Saturday, September 19, 2026

Avoid These Daily Habits - Agarbatti, Perfume, Makeup, Cooking Oil & Mattress | Dr. Arrjun & Shlloka

Avoid These Daily Habits - Agarbatti, Perfume, Makeup, Cooking Oil & Mattress | Dr. Arrjun & Shlloka

Author Name:SHLLOKA

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Title: Avoid These Daily Habits - Agarbatti, Perfume, Makeup, Cooking Oil & Mattress | Dr. Arrjun & Shlloka

Author Name: SHLLOKA

Description: ➡️ Avoid These Daily Habits: Agarbatti, Perfume, Makeup, Cooking Oil & Mattress | Dr. Arrjun & Shlloka
➡️ What Is Cancer? What Causes It & How Is It Treated? | Body to Beiing
➡️ From Your Mattress & Morning Tea to Perfume, Cookware & Sunscreen | Shlloka

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🎙️ Today’s Episode Covers:

Welcome back to the Body to Beiing Podcast!

In this insightful episode, we are joined by **Dr. Arrjun Sankaran, a surgical oncologist**, to discuss everyday lifestyle choices, environmental exposures and common health misconceptions.

From mattresses, fragrances and cosmetics to cookware, cooking oils, hot beverages and indoor air quality, Dr. Arrjun explains what we should know about everyday products and their potential impact on long-term health.

We also discuss protein powders, sunscreen, vaping, hookah, children's drinks, personal care products, HPV vaccination and preventive health screening.

✨ What You Will Discover

🪷 What mattress off-gassing means and what to consider
🪷 What to check on shampoo, body wash & moisturizer labels
🪷 Understanding fragrance ingredients in everyday products
🪷 How to choose an air purifier beyond marketing claims
🪷 Cookware and cooking oil considerations
🪷 What we know about very hot beverages and long-term health
🪷 Alcohol, vaping, hookah and shisha: what to know
🪷 Hidden sugar in children's malt drinks and fruit juices
🪷 Sunscreen basics: SPF, PA rating and the two-finger rule
🪷 What to consider when choosing makeup, nail polish and hair dye
🪷 Sanitary product choices and the importance of HPV vaccination
🪷 Preventive health checks and recommended screening discussions

Timestamps:

00:00 Introduction 🎙️
03:06 Guest Welcome 🙏
04:27 Health Trends 📈
05:54 Mattress & Bedroom 🛏️
08:53 Brush & Bodywash 🚿
11:19 Perfume & Fragrance 🌸
13:37 Incense & Havan 🔥
14:58 Air Purifiers 🌬️
16:49 Hair Oil & Deodorant 🧴
21:22 Kitchen Utensils 🍳
24:14 Grilling & Red Meat 🍖
26:14 Peanuts & Aflatoxin 🥜
27:20 Cooking Oils 🫗
30:17 Protein Myths 💪
32:21 Appliances & Plastics ♻️
35:23 Hot Tea & Coffee ☕
37:04 Alcohol & Health 🍷
38:20 Vaping & Hookah 💨
40:58 Kids' Drinks 🧒
43:55 Sugar & Cornflakes 🍬
47:06 UV & Sunscreen ☀️
51:42 Pollution & Radon 🏭
53:44 Makeup & Hair Dye 💄
58:41 Sanitary Pads & HPV 🩸
1:02:34 Paan & Mosquito 🌙
1:03:57 Rapid Fire Q&A ⚡
1:04:37 Preventive Screening ✅
1:06:07 Closing Thoughts 🙏

🌸 Episode Highlights

Dr. Arrjun Sankaran connects medical knowledge with everyday lifestyle choices, explaining how we can think more carefully about product exposure, food choices, indoor air quality, personal care routines and preventive healthcare.

The conversation is designed to help viewers make more informed health decisions and understand common health claims without unnecessary fear.

🌟 About Our Guest
Dr. Arrjun Sankaran is a surgical oncologist from Hyderabad with experience in breast, ovarian, and head & neck oncology.

He is also a health content creator who focuses on making complex medical topics easier to understand and discussing common health misconceptions and everyday lifestyle choices.

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📌 Medical Disclaimer:
This episode is for educational and informational purposes only and is not a substitute for professional medical advice, diagnosis or treatment. Individual health risks can vary. Please consult a qualified healthcare professional for personal medical concerns.

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#HealthAwareness #HealthyLifestyle #HealthMyths #PreventiveHealth #Shlloka #BodyToBeiing

Transcript:
(00:00) जब अपन फूड को बार्बक्यू कर रहे हैं, देयर इज़ दिस ब्लैक लेयर व्हिच फॉर्म्स ऑन टॉप। सो दिस ब्लैक लेयर इज़ समथिंग व्हिच इज कॉल्ड एज़ एक्रिलमाइड फॉर्मेशन। सो दिस एक्रिलमाइड इज़ अ ग्रुप टू वे कार्सिनोजन। व्हाट आर यू सेइंग? गरमा गरम चाय पीते हो व्हिच इज मोर देन 65 डिग्री सेल्सियस। दिस इज अ ग्रुप टू वे कार्सिनोजन। इससे अपनी खाने की नल्ली इससोफेगस एंड पेट में कैंसर होने का संभावना रहता है। एविडेंस आप देखते हो। इट इज देयर फॉर कॉफी। और कैंसर प्रोटेक्शन। व्हाट आर यू सेइंग? कैंसर प्रोटेक्शन? साइलेंट विलन नंबर वन जो लोग को लगता नहीं
(00:27) है यूवी रेडिएशन। तो अगर आप घर के अंदर भी बैठे रहते हो फिर भी आपको सनस्क्रीन लगाना चाहिए। अगर एक मर्द दिन में कम से कम 30 से 35 ग्राम के फाइबर खाना चाहिए। औरत दिन में कम से कम 25 ग्राम के फाइबर खाना चाहिए। तो जितना खाएंगे उतना कोरक्टल कैंसर का संभावना भी कम होता है। जब आप नया मैट्रेस लेते हैं मैट्रेस का स्मेल आता है। वी कॉल दिस एस ऑफ गैसिंग। इसमें से वीओसी रिलीज होता है। जो एक ग्रुप वन आईएआरसी कार्सिनोजन है। लॉट ऑफ फोन स्क्रॉलिंग एट नाइट। ये ग्रुप टू ए कार्सनोजन है। हमारी बड़ी आंत में कैंसर रहता है। वो आने का संभावना रहता है।
(00:56) ब्रेस्ट में कैंसर आने का संभावना रहता है। बच्चों वाली चीज से अच्छी खुशबू आ रही है। तो उसको प्लीज इग्नोर कर दीजिए। हर कंपनी वो परफ्यूम का जो ब्रास है उसको छुपा के रखती है। उसमें कौन सा केमिकल है उनको बताने की जरूरत नहीं है। इट्स लीगली प्रोटेक्टेड। ओ व्हाई? जब भी आप कुछ चीज को जलाते हो वहां से स्मेल निकलता है। वीओसी विल बी रिलीज़्ड। बोर्न फायर भी प्रॉब्लम है। यस, यस। इसलिए शायद आजकल इतने सारे यंग पेशेंट्स में भी लंग कैंसर के केसेस भी बढ़ रहे हैं। एंड दीज आर आल नॉन स्मोकर्स। डॉक्टर अर्जुन शंकरा इज अ सर्जिकल ओकोलॉजिस्ट फ्रॉम हैदराबाद हु वर्क्स
(01:29) एक्सपेंसिवली इन ब्रेस्ट ओवेरियन एंड हेड एंड नेक कैंसर। बियोंडन्ड द ऑपरेटिंग रूम ही हेज़ बिकम अ वॉइस ऑफ़ सैनिटी ऑन दी इंटरनेट बस्टिंग द हेल्थ ऑल ऑफ़ अस हेव फॉलन फोक फ्रॉम द प्रोडक्ट्स वी यूज़ एववरी डे टू द फूड ऑन आन आवर प्लेट्स। कोई दिल्ली में योगा कर रहा है। दैट इज अनहेल्दीियर देन स्मोकिंग अ सिगरेट इन शिलॉन्ग। ओह माय गॉड। एयर प्यूरीिफाइर्स की बात करते हैं। हाउ डू यू सेलेक्ट द परफेक्ट एयर प्यूरीिफायर? इसमें दो चीज रहता है। एलुमिनियम ज्यादा यूज़ करते हैं तो इसके कारण किडनी डिजीज हो सकता है। ध्यान रखना चाहिए। ज्यादा पुराना नहीं रहना चाहिए।
(01:59) इसके ऊपर क्रैक्स वगैरह नहीं होना चाहिए। इसके ऊपर एसिडिक कुकिंग नहीं करना चाहिए। एलपीजी उसके अंदर भी अनबर्न गैस वगैरह जो होता है। इवन दैट कैन इज अ पोटेंशियल कार्सिनोज। मटन कैन गिव यू कोन कैंसर। प्लास्टिक को यूज नहीं करना चाहिए माइक्रोवेव में। एंड एस्पेशली वो जो ब्लैक प्लास्टिक बॉक्स रहता है उसको तो बिल्कुल यूज नहीं करना चाहिए। क्लासिक हेल्थ माल्ट बेस्ड ड्रिंक्स वगैरह रहते हैं। सम ऑफ़ देम हैव क्लोज टू 30 टू 40 ग्राम्स ऑफ़ शुगर पर 100 ग्राम। इट लीड्स टू चाइल्डहुड ओबेसिटी एंड ओबेसिटी इज़ अगेन अ सेकेंडरी रिस्क फैक्टर
(02:26) फॉर कैंसर। हाई फ्रुक्टोज़ कॉन सिरप एचएफसीएस। जो आपके केचप्स में रहता है। जो एक टैंजी मीठा फ्लेवर आता है। दैट इज द वर्स्ट। अल्कोहल एक ग्रुप वन कार्सिमोजन है। देयर इज़ नो सेफ लिमिट ऑफ़ अल्कोहल। और कितनी फ्रीक्वेंसी [संगीत] में पीना ठीक है? पीना ही नहीं चाहिए। कार्टू कभी कबभार आप हाइजीनिक जगह में जाके करा लेती हो। उसके कारण हेपेटाइटिस बी हो सकता है। एंड हेपेटाइटिस बी हेपेटाइटिस सी कैन आल्सो कॉज कैंसर इवेंचुअली। जब ऐसा होता है कि आप एक हेयर कलर का शैंपू लगा लो और 5 ही मिनट में मेरा आपका हेयर कलर हो जाएगा। वो नहाते नहाते दीज़ आर द मोस्ट डेंजरस वंस।
(02:54) सर्वाइवल कैंसर बढ़ने का सबसे बड़ा कारण ये है एचपीवी वायरस। इंडिया में अभी भी वायरस के वैक्सीनेशंस कोई लेता नहीं है। ज्यादातर लोग डरते हैं। सम ऑफ द वर्स्ट सेनेटरी प्रोडक्ट्स आर द पेंटी लाइनर्स जो पीरियड्स के बीच में यूज़ करते हैं। टुडे वी आर स्पेंडिंग अ डे विद डॉक्टर अर्जुन टू सेटिवेट द रियल हेल्थ रिस्क फ्रॉम द मिथ्स ऑन द बॉडी टू बीइंग पॉडकास्ट। दुनिया भर में पांच में से एक इंसान अपनी पूरी लाइफ टाइम में कैंसर से पीड़ित होता है और यह स्टैटिस्टिक्स बहुत ही तेजी से बढ़ रहे हैं जो कि आज एक एपिडेमिक से कम नहीं है। अब कैंसर का हर एक फैक्टर हमारे
(03:28) कंट्रोल में तो नहीं है लेकिन काफी हद तक काफी फैक्टर्स हमारे कंट्रोल में हैं। जैसे कि क्या आप जानते हैं कि मटन खाने से आप कोलोरेक्टल कैंसर के ज्यादा करीब हैं। या फिर जिस मैट्रेस में आप हर रोज सात से आठ घंटे या फिर इवन ज्यादा सोते हैं, वो कहीं ना कहीं बीमारी का कारण बन सकता है। या फिर कॉर्नफ्लिक जो आप हेल्थ फूड समझकर अपने बच्चों को देते हैं वो भी उनकी हेल्थ के लिए हानिकारक साबित हो सकता है या फिर फ्रेगरेंसेस जो कि आपके बॉडी वाशेस, शैंपूस, रूम फ्रेशनर में होता है वो भी कैंसर का कारण बन सकता है। तो आज हम मॉर्निंग से नाइट ऐसे हर फैसिट को एग्जाम
(04:06) करेंगे जो या तो आपकी हेल्थ के लिए हानिकारक है या फिर कैंसर कॉजिंग है। तो आज का पॉडकास्ट इनफेटिव तो है ही है बट मुझे यह पॉडकास्ट पर्सनली कंडक्ट करके बहुत ही मजा आया बिकॉज़ ही इज़ अ वेरी यंग डायनामिक डॉक्टर हु इज आल्सो अ कंटेंट क्रिएटर एंड हु अंडरस्टैंड्स कि व्यूअर्स तक ऐसी इंफॉर्मेशन चटक तरीके से कैसे डिलीवर करनी चाहिए। तो प्लीज इस पॉडकास्ट को पूरा देखिए और ज्यादा से ज्यादा लोगों तक शेयर करिए। अर्जुन जी आईसीएमआर के हिसाब से इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च एंड नेशनल कैंसर रजिस्ट्री प्रोग्राम के हिसाब से हर एक फैमिली में कोई ना कोई कैंसर से डिटेक्ट
(04:41) जरूर होता है। अगर तो हम वर्ल्ड के स्टैट्स माने तो एक में से पांच इंसान कैंसर का शिकार है। और वन आउट ऑफ नाइन मेन एंड वन आउट ऑफ 13 वुमेन आर डाइंग ऑफ कैंसर ग्लोबली। व्हाट इज हैपनिंग? मतलब जितने भी कैंसर केसेस हैं वो जरूर बढ़ रहे हैं। ऑब्वियसली इन इंडिया एंड अक्रॉस द वेस्ट एज वेल। इसके बहुत सारे कारण हैं। अगर आप इंडिया के हिसाब से कॉसेस देखोगे। नंबर वन वी आर अडॉप्टिंग अ वेस्टर्न टाइप ऑफ लाइफ। इंडिया पहले हमेशा कैसा रहता था? ज्यादा अपन खेत वगैरह में काम करते थे। जो होम ग्रोन फूड है वो खाते थे। आजकल वेस्टर्न फूड ज्यादा प्रोसेस्ड
(05:12) फूड खा रहे हैं। ये भी होने लग गया। मोटापा बढ़ने लग गया। अपन काम कम कर रहे हैं। पोल्यूशन बढ़ने लग गया। अगर आप दिल्ली वगैरह देखोगे तो 500 550 एक नॉर्मल हो गया। उससे कम होता है तो हमको लगने लग जाता है यार एक्यूआई आज थोड़ा ठीक लग रहा है। एंड समवेयर इन द वेस्ट प्रोब्ली यू लुक एट एक्यूआई प्रोब्ली फाइव और 10 एंड इट गोज़ बियड 50 दे शट द सिटी डाउन। उसके अलावा जो अपना डायग्नोसिस है जो हम जल्दी स्क्रीन कर रहे हैं, ज्यादा टेस्टिंग कर रहे हैं। लोग के मन में थोड़ा अवेयरनेस भी बढ़ने लग गया। तो इसके कारण ज्यादा कैंसर के केसेस भी पकड़ में आ रहे हैं।
(05:41) जब मेरी आपसे पहले बात हो रही थी तो मेरा यह कंक्लूजन निकला कि ऐसे काफी सारे फैक्टर्स हैं कैंसर कॉजिंग जो हमारे होल्ड के बाहर हैं। लेकिन काफी ज्यादा यानी कि मेजॉरिटी हमारे कंट्रोल में है। तो आज हम चाहेंगे कि मॉर्निंग टू नाइट आप एक-एक चीज एक-एक फैसिट हमारी लाइफस्टाइल का बताएं जो आपके हिसाब से या तो कैंसर कॉजिंग हो रहा है। हमें लगता है वह तो चीज सही है पर वो एक्चुअली चीज सही नहीं है और हमारे हेल्थ के लिए ओवरऑल डेटरमेंटल है। तो सबसे पहले अपन शुरू करते हैं बेड से जब सबसे पहले उठते हैं मान लीजिए 6:00 बजे को अपन उठ रहे हैं जो मैट्रेस जब अपन नया
(06:16) मैट्रेस लेते हैं न्यू मैट्रेस उससे हमेशा एक न्यू फर्नीचर या न्यू मैट्रेस का स्मेल आता है। वी कॉल दिस एस ऑफ गैसिंग। ये शुरुआत के कुछ दिनों के लिए रहता है। इसमें से वीओसी रिलीज होता है। वोलेटाइल ऑर्गेनिक केमिकल्स। सो ये वीओसी क्या करता है? है इट कैन कॉज एयरवे इरिटेशन इट कैन कॉज अस्थमा एंड आल्सो दिस वीओसी कैन रिएक्ट विद द ओजोन इन द एयर इसके साथ रिएक्ट करके फॉर्मेल्डिहाइड बनता है जो एक ग्रुप वन आईएआरसी कार्सिनोजन है आईएआरसी बोल के एक इंटरनेशनल ग्रुप है व्हिच हैज़ क्लासिफाइड मल्टीपल डिफरेंट आइटम्स ऑन द बेसिस ऑफ देयर एबिलिटी टू कॉज कैंसर तो
(06:49) ग्रुप वन होता है जिसका हाईएस्ट रिस्क ऑफ कैंसर कॉजिंग है जैसे इसमें आता है सिगरेट अल्कोहल एफेटॉक्सिंस ग्रुप टू ए होता है उससे थोड़ा सा कम रिस्क है टू टू भी और भी कम रिस्क है एंड थ्री ना के बराबर रिस्क है। इसलिए जब भी अपन नया मैट्रेस या नया फर्नीचर लेते हैं उसको पहले बाहर हवा में थोड़ी देर कुछ दिनों के लिए रखना चाहिए जब तक वो जो नया मैट्रेस वाला स्मेल है वो कम हो जाए। उसके बाद अपन इसकी इस्तेमाल कर सकते हैं। ओके। यू नो 80 टू 90% जो लोग हैं वो अपना मैट्रेस सालों तक बदलते नहीं है। एक रिसर्च के मुताबिक लगभग 60 टू 70% लोग
(07:23) अपना मैट्रेस 8 से 10 साल तक चेंज नहीं करते हैं। इज दैट अ प्रॉब्लम एंड शुड यू चेंज योर मैट्रिस फ्रीक्वेंटली? मैट्रेस चेंजिंग फ्रीक्वेंटली एटलीस्ट कुछ साल में एक बार उसको चेंज करना चाहिए। एंड मैट्रेस का यूजुअली अपन शेप देखना चाहिए। अगर वो शेप डिफॉर्म हो रहा है तो आपको जरूर उसको चेंज करना चाहिए। एंड आइडियली यू शुड आल्सो कीप फ्लिपिंग योर मैट्रेस। हेड एंड को टेल एंड की तरफ लेके आना चाहिए। नीचे की तरफ रहता है उसको ऊपर लेके आना चाहिए। यू नो आपने मैट्रेस की बात करी तो मुझे स्ट्राइक हुआ कि बेड में एक और कंपैनियन हमारा होता है व्हिच इज द फोन।
(07:53) पति और बच्चों के अलावा? करेक्ट। सर्वे दिखाता है कि अबाउट 80% से ज्यादा लोग अपना फोन अपने बेड के पास रखते हैं। तो इसके बारे में थोड़ा बताइए। एक्चुअली काफी स्टडीज भी पहले किए थे एंड एक टेंटेटिव रिस्क भी पहले हुआ था। मतलब ब्रेन में ट्यूमर्स आने का संभावना रहता है। बट एज ऑफ नाउ फोन यूसेज और फोन चार्जिंग बाय अ बेड साइड इज़ कंसीडर्ड एज अ ग्रुप टू बी इसका ज्यादा रिस्क नहीं है। यू कैन कीप इट बाय द साइड ऑफ योर बेड इफ यू वांट बट देयर इज़ नो लिंक विथ कैंसर एज ऑफ नाउ। पर फोन से वहां प्रॉब्लम होता है जब आप रात में 12 1:00 बजे 2:00 बजे तक
(08:22) बैठ के आप फोन स्क्रॉल करते रहते हो। तो फोन से जो ब्लू लाइट निकलता है ये आपकी रात की नींद को खराब कर देती है। एंड दिस अफेक्ट्स अ सरकेडियन रिदमम। सो जब आपका ये सरकेडियन रिदमम खराब हो जाता है। रात तक आप बैठे रहते हो, फोन देखते रहते हो। तो मेलेटनिन का प्रोडक्शन भी कम हो जाता है। ये ग्रुप टू वे कार्सिनोजन है। इसका कोलोरेक्टल मतलब हमारी जो आंत की बड़ी आंत में कैंसर रहता है वो आने का संभावना रहता है। छाती में मतलब ब्रेस्ट में कैंसर आने का संभावना रहता है। नहीं तो प्रोस्टेट में भी कैंसर आने का संभावना रहता है। व्हाट इज द नेक्स्ट थिंग जो हमें केयरफुल
(08:51) रहना चाहिए इन अ रिचुअल इन द मॉर्निंग। बाथरूम में द फर्स्ट थिंग यू डू इज ब्रश योर टीथ। जब टीथ के बारे में अपन बात करते हैं, इसमें दो चीज आता है। एक टूथब्रश रहता है। टूथब्रश ज्यादातर जो भी होता है, वो प्लास्टिक से बनता है। एंड दिस हैज़ अ पोटेंशियल टू रिलीज़ माइक्रोप्लास्टिक्स। नाउ ये माइक्रोप्लास्टिक्स और कैंसर का क्या लेना देना है? नोबडी रियली नोज़ द रिसर्च अबाउट दिस इज़ स्टिल गोइंग ऑन। बट जो भी माइक्रोप्लास्टिक्स है वो बॉडी में एक्यूमुलेट होता है। एंड समथिंग व्हिच इज़ नॉट अ बॉडी व्हिच इज़ फॉरेन एक्यूमुलेटिंग इन आवर बॉडी। इज़ नॉट अ गुड साइन। एंड उसके
(09:20) बाद जो अपन टूथपेस्ट लगाते हैं, टूथपेस्ट के बारे में इतने सारे Instagram के रील्स चल रहे हैं। टूथपेस्ट के कारण कैंसर होता है क्या? अब टूथपेस्ट के बारे में जब अपन देखते हैं, मेनली हमारे पास तीन रहता है। एक सबसे पहले रहता है फ्लोराइड टूथपेस्ट। एंड फ्लोराइड टूथपेस्ट ऑन द रिकॉर्ड देयर इज नो रिलेशन विद फ्लोराइड एंड कैंसर। शैंपूस, बॉडी वाशेस, सोप्स इन पे क्या कहना चाहेंगे आप? शैंपूज एंड बॉडी वाशेस ज्यादातर जो भी अपन बॉडी के ऊपर यूज़ करते हैं, इसको दो चीज में अपन डिवाइड कर सकते हैं। वन आर रन ऑफ थिंग्स जो हम यूज़ करते
(09:48) हैं एंड बॉडी के ऊपर रहता नहीं है। जैसा शैंपू या कंडीशनर रहता है। एक दो मिनट के लिए बाल के ऊपर रहता है। उसके बाद अपन धो देते हैं। इसको निकाल देते हैं। सो द रिस्क ऑफ़ टॉक्सिसिटी विथ दीज़ आइटम्स इज़ स्लाइटली लेसर। एंड एक चीज रहता है जैसा मेकअप रहता है या फाउंडेशन रहता है या परफ्यूम रहता है जो अपन शरीर के ऊपर लगा देते हैं। एंड दिन भर अपने शरीर के ऊपर ही रहता है। सो द रिस्क फॉर टॉक्सिसिटी विथ दीज़ आइटम्स इज़ स्लाइटली हायर। अगर आपका ऑयली स्कैल्प है तो आप सल्फेट वाला शैंपू यूज़ कर सकते हो। सल्फेट्स आर नॉट द बिलन। उसके अलावा भी थोड़े बहुत चीज़ है जो अपन
(10:16) शैंपूस में देखना चाहिए। वन ऑफ़ दीज़ इज़ समथिंग व्हिच इज़ कॉल्ड एज फॉर्मेल्डिहाइड रिलीज़। जैसे अपन पहले ही बात किए थे फॉर्मेल्डिहाइड इज़ अ ग्रुप वन आईएआरसी कार्सिनोजन। सो फॉर्मेल्डिहाइड रिलीज़ स्टार्ट लुकिंग एट द लेबल। आप हमेशा बॉटल को पलटा के पीछे देखो। पीछे देखते हो तो एक डीएम डीएन हाइड एंड या इमिडजो लिडनल यूरिया बोल के एक और चीज भी रहती है। ये सारी चीज से फॉर्मेल्डिहाइड बन सकता है। तो प्रेफरेबली अगर ये चीज है उस शैंपू में तो उसको यूज़ नहीं करना चाहिए। जब अपन बॉडी वाश की बात करते हैं। सेम थिंग अगेन मोस्ट ऑफ़ दीज़ कंपाउंड्स और मोस्ट ऑफ़ दीज़
(10:44) प्रोडक्ट्स हैव द सेम केमिकल्स। अवॉयड फॉर्मेल्डिहाइड रिलीज़ फ्रेगरेंस ऑफ़ पारफ नहीं रहना चाहिए। सिलिकॉन्स नहीं रहना चाहिए। एंड थोड़े बहुत इसमें मॉइस्चराइजिंग चीज रहना चाहिए। जैसा ऑइल्स, मुरमुरू बटर, होहोबाबो ऑइल ये सारी चीज रहता है। ये सारी चीज उसमें होना चाहिए। एंड यू कैन इवन हैव फैटी अल्कोहॉल्स। जैसे सिरिल अल्कोहल, सीरियल अल्कोहल ये सारी चीज रहता है। ये सारी चीज उसमें होना चाहिए। आपने फ्रेगरेंस की बात करी है। रीसेंट डर्मेटोलॉजिकल स्टडी के हिसाब से जो एलर्जिक कांटेक्ट डर्मेटाइटिस होता है यानी कि स्किन एलर्जी और लैशेस उसका सबसे
(11:13) बड़ा कारण है फ्रेगरेंसेस। जो लिटरली सब कुछ में है। सो मुझे इसके बारे में बताइए कि जो फ्रेगरेंसेस हैं यू नो फ्रॉम द एक्सपेंसिव परफ्यूम्स टू द रूम फ्रेशनर्स क्या ये सब हानिकारक हैं या फिर ऐसे कुछ फ्रेगरेंसेस हैं जैसे कि इत्र हो गया या अरोमा थेरेपी के ऑयल्स हो गए। क्या ये सेफ ऑप्शंस हैं? दिस इज़ अ डबल एच सोर्ड। सबसे पहले अगर अपन रूम फ्रेशनर की बात करते हैं। रूम फ्रेशनर्स ज्यादातर अपन जो भी इंडिया में यूज़ करते हैं दो या तीन ब्रांड्स ही है फेमस। एंड हर रूम फ्रेशनर में तीन बेसिक चीज रहता है। एक प्रोपेलेंट रहता है जो
(11:45) रूम फ्रेशनर वो स्मेल को बाहर भेजता है। एंड देयर इज़ समथिंग व्हिच इज कॉल्ड एज अ सॉल्वेंट व्हिच हेल्प्स दैट स्मेल टू डिसॉल्व इंटू दी एयर एंड देयर इज़ एट एक्चुअल फ्रेगरेंस इटसेल्फ। सो एवरीथिंग विल बी हैविंग जस्ट थ्री ऑफ़ दीज़। एंड ऑन दी अदर हैंड यू गो टू द यूके द यूएस। एंड यू लुक एट देयर लिस्ट ऑफ़ फ्रेगरेंसेस। दे बी ऑलमोस्ट 20 और 30 डिफरेंट इंग्रेडिएंट्स लिस्टेड। बिकॉज़ देयर इज़ अ डिफरेंस इन लॉ इंडिया के हिसाब से। एंड अगर आप वेस्ट के हिसाब से देखोगे तो इंडियन रूल्स के हिसाब से ऑल यू हैव टू मेंशन इज़ दीज़ थ्री आइटम्स एंड अगर आप रूम
(12:13) फ्रेशनर की बात भी करते हो जब भी आप उसको स्प्रे करते हो अगेन व्हाट रिलीजस फ्रॉम दिस इज़ समथिंग व्हिच इज़ कॉल्ड एज वीओसी और वोलेटाइल ऑर्गेनिक केमिकल्स दीज़ वीओसीस दे कैन कॉज़ एयरवे इरिटेशन अस्थमा हो सकता है स्पेशली अगर एक्सट्रीम्स ऑफ़ एज है एंड ऑन टॉप ऑफ़ दैट दिस अगेन हैज़ अ थ्योरेटिकल रिस्क ऑफ़ कैंसर। सो अगर आपके रूम से बदबू आ रहा है तो उसको सॉल्व कैसे करना चाहिए? व्हाट इज़ अल्टरनेटिव फॉर दिस? नंबर वन अल्टरनेटिव आपको रूम को वेंटिलेट करना चाहिए। खिड़की खोलो वेंटिलेटेड। अगर बाथरूम से बदबू आ रहा है, एग्जॉस्ट फैन लगाओ। एग्जॉस्ट फैन को चालू
(12:42) करो। एंड पता करो बदबू क्यों आ रहा है? अगर आपके रूम से बदबू आ रहा है। फाइंड आउट व्हाई दे सम डपनेस। कहीं अगर पानी टपक रहा है, कहीं कोने में डैंपनेस है, शायद वहां से बदबू आ रहा है। शायद आपके कपड़े अच्छे से धुले नहीं है। अगर कपड़े धुलने के बाद भी शायद आपने अच्छे से उसको सुखाया नहीं है। डायरेक्टली आपने कबोर्ड के अंदर रख दिया। मे बी दैट्स द कॉज़। अगर आपके किचन से बदबू आ रहा है, पता करो। डोंट जस्ट रूम फ्रेश एंड मास्क इट। ये कैसा है? मैंने दो से तीन दिन नहाया नहीं। बस ऊपर से परफ्यूम लगा के आ गया। सो, आई एम नॉट सॉल्विंग द
(13:07) रूट कॉस्ट। आई एम जस्ट कवरिंग इट अप विथ द फ्रेगरेंस व्हिच इज़ नॉट हेल्दी अगेन। काफी जो आयुर्वेदिक लग्जरी ब्रांड्स हैं उनके पास सैंडलवुड फ्रेगेंसेस हैं, जैसमीन फ्रेगरेंसेस और बोलते हैं नेचुरल है। तो क्या वो ठीक है? हम बहुत सारे लोग एसेंशियल ऑइल्स यूज़ करते हैं। एंड दिस इज़ सेड टू बी नेचुरल। यस एसेंशियल ऑइल्स विल बी नेचुरल। बट इवन इन द डिस्पेंसिंग देयर आर टू टाइप्स ऑफ़ डिस्पेंसर्स। वी हैव हॉट डिस्पेंसर्स एंड कोल्ड डिस्पेंसर्स। सो, दे सेट इवन व्हेन यू यूजिंग अ हॉट डिस्पेंसर। एक छोटा सा टी लाइट लगा देते हैं। फिर उसको जलाते हो।
(13:32) एंड फिर वहां से स्मेल निकलता है। इवन दैट हैज़ अ थ्योरेटिकल रिस्क ऑफ वीओसी। इवन दो इट इज़ लेस कंपेयर टू अ रूम फ्रेशनर। सो दे से दैट कोल्ड डिस्पेंसिंग इज़ बेटर। केवल आप एसेंशियल ऑइल को एक कटोरी में लगा के छोड़ दो। तो वहां से जो नेचुरल स्मेल आता है वो बेटर है। जब भी आप कुछ चीज को जलाते हो वहां से सीओसी विल बी रिलीज़्ड। दिस इज़ केमिस्ट्री एंड अगर वीओसी रिलीज़ हो रहा है देन देयर इज़ अ थ्योरेटिकल रिस्क ऑफ़ कैंसर। अगरबत्ती सांभरानी लगाते हैं वह हवन जो करते हैं कैमफर एनीथिंग एंड एवरीथिंग व्हिच रिलीज़ स्मोक व्हेन बीइंग बर्न एंड
(14:02) स्मोक से निकलता है पीएम 2.5 पार्टिकल्स एंड पीएम 2.5 पार्टिकल्स इज़ एन इंडोर एयर पोल्यूटेडेंट बट इवन दो उनके इंग्रेडिएंट्स अच्छे हैं लाइक घी होता है कपूर होता है ये तो सब अच्छे इंग्रेडिएंट्स हैं इनफैक्ट जो हवंस करते हैं या यू नो एक योगिक प्रोसेस होता है भूता शुद्धि उसमें भी आप एक लाइटिंग प्रोसेस करते हो वो कैमफ वगैरह तो कहते हैं जब आप इन्हेल करो तो पूरा वाता पित्ता कफा को यू नो बैलेंस आउट वगैरह करता है तो इसकी रीजनिंग आप कैसे जस्ट नहीं इवन आई एम अ ह्यूज बिलीवर इन दैट। मैं क्योंकि हमारे घर में भी हवन वगैरह चलता रहता है। साल
(14:27) में कम से कम एक से दो बार कर देते हैं। बट द थिंग इज़ रेस्पेक्टिव ऑफ़ द इंग्रेडिएंट्स यूज़। आप सबसे बेस्ट इंग्रेडिएंट्स भी यूज़ कर सकते हो। पर वो जलने के बाद उससे निकलता है स्मोक। सो स्मोक इज़ एन इंडोर एयर पोलटेंट। तो अगर अपन हवन करना चाह रहे हैं तो भी प्रेफरेबबली अगर थोड़ा ओपन करेंगे खिड़की खोल के करेंगे या बालकनी में करेंगे तो बेटर रहेगा। और दूर बैठे हैं। हां, दूर बैठे। जरूर दूर बैठना चाहिए। एंड इफ यू सी अगर आजकल की जो जवान औरत है मतलब 20 30 साल की उम्र के आसपास में वो पेशेंट्स में भी काफी लंग कैंसर का इंसिडेंस बढ़ गया। एंड दीज़ आर ऑल नॉन
(14:56) स्मोकर्स। उन्होंने कभी जिंदगी में सिगरेट नहीं पिया फिर भी लंग कैंसर आ रहा है। व्हिच ब्रिंग्स मी टू द एयर प्यूरीिफायर। ये एयर प्यूरीिफायर गेमिक है या फिर डस इट रियली वर्क? एयर प्यूरीफायर वर्क्स। इनफैक्ट मुझे लगता है स्पेशली दिल्ली, मुंबई ऐसे वाले जगह में हर घर में रहना चाहिए। सो अगर अपन एयर प्यूरिफायर्स की बात करते हैं। हाउ डू यू सेलेक्ट द परफेक्ट एयर प्यूरीिफायर? इसमें दो चीज रहता है। एक होता है इसमें फिल्टर। हेपा फिल्टर होता है। सो हेपा फिल्टर होता है एंड हेपा लाइक फिल्टर होता है। सो द लाइक इज़ नेवर एज़ गुड एज़ द ओरिजिनल वन। सो
(15:24) यू शुड नेवर गो फॉर द लाइक। गो फॉर द हेपा फिल्टर एंड उसमें भी H13 से ज्यादा रहना चाहिए। सो दिस इज़ वन थिंग। एंड देयर इज़ वन मोर थिंग व्हिच इज़ कॉल्ड एज़ सी एडीआर क्लीन एयर डिलीवरी रेट। सो ये दोनों चीज को हमें इंक्लूड करना चाहिए। अगर अपन दिल्ली की बात करते हैं। ऑब्वियसली द फिल्टर इज़ गोइंग टू चेंज। यू हैव स्माल रूम, लो एक्यूआई, स्माल रूम, मॉडरेट एक्यूआई एंड मॉडरेट साइज रूम रहता है। फिर लार्ज साइज रूम रहता है। इसके हिसाब से होना चाहिए। एंड देन यू कैन सेलेक्ट द एयर प्यूरीिफाइस ऑन द बेसिस ऑफ़ दैट। एंड एयर प्यूरिफाइस में भी काफी गिमिक्स है। वो ऐप
(15:53) कनेक्टिविटी दे देते हैं। रात में फैंसी लाइटिंग देता है। ये सब चीज़ फालतू चीज़ के ऊपर कूलिंग मोड एंड हीटिंग। राइट? राइट। राइट। ये सारी चीज को मतलब फोन से कंट्रोल करके क्या करने वाले हैं अपन? वो ₹10,000 और जोड़ देंगे। ये सारी चीज बस मार्केटिंग रहता है। बट अगेन इसमें भी आयनाइजिंग होता है एंड ओजोन जनरेटर्स होते हैं। अगेन दिस इज़ नॉट टू बी यूज्ड। प्योर आप हेपा फिल्टर ले लो। सीए डीआर को देख लो एंड उसके अंदर का एक कार्बन फिल्टर भी रहता है। सो दैट कार्बन फिल्टर हैज़ टू बी थिक। थोड़े बहुत फिल्टर्स के ऊपर केवल एक कार्बन का लेयर जैसा आ जाता है। सो दिस
(16:22) इज़ नॉट एज गुड। क्योंकि एस्पेशली अपना जो घर में जो भी खानावाना बनाते हैं। एंड ऑब्वियसली किचन इज़ वन ऑफ़ द बिगेस्ट सोर्स ऑफ़ इंडोर एयर पोलशन। एंड देयर इज़ अ लॉट ऑफ़ स्मोक जनरेशन। तड़का करते हैं, मसाला सारी। सो, यह कार्बन फिल्टर जितना मोटा रहता है, यह कुकिंग के टाइम पे जो भी केमिकल्स या इंडोर एयर पोलशन जो भी जनरेट होता है, उसको भी अब्सॉर्ब कर देता है। एंड एस्पेशली अगर आपका बड़ा रूम है, वन एयर प्यूरी इज़ नेवर गोइंग टू बी इनफ। इफ यू हैव अ बिग रूम। दोनों कोने में एक-एक एयर प्यूरीिफायर लगा लो आप। मुझे यह पता चला कि आजकल हेयर ऑयल भी
(16:52) कंटैमिनेटेड हो रहे हैं। माइनस द फ्रेगरेंस। क्योंकि हमको लगता था कोकोनट ऑयल जो इतना कॉमनली मिल रहा है वो ठीक है। आंवला का कुछ वेरिएंट है ऑइल का वो ठीक है। बट उसमें भी कंटैमिनेशन है। तो हेयर ऑइल्स में किस प्रकार का कंटैमिनेशन है? व्हाट आर द रेड फ्लैग्स और हमें क्या चीजें देखनी चाहिए? हेयर ऑइल्स काफी सिंपल रहता है। इसमें दो ही चीज हमको अवॉइड करना चाहिए। एक उसमें फ्रेगरेंस नहीं रहना चाहिए। व्हिच एवर स्मेल्स गुड स्टॉप यूजिंग इट। एंड सेकंड थिंग एज मच एस पॉसिबल कोल्ड प्रेस्ट या वर्जिन कोकोनट ऑयल को प्रेफर करना चाहिए।
(17:22) जैसा अपन अपना दादा नानी वगैरह करते थे वही है। यू हैव टू गो बैक टू द बेसिक्स नाउ। एंड द थर्ड थिंग कभी कबभार उसमें मिनरल ऑयल की कंटैमिनेशन रहता है। सो मिनरल ऑयल की कंटैमिनेशन नहीं रहना चाहिए। गो फॉर व्हाटएवर इज 100% प्योर कोकोनट ऑयल। और आपको लगता है जो थोड़ा एक्सपेंसिव हो इफ यू कैन अफोर्ड। यस डेफिनेटली डेफिनेटली। ओके। बॉडी मॉइस्चराइज़र्स के बारे में आपको क्या कहना है? बॉडी मॉइस्चराइज़र्स इट ऑल कम्स ऑन टू द सेम बेसिक थिंग्स अगेन। इसमें फॉर्मेल्डिहाइड रिलीज़ नहीं होना चाहिए। जैसे डीएमडीएन, हाइड्रेंट, इमीडज़, डिडनल यूरिया ये सारी चीज नहीं रहना चाहिए।
(17:51) फ्रेगरेंस नहीं रहना चाहिए। और एक और चीज रहता है जिसको अपुन बोलते हैं बीएचए और बीएचटी। बूटाइलेटेड हाइड्रोक्सी एनिसोल और बुटाइलेटेड हाइड्रोक्सी टॉलन। ये सारी चीज भी इसमें नहीं रहना चाहिए। एंड जो चीज रहना चाहिए फैटी अल्कोहल्स रहना चाहिए। एंड एक और चीज रहता है जिसको अपन बोलते हैं क्वट्स। ये काफी कॉम्प्लिकेटेड नाम रहता है। बहन ट्राइमोनियम क्लोराइड ऐसा काफी कॉम्प्लिकेटेड चीज रहता है। ये सारे चीज भी रहना चाहिए उसमें। एस्पेशली इन हेयर कंडीशनर्स एंड इन द बॉडी मॉइस्चराइज़र्स। एंड जो बटर रहता है अगर ऑइल रहता है अगर यह सारी चीज आपके टॉप के
(18:21) दो से तीन इंग्रेडिएंट्स में है देन यू हैव टू गो फॉर इट। मैं आपसे डड्रेंस और परफ्यूम्स और बॉडी मिस के बारे में बात करना चाहती हूं। आल्सो मैं उसके अल्टरनेटिव्स के बारे में बात करना चाहती हूं जो अपेरेंटली हर्बल होते हैं विथ अ लॉट ऑफ़ दीज़ लग्जरी आयुर्वेदिक ब्रांड्स। हमने यह देखा है स्टडीज के मुताबिक कि बहुत सारे एंटी परस्परेंट्स में एलुमिनियम होता है। और वो एलुमिनियम का काम होता है कि वो आपके स्वेट डक्ट्स को बेसिकली बंद करता है। राइट? और फिर वो अल्टीमेटली अब्सॉर्ब हो जाता है और उसमें कई सारी प्रॉब्लम्स आ जाती होंगी। तो क्या ये अक्रॉस द बोर्ड
(18:51) ट्रू है? अगर अपन परफ्यूम्स की बात करते हैं जी द मेजर कंसर्न इन दिस इज द थैलेट्स इन दिस। ये थैलेट्स क्या होते हैं? जैसा हम पहले बात किए थे एंडोक्रेन डिसरप्टर है। एंड ऑब्वियसली परफ्यूम का यह माना जाता है दैट इट शुड बी स्प्रेड डायरेक्टली ऑन द स्किन। बिकॉज़ परफ्यूम्स हैव दैट डिफरेंट नोट्स। इट हैज़ अ टॉप नोट, इट हैज़ अ मिडिल नोट एंड इट हैज़ अ लोअर नोट। अ डीपर नोट। तो जब भी आप परफ्यूम को स्प्रे करते हो एक टॉप नोट जो आता है वो वैनिला ये वो कुछ रहता है। एंड देन आफ्टर सम टाइम व्हेन यू स्प्रे इट ऑन योर बॉडी आफ्टर हाफ एन एन एन एन एन एन
(19:17) एन एन एन एन आवर एन आवर सो उसका जो बीच का नोट है सम अदर स्मेल स्टार्ट्स कमिंग एंड देन एस्पेशली परफ्यूम्स की अगर ब्यूटी अगर आप देखोगे इट स्टार्ट्स रिएक्टिंग विथ योर ऑइल बॉडी का ऑइल या बॉडी का स्वेट जो भी रहता है सेम परफ्यूम अगर मैं यूज़ करता हूं अब आप यूज़ करोगे दोनों के लिए इट विल स्टार्ट स्मेलिंग डिफरेंट बिकॉज़ अ बॉडी स्मेल और अ बॉडी सेक्रेशंस आर गोइंग टल डिफरेंट। सो दैट परफ्यूम स्टार्ट्स रिएक्टिंग विथ दैट। बट अगर अपन परफ्यूम को डायरेक्टली बॉडी के ऊपर यूज करते हैं। स्पेशली ऑन द पल्स पॉइंट्स जैसा नेक पे यूज करते हैं या हैंड के ऊपर यहां
(19:45) यूज करते हैं, शोल्डर के ऊपर यूज करते हैं। दीज़ एरियाज दे आर ऑल हाई ब्लड फ्लो एरियाज। सो दीज़ टाइलेट्स कैन गेट डायरेक्टली अब्सॉर्ब ओवर देयर एंड वहां से एंडोक्राइन डिसरप्शन का होने का संभावना ज्यादा रहता है। सो इवन दो परफ्यूम मेकर्स एडवर्टाइज दैट यू हैव टू यूज़ द परफ्यूम ऑन द स्किन। प्लीज डू नॉट यूज़ इट ऑन द स्किन। कपड़े के ऊपर आप यूज़ कर लो। मे बी यू विल नॉट गेट टू एंजॉय द डीपर नोट। मे बी सात आठ घंटे तक नहीं रहेगा। शायद दो से तीन घंटे में उसका स्मेल निकल जाएगा। शायद आपका कपड़े में थोड़ा ऑइल के स्ट्स आ सकते हैं। शायद आपके कपड़े थोड़ा खराब हो
(20:13) जाएंगे जल्दी। बट कम से कम आपकी तबीयत ठीक रहेगी। ओके। तो ये जो रोल ऑन यू हैव सीन दैट्स जो बहुत सारे मेन करते हैं स्पेशली यू नो दिस भर भर के। उसका वो तो बहुत डैमेजिंग होता होगा। रोलन्स के हिसाब से अगर अपन देखते हैं तो वहां भी ये पैराबिन रहता है। एंड मेनी न्यू टलेट एंड पैराबिन फ्री परफ्यूम्स आर आल्सो कमिंग। बट प्रॉब्लम ये रहता है जो चीज अच्छा है वो चीज हमेशा महंगा रहता है। सो दीज़ थिंग्स आर आउट ऑफ द परचेस ऑफ मेनी ऑफ़ द कॉमन पीपल। ये दिस एलुमिनियम कंटेनिंग ड्यूडेंट्स इज़ अगेन अ ह्यूज थिंग व्हिच हैज़ बीन गोइंग ऑन। एलुमिनियम
(20:42) ऑब्वियसली एंटीस्पिरेंट है। वहां से जो भी पसीना निकलता है वो पसीना का जो फ्लो रहता है उसको कम कर देता है। एंड इसका थियोरिटिकली बहुत सारे स्टडीज भी पहले हुए थे लुकिंग एट अ रिस्क बिटवीन ये एलुमिनियम यूज़ एंड ब्रेस्ट कैंसर। हम बट हमेशा जो भी ऐसे स्टडीज होते हैं देयर इज़ समथिंग व्हिच इज़ सीन एज एन असोसिएशन और कॉजलल केस मतलब एलुमिनियम जो यूज़ कर रहा है उसको ब्रेस्ट कैंसर हुआ है। बट ये एलुमिनियम के कारण कैंसर हुआ है क्या? वाज़ इट कॉजेटिव नो इट वाज़ नेवर कॉज़ेटिव। इट इज़ एसोसिएशन। हां वो है। बट दैट एलुमिनियम हैज़ नेवर बीन प्रूव टू कॉज़ ब्रेस्ट कैंसर। सो अगर आप वो
(21:15) एलुमिनियम की जो एंटीपर्सेंट एक्शन है वो आपको अच्छा लगता है तो आप यूज़ कर सकते हो। बट देयर आर प्लेंटी ऑफ़ नॉन एलुमिनियम वेरिएंट्स एज वेल। किचन की बात करते हैं। ऐसे बहुत सारे यूटेंसिल्स हैं फॉर एग्जांपल नॉन स्टिक। यह देखा गया है कि 79% ऑफ द पॉपुलर नॉनस्टिक कुकवेयर में एक सर्टेन पॉलीमर्स होते हैं जिनमें कार्सिनोजेनिक प्रॉपर्टीज होती है। तो ऐसे कौन से यूटेंसिल्सिल्सिल्सिल्सिल्सिल्सिल्स हैं आपके हिसाब से जिन जो कैंसर कॉजिंग होते हैं या फिर जो ओवरऑल हेल्थ के लिए डेट्रिमेंटल है। जब अपन वेसल के बारे में बात करते हैं। सबसे पहले एलुमिनियम वेसल्स के बारे में
(21:42) हमें बात करना चाहिए। अगर अपन खाना एलुमिनियम वेसल के ऊपर बना रहे हैं। इसका कैंसर का कुछ लेना देना नहीं है। बट थोड़ी बहुत चीज हमें ध्यान रखना चाहिए। जब भी अपन खाना एलुमिनियम वेसल के ऊपर बना रहे हैं, वी हैव टू गो फॉर समथिंग व्हिच इज़ कॉल्ड एज एनोडाइज्ड एलुमिनियम कोटिंग। उसके ऊपर एलुमिनियम का जो कोटिंग है एनोडाइज्ड मतलब नॉन रिएक्टिव रहना चाहिए। ज्यादा पुराना नहीं रहना चाहिए। इसके ऊपर क्रैक्स वगैरह नहीं होना चाहिए। इसके ऊपर एसिडिक कुकिंग नहीं करना चाहिए। जैसा टमाटर वगैरह डालते हैं उसको ज्यादा देर के लिए अपन फ्राई करते हैं। ये सारे तरह की
(22:09) कुकिंग उसके ऊपर नहीं करना चाहिए। WHO ने भी ये बोला है ना अगर तो आपका सर्टेन लिमिट क्रॉस करता है एलुमिनियम तो वो लीचन करेगा आपके फ्रूट में। ट्रू ट्रू। इसलिए ज्यादा पुराना वेसल नहीं यूज़ करना चाहिए। कि अगर उसके ऊपर ऑब्वियस क्रैक्स है या डेंटेड है या कलर खराब है तो उसको इसकी इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। अदर एंड दैट इफ इट इज़ अ सेफ एनाडाइज्ड एलुमिनियम कोटिंग हेल्दी न्यू वेज़ल देन कुछ प्रॉब्लम नहीं है। दैट इज़ नंबर वन। सेकंड बिगेस्ट अगर अपन हेल्थ मिथ के बारे में बात करते हैं। इट इज़ दैट जो नॉन स्टिक पैं्स रहते हैं। ये सारे मिथ्स कहां से
(22:38) शुरू हुए? आजकल के जो पैं्स बनते हैं, इट इज़ मेड ऑफ़ अ केमिकल व्हिच इज़ कॉल्ड एज पीटीएफ। सो पीटीएफ पर से इज़ हेल्दी। अगेन इसके ऊपर क्रैक्स नहीं रहना चाहिए। वो जो ऊपर का नॉन स्टिक कोटिंग है वो इंटैक्ट रहना चाहिए। ज्यादा पुराना नहीं रहना चाहिए। अगर आप इसके ऊपर ड्राई कुकिंग करने वाले हो। अगर इसमें ज्यादा स्मोक निकल रहा है। ये सारी चीज अनहेल्ी होता है। अगर क्रैक भी हुआ है या कट हुआ है तो इसके इससे केमिकल्स वगैरह निकल सकते हैं। सो इफ इट इज़ समथिंग लाइक दैट देन थ्रू अवे दैट पीटीएफ गेट अ न्यू पैन उसको यूज़ करो। तो ये कंट्रोवर्सीज कहां से शुरू हुए? पुराने
(23:08) जमाने के जो भी पैं्स बनता था ये पीएफओए परफ्लोरो ऑक्टेनॉइक एसिड बोल के एक केमिकल से बनता था। तो देयर वास मोर रिस्क ऑफ ऑल ऑफ दिस विथ दैट बट नॉट इन द करंट जनरेशन। अच्छा और जैसे आप यू नो कई बार वुडन स्पैट यूज़ नहीं करते। एंड स्टील का स्पैट यूज़ नहीं करना चाहिए होता नहीं होना चाहिए ना। बिकॉज़ स्टील स्पैट ऑब्वियसली पैंट्स को स्क्रैच करेगा। स्क्रैच करेगा और हमें पता भी नहीं चलेगा। एंड ऑब्वियसली जब भी कुकिंग कर रहे हैं प्लीज यूज़ एन इलेक्ट्रिक चिमनी। इंडियन कुकिंग इज़ अ वैरी स्मोक डिपेंडेंट कुकिंग। दिस स्मोक अगेन इस इंडोर एयर पोलटेंट। एंड
(23:39) जो भी खाना बना रहा है इवन इफ इट्स द मम्मी ऑर द मेड ओर हू एवर इट माइट बी। यू हैव टू मेक श्योर दैट दे आर नॉट एक्सपोज्ड टू दिस बट यूज़ एन इलेक्ट्रिक चिमनी इफ पॉसिबल इसके साथ-साथ एक एयर प्यूरीिफायर भी यूज़ कर लो साइड में लगा लो वेंटिलेट करो खिड़की को खुला रखो दरवाजा को खुला रखो एंड यूज़ करो एंड एज मच एस पॉसिबल अगेन प्रेफर एन इंडक्शंस ताऊ अच्छा बिकॉज़ आजकल व्हिच इज़ वेरी सरप्राइजिंग एज वेल अपेरेंटली इवन दैट एलपीजी उसके अंदर भी अनबर्न गैस वगैरह जो होता है इवन दैट कैन इज़ अ पोटेंशियल कार्सिनोजन हम स्टडीज चल रहे हैं एंड देयर कपल ऑफ़ स्टडीज
(24:09) एज वेल आई थिंक स्टैनफोर्ड का स्टडी था तो उसमें भी ये निकला था एंड इट इज़ एक्चुअली वैरी वरी सम हम और स्टोफ कुकिंग चूल्हा कुकिंग चूल्हा नो इट्स अ बिग नो अगर आप गांव की तरफ जाते हो तो चूल्हे के हां बट टेस्ट आता है दो तंदूरी का ये रहता है वी गेट दैट वुड फायर्ड पिज़्ज़ा हां इट्स सच अ बिग थिंग या वुड फायर पिज़्ज़ा एंड हम वही चीज़ क्रेव करते हैं क्योंकि इसमें वुडी स्मोकी फ्लेवर एंड टेक्सचर आता है राइट राइट बट अगेन वुड बर्न होता है देयर इज़ अ लॉट ऑफ़ पीएम 2.
(24:38) 5 पार्टिकल्स दे अपन पीएम बोलते हैं क्या होता है पार्टिकुलेट मैटर व्हिच इज़ लेस देन 2.5 माइक्रोस इन साइज सो माइक्रोन इज़ विद 10 टू द पावर -6. सो वी हैव डिफरेंट साइज़ज़।ज़ ये 2.5 इतना डेंजरस है बिकॉज़ इट कैन गो इंटू द डीपेस्ट पार्ट्स ऑफ योर लंग। लंग में अल्वओलाई होता है जो नॉर्मली बबल जैसा होता है जो ऑक्सीजन को अब्सॉर्ब करता है एंड ब्लड को पास ऑन कर देता है। सो इट गोज़ स्टिल दैट अल्वियोलाई एंड गेट्स सेटल्ड ओवर देयर एंड दिस दीज़ आर ऑल कॉज़ेटिव रिस्क फॉर लंग कैंसर? ऑब्वियसली जब भी अपन एक चीज़ बात कर रहे हैं हाउ डू यू प्रिवेंट दिस? वी हैव टू टॉक अबाउट दी अल्टरनेटिव्स एज़ वेल। सो इवन
(25:08) इफ यू आर ग्रिलिंग मेक श्योर यू कीप ऑन टर्निंग एस्पेशली आप नॉनवेज की बात कर रहे हो यह जो ग्रिल्ड वेजिटेबल्स रहते हैं दैट इज़ अ लेस रिस्क ऑफ़ नाइट्रोसामिनेशन विथ दिस इस्पेशली अगर आप मटन ग्रिल कर रहे हो चिकन ग्रिल कर रहे हो मैरिनेटेड चिकन एटसेट्रा मेक श्योर यू कीप ऑन फ्लिपिंग इट उसको मतलब हमेशा आप टर्न करते रहो क्योंकि जब आप मटन को बार्बक्यू कर रहे हो उसमें से फैट के जो ड्रॉपलेट्स हैं वो नीचे आके आग के ऊपर टपकता है टपकने से फिर वो भी जलता है एंड दैट कॉसेस मोर रिलीज ऑफ़ कार्सिनोजेनिक सब्सटेंसेस सो कीप ऑन टर्निंग मेक श्योर यू गो फॉर और लीन कट्स
(25:38) जिसमें मोटापा कम है वो जो साइड का फैट है उसको कम करना चाहिए। लीन कट्स लेना चाहिए। सो यू गो फॉर दैट दीज़ आर कंपेरेटिवली सेफर। अंडरस्टुड एंड व्हेन आर टॉकिंग अबाउट दिस अनदरेंट थिंग हमें ब्रेड मीट के बारे में भी बात करना चाहिए। रेड मीट व्हिच इज़ मटन और पोर्क एटसेट्रा दीज़ आर ऑल ग्रुप टू ए कार्सिनोज्स। सो रेड मीट अगेन ग्रुप टू ए उसको लिमिट में खाइए। पूरा बंद करने की जरूरत नहीं है। हफ्ते में 300 से 400 ग्राम से कम खाना चाहिए। आफ्टर कवरिंग दी टू एंड एस्पेशली हमें एक और चीज के बारे में बात करना चाहिए व्हिच इज आल्सो अ ग्रुप वन कार्सिनोजन जिसको
(26:09) बोलते हैं अपन मूंगफली ग्राउंड नट्स इवन राइस राइस स्टे इन हैदराबाद एंड वहां ये पल्ली की चटनी बनती है जो शेंगा एंड महाराष्ट्र की तरफ जाओगे तो जवाहर रोटी को शेंगा की चटनी के साथ खाते हैं एकदम लाल कलर की शेंगा के पाउडर बनता है सो व्हाट हैपेंस इज व्हेन दी ग्राउंड नट्स आर मेड एंड दे आर स्टर्ड इट्स नॉट वि द मेकिंग प्रोसेस इज़ विथ द स्टोरिंग प्रोसेस बोथ विथ ग्राउंड नट्स एंड राइस एंड अगर उसको आप डैंप कंडीशंस में स्टोर कर रहे हो एंड ज्यादातर ग्रेनरीज एकदम एकदम काला एकदम दे आर डार्क एंड डैंप। सो देयर इज़ अ चांस ऑफ़ गेटिंग इनफेक्टेड। देयर इज़ अ चांस ऑफ़ अ
(26:38) फंगस ग्रोइंग ऑन टॉप व्हिच इज़ कॉल्ड ऐज़ एस्परजिलस फंगस। ये एस्परजिलस फंगसक्रीट्स अ टॉक्सिन व्हिच इज़ कॉल्ड एज एफलेटॉक्सिन। सो दिस एफलेटॉक्सिन इज़ अ ग्रुप वन कार्सिनोजन। इससे लिवर का कैंसर हो सकता है। सो, हाउ डू यू लुक फॉर दिस? इसका मतलब यह नहीं कि मैं आज से कभी मूंगफली नहीं खाऊंगा या चावल खाना छोड़ दूंगा। यह रास्ता नहीं है। सो, हाउ डू यू प्रिवेंट अगेंस्ट दिस? जब भी आप मूंगफली या चावल की इस्तेमाल कर रहे हो, लुक फॉर दैट राइस और ग्राउंड नट व्हिच इज नीट एंड क्लीन इन कलर। अगर आपको थोड़ा सा मस्ती स्मेल आ रहा है, थोड़ा सा काला है या
(27:08) ब्राउन है या थोड़ा सा मोल्ड दिख रहा है, उसको तुरंत फेंक दो। उसको यूज़ मत करो। ये मत सोचो कि यार मैंने खरीद लिया, इसको मैं यूज़ कर लेता हूं। क्योंकि जो भी कार्सिनोजेनिक रिस्क वगैरह रहता है, इट गेट्स एंपलीफाइड। सो दिस इज़ समथिंग वी हैव टू बी वेरी अबाउट। ऐसे कौन से और फूड पदार्थ है, फूड आइटम्स है जिसको हीट नहीं करना चाहिए। जो चीज यूज़ हीट नहीं करना चाहिए अगर अपन देखते हैं तो ऑइल का भी एव्री डिफरेंट ऑइल हैज़ अ डिफरेंट स्मोक एंड अ हीट पॉइंट। तो हर तेल को हम पापड़ तलने के लिए नहीं यूज़ करना चाहिए। सो देयर आर सम ऑइल्स व्हिच आर
(27:33) मेंट फॉर डीप फ्राइंग देयर आर सम ऑइल्स व्हिच आर मेंट फॉर सॉर्टिंग थोड़े बहुत ऑइल है जिसको ऊपर से हम ड्रज़ल करना चाहिए। सो दीज़ ऑर ऑल डिफरेंट टाइप्स ऑफ़ ऑइल। द सेफेस्ट ऑइल्स फॉर डीप फ्राइंग। अगर पूरे इंडिया में देखोगे दे आर प्रेफर कोल्ड प्रेस्ट विदाउट डाउट। रिफाइंड ऑइल्स या डबल रिफाइंड ऑइल जो भी रहता है उसके एक कॉस्टिक एक फैक्ट्री बेस प्रोसेस रहता है। कॉस्टिक केमिकल्स वगैरह यूज़ करते हैं। सो इट बिकम्स दिस कलरलेस वाइट थिंग विदाउट एनी हेल्थ बेनिफिट्स। सो उसको प्रेफरेबली अवॉयड करिए। कोल्ड प्रेस भी अगर आप देखते हो। सो फॉर डीप फ्राइ यू शुड हैव फोर
(28:02) डिफरेंट काइंड्स ऑफ ऑल। आइदर यू कैन यूज़ मस्टर्ड और यू कैन यूज़ ग्राउंड नट, नहीं तो सेसमी नहीं तो कोकोनट ऑइल। दीज़ आर द फोर थिंग्स। एंड जब भी आप ऑइल को यूज़ करते हो प्लीज डू समथिंग व्हिच इज़ कॉल्ड एज ऑइल साइकिलिंग। ऐसे नहीं कि मुझे मूंगफली की तेल पसंद है। उसका जो नटी फ्लेवर है मुझे पसंद है। तो हर साल हर दिन में वही यूज़ करते रहना। नहीं। आप इस बार मूंगफली की तेल ले लो। नेक्स्ट टाइम सरसों का तेल ले लो। नेक्स्ट टाइम सेमी का ऑयल यूज़ कर लो। कीप साइकिलिंग ऑइल्स। कीप साइकिलिंग बिटवीन बॉटल्स। एंड इफ यू आर हैविंग हार्ट डिजीज व्हाटएवर
(28:30) टाइप ऑफ ऑयल इट माइट बी दो से तीन चम्मच से ज्यादा नहीं खाना चाहिए। ऑइल शुड बी इन रेस्ट्रिक्शन वो है। एंड उसके अलावा घी इज़ आल्सो क्वाइट गुड। घी का भी इट हैज़ अ हाई स्मोक एंड घी को भी अपन फ्राइंग के लिए यूज़ कर सकते हैं। उसमें थोड़ा सैचुरेटेड फैट्स वगैरह ज्यादा रहता है। आप डायबिटिक हो, हार्ट डिजीज हो, अगेन यूज़ इन मॉडरेशन। दिस इज़ एनी ऑइल व्हिच आर यूज़िंग। मॉडरेशन में यूज़ करना चाहिए। इसका मतलब यह नहीं कि मूंगफली का तेल अच्छा है, तो मैं बहुत ज्यादा ले लिया। तो वो एक बात है। अगर अपन तड़का मारने के लिए यूज कर रहे हैं। तड़का
(28:55) मारने के लिए अपन सरसों का तेल यूज़ कर सकते हैं। सरसों का तेल ऊपर से तड़का मार लिए तो बहुत अच्छा टेस्ट आता है। एंड फॉर ड्रिजलिंग सैलेड्स अगर बना रहे हैं। ऊपर से ड्रिजलिंग करने के लिए यू कैन यूज़ एक्स्ट्रा वर्जन ऑलिव ऑयल। अगेन दैट इज आल्सो गुड। वन ऑफ़ द हेल्दीएस्ट ऑइल्स रहता है अवोकाडो ऑइल। बट अवोकाडो ऑइल देसी नहीं है। बाहर से मंगाना पड़ता है। थोड़ा महंगा रहता है। सो यू कैन मेक डू विथ द अदर ऑइल्स। लोग ऑलिव ऑइल को जो हेल्थ कॉन्शियस लोग हैं स्पेशली उसमें खाना भी पकाते हैं। इज दैट ओके? ऑलिव ऑइल देयर आर टू डिफरेंट टाइप्स ऑफ ऑयल जो एक्स्ट्रा वर्जन ऑलिव
(29:23) ऑयल रहता है उसको हीट नहीं करना चाहिए बट जो ये रिफाइंड ऑलिव ऑयल रहता है उसको आप खाना बनाने के लिए यूज़ कर सकते हो सो जब अपन तेल के बारे में बात कर ही रहे हैं यू शुड नॉट कीप ऑन रीहीटिंग ऑइल इफ आर गोइंग टू यूज़ ऑयल अगर आप तेल की इस्तेमाल कर रहे हो तो ऑइल को एक से दो बार से ज्यादा रीहीट नहीं करना चाहिए तो इसमें क्या सावधानी की चीज़ है अगर आप तेल देख रहे हो अगर वो काला हो गया अगर उससे बदबू आ रहा है थोड़ा सा मरकीमरकी हो गया अगर उसमें फूड पार्टिकल्स फ्लोट हो रहे हैं तो उसको रीयूज़ नहीं करना चाहिए क्योंकि जितना जितना अपन तेल रीयूज करते हैं उसमें
(29:51) एक्रिलमाइड्स फॉर्म होता है। व्हिच इज अ ग्रुप टू ए कार्सिनोजन। एस्पेशली जब आप बाहर पकोड़े, जलेबी, सर्दी का मौसम आ जाता है। हमें पकोड़े खाने का मन करता है। बाहर जाते हैं ये पकोड़े के भंडार वगैरह देखोगे तो उनका तेल एकदम काला रहता है। दैट इज एक्सट्रीमली अनहेल्दी। नोबडी नोस व्हेन ही चेंज द ऑइल। शायद दो से तीन दिन से एक ही तेल चल रहा होगा। एंड यू शुड नॉट गो फॉर दैट एट ऑल। ये भी कहा गया है कि एक्सेसिव प्रोटीन कैंसर कॉज करता है। क्या ये बात सच एक्सेसिव प्रोटीन कैंसर नहीं कॉज करेगा। एंड काफी Instagram के रील्स भी आते हैं
(30:22) कि आप जानते हो आपकी वे प्रोटीन में हैवी मेटल्स है, लेड है। हर चीज में लेड हैवी मेटल्स है। मेटल्स इज़ देयर इन एव्री सिंगल थिंग व्हाट वी ईट। माइट बी देयर इन द राइस। आप जो मेथी खाते हैं, जो पालक खाते हैं, उसमें हैवी मेटल्स हो सकते हैं। सो, इट इज़ देयर इन द सइल इन व्हिच थिंग्स आर बीइंग ग्रोन। सो, प्लांट्स या प्लांट्स खाते हैं तो उसमें हैवी मेटल रहेगा ही। सो, व्हाट यू हैव टू लुक फॉर इज़ समथिंग व्हिच इज़ कॉल्ड एज़ बीएल क्यू और बिलो लिमिट ऑफ़ क्वांटिफिकेशन। सो इफ इट इज़ बिलो द लिमिट ऑफ क्वांटिफिकेशन बिलो व्हाट द मशीन कैन डिटेक्ट देन इट इज़ फाइन। यू कैन
(30:51) गो अहेड एंड हैव इट। बट इट इज़ नॉट पॉसिबल टू कंप्लीटली इरेडिकेट हैवी मेटल्स। प्रोटीन खा सकते हैं। प्रोटीन और कैंसर का कुछ लेना देना नहीं है। प्रोटीन का भी कई सारे तरीका होता है। वे प्रोटीन होता है। प्लांट प्रोटीन होता है। यीस्ट प्रोटीन भी आजकल आने लग गया। एंड इंडियंस या टोटली सेफ। ऑल ऑफ़ देम आर सेफ। प्लांट प्रोटीन इट नीड्स टू बी हेल्ड टू अ हायर स्टैंडर्ड। बिकॉज़ प्लांट प्रोटीन एक इट इज़ नॉट न्यूट्रिशनली और अमीनो एसिड प्रोफेल इज़ नॉट कंप्लीट। वे एंड यीस्ट हैव अ कंप्लीट अमीनो एसिड प्रोफाइल। तो प्लांट प्रोटीन ऊपर से क्या
(31:18) होता है? ऑब्वियसली इट इज़ मेड फ्रॉम प्लांट्स। प्लांट्स ग्रो इन द सइल। सइल में हैवी मेटल्स कंटैमिनेशन का चांस ज्यादा रहता है। सो प्लांट प्रोटीन एव्री सिंगल बैच को टेस्ट करना चाहिए। इसका मतलब ये नहीं कि मैंने एक बढ़िया प्लांट प्रोटीन का ब्रांड देख लिया जो चार पांच एडवर्टाइजमेंट्स डाल रहे हैं। हर बार मैं वही हर बार मैं वही खाता हूं। ऐसा नहीं है। सो लुक फॉर अ ब्रांड व्हिच इज़ एक्सेप्शनली प्योर व्हेयर एव्री सिंगल बैच इज़ बीइंग टेस्टेड। यीस्ट प्रोटीन महंगा रहता है बट इट इज न्यूट्रिशनली गुड एंड आल्सो गट फ्रेंडली रहता है। थोड़े बहुत लोग को वे
(31:45) का टॉलरेंस वगैरह रहता है। लैक्टोज़ इनटॉलरेंट रहता है। वो वे नहीं पी पाते हैं। तो उन लोग यीस्ट का प्रोटीन ले सकते हैं। अंडरस्टुड। सो आप कह रहे हैं कि एनिमल प्रोटीन बेटर होगा प्लांट प्रोटीन से। वे एंड यीस्ट प्रोटीन आर द बेस्ट। प्लांट प्रोटीन आपको दो-तीन प्लांट प्रोटीनंस को मिक्स करके लेना चाहिए। बिकॉज़ यू हैव टू कंप्लीट योर अमीनो एसिड प्रोफाइल। सो मोस्टेंट अमीनो एसिड एस्पेशली फॉर प्रोटीन फॉर मसल बिल्डिंग इज़ ल्यूसिन। सो ल्यूसिन हैज़ टू बी एटलीस्ट 10% ऑफ योर वे प्रोटीन कंटेंट। जो भी आप वे प्रोटीन देखते हो 100 ग्राम में से 70 ग्राम प्रोटीन रहना
(32:13) चाहिए। वो 70 में से आपको कम से कम 10% ल्यूसिन रहना चाहिए। बिकॉज़ दिस इज़ व्हाट इज मोस्टेंट फॉर मसल बिल्डिंग। सो आपको वो प्रोफाइल देख के कंज्यूम करना चाहिए। एयर फ्रायर्स का क्या कहना है? एयर फ्रायर्स टोटली सेफ। खाना जलाओ मत उससे। अदर एंड दैट इट्स अ वै गुड अल्टरनेटिव। ओके? इलेक्ट्रिक कैटल्स? इलेक्ट्रिक कैटल्स भी सेफ है। वो उसका जो हीटिंग रहता है वो कन्वेक्शन से होता है। सो इट इज नॉट अ कॉज ऑफ कैंसर। मेक श्योर दैट द कोटिंग उसका जो इलेक्ट्रिक कैटल का कोटिंग है ऐसा कुछ निकल जैसा कोटिंग नहीं है। अदर अदर अदर कैसे एंड शोर करें बैक ऑफ द पैक।
(32:44) यू विल बैक ऑफ द पैक रहता है। दे विल बी हैविंग व्हाट कोटिंग इट इज़ मेड आउट ऑफ। मोस्ट हाई एंड ब्रांड्स ये सब एडवर्टाइज करते हैं। दैट आवर कोटिंग इज़ मेड आउट ऑफ दिस। वो प्राउडली दिखाते हैं। जिनको कुछ छुपाने की जरूरत नहीं है। वो छुपाते नहीं है। वो प्राउडली बोल देते हैं कि हां मेरे मेरे सामान में मेरे आइटम में ये ये है। तो वो शो ऑफ करते हैं। माइक्रोवेव के बारे में आपका क्या कहना है? बिकॉज़ लोग कहते हैं कि यू शुड माइक्रोवेव योर फूड वैरी ऑफन। उसमें रेडिएशन होता है और उसमें भी कार्सिनोजेनिक प्रॉपर्टीज हो सकती हैं। माइक्रोवेव टोटली सेफ माइक्रोवेव अगेन
(33:10) उसमें नॉन आयनाइजिंग रेडिएशन रहता है जो अपने डीएनए को डैमेज नहीं कर सकता है। पर गड़बड़ वहां शुरू होता है वो जो वेसल अपन यूज़ करते हैं ऑलवेज लुक फॉर समथिंग व्हिच इज़ माइक्रोवेव सेफ। प्लास्टिक को यूज़ नहीं करना चाहिए माइक्रोवेव में। एंड एस्पेशली वो जो ब्लैक प्लास्टिक बॉक्स रहता है उसको तो बिल्कुल यूज़ नहीं करना चाहिए। तो जब अपन प्लास्टिक के बारे में बात करते हैं वन ऑफ द मोस्ट युबिक्वेस्ट थिंग्स जो हर घर में रहते हैं वो जो प्लास्टिक के पानी की टंकी तो जो रहते हैं तो हर प्लास्टिक के कंटेनर के नीचे अगर आप देखते हो तो
(33:36) देयर इज़ नंबर्स फ्रॉम वन टू से ऑन द बॉटम ऑफ इट इट्स गिवन विथ इन अ स्मॉल ट्रायंगल। सो व्हाट इज द मीनिंग ऑफ़ दीज़ नंबर्स। जस्ट फॉर अ सेक ऑफ़ द पॉडकास्ट थोड़ा सा सिंपलीफाई करने के लिए अगर अपन देखते हैं। यू शुड अवॉयड द नंबर्स 3 6 7 सो अगर 3 6 7 है नेवर कुक इन दैट। सो इफ यू वांट टू कुक समथिंग लुक फॉर द नंबर्स 2 45 सो अवॉयड 367 यूज़ 245 एंड जो नंबर वन रहता है नंबर वन इज़ ओनली फॉर सिंगल यूज़ जो प्लास्टिक का बॉटल खरीदते हो ये कहीं गए ट्रेन में गए प्लास्टिक का बोतल ले लिए उसके नीचे वन रहता है। सो दोज़ वन नंबर इज़ ओनली फॉर सिंगल यूज़। आपको एक ही बार यूज़
(34:14) करना चाहिए। तुरंत उसको फेंकना चाहिए। पर आप बहुत सारे अगर पानी की टंकी देखोगे तो उसके नीचे नंबर वन रहता है। अगेन इससे कैंसर नहीं होने वाला है। पर जब एक कंटेनर आप वो कंटेनर जब ट्रांसपोर्ट होता है कभी आपने देखा उसको वो लोरी के पीछे पीछे डाल देते हैं। एकदम गर्मी में ऐसे ही उसको लेके जाता है। तो जब धूप के नीचे वो बेक होता है। देयर इज़ अ हाई रिस्क ऑफ़ माइक्रोप्लास्टिक्स लीचिंग इंटू दैट वाटर। एंड वो पानी की टंकी को कोई धोता नहीं है अच्छे से। इतना नैरो लिड है। ब्रश लेके कौन साफ करता है उसको? तो उसके अंदर बायोफिलम बोल के एक चीज डेवलप होता है।
(34:42) व्हिच इज़ अ कॉज़ ऑफ़ इनफेक्शन। एंड माइक्रोप्लास्टिक्स लीचिंग इंटू द वाटर। उसके ऊपर भी चर्चा चल रहा है, रिसर्च चल रहा है। नोबडी नोस इसका फ्यूचर का इंप्लिकेशन क्या है? सो एस मच एस पॉसिबल लुक फॉर द सेफ प्लास्टिक। अनसेफ प्लास्टिक्स यूज़ मत करो। अगर आप प्लास्टिक यूज़ भी कर रहे हो, मेक श्योर दैट दैट प्लास्टिक कैन इज़ ऑलवेज क्लीन। एंड प्लास्टिक को कभी भी हीट के साथ मिक्स नहीं करना चाहिए। हॉट फूड एंड प्लास्टिक। नो। अगर आप जब होटलविटल जाते हो तो सांभर गरमा गरम सांभर को थैली में डाल के देता है। क्यों? चाय को कवर में डाल के देता है
(35:10) वो। वो गरम चाय है थैली में डाल के दे रहे हैं वो प्लास्टिक भगवान जाने वो क्या है किस तरह की प्लास्टिक है नोबडी नोस एंड उसी को अपन डाल डाल के पी रहे हैं एंड जब अपन गरम चाय की बात कर रहे हैं जब गरम गरमा गरम चाय पीते हैं स्पेशली नॉर्थ इंडिया में एकदम गरमा गरम चाय पीने की शौक है एंड जब भी चाय अपन तवा से उतारते हैं जब स्ट से उतारते हैं उसको थोड़ी देर के लिए ठंडा करना चाहिए इफ यू आर गोइंग टू ड्रिंक बॉईलिंग हॉट टी और कॉफी एनी बॉइलिंग हॉट लिक्विड व्हिच इज मोर देन 65° सेल्सियस दिस इज अ ग्रुप टू वे कार्सिनोजन इससे अपनी खाने की नल्ली इससोफेगस एंड पेट
(35:40) में कैंसर होने का संभावना रहता है। इसका मैकेनिज्म ऑफ़ एक्शन है। यह कैसा होता है? सो जब आप लगातार गरमा गरम चाय या कुछ भी लिक्विड पीते हो तो ये खाने की नली है जो इससोफेगस है उसके जो ऊपर का लेयर रहता है जिसको हम बोलते हैं म्यूकोसल लेयर। ये म्यूकोसल लेयर छिल जाता है। सो वो छिलता है। बाद में रिग्रो होता है। एंड देन यू कीप ऑन डूइंग दिस। थोड़े बहुत लोग नॉर्थ इंडिया में तो दिन में चार पांच चाय तो आराम से पी लेते हैं। वो तो चले जाते हैं एकदम गरमा गरम। सो यू आर डैमेजिंग अ म्यूकोसोल अगेन एंड अगेन एंड देन इट इज़ रीग्रोइंग। सो 15 से 20 साल बाद वहां
(36:09) कैंसर होने का संभावना रहता है। इट इज अ ग्रुप टू ए कार्सिनोज। तो इसका मतलब ये नहीं कि गरम चाय बिल्कुल नहीं पीना चाहिए। पी लो। जो पीना है पी लो। बट थोड़ी देर के लिए ठंडा कर लो। एकदम पाइपिंग हॉट मत पियो। टी कॉफी? टी और कॉफी इट इज योर कॉल। यू कैन हैव इट एज यू विश। बट या दे आर हेल्दी। बट अगर ज्यादा एविडेंस आप देखते हो इट इज़ देयर फॉर कॉफी फॉर कैंसर प्रोटेक्शन। व्हाट आर यू सेइंग? कैंसर प्रोटेक्शन? यस। एंड द स्वीट स्पॉट इज़ समवेयर अराउंड थ्री टू फोर कप्स ऑफ कॉफी पर डे। ब्लैक कॉफी इज द बेस्ट। थोड़े बहुत लोग क्या करते हैं? इतना सा डीऑक्शन डालते हैं। जरा दूध
(36:39) वाला कॉफी पी लेते हैं। ब्लैक कॉफी प्योर ब्लैक कॉफी इट्स एक्सीलेंट। कैंसर प्रोटेक्शन एक्चुअली एंड इट इज हेल्पफुल फॉर फैटी लिवर मल्टीपल अदर थिंग्स। बट व्हाट इट डस टू योर ब्रेन बिकॉज़ नर्वस स्टिमुलेंट है ना एट द एंड इट वो? एक लिमिट में जैसा मैं बहुत कम कॉफी पीता हूं। कभी कबार मुझे पीना पसंद है पर बहुत कम पीता हूं। तो मैं थोड़ा सा भी ज्यादा कॉफी पी लिया तो मुझे थोड़ा ट्रेमर्स या पप्पिटेशन थोड़ा घबराहट जैसा महसूस होता है। तो वी हैव टू लुक फॉर अ स्वीट स्पॉट। कहा जाता है अल्कोहल के बारे में कि जो लोग अल्कोहल पीते हैं दे आर 20 टू 25% लेस एट
(37:12) रिस्क व्हेन इट कम्स टू हार्ट डिजीजसेस इन कंपैरिजन वो [नाक से की जाने वाली आवाज़] लोग जो अल्कोहल रेगुलरली नहीं पीते हैं। क्या ये बात सच है? ये एक स्टडी आया था। आई थिंक 2006 में आया था। आई थिंक इन द हिस्ट्री ऑफ़ ऑल द स्टडीज व्हिच हैव कम आउट। देयर इज़ नो स्टडी व्हिच हैज़ डन मोर हार्म। ये स्टडी ने इतना हार्म किया है। इतना लोग के दिमाग में बिठा दिया है कि दारू हां थोड़ा सा एक पैक भी ना चलता है। एक पैक से कुछ नहीं होता है। नो अल्कोहल एक ग्रुप वन कार्सिनोजन है। देयर इज़ नो सेफ लिमिट ऑफ़ अल्कोहल। अगर आप हफ्ते में इतना पी लेते हो, महीने में इतना पी
(37:42) लेते हो फिर भी आपका कैंसर का रिस्क एक नॉन ड्रिंकर के हिसाब से बढ़ता है। इवन इफ यू कन्विंस योरसेल्फ। हां, मैं रेड वाइन पी लेता हूं। रेड वाइन में तो रेस्पिरेट्रॉल है। वो मेरे लिवर को प्रोटेक्ट करेगा, लंग को प्रोटेक्ट करेगा। नहीं कुछ भी नहीं है। इवेंचुअली इन द एंड हर अल्कोहल आपके लिवर को जाने के बाद एसिट्डिहाइड बनने वाला है। एसिटल्डिहाइड इज़ अ लिवर कार्सिनोजन। तो कितनी फ्रीक्वेंसी में पीना ठीक है। पीना ही नहीं चाहिए। ओके। बिल्कुल नहीं। ओकेजनली भी नहीं। ओकेशनली भी नहीं। अगर आप इसके बावजूद भी पीना चाह रहे हैं, कोई पीना चाह रहे हैं
(38:12) तो इट इज़ देयर इज़ नो सेफ लिमिट ऑफ़ अल्कोहल। अगर आप महीने में एक भी पी लोगे, छ महीने में एक भी पी लोगे तब आपका कैंसर का रिस्क बढ़ेगा। ओह ओके। एंड वेपिंग द प्रॉब्लम इज वेपिंग पीपल अस्यूम दैट वेपिंग इज एक स्टोरी बताता हूं मैं जब मैं अपना ओपीडी में बैठा था ये दो से तीन महीने हो गया शायद एक लड़का आया था अपनी मम्मी के साथ 15 16 साल की उम्र होगा शायद उसको एंड लगातार उसको खांसी चल रहा था दो से तीन महीने से वो लगातार खांस रहा था तो एक्चुअली मम्मी आई थी मेरे पास उनको छाती में गार्ड था तो उसके लिए आया था तो साथ-साथ बच्चे को भी पकड़ के ले आई तो बस
(38:44) सर इसको भी देख लो उसको खांसी हो रहा है तो मैंने एक छाती का एक्सरे करा लिया एक्सरे करा के देखा तो उसमें एकदम सीवियर साइन ऑफ इनफ्लेमेशन डॉट डॉट डॉट डॉट डॉट ऐसा है तो मैंने लड़का से पूछा था यार तेरा उम्र इतना कम है 15 16 है क्या तू सिगरेट पीता है क्या नो मैं सिगरेट तो बिल्कुल नहीं पीता हूं कोई वेप करते हो क्या हां डॉक्टर यस आई व्हाई वेप सो व्हाट क्या है इट्स सेफ राइट तो वो मिसकंसेप्शन बैठा है लोग के दिमाग में वेपिंग क्या होता है वो और भी डेंजरस है क्योंकि उसमें स्मेल भी नहीं आता है एंड इट इज कंप्लीटली डिस्क्रीट मैं आपके सामने बैठाऊंगा मेरे
(39:15) हाथ में अगर एक वेपिंग अप्लेंस है आई कैन जस्ट बेंड ओवर आई कैन थोड़ा सा एक वेप ये करके कैन जस्ट ब्लो इट आउट स्मोक भी दिखाई नहीं देगा आपको स्मेल भी नहीं दिखाई देगा वो फंकी फ्लेवर्स में आ रहा है इट्स टोटली साइलेंट कैफे में बहुत सारे लोग बैठे होंगे ऐसा करते रहते होंगे [हंसी] एंड उसके अंदर बैटरी भी रहता है वो बैटरी भी फूट सकता है एक्सप्लोर हो सकता है एंड वेपिंग रिलेटेड लंग इंजरी समथिंग व्हिच इज़ कॉल्ड एज इवाली ईवीए एलआई पिंग एसोसिएटेड लंग इंजरी एंड इट इज़ वेरी क्विक पॉपकर्न लंग हो जाता है हां पॉपकर्न लंग हो जाता है पॉपकॉर्न लंग
(39:43) एक्चुअली ये होता था क्योंकि पहले जो पॉपकॉर्न बनाते थे वो टॉक्सिक स्मोक के कारण उनको आता था ये बट नाउ इट सीन इन वेपिंग एज वेल इन वेपिंग इज वेरी क्विक सिगरेट शायद आपको पांच छ साल पीने के बाद प्रॉब्लम्स वगैरह शुरू होता है। वेपिंग और भी जल्दी शुरू होता है। और इससे भी खराब है शीशा हुक्का बार जो लोग बाहर बैठ के हुक्का वगैरह पीते रहते हैं। तो हमारी राइट राइट ट्रेडिशन का पार्ट है। हां। वो चारकोल जलता रहता है। एंड इट इज सो डेंजरस बिकॉज़ इट गोज़ ऑन फॉर आवर्स एट अ स्ट्रेच। आप सिगरेट शायद एक सिगरेट पी लोगे उसको फेंक दोगे। फिर बाद में आपको
(40:12) पीने का टाइम नहीं मिलेगा क्योंकि इसमें स्मेल भी आता है। शीशा का बस चलता रहता है और दारू के साथ चलता रहता है। सो दिस इज़ ऑल एक्सट्रीमली डेंजरस। एंड द हुक्का बार आर स्प्राउटिंग अप एवरीवेयर। हर कोने में एक हुक्का बार है। करेक्ट। हम सो आप कहोगे कि वेपिंग इज वर्स्ट देन स्मोकिंग अ सिगरेट। बिकॉज़ इट इज़ कंसीडर्ड सेफ। उसमें वही उतना वही हेवी मेटल्स जो भी सिगरेट में रहते हैं वो सारी चीज़ रहता है। सिगरेट में तो उल्टा कोल टायर वगैरह वो भी होता है जो अपन रास्ता बनाने के लिए यूज़ करते हैं। कोल वो भी होता है उसमें। तो दैट इज आल्सो
(40:42) देयर। तो आपको लाइन अप करना होता तो सबसे खराब क्या है? सबसे खराब मेरे हिसाब से बिकॉज़ इट इज अस्यूम टू बी सेफ। आई विल पुट वेपिंग एंड शीशा ऑन टॉप। क्योंकि बच्चे भी उसको एडिक्ट हो रहे हैं। उसके बाद आएगा सिगरेट। क्योंकि सिगरेट सब जानते हैं ये है। अब बच्चा बाहर जाके वेप करके आएगा तो घर में मम्मी को पता भी नहीं चलेगा। एंड दे आर कैचिंग देम यंग। तो एक रिसर्च के मुताबिक जो बच्चों के हेल्थ ड्रिंक्स या मोल्ट ड्रिंक्स है ना उसका सबसे ज्यादा कंजमशन इंडिया में है। यानी कि वर्ल्ड का 22% कंसमशन इंडिया में है और उसकी इकॉनमी देखे
(41:12) तो इंडिया में अलोन 11,000 करोड़ की है। एंड वी हैव ग्रोन अप इट। यू आर अ 90ज किड आई एम अ 90ज किड। राइट? तो क्लासिक आप जानते हो मैं किसकी बात कर रही हूं। तो क्या कहना है आपका? मैं एकदम उसको ऐसे ही कटोरी में डाल के खा लेता था। ऊपर से उसमें चीनी मिला के खाता था। हां। पानी भी पड़ा। सोड बट अगर देखेंगे तो उसमें इतना ज्यादा शुगर के कंटेंट है जो क्लासिक हेल्थ माल्ट बेस्ड ड्रिंक्स वगैरह रहता है। सम ऑफ़ देम हैव क्लोज टू 30 टू 40 ग्राम्स ऑफ़ शुगर पर 100 ग्राम। ऊपर से अगर आप देखोगे तो नंबर वन इंगडिएंट विल बी माल्ट। नंबर टू इंग्रेडिएंट विल बी शुगर। सो शुगर इज़ अ
(41:46) सेकंड इंग्रेडिएंट इन अ चाइल्ड। एंड हम इसको शुरू कर देते हैं चार या पांच साल की उम्र से। एंड इतने अगर कम उम्र में हम शुगर इतना ज्यादा शुरू कर भी देंगे एटलीस्ट टू चाइल्डहुड ओबेसिटी। जब चाइल्डहुड में ओबीसिटी आ जाता है उसके बाद उसको इरेडिकेट करना बहुत मुश्किल है। एंड ओबसिटी इज अगेन अ सेकेंडरी रिस्क फैक्टर फॉर कैंसर। तो उसको जितना अवॉइड करेंगे उतना बेस्ट है। क्योंकि जितना शुगर रहता है इससे अपना जो ग्लाइसेमिक लोड बोलते हैं। दैट इज इट कॉसेस योर इंसुलिन टू शूट अप। थोड़ा सा पी लेते हैं। तुरंत इंसुलिन का ये बढ़ता है। सो इंसुलिन सेंसिटिविटी
(42:14) आल्सो स्टार्ट्स गोइंग डाउन। इंसुलिन बढ़ता है, कम होता है, बढ़ता कम होता है। उसके कारण भी काफी प्रॉब्लम शुरू होता है। एंड एक और चीज जो अपन बच्चों में पिलाते रहते हैं, बच्चे को फ्रूट के जूसेस पिलाते रहते हैं। स्पेशली जो कंटेनर में आता है या थैली में आता है। इसको बिल्कुल नहीं पिलाना चाहिए। अगर आप कुछ देना चाह रहे हो डायरेक्ट फल खिला दो। फल में क्या रहता है? अपना जो ग्लाइसमिक का लोड रहता है वो भी कम रहता है। क्योंकि उसमें फाइबर रहता है। ऊपर का छिलका भी रहता है। अगर अपन सेब खा लिए या संतरा खा लिए। इसमें फाइबर ज्यादा रहता है। अगर यही अपन संतरा के जूस
(42:40) पी लिए। उसमें बिल्कुल फाइबर नहीं है। सो योर शुगर इज़ जस्ट गोइंग टू शूट अप एंड कम बैक डाउन अगेन। ऑन टॉप ऑफ दैट आपने उतना ही कैलोरीज कंज्यूम किया जितना फल में होता है। माइनस द फाइबर। सो योर इंसुलिन फ्लक्चुएशन इस गोइंग टू बी इवन मोर। एंड टॉप ऑफ दैट इसमें से सटाइटटी भी नहीं है। क्योंकि आपका पेट भरता है केवल फाइबर। जूस पीने से कभी भी पेट नहीं भरता है। तो पैंकक्रियाज में लोड आता है। पैंकक्रियाज में लोड भी आ गया। तो कैलोरीज भी कंज्यूम हो गया। पेट भी नहीं भरा। ऊपर से और कुछ और भी खा लोगे आप। सो ऑलवेज ट्राई एंड गो फॉर द होल फ्रूट।
(43:09) तो चाहे जूस हो या बिकॉज़ आजकल आजकल क्या काफी यह तो आई थिंक काफी पुरानी स्टोरी है कि जो बोला जाता था ये तो नेचुरल फ्रूट जूस है लेकिन वो नेचुरल नहीं होता था जबकि उसका नेम नेचुरल की तरफ रिेंबल करता है और वो बच्चों को माय मदर हैज़ डन दैट विद मी यू यही पी लो भाई यू नो एटलीस्ट कुछ अच्छा तो जा रहा है बट इट्स एक्चुअली नॉट नेचुरल क्योंकि मार्केटिंग ऐसा रहता है ना आप हर कंटेनर के फ्रंट देखोगे 100% नेचुरल फुल फ्रूट ये वो सब लिखा हुआ रहता है पीचर पलटा के देखो लेबल पढ़ के देखो उसमें रहता है लिच्ची का पल्प या कुछ भी रहता है 19%
(43:44) अब आप 100 में से 19 या 20 देख लिए मतलब बाकी का 80 क्या है प्रिजर्वेटिव्स कलरिंग एजेंट्स आर्टिफिशियल फ्लेवरिंग एजेंट्स शुगर ये सारी चीज रहता है पानी रहता है सो एक्सट्रीमली अनहेल्दी अंडरस्टुड यू नो शुगर की बात कर रहे हैं तो इट्स अ वेरी पॉपुलर फैक्ट शुगर प्रमोट्स कैंसर तो ये वॉबर्ग इफेक्ट है जिसने ये बोला था कि कैंसर ग्लूकोस पे फीड करता है इज इज शुगर अ प्रॉब्लम इज मीठापन अ प्रॉब्लम मीठापन इज इज़ अ प्रॉब्लम डेफिनेटली नो डाउट बट दिस वॉरबर्ग इफ़ेक्ट हैज़ बीन अब्यूस्ड। मैं एक्चुअली बोल दूंगा कि इतने सारे लोग ने वॉरबर्ग इफ़ेक्ट पढ़ लिया।
(44:15) वॉरबर्ग इफ़ेक्ट इज़ अ वेरी बेसिक ह्यूमन थिंग। जो हम पेट स्कैन करते हैं। पेट स्कैन के बारे में सुने होंगे जहां पूरे बॉडी को अपन स्कैन करते हैं। सो दिस वॉरबर्ग इफ़ेक्ट इज़ अ बेसिस ऑफ़ दैट। जो सेल्स हैं दे प्रेफर यूजिंग ग्लूकोस फॉर देयर नॉर्मल मतलब सस्टेनेंस और सर्वाइवल। सो पेट स्कैन भी इसी के ऊपर बनता है। बट इसका मतलब ये नहीं है कि मैं जो भी शुगर खाता हूं वो कैंसर सेल्स को फीड करता है। अगर इफ दिस इज ट्रू अगर आप लेट स्टेज कैंसर पेशेंट्स देखोगे जो स्टेज फोर में है या जो दो-ती हफ्ते से खाना ही नहीं खा पा रहे हैं भूख ही नहीं लग रहा है तो उनको
(44:43) कैंसर ठीक हो जाना चाहिए। वो तो खा ही नहीं रहे हैं खाना। है ना? तो डायरेक्टली ईटिंग शुगर। शुगर इज़ नॉट अ डायरेक्ट फॉर्म ऑफ़ कैंसर। डायरेक्टली कैंसर को कॉज नहीं करता है। पर शुगर जो मोटापा कॉज करता है। दैट इनडायरेक्टली एंड्स अप कॉजिंग कैंसर। एंड एक्चुअली बहुत सारे शुगर के ये भी आ गए आजकल। वाइट शुगर को कवर करने के लिए ब्राउन शुगर आ गया, गुड़ आ गया। लोगों को लगता है गुड़ बेटर है वाइट शुगर से। गुड़ में ऑब्वियसली थोड़ा बहुत मिनरल्स रहता है। लोग गुड़ को खा लेते हैं कि इसमें आयन है। मेरा एनीमिया ठीक हो जाता है। ऐसा कुछ
(45:09) नहीं है। दिन में फिर आपको 15 16 केजी गुड़ खाना पड़ेगा आपको एनीमिया को ठीक करने के लिए। बट सम ऑफ़ द बेस्ट थिंग्स अगर आप देखते हैं तो स्टीविया है। स्टीविया इज़ वैरी हेल्दी। अगर आप 10 के अभी इट इज़ ऑलमोस्ट 8 ऑन 10। अगर बट इट हैज़ स्लाइटली बिटर आफ्टर टेस्ट। सबसे अच्छा रहता है मंक फ्रूट। मंक फ्रूट इज़ रियली गुड। अच्छा बट द प्रॉब्लम फ्रूट इन अगर आप प्योर मंक फ्रूट के लिए ढूंढ रहे हो बहुत महंगा है वो तो क्या करते हैं मंक फ्रूट को लोग एरथिटल के साथ कंटैमिनेट या मिक्स कर देते हैं। सो एरिथटॉल इज शीपर इट इज़ नॉट दैट एरिथटॉल इज़ अ बैड एडल्टेंट। वो थोड़ा एक सस्ता
(45:39) स्वीटनर है। तो आपका पेट खराब कर सकता है। थोड़ा गट इनटॉलरेंस वो सारे चीज भी हो सकता है। सो ये जो एक सीन है मैं हर रोज अपने घर पे देखती हूं। आई ओपन माय बेडरूम डोर एंड आई सी माय मदर ऑन द टेबल ईटिंग कॉन्फ्लिक्ट्स। कॉन्फ्लिक्ट्स का मार्केट आई वास शॉक टू नो इज़ इट्स अ 6.5 बिलियन मार्केट इन इंडिया। तो कॉन्फ्लिक्ट्स जो है या जो ऐसे सीरियल्स होते हैं जो बहुत पॉपुलर है ओवरसीज तो बहुत ही ज्यादा पॉपुलर है। ये हार्मफुल है नहीं है और हार्मफुल है तो कितना हार्मफुल है? हार्मफुल इन द सेंस इससे कैंसर नहीं होने वाला है। एटलीस्ट नॉट डायरेक्टली बट
(46:17) कॉर्नफ्लेक्स अगेन ग्लाइससेमिक लोड ज्यादा रहता है। ग्लाइस्सेमिक इंडेक्स ज्यादा रहता है। आपका तुरंत इंसुलिन स्पाइक होगा। एंड एक छोटा सा कटोरी खाने से पेट नहीं भरने वाला है। अपन ज्यादा खा लेते हैं। इट इज वैरी ईजी टू ओवर ईट इट। टेस्टी भी रहता है। एंड दिस इज अगेन माय कैन कॉज ओबेसिटी व्हिच इज़ एन इनडायरेक्ट रिस्पेक्ट ऑफ़ फॉर कैंसर। गो फॉर हेल्थियर ऑप्शंस। बेसन के चिल्ला खा लो, अंडे खा लो, फल खा लो, बीच में रहते हैं अगर पोहा खा सकते हैं। साउथ में रहते हैं डोसा और चटनी के साथ खा सकते हैं। सो, व्हाट हैप्पेंस इज़ आवर एंशिएंट
(46:44) कल्चर इज़ ऑलवेज बेस्ड ऑन दैट। हम्म। टू स्लो इट डाउन। साउथ में भी जो इडली प्लस चटनी खाते हैं। यू ईट ओनली इडली। योर ग्लूकोस लेवल इज़ गोइंग टू करेक्ट। स्पाइक अप सडनली। सो यू हैव द चटनी अलोंग विथ इट व्हिच गिव्स फैट्स। सो व्हिच काइंड ऑफ़ हेल्प्स टू फिल योर स्टमक अप एंड न्यूट्रलाइज दैट ग्लूकोस एज वेल। यही होता है। तो हर चीज जब अपन देसी खाना खाते हैं तो देयर इज़ ऑलवेज अ हेल्थीयर वर्शन फॉर दैट। सो वी हैव टू ट्राई एंड गो फॉर दैट। ऑफिस गोअर्स के लिए हम काम पे निकल गए हैं। अब ऐसी क्या-क्या चीजें हम एनकाउंटर करते हैं जिससे हमारी हेल्थ डिटररेट हो
(47:13) रही है। ऑफ कोर्स पोल्यूशन बीइंग वन। बट व्हाट आर सम ऑफ द हिडन साइलेंट विलंस जो हमको पता नहीं है। साइलेंट विलन नंबर वन जो लोग को लगता नहीं है यूवी रेडिएशन। सो जब आप बाहर निकलते हो, अगर आप बाहर नहीं निकलते हो, अगर आप घर के अंदर भी बैठे रहते हो, फिर भी आपको सनस्क्रीन लगाना चाहिए। सो यूवी रेडिएशन में दो कॉम्पोनेंट्स रहते हैं। एक यूवी ए रहता है एंड एक यूवी बी रहता है। यूवीए कैन पेनिट्रेट इवन थ्रू द विंडोज एंड कम इंडोर्स। एंड दिस कॉजेस फोटो एजिंग। इंडियंस में आप देखते हो तो इधर-उधर थोड़े बहुत थोड़े बहुत डार्क डार्क स्पॉट्स रहते
(47:40) हैं। ऐसा ये रहते हैं, अनइवन स्किन टोन रहते हैं। तो इसके लिए हमें सनस्क्रीन की इस्तेमाल करना चाहिए। सनस्क्रीनंस अगर आप देखते हो तो इसमें बहुत मिसकंसेप्शन है कि सनस्क्रीन के कारण कैंसर होता है। दिस वास् बिकॉज़ कहीं तो पुराने जमाने में एक बेंजीन का कंटमिनेंट निकला था एक बैच में। एंड देन देयर वास अ लॉट ऑफ़ स्टडीज व्हिच आर गोइंग ऑन। बट सनस्क्रीन हेल्प्स टू प्रिवेंट कैंसर। बिकॉज़ सन से जो यूवी रेडिएशन निकलता है, यूवी रेडिएशन कॉज स्किन डैमेज एंड व्हेन इट कॉज स्किन डैमेज, इट इज़ गोइंग टू कॉज कैंसर। सो सनस्क्रीन में बहुत सारे फिल्टर्स के बारे
(48:09) में चर्चा चलता रहता है। सो पुराने जमाने का अगर अपन फिल्टर्स देखते हैं देन वी हैव ओल्ड जनरेशन केमिकल फिल्टर्स व्हिच आर ऑक्सी बेंजज़ोन, एोबेंज़ोन, ऑक्टोक्रिलीन ये सब ऑक्टिनॉक्सेट ये सारी चीज़ रहती है। ये ऑक्सीेंज़ोन तो बहुत प्रॉब्लमैटिक है ना? बिकॉज़ ये ब्लड स्ट्रीम में अब्सॉर्ब हो जाता है। राइट? राइट। ब्लड ट्री में अब्सॉर्ब हो जाता है। एंड ऑक्सीेंजज़ोन नॉट मच स्टडीज ऑन ह्यूमंस पर से। पर एनिमल्स के ऊपर स्टडीज है कि ये थोड़ा एंडोक्राइन डिसरप्शन हो सकता है। कैंसर कॉजिंग भी हो सकता है बोल के। बट नॉट एट द लेवल्स व्हिच आर सीन
(48:35) इन ह्यूमंस। बट ऑक्सीबेंज़ोन का क्या रहता है? एंड अवेबज़ोन भी ये फोटोसेंसिटिव नहीं है। फोटोसेंसिव का मतलब क्या है? अगर आप सनस्क्रीन लगाते हो फिर धूप में निकलते हो। भाई अपन सनस्क्रीन इसलिए लगा रहे हैं ताकि धूप में जाने के बाद वो प्रोटेक्ट करे। करेक्ट। द सेकंड यू गो आउट इन द सन। अगर वह ब्रेकडाउन हो जाता है, अगर वह प्रोटेक्शन नहीं कर रहा है, फिर सनस्क्रीन लगाने का फायदा ही नहीं है। सो दीज़ थिंग्स आर नॉट फोटोसेंसिव। आप धूप में तुरंत जाओगे, अगर जब धूप पड़ती है सनस्क्रीन के ऊपर, तो ये ब्रेकडाउन होना शुरू करता है। सो, यू हैव
(49:00) टू कीप अप्लाइंग दीज़ ओल्ड जेन केमिकल फिल्टर्स फ्रीक्वेंटली। सो दैट इज़ वन साइड इफेक्ट। इसलिए न्यू केमिकल फिल्टर्स बने थे। न्यू केमिकल फिल्टर्स ए आर समथिंग व्हिच इज़ नोन ऐज़ यूवीनॉल ए, यूवीनॉल बी, टीनोसर, एटसेट्रा ये भी आ रहे हैं। तो अभी आजकल पांच या छह तरह के न्यू जेन केमिकल फिल्टर्स आ गए। सो दीज़ आर गुड। सनस्क्रीन से बाहर निकलने के पहले आपको कम से कम 20 मिनट पहले उसको लगाना चाहिए। ऑलवेज फॉलो द टू फिंगर रूल। दो उंगली ले लो। यहां से यहां लगा लो। यहां से यहां लगा लो। मुंह के ऊपर लगा लो। फेस एंड नेक पॉसिबल अप्लाई ऑन द हैंड्स एस
(49:30) वेल। एंड कभी भी उसको एकदम घसीट के अंदर नहीं लगाना चाहिए। रब नहीं करना चाहिए। बस रब इट कवर योर इयर्स। कवर ऑल पार्ट ऑफ योर फेस एटसेट्रा। सो दैट इट। डस नॉट गेट अब्सॉर्ब्ड इन मतलब ऐसा ज्यादा रब रब नहीं करना चाहिए। उसको ऊपर एक लेयर जैसा छोड़ना चाहिए। बट इफ यू डोंट वांट दी केमिकल फिल्टर्स एट ऑल अगर आपको लग रहा है कि नहीं मुझे बिल्कुल केमिकल फिल्टर चाहिए ही नहीं तो आप फिजिकल फिल्टर्स यूज कर सकते हो और मिनरल फिल्टर्स दैट इज़ जिंक ऑक्साइड और टाइटेनियम डाइऑक्साइड सो दीज़ आर आल्सो गुड बट ये प्रॉब्लम क्या रहता है ये थोड़ा मोटा रहता है थोड़ा थिक रहता है एंड जब आप
(50:01) शकल के ऊपर लगाते हो थोड़ा वाइट कलर के वाइट कास्ट आ जाता है अच्छा उसके वजह से होता है और जिनमें वो वाइट कास्ट नहीं होता मतलब ये एलिमेंट्स नहीं है नहीं थोड़े बहुत मिनरल फिल्ट मिनरल सनस्क्रीन्स भी है जिसमें वाइट कास्ट नहीं होता है सो यू हैव टू फाइंड व्हाट इज गुड फॉर यू अच्छा सो द सनस्क्रीन मिनरल सनस्क्रीन आई यूज़ इट डजंट लीव मच ऑफ़ वाइट कास्ट। इट्स फाइन। मैं दोनों को अल्टरनेट करता हूं। आई यूज़ समटाइम्स मिनरल्स, समटाइम्स यूज़ न्यू जैन केमिकल फिल्टर्स। बट आई यूज़ सनस्क्रीन फॉर श्योर। तो जब अपन सनस्क्रीन के बारे में बात करते हैं, वी
(50:25) हैव टू स्टार्टेड यंग। वी थिंक सनस्क्रीन शुड बी यूज़्ड ओनली इन एडल्ट लाइफ। टीनएजर्स को भी लगाना चाहिए। बच्चों में भी लगाना चाहिए। बट बच्चों में केमिकल फिल्टर्स यूज़ नहीं करना चाहिए। बच्चे मतलब बच्चे इन द सेंस अंटिल टीनएज लेवल। अंटिल एनी ऐज व्हिच इज़ लेस देन 18 इयर्स ऑफ़ एज डोंट यूज केमिकल फिल्टर्स। यू शुड ओनली यूज़ प्योर मिनरल फिल्टर्स। ओनली जिंक ऑक्साइड एंड टाइटेनियम डाइऑक्साइड यह रहता है। जब हम सनस्क्रीन यूज कर रहे हैं या खरीद रहे हैं तो बैक ऑफ द लेबल ऐसी कौन सी चीजें हैं जो हमें देखनी चाहिए व्हिच आर रेड फ्लैग्स एंड व्हिच व्हिच व्हिच व्हिच
(50:51) व्हिच आर ग्रीन फ्लैग्स। सनस्क्रीन व्हेनएवर यू आर बाइंग हमेशा आप एसपीएफ देखिए एंड पीए देखो। एसपीएफ इसमें बहुत सारी चीज रहता है। ये 30 रहता है, 50 रहता है, 50 के ऊपर भी रहता है। सो 30 प्रोटेक्ट्स क्लोज टू 97% ऑफ़ यूवीबी रेडिएशन। 50 प्रोटेक्ट्स 98% तो 50 के ऊपर जो भी रहता है वो केवल मार्केटिंग गिमिक है। सो आप एसपीएफ 50 का अगर सनस्क्रीन खरीद रहे हो ये आपको ₹400 में मिल जाएगा। पर अगर आप एसपीएफ 100 का ले रहे हो वो ढाई 3000 का होगा एंड देयर इज़ ओनली 1% डिफरेंस 98 टू 99% सो डोंट गो फॉर एनीथिंग मोर देन 50 इज़ इनफ फॉर इंडियन कंडीशंस 30 इज़ नॉट
(51:26) इनफ फॉर इंडियन कंडीशंस इंडिया में जो गर्मी है जो धूप है उसके लिए 30 काफी नहीं है आपको कम से कम 50 लेना चाहिए एंड ऊपर से एक और चीज रहता है जो पीए होता है दैट इज़ फॉर द यूबीए प्रोटेक्शन जो फोटोपिगमेंटेशन मेलास्मा एजिंग वगैरह रहता है यू हैव टू गो फॉर एटलीस्ट पीए 4 प्लस ये दो चीज है अच्छा ओके। इसके बाद अपन सनस्क्रीन लगा लिए। फिर हम जा रहे हैं। यू आर एक्सपोज्ड टू एयर पोल्यूशन। एयर पोलशन अगेन एक ग्रुप वन कार्सिनोजन है। एंड जो बस से निकलता है डीजल पोल्यूशन एस्पेशली दैट वो भी एक ग्रुप वन कार्सिनोजन है। सो वहां से भी अपन इतना
(51:57) मेहनत करते हैं शैंपू का लेबल पढ़ते हैं पर जाके बस के बगल में जाके खड़े हो जाते हैं। सो वो भी एक चीज है जिससे थोड़ा केयर लेना चाहिए। फिर ऑफिस पहुंच गए। वन ऑफ़ द थिंग्स व्हिच आल्सो हैपेंस इज़ सम ऑफ़ दीज़ एनक्लोोज्ड ऑफिसेस। ऑफिस वगैरह ज्यादातर कभी कबार बेसमेंट में रहता है, ग्राउंड फ्लोर में रहता है। वहां वो वाले जगह में एक रेडॉन पोलटेंट बोल के रह सकता है। व्हिच इज़ आल्सो अ ग्रुप वन कार्सिनोजन। रेड ऑन इज़ फाउंड इन सर्टेन पॉकेट्स इन इंडिया। ऐसा नहीं है कि हर जगह में है। थोड़ा बहुत केरला में है, नॉर्थ इंडिया, राजस्थान के साइड में है। एंड दिस इज़
(52:25) आल्सो फाउंड इन दीज़ ग्राउंड फ्लोर एरियाज़, बेसमेंट एरियाज जो थोड़ा डैंप रहता है, पूअरली वेंटिलेटेड है। सो दिस कैन कॉज लंग कैंसर। सो आप अगर ऐसा कुछ आप पुअरली वेंटिलेटेड एरियाज़ में रहते हो तो रेड ऑडाउन के लेवल्स भी एक बार आपको चेक करके देखना चाहिए। एंड थोड़े बहुत लोग बोलते हैं कि जो प्रिंटिंग रहता है, प्रिंटर से जो पेपर वगैरह निकलता है उसके कारण भी कैंसर हो सकता है। बट देयर इज़ नो रोल विथ दैट। बट अगर अपन बात करके देखते हैं कहीं आप जा रहे हो सुपर मार्केट जा रहे हो तो जो कैशियर रहता है कैशियर हमेशा आपको वो क्विक वाला बिल देता है। एकदम फटाफट
(52:54) बिल निकाल के देता है। तो उसका ऊपर जो क्विक ड्राइंग इंक निकलता है दैट कैन कॉज बीपीए कंटैमिनेशन। बिसफिनोल ए कंटैमिनेशन। बिसफिनोल ए इज़ एन एंडोक्राइन डिसरप्टर। सो इससे कैंसर नहीं होने वाला है। पर आपका एंडोक्राइन सिस्टम खराब हो जाएगा। नॉट फॉर अस बट फॉर द पर्सन फॉर हुम इट इज़ ऑक्युपेशन। जो दिन रात मतलब दिन में हजारों बेल निकाल के देता रहता है तो उसके लिए ये दिक्कत है। अगर हाथ में प्लास्टिक का कवर कुछ पहन लिया, ग्लव्स पहन लिया तो उसके लिए बेटर रहेगा। व्हाट अबाउट टैटू? टैटू इज सेफ। टैटू सेफ? टैटू सेफ। कंप्लीटली सेफ। टैटू कभी कबभार
(53:23) इट हैज़ बीन फाउंड इन सर्टेन लिंफ नोट्स एंड ऑल एज वेल। ओनली द कलरिंग पिगमेंट्स, वेल इट इज़ टोटली सेफ। फ्रॉम द कैंसर पॉइंट ऑफ व्यू। यू कैन कॉज इन्फेक्शन। अगर आपाइजीनिक जगह में जाके करा लेते हो उसके कारण हेपेटाइटिस बी हो सकता है। हेपेटाइटिस सी हो सकता है। एंड हेपेटाइटिस बी हेपेटाइटिस सी कैन आल्सो कॉज कैंसर इवेंचुअली। लिवर कैंसर हो सकता है उससे 15 20 साल के बाद। अच्छा। सो अभी योर वर्ड्स हम आ गए हैं ऑफिस से। अब हम पार्टी के लिए तैयार हो रहे हैं। अब क्या होता है? पार्टी के लिए तैयार हो रहे हैं। सो सबसे पहले अह फेस वॉश वी हैव ऑलरेडी टोकड अबाउट
(53:55) दैट अर्लियर। एंड आफ्टर दैट फाउंडेशन्स लगाते हैं। फाउंडेशन इस समथिंग व्हिच स्टेज ऑन योर स्किन फॉर अ लॉन्ग टाइम। सो, जब भी फाउंडेशन लगाते हैं, सेम थिंग्स व्हिच टॉक अबाउट अर्लियर, अवॉयड द फॉर्म एल्डिहाइड रिलीज़र्स, बीएचए, बीएचटी नहीं रहना चाहिए। एंड इसकी सावधानी रखना चाहिए। बहुत सारे वीगन फाउंडेशंस भी आ रहे हैं। सो, वी हैव टू टू टू टू टू टू टू य्राई एंड गो फॉर दे। आर ऑलवेज सेफर कंपाउंड्स अवेलेबल। सो वी हैव टू गो फॉर दैट। एंड फाउंडेशन लगाने के बाद लिपस्टिक लगाते हैं। सो, लिपस्टिक हैज़ मल्टीपल डिफरेंट थिंग्स। द बिगेस्ट डेंजर एसोसिएटेड विद
(54:23) लिपस्टिक इज़ हैवी मेटल कंटैमिनेशन। सो ये बात कहा जाता है कि जितना ग्लॉसी है लिपस्टिक जितना चमकता है उतना उसमें हैवी मेटल्स का कंटैमिनेशन होने का संभावना रहता है। सो अगेन गो फॉर द सेफ थिंग्स एंड ऑल एज वेल एंड देयर आर पेंटी ऑफ़ सेफ ब्रांड्स अवेलेबल। सो वी हैव टू टेक केयर ऑफ़ दैट। एंड लिपस्टिक्स के हिसाब से देखते हो तो भी वी हैव अ क्रुएल्टी फ्री। वी हैव ऑर्गेनिक एंड ऑल एज वेल। सो, द लिपस्टिक व्हाट गिवेस दैट कलर। जब लाल लिपस्टिक लगाते हैं, इट इज़ सेड दैट दैट रेड कलर कम्स फ्रॉम कार्मन फ्रॉम द बीटल्स। इट्स ग्राउंड बीटल। व्हिच गिव्स रेड कलर कार्बन
(54:54) कलर सो आल्सो सम पीपल बीक्स एंड ऑल एज वेल। सो ये सारी चीज नहीं यूज करते हैं तो वी कॉल इट एज ऑर्गेनिक एंड इफ द प्रोडक्ट हैज़ नॉट बीन टेस्टेड एन एनिमल्स जिसको क्रुएल्टी फ्री बोलते हैं। सो इसके लिए थोड़े बहुत सर्टिफिकेशंस रहते हैं। यूएसडीए ऑर्गेनिक रहता है। इकोसर्ट रहता है। पीटा क्रुएल्टी फ्री रहता है। तो ये सारे चीज प्रेफर करते हैं तो थोड़ा बेटर रहता है। हम एंड उसके बाद नेल पॉलिश लगाते हैं। नेल पॉलिश जब लगाते हैं देयर इज़ अ समथिंग व्हिच इज़ कॉल्ड एज अ टॉक्सिक ट्रायो जो तीन सबसे टॉक्सिक केमिकल्स रहते हैं। दीज़ आर डीबीपी, टॉलन एंड फॉर्मेल्डिहाइड।
(55:25) सो दीज़ थ्री आर नॉट देयर इन योर नेल पॉलिश। इट इज़ कॉल्ड एज थ्री फ्री। इसमें दो और टॉक्सिक केमिकल्स नहीं है। तो उसको बोलते हैं अपन फाइव फ्री। तो द बेयर मिनिमम जो भी नेल पॉलिश लगाते हैं दे हैव टू प्रेफर एटलीस्ट द फाइव फ्री। तो इसमें दो से तीन और टॉक्सिक केमिकल्स नहीं होते हैं। थोड़ा कॉम्प्लिकेटेड नेम्स रहता है इसलिए मैं नाम नहीं बोल रहा हूं। तो दो से तीन और नहीं होते हैं। तो सेवन और एट फ्री होता है। सबसे बेस्ट होता है जो वीगन है दैट इज़ 20 फ्री। सो 20 फ्री इज़ दी बेस्ट अवेलेबल। ऑब्वियसली थोड़ा सा एक्सपेंसिव रहेगा। इंडिया में एक ही ब्रांड देता है
(55:53) वो 20 फ्री। अच्छा। या बट इट्स क्वाइट गुड। ओके गुड। अच्छा। सो वो अपन यूज़ भी कर सकते हैं। बट अदरवाइज अगर तो रेगुलर नेल पॉलिश यूज़ करें तो नेल पॉलिश कैंसर दे सकता है। नेल पॉलिश का जो उसके अंदर जो केमिकल्स रहते हैं अगेन उसके वो टॉक्सिक ट्रायो अगर है तो इट कंटेन फॉर्मेल्डिहाइड फॉर्मेल्डिहाइड इज़ अ ग्रुप वन कार्सिनोजन। नेल पॉलिश जो लगाते हैं जो खुद मैं यूज़ कर रहा हूं। देयर इज़ अ लेस ऑफ़ अ रिस्क फॉर मी। ऑब्वियसली थोड़ा बहुत स्किन के ऊपर कंटैमिनेशन हो रहा है। अगर मैं हर दिन सुबह शाम ऐसे कोई नहीं लगाते। एक बार लगा लेते तो एक सप्ताह तक वही चलता रहता है।
(56:23) जिसके लिए ऑक्युपेशनल है। आप सलून जा रहे हो। नेल पिश वो दिन भर लगाते रहते हैं। उससे जो फ्यूम्स निकलता है। सो दैट कैन कंटेन फॉर्मेल्डिहाइड एट्रा व्हिच इज़ कैंसर कॉजिंग मोर फ्रॉम द ऑक्युपेशन पॉइंट ऑफ व्यू। अगर आप एक अंडर वेंटिलेटेड सलूून में बैठे हो बिल्कुल एक छोटे से कमरा है। कहीं वेंटिलेशन नहीं है। आप नेल पॉलिश लगवा ले रहे हो तब आपके लिए दिक्कत हो सकता है। नेल पार्लर्स एंड ऑल जो क्लासिक एंड हेयर डाइस भी अगर पार्टी जाने के पहले अगर अपन हेयर डे भी लगाना चाह रहे हैं। दिस इज़ आल्सो बिग थिंग। हेयर डाई इज अ वै नंस्ड थिंग।
(56:50) ऐसा नहीं है कि जो भी हेयर डे लगाते हैं उसको कैंसर होने वाला है। सो अगर मैं पर्सनल हेयर डे यूज़ करता हूं। अगर मैं खुद अपने बाल के लिए हेड नहीं लगाता हूं, इट इज़ कंसीडर्ड ऐज़ अ ग्रुप थ्री कार्सिनोजेन। मतलब देयर इज़ नो कार्सिनोजेनिक ना के बराबर कार्सिनोजेनिक रिस्क है। अगर मैं खुद महीने या एक दो महीने में एक बार लगाने वाला हूं तो बट अगर जो ऑक्युपेशन लगाता है अगर आप मान लीजिए बारबर के पास जा रहे हो तो दिन में 101 लोग के लिए वो हेयर डाई लगाते रहते हैं। तो उनके लिए इट इज़ अ ग्रुप टू ए कार्सिनोजन। सो इट डिफर्स। बट हेयर ड्राई भी अगर आप
(57:18) देखते हो तो उसमें थोड़े बहुत हार्मफुल चीज नहीं रहना चाहिए। जैसे पीपीडीस बोलते हैं। पैराफेनिन डाईमीन। दैट इज पीपीडी इट शुड नॉट कंटेन अदर ऑर्गेनिक अमीनस इट शुड नॉट कंटेन रिसोर्स इनॉल तो वैसे वाले सारे चीज रहता है कोल्ड टार डेरिवेटिव्स नहीं होना चाहिए तो वैसा प्रोडक्ट्स ढूंढना चाहिए जिसमें ये सारी चीज नहीं है अंडरस्टुड डोंट प्योरली गो फॉर नेचुरल कोई बोलता है 100% नेचुरल है उसमें उल्टा ज्यादा हैवी मेटल्स हो सकता है अच्छा जी तो पीछे हमेशा जो कंटेंट्स है उसको पढ़ के देखो कि उसमें पीपीडी नहीं है ऑर्गेनिक अमीनस नहीं है रिसोर्सनॉल नहीं है कोल्टार
(57:48) डेरिवेटिव्स नहीं है प्रेफरेबली ट्राई फॉर समथिंग व्हिच इज ऑर्गेनिक एंड पहनना या इंडिगो प्रोडक्ट्स जो भी रहता है इंडिगो का भी एलर्जी हो सकता है। थोड़े बहुत लोग का एलर्जी करते हैं। तो जब भी आप ऑर्गेनिक प्रोडक्ट यूज़ करते हो हमेशा पैच टेस्ट करो। एक छोटा सा जगह ये मुंह के ऊपर या हाथ के ऊपर लगा के देख लो। पूरा ऐसा नहीं कि पूरा मैंने बाल के ऊपर एक साथ लगा लिया। फिर दिक्कत हो जाता है। सो दैट इज आल्सो देयर। मैं आपको बता रही थी ना डॉक्टर थूपेल आए थे हमारे पडकास्ट में द लेड मैन ऑफ़ इंडिया। उन्होंने कहा था कि मैं जब डायलिसिस वार्ड में जाता हूं। नाइन आउट ऑफ़
(58:14) 10 डायलिसिस पेशेंट्स हैव देर हेड आइड। द थिंग इज जब अपन डई ये पीपीडी अमीनस वाला डई सब बाल के ऊपर लगा लेते हैं। बाल से वो स्कैल्प में आ जाता है। स्कैल्प से ब्लड में आता है। ब्लड से ब्रेस्ट कैंसर और ब्लैडर कैंसर एंड कभी कबभार प्रोस्टेट कैंसर भी होने का चांस रहता है। सो दिस कैन कॉज सर्टन टाइप्स ऑफ़ कैंसर। कैन इवन कॉज़ सर्टन टाइप्स ऑफ़ ब्लड कैंसर सच एज लुकेमिया। बट अगर ये सारे प्रोडक्ट्स नहीं है। ये जो दो तीन चीज बोला था अगर वो नहीं है अगर मैं खुद यूज़ कर रहा हूं देन इट इज़ कंसीडर्ड एज अ ग्रुप थ्री कार्सिनोजन। ओके? तकरीबन 55% से 60% वुमेन कमर्शियली
(58:46) डिस्पोजेबल सैनिटरी नैपकिंस यूज़ करती हैं। राइट? अ मैंने ये सुना था कि ये बहुत ही प्रॉब्लमैटिक है। जैसे मैं पर्सनली जब मैंने ये स्टडी पढ़ी तो आई शिफ्टेड टू दोज़ ऑर्गेनिक बनाना फाइबर नैपकिंस। मैंने आपको एक बताया भी था कंपनी। फिर आपने मुझसे शेयर किया। मेरी वाइफ भी वही कंपनी का यूज़ करती है। तो इसके बारे में बताइए। और आपको लगता है कि आज जो इतना सर्वाइकल कैंसर हैज़ बिकम अ बिग थिंग। राइट? आपको लगता है कहीं ना कहीं यूज़ ऑफ़ सैनिटरी नैपकिंस एंड द सिंथेटिक वंस इज वन ऑफ द कॉजेस फॉर सर्वाइकल कैंसर। सिंथेटिक नैपकिंस एटलीस्ट ऑन द बेसिस ऑफ़
(59:15) करंट स्टडीज कैंसर का कुछ रिस्क नहीं है बट इट हैज़ अ रिस्क विथ इनफेक्शंस, बैक्टीरियल वजाइनोसिस, यीस्ट इनफेक्शंस एटसेटरा। सर्वाइकल कैंसर बढ़ने का सबसे बड़ा कारण यह है एचपीवी वायरस। इंडिया में अभी भी वायरस के वैक्सीनेशन कोई लेता नहीं है। ज्यादातर लोग डरते हैं। वैक्सीन के खिलाफ इतना बैड इनफेशन चल रहा है। मिस इनफेशन चल रहा है। आप ले लोगे आपको पैरालिसिस हो जाएगा। ये हो जाएगा वो हो जाएगा। प्लीज गो अहेड टेक द एचपीवी वैक्सीन। बच्चों को दिलाना चाहिए। बोथ गाइस एंड गर्ल्स। अगर अपन दिलाते हैं 9 से 15 साल की उम्र के बीच में दिलाते हैं। देन इट प्रिवेंट्स
(59:47) अगेंस्ट मल्टीपल कैंसर्स। लड़कियों में सर्वाइकल कैंसर होता है एंड व्वल कैंसर, वजाइनल कैंसर होता है। मेल्स में एनल कैंसर, पिनाइल कैंसर भी प्रिवेंट होता है। सो वी शुड गो अहेड एंड टूक दैट। सो दैट इज़ वन थिंग। नेक्स्ट थिंग जब अपन सैनिटरी प्रोडक्ट्स के बारे में बात करते हैं। सम ऑफ़ द वर्स्ट सैनिटरी प्रोडक्ट्स आर द पेंटी लाइनर्स जो पीरियड्स के बीच में यूज़ करते हैं औरत लोग जब वो ओवुलेशन के टाइम रहता है। 14 डे के आसपास में थोड़ा डिस्चार्ज ज्यादा रहता है। सो दे यूज़ द पेंटी लाइनर्स एंड इनवेरिएबली एव्री सिंगल पेंटी लाइनर हैज़ फ्रेगरेंस। वो स्मेल रहता
(1:00:15) ही है उसमें। सो व्हाट हपेंस इज़ वंस यू आर पुटिंग इट ओवर देयर एंड द वजाइनल वलवेल एरिया सम ऑफ़ द मोस्ट सेंसिटिव एरिया। उसमें इतना ज्यादा ब्लड फ्लो है एंड वी व्हेन यू पुटिंग फ्रेगरेंस डायरेक्टली ओवर देयर इट इज गोइंग टू अफेक्ट यू इनफेक्शंस होने का चांस ज्यादा रहता है। सैनिटरी नैपकिंस अगेन जब भी सैनेटरी नैपकिन यूज़ करते हैं लोग वो मार्केटिंग टर्म देखते हैं फ्रेश। फ्रेश देख के उनको लगती है कि यार ये सच में फ्रेश है। इसको मैं पहन लेती हूं। नहीं। फ्रेश इज जस्ट अ मार्केटिंग टर्म। आप स्मेल करके देखो। लुक फॉर व्हाट प्रोडक्ट इट इज मेड आउट ऑफ। एंड सेनेटरी
(1:00:44) पनैपकिंस का भी क्या रहता है पीछे का एक प्लास्टिक का बैक लेयर रहता है। सो दैट टेंड्स टू ट्रैप योर मॉइस्चर इन। सो यू आर वेरिंग इट एंड ऑन टॉप ऑफ दैट वो जो ये भी रहता है अंडर गारमेंट्स भी रहता है। सो हीट बढ़ जाता है। सो स्वेट बढ़ता है, इनफेक्शन बढ़ता है। तो ये सारे चीज भी रहता है। हम तो इसका अगर अपन सेफ्टर वर्शनंस वगैरह देखते हैं तो जो ऑर्गेनिक पैड्स वगैरह आते हैं। कॉटन ये कॉटन वूल पैड्स आते हैं। तो उसको यूज़ कर सकते हैं। या फिर में्रुअल कप्स आजकल काफी चर्चा में है। सेफेस्ट नंबर वन सस्टेनेबल एनवायरमेंटली ट्रू ट्रू ट्रू। एंड मेंस्ट्रुअल कप्स भी
(1:01:13) जो सिलिकॉन से बनता है तो उसको आराम से अंदर लगा ले सकते हैं। थोड़ा सा साइज ढूंढने में थोड़ा दिक्कत रहता है। ऑब्वियसली ए्री लेडी इस गोइंग हैव अ डिफरेंट साइज। सो दैट विल बी देयर। सम पीपल टपेंस भी यूज़ करना प्रेफर करते हैं। टैंप्स कैन आल्सो बी यूज्ड बट टैं्प्स को बहुत ढंग से यूज़ करना चाहिए। दिक्कत वो होता है कि टैंप्स अनसेफ नहीं है। टैंप्स को लोग अच्छे तरीका से यूज़ नहीं करते हैं। तो उसको बहुत काफी देर के लिए अंदर रख लेते हो। तो उसमें एक सिंड्रोम होने का संभावना रहता है जिसको बोलते हैं टॉक्सिक शॉक सिंड्रोम। इट इज़ वैरी डेंजरस।
(1:01:41) ओ सो इफ यू आर यूजिंग टैं्प्स गो अहेड बट यूज़ इट इन अ सेफ बट बेस्ट ऑफ़ द लॉट इज़ में कप थोड़े बहुत लोग इसको भी यूज़ करते हैं ना ये पीरियड पेंटीस हां पीरियड पीटीज दे आल्सो यूज़ दैट सो पीरियड पीटीज आर आल्सो गुड इट्स आल्सो गुड बट ऑब्वियसली पीरियड पेंटज़ में कभी कबभार पीएफएस बोल के एक केमिकल होने का ये रहता है जिसको बोलते हैं फॉरएवर केमिकल्स मतलब इट स्टेज़ फॉर अ लॉन्ग टाइम सो मेक श्योर इट्स थर्ड पार्टी टेस्टेड जस्ट एक पीरियड पटी है बोल के ब्लैंकेट वो खरीद के नहीं पहनना चाहिए अच्छा दैट इज देयर बट इट्स आल्सो वैरी कंफर्टेबल इंटमेसी मार्केट या फिर प्लेजर मार्केट
(1:02:11) मार्केट इंडिया में हैज़ बिगन मेकिंग इट्स वे। तो मैं यह सवाल आपसे पूछना चाहूंगी कि जो इंटिमेट टॉयज होते हैं जो कपल्स यूज़ करते हैं या जो पीपल इंडिपेंडेंटली यूज़ करते हैं क्या वो सेफ है? क्योंकि वो [नाक से की जाने वाली आवाज़] इनवेजबल भी होते हैं। या यूजुअली ज्यादातर वो जो भी बनता है सिलिकॉन से बनता है मेडिकल ग्रेड सिलिकॉन। सो वी आर फाइन एंड समटाइ्स जो लुब्रिकेंट्स यूज़ करते हैं। दैट कैन कॉज इनफेक्शन। सो जस्ट मेक श्योर वी हैव टू बी वेरी ऑफ़ द फ्रेगरेंस इन दैट एज वेल। तो थोड़ा संभाल के यूज़ करना चाहिए। सो मॉर्निंग से लेके हमने अपनी दिन की
(1:02:37) शुरुआत की। फिर हम काम पे गए। फिर हम एक काम के बाद आए। फिर हम पार्टी में भी गए और अब हम फाइनली आके सो रहे हैं। अब बताइए। खाना खाने के पहले थोड़े बहुत लोग पान भी खा लेते हैं। तो पान जो होता है उसमें जो सुपारी या अरेकानेट होता है दैट इज अगेन उसके कारण भी कैंसर हो सकता है। एंड रात में जब सोने जा रहे हैं इंडिया के हर घर में मच्छर का दिक्कत भी रहता है। तो मच्छर के लिए हम कभी कबभार मॉस्किटो के कॉइल जलाते हैं। तो मॉस्किटो कॉइल जो यूज़ करते हैं इसमें पीएम 2.
(1:03:05) 5 पार्टिकल्स रिलीज होता है। कैन कॉज एयरवे इरिटेशन, अस्थमा एंड आल्सो अ थ्योरेटिकल डिस्क ऑफ कैंसर। तो मॉस्किटो कॉइ्स नहीं यूज़ करना चाहिए। काफी मॉस्किटो के लिए वो छोटे-मोटे पैड्स वगैरह भी आते हैं। उसको भी यूज़ नहीं करना चाहिए। जो लिक्विड रिपेलेंट्स है उसको आप यूज़ कर सकते हैं। ऑल आउट जैसे चीजें यूज़ कर सकते हैं। यस जो लिक्विड मॉस्किटो रिपलेंस है उसको अपन यूज़ कर सकते हैं। पर जब भी यूज़ करते हैं अगेन व्हेनवर यूजिंग लिक्विड रिपलेंस एक्सट्रीम्स ऑफ़ एज में थोड़ा संभाल के यूज़ करना चाहिए। अगर छ महीने का बच्चा है या 80 साल का अम्मा है घर में तो थोड़ा संभाल के यूज़ करना है। तो जब भी आप यूज़ करते हो
(1:03:34) थोड़ा वेंटिलेट करो पहले रूम को। उसके बाद जब दरवाजा बंद कर देते हो उसके बाद रात भर उसको चलाओ मत। वो एक सावधानी की चीज है। ओडोमास वगैरह भी अपन शरीर के ऊपर लगा सकते हैं। टोटली सेफ दैट इज देयर। पर नंबर वन फॉर मॉस्किटो रिपेलेंस इज़ मॉस्किटो नेट। अब मॉस्किटो नेट जो फिजिकल प्रोटेक्शन है वो सबसे बेस्ट है। सो एंड सेफेस्ट एस वेल। उसमें कुछ केमिकल नहीं निकलता है तो धुआ नहीं है। तो सबसे आराम से आप लगा सकते हो। अंडरस्टुड? वी हैव अ कैंसर प्रिवेंशन रैपिड फायर सेगमेंट। तो मेरा पहला आपसे यही है कि अ कैंसर सर्जन। आप सबसे ज्यादा
(1:04:03) केसेस बॉडी के किस भाग में देखते हैं? इन वुमेन ब्रेस्ट एंड सर्वाइकल इन मेन लंग एंड ओरल। फाइव फूड आइटम्स जो हेल्थ के लिए बहुत हानिकारक है। प्रोसेस्ड मीट, रेड मीट, प्रोसेस्ड पैकेज्ड फ्रूट ड्रिंक्स, अल्कोहल जो अपना फॉर चिल्ड्रन हेल्थी माल्ट बेस्ड ड्रिंक्स। ओके? फोर होम आइटम्स जो साइलेंट किलर्स की तरह काम करते हैं। रूम फ्रेशनर्स जो अपने इंसेंस स्टिक्स वगैरह यूज़ करते हैं पूजा पाठ करने के लिए जो इनडोर एयर पोलशन रहता है जब अपन खाना बनाते हैं उसके कारण एंड जो अपना नेप्सिलीन बॉल्स रहता है। ओके। तीन ऐसे टेस्ट जो गर्ल्स और
(1:04:41) वुमेन को करने ही चाहिए टू प्रिवेंट कैंसर। और तीन ऐसे टेस्ट जो मेन या यंग बॉयज को करने चाहिए टू प्रिवेंट कैंसर। थ्री टेस्ट फॉर वुमेन मेमोग्राम 40 साल की उम्र के बाद साल में एक बार कराना चाहिए हर औरत के लिए। उसके अलावा पैप्समियर कराना चाहिए हर औरत के लिए 21 साल की उम्र के बाद। तीन साल में एक बार केवल आप पैप्समियर करा रहे हो तो थ्री इयर्स में एक बार अगर पैप्समियर के साथ एचपीवी वायरस के टेस्टिंग भी करा रहे हो देन फाइव इयर्स इन वंस इन फाइव इयर्स। एंड आल्सो कोलरिक्टल कैंसर के लिए स्क्रीनिंग करना चाहिए। जो अपनी बड़ी आंत में कैंसर रहता
(1:05:09) है। मोशन का सैंपल देना चाहिए। उसमें ब्लड है या नहीं चेक करने के लिए। वी कॉल इट एज आइदर एफ ओ बीटी और एफओ एफआई टी। सो इयरली वंस फ्रॉम द एज ऑफ़ 50। अगर आपका हिस्ट्री ऑफ़ कैंसर है यू हैव टू स्टार्ट इट इवन अर्लियर। मेन में अगर देखते हैं देन यू हैव टू अह अगेन चेक फॉर कोलरेक्टल कैंसर। कॉमन है। एफओबीटी और एफ एफआईटी फ्रॉम द एज ऑफ़ 50 एटलीस्ट वंस एव्री ईयर। गो फॉर ओरल कैंसर स्क्रीनिंग। अगर गुटखा तंबाकू वगैरह खाने की आदत है, अगर शार्प टीथ है मुंह में तो एटलीस्ट छ महीने में एक बार डेंटिस्ट या ऑनकोलॉजिस्ट से जाके एक बार मिलना चाहिए।
(1:05:40) ओके? एंड ओल्ड पीपल इफ यू आर प्रोब्ली बियड 70 इयर्स हो यू शुड कंसीडर गेटिंग अ पीएसए टेस्ट डन। प्रोस्टेट स्पेसिफिक एंटीजन ये प्रोस्टेट कैंसर के लिए स्क्रीनिंग करता है। आजकल कैंसर भी एक क्रॉनिक डिजीज जैसा हो गया है। जैसे डायबिटीस या शुगर यू आर एबल टू एक्सटेंड द लाइफ। यू आर एबल टू प्रोलोंग द लाइफ। माइट नॉट बी एबल टू कंप्लीटली क्योर इट। नॉट फॉर एव्री सिंगल टाइप ऑफ़ कैंसर ऑब्वियसली। बट थोड़े बहुत कैंसर्स के लिए। ओके डॉक्टर अर्जुन शंकरन थैंक यू सो मच बहुत मजा आया एंड बॉडी टू बीइंग की जर्नी में आप पहले साउथ इंडियन है जिसने हिंदी में पडकास्ट किया सो कूडोस
(1:06:11) टू यू सलूट टू यू एंड लाइक आई सेड हाई फाइव ऑन बीइंग अ 90ज किड इट्स अ नाइस इंटरेक्शन इट इज़ अ नाइस बॉन्डिंग विशिंग यू ऑल द स्ट्रेंथ एंड लक एंड थैंक यू फॉर इनफॉर्मिंग सो मेनी ऑफ़ आवर पीपल बहुत ही वैल्यूएबल पॉडकास्ट रहा है सो थैंक यू सो मच थैंक यू सो मच श्लोका जी थैंक यू सो मच आई हैड अ वंडरफुल टाइम इन केस यू वुड लाइक टू बी पार्ट ऑफ आवर ऑनलाइन एंड इनपर्सन योगा, डाइट एंड स्पिरिचुअल प्रोग्राम्स। यू कैन जॉइन आवर WhatsApp ग्रुप बिलो वेयर वी पोस्ट ऑल आवर अपकमिंग प्रोग्राम्स एंड गिव फ्री टिप्स ऑन हेल्थ, डाइट एंड लाइफस्टाइल।
(1:06:47) [संगीत]

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