What Really Happens to Your Brain Under Anesthesia? The Precision Behind Every Dose | Dhirja Sharma
Author Name:Flirting With A Fish
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Transcript:
(00:00) जब हम एनस्थीसिया देते हैं ना उसकी एक बहुत पिकुलरिटी एक खासियत है। हर किलो के हिसाब से हम बनाते हैं। बॉडी वेज वी टेक लीन बॉडी मास मतलब आपकी मसल मास कितना है? आपका फैट मास कितना है? उस सब के बेसिस पर डिफरेंट दवाइयों की अलग-अलग डोसेज कैलकुलेट होती है। एनस्थीसिया के पॉइंट ऑफ व्यू से ऐसी कौन-कौन सी चीजें हो सकती हैं जो कि अगर वो गलत मेडिकेशन चला गया है तो उसकी वजह से हुई होंगी। पेशेंट को अवेयरनेस ड्यूरिंग एनस्थीसिया [संगीत] जो चीज कही जाती है वो हो जाती है कि उनका उठ गए वो हम बीच में उठ जाते हैं कभी-कभी हां पर उनका बॉडी हमने रिलैक्स करी हुई हो
(00:37) तो हिल नहीं सकते पर वो सुन लेते हैं तुम लोग ऑपरेशन शुरू करने वाले हो मुझे तो बेहोश होना चाहिए राइट मुझे सबकी आवाें कैसे सुनाई दे रही है लगता है मुझ पर एनसी का असर नहीं हुआ है क्रिप्स गाइस हेलो कुछ ठीक नहीं है नो नो नो नो नो नो सैम मुझे बहुत दर्द हो रहा है [चीखने की आवाज़] स्टॉप इट सैम। मुझे बहुत दर्द हो रहा है सैम प्लीज। बड़ा ट्राटिक एक्सपीरियंस है। या पर व्हेन यू से अनक्लेन डेथ हम लोग को मोस्टली पता नहीं होता है कि किस वजह से डेथ हुई है। ऑपरेशन और एनस्थीसिया के 24 घंटे बाद अगर कोई डेथ होती है। व्हाई डस अ डेथ बिकॉज़ ऑफ़ एनस्थीसिया हैपन?
(01:18) स्पेशली जब हम जनरल एनस्थीसिया देते हैं तो हम पेशेंट को सिर्फ सुलाते ही नहीं है। उनके सांस लेने की शक्ति भी हम ले लेते हैं। सो व्हाट रियली हैपेंस इनसाइड द ब्रेन? एंड जब एनस्थीसिया दे दिया तो कॉन्शियसनेस कहां चली जाती है? इस पडकास्ट को शुरू करने से पहले मेरी आपसे एक छोटी सी रिक्वेस्ट है। सब्सक्राइब बटन और बेल आइकन को क्लिक करिए क्योंकि आपके ऐसा करते ही आप हमारी कम्युनिटी के पार्ट बन जाते हो। हमारी कम्युनिटी बड़ी हो जाती है और ट्रस्टेबल हो जाती है। यह स्पेशली इंपॉर्टेंट होता है हमारे गेस्ट के लिए जिनको हम बहुत मेहनत से अप्रोच
(02:00) करते हैं। और वो जब आते हैं पडकास्ट पे तो अपने सालों की इंफॉर्मेशन आपके साथ शेयर करते हैं जिसको आप आराम से घर में बैठकर सुन पाते हो। उन गेस्ट के लिए इंपॉर्टेंट होता है कि कौन सुनेगा उनको? कितने लोग सुनेंगे और यह सवाल का जवाब आप बहुत आसानी से दे सकते हो सब्सक्राइब करके। आपको सिर्फ इतना करना है। बाकी हम देख लेंगे। तो आइए चलते हैं। देखते हैं यह पडकास्ट। डू यू थिंक कि एनस्थीसिया जैसी एक चीज है उसमें हमको एज पेशेंट्स कुछ घुसना भी चाहिए। लाइक एज अ क्यूरोसिटी ठीक है। यू नो आप एंटरटेन कर रहे हो हम बात कर रहे हैं। दैट्स फाइन। फिर एज अ पेशेंट इन अ
(02:40) डॉक्टर व्हाट वुड यू से लाइक मी आस्किंग ऑल दी क्वेश्चंस इज इट इवन नेसेसरी या यू विल से रहने दो आई नो माय जॉब। देखिए अगर आप पेशेंट हैं हम और आपके बॉडी के साथ कुछ हो रहा है कैसे भी तो यू मस्ट इंटैक्ट। यह तो मैं कहूंगी 100% 100% अगर आपने किसी एनस्थीजिया के एपिसोड में जाना है आपको किसी कारण चाहे लोकल में हो रहा है जहां दांत भी निकलवाने आप जा रहे हैं आंख का ऑपरेशन कराने जा रहे हैं या पेट का बड़ा ऑपरेशन होने जा रहा है सब में आपको उसके बारे में पता होना चाहिए और आपको उसके बारे में आप पे क्या इफेक्ट होगा यह जानना भी चाहिए
(03:19) पूछना भी चाहिए तो अगर मैं एक डॉक्टर हूं और अगर अगर मैं ये उत्तर देती हूं कि नहीं मैं अपना मैं पढ़ी लिखी हूं। मुझे आता है। आपको जानने की जरूरत नहीं है तो वो उचित नहीं है। क्योंकि ये तो अब इंक्रीजिंगली सब जगह हम मानते हैं कि जो पेशेंट है जो मरीज है वो सेंटर पे है। उसकी जो बॉडी है वो उसकी अपनी है। उसके साथ जो भी दवाई दी जा रही है। जैसे हम ये पूछते हैं ना अगर हमें एंटीबायोटिक डॉक्टर खांसी जुकाम में लिख के देता है तो हम जानना चाहते हैं ना इससे क्या होगा? क्या असर होगा? इफेक्ट नींद तो नहीं आएगी पेट में दर्द तो नहीं
(03:59) होगा सेम एनस्थिया भी एक तरीके से दवाइयां ही है तो पता होना चाहिए हमें करना चाहिए पता तो आपके एक्सपीरियंस में लोग आपसे पूछते हैं कल्चर क्या है हां पूछते हैं पूछते हैं तो अगर कोई भी पेशेंट जिसको सर्जरी के लिए जाना है और उसको उसके अंडर एनस्थीसिया होना है तो वो पेशेंट आते हैं प्री एनस्थेटिक चेकअप हम जिसे कहते हैं पीएसी उन क्लीनिक्स में ओपीडी में जैसे आप दूसरे मरीजों को दिखाते हैं वैसे वो पेशेंट एनस्थीसिया के डॉक्टर को दिखाते हैं। तो उनमें जैसे जनरल चेकअप और डॉक्टर करते हैं। वो पूरा फुल जनरल चेकअप होता है। ब्लड टेस्ट वगैरह देखे जाते हैं। पेशेंट
(04:37) की हिस्ट्री पूछी जाती है। उसके बाद एक एनस्थेटिक प्लान बनता है। तो हम तो पेशेंट को वो भी एक्सप्लेन करते हैं कि आपकी ये सर्जरी होगी। हम इस सर्जरी के लिए हमारे ओपिनियन में ये बेस्ट आपके लिए इस तरीके से एनस्थीजिया है एंड अल्टरनेट भी ये है। अगर ऐसा नहीं तो ऐसा किया जा सकता है और आपको समझा रहे हैं जिससे आप समझ सको इसके बारे में कोई क्वेश्चन पूछना चाहते हैं आप क्वेश्चन भी पूछ लो पर जब आप समझ लेंगे वो हमें कंसेंट देंगे हामी देंगे फिर ही हम एनस्थीसिया देते हैं। सो आप ऐसे बोल रहे हो कि ऑप्शंस तो मतलब पेशेंट चूज़ कर सकता है कि वो कौन से रूट
(05:14) पे जाए? कई हां कई बार देयर यह कॉस्ट का कॉस्ट का वेरिएशन की वजह से होता है या और कोई फैक्टर कॉस्ट है पेशेंट कंफर्ट है। अच्छा सबसे जो प्राइमरी चीज होती है उसमें तो पेशेंट की अपनी बॉडी कंडीशन पे है। ठीक है ना? तो और क्या सर्जरी होनी है? तो अब जैसे मेरे मैं पेशेंट हूं। मेरे हाथ की कोई सर्जरी होनी है। ठीक है? तो उसमें मैं पूरा बेहोश हो सकती हूं। डीपेस्ट एनस्थीजिया में मेरे हाथ की सर्जरी हो सकती है। मैं छोटे लाइट एनस्थीसिया सेडेशन में वह सर्जरी करा सकती हूं। या फिर अब बहुत सारे एनस्थेटिक टेक्निक है जिसमें सिर्फ उस हिस्से को ही
(05:49) हम एनस्थेटाइज करते हैं। एकदम हां लोकल में कर सकते हैं। रीजनल में कर सकते हैं। अल्ट्रासाउंड मेरे पास अल्ट्रासाउंड बिल्कुल वहां पे नर्व पे जाके करते हैं। तो अब हमारे पास चार मेरे लिए चार ऑप्शन हो गई है एज अ पेशेंट। तो अब मेरी कई बार हो सकता है मैं बहुत डरी हुई हूं। मुझे नहीं मुझे नई जगह से डर लगता है। मन में चिंता है उस जगह के बारे में। मैं कुछ अवेयर ही नहीं रहना चाहती। तो आई विल चूज़ अ चॉइस। सो उसमें डॉक्टर की तरफ से एनस्थीसिया के डॉक्टर की तरफ से तो कई ऑप्शंस थी। हम पर एज अ पेशेंट मैंने चूज़ क्यों की कि मेरा वो बेस्ट कंफर्ट था।
(06:24) राइट? कि मुझे फुल एनस्थीसिया दे दो। पर इसी में ही सपोज मुझे कोई ऐसी मेडिकल कंडीशन है जिसमें फुल एनस्थीसिया में रिस्क हो सकता है। तो डॉक्टर मुझे कहेंगे कि नहीं आप यह चूज़ करिए क्योंकि आपकी बॉडी को रिस्क इसमें लीस्ट है। तो आप डर भी रही हैं तो फिर भी आप ये चूज़ करिए। ये हमारी एडवाइस है। तो फिर देन वी विल गिव दैट। इट्स पॉसिबल देन आल्सो पेशेंट से कहते हैं कि नहीं हम फिर भी हमारा वो डर ज्यादा ओवराइडिंग है। तो फिर उसमें हम चॉइससेस देते हैं। बट दैट इज हाउ इट इज। हम और यही सही तरीका है। वाओ ओके। एंड नाउ ये वाली चॉइससेस तो उस
(07:02) बेसिस पे है कि उनकी हेल्थ कंडीशन के हिसाब से जो आपने रिकमेंड किया वो यू नो बट क्योंकि ये एक इंटरेक्टिव प्रोसेस है। जितना मैंने एक्सपीरियंस भी किया है उसमें डॉक्टर पूछते हैं सवाल। बट क्या ये जो सवाल पूछे जाते हैं ये एक स्टैंडर्ड फॉर्मेट है? और क्या इस फॉर्मेट में कुछ मिस हो सकता है किसी किसी डॉक्टर से? या ये इतना रोबस्ट फॉर्मेट है कि जब कोई डॉक्टर आपसे पूछ रहा है एनस्थेसिस पूछ रहा है तो कुछ मिस होने वाला नहीं है। ठीक है? अच्छा क्वेश्चन है। फॉर्मेट तो स्टैंडर्ड होता है। इट्स लाइक अच्छा मैं एक चीज आपको बताना चाहूंगी जब हम
(07:40) एनस्थीसिया देते हैं ना उसकी एक बहुत पिकुलैरिटी एक खासियत है। वो ये है कि जो आपने अभी तक दवाइयां खाई है किसी भी कारण। आप बीमार थे तो इसने आपने दवाई खाई। आपके पेट में दर्द था किसी को 10 लग गए तो 10 ठीक करने की दवा खाई एनस्थसिया में जो दवाई दी जाती है ना वो किसी बीमारी के लिए नहीं दी जाती हम वो एक स्पेसिफिक पर्पस के लिए जाती है कि पेशेंट्स हो जाए उनका ऑपरेशन हो जाए ऑपरेशन के बाद उन्हें पेन ना हो हम तो इसलिए एनस्थीजिया डॉक्टर की तरफ से हमारी रिस्पांसिबिलिटी बहुत हाई होती है क्योंकि अगर हम पेशेंट को एनस्थीजिया ना दें
(08:17) सपोज कोई मेरे पास पेशेंट आते हैं उनके हाथ की हड्डी टूट गई है तो वो हड्डी अपने आप ठीक होगी। मैं एनस्थीसिया ना दूं तो कोई बात नहीं। वो अपने आप ठीक होगी। एनस्थीसिया मैं दे रही हूं कि वो हड्डी जुड़ जाए। तो वो जो मेरी प्रोसेस है एनस्थीसिया देने का और जो मैं दवाइयां दे रही हूं उसमें मेरी रिस्पांसिबिलिटी कि पेशेंट पे उसका असर रेजिडुअल इफेक्ट ऑलमोस्ट जीरो हो। वो बहुत हाई है। वो मेरी रिस्पांसिबिलिटी है एज अ क्लीन। तो इसलिए मुझे उस पेशेंट के बारे में जानना एक-ए चीज उनके हर सेल के बारे में जानना बहुत इंपॉर्टेंट है। इसलिए
(08:52) एक हमारे स्टैंडर्ड फॉर्मेट होते हैं। एक होता है कि मरीज की हिस्ट्री हम पूछते हैं बीमारियां वगैरह दवाइयां क्या कह रहे हैं? पहले कभी उनको ऑपरेशन के लिए जब एनस्थीसिया के लिए गए क्या कोई साइड इफेक्ट हुआ था? क्या कोई स्पेसिफिक इफेक्ट होता है? पेशेंट्स बताते हैं वो हुआ था। घर में किसी और को कोई हिस्ट्री है? तो बहुत डिटेल समटाइ्स मोर डिटेल्ड हिस्ट्री फैमिली वालों से भी रिलेटेड होती है। बिल्कुल कुछ जेनेटिक कंडीशंस होती हैं जिनमें एक पर्टिकुलर दवाई का असर ज्यादा आ जाता है। तो वो सब चीजें हमें फिर हम अवॉइड करते हैं कम देते हैं।
(09:26) तो उसके अलावा फिर जो प्रेजेंट उनके ब्लड टेस्ट हैं उनमें उनकी डिफरेंट ऑर्गन्स की क्या हेल्थ है? हार्ट का क्या असर है? किडनीज का क्या फंक्शन चल रहा है? लिवर का वो सब हमारी दवाइयों को इंपैक्ट करते हैं। तो इसलिए वो बहुत जरूरी है कि उनके बारे में जाना जाए। तो जो पेशेंट का एक तो इंटरव्यू होता है उनसे बात हम करते हैं। दूसरा उनकी जो ब्लड इन्वेस्टिगेशंस और हार्ट वगैरह की जांच देखते हैं। दैट इज मच मोर एक्सटेंसिव। देन मे बी शायद अगर आप किसी सिर्फ गायनेकोलॉजिस्ट को दिखाएंगे तो वो एक पर्टिकुलर चीज देखेंगे। आप अगर सिर्फ आई के लिए जाएंगे तो डॉक्टर कुछ हिस्सा
(10:08) देखते हैं। एनस्थेटिस को पूरा शरीर देखना पड़ता है क्योंकि अंत में जो दवाइयां दी जा रही है वो सारे शरीर पे असर करती बट फिर भी पेशेंट की अश्योरेंस के लिए कौन सी ऐसी चीजें हैं जो कि पेशेंट को बता देनी चाहिए एनस्थेसिस को अगर वो ना भी पूछे सपोज आपसे भी बात कर रहे हो उस दिन अगर आप भूल जाओ तो हमें क्या ध्यान में रखना चाहिए कि अगर किसी भी तरह की सर्जरी में हम जा रहे हैं तो ये चीजें तो हम बिना पूछे बता दें। हां इट्स अ गुड थिंग। अगर कोई भी पेशेंट आ रहे हैं तो उनको अपने एनस्थीसिया डॉक्टरों को अपनी जो भी बीमारियां हैं उनके बारे
(10:45) में बताना चाहिए। सपोज जैसे ब्लड प्रेशर की तकलीफ है, डायबिटीज की तकलीफ है, कोई हार्ट की प्रॉब्लम थी, कोई लिवर की प्रॉब्लम है, वो बतानी चाहिए। ये बात मैंने बड़ी इंटरेस्टिंग देखी। कई बार पेशेंट्स ना अगर उनको लगता है कि उनकी से डायबिटीज वेल कंट्रोलोल्ड है। हां। 10 साल से दवाई खा रहे हैं। शुगर बड़ी वेल कंट्रोलोल्ड है। तो सोचते हैं अब तो हम बीमार नहीं है। ये दिस हैप्स वेरी ऑफन। मेरा ब्लड शुगर अब तो ब्लड प्रेशर मेरा बिल्कुल ठीक है। दवाई खा रहा हूं तो ब्लड प्रेशर की तकलीफ नहीं है। वो नहीं बताते डॉक्टर को अपने और दवाई कोई
(11:17) बीमारियां हैं वो पता नहीं उन बीमारियों के लिए क्या दवाइयां खा रहे हैं वो बताना बहुत जरूरी है। तो अगर कई बार याद भी ना रहे तो एक अपनी प्रिस्रिप्शन या अगर दवाई के वो पर्चे भी मतलब स्ट्रिप भी लेके आ जाए। सो दैट विल हेल्प क्योंकि पर्टिकुलर दवाइयों का अलग-अलग असर होता है बॉडी पे। तो उनका हमारी दवाइयों से अलग-अलग इंटरेक्शन होता है। तो कुछ दवाइयां डॉक्टर्स देने से मना कर सकते हैं। कुछ दवाइयां वो कह सकते हैं जरूर खानी है। कुछ दवाइयां होते हैं कि अच्छा दो घंटे पहले खानी है। ऐसे मतलब उन सबका इंटरेक्शन है। हां। तो अपनी मतलब आपको कोई
(11:55) भी अगर कभी भी किसी तरह की भी फिजिकल प्रॉब्लम हुई हो। भले ही हमारे हिसाब से वो ठीक भी हो गई हो। हां। तो भी बता देना चाहिए। बतानी चाहिए। और दवाइयां बतानी चाहिए। क्या कारण है? जैसे कई बार पेशेंट को जैसे ट्यूबरक्लोसिस की ट्रीटमेंट लीनि हमने दो साल पहले ली थी। बता देना चाहिए क्योंकि उसका भी असर आ सकता है। तो वो कंसीडरेशन में रहेगा क्योंकि यह बेसिकली बात यह है कि जब वो एनस्थेटिक प्लान बनाता है डॉक्टर तो उनको पता होगा किस दायरे में मुझे किस तरीके से करना है। सो इसमें मरीज की सेफ्टी है। पेशेंट सेफ्टी टू यू अपने बारे में जितना
(12:31) कुछ बता सकते हैं। दूसरा अगर कोई दवाइयों से उनको एलर्जी है या खानेपीने की चीज से इवन सिंपल थिंग मिल्क एलर्जी है, पोटैटो एलर्जी है, एग एलर्जी है क्योंकि हमारी काफी दवाइयां जिनमें इनके कॉम्पोनेंट्स होते हैं प्रोटीनंस तो वो फिर पेशेंट में प्रेसिपिटेट हो सकती है। किसी दवाई खाने से दमा हो जाता है। दे शुड टेल दवाई की एलर्जी दवाई और खाने पीने की चीजों की एलर्जी बतानी चाहिए। ये थोड़ा सा बताइए कि नॉट लाइक ये कौन सी दवाई बट जैसे कि हम लोग साइड इफेक्ट से एक कॉमन वर्ड बोलते हैं। राइट? बट साइड इफेक्ट क्या-क्या होते हैं ये हमको नहीं पता होता
(13:09) कॉमनली। राइट? बट एनस्थीसिया के पॉइंट ऑफ व्यू से जैसे अभी आपने बोला कि किसी में किसी दवाई में ये कॉम्पोनेंट्स होते हैं। सो ऐसी कौन-कौन सी चीजें हो सकती हैं जो कि अगर वो गलत मेडिकेशन चला गया है तो उसकी वजह से हुई होंगी। लाइक आई एम जस्ट ट्राइंग टू से कि अगर जैसे अगर अगर आपने बोला रशेस हो सकते हैं यू नो तो अगर ये सुनने के बाद में किसी को वो उनमें से कोई चीजें हो तो ध्यान आ सके कि शायद इट हैपेंड बिकॉज़ ऑफ़ एनस्थीसिया एंड सो देन यू कैन गो एंड कोर्स करेक्ट इट हां कौन सी चीज़ हां सो दैट कैन बी बिकॉज़ ऑफ़ एनस्थीसिया नो नो मैंने जिस बात की कि
(13:44) वो कोई भी खाने की पीने की चीज जिससे आपको पहले कभी हुई हो ओ ओके ओके सो दूध से जैसे कई आप कहते हैं ना कई लोगों को मैं जो एग एलर्जी है, मिल्क एलर्जी है, या फिर मैं कॉर्न से एलर्जी है, कई शेलफिश से एलर्जी है। अच्छा इनका इसलिए इंपॉर्टेंट है क्योंकि जो उन दवाइयों उन खाने पीने के चीजों से एलर्जी हो रही है। उसकी क्रॉस एलर्जी एनस्थीसिया कुछ दवाइयों से हो सकती है। उसमें ड्यूरिंग एनस्थसिया जब एलर्जी होगी पेशेंट सो रहे होंगे। वो आपको नहीं पता होगा। हमारे लिए होगा कि पेशेंट का ब्लड प्रेशर कम हो जाएगा। हम पेशेंट के जैसे आप कह रहे हैं रशेस तो आ
(14:22) जाएंगे। पेशेंट विल नॉट नो हमें पता है रशेस आ गए और उनको हमें दवाइयां देनी पड़गी उनके हार्ट और ब्लड प्रेशर को सपोर्ट करने के लिए। तो अगर पहले पता है डॉक्टर को तो वो एक तो अवॉयड करेंगे उस दवाई को। है ना? जैसे अगर आप लोग कहते हैं मुझे पेनिसिलिन की एलर्जी है तो फिर पेनिसिलिन का प्रिस्रिप्शन नहीं मिलता ना उनको कभी भी इंजेक्शन। सो उस तरीके से अदरवाइज आफ्टर एनस्थीजिया जैसे आप पूछिए ना कुछ कैसे पता चले कि एलर्जी थी तो उसमें टिपिकली जो एनस्थीसिया डॉक्टर्स होते हैं हम लोग इनफॉर्म करेंगे पेशेंट को जब वो उठते हैं तो कहते हैं आपको इस दवाई से ये
(15:00) असर आया था सो फॉर आवर हम आपको ये प्रिस्रिप्शन दे रहे हैं कि आगे आप जब भी कभी जाएं तो अपने एनस्थीसिया डॉक्टर को यह जरूर बता दें कि मुझे ऐसे आते हैं अब हमारे पास पेशेंट कि हमें प्रीवियस एनस्थीसिया में डॉक्टर ने कहा था कि आप यह मत लीजिएगा या फिर आपको इस दवाई का असर बहुत देर तक चला था। तो नेक्स्ट डॉक्टर शुड नो कि दिस इज योर बॉडी टेंडेंसी पहली बार होता है ना कभी कभी तो सर्जरी पहली पहली बार अगर ऐसा करते हैं पर पेशेंट अगर सो के जैसे सपोज आपने लोकल में आप पता कर सकते हैं मरीज को खुद पता चल सकता है जैसे डेंटल एक्सट्रैक्शन कराने
(15:37) जाते हैं उसमें लोकल लगता है दांत या फिर कुछ छोटी चीज निकाली उसमें लोकल इंजेक्शन लगता है तो उस वक्त अगर एलर्जी होगी तो एक तो वो चतके और खुजली आ सकती है आपको फेंटिंग की सेंसेशन हो सकती है। हार्ट रेट कम हो सकता है। वो पेशेंट कैन फील अगर वो जगे हुए हैं। तुरंत क्योंकि वो लोकल में हैं आप आप होश में हो और बहुत रेयरली पेशेंट्स को लोकल से फिट टाइप सेंसेशन आ सकती है। तो वो आपके डॉक्टर आपको बता देंगे। दैट इज वेरी रेयर बट कैन हैपन। सो ऐसा क्यों होता है कि एनस्थिस किसी सर्जरी के बाद में कुछ लोगों को रिकवर करने में बहुत कम टाइम लगता है।
(16:17) कुछ लोगों को बहुत प्रोलोंग टाइम लगता है। व्हाई इज दैट? [हंसी] तो दो हो सकते हैं। एक तो पेशेंट पर्सन स्पेसिफिक राइट? और एक एनस्थीसिया एंड ड्रग स्पेसिफिक। तो अगर मैं बोलूं कि अगर मैंने रेंज में नॉर्मली किसी भी बीमारी के लिए जैसे सपोज आप एंटीबायोटिक खाते हैं तो आपको सबको एक सेम कैप्सूल दिया गया सपोज आपको भी एमॉक्सिसिलिन 500 मिलीग्राम आपके हस्बैंड को भी 500 मिलीग्राम दिया पर दोनों शरीर पे असर अलग आता है सेम डोसेज का तो एक तो वो है कि फॉर दिस बॉडी टू मेडिसिन ईच बॉडी इज रिएक्टिंग आपको पहले से पता होता है।
(17:01) हां वी कैन कि इस इस इंसान को थोड़ा सा टाइम लगेगा और इसको हां तो इसलिए हम लोग तो जो एनस्थीसिया की मेडिसिंस होती हैं नॉर्मली वो हम पर केजी हर किलो के हिसाब से हम बनाते हैं। बॉडी वेट हां और बॉडी वेट भी डिफरेंट वी डोंट कंसीडर बॉडी वेट एस द एक्चुअल वेट व्हिच इज देयर इन योर वेइंग बैलेंस। वी टेक लीन बॉडी मास। मतलब आपकी मसल मास कितना है? आपका फैट मास कितना है? उस सब के बेसिस पर डिफरेंट दवाइयों की अलग-अलग डोसेज कैलकुलेट होती है। तो नॉर्मली वी आर कैलकुलेटिंग फॉर दैट। पर उसमें यह है जैसे कई बार बहुत छोटे बच्चे हैं या फिर बड़ी
(17:42) उम्र के लोग हैं जो एक्सट्रीम सीनियर सीनियर्स हैं। उन सब में सेम दवाई का सर इवन बाय बॉडी मास कैन टेक लिटिल लगर दे कैन कम आउट। एंड देन अगर मैंने एज एनस्थेटिस मैंने तकरीबन सबको स्टैंडर्ड डोसेजेस दे दी तो उसमें फर्क होता है कि सम पीपल मे टेक लिटिल लगर टू कम आउट। बट व्हेन यू से अनक्लेन डेथ तो हम हम लोग को मोस्टली पता नहीं होता है कि किस वजह से डेथ हुई है। यू नो अगर स्पेशली अगर सर्जरी के टाइम पे किसी की डेथ हुई तो यही कह यही कहा जाता है कि ऑपरेशन सक्सेसफुल नहीं हुआ। अब वो एनस्थीसिया की वजह से नहीं हुआ। वो सर्जरी में कोई प्रोसेस हुआ, बॉडी में कुछ
(18:21) सडन कुछ हो गया, वी डोंट नो दैट। राइट? सो अगर आप बाद में पूछोगे भी कि आपकी फैमिली में क्या हुआ? तो आई डोंट थिंक सो वो चीज रिकॉल भी नहीं हो सकती है। हां। तो लाइक वी डोंट इवन नो। हां। आपने ये बात सही कही है। बट पेशेंट स्पेसिफिकली कहते हैं हां हमारे घर में हमारे चाचा जी के साथ ऐसा हुआ था। फिर एक दूसरे कजिन थे डैडी के साइड। उनके भी सडन हुई थी। तो लोग ऐसे बोलते हैं कि पता चला अचानक उनका ऑपरेशन हो गया और वो ऑपरेशन के दौरान मतलब उसके साथ ऐसा नहीं कि ऑपरेशन के महीने बाद किसी की डेथ हुई तो वो एक अलग है। अगर ऑपरेशन और एनस्थीसिया के 24 घंटे बाद अगर कोई डेथ
(19:04) होती है तो वो नॉर्मली एनस्थीसिया से रिलेटेड नहीं मानी जाती है। तब तक सारा असर खत्म हो गया होता है। तो ऑपरेशन के दौरान या पहले 24 घंटे में अगर कोई डेथ है तो उसमें हो सकता है कि एनस्थीसिया की दवाई का असर हो व्हिच द पेशेंट शुड नो और देर फैमिली शुड नो सो आई थिंक आपको वैसे बताते होंगे जब आप इतना प्रोब करते होंगे तो इतना बताते होंगे हां किसी की किसी सर्जरी के टाइम पे डेथ हुई थी हां नहीं नहीं अब इतना ही आपको पता चलेगा नहीं नहीं जैसे मैंने आपको समझाया ना कि उनका टेंपरेचर बहुत बढ़ जाता है और बॉडी स्टिफ हो जाती है तो वो तो एक उस
(19:40) पर्टिकुलर बीमारी में ही होती है। तो अगर किसी पेशेंट के साथ ऐसा हुआ है तो 100% वो डॉक्टर उनकी फैमिली को बताएंगे और उनको लिख के भी देते हैं कि आपकी फैमिली में हर जन को इसको टेस्ट करना चाहिए और ये आपको पता होना चाहिए क्योंकि ये एक अवॉयडेबल हैपनस्टेंस है। अगर वो किसी को जाना पड़ा एनस्थीसिया के लिए और वो अपने एनस्थीसिया डॉक्टर को बता देंगे तो वो अपना प्लान ऐसे बनाएंगे कि बिल्कुल भी मतलब जनरल एनस्थीसिया अवॉइड करेंगे या कुछ भी। सो उनको चांस ही ना मिले कि उनकी बॉडी ऐसे रिएक्ट करे। सो मतलब व्हाट आई एम टेकिंग अवे इज कि यह
(20:16) सुनना भी बहुत जरूरी है। हां हां अगर डॉक्टर कह रहे हैं कि आपकी फैमिली में इसका चांस है तो उसको कैजुअली नहीं मिलना चाहिए। इट इज सीरियस। हां। अगर हम किसी मेडिसिन से एलर्जी देखते हैं। हम पेशेंट को बताते हैं। और उनकी फैमिली को आप ये लिख लीजिए। और अब तो बहुत पेशेंट्स आते हैं हमारे पास जो आके बताते हैं कि हमें डॉक्टर ने लास्ट टाइम कहा था कि आप प्लीज जरूर बता दीजिएगा नेक्स्ट टाइम। नाइस कि इस मेडिसिन से एलर्जी लगी थी या सस्पिशन था। व्हाई डस अ डेथ बिकॉज़ ऑफ़ एनस्थीसिया हैपन? एक तो है कि एनस्थीसिया एंड सर्जरी दोनों दो हाथ हैं बॉडी के। है ना? जब सर्जरी हो
(20:53) रही है इसलिए एनस्थीसिया देना पड़ रहा है। तो उस दौरान जब वो इवेंट चल रहा है दो चीजें साथ चल रही हैं। एक पेशेंट का ऑपरेशन हो रहा है। एक पेशेंट को सुलाया गया है। बेहोश किया गया है उस ऑपरेशन के लिए। तो इन दोनों इवेंट में किसी भी इवेंट में ऐसा इफेक्ट आ सकता है कि पेशेंट को हम लूज कर लें। ठीक है? तो मैं इसलिए बता रही हूं कई बार वेरी ऑफन ये हम सोचते हैं कि ड्यूरिंग एनस्थीसिया पेशेंट की डेथ हो गई बट इट कैन वो इसलिए भी हो सकती है कि सर्जिकल सर्जरी के दौरान या सर्जरी के कारण पेशेंट का लॉस हो गया फॉर एग्जांपल मैं आपको बताती हूं कि अगर
(21:38) किसी पेशेंट की किसी की बहुत बुरी एक्सीडेंट हो गया किसी का बाहर हड्डियां टूट गई सारी पेट में लिवर इंजरी हो गई स्प्लीन की। अब वो पेशेंट आए एनस्थ सर्जरी के लिए उनको एनस्थीसिया दिया गया। पर पेशेंट के अंदर बॉडी में इतनी ज्यादा इंजरीज थी दैट पेशेंट डाइस। सो नाउ दिस इज बिकॉज़ ऑफ़ द इंजरी जो हां इंजरी और जो सर्जरी चल रही है। फॉर एग्जांपल अगर हमने जैसे प्रिंसेस डियाना का सबने पढ़ा है उनको वो तो उनसे मोर इंपॉर्टेंट तो कोई पेशेंट हो नहीं सकता। तो जब वो गई अपनी सर्जरी के लिए उनकी जब ट्र एक्सीडेंट के बाद गई तो सबने पूरी कोशिश की बावजूद उसके वो उनको नहीं
(22:24) बचा पाए क्योंकि बॉडी में अंदर इतनी मेजर इंजरी थी कि वो नहीं बचा पाए। तो इसलिए एक होता है कि सर्जिकल कोई रीज़ था जिसके कारण पेशेंट इज़ लॉस बट दैट हैप्स अंडर एनस्थीसिया। सो वी हैव टू सो इट्स नॉट नेसेसरी दैट इट्स हैपनिंग बिकॉज़ ऑफ़ एनस्थसिया। दूसरा है कि एनस्थीजिया स्पेशली जब हम जनरल एनस्थीजिया देते हैं तो हम पेशेंट को सिर्फ सुलाते ही नहीं है। उनके सांस लेने की शक्ति भी हम ले लेते हैं दवाइयों से। तो हम उन पेशेंट को सांस देते हैं। तो हम उनको जल्दी से एक नली डालते हैं जिससे हम सांस देंगे और सांस की मशीन में लगाते हैं पेशेंट को।
(23:04) और तो उसमें अगर वो जो जब पेशेंट के अपने सांस लेने की शक्ति गई है और जब तक सांस की मशीन में अटैच करा है अगर उस दौरान देर हो गई या किसी कारण नहीं कर पाए हैं तब लॉस हो सकता है पेशेंट का और इन दोनों के अलावा तो नहीं उन दोनों के अलावा क्या हो सकता है जो चीज है कि जैसे आपने पहले कहा था कि असर देर तक चल सकता है तो आजकल अब वो असर देर तक चल रहा है ना उसको उसमें डेथ बहुत कम होती है। उसमें था कि पेशेंट आईसीयू चले जाएंगे वो ओवरनाइट उनको हम सपोर्ट दे देंगे फिर वो उठ जाते हैं थोड़ा देर
(23:46) दवाई हां मतलब डिले हो जाती है बट डेथ नहीं होती यूजुअली सो डेथ मोस्टली अगर अननोन को बहुत सीवियर अननोन एलर्जी है और कोई या फिर ऐसा है कि एस्टैब्लिश नहीं कर पाया उसमें वेंटिलेशन ऐसे कॉमनली सुनने को मिलता है कि एनस्थसिया ज्यादा दे दिया जो जैसे पहले बताइए हम स्टैंडर्डाइज मेजर्स लेते हैं। आपका वेट ले लिया। उसके बेसिस पे मैंने दे दी। बट स्टिल आपकी बॉडी में क्या उसका एग्जैक्ट प्रोसेस हो रहा है? कितनी आपॉर्ब कर रही हैं? कितनी आपकी लिवर उसको निकाल पा रहा है? कितना किडनी कर पा रहा है? वो सब चीजें एक हम लोग स्टैंडर्डाइज पपुलेशन
(24:26) मॉडल्स के बेसिस पे कैलकुलेट करते हैं। पर एन इंडिविजुअल इज़ नेवर अ स्टैंडर्ड। है ना? तो उसमें वेरिएशन आ सकता है कि इंडिविजुअल। तो उसकी उसकी आखरी तह तक तो नहीं कोई दे सकता। बट सो दैट इज व्हाई जो आप कह रहे हैं कंपेयर टू अरर्लियर अब जो दवाइयां हैं वो बहुत सेफ हैं। अब जो हमारे स्टैंडर्ड्स एंड रेगुलेशंस बन गई वो बहुत सेफ हो गई हैं। तो आजकल तो बहुत कम है। पहले होता था। पहले जब जैसे क्लोरोफॉर्म्स उघाई जाती थी। ईथर दी जाती थी। उनमें था क्योंकि उनमें आपने सब कुछ सप्रेस कर दिया। उसमें अलग-अलग अलग ढंग से तब कंपेरेटिवली बहुत कम रह गया है। सो इट शुड
(25:12) बी पहले तो वो मूवीज़ में नहीं दिखाते थे वो रुमाल पे क्लोरोफॉर्म लगा के उसमें ज्यादा अगर डोज़ गई तो पेशेंट वुड बी यू विल नॉट दैट क्या ऑब्वियसली वो जैसे फिल्म्स में दिखाते थे रुमाल पे ऐसे डाल रहे तो आपको क्वांटिटी का क्या पता आपको तो द इंटेंशन इज़ कि बेहोश कर रहे हो इसको किडनैप कर रहे हैं या कोई ऐसा सीन होता था तो हां वो तो खैर मजाक या वो मजाक वाला इवन इफ डॉक्टर्स वर गिविंग द रेगुलेशन वाज़ मोर वाइड देयर अब बहुत स्ट्रिक्ट रेगुलेशन सिर्फ इसी कारण जो मैंने पहले बताया हूं कि यह जो चीज है यह एक आर्टिफिशियली इंड्यूस स्टेट है।
(25:47) तो इसलिए रिस्पांसिबिलिटी टुवर्ड्स उसको स्टेट के लिए तरफ लेके जाना उससे वापस नॉर्मल के लिए लाना बहुत हाई रहती है। इसलिए अब बहुत बहुत इनफैक्ट अगर आप मेडिसिन में अगर इंटरेस्ट रखते हैं, जानते हैं तो पेशेंट सेफ्टी नामक चीज आजकल बहुत बात हो रही है। जनरल पपुलेशन में भी हम आम आदमी से भी कहते हैं कि पेशेंट एज अ पेशेंट पेशेंट सेफ्टी एडवोकेट्स जिनको कहा जाता है वो लोग आ रहे हैं। पीपल आर टॉकिंग कि भ हां जैसे हमने पहले बात किया था कि हमारा शरीर है हमें उसके बारे में पता होना चाहिए चाहिए। हम तो [गला साफ़ करने की आवाज़] पेशेंट
(26:25) सेफ्टी जो एक आस्पेक्ट है अमोंग्स ऑल दी डिसिप्लिंस एनस्थसिया वास द फर्स्ट डिसिप्लिन जिसने पेशेंट सेफ्टी की पहल करी और हमारी जो सोसाइटीज हैं वर्ल्ड ओवर वी वर द फर्स्ट वन हु वर टॉकिंग एंड हमारे स्टैंडर्ड्स भी पेशेंट सेफ्टी रिलेटेड वी वर द फर्स्ट वंस टू गिव कि अगर आप एनस्थीसिया दे रहे हैं तो यह मिनिमम मॉनिटरिंग स्टैंडर्ड है। मतलब अगर जिस जगह एनस्थिया जा रहा है यहां पे कम से कम इस तरीके के मॉनिटर अवेलेबल हैं। तभी पेशेंट को एनस्थीसिया दिया जाता है। क्या-क्या मॉनिटर होता है उसमें? आप जब सर्जरी चल रही होती है व्हाट ऑल कैन
(26:59) यू मेक आउट? या सो बहुत स्टैंडर्ड बेसिक मॉनिटर जो 100% मिलेगा आपको वो है कि आपका दिल ईसीजी हार्ट रेट के क्या चल रहा है। आपके शरीर में मात्रा ऑक्सीजन की कितनी है? पल्स ऑक्सिमिट्री एंड देन ब्लड प्रेशर आपका क्या चल रहा है? यह बहुत स्टैंडर्ड मॉनिटरिंग है। लाइव एकदम सेकंड टू सेकंड अपडेटेड होता है। हां ये तो है ही। अब उसके बाद जो इससे हायर स्टैंडर्ड है जैसे हमारा पेशेंट जिनको हम पूरा फुल एनस्थीसिया दे रहे हैं। उनको हम लोग ब्रेन मॉनिटरिंग करते हैं टू फाइंड आउट डेप्थ ऑफ एनस्थीसिया जिसे कहा जाता है। ओके? कि कितना ब्रेन सप्रेस हो गया है।
(27:41) ब्रेन में कितना एनस्थीसिया चल रहा है। फिर अगर हम जैसे मैंने कहा था हम पेशेंट के सांस लेने की शक्ति लेते हैं तो वो दवाइयां होती है जो आपकी मसल्स को कंप्लीटली ब्लॉक्ड और रिलैक्स रखती हैं। तो उसकी मॉनिटरिंग करते हैं कि कितना दवाई का असर चल रहा है। एंड कितने असर पे उसके बेसिस पे ही हम पेशेंट को दवाइयां देते हैं जिससे उनका ब्लॉक चला जाए। वापस से वो उठ जाए। तो न्यूरोमस्कुलर ब्लॉकिंग इसको मॉनिटरिंग कहते हैं। वो कर रहे हैं। फिर स्पेशलाइज स्पाइन की सर्जरी होती है उनका इवो वो तो स्पेशलाइज्ड हैं। पर जैसे हार्ट की ऑपरेशन हो रहे हैं तो
(28:18) हार्ट की जो मेजर आर्टरी वगैरह हैं उनमें हम मॉनिटर डालते हैं वहां के पर्टिकुलर प्रेशर को देखने या कार्डियक आउटपुट उनको हम डिफरेंट इन्वेसिव मॉनिटरिंग कहते हैं। वो भी चल रही होती है। बेसिकली एक पेशेंट जब सो रहा होता है एंडोस्थीसिया में या तो उसके शरीर में कैसे हार्ट काम कर रहा है? कैसे उसका ब्लड प्रेशर ब्लड प्रेशर तो है ही वो हार्ट का ही पार्ट है। कैसे उसका लंग काम कर रहा है। उसके शरीर में कितनी ऑक्सीजन की मात्रा चल रही है। उनकी आर्टरी में कितनी ऑक्सीजन है? कितनी कार्बन डाइऑक्साइड है, यूरिन कितना वह उनकी बॉडी किडनी बना पा रही है, वह भी हम
(29:01) मॉनिटर करते हैं। और क्या असर उनके दिमाग पे एनस्थीसिया दवाई का चल रहा है? व्हिच इज इवो मतलब ब्रेन मॉनिटरिंग, एनस्थिया डेप्थ मॉनिटरिंग वो करते हैं। प्लस एनस्थीजिया की दवाइयां कितनी चल रही हैं लंग में और ब्रेन में उनका जो लेवल है वो हम मॉनिटर करते हैं। तो दैट इज एनस्थीजिया। तो मतलब कास्टेंट अगर आप देखेंगे तो बड़े ऑपरेशन में तो तकरीबन इट लुक्स लाइक अ कॉकपिट एरोप्लेन कॉकपिट इट हैज़ सो मेनी मॉनिटर्स बट देन फिर वो रिस्पांसिबिलिटी भी है ना या सो ये जो जैसा आपने बोला कि अवेयरनेस को कंट्रोल करते हैं। सो मेंटल एक्टिविटी जो होती है नॉर्मली हमारा माइंड बहुत
(29:45) एक्टिव रहता है। बट आपको एनस्थीसिया देते टाइम आप उसको इंटेंशनली क्वाइट करते हो। राइट? सो हर एक बीमारी के लिए आप ब्रेन को सिमिलर तरह से क्वाइट करते हो या अलग चीज के लिए आपको ब्रेन के अंदर कंट्रोल करना पड़ता है कि ब्रेन मे भी आप यह पार्ट क्वाइट करोगे या यह प्रोसेस क्वाइट करोगे इज इट दैट डिटेल या ब्रेन इज वन थिंग जिसको क्वाइट करते हो हां तो वो दो तीन तरीके हैं जो ब्रेन के क्वाइट करने के भी हम सोच सकते हैं हमने चार प्लेन बना लिए ओके तो उसके डिपेंडिंग अपॉन कि आपकी सर्जरी के लिए क्या रिक्वायरमेंट है? सिर्फ ये जरूरत है कि थोड़ी सी डेटेड हो, आप सो रही हो पर
(30:26) आप जवाब दे सकती हैं। तो उसके लिए हम एक पर्टिकुलर लेवल ऑफ ब्रेन सप्रेशन करते हैं। एक चाहिए कि आप सो रही हैं और बिल्कुल भी आप नहीं रिसोंड कर पा रही हैं और आपकी कोई रिकॉल भी नहीं है उसका। अब जब सोके उठी डायनेस्टीस है पेशेंट को कुछ कुछ याद नहीं होता। उनके शरीर के साथ क्या हुआ? तो वो चीज उसके लिए एक पर्टिकुलर लेवल ऑफ ब्रेन सप्रेशन है और उसके बियों्ड जो बहुत डीप सप्रेशन है दैट कैन कॉज अ वेरी सीवियर सप्रेशन एंड कॉज ब्रेन डेथ वो हम कभी नहीं चाहते। बट दैट दैट हैपन इफ यू कीप ऑन गोइंग डीपर। तो वो अगर देना ही पड़े तो किस सिचुएशन
(31:05) में देते हैं? नहीं वो नहीं डीप दैट डीप सप्रेशन कभी नहीं देते। हम प्लेन प्लेन थ्री तक ही करके आते हैं। वन टू वन इज़ फुल्ली अवेक एंड वन टू के बीच में पेशेंट इज़ अवेक बट फॉलोइंग आपकी बात मान रहे हैं। मैं कह रहे अच्छा आप चुपचाप लेट जाए। हम आपके हत्या करेंगे ठीक है वो अलव कर रहे हैं। शायद पूरे अवेक होंगे तो डर के मारेंगे नहीं नहीं आप मेरे साथ ऐसा नहीं कर सकते और ये मान रहे हैं। फिर सेटेड हैं। हां सो रहे हैं। उठ के आप मुझसे बात कर सकती हैं। मैं आपसे बात कर सकती हूं। पर आप फिर भी हां अपना काम करवा रहे और उसके बाद जो कॉमनस्ट है
(31:36) सर्जिकल प्लेन ऑफ एनस्थिया जिसे हम कहते हैं ब्रेन सप्रेशन उसमें पेशेंट इज टोटली स्लीप उनको कोई याद भी नहीं है उस चीज की सो वही जब हम बोलते हैं कि कोई ऑपरेशन थिएटर में होता है बोलते हैं मुझे सुन रहा था सब कुछ क्या बात कर रहे थे तो वो एकदम बेस लेवल जब वो लोग हां अगर किसी ऑपरेशन के लिए आपको हमने लेवल थ्री में रखा हुआ है एंड फिर जब आप लाइटन हो रहे हैं आपको उठाया जा रहा है और उस दौरान दौरान जब आप उठते हैं तो हियरिंग सबसे फर्स्ट आती है। बिकॉज़ हियरिंग कान से जो हमारे ब्रेन में हियरिंग सेंटर से सबसे फास्ट डायरेक्ट कनेक्शन है। बिकॉज़
(32:14) फास्ट वहां से न्यूरॉन जाता है। छोटा ब्रेन हां कान से ब्रेन में हियरिंग सेंटर है। तो इसलिए हियरिंग सबसे सब सेंसेस में से पहले हियरिंग्स आ जाती है। व्हेन पेशेंट इज़ इमर्जिंग। तो पेशेंट कहेगा हां मुझे याद है। मैं सो आपने ऐसे बोला था। हम तो क्योंकि वो इमर्ज कर रहे हैं अपने डीप प्लेन से तो उनको रिकॉल भी रहेगा थोड़ा सा और वो सुन भी पा रहे थे तो बता सकते हैं मरीज इसमें कभी ऐसा होता है बाय चांस ड्यूरिंग एनस्थीजिया कुछ कारण है जिससे वो लाइटन हो गया पेशेंट बीच में कुछ दवाई नहीं जा पाई या कुछ तब पेशेंट को अवेयरनेस ड्यूरिंग
(32:52) एनस्थीजिया जो चीज कही जाती है वो हो जाती है कि उनका उठ गए वो हम बीच में उठ जाते हैं कभी-कभी हां पर उनका बॉडी हमने रिलैक्स करी कर रही हूं तो हिल नहीं सकते पर वो सुन लेते हैं और फिर उनको क्योंकि उठ गए ब्रेन से उठ गए तो उनको याद भी रहता है कि ये बात हो रही थी मेरे आसपास बड़ा ट्रोैटिक एक्सपीरियंस है या पेशेंट के लिए वेरी ऑफन ज्यादातर मरीज कहते हैं कि हमें अच्छा नहीं लगा हम हिल नहीं पा रहे थे हम सुन रहे थे और हमें लग रहा था कि ये क्यों हुआ क्यों हो रहा है हमारे पास पर हम किसी को बता नहीं पा रहे थे तो वो तो अगर ऐसे किसी के साथ हां
(33:31) हेल्पलेस फीलिंग वै हेल्पलेस फीलिंग हेल्पलेस फीलिंग एंड द पर्सन डजंट फील तो फिर उसके लिए देन दैट हैज़ टू बी टेकन सीरियसली एंड पेशेंट आपसे उस वक्त फिर एनस्थसिया नहीं वो एनस्थसिया तो हम जैसे हमने कहा ना हमारे मॉनिटर्स चल रहे होते हैं वी कैन मेक आउट इमीडिएटली कि पेशेंट हैज़ इमर्ज आउट एंड वी हम उसका लेवल इंक्रीस कर देते हैं फिर से पर पेशेंट को वो मोमेंटरी भी जो हुआ वो उनको याद रहता तो फिर पेशेंट शुड बी सपोर्टेड। उनकी काउंसलिंग होनी चाहिए। एंड अगर नहीं इस चीज को उस एपिसोड को अगर हम बाय चांस पेशेंट नहीं एक्सप्रेस कर पाया
(34:11) या किसी ने उसको तवज्जो नहीं दिया तो फिर वो लॉन्ग टर्म पेशेंट को एक ट्रोमेटिक सा एक्सपीरियंस याद रहता है। जैसे हम भी और [नाक से की जाने वाली आवाज़] इट गो वैप हां इट्स अ याद रह जाता है। उधर वही हेल्पलेसनेस इतनी बुरी तरह से फील होती है ना कि आप कुछ कर नहीं पा रहे थे। आपको कुछ महसूस हो रहा था बट आप कुछ नहीं कर पाए थे। तो ये बिल्कुल बहुत शायद सही कंपैरिजन नहीं है। बट आई जस्ट वांट टू से कि यू कैन थिंक जैसे सपोज आप कहीं जा रही हैं। आपसे कोई चीज छीन के ले गया कोई जगह। यू फ्ट हेल्पलेस लाइक समबडी टूक योर पर्स। आप नहीं रोक पाई तो वो
(34:48) [गला साफ़ करने की आवाज़] एक ट्रोमेटिक याद तो रहती है ना। कई दिन तक आप सोचते हो कि मैं देखो एकदम ले गया। फिर डरते भी हो कि फिर ना कोई मुझसे ले जाए। तो दैट ट्रोमा स्टेज। सो दैट ट्रॉमा लाइक हम लोग जनरली अपने सोशल सर्किल में नहीं कोई बात नहीं ठीक हो जाएगा या फिर वी टॉक अबाउट इट कम्स सिमिलरली दिस शुड आल्सो बी टॉक्ड अबाउट इट्स अ रेयर अकरेंस कभी हो सकता साइडलाइन नहीं करना चाहिए उसको कि नहीं हुआ बिकॉज़ उस इंसान के लिए वो बहुत ट्रोैटिक है इवन एज अ डॉक्टर आई शुड रिकग्नाइज एंड रिस्पेक्ट दैट कि मेरे पेशेंट के साथ ऐसा हुआ नाउ आई
(35:21) मस्ट गिव सपोर्टिव ट्रीटमेंट टू माय पेशेंट सो सिंस वी आर टॉकिंग अबाउट स्लीप आई आई वास आल्सो रीडिंग कि स्लीप एपनिया जो कि अब हम बहुत रिकॉग्नाइज करने लगे हैं। उसकी उसको डिस्क्लोज करना बहुत जरूरी है डॉक्टर को एनस्थेसिया डॉक्टर को राइट और इवन स्नोरिंग को हां या इज दैट ट्रू? क्या कनेक्शन है? अगर कोई स्नोर करता है या उसको स्लीप एपनिया है तो व्हाई इज दैटेंट आपके लिए? हम क्योंकि देखिए जो स्नोर कर रहे हैं उनमें चांसेस स्लीप एपनिया के ज्यादा होते हैं। तो जरूर स्लीपनिया तो एक मेडिकल टर्म है। वो टर्म तब हम इस्तेमाल करेंगे जब वो एक पेशेंट
(36:01) में डायग्नोस हो गई है वो मेडिकल टर्म। उससे पहले पेशेंट तो अपनी तरफ से स्नो स्नोरी कर रहा होता है। घर वाले बोल रहे हैं हम तो कई बार पेशेंट के साथ आप बताइए। आप नहीं आप बताइए बहुत जोर से खराटे लेते हैं। ख्राटे लेते लेते कभी रुक जाती है सांस। तो पेशेंट के रिलेशन फैमिली बताती है कि ऐसा है। उसमें क्या है कि एनस्थीसिया की दवाइयों का असर बहुत सेंसिटिव होते हैं। हो जाते हैं। ओके जो हम लोग नारकोटिक हम कहते हैं दवाइयां सुलाने के लिए देते हैं। इनमें वो अगर एक पेशेंट में हमने एक कण देना है तो इन पेशेंट में शायद एक 1/10 कण देंगे हम क्योंकि इनकी बॉडी में
(36:40) सेंसिटिविटी बहुत बढ़ जाती है। क्योंकि बेसिकली स्लीप एपनिया और ख्राटे में क्या है कि ऑक्सीजन की मात्रा शरीर में कंटिन्यूली कम जा रही है क्योंकि वो ठीक से सांस नहीं ले पा रहे हैं स्लीप के दौरान तो उसके कारण उनके दिमाग में एक पर्टिकुलर सेंटर होता है उसमें इंक्रीस सेंसिटिविटी टू नारकोटिक हो जाती है। तो एक तो ये है कि उनकी दवाई का असर ज्यादा डीप होगा और देर तक चलेगा। हम दूसरा है कि अगर जब स्ली हम बेहोशी से उठते हैं पेशेंट तो जब उनकी सांस भी पूरी रेगुलराइज होती है। शरीर की ताकत भी जब तक रेगुलराइज होती है तब तक उनकी ब्रीदीिंग नॉर्मली पेशेंट की एकदम
(37:22) जैसे डीप जैसे स्लीप एपनिया में होती है जैसे खराटे वाली हो जाती है। तो जिन लोगों को ऑलरेडी खराटे आते हैं उनमें उसका असर भी बहुत ज्यादा होता है। तो अगर हमें पहले पता है कि किसी को खराटे आ रहे हैं या फिर खराटे की मशीन वो स्लीप एपनिया की मशीन लगा मतलब जब वो डीप स्लीप में जाते हैं उनको इसकी जरूरत है तो फिर हम वो सेम कंडीशन उनके लिए एस प्रिस्रिप्शन लगा देते हैं तो उनको हम कई बार ये भी कहते हैं पेशेंट को कि आप अपनी मशीन लेके आइएगा क्योंकि जो नॉर्मल पेशेंट हैं वो एनस्थीसिया से सो के उठेंगे तो वो कामर होंगे जो ये पेशेंट है
(38:01) एक तो स्लो सोके उठने में इनको देर लग सकती है। प्लस उनकी ब्रीथिंग फिर भी नॉर्मल नहीं आ पाएगी। एक नॉर्मल पेशेंट के कंपैरिजन उनको वो सपोर्ट चाहिए जो उनको स्लीप एपनिया में चाहिए होता है। तो अगर पता होगा तो वो हम सपोर्ट करेंगे तो उनका वो जो पूरा एक्सपीरियंस है बॉडी का अपना और साइकोलॉजिकली वो बेटर हो जाएगा पेशेंट के लिए। नहीं तो फिर अगर सांस नहीं ले पा रहे हैं, ऑक्सीजन नहीं जा पा रही है, कार्बन डाइऑक्साइड शरीर से नहीं निकल पा रही है तो उनकी तबीयत खराब हो सकती है। खराब हो सकती है। तो उनके लिए हम दवाई कम देते हैं तो इसके
(38:37) लिए अगर स्नोरिंग भी है स्लीप आपने नहीं भी स्नोरिंग भी है तो बताना बहुत जरूरी है। हां हां स्नोरिंग के कारण जो हम जब वो ब्रीदीिंग मैंने कहा था ना एस्टैब्लिश करते हैं उसको एयरवे कंट्रोल कहते हैं। उन सब चीजों में भी हमको स्नोरिंग एंड ऑल से इंपैक्ट होता है। तो उसमें हम स्पेशलाइज इक्विपमेंट वगैरह यूज करते हैं उनके लिए। सो आई जस्ट वांडिंग जो स्नोर करते हैं जब आप ओटी में जब एनस्थसिया में हैं तो भी अंदर स्नोर हो रहा होता है क्या? अगर जिसकी टेंडेंसी है स्नोरिंग की। हां। तो इसलिए नहीं हो रहा क्योंकि स्नोरिंग इसलिए हो रही है कि आपकी जुबान
(39:12) जीभ पीछे जाके गले में अटक जाती है। तो जब हवा गले से नाक से निकलती है तो उसमें वो जीभ हिलती है तो वो आवाज आती है खर्राटे की हां तो अंडर एनस्थसिया हम जीभ पहले ही दूर रखते हैं। प्लस वेरी ऑफन हम गले से अंदर लंग्स में ट्यूब डाल देते हैं। तो वो फिर आवाज नहीं निकल पाती। पर हां जब [हंसी] निकल रहे हैं एनस्थिया से लाइटर प्लेन में तब स्नोरिंग आती है तो उसके लिए वही ना मैंने कहा हम डिवाइसेस रखते हैं वो रखते हैं जिससे उनकी टंग ना पीछे रहे हम जॉब खोल के रखते हैं एयरवे एजुएट डिवाइसेस कहते हैं वो हम रखते हैं तो अगर एक है कि कोई पेशेंट सडनली करने लगता है तो हम करते
(39:57) हैं एक है कि हमें हिस्ट्री है तो पहले ही हम सब कुछ तैयार रखते हैं उनके उनका स्टेप वाइज इमरजेंस फनी हो जाएगी आप सब लोग इतना कंसंट्रेट कर रहे हो और पेशेंट स्नोअर कर रहा है। हां [हंसी] वो वो ऐसा होता है जैसे अगर हमने कोई लोकल रीजनल ब्लॉक दिया और साथ में पेशेंट मैं सोना चाहता हूं सुला दे उसमें पेशेंट स्नो या डिस्टर्ब होता है आप लोगों को हमें तो नहीं पढ़ हां सर्जन्स कहीं वो कहते हैं पेशेंट स्नोरिंग टू मच इनको सुलाओ और स्नो कंसंट्रेशन कैन गो हियर एंड देयर या [हंसी] अभी आप बोल रहे थे तो मुझे लिटिल [गला साफ़ करने की आवाज़] हटके है
(40:32) फनी एंड नोट बट यस या इट इज लाइक पेशेंस स्नोर कर रहा है यहां सारे कंफ्यूज ्यूज और डिस्टर्ब हो रहे हैं उनसे। स्मोकिंग, वेपिंग एंड अल्कोहल का क्या रोल होता है एनस्थेसिया से? सब पर है अल्कोहल से तो लिवर पर असर आता है। तो लिवर के फंक्शन में असर आ रहा है। एक तो वह पॉइंट है लिवर अल्कोहल जो कई [गला साफ़ करने की आवाज़] दिनों से ले रहे हैं उनके लिवर के का फंक्शन कम हो सकता है तो उससे दवाइयों पे असर आता है। तो हम दवाइयां डिफरेंट देते हैं। कम मात्रा में देते हैं। ये सब होता है। ओके। दूसरा है कि अगर आदतन अल्कोहल लेते हैं लाइक हर रोज ले रहे हैं
(41:14) तो उनके बॉडी को अल्कोहल की आदत हो जाती है। तो अंडर एनस्थीजिया अगर वह काफी देर रहे और उनको अल्कोहल उस वक्त नहीं मिली तो अल्कोहल विड्रॉल सिंड्रोम हम कहते हैं। वो उस पेशेंट में आ सकता है। तो जो क्रॉनिक सीवियर क्रॉनिक अल्कोहलिक पेशेंट होते हैं उनको हम वो अल्कोहल विड्रॉल को का असर कम हो उसके लिए दवाइयां साथ में देते हैं। फिर ओके अल्कोहल विड्रॉल ना हो। नहीं तो इट कैन बी काइंड ऑफ सीवियर अल्कोहल विड्रॉल तो एक मेडिकल इमरजेंसी भी हो जाती है। तो उसके लिए हम साथ में दवाइयां देते हैं कि उनको एक्यूट अल्कोहल विड्रॉल सिंड्रोम ना हो।
(41:49) ये अल्कोहल्स है। स्मोकिंग और वेपिंग का यह है कि जब चाहे आप स्मोक करें, चाहे आप वेप करें या तो निकोटिन रहा है आपके अंदर। तो निकोटीन का असर है लंग्स पे, निकोटीन का असर है दूसरे सेल्स पे और एनस्थेटिक ड्रग्स पे भी और आपकी बॉडी की कैपेसिटी ऑक्सीजन कैरी करने की और कार्बन डाइऑक्साइड निकालने की वो सब असर होता है। तो कम हो जाती है। हां कम हो जाती है इन सब में। तो इसलिए स्मोकिंग वेपिंग का डेफिनेट हमारे लिए असर है। अब कंपेयर टू स्मोकिंग स्मोकिंग में ये होता है कि आप सिर्फ निकोटीन नहीं ले रहे हैं। आप एक ज्वलित उसकी तार कहते हैं
(42:32) जिसको हम वो भी साथ में स्मोक कर रहे हैं। क्योंकि जिस भी चीज को जलाया गया है उसका टार भी आप ले रहे हैं। तो उसका टार का भी असर होता है। वेपिक में यही है कि वो स्मोक नहीं है। वो तार नहीं है। बस निकोटीन तो निकोटीन तो है ही वो एक लगता है सुनने में देखने में लगता है रे कुछ नहीं है बट एक्चुअली अब तो कह रहे हैं कि वेपिंग से निकोटीन इज मोर सो पीपल कंसीडर दैट वेपिंग इज नॉट सेफ नॉट दैट सेफ और नॉट दैट सेफ कैसे होगा है तो निकोटीन ही हां अगर जैसे जो बच्चे टीनएजर्स वगैरह वेप करने लग जाते हैं उनके लिए तो क्योंकि वो फिर एडिक्शन इज मच मोर
(43:13) इसलिए अदरवाइज स्मोकिंग और वेपिंग दोनों के लिए हमारी एक स्टैंडर्ड पेशेंट को इंस्ट्रक्शन होती है कि अगर आप स्मोकिंग रोक पाए हम अगर एक महीना रोक लेंगे आप स्मोकिंग ऑपरेशन के पहले अगर इतनी है आपके पास टाइम तो आपका ऑलमोस्ट नॉर्मल हो जाएगी बॉडी और आपकी असर कम होगा। अगर आप एक हफ्ता रोक लें तो ऑक्सीजन कैरिंग कैपेसिटी और कार्बन डाइऑक्साइड निकालने की काफी हद तक ठीक हो जाती है। अगर आप एक दिन पहले भी एक दिन भी रोक लें तब भी आपके शरीर की ऑक्सीजन कैरिंग कैपेसिटी बेटर होती है। तो हम कहते हैं जितना आप रोक सकते हैं फर्स्ट विजिट
(43:50) में पेशेंट आता है उनको हम एडवाइस करते हैं प्लीज स्टॉप स्मोकिंग। कई मरीज कहता है मैं नहीं रोक सकता जो चेन स्मोकर हैं या बहुत डिपेंडेंट हैं तो हम कहते हैं कम से कम एक हफ्ता ना लें। एक हफ्ता नहीं क्योंकि एक इनसे ना हीमोग्लोबिन एक मॉलिक्यूल होता है शरीर में जो ऑक्सीजन ले सब जगह जानता है। तो उसके कैरेक्टर चेंज होते हैं स्मोकिंग से। तो अगर हफ्ता पहले रोक देंगे तो वह अमाउंट ऑफ़ नॉर्मल हीमोग्लोबिन बढ़ जाता है। एक दिन पहले भी कर लेंगे तो वो उसका कैरेक्टर ही कह एक तरीके से चेंज हो जाता है व्हिच हेल्प्स और एक दिन में भी फर्क पड़ता है। एकदम कुछ
(44:27) मात्रा का बेस्ट तो है कि आप कम से कम तीन महीना पहले छोड़ दें पर तीन महीना नहीं कर पा रहे हैं तो महीना महीना इसका ये कनेक्शन है बिकॉज़ मैं जानती हूं जो चेन स्मोकर्स रहे हैं उनका हीमोग्लोबिन बहुत लो रहता है हम यू नो ये मतलब किसी और वजह से भी हो सकता है अंडरस्टैंड लेकिन अगर किसी ने बहुत सालों 20 30 साल चैन स्मोकिंग करी है तो वो मतलब कि वो उनका ऑक्सीजन डिलीवरी प्रोसेस में ही कहीं पे डैमेज हो गया है। हीमोग्लोबिन परमानेंटली लो रहना। ऑक्सीजन डिलीवरी प्रोसेस में तो डैमेज हो गया है। ऑक्स द अमाउंट ऑफ हीमोग्लोबिन कम होना उससे कोरिलेटेड नहीं है।
(45:09) ओके? वो तो बल्कि अगर बिल्कुल प्योर इसमें फिजियोलॉजी बताया तो शायद थोड़ी सी हीमोग्लोबिन शायद थोड़ी सी बढ़ जाए। क्योंकि बॉडी रिएक्ट करती है कि भैया मैं नहीं ऑक्सीजन इतनी कैरी कर पा रही। तो चलो एक्स्ट्रा सेल बना लो। ओके। जैसे स्मोकी एनवायरमेंट में लोग रहते हैं तो उनको थोड़ा पॉलिसाइटी पर वो लो हीमोग्लोबिन इज नॉट कनेक्टेड टू नॉट नेसेसली क्रॉनिक स्मोकिंग कैरेक्टर ऑफ हीमोग्लोबिन चेंजेस अच्छा सो द वे इट बिहेव्स चेंज हां हम दोनों दो कुर्सियां उठा ले जा सकते हैं पर अगर मैं खा पी नहीं रही हूं पतली दुबली हूं तो मैं शायद ना कुर्सी उठाऊं
(45:47) है तो हम दो जने ही कैरेक्टर राइट मेन और वुमेन अलग फर्क होता है एनस्थसिया का। जेंडर हैज़ एनी रोल। हां एक तो जो फिजियोलॉजी है शरीर अलग है। मेन का एंड वुमेन का तो उसमें फैट डिस्ट्रीब्यूशन, मसल डिस्ट्रीब्यूशन ये सब चीजें अलग हैं। तो इसलिए अलग-अलग मात्रा दवाइयों की लाइक अगर हम मसल रिलैक्सेंट कोई दे रहे हैं। उसका फर्क अलग होगा इन अ फीमेल पेशेंट अमाउंट एंड टाइप्स। बट इन सब चीजों के अलावा मुझे एक नॉर्मल शरीर की फिजियोलॉजी फर्क है। साइकोलॉजिकली कुछ फर्क देखा गया है। समटाइ्स इमरजेंस आउट ऑफ एनस्थीसिया फीमेल पेशेंट्स में ज्यादा एपिसोड कुछ-कुछ हो सकते हैं। शायद
(46:32) वो लाइक ज्यादा विचलित उठे या फिर दे मे हैव मोस्ट टमी इमरजेंस जिसको हम कहते हैं कि या फिर कई बार जैसे लोग नॉर्मल जिसको हिस्टीरिया बोलते हैं हम नहीं कह रहे पर हम लोग कन्वर्जन रिएक्शन बोलते हैं जिसको अंग्रेजी में मेडिकल टर्म में वो फीमेल पेशेंट में कई बार होता होता होगा सर वो एक तरीके से उनका साइकोलॉजिकल मेकअप है उस पर्सन का बेसिक साइकोलॉजिकल मेकअप पैनिकिक हां पैनिकिक अगर किसी का बेसिक वो मेकअप है तो दैट कम्स आउट बट इट इज नॉट नेसेसरीली कि उस शरीर की फिजियोलॉजी ऐसी है बट सोशियो फिजियोलॉजिकली अब वो व्यक्ति ऐसा हो गया राइट
(47:15) इसलिए सो जैसे जनरली बोलते हैं कि वुमेन पैनिकिक अ लिटिल मोर सो इन दैट कॉन्टक्स्ट क्योंकि वो लोग सोशली अब इतने दिनों से वो कंडीशंड हैं टू बी शोइंग दैट रिएक्शन राइट तो वो रिएक्शन इमर्ज करता है कई बार वोमिटिंग कई बार ज्यादा हो जाती है और एक जैसे हम स्पाइनल देते हैं कुछ लोगों को उसके बाद हेडेक होता है पोस्ट ड्यूरल पंक्चर हेडेक वो फीमेल पेशेंट में थोड़ा ज्यादा इंसिडेंस देखा गया अगर सब चीज सेम है तो हम सो व्हाट रियली हैपेंस इनसाइड द ब्रेन व्हाट आई एम ट्राइंग टू विजुअलाइज ऑल दिस टाइम यू सेइंग लेवल वन लेवल टू लेवल थ्री राइट तो मेरा बड़ा डायग्रामैटिक एक व्यू
(47:52) बन रहा है बट इट्स ऑब्वियसली नॉट दैट सिंपल सो जब एनस्थीसिया की दवाई आप डालते हो तो व्हेन वी शिफ्ट फ्रॉम बीइंग कॉन्शियस टू लैक ऑफ कॉन्शियसनेस राइट तो एक तो यह जो कॉन्शियसनेस वर्ड है वो अलग-अलग रेल में हम अलग-अलग समझते हैं। सो आपके हिसाब से कॉन्शियसनेस क्या होती है इन योर मेडिकल टर्म एंड जब एनस्थसिया दे दिया तो कॉन्शियसनेस कहां चली जाती है? हम सो इससे पहले एक मिनट हमें जरा ब्रेन को समझना पड़ेगा। मैं स्ट्रक्चरली बताती हूं। हां एक हम कुछ बात करते हैं प्रिमिटिव ब्रेन और एक नई बात फिजियोलॉजी में और न्यूरोसाइटिस्ट कहते हैं नियोकॉर्टेक्स
(48:36) जो अब इंसान में ह्यूमन बीइंग में बना है हमारा बड़ा तो प्रिमिटिव ब्रेन तो कुछ ब्रेन तो छोटे-छोटे जानवर से चला आ रहा है इवन कॉकरोचेस हैव ईल्स हैव जेली फिश आल्सो सपोज टू हैव सो देयर आर डिफरेंट फॉर्म्स ऑफ़ प्रिमिटिव ब्रेन तो जो प्रिमिटिव ब्रेन है जो तकरीबन सारे जानवरों में है उस ब्रेन ब्रेन का क्या काम है? उस ब्रेन का हमारा हार्ट कंट्रोल करेगा। हमारी ब्रीथिंग कंट्रोल करेगा। हमारी बॉडी की पूरी बॉडी कैसे काम कर रही है? ऑटोनॉमस नर्वस सिस्टम वो कंट्रोल करेगा। आपका आप खाना खा रही हैं। वो पेट में चला गया। पेट से पाचन हो के नीचे निकल गया। उन
(49:14) सब चीज को आपको पता नहीं है। या बट देयर इज़ समथिंग व्हिच इज कंट्रोलिंग इट। राइट? कई बार ऐसा भी होता है कि आप अब घबरा रही हैं। मैं इंटरव्यू के लिए जा रही हूं तो आपके पेट में बटरफाई इन द पेट खराब हो गया जल्दी। सो एवरीथिंग इज कंट्रोल। दैट इज व्हाट द प्रिमिटिव ब्रेन। आप कितनी बार अभी इतनी देर से हम बात कर रहे हैं। कितनी बार आपने सांस लिया पता है आपको? नहीं काउंट नहीं। कहां से सांस लिया? कौन सी मसल सांस ली? कुछ नहीं पता। दैट इज़ ऑल डन बाय दी ब्रेन स्टम व्हिच इज द प्रिमिटिव ब्रेन। सो देयर आर अंशंस व्हिच द प्रिमिटिव ब्रेन
(49:44) डस। देयर इज़ इफेक्ट ऑन दैट। देन दे आर फंक्शनंस। तो इसके ऊपर एक बहुत बड़ा हम लोगों का ब्रेन ह्यूमन बीइंग्स में डेवलप जिसको हम न्यू कॉर्टेक्स कहते हैं। वो हमारा थिंकिंग ब्रेन है जिसमें हमारे सारे थॉट्स बनते हैं। प्रोसेससेस बनते हैं। सपना देख रहे हैं तो उसमें देख रहे हैं। सोच रहे हैं। वहीं पे होते हैं। आप आप मेरे को देख रही हैं। आप मेरी बात सुन पा रही हैं। आप सिर हिला रही हैं। वो सब आपका न्यूकॉर्टेक्स कर रहा है। ओके। आपकी आंख ने कुछ देखा। वो गया वहां पे। उसने उसको बताया कि मैंने यह इमेज देखी है। व्यक्ति ऐसे बैठा हुआ है। उनके लिप्स
(50:16) ऐसे हिल कर रहे हैं। हिल रहे हैं। सामने पानी गिलास का ऐसे इस तरफ पड़ा हुआ है। वो आपका नियोेक्स देख रहा है। उसके बाद आप कह रही हैं कि अच्छा है। ठीक है। तो पानी में मैं जरा शरबत ले लेती। याद कर रहे होंगे। उस दिन मैंने रूअजा पिया था। इतना टेस्टी था। वो आपका नियोेक्स थॉट बना रहा है। ओ गरम चाय पी लूं। बाहर बारिश हो रही है। समोसे आ जाते। यह आपका दिस इज़ अलैट्स कम। या ऑल पैटर्न। सो देयर आर लॉट ऑफ़ बहुत सारे सेल्स हैं कोशिकाएं जो ये काम कर रही है जिसको हम न्यूकॉर्टेक्स कहते हैं। तो जब हम एनस्थीसिया दे रहे हैं बेसिकली हम जो न्यू कॉर्टेक्स के अंदर एक्टिविटी
(50:51) है उसको सप्रेस कर रहे हैं। सो हम मेडिसिंस देते हैं जो जाके उन एक्टिविटीज को लोअर कर देता है। और ये एक्टिविटीज भी क्या हो रही हैं? ये तो बहुत मतलब बहुत बड़ा टॉपिक है। टॉपिक है। न्यूरोसाइंटिस्ट कितने सालों से इस पे काम अभी अभी तक भी अंडरस्टैंडिंग नहीं है कि हमारा ब्रेन अंदर क्या काम करता है। पर कई तरीके के जो ब्रेन की छोटी कोशिका जिसको हम न्यूरॉन कहते हैं। कई तरीके के न्यूरॉन है वो आपस में एक दूसरे से बात करते हैं। एक ऊपर लेयर पे नीचे लेयर से बात कर रहा है। नीचे इस वाली से कर रहा है। तो लॉट ऑफ़ दैट इज़ व्हाट वी टॉक
(51:25) ओवर इंटेलिजेंस आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आल्सो स्टिल ट्राइंग टू लर्न टू वर्क लाइक आवर ब्रेन। सो बेसिकली न्यूरोसाइटिस्ट आर नॉट ट्राइंग टू अंडरस्टैंड। वो अपना दिमाग समझना चाहते हैं कि उससे वो आर्टिफिशियल इंटेल न्यूरल लिंक्स जो कहते हैं वो बनाना चाहते हैं कि जैसे ब्रेन करता है उस तरीके से पाए क्सेंट बीइंग में ब्रेन इंटरलिंकेजेस बनाए जैसे वो भी ऐसे थॉट प्रोसेस बना पाए पाए तो उसमें उसको हम सप्रेस करते हैं हायर कॉर्टिकल थिंकिंग को जो बेसिक प्रिमिटिव ब्रेन का काम है उसको हम सप्रेस नहीं करते उसको हम रेगुलेट करते हैं तो हम हार्ट ब्रीथ को रख के हाउ मेनी
(52:03) टाइम्स उसको हम रेगुलेट करते हैं वहां वहां से या फिर हार्ट में डायरेक्टली या फिर हम रेस्पिरेशन है उसको हम रेगुलेट करते हैं। वो भी सेंट्रली नहीं करते। हम इनडायरेक्टली करते हैं मसल्स को रिलैक्स करके। पर उसका एक बहुत इंपॉर्टेंट आस्पेक्ट एनस्थीजिया में है कि हमें पेट खाली चाहिए एनस्थीजिया के पहले। तो जो पेशेंट मंजोरों हां मैं बताती हूं ले रहे हैं। उनको बताना पड़ता है। उनका तकरीबन एक हफ्ता पहले हमें दवाइयां खाली एक हफ्ते तक असर रहता है उस दवाई का। तो हफ्ता पहले रोकना पड़ता है। अब जैसे मैंने आपको बताया था कि हम बेहोशी में दवाई देते
(52:36) हैं अवेक स्टेट से डीप मेडिसिन एंडस्कोमा करते हैं। तो उसमें जो नॉर्मली आप खाना खाती हैं हम तो जो आपके सांस लेने की नली है उसके ऊपर एक लीफ लाइक स्ट्रक्चर होता है। वो जाके बंद कर देता है सांस की नली को जिससे आपका खाना इसफेगस में चला जाए। हम पर जब आप कोमेटोज़्ड हैं या डीप इंड्यूस में है तो वह अपने आप नहीं हिलती वो तो जो आपके मुंह में खाना गया या पेट में जो खाना है वो लौट के अगर मुंह की तरफ आ गया तो वो सांस की नली से लंग में चला जाता है। तो ये तो बहुत ही इंपॉर्टेंट आस्पेक्ट है कि आपने खाना कब खाया। आपका पेट खाली होना
(53:16) चाहिए। तो कहते हैं। सॉलिड जो खाना है वो कम से कम 8 से 12 घंटे पहले नहीं खाना चाहिए। हम और पानी वगैरह आप 3 घंटे तक पहले पी सकते हैं। ग्लूकोस का पानी भी पी सकते हैं। पर दूसरा जूस वगैरह भी 6 घंटे से पेट खाली होना चाहिए। क्योंकि अंडर एनस्थीसिया वो सब चीज रिलैक्स कर जाएगी। वो लीफ लाइक स्ट्रक्चर हट जाता है। फिर आपके पेट भी पूरा रिलैक्स कर गया। उसका सारा कंटेंट मुंह को आ गया तो वो आपके लंग में जाता है। उससे फिर बहुत सीवियर निमोनिया होता है। तो लाइफ थ्रेटनिंग होता है। आप आईसीयू में जाएगा वो पेशेंट वेंटिलेटर पे रहेगा। तो ये तो
(53:52) बहुत जरूरी है। व्हाट आर द काइंड ऑफ फिय्स दैट यू गो थ्रू यू नो आई एम श्योर इट्स बीन मेनी इयर्स बट हर एक पेशेंट अलग है। हर एक पेशेंट की जान अलग है। एंड दैट दैट मोमेंट इज वेरी यूनिक फॉर एवरीबडी। सो व्हाट इज योर फियर? एंड हाउ डू यू वर्क अराउंड इट? सो फियर इज अ वर्ड आई विल नॉट यूज़ बट व्हाट इज माई कॉशन? ऑलवेज देयर। हम्। सो, यह कि वो डर इज़ एन इमोशन। हम वो इमोशन हम पार कर चुके हैं। इनफैक्ट एज़ एनस्थिज़ल दैट्स द फर्स्ट थिंग वी लर्न इज़ हाउ टू कंट्रोल एनी एडवर्स सिचुएशन। हाउ टू बी इन कंट्रोल्ड एंड फर्स्ट थिंग वी लर्न इज़ दैट रिमूव आवर इमोशंस। दैट्स
(54:37) व्हाई यू रियलाइज़ इफ यू इंटरक्टर एनस्थिस मोस्ट ऑफ़ द एनस्थिसियोलॉजिस्ट हु प्रैक्टिस फॉर अ लॉन्ग टाइम वैरी काम पीपल। हम् दे हैव लर्न दैट यू नो अह फ़ियर एंगर दीज़ आर यह कपड़े हैं जो आप पहनाते हो एक सिचुएशन को हम है ना तो वो तो हमने हटा दिया सो दैट इमोशन इज़ गॉन बट यस वी आर वै कॉशियस एंड वी आर ऑलवेज वाचिंग आउट सो पेशेंट एनस्थीसिया दिया है व्हाट इज़ द इफ़ेक्ट ऑन देयर हार्ट इज़ देयर हार्ट ड्रिपिंग टू फास्ट इज़ देयर पल्स ऑक्सीजन इनाइड देयर बॉडी अप टू द प्रॉपर व्हाटएवर लेवल्स दैट आई वांट इज इट देयर ऑ नॉट इज़ द हार्ट इज़ द ब्लड प्रेशर मेंटेंड
(55:20) ऑ नॉट सो दीज़ आर थिंग्स दैट आई लुक फॉर सो इवन इन अ वेरी हेल्दी यंग एडल्ट वेयर आई एक्सपेक्ट नथिंग विल हैपन इफ यू लूज़ योर कॉशन एंड कॉन्शियस इवन अ नॉर्मल पेशेंट कैन हैव बिकॉज़ डिलिटेरियस इफेक्ट सो यू हैव टू कीप दैट दैट कॉशन इज़ ऑलवेज केप्ट ऑन फियर वर्ड वोकैबरी से निकल गया। वाओ। आई नो आई सेड लास्ट है बट ये लास्ट नहीं है क्योंकि आपने जो बोला फियर और एंगर निकाल दिया तो ये आपको मेडिकल प्रैक्टिस ने आपका निकलवा दिया फियर और एंगर। हां। कैसे? ओके। सो दिस आई हैव थॉट अबाउट वै नाई। आई यूज्ड टू थिंक दैट हाउ इज दैट सम पीपल लाइक माय स्पेशलिटी बिकम्स लाइक दिस ओवर
(56:02) टाइम। दैट्स बिकॉज़ देयर वर थ्री थिंग्स। देयर वाज़ समथिंग आई वाज़ डूइंग लाइफ रटनिंग वाज़ हैपनिंग टू द पेशेंट। इन दैट सिचुएशन। उनका ब्रीथिंग ले ली सपोज या हार्ट रेट उनका बहुत कम हो गया। मेरे पास टाइम बहुत कम था टू रिसोंड टू दैट एज एन एनस्थिजियोलॉजिस्ट एंड आई हैव टू ब्रिंग आई हैव टू गेट पॉजिटिव रिजल्ट हम नेगेटिव रिजल्ट की मेरे पास गुंजाइश नहीं है तो इन तीनों चीजों ने मुझे करा मेड मी लर्न प्रोटोकॉल्स हम दैट इफ द हार्ट रेट बिकम बिलो विल बिकम लाइक दिस आई विल डू दिस एंड आई विल डू दिस इमीडिएटली सेकंड आई विल डू दिस थ्री आई दिस सो आई वाज एंटीिसिपेटिंग एंड
(56:41) प्रिपेयरिंग फॉर दैट सिचुएशन मच बिफोर बिफोर दैट सिचुएशन अकरर्ड दिस इज़ व्हाट द कॉकपिट डज़। दिस इज़ व्हाट दी पायलट मे बी सिंग लाइक दिस बट ही नोज़ कि अगर टर्बुलेंस आ गई तो मैंने यह करना है। सडनली मेरा विंग नहीं खुला तो मैंने ये करना है। वो चाहे लाख फ्लाइट्स में एक बार हो। बट ही कांट बी सिंग इन दैट लाख फ्लाइट। फ्लाइट ही हैज़ टू बी रेडी कि ये मेरा विंग ठीक से उठ रहा है कि नहीं। एंड ही डजंट हैव टू वेट कि विंग नहीं उठा। वो ड्यूरिंग दैट प्रोसेस भी अर्ली इंडिकेशन होंगे विंग नहीं उठ पा रहा है। तो ही हैज़ टू एक्ट। दिस नहीं हो
(57:19) आप तो फियरलेस होने की बात कर रहे हो बट आप जब बोल रहे हो मुझे ऐसा लग रहा है इससे तो और डर बैठेगा कि ये भी ये भी चेक करना है वो भी चेक करना है वो भी चेक करना है डर नहीं है आई एम कंफर्मिंग टू दैट प्रोटोकॉल एंड आई एम गेटिंग ऑन दी प्रोटोकॉल फास्ट माय हां सो माय एक्शंस बिकम फास्टेस्ट सो देन आई डोंट कीप अगेन आई सेड देयर इज़ एन इमोशन आई डोंट लीव दैट प्लेस फॉर दैट इनसाइड माय ब्रेन व्हेन आई एम एक्टिंग व्हेन आई सी अ सिचुएशन आई एक्ट एंड देन आई जस्ट डू द एक्शन एस पर दी प्रोटोकॉल्स माय ब्रेन ऑल द ब्रेन सेल्स आर कंसंट्रेटिंग ऑन दैट प्रोटोकॉल हम
(57:57) सो प्रोबब्ली व्हेन ऑल दिस हैपेंस वी डोंट रिकॉल कौन आया था कौन गया था उधर कोने में कौन खड़ा था उसने क्या बोला बिकॉज़ वी हैव दैट ऑल हैज़ गॉन अवे श है शट ऑफ वी आर कंसंट्रेटिंग डूइंग दैट थैंक यू वेरी मच। आई लर्न अ लॉट एंड आई एम गोइंग टू कैच होल्ड ऑफ यू इंटरेक्शन विद यू। अच्छा लगा आपसे बात करके। थैंक यू। आई होप इट वास वर्थ योर टाइम एंड नॉट वै स्टूपिड एंड सिल्ली। नहीं नहीं [हंसी] बट आई जस्ट वांटेड टू कवर द डिफरेंट डायरेक्श ऑफ क्वेश्चन। लवली। थैंक यू।
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