Fever Can Damage Heart, Brain & Bones - Treatment & Home Remedies | Dr Navneet | FO451 Raj Shamani
Author Name:Raj Shamani
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Transcript:
(00:00) यू हैव सेड डेली 2 से 3 लीटर पानी पीने से 80% डेंगू तो ठीक हो जाता है। एग्जैक्टली लेट अस सपोज़ हमारे जो ब्लड वेसल्स हैं वो एक पाइप है। वो पाइप को अटैक करेगा। उसमें से पानी जा रहा है। अब पाइप में होल हो जाएंगे तो पानी लीक होना शुरू हो जाएगा। हमारी ऑर्गन्स का मेन ट्रांसपोर्ट मीडियम ब्लड है। ब्लड लिक्विड होता है। तो वो थोड़ा-थोड़ा लीक हो रहा है। वो पियोगे तो उससे क्या होगा? ब्लड सर्कुलेशन बढ़ेगी। ऑक्सीजन मिलेगी हर चीज को। बॉडी को ऑक्सीजन चाहिए। क्या हो सकता है? अगर कच्चा मिल्क पीता है कोई तो। कच्चे दूध से ब्रूसेला होने का चांस बढ़ जाता है। वो
(00:26) पहले तो आपको बुखार करेगा। आपके सारे सेल्स प्रेस कर देगा। हार्ट के वॉल्स के ऊपर परमानेंट डैमेज कर देगा। फिर वहां से निकलेगा, ब्रेन में चला जाएगा। वहां से हड्डियों में जाएगा, हड्डियां तोड़ देगा। पैरासिटामॉल लेनी चाहिए। एक नॉर्मल बंदा एसओएस बेसिस पे पैरासिटामॉल ले सकता है जिसमें कोई हार्म नहीं है। कौन सी तीन कॉमन मिस्टेक्स हैं जो लोग करते हैं एट द टाइम ऑफ़ फीवर? एक तो सेल्फ मेडिकेशन मुझे लगता है बड़ी मिस्टेक है। दूसरा फीवर को इग्नोर करना तीन दिन से ज्यादा। तीसरी लगती है कि इधर-उधर से बात सुनके अपना खुद इलाज कर लेना गलत बात है। क्या आपको पता है कि
(00:56) आपका जो थ्रोट इंफेक्शन है वह एंटीबायोटिक से ठीक नहीं होता है। पेन किलर्स का आपके ऑर्गन्स पे क्या इफेक्ट होता है? आज के हमारे गेस्ट है डॉक्टर नवनीत अरोरा। आज हम उनसे जानेंगे वेदर चेंज होने से फीवर क्यों होता है? पेन किलर्स लेने की सेफ डोसेज क्या है? और फीवर आपके ब्रेन को कैसे इफेक्ट करता है? तीन डेली हैबिट्स जो हर किसी को फॉलो करनी चाहिए ताकि वो फीवर, वायरल जो इतनी चीजें हमारे देश में उसे नहीं हो। 45 मिनट्स ब्रिस्क वॉक, एक्सरसाइज, [संगीत] गुड डाइट, गुड स्लीप मस्ट। फीवर से ब्रेन को क्या असर होता है? फाइव रीज़ंस
(01:29) कि अनप्रोटेक्टेड सेक्स से फीवर होता है। ये क्या है? बेसिकली आगे बढ़ने से पहले इस चैनल को सब्सक्राइब कर लीजिए ताकि हम आपके लिए इसी तरह से और इंसाइटफुल और बेहतर पॉडकास्ट बनाते रहें। एंड इस पूरे शो का ऑडियो एक्सपीरियंस स्पॉटिफाई पे अवेलेबल है। जहां पे आप हमें फॉलो कर सकते हैं। एंजॉय द शो। [संगीत] मैं आपके वीडियोस देखता हूं काफी थोड़े अगेंस्ट। तो आप एंटीबायोटिक्स के तो मैं एंटीबायोटिक्स के अगेंस्ट नहीं हूं। मैं हर चीज के लिए एंटीबायोटिक लेने के डेफिनेटली अगेंस्ट। तो घरघर में इंडिया में तो हर कोई चलो एंटीबायोटिक्स का ट्रीटमेंट स्टार्ट कर
(02:08) दो। दो दिन फीवर आया एंटीबायोटिक डाल दो। हां तो नॉट थोड़ा गला खराब हो रहा है। एंटीबायोटिक बिल्कुल नॉट राइट नॉट राइट। 70 टू 80% डाटा है। मतलब वर्ल्ड वाइड अवेलेबल है। Google कर लो। एविडेंस बेस्ड मेडिसिन के सॉफ्टवेयर हैं। अप टू डेट है, पबड है। सब पे अवेलेबल है। 70 से 80% गले खराब। सीजनल फ्लू होते हैं। इन्फ्लुएंजा से कॉज होते हैं। रियो वायरस से कॉज होते हैं। उसमें आप चाहे एंटीबायोटिक बच्चों वाली खिला दो, चाहे बड़ों वाली खिला दो। ठीक उसने पांच से सात दिन में होना है। ठीक है ना? और आप जो मर्जी जोर लगा लो। ठीक होना नहीं उसने
(02:36) उसके साथ। बट अब क्या होता है ना एंटीबायोटिक का कोर्स होता है पांच से सात दिन का। आप पांच दिन खाते हो कि यार मैं तो इससे ठीक हो गया। आप पांच दिन मिश्री खा लो। आप ठीक तो उससे भी हो जाओगे। कल को आप ये थोड़ी बोलोगे कि यार मिश्री से ठीक हो जाता है बंदा। है ना? तो ये डिफरेंस है। जब सच्ची में निमोनिया हो जाएगा या एलआरटीआई हो जाएगा, लोअर रेस्पिरेटरी ट्रैक्ट इनफेक्शन हो जाएगा। फिर चाहे आप 100 दिन रुके रहो, ठीक नहीं होगे। उस टाइम पे लोग कहते हैं हम एंटीबायोटिक्स नहीं खाएंगे। तो एक बैलेंस्ड अप्रोच होनी चाहिए कि कब चाहिए और कब नहीं चाहिए ये पता होना
(03:03) चाहिए। पता अपने डॉक्टर से कर लो। खा खुद लो कोई चक्कर नहीं। बट पता करके खाओ कि क्या करना है। और अगर पता करके खाओगे तो पांच चीजें बचाओगे। सिर्फ अपने आप को नहीं अपनी कम्युनिटी को भी हेल्प करोगे इस चीज से। तो इसीलिए मैं उस चीज के फेवर में नहीं हूं। नॉट अगेंस्ट बट नॉट इन फेवर नॉट इन फेवर फेयर क्योंकि यू नो मैं जितना पढ़ते जाता हूं मैं काफी मैं अदर साइड ऑफ द बैलेंस में पहुंच चुका हूं एंटीबायोटिक के कि मुझे डर लगता है मुझे चाहिए ही नहीं एंटीबायोटिक्स मुझे चाहिए ही नहीं क्योंकि मैंने ना इतना पढ़ लिया इसके बारे में और
(03:32) इतने सारे डॉक्टर्स ने इतनी सारी रिसर्चेस पढ़ ली कि एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस क्या होता जा रहा है तो ऐसा हो गया कि जो हर थोड़ी-थोड़ी चीजों के लिए एंटीबायोटिक्स ले रहे हैं उन्हें एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस हो जाता है मतलब बाद में कभी कोई एंटीबायोटिक काम ही नहीं करती तो अगर मेरे को कोई बड़ी बीमारी हुई उस दिन काम नहीं नहीं हुआ तो इसकी वजह से मैं छोटे जो दर्द होते हैं गले वले के या कोई प्रॉब्लम होती है मैं दूर रहता हूं। बेसिकली क्या होता है ना एक नेचुरल हिस्ट्री ऑफ़ डिजीज होती है। नेचुरल हिस्ट्री का मतलब क्या होता है? कि कैसे
(03:56) डिजीज होगा? कैसे वो आपकी बॉडी पे एक्ट करेगा? कैसे बॉडी रिसोंड करेगी और कैसे वो क्लियर होगा या क्रॉनिक हो जाएगा। तो वायरस की नेचुरल हिस्ट्री तो होती सात दिन की है। तो वो आएगा दो-तीन दिन बुखार करेगा। फिर गला खराब करेगा। फिर आपको नोज ब्लॉक होएगा। रनिंग नोज़ होएगा। फिर आप ठीक हो जाओगे। अब आप एंटीबायोटिक तीसरे दिन पर शुरू कर दोगे तो भी सातवें दिन ठीक होगे। पहले दिन कर दोगे तो भी सातवें दिन ठीक होगे। नहीं करोगे तो भी सातवें दिन पर ठीक होगे। अब आप देख लो कि आपने कैसे ठीक होना है। अब आप कैसे देख सकते हो क्योंकि आपको पता नहीं है। है ना? तो उसके लिए आप जाते
(04:28) हो। जब आप जाते हो यू आर वेल विद इन योर रेंज टू आस्क कि सर आपको क्या लग रहा है। इतनी नॉलेज तो सभी को है। वायरल बैक्टीरियल तो कोविड ने सबको बता दिया है कि क्या होता है ना। इतनी नॉलेज तो अब मेरे को लगता है कि रिक्शा पुलर से लेके एक टॉप इंडस्ट्रियलिस्ट को भी है। तो इतना तो पूछ सकते हैं कि सर आपको बीमारी क्या लग रही है? फिर क्या के बाद वो अपने आप ही बता देगा कि भाई ये वायरल लग रहा है या बैक्टीरियल लग रहा है। हां अगर बैक्टीरियल लग रहा है तो एंटीबायोटिक लेने में कोई हार्म नहीं है। इंपेरिकल ट्रीटमेंट इज फाइन। बट दैट शुड बी सपोर्टेड विद द
(05:00) इन्वेस्टिगेशंस। तो इसका मतलब है कि अगर वो ट्रीटमेंट चल रही है तो आपको अगले दिन इन्वेस्टिगेशंस के साथ फॉलो अप करना है क्योंकि वो बंद हो जाएगी एक दिन में। बट अगर इंपेरिकल ट्रीटमेंट नहीं दी है और सिम्टमेटिक ट्रीटमेंट दी है यू आर फाइन। आई गेस इन्वेस्टिगेट तो तब भी करेंगे बट उसमें वही प्रूव होगा जो उसने सोचा है। तो क्लीनिकलशन बेसिकली इंपेरिकल ट्रीटमेंट और सिम सिम्टमैटिक सिम्टमैटिक इंपेरिकल बेसिकली होता है कि आप क्लनिक पे आए या डॉक्टर के पास आए। उसने अपने दिमाग में डिफरेंशियल डायग्नोसिस मतलब कि पॉसिबिलिटी ऑफ व्हाट
(05:32) इनफेक्शन आपको है वो बनाया। उसमें उसके टॉप थ्री में बैक्टीरियल भी आया। है ना? तो उसने उसको अस्यूम करके कि ये बैक्टीरियल हो सकता है। हिट अर्ली हिट हार्ड और एंटीबायोटिक डाल दिया। दैट इज नॉट रोंग। ओके? है ना? दैट इज नॉट रोंग। अगर उसके दिमाग में आया कि यार है तो वायरली चल सेफ रहने के लिए डाल देता हूं। प्रोबेबबली अ थिन लाइन नॉट टू बी डन। है ना? बट अगर उसने ये सोच के डाल दिया है कि मेरे टॉप थ्री में बैक्टीरियल आ रहा है तो उसको फिर अपने क्लनिक्स के साथ मतलब लैब्स ब्लड वर्क के साथ उसको वो भी करना है। जस्टिफाई भी करना है। अपने लिए भी और पेशेंट के लिए भी। अगर
(06:05) वो जस्टिफाई हो जाता है तो फुल कोर्स चलेगा। नहीं होता है तो वो अगले दिन बंद कर देगा उसको। तो फॉलो अप बिकम्स वेरीेंट इन दिस। गॉट इट। बट आजकल के बिजी वर्ल्ड में फॉलो अप का टाइम नहीं है। हालांकि फॉलो अप फ्री होता है बट उसका टाइम भी नहीं है कि चल यार अब तो दवाई दे दी है लेके देख लेते हैं। है ना? तो ये पांच दिन बाद ही जाएंगे। हां कि भाई अब उसके बाद ही देखेंगे। जाएंगे भी अगर बीमारी रही नहीं तो नहीं जाएंगे। क्या है? एंड सिम्टमेटिक मतलब क्या होता है? सिम्टमैटिक मतलब जैसे गला दर्द हो रहा है, गर्म पानी पिया है हमने। मतलब सिम्टम्स जो
(06:29) आपको तंग कर रहे हैं। तो सिम्टम्स और अंडरलाइंग डिजीज में डिफरेंस होता है। अंडरलाइंग डिजीज सिम्टम्स कॉज करता है। जैसे मान लो मुझे बैक्टीरिया हो गया है या यूरिन इंफेक्शन हो गया तो मुझे बुखार हो रहा है। तो यूरिन इंफेक्शन अंडरलाइन कॉज है और बुखार जो है वो सिम्टम है। तो बेसिकली ट्रीटमेंट बुखार का नहीं होता है। बेसिकली ट्रीटमेंट तो यूटीआई का होता है एंटीबायोटिक से। बट बुखार उतर जाता है उससे क्योंकि उसका सिम्टम खत्म हो गया। जब बीमारी खत्म हो गई तो सिम्टम खत्म हो गया। तो ये सिम्टोमेटिक ट्रीटमेंट है। गुड। ऐसे। किसको एंटीबायोटिक लेनी चाहिए और
(06:57) किसको नहीं लेनी चाहिए। कब लेनी चाहिए और कब नहीं लेनी चाहिए? देखो अगर बैक्टीरियल इंफेक्शन प्रूवन है, एंटीबायोटिक लेनी चाहिए। नहीं तो किसी को भी नहीं लेनी चाहिए। बैक्टीरियल इंफेक्शंस नाम दो तीन चार जैसे किन केसेस में लेनी चाहिए? किन केसेस में नहीं लेनी चाहिए? हर बैक्टीरियल इंफेक्शन में लेनी चाहिए। आपको निमोनिया हो जाए बैक्टीरिया से डेफिनेटली लेनी चाहिए। वायरल निमोनिया हो जाए नहीं लेनी चाहिए। आपको यूटीआई हो गया लेनी चाहिए। प्रोस्टाइटिस हो गया, सेक्सुअली ट्रांसमिटेड इनफेक्शन बैक्टीरियल्स जिससे होते हैं तो उन सब में
(07:22) लेनी चाहिए। बट अगर यही एियोलॉजीस मतलब यही कॉजेस किसी और ऑर्गेनिज्म से हो रहे हैं। ये नहीं है कि ये सारे जो लिस्ट मैंने दी है ये बैक्टीरिया ही कॉज करता है। ये वायरस भी कॉज कर सकता है। तो उसके लिए उसके स्पेसिफिक टेस्ट होते हैं। 40 मिनट्स टू वन डे उसका टर्न अराउंड टाइम है। उसमें पता लग जाता है। तो उसके अकॉर्डिंग आपको ट्रीटमेंट देखना चाहिए। सर एविडेंस बेस्ड मेडिसिन होनी चाहिए। दिख रहा है तो दे रहे हैं। नहीं दिख रहा है तो नहीं दे रहे हैं। डर लग रहा है तो दे रहे हैं। एविडेंस बेस्ड नहीं है। दिख रहा है तो दे रहे हैं। एविडेंस बेस्ड है। और आजकल
(07:51) दिखता है। 90% केसेस में दिख जाता है। इट्स है इनफेक्ट डिजीज सोसाइटी ऑफ़ अमेरिका। उनका आर्टिकल है इस चीज़ पे कि पहले फ़ीवर का कॉज़ 53 टु 70% पेशेंट्स में ही दिखता था। अब अराउंड 80 से 90% में पता लग जाता है कि क्या है कॉज़। एडवेंट ऑफ मेडिसिन हुआ है। न्यूअर आरटीपीसीआर बेस्ड मॉलिक्यूलर टेक्निक्स, नेक्स्ट जनरेशन सीक्वेंसिंग आ गई है जिसमें आप आरएनएज़ को पीछे ट्रेस कर लेते हो। डीएनए को पीछे ट्रेस करके ऑर्गेनिज़्म बता देते हो। तो अवेलेबल सब कुछ है हमारे पास। बट ट्रीटमेंट एविडेंस बेस्ड होना चाहिए। उसके लिए आपको एक आधा दिन लग सकता है। बट
(08:24) पेशेंस पेशेंट को भी होनी चाहिए। तो अगर जो गला खराब हो जाता है लोगों का पहले तीन दिन तक कुछ नहीं करना है। पानी पियो गरम बस ठीक हो जाएगा। नहीं होएगा तो आगे देखेंगे। नहीं हुआ तो बुखार भी चढ़ता रहेगा। बहुत कुछ होता रहेगा। हाई ग्रेड फीवर चिल्स आने लग जाएंगे। अपने आप पता लग जाएगा कुछ ठीक नहीं चल रहा है। आपको भी और आपके डॉक्टर को भी। बट पहले दिन से ही एंटीबायोटिक लेना तो मेरे को लगता है कि नॉट राइट। और तीन चार दिन बाद एंटीबायोटिक ले सकते। नहीं नहीं नहीं नहीं नहीं तीन दिन चार दिन बाद नहीं ले सकते हो एंटीबायोटिक। तीन दिन
(08:51) चार दिन में पता लग जाएगा कि क्यों हुआ है। कल्चर को तीन दिन लगते हैं 72 आवर्स आने में पीसीआर को एक दिन लगता है आने में। तो ये जब भी आप तीन दिन बाद तो आप क्लनिक पहुंचोगे ना। तीन दिन तक तो आप घर पे रहोगे। ये तो आप लगा के चलो कि तीन दिन तक तो आप कहीं नहीं जा रहे हो। है ना? तीन दिन बाद आप मिले उससे जाके तो साइकिल मान लो हफ्ते की है। फाइव टू सेवन डेज की साइकिल है। उसमें से तीन दिन निकल गए। दो दिन में इन्वेस्टिगेशंस आ गई। अगर तब भी दोबारा जाना पड़ गया तो तो डेफिनेटली इंपेरिकल ट्रीटमेंट चाहिए और अगर वापस जाना ही नहीं पड़ा फिर आप वैसे
(09:19) ही कुछ नहीं ले रहे हो तो कुछ नहीं चाहिए और अगर उसके बीच में कोई ऑर्गेनिज्म ग्रो हो गया तो खुद फोन आएगा कि आप वापस आओ हम ये देंगे आपको और जो सर्दी जुकाम में भी लोग लेते हैं एंटीबायोटिक्स सर एंटीबायोटिक्स इज अ नो नो फॉर मी अनलेस एंड अंटिल आपने देख लिया है या क्लीनिकली सस्पेक्ट कर लिया है हां ओल्ड एज पेशेंट आया 65 से ऊपर मेरे को बुखार हो रहा है ठंड लग रही है पहली चीज मेरे को यूटीआई आएगी दिमाग में है ना तो मैं दूंगा उसको एंटीबायोटिक बट मैं एज रिलेटेड दूंगा ना मैं ऐसे थोड़ी कि यार 18 साल से 65 साल के बीच में कोई आ गया
(09:49) नॉर्मल फ्लू सीजन चल रहा है मुझे पता है कि भाई सीजनालिटी है ये इसमें ये होना चाहिए या कोई पेशेंट डेंगू के टाइम पे आ गया और मेरे को पता है कि डेंगू है मैं उसको थोड़ी एंटीबायोटिक दे दूंगा वो तो मेरे पार्ट पे ठीक नहीं होगा तो ऐसे ओके ये मुझे बताओ फीवर होता क्यों है माइक्रो ऑर्गेनिज्म्स जो कि बैक्टीरिया वायरसेस फंगस जो भी होते हैं वो हमारी बॉडी को अटैक करते हैं ब्लड में आते हैं और अटैक अटैक करते हैं। वो कैसे अटैक करेंगे? वो टॉक्सिंस जो कि पोइजन होता है उनके अंडर वो रिलीज करते हैं। अब उनका काम है उनका बेसिकली काम क्या है कि वो एक
(10:21) पैरासिटिक ऑर्गेनिज्म्स होते हैं। मतलब वो अपने आप सर्वाइवल उनका कम है। तो वो किसी के ऊपर रह के वो करेंगे। तो हमारे ब्लड में हमारे सेल्स को डिस्ट्रॉय करते हैं और हमारे सेल्स के अंदर इंटीग्रेट हो जाते हैं। वहां रेप्लिकेट करते हैं। अपने आप को रेप्लिकेट करते हैं। तो उन्होंने अपना पोइजन निकाला। अब बॉडी भी एक कॉम्प्लेक्स मैकेनिज्म से चलती है। बॉडी को पता है यार कि इसकी आर्मी आ रही है। हमारी तो खुद की आर्मी है। इधर से बॉडी ने अपने टॉक्सिंस जिसको साइटोकाइन बोलते हैं वो रिलीज किए। अब इन दोनों में लड़ाई हुई। ये साइटोकाइन ने मेटाबॉलिक रेट
(10:49) बढ़ा दिया। ब्रेन पे इफेक्ट किया। तो ब्रेन के अंदर एक पॉइंट होता है थर्मोरेगुलेटरी पॉइंट होता है हाइपोथैलेमस में। वो टेंपरेचर सेट पॉइंट ऊपर कर देता है। ये तो हो गया स्पेसिफिक रीज़न। हम्म। दूसरा रीजन है कि एक हमारा एक्यूट मतलब इमीडिएट इम्यूनिटी रिस्पांस होता है जो कि नॉन स्पेसिफिक होता है। उसमें हमारी ब्रेन मेमोरी इम्यूनिटी मेमोरी में होता है कि कई ऑर्गेनिज्म थर्मोलेबाइल मतलब कि हीट से मर जाते हैं। तो बॉडी इसीलिए भी अपना थर्मोसेट पॉइंट ऊपर करती है। तो यह एक्सोजेनस मतलब बाहर से आए हुए ऑर्गेनिज्म एंडोजेनस मतलब अंदर वाले ऑर्गेनिज़्म अंदर
(11:21) वाले हमारे इम्यून रिस्पांस प्लस इननेट इम्यूनिटी मतलब कि जो हमारी नॉन स्पेसिफिक इम्युनिटी है तीनों मिला के टेंपरेचर राइज करते हैं ताकि हमारे को बेनिफिट हो और फीवर हो जाता है। सो अब फीवर और वायरल और इंफेक्शन इन तीनों में क्या डिफरेंस होता है? देखो फीवर एक सिम्टम है। फीवर बीमारी नहीं है। ओके? इंफेक्शन बीमारी है। अब इनफेक्शन बैक्टीरिया से हो या वायरस से हो वो उसके कॉजेस हैं। तो ये डिफरेंस है तीनों में कि फीवर बीमारी नहीं है। आप फीवर नहीं ट्रीट कर रहे हो। आप बीमारी ट्रीट कर रहे हो। फीवर अपने आप ठीक होएगा। इंटरेस्टिंग। सो फीवर आना इज नॉट अ
(11:56) बीमारी। कोई कुछ फीवर आना हुआ होगा। फीवर आना मतलब घर की बेल बज गई है कि भाई कोई घर में आया है। बट आया कौन है पता नहीं। आया कौन है वो तो जब तक आप या वीडियो पे देखोगे अपनी बेल पे या खुद जाके देखोगे तभी पता लगेगा। वायरल क्या होता है? वायरल बेसिकली वायरसेस की वजह से होते हैं। हम अब वायरसेस मल्टीपल टाइप के होते हैं। है ना? जैसे आप आपके 10 दोस्त हैं। हम आपके 10 दोस्तों के अलग-अलग नाम है। वैसे 10 वायरसेस हैं जिनके अलग-अलग नाम होते हैं। है ना? तो बेसिकली डीएनए और आरएनए वायरसेस होते हैं। बिल्कुल ही बेसिक से मतलब मिनिलिस्टिक बंदा बोल सकते हो आप
(12:30) वायरस को ना कि कुछ नहीं है उस पे बस एक जेनेटिक मटेरियल है। बॉडी में घुस गया है। वो जेनेटिक मटेरियल हमारे सेल में डाल दिया और वहां रेप्लिकेट कर रहा है और चिल कर रहा है बिल्कुल ही कि हां भाई मैं तो इसी पे खा पी रहा हूं। यहीं बैठा हूं। रेंट मैंने देना नहीं है। बॉडी को मैं इवेट कर ही लूंगा। इतना मैं स्मार्ट हो गया हूं कि इम्यून सिस्टम को मैं बेवकूफ बना लूंगा और जिंदा रहूंगा। यह वायरस घूमता ही रहता है और हर जगह घूम के ब्लड में जाता है। एक सेल में घुस जाता है। उस सेल को बारी-बारी ये रेप्लिकेशन इसको रोक सकते हैं हम।
(12:54) हां रोक सकते हैं। बिल्कुल इसको बॉडी खुद रोक देती है। 90% वायरसेस हमारी इम्यून रिस्पांस से मर जाते हैं। पर हर फिर हर थोड़े दिन में कुछ लोग बीमार क्यों हो जाते हैं? इम्युनिटी वीक है आपकी। प्रोटीनंस खाओ ढंग से 1 ग्राम पर केजी। [हंसी] ठीक हो जाएगी। और इससे सही हो जाएगा। तो यू थिंक कि जो लोग प्रोटीन लेते हैं वो लोग कम बीमार पड़ते हैं। नहीं नहीं जो लोग प्रोटीन सिर्फ लेते हैं वो कम बीमार नहीं पड़ते। जो लोगों की डाइट हैबिट्स अच्छी हैं, बैलेंस डाइट जो लेते हैं, अपनी बॉडी का ध्यान रखते हैं, वो डेफिनेटली कम बीमार पड़ते हैं। गॉट इट।
(13:23) एंड जैसे आपने बोला कि 60 बार 60 किलो का बंदा है 90 ग्राम प्रोटीन होना चाहिए। 60 टू 90 60 टू 90 ग्राम प्रोटीन होना चाहिए। अब ये फूड सोर्सर्सेस से जरूरी है कि ले लें। ले सकते हो। अभी स्कूप ले लें। बहुत देखो अब तीन स्कूप में 75 ग्राम प्रोटीन है। हम ठीक है? फिर उसके बाद आप लोगे उसके साथ खाना पीना तो खाओगे कम से कम नहीं तो 30-40 ग्राम प्रोटीन तो जाएगा तो फिर सरप्लस ऑफ एवरीथिंग इज बैड बहुत लोगों का प्रोटीन इंटेक ही बहुत कम होता है क्योंकि सुबह से लेके रात तक जो खाना होता है उसमें प्रोटीन है ही नहीं हां सुबह दाल रोटी दाल तो छोड़ सब्जी रोटी खा
(14:01) रहे हैं सब्जी रोटी खा रहे हैं सब्जी रोटी खा रहे हैं या दाल चावल खा रहे हैं उसमें क्या ही प्रोटीन मिल रहा है हां 10 ग्राम का राइट तो अब ये 10 ग्राम प्रोटीन मिल रहा है तो तीन स्कूप प्रोटीनंस लेने पड़ेंगे और फिर ले आपने अगर 60 ग्राम प्रोटीन बनाना है आप जैसे मर्जी बना लो। उसमें कोई दिक्कत नहीं है। तो अगर तीन स्कोप ले लिए तो कोई प्रॉब्लम नहीं है एक दिन में। मेरे हिसाब से ज्यादा दिक्कत नहीं है। बट नॉट अ डाइटिशियन टू बिल्कुल ही आउटराइटली आपको फैक्ट दे देगा वो नहीं दे पाऊंगा। बट मतलब ऐसा कुछ नहीं है। अगर आपको अपनी रिक्वायरमेंट के अकॉर्डिंग विदाउट
(14:29) डिसबैलेंसिंग एनीथिंग मिल रहा है। आई डोंट थिंक देयर इज़ अ प्रॉब्लम। बट देयर आर मेनी थिंग्स जैसे मल्टीपल रिसर्चेस हैं लिवर के जर्नल्स के ऊपर कि लिवर टॉक्सिक होती है कई चीजें। आई थिंक आपने Twitter पे फॉलो किया होगा। की आप बात करो। हमारे सीनियर हैं वो। [हंसी] ठीक है ना? तो ही हैज़ अ स्टडी अ वेरी गुड स्टडी टेलिंग कि कौन-कौन से प्रोटीनंस आर वेरी गुड। मैं पेपर नहीं कोट कर सकता क्योंकि मैंने बहुत पहले पढ़ा था वो। बहुत अच्छा पेपर है। उसके अकॉर्डिंग अगर आप ले रहे हो तो 3 ग्राम ले तीन स्कूप ले सकते हो बड़े आराम से। सो क्योंकि जितने डॉक्टर से मैंने बात करी
(14:59) है। सो देयर आर टू टाइप्स ऑफ़ पीपल ऑन द पडकास्ट जो आए। एक जो बहुत ज्यादा एडवांस साइंस पढ़ रहे हैं और हावर्ड की स्टडीज पढ़ते हैं, स्टैनफोर्ड की स्टडीज पढ़ते हैं या यह बायो हैकिंग वाली वर्ल्ड में एंटर होते जा रहे हैं। दे आर नॉट डॉक्टर्स बट बहुत एक्सटेंसिवली वेल रिसर्च वेल रेड पीपल इन द फील्ड ऑफ मेडिसिन न्यूट्रिशन यूजुअली ह्यूमन परफॉर्मेंस पे करते हैं। ये लोग बहुत फेवर में है प्रोटंस के। राइट? मैं भी हूं वैसे। हां। फिर डॉक्टर्स आते हैं। डॉक्टर्स में डिवाइडेड है। कुछ डॉक्टर्स बहुत फेवर में है। कुछ डॉक्टर्स बोलते हैं यार नहीं लेना
(15:32) चाहिए क्योंकि किडनी और लिवर में बहुत ज्यादा देखो मैं ऑन रिकॉर्ड एक चीज आपको बोलना चाहूंगा। डॉक्टर होने का मतलब ये नहीं है कि मुझे सब पता है। मैं एक्सेप्ट करता हूं इस चीज को। जो मेरी फील्ड की स्पेशलिटीज हैं। हां शायद मुझे उसमें टच नहीं कर पाओगे। बट उसके ऊपर नीचे टच क्या मुझे धक्का भी दे पाओगे। तो मैं बोलता हुआ कि यही है राइट नहीं है। ठीक। हां मेरे पास अगर कोई चीज मैंने पढ़ रखी है वो बोलता हुआ मैं राइट हूं। हो सकता है। है ना? तो अब हो सकता है उन्होंने कुछ ऐसा पढ़ा हो जैसे कि आप सिरम क्रिएटिनिन और एलएफटीस की बात कर रहे हो। देयर आर नंबर
(16:04) ऑफ थिंग्स जिससे वो बिगड़ते हैं। हालांकि मैं बहुत पढ़ता भी था इसके लिए। मेरे को बड़ा डर लगता था इस चीज से। बट ये है कि जब आप एक बारी उसको पढ़ के निकल जाते हो आगे तो आपको ये पता है कि हां ये दो तीन चीजें सेफ हैं लेने के लिए। कोई दिक्कत नहीं है। इन पे हो चुकी है पोस्ट मार्केटिंग और सब कुछ। तो वो आप करते हो। बट ये आप जनरलाइज नहीं कर सकते ना। अब मैं कहूं कि वे प्रोटीन तीन स्कूप ले लो जनरलाइज हो गया ना यार वो नहीं कर सकते हैं बट हां ये वाला पर्टिकुलर इस पे ये स्टडी आई थी इसके अकॉर्डिंग ले लो हां बिल्कुल स्पेसिफिक है और कर सकते हो
(16:32) तो ऐसे दो स्कूप्स तक तो बहुत लोग लेते ही हैं रोज है ना मैंने तो किसी का एलईएफटी बिगड़ता हुआ ऐसा देखा नहीं है बट नॉट हां बट नॉट अ स्पेशलिस्ट तो मतलब कैन नॉट बी कोटेड ऑब्वियसली नो आई बट बट आई अग्री विद दिस मैं सिर्फ खुद की बात कर सकता हूं और हां आइसोलेटेड एग्जांपल्स हैं हां और जितना पढ़ा है उसकी बात कर सकता हूं एंड मैं मेरे मेरे घर में मेरी मॉम की भी बात कर सकता हूं। जब से मैंने उनका प्रोटीन लेवल स्टार्ट करा है। प्रोटीन स्कूप स्टार्ट करें और बढ़ाने लग गया। ऑल ऑफ अस जब मैं प्रोटीनंस लेता हूं, वर्कआउट करता हूं या थोड़ी मेरी डाइट बेटर होती
(17:04) है। तब मैं डेफिनेटली कम बीमार पड़ता हूं। जब मैं नहीं लेता हूं। 100 मैं एक्सटेंसिव ट्रेवल कर रहा होता हूं। मेरी डाइट अप डाउन होती है। देयर इज ऑलमोस्ट 70% चांसेस कि चेंज ऑफ़ वेदर की वजह से बीमार हो जाऊंगा। तो मैं आपको इस पे करेक्ट कर देता हूं। चेंज ऑफ वेदर कुछ नहीं होता। वायरल होता है जो भी होता है। अच्छा ओके मतलब हमें तो [हंसी] यही बताया दूसरे शहर चेंज ऑफ़ वायरल चेंज ऑफ़ वेदर इज वायरल मतलब वो लेमन टर्म है। इट इज़ वायरल। बीमार वेदर से होता ही नहीं है बंदा। एसी के नीचे सो गया फीवर हो गया ना वायरल हुआ था। तीन दिन पहले किसी के कांटेक्ट में आया था।
(17:37) नियरेस्ट को-रिलेशन एसी लग रहा है कि हां यार कल ही चलाया था और आज बीमार हो गया। वो है। कोरिलेशन इज नॉट एवरी टाइम राइट। हम फीवर की बात कर रहे थे। हां जी। और आपने बोला फीवर सिम्टम है। एग्जैक्टली। फीवर बीमारी नहीं है। हां। राइट? तो कौन बहुत सारी चीज़ों की वजह से फीवर आ जाता है। तो मुझे बताओ कौन सा फीवर किस लिए आता है? चलो पहले मैं ना एक चीज़ डिकोड कर देता हूं। फीवर 90% मतलब इंफेक्शन होता है और ये नॉन इनफेक्टिव भी होता है। ओके? नॉन इनफेक्टिव की बात नहीं करेंगे। मेरी डोमेन नहीं है। पता है मुझे उसके बारे में बट बात नहीं करते। इनफेक्शन की बात करते
(18:11) हैं। इनफेक्टिव फीवरर्स बेसिकली जो होते हैं वो डिफरेंट कॉज से होते हैं। बैक्टीरिया, वायरसेस, फंगल्स, प्रोटोजोआस, मिसलेनियस बैक्टीरियास। अब मिसलेनियस ऑर्गेनिज्म्स। अब क्या होता है कि आपको किस टाइम पे क्या हिट किया है ये पता करना जरूरी है। इसको बोलते हैं इटियोलॉजी। हम इटियोलॉजी मतलब क्या रीज़न है? क्या रीज़न है? ठीक है? तो अब बैक्टीरियल फीवर्स अगर आपने वो करने हैं तो बेसिकली फीवर आगे डिवाइड होते हैं। एक्यूट फीवर लेस देन से डेज। एक्यूट अनडिफरशिएटेड फीवर से टू 14 डेज। फिर आता है फीवर ऑफ अननोन ओरिजिन जो कि एक पर्टिकुलर डेफिनेशन है
(18:47) जो बताती है कि तीन ओपीडी विजिट्स तीन इनपेशंट विजिट्स मतलब तीन इनपेशेंट डेज से ज्यादा विद अ पर्टिकुलर सेट ऑफ इन्वेस्टिगेशन से ज्यादा अगर फीवर रहा है तो फीवर ऑफ अननोन ओरिजिन है वो। तो इन तीनों में डिवाइड होता है। एक्यूट फीवरर्स अगर आप देखोगे एकदम से फीवर चढ़ गया मोस्ट कॉमनली वायरल की वजह से होता है। उसके साथ-साथ वायरस में कुछ भी हो सकता है। जैसे कि आपको कोल्ड सोर हपीज हो गया है ना या फिर आपको रियो वायरसेस हो गए। कोरोना वायरस हो गया इन्फ्लुएंजा वायरस हो गया जैसे H1 N1 हो गया या H3 N2 हो गया। है ना? ये सारे वायरसेस जो होते हैं एक्यूट फीवर कॉज करते
(19:20) हैं। सात दिन के अंदर-अंदर ठीक हो जाते हैं। ऐसे ही बैक्टीरिया होते हैं। बैक्टीरिया के अंदर मान लो यूटीआई हो गया। बैक्टीरिया अपने आप नहीं ठीक होएगा। है ना? अगर हो गया तो वो पहले एक्यूट फीवर, अनडिफरशिएटेड फीवर और अगर नहीं डायग्नोस किया तो फीवर ऑफ वो बढ़ता ही जाएगा। आपको पता लग जाएगा कि मेरे में तो कुछ ठीक नहीं चल रहा है। या मेरा डॉक्टर बेवकूफ है या मैं बेवकूफ हूं जो मैं जा नहीं रहा हूं। ये आपको पता लग जाएगा इस टाइम पे। है ना? तो ये वायरसेस हो गए। अब यूटीआई कॉज करता है मेजॉरिटी ऑफ द यूटीआई ऑर्गेनिज्म्स जो होते हैं वो बैक्टीरियल ग्राम नेगेटिव
(19:48) ऑर्गेनिज्म्स कॉज करते हैं। ज्यादा डिटेल में नहीं जाऊंगा। समझ नहीं आएगा किसी को। उसके अलावा निमोनियास होते हैं। लोअर रेस्पिरेटरी ट्रैक्ट इनफेशंस एलआरटीआई जिन्हें बोला जाता है। है ना? एलआरटीआई भी बेसिकली मेजॉरिटी बैक्टीरियल काइंड ऑफ वायरल से भी कॉज हो जाता है। बट वायरल एक्यूट ही रहते हैं। ज्यादा बढ़ गया तो आपको सोचना है कि बैक्टीरियल फीवर आ गया। फिर उसके बाद फंगल इंफेक्शंस होते हैं। जैसे इम्यूनो कॉम्प्रोमाइज्ड ग्रुप है। मान लो किसी को कैंसर हो गया है। मेजर कॉज ऑफ़ डेथ इंफेक्शन होता है उसके अंदर। ठीक है ना? कैंसर कॉम्प्लिकेशन से मारता है
(20:14) सबसे ज्यादा। फिर कैंसर अपने आप से मारता है। फिर उसके बाद होते हैं ऑटोइ्यून डिजीजसेस। फीमेल्स में ज्यादा कॉमन होते हैं। जैसे रूमेटॉइड अर्थराइटिस हो गया, एसएलई सिस्टेमिक ल्यूपरिथमेटोसिस हो गया या फिर कोई भी ऐसा ऑटोइ्यून डिजीज जिसके लिए आप इम्यूनो सप्रेसिव ड्रग्स स्टेरॉइड्स या फिर इम्यूनोमोड्यूलेटर्स लेते हो उसमें इनफेक्शंस होते हैं। तो ये वाले इंफेक्शंस जो होते हैं ये एक पर्टिकुलर ग्रुप ऑफ पीपल को होते हैं। फिर एचआईवी इनफेक्शन क्रॉनिक इंफेक्शंस के अंदर आ जाता है। कि जैसे मान लो हफ्ते से ज्यादा इनफेक्शन मतलब फीवर आ रहा है उतर
(20:42) नहीं रहा। ट्यूबर अगर हफ्ते से ज्यादा आ रहा है ट्यूबरक्लोसिस पॉसिबिलिटी इंडिया। हफ्ते से ज्यादा फीवर टीबी एक पॉसिबिलिटी हो ही गई है। ठीक है? बाकी स्क्रब टाइफस करके इनफेक्शन होता है। लेप्टोस्पाइरा हमारे वहां बहुत कॉमन है। लेप्टो आपके मुंबई रेंस में बहुत कॉमन है। है ना डॉक्सी साइक्लोन प्रोफाइलसिस चलता है। आपके गवर्नमेंट प्रोग्राम्स चलते हैं। तो ये सारी चीजें जो होती हैं ये एक्यूट अनडिफरशिएटेड फीवर्स बताती है। फिर आता है पाइरेक्सिया ऑफ अननोन ओरिजिन या फीवर ऑफ अननोन ओरिजिन जो उसकी लेटेस्ट टर्म है। ये फीवर की जो प्रॉब्लम है ये पॉइंट होता है
(21:10) जहां पर आपको एक डिटेक्टिव बन के ढूंढना पड़ता है कि बुखार हो क्यों रहा है। मेजॉरिटी ऑफ द एफओस मतलब फीवर ऑफ़ अननोन ओरिजिन इनफेक्शन से कॉज होते हैं 53 टू 70%। ओके ना? टोटल इंफेक्शन से 90% फीवर कॉज होते हैं। बट जो फीवर का पता नहीं लग रहा है उसमें से 53 टू 70% कॉज हो गए इनफेक्शन की वजह से। उसके अलावा जब आप ऐज बढ़ती रहती है तो उसमें मेगनेंसी मतलब कैंसर्स कॉमन हो जाते हैं। ऑटोइ्यून डिजीजसेस कॉमन हो जाते हैं। है ना? या फिर फैक्टिशियस फीवर्स होते हैं जो कि यंग एडल्ट्स के अंदर मिलते हैं कि फीवर हो नहीं रहा है। बट टेंपरेचर मॉड्यूलेशन होती
(21:40) है। फैमिली मेडिटेरेनियन फीवर्स हैं। ये सारे होते हैं। तो ये एक मोटी-मोटी क्लासिफिकेशन है कि क्या-क्या जब बुखार होता है तो आपको सोचना है इसके बारे में। ठीक है? लेकिन अलग-अलग नॉर्मल लैंग्वेज में बात करता हूं मैं। नॉर्मल लोगों को इतना तो समझ नहीं आता नॉर्मल लोगों को कि भाई सर दर्द की वजह से फीवर हो गया। उसका मतलब क्या होता है? देखो पहली बात तो फीवर रिकॉर्डेड है कि नहीं है। ऐसे फीवर हो गया। मतलब मतलब कि 90% ऑफ द लोग जो आपके पास आके बोलेंगे कि बुखार हुआ है। नेक्स्ट क्वेश्चन आप उससे पूछोगे कितना बुखार हुआ है सर? वो तो चेक नहीं किया। तो वो बुखार
(22:14) थोड़ी हुआ है। लग रहा है। हां गर्म लगना बिल्कुल जायज है। बॉडी की सकेडियन रिदमम है। मॉर्निंग टेंपरेचर कम होता है। 8 am टेंपरेचर कम होता है। 4 पीएम टेंपरेचर 99.9 फारेनहाइट तक नॉर्मल होता है। ठीक है? इसके बीच में टेंपरेचर वेरीरी करता है पूरे दिन के अंदर। मेंुरल साइकिल्स जब पेशेंट्स को या फीमेल्स को आती हैं उस टाइम पर फीवर 1 डिग्री फारेनहाइट से इंक्रीज होता है। मतलब टेंपरेचर तो टेंपरेचर इंक्रीस होना और फीवर में डिफरेंस है। फीवर फॉर ऑल प्रैक्टिकल पर्पसेस जो कि हैसन मेंशन करती है इज मोर देन 100 फारेनहाइट फॉर ऑल प्रैक्टिकल पर्पसेस। मैं एक डिस्क्लेमर
(22:52) दूंगा यहां पर कि वर्ल्ड वाइड कोई भी एक पर्टिकुलर टेंपरेचर गाइडलाइन नहीं है फीवर के लिए। क्योंकि अफ्रीकन कंट्रीज के अंदर बेसल मेटाबॉलिक रेट ज्यादा है। टेंपरेचर ज्यादा रहता है। लोग वहां पर 100.4 टू 100.8 को भी फीवर नहीं कंसीडर करते हैं डॉक्टर्स। बट एक यूनिवर्सल कंसेंस गाइडलाइन बनी थी। आई थिंक 1980 के अंदर इसकी स्टडी हुई थी। उसमें 6700 पेशेंट्स के ऊपर एकिलरी टेंपरेचर देखा गया था। और 99.
(23:22) 9 तक फीवर को टेंपरेचर को फीवर नहीं माना गया था। उसके ऊपर फीवर को फीवर माना जाता है। ये लेटेस्ट था के एडिशन में भी है। ठीक है? ठीक है? तो पहले तो ये देखना है ना कि सिर दर्द के साथ टेंपरेचर बढ़ा है कि फीवर हुआ है। तो इसमें डिफरेंस है। है ना? और अगर ये हुआ है तो फिर देखना है कि क्यों हो रहा है? क्योंकि वायरल के सिम्टम्स विद हेडेक आते हैं। डेंगू के सिम्टम्स विद हेडेक आते हैं। मलेरिया में हेडेक होता है। स्क्रब टाइफस में हेडेक हो जाता है। लेप्टोस्पाइरा में हेडेक हो जाता है। निमोनियास में हेडेक हो जाता है। तो आपको फिर वो देखना है। बट पहले देखना है
(23:52) कि फीवर है या टेंपरेचर ये डिफरेंस देखना है आपको। तो हेडेक से तो आपने बता दिया। जो जॉइंट पेन होता है लोगों को लगता है कि यार आज तो मैं थक गया। बहुत पैर दुख रहे थे और कल सुबह फिर वो थोड़ा फीवर आ गया। तो वो किस लिए होता है? फर्स्ट डिफरेंशियल वायरल हम अगर लेस देन सेवन डेज है, फीवर आया है, जॉइंट पेंस हो रहे हैं, बॉडी एक हो रही है, वायरल मैं इसके अलावा कुछ नहीं सोचूंगा। इतना बेनिफिट मैं दूंगा वायरल को। अगर फीवर हो रहा है, जॉइंट पेंस हो रहे हैं। आंखों के पीछे दर्द हो रहा है, बैक एक हो रही है, डेंगू सोचूंगा मैं। बट वो सीजनली सोचूंगा। रेनी सीजन के आसपास
(24:25) मच्छर आते हैं उस टाइम पे। हां, ऐसा नहीं है कि सिर्फ रेनी सीजन में डेंगू होता है। डेंगू पूरा साल हो सकता है। बट मेजॉरिटी एपिडेमिक्स मतलब कि मोर देन व्हाट द सिटी और द एरिया इज एंटीिसिपेटिंग को एपिडेमिक बोलते हैं। वो वाला जो होता है वो एक पर्टिकुलर सीजन में ही होता है जो अभी जस्ट खत्म ही हुआ है। हमारे यहां तो अभी खत्म हुआ है और हर जगह खत्म हो चुका है क्योंकि रेनी सीज़ंस खत्म हो गए हैं। अब विंटर्स आ गए हैं। विंटर्स में डेंगू का मच्छर जिंदा रह नहीं पाता है। तो इसीलिए इस टाइम तक आते-आते खत्म हो जाता है। इसमें मैं लेप्टोस्पाइरा
(24:54) सोचूंगा। बारिशों के अंदर नंगे पैर आप जाते हो यूरिनेशन ऑफ पिग्स या फिर डॉग्स की वजह से लेप्टोस्पायरोसिस हो सकता है। मैं वो भी सोचूंगा। टाइफाइड सोचूंगा मैं। बट उसके लिए मैं फीवर को हफ्ते से ज्यादा का देखता हूं। हफ्ते से कम को मैं इतनी जल्दी नहीं सोचूंगा। क्योंकि इंडिया एक ऐसी कंट्री है जो एंडेमिक है टाइफाइड के लिए। आप एक छोटा सा विडाल का टेस्ट ले आओगे। सर टाइफाइड हो गया। मैं तो उस टेस्ट को कुछ नहीं मानूंगा। क्योंकि उसकी जो जो वैल्यूस यूएस में डिटरमिन है वो एक टाइफाइड फ्री कंट्री है। वहां पर 1:40 180 को मानते हैं कि टाइफाइड
(25:22) है। इंडिया में तो 1:320 तक नहीं मानते कि टाइफाइड है। बट अब कुछ तो लेबल करना है किसी ने तो भाई बोल के भेज दिया कि टाइफाइड हो गया है। बट दैट इज नॉट राइट। है ना? तो वो मैं उसके सिम्टम्स के साथ क्लीनिक्स को मैच करूंगा। इसको मेडिकल या फिर इनफेक्शियस डिजीज में बोलते हैं क्लीनिकोपैथोलॉजिकल या क्लीनिको लेबोरेटरी को-रिलेशन। दोनों चीजें दिख रही हैं तो आगे जाऊंगा नहीं तो नहीं जाऊंगा। तो ये चीजें सोचूंगा अगर फीवर और हेडेक आप मुझे बोलोगे। एंड अगर थ्रोट इंफेक्शन की वजह से फीवर हो तो सब कुछ सोचूंगा। ए टू जेड जितना भी हो सकता है हर वायरल सोचूंगा। हर बैक्टीरियल
(25:52) सोचूंगा। ट्रीट नहीं करूंगा बस सीधा ढूंढूंगा कि क्या है बट सोचूंगा हर कुछ। एवरीथिंग विल कम टू माय माइंड। बैक्टीरियल सभी में प्रेजेंटेशन है ना? जनरल प्रेजेंटेशन है ये। मतलब आप मेरे को बोलोगे कि क्या कहते हैं उसको मेरे को बुखार हो गया, गला भी दर्द हो रहा है तो मैं शुरू होऊंगा वायरल से। फिर आप ड्यूरेशन बताओगे अगर हफ्ते से ज्यादा है तो बैक्टीरियल पे आ जाऊंगा। महीने से ज्यादा है तो फंगल पे आ जाऊंगा। है ना? तो ये चीजें मैं सोचता रहूंगा क्योंकि ये चीजें बुक्स में डिफाइंड है। बट सिर्फ फीवर और गला दर्द नहीं देखूंगा। फिर आपको
(26:21) एग्जामिन भी करूंगा। आगे आप में और भी सिम्टम्स देखूंगा कि गले दर्द के साथ-साथ खून की उल्टी तो नहीं आई, स्पम तो नहीं आ रहा, ब्लड तो नहीं आ रहा, टीबी सोचूंगा मैं एक उसमें। बट ड्यूरेशन देखूंगा। मतलब जैसे हफ्ते से कम है, दो हफ्ते तक है, तीन विजिट से ज्यादा हो गया है। तो उसके अकॉर्डिंग उसको वो करूंगा वो जैसे ही आप मुझे बोलोगे मेरे दिमाग में चलने लग जाएगा वो। गॉट इट। एंड जो अल्कोहल से फीवर आ जाता है। कुछ लोग बहुत पी [हंसी] लेते हैं। हैंग ओवर में नेक्स्ट डे हैंग ओवर होता है और हैंग ओवर में देखो उनके लिए टेंपरेचर मॉनिटर करना
(26:49) चाहिए। ठीक है ना? करते हैं लोग 100 हो जाता है बहुत लोग। 100 से ऊपर हो जाएगा तो फिर कुछ सोचेंगे कि इंफेक्शन हो गया है। मतलब मेजॉरिटी केसेस में इंफेक्शन सोचूंगा बट इतनी जल्दी अल्कोहल से फीवर नहीं सोचूंगा मैं। अच्छा अल्कोहल से यूजुअली अल्कोहल से हेडेक, नजिया हैंग ओवर सिंड्रोम डेफिनेटली सोचूंगा बट फीवर नहीं सोचूंगा। वीकनेस सोचूंगा उससे मैं और जो थोड़ा गरम हो जाते हैं वो ठीक है गरम हो जाते हैं वो नापते नहीं ना जिसने इतनी अल्कोहल ले ली उसको क्या पता टेंपरेचर का कहां देखना है मैंने क्या [हंसी] करना है तो यूजुअली जो बोलते हैं कि हो रहा है अब
(27:18) उसको क्या करना चाहिए हो रहा है तो उसका उसको बोलना चाहिए कि दो दिन टेंपरेचर मॉनिटर करो एव्री फोर आवरली उसको लिखो एक चार्ट बना के मेरे पास लाओ अगर हो रहा है तो वी विल ट्रीट नहीं हो रहा है तो यू आर फाइन हम लोग दवाइयों की बात कर रहे थे एंटीबायोटिक्स लेनी चाहिए कि नहीं लेनी चाहिए पैरासिटामॉल के ऊपर बात करते हैं पैरासटामॉल के पैरासिटामॉल लेनी चाहिए हां सेफेस्ट ड्रग है। ले सकते हैं। कोई दिक्कत नहीं है। ऐसे ही रैंडमली अगर एक के ऊपर मेरा फीवर गया तो खा लो। एक नॉर्मल बंदा एसओएस बेसिस पे पैरासिटामॉल ओवर द काउंटर ले सकता है।
(27:47) जिसमें कोई हार्म नहीं है। नॉर्मल से मतलब है कि प्रीवियस कोई इलनेस नहीं होनी चाहिए। क्रॉनिक इलनेस लंबे टाइम से। हम बट ऐसे मतलब मैं हूं। आप वो हेल्थी हो जाके उठा सकते हैं। एंड लोग यूजुअली पेन के लिए भी यूज़ करते हैं। इट इज़ एक्चुअली अ वेरी गुड पेन किलर। नॉट अ वेरी वेरीरी गुड पेन किलर बट गुड एनालजेसिक इफेक्ट होता है उसके अंदर और पेन के लिए मेरी फर्स्ट चॉइस ऑफ ड्रग पैरासिटामॉल है। क्यों ऐसे पेन किलर क्यों नहीं है? पेन किलर ले सकते हो बट अगर ज्यादा हो रही है तो पहले देखो तो सही कि बेसिक पे ही आप रुक सकते हो। जहां पर आपको
(28:19) बात करके लड़ाई सॉल्व हो रही है वहां न्यूक्लियर बम मारना जरूरी तो है नहीं। [हंसी] अकॉर्डिंग टू दैट। अब पेन किलर पे ही सीधा थोड़ी चले जाओगे आप। तो हल्का-फुल्का पेन है तो और पैरासिटामॉल पेन किलर है एक्चुअली। इट इज एन एनालजेसिक ना तो हल्काफुल्के में ये एंड डिस्प्रिन वगैरह जो होती है वो डिस्प्रिन देखो मैं बहुत ज्यादा यूज़ नहीं करता पुराने उसकी दवाई है बट लोग लेते हैं फीवर के लिए या हेडेक के लिए बट मैं नहीं यूज़ करता हूं इतनी ना मेरे मैंने ज्यादा पढ़ा है उसके बारे में ओके एंड एक और होता है आइबोप्रूफेन इब्रूप्रफेन हां वो क्या होता है
(28:51) वो बेसिकली नॉन स्टेरॉइडल एंटी इनफ्लेमेटरी ड्रग है एक स्टेप ऊपर पैरासिटामॉल से तो पैरासिटामॉल जो होती है वो बेसिकली एन एनसेड नॉन स्टेरॉइडल एंटी इनफ्लेमेटरी नहीं है। बट ये एनआईडीज हैं। है ना? तो इसीलिए क्या कहते हैं उसको? ये एक स्टेप ऊपर होती हैं। इनकी पेन किलर पोटेंसी थोड़ी ज्यादा होती है। लोग ऐसे बोलते हैं कि यार पैरासमोल असर नहीं करती। हां बहुत ले लो तो नहीं भी करती है। टेकिफलेक्सिस नाम की एक चीज है कि बारी-बारी आप स्टिमुलस दे रहे हो तो जो रिसेप्टर्स होते हैं वो स्टिमुलस देना बंद कर देते हैं तो रिसोंड करना बंद कर देते
(29:23) हैं। तो इसीलिए यही एक पॉइंट है मेरा जिसमें एप्रोप्रियट ट्रीटमेंट ट्रीटमेंट शुड बी एप्रोप्रियट ना ट्रीटमेंट ये नहीं कि मन कर रहा है तो कुछ भी कर दिया। जरूरत है तो कुछ भी कर दिया वाला सीन है इसके अंदर। बट ज्यादा पैरासिटामॉल लेने से लिवर को फर्क नहीं पड़ता। टॉक्सिटी डोज़ होती है उसकी। लाइक जनरली सेफ डोज़ एक नॉर्मल बंदे में 4 ग्राम तक जा सकते हो आप। बॉडी वेट के अकॉर्डिंग नहीं बता रहा हूं। एक जनरली रफ आईडिया दे रहा हूं। तो 4 ग्राम के आसपास तक सेफ रहती है। 1 ग्राम की चार डोजेज जनरली हम देते हैं। तो वो पेन भी किल करती है। फीवर भी उतारती
(29:53) है। जैसे डेंगू वगैरह का फीवर जो कि उतरता नहीं है आराम से उसमें हायर डोज़ पे जाना पड़ता है। यहां तक जनरली सेफ रहती है। इसके ऊपर डेफिनेटली लिवर टॉक्सिक रहती है। एसिटामाइनोफाइन जो इनका वो है पैरासिटामॉल का बेसिकली साल्ट या ड्रग कह लो बेसिकली तो वो बच्चों के अंदर दिक्कत कॉज करता है। तो उनके अंदर बाय वेट दी जाती है। उसके अंदर ऐसा नहीं है कि आउटराइटली इतना हायर डोस पे जाते हैं। तो हर मतलब बेसिकली क्या होता है ना टेलर्ड ट्रीटमेंट होता है। जैसे आप कपड़े सिलवाने जा रहे हो। आपका और मेरा साइज सेम नहीं है। ऐसी दवाइयां हैं।
(30:26) आपकी और मेरी दवाइयां भी सेम नहीं है। आपको देख के आपके अकॉर्डिंग दवाई दूंगा। इसका मतलब ये नहीं है दूसरे को देख के उस सेम दवाई चल जाएगी। एंड पेन किलर्स पेन किलर्स जो होती हैं बेसिकली वो अप फ्रंट मेरे को लगता है कि थोड़ा बच सकते हो उनसे। जरूरत पड़े तो ले सकते हो। ऐसा नहीं है कि बहुत ही नुकसान कर देगी। रिपीटेड पेन किलर्स डेफिनेटली किडनी पे इफेक्ट डालती हैं। क्योंकि पेन किलर्स ऐसी चीज होती हैं जब किसी को क्रॉनिक पेन मतलब लंबी पेन हो रही होती है तो वो लेते हैं। तो फिर हिसाब नहीं रहता है कि कितनी ले ली में और एक दवाई की मैक्सिमम कैपिंग ऑफ डोज़
(30:57) होती है। उससे ऊपर जाओगे तो वो हार्मफुल इफेक्ट देगी ही देगी। एक्सेस में कोई भी चीज अच्छी नहीं होती है। ऐसी दवाइयों के साथ तो जो लोग बिना सोचे समझे पेन ले लेते हैं ज्यादा। नॉट राइट। क्या हो सकता किडनी फेल हो जाती है। आप एक चीज समझिए। आपके घर में आग लग गई। आपने बुझाने के लिए फायर ब्रिगेड बुलाई। अब उसने क्या कहते हैं उसको आग बुझा दी। बट जो डैमेज आग कर गई है वो रिवर्स नहीं हो रहा है ना। वो तो पानी से भी रिवर्स नहीं हो रहा है। और अगर आप उस पे पानी डालते रहे डालते रहे डालते रहे। तो जो बाकी चीजें घर की आग से खराब हो रही थी पहले। अब वो पानी से खराब
(31:32) होनी शुरू हो जाएंगी। तो एक एप्रोप्रियट लिमिट आपको पता लग गई कि इस पे तो मुझे रुकना था। अगर तो आप रुक गए जैसे आग बुझना आपका ऐ था उस पे रुक गए तो ठीक है। अब आग बुझने के बाद भी आपको कहोगे नहीं यार इससे फायदा हुआ था। मैं तो और पानी पाते जाता हूं। तो तो खराब ही है ना आपके लिए। सेम कांसेप्ट मेडिकेशन के अंदर भी है। बट बहुत लोग जो बिना सोचे पेन किलर लेते हैं। नॉट राइट। क्या हो सकता है उनके साथ? व्हाट वुड यू टेल देम? मैं उनको बोलना चाहता हूं कि पेन किलर्स एसओएस रिक्वायर्ड टाइम पे होनी चाहिए। एक्सेस लेंगे तो कोई भी ऑर्गन कभी
(32:06) भी फेल हो जाएगी क्योंकि बॉडी मेटाबॉलाइज करती है उनको। आप आप अपनी बॉडी को एक वो समझिए एक कंटेनर समझो। आप इसके अंदर जो डालोगे वो बॉडी जैसे आप मान लो एक कंटेनर में कुछ डालते हो तो कंटेनर में जब जगह भर जाती है तो वो चीजों को खराब करना शुरू करता है। वैसे ही बॉडी के अंदर आप जो भी चीज डालोगे वो आपकी ऑर्गन्स को फंक्शन करवाएंगी और दवाइयां या तो लिवर के रूट से या किडनी के रूट से निकलती हैं। जब वो एक्सेस फंक्शन होगा तो ऐसा है ना कि जो चीज ज्यादा यूज़ होती रहेगी वेयर एंड एयर होता रहेगा। उस अकॉर्डिंग आपके ऑर्गन फेल होने शुरू हो जाएंगे अगर करोगे। ये नॉर्मल
(32:39) चीजों से ज्यादा टॉक्सिक भी होती हैं। मतलब आपको पता है कि केमिकल स्ट्रक्चर्स हैं और आपकी बॉडी में रिएक्ट करती हैं जाके। है ना? कोई भी चीज रिएक्ट करेगी। तो जब रिएक्ट करेगी और आपको ये सब पता है तो क्यों एक्सेस में यूज़ करना है? एप्रोप्रियटली यूज़ करो इसको। किसी भी चीज को एप्रोप्रियेटली यूज़ करो। ओके। मुझे तो बताओ बहुत लोग ना फीवर को लाइटली लेते हैं। हां जी। कि 102 हो गया, 103 हो गया। क्या है? मैं तो काम पे चले जाऊंगा। इट्स फाइन। मैं ले लेता हूं पैरासिटामॉल और चले जाता हूं पैरासिटामॉल के भी नीचे नहीं आता बट चल। करना चाहिए ऐसा
(33:08) देखो अप टू थ्री डज़ तक फीवर को आप एक नॉर्मल कंडीशन मान के चल सकते हो एक रफली मतलब वेग सा आंसर दे रहा हूं नॉट कि अब आप कहो कि बुक में तो ऐसा लिखा है कि मतलब एक लेमैन एक प्रोटोकॉल ये बना सकता है कि तीन दिन तक बुखार सेटल हो जाएगा तब तक मेजर मतलब मॉनिटर घर पे कर सकते हो और कर तीन दिन बाद एक ऑफिशियल कंसल्ट लेनी जरूरी है। ओके। ठीक है। तीन दिन के बाद अगर फीवर आपका नीचे नहीं आ रहा है, कंसल्ट आपने ले लिया है, उसके बाद आपको वार्निंग साइन पता होने चाहिए फीवर के। फीवर जो है, अकेला इतना नुकसान नहीं करेगा जितना वार्निंग साइन
(33:44) नुकसान करेंगे। एक एग्जांपल लेता हूं मैं डेंगू फीवर है जैसे उसका बुखार मान लो हफ्ता रहता है। तीन दिन आपने पीसीएम ली नहीं ठीक हुआ। है ना? उसके बाद आपने पीसीएम इज़ पैराटमॉम पैराटॉम हो गया। हां। तो अब आपने क्या करना है कि आपने उसके साथ-साथ यह ध्यान रखना है कि कभी भी उल्टियां आनी शुरू हो गई पर्सिस्टेंटली। कभी भी कहीं से कोई ब्लीड हो गया। यूरिन में ब्लीड हो गया, उल्टी में ब्लीड हो गया। कभी भी ऐसा हुआ कि इररेिलेवेंट बातें करने लग गया मरीज मेरा आपके क्लोज्ड वंस या फिर आप खुद कभी भी ऐसा हुआ चक्कर आके गिरने लग गए। सांस फूलने लग गई आपकी। ये
(34:17) वार्निंग साइन हैं। इमीडिएटली हॉस्पिटल जाना है इस टाइम पे। इसको लाइटली नहीं लेना है। इसका मतलब है प्रोग्रेस कर रहा है। जो डिजीज प्रोग्रेस कर रहा है उसका मतलब है वह कंट्रोल में नहीं आ रहा है। जब कंट्रोल में नहीं आ रहा है तो डेफिनेटली हेल्प चाहिए। अगर इनमें से कुछ नहीं होता है और फीवर कंसिस्टेंटली जैसे कल 104 था पीसीएम लेने के पैरासिटामॉल लेने के बाद भी नहीं उतर रहा था। अब पैरासिटामॉल के लेने के बाद 8 घंटे बाद उतरने लग गया है। अगले दिन पैरासिटामॉल ही 2 घंटे में ही उतर गया और गैप बीच में तो मतलब ठीक चल रहे हो। बट अगर उतर ही नहीं रहा है, दवाई
(34:46) को रिसोंड ही नहीं कर रहा है, हाई ग्रेड फीवर रह रहा है तो डेफिनेटली हेल्प लेनी चाहिए। तो उस टाइम पे इजीली नहीं लेना चाहिए इसको और ऐसा भी नहीं कि डर जाओ यार कि बुखार हुआ भागते जाओ वो भी ठीक नहीं है ना क्योंकि बट 102 103 में काम करने नहीं काम करने तो आप जा नहीं सकते क्योंकि 102 103 में बॉडी इतना रिसोंड करने नहीं देगी आपको आराम करना चाहिए एक आधा दिन आपको सिक लीव मिलती है वो लेनी चाहिए और मॉनिटर करना चाहिए यू शुड बी कॉन्शियस अबाउट इट नॉट पैरानॉइड अबाउट इट यू शुड बी कॉन्शियस अबाउट इट हां ये भी हो सकता है और ठीक भी हो सकता है
(35:17) उसके बीच में हूं मैं हार्ड अगर लंबी रेस में दौड़ना है तो हेल्दी रहना है। पैसा चला गया वापस आ जाएगा। बंदी चली गई वापस आ जाएगी। कोई भी चला गया वापस आ जाएगा। हेल्थ खुद की चली गई ना वापस नहीं आएगी। और कुछ नहीं कर पाओगे। मतलब उस टाइम पे सोचोगे कि यार वो टाइम था दो दिन बैठता आराम से तो यह हो जाता। ये ऑर्गन बच जाता और मैं आगे चिल कर रहा होता। अभी तो ब्रेक ले सकते हो। है ना? ऐसा नहीं है कि कुछ मिस हो जाएगा। बट इंपॉर्टेंट है और रेड फ्लैग्स जरूर देखने हैं। तो रेड फ्लैग्स मतलब मतलब पर्सिस्टेंट फीवर दवाइयों के साथ ना उतर रहा हो।
(35:55) ओके? वन पेट में दर्द हो, उल्टी आनी शुरू हो जाए। टू कहीं से भी कोई ब्लीड होनी शुरू हो जाए। थ्री एकदम से लेथार्जी या फिर एबनॉर्मल एक्टिविटी इन द सेंस ऑफ इररेिलेवेंट टॉक्स चक्कर आ जाना या फिर मतलब समझ ना आना कि क्या हो रहा है। या फिर एकदम से ब्लड रिपोर्ट्स ऊपर नीचे बिगड़ जाना। अक्यूटली मतलब जल्दी रेड फ्लैग साइन है। ध्यान रखना चाहिए और केयर करनी चाहिए। ठीक है? प्रिवेंटेबल कॉजेस ऑफ डेथ हैं ये। प्रिवेंट हो जाना चाहिए। एक बात बताओ मुझे लोग फीवर में ना पट्टी चढ़ाते चढ़ाते हैं। वेरी गुड। अच्छा करते हैं। अच्छा करते हैं। ठंडी पट्टी चढ़ानी चाहिए।
(36:30) अच्छा करना चाहिए। क्या होता है उससे? बेसिकली क्या होता है ना हाई मतलब ब्रेन ने आपका सेट पॉइंट ऊपर कर दिया है। अब ब्रेन सेट पॉइंट जब ऊपर करता है तो बॉडी कैसे हीट को प्रिजर्व करती है शिवरिंग से। ब्राउन फैट जो होता है वो आपका वो थर्मोजेनेसिस करता है मतलब हीट प्रोड्यूस करता है। तो अब बॉडी जो है वो इंटरनल फैक्टर्स बढ़ा रही है। अब आप दवाइयां तो बारी जैसे पैरासिटामॉल की मैंने आपको रेंज बता दी कि इससे ज्यादा नहीं ले सकते। अब कई वायरल डिजीज हैं जिसमें आप उसके ऊपर जा नहीं सकते। तो क्या करोगे? टेंपरेचर ज्यादा जाएगा तो ऑर्गन्स डैमेज
(37:01) होने के चांस रहेंगे तो उसको ऐसे ही कूल करोगे। इनफैक्ट हाइपरपाइरेक्सिया जो होता है मतलब फीवर जब 106 से ऊपर जाता है तो कोल्ड बेड्स और आइस वाटर इमर्ज सममर्जन जो होती है वन ऑफ द ट्रीटिंग टेक्निक्स हैं इस चीज के लिए हीट स्ट्रोक वगैरह के लिए तो ठंडी पट्टियों से कोई दिक्कत नहीं है बेटर चीज है कर सकते हैं आप बिल्कुल कर सकते हो जब आप डॉक्टर के पास जाते हो ठीक है तो कौन से क्वेश्चंस होने चाहिए जो डॉक्टर से पूछने चाहिए अरे कुछ भी पूछना चाहिए आपको आप थोड़ी डॉक्टर हो आपको क्या है आप स्टूपिड लगो अच्छे लगो ऐसा थोड़ी होगा कुछ डॉक्टर ने
(37:32) कुछ बेवकूफ वाली बात पूछ ली तो वो स्टूपिड लगेगा। आप थोड़ी आउट ऑफ द ब्लूस अंडर द स्काई जो मर्जी पूछ लो। बट स्टार्टिंग में आपने मेरे से बोला था कि ये पूछना चाहिए डॉक्टर से ये दवाई क्यों दी? ये दवाई क्यों दी? ये उससे कि आपको क्या लग रहा है? तो बहुत लोग जाते हैं डॉक्टर के पास डायरेक्टली बोलते हैं कि मेरे को ना ये हो गया। मेरे को फीवर जैसा लग रहा है। मेरे को ये लग रहा है। वो खुद ही बता देते हैं डायग्नोस। ठीक है कोई नहीं बताने दो। वो वो तो उनकी नेचुरल वो है ना। उनको थोड़ी पता है कि हिस्ट्री टेकिंग में पहले आप अपनी लैंग्वेज में
(38:00) बताओगे फिर मैं इंटरप्रेट करूंगा। वो थोड़ी पढ़ के आए हैं। वो जो भी बताएंगे नेचुरल हिस्ट्री पेशेंट की टर्म्स में ही होएगी। आपको इंटरप्रेट करनी है। उसी के पैसे दे रहे हैं आपको या उसी की सर्विस ले रहे हैं आपसे ना वो तो आपको इंटरप्रेट करनी है। पेशेंस रखनी चाहिए। मतलब हालांकि कम होती है हमारे में बट रखनी चाहिए मुझे लगता है। बट इजंट इट बेटर कि आप सिर्फ बताओ कि क्या-क्या हो रहा है। नॉट गिव डाइट। नहीं नहीं नहीं। आप सब कुछ बताओ ना। तभी तो हमें पता लगेगा कि क्या-क्या हो रहा है। आपके अकॉर्डिंग जो चीज इंपॉर्टेंट नहीं है। हो सकता है मेरे अकॉर्डिंग हो।
(38:27) हम है ना? जैसे आप मेरे को बताने आए कि यार मेरा गला दर्द हो रहा था। साथ में मुझे फीवर हो रहा था। और आपने सोचा कि जो मेरे को बारी-बारी यूरिन आ रहा है ये शायद ठंड की वजह से हो रहा है। मेरे लिए तो वो यूटीआई का साइन है। मैं तो फीवर से कोरिलेट करूंगा। तो सब कुछ बताओ ना मुझे। मैं डिसाइड करूंगा क्या ठीक है कि क्या ठीक नहीं है। आप थोड़ी डिसाइड करोगे ये चीज। ओके ना? यू सेड कि तीन से पांच दिन में ना नॉर्मल फीवर चले जाता है। तो इसमें कोई दिक्कत नहीं है। इतना मत दिमाग लगाओ। हां और अगर वार्निंग साइंस नहीं है। अगर वार्निंग साइंस नहीं है इनफेक्शन की
(38:55) वजह से हुआ थ्रोट इनफेक्शन हुआ कोई भी इनफेक्शन हुआ चला जाएगा अपने आप। राइट? बच्चों में भी सेम होता है। देखो बच्चों के अंदर क्या होता है ना बच्चे बोल नहीं पाते हैं। 14 साल से नीचे-नीचे पीड्स मतलब पीडिएट्रिक इनफेशस डिजीज वाले देखते हैं। तो उनके अंदर ना जैसे हमारे पेट्स में होता है कि वी अस्यूम थिंग्स। और उनकी जो डिस्ट्रीब्यूशन ऑफ इलनेसेस होती हैं उनमें बैक्टीरिया समहाऊ एज करता है वायरसेस को। तो उनकी ट्रीटमेंट डिफरेंट होती है। मतलब उनके सिनेरियोस डिफरेंट होते हैं। तो बेसिकली आप वही है कि हेल्थ फॉर ऑल एक जनरलाइजेशन
(39:25) नहीं होती है। हर स्पेसिफिक एज ग्रुप के लिए आपको हर स्पेसिफिक डेमोग्राफी ज्योग्राफी और आपको हर स्पेसिफिक इलनेस पता होनी चाहिए। तो उसके अकॉर्डिंग आप आगे जाते हो। यही आपको पढ़ के पता लगता है। तो फिर फीवर कम कैसे करें? क्योंकि फीवर हो गया। आप चार दिन तक तो पैनिकिक हो जाते हैं लोग। नहीं आप तीसरे दिन पे डॉक्टर के पास आ तो रहे हो। कम तो होएगा ही। तो तीन दिन तक भी अगर कम नहीं हो और बढ़ता ही जाए तो पीसीए हम देते हैं जैसे मेरी डॉटर है मतलब अभी डेढ़ साल की है हमारे हमारे तो फट लेती मतलब हमारे तो हो जाता है कि एक बार भी बुखार हो जाए
(39:54) मतलब मैं ना मैं मेरे को डर नहीं लगता है बुखार से या किसी भी बीमारी से क्योंकि मैं मेरे को पता है कि ये होगा तो ये क्योंकि हम अपने दिमाग में सिनेरियोस बनाते हैं कि ये ये तीन चार हैं तो इसमें ऐसा कुछ नहीं भाई मेरी बेटी को कुछ हो जाता है मेरे को समझ ही नहीं आता है कि क्या हो गया मतलब मैं तो भागता हूं अपने डॉक्टर के पास कभी-कभी तो मेरे मेरे दोस्त मेरे को बोलते हैं कि तू मत बात किया कर तू विधमा मतलब मेरी वाइफ को बात करने दिया कर और तू हमसे मत बात किया कर तू उल्टी सीधी चीजें पूछता है तो एज अ लेमनैन हूं मैं तो उस चीज में ना मतलब तो इसीलिए तो
(40:25) वो तो आपको तीसरे दिन पे दिखाना चाहिए डेफिनेटली तीन दिन तक मैं उसमें भी लेवरेज देता हूं क्योंकि वही वार्निंग्स जैसे आप बच्चों की बात करें आई एम नॉट अ स्पेशलिस्ट ऑफ पीडियाट्रिक इंफेक्शंस बट थोड़ा बहुत तो मुझे समझ आता है कि जैसे बच्चा जब तक खा रहा है खेल रहा है और बुखार है उसको क्योंकि उनमें प्रीपोटेंसी टू फीवर ज्यादा ज्यादा होती है तब तक सही चल रहा है। जैसे ही बच्चे का बिहेवियर अब्नॉर्मल हुआ यू हैव अ प्रॉब्लम डायरेक्टली गो टू द कंसर्न पर्सन और दिखाओ कि बट फीवर रात को बहुत वर्स हो जाता है। व्हाई डस इट हैपन? देखो फीवर की सकेडियन
(40:58) रिदमम है। इवनिंग टाइम पे 4 ओ क्लॉक नॉर्मल बॉडी टेंपरेचर ही ज्यादा होता है। वो 1 डिग्री से ऊपर वैसे ही जाता है। तो इसके हिसाब से जब फीवर होता है तो वो मेटाबॉलिक रेट हमारा उस टाइम पे ज्यादा होता है। तो इसलिए फीवर ज्यादा दिखता है। बट उस टाइम पे जो लोअर वैल्यू है वो 99.9 तक होती है। सुबह जो होती है 98.
(41:15) 6 तक होती है। तो 1ढ़ डिग्री के आसपास 1.3° का तो यहीं फर्क पड़ गया ना। तो ऑब्वियसली उतना ऊपर जाएगा। बट हां 100 मतलब मान लो 100 या फिर 101 फीवर चल रहा है। शाम को सीधा ही 105 पे पहुंच गया। अलर्ट अलर्ट अलर्ट डेफिनेटली अलर्ट। एंड ऐसी कौन सी तीन कॉमन मिस्टेक्स हैं जो लोग करते हैं एट द टाइम ऑफ़ फीवर? अ देखो एक तो सेल्फ मेडिकेशन मुझे लगता है बड़ी मिस्टेक है। दूसरा मुझे लगता है कि इग्नोर करना तीन दिन से ज्यादा रेड फ्लैग्स को या फिर फीवर को मिस्टेक है। है ना? फिर उसमें कुछ भी हो सकता है। क्योंकि ये प्रिवेंटेबल कॉज ऑफ़ डेथ है तो प्रिवेंट होना चाहिए। जब आपके पास
(41:48) एक्सपर्ट गाइडेंस है प्रिवेंट होना चाहिए। और मुझे तीसरी लगती है कि इधर-उधर से बात सुन के अपना खुद इलाज कर लेना गलत बात है। अगर इलाज करना ही है तो ढंग के बंदे से बात करके करो नहीं तो मत डरो। बीच वाला रास्ता नहीं कि दो बार ये दे दिया एक आधी बार ये भी दे दिया और उसके बाद कि भाई अब कुछ हो नहीं रहा है वो नहीं करना चाहिए। एक व्हेन यू आर नॉट क्लियर ओवर हियर स्टॉप व्हेन यू आर क्लियर ओवर हियर डोंट लिसन टू एनीबॉडी वो होना चाहिए। कि एक बार या ये डॉक्टर चीज सुनूंगा। हां। नहीं तो नहीं सुन। नहीं तो मैं मेरे को पता है कि यह ऐसे चल
(42:20) रहा है। चिल होएगा। मैं चलूंगा इस पे। कोई चक्कर नहीं। ओके। टेल मी डेली हैबिट्स। ऐसी कोई तीन डेली हैबिट जो हर किसी को फॉलो करनी चाहिए ताकि वो फीवर, वायरल जो इतनी चीजें हमारे देश में उन सबसे उसे नहीं हो। 45 मिनट्स ऑफ ब्रिस्क वॉक वर्सेस एक्सरसाइज मस्ट। गुड डाइट, बैलेंस डाइट अलोंग विद टाइमली डाइट। मस्ट गुड स्लीप मस्ट तीन और काम खत्म होते ही 5:00 बजे या जितने बजे भी खत्म करते हो स्विच ऑफ करके घर पहुंच जाओ और चिल करो घर जाके। कौन-कौन सी वैक्सीनंस लोगों को लगानी चाहिए इन सब चीजों से बचने के लिए। गुड। क्या है ना अभी क्लीनिकल इनफेशस
(43:04) डिजीज सोसाइटी ऑफ इंडिया की गाइडलाइन आई है। देयर आर मल्टीपल वैक्सीनेशंस जो आ गई हैं। जैसे यूएस के अंदर लाइन लगती है एक चीज के लिए वैक्सीनेशन के लिए कि हमने नहीं बीमार होना हमारे टीका टूका सा है जो लगा। हां इंडिया में अभी इंडिया क्या है? मतलब एलएमआईसीस लोअर मीडियम इनकम कंट्रीज के अंदर। एक तो वैक्सीनेशन थोड़ी महंगी है और इतनी गाइडलाइंस नहीं है बट इंडिया ने निकाल दी है। कंसेंसेस है सारी लंग इंडिया गाइडलाइंस का उसके साथ-साथ आईडी की एपीआई इन सब ने मिलके एक बुक बनाई है। पर्टिकुलर बीमारियां या पर्टिकुलर एज ग्रुप के ऊपर
(43:35) वैक्सीनेशन बहुत जरूरी है। निमोनिया की वैक्सीन आती है। 55 एज कट ऑफ कर दी है। डेफिनेटली लगनी चाहिए। 55 तक 55 के बाद तो लगनी ही लगनी चाहिए। 55 से पहले अगर आपको कोई कमोडिटी है तो भी लगाते हैं और उसके साथ-साथ हरपीस की वैक्सीन आई है। अमिताभ बच्चन जी बहुत ऐड करते हैं उसकी। डेफिनेटली लगनी चाहिए भाई। जिंदगी बचा देती है। टाइफाइड की वैक्सीन ट्रैवल कर रहे हो या इंडिया जैसी जगह पे लगा सकते हो। इनफ्लुएंजा की वैक्सीन हर साल डेफिनेटली लगानी चाहिए। कोविड की वैक्सीन बहुत हेल्पफुल है। जो जो प्रोटोकॉल आता है डेफिनेटली लगनी चाहिए। हेपेटाइटिस ए की
(44:08) वैक्सीन है डेफिनेटली लगनी चाहिए। जिन-जिन्होंने ह्यूमन पेपिलोमा वायरस की वैक्सीन नहीं लगाई है अप टू 28 इयर्स इंडियन गाइडलाइंस में आ गया। वर्ल्ड ने अप टू 45 इयर्स कर दी है। डेफिनेटली लगनी चाहिए इकलौती वैक्सीन जो कैंसर से बचा देती है जो इनफेक्टिव कैंसर एचपी मेन को भी हां हां मेन में एनल कैंसर, ओरल कैंसर, इससोफेजियल कैंसर सबसे बचाती है। पेनाइल कैंसर से बचाती है। और 85% केसेस ह्यूमन पेप्लोमा वायरस 16 और 18 टाइप से होते हैं। और नैनोवेलेंट मतलब नोनावेलेंट वैक्सीन आई है। नाइन स्टेन टेट्रावेलेंट है, बायवेलेंट है, गार्डसिल और सर्विराक्स
(44:43) करके वैक्सीनंस आई हैं। बहुत तगड़ी वैक्सीनंस हैं। डेफिनेटली लगानी चाहिए। मतलब मेरे को हमारे टाइम पे अगर स्ेड्यूल में होती पक्का लगवाते। अब मेरे को पता है मैं अब लगवाऊंगा। 100% लगवाऊंगा मैं। तो ये 100% लगनी चाहिए वैक्सीन। एक हेल्दी एडल्ट जो इंडिया में है अभी अपने 20ज में लेट्स से आई एम 28 हम राइट? सो जो 20ज में है या 30ज में है उनको ये सारी वैक्सीन लगानी चाहिए। नहीं उनको अगर आप एंडेमिक नॉट गुड सैनिटाइजेशन वाले एरिया में हो तो टाइफाइड लगनी चाहिए। फ्लू वैक्सीन हर साल लगनी चाहिए। वेरी स्ट्रांगली हर साल लगनी चाहिए क्योंकि अब जैसे एनवायरमेंट और
(45:18) रेस्पिरेटरी इंफेक्शंस फैल रहे हैं फ्लू सिक हो जाएगा मतलब धीरे-धीरे बढ़ जाएगा है ना और अब तो हर साल उसका नया स्टेन ढूंढ के वैक्सीन बनती है टेट्रावेलेंट वैक्सीन आती है चार स्टनस मार देती है उसी से ही लाइफ थ्रेटनिंग कंडीशन होती है बच जाओगे तो और क्या चाहिए इनफैक्ट एक रिंग वैक्सीनेशन कांसेप्ट होता है कि आपने वैक्सीन लगा ली आपके घर में कोई बंदा है जो 65 से ऊपर है डायबिटिक है या कोई डिजीज के लिए दवाई ले रहा है जब आप ही को फ्लू नहीं होगा क्योंकि आपको तो कोई सीरियस फ्लू होएगा नहीं तो आपने जब वैक्सीन नहीं लगवा ली तो उसको नहीं होगा। वो बच जाएगा।
(45:47) इसे रिंग वैक्सीनेशन बोलते हैं कि कम्युनिटी ने लगवा रखी है तो एक बंदा बच रहा है। चाहे वो माने ना माने बात। तो इंपॉर्टेंट है वैक्सीनेशंस लगनी चाहिए। सो इन्फ्लुएंजा इन्फ्लुएंजा लगनी चाहिए। एचपीवी डेफिनेटली 28 फर्स्ट सेक्सुअल कांटेक्ट से पहले पहले नहीं तो कैच अप वैक्सीनेशन 28 से पहले पहले। अगर गाइडलाइन नहीं फॉलो करनी है तो कई स्टडीज 45 की ऐज भी रेकमेंड करती है। उससे पहले पहले लगवा लेनी चाहिए आपको। ठीक है? उसके अलावा टाइफाइड की वैक्सीन लगवा सकते हैं। ऑप्शनल वैक्सीन बट लगवा लेनी चाहिए। अब तो बच्चों को लगती है। ठीक है?
(46:16) और फिर उसके साथ-साथ आपको जो हर्पीस की वैक्सीन है अगर इम्यूनो कॉम्प्रोमाइज्ड हो डायबिटिक हो या कुछ हो तो वो लगनी चाहिए। बट ये 30ज के ऊपर भी 50ज में आ गई है। मतलब हर्पीस की उस टाइम पे लगवानी चाहिए आपको। ओके सर। 30ज में हर्पीस नहीं लगवाना चाहिए। जरूरत नहीं होती। उसमें इम्युनिटी होती है। 55 इयर्स तक रहती है। सिर्फ सिर्फ और सिर्फ इन्फ्लुएंजा, टाइफाइड और एचपीवी लगाना। एचपीवी डेफिनेटली लगनी चाहिए। हेपेटाइटिस ए की वैक्सीन लगवानी चाहिए आपको। है ना? ये वैक्सीन बाकी तो इम्यूनाइजेशन स्ेड्यूल में जो बच्चों को लगती है वो तो डेफिनेटली
(46:44) मस्ट है। उनका तो कोई सेकंड वो है ही नहीं है। ओपिनियन। सो लेट्स ट्राई टू डू दिस। ये हम क्या डिस्क्रिप्शन में लिख सकते हैं? डेफिनेटली मैं आपको इसका एक वो भेज दूंगा। क्या कहते हैं कि क्या गाइडलाइन आई है। इनफैक्ट मैं आपको डायबिटीज, हाइपरटेंसिव्स, बोन मैरो ट्रांसप्लांट्स और इन सब की अलग-अलग फोटो भेज दूंगा। ये डेफिनेटली जाना चाहिए। हमारा मेन पर्पस ही लोगों के लिए वो है ना? तो आई थिंक ये उनके लिएेंट है। ठीक है? तो डायबिटीज का क्या बता रहे थे? डायबिटीज जो होता है वो भी एक इम्यूनो कॉम्प्रोमाइज स्टेट होती है। अनकंट्रोल्ड
(47:11) डायबिटीज जो होती है तो उसके अंदर ये सारी वैक्सीनेशंस जो मैंने पांच छह बताई हैेंट हो जाती है। ओके? सो डायबिटीज है तो फिर लगवाएं। डेफिनेटली लगनी तो जल्दी भी लगनी चाहिए। जिसको 30 साल पे होगी उसको उसी पे लग जानी चाहिए। ओके। एंड किसी की अगर फैमिली हिस्ट्री हो डायबिटीज की लेकिन वो बच्चे डायबिटिक नहीं हो तो देखो फिर तो नॉर्मल वैक्सीन लगवाओ और अपना एचबीए वन सी मॉनिटर कराओ हर छ महीने में। ओके। बाकी फिर कोई दिक्कत नहीं। बाकी फिर देखते रहो। जैसे-जैसे आगे होता है उसके अकॉर्डिंग देखो। गॉट इट। एंड अगर कोई ट्रैवल कर रहा है तो
(47:36) कोई स्पेसिफिक वैक्सीन कई एरियाज होते हैं जैसे अफ्रीकन ट्रेवल में येलो फीवर वैक्सीन मांगते हैं वो यूएस जब जा रहे होते हो तब वो मांगते हैं वो तो एरिया वाइज वैक्सीनेशन होती है बट ऐसी कोई जो फ्रीक्वेंट ट्रेवलर हो बिकॉज़ वो ज्यादा प्रोन है वायरसेस और इंफेक्शन इंडिया से कहीं जा रहे हो तो आप वैक्सीन इंडिया से लेके ही जा रहे हो हर किसी की है ना तो मतलब जैसे इंडिया में भी टाइफाइड एंडेमिक है बाहर भी कहीं जिन जगहों पे जा रहे हो एंडेमिक है तो टाइफाइड टाइफाइड की वैक्सीन लगवा सकते हो क्योंकि नेचुरल इम्युनिटी से बेटर इम्युनिटी वैक्सीनेशन
(48:04) देती है क्योंकि वैक्सीनेशन के अंदर एडजुएंट्स डालते हैं। एडुएंट्स मतलब एडिशन ऑफ सम सब्सटेंसेस जो आपकी इम्यून रिस्पांस को बढ़ाता है। नेचुरल इम्यूनिटी का जो कांसेप्ट होता है उसमें जो मेमोरी सेल बनते हैं। बेसिकली मैं इम्यूनिटी समझा देता हूं थोड़ी सी। आपको मान लो कोई वायरस या फिर कोई बैक्टीरियल या कोई भी इंफेक्शन हुआ तो बॉडी एक नॉन स्पेसिफिक इम्यून रिस्पांस देगी। पहले साथ-साथ बॉडी समझेगी कि क्या चीज है और जो अंदर के जो बॉडी के वाइट सेल्स होंगे वो उस पर्टिकुलर बीमारी के अगेंस्ट आपको एंटीब वो बनाएंगे एंटी मतलब उसकी डिजीज के अगेंस्ट आपकी
(48:36) इम्युनिटी बिल्ड करनी शुरू कर देंगे। अब वो इम्यूनिटी एकदम से ऊपर आ गई। उसने उसको डिजीज को खत्म कर दिया। बट इस इम्यूनिटी में जो ये सेल बने इसमें से कई सेल मेमोरी सेल की तरह स्टोर हो जाएंगे आपकी बोन मैरो में। अब अगली बार वो इंफेक्शन हुआ तो जैसे इस बार सात दिन लगे उसको कंट्रोल करने में। अगली बार उसको पता है कि ये पहले हो चुका है। इम्युनिटी किक इन की। पहले दिन ही सारे गए और उसको मार दिया। बट ये मेमोरी सेल्स जो होते हैं ये दो से तीन साल में वीन ऑफ हो जाते हैं। जैसे ब्रेन है। ब्रेन में बहुत सारे थॉट्स आते हैं तो पुराने थॉट्स गायब हो रहे हैं। बट अगर
(49:04) आपने यही इम्युनिटी वैक्सीन से गेन कर लिया तो ये मेमोरी सेल्स बहुत टाइम तक रहेंगे। तो फिर मान लो 50 साल बाद भी इनफेक्शन आया। उसको पता है कि ये भाई एंबेड हो गया है। ये हमने देना है। तो फिर इसी वजह से वैक्सीनेंट होती हैं। और लॉन्ग टर्म कोई साइड इफेक्ट्स नहीं होते इन वैक्सीनंस के। देखो रिस्क बेनिफिट साइड इफेक्ट तो अभी आप बाहर जाकर सांस लोगे उसका भी है ना तो रिस्क बेनिफिट सांस लेना जरूरी है ले रहे हो जिंदा रह रहे हो वैक्सीन जरूरी है ठीक है छोटे-मोटे साइड इफेक्ट पैरासिटामॉल या ये देके मम वो कर लोगे काउंटर कर लोगे जिसके मेजर साइड
(49:34) इफेक्ट्स हैं वो तो वैक्सीनंस ही चेंज हो गई हैं जैसे चिकन पॉक्स की लाइव वैक्सीन आती थी अब रिक्बिनेंट वैक्सीन आने लग गई है वो चेंज होती अब जैसे एग्जांपल लो आपने अभी तीन वैक्सीन वाली जो लोगों को लगवा लेनी चाहिए ओके इन्फ्लुएंजा एचपी इन्फ्लुएंजा एंड हेपेटाइटिस हेपेटाइटिस और टाइफाइड काफी कंपेरेटिव सेफ वैक्सीन ये चारों चारों के कुछ भी लॉन्ग टर्म साइड इफेक्ट्स हैं। नॉट दैट अ पर्टिकुलर थिंग हैज़ कम अप टिल नाउ और बहुत टाइम से वैक्सीनंस आ रही हैं। सो ऐसा कुछ नहीं है। एनीथिंग कोई फेलियर कोई पर्टिकुलर प्रॉब्लम कोई ब्रेन इन सब
(50:03) नहीं नहीं अभी तक तो ऐसा कोई मेजर साइड इफेक्ट आया रिकॉर्डेड ही नहीं है। मतलब अनऑफिशियली भी रिकॉर्डेड नहीं है जिसपे स्टडी शुरू होगी। क्योंकि ये सारा कुछ आप वेबसाइट्स पे देख सकते हो। क्लीनिकल ट्रायल.gov पे जाके देख सकते हो कि कौन-कौन सी चीजों के लिए क्या-क्या स्टडी चल रही है। तो उसमें पता लग जाएगा कि यार अगर वैक्सीन के अगेंस्ट कोई स्टडी चल रही है कि मान लो 10 साल बाद ये बताएं तो आपको पता तो थोड़ा आईडिया तो हो जाएगा ना कि ये हो रहा है। वैसा भी कुछ नहीं है। अभी गॉट इट। तो एक वैक्सीन बनाने के लिए कितने फेसेस हो? क्या?
(50:30) सो मेरे को समझाओ कि अगर कोई बीमारी हुई एंड कोई फार्मा कंपनी या डॉक्टर बोलता है कि मैं इसको ट्रीट कर सकता हूं मेरी दवाइयों से या मेरी वैक्सीन से। तो उसको अप्रूवल लाने में, प्रूफ करने में क्या साइकिल होती है? तो देखो ऐसा है कि जनरली फेसेस ऑफ ट्रायल्स होते हैं। फेस ऑफ़ वैक्सीनंस नहीं होते हैं। अच्छा। तो बेसिकली पहले मैं आपको बताता हूं कि मार्केट में चीज कैसे आती है। जैसे आपने एक दवाई बना ली या आपने एक वैक्सीन बना ली। तो पहले उसका फेज वन सेफ्टी ट्रायल होता है। वो होता है 100 10 टू 100 पेशेंट्स के ऊपर कि हम हेल्दी वालंटियर्स
(51:06) को लेते हैं। उनको वैक्सीन या फिर दवाई देते हैं। उसमें सेफ्टी प्रोफाइल देखते हैं कि भाई सेफ है कि नहीं है। तभी आगे फेज टू में कोई मर तो नहीं जाता। कोई हैंडीकैप नहीं हो जाता। सीवियर साइड इफेक्ट्स ये देखे जाते हैं। फज़ टू ट्रायल आता है। सीवियर साइड इफेक्ट्स मतलब क्या? मतलब आप हाइपरसेंसिटिविटी से लेके मौत तक कुछ भी देखना है इसके बीच में। सारा स्पेक्ट्रम देखा जाता है इंक्लूडिंग फीवर, हेडेक, बॉडीक कुछ भी मतलब ऐसा कुछ भी अबनॉर्मल जो आप नॉर्मल लाइफ में नहीं देख रहे हो। ठीक है? ठीक है? फिर फज़ टू ट्रायल पे आते हैं। एफिकसी स्टडी देखते हैं कि सच्ची में
(51:37) एफिकेशियस है भी है कि नहीं है। फिर फज़ थ्री ट्रायल होता है जो कि हजारों लोगों पे होता है। उसके बाद सारी एफिकसी सेफ्टी डिटरमिन कर ली जाती है और मार्केट रेडी हो जाती है दवाई। उसके बाद उसे मार्केट में रिलीज किया जाता है। बट मेडिकल साइंस यहां तक नहीं शांत बैठती है। उन्हें लगता है कि अब हमने रिलीज कर दिया। अब रियल वर्ल्ड डाटा भी तो देखना है। जो मेरी लैब में हो रहा है हजार लोगों पे क्या वो रेप्लिकेट मिलियंस पे हो भी रहा है कि नहीं हो रहा है। जो मैंने एफिकसी 50% की, 60% की, 80% की या 100% की बोली है वो सच्ची में इतनी है भी है कि नहीं
(52:09) है। तो एक ऑब्वियसली अब सारे जेनेटिक मेकअप अलग हैं सबके। जो 10,000 लोगों के हैं वो 8 मिलियन के तो 8 बिलियन के तो नहीं है तो उनके ऊपर ट्रायल होने के बाद ही पता लगेगा कि क्या है तो वो लंबी स्टडी चलती रहती है और कोई रेयर साइड इफेक्ट्स हैं वो 10 साल भी चल सकती है 20 साल भी चल सकती है वो डिपेंड करता है प्री एक्चुअली जब आप एक रिसर्च आर्टिकल या फिर कुछ नई बीमारी या फिर कोई नई दवाई के बारे में कुछ करना चाहते हो तो पहले ही गवर्नमेंट आपसे एक रिटन में प्रोटोकॉल लेती है कि मैं कितने टाइम तक कौन-कौन सी चीज देखूंगा। वो प्रोटोकॉल बाद में नहीं चेंज
(52:41) हो सकता है। यही एविडेंस बेस्ड मेडिसिन का मेन गोल है कि आपने जो पहले बोला था वो आप बाद में करके दिखा रहे हैं और उसके बाद आप मार्केट में लाने के बाद उसे करके हमें उसे मैच करा रहे हैं तभी हम आगे दवाई के साथ जाएंगे। तो ये नॉर्मल प्रोटोकॉल होता है दवाइयों का। ओके? एंड ये सारी चीजें होती पेशेंट्स पे हैं। काफी गुड आपने क्वेश्चन पूछा है ये। तो ये फसेस ऑफ ह्यूमन ट्रायल्स हैं। ह्यूमन ट्रायल होने से पहले एनिमल्स ट्रायल होते हैं। उन पे देखा जाता है कि सच्ची में भाई कोई खराब ही तो नहीं हो जाएगा असली में काम। फिर ह्यूमन ट्रायल्स में आता है। फिर
(53:11) ह्यूमन ट्रायल्स में भी ऐसे स्क्रूटनाइज करके आगे जाया जाता है। तो आप बिल्कुल राइट हो कि पेशेंट्स पे ट्रायल किया जाता है। बट उससे पहले एनिमल स्टडीज डेफिनेटिवली पब्लिश्ड होनी चाहिए। ये नहीं कि एनिमल स्टडीज हो गई होनी चाहिए। पब्लिश्ड होनी चाहिए वो स्टडीज और फिर ह्यूमंस के ऊपर ये आती है और किसी के साथ कुछ सीवियर हो गया किसी की डेथ हो गई कुछ हो गया वैक्सीन सर कंसेंट फॉर्म होता है बताया जाता है पहले और फिर कुछ नहीं अगर हो गया तो नहीं हो गया तो उसकी बेसिकली गवर्नमेंट अप्रूव्ड गाइडलाइंस होती है कि उसमें क्या करना है कैसे करना है तो वो मीट की जाती
(53:42) है उसके बाद क्या करना होता है मतलब मान लो कि अगर एक01% चांस है कि फज़ वन में ट्रायल किया और किसी की यहां तो डेथ डेथ हो गई सेफ्टी कंसर्न पे फिर देखो ऐसा नहीं होता है कि पेशेंट को कुछ लगा दिया और वो मर ही जाएगा। है ना? यह तो नहीं होता है। यह तो एनिमल मॉडल्स में ही पता लग जाता है। तो इतना बिलीफ ऑन साइंस करके ही आगे जाया जाता है। ऐसे तो नहीं जाया जाता है। बाकी 1.
(54:06) 1% चांस तो ये भी है कि मैं यहां से बाहर जाऊंगा और गाड़ी हिट कर जाएगी। उतना ही चांस इसके अंदर होता है। उससे ऊपर नहीं होता है। इंडिया में इनोवेशंस नहीं होते ना। इंडिया में मेडिसिन से वैक्सीनंस नहीं बनती। राइट? सीरम इंस्टट्यूट वैक्सीन बनाता है। इंडिया से वो सब बाहर से लेके बनाते हैं ना बाहर के साइंस पे। इट्स नॉट कुछ हमारा आरएडी करके नहीं। वैक्सीन है इंडिया बनाता है बट बहुत मेजर स्केल पे नहीं बनाता है बट आई थिंक अगले 10 सालों में आप वो चेंज देख लोगे कि इंडिया ही बना रहा है बस और कोई नहीं बना रहा है। कोई इनोवेशन कोई रिसर्च करके हमने कुछ बनाया है?
(54:34) हमारे पास पेटेंट्स इतने ज्यादा नहीं है। नहीं है ना जितने यूएस के पास हैं। तो पेटेंट्स एक भी है हमारे पास। इसके बारे में बिल्कुल आईडिया नहीं है कि कौन से हैं और कौन हैं वैसे हमारे पास बट कौन-कौन से हैं वो नहीं। हां बहुत सारी चीजें हैं। जैसे यूरोफ्लोमेट्री वगैरह की जो यहीं बनी है। बट मेरे को इतना वो याद नहीं है कि कौन-कौन सी हैं। कि अ सो देयर वाज अ गेस्ट ऑन पडकास्ट थोड़े टाइम पहले। मेट प्लस पता है आपको? Med प्लस सुना है मैंने। हां तो मेट प्लस के फाउंडर हैं। ओके। वो ये बता रहे थे कि इंडिया में मतलब कोई हमारी आरएडी करके जो हमारा ही प्रॉपर कोई
(55:09) ऐसी चीज है जो मैसिव वर्ल्ड में प्रॉब्लम सॉल्व कर रही है। ऐसा कोई पेटेंट ही नहीं है हमारे पास। बिल्कुल आप मतलब सही नहीं। एंड ही वाज़ लाइक देखो डायबिटीज कैपिटल ऑफ द वर्ल्ड बोलते हैं हम उसके लिए हमने कुछ नहीं बनाया। कैंसर की बात करते हैं कुछ नहीं बनाया। ही वास जस्ट लाइक कि ही वाज़ नॉट क्रिटिसाइजिंग ही इज़ लाइक हमारी बहुत सारी स्ट्रेंथ है बट अब इट्स टाइम कि हमारी अब ये भी स्ट्रेंथ मेरे को लगता है नेक्स्ट 10 इयर्स के अंदर आप ये चीज इंडिया में बहुत ज्यादा देखोगे कि यहीं से बन रहा है बहुत कुछ एंड कहां से बिलीफ आता है ये क्यों बोलते
(55:36) हो आप ऐसा दिखता है हमारे जूनियर्स को काम करते और ये भी दिखता है कि कैसे प्रो इनोवेटिव आइडियाज आजकल लोग लेके आ रहे हैं आउट ऑफ द बॉक्स हम है ना और फंडिंग इजी है आप बिजनेस ईजीली कर सकते हो चलो मैं एक आउटसाइड द बॉक्स आपको एक इंफॉर्मेशन दे देता हूं। एक एंटीबायोटिक इंडिया में बोर में डेवलप हुई है। अभी फज़ वन ट्रायल खत्म हुआ है। जो सारे रेजिस्टेंट ऑर्गेनिज्म्स की एमआईसी को ब्रेक कर चुकी है। इंडिया में हुई है डेवलप। अभी हमारी पीजीआई में कॉन्फ्रेंस हुई थी। उस पे आके उन्होंने बताया है। तो बस वही है कि वो कंपनी इतना फंड रेज कर
(56:14) चुकी है। मतलब इतनी बार जा चुकी है। उन्हें इवेंचुअली WHO ने हेल्प किया तो जाके दे वर एबल टू डू इट। और अभी भी फज़ वन में पहुंचे हैं। फज़ वन खत्म किया है उन्होंने। बट बहुत बड़ी चीज है। अंदर पता होती है क्योंकि ये चीजें पढ़ते हैं आगे जाके पता होता है कि 10 साल बाद हमने क्या करना है। सो यू हैव टू बी रेडी फॉर द नेक्स्ट 10 इयर्स एंड यू हैव टू एंटीिसिपेट उसके आगे तो ये चीजें पता होती है। तो ये चीजें हैं इंडिया में। तो अगर ये जो पर्टिकुलर इन्होंने मेडिसिन बनाई एंटीबायोटिक बनाई है। एंटीबायोटिक ये एंटीबायोटिक अगर मार्केट में आ जाती है इंडिया
(56:44) बहुत फायदा होगा। क्या फायदा होगा आज की एंटीबायोटिक और इस एंटीबायोटिक में क्या डिफरेंस है? पहले तो आपको यह समझना पड़ेगा कि एंटीबायोटिक्स जो होती हैं दे आर वेरी कॉस्टली। तो जो डिफरेंस ऑफ कॉस्ट एंटीबायोटिक्स का है दैट इज वेरी मैसिव है ना? तो अगर आप एक एंटीबायोटिक्स से सबको टारगेट कर रहे हो। लेट अस सपोज दैट इज फॉर एग्जांपल ₹100 जो हम हायर एंटीबायोटिक दे रहे हैं। दैट इज सपोज ₹5,000 अ सिंगल डोज़। तीन डोज़ ₹15,000 की एक पेशेंट को आप दोगे। ये जस्ट एग्जांपल है। इधर आप ₹300 की डोज़ दोगे। इधर की जो डोज़ है उसके साथ एडिशनल एंटीबायोटिक्स है। एडिशनल ट्रीटमेंट लगेगा
(57:21) क्योंकि ऑर्गेनिज्म अब रेजिस्टेंट हो चुका है। इधर कुछ और नहीं लगेगा। तो ₹300 वर्सेस ₹00 में बहुत ज्यादा डिफरेंस है। हेल्थ केयर बर्डन पे, पीपल रिसोर्सेज पे प्लस रेजिस्टेंस पे। फ्यूचर बचा रही है रेजिस्टेंस। हेल्थ केयर रिसोर्सेज प्रेजेंट बचा रहा है और जो बर्डन है वो लोगों को बचा रहा है। तो इतना डिफरेंस है। तो ये 5000 वाली 500 में मिलने लग जाएगी। नहीं नहीं मिलने नहीं लग जाएगी। उसका एक अल्टरनेटिव आ गया आपके पास। अभी आपके पास सिर्फ एक ही चीज है। अब आप एक नई चीज़ मार्केट में उतार रहे हो या एक नई चीज़ आपने ऐसी 5000 वाली जितनी है।
(57:50) ज्यादा ही होएगी ना अगर रेजिस्टेंस प्रिवेंट कर रही है तो क्योंकि 5000 वाली तो चल रही है बहुत टाइम से। 70% ही काम कर रही है। ये नहीं आएगी। मान लेते हैं इसका कोई जीन निकल भी गया रेजिस्टेंट। तो जब तक ये मार्केट में आएगी तब तक वो कंपनी कुछ और भी तो बना रही होएगी ना। क्योंकि वो तो वहां नहीं रुक रही है। अब आप इसको एज अ रिसर्च एंड डेवलपमेंट या बिज़नेस देखोगे तो वो कंपनी ऐसा थोड़ी है एक बना के छोड़ेगी। फिर है ना तो वो उनका काम है वो वो करते रहेंगे ये हमारा काम है ये हम करते रहेंगे और जो पेशेंट का काम है ना वो ये प्रिस्राइब्ड मेडिसिनस में आ रहा है कि
(58:20) ओवर द काउंटर नहीं नहीं अब तो डीसीजीआई ने सारी एंटीबायोटिक्स को प्रिस्राइब कर दिया है फाइनली अब इंप्लीमेंट भी बड़े जल्दी हो जाएगा व्हिच इज अ वेरी गुड थिंग मुझे लगता है तो ये जो इंडियन एंटीबायोटिक है इसके चांसेस हैं कि ये मार्केट बहुत डिसरप्ट करनी चाहिए वर्ल्ड वाइड ही करेगी क्योंकि अभी देखो जर्नल्स जो अप्रूव करते हैं बड़े जर्नल्स हैं उन पे पेपर्स छपेंगे जैसे लसेट पे छप जाएगा, एनीजीएम पे छप जाएगा, वर्ल्ड वाइड पता लग जाएगा। इंडिया से तो अभी एक आधी एंटीबायोटिक ही है जो आगे तक गई है। है ना? उसके भी मेजर रिसर्च आर्टिकल्स अभी तक
(58:51) आए नहीं है। बट अब इंडियन आर्टिकल्स एक्सेप्ट होने शुरू हो गए हैं। जैसे कोविड में एक पेशेंट आया था हमारे पास। उसको म्यूकर मीडियास्टेनाइटिस नाम की बीमारी थी। कोविड के अंदर यंग पेशेंट को छाती पे म्यूकर हो गया था। वो पेपर मतलब मैं देख रहा था उस पेशेंट को। क्या होता है म्यूकर? म्यूकर एक फंगल इंफेक्शन होता है जो आपने कोविड में सुना होगा कि नाक के और आंख में इनफेक्शन हो जाता है फंगस का। उसको स्किन पे हो गया था। वहां से चेस्ट के अंदर गया था। वर्ल्ड में एक ही केस होगा मुझे लगता है। हमने लैंडसेट पे भेजा था। हमारी फर्स्ट ऑथर
(59:20) पब्लिकेशन है वो। तो अब एक्सेप्ट जब हमारे जैसे रेजिडेंट्स के एक्सेप्ट हुए हैं तो ये तो बड़ी चीज कर रहे हैं। हमने तो सिर्फ एक चीज ऐसी दिखाई है कि हां ये होता है कि हमने देख लिया ये होता है। देखो ये तो कह रहे हैं कि हमने कर दिया है। ये हो रहा है। आगे देखो क्या करना है। तो जब ये एक्सेप्ट करेंगे तो वर्ल्ड वाइड ऑब्वियसली चलेगी। और ऐसा तो है नहीं कि इंडिया किसी चीज से में पीछे है। मतलब जब इंडिया धक्का करता है इन चीजों में तो वो वर्ल्ड वाइड इफेक्ट तो डालती है। तो ये भी डालेगी डेफिनेटली। आई वा नो अबाउट ब्रेन कनेक्शन एंड फीवर। फीवर से
(59:53) ब्रेन को क्या असर होता है? देखो हाई फीवर इनफेक्टिव फीवर हम जो होता है अगर कंट्रोल ना हो तो ऑर्गन्स में स्प्रेड करता है। हम मान लो आपको इंफेक्शन एक ऑर्गन का हो गया। हम अब उस ऑर्गन को आपने कंट्रोल नहीं किया तो वो ब्लड में आएगा और ब्लड सप्लाई कर रहा है पूरी बॉडी को। फिर देयर इज़ अ ब्लड ब्रेन बैरियर। उसको वो इंफेक्शन ब्रेक करेगा। क्योंकि इंफेक्शन हैज़ अ मैकेनिज्म जिससे वह सर्वाइव करेगा। अब वो मैकेनिज्म इम्युनिटी को अवेइड करता है। जो हमारे बॉडी के डिफेंस मैकेनिज्म्स होते हैं उसको अवेइड करना सीख जाता है। जब वो ब्रेन को जाके इफेक्ट करता है तो ब्रेन
(1:00:29) में इंफेक्शन चला जाता है। अब ब्रेन में इंफेक्शन डायरेक्टली जाता है तो वो ब्रेन इनफेक्शन मेनंजाइटिस इंसेफेलाइटिस दौरे वगैरह पड़ते हैं। ब्रेन में इनफेक्शन हो जाता है वो बोला जाता है। अगर वो इन जनरल ब्लड में जाता है तो उसको सेप्टिक इंसेफेलोपैथी की इंफेक्शन फैल गया है ब्लड स्ट्रीम की वजह से और अब ब्रेन भी इनवॉल्व हो गया। उसको वो बोला जाता है। क्या होता है? तो बेसिकली क्या होता है कि जब इन मल्टी ऑर्गन डिस्फंक्शन सिंड्रोम बोला जाता है कि इनफेक्शन जब फैल जाता है तो ब्रेन के फंक्शनंस को जैसे ब्रेन का फंक्शन आपको अवेक रखना है उसको खत्म कर
(1:01:00) देगा। ब्रेन का फंक्शन आपको नॉर्मल रखना है। अगर उसको हाइपरस्टिमुलेट कर देगा तो दौरे पड़ने लग जाएंगे। सीज़र्स आने शुरू हो जाएंगे। अगर ब्रेन की वेसल्स को इफेक्ट किया तो उसके अंदर वैस्कुलाइटिस या फिर उसके आर्टरीज का इनफेक्शन कर देगा। आर्टरीज रप्चर करके लीक कर देगा जिससे ब्लीड हो जाएगी। हेमरेजेस हो जाएंगे। कभी-कभी ब्रेन के अंदर जाएगा। इनफेक्शन का क्लॉट बन जाएगा तो वो स्ट्रोक कॉज कर देगा। तो इंफेक्शन कैन लीड टू एनीथिंग एक्सेप्ट प्रेगनेंसी। यह बोला जाता है। आप इतनी रिसर्चेस पढ़ते हो, आप इतनी ज्यादा इस चीज में इनवॉल्वड हो। एंड आपका
(1:01:32) स्पेशलाइजेशन इस इस पर्टिकुलर फील्ड में है जहां पे आप पढ़ते हो वायरसेस, इनफेक्शंस, फीवरर्स, वायरल्स। राइट? मेरे को बताओ व्हाट इज द मोस्ट शॉकिंग थिंग यू हैव फाउंड आउट इन योर स्टडीज एंड इन रिसर्चेस? आई विल गिव यू एन एग्जांपल कि मैं शॉकिंग नहीं बोलूंगा बट मेरे लिए सबसे इन द फील्ड ऑफ हेल्थ मेरे लिए सबसे अच्छा रेवोलेशन या सबसे सरप्राइजिंग और सबसे इंपॉर्टेंट जो कांसेप्ट मैंने मेरी लाइफ में पढ़ा वाज़ साइकोलॉजी एंड मेरे लिए वो बहुत न्यू था। दिस इज़ इनसेन कि आप जो सोचते हो वो चीज आपके ऑर्गन्स इंटरनली खराब कर सकती है कि अगर
(1:02:16) मेरी पर्टिकुलरली मैं किसी चीज के बारे में परेशान हूं तो वो परेशानी मेरे ऑर्ग्स पे एक्चुअली इफेक्ट कर सकती है। राइट? एंड दैट वास वै न्यू फॉर मी कि मेरे को गुस्सा आने से मेरा लिवर खराब हो सकता है। मेरे फ्रस्ट्रेशन होने से, स्ट्रेस होने से मेरा गठ खराब हो सकता है। मेरी किडनी पे फर्क पड़ सकता है। मेरे मेंटल डिसऑर्डर्स मतलब दिस वास इनसेन कि मेरे जो सोचने की मेरी शक्ति है वो मेरे को अंदर ही अंदर खाते जा रही है। और मेरी बॉडी पे एक्चुअल असर दिख रहा है। हम तो जो मैं सोचता हूं उससे मेरा ब्रेन खराब होता है। मेरा ब्रेन जो खराब होता है,
(1:02:46) मेरा गट खराब होता है, गट खराब होता है, मेरी बॉडी खराब है। राइट? दैट वाज़ वैरी न्यू। वो फील्ड मेरे लिए मेरे को लगा था कि ये तो कोई बात ही नहीं करता। हम सब ये सोचते हैं कि कहीं बाहर से आया कहीं दिमाग से आया। एक्चुअल तो घर में जो लड़ाई हो रही है उस लड़ाई की वजह से भी मेरे अंदर ही अंदर बॉडी ऑर्गन्स खराब हो सकते हैं क्योंकि मैं सप्रेस करते जा रहा हूं मेरे इमोशंस और नेगेटिव से नेगेटिव बनते जा रहा हूं। बाहर दिखा नहीं रहा हूं। सो ये साइकोनोलॉजी की जो फील्ड थी इसके बारे में जब मैंने पढ़ना स्टार्ट किया इट वाज़ इट वास शॉकिंग फॉर मी। इट वास न्यू फॉर मी।
(1:03:14) सो व्हाट इज फॉर यू? तो मैं आपको ना एक एग्जांपल के साथ इसका आंसर देता हूं। बड़ी कॉमन सी चीज है। लेट मी आस्क यू अ क्वेश्चन। हम्। आपके किसी लव्ड वन को डेंग्यू हुआ या आपके किसी नोन को डेंग्यू हुआ। आप उसकी कंडीशन के बारे में कैसे पता करते हैं? क्या पूछते हैं आप उसको फोन करके? कि प्लेटलेट्स नॉर्मल है, कम है, ज्यादा है, क्या हो गया? तो गिर तो नहीं। प्लेटलेट्स और डेंगू सीवियरिटी हैज़ नो रिलेशन। जीरो रिलेशन। तो डेंगू में सबसे पहले प्लेटलेट्स की तो बात करते हैं। हां। तो वो उसका कोई वो नहीं है। इनफैक्ट 2016 में दो पेपर आए थे इजराइल से और आई
(1:03:51) थिंक एक साउथ अफ्रीका से जो साउथ अमेरिका से जो लसेट पे पब्लिश्ड हैं। मैं आपको आर्टिकल्स के वो भी भेजूंगा व्हिच सेस प्रोफाइलिक प्लेटलेट ट्रांसफ्यूजन इज यूज़लेस इंडगी। इनफैक्ट नई गाइडलाइंस इंडिया की 10,000 तक भी प्लेटलेट ट्रांसफ्यूज नहीं करने देती है। टर्शरी या क्वार्टनरी सेंटर में जीरो प्लेटलेट पर भी कोई फर्क नहीं पड़ता है। डेंग्यू के अंदर अगर आप जेनुइनली पेशेंट को मॉनिटर कर रहे हो तो हेमेटोक्रेट एक पैरामीटर है सीबीसी के अंदर जो आता है वो या वार्निंग साइंस ऑफ डेंग वो सबसे ज्यादा इंपॉर्टेंट होते हैं। हिमैटोक्रेट
(1:04:28) एकदम से कम हो रही है तो मतलब इंटरनल ब्लीड चल रहा है जिसके अंदर आपको हाइड्रेशन देनी है या फिर ब्लड ट्रांसफ्यूज करना है। एकदम से ज्यादा हो गई है पर्टिकुलर रेंज से तो इसका मतलब ब्लड वो पानी जो है फ्लूइड लीक हो रहा है उसमें आपको फ्लूइड थेरेपी देनी है। हम इसका प्लेटलेट से कोई लेना देना है ही नहीं। तो ऐसे क्यों बोलते हैं कि प्लेटलेट्स डेंग होने के बाद गिरने क्योंकि वो चीज आपको दिखती है और उससे आप डर जाते हो बेसिकली ना कि भाई मेरी तो जीरो होगी। मेरी मतलब पर्सनली मेरे परिवार में मैं प्लेटलेट जीरो पर भी नहीं डरूंगा जब तक उसको ब्लीड नहीं हो रहा है तो और यह
(1:05:01) आप मैं डॉक्टर नहीं सारे डॉक्टर्स को पता है ये और आप कभी भी देखोगे फालतू प्लेटलेट ट्रांसफ्यूजन कहीं भी नहीं होता है अनलेस एंड अंटिल आप ही पीछे लग जाओ कि कर कर कर फिर वो आपका कंसेंट लेके कर देते हैं कि भाई ये कह रहा है 20000 के नीचे पहले पुरानी गाइडलाइन थी तो कर दी अब 10,000 के नीचे आई है तो कर दी तो लोग तो ऐसे बोलते हैं कि अगर प्लेटलेट्स बहुत ज्यादा कम हो जाए तो परेशानी की बात है प्लेटलेट खत्म नहीं हो जाएगा मतलब है कि बॉडी के अंदर वायरस डिस्ट्रॉय कर रहा है अभी बट उसका मतलब ये नहीं है कि पेशेंट मर जाएगा पेशेंट तो कैपिलरी लीक से डेंगू शॉक जो
(1:05:34) जिसका मतलब कि रिड्यूस इन ब्लड प्रेशर इससे मरेगा प्लेटलेट से नहीं मरेगा पेशेंट कभी भी ओके आपने एक जगह मैं आपका रील्स देख रहा था यू हैव सेड कि डेली दो से तीन लीटर पानी पीने से 80% डेंगू तो ठीक हो जाता है। हां एग्जैक्टली क्या होता है ना कि डेंगू पेशेंट को कैसे मारेगा? डेंगू प्लेटलेट डेंगू पेशेंट जो होता है उसकी जो हमारी ब्लड वेसल्स लेट अस सपोज कि हमारे जो ब्लड वेसल्स हैं वो एक पाइप है। हम वो पाइप को अटैक करेगा उसमें से पानी जा रहा है। अब पाइप में होल हो जाएंगे तो पानी लीक होना शुरू हो जाएगा। हमारी ऑर्गन्स का मेन जो वो है
(1:06:10) ट्रांसपोर्ट मीडियम ब्लड है। ब्लड लिक्विड होता है। हम है ना? तो वो थोड़ा-थोड़ा लीक हो रहा है। अब 6 लीटर ब्लड मतलब 6 लीटर के आसपास पानी होता है। अब वो पानी मान लो 4 लीटर हो गया तो डेफिसिट कितना हुआ? 2 लीटर। वो पियोगे तो उससे क्या होगा? ब्लड सर्कुलेशन बढ़ेगी। ऑक्सीजन मिलेगी हर चीज को। ऑक्सीजन नेचुरल वो है। फ्यूल है। गाड़ी को पेट्रोल चाहिए। बॉडी को ऑक्सीजन चाहिए। चलता रहेगा काम। अब आपको पता है आपने तीन से चार दिन ये कर लिया तो आपकी बॉडी ने अपने आप ही इम्युनिटी से फट्टे चक देने हैं उसके और सारा डेंगू क्लियर कर देना
(1:06:37) है। जब वो क्लियर ही कर देगा तो ये जितनी भी रिपेयर मैकेनिज्म है बॉडी साथ-साथ कर लेगी। उसको एक-द दिन में वो ठीक हो जाएगा। ये क्रिटिकल फज़ ऑफ़ डेंगू है। पांच से सात दिन के बीच में रहता है। डेंगू में जब बुखार उतर जाता है ना सबसे ज्यादा डेंजर वो दो दिन होते हैं। क्यों? क्योंकि वही क्रिटिकल फज़ होता है। जब तक बुखार रहता है तब तक बॉडी रिस्पांस कर रही है, लड़ रही है। जब बुखार उतर गया है, इसका मतलब है कि क्रिटिकल फज़ शुरू हो गया है। तो फिफ्थ टू सेवंथ डे क्रिटिकल होता है। सेवेंथ डे के बाद डेंगू रिकवर अपने आप होना शुरू हो जाता है। सात दिन तक
(1:07:05) आप पेशेंट को अगर मॉनिटर करके बचाते रहे तो आपको आठवें दिन कुछ नहीं करना है। तो आर यू टेलिंग कि अगर डेंगू है किसी को? हम तो 2 से 3 लीटर पानी डेफिनेटली राइट और पैरासिटामॉल से लगभग ट्रीटमेंट तो हॉस्पिटल में भी तो यही करते हैं जो फ्लूइड देते हैं वो क्या होता है पानी तो है मतलब पानी का ही सब्स्टट्यूट है हाइड्रेट ही कर रहे हो आप और हॉस्पिटल में उतारने के लिए क्या दे रहे हो 1 ग्राम पैरासिटामॉल दे रहे हो तो और क्या कर रहे हो आप ऐसा हॉस्पिटल में बट प्रॉब्लम ये है कि हॉस्पिटलाइजेशन का एक क्राइटेरिया है रैपिड फॉल ऑफ प्लेटलेट रिपीटेड वोमिटिंग्स
(1:07:36) या फिर लूज टूल्स ऐसे हो जिसमें ब्लड आए या फिर उल्टियां हो जिसमें ब्लड आए एकदम से लेथार्जी हो जाओ। ऑल्टर्ड मेंटल सिंसोरियम मतलब इरिलेवेंट टॉक्स होनी शुरू हो जाए। एंड बहुत बड़ा मिथ है इसके अराउंड कि गोट मिल्क पीने से डेंगू वैसा [हंसी] हैव यू व्हाट दैट? या मेरी रील्स हैं इस पे काफी। बहुत गालियां पड़ती है मुझे इस पे। एक्चुअली कोई इससे कुछ नहीं होता है। गोट मिल्क पे मॉलिक्यूलर बायोलॉजी पे स्टडी हुई है। मेटा एनालिसिस तक हुआ है। एक भी एविडेंस नहीं मिला है। गोट मिल्क न्यूट्रिशन के लिए पीना है पी लो। बट पेस्टराइज्ड गोट मिल्क पी लो। नहीं तो
(1:08:05) ब्रूसेला नाम की बीमारी हो जाएगी। उससे क्या हो जाएगी? ब्रुसेलोसिस एक बीमारी होती है जो इनफेक्टेड मिल्क की वजह अनपेस्टराइज मिल्क की वजह से होती है। बताओ क्या होता है कि जो लोग डायरेक्ट मिल्क पीते हैं अनपेस्टिराइड अनपेस्टराइज मिल्क में एक और अनपेस्टराइड मिल्क का मतलब बताओ जो ढंग से उबाला नहीं गया लेमन टर्म में ढंग से उबाला नहीं गया 100 डिग्री पे 4 मिनट तक उबालो पैचराइजेशन हो जाती है तो अब क्या होता है इस टाइम पे कच्चे गोट मिल्क का रेट बड़ा चढ़ जाता है कच्चा दूध पीते हैं इन और जो कैटल होती है या फिर जो वेटनरी होते हैं इनके अंदर ब्रुसेलोसिस या
(1:08:37) फिर ब्रूसेला नाम का एक ऑर्गेनिज्म होता है जो कि एक डिजीज कॉज करता है फीवर का फीवर फीवर के साथ-साथ वो स्केलेटल मतलब मसल्स ओ सॉरी जो आपकी बोनस होती है उसे डिस्ट्रॉय कर देता है और बहुत सारे हार्ट के वॉल्स में पस भर देता है। ब्रेन को इफेक्ट कर देता है। है ना? और ये लॉन्ग फीवर चलता है। ये डायग्नोस नहीं होता। बड़ा मुश्किल होता है डायग्नोस करना। तो ये चीजें कॉज कर देता है। तो अब आप अगर ये साथ-साथ पियोगे और गॉड फॉरबिट्स हो गया जिसका काफी गुड नंबर ऑफ चांस है। परसेंटेजेस मैं मेरे को याद नहीं है तो मैं उसके बारे में कमेंट नहीं कर रहा अभी।
(1:09:06) तो अगर ये हो गया तो आपको तो पता ही नहीं आपने डेंगू ठीक करना है, डेंगू ठीक करना है या फिर आपने ब्रुसेला ठीक करना है या ब्रुसेला हो भी गया है या क्या हो गया ये आपको पता ही नहीं है। आए आप किसी और चीज से थे जाओगे आप किसी और चीज से। गोट मिल्क पी लो। दूध जो मर्जी पी जाओ पै्चराइज करके पी लो। बट प्लेटलेट में इसका कोई वो नहीं है। कोई रोल नहीं है। क्या हो सकता है अगर कच्चा मिल्क पीता है कोई तो। कच्चे दूध से ब्रूसेला होने का चांस बढ़ जाता है। एक बस मेरे लिए यही एक मेजर इनफेक्शन है। और वो ब्रुसेला मतलब होता है कि ब्रसेला में
(1:09:34) ब्रूसेला क्या होता है? एक इनफेक्टिव डिजीज एक ऑर्गेनिज्म आपकी शरीर में जाएगा ब्रूसेलोसिस नाम का वो पहले तो आपको बुखार करेगा फिर आपकी बोन मैरो में जाएगा आपके सारे सेल्स प्रेस कर देगा उसके बाद वहां से जाएगा आपके हार्ट में क्योंकि डायग्नोस तो हुआ नहीं इतना तो सोचते नहीं इंडिया में तो बहुत अंडर रिपोर्टेड है तो फिर हार्ट में जाएगा हार्ट के वाल्स के ऊपर परमानेंट डैमेज कर देगा जब वो डैमेज होएगा तो वहां पर ब्लड तेज-तेज़ बजेगा उससे पस भर जाएगी वहां पर फिर वहां से निकलेगा ब्रेन में चला जाएगा वहां से हड्डियों में जाएगा हड्डियां तोड़ देगा आपकी ये होता है
(1:10:02) ब्रुसेलोसिस के अंदर ओके तो हमने आज इतनी सारी बातें करी उसमें ये पता चला कि एसी के नीचे सोने से फीवर नहीं होता। एंटीबायोटिक से फीवर ट्रीट नहीं होता। राइट? तो ऐसे और कितने पांच मुझे मिथ्स बताओ जो फीवर के हैं एंड कंक्लूड दिस। ठीक है? तो सबसे पहला मिथ फीवर से रिलेटेड ये है कि सर्दी लग गई, टेंपरेचर चेंज हो गया से फीवर हो गया। नहीं सीजनल वायरल फीवर हो गया। ठीक है? दूसरा मिथ है फीवर का कि यार बुखार हो गया है। एंटीबायोटिक्स खा ले ठीक हो जाएगा। वेरी रॉन्ग। पहले पता करना है कि किस किस बीमारी की वजह से फीवर हुआ है या किस ऑर्गेनिज्म से फीवर हुआ है। फिर
(1:10:42) उसके बाद ट्रीटमेंट करना है। तीसरा है कि कोल्ड स्पोंजिंग या गुड होम रेमेडीज। जैसे कि आप कोल्ड स्पोंजिंग हाई फीवर के लिए करते हो। दैट इज ऑल राइट। ओके। दैट इज अ नॉन फार्माकोलॉजिकल मेथड जिससे बुखार ठीक हो सकता है। चौथी चीज है कि फीवर विद वार्निंग साइंस कि अपने आप ठीक हो जाएगा नहीं होगा। उसके लिए आपको एक्सपर्ट हेल्प पर्टिकुलर तीन से चार दिन के अंदर-अंदर डेफिनेटली विजिट करना चाहिए। पांचवा पॉइंट है कि वायरल फीवर्स के अंदर पेन किलर्स अवॉइड करनी चाहिए। जब तक हमें नहीं पता है कि फीवर का क्या कॉज है। पैरासिटामॉल बेस्ट ड्रग ऑफ चॉइस है फीवर को रिड्यूस करने के
(1:11:24) लिए। एंड ये भी रिकॉर्डेड फीवर के बाद ही हां छहवा पॉइंट भी सुन लो या [हंसी] फीवर और टेंपरेचर हो गया में डिफरेंस है। हम रिकॉर्डेड फीवर 100 से ऊपर फीवर माना जाएगा। रिकॉर्डेड टेंपरेचर 100 से नीचे फीवर नहीं माना जाता है। हम ये मिथ्स हैं हमारे फीवर के बारे में। गॉट इट? एंड एक वीडियो आपने बनाया था फाइव के ऊपर ही। फाइव रीज़ंस कि अनप्रोटेक्टेड सेक्स से फीवर होता है। ये क्या है? बेसिकली अनप्रोटेक्टेड से। सो अब हम 20थ सेंचुरी में हैं। सेक्सुअल इंटरकोर्स एक बहुत बड़ी चीज नहीं है। स्कूल्स के अंदर मतलब मेरे टाइम पे ही स्कूल्स के अंदर
(1:12:04) सेक्स एजुकेशन सेक्सुअल एजुकेशन शुरू हो गई थी। एंड पीपल आर वेरी ओपन अबाउट इट। पेरेंट्स गिव दिस टू देयर चिल्ड्रन। और मैं भी प्लान करता हूं कि मेरे बच्चे शुड बी अवेयर ऑफ एयर। तो बहुत सारे सेक्सुअली ट्रांसमिटेड डिजीजेसेस हैं जो फैलते हैं अनप्रोटेक्टेड सेक्सुअल इंटरकोर्स से। नेमली हर्पीस जेाइटल अल्सर्स। दूसरा डिजीज ह्यूमन पेपिलोमा वायरस, जेाइटल वॉट्स उससे होते हैं। एचआईवी वायरस सेक्सुअल इंटरकोर्स से फैलता है। हालांकि इंसिडेंस 33 टू 1% है। बट डिपेंडिंग ऑन द टाइप ऑफ इंटरकोर्स यू आर हैविंग। चौथा हेपेटाइटिस बी हेपेटाइटिस सी। यह भी सेक्सुअल
(1:12:40) इंटरकोर्स से फैलता है। पांचवा क्लमेडिया सेक्सुअल इंटरकोर्स से फैलता है। तो, यह चीजें जो हैं, यह प्रेजेंटेशन एज फीवर कर सकती हैं। तो, सेक्सुअल इंटरकोर्स रिसेंट हिस्ट्री में क्योंकि सेक्सुअल इंटरकोर्स की हिस्ट्री बहुत इंपॉर्टेंट है आजकल के उसमें। एंड द इंक्रीजिंग एडवेंट ऑफ एलजीबीटी क्यू एक्सेप्टेंस टेल्स अस टू बी अवेयर ऑफ़ दिस। नॉट टू बी अफ्रेड ऑफ इट, टू बी अवेयर ऑफ इट। एंड टू लुक फॉर द करेक्ट रीज़ंस एट करेक्ट प्लेसेस। तो यह फीवर का कॉज हो सकता है एंड यू शुड नॉट मिस इट व्हाइल अ पर्सन कम्स टू यू ऑन द क्लीनिक एंड यू शुड नॉट
(1:13:15) एडवाइस अगेंस्ट इट अगेंस्ट आई मीन यू शुड नॉट एडवाइस अगेंस्ट अ पर्टिकुलर लाइफ स्टाइल बट यू शुड ऑलवेज प्रीच अबाउट अ सेफ सेक्सुअल प्रैक्टिस टू अवॉयड दीज़ इंफेक्शंस बिकॉज़ दे आर 100% अवॉयडेबल विथ बैरियर मेथड्स एंड वेरियस अदर ट्रीटमेंट मॉडेलिटीज़। एंड यू आर सेइंग दैट यह सारे इतने ज्यादा डेंजरस जो डिजीजेस हैं वो हो सकती है बट उनका अर्ली सिम्टम इज़ ओनली गोना बी फीवर डेफिनेटली मेजोरिटी ऑफ़ द टाइम इट विल ओनली बी फीवर तो यू यू विल फील लाइक ओ फीवर ही तो है इट्स फाइनली जस्ट प्लस सबसे बड़ी बात है कि फीवर के साथ जेाइटल अल्सर्स हो गए या कुछ
(1:13:56) प्राइवेट एरियाज पे कुछ हो गए सो इट इज़ वेरी डिफिकल्ट टू टॉक अबाउट इट राइट तो देयर आर न्यूमरस ऑफ़ पेशेंट्स हु कम एंड हु आर वेरी स्केप्टिकल अबाउट टॉकिंग स्पेशली यंग बॉयज है ना आई फील गर्ल्स आर हिंदी में बता दो ये एक्चुअली इट्स मच बेटर कि जितने ज्यादा लोग तो एक्चुअली क्या होता है कि बहुत सारे पेशेंट्स आते हैं स्पेशली यंग बॉयज हु आर हैविंग अ सेक्सुअल रिलेशनशिप और अ सेक्सुअल पार्टनर विद द सेम सेक्स और आर बाईसेक्सुअल हु आर वेरी अफ्रेड टू टॉक ऑफ बीइंग जज्ड एंड दे डू नॉट गिव दिस हिस्ट्री बट आई मेक मतलब मैं मेक श्योर करता हूं कि
(1:14:31) कि मैं यह हिस्ट्री उनसे पूछूं, उन्हें कंफर्टेबल फील कराऊं ताकि मुझे एग्जैक्ट कॉज मुझे क्या किसी भी डॉक्टर को एग्जैक्ट कॉज पता लगे और मैं उसको अननेसेसरी बर्डन ऑन ह पॉकेट बाय प्रिस्राइबिंग फालतू की दवाइयां या फिर कोई ऐसी चीज देके जो मुझे ना समझ आए वैसे भेजूं। मेरे को लगता है कि मेरा मतलब मेरा रिस्पांसिबिलिटी है कि मैं मेरे पास मेरी स्पेशलाइजेशन को सीक करने आ रहे हो तो मैं उसे जस्टिस करके आपको भेजूं। मुझे अच्छा लगता है कि मैं उसकी जड़ तक पहुंचा। बट मुझे यह भी बहुत अच्छा लगता है कि दूसरा बंदा बहुत कंफर्टेबली मुझे बता गया
(1:15:08) ये चीज। तो ये चीजें बहुत इंपॉर्टेंट होती हैं। आपकी सेक्सुअल हिस्ट्री वेरीेंट है और मुझे नहीं लगता इसमें कोई शर्म की बात है। आपकी लाइफ आपके रूल्स हां ये नहीं कि गोलियां चला दो जाके कहीं। बट आपकी प्रेफरेंस जो करना है आप कर सकते हैं। और अगर प्रॉब्लम है तो हेड ऑन फेस कर सकते हैं उसको रादर दैन कि उससे भागते रहें। खैर और बहुत जल्दी ठीक हो जाती है। ऐसा कुछ नहीं है। कई स्टैट डोसेस हैं। सिंगल सिंगल डोस पे ठीक हो जाती है। अगर पता लग जाए कि क्या है तो गॉट इट? हियर वास माय लास्ट क्वेश्चन। बहुत लोग बोलते हैं कि फीवर आना अच्छी बात होती है। क्योंकि ये बॉडी में
(1:15:44) सारे आपके जो जर्म्स हैं और वो चीजें वायरसेस हैं वो मारता है। तो अच्छी बात होती है। और अगर आपको साल में दो बार फीवर आता है तो आप तो बहुत ही लकी हो। हैव यू हर्ड दिस? मैंने [हंसी] मतलब हां मैं सुनता हूं ये चीजें। इनफैक्ट कल मेरे क्वेश्चन आंसर सेशन में एक मेरे फॉलोअर या मेरे एक किसी ने मेरे से ये चीज पूछी है कि मुझे फीवर नहीं आता। ये बुरी बात तो नहीं है। तो मैं ये सुनता रहता हूं ऑन एंड ऑफ। बट नहीं ऐसा नहीं है। फीवर आना इम्यूनिटी रिस्पांस के लिए ठीक है कि हां इम्यूनिटी काम कर रही है। बट अच्छी चीज नहीं है। अवॉयड देखो लड़ाई हो गई है। मेरी आर्मी आ
(1:16:24) गई है। मार काट के जीत भी गई है। बट मैं कोलटरल डैमेज तो ले ही चुका हूं ना। तो बेटर क्या था कि मेरी आर्मी आए ना तो वैसे ही फीवर ही ना आए। फीवर नहीं आने के लिए मैं अपनी हेल्थ लाइफस्टाइल मॉडिफिकेशन प्रिकॉशंस ले ही रहा हूं। अगर मैं सब कुछ सही ट्रैक पे कर रहा हूं तो क्यों मैं दलदल में फंस के बाहर निकलूं। मैं दलदल के ऊपर से छलांग मार के ना निकल जाऊं इससे बेटर। तो वही सीन है। ऐसा कुछ नहीं होता। दो बार फीवर आने से तुम बेटर हो रहे हो। ज्यादा मेरे लिए बेटर हो सकता है। मेरे पास कंसल्ट करने आ जाओगे। [हंसी] मेरे को नहीं लगता पेशेंट के लिए बेटर होगा ये।
(1:16:54) ऑन दैट नोट थैंक यू सो मच। प्लेजर इट वाज फन मैन। थैंक यू। आई सी यू इन योर पॉडकास्ट। मतलब आई सबस्क्राइब टू यू टू बी वैरी प्रिसाइज। मैं उन 71% में नहीं बचाऊंगा। [हंसी] नाइस नाइस तो द थिंग इज कि मतलब आई सी यू वैरी फिट टू बी वैरी प्रिसाइज आई हैव नेवर स्मोक इन माय लाइफ आई हैव नेवर आई डोंट ड्रिंक आई डोंट स्मोक टू कूल एक्चुअली मतलब दैट इज द आइडियल लाइफ अ पर्सन शुड हैव बट इट्स गुड एंड आई हैव नेवर डन इट तो बढ़िया बात ये है कि चलो मुझे टेस्ट भी नहीं पता तो मुझे कभी इंक्लिनेशन्स भी नहीं होती अच्छा [हंसी] थैंक यू सो मच ये एपिसोड एंड तक देखने के
(1:17:32) लिए अब आपको तीन चीजें करनी है सबसे पहले इस चैनल को सब्सक्राइब कर लो क्योंकि जितना आप सब्सक्राइब करोगे उतने ही बेहतर और वैलुएबल गेस्ट हम ला पाएंगे आपके लिए। नंबर टू मुझे कमेंट्स में बताओ इस एपिसोड में आपको क्या अच्छा लगा और क्या गंदा लगा ताकि हम वो मिस्टेक्स रिपीट ना कर पाए एंड कौन से ऐसे गेस्ट हैं जो आप देखना चाहते हो वापस हमारे पॉडकास्ट पे ताकि हम उन्हें लेके आए और आपको ज्यादा से ज्यादा वैल्यू दे पाएं। एंड नंबर थ्री ये एपिसोड किसी एक इंसान के साथ जरूर शेयर करना क्योंकि वन कॉन्वर्सेशन कैन चेंज समवनस लाइफ। आई विल
(1:18:03) सी यू नेक्स्ट टाइम। Until then keep figuring up. [संगीत] [संगीत] [संगीत]
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