Sunday, August 2, 2026

Fix Joint Pains and Inflammation with THIS | Dr. Mukesh Sharda with GunjanShouts

Fix Joint Pains and Inflammation with THIS | Dr. Mukesh Sharda with GunjanShouts

Author Name:GunjanShouts

Youtube Channel Url:https://www.youtube.com/@GunjanShouts

Youtube Video URL:https://www.youtube.com/watch?v=b9nmGigRd0I



Transcript:
(00:00) पहले के जमाने में वुमेन से सिर्फ एक्सपेक्ट [संगीत] करते थे कि वह घर का ध्यान रखें, खाना बनाएं। अब आज जब वो वर्किंग वुमेन बन गई हैं तो रिस्पांसिबिलिटीज डबल हो गई हैं। सबसे पहले पेंस आएंगी। [संगीत] बैक पेन, सर्वाइकल, इनफ्लामेशन, गठिया बनेगा उसी से रुमेटाइड अर्थराइटिस वेट लॉस नहीं होगा। जितना मर्जी [संगीत] डाइट कर ले वेट नहीं ज्यादा। इस चीज को रोकने के लिए हमें क्या लेना चाहिए? हमें लेना चाहिए। मैम आयुर्वेद में दिनचर्या को बहुतेंस देते हैं। जी। तो वो कौन सी ऐसी डेली हैबिट्स या डेली रिचुअल्स है जिनका आरओआई सबसे ज्यादा
(00:35) है? जितना सिंपल हो सके उतना सिंपल रखिए। ऐसा कुछ नहीं है कि ब्रेकफास्ट करना ही करना है। ऐसा कुछ नहीं है कि रात को यह खाना ही खाना है। ऐसा भी कुछ नहीं है कि इतने घंटे सोना ही सोना है। ये सारे मिथ हैं। [संगीत] दूध के साथ नमक वाली चीजें नहीं लेनी। दूध के साथ फिश नहीं आप ले सकते। दूध के [संगीत] साथ आप नॉनवेज नहीं ले सकते। घी और शहद एक साथ नहीं ले सकते। क्योंकि जब ये चीजें मिल जाती है ना तो यह पोइजन बन जाती है। [संगीत] अभी भी वो वुमेन को आदत है परमिशन लेने की। परमिशन लेने की। मुझे पूछना है। पहले पापा से पूछना है, फिर हस्बैंड से पूछना है, फिर बच्चों से
(01:08) पूछना है। [संगीत] इन सम पॉइंट दे हैव फॉरगॉटन दैट दे आर ह्यूमन बीइंग्स। सारा कुछ दे दिया आपको। आपकी फैमिली को, बच्चों को। किसी के पास समय ही [संगीत] नहीं है कि वो अपनी वाइफ के पास 10 मिनट बैठ के उसको पूछे कि कैसे हो आप? कैसी चल रही है आपकी लाइफ? यह फॉर्मेलिटी नहीं है। ये एक केयर है और एक फीमेल को यही सबसे ज्यादा चाहिए कि इमोशनल स्ट्रेस बाद में एन एंग्जायटी, [संगीत] डिप्रेशन और उनकी हेल्थ जो है वो काफी पीछे चलती जा रही है। [संगीत] कौन सी वो चीजें हैं जो हर मदर को अपनी बेटी को पास ऑन जरूर करनी चाहिए ताकि वो इन सब लाइफस्टाइल रिलेटेड बीमारियों से
(01:44) जितना हो सके जब तक हो सके दूर रहे। एटलीस्ट तीन पॉइंट्स तो मैं जरूर आपको बताऊं इस चीज के बारे में। सबसे पहले आज का यह एपिसोड है खास वुमेन के लिए क्योंकि इसमें हमने वुमेन हेल्थ के बारे में बात करी है मगर आयुर्वेदिक पर्सपेक्टिव से। [संगीत] इस एपिसोड में हमने डिस्कस किया है प्रॉब्लम्स जैसे कि नी पेन, बैक पेन, पीसीओडी, हेयर फॉल, [संगीत] अर्थराइटिस। क्योंकि इस तरह की क्रॉनिक इलनेसेस को हमने इतना नॉर्मलाइज जो कर दिया है। तो हम जानेंगे इनके [संगीत] कुछ नेचुरल येट प्रैक्टिकल सॉलशंस जिन्हें आप अपनी आजकल की [संगीत] लाइफस्टाइल में भी इजीली इनकरपोरेट कर
(02:22) सकें। और इस डिस्कशन के लिए आज हमारे [संगीत] साथ हैं डॉक्टर मुकेश फाउंडर ऑफ डॉक्टर शारदा आयुर्वेददा। यह 15 साल से इस फील्ड में है और इनके रेवोल्यूशनरी अचीवमेंट्स के लिए इन्हें गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड, वर्ल्ड बुक ऑफ रिकॉर्ड से भी रिकॉग्नाइज [संगीत] किया गया है। इस तरह के पॉडकास्ट हम हर हफ्ते आपके लिए लेकर आते रहते हैं ताकि आपको [संगीत] जेन्युइन क्रेडिबल इंफॉर्मेशन का एक्सेस अपने घर बैठे मिल सके और आप अपनी और अपनी परिवार [संगीत] की हेल्थ का ध्यान रख सकें। इसलिए अगर अभी तक आपने चैनल को सब्सक्राइब नहीं किया है देन प्लीज डू हिट द सब्सक्राइब
(02:55) बटन ताकि कोई भी एपिसोड आप मिस ना करें। [संगीत] [संगीत] आज की डेट में ना इंफॉर्मेशन की कमी नहीं है। जी। सच्चाई ये है कि सबको सब कुछ पता है। क्या खाना चाहिए? एक्सरसाइज करनी जरूरी है। प्राणायाम करना जरूरी है। वॉक पे जाना जरूरी है। खाने में भी हमें अब सब पता है। बट इसके बावजूद भी हम अपनी हेल्थ को प्रायोरिटी नहीं दे पा रहे। नहीं दे पा रहे। चाहे वो काम का रीजन हो, चाहे वो फैमिली की रिस्पांसिबिलिटीज हो, बच्चे हो, इतना बिजी हैं अपनी लाइफ में कि हम टाइम निकाल ही नहीं पा रहे। इसकी वजह
(03:39) से वुमेन आज भी वो इतना एग्जॉस्टेड थकान फील करती हैं। बॉडी में इनफ्लेमेशन है जिसकी वजह से जगह-जगह पे पेंस है, ब्लोटिंग है, वेट बढ़ रहा है, कंट्रोल नहीं हो पा रहा। एंजाइटटी जिसको देखो वो स्ट्रेस्ड आउट है हार्मोनली हम लोग इमंबैलेंस है जिसकी वजह से पीरियड्स में हो रहा है आपको क्या लगता है कि क्यों वुमेन अपनी बॉडी से इतना डिस्कनेक्टेड है इतनी अवेयरनेस होने के बावजूद भी ये जो प्रॉब्लम्स आ रही हैं इसका सबसे बड़ा जो बेस अगर हम कहें तो हमारा जो सोशल स्ट्रक्चर है वो है क्योंकि आपने कितना देखा होगा कि आज भी जैसे बच्चे बड़े हो गए
(04:15) हैं तो उनको रात को 10:00 बजे आना है 11:00 बजे आना है बट दे फील सो कनेक्टेड कि हम अपनी मां के हाथ का बना ही खाना खाएं। है ना? हम लेकिन उन उनके चक्कर में वो ये भी भूल जाते हैं कि उनकी मदद शी इस गेटिंग दैट मच ओल्ड। 20 इयर्स का बच्चा होगा तो 40 इयर्स तो नेचुरली मदर होगी 40 45 या मे बी अप टू 50 तो अपने बच्चे से उनको प्यार है। अनकंडीशनल लव है और उसके कारण वो खुद भी जग रही हैं। और उन्होंने अपना खाना टाइम से नहीं लिया। फिर हस्बैंड बिजनेस से काम से जब आएंगे तो उनको यह है जब आएंगे तो थोड़ा सेटल हो जाए। फिर वो खाना खा ले फिर
(04:49) हम खाएंगे। इन सम पॉइंट दे हैव फॉरगॉटन दैट दे आर ह्यूमन बीइंग्स। उनके इमोशंस को हम यूटिलाइज कर रहे हैं और उनकी हेल्थ जो है वो काफी पीछे चलती जा रही है। और दूसरे पॉइंट पे हम आते हैं इनफ्लामेशन पे। इनफ्लामेशन मैक्सिमम अगर मैं कहूं अकॉर्डिंग टू आयुर्वेद तो जब भी एक वूमेन की डिलीवरी होती है उसके बाद स्पेसिफाइड अकॉर्डिंग टू आयेदा इट इज प्रिस्क्राइब दैट फॉर 40 डेज मिनिमम दे हैव टू टेक केयर ऑफ देयर हेल्थ। वो प्रॉपर एक जैसे हम पुराने टाइम में करते थे वह आज भी वैसा ही होना चाहिए। लेकिन वह चीज नहीं होती। फ्रॉम द फर्स्ट डे ऑफ़ डिलीवरी चाहे सी
(05:25) सेक्शन हुआ, नॉर्मल हुआ लेकिन हम उस चीज को भूल गए। लेकिन उस चीज ने हमारे शरीर पे इतना बड़ा इंपैक्ट डाला है कि देखिए पोस्ट डिलीवरी सबको बॉडी में इनफ्लामेशन आनी ही आनी है। अगर उन्होंने अपना ध्यान नहीं रखा। और ओवर द टाइम ओवर द पीरियड धीरे-धीरे जॉइंट पेंस इनफ्लामेशन गठिया बनेगा। उसी से रुमेटेड अर्थराइटिस वेट लॉस नहीं होगा। जितना मर्जी डाइट कर ले वेट नहीं ज्यादा। आपने सुना होगा ऐसे पेशेंट्स कि बहुत कुछ कर लेते हैं। जैसे पीछे विद्या बालन जी का भी आ रहा था कि मैंने तो पूरी लाइफ स्ट्रगल किया वेट कम करने के लिए। बट नाउ एट लास्ट आई गॉट आयुर्वेदिक
(06:00) एंटी इनफ्लामेटरी डाइट। तो वो एंटी इनफ्लामेशन को भी समझना बहुत जरूरी है। इनफ्लामेशन कैसे आती है? जब बात इमंबैलेंस हो जाता है। व बात और कफ इंबैलेंस होगा तो उस टाइम पे आपका शरीर फूलता जाएगा। चाहे आप कुछ ना भी खाओ, पानी भी पियो तो भी मोटापा बढ़ता जाएगा। अब वो कांस्टेंट वे में बढ़ता गया ना तो उसके साथ क्या है? आपको स्ट्रेस होना शुरू हुआ। क्योंकि ओवर द टाइम यू आर लुकिंग एट मिरर और आप देख रहे हो यार सारी दुनिया पतली है और ऐसे है। अच्छा लगता है हर किसी को ड्रेस अप होना बाहर निकलना। और मैं इतना कुछ कर रही हूं। मैं कुछ खा भी नहीं रही हूं। फिर भी
(06:34) मैं पतली नहीं हो रही या ऐसे मतलब होता है लोगों को। बहुत इंटरनल इनसिक्योरिटी बहुत ज्यादा हो जाती है कई बार रिलेशनशिप्स में क्योंकि बच्चे बड़े हो जाते हैं और अब 15 20 साल के गैप के बाद हम कोशिश कर रहे हैं कि अब हम ठीक हो जाए बट स्टिल वी आर दैट मच फगी जैसे कंफ्यूजन बहुत है ना सोशल मीडिया भरा पड़ा है सारी चीजों के साथ इंफॉर्मेशन जैसे आपने बोला बहुत है लेकिन राइट इंफॉर्मेशन फॉर राइट पर्सन नहीं है आयुर्वेद ये बोलता है कि हर इंसान एक दूसरे से अलग है हम सिंपल पैराटर्स पे कैलोरी के बेसिस पे या बिना एनालाइज किए हम किसी को भी एक चीज नहीं दे सकते।
(07:10) इसीलिए आयुर्वेद कहता है दैट वी हैव टू वर्क एंड वी हैव टू एनालाइज बात पिता एंड कफा। राइट राइट राइट। आपने आयुर्वेदिक टर्म्स को रेफर किया जो कि सिर्फ टर्म्स ही नहीं है। ये बेसिकली हमारी रियलिटी है। ये हमारे की तत्व हैं जिनसे हम बने हैं। तो क्या है ये वात, पित्त, कफ? और कैसे किसी को पता चल सकता है कि मेरा क्या इमंबैलेंस है? क्या बैलेंस है? मुझे किस पे काम करना है और उसका क्या इफेक्ट हो सकता है? जो सारी दुनिया बनी है अकॉर्डिंग टू आयुर्वेद एंड अकॉर्डिंग टू स्पिरिचुअलिटी वो विद फाइव एलिमेंट्स के साथ बनी है। उसी फाइव एलिमेंट्स में अगर हम आगे और उसको
(07:48) डिफाइन करते हैं जो ह्यूमन बॉडी है तीन तत्वों के ऊपर ज्यादा काम करती है वाता, पिता एंड कफा। तो छोटा बच्चा जब जन्म लेता है वहां से लेके 10 12 साल तक उसकी बॉडी में जो सबसे ज्यादा डोमिनेंटिंग फैक्टर रहता है वो रहता है कफा। कफा जो है वो बॉडी के टिश्यूस बिल्ड अप करता है। बॉडी में एक गुड क्वालिटी का जो म्यूकस है और कफ है वो उसके ब्रेन को धीरे-धीरे करके स्ट्रक्चरर्ड करता है। उसके ऑर्गन्स को बनाता है, शेप देता है, साइज में कन्वर्ट करता है और इसके साथ-साथ देखें तो छोटे बच्चों में बीमारियां भी अकॉर्डिंग टू आयुर्वेद कफ इंबैलेंस के साथ ही होती हैं।
(08:24) जैसे आपने देखा होगा कि छोटे बच्चों को जो है सांस से रिलेटेड सर्दी, खांसी, जुकाम ऐसे ही बीमारियां ज्यादा आती हैं या फिर स्किन डिजीज आती हैं ज्यादातर। [गला साफ़ करने की आवाज़] तो ये बीमारियां भी कफ से रिलेटेड है और इस टाइम पे कफ जो है वो अपना डोमिनेंस भी दिखा रहा है एक ह्यूमन स्ट्रक्चर को बनाने में। तो जो पांच एलिमेंट्स हैं जो सब जानते ही हैं पृथ्वी, अग्नि, जल, वायुस। तो कफ कब होता है? जब इसमें से क्या चीज ज्यादा हो? जब हमारे शरीर में पानी बहुत ज्यादा होता है और अर्थ एलिमेंट ज्यादा होता है। उसके कारण जो है कफा जो है वो
(08:58) स्ट्रक्चर होता है। तो बॉडी जो है वो धीरे-धीरे बनना शुरू होती है। बच्चों का वेट गेन होना शुरू होता है। बच्चों की हेल्थ अच्छी डेवलप होती है। नेल्स अच्छे ग्रो करते हैं। हेयर्स ग्रो करते हैं। तो ये उनकी लाइफ का ये सबसे प्राइम टाइम है। जिस टाइम पे वो डेवलप हो रहे होते हैं एज अ गुड ह्यूमन हेल्दी बीइंग्स। लेकिन जब हम उस टाइम पे उनको खाना पीना उल्टा देंगे जिसके कारण कफ दूषित हो जाता है, खराब हो जाता है। जो गुड क्वालिटी का कफ था वो एक बैड म्यूकस में फॉर्म हो गया। इसी करके बच्चों को खांसी, सर्दी, जुकाम, स्किन की बीमारियां, अस्थमा, साइनस ऐसी
(09:34) चीजें बहुत ज्यादा हो जाती हैं। अब हम लोगों ने नेचर को फॉलो करना बंद कर दिया। जैसे अकॉर्डिंग टू आयुर्वेद दो साल तक बच्चे को मदद फीड देनी चाहिए। कभी दो से तीन साल तक देनी चाहिए। लेकिन अब बहुत कम हो गया। अब हम क्या करते हैं कि दो-ती महीने वह भी थोड़ा देके हम मार्केट के जो मिल्क प्रोडक्ट्स वो लेके हम सोचते हैं कि वो बहुत अच्छे हैं और हम दे देते हैं उनको और सबसे बड़ी बात यह कि उनको हम ठंडे पानी में कई बार मिक्स करके दे देते हैं। तो बच्चे की जो बेसिकली अग्नि है ना वो प्रदीप्त नहीं होती और वैसे भी बच्चा छोटा बच्चा आप देखेंगे छ महीने 9 महीने का जो
(10:09) बच्चा है वो बेड से हिल नहीं पाता। मूवमेंट्स नहीं है उसके। तो वो मूवमेंट्स आपको देने होते हैं। जैसे पुराने टाइम में आपने एक बहुत अच्छे ऑइल की ऐड आती थी ना बहुत पुराने समय के बाद डावर डावर लाल शिशु तेल ऐसा कोई मुझे याद नहीं आ रहा तो वो इसी चीज के लिए था ताकि बॉडी बच्चे के जो शरीर के अंदर गर्मी बनी रहे अग्नि जो है वो जली रहे और बच्चा ठंडा ना पड़े किसी भी एंगल से तो बच्चे की बॉडी का जो इनर टेंपरेचर है दैट शुड बी इक्वली बैलेंस्ड जो हम उसको फूड भी दे रहे हैं ना अब हमने क्या किया बाहर से ठंडा खाना उसको दे दिया लेकिन उसकी बॉडी के अंदर तो वैसे
(10:43) ऐसे ही अग्नि धीरे-धीरे करके कम होती जा रही है। इसीलिए उस टाइम पे सबसे ज्यादा जो जोर दिया जाता था कि मदर ही फीड करे। छ महीने तक तो मदर की ही फीड नॉट इवन वाटर लेकिन हम फिर भी बाहर से ले कोई चीज उसको दे रहे हैं। दूसरा कई बार आजकल के टाइम में मैंने बहुत देखा कि हम लोग बच्चों की ज्यादा मालिश पे ध्यान नहीं देते। एटलीस्ट 2 साल तक बच्चे की पूरी मालिश करनी चाहिए। क्योंकि आप देखिए बच्चा 9 महीने पेट में रहता है। 9 महीने कैसी शेपों में रहता है। ऐसे बिल्कुल छोटा सा बन के रहता है। गोलमोल सा बन जाता है। तो अब हमने उसके मसल्स को भी स्ट्रक्चरर्ड करना है। उसके
(11:18) हमने बोनस को सीधा करना है। उसकी बॉडी में जो है एक्टिविटी मूवमेंट्स को प्रॉपर नॉर्मल करना है। क्योंकि काफी बच्चों में यह भी डिफिटीज पाई जाती हैं कि उनकी बोन प्रॉपर्ली शेप में नहीं आ रही। टांगे बच्चों की सीधी नहीं होती हैं और फिर कई बार बाजू सीधे नहीं होते हैं। तो ये चीजें धीरे-धीरे सॉफ्ट सपल मसाज देके प्रॉपर विद ऑथेंटिकेटेड ऑयल 10-1 साल तक वो कफ के साथ ही डोमिनेट भी रहेगा और वही कुपित भी होगा। अगर हम खाना सही नहीं देंगे, बच्चों का डाइट का ध्यान नहीं रखेंगे तो ये चीजें होंगी और बहुत सारे पेशेंट जो है वो छोटे-छोटे बच्चों को जब बीमार होते हैं
(11:54) उनको बुखार है, सर्दी, खांसी तो दही देते हैं। दही इटसेल्फ कफ बढ़ाता है। हम दूध देते हैं, दूध भी कफ बढ़ाता है। हम मीठा बहुत देते हैं। मीठा भी कफ बढ़ाता है। ये सारी चीजें कफ को ही एग्रावेट करती हैं। मतलब आयुर्वेद में पोस्टपार्टम वाला जो फेस है उसको बहुत इंपॉर्टेंट बताया गया। जैसे आपने बोला जो है बहुत क्रूशियल होते हैं। आयुर्वेदिक पॉइंट ऑफ व्यू से एक न्यू मॉम को न्यू मदद को किन बातों का ध्यान रखना चाहिए ताकि उसकी रिकवरी अच्छी हो? बच्चा बना कैसे? फादर का सिर्फ बीज है। है ना? हम सीड काउंट कर सकते हैं। लेकिन बच्चे की जो बॉडी बनी है वो मदर की बॉडी
(12:27) से ही बनी है। तो हम लोगों ने अपने शरीर का काफी पार्ट अपने बच्चे को बनाने में दे दिया। अब बच्चे ने जन्म लिया लेकिन मदर अपना ध्यान रखना भूल गई। बच्चे को ध्यान रखना। सारी अटेंशन बच्चे। हां। बचा हुआ है तो सारा कंप्लीट फोकस बच्चे पर है लेकिन मदर पे फोकस हट गया सारा और लाइफस्टाइल क्योंकि मॉडर्न हो गया तो हम एसी भी यूज कर रहे हैं। हम सुबह का बना खाना दोपहर को रात को खा रहे हैं और कुछ भी खाए जा रहे हैं। हालांकि यह सबसे प्राइम सेगमेंट है जिसमें हर वूमेन को ध्यान देना चाहिए जब भी किसी की डिलीवरी होती है। डिलीवरी के टाइम में भी डिलीवरी
(13:02) से पहले भी आप तैयारी कर रहे हो कि आपकी प्रेगनेंसी होनी चाहिए। इवन एट दैट टाइम अकॉर्डिंग टू माय ओपिनियन वन शुड गो एंड डिटॉक्सिफाई देमसेल्व्स हम ताकि आपका बिफोर प्रेगनेंसी अच्छा बिफोर प्रेगनेंसी बिफोर यू कंसीव बिफोर यू कंसीव क्लज़ योर बॉडी क्लज़ योर बॉडी आप बहुत अच्छे और हेल्दी बच्चे को जन्म दोगे आपको भी करना चाहिए आपके हस्बैंड को भी करना चाहिए अगर आप उस तरह से एक सीड को पेड़ बनाने की तरफ आप चलते हो तो आपके बच्चे की लाइफ में इनिशियल लेवल पे कोई भी हेल्थ प्रॉब्लम्स नहीं आएंगी। जैसे हम एक नए जगह पर अगर शिफ्ट करते हैं, एक नए घर में जाते हैं तो पहले उसको अच्छे
(13:41) से सफाई करते हैं। वहां पूजा करते हैं, हवन करते हैं। उसको शुद्ध करते हैं और फिर वहां पर अपनी लाइफ स्टार्ट करते हैं। इवन इन आयुर्वेदा ये तो बहुत ज्यादा डिटेल में भी बताया गया है कि थ्रू आउट द ईयर व्हेन यू हैव टू प्लान फॉर योर प्रेगनेंसी एंड ऑल दैट। और उसके लिए आपको क्या-क्या करना चाहिए, क्या पूजा करनी चाहिए? हर एक चीज। स्पिरिचुअलिटी सीधा आपके मन पे असर करती है और शरीर मन के साथ ही चलता है। जिनका मन नहीं अच्छे से काम करता उनका शरीर भी अच्छे से काम करता है। माइंड बॉडी कनेक्शन यस यस माइंड बॉडी एंड सोल कनेक्शन देखिए
(14:14) आप एक न्यू लाइफ को जन्म देने जा रहे हैं दुनिया में और जो आपको आपका बच्चा है दुनिया में सबसे प्यारा वही बनेगा। [हंसी] तो ये हमारी फर्स्ट सोशल और हमारी सेल्फ रिस्पांसिबिलिटी है कि हम हेल्दी बच्चों को जन्म दें। अगर आप माता-पिता बनने जा रहे हैं तो आप एक बहुत ही जिम्मेदारी वाला काम करने जा रहे हैं। इट्स नॉट लाइक दैट कि अब हम बर्थ दे के हम भूल जाएंगे बच्चे को ना आगे की सारी लाइफ इंटरकनेक्टेड है। आगे आपका बच्चे को कोई भी तकलीफ होगी तो सबसे पहले मां को तकलीफ ज्यादा होती है। अगर हम वाइल्ड लाइफ पे भी जाए क्रिएचर्स भी देखें तो वो भी ऐसे ही काम कर रहे हैं।
(14:48) तो इसमें कोई हम बहुत बड़ा नहीं ऐसा कुछ प्लान कर रहे हैं। सृष्टि की रचना जब से हुई है तब से ऐसे ही चले आ रहे हैं। लॉस ऑफ नेचर यस। और जब आपने बच्चे को जन्म दे दिया तो उस टाइम पे आफ्टर डिलीवरी आपको क्या ध्यान रखना है? तो आपका बॉडी जो है वो सबसे बड़ा बेस है जिस पे आपको फुल्ली जो है कंसंट्रेशन देनी है। जिन्होंने अपने बच्चे को जन्म दिया वो नहीं रख पाते। तो एट दैट टाइम यू नीड द हेल्प ऑफ योर फैमिली मेंबर्स। लाइक योर मदर इन लॉ घर पे कोई है या आपके हस्बैंड है या जो भी है आपके परिवार में जो भी हैं आपको उन लोगों का पूरा सहयोग चाहिए ताकि आप अपने हेल्थ के
(15:22) ऊपर पूरा ध्यान दें। देखिए आप अच्छे से खाना खाएंगे या अपना अपना ध्यान रखेंगे तो आपको फीड बहुत अच्छी आएगी। आपका बच्चा बिल्कुल हेल्दी हो। आपको नेचुरल फीड आ रही है तो आपको बाहर से लेने की रिक्वायरमेंट नहीं है। बहुत सारे लोगों को मिथ है कि जैसे डिलीवरी हो जाती है वो घी लेना बंद कर देते हैं। लेकिन ये सबसे आयुर्वेद कहता है कि घी तो आपको उधार लेके भी खाना चाहिए और प्रेगनेंसी के बाद घी लेना बहुत ज्यादा जरूरी होता है। उसका कारण है क्योंकि आपने दो से 3 केजी के या 4 केजी के बीच-बीच में आप आपका जो बच्चा था उसका वेट एप्रोक्समेटली डेढ़ आजकल तो कम हो रहा है।
(15:54) 1 1/2 किलो सवा किलो के बच्चे हो रहे हैं। अच्छा हां बहुत ज्यादा दिक्कत आ रही है लोग लोगों को बट एवरेज 2 2ाई किलो एवरेज 2 2ाई किलो बट जो स्टैंडर्डाइज्ड है अबव 3 किस होते हैं आइडियल क्या वेट होना चाहिए सवा5 किलो 3 किलो हां तो उस टाइम पे घी क्यों लेना है क्योंकि आपने अपनी आपकी बॉडी के अंदर तीन से 4 किलो या 2 किलो का बेबी था वो आपकी बॉडी से निकला बाहर चाहे सी सेक्शन के थ्रू निकला चाहे नॉर्मल डिलीवरी के थ्रू निकल रहा अब वो बॉडी के अंदर एक वैक्यूम क्रिएट हो वो बहुत बड़ा वैक्यूम है और अब यहां एयर इमंबैलेंस हुई है। आपको समझ नहीं
(16:31) आ रहा। अब उस एयर को समझ नहीं आ रहा कि मैं कैसे बाहर निकलूं। अगर वो एयर प्रॉपर्ली बाहर नहीं निकली ना तो वो आपके सारे शरीर में घूमेगी और जहां वो ब्लॉक हो जाएगी वहीं वो कुपित हो जाएगी। खराब हो जाएगी क्योंकि जहां ब्लॉक होगी वहां कफ कफ ने भी ब्लॉकिंग कर देनी है। उसके कारण जो है आपको सबसे बड़ी प्रॉब्लम क्या आएगी? आपका वेट गेन होगा। नंबर वन सबसे ज्यादा दिक्कत ये है और दूसरे नंबर पे आपको जॉइंट पेंस होंगी बहुत ज्यादा। तीसरे नंबर पे आपकी आंखें बहुत ज्यादा कमजोर होंगी। आपको स्पेक्स लगने के चांसेस हैं। और आपने काफी नॉर्मल टाइम पे भी ऐसे फीमेल्स देखी हैं
(17:05) जिन्होंने जैसे बच्चे को जन्म दिया और अपने शरीर का ध्यान नहीं रखा। उनकी ऐज अगर 30 है ना तो आप देखतेदेखते वो छ महीने के अंदर आपको ऐसे लगेगा कि वो 40 इयर्स की है। हार्मोनल इमंबैलेंस इस चीज को कहते हैं क्योंकि बात इमंबैलेंस हुआ उसने बॉडी के अंदर हर चीज सुखा दी। स्किन में झुर्रियां पड़ जाती हैं, चिमड़ियां पड़ जाती है। आप बूढ़े हो जाते हो। 10 साल आगे चले जाते हो। इसलिए जब भी डिलीवरी होती है, सबसे पहला जरूरी काम यह करें। अगर सी सेक्शन हुआ है तो एक महीना वेट कीजिए। उसके बाद आप घी लेना शुरू कीजिए। गाय का घी लीजिए। डाइजेशन में बहुत अच्छा होता है
(17:39) और आप उसके रिजल्ट भी देख पाएंगे कि आपको दर्दें होना बंद हो गई। आपको इनफ्लामेशन नहीं है। आपका वेट गेन नहीं है। अगर गांव में अभी भी किसी की बात करें या कोई महिला ऐसी भी हैं जो अभी लेबर या हार्ड वर्क करती हैं। आपने उनमें कभी मोटापा देखा? नहीं है। उनमें नहीं है क्योंकि वो यह सारी चीजें फॉलो करते हैं। अभी भी हरियाणा में गांव में बहुत सारे लोग जो हैं वो डिलीवरी के बाद स्पेसिफाइड घी बनाते हैं महिलाओं को देने के लिए चार से पांच किलो और उसमें अजवाइन डाल के रखते हैं। एक डेढ़ महीना पहले अजवाइन सोक सोक कर देते हैं। उसके बाद जैसे डिलीवरी होगी उसके बाद
(18:12) उन्होंने दो से तीन चम्मच रोज जो उनके घर की बहू है, बेटी है उनको देना है। और इसके साथ-साथ बच्चा भी हेल्दी होता है। तो अपना ध्यान रखना बहुत ज्यादा जरूरी है। सोशल मीडिया चलाते हैं, टीवी ऑन करते हैं तो हमें ना सुबह शाम इन सब प्रॉब्लम्स के सॉलशंस बेचे जाते हैं। ये खा लो, ये लगा लो, ये पी लो, ये कर लो। रूट कॉज की जो बात है वो कोई नहीं कर रहा। आप यह बिल्कुल भी मत सोचिए कि आपको एग्जिमा है, सोरायसिस है और कोई क्रीम, कोई सनस्क्रीन उसको ठीक करेगी। कभी भी नहीं करेगी। लोगों की [संगीत] लाइफ खराब होते देखा है मैंने इस सोरायसिस में। एक
(18:48) लेडी आई मेरे पास। उसको सीवियर सोरायसिस उसको यह पता है कि उसके हस्बैंड का कहीं एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर हो गया। हम इन पूरे एपिसोड्स की मिनी क्लिप्स को टॉपिक वाइज एक दूसरे चैनल पे अपलोड करते हैं जिसका नाम है गुंजन टॉक्स क्लिप्स। इस चैनल पे आप कम टाइम में भी अपने फेवरेट टॉपिक को आसानी से रिवजिट कर सकते हैं। गुंजन टॉक्स क्लिप्स का लिंक आपको डिस्क्रिप्शन में मिल जाएगा। इसके बाद अगर हम आगे पित्त के ऊपर आए तो पित्त की जो स्टेज है वो है जैसे 121 साल से बच्चे बच्चों में स्टार्ट हो जाती है 30 इयर्स 35 इयर्स तक ये रहती है। पित्त डोमिनेट तब
(19:22) करता है जब आप एक्टिव हो गए फुल्ली आपकी बॉडी रिवाइव कर गई। पूरे ऑर्गन्स जो है वो उन्होंने जितना बनना था वो फुल कैपेसिटी में या ब्लूम कर गए। तो उस टाइम पे बॉडी जो है वो ऑटोमेटिकली एक पिता में पिता जोन में जो है वो ज्यादा शिफ्ट हो जाती है। जिसमें फायर एलिमेंट फायर एलिमेंट ज्यादा होता है और उस टाइम पे देखो यूथ में सबसे ज्यादा अग्रेशन होता है किसी भी चीज को लेके काम करने का लड़ने का हार्मोंस चेंज कुछ अपना नया कुछ करने का लाइफ में नया कुछ ऐसे मोटिवेशन एंथूजियाज्म ये सारी चीजें जो है वो पित्त डिफाइन करता है। ये गुड क्वालिटी का पित्त
(20:00) जो डोमिनेट कर रहा है। अब इसके सेकंड वर्जन पे आते हैं। तो अगर हमने लाइफ में खानेपीने का ध्यान नहीं रखा, ऐसी चीजें बहुत ज्यादा की तो बीमारियां क्या होंगी? इससे होती हैं स्किन डिजीज ज्यादा। जैसे रैशेस, रेडनेस, हार्मोनल इमंबैलेंस या फिर एक्नेज़ बहुत ज्यादा। इसकी वजह से ज्यादा अग्नि होती है। इसलिए वो फेस के ऊपर बहुत ज्यादा दाने और एक्ने, पिंपल्स की प्रॉब्लम्स इसी फज़ में होती है। यस। रशेस, इचिंग, इरिटेशन, एक्सेस में स्वेटिंग, हॉट फ्लैशेस ये सारी जो है वो पित्त के कारण जो है और उसका जो समाधान है वो यही है कि आप अच्छे से
(20:36) प्रॉपर्ली जो है जूसे या फिर सैलेड्स अच्छे लेवल पे खाएं और दूसरा हम लोग क्या करते हैं कि पित्त भी बढ़ रहा है और हम लोग पित्त बढ़ाने वाली चीजें भी ज्यादा खाते हैं। जैसे कि चिप्स कुरकुरे या फिर कॉफी बहुत ज्यादा यूथ जो है वो इंटेक करता है। कॉफी इटसेल्फ जो है वो पित्त एग्रेवेट करती है। ऐसा हम खाना भी ऐसा खाते हैं जो उस चीज को और बढ़ाता है। फिर बीमारियां ज्यादा होती है। पूरा ओवरऑल लाइफ स्टाइल हमारा पित्त को और ज्यादा एग्रवेट करता है। यस यस। और अगर हम अब लास्ट इस पे आए तो वो है वाता। वाता जो है पहले तो चलो अबव 60 इयर्स हम कंसीडर करते रहते हैं। बट राइट
(21:10) नाउ वी कंसीडर 40 इयर्स क्योंकि वही है कि मदर्स अपना ध्यान नहीं रखती और वो सारी इनफ्लेमेशन जॉइंट पेंस पहले ही स्टार्ट हो जाती हैं। तो वाता का मतलब होता है बॉडी के अंदर जितने भी मूवमेंट्स हो रहे हैं। जैसे मैं आपसे बात कर रही हूं। हाथ हिला रही हूं। आइज हम ब्लिंक कर रहे हैं। ब्रेन कुछ सोच रहा है। थॉट्स प्रोसेस में चल रही हैं या ब्लड सर्कुलेट हो रहा है या लिब्राटिक सिस्टम सर्कुलेशन में है जो भी इनवोलेंटरी एक्टिविटीज है दैट इज दैट कम्स अंडर बाथ अप ओके और जब वात एग्रावेट करता है तो जॉइंट पेंस बहुत ज्यादा होती है। सबसे पहले पेंस
(21:42) आएंगी। पेंस कहीं पे भी आ सकती हैं। अकॉर्डिंग टू आयुर्वेद और चर्क संहिता के अकॉर्डिंग मैं बात करूं तो 80 टाइप्स का बात देखने को मिलता है। 80 प्रकार के ऐसे रोग हैं जो सिर्फ बात इमंबैलेंस होने के साथ ही होते हैं। 80 टाइप्स गॉड। आपने सुना होगा ना कि बुजुर्ग और बच्चे एक ही जैसे होते हैं वो सेम चीज तो वो भूल जाते हैं सब कुछ और पैरालाइज हो गया फेशियल पैरालाइज आई विजन लॉसेस हो गए स्किन में झुर्रियां पड़ना रिंकल्स पड़ना आना शुरू हो गई कुछ लोग काले हो जाते हैं आपने देखा होगा कि यंग जब रहते थे तो उनका कलर फेयर इनफ था जितना होना चाहिए लेकिन
(22:17) जब बूढ़े हो जाते हैं तो थोड़ा सा ब्लैक स्टोन में ब्राउन स्टोन में चला जाता है सोरायसिस कई बार हो सकता है अस्थमा हो सकता है या जोड़ों के दर्दें गठिया हो सकता है बैक पेन, सर्वाइकल ऐसे बहुत सारी बीमारियां पेट में दर्द, शूल ऐसे कोई सिस्ट बनना, गांठे बनना। इस चीज को रोकने के लिए हमें क्या लेना चाहिए? हमें लेना चाहिए घी। घी एक ऐसी औषधि मानी गई है जो बात को सबसे अच्छे तरीके से बैलेंस करती है और हमारी बॉडी में जैसे हमारी बॉडी सात धातुओं से बनी है तो धीरे-धीरे करके एक-एक धातु का प्रॉपर्ली पोषण करके जो है वो हेल्दी रहती है। मसल्स प्रॉपर्ली काम करते
(22:55) हैं। नर्वस सिस्टम प्रॉपर्ली काम करता है। जॉइंट्स प्रॉपर्ली काम करते हैं। इसी करके आज भी हिमाचल में 80 90 साल के जो बुजुर्ग हैं वो काम करते हैं पूरा। जैसे मेरे घरों में भी दादियां हैं तो वो खाना भी बनाएंगी। सारा काम करेंगी। उनको कोई जॉइंट पेन नहीं, कुछ नहीं। क्योंकि लाइफस्टाइल वैसा है कि कुछ भी एक्स्ट्रा नहीं खाएंगे और टाइम से खाएंगे और जितना हो सके उतना मैक्सिमम काम करते रहेंगे। तो आपका कहने का मतलब है कि इस फेज में स्पेशली वैसे तो हर फज़ में ही द बेस्ट लाइफस्टाइल इज द वन व्हिच इज द मोस्ट सिंपल लाइफस्टाइल। यस यस वै सिंपल। जितना नेचर से कनेक्टेड
(23:29) वही सिंपल टाइम पे खाना, टाइम पे सोना, उठना, रूटीन फॉलो करना, नेचर से कनेक्टेड रहना यही बेस्ट लाइफस्टाइल है। इसको जितना ज्यादा हम कॉम्प्लिकेट या मॉडर्नाइज करेंगे, उतना हम नेचर से दूर जाएंगे और खुद से दूर जाएंगे। जी। इतने सालों से कितना बड़ा आप ये शारदा आयेदा रन कर रहे हैं। तो आपके हॉस्पिटल में लोग किस तरह की सबसे कॉमन बीमारियां लेकर आते हैं? बेसिकली हमारी यूएसपी है जिसमें हम सिर्फ फाइव डिजीजेस, फाइव सेगमेंट्स जो हैं वो कवर करते हैं और सबसे ज्यादा हमारे पास जॉइंट पेन के केसेस आते हैं। वही पोस्ट डिलीवरी जो मैंने बताया
(24:05) आपको पोस्ट डिलीवरी में और देखिए ये सिंपल जॉइंट पेंस नहीं होती। अगर हम इसको प्रॉपर इग्नोर करते हैं ना जैसे वुमस की आदत है। अपने आप को वो ह्यूमन समझती ही नहीं है कि हम तो सबके लिए काम कर रहे हैं। हम अपने बारे में बाद में सोचेंगे। यही सबसे बड़ा कारण है। और दूसरे नंबर पे स्ट्रेस कारण है। जब कोई इंसान अपने आप को ऐसे फॉर ग्रांटेड दे देता है ना सबके लिए तो कई बार काफी लोग उसको ग्रांटेड ही समझ जाते हैं। तो वहां पे उसके इमोशंस हर्ट होते हैं। तो वुमस को सबसे ज्यादा जो प्रॉब्लम है ना आप किसी को भी देखो हमारी दादी को, मदर
(24:38) को, भाभी को, बहन को सबसे ज्यादा कुछ भी बात होगी ना अगर हम बात करना भी शुरू करें तो वो रो देंगे 2 मिनट में। तो आज के टाइम में किसी के पास समय नहीं है कि वह अपनी वाइफ के पास 10 मिनट बैठ उसको पूछे कि कैसे हो आप? कैसी चल रही है आपकी लाइफ? ये दो शब्द है ना वो उसका इमोशनल स्ट्रेस जो है वो कहां कितना दूर ले जाएंगे वो उनको अंदाजा नहीं है बट जो मेल है उनका सोचने का तरीका अलग है और वो इसको सोचते हैं क्या फॉर्मेलिटी करनी है ये फॉर्मेलिटी नहीं है ये एक केयर है और एक फीमेल को यही सबसे ज्यादा चाहिए कि उसके हस्बैंड 5 मिनट
(25:13) आके बैठ जाए बस कभी छ महीनों में एक बार चाय बना के दे दे कि आज मैं मेरी बारी है आज मैं हूं ना [हंसी] छ महीने बहुत लंबा टाइम बोलते हैं मतलब होना होना चाहिए फ्रीक्वेंटली बट नहीं है तो ऐसा एटलीस्ट करना चाहिए। देखिए आपके लिए कोई 24 घंटे खड़ा है। है ना? अपनी पूरी लाइफ डेडिकेट कर दी उन्होंने। आज भी जो वुमस है ना कहने को चाहे हम इस सेंचुरी में टाइम में चल रहे हैं। बट मैंने अपनी लाइफ में देखा कि इवन एजुकेटेड पढ़ी लिखी लड़कियां भी सेल्फ डिसीजन नहीं ले पाती। नहीं लेती हैं। वो कहीं ना कहीं से पीछे से उनको कोई ना कोई खींचे जा रहा है।
(25:48) आई थिंक अभी भी वो वुमेन को यह आदत है परमिशन लेने की। परमिशन लेने की। मुझे पूछना है। पहले पापा से पूछना है। फिर हस्बैंड से पूछना है। फिर बच्चों से पूछना है। सबसे पूछना है। सो हर वक्त लाइफ में किसी ना किसी से परमिशन लेके ही उन्होंने काम किया। एक्सक्ट्ली और उसको नॉर्मलाइज कर दिया गया है। नॉर्मलाइज है। वो चीजें नॉर्मलाइज हो गई है। तो अब पढ़ा लिखा इंसान भी हो ना। वो अपने करियर को, अपनी पढ़ाई को, एजुकेशन को वो सैक्रिफाइस कर देते हैं। क्योंकि देखिए जब एक बच्चा होगा ना तो जनरली 5 साल लेगा आपका एक बच्चा। ठीक है? आप एक बच्चे को
(26:19) जन्म देके ऐसे नहीं चले जाएंगे। तो एजुकेशन को भी हमने साइड पर रख दिया। अब एक इंसान ने सारा कुछ दे दिया आपको आपकी फैमिली को, बच्चों को। है ना? वो कांस्टेंट उसके दिमाग में थॉट तो चल रही है। एज शी इज़ अ ह्यूमन बीइंग। कहीं ना कहीं हमें लगता तो है ना कि ठीक है मेरे हस्बैंड ने थोड़ी ना सैक्रिफाइस किया। उन्होंने थोड़ी ना अपना काम छोड़ा है। मैंने छोड़ा है ना? क्यों? मैं भी तो अच्छा अर्न कर रही थी ना। यह जो इमोशनल स्ट्रेस है ना, यह इमोशनल स्ट्रेस बाद में एन एंग्जायटी, डिप्रेशन, इवन लोग साइकेट्रिक ड्रग्स लेने तक चले जाते हैं। क्योंकि आप उस चीज को
(26:50) कभी पूछते ही नहीं हो। आप उस आपने उस चीज को ग्रांटेड ही ले लिया कि नहीं यह इसका धर्म है करना। यह तो करते ही हैं। पीछे से करते ही आ रहे हैं। अब भी करोगे। नहीं वो देखिए समय के साथ हर चीज बदलती है। पहले पुराना समय कुछ और था। अब अब टाइम कुछ और है। अब अगर हम इक्वलिटी पे बात करें तो आप एटलीस्ट थैंक्स नहीं बोलना चाहते। उसको प्यार से उसका हाथ पकड़ के बैठ जाओ 10 मिनट कुछ मत बोलो। कुछ म्यूजिक लगा लो 10 मिनट के लिए टीवी देख लो। घर में आपकी वाइफ को स्ट्रेस नहीं है ना। तो मैं कहती हूं आप स्वर्ग में हो। जीते जागते स्वर्ग में हो क्योंकि घर खुश है ना [हंसी]
(27:24) तो आप कुछ भी कर सकते हो। फिर आपको कोई चीज किसी भी जैसे कमर्शियल उसमें रोक नहीं पाएगी कोई चीज। लेकिन घर में आपकी वाइफ दुखी है ना वो एक बहुत अंदर से नेगेटिव ओरा जनरेट होता है वहां पे एक नेगेटिविटी होती है क्योंकि ऐसे स्माइल दे रही है लेकिन अंदर से दुखी है तो एक वैलिडेशन थोड़ी सी वैलिडेशन और थोड़ा सा समय ज्यादा नहीं दिन में 5 मिनट 10 मिनट अगर ऐसा हो तो मुझे लगता है कि लाइफ बहुत ब्यूटीफुल हो जाएगी। फिर यह जो एक वॉर चलती है ना मेल की फीमेल की पीस ज़ोन में हम लोग चले जाएंगे। और जहां माता-पिता हस्बैंड वाइफ दोनों अच्छे रिलेशनशिप्स में है।
(28:00) डेफिनेटली आपके बच्चे आप आपको देख के सीखेंगे। उनकी आगे लाइफ पे भी बहुत इंपैक्ट पड़ेगा और वो भी इन चीजों में जो है वो आएंगे आगे। बिल्कुल बिल्कुल एक औरत तो वैसे ही अपने घर की एनर्जी होती है। अगर वो खुश है तो पूरा परिवार खुश है। अगर वो दुखी है तो फिर कोई खुश हो के दिखाए। नहीं ये सही बात है। [हंसी] राइट? तो मैं अपने सवाल पे वापस आती हूं कि आजकल वुमेन किस तरह की प्रॉब्लम्स लेकर आती हैं आपके पास? जी जॉइंट पेंस क्योंकि हम ज्यादातर इस पे काम करते हैं। गठिया है लेकिन गठिए का भी सबसे प्रोमिनेंटिंग कारण इमोशनल स्ट्रेस माना
(28:33) गया है। सोरायसिस है स्किन की बीमारियां लेके आते हैं तो उसमें भी कहीं ना कहीं स्ट्रेस बहुत बड़ी भूमिका निभाता है। जनरली बाकी बैक पेन बैक पेन को तो कोई फीमेल बीमारी समझते ही नहीं है। तो नॉर्मल है वो तो नॉर्मल है। उसके बाद हम अस्थमा पे बहुत अच्छा काम करते हैं। साइनस पे इनफर्टिलिटी पे और ज्यादातर वुमस को प्रॉब्लम आती है हार्मोनल इमंबैलेंस की। हार्मोनल इमंबैलेंस में पीसीओडी, इर्रेगुलर मेंुएशन, मेनोपज की प्रॉब्लम्स, पिगमेंटेशन, मूड स्विंग्स और इनफर्टिलिटी आप देखो आजकल बहुत लेवल पे हाई लेवल पे लोग आईवीएफ या ऐसे प्रोसीजर्स पे जा रहे
(29:09) हैं क्योंकि नेचुरली वो कंसीव नहीं कर पा रहे और इन सारी चीजों का कहीं ना कहीं कारण जो है वो लाइफ स्टाइल है। तो हमारे पास इस तरह के पेशेंट्स बहुत ज्यादा आते हैं। एंड वी डू हैव सच अ ग्रेट गुड रिजल्ट्स। मैं एक्चुअली ये जानना चाहती हूं कि यह जितनी भी आपने लिस्ट ऑफ प्रॉब्लम्स बताई है ना यह बहुत कॉमन है आज की डेट में और जब भी हम सोशल मीडिया चलाते हैं, टीवी ऑन करते हैं तो हमें ना सुबह शाम इन सब प्रॉब्लम्स के सॉलशंस बेचे जाते हैं। पर वो ज्यादातर सॉलशंस होते हैं क्विक फिक्सेस या टॉपिकल स्यूशन। ये खा लो, ये लगा लो, ये पी लो, ये कर लो। रूट
(29:44) कॉज की जो बात है वो कोई नहीं कर रहा। यस। कि हो क्यों रहा है? रूट कॉज को क्यों नहीं फिक्स किया जाए? प्रॉब्लम नहीं सॉल्व हो रही है। सिर्फ दब रही है प्रॉब्लम। इट्स लाइक बैंडेज लगा ली मगर घाव अंदर वैसा का वैसा ही है। वैसे ही है। कैसे आपको लगता है कि इस फील्ड में इन सब प्रॉब्लम्स के सॉलशंस में आयुर्वेद कैसे शाइन करता है? आयुर्वेद जो है वो रूट कॉज से काम करता है। एग्जांपल से मैं समझाती हूं कि हमारे पास गठिया का पेशेंट आ रहा है। तो अब पेशेंट यह कह के आ रहा है कि मुझे तो जोड़ों में दर्द हैं। लेकिन आयुर्वेद ये कहता है कि 80 टू 90% डिजीज
(30:16) दे स्टार्ट्स विद योर गट या आपके एब्डोमिन से स्टार्ट होती हैं। अब पेशेंट को चाहे हम जितना भी समझाएं कई बार पेशेंट उस लेवल पे फॉलो नहीं करता। लेकिन हमें पता है कि हमने लाइन ऑफ ट्रीटमेंट क्या देना है। तो जो पेशेंट हमारे पास इतनी अच्छी रेश्यो से ठीक होते हैं। है ना? तो हम रूट कॉज पे ही वर्क करते हैं। हम पहले सारे सिस्टम को क्लीन करते हैं। सिस्टम को क्लीन करने के बाद जो अग्नि जो मन बेसिकली होता है डाइजेस्टिव फायर स्लो होती है। हम उसको बर्न करते हैं ताकि जो भी आप खाओ वो प्रॉपर्ली जो है डाइजेस्ट हो। हां मेटाबॉलिज्म आपका सही हो डाइजेशन सही
(30:49) हो और जो टॉक्सिंस है वो कम से कम बने। इसके बाद जहां पे आपको दिक्कत आई है जॉइंट्स में जैसे मानो कि आपके अह हाथों में, कोहनियों में, जोड़ों में कहीं पे भी दिक्कत आई है, वहां कोई ना कोई धातु क्षय हुआ है। धातु मतलब कि आपकी बोनस जो हैं, वह कहीं ना कहीं खराब हुई हैं। आपके मसल्स खराब हुए हैं। बेयर एंड टियर बॉडी में पर्टिकुलर ऑर्गन में हुआ है और वो एक डिफिटी बन गई है। डिफिटी का मतलब जैसे मैं आपको समझाऊं कि गठिए में काफी केसेस ऐसे होते हैं जो जिनके हाथ पैर बिल्कुल मुड़ जाते हैं जो काम नहीं करते। तो इस जाती है जिसको हम धातु कह देते हैं।
(31:23) तो आयुर्वेद ऐसे काम करता है कि हमने सिस्टम को क्लीन किया। उसके बाद हमने डाइजेस्टिफायर को सही किया विद गुड लाइफ स्टाइल विद गुड चॉइस ऑफ फूड्स। वो सारा खाना क्या खाना है क्या पीना है लाइफस्टाइल करेक्शंस की उसके साथ विद मेडिकेशंस भी। क्योंकि देखिए जब ऐसी क्रॉनिक बीमारियां आपको किसी को भी हो जाती है ना तो वो सिंपल होम सॉलशंस के साथ ठीक नहीं होती हैं। उस टाइम पे आप कुछ भी अब मैं सिंपल कह दूं कि आप हल्दी पी लो अब मेथी खा लो क्योंकि आजकल के टाइम में गुंजन जी एक पेशेंट को एक बीमारी नहीं है। हो सकता है जो गठिए वाला पेशेंट हमारे पास
(31:57) आ रहा है ना ही मस्ट बी सफरिंग विद डायबिटीज। ही मस्ट बी सफरिंग विद हाइपरटेंशन ये और गैस्ट्राइटिस कॉन्स्टिपेशन और इन चीजों को तो नॉर्मल अब ये बीमारियां नहीं रही हैं। यह नॉर्मल है। नॉर्मल ये थोड़ा सा टैग है। लोग खुश भी हो जाते हैं। अच्छा मेरे को मेरे तो डायबिटीज की टेबलेट लेके आई हूं। कई बार वो नॉर्मलाइज करते हैं। जैसे बैक पेन को नॉर्मलाइज कर दिया ना वैसे यहां भी नॉर्मलाइज करते हैं। तो जब हम पेशेंट को कंसल्ट करते हैं ना एट दैट टाइम वी सी कि पेशेंट को क्या-क्या दिक्कत है। तो जब हमारे पास पेशेंट अगर गठिया का इलाज कराने
(32:28) आया ना तो धीरे-धीरे उसको पता भी नहीं चलेगा। उसकी तीन चार बीमारियां भी साथ में ठीक हो जाएंगी। तो ये चीजें आयुर्वेद ऐसे ही काम करता है। कलेक्टिव अप्रोच है बेसिकली। एक होलिस्टिक अप्रोच है जो शरीर के अंदर जितना भी टॉक्सिंस का एक्यूमुलेशन है कोई बीमारी बनी है तो वह धीरे-धीरे करके रूट कॉज से वहां से निकलती है और होम सॉलशंस के साथ क्रॉनिक वाली बीमारियां ठीक नहीं होती वो फिर बात वही आ जाएगी टेंपरेरी सॉल्यूशन पे और टेंपरेरी सॉल्यूशन देखिए आज मैं बोल के चली जाऊंगी ना यहां पे ऑन ईयर कि आप हल्दी ले लेना लेकिन किसी को अगर पित्त बड़ा होगा और
(33:01) उसने हल्दी ले ली तो उसको इचिंग हो जाएगी ठीक है अगर मैं आज बोल के चली जाऊंगी कि मेथी ले लो आपके बहुत अच्छा रिजल्ट डाउट देती है रिजल्ट विल एनालाइज हो सकता है पेशेंट को साथ मेंशन हो और पेशेंट को बहुत गर्मी हो जाए इफेक्ट हो जाए हां उसको [गला साफ़ करने की आवाज़] पाइल्स क्रिएट हो जाए मैं तो हमेशा सबको ये सलाह देती हूं कि पर्सनलाइज्ड अप्रोच बहुत जरूरी है। बहुत ज्यादा एक स्यूशन सबके लिए काम नहीं कर सकता। आपकी बॉडी के हिसाब से आपका स्यूशन होना चाहिए। जी अब सिंपल बात है कि लोग कहते हैं कि जिम करना चाहिए। मैं कहती हूं जिसको गठिया
(33:36) हो गया उसको नहीं करना चाहिए। हम लोग कहते हैं अग्रेसिव एक्सरसाइज करनी चाहिए। दैट्स गुड फॉर योर मसल्स। आपके मसल्स बिल्ड अप होंगे। कैसे बिल्ड अप होंगे? जब आप डिफिटी की स्टेज में हो। आपका और कहीं हाथ की उंगलियां टूट जाएंगी। कुछ हो जाएगा। आपको फीवर आ जाएगा। आप बेड रीडन हो सकते हो और गठिया तो ऐसे कॉम्प्लिकेटेड डिजीज है कि आप थोड़ा सा ऐसे पिन भी लगा दो ना तो पेन अनबेरेबल पेन होती है। तो इस तरह से बेसिकली सारे पेशेंट अब हमें नहीं ना पता कि एक पेशेंट के एक चीज के साथ उसको कितनी कॉम्प्लिकेशंस है। तो ये जो पर्सनल अप्रोच के लिए आप बात कर रहे
(34:08) हैं ना आप हमेशा देखिए कि आपका आपको राइट डॉक्टर आसपास में है तो आप वहां जाइए। जरूरी नहीं हमारे पास आना है। कहीं भी जाइए। यू हैव टू चूज़ अ राइट अप्रोच कि आपको कहां जाना है, किसके पास दिखाना है और जब भी जाएं पूरे फेथ के साथ जाएं चाहे आप एलोपैथिक में जाएं डेवलप कंप्लीट फेथ जो वो कहते हैं डॉक्टर फिर वो पूरा कीजिए। ये नहीं कि डॉक्टर ने कहा लेकिन Google कुछ और कह रहा है। Google को नहीं लेना देना आपकी हेल्थ के साथ कुछ ना। बिल्कुल बिल्कुल 100% एग्री विद यू। जो आपने ये एक्यूट प्रॉब्लम्स की बात की ना कि उस लेवल पे पहुंच के लोग आते हैं।
(34:41) अर्ली साइन क्या होंगे? अर्ली वार्निंग साइन जो आपने इतनी सारी प्रॉब्लम्स बताई कि आप कॉमनली देखते हो ताकि बहुत देर ना हो और ऐसा ना हो कि एक बीमारी 10 बीमारियों में कन्वर्ट हो चुकी है। सही कह रहे हैं आप। वो बहुत अच्छे अर्थशास्त्री थे उनका नाम चाणक्य। उन्होंने भी बहुत अच्छी कोट कही थी कि कभी भी आपको लगे ना कि कोई भी बीमारी ने जन्म ले लिया। उस बीमारी को तब के तभी ठीक कर दो। अगर आपकी लाइफ में कोई दुश्मन उस टाइम की बात है मतलब जब वह मे बी आक्रमण वगैरह होते थे कि आपको लगा तो दुश्मन को तभी मार दो उसको छोड़ो मत तो वो बीमारी के लिए
(35:14) बहुत अगर हम कोरिलेट करें तो अच्छी बात है। किसी भी बीमारी को मैं कहती हूं इग्नोर नहीं करना चाहिए। आपको जब स्टार्ट होती है उस टाइम पे अगर आप उसका उपचार कर देते हो ना तो वह जल्दी ठीक हो जाती है। नहीं तो आपको पता भी नहीं चलेगा कि आपकी लाइफ का बहुत प्राइम हिस्सा, पैसा, मेंटली पीस ऐसा सारा दवाइयों में डॉक्टरों के पास ही चला जाएगा। यह गठिया अब सिर्फ पोस्टेड डिलीवरी के बाद नहीं है। छोटे बच्चों में भी होता है। छोटे बच्चों में आपने देखा होगा कि चाइल्ड स्पेशलिस्ट की ओपीडी किस लेवल पे आजकल बहुत ज्यादा होती है। ऐसा कहीं भी चले जाओ। बहुत सारे बच्चे बीमार
(35:49) हैं। जोड़ों में दर्द है उनको बार-बार बुखार आता है। बुखार ठीक नहीं होता। तो ये सिम्टम छोटे बच्चों में ज्यादातर देखने को मिलता है। बड़े लोगों की मैं बात करूं तो जैसे 1820 साल की जो महिलाएं हैं या बच्चियां हैं उनमें भी ये चीज जॉइंट पेन, डिफिटी छोटे जोड़ों में ज्यादा दर्द रहती है। कई बार पैरों की उंगलियों से स्टार्ट हो जाते हैं। कई बार हाथों की उंगलियों से स्टार्ट हो जाते हैं। या फिर कांस्टेंट बुखार रहता है। लाइक थर्मामीटर में नहीं आएगा लेकिन आपको फील होगा इंटरनली। 99 फीवर इतना रहता ही रहता है बॉडी में। उठने का मन नहीं करेगा। थकावट रहेगी। लेथार्जी,
(36:22) पेंस, इनफ्लामेशन कहीं से भी दबाओ वहां दर्द होगा। ये अर्ली सिम्टम्स होते हैं। अगर इससे एडवांस सिम्टम्स की बात करें, कई बार जो है वो गठिए के अटैक भी आ जाते हैं। मतलब आज इंसान बिल्कुल हेल्दी सोया था। रात को उसको अटैक आया और यह ज्यादातर जो है फॉरेन कंट्रीज में ज्यादा देखने को मिलता है। वहां पे गठिए के अटैक बहुत ज्यादा आते हैं। फ्रीक्वेंट वे में आते हैं। उसका कारण है क्योंकि वो सारा ही वो फ्रीज्ड एंड प्रोसेस्ड फूड जो मतलब काफी वो वही खाते हैं ज्यादातर। तो उसमें कहीं ना कहीं हम जितने मर्जी टैग लगा लें। सात दिन तक खाना चलेगा। प्रिजर्वेटिव है या जो
(36:57) भी गवर्नमेंट के रूल्स को फॉलो करें लेकिन खाना दो या तीन घंटे बनने के बाद खराब होता है। वो डिक होना शुरू हो जाता है। तो वहां के साथ जो जर्म्स और पैरासाइट्स बैक्टीरियास डेवलप होते हैं ना वो हैवी क्वांटिटी में आपने ले लिया तो अब आपकी बॉडी की इम्यूनिटी तो है नहीं उससे उस लेवल की लड़ने लायक तो आपको गठिए के अटैक आ जाते हैं। रात को बिल्कुल इंसान अच्छे से सोया है लेकिन सुबह उससे उठा ही नहीं जा रहा। पूरी बॉडी फ्रीज़ होगी, स्टिफ होगी, फीवर आ गया। तो, ऐसा बाहर देखने को ज्यादा मिलता है। इंडिया में ज्यादातर गठिया जो है वह मेल में कम पाया जाता है,
(37:29) फीमेल्स में ज्यादा पाया जाता है। वही रूट कॉज जो पहले डिस्कस किया कि वो अपनी हेल्थ का प्रॉपर ध्यान नहीं रखते और इमोशनली डिस्टर्ब काफी होते हैं। तो जिन जो महिलाएं इमोशनली डिस्टर्बड है ना उनको भी जॉइंट पेंस बहुत जल्दी होती हैं। बॉडी अंदर ही अंदर स्प्रे कर रही है किसी चीज को। बेग होते हैं बेसिकली ना ये जिस तरह के इमोशंस है आपको हर इमोशन को एक्सप्रेस करना सीखिए। आपको कोई दिक्कत है आप शांत मत बैठिए। बहुत तूफान मचा दीजिए। [हंसी] बाद में समेट भी लीजिए। किसी को चैन से मत जीने दीजिए। [हंसी] नहीं तो सुनामी आ जाएगी। फिर अंदर की सुनामी से बाहर की सुनामी बेटर।
(38:07) [हंसी] तो यू शुड नो हाउ टू एक्सप्रेस योरसेल्फ इन अ डिसेंट वे। और हस्बैंड्स को भी या बच्चों को भी, बेटों को भी सबको या ब्रदर्स को भी अपनी प्रॉब्लम्स को शेयर करना सीखिए। बताना सीखिए क्या फील करते हैं आप? क्यों फील करते हैं? हो सकता है कोई सामने वाला अच्छा स्यूशन दे दे। बहुत बड़ी-बड़ी बातें भी है ना वॉर्स भी है। अभी पीछे चल रही है जैसे यूएस और ईरान की। ये टेबल पे सॉर्ट आउट हो जाती हैं। अच्छे तरीके से जब हम एक्सप्लेन करते हैं एक दूसरे को। तो हम नौबत ही ना आने दें। इमोशनल जो स्ट्रेस बिहेवियर डिसऑर्डर्स आ रहे हैं ना वहां तक पहुंचने की सप्रेस ना
(38:42) करें। स्ट्रेस ना करें। अब स्किन वाली बीमारियों पे अगर हम आए तो मैक्सिमम 80 90% लोग आपको पता है क्या उसका स्यूशन करते हैं। हम कुछ भी क्रीम जाएंगे लेंगे और उसको लगा लेंगे। एंड वी एक्सपेक्ट कि ये बीमारी ठीक हो जाए। तो वो ऊपर से हमने टॉपिंग्स कर दी लेकिन बीमारी तो अंदर से बनी है ना। बॉडी के बहुत सारे सिस्टम इनवॉल्व हो चुके हैं। उसमें आपका डाइजेशन, आपका लेबर, आपका लिंफेटिक सिस्टम, स्किन ये बहुत सारे सिस्टम इनवॉल्व हो के तब बहुत बड़ी बीमारी बनी। बॉडी का हर सेल जो उसमें यस। तो इस करके आप यह बिल्कुल भी मत सोचिए कि आपको
(39:20) एग्जिमा है, सोरायसिस है और कोई क्रीम, कोई सनस्क्रीन उसको ठीक करेगी, कभी भी नहीं करेगी। और इस चीज की मैं आपको गारंटी देती हूं। जरा सा एक टेंपरेरी सॉल्यूशन एक टेंपरेरी रिजल्ट दिखेगा। बट अगर रूट कॉज पे काम नहीं किया तो फिर वो वापस इट इज बाउंड टू कम अगेन। डेफिनेटली गुंजन जी लोगों की लाइफ खराब होते देखा है मैंने इस सोरायसिस में। मे बी आप नहीं अवेयर क्योंकि हम लोग तो देखते हैं डेली। इट्स लाइक स्किन कैंसर व्हिच स्प्रेडिंग मैं मेरे ख्याल से तीन दो-तीन साल पहले। मैंने एक छोटी बच्ची को पेरेंट्स लेके आए मेरे पास एंड शी वाज़
(39:55) सफरिंग वि सोरायसिस। तो उन्होंने मुझे दिखाया उसके कपड़े निकाल के उसके बैक उसके सारे हिप्स जेाइटल ऑर्गन्स ग्रोइंस वो सारे जो हैं वो मतलब बहुत मैं एक्सप्लेन नहीं कर सकती कि जैसे पूरी स्किन फट चुकी है। क्रैक्स आए हैं और रेडिश है। अब हमारा जो सिस्टम है कैसे काम करता है कि हमने डिटॉक्सिफिकेशन करनी है। डिटॉक्सिफिकेशन कैसे? जैसे कि विरेचन करेंगे, मोशंस आएंगे। फर्स्ट प्राइम कैटेगरी ऑफ़ डिटॉक्सिफिकेशन। तभी जो अंदर आंतों में जो सड़ा पड़ा कचरा है वो बाहर निकलेगा तभी पेशेंट ठीक होगा या स्वेटिंग या फिर वोमिट्स या एक्सेसिव यूरिनेशन ये तीन चार चीजें
(40:33) होंगी तो पेशेंट जल्दी ठीक होता है। लेकिन मैंने उनको बताया तो अब वो उन्होंने मुझे यह कहा कि हम तो जान के बच्चे को ऐसी दवाइयां दे रहे हैं जिससे बच्चा फ्रेश ही ना हो क्योंकि उसको फ्रेश होने में दिक्कत आती है। वो रोती है, चिल्लाती है, कट्स पड़ जाते हैं एनल एरिया में। वो स्टूल पास नहीं कर सकती। ओह माय गॉड। हां, इस लेवल पे चली जाती हैं स्किन डिजीजेस कि हम एक्सप्लेन नहीं कर सकते। अब आप यह सोचो एक छोटा बच्चा 9-10 साल का कैसे मतलब हेल्थ से निकल रहा है कि नहीं निकल रहा है। तो ये बहुत सारी डरावनी चीजें हैं। मतलब हमें कई बार ऐसे एक बहुत
(41:07) अच्छे पॉलिश्ड फॉर्म में वो चीजें देखने को नहीं मिलती। जब हम प्रैक्टिकल लाइफ में ऐसी चीजें देखते हैं ना तो पता चलता है। अब मेरी मजबूरी यह है कि बिना डिटॉक्सिफिकेशन किए हम कैसे ही ठीक करें। तो वो यह कह रहे हैं कुछ भी क्रीम दे दो यह छुप जाए। कुछ भी दे दो बच्चा ठीक हो जाए। बच्चा अब कैसे ठीक होगा? वहां एक डॉक्टर की भी लिमिटेशंस आ रही हैं कि कुछ ना कुछ करके तो कैसे ना कैसे करके उस बच्चे को ठीक करना है। तो मैं यही बताना चाह रही हूं कि लगाने लगने से कुछ नहीं ठीक होने वाला। और इस चीज को बिल्कुल लाइटली मत लो। क्योंकि अब आप यह देखो वो
(41:37) सिर्फ 9 10 साल की बच्ची है। डे बाय डे ग्रो हो रही है। आज शायद 13 14 साल की हो गई होगी। 15 16 साल में जब स्कूल में कॉलेज में बच्चे सारे जाते हैं। हर किसी की डिफरेंट एस्पिरेशंस है। आई शुड लुक ब्यूटीफुल। आई शुड लुक इन दैट शेप। मैं लोगों से मिलूं, बात करूं, मैं फ्लोरिश हूं। अब आप बताओ वो बच्चा जाएगा बात कर पाएगा? उसका तो कॉन्फिडेंस कॉन्फिडेंस वो एक दिन में 100 बार मर रही है अंदर से। कितने मैंने ऐसे पेशेंट देखे जो डिवोर्स लेते हैं। मेरे पास भटिंडा में प्रैक्टिस करते हुए मैंने एक लेडी आई मेरे पास। मेरे ख्याल से शी मस्ट बी 35 टू 45 इन बिटवीन।
(42:12) इस ऐज के बीच की थी। उसको सीवियर सोरायसिस पूरी बॉडी उसकी इनवॉल्व है सोरायसिस में। अब इलाज भी बेचारे करा ही रहे होंगे कहीं ना कहीं से हमारे पास आने से पहले। तो उन्होंने मुझे बताया कि इतने सालों से मुझे यह प्रॉब्लम है। एंड यू का कैन नॉट इमेजिन कि क्या हुआ उस लेडी के साथ सोशल स्ट्रक्चर में रहने के बाद उसको यह पता है कि उसके हस्बैंड का कहीं एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर हो गया। अच्छा लेकिन क्योंकि वो ठीक नहीं हो रही तो वो उसको मना भी नहीं कर सकती है। ना वो रेज कर सकती है क्वेश्चन ना वो उसको बात कर सकती है कि तुम ऐसा कर रहे हो तो क्यों कर
(42:43) रहे हो? क्योंकि हस्बैंड के पास आंसर है बिकॉज़ यू आर सफरिंग विथ सच टाइप ऑफ़ डिजीज दैट इन एनी वे आई एम नॉट एबल टु गेट इन रिलेशनशिप्स। तो आप यह देखिए मेंटल टॉर्चर कितना बड़ा है और इतना बड़ा मेंटल टॉर्चर है कि डेली लाइफ में मेंटल टॉर्चर है। 100 बार एक लेडी ऐसे सोचती होगी कि मैं नहीं ठीक हो रही ये हो रही हूं कि मैं मर जाऊं। अच्छा है कैसे क्यों मैं जीवित हूं। मतलब यह उस लेवल की सुसाइडल थॉट्स की तरफ हम लोग जाते हैं। और सीवियर डिप्रेशन और जब ऐसा डिप्रेशन होता है तो डॉक्टर्स ज्यादातर क्या देते हैं? नींद की दवाइयां सो जाओ। अब कितना सोए रहो? दिन में भी रात
(43:17) में भी तो सोने थोड़ी ना आया ना इंसान। और किसी को तो पहल करनी पड़ेगी ना इन चीजों के इन बीमारियों का स्यूशन किसी को तो देना पड़ेगा। हम यह कह देते हैं कि इनक्यूरेबल है। इनक्यूरेबल इसलिए हैं क्योंकि किसी ने ट्राई ही नहीं किया क्योंकि किसी को पैसे कमाने से फुर्सत नहीं है। क्योंकि क्योर हो गया तो पैसे थोड़ी ना बाद में पेशेंट आके दे। [हंसी] एंड हो जाएगा बीमारी का। वही वही बात है ना? ऐसा नहीं है। आजकल के टाइम में अगर एलन मस्क जो है वो मंगल में जाने की सोच रहे हैं या कुछ कर रहे हैं या ऐसा कुछ कर रहे हैं तो आपको क्या लगता है
(43:48) कि एक बीमारियां बहुत बड़ी बात है कि हम क्योर नहीं कर सकते? वी डू हैव गुड साइंटिस्ट वी डू हैव सर्टेन थिंग्स ऑफ लाइक अल्टरनेटिव अप्रोचेस हैं। इवन अगर हम एलोपैथी की भी बात करें तो अच्छे डॉक्टर अच्छे ट्रीटमेंट हमेशा अवेलेबल है। पर क्यों नहीं दे रहे? अगर नहीं भी है तो खोज क्यों नहीं कर रहे हम? लोग मर रहे हैं पता है इस दुनिया में। डेली मर रहे हैं। एक एक मरना होता है शरीर से प्राण निकल गए। वो मरना अलग है। एक मरना होता है कि आप रोज मर रहे हो लेकिन किसी को दिख नहीं रहा। यह बीमारियां ऐसी ऐसी हैं क्रॉनिक डीजी जिस पे हम ज्यादा काम करते हैं।
(44:19) एक्चुअली आप हर दिन देखते हो ना ऐसे हैं। हम लोग ऐसे देखते हैं। इसलिए आपको बहुत नजदीकी से ये सब चीजें एक्सक्ट्ली मुझे तो सारी चीजें तो कोई ना भी बताए तो भी अब तो एक्सपीरियंस इतना हो गया कि लोगों के फेस से देख के पता चल जाता है कि इसको दिक्कत क्या है। 18 20 साल की बच्ची थी। अस्थमा से मतलब पांच सात साल से उसको अस्थमा की प्रॉब्लम। इन्हेलर पे इन्हेलर मेड्रोल ये वो सो बड़ा कुछ लेते ही जा रहे थे और बच्चा ठीक नहीं हो रहा था और वेट गेन हो गया 30 किलो वजन बढ़ गया 30 किलो हां और सबसे बड़ी बात चलो वेट भी एक सेकेंडरी ऑप्शन है कि कई बार नहीं हम कंसीडर करते
(44:50) कि वेट बड़ा नहीं मिला 18 से शायद 22 साल के बीच-बीच की लड़की और उसके पेरेंट्स रेडी है कि उसकी शादी उन्होंने करनी है एंड यू कैन नॉट इमेजिन कि वो बच्ची जो है वो डायपर पहनती है। अच्छा अब वो डायपर क्यों पहनती है? क्योंकि वो मेडिसिन के साइड इंपैक्ट्स आ रहे हैं। वो ठीक नहीं हो रही है। तो देखो कहां कितना बड़ा कज़ है और ह्यूमन लाइफ कितनी कंप्रोमाइज्ड हो चुकी है। और वही बात इंटरनेट में स्यूशन बहुत सारे हैं जिसे पेशेंट या लोग ही पागल हो गए हैं कि उनको समझ ही नहीं आ रहा अब करना क्या है। [हंसी] ब्रेन फोगी बन गया ना। अब एक एक चीज का आप
(45:25) 100 स्यूशन दोगे तो कहीं ना कहीं ब्रेन तो अटक जाएगा ना कि क्या करूं यार? क्योंकि हर स्यूशन इमीडिएटली तो फर्क नहीं डालेगा। एक सशन अगर अप्लाई भी करेंगे तो मिनिमम थ्री मंथ्स तो लेगा ना और नेचुरल सशन तो अपना पूरा टाइम लेते हैं। लेते हैं। उसके लिए वो पेशेंस कंसिस्टेंसी चाहिए ही चाहिए। अगर आप ऐसी बीमारियों से ग्रसित हो आप नहीं सोच सकते कि अकेले दवाइयां ठीक करेंगे। उसमें बहुत सारे चैनल्स इनवॉल्व होते हैं। लाइक यू हैव टू करेक्ट योर लाइफस्ट। आयुर्वेद बहुत अच्छा एक्सप्लेन करता है। विरुद्ध आहार जैसे कि पुराने टाइम में भी या इवन स्क्रिप्चर्स कहते हैं
(45:57) कि दूध के साथ नमक वाली चीजें नहीं लेनी। कंटिन्यूटी में लोगे तो डेफिनेटली स्किन डिसऑर्डर बनेगा। मे बी 5 साल में छ साल में कभी भी बनेगा। दूध के साथ फिश नहीं आप ले सकते। दूध के साथ आप नॉनवेज नहीं ले सकते। घी और शहद एक साथ नहीं ले सकते। क्योंकि जब ये चीजें मिल जाती है ना तो ये पोइजन बन जाती है। रोंग कॉम्बिनेशन। यस यस। तो ये बहुत सारी चीजें हैं जो अगर आप सीखना भी चाहते हैं ना तो ऐसी चीजें सीखिए कि व्हाट इज रोंग कॉम्बिनेशंस? लाइक रादर कि आप नुस्खों पे जाएं। उससे पहले आप थोड़ा बेस रेडी करना सीखिए कि आप समझिए कि बात पित्त कफ क्या है? क्या प्रिकॉशंस
(46:34) लेनी है? लाइक छोटे बच्चों में कफ आया तो मुझे क्या करना है? सिंपल गाय का घी लीजिए। बच्चे की चेस्ट पे रब कीजिए। बैक पे रब कीजिए धीरे-धीरे और उसको थोड़ा वार्म एनवायरमेंट दीजिए। ठंडी चीजें खाने में बंद कर दीजिए। जैसे कि दही हो गया। मदर फीड दीजिए दूसरा मिल्क देने की बजाय। या कभी आपको दूसरा दूध देना ही पड़ता है। तो उसमें थोड़ा सा चुटकी अदरक मिला के दीजिए। सो दैट जो म्यूकस है ना डिॉल्व हो जाए। गर्मी देंगे तो ही जो पानी इकट्ठा हुआ है ना पिघलेगा। पिघल के निकलेगा। ठीक है? ऐसी स्किन डिजीज में बहुत ज्यादा आपको ऐसे जलन हो रही है या कुछ हो रहा है तो आप
(47:06) मूली खाइए, खीरा खाइए या फिर ऐसे थोड़ी सी ठंडी चीजें गूंद कतीरा या लाइफस्टाइल वैसा कर लीजिए। अवॉयड ऑल सॉर्ट ऑफ केमिकल्स लाइक कॉस्मेटिक्स, शैंपूस, मॉइस्चराइजर सिंपल। क्या कर सकते हैं? नारियल का तेल लगाइए। नहाने के लिए भी नहाने के बाद भी लगा लीजिए। अगर आपको नहीं समझ आता तो दिस इज द बेस्ट रेमेडी दैट यू कैन डू एट होम गुड ओल्ड देसी नुस्खे यस यस यस डेफिनेटली क्योंकि इन चीजों का कोई नुकसान नहीं है रादर आप थोड़ा और डीपली चले जाए कि मैं ये भी करूं मैं वो भी करूं इन चीजों से ये चीजें मच बेटर है क्योंकि कोई एडवर्स जो है आपकी बॉडी पे
(47:39) इंपैक्ट नहीं आने वाले सर्टेनली लेकिन फॉर दैट यू हैव टू बी एजुकेटेड बाय योरसेल्फ ओनली बेसिक चीजें आप सीख सकते हैं ऐसी ना आपने एजुकेशन और अवेयरनेस की बात करी हर लड़की की पहली टीचर उसकी मां होती है। यस। तो कौन सी वो चीजें हैं जो हर मदर को अपनी बेटी को पास ऑन जरूर करनी चाहिए ताकि वो इन सब लाइफस्टाइल रिलेटेड बीमारियों से जितना हो सके जब तक हो सके दूर रहे। अगर गुंजन जी मैं बात करूं तो एटलीस्ट तीन पॉइंट्स तो मैं जरूर आपको बताऊं इस चीज के बारे में। सबसे पहले मदर को चाहिए कि वो अपनी बेटी अपने बच्चों को स्पिरिचुअलिटी के साथ जो है वह जोड़ के रखें। अगर
(48:16) स्पिरिचुअलिटी मेडिटेशन वह उनकी लाइफ में ले आते हैं नंबर वन पॉइंट पे तो उसके साथ आपके बच्चे को आगे चलके लाइफ में स्ट्रेस एन एंग्जायटी साइकोलॉजिकल प्रॉब्लम्स होने के जो चांसेस हैं वो ना के बराबर हो जाते हैं। एक फेथ डेवलप होता है और हर इंसान को लगता है कि नहीं परमात्मा मेरी सुन रहा है। मेरी हेल्प कर रहा है अच्छे बुरे टाइम में। तो एक बहुत एक डिफरेंट ओरा बच्चे में जनरेट होती है। दूसरे नंबर पे बच्चे को हेल्दी रखने के लिए उसको हेल्थ के रिगार्डिंग जो है आपको हमेशा एजुकेट करना चाहिए। ज्यादा नहीं तो एटलीस्ट 50% जो आपका फ़ूड है दैट शुड बी प्रॉपर फुल ऑफ
(48:56) न्यूट्रिशंस और वह रॉ हो तो ज्यादा अच्छा है। रॉ में जैसे फ्रूट्स ऑल सॉर्ट ऑफ फ्रूट्स, वेजिटेबल्स, सैलेड, सीड्स ले सकते हैं, नट्स ले सकते हैं। इस तरह के एटलीस्ट 50 भी नहीं होता तो 30% तो बिल्कुल आप लेकर रखिए क्योंकि उसके साथ जो है आपकी बॉडी बच्चे को जो है उसकी हेल्थ हमेशा मेंटेन रहेगी। बेसिक न्यूट्रिशन बेसिक न्यूट्रिशन और हेल्थ एक सबसे बड़ी चीज है। अगर हम एस्ट्रोलॉजी आयुर्वेदिक पॉइंट से भी देखें तो सबसे पहला स्थान हेल्थ का ही आता है। क्योंकि अगर शरीर ठीक है तो आप दुनिया में हर चीज को एंजॉय कर सकते हो। पंजाबी में ना तन चंगा ते मन चंगा।
(49:32) मन चंगा। हां [हंसी] जी। काया जो है काय चिकित्सा सबसे पहले मानी गई है कि आपकी हेल्थ हमेशा जो है अच्छे लेवल पे होनी चाहिए। तीसरा पॉइंट अगर मैं बच्चे को देना चाहूंगी एज अ टिप तो हमेशा सच का साथ दें। सच बोलें और अगर आप सच बोलते हो तो आपका दिमाग 80% जो है वो फालतू की चीजों को कट डाउन कर देता है। आपको कुछ भी याद रखने की जरूरत नहीं रहती क्योंकि रिसेंटली आप देखते हैं कि हर जगह पे एक्सप्लइटेशन होती है। कॉर्पोरेट्स में आपको भी पता है आजकल कितना कुछ चलता रहता है। एक्सप्लइटेशन बहुत होती है। वो क्यों हो रही है? क्योंकि आपने अपने बच्चे को सच बोलना उस
(50:08) टाइम पे नहीं सिखाया और आज आपका बच्चा सच बोलने से डर रहा है। तो एक्सप्रेस करना एक्सप्रेस करना साथ देना। आपके साथ कुछ भी गलत होता है या कुछ भी है। आपको तभी अपनी आवाज उठानी है। यह बिल्कुल नहीं सोचना कि यह हो जाएगा, क्या होगा, नौकरी चली जाएगी। हजारों नौकरियां पड़ी है दुनिया में करने के लिए। हजार तरह के काम है। हजार तरह का हर चीज कर सकते हैं। हमें किसी भी चीज में कंप्रोमाइज नहीं करना चाहिए। और यह तब हो रहा है जब आपका बच्चे को सच बोलने से डराया या धमकाया गया है। क्यों डरना है? एक ही लाइफ है। देखिए सच बोल सच का साथ
(50:43) देंगे। मैं कहती हूं कोई नहीं डरा पाएगा आपको। और ये अपने फैमिली में इस चीज को इनवॉल्वमेंट में लेके आइए। अपने बच्चों को स्टार्टिंग से सिखाइए कि हमेशा सच बोलना है। क्योंकि बच्चा सच बोलेगा ना तो कुछ भी स्कूल में, फ्रेंड सर्कल में कुछ भी हुआ। सबसे पहले आपको पता चलेगा और आप देखिए कि वो एक वरदान बनेगा आपकी लाइफ में। तो मेरी तरफ से ये तीन टिप्स हैं। [हंसी] बहुत बहुत ही बढ़िया। मैं इसको ऐसे ही कंक्लूड करूंगी कि हर मदर को अपनी डॉटर को ये तीन चीजें सिखानी चाहिए। एस एच ई शी सबसे पहला एस फॉर स्पिरिचुअलिटी एच फॉर हेल्दी डाइट एंड ई टू एक्सप्रेस
(51:16) ऑनेस्टी। यस एक्सैक्टली एक्सक्टली। अगर आप 100% नेचुरल तरीके से अपने किसी भी तरह के हेल्थ गोल को पूरा करना चाहते हैं, चाहे [संगीत] वह वेट लॉस या वेट गेन हो या फिर डायबिटीज, पीसीओडी, थायराइड जैसी चीजों को मैनेज करना हो, तो उसके लिए आप हमारे प्रोग्राम आई एम वाओ का बेनिफिट ले सकते हैं। इस प्रोग्राम में आपको एक डेडिकेटेड सर्टिफाइड न्यूट्रिशनिस्ट असाइन होते हैं [संगीत] जो आपके लाइफस्टाइल, आपके चॉइसेस, आपके टेस्ट एंड प्रेफरेंसेस, आप कहां पे रहते हैं? आपकी जॉब क्या है? इन सब चीजों को कंसीडर करते हुए आपके लिए वीकली कस्टमाइज डाइट प्लान क्रिएट करते हैं। इसी
(51:54) के साथ आपको हमारी ऐप का एक्सक्लूसिव एक्सेस मिलता है जिसमें आपको बहुत सारी रेसिपी वीडियोस, वर्कआउट वीडियोस, योगा वीडियोस, मेडिटेशन और बहुत सारी ऐसी सर्विज कॉम्प्लीमेंट्री मिलती हैं। आई एम वाओ की यह कम्युनिटी, डाइटिशियन का सपोर्ट, वीकली कॉल्स, चैट असिस्टेंट इन सब चीजों की मदद से दुनिया भर से हजारों लोगों ने अपने हेल्थ गोल्स को इस प्रोग्राम के थ्रू इजीली अचीव किया है। अगर आप इसके बारे में और डिटेल्स जानना चाहते हैं तो डिस्क्रिप्शन में दिए गए लिंक पर विजिट कर सकते हैं। अब हम थोड़ा बात करते हैं एडल्ट्स वर्किंग वुमेन के
(52:26) बारे में। पहले के जमाने में वुमेन से सिर्फ एक्सपेक्ट करते थे कि वो घर का ध्यान रखें, खाना बनाएं, बच्चों को बियर करें। फिर उनको ब्रिंगिंग अप नर्चर करें, सब कुछ करें। अब आज जब वो वर्किंग वुमेन बन गई है तो रिससिबिलिटीज डबल हो गई है। क्योंकि जॉब में भी उनके लिए भी वही रोल्स हैं, वही केपीआई हैं, वही रूल्स हैं जो एक मेल काउंटर पार्ट के लिए हैं। दोनों पोजीशंस को जस्टिफाई करना बहुत डिफिकल्ट हो जाता है। और मुझे लगता है कहीं ना कहीं ये चीजें भी रूट कॉज बनती हैं। वो हार्मोनल फ्लक्चुएशनंस का बहुत सारी प्रॉब्लम्स का घर बनती हैं ये। तो इस बैलेंस को या इस
(53:05) मिसमैच को आप कैसे सजेस्ट करते हो कि एक वुमेन किस तरह से बैलेंस कर सकती है अपनी पर्सनल और प्रोफेशनल लाइफ। ऐसी स्थिति में मेडिटेशन आपके लिए बहुत बड़ा वरदान साबित होगी क्योंकि बहुत सारी अनसुलझी चीजों का इंसानों के पास भी जवाब नहीं होता और जब आपका मन जो है पूरी तरह से शांत हो जाता है तो हर चीज जो है ऑटोमेटिकली डिॉल्व होना भी शुरू हो जाती है। लेकिन सबसे पहले तो हैट्स ऑफ टू ऑल वुमस जो ऐसा कर रही हैं क्योंकि ऐसा करना सबके बस की बात नहीं होती है कि आप घर भी चलाएं, बच्चे भी देखें, बुजुर्गों को भी देखें, घर में गैस खत्म होगी, यह बिल देना है, वह करना है।
(53:40) सब देखें और साथ में आप इक्वल गुड परफॉर्मेंस दें अपने प्राइवेट या गवर्नमेंट या प्रोफेशनल आप उस सेगमेंट में या तो आप बहुत अच्छे लेवल पे अर्निंग कर रहे हो देन आई विल सजेस्ट कि आप अच्छी हाउस हेल्प का सहारा लें घर पे बहुत ही बढ़िया सजेशन [हंसी] फिर उसमें यह नहीं सोचे कि मैं क्यों ही ऐसे रखूं कोई और कह देगा ऐसे नहीं नहीं क्योंकि आपको अपने आप को हेल्दी रखना है स्ट्रेस फ्री रखना है एंड ए्जायटी के साथ नहीं रहना है और देखिए एक ही लाइफ मिली है आप हम सब दुनिया दुनिया में लिमिटेड टाइम पीरियड के लिए हैं। 50 साल, 10 साल, 50
(54:13) साल, 60 70 साल इतना ही समय है हमारे पास। इतना समय रो धो के नहीं निकालना चाहिए। खुश रह के निकालना चाहिए। अफोर्ड कर सकते हैं तो गुड हाउस हेल्प अफोर्ड कीजिए ताकि आप अपने स्ट्रेस ज़ोन से बाहर निकल जाए और प्रोफेशनलली भी अच्छा कुछ कर पाएं। और दूसरा लाइफ को बहुत सिंपल रखिए। जितना सिंपल रखेंगे ना अब आप देखिए कि जो Facebook के ओनर हैं मार्क जुकरबर्ग कितना सिंपल उन्होंने अपनी लाइफ को रखा है। सेम कलर के साथ यस वही है। तो डिस्ट्रैक्शंस हटा दी उन्होंने अपनी लाइफ से। अब मैं सुनील छत्री जी के बारे में बात करूं जो इंडिया के बहुत अच्छे फुटबॉल
(54:52) प्लेयर रहे हैं। तो अगर हम उनकी बायो को स्टडी करें तो वो यही कहते हैं कि मैं कितने सालों से सिंपल खाना खा रहा हूं। बस टाइम फिक्स है सुबह दोपहर शाम जो भी है बहुत मतलब तो मेरा बोलने का मतलब है कि चीजें चीजों को बहुत ज्यादा सिंपल रखिए जितना आप रख सकते हैं। आपने मार्क ज़गरबर्ग की बात करी। आपको पता है कि मार्क ज़गरबर्ग ने अपने ही बच्चों को एक ऑर्डिनरी फोन लेके दिया हुआ है। हिज किड्स आर नॉट अलाउड टू यूज़ सोशल मीडिया। द ओनर ऑफ़ बिगेस्ट सोशल मीडिया। [हंसी] बिकॉज़ उनको पता है कि इसके कॉम्प्लिकेशंस क्या है। उनको वो तो बना रहे हैं ना। आपको पता है
(55:26) कि इसके पीछे की साइकोलॉजी क्या है? लेकिन अब उस चीज के लिए वही मैंने आपको बताया पहले कि सबसे पहले आपको अपने आप को एजुकेट करना पड़ेगा। यू हैव टू बी वाइस। आप वाइस होंगे तो ही आप आगे वाइस जनरेशन क्रिएट करेंगे। अगर आप ऐसे पढ़े लिखे लोग होके ऐसे डिसीजंस पे चले जाएंगे। देखिए हां तो वो कहीं ना कहीं हिट बैकक आप ही को लगनी है। आपकी फैमिली को ही हिट बैकक लगनी है कि हम बीमार हो जाएंगे। क्रीम लगा लेंगे। बीमारी फिर बढ़ेगी। फिर इधर जाएंगे फिर उधर जाएंगे। आपकी लाइफ का प्राइम टाइम, पैसा, टाइम, एनर्जी, हेल्थ ऐसी चीजें कंप्रोमाइज्ड हो रही है और लोग बहुत
(56:03) बड़ी रैट रेस भी फॉलो करते हैं। जैसे देख लेते हैं इधर पड़ोसियों के पास ये गाड़ी आ गई, इधर ये आ गई। ये देखिए कंटेंटमेंट लाइफ में होना बहुत जरूरी है। आर्मी में एक बहुत अच्छी कहावत है। मैं जरूर आपको बताना चाहूंगी। जो प्राप्त है वही पर्याप्त है [हंसी] कि जो आपको ईश्वर ने दिया एटलीस्ट यू शुड बी ग्रेटफुल फॉर दैट कि जो मिला है बहुत अच्छा है। अब हम जरूर और एफर्ट्स करेंगे कि हमें और चाहिए लेकिन उसके पीछे पागल नहीं हो जाना है। काम बहुत जरूरी है क्योंकि आफ्टर ऑल हम एक ह्यूमन बीइंग हैं। कहीं ना कहीं हमें लगता है कि हमें भी एक
(56:37) नेम फेम अर्न करना है और हम क्यों नहीं अर्न कर सकते? ये क्वेश्चन हर फीमेल को आता है। ये आता है इसके कारण ही उनको एक फ्रीडम चाहिए था। तभी वो इस सेक्टर में आए। फीमेल्स की प्रॉपर वैल्यू्यूएशन या वैलिडेशन हुई होती ना तो उनको आने की जरूरत ही नहीं थी। उनको बहुत सारे फाइनेंससेस से रोका गया। जैसे अगर रूरल की बात करें अभी भी बहुत दिक्कत है। लोगों लोग अपने बहुओं को या अपनी वाइफ्स को पैसे नहीं देते या फिर वो सिर्फ काम करती हैं। दे आर नॉट गेटिंग इवन कुछ-कछ जगह तो ₹5000 भी नहीं देते। हम तो कहीं ना कहीं वो एक हिट बैक है ना
(57:13) दिमाग में। यह जो औरतें काम करती हैं अपना घर का पूरा बच्चों का फैमिली का देखती हैं। दिस इज नथिंग बट अनपेड एंप्लॉयमेंट। या एक्सैक्टली पूरा दिन काम कर रही हैं। सातों दिन काम कर रही हैं। बिना छुट्टी बिना आराम के काम कर रही हैं। और कोई उसके लिए उनको सैलरी तो छोड़ो। अप्रिसिएशन या एकनॉलेजमेंट भी नहीं है। वही तो मैंने बोला कि ऑटोइ्यून डिजीज की जो रूट कॉज है ना तो वो सबकॉन्शियसली यही निकलती है कि वो इतनी स्ट्रेस्ड हैं, दुखी हैं मतलब ऑलमोस्ट इन नेगेटिव ओरा में नेगेटिव ज़ोन में। अब एक इंसान हमेशा नेगेटिव सारा दिन रात सोचेगा तो कितना
(57:46) इंपैक्ट पड़ेगा। उसकी हेल्थ पे, फिर फैमिली पे, फिर बच्चों पे। आपने जो बीच में बात कही थी ना, मैं उसको क्योंकि वो मुझे इतनी ज्यादा पसंद आई। मैं उसको एक बार डबल एम्फेसिस देना चाहूंगी। आपने कहा था कि आउटसोर्स करें, हेल्प्स रखें। अगर आप तो मैं अभी रिसेंटली एक लेडी से मिली थी। वो एक अच्छे घर से हैव गुड हाउस वेरी गुड लग्जरी कार और अच्छा खासा उनका फैमिली बिजनेस है और वो खुद भी वर्किंग है। तो ऐसे ही मैं पहली बार मिली हमने पूछा एक दूसरे से क्या करते हो आप? लाइफस्टाइल रूटीन डिस्कशन हो रही थी। वी वर गेटिंग टू नो ईच अदर। तो उसने मुझे बताया कि वो
(58:23) अर्ली मॉर्निंग ऑफिस जाती है और जाने से पहले वो उठ के पूरे फैमिली का खाना बनाती है। उसके बाद जब शाम को वो वापस आती है तो फिर पूरे फैमिली का डिनर बनाती है और फिर वो इस तरह से तो मैंने बोला यू बिलोंग टू सच अ गुड फैमिली एंड यू हैव एवरीथिंग गॉड हैज़ गिवेन यू एवरीथिंग देन एक कुक क्यों नहीं मतलब मेरे अंदर से जनरल एक क्यूरियसिटी हुई कि इतना अपने आपको क्यों आप टॉर्चर कर रहे हो आई मीन एक तो है कि चलो नहीं कर सकते अफोर्ड तो समझ में आता है बट आप तो बहुत आसानी से अफोर्ड करते हो तो आप एक कुक या फिर एक पार्ट टाइम कुक या फिर एक हेल्पर ही रख लीजिए तो उसने मुझे
(58:57) बोला कि नहीं मेरे इन लॉस को पसंद नहीं है। खाना जो है वो किसी और से नहीं बनवाना। खाना घर में खुद हमें ही बनाना है तो मैं ही बनाती हूं। और मुझे ये चीज बिल्कुल समझ नहीं आई। लिटरली मतलब मेरे सिर के ऊपर से गई कि खाना किसी और से क्यों नहीं बनवाना है। ये वो उनके थोड़े से ऑर्थोडॉक्स थिंकिंग होगी या जो भी उनके बिलीव्स होंगे। बट अगर हम प्रेजेंट में जी रहे हैं, अगर हम चाहते हैं कि हमारी डॉटर इन लॉ जॉब करे, अर्न करे और सब कुछ देखे तो फिर हम यह भी नहीं चाह सकते कि हम अपने अभी पुराने बिलीफ्स को भी फॉलो करें। कुछ ना कुछ कहीं ना कहीं तो आपको बदलना
(59:33) होगा। तो ये चीज मतलब थैंक यू फॉर सेइंग दैट एव्री इंडिविजुअल इवन एक वुमेन एक ह्यूमन बीइंग है और उसको भी अपनी शांति अपने लिए टाइम, अपनी बॉडी के लिए टाइम चाहिए। तो अगर हम सब चीजें संभाल रहे हैं तो जितना हो सके उतना आउटसोर्स करें और इससे हमारी इकॉनमी भी चलती रहेगी। हम किसी को देंगे वो किसी और को देगा उनके भी घर चलेंगे। सो इट्स वेरीेंट दिस इज अ लाउड एंड क्लियर मैसेज टू ऑल दोज़ फैमिली टू ऑल दोज़ इनलॉज़ टू ऑल दोज़ वुमेन प्लीज टेक अ स्टैंड फॉर योरसेल्फ। दे हैव टू दे हैव टू। क्योंकि आज अगर एक मदर सप्रेस कर गई ना ऐसा पूरा फाइनेंसियल
(1:00:11) फ्रीडम होने के बावजूद भी। आप बिलीव कीजिए आपकी डॉटर भी करेगी क्योंकि उसने आपको सफर होते हुए देख लिया। वह कहीं ना कहीं उसके सबकॉन्शियस माइंड में वह चीज़ घर कर गई कि नहीं फैमिली फर्स्ट है चाहे जितना मर्जी पैसा प्रॉपर्टी कुछ भी है। समय की एक बहुत अच्छी खूबसूरती है कि वो बदलता है और वो उसके साथ-साथ हम सबको बदलना चाहिए। ट्रू। सबसे पहले तो इसमें हस्बैंड की रिस्पांसिबिलिटी है। देखो आप एक लड़की को मैरी करके अपने घर में लेके आए। मेड नहीं है ना मतलब शी इज नॉट मेड फॉर दिस पर्पस अगर हम अपने स्क्रिप्चर्स की बात करें तो उस टाइम पे भी बहुत मतलब अगर हम जैसे माता
(1:00:49) लक्ष्मी की बात करें तो उनको पूजा जाता है माता दुर्गा को पूजा जाता है तो हम ये एक्सपेक्ट थोड़ी ना करते हैं कि माता दुर्गा यह भी करें ठीक है जब जहां जरूरत होगी वहां कर ही लेंगी वो उन्होंने भी डिनिटीज ने भी अपनी रिस्पांसिबिलिटीज को डिवाइड किया हुआ है कि लक्ष्मी मैं करूंगी सरस्वती मैं करूंगी लेकिन ये मेरे ख्याल से कई बार जो जो है वो पेरेंट्स या बुजुर्ग लोग नहीं समझते। बट एट दैट टाइम हस्बैंड हैज़ टू टेक स्टैंड विद योर वाइफ। क्योंकि अगर आपने नहीं लिया ना तो यह सेम चीज होते आप अपनी बेटी के साथ देखोगे और तब आप बैठ के रोओगे अपने घर
(1:01:22) में। रादर आपके पास करोड़ों रुपए होंगे लेकिन आप उस टाइम पे कुछ कर नहीं पाओगे। इस चीज के लिए ओशो बहुत अच्छा बोलते हैं। अब यह सोशल बैकग्राउंड्स इस तरह की हैं कि उसमें सिखाया ही गया है कि एक फीमेल को मतलब इन चीजों में डाल दो ताकि वो अपना जो एक्चुअली उनका जो अस्तित्व है उसको वो पहचान ही ना पाए क्योंकि जिस दिन पहचान गई आप लोग रिस्क में आ जाओगे। ये ये रीज़न है। ये ये रीज़ है। अभी भी है। सारी जगह पे है। तो लेकिन अच्छा करने की शुरुआत हमें खुद से करनी पड़ेगी। अंडरस्टैंड योर वर्थ यस यू हैव टू गुंजन जी हर किसी को फ्रीडम चाहिए किसको नहीं चाहिए
(1:01:58) हम फ्रीडम ऑफ टाइम चाहिए फ्रीडम ऑफ मनी चाहिए फ्रीडम ऑफ कुछ भी पहनने की आजादी चाहिए एक डिसेंट वे में आई एम टॉकिंग अबाउट ऐसा कुछ न्यूसेंस नहीं बट जो भी है एक फ्रीडम एक चॉइस तो हर किसी इंसान की होती है और वो चॉइस को हम दबा रहे हैं जानबूझ के अपना ट्रेडिशन का नाम देके ये नहीं कुछ भी कीजिए इच्छा से करना चाहिए फ्रीडम आपके बेटे को है तो आपकी बेटी और बहू को भी इक्वली नहीं मिलनी चाहिए। आपका मानना है कि एक लड़की का एंबिशन और उसकी जो फेमिनिन हेल्थ या रोल है ये दोनों चीजें को एक्जिस्ट कर सकती हैं। यस यस कर सकती हैं। डू यू बिलीव इन दिस?
(1:02:35) यस यस डेफिनेटली। बिकॉज़ यू आर एन एग्जांपल ऑफ़ दैट। आई एम एन एग्जांपल ऑफ़ दैट। शी इज़ एन एग्जांपल ऑफ़ दैट। मोस्ट ऑफ़ देम आर एन एग्जांपल ऑफ़ दैट। यस। वुमन की क्वालिटी है। उसमें बहुत सारी ऐसे गुण हैं जो इवन मेल में नहीं है। मतलब आप में तो परमात्मा ने वह शक्ति दी है कि आप सृजन कर सकते हैं। है ना? नई सृष्टि बना सकते हैं। तो आप को क्यों लगता है कि आप कमजोर हैं। मुझे लगता है कि आपसे शक्तिशाली ही कोई नहीं है। [हंसी] अब ये सिर्फ परसेप्शन है थॉट्स की। मैं हमेशा एक वूमन को देखती हूं कि वो दुनिया में सबसे सर्वशक्तिशाली है। आप देखते हो कि मैं
(1:03:09) कमजोर हूं, मैं अवला हूं। क्यों है? किसने सिखाया आपको? रानी झांसी हमारी जो थी वो क्या कमजोर थी जिन्होंने एजुकेशन के लिए फाइट की अहल्या बाई क्या वो कमजोर थी किस एंगल से आपको लगता है क्यों ऐसे इन चीजों में बिल्कुल बिलीव मत कीजिए इंडियन वुमस क्रिकेट टीम को ही देख लो जी बिल्कुल एग्जैक्टली हमारी राष्ट्रपति आप देखिए कहां से वो आई अगर उनकी जर्नी हम देखें तो वो कहां से आई हैं आप में बहुत कैपेबिलिटीज हैं। जरूरी नहीं होता कि हर किसी को बाहर जाके काम करना है। आप जो भी कीजिए बेस्ट कीजिए और अपने साथ कंप्रोमाइज मत कीजिए। गुड टर्म्स में अच्छी तरीके से।
(1:03:43) फैमिली भी आपकी है और फैमिली को भी समझना चाहिए कि आपके बिना वो भी अधूरे हैं ना। इट्स बेसिकली 50-50 कोपरेशंस। यस। मुझे लगता है यहां पर एक बहुत बड़ा रोल आता है कि उसका जो पूरा दिन है वो किस तरह से बीतता है। मतलब एक ही दिन में इतना सारा कुछ बैलेंस करना। उसके बाद अपनी हेल्थ का भी ध्यान रखना, अपनी नींद भी पूरी लेना। ये सब चीजें भी छोटी-छोटी एक इंपॉर्टेंट रोल प्ले करती हैं माइंड, बॉडी, सोल के लिए। तो क्योंकि आप एक आयुर्वेदिक एक्सपर्ट हैं तो आप हमें बताइए कि हम आयेदा में दिनचर्या को बहुतेंस देते हैं। तो वो कौन सी ऐसी डेली हैबिट्स या डेली
(1:04:19) रिचुअल्स है जिनका आरओआई सबसे ज्यादा है। मैं आरओआई वर्ड इसलिए यूज कर रही हूं क्योंकि मैं एक आइडियल दिनचर्या नहीं बोल रही। मैं एक वो दिनचर्या बोल रही हूं जो कि प्रैक्टिकल भी हो। आइडियल तो यही है कि सूरज निकलने से पहले आप उठ जाए। बट ड्यू टू एनी रीज़ नहीं उठ सकते हैं तो मे बी जरूरी नहीं होता। कई बार कोई लोग 6:00 बजे 7:00 बजे भी उठने हैं। आप अपना कंफर्ट देखिए। सबसे पहले जोेंस आप दीजिए अपनी बॉडी को दीजिए। देखिए बीमार पड़ेंगे तो कोई चीज काम नहीं आने वाली। ना पति ना बच्चे ना साससुर कोई नहीं आने वाला। और यह लिटरली ऐसा ही होता है। तो हेल्थ प्राइम
(1:04:55) चीज है। और उसको सिंपल जितना सिंपल हो सके उतना सिंपल रखिए। ऐसा कुछ नहीं है कि ब्रेकफास्ट करना ही करना है। ऐसा कुछ नहीं है कि रात को यह खाना ही खाना है। ऐसा भी कुछ नहीं है कि इतने घंटे सोना ही सोना है। ये सारे मिथ हैं। जानवरों को कौन बताता है कब खाना है, कब पीना है, कब सोना है। है ना? वो सिंपल नेचर फॉलो करते जो उन्हें जिस चीज की रिक्वायरमेंट होती है तब वो कर लेते हैं। आप जितना सिंपल होते जाएंगे ना आप देखेंगे उतनी क्लेरिटी लाइफ में आती जाएगी। आपको नींद आ रही है सो जाइए। आपको लग रहा है कि आप एक्टिव है उठ जाइए। आपको भूख लगी है, आप खा लीजिए। आपको
(1:05:25) प्यास लगी है, आप पानी पी लीजिए। दैट्स इट। यही तो लाइफ है। यही नेचर है। अब सूरज के साथ हम लोग क्यों कोरिलेट करते हैं? क्योंकि जब सूरज निकलता है तो बॉडी का जो ब्लड सर्कुलेशन है बहुत अच्छे लेवल पे एनहांस हो जाता है। बॉडी बहुत एक्टिव हो जाती है और पुराने जमाने में सूरज को पानी देते थे। मैं अपने बचपन में जब पानी लेने जाती थी तो मैंने डेली सूरज को पानी देती थी। उसका यह कि फिल्टर होके जो रेज आइज पे आती है उससे आपकी आई साइड बहुत अच्छी जो है विज़ आपकी एनहांस होती है। आप स्ट्रेस फ्री होते हैं। एंग्जायटी फ्री होते हैं।
(1:05:57) ब्रेन केमिकल रिलीज करता है जिससे कि बॉडी जो है एक बहुत अच्छे उसमें रहती है और एक्टिव हो जाते हैं। आप काम के लिए तैयार हो जाते हैं। देखिए कुछ पाना है तो कुछ करना पड़ेगा। कुछ खोना पड़ेगा ना। मतलब बैड चीजें खोनी पड़ेंगी और लाइफ को जितना सिंपल रखें उतना अच्छा है मेरे हिसाब से। राइट राइट बिल्कुल बिल्कुल जी। सो सिंपल रखना है। वही जो हमने डिस्कस भी किया था। द बेस्ट लाइफ स्टाइल इज द मोस्ट सिंपल लाइफस्टाइल। एंड द वन दैट यू कैन फॉलोली जिसे आप फॉलो कर सकें। तो ये बड़ा आपने अच्छा बोला। मैं एक आयुर्वेदिक डॉक्टर से ये एक्सपेक्ट नहीं कर रही थी। वो बोलेंगे
(1:06:29) कि जब भूख है खाओ नहीं है तो छोड़ो यार। सो ये मुझे लगता है आजकल के एरा में ये सबसे प्रैक्टिकल एडवाइस है। बिल्कुल। अभी ऐसा नहीं है कि ब्रेकफास्ट इज वेरीेंट। यार अगर आपका लाइफ स्टाइल ही ऐसा है, आपकी जॉब की डिमांड ही ऐसी है कि आपको लेट से आपकी शिफ्ट्स है, आप लेट सोते हैं, लेट उठ रहे हैं तो आप उठ के जबरदस्ती थोड़ी ना खाना खाएंगे। सो ये बैलेंस बनाना और प्रैक्टिकल रहना और जितना हो सके सिंपल एंड नेचर के साथ कनेक्टेड रहना इज दी आइडियल दिनचर्या। थैंक यू फॉर मॉडर्नाइजिंग इट। [हंसी] डॉक्टर जो वर्किंग वुमेन है ना उनके कुछ
(1:07:03) और कॉमन इशूज़ हैं। जैसे कि हम देखते हैं कि आईटी सेक्टर में क्योंकि पूरा दिन सिंग जॉब रहती है तो बैक पेन तो हर किसी को ही है। मैं आई विल नॉट इवन से हर सेकंड वुमेन एव्री वुमेन अप्पर बैक, लोअर बैक, मिडिल बैक कहीं ना कहीं तो बैक पेन है ही है। इसके अलावा हॉर्मोनल इमंबैलेंस भी इनमें सबसे ज्यादा कॉमन है। बिकॉज़ इरेक्टिक स्केेड्यूल होता है। खाने पीने का टाइम नहीं होता। जॉब रिस्पांसिबिलिटीज बहुत होती है, स्ट्रेस होता है। रिपोर्टिंग्स हैं, डेडलाइंस हैं, प्रेजेंटेशंस हैं। तो दैट्स अगेन अ प्रॉब्लम। तो यह जो सारी कॉमन प्रॉब्लम्स
(1:07:37) हैं जो स्पेशली एक वर्किंग वुमेन जो ऑन टोस ऑन फील्ड ऑन ग्राउंड बाहर घर सब बैलेंस कर रही है बहुत कॉमनली ये फेस करती हैं। फ्रॉम एन आयुर्वेदिक पॉइंट ऑफ व्यू व्हाट डू यू थिंक कैन बी अ सॉल्यूशन फॉर ऑल दीज प्रॉब्लम्स। मैक्सिमम जो फीमेल्स है ना बैक पेन को तो वो बीमारी समझती ही नहीं है। ये सबसे बड़ी बीमारी है। सबसे बड़ी प्रॉब्लम है ये कि हम इसको समझते ही नहीं। और इवन अगर मेल भी नहीं समझते। अगर इनिशियल स्टेज पर हम देखें जो एडल्ट्स हैं जैसे आप आईटी या कॉर्पोरेट की बात करें फॉर द होल डे दे हैव टू सीट कई बार रात को भी बैठना है कितने लगातार ऑन
(1:08:10) कंटिन्यूटी बेसिस तो इस चीज को वो इग्नोर करे जाते हैं ये जब ज्यादा हो जाती है देन दे यूज्ड टू गो फॉर लाइक पेन किलर्स अभी ले ली इट्स ओके नाउ क्विक फिक्सेस एंड फिर कल होगी तो कल फिर ले लेंगे ऐसे कितना टाइम वो ऐसे ही सरपासेस में निकाल देते हैं और फाइनली जब वो लास्ट में फिर बहुत ज्यादा अनबरेबल हो जाती है एट दैट टाइम दे गो एंड मीट विद डॉक्टर। तो डॉक्टर भी उसमें पेन किलर थोड़ा देके दो दोती महीने देखते हैं। जब उनको लगता है कि पेन किलर से सबसाइड नहीं हो रही। देन अल्टीमेट स्यूशन दे सजेस्ट गो फॉर सर्जरी। लेकिन मैं स्पाइन की सर्जरी के हक में बहुत
(1:08:45) ज्यादा नहीं रहती। क्योंकि देखिए जब भी हम सर्जरी की बात करते हैं है ना एट दैट टाइम वी हैव टू एनालाइज द पेशेंट फर्स्ट। कि हमें देखना है कि उसकी एज क्राइटेरिया क्या है? क्या वह बुजुर्ग हो गए हैं कि उनकी लाइफ काफी जीवन का हिस्सा जी चुके हैं तो अब हम उस चीज को कर सकते हैं। अगर हम यह सोच रहे हैं कि हम 30 या 40 इयर्स के मेल या फीमेल की सर्जरी करें इवन सर्जन नोस बेटर कि उसमें कॉम्प्लिकेशंस क्या है? देखिए आप इंडिया को किसी भी पॉइंट में यूएस के साथ कंपटीशन में नहीं ले सकते। यू कैन नॉट से कि सर्जरी के रेट्स 95% गुड है। होंगे गुड बट नॉट इन इंडिया बाहर हैं।
(1:09:23) और इंडिया में जो है ना अच्छे सक्सेस जो रेट्स हैं वो वाली सर्जरी हम अफोर्ड भी नहीं कर सकते गुंजन जी। हां एक्चुअली हर कोई नहीं अफोर्ड एक एक अच्छा कॉर्पोरेट एम्प्लई यस हर लेवल की सर्जरी नहीं अफोर्ड कर पाएगा। और दूसरी बात यह कि आपका राइट एज नहीं है। यू आर इन 30 40 45 आपकी लाइफ का प्राइम ऐज चल रहा है। और इसमें यू आर फुल ऑफ रिस्पांसिबिलिटीज। घर की ईएमआई बच्चे पढ़ रहे हैं, स्कूल जा रहे हैं, इंश्योरेंसेस चल रही है, सारा कुछ हो रहा है। एनी हाउ सर्जरी सक्सेस नहीं होती है। देन व्हाट? फॉर द होल ऑफ योर लाइफ यू आर बेड रिडन।
(1:09:59) और तब आपको एक परमानेंट असिस्टेंस की जरूरत पड़ेगी। और कितने लोग मैं यह बताना चाहूंगी। आप मेरी बात पे मत जाइए। आसपोस में देखिएगा। हम जिन लोगों की स्पाइन की सर्जरीज हुई है, होने के बावजूद उनकी प्रॉब्लम सॉर्ट आउट नहीं हुई, बढ़ गई। दे आर ऑन परमानेंट लाइक बेल्ट वो डेली पहन के रखते हैं। गाड़ी उस स्पीड से नहीं चल सकते। दौड़ना भागना तो दूर की बात है। नीचे बैठ नहीं सकते हैं। इवन जिनकी घुटनों की भी सर्जरी अर्ली एजेस में हो जाती है। इवन देन सर्जरीज दे ऑल डू हैव लिटिल कॉम्प्लिकेशंस। उसमें ऑफ़ लाइफ पहले जैसी नहीं रहती। नहीं रहती है। इट्स 100% कंप्रोमाइज।
(1:10:34) 40 साल के होने के बाद आप फील करोगे कि राइट नाउ यू आर 80 इयर्स ओल्ड। यस नहीं ये तो एक्चुअली मैंने आई हैव गॉट अ चांस टू स विद अ नी सर्जन और ये उन्होंने ही कहा था ये उन्हीं की खुद की स्टेटमेंट है कि आपकी क्वालिटी ऑफ़ लाइफ कैन नॉट बी द सेम आफ्टर सर्जरी। ये हम इसलिए करते हैं क्योंकि इसके बाद इसके अलावा कोई सशन नहीं बचता कई बार। इतने एडवांस स्टेज में लोग हमारे पास जाकर आते हैं। बट सर्जरी के बाद यू कैन नॉट एक्सपेक्ट द सेम क्वालिटी ऑफ़ लाइफ। नो नॉट एट ऑल। बिल्कुल नहीं कर सकते। एंड ही इज ट्रू अबाउट दिस। अगर मैं सशंस पे
(1:11:06) आऊं देन आयेदा प्लेज़ अ वेरी वंडरफुल रोल इन दिस। इवन काफी केसेस तो ऐसे होते हैं कि अगर सर्जरी रेकमेंड की है तो आपकी सर्जरी की जरूरत ही नहीं पड़ती विद आयुर्वेदिक मेडिसिंस एंड विद पंचकर्मा एंड डिफरेंट प्रोसीजर्स। आप उस चीज को बिल्कुल लाइफ से हटा सकते हैं। देखिए पैसे भी बहुत कम लगेंगे। नो डाउट थोड़ा टाइम लगता है। कई बार 3 महीने 6 महीने ऐसे इतना कि टाइम लग जाता है। लेकिन आप एक बहुत बड़े जो है केओस से बच गए। आपकी लाइफ कंप्रोमाइज्ड नहीं है। वी हैव नॉट इंप्लांटेड एनी स्क्रूस एंड ऑल दैट तो कहीं पे भी आप अपनी मर्जी से दौड़ भाग सकते हो। कोई
(1:11:42) कंप्रोमाइज नहीं है। ऐसा लोगों को अभी तक लगता है कि सशन नहीं है। बट वी आर डूइंग वेरी वेल इन दिस सेगमेंट। कितने लोगों को जिनको स्पाइन की सर्जरी रेकमेंड की जाती है उनको हमने बहुत अच्छे रिजल्ट्स दिए हैं और पोस्टपोन हो गई है। मतलब हुई नहीं जरूरत ही नहीं पड़ी। इट वास नॉट नॉट एट ऑल नीडेड नाउ। और जो हम ट्रीटमेंट करते हैं वो विद एविडेंसेस होता है। लाइक फर्स्ट ऑफ ऑल वी विल गो फॉर एक्सरेज, एमआरआई उसमें एकजेक्टली जो आपका पिक्चर है बिफोर आफ्टर की वी विल शो यू कि ये डिफरेंस आया। इवन जो सर्जन्स हैं वो भी बहुत एप्रिशिएट करते
(1:12:14) हैं इस चीज को। देखिए अनवांटेडली तो वो भी नहीं करना चाहेंगे। लेकिन कई बार पेशेंट भी थोड़ा इस चीज को उनको ऐसे होता है कि मुझे आज ही सशन मिल जाए। तो जो बीमारी इतने सालों में बनी है ना उसको ठीक होने में कुछ समय दीजिए। क्योंकि अल्टीमेटली सफर कौन होगा? ना सर्जन होगा ना मैं होंगी। सिर्फ पेशेंट सफर करेगा। और यह चीज पेशेंट को वाइस होके समझनी पड़ेगी। तो एटलीस्ट अगर आपको रेकमेंड भी की है ना देन इवन ट्राई। आप एक महीना दो महीना ट्राई तो कीजिए। आप अपने आप को चांस दीजिए। कि आप अपनी हेल्थ को, शरीर को चांस दे रहे हैं। हमें चांस नहीं दे रहे। डोंट थिंक कि आप
(1:12:49) किसी और को अपनी ही हेल्थ के ऊपर इन्वेस्टमेंट है। एक्सक्टली वही आरओआई है कि आप स्वस्थ रहे उससे बड़ी क्या ही क्या ही बून है। बेसिकली कुछ भी नहीं है। लाइफ में हेल्थ है तो सारा कुछ आएगा। उसके पीछे पीछे आएगा। राइट? नहीं कांग्रेचुलेशंस जो आप इस तरह से नेचुरल तरीके से लोगों की इतनी बड़ी सर्जरीज को प्रिवेंट कर पा रहे हैं। इनफैक्ट मैं यहां पर एक बार शाउट आउट देना चाहूंगी शारदा आयेदा को और जो लोग मतलब इस तरह की किसी प्रॉब्लम में स्टक हैं, कंफ्यूज्ड हैं, कोई सशन नहीं मिल रहा, आई वुड डेफिनेटली एनकरेज देम कि आप इस तरह के आयुर्वेदिक सलूशंस को एक बार जरूर ट्राई
(1:13:24) करें। सो हम आपके जो भी हॉस्पिटल के लिंक्स हैं, आपके वेबसाइट के लिंक्स हैं वो डिस्क्रिप्शन में लगाएंगे। इफ एनीबडी इज इंटरेस्टेड एंड वांट्स टू नो मोर अबाउट इट यू कैन गो अहेड इन द डिस्क्रिप्शन और एक बार आप लिंक पे जाके सब चेक कर सकते हैं। डेफिनेटली ये जो आपने पंचकर्मा और इस तरह के और आयुर्वेदिक सॉलशंस बताए हैं क्या ये हॉर्मोन इमंबैलेंस या फिर यूटीआई जैसी चीजों के लिए भी काम करते हैं? बिल्कुल बिल्कुल और ये चीजें तो जैसे यूटीआई तो 100% क्यूरेबल होती है और इसमें बहुत सारी चीजें इन्वॉल्व रहती हैं। जैसे आपने पहले भी बताया कि कई बार हमें काम के लिए बाहर
(1:13:56) जाना पड़ता है। पर्सनल हजीन उस लेवल की मेंटेन नहीं होती है। तो ऐसे पेशेंट को थोड़ा लाइफ स्टाइल अपना अच्छा रखना चाहिए और कोशिश कीजिए जैसे आप काम करके वापस आ गए। ऑलवेज गो एंड हैव अ बाथ। प्रोफेशनल है वापस आए। तो इस डेली हैबिट में जो है वो लेकर आइए। इवन जापान भी इस चीज को फॉलो करता है। यू नो जापान तो बहुत कुछ फॉलो करता है। तो बहुत कुछ सीखने वाला है। जैसे वो लोग रात को जितने बजे भी आएंगे तो वो बैथ जो है वो लेनी ही लेनी है। वो उनका फर्स्ट रिचुअल होगा। अगेन सिंपल फ्री का सशन। यस। [हंसी] तो देखिए आप कितनी इनफेक्शन से बच गए। है
(1:14:34) ना? अब हम अगर जिम जाते हैं तो आप देखिए जिम मैक्सिमम मैंने जितने जिम देखे हैं वो थोड़ा सा जैसे इंडोर होते हैं इंडोर और उनमें कोई वेंटिलेशन नहीं है प्रॉपर्ली कोई इवन नॉट अ विंडो या ऐसा कुछ एसी चलते रहते हैं अब आप देखिए एक ऐसी जगह जिसमें डे नाइट जो लोग आके जिम कर रहे हैं स्वेट हो रहा है ना स्वेट हो रहा है तो कितने पैरासाइट फंजाई बैक्टीरिया वायरस तो निकली सब इक्विपमेंट्स योगा आप कुछ भी टच करो ना जो भी चीजें टच कर रहे हो उस पे लोगों का स्वेट है [हंसी] हां अगर आप इन चीजों को थोड़ा सा ध्यान में रखेंगे और थोड़ा अपनी लाइफ को अच्छे
(1:15:07) से रखेंगे तो आप सूर्य नमस्कार भी कर सकते हैं। व्हाई डोंट यू गो एंड जॉइन योगा? खुद ही कर लीजिए। नहीं है सैर कर लीजिए। एटलीस्ट आप अपने आप को जितना हेल्दी रख सकते हैं। अगर ऑप्शन जिम जाना ही है तो वापस आके बेथ लेना कंपलसरी है। इट्स मस्ट। ऐसे ही आप किसी भी कॉर्पोरेट से वापस आ रहे हैं। घर पे आइए और कपड़े चेंज करके उनको भी वॉश कीजिए। कई बार बहुत लोगों को फ्रीक्वेंट हैबिट है। एक ही कपड़ों को तीन-तीन दिन यूज़ करेंगे ना। यही कारण है गुंजन जी। आज बैक्टीरियल इंफेक्शन की वजह से बीमारियां किस लेवल पे चली गई? इम्यूनिटी वीक हो गई क्योंकि बाहर से बहुत
(1:15:40) सारी चीजों का अटैक ऑन कंटिन्यूटी बेसिस पे हो जा रहा है। तो बॉडी अक्सर कहां तक सर्वाइव करेगी? यह चीजों का बहुत ध्यान रखना जरूरी है। पीसीओडी, पीसीओएस की प्रॉब्लम बहुत ज़्यादा है क्योंकि लोग बैठे हुए हैं। एक्सरसाइज़ नहीं है और बहुत ज्यादा मीठा खा रहे हैं। बहुत ज्यादा मीठा खा रहे हैं या ये रिफाइंड चिप्स, कुरकुरे जो भी ऐसी चीजें ऐसा कुछ भी होता है। ऐसी चीजें हम बहुत ले रहे हैं। तो, उसके कारण क्योंकि ब्लड फ्लो नहीं हो रहा आपके यूट्रस के एरिया में। तो आपको कोई ना कोई बीमारी आज नहीं तो कल लगेगी और उसके कारण आप स्ट्रेस में आ रहे हो क्योंकि एक्सेस
(1:16:13) में हेयर ग्रोथ आ रही है फेस पे डबल चिन बन रही है जो कंप्लेक्शन फेयर होना चाहिए वो नहीं है बहुत सारे एक्ने हैं पिगमेंटेशन है डलनेस आ रही है मन नहीं कर रहा वेट गेन हो रहा है वो इनहीं सारी चीजों की वजह से है और आयुर्वेद इन चीजों का बहुत अच्छा सशन देता है वही बात है जो चाणक्य जी कहते थे कि बीमारी आई तो उसको तभी ठीक कर दो तभी ठीक कर दो यस अब्सोलुटली ब्यूटीफुल मैं इन सारी क्योंकि हमने बहुत सारे सशंस डिस्कस किए हैं। तो मैं इन सब सश को एक बार समराइज करना चाहूंगी। इसमें से मैक्सिमम सशंस आपके और एक दो इनपुट्स मेरी तरफ से भी होंगे। सो एक फार्मूला जो मैं
(1:16:45) हर उस लेडी को देना चाहूंगी जो आज हमें सुन रही है और अपनी हेल्थ को बेटर बनाना चाहती है। द फार्मूला इज़ ब्लूम बी एल ओ ओ एम। सो बी इज फॉर ब्रेथ वर्क जो आपने जिस पे आपने बहुत एम्फसाइज किया। मेडिटेशन प्राणायाम। अपनी ब्रीथिंग को करें कंट्रोल करेंगे तो आपका नर्वस सिस्टम रेगुलेट होगा और आपके हॉर्मोंस आपके कंट्रोल में रहेंगे। देन एल इज़ फॉर लाइट एक्सपोज़र जिस पे अगेन आपने बहुत एफसाइज करा कि सन एक्सपोज़र सुबह उठकर सूरज की किरणें सूरज को जल दीजिए सूर्य नमस्कार कीजिए। सो दैट इज अगेन वेरीेंट। तो मैं अपनी तरफ से ऐड करना चाहूंगी। हम अपने ऑर्ग्स को सपोर्ट
(1:17:21) करें। मूवमेंट के थ्रू, वॉक के थ्रू। आपने भी पोस्ट डिनर वॉक की बात करी थी। वॉक की बात की थी। तो बॉडी को मूव करें। उससे सारे ऑर्गन्स हेल्दी रहेंगे। देन ओ ओवोल्यूशन सपोर्ट। [नाक से की जाने वाली आवाज़] अपनी साइकिल्स को समझें। हॉर्मोन्स को बैलेंस में रखें। अपनी डाइट वगैरह सब चीजें उसके हिसाब से रहें। एंड एम स्टैंड्स फॉर मसल्स एंड पेल्विक फ्लोर रिकवरी। तो मुझे लगता है हमने जितना भी सब डिस्कस किया है इसमें सारे आपके पॉइंट्स और एक दो मेरे इनपुट्स मे यू ऑलवेज कीप ब्लूमिंग। [हंसी] हाय यार। डेफिनेटली। ब्यूटीफुल। लवली। तो डॉक्टर मुकेश बिफोर
(1:17:53) वी रैप दिस अप। एक बहुत इंटरेस्टिंग सेगमेंट है। रैपिड फायर सेक्शन है ये। इसमें मैं आये से रिलेटेड कुछ टर्म्स बोलूंगी और आप एक या मैक्सिमम दो लाइंस में हम एक्सप्लेन कीजिए कि वो क्या है या उसका क्या रेलेवेंस है। जी दोषाज दोष यस दोषाज मींस टॉक्सिंस बेसिकली और एक अगर गुड फॉर्म में बात पिता कफा। ओके जिसको हम डिटेल में डिस्कस कर चुके हैं। उसके लिए पूरा एपिसोड देखिए क्योंकि आपने टॉक्सिंस की बात करी है तो माय नेक्स्ट वर्ड इज बॉडी डिटॉक्स। बॉडी डिटॉक्स मींस टॉक्सिंस जो हम खा जितना भी हम खा रहे हैं उसके खाने के जितने रेड्यूल्स हैं जो नहीं डाइजेस्ट हुए और
(1:18:29) बाहर नहीं निकले थ्रू एसिमिलेशन ओके ओके सो बॉडी को डिटॉक्स करना एज एन क्लीजिंग प्यूरिफिकेशन यस यस पंचकर्मा पंचकर्मा बेसिकली दैट गोस विद फाइव वेरिएशंस लाइक बस्ती वर्मन विरेचन स्नेहन स्वेदन तो ये बॉडी को डिटॉक्स करने के तरीके हैं। बस्ती का मतलब ऑयल और विद हर्ब्स एनीमा देते हैं। एनल रूट से बमन विद हर्ब्स वोमिट्स करवाते हैं। हम सो दैट कि स्टमक टॉक्सिन को बाहर स्टमक की एनलाइनमेंट के साथ जितने टॉक्सिनस चिपके पड़े होते हैं वो निकलते हैं उससे। देन विरेचन। विरेचन का मतलब है हम स्पेसिफाइड काढ़ा या मेडिसिंस देते हैं जो खा के पेशेंट को परगेशंस होती हैं। लूज
(1:19:11) मोशन सॉर्ट ऑफ में 5 10 15 20 25 30 ये डिपेंड करता है ऑन योर डिजीज देन स्नेहन। स्नेहन का मतलब होता है ऑलेशन। बॉडी मसाज खुद भी ऑइल लगा के ऐसे भी और स्वेदन मींस स्टीम या सोना ताकि स्वेटिंग के थ्रू टॉक्सिंस जो हैं। तो ये जितने पांच मेजर चीजें हैं ये बॉडी आपकी डिटॉक्सिफाई करती है इन चीजों के साथ। दैट इज कॉल्ड पंचकर्मा। दी फाइव कॉम्पोनेंट्स टुगेदर कॉल्ड एज पंचकर्मा। पंचकर्मा। ब्यूटीफुल। लास्ट बट नॉट द लीस्ट यस। अग्नि अग्नि सबसे अंडररेटेड चीज है। आजकल के टाइम में लोग समझ नहीं पाते इसको। ये आपके शरीर के अंदर एक तरह की आग प्रज्वलित करती
(1:19:54) है। सो दैट आपने कुछ भी खाया और पिया वो उसको पूरी तरह से डाइजेस्ट कर देगी। सपोज कि जैसे हम खाना बनाते हैं तो हम एक गुड फ्लेम का यूज करते हैं। आपने कहावत सुनी है बीरबल की खिचड़ी वो कभी नहीं पकती वो इसी करके क्योंकि आग सही नहीं थी। तो [हंसी] गुड डाइजेस्टिव फायर इफ यू डू हैव गुड डाइजेस्टिव फायर देन यू वोंट बी हैविंग 80% ऑफ डिजीजसेस। क्योंकि अकॉर्डिंग टू आयुर्वेद सारी बीमारियां जो है वो पेट से रिलेटेड हैं। और पेट में अगर अग्नि का प्रज्वलन सही है देन यू वोंट बी हैविंग दैट मच क्रॉनिक डिजीजसेस इन योर लाइफ। ब्यूटीफुल ब्यूटीफुल मैंने एक्चुअली
(1:20:31) अग्नि को लास्ट में इसलिए रखा है क्योंकि अग्नि सीधा डायरेक्टली रिलेट करती है गट से और गट हेल्दी तो फिर आपकी सारी चीजें आपकी ओवरऑल बॉडी इज हेल्दी। सो ये अग्नि पे ही मेनली काम करना है। इसी से आपकी इनफ्लामेशन और इसी से आपके हार्मोंस और इसी से आपके सब कुछ जो है सारा कुछ बैलेंस होगा। आपने सुना भी होगा कि कुछ लोग ऐसे होते हैं अभी कुछ भी खा लेते हैं लेकिन वो हेल्दी रहते हैं क्योंकि उनकी अग्नि बहुत अच्छी है और जैसा कि मैंने आपको बताया बीच में कि आपने मेरे से पूछा कि क्या सिंपल चीजें करनी चाहिए? मैंने बोला कि जब नींद आए सो जाओ जब भूख
(1:21:04) लगे खा लो। मुझे वो वाला पार्ट बेस्ट लगा था। [हंसी] जब प्यास लगे पी लो। तो जब भूख लगे इसका मतलब कि आपकी अग्नि अपने आप करेक्ट होगी। अब शरीर कुछ खाने को मांग रहा है और आप जब भी उस टाइम पे दोगे तो वो डाइजेस्ट कर लेगा उसको और बिना भूख के खाओगे तो वो सड़ जाएगा खाना अंदर। सिंपल लैंग्वेज में हम इसे यही बोलते हैं ना लिसन टू योर बॉडी। यस एक्जेक्टली। अमेजिंग थैंक यू सो मच डॉक्टर। वेरी लवली स्पीकिंग विद यू अबाउट ऑल दी थिंग्स। मेरे को जितनी शुरू में एक्साइटमेंट थी मुझे लगता है मुझे हर उस सवाल का एकदम आइडियल और मोस्ट प्रैक्टिकल आंसर मिला है।
(1:21:39) जी। सो थैंक यू सो मच वंस अगेन। थैंक यू सो मच। और मैं जरूर आपके दर्शकों को कहना चाहूंगी कि सिर्फ फीमेल्स ही नहीं मेल्स भी यह चैनल सब्सक्राइब करें गुंजन मैम का क्योंकि [हंसी] ये वाइसवरसा है। अगर फीमेल के साथ आप भी इक्वली जुड़े हुए हैं तो आपको भी ध्यान रखना है आपकी फैमिली का पूरी तरह से। नहीं ये बहुत अच्छा मैसेज है। नॉट जस्ट मुझे सब्सक्राइब करने के लिए। बट द बिगर पर्पस हियर इज कि ये सारी नॉलेज मेल्स को भी उतना ही जरूरी है। जरूरी है। सो बहुत जरूरी है। क्योंकि कई बार फीमेल्स अपनी इच्छाएं पूरी तरह से व्यक्त नहीं करती। एक्सप्रेस दे आर नॉट दैट मच
(1:22:15) एक्सप्रेसिव। तो ये चीजें समझने में आपको बहुत सहायता मिलेगी यहां से। 1% थैंक यू सो मच मैम। थैंक यू सो मच फॉर मच। थैंक यू। थैंक यू। एंड आई वुड लाइक टू रिक्वेस्ट आवर ऑडियंस कि आज की पूरी इस कन्वर्सेशन में से आपको सबसे अच्छा पार्ट कौन सा लगा? प्लीज कमेंट करके जरूर बताइए। और शारदा आयुर्वेदिक हॉस्पिटल हैं। उनके लिंक्स हम डिस्क्रिप्शन में दे रहे हैं। तो अगर आप और एक्सप्लोर करना चाहते हैं इनके बारे में और जानना चाहते हैं देन प्लीज फील फ्री एंड चेक आउट दोज़ लिंक्स।

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