Friday, August 28, 2026

Unlock Ayurvedic Marma points- Panchakarma, joint pain, Eye Strain, Kidney |Dr. Puneet & Shlloka

Unlock Ayurvedic Marma points- Panchakarma, joint pain, Eye Strain, Kidney |Dr. Puneet & Shlloka

Author Name:SHLLOKA

Youtube Channel Url:https://www.youtube.com/@Shlloka_B2B

Youtube Video URL:https://www.youtube.com/watch?v=vkgwT16k_vY



Transcript:
(00:00) पंचकर्माना घर से भी शुरू किया जा सकता है। इसमें तीन स्टेप्स जो है अभ्यंग, स्वेदन और नस्यन। घुटने की कटोरी, पैटिला के ठीक नीचे और पीछे की साइड पे ना ये जानू मर्म होते हैं। हल्के हाथ से प्रेस करने से जो जॉइंट की स्टिफनेस कम होती है। मसाज करने का तरीका मैं बताऊं। हल्के हाथ से इट शुड बी एज जेंटल एज पॉसिबल। घुटने पे कर रहे हो तो उसको ऐसे रोटेट करना है। जेंटली स्टमक पे राउंड फॉर्म में करना है। हैंड्स पे कर रहे हो तो यहां पे भी नी जॉइंट की तरह फंड मर्म होता है। यह नोज़ और साइनसिस के लिए होता है। यह मास्टर मर्म है। अगर घर पे कुछ करना है तो आपको अपनी
(00:33) रिंग फिंगर पे देसी घी लेके इसको यहां पे ऐसे मूव करना है ऑर्बिटल एरिया में। आपका आई का स्टेन खत्म हो जाएगा। किडनी फेल जो हो रही है उसके पीछे के रीज़ंस क्या है? जो बच्चे जिम जाते हैं रेगुलर। कई बार प्रोटीन का एक्सेसिव यूज़ कर रहे होते हैं। किडनी को नुकसान होना शुरू हो जाता है और बॉडी एकदम से बननी शुरू हो जाएगी। जब 50% से ऊपर किडनी खराब हो जाती है ना तब पता चलता है। आपने एक पुनर्नवा का काढ़ा साथ में पंच त्रिणमूल का काढ़ा वो आप यूज कर सकते हो। इसका पाउडर बना के आप डेली बेसिस पे दो चम्मच पर डे ले सकते हो। 107 बीमारियां हमारे अनडाइजेस्टेड फूड के कारण
(01:07) होगी। वही अनडाइजेस्टेड फूड जब हमारे घुटनों में जा रहा है। ऑर्थो के कितने पेशेंट हमारे पास आए जिनको नी रिप्लेसमेंट एडवाइस कर दिया गया। उनका जानू बस्ती करी मेडिकेटेड ऑयल से हमने प्रॉपर उनका पंचकर्म करा 15 से 30 दिन के अंदर एक्सरे जब रिपीट कराया तो उनका जेएसडब्ल्यू में चेंजेस आना शुरू डॉक्टर पुनीत धवन एक आयुर्वेदिक स्पेशलिस्ट और कर्मा आयेदा के फाउंडर और डायरेक्टर हैं। उन्होंने ट्रेडिशनल आयुर्वेद के थ्रू देश और विदेश में हजारों लोगों को बेटर हेल्थ की तरफ गाइड किया है। जिन लोगों को भी बोन की स्टार्टिंग फेज में इश्यूज है वो यह हर्ब का कैप्सूल लेके
(01:43) स्टार्ट कर सकते हैं। जिनको भी ना जॉइंट्स की प्रॉब्लम रहती है ना उनको ना घर पे ना एक ऑयल बनाना है। सरसों का तेल डालना है एक पैन में आधा कप। आपने दोनों नॉस्ट्रिल्स में दो-दो ड्रॉप्स डालने हैं। साइनोसाइटिस के लिए रामबाण। पंचकर्मा है ना उसके अंदर आइज के लिए भी ना एक नेत्र तर्पण होता है। उड़द की दाल का एक राउंड शेप में आंखों के ऊपर एक पैरों की अभ्यंग करना बहुत ज्यादा जरूरी है। मलाई का भी प्रयोग कर सकते हैं। आप देखोगे डायबिटीज भी इससे कंट्रोल होगी। कौन से वाइटल पॉइंट्स हैं जिससे लोगों को इमीडिएटली बेनिफिट मिल सके।
(02:17) डाइजेशन का मर्म है वो है हृदय मर्म। छाती की जो हड्डी है उसके और एपीगैस्ट्रम यानी पेट के ऊपर वाले हिस्से में है ये। हल्के हाथ से प्रेस करना है। एसिडिटी, जलन जिनको गैस्ट्रोइसोफिगल रिफ्लेक्स भी रहता है। यह बहुत अच्छा मत है। जोड़ों में कट कट की आवाज हो, हड्डियों की कमजोरी हो। इन बिंदुओं को आपने यूज करना है। 12 प्लस इयर्स के एक्सपीरियंस के साथ डॉक्टर पुनीत अब तक 15,500 से भी ज्यादा पेशेंट्स को कंसल्ट कर चुके हैं। और आज हम उनको बहुत खुशी से बॉडी टू बीन पडकास्ट पर स्वागत करते हैं। ये जो मर्मा पॉइंट्स मैं बता रहा हूं ना,
(02:53) यह सभी लोगों को करना बहुत जरूरी है। फिट रहना है। बिल्कुल बीमार नहीं पड़ना है। मर्म पॉइंट समझने हैं। हमारे आयुर्वेद का ज्ञान है। हमारे देश का, हमारी मिट्टी का ज्ञान है। और सभी लोगों तक यह वीडियो पहुंचनी चाहिए और सभी लोग मर्म पॉइंट को समझकर अगर उनको करते हैं तो वह फिट रहेंगे, हेल्दी रहेंगे और यह घर पे ही करना है। मैंने इस पॉडकास्ट के लिए एक बहुत ही अलग इंट्रोडक्शन प्रिपेयर किया था जो मुझे पूरी तरह से बदलना पड़ा क्योंकि इस कॉन्वर्सेशन के दौरान जो टॉपिक्स सामने आए वो ज्यादा गहरे और इंसाइटफुल तो थे ही थे बट बहुत ही यूनिक थे। मतलब हमारे चैनल में
(03:29) तो हमने ऐसे टॉपिक्स कवर करे नहीं है और शायद से ही YouTube में ये टॉपिक्स की चर्चा कभी हुई हो। जैसे कि पंचकर्मा थेरेपीस तो आपने सुना ही होगा लेकिन पंचकर्मा थेरेपी को घर पे कैसे किया जाता है? उसका स्टेप बाय स्टेप प्रोसेस क्या है? एक और कांसेप्ट जो डिस्कस हुआ है वो है आयुर्वेदिक मर्मा पॉइंट्स। आयुर्वेदिक मर्मा पॉइंट एक्यूप्रेशर से बहुत अलग है। इनफैक्ट डॉक्टर ने यह कहा कि मरमा पॉइंट्स एक्यूप्रेशर से ज्यादा बेनिफिशियल और ज्यादा इंपैक्टफुल होते हैं। उनको कैसे दबाया जाता है? क्या फ्रीक्वेंसी में दबाया जाता है? पूरी तरह से डिटेल में यह
(04:01) बात डिस्कस हुई है। तो प्लीज इस पडकास्ट को पूरा देखिए। ज्यादा से ज्यादा लोगों तक शेयर करिए और अगर तो आपने चैनल सब्सक्राइब नहीं किया हो तो दोबारा रिकंसीडर करिए क्योंकि इससे हमारे चैनल और कंटेंट दोनों को ज्यादा विजिबिलिटी मिलती है और अच्छे और ऑथेंटिक स्पीकर्स लाने में मदद। आजकल जो हम इतनी क्रॉनिक लाइफस्टाइल डिजीजसेस देख रहे हैं। चाहे वो डायबिटीज हो, थायरॉइड हो। 70% जो जनता है आज इंडिया में वह क्रॉनिक लाइफस्टाइल डिजीज से पीड़ित है। लोग यह रियलाइज नहीं करते कि यह जो इशूज़ हैं वो सेल्यूलर टॉक्सिसिटी से आते हैं। यानी कि
(04:39) आपका बहुत टाइम से सेल में टॉक्सिंस डेवलप होते हैं। एंड ओवर अ पीरियड ऑफ़ टाइम ये मैनिफेस्ट होते हैं इन द फॉर्म ऑफ़ डिजीजसेस। जब मैंने अपना रिसर्च किया तो मैंने ये पता लगाया कि सेल्यूलर टॉक्सिसिटी से मुक्त होने का एक बहुत रामबाण जिसको बोलेंगे वो है पंचकर्मा। एम आई राइट? यस अब्सोलुटली। थोड़ा पंचकर्मा बताइए बिकॉज़ ऑनेस्टली बिफोर दिस पडकास्ट मुझे लगता था कि पंचकर्मा एक स्पा है। नॉर्मल मसाज होती है। बट इट्स नॉट दैट। यस। बहुत सारे लोगों को ना पंचकर्मा वो स्पा की तरह लगता है। बट पंचकर्मा इज अ प्रॉपर टेक्निक जो आपको इलनेस से बचाती
(05:12) है। इलनेस में भी काम आती है, वेलनेस में भी काम आती है। सिर्फ ऑयल लगाना इज नॉट पंचकर्मा। इसमें जो हमारे वात, पित्त, कफ है, उसको बैलेंस किया जाता है। जो दोष हैं वमन यानी एमाइसिस विरेचन यानी परगेशन, बस्ती यानी एनीमा, नस्य यानी नेज़ल हम जो ऑयल दे रहे हैं वो है और जो रक्त मोक्षण है वो है रक्त मोक्षण इज़ लीचिंग। तो ये सारी चीजें जो हैं वो हम कर रहे होते हैं। तो पंचकर्मा में ना अब हम देखते हैं कि वात बढ़ा हुआ है। वात बढ़ा हुआ है तो हमें उसको हो सकता है कि बस्ती देनी पड़े। कफ बढ़ा हुआ है तो हमें उसको वमन देना पड़े। पित्त बढ़ा हुआ है तो विरेचन
(05:49) देना पड़े। तो ये डिपेंड करता है। हो सकता है हमें वात में कुछ और देना पड़े, पित्त में कुछ और देना पड़े। किसके क्या सिम्टम्स हैं। तो ये प्रॉपर ना एक ट्रीटमेंट का प्रोटोकॉल है। अब पंच प्रिवेंटिव भी है। कोई डिजीजसेस नहीं भी है तो भी करना ही करना है। करने से आप अगर सीजनल पंचकर्म कराते हैं तो आप बीमार ही नहीं पड़ते। ओके? क्योंकि आपकी शरीर की गंदगी पहले ही निकल गई। सीजनल पंचकर्मा क्या होता है? मौसम जब चेंज होता है ना तो उस समय क्या होता है? हमारी बॉडी प्रोन होती है। जैसे आप देखा होगा ना आपने जैसे अब बारिश का मौसम आ रहा है तो इसमें अब जब मौसम चेंज
(06:17) हो रहा है छह क्लाइमेटिक ज़ों्स में हम एक से दूसरे में आ रहे हैं तो उस समय हमने अपनी बॉडी को डिटॉक्स कर लिया तो बीमारी नहीं पड़ोगे लंघन कर लिया नहीं लंघन इज नथिंग बट फास्टिंग तो आपको बुखार नहीं आएगा 10 साल से ये मैं प्रैक्टिकली करता आ रहा हूं एक दिन पहले बॉडी एक होगा सिम्टम्स आपको नजर आएंगे उस समय अगर आपने कुछ नहीं खाया या आपने फ्रूट्स खा लिया हल्काफुल्का खा लिया हाइड्रेशन प्रॉपर मेंटेन रखा पानी पूरा पिया तो आपको बुखार नहीं आएगा आपने मुझे यह भी बोला कि पंचकर्मा एक मेडिकल ड्रिवन ट्रीटमेंट ही नहीं है बल्कि एक बहुत ब्यूटीफुल
(06:49) प्रिवेंटिव और एक ओवरऑल हेल्थ ट्रीटमेंट है जो लोग कर सकते हैं और लोगों को रेगुलरली करना चाहिए एटलीस्ट वंस इन अ वीक। तो अगर तो कोई पंचकर्मा ट्रीटमेंट घर से स्टार्ट करना चाहे। आप कुछ पंचकर्मा के ऐसे स्टेप्स बताइए जो लोग फॉलो कर सकें। देखो पंचकर्मा ना घर से भी शुरू किया जा सकता है। इसमें तीन स्टेप्स जो है वह घर पर किए जा सकते हैं। पंचकर्मा के अभ्यांग, स्वेदन और नस्य। अभ्यांग में क्या करना है कि आपको पूरी बॉडी जो है उसके ऊपर ऑयल का यूज करना होता है। ऑयल कौन सा होगा इसमें? तिल का तेल होगा या फिर आपका कोकोनट ऑयल होगा। तो पूरी बॉडी पर हल्के हाथ से आप
(07:28) ऑयल लगा दें। इसी तरीके से जब हम उस ऑयल को का अभ्यंग कर रहे होते हैं, उस समय हमने पंखे या एसी का प्रयोग नहीं करना है। हमने जब ऑयल में लगाना है, उससे पहले हमने दो घंटे पहले कुछ नहीं खाना है। स्टूल क्लियर होना चाहिए। यूरिन को क्लियर करके ही अभयंग करना शुरू करना है। लगभग तीन से चार दिन पहले आपने लाइट खाना ही खाना है। लाइट खाने में आपने खिचड़ी, दलिया, घिया, तोरी, टिंडा, परवल, मूंग दाल तो ये सब चीजें आप ले सकते हो। तो तीन दिन का प्री ऑपरेटिव प्रोसेस आपने फॉलो किया। उसके बाद आपने प्रॉपर्ली अभयंग करा। देन देयर आफ्टर आपने अभयंग में जो आपने किया
(08:12) उसके बाद स्नेहन हुआ। मतलब बॉडी में जो आपके टॉक्सिंस जमा थे स्किन के अंदर वो लूज होना शुरू हो गए। उसके बाद जब आपने स्वेदन करा तो उसमें आपने एक लक्वार्म जो पानी है गर्म पानी है उसमें आप एक तो फेशियल स्टीम लेंगे। दूसरा आप एक टॉवल पे उसको गर्म करके आप अपनी बॉडी पे लगा सकते हो ताकि जो टॉक्सिंस लूज हुए हैं वो हमारी स्किन से निकल पाए बाहर। तो ये दोनों चीजें करके आप देखेंगे स्नेहन और स्वेदन से जो जमा हुई गंदगी है जो प्री ऑपरेटिव प्रोसेस ऑफ पंचकर्मा भी है वो निकलनी शुरू हो जाएगा। तो हम लाइ डाउन कर सकते हैं खड़े हो सकते
(08:45) हैं कुछ भी हो सकता है। राइट स्नेहन और स्वेदन में इट इज़ जस्ट दैट कि आपको एक चीज का ध्यान रखना है जब भी आप स्टीम ले रहे हो आप ना अपने सर पे एक ठंडा टॉवल रख लेंगे। अगर बहुत ज्यादा स्टीम ना हो जिससे ब्लड प्रेशर कंट्रोल रहे। तीसरा जो नस् आप कर करते हो। नस्से में क्या होता है? अगर आपने अणु तेल आपने दोनों नस्ट्रिल्स में दो-दो ड्रॉप्स डालने हैं। इससे आपको साइनस जो है ना जिन लोगों को ऐसे लगता है कि नाक में दर्दी रहता है, सर में दर्दी रहता है। साइनोसाइटिस के लिए रामबाण इलाज है। नस्य अच्छा माइग्रेन जिनको रहता है। ओके। आपने अभ्यंग कर लिया। आपने स्नेह स्वजन कर
(09:21) लिया। उसके बाद नस्य कर लो। घर पे ही हो जाएगा ये। उनके लिए बहुत बढ़िया है। जिन लोगों को रेगुलर बेसिस पे जो ये डिप्रेशन, ए्जायटी, स्ट्रेस, मेंटल क्लेरिटी नहीं रहती उन लोगों के लिए बहुत अच्छा है। तो ये तीन प्रोसेस ऑफ़ पंचकर्मा घर पे आप कर सकते हो। अब नसे आपने ले लिया। अब नस् लेते ही ना आपको एक दो चीजों का ध्यान रखना है। एसी में एकदम से नहीं जाना। एक घंटे तक आप एसी में नहीं जाएंगे और पंखे की भी डायरेक्ट हवा अवॉइड करनी है आपने उस समय। ठीक है? सेम गोज़ फॉर स्नेहन एंड स्वेज। सिनेसन के बाद भी इमीडिएटली आपने पंखे में नहीं जाना, हवा में नहीं
(09:54) जाना, बाहर नहीं जाना, एसी में डायरेक्ट नहीं जाना। तो यह प्रिकॉशन बहुत जरूरी है। और जब आपने यह पूरा प्रोसेस कर लिया उसके बाद आपने लगभग एक से दो दिन तक लाइट ही खाना खाना है। ओके? हैवी कुछ नहीं खाना। ताकि बॉडी जो है वो उसको अब्सॉर्ब कर पाए। जो आपने लिया है उसको रिकवरी हो पाए बॉडी में। जो पंचकर्मा है ना उसके अंदर आइस के लिए भी ना एक नेत्र तर्पण होता है। आइस स्टेन बहुत लोगों को रहता है। तो नेत्र तर्पण में क्या करते हैं? हम उड़द की दाल का आटे का उसका एक आंखों के ऊपर एक पैक बनाते हैं और उसमें हम ना एक ऑयल डालते हैं आंखों के ऊपर और फिर उसको ब्लिंक करने
(10:30) के लिए बोलते हैं। बट ये घर पे करना पॉसिबल नहीं है। तो आइस के लिए घर पे पंचकर्मा में क्या किया जा सकता है? एक कप पानी में हम त्रिफला अगर ऐड करें। उस त्रिफला वाले पानी को अगर हम बॉईल करते हैं। बॉईल करने के बाद उसे एक कॉटन के कपड़े पर छान लें और उस को हम फिर निकाल के नॉर्मल गर्म पानी की वजह से उसे नॉर्मल होने दें। नॉर्मल पानी जब वो हो जाए तो उसको एक कप में लेके आंखें उसमें डुबो के ऐसे-ऐसे अगर हम करते हैं ब्लिंक करते हैं उसको हमने आंखों पे ब्लिंक करना शुरू किया। राइट लेफ्ट राइट लेफ्ट तो आपकी आंखों का स्ट्रेन गायब हो जाएगा। दूसरा
(11:09) आपको अगर घर पर कुछ करना है तो आपको अपनी रिंग फिंगर पे जो देसी घी है वो लेके इसको यहां पे ऐसे मूव करना है ऑर्बिटल एरिया में उससे अगर आप फाइव टू सिक्स टाइम अपनी आंखों के आसपास मूव करते हो राइट और लेफ्ट दोनों जगह पे तो भी आपका आई का स्टेन खत्म हो जाएगा। तीसरा आपने ना एक कॉटन पैड लेना है। उसको ना ए टू घी के ऊपर आपने सोक कर लेना है। हल्का गुनगुना होना चाहिए वो। और उसको फिर अपनी दोनों आंखों पे लगाना है। दो पैड एक लेफ्ट पे लगाया, एक राइट पे लगाया। 10 मिनट तक आपने आंखें बंद करनी है। तो आप देखोगे कि आपकी आंखें जो हैं वो
(11:43) जो स्टेंड थी वो स्टेन गायब हो जाएगा। ओके? तो इसमें एक चीज और हम ऐड कर सकते हैं। पंचकर्मा में ना पैरों में भी आपने तलवों के ऊपर भी आपने ऑयल की मसाज करनी है। उन तलवों पे करने से क्या होता है कि जो हमारे एक्यूप्रेशर पॉइंट्स होते हैं हमारे एक्यूप्रेशर पॉइंट्स सभी जगह के होते हैं। उसके बारे में भी हम बात करेंगे। वो पूरे के पूरे हमारे ऑयल जो है उसको कवर कर लेता है। तो जब तलवों पे हम मसाज कर रहे होते हैं बेसिकली क्या होता जिनको डायबिटीज है, जिनको कोई भी प्रॉब्लम है, उनका ब्लड फ्लो हार्ट से ऑर्गन जितना दूर है, उतना वह
(12:16) नहीं पहुंच पाता। तो इसलिए पैरों की अभ्यंग करना बहुत ज्यादा जरूरी है। तलवों का अभ्यंग करना बहुत ज्यादा जरूरी है। और अगर आपको ऑयल के साथ-साथ कुछ और भी करना है, तो आप पैरों के तलवों पर मलाई का भी प्रयोग कर सकते हैं। इससे भी आपका ब्लड सर्कुलेशन इंप्रूव होगा और साथ में आप देखोगे कि डायबिटीज भी इससे कंट्रोल होगी। बिकॉज़ कहा जाता है ना कि हमारे पैर के तलवों में 72,000 पॉइंट्स हैं। फ्री नर्व एंडिंग्स। तो उसको कर लेंगे तो इंटरनल ऑर्गन्स की काफी हेल्थ सही हो जाती है और नींद अच्छी आती है। बिकॉज़ मैं ये करती हूं कोकोनट ऑयल से तो नींद अच्छी आती है।
(12:48) तो उससे एक तो नींद अच्छी आएगी और साथ में क्या होता है कि उसमें आप देखोगे कि ओपन नर्व एंडिंग्स की वजह से आपकी पूरी बॉडी जो है ना वो आपकी रिलैक्स हो जाएगी। रिलैक्स के साथ-साथ रिजुमिनेट भी हो जाएगी। हम जब एक्सरसाइज करते हैं जैसे कहीं हम लोग को योग में बोला जाता है कि आप अच्छे से गरम तेल लगाइए। उसके बाद हट योगा करिए तो उससे वो प्रोस्परेशन होता है और आपके टॉक्सिंस निकल जाते हैं। क्या ये सही है? अब्सोलुटली राइट। वही कांसेप्ट तो वही है ना। आपने ऑयल लगाया आपने जॉइंट्स की, मसल्स की, गंदगी जो टॉक्सिंस है वो आपने करा। प्लस उनको आपने लुब्रिकेट कर दिया
(13:19) बिफोर यू नो स्टार्टिंग द एक्सरसाइज। लुब्रिकेशन के बाद जब हमने एक्सरसाइज करी या हमने कोई भी ऐसी चीज करी जिससे हमारी स्वेटिंग हो रही है। मेटाबॉलिज्म इंप्रूव हो रहा है। स्टीम से हमारी स्वेटिंग बढ़ रही है। तो स्वेटिंग से जो वो टॉक्सिंस जो है वो बाहर निकलना शुरू हो जाएंगे। तो आपने बिफोर एक्सरसाइज बिफोर एनीथिंग दैट यू आर यू नो आप अगर घर पे भी कुछ भी ऐसा कर रहे हो जिसमें आपको स्वेटिंग हो रही है। मेटाबॉलिज्म बढ़ रहा है उससे पहले ऑइल लगा लो। पंचकर्मा थेरेपी क्यों लेनी चाहिए और इसके बेनिफिट्स क्या है डॉक्टर? देखो पंचकर्माना एक प्रकार की शोधन चिकित्सा
(13:49) है। ट्रीटमेंट जो होता है आयुर्वेद में दो प्रकार से होता है। शमन और शोधन। शमन चिकित्सा वो होती है जिसमें हम ना मेडिसिंस देते हैं और प्रॉब्लम को ठीक करते हैं। शोधन चिकित्सा हम जड़ से बॉडी को उस प्रॉब्लम को खत्म करते हैं। दोषों को बैलेंस करते हैं। गंदगी को बाहर निकालते हैं। जो प्रॉब्लम कर रही होती है बॉडी को पूरा डिटॉक्स करते हैं। वो है शोधन चिकित्सा। वो है पंचकर्मा। पंचकर्मा में मैंने पांच चीजें बताई। वो पांचों चीजें यही कर रही होती हैं। हमारी बॉडी को पूरे तरीके से डिटॉक्स कर रही होती हैं। और हर बार जब सीजन चेंज होता है तब हमें
(14:13) पंचकर्मा थेरेपी करना चाहिए। सीजन चेंज में भी करनी चाहिए। पंचकर्मा थेरेपी आप इसे रेगुलर डिजीज पॉइंट ऑफ व्यू से तो इसे रेगुलर कर सकते हो। सीजनल चेंज में वेलनेस के लिए करनी है। फिट रहना चाहिए। वो सीजन में करें। जब भी बारिशों का मौसम शुरू हो रहा हो जहां पे जब आपका गर्मी से सर्दी आ रही हो, सर्दी से गर्मी आ रही हो, जिस जगह पे आप रहते हो उस जगह का वो मंथ अलग हो सकता है। जब भी मौसम चेंज हो, टेंपरेचर चेंज हो रहा हो, क्लाइमेट चेंज हो रहा हो, वो बेस्ट टाइम है। अंडरस्टुड। यू नो पहले एक्सरसाइज के नाम पे लोग योग करते थे। कार्डियो के लिए
(14:40) सूर्य शक्ति करते थे। सूर्य नमस्कार करते थे 108 बार। मेरे गुरु के गुरु तो 1000 के ऊपर जाते थे। लेकिन आजकल के जमाने में कार्डियो मतलब रनिंग मैराथों्स। क्या आयुर्वेद के हिसाब से ये जो पूरा मैराथॉन [गला साफ़ करने की आवाज़] कल्चर है या एक्सेसिव जो ट्रेनिंग और फिजिकल एक्टिविटी का कल्चर है क्या ये ठीक है? क्योंकि मुझे याद है ऐसे कभी कोई पास्ट में स्टडी निकली थी कि जो लोग बहुत इंटेंस फिजिकल एक्सरसाइज करते हैं या जो मैराथॉन रनर्स हैं उनकी आयु नॉर्मल लोगों की आयु से थोड़ा कम होती है। देखो जो ना बहुत एक्सेसिव फिजिकल एक्सरसाइज कर रहे हैं उनकी जैसे मान लो 4
(15:15) घंटे 5 घंटे आप फिजिकली एक्टिविटी कर रहे हो तो वो बहुत ज्यादा है। वो आपकी बॉडी को नुकसान देगा। 1 घंटे से ले 2 घंटे तक इज द एप अमाउंट। आयुर्वेद में भी लिखा है ना दिनचर्या में व्यायाम। व्यायाम आपको पूरे दिन एक्टिव रखने के लिए है। व्यायाम का इतना रोल है। व्यायाम को अगर आप 4 5 6 घंटे आपने एक्सेस में कर दिया तो वो नुकसान देगा। एक्सेस ऑफ़ एवरीथिंग इज़ बेड। तो आप करना बहुत जरूरी है। इसको छोड़ना नहीं है। डायबिटिक कैपिटल है हमारा देश। कैन यू इमेजिन कि भारत जो एक योग की भूमि है, आयुर्वेद की भूमि है। डायबिटिक कैपिटल बन गया है। हर 10 में से एक आदमी किडनी का
(15:50) पेशेंट है। हर 10 में से दो आदमी ब्लड प्रेशर के पेशेंट है। हर 10 में से एक आदमी थायराइड का पेशेंट है। अरे प्री डायबिटिक प्री हाइपरटेंसिव तो आग लगी पड़ी है। एक्सरसाइज नहीं छोड़नी। करनी है। अभी शुरू करो। जो नहीं करते वो शुरू करो। डॉक्टर पुनीत मैं आपसे बोन हेल्थ के बारे में जानना चाहती हूं। ऑस्टियो अर्थराइटिस एक बहुत और मेरे ख्याल से सबसे कॉमन जॉइंट इशू है जो लगभग 22 टू 39% इंडियंस इससे पीड़ित है आज की डेट पे। मॉडर्न साइंस तो कुछ कहता है पर मैं जानती हूं कि आयुर्वेद में देयर इज सम डीप रूटेड इशू जो अक्सर बोला जाता है कि आपका वाता
(16:27) एंबैलेंस की वजह से होता है। मुझे यह पर्सनली टॉपिक इसलिए रेजोनेट करता है बिकॉज़ मैं मिड 30ज में हूं और हड्डियां मेरी थोड़ी क्विक क्विक करने लग गई हैं। रियली पेरेंट्स को तो देखते ही हैं यह प्रॉब्लम है, यह नी का प्रॉब्लम है। डर लगता है कि यार कहीं हम भी उस स्टेज पे पहुंच ना जाए और जब हम लोगों को देखते हैं कि अर्ली ऑनसेट ऑफ़ अर्थराइटिस 30ज में लोगों को पकड़ रहा है तो सच्ची में डर लगता है। तो सबसे पहले तो डॉक्टर आप मुझे बताइए कि ऐसे क्या प्रिवेंटिव मेजर्स हम ले सकते हैं चाहे वो हमारा डाइट हो, दिनचर्या हो, आयुर्वेदिक नुस्खे हो जो हम डेली करें और
(17:00) इस चीज को प्रिवेंट कर लें। और दूसरे नंबर पे जो लोग ऑलरेडी बोन इशू से पीड़ित है वो क्या कर सकते हैं? तो लेट्स स्टार्ट विद पॉजिटिव हेल्थ फर्स्ट। सो पॉजिटिव हेल्थ की बात करी श्लोका। तो सबसे पहले हमें देखना है कि ये हो क्यों रहा है? ये इतना बढ़ क्यों रहा है? पहले आपने देखा कि आपके फादर वाली ऐज में बहुत ज्यादा था। लेकिन उससे अगर दो जनरेशन और पीछे चले जाएं तो शायद ये प्रॉब्लम्स कम मिलेंगी। बहुत कम मिलेंगी आपको। उसके पीछे का सिंपल सा रीज़न ये है कि हमारा लाइफस्टाइल जो है वो इस तरीके का हो गया कि हम डिजीज के पास जा रहे हैं। हम बीमारी
(17:31) के पास जा रहे हैं। नंबर वन हमने इंडियन टॉयलेट की जगह वेस्टर्न टॉयलेट यूज़ करना शुरू कर दिया। अब इंडियन टॉयलेट जब आप यूज करते हो तो आपके घुटने मुड़ते हैं, फ्लैक्सिबल रहते हैं। वेस्टर्न टॉयलेट में आप बैठते हो घुटनों की मूवमेंट जीरो हो जाती है। नहीं मूव करते हैं। दूसरा हमने क्या करा? हमने डाइनिंग टेबल यूज़ करना शुरू कर दी। सुखासन छोड़ दिया। सुखासन में जब आप खाना खाते हो तो आपके घुटने मूव करते हैं। डाइनिंग टेबल में वो स्ट्रेट रहते हैं। तो ये जो छोटे-छोटे हम चेंजेस करते चले गए। जिस वजह से घुटनों की जो हेल्थ है वो डिटोरिएट होती चली गई। इंडिया
(18:01) में मोस्ट कॉमन ऑस्टियो आर्थराइटिस इज़ नी ऑस्टियो आर्थराइटिस। और जो इंडिया के बाहर कॉमन ऑस्टियोराइटिस है वो हिप ऑस्टियोराइटिस है। तो यहां पे नी ऑस्टियो आर्थराइटिस कॉमन होने का रीजन ये है क्योंकि यहां पे सिक्स क्लाइमेटिक ज़ोंस हैं इंडिया में। उन सिक्स क्लाइमेटिक ज़ों्स के अकॉर्डिंग हमारे जो घुटने हैं वो मोबाइल हैं। वो वो मतलब उनमें मूवमेंट चाहिए उनको। जबकि जो बाहर के लोग हैं वहां पे ठंड ज्यादा होती है। ठंड ज्यादा होने के कारण उनको मूवमेंट रिस्ट्रिक्ट करनी पड़ती है। बहुत ज्यादा मूवमेंट के बिना उनका काम चलता है। तो उन्होंने चेयर
(18:28) इन्वेंट करी, सोफा इन्वेंट करा, वेस्टर्न टॉयलेट इन्वेंट करा, डाइनिंग टेबल इन्वेंट करी। लेकिन हमारे पास जो हम पहले से करते आ रहे हैं उसमें हमारी जो चीजें थी वो हमारी हेल्थ के अकॉर्डिंग और हमारी हवा पानी के अकॉर्डिंग थी। जिसके अंदर हमारी सुखासन में खाना, इंडियन टॉयलेट, रनिंग, वॉकिंग, दंड मारना, ये सब फिजिकल एक्टिविटी जो हम मिस करते जा रहे हैं ये उसी का कारण है कि नी ऑस्टियो आर्थराइटिस बहुत तेजी से बढ़ता चला जा रहा है। तो आप कह रहे हैं कि जो ये पूरा चेयर कल्चर, फर्नीचर कल्चर आया हुआ है क्योंकि इंडियन होम्स में फॉरेन फर्नीचर लग रहा
(19:02) है। आप कह रहे हो वो वो लोगों के लिए परफेक्ट है। उन लोगों की लाइफ स्टाइल के लिए बिल्कुल फिटिंग है। क्योंकि उनका क्लाइमेटिक कंडीशन अलग है। लेकिन हमारे लिए फर्नीचर बिज़नेस चलता ही नहीं है। बिकॉज़ ये भी कहा जाता है कि आपको जमीन पे सोना चाहिए। राइट? जमीन पे सोना चाहिए। जमीन पे खाना खाने का हमारा चलन था। हम हम जो भी करते थे वो हमारी बॉडी के अकॉर्डिंग वो होती थी और वो हमारी चीजें ऐसी होती थी जो हमारे लिए अच्छी हैं। हमारी हेल्थ के लिए अच्छी हैं। देखो लोग मेरे से पूछते हैं कि क्या खाना खाना है? खाना हमेशा लोकल होता है।
(19:28) तो हमारा जो लाइफस्टाइल है वो भी लोकल होगा। वो कभी इंटरनेशनल नहीं हो सकता। नेशनल नहीं हो सकता। ऐसा इसलिए क्योंकि हो सकता है कि कश्मीर में अलग लाइफस्टाइल हो, जहां ठंड ज्यादा पड़ती है और गुजरात में अलग लाइफस्टाइल हो और साथ में आपका जो वेस्ट बंगाल है वहां अलग लाइफ स्टाइल हो, खाना पीना भी अलग हो। तो डाइट कैन नेवर बी नेशनल एंड आल्सो दिस लाइफस्टाइल कैन नेवर बी नेशनल एंड डाइट कैन नेवर बी इंटरनेशनल एंड लाइफस्टाइल कैन नेवर बी इंटरनेशनल। तो ये लोकल होगी। ओके। हम जितना अपनी चीजों से दूर जा रहे हैं ना उतना बीमारियों के पास जा रहे हैं।
(19:56) तभी बोलते हैं ना थिंक ग्लोबल एक्ट लोकल है। यस। ओके। आपने खाने पीने की बात करी। मुझे बताइए कुछ ऐसे हर्बल नुस्खे, डाइट, फूड जिसको मैं डेली इंप्लीमेंट करके मेरी बोन हेल्थ मजबूत हो सके और फ्यूचर में मुझे हड्डियों की प्रॉब्लम ना आए। देखो सबसे पहले तो हड्डियों की प्रॉब्लम के लिए आपको डेली बेसिस पे हमारे आयुर्वेद में भी लिखा हुआ है। और यह मैं खुद भी करता आ रहा हूं। हमें डेली बेसिस पे ना तिल का तेल, सरसों का तेल या फिर नारियल का तेल। यह लेना है और पूरी बॉडी पे उसको हमें मसाज करनी है। हल्के हाथ से मसाज करनी है। रगड़ना नहीं है। उससे बोनस और
(20:33) मसल्स दोनों उनकी हेल्थ जो है वो सही रहेगी। अच्छी रहेगी। दूसरा आप जितना इसका बॉडी का यूज करेंगे ना उतना वो बॉडी फिट रहेगी। इसको जितना आराम दोगे उतना बॉडी जो है वो आपका साथ नहीं देगी। तो आपको क्या करना है? आपको नेचुरल एनवायरमेंट में ज्यादा से ज्यादा रहना है। एसी का प्रयोग जितना हो सके कम करने की कोशिश करनी है। मैं नहीं कह रहा बिल्कुल बंद कर दो। अकॉर्डिंगली हमें जो हमारी सिचुएशन है जिस हिसाब से हम रहते हैं वहां पे एसी भी जरूरी है। रिक्वायर्ड है। लेकिन उसकी रिक्वायरमेंट हमें कम से कम यूज़ करना है हमें। तो दूसरा हमें यह ध्यान रखना है कि
(21:07) जो हम हर्ब जो आप कह रहे हो वो हमें खाना पीना आप जो भी खाते हो ना अभी कोई भी बीमारी हो रही है चाहे वो ऑस्टियो अर्थराइटिस हो, चाहे वो पेट की हो, चाहे वो लंग्स की हो वो क्यों हो रही आयुर्वेद में उसके पीछे एक सिंपल सी चीज बताई है। आम क्या है? अनडाइजेस्टेड फूड मैटर। आम कब बन रहा है? जब हम जो खा रहे हैं वो प्रॉपर पच नहीं रहा। अनडाइजेशन में जो हो रहा है वो हमारी बॉडी में 107 बीमारियों का कारण बन रहा है जिसे हम आम कह रहे हैं। जब हम खाना खाते हैं तो वह सात धातुओं में बनता है। रस, रक्त, मांस, मेद, अस्थि, मज्जा और शुक्र। तो आम ना बने उसके लिए दो चीजें
(21:42) करनी है। जटर अग्नि यानी डाइजेस्टिव फायर को हमें प्रदीप्त करना है। वो हमारी जलती रहे। वो कैसे जलेगी? शाम को 6 या 7:00 बजे के बाद बिल्कुल खाना नहीं खाना क्योंकि जटर अग्नि बिल्कुल ही डाउन हो जाती है। ये हमारे सूर्य के अनुसार ही हमारी जटर अगर चलती है। जिस प्रकार संसार को सूर्य, चंद्रमा और वायु चलाते हैं। उसी प्रकार हमारे शरीर को वात, पित्त और कफ चलाते हैं। और इनका जब बैलेंस रहता है तो जटर अग्नि बैलेंस रहती है। 7:00 बजे के बाद कुछ नहीं खाना। जटर अग्नि बिल्कुल मस्त चलेगी। डाइजेशन बिल्कुल प्रॉपर रहेगा। 45 मिनट्स आपने रनिंग, वॉकिंग, एक्सरसाइज
(22:19) जरूर करनी है। बॉडी का बैलेंस, त्रिदोष, जटर अग्नि सब बिल्कुल फिट रहेंगे। अंडरस्टुड? पुनीत जी आप अभी कह रहे थे कि आपको बॉडी में मसाज करना चाहिए सरसों यानी कि मस्टर्ड से। तिल यानी कि सेस्मियो और तीसरा आपने बोला कोकोनट। कोकोनट से। इनमें तीनों सही है या फिर उसको सीजन वाइज लेना हुआ? सीजन वाइज। तिल का तेल ठंडी जगहों के लिए बेस्ट है। सरसों का तेल प्लेेंस के लिए बेस्ट है। जैसे दिल्ली, हरियाणा, पंजाब, इधर उत्तराखंड, यहां यूपी एंड कोकोनट ऑयल जो है वो हमारा कोस्टल एरियाज के लिए बेस्ट है। ये अभयंग के लिए कह रहा हूं मैं। इन सब में भी अगर मैं बोलूं कि एक ही
(22:52) पर्टिकुलर ऑयल बताया जाए तो वो तिल का तेल अभयंग के लिए सबसे बढ़िया है जो हमारी मसल्स को, हमारी बोनस को स्ट्रेंथनिंग देता है। तो डेली सुबह नहाने के बाद आपने अगर तिल के तेल से पूरी बॉडी में हल्के हाथ से मसाज करें तो आपको बहुत ज्यादा फायदे मिलेंगे। मसाज करने का तरीका मैं बताऊं तो उसको आपको हल्के हाथ से करनी है। मतलब आपको रगड़ना नहीं है जोर-जोर से कि आप उसको मसले जा रहे हो। इट शुड बी एज जेंटल एज पॉसिबल। इट शुड बी एज स्लो एज पॉसिबल। जल्दी-जल्दी नहीं करना। आराम आराम से हल्के हाथ से पूरी बॉडी पे ऑयल मसाज करनी है। और जब आप बोनस पे करते हो जैसे
(23:31) घुटने पे कर रहे हो तो उसको ऐसे रोटेट करना है। जेंटली करना है। आप जब स्टमक पे कर रहे हो तो उसको राउंड फॉर्म में रोटेट करना है। आप जब घुटनों पे कर रहे हो तो ऊपर से घुटनों की तरफ और नीचे से भी घुटनों की तरफ आएंगे आप। और आप जब हैंड्स पे कर रहे हो तो यहां पे भी नी जॉइंट की तरफ और यहां पे ऐसे नी जॉइंट की तरफ आएंगे। सो दिस शुड बी द टेक्निक टू डू अभयंग ऑन डेली बेसिस एट होम। इससे आपका बॉडी का ब्लड सर्कुलेशन बढ़ेगा, मेंटल क्लेरिटी बढ़ेगी। उसके साथ-साथ आप देखेंगे अभ्यंग से आपकी मसल्स की हेल्थ, मसल्स की लाइफ और उसके साथ-साथ बोनस में भी इसमें
(24:05) इंप्रूवमेंट नजर आएगी आपको। वात दोष भी कम होगा इससे। फेस में भी आप लगा सकते हैं ना? अच्छा। क्योंकि एक्ने की प्रॉब्लम हो जाती है क्योंकि थिक होता है ना तिल का तेल। तो क्या करा जा सकता है? फेस के बजाय आप पूरी बॉडी पे उसको यूज कीजिए। पूरी बॉडी के लिए वह बेस्ट है। फेस के लिए हम जेंटल हल्के हाथ से आप मसाज कर सकते हैं। वह भी बेस्ट है। मतलब बहुत एक दो ड्रॉप्स लेके ना आप उसको ऐसे-ऐसे ऐसे-ऐसे रब करोगे देन यू विल फील दैट फेस। फेस पे बहुत ज्यादा नहीं लगाना आपने। अंडरस्टुड। आपने बताया कि एक्सरसाइज 30 टू 40 मिनट्स आप वॉक करें। यह भी कहा जाता है
(24:36) कि 40 के बाद अगर तो आप एक्सेसिवली एक्सरसाइज करें, तो वो भी बोन इशू का कारण बनता है। इसमें कोई तथ्य है? पहले तो आप यह समझना पड़ेगा कि आपकी बोन हेल्थ 40 की हो रही है तो आप अपनी बॉडी की पहले सुनेंगे। आप कोई भी एक्सरसाइज कर रहे हो या कोई भी आप मान लो आप पुल अप्स कर रहे हो, पुश अप्स कर रहे हो या आप बेंच प्रेस कर रहे हो। एनी एक्सरसाइज दैट यू आर डूइंग वो एक्सरसाइज आपको अगर डिसकंफर्ट में ला रही है तो आपको उसी टाइम रोक देना है। आपकी बॉडी आपको बताएगी। दैट इज़ अ बेस्ट साइन एंड योर बॉडी गोइंग टू टेल यू। जैसे ही आप वॉक रन करते टाइम आपको कोई भी
(25:06) फिजिकल डिसकंफर्ट लग रहा है, स्टॉप द एक्सरसाइज़ देन एंड देयर। आपको जबरदस्ती बॉडी पे कोई लोड नहीं डालना अपनी बॉडी पे। तो ये होते ही आप देखेंगे कि आप ग्रेजुअली जो है आपकी कैपेसिटी इनक्रीस होती चली जा रही है। 40 के बाद भी मसल मास को मेंटेन करना इज़ वेरी एसेंशियल कि आप प्रॉपर एक्सरसाइज करो। प्रॉपर आप अपना रूटीन डिसिप्लिन में रहो। वो बहुत जरूरी है। आपकी बॉडी के लिए भी जरूरी है। सरकेडियम रिदमम के लिए जरूरी है। आप सरकेडियम रिदमम की इतनीेंस आयुर्वेद में बताई गई है। सोने उठने का टाइम सही होना चाहिए। हमारा मेलाटोनिन हॉर्मोन रिलीज़ होगा अगर आप टाइम
(25:37) से सो रहे हो और वो हॉर्मोन अगर टाइम से सीक्रेट हो गया वो प्रॉपर्ली रिलीज़ हो गया तो आपके आधे से ज्यादा प्रॉब्लम तो वैसे ही खत्म हो गई ना और जो अभ्यंग मैंने आपको बताया उसके लिए पंचकर में प्रॉपर अभयंग बताया गया जिसमें हम स्नेहन और स्वेजन करते हैं। मेडिकेटेड तिल का तेल यूज़ करते हैं। सभी लोगों को मैं कहूंगा कि हफ्ते में एक बार अपने आसपास आयुर्वेदिक पंचकर्मा सेंटर में जाके अभयंग जरूर कराएं। अच्छा बोन हेल्थ मसल हेल्थ के लिए बेस्ट है। आचार्य वागभट कहते हैं हफ्ते में एक बार अभ्यंग जरूर होना चाहिए। तो इन हॉस्पिटल्स में आप जाके अभयंग करा सकते हैं। पंचकर्म
(26:09) करा सकते हैं। सी पंचकर्म इस यू नो इट इज़ लाइक अ टर्म जिसको मिस इंटरप्रेट किया जाता है। ऑर्थो के कितने पेशेंट हमारे पास आए जिनको नी रिप्लेसमेंट एडवाइस कर दिया जाता है। नी रिप्लेसमेंट मतलब आपकी घुटनों की रिप्लेसमेंट की जरूरत है। अब आपके घुटने काम नहीं कर रहे। आपको प्लास्टिक का घुटना लगेगा। आपको मेटल का घुटना लगेगा। टीकेआर यानी टोटल रीप्लेसमेंट एडवाइस कर दिया गया था। उन पेशेंट्स के अंदर जिनको टीकेआर एडवाइस कर दिया गया था। उनका जॉइंट स्पेस विड्थ होता है। यानी कि टिबिया और फीमर दो बोनस होती हैं। उन दोनों बोनस के बीच में जब स्पेस बढ़ जाता है, इंक्रीस हो
(26:40) जाता है जिसे जीएसडब्ल्यू कहते हैं। जॉइंट स्पेस विड्थ तो ये बोन ऑन बोन की सिचुएशन आ जाती है। जिसे कहते हैं ना कट कट की आवाज आ रही है। सीढ़ियां चढ़ने में प्रॉब्लम होनी शुरू हो जाती है। उन पेशेंट्स के अंदर जेएसडब्ल्यू में चेंजेस नजर आए। एक्सरे के अंदर जब हमने प्रॉपर उनका जानू बस्ती करी मेडिकेटेड ऑयल से हमने प्रॉपर उनका पंचकर्म करा एस पर द मेडिसिनस मेडिसिनस उनकी प्रॉपर चली एस पर द प्रोटोकॉल हमने उनका 15 से 30 दिन के अंदर एक्सरे जब रिपीट कराया तो हमने देखा कि उनका जेएसडब्ल्यू में चेंजेस आना शुरू हो गए। जॉइंट स्पेस विद बिफोर और आफ्टर
(27:12) में चेंजेस आना शुरू हो गए। तो दिस इज द पावर ऑफ़ आई। आपने बस एक चीज का ध्यान रखना है जो आप घर पे जितना आप कर पाओ उतना कीजिए। लेकिन उसके साथ-साथ पंचकर्म में बोनस का, मसल्स का एक होता है शमन एक होता है शोधन। शोधन चिकित्सा है पंचकर्म में। शोधन मतलब हम उसकी पहले क्लीयरेंस करेंगे। शमन मतलब उस बीमारी को हम जो है फिर दबाएंगे। तो आयुर्वेद में शोधन और शमन साथ-साथ चलता है। तो अगर बोनस की बात करें ना तो यहां पे शोधन होता है फिर शमन होता है। तो जो मैंने ऑस्टियो आर्थराइटिस की प्रॉब्लम बताई। जो मैंने आपको और भी कोई भी आरे की प्रॉब्लम है, गाउट की प्रॉब्लम
(27:46) है, बोन से रिलेटेड कोई भी प्रॉब्लम है, वहां पे आप देखेंगे कि इन चीजों में शोधन प्लस चमन के बहुत अच्छे रिजल्ट्स आ रहे होते हैं। हमारा खानपान या फूड डाइट कैसा होना चाहिए? अगर तो मुझे बोन रिलेटेड इशज़ को प्रिवेंट करना है और अपनी बोनस को स्ट्रांग करना है। देखिए आपको ना सबसे पहले एक मिसकंसेप्शन ये भी है कि आप घी मत खाओ। जो घी है, देसी घी है उसको बिल्कुल बंद कर दिया जाता है। देखो घी का ना आप एक चम्मच अगर डेली बेसिस पे लेते हो तो वो आपको फायदा करेगा। आपको ओवर नहीं करना घी को। अगर आपका एलडीएल बहुत ज्यादा बढ़ा हुआ है तो इसका एलएडीएल
(28:16) से कोई डायरेक्ट लिंक नहीं है। आप तेल गंदा तेल जो पाम ऑयल खाते हो वो एलडीएल बढ़ाता है। उसको आपको कम करना है या रिफाइंड तेल कोई भी। रिफाइंड तेल तो बंद ही करना है। रिफाइंड तेल तो उसमें कुछ ऐसा है नहीं हमारी बॉडी को जो चाहिए हो। घर में जो ऑयल यूज़ कर रहे हो ना आप उसमें सिर्फ तीन ही ऑयल यूज़ करना है खाने में। सरसों का तेल, तिल का तेल और कोकोनट ऑयल। ये तीन ही तेल में खाना बनाना है आपने। इसके अलावा जो भी आप रिफाइंड ऑयल यूज़ कर रहे हो वो बीमारियों का कारण है। जो भी आप पाम ऑयल का सामान बना हुआ बाहर से खाते हो, लेते हो,
(28:44) बीमारियों का कारण है। आपने अभी ऑइल की बात करी कहा जाता है कि शुगर इज नॉट द रियल किलर बट ऑइल इज द रियल किलर। आपको नहीं लगता ये ऑइल की अननेसेसरी बैशिंग हो रही है। ऑइल इज नीडेड ना। ऑइल इज नीडेड फॉर द बोनस एंड द जॉइंट्स। राइट टू लुब्रिकेट देम। तो इसमें ऑयल जो है ना शुगर तो है ही एक नेचुरल किलर। सी शुगर का अपना एक रोल है ही है। वो एक नेचुरल किलर है। उसको अवॉयड करना ही करना है। एट एनी कॉस्ट करना है। उसमें कुछ ऐसा नहीं है जो आपकी बॉडी को चाहिए। बट आपने अगर ऑयल का पूछा तो ऑयल में भी हमें ये जो तीन ऑयल है इसके अलावा कोई भी आप रिफाइंड ऑयल यूज़ कर रहे हो, पाम
(29:11) ऑयल यूज़ कर रहे हो या आप कुछ भी यूज कर रहे हो सब, सब सब महा घटिया है। सब कचरा है। सब बॉडी में जाके जमेगा और बॉडी में जाके जमेगा तो वो बॉडी में जाके आपको क्लॉटिंग करेगा। क्लॉटिंग करके वो फिर हार्ट फेलियर हार्ट अटैक की तरफ जाता है। तो पाम ऑयल को घर से बाहर फेंको। दूसरा आप जो खाने-पीने का आपका है टाइम उसको आपने ठीक करना है। 6:00 बजे के बाद कुछ नहीं खाना। इससे आपका आम बनना बंद हो जाएगा। रहेगा जठग्नि प्रदीप रहेगी। तीसरा एक ना एक हर्ब है शलखी हर्ब। शलखी हर्ब जो है वो बोन के लिए आयुर्वेद में बेस्ट बताई गई है। जिन लोगों को भी बोन की स्टार्टिंग फज़
(29:45) में इशूज़ है वो यह हर्ब का कैप्सूल लेके स्टार्ट कर सकते हैं। सो बेसिकली ना एक और सफेद तिल। सफेद तिल जो होता है ना वो हड्डियों के लिए बहुत अच्छा होता है। तो एक चम्मच सफेद तिल जो है उसको अगर च्यू किया जाए ना डेली बेसिस पे तो वो हड्डियों की स्ट्रेंथ को इनक्रीस करता है। तो यह हड्डियों के लिए आप समझो कि वन ऑफ द बेस्ट अवेलेबल फूड है सफेद तिल। उसके साथ-साथ डेली बेसिस पे अगर रागी रागी जो होती है ना ये कैल्शियम में बहुत ज्यादा रिच होती है। तो रागी की जो रोटी है अगर आप वो खा रहे हो तो वो भी हड्डियों के लिए बहुत बेनिफिशियल रहती है। अब इसके साथ-साथ घी
(30:23) जैसे मैंने बताया घी का प्रयोग इज अगेन गुड फॉर बोन हेल्थ। उसके साथ एक एक हर्ब आती है हटजोड़। जैसे ये नाम बता रहा हूं ना हड्डी को जोड़ने वाला। सो दिस इज़ समथिंग व्हिच विल गिव स्ट्रेंथ टू द बोन आल्सो। तो ये हटजोड़ का भी यूज़ हमें जो है वो कर सकते हैं। जिनकी बोनस वीक है ऑलरेडी। आलमंड्स और डेट्स गोल्डन मिल्क। गोल्डन मिल्क यानी हल्दी वाला दूध। रात को सोने से पहले इसका प्रयोग करना है। और दिन में पांच आलमंड बादाम और पांच अखरोट भगाए हुए। भीगे हुए। भीगे हुए ही लेने हैं। ये ऐसे नहीं लेने। मतलब ओवरनाइट सोकिंग हो इनकी। ये हड्डियों के लिए बहुत अच्छे और बहुत
(31:02) बेनिफिशियल है। तो फूड में अगर आप ये चीजें ले रहे हो ना तो हड्डियों की हेल्थ स्ट्रेंथ वैसी मेंटेन रहती है। सुपर्ब सनलाइट आजकल विटामिन डी की तो ऑलरेडी बहुत कमी है इंडिया में। राइट? 80% ऑफ़ लोग विटामिन डेफिशिएंट है इंडिया में। मुझे सन बेदिंग का करेक्ट तरीका बताइए। देखिए सन को ना लोग ना मिसअंडरस्टुड करते हैं। बोन हेल्थ के लिए है ना सनलाइट एसेंशियल। लेकिन कौन सी सनलाइट? ओके। जो मॉर्निंग की सनलाइट है ना इनिशियल जो रेज आ रही है उसी में है विटामिन डी। अच्छा। तो आपको उसी से ही विटामिन मिलेगा। यह नहीं कि जो आपने 11 12 वाली धूप आपने
(31:34) कड़कती धूप में खड़े हो गए कि आप विटामिन डी बना रहे हो बढ़ा रहे हो वो नहीं होने वाला। आपको मॉर्निंग की 7 6 वाली जो इनिशियल सन रेज है अगर आप 20 मिनट्स डेली वहां पर आपने सन रेज ले ली सन ब्रीथिंग कर ली सन बात कर ली तो उससे बेटर कुछ नहीं है। घास पे पार्क में नंगे पैर चल के 6:30 7 बजे अगर आपने सन की जो रेज है उस समय ले ली हड्डियों की हेल्थ के लिए बेनिफिशियल है। बहुत बेनिफिशियल है। अंडरस्टुड जो लोग ऑलरेडी बोन रिलेटेड इशू से पीड़ित हैं या तो जिनको बोन पेन रहता है या फिर अर्थराइटिस है या ऑस्टियोपोसिस है तो उस केस में क्या करा जा सकता है आयुर्वेदिक
(32:15) तरीका क्या है जिन लोगों को ना ऑलरेडी ऑस्टियो आर्थराइटिस है ना उनको ना एक प्रॉपर ट्रीटमेंट की जरूरत है उनके लिए ना शोधन और शमन चिकित्सा बेस्ट है शल्यकी जो मैंने बताया बॉसला सिरेट हटजोड़ इसके साथ-साथ अगर आम बन रहा है तो पहले डिटॉक्स किया जाएगा फिर रिजुमिनेट किया जाएगा डिटॉक्स किस लिए कि आम क्यों बन रहा है? पहले उसको देखा जाएगा। डाइट करेक्शन की जाएगी। आम को पचाने वाली औषधियां दी जाएंगी। डिटॉक्सिफिकेशन फज़ में। फिर रिजुमिनेशन फज़ शुरू होगा। जिसके अंदर प्रॉपर हम जॉइंट रीजनरेशन स्ट्रेटजी के अकॉर्डिंग उसके अंदर उसकी जीएसडब्ल्यू को रिड्यूस करने पर
(32:51) काम करते हैं। जिसके अंदर हम मेडिकेटेड जानू बस्ती भी देते हैं। हम उसमें जानू धारा भी दे रहे होते हैं। हम उसमें अभयंग भी कर रहे होते हैं। स्वेदन भी कर रहे होते हैं। लोकल स्वेदन भी कर रहे होते हैं। प्रॉपर पंचकर्म का प्रोसेस है। इस पूरे पंचकर्म के प्रोसेस में हम एक एक्सरे पेशेंट का पहले करा रहे होते हैं। और एक एक्सरे हम रिपीट करा रहे होते हैं आफ्टर अ पीरियड ऑफ़ अराउंड 60 डज़। 60 दिन के अंदर अगर किसी का जीएसडब्ल्यू ज़्यादा बढ़ा हुआ है तो 60 दिन का कोर्स में उसको बहुत अच्छे चेंजेस नजर आ रहे होते हैं। मेरे को लग रहा है आजकल बहुत से ऐसे पेशेंट हैं
(33:24) जिनको पहले टीकेआर एडवाइस कर दिया था। अब उनको टीकेआर की जरूरत नहीं पड़ी है। जस्ट बिकॉज़ उनके जीएसडब्ल्यू जॉइंट स्पेस विथ में इंप्रूवमेंट आ गई है। अंडरस्टुड। तो आयुर्वेद में ना वो पावर है। नी रिप्लेसमेंट सिज़ेरियन जैसा हो चुका है। यू नो काफी लोग बोलते हैं कि यह मॉडर्न मेडिसिन की एक कमर्शियलाइजेशन हो चुका है। जहां पर आपको जबरदस्ती नी रिप्लेसमेंट करवाया जाता है। आपको सिज़ेरियन जबरदस्ती करवाया जा सकता है। अगर तो नी का इशू है तो नी रिप्लेसमेंट अगर तुम नहीं कराए इज दैट ओके? आयुर्वेद में इसका क्या इलाज है? सिज़ेरियन की आपने बात बोली और नी
(33:57) रिप्लेसमेंट की बात बोली। आपने बिल्कुल एप्ट कंपैरिजन दिया। भारत के बाहर बच्चे नॉन सिज़ेरियन हो रहे हैं। 80% भारत में 80% सिज़ेरियन हो रहे हैं। अब क्या रीज़न है इसके पीछे? जींस मतलब भारत के ऐसे नहीं है कि 80% सिज़ेरियन बच्चे हो रहे हैं। 80% बच्चों के आसपास ही कॉड लिपट जाती है सभी के। सिज़ेरियन करना पड़ता है। हमें देखना पड़ेगा। हम कहां जा रहे हैं। बेसिकली कमर्शियलाइजेशन इतना ज्यादा हो गया है कि इट इज़ यू नो इट इज़ गोइंग बिय्ड आवर हेल्थ। तो हमें इसी तरीके से जो टीकेआर है टोटल नी रिप्लेसमेंट है उसके अंदर आपका अपना घुटना हटा के उसके अंदर जो कार्टिलेज है
(34:30) जैसा फ्लूइड है वो घिस जाता है वो कम हो जाता है उसमें एक प्लास्टिक या मेटल का घुटना डाल देते हैं तो टीकेआर के बिना अगर आपका एक्सरे के अंदर चेंजेस आ रहे हैं नेचुरल चीज में आपके चेंजेस आ रहे हैं तो उससे बेटर कुछ नहीं है पॉसिबल है यस यस देयर आर मेनी पेशेंट्स जिनके जेएसडब्ल्यू में इंप्रूवमेंट्स आई हैं थ्रू पंचकर्मा यस यस पंचकर्मा के थ्रू ही और उनके बिफोर आफ्टर की एक्सरे की रिपोर्ट्स भी अवेलेबल है कि पहले उनको यह प्रॉब्लम थी और उसमें उन्होंने जब ये स्ट्रेटजी फॉलो करी जिसमें हमने उनको डिटॉक्स करा फिर हमने रिजुमिनेट किया उनके जेएसडब्ल्यू में इंप्रूवमेंट आई
(35:03) उनके जो कट कट की आवाज आती थी उसमें इंप्रूवमेंट आई जो उनको सीढ़ियां चढ़ने में दिक्कत हो रही थी उसमें इंप्रूवमेंट्स आई तो ये फिजिकल इंप्रूवमेंट भी आती है और साथ-साथ क्लीनिकल इंप्रूवमेंट भी आती है। दिस इज वेरी मच पॉसिबल। ओके ओके। यू नो काफी लोगों को फ्रोजन शोल्डर भी हो रहा है। क्या करा जा सकता है उस केस में आयुर्वेद में? देखो मेरे को लगता है कम से कम कई हजार पेशेंट ट्रोज एंड शोल्डर के आ चुके हैं जिनका ना हाथ बिल्कुल मूव नहीं करता था। ऐसे ऊपर नहीं उठता था। 12 दिन या 14 दिन के ट्रीटमेंट में पंचकर्म के हमारे यहां पर जो रह के कराते
(35:31) हैं हॉस्पिटल में फ्रोजन शोल्डर में बहुत अच्छी इंप्रूवमेंट नजर आती है। वो लोग फिजियोथरेपी करा के आते हैं। वो लोग मतलब ऑर्थोपेडिशियन को दिखा के आ रहे होते हैं। और वो सर्जरी भी आई एम श्योर उनको बोला जाता है। बोला जाता है। बहुत से पेशेंट ऐसे जो सर्जरी की बिल्कुल खड़े होते हैं। ब्रिंग पे हैं और उनको एडवाइस कर दिया जाता है। लेकिन उस सर्जरी में वो हर कोई जल्दी से जाना नहीं चाहता। सो देन दे आर लुकिंग फॉर सम अल्टरनेटिव्स। तो वो जब हमारे पास आते हैं तो वहां पे उनमें जो है शोल्डर की मूवमेंट इंक्रीस होनी शुरू हो जाती है और
(36:00) उनका जो एंगुलर मूवमेंट है वो भी इनक्रीस होती है। तो मैंने देखा है कि कई हजारों की संख्या में पेशेंट ऐसे आए हैं जिनको फ्रोजन शोल्डर था और जिनको फ्रोजन शोल्डर में इंप्रूवमेंट ऐसी आई है कि वो कहते हैं जी हम तो बिल्कुल ठीक हो गए 12 दिन के बाद। सो बेसिकली ना जिनको भी ना जॉइंट्स की प्रॉब्लम रहती है ना उनको ना घर पे ना एक ऑयल बनाना है। सरसों का तेल डालना है एक पैन में आधा कप। उसके साथ उनको एक चम्मच अजवाइन डालनी है। चार लहसुन की कली डालनी है। और एक चम्मच मेथी दाना डालना है। इसको बॉईल करना है। इस ऑयल को बॉईल करेंगे जब
(36:33) तक वो ऑयल का कलर जो है ब्लैकिश ना हो जाए। जब वो ऑयल का कलर चेंज होना शुरू हो जाए तो उसको आपको एक डब्बी में पैक करना है और उसको अपने रख लेना है। अब उसमें से आप दो चम्मच रोज ऑयल निकाल के दोनों घुटनों पे इसकी मालिश करेंगे इस ऑइल की। इसको ना हथेली से करनी है। आराम आराम से हल्के हाथों से करना है। कहीं पर भी कर सकते हैं। कहीं पे भी कर सकते हैं। गर्दन में भी कर सकते हैं। पैरों में घुटनों में जहां पे भी आपको पेन रहता है। वात दोष का शमन करेगा सरसों का तेल। साथ-साथ जो लहसुन है ये इनफ्लेमेशन को कम करेगा। सूजन जो है उसको रिड्यूस करेगा। तो
(37:07) एक तो ये सभी जॉइंट्स जिन जिन-जिन को जॉइंट्स की प्रॉब्लम उन सबको ये जरूर करना है। जो ना ये बेसिकली प्रॉब्लम जॉइंट्स की क्यों हो रही है? क्योंकि यहां पे इनफ्लेमेशन है। यहां पे आम जमा हुआ है। तो उसको हटाने के लिए सुबह-सुबह एक गिलास पानी में आधा चम्मच जो है मेथी दाना और एक चुटकी सोंठ मिलाना है। उसको हल्का गुनगुना बॉईल करना है और उसको डेली बेसिस पे लेना है। इसको लेने से आप देखेंगे कि आपकी जो जॉइंट की इनफ्लेमेशन है वो रिड्यूस होती चली जाएगी। पेन भी रिड्यूस होगा और जॉइंट इंप्रूव होते चले जाएंगे। 30 डेज तक इसको ट्राई करना है। पेन कहीं पर भी हो।
(37:41) अच्छा। स्पॉन्डिलाइटिस का हो, घुटनों का हो। बोन और जॉइंट पेन कहीं पर भी हो उसके लिए ये बहुत अच्छा है। अंडरस्टुड। अगर तो आप कुछ ऐसा सप्लीमेंट या सजेस्ट कर सकते हैं जिनको बोन हेल्थ इंप्रूव करना हो। सो बेसिकली ना या तो आपने जो मैंने ऑइल बताया इसको यूज़ कर लेना या फिर हमारी वेबसाइट पे एक केयर रिलेग्जॉल ऑयल है जो इस प्रकार की प्रॉब्लम्स में बहुत अच्छा काम करता है। जो भी जॉइंट्स पेन है वहां पे आप उसको अप्लाई कर सकते हैं। देखो बाहर की किसी भी चीज पे मैं नहीं बोल सकता तो घर पे बना लो या फिर आप जो है हमारे यहां से ले लो। दूसरा अगर कोई सप्लीमेंट लेना
(38:13) चाहते हो तो वो शलकी हर्ब और साथ में जो आपका हटजोड़ है इसका पाउडर बना के ले लो घर पे बना लो। अगर घर पे बना सकते हो बहुत अच्छी बात है। नहीं बना सकते तो एक हमारे पास इनफ्लोमक्स कैप्सूल है। हड्डियों में जिनको सूजन ज्यादा है वो ले सकते हैं। के रिलेगजोल एम जो है वो एक हमारा टैबलेट है जो साथ में इसके लिया जा सकता है। तो ये दोनों चीजें अगर आप लेते हैं देन यू विल सी कि बहुत अच्छे आपको इंप्रूवमेंट्स नजर आएंगे। केरलॉल ऑयल और केरल टैबलेट उसके साथ इनफ्लेममेक्स कैप्सूल इनफ्लेमेशन रिड्यूस करने के लिए। आई एम गोइंग टू बी [संगीत] पर्सनली
(38:44) कंडक्टिंग अ क्लासिकल हट योगा रिट्रीट इन लद्दाख फ्रॉम द 23 ऑफ़ अगस्त अंटिल द 31 ऑफ़ अगस्त। इफ यू लाइक टू [संगीत] बी अ पार्ट ऑफ़ दिस मिस्टिकल एक्सपीरियंस व्हेयर यू विल बी लर्निंग क्लासिकल टूल्स ऑफ़ योगा। व्हिच आर ऑलमोस्ट 5000 इयर्स ओल्ड फॉर योर होलिस्टिक वेल [संगीत] बीइंग देन यू कैन कांटेक्ट द डिटेल्स फ्लैशिंग ऑन योर स्क्रीन। प्लीज शेयर दिस वीडियो अमंग अदर्स। आई लुक फॉरवर्ड टू सी ऑल ऑफ़ यू नाउ। मैं आपसे एक टॉपिक के बारे में जानना चाहूंगी जो आज तक शायद से कभी किसी पॉडकास्ट में डिस्कस नहीं हुआ है जो है आयुर्वेदिक मारमा पॉइंट्स। अब कहा जाता है
(39:13) कि हमारी बॉडी में 117 एनर्जी सेंटर्स हैं जो वहां जुड़ते हैं जहां पर आपके जॉइंट्स, लिगमेंट्स, बोनस, वेंस का कॉन्फ्लुएंस होता है। तो उनको दबाने से कहा जाता है कि जो आपके इंटरनल ऑर्गन्स हैं वो खुद ही मसाज और वो खुद ही एक स्टेट ऑफ हेल्थफुलनेस में आते हैं। तो ऐसे कौन से वाइटल पॉइंट्स हैं जो आप बता सके और जिससे लोगों को इमीडिएटली बेनिफिट मिल सके। सो बेसिकली ना मर्म पॉइंट्स जो होते हैं ना वो हमारी पूरी बॉडी में प्रेजेंट होते हैं और हर पर्टिकुलर प्रॉब्लम के लिए मर्म पॉइंट जो है वो अलग-अलग हो सकते हैं। तो अगर किडनी की बात करें तो किडनी में जो एक
(39:51) मेन मर्म पॉइंट है वो है पार्श्वव संधि। जो पार्श्व संधि मर्म पॉइंट है ना वह पीठ के ना निचले हिस्से में होता है। 12th रिब के पास होता है। जहां पर ना रिनल एंगल होता है। जहां पे किडनी होती है। तो इस मर्म पॉइंट को अगर एक से दो मिनट तक हल्के प्रेशर से थंब से या फिर हथेली से प्रेस किया जाता है तो जीएफआर में ही हेल्प करता है और उसके साथ-साथ यह कमर दर्द के लिए भी बहुत अच्छा पॉइंट है। दूसरा पॉइंट जो किडनी के लिए है वो है बस्ती मर्म। यह नाभि के नीचे होता है और सुप्रा प्यूबिक और या फिर लोअर एब्डोमिन के पास होता है। इसको प्रेस करने से ना जो यूरिन का
(40:30) रिटेंशन होता है वो इंप्रूव होता है। यूरिन के रिटेंशन के इंप्रूवमेंट के साथ ये जो यूटीआई जिनको रहता है यूरिनरी ट्रैक्ट इनफेक्शन रहता है उनके लिए भी बहुत अच्छा पॉइंट है। उसके साथ-साथ जिन लोगों को अपान भाई यानी कि गैस एसिडिटी रहती है उनके लिए भी बहुत अच्छा पॉइंट है। ये वंडरफुल। तीसरा जो किडनी का पॉइंट है वो है कटिका तरुण। यह कमर के पीछे रीड की हड्डी के दोनों तरफ इलियक क्रस्ट के पास होता है। यह एक से दो मिनट तक प्रेस करना है अगेन हल्के हाथ से और बिल्कुल इस पे एक्स्ट्रा प्रेशर नहीं डालना किसी भी पॉइंट पे। अब ये ना किडनी के फिल्ट्रेशन को भी बढ़ाएगा
(41:04) और साथ-साथ जो कमर की स्टिफनेस है उसको भी इंप्रूव करेगा। चौथा और मेन पॉइंट है किडनी फेलियर पेशेंट्स के लिए वो है इंद्र बस्ती। ये क्या होता है यहां पे ना जो पैरों की पिंडली है ना उसके बिल्कुल बीचों-बीच होता है ये पॉइंट। और इसको प्रेस करने से ना जो वाटर रिटेंशन होता है जो पैरों के अंदर क्योंकि किडनी फेलियर पेशेंट्स में पानी इकट्ठा होना शुरू हो जाता है जिस वजह से वाटर रिटेंशन होता है। तो वाटर रिटेंशन जो पेशेंट्स को होता है उनका वाटर रिटेंशन ये एडमा जो है वो कम होना शुरू हो जाता है। यानी यूरिन आउटपुट इंप्रूव होना शुरू हो जाता है। तो ये चार
(41:35) पॉइंट किडनी के लिए है। ये चार पॉइंट अगर घर पे कर पाओ तो घर पे कर लो। नहीं तो हमारे यहां पे पंचकर्मा में इन्हीं का ही यूज करके ऑइल के थ्रू हम करते हैं हमारे हॉस्पिटल्स में जिससे किडनी का फंक्शन इंप्रूव हो। अंडरस्टुड। और जिन लोगों को कोई प्रॉब्लम नहीं है, जो बिल्कुल फिट है, किडनी बिल्कुल सही है, वो लोग भी यह पॉइंट को अपने घर पे प्रेस कर सकते हैं ताकि वो फिट रहे और उनकी किडनी भी हेल्दी रहे। सुपर्ब। तो घुटने की कटोरी पैटिला के ठीक नीचे और पीछे की साइड पर ना जानू मर्म होते हैं। इन जानू मर्म को प्रेस करने से जॉइंट की स्टिफनेस कम होती है और जॉइंट
(42:09) में मोबिलिटी भी बनी रहती है और कार्टिलेज जो है जॉइंट का वो भी घिसने से बचता है। नेक्स्ट जो होता है वो होता है कुरपुरामर्ब। यह अपर बॉडी जॉइंट्स के लिए होता है। हाथ की कोहनी एल्बो जॉइंट्स के जोड़ पर। यह ऊपरी अंगों यानी अपर लिम्स के जोड़ों और हड्डियों को पोषण देता है। ये टेनिस एल्बो जिनको हो, कोहनी की जकड़न और कंधों के दर्द में राहत इसमें मिलती है। और उसके होता है नेक्स्ट होता है अणिमर्म। अणिमर्म जो होता है यह लिगमेंट स्ट्रेंथ और फ्लेक्सिबिलिटी के लिए होता है। घुटने की कटोरी से लगभग तीन उंगली ऊपर होता है। जांघ के निचले हिस्से में होता है और
(42:44) कोहनी से तीन उंगल के ऊपर होता है। ये स्नायुमर्म। नेक्स्ट शो क्या होता है कि स्नायु उम्र मांसपेशियों और लिगामेंट्स को हड्डियों से मजबूती से जोड़कर रखता है और जोड़ों का फ्लैक्सिबिलिटी को मेंटेन करता है। उसके बाद आता है कटिक तरुण मर। यह हिप जॉइंट की हड्डियों और रीड की हड्डी के निचले भाग में होता है। यह उसको शक्ति देता है। सियाटिका और कमर दर्द में ना यह बहुत इफेक्टिव होता है। इसमें ना बेस्ट ऑयल भी है कि कौन से ऑयल से करना है। महानारायण तेल जो होता है उसको जोड़ों का दर्द और वात चमन के लिए बेस्ट बताया गया है। तो उसको भी यूज़ कर सकते हैं। गंध
(43:17) तेलम होता है एक। गंध तेल जो होता है यह हड्डियों के लिए बोन डेंसिटी और फ्रैक्चर रिकवरी के लिए बेस्ट होता है। शीरबला तेल होता है। नसों की कमजोरी और जकड़न के लिए होता है। आयुर्वेदिक मर्मा पॉइंट फॉर डाइजेशन कौन से होंगे? डाइजेशन के लिए ना जो सबसे इंपॉर्टेंट मर्म है वो है नाभि मर्म। नाभि मर्म जो होता है ना वो बिल्कुल अंबलाइकस यानी नाभि का बिल्कुल केंद्रबिंदु है। अंबलाइकस के बिल्कुल बीचोंबीच। उसको हल्के हाथ से प्रेस करने से ना एक तो डाइजेशन बहुत अच्छा होता है। चटर अग्नि जो डाइजेस्टिव फायर है वह प्रतीत होती है। समान वायु
(43:51) अपान वायु का बैलेंस बनता है। वायु के भी पांच प्रकार हैं। उनका बैलेंस बनता है। तो ये एक बहुत अच्छा पॉइंट है नाभि मर्म। मास्टर मर्म है। नेक्स्ट जो डाइजेशन का मर्म है वो है हृदय मर्म। छाती की जो हड्डी है उसके और एपिगैस्ट्रम यानी पेट के ऊपर वाले हिस्से में है। यह इस मर्म को करने से ना प्रेस करने से एसिडिटी, जलन जिनको गैस्ट्रोइसोफिकल रिफ्लेक्स भी रहता है ना जिनको जलन रहती है पेट में उनके लिए भी यह बहुत अच्छा मर्म है। तो उनको भी यह रेगुलर प्रेस करना है डाइजेशन के लिए। और नेक्स्ट जो है ना डाइजेशन के लिए जो मर्म है वो है शिपप्रर्म। शिपप्रमर्म जो है वो
(44:26) हाथ की उंगली और इंडेक्स फिंगर के बीच का जो एरिया है यह वहां पे है। यहां पे ऑयलिंग करने से हल्के हाथ से लगाने से पेरिस्टालिसिस मूवमेंट जो है वो तेज होती है। उसके साथ-साथ इसको करने से जो लीवर की हेल्थ है, डाइजेस्टिव हेल्थ है उसके अंदर ये बहुत अच्छा है। तो ये चार मर्मा आपके डाइजेशन के लिए बेस्ट है। डॉक्टर आप आयुर्वेदिक मर्मा पॉइंट को कैसे डिस्क्राइब करेंगे और इनके बेनिफिट्स क्या हैं? देखो आयुर्वेदिक जो मरमाम पॉइंट्स हैं ना ये वो पॉइंट्स हैं जिनको हल्के हाथ से अगर प्रेस किया जाता है तो ये आपकी बॉडी को स्टिमुलेट करते हैं। रिजुमिनेट
(45:02) करने में उस पर्टिकुलर ऑर्गन में हेल्पफुल होते हैं। तो मर्म पॉइंट्स में हम हम जो पंचकर्म करते हैं उसमें हम जो अभ्यंग करते हैं उसमें मर्म पॉइंट्स का बहुत इंपॉर्टेंट रोल होता है। तो हमारे हॉस्पिटल्स में हमारे क्लनिक्स में जो भी पंचकर्मा होता है वो सब इसी के अनुसार होता है। नेक्स्ट जो है ना ईएनटी से जो जुड़ी हुई समस्याएं होती हैं जैसे साइनोसाइटिस हो गया एलर्जी हो गई बंद नाक है किसी को अटेनेटस है यानी कि कान में सिटी बजने जैसी प्रॉब्लम रहती है गले की खराश है टॉन्सिल्स है थायरॉइड के लिए इसमें आयुर्वेद के ना ऊर्ध्व जत्रुगत यानी
(45:33) हेड नेक और फेस मर्म बिंदुओं को इसमें उद्दीपन किया जाता है। यह क्षेत्र मुख्य रूप से ना कफ और वात दोषों से संचरित होता है। तो इसमें जो मर्म पॉइंट है वो है इसमें फण मर्म होता है। फण मर्म होता है। यह नोज और साइनसिस के लिए होता है। यह मास्टर मर्म है। यह नोज की स्मेल के लिए भी बहुत यूटिलाइज होता है। नाक के दोनों नस्ट्रिल्स जो होते हैं ना उसके बाहरी किनारों के ठीक पास जहां गड्ढा बनता है वहां होता है। यह बंद नाक तुरंत खोल देता है। कान के लिए जो होता है ना उसका नाम है विधुर मर्म। कान की लोभ यानी इयर लोब के ठीक पीछे जहां
(46:09) कान और जबड़ा मिलते हैं यह टिनीटस कान में सीटी या घंटी की आवाज आना कान के दर्द भारीपन और सुनने की क्षमता को बढ़ाने में बहुत इफेक्टिव है। नेक्स्ट जो होता है वो गले के लिए होता है। मन्यामर्म कहते हैं इसे। सिरा मात्रिका भी कहते हैं। थ्रोट और वॉइस के लिए बहुत अच्छा होता है। गले के सामने उभरी हुई हड्डी जिसे एडमम्स वेपल भी कहते हैं। कंठ मणि भी कहते हैं कि दोनों तरफ गर्दन की नसों के पास होता है। यह गले की खराश टॉन्सिलाइटिस आवाज बैठना जैसे हॉर्सनेस हो जाती है ना बैठी हुई आवाज हो जाती है। थायरॉइड ग्लैंड्स के नियमन में
(46:40) भी ये ये होता है। सहायक होता है। दबाव बहुत ही हल्का देना है। यहां पे इसका स्पेशल ध्यान रखना है। साइनस क्लीयरेंस जिनको साइनस क्लियर कराना हो ना उनके लिए स्थापनी मर्म होती है। फ्रंटल साइनोस और हेड प्रेशर पे होता है। इससे होता कहां है? दोनों बाहों के ठीक बीच में यानी कि थर्ड आई एरिया सेंटर ऑफ आइब्रो के पास होता है। साइनस के कारण माथे में होने वाले भारीपन, सिर दर्द और आंखों के तनाव को यह दूर करता है। ईएनटी जो मर्म थेरेपी है, उसमें पहले अणु तेल या षट बिंदु तेल की दो-दो बूंदे नाक में डालने से ना इसका जो यूज़ होगा, इसका जो रिजल्ट आएगा वो 10
(47:12) गुना बढ़ जाएगा। यानी कि नशे के बाद अगर आप यूज़ कर रहे हैं, तो 10 टाइम्स रिजल्ट देगा। डॉक्टर, ये जो पॉइंट्स की आप बात कर रहे हैं, इनको कितने टाइम तक दबाना चाहिए? इनको ना 1 मिनट से 2 मिनट से ज्यादा बिल्कुल नहीं दबाना और इनको हल्के प्रेशर से दबाना या तो अंगूठे से दबाना या फिर इसको हथेली से दबाना है। हार्ट जो है ना वो आयुर्वेद में केवल एक रक्त पंप करने वाला अंग नहीं है बल्कि यह माइंड वाइटल एसेंस और चेतना का मुख्य स्थान माना गया है। हृदय स्वास्थ्य रक्त संचार यानी कि व्या वायु और धड़कन के संतुलन जिसे पपिटेशन कहते हैं। जिनका बीपी की प्रॉब्लम
(47:44) है। भावात्मक तनाव होता है। घबराहट होती है को दूर करने के लिए चेस्ट और हाथों में स्थित मन बिंदुओं का बहुत अच्छे से बताया गया है। हृदय मर्म जो होता है ये सुप्रीम मर्म बताया गया है यानी कि महामर्म है। छाती के ठीक बीचोंबीच स्टर्नम पर होता है और यह दोनों निपल्स के बीच के क्षेत्र में होता है। यह आयुर्वेद के ना तीन महामर्मों और सद्य प्राण मर्म यानी कि तत्काल प्रभाव वाले मर्म जो होते हैं उनमें से एक है। यह सर्कुलेशन बढ़ाता है। इमोशंस को नियंत्रण में रखता है। ए्जायटी को कंट्रोल करता है और सीने में भारीपन घबराहट जो होता है उसे भी कंट्रोल
(48:24) करता है। और नेक्स्ट इसके लिए हार्ट के लिए तल हृदय मर्मर। हथेली के बिल्कुल बीचोंबीच मिडिल फिंगर को हथेली की ओर मोड़ते हुए जहां पे टिप टच होती है ना वहीं पर है। ये हृदय का रिमोट कंट्रोल इसे कहा जाता है। अचानक घबराहट होना, पसीना आना, दिल की धड़कन तेज होना या गुस्सा तनाव बढ़ने पर इस बिंदु को दबाने से हृदय और मस्तिष्क तुरंत शांत हो जाएगा। नेक्स्ट जो है इसमें स्तन मूलमर्मा। चेस्ट की स्ट्रेंथ के लिए है ये। स्तन के ठीक नीचे होता है स्तनमुला अवलंब कफ को पोषण देता है। छाती की मांसपेशियों को मजबूत करता है और कार्डियक पेरिकार्डियम को सुरक्षित करता है। ये
(49:04) छाती पे जो हृदय मर्म है ना उस पे कभी भी तेज या अचानक दबाव बिल्कुल नहीं देना है। यह बहुत ही हल्का सॉफ्ट और क्लॉकवाइज और फेदर टच होना चाहिए। बिल्कुल लाइट टच वाला दबाव होना चाहिए। जिनको अस्थमा है, ब्रोंकाइटिस है, पुरानी खांसी है, छाती में कफ जमाव हो तो उनके लिए विशेष जो है मर्म बिंदियों के बारे में बताया गया है। और इसमें जो है सबसे पहला है आपसंबन मर्म। यह मास्टर पॉइंट है ब्रोंकियल एयरवेज के लिए। छाती के मध्य जो स्टर्नम होती है ना उसके दोनों तरफ कॉलर बोन के थोड़ा नीचे होता है। यह सांस की नली एयर वेस्ट की रुकावट को खोलता है। अस्थमा, सांस फूलना,
(49:43) शॉर्टनेस ऑफ ब्रेज जिनको होती है, ब्रोंकाइटिस होता है, लगातार उठने वाली खांसी होती है उसमें तुरंत राहत देगा। नेक्स्ट जो मर्म है वो है स्तन रोहित मर्म। यह म्यूकस क्लीयरेंस और चेस्ट इम्यूनिटी के लिए होता है। जो स्तन मसल के ठीक ऊपर होता है। लगभग दो उंगल ऊपर के क्षेत्र में होता है। यह अवलंबक कफ को बढ़ाता है। छाती में जमे पुराने कफ म्यूकस को पिघलाकर बाहर निकालकर और फेफड़ों की प्रतिरोधक क्षमता इम्यूनिटी को बढ़ाने में मदद करता है। और नेक्स्ट जो होता है वो है अंश फलक मर। क्रोनिक कफ के लिए बहुत ज्यादा यूज़फुल है। पीठ के ऊपरी
(50:17) भाग में होता है। दोनों कंधों की हड्डियां के ठीक बीच में होता है। फेफड़ों का पिछला हिस्सा अक्सर कफ से प्रभावित होता है। यह बिंदु को स्टिमुलेट करने से पुराना काली कफ जो होता है ना पीठ की जकड़न, फेफड़ों के पिछले हिस्से का जो इंफेक्शन है वो दूर हो जाता है। यह पॉजिटिव अवेयरनेस के लिए है सबके लिए। जो भी लोग फिट हैं वह भी यह करें और जिनको प्रॉब्लम है वो भी यह करें। सारे के सारे जो मर्म बताए हैं ये सब हेल्दी लोग भी कर सकते हैं। और अब आते हैं जो यौन स्वास्थ्य यानी फर्टिलिटी के लिए, लिबिडो के लिए और साथ में सेक्सुअल हेल्थ
(50:52) के लिए इसका संबंध होता है शुक्र धातु से अपान वायु और ओथ से होता है। पेल्विक फ्लोर में ना रक्त संचार बढ़ाने, नसों की कमजोरी दूर करने और परफॉर्मेंस एंजाइटटी को शांत करने और हॉर्मोनल संतुलन के लिए विशेष मर्म बिंदुओं के बारे में बताया गया है। सबसे इंपॉर्टेंट इसमें मर्म है विटअप मर्म। ये ना रिप्रोडक्टिव ब्लड फ्लो के लिए बहुत एसेंशियल है। ये ना जांग और पेल्विक क्षेत्र का जो जोड़ होता है यानी ग्रोयन एरिया और इगनल फोल्ड पर होता है। ये ना रिप्रोडक्टिव ऑर्गन्स में ब्लड सर्कुलेशंस को बढ़ाता है। नसों की कमजोरी, इरेक्टाइल डिस्फंक्शन, शुक्राणु की
(51:26) गुणवत्ता और पेल्विक जो कंजेशन होती है ना जिनको उसको दूर करने का मुख्य बिंदु है। नेक्स्ट जो है वो है कुकंदर मर्म। पीठ के नीचे निचले हिस्से में होता है और यह बटक्स के ठीक ऊपर दोनों तरफ बनने वाले छोटे गड्ढे जो होते हैं ना उसमें होता है। पेल्विक नर्व को सक्रिय करता है। स्टेमिना पेल्विक मजबूती और कमर के निचले हिस्से को ताकत देने और बढ़ाने के लिए सबसे असरदार है। नेक्स्ट है तल हृदय मर्म। यह परफॉर्मेंस एंजाइटटी जिनको रहती है। स्ट्रेस रहता है जिनको। पैर के तलवे के बिल्कुल बीचोंबीच सेंटर ऑफ फुट सोल वहां पे होता है। यौन समस्याओं का एक बड़ा कारण
(52:04) मानसिक तनाव और परफॉर्मेंस एंजाइटटी रहता है। पैर के तल हृदय मन को दबाने से तंत्रिका तंत्र यानी नर्वस सिस्टम जो है वो तुरंत शांत होता है। आंखों के लिए ड्राई आइज हो, चाहे वो आईज स्टेन हो या फिर किसी को अर्ली कैटरेक्ट हो। इसमें अपांग मर्म बताया गया है जो आई हेल्थ के लिए बहुत अच्छा है। आंखों के बाहरी कोने आउटर कैंथस के ठीक पास होता है। जहां आंख और हड्डी का जोड़ मिलता है। नेक्स्ट इज आरवत मर्म। यह आई स्टेन और प्रेशर के लिए बहुत अच्छा है। आइब्रोस के ठीक मध्य भाग में होता है। थोड़ा ऊपर की तरफ होता है। सुपर ऑर्बिटल नच का गड्ढा जहां होता है।
(52:37) और फिर है पाद अभ्यंग और तल हृदय भर। फुटमर्म फॉर आई हेल्थ। यह पैर के तलवों का मध्य भाग होता है। आयुर्वेद के अनुसार ना पैरों के तलवों में दो मुख्य नाड़ियां होती हैं। चक्षु नाड़ियां होती हैं। सीधे आंखों से जुड़ी हुई होती है। पैर के तलवे से मर्म से मालिश करने पर आंखों में भी इंप्रूवमेंट आती है। मर्मा पॉइंट्स और एक्यूप्रेशर पॉइंट्स में क्या फर्क है? एक्यूप्रेशर पॉइंट जो है वो सुपरफिशियल्स हैं। मर्म पॉइंट्स डीप होते हैं। बहुत सारे होते हैं। और मर्म पॉइंट्स के जो रिजल्ट्स होते हैं वो आप देखोगे एक्यूप्रेशर पॉइंट से आपको कई गुना ज्यादा
(53:07) मिलेंगे। अच्छा पॉइंट्स अपने को मर्म पॉइंट्स आर मोर इफेक्टिव देन एनी अदर पॉइंट्स। ओके ये जो मर्मा पॉइंट का एप्लीकेशन है इसकी फ्रीक्वेंसी कितनी होनी चाहिए? हफ्ते में एक ही बार करना है इसको और उससे ज्यादा इस इसको फ्रीक्वेंसी पे नहीं लेना है हमें। कुछ कॉमन मिस्टेक्स के बारे में आप बताना चाहेंगे जो हो सकती हैं मरमा पॉइंट थेरेपी में। एक्स्ट्रा प्रेशर नहीं देना। एंटीक्लॉकवाइज नहीं करना है और साथ में इसको आपने हल्के हाथ से करना है। यह जो मर्मा पॉइंट्स मैं बता रहा हूं ना यह सभी लोगों को करना बहुत जरूरी है। फिट रहना है। बिल्कुल बीमार नहीं पड़ना है। मर्म
(53:46) पॉइंट समझने हैं। हमारे आयुर्वेद का ज्ञान है। हमारे देश का हमारी मिट्टी का ज्ञान है। और सभी लोगों तक ये वीडियो पहुंचनी चाहिए और सभी लोग मर्म पॉइंट को समझकर अगर उनको करते हैं तो वो फिट रहेंगे, हेल्दी रहेंगे और ये घर पे ही करना है। मैं आपसे किडनी हेल्थ के बारे में पूछना चाहती हूं। यह टॉपिक पर्टिकुलरली मेरे दिल के ज्यादा करीब है बिकॉज़ आई लॉस्ट अ फ्रेंड टू किडनी फेलियर लास्ट ईयर एट द एज ऑफ़ 34। तो कहने का मतलब है यह किडनी सडनली यू नो एक्सप्ललोड हो गया है इन द पास्ट फ्यू इयर्स जहां हम देख रहे हैं या तो लोगों को किडनी रिलेटेड इशूज़ हो रहे हैं।
(54:17) डायलिसिस तो हर दूसरे घर में कोई ना कोई हमको पेशेंट दिख ही जाएगा। स्टैट्स के मुताबिक आठ में से एक इंसान को क्रॉनिक किडनी डिजीज है इंडिया में और 3.4 करोड़ लोग ऑलरेडी डायलिसिस लेते हैं। वेरी ब्रीफली आयुर्वेद किडनी को कैसे समझता है और किडनी बैलेंस को कैसे समझता है? देखिए आयुर्वेद में ना सबसे पहली चीज ये है कि किडनी जो है ना वो फेल जो हो रही है उसके पीछे के रीज़ंस क्या है? बढ़ा हुआ ब्लड प्रेशर, बढ़ी हुई डायबिटीज, अनकंट्रोल्ड डायबिटीज एंड अनकंट्रोल ब्लड प्रेशर। यह हमारी किडनी को जाके घात मार रहे हैं। यानी कि उनको चोट पहुंचा रहे हैं। जिस वजह
(54:49) से नेफ्रॉन्स जो हैं वो किडनी के डेलगेटेड ऑर्गन्स जो हैं जो हमारी किडनी की छननी है एक प्रकार से वो खराब हो रही है। वो डैमेज होती चली जा रही है। अब जो मेन चीज है वो ये है कि ये हो क्यों रहा है? क्योंकि हमारा लाइफस्टाइल, हमारा डाइट और लाइफस्टाइल डिजीजेस बहुत प्रिवेलेंट है। डायबिटीज मेजर कॉज है किडनी फेलियर का। अनकंट्रोल डायबिटीज जिसको डायबिटिक नेफ्रोपैथी कहा जाता है। बढ़ी हुई डायबिटीज किडनी को नुकसान दे रही है। हाइपरटेंसिव नेफ्रोपैथी बढ़ा हुआ ब्लड प्रेशर किडनी को नुकसान दे रहा है। तीसरा मेजर जो रीज़न है जो आपने बताया ना कि
(55:26) यंगस्टर्स में क्यों हो रहा है? अब 34 इयर्स की ऐज है। से आपने दूसरा एग्जांपल दिया कि वो भी काफी यंग हैं। उनके अंदर इसलिए हो रहा है क्योंकि जो बच्चे जिम जाते हैं रेगुलर उनको ना बहुत जल्दी शौक होता है कि हमारी मसल्स बहुत जल्दी बन जाए। हम और वो कई बार प्रोटीन का एक्सेसिव यूज़ कर रहे होते हैं और उन प्रोटीन के डब्बों में बहुत सी बार मैं हमेशा नहीं कह रहा बहुत सारे सही भी प्रोटीनंस होंगे। बहुत सी बार उसमें स्टेरॉइड मिला हुआ होता है। वो स्टेरॉइड लेते ही किडनी को नुकसान होना शुरू हो जाता है। किडनी को नुकसान होगा और बॉडी एकदम से
(55:54) बननी शुरू हो जाएगी। ये रिसर्च है। ये पब्लिश्ड रिपोर्ट्स हैं इसके ऊपर कि किडनी हेल्थ जो है वो डिटोरेट होती है जब आप प्रोटीन के डब्बे एक्सेसिव ले रहे होते हो या आप स्टेरॉइड वाले डब्बे ले रहे होते हो। नेक्स्ट आप जो दर्द हुआ घुटने में दर्द हुआ सर में दर्द हुआ कहीं पर भी बॉडी में दर्द हुआ आपने क्या खाया आपने दर्द की गोली खा ली दर्द की गोली जाके किडनी को नुकसान देगी नेफ्रोटक्सिक है अगेन वो तो दर्द की गोलियां जहां तक हो सके अवॉयड कर पेन किलर्स पेन किलर्स आपने कहा कि कोई अंडरलाइन कंडीशन सच एस हाइपरटेंसिव पेशेंट्स या फिर जो
(56:25) डायबिटिक्स हैं वो ज्यादा ससेप्टेबल होते हैं किडनी फेलियर के पर ये जो मेरे दोस्त थे या एक दूसरा एक मैं एक और केस जानती हूं जिनकी जो डायलिसिस पे है रेगुलर डायलिसिस पे उनको को तो ऐसा कोई अंडरलाइन कंडीशन नहीं था। देखो होता क्या है ना कि अभी मैं एक रिसेंटली कल एक पेशेंट से मिला। उसकी ऐज मात्र 29 इयर्स की है। क्रेटनाइन वाज़ अराउंड 3.
(56:46) 2 उसको पता नहीं चला। ब्लड प्रेशर जब उसने चेक कराया ड्यूरिंग द डायग्नोसिस वाज़ वेरी हाई। तो ब्लड प्रेशर और डायबिटीज में प्रॉब्लम ये है किडनी प्रॉब्लम में ये इशू है कि ये बड़ा साइलेंट है। साइलेंट प्रॉब्लम है। सिम्टम्स नहीं दिखाता। जब 50% से ऊपर किडनी खराब हो जाती है ना तब पता चलता है कि अब तो किडनी जो है वो वो काम नहीं कर रही। जब क्रेटनाइन एक से दो जाता है ना तो किडनी 50% तक खराब हो जाती है और दो से तीन में 25% खराब हो रही है और तीन से 10 में अगले 25% खराब हो रही है। सो वन टू टू इज़ नॉट इक्वल टू टू थ्री इज़ नॉट इक्वल टू थ्री एंड फदर। तो ये
(57:16) जरूरी है हमें यहां से देखना कि एक से दो में जब बढ़ता है ना पेशेंट का क्रेटिन तो उनको क्या लगता है? अरे यार थोड़ा सा ही तो बड़ा है। कुछ नहीं हुआ। सब ओके। बट वहीं पे मेजर डैमेज हो जाता है। 50% तक जो जीएफआर है जो 90 मैंने बताया 1 मिनट में 90 ml किडनी फिल्टर कर रही है वो 50 55 45 तक आ जाता है। ओ तो उस केस में प्रिवेंटिव अगर तो मुझे अपनी किडनी को स्ट्रांग करना है तो आप आयुर्वेदिक नुस्खे और बता सकते हैं। देखो सबसे इंपॉर्टेंट है आपने एक पुनर्नवा का काढ़ा और साथ में पंच तृणमूल का काढ़ा। इसमें पांच जड़ी बूटियां जो डायरेटिक होती
(57:49) है और पुनर्नवा क्या है कि पुनर्नवा इज समथिंग जो हमारी बॉडी को नया बना दे। पुनरनवा जो अगेन नया बना दे। एज द नेम डिस्क्राइब्स वो आप यूज़ कर सकते हो। इसका पाउडर बना के आप डेली बेसिस पे दो चम्मच पर डे ले सकते हो। या तो घर पे बनाओ। या हमने ना एक मेडिसिन बनाई है जो प्रिवेंटिव भी है केआरएम रेन प्लस अल्ट्रा क्वात जिनका क्रेटनाइन अभी बड़ा नहीं है और साथ-साथ जिनको वन है क्रेटनाइन टू है थ्री है फोर है लेकिन बहुत ज्यादा अभी प्रॉब्लम नहीं पड़ी है डायबिटीज बढ़ी हुई रहती है किडनी को सेफ रखना चाहते हैं। ब्लड प्रेशर है। ब्लड प्रेशर बढ़ा हुआ रहता है। किडनी
(58:27) को सेफ रखना चाहते हैं। अगेन जिनका वेट बहुत ज्यादा है। अब आप कहोगे किडनी में क्या ऐसा वेट का? देखो नेचुरल तरीके से वेट लॉस करने में इसमें जड़ी बूटियां ऐसी हैं जो नेचुरल तरीके से वेट लॉस करने में बहुत हेल्प हेल्पफुल होंगी। जिनको अल्कोहल की एडिक्शन है किडनी को सेफ रखना चाहते हैं उनके लिए बहुत बेस्ट है। जिनको गाउट है गाउट में क्या होता है? यूरिक एसिड जो होता है ना दो तरीके से होता है। एक यूरिक एसिड बहुत ज्यादा बन रहा है। एक यूरिक एसिड किडनी फिल्टर नहीं कर पा रही। दोनों केसेस में बहुत ज्यादा हेल्पफुल है। सो आप इसमें देखेंगे कि इसमें ना पांचप पैकेट्स
(58:57) के तीन लेयर्स हैं। और इसमें डे वाइज हमने ना डिमार्केशन करी हुई है। अब इसको खोल के अगर आप देखोगे तो हर दिन के अंदर एक मॉर्निंग का काढ़ा है और एक इवनिंग का काढ़ा है कि कैरम ड्रेन प्लस काढ़े में आपको एक काढ़ा मॉर्निंग में पानी में भिगोना है और उसको शाम को आपने लेना है छान के लकवाम्म पानी में। सिमिलरली शाम को भिगोना है, ल्यूकवा में और मॉर्निंग में आपने उसको लेना है। 15 दिन का यह कोर्स होता है। जिनका बेसिक क्रेटनाइन बढ़ा हुआ है, जिनका वो चाहते हैं कि यह कंट्रोल में रहे उनके लिए बहुत अच्छा है। कुछ खानपान डाइट के बारे में बताइए जो
(59:28) हमें अपनी किडनी स्ट्रांग करने के लिए लेना चाहिए। देखो जिनको ना किडनी की प्रॉब्लम अभी नहीं हुई है। उनके लिए ना सबसे बेस्ट है कि किडनी को ना डिटॉक्स रखें। मतलब किडनी में खराबी ना आए उसके लिए सबसे बढ़िया है नारियल पानी। यस। द वन दैट वी आर हैविंग राइट नाउ जो भी हमारे शरीर में गंदगी है वो यूरिन के रास्ते निकलनी शुरू हो जाती है। तो नारियल पानी इज वन ऑफ द यू नो बेस्ट थिंग जो हम डेली बेसिस पे ले सकते हैं। लेकिन किडनी के पेशेंट को नहीं लेना ये। जिनकी किडनी हेल्दी है, फिट है और जो अपनी किडनी को हेल्दी रखना चाहते हैं उनके
(1:00:02) लिए बेस्ट है ये। तो किडनी को सेफ रखने के लिए ना सॉल्ट [गला साफ़ करने की आवाज़] इंटेक। एक तो आपको सोडियम बहुत ज्यादा नहीं लेना। नमक जो है ना वह हमने बहुत ज्यादा लेना शुरू कर दिया। एक तो हम ड्यूरिंग द जब सब्जी बनाते हैं ना उसमें भी डालते हैं। दूसरा हम कब डालते हैं नमक? नमक हम डाल रहे होते हैं ऊपर से भी टेबल साल्ट। नमक की क्वांटिटी को रिड्यूस करना है। किडनी के लिए नुकसान देगा। अच्छा इसमें मुझे एक सवाल है हिमालयन पिंक साल्ट लेंगे तो या रॉक साल्ट लेंगे तो? यस। सो अगर आप सेंधा नमक ले रहे हो या आप काला नमक ले रहे हो तो वो स्लाइटली बेटर
(1:00:30) है क्योंकि उसमें सोडियम कंटेंट कम होता है। तो वो आप ले सकते हो डेली बेसिस पे। बट ये जो आप सोडियम वाला नमक उसमें सोडियम कंटेंट ज्यादा होता है। आयोडीन वाले नमक में। जिनको भी किडनी प्रॉब्लम है, कोई भी ऐसी चीज़ मत लो जिसमें एक्सेसिव प्रोटीनंस हो। जो किडनी पेशेंट्स हैं उनको बेसिकली पोटैशियम कम रखना होता है, सोडियम कम रखना होता है, प्रोटीन कम रखना होता है। प्रोटीन कम इसलिए रखना होता है क्योंकि प्रोटीन का बाय प्रोडक्ट होता है यूरिया। लेकिन प्रोटीन हमारी बॉडी में 99% काम कर रहा होता है। तो प्रोटीन को बंद नहीं करना। प्रोटीन को कम करना है। आपने जो रेड
(1:01:02) मीट है उसको अवॉइड करना है। उसके साथ-साथ आपने नॉन वेजिटेरियन वाला फूड है जो प्रोटीन है उसको अवॉइड करके आप प्लांट बेस्ड प्रोटीन की तरफ आ सकते हो। नंबर वन तो आप ये कर सकते हो जो किडनी पेशेंट है। सी फूड देखो मैं बात कर रहा हूं नॉनवेज बंद कर दो। लेकिन कोई लद्दाख में रहता है, कोई अंटार्कटिका में रहता है। उसके लिए तो चाहिए। वो तो खाएगा ना क्योंकि उसके लिए तो वही स्टेबल फूड है। सी फूड की जहां तक बात है सी फूड जो लोग वेस्ट बंगाल रह रहे होंगे उसके लिए सी फूड ठीक है। उसके लिए अच्छा है। जो लोग खा रहे हैं शुरू से उनके लिए अच्छा है। अप्टेबिलिटी है उनकी। लेकिन
(1:01:33) जहां पे वेजिटेरियन ऑप्शंस अवेलेबल है वहां पे हमें प्रेफरेंस वेजिटेरियन ऑप्शंस को देना चाहिए। मेरी किडनी ठीक है। कोई प्रॉब्लम नहीं है। लेकिन मुझे उसको और स्ट्रांग करना है। तो मैं क्या करूं? किडनी ठीक है। स्ट्रांग करना है। ब्लड प्रेशर कंट्रोल रखो। डायबिटीज कंट्रोल रखो और बहुत देर से ना एक ही जगह पे मत बैठे रहो। अभी कितनी देर हो गई मैं बैठे हुए? बहुत लंबा टाइम हो गया आई थिंक। सो आई थिंक वी शुड यू नो अपनी पोजीशन से थोड़ी देर खड़े होते हैं। हम तो आप देखोगे कि हम एक ही जगह पे जब बैठे रहते हैं ना तो हमारी पूरी बॉडी कहती है
(1:02:01) कि बहुत देर हो गई अब मत बैठो। अब उठ जाओ। या सो यू कैन जस्ट यू नो आप आओ एक बार ऐसे यू नो स्ट्रेच इट आउट। सो सिंग इज द न्यू स्मोकिंग। तो आप बहुत देर तक ना एक ही जगह पे जब बैठे रहते हो तो उससे क्या होता है कि आपकी बॉडी का ब्लड सर्कुलेशन जो है ना वो हमारी बॉडी इतनी इतनी देर इन सोफो पे और इन फर्नीचर पे बैठने के लिए बनी नहीं है। तो जब बैठे रहते हो ब्लड सर्कुलेशन डिस्टर्ब हो जाता है। सो द बेस्ट थिंग इज दैट कि आप एक घंटे बाद अपनी पोजीशन को चेंज करो। स्ट्रेच अ लिटिल बिट एंड देन फिर आप दोबारा से एक आध मिनट के बाद दोबारा से आपको काम है। आप ट्रेवल कर रहे
(1:02:30) हो देन आल्सो इट इज रिक्वायर्ड कि आप अपनी पोजीशन पोस्टर चेंज करते रहो। परफेक्ट पुनीत जी प्रोटीन एक ट्रिलियन डॉलर इंडस्ट्री है। अ हम देखते हैं कि सब जगह प्रोटीन प्रोटीन है। राइट? अब ये क्या हाइप है या असल में इतनी प्रोटीन की रिक्वायरमेंट है? एंड स्पेशली विद रिगार्ड्स टू किडनी प्रोटेक्शन। देखो आयुर्वेद में ना प्रोटीन का ना कोई कांसेप्ट नहीं है। तो प्रोटीन जो है आजकल जो हम ले रहे हैं ना वो नेचुरल फॉर्म में हम जितना लें उतना अच्छा है। जो लोग बहुत ज्यादा विग्रस एक्सरसाइजेस करते हैं उनको हो सकता है जो एथलीट है उसको प्रोटीन की
(1:03:06) रिक्वायरमेंट ज्यादा हो। इनऑर्गेनिक प्रोटीन जो आप लेते हो जो डब्बे वाला प्रोटीन है वो आपको उतना जल्दी अब्सॉर्ब नहीं होगा जितना जल्दी आपका नेचुरल तरीके से लिया गया प्रोटीन होगा। बट ऐसे काफी जिम गवर्स हैं जिन्होंने डब्बे ले लिए हैं और वो डब्बों पे हैं बहुत टाइम से तो वो क्या करें? देखो ऐसे जो जिम गवर्स हैं जिन्होंने ले लिए हैं। अब उनको पहले तो वो कम करने की कोशिश करनी है। और साथ में किडनी को नुकसान से बचाना है। तो उसके लिए किडनी डिटॉक्स किट का भी यूज़ करना है। तो किडनी डिट्रॉक्स किट में ना पंच त्रिणमूल, पुन नवा, गोक्षरू, गोग्लू और ऐसे बहुत सारे
(1:03:43) इंग्रेडिएंट है जो हमारी किडनी को रिजुमिनेट करने में हेल्प करते हैं। मुझे एक ऐसे आयुर्वेदिक हर्बल नुस्खा बताइए जो हम किडनी प्रोटेक्शन के लिए या किडनी स्ट्रांग करने के लिए ले सकते हैं ऑन अ रेगुलर बेसिस। सो जो भी घर पे कुछ बना के लेना चाहते हैं तो उसमें दो कप पानी लेना है उनको। आधा चम्मच पुनर्नवा का पाउडर, आधा चम्मच गोकशू का पाउडर और आधा चम्मच धनिया इसको लेके बॉईल करना है और दो कप को एक कप कर देना है और उसको फिर छानना है और छान के उसको पीना है। जिन लोगों को अपनी किडनी हेल्दी रखनी है, या तो वह घर पे यह बना लें या घर
(1:04:23) पे हमारी किडनी डिटॉक्स किट को ऑर्डर करके मंगा सकते हैं। बाहर की कोई और चीज नहीं लेनी। और जिनको किडनी प्रॉब्लम है वो भी ये यूज कर सकते हैं जो काढ़ा आपने बताया। यस जो अभी काढ़ा बताया जिनको किडनी का इशू है वो भी ले सकते हैं और जो अपनी किडनी हेल्दी रखना चाहते उनके लिए भी अच्छा है। तो फिजिकल पे जनरली लोग हेल्थ समझते हैं कि मेरी बॉडी ठीक है तो मैं फिट हूं। आप मेंटली ठीक हो। आप डिप्रेशन में तो नहीं हो। आप बहुत ज्यादा तो नहीं सोच रहे। दैट इज़ आल्सो हेल्थ। तो मेंटली फिट रहो। मेंटली फिट रहे। मेंटली स्ट्रांग रहे। स्ट्रेस हर चीज का आदमी को होता है। बट
(1:04:53) उसको कितना मैनेज कर पा रहे हो वो भी जरूरी है। स्पिरिचुअल आप कितना कनेक्टेड हो ग्रेटट्यूड कितना है उतना आप बीमार कम हो गए एंड देन अगेन दी सोशल वेल बीइंग कि आप ऐसा तो नहीं कि आप हर चीज में आपको लगता है कि आप अकेले हो या आपको लगता है कि यू नो यू डोंट हैव एनीवन टू शेयर थिंग्स विद यू तो आपको ना ये सारी चीजें भी हेल्थ के अंडर आ गई ये आयुर्वेद ने 5000 साल पहले बताया था सम दोदोष सम धातु सम अग्नि मलकरी या प्रसन्न आत्म इंद्रिय मना स्वस्थ इति और डब्ल्यूho ने क्या बताया हेल्थ इज़ द कंप्लीट वेल बीइंग ऑफ़ फिजिकल मेंटल सोशल एंड स्पिरिचुअल वेल
(1:05:26) बीइंग तो हमें सबसे पहले देखना है कि हमारी अगर यह हेल्थ ठीक है ना तो हमारी बहुत सारी चीजें ऑटोमेटिकली कंट्रोल रहती हैं। अ डॉक्टर पुनीत धवन मुझे लगता है ऐसा पडकास्ट कहीं पर भी इंटरनेट में किसी को मिलेगा नहीं ट्रूली और मैं दर्शकों को बताना भी चाहूंगी कि हमने सोचा था कि हम कुछ और कंटेंट लेंगे और निकल कुछ और एंड आई एम सो हैप्पी कि रेंडरपिटी टाइप का मोमेंट हो गया कि बहुत बढ़िया कंटेंट मिला और आपने इतना कुछ हमें ज्ञान दिया है फ्री ऑफ कॉस्ट एंड पीपल कैन डू दिस एट होम फ्रॉम द कंफर्ट्स ऑफ देयर होम तो थैंक यू सो मच एंड यू ट्रूली आर अ सर्वर
(1:05:58) थैंक यू सो मच एंड थैंक यू थैंक यू सो मच एंड विशिंग यू ऑल द स्ट्रेंथ 10थ और आप लोगों को और हेल्प करे और ग्रो करे अंटिल नेक्स्ट टाइम प्रणाम। इन केस यू वुड लाइक टू बी अ पार्ट ऑफ आवर ऑनलाइन एंड इनपर्स योगा, डाइट एंड स्पिरिचुअल प्रोग्राम्स। यू कैन जॉइन आवर WhatsApp ग्रुप बिलो वेयर वी पोस्ट ऑल आवर अपकमिंग प्रोग्राम्स एंड गिव फ्री टिप्स ऑन हेल्थ, डाइट एंड लाइफस्टाइल। [संगीत]

Why You Can’t Let Go Of The Past | Tamanna C

Why You Can’t Let Go Of The Past | Tamanna C

Author Name:Making It Mumkin Podcast

Youtube Channel Url:https://www.youtube.com/@makingitmumkinpodcast

Youtube Video URL:https://www.youtube.com/watch?v=4Og4xdS3Duc



Transcript:
(00:00) Have you ever wondered why you keep attracting the same kind of people? What do you mean by karmic coach? I as a psychic use my psychic abilities to help people understand their [music] karmic blueprint. See your grandmother around you. You cannot destroy the energy of anger. Nine out of 10 women when they get cheated on, they all knew it in their gut. Something is fishy.
(00:23) They never trusted themselves. I don't believe in the law of manifestation. [music] There's nothing which is called the law of manifestation. What stage of life does insecurity or doubt ever leave you? >> I booked my [music] second private jet and will I get the delivery on time before my wife's 60th and the last question were like will I be rich enough? You get all kinds of people.
(00:46) Have you ever wondered why you keep attracting the same kind of people? Why the same kind of challenges seem to show up in different forms? or no matter how hard you work, sometimes abundance and success can just feel way too out of reach. Today, we are unpacking the patterns behind our relationships, money, self-worth, manifestations, and life lessons that life keeps trying to teach us. Joining me today is Dr.
(01:11) Tamana, a karmic coach who helps people understand subconscious patterns that shape people's lives. Let's get right into it. Welcome, Tamana. >> Thank you, Niki. It's a pleasure to have you and I'm super curious because when I came across your Instagram I saw karmic coach and psychic >> and I was very curious.
(01:36) >> What do you mean by karmic coach? Karma is known to everybody right and we all believe that we are born on earth with a certain karma certain things that we need to do certain things we need to learn. We are coming from somewhere going somewhere. I as a psychic use my psychic abilities to help people understand their karmic blueprint and I help them walk that journey by breaking it down into simple relevant basic facts like in terms of your year in this point these are the lessons you need to learn or this is why your soul chose to go
(02:13) through pain in order to finish or balance some karmmas. So if I have to kind of talk about it in a lay man's language, every time you construct something or a building is being made, the architect draws a blueprint. >> But only people who have the knowledge can actually read that blueprint. You need someone to decode it, right? >> A contractor can, but a client or a lame man cannot.
(02:42) So I decode the energetic blueprint of your soul that why are you here in this life and in this timeline what are your lessons where are you coming from why did you go through what you went through why have you attracted past people's situations and learning from that where do you need to go >> heavy duty I know like tarot card reading like you'll ask me to draw cards or do you just energetically >> I just I just close my eyes and I start uh downloading information and in the realm of energy it's called channeling.
(03:14) So >> I just start channeling. >> Interesting. Am I allowed to ask you? I mean this is the first time we're meeting. >> Yes, we can. Of course. >> Was there anything you picked up when you first met me? I see your grandmother around you and I also see that uh there has been a lot of back and forth back and forth and since last year I'm talking about career-wise since last year August you want to do something in the realm of creativity but you keep going back and forth and you're not getting the right kind of people to work
(03:45) with. So there's an idea that you've been working on very passionate about and it's something different than what you've done in the past or what you're doing right now but you're not getting that breakthrough or entry and the time is not right. It will happen with the right people but after Feb next year. >> Oh my god. Wow.
(04:02) >> Wow. I Yeah, there are parts of it that is very very true and it's strange that you said you saw my grandmother because she's um she's somebody I mention a lot. I lost her a while ago. She she died young. Um but uh in fact from my childhood if there's one person who I always mention it's my amma my grandmother.
(04:24) Um and I always say that she's the only one who loved me. >> So does that validate that she's very strongly around? >> I've always been a little scared of these readings because I'm like you know what if I make it a self-fulfilling prophecy? What if I hear something and then you know I'll make it my entire life like oh like if I ask you when will I get married and if you say you'll get married at 38 then I'll make that my blueprint.
(04:44) But um you mentioned on your page a lot about patterns. >> Yeah. >> Yeah. What are patterns? >> Patterns are nothing but behavior patterns that we keep repeating till it becomes a very integral part of our personality or who we are. And we start believing ngi that that's the only way to be and those those repetitive behavior patterns or activities or our inner talk that we have with ourel can also be quite detrimental.
(05:12) M >> because not everything we keep repeating is actually healthy for us. >> So can you break patterns? >> Yes, you can break patterns but you can break patterns by replacing it with positive pattern or a pattern which is opposite that or equivalent to the positivity of it. So for example, if your pattern is to get triggered or get angry, right? And most of the people keep talking about don't get angry, don't get angry, don't get angry.
(05:39) You cannot you cannot destroy the energy of anger but you can replace the anger by becoming more kind by becoming more patient by becoming more accepting towards people or situations >> and once you invite that positive pattern automatically the influence of the negative pattern will start reducing.
(06:04) I want to connect relationships and patterns >> because sometimes our patterns can hurt our partners >> or ruin the relationship. >> So what are some of the you know common cases that you see be it you know with patterns and relationships >> and can you spot a pattern before and can you work towards it like >> absolutely can you spot a pattern? Yes.
(06:28) But then you need a coach or someone who can decode the energy without really you going through pain. >> So for example, if just for the sake of conversation, if I tell you that niggi this is your pattern and if you don't learn it now, your mother is trying to teach you this or your father's trying to teach you this and if you don't learn it right now, in the future, your future mother-in-law or your father-in-law will teach you the same thing in a in a more difficult way.
(06:53) M >> but you need a coach or someone who understands energies to point that out. But having said that, one of the most common patterns and it depends from gender to gender. So with men, I think one of the most common patterns would be emotional communication >> um and the lack of emotional communication or being an extremist where if they're focusing on work, then it's just work, personal life takes a backseat or vice versa.
(07:21) If there's a personal stress for a lot of men, they can't handle that and then you know work takes a hit. Um for women the most common pattern that can kind of bring an imbalance into the relationships is the constant need to seek approval, the emotional dependency or the clinginess and also a lot of women find it difficult to let go of the past.
(07:45) With men, it's more to do with rigidity where the pattern or the lesson is you need to learn to be more flexible and learn to go with the flow. >> A lot of women also have that. But a lot of women who are living in their masculine energy have that. So patterns also can be masculine and feminine in nature.
(08:03) I'm not talking about um men or women, but I'm talking about the energy of the pattern. >> So let's go to women cuz my audience is predominantly women. And you said some of the common patterns that you see. Let's let's pick one that they don't know how to let go, you said. >> So, how can they work around something like that? Let go of the past.
(08:19) >> With women, they are the nurturers >> by the force of nature. They like to take responsibility or they like to kind of nurture and take care of people or more to do with fix fix things. So, whenever something that's happened in the past, I think women feel a little disempowered because they don't have the power to go and fix it.
(08:42) they don't have the power to go fix a situation or a relationship or even a person who's caused damage. >> That's one aspect of it. The second aspect of it is also ngi women unfortunately and I'm not saying this for all women but we're just generally talking about it as a common pattern. Women also do have the tendency to take things personally >> and they make everything that's happening in the past or present about them.
(09:09) And I usually land up telling most of my clients is it's not about you. People are going to be who they are. And if they are like that, they are like that with everybody. So today, if you have a husband who's busy or who's a workaholic, he won't even show up for his parents. >> He won't even show up for his friends. He won't even show up for his siblings.
(09:27) So today, if he's not showing up for you, you don't have to take it personally. That's just who he is. M >> or it could also be for men who you know who are complaining about women who are rigid or women who are intolerant. They are like that with everybody including their own parents. >> But people in relationships especially land up taking it personally.
(09:52) So coming back women find it difficult to let go because they think they can fix it and they don't have the power to and also because they land up taking things personally. But it's not always about them. >> Is there anything you can do to kind of rewire your brain to not take it uh personally? >> It's a a logical tactic would be having a conversation with yourself saying this is not about me.
(10:17) In fact, I look at it this way that if you change your mindset and this is a very common statement that instead of oh, why is this happening to me versus what is this showing me or teaching me about the person or situation the answers are going to be very different that awareness and patterns ni can only break through self-t talk because patterns are also created with selft talk it's how you talk to yourself and I often say that it's not the situation ations that hurt us or it's not the situations that make us who we are. It is about what we are
(10:51) telling ourselves when the situation is taking place that makes us who we are. >> It's how we react to it, right? How we choose to react. >> So reaction is a very wide angle term. >> It's a very diluted term. But our reactions also come from the way we talk to us, right? H >> say for example if your partner is late he may have genuine reasons traffic or work or an important call that went for a longer period of time.
(11:20) The conversation the woman will have is oh he does not have time for me rather than having that trust that oh maybe something must have come up and maybe he has reasons. >> But if it's happening again and again then how >> then you have to say that maybe this is how the person is. But are you giving way too much benefit of the doubt? >> But if it doesn't suit you, then you always have a choice to do something about it.
(11:43) Does that make sense? >> Yeah. >> Number one. Number two is you know how we as women have our own limitations and we want men and our in-laws and our parents to accept us for who we are. So do men, right? We want a man to go make money. We want a man who is in touch with his feminine energy. We want a man who will fight for us in front of his parents and stand up for.
(12:10) We want a man who after 10 12 hours of work will come back home and party with us because we have to show up for that couple kitty. And then we want a man who will miss work and show up for kids for every parents teacher meeting. These are not wrong expectations. But then somewhere you have to compromise. >> Okay.
(12:30) But it's not like women don't compromise. >> No, women also compromise. But again, what I'm trying to say is that with men, the expectations are very different. With women, the expectations are very different. >> Rightfully so, as it should be. >> Absolutely. But men react to unmet expectations very differently than what women react to unmet expectations.
(12:52) And that causes a major disparity or a conflict in relationships. That's the difference. Both of them may have expectations and both of them may feel led down because of expectations. Again, we are not perfect. >> But the reaction to unmet expectations is what makes either can make things in a positive way in a relationship or that can be the downfall of a relationship.
(13:20) >> So where does karma come in all this? >> So karma basically comes with it's the cause and effect, right? M what you put in anything the effect is going to be that you know planting a tree and you keep putting chemicals the fruit and the flowers will be poisonous versus if you're nourishing the tree with the right kind of fertilizers and the right kind of whatever it needs the effect will be very different.
(13:47) So it's exactly like that. If you enter a relationship with past baggage, with fears, with trust issues, with um rigidity, with criticism, with you know constantly attaching yourself to other people's problems, exhausting yourself, not standing up for yourself or being too aggressive, the quality of the relationship will be very different versus the pattern.
(14:11) If you're operating from kindness, if you're operating from trust, if you're operating from learning to detach from people's problems and giving up the need to fix people, I have to ask you, every experience of life, no matter how good or bad, teaches you something, >> right? >> So, let's say we're talking about a u we were talking about the example of cheating or abusive partners, right? Let's say there's a woman who's been cheated on >> and if she's going to get into her next relationship, >> she has to take the lessons from the
(14:41) first. >> Absolutely. But the biggest lesson about and this is for everyone who's been cheated on is either it was not a karmic relationship that was meant to be. So that was the universe's way of breaking that relationship. Number one. Number two is selfrust. You know people say that oh I stopped trusting because I was cheated on and I'm like not trusting is not a karmic lesson. It's not a lesson.
(15:11) Lessons are not limitations. So the minute a pattern or a minute a selft talk is limiting you that is not a lesson. >> So what would the lesson be then? >> The lesson would be trusting yourself more than the other person. And that's a mistake a lot of women make um that they land up in any relationship they lose trust.
(15:32) They think that in order to love somebody, in order to be with somebody, we have to compromise on our relationship with ourel. And that is detrimental. Nine out of 10 women when they get cheated on these nine out of 10 women or even when if they go through a divorce, they all knew it in their gut that not to get married. They all knew it in their gut not to enter the relationship.
(15:56) They all knew it in their gut. Something is fishy. They never trusted themselves. So the lesson with the cheating experience is selfrust and learning to stand up for yourself. How do you get better at that? >> Telling yourself that you deserve better and following that gut instinct. Following that gut instinct no matter what the other person is saying.
(16:17) Like they say, if you know it, you know it. >> Wow. Interesting. You know we were talking a little bit about weight and I was telling you my story. Why is it that women find so much so in food? >> That's because again going back to childhood right it all starts from when we are kids. And I mean for every mother the first instinct when the child cries is food is either the child is hungry or sleepy or tired.
(16:46) And that's also the reason why a lot of grown-ups when they're emotionally low, they sleep. It's either food or sleep >> because that's exactly what the coping mechanism was given to us from when we were kids, >> you know. So for every mother, I think I would say that the love language has been food.
(17:05) So even in the western world, if the child is crying because I've lived in London and my child was born in London. So it's like check for a bad diaper, check for if the child is hungry or check if the child is tired. Coming back, it's like if a child is crying, you shove the bottle of milk in their mouth, >> you know.
(17:22) So it just becomes such a food dependency, >> you know, to comfort, what we call self pacifying. >> And as we grow up into adults, our brain still remembers the experience of food comforting you. >> You know, emotional eating is always a term I've heard women use. Yeah. >> Why? >> For for the simple reason again, a lot of shame. >> Number one.
(17:46) Number two is they feel they're going to be judged for eating. And especially the world that oh my god, I get that all the time. I love my fries. >> You know, you eat fried food and why are you skinny? And I'm like, that's my body type. >> You know, coming back, taking two steps back nine, I'm not blaming the mother. >> I'm talking about even in the cultural dynamic, >> right? the in the environment that you are in, your parents, your grandparents, how you see their equation with food, you know, that also shapes your reality.
(18:19) >> So, and that becomes a part of your programming. >> I would also like to use the word limiting beliefs cuz I think both these connect very closely to patterns. True. >> Right. Is there something commonly you see amongst men or women which are anywhere between 25 to 44 that you think are problematic? you would like to raise more awareness of or >> I think right now in the world I'm primarily talking about the world that we're living in I think it's instant gratification >> the patience is not there and also I
(18:46) don't want to categorize but yes a lot of people including men and women also have this constant comparison you know and also I think the third most common thing is limiting karmmas or limiting results according to age and I always tell people that karma doesn't come looking at your age. I've seen women at 38 and they're like, "Oh, will I ever find love?" And I'm like, "Yeah.
(19:09) " You know, just because someone's found love at 25 does not mean they're happily married. >> And someone could find true love at 40 and be happily married. And then there are women and men at the age of 26, 28, 30 going through fertility issues. And then there are women at 38 and 40 and 42 conceiving naturally.
(19:30) So karma doesn't come looking at your age. If you have to find love, you can even find love at the age of 55. So I think people put themselves in timelines that by 30 I need to have a property. By 31 I need to get married. By 35 I need to have two kids. By 45 I need to retire. It doesn't work that way.
(19:48) I think it's also the fear of the society that this is the role you're supposed to play and this is what you need to accomplish. >> But I believe that there's a time and space for everything. And if you haven't gotten to where you are supposed to, then there's a reason for it. >> But you know, some people don't make it in the same way.
(20:08) And I'm nobody to decide what making it is or not. >> But how would you describe that then? >> So a lot is to do with it could be a time factor that the time may not be right. Some people make it but are also not happy or then they their goals change. So people who are in a 50,000 job want a one lakh job. People are in a one lakh job, they want a 10 lakh job.
(20:33) So then how much is too much, right? >> And there are some people who have a 50,000 job and they're like, I'm okay with it. >> They're very happy with it. >> And I think that's the point of life. >> And it's not about also earning whatever it is that you're chasing. It's also about sustaining it.
(20:50) A lot of people um find ways to chase and earn what they want. Be it wealth or be it success or be it fame. But sustaining is the most important part of it. >> Absolutely. >> Today someone who makes 50,000 bucks a month can be wealthier compared to someone who's making two lakhs depending on their spending capacity, saving capacity and sustainance capacity.
(21:11) And similarly with love, we all find love but not everyone can sustain it. Let's talk about success and sustaining it and what karmic lessons are there or could there be? >> So, first of all, the most important karmic lesson about someone who's successful is prioritizing your goals and prioritizing yourself.
(21:33) And in order to achieve that, making choices that align with that. >> Number two is discipline and balance. If you talk to the most successful people in the world, um they all talk about balance and uh discipline because balance and discipline is the act of choosing the same thing every single day at that time.
(21:56) And that brings in a lot of alignment. >> And when I talk about prioritizing and balance, it also keeps all the white noise and the white people noise away. And what do I mean by doing that is all the distractions away. All the unnecessary unwanted karmic attachments away. Not connections, attachments. >> What's the difference? >> Not everyone that we connect with or not everyone that we like or attach to our karmic connections.
(22:23) Attachment is very self-created. It's a personality created. >> Karmic connections is what's truly meant to be. So today in a party if you have a conversation with 50 people and you take 10 people's numbers and you meet those 10 people for coffee or a meal you will only deeply connect with two. >> You may still start hanging out with those 10 for whatever reasons but that connection will only be with one or two or maybe not.
(22:49) >> So just because you're attached to somebody does not mean it's a karmic connection. Attachment happens on the personality level. I was at this uh very nice all women's conference last week and you know very successful woman and everyone kept talking about how lonely it's um you know success comes with a price and it's lonely when you get successful or it's lonely at the top to which I said that no >> in fact success helps you prioritize all the riff raff >> and it's not lonely it's only those people that you choose to have with you
(23:22) they stay back and I so totally agree to that >> you know right now we all are living with that FOMO. We want everything >> and that's diluting the energy of wanting success. >> Can you manifest love? >> You can manifest the kind of love you want but that can only happen by the way you treat yourself.
(23:42) I don't believe in the law of manifestation. There's nothing which is called the law of manifestation. Manifestation is an act of wanting something and getting it. Manifestation is based on what we call the law of resonance. It's the universal law of resonance. And according to that, the universe will give you what you're vibrating at.
(24:02) Now, if you're vibrating at frequencies of self-sabotage, of not having confidence, of not feeling worthy, of not trusting yourself or not being able to take decisions, you are going to attract a partner who's going to exactly heighten that vibration. >> How? >> It's what you're vibrating at, right? So if you are constantly angry with yourself or if you're constantly feeling guilty, you will attract a partner who will constantly make you feel guilty, who will be angry with you.
(24:31) >> Versus if you love yourself, and I'm not talking about selfobsession, I'm talking about standing up for yourself. If you are um prioritizing yourself, if you are standing up for your career because you think that it's important to you, you will attract a partner who will support your career as much. M >> you will attract a partner who will stand up for you as much because you are standing up for yourself.
(24:55) >> So the love that you attract in your life is a reflection of your relationship with yourself. >> How [snorts] do women improve their relationship with themselves? >> By being gentle with themselves, by being kind and by telling themselves that you know the world, be it their man, be it their family, they are there but they don't need to constantly keep leaning on them for the love.
(25:19) A woman is the epidome of love. She's a creator of whatever frequency that she wants to create. She can be kind. She can be aggressive. She she can be everything that she wants. >> So to create that for yourself first and then pass it on to people. What women do is they create it. They pass it on to other people and then they beg for the same love from other people.
(25:44) So you need to hold on to a little bit of self love for yourself as well, >> you know. I agree but I want to disagree a little because where what is that sweet spot of you know when they say oh be gentle with yourself like I'm I'm having some issues and my friends my girlfriends keep calling me and they're like have some grace you know I'm going through something have some grace I'm like what grace how much grace if I keep giving myself grace then I'll be in this situation or this mindset forever isn't it my duty to pick myself up
(26:15) >> true grace does not mean uh being in or keep lying in the mud or not doing anything about it. >> Grace means that work but work at the pace where you're not criticizing yourself. So if you feel like moving ahead for 2 days, so be it. Take charge but don't feel guilty for taking 3 hours of break. >> And coming back to um you know being gentle with yourself, being gentle with yourself is again the conversation you have with yourself.
(26:47) Stop judging yourself. Everybody's work and progress. People ask me, will I achieve moa? And I'm like, no. Because on your deathbed, even if you have one lesson to learn, your soul will come back. Even you could be dying and you'll still have lessons to learn. We are all work in progress. Even the universe is work in progress.
(27:05) The universe is not stagnated. The frequencies keep changing. The cosmic keeps changing. >> So it's okay. >> So what if things don't happen the way you want? Nobody has died of their expectations not being met. Niki, >> it's all in your head. >> Yeah, I think there's too much in our heads, right? >> Let me break it down in a in a different way.
(27:31) What at any point? Do what you feel okay with it. >> I think >> and listening to your body, your mind and your soul. There has to be that alignment. You know, sometimes we listen to our body, sometimes we listen to our mind or sometimes we listen to our soul. It has to be at any given point you know you have to listen to all three. >> How does one be more in tune with the voices from their mind, body or soul.
(27:54) >> Okay. So here there's something where people ask me again that how do we decipher whether it's an intuition or a in a voice versus a mind playing games. A mind will always keep changing. The voice of the mind will always keep changing with ifs and buts. The voice of your higher self will always be consistent.
(28:14) What do you mean by that? >> So, say you you go out on a date, okay? >> And your gut says that no, there's something fishy. But in your head, you'll be like, "But Nikki, if I keep doing this to all the men, I will land up being alone. >> My friends say that no, this guy is good on paper and you know, this is the guy I should be with." That's your mind.
(28:34) That if and but is your mind. M >> again uh when it's an intuition it's it's just a knowing it doesn't create fear. Your mind will create fears. >> What if I let this one go? I'll be the I'll be single forever. You know, you know, I'll be again back to the whole dating dog. Yeah. So that's that's the difference between the mind and the soul.
(29:00) And we often land up listening to the mind. >> And you're saying listen to the soul >> because your soul knows your path. The mind will not remember the blueprint, but your soul will always remember the blueprint. >> I have this um conflict in my mind and soul. I'm guessing now >> um because pre- transformation my life was very different.
(29:20) I was the party girl and you know, >> but now I choose a different life and I love my life right now. And even though I say it, I feel like sometimes that girl um kind of knocks and she's like, "Hey, come on. You need to be out there. Like, what are you doing on Saturday night in bed at 8:00 p.m.?" >> But I know that this life is more peaceful.
(29:38) >> So, is that my mind and my soul conflicting? >> No, it's your soul choosing this life and maybe it's that mind, but there's nothing wrong in the other side. It's okay to go there for a while, but come back to >> let your soul be a resting ground. Is there a difference um about listening to your mind and soul when it comes to matters of business or work? >> Intuition is not emotional.
(30:02) A lot of people think that intuition is emotional. Between a mind and your soul, even when it comes to work, listen to your soul. >> Because in today's day and age, work is all about relationships and the quality of people that you work with, the quality of your team, the quality of your clients.
(30:21) um every single person that you're dealing with. Today, someone could be giving you a million-doll deal, but if you don't like their energy, that same energy can create problems once you sign the contract. >> Absolutely. >> So, your intuition will guide you. >> So, I would not say that, oh, you can't be emotional about work, but you must listen to your intuition even with work.
(30:40) And that's also another signature of successful people. >> What are some of the things you've noticed about successful people when it comes to karmic lessons? They know what their limitations are, but they are not guilty or they don't go into self-sabotage. They're okay with their limitations.
(30:56) Um, number two is sustainability. Like I said, the thing about people who are successful, they value their energy, they value their time, they value their money, and that's important, >> you know, and I'm sure even you've seen and you know, luxury is is loud, but for people who've actually made it for them, luxury is very silent.
(31:17) Um so that's how it works today. Someone who's successful will not uh walk into brand from head to toe because they don't want the attention because they know that they will have the ultimate word you know. >> So that knowing that grounding that self-love that selfd deservability they are aware of the power that they have.
(31:40) They don't look for an external validation. They don't go on Instagram to see how many likes I've got. M >> you know most of the successful people are not even perhaps on Instagram. They don't spend time wanting the external validation and I think that's what the signature of a energetic successful person is. >> When something's missing from your life >> there's a karmic lesson that you need to learn.
(32:01) >> I want you to talk about that. The quote that you're talking about is it says that you will get everything you want in life but not at the time you want it because it's through the missing thing that you'll learn your lessons. >> If you get everything in life when you want it there won't be growth.
(32:19) You won't sit with yourself and ask yourself why is this not happening? You'll be so content that you will be like okay everything is fine. >> You know you will not look inward and if you're not looking inward how are you growing? Can you give us an example of something that's missing and what could be the karmic lesson to learn there? So for example um someone may did all the right things education good career good business good investments good family life good children but they have to learn the lesson of self- prioritizing
(32:50) slowing down where they will be met with bad health and it is through that phase of bad health that maybe they have to learn the lessons of giving them priority >> of um standing up for themselves or bringing in that balance or that discipline. They could be brilliantly disciplined when it comes to working out in the gym or going to office and coming back.
(33:12) But when it comes to discipline of rest, that it comes to discipline of listening to your body, maybe they lack that. So the universe will kind of pull the handbrake to teach them that teach them that lesson. >> The same thing could be with someone who's successful in career but still single at the age of 40 or 45. And maybe they need to learn the lesson of being flexible.
(33:35) Maybe they could get away by being rigid in areas of work because that works for them. But the same rigidity when it comes to relationships or choosing a life partner may not work for them. >> Interesting. Is there anything particularly absurd that you get asked a lot? >> What does this person think of me? When will I find a nanny? That's a very common and and now after being a mother, I kind of know why it's so important.
(33:56) When will I lose weight? That's losing weight is not I mean forget a psychic your own nutritionist or your PT cannot tell you that or predict that for you because that also depends on choices every single day. >> You may diet well for 2 months and then if you go on a binge for 5 days you'll put that weight back.
(34:16) When will I be rich? [laughter] >> You know >> what do you say to something like that? You can't like I've had clients >> and I'm I'm I'm literally sitting on their private island and like you know overlooking their villa overlooking the ocean and and his second question or third question is I booked my second private jet and will I get the delivery on time before my wife's 60th and the last question were like will I be rich enough so yeah you get all kinds of people [laughter] so and there's no judgment there's no judgement
(34:45) >> but there is how much is enough >> how much is enough and then you wonder that at What stage of life does insecurity or doubt ever leave you? >> It doesn't. >> It doesn't. >> You want to invest only 20% energy in your work, but you want 100% result. You want to only invest 15% of your day's energy in your relationship with your partner, but you want 200% result.
(35:07) It doesn't work that way. >> Energy, it's cause and effect. How much you are giving in and what you're [clears throat] giving in is exactly what you're going to get back. But you know there's always this thing that say that one person always has to do more ends up doing more. >> A lot of people land up doing more because of their insecurity, because of their rigidity, because of their they wanting to attach themsel to people's problems, because of people pleasing.
(35:34) But it's not a norm. Even if they don't do it, their partner is not going to abandon them. >> Think about it. >> It's a them problem, not >> talk to me about money. How does uh money and karmic lessons play a role? >> Your relationship with money is a direct reflection of your relationship with your own energy.
(35:55) And what do I mean by own energy? It's your frequency, your time, your how you give priority to money is also energy. And your your mental emotional time is also energy. If you value time, you'll be able to value money. If you value your thoughts, you'll be able to value money. So, it's very much alike. And I always say this that making money is not difficult.
(36:22) Sustaining money is. Often people land up making money, but then again they get attached to other people's problems. They land up overgiving. But it's not needed. Even if you meet someone once a year, but you go you want to go buy them an expensive gift just to prove a point. So unfortunately in today's day and age um people want money without really working on your relationship with money.
(36:47) I've seen so many people who have everything but they still have the scarcity wound and that's a big wound. Some people think that they don't deserve you know that oh if I increase my rate or if I sell an outfit for double the price no one will because they don't trust themselves. So they are also scared for asking.
(37:09) >> You know some people shy away from asking for their own payments. >> Yeah. >> That in itself is a direct reflection of how much you value yourself. I'll give you a few relatable u instances that can happen to anyone's life. And if you can just briefly tell us the karmic lessons that could potentially be behind those.
(37:28) >> Having a toxic boss, >> not to take things personally number one and also to stand up for yourself. abusive partner, >> selfrust and making a choice to walk away because you have to honor your body. You have to honor your mental energies. You have to honor yourself. >> Trying really hard but not losing weight.
(37:47) >> That's to do with consistency, that's to do with balance and discipline. >> Not making the right kind of money. >> So there are multiple aspects here. One could be the scarcity wound and one could be low deservability. Because if you think that you don't deserve money then you will also attract a job a boss a business partner who will think that you don't deserve it.
(38:08) >> So low deservability [snorts] >> difficult relation with parents >> is not to take things personally and giving up the need for them to be perfect. I think that's a wound that everyone carries. >> Yeah. >> Our parents are just work in progress. before they are parents. They are just souls for you to learn their lessons.
(38:29) >> You've mentioned a couple of times that's the kind of person you'll attract. Attract. You've used that word. >> Is there a way I can attract the kind of person I want? >> Absolutely. But by changing your frequency of what you think you deserve, how you need to be treated. >> So would you say that I should know what I want? I should know how I need to be treated and like awareness to that.
(38:52) >> Yes. Tamana before I wrap up I want to ask you is there any kind of daily practice or anything one can do regularly >> to know more about you know the karmic lessons behind what they're feeling I would say journaling I think journaling really really helps because it helps you have that inner conversation it kind of helps you dig deep into the kind of conversations you're having with yourself and like I said selft talk is everything uh people keep talking about awareness keep people keep talking about breakthroughs but awareness
(39:26) breakthroughs inner transformation happens with self-t talk. So journaling is basically is a deep dive into the tone in what you talk to yourself and that really helps you break it down. And whenever I say journaling ask yourself questions like how am I feeling today physically, mentally, emotionally, spiritually what do I want? Like when you sit to ask yourself what kind of a partner do I want? Ask yourself what kind of a partner do I want physically, mentally, emotionally and spiritually.
(39:58) You know, we often base the kind of partners we want based on what what's been told to us by society, by parents. Also, our past relationships play a very important role. So again, sitting with yourself and asking these difficult questions and now thanks to of course Chad GPD and Instagram and Pinterest and YouTube, there are so many journaling prompts.
(40:20) If you're angry, just look up for journaling prompts to deal with anger or if you're stuck in a relationship. So, journaling really helps. Apart from the grounding and the energy work, I think this is a practical tool that one can work with. >> Amazing. Amazing. Thank you so much for your time and your great insights. A lot of lessons for me as well.
(40:39) And thank you. My pleasure.