Wednesday, April 22, 2026

Rise of Corporate Compromise Culture in India

Rise of Corporate Compromise Culture in India

Author Name:Nikita Thakur

Youtube Channel Url:https://www.youtube.com/@nikitaksthakur

Youtube Video URL:https://www.youtube.com/watch?v=QlDFNkyf4qA



Transcript:
(00:00) बॉस ने एम्प्लाइजस को कुत्ता बना दिया जमीन पे। ने कहा सिर्फ सेल्स टारगेट मीट नहीं होने के लिए। यह पैरमपुर केरला का एक वीडियो है मगर ये कोई इकलौता केस नहीं। इंडिया में ये एक पैटर्न है। मैं कॉल करूंगा तेरे को रात को 11:30 बजे। नहीं नहीं सर अभी करने वाला मतलब अभी। रख दूंगा मैं तेरी। सॉरी सॉरी। नेक्स्ट टाइम विल ओपन योर माउथ। आई विल पुट माय योर माउथ। क्या हो जाएगा? ये कौन सी बात है? हो जाएगा। एहसान करोगे क्या? बंधुआ मजदूर होगा इनके। इंडिया के तीन केसेस बताती हूं। तीन अलग ऑफिस, तीन अलग इंडस्ट्रीज मगर एक ही वाहियात सिस्टम जिसमें आप भी फंसे हुए हो।
(00:35) इसीलिए इस वीडियो को ध्यान से सुनना। Twitter भरा पड़ा है ऐसे वीडियोस से। यह वीडियो तो यूपी के वुमेन वेलफेयर डिपार्टमेंट का है। जहां का डीपीओ जैसा सीनियर ऑफिसर एक लेडी को जबरदस्ती पे टच कर रहा [संगीत] है। कहने को तो ऐसे केसेस से बचने के लिए औरतों के पास प्रिवेंशन ऑफ हरासमेंट एक्ट पॉश है। मगर पॉश तो सबसे बड़ा मजाक बन चुका है। अब इतनी सी स्पेस में यहां वो बैठा है। यहां मैं बैठी हूं। और मैं बता रही हूं ये हरासमेंट वाली चीजें कि यू नो मुझे कहीं पे भी हाथ पकड़ लेता है और मुझे एक दिन दिवाली के दिन पहले उसने प्रपोज कर दिया। और मैं आंखें
(01:06) भी ऊपर नहीं कर पा रही हूं। यू आई एम शवरिंग। और यह आदमी हंस रहा है। इट्स लाइक सर दिस इज नॉट फनी। आज भी इंडिया के टॉप कंपनीज में 67% केसेस आर पेंडिंग क्योंकि पॉश क्लॉजेस आर इनकंप्लीट एंड वेरी डेंजरस। सेकंड केस यह कोई जेल नहीं बल्कि एक इंडियन ऑफिस है जहां बॉस ने एम्प्लाइजस को रात भर कैद कर दिया। कहकर [संगीत] जब तक काम खत्म नहीं होता ऑफिस से बाहर नहीं निकल सकते। लॉक क्यों किया भैया? बिना परमिशन के नहीं जाने देना। अच्छा किसकी परमिशन? सर ताला लगाने को बोला है। यह शॉकिंग इंसिडेंट गुरुग्राम के एक एटेक कंपनी का है। थर्ड केस जून 2025 बोर
(01:42) एंप्लई ऑलरेडी रिजाइन कर चुका है। मगर फिर भी ज़ूम कॉल पे सीईओ के साथ एग्रेसिव क्वेश्चनिंग और अचानक एंप्लई को छाती में दर्द। सांस लेने नहीं हो रहा बंदा जमीन पे कोलैप्स। इमरजेंसी हॉस्पिटलाइजेशन। फॉरर्चुनेटली बंदा बच गया बट कंपनी का रिस्पांस उसका एक्सपीरियंस लेटर सस्पेंडेड ताकि उसे फ्यूचर जॉब्स ना मिल सके। बट सबसे शॉकिंग बात यह है कि ये सभी चीजें टेक्निकली इंडिया में लीगल है क्योंकि इंडिया के कोर्ट्स एंप्लाइज को वर्कर्स नहीं समझते हैं। नहीं यह सिर्फ शब्दों का फर्क नहीं एंप्लई [संगीत] नॉट वर्कर। सिर्फ इस एक शब्द से इंडियन एंप्लाइजस के
(02:18) सभी हक छीन लिए जाते हैं। लेबर लॉस एकिस्ट करने के बावजूद आप लेबर कोर्ट तभी जा सकते [संगीत] हो अपने कंपनी के खिलाफ जब आप वर्कमैन के डेफिनेशन में बैठते हो या जिसकी तनख्वाह 10,000 से ऊपर हो। ऐसे लोग वर्मेन के डेफिनेशन में नहीं आते। आज की वीडियो में एक्सजेक्टली बताऊंगी कैसे। इसीलिए अगर आप किसी भी इंडस्ट्री में एक एंप्लई हो, दिस वीडियो इज गोइंग टू बी एक्सट्रीमलीेंट फॉर यू। एंड इन्हीं लीगल लूप होल्स का नतीजा डेलॉयड का 2024 का स्टडी। इंडिया में 80% एंप्लाइज मेंटल हेल्थ प्रॉब्लम से गुजर रहे हैं। डिप्रेशन, बर्न आउट, ए्जायटी सबसे कॉमन
(02:51) रीजन ऑफिस 47% फाइनेंशियल स्ट्रेस से भी ज्यादा, फैमिली प्रॉब्लम से भी ज्यादा, पेंडेमिक के दौर में कोविड से भी ज्यादा। ऑफिस इंडिया का नंबर वन मेंटल हेल्थ डिस्ट्रयर है। मगर सवाल यह नहीं है कि कंपनीज़ ऐसा क्यों करती है? सवाल है एंप्लाइजस चुपचाप इसे सहते क्यों हैं? एंप्लाइजस जॉब के हर एस्पेक्ट में इतना कॉम्प्रोमाइज क्यों करते हैं? क्योंकि कॉम्प्रोमाइज इज नॉट अ वीकनेस। इट इज अ स्मार्टली इंजीनियर ट्रैक जो कंपनीज़ जानबूझकर बनाते हैं एंप्लाइजज़ को फंसाने के लिए। बॉन्डेड लेबर यानी बंधुआ मजदूरी इंडिया में ऑफिशियली बैंड है, डेड है बट
(03:26) वो आज भी कॉन्ट्रैक्ट के नाम से जिंदा है। एंड आई विल प्रूव [संगीत] दिस टू यू विद एग्जांपल्स। बट उससे पहले ऑफिस के टॉक्सिक ट्रेड समझते हैं। पहला मेंटल कॉम्प्रोमाइज। एम्प्लाइजस को मीटिंग्स में अब्यूज करना, गाड़ी देना, उनके ऊपर बॉटल, माउस फेंकना इज अनफॉर्चूनेटली मोर कॉमन देन वी थिंक। इस कैटेगरी को समझने से पहले एक इंपॉर्टेंट फैक्ट डिड यू नो एक सर्वे के [संगीत] हिसाब से एपिकेंट्स जिनके डेंटल इनपरफेक्शंस होते हैं उनकी हायरिंग की प्रोबेबिलिटी 52% कम होती है एज कंपेयर टू अदर एपेंट्स। क्योंकि वर्क प्लेस पे सिर्फ आपकी स्किल नहीं आपकी प्रेजेंस भी
(03:58) जज होती है। मीटिंग स्पिच या फिर मेरी तरह कैमरा ऑन। मिसअलाइन टीथ मतलब कॉन्फिडेंस डाउन। आप सोचते हो आप इंट्रोवर्ट हो। नाउ यू जस्ट कॉन्शियस तो ऑप्शन मेटल बसेस मतलब पेन अगली रूल्स एंड फुल पनिशमेंट मोड प्रेजेंटिंग टूथ सीस क्लियर अ लाइनर्स सच में इनविज़िबल कोई नोटिस भी नहीं करेगा इजी टू वेयर इजी टू रिमूव ये है यूएस एफडी अप्रूव्ड जो देता है सिक्स से 12 मंथ्स में 100% रिजल्ट्स गारंटी इजी स्टार्ट क्विक एंड पेनलेस 3D करवाओ फॉर योर इनविज़िबल अलाइनर्स कॉर्पोरेट ट्रुथ आपकी स्माइल डिसाइड करती है आप कॉन्फिडेंट हो या नहीं इसीलिए बुक योर फ्री स्कैन टुडे
(04:32) एमआई स्टार्टिंग एट जस्ट रूपी ₹149 499 साले इतनी दूर है ना मार मार के डाल लेते सड़क पे खींच के घोड़ी अरे छोड़ ना बैंक के नौकरी साले जाते घर पे जब बोला था ऑफिस आने के लिए डायरेक्ट ऑफिस क्यों नहीं आया सर डायरेक्ट ऑफिस सर वो फॉर्मल्स मेरे गंदे थे मेरे पास कुछ नहीं था तो मैं वो भिगोने आया था कि मतलब भिगो दूंगा इसको भिगो देंगे बायजूस कैनरा बैंक जैसे क्रेडिबल कंपनीज के साथ यह हो रहा है तो छोटे प्राइवेट फर्म्स के केसेस सोचो संडेस को भी काम नॉर्मलाइज करना वो भी धमकी देके जिसका चार पिकअप नहीं होगा पांच पिकअप नहीं होगा वो नहीं जाएगा घर पे। अगर चला
(05:06) गया वो मैं बता रहा हूं अगले दिन वो नहीं रहेगा सिस्टम में। कई एम्प्लाइजस को तो फायर कर दिया जाता है सिर्फ क्योंकि वो वीकेंड्स पे काम करने के लिए राजी नहीं होते। ये अगली रिपोर्ट लेट नहीं आनी चाहिए वरना तुमको सैटरडे संडे रुक के काम करना पड़ेगा मुझे। आई रिग्रेट आई एम नॉट एबल टू वर्क मेक यू वर्क ऑन संडे। व्हाट डू यू डू सिंग एट होम? हाउ लॉन्ग कैन यू स्टेयर एट योर वाइफ। हाउ लॉन्ग कैन द वाइफ स्टेयर एट योर हस्बैंड? कनाडा बैंक से तो एक कॉन्फ्रेंस कॉल लीक हुआ था जिसमें बॉस सीधे कह रहा है भाड़ में जाए तुम्हारी फैमिली? बैंक ने तुम्हें
(05:30) नौकरी क्यों दिया है? काम करने के लिए या फैमिली लेके घूमने के लिए? छुट्टी देके जाके घूमे आएंगे फैमिली के लिए। अरे तेरा फैमिली मेरा क्या होता है भाई? अगर बैंक ने नौकरी दिया काम करने के लिए फैमिली लेके घूमने के लिए दिया क्या? अराउंड 55% इंडियन एम्प्लाइजस रेगुलरली ऐसे वर्बल या फिजिकल अब्यूसेस फेस करते हैं। बट कई फीमेल्स के लिए यही फिजिकल अब्यूज अनफॉर्चूनेटली सेक्सुअल अब्यूज बन जाता है। [संगीत] एंड देन ही वास् लाइक इफ वीमेन नो हाउ टू यूज़ दैट चार करेक्टली दे कैन डू वंडर्स इन कॉर्पोरेट। न्यूज़ रूम्स आर फुल ऑफ प्रिडेटर्स।
(06:09) इस कैटेगरी के कई वीडियोस तो मैं आपको YouTube पे दिखा भी नहीं सकती। वुमेन सेफ्टी गाइडलाइंस की वजह से। मगर ऐसे केसेस में औरतों को क्या न्याय मिलता [संगीत] है? यह वीडियो दिल्ली के फाइव स्टार होटल प्राइड प्लाज़ा का है। जहां के दो सीनियर एंप्लाइजज़ एक फीमेल स्टाफ को कमरे से बाहर निकलने ही नहीं दे रहे। एंड उसे फोर्स कर रहे हैं मैनेजर के साथ फिजिकल होने के लिए। पर सबसे बड़ा ट्विस्ट वीडियो प्रूफ के बावजूद कंप्लेंट फाइल करने के बावजूद इस हादसे के अगले ही दिन उस लड़की को होटल से फायर कर दिया गया सिर्फ क्योंकि उसने आवाज उठाई।
(06:40) और होटल वालों ने मुझे भी आउट कर दिया। मैंने लेटर नहीं लिया। वो मुझे बोल रहे हैं। हमने आपको टर्मिनेट कर दिया। 2024 का यह डाटा है टॉप इंडियन कंपनीज़ में सेक्सुअल हरासमेंट कंप्लेंट्स 40% से बड़ी है। जबकि 70% औरतें तो ऑफिस में हुआ सेक्सुअल हरासमेंट आज भी रिपोर्ट ही नहीं करती है। रीजन है पॉश के इनकंप्लीट लॉज़। इस लॉ के तहत सेक्सुअल हरासमेंट के सभी कंप्लेंट्स के लिए एक इंटरनल कंप्लेंट्स कमिटी आईसीसी बनती है जो पहले तो खुद एंप्लयर ही बनाता है। दूसरी बात यस एक एक्सटर्नल मेंबर मैंडेटरी है मगर मैक्सिमम मेंबर्स कंपनी के इंटरनल मेंबर्स ही होते
(07:14) हैं। जिससे कि करप्शन या फिर बायसनेस के चांसेस सिग्निफिकेंटली बढ़ जाते हैं। तीसरी बात इस एक्सटर्नल मेंबर का अपॉइंटमेंट भी एंप्लयर ही तय करता है। एंड फाइनली सेक्शन 13 की यह लाइन कहती है द कमिट शैल रेकमेंड। इसका मतलब यह कमेटी सिर्फ सजेशन दे सकती है ना कि डिसीजन पास कर सकती है। डिसीजन अभी भी एंप्लयर के हाथ में है। मेरे पास एक महिला आई वो इंटरनल कंप्लेंट्स कमेटी की चेयर पर्सन थी। उसके सामने तीन चार महिलाएं आई और ये पाया कि वो पुरुष दोषी है। जब बॉस उनको पसंद नहीं आया उस महिला को जो इंटरनल कंप्लेंट्स कमिटी की चेयर पर्सन थी। एक महीने बाद
(07:48) उसको टर्मिनेट कर दिया इन्होने। उल्टा फीमेल के लिए भी कंप्लेंट फाइल करना काफी बड़ा रिस्क है। क्योंकि सेक्शन 14 के हिसाब से अगर कमिटी इस कंक्लूजन पे पहुंची कि कंप्लेंट फॉल्स थी, तो सजा कम्प्लेंट करने वाली फीमेल को भी मिल सकती है। I आईसीसी इन आवर ऑफिस इज़ टोटली इनएक्टिव। दे आल वे वर लुकिंग एट मी एज़ इफ आई एम द कलप्रेट। बट फीमेल एम्प्लाईस की परेशानियां तो अभी बस शुरू ही हुई है। जेंडर बेस्ड कॉम्प्रोमाइज इज़ अ बिग प्रॉब्लम टिल डेट। जनवरी [संगीत] 2018 पुणे। सीनियर मार्केटिंग एग्जीक्यूटिव अपने कंपनी को बताती है आई एम प्रेग्नेंट। बॉस कहता है
(08:21) कोई बात नहीं [संगीत] घर पर आराम करो। मगर कुछ महीने बाद सीधा टर्मिनेशन लेटर उस लेडी को कंपनी से फायर कर दिया गया। यहां पर लॉ क्या कहता है? मेटरनिटी बेनिफिट एक्ट 1961 प्रेगनेंसी के दौरान किसी भी फीमेल एंप्लई को जॉब से निकालना इललीगल है। मगर रियलिटी [संगीत] 93.5% इंडियन औरतों को मेटरनिटी के कोई बेनिफिट्स ही नहीं मिलते हैं। एक फीमेल एंप्लई को तो अपने बेबी को लेकर कोर्ट पहुंचना पड़ा क्योंकि उसका एंप्लयर उसको मेटरनिटी अमाउंट पे नहीं कर रहा था और उससे फोर्सफुली रिजाइन करवा रहा था। अंटिल द लास्ट फ्यू डेज ऑफ़ माय प्रेगनेंसी
(08:55) आई वास जस्ट इन ऑफिस। बट दैट पर्टिकुलर ईयर आई वास एक्चुअली डिनाइड एन इंक्रमेंट। मैरिड औरतों के लिए भी वर्क स्पेस काफी अनफेयर है। लगभग 60% वर्किंग वूमेन का कहना है कि उनके साथ भेदभाव होता है सिर्फ क्योंकि वो मैरिड है। एंप्लाइजस का मानना है कि मैरिड औरतों का जॉब में नहीं फैमिली में ज्यादा ध्यान रहता है। ड्यूटर्स की इन्वेस्टिगेशन के मुताबिक Foxक कंपनी पर यह एलगेशंस लगे कि चेन्नई के पास अपने मेन iPhone प्लांट में उन्होंने मैरिड औरतों को जानबूझकर जॉब्स नहीं दिए। यह बोलकर कि उनके ऊपर फैमिली रिस्पांसिबिलिटीज बहुत ज्यादा होती है।
(09:27) एंड मूविंग टू इंडिया Apple सप्लायर Foxon रिजेक्टिंग मैरिड वुमेन हु वांट टू वर्क फॉर इट्स iPhone प्लांट। 2025 में तो एक कंपनी के बॉस ने यह रूल ही बना दिया कि अब से सारे मैरिड फीमेल स्टाफ को वो अनमैरिड लड़कियों से रिप्लेस कर देगा। अगेन सेम रीज़न मैरिड औरतें जॉब को लेकर इतना सीरियस कहां होती है? नेक्स्ट फाइनेंसियल कॉम्प्रोमाइज जिसमें सबसे कॉमन है डिलेड सैलरीज। TCS के एक एंप्लई का यह ट्वीट बीच में काफी वायरल हुआ था जिसमें उसका कहना है कि उसने ऑफिस तो ज्वाइन कर लिया मगर क्योंकि सॉफ्टवेयर में उसका आईडी डाटा एंटर नहीं हुआ था तो कंपनी उसे सैलरी
(10:01) पे नहीं कर रही थी। उसने एचआर को मेल करके यह भी बताया कि उसके पास पैसे नहीं है। उसे रास्ते पर सोना पड़ेगा। मगर इसके बावजूद उसकी सैलरी डिली होती रही। जिस वजह से वो मजबूर हो गया TCS के ऑफिस के सामने वाले रास्ते पे [संगीत] ही सोने के लिए वहीं पर रहने के लिए। फुटपाथ पर सोता नजर आ रहा यह शख्स TCS यानी Tata कंसलटेंसी सर्विज का कर्मचारी सौरभ मोरे है। TCS ने पिछले कई महीनों से उनकी सैलरी नहीं दी है। जिसकी वजह से वो फुटपाथ पर सोने को मजबूर हैं। एिएशन इंडस्ट्री में भी सैलरी डिलेज़ काफी कॉमन है। 2018 में जेट एयरवेज ने अपने 20% एंप्लाइजज़ की सैलरी डिले की
(10:35) थी। उससे पहले Air इंडिया ने 11,000 एंप्लाइजज़ की सैलरी होल्ड कर दी थी और 2025 में SPI जेट भी वही रिपीट कर रहा है। गवर्नमेंट हॉस्पिटल्स में तक यह हो रहा है। कर्नाटका का गवर्नमेंट हॉस्पिटल जहां के 300 नर्सेज और लैब स्टाफ महीनों से बिना सैलरी के काम कर रहे थे। नतीजा रेंट अनपेड बिल [संगीत] स्पेंडिंग और डेली सर्वाइवल क्राइसिस। क्लाइंट ने पे नहीं किया तो एम्प्लाइजस का सैलरी काट दिया। कंपनी के पास कोई प्रोजेक्ट नहीं है तो एंप्लाइजस को हाफ पे किया। इनकी जो सैलरी लेट है वो सिर्फ इसी वजह से लेट है क्योंकि थोड़ा सा पेमेंट हमारे को नहीं
(11:05) आया क्लाइंट से। ऐसे अलग-अलग रीजन से फाइनेंसियल कॉम्प्रोमाइज [संगीत] इंडिया के 50% वर्कर्स फेस करते हैं। यानी इंडिया की आधी से भी ज्यादा वर्किंग पपुलेशन को सैलरी या तो टाइम पे नहीं [संगीत] मिलता है या फिर मिलता ही नहीं है। किशोर एंड हज वाइफ आर नाउ फोर्स टू सेल मोमोज़ टू मेक एंड्स मीट एस ही हैज़ रिसीव्ड द सैलरी फॉर द लास्ट 20 मंथ्स। हमारे बहुत ऐसे साथी हैं जो छोटे-छोटे दुकान का इडली है, मोमोज है। इस तरह का दुकान खोल के बैठे हुए हैं। बट द मोस्टेंट क्वेश्चन इज इतने कॉम्प्रोमाइजिस के बाद भी कई एंप्लाइज मजबूरन उसी फील्ड में उसी इंडस्ट्री में
(11:40) उसी कंपनी में काम क्यों करते रहते हैं? क्योंकि जैसे मैंने कहा कॉम्प्रोमाइज इज नॉट अ वीकनेस। दिस इज स्मार्टली इंजीनियर ट्रैक। बस सोचो आपको साल के ₹4 लाख की जॉब मिलती है। आप जॉइ करते हो लेकिन 2 महीने में मालूम पड़ जाता है कि ऑफिस काफी टॉक्सिक है। आप रेजिग्नेशन डालने जाते हो और तब एचआर बोलता है अगर 3 साल से पहले आपने जॉब छोड़ी तो आपको ₹1 लाख की पेनल्टी भरनी पड़ेगी। यह [संगीत] कोई मनगढ़ंत कहानी नहीं है। रियलिटी है। कुछ केसेस में तो यह भी लिखा होता है कि अगर कंपनी आपको जॉब से निकाले तब भी आपको कंपनी को ₹1 लाख देना पड़ेगा एज अ पेनल्टी। बट 4 लाख की
(12:15) जॉब के लिए 10 लाख की पेनल्टी कैसे जस्टिफाई होती है? इसे कहते हैं कॉन्ट्रैक्ट ट्रैप। कुछ कंपनीज़ जॉइनिंग के टाइम ही एम्प्लाइजस के ओरिजिनल डॉक्यूमेंट्स तक सीज कर लेती है। डिग्रीज, सर्टिफिकेट्स, मार्कशीट्स ताकि आप जॉब छोड़ ही ना पाओ। आज इंडिया में बॉनडेड लेबर बैंड है। मगर रियलिटी में कॉन्ट्रैक्ट्स ने उसकी जगह ले ली है। क्लीन लैंग्वेज, डर्टी पावर। वर्ल्ड बैंक डाटा के अकॉर्डिंग इंडिया में 36% एंप्लाइज आज भी ऐसे हैं जो इन्हीं कॉन्ट्रैक्ट्स और बॉन्ड्स की वजह से अपने टॉक्सिक जॉब्स में फंसे हुए हैं। वो जॉब को छोड़ ही नहीं पा रहे हैं। सेकंड रीज़
(12:48) ट्रेनिंग ट्रैप। NASकॉम सर्वे से पता चला कि इंडिया में 30% नो नोटिस रेजिग्नेशंस हुए थे। यानी कि बिना नोटिस पीरियड सर्व किए एंप्लाइजज़ पहले से ही रिजाइन कर देते हैं। अब इससे डेफिनेटली कंपनीज़ के सिर पे एंप्लाइजस का ट्रेनिंग कॉस्ट आ जाता है। सो ऐसा ना हो कंपनीज़ का लॉस ना हो। इसीलिए कंपनीज़ ट्रेनिंग कॉस्ट का रिकवरी क्लॉज़ पहले से ही आपके ऑफर लेटर में डाल देते हैं। जिसके तहत अगर एंप्लाइजज़ ने एक सर्टेन टाइम पीरियड जैसे कि 6 महीना या एक साल के पहले कंपनी से रिजाइन कर दिया तो एंप्लई को कंपनी को ट्रेनिंग एक्सपेंस पे करना पड़ेगा। एंड ये सिर्फ धमकी नहीं है
(13:23) लीगल है। रिसेंटली ऑनरेबल सुप्रीम कोर्ट हेल्ड इंपोजिंग फाइन पेनल्टी अपॉन द एंप्लई और अर्ली रेिग्नेशन आर हेल्ड वैलिड। मई 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने विजय बैंक वर्सेस प्रशांत नरनावरे के केस में यह क्लॉज़ को लीगल डिक्लेअ कर दिया था। रिजल्ट एंप्लई को ₹ लाख की पेनल्टी देनी पड़ी क्योंकि उसने 3 साल से पहले जॉब छोड़ी थी एस पर कॉन्ट्रैक्ट यह इललीगल [संगीत] था। रीज़न नंबर थ्री नॉन कॉम्पीट क्लॉजेस। अगला शौक आप रिजाइन करने जाते हो लेकिन रिजाइन करने के बाद भी आप 6 महीने तक कोई भी राइवल कंपनी में जॉब नहीं कर सकते हो। Infosys जैसे कंपनी के कॉन्ट्रैक्ट्स में तक लिखा
(14:01) गया है कि अगर आपने उनके कोई स्पेसिफिक क्लाइंट के साथ काम किया तो आप TCS, Wipro या HCL जैसे Infosys के कॉम्पिटिटर्स के साथ काम नहीं कर सकते हो। वहां पर जाकर जॉब जॉइ नहीं कर सकते हो। ऐसा करने पर रिजल्ट होता है रिलीविंग लेटर्स रोक देना, बैकग्राउंड वेरिफिकेशन ब्लॉक कर देना, न्यू जॉब मिलने से तक रोक देना। दे विल नॉट गिव यू दी एक्सपीरियंस सर्टिफिकेट। विदाउट दी एक्सपीरियंस सर्टिफिकेट द नेक्स्ट कंपनी विल नॉट रियली वांट यू। एनआईटीएस यूनियन ने इस प्रैक्टिस के लिए एक शब्द यूज किया कॉर्पोरेट हैंडकफिंग। गवर्नमेंट ने भी Infosys को
(14:33) नोटिस भेजा मगर कंपनी का रिस्पांस था स्टैंडर्ड बिजनेस प्रैक्टिस। यह नॉन कॉम्पीट क्लॉज़ इंडियन कॉर्पोरेट्स में काफी कॉमन है। बट मुझे एक बात बताओ एक एंप्लई अपने एक्सपीरियंस के बेसिस पर सेम इंडस्ट्री के दूसरे कंपनीज़ में ही तो जॉब ढूंढेगा। बट अगर आपके कॉन्ट्रैक्ट में नॉन कंप्लीट क्लॉजेस हैं तो आप ऐसा नहीं कर सकते हो। लेकिन अनफॉर्चूनेटली इन क्लॉजेस के बारे में जानते हुए भी कई एंप्लाइज मजबूरन इन इललीगल कॉन्ट्रैक्ट्स को साइन कर लेते हैं। क्योंकि इंडिया का जग मार्केट आज काफी अनस्टेबल है। 20 से 24 एज ग्रुप में 44% यूथ अनइंप्लॉयड
(15:09) है। 44% बहुत सारे लोग अपने घर के सोल्ड ब्रेड अर्नर्स हैं। ईएमआई, रेंट, पेरेंट्स, मेडिकल बिल्स कंपनी यह सब जानती है। इसीलिए एक्सप्लॉयटेशन चलता है क्योंकि एंप्लई के पास कोई एग्जिट ऑप्शन ही नहीं होता है। नेक्स्ट रीज़न वीक लेबर लॉस। इंडिया में लोग कहते हैं लेबर लॉस तो है वहां पर कंप्लेन करो। हां है बट वो सबके लिए नहीं है। फैक्ट्रीज एक्ट, इंडस्ट्रियल डिस्प्यूट्स एक्ट ये सब वर्क मैन को प्रोटेक्ट करते हैं। इस लॉ के तहत ओवरटाइम पे, वर्किंग आवर लिमिट्स सब कुछ एप्लीकेबल है। बट जैसे ही आपको मैनेजर, एग्जीक्यूटिव, कंसलटेंट बोल दिया जाता है,
(15:44) लेबर लॉ बोलता है आप मेरे स्कोप से बाहर हो। कि यदि कोई इंसान मैनेजेरियल कैपेसिटी में काम करता हो या जिसकी तनख्वाह 10,000 से ऊपर हो वो वर्कमैन के डेफिनेशन में नहीं आता। कंपनी वाले जो होते हैं इसी बात का फायदा उठाकर जो टाइटल है उसके आगे मैनेजर लिख देते हैं। इसीलिए कंपनीज़ डेलीबेटली वाइट कॉलर एंप्लाइजज़ को लेबर लॉ के बाहर ही क्लासिफाई करते हैं। ऊपर से ब्लू कॉलर जॉब्स की तरह वाइट कॉलर जॉब्स में यूनियन बाजी नहीं होती है। कोई यूनियन का फॉर्मेशन नहीं होता है। आज 98% एंप्लाइजज़ किसी यूनियन से जुड़े हुए नहीं है। इसीलिए इनका आवाज उठाना भी एक बड़ा करियर रिस्क बन
(16:19) जाता है। क्योंकि लॉ का कहना सिंपल है। एंप्लॉयमेंट कॉन्ट्रैक्ट्स, ट्रेनिंग पेनल्टीज या फिर नॉन कम्पीट क्लॉज़ इन सब पर कोई भी कैप नहीं है। कोई लिमिट नहीं है। बॉन्ड का अमाउंट 5 लाख, 10 लाख, कुछ भी एब्सर्ड अमाउंट देते हैं। उससे एक ब्लैंक चेक लेके साइन करवा के भी रखते हैं। और जैसे ही बंदा छोड़ के जाता है बैंक में डिपॉजिट करा देते हैं और वो चेक बाउंस होता है। केस चेक बाउंस का केस लगाते हैं। इंडियन लॉ में कोई भी बॉडी या फिर कोई भी क्लॉज़ ऐसा नहीं है जो यह बोले कि पेनल्टी इतनी होनी चाहिए। इंडियन कॉन्ट्रैक्ट एक्ट 1872, सेक्शन 73 और 74 पेनल्टी को अलाउ
(16:50) करता है। मतलब पहले तो लॉ ये खुद कह रहा है कि हां कंपनीज एंप्लाइज से पैसे फाइंड्स के तौर पर ले सकते हैं। ऊपर से सेक्शन 74 क्लियरली कहता है कि कॉन्ट्रैक्ट में जो अमाउंट लिखा है उसे एंप्लई को देना ही पड़ेगा। हां, लॉ ये भी कहता है कि पेनल्टी कंपनी के एक्चुअल मॉनिटरी लॉस से मेल खानी चाहिए। लेकिन कंपनीज़ को कॉन्ट्रैक्ट में कोई भी रैंडम अमाउंट लिखने से कोई नहीं रोक रहा। 10 लाख, 25 लाख या उससे ज्यादा। यह बाद में कोर्ट में जाके डिसाइड होता है कि वह पेनल्टी अमाउंट ज्यादा था या कम। और इंडिया का लीगल सिस्टम तो हम सब जानते हैं
(17:21) कितना फास्ट है। इसीलिए जब तक जस्टिस मिले तब तक एंप्लई का क्या हाल होता है। लीगल नोटिस, मेंटल प्रेशर, करियर डैमेज, फाइनेंसियल स्ट्रेस। जस्टिस तो बाद में आएगी, अगर आएगी पर डैमेज तो पहले ही हो जाता है। यह बात सही है कि नए लेबर लॉज़ ने सैलरीज और सोशल सिक्योरिटी बढ़ाई। मगर वर्कमैन का एग्जैक्ट डेफिनेशन क्या है? और क्या उसमें प्रोफेशनल एंप्लाइजज़ भी शामिल होते हैं? इसकी कोई क्लेरिटी नहीं दी। इललीगल कॉन्ट्रैक्ट्स और उस पे चार्ज किए जाने वाले इललीगल पेनल्टीज जैसे इशू को भी इस नए लॉ ने टच भी नहीं किया है। एंड एग्जैक्टली इसी गैप का फायदा कई सारे
(17:55) कॉर्पोरेट कंपनीज़ उठाते हैं। [संगीत] लॉक क्यों किया भैया? बिना परमिशन के नहीं जाने देना। अच्छा किसकी परमिशन? अनलॉक। ताला लगाने को बोला है। अब मैं उसके अंदर नहीं जाऊंगी कि कितने सारे प्रॉब्लम्स हैं इंडिया में। अभी हमें इसके खिलाफ आवाज उठानी चाहिए। फिलहाल सवाल यह है कि इस गैप के अंदर हम एज एंप्लाइजस सर्वाइव कैसे कर सकते हैं? क्योंकि वो चीज हमारे हाथ में है। देखो इन लॉस को हम बदल नहीं सकते। मगर कुछ ऐसे तरीके हैं जिससे लीगली आपका केस स्ट्रांगर हो सकता है। अगर कल को आप पर ऐसी कोई मुसीबत आए तो। फर्स्ट बाउंड्री बाय ईमेल मेथड। इंडिया में
(18:28) अब्यूजस वर्बल स्पेस में सर्वाइव करता है। बट इस मेथड में सारे बाउंड्रीज एंप्लाइजस रिटर्न सेट करता है। एग्जांपल के लिए संडे ओवरटाइम काम मिलने पर आप अपने बॉस को पोलाइटली मेल कर सकते हो। हाय जस्ट कंफर्मिंग माय वर्क टाइमिंग्स आर 9:00 am टू 6:00 pm एस पर कॉन्ट्रैक्ट। पोस्ट आर्स वर्क विल नीड टू हैव प्रायर अप्रूवल। [संगीत] ऐसे रिटन मैसेज से मैनेजर या तो बैक ऑफ कर देगा या फिर खुद ही ऑन रिकॉर्ड अपने आप को एक्सपोज कर देगा। वर्बल [संगीत] अब्यूज यहां पर सर्वाइव नहीं हो सकता है। सेकंड रिवर्स गोल्स। मैनेजर से लिखित में कंफर्मेशन लो। इस क्वार्टर में
(19:01) मैं ए बी सी पर इवैलुएट होने वाला हूं। प्लीज कंफर्म। या फिर इस वीक में मैं यह डिलीवरी बिल्स कंप्लीट करूंगा। प्लीज कंफर्म। इससे बायस्ड बैड रिव्यूज रुक जाते हैं। फोर्स ओवरटाइम कट होता है और लास्ट मिनट ब्लेम गेम इंपॉसिबल बन जाता है। थर्ड सिस्टम तुम्हें इसीलिए कंट्रोल करता है क्योंकि वो जानता है तुम कहीं जा नहीं सकती। जैसे ही यह एजम्पशन गलत साबित होता है, पावर डायनामिक शिफ्ट हो जाता है। आपकी पावर कंप्लीटली डिपेंड करती है सिर्फ एक चीज पे। आपके [संगीत] पास एग्जिट के कितने ऑप्शंस हैं। आपकी स्किल डेंसिटी कितनी है? अपडेटेड मार्केट के लिए आप कितने
(19:35) प्रिपयर्ड हो? सेम इंडस्ट्री के कितने कंपनीज़ में आपका नेटवर्क [संगीत] है? एंड वर्स्ट केस सिनेरियो में आपके पास आपके हाथ में कितने जॉब ऑफर्स हैं। फोर्थ रिटन डॉक्यूमेंटेशन सिस्टम योर लीगल शील्ड। इसमें आपको एक प्राइवेट रिकॉर्ड मेंटेन करना है टाइम स्टैंप्स के साथ जो आपका खुद का पर्सनल हो। इसे कभी भी ऑफिशियल सिस्टम्स या फिर ऑफिशियल ईमेल पर मत रखना। आपके ऑफिस में कोई भी वर्बल, फिजिकल या मेंटल अब्यूज हो उसे नोट कर लो। डेट और टाइम एग्जैक्टली क्या कहा गया? उस समय वहां पर कौन-कौन मौजूद थे? यह सब आपके आई विटनेस है। और इस अब्यूज का आपके काम पर
(20:10) या आपके हेल्थ पर क्या असर हुआ। आल्सो अब्यूजिव ईमेल्स या फिर WhatsApp मैसेजेस के स्क्रीनशॉट्स को सेव कर लो। इसे पर्सनल Google डॉक्स या फिर क्लाउड बैकअप पर मेंटेन करो क्योंकि ज्यादातर केसेस में एंप्लाइज हार जाते हैं जस्ट बिकॉज़ ऑफ लैक ऑफ एविडेंस। [संगीत] बट कोर्ट्स कंटेंपोरेनियस रिकॉर्ड्स यानी कि इंसिडेंट के टाइम लिखे गए नोट्स को बहुत सीरियसली लेती है। प्लस कई बार तो इनका सिर्फ डर ही काफी है। बात कोर्ट तक तो पहुंचती भी नहीं। एम्प्लाइजस के ऐसे टाइमली रिटन रिकॉर्ड्स के केस में कंपनीज़ कोर्ट के पहले ही आपस में सेटलमेंट कर लेती है। एंड
(20:42) फाइनली नंबर फाइव अवेयरनेस। प्रॉब्लम सिर्फ हरासमेंट या अब्यूज नहीं है। प्रॉब्लम इग्नोरेंस भी है। लेकिन जिस दिन आप सिस्टम को समझ लेते हो उसके रूल्स, उसके लूप होल्स और पावर डायनामिक्स समझ लेते हो अब बाकियों से ऑलरेडी एक स्टेप आगे हो। अवेयरनेस इज नॉट जस्ट इनेशन। अवेयरनेस इज लेवरेज। सिस्टम से लड़ना अगर हमारे हाथ में नहीं तो सिस्टम को आउटस्मार्ट करना सीखो। आज के वीडियो से मेरी यही कोशिश थी। होप इट हेल्प। इसे जितना हो सके अपने फ्रेंड्स, अपने फैमिली में शेयर करो ताकि और इंडियंस इसके बारे में अवेयर हो सके। एंड अगर आपको यह वीडियो
(21:15) पसंद आया तो यू विल डेफिनेटली बी इंटरेस्टेड टू नो सिंगापुर एक अंडरवर क्राइम माफिया देश से आज दुनिया की सेफेस्ट कंट्री कैसे बन गया। इस बार मैं खुद सिंगापुर जाके उसे टेस्ट करके आई हूं। क्लिक हियर ऑन माय राइट टू वाच दैट वीडियो। जय हिंद। एंड हां, डोंट फॉरगेट टू चेक आउट टू सी फॉर अ कॉन्फिडेंट स्माइल। लिंक इज इन द डिस्क्रिप्शन। बुक योर फ्री स्कैन टुडे।

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