Monday, May 4, 2026

osho ~ You don't know anything about sex #sadhguru #dhyanajyothyfoundation #oshobharat

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Youtube Video URL:https://www.youtube.com/watch?v=7s9-1U6xPA8



Transcript:
(00:01) सेक्स गुरिंची मीमी तेलियदु नेला अंद को मी आश्चर्य उं ंद कंटे देव गुरिंची आत्म गुरिंची तेलिक पवम कानी भार्या भर्ता पिल्लु उगा सक्स गुरिंची मीमी लि ला ं अरनव नेन े रिंच मी चाला कष्ट उक सस अनुभवा उं उ ना द लो चिन्न पिल लन दनी कना मीक लिसन एकम काद ने तंग लन दे बट पलना दानि लसत मात्र सरि पोद ओ व्यक्ति ओ कारन 1 मल नपत मात्र अतन की आ
(00:47) कार सांकेतिक परिज्ञान अंता तेलस अनन की ये मात्र वील लेद अतन ना माटल कादन वु ना सरे अतन की कार सांकेतिक परिज्ञान गुरिंची ंग तेलिनी नेन तंग लन ंद कंटे कारन डपम पै पई विषयम ते दानी सांकेतिक परिज्ञान अंतर्गत विषयम म स्विच ननप बल्ब लग मल्ली नते आरि पो इला मी मी इष्टम नट बल्बन लिगं आर पेय गगनत मात्रा मीक विद्युत शक्ति गुरिंची अंता तेलसन कोवम मूर्ख अंद प चिन्न पिल्ला को य गल अंको विद्युत शक्ति परिज्ञान वाक अवसरम
(01:36) लेद पेली चेसक पिलन एना कनगर शृंगारा की संबंध अवगाहन तो दानि एलाट संबंध लेद जंतु को पल्लन पुटिता अंत मात्रा शृंगारा संबंध परिपूर्णम अवगाहना जंतुक मंदन कोवम केवलम भ्रम अंद वास्तव एंटे इत वरक शास्त्रीय परम शृंगारा अध्ययनम रगले अंद के शृंगार शास्त्रम दानी तत्वम नेटिक ये मात्र अभिवृद्धि चंद लेद ंद कंटे शृंगार गुरिंची तमक अंता तेलस अंदरी नम्मकम शृंगार शास्त्र ग्रंथम अवसरा इत वरक एव र्च लेद मानवाने पट्ट पीड़ स्तु दुर दृष्ट इ य
(02:26) रोजु शृंगारा की संबंध परिपूर्णम अवगाहन प शास्त्रीय समग्र अध्ययनम जरिग व अध्ययन ग्रंथा मन अभिवृद्धि चेस कुमो आ रोज नचे संपूर्णम नवीन मानवन जन्म इचेक कावलन शक्ति सामर्थ मन कलिग उं अपट नंची विकृत मना निसार मना बलहीनता निकृष्ट मानवा जनना की य मात्र अवकाशम लेंडा पि अप मंत वेतिकिना अलाट वार ई भूमि प ड़ा कनि पिंचर सेक्स पापम अने अपराध भावन नुची पुट पिल समाजा की य मात्र अवसरम लेने नगन
(03:13) सत्यम मीक अर्थम कावट लेद अलाट रभ प्राय म जीनाम काब इत वरक सेक्स को संबंध समग्र परिशोधन रिगे अवकाश लेंड पोइ मीक तेलसन दल्ला यांत्रिक जरिपे शारीरिक संभोगम मात्रे दाने म संपूर्ण शृंगार परिज्ञान अनक नार अंद के सेक्स गुरिंची समग्र तेलस कोंडाने मी जीवितम मुग पोतो ना अंदर की सेक्स गुरिंची अंता लिसिन इ दानी गुरिंची चर्चिच वलन पने मुंदी दानी गुरिंची मनम आलोचिंचवा लेने
(04:01) लेन परमाणु गुरिंची इवले तेलस कुनाम दानि तो प्रपंच लो अदभुतम परिणामम चोट चेसक अलाग रोजु संभोगा की संबंध परमाणु गुरिंची मनम संपूर्ण तेलस कुं मो आ रोज नचे मानव जाति ओ नूतन परिज्ञान सेकंड लोक प्रवेश चैतन्या सृष्टि पद्धति प्रक्रिया ंग अर्थम चेस कुंटे मन रकने उन्नत नतम दानी प्रभाव एला उंटो मुंदगांव मदनी गंभीर मदनी ई प्रपंच लोने अदि अत्यंत विलैन दनी मात्र खच चप गलन कानी दानी
(04:50) गुरिंची मनम ये मात्र पिंच कोम निजा की प्रपंच लो अत्यंत लुव वनी निषेधा गुर उतने उं अंद के प्रजल वारी जीवित कालम अंता प्रति रोजू शृंगार लो पालन पटकी वार च पोय नाटिक ा दानी रिंच वारिक य मात्र अर्थम काद आलोचना रहित अहंकार रहित अनुभवालु संभोगम द्वारा लभ स्तानी ने िन ना माटल एवर नम्म लेद पैगा अद असंभव मनी भाविंस कानी तरवाता ओ मित्र ना देगर व म िन विषयालु ने आलो चिंच लेद कानी मनद मात्र निम ंद कं अद नाक जरिगिंदी अना अलाग ओ महि नागर व मी िन विषयालु वि तरवाता ने गत
(05:41) अनुभवा जप्त ुक ना मनसु निश्चल निर्मल उ अनुभूति पिनल ंद ते निरंकार स्थिति कानी अलाट मरक मंत ढम अनुभूति पिनल कानी नाक ए अनि पिंच लेद अंदी काब ने चिन विषयालु इंका अनेक मंद मनसु अनेक प्रश्न रेख तिचे अवकाशम उंदी अंव कोन् मुख्य विषयाची मनम मंत लोगा मंत विपुल चर्चिच कोवम चाला मंच पुट्टक तोटे संपूर्ण लैंगिक विज्ञानं तो एव जन्म चट लेद बहुसा अनेक गत जन्मला अनुभवालु ज्ञाप कम उं चकना चाला कोद मंद मात्र मेंे कलात्मक लैंगिक विज्ञान
(06:28) प्रक्रिया संपूर्ण अर्थम चेको गलर अलाट वारे असलन ब्रह्म चारुल ंद कंटे सक्स गुरिंची संपूर्ण अर्थम चेसक व्यक्ति की दानी वल्ला पे प्रयोजन उद लस्तु दांतो अतन दानि अधिगम मुक ताड कानी विषयम रिंचन कोनी मुख्यम वियालन इतक मंद एव ए लेद सेक्स गुरिंची स्पष्ट मना अवगाहना मीक कलगा मुंदगांव पुट्टक तोटे शृंगार गुरिंची प्रेम कलाल गुरिंची मीक अंता लसु अने भ्रम नंची मीर बट पडली अद मुख्य म तेलस कोवलन म्मद विषयम ंद कंटे निजा की सेक्स गुरिंची
(07:15) मीमी तेलियदु अंद अंदरी जीविता वार चपय वरक सेक्स चु पर भ्रम स्ने उनाई सेक्स को सिचन वरक जंतु वलक ओ प्रत्येक मना काल परिमिति उनी आ ऋत समय लोने अ शृंगार लो पालनी नेन मीक मंदे चन कानी मनिष अला ओ निर्म काल परिमिति अने लेदु ंद को लसा मनुल कन्ना जंत लके शृंगार लोत लो की वे गलगे सामर्थ्य एकवा सेक्स परिशोधन चेसन वारु दानी लोलो की वे अनेक अनुभवा लसक वारु संभोग परा काष्ट संभ विचे भाव प्राप्ति लो केवलम निमिष मात्रे उंड गलगे व्यक्ति मल्ली मरना दानी कोसम आरा
(08:05) पड़ता अद भाव प्राप्ति समया मू निमिषा पाट कोन सागं गलगे व्यक्ति ओ वार रोजुल पाट असल दानी गुरिंची य मात्र आलो चिंचनी अद भाव प्राप्ति लो ए निमिषा पाट स्थिर उंड गलगे व्यक्ति सेक्स गुरिंची मूड लल वरक ये मात्र आलो चिंचनी अद भाव प्राप्ति समया मू ंट पाट कोन सागं गलगन व्यक्ति मल्ली अद कालनी ए कोकोनी अंव अतन सेक्स नंची शाश्वत बट पडता तेच चेपे सार ओ क्षण कालम मात्रे लचे भाव प्राप्ति मू ंट पाट कोन सागं चडम अने हिंच के कष्टम अलाट ओ व्यक्ति अहंकार रहित मना संभोग स्थिति
(08:53) लो मू गंला पाट लीनम उगलते अलाट ओके व संभोग तो जीवित अतन सेक्स नंची विमुक्त वता अलाट संभोगम ओ जीवित काला सरपो संतृप्ति परमानंद रकन अस्तु अलाट संभोगा अनुभव वारे असल ब्रह्म चर्या साधि स्तार

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