत है। आपका एग्जामिनेशन होने की जरूरत है। आपको बेसिकली डॉक्टर के पास जाना पड़ेगा। गॉट इट। ओके। सो जैसे कि अभी आप बता रहे थे कि अगर मान लीजिए फॉर एग्जांपल कि किसी को वन मंथ में दो बार पीरियड्स हो रहे हैं तो उस टाइम पर ये चीज मतलब अबनॉर्मल होगी तब भी देखिए मंथ में दो बार पीरियड ये बहुत ही कॉमनली पूछा गया सवाल है। मंथ में दो बार पीरियड का मतलब होता है कि अगर अगर आपको पीरियड दो एक बार दो तारीख को आया और अगली
(13:33) बार 28 या 29 तारीख को आया तो दोनों पीरियड के बीच का जो गैप है वो इट इज मोर देन 22 डेज। तो इसका मतलब वो पीरियड नॉर्मल है। अगर वही आपको 2 तारीख को आया और फिर 18 तारीख को आ गया तो दोनों पीरियड के बीच का गैप जो है वो 16 दिन ही है। इसका मतलब कि वो एबनॉर्मल है। तो कभी भी ऐसा हो कि पीरियड में गैप जो है वो 21 दिन का से कम हो तो वो एबनॉर्मल है। अगर उससे ज्यादा है और एक ही महीने में वो दोनों पीरियड आ रहे हैं तो वो नॉर्मल है। ओके गॉट इट। सो डॉक्टर निधि अगर जैसे कि मैं पूछूं कि बहुत सारे ऐसे वुमेन है जो कि पीसीओडी पीसीओएस से भी सफर करते हैं।
(14:16) राइट? सो ऐसे कौन से हमारे मेजर फैक्टर्स रहते हैं जो कि इन चीजों को ट्रिगर करते हैं तो वो क्या होंगे हमारे? देखिए पीसीओडी पीसीओएस अगर आप पूछे तो पिछले 10 साल में उसका इंसिडेंस बहुत ज्यादा बढ़ा है। और अब लगभग ऐसा हो गया है कि अराउंड 30% इंसिडेंस हो गया। 30% मतलब हर तीन में से एक महिला को या गर्ल को पीसीएस होने के चांसेस हैं। अब इसका इंसिडेंस क्यों बढ़ा है? सबसे ज्यादा जो बढ़ा है रीजन है वो है लाइफस्टाइल फैक्टर। चाइल्डहुड ओबेसिटी बहुत ज्यादा है। बाद में भी प्यूबर्टी के टाइम पे बढ़ने वाला भी वेट जो है वो भी बहुत ज्यादा हो गया है।
(14:57) तो ये पहला फैक्टर है जो लाइफस्टाइल डिस्टरबेंस जो कि बचपन में ही जंक फूड और इसकी जो हैबिट है वो काफी ज्यादा देखने को प्रिपयर्ड फूड और इसकी मात्रा काफी बढ़ गई है। लैक ऑफ एक्सरसाइज हो गया है। तो एक्सरसाइज की कमी काफी बढ़ गई है। स्क्रीन पे आप अभी देख रहे हैं पोल्यूशन में ऑनलाइन क्लासेस हो रहे हैं। तो बच्चे स्कूल सिर्फ क्लासेस करने तो नहीं जाते वहां खेलते हैं और बहुत सारी एक्टिविटीज करते हैं। तो उस तरह की चीजें जो है वो काफी बढ़ गई हैं। तो एक तो लाइफस्टाइल फैक्टर और ओबेसिटी है। दूसरा जो बहुत इंपॉर्टेंट फैक्टर है वो यह है कि
(15:38) फैमिली हिस्ट्री ऑफ़ डायबिटीज। हम अगर किसी के पेरेंट्स को डायबिटीज है या फैमिली में डायबिटीज है या उनकी मदद को पीसीओएस या डायबिटीज रहा हुआ है तो बच्चे में इसके आने के चांसेस काफी बढ़ जाते हैं। ऐसा जरूरी नहीं है कि हर उस फीमेल को पीसीओएस हो जिसकी मदर को डायबिटीज या पीसीओएस है। बट यस अगर उनकी मदर को या फैमिली में किसी और को डायबिटीज है और उनके मदर को पीसीओएस रहा है या मदर ओबीज रही है तो बच्चे में या उस उनके डॉटर में होने के चांसेस काफी बढ़ जाते हैं। बट इट कैन बी कंट्रोलोल्ड अगर बचपन से उसको मॉडिफाई लाइफस्टाइल फैक्टर से अगर इंप्रूव
(16:20) किया जाए तो जरूरी नहीं है कि उनमें होगा। तो ये दो फैक्टर्स बहुत ज्यादाेंट है। ओके ओके एंड डॉक्टर निधि आल्सो मैं आपसे क्वेश्चन जरूर पूछना चाहूंगी कि आपको क्या लगता है कि जैसे कि अगर हम अपनी लाइफ स्टाइल के बारे में बात करें तो उसमें ऐसे क्या चेंजेस होने चाहिए या फिर उसमें ऐसा क्या लूप होल है जिससे हमारी अगर इन फ्यूचर जो फर्टिलिटी है उसको भी काफी हार्म पहुंचा सकता है। काफी इश्यूज आ सकते हैं। देखिए लाइफस्टाइल फैक्टर जैसे एक ऑप्टिमम वेट मेंटेन करना एक ऑप्टिमम बीएमआई मेंटेन मेंटेन करना बहुत ज्यादा जरूरी है जो जिसके लिए कोई दवा नहीं चाहिए
(16:58) जी ठीक है तो बचपन से ये और एवरीथिंग स्टार्ट्स इन द अर्ली एज वो आपको ज्यादा दिन तक आपके साथ रहता है और वो हैबिट्स लाइफ लॉन्ग आपके साथ रहती है। तो जो एक है जो नॉर्मल इंडियन फूड हुआ करता था जब हम छोटे थे तो वो कांसेप्ट कि घर का खाना खाना है। कार्बोहाइड्रेट का अमाउंट कम रखना है। प्रोटीन और विटामिंस और मिनरल्स का अमाउंट जो है वो थोड़ा बढ़ा के रखना है। फैट का अमाउंट कम रखना है। कम से कम मिनिमम कुछ एक्सरसाइज हैं जो हमें करने हैं। बचपन में बच्चों को खेलना लेस स्क्रीन टाइम। स्क्रीन टाइम एक बहुत बड़ा फैक्टर हो गया है आजकल के ऐज में।
(17:40) जो वो होता है कि टीवी देख के खाना या मोबाइल देख देख के खिलाना बच्चों को वो आई नो कि बहुत डिफिकल्ट हो गया है आजकल पेरेंटिंग और बहुत डिफिकल्ट हो गया है बच्चों को पालना बिकॉज़ ऑफ लॉट्स ऑफ एक्सपोज़र पेरेंट्स जो दोनों होते हैं मोस्ट ऑफ द टाइम वर्किंग होते हैं। बट देखिए जो नीव आप आज बचपन में डाल रहे हैं उसी पे आपके बच्चे की बिल्डिंग बनेगी। तो वह बहुत ज्यादा जरूरी है किेंस ऑफ वर्कउ बचपन में बच्चों को तो आप वर्कउ करने के लिए नहीं खेलोगे कहोगे तो उनको आउटडोर एक्सपर्ट स्पोर्ट्स में डालना बहुत ज्यादा जरूरी है। आउटडोर स्पोर्ट्स में
(18:18) डालिए। बच्चों को रोज शाम को नीचे जहां भी आपका प्लेग्राउंड है उसमें खेलने जाने के लिए एनकरेज करिए। तो यह सारी चीजें आपको बचपन से डालनी पड़ेंगी। फिर जो जंक फूड या आउटसाइड फूड है आप कंप्लीटली उसको रिप्लेस नहीं कर सकते क्योंकि तब बच्चे को बहुत बार फील होने लगता है कि हमारे ही पेरेंट्स बहुत स्ट्रिक्ट हैं तो उसका वे है आप उनके सब्स्टट्यूट्स अपने घर में बनाना सीखिए जैसे नूडल्स है तो आप आटा नूडल्स यूज कर सकते हैं या अब अब तो YouTube के जमाने में यह बहुत अच्छा ऑप्शन हो गया है। यू कैन फाइंड हेल्थियर ऑप्शंस ऑफ़ सिमिलर थिंग्स। अगर आप किसी मैगी ही की
(18:56) बात कर रहे हैं तो आप मैगी का मसाला यूज़ कर लीजिए और नूडल कुछ और यूज़ कर लीजिए। तो इस तरीके से आप बैलेंस कर सकते हैं। आप चीजें हैं जो अपनी तरफ से इन्वेंट कर सकते हैं। थोड़ी और वो बहुत मुश्किल नहीं है। आपके बच्चों को यह फील नहीं होगा कि हम पे यह थोपा जा रहा है। कुछ भी आप बनाते हैं। अगर आप नूडल्स ही बना रहे हैं या आई एम जस्ट गिविंग पास्ता ही बना रहे हैं। तो पास्ता के भी अब आटा का पास्ता आता है। मतलब मिलने लगा है। कुछ आप घर पे भी बना सकते हैं। तो ऐसी चीजें चीज के बदले आप किसी और चीज जहां पर आप सैंडविच में चीज यूज कर रहे हैं या बटर यूज कर रहे हैं आप
(19:32) हंग कर्ड यूज कर सकते हैं। तो हर चीज का हेल्थियर ऑप्शन अवेलेबल है। आपको उसके बारे में ध्यान देना चाहिए। और हमारे प्रधानमंत्री ने भी कहा है कि आप 10% जो अपना कुकिंग ऑयल है कुकिंग ऑयल का अमाउंट जो आप दाल में, सब्जी में और इसमें यूज करते हैं उसको अगर आप 10% भी उनकी बात मान के भी कम करेंगे तो भी बहुत ज्यादा ओबेसिटी का जो इंसिडेंस है इंडिया में वो कम हो जाएगा। ठीक है? तो एक तो ये हो गया। उसके बाद अब अगर हम इनफर्टिलिटी की बात करें तो इनफर्टिलिटी में एक स्मोकिंग का इंसिडेंस बहुत बढ़ गया है। जो फीमेल स्मोकिंग पहले उतना नहीं देखा
(20:10) जाता था। देखिए मेल और फीमेल दोनों ही स्मोकिंग इंपॉर्टेंट है। बट फीमेल स्मोकिंग देखा गया है इन द लॉन्ग रन जो है वो ज्यादा हैंपर करती है। बिकॉज़ वी आर बोर्न विद फिक्स नंबर ऑफ एग्स। वो अगर डैमेज होते हैं तो वो फिर रिप्लेस नहीं होते। जो मेल के स्पर्म की साइकिल होती है वह तीन महीने में हर बार वो रिप्लनिश होता रहता है। फिर नया स्पर्म बनता है। बट फीमेल्स आर बोर्न विद फिक्स्ड नंबर ऑफ एग्स। तो ऐसे में यह होता है कि उनके एग्स पे वो ज्यादा हार्मफुल होता है। ऐसा मैं प्रमोट नहीं करती कि मेल में स्मोकिंग होना चाहिए। बट वी शुड थिंक ऑफ वाइल स्टार्टिंग
(20:49) स्मोकिंग। और जो अवेयरनेस है यह बहुत ज्यादा फैलने की जरूरत है। और स्मोकिंग से और भी बहुत सारी चीजें होती है। आपकी एजिंग जल्दी होती है। आपका मेनोपॉज जल्दी आता है। तो ये सब हमारे बच्चों को नहीं पढ़ाया जाता है। नहीं सिखाया जाता है। तो ये दो चीजें हैं लाइफ स्टाइल स्ट्रेस जो लेट नाइट सोना। हम रात सोने के लिए बनाया गया है और दिन जागने के लिए बनाया गया है। अगर हम उसको फॉलो नहीं करते हैं तो मेलाटोनिन करके एक हॉर्मोन होती है हमारी बैड बॉडी में जो डिसररप्ट होने लगती है और वो बहुत सारे हॉर्मोनल इमंबैलेंसेस कॉज करती है। तो वो
(21:24) भी लाइफस्टाइल मॉडिफिकेशन में ही आता है। गॉट इट। एंड आल्सो डॉक्टर निधि मैं ये भी चाहूंगी कि आप हमारी ऑडियंस को कोई टिप्स दें जिनकी मदद से वो अपनी हाइजीन को अपनी वजाइनल हेल्थ को मेंटेन कर सके। सो वो क्या टिप्स रहेंगी? देखिए वजाइनल हाइजीन के बारे में दो जो इंपॉर्टेंट चीजें हैं। पहला तो ये है कि कोई इंटिमेट वॉश या कोई फ्रग फ्रेगरेंस वाली जो हजीन वॉश सो कॉल्ड हाइजीन वॉश है उसका इस्तेमाल ना करें। जो इंपॉर्टेंट है आपका वाइना इज अ सेल्फ क्लींजिंग ऑर्गन। उसके अंदर गुड बैक्टीरियास होते हैं जो उसके हाइजीन का टेक केयर करते हैं। तो आपको अंदर में
(22:09) सिर्फ नॉर्मल पानी से वॉश करना है। वो भी बहुत ज्यादा नहीं करना है। देखा गया है कि डशिंग का इंसिडेंस बहुत बढ़ गया। लशिंग मतलब जो आपका हेल्थ होता है उससे हम वाइना को अंदर की तरफ भी वाइना के अंदर भी बहुत क्लीनिंग करते हैं। उस क्लीनिंग की जरूरत नहीं है। वहां पे बहुत सारे गुड बैक्टीरिया होते हैं जो आपके वाइना का पीएच एसिडिक पीएच मेंटेन करते हैं जो कि वाजाइनल इंफेक्शन के प्रिवेंशन में बहुत इंपॉर्टेंट फैक्टर है। जब आप वो डशिंग करते हैं या बार-बार वाइना के अंदर क्लीन करते हैं तो वह बैक्टीरिया वाश आउट हो जाते हैं। तो पहला पॉइंट तो वाइना के अंदर
(22:47) कुछ क्लीन नहीं करना है। बाहर आप जो बाहर का लेबिया और जो एक्सटर्नल जेिटेलिया हम कहते हैं उसको आप नॉर्मल पानी से साफ कर सकते हैं और माइल्ड बेबी सोप वगैरह आप यूज कर सकते हैं। सो दैट इज फाइन। और सिर्फ बाहर करना है। अंदर नहीं करना है। एक्स्ट्रा टिप कोई इंटिमेट हाइजीन के लिए आपको। आपको हां अंडरगारमेंट्स आपको लगता है कभी कि थोड़ा ज्यादा डिस्चार्ज हो रहा है तो आप अपने अंडर गारमेंट्स इवनिंग में भी एक बार चेंज कर लें। जैसे ह्यूमिडिटी होती है, बारिश का मौसम होता है या गर्मी का मौसम होता है। तो ह्यूमिडिटी की वजह से जो होता है
(23:25) वो नीचे काफी पसीना आ जाता है तो और कभी डिस्चार्ज भी ज्यादा हो जाता तो उन सब टाइम पे आप एक बार इवनिंग में भी अपना अंडरगारमेंट चेंज करें और ब्रीदेबल अंडरगारमेंट्स कॉटन वेयरिंग कॉटन अंडरवेयर्स आर वेरी वेरीेंट या गॉट इट परफेक्ट। काफी अच्छी टिप्स थी। आई होप हमारी ऑडियंस के लिए भी इतनी हेल्पफुल हो टिप्स। सो डॉक्टर रिधि आजकल हम सोशल मीडिया पर बहुत सारा कंटेंट कंज्यूम कर रहे हैं। सो उसमें कई सारी चीजें दिखाते हैं। जैसे कि सेक्सुअल हेल्थ की भी अगर हम बात करें तो कई सारी रील्स हम देखते हैं। तो अगर मैं आपसे पूछूं कि आप भी सोशल मीडिया देखते
(24:00) होंगे कभी-कभी जब आपको टाइम मिलता होगा। नहीं नहीं मैं तो सोशल मीडिया पे बहुत रेगुलर हूं। आई कैन नॉट कॉल मसेल्फ एन इन्फ्लुएंसरर। बट अगर सेमी इनफ्लुएंसरर टाइप की कोई टर्मिनोलॉजी होगी तो आई ट्राई टू गिव दैट गिव दोस कंटेंट। एक्सक्टली एक्सक्टली। सो डॉक्टर निधि जैसे कि अभी हम सोशल मीडिया के पहले बारे में बात कर रहे थे तो वहां पे हम जैसे कि कई सारी चीजें सुनते हैं कि अगर हम बात करें सेक्सुअल हेल्थ की या फिर अगर सेक्स रिलेटेड टॉपिक के बारे में बात करें तो हम यह सुनते हैं कि जो कंडोम्स होते हैं वो हमें इतना प्लेजर नहीं दे पाते। अगर हम जैसे कि
(24:35) अनप्रोटेक्टेड सेक्स करें उस टाइम पर तो वो हमें ज्यादा प्लेजर देगा। तो आपको क्या लगता है कि ये चीज सही है कि नहीं? देखिए ये तो आपने काफी पुराने जमाने वाली बात कर दी। अब देयर आर डिफरेंट काइंड्स ऑफ कंडोम जो बहुत थिन कंडोम्स आते हैं। उसके अलावा डॉटेड कंडोम्स आते हैं और बहुत तरह के कंडोम आते हैं। वो इक्वली प्लेजर देते हैं एंड ज्यादा भी दे सकते हैं। अब देखिए कंडोम इज नॉट अ रिप्लेसिबल थिंग। हम यह बहुत इंपॉर्टेंट चीज है जो आपको सेक्सुअली ट्रांस सिर्फ प्रेगनेंसी से नहीं सेक्सुअली ट्रांसमिटेड डिजीजसेस से बचाता है। सो व्हनेवर यू आर नॉट इन अ फिक्स्ड रिलेशन
(25:17) या फिक्स्ड रिलेशन में भी इफ यू आर यू आर नॉट मैरिड या आप दोनों ही चीजों में या तो आप प्रेगनेंसी नहीं चाहते हैं या आप सेक्सुअली ट्रांसमिटेड डिजीज नहीं चाहते हैं तो आपको कंडोम यूज़ करने की जरूरत है। अ जो कंडोम नहीं लगाने से आपको बीमारियां हो सकती हैं। इसके बारे में काफी कम लोग बात करते हैं। उसमें जो सबसे बड़ी बीमारी है जिसके नाम से सब डर जाते हैं। दैट इज एचआईवी और एड्स। जो जानलेवा हो सकता है। हेपेटाइटिस बी हो सकता है। आपको हेपेटाइटिस सी हो सकता है आपको। यह सारी जानलेवा बीमारियां हैं। उसके अलावा आपको सिफलिस हो सकता है। आपको
(25:58) गोरिया हो सकता है। बहुत सारी बीमारियां आपको इवन सर्वाइकल कैंसर या पेनाइल कैंसर पेनिस का कैंसर हो सकता है। ये बातें जानना बहुत जरूरी है इससे पहले कि हम प्लेजर के बारे में जाने। सो ऑल आवर टीनएजर्स, ऑल आवर यंग पपुलेशन शुड बी टॉट दिस। और धीरे-धीरे हम लोग बात भी कर रहे हैं जो सेक्स एजुकेशन की सेक्स एजुकेशन की बात स्कूलों में शुरू हो गई और बहुत अच्छी चल रही है। बट उसको करिकुलम में अभी भी इंक्लूड नहीं किया गया है। दे कॉल एजुकेटर्स फॉर काउंसिलिंग। अलग हम भी जाते हैं काउंसिलिंग के लिए। लेकिन अभी तक करिकुलम में नहीं आया। तो हमारे बच्चों को बहुत
(26:40) यंग एज से यह बताना बहुत जरूरी है कि कंडोम या एक बैरियर जो है वह बहुत ज्यादा जरूरी है। बिकॉज़ जो जेाइटल फ्लूइड्स होते हैं, बॉडी फ्लूइड्स होते हैं वो बहुत डेंजरस बीमारियां कराते हैं। और यस प्लेजर कम नहीं होता है। यू नीड टू एक्सप्लोर मोर। और एक चीज जो बहुत इंपॉर्टेंट है कंडोम कैसे यूज करना है, कैसे स्टोर करना है और कैसे डिस्कार करना है, यह बताना मैं बहुत जरूरी समझूंगी। कभी भी कंडोम यूज करने से पहले उसकी एक्सपायरी डेट देख लें। कंडोम जनरली जो बॉयज होते हैं वह वॉलेट में कैरी करते हैं। वॉलेट में बहुत फ्रिक्शन होता है। वह
(27:23) पूरे टाइम आपके पॉकेट में निकलता है, बाहर होता है। तो बहुत दिनों तक स्टर्ड जो उसमें रहता है वह बहुत सेफ नहीं रहता है। फ्रजाइल हो सकता है, फट सकता है। दूसरी बात जब आप कंडोम सेक्स करते हैं, तो इट शुड बी कंडोम शुड बी इंसर्टेड एट द स्टार्टिंग ऑफ द सेक्स। क्योंकि आपका जो होता है बॉडी फ्लूइड का एक्सचेंज शुरू से ही हो जाता है स्टार्ट। तो वह एक इंपॉर्टेंट फैक्टर है। और दूसरा जब आप एसटीडी के बारे में नहीं प्रेगनेंसी के बारे में सोच रहे हो तब यह भी जानना इंपॉर्टेंट है कि प्रीकम मतलब जो सेक्स के पहले जो सीमेन से पहले जो लिक्विड आता है
(28:03) उसमें भी कुछ स्पर्म रह सकते हैं। दूसरा पूरा एक्ट ऑफ सेक्स में आप कंडोम को पहन के रखें। यूज करके रखें। एंड जब आपका एक्ट ऑफ सेक्स खत्म हो जाता है और एक्ट ऑफ क्वइटस खत्म हो जाता है तब उसको जेंटली निकालें और उसको लीकेज के लिए चेक करें। ठीक है? लीकेज चेक करना एक बहुत इंपॉर्टेंट फैक्टर होता है और उसके बाद डिस्कार्ड करने की भी पद्धति लोगों को बहुत ज्यादा नहीं पता है। उसको सिंपल यूज्ड कंडोम को एक नैपकिन में आप रोल करके और उसको अपने किसी भी रेगुलर डस्टबिन में डाल सकते हैं। या परफेक्ट। काफी डिटेल में आपने बताया काफी अच्छे से। सो यह आपने काफी से मतलब
(28:45) काफी अच्छे से बताई यह चीज। अब इसके अलावा जैसे कि हम डॉक्टर निधि आजकल एग फ्रीजिंग का भी ट्रेंड काफी देख रहे हैं। सो आपको क्या लगता है कि वो हमारे लिए सेफेस्ट ऑप्शन है क्या? देखिए एग फ्रीजिंग इज अ पंडोरा ऑफ़ बॉक्स। बीइंग एन इनफर्टिलिटी एक्सपर्ट मैं बहुत कुछ बात कर सकती हूं। लेकिन मैं इंपॉर्टेंट चीजें बताती हूं। जैसा कि मैंने शुरू में ही कहा था कि जो एज ऑफ़ मैरिज बढ़ गया है, एज ऑफ़ कंसीविंग बेबी बढ़ गया है। ये रीजन क्या है? वी ऑल आर एकेडमिकली ओरिएंटेड, वर्क ओरिएंटेड जो डेमोग्राफी ही चेंज हुई है। सारी फीमेल्स जो है वो आगे बढ़ने के की कोशिश कर रही
(29:25) हैं। व्हिच इज अ गुड थिंग टू डू। तो आपको अगर लगता है कि आप बहुत अर्ली बहुत जल्दी मां बनने के लिए तैयार नहीं है तो उन फीमेल्स के लिए है एग फ्रीजिंग। तो एग फ्रीजिंग किसको करवाना चाहिए? अगर आप अपने लेट 20ज में है और अर्ली 30ज में है और आपको लगता है मैरिज इज नॉट ऑन कार्ड्स। अभी मैं तैयार नहीं हूं। मुझे कोई पढ़ाई पूरी करनी है या कोई एग्जाम देना है या कोई कोई जॉब में कुछ अचीव करना है तो वो उन फीमेल्स के लिए बहुत इंपॉर्टेंट है। अगर आप लेट 20ज में है तो आप अपना एग फ्रीज करा लीजिए। अर्ली 30ज में है तो आप अपना एग फ्रीज करा लीजिए।
(30:05) बहुत बार ऐसा होता है कि शादी ही 35 में हुई है। तो मैं यह नहीं कह सकती कि आप उन्होंने सोचा था कि पहले कर लेंगे लेकिन अब नहीं कर पा रहे। तो आपको जब याद आए जब आपने डिसाइड किया कि नहीं अभी बच्चा नहीं चाहिए। आप उस टाइम पे फ्रीज करवा लीजिए। यह जानना बहुत जरूरी है। हम क्यों कहते हैं बहुत अर्ली एज में मत कराओ क्योंकि ऐसे में क्या होता है कि बहुत खुद ही बहुत लोग खुद ही प्रेग्नेंट हो जाते हैं। बहुत लेट में मत कराओ इसलिए बोलते हैं क्योंकि एग की क्वालिटी और क्वांटिटी जो होती है वो कम हो जाती है। हम अब अगला सवाल जो लोगों के दिमाग में रहता
(30:40) है कि वो एग जब हमने फ्रीज कर लिया तो हम उसको कितने साल तक रख सकते हैं? ऑफिशियली हम 10 साल तक तो उसको रख ही सकते हैं। उसके बाद रिन्यूल के साथ आप आगे भी रख सकते हैं गवर्नमेंट को बता के कि हम और ज्यादा स्टोर करना चाहते हैं। और फिर जब आप तैयार हैं और आपका पार्टनर तैयार है तो उसी एग को स्पर्म के साथ फ्रीज करा के एम्ब्रियो बनाते हैं और आपके यूट्रस में डाल देते हैं। तो आईवीएफ का प्रोसेस कंप्लीट होता है। गॉट इट। सो डॉक्टर निधि आजकल हम कॉस्मेटिक गनेकोलॉजी का भी ट्रेंड काफी सुन रहे हैं। तो इसके बारे में आप थोड़ा हमें बता सकते
(31:14) हैं होता क्या है? कैसे काम करता है ये? देखिए कॉस्मेटिक गायनेकोलॉजी को जब हम डिटेल में बात करें तो हम कहते हैं इसको एस्थेटिक फंक्शनल एंड रीजनरेटिव गायनेकोलॉजी। यह एक सुपर स्पेशलिटी है या सब स्पेशलिटी है गनेकोलॉजी का जो बहुत ही अपकमिंग है जो बहुत देर से आया है ये उनमें इन चीजों को कंसीडर किया गया जो चीजें पहले हमें जनरल गननेकोलॉजी में कॉलेजेस में नहीं पढ़ाई जाती थी जैसे कि आपको यूरिन लीकेज है जो माइल्ड यूरिन लीकेज लोगों को होता है। लैक्स वाइना का ट्रीटमेंट जो आपका इंटिमेट एरिया है उसका थोड़ी बहुत जो ज्यादा सुंदर लगे उसको
(31:58) बनाने के लिए भी किया जाता है और जो मेनोपॉज के बाद सिम्टम होने लगते हैं जैसे कि ड्राइनेस ऑफ वाइना हो जाता है। बहुत बार लीकिंग ऑफ यूरिन हो जाता है। रेकरेंट वजाइनल इंफेक्शन मतलब कि बार-बार वाइना में इनफेक्शन हो रहा है और उसको वो दवाइयों से ट्रीटमेंट नहीं हो रहा है। आपको यूरिनरी ट्रैक्ट इनफेक्शन हो रहा है जो दवाइयों से ट्रीट नहीं हो पा रहा है। तो उन सबके लिए एक नई एक सब स्पेशलिटी और सुपर स्पेशलिटी आई है जिसको कि कॉस्मेटिक गायनेकोलॉजी कहते हैं और जो उनको करने वाले डॉक्टर्स होते हैं उनको कॉस्मेटिक गनेकोलॉजिस्ट कहते हैं एंड आई एम वन ऑफ
(32:35) देम। वाओ दैट्स ग्रेट। ओके। सो डॉक्टर निधि लास्टली आई वुड लाइक टू आस्क कि अगर आपको हमारी ऑडियंस को एक पीस ऑफ एडवाइस देनी हो चाहे वो वुमेन हेल्थ केयर रिगार्डिंग हो या फिर कोई भी एडवाइस हो तो वो आप क्या देना चाहेंगे? पीस ऑफ एडवाइस एक नहीं है। बहुत सारे हैं। लेकिन आई विल ट्राई कि कम से कम टाइम में बता पाऊं। सबसे पहले चाइल्डहुड ओबेसिटी को प्रिवेंट करिए और लाइफस्टाइल मॉडिफिकेशन करिए। चाइल्डहुड अबेस्टिटी मतलब सुबह बचपन से जंक फूड नहीं खाना है। कम खाना है। अपने लाइफ स्टाइल को बेटर रखना है। एक हेल्दी एक्सरसाइज अडप्ट करना है। यह कुछ
(33:14) चीजें हैं। उसके बाद स्मोकिंग नहीं करनी है। आपको हर फीमेल को नाइन इयर्स से लेके 45 इयर्स की एज के बीच में सर्वाइकल कैंसर की वैक्सीन लगनी है। वह आप सब लगवा सकते हैं। पैप्सियर हर फीमेल जो कि मोर दैन 22 इयर्स ऑफ़ एज है उसका पैप्सियर होना चाहिए हर 3 साल से 5 साल के गैप पे और एव्री फीमेल हैज़ एटलीस्ट वन गायनी एग्जामिनेशन जो आप साल में एक बार कराएं। तो यह सारी चीजें बहुत ज्यादा इंपॉर्टेंट है। अपने इंटिमेट हेल्थ का ख्याल रखिए। अपने पीरियड्स अगर इर्रेगुलर या बहुत पेनफुल होते हैं तो अपने डॉक्टर से मिलिए। परफेक्ट। थैंक यू वेरी मच फॉर वाचिंग द
(33:57) वीडियो। होप यू हैव एंजॉयड इट एंड यू हैव अंडरस्टुड सो मेनी मिथ्स एंड फैक्ट्स। एंड इफ यू स्टिल हैव सम क्वेश्चंस, द डिटेल आर गिवेन इन द लिंक एंड ऑन द स्क्रीन। सो डू डायल अस, डू कॉल अस एंड लेट अस नो व्हाट आर योर कंसर्न्स। थैंक यू।
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