Osho ~ Sex is a great sin. Yet the husband is God. How does an ideal marriage happen? #sadhguru #...
Youtube Video URL:https://www.youtube.com/watch?v=xh548QMIOE0
Transcript:
(00:01) भारत देश लो स्त्री तन भर्त दवनला आराध चाल अार अलाग आमे को अति बाल्य चे सेक्स महा पापम नरका द्वार मनी बोधि चम को जरिगिंदी अलाट परिस्थिति आमक पेन तरवाता महा पापम नरक कोपन लां सेक्स लोक लागे तन भर्त आमे एला गौर विंच गलगुंद ओ पक्का भरते दैवम म स्त्री की बोधि स्तार कानी पापाम न नरकम लो की लागुना अ आमे अनुभवम आम तने ंद ई विषयम पै बंबई लो प्रसंग चिन महि ना दग को व मी माटल विं नाक ल् मं पोतो मी पै नाक चाला कोप उंदी
(00:50) सेक्स महा पापम अंते काद अद मरी चडाल विषयम अलाट दनी गुरिंची मींद को अंतगा मालाड निज नाक सेक्स चाला असम अंदी इप ई वियानी मनम लोगा पिलिम आम पे कोडकल कू उना आना आमे सेक्सन असच कुंद अलाट सेक्स लोक लागे भर्त आमे एला प्रेम गलु सेक्स महा पाप मनी परम डालनी ं आमे सेक्स द्वारा पुट्टिना पिलन एला प्रेम गद आमे प्रेम विष पूतम पो इंद विषम आमे प्रेम लो शाश्वत पातक पोइ सेक्स पटला आमे कु
(01:38) निरसन वखरी वल्ला आमे को आमे भर्त को मध्या अलगे आमे को आमे पिल को मध्या पे अगाध उे ंद ंद कंटे आ पिल्लु महा पाप कार्यम सेक्स नंची पुर काब अलाग आमे को आमे भर्त को मध्य अनुबंध को सेक्स महा पापम अने भावन तो पाप भू इष्टम पोइ अलाट भावन तो कोन सागे पापा अनुबंधन लो व्यक्ति तो मर स्नेह उगल पापं तो सहवास चेय गलर सेक्सन दूष द्वेष वारु अंदरी वैवाहिक जीविता नासनम चेसर फलित प्रजल सेक्सन अधिगम मंदक वेलेक पोया सेक्स महा पापम लचे
(02:26) भार्य तो जरिपे शृंगार लो पुरुषु मात्र संतृप्ति चंद लेड दांतो अतन मरक स्त्री कोसम चेसे तुक लाट लो वेस्य तारस पड अतन आला वेक तद निजा की इंट दिगर शृंगार लो संतृप्ति चंदन ए पुरुषु कैना प्रपंच लो इतर स्त्री अंदरू तगा तोड़ बुट्टन वागा कन पिस्ता अलाग भार्य दग संतृप्ति लचन पुरुषु की इतर स्त्री अंदरू तनक भार्य कागल अर्हत कलवाने कन पिस्ता अद सहज अद अलाग जगतु क ंद कंटे संतृप्ति परमानंद लभ वलन चोटा अतन की व्यतिरेक असह्य रवना अंद वल्ला अत तनक
(03:18) कावलन संतृप्ति कोसम अनी चोटला तकने उं प्रेम को सेक्स को मूलाधार सहज प्रवाह को विषपुरम पोने मौलिक अंशा म गम निच लेद भार्या भर्त मध्या सेक्स पापम विषम अने भावना तप चेना मेमो अने संकोच उनत वरक वारी जीविता अभिवृद्धि चंदक परिणामम चंदक मात्र अवकाशम उद वारीलो बल नाटक पोय उना अपराध भावन अंद मुख्य कारण ना अवगाहन मेरक य दंपति सेक्स पटला लांटी व्यतिरेक भावन लेक दानी सामर अर्थम चेसक अभिनंदिता परस्पर अवगाहन तो इव नकर प्रेम कुंटू
(04:08) आनंदा अनुभूति पतार अप वारी मध्य उन अनुबंध मल्ल मेलगा परिवर्तन चंदी उन्नत स्थिति की तप कुंडा चेरुकु आ क्रम लो भार्य स्थान लो आमे उन पटकी भर्त को आमे लिगा अनि पस्तु काब भार्या भर्त परस्पर अवगाहन तो अर्थम चेको ये मात्र प्रयत्न चिना वार रवर चक्कनी स्नेहिल पतार अंते काद सेक्सन रूपांतर कंचे विषयम लो वादर ओकर कोकर तोड वतार आ प्रयत्न लो य रोजु वार विजया साधि स्तार आ रोज नंची वारि मध्या परिपूर्णम कृतज्ञता भाव वेल्ली विंद गतम लो एड इला रग लेद सरी कदा वारी मध
(04:57) कोपता पाल कक्ष साधि पुल निरंतर घर्षण मात्रे उे अंते कानी वारी मध्या निर्मलम स्नेह भाव उे दे काद येय रोजु भार्या भर्त र कोकर तोड तम लैंगिक शक्लन रूपांतर करिचे पनि की तम शरीरा साधन विनियोग स्तार आ रोज नचे वारी मध्या परिपूर्ण कृतज्ञता पूर्वक मना स्नेह भाव वेल्ली विंदी आ रोजु भर्त मनसु तन भार्य पटल परिपूर्णम गौरव तो निंप ंद कंटे अनी कामदानी र्ची दान ंची अतन बैट पडेको आमे अतन की संपूर्ण सहक चिंद कनुका अलाग अद रोजु नंची भार्य कु तन
(05:45) भर्त पटला परिपूर्णम कृतज्ञता भाव कलग ंद कंटे लैंगिक व्यामोह ंची आमे बट पक अतन तनो सहक चाड कनका अला आ रोज ंची इरवु केवल शृंगार कोसम काकुंडा असलन प्रेमा रक्ति तो कोन स्नेह बंधन तो जी विस्तार भार्य भर्त दवन भर्ता भार्य देवत गान भाविक अद नांद अंद
No comments:
Post a Comment