Spiritual Gifts In Your Kundli | Astrology Guide | IlaVerse Journeys FT Rahul Kaushik Part2
Author Name:Ila Goswami
Youtube Channel Url:https://www.youtube.com/@ilaverse_yt
Youtube Video URL:https://www.youtube.com/watch?v=rpd1MsI9fzo
Title: Spiritual Gifts In Your Kundli | Astrology Guide | IlaVerse Journeys FT Rahul Kaushik Part2
Author Name: Ila Goswami
Description: IlaVerse Journeys – Chapter 1 | Rahul Kaushik | Part 2
Awakening of Spiritual Consciousness ✨
What if your Kundli could reveal the deeper journey of your soul?
In Part 2 of IlaVerse Journeys – Chapter 1 with Rahul Kaushik, Ila Goswami explored the connection between astrology, spiritual consciousness, and the evolution of the Soul. He explains the spiritual yogas in a Kundli, how planetary combinations may guide a person toward spiritual growth, and how certain planetary periods can bring profound experiences and realisations.
From the significance of the Pancham Bhav, Navam Bhav, and Dwadash Bhav to the deeper meaning of past-life punya, Guru, vairagya, surrender, and daan, this conversation takes you into the unseen dimensions of Jyotish and spirituality.
The discussion also moves beyond astrology into the subtle world of energies, supernatural experiences, and extraordinary spiritual encounters. What are these experiences? How should we understand them? And can a person who has experienced divine or supernatural realities truly explain them to someone else?
Watch this powerful conversation to explore the relationship between astrology, spiritual evolution, consciousness, and the unseen dimensions of existence.
Watch this insightful conversation with Rahul Kaushik and explore the deeper meaning of your soul's journey.
🔗 Watch Part 1 here:
• Rahu,Moon,Mars in 1,5,9 Houses | IlaVerse ...
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Filming location:
White Lotus Kanu’s Abode
139, Purkul Rd, Salan Gaon, Bhagwant Pur, Dehradun, Purkal Gaon, Uttarakhand
http://whitelotuspurkul.com/
Timestamps
00:13 - Coming Up Next
01:34 - Introduction
02:53 - Spiritual Yogas In Kundli
10:24 - 12th Lord Dasha & Daan
11:45 - Real Meaning Of Daan
17:45 - Past Life Punya
24:24 - 5th Lord Sambandh with 8th Lord
27:51 - Karma Alignment Technique ( KAT )
44:54 - Decoding Atmakaraka In Kundli
56:37 - Decoding Supernatural Experiences
01:23:11 - Ending
01:25:29 - BTS with Rahul Kaushik
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Transcript:
(00:18) ईश्वर ने एक पोर्टल ओपन किया है एक सर्टेन टाइम के लिए हमारे लिए जहां हम अपनी आत्मा के विकास के लिए कुछ कर सकते हैं। पूरी जिंदगी व्यक्ति जो है पैदा होने से लेकर मरने तक किसी ना किसी चीज को चस कर रहा होता है। तो ये चज़ करने की जो उसकी यात्रा है जन्म से लेकर मरण तक ये कभी खत्म नहीं होती। हम लेकिन 12व घर के स्वामी की जब दशा आती है ना व्यक्ति के जीवन में उसको जीवन में पहली बार यह पता चलता है कि निष्काम भाव और समर्पण कहते किसे हैं। जिस वस्त्र को आप पहनते हो वही वस्त्र जब
(01:13) आप दूसरे को दोगे तो दान कहलाएगा। जिस अन्न को आप ग्रहण करते हो जब उस ठीक उसी अन्न को आप किसी को दोगे वह दान कहलाएगा अन्यथा वो दान नहीं है। नमस्कार भारत यू आर वाचिंग एलावर्स जर्नीज वि राहुल कौशिक और मैं हूं आपकी होस्ट एंड स्पिरिचुअल जर्नलिस्ट इला गोस्वामी इलावर्स जर्नीज के पार्ट वन में हमने राहुल कौशिक सर के साथ राहु मून एंड मार्स के कॉम्बिनेशंस एनर्जी स्पोंज बनने की प्रोसेस और केतु के रिलीज आस्पेक्ट को एक्सप्लोर किया था। अब बारी है इस
(01:58) एस्ट्रोसाइकोलॉजी फिल्म में और गहराई से उतरने की। इस पार्ट का नाम है कर्मा अलाइनमेंट टेक्निक यानी कैट। राहुल सर की सालों की रिसर्च से निकला हुआ एक कांसेप्ट जो आपको आपके जीवन की दिशा और दशा दोनों को सही करने में मदद करेगा। इस पार्ट में आप जानेंगे पास्ट लाइफ के कर्मों के फल, फिफ्थ और ए्थ हाउस का कनेक्शन और वह कार्मिक पैटर्न्स जो हमारी लाइफ को इन्फ्लुएंस करते हैं। आखिर क्या है कर्मा अलाइनमेंट टेक्निक और यह हमारी
(02:43) लाइफ को कैसे समझने में मदद कर सकता है? चलिए राहुल सर से ही जानते हैं। ज्योतिष में क्या कोई योग हैं जो व्यक्ति की आध्यात्मिक चेतना को इस स्तर पर ले जा सकते हैं कि वो व्यक्ति उस चेतना को महसूस कर सके। तो अब यहां पर बहुत सारे योग जो है ज्योतिष के अंदर दिए गए जो व्यक्ति को अध्यात्म या आध्यात्मिक प्रगति प्रदान करते हैं। उसमें से एक जो बहुत बड़ा योग है वो यह है कि चंद्रमा यदि मंगल की राशि में हो और शनि की उस पर दृष्टि पड़ जाए या चंद्रमा शनि की राशि में हो और मंगल की उस पर दृष्टि पड़ जाए तो यह व्यक्ति को बहुत
(03:29) अच्छी जो है वह आध्यात्मिक प्रगति देता है। यह योग उसके अलावा कुछ और योग भी दिए हैं। जैसे बरामीर की जो बृहत जातक है उसके अंदर एक योग यह भी कहता है कि चंद्रमा आपका जिस राशि के अंदर है तो चंद्रमा का जो भी आपका राशि स्वामी है अगर उस राशि स्वामी पर सिर्फ शनि की दृष्टि पड़ रही हो और किसी ग्रह की दृ दृष्टि ना पड़ रही हो। शनि की दृष्टि पड़ रही हो तो ऐसे जातक के अंदर वैराग्य उत्पन्न हो जाता है। वैराग्य तो अब क्योंकि वैराग्य जो है वो भी आध्यात्मिक उसकी तरफ लेकर जाता है। तो यह तो हो गई योग जो व्यक्ति को अध्यात्म की तरफ लेकर जा
(04:09) रहे हैं। उसके बाद आती है दशाएं हम कि वो कौन सी दशा है जो व्यक्ति को उन आध्यात्मिक अनुभवों को साक्षात महसूस करवाएगी। मतलब वो व्यक्ति महसूस करेगा कि उसके जीवन में कुछ घटित हुआ है। लेकिन एक जो बहुत बड़ा प्रश्न यहां पर है कि जब व्यक्ति के भीतर वो चीज घटित होती है और जिसका रियलाइजेशन वो करता है या अनुभव वो करता है क्या वो किसी को समझा पाएगा? सवाल है क्या वो किसी को समझा पाएगा? अगर किसी ने ईश्वर की अनुभूति अपने भीतर कर ली तो आपको क्या लगता है? वो समझा पाएगा किसी को कि मैंने अनुभूति कर ली? नहीं समझा पाएगा। वो समझ लेगा कुछ हुआ है। समझ लेगा कुछ
(04:54) लेकिन समझा नहीं पाएगा। स्वयं तो कुछ समझेगा कुछ हुआ है लेकिन दूसरे को नहीं बता पाएगा। क्योंकि अगर दूसरे को बताने पे गया तो हो सकता है सामने वाला जो है उसको पागल कह दे क्योंकि उसका स्तर जो है उसकी चेतना का कहीं पर भी हो सकता है। यह तो उठ चुका ना वहां से। हम तो यहां पर तीन ग्रहों की दशाएं जो है बहुत महत्वपूर्ण है। पंचम भाव के स्वामी की दशा वेरी इंपॉर्टेंट। क्यों? क्योंकि जब हम बात यह करते हैं भगवत गीता में बात आती है कि अर्जुन तुम अपनी यात्रा जहां छोड़ते हो अगले जन्म में उस यात्रा को वहीं से शुरू करते हो। और पंचम भाव को आप क्या कहते हो? पूर्व
(05:34) पुण्य भाव का कहते हो। वो सिर्फ पूर्व पुण्य भाव नहीं है। आपने अपनी चेतना को विकसित करने के लिए जो भी प्रयत्न करे हैं पिछले जन्म में वह भी आपके पंचम भाव में आते हैं। इसलिए जैसे ही पंचम भाव के स्वामी की दशा आती है व्यक्ति की चेतना में प्रगति आने लगती है। फिर आती है नवम भाव की स्वामी की दशा। नवम भाव को आप किस उसमें देखते हो जब भी बात आती है कि भाई नाइंथ लॉर्ड जो है वो क्या है? गुरु है। ठीक है? गुरु है। तो गुरु कौन व्यक्ति है? गुरु वो व्यक्ति है जो आपकी प्रेजेंट कॉन्शियसनेस को अपलिफ्ट कर दे। वो जहां कहीं भी है वो आपका गुरु है। वो कोई भी हो
(06:16) सकता है। वो बच्चा भी हो सकता है। वो कोई वृक्ष भी हो सकता है। क्योंकि गुरु का कोई रूप नहीं है। गुरु एक तत्व है। जैसे दत्तात्रेय ने अपने जब गुरुओं का जिक्र किया तो उन्होंने बोला एक गुरु मेरी मकड़ी भी है। यस यस। क्योंकि जिस प्रकार मकड़ी जो है अपने जाल का निर्माण करती है उसमें विचरती है और बाद में उसी को निगल लेती है। ठीक उसी प्रकार जो है ब्रह्म भी अपने जगत को अपने जगत को इस सृष्टि को प्रकट करता है। उसी में विचरता है और बाद में उसी को ही अपने में समेट लेता है। तो ये क्या है? यहां उन्होंने उदाहरण दिया किस चीज का? गुरु का।
(06:56) अब यहां उन्होंने मकड़ी को गुरु क्यों कहा? क्योंकि मकड़ी ने उन्हें बोध कराया कि ब्रह्म जिस तरीके से कार्य कर रहा है या ब्रह्म जो कार्य कर रहा है और मकड़ी जो कार्य कर रही है वो एक समान जैसा है। तो कोई भी व्यक्ति आपकी कॉन्शियसनेस को इंप्रूव करेगा वो कौन है? वो आपका गुरु है। गुरु कौन से भाव से आता है? नाइंथ हाउस से आता है। नाइंथ लॉर्ड की दशा जब आपके जीवन में आएगी। आपके जीवन में कोई ना कोई व्यक्ति अवश्य ऐसा आएगा जो आपकी चेतना को विकसित करके जाएगा। लेकिन यह जरूरी नहीं है कि कोई वह व्यक्ति ही हो, कोई आपका गुरु हो, कोई मित्र हो। अब
(07:34) यहां पर एक एक बहुत इंपॉर्टेंट बात मैं आपको बता रहा हूं जो हर आदमी को समझनी होगी। यहां पर मान लीजिए किसी का नवम भाव का स्वामी छठे भाव के स्वामी के साथ है। नाइंथ लॉर्ड इज विद सिक्स्थ लॉर्ड। नाउ द थिंग इज के एट दिस पर्टिकुलर टाइम हु विल बिकम योर गुरु व्हेन नाइंथ लॉर्ड इज विद सिक्स्थ लॉर्ड समवन विद हुम यू विल फाइट विल बिकम योर गुरु आपको जो बोध दत्तात्रेय को मकड़ी ने कराया वह बोध आपका आपको शत्रु करा के जाएगा वह आपकी चेतना को विकसित करके जाएगा
(08:19) इसलिए नाइंथ लॉर्ड की दशा में आपकी चेतना का विकास तो होना है लेकिन जो ग्रह उसके साथ में होगा उसके द्वारा होना है। अगर हुआ पंचम के साथ तो अच्छा है। हंसते खेलते पढ़ते लिखते विकसित होगी। अगर 12वें के साथ है तो दान धर्म के द्वारा होगी। आध्यात्मिक जो आप अध्ययन कर रहे हैं उसके द्वारा होगी। या जो अनुभव कर रहे हैं उसके द्वारा होगी। लेकिन अगर छठे भाव के साथ है तो किसके द्वारा होगी? शत्रुओं के द्वारा। शत्रु के द्वारा होगी या उन लोगों के द्वारा हो सकती है जो आपके अधीनस्थ हैं। मतलब आपके एम्प्लाइज जिनको हम बोलते हैं। हम क्योंकि आपको कौन किस समय कौन सी शिक्षा
(09:04) दे जाए इसका कोई वो नहीं है। कहीं से भी आपको कोई शिक्षा कभी भी आ सकती है। ठीक है? ये नवम भाव का स्वामी करता है। अब आते हैं द्वादश भाव के स्वामी पे। जी। पूरी जिंदगी व्यक्ति जो है पैदा होने से लेकर मरने तक किसी ना किसी चीज को चज कर रहा होता है। किसी ना किसी चीज को चज़ कर रहा होता है। अब कोई कहे कि नहीं ऐसा नहीं हो सकता। वो चज़ नहीं कर सकता। तो एट लास्ट हर व्यक्ति किस चीज की कामना करता है? मुक्ति का। यस वो उसको तो हम कहे तो मुक्ति भी तो चज़ ही कर रहा होता है। समझ रहे हैं? हम तो ये चस करने की जो उसकी यात्रा है जन्म से लेकर मरण तक ये कभी खत्म नहीं होती।
(09:46) लेकिन 12व घर के स्वामी की जब दशा आती है ना व्यक्ति के जीवन में उसको जीवन में पहली बार यह पता चलता है कि निष्काम भाव और समर्पण कहते किसे हैं। क्योंकि आपको और कोई भाव समर्पण सिखा ही नहीं सकता। क्योंकि हर भाव आपको कुछ ना कुछ देने के लिए बैठा है। आप नवम भाव के सामने गए, गुरु के सामने गए। आप क्या जिज्ञासा? अरे गुरु जी मेरे को कुछ ज्ञान दें। तीसरे भाव के सामने गए तो मुझसे कोई बात करें। चतुर्थ भाव के सामने गए। मेरे मेरी भावनाओं को कोई समझे। पंचम के सामने गए। मुझे कोई विद्या दे या मुझे विद्या के बारे में बताएं। लेकिन जब आपके द्वादश भाव
(10:27) के स्वामी की दशा चलती है। आपको ना कोई सिखाता है, ना आपसे कोई बात करने आता है, ना आपसे कोई रिश्ता बनाता है। आप एकांत में रहकर इस विचार से जुड़ जाते हैं कि समर्पण क्या है? या किसी चीज को विड्रॉ करना या जिसको हम चैरिटी कहते हैं वो असल में क्या है? या जिसको एक शब्द कहा है दान। तो दान अभी किसी से पूछने लगो। आप दान क्या है? तो हर आदमी अपनीपनी डेफिनेशन लेकर खड़ा हो जाएगा। दान क्या है? पूछिए इनसे। दान क्या है भाई? दान क्या है भाई? किसी को पता हो तुम सूरज दान क्या है? दान क्या है? दान जो बोलते हैं जो अपनी श्रद्धा से किसी को अगर कुछ भी
(11:05) देते हैं हां आरिफ तुम्हारे लिए दान दान क्या है? जो अपने मन की इच्छा से इसको ये कहा गया ना कि एक हाथ का दिया हुआ है। दूसरे हाथ को पता नहीं लगना चाहिए। वो वो दान की कंडीशन है जो आपने कहा ना कि एक हाथ ने दिया है तो दूसरे हाथ को पता ना चले एक कंडीशन ठीक है दान का पपस मतलब मेरे उससे या दूसरे अगर तुम उसको देने में या उसकी हेल्प करने में सक्षम हो तो बिल्कुल देना चाहिए सामने वाले को अगर तुम नहीं हो तो अपने दिल में फिर एक वर्ड होता है वो नहीं हो अगर तुम किसी की हेल्प कर सकते हो तो बिल्कुल करनी चाहिए लाइक इस तरीके से तुमने बहुत अच्छे ना अपनेप ढंग से बहुत
(11:42) अच्छे उसके कंडी कंडीशंस बताए हैं दान के। मैं बताने का प्रयास करता हूं। दान क्या है जो मेरी समझ में आया है। अपनी किसी भी प्रिय वस्तु विषय या व्यक्ति को किसी परमार्थिक कार्य के लिए समर्पित कर देना दान। तभी कर्ण का नाम दानवीर कर्ण था। दानवीर कर्ण। बात समझे आप? तो दान का अर्थ यह नहीं होता कि अभी कोई भूखा आया। मैंने उसको कुछ खिला दिया। वो दान है। एक उपनिषद में फिर मैं उपनिषदों पे आ रहा हूं क्योंकि उपनिषद मैंने पढ़े नहीं है। लेकिन जो चीज मुझे अच्छी लगती है उसे पकड़ लेता हूं। तो उपनिषद में एक कथा आती है। हम और कथा आती है किसकी?
(12:26) यमराज और नचिकेता की। कठोपनिषद में। कठोपनिषद में। तो नचिकेता जब अपने पिता से ये पूछते हैं अब देखिए कथा को अलग-अलग ढंग से प्रस्तुत किया गया है। लेकिन हम कथा का वही स्वरूप समझेंगे जो हमें दान का अर्थ ढंग समझाए या अर्थ समझाए तो कथा अलग हो सकती है। लेकिन हम इसको उस ढंग से ले रहे हैं ताकि हमें दान समझ में आए क्या होता है। सही। तो जब नचिकेता के पिता बीमार होते हैं तो ब्राह्मण उनको क्या आदेश देते हैं कि आप एक काम कीजिए। आप इतनी सारी गओं का दान कर दीजिए। हम तो उसके पिता क्या करते हैं? लालसा के चलते जो बूढ़ी गाय होती है, जो बूढ़ी गाय
(13:04) होती हैं, अधमरी गाय होती है, उनको दान कर देते हैं। तो अब नचिकेता अपने पिता के पास जाता है और पूछता है कि पिताजी आपने इनका दान क्यों किया? यह तो पहले ही मतलब मरने के उस पे आ गई हैं कगार पे। और क्या कल को अगर मैं किसी लायक नहीं रहा जिस प्रकार यह गौएं लायक नहीं रही तो आप मुझे भी किसी को दे दोगे। बड़ा प्रश्न था भाई। बुद्धिमान जो संतान होगी वो कैसा प्रश्न करेगी? वो यही प्रश्न करेगी। अब इसको दान से जोड़ते हैं। वहां जो नचिकेता ने प्रश्न उठाया उस प्रश्न में कहीं ना कहीं उसने अपने पिता से यह प्रश्न किया कि हम दान में किसी व्यक्ति को वही
(13:52) वस्तु क्यों नहीं दे रहे जिसका उपयोग हम कर रहे हैं? हम उसका उसका दान क्यों कर रहे हैं जो हम भी जिसका उपयोग नहीं कर रहे? तो सवाल उठता है ना? तो अब ऐसे में इसको आज मॉडर्न डे कॉन्टेक्स्ट में समझते हैं कि मैं किसी बहुत अच्छे रेस्टोरेंट से खाना खा के उतर रहा हूं। हम बहुत अच्छे से अचानक से सामने मेरे पास कोई भूखा व्यक्ति खड़ा हो जाए आके कि भाई मेरे को खाना खाना है। मेरे को भूख लगी है। आपके अंदर सामर्थ्य है कि आप उसको वहीं भोजन करा सकते हो जहां आपने भोजन किया। लेकिन फिर भी आप क्या करोगे? आप जाओगे। आप कोई सस्ता से जगह देखोगे और
(14:32) उसको 10-15 का भोजन करा के जो भी आदमी करता है उसे करा के चल देता है और सोचता है आज मैंने दान कर दिया ओो वो दान नहीं वो सिर्फ आपकी अपनी एक मानसिक अवस्था है जिसमें आप अपने आपको जो है वो एक क्या कहें झूठा दिलाशा दे रहे हो कि भाई मैंने आज एक बहुत अच्छा काम किया इसलिए कहा जाता है कि जिस वस्त्र को आप पहनते हो वही वही वस्त्र जब आप दूसरे को दोगे तो दान कहलाएगा। जिस अन्न को आप ग्रहण करते हो जब उस ठीक उसी अन्न को आप किसी को दोगे वो दान कहलाएगा। अन्यथा वो दान नहीं है। तो हर आदमी को ना यह समझना पड़ेगा कि जब वो सुनता है इस बात को कि
(15:17) दान तो दान का अर्थ क्या है? भाई दान का अर्थ वही है कि जो चीज तुम अपने उपयोग में नहीं ले सकते वो अगर आप किसी को दान दे रहे हो तो आप दान नहीं दिखावा कर रहे हो। बिल्कुल। इसलिए बात हम वापस अपने 12व घर के स्वामी की दशा पर आएंगे कि जब द्वादश भाव के स्वामी की दशा आती है ना तो व्यक्ति चीजों को त्यागना सीखता है और वो त्याग कैसा होता है मानते 12व घर के स्वामी की दशा आ रही है किसी व्यक्ति की और उसके कुंडली में आध्यात्मिक योग प्रबल है हम प्रबल है हम और मान लीजिए वो व्यक्ति कहीं जा रहा है सर्दी का समय है उसने कुछ ओढ़ रखा है हम
(15:56) ये मैं दशा की बात बता बता रहा हूं दशा क्या करती है? अचानक से कोई व्यक्ति ठुरता मिल गया। वो बोला कि साहब बड़ी ठंड लग रही है। मैं क्या करूं? जानते हो अगर आध्यात्मिक योग हुए और 12व घर के स्वामी की दशा चल रही है। वो क्या करेगा? वो उतारेगा उसको पहना देगा। वो विचार ही नहीं करेगा। यह क्या है? यह मेरे लिए क्यों है? इसने क्यों यह मांग ली? इसमें मेरा कितना फायदा होगा? कितना नुकसान होगा? वह उसी समय उसका त्याग कर देगा। किस लिए? एक परमार्थिक कार्य के लिए त्याग कर देगा। इसको दान कहा जाता है। यह सोच आप में कौन पैदा करता है? यह सोच आप में 12व घर के
(16:33) स्वामी की दशा पैदा करती है। आदमी छोड़ना सीखता है। आदमी त्यागना सीखता है। आदमी समर्पण करना सीखता है। इसलिए जो हम बात कर रहे थे ना कि आदमी जो आध्यात्मिक प्रगति करता है वो सबसे ज्यादा प्रगति इन तीन ग्रहों की दशा में ही करता है। पंचमेश, नवमेश और द्वादशेष। तो अगर किसी भी व्यक्ति की यह दशा चल रही है आपकी चल रही है द्वादशेष की मेरी नवमेश की चल रही है किसी और की पंचमेश की चल रही होगी उनकी नवमेश की चल रही होगी तो यह समझिए कि ईश्वर ने एक पोर्टल ओपन किया है एक सर्टेन टाइम के लिए हमारे लिए जहां हम अपने अपनी आत्मा के विकास के लिए कुछ कर
(17:13) सकते हैं और अगर हमने इस पोर्टल को जाने दिया जो खुला हुआ है तो समझ लीजिए हमने इस दशा को निराधार कर दिया जो जीवन में घटित हो रहा है जो लाभ हानि हमें में होंगी, वह हमारा प्रारब्ध है। वो हम नहीं भी करेंगे तो भी हमें मिल जाएगा। यश अप यश जो भी है। लेकिन हमारा हमारी अपनी बुद्धि या हमारी अपनी जो हमारा तार्किक दृष्टिकोण है वो ज्योतिष के आधार पे हमें क्या कहेगा कि अगर यह दशा हमें मिली है तो हम इसका जितना आध्यात्मिक लाभ उठा सके उतना उठा लें। बिल्कुल सर कई लोगों के जीवन को मैंने देखा है बहुत नजदीकी से और उनके जीवन को ऐसे देखकर
(17:52) एक डायलॉग निकलता है जो बहुत लोगों के मुंह से मैंने सुना है कि यार ये तो ना अपनी पास्ट लाइफ के अच्छे कर्मों का फल खा रहा है। अच्छा ये मतलब अगर मैं आपसे पूछूं टेक्निकली देखना पॉसिबल है क्या कि क्या हम हमारे जीवन में जो अच्छी चीजें घटित हो रही हैं वो क्या पास्ट लाइफ के पूर्व पुण्यों की वजह से है ये मतलब आई डोंट नो ये देखा जा सकता है। ठीक है बिल्कुल देखा जा सकता है और कुंडली के अंदर एक योग भी होता है हम जो यह बताता है कि यह घटना जो आपके जीवन में घट रही है यह आपके पूर्व जन्म में किए गए पुण्य कर्मों के कारण ही घट रही थी। हम
(18:32) उसका सीधा सा उदाहरण मैं आपको देता हूं के इतना तो ज्योतिष आपने भी पढ़ लिया होगा। जब कोई कहता है आपसे कि पूर्व पुण्य भाव कौन सा है? आप क्या कहेंगे पॉइंट? पंचम। पंचम। और अगर आपसे मैं पूछूं कि आप स्वयं कौन सा भाव हो? लग्न। लग्न हो। हम तो यह बड़ा सिंपल सा फंडामेंटल अप्रोच मैं आपको बता रहा हूं। किसी भी कुंडली पर लगाना आपको समझ में आ जाएगा इसके जीवन में क्या हो रहा है क्यों हो रहा है। फॉर एग्जांपल अगर किसी के लग्नेश का संबंध पंचम भाव के स्वामी के साथ हो गया। अब संबंध चार प्रकार से बनते हैं कुंडली में। याद रखिएगा। एक दोनों एक राशि में बैठे हो।
(19:11) एक दोनों एक दूसरे को देख रहे हो। एक दोनों ने राशि परिवर्तन कर लिया। वह उसकी राशि में, उसकी राशि में और एक होता है राशि के स्वामी का उस ग्रह को देखना जो उस राशि के अंदर विद्यमान है। इसको डिस्पोजिटर्स एस्पेक्ट बोलते हैं। चार प्रकार के संबंध अगर इनमें से कोई भी संबंध लग्नेश और पंचमेश का बन रहा है तो आप साफ-साफ बोल सकते हैं सामने वाले को कि इस व्यक्ति के जीवन में जो कुछ भी अच्छा घटित हो रहा है वो इसके पूर्व जन्म के पुण्य कर्मों के कारण है। क्योंकि अगर मैं अपना जीवन देखूं तो ईश्वर की कृपा से अच्छा स्वास्थ्य मिला, अच्छा
(19:46) शरीर मिला, अच्छा परिवार मिला। हम और ईश्वरीय कृपा से कभी ऐसा कोई चैलेंज नहीं आया कि हां ब्रेड एंड बटर के लिए भी स्ट्रगल करना पड़ा हो। लेकिन अगर आप देखो उठ के तो एक आदमी है जो सुबह से शाम तक सिर्फ के उसका पेट भर जाए उसके लिए वो निरंतर प्रयास कर रहा होता है। तो ऐसा हमने इस जन्म में ऐसा क्या कर दिया? तो यह बात इस बात को भी प्रूफ करती है कि कर्मों का लेखाजोखा कहीं तो काम कर रहा है और उसी कर्मों के लेखेजोखे के कारण एक व्यक्ति अपने लग्न भाव के स्वामी का संबंध पंचम भाव के स्वामी के साथ लेकर आता है जिसके कारण इस जीवन में
(20:29) उसके साथ में जो कुछ भी घटित होता है वह सिर्फ और सिर्फ अपने पूर्व जन्म के पुण्य कर्मों के कारण होता है। लेकिन इसके भी अपने-अपने रूप हैं। किसी को पंचमेश लग्नेश के साथ मिला ठीक है। तो वो सारे पुण्य जो है वो किसको आए? वो स्ट्रेट अवे आपको आ गए। सीधा-सीधा आपको आ गए। अगर इसको भगवत गीता या आध्यात्मिक दृष्टि से समझे तो जो आपने अपनी भक्ति के द्वारा या जो भी आपने भक्ति की जो भी अपनी चेतना के लिए प्रयास किया वो सीधे-सीधे किसको मिली? स्ट्रेट अवे आपको मिली। मतलब आपको कुछ करना नहीं पड़ा। बिकॉज़ आप तो स्वयं आप हो ना। तो स्ट्रेट अवे आपको मिल गया।
(21:10) अब मान लो किसी का पंचमेश लग्न के साथ तो नहीं आया। दूसरे घर के स्वामी के साथ आ गया। तो पंचम भाव का स्वामी और दूसरे भाव के स्वामी ने आपस में संबंध बना लिया। अब इसका अर्थ क्या होगा? इसका अर्थ यह होगा इस व्यक्ति के जीवन में जो कुछ भी धन आएगा, वो पूर्व पुण्य जन्मों के कारण आएगा। पहले हम क्या कह रहे थे कि पूर्व पुण्य जो हमारे कर्म है वो अगर उसका रिजल्ट व्यक्ति को मिल रहा है तो अगर वो दूसरे भाव के साथ में पंचम भाव का स्वामी है हम तो वो इस व्यक्ति को जो पूर्व पुण्य भाव का जो रिजल्ट मिल रहा है जो फल मिल रहे हैं वो धन के रूप में मिलेगा
(21:47) केवल धन के रूप में कुटुंब सेकंड लॉर्ड है ना कुटुंब अच्छा मिल जाएगा धन अच्छा मिल जाएगा अब सोचो किसी का फिफ्थ लॉर्ड 10थ लॉर्ड के साथ आ गया पंचमेश और दशमेश का संबंध आ गया यस तो यह बात पक्का है लेकिन हां नवांश को जरूर यहां कंसीडर करना है कि वहां उसकी स्थिति क्या है नहीं तो फिर आप वो मिस कर जाओगे लेकिन स्टिल जिसका पंचमेश और दशमेश एक साथ होगा उसको इस जीवन में जो मान सम्मान मिलेगा जो ख्याति मिलेगी जो स्टेबिलिटी मिलेगी करियर में वो इसी कारण से मिलेगी क्योंकि अपने पिछले जन्म में इसने कोई कार्य ऐसे अवश्य किए हैं जिसके
(22:22) कारण से इस जन्म में इसको ख्याति मान प्रतिष्ठा पद सब चीजों की प्राप्ति होगी। हम तो यह ना एक एक तरह का एक चक्र है। हम भाग्य चक्र जिसको बोले तो चल रहा है। हर किसी का चल रहा है। लेकिन यह भाग्य चक्र काम सबका अलग-अलग तरीके से कर रहा है। किसी का पंचमेश लग्न के साथ है। किसी का पंचमेश दूसरे घर के साथ है। किसी का पंचमेश तीसरे घर के साथ है। किसी का पंचमेश चतुर्थ भाव के साथ है। और ऐसे भी बहुत सारे लोग देखे हैं मैंने जीवन में। जिनका पंचम भाव का स्वामी तीन चार ग्रहों के साथ जुड़ जाता है। जैसे पंचम भाव का स्वामी मान लीजिए किसी घर में बैठा है। हम
(23:06) तो अब लग्न का स्वामी भी वहां आ गया। दशम भाव का स्वामी भी आ गया और दूसरे घर का स्वामी भी आ गया। तो अब ये क्या हुआ? यह ऐसे हुआ जैसे स्वयं ईश्वर ने प्रसन्न होकर इसको तथास्तु कह दिया। क्यों? अब इसको पूर्व पुण्य भाव के फल भी प्राप्त होंगे स्वयं को। इसको धन भी प्राप्त होगा, कुटुंबी भी प्राप्त होगा और पद मान प्रतिष्ठा भी प्राप्त होगी। सब चीजें इसको मिलेगी। अब जब हम यह प्रश्न करते हैं ना किसी व्यक्ति को देखकर कि यार यह तो बड़ा पापी व्यक्ति प्रतीत होता है। इसने तो जीवन में अभी कभी ऐसा लगता नहीं इसने कुछ किया है। हमने तो हमेशा इसको लोगों की हानि करते
(23:49) हुए देखा है। लोगों को परेशानी पहुंचाते हुए देखा है। लेकिन पता नहीं हम देख रहे हैं इसको ये निरंतर करता जा रहा है। करता जा रहा है। क्योंकि उसके पूर्व पुण्य जो कर्म है उनका क्षय अभी हुआ नहीं है। और वो क्षय जब तक नहीं होगा तब तक उसका कोई भी चीज उसको आगे बढ़ने से रोक नहीं सकती। यह प्रारब्ध है वो जो लेकर आया है। लेकिन जिस दिन ये क्षय होगा फिर वो जो उसके जो बाकी योग हैं अरिष्ट योग है या और कोई दुर्योग है जो उसको जो हानि पहुंचाएगा वो फिर उसका सर्वनाश कर। अच्छा अगर सर पंचमेश अष्टमेश से संबंध बना ले और बहुत तगड़ा संबंध बना ले कि वो उसकी
(24:31) राशि में वो उसकी राशि में है। हां तो पंचम भाव का जब अष्टम भाव से संबंध बनता है तो ऐसे व्यक्ति को बहुत सारी ऐसी चीजें मिल जाती हैं जिसके लिए उसने प्रयास भी नहीं किया। जैसे हम कहें इनहेरिटेड वेल्थ जो मिलती है। ठीक है? तो आप देखते होंगे बहुत से लोग ऐसे होते हैं कि अपने जीवन में ज्यादा कुछ कर नहीं पाते। किसी भी कारण से उनका योग कह लीजिए कुछ कह लीजिए। अचानक से घर में किसी मुख्य व्यक्ति की जो है मृत्यु हो गई। अब मृत्यु हो गई तो क्या हुआ? वो अपनी वसीयत जो है इस व्यक्ति के नाम करके चला गया। अब नाम करके चला गया तो क्या हुआ? इसको बिना कमाए
(25:11) जो है बहुत सारा धन जो है वो अचानक से मिल गया। तो जितने भी लोग आपको ऐसे दिखेंगे जीवन में जिनको अचानक से बहुत बड़े धन की प्राप्ति हो जाती है वह सब अष्टम भाव के हैं। तो यह योग कुछ ऐसे हालात भी पैदा करता है जहां आपको अचानक से धन लाभ हो सकता है। लेकिन अगर इसको एक और दृष्टिकोण से देखें खासकर जो आध्यात्म के दृष्टिकोण से देखो तो जब पंचम भाव का स्वामी अष्टम भाव के स्वामी के साथ होगा तो यह व्यक्ति को पूर्व जन्मों के कारण इस जन्म में किसी ना किसी प्रकार की सिद्धि प्रदान कर देगा। आपको सिद्धि दे देगा। अब वह सिद्धि एक ज्योतिषी के रूप में भी वह आपको दे सकता
(25:53) है। एक तांत्रिक के रूप में भी आपको दे सकता है या किसी सिद्ध पुरुष के रूप में भी दे सकता है। पर कोई ना कोई सिद्धि अवश्य आपको देकर जाएगा। क्योंकि सिद्धियां कौन से घर से आती है? सिद्धियां अष्टम भाव से आती है। इसलिए जब हम कहते हैं ना कि ज्योतिष तो अष्टम भाव से देखा जाता है। ज्योतिष अष्टम भाव से ही देखा जाता है। लेकिन जैसा मैंने कल कहा था कि ज्योतिष व्यक्ति करता नहीं है। ज्योतिष व्यक्ति से खुद को करवाता है। तो ज्योतिष बनना, ज्योतिष होना फर्क है। ज्योतिष बनना और ज्योतिषी होना फर्क है। क्योंकि ज्योतिषी होना अपने आप में ईश्वर
(26:36) की एक देन है। ईश्वर ने आपको कहीं ना कहीं ब्लेस किया है। तभी आप इस विद्या को कर पाओगे। अन्यथा नहीं कर पाओगे। आप पढ़ लोगे दुनिया भर के ग्रंथ पढ़ लोगे ज्योतिष में लेकिन जब सामने कुंडली आएगी और जब आपके मुख से जो बात निकलेगी वो निकलवाई जाएगी अन्यथा वो सत्य नहीं होगी। इसलिए जो आदमी यह कहता है ना कि मैंने प्रेडिक्ट किया तुमने प्रेडिक्ट किया तुम्हारा अधिकार क्षेत्र था। कर्मनेवाधिकारस्ते लेकिन प्रेडिक्शन सत्य होगी। वो तुम्हारा अधिकार क्षेत्र नहीं है। यह ज्योतिषी को जान लेना चाहिए। मैं यहां पे 10 आदमियों की आप सब लोगों की
(27:22) कुंडलियां देखदेख के 10 बातें यहां बोल दूं हम और बिल्कुल सटीक आधारित पे बोलूंगा। उनके मूल कारणों के कारण बोलूंगा कि ये देखो ये योग बन रहा है। ये होगा ये होगा ये होगा ये होगा। लेकिन उनमें से एक भी प्रेडिक्शन तब तक सत्य नहीं होगी जब तक ईश्वर नहीं चाहेगा वो सत्य। इसलिए ज्योतिष जो है वह 1 5 9 से नहीं किया जाता। वो 4 8 12 से ही किया जाता है। तो ये चीज हमें जाननी बहुत आवश्यक है। आज बहुत सारा डिस्कशन किया है। आज सुबह से हम शुरू हुए थे और अभी एक बहुत इंपॉर्टेंट सेगमेंट बचा है। तो वो देखते हुए जाइएगा आप सभी। लेकिन उससे पहले मैं ना उस चीज की बात
(28:04) करना चाह रही हूं जो आप जिस पर जोर देते हैं। कार्मिक अलाइनमेंट यह कार्मिक अलाइनमेंट क्या है? एंड इज इट पॉसिबल बिकॉज़ मुझे तो उन शब्द से यह समझ में आ रहा है। कार्मिक अलाइनमेंट मतलब जो आपके कार्मिक डेट्स हैं, जो आपके कर्माज़ हैं, चाहे वो प्रारब्ध के हो, मतलब पूर्व जन्म के हो या इस जन्म के हो, उसका अलाइनमेंट करना है। मतलब उसको सही करना है। क्या मैं सही हूं? देखिए कार्मिक अलाइनमेंट पहले मैं एक शब्द को थोड़ा सा करेक्ट कर दूं बिकॉज़ मैंने जो नाम दिया है हम इस थ्योरी को वो कार्मिक अलाइनमेंट नहीं दिया वो कर्मा अलाइनमेंट दिया
(28:37) ओके कर्मा अलाइनमेंट तक नहीं ओके अब अगर मैं आपको इसको बताऊं तो इसका जो आधार है वो सीधे-सीधे भृगुनंदी नाड़ी पर बेस्ड आधारित है। हां ये बेस्ड है। ओके। मैं अगर यह कहने लगूं कि नहीं यह कंप्लीटली मेरा है तो मैं साफ कहता हूं कि यह उस पर आधारित है। अब बात यह आती है कि मैंने इसमें क्या किया? भाई आधार तो मैंने वहां से लिया तो इसमें मेरा क्या है? मेरी सिर्फ इसमें कुछ इंटरप्रिटेशंस हैं जो मैंने अपने अकॉर्डिंग करने का प्रयास किया है। अब उसमें क्या होता है? मैं उसका एक उदाहरण देता हूं आपको कि पहले तो मैं आपको यह बताता हूं इस पे काम करने
(29:17) का मेरी इच्छा क्यों हुई? इस पे काम करने की। लगभग छ सात साल पहले की बात मैं आपको बता रहा हूं। जैसे हमारे घर पर ना एक ज्योतिषी आए। अब उन्होंने क्या है वाइफ की कुंडली देखी और कुंडली देखकर यह कहा कि अगर आपके घर में नरसंतान आएगी तो वो नरसंतान अपनी मां की लीनियज से होगी। मतलब मेरी वाइफ की लीनियज से होगी। मेरी लीनियज से नहीं होगी। ओके। हां। तो हमें भी बड़ा आश्चर्य हुआ कि यार यह कैसे बता रहे हैं कि वह उसकी लीनियर से होगी और उन्होंने बताया कि हो सकता है हम
(30:00) हो सकता है वो व्यक्ति जो आए वो अपनी मां के हम बहुत क्लोज कोई रहा हो उस तरीके से रहा हो। अब जब हमने यह पढ़नी शुरू करी भृगु नंदी नाड़ी तो उसमें हमें पता चला कि जो केतु है वो मैटरनल ग्रैंडफादर को रिप्रेजेंट करता है। केतु मैटरनल ग्रैंडफादर को राहु मैटरनल ग्रैंडफादर मतलब दादाजी। ओके। और केतु मैटरनल ग्रैंडफादर मतलब नाना जी। ठीक है? अब जब आप नाड़ी ज्योतिष की बात करते हैं तो नाड़ी ज्योतिष के अंदर सूर्य जो है वह पुत्र का कारक है। हम सूर्य जो है वह पुत्र का कारक है और जब मैं अपनी वाइफ की पत्रिका देखता हूं तो
(30:46) उसमें सूर्य और केतु का त्रिकोण बना हुआ है। सूर्य और केतु और केतु का त्रिकोण बना हुआ है। कैसे देखेंगे सर? सॉरी आई डोंट। देखिए त्रिकोण का अर्थ ये होता है कि अगर कोई भी ग्रह किसी राशि में स्थित है। हम तो उस राशि को आधार मान के आप उस राशि से पांचवें घर में कौन सी राशि आ रही है? हां वह और वहां से नवम भाव में कौन सी राशि आ रही है वह वह त्रिकोण उनको देख लीजिए वह त्रिकोण कहलाएगा इट इज़ ट्राइन बेस तो भृगु नंदीनाड़ी में यह माना जाता है कि अगर कोई ग्रह एक राशि में बैठे हैं दो ग्रह तो उनको हम युति में मानेंगे और अगर वो त्रिकोण में बैठे हैं तो भी हम उनको
(31:23) युति में मानेंगे। तो अब उन्होंने जब पत्रिका देखी तो हम सीख रहे थे भृगु नंदीनाड़ी थोड़ा पता चल रहा था तो उसमें वाइफ की पत्रिका में सूर्य के ट्राइन में केतु आ जाता है जो कि मैटरनल ग्रैंडफादर को केतु कौन है मैटरनल ग्रैंडफादर और सूर्य कौन है आपकी नरसंतान तो एक कंडीशन क्या बनती है कुछ कुछ ऐसी बनती है कि जो आपको पुत्र आएगा उसका कोई ना कोई लिंकेज जो है वह अपने मैटरनल ग्रैंडफादर से हो सकता है। ठीक है? अब जब हम अपनी कुंडली देखते हैं स्वयं उस जीव की कुंडली देखते हैं जो जो जीव जन्मा है उसको किस ग्रह से देखते हैं जीव को?
(32:07) बृहस्पति से। अपनी कुंडली में। जब अपनी कुंडली में हम अपने बारे में विचार करते हैं तो बृहस्पति से करते हैं। अकॉर्डिंग टू भृगु नंदीनाड़ी। तो अगर मां की पत्रिका में सूर्य केतु का योग है जो यह बता रहा है कि पुत्र जो प्राप्त होगा उसका संबंध नाना से हो सकता है। तो पुत्र की पत्रिका में भी तो संबंध केतु से होना चाहिए अगर वास्तव में वो है। बिल्कुल तो मेरे बेटे के पत्रिका में बृहस्पति का संबंध केतु से ही है। और मैं आपको एक बड़ी विचित्र बात बताता हूं के इनके नाना जी का जो देहांत है वह 24 मार्च को हुआ हम हम और सुबह 8:00 बजे हुआ
(32:50) हम 24 मार्च को सुबह 8:00 बजे हुआ और नाना जी के यहां पर एक जैसे स्पॉट होता है ना आप कहते हो उसको कभी कोई मार्क कह देता है बर्थ मार्क कह देता है लेसन कह देता है काइंड ऑफ उसको बहुत सारे नाम देते हैं बट बर्थ मार्क अब इस व्यक्ति के जो नाना जी हैं उनका देहांत कब होता है? 24 मार्च सुबह 8:00 बजे साथ में एक साथ में थे जिस समय देहांत हुआ। हम अब 24 मार्च को 9:30 बजे पुत्र आता है। वही बर्थ मार्क यहां लेकर आता है। सेम ईयर में? सेम ईयर में नहीं।
(33:33) हां। ईयर तो बहुत बाद में आया। वही सोचूं कि आत्मा तो मतलब इतनी नहीं नहीं नहीं एकदम नहीं है। एकदम नहीं ऐसे नहीं वो करीबन 2011 में गए थे। मतलब 2011 में डेथ हुई थी उनकी। तो 2011 में उनकी डेथ हुई और 2000 अ 22 के अंदर 24 मार्च 2022 को मेरे घर में पुत्र आता है। यहां पर वही मार्क लेकर आता है और सुबह 9:30 बजे आता है। मतलब उनकी सोल 2011 से इतनी अब मैं अब मैं इस चीज पे देखिए मैं इस चीज को बिल्कुल ये नहीं कह रहा कि मुझे पता है नहीं मानिएगा मैं जो वो बताना आपको चाह रहा हूं लेकिन ये चीज इतना बड़ा प्रमाण है
(34:19) मेरे लिए यह बात को मानने का कि ज्योतिष कितना ज्यादा कार्य कर रहा है यानी कि सिंक्रोनोसिटी जो हम बोलते हैं कि चीजें कितना सिंक में काम करती हैं एक दूसरे से ये प्रमाण है इस बात का तो कर्मा अलाइनमेंट की जैसे हमने बात की ना हम तो जैसे-जैसे इस पे आगे काम किया तो बहुत सारी चीजें पता चली जैसे एक बहुत अच्छी प्रेडिक्शन इसमें ये आती है कि अगर आपका बृहस्पति राहु हम एक साथ है हम या त्रिकोण में है हम तो आप अपने फोरफादर का कोई रीकार्नेशन अपने फोरफादर का एंड यू कुड बी योर ग्रैंडफादर आल्सो डी1 डी9
(35:02) डी1 एंड डी9 9 स्पेशली मैं कहूंगा D9 हम राइट डी1 के अंदर भी और D9 में तो वो फिर वो कहते हैं ना जैसे पुख्ता हो जाती है वो चीज कि हां ये पक्का है तो उसमें वो चीज पड़ी तो ऐसीऐसी चीजों को ना बहुत देखा हम और उनको टेस्ट किया कुंडलियों पे लगा के तो समझ में आया कि ये सिर्फ मृगु नंदीनाड़ी को हम एक टेक्स्ट के रूप में नहीं ले सकते ये कंप्लीटली व्यक्ति के जीवन में एक अलाइनमेंट करके दे सकता है। उसको इसका एक उदाहरण देता हूं मैं आपको। पहले तो यह समझते हैं कि यह हमें प्रारब्ध को समझने में किस तरीके से हमारी मदद करती है और फिर कि इससे एलाइनमेंट हम कैसे करते हैं?
(35:46) दोनों पर बात करेंगे। आपने सुना होगा कि बहुत पहले जो ज्योतिषी आया करते थे, पुराने ज्योतिषी थे, उनकी प्रेडिकशंस कुछ इस प्रकार की हुआ करती थी कि जिस दिन इस व्यक्ति के प्रथम संतान पैदा होगी, उस दिन के बाद से यह व्यक्ति जो है तरक्की करता चला जाएगा। हम हम कुछ लोग ये बोलते थे जिस दिन इसका विवाह हो जाएगा उसके बाद से इसके जीवन में से आर्थिक तंगी समाप्त हो जाएगी। तो पहले लोग ना बहुत इस प्रकार की जो है वो प्रेडिकशंस दिया करते थे लोगों को। अब वो प्रेडिक्शनंस खत्म हो गई। अब लोगों ने राहु केतु, शनि, साढ़ेसाती इन चीजों पे ज्यादा ले गए लोगों को।
(36:24) तो अब क्या है? अब जब आप इसको देखते हो तो उसमें एक बड़ा अच्छा योग काम करता है। जैसे लेट्स से आपकी अपनी जन्म पत्रिका है। उसमें अगर हमने आपके हस्बैंड को देखना है तो हम किस ग्रह से देखें? मंगल से देखें। तो यदि आपकी जन्म कुंडली में यदि आपकी अपनी जन्म कुंडली में मंगल का संबंध बृहस्पति से बन गया। और मंगल का संबंध शुक्र से बन गया तो मंगल कौन है? हस्बैंड। हम बृहस्पति कौन है? वृद्धि। प्रोस्पेरिटी और शुक्र क्या है? धन, ऐश्वर्य, वैभव। तो हम यह कहेंगे कि जिस दिन इस स्त्री का विवाह होगा, इसके विवाह के उपरांत इसके पति के धन में बढ़ोतरी होगी।
(37:15) और उसके जीवन में हर प्रकार से वृद्धि शुरू हो जाएगी। ओके? वहीं ऐसा नहीं है कि हर किसी के लिए ये प्रेडिक्शन दी जाती है। कुछ जगह टेंशन शुरू हो जाती है। कुछ जगह परेशानियां शुरू हो जाएंगी। तो वहां पर भी आप मंगल के लिंकेज देखोगे कि भाई मंगल जो है कैसे ग्रहों के साथ में लिंक है। राइट? अब यहां पर जब हम एलाइनमेंट की बात करते हैं तो एलाइनमेंट क्या करता है यहां? एलाइनमेंट यह करता है कि मान लीजिए हमने केतु ग्रह उठाया। और केतु किसी व्यक्ति का चंद्रमा के साथ है। किसके साथ है? चंद्रमा। चंद्रमा के साथ है। त्रिकोण में है या एक साथ है? नवांश के अंदर।
(38:01) और ऐसा व्यक्ति किसी भी विचार को लेकर डिस्टर्बड है। हम और कोई भी विचार जो बहुत समय से उसको परेशान कर रहा है। तो यहां पर हम केतु को लेखन लेते हैं। क्या लेते हैं? लेखन मतलब राइटिंग। और चंद्रमा क्या है? इमोशन है। तो यदि किसी कारण से आपका इमोशनल आउटलेट नहीं हो रहा है तो लेखन के द्वारा वो इमोशनल आउटलेट आपका हो जाएगा। यानी कि आप अपनी इमोशनल स्टेट को स्टेबल कर लोगे सिर्फ किस चीज के चलते? लेखन के चलते। इसलिए आप यह उठा के देखिए पत्रिकाएं कि जो व्यक्ति भी चंद्र केतु लेकर आया है नववांश में लेकर आया है वह व्यक्ति जबजब
(38:45) लिखेगा हम तबतब आपको लगेगा उससे पूछना कि जब तुम लिखते हो तो तुम्हें ऐसा लगता है तुम्हारा इमोशन बाहर आ रहा है तो वो कहेगा हां कभी आंसू आने लगते हैं आंसू गिरने लगते हैं मतलब मुझे समझ नहीं आता क्या होता है पर जब लिखता हूं तो ऐसा लगता है कि कोई भाव ऐसा है जो बाहर आ रहा है तो ये किसके लिए रेमेडी हो गई। यह चंद्र केतु के लिए रेमेडी है। अब कहने को हमने इसमें क्या किया? हमने कुछ नहीं किया। हमने दो सिग्निफिकेशंस उठाए। किसके? चंद्रमा मतलब मन या इमोशन। केतु मतलब लेखन राइटिंग। उनको साथ में जोड़ा। तो इमोशनल स्टेबिलिटी किस चीज से आई? लेखन
(39:25) से आई। इसको हमने नाम दिया कर्मा अलाइनमेंट टेक्निक। फिर एक व्यक्ति तो हो गया चंद्रकेतु का। अब दूसरा व्यक्ति है चंद्र राहु। अब एक ने तो अपने इमोशन जो है लेखन के जरिए पूरे कर लिए। उसने लेखन किया तो उसने अपने इमोशन निकाल दिए। लेकिन उस व्यक्ति का क्या जो चंद्र राहु लिए बैठा है? हम अब वो कहेगा भाई जब ये इमोशनल स्टेबल हो सकता है तो मेरी इमोशनल स्टेबिलिटी मुझे कहां से मिलेगी? हम तो अब आपको दो तरीके से इसको समझना पड़ेगा। कि अगेन चंद्रमा कौन है? मान राहु कौन है? अब्सॉर्बर जिसने अब्सॉर्ब किया है। मतलब चंद्रमा राहु वाला व्यक्ति कौन है जो इमोशंस को
(40:09) रिलीज नहीं करता। इमोशंस को अब्सॉर्ब करता है। अच्छा होगा तो भी उसको अब्सॉर्ब कर लेगा। बुरा होगा तो भी उसको अब्सॉर्ब कर लेगा। अब वो कई दफा अनअवेयर हो जाता है अपने चंद्रमा राहु अपने इमोशंस को लेकर। और कई बार वो दूसरे व्यक्ति के महसूस किए इमोशन से खुद को आइडेंटिफाई कर लेता है। ये तो मेरा इमोशन है। हम और उसके कारण क्या होता है? उसको इमोशनल ओवरवेल्मिंग हो जाती है। जैसे कई लोग जो हैं वह भावनात्मक निर्णय के चलते अपने को फंसा लेते हैं। निर्णय क्लेरिटी से लिया जाए तो आपको कहीं ना कहीं अच्छे फल देगा और भावनात्मक लिया जाए तो वह किसी भी दिशा में जा सकता है,
(40:51) अच्छा भी जा सकता है, बुरा भी जा सकता है। तो चंद्रमा राहु वाले व्यक्ति जितने भी होते हैं जिनके एक साथ में चंद्र राहु नववांश में या त्रिकोण में चंद्रमा राहु हो ऐसे व्यक्ति की कभी भी आप कुंडली उठा के देखिएगा उनसे पूछिएगा आप अपने इमोशंस के चलते कितनी बार ट्रैप हुए तो वो कहेंगे हम ट्रैप ही अपने इमोशंस के चलते होते हैं और कोई चीज हमें ट्रैप ही नहीं करती क्लियर बोल देंगे अब सवाल यह उठता है कि जिस कर्मा अलाइनमेंट टेक्निक की हम बात कर रहे हैं वो चंद्रमा राहु को क्या कह रही है हम कि आपको कैसे बचना है? बिकॉज़ आप तो अब्सॉर्ब करोगे।
(41:29) तो अब्सॉर्ब करने वाला व्यक्ति जो होता है जो भावनाओं को इमोशंस को अब्सॉर्ब करता है वो एक कंटेनर बन जाता है। लाइक वो कंटेन कर रहा है। कह रहा है लाओ भाई मेरे पास जगह है तो मैं इमोशंस जो है अपने भीतर भर लूं। अब जब वो ओवरवेल्म हो जाएगा उसका जो मानसिक स्तर है वह थोड़ा हिलने लगेगा। गड़बड़ाने लगेगा तो वो मांगेगा उपाय कि उपाय क्या है? अब हम कहेंगे कि जो कंटेनर आपने अपने इमोशंस से भर लिया है अब उसको खाली करो। खाली करोगे उसको। अब खाली कैसे करोगे? अब खाली करने का तरीका है ग्राउंडिंग। अभी हम इस घास पे बैठे हुए हैं। हम नंगे पांव बैठे हैं।
(42:07) हम ठीक है? बेयर फूट है। हम अभी क्या हो रहा है? अगर हम अननोइंगली देखें तो पांव जो है वो यहां जुड़ा हुआ है। ठीक है? अर्थ से जुड़ा हुआ है। ये क्या हो रहा है? ये ग्राउंडिंग हो रही है। दिस इज व्हाट वी कॉल ग्राउंडिंग और इसको अर्थिंग भी कह सकते हैं। अब यह क्या कर रही है? यह यह कर रही है कि मान लीजिए मेरे चार्ट में चंद्र राहु का कॉम्बिनेशन है और वह चंद्रमा राहु का कॉम्बिनेशन कहीं ना कहीं मेरे करियर के साथ में कोई रिलेशन बना रहा है। तो इसका अर्थ क्या है? कि अगर मैं ग्राउंडिंग करता हूं तो मैं अपने इमोशंस को स्टेबल रख पाऊंगा जिसके कारण मेरा करियर भी सुचारू
(42:49) रूप से चल सके। अन्यथा अगर मैंने ग्राउंडिंग नहीं की तो यही इमोशन ओवरवेल्मनेस के कारण मेरे ऊपर हावी हो जाएंगे और उन इमोशंस के चलते मैं कोई ऐसा निर्णय ले लूंगा जो आगे चलके मेरे ही करियर को डिस्टर्ब करे और ऐसा होता है लोगों के साथ। इसलिए जिस किसी के चार्ट में मैं चंद्रमा राहु देखता हूं तो मैं कैट के अनुसार क्या कहता हूं आप ग्राउंडिंग कीजिए। आपका कोई इलाज नहीं है। लेकिन यहां एक बहुत इंपॉर्टेंट चीज जो कैट करती है वो डिफरेंशिएशन है। डिफरेंशिएशन है। क्या कि अगर आप यह रेमेडी को समझें कि लिखने से व्यक्ति के इमोशन रिलीज होते हैं। इसको हर कोई बता देगा। ये
(43:34) कोई मैंने कोई नई बात नहीं बताई है। पहले भी लोग बोलते आए हैं कि आप डायरी लिखिए। उससे आपके इमोशन रिलीज होते हैं। ये बात भी बहुत लोग बताते हैं। आप ग्राउंडिंग करिए। आप अर्थिंग कीजिए। उससे आपको बहुत कामनेस फील होती है। कैट ये बताता है कि ग्राउंडिंग किसके लिए उपयोगी है और लेखन किसके लिए उपयोगी। हर व्यक्ति के लिए लेखन काम नहीं करेगा। मेरे चार्ट में चंद्र राहु है तो मैं लिखने बैठूंगा तो उससे मेरा कोई इमोशनल स्टेबिलिटी नहीं होने वाली क्योंकि मैं रिलीज वही करूंगा ना जो भीतर है जो मेरा कंटेन किया हुआ है उसको ग्राउंड ही करना
(44:10) पड़ेगा उस ऊर्जा को ग्राउंड करना पड़ेगा और जो स्वयं का है उसको रिलीज करना पड़ेगा जो स्वयं की बेचैनी है उसको क्या करना पड़ेगा उसको रिलीज करना पड़ेगा इसलिए चंद्रकेतु विल गिव यू रिलीफ थ्रू राइटिंग एंड चंद्र राहु विल विल गिव यू रिलीफ थ्रू ग्राउंडिंग। ये दोनों में भेद है। यही कर्मा अलाइनमेंट टेक्निक का एक छोटा सा मैंने एग्जांपल आपको यहां है। अगर हम बात करने बैठ जाए तो मेरे ख्याल जितने भी ग्रह हैं उनके साथ में जो ग्रह है और फिर उनके साथ में और कोई तीसरा ग्रह जुड़ गया, चौथा ग्रह जुड़ गया तो ऐसे एंडलेस कॉम्बिनेशंस जो है हमारे बनके खड़े हो जाएंगे।
(44:54) आप लोग हमेशा कहते हैं ना कि इलाजी आप अपनी कुंडली तो पूछ लेती हैं लेकिन हमें भूल जाती हैं। तो इस बार मैंने अपनी कुंडली तो पूछी ही पूछी लेकिन मैंने आप सभी के आत्मकारकों यानी कि आपकी कुंडली के हाईएस्ट डिग्री प्लनेट को कैसे डिकोड करना है यह सब राहुल सर से पूछा। मेरे वाले का तो बता दीजिए। अच्छा आपके चार्ट का मुझे बताना मतलब किस सन मार्स सन मार्स का मैं बता दूं ओके देखिए सन मार्स क्या है कि सूर्य क्या है ना सूर्य आत्मकारक है मेरा आत्मकारक भी सूर्य ही है अरे हर किसी का आत्मकारक सूर्य है नहीं मेरा तो हाईएस्ट डिग्री नहीं
(45:37) अच्छा आपका हाईएस्ट डिग्री है बहुत अच्छी बात है तो एक होता है कि आत्मकारक हम जो चर कारक के रूप में मिला डिग्री वाइज और एक आत्मकारक कारक वो होता है जो नैसर्गिक सबकी कुंडलियों में सूर्य ही है। मेरा भी कुंडली में आत्मकारक सूर्य है। इनका भी सूर्य है। हर व्यक्ति का सूर्य है। ठीक है? अब जब सूर्य मंगल के साथ में आता है हम तो यह व्यक्ति जो एक आत्म के रूप में सेल्फ के रूप में आया है। ये कौन है? यह कोई वॉरियर है। यह कोई क्षत्रिय है। अब क्षत्रिय जो है वो ऐसा नहीं है कि वो क्षत्रिय सूर्य मंगल दिख गया। किसी का तो तलवार लेके आपको
(46:15) दिखाई देगा कि वो मार रहा है, काट रहा है। क्षत्रिय इन द सेंस उसके अंदर वो गुण आपको दिखाई देंगे लड़ने के किसी बात को लेकर खड़े होने के। कभी किसी की अगर रक्षा करने का समय आएगा तो उस चीज के तो ये चीजें आपको देखने को मिलेगी। रही बात जब आपका चर आत्मकारक सूर्य है यानी कि हाईएस्ट डिग्री प्लनेट सूर्य है। तो यह आपको क्या बोलता है? आत्मकारक आपको जीवन में कोई ना कोई शिक्षा देने आता है। इस जन्म में आपकी आत्मा जो है वो क्या शिक्षा लेने आई है? वो शिक्षा यह लेने आई है कि आपको कंट्रोल जो है या पावर जो है अगर कभी आपके पास आई तो कभी आप पावर का मिसयूज मत कीजिएगा।
(47:00) क्योंकि आपको सूर्य क्यों मिला है? आपको सूर्य हाईएस्ट डिग्री में क्यों मिला है? क्योंकि आपकी सोल सूर्य को ही क्यों सीखने आई है? सूर्य से क्यों टीचिंग लेने आई है? आत्मकारक सूर्य क्यों बना है? क्योंकि कहीं ना कहीं बहुत हद तक यह पॉसिबल है कि आपने अपने किसी पास्ट लाइफ के अंदर अपनी पावर का गलत यूज किया हो। इसलिए इस जन्म में यह आपको शिक्षा देती है कि अगर कभी जीवन में आपके पास पावर आई तो कभी आपको उसका गलत यूज़ नहीं लेना है। अन्यथा इस जीवन में भी आप उस शिक्षा को नहीं ले पाएंगी जो आपका आत्मकारक आपको देने आए। बात समझे आप राहुल सर तीन लोग स्पीकिंग
(47:49) ट्री के स्टूडियो में एक व्यक्ति थी आकांशिक रिकॉर्ड जो पूरा पढ़ती थी दूसरे एक योगी थे तांत्रिक थे बगलामुखी के साथ और तीसरी एक पास्ट लाइफ रिग्रेशन थेरेपिस्ट थी। इन तीनों को एस्ट्रोलॉजी का नहीं आता कुछ। तीनों से अलग-अलग समय पर अलग-अलग बात हुई है। किसी और कॉन्टेक्स्ट में बात हुई है। मेरे ड्रीम्स के बारे में जो मुझे ड्रीम्स आते हैं, जो मेरा अपना अनुभव रहा है। तीनों ने आपको पता है यही बात कही है कि इलाजी आप पास्ट लाइफ में अपनी पावर का बहुत गलत इस्तेमाल करके आए हैं और इस लाइफ में आपको वही ईगो पावर का गलत इस्तेमाल पावर आ गई तो वह रिपीट नहीं करना है। हाउ
(48:30) इज दैट पॉसिबल कि आप भी वही बात बोल रहे हैं। मतलब इस बात में सच्चाई है। देखिए लाला जी मैं कुंडली ठप्पा लगा रही है। देखिए लाला जी मैं कोई तांत्रिक नहीं हूं। ना मेरे पास कोई ज्ञान है। मेरे पास कुंडलियों पर काम किया हुआ अनुभव है जो मैंने अपने सूत्रों से या अपने परम्यूटेशन कॉम्बिनेशन से लगाया है। लोगों बिल्कुल ठीक है। हां ठीक है। क्योंकि मेरी अपनी अंडरस्टैंडिंग ये कहती है ना एक भाई आपके ग्रह तो सात है ना राहु केतु को हम आत्म आत्मकारक में कंसीडर नहीं करते। हम सात सात ग्रह लेते हैं। उन्हीं में से कोई आपका एक आत्मकारक बनता है जो ग्रह हाईएस्ट
(49:07) डिग्री है। तो मेरा मन सबसे पहले प्रश्न क्या पूछेगा स्वयं से कि आपका आत्मकारक यही ग्रह क्यों बना और कोई क्यों नहीं बना? सही बात है। क्योंकि कहीं ना कहीं व्यक्ति के अंदर ना वह बीज रूपी संस्कार आपको मिलेगा उस ग्रह का जिस ग्रह का आत्मकारक व्यक्ति लेकर आया है। फॉर एग्जांपल आपने तो सूर्य बोल दिया। अब कोई व्यक्ति ऐसा भी होगा जो सुन रहा होगा कि जिसका आत्मकारक जो है चंद्रमा है। अब उसके लिए लेसन क्या है? उसके लिए लेसन यह है कि उसने पिछले जन्म में हो सकता है अपने मातृ धर्म का पालन सही से ना किया हो। इस कारण से उसको चंद्रमा जो है
(49:51) आत्मकारक के रूप में मिला है। शुक्र में अगर किसी को शुक्र के रूप में आत्मकारक मिला है तो आप क्या कहोगे उसको? कि इस जन्म में इस व्यक्ति को वासनाएं को त्याग कर प्रेम करना सीखना होगा। नहीं तो क्या है इस जन्म में भी वह जो वासना के रूप में जो संस्कार आया है वह फिर दोबारा से इसको परेशान करेगा। मंगल अगर किसी का है तो कहीं ना कहीं क्रोध का बीज या लड़ने का जो एक वो संस्कार होता है लड़ने झगड़ने का या क्रोध करने का वो संस्कार कहीं ना कहीं उठ के आया है इस जन्म में। इसलिए जिसका आत्मकारक मंगल होगा उसकी सबसे
(50:37) बड़ी सीख यह है कि उसको अपने चित्त से सबसे ज्यादा अगर किसी एक षड रिपु को दूर करना है वो डर रिपु क्या है वो क्रोध इस कारण से वह ग्रह आया है आत्मकारक में नहीं तो सारे ग्रह आत्मकारक होते ना आपके एक ही क्यों बना वो बस इतना विचार कर लोगे तो आपको अपने आप ही वह दृष्टि जो है वह ईश्वर दे देगा कि हां यह ग्रह जो है क्या है। एक सूर्य जो है वह सबसे अच्छा कार्य कब करता है? सूर्य सबसे अच्छा कार्य तब करता है जब वो अपनी अथॉरिटी को कंस्ट्रक्टिव रूप से यूज करता है कि अगर मुझे ईश्वर ने अथॉरिटी दी है तो उसको मैं कंस्ट्रक्टिव रूप से कैसे यूज़ करूं? एक
(51:23) बात कही गई है विद ग्रेट पावर कम्स ग्रेट रिस्पांसिबिलिटीज। यस तो जिसका आत्मकारक सूर्य होगा उसको यह रियलाइज करना जिसका आत्मकारक मंगल है हम उसको क्या कहोगे गुस्सा कम करना है नहीं क्योंकि कभी-कभी क्रोध भी जो है वो आवश्यक है। ऐसा नहीं है कि आप क्रोध को हटा दोगे। हम लेकिन क्रोध के दो रूप हैं। एक क्रोध व्यक्ति वो होता है जो अपने हित के लिए करता है और एक क्रोध वो होता है जो व्यक्ति किसी की रक्षा के लिए करता है। एक किसी का विध्वंश कर रहा है। एक किसी का रक्षण कर रहा है। तो यहां पर जब मंगल आपका आत्मकारक बन के आए तो आपने अपना जीवन जो है वह रक्षक बन
(52:02) के जीना है। भक्षक बनके नहीं जीना। तभी आप उस आत्मकारक से आत्म साक्षात्कार कर पाओगे। अन्यथा नहीं। बुध, शनि, बृहस्पति वालों का भी बता दीजिए। अरे हिला जी क्या है वो पूरा ना एक वो एक तार जोड़ना पड़ता है वो कि भाई परमात्मा बुलवा कुछ बुलवा कुछ तो बुध जो है आपकी कोई लर्निंग अधूरी रही है कुछ जैसे कहते हैं ना जिसका बुध आत्मकारक होगा ना अपने आप उसका मन कुछ ना कुछ सीखते रहने का करेगा क्योंकि कहीं ना कहीं कोई अधूरी पूरी ख्वाहिश किसी लर्निंग को लेकर रह गई है
(52:47) तो लर्निंग ही उसका मार्ग है। यानी कि ज्ञान मार्ग बोल देते हैं जिससे बृहस्पति के लिए भी हम वही कहेंगे कि दोनों ग्रह जो है कहीं ना कहीं लेकिन बृहस्पति जो है वो विवेक से जुड़ा है। विवेक से जुड़ा है। और विवेक को अध्यात्म की दृष्टि से एक बहुत अच्छे तरीके से जो है विवेक का जो है वह एक डेफिनेशन दिया गया है कि विवेक क्या है? तो अध्यात्म में कहा गया विवेक के द्वारा ही व्यक्ति नित्य और अनित्य में भेद कर सकता है। बिना विवेक के नित्य और अनित्य में भेद नहीं कर सकता। यानी कि एक विवेकी पुरुष क्या होगा? विवेकी पुरुष कहेगा भाई यह
(53:29) शरीर है। आज है कल ऐसा नहीं रहेगा। और जब मैं चला गया तब तो इसका अस्तित्व ही समाप्त हो जाएगा। और जो अविवेकी है उसको क्या लगेगा? अरे इस शरीर से मुझे इतना लाभ हो रहा है। यह शरीर ही मुझे सब कुछ दे रहा है। तो मैं शरीर पर ही ध्यान दूं। तो वह क्या कर रहा है? विवेकी क्या है? विवेक जो है जिसके भीतर वो नित्य को नित्य मान रहा है। और जो अविवेकी है वो किसको मान रहा है? वो अनित्य को नित्य मान रहा है। राइट? तो जुपिटर किस चीज का कारक है? जुपिटर विवेक का कारक है। इसलिए आपने अपने इस जन्म में अपने विवेक के ऊपर कार्य करना है। फिर आता है सैटर्न। तो जिसका शनि
(54:12) आत्मकारक होगा ना ऐसा लगेगा जैसे सारे जगत की रिस्पांसिबिलिटीज सारे जगत की एक्सपेक्टेशंस आपने उस पर डाल दी। या बहुत से लोग ऐसे होते हैं जो अपने पिछले जन्म में ना अपने काम को लेकर कुछ करना चाहते थे। दे वर हैविंग सो मेनी ड्रीम्स कि यार मैं यह काम करूं, मैं वह काम करूं। अब मान लीजिए आज के जमाने में कोई व्यक्ति है। उसने बहुत मेहनत करी, बहुत प्रयास किया। उसने सोचा मैं एक अंपायर खड़ा कर दूं। ठीक है? लेकिन खड़ा करते करते कहीं उसकी मृत्यु हो गई। तो आपको नहीं लगता कि वो संस्कार के रूप में वो बीज जो है उसके चित्त में समा गया कि
(54:49) मैं यह नहीं कर पाया। क्योंकि मृत्यु शैया पे कहीं ना कहीं उसको वो विचार जरूर आएगा कि मैं यह कार्य कर रहा था और मैं इस कार्य को पूर्ण नहीं कर पाया। तो अब अगले जन्म में वही संस्कार जो है वह फिर चित्त लेकर आएगा और फिर जो आत्मा है वह कुछ बड़ा करने का प्रयास करेगी क्योंकि छटपटाहट है ना वो उस चीज की तो वह उसको पूर्ण करने का प्रयास करेगी कि मैं अपना कुछ कर्म करूं कुछ बड़ा कर्म करूं यह शनि आत्मकारक दिखाता है इसलिए आप जितने भी लोग उठाएंगे जीवन में जितनी छटपटाहट आप काम को लेकर किसी कार्य को लेकर शनि आत्मकारक के रूप में देखेंगे लोगों की कुंडलियों में इतना
(55:30) आप किसी के चार्ट में नहीं देखेंगे सबसे ज्यादा मिलेगी ठीक है तो मेरे ख्याल सातों का कंप्लीट हो गया बोलने को तो अब हम बहुत बोल सकते हैं आत्म कारक पे भी लेकिन अभी के लिए मैं समझता हूं इतना बहुत शुक्र शुक्र बुध मंगल मंगल सूर्य चंद्रमा चंद्रमा पांच ही हुए हैं नहीं हो गए ना सूर्य हो गया चंद्रमा हो गया हम मंगल हो गया हम बृहस्पति हो गया हम शनि हो गया बुध हो हो गया। बुध हो गया। शुक्र भी हो गया। शुक्र भी कंप्लीट हो गया। परफेक्ट इस सेगमेंट में इतना ही। अब हम आपका आपको जो जानने की जरूरत है और उस विषय में आपको जागृति की बहुत जरूरत है। अगले सेगमेंट पर
(56:12) उस पर बात करेंगे और वह यह है कि जो लोग इतनी वेगली बोल देते हैं कि आपकी कुंडली में तो यह दिख रहा है कि किसी ने आपके ऊपर जादू टोना किया है। आपके ऊपर कोई आत्मा का साया आ गया है। क्या यह कुंडली से देखा जा सकता है? और क्या वास्तव में राहुल कौशिक की नजर में यह चीजें एग्ज़िस्ट करती हैं? किस रूप में करती हैं? इस पर बात करेंगे। हम पहाड़ी इलाके में थे। थोड़ी-थोड़ी ठंड बढ़ गई थी। इसके बाद हमने एक-एक कप चाय पी और कर्मा और पास्ट लाइफ की बातों से हम बढ़े एनर्जीस की तरफ। रात के लगभग 11:00 बज चुके थे और हमने बात शुरू की सुपर
(56:54) नेचुरल एक्सपीरियंसेस पे। जहां राहुल सर अपनी लाइफ के ऐसे सुपर नेचुरल एक्सपीरियंसेस के बारे में मुझे बता रहे थे जो एक्चुअली मुझे गूसबम्स दे गए और फिर एक इंटेंस सेशन के बीच अचानक से लाइट चली गई। उस वक्त कुछ ऐसा महसूस हुआ जिसे शब्दों में समझना मुश्किल है। वो सेशन हमने इस पार्ट में से हटा दिया है क्योंकि वो पूरा ही नहीं हो पाया था। लेकिन अगर आप एक्सपीरियंस पूछें तो वह बहुत इंटेंस सा कुछ था जिसको मैं बता ही नहीं सकती। लाइट आने के बाद हमने महादेव को याद करके एनर्जीज़ पर अपनी बातचीत
(57:39) दोबारा शुरू की। एनर्जीज़ क्या हैं? और किन लोगों को यह ज्यादा फील होती हैं? क्या देव देवी काली मां यह सारी एनर्जीज हमारे अंदर वाकई में आती हैं? इन सबके पीछे की जितनी मिस्ट्री है राहुल सर ने उसको एस्ट्रोलॉजिकल पॉइंट ऑफ व्यू से डिकोड किया है। अगर आप मनोवैज्ञानिक दृष्टिकोण से देखेंगे ना तो आपको यही समझ में आएगा कि ऊर्जा एक्सिस्ट करती है और कुछ लोग जो है उन ऊर्जाओं को लेकर रिसेप्टिव बहुत होते हैं। इसलिए वो उसको सोख लेते हैं बहुत जल्दी और जिस भी प्रकार की ऊर्जा होगी वो उससे वैसी कराने लगेगी। अब यह तो हमने भूत प्रेतों की बात की है। क्यों?
(58:22) बहुत से लोग देव की भी तो बातें करते हैं। देव आ गए। माता आ गई तो वो क्या वो माता जो है वो पूरे जगत को चला रही एक आदमी में आ जाएंगी। माता आई या नहीं आई। लेकिन माता से जुड़ा जो भाव है वो आ गया। वो आ गया। परफेक्ट। तो माता का आना या माता से जुड़ा भाव का आना वो डिफरेंट है। इसलिए यहां पर सजगता आवश्यक है। तो जिसको आप कह रहे हो यह पजेस हो गया है। वो पस नहीं हो गया। इसने कोई ना कोई चीज सोक ली है अनअवेयरनेस के चलते जो इस पर हावी हो गई है। क्यों? ये मानसिक रूप से उतना सशक्त नहीं था। अब यहां हम बात तो ज्योतिष की कर रहे हैं। यह
(59:00) तो चलो एक दृष्टिकोण हमने समझ लिया कि ऐसा कुछ हो सकता है। ज्योतिष कैसे काम करता है यहां पे। तो किसी भी चीज का अब्सॉर्प्शन करने वाला एक ही ग्रह है। हम सुबह से बात कर राहु राहुल हर चीज को अब्सॉर्ब राहु ही करता है। और ऊर्जा कौन है? मंगल मंगल तो मंगल और राहु जिस कुंडली में हम एक साथ होंगे या त्रिकोण में होंगे नवांश में बात कर रहा हूं मैं स्पेशली लग्न की बात नहीं कर रहा। तो यह व्यक्ति जो है ऊर्जा को अबजॉर्ब करता है। इसकी बॉडी जो है वो ऊर्जा को अब्सॉर्ब करती है। अब बॉडी
(59:46) जब ऊर्जा को अब्सॉर्ब करेगी तो बॉडी आइडेंटिफाई नहीं कर पाएगी कि वो ऊर्जा सही है या गलत। बॉडी का अपना तरीका है रिसोंड करने का। लेकिन अगर आपका कॉन्शियस स्ट्रांग है, आपका मनस स्ट्रांग है तो एटलीस्ट वो आइडेंटिफाई कर लेगा कि क्योंकि मैं इस जगह यहां गया था और उसके बाद मुझे अच्छा फील नहीं हो रहा तो उस आइडेंटिफिकेशन के चलते वो कुछ स्टेप्स ले लेगा जिसके चलते वो उनसे बाहर आ जाएगा। लेकिन अगर चंद्रमा वीक हुआ कमजोर हुआ तो वो क्या सोचेगा? वो यह सोचेगा किसी ऊर्जा ने मेरे ऊपर कब्जा कर लिया है और वह इस बात को स्वीकार लेगा अंतर अंतर
(1:00:22) का मून राहु मार्स तीनों साथ आ गए तीनों साथ में हो तो उस केस में तो बहुत हद तक संभव है कि वो ये मान ही लेगा कि उसके भीतर ये चीज आ रही है। मान ही लेगा वो और फिर मैं आपको बता रहा हूं कि ऐसा नहीं है कि हमेशा भूत प्रेत को ही इस चीज से लीजिए। मैं इसका एक बहुत छोटा एग्जांपल आपको देता हूं। बहुत सल एग्जांपल हम ये सब लोगों के काम आएगा जो लोग बहुत परेशान रहते हैं मेंटली यस क्योंकि ये योग ऐसा है अगर नहीं समझा बहुत परेशान रहोगे चंद्र मंगल राहु ठीक है चंद्रमा मंगल राहु त्रिकोण में अगर किसी के दूसरे घर में छठे घर में 10वें घर में
(1:01:07) आ जाए कहां लग्न कुंडली या नववांश कुंडली में नववांश में मैं ज्यादा ज्यादाेंस देता हूं हमेशा क्योंकि सूक्ष्म रूप है लगन का तो अगर किसी का चंद्र मंगल राहु नवांश में प्रथम भाव में पंचम में नवम में आ जाए तो यह क्या हो गया ये एक ट्राइन बन गया एक पांच नौ का या फिर दूसरे घर में छठे घर में 10वें में आ जाए ये एक ट्राइन बन गया तीसरे में सातवें में 11व में आ जाए यह ट्राइन बन गया और चौथे में आ जाए आठवें में आ जाए 12व में आ जाए यह एक ट्राइन बन गया राइट अब इसको समझिए दूसरा अगर फैमिली का क्या है? फैमिली। छठा घर किस चीज का है? डिस्टरबेंसेस का।
(1:01:51) और दवां घर किस चीज का है? कर्म का है। एक्शंस का है। तो मान लीजिए किसी के 2 6 10 में मून, मार्स राहु का एक कॉम्बिनेशन बन रहा है चंद्र, मंगल, राहु का। तो जो भी फैमिली के डिस्टरबेंसेस होंगे वो यह व्यक्ति जो है अननोइंगली सोख लेगा। और सिर्फ उन इमोशंस को नहीं सोखेगा। उन इमोशंस के पीछे जो द्वंदात्मक ऊर्जा है उसको भी सोख लेता। इसलिए जिनके दूसरे छठे और 10वें घर में आपको नववांश में राहु मिले ना यह बहुत दिन तक अपने घर में रह नहीं पाते ये लोग। बहुत दिन तक नहीं रह सकते अपने घर में। क्यों नहीं रह सकते? क्योंकि बॉडी का अपना
(1:02:33) एक तरीका है ना। अगर ब्रेन जान भी नहीं पा रहा, अगर माइंड जान भी नहीं पा रहा कि यह मैं क्यों कर रहा हूं। लेकिन बॉडी तो कुछ ना कुछ कहेगी ना बॉडी कहेगी नहीं यहां मेरे को बेचैनी हो रही है मेरे को कंपन फील हो रही है वो बाहर भागेगा तो बाहर जाएगा वो पार्टी करेगा दोस्तों के साथ मिलने जाएगा या जो भी उसका एक तरीका है अपने आपको रिलैक्स करने का वो वो करेगा लेकिन घर में नहीं रुक पाएगा यही 3 7 11 में अगर आ जाए तो तो हम कम्युनिकेट कौन से भाव से करते हैं तीसरे से इंटरेक्ट कौन से भाव से करते हैं सप्तम और एकादश भाव किस चीज का है? मैत्री संबंध
(1:03:12) हो गया या कुछ कुछ भी हो गया, कोई डिजायर हो गया। अब जिसके तीसरे सातवें 11वें घर के अंदर यह कॉम्बिनेशन बनेगा चंद्र, मंगल, राहु का। अब वो व्यक्ति जिस व्यक्ति से इंटरेक्ट कर रहा है। अब वो व्यक्ति शब्द कुछ भी कहे लेकिन उन शब्दों के पीछे जो उसका इंटेंट है, जो उसका भाव है, वह तो कैसा भी हो सकता है ना। आप उसको कैसे पकड़ोगे? उसको नहीं पकड़ सकते ना। आप मैं आपसे बात तो बहुत अच्छी कर रहा हूं लेकिन जो मेरे पीछे जो एक एलिमेंट काम कर रहा है ऊर्जा का वो नेगेटिव है और आपके चार्ट में चंद्र मंगल राहु जो है वो तीसरे सातवें और 11वें घर
(1:03:50) में है। आपको यह समझ नहीं आएगा कि क्या हुआ। लेकिन कहीं ना कहीं आपका शरीर और आपका अंतर्मन कुछ ना कुछ आपको सिग्नल देना शुरू कर देगा। आपको बेचैनी शुरू हो जाएगी। आपको लगेगा अभी तक तो सब ठीक चल रहा था। अब मुझे बेचैनी हो रही है। अब मैं यहां बैठ नहीं सकता। क्यों नहीं बैठ सकता? अभी अचानक से क्या हो गया? क्योंकि आपके बॉडी ने उस चीज को अब्सॉर्ब कर लिया जो एनर्जी के रूप में इस व्यक्ति के बैक ऑफ द माइंड काम कर रही है। यस। तो ये जो कांसेप्ट अगर समझ लिया जाए ना तो इससे बहुत लोग तर जाएंगे। वह भी तर जाएंगे। जो यह सोचते हैं कि वह
(1:04:36) उन पर भूत प्रेत बहुत वो करते हैं। वह भी तर जाएंगे। जो लोग मानसिक रूप से बहुत परेशान रहते हैं और अभी हम ईश्वरीय कृपा से एस्ट्रोसाइकोलॉजी या मनोवैज्ञानिक ज्योतिष पे कार्य कर रहे हैं। कार्य कर रहे हैं। क्योंकि जो वाइफ है हम वो अपने आप में मनोचिकित्सक है। साइकोथरेपिस्ट भी रही है। साइकेट्रिस्ट भी रही है। उसने काउंसलिंग भी किया है लोगों की। हम तो बहुत से कांसेप्ट मुझे उससे समझने को मिले। फिर क्या है? बहुत से हमारे स्टूडेंट्स भी ऐसे हैं जो मनोविज्ञान से जुड़े हुए हैं। तो हम ज्योतिष और मनोविज्ञान के साथ में मिलकर कुछ ऐसा
(1:05:19) कार्य कर रहे हैं ताकि लोगों को ना हम मेंटली ये समझा सकें कि वो जिस स्टेट में है क्यों? वो स्टेट में क्यों है? ये क्यों का आंसर लोग? क्योंकि क्योंकि फिजिकल नंबनेस एक बार को व्यक्ति झेल सकता है। लेकिन इमोशनल नंबनेस बहुत खतरनाक है। क्यों? अगर मेरा एक हाथ जो है वह काम करना बंद भी कर दे तो कहीं ना कहीं यह हाथ और मेरे दो पैर मेरा बहुत सा काम कर देंगे। लेकिन अगर दिमाग काम करना बंद कर दे तो यह शरीर होते हुए भी कुछ नहीं कर पाएगा। तो मैं समझता हूं कि लोगों को मनोवैज्ञानिक स्तर पर जागरूक करने की बहुत आवश्यकता है और ईश्वर की कृपा रही तो हम
(1:06:05) इसमें काम कर रहे हैं और बहुत जल्दी कुछ ऐसा लेकर आएंगे और उसके लिए कोई हमारा प्रयास रहेगा कि हम उसको कुछ इस तरीके से ना बताएं कि हमने कोई टेक्निक वो की है या कुछ की है। हम उसको कुछ इस तरीके से रखेंगे ताकि हर व्यक्ति उससे घर बैठे लाभान्वित हो सके और उसको यह पता चल सके कि जिस स्टेट को वो फील कर रहा है जिस भी मानसिक स्थिति से वो गुजर रहा है उसके पीछे कारण क्या है उसका बैकग्राउंड क्या है और अगर उसकी स्थिति बहुत खराब हो चुकी है तो उसका सॉल्यूशन क्या है हम तीनों स्तर पर काम कर रहे हैं लेकिन अभी जो मैं आपको बता पा रहा हूं वो यही बता पा रहा हूं कि
(1:06:48) अगर आप मुझसे यह पूछेंगे कि भूत प्रेत होते हैं या नहीं है तो शायद मेरे पास उसका उत्तर नहीं होगा क्योंकि मैंने जो चीज देखी नहीं है मैं उसको नहीं एक्सप्लेन कर सकता। लेकिन अगर आप पूछेंगे मुझसे कि क्या आपने अपने जीवन में ऐसा कुछ अनुभव किया है तो मैं कहूंगा अनुभव के रूप में या उस ऊर्जा के रूप में मैंने एक बार नहीं अनगिनत बार उस चीज को ऑब्जर्व किया है। अगर मैं यह कहूं कि इस समय भी जब जहां हम बैठे हैं, मैं महसूस कर सकता हूं कि इस समय यहां की ऊर्जा कैसी है। तो मैंने वहां भी उसको महसूस किया है। तो इसको लेकर मैं एक ही बात कहूंगा ताकि सब लोगों को इसका
(1:07:33) पता चल सके कि इफ यू आर अ सेंसिटिव पर्सन हम अगर आप बहुत सेंसिटिव हैं चाहे इमोशनली चाहे एनर्जी वाइज तो बिल्कुल भी आपको घबराने की या अपने आपको कमजोर समझने की गलती बिल्कुल भी मत करिएगा। यह ईश्वर ने आपको अवेयर होने के लिए एक टूल दिया है जिसको आप अवेयरनेस के चलते खुद भी अवेयर हो सकते हैं और अपने जैसे बहुत से लोगों को इस प्रॉब्लम से निकाल सकते हैं क्योंकि मैं खुद इस चीज को मैंने फील किया है। फेस किया है और 5 साल नहीं 10 साल नहीं करीबन 40 साल इस चीज को फेस किया है मैंने अपने जीवन में। मैंने खुद यह ऑब्जर्व किया है कि कब आप
(1:08:21) इमोशनल सेंसिटिविटी के चलते लोगों के लिए एक इमोशनल डंपिंग ग्राउंड बन जाते हो। लोग आते हैं अपना इमोशन जो है आपके ऊपर डंप करके चले जाते हैं और आप समझ नहीं पाते कि आपके साथ जीवन में क्या घटित हो रहा है। आप रो रहे हो। आप बेचैन हो रहे हो। आपको यह समझ में नहीं आ रहा कि अभी मैंने इस आदमी से बात ही तो करी थी 5 मिनट पहले। अब मैं अचानक से डिस्टर्ब क्यों हो गया? तो यहां पर अवेयरनेस ही आपको बचा सकती है। और मैं धन्यवाद करता हूं अपने गुरु का जिसके कारण ज्योतिष आया। ज्योतिष के माध्यम से एटलीस्ट मैं समझ पाया कि जब आप बहुत इमोशनली सेंसिटिव होते हो तो यह कोई
(1:08:59) कमजोरी नहीं है आपका सेंसिटिव होना। यह बहुत बड़ी शक्ति है अगर आप जागरूक हो जाओ तो। क्योंकि एक बार आप जागरूक हो गए ना तो आप सिर्फ उन इमोशंस को नहीं पकड़ोगे। आप एक मिरर बन जाओगे सामने वाले के लिए भी और आप उनके लिए भी एक सहायक व्यक्ति का काम करोगे जो ऑलरेडी इस पेन से गुजर रहे हैं। और स्पेशली आपको बता दूं कि ये जो कांसेप्ट कहा जाता है आज की डेट में एमैथ और नार्सिस्ट का इसमें मैक्सिमम केसेस में जो पज़ेस होने की बात होती है कि यार इसके ऊपर कुछ आ गया, उसके ऊपर कुछ आ गया। ये किनके ऊपर आता है? ये एमैथ्स के ऊपर आता है। नार्सिस्ट के ऊपर कभी नहीं आएगा।
(1:09:44) सही है। नार्सिस्ट व्यक्ति के ऊपर कभी कोई जो ऊर्जा है ना वो उसको पज़ेस नहीं करेगी। एमैथ को कर लेगी। क्यों कर लेगी? क्योंकि एमैथ बेचारा एक अननोन कंटेनर है। एक एक वो ड्रम है। एक तरह का खाली ड्रम जो बेचारा घूम रहा है अननोइंगली। और जिस व्यक्ति को देखो वो आके उस पे अपना इमोशनल गार्बेज जो है उस पे डंप करके चला जाता। जैसे खाली प्लॉट की हालत होती है ना कॉलोनीज़ में आपने देखा हो कि भाई खाली पड़ा हुआ है। कोई पूछने वाला है नहीं डाल दो। वही हालत बेचारे एम्पैथ की होती है कि वो कह किसी को कुछ पाता नहीं। क्योंकि वो जीवन भर यह समझता रहता है कि यह दुख मेरा है। यह
(1:10:24) पीड़ा मेरी है। यह बेचैनी मेरी है। जबकि पहचान ये नहीं पाता कि वो दुख बेचैनी और पीड़ा उसकी नहीं है। यह उस पर डाली गई। तो यहां इस चीज से लोगों को निकालना बहुत जरूरी है और वह हर वह व्यक्ति जो बेचारा ना नहीं बोल पा रहा अपने इमोशनल एक्सप्लइटेशन को रोक नहीं पा रहा उनको यह जानने की जरूरत है अवेयर हो जाओ। अवेयर हो जाओगे तो अपने लिए अपनी ही शक्ति खुद जो है उसका निर्माण कर दोगे और अवेयर नहीं हुए तो यही इमोशनल एमथी एक दिन आपके लिए सुसाइडल बन जाएगी। यह आपको ही खा जाएगी। क्योंकि दूसरे व्यक्ति का डंप किया हुआ जो
(1:11:12) गार्बेज है ना वो एक दिन ऐसा विभत्स रूप ले लेगा कि वह स्वयं दानव बनकर सबसे पहले आपको ही निगल जाए। एक चीज और है कि जब जागरूकता आएगी ऐसे व्यक्ति जो इतने इमोशंस लिए घूम रहा है तो वो सबसे पहले क्या करेगा क्योंकि अभी तक उसका एक टेंडेंसी क्या रही है मान लीजिए उसको कोई डिस्टर्ब कर गया तो तो वो कुछ कह नहीं पाया जब वो डिस्टरबेंस बहुत बढ़ गई बहुत ज्यादा उस पे डंपिंग हो गई तो अचानक से वो रिएक्ट कर गया क्योंकि एक बॉडी की एक कैपेसिटी है ना कितना वह उसको झेल सकती है। जब वह कैपेसिटी यहां भरेगी तो क्या होगा? वह अचानक से रिएक्ट
(1:11:57) कर देगा। लेकिन जिस दिन इसको अवेयरनेस आ जाती है इस बात की कि ये जो जिसको आप क्या अंग्रेजी में हम वर्ड बोलते हैं ना दिस शिट इज नॉट माइन बेसिकली कि भाई ये आपका है। आप इसको रखिए। तो व्यक्ति जागरूक हो जाता है। अब वो जैसे ही जागरूक होगा वो सामने वाले का गार्बेज लेने से इंकार कर देगा। और जैसे ही वह इंकार करेगा तो सबसे पहला एक जो स्टेटमेंट उसको सुनने को मिलेगा जानते हो क्या मिलेगा उसको सुनने को मिलेगा यार तुम ना बहुत बदल गए हार्टलेस हो गए हो तुम्हारे अंदर इमोशंस नहीं रहे तो ऐसे आदमी को पहले तो अपने को जागरूक करना है। जागरूक करने के बाद सशक्त करना
(1:12:41) है और सशक्त करने के बाद उसको गिल्ट से भी फ्री रहना है। क्योंकि उसके ऊपर गिल्ट डाला जाएगा ताकि उस गिल्ट में उसको ट्रैप करके वही चीजें कराई जा सके जो पहले कराई गई थी। तो आपको इन तीनों चीजों से बचना है और स्पेशली तब जब यह योग आपके जन्म कुंडली में है। चंद्र, मंगल, राहु हर व्यक्ति को बचाना है। हर व्यक्ति को बचाना है जो पीड़ा और बहुत आवश्यक है और जागरूकता ही इसको बचा सकती है। अवेयरनेस ही बचा सकती है। कोई दूसरा उपाय नहीं है। अन्यथा और जगह एक्सप्लइटेशन होगा और कुछ नहीं होगा। इसलिए बोल पा रहा हूं क्योंकि मैं इन सब चीजों से गुजरा हूं
(1:13:27) और गुजरने के बाद मैंने जो जाना है मैं चाहता हूं वह हर व्यक्ति जाने तो आपकी सबसे पहली जिम्मेदारी जो बनती है वो मानसिक रूप से स्वयं को सशक्त करने की बनती है। किसी और की नहीं बनती। ईश्वर ने हर किसी को हाथ दिए हैं, पैर दिए हैं, मस्तिष्क दिया है, सब चीजें दी है। तो आपकी जिम्मेदारी सर्वप्रथम अपने लिए बनती है। आप सशक्त हैं, दूसरे को सशक्त कर पाएंगे। आप अगर सही नहीं है तो कोई भी सही नहीं। आपकी इस बात से ना राहुल सर मुझे 100% मैं कह सकती हूं कि जितने लोग सुन रहे होंगे और अगर वह इंपैथ हैं कुंडली में योग हो ना हो अगर वह इंपैथ हैं और यह चीजें अपनी
(1:14:08) लाइफ में फील कर रहे हैं। ऐसे रिश्तों को लेकर चल रहे हैं। ऐसे दोस्तों को ऐसे ऑफिस के माहौल को लेकर चल रहे हैं ना तो आज की बात से अवेयरनेस भी आएगी उन्हें और उनको लाइफ में बहुत रिलीफ भी महसूस होगा क्योंकि वो गिल्ट होता है ना सर जो दूसरे लोग देते हैं वो इतना भयंकर होता है कि आप खुद से ही लगता है आपको कि आप कितने बुरे हो जबकि वो बुरे हैं वो आपके अंदर अपने इमोशंस डम कर रहे हैं। वो आपको अपने ट्रैप में ले रहे हैं। लेकिन बुरा कौन है आप हो। और फिर जो आपने बात कही ना कि जब आप छोड़ते हो अवेयरनेस जैसे ही आती है ना क्योंकि आप कट ऑफ करते हो मैंने यही किया
(1:14:45) था एंड हर हर उस जगह से कट ऑफ किया जिसने यह इमोशनल डम ग्राउंड बनाया मेरे को उसके बाद जो सुनने को मिलती है ना सर यू वांट बिलीव पहले ना मैं बहुत रोती थी कि मेरे ही दोस्त ऐसे बोल रहे हैं या मेरे ही जो जो इतना पसंद करते थे वो मुझे अहंकारी बोल रहे हैं कि तुम तो अहंकारी हो गई हो। तुम में चार बातें ज्ञान की क्या आ गई? तुम तो अब अब उनकी शिट नहीं ले रही हूं ना मैं तो अब मैं अहंकारी हो गई हूं। लेकिन उनको समझ में नहीं आता है कि आपने मुझे इमोशनली और मेंटली कितना कितना ज्यादा ब्रेक किया है कि मैं अपनी ही पोटेंशियल को पहचानने से
(1:15:20) डरती थी और मैं आपको बोल रही हूं ना मुझे घूस बम्स आ रहे हैं क्योंकि क्योंकि बहुत सारे लोग इस चीजों से गुजरे हैं और गुजर रहे हैं और हिम्मत ना राहुल सर मिल नहीं पाती है क्योंकि हर किसी को आप जैसे लोग नहीं मिलते ना मैं तो बहुत लकी हूं जो आपने शुरुआत में भी पडकास्ट में गाना इससे पहले वाले सेगमेंट में कि आप प्रारब्ध का बहुत अच्छे पुण्य खा रहे हो। ऐसे योग होते हैं। है मेरी कुंडली में योग बट बहुत सारे लोगों की कुंडली में नहीं होते हैं। करेक्ट। तो वो बेचारे कभी समझ ही नहीं पाते हैं। जो गिल्ट लेके खोज ढूंढ वो आई एम सो सॉरी।
(1:15:56) मैं समझ पा रहा हूं। मैं समझ पा रहा हूं। अब एक व्यक्ति है जिसको आपने फिजिकली क्षति पहुंचा दी। तो वह उससे एक दिन में, दो दिन में, 10 दिन में, महीने भर में बाहर आ जाएगा। और एक व्यक्ति है जिसको आपने मानसिक रूप से आघात पहुंचाया है। पता नहीं वो कब बाहर आएगा। और अगर ईश्वरीय कृपा ना रही तो हो सकता है इस जन्म में बाहर ही ना आ पाए। उस चीज दे फीड ऑन योर इमोशंस। दे फीड ऑन योर वलनेरेबिलिटी कि आप की जहां कमजोरी होगी ना उसको फीड करेंगे बट बट जैसा मैंने कहा कि एक दिन आप जागरूक अवश्य होगे। आपको अवेयरनेस पक्का आएगी कि अब इसके बाद
(1:16:44) में मेरा कोई रोल नहीं है। यह व्यक्ति अपने पर है। मेरी कोई जिम्मेदारी नहीं है। तो उसके बाद यह फिर आएंगे ताकि आपको यह एहसास दिलाएं कि आप कितने हार्टलेस हो। आपने इन्हें अबेंडन कर दिया। आपने इनको अबेंडन कर दिया और वो एक तरीका होता है ताकि आप उस गिल्ट के चलते फिर दोबारा से सबमिसिव हो जाओ और सबमिसिव होकर कह दो कि मेरे प्रभु मुझे बताइए मुझसे क्या गलती हुई गलती हुई क्या गुनाह और उसी चीज के जो है यह ताक में बैठे होते हैं। यहां पर ये जो मूवमेंट होता है गिल ट्रिपिंग के बाद का दैट इज द मोस्टेंट
(1:17:30) मूवमेंट जहां पर आपको बहुत ज्यादा सजगता की इनफैक्ट पहले से ज्यादा सजगता की आवश्यकता है क्योंकि इतनी आसानी से उस चीज को जाने नहीं दे सकते। सालों साल जिस व्यक्ति ने इनके लिए कंटेनर का काम किया है। अपने इमोशनल गार्बेज को यह जहां बिना कहे बिना सोचे बिना समझे डंप कर सकते थे। अब वो इनको अचानक से इनके लिए अनअवेलेबल हो गया है। तो वह चीज ना समय लेती है। इसलिए छटपटाते हैं और यह पूरा प्रयास करेंगे कि आप वापस से उस चीज को कर लीजिए। तो यहां पर फिर मैं वही कहता हूं। कि यू नीड टू बी वेरी मच अवेयर।
(1:18:15) और मैं जैसे हम रेमेडीज की बात करते हैं नैला जी तो मैं हमेशा कहता हूं कि एक एमैथ जो भी व्यक्ति होगा जो भी कोई भी हो सकता है एमैथ हम में से और खासकर एम्पैथी जो है वो एक ह्यूमन कैरेक्टरिस्टिक है। हर व्यक्ति में होती है। तो एक एमैथ व्यक्ति सबसे ज्यादा अपने को किससे रिलेट करता है? किससे रिलेट करके देखना है? तो यहां मैं एक बात कहूंगा जिन भी देवी देवताओं को हम पूजते हैं हम सबसे ज्यादा अपने को उन देवी देवताओं से रिलेट कर पाते हैं जो हमें लगता है हमारे अंदर का जो स्वभाव है जिनसे मेल खाता जैसे जो भी एमैथ होगा
(1:19:03) ना वो कहीं ना कहीं कहीं ना कहीं आपको उसको महादेव से आप उसको अटैच होते हुए देखोगे कि वो महादेव से अटैच होगा या महादेव से ना भी अटैच हो तो महादेव के उस कांसेप्ट से अटैच होगा जो महादेव को महादेव बनाता है। तो अब देखिए वह जो विष की बात आती है वह क्या कहते हैं वह विष किसने धारण किया महादेव ने एमैथ क्या कर रहा है वह भी तो विष ही धारण कर रहा है किसका धारण कर रहा है लोग है दुनिया उसका विष धारण कर रहा है वो डाल के जा रहे हैं ये अपना ले रहा है तो जो भी एंपायर है अगर कोई व्यक्ति उसके पास है तो उसको सजगता दे सकता है तो बहुत
(1:19:44) अच्छी बात है और अगर कोई व्यक्ति नहीं भी है आपके पास तो आपके पास एक बहुत बड़ी शक्ति है। महादेव के रूप में जाओ उनको पूजो। आपको ना तो कोई एंपैथी आपकी कभी डिस्टर्ब करेगी और ना ही आप कंटेनर बनेंगे किसी ऊर्जा का जिसके चलते आप यह कहें मैं पज़ेस हो गया हूं। कुछ भी आपके ऊपर नहीं है। आप बस एक काम करते रहिए और मैं आपको यह अपने पर्सनल एक्सपीरियंस से बता रहा हूं। शायद किसी के काम आ जाए और मैं इसको रेमेडी नहीं मानता। मैं ये मानता हूं ऐसे जैसे हमारे लिए भूख खाना है या हमें जैसे किसी चीज की आवश्यकता पड़ती है बचपन में तो किसके पास भागते हैं
(1:20:24) मां-बाप के कि हमें ये चाहिए तो मैं समझता हूं आप कुछ मत कीजिए आप शिवलिंग पे जल अभिषेक कीजिए और पूरी श्रद्धा से कीजिए जो कुछ अंदर होगा वो निकल जाएगा जो डंप होगा वो निकल जाएगा जब कोई बैठा है आपके भीतर का भी विष ग्रहण करने के लिए तो आपको किसी व्यक्ति के पास जाने की आवश्यकता क्या है मैं तो अपना एक्सपीरियंस बता रहा हूं। यू नीड नॉट एनी रेमेडी। जस्ट गो टू महादेव। शिवलिंग पे जल अभिषेक कीजिए और उनको बोलिए मेरे भीतर जो कुछ भी है वो आपको समर्पित और आ जाइए। आपका काम हो गया। अब वह देखेंगे कि आपको जागरूकता कैसे देनी है। आपको अवेयर कैसे करना है और आपको यहां
(1:21:05) से कैसे निकालना है। अब उस अब उनका काम है ये आपका नहीं है। तो इतना ही बस मुझे कहना था और आगे कभी अगर हम मनोविज्ञान और ज्योतिष पर बात कर पाए तो अवश्य करेंगे। बिल्कुल सर ताकि और लोग और लोगों का थोड़ा सा उसमें सहयोग हो सके। वो जिस भी मानसिक अवस्था में है तो करेंगे। मुझे लगता है सर यह सारी प्लानिंग और प्लॉटिंग भी महादेव की ही है कि कैसे इस मीडियम के जरिए लोगों की मदद हो पाए क्योंकि हर कोई ना उस अवेयरनेस में सर है नहीं कि हमारे साथ गलत हो रहा है या उस गलत के प्रति हमें आवाज उठानी है। हम पता है हमारे अंदर प्रॉब्लम क्या है सर? क्यों
(1:21:48) आवाज नहीं उठा पाते हैं या क्यों उस ट्रैप से बाहर नहीं आ पाते हैं? ये खोने का डर होता है ना सर कि यह व्यक्ति भले ही हमें समझ में आ रहा है इसकी वजह से मैं परेशान हो रहा हूं। उसके इमोशंस में सक कर रहा हूं। यह एनर्जी वैंपायर है। लेकिन हमें लगता है कि वो रिक्तता आ जाएगी कहीं अगर यह व्यक्ति चला गया क्योंकि उसने आपको ऐसा ऐसा ट्रैप किया होता है। आपको लगने लगता है कि अगर यह मेरी लाइफ से चला गया तो एक गाइडेंस चली जाएगी या शायद एक एक ऐसी शक्ति चली जाएगी जो मेरी लाइफ को संचालित कर रही है। बट लोग भूल जाते हैं भाई आपकी लाइफ को कोई मनुष्य संचालित कर ही नहीं
(1:22:24) रहा है। फियर ऑफ़ अबंडनमेंट एक्सक्टली कि छोड़ देने का जो डर है का डर है वो हर रिलेशनशिप में है लेकिन लोग यह भूल जाते हैं कोई मनुष्य आपको थामे रख ही नहीं सकता है वही है जो बस आपको थाम के रख सकता है और वही है बस जो आपकी मंजिल है बिल्कुल ये आई थिंक हम याद रखेंगे ना तो किसी से भी नहीं डरेंगे डेफिनेटली डेफिनेटली देखिए जब हम मुक्ति की बात करते हैं ना तो मुक्ति अवेयरनेस से ही आ सकती है अनअवेयर होकर कभी आप मुक्त नहीं हो पाओगे। वो तो आप बंधन में बंधते रहोगे। तो हमारा प्रयास यही रहना चाहिए कि पहले तो हम अवेयर हो और जब हमें लगे कि हम अवेयर हो चुके हैं तो
(1:23:05) जो कोई भी और व्यक्ति है जो उस दलदल में फंसा हुआ है उसे भी अवेयर करें। यही हमारा काम होना चाहिए। बहुत-बहुत धन्यवाद सर। जय श्री राम। अ डे विद राहुल कौशिक में तो मतलब क्या बताऊं मैं शायद यह दिन मैंने आपके साथ बिताया है। मेरी टीम ने आपके साथ बिताया है। लेकिन आई एम 100% श्योर कि दर्शकों को ऐसा लगेगा कि यह पूरा दिन उन्होंने आपके साथ बिताया है और बहुत कुछ टेक अवे वो लेकर गए हैं। उनमें से एक भी टेक अवे में ना सर उन्होंने अप्लाई कर लिया ना। एक को भी अगर अवेयरनेस आ गई ना मुझे लगता है यहीं पे हम हमारा काम सफल हो हम सब करेक्ट
(1:23:47) हर हर महादेव हर हर महादेव आप बताते हुए जाइएगा कि यह हमारा पहला इनिशिएशन था एक पडकास्ट से हटकर कुछ ऐसा नया करने का जो आपको और ज्यादा हेल्प कर सके आपकी जर्नी में आपकी चेतना को और कैसे ऊपर ले जाया जा सके और सबसे बड़ी बात जो इमोशनल इमंबैलेंस की वजह से हमारी लाइफ में परेशानियां आती हैं या हम जो पीड़ा सहन करते हैं उसमें कैसे हेल्प हो सकती है यह पूरा एक जो एक दिन का प्लान था इतने घंटे का कंटेंट हमने दिया है आपको यह उसी का एक पार्ट था तो प्लीज आपके जो जो भी फीडबैक्स हैं आपकी जो भी राय है वो जरूर बताते हुए जाइएगा
(1:24:40) एलावर्स जर्नीज के चैप्टर वन में हमने राहुल कौशिक सर के साथ एस्ट्रोसाइकोलॉजी और अध्यात्म को एक्सप्लोर करने की एक शुरुआत की है। उम्मीद है इस जर्नी से आपको कुछ नया समझने को जरूर मिला होगा। आपको यह चैप्टर कैसा लगा कमेंट बॉक्स में जरूर बताइएगा और अगर इलावर्स को आपने अभी तक सब्सक्राइब नहीं किया है तो प्लीज जरूर कर लीजिए। चेक करिए कि सब्सक्राइब वाला बटन आपने दबाया है या नहीं। क्योंकि इस फील्ड के और एक्सपर्ट्स को लाने के लिए हमें आपके सपोर्ट की बहुत जरूरत है। अगली जर्नी में आप किसे सुनना चाहेंगे? अपने सजेशंस कमेंट बॉक्स में जरूर बताइएगा। मैं हूं
(1:25:22) इला गोस्वामी और यह है इलावस जर्नीज एंड द जर्नीज कंटिन्यूस। आखिर मैं क्या बोलूं मैं? मैंने महादेव को याद किया था और महादेव के गण यहां आ चुके हैं। सांपों के रूप में, छोटे-छोटे प्यारे-प्यारे सांपों के रूप में और बस सार्थक रही ये चर्चा। आप लोगों के भी काम आए बस यही बात से मैं महादेव का स्मरण करके खत्म करती हूं। हर हर महादेव। आप तो बोल ही नहीं रहे हैं। यही तो प्लान किया था। एक चीज प्लान करिए। एक चीज एक चीज प्लान भी नहीं हुई है आपसे। मैं एकदम से बहुत मतलब सोच में पड़ गया। कोई नहीं आप फिर कर
(1:26:06) सकते हो। कोई नहीं कोई नहीं नेचुरल रहिए। हर हर महादेव। हर हर महादेव।
Author Name:Ila Goswami
Youtube Channel Url:https://www.youtube.com/@ilaverse_yt
Youtube Video URL:https://www.youtube.com/watch?v=rpd1MsI9fzo
Title: Spiritual Gifts In Your Kundli | Astrology Guide | IlaVerse Journeys FT Rahul Kaushik Part2
Author Name: Ila Goswami
Description: IlaVerse Journeys – Chapter 1 | Rahul Kaushik | Part 2
Awakening of Spiritual Consciousness ✨
What if your Kundli could reveal the deeper journey of your soul?
In Part 2 of IlaVerse Journeys – Chapter 1 with Rahul Kaushik, Ila Goswami explored the connection between astrology, spiritual consciousness, and the evolution of the Soul. He explains the spiritual yogas in a Kundli, how planetary combinations may guide a person toward spiritual growth, and how certain planetary periods can bring profound experiences and realisations.
From the significance of the Pancham Bhav, Navam Bhav, and Dwadash Bhav to the deeper meaning of past-life punya, Guru, vairagya, surrender, and daan, this conversation takes you into the unseen dimensions of Jyotish and spirituality.
The discussion also moves beyond astrology into the subtle world of energies, supernatural experiences, and extraordinary spiritual encounters. What are these experiences? How should we understand them? And can a person who has experienced divine or supernatural realities truly explain them to someone else?
Watch this powerful conversation to explore the relationship between astrology, spiritual evolution, consciousness, and the unseen dimensions of existence.
Watch this insightful conversation with Rahul Kaushik and explore the deeper meaning of your soul's journey.
🔗 Watch Part 1 here:
• Rahu,Moon,Mars in 1,5,9 Houses | IlaVerse ...
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Filming location:
White Lotus Kanu’s Abode
139, Purkul Rd, Salan Gaon, Bhagwant Pur, Dehradun, Purkal Gaon, Uttarakhand
http://whitelotuspurkul.com/
Timestamps
00:13 - Coming Up Next
01:34 - Introduction
02:53 - Spiritual Yogas In Kundli
10:24 - 12th Lord Dasha & Daan
11:45 - Real Meaning Of Daan
17:45 - Past Life Punya
24:24 - 5th Lord Sambandh with 8th Lord
27:51 - Karma Alignment Technique ( KAT )
44:54 - Decoding Atmakaraka In Kundli
56:37 - Decoding Supernatural Experiences
01:23:11 - Ending
01:25:29 - BTS with Rahul Kaushik
#IlaVerse #IlaVerseJourneys #RahulKaushik #SpiritualConsciousness #Astrology #Spirituality #Kundli #PastLife #SoulJourney #Jyotish #SpiritualGrowth
Transcript:
(00:18) ईश्वर ने एक पोर्टल ओपन किया है एक सर्टेन टाइम के लिए हमारे लिए जहां हम अपनी आत्मा के विकास के लिए कुछ कर सकते हैं। पूरी जिंदगी व्यक्ति जो है पैदा होने से लेकर मरने तक किसी ना किसी चीज को चस कर रहा होता है। तो ये चज़ करने की जो उसकी यात्रा है जन्म से लेकर मरण तक ये कभी खत्म नहीं होती। हम लेकिन 12व घर के स्वामी की जब दशा आती है ना व्यक्ति के जीवन में उसको जीवन में पहली बार यह पता चलता है कि निष्काम भाव और समर्पण कहते किसे हैं। जिस वस्त्र को आप पहनते हो वही वस्त्र जब
(01:13) आप दूसरे को दोगे तो दान कहलाएगा। जिस अन्न को आप ग्रहण करते हो जब उस ठीक उसी अन्न को आप किसी को दोगे वह दान कहलाएगा अन्यथा वो दान नहीं है। नमस्कार भारत यू आर वाचिंग एलावर्स जर्नीज वि राहुल कौशिक और मैं हूं आपकी होस्ट एंड स्पिरिचुअल जर्नलिस्ट इला गोस्वामी इलावर्स जर्नीज के पार्ट वन में हमने राहुल कौशिक सर के साथ राहु मून एंड मार्स के कॉम्बिनेशंस एनर्जी स्पोंज बनने की प्रोसेस और केतु के रिलीज आस्पेक्ट को एक्सप्लोर किया था। अब बारी है इस
(01:58) एस्ट्रोसाइकोलॉजी फिल्म में और गहराई से उतरने की। इस पार्ट का नाम है कर्मा अलाइनमेंट टेक्निक यानी कैट। राहुल सर की सालों की रिसर्च से निकला हुआ एक कांसेप्ट जो आपको आपके जीवन की दिशा और दशा दोनों को सही करने में मदद करेगा। इस पार्ट में आप जानेंगे पास्ट लाइफ के कर्मों के फल, फिफ्थ और ए्थ हाउस का कनेक्शन और वह कार्मिक पैटर्न्स जो हमारी लाइफ को इन्फ्लुएंस करते हैं। आखिर क्या है कर्मा अलाइनमेंट टेक्निक और यह हमारी
(02:43) लाइफ को कैसे समझने में मदद कर सकता है? चलिए राहुल सर से ही जानते हैं। ज्योतिष में क्या कोई योग हैं जो व्यक्ति की आध्यात्मिक चेतना को इस स्तर पर ले जा सकते हैं कि वो व्यक्ति उस चेतना को महसूस कर सके। तो अब यहां पर बहुत सारे योग जो है ज्योतिष के अंदर दिए गए जो व्यक्ति को अध्यात्म या आध्यात्मिक प्रगति प्रदान करते हैं। उसमें से एक जो बहुत बड़ा योग है वो यह है कि चंद्रमा यदि मंगल की राशि में हो और शनि की उस पर दृष्टि पड़ जाए या चंद्रमा शनि की राशि में हो और मंगल की उस पर दृष्टि पड़ जाए तो यह व्यक्ति को बहुत
(03:29) अच्छी जो है वह आध्यात्मिक प्रगति देता है। यह योग उसके अलावा कुछ और योग भी दिए हैं। जैसे बरामीर की जो बृहत जातक है उसके अंदर एक योग यह भी कहता है कि चंद्रमा आपका जिस राशि के अंदर है तो चंद्रमा का जो भी आपका राशि स्वामी है अगर उस राशि स्वामी पर सिर्फ शनि की दृष्टि पड़ रही हो और किसी ग्रह की दृ दृष्टि ना पड़ रही हो। शनि की दृष्टि पड़ रही हो तो ऐसे जातक के अंदर वैराग्य उत्पन्न हो जाता है। वैराग्य तो अब क्योंकि वैराग्य जो है वो भी आध्यात्मिक उसकी तरफ लेकर जाता है। तो यह तो हो गई योग जो व्यक्ति को अध्यात्म की तरफ लेकर जा
(04:09) रहे हैं। उसके बाद आती है दशाएं हम कि वो कौन सी दशा है जो व्यक्ति को उन आध्यात्मिक अनुभवों को साक्षात महसूस करवाएगी। मतलब वो व्यक्ति महसूस करेगा कि उसके जीवन में कुछ घटित हुआ है। लेकिन एक जो बहुत बड़ा प्रश्न यहां पर है कि जब व्यक्ति के भीतर वो चीज घटित होती है और जिसका रियलाइजेशन वो करता है या अनुभव वो करता है क्या वो किसी को समझा पाएगा? सवाल है क्या वो किसी को समझा पाएगा? अगर किसी ने ईश्वर की अनुभूति अपने भीतर कर ली तो आपको क्या लगता है? वो समझा पाएगा किसी को कि मैंने अनुभूति कर ली? नहीं समझा पाएगा। वो समझ लेगा कुछ हुआ है। समझ लेगा कुछ
(04:54) लेकिन समझा नहीं पाएगा। स्वयं तो कुछ समझेगा कुछ हुआ है लेकिन दूसरे को नहीं बता पाएगा। क्योंकि अगर दूसरे को बताने पे गया तो हो सकता है सामने वाला जो है उसको पागल कह दे क्योंकि उसका स्तर जो है उसकी चेतना का कहीं पर भी हो सकता है। यह तो उठ चुका ना वहां से। हम तो यहां पर तीन ग्रहों की दशाएं जो है बहुत महत्वपूर्ण है। पंचम भाव के स्वामी की दशा वेरी इंपॉर्टेंट। क्यों? क्योंकि जब हम बात यह करते हैं भगवत गीता में बात आती है कि अर्जुन तुम अपनी यात्रा जहां छोड़ते हो अगले जन्म में उस यात्रा को वहीं से शुरू करते हो। और पंचम भाव को आप क्या कहते हो? पूर्व
(05:34) पुण्य भाव का कहते हो। वो सिर्फ पूर्व पुण्य भाव नहीं है। आपने अपनी चेतना को विकसित करने के लिए जो भी प्रयत्न करे हैं पिछले जन्म में वह भी आपके पंचम भाव में आते हैं। इसलिए जैसे ही पंचम भाव के स्वामी की दशा आती है व्यक्ति की चेतना में प्रगति आने लगती है। फिर आती है नवम भाव की स्वामी की दशा। नवम भाव को आप किस उसमें देखते हो जब भी बात आती है कि भाई नाइंथ लॉर्ड जो है वो क्या है? गुरु है। ठीक है? गुरु है। तो गुरु कौन व्यक्ति है? गुरु वो व्यक्ति है जो आपकी प्रेजेंट कॉन्शियसनेस को अपलिफ्ट कर दे। वो जहां कहीं भी है वो आपका गुरु है। वो कोई भी हो
(06:16) सकता है। वो बच्चा भी हो सकता है। वो कोई वृक्ष भी हो सकता है। क्योंकि गुरु का कोई रूप नहीं है। गुरु एक तत्व है। जैसे दत्तात्रेय ने अपने जब गुरुओं का जिक्र किया तो उन्होंने बोला एक गुरु मेरी मकड़ी भी है। यस यस। क्योंकि जिस प्रकार मकड़ी जो है अपने जाल का निर्माण करती है उसमें विचरती है और बाद में उसी को निगल लेती है। ठीक उसी प्रकार जो है ब्रह्म भी अपने जगत को अपने जगत को इस सृष्टि को प्रकट करता है। उसी में विचरता है और बाद में उसी को ही अपने में समेट लेता है। तो ये क्या है? यहां उन्होंने उदाहरण दिया किस चीज का? गुरु का।
(06:56) अब यहां उन्होंने मकड़ी को गुरु क्यों कहा? क्योंकि मकड़ी ने उन्हें बोध कराया कि ब्रह्म जिस तरीके से कार्य कर रहा है या ब्रह्म जो कार्य कर रहा है और मकड़ी जो कार्य कर रही है वो एक समान जैसा है। तो कोई भी व्यक्ति आपकी कॉन्शियसनेस को इंप्रूव करेगा वो कौन है? वो आपका गुरु है। गुरु कौन से भाव से आता है? नाइंथ हाउस से आता है। नाइंथ लॉर्ड की दशा जब आपके जीवन में आएगी। आपके जीवन में कोई ना कोई व्यक्ति अवश्य ऐसा आएगा जो आपकी चेतना को विकसित करके जाएगा। लेकिन यह जरूरी नहीं है कि कोई वह व्यक्ति ही हो, कोई आपका गुरु हो, कोई मित्र हो। अब
(07:34) यहां पर एक एक बहुत इंपॉर्टेंट बात मैं आपको बता रहा हूं जो हर आदमी को समझनी होगी। यहां पर मान लीजिए किसी का नवम भाव का स्वामी छठे भाव के स्वामी के साथ है। नाइंथ लॉर्ड इज विद सिक्स्थ लॉर्ड। नाउ द थिंग इज के एट दिस पर्टिकुलर टाइम हु विल बिकम योर गुरु व्हेन नाइंथ लॉर्ड इज विद सिक्स्थ लॉर्ड समवन विद हुम यू विल फाइट विल बिकम योर गुरु आपको जो बोध दत्तात्रेय को मकड़ी ने कराया वह बोध आपका आपको शत्रु करा के जाएगा वह आपकी चेतना को विकसित करके जाएगा
(08:19) इसलिए नाइंथ लॉर्ड की दशा में आपकी चेतना का विकास तो होना है लेकिन जो ग्रह उसके साथ में होगा उसके द्वारा होना है। अगर हुआ पंचम के साथ तो अच्छा है। हंसते खेलते पढ़ते लिखते विकसित होगी। अगर 12वें के साथ है तो दान धर्म के द्वारा होगी। आध्यात्मिक जो आप अध्ययन कर रहे हैं उसके द्वारा होगी। या जो अनुभव कर रहे हैं उसके द्वारा होगी। लेकिन अगर छठे भाव के साथ है तो किसके द्वारा होगी? शत्रुओं के द्वारा। शत्रु के द्वारा होगी या उन लोगों के द्वारा हो सकती है जो आपके अधीनस्थ हैं। मतलब आपके एम्प्लाइज जिनको हम बोलते हैं। हम क्योंकि आपको कौन किस समय कौन सी शिक्षा
(09:04) दे जाए इसका कोई वो नहीं है। कहीं से भी आपको कोई शिक्षा कभी भी आ सकती है। ठीक है? ये नवम भाव का स्वामी करता है। अब आते हैं द्वादश भाव के स्वामी पे। जी। पूरी जिंदगी व्यक्ति जो है पैदा होने से लेकर मरने तक किसी ना किसी चीज को चज कर रहा होता है। किसी ना किसी चीज को चज़ कर रहा होता है। अब कोई कहे कि नहीं ऐसा नहीं हो सकता। वो चज़ नहीं कर सकता। तो एट लास्ट हर व्यक्ति किस चीज की कामना करता है? मुक्ति का। यस वो उसको तो हम कहे तो मुक्ति भी तो चज़ ही कर रहा होता है। समझ रहे हैं? हम तो ये चस करने की जो उसकी यात्रा है जन्म से लेकर मरण तक ये कभी खत्म नहीं होती।
(09:46) लेकिन 12व घर के स्वामी की जब दशा आती है ना व्यक्ति के जीवन में उसको जीवन में पहली बार यह पता चलता है कि निष्काम भाव और समर्पण कहते किसे हैं। क्योंकि आपको और कोई भाव समर्पण सिखा ही नहीं सकता। क्योंकि हर भाव आपको कुछ ना कुछ देने के लिए बैठा है। आप नवम भाव के सामने गए, गुरु के सामने गए। आप क्या जिज्ञासा? अरे गुरु जी मेरे को कुछ ज्ञान दें। तीसरे भाव के सामने गए तो मुझसे कोई बात करें। चतुर्थ भाव के सामने गए। मेरे मेरी भावनाओं को कोई समझे। पंचम के सामने गए। मुझे कोई विद्या दे या मुझे विद्या के बारे में बताएं। लेकिन जब आपके द्वादश भाव
(10:27) के स्वामी की दशा चलती है। आपको ना कोई सिखाता है, ना आपसे कोई बात करने आता है, ना आपसे कोई रिश्ता बनाता है। आप एकांत में रहकर इस विचार से जुड़ जाते हैं कि समर्पण क्या है? या किसी चीज को विड्रॉ करना या जिसको हम चैरिटी कहते हैं वो असल में क्या है? या जिसको एक शब्द कहा है दान। तो दान अभी किसी से पूछने लगो। आप दान क्या है? तो हर आदमी अपनीपनी डेफिनेशन लेकर खड़ा हो जाएगा। दान क्या है? पूछिए इनसे। दान क्या है भाई? दान क्या है भाई? किसी को पता हो तुम सूरज दान क्या है? दान क्या है? दान जो बोलते हैं जो अपनी श्रद्धा से किसी को अगर कुछ भी
(11:05) देते हैं हां आरिफ तुम्हारे लिए दान दान क्या है? जो अपने मन की इच्छा से इसको ये कहा गया ना कि एक हाथ का दिया हुआ है। दूसरे हाथ को पता नहीं लगना चाहिए। वो वो दान की कंडीशन है जो आपने कहा ना कि एक हाथ ने दिया है तो दूसरे हाथ को पता ना चले एक कंडीशन ठीक है दान का पपस मतलब मेरे उससे या दूसरे अगर तुम उसको देने में या उसकी हेल्प करने में सक्षम हो तो बिल्कुल देना चाहिए सामने वाले को अगर तुम नहीं हो तो अपने दिल में फिर एक वर्ड होता है वो नहीं हो अगर तुम किसी की हेल्प कर सकते हो तो बिल्कुल करनी चाहिए लाइक इस तरीके से तुमने बहुत अच्छे ना अपनेप ढंग से बहुत
(11:42) अच्छे उसके कंडी कंडीशंस बताए हैं दान के। मैं बताने का प्रयास करता हूं। दान क्या है जो मेरी समझ में आया है। अपनी किसी भी प्रिय वस्तु विषय या व्यक्ति को किसी परमार्थिक कार्य के लिए समर्पित कर देना दान। तभी कर्ण का नाम दानवीर कर्ण था। दानवीर कर्ण। बात समझे आप? तो दान का अर्थ यह नहीं होता कि अभी कोई भूखा आया। मैंने उसको कुछ खिला दिया। वो दान है। एक उपनिषद में फिर मैं उपनिषदों पे आ रहा हूं क्योंकि उपनिषद मैंने पढ़े नहीं है। लेकिन जो चीज मुझे अच्छी लगती है उसे पकड़ लेता हूं। तो उपनिषद में एक कथा आती है। हम और कथा आती है किसकी?
(12:26) यमराज और नचिकेता की। कठोपनिषद में। कठोपनिषद में। तो नचिकेता जब अपने पिता से ये पूछते हैं अब देखिए कथा को अलग-अलग ढंग से प्रस्तुत किया गया है। लेकिन हम कथा का वही स्वरूप समझेंगे जो हमें दान का अर्थ ढंग समझाए या अर्थ समझाए तो कथा अलग हो सकती है। लेकिन हम इसको उस ढंग से ले रहे हैं ताकि हमें दान समझ में आए क्या होता है। सही। तो जब नचिकेता के पिता बीमार होते हैं तो ब्राह्मण उनको क्या आदेश देते हैं कि आप एक काम कीजिए। आप इतनी सारी गओं का दान कर दीजिए। हम तो उसके पिता क्या करते हैं? लालसा के चलते जो बूढ़ी गाय होती है, जो बूढ़ी गाय
(13:04) होती हैं, अधमरी गाय होती है, उनको दान कर देते हैं। तो अब नचिकेता अपने पिता के पास जाता है और पूछता है कि पिताजी आपने इनका दान क्यों किया? यह तो पहले ही मतलब मरने के उस पे आ गई हैं कगार पे। और क्या कल को अगर मैं किसी लायक नहीं रहा जिस प्रकार यह गौएं लायक नहीं रही तो आप मुझे भी किसी को दे दोगे। बड़ा प्रश्न था भाई। बुद्धिमान जो संतान होगी वो कैसा प्रश्न करेगी? वो यही प्रश्न करेगी। अब इसको दान से जोड़ते हैं। वहां जो नचिकेता ने प्रश्न उठाया उस प्रश्न में कहीं ना कहीं उसने अपने पिता से यह प्रश्न किया कि हम दान में किसी व्यक्ति को वही
(13:52) वस्तु क्यों नहीं दे रहे जिसका उपयोग हम कर रहे हैं? हम उसका उसका दान क्यों कर रहे हैं जो हम भी जिसका उपयोग नहीं कर रहे? तो सवाल उठता है ना? तो अब ऐसे में इसको आज मॉडर्न डे कॉन्टेक्स्ट में समझते हैं कि मैं किसी बहुत अच्छे रेस्टोरेंट से खाना खा के उतर रहा हूं। हम बहुत अच्छे से अचानक से सामने मेरे पास कोई भूखा व्यक्ति खड़ा हो जाए आके कि भाई मेरे को खाना खाना है। मेरे को भूख लगी है। आपके अंदर सामर्थ्य है कि आप उसको वहीं भोजन करा सकते हो जहां आपने भोजन किया। लेकिन फिर भी आप क्या करोगे? आप जाओगे। आप कोई सस्ता से जगह देखोगे और
(14:32) उसको 10-15 का भोजन करा के जो भी आदमी करता है उसे करा के चल देता है और सोचता है आज मैंने दान कर दिया ओो वो दान नहीं वो सिर्फ आपकी अपनी एक मानसिक अवस्था है जिसमें आप अपने आपको जो है वो एक क्या कहें झूठा दिलाशा दे रहे हो कि भाई मैंने आज एक बहुत अच्छा काम किया इसलिए कहा जाता है कि जिस वस्त्र को आप पहनते हो वही वही वस्त्र जब आप दूसरे को दोगे तो दान कहलाएगा। जिस अन्न को आप ग्रहण करते हो जब उस ठीक उसी अन्न को आप किसी को दोगे वो दान कहलाएगा। अन्यथा वो दान नहीं है। तो हर आदमी को ना यह समझना पड़ेगा कि जब वो सुनता है इस बात को कि
(15:17) दान तो दान का अर्थ क्या है? भाई दान का अर्थ वही है कि जो चीज तुम अपने उपयोग में नहीं ले सकते वो अगर आप किसी को दान दे रहे हो तो आप दान नहीं दिखावा कर रहे हो। बिल्कुल। इसलिए बात हम वापस अपने 12व घर के स्वामी की दशा पर आएंगे कि जब द्वादश भाव के स्वामी की दशा आती है ना तो व्यक्ति चीजों को त्यागना सीखता है और वो त्याग कैसा होता है मानते 12व घर के स्वामी की दशा आ रही है किसी व्यक्ति की और उसके कुंडली में आध्यात्मिक योग प्रबल है हम प्रबल है हम और मान लीजिए वो व्यक्ति कहीं जा रहा है सर्दी का समय है उसने कुछ ओढ़ रखा है हम
(15:56) ये मैं दशा की बात बता बता रहा हूं दशा क्या करती है? अचानक से कोई व्यक्ति ठुरता मिल गया। वो बोला कि साहब बड़ी ठंड लग रही है। मैं क्या करूं? जानते हो अगर आध्यात्मिक योग हुए और 12व घर के स्वामी की दशा चल रही है। वो क्या करेगा? वो उतारेगा उसको पहना देगा। वो विचार ही नहीं करेगा। यह क्या है? यह मेरे लिए क्यों है? इसने क्यों यह मांग ली? इसमें मेरा कितना फायदा होगा? कितना नुकसान होगा? वह उसी समय उसका त्याग कर देगा। किस लिए? एक परमार्थिक कार्य के लिए त्याग कर देगा। इसको दान कहा जाता है। यह सोच आप में कौन पैदा करता है? यह सोच आप में 12व घर के
(16:33) स्वामी की दशा पैदा करती है। आदमी छोड़ना सीखता है। आदमी त्यागना सीखता है। आदमी समर्पण करना सीखता है। इसलिए जो हम बात कर रहे थे ना कि आदमी जो आध्यात्मिक प्रगति करता है वो सबसे ज्यादा प्रगति इन तीन ग्रहों की दशा में ही करता है। पंचमेश, नवमेश और द्वादशेष। तो अगर किसी भी व्यक्ति की यह दशा चल रही है आपकी चल रही है द्वादशेष की मेरी नवमेश की चल रही है किसी और की पंचमेश की चल रही होगी उनकी नवमेश की चल रही होगी तो यह समझिए कि ईश्वर ने एक पोर्टल ओपन किया है एक सर्टेन टाइम के लिए हमारे लिए जहां हम अपने अपनी आत्मा के विकास के लिए कुछ कर
(17:13) सकते हैं और अगर हमने इस पोर्टल को जाने दिया जो खुला हुआ है तो समझ लीजिए हमने इस दशा को निराधार कर दिया जो जीवन में घटित हो रहा है जो लाभ हानि हमें में होंगी, वह हमारा प्रारब्ध है। वो हम नहीं भी करेंगे तो भी हमें मिल जाएगा। यश अप यश जो भी है। लेकिन हमारा हमारी अपनी बुद्धि या हमारी अपनी जो हमारा तार्किक दृष्टिकोण है वो ज्योतिष के आधार पे हमें क्या कहेगा कि अगर यह दशा हमें मिली है तो हम इसका जितना आध्यात्मिक लाभ उठा सके उतना उठा लें। बिल्कुल सर कई लोगों के जीवन को मैंने देखा है बहुत नजदीकी से और उनके जीवन को ऐसे देखकर
(17:52) एक डायलॉग निकलता है जो बहुत लोगों के मुंह से मैंने सुना है कि यार ये तो ना अपनी पास्ट लाइफ के अच्छे कर्मों का फल खा रहा है। अच्छा ये मतलब अगर मैं आपसे पूछूं टेक्निकली देखना पॉसिबल है क्या कि क्या हम हमारे जीवन में जो अच्छी चीजें घटित हो रही हैं वो क्या पास्ट लाइफ के पूर्व पुण्यों की वजह से है ये मतलब आई डोंट नो ये देखा जा सकता है। ठीक है बिल्कुल देखा जा सकता है और कुंडली के अंदर एक योग भी होता है हम जो यह बताता है कि यह घटना जो आपके जीवन में घट रही है यह आपके पूर्व जन्म में किए गए पुण्य कर्मों के कारण ही घट रही थी। हम
(18:32) उसका सीधा सा उदाहरण मैं आपको देता हूं के इतना तो ज्योतिष आपने भी पढ़ लिया होगा। जब कोई कहता है आपसे कि पूर्व पुण्य भाव कौन सा है? आप क्या कहेंगे पॉइंट? पंचम। पंचम। और अगर आपसे मैं पूछूं कि आप स्वयं कौन सा भाव हो? लग्न। लग्न हो। हम तो यह बड़ा सिंपल सा फंडामेंटल अप्रोच मैं आपको बता रहा हूं। किसी भी कुंडली पर लगाना आपको समझ में आ जाएगा इसके जीवन में क्या हो रहा है क्यों हो रहा है। फॉर एग्जांपल अगर किसी के लग्नेश का संबंध पंचम भाव के स्वामी के साथ हो गया। अब संबंध चार प्रकार से बनते हैं कुंडली में। याद रखिएगा। एक दोनों एक राशि में बैठे हो।
(19:11) एक दोनों एक दूसरे को देख रहे हो। एक दोनों ने राशि परिवर्तन कर लिया। वह उसकी राशि में, उसकी राशि में और एक होता है राशि के स्वामी का उस ग्रह को देखना जो उस राशि के अंदर विद्यमान है। इसको डिस्पोजिटर्स एस्पेक्ट बोलते हैं। चार प्रकार के संबंध अगर इनमें से कोई भी संबंध लग्नेश और पंचमेश का बन रहा है तो आप साफ-साफ बोल सकते हैं सामने वाले को कि इस व्यक्ति के जीवन में जो कुछ भी अच्छा घटित हो रहा है वो इसके पूर्व जन्म के पुण्य कर्मों के कारण है। क्योंकि अगर मैं अपना जीवन देखूं तो ईश्वर की कृपा से अच्छा स्वास्थ्य मिला, अच्छा
(19:46) शरीर मिला, अच्छा परिवार मिला। हम और ईश्वरीय कृपा से कभी ऐसा कोई चैलेंज नहीं आया कि हां ब्रेड एंड बटर के लिए भी स्ट्रगल करना पड़ा हो। लेकिन अगर आप देखो उठ के तो एक आदमी है जो सुबह से शाम तक सिर्फ के उसका पेट भर जाए उसके लिए वो निरंतर प्रयास कर रहा होता है। तो ऐसा हमने इस जन्म में ऐसा क्या कर दिया? तो यह बात इस बात को भी प्रूफ करती है कि कर्मों का लेखाजोखा कहीं तो काम कर रहा है और उसी कर्मों के लेखेजोखे के कारण एक व्यक्ति अपने लग्न भाव के स्वामी का संबंध पंचम भाव के स्वामी के साथ लेकर आता है जिसके कारण इस जीवन में
(20:29) उसके साथ में जो कुछ भी घटित होता है वह सिर्फ और सिर्फ अपने पूर्व जन्म के पुण्य कर्मों के कारण होता है। लेकिन इसके भी अपने-अपने रूप हैं। किसी को पंचमेश लग्नेश के साथ मिला ठीक है। तो वो सारे पुण्य जो है वो किसको आए? वो स्ट्रेट अवे आपको आ गए। सीधा-सीधा आपको आ गए। अगर इसको भगवत गीता या आध्यात्मिक दृष्टि से समझे तो जो आपने अपनी भक्ति के द्वारा या जो भी आपने भक्ति की जो भी अपनी चेतना के लिए प्रयास किया वो सीधे-सीधे किसको मिली? स्ट्रेट अवे आपको मिली। मतलब आपको कुछ करना नहीं पड़ा। बिकॉज़ आप तो स्वयं आप हो ना। तो स्ट्रेट अवे आपको मिल गया।
(21:10) अब मान लो किसी का पंचमेश लग्न के साथ तो नहीं आया। दूसरे घर के स्वामी के साथ आ गया। तो पंचम भाव का स्वामी और दूसरे भाव के स्वामी ने आपस में संबंध बना लिया। अब इसका अर्थ क्या होगा? इसका अर्थ यह होगा इस व्यक्ति के जीवन में जो कुछ भी धन आएगा, वो पूर्व पुण्य जन्मों के कारण आएगा। पहले हम क्या कह रहे थे कि पूर्व पुण्य जो हमारे कर्म है वो अगर उसका रिजल्ट व्यक्ति को मिल रहा है तो अगर वो दूसरे भाव के साथ में पंचम भाव का स्वामी है हम तो वो इस व्यक्ति को जो पूर्व पुण्य भाव का जो रिजल्ट मिल रहा है जो फल मिल रहे हैं वो धन के रूप में मिलेगा
(21:47) केवल धन के रूप में कुटुंब सेकंड लॉर्ड है ना कुटुंब अच्छा मिल जाएगा धन अच्छा मिल जाएगा अब सोचो किसी का फिफ्थ लॉर्ड 10थ लॉर्ड के साथ आ गया पंचमेश और दशमेश का संबंध आ गया यस तो यह बात पक्का है लेकिन हां नवांश को जरूर यहां कंसीडर करना है कि वहां उसकी स्थिति क्या है नहीं तो फिर आप वो मिस कर जाओगे लेकिन स्टिल जिसका पंचमेश और दशमेश एक साथ होगा उसको इस जीवन में जो मान सम्मान मिलेगा जो ख्याति मिलेगी जो स्टेबिलिटी मिलेगी करियर में वो इसी कारण से मिलेगी क्योंकि अपने पिछले जन्म में इसने कोई कार्य ऐसे अवश्य किए हैं जिसके
(22:22) कारण से इस जन्म में इसको ख्याति मान प्रतिष्ठा पद सब चीजों की प्राप्ति होगी। हम तो यह ना एक एक तरह का एक चक्र है। हम भाग्य चक्र जिसको बोले तो चल रहा है। हर किसी का चल रहा है। लेकिन यह भाग्य चक्र काम सबका अलग-अलग तरीके से कर रहा है। किसी का पंचमेश लग्न के साथ है। किसी का पंचमेश दूसरे घर के साथ है। किसी का पंचमेश तीसरे घर के साथ है। किसी का पंचमेश चतुर्थ भाव के साथ है। और ऐसे भी बहुत सारे लोग देखे हैं मैंने जीवन में। जिनका पंचम भाव का स्वामी तीन चार ग्रहों के साथ जुड़ जाता है। जैसे पंचम भाव का स्वामी मान लीजिए किसी घर में बैठा है। हम
(23:06) तो अब लग्न का स्वामी भी वहां आ गया। दशम भाव का स्वामी भी आ गया और दूसरे घर का स्वामी भी आ गया। तो अब ये क्या हुआ? यह ऐसे हुआ जैसे स्वयं ईश्वर ने प्रसन्न होकर इसको तथास्तु कह दिया। क्यों? अब इसको पूर्व पुण्य भाव के फल भी प्राप्त होंगे स्वयं को। इसको धन भी प्राप्त होगा, कुटुंबी भी प्राप्त होगा और पद मान प्रतिष्ठा भी प्राप्त होगी। सब चीजें इसको मिलेगी। अब जब हम यह प्रश्न करते हैं ना किसी व्यक्ति को देखकर कि यार यह तो बड़ा पापी व्यक्ति प्रतीत होता है। इसने तो जीवन में अभी कभी ऐसा लगता नहीं इसने कुछ किया है। हमने तो हमेशा इसको लोगों की हानि करते
(23:49) हुए देखा है। लोगों को परेशानी पहुंचाते हुए देखा है। लेकिन पता नहीं हम देख रहे हैं इसको ये निरंतर करता जा रहा है। करता जा रहा है। क्योंकि उसके पूर्व पुण्य जो कर्म है उनका क्षय अभी हुआ नहीं है। और वो क्षय जब तक नहीं होगा तब तक उसका कोई भी चीज उसको आगे बढ़ने से रोक नहीं सकती। यह प्रारब्ध है वो जो लेकर आया है। लेकिन जिस दिन ये क्षय होगा फिर वो जो उसके जो बाकी योग हैं अरिष्ट योग है या और कोई दुर्योग है जो उसको जो हानि पहुंचाएगा वो फिर उसका सर्वनाश कर। अच्छा अगर सर पंचमेश अष्टमेश से संबंध बना ले और बहुत तगड़ा संबंध बना ले कि वो उसकी
(24:31) राशि में वो उसकी राशि में है। हां तो पंचम भाव का जब अष्टम भाव से संबंध बनता है तो ऐसे व्यक्ति को बहुत सारी ऐसी चीजें मिल जाती हैं जिसके लिए उसने प्रयास भी नहीं किया। जैसे हम कहें इनहेरिटेड वेल्थ जो मिलती है। ठीक है? तो आप देखते होंगे बहुत से लोग ऐसे होते हैं कि अपने जीवन में ज्यादा कुछ कर नहीं पाते। किसी भी कारण से उनका योग कह लीजिए कुछ कह लीजिए। अचानक से घर में किसी मुख्य व्यक्ति की जो है मृत्यु हो गई। अब मृत्यु हो गई तो क्या हुआ? वो अपनी वसीयत जो है इस व्यक्ति के नाम करके चला गया। अब नाम करके चला गया तो क्या हुआ? इसको बिना कमाए
(25:11) जो है बहुत सारा धन जो है वो अचानक से मिल गया। तो जितने भी लोग आपको ऐसे दिखेंगे जीवन में जिनको अचानक से बहुत बड़े धन की प्राप्ति हो जाती है वह सब अष्टम भाव के हैं। तो यह योग कुछ ऐसे हालात भी पैदा करता है जहां आपको अचानक से धन लाभ हो सकता है। लेकिन अगर इसको एक और दृष्टिकोण से देखें खासकर जो आध्यात्म के दृष्टिकोण से देखो तो जब पंचम भाव का स्वामी अष्टम भाव के स्वामी के साथ होगा तो यह व्यक्ति को पूर्व जन्मों के कारण इस जन्म में किसी ना किसी प्रकार की सिद्धि प्रदान कर देगा। आपको सिद्धि दे देगा। अब वह सिद्धि एक ज्योतिषी के रूप में भी वह आपको दे सकता
(25:53) है। एक तांत्रिक के रूप में भी आपको दे सकता है या किसी सिद्ध पुरुष के रूप में भी दे सकता है। पर कोई ना कोई सिद्धि अवश्य आपको देकर जाएगा। क्योंकि सिद्धियां कौन से घर से आती है? सिद्धियां अष्टम भाव से आती है। इसलिए जब हम कहते हैं ना कि ज्योतिष तो अष्टम भाव से देखा जाता है। ज्योतिष अष्टम भाव से ही देखा जाता है। लेकिन जैसा मैंने कल कहा था कि ज्योतिष व्यक्ति करता नहीं है। ज्योतिष व्यक्ति से खुद को करवाता है। तो ज्योतिष बनना, ज्योतिष होना फर्क है। ज्योतिष बनना और ज्योतिषी होना फर्क है। क्योंकि ज्योतिषी होना अपने आप में ईश्वर
(26:36) की एक देन है। ईश्वर ने आपको कहीं ना कहीं ब्लेस किया है। तभी आप इस विद्या को कर पाओगे। अन्यथा नहीं कर पाओगे। आप पढ़ लोगे दुनिया भर के ग्रंथ पढ़ लोगे ज्योतिष में लेकिन जब सामने कुंडली आएगी और जब आपके मुख से जो बात निकलेगी वो निकलवाई जाएगी अन्यथा वो सत्य नहीं होगी। इसलिए जो आदमी यह कहता है ना कि मैंने प्रेडिक्ट किया तुमने प्रेडिक्ट किया तुम्हारा अधिकार क्षेत्र था। कर्मनेवाधिकारस्ते लेकिन प्रेडिक्शन सत्य होगी। वो तुम्हारा अधिकार क्षेत्र नहीं है। यह ज्योतिषी को जान लेना चाहिए। मैं यहां पे 10 आदमियों की आप सब लोगों की
(27:22) कुंडलियां देखदेख के 10 बातें यहां बोल दूं हम और बिल्कुल सटीक आधारित पे बोलूंगा। उनके मूल कारणों के कारण बोलूंगा कि ये देखो ये योग बन रहा है। ये होगा ये होगा ये होगा ये होगा। लेकिन उनमें से एक भी प्रेडिक्शन तब तक सत्य नहीं होगी जब तक ईश्वर नहीं चाहेगा वो सत्य। इसलिए ज्योतिष जो है वह 1 5 9 से नहीं किया जाता। वो 4 8 12 से ही किया जाता है। तो ये चीज हमें जाननी बहुत आवश्यक है। आज बहुत सारा डिस्कशन किया है। आज सुबह से हम शुरू हुए थे और अभी एक बहुत इंपॉर्टेंट सेगमेंट बचा है। तो वो देखते हुए जाइएगा आप सभी। लेकिन उससे पहले मैं ना उस चीज की बात
(28:04) करना चाह रही हूं जो आप जिस पर जोर देते हैं। कार्मिक अलाइनमेंट यह कार्मिक अलाइनमेंट क्या है? एंड इज इट पॉसिबल बिकॉज़ मुझे तो उन शब्द से यह समझ में आ रहा है। कार्मिक अलाइनमेंट मतलब जो आपके कार्मिक डेट्स हैं, जो आपके कर्माज़ हैं, चाहे वो प्रारब्ध के हो, मतलब पूर्व जन्म के हो या इस जन्म के हो, उसका अलाइनमेंट करना है। मतलब उसको सही करना है। क्या मैं सही हूं? देखिए कार्मिक अलाइनमेंट पहले मैं एक शब्द को थोड़ा सा करेक्ट कर दूं बिकॉज़ मैंने जो नाम दिया है हम इस थ्योरी को वो कार्मिक अलाइनमेंट नहीं दिया वो कर्मा अलाइनमेंट दिया
(28:37) ओके कर्मा अलाइनमेंट तक नहीं ओके अब अगर मैं आपको इसको बताऊं तो इसका जो आधार है वो सीधे-सीधे भृगुनंदी नाड़ी पर बेस्ड आधारित है। हां ये बेस्ड है। ओके। मैं अगर यह कहने लगूं कि नहीं यह कंप्लीटली मेरा है तो मैं साफ कहता हूं कि यह उस पर आधारित है। अब बात यह आती है कि मैंने इसमें क्या किया? भाई आधार तो मैंने वहां से लिया तो इसमें मेरा क्या है? मेरी सिर्फ इसमें कुछ इंटरप्रिटेशंस हैं जो मैंने अपने अकॉर्डिंग करने का प्रयास किया है। अब उसमें क्या होता है? मैं उसका एक उदाहरण देता हूं आपको कि पहले तो मैं आपको यह बताता हूं इस पे काम करने
(29:17) का मेरी इच्छा क्यों हुई? इस पे काम करने की। लगभग छ सात साल पहले की बात मैं आपको बता रहा हूं। जैसे हमारे घर पर ना एक ज्योतिषी आए। अब उन्होंने क्या है वाइफ की कुंडली देखी और कुंडली देखकर यह कहा कि अगर आपके घर में नरसंतान आएगी तो वो नरसंतान अपनी मां की लीनियज से होगी। मतलब मेरी वाइफ की लीनियज से होगी। मेरी लीनियज से नहीं होगी। ओके। हां। तो हमें भी बड़ा आश्चर्य हुआ कि यार यह कैसे बता रहे हैं कि वह उसकी लीनियर से होगी और उन्होंने बताया कि हो सकता है हम
(30:00) हो सकता है वो व्यक्ति जो आए वो अपनी मां के हम बहुत क्लोज कोई रहा हो उस तरीके से रहा हो। अब जब हमने यह पढ़नी शुरू करी भृगु नंदी नाड़ी तो उसमें हमें पता चला कि जो केतु है वो मैटरनल ग्रैंडफादर को रिप्रेजेंट करता है। केतु मैटरनल ग्रैंडफादर को राहु मैटरनल ग्रैंडफादर मतलब दादाजी। ओके। और केतु मैटरनल ग्रैंडफादर मतलब नाना जी। ठीक है? अब जब आप नाड़ी ज्योतिष की बात करते हैं तो नाड़ी ज्योतिष के अंदर सूर्य जो है वह पुत्र का कारक है। हम सूर्य जो है वह पुत्र का कारक है और जब मैं अपनी वाइफ की पत्रिका देखता हूं तो
(30:46) उसमें सूर्य और केतु का त्रिकोण बना हुआ है। सूर्य और केतु और केतु का त्रिकोण बना हुआ है। कैसे देखेंगे सर? सॉरी आई डोंट। देखिए त्रिकोण का अर्थ ये होता है कि अगर कोई भी ग्रह किसी राशि में स्थित है। हम तो उस राशि को आधार मान के आप उस राशि से पांचवें घर में कौन सी राशि आ रही है? हां वह और वहां से नवम भाव में कौन सी राशि आ रही है वह वह त्रिकोण उनको देख लीजिए वह त्रिकोण कहलाएगा इट इज़ ट्राइन बेस तो भृगु नंदीनाड़ी में यह माना जाता है कि अगर कोई ग्रह एक राशि में बैठे हैं दो ग्रह तो उनको हम युति में मानेंगे और अगर वो त्रिकोण में बैठे हैं तो भी हम उनको
(31:23) युति में मानेंगे। तो अब उन्होंने जब पत्रिका देखी तो हम सीख रहे थे भृगु नंदीनाड़ी थोड़ा पता चल रहा था तो उसमें वाइफ की पत्रिका में सूर्य के ट्राइन में केतु आ जाता है जो कि मैटरनल ग्रैंडफादर को केतु कौन है मैटरनल ग्रैंडफादर और सूर्य कौन है आपकी नरसंतान तो एक कंडीशन क्या बनती है कुछ कुछ ऐसी बनती है कि जो आपको पुत्र आएगा उसका कोई ना कोई लिंकेज जो है वह अपने मैटरनल ग्रैंडफादर से हो सकता है। ठीक है? अब जब हम अपनी कुंडली देखते हैं स्वयं उस जीव की कुंडली देखते हैं जो जो जीव जन्मा है उसको किस ग्रह से देखते हैं जीव को?
(32:07) बृहस्पति से। अपनी कुंडली में। जब अपनी कुंडली में हम अपने बारे में विचार करते हैं तो बृहस्पति से करते हैं। अकॉर्डिंग टू भृगु नंदीनाड़ी। तो अगर मां की पत्रिका में सूर्य केतु का योग है जो यह बता रहा है कि पुत्र जो प्राप्त होगा उसका संबंध नाना से हो सकता है। तो पुत्र की पत्रिका में भी तो संबंध केतु से होना चाहिए अगर वास्तव में वो है। बिल्कुल तो मेरे बेटे के पत्रिका में बृहस्पति का संबंध केतु से ही है। और मैं आपको एक बड़ी विचित्र बात बताता हूं के इनके नाना जी का जो देहांत है वह 24 मार्च को हुआ हम हम और सुबह 8:00 बजे हुआ
(32:50) हम 24 मार्च को सुबह 8:00 बजे हुआ और नाना जी के यहां पर एक जैसे स्पॉट होता है ना आप कहते हो उसको कभी कोई मार्क कह देता है बर्थ मार्क कह देता है लेसन कह देता है काइंड ऑफ उसको बहुत सारे नाम देते हैं बट बर्थ मार्क अब इस व्यक्ति के जो नाना जी हैं उनका देहांत कब होता है? 24 मार्च सुबह 8:00 बजे साथ में एक साथ में थे जिस समय देहांत हुआ। हम अब 24 मार्च को 9:30 बजे पुत्र आता है। वही बर्थ मार्क यहां लेकर आता है। सेम ईयर में? सेम ईयर में नहीं।
(33:33) हां। ईयर तो बहुत बाद में आया। वही सोचूं कि आत्मा तो मतलब इतनी नहीं नहीं नहीं एकदम नहीं है। एकदम नहीं ऐसे नहीं वो करीबन 2011 में गए थे। मतलब 2011 में डेथ हुई थी उनकी। तो 2011 में उनकी डेथ हुई और 2000 अ 22 के अंदर 24 मार्च 2022 को मेरे घर में पुत्र आता है। यहां पर वही मार्क लेकर आता है और सुबह 9:30 बजे आता है। मतलब उनकी सोल 2011 से इतनी अब मैं अब मैं इस चीज पे देखिए मैं इस चीज को बिल्कुल ये नहीं कह रहा कि मुझे पता है नहीं मानिएगा मैं जो वो बताना आपको चाह रहा हूं लेकिन ये चीज इतना बड़ा प्रमाण है
(34:19) मेरे लिए यह बात को मानने का कि ज्योतिष कितना ज्यादा कार्य कर रहा है यानी कि सिंक्रोनोसिटी जो हम बोलते हैं कि चीजें कितना सिंक में काम करती हैं एक दूसरे से ये प्रमाण है इस बात का तो कर्मा अलाइनमेंट की जैसे हमने बात की ना हम तो जैसे-जैसे इस पे आगे काम किया तो बहुत सारी चीजें पता चली जैसे एक बहुत अच्छी प्रेडिक्शन इसमें ये आती है कि अगर आपका बृहस्पति राहु हम एक साथ है हम या त्रिकोण में है हम तो आप अपने फोरफादर का कोई रीकार्नेशन अपने फोरफादर का एंड यू कुड बी योर ग्रैंडफादर आल्सो डी1 डी9
(35:02) डी1 एंड डी9 9 स्पेशली मैं कहूंगा D9 हम राइट डी1 के अंदर भी और D9 में तो वो फिर वो कहते हैं ना जैसे पुख्ता हो जाती है वो चीज कि हां ये पक्का है तो उसमें वो चीज पड़ी तो ऐसीऐसी चीजों को ना बहुत देखा हम और उनको टेस्ट किया कुंडलियों पे लगा के तो समझ में आया कि ये सिर्फ मृगु नंदीनाड़ी को हम एक टेक्स्ट के रूप में नहीं ले सकते ये कंप्लीटली व्यक्ति के जीवन में एक अलाइनमेंट करके दे सकता है। उसको इसका एक उदाहरण देता हूं मैं आपको। पहले तो यह समझते हैं कि यह हमें प्रारब्ध को समझने में किस तरीके से हमारी मदद करती है और फिर कि इससे एलाइनमेंट हम कैसे करते हैं?
(35:46) दोनों पर बात करेंगे। आपने सुना होगा कि बहुत पहले जो ज्योतिषी आया करते थे, पुराने ज्योतिषी थे, उनकी प्रेडिकशंस कुछ इस प्रकार की हुआ करती थी कि जिस दिन इस व्यक्ति के प्रथम संतान पैदा होगी, उस दिन के बाद से यह व्यक्ति जो है तरक्की करता चला जाएगा। हम हम कुछ लोग ये बोलते थे जिस दिन इसका विवाह हो जाएगा उसके बाद से इसके जीवन में से आर्थिक तंगी समाप्त हो जाएगी। तो पहले लोग ना बहुत इस प्रकार की जो है वो प्रेडिकशंस दिया करते थे लोगों को। अब वो प्रेडिक्शनंस खत्म हो गई। अब लोगों ने राहु केतु, शनि, साढ़ेसाती इन चीजों पे ज्यादा ले गए लोगों को।
(36:24) तो अब क्या है? अब जब आप इसको देखते हो तो उसमें एक बड़ा अच्छा योग काम करता है। जैसे लेट्स से आपकी अपनी जन्म पत्रिका है। उसमें अगर हमने आपके हस्बैंड को देखना है तो हम किस ग्रह से देखें? मंगल से देखें। तो यदि आपकी जन्म कुंडली में यदि आपकी अपनी जन्म कुंडली में मंगल का संबंध बृहस्पति से बन गया। और मंगल का संबंध शुक्र से बन गया तो मंगल कौन है? हस्बैंड। हम बृहस्पति कौन है? वृद्धि। प्रोस्पेरिटी और शुक्र क्या है? धन, ऐश्वर्य, वैभव। तो हम यह कहेंगे कि जिस दिन इस स्त्री का विवाह होगा, इसके विवाह के उपरांत इसके पति के धन में बढ़ोतरी होगी।
(37:15) और उसके जीवन में हर प्रकार से वृद्धि शुरू हो जाएगी। ओके? वहीं ऐसा नहीं है कि हर किसी के लिए ये प्रेडिक्शन दी जाती है। कुछ जगह टेंशन शुरू हो जाती है। कुछ जगह परेशानियां शुरू हो जाएंगी। तो वहां पर भी आप मंगल के लिंकेज देखोगे कि भाई मंगल जो है कैसे ग्रहों के साथ में लिंक है। राइट? अब यहां पर जब हम एलाइनमेंट की बात करते हैं तो एलाइनमेंट क्या करता है यहां? एलाइनमेंट यह करता है कि मान लीजिए हमने केतु ग्रह उठाया। और केतु किसी व्यक्ति का चंद्रमा के साथ है। किसके साथ है? चंद्रमा। चंद्रमा के साथ है। त्रिकोण में है या एक साथ है? नवांश के अंदर।
(38:01) और ऐसा व्यक्ति किसी भी विचार को लेकर डिस्टर्बड है। हम और कोई भी विचार जो बहुत समय से उसको परेशान कर रहा है। तो यहां पर हम केतु को लेखन लेते हैं। क्या लेते हैं? लेखन मतलब राइटिंग। और चंद्रमा क्या है? इमोशन है। तो यदि किसी कारण से आपका इमोशनल आउटलेट नहीं हो रहा है तो लेखन के द्वारा वो इमोशनल आउटलेट आपका हो जाएगा। यानी कि आप अपनी इमोशनल स्टेट को स्टेबल कर लोगे सिर्फ किस चीज के चलते? लेखन के चलते। इसलिए आप यह उठा के देखिए पत्रिकाएं कि जो व्यक्ति भी चंद्र केतु लेकर आया है नववांश में लेकर आया है वह व्यक्ति जबजब
(38:45) लिखेगा हम तबतब आपको लगेगा उससे पूछना कि जब तुम लिखते हो तो तुम्हें ऐसा लगता है तुम्हारा इमोशन बाहर आ रहा है तो वो कहेगा हां कभी आंसू आने लगते हैं आंसू गिरने लगते हैं मतलब मुझे समझ नहीं आता क्या होता है पर जब लिखता हूं तो ऐसा लगता है कि कोई भाव ऐसा है जो बाहर आ रहा है तो ये किसके लिए रेमेडी हो गई। यह चंद्र केतु के लिए रेमेडी है। अब कहने को हमने इसमें क्या किया? हमने कुछ नहीं किया। हमने दो सिग्निफिकेशंस उठाए। किसके? चंद्रमा मतलब मन या इमोशन। केतु मतलब लेखन राइटिंग। उनको साथ में जोड़ा। तो इमोशनल स्टेबिलिटी किस चीज से आई? लेखन
(39:25) से आई। इसको हमने नाम दिया कर्मा अलाइनमेंट टेक्निक। फिर एक व्यक्ति तो हो गया चंद्रकेतु का। अब दूसरा व्यक्ति है चंद्र राहु। अब एक ने तो अपने इमोशन जो है लेखन के जरिए पूरे कर लिए। उसने लेखन किया तो उसने अपने इमोशन निकाल दिए। लेकिन उस व्यक्ति का क्या जो चंद्र राहु लिए बैठा है? हम अब वो कहेगा भाई जब ये इमोशनल स्टेबल हो सकता है तो मेरी इमोशनल स्टेबिलिटी मुझे कहां से मिलेगी? हम तो अब आपको दो तरीके से इसको समझना पड़ेगा। कि अगेन चंद्रमा कौन है? मान राहु कौन है? अब्सॉर्बर जिसने अब्सॉर्ब किया है। मतलब चंद्रमा राहु वाला व्यक्ति कौन है जो इमोशंस को
(40:09) रिलीज नहीं करता। इमोशंस को अब्सॉर्ब करता है। अच्छा होगा तो भी उसको अब्सॉर्ब कर लेगा। बुरा होगा तो भी उसको अब्सॉर्ब कर लेगा। अब वो कई दफा अनअवेयर हो जाता है अपने चंद्रमा राहु अपने इमोशंस को लेकर। और कई बार वो दूसरे व्यक्ति के महसूस किए इमोशन से खुद को आइडेंटिफाई कर लेता है। ये तो मेरा इमोशन है। हम और उसके कारण क्या होता है? उसको इमोशनल ओवरवेल्मिंग हो जाती है। जैसे कई लोग जो हैं वह भावनात्मक निर्णय के चलते अपने को फंसा लेते हैं। निर्णय क्लेरिटी से लिया जाए तो आपको कहीं ना कहीं अच्छे फल देगा और भावनात्मक लिया जाए तो वह किसी भी दिशा में जा सकता है,
(40:51) अच्छा भी जा सकता है, बुरा भी जा सकता है। तो चंद्रमा राहु वाले व्यक्ति जितने भी होते हैं जिनके एक साथ में चंद्र राहु नववांश में या त्रिकोण में चंद्रमा राहु हो ऐसे व्यक्ति की कभी भी आप कुंडली उठा के देखिएगा उनसे पूछिएगा आप अपने इमोशंस के चलते कितनी बार ट्रैप हुए तो वो कहेंगे हम ट्रैप ही अपने इमोशंस के चलते होते हैं और कोई चीज हमें ट्रैप ही नहीं करती क्लियर बोल देंगे अब सवाल यह उठता है कि जिस कर्मा अलाइनमेंट टेक्निक की हम बात कर रहे हैं वो चंद्रमा राहु को क्या कह रही है हम कि आपको कैसे बचना है? बिकॉज़ आप तो अब्सॉर्ब करोगे।
(41:29) तो अब्सॉर्ब करने वाला व्यक्ति जो होता है जो भावनाओं को इमोशंस को अब्सॉर्ब करता है वो एक कंटेनर बन जाता है। लाइक वो कंटेन कर रहा है। कह रहा है लाओ भाई मेरे पास जगह है तो मैं इमोशंस जो है अपने भीतर भर लूं। अब जब वो ओवरवेल्म हो जाएगा उसका जो मानसिक स्तर है वह थोड़ा हिलने लगेगा। गड़बड़ाने लगेगा तो वो मांगेगा उपाय कि उपाय क्या है? अब हम कहेंगे कि जो कंटेनर आपने अपने इमोशंस से भर लिया है अब उसको खाली करो। खाली करोगे उसको। अब खाली कैसे करोगे? अब खाली करने का तरीका है ग्राउंडिंग। अभी हम इस घास पे बैठे हुए हैं। हम नंगे पांव बैठे हैं।
(42:07) हम ठीक है? बेयर फूट है। हम अभी क्या हो रहा है? अगर हम अननोइंगली देखें तो पांव जो है वो यहां जुड़ा हुआ है। ठीक है? अर्थ से जुड़ा हुआ है। ये क्या हो रहा है? ये ग्राउंडिंग हो रही है। दिस इज व्हाट वी कॉल ग्राउंडिंग और इसको अर्थिंग भी कह सकते हैं। अब यह क्या कर रही है? यह यह कर रही है कि मान लीजिए मेरे चार्ट में चंद्र राहु का कॉम्बिनेशन है और वह चंद्रमा राहु का कॉम्बिनेशन कहीं ना कहीं मेरे करियर के साथ में कोई रिलेशन बना रहा है। तो इसका अर्थ क्या है? कि अगर मैं ग्राउंडिंग करता हूं तो मैं अपने इमोशंस को स्टेबल रख पाऊंगा जिसके कारण मेरा करियर भी सुचारू
(42:49) रूप से चल सके। अन्यथा अगर मैंने ग्राउंडिंग नहीं की तो यही इमोशन ओवरवेल्मनेस के कारण मेरे ऊपर हावी हो जाएंगे और उन इमोशंस के चलते मैं कोई ऐसा निर्णय ले लूंगा जो आगे चलके मेरे ही करियर को डिस्टर्ब करे और ऐसा होता है लोगों के साथ। इसलिए जिस किसी के चार्ट में मैं चंद्रमा राहु देखता हूं तो मैं कैट के अनुसार क्या कहता हूं आप ग्राउंडिंग कीजिए। आपका कोई इलाज नहीं है। लेकिन यहां एक बहुत इंपॉर्टेंट चीज जो कैट करती है वो डिफरेंशिएशन है। डिफरेंशिएशन है। क्या कि अगर आप यह रेमेडी को समझें कि लिखने से व्यक्ति के इमोशन रिलीज होते हैं। इसको हर कोई बता देगा। ये
(43:34) कोई मैंने कोई नई बात नहीं बताई है। पहले भी लोग बोलते आए हैं कि आप डायरी लिखिए। उससे आपके इमोशन रिलीज होते हैं। ये बात भी बहुत लोग बताते हैं। आप ग्राउंडिंग करिए। आप अर्थिंग कीजिए। उससे आपको बहुत कामनेस फील होती है। कैट ये बताता है कि ग्राउंडिंग किसके लिए उपयोगी है और लेखन किसके लिए उपयोगी। हर व्यक्ति के लिए लेखन काम नहीं करेगा। मेरे चार्ट में चंद्र राहु है तो मैं लिखने बैठूंगा तो उससे मेरा कोई इमोशनल स्टेबिलिटी नहीं होने वाली क्योंकि मैं रिलीज वही करूंगा ना जो भीतर है जो मेरा कंटेन किया हुआ है उसको ग्राउंड ही करना
(44:10) पड़ेगा उस ऊर्जा को ग्राउंड करना पड़ेगा और जो स्वयं का है उसको रिलीज करना पड़ेगा जो स्वयं की बेचैनी है उसको क्या करना पड़ेगा उसको रिलीज करना पड़ेगा इसलिए चंद्रकेतु विल गिव यू रिलीफ थ्रू राइटिंग एंड चंद्र राहु विल विल गिव यू रिलीफ थ्रू ग्राउंडिंग। ये दोनों में भेद है। यही कर्मा अलाइनमेंट टेक्निक का एक छोटा सा मैंने एग्जांपल आपको यहां है। अगर हम बात करने बैठ जाए तो मेरे ख्याल जितने भी ग्रह हैं उनके साथ में जो ग्रह है और फिर उनके साथ में और कोई तीसरा ग्रह जुड़ गया, चौथा ग्रह जुड़ गया तो ऐसे एंडलेस कॉम्बिनेशंस जो है हमारे बनके खड़े हो जाएंगे।
(44:54) आप लोग हमेशा कहते हैं ना कि इलाजी आप अपनी कुंडली तो पूछ लेती हैं लेकिन हमें भूल जाती हैं। तो इस बार मैंने अपनी कुंडली तो पूछी ही पूछी लेकिन मैंने आप सभी के आत्मकारकों यानी कि आपकी कुंडली के हाईएस्ट डिग्री प्लनेट को कैसे डिकोड करना है यह सब राहुल सर से पूछा। मेरे वाले का तो बता दीजिए। अच्छा आपके चार्ट का मुझे बताना मतलब किस सन मार्स सन मार्स का मैं बता दूं ओके देखिए सन मार्स क्या है कि सूर्य क्या है ना सूर्य आत्मकारक है मेरा आत्मकारक भी सूर्य ही है अरे हर किसी का आत्मकारक सूर्य है नहीं मेरा तो हाईएस्ट डिग्री नहीं
(45:37) अच्छा आपका हाईएस्ट डिग्री है बहुत अच्छी बात है तो एक होता है कि आत्मकारक हम जो चर कारक के रूप में मिला डिग्री वाइज और एक आत्मकारक कारक वो होता है जो नैसर्गिक सबकी कुंडलियों में सूर्य ही है। मेरा भी कुंडली में आत्मकारक सूर्य है। इनका भी सूर्य है। हर व्यक्ति का सूर्य है। ठीक है? अब जब सूर्य मंगल के साथ में आता है हम तो यह व्यक्ति जो एक आत्म के रूप में सेल्फ के रूप में आया है। ये कौन है? यह कोई वॉरियर है। यह कोई क्षत्रिय है। अब क्षत्रिय जो है वो ऐसा नहीं है कि वो क्षत्रिय सूर्य मंगल दिख गया। किसी का तो तलवार लेके आपको
(46:15) दिखाई देगा कि वो मार रहा है, काट रहा है। क्षत्रिय इन द सेंस उसके अंदर वो गुण आपको दिखाई देंगे लड़ने के किसी बात को लेकर खड़े होने के। कभी किसी की अगर रक्षा करने का समय आएगा तो उस चीज के तो ये चीजें आपको देखने को मिलेगी। रही बात जब आपका चर आत्मकारक सूर्य है यानी कि हाईएस्ट डिग्री प्लनेट सूर्य है। तो यह आपको क्या बोलता है? आत्मकारक आपको जीवन में कोई ना कोई शिक्षा देने आता है। इस जन्म में आपकी आत्मा जो है वो क्या शिक्षा लेने आई है? वो शिक्षा यह लेने आई है कि आपको कंट्रोल जो है या पावर जो है अगर कभी आपके पास आई तो कभी आप पावर का मिसयूज मत कीजिएगा।
(47:00) क्योंकि आपको सूर्य क्यों मिला है? आपको सूर्य हाईएस्ट डिग्री में क्यों मिला है? क्योंकि आपकी सोल सूर्य को ही क्यों सीखने आई है? सूर्य से क्यों टीचिंग लेने आई है? आत्मकारक सूर्य क्यों बना है? क्योंकि कहीं ना कहीं बहुत हद तक यह पॉसिबल है कि आपने अपने किसी पास्ट लाइफ के अंदर अपनी पावर का गलत यूज किया हो। इसलिए इस जन्म में यह आपको शिक्षा देती है कि अगर कभी जीवन में आपके पास पावर आई तो कभी आपको उसका गलत यूज़ नहीं लेना है। अन्यथा इस जीवन में भी आप उस शिक्षा को नहीं ले पाएंगी जो आपका आत्मकारक आपको देने आए। बात समझे आप राहुल सर तीन लोग स्पीकिंग
(47:49) ट्री के स्टूडियो में एक व्यक्ति थी आकांशिक रिकॉर्ड जो पूरा पढ़ती थी दूसरे एक योगी थे तांत्रिक थे बगलामुखी के साथ और तीसरी एक पास्ट लाइफ रिग्रेशन थेरेपिस्ट थी। इन तीनों को एस्ट्रोलॉजी का नहीं आता कुछ। तीनों से अलग-अलग समय पर अलग-अलग बात हुई है। किसी और कॉन्टेक्स्ट में बात हुई है। मेरे ड्रीम्स के बारे में जो मुझे ड्रीम्स आते हैं, जो मेरा अपना अनुभव रहा है। तीनों ने आपको पता है यही बात कही है कि इलाजी आप पास्ट लाइफ में अपनी पावर का बहुत गलत इस्तेमाल करके आए हैं और इस लाइफ में आपको वही ईगो पावर का गलत इस्तेमाल पावर आ गई तो वह रिपीट नहीं करना है। हाउ
(48:30) इज दैट पॉसिबल कि आप भी वही बात बोल रहे हैं। मतलब इस बात में सच्चाई है। देखिए लाला जी मैं कुंडली ठप्पा लगा रही है। देखिए लाला जी मैं कोई तांत्रिक नहीं हूं। ना मेरे पास कोई ज्ञान है। मेरे पास कुंडलियों पर काम किया हुआ अनुभव है जो मैंने अपने सूत्रों से या अपने परम्यूटेशन कॉम्बिनेशन से लगाया है। लोगों बिल्कुल ठीक है। हां ठीक है। क्योंकि मेरी अपनी अंडरस्टैंडिंग ये कहती है ना एक भाई आपके ग्रह तो सात है ना राहु केतु को हम आत्म आत्मकारक में कंसीडर नहीं करते। हम सात सात ग्रह लेते हैं। उन्हीं में से कोई आपका एक आत्मकारक बनता है जो ग्रह हाईएस्ट
(49:07) डिग्री है। तो मेरा मन सबसे पहले प्रश्न क्या पूछेगा स्वयं से कि आपका आत्मकारक यही ग्रह क्यों बना और कोई क्यों नहीं बना? सही बात है। क्योंकि कहीं ना कहीं व्यक्ति के अंदर ना वह बीज रूपी संस्कार आपको मिलेगा उस ग्रह का जिस ग्रह का आत्मकारक व्यक्ति लेकर आया है। फॉर एग्जांपल आपने तो सूर्य बोल दिया। अब कोई व्यक्ति ऐसा भी होगा जो सुन रहा होगा कि जिसका आत्मकारक जो है चंद्रमा है। अब उसके लिए लेसन क्या है? उसके लिए लेसन यह है कि उसने पिछले जन्म में हो सकता है अपने मातृ धर्म का पालन सही से ना किया हो। इस कारण से उसको चंद्रमा जो है
(49:51) आत्मकारक के रूप में मिला है। शुक्र में अगर किसी को शुक्र के रूप में आत्मकारक मिला है तो आप क्या कहोगे उसको? कि इस जन्म में इस व्यक्ति को वासनाएं को त्याग कर प्रेम करना सीखना होगा। नहीं तो क्या है इस जन्म में भी वह जो वासना के रूप में जो संस्कार आया है वह फिर दोबारा से इसको परेशान करेगा। मंगल अगर किसी का है तो कहीं ना कहीं क्रोध का बीज या लड़ने का जो एक वो संस्कार होता है लड़ने झगड़ने का या क्रोध करने का वो संस्कार कहीं ना कहीं उठ के आया है इस जन्म में। इसलिए जिसका आत्मकारक मंगल होगा उसकी सबसे
(50:37) बड़ी सीख यह है कि उसको अपने चित्त से सबसे ज्यादा अगर किसी एक षड रिपु को दूर करना है वो डर रिपु क्या है वो क्रोध इस कारण से वह ग्रह आया है आत्मकारक में नहीं तो सारे ग्रह आत्मकारक होते ना आपके एक ही क्यों बना वो बस इतना विचार कर लोगे तो आपको अपने आप ही वह दृष्टि जो है वह ईश्वर दे देगा कि हां यह ग्रह जो है क्या है। एक सूर्य जो है वह सबसे अच्छा कार्य कब करता है? सूर्य सबसे अच्छा कार्य तब करता है जब वो अपनी अथॉरिटी को कंस्ट्रक्टिव रूप से यूज करता है कि अगर मुझे ईश्वर ने अथॉरिटी दी है तो उसको मैं कंस्ट्रक्टिव रूप से कैसे यूज़ करूं? एक
(51:23) बात कही गई है विद ग्रेट पावर कम्स ग्रेट रिस्पांसिबिलिटीज। यस तो जिसका आत्मकारक सूर्य होगा उसको यह रियलाइज करना जिसका आत्मकारक मंगल है हम उसको क्या कहोगे गुस्सा कम करना है नहीं क्योंकि कभी-कभी क्रोध भी जो है वो आवश्यक है। ऐसा नहीं है कि आप क्रोध को हटा दोगे। हम लेकिन क्रोध के दो रूप हैं। एक क्रोध व्यक्ति वो होता है जो अपने हित के लिए करता है और एक क्रोध वो होता है जो व्यक्ति किसी की रक्षा के लिए करता है। एक किसी का विध्वंश कर रहा है। एक किसी का रक्षण कर रहा है। तो यहां पर जब मंगल आपका आत्मकारक बन के आए तो आपने अपना जीवन जो है वह रक्षक बन
(52:02) के जीना है। भक्षक बनके नहीं जीना। तभी आप उस आत्मकारक से आत्म साक्षात्कार कर पाओगे। अन्यथा नहीं। बुध, शनि, बृहस्पति वालों का भी बता दीजिए। अरे हिला जी क्या है वो पूरा ना एक वो एक तार जोड़ना पड़ता है वो कि भाई परमात्मा बुलवा कुछ बुलवा कुछ तो बुध जो है आपकी कोई लर्निंग अधूरी रही है कुछ जैसे कहते हैं ना जिसका बुध आत्मकारक होगा ना अपने आप उसका मन कुछ ना कुछ सीखते रहने का करेगा क्योंकि कहीं ना कहीं कोई अधूरी पूरी ख्वाहिश किसी लर्निंग को लेकर रह गई है
(52:47) तो लर्निंग ही उसका मार्ग है। यानी कि ज्ञान मार्ग बोल देते हैं जिससे बृहस्पति के लिए भी हम वही कहेंगे कि दोनों ग्रह जो है कहीं ना कहीं लेकिन बृहस्पति जो है वो विवेक से जुड़ा है। विवेक से जुड़ा है। और विवेक को अध्यात्म की दृष्टि से एक बहुत अच्छे तरीके से जो है विवेक का जो है वह एक डेफिनेशन दिया गया है कि विवेक क्या है? तो अध्यात्म में कहा गया विवेक के द्वारा ही व्यक्ति नित्य और अनित्य में भेद कर सकता है। बिना विवेक के नित्य और अनित्य में भेद नहीं कर सकता। यानी कि एक विवेकी पुरुष क्या होगा? विवेकी पुरुष कहेगा भाई यह
(53:29) शरीर है। आज है कल ऐसा नहीं रहेगा। और जब मैं चला गया तब तो इसका अस्तित्व ही समाप्त हो जाएगा। और जो अविवेकी है उसको क्या लगेगा? अरे इस शरीर से मुझे इतना लाभ हो रहा है। यह शरीर ही मुझे सब कुछ दे रहा है। तो मैं शरीर पर ही ध्यान दूं। तो वह क्या कर रहा है? विवेकी क्या है? विवेक जो है जिसके भीतर वो नित्य को नित्य मान रहा है। और जो अविवेकी है वो किसको मान रहा है? वो अनित्य को नित्य मान रहा है। राइट? तो जुपिटर किस चीज का कारक है? जुपिटर विवेक का कारक है। इसलिए आपने अपने इस जन्म में अपने विवेक के ऊपर कार्य करना है। फिर आता है सैटर्न। तो जिसका शनि
(54:12) आत्मकारक होगा ना ऐसा लगेगा जैसे सारे जगत की रिस्पांसिबिलिटीज सारे जगत की एक्सपेक्टेशंस आपने उस पर डाल दी। या बहुत से लोग ऐसे होते हैं जो अपने पिछले जन्म में ना अपने काम को लेकर कुछ करना चाहते थे। दे वर हैविंग सो मेनी ड्रीम्स कि यार मैं यह काम करूं, मैं वह काम करूं। अब मान लीजिए आज के जमाने में कोई व्यक्ति है। उसने बहुत मेहनत करी, बहुत प्रयास किया। उसने सोचा मैं एक अंपायर खड़ा कर दूं। ठीक है? लेकिन खड़ा करते करते कहीं उसकी मृत्यु हो गई। तो आपको नहीं लगता कि वो संस्कार के रूप में वो बीज जो है उसके चित्त में समा गया कि
(54:49) मैं यह नहीं कर पाया। क्योंकि मृत्यु शैया पे कहीं ना कहीं उसको वो विचार जरूर आएगा कि मैं यह कार्य कर रहा था और मैं इस कार्य को पूर्ण नहीं कर पाया। तो अब अगले जन्म में वही संस्कार जो है वह फिर चित्त लेकर आएगा और फिर जो आत्मा है वह कुछ बड़ा करने का प्रयास करेगी क्योंकि छटपटाहट है ना वो उस चीज की तो वह उसको पूर्ण करने का प्रयास करेगी कि मैं अपना कुछ कर्म करूं कुछ बड़ा कर्म करूं यह शनि आत्मकारक दिखाता है इसलिए आप जितने भी लोग उठाएंगे जीवन में जितनी छटपटाहट आप काम को लेकर किसी कार्य को लेकर शनि आत्मकारक के रूप में देखेंगे लोगों की कुंडलियों में इतना
(55:30) आप किसी के चार्ट में नहीं देखेंगे सबसे ज्यादा मिलेगी ठीक है तो मेरे ख्याल सातों का कंप्लीट हो गया बोलने को तो अब हम बहुत बोल सकते हैं आत्म कारक पे भी लेकिन अभी के लिए मैं समझता हूं इतना बहुत शुक्र शुक्र बुध मंगल मंगल सूर्य चंद्रमा चंद्रमा पांच ही हुए हैं नहीं हो गए ना सूर्य हो गया चंद्रमा हो गया हम मंगल हो गया हम बृहस्पति हो गया हम शनि हो गया बुध हो हो गया। बुध हो गया। शुक्र भी हो गया। शुक्र भी कंप्लीट हो गया। परफेक्ट इस सेगमेंट में इतना ही। अब हम आपका आपको जो जानने की जरूरत है और उस विषय में आपको जागृति की बहुत जरूरत है। अगले सेगमेंट पर
(56:12) उस पर बात करेंगे और वह यह है कि जो लोग इतनी वेगली बोल देते हैं कि आपकी कुंडली में तो यह दिख रहा है कि किसी ने आपके ऊपर जादू टोना किया है। आपके ऊपर कोई आत्मा का साया आ गया है। क्या यह कुंडली से देखा जा सकता है? और क्या वास्तव में राहुल कौशिक की नजर में यह चीजें एग्ज़िस्ट करती हैं? किस रूप में करती हैं? इस पर बात करेंगे। हम पहाड़ी इलाके में थे। थोड़ी-थोड़ी ठंड बढ़ गई थी। इसके बाद हमने एक-एक कप चाय पी और कर्मा और पास्ट लाइफ की बातों से हम बढ़े एनर्जीस की तरफ। रात के लगभग 11:00 बज चुके थे और हमने बात शुरू की सुपर
(56:54) नेचुरल एक्सपीरियंसेस पे। जहां राहुल सर अपनी लाइफ के ऐसे सुपर नेचुरल एक्सपीरियंसेस के बारे में मुझे बता रहे थे जो एक्चुअली मुझे गूसबम्स दे गए और फिर एक इंटेंस सेशन के बीच अचानक से लाइट चली गई। उस वक्त कुछ ऐसा महसूस हुआ जिसे शब्दों में समझना मुश्किल है। वो सेशन हमने इस पार्ट में से हटा दिया है क्योंकि वो पूरा ही नहीं हो पाया था। लेकिन अगर आप एक्सपीरियंस पूछें तो वह बहुत इंटेंस सा कुछ था जिसको मैं बता ही नहीं सकती। लाइट आने के बाद हमने महादेव को याद करके एनर्जीज़ पर अपनी बातचीत
(57:39) दोबारा शुरू की। एनर्जीज़ क्या हैं? और किन लोगों को यह ज्यादा फील होती हैं? क्या देव देवी काली मां यह सारी एनर्जीज हमारे अंदर वाकई में आती हैं? इन सबके पीछे की जितनी मिस्ट्री है राहुल सर ने उसको एस्ट्रोलॉजिकल पॉइंट ऑफ व्यू से डिकोड किया है। अगर आप मनोवैज्ञानिक दृष्टिकोण से देखेंगे ना तो आपको यही समझ में आएगा कि ऊर्जा एक्सिस्ट करती है और कुछ लोग जो है उन ऊर्जाओं को लेकर रिसेप्टिव बहुत होते हैं। इसलिए वो उसको सोख लेते हैं बहुत जल्दी और जिस भी प्रकार की ऊर्जा होगी वो उससे वैसी कराने लगेगी। अब यह तो हमने भूत प्रेतों की बात की है। क्यों?
(58:22) बहुत से लोग देव की भी तो बातें करते हैं। देव आ गए। माता आ गई तो वो क्या वो माता जो है वो पूरे जगत को चला रही एक आदमी में आ जाएंगी। माता आई या नहीं आई। लेकिन माता से जुड़ा जो भाव है वो आ गया। वो आ गया। परफेक्ट। तो माता का आना या माता से जुड़ा भाव का आना वो डिफरेंट है। इसलिए यहां पर सजगता आवश्यक है। तो जिसको आप कह रहे हो यह पजेस हो गया है। वो पस नहीं हो गया। इसने कोई ना कोई चीज सोक ली है अनअवेयरनेस के चलते जो इस पर हावी हो गई है। क्यों? ये मानसिक रूप से उतना सशक्त नहीं था। अब यहां हम बात तो ज्योतिष की कर रहे हैं। यह
(59:00) तो चलो एक दृष्टिकोण हमने समझ लिया कि ऐसा कुछ हो सकता है। ज्योतिष कैसे काम करता है यहां पे। तो किसी भी चीज का अब्सॉर्प्शन करने वाला एक ही ग्रह है। हम सुबह से बात कर राहु राहुल हर चीज को अब्सॉर्ब राहु ही करता है। और ऊर्जा कौन है? मंगल मंगल तो मंगल और राहु जिस कुंडली में हम एक साथ होंगे या त्रिकोण में होंगे नवांश में बात कर रहा हूं मैं स्पेशली लग्न की बात नहीं कर रहा। तो यह व्यक्ति जो है ऊर्जा को अबजॉर्ब करता है। इसकी बॉडी जो है वो ऊर्जा को अब्सॉर्ब करती है। अब बॉडी
(59:46) जब ऊर्जा को अब्सॉर्ब करेगी तो बॉडी आइडेंटिफाई नहीं कर पाएगी कि वो ऊर्जा सही है या गलत। बॉडी का अपना तरीका है रिसोंड करने का। लेकिन अगर आपका कॉन्शियस स्ट्रांग है, आपका मनस स्ट्रांग है तो एटलीस्ट वो आइडेंटिफाई कर लेगा कि क्योंकि मैं इस जगह यहां गया था और उसके बाद मुझे अच्छा फील नहीं हो रहा तो उस आइडेंटिफिकेशन के चलते वो कुछ स्टेप्स ले लेगा जिसके चलते वो उनसे बाहर आ जाएगा। लेकिन अगर चंद्रमा वीक हुआ कमजोर हुआ तो वो क्या सोचेगा? वो यह सोचेगा किसी ऊर्जा ने मेरे ऊपर कब्जा कर लिया है और वह इस बात को स्वीकार लेगा अंतर अंतर
(1:00:22) का मून राहु मार्स तीनों साथ आ गए तीनों साथ में हो तो उस केस में तो बहुत हद तक संभव है कि वो ये मान ही लेगा कि उसके भीतर ये चीज आ रही है। मान ही लेगा वो और फिर मैं आपको बता रहा हूं कि ऐसा नहीं है कि हमेशा भूत प्रेत को ही इस चीज से लीजिए। मैं इसका एक बहुत छोटा एग्जांपल आपको देता हूं। बहुत सल एग्जांपल हम ये सब लोगों के काम आएगा जो लोग बहुत परेशान रहते हैं मेंटली यस क्योंकि ये योग ऐसा है अगर नहीं समझा बहुत परेशान रहोगे चंद्र मंगल राहु ठीक है चंद्रमा मंगल राहु त्रिकोण में अगर किसी के दूसरे घर में छठे घर में 10वें घर में
(1:01:07) आ जाए कहां लग्न कुंडली या नववांश कुंडली में नववांश में मैं ज्यादा ज्यादाेंस देता हूं हमेशा क्योंकि सूक्ष्म रूप है लगन का तो अगर किसी का चंद्र मंगल राहु नवांश में प्रथम भाव में पंचम में नवम में आ जाए तो यह क्या हो गया ये एक ट्राइन बन गया एक पांच नौ का या फिर दूसरे घर में छठे घर में 10वें में आ जाए ये एक ट्राइन बन गया तीसरे में सातवें में 11व में आ जाए यह ट्राइन बन गया और चौथे में आ जाए आठवें में आ जाए 12व में आ जाए यह एक ट्राइन बन गया राइट अब इसको समझिए दूसरा अगर फैमिली का क्या है? फैमिली। छठा घर किस चीज का है? डिस्टरबेंसेस का।
(1:01:51) और दवां घर किस चीज का है? कर्म का है। एक्शंस का है। तो मान लीजिए किसी के 2 6 10 में मून, मार्स राहु का एक कॉम्बिनेशन बन रहा है चंद्र, मंगल, राहु का। तो जो भी फैमिली के डिस्टरबेंसेस होंगे वो यह व्यक्ति जो है अननोइंगली सोख लेगा। और सिर्फ उन इमोशंस को नहीं सोखेगा। उन इमोशंस के पीछे जो द्वंदात्मक ऊर्जा है उसको भी सोख लेता। इसलिए जिनके दूसरे छठे और 10वें घर में आपको नववांश में राहु मिले ना यह बहुत दिन तक अपने घर में रह नहीं पाते ये लोग। बहुत दिन तक नहीं रह सकते अपने घर में। क्यों नहीं रह सकते? क्योंकि बॉडी का अपना
(1:02:33) एक तरीका है ना। अगर ब्रेन जान भी नहीं पा रहा, अगर माइंड जान भी नहीं पा रहा कि यह मैं क्यों कर रहा हूं। लेकिन बॉडी तो कुछ ना कुछ कहेगी ना बॉडी कहेगी नहीं यहां मेरे को बेचैनी हो रही है मेरे को कंपन फील हो रही है वो बाहर भागेगा तो बाहर जाएगा वो पार्टी करेगा दोस्तों के साथ मिलने जाएगा या जो भी उसका एक तरीका है अपने आपको रिलैक्स करने का वो वो करेगा लेकिन घर में नहीं रुक पाएगा यही 3 7 11 में अगर आ जाए तो तो हम कम्युनिकेट कौन से भाव से करते हैं तीसरे से इंटरेक्ट कौन से भाव से करते हैं सप्तम और एकादश भाव किस चीज का है? मैत्री संबंध
(1:03:12) हो गया या कुछ कुछ भी हो गया, कोई डिजायर हो गया। अब जिसके तीसरे सातवें 11वें घर के अंदर यह कॉम्बिनेशन बनेगा चंद्र, मंगल, राहु का। अब वो व्यक्ति जिस व्यक्ति से इंटरेक्ट कर रहा है। अब वो व्यक्ति शब्द कुछ भी कहे लेकिन उन शब्दों के पीछे जो उसका इंटेंट है, जो उसका भाव है, वह तो कैसा भी हो सकता है ना। आप उसको कैसे पकड़ोगे? उसको नहीं पकड़ सकते ना। आप मैं आपसे बात तो बहुत अच्छी कर रहा हूं लेकिन जो मेरे पीछे जो एक एलिमेंट काम कर रहा है ऊर्जा का वो नेगेटिव है और आपके चार्ट में चंद्र मंगल राहु जो है वो तीसरे सातवें और 11वें घर
(1:03:50) में है। आपको यह समझ नहीं आएगा कि क्या हुआ। लेकिन कहीं ना कहीं आपका शरीर और आपका अंतर्मन कुछ ना कुछ आपको सिग्नल देना शुरू कर देगा। आपको बेचैनी शुरू हो जाएगी। आपको लगेगा अभी तक तो सब ठीक चल रहा था। अब मुझे बेचैनी हो रही है। अब मैं यहां बैठ नहीं सकता। क्यों नहीं बैठ सकता? अभी अचानक से क्या हो गया? क्योंकि आपके बॉडी ने उस चीज को अब्सॉर्ब कर लिया जो एनर्जी के रूप में इस व्यक्ति के बैक ऑफ द माइंड काम कर रही है। यस। तो ये जो कांसेप्ट अगर समझ लिया जाए ना तो इससे बहुत लोग तर जाएंगे। वह भी तर जाएंगे। जो यह सोचते हैं कि वह
(1:04:36) उन पर भूत प्रेत बहुत वो करते हैं। वह भी तर जाएंगे। जो लोग मानसिक रूप से बहुत परेशान रहते हैं और अभी हम ईश्वरीय कृपा से एस्ट्रोसाइकोलॉजी या मनोवैज्ञानिक ज्योतिष पे कार्य कर रहे हैं। कार्य कर रहे हैं। क्योंकि जो वाइफ है हम वो अपने आप में मनोचिकित्सक है। साइकोथरेपिस्ट भी रही है। साइकेट्रिस्ट भी रही है। उसने काउंसलिंग भी किया है लोगों की। हम तो बहुत से कांसेप्ट मुझे उससे समझने को मिले। फिर क्या है? बहुत से हमारे स्टूडेंट्स भी ऐसे हैं जो मनोविज्ञान से जुड़े हुए हैं। तो हम ज्योतिष और मनोविज्ञान के साथ में मिलकर कुछ ऐसा
(1:05:19) कार्य कर रहे हैं ताकि लोगों को ना हम मेंटली ये समझा सकें कि वो जिस स्टेट में है क्यों? वो स्टेट में क्यों है? ये क्यों का आंसर लोग? क्योंकि क्योंकि फिजिकल नंबनेस एक बार को व्यक्ति झेल सकता है। लेकिन इमोशनल नंबनेस बहुत खतरनाक है। क्यों? अगर मेरा एक हाथ जो है वह काम करना बंद भी कर दे तो कहीं ना कहीं यह हाथ और मेरे दो पैर मेरा बहुत सा काम कर देंगे। लेकिन अगर दिमाग काम करना बंद कर दे तो यह शरीर होते हुए भी कुछ नहीं कर पाएगा। तो मैं समझता हूं कि लोगों को मनोवैज्ञानिक स्तर पर जागरूक करने की बहुत आवश्यकता है और ईश्वर की कृपा रही तो हम
(1:06:05) इसमें काम कर रहे हैं और बहुत जल्दी कुछ ऐसा लेकर आएंगे और उसके लिए कोई हमारा प्रयास रहेगा कि हम उसको कुछ इस तरीके से ना बताएं कि हमने कोई टेक्निक वो की है या कुछ की है। हम उसको कुछ इस तरीके से रखेंगे ताकि हर व्यक्ति उससे घर बैठे लाभान्वित हो सके और उसको यह पता चल सके कि जिस स्टेट को वो फील कर रहा है जिस भी मानसिक स्थिति से वो गुजर रहा है उसके पीछे कारण क्या है उसका बैकग्राउंड क्या है और अगर उसकी स्थिति बहुत खराब हो चुकी है तो उसका सॉल्यूशन क्या है हम तीनों स्तर पर काम कर रहे हैं लेकिन अभी जो मैं आपको बता पा रहा हूं वो यही बता पा रहा हूं कि
(1:06:48) अगर आप मुझसे यह पूछेंगे कि भूत प्रेत होते हैं या नहीं है तो शायद मेरे पास उसका उत्तर नहीं होगा क्योंकि मैंने जो चीज देखी नहीं है मैं उसको नहीं एक्सप्लेन कर सकता। लेकिन अगर आप पूछेंगे मुझसे कि क्या आपने अपने जीवन में ऐसा कुछ अनुभव किया है तो मैं कहूंगा अनुभव के रूप में या उस ऊर्जा के रूप में मैंने एक बार नहीं अनगिनत बार उस चीज को ऑब्जर्व किया है। अगर मैं यह कहूं कि इस समय भी जब जहां हम बैठे हैं, मैं महसूस कर सकता हूं कि इस समय यहां की ऊर्जा कैसी है। तो मैंने वहां भी उसको महसूस किया है। तो इसको लेकर मैं एक ही बात कहूंगा ताकि सब लोगों को इसका
(1:07:33) पता चल सके कि इफ यू आर अ सेंसिटिव पर्सन हम अगर आप बहुत सेंसिटिव हैं चाहे इमोशनली चाहे एनर्जी वाइज तो बिल्कुल भी आपको घबराने की या अपने आपको कमजोर समझने की गलती बिल्कुल भी मत करिएगा। यह ईश्वर ने आपको अवेयर होने के लिए एक टूल दिया है जिसको आप अवेयरनेस के चलते खुद भी अवेयर हो सकते हैं और अपने जैसे बहुत से लोगों को इस प्रॉब्लम से निकाल सकते हैं क्योंकि मैं खुद इस चीज को मैंने फील किया है। फेस किया है और 5 साल नहीं 10 साल नहीं करीबन 40 साल इस चीज को फेस किया है मैंने अपने जीवन में। मैंने खुद यह ऑब्जर्व किया है कि कब आप
(1:08:21) इमोशनल सेंसिटिविटी के चलते लोगों के लिए एक इमोशनल डंपिंग ग्राउंड बन जाते हो। लोग आते हैं अपना इमोशन जो है आपके ऊपर डंप करके चले जाते हैं और आप समझ नहीं पाते कि आपके साथ जीवन में क्या घटित हो रहा है। आप रो रहे हो। आप बेचैन हो रहे हो। आपको यह समझ में नहीं आ रहा कि अभी मैंने इस आदमी से बात ही तो करी थी 5 मिनट पहले। अब मैं अचानक से डिस्टर्ब क्यों हो गया? तो यहां पर अवेयरनेस ही आपको बचा सकती है। और मैं धन्यवाद करता हूं अपने गुरु का जिसके कारण ज्योतिष आया। ज्योतिष के माध्यम से एटलीस्ट मैं समझ पाया कि जब आप बहुत इमोशनली सेंसिटिव होते हो तो यह कोई
(1:08:59) कमजोरी नहीं है आपका सेंसिटिव होना। यह बहुत बड़ी शक्ति है अगर आप जागरूक हो जाओ तो। क्योंकि एक बार आप जागरूक हो गए ना तो आप सिर्फ उन इमोशंस को नहीं पकड़ोगे। आप एक मिरर बन जाओगे सामने वाले के लिए भी और आप उनके लिए भी एक सहायक व्यक्ति का काम करोगे जो ऑलरेडी इस पेन से गुजर रहे हैं। और स्पेशली आपको बता दूं कि ये जो कांसेप्ट कहा जाता है आज की डेट में एमैथ और नार्सिस्ट का इसमें मैक्सिमम केसेस में जो पज़ेस होने की बात होती है कि यार इसके ऊपर कुछ आ गया, उसके ऊपर कुछ आ गया। ये किनके ऊपर आता है? ये एमैथ्स के ऊपर आता है। नार्सिस्ट के ऊपर कभी नहीं आएगा।
(1:09:44) सही है। नार्सिस्ट व्यक्ति के ऊपर कभी कोई जो ऊर्जा है ना वो उसको पज़ेस नहीं करेगी। एमैथ को कर लेगी। क्यों कर लेगी? क्योंकि एमैथ बेचारा एक अननोन कंटेनर है। एक एक वो ड्रम है। एक तरह का खाली ड्रम जो बेचारा घूम रहा है अननोइंगली। और जिस व्यक्ति को देखो वो आके उस पे अपना इमोशनल गार्बेज जो है उस पे डंप करके चला जाता। जैसे खाली प्लॉट की हालत होती है ना कॉलोनीज़ में आपने देखा हो कि भाई खाली पड़ा हुआ है। कोई पूछने वाला है नहीं डाल दो। वही हालत बेचारे एम्पैथ की होती है कि वो कह किसी को कुछ पाता नहीं। क्योंकि वो जीवन भर यह समझता रहता है कि यह दुख मेरा है। यह
(1:10:24) पीड़ा मेरी है। यह बेचैनी मेरी है। जबकि पहचान ये नहीं पाता कि वो दुख बेचैनी और पीड़ा उसकी नहीं है। यह उस पर डाली गई। तो यहां इस चीज से लोगों को निकालना बहुत जरूरी है और वह हर वह व्यक्ति जो बेचारा ना नहीं बोल पा रहा अपने इमोशनल एक्सप्लइटेशन को रोक नहीं पा रहा उनको यह जानने की जरूरत है अवेयर हो जाओ। अवेयर हो जाओगे तो अपने लिए अपनी ही शक्ति खुद जो है उसका निर्माण कर दोगे और अवेयर नहीं हुए तो यही इमोशनल एमथी एक दिन आपके लिए सुसाइडल बन जाएगी। यह आपको ही खा जाएगी। क्योंकि दूसरे व्यक्ति का डंप किया हुआ जो
(1:11:12) गार्बेज है ना वो एक दिन ऐसा विभत्स रूप ले लेगा कि वह स्वयं दानव बनकर सबसे पहले आपको ही निगल जाए। एक चीज और है कि जब जागरूकता आएगी ऐसे व्यक्ति जो इतने इमोशंस लिए घूम रहा है तो वो सबसे पहले क्या करेगा क्योंकि अभी तक उसका एक टेंडेंसी क्या रही है मान लीजिए उसको कोई डिस्टर्ब कर गया तो तो वो कुछ कह नहीं पाया जब वो डिस्टरबेंस बहुत बढ़ गई बहुत ज्यादा उस पे डंपिंग हो गई तो अचानक से वो रिएक्ट कर गया क्योंकि एक बॉडी की एक कैपेसिटी है ना कितना वह उसको झेल सकती है। जब वह कैपेसिटी यहां भरेगी तो क्या होगा? वह अचानक से रिएक्ट
(1:11:57) कर देगा। लेकिन जिस दिन इसको अवेयरनेस आ जाती है इस बात की कि ये जो जिसको आप क्या अंग्रेजी में हम वर्ड बोलते हैं ना दिस शिट इज नॉट माइन बेसिकली कि भाई ये आपका है। आप इसको रखिए। तो व्यक्ति जागरूक हो जाता है। अब वो जैसे ही जागरूक होगा वो सामने वाले का गार्बेज लेने से इंकार कर देगा। और जैसे ही वह इंकार करेगा तो सबसे पहला एक जो स्टेटमेंट उसको सुनने को मिलेगा जानते हो क्या मिलेगा उसको सुनने को मिलेगा यार तुम ना बहुत बदल गए हार्टलेस हो गए हो तुम्हारे अंदर इमोशंस नहीं रहे तो ऐसे आदमी को पहले तो अपने को जागरूक करना है। जागरूक करने के बाद सशक्त करना
(1:12:41) है और सशक्त करने के बाद उसको गिल्ट से भी फ्री रहना है। क्योंकि उसके ऊपर गिल्ट डाला जाएगा ताकि उस गिल्ट में उसको ट्रैप करके वही चीजें कराई जा सके जो पहले कराई गई थी। तो आपको इन तीनों चीजों से बचना है और स्पेशली तब जब यह योग आपके जन्म कुंडली में है। चंद्र, मंगल, राहु हर व्यक्ति को बचाना है। हर व्यक्ति को बचाना है जो पीड़ा और बहुत आवश्यक है और जागरूकता ही इसको बचा सकती है। अवेयरनेस ही बचा सकती है। कोई दूसरा उपाय नहीं है। अन्यथा और जगह एक्सप्लइटेशन होगा और कुछ नहीं होगा। इसलिए बोल पा रहा हूं क्योंकि मैं इन सब चीजों से गुजरा हूं
(1:13:27) और गुजरने के बाद मैंने जो जाना है मैं चाहता हूं वह हर व्यक्ति जाने तो आपकी सबसे पहली जिम्मेदारी जो बनती है वो मानसिक रूप से स्वयं को सशक्त करने की बनती है। किसी और की नहीं बनती। ईश्वर ने हर किसी को हाथ दिए हैं, पैर दिए हैं, मस्तिष्क दिया है, सब चीजें दी है। तो आपकी जिम्मेदारी सर्वप्रथम अपने लिए बनती है। आप सशक्त हैं, दूसरे को सशक्त कर पाएंगे। आप अगर सही नहीं है तो कोई भी सही नहीं। आपकी इस बात से ना राहुल सर मुझे 100% मैं कह सकती हूं कि जितने लोग सुन रहे होंगे और अगर वह इंपैथ हैं कुंडली में योग हो ना हो अगर वह इंपैथ हैं और यह चीजें अपनी
(1:14:08) लाइफ में फील कर रहे हैं। ऐसे रिश्तों को लेकर चल रहे हैं। ऐसे दोस्तों को ऐसे ऑफिस के माहौल को लेकर चल रहे हैं ना तो आज की बात से अवेयरनेस भी आएगी उन्हें और उनको लाइफ में बहुत रिलीफ भी महसूस होगा क्योंकि वो गिल्ट होता है ना सर जो दूसरे लोग देते हैं वो इतना भयंकर होता है कि आप खुद से ही लगता है आपको कि आप कितने बुरे हो जबकि वो बुरे हैं वो आपके अंदर अपने इमोशंस डम कर रहे हैं। वो आपको अपने ट्रैप में ले रहे हैं। लेकिन बुरा कौन है आप हो। और फिर जो आपने बात कही ना कि जब आप छोड़ते हो अवेयरनेस जैसे ही आती है ना क्योंकि आप कट ऑफ करते हो मैंने यही किया
(1:14:45) था एंड हर हर उस जगह से कट ऑफ किया जिसने यह इमोशनल डम ग्राउंड बनाया मेरे को उसके बाद जो सुनने को मिलती है ना सर यू वांट बिलीव पहले ना मैं बहुत रोती थी कि मेरे ही दोस्त ऐसे बोल रहे हैं या मेरे ही जो जो इतना पसंद करते थे वो मुझे अहंकारी बोल रहे हैं कि तुम तो अहंकारी हो गई हो। तुम में चार बातें ज्ञान की क्या आ गई? तुम तो अब अब उनकी शिट नहीं ले रही हूं ना मैं तो अब मैं अहंकारी हो गई हूं। लेकिन उनको समझ में नहीं आता है कि आपने मुझे इमोशनली और मेंटली कितना कितना ज्यादा ब्रेक किया है कि मैं अपनी ही पोटेंशियल को पहचानने से
(1:15:20) डरती थी और मैं आपको बोल रही हूं ना मुझे घूस बम्स आ रहे हैं क्योंकि क्योंकि बहुत सारे लोग इस चीजों से गुजरे हैं और गुजर रहे हैं और हिम्मत ना राहुल सर मिल नहीं पाती है क्योंकि हर किसी को आप जैसे लोग नहीं मिलते ना मैं तो बहुत लकी हूं जो आपने शुरुआत में भी पडकास्ट में गाना इससे पहले वाले सेगमेंट में कि आप प्रारब्ध का बहुत अच्छे पुण्य खा रहे हो। ऐसे योग होते हैं। है मेरी कुंडली में योग बट बहुत सारे लोगों की कुंडली में नहीं होते हैं। करेक्ट। तो वो बेचारे कभी समझ ही नहीं पाते हैं। जो गिल्ट लेके खोज ढूंढ वो आई एम सो सॉरी।
(1:15:56) मैं समझ पा रहा हूं। मैं समझ पा रहा हूं। अब एक व्यक्ति है जिसको आपने फिजिकली क्षति पहुंचा दी। तो वह उससे एक दिन में, दो दिन में, 10 दिन में, महीने भर में बाहर आ जाएगा। और एक व्यक्ति है जिसको आपने मानसिक रूप से आघात पहुंचाया है। पता नहीं वो कब बाहर आएगा। और अगर ईश्वरीय कृपा ना रही तो हो सकता है इस जन्म में बाहर ही ना आ पाए। उस चीज दे फीड ऑन योर इमोशंस। दे फीड ऑन योर वलनेरेबिलिटी कि आप की जहां कमजोरी होगी ना उसको फीड करेंगे बट बट जैसा मैंने कहा कि एक दिन आप जागरूक अवश्य होगे। आपको अवेयरनेस पक्का आएगी कि अब इसके बाद
(1:16:44) में मेरा कोई रोल नहीं है। यह व्यक्ति अपने पर है। मेरी कोई जिम्मेदारी नहीं है। तो उसके बाद यह फिर आएंगे ताकि आपको यह एहसास दिलाएं कि आप कितने हार्टलेस हो। आपने इन्हें अबेंडन कर दिया। आपने इनको अबेंडन कर दिया और वो एक तरीका होता है ताकि आप उस गिल्ट के चलते फिर दोबारा से सबमिसिव हो जाओ और सबमिसिव होकर कह दो कि मेरे प्रभु मुझे बताइए मुझसे क्या गलती हुई गलती हुई क्या गुनाह और उसी चीज के जो है यह ताक में बैठे होते हैं। यहां पर ये जो मूवमेंट होता है गिल ट्रिपिंग के बाद का दैट इज द मोस्टेंट
(1:17:30) मूवमेंट जहां पर आपको बहुत ज्यादा सजगता की इनफैक्ट पहले से ज्यादा सजगता की आवश्यकता है क्योंकि इतनी आसानी से उस चीज को जाने नहीं दे सकते। सालों साल जिस व्यक्ति ने इनके लिए कंटेनर का काम किया है। अपने इमोशनल गार्बेज को यह जहां बिना कहे बिना सोचे बिना समझे डंप कर सकते थे। अब वो इनको अचानक से इनके लिए अनअवेलेबल हो गया है। तो वह चीज ना समय लेती है। इसलिए छटपटाते हैं और यह पूरा प्रयास करेंगे कि आप वापस से उस चीज को कर लीजिए। तो यहां पर फिर मैं वही कहता हूं। कि यू नीड टू बी वेरी मच अवेयर।
(1:18:15) और मैं जैसे हम रेमेडीज की बात करते हैं नैला जी तो मैं हमेशा कहता हूं कि एक एमैथ जो भी व्यक्ति होगा जो भी कोई भी हो सकता है एमैथ हम में से और खासकर एम्पैथी जो है वो एक ह्यूमन कैरेक्टरिस्टिक है। हर व्यक्ति में होती है। तो एक एमैथ व्यक्ति सबसे ज्यादा अपने को किससे रिलेट करता है? किससे रिलेट करके देखना है? तो यहां मैं एक बात कहूंगा जिन भी देवी देवताओं को हम पूजते हैं हम सबसे ज्यादा अपने को उन देवी देवताओं से रिलेट कर पाते हैं जो हमें लगता है हमारे अंदर का जो स्वभाव है जिनसे मेल खाता जैसे जो भी एमैथ होगा
(1:19:03) ना वो कहीं ना कहीं कहीं ना कहीं आपको उसको महादेव से आप उसको अटैच होते हुए देखोगे कि वो महादेव से अटैच होगा या महादेव से ना भी अटैच हो तो महादेव के उस कांसेप्ट से अटैच होगा जो महादेव को महादेव बनाता है। तो अब देखिए वह जो विष की बात आती है वह क्या कहते हैं वह विष किसने धारण किया महादेव ने एमैथ क्या कर रहा है वह भी तो विष ही धारण कर रहा है किसका धारण कर रहा है लोग है दुनिया उसका विष धारण कर रहा है वो डाल के जा रहे हैं ये अपना ले रहा है तो जो भी एंपायर है अगर कोई व्यक्ति उसके पास है तो उसको सजगता दे सकता है तो बहुत
(1:19:44) अच्छी बात है और अगर कोई व्यक्ति नहीं भी है आपके पास तो आपके पास एक बहुत बड़ी शक्ति है। महादेव के रूप में जाओ उनको पूजो। आपको ना तो कोई एंपैथी आपकी कभी डिस्टर्ब करेगी और ना ही आप कंटेनर बनेंगे किसी ऊर्जा का जिसके चलते आप यह कहें मैं पज़ेस हो गया हूं। कुछ भी आपके ऊपर नहीं है। आप बस एक काम करते रहिए और मैं आपको यह अपने पर्सनल एक्सपीरियंस से बता रहा हूं। शायद किसी के काम आ जाए और मैं इसको रेमेडी नहीं मानता। मैं ये मानता हूं ऐसे जैसे हमारे लिए भूख खाना है या हमें जैसे किसी चीज की आवश्यकता पड़ती है बचपन में तो किसके पास भागते हैं
(1:20:24) मां-बाप के कि हमें ये चाहिए तो मैं समझता हूं आप कुछ मत कीजिए आप शिवलिंग पे जल अभिषेक कीजिए और पूरी श्रद्धा से कीजिए जो कुछ अंदर होगा वो निकल जाएगा जो डंप होगा वो निकल जाएगा जब कोई बैठा है आपके भीतर का भी विष ग्रहण करने के लिए तो आपको किसी व्यक्ति के पास जाने की आवश्यकता क्या है मैं तो अपना एक्सपीरियंस बता रहा हूं। यू नीड नॉट एनी रेमेडी। जस्ट गो टू महादेव। शिवलिंग पे जल अभिषेक कीजिए और उनको बोलिए मेरे भीतर जो कुछ भी है वो आपको समर्पित और आ जाइए। आपका काम हो गया। अब वह देखेंगे कि आपको जागरूकता कैसे देनी है। आपको अवेयर कैसे करना है और आपको यहां
(1:21:05) से कैसे निकालना है। अब उस अब उनका काम है ये आपका नहीं है। तो इतना ही बस मुझे कहना था और आगे कभी अगर हम मनोविज्ञान और ज्योतिष पर बात कर पाए तो अवश्य करेंगे। बिल्कुल सर ताकि और लोग और लोगों का थोड़ा सा उसमें सहयोग हो सके। वो जिस भी मानसिक अवस्था में है तो करेंगे। मुझे लगता है सर यह सारी प्लानिंग और प्लॉटिंग भी महादेव की ही है कि कैसे इस मीडियम के जरिए लोगों की मदद हो पाए क्योंकि हर कोई ना उस अवेयरनेस में सर है नहीं कि हमारे साथ गलत हो रहा है या उस गलत के प्रति हमें आवाज उठानी है। हम पता है हमारे अंदर प्रॉब्लम क्या है सर? क्यों
(1:21:48) आवाज नहीं उठा पाते हैं या क्यों उस ट्रैप से बाहर नहीं आ पाते हैं? ये खोने का डर होता है ना सर कि यह व्यक्ति भले ही हमें समझ में आ रहा है इसकी वजह से मैं परेशान हो रहा हूं। उसके इमोशंस में सक कर रहा हूं। यह एनर्जी वैंपायर है। लेकिन हमें लगता है कि वो रिक्तता आ जाएगी कहीं अगर यह व्यक्ति चला गया क्योंकि उसने आपको ऐसा ऐसा ट्रैप किया होता है। आपको लगने लगता है कि अगर यह मेरी लाइफ से चला गया तो एक गाइडेंस चली जाएगी या शायद एक एक ऐसी शक्ति चली जाएगी जो मेरी लाइफ को संचालित कर रही है। बट लोग भूल जाते हैं भाई आपकी लाइफ को कोई मनुष्य संचालित कर ही नहीं
(1:22:24) रहा है। फियर ऑफ़ अबंडनमेंट एक्सक्टली कि छोड़ देने का जो डर है का डर है वो हर रिलेशनशिप में है लेकिन लोग यह भूल जाते हैं कोई मनुष्य आपको थामे रख ही नहीं सकता है वही है जो बस आपको थाम के रख सकता है और वही है बस जो आपकी मंजिल है बिल्कुल ये आई थिंक हम याद रखेंगे ना तो किसी से भी नहीं डरेंगे डेफिनेटली डेफिनेटली देखिए जब हम मुक्ति की बात करते हैं ना तो मुक्ति अवेयरनेस से ही आ सकती है अनअवेयर होकर कभी आप मुक्त नहीं हो पाओगे। वो तो आप बंधन में बंधते रहोगे। तो हमारा प्रयास यही रहना चाहिए कि पहले तो हम अवेयर हो और जब हमें लगे कि हम अवेयर हो चुके हैं तो
(1:23:05) जो कोई भी और व्यक्ति है जो उस दलदल में फंसा हुआ है उसे भी अवेयर करें। यही हमारा काम होना चाहिए। बहुत-बहुत धन्यवाद सर। जय श्री राम। अ डे विद राहुल कौशिक में तो मतलब क्या बताऊं मैं शायद यह दिन मैंने आपके साथ बिताया है। मेरी टीम ने आपके साथ बिताया है। लेकिन आई एम 100% श्योर कि दर्शकों को ऐसा लगेगा कि यह पूरा दिन उन्होंने आपके साथ बिताया है और बहुत कुछ टेक अवे वो लेकर गए हैं। उनमें से एक भी टेक अवे में ना सर उन्होंने अप्लाई कर लिया ना। एक को भी अगर अवेयरनेस आ गई ना मुझे लगता है यहीं पे हम हमारा काम सफल हो हम सब करेक्ट
(1:23:47) हर हर महादेव हर हर महादेव आप बताते हुए जाइएगा कि यह हमारा पहला इनिशिएशन था एक पडकास्ट से हटकर कुछ ऐसा नया करने का जो आपको और ज्यादा हेल्प कर सके आपकी जर्नी में आपकी चेतना को और कैसे ऊपर ले जाया जा सके और सबसे बड़ी बात जो इमोशनल इमंबैलेंस की वजह से हमारी लाइफ में परेशानियां आती हैं या हम जो पीड़ा सहन करते हैं उसमें कैसे हेल्प हो सकती है यह पूरा एक जो एक दिन का प्लान था इतने घंटे का कंटेंट हमने दिया है आपको यह उसी का एक पार्ट था तो प्लीज आपके जो जो भी फीडबैक्स हैं आपकी जो भी राय है वो जरूर बताते हुए जाइएगा
(1:24:40) एलावर्स जर्नीज के चैप्टर वन में हमने राहुल कौशिक सर के साथ एस्ट्रोसाइकोलॉजी और अध्यात्म को एक्सप्लोर करने की एक शुरुआत की है। उम्मीद है इस जर्नी से आपको कुछ नया समझने को जरूर मिला होगा। आपको यह चैप्टर कैसा लगा कमेंट बॉक्स में जरूर बताइएगा और अगर इलावर्स को आपने अभी तक सब्सक्राइब नहीं किया है तो प्लीज जरूर कर लीजिए। चेक करिए कि सब्सक्राइब वाला बटन आपने दबाया है या नहीं। क्योंकि इस फील्ड के और एक्सपर्ट्स को लाने के लिए हमें आपके सपोर्ट की बहुत जरूरत है। अगली जर्नी में आप किसे सुनना चाहेंगे? अपने सजेशंस कमेंट बॉक्स में जरूर बताइएगा। मैं हूं
(1:25:22) इला गोस्वामी और यह है इलावस जर्नीज एंड द जर्नीज कंटिन्यूस। आखिर मैं क्या बोलूं मैं? मैंने महादेव को याद किया था और महादेव के गण यहां आ चुके हैं। सांपों के रूप में, छोटे-छोटे प्यारे-प्यारे सांपों के रूप में और बस सार्थक रही ये चर्चा। आप लोगों के भी काम आए बस यही बात से मैं महादेव का स्मरण करके खत्म करती हूं। हर हर महादेव। आप तो बोल ही नहीं रहे हैं। यही तो प्लान किया था। एक चीज प्लान करिए। एक चीज एक चीज प्लान भी नहीं हुई है आपसे। मैं एकदम से बहुत मतलब सोच में पड़ गया। कोई नहीं आप फिर कर
(1:26:06) सकते हो। कोई नहीं कोई नहीं नेचुरल रहिए। हर हर महादेव। हर हर महादेव।
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