Why Is It So Hard to Leave a Toxic Relationship? | Trauma Bond Explained | Ft. Karishma Mehra
Author Name:Connected Minds Wellness
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Title: Why Is It So Hard to Leave a Toxic Relationship? | Trauma Bond Explained | Ft. Karishma Mehra
Author Name: Connected Minds Wellness
Description: Why is it so difficult to leave a toxic relationship even when you know it's hurting you?
In this powerful podcast, Relationship Coach Karishma Mehra joins Ritu Bhardwaj, Founder of Connected Minds Wellness, to explain the psychology behind toxic relationships, trauma bonding, emotional dependency, love bombing, manipulation, and why leaving isn't as easy as people think.
Whether you're in a relationship, recovering from a breakup, or trying to help someone you love, this conversation will help you understand the emotional patterns that keep people stuck.
In this episode, we discuss:
✔ What makes a relationship toxic?
✔ Is every fight a red flag?
✔ Why do people stay in abusive relationships?
✔ Trauma Bond Explained
✔ Love Bombing & Emotional Manipulation
✔ Emotional Dependency
✔ Signs it's time to leave
✔ How to heal after a toxic relationship
This podcast is for anyone looking for relationship advice, mental health awareness, emotional healing, and healthier relationships.
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Connected Minds Wellness is building India's complete mental health ecosystem by bringing together psychologists, psychiatrists, coaches, wellness experts, communities, and evidence-based resources to make mental wellbeing accessible to everyone.
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Comment below:
Have you ever found it difficult to leave a toxic relationship? What was the biggest lesson you learned?
#ToxicRelationship #RelationshipAdvice #MentalHealth
Transcript:
(00:00) प्रॉब्लम आती है जब आई ओनली बिकम अबाउट मी। आई फॉरगेट रिलेशनशिप इज अबाउट वी नॉट जस्ट मी। यह पता होने के बावजूद कि यह रिलेशनशिप मुझे हर्ट कर रहा है तब भी हम उसे छोड़ नहीं पाते। [संगीत] आइसोलेशन अकेलापन कॉन्फिडेंस नहीं है। अक्सर प्यार नहीं हम इस आइसोलेशन की वजह से ऐसे रिश्ते में टिके हैं। क्यों? [संगीत] एज वीमेन हम जनरली हम कभी नहीं सोचते कि हम सामने वाले को कितना पिन करते [संगीत] हैं कि सामने वाला यह हाथ उठाए। यू डीड दिस? व्हाई डीड यू डू दिस? टेल मी व्हाई डिड यू डू दिस? आई वांट टू नो। आप बच्चों को देखोगे बहुत डिसरिस्पेक्ट कर
(00:34) रहे हैं अपने पेरेंट्स को, आसपास के लोगों को क्योंकि उन्हें लगता है अगर पापा कर सकते हैं तो मैं भी कर सकती हूं। मम्मा इतना मार सकती है अगर पापा को तो मैं भी कर सकती हूं। वी डोंट अंडरस्टैंड जो उसका रेपकेकशन और लॉन्ग टर्म इफेक्ट है हाउ हॉरेबल दैट विल बी। आई [संगीत] मीट सो मेनी 50 प्लस 40 प्लस वुमेन। द वर्ड इज रिग्रेट। [संगीत] रिग्रेट ऑफ नॉट डूइंग एनीथिंग फॉर माय सेल्फ। 10 साल बाद कि मैंने आपके लिए यह सैक्रिफाइस किया। तो बच्चा भी पलट कर बोलता है मैंने तो नहीं कहा था। [संगीत] आप जी लेते अपनी जिंदगी। टॉक्सिसिटी हैज़
(01:08) बिकम अ वेरीेंट पार्ट ऑफ रिलेशनशिप्स। मुझे गुस्सा आ गया। तो मैंने अपनी नस काट ली या मैंने अपने सामने वाले को [संगीत] मार दिया। फिर वो ना हेल्दी रिलेशनशिप है ना टॉक्सिक है। वो एक ट्रांजैक्शनल [संगीत] रिलेशनशिप है। गिव एंड टेक। क्योंकि हम चाहें कूड़े को घर में रखें, बेडरूम में या किचन में। कूड़ा तो स्मेल मारेगा ही हमारी। कहते हैं कि रिश्ते और प्यार हमें सुकून देने के लिए होते हैं। लेकिन अगर वही रिश्ते हमारी खुशी, आत्मसम्मान और मानसिक शांति को छीनने लगे तो क्या यह सही है? सबसे बड़ा सवाल कि जब वह रिश्ता इतना तकलीफ दे रहा होता है तो हम उसे छोड़
(01:52) क्यों नहीं देते? क्या इसके पीछे प्यार ही वजह है या कोई डर, अकेलापन या कोई और साइकोलॉजिकल रीजन? तो इसी सब पर बात करने के लिए आज मेरे साथ हैं करिश्मा मेहरा जो साइकोलॉजिस्ट हैं और बहुत सारे लोगों को वो रिलेशनशिप काउंसलिंग भी देती हैं। तो वेलकम करिश्मा फिर से कनेक्टेड पर आपका स्वागत है। थैंक यू। तो आज मैं इसी सब पर बात करना चाहूंगी कि क्या सबसे पहले तो टॉक्सिक रिलेशन हम किसे कह सकते हैं या एक दो बार लड़ाई होना या आर्गुममेंट होने के बाद रिश्ते को टॉक्सिक रिलेशन कह देना सही है? आई थिंक टॉक्सिसिटी एक ऐसी चीज है जिसका मतलब होता
(02:30) है समथिंग दैट इज नॉट गुड फॉर यू। तो जब हम टॉक्सिसिटी की बात करते हैं या जहरीलेपन की बात करते हैं या पोइजननेस चीजों की बात करते हैं रिश्तों में अब टॉक्सिसिटी हैज़ बिकम अ वेरी इंपॉर्टेंट पार्ट ऑफ रिलेशनशिप्स सब कहते हैं शी इज़ सो टॉक्सिक ही इज़ सो टॉक्सिक दिस रिलेशनशिप टॉक्सिक एक्सैक्टली बट एक्चुअली हर रिलेशनशिप टॉक्सिक नहीं होता हर इंसान टॉक्सिक नहीं होता टॉक्सिसिटी इन अ रिलेशनशिप वो तब आती है जब हम एक ही स्पायरल और एक ही लूप रूप में सालों साल निकाल देते हैं। दैट्स टॉक्सिसिटी। जब हमें पता है कि हम कैसे हैं, सामने वाला
(03:10) कैसा है और हम उस चीज को झेलते जाते हैं या फिर हम उस चीज को डील करते जाते हैं अपने तरीके से। चाहे वह चले ना चले। जब रिलेशनशिप में आपको डर हो। जब रिलेशनशिप में बहुत सारी नेगेटिव कॉमोनेंट्स आ जाए कि शक आना, किसी पे विश्वास ना होना, झूठ बोलने की जरूरत पड़े या फिर छुपाने की जरूरत पड़े तो वो रिलेशनशिप ऑटोमेटिकली टॉक्सिसिटी की तरफ जा रहे हैं। बिकॉज़ दे आर नॉट ऑथेंटिक। जब आप अपने आपको दिखाने से डरते हैं एक रिलेशनशिप में क्योंकि उससे लड़ाई होगी तो वो ऑटोमेटिकली एक पहलू है रिलेशनशिप का जो सही नहीं है। दैट इज टॉक्सिसिटी। द टॉक्सिसिटी वहां पे जो हो
(03:56) रही है वो एक इंसान नहीं है। बट वो जो बिहेवियर छुपा रहे हैं या हम डर रहे हैं कि इससे लड़ाई होगी, क्लेश होगा तो हटा देते हैं इसे। दैट इज टॉक्सिसिटी। क्योंकि हम चाहें कूड़े को घर में रखें बेडरूम में या किचन में कूड़ा तो स्मेल मारेगा ही मारेगा। उसी तरह से अगर रिलेशनशिप का एक पहलू डिस्फंक्शनल हो रहा है और उस पे आप काम नहीं करेंगे और उसे साइड पे पड़े रहने देंगे और आगे बढ़ते जाएंगे जैसे बहुत कपल्स करते हैं। दैट टॉक्सिसिटी दैट स्मेल दैट ऑर्डर वो ऑटोमेटिकली उस चीज को खराब करेगा ही करेगा। हेल्दी रिलेशनशिप और टॉक्सिक रिलेशनशिप कैसे समझें डिफरेंस?
(04:37) मतलब कब मैं कह सकती हूं कि यह रिलेशनशिप टॉक्सिक है। डेफिनेटली अह एक हेल्दी रिलेशनशिप वो है जहां लड़ाई भी हो, प्यार भी हो, बहुत बार ट्रम्स भी होते हैं। प्लस माइनस भी होता है बट बैलेंस बन जाता है। आप दोनों फिर वापस आते हैं। बट वापस इसलिए आते हैं बिकॉज़ यू हैव समथिंग जो आपके लिए बहुत जरूरी है। आपके पास 100 कारण हो सकते हैं उस रिश्ते को छोड़ने के, तोड़ने के, भागने के। बट वह एक कारण जब आपका पार्टनर और आपका कॉमन कारण है। नॉट चिल्ड्रन, नॉट अ फैमिलीज़, नॉट मनी। बट देयर इज़ समथिंग अबाउट माय पार्टनर दैट ब्रिंग्स मी बैक टू
(05:20) द रिलेशनशिप। दैट इज़ स्टिल अ हेल्दी पार्ट ऑफ़ द रिलेशनशिप, अ हेल्दी रिलेशनशिप। बट टॉक्सिसिटी जब हम बोलते हैं यहां एक टॉक्सिक रिलेशन की बात करते हैं। टॉक्सिक रिलेशनशिप वो होता है जहां बहुत बार गिर पड़ रहे हैं। बहुत बार एक दूसरे को हैंडल करने की कोशिश कर रहे हैं। मैं अपने आप में परेशान हूं। बट मैं अपने हस्बैंड या अपने पार्टनर को खुश करने के लिए उस चीज को डील कर रही हूं। वह ज्यादा देर रुक नहीं सकता। दैट बिकम्स टॉक्सिक। क्योंकि हम प्यार में भी टॉक्सिसिटी देखते हैं। रिलेशनशिप्स में भी टॉक्सिसिटी देखते हैं। जहां एक इंसान दूसरे इंसान के लिए ओवर द
(05:59) बोर्ड जाके कर रहा है। सामने वाला कहता है मैंने तो नहीं कहा मेरे लिए करो। बट यह इंसान कर रहा है और वह उसे रिसीव कर रहा है। तो टॉक्सिसिटी वहां आएगी ही आएगी। क्योंकि एक गिवर बन रहा है, एक रिसीवर बन रहा है। इट्स नॉट बैलेंस्ड। टॉक्सिसिटी आती है। जहां दोनों जने आपस में घुल रहे हैं एक दूसरे के साथ। दे आर स्पाइरलिंग बिकॉज़ ऑफ़ द नेगेटिव्स और द पार्ट्स दैट आर नॉट वर्किंग। हेल्दी रिलेशनशिप में प्रॉब्लम्स आती हैं। बात होती है कि चलो आओ बात करें। इसे सुलझाते हैं। इसकी तह तक जाते हैं। कुछ स्ट्रगल्स, कुछ आप गार्ड रेल्स बनाते हो कि चलो अगर यह दिक्कत हमें
(06:40) बार-बार आ रही है, तो लेट्स मेक सम रूल्स फॉर यू एंड मी बोथ। कि हम उस चीज से अबाइड करेंगे। फॉर एग्जांपल सोशल मीडिया और फोंस यूसेज सबसे बड़ा एक कारण बनता जा रहा है रिलेशनशिप में दूरियों का कि रात को सोने से पहले एक जना डूम स्क्रोल करना रुकता ही नहीं है। या बाथरूम में जाके फोन पे बैठ जाते हैं। सो व्हाट हैपेंस इज़ द हेल्दी रिलेशनशिप इज़ नाउ गोइंग टुवर्ड्स अनहेल्ी रिलेशनशिप। बिकॉज़ वन ऑफ़ अस उसकी जरूरत है। मुझे शांति चाहिए। मुझे एकांत चाहिए। दूसरा कहता है मेरी सारी बातें सुनो, नैगिंग सुनो या केओस सुनो या जनरल बातें सुनो। बट सामने वाला शायद उस ज़ोन में ना
(07:22) हो। आजकल ज़ों्स भी आ गए हैं। आज मैं ज़ोन में हूं। आज मैं ज़ोन में नहीं हूं। सो इट्स नॉट जस्ट टॉक्सिसिटी। इट इज़ ज़ोनिंग आउट एंड ज़ोनिंग इन। ट्यूनिंग इन एंड ट्यूनिंग आउट। नंबिंग इन एंड नंबिंग आउट। बहुत सारे ऐसे फ्रेजेस आ गए हैं जो कपल्स या फैमिलीज़ में मैं सुनती हूं। वेयर दे आर टॉकिंग अबाउट हाउ दे आर फीलिंग बाय सेइंग मैं तो नम्ड आउट हूं मुझसे ना बात करें। हस्बैंड सेज़ मुझे डीप कनेक्शन ही नहीं फील होता। वाइफ सेज़ मैं वेट करती हूं हस्बैंड से बात करने की। वो आते हैं बात ही नहीं करते। सो स्टोरीज और कहानियां जो हम कहते हैं, नैरेटिव्स जो हम कहते हैं, सबके
(08:01) वर्जनंस हैं। बट रियलिटी क्या है? कि मैं और मेरा पार्टनर हम हेल्दी नहीं बना पा रहे। और हेल्दी बनाने के लिए आई थिंक सबसे जरूरी टू मूव फ्रॉम अ टॉक्सिक रिलेशनशिप टू अ हेल्दी रिलेशनशिप इज़ पॉसिबल। बट वह पॉसिबिलिटी क्या है? जब हम दोनों अपने ऊपर काम करने के लिए रेडी हो। बट बहुत बार मैंने रिसेंटली देखा है जहां कपल्स अगर थेरेपी में भी आते हैं तो वो उसे एक माध्यम बना लेते हैं सामने वाले को समझाने का। आप उनको समझाएं। आप उनको समझाएं। मैं क्यों समझाऊं? रिलेशनशिप काउंसलिंग इज नॉट टू रिमूव योर टॉक्सिसिटी और योर टॉक्सिसिटी। अगर आपको अपने पे काम करना है
(08:45) तो वह एक तरीका है टॉक्सिसिटी से बाहर आने का। जब मुझे समझना है कि मैं अपने रिलेशनशिप को ठीक कैसे कर सकती हूं। वो सोच मेरी मुझे उस टॉक्सिसिटी से उठाती है। ना कि मैं यह सोचूं हमारा तो कुछ नहीं हो सकता। हम दोनों तो बहुत ही खराब ज़ोन में हैं। क्योंकि सामने वाला मेरी बात नहीं सुनता। तो अब मुझे किसी को डालना पड़ेगा बीच में जो इनको समझा सके। वह सोच और वह तरीका ही अलग चला गया। यू आर ऑलरेडी आउट ऑफ द रिलेशनशिप। जहां आप तीसरे बंदे को इनवॉल्व कर रहे हो किसी को समझाने के लिए वहां आप रिलेशनशिप की कड़ी कमजोर कर रहे हो। सो प्रॉब्लम इज नॉट टॉक्सिसिटी और
(09:23) हेल्दी। क्योंकि हर रिलेशनशिप इस पूरे पेंडुलम में स्वे होता है। हर हेल्दी रिलेशनशिप कभी-कभी टॉक्सिसिटी की तरफ भी जाता है और हर टॉक्सिक रिलेशनशिप कभी-कभी हेल्दी भी हो सकता है। आपने जो कहा कुछ देर पहले कि हेल्दी रिलेशनशिप में एक वजह चाहिए होती है। अब मैं इसको थोड़ा अलग तरीके से पूछती हूं। कई बार एक ही वजह होती हैं या कुछ वजह होती है जिसके कारण टिके रहते हैं। हम तो ऐसे ये पता होने के बावजूद कि रिलेशनशिप मुझे हर्ट कर रहा है या यही है जो मेरी परेशानियों की वजह है तब भी हम उसे छोड़ नहीं पाते। क्या वो एक या दो वजह ही है जिसके कारण हम टिके रहते हैं। है तो
(09:59) क्या है? उम कहीं ना कहीं हेल्दी रिलेशनशिप्स में जैसे मैंने कहा एक वह कारण चाहिए पर हर रिलेशनशिप में अगर आप देखो तो अगर सफरिंग है, प्रॉब्लम्स हैं और प्रॉब्लम्स नंबर से ज्यादा हैं और आपको उस रिलेशनशिप की पॉजिटिव थोड़ी कम दिख रही है। बट फिर भी हम टिके हुए हैं। डेफिनेटली आपके पर्सनल रीज़ंस हैं। द फर्स्ट थिंग इन अ रिलेशनशिप इज़ टू टेक ओनरशिप ऑफ़ योर पार्ट ऑफ़ इट। कि मैं इसमें क्या कर रही हूं या मैं क्या कर रहा हूं। जरूरी नहीं है कि मुझे पहले पूरा अकाउंट चाहिए और एक बैलेंस शीट चाहिए। A ने यह किया और B ने यह किया। नहीं। जब मैं एक रिलेशनशिप की
(10:41) तरफ देख रही हूं तो पहले मुझे यह समझना है इसमें मैं क्या कर रही हूं। अपना अकाउंट लेना। और उस अकाउंट में बहुत सारे कारण हो सकते हैं। जैसे मे बी मोस्ट वुमेन आई नो आज भी हमारे इंडिया में ऐसे बहुत सारी फैमिलीज हैं जहां लेडीज आके बोलती है हमारे पास वापस जाने के लिए जगह नहीं है। हमें छोड़ दिया गया है। बहुत सारे पेरेंट्स से मिलती हूं जहां वो कहते हैं अब यही तुम्हारा ससुराल ही तुम्हारा घर है। सो देयर इज़ नो एक्सेप्टेंस। देयर इज़ नो सेफ प्लेस टू गो बैक। तो एक इंसान के लिए उसे पता है कि अब जो करना है मुझे यहीं करना है। हो सकता है हस्बैंड के लिए
(11:19) भी हो या आदमी के लिए भी हो कि अपना घर छोड़ के अब मैं कहां जाऊं। तो वो भी बेचारा रोज आ ही रहा है। बट प्रॉब्लम यह है जब हम ऐसी सिचुएशंस में होते हैं जहां यह प्रॉब्लम्स आती हैं जैसे अकेलापन, लैक ऑफ सेफ स्पेस टू गो बैक। कोई और है नहीं जिंदगी में जो हमारे को सपोर्ट या हेल्प करे या अपने ही कोर बिलीव्स कि मेरे को तो यह मुझे तो यहीं रहना है। मैं यहां से नहीं हिल सकता या हिल सकती। मुझे इसको छोड़ना नहीं है। इसे मुझे छोड़ना नहीं है। हमारी सोच बचपन से कंडीशनिंग भी हुई हुई है। हमें बचपन से मुझे तो बचपन से यही सुनाया गया था कि यही है। यही हस्बैंड है।
(12:00) इनसे ही शादी करनी है और उनके हिसाब से रहना है। सो जो वो एक कंडीशनिंग से हम इंडिया में स्पेशली यहां पर जो हम कल्चरली बच्चों को ट्रेन करते हैं लिटरली वह भी एक कारण अपने मन का बनता है कि छोड़ नहीं सकते। एंड वन ऑफ द वेरी इंपॉर्टेंट रीज़ंस जो मुझे लगता है हेल्दी रिलेशनशिप्स फॉल इंटू द टॉक्सिक कैटेगरी या कारण जिसकी वजह से ये प्रॉब्लम्स आती है इज़ आइसोलेशन अकेलापन कॉन्फिडेंस नहीं है तो अक्सर प्यार नहीं हम इस आइसोलेशन की वजह से ऐसे रिश्ते में टिके हैं क्योंकि अकेलापन इतना ज्यादा अंदर से लगता है कि अगर यह नहीं हुए तो मैं क्या करूंगा
(12:40) या मैं क्या करूंगी तो हम उसी चीज को फिर से पकड़ने लगते हैं कि यही है यही है यही है क्योंकि कहीं ना कहीं ना जब आप दो लोग एक रिश्ते में आते हो और एक अरसा बीत जाता है तो वह कॉन्फिडेंस भी कहीं ना कहीं दो लोगों का मिलकर होता है। सडनली आपको लगे कि आप अकेले हो तो आपका कॉन्फिडेंस कहीं ना कहीं कभी वोबल करता है और वह वोबल जो है कॉन्फिडेंस का वह आपको आगे नहीं बढ़ने देता। वो आपको डराता है। वो आपको कंफ्यूज करता है। स्पेशली अगर आप मैरिटल रिलेशनशिप्स की बात करो तो बच्चे होते हैं बीच में। तो बच्चों का सोच के बहुत बार कपल्स जिंदगी को सिर्फ खींच रहे हैं।
(13:22) बिकॉज़ उन्हें पता है कि बच्चे बड़े करने हैं। नॉट रियलाइजिंग कि बच्चे देख रहे हैं। और बच्चों को जो समझ आ रहा है वो देखकर समझ आ रहा है ना कि मैं क्या बोल रही हूं या सामने वाला क्या बोल रहा है। और जब वो बच्चे यह देख रहे हैं कि एक जने को सफर करना है। तो प्रोबेबिलिटी है कि वह भी उस चीज को एक्सेप्ट करें और यहीं पर जनरेशनली ट्रॉमा पास ऑन होता है। जब हम रिलेशनशिप्स को हैंडल नहीं कर पाते और हम उन्हें खींचते जाते हैं, खींचते जाते हैं विदाउट एक्चुअली मैनेजिंग देम विदाउट सर्विसिंग आवर रिलेशनशिप्स। तो वो रिलेशनशिप्स कहीं ना कहीं टॉक्सिक
(14:02) होते हैं जो हम कहते हैं जंग लगते हैं। एक नई गाड़ी को भी सर्विस की जरूरत होती है। तो हमें यह क्यों नहीं लगता कि हर रिलेशनशिप को भी एक सर्विस की जरूरत होती है। एनुअली अपने रिलेशनशिप का एक अकाउंट बनाना। आपस में डिस्कस करना कि अच्छा अब हम आगे कैसे कर सकते हैं या हमने वहां क्या किया? जब हम उस चीज को अकाउंटेबिलिटी में डालते हैं, इट ओनली ब्रिंग्स अस क्लोज़र। हमारी प्रॉब्लम यह है हम चलते जाते हैं चलते जाते हैं चलते जाते हैं यह सोच के नहीं अब तो खींचना ही है दो द ट्रेंड इज चेंजिंग डेफिनेटली बट आई स्टिल फील अ लॉट ऑफ़ अस आर स्टिल
(14:43) स्टक इन लूप्स ऑफ़ आवर ओन और यह लूप बाहर नहीं है। आप ढूंढने जाओगे आपको लूप किसी फैमिली में नहीं मिलेगा। दिस लूप इज़ इन द माइंड। आप उनके बिहेवियर में देखोगे। जब आप किसी को देखते हो बहुत कंफ्यूज्ड। आजकल एंजायटी, डिप्रेशन ऑल दीज़ प्रॉब्लम्स आर आल्सो सो हाई। क्योंकि रिलेशनशिप्स में देयर इज़ सो मच मेस अप। हम रिलेशनशिप्स में सुकून ढूंढने जाते हैं। बट सुकून नहीं हम वहां से सिर्फ डर लेकर आते हैं बहुत बार। और वो डर हमें सिर्फ अपने अंदर ही सोचने पे मजबूर करता है। एंड फिर हम कॉम्प्रोमाइज करते हैं। एक रिलेशनशिप कनेक्शन पे बनता है ना कि कॉम्प्रोमाइज
(15:26) और कंपैरिजन पे। आपके पास इतने सारे केस आते हैं और आपने अभी कहा कि ट्रेंड इज़ चेंजिंग। कुछ समय पहले हम लोगों ने देखा ग्रे डिवोर्स केसेस बहुत आए जो जनरली आफ्टर 50 55 इस तरह के केसेस बहुत आए। फिर अभी हम देख रहे हैं रिलेशनशिप में हार्म का बी इटसेल्फ हार्म या फिर आपके पार्टनर को हार्म करना ये हम बहुत देख रहे हैं। हालांकि अभी भी अगर हम ओवरऑल बात करें तो ये एक बहुत कम परसेंटेज है उन रिलेशनशिप्स की। स्टिल मैक्सिमम आर सफरिंग वो अभी भी वहीं पर हैं। वो उसी रिलेशनशिप में है। हर दिन सफर कर रहे हैं। बट क्या लो सेल्फ एस्टीम इसकी वजह है
(16:01) करिश्मा कि हम निकल नहीं पाते। % 1120% इट्स लो सेल्फ एस्टीम एंड एक सोसाइटल प्रेशर जो हमें कंफ्यूज करता है क्या हम समर्थ हैं सक्षम हैं कि हम अपने आप को हैंडल कर सकें। वो एक डर है जो हम कंटीन्यूअसली रोज जीते हैं। ग्रे डिवोर्स इज़ वेरी वेरी नॉट पॉपुलर बट ग्रे डिवोर्स इज़ वेरी प्रवेलेंट। जहां हस्बैंड वाइफ आर जस्ट कोएस्टिंग, कोपरेंटिंग, कोलिविंग अपने-अपने कमरों में हैं। अपनी-अपनी जिंदगियों में है। पर बच्चों के लिए साथ हैं। प्रॉब्लम इज़ ऊपर से तो बिल्कुल ठीक लगता है। हम साथ-साथ हैं वाली फैमिली लगती
(16:46) है। बट द रियलिटी इज़ कि जो बच्चे नोटिस कर रहे हैं, जो अंडरकरेंट वहां बैठ के फील होता है, दैट अंडरकरेंट इज़ नॉट ओके। एंड दैट अंडर करंट इज फेल्ट बाय एवरीबॉडी। अगर मैं बोलूं कि जी सपोज़ एक हस्बैंड वाइफ में हस्बैंड इज़ एट फॉल्ट अकॉर्डिंग टू द वाइफ और द वाइफ इज़ एट फॉल्ट बिकॉज़ ऑफ़ अकॉर्डिंग टू द हस्बैंड। बट मैं यह बोलूं कि वो अंडर करंट हस्बैंड को नहीं फील हो रहा या वाइफ को नहीं फील हो रहा या उनमें से एक भी खुश है। नॉट पॉसिबल। बोथ आर अंडरगोइंग देयर ओन स्टोरीज़ ऑफ़ अनहैपीनेस। ब्लेम गेम है, कंपैरिजंस हैं। खींचतान है बच्चों का। बच्चों को पैसे लुटाए जाते
(17:31) हैं। एक [गला साफ़ करने की आवाज़] ज्यादा देता है अपना पावर दिखाने के लिए, एक अपना कंट्रोल जताने के लिए। डिसिप्लिनिंग बहुत ज्यादा होता है। सो व्हाट हैपेंस इज़ वो जो नोज़ है वो टाइटन होती है बच्चों की गर्दन पर। या जो कॉमन चीजें हैं क्योंकि आप एक दूसरे के तो गले तक नहीं पहुंच पा रहे। सो इन ऑल दीज़ ग्रे डिवोर्सेस और दीज़ साइलेंट कोपेरेंटिंग प्लेटफॉर्म्स हो क्या रहा है? सफरर्स आर एक्चुअली द चिल्ड्रन। बिकॉज़ वो जो कहानियां पढ़ रहे हैं या समझ रहे हैं उन्हें लगता है इट्स ओके टू लिव लाइक दिस। इट्स अ चॉइस। फिर अगर अब आपकी मदर बोले 10
(18:09) साल बाद कि मैंने आपके लिए यह सैक्रिफाइस किया। तो बच्चा भी पलट कर बोलता है मैंने तो नहीं कहा था। आप जी लेते अपनी जिंदगी। सो इट इज़ वेरीेंट अगेन कि एज कपल्स एज इंडिविजुअल्स हम ओनर्स अपने पे रखें। हम सेंस ऑफ ओनरशिप, सेंस ऑफ़ रिस्पांसिबिलिटी, सेंस ऑफ़ अकाउंटेबिलिटी ऑफ़ माय डिसीजंस। जरूरी नहीं है कि मुझे अपने 10 साल के या 12 साल के बच्चे का ही सिर्फ सोचना है। और यह सोच-सच के मैं आज की अपनी जिंदगी भी खराब करूं। मे बी किसी को लगता हो कि बोलना बहुत आसान है। बिकॉज़ एवरीबॉडी इज़ लिविंग देयर एक्सपीरियंस। आई एम नॉट डिसरिस्पेक्टिंग बट मुझे ऐसे लगता है कि
(18:49) यह जो बच्चे हैं जिनकी वजह से हम सोच रहे हैं हम सैक्रिफाइस कर रहे हैं। यह बच्चे हमारी सैक्रिफाइस को भी सफरिंग देख रहे हैं। एंड यह बड़े होकर आई गारंटी यह बड़े होकर कह रहे हैं आई डोंट वांट टू बी लाइक हर। आई डोंट वांट हर इन माय लाइफ लाइक दैट। क्योंकि कहीं ना कहीं उनके लिए भी वह ट्रॉमा था टू सी देयर मदर और देयर फादर अनहैपी। एंड दे आर ओनली एक्सेप्टिंग एंड अंडरस्टैंडिंग कि अब हमें इसमें कैसे रहना है। और फिर हर बच्चा अपनी कोपिंग मैकेनिज्म ढूंढ लेता है। कुछ एडिक्शंस में जाते हैं। कुछ बहुत अच्छा करते हैं और कुछ कहीं ना कहीं गुम जाते हैं दोस्तों यारों
(19:29) में। बट हर बच्चा अपने आप से कोप कर लेता है इस पूरे रिलेशनशिप ट्रॉमा को लेके। एंड दिस इज कॉल्ड फैमिली ट्रॉमा। और बाद में वो शायद उनके रिलेशनशिप में दिखते हैं। अब्सोलुटली। करिश्मा जनरली वैसे तो अभी ये बहुत आने लगा कि अब ऐसा नहीं है कि सिर्फ महिलाएं सफर कर रही हैं। बट स्टिल नंबर ज्यादा है। मेरे पास बहुत सारे या मैं सोशल मीडिया पे भी देखती हूं बहुत सारी ऐसी महिलाएं जो बहुत अच्छा कर रही थी करियर वाइज, जॉब वाइज बहुत पढ़ी लिखी। बट जब वो एक शादी में एंटर करती हैं तो वो अपने करियर और जॉब को पीछे कर देती हैं। हो सकता है वो मदरहुड ब्रेक के कारण या
(20:03) बहुत सारी चीजों के कारण। फिर एक समय आता है जब उन्हें लगता है कि यह रिश्ता अब इसमें नहीं रहना है। पर तब वापस से जिंदगी शुरू करना मुश्किल होता है। ऐसी महिलाएं आपके पास भी केस आते होंगे। आप उनके लिए क्या कहना चाहेंगी? क्योंकि वो फिर अब इसी डर से कि अब क्या करूं? जनरली बहुत सारी डालती हैं कि कुछ ऐसा आप हमें बता दीजिए कि शायद हम वापस से काम करने लगे, अर्न करने लगे तो फिर हम निकल जाएंगे। आई थिंक अबब्सोलुटली बहुत रेलेवेंट है। ग्रे डिवोर्सेस, डिवोर्सेस, सेपरेशंस, प्रॉब्लम्स बहुत सारे इशूज़ हम देखते हैं जिसकी वजह से लोग अलग हो जाते हैं। और उस
(20:40) पूरी खींचातानी में हमारा कॉन्फिडेंस कहीं बिल्कुल ही खो जाता है। और जब आप अकेले रहते हो बहुत अरसे तक तो यू ऑटोमेटिकली स्टार्ट फीलिंग श्रंक कि आप श्रिंक हो रहे हो। और उसमें कॉन्फिडेंस नहीं आपके स्किल सेट्स, आपकी थिंकिंग प्रोसेस, आपका वे ऑफ लाइफ सब कुछ कहीं ना कहीं अफेक्ट होता है। और उस फियर से भी हम क्योंकि मैं उस चीज को इन्वज़ करती हूं तो मैं आज अपना आज नहीं खराब कर रही इसलिए मैं उस रिलेशनशिप को बर्दाश्त कर रही हूं। बट बहुत लोग हैं जो यह पहल करते हैं कि नहीं अब बस आई वांट टू स्टॉप। आई थिंक इट्स अ वेरी पावरफुल
(21:16) डिसीजन दैट दे फर्स्ट टेक फॉर देमसेल्व्स। उस डिसीजन को हम बहुत बार रिग्रेट करेंगे अपनी लाइफ में कि अरे साथ होते यह होता वो होता। बट कहीं ना कहीं आई फील फॉर पीपल हु हैव टेकन दैट स्टेप कि मुझे यह टॉक्सिसिटी अपनी लाइफ में नहीं चाहिए। द फर्स्ट थिंग इज़ दे हैव ऑनर्ड देमसेल्व्स। अपने आपको अपने अंदर के सोल को दे हैव ऑनर्ड। दे हैव एक्सेप्टेड दैट दिस वाज़ नॉट वर्किंग फॉर मी। सो आई हैव स्टेप्ड आउट ऑफ इट। द कॉन्फिडेंस टू हैंडल दैट इज कमिंग फ्रॉम योर। हमारी प्रॉब्लम यह है सोसाइटी भी तो हमारे जैसे लोगों से ही बनी है। लोगों का
(21:57) काम है बात करना। प्रॉब्लम कहां आती है? जब हम अपने दिमाग में उस सोसाइटी को ले जाते हैं और अपने दिमाग में सोचते हैं कि उन्होंने ऐसे बोला होगा, ऐसे सोच रहे होंगे, ऐसे सोच रहे होंगे। उससे क्या होता है? आई एम रिड्यूसिंग माय कैपेसिटी। आई एम नेगोइंग नेगेटिव। सो द प्रॉब्लम इज कि जो लोग बोल रहे हैं वो बोल रहे हो या ना मैंने अपने दिमाग में बात बिठा ली तो मैं ऑलरेडी श्रिंक हो गई और वो श्रिंक करते करते वी एक्चुअली रीच रॉक बॉटम बहुत सारे इंस्टीटशंस फाउंडेशंस हैं जहां दे गिव हेल्प टू वुमेन हु वांट टू डू सेकंड इनिंग्स फॉर एग्जांपल टाटा करता है और
(22:36) अदरवाइज हमने ना अपनी लाइफ में बहुत सारी चीजें सैक्रिफाइस की होती हैं आगे बढ़ने के लिए रिश्तों में एंड उन चीजों के लिए हम अपनी बहुत सारी ऐसी चीजें और चाहतें छोड़ देते हैं। समटाइ्स इट्स अबाउट टेकिंग अकाउंट ऑफ मुझे क्या करना था? अपने साथ बैठकर अपने आप में समझना कि मुझे करना क्या है? मुझे आगे कैसे बढ़ना है। सिर्फ पैसे नहीं कमाने, इज्जत कमानी है। अपना कॉन्फिडेंस जीतना है। अपने आपको शीशे में देखकर बोलना है गुड जॉब। दीज़ आर स्टोरीज दैट विल मेक यू फील कॉन्फिडेंट ऑफ व्हाट यू आर डूइंग। उसके लिए आप सपोर्ट ले सकते हो। आप फिर से पढ़ाई कर सकते हो। मे बी फॉर
(23:20) अ 50 ईयर ओल्ड इट्स नॉट अ गुड आईडिया टू स्टडी मे बी बट एट द सेम टाइम आज आपके पास सोशल मीडिया है आज आपके पास कोर्सेज हैं आपके पास एआई है टेक्नोलॉजी को अगर हम सही मायनों में यूज़ करें तो एक इंसान के लिए वह उसे ऑलरेडी एक लेवल अप दे देता है और जब आपको वह लेवल अप मिले आप अपनी लाइफ को लीप आउट करेंगे दैट लीप ऑफ़ फेथ दैट यू हैव टेकन एट दैट टाइम वह ऑलरेडी अपने आप में एक करजियस स्टेप था और आपको यह सोचना है जो आपने किया आपके जैसे 10 लोगों ने सोचकर भी नहीं किया। दैट इज़ अ फर्स्ट स्टेप बट अगेन इट्स इज़ियर एट देन डन। कुछ लोग जाकर
(24:01) भी रिग्रेट करते हैं। एंड देन दे कम बैक एंड देन दे टेल देमसेल्व्स मुझे सफर करना है। और कुछ अनफॉर्चूनेटली आल्सो यह इंसिडेंट्स हैं व्हेयर दे ट्राई टू हार्म देमसेल्व्स लाइक यू सेड। और दे हार्म दी अदर पर्सन। हार्म की जो बात है वहां पर यह प्रॉब्लम है कि रिलेशनशिप्स में हार्म इज द इज़िएस्ट आउट ऑफ स्पाइट आउट ऑफ एंगर मुझे गुस्सा आ गया तो मैंने अपनी नस काट ली या मैंने अपने सामने वाले को मार दिया वायलेंस रेज इज नॉट लिमिटेड टू ओनली फिजिकल अब्यूज इमोशनल यस ये मैं आपसे जानती हूं इमोशनल मेंटल वर्बल अब्यूज वर्बली ट्राइंग टू डिमिन सोशल अब्यूज आजकल लोग मीडिया में
(24:44) इतना लिखने लग गए पीछे। आई थिंक आपने वो शायद आई थिंक मैंने कोई कैंपेन देखा था वेयर वन गर्ल वाज़ ट्राइंग टू डिफेम अ बॉय और अ बॉय वाज़ ट्राइंग टू डिफेम अ गर्ल। यूपी के किसी स्मॉल टाउन की बात है। वेयर जस्ट बिकॉज़ उस लड़की ने मना कर दिया। उस लड़के ने इश्तियार छाप कर पूरे शहर में डाल दिए। सो, व्हाट हैप्पेंस इज़ हम सामने वाले को पूरी तरह से डाउन कर देते हैं। और हमें जनरली सिर्फ किसी भी रिलेशनशिप में फिजिकल अब्यूज दिखता है कि हाथ क्यों उठाया? और इस फिजिकल अब्यूज कि भ मुझे ऐसे लगता है कि एक बहुत विचित्र एक तरीका है इसको देखने का।
(25:23) फिजिकल अब्यूज में हम जनरली कहते हैं अह कि अगर हस्बैंड वाइफ या किसी रिलेशनशिप की बात करें। आजकल तो आपको दूसरे केसेस भी सुनने को मिल रहे हैं। हां वुमेन आर आल्सो नॉट स्टॉपिंग बट व्हेन अ मैन इज़ ट्राइंग टू फिजिकली अब्यूज अ गर्ल और यू नो कभी वायलेंस आता है तो हम यह भूल जाते हैं व्हाट वुड हैव बीन द रीज़न फॉर दी अदर पर्सन टू हैव रीच्ड देयर जनरली आई एम नॉट सेइंग हर इंसान को एक आप यू कैन नॉट गिव लिवरेज टू एवरीबॉडी बट इन वेरी जनरल सेंस जब आप हस्बैंड वाइफ की बात करते हैं और आप फिजिकल वायलेंस या अब्यूज की बात करते हैं। बहुत बार रेज वेटिंग जो
(26:08) आजकल एक वर्ड है जहां हम सामने वाले को उकसाते हैं। हम उसे पुश करते हैं। एज अ वुमेन आई एम ट्राइंग टू पुश माय पार्टनर टू हिज लिमिट। यू डिड दिस व्हाई डिड यू डू दिस? टेल मी व्हाई डिड यू डू दिस? आई वांट टू नो। मैंने ऐसे किया तो आपने ऐसे क्यों किया? आई एम रे वेटिंग दी अदर पर्सन। आई एम गोइंग एंड प्रेसिंग ऑल द बटंस टू ट्रिगर दी अदर पर्सन राइट एंड देन व्हाट डू आई अचीव दी अदर पर्सन हिट्स एंड व्हाट डू आई डिक्लेयर व्हाई डिड ही हिट मी सो व्हाट आई हैव डन हैज़ गॉन टू द डॉग्स नाउ अह अ लॉट ऑफ़ पीपल व्हाई माइट थिंक दैट व्हाई एम आ ओनली टॉकिंग अबाउट मेन आई एम
(26:50) नॉट टॉकिंग अबाउट मेन और वी वुमेन आई एम जनरली सेइंग जब एक पार्टनर दूसरे पार्टनर को पोक प्रवोक करता है उस पॉइंट पे लाता है। जहां सामने वाला कुछ बोल दे तो सारा ब्लेम गेम उस फिजिकल अब्यूज पे आ जाता है। व्हाट अबाउट द रेज वेटिंग दैट हैपेंड? हम एज वुमेन हम जनरली हम कभी नहीं सोचते कि हम सामने वाले को कितना पिन करते हैं। कितना निबल करते हैं उस पॉइंट तक कि सामने वाला यह हाथ उठाए। आई एम नॉट सेइंग हाथ उठाना इज़ फाइन। बट एट द सेम टाइम इज़ वर्बल अब्यूज इज़ इमोशनल अब्यूज फाइन। आप किसी को टेक्स्ट करते जा रहे हो। करते जा रहे हो,
(27:29) करते जा रहे हो, करते जा रहे हो, बोलते जा रहे हो, बोलते जा रहे हो, बोलते जा रहे हो। यू आर नॉट स्टॉपिंग पर थ्रेशहोल्ड तो सबका है ना। आई अंडरस्टैंड कि वायलेंस इज़ नॉट एन आंसर। बट वी एज पीपल हम में से कितने लोग समझते हैं कि एक रिश्ते में बाउंड्रीज़ बहुत जरूरी है। चाहे वह फिजिकल अब्यूज की हो, मेंटल अब्यूज की हो, इमोशनल वायलेंस की हो या सोशल अब्यूज की हो। देयर हैज़ टू बी अ बाउंड्री। एक सीमा बंधी होनी चाहिए। इसके आगे हम इसके बारे में नहीं बात करेंगे। हम बदतमीजी पर नहीं आएंगे। हम अब्यूज पर नहीं आएंगे। बहुत बार देखा है
(28:06) कपल्स एक दूसरे को हिंदी में अब्यूज कर रहे होते हैं। कोई रिस्पेक्ट फैक्टर नहीं है। कोई कोई सीमा नहीं है। कोई अंडरस्टैंडिंग नहीं है। समझ नहीं आता इतने एजुकेटेड कैसे हम वहां पहुंच जाते हैं। द प्रॉब्लम इज़ योर ब्रेन इज़ सो ट्रिगरर्ड। सो ट्रिगरर्ड कि आप सामने वाले को ट्रिगर करना चाहते हो। दिस बिकम्स टॉक्सिक। दी स्टोरीज बिकम टॉक्सिक। फिर हम जब अपनी दूसरे फैमिली मेंबर्स को जाके या अपने फ्रेंड्स को बताते हैं इसके बारे में। उसने यह किया मेरे साथ। उसने मुझे यह बोला ऐसे हुआ, वैसे हुआ। मैं क्या कर रही हूं? मैं सामने वाले की इमेज खराब कर रही हूं।
(28:45) मैं सामने वाले के बारे में और 10 लोग इकट्ठे कर रही हूं जो उसके बारे में मेरे जैसे सोचे। मैं तो ठीक हो जाऊंगी। बट उन सबका क्या? और फिर यह कहानी रोजमर्रा हो जाती है। और फिर आसपास की सोसाइटी जिसको हम इकट्ठा कर रहे थे, वह कहते हैं, यह तो रोज ही लड़ते हैं। यह तो हैं ही बेकार। इनका रिश्ता ही ऐसा है। जोर-जोर से आवाें आती है इनके घर से। वी जनरलाइज इट। कोई किसी के क्लेश में नहीं आना चाहता। पर जब क्लेश हो रहा है तो हम उनको हैंडल कैसे करते हैं? हम अपने आप को कैसे हैंडल करते हैं? मुझे ऐसा लगता है कि हेल्दी रिलेशनशिप हो या टॉक्सिक। एक
(29:21) रिलेशनशिप में बाउंड्रीज, रिस्पेक्ट, ऑनेस्टी और स्पेस ये चार पहलू हैं जो होने ही चाहिए। व्हेन आई एम माइंडफुल ऑफ दीज़ इन अ रिलेशनशिप वो रिलेशनशिप टॉक्सिक तो नहीं हो सकता। एंड मोर इंपॉर्टेंट एक हेल्दी और टॉक्सिक रिलेशनशिप आर सम वॉट टू साइड्स ऑफ़ द सेम कॉइन। द रिलेशनशिप। या तो वह हेल्दी होगा या वह टॉक्सिक होगा, हेड्स होगा या टेल्स होगा। मुझे ऐसे लगता है हाउ डस वन एनश्योर दैट टॉक्सिक ना हो और हेल्दी बने। राइट? सो उसमें आई थिंक एक रिलेशनशिप को हेल्दी बनाने के लिए आई ऑलवेज आस्क माय क्लाइंट्स व्हाट आर द रिसोर्सेज दैट यू
(30:08) हैव बिल्ट इन अ रिलेशनशिप? तो सबसे पहले उल्टा जब क्वेश्चन आता है, इसका मतलब क्या है? मैडम समझाएं। जब आप कोई रिश्ता बनाते हैं उस रिलेशनशिप में क्या आप कुछ रिसोर्सेज सेव करते हैं? कुछ ऐसी चीजें, यादें, मेमोरीज या कहानियां बनी हो जिनको जाकर हम याद कर कर हंस सके। और उस मोमेंट को हैंडल कर सके जब प्रॉब्लम आती है। प्रॉब्लम यह है आजकल की डेट में क्योंकि हमारे पास अपने लिए समय नहीं है तो रिश्तों के लिए समय निकालना इतना मुश्किल है कि हम रिश्तों को भी टाइम से चलाते हैं। अभी यह वाला, फिर यह वाला, फिर यह वाला, फिर यह वाला। हो तो गया। और
(30:53) कितना टाइम दूं वाइफ को? पैसे भी तो कमाने हैं। मुझे काम भी तो करना है। वाइफ कहती है बच्चे देखूं कि इनके साथ बैठूं सारा दिन। सो व्हाट वी आर डूइंग इज वी आर प्रॉब्लम सॉल्विंग। हम सिर्फ और सिर्फ प्रॉब्लम्स को सॉल्व कर रहे हैं। खाना बन गया, मेड आ गई, घर साफ हो गया, बच्चे आ गए, बच्चों का होमवर्क हो गया, हस्बैंड ने खाना खा लिया। सो जाओ। रोज रूटीन लाइफ। दिस इज़ प्रॉब्लम सॉल्विंग। दिस इज़ लिविंग डेली। हम जब काम भी करते हैं, तो हम पैसे जमा करते हैं बैंक में, लॉकर्स में, शिप्स में, म्यूच्यूल फंड में, गोल्ड में। और हम कहते हैं अपने आप को कि ये हमारा
(31:29) सिक्योरिटी डिपॉजिट है। जब हमें जरूरत होगी हम इसमें से निकालेंगे। तो रिलेशनशिप के लिए वो सिक्योरिटी डिपॉजिट क्यों नहीं है? वो सिप क्यों नहीं बनाया? और वो जो सिप बनाना है एक रिलेशनशिप के लिए आई थिंक वो भी मंथली बेसिस पे होना चाहिए। अगर आप वीकली नहीं कर सकते। जहां डेट्स कॉन्वर्सेशंस टाइम आउट अलोन अकेले बैठकर बातें करना घंटों एक दूसरे के साथ समय बिताना। दैट इज एक्चुअली द बैंक, द पावर बैंक, द सिक्योरिटी डिपॉजिट। उसमें से फिर आप चीजें निकाल सकते हो। वहां बनता है आपका कॉन्फिडेंस। आपका लव मजबूत होता है। आपकी रिस्पेक्ट मजबूत होती है। आपके पिलर्स ऑफ
(32:11) स्ट्रेंथ बाउंड्रीज मजबूत होती हैं। और आपका सेल्फ कंट्रोल वैलिडेट करता है। यह सेफ है। सेफ्टी। एक रिलेशनशिप जब सेफ नहीं फील करता तब वह रिलेशनशिप टॉक्सिसिटी की तरफ जाता है। जब एक रिलेशनशिप में आपको सेफ्टी फील होती है इमोशनली, फिजिकली, मेंटली, सोशली तब वो हेल्दी की तरफ जाता है। और बहुत बार हेल्दी रिलेशनशिप्स सेफ्टी होते हैं तो दे लैंड अप ऑन द टॉक्सिसिटी साइड। बिकॉज़ टॉक्सिसिटी इज़ नथिंग बट लैक ऑफ़ सेफ्टी। इसीलिए गंदा पानी आता है। जब आपकी ड्रेन पाइप एसी की खराब होगी तो पानी अंदर आता है। उसी तरह से जब आपके रिलेशनशिप में एक सेफ्टी नेट खत्म
(32:55) होती है तो सारी जो क्लॉगिंग है वह भी अंदर ही आती है रिलेशनशिप के। तुमने यह किया, मैंने यह किया। ब्लेम गेम्स। सबसे क्लासिक वे ऑफ़ चेकिंग इज़ ब्लेम गेम्स। बच्चे एज यंग एस सेवन एंड एट बोलते हैं। ये तो कहीं पे भी लड़ पड़ते हैं। कहीं भी शुरू हो जाते हैं। आई हैव सो मेनी चिल्ड्रन जो 16 17 की ऐज में होते हैं। काउंसलिंग के लिए आते हैं। देयर वन क्वेश्चन टू मी इज़ आंटी आप तो फैमिली काउंसलर हो। व्हाई डोंट यू सेपरेट बोथ ऑफ देम? इतना लड़ते हैं। कोई फायदा नहीं है हमें इनको देख के साथ। हमें डर लगता है इनसे बात करने में दोनों से क्योंकि लगता
(33:33) है अभी लड़े, अभी लड़े, अभी लड़े। इससे अच्छा है इन दोनों को अलग करो। एज चिल्ड्रन दे ओनली अंडरस्टैंड ऊपर ऊपर से। अब आप किसी पेरेंट को जाके यह नहीं बोल सकते कि जी आप अलग हो जाओ। आपका बच्चा कह रहा है आप दोनों बहुत लड़ते हो। बिकॉज़ इट्स वेरी डिफिकल्ट टू एक्सेप्ट एज अ पेरेंट। क्योंकि हर पेरेंट को लगता है मेरे समेत कि हम तो बेस्ट कर रहे हैं अपने बच्चों के लिए। बट द रियलिटी इज़ कि बच्चे यह इनफेंस निकाल रहे हैं। स्पेशली ये जेन अल्फा और ये जेन ज़ है दे आर वेरी क्विक। दे आर ऑलरेडी क्लियर। आई डोंट वांट टू गेट मैरिड। रिलेशनशिप है बट आई डोंट वांट टू
(34:10) कमिट एनीथिंग। आई विल डू अ प्रीन अप। दीज़ आर थिंग्स दैट आर ट्रेंडिंग नाउ। जहां बच्चे अपना कॉशन खुद ढूंढ रहे हैं। और उनके सबसे बड़े लाइव एग्जांपल्स ऑफ़ टॉक्सिक रिलेशनशिप इज़ पेरेंटल रिलेशनशिप। ऐसा नहीं बनाना अपना रिलेशनशिप। आई डोंट वांट माय रिलेशनशिप टू लुक लाइक माय पेरेंट्स रिलेशनशिप। सो दीज़ आर स्टोरीज वेयर चिल्ड्रन आर आल्सो मेकिंग देयर ओन स्टोरीज कि भाई ऐसे नहीं हो सकते। कहीं ना कहीं उल्टा भी है। आप बच्चों को देखोगे बहुत डिसरिस्पेक्ट कर रहे हैं अपने पेरेंट्स को, आसपास के लोगों को क्योंकि उन्हें लगता है अगर पापा कर सकते हैं तो मैं भी
(34:44) कर सकती हूं। मम्मा इतना मार सकती है अगर पापा को तो मैं भी कर सकता हूं। वी डोंट अंडरस्टैंड जो उसका रेपकाशन और लॉन्ग टर्म इफ़ेक्ट है। हाउ हॉरेबल दैट विल बी। बहुत सारे केसेस हम लोग देखते हैं जनरली सोशल मीडिया को वैसे भी हम लोगों ने एक रिफ्लेक्शन वो बना लिया कि वहां पर जो दिखता है सब ऐसा ही हम क्योंकि ज्यादातर समय उस बिता रहे हैं तो बहुत सारे या तो हमें उसमें दिखते हैं कि बहुत रोजी पिक्चर रिलेशनशिप्स की कुछ लोग हैं वो बस डेट्स पे जा रहे हैं, डिनर्स पे जा [गला साफ़ करने की आवाज़] रहे हैं, वैकेशंस पे जा रहे हैं और कुछ कपल्स हैं
(35:14) जो सिर्फ वहां पर शिकायतें डाल रहे हैं। किसी मैं चाहती हूं ऐसा हो बट मेरे हस्बैंड ये नहीं करते या मेरी वाइफ ऐसी होनी चाहिए। लेकिन वो ऐसी है। तो हम वो जो एक शायद जो आपने कहा कि हेल्थी रिलेशनशिप में लड़ाई भी होंगी तो प्यार भी होगा कमी होगी तो कुछ ना कुछ और अच्छा होगा पर हम ये बस टू साइड्स देखते हैं तो सोशल मीडिया या ये जो हमारी लाइफ है सोशल मीडिया के ऊपर कितना असर डाल रही है रिलेशनशिप पे आई थिंक प्रॉब्लम इज सोशल मीडिया इतना ज्यादा आ गया है हमारी लाइफ्स में कि अब हम लोगों को जज करने लगे हैं जैसा कंटेंट वोट डाल रहे हैं। फॉर एग्जांपल अगर मैंने कुछ
(35:58) जो कंटेंट देख रहे हैं उसके बेस पे भी हम रिलेशनशिप्स उसके बेस पे भी हम इनफेंसेस बना रहे हैं। हम कुछ कहानियां पढ़ते हैं। कुछ एग्जांपल्स देखते हैं। हम उन्हें इंबाइप करते हैं। हां इसके साथ ये हुआ इसलिए मेरे साथ भी यही हो रहा है। जब आप किसी और फ़ॉर एग्ज़ांपल अह रिसेंटली जो दो-तीन केसेस हुए हैं, उसके बाद देयर आर अ लॉट ऑफ़ क्वेश्चंस ऑन अरेंज्ड मैरिजेस कि करनी भी चाहिए या नहीं और करनी चाहिए तो कितने कंफर्ट में करनी चाहिए? कैसा कंफर्ट बच्चों को देना चाहिए? सो, देयर आर लॉट ऑफ़ क्यूरियोसिटीज़। सोशल मीडिया ने एक्चुअली क्या किया है? लाइक वी से द वर्ल्ड इज़ अ
(36:35) ग्लोबल विलेज। अब तो वर्ल्ड इज ओनली लिमिटेड टू मेटा एंड ऑल दी स्टोरीज ऑफ एआई एंड सोशल मीडिया पर आपको क्या दिखता है? बट इन कहानियों में बहुत बार जजमेंट्स हैं। कभी जजमेंट सामने हैं उन पर जो दिखा रहे हैं या अपने आप पर या अपने पार्टनर पे कि मैंने कुछ इनफ किया और मैंने बोला हां आदमी होते ही ऐसे हैं। करेक्ट है। तो मैं क्या करूंगी? उसको स्क्रीनशॉट करके अपने हस्बैंड को भेजूंगी या अपने पार्टनर को भेजूंगी। देखो Instagram भी मुझे यही कह रहा है। रील्स से हम मैसेज हां जी। तो अगर मैं कभी किसी पेरेंट को बोलूंगी या किसी पार्टनर को बोलूंगी, किसी
(37:16) कपल में, किसी पार्टनर को बोलूंगी कि एक दूसरे को WhatsApp करो। यूज़ टेक्नोलॉजी टू द बेस्ट ऑफ योर पर्पस एंड वेज़। तो, वह मुझे पूछेंगे क्या भेजूं? WhatsApp क्या करना है? मैसेज क्यों भेजना है? पीपल गो ब्लैंक। बिकॉज़ व्हाट वी हैव डन इज़ वी आर नॉट यूज़िंग द WhatsApp और मैसेजिंग बिकॉज़ वी वांट टु कनेक्ट विथ समवन। वह सिर्फ हमारी लड़ाई डेली रूटीनंस, सब्जेक्ट्स और मेमोरी के लिए है। बट एक्चुअली हम उसको क्यों यूज़ करते हैं? मीम्स भेजने के लिए, फॉरवर्ड्स भेजने के लिए, रील्स भेजने के लिए। सो, व्हाट वी आर डूइंग इज़ हम सोशल मीडिया के माध्यम से एक दूसरे को अपनी
(37:56) कहानी बताने की कोशिश करें। एवरीबॉडी इज वरिड अबाउट देमसेल्व्स। ऐसा कोई नहीं है जो सिर्फ सामने वाले का सोच रहा हो। हमें अगर यह भी लगता है ना कि नहीं नहीं मैं तो अपने पार्टनर का सोचती हूं। हमेशा सोचती हूं। आई एम टेलिंग यू मैन इज़ अ वेरी सेल्फिश एनिमल। हम सबसे पहले अपने बारे में सोचते हैं। आप बच्चों को देख लीजिए। एज ओल्ड एज 15 एज यंग एस वन। अगर आप एक 2 साल या चार साल के बच्चे को बोलते हैं ना बेटा मैं जरा मार्केट जा रही हूं। मैं क्या करूंगा? मेरा कैसे होगा? आप किसी छ साल के बच्चे को बोलो बेटा मैं तो घर छोड़ के जा रही हूं। दे विल नॉट आस्क आप कहां
(38:33) जा रहे हो? दे विल से मैं क्या करूंगा? मेरा कैसे होगा? सो वी आर ऑल वरिड अबाउट आवरसेल्व्स। सेम वे इन रिलेशनशिप्स सोशल मीडिया हैज़ क्रिएटेड दिस ड्रामा वेयर जजमेंट्स अबाउट मायसेल्फ, अबाउट दी अदर पर्सन और अबाउट माय पार्टनर इज़ बिगर दैन एनीथिंग। और वो सेल्फ वैलिडेटेड है क्योंकि उस चीज को इतने लाइक्स मिले हैं या एग्रीमेंट्स मिले हैं या थम्स अप मिले हैं तो मेरे को अपने पार्टनर को जताना है। सिर्फ तुम्हें ऐसे नहीं लगता यह बिल्कुल ठीक है। बहुत बार लेडीज या स्पेशली मैंने देखा है वुमेन दे एक्चुअली फाइंड रील्स दैट आर शेयरिंग देयर इमोशंस एंड दे पुट इट
(39:11) आउट टू देयर पार्टनर। हम चाहते हैं टू बी सीन टू बी हर्ड टू बी अंडरस्टुड। ये तीन चीजें हैं। एंड सोशल मीडिया इज एक्चुअली हेल्पिंग समवेयर सपोर्ट अस इन बीइंग एबल टू बी सीन इन बीइंग एबल टू बी हर्ड एंड इन बीइंग एबल टू बी अंडरस्टुड वैलिडेशन कि मैं जो हूं कोई मुझे उस तरह से देखे। मैं जैसे सुन रही हूं या सोच रही हूं। सामने वाला मुझे उस सोच में देखे। मैं क्या करना चाहती हूं और मेरे इंटेंशंस क्या हैं? सामने वाला समझ जाए। यही एक उम्मीद है हर ह्यूमन बीइंग की। टू बी सीन, टू बी हर्ट, टू बी अंडरस्टुड। प्रॉब्लम आती है जब आई
(39:58) ओनली बिकम अबाउट मी। आई फॉरगेट कि अ रिलेशनशिप इज़ अबाउट वी नॉट जस्ट मी। जब उस वी में सोचते हैं तो हम एक दूसरे का सोचते हैं। प्रॉब्लम यह है हम कभी-कभी उस वी में जाके भी मी को ढूंढते हैं। वहां पे वो वी घूम जाता है। फिर बिकमता है मी एंड माइन। फिर वहां गेम चेंज हो जाती है। सो एक्चुअली रिलेशनशिप्स आर अ डिस्टेंस यू कवर फ्रॉम मी टू वी। जहां हम दोनों रस्ते में मिले। दैट्स वी। एंड द पावर ऑफ वी इज़ हम एक दूसरे के लिए क्या कर सकते हैं? आई थिंक रिलेशनशिप्स में सबसे बड़ी पावर है द जॉय ऑफ़ गिविंग। द पावर ऑफ़ गिविंग। बट
(40:44) प्रॉब्लम यह है हमें बचपन से कंडीशनिंग दी गई है। अगर आप ए करोगे तो आपको बी मिलेगा। आज आपको मार्क्स लाओगे तो मैं आपको न्यू फोन लेके दूंगी। कॉज एंड इफेक्ट। हम हर चीज के लिए बच्चों को एक कैरेट देते हैं। आप यह कर लो। फिर मैं आपको अमेरिका ले जाऊंगी या मैं आपको जापान घूमने ले जाऊं। वी आर गिविंग देम रीज़ंस टू परफॉर्म परफॉर्मेंस अप्रोच। तो जब रिलेशनशिप में यही बच्चे आएंगे तो ये बच्चे बोलते हैं मैं अगर उनको यह दे रहा हूं या दे रही हूं तो मुझे क्या मिल रहा है? देन इट बिकम्स अ गिव एंड टेक। देन इट्स ट्रांजैक्शनल। फिर वो ना हेल्दी रिलेशनशिप है ना टॉक्सिक है।
(41:22) वो एक ट्रांजैक्शनल रिलेशनशिप है। गिव एंड टेक। एंड 99 कपल्स आउट ऑफ 100 एंड अप ओवर अ पीरियड ऑफ़ टाइम ओनली टॉकिंग ट्रांजैक्शंस। टिफिन ले गए बच्चों की फीस भर दी। बच्चों ने यह किया, बच्चों ने वो किया, मम्मी पापा का ऐसे करना है। वीर ओनली टॉकिंग ट्रांजैक्शंस। वी आर नॉट टॉकिंग लव। तो वो जो सिप की हम बात कर रहे थे वो तो कहीं गुम गई। आपने जो बात की वह सब तो है ही लेकिन मैं उन रिश्तों की बात करूंगी जहां सच में अब्यूज है, टॉक्सिसिटी है और वो मैं उन्हें टॉक्सिक भी नहीं कहूंगी। कहीं ना कहीं वो कभी टॉक्सिक होते हैं, कभी वो डेड हो चुके होते हैं। वहां
(41:59) पे सर्वाइवल मुश्किल है। लेकिन हमने बहुत से रिलेशनशिप में देखा बहुत सी फीमेल्स को फाइनेंशियल नॉलेज नहीं है कि आगे वो सर्वाइव कैसे करेंगी? क्योंकि जैसे मैंने पहले कहा कि वो जॉब्स छोड़ चुकी हैं, ब्रेक ले चुकी हैं या फिर उन्हें यह नहीं पता कि लीगली उनके पास राइट क्या है। हम कई बार बच्चों को संभालना पूरी तरह से उनके ऊपर आ जाएगा या बहुत सारी और चीजें कैसे निकले क्या हो। आपके पास भी क्या इस तरह के केसेस आते हैं कि फाइनेंशियल और लीगल लिटरेसी मैं कहूं ये बहुत जरूरी है। बहुत ज्यादा जरूरी है। दैट एज वुमेन हम यह रियलाइज़ करें कि फाइनेंशियल इंडिपेंडेंस
(42:37) इकोनॉमिक इंडिपेंडेंस जो हम कहते हैं वह एक बहुत बड़ी जरूरत है आज हर इंसान के लिए बिफोर दे गेट इनू अ रिलेशनशिप। सो दैट आप डिपेंडेंट नहीं हैं। आप इंडिपेंडेंट हैं। बट बहुत सारे लोग इन कारणों की वजह से दे आर स्टक इन डेड रिलेशनशिप्स एंड दे आर जस्ट ट्राइंग टू सर्वाइव। लाइक उठे हैं तो जी रहे हैं। टाइम हो गया सोने का तो सो रहे हैं। व्हेन दीज़ रिलेशनशिप्स आर डेड। द प्रॉब्लम इज हमारे अंदर कोई ना कोई एक ऐसी हलचल है जहां हमें लगता है कि अब नहीं हो पाएगा। अब हम नहीं कर सकते। बिकॉज़ मेरे पास तो पैसे नहीं है। मेरे पास कोई जगह
(43:20) नहीं है। सो लीगली आल्सो नोइंग कि मेरे यह राइट्स हैं। लीगल लिटरेसी जो हम बोलते हैं कि लेट्स एजुकेट पीपल अराउंड द वर्ल्ड। मैन और वुमेन अबाउट देयर राइट्स इन अ रिलेशनशिप और मैरिज। माय पॉइंट इज नोइंग द लीगल एंगल सो मेनी वुमेन हु आर एजुकेटेड वो जो एक कॉन्फिडेंस टू बी एबल टू चैलेंज समबडी और टू स्टेप योरसेल्फ आउट ऑफ समथिंग और टू स्टैंड अप फॉर योरसेल्फ वो जो एक करज है वो बहुत मुश्किल है। वो जेनुइनली हमारी इंडियन सोसाइटी में इज़ वेरी डिफिकल्ट फॉर अ वूमेन टू एक्सेप्ट एंड पुल हरसेल्फ अप। एंड व्हेन दैट हैपेंस देन देयर इज़ नो
(44:06) स्टॉपिंग अप बट इमोशनल लिटरेसी इज़ आल्सो इक्वलीेंट इमोशनल लिटरेसी इज़ अंडरस्टैंडिंग माय ओन थ्रेशहोल्ड्स अंडरस्टैंडिंग मेरा क्या लेवल है इस लेवल के आगे आई कैन नॉट टोलरेट तो उसके बाद व्हाट व्हाट नेक्स्ट फॉर मी एंड इमोशनली आई थिंक इट्स वेरीेंट टू अंडरस्टैंड फॉर एव्री वुमन कि एक इकोनॉमिकल और लीगल एजुकेशन आपके पास होनी चाहिए। इकोनॉमिक इंडिपेंडेंस, इकोनॉमिक फाइनेंशियल जो आपको बोलते हैं फ्रीडम टू बी एबल टू अर्न समथिंग और हैव योर ओन सेविंग्स और हैव योर ओन मनी। आई थिंक दैट जस्ट मेक्स इट इज़ियर फॉर यू टू फील एंड थिंक अबाउट योरसेल्फ। बहुत बार एक औरत
(44:49) क्योंकि उसके पास पैसे नहीं है। कॉन्फिडेंस आएगा भी तो कैसे आएगा ना। कॉन्फिडेंस के लिए भी तो कुछ करना पड़ेगा और कुछ करने के लिए आपको पैसा चाहिए। सो इट्स अ सर्कल ऑफ़ इट्स इटसेल्फ। एंड उस सर्कल में बहुत सारे लोग फंस जाते हैं। बट उसी सर्कल में आज अगर इस सोशल मीडिया या हम इंटरनेट को यूज करें तो बहुत अपॉर्चुनिटीज आप घर बैठकर भी कर सकते हैं। स्टार्ट स्मॉल डोंट स्टार्ट बिग थिंक स्मॉल थिंक बेसिक। जितना हो उतना करो। बट रुकना नहीं। आपको डिसरिस्पेक्ट करने को कोई नहीं बोल रहा। क्योंकि बहुत बार फैमिलीज में पेट्रिय्की शोबेनिज्म इज वेरी
(45:30) वेरीरी बिग। हमारे घरों में अलाउड नहीं है। हस्बैंड सेज़ मुझे नहीं अच्छा लगता। आई एम वेरी टेरिटोरियल। अ मेरे हिसाब से चलो। सो अ वाइफ अकोमोडेट्स। वो ठीक कर लेती आपने। अच्छा ठीक है। इन्होंने कहा थोड़ी देर तो आप चल पड़ोगे। थोड़ी देर बाद आपके अंदर का जमीर आपको खुद क्वेश्चन करेगा। आई मीट सो मेनी 50 प्लस 40 प्लस वुमेन द वर्ड इज रिग्रेट रिग्रेट ऑफ नॉट डूइंग एनीथिंग फॉर माय सेल्फ जरूरी नहीं है अपने सेल्फ के लिए कुछ करने का मतलब है कि मुझे 5 करोड़ कमाने हैं। नहीं सेल्फ का मतलब है अपने लिए क्या किया? व्हाट मेक्स यू हैप्पी एज
(46:16) सिंपल एज दैट। आई मे नॉट हैव अ प्रॉब्लम विथ माय हस्बैंड। बट आई मे वांट टू नो व्हाट इज गुड फॉर मी। आई वांट टू फील हैप्पी। एक रिश्ते में दो लोग हैं। बट टॉक्सिसिटी कभी-कभी आती जाती रहती है। हाउ डू यू हैंडल योरसेल्फ? अपने आप को स्थिर कैसे रखते हैं? एंड एवरीथिंग इज़ नॉट अबाउट मनी। एवरीथिंग इज़ नॉट अबाउट द लीगल बैटल्स। टुडे आई मे नो एवरीथिंग अबाउट इट लीगली। बट आई डोंट वांट टू डू इट। राइट? बट व्हाट डू आई एक्चुअली वांट टू डू? आई जस्ट वांट टू बी हैप्पी। आई वांट टू फील सिक्योर। आई वांट टू फील सेफ। एंड सेफ इज द मोस्ट पावरफुल। और जरूरी
(46:53) नहीं है सेफ के लिए आपको एक और आदमी चाहिए। सेफ यू कैन फील विद योर किड्स। सेफ यू कैन फील विथ व्हाट यू डू। सेफ यू कैन फील ऑन योर ओन। मेडिटेट करके, योगा करके, आर्ट क्लास जाके व्हाटएवर वर्क्स फॉर यू। फ्रेंड्स को मिलके। दैट्स सेफ्टी व्हेयर आई फील सपोर्टेड। आई फील आई एम आल्सो वर्दी। बस उतना ही। सो लुकिंग योरसेल्फ आउट ऑफ दैट रिलेशनशिप इज रियली। योर रिलेशनशिप इज अ पार्ट ऑफ यू। यू आर अ पार्ट ऑफ द रिलेशनशिप एंड द रिलेशनशिप इज़ आल्सो अ पार्ट ऑफ़ यू बट इट्स नॉट यू। यू आर द पर्सन यू आर एंड रिलेशनशिप इज़ अ पार्ट ऑफ़ दैट पर्सन। डोंट मेक एनीथिंग योर
(47:36) पर्सनालिटी और पर्सोन। आई एम नॉट जस्ट अ मिसेस। आई एम फर्स्ट एन इंडिविजुअल हु हैज़ मेड सम डिसीजंस टू बी अ पार्ट ऑफ अ ब्यूटीफुल रिलेशनशिप हैव माय चिल्ड्रन एंड बी अ पार्ट ऑफ़ अ सोसाइटी बट स्टिल फर्स्ट इज़ मी आई बट द जर्नी इन रिलेशनशिप्स इज़ फ्रॉम आई मी मायसेल्फ टू वी अस आवरसेल्व्स गिरोगे डूबोगे टूटेगा गिरेगा हिलेगा ट्रेमर्स होंगे बट द आइडिया ऑफ़ अ रिलेशनशिप बिकमिंग पावरफुल इज़ जबजब नीचे जाएगा उतना ही ऊपर आएगा। एक रिलेशनशिप की स्ट्रेंथ भी सिर्फ
(48:21) सालों से नहीं होती। एक्सपीरियंसेस से होती है। हाउ मच हैव यू एक्चुअली लिव्ड टुगेदर, सर्वाइव्ड टुगेदर टू नो और कोई हो ना हो यह तो खड़े ही हैं। सो दैट स्ट्रेंथ ऑफ़ अ रिलेशनशिप आल्सो वी हैव टू एकनॉलेज। हम क्या करते हैं बहुत बार? हम एक रिलेशनशिप में अगर कुछ बहुत अरसे तक कोई एक चीज नहीं चल रही, हम उसी के बारे में बुराई करते हैं। हम उस इंसान को ही बुरा बना देते हैं उस चक्कर में। बट द रियलिटी इज़ कि बहुत एरी अच्छी चीजें भी होंगी उस रिश्ते की जो हम भूल गए। सो मे बी यू वांट टू रिवाइव एंड टेक अकाउंट। जैसे मैंने कहा कि साल में एक बार अकाउंट ज़रूर लें कि
(49:04) बैलेंस शीट चेक करें। रिश्ता ठीक है या कुछ करने की जरूरत है और वो बैलेंस शीट शायद आपको उस डेड या टॉक्सिक रिलेशनशिप से हेल्दी की तरफ ले आए। थैंक यू सो मच करिश्मा। फिर से इसे एक ऐसी बातचीत जिसने रिलेशनशिप के बहुत सारे एंगल्स पे हम लोगों को नॉलेज दी। एंड जो भी हमें सुन रहे हैं अगर करिश्मा से आप सेशन लेना चाहते हैं तो कनेक्टेड की वेबसाइट और ऐप पे जाके आप सेशन बुक कर सकते हैं। थैंक यू सो मच। थैंक यू।
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Title: Why Is It So Hard to Leave a Toxic Relationship? | Trauma Bond Explained | Ft. Karishma Mehra
Author Name: Connected Minds Wellness
Description: Why is it so difficult to leave a toxic relationship even when you know it's hurting you?
In this powerful podcast, Relationship Coach Karishma Mehra joins Ritu Bhardwaj, Founder of Connected Minds Wellness, to explain the psychology behind toxic relationships, trauma bonding, emotional dependency, love bombing, manipulation, and why leaving isn't as easy as people think.
Whether you're in a relationship, recovering from a breakup, or trying to help someone you love, this conversation will help you understand the emotional patterns that keep people stuck.
In this episode, we discuss:
✔ What makes a relationship toxic?
✔ Is every fight a red flag?
✔ Why do people stay in abusive relationships?
✔ Trauma Bond Explained
✔ Love Bombing & Emotional Manipulation
✔ Emotional Dependency
✔ Signs it's time to leave
✔ How to heal after a toxic relationship
This podcast is for anyone looking for relationship advice, mental health awareness, emotional healing, and healthier relationships.
About Connected Minds Wellness
Connected Minds Wellness is building India's complete mental health ecosystem by bringing together psychologists, psychiatrists, coaches, wellness experts, communities, and evidence-based resources to make mental wellbeing accessible to everyone.
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Have you ever found it difficult to leave a toxic relationship? What was the biggest lesson you learned?
#ToxicRelationship #RelationshipAdvice #MentalHealth
Transcript:
(00:00) प्रॉब्लम आती है जब आई ओनली बिकम अबाउट मी। आई फॉरगेट रिलेशनशिप इज अबाउट वी नॉट जस्ट मी। यह पता होने के बावजूद कि यह रिलेशनशिप मुझे हर्ट कर रहा है तब भी हम उसे छोड़ नहीं पाते। [संगीत] आइसोलेशन अकेलापन कॉन्फिडेंस नहीं है। अक्सर प्यार नहीं हम इस आइसोलेशन की वजह से ऐसे रिश्ते में टिके हैं। क्यों? [संगीत] एज वीमेन हम जनरली हम कभी नहीं सोचते कि हम सामने वाले को कितना पिन करते [संगीत] हैं कि सामने वाला यह हाथ उठाए। यू डीड दिस? व्हाई डीड यू डू दिस? टेल मी व्हाई डिड यू डू दिस? आई वांट टू नो। आप बच्चों को देखोगे बहुत डिसरिस्पेक्ट कर
(00:34) रहे हैं अपने पेरेंट्स को, आसपास के लोगों को क्योंकि उन्हें लगता है अगर पापा कर सकते हैं तो मैं भी कर सकती हूं। मम्मा इतना मार सकती है अगर पापा को तो मैं भी कर सकती हूं। वी डोंट अंडरस्टैंड जो उसका रेपकेकशन और लॉन्ग टर्म इफेक्ट है हाउ हॉरेबल दैट विल बी। आई [संगीत] मीट सो मेनी 50 प्लस 40 प्लस वुमेन। द वर्ड इज रिग्रेट। [संगीत] रिग्रेट ऑफ नॉट डूइंग एनीथिंग फॉर माय सेल्फ। 10 साल बाद कि मैंने आपके लिए यह सैक्रिफाइस किया। तो बच्चा भी पलट कर बोलता है मैंने तो नहीं कहा था। [संगीत] आप जी लेते अपनी जिंदगी। टॉक्सिसिटी हैज़
(01:08) बिकम अ वेरीेंट पार्ट ऑफ रिलेशनशिप्स। मुझे गुस्सा आ गया। तो मैंने अपनी नस काट ली या मैंने अपने सामने वाले को [संगीत] मार दिया। फिर वो ना हेल्दी रिलेशनशिप है ना टॉक्सिक है। वो एक ट्रांजैक्शनल [संगीत] रिलेशनशिप है। गिव एंड टेक। क्योंकि हम चाहें कूड़े को घर में रखें, बेडरूम में या किचन में। कूड़ा तो स्मेल मारेगा ही हमारी। कहते हैं कि रिश्ते और प्यार हमें सुकून देने के लिए होते हैं। लेकिन अगर वही रिश्ते हमारी खुशी, आत्मसम्मान और मानसिक शांति को छीनने लगे तो क्या यह सही है? सबसे बड़ा सवाल कि जब वह रिश्ता इतना तकलीफ दे रहा होता है तो हम उसे छोड़
(01:52) क्यों नहीं देते? क्या इसके पीछे प्यार ही वजह है या कोई डर, अकेलापन या कोई और साइकोलॉजिकल रीजन? तो इसी सब पर बात करने के लिए आज मेरे साथ हैं करिश्मा मेहरा जो साइकोलॉजिस्ट हैं और बहुत सारे लोगों को वो रिलेशनशिप काउंसलिंग भी देती हैं। तो वेलकम करिश्मा फिर से कनेक्टेड पर आपका स्वागत है। थैंक यू। तो आज मैं इसी सब पर बात करना चाहूंगी कि क्या सबसे पहले तो टॉक्सिक रिलेशन हम किसे कह सकते हैं या एक दो बार लड़ाई होना या आर्गुममेंट होने के बाद रिश्ते को टॉक्सिक रिलेशन कह देना सही है? आई थिंक टॉक्सिसिटी एक ऐसी चीज है जिसका मतलब होता
(02:30) है समथिंग दैट इज नॉट गुड फॉर यू। तो जब हम टॉक्सिसिटी की बात करते हैं या जहरीलेपन की बात करते हैं या पोइजननेस चीजों की बात करते हैं रिश्तों में अब टॉक्सिसिटी हैज़ बिकम अ वेरी इंपॉर्टेंट पार्ट ऑफ रिलेशनशिप्स सब कहते हैं शी इज़ सो टॉक्सिक ही इज़ सो टॉक्सिक दिस रिलेशनशिप टॉक्सिक एक्सैक्टली बट एक्चुअली हर रिलेशनशिप टॉक्सिक नहीं होता हर इंसान टॉक्सिक नहीं होता टॉक्सिसिटी इन अ रिलेशनशिप वो तब आती है जब हम एक ही स्पायरल और एक ही लूप रूप में सालों साल निकाल देते हैं। दैट्स टॉक्सिसिटी। जब हमें पता है कि हम कैसे हैं, सामने वाला
(03:10) कैसा है और हम उस चीज को झेलते जाते हैं या फिर हम उस चीज को डील करते जाते हैं अपने तरीके से। चाहे वह चले ना चले। जब रिलेशनशिप में आपको डर हो। जब रिलेशनशिप में बहुत सारी नेगेटिव कॉमोनेंट्स आ जाए कि शक आना, किसी पे विश्वास ना होना, झूठ बोलने की जरूरत पड़े या फिर छुपाने की जरूरत पड़े तो वो रिलेशनशिप ऑटोमेटिकली टॉक्सिसिटी की तरफ जा रहे हैं। बिकॉज़ दे आर नॉट ऑथेंटिक। जब आप अपने आपको दिखाने से डरते हैं एक रिलेशनशिप में क्योंकि उससे लड़ाई होगी तो वो ऑटोमेटिकली एक पहलू है रिलेशनशिप का जो सही नहीं है। दैट इज टॉक्सिसिटी। द टॉक्सिसिटी वहां पे जो हो
(03:56) रही है वो एक इंसान नहीं है। बट वो जो बिहेवियर छुपा रहे हैं या हम डर रहे हैं कि इससे लड़ाई होगी, क्लेश होगा तो हटा देते हैं इसे। दैट इज टॉक्सिसिटी। क्योंकि हम चाहें कूड़े को घर में रखें बेडरूम में या किचन में कूड़ा तो स्मेल मारेगा ही मारेगा। उसी तरह से अगर रिलेशनशिप का एक पहलू डिस्फंक्शनल हो रहा है और उस पे आप काम नहीं करेंगे और उसे साइड पे पड़े रहने देंगे और आगे बढ़ते जाएंगे जैसे बहुत कपल्स करते हैं। दैट टॉक्सिसिटी दैट स्मेल दैट ऑर्डर वो ऑटोमेटिकली उस चीज को खराब करेगा ही करेगा। हेल्दी रिलेशनशिप और टॉक्सिक रिलेशनशिप कैसे समझें डिफरेंस?
(04:37) मतलब कब मैं कह सकती हूं कि यह रिलेशनशिप टॉक्सिक है। डेफिनेटली अह एक हेल्दी रिलेशनशिप वो है जहां लड़ाई भी हो, प्यार भी हो, बहुत बार ट्रम्स भी होते हैं। प्लस माइनस भी होता है बट बैलेंस बन जाता है। आप दोनों फिर वापस आते हैं। बट वापस इसलिए आते हैं बिकॉज़ यू हैव समथिंग जो आपके लिए बहुत जरूरी है। आपके पास 100 कारण हो सकते हैं उस रिश्ते को छोड़ने के, तोड़ने के, भागने के। बट वह एक कारण जब आपका पार्टनर और आपका कॉमन कारण है। नॉट चिल्ड्रन, नॉट अ फैमिलीज़, नॉट मनी। बट देयर इज़ समथिंग अबाउट माय पार्टनर दैट ब्रिंग्स मी बैक टू
(05:20) द रिलेशनशिप। दैट इज़ स्टिल अ हेल्दी पार्ट ऑफ़ द रिलेशनशिप, अ हेल्दी रिलेशनशिप। बट टॉक्सिसिटी जब हम बोलते हैं यहां एक टॉक्सिक रिलेशन की बात करते हैं। टॉक्सिक रिलेशनशिप वो होता है जहां बहुत बार गिर पड़ रहे हैं। बहुत बार एक दूसरे को हैंडल करने की कोशिश कर रहे हैं। मैं अपने आप में परेशान हूं। बट मैं अपने हस्बैंड या अपने पार्टनर को खुश करने के लिए उस चीज को डील कर रही हूं। वह ज्यादा देर रुक नहीं सकता। दैट बिकम्स टॉक्सिक। क्योंकि हम प्यार में भी टॉक्सिसिटी देखते हैं। रिलेशनशिप्स में भी टॉक्सिसिटी देखते हैं। जहां एक इंसान दूसरे इंसान के लिए ओवर द
(05:59) बोर्ड जाके कर रहा है। सामने वाला कहता है मैंने तो नहीं कहा मेरे लिए करो। बट यह इंसान कर रहा है और वह उसे रिसीव कर रहा है। तो टॉक्सिसिटी वहां आएगी ही आएगी। क्योंकि एक गिवर बन रहा है, एक रिसीवर बन रहा है। इट्स नॉट बैलेंस्ड। टॉक्सिसिटी आती है। जहां दोनों जने आपस में घुल रहे हैं एक दूसरे के साथ। दे आर स्पाइरलिंग बिकॉज़ ऑफ़ द नेगेटिव्स और द पार्ट्स दैट आर नॉट वर्किंग। हेल्दी रिलेशनशिप में प्रॉब्लम्स आती हैं। बात होती है कि चलो आओ बात करें। इसे सुलझाते हैं। इसकी तह तक जाते हैं। कुछ स्ट्रगल्स, कुछ आप गार्ड रेल्स बनाते हो कि चलो अगर यह दिक्कत हमें
(06:40) बार-बार आ रही है, तो लेट्स मेक सम रूल्स फॉर यू एंड मी बोथ। कि हम उस चीज से अबाइड करेंगे। फॉर एग्जांपल सोशल मीडिया और फोंस यूसेज सबसे बड़ा एक कारण बनता जा रहा है रिलेशनशिप में दूरियों का कि रात को सोने से पहले एक जना डूम स्क्रोल करना रुकता ही नहीं है। या बाथरूम में जाके फोन पे बैठ जाते हैं। सो व्हाट हैपेंस इज़ द हेल्दी रिलेशनशिप इज़ नाउ गोइंग टुवर्ड्स अनहेल्ी रिलेशनशिप। बिकॉज़ वन ऑफ़ अस उसकी जरूरत है। मुझे शांति चाहिए। मुझे एकांत चाहिए। दूसरा कहता है मेरी सारी बातें सुनो, नैगिंग सुनो या केओस सुनो या जनरल बातें सुनो। बट सामने वाला शायद उस ज़ोन में ना
(07:22) हो। आजकल ज़ों्स भी आ गए हैं। आज मैं ज़ोन में हूं। आज मैं ज़ोन में नहीं हूं। सो इट्स नॉट जस्ट टॉक्सिसिटी। इट इज़ ज़ोनिंग आउट एंड ज़ोनिंग इन। ट्यूनिंग इन एंड ट्यूनिंग आउट। नंबिंग इन एंड नंबिंग आउट। बहुत सारे ऐसे फ्रेजेस आ गए हैं जो कपल्स या फैमिलीज़ में मैं सुनती हूं। वेयर दे आर टॉकिंग अबाउट हाउ दे आर फीलिंग बाय सेइंग मैं तो नम्ड आउट हूं मुझसे ना बात करें। हस्बैंड सेज़ मुझे डीप कनेक्शन ही नहीं फील होता। वाइफ सेज़ मैं वेट करती हूं हस्बैंड से बात करने की। वो आते हैं बात ही नहीं करते। सो स्टोरीज और कहानियां जो हम कहते हैं, नैरेटिव्स जो हम कहते हैं, सबके
(08:01) वर्जनंस हैं। बट रियलिटी क्या है? कि मैं और मेरा पार्टनर हम हेल्दी नहीं बना पा रहे। और हेल्दी बनाने के लिए आई थिंक सबसे जरूरी टू मूव फ्रॉम अ टॉक्सिक रिलेशनशिप टू अ हेल्दी रिलेशनशिप इज़ पॉसिबल। बट वह पॉसिबिलिटी क्या है? जब हम दोनों अपने ऊपर काम करने के लिए रेडी हो। बट बहुत बार मैंने रिसेंटली देखा है जहां कपल्स अगर थेरेपी में भी आते हैं तो वो उसे एक माध्यम बना लेते हैं सामने वाले को समझाने का। आप उनको समझाएं। आप उनको समझाएं। मैं क्यों समझाऊं? रिलेशनशिप काउंसलिंग इज नॉट टू रिमूव योर टॉक्सिसिटी और योर टॉक्सिसिटी। अगर आपको अपने पे काम करना है
(08:45) तो वह एक तरीका है टॉक्सिसिटी से बाहर आने का। जब मुझे समझना है कि मैं अपने रिलेशनशिप को ठीक कैसे कर सकती हूं। वो सोच मेरी मुझे उस टॉक्सिसिटी से उठाती है। ना कि मैं यह सोचूं हमारा तो कुछ नहीं हो सकता। हम दोनों तो बहुत ही खराब ज़ोन में हैं। क्योंकि सामने वाला मेरी बात नहीं सुनता। तो अब मुझे किसी को डालना पड़ेगा बीच में जो इनको समझा सके। वह सोच और वह तरीका ही अलग चला गया। यू आर ऑलरेडी आउट ऑफ द रिलेशनशिप। जहां आप तीसरे बंदे को इनवॉल्व कर रहे हो किसी को समझाने के लिए वहां आप रिलेशनशिप की कड़ी कमजोर कर रहे हो। सो प्रॉब्लम इज नॉट टॉक्सिसिटी और
(09:23) हेल्दी। क्योंकि हर रिलेशनशिप इस पूरे पेंडुलम में स्वे होता है। हर हेल्दी रिलेशनशिप कभी-कभी टॉक्सिसिटी की तरफ भी जाता है और हर टॉक्सिक रिलेशनशिप कभी-कभी हेल्दी भी हो सकता है। आपने जो कहा कुछ देर पहले कि हेल्दी रिलेशनशिप में एक वजह चाहिए होती है। अब मैं इसको थोड़ा अलग तरीके से पूछती हूं। कई बार एक ही वजह होती हैं या कुछ वजह होती है जिसके कारण टिके रहते हैं। हम तो ऐसे ये पता होने के बावजूद कि रिलेशनशिप मुझे हर्ट कर रहा है या यही है जो मेरी परेशानियों की वजह है तब भी हम उसे छोड़ नहीं पाते। क्या वो एक या दो वजह ही है जिसके कारण हम टिके रहते हैं। है तो
(09:59) क्या है? उम कहीं ना कहीं हेल्दी रिलेशनशिप्स में जैसे मैंने कहा एक वह कारण चाहिए पर हर रिलेशनशिप में अगर आप देखो तो अगर सफरिंग है, प्रॉब्लम्स हैं और प्रॉब्लम्स नंबर से ज्यादा हैं और आपको उस रिलेशनशिप की पॉजिटिव थोड़ी कम दिख रही है। बट फिर भी हम टिके हुए हैं। डेफिनेटली आपके पर्सनल रीज़ंस हैं। द फर्स्ट थिंग इन अ रिलेशनशिप इज़ टू टेक ओनरशिप ऑफ़ योर पार्ट ऑफ़ इट। कि मैं इसमें क्या कर रही हूं या मैं क्या कर रहा हूं। जरूरी नहीं है कि मुझे पहले पूरा अकाउंट चाहिए और एक बैलेंस शीट चाहिए। A ने यह किया और B ने यह किया। नहीं। जब मैं एक रिलेशनशिप की
(10:41) तरफ देख रही हूं तो पहले मुझे यह समझना है इसमें मैं क्या कर रही हूं। अपना अकाउंट लेना। और उस अकाउंट में बहुत सारे कारण हो सकते हैं। जैसे मे बी मोस्ट वुमेन आई नो आज भी हमारे इंडिया में ऐसे बहुत सारी फैमिलीज हैं जहां लेडीज आके बोलती है हमारे पास वापस जाने के लिए जगह नहीं है। हमें छोड़ दिया गया है। बहुत सारे पेरेंट्स से मिलती हूं जहां वो कहते हैं अब यही तुम्हारा ससुराल ही तुम्हारा घर है। सो देयर इज़ नो एक्सेप्टेंस। देयर इज़ नो सेफ प्लेस टू गो बैक। तो एक इंसान के लिए उसे पता है कि अब जो करना है मुझे यहीं करना है। हो सकता है हस्बैंड के लिए
(11:19) भी हो या आदमी के लिए भी हो कि अपना घर छोड़ के अब मैं कहां जाऊं। तो वो भी बेचारा रोज आ ही रहा है। बट प्रॉब्लम यह है जब हम ऐसी सिचुएशंस में होते हैं जहां यह प्रॉब्लम्स आती हैं जैसे अकेलापन, लैक ऑफ सेफ स्पेस टू गो बैक। कोई और है नहीं जिंदगी में जो हमारे को सपोर्ट या हेल्प करे या अपने ही कोर बिलीव्स कि मेरे को तो यह मुझे तो यहीं रहना है। मैं यहां से नहीं हिल सकता या हिल सकती। मुझे इसको छोड़ना नहीं है। इसे मुझे छोड़ना नहीं है। हमारी सोच बचपन से कंडीशनिंग भी हुई हुई है। हमें बचपन से मुझे तो बचपन से यही सुनाया गया था कि यही है। यही हस्बैंड है।
(12:00) इनसे ही शादी करनी है और उनके हिसाब से रहना है। सो जो वो एक कंडीशनिंग से हम इंडिया में स्पेशली यहां पर जो हम कल्चरली बच्चों को ट्रेन करते हैं लिटरली वह भी एक कारण अपने मन का बनता है कि छोड़ नहीं सकते। एंड वन ऑफ द वेरी इंपॉर्टेंट रीज़ंस जो मुझे लगता है हेल्दी रिलेशनशिप्स फॉल इंटू द टॉक्सिक कैटेगरी या कारण जिसकी वजह से ये प्रॉब्लम्स आती है इज़ आइसोलेशन अकेलापन कॉन्फिडेंस नहीं है तो अक्सर प्यार नहीं हम इस आइसोलेशन की वजह से ऐसे रिश्ते में टिके हैं क्योंकि अकेलापन इतना ज्यादा अंदर से लगता है कि अगर यह नहीं हुए तो मैं क्या करूंगा
(12:40) या मैं क्या करूंगी तो हम उसी चीज को फिर से पकड़ने लगते हैं कि यही है यही है यही है क्योंकि कहीं ना कहीं ना जब आप दो लोग एक रिश्ते में आते हो और एक अरसा बीत जाता है तो वह कॉन्फिडेंस भी कहीं ना कहीं दो लोगों का मिलकर होता है। सडनली आपको लगे कि आप अकेले हो तो आपका कॉन्फिडेंस कहीं ना कहीं कभी वोबल करता है और वह वोबल जो है कॉन्फिडेंस का वह आपको आगे नहीं बढ़ने देता। वो आपको डराता है। वो आपको कंफ्यूज करता है। स्पेशली अगर आप मैरिटल रिलेशनशिप्स की बात करो तो बच्चे होते हैं बीच में। तो बच्चों का सोच के बहुत बार कपल्स जिंदगी को सिर्फ खींच रहे हैं।
(13:22) बिकॉज़ उन्हें पता है कि बच्चे बड़े करने हैं। नॉट रियलाइजिंग कि बच्चे देख रहे हैं। और बच्चों को जो समझ आ रहा है वो देखकर समझ आ रहा है ना कि मैं क्या बोल रही हूं या सामने वाला क्या बोल रहा है। और जब वो बच्चे यह देख रहे हैं कि एक जने को सफर करना है। तो प्रोबेबिलिटी है कि वह भी उस चीज को एक्सेप्ट करें और यहीं पर जनरेशनली ट्रॉमा पास ऑन होता है। जब हम रिलेशनशिप्स को हैंडल नहीं कर पाते और हम उन्हें खींचते जाते हैं, खींचते जाते हैं विदाउट एक्चुअली मैनेजिंग देम विदाउट सर्विसिंग आवर रिलेशनशिप्स। तो वो रिलेशनशिप्स कहीं ना कहीं टॉक्सिक
(14:02) होते हैं जो हम कहते हैं जंग लगते हैं। एक नई गाड़ी को भी सर्विस की जरूरत होती है। तो हमें यह क्यों नहीं लगता कि हर रिलेशनशिप को भी एक सर्विस की जरूरत होती है। एनुअली अपने रिलेशनशिप का एक अकाउंट बनाना। आपस में डिस्कस करना कि अच्छा अब हम आगे कैसे कर सकते हैं या हमने वहां क्या किया? जब हम उस चीज को अकाउंटेबिलिटी में डालते हैं, इट ओनली ब्रिंग्स अस क्लोज़र। हमारी प्रॉब्लम यह है हम चलते जाते हैं चलते जाते हैं चलते जाते हैं यह सोच के नहीं अब तो खींचना ही है दो द ट्रेंड इज चेंजिंग डेफिनेटली बट आई स्टिल फील अ लॉट ऑफ़ अस आर स्टिल
(14:43) स्टक इन लूप्स ऑफ़ आवर ओन और यह लूप बाहर नहीं है। आप ढूंढने जाओगे आपको लूप किसी फैमिली में नहीं मिलेगा। दिस लूप इज़ इन द माइंड। आप उनके बिहेवियर में देखोगे। जब आप किसी को देखते हो बहुत कंफ्यूज्ड। आजकल एंजायटी, डिप्रेशन ऑल दीज़ प्रॉब्लम्स आर आल्सो सो हाई। क्योंकि रिलेशनशिप्स में देयर इज़ सो मच मेस अप। हम रिलेशनशिप्स में सुकून ढूंढने जाते हैं। बट सुकून नहीं हम वहां से सिर्फ डर लेकर आते हैं बहुत बार। और वो डर हमें सिर्फ अपने अंदर ही सोचने पे मजबूर करता है। एंड फिर हम कॉम्प्रोमाइज करते हैं। एक रिलेशनशिप कनेक्शन पे बनता है ना कि कॉम्प्रोमाइज
(15:26) और कंपैरिजन पे। आपके पास इतने सारे केस आते हैं और आपने अभी कहा कि ट्रेंड इज़ चेंजिंग। कुछ समय पहले हम लोगों ने देखा ग्रे डिवोर्स केसेस बहुत आए जो जनरली आफ्टर 50 55 इस तरह के केसेस बहुत आए। फिर अभी हम देख रहे हैं रिलेशनशिप में हार्म का बी इटसेल्फ हार्म या फिर आपके पार्टनर को हार्म करना ये हम बहुत देख रहे हैं। हालांकि अभी भी अगर हम ओवरऑल बात करें तो ये एक बहुत कम परसेंटेज है उन रिलेशनशिप्स की। स्टिल मैक्सिमम आर सफरिंग वो अभी भी वहीं पर हैं। वो उसी रिलेशनशिप में है। हर दिन सफर कर रहे हैं। बट क्या लो सेल्फ एस्टीम इसकी वजह है
(16:01) करिश्मा कि हम निकल नहीं पाते। % 1120% इट्स लो सेल्फ एस्टीम एंड एक सोसाइटल प्रेशर जो हमें कंफ्यूज करता है क्या हम समर्थ हैं सक्षम हैं कि हम अपने आप को हैंडल कर सकें। वो एक डर है जो हम कंटीन्यूअसली रोज जीते हैं। ग्रे डिवोर्स इज़ वेरी वेरी नॉट पॉपुलर बट ग्रे डिवोर्स इज़ वेरी प्रवेलेंट। जहां हस्बैंड वाइफ आर जस्ट कोएस्टिंग, कोपरेंटिंग, कोलिविंग अपने-अपने कमरों में हैं। अपनी-अपनी जिंदगियों में है। पर बच्चों के लिए साथ हैं। प्रॉब्लम इज़ ऊपर से तो बिल्कुल ठीक लगता है। हम साथ-साथ हैं वाली फैमिली लगती
(16:46) है। बट द रियलिटी इज़ कि जो बच्चे नोटिस कर रहे हैं, जो अंडरकरेंट वहां बैठ के फील होता है, दैट अंडरकरेंट इज़ नॉट ओके। एंड दैट अंडर करंट इज फेल्ट बाय एवरीबॉडी। अगर मैं बोलूं कि जी सपोज़ एक हस्बैंड वाइफ में हस्बैंड इज़ एट फॉल्ट अकॉर्डिंग टू द वाइफ और द वाइफ इज़ एट फॉल्ट बिकॉज़ ऑफ़ अकॉर्डिंग टू द हस्बैंड। बट मैं यह बोलूं कि वो अंडर करंट हस्बैंड को नहीं फील हो रहा या वाइफ को नहीं फील हो रहा या उनमें से एक भी खुश है। नॉट पॉसिबल। बोथ आर अंडरगोइंग देयर ओन स्टोरीज़ ऑफ़ अनहैपीनेस। ब्लेम गेम है, कंपैरिजंस हैं। खींचतान है बच्चों का। बच्चों को पैसे लुटाए जाते
(17:31) हैं। एक [गला साफ़ करने की आवाज़] ज्यादा देता है अपना पावर दिखाने के लिए, एक अपना कंट्रोल जताने के लिए। डिसिप्लिनिंग बहुत ज्यादा होता है। सो व्हाट हैपेंस इज़ वो जो नोज़ है वो टाइटन होती है बच्चों की गर्दन पर। या जो कॉमन चीजें हैं क्योंकि आप एक दूसरे के तो गले तक नहीं पहुंच पा रहे। सो इन ऑल दीज़ ग्रे डिवोर्सेस और दीज़ साइलेंट कोपेरेंटिंग प्लेटफॉर्म्स हो क्या रहा है? सफरर्स आर एक्चुअली द चिल्ड्रन। बिकॉज़ वो जो कहानियां पढ़ रहे हैं या समझ रहे हैं उन्हें लगता है इट्स ओके टू लिव लाइक दिस। इट्स अ चॉइस। फिर अगर अब आपकी मदर बोले 10
(18:09) साल बाद कि मैंने आपके लिए यह सैक्रिफाइस किया। तो बच्चा भी पलट कर बोलता है मैंने तो नहीं कहा था। आप जी लेते अपनी जिंदगी। सो इट इज़ वेरीेंट अगेन कि एज कपल्स एज इंडिविजुअल्स हम ओनर्स अपने पे रखें। हम सेंस ऑफ ओनरशिप, सेंस ऑफ़ रिस्पांसिबिलिटी, सेंस ऑफ़ अकाउंटेबिलिटी ऑफ़ माय डिसीजंस। जरूरी नहीं है कि मुझे अपने 10 साल के या 12 साल के बच्चे का ही सिर्फ सोचना है। और यह सोच-सच के मैं आज की अपनी जिंदगी भी खराब करूं। मे बी किसी को लगता हो कि बोलना बहुत आसान है। बिकॉज़ एवरीबॉडी इज़ लिविंग देयर एक्सपीरियंस। आई एम नॉट डिसरिस्पेक्टिंग बट मुझे ऐसे लगता है कि
(18:49) यह जो बच्चे हैं जिनकी वजह से हम सोच रहे हैं हम सैक्रिफाइस कर रहे हैं। यह बच्चे हमारी सैक्रिफाइस को भी सफरिंग देख रहे हैं। एंड यह बड़े होकर आई गारंटी यह बड़े होकर कह रहे हैं आई डोंट वांट टू बी लाइक हर। आई डोंट वांट हर इन माय लाइफ लाइक दैट। क्योंकि कहीं ना कहीं उनके लिए भी वह ट्रॉमा था टू सी देयर मदर और देयर फादर अनहैपी। एंड दे आर ओनली एक्सेप्टिंग एंड अंडरस्टैंडिंग कि अब हमें इसमें कैसे रहना है। और फिर हर बच्चा अपनी कोपिंग मैकेनिज्म ढूंढ लेता है। कुछ एडिक्शंस में जाते हैं। कुछ बहुत अच्छा करते हैं और कुछ कहीं ना कहीं गुम जाते हैं दोस्तों यारों
(19:29) में। बट हर बच्चा अपने आप से कोप कर लेता है इस पूरे रिलेशनशिप ट्रॉमा को लेके। एंड दिस इज कॉल्ड फैमिली ट्रॉमा। और बाद में वो शायद उनके रिलेशनशिप में दिखते हैं। अब्सोलुटली। करिश्मा जनरली वैसे तो अभी ये बहुत आने लगा कि अब ऐसा नहीं है कि सिर्फ महिलाएं सफर कर रही हैं। बट स्टिल नंबर ज्यादा है। मेरे पास बहुत सारे या मैं सोशल मीडिया पे भी देखती हूं बहुत सारी ऐसी महिलाएं जो बहुत अच्छा कर रही थी करियर वाइज, जॉब वाइज बहुत पढ़ी लिखी। बट जब वो एक शादी में एंटर करती हैं तो वो अपने करियर और जॉब को पीछे कर देती हैं। हो सकता है वो मदरहुड ब्रेक के कारण या
(20:03) बहुत सारी चीजों के कारण। फिर एक समय आता है जब उन्हें लगता है कि यह रिश्ता अब इसमें नहीं रहना है। पर तब वापस से जिंदगी शुरू करना मुश्किल होता है। ऐसी महिलाएं आपके पास भी केस आते होंगे। आप उनके लिए क्या कहना चाहेंगी? क्योंकि वो फिर अब इसी डर से कि अब क्या करूं? जनरली बहुत सारी डालती हैं कि कुछ ऐसा आप हमें बता दीजिए कि शायद हम वापस से काम करने लगे, अर्न करने लगे तो फिर हम निकल जाएंगे। आई थिंक अबब्सोलुटली बहुत रेलेवेंट है। ग्रे डिवोर्सेस, डिवोर्सेस, सेपरेशंस, प्रॉब्लम्स बहुत सारे इशूज़ हम देखते हैं जिसकी वजह से लोग अलग हो जाते हैं। और उस
(20:40) पूरी खींचातानी में हमारा कॉन्फिडेंस कहीं बिल्कुल ही खो जाता है। और जब आप अकेले रहते हो बहुत अरसे तक तो यू ऑटोमेटिकली स्टार्ट फीलिंग श्रंक कि आप श्रिंक हो रहे हो। और उसमें कॉन्फिडेंस नहीं आपके स्किल सेट्स, आपकी थिंकिंग प्रोसेस, आपका वे ऑफ लाइफ सब कुछ कहीं ना कहीं अफेक्ट होता है। और उस फियर से भी हम क्योंकि मैं उस चीज को इन्वज़ करती हूं तो मैं आज अपना आज नहीं खराब कर रही इसलिए मैं उस रिलेशनशिप को बर्दाश्त कर रही हूं। बट बहुत लोग हैं जो यह पहल करते हैं कि नहीं अब बस आई वांट टू स्टॉप। आई थिंक इट्स अ वेरी पावरफुल
(21:16) डिसीजन दैट दे फर्स्ट टेक फॉर देमसेल्व्स। उस डिसीजन को हम बहुत बार रिग्रेट करेंगे अपनी लाइफ में कि अरे साथ होते यह होता वो होता। बट कहीं ना कहीं आई फील फॉर पीपल हु हैव टेकन दैट स्टेप कि मुझे यह टॉक्सिसिटी अपनी लाइफ में नहीं चाहिए। द फर्स्ट थिंग इज़ दे हैव ऑनर्ड देमसेल्व्स। अपने आपको अपने अंदर के सोल को दे हैव ऑनर्ड। दे हैव एक्सेप्टेड दैट दिस वाज़ नॉट वर्किंग फॉर मी। सो आई हैव स्टेप्ड आउट ऑफ इट। द कॉन्फिडेंस टू हैंडल दैट इज कमिंग फ्रॉम योर। हमारी प्रॉब्लम यह है सोसाइटी भी तो हमारे जैसे लोगों से ही बनी है। लोगों का
(21:57) काम है बात करना। प्रॉब्लम कहां आती है? जब हम अपने दिमाग में उस सोसाइटी को ले जाते हैं और अपने दिमाग में सोचते हैं कि उन्होंने ऐसे बोला होगा, ऐसे सोच रहे होंगे, ऐसे सोच रहे होंगे। उससे क्या होता है? आई एम रिड्यूसिंग माय कैपेसिटी। आई एम नेगोइंग नेगेटिव। सो द प्रॉब्लम इज कि जो लोग बोल रहे हैं वो बोल रहे हो या ना मैंने अपने दिमाग में बात बिठा ली तो मैं ऑलरेडी श्रिंक हो गई और वो श्रिंक करते करते वी एक्चुअली रीच रॉक बॉटम बहुत सारे इंस्टीटशंस फाउंडेशंस हैं जहां दे गिव हेल्प टू वुमेन हु वांट टू डू सेकंड इनिंग्स फॉर एग्जांपल टाटा करता है और
(22:36) अदरवाइज हमने ना अपनी लाइफ में बहुत सारी चीजें सैक्रिफाइस की होती हैं आगे बढ़ने के लिए रिश्तों में एंड उन चीजों के लिए हम अपनी बहुत सारी ऐसी चीजें और चाहतें छोड़ देते हैं। समटाइ्स इट्स अबाउट टेकिंग अकाउंट ऑफ मुझे क्या करना था? अपने साथ बैठकर अपने आप में समझना कि मुझे करना क्या है? मुझे आगे कैसे बढ़ना है। सिर्फ पैसे नहीं कमाने, इज्जत कमानी है। अपना कॉन्फिडेंस जीतना है। अपने आपको शीशे में देखकर बोलना है गुड जॉब। दीज़ आर स्टोरीज दैट विल मेक यू फील कॉन्फिडेंट ऑफ व्हाट यू आर डूइंग। उसके लिए आप सपोर्ट ले सकते हो। आप फिर से पढ़ाई कर सकते हो। मे बी फॉर
(23:20) अ 50 ईयर ओल्ड इट्स नॉट अ गुड आईडिया टू स्टडी मे बी बट एट द सेम टाइम आज आपके पास सोशल मीडिया है आज आपके पास कोर्सेज हैं आपके पास एआई है टेक्नोलॉजी को अगर हम सही मायनों में यूज़ करें तो एक इंसान के लिए वह उसे ऑलरेडी एक लेवल अप दे देता है और जब आपको वह लेवल अप मिले आप अपनी लाइफ को लीप आउट करेंगे दैट लीप ऑफ़ फेथ दैट यू हैव टेकन एट दैट टाइम वह ऑलरेडी अपने आप में एक करजियस स्टेप था और आपको यह सोचना है जो आपने किया आपके जैसे 10 लोगों ने सोचकर भी नहीं किया। दैट इज़ अ फर्स्ट स्टेप बट अगेन इट्स इज़ियर एट देन डन। कुछ लोग जाकर
(24:01) भी रिग्रेट करते हैं। एंड देन दे कम बैक एंड देन दे टेल देमसेल्व्स मुझे सफर करना है। और कुछ अनफॉर्चूनेटली आल्सो यह इंसिडेंट्स हैं व्हेयर दे ट्राई टू हार्म देमसेल्व्स लाइक यू सेड। और दे हार्म दी अदर पर्सन। हार्म की जो बात है वहां पर यह प्रॉब्लम है कि रिलेशनशिप्स में हार्म इज द इज़िएस्ट आउट ऑफ स्पाइट आउट ऑफ एंगर मुझे गुस्सा आ गया तो मैंने अपनी नस काट ली या मैंने अपने सामने वाले को मार दिया वायलेंस रेज इज नॉट लिमिटेड टू ओनली फिजिकल अब्यूज इमोशनल यस ये मैं आपसे जानती हूं इमोशनल मेंटल वर्बल अब्यूज वर्बली ट्राइंग टू डिमिन सोशल अब्यूज आजकल लोग मीडिया में
(24:44) इतना लिखने लग गए पीछे। आई थिंक आपने वो शायद आई थिंक मैंने कोई कैंपेन देखा था वेयर वन गर्ल वाज़ ट्राइंग टू डिफेम अ बॉय और अ बॉय वाज़ ट्राइंग टू डिफेम अ गर्ल। यूपी के किसी स्मॉल टाउन की बात है। वेयर जस्ट बिकॉज़ उस लड़की ने मना कर दिया। उस लड़के ने इश्तियार छाप कर पूरे शहर में डाल दिए। सो, व्हाट हैप्पेंस इज़ हम सामने वाले को पूरी तरह से डाउन कर देते हैं। और हमें जनरली सिर्फ किसी भी रिलेशनशिप में फिजिकल अब्यूज दिखता है कि हाथ क्यों उठाया? और इस फिजिकल अब्यूज कि भ मुझे ऐसे लगता है कि एक बहुत विचित्र एक तरीका है इसको देखने का।
(25:23) फिजिकल अब्यूज में हम जनरली कहते हैं अह कि अगर हस्बैंड वाइफ या किसी रिलेशनशिप की बात करें। आजकल तो आपको दूसरे केसेस भी सुनने को मिल रहे हैं। हां वुमेन आर आल्सो नॉट स्टॉपिंग बट व्हेन अ मैन इज़ ट्राइंग टू फिजिकली अब्यूज अ गर्ल और यू नो कभी वायलेंस आता है तो हम यह भूल जाते हैं व्हाट वुड हैव बीन द रीज़न फॉर दी अदर पर्सन टू हैव रीच्ड देयर जनरली आई एम नॉट सेइंग हर इंसान को एक आप यू कैन नॉट गिव लिवरेज टू एवरीबॉडी बट इन वेरी जनरल सेंस जब आप हस्बैंड वाइफ की बात करते हैं और आप फिजिकल वायलेंस या अब्यूज की बात करते हैं। बहुत बार रेज वेटिंग जो
(26:08) आजकल एक वर्ड है जहां हम सामने वाले को उकसाते हैं। हम उसे पुश करते हैं। एज अ वुमेन आई एम ट्राइंग टू पुश माय पार्टनर टू हिज लिमिट। यू डिड दिस व्हाई डिड यू डू दिस? टेल मी व्हाई डिड यू डू दिस? आई वांट टू नो। मैंने ऐसे किया तो आपने ऐसे क्यों किया? आई एम रे वेटिंग दी अदर पर्सन। आई एम गोइंग एंड प्रेसिंग ऑल द बटंस टू ट्रिगर दी अदर पर्सन राइट एंड देन व्हाट डू आई अचीव दी अदर पर्सन हिट्स एंड व्हाट डू आई डिक्लेयर व्हाई डिड ही हिट मी सो व्हाट आई हैव डन हैज़ गॉन टू द डॉग्स नाउ अह अ लॉट ऑफ़ पीपल व्हाई माइट थिंक दैट व्हाई एम आ ओनली टॉकिंग अबाउट मेन आई एम
(26:50) नॉट टॉकिंग अबाउट मेन और वी वुमेन आई एम जनरली सेइंग जब एक पार्टनर दूसरे पार्टनर को पोक प्रवोक करता है उस पॉइंट पे लाता है। जहां सामने वाला कुछ बोल दे तो सारा ब्लेम गेम उस फिजिकल अब्यूज पे आ जाता है। व्हाट अबाउट द रेज वेटिंग दैट हैपेंड? हम एज वुमेन हम जनरली हम कभी नहीं सोचते कि हम सामने वाले को कितना पिन करते हैं। कितना निबल करते हैं उस पॉइंट तक कि सामने वाला यह हाथ उठाए। आई एम नॉट सेइंग हाथ उठाना इज़ फाइन। बट एट द सेम टाइम इज़ वर्बल अब्यूज इज़ इमोशनल अब्यूज फाइन। आप किसी को टेक्स्ट करते जा रहे हो। करते जा रहे हो,
(27:29) करते जा रहे हो, करते जा रहे हो, बोलते जा रहे हो, बोलते जा रहे हो, बोलते जा रहे हो। यू आर नॉट स्टॉपिंग पर थ्रेशहोल्ड तो सबका है ना। आई अंडरस्टैंड कि वायलेंस इज़ नॉट एन आंसर। बट वी एज पीपल हम में से कितने लोग समझते हैं कि एक रिश्ते में बाउंड्रीज़ बहुत जरूरी है। चाहे वह फिजिकल अब्यूज की हो, मेंटल अब्यूज की हो, इमोशनल वायलेंस की हो या सोशल अब्यूज की हो। देयर हैज़ टू बी अ बाउंड्री। एक सीमा बंधी होनी चाहिए। इसके आगे हम इसके बारे में नहीं बात करेंगे। हम बदतमीजी पर नहीं आएंगे। हम अब्यूज पर नहीं आएंगे। बहुत बार देखा है
(28:06) कपल्स एक दूसरे को हिंदी में अब्यूज कर रहे होते हैं। कोई रिस्पेक्ट फैक्टर नहीं है। कोई कोई सीमा नहीं है। कोई अंडरस्टैंडिंग नहीं है। समझ नहीं आता इतने एजुकेटेड कैसे हम वहां पहुंच जाते हैं। द प्रॉब्लम इज़ योर ब्रेन इज़ सो ट्रिगरर्ड। सो ट्रिगरर्ड कि आप सामने वाले को ट्रिगर करना चाहते हो। दिस बिकम्स टॉक्सिक। दी स्टोरीज बिकम टॉक्सिक। फिर हम जब अपनी दूसरे फैमिली मेंबर्स को जाके या अपने फ्रेंड्स को बताते हैं इसके बारे में। उसने यह किया मेरे साथ। उसने मुझे यह बोला ऐसे हुआ, वैसे हुआ। मैं क्या कर रही हूं? मैं सामने वाले की इमेज खराब कर रही हूं।
(28:45) मैं सामने वाले के बारे में और 10 लोग इकट्ठे कर रही हूं जो उसके बारे में मेरे जैसे सोचे। मैं तो ठीक हो जाऊंगी। बट उन सबका क्या? और फिर यह कहानी रोजमर्रा हो जाती है। और फिर आसपास की सोसाइटी जिसको हम इकट्ठा कर रहे थे, वह कहते हैं, यह तो रोज ही लड़ते हैं। यह तो हैं ही बेकार। इनका रिश्ता ही ऐसा है। जोर-जोर से आवाें आती है इनके घर से। वी जनरलाइज इट। कोई किसी के क्लेश में नहीं आना चाहता। पर जब क्लेश हो रहा है तो हम उनको हैंडल कैसे करते हैं? हम अपने आप को कैसे हैंडल करते हैं? मुझे ऐसा लगता है कि हेल्दी रिलेशनशिप हो या टॉक्सिक। एक
(29:21) रिलेशनशिप में बाउंड्रीज, रिस्पेक्ट, ऑनेस्टी और स्पेस ये चार पहलू हैं जो होने ही चाहिए। व्हेन आई एम माइंडफुल ऑफ दीज़ इन अ रिलेशनशिप वो रिलेशनशिप टॉक्सिक तो नहीं हो सकता। एंड मोर इंपॉर्टेंट एक हेल्दी और टॉक्सिक रिलेशनशिप आर सम वॉट टू साइड्स ऑफ़ द सेम कॉइन। द रिलेशनशिप। या तो वह हेल्दी होगा या वह टॉक्सिक होगा, हेड्स होगा या टेल्स होगा। मुझे ऐसे लगता है हाउ डस वन एनश्योर दैट टॉक्सिक ना हो और हेल्दी बने। राइट? सो उसमें आई थिंक एक रिलेशनशिप को हेल्दी बनाने के लिए आई ऑलवेज आस्क माय क्लाइंट्स व्हाट आर द रिसोर्सेज दैट यू
(30:08) हैव बिल्ट इन अ रिलेशनशिप? तो सबसे पहले उल्टा जब क्वेश्चन आता है, इसका मतलब क्या है? मैडम समझाएं। जब आप कोई रिश्ता बनाते हैं उस रिलेशनशिप में क्या आप कुछ रिसोर्सेज सेव करते हैं? कुछ ऐसी चीजें, यादें, मेमोरीज या कहानियां बनी हो जिनको जाकर हम याद कर कर हंस सके। और उस मोमेंट को हैंडल कर सके जब प्रॉब्लम आती है। प्रॉब्लम यह है आजकल की डेट में क्योंकि हमारे पास अपने लिए समय नहीं है तो रिश्तों के लिए समय निकालना इतना मुश्किल है कि हम रिश्तों को भी टाइम से चलाते हैं। अभी यह वाला, फिर यह वाला, फिर यह वाला, फिर यह वाला। हो तो गया। और
(30:53) कितना टाइम दूं वाइफ को? पैसे भी तो कमाने हैं। मुझे काम भी तो करना है। वाइफ कहती है बच्चे देखूं कि इनके साथ बैठूं सारा दिन। सो व्हाट वी आर डूइंग इज वी आर प्रॉब्लम सॉल्विंग। हम सिर्फ और सिर्फ प्रॉब्लम्स को सॉल्व कर रहे हैं। खाना बन गया, मेड आ गई, घर साफ हो गया, बच्चे आ गए, बच्चों का होमवर्क हो गया, हस्बैंड ने खाना खा लिया। सो जाओ। रोज रूटीन लाइफ। दिस इज़ प्रॉब्लम सॉल्विंग। दिस इज़ लिविंग डेली। हम जब काम भी करते हैं, तो हम पैसे जमा करते हैं बैंक में, लॉकर्स में, शिप्स में, म्यूच्यूल फंड में, गोल्ड में। और हम कहते हैं अपने आप को कि ये हमारा
(31:29) सिक्योरिटी डिपॉजिट है। जब हमें जरूरत होगी हम इसमें से निकालेंगे। तो रिलेशनशिप के लिए वो सिक्योरिटी डिपॉजिट क्यों नहीं है? वो सिप क्यों नहीं बनाया? और वो जो सिप बनाना है एक रिलेशनशिप के लिए आई थिंक वो भी मंथली बेसिस पे होना चाहिए। अगर आप वीकली नहीं कर सकते। जहां डेट्स कॉन्वर्सेशंस टाइम आउट अलोन अकेले बैठकर बातें करना घंटों एक दूसरे के साथ समय बिताना। दैट इज एक्चुअली द बैंक, द पावर बैंक, द सिक्योरिटी डिपॉजिट। उसमें से फिर आप चीजें निकाल सकते हो। वहां बनता है आपका कॉन्फिडेंस। आपका लव मजबूत होता है। आपकी रिस्पेक्ट मजबूत होती है। आपके पिलर्स ऑफ
(32:11) स्ट्रेंथ बाउंड्रीज मजबूत होती हैं। और आपका सेल्फ कंट्रोल वैलिडेट करता है। यह सेफ है। सेफ्टी। एक रिलेशनशिप जब सेफ नहीं फील करता तब वह रिलेशनशिप टॉक्सिसिटी की तरफ जाता है। जब एक रिलेशनशिप में आपको सेफ्टी फील होती है इमोशनली, फिजिकली, मेंटली, सोशली तब वो हेल्दी की तरफ जाता है। और बहुत बार हेल्दी रिलेशनशिप्स सेफ्टी होते हैं तो दे लैंड अप ऑन द टॉक्सिसिटी साइड। बिकॉज़ टॉक्सिसिटी इज़ नथिंग बट लैक ऑफ़ सेफ्टी। इसीलिए गंदा पानी आता है। जब आपकी ड्रेन पाइप एसी की खराब होगी तो पानी अंदर आता है। उसी तरह से जब आपके रिलेशनशिप में एक सेफ्टी नेट खत्म
(32:55) होती है तो सारी जो क्लॉगिंग है वह भी अंदर ही आती है रिलेशनशिप के। तुमने यह किया, मैंने यह किया। ब्लेम गेम्स। सबसे क्लासिक वे ऑफ़ चेकिंग इज़ ब्लेम गेम्स। बच्चे एज यंग एस सेवन एंड एट बोलते हैं। ये तो कहीं पे भी लड़ पड़ते हैं। कहीं भी शुरू हो जाते हैं। आई हैव सो मेनी चिल्ड्रन जो 16 17 की ऐज में होते हैं। काउंसलिंग के लिए आते हैं। देयर वन क्वेश्चन टू मी इज़ आंटी आप तो फैमिली काउंसलर हो। व्हाई डोंट यू सेपरेट बोथ ऑफ देम? इतना लड़ते हैं। कोई फायदा नहीं है हमें इनको देख के साथ। हमें डर लगता है इनसे बात करने में दोनों से क्योंकि लगता
(33:33) है अभी लड़े, अभी लड़े, अभी लड़े। इससे अच्छा है इन दोनों को अलग करो। एज चिल्ड्रन दे ओनली अंडरस्टैंड ऊपर ऊपर से। अब आप किसी पेरेंट को जाके यह नहीं बोल सकते कि जी आप अलग हो जाओ। आपका बच्चा कह रहा है आप दोनों बहुत लड़ते हो। बिकॉज़ इट्स वेरी डिफिकल्ट टू एक्सेप्ट एज अ पेरेंट। क्योंकि हर पेरेंट को लगता है मेरे समेत कि हम तो बेस्ट कर रहे हैं अपने बच्चों के लिए। बट द रियलिटी इज़ कि बच्चे यह इनफेंस निकाल रहे हैं। स्पेशली ये जेन अल्फा और ये जेन ज़ है दे आर वेरी क्विक। दे आर ऑलरेडी क्लियर। आई डोंट वांट टू गेट मैरिड। रिलेशनशिप है बट आई डोंट वांट टू
(34:10) कमिट एनीथिंग। आई विल डू अ प्रीन अप। दीज़ आर थिंग्स दैट आर ट्रेंडिंग नाउ। जहां बच्चे अपना कॉशन खुद ढूंढ रहे हैं। और उनके सबसे बड़े लाइव एग्जांपल्स ऑफ़ टॉक्सिक रिलेशनशिप इज़ पेरेंटल रिलेशनशिप। ऐसा नहीं बनाना अपना रिलेशनशिप। आई डोंट वांट माय रिलेशनशिप टू लुक लाइक माय पेरेंट्स रिलेशनशिप। सो दीज़ आर स्टोरीज वेयर चिल्ड्रन आर आल्सो मेकिंग देयर ओन स्टोरीज कि भाई ऐसे नहीं हो सकते। कहीं ना कहीं उल्टा भी है। आप बच्चों को देखोगे बहुत डिसरिस्पेक्ट कर रहे हैं अपने पेरेंट्स को, आसपास के लोगों को क्योंकि उन्हें लगता है अगर पापा कर सकते हैं तो मैं भी
(34:44) कर सकती हूं। मम्मा इतना मार सकती है अगर पापा को तो मैं भी कर सकता हूं। वी डोंट अंडरस्टैंड जो उसका रेपकाशन और लॉन्ग टर्म इफ़ेक्ट है। हाउ हॉरेबल दैट विल बी। बहुत सारे केसेस हम लोग देखते हैं जनरली सोशल मीडिया को वैसे भी हम लोगों ने एक रिफ्लेक्शन वो बना लिया कि वहां पर जो दिखता है सब ऐसा ही हम क्योंकि ज्यादातर समय उस बिता रहे हैं तो बहुत सारे या तो हमें उसमें दिखते हैं कि बहुत रोजी पिक्चर रिलेशनशिप्स की कुछ लोग हैं वो बस डेट्स पे जा रहे हैं, डिनर्स पे जा [गला साफ़ करने की आवाज़] रहे हैं, वैकेशंस पे जा रहे हैं और कुछ कपल्स हैं
(35:14) जो सिर्फ वहां पर शिकायतें डाल रहे हैं। किसी मैं चाहती हूं ऐसा हो बट मेरे हस्बैंड ये नहीं करते या मेरी वाइफ ऐसी होनी चाहिए। लेकिन वो ऐसी है। तो हम वो जो एक शायद जो आपने कहा कि हेल्थी रिलेशनशिप में लड़ाई भी होंगी तो प्यार भी होगा कमी होगी तो कुछ ना कुछ और अच्छा होगा पर हम ये बस टू साइड्स देखते हैं तो सोशल मीडिया या ये जो हमारी लाइफ है सोशल मीडिया के ऊपर कितना असर डाल रही है रिलेशनशिप पे आई थिंक प्रॉब्लम इज सोशल मीडिया इतना ज्यादा आ गया है हमारी लाइफ्स में कि अब हम लोगों को जज करने लगे हैं जैसा कंटेंट वोट डाल रहे हैं। फॉर एग्जांपल अगर मैंने कुछ
(35:58) जो कंटेंट देख रहे हैं उसके बेस पे भी हम रिलेशनशिप्स उसके बेस पे भी हम इनफेंसेस बना रहे हैं। हम कुछ कहानियां पढ़ते हैं। कुछ एग्जांपल्स देखते हैं। हम उन्हें इंबाइप करते हैं। हां इसके साथ ये हुआ इसलिए मेरे साथ भी यही हो रहा है। जब आप किसी और फ़ॉर एग्ज़ांपल अह रिसेंटली जो दो-तीन केसेस हुए हैं, उसके बाद देयर आर अ लॉट ऑफ़ क्वेश्चंस ऑन अरेंज्ड मैरिजेस कि करनी भी चाहिए या नहीं और करनी चाहिए तो कितने कंफर्ट में करनी चाहिए? कैसा कंफर्ट बच्चों को देना चाहिए? सो, देयर आर लॉट ऑफ़ क्यूरियोसिटीज़। सोशल मीडिया ने एक्चुअली क्या किया है? लाइक वी से द वर्ल्ड इज़ अ
(36:35) ग्लोबल विलेज। अब तो वर्ल्ड इज ओनली लिमिटेड टू मेटा एंड ऑल दी स्टोरीज ऑफ एआई एंड सोशल मीडिया पर आपको क्या दिखता है? बट इन कहानियों में बहुत बार जजमेंट्स हैं। कभी जजमेंट सामने हैं उन पर जो दिखा रहे हैं या अपने आप पर या अपने पार्टनर पे कि मैंने कुछ इनफ किया और मैंने बोला हां आदमी होते ही ऐसे हैं। करेक्ट है। तो मैं क्या करूंगी? उसको स्क्रीनशॉट करके अपने हस्बैंड को भेजूंगी या अपने पार्टनर को भेजूंगी। देखो Instagram भी मुझे यही कह रहा है। रील्स से हम मैसेज हां जी। तो अगर मैं कभी किसी पेरेंट को बोलूंगी या किसी पार्टनर को बोलूंगी, किसी
(37:16) कपल में, किसी पार्टनर को बोलूंगी कि एक दूसरे को WhatsApp करो। यूज़ टेक्नोलॉजी टू द बेस्ट ऑफ योर पर्पस एंड वेज़। तो, वह मुझे पूछेंगे क्या भेजूं? WhatsApp क्या करना है? मैसेज क्यों भेजना है? पीपल गो ब्लैंक। बिकॉज़ व्हाट वी हैव डन इज़ वी आर नॉट यूज़िंग द WhatsApp और मैसेजिंग बिकॉज़ वी वांट टु कनेक्ट विथ समवन। वह सिर्फ हमारी लड़ाई डेली रूटीनंस, सब्जेक्ट्स और मेमोरी के लिए है। बट एक्चुअली हम उसको क्यों यूज़ करते हैं? मीम्स भेजने के लिए, फॉरवर्ड्स भेजने के लिए, रील्स भेजने के लिए। सो, व्हाट वी आर डूइंग इज़ हम सोशल मीडिया के माध्यम से एक दूसरे को अपनी
(37:56) कहानी बताने की कोशिश करें। एवरीबॉडी इज वरिड अबाउट देमसेल्व्स। ऐसा कोई नहीं है जो सिर्फ सामने वाले का सोच रहा हो। हमें अगर यह भी लगता है ना कि नहीं नहीं मैं तो अपने पार्टनर का सोचती हूं। हमेशा सोचती हूं। आई एम टेलिंग यू मैन इज़ अ वेरी सेल्फिश एनिमल। हम सबसे पहले अपने बारे में सोचते हैं। आप बच्चों को देख लीजिए। एज ओल्ड एज 15 एज यंग एस वन। अगर आप एक 2 साल या चार साल के बच्चे को बोलते हैं ना बेटा मैं जरा मार्केट जा रही हूं। मैं क्या करूंगा? मेरा कैसे होगा? आप किसी छ साल के बच्चे को बोलो बेटा मैं तो घर छोड़ के जा रही हूं। दे विल नॉट आस्क आप कहां
(38:33) जा रहे हो? दे विल से मैं क्या करूंगा? मेरा कैसे होगा? सो वी आर ऑल वरिड अबाउट आवरसेल्व्स। सेम वे इन रिलेशनशिप्स सोशल मीडिया हैज़ क्रिएटेड दिस ड्रामा वेयर जजमेंट्स अबाउट मायसेल्फ, अबाउट दी अदर पर्सन और अबाउट माय पार्टनर इज़ बिगर दैन एनीथिंग। और वो सेल्फ वैलिडेटेड है क्योंकि उस चीज को इतने लाइक्स मिले हैं या एग्रीमेंट्स मिले हैं या थम्स अप मिले हैं तो मेरे को अपने पार्टनर को जताना है। सिर्फ तुम्हें ऐसे नहीं लगता यह बिल्कुल ठीक है। बहुत बार लेडीज या स्पेशली मैंने देखा है वुमेन दे एक्चुअली फाइंड रील्स दैट आर शेयरिंग देयर इमोशंस एंड दे पुट इट
(39:11) आउट टू देयर पार्टनर। हम चाहते हैं टू बी सीन टू बी हर्ड टू बी अंडरस्टुड। ये तीन चीजें हैं। एंड सोशल मीडिया इज एक्चुअली हेल्पिंग समवेयर सपोर्ट अस इन बीइंग एबल टू बी सीन इन बीइंग एबल टू बी हर्ड एंड इन बीइंग एबल टू बी अंडरस्टुड वैलिडेशन कि मैं जो हूं कोई मुझे उस तरह से देखे। मैं जैसे सुन रही हूं या सोच रही हूं। सामने वाला मुझे उस सोच में देखे। मैं क्या करना चाहती हूं और मेरे इंटेंशंस क्या हैं? सामने वाला समझ जाए। यही एक उम्मीद है हर ह्यूमन बीइंग की। टू बी सीन, टू बी हर्ट, टू बी अंडरस्टुड। प्रॉब्लम आती है जब आई
(39:58) ओनली बिकम अबाउट मी। आई फॉरगेट कि अ रिलेशनशिप इज़ अबाउट वी नॉट जस्ट मी। जब उस वी में सोचते हैं तो हम एक दूसरे का सोचते हैं। प्रॉब्लम यह है हम कभी-कभी उस वी में जाके भी मी को ढूंढते हैं। वहां पे वो वी घूम जाता है। फिर बिकमता है मी एंड माइन। फिर वहां गेम चेंज हो जाती है। सो एक्चुअली रिलेशनशिप्स आर अ डिस्टेंस यू कवर फ्रॉम मी टू वी। जहां हम दोनों रस्ते में मिले। दैट्स वी। एंड द पावर ऑफ वी इज़ हम एक दूसरे के लिए क्या कर सकते हैं? आई थिंक रिलेशनशिप्स में सबसे बड़ी पावर है द जॉय ऑफ़ गिविंग। द पावर ऑफ़ गिविंग। बट
(40:44) प्रॉब्लम यह है हमें बचपन से कंडीशनिंग दी गई है। अगर आप ए करोगे तो आपको बी मिलेगा। आज आपको मार्क्स लाओगे तो मैं आपको न्यू फोन लेके दूंगी। कॉज एंड इफेक्ट। हम हर चीज के लिए बच्चों को एक कैरेट देते हैं। आप यह कर लो। फिर मैं आपको अमेरिका ले जाऊंगी या मैं आपको जापान घूमने ले जाऊं। वी आर गिविंग देम रीज़ंस टू परफॉर्म परफॉर्मेंस अप्रोच। तो जब रिलेशनशिप में यही बच्चे आएंगे तो ये बच्चे बोलते हैं मैं अगर उनको यह दे रहा हूं या दे रही हूं तो मुझे क्या मिल रहा है? देन इट बिकम्स अ गिव एंड टेक। देन इट्स ट्रांजैक्शनल। फिर वो ना हेल्दी रिलेशनशिप है ना टॉक्सिक है।
(41:22) वो एक ट्रांजैक्शनल रिलेशनशिप है। गिव एंड टेक। एंड 99 कपल्स आउट ऑफ 100 एंड अप ओवर अ पीरियड ऑफ़ टाइम ओनली टॉकिंग ट्रांजैक्शंस। टिफिन ले गए बच्चों की फीस भर दी। बच्चों ने यह किया, बच्चों ने वो किया, मम्मी पापा का ऐसे करना है। वीर ओनली टॉकिंग ट्रांजैक्शंस। वी आर नॉट टॉकिंग लव। तो वो जो सिप की हम बात कर रहे थे वो तो कहीं गुम गई। आपने जो बात की वह सब तो है ही लेकिन मैं उन रिश्तों की बात करूंगी जहां सच में अब्यूज है, टॉक्सिसिटी है और वो मैं उन्हें टॉक्सिक भी नहीं कहूंगी। कहीं ना कहीं वो कभी टॉक्सिक होते हैं, कभी वो डेड हो चुके होते हैं। वहां
(41:59) पे सर्वाइवल मुश्किल है। लेकिन हमने बहुत से रिलेशनशिप में देखा बहुत सी फीमेल्स को फाइनेंशियल नॉलेज नहीं है कि आगे वो सर्वाइव कैसे करेंगी? क्योंकि जैसे मैंने पहले कहा कि वो जॉब्स छोड़ चुकी हैं, ब्रेक ले चुकी हैं या फिर उन्हें यह नहीं पता कि लीगली उनके पास राइट क्या है। हम कई बार बच्चों को संभालना पूरी तरह से उनके ऊपर आ जाएगा या बहुत सारी और चीजें कैसे निकले क्या हो। आपके पास भी क्या इस तरह के केसेस आते हैं कि फाइनेंशियल और लीगल लिटरेसी मैं कहूं ये बहुत जरूरी है। बहुत ज्यादा जरूरी है। दैट एज वुमेन हम यह रियलाइज़ करें कि फाइनेंशियल इंडिपेंडेंस
(42:37) इकोनॉमिक इंडिपेंडेंस जो हम कहते हैं वह एक बहुत बड़ी जरूरत है आज हर इंसान के लिए बिफोर दे गेट इनू अ रिलेशनशिप। सो दैट आप डिपेंडेंट नहीं हैं। आप इंडिपेंडेंट हैं। बट बहुत सारे लोग इन कारणों की वजह से दे आर स्टक इन डेड रिलेशनशिप्स एंड दे आर जस्ट ट्राइंग टू सर्वाइव। लाइक उठे हैं तो जी रहे हैं। टाइम हो गया सोने का तो सो रहे हैं। व्हेन दीज़ रिलेशनशिप्स आर डेड। द प्रॉब्लम इज हमारे अंदर कोई ना कोई एक ऐसी हलचल है जहां हमें लगता है कि अब नहीं हो पाएगा। अब हम नहीं कर सकते। बिकॉज़ मेरे पास तो पैसे नहीं है। मेरे पास कोई जगह
(43:20) नहीं है। सो लीगली आल्सो नोइंग कि मेरे यह राइट्स हैं। लीगल लिटरेसी जो हम बोलते हैं कि लेट्स एजुकेट पीपल अराउंड द वर्ल्ड। मैन और वुमेन अबाउट देयर राइट्स इन अ रिलेशनशिप और मैरिज। माय पॉइंट इज नोइंग द लीगल एंगल सो मेनी वुमेन हु आर एजुकेटेड वो जो एक कॉन्फिडेंस टू बी एबल टू चैलेंज समबडी और टू स्टेप योरसेल्फ आउट ऑफ समथिंग और टू स्टैंड अप फॉर योरसेल्फ वो जो एक करज है वो बहुत मुश्किल है। वो जेनुइनली हमारी इंडियन सोसाइटी में इज़ वेरी डिफिकल्ट फॉर अ वूमेन टू एक्सेप्ट एंड पुल हरसेल्फ अप। एंड व्हेन दैट हैपेंस देन देयर इज़ नो
(44:06) स्टॉपिंग अप बट इमोशनल लिटरेसी इज़ आल्सो इक्वलीेंट इमोशनल लिटरेसी इज़ अंडरस्टैंडिंग माय ओन थ्रेशहोल्ड्स अंडरस्टैंडिंग मेरा क्या लेवल है इस लेवल के आगे आई कैन नॉट टोलरेट तो उसके बाद व्हाट व्हाट नेक्स्ट फॉर मी एंड इमोशनली आई थिंक इट्स वेरीेंट टू अंडरस्टैंड फॉर एव्री वुमन कि एक इकोनॉमिकल और लीगल एजुकेशन आपके पास होनी चाहिए। इकोनॉमिक इंडिपेंडेंस, इकोनॉमिक फाइनेंशियल जो आपको बोलते हैं फ्रीडम टू बी एबल टू अर्न समथिंग और हैव योर ओन सेविंग्स और हैव योर ओन मनी। आई थिंक दैट जस्ट मेक्स इट इज़ियर फॉर यू टू फील एंड थिंक अबाउट योरसेल्फ। बहुत बार एक औरत
(44:49) क्योंकि उसके पास पैसे नहीं है। कॉन्फिडेंस आएगा भी तो कैसे आएगा ना। कॉन्फिडेंस के लिए भी तो कुछ करना पड़ेगा और कुछ करने के लिए आपको पैसा चाहिए। सो इट्स अ सर्कल ऑफ़ इट्स इटसेल्फ। एंड उस सर्कल में बहुत सारे लोग फंस जाते हैं। बट उसी सर्कल में आज अगर इस सोशल मीडिया या हम इंटरनेट को यूज करें तो बहुत अपॉर्चुनिटीज आप घर बैठकर भी कर सकते हैं। स्टार्ट स्मॉल डोंट स्टार्ट बिग थिंक स्मॉल थिंक बेसिक। जितना हो उतना करो। बट रुकना नहीं। आपको डिसरिस्पेक्ट करने को कोई नहीं बोल रहा। क्योंकि बहुत बार फैमिलीज में पेट्रिय्की शोबेनिज्म इज वेरी
(45:30) वेरीरी बिग। हमारे घरों में अलाउड नहीं है। हस्बैंड सेज़ मुझे नहीं अच्छा लगता। आई एम वेरी टेरिटोरियल। अ मेरे हिसाब से चलो। सो अ वाइफ अकोमोडेट्स। वो ठीक कर लेती आपने। अच्छा ठीक है। इन्होंने कहा थोड़ी देर तो आप चल पड़ोगे। थोड़ी देर बाद आपके अंदर का जमीर आपको खुद क्वेश्चन करेगा। आई मीट सो मेनी 50 प्लस 40 प्लस वुमेन द वर्ड इज रिग्रेट रिग्रेट ऑफ नॉट डूइंग एनीथिंग फॉर माय सेल्फ जरूरी नहीं है अपने सेल्फ के लिए कुछ करने का मतलब है कि मुझे 5 करोड़ कमाने हैं। नहीं सेल्फ का मतलब है अपने लिए क्या किया? व्हाट मेक्स यू हैप्पी एज
(46:16) सिंपल एज दैट। आई मे नॉट हैव अ प्रॉब्लम विथ माय हस्बैंड। बट आई मे वांट टू नो व्हाट इज गुड फॉर मी। आई वांट टू फील हैप्पी। एक रिश्ते में दो लोग हैं। बट टॉक्सिसिटी कभी-कभी आती जाती रहती है। हाउ डू यू हैंडल योरसेल्फ? अपने आप को स्थिर कैसे रखते हैं? एंड एवरीथिंग इज़ नॉट अबाउट मनी। एवरीथिंग इज़ नॉट अबाउट द लीगल बैटल्स। टुडे आई मे नो एवरीथिंग अबाउट इट लीगली। बट आई डोंट वांट टू डू इट। राइट? बट व्हाट डू आई एक्चुअली वांट टू डू? आई जस्ट वांट टू बी हैप्पी। आई वांट टू फील सिक्योर। आई वांट टू फील सेफ। एंड सेफ इज द मोस्ट पावरफुल। और जरूरी
(46:53) नहीं है सेफ के लिए आपको एक और आदमी चाहिए। सेफ यू कैन फील विद योर किड्स। सेफ यू कैन फील विथ व्हाट यू डू। सेफ यू कैन फील ऑन योर ओन। मेडिटेट करके, योगा करके, आर्ट क्लास जाके व्हाटएवर वर्क्स फॉर यू। फ्रेंड्स को मिलके। दैट्स सेफ्टी व्हेयर आई फील सपोर्टेड। आई फील आई एम आल्सो वर्दी। बस उतना ही। सो लुकिंग योरसेल्फ आउट ऑफ दैट रिलेशनशिप इज रियली। योर रिलेशनशिप इज अ पार्ट ऑफ यू। यू आर अ पार्ट ऑफ द रिलेशनशिप एंड द रिलेशनशिप इज़ आल्सो अ पार्ट ऑफ़ यू बट इट्स नॉट यू। यू आर द पर्सन यू आर एंड रिलेशनशिप इज़ अ पार्ट ऑफ़ दैट पर्सन। डोंट मेक एनीथिंग योर
(47:36) पर्सनालिटी और पर्सोन। आई एम नॉट जस्ट अ मिसेस। आई एम फर्स्ट एन इंडिविजुअल हु हैज़ मेड सम डिसीजंस टू बी अ पार्ट ऑफ अ ब्यूटीफुल रिलेशनशिप हैव माय चिल्ड्रन एंड बी अ पार्ट ऑफ़ अ सोसाइटी बट स्टिल फर्स्ट इज़ मी आई बट द जर्नी इन रिलेशनशिप्स इज़ फ्रॉम आई मी मायसेल्फ टू वी अस आवरसेल्व्स गिरोगे डूबोगे टूटेगा गिरेगा हिलेगा ट्रेमर्स होंगे बट द आइडिया ऑफ़ अ रिलेशनशिप बिकमिंग पावरफुल इज़ जबजब नीचे जाएगा उतना ही ऊपर आएगा। एक रिलेशनशिप की स्ट्रेंथ भी सिर्फ
(48:21) सालों से नहीं होती। एक्सपीरियंसेस से होती है। हाउ मच हैव यू एक्चुअली लिव्ड टुगेदर, सर्वाइव्ड टुगेदर टू नो और कोई हो ना हो यह तो खड़े ही हैं। सो दैट स्ट्रेंथ ऑफ़ अ रिलेशनशिप आल्सो वी हैव टू एकनॉलेज। हम क्या करते हैं बहुत बार? हम एक रिलेशनशिप में अगर कुछ बहुत अरसे तक कोई एक चीज नहीं चल रही, हम उसी के बारे में बुराई करते हैं। हम उस इंसान को ही बुरा बना देते हैं उस चक्कर में। बट द रियलिटी इज़ कि बहुत एरी अच्छी चीजें भी होंगी उस रिश्ते की जो हम भूल गए। सो मे बी यू वांट टू रिवाइव एंड टेक अकाउंट। जैसे मैंने कहा कि साल में एक बार अकाउंट ज़रूर लें कि
(49:04) बैलेंस शीट चेक करें। रिश्ता ठीक है या कुछ करने की जरूरत है और वो बैलेंस शीट शायद आपको उस डेड या टॉक्सिक रिलेशनशिप से हेल्दी की तरफ ले आए। थैंक यू सो मच करिश्मा। फिर से इसे एक ऐसी बातचीत जिसने रिलेशनशिप के बहुत सारे एंगल्स पे हम लोगों को नॉलेज दी। एंड जो भी हमें सुन रहे हैं अगर करिश्मा से आप सेशन लेना चाहते हैं तो कनेक्टेड की वेबसाइट और ऐप पे जाके आप सेशन बुक कर सकते हैं। थैंक यू सो मच। थैंक यू।
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