Friday, May 1, 2026

osho ~ How we are losing our original vitality ~మనం మన అసలైన జీవశక్తిని ఎలా కోల్పోతున్నాం? #sadhguru

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Youtube Video URL:https://www.youtube.com/watch?v=o7hImwBwLEE



Transcript:
(00:00) मनम मन असलन जीव शक्ति एला कोलपो नामो मीक लसा केवलम सक्स द्वाने मनम मन असलन जीव शक्ति कोलपोना ते निजा की तम शक्ति पोग कोनी एवर कोरको कानी सेक्स लो भाव प्राप्ति अनब ओ रकम क्षणिका आनंदम उंदी दानी कोसम मनम मन शक्ति कोलपो को सिद्ध उन्नाम कानी ओवे सरिगा अला अनुभूति मरोक रक मनक लभ पक्षम लो सक्ष द्वारा शक्ति कोलपो को मनम ए सिद्ध पम मरी अलाट अनुभूति पंदरम ए दैना उदा मन उनके अंत भागम लोक
(00:47) वेदु को जीवित सखरा ग्रा ताकद को जीवित परमानंद क्षणात पेंदु को वाट मोलाल तो पाट मी अंतर्गत केंद्रा चेरक को मरक मार्गम ए दैना उदा अलाट दारी ए दैना रकते जीवितम लो अद पद विप्लवा की कारण अंद अप मीर सेक्सन व दिले दिव्य चैतन्यम दिश पै निस्तार दातो मीलो अंतर्गत विप्लवम चोट चेस कुंद नूतन द्वार रच कुंद प्रजल मन त्त मार्गम चपलेन वारु पात पद्धतीने अनुसत पतन पतार इट वरक सेक्स को संबंध उ भावन स्त्री पुरुषु
(01:37) सेक्स तपा मर मार्गम चोप लेक पोगा पतन मने दारुण मात्र जरिग पोइ मानव को प्रकृति सेक्स अने चक्कनी मार्गा प्रसाद चिंद कानी शताब्दाम चूप कुंडा उन मार्गाने मूसे दांतो मानव लैंगिक शक्ति अकड़ ग रगत मनिष पिवा चेस ंद अंद के पिच मनिष बलवंत नना शक सहज मार्गा रचे को य मात्र प्रय चड कानी अतन लो लैंगिक शक्ति तान बट पडे अड उन वाटनी ध्वंस चेसक प्रय कानी बट पडेको सहज उन मार्गम गट्टिगा
(02:25) मसक पोव तो गत्र लेका अद असहज मार्ग द्वारा बट प ंद कंटे उ मार्गम मूसक पोइ त्त मार्गम लेद मनिष उन दर् भागल इटी निजन की सेक्स व्यतिरेक अचत बोधन वल्ले मानव लो लैंगिक परम आलोचना एक अंते काद अ वक्र मार्गम प दान चिकित्स एमटी अंद मर मार्गा रव गलमा भाव प्राप्ति समयमलो काला निरंकार स्थि रडू अनुभव लो की वस्तानी गतम लो ने न कालम अदृश्य पो अहं करग पो आ समयमलो ओ क्षणम असल तने मिटो तन वास्तव एमिट लस्तु
(03:17) कानी अदभुतम अनुभवम ओ क्षणम उंदी मल्ली मनम रग मुखम पट्ट पात मने पड़ पोता क्रम मलो प्रव अदभुतम विद्युत शक्ति मनमे विनम चडम वल्ला आ शक्ति मनम कोल पयाम कानी मनसु आ क्षणिका नंदानी मल्ली मल्ली चेज किंच को वालनी एप वेंपर लाने ंद कानी आ क्षण कानंद यंत तात्कालिक अटे सरिगा अद अदृश्य मंद चाला अरु दुगा अद मनक लस्तु अंते काद दानी अनुभूति की संबंध लां आन वान ज्ञापन अ मनक मिगल इ मनक मगिला मल्ली दानी कोसम वेंपर
(04:07) लाडम मात्रे अला मनुष वा जीवित कालम अंता मदान मल्ली मल्ली पलने प्रयत्न लोने निमग्न पतार कानी वारु तगा प्रयत्न चना महानंद वारिक व क्षणम कना एक कुव कालम एटकी लभ आ मदान मनम ध्यान द्वारा मनम मन चैतन्या चेरने मन मु सेक्स ध्यानम अने र मार्गा नाई सेक्सन प्रकृति मनक प्रसाद सेक्स प्रकृति सहज अद जंतु को पक्षु को टलक मनुल को उंदी दा प्रकृति सहज उपयोग स्तुत कालम मनम जंतु कना गपम काम
(04:56) कालेम सेक्स को बदल रोज मनम नूतन द्वारा रुस्ता मो आ रोज नचे मलो मानवत्वम विकस चिनल लेका अंतक मंद मनम येदो पेरक नवलम कानी नि जमन नवलम काने काद अंते काद मन जीव केंद्रम को जंतु जीव केंद्रम मादर गाने ई प्रकृति जीव केंद्रम तो एकी भ विंच उंट मनम ई स्थिति मिंच ददग रूपांतरण चंदे वरक जंतु लाग जी विस्ता मनम अंदर लागे तुल रिंची वारी लागे मालाड पैक मनुष लागे कनि पस्तु पटकी मन मनसु लोलो पली मूलो जंतु लागे उं तपा अंतक मिंच लेम अके
(05:44) मलोनी पशु प्रवृति ए चिन्ना अवकाशम दना विजम स्ने उंट नित्यम मसीद लो चर्च लो देवाया प्राथन चेसे वार बटक नड वेलो मान भंगाल लूटी ऊच कोतल इला ए दैना चेय गलर एला चे सार मनक लसु इला ंद रग तोंद इ इडे दमी जरिग अनुक वेंटने मानव पक्कन पडेको प्रजल को ओ अवकाशम दरकिन वारीलो सिद्ध पंच उन पशु प्रवृति वेंटने बट पड निजा मनिष दाग न् पशु बट पडे अवकाशम कोसम ए आत्र एर चूने ंद ंप रिगे
(06:32) घर्षण लो मानवत्वम अने मारु वेष लगच तन तान मर्चो प्रवर्ती चंद को मनिष व अवकाशम नटले ला गोला तं पडत तन स्वाधीन उचक पशु प्रवृति बट पेक धैर कोड गट कुं घोरम नेरा ंप अंदर तो कसी चेनगा ये मनिष रिगा आप पनि यड एं तन एना चस्ता मो अड कुं मो नन ओ पसला तकता रेमो अने यम अतन एड ंद अद पद ंप ते तान ड़ने अने भयम कानी तन एना तिस्ता मो अने भयम कानी अतन उद ंद कं ंप अंदर तो
(07:19) पाट तान क ड काब नन प्रत्यक तिचे वाव उर अद अतन ंद अके ंप येद चस्ते अ अद चेस्ड अंदर तो पाट रा विरता निस्ता मान भंगन चेस्ड इला तन दागन मृगा बट पेक ंप ओ अवकाश तीस कुं अंद मनिष प्रति ले 10 संवतसरा को युद्धम कोसम कुमला कोसम चाला आत्र यदुर चस्ता हिंदू मुस्लिम समस्या गुजराती मराठी समस्या हिंदी मातला वारु माला वा अने समस्या इला ो समस्या अंद को साक काव नलो असंतृप्त तो रग पोन मृगा बट पडे को मनिष
(08:10) कीद साक कावाली अंदुकु य साकना परवा लेद मनुष मृगा जैल बिलगा चाला कालम बिंच उं चिते दान ऊप राड बट पड़ अ अरुत उं मानव चैतन्यम प्रक सहज पशु प्रवृति अधिगम एगन वरक मनिष नलो मृगा एटकी जंच लेड

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