Pehli Baar Ek Asli Kriya Yogi Ki Duniya Ke Andar | The Real One
Author Name:The Real One
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Transcript:
(00:00) इस तरफ से दौड़ते हुए इधर जाएंगे। वो 5 6 इंच के हैं। [संगीत] इधर से इधर तो देखते रहिए। सेमी ट्रांसपेरेंट है। शायद ये इधर से उधर जाएगा। अरे हां हां वो जरा इसमें एक बाइक आएगी तो वो लोग रुक जाएंगे। ये [संगीत] भैया बताइए हेडलेस आदमी का क्या करेंगे? एक बहुत अजीब फोटो है ये। यह मैं बैठा हूं बहुत साल पुराना और ऊपर से दो बड़े-बड़े विशाल विराट स्तन लटक रहे थे पेड़ पर से। हैं? नाड़ी पकड़िए। ये मैंने सुना था कहीं। हम्म।
(00:42) लड़क रही है? हम्म। चल रही है? हां जी। अब [संगीत] रुक गई। रुक चुकी है। आप भगवत गीता के कृष्ण की तरह हैं। देखिए पंजाबी में कहते हैं अस तो चरणा है। लेकिन जैसे कि अर्जुन बार-बार प्रश्न करता है और कृष्ण जो है वो पन्ना फाड़ के ही फेंक देते हैं। जी आप ऐसे ही करते हैं। [हंसी] मैं कंक्लूजन दे देता हूं। लेकिन वो इतना छोटा होता है कि कंक्लूजन हमेशा छोटा ही रहेगा। [हंसी] एक हिमालयन योगी थे। उन्होंने कहा जब वहां जाया जाएगा ना तो वहां कहा जाएगा चप्पल बाहर उतार के आओ यानी कि मन को बाहर
(01:28) छोड़कर आओ। अभी हमने कहा भगवान दसवें अध्याय में कह रहे हैं इंद्रियों में मन मैं हूं। यानी इसका मतलब है कि आप मन को भगवान को बाहर छोड़ के कहां जा रहे हैं? ये संभव है? अरे जब मन भगवान का ही स्वरूप है। मन नहीं रहेगा तो आपके तो फिर पागलखाने में बिजली के झटके लगते मिलेंगे। गुरु जी जैसा आपने बताया आपको अश्वत्थामा के दर्शन हुए। जिम में [संगीत] ही हुए थे। महावतार बाबा जी के दर्शन हुए थे। वो अंदर हॉल वाले हॉल में आए थे। शिव जी के भी वहीं दर्शन हुए थे। क्या कृष्ण के कभी दर्शन हुए? कृष्ण की तो कृपा चल ही रही है। मैंने एक ऐसे योगी देखे जो बिल्कुल ही
(02:03) श्रृंख थे। हम 53 किलो, 54 किलो, 55 किलो। ये भी मेरी समझ से बाहर है। ऐसा क्यों? योग ही सडोल मिलेगा। चौड़ी छाती हो जाएगी, पेट पतला हो जाएगा। ये तो सिर्फ योग साधना से ही हो जाएगा। वर्मा जी ये डमरू वाले के हाथ है जांच मजीरे वाले के नहीं क्या बात है [हंसी] द मोस्ट ब्यूटीफुल प्लेस ऑन दिस प्लेनेट
(02:50) हर हर महादेव जब हमारी एक बंदरिया है हां जिसको रेस्क्यू किया था रेस्क्यू किया था गुरुजी ने चुनमुन चुनमुन नाम है उसका और रेस्क्यू ऐसे किया था कि जब वो मतलब यहां अपने घर में ही झरना है उसकी मदर शी जस्ट डाइड आफ्टर गिविंग बर्थ और वो नीचे गिर गई वो नीचे गिरी तो हम लोगों के डॉग्स का टाइम होता है तो एक डॉग ने उसको पकड़ लिया तो उससे बचाया गया तो बचाया गया तो उसके बाद में फिर पाल लिया गया ऑब्वियसली रेस्क्यू करके छोटा सा बच्चा है उसने कभी देखा नहीं है और बंदर कभी किसी टच्ड ह्यूमन बीइंग जब टच कर लेता है ना तो वो एक्सेप्ट नहीं करते उसको
(03:35) अच्छा हां अगर ह्यूमन बीइंग किसी बंदर के बच्चे को टच कर ये मैंने लेपर्ड्स के बारे में सुना था ये हर जानवर के बारे में होता है चिड़िया के बच्चे के बारे में किसी भी बच्चे के बारे में ओके न्यूली बोर्न बेबी अगर कोई ह्यूमन टच कर लेता है तो उसको एनिमल एक्सेप्ट नहीं करता। ठीक है? तो उसको ले लिया। फिर एक जब वो बड़ी हुई तो गुरुजी उसको जामुन खिला रहे थे। अच्छा। जब वो जामुन खिला रहे थे तो जामुन खाते-खाते गुरुजी ने बोला इसको तो बहुत पसंद आ रहे हैं। इसको पसंद आ रहे हैं तो बाहर जो बंदर होंगे उनको कितने पसंद आएंगे। तो वहां पूरा जो फॉरेस्ट
(04:10) डिपार्टमेंट से जो लैंड तो बोर्ड पे लिखा हुआ था 11,000 लेकिन मेरे को बताया कि उन्होंने 1 लाख लगवा। यहां लिखा हुआ है चुनमुन बंदरिया के सौजन्य से बंदर समाज के लिए सप्रेम भेंट 11,000 जामुन के ये बहुत पुराना बोर्ड है। अब यहां पर कितना पड़ा है? 11,000 अभी 1 लाख हो चुके हैं। हां अब ये कितने 1 लाख तो हो गए ना अराउंड? हां 1 पहले उन्होंने 11,000 लगाए थे। ठीक है। फिर आज तक उनके जो हैं वो ₹1.
(04:36) 5 लाख पेड़ लग चुके हैं। यहां गोवर्धन में आने से पहले गुरु जी पहले वृंदावन गए थे। मथुरा से वृंदावन गए थे। वृंदावन में जिस जगह पे वो रहे थे हां जी। ये हाउस जो आप देख रहे हैं ना यहां बिल्कुल सेम ऐसा ही उसका वो था अंदर से जो स्ट्रक्चर अंदर है और बाहर है वो वैसा सेम स्ट्रक्चर उनको वृंदावन में मिला ओके उनको लगा शायद यही है वो बट उनको उस वक्त ये आईडिया नहीं था कि ये तो सिर्फ एक पार्ट है एग्जैक्ट प्लेस जो महल है वो कुछ और है। उनको दिखता था। सपने में दिखता था। बट वह नहीं कर पा रहे थे कि मथुरा वृंदावन कहां रहना है। एग्जैक्ट कहां रहना है।
(05:13) वृंदावन में जाके उनको सेम एग्जैक्ट प्लेस मिली। ये है वो अंदर से अभी ताला लगा हुआ है। बट ये जो भी इसके अंदर है रूम्स वगैरह सेम एग्जैक्ट उसका है। बिल्कुल। इवन मेज़रमेंट्स आर आल्सो इक्वल। वृंदावन में जिस रूम घर में रहेंगे। क्या बात है। आइए। आराम से आइएगा। समझ गया। इसके अंदर खजाना है। खोल देंगे। [हंसी] बहुत सारी ऐसी स्टोरीज हैं। लोग कहते हैं कि खजाने की वजह से आए थे या वो आए थे। बट अच्छा लोग कहते हैं गुरुजी यहां पे खजाने की वजह से आए हां, उनको ऐसा लगता है। बट यहां की जो बहुत सारी लोकल स्टोरीज है वो
(05:58) ये बोलती हैं कि जो भी यहां पे आज तक खजाने की वजह से आया वो या तो मर गया या पागल हो गया। डेड बॉडी ही मिली है कुछ लोगों की। छह अभी मैं आपको एक जगह जहां लेके जाऊंगी ऊपर। उसके यहां पे खजाने की बात है। ऐसा कुछ है तो सही खजाने की बात। लेकिन किसी ने हम लोगों में से किसी ने ट्राई नहीं किया। ओके। बीइंग अ फैमिली गुरुजी बोलते हैं अगर कुछ मिलना होता है तो भगवान खुद आपके हाथ में आपकी गोदी में दे देंगे। जरूरत नहीं है कि वहां ढूंढो वहां ढूंढो। इस चीज की जरूरत नहीं है। नेचुरली सब कुछ मिल जाएगा। सिर्फ गिरिराज जी की कृपा और उनके गुरु का आशीर्वाद।
(06:37) क्या बात है। सिर्फ इसी चीज को लेकर वो यहां आए थे। यही मेन गोवर्धन की पहाड़ी है। ये तलहटी है। तलहटी है ये मतलब चरण सेवा है। चरण सेवा है। हां। आगे से आपको और दिख जाएगा। पहाड़ दिख जाएगा। तो पहले तो मैंने आपको जैसे बताया कि ये तलहटी है और 22 23 साल पहले जब यहां गुरुजी ने सबसे पहले प्लांटेशन का काम करवाया तो ये नहीं थे ऊपर ये सब हैं। गिरिराजी थे। अच्छा गिरिराज थे। लेकिन गिरिराजी पे सिर्फ कांटे नाक फनी सबसे वैसा पेड़ होता है कि उसके अलावा और कोई वो वेजिटेशन और कुछ हो नहीं सकती उसमें। सिर्फ वही थी। तो लोग फूल अर्पण करते हैं,
(07:17) मालाएं अर्पण करते हैं। गुरु जी ने बोला कि फूल माला तोड़ के डालने की वजह ये की वजह हम लोग क्यों ना नेचुरली उनको फूलों से कवर करवाएं। तो उन्होंने ये बोगनविलिया की बेलें जो हर वक्त फूल बिखेरती हैं। आप देख सकते हैं आज भी है। है ना? क्या बात है। तो उनका यह मानना है कि मेरा मेरे विचार भी यही है कि फूल को तोड़ कर जो पहले से ही उसके चरणों में चढ़ा हुआ है। हां। उसको मारकर हम उसके चरणों में चढ़ा रहे हैं। इससे बढ़िया जिंदा ही फूल चढ़ा दें। तो उन्होंने सब जगह बेले लगवा दी बोगनविलिया की। थोड़ा सा जब बारिश वारिश होती है तो ये तो आपको सफेद फूल दिख रहे
(07:56) हैं। पिंक, रेड। पूरे इसमें यहां तक कलरफुल हो जाती है। ये उनके विचार थे। क्या बात है। ये जो शिला आप देख रहे हैं नागशिला आ जाइए। कोई दिक्कत नहीं है। थोड़ा आराम से आइएगा। ये आप दूर से अगर कैप्चर करेंगे तो यहां नाग दिखेंगे आपको छोटे से। फन वाले नाग दिखेंगे यहां अंदर। ये नागशिला है। गुरु जी एक बार सो रहे थे तो उनको एक स्पेशल मंत्र दिया था। एक बाबा जी थे उठे। तो दो बार वो मंत्र बोलते हुए उठे। आज तक वो मंत्र कर रहे हैं। यहीं खड़े थे वो। ओके। और गुरु जी उनके बगल में खड़े हुए थे और उन्होंने एक मंत्र उनको दिया और उनसे बोला
(08:40) रिपीट करो। दो बार रिपीट किया। बोलते बोलते उठे थे। आज तक वो मंत्र वो कर रहे हैं। आज इसलिए हम इनकी आज तक सेवा करते हैं। ऊंचा करते हैं। मतलब शिला में नाग है। नेचुरल है। बनाया हुआ नहीं है। तो ये हमारी नागशिला साल में एक बार जिस समय उनको मंत्र मिला था शायद 11 जनवरी मिला था। एक बार गुरु जी से डेट कंफर्म कर लीजिएगा। ओके ओके। वो आएंगे मेरे ख्याल से आपके साथ आएंगे। आएंगे हां तो यहां उनको मंत्र मिला था और इसलिए वो सेवा भी करते हैं अभी भी सारी सफाई वगैरह लोग कर देते हैं। ये गंदगियां मचा देते हैं लेकिन सारी सफाई की जिम्मेदारी फिर वही रखते हैं।
(09:18) गुरु जी क्या बात है। तो आपको गुरु जी ने शायद बताया हुआ कि जब उनको बाबा जी महाराज के दर्शन हुए थे तब उस वक्त गुरु जी इस दरवाजे से निकले थे और इस रूट से गए थे। जी आपको उन्होंने बताया था मुझे याद है पॉडकास्ट में उन्होंने उनको आप लेकिन उन्होंने आउट ऑफ द बॉडी एक्सपीरियंस बताया था वो नहीं आउट ऑफ द बॉडी एक्सपीरियंस बताया था और उसके बाद में ये नहीं बताया था कि जब बाबा जी महाराज के साथ लेकिन वो पीछे वाले कमरे में बताया था बाबा जी महाराज की मुलाकात तो वो इसी रास्ते से गए थे ओके ओके हां दिस इज द सेम वे और इस रास्ते से ये इन्होंने एक्चुअली गुरुजी ने इसको इसलिए
(09:55) जानबूझ के अलग किया लेन बनाई है जहां से वो चल के आए ये फ्लैट था ओके बनवाया है ये उन्होंने ठीक है ये सब कुछ भी नहीं था यहां पे पुरानी फोटो अगर कभी होंगी मेरे पास में मैं पूछूंगी किसी से वो लेकर आएंगे तो आपको समझ में आएगा कि जगह बिल्कुल बिल्कुल डिफरेंट है समझ गया मैं हां जी डेवलप करी है पूरी जगह और यहां से जाके वो इधर से ऊपर गए थे इस जीने से ऊपर गए थे ये है क्या बेसिकली हां ये मैं बताती हूं आपको हां ये खुला भी हुआ है इसके अंदर जा सकते हैं हां इधर से चलिए आ जाओ गौरव आ जाओ थोड़ा सा ना ध्यान से चलिएगा यहां से आराम
(10:40) से [गला साफ़ करने की आवाज़] तो ये जगह आपको बाहर से नहीं दिखती है कि ये भी इतनी बड़ी जगह है। यहां हम तो बाबा जी महाराज यहां पर आए थे। इस जीने से ऊपर आए थे। ओके। ऐसे करके वेव किया था और फिर वो यहीं से गायब हो गए थे। पता नहीं चला था कि वो कहां गए हैं, कहां नहीं गए हैं। ठीक है। तो अब हम बात करते हैं खजाने की। जो मैं आपसे बोल रही हूं। और टॉपिक बनने वाला है खजाना। [हंसी] क्योंकि खजाना इज नॉट एन इशू। एक्चुअली कभी गुरुजी ने ऐसे कुछ ट्राई नहीं किया है। बस मैं
(11:26) आपको एक छोटा सा इंसिडेंट बता रही हूं। हम जिस जगह पे खड़े हुए हैं ये वही है जहां हम लोग घूम रहे थे अभी। हां जी। ये सारी गाय हैं गुरुजी की। ओके। जो घूमने आ रही हैं। ये सब गाय गुरुजी की ही हैं। शाम को वापस आएंगी घर पे। ठीक है। ये आपको दरवाजा दिख रहा है? हां। लोगों ने ना इसी के अंदर एक बहुत बड़ा हॉल है। लोग इसके अंदर गए। उन्होंने खोदना शुरू किया। यहां दीवाल थी। हम लोगों को अलाउड नहीं है। बंद बंद करवा दिया है। इसलिए मैं आपको अंदर से लेके नहीं गई। दीवाल थी दीवार खोद। वहां से निकलती है एक रेत जिसमें से एक कीड़ा भी नहीं। मतलब एक
(12:01) चींटी तक नहीं थी उस रेत में से। और दूसरे दिन सिर्फ उन पांच लोगों की डेड बॉडी मिली वहां। यहां पे? हां जी। इसके नीचे एक हॉल है उसमें। हम्म। फिर इस दरवाजे को बंद कर दिया गया। हम लोगों ने देखा है जब हम लोग अंदर इसमें घुसे जब रिपेयरिंग वगैरह करवानी थी तब पता चला कि आपस में मिलते-जुलते बहुत सारे कमरे हैं इसमें इंटरकनेक्टेड। थोड़ा सा झांका फिर वापस आके उसको बंद करवा दिया दीवार को। जिस दीवार को खोदा था उस दीवार की बात कर रही हूं मैं। क्या बात है। तो कोशिश नहीं की कि क्या करना चाहिए। कोई कोशिश नहीं की। अंदर नहीं। जो लोगों ने खराब किया वो खोद दी।
(12:37) वो सही करवा दिया। ठीक है। ये जगह की अगर हम बात करते हैं तो ये आपको ये दिख रहे हैं रिमेंस जो दिख रहे हैं यहां पे। ये रिमेंस दिख रहे हैं आपको? मैं आपको भी छतरियों में लेके जाऊंगी। हम्म। यूजुअली ये भी एक छतरी हुआ करती थी। ओके। फिर एक बहुत बड़े साहूकार ने हां। यहां से ये पत्थर लूट लिए और अपनी हवेली बनवाई। गुरु जी से आप उनका नाम जरूर पूछिएगा। ठीक है। और बाकी बचा कुचा ऐसे ही छोड़ दिया तो हम लोगों ने खिंचवा के यहां पर उठवा के इसको करवा दिया। तो पत्थर के साहूकार क्या यहीं के थे? नहीं नहीं वृंदावन के नहीं थे। वो शायद जयपुर राजस्थान कहीं तो कोई जगह है कि
(13:18) यहां की छतरी के पत्थर निकलवा के अपने घर में लगवाए थे। ओके। यहां से निकल पाएंगे? हां निकल पाएंगे आइए। आइए। तुम्हें जाना पहले। थोड़ा सा ध्यान से निकलना पड़ेगा। पत्थर केयरफुल निकलना केयरफुली निकलना पड़ेगा। है ना? आइए। ओह माय गॉड। मैंने इसलिए कहा था केयरफुली निकलना पड़ेगा। तो यहां से निकलते नहीं है मैम। वहीं से निकलते हैं। नहीं मैं बताती हूं। चलिए। ऐसे। पकड़ लीजिए और चलिए। चलिए। कोई कुछ नहीं कहेगा। मैंने कहा था कोई कुछ नहीं कहेगा। चलिए
(14:06) मेरे साथ हैं आप सेफ हैं। रनो ततया है वहां पे। बचे हैं अभी हम जस्ट ततयों से। [हंसी] कोई दिक्कत नहीं है। मैंने बोला ना इसलिए मैं आपको यहां से लेकर आई थी। हां जी। अच्छा तो गौरव आपको बता रहे थे ना कि आपको शायद ये नहीं पता कि गुरु जी के नाम से दरबार भी नाम से दरबार लगता है। गुरुजी ही लगाते हैं उस दरबार। नहीं नहीं गुरुजी नहीं लगाते हैं। अब ये एक बहुत स्ट्रेंज स्टोरी है। मैं नहीं जानती आप थोड़ा कम हो सकता है क्या? हां बिल्कुल बंद हो सकता है। हां जी बिल्कुल। ये लैंप भी हां गुरुजी ने कभी ये नहीं बोला कि वो
(14:51) दरबार लगाएंगे। तो एक बार अपने आप बालाजी ने ही गुरुजी से कनेक्ट किया। बालाजी ने गुरुजी से कनेक्ट किया। ये मेहंदीपुर बालाजी की बात है। जी ये मेहंदीपुर बालाजी की ही बात कर रही हूं मैं। उन्होंने ही गुरु जी को कनेक्ट से कनेक्ट किया। और उन्होंने बोला कि मैं चाहता हूं कि आपकी यहां प्रेजेंस हो। अब यह एक बहुत स्ट्रेंज बात है कि जब गुरुजी ध्यान में जाते हैं तो वहां पर दरबार लगता है और जब दरबार लगता है तो गुरु जी की शक्ति वहां पर प्रेजेंट होती है। गुरु जी नमस्कार कैसे हैं आप? कैसे हैं वर्मा जी? [हंसी] आप आए हमारी किस्मत कभी हम उनको कभी आपके
(15:32) घर को देखते हैं। [हंसी] क्या बात है गुरु जी चेयर दी जाए। और मैं एक कमेंट करने की इजाजत चाहूंगा चेयर को लेके। डेमोक्रेसी ब्रज भाषा का एक शब्द है। ब्रज भाषा में कहते हैं द मोहे कुर्सी। वही अंग्रेजी में डेमोक्रेसी बन गए। [हंसी] पधारिए। क्या बात है गुरु जी। क्या बात है? क्या बात है। ब्रज में बस कर रहा है। [हंसी] नींद अच्छे से पूरी हुई आपकी? सब ठीक है। सब ठीक है। जी। अभी मैं जानना चाहता हूं जस्ट पिछली बार हमने थोड़ी मिस्टिकल बातें करी। पिछली बार हमने काफी आपके एक्सपीरियंस की बात करी।
(16:16) लेकिन मेरे को आज एक योगी की डेली लाइफ कवर करनी है। उसमें आपके विचार कवर होंगे। जरूर जरूर। बहुत रैंडम बातें करेंगे। मुश्किल थोड़ा सा ये है कि आप भगवत गीता के कृष्ण की तरह हैं। अर्जुन बार-बार बहुत बड़ी तुलना कर दी आप। नहीं नहीं मैं आप ही को अब तक मैं 400 प्लस पहुंच देखिए पंजाबी में कहते हैं 80 तो उन चरणा धूल है उनकी तो चरणों की धूल ही मिलती रहे वो बहुत है लेकिन जैसे कि अर्जुन बार-बार प्रश्न करता है और कृष्ण जो है वो पन्ना फाड़ के ही फेंक देते हैं। जी आप ऐसे ही करते हैं। [हंसी] मैं कंक्लूजन दे देता हूं। लेकिन वो इतना छोटा होता है कि
(16:58) कंक्लूजन हमेशा छोटा ही रहेगा। [हंसी] क्या अलग है नॉर्मल लाइफ और एक योगी की लाइफ में विचारधारा से कॉन्शियसनेस से क्या अलग है? देखिए सामान्य आदमी ज्यादातर लोग अपने कर्म के जो करे उन्होंने उसके फल के बंधन में बंधे हुए हैं। उसी को हम डेस्टिनी कहते हैं, प्रारब्ध कहते हैं। तो आदमी उससे इधर दाएं बाएं हो नहीं पाता। योगी जो थोड़े से बैलेंस में आ गए हैं, वह सोचने लगते हैं कि ये चक्कर क्या है? तब उनकी समझ में आता है कि यह जो हमारी चेतना है वह बड़ी अविकसित है। ज्यादा विकसित नहीं है। इसलिए ज्ञान प्राप्त नहीं हो पा रहा। तो फिर वो जिसके भाग्य में योग साधना लिखी
(17:43) वो फिर योगी गुरु की खोज करेगा, स्टडी करेगा, रिसर्च करेगा। जितना मटेरियल अवेलेबल होगा वो उसको सब करेगा और अगर उसको कृपा हो जाएगी तो उसको एक गुरु भी मिल जाएंगे। वहां से फिर उसकी यात्रा शुरू होती है। स्पेशली चेतना के विकास की, ब्रेन के डेवलपमेंट की, पूरे नर्वस सिस्टम के डेवलपमेंट की क्योंकि अंत में बॉडी एक सपोर्ट सिस्टम है ब्रेन का। तो जितना आप ब्रेन को डेवलप करेंगे, उसके हिसाब से ही नर्वस सिस्टम भी स्ट्रांग होना चाहिए। यह पूरी योग साधना इसी पर आधारित है। मैंने बहुत सारे योगियों को पढ़ा है। बहुत सारे योगियों को सुना है। आप लेकिन इनमें
(18:23) से एक ऐसे हैं जो ब्रेन के डेवलपमेंट की बात करते हैं। ज्ञान तो वहीं हो रहा है माइंड को। स्टेप बाय स्टेप कैसे पॉसिबल है ये डेली लाइफ में? क्योंकि मन का इतना भटकाव है। देखिए डेली लाइफ वालों के लिए है ही नहीं। [हंसी] के लिए तो थोड़े बहुत आसन कर लें जिससे पेटवेट ठीक रहे थोड़ा स्ट्रेस प्राणायाम कर लें मतलब ब्रीथिंग एक्सरसाइज कर लें इतना काफी है उनके लिए या एक्सरसाइज का रूटीन डेली करते रहें जिम जाते रहें थोड़ा खानपान का अपना एक डिसिप्लिन रखें उतना बहुत होता है आदमी के लिए आप क्या उनसे एक्स्ट्रा ऑर्डिनरी करते हैं और क्या
(19:02) देखिए मैं पूरा पिछले 44 साल से तो क्रिया योगी कर रहा हूं 1982 से 1 अक्टूबर से और खोज हमारी 1979 से ही शुरू हो गई थी। तो जितना मटेरियल अवेलेबल हो सकता है दुनिया में योग के ऊपर भारत में ही सबसे ज्यादा वो सब आरपार करा। उससे एक सब्जेक्ट की आपकी अंडरस्टैंडिंग बनती है। फिर कृपा हुई तो गुरु भी मिले जो श्री श्यामाच डैडी के ग्रैंड सन थे। हां जी। उनकी कृपा से जिंदगी बदल गई। ये आप मान के चलिए। लेकिन लोग बड़े फंसे हुए हैं आजकल फेक गुरु रियल गुरु इसके चक्कर में आपको कैसे मिल गए रियल गुरु और फेक गुरु से कैसे बच कई फेक गुरुओं से भी पाला पड़ा उनका बताइए
(19:46) थोड़ा सा आप देखिए बड़े मेकअप में रहते हैं अब तो खैर वो मर ही गए ज्यादातर [हंसी] लंबा टाइम हो गया है शांता क्लॉथ जैसी दाढ़ी है रूझूझ लगा के प्रवचन दे रहे हैं और ऐसा लगता है कि ये बिल्कुल ये अभी भगवान से मिलवा ही देंगे बाद में जो चीजें सामने आई वो बताने लायक नहीं है तो मेरा तो एक कंफ्रंटेशन भी हुआ गुरुजी से जब पहली मुलाकात हुई तो मैं एडजस्ट नहीं कर पाया कैसे सिंपलिस्टिक मोस्ट ऑनेस्ट और वेरी कॉन्फिडेंट ओके कोई नाटक ही नहीं था वो सादा धोती और उसमें जो फतई पहनते हैं उसमें बैठे थे 77 साल उनकी उम्र थी उस समय तो जो एक सिंपलिस्टिक कॉन्फिडेंस था वो शोबाजी से
(20:31) तो मैं एक्सपोज़र था पहले से तो वो एडजस्ट नहीं उनको समझने में थोड़ा सा टाइम लगा। कॉन्फिडेंस उनमें इसलिए था कि विद्या उनके पास थी, अनुभव उनके पास था। परंपरा उनके पास थी। तो उनकी कृपा से शायद 1% कॉन्फिडेंस हमारे अंदर भी डेवलप हुआ। कृपा हुई उनकी उनकी कृपा हुई। एक योग क्रिया को आपने चुना। हम जिस भूमि पे बैठे हैं यहां पर भक्ति योग को बहुत ज्यादा। मुझे यह बताइए भक्ति के साथ फिर योग क्यों जोड़ रहे हैं कि भक्ति योग इसका जवाब नहीं देते। गीता में 12व अध्याय को भक्ति योग का अध्याय बोला गया है।
(21:16) और उसमें भी एंड में यही लिखा है श्रीमद् भगवत गीता सूप शास्त्र ब्रह्म विद्यायाम योग शास्त्र ब्रह्म विद्या का योग शास्त्र उसमें भक्ति योग का 12वा अध्याय समाप्त। इसमें आप पहले प्रश्न पर जाइए अर्जुन के उसको भी पढ़िए। जो आपकी साकार रूप में उपासना करते हैं और जो निराकार रूप में करते हैं इनमें श्रेष्ठ योग को जानने वाला कौन है? प्रश्न तो यह है। वहां उस पर ध्यान कोई नहीं देता। भक्ति हम लोगों ने एक शब्द पकड़ लिया है। बस भक्ति बहुत बड़ी चीज है। मेरे दृष्टिकोण में भक्ति जो जो कर रहा है उससे मुझे कोई आपत्ति नहीं है। हम मेरे दृष्टिकोण में जो मेरी समझ में आया
(21:59) जो भगवान ने गीता में वचन बोल दिए। सरेंडरनेस नहीं नहीं जो वचन बोल दिए उनको आप अपने जीवन में उतार पाए। यही भक्ति है। बस उन वो उनके वचन है जो रिकॉर्ड है। कृपा है व्यास जी की कि अपने पास रिकॉर्ड है। उससे हम जीवन में उतारें या उनमें अपने कानून निकाले कि नहीं नहीं ये गलत है ये सही है। जो भगवान ने कह दिया वी एक्सेप्ट इट। यही सरेंडर है। हो सकता है गुरु जी मैं गलत हूं। लेकिन मुझे गीता से यह समझ में आया कि चाहे भक्ति हो, ध्यान हो, ज्ञान हो लेकिन कर्मों के आधार पर ही सब मिलेगा। आप एग्रीड कर्म ही सर्वोपरि है। मान लिया।
(22:44) लेकिन बिना ध्यान और ज्ञान के कर्मों का। देखिए मैं अब आपको की दे देता हूं गीता की जो शायद आपने आज तक कहीं ना तो किसी ने इसको बोला होगा। हां जी। और ना आपका ध्यान गया हुआ है। सातवें अध्याय का 29वा श्लोक ये फार्मूला भगवान दे रहे हैं वहां एक जो मेरी शरण लेकर वृद्धा अवस्था और मुक्त मृत्यु से मुक्त होने के लिए प्रयास करता है। जरा मरण मोक्ष मामस ततते वही ब्रह्म को आध्यात्म को और कर्म को संपूर्ण रूप से जान पाता है। तो यह उन्होंने फार्मूला दे दिया है पहले ही। इसको छोड़ के बाकी हर आदमी हर चीज पर बात करता है। तो डायरेक्ट
(23:30) यह उनका एक आदेश है कि जो यह करेगा वो अध्यात्म को भी जानेगा, कर्म को भी जानेगा और ब्रह्म को भी जानेगा। लेकिन बहुत सारे लोग कृष्ण भगवान से कंफ्यूज्ड भी हैं। सो स्वाभाविक बात है। वो कह रहे हैं कि मेरी मर्जी के बिना पत्ता भी नहीं हिलता और अर्जुन को ही कह रहे हैं तू ही तीर चला। ठीक है। इन दोनों बातों को एक कैसे तो अंत में उन्हीं की तो मर्जी चली। उनकी मर्जी से ही तो अर्जुन ने तीर चला है। बिल्कुल सही कह रहे हैं आप। तीर तो उसकी मर्जी सही चला। उसमें क्या इसमें इसमें कंफ्यूजन तो मेरे लिए तो कुछ भी नहीं। कृष्ण आपके लिए क्या है? पिछली बार आपने
(24:12) बड़ा छोटा सा आंसर दे दिया था इसका। आपने कहा था कृष्ण कोई जान ही नहीं पाया कि कृष्ण क्या है। देखिए हमारी परंपरा में गीता का एक अध्याय नित्य पढ़ने की प्रतिज्ञा की जाती है। गीता हम लोगों का एक मुख्य ग्रंथ है और वह योग शास्त्र भी है। हर गीता के अध्याय के अंत में लिखा हुआ है। तो जब हम लोग कहते हैं गुरु महाराज की कृपा है तो उसमें एक लाइन पीछे होती है। कृष्णम वंदे जगत गुरु कृष्णम वंदे जगत गुरु जगत के गुरु तो वही है। तो आप चाहे योग करें या कुछ भी करें आप वंदना तो उन्हीं की कर रहे हैं। आपने जिस चेतना की बात करी जिस कॉन्शियसनेस की बात करी क्या वही है कृष्ण
(24:53) आप दव अध्याय में पढ़िए समस्त भूतनाओं की चेतना मैं हूं बोल रहे हैं उसमें तो यदि आप चेतना का विकास करेंगे तो आपकी समझ कृष्ण को लेकर और जो वो बोल रहे हैं उसको लेकर बढ़ती चली जाएगी। समस्त भूतों की चेतना ही वो है। समस्त इंद्रियों में मन वही है। दवां अध्याय बड़ा सारगर्भित है। आप ओशो को पढ़ते हैं? बहुत पहले पढ़ा था। क्या है उनकी? आपकी आपके विचार क्या है उनके बारे में? वो फिलॉसफी के प्रोफेसर थे। बहुत ज्यादा पढ़े लिखे थे और बहुत अच्छे वक्ता थे। और उस काल में उन्होंने जो बोला वो काफी क्रांतिकारी विचार उन्होंने समाज के सामने
(25:33) रखे। क्या वह सत्य था? देखिए सत्य असत्य का तो फैसला कोई और ही करेगा लेकिन उन्होंने सोचने के लिए एक बहुत बड़ा मैटर तो दिया ही जो इंटेलेक्चुअल्स थे और जो पढ़े लिखे लोग थे उनको कोई गांव वाला उनका भगत नहीं बना कभी ग्रास रूट लेवल उनसे दूर रही जो पढ़े लिखे लोग थे वही उनके चक्कर लगाते थे और मटेरियल उन्होंने बहुत दिया है चिंतन करने के लिए इसमें कौन डाउट करेगा अभी मैं उनकी हाल ही में किताब पढ़ रहा था चेतना के सात द्वार जी आपकी योगिक क्रियाओं से कैसे यह सिमिलर है? देखिए सात प्रकार की समाधियों का वर्णन आपको योग वशिष्ठ में भी पढ़ने को मिल
(26:14) जाएगा। तो सात तो और योग दर्शन में भी आपको पढ़ने को मिलेगा। तो ये तो जो सप्तधा भूमि चेतना के सात स्तरीय योग में बताए गए हैं शुरू से। तो कोई नई बात तो नहीं बोली उन्होंने क्योंकि वो बहुत ज्यादा पढ़े लिखे थे। बिल्कुल ही कोई बेसिक बच्चा अगर आज यह पडकास्ट सुन रहा है गुरुजी जी बिल्कुल बेसिक जिसको पता ही नहीं है क्रिया योग क्या है वो छोटे-छोटे एडिकशंस में फसा हुआ है कोई सिगरेट में फंसा हुआ है कोई ड्रग्स में फंसा हुआ है कैसे वो अप्लाई करेगा अपनी लाइफ में और देखिए मेरा एक ही कहना है कि जो भी चीज आपको अच्छी लग रही है उसको फिर पूरी तरह
(26:52) ही करो अधूरे मन से कोई भी चीज की जाती है वो फिर परेशानी ही उत्पन्न करती है नशा ही करना है तो फिर पूरी पूरी तरह करो। गड़बड़ करनी है तो फिर आरपार गड़बड़ करो। मतलब उसकी पराकाष्ठा को ही छुओ। फिर आदमी में महत्वाकांक्षा भी होनी चाहिए। और सेल्फ डेवलपमेंट की बात है, पढ़ाई लिखाई की बात है तो बिल्कुल आर-पार करो। नो कंप्रोमाइज। क्या बात है। आपके पास मैं देखता हूं हमेशा भीड़ लगी रहती है। नहीं आज तो कम है। मैं आज तो कम है। आज तो कम है। ज्यादा मिलते भी नहीं है वैसे। [हंसी] क्या एक आम चेतना के प्रश्न क्या है आप? कहां फंसे हुए हैं लोग?
(27:36) देखिए फंसे हुए नहीं है। जिसे हम प्रारब्ध कहते हैं, डेस्टिनी कहते हैं। हमारे पहले के किए हुए कर्मों का एक रिजल्ट है। उससे आप दाएं बाएं होंगे नहीं। चाह के भी नहीं हो पाएंगे। तो सबका रास्ता फिक्स है जीवन का। इसमें जो थोड़े चिंतक हैं वह फिर ऑब्जर्व करने लगते हैं कि यह कर्म किया गया है तो इसका यह रिजल्ट सामने आ रहा है तो हमें सावधानी के साथ कर्म करने चाहिए और फिर जब तक जरा मरण मोक्ष की बात नहीं आएगी जब तक कर्म एक्चुअल है क्या वो भी समझ में नहीं आएगा मैं एक आज ऐसा कांसेप्ट देता हूं जो शायद ही आपको कभी किसी ने बोला हो
(28:15) हम सब कह रहे हैं जहां कर्म बंधन में फंसे हुए हैं सुनते सुनते हम लोग काफी उम्र हो इसका मतलब है कि जो पृथ्वी है यह एक जेल की तरह से है। कारागार है। हमने कहीं कर्म करा है कोई। परिणाम स्वरूप हम कारागार में डले हुए हैं। ठीक है? इसीलिए हर धर्म में यह बात होती है कि जजमेंट डे होगा। यमराज न्याय करेंगे। वो ऊपर से आएंगे। खुदावंद करीम वो सब मुर्दों को उठा के उनका जजमेंट करेंगे। मुक्ति की बातें, मोक्ष की बातें, लिबरेशन की बातें इसीलिए तो हैं कि हम लोग जेल में हैं। ठीक है? दूसरा पक्ष क्या बात है? आप बाहर गलत काम करते हैं तो आप जेल में आ
(28:59) जाते हैं। जेल में यदि आपका अच्छा व्यवहार है तो आपकी सजा कम हो जाएगी और पैरोल पे बाहर आ जाएंगे। सत्य बोलो, चोरी मत करो, डकैती मत डालो, बलात्कार मत करो। सदाचार से रहो। यह जेल से जल्दी बाहर जाने पर पैरों पर छूटने के आपके अभ्यास है। चिंतन करिए। बहुत इसमें गहरे आपको समय गुरुजी जो आपने बात कही ना यही बात एग्जैक्ट एक से डेढ़ महीने पहले मेरे रात को ध्यान में अपने आप आई जा रही थी कि जितने अच्छे व्यवहार करेगा ना उतनी सजा कम होती चली जाएगी। बिल्कुल सही है। एग्जैक्ट यही बात सही इंट्यूशन हुआ है। लगता है हमारी गीता पढ़ रहे हैं आप आजकल। मैंने आपकी गीता
(29:41) पढ़ी है। मैं आपकी अवेकनर और पढ़ना चाहता हूं। जरूर पढ़िए। अब तो हिंदी में आ रही है वो। हां जी। मैंने आपकी गीता पढ़ी है और एक अलग दृष्टिकोण है। एक अलग चीजें हैं। मेरी लाइफ में थोड़ा सा भी अगर बदलाव आया है तो गुरुजी वो गीता ही है। वो तो जिसने गीता पढ़ ली उसका थोड़ी भी अगर उसकी छाया पड़ गई उस पर तो उसका जीवन तो बदल ही जाएगा। चुनाव कौन करता है? परमात्मा ही करता है क्योंकि हमारी तो औकात नहीं है क्योंकि अपने तो कर्म ऐसे थे ही नहीं कि इस जरा सी भी लेकिन देखिए कई लोग ऐसे होते हैं जो शरीफ लोग होते हैं वो जेल में जाते हैं तो उनका एक
(30:20) विवेक जागृत हो जाता है उन्हें अपने कर्म और उसका परिणाम समझ में आ जाता है तो फिर वह अच्छे कर्म करने लगते हैं और फिर वो ज्ञान के पीछे जाते हैं क्योंकि जितना ज्ञान आपको होगा उतने आप कर्म अच्छे कर पाएंगे ज्ञान बहुत जरूरी है डेली डेली जिंदगी में डेली लाइफ में जी मेरी लाइफ में बदलाव गीता से तो आया ही त्राटक क्रियाओं से बहुत बदलाव आया। ठीक है। परंतु उसका एक ड्रॉबैक भी है कि जैसे मैंने आज त्राटक करा तो मैं पांच छ घंटे करा और फिर दिन भर दिन फिर परत दोबारा मन की मन कब्जे में ले लेता है अपने। देखिए मन तो कब्जे में ही लेगा। वह तो
(31:01) भगवान का स्वरूप ही है। हमारा प्रयास यह होना चाहिए कि उसके साथ मैत्रीब संबंध स्थापित हो जाए। और यह भी लोग कहते हैं मन बड़ा चंचल है, मन बड़ा पापी है। मैं कहता हूं मन का तो स्वभाव ही शांत और स्थिर है। जो चीज मन को अच्छी लगती है, मन तत्काल वहां स्थिर हो जाता है। दूसरों के कहने से अगर आप यह सोच के काम कर रहे हैं कि यह मैं करूंगा तो मुझे फायदा होगा तो वहां मन नहीं लगेगा कभी। आपको अच्छा लगना चाहिए तो मन वहां तुरंत स्थिर हो जाएगा। क्या बात है। पहली वह चीज की खोज चाहिए कि मन को अच्छा लग क्या रहा है। क्या बात है? फिर टेंपरेरी नहीं। फिर खोज बढ़ेगी कि
(31:42) परमानेंटली क्या अच्छा लग रहा है। तो मन स्थिर होता चला जाएगा। मन स्थिर होता चला जाएगा। अभी आपकी जो भी बातें है ना मेरे अंदर ऐसे लग रही है ना तीर की तरह। थैंक यू। [हंसी] अभी मैं प्रधानमंत्री जी का इंटरव्यू देख रहा था तीन-चार दिन पहले ही। प्रधानमंत्री जी से एक पत्रकार पूछता है कि आप इतने अनुशासित कैसे रहते हैं? इतने होश में कैसे रहते हैं? तो प्रधानमंत्री जी कहते हैं मेरा शौक है। ये मैं एग्री करूंगा उनसे। शौक जो आपने कहा कि अच्छा लगने लग जाएगा। हां वो शौक डेवलप होना चाहिए। शौक डेवलप होना चाहिए। जिसमें शौक नहीं है वो फिर शॉक्ड लाइफ ही
(32:21) लीड करता हुआ रह जाता है। शॉकिंग हो जाती है हर चीज में। [हंसी] शौक तो होना चाहिए। शौक तो होना चाहिए। अच्छा मैंने यह भी देखा है कि अपनी भी एक उम्र तो हो ही गई है। जिन लोगों के कोई शौक होते हैं वही कुछ कर पाते हैं। नहीं उनकी ओल्ड एज बड़ी रिलैक्स हो जाती है। हम जिनके शौक नहीं है वो टाइम पास करना उनके लिए एक बड़ी भारी समस्या हो जाती है कि अब करें क्या? ये भगवान की कृपा है कि किसी में शौक हो, किसी चीज का भी हो, संगीत का, पढ़ने का। पढ़ने का शौक तो बहुत अच्छी बात है। पढ़ना चाहिए। क्या बात है। मैं आपके लाइफ के बारे में थोड़ा सा और जानना चाहता हूं।
(33:03) पूछिए कि जैसे ही आप क्रिया योग में आए जी। पहला अनुभव सबसे पहला अनुभव क्या था कि हां अब यही चुना ये सही चुन लिया मैंने। देखिए मैंने उसके पहले मुझे पढ़ने का बड़ा शौक रहा। तो योग के जितने ग्रंथ उपलब्ध थे प्राचीन आधुनिक सब मैंने पढ़ लिए थे। उससे आपकी एक अंडरस्टैंडिंग बनती है विषय को ले कि सामने वाला जो बता रहा है वह शास्त्रोक्त है कि नहीं है। गीता के 16व अध्याय में भी अगर आप पढ़ेंगे तो भगवान ने यही बोला है के संशय के समय में शास्त्र वाक्य को ही प्रमाण मान के चलना चाहिए। तो यह तो पढ़ा ही हुआ था। तो शास्त्र से अलग हट के अगर कोई आपको ज्ञान
(33:46) दे रहा है तो हमेशा एक क्वेश्चन मार्क रखिए दिमाग में। तो वह पढ़ा हुआ था तो कई लोगों से जैसे उनको पता ही नहीं था। मैं कोई प्रश्न पूछता था तो वह नाराज हो जाते थे या जो थोड़े से स्मार्ट होते अरे आपको अभी और ध्यान करना चाहिए अभी भ्रम में डाल देते थे। गुरु जी हमारे टू दी पॉइंट जवाब देते थे और जो उन्होंने सिखाया वो पूरी तरह शास्त्र भी था। तो क्रिया योग एक प्राचीन योग पद्धति ही है। कोई अलग से कोई वो नहीं है। परमहंस योगानंद ने क्रिया योग नाम देकर अमेरिकनंस को इंट्रोड्यूस किया। मूल तो योग विद्या ही है प्राचीन। कोई फर्क
(34:25) नहीं है इसमें। ना तो इसमें क्रियात्मक कोई फर्क है ना कुछ है। जैसा करेंगे वैसा रिजल्ट मिलेगा। ऐसी विचारधारा रखने के लिए कितना ठहराव चाहिए? अह कृपा तो चाहिए। बड़ों का सत्संग चाहिए और सत्संग एक बहुत बड़ी चीज है। उससे आपके एक समझ तो विकसित होती है। अंडरस्टैंडिंग डेवलप होती है। अभी आपको गुस्सा आता है किसी बात पे? अरे सब समय गुस्सा ही आता रहता है। [हंसी] क्योंकि मैं जानना चाहता हूं आप कैसे इतने कूल? नहीं देखिए। जो लोहा जितना आग और हथौड़े की चोट सह लेता है उतना ही मजबूत हो जाता है। टपरिंग
(35:11) हो जाती है। टपरिंग क्या बात यह तो एक सहनशक्ति ऐसे ही बढ़ती है। वो तो गुस्सा तो कुछ लोगों ने देखा हुआ है तो उसकी बात ना ही करी जाए तो ठीक है। [हंसी] वो भी एक हद पार ही आया है। हां सर परिस्थिति के अनुसार शुरू-शुर में जब चेतना उठती है जी तो बंधन लगता है बंधन नहीं लगता है। आसपास लोगों की बातें बड़ी समझ में आने लगता है कि किसका क्या इस तरह है। हम तो शुरू में तो आपके नए-नए होते हैं तो ज्यादा जोश होता है। हर एक से उम्मीद करते हैं कि ये समझ रहा होगा। क्यों? क्योंकि व्यक्ति जैसा होता है दूसरे को वैसे ही
(35:57) समझता है। फिर आप में मैच्योरिटी आती है तो आपकी समझ में आता है कि ऐसा है नहीं। फिर आप सावधान होने लगते हैं। फिर चुप रहना सीखने लगते हैं। फिर समान मानसिकता के लोग आने लगते हैं आपके पास। ये ये गुरु जी मेरा अभी जीवन का उद्देश्य यही है बस चेतना चेतना चेतना। क्योंकि मैंने यही देखा जो आपने भी लास्ट में बात कही। समान मानसिकता के लोग आपके पास आने लग जाते हैं। आने लगते हैं। खोज ही लोग आने लगते हैं। ऐसा कैसे संभव हो पाता है? अरे अंग्रेजी में भी कहते हैं लाइक अट्रैक्ट्स लाइक। बर्ड ऑफ फीदर फ्लॉक टुगेदर तो कहावत है गुंडा गुंडों में
(36:34) बैठेगा शरीफ आदमी शरीफ [हंसी] ये तो एक दिखाई देता है पूरे जीवन में गुंडा गुंडों में ही बैठेगा और क्या उसका मन ही नहीं लगेगा शराफत में हम भक्ति आपके लिए क्या है परमात्मा क्या है आपके लिए आकार रूप में है निराकार रूप में है देखिए समुद्र को देखिए समुद्र की लहरें उठती ठीक है? लेकिन लहरों को समुद्र कोई नहीं कहता और समुद्र को भी लहर कोई नहीं कहता। जबकि वो समुद्र की का ही एक अभिव्यक्ति तो है। लहर अलग थोड़ी है उससे। तो जैसे ही हम भाषा बोलते हैं कि लहर और सागर तो वो एक द्वैत की स्थिति बन जाती है कि दोनों अलग-अलग चीज है। जबकि है तो वो एक ही इतनी
(37:21) सी बात है बस। इसी में जो है बहस चल रही है शताब्दी में। और एक और सुन लीजिए जिसे हमने नहीं देखा सागर को आप एक साथ पूरा देख नहीं सकते तो वह हमारे लिए निराकार रहेगा जिससे हम परिचित हो गए जिसे हमने देख लिया वो हमारे लिए साकार हो गया यही सगुण और निर्गुण है जिसके गुणों से आप परिचित नहीं है वो निर्गुण ही रहेगा जब गुणों से परिचित हो जाएंगे वो सगुण हो जाएगा इतनी सी बात [हंसी] है बस जिस पर शताब्दियों से बहस चलती चली आ रही है। चलने दीजिए। अब तो कार बहुत लोगों के पास है। अब उस अब वो सब साकार हो गए। [हंसी]
(38:11) मैंने तो अभी क्रिया योग के बारे में थोड़ा सा और ज्यादा देखा। तो बड़ी मेरी बड़ी दिलचस्पी हुई। अब पता नहीं आप मुझे इस लायक समझेंगे नहीं समझेंगे। क्या मैं आपका शिष्य बन सकता हूं क्रिया योग में? सिखा देंगे। हम तो पांचवें गुरु हैं परंपरा में। और आपने इतने हंबल ही पूछा है तो बिल्कुल प्रोसेस क्या है शुरू से अगर हम बात करें देखिए आपने मेरी इस वाली बात का जवाब दिया नहीं ऑडियंस अभी बैठी हुई थी क्रिया योग बेसिक से कोई स्टार्ट करना चाहता है देखिए सबसे पहले तो उसको पढ़ना चाहिए जितने योग के पुराने ग्रंथ हैं मूल वो सब पढ़ लेने चाहिए तो सब्जेक्ट की एक उसमें
(38:49) एक अंडरस्टैंडिंग डेवलप होगी फिर वो फिजिकली फिट होना चाहिए क्योंकि क्योंकि ये किसी फिजिकल डिसेबिलिटी का उसका वो नहीं है। ये चेतना जागृत करने की चीज है। तो जो सपोर्ट सिस्टम है वो रीज़नेबली फिट होना चाहिए। फिर सिंसियरली अगर वो गुरु की खोज करेगा तो गुरु कहीं ना कहीं मिलेंगे। फिर उसकी यात्रा प्रारंभ हो जाएगी। ब्रीथिंग कितनी ज्यादा मैटर करती है? ब्रीदीिंग सबसे ज्यादा मैटर करती है। हम लोग जीवित ही उसी के कारण है। एक सिरा ब्रीथिंग का स्थूल शरीर से जुड़ा है। दूसरा आत्मा से जुड़ा है। तो सांस पकड़ के चलेंगे तो आत्मा तक पहुंच जाएंगे। वहां से
(39:27) प्राण पकड़ के चलेंगे तो आत्मा परमात्मा से मिलवाएगी। यहां सबसे बड़ी बात क्रिया योग की यह है। इसलिए हम लोग तपस्या करते हैं कि जब आत्मा परमात्मा से मिलवाए तो उन्हें मुंह दिखाने लायक तो हो। बस इतनी सी बात है। बिना किसी शर्म के, बिना किसी गिल्ट के उनको मुंह दिखा पाए अपना बस इसलिए सारे प्रोग्राम। अभी मैं किसी से बात कर रहा था। एक हिमालयन योगी थे। उन्होंने भी बड़ा सुंदर ब्रॉडकास्ट दिया था मुझे। बातें करी थी। उन्होंने कहा जब वहां जाया जाएगा ना तो वहां कहा जाएगा चप्पल बाहर उतार के आओ। यानी कि मन को बाहर छोड़ के आओ।
(40:12) मैं एक बहुत साधारण आदमी हूं। अभी हमने कहा भगवान 10वें अध्याय में कह रहे हैं इंद्रियों में मन मैं हूं। यानी इसका मतलब है कि आप मन को भगवान को बाहर छोड़ के कहां जा रहे हैं? फिर इसका समाधान होना जरूरी है। ये ओशो कहा करते थे इस बात को कि मन को चप्पलों के साथ बाहर छोड़ के। यह संभव है। अरे जब मन भगवान का ही स्वरूप है हम तो उसे छोड़ोगे कहां? और कौन छोड़ेगा? मन नहीं रहेगा तो आपके तो फिर पागलखाने में बिजली के झटके लगते मिलेंगे। दो तरह के मन है गुरु जी। एक है जो तीर चलाया जा रहा है। मछली की आंख भेदे जा रहा है और एक है जो पांच गांव भी देने को
(40:56) तैयार नहीं है। क्या दोनों ही भगवान के रूप है? दोनों भगवान के रूप है क्योंकि वो दता नाम छलस्म ये भी कहते हैं जुआ खेलने में छल मैं हूं। तो जो भी शकुनी ने जो भी सब किया वह उनकी इच्छा से ही हुआ। गीता बड़ी भयंकर चीज है। समझने की बात [हंसी] है और वो एक सिचुएशन बननी थी तो बनी। अर्जुन को दंड मिला इस चीज का। देखिए मैं फिर मैं कहूंगा मैं ब्रिज में रह रहा हूं और ग्रास रूट लेवल के आदमी हैं। यहां आपको गांव वाले बुजुर्गों से भी बातचीत करनी चाहिए। अंत में पांडवों को अंतिम संस्कार उपलब्ध
(41:42) नहीं हुआ था। भागते हुए भूखे प्यासे एक-एक करके मरते चले गए। वीरगति को प्राप्त नहीं हुए। इसमें आपको जो समझना है समझ सकते हैं। और दुर्योधन को सीधा स्वर्ग भेजा गया। अरे वह शस्त्र से मरा, युद्ध में मरा, ड्वेल में मरा, वीरगति को प्राप्त हुआ। इस भेद पर भी चिंतन करना चाहिए। नहीं तो नारा तो हम लोग सब लगाते हैं। धर्म की जय हो, अधर्म का नाश हो। महाभारत बहुत बड़ी पहेली है। बहुत बड़ी पहेली है। चिंतन करना चाहिए। अर्जुन क्या है? हायर कॉन्शियसनेस। देखिए यह फिलॉसफी है।
(42:29) 10वें अध्याय में उन्होंने कहा है कि अर्जुन मैं हूं। अर्जुन भी मैं हूं। पांडवों में मैं हूं। भ्रष्ट वंशियों में कृष्ण मैं हूं। उन्होंने अपनी विभूतियों का वर्णन किया। तो जितने भी लोग थे जो अत्यंत मारक क्षमताओं से संपन्न थे। वह सब काल के ही स्वरूप है। यहां एक बात हमेशा हमें ध्यान रखनी चाहिए जो शायद ही आपको कोई पॉइंट करेगा। अर्जुन ने जब पूछा आप कौन हैं? तो उन्होंने एक ही उत्तर दिया कालोसमी मैं काल हूं। मैं समय हूं। समय को लेके केवल शैलेंद्र शर्मा की व्याख्या और किसी ने इस पॉइंट को टच नहीं करा। आप बार-बार कहते हैं कि कृष्ण ही समय है।
(43:09) इसको थोड़ा सा बोल ही रहे हैं। उन्होंने ये तो नहीं कहा मैं क्रस्ट हूं। उन्होंने कहा मैं काल हूं। काल माने समय। तो जब वो कह रहे हैं मेरी शरण में आर्त समय की शरण में चले जाओ। यह भी पेच है। यह लास्ट वाला जो श्लोक बोला गया है सर्वधम परितज मामेकम शरणम ब्रज। ठीक है। वो समय ही कह रहा है। उनके मुंह से तो समय ही बोल रहा था उस समय। महाभारत युद्ध समाप्त होने के बाद जब अर्जुन भूल गए इस उपदेश को तो राजूया कि जब युधिष्ठिर कर रहे तो उन्होंने पूछा कि वो कृपया दोबारा मुझे बताएं। में तो भगवान ने डांटा है उसको कि तुम मूर्ख हो, शट हो, दुर्बुद्धि
(43:53) हो। अब मैं वो दोबारा नहीं बोल सकता। मैं उस समय योग युक्त स्थिति में था। क्या बात है? तो समय समय की वाणी पहली बार रिकॉर्ड हुई है। इससे पहले समय ने कुछ बोला नहीं है पूरे इतिहास में। इसीलिए गीता इतना जबरदस्त ग्रंथ माना गया है हमारे यहां। बहुत सारे लोग ये भी बात कहते हैं गीता को कंपलसरी कर देना चाहिए स्कूलों में। देखिए जो स्कूल में चीज कंपलसरी हो जाती है फिर उसका जीवन में ज्यादा उपयोग नहीं रहता। [हंसी] तो यह जो प्रेरणा देनी चाहिए गीता पढ़ने की ना कि जबरदस्ती उसके एग्जाम लेने के लिए टेस्ट लेने के लिए पढ़ाई जाए। मैं भी स्कूलिंग करी है। आपने भी करी है।
(44:35) स्कूल की पढ़ाई हुई कितनी चीजें काम आ रही हैं। बहुत नहीं आती काम। क्रिया योग के अंदर ब्रीथिंग जो है वह स्लो हो जाती है। देखिए ब्रीथिंग का ही खेल है सारा। श्वास से आप परिचित होने लगेंगे। श्वास से आपकी मैत्री हो जाएगी तो आपका हार्ट दूसरे ढंग से काम करने लगेगा। और हार्ट क्या पूरा ब्रेन को फीड कर रहा है। शुद्ध ऑक्सीजन और ग्लूकोज। तो ब्रेन को पर्याप्त फीड मिलेगा, भोजन मिलेगा तो ब्रेन एक्टिव होने लगेगा। सुषुमना भी ब्रेन का ही एक एक्सटेंशन है। तो सुषुमना भी प्राण जाने लगेंगे तो वो भी
(45:20) एक्टिव होने लगेगी। फिर जो है सेरीबल फ्लूइड में चक्रों का भी डेवलपमेंट होना शुरू हो जाएगा। स्वास को कैसे मतलब आप बहुत सारी क्रियाएं हैं। क्रिया योग में बताई जाती हैं और प्रतिज्ञाबद्ध हो के ही दी जाती है क्योंकि यह गुप्त चीज है। एक फिर भी मतलब जैसे स्लो सांस लेना, नाभि तक लेना और स्लो ही छोड़ना जैसे नाक की कह नहीं यह तो एक अलग चीज है। वो सांस लेने की स्पेशल प्रक्रियाएं हैं। तो उसका परिणाम बिल्कुल अलग आता है। जो ये बेसिक चीजें हैं इनसे बिल्कुल अलग हैं। नहीं अगर आप चाहे तो एक रिजल्ट तो मैं अभी दिखा सकता हूं आपको। प्लीज मैं
(45:58) चाहती हूं कि आप दिखाएं। दिखाएं। जी प्लीज। देखिए क्रिया योग के पहले प्राणायाम का परिणाम आज मैं आपको दिखाता हूं। आप नाड़ी नाड़ी देखना जानते हैं? हां जी। हां जी। नहीं। मैं मैं कहां पे आऊं? यहां पे। नहीं नहीं इधर इधर आइए। हां जी। अब आप देख ही लो। यह कोई जादूगिरी नहीं है, कुछ नहीं है। यह क्रिया योग के पहली क्रिया के प्राणायाम का परिणाम है। नाड़ी पकड़िए। ये मैंने सुना था कहीं नाड़ी यहां है। यहां है। यहां मिल गई? नहीं मिली। नहीं आप थोड़ा ऐसे करिए। यहां पे
(46:43) वापस से हल्का सा दवाई ये मिल गई धड़कता हुआ फील हुआ एक मिनट अब मैं केवल क्रिया योग का एक पहली क्रिया का श्वास सहित प्राणायाम करूंगा रुक जाए तो कृपया अपने कैमरामैन को बताइए कि रुक गई ठीक है रेडी हां जी हां जी चल लाइए हां जी अब्स देखिए रुक गई। रुक चुकी है। आ गई। हां, अब आ गई। अब आप बैठिए तसल्ली
(47:34) से। यह क्रिया योग के पहले प्राणायाम का जो सिखाया जाता है, उसका एक परिणाम है। ये भी मैंने अभी एक अमिताभ बच्चन का एक इंटरव्यू पढ़ा था तो उसकी पल्स हमेशा के लिए चली गई है यहां वाली। नहीं वो तो एक मेडिकल कंडीशन है। हां मेडिकल कंडीशन के कारण। लेकिन आपने ये कंडीशन है। [हंसी] ये एक योगिक कंडीशन है। क्या बात है। और कुछ एक शिष्य भी इसके लगभग नजदीक हैं। नहीं तो मतलब ही क्या है? खाली गुरु ही पूछते रहे। चेले साले वहीं पड़े रहे। वो नहीं। क्या बात है। शिष्य की अगर प्रोग्रेस नहीं हो रही है तो
(48:18) मतलब गुरु सही शिक्षा नहीं दे रहे। हां, मेहनत और लगन तो शिष्य से उम्मीद की जाती है। ये क्या पहली बार देखा है आपने किसी को? ये तो मैंने पहली बार देखा है गुरु जी। थोड़ा सा फिर भी इसके पीछे बात कर सकते हैं क्योंकि यह तो मैं और बात बताता हूं। मैं इसीलिए हाथ ऐसे किया। कई स्टेट मैजिशियन यहां गेंद लगा के ऐसे दबाते हैं तो बंद हो जाती है। ये भी ज्ञान होना चाहिए। ऐसे करके कोई नहीं देखता। चलो सही है। तो दोनों बातें हम आपको बताएंगे। यही तंत्र है। तंत्र [गला साफ़ करने की आवाज़] माने टेक्निकल एस्पेक्ट कोई भी चीज का। सब तंत्र है।
(49:05) सब तंत्री है। जैसे किसी हाथ में दर्द हुआ है तो हम इस टेक्निक से वो भी गायब कर सकते होंगे। नहीं नहीं वो तो आप कोई पेन किलर लीजिए। डॉक्टर को दे। [हंसी] यह तो तलवार से मक्खी मारने जैसा हो जाएगा। अगर ऐसा होगा तो। इसके पीछे का फिर भी थोड़ा सा लॉजिक पर बात कर सकते हैं क्योंकि यह तो गुरुजी बहुत अलग चीज थी। ये अलग चीज है। बहुत अलग चीज। देखिए बहुत सिंपल बात है। स्थूल शरीर पर नियंत्रण हुआ नहीं। हम सीधा मन पर नियंत्रण करने की बातें करने लगे। मैच नहीं होती बात। जब स्थूल शरीर भी आपको नहीं पता पड़ रहा है कि मेरे अंदर क्या चल रहा है और क्या
(49:49) मैं कर सकता हूं तो मन जैसी सूक्ष्म वस्तु जो कि भगवत स्वरूप ही है उसके नियंत्रण की तो बात करना बेईमानी होगी। हम लोग जमीनी लोग हैं तो बहुत ज्यादा ज्ञान की बातें भी नहीं करते। यह रुकते हुए दिसंबर में 44 साल हो जाएंगे। इससे बड़ा ज्ञान कुछ हो नहीं सकता है। आप यह एक जो अंदर चल रहा है यह उसका एक रिफ्लेक्शन भर है। अब जैसे ये नाड़ी रुकी या जो भी हुआ उस समय मेरे मन की स्थिति क्या होगी? हां ये आपने सही वो है। रशियन कुछ साइंटिस्ट शिष्य हैं हमारे। उनको लगा शुरू में कि यह कोई ट्रिक है।
(50:38) तो वो पोर्टेबल ईजी मशीन ले आए। ठीक है। ईजी करेंगे में कर लो। हमें भी पता पड़ेगा हमारे अंदर क्या चल रहा है। ईसीजी ईजी ईईजी हां इलेक्ट्रो एनसेफोग्राम की मशीन आती है। तो जो मेंटल वेव्स चल रही थी वो अति असाधारण थी। थीटा वेव बिल्कुल कांस्टेंट थी जो केवल 5 साल की उम्र तक ही मिलती है बच्चों की। डेल्टा वेव जो डीप स्लीप में आती है वो कांस्टेंट थी। हाई। उस समय उन्होंने कहा कि अब आप नाड़ी रोक सकते हैं। मैं रोक देंगे। रोका तो सब चुप हो गए। एकदम मेरी इस तरफ देखने लगे। बोले आप ठीक तो मैं क्यों क्या हो गया? एक बार और कर सकते हैं। कर देंगे। दोबारा किया बाद
(51:21) में उन्होंने बताया यह मुझे पता नहीं था कि ऐसा हो रहा होगा। जिस समय नाड़ी रोकी गई। मेंटल वे फ्लैट हो गई थी जो मरने के बाद होती हैं और वह भी फ्लैट तब होती है हार्ट फेल होने के तीन-चार मिनट बाद हमारी इंस्टेंट फ्लैट हो रही थी ना रोकने के साथ ही वो रिपोर्ट कहीं अवेलेबल हो गई ये बता देंगे आपको अब इससे जो भी आप अनुमान लगाना चाहे लगा लें मैं तो सामने ही बैठा हूं नॉर्मल सा लगता होगा गुरुजी मेघा भैया के पास में वो वीडियो है वीडियो तो वो देना इनको वर्मा जी को। क्या बात है गुरु जी। क्या विचार चल रहे थे फिर भी मैं या विचार शून्य होना ये
(52:08) कैसे संभव है? नहीं नहीं विचारों का बहुत गहराई तक चले जाना ही ज्ञान है। ज्ञान विचारों पर ही तो आधारित है। गोरखनाथ ने मत्सनाथ से पूछा है। मैंने उसकी व्याख्या भी करी है। गोरख बोध किताब एक हमारी कि बिना पैर के कौन चलता है? मत्सर गुरु उत्तर देते हैं विचार बिना पांव के ज्ञान के मार्ग पर चलता है। विचारशील नहीं है तो आपको ज्ञान कभी होगा नहीं। तो विचार शून्यता की बात भी करना उचित नहीं है। हां, यह जरूर है कि उनकी गहराई बढ़नी चाहिए। उथले विचारों में ज्ञान नहीं होता। जितने विचार आपके गहरे जाएंगे उतना आपका ज्ञान
(52:54) बढ़ेगा। अब मैंने मना कर दिया मशीनें लगवाने में कि एक दो बार लग गई। अरे [हंसी] आप हमें भी पता पड़ा क्योंकि मुझे पता नहीं था कि ये क्या इनके साइंटिफिक टर्म क्या है अंदर मेंटल वेव्स के या वो रुकती है कि नहीं रुकती है तो वो तो पता पड़ ही गया तो क्या करना बॉडी के लिए हार्मफुल है बाकी मशीनंस ये जो लगता है नहीं गिनी पैक बनने से क्या फायदा कि कोई भी चला रहा है टेस्ट करने के लिए वो नहीं एक आध बार तो ठीक है शशि है तो प्रत्यक्ष को बहुत दिन बाद दिखाई है नाड़ी रोक के आज आपने मौका ही नहीं। अब सबको पता ही है तो
(53:38) ज्यादा कोई बात नहीं करता। अभी तक मैं सोचता था कि मन के घोड़े पर सवार होना है कि विचारों का चुनाव करना। देखिए मैं गीता को ही कोट कर रहा हूं। अथ ध्यानम प्रारंभ में उसको गौर से पढ़िए। उसमें एक लाइन आती है ध्यानस्थ तदतेन मन पश्यंत योग ध्यान पर अवस्थित होकर मन वहां जाता है और योगी उसे देखते हैं। यही सत्य है। यही सत्य है। वायुयान, जलयान, अंतरिक्ष यान, ध्यान, बुद्धि रूपी यान जिस पर मन सवार होकर वहां जाता है और योगी को उनके
(54:26) दर्शन होते हैं। गीता बहुत बड़ी किताब है। लगता है आज आपसे पूरी गीता की चर्चा मैं करके ही रहूंगा रात तक करते रहिए तो मैं तो मुझे तो व्याख्या लिखे 34 साल हो गए तो अच्छा ही लग रहा है सही विचारों का चुनाव करना देखिए आपकी लगन लग जाएगी एकाग्रता का भी मैंने परिभाषा दी है अपनी इसमें अपने विचारों की भीड़ में से एक विचार को चुनकर आगे बढ़ाना एकम अग्रे यही एकाग्रता क्या बात है गुरु जी सर उसके पीछे चलना वह आपकी जिंदगी को एक पपज भी देगा आप एकाग्रता को एकम अग्रे एक को आगे करके चलिए विचारों की भीड़ में ऐसे
(55:12) एक को चुनिए उसे आगे करके चलिए गुरु जी अब लाइफ में प्रायोरिटी यह हो जाए कि बस कैसे पहुंचा जाए उस तक जो शांति देता है जो चुप करा देता है मौन करा देता है जैसे ही आपका चेतन और अचेतन के बीच में पहुंचेंगे टॉयलाइट स्टेट में इससे पार कैसे जाएंगे? यह तो विकास करेंगे तो जाएंगे। अभी तो अपन 2% से कम ही प्रयोग कर रहे हैं। और मुख्य बात है कि 100% जागृत हो जाए ब्रेन। ये पॉसिबल है? है। क्यों नहीं? आपने एक लसी मूवी देखी है? देखी हुई है। वो लगता है आपको कि ऐसा कुछ होता होगा? देखिए वह केमिकल पर चले गए क्योंकि
(55:57) पाश्चात्य लोग हैं। योगी तो बात ही यही कर रहे हैं कि पहले खुद को प्रिपेयर करो तो जगेगा। जगने से क्या होगा? ये भी बड़ा टेक्निकल काम है। बताइए। हमारे सारे विचार इलेक्ट्रोमैग्नेटिक करंट के चार्जे ही तो हैं। अभी 2% से कम यूज कर रहे हैं। तो हमारा जो बॉडी है नर्वस सिस्टम है वो लेस देन 2% को टोलरेट कर पाता है। एकदम अगर 100% जगेगा तो इतना सुपर चार्ज डेवलप होगा कि शरीर भस्म हो जाएगा। तो पहले शरीर की तैयारी चाहिए। क्रमिक जैसेजैसे मन जगता जाएगा शरीर की टपरिंग होती जाएगी आप उसको सहन करते चले जाएंगे। ज्ञान भी सहन नहीं होता। एकदम
(56:41) टाइम लगता है। जब पुराने लोग कह गए हैं धीरे धीरे रे मना धीरे सब कुछ होए। हल्के गाड़ी आंखों मेरे राम गाड़ी वाले बिल्कुल मा सी 100 घड़ा ऋतु आए फल होए। आपकी नजरों में जगह की क्या परिभाषाएं हैं? जैसे कि केदारनाथ, बद्रीनाथ अलग एनर्जी [नाक से की जाने वाली आवाज़] से या फिर जहां आप बैठे हो वहीं पर ही परमात्मा प्रकट हो जाता है। देखिए जहां आप बैठे हैं ये विशेष स्थान है। जितने भी जीव इस पृथ्वी पर आए हैं सबने सांस ली है। सबकी सांसे आज तक वायुमंडल में घूम रही हैं। एक स्मृति के साथ क्योंकि कोई एयर फिल्टर भी नहीं लगा हुआ
(57:27) वायुमंडल में। सबकी सांसे तो हैं। यहां भगवान कृष्ण ने इतनी सांसे ली है। राधा जी ने यहां इतनी सांसे ली है। गिरिराज जी को उठाया तो जो सांसे होंगी वो यहां है। प्लस जो मेरे लिए बहुत महत्वपूर्ण बात है। यहां उनकी 1600 रानियों की अंतिम सांस भी हुई है और यही उनका अंतिम संस्कार भी हुआ है। क्या बात है? तो वो सारी सांसे इसी स्थान में ओतप्रोत हैं। तो आप अगर सही ढंग से यहां रहेंगे, शुद्ध जीवन, पवित्र जीवन देंगे तो उन सांसों की स्मृति आपके अंदर प्रवेश करेगी और वो जागृत नहीं होगी। इसी यही स्थान का महत्व है कि वहां कौन रह के गया है और किसने वहां तप किया है। इससे
(58:09) ज्यादा दिव्य जगह मुझे तो पृथ्वी पर कोई दिखती ही नहीं है। इसीलिए हमने इतनी जगह की सफाई करके इतने पेड़ लगाए। मैंने मैंने भी सारा देखा। भगवान की महारानियों का अंतिम संस्कार यहीं हुआ है। मंदिर में मूर्ति रख के तो सभी आरती कर ही लेते हैं। पर यह मुझे लगता है उन्होंने व्यक्तिगत सेवा ली है। जो ये एक बहुत बड़ा सौभाग्य है अपने लिए। मैंने देखा अभी आपने सारा थोड़ा सा माहल को लाइट कर देते हैं क्योंकि हमने बहुत ज्यादा बिगिनर्स के लिए बहुत ऐसी बातें कर दी जो उससे ऊपर जाएंगी। अभी मैंने सुना दीदी ने बताया मेरे को कि कुछ यहां पर एक विवाद चलता आया जो खजाने
(58:46) का विवाद है। देखिए यह जगह जब महाराज भरतपुर ने हमको दी खुद ही पड़ी थी ये खजाना खोदने की टीमें भारतवर्ष के कोनेकोने में मिलेंगी आपको। सोना बनाने वाले और खजाना ढूंढने वाले। ये सब खुदा पड़ा था। टूटा पड़ा था। ये तो वैसे 200 साल से खाली पड़ी थी जगह। अबंडेंट सी थी। शमशान भी था। हम अच्छा जिन्होंने भी यहां खुदाई-बुदाई करी सब मर गए। कोई जिंदा नहीं बचा उसके पास। तो खजाना तो मुझे नहीं लगता कि गिरिराज जी के एक शिला का भी कोई कीमत चुकाने की औकात रखता है संसार में। क्या बात है? मेरे को तो नहीं लगता। क्या बात है। और फिर संसार में पैसे का समुद्र बहरा। आप
(59:29) में मेहनत है, बुद्धि है तो एक कनेक्शन घर में ले लेंगे। खजाने खोदने की क्या जरूरत? पर एडवेंचर उसकी थ्रेल अलग है। एक उसकी [हंसी] वो भी एक क्रेविंग है। क्रेविंग है। क्रेविंग और हिंदुस्तान में है भी बहुत खजाने। हां सही कहा आपने। मन नहीं किया आपका यहां से कहीं बाहर जाने का। मैंने अभी बताया भगवान का श्मशान है। ये उनकी सांसे यहां है। साक्षात कृष्ण ने गिरिराज जी की पूजा करी है। इंद्र का विरोध करके। श्मशान ऊपर से है। बाहर मेरे लिए क्या रखा है? और मैं एक भयानक बात बताऊं जिसको सुनकर लोग डर जाएंगे। पिछले 33 साल से मैं श्मशान में
(1:00:13) पका हुआ ही भोजन कर रहा हूं। फ्लेवर उसी में आता है। बाहर नहीं खाते। तो गुरु ने जो नियम बना दिया उनकी कृपा से चल रहा है। फिर गिरिराज जी की कृपा है। भगवान की कृपा है। इतना पर्याप्त है। बाहर जाके करेंगे क्या? आप वो कहानी या स्टोरी शेयर करना चाहेंगे जो राजा भरतपुर ने आपको जब ये दिया उसके पीछे का क्या रहस्य था? क्या देखिए ये उनके पूर्वजों का भी श्मशान है। अभी भी एक्टिव है। मेरी छोटी बहन का भी अंतिम संस्कार ही हैं। हां जी। तो आधा तो यह लगभग आर्कियोलॉजी में डिक्लेअ हो ही चुका था। उनका समय उतना ठीक नहीं था। तो बहुत फालतू
(1:00:58) के लोग यहां थे। सब गिद्ध रहते थे ऊपर। चारों तरफ नाक फनी थी। ये तो खंडहर ही था पूरा। तो हमारी छोटी बहन ने किसी के थ्रू गीता उनको हमारी गिफ्ट करवाई। महाराजा विश्वेंद्र सिंह इस समय हैं। तो वो बड़े प्रभावित थे। उन्होंने मुझे ढूंढा। ये जगह आप ले लो। मैंने कहा हमारी परंपरा में डोनेशन लेने की परंपरा नहीं आपकी जेब में कितने पैसे हैं? तो 454 कुछ पैसे थे। बोले लाइए यू हैव पेड मी रजिस्ट्री कर दी। क्या बात है? अंदर आ गए। पर मुझे पता नहीं था कि इतना भयानक प्रोग्राम होगा यहां। 4050 गिद्ध छत पर रह रहे हैं। पूरा ठसा जो आपको दिख रहा है सब
(1:01:42) नागपनियों से भरा हुआ है। और आप जानते हैं भारतवर्ष में जितनी भी आर्कलॉजी की जगह वो सब पब्लिक लैटिन हो जाती है। हम वो फिर एक युद्ध स्तरीय कार्यवाही शुरू हुई जिसमें प्रभु की कृपा थी कि मैं जीत गया। क्या क्या-क्या सामना सहना पड़ा आपको? एक तो 7 800 लोगों का सामना करना पड़ा जो गंदगी करने आते थे। हम और मुझे देखिए आपने शायद कोई आदमी नहीं देखा होगा जो गिद्धों के नीचे दो साल तक सोया हो। छत पे गिद्ध है नीचे हम सो रहे हैं। कोई लेबर अंदर आने को तैयार नहीं होता था क्योंकि इसकी जगह की रेपुटेशन बड़ी भयंकर थी। पैरानॉर्मल इंसिडेंट की वजह से
(1:02:22) बहुत सारा मतलब यहां जो भी सोता था वो या तो पागल हो के भागता था या उसकी लाश मिलती थी। पहले तीन महीने लोगों ने देखा कि यह अभी तक मौजूद है। तब लेबर ने आना शुरू करा। फिर सफाई अभियान चालू हुआ। फिर एक वो आप अवेकनर में पढ़ेंगे हिंदी में। जो भी आपकी आपके बर्थडे पे जो हां ल्च हो रही है। बुक ल्च हो रही है। जी हां, उसमें सारे डिटेल्स हैं सर। यहां की पूरी डिटेल्स हैं। बहुत सारे हैं। बहुत सारे। तो जब राजा भरतपुर ने आपको ये जमीन दी तो उसके पीछे अह आपने उनको कुछ योग्य क्रियाएं सिखाई। कुछ नहीं नथिंग आते हैं कभी-कभी मिलने आते हैं
(1:03:03) खानदानी आदमी है तो पर्याप्त रिस्पेक्ट भी वो देते ही है हाउ टू गिव रिस्पेक्ट खानदान ही सिखाता है ये बिल्कुल सही कह रहे हैं आप उसके बाद तो हम लोगों ने रिकॉर्डिंग ज्यादा देखना बंद कर दी अब देखिए इस तरफ से दौड़ते हुए इधर जाएंगे वो। ठीक है? इसमें भी है, इसमें भी है। सेमी ट्रांसपेरेंट है। देखिए पकड़ लीजिए। देखिए 5 6 इंच के हैं। इधर से इधर आया
(1:03:59) देखते रहियो सेमी ट्रांसपेरेंट है ये है शायद शायद ये उधर से उधर जाएगा अरे हां हां हां हां हां हां वो जा रहा हम देखते रहिए और आएगा और निकलेंगे दूसरे वीडियो में अभी पांच छह निकलेंगे ये जरा हम एक ये रहा ये यहां पे रुक गया ये चल जल्दी आओ अब बोलिए दूसरा वाला भी देखिए क्या हुआ फस गया ये बैग आपको पूरा बैक करना पड़ेगा बाबा कैसे अच्छा अच्छा यूज़ ही नहीं करते ना तो ज्यादा पता ही
(1:04:47) नहीं है मुझे इसमें और है सेम रूट है। इसमें एक बाइक आएगी तो वो लोग रुक जाएंगे। गए ये जा रहे हैं। ये जा रहे हैं। अभी पता है क्या होगा? अभी एक बाइक आएगी तो ये रुक जाएंगे। यह लॉकडाउन के टाइम के यह फूटेंगे फुटेज है। ये जा रहे और अब ये जाके किसी को बताएंगे हम वहां गए थे जहां 6-6 इंच के आदमी रहते हैं तो कोई
(1:05:33) यकीन नहीं करेगा। ये कहेंगे बाबा ने मास हिप्नोटिज्म कर दिया। जो क्रॉस कर रहे हैं ना इनका क्रॉस होना बंद हो जाएगा। ये ये रुकेंगे। यह निकलेगी तब जाएंगे यानी वह चोट लग सकती है उनको नहीं तो रुकता नहीं क्रॉस करेगा अब बताइए अब रिएक्शन दीजिए क्या कहेंगे इसको हां जी देखिए शिव जी के मंदिर में है ये रात में चालू करो ना चल गया चल गया ये एक लाइट आई थी जो शिवलिंग के चारों तरफ घूम रही है।
(1:06:18) गुरु जी मैं आपको बता देता हूं। मैं एक पैरानॉर्मल सर्टिफाइड रिस्चर भी रहा हूं जो ओब्स है। ठीक है। ये ओब्स बताते हैं। ये पैरानॉर्मल एक्टिविटी है। नहीं अब ये बताइए हेडलेस आदमी का क्या करेंगे? [हंसी] और तो हमारे हजारों आ चुके हैं। ये मेरा फर्स्ट बैच है। इसका वो चलो इसको इसको हटाओ। दूसरा एक ढूंढ रहा हूं। मिल जाएगा तो एक किसी ने फोटो लिया तो एक बहुत अजीब फोटो है ये। यह मैं बैठा हूं बहुत साल पुराना।
(1:07:06) और ऊपर से दो बड़े-बड़े विशाल विराट स्तन लटक रहे थे पेड़ पे ऐसे। उसी पेड़ के नीचे ये लोग खाना खा के आए हैं। यहां बड़ी चीजें हैं। अजीब अजीब [नाक से की जाने वाली आवाज़] खराब हो गई है। उसकी क्वालिटी है। अच्छी यह ऐसी जगह का है यहां कोई सुनता है बैठ के अरे मेरे पास एसटी आपकी बातें हां ये यहां से है सामने से ली है सामने से फोटो ली हुई है पीछे इधर मेरे ये बिल्कुल विक्रम और बैताल वाला पोज है
(1:07:53) बिल्कुल सही कह रहे हैं आप आपने विक्रम बैताल की कहानी डिटेल में पूरी सुनी तो होगी देखिए मैंने किताब पढ़ी है संस्कृत का एक महान महान ग्रंथ है बैताल पंचवंशी। हां मैं य बैठ जाता हूं गुरु जी। बैठिए। मैं यहीं बैठता हूं और बाकी पास में अब से अंग्रेजी तो अपन लोग पढ़ते हैं लेकिन जिसने बैताल 25 ही नहीं पढ़ी। हां जी। उसको ज्ञान नहीं होगा कभी। गुरु जी मैंने भी बेताल 25 ही पढ़ी हाल ही में। मैं आपको छोटा सा बताता हूं कि मैंने क्या समझा। बताइए। एक भिखारी तो कहना उचित नहीं होगा। एक फकीर। अघोरी। एक अघोरी। स्टार्टिंग में यही आता है।
(1:08:29) रोज जंगली फल लेके आता है। हां वो वो स्टार्टिंग पता है मुझे सारी। पड़ी हुई है। तो मैंने यही समझा कि वो मन ही है जो बेताल है उसको नहीं नहीं वो बेताल सिद्ध करना चाहता था। तो विक्रम फिर लाश को लेके आते हैं। हां जी। बेताल लाश में घुस के बोलता है। हां जी। हमारे यहां दो पेड़ हैं जिन पर दो बेतालों का वास है। यहां बंदर भी बहुत हैं। पिछले 33 साल से उन पेड़ों पर ना तो एक भी बंदर चढ़ा। ना कोई चिड़िया बैठी ना मधुमक्खियों ने छत्ता लगाया तो एंटिटी दिखाऊंगा एंटिटी है प्रॉपर बेताल की शिव जी के द्वारपाल माने जाते हैं बेताल ब्रह्म राक्षस और बेताल
(1:09:09) नहीं भूतों के राजा हैं ब्रह्म राक्षस से अलग है ये ब्रह्म राक्षस से ज्यादा पावरफुल है बहुत ज्ञानी भी है इनका एक ही शौक है ज्ञान जब विक्रम से ज्ञान की बात पूछी है हम और आखिरी कहानी तो ऐसी है कि उसका जवाब मैं भी ढूंढ रहा हूं 40 साल से मैं नहीं निकाल पाया मेरे को आप थोड़ा साहब बताना चाहेंगेशिप में कहानी क्या है आखरी आखरी वाली हां जी एक राजा और राजकुमार जाते हैं शिकार करने तो वहां उनको दो स्त्रियों के पैरों के निशान मिलते हैं एक बड़ा होता है एक छोटा होता है तो राजकुमार छोटे पैरों पर मोहित हो जाता है राजा बड़े पैरों पर मोहित हो
(1:09:45) जाता है वो कहते हैं हम इनसे शादी करेंगे वो बगल के राज्य की भागी हुई रानी और राजकुमारी होते हैं वहां आक्रमण होता है तो जान बचाने आती है छोटे पैरों वाली मां होती है। बड़े पैरों वाली लड़की होती है। तो राजा ने लड़की से शादी करी। राजकुमार ने उसकी मां से शादी करी। अब बेताल पूछ रहे हैं बता विक्रम इनकी जो संताने होंगी इनका आपस में क्या रिश्ता होगा? कोई जवाब नहीं है। जितने रिश्ते हो सकते हैं एक क्रॉस से सारे रिश्ते वहां अप्लाई हो जाते हैं। ये और एक वीडियो ना गुरुजी धनी पे बैठे हैं। हां ये देखने लायक है। इसको ध्यान से देखिए।
(1:10:27) इसको देखते चलिए। दोबारा देखिए। देखते रहिए। बीच में एकदम धड़ाका होगा। एक कहां है कुत्ते? गए। जबरदस्त लाइट आएगी जो धोनी में चली जाएगी। [नाक से की जाने वाली आवाज़] आएगी। अभी तो ये अरे बस यही है ये अखंड ध्वनि है ये चल रही है 2001 से श्मशान में शायद यही एक धोनी है ये यहां पे है
(1:11:10) जी शिव जी मंदिर के है ना जो मैंने देखी थी पिछली बार हां जी हां जी अभी अपन चलेंगे वहां से कुत्तों के साथ जी एक क्रॉस कनेक्शन में राजा विक्रम जवाब नहीं दे पाए। हम लोग भी नहीं ढूंढ पाए आज तक। जरा सा क्रॉस और मामला खत्म। तो बैताल 25 ही और सिंहासन 32 ही। हालांकि लोग इनको बड़ा लाइटली लेते हैं। महान ज्ञान छुपा हुआ है। मैं तो रिकमेंड करता हूं हर एक को पढ़नी चाहिए। उससे यह पता पड़ता है कि बैतालों को केवल ज्ञान चर्चा ही पसंद है। शायद इसीलिए यहां बैठ के सुनते हैं। आपका यह कड़ा बड़ा इंटरेस्टिंग लग रहा है। थैंक यू। इसका कोई खास मीनिंग?
(1:11:55) एक तो सब लोग नोटिस करते हैं। फिर पुराना चिन्ह है जो एंड है वही बिगिनिंग भी है। क्या बात है। बूंद को सागर में मिलना है। [हंसी] और बूंद सागर से ही आई है। क्या बात है। यह ज्यादातर प्राचीन सभ्यताओं में यह चिन्ह मिला है। सांप अपनी खुद की पूछ पकड़े हुए। आपके फॉरेनर बहुत ज्यादा डिसाइपल्स हैं। नहीं इंडिया नहीं ज्यादा। देखिए आप मुझे कुछ भी कहें। हालांकि एक योगी के लिए सारे पृथ्वी वासी बराबर है ना हम लोग जाति पाती को मानते हैं। सब एक लगते हैं। सब प्रभु की रचना है। फिर भी मुझे भारतीय लोगों को सिखाने
(1:12:40) में ज्यादा अच्छा लगता है। अपनी चीजें अपने लोगों में ज्यादा जानी चाहिए। विदेशी वही आ रहे हैं जो योग में गहरी रिसर्च में उतरे हुए हैं और एक से एक कलावंत भी आ रहे हैं और बहुत प्रोग्रेस भी कर रहे हैं। उनकी देखने से उनकी मेहनत देखने से भारतीय लोगों को भी प्रेरणा मिलती है कि वो भी मेहनत करें। तो वो ठीक चल रहा है मामला। अभी शाम को आप देखेंगे जिम के सामने एक शिष्य हैं। तीन बच्चों की मां है। लेकिन आप पहचान नहीं सकते। जबरदस्त योगासन एक्सपर्ट हैं और क्रिया योग में भी काफी एडवांस हैं। वह एक संकल्प के साथ एक खास तरह का नृत्य करती हैं रोज। तो उनकी बड़े
(1:13:22) संकल्प पूरे हो गए उस चक्कर में। उनकी बड़ी प्रॉब्लम थी। हां, इन्होंने मेरे को बताया अभी कि वो शाम को देखेंगे। फायर डांस मैंने पहली बार ही देखा है। वो ये रस्टी है। यह ब्लैकी है। एक और आएगा जैकी। चलिए आइए चलिए आप लोग बैठिए मैं आया। ये जो दिख रही है समाधियां ये महाराजा बृजेंद्र सिंह और इनकी दो महारानियों की ये रिपेयर सब मैंने करा ही दिया क्योंकि अब ऐसे लोग दोबारा दिखने को मिलेंगे नहीं। यह जो पेड़ देख रहे हैं ना पीछे बड़ा
(1:14:07) हां जी हां जी खिरनी का पेड़ है इस पे 33 साल में एक भी बंदर नहीं चढ़ा ना कोई चिड़िया बैठी ऐसा क्यों इस पे बेताल का वास है अच्छा यही एक इधर है और एक शिवजी के पास है वो भी दिखाऊंगा अभी ये वाला जो पेड़ है ये जिसका चबूतरा जिसका चबूतरा बना रखा है आपने और आप देखेंगे तो एक सन्नाटा सा तो महसूस हो ही रहा होगा आज तक इस पर बंदर नहीं चढ़ा ना कोई चिड़िया बैठी ना मधुमक्खी कभी नहीं इधर आते ही बहुत कम है बंदर इस तरफ जबकि बंदर ही बंदर हैं चारों तरफ हां मैंने देखा तो गुरु जी मेरा एक और प्रश्न था आपसे बोलिए
(1:14:51) कैसे मैनेज करते हो आप चेतना खींच उच्च स्तर को इन लोगों के बीच में इन्हीं लोगों से तो बैलेंस हो पाता है जैसे से देखिए कोई भी आदमी असाधारण या सुपरमैन नहीं है। हम सब साधारण ही लोग हैं। तो आप अगर बहुत ऊंचे किसी विचार में चले जाते हैं तो बैलेंस बनाने के लिए साधारण लोगों से भी आपका इंटरेक्शन होते रहना चाहिए। नहीं तो एक फालतू का एक अहंकार और घमंड और एक ईगो डेवलप हो जाएगी कि हम ही श्रेष्ठ हैं। बाकी सब बेवकूफ हैं। वो भी बचना चाहिए उससे। कितना जरूरी है ये चीज लाइफ में ग्रेटट्यूड। ग्रेटट्यूड तो सर्वाइवल के लिए बहुत जरूरी है क्योंकि आप अकेला चना भाड़ नहीं
(1:15:36) फोड़ता। आप चाहे जितने महान बन जाए आपको हमेशा मददगारों की जरूरत पड़ेगी। तो हर आदमी महात्मा को भी पड़ी है और हर आदमी के अंदर वासुदेव बैठे हुए हैं। कण-कण में भगवान है। तो आप उसको यह नहीं कह सकते कि ये बेवकूफ है। ईश्वर उसके अंदर भी है। अलग-अलग ढंग से उनकी लीलाएं हो रही हैं। उसका आनंद लीजिए संभल के गुरु बेटा आराम से अभी समझ गया। बहुत ज्यादा लग सकती थी। कैसी है लेन? अच्छी लग रही है। देख रहे हैं। बहुत सुंदर। बहुत सुंदर। मैं तो पेड़ों पे भी बोगन बे चढ़ा दिए हैं जिससे कि चारों तरफ कलर तो दिखे। हम गुरु जी जैसा आपने बताया आपको एक बार
(1:16:20) अश्वत्थामा के दर्शन हुए। जिम में ही हुए थे। महावतार बाबा जी के दर्शन हुए। वो अंदर हॉल वाले हॉल में आए थे। मैं गया था उसमें भी। जी। शिव जी के भी वही दर्शन हुए थे। किसके? शिव जी के। शिव जी के। क्या कृष्ण के कभी दर्शन हुए? कृष्ण की तो कृपा चल ही रही है। वो तो ग्वालियर में ही आभास हो गए थे। बताएंगे कुछ उनके बारे में स्टोरी। देखिए हमारे कुछ शिष्य मुझे पकड़ लाए परिक्रमा लगाने को। गोवर्धन पूजा सब जगह होती है दिवाली के बाद। हां जी। तो वहां गोवर्ध के बना के चल रहे थे तो मन में आया कि असली गोवर्धन के हम लोग आए रात को यहां। वो भी 21 दिसंबर 91 की रात थी।
(1:16:59) तो हम लोग खाली अंगोछा पहन के बेयर बॉडी परिक्रमा लगाई। भयानक ठंड तो मुझे लगता है कि इतनी ठंड में उगाड़े जा रहे थे तो गिरिराज जी की निगाह पड़ी। कुछ शुरू हो गया। अजीब-अजीब बातें आने लगी। अलग-अलग ढंग से जो है ज्ञान प्रकट होने लगा। ग्वालियर पहुंचे। एक शिष्य ने प्रश्न किया। पूरी गीता का फ्लो शुरू हो गया। जस्ट लाइक दैट। और 21 दिन में डिक्टेशन पूरा हो गया। फिर रुक नहीं पाए ग्वालियर में। फिर सीधे यही आकर रुके। गीता लिखने के डेढ़ साल में मैं यहां था। खींच लिया भगवान ने। ऐसा ऐसा क्यों होता है कि गीता खुद ब खुद आने लग जाती है।
(1:17:41) क्योंकि मेरे 2018 में बहुत ज्यादा क्रैश में आया मैं तो 2019 में मेरे को गीता जबकि मेरा कोई लेना ना देना अपने आप। देखिए ये उन्हीं की कृष्ण की कृपा यही है और मैं तो गिरि गोवर्धन गिरिराज जी की भी कृपा मानता हूं तो उन्होंने अपनी गोद में जगह दी हुई है। अब यहां से पहले ये कोठी दिखती नहीं थी। नागफनी इतनी थी और ऊपर छत पे गिद्ध बैठे रहते थे तो आदमी देखने में डरता था। और ठीक-ठाक रुको जरा। तुम राणा साहब के तो ले आए तुम्हारे ये रह गए नल ऊपर से दे दे
(1:18:32) मुझे पिछली बार आपसे मिलके ये आभास हुआ जी कि आप इतना कम इसलिए बोलते हैं कम नहीं बोलते आप मतलब उतना नहीं बोलते जितना बोलना चाहिए क्योंकि मैं कस्टमर नहीं पटा रहा [हंसी] ये भी तो एक पॉइंट है इस समय आप राजाशाही जी श्मशान में खड़े हुए हैं। हां जी। ये सब चिताओं की जगह है। ओ ये महाराजा किशन सिंह, महाराजा राम सिंह और जहां हमारे शिव जी स्थापित हैं महाराजा जसवंत सिंह की चिता दली थी उसी के ऊपर। तो ये सारी जो जगह है इनके ऊपर चिता जलती है। ये चिता जली थी। फिर ये कर दी जिससे कोई और ना जल जाए। राजाओं की जगह कॉमनर नहीं है। राजाओं की जगह
(1:19:17) जी। तो मैं अपनी बात पूरी करता हूं। मैंने सोचा आप इतना कम इसलिए बोलते हैं हम क्योंकि कृष्ण को मैंने जब समझा जी तो कृष्ण ने जब पहला विश्व रूप दिखाया दुर्योधन को तो दुर्योधन कह रहा है मायावी ग्वाला इस पेड़ पे भी कोई नहीं चढ़ता ये भी चबूतरा जो बना हुआ है जी हां जी इस पे भी एक बेताल इस पूरे एरिया में कोई बंदर वंदर नहीं आता ना चिड़िया ना मधुमक्खी कोई नहीं आपको कभी आभास हुआ दिखा कुछ ये तो सब दिखते ही रहे हैं तो फोटो भी दिखा दिखा दिया आपको। तो कृष्ण ने जो पहला विश्व रूप दिखाया जी वो दुर्योधन को दिखाया। उसके पहले उन्होंने मुंह में यशोदा जी को
(1:20:01) भी मुंह के अंदर दिखाया था बच्चेपन में। क्या बात है। लेकिन अर्जुन समझा दुर्योधन समझा नहीं। नहीं अर्जुन भी कहां समझे? भूल गए। अब शाम को पूजा हो गई है। देखिए इधर ये रुद्राक्ष के पेड़ हैं। ये रुद्राक्ष के पेड़ है? जी क्या बात है। ये ये जो पेड़ है ये रुद्राक्ष है। ये जो हैवी वाला पेड़ है पेड़ है ये कल्पवृक्ष है। ये कल्पवृक्ष है। इसके फूल भी आने लगे हैं। शिव जी पे करीब-करीब 48 फूल चढ़ा चुके हैं इसके। ये ध्वनि है। श्मशान की एकमात्र ध्वनि। कंटिन्यू चलती रहती है।
(1:20:47) और ये जो फुटेज दिखाई है आपने वो इस कैमरे से दिखाई है। जी हां जी। कैमरे की रिकॉर्डिंग थी जो एकदम से एक ब्लास्ट टाइप का सा हुआ है। अब हो सकता है शाम को आप करेंगे कुछ पैरानॉर्मल आए ना आए कह नहीं सकते। गुरु जी डरा रही मेरे को। [हंसी] बाबा जी की जो मूर्ति है अभी कहीं होगा तो बताऊंगा। पलकें आज झपकते हुए 20ों बार आई हैं। हनुमान जी की पलक झपकते हुए कई बार आई हैं। गुरु जी आपने ये भी तो बताया था कि कंप्लेंट कर दी थी। [हंसी] उसका कैमरा था उसका क्या था कैमरा Nikon कैमरे पे उसने कंपनी को लीगल नोटिस भेजा कि कैमरे की गड़बड़ है जो ये सही
(1:21:31) नहीं आया फिर उन्होंने जांच करके बताया कि जेन्युइन फुटेज है ओके सैकड़ों बार आ चुका है उनके बाबा जी की पलकियां झपकते हुए तो ये पूरा भी एएसआई के अंडर है गुरुजी प्रॉपर्टी हमारी या प्रोटेक्शन उनका अच्छा अच्छा लेकिन टूरिस्ट के लिए अलाउड नहीं है नाउ बहुत ही सुंदर ऊपर लाइटिंग लगी है। अभी शाम को देखिए गजब ही हो जाएगा। ये इतनी यूनिक सिचुएशन है। आई एम द ओनली वन जिसका गवर्नर ऑफ यूसी से यूपी के साथ बाकायदा एग्रीमेंट है। प्रॉपर्टी विल
(1:22:17) रिमेन माइन बट दे विल प्रोटेक्ट। क्या बात है। [हंसी] आपकी तरफ कभी आपके पास आते हैं यहां पे मिनिस्टर्स कुछ कोई ध्यान सीखने कोई नहीं नहीं कोई नहीं आता। राजनीतिज्ञों से मैं दूर ही रहा हूं हमेशा। और यहां का वन ऑफ द बेस्ट व्यू दिन के टाइम का। हां जी। क्या बात है। बहुत सुंदर। चल। बढ़िया आ रही है इनको तैरने का बड़ा शौक है कुत्तों का। क्या बात है? क्या बात है ये तैर रहे हैं। जी
(1:23:01) लो उसका फुटेज लो। उधर उधर लो बेटा उसका वहां से सब कैप्चर। लो। वाओ वाओ। ये सब तब तैरते हैं। जब कोई ह्यूमन वहां डूब रहा हो तो यह बचा लाता है। बचा के लाने के लिए तैरते हैं ये। ये कितना गहरा है? ये 108 फुट तो अभी पता है। कितना? 108 फुट पता है। 108 सीढ़ियां है इसमें। ये साइज की इस साइज की 108 की सीढ़ियां है। तो 108 फुट तो पता है। इतना तो होना ही चाहिए। अब ये टूरिस्ट डिपार्टमेंट ₹8 करोड़ रिलीज़ करने वाला है। इसकी खू रिपेयर करेंगे फिर से। क्या बात है। अब यह कृष्ण की कृपा नहीं है तो कृपया
(1:23:48) बताएं फिर यह क्या है? ग्वालियर का प्रसिद्ध बेरोजगार भगवान की कृपा में पड़े हैं। मैंने आज तक कुछ नहीं करा। ना जॉब ना बिजनेस। जब भगवान के ही ऊपर शरण [हंसी] में है तो फिर क्या बिजनेस की शरण में जाए या धंधे की काय की शरण में जाए। आपने सिर्फ एक ही चीज करी है वो है चेतना। बस तो आपने बेताल के फोटो भी देख लिए और जहां वो रहते हैं वो जगह भी देख ली। कभी किसी को नुकसान नहीं पहुंचाया इन
(1:24:32) चीजों ने यहां पे काफी नुकसान पहुंचाया है जो फालतू टाइप के आए वो गायब हो गए फिर [हंसी] इसीलिए मैं निश्चिंत रहता हूं [नाक से की जाने वाली आवाज़] अभी दीदी ने मेरे को एक वो दिखाया बाहर गांधी जी उनके बारे में बताइए थोड़ा सा जी हां वो फोटो भी लगा है हां वो 2 अक्टूबर को पैदा हुआ था। करीब एक महीने का हमारे पास आया था ग्वालियर में और मुझे लगता है कि वह और उसकी मां मुझे यहां ले आए। बहुत दोस्ती मानता था और यहां का एक दैत्याकार सांड था। वो सबसे बड़ा सांड वही था। इतने बड़े-बड़े खुर थे उसके।
(1:25:18) और उसके सामने अगर कोई मुझे छू लेता था, तो जंजीर टूट के उसका बचाना मुश्किल हो जाता था। इतना पजेसिव था, प्रोटेक्टिव था। और मैं और मेरी बहन खूब उसकी सवारी करते थे। कुश्ती लड़ते रहते थे। वह बिल्कुल सही था। तो जब उसका देहांत हुआ यहां 2006 में सेम डे जिस दिन सुनील दत्त की डेथ हुई तो फिर यहीं उनको समाधि दी गई और उसका स्मारक बना हुआ है। ही वाज अ रियल फ्रेंड। गुरुजी नॉलेज जो है वो एक बाउंडेशन भी है वहां तक पहुंचने की। नहीं नहीं नॉलेज या पुराने लोग कहते हैं पढ़े तो हो गुने हो कि ना है यानी पढ़ तो लिया है अनुभव
(1:26:04) हुआ है कि नहीं हुआ है हम तो नॉलेज एक जानकारी है हम अनुभव के बाद वो ज्ञान हो जाता है इतनी सी बात जानकारी होना तो बहुत जरूरी है। जानकारी होना बहुत जरूरी है। कैसे पता लगेगा पहला कॉन्शियसनेस का पहला वह पल जब यह जानकारी होगी कि हां कॉन्शियसनेस में एंटर हो चुके हैं। देखिए अपने यहां बड़ी प्रसिद्ध किताब है हिंदुओं की ब्रह्मसूत्र। ब्रह्मसूत्र उसकी स्टार्टिंग क्या है? मैंने पढ़ी नहीं गुरु जी। मैं बता रहा हूं। अथात तो ब्रह्म जिज्ञासा। ब्रह्म क्या है? तो मेरे हिसाब से माइंड और ब्रह्म मैं कौन हूं? माइंड और भ्रम समानार्थी। सब कुछ जान लेने के बाद क्वेश्चन आता है
(1:26:50) कि जान कौन रहा था? क्या बात है। वहां से योग शुरू होता है। कितनी सी बात है। [हंसी] उसके लिए जरूरी है कि आप जाने पहले सब कुछ। फिर क्वेश्चन आएगा कि जान कौन रहा था। तो वहां से रिट्रोस्पेक्शन में आप अपनी स्टडी करना शुरू करें। मेडिटेशन कैसे इससे भिन्न है? क्रिया योग से कितनी भिन्न है? देखिए हमारे यहां मेडिटेशन नहीं है। गहन चिंतन को आप मेडिटेशन कह सकते हैं। ध्यान नहीं है वो। ध्यान योग की सातवीं स्थिति है। जो बहुत ज्यादा कठोर योग साधना के बाद जब आपका चेतना पकती है तब ध्यान की स्थिति प्राप्त होती है। ध्यान अवस्थे तदतेन मन
(1:27:34) ध्यान पर बैठकर ही मन वहां जाता है। मेडिटेशन पर बैठकर नहीं। तो इसकी शुरुआत ही मेड से ही हो रही है। जब आपने कहा कि ध्यान में बैठकर यान ध धी माने बुद्धि बुद्धि जब प्रज्ञा हो जाए तब उसका सहारा लेके आप वहां पहुंचेंगे त्रतांबरा प्रज्ञा बोली गई है योग में विशेष उन्नत हुई बुद्धि को वही बताएगी क्या ठीक है क्या ठीक नहीं है और हम कहां जा रहे हैं क्यों जा रहे हैं कहां पहुंच रहे हैं जब चेतना का उप स्तर आ जाएगा तो ऑटोमेटिकली ऐसा हो जाता है कि धर्म और अधर्म का चुनाव कर पाएगा कर्मों में।
(1:28:20) पूरी तरह से आपको कर्म का ज्ञान हो जाएगा। जो अभी मैंने गीता का उदाहरण दिया आपको। वृद्धावस्था और मृत्यु से मुक्त होने के लिए जो प्रयास करेगा वही जानेगा कि कर्म क्या है? ब्रह्म क्या है और आध्यात्म क्या है? तब तक तो हम लोग बातें ही करते रहते हैं। गीता को आपने बड़ी ही एक अलग एंगल से देखा है। जी जो अज्ञानी है वो सिर्फ उसको एंटरटेनमेंट के तौर पर देखते हैं। वो पढ़ते ही नहीं है उसको। उसके अंदर सबसे जो विचित्र पड़ाव है और सबसे कठिन पड़ाव तब आता है जब वस्त्र हरण हो जाता है द्रोपदी का
(1:29:03) द्रोपदी का उसमें क्या विचित्र पड़ाव है उसी के बाद से चेतना का विस्तार होता है अर्जुन में देखिए वो लोगों ने जोड़ा है कि पांच पांडव पंच तत्व हैं द्रोपदी आत्मा है वगैरह वगैरह हां हां मैं इसी की बात कर रहा था सिं मैं उसको गलत भी नहीं कहता और ना मैं उसका अनुमोदन करता वो तो सारा प्रयास पांडवों के इतने अपमान करने का था कि उनके सामने युद्ध के अलावा और कोई ऑप्शन बचे ही ना वो हुआ और जिन्होंने अपमान किया वो वीरगति प्राप्त कर गए युद्ध में मर गए और भगवान ने इनकी रक्षा करी तो इनको पता नहीं क्या हुआ बाद में वीरगति तो प्राप्त नहीं हुई
(1:29:47) ये बहुत बड़ी बात है ये आपका क्या विचार है इसके बारे में? मेरे इसमें बहुत खतरनाक टाइप के विचार हैं। वो आप रिकॉर्ड नहीं करो तो ठीक है। जो वस्त्र हरण है वो किस चीज का सिंबल है? अगर आप महाभारत गौर से पढ़ेंगे तो उसको पढ़ के लगेगा कि वस्त्र हरण हुआ ही नहीं। हुआ ही नहीं। अपमान सुनते हैं। अपमान हुआ जबरदस्त। लेकिन वस्त्र हरण नहीं हो पाया। उसमें केवल एक श्लोक आता है जो कई विद्वान कहते हैं कि बाद में जोड़ दिया गया। कि कृष्ण ने गुप्त रूप से भिन्न-भिन्न प्रकार के वस्त्रों से उसको आच्छादित करा। बाद में जब वनवास में कृष्ण उनसे मिलने गए
(1:30:28) हैं तो वहां पूरे अध्याय में द्रोपदी को बता रहे हैं कि मैं वहां युद्ध में व्यस्त था इसलिए नहीं आ पाया। अब इसमें किसकी बात सही मानेंगे? हम तो कृष्ण की बात को सही मानेंगे। कोई राजा शाल थे। उन्होंने इनके पिता थे जो उनका अपहरण कर लिया वसुदेव जी का। वह अपने को वास्तव घोषित करे हुए था। तो कृष्ण ने उसको उनको बचाया और उसको मारा है। उस युद्ध में श्री कृष्ण व्यस्त थे। आप चाहे तो महाभारत में इस पूरे प्रसंग को पढ़ सकते हैं। तो जब कृष्ण खुद कह रहे हैं कि मैं वहां व्यस्त था इसलिए नहीं आ पाया। तो बात ही खत्म हो जाती है। तो हुआ क्या था?
(1:31:13) उनका घोर अपमान हुआ था द्रोपदी का। यह हुआ था। मतलब वस्त्र हरण हो गया था। कुछ तो अपमान तो हुआ ही था। घसीट के तो वो ला ही गई थी। और फिर उन्हें सामान्य नारी भी नहीं मानना चाहिए। वो यज्ञ सैनी है। यज्ञ में से अग्नि में से उत्पन्न हुई। तो वो क्या थी? वह तो एक विनाश के लिए ही उनका आविर्भाव हुआ था। वो उसमें सफल भी रही पूरी तरह से। वो कहते हैं कि भारत ने द्रोपदी का वो सम्मान नहीं करा जो करना चाहिए था। देखिए सबके अपने-अपने विचार हैं। जैसे एक ने मुझसे पूछा आपके स्त्रियों के बारे में क्या विचार है?
(1:31:56) ये रिकॉर्ड कर सकते हैं गुरुजी। हां हो रही है रिकॉर्डिंग। मैंने कहा मेरे बहुत अच्छे विचार हैं स्त्रियों को लेके। मेरी मां भी एक स्त्री थी। मेरी दादी भी एक स्त्री थी। मेरी नानी भी एक स्त्री थी। मेरी चाची, मामी, भाभी, बहन, भतीजी सब स्त्रियां ही तो हैं। हम सब ने मुझे सपोर्ट किया। तो मेरे तो बड़े अच्छे विचार हैं स्त्रियों के लिए। तो इस बात पर वो थोड़े से अचकचा से गए क्योंकि वो कोई दूसरे तरह के के उत्तर की उम्मीद कर रहे थे। पर क्या मैंने गलत बोला? बात तो सही है। पैदा ही हमें एक स्त्री ने करा तो हमारे क्या विचार हो सकते हैं पैदा करने वाली को ले?
(1:32:38) लोग व घूमते रहते हैं। गीता के अंदर सबसे कंट्रोवरर्शियल एक टॉपिक रहा है जो समय-समय पर उछलता रहा है। कुछ लोग कहते हैं कि कृष्ण ने गोपियों के वस्त्र उठाए। कुछ महानुभव ज्ञानी लोग कहते हैं कि कृष्ण कहते हैं कि जो भी मेरे प्रेम में है मैं उसका कुछ उसके पास रहने नहीं दूंगा। सब छीन लूंगा। सत्य क्या है? सत्य यह है कि वो उनकी बाल लीलाओं में आता है कृष्ण की। और मेरा कहना मैंने प्रेम की परिभाषा किसी ने पूछी तो मैंने यही परिभाषा दी है कि बहुत गहरी अंतरंग उन्मुक्त मित्रता को प्रेम कहा जा सकता है। तो उनकी गोपियों से
(1:33:23) इतनी मित्रता थी तो वस्त्र वस्त्र क्या आते हैं बीच में। उन्होंने छेड़ा उनको बात खत्म हो गई। एक ही तो अवतार है जिनमें सेंस ऑफ ह्यूमर भी था। इतना ज्यादा और किसी ने बुरा नहीं माना। गोपियों के पतियों ने भी बुरा नहीं माना। यह एक चमत्कार है। यही भगवतता है। राम और कृष्ण कैसे भिन्न है आपके लिए? देखिए रामचंद्र जी का वन पॉइंट प्रोग्राम था रावण को मारना। इसके अलावा उनका और कोई उद्देश्य नहीं था अवतार लेने का। कृष्ण का अवतार बिल्कुल अलग है। उन्होंने तो स्वर्गवासी देवताओं की सत्ता को समाप्त करके प्रकृति पूजा की स्थापना करी। इंद्र
(1:34:10) की पूजा बंद करके गोवर्धन की पूजा शुरू करी। प्रकृति की तो पूजा है। ब्रह्मा ब्रह्मा का यहां मान मर्दन हुआ। यही गोवर्धन में ही हुआ। तो जो वेदों के प्रमुख देवता थे उनका ही उन्होंने कैरियर खत्म कर दिया। [हंसी] कैरियर वहीं से प्रजातंत्र की शुरुआत हुई है। एक प्रकार से देखें। एक को भारत आंशिक अवतार कहता है और एक को पूर्ण अवतार कहता है। देखिए यह विद्वानों के विचार हैं। मैं नहीं जानता इसमें है दोनों परमात्मा ही। क्या संदेह है? मुझे तो यह लगता है कि जो राम और रावण का युद्ध हुआ वैसा युद्ध ना तो पहले कभी देखा गया ना उसके बाद कभी
(1:34:49) हुआ। वो भयानक युद्ध था। और कृष्ण ने जब लीलाएं करी, पर्वत उठाया, यह सब कुछ करा और 16108 शादियां भी करी। यह भी पहले कभी देखा नहीं गया। पर कृष्ण से क्योंकि उनमें सेंस ऑफ ह्यूमर भी है तो हमें ज्यादा प्रिय लगते हैं। हम तो रहे ही उन्हीं की जगह पर हैं तो मैं तो कृष्णम वंदे जगतगुरु। अगर आप गीता को पूरा नाप जो बिगिनर्स हैं हमारे किसी ने गीता नहीं पढ़ी आप दो ढाई मिनट में पूरी गीता को के सार को कैसे समझा सकते हो क्या समझाना चाहेंगे देखिए थोड़ा तो पढ़ना ही पड़ेगा सार तो
(1:35:35) नहीं आता जैसे आपसे कोई पूछे आप एजुकेटेड आदमी हैं और कोई बिल्कुल अनपढ़ आदमी पूछे आपसे कि एजुकेशन क्या होती है आप उसे उत्तर नहीं दे पाएंगे यह तो ज्ञान अर्जित करने की प्रक्रिया है जिसे एजुकेशन कहते हैं और एक शब्द में नहीं बताया जा सकता। एक वाक्य में भी नहीं बताया जा सकता। उसकी तो प्रक्रिया में से निकलेंगे तो आपको पता पड़ेगा कि एजुकेशन क्या होती है? तो गीता का पढ़ने का फायदा मैं बता दूंगा। शायद उससे लोग पढ़ने लगे। बताइए। अर्जुन ने सबसे पहले गीता सुनी। 18 दिन में सारे तो दुश्मन मर गए। हम डूबा हुआ राज्य वापस मिला। ज्ञान ऊपर से
(1:36:15) मिला तो गीता के एक अध्याय का पाठ करिए। सारा अपोजिशन सामने से हट जाएगा। आपकी प्रोस्पेरिटी बढ़ने लगेगी। और मुझे आज तक कोई ऐसा नहीं मिला जिसको प्रोस्पेरिटी बढ़ना बुरा लग रहा हो। आपके पड़ोसी को आपकी प्रोस्पेरिटी बुरी लग सकती है। आपको नहीं लगेगी। प्रोस्पेरिटी होनी चाहिए। हां, यहां चलते-चलते एक और मैंने अभी एकद दिन पहले त्याग की परिभाषा दी है। हां जी। त्याग क्या है? क्या करना चाहिए त्याग? [गला साफ़ करने की आवाज़] सुनिए। असुविधाओं का त्याग ही सबसे बड़ा त्याग है। असुविधाओं का लोग त्याग के चक्कर में घर बार छोड़ के चले गए। जबकि त्याग केवल असुविधा का करना
(1:37:02) था। ठीक है? चिंतन करिए उसका। भोजन का कितना बड़ा रोल है? जैसा अन्न वैसा मन जिस प्रकार का भोजन ग्रहण करेंगे मानसिक विचार वैसे ही उत्पन्न होंगे। स्पष्ट बात अभी जो मैंने एक बात समझी गुरु जी कि ऊर्जा कमाने से ज्यादा ऊर्जा बचाने का खेल है। कह सकते हैं। कि हमारी आंखों ने जो भी देखा और कुछ गढ़ना शुरू कर दिया। वह ऊर्जा का बचा ये इस पर भी निर्भर करेगा कि आपका
(1:37:46) पर्सपेक्टिव क्या है? आपका पॉइंट ऑफ व्यू क्या है? आप जो चीज देख रहे हैं उसको प्रोसेस आप कैसे कर रहे हैं? अब जैसे कि हम रोड पे खड़े हैं और एक गाड़ी निकली और हमारे मन में विचार आने लगे कि ये गाड़ी कितनी चलती होगी। हमें कोई लेना देना नहीं है। ना वो खरीदनी है ना कुछ। लेकिन अपनी ऊर्जा उसमें नहीं ऊर्जा नहीं खर्च हो रही है। आपका ज्ञान वर्धन हो रहा है। एक आपके मन में प्रश्न आया कि ये गाड़ी कैसी है? क्या है? आप पता लगा लेंगे तो आपकी जानकारी में एक वृद्धि हो जाएगी। हमारी ऊर्जा उससे बढ़ जाएगी और क्या बात है और तो शरीर को लेकर आप बड़े सज्ग हैं
(1:38:30) ये शौक है पुराना शौक हां मुझे ये सब करते हुए 57 इयर्स हो गए इस साल 57 इयर्स अच्छा लगता लगता है। जिम में मूड भी ठीक रहता है। मूड का तो मैंने देख लिया लाइव चमत्कार। मूड का तो खेल है ही नहीं आपके साथ। फिर भी [हंसी] अच्छा लगता है। फील तो होता है। 10 महाविद्याओं की बात करते हैं थोड़ी सी गुरु जी। जी। काफी लोग आप नॉर्मल भक्ति में बहुत डरते हैं। 10 महाविदओं से, मां काली से, घर में नॉर्मल पूजा करने से। देखिए यदि वह आपकी कुलदेवी हैं और यदि किसी गुरु ने आपको उनका उपदेश दिया है
(1:39:17) उनकी आराधना का तो जरूर करिए। वरना क्या लोग उदाहरण देते हैं बंदर के हाथ में उस तरह दे देंगे तो वो खुद को ही घायल करेगा। जैसे एग्जांपल यह विद्या है। विद्या है। विद्या ज्ञान है। हम और जैसे कि न्यूक्लियर फिजिक्स हर एक को नहीं पढ़ाई जाती। जो क्वालीफाई कर जाता है उसी को पढ़ाई जाती है। तो यह भी विद्याएं हैं। महाविद्याएं हैं। इनका जिसको ज्ञान हो जाएगा वो तो महाज्ञानी हो जाएगा। क्या-क्या बदलाव आएंगे जीवन में? पूरा ही ट्रांसफॉर्मेशन हो जाएगा। हो सकता है आप अमर भी हो जाए। अमर भी हो जाए। क्यों नहीं विद्या? स विद्या या विमुक्त
(1:39:58) है। विद्या वो है जो आपको मुक्त कर दे। और जो गीता अपन पढ़ रहे हैं। वृद्धा अवस्था मृत्यु से तो पहली मुक्ति है। नहीं तो क्या फायदा आप महावतार बाबा जी की बार-बार बातें करते हैं गुरु ही है वो तो बड़े बताते हैं वो एक अलग टाइमलाइन से आते हैं। देखिए अब साइंस सेक्शन का जमाना है। अब इतने पुराने हैं वो कितने पुराने हैं ये भी कंफर्म नहीं है। तो शताब्दियों पहले से तो वो आ ही रहे हैं। लेकिन ये स्थूल शरीर के साथ कैसे संभव है? अगर आप आयुर्वेद पढ़ेंगे तो उसमें कायाकल्प के कई विधान दिए हुए हैं। 500 वर्ष की आयु,000 वर्ष की आयु, 10,000 वर्ष
(1:40:38) की आयु, 1 लाख वर्ष की आयु चंद्र तार का अवधि तक जीने के उसमें फार्मूले दिए हुए हैं। जब चूर्ण चटनी के फार्मूले सफल है तो अगर कोई कर पाएगा तो वो भी सफल होगा। हो सकता है उन्होंने सफलतापूक किया हो। और योग में तो यह बोला ही जाता है कि ऐसा रिजल्ट आना चाहिए। इसका गोरखनाथ ने तो गोरख वाणी में बोला ही है और वह हमले हम लोगों के लिए सबसे बड़ी अथॉरिटी है मसेना तो गोरखनाथ बाबा जी तो है ही हां जी कि यदि योगी है तो उसे वृद्ध नहीं होना चाहिए यदि वैद्य है तो उसको रोगी नहीं होना चाहिए यदि शूरवीर का दावा कर रहा है तो पीठ का घाव नहीं होना चाहिए अगर कोई सोना
(1:41:21) चांदी बनाने का दम भर रहा है तो वह भीख मांग के नहीं खाना चाहिए गोरखनाथ के दिए हुए स्टैंडर्ड्स हैं जो अपने लिए पत्थर की लकीर आपकी जीवन में दैनिक च्या में जी योग ने उम्र को लेके क्या-क्या बदलाव किए? देखिए 10 तारीख को मैं 69 साल का हो जाऊंगा। यही बदलाव है। पांच चार दिन बाद और जैसा पिछले पडकास्ट में भी आप लोगों ने पूछा था ये ओरिजिनल है। हां जी यार कलर नहीं है। पर बड़ा डाउट होता है लोगों को इस बात का। उसमें कमेंट्स भी आए।
(1:42:06) आए थे? हां। [हंसी] कि ये कैसे संभव है? आप कह सकते हैं कि यह ऐसे ही संभव है। जैसे नाड़ी रोक ली गई थी। बस ऐसे ही संभव है। शरीर भी यदि स्थिर नहीं हुआ है तो मन आपका स्थिर हो गया। इसकी क्या गारंटी है? स्थूल चीज पहले स्थिर होनी चाहिए। तब मन जैसी सूक्ष्म चीज का कार्यक्रम चालू होगा। पर योग इस लेवल के योग ही ज्यादा है नहीं। ना सिखाने वाले हैं ना जिज्ञासु ना करने वाले हैं। परंतु कृष्ण कह रहे हैं कि ध्यान योग की जरूरत ही नहीं है। वो कहते हैं कि यो मुनियों में मैं कपिल हूं। सांख्य योग की बात करते हैं।
(1:42:51) ठीक है। जो जाग गया वो सो कैसे सकता है? बार-बार ध्यान करने की जरूरत क्या है? नहीं वो तो ध्यान की प्रक्रिया पार कर चुका है। हम वो तो सीढ़ी की जरूरत उनको खत्म हो गई। क्योंकि सीढ़ी चढ़ के वो ऊपर पहुंच गए। क्या बात है। बार-बार थोड़ी सीढ़ी चढ़ेंगे उतरेंगे। अंटिल अनलेस उनको कार्डियोवस्कुलर ट्रेनिंग करनी है तो उस लेवल वाला आदमी काहे को करेगा यह सब कपिल मुनि सिद्धा नाम कपिल और मुनि सिद्धों में कपिल मैं हूं ये तो खुद गीता में उन्होंने बोला बड़े आदमी है क्या बात है कभी देखा नहीं था बोलिए क्या पूछ रहे थे
(1:43:35) क्या हां जी क्या पूछ रहे थे? मैं तो यही पूछ रहा था मैं काले टीका का कोई स्पेशल इनको टीका लगा दो तिलक मैं लगाऊं लगा दो सबके [नाक से की जाने वाली आवाज़] लगा दीजिए क्या बात बस लग गई बहुत मतलब मीनिंग गुरु जी देखिए हिंदुओं में टीका उनके संप्रदाय को बताता है सांप्रदायिक चिन्ह है ये वैष्णवों के अलग टीके हैं। शैवों के अलग टीके हैं। शाक लोगों के अलग हैं। गणपति की उपासना करने वालों के अलग टीके हैं। अब ये काला टीका तो कुछ अघोरी लगाते हैं
(1:44:22) या भैरव के उपासक लगाते हैं या जो श्मशान में रहते हैं वो लगाते हैं। आप भैरव की उपासना करते हैं? भैरव का यहां पुराना एक 800 साल पुरानी एक शिला है। उसकी डेली पूजा करते हैं। तो श्मशान में तो रह ही रहे हैं। तो काला टीका बस एक दिन लगा लिया। तो अच्छा लगा तो लगाने लगे। इससे कोई ऊर्जा मिलती हो या ऐसा कुछ या ऊर्जा अंदर ही है आपके नहीं ऊर्जा क्या लेकिन शकल बदल जाए। शकल कुछ ठीक सी लगने लगती है। [हंसी] इतना तो है। नजर वजर कम लगती है। मैं थोड़ा सा बेसिक पे आऊंगा गुरु जी शुरू में। बोलिए। क्योंकि मैं कुछ सवाल स्किप कर गया मैंने।
(1:45:03) अभी सोचा विचार किया। जब आपने यह चुनाव किया इस रास्ते का तो घर वालों का किस-किस परिस्थिति का सामना सहना पड़ा आपको? घर वालों ने मेरा कोई विरोध नहीं किया क्योंकि पिताजी बहुत कुछ योग के बारे में जानते थे। नली करना मैंने उनसे ही सीखी थी। वो पर्याप्त जज होते हुए भी इतना सब वो भी करते थे। हमारी माताजी नली वगैरह कर लेती थी। तो एक पढ़े लिखे घर के थे तो कोई ज्यादा पिताजी बहुत पढ़े लिखे थे इन मामलों में। तो किसी ने कोई विरोध नहीं किया। उनको मेरे ऊपर भरोसा भी था काफी कि यह कोई गड़बड़ तो नहीं करेंगे। तो किसी ने रोका नहीं।
(1:45:44) यह एक सौभाग्य रहा। हालांकि इंडियन मिलिट्री एकेडमी के लिए सिलेक्शन हो गया था नवंबर 77 में। फिर मैं गया नहीं। वो आप अवेकनर में पढ़ेंगे पूरा घटनाक्रम। तो ऐसा भी नहीं है कि कुछ कर नहीं पाए तो योग करने लगे। वो पिछले पडकास्ट में हमने कवर भी किया था। जी हां। जी हां। आपने बुल्ले शाह पढ़े हैं, कबीर पढ़े हैं? सब पढ़े हुए हैं। क्या लगा आपको इनकी विचारधारा में दिन? देखिए विचारधारा बुल्ले शाह तो फकीर ही थे और गजब की पोएट्री है उनकी। और जहां भी आप देखेंगे काव्य की क्षमता जहां होगी तो मेरे हिसाब से तो भगवान की कृपा ही है। भगवान की कृपा इन्हीं गुणों से प्रकट होती
(1:46:30) है। संगीत आ जाए जैसे स्वामी हरिदास थे, मीराबाई थी, कविता होने लगी। सूरदास थे, तुलसीदास थे, कबीर थे, बुल्ले शाह थे, लल्लेश्वरी थी कश्मीर की। यहां भी आप देखेंगे असाधारण अभिव्यक्ति जहां मिलेगी वह भगवान की कृपा ही है। इन्हीं चीजों से दिखाई देती है। तो ये तो जबरदस्त लोग हुए हैं। आज तक प्रेरणा दे रहे हैं। ये प्योर भक्ति की बातें करते हैं। देखिए ये जिस मन स्थिति पर पहुंचे हुए थे। उसके बाद उन्होंने इस चीज को बोला। प्रक्रिया पे कोई बात नहीं है उनकी। तो जो क्रिया योग है यह उस मनुस्थिति पर पहुंचने के लिए ही एक शॉर्टकट है।
(1:47:15) शॉर्टकट नहीं है। पक्का रास्ता है। पक्का रास्ता है। लेकिन है सारा खेल उस मन सारा खेल मन का ही है। और फिर भगवान आपके अंदर से किस चीज को अभिव्यक्त करवाएं? इमोशंस भी तो सारे चेतना में ही भरे पड़े हैं। इमोशन भी तो लहरें ही हैं चेतना की। जिसकी जो लहर प्रकट हो जाए जो जिसकी अभिव्यक्ति हो जाए वह फिर कृपा है वहां इतने सालों बाद अगर यह याद किए जा रहे हैं और यह हम सबको प्रेरणा दे रहा है तो वह तो बिल्कुल नमन करने वाले लोग हैं विभूतियां हैं कोई भी हो
(1:48:02) पूरी दुनिया में आपको ऐसे लोग मिलेंगे। सबसे बड़ा भाव क्या लगता है आपको परमात्मा से जुड़ने का? क्या है? मोल कण-कण में भगवान है। यह समझ में आ जाए तो बात ही खत्म। फिर भूदेवी की चेतना अपने आप में सर्वत्र व्याप्त है। तो कण-कण में भी उनकी चेतना है। तो अपने लिए तो यही परमात्मा है। जब आपका शरीर पार्थिव शरीर है। इसमें आत्मा है तो पृथ्वी के शरीर में जो आत्मा है वो हमारे लिए परमात्मा है। सीधा-सीधा एक सब है। तंत्र की आपने बात बताई मुझे अभी दश महाविद्याओं की बात करी। उसका एक अलग और तामसिक तंत्र
(1:48:48) देखिए सात्विक हो या तामसिक हो यह है तो एक टेक्निकल एस्पेक्ट ही किसी भी चीज का अब ये आपकी रुचि है कि आपकी रुचि किस तरफ जा रही है उसी दिशा में आप जाएंगे जिसकी गांव जाने की इच्छा होगी वो गांव की तरफ जाएगा बंबई जाने की इच्छा होगी वो मुंबई की तरफ जाएगा हॉलीवुड जाना चाहेगा वो हॉलीवुड जाएगा लेकिन बलि प्रथा का कैसे आप आपकी विचारधारा क्या है बलि के बारे मेरी कोई विचारधारा नहीं है। जो शास्त्र में जिस देवता का जो भोग का विधान है वो है। पर यह एक बात आप मानेंगे मेरी कि सबसे ज्यादा बलि मनुष्यों के लिए ही चढ़ती है। जितने भी बुचेरी चल रही है वो मनुष्यों के
(1:49:31) लिए चल रही है। देवताओं के लिए हमें इस पर भी गौर करना चाहिए। देवताओं के लिए कितनी बलि चढ़ रही होंगी। मनुष्यों के लिए तो पूरी इंडस्ट्री लगी हुई है। क्या बात है। ध्यान देने वाली बात है। [हंसी] मैं तो वेजिटेरियन हूं शुरू से ही। प्योर वेज प्योर वेजिटेरियन है। उसका रीजन कोई खास क्योंकि ऊर्जा नहीं ऊर्जा ऊर्जा पे नहीं रुचि नहीं हुई कभी कुछ खाने पीने की। शुरू से ही दाल रोटी पे ही चल रहे हैं। आलू दाल रोटी थोड़े से चावल बस ना मैंने प्रोटीन पाउडर लिए ना कुछ लिए ना कुछ करा। आपको लगता है चेतना बहुत लोगों की जो गिरी
(1:50:18) हुई है उसका मेन कारण फूड पैकेट्स भी है क्योंकि प्रिजर्वेटिव बहुत ज्यादा देखिए ये तो आजकल बहुत सारे लोग बहुत सारी बातें करते हैं। संगत का असर पड़ता है। जैसे जैसे मैं एक बिल्कुल अलग बात बोलता हूं और आप शायद मानेंगे भी। राजाशाही का पतन कब से हुआ? जब से राजा लोग इंग्लैंड पढ़ने जाने लगे और अंग्रेजी बोलने लगे। फिर हमें शूरवीरता की कथाएं सुनने को नहीं मिलती। ज्यादातर राजा महाराजा लोग आजकल होटल खोल के बैठे हुए हैं। क्या बात है? [हंसी] महाराणा प्रताप को अंग्रेजी नहीं आती थी। बप्पा रावल को अंग्रेजी नहीं आती थी। ना
(1:51:02) वो लंदन गए पढ़ने। पतन का कारण वहां से होता है जब हम अपनी पुरानी ट्रेडिशनल परंपराओं से दूर होने लगते हैं। संगत का असर पड़ता है। ये तीसरी बात है। आयुष जी आइए। ये हम लोगों का डेली रूटीन है। हां जी। रोज इसी रास्ते से जाते हैं। तो हमारी जगह पसंद आई आपको? बहुत सुंदर। बहुत सुंदर और अद्भुत जगह है आपकी। थैंक यू। यहां मैं एक और बात आपको बताऊं। बता ही दें। बताएंगे ना भैया। निराकार उदाहरण है सरकार। सब काम सरकार का चल रहा है। सरकार के
(1:51:47) प्रतिनिधि आपको दिखाई देते हैं। पर सरकार कहीं दिखाई नहीं देती। यही निराकारों साकारात है। ठीक है। [नाक से की जाने वाली आवाज़] आप छोटी-छोटी लाइनों में इतनी गहरी बात क्या चाहते हैं? ये गिरिराज जी की कृपा है। इनको डाइजेस्ट करने के लिए फिर कई घंटे चले जाते हैं। प्रोसेस करने में टाइम लगेगा। [हंसी] चलिए अब आप एक बहुत ही ग्रैंड शो देखने वाले हैं। जय महाकाली। जय महाकाली। हर हर महादेव। क्या बात है। ईशा ईशा। डॉबरी बैच। इधर आ जाओ।
(1:52:36) तो पहले इनका शो फिर अपन गेम। ठीक है। ये रोज कर रही है डेली। क्या बात है। क्या बात है। बैठिए। मैं आपके साथ ही खड़ा हुआ। चलिए आपकी इच्छा ध्यान से। [संगीत] [संगीत]
(1:53:54) [संगीत] [संगीत] [संगीत] आ
(1:54:48) [चीखने की आवाज़] [संगीत] [संगीत] [संगीत] [संगीत]
(1:55:38) [संगीत] [संगीत] [संगीत] ओ [संगीत] [संगीत]
(1:56:32) [संगीत] [संगीत] बम बम बम बम बम बम बम बम बम बम [संगीत] बम बम [संगीत] बम बम बम बम बम बम बम [संगीत] बम बम आ [संगीत] [संगीत] [संगीत]
(1:57:34) [संगीत] [संगीत] [संगीत] [संगीत] [संगीत] [संगीत]
(1:58:26) धुम धुम धूम धुमम धुम धुमम [संगीत] धमम धमम धुमममममममममममममममममममममम [संगीत] [संगीत] राम राम [संगीत] [संगीत] [संगीत]
(1:59:19) [संगीत] ओ [गाना गाने की आवाज़] ओ [संगीत] ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ हो [संगीत] ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ [संगीत] [संगीत] हाय हमम [संगीत]
(2:00:15) हे [संगीत] [संगीत] [संगीत] [संगीत] [संगीत] [संगीत]
(2:01:08) धम धुमम [संगीत] [संगीत] राम [संगीत] [संगीत] जय महाकाली
(2:01:56) जय महाकाली अमेजिंग दैट वास समथिंग टुडे थैंक यू वेरी मच दैट वाज़ अमेजिंग [संगीत] जय महाकाली जय महाकाली थैंक यू जिम जा रही है ना अमेजिंग जिम रहा जिम रुक जा रुक जा इनका बताता हूं मैं इनकी स्टोरी भी बताता हूं कैसा है ठीक है अद्भुत अमेजिंग मैंने भी 10 साल 10 साल जिम चलाया गुरुजी
(2:02:45) मैंने वैसे इससे पहले फिर तो क्या वो तो डोले है देख [हंसी] ये साल भर से डेली मुझे दिखा रही है रोज ये एक संकल्प के साथ डांस कर रहे हैं इनकी तपस्या योगी है तीन बच्चों की मां है बड़ी लड़की इनकी 17 18 साल की छोटी लड़की एपिलेप्टिक पैदा हुई तो मैंने थोड़ा सा कुछ मदद करी तो शी हैज रिक कवर्ड 60% इसी दौरान इन्होंने डांस करने का संकल्प किया कि मेरी समस्या दूर होगी तब तक मैं नाचूंगी। इनके पति को कोई एक अजीब सी बीमारी थी वो नॉर्मल हो गए। पुराने फ्लैटव बड़े परेशान अब वो सब बेच पाच के सेंट पीटर्सबर्ग में पहले इसकी बगल में फ्लैट
(2:03:26) मिल गया है। लड़की 60% रिकवर हो गई है जो एक एपिलेप्टिक उसमें एक चमत्कार माना जाता है। और गजब की योगी है। मतलब क्रिया योग में भी बहुत अच्छी चल रही है। रामदेव की नली देखी है आपने? रामदेव की जो नली दिखाते हैं। वो आप भी करते हैं। मैंने सुना है। मैं तो करता हूं। यह खड़े होकर करके दिखा देंगे बिना झुके हाथ लगाए। हमारे कई शिष्य हैं जो इस लेवल पर हैं। सीधे खड़े हैं। नली करके दिखा। मैंने सिखाया खूब। चलो बंद ही कर दो इसको। अभी मत चला। अभी बातचीत भी रिकॉर्ड होगी। थोड़ा सा साइलेंस ही मेंटेन हो गया। चलिए बस अभी उधर ही चलना है। पुराने जमाने के
(2:04:12) आदमी हैं। [हंसी] बस अंग्रेजों के जमाने के नहीं है। खत्म बिस्कुट कुछ नहीं है अब मेरे पास। और वर्मा जी एक चीज अब आप देखेंगे। हां जी। हां जी। आप देखना कि मैं हाफनी मुझे कब आती है। इतने वर्कआउट के बाद भी बहुत ज्यादा हाफनी आती नहीं है। जब स्पिरिचुअलिटी की बात आती है गुरु जी तो सारे संत ही कहूंगा मैं तो बहुत सारे
(2:04:56) नहीं। शरीर की बात ही नहीं करते हैं। फिटनेस की बात ही नहीं करते हैं। जबकि शरीर जो है आत्मा का निवास स्थान है और हृदय में जो ईश्वर है उनका भी मंदिर है। ये तो हम ही लोग बोलते हैं योगी लोग। हां जी। तो मशीनें तो ठीक है हमारे जिम में। बहुत सुंदर बहुत अद्भुत है। जी। थैंक यू। श्मशान में है। गुरु जी पहले दीपक जी की जिम थी। हां अभी इन्हने बताया देखो जो जिम करता है वो अपना विकास चाहता है तो शरीर से ही शुरू करता है। सही बात है। जो कसरत नहीं करता वो कहे मैं विकास कर
(2:05:40) रहा हूं तो वो मानना मत उसकी बात को। अभी यहां बड़े प्रचलित चल रहे हैं एक संत प्रेमानंद जी। जी हां, बहुत प्रसिद्ध है वो। उनके बारे में क्या आपके विचार हैं? मेरे बहुत अच्छे विचार हैं उनके बारे में। देखिए बाकी जो लोग कहते हैं उससे मुझे कोई मतलब नहीं है। मैं उनकी एक विशेषता पर आपका ध्यान आकर्षित करूंगा। बीमार है उनकी दोनों किडनियां फेल है। और जो हम पिछले सालों सालों से देख रहे हैं। कई दशकों से ज्यादातर कई संत और महात्मा वेदांता में जाकर मरे। प्रेमानंद जी वृंदावन छोड़ नहीं रहे। यह उनकी सुनताई का एक बहुत बड़ा प्रमाण हमारे सामने है। एक रमेश बाबा है बरसाने
(2:06:26) के। वह भी बरसाना नहीं छोड़ते। बोले हमें मरना ही ब्रज में। बाहर गए वही मर गए। फिर तो प्रेमानंद जी की हमें विशेषता माननी पड़ेगी कि वो भी वृंदावन का त्याग नहीं कर रहे। भले ही इलाज के नाम पर हो या किसी और के नाम पर हो। तो इतना काफी है। क्या बात है। और क्या संताई चाहिए? [हंसी] ये ग्रास रोड लेवल की है। ये बिल्कुल सत्य कह रहे हैं। अब वो क्या बता रहे हैं? नाम जप बता रहे हैं। जो बता रहे हैं भाई जो इसका अभ्यास उन्होंने किया है वो वो बता रहे हैं। वही तो आदमी बताएगा जिसका अभ्यास करा होगा। आपने कभी करा नाम जप आपने कभी देखिए योग में बोला भी है ना पिछली बार भी
(2:07:06) तन जपस तदर्थ भावनम। आ जाओ आ जाओ। और अजपा तो स्वास के साथ है ही जो अपने आप अंदर चले जा रहा है। नहीं उसकी फिर वो उसकी गहराई बहुत है। ये तो प्रारंभिक बात है। जैसे आपने ए बी सी डी पढ़ ली तो आप अपने को अंग्रेजी भाषा का ज्ञाता नहीं घोषित कर सकते। वो तो शुरुआत है। हम इसी प्रकार अब आप एक पुराने जमाने के आदमी की कसरत करके देखो। बताइए आप ये करके देखिए। और इसमें और इसमें अभी फर्क क्या है? ऐसे। ये ट्राइसेप एक्सटेंशन। ठीक है जी। आ कौन थोड़ा पीछे थोड़ा आप आगे आ जाओ। और ज़रा बताइए। बस अब नीचे लाइए। ट्राइसेप पे ज्यादा जोर आ रहा होगा।
(2:07:50) आ रहा है? इतनी सी बात [हंसी] है बस। सारा तंत्र का खेल है टेक्निक का। आ रहा है। सच में बहुत ज्यादा आ रहा है। यही बात है बस। थोड़ा सा 1 इंच और ऊपर को लाइए। बस बस बस बस। एक दिन पीछे रखी फर्क पड़ गया [हंसी] यही बात है बस और जिंदगी में रखा क्या क्या बात है क्या बात है सारा कुछ मॉडर्न है क्या बात है मैंने बताया आपको एक योगी का मैंने किया वो मेरे को कहने लगे पहले तेरे को वहां आना पड़ेगा 14 किमी पहाड़ पे चढ़ना पड़ेगा
(2:08:34) अपने से डबल बोरी लाद कर क्या फिर जब शरीर सदेगा तभी मन सधेगा वो कह रहे हैं ये तो मारपा ने मिलारेपा से भी करवाया था ये तो पुरानी बात है और आप अपने शास्त्रों पे चलिए ना शरीर माध्यम खलु धर्म साधन शरीर ही माध्यम है सारे धर्मों के साधन का माध्यम ही बिल्कुल सडियल और झड़ होगा तो फिर क्या धर्म का साधन होगा कुछ नहीं फिर आप जो है शरणागति में जाएंगे हमारा ये कहना कि हम छोटी मोटी बातों के लिए प्रभु को क्यों तकलीफ दें? हम खुद ही झेल है जो हम झेल सकते हैं। और वो देख ही रहे हैं। तो जब मौका पड़ेगा तो वो खुद ही ध्यान रखें। बार-बार उनको
(2:09:17) चिल्लाने की जरूरत क्या है? ये आपकी 56 ऐज की फोटो है। जी। और घर जो लगी है वो 68 इयर्स ऐज की फोटो है। तो कोई चेंज तो है नहीं। सेम है। हम लगभग इसमें कट थोड़े से ज्यादा [हंसी] तो आपने कभी आज तक कोई ऐसा सप्लीमेंट्स प्रोटीन कुछ भी कुछ नहीं ट्राई भी नहीं करके देखा आपने दो दिन ट्राई करा था तो मुझे अच्छा नहीं लगा पसीने में बास सी आने लगी छोड़ दिए दाल रोटी खाओ प्रभु के गुण गाओ दाल रोटी खाओ प्रभु के गुण गाओ एक आए पौराणिक एक शास्त्री उन्होंने सब
(2:10:04) पुराणों पर मास्टरी थी। मेरे अंदर उनसे ज्यादा ज्ञान था। उन्होंने खूब पुराण बोले। मैंने ये सब बात ठीक है। क्या आपने मसल पुराण पढ़ी है? बोले ये कौन सी पुराण है? चल [हंसी] मैं थोड़ा सा इरिटेट हो गया था। आपने पढ़ी मैंने मेरे पास है। मैं दिखाता हूं। तो मैंने आर्नोल्ड स्वार जनक जर का एनसाइक्लोपीडिया मॉडर्न बॉडी बिल्डिंग दिखा। ये देखो मसल पुराण और ये ऋषि आर्नोल्ड हुए [हंसी] मैंने कहा ये 19वीं पुराण है जो हमने पढ़ रखी है। पढ़ना जरूरी है। पाना जरूरी है। पिछली बार जब मैं आया था मैंने जिम देखा
(2:10:56) आपका। तभी मेरा था कि मैं अगली बार आपके साथ जिम करते हुए अरे जरूर व्हाई नॉट गर्मी सर्दी बरसात ये चालू रहता है इसमें कभी भी अपन कभी आपने छुट्टी नहीं ली आज तक नहीं ली नो नो हमारे चक्कर में ये लोग और फंसे हुए हैं। वर्मा जी ये डमरू वाले के हाथ है जांच मजीरे वाले के नहीं। क्या बात है [हंसी] ठीक है। आ गए [हंसी] बहुत सारे लोगों को जैसे गोश पोजीशन स्तंभन क्रियाएं हां ये
(2:11:46) श्मशान की भूत ले जाइए दे दीजिए तावीज में भर के पहन लेंगे तो प्रोटेक्शन हो जाएगी क्या बात है एक्चुअल आज मैंने आपको तो बड़ा सोफेस्टिकेटेड डायलॉग हां जी नहीं तो वर्मा ये शुक्ला जी हैं इनको मैं अलग देता हूं कुंवर साहब यह कुंवारे का हाथ है शादीशुदा का [हंसी] नहीं आपने सोचा नहीं कभी इस बारे में जो आपने अभी डायलॉग मारा देखिए बेरोजगारी इसीलिए रखी बेरोजगारों से कौन रिश्ते लाता [हंसी] अच्छे लड़कों से कोई शादी नहीं करता। क्लर्क से, सरकारी अफसर से, बिजनेसमैन से,
(2:12:33) प्रॉपर्टी वाले से शादी के ऑफर आते हैं। शादी नहीं करता ये आपकी चॉइस थी या सामने वाले की? ये मुझे लगता है कि ऊपर वाले की चॉइस थी। और अपन उसकी चॉइस पे ही चलना पसंद करते हैं। मन माना आचरण गीता भी कहती है। इस लोक में और उस लोक में शांति प्रदान नहीं करता। 16 अध्याय के एंड में पढ़िए। प्रभु की जो इच्छा है संभोग से समाधि वो तो फ्रॉम संभोग टू समाधि वाली बात थी लोगों ने कहा कि थ्रू संभोग तो ये पॉसिबल है वैसे थ्रू संभोग हां जी इसमें गोरख है वचन मैं कोट कर दूंगा ऑफ द कैमरा ठीक है [हंसी] घोसला जी ये शादीशुदा के हाथ नहीं है [हंसी]
(2:13:19) ये बात मैं सिर्फ शादीशुदाओं के ही सामने प्रेरित करने के लिए [हंसी] अंकुर यार प्रेरित करने को बचा क्या है? ये मैं सोचता दूसरी शादी के लिए ये गुरुजी एक बार ऑन करो। ये आपको मिलवाना चाहता हूं। ये बहुत बड़े कॉमेडियन है इंडिया के। Netflix पे भी आते हैं। अंकुर पाठक जी। अच्छा अच्छा। हां। ये सीए टॉपर मूवी आई है और चीजें आई है उनमें। मैं मिलवाता हूं गुरु जी से आपको। ठीक है। हां जी। हां जी गुरु जी। प्रणाम। खुश रहिए। [हंसी] हंसते रहिए, हंसाते रहिए। अरे बहुत-ब धन्यवाद। ये आज आने वाले थे। इनका शूट आ गया। चलिए बहुत देखिए हमारे आने के नाम पे ही
(2:14:03) शूट आ गया। [हंसी] ठीक है। अंकुर भाई। ऑल द बेस्ट। ठीक है। थैंक यू। थैंक यू। ओके। [गहरी सांस लेने की आवाज़][अचानक ज़ोर से सांस लेने की आवाज़] कितने हो गए यार आज गिन ही नहीं पा रहे तीसरा तो आपने इतने पॉडकास्टर देखे करे मतलब हां जी ये नहीं देखा मैंने ये नहीं देखा मैं इसलिए ही बात करना चाह रहा था अगर मैंने देखा भी तो मैंने एक ऐसे योगी देखे जो बिल्कुल ही श्रिंक थे हम 53 किलो, 54 किलो, 55 किलो ये भी मेरी
(2:14:51) समझ से बाहर है। ऐसा क्यों? योग ही सडोल मिलेगा। चौड़ी छाती हो जाएगी, पेट पतला हो जाएगा। ये तो सिर्फ योग साधना से ही हो जाएगा। और गोरखनाथ की मैंने परिभाषा आपको बताई थी। योगी है तो बड़ा नहीं देखना चाहिए। तो उनके वचन अपने लिए प्रमाण है। यह जरूरी नहीं है कि इतनी नसें चमके। [हंसी] जरूरी नसे चमकना नहीं है गुरु जी। कंडीशनिंग जरूरी है। 70 की उम्र में नसें चमकना बहुत तो [हंसी] बाबा जी ने हाथ रखा है तब से ही
(2:15:34) साला चमत्कार हुआ। नहीं तो पता नहीं क्या होता। अभी बच गए। ये अभी 68 कौन बताएगा। हां। अब 69 पे देखते हैं क्या फोटो आते हैं। अब मैं भी बंद कर दूंगा फोटो खिंचाना। नहीं ये तो आपको खिंचवाते रहना चाहिए आगे को प्रेरणा देने के लिए। नहीं नहीं उसमें ईर्ष्या की लहरें भी बहुत उठती है। [गहरी सांस लेने की आवाज़] आ जाओ जी आप भी दो नंबर। जाओ ना एक बार लो मैं इनको कह रहा हूं
(2:16:22) और इनको मैं दूसरा डायलॉग बोलता हूं हमारे किसी जानने वाले के चिया ससुर की ऐसी नसे नहीं होंगी बात है बिल्कुल सत्य है ये भी [हंसी] क्या पता नशे निकालने की बात कर चल रही हो तो नस की जगह लोग नशा करने लगे। गलतफहमी हो ही जाती है। गलतफहमी हो ही जाती है समय-समय पर। यार मर गए आज गर्मी बहुत है। हां जी। आज गर्मी बहुत है। जी गुरु जी। आई है। बहुत गर्मी है आज। बारिश उड़ा दीजिए ना छुट्टी हो जाए। पर अपन ने कहीं कट कॉर्नर तो नहीं करा? ठीक है।
(2:17:25) जबरदस्त। थैंक यू। हम भी बाय गुरुदेव बंदे हैं। शायद ही आज आपका यह रूप पहली बार ही किसी पडकास्ट पे आ रहा हो मैं भी वरना अ लोग बड़ा सीरियस आपको बहुत ही ज्यादा कि स्पिरिचुअलिटी का मतलब यही है कि एक सीरियस फेस हां रोना सा मुंह बनाए रहो ओवर सीरियस मुंह लेके बात करो और कुर्ते पजामे में किसी को जिम करते हुए भी आपने नहीं देखा होगा।
(2:18:10) मैं तो पहले कुर्ते पजामे में ही सोचा था अभी जिम करने के लिए आपके साथ। बेस्ट है पर ये बेस्ट है। ड्रेस चलिए आज का जिम का एंड देन का था। आइए अब बजरंगबली की जय होगी। चक हुआ। बोल बजरंगबली की जय। क्या बात है। बोल बजरंगबली की
(2:18:59) जय थैंक यू क्या बात है डन सो नाउ आई विल मेक अ स्टेटमेंट द मोस्ट मोस्ट ब्यूटीफुल प्लेस ऑन दिस प्लेनेट। क्या बात है। यू आर लुकिंग एट इट। बहुत ही सुंदर। बहुत ही मजा आया। थैंक यू आपके साथ। [हंसी] मुझे तो सबसे ज्यादा मजा नसें दिखाने में आता है। रेयर रेयर है। और हां। आपके अंदर एक चीज जो है इनोसेंसी। ओ थैंक यू। थैंक यू। वो सबसे ज्यादा यह भी कृपा ही है गिरिराज जी की कि उसकी कोई उसकी कोई रिप्लेसमेंट नहीं
(2:19:44) है। थैंक यू। इट्स अ बिग कॉम्प्लीमेंट। डन डन। तो आप चाहे तो ब्रेक लें, चाहे तो एक कप चाय पिए जो चाहे आप करिए। ठीक है जी। [हंसी] नहीं कॉफी बहुत हो गई आज। चलिए फिर ओके। माय डिसाइपल। शी इज अ इंटरनेशनल फेमस फायर डांसर। एंड ए वेरी वेरी गुड योगी। शी इज एक्सपर्ट इन योगा पोश्चर इनली इन एवरीथिंग एंड शी इज एडवांसिंग वेरी वेल इन क्रिया योगा एंड शी इज मदर ऑफ थ्री डॉटर्स एंड शी इज़ डांसिंग हियर विथ ए सर्टेन रिसोल्व ऑलमोस्ट वन ईयर नाउ यस यस एववरीडे एव्रीडे
(2:20:26) एंड आई थिंक इट इज़ अ बिग प्रिविलेज फॉर मी टू वाच हर परफॉर्म एवरीडे जस्ट बिफोर यू कैन आस्क एनीथिंग यू वांट टू आस्क हर एक्चुअली एक्चुअली दे नीड टू रिकॉर्ड सम एनी एक्सपीरियंस ऑफ़ लॉर्ड्स विद गुरुजी एंड व्हाई वी स्टार्टेड द डांस और एनीथिंग बिफोर बिफोर दिस यू कैन जस्ट से दैट यस यस गुरुजी ओके बिफोर बिफोर दिस एक्सपीरियंस ऑन शमशान डांसिंग आई एम डांसिंग मेनी इयर्स ऑन सेंटर ऑफ सेंट पीटर्सबर्ग नियर वसोबा स्क्वायर नियर विंटर पैलेस एंड सेंट पीटर्सबर्ग एंड एंड मेनी मेनी परफॉर्मेंस नॉट ऑन देयर इन वेरी फेमस प्लेसेस इन सेंट पीटर्सबर्ग एंड आई वांट
(2:21:15) टू से दैट आई एवरी आई वेरी गुड नो माय लिमिटेशंस लाइक अ डांसर बिकॉज़ एंड आय एम अ मदर ऑफ़ थ्री चाइल्ड एंड आई एम 42 इयर्स ओल्ड एंड [हंसी] अ लिटिल बिट हियर मे बी अह टू और थ्री ईयर आई आई डिडंट एक्सपेक्ट इट दैट इट विल बी माय माय सेकंड ब्रेथ इन माय लाइफ ऑफ़ डांसिंग एंड गुरुजी गिव मी अब्सोल्युटली न्यू लेवल ऑफ़ डांसिंग एंड आई एम अब्सोलुटली श्योर दैट इट इज़ गुरुजी पावर पावर ऑफ़ गुरुजी अब्सोर्विंग बिकॉज़ व्हेन आई एम डांसिंग एवरीडे आई एम आई एम आई कैन नॉट डांस लेस देन 1% एवरीडे इज़ 1% दैट्स व्हाई माय सपोर्ट
(2:22:05) माय डेवलपिंग दे थिंक इज मच हायर दैट आई कैन इमेजिन एवरीडे गुरुजी थैंक यू थैंक यू एंड आई विल कोट जस्ट वन थिंग एज क्वांटम फिजिक्स टेल्स अस ए पार्टिकल चेंजेस इट्स बिहेवियर इफ इट इज़ बीइंग ऑब्जर्व सो आई एम ऑब्जर्विंग डांस इज़ गेटिंग बेटर एंड बेटर एंड बेटर एंड आई होप इट विल बी इवन बेटर इन फ्यूचर एंड समटाइम्स इट फील लाइक लाइक चेंजिंग माय रियली सो डीप दे चेंजिंग पार्टिकल्स नॉट ओनली टेक्निक ऑन मास्क इट इज लाइक चेंजिंग यस वै डीप थैंक यू गुरुजी थैंक यू डन
(2:22:49) व्हेन यू फर्स्ट डांस्ड व्हेन यू फर्स्ट डांस्ड हियर व्हाट वास योर एक्सपीरियंस फर्स्ट डांस हियर इट वास समथिंग आई हड परफॉर्मेंस इन अ वेरी अह ग्रेट डज़ ऑन रश फॉर एग्ज़ांपल वन माय मोस्ट बिग परफ़ेंस इन अह डे ऑफ़ मॉस्को बेस डे एंड इट वाज़ अ वेरी बिग स्टेज एंड मेनी थाउजेंड्स ऑफ़ पीपल एंड हेलो मॉस्को एंड ओह एंड मेनी मेनी बट गुरुजी अटेंशन इज़ मच मोर पावरफुल। दैट्स व्हाई आई वास ऑल ऑल इनसाइड माय ऑल ओनली अटेंशन। आई आई एम नॉट रिमेंबर माय डेंस ओनली जस्ट अटेंशन [हंसी]
(2:23:33) थैंक यू वेरी अटेंस अटेंशन थैंक यू वेरी गुड ओके चलो डन फॉर वन ईयर रोज एवरीडे आपके लिए क्या है आपके लिए ये परफस क्या है मेरे लिए कला है और श्मशान में जिनको डांस करने का मौका मिला है बिना शिव जी की इच्छा के संभव नहीं तो मैं आई थिंक शिवाज ग्रेस इन ऑन हर शिव जी की कृपा है। यस यहां हर आदमी परफॉर्म नहीं कर पाता कुछ हो जाता है। इतना कंटीन्यूअस परफॉर्मेंस का मतलब ही है इन पर शिव और शक्ति की कृपा है। जब आप देखते हो इनकी परफॉर्मेंस क्योंकि
(2:24:18) मैं आपको देख रहा था। आप आप एक साल से रोज एक परफॉर्मेंस देख रहे हो। लेकिन आपके कॉन्शियसनेस में दिख रहा था कि आप फर्स्ट टाइम देख रहे हो। उस परफॉर्मेंस में डूब रहे थे आप। मुझे रोज ऐसे ही लगता है एवरीड। क्योंकि डेली परफॉर्मेंस इज डिफरेंट। आई एम डिफरेंट। शी इज़ डिफरेंट। एवरीथिंग इज डिफरेंट एवरीडे। क्या बात है। सो इट्स अ न्यू थिंग एवरीडे। दैट्स इट्स अ बिग प्रिविलेज। बड़ी बात है ये। थैंक यू। पूजा के पूजा में जाते हैं। गुरु जी जिस वक्त पूजा में जाते हैं उस वक्त सिर्फ किसी भी शिष्य को या किसी को भी भैररो बाबा की तरफ जाना अलाउड नहीं है।
(2:25:00) गुरु जी ही जाते हैं। और मेरा असिस्टेंट तक हुआ क्या? बहुत पहले इनके पिताजी उमाशंकर शर्मा पुराने शिष्य हैं हमारे। उस समय तक मुझे पता नहीं था इस बात का। हां कि यहां क्या होगा? तो हम जा रहे थे पूजा करने। उनकी आवाज वगैरह आई। मेरी बहन ने सुनी तो उन्होंने कहा जाया करो वहां। तो इनके पिताजी बोले भैरव बाबा हमारे भी इष्ट है तो हम भोग बनाकर ले चलते हैं। चलो तो वह मुठिया के लड्डू बनाकर ले गए। हमने पूजा करी जैसे बताई गई थी मुझे वहीं उनको 107 डिग्री बुखार चढ़ गया एक मिनट के अंदर। वहीं पर ही वहीं पर ही और बिल्कुल हिलते हुए आए बड़ी
(2:25:40) मुश्किल से और उल्टियां शुरू हुई। रात भर में कम से कम मोर देन 200 उल्टियां उन्होंने करी। मैं बैठा रहा। मेरी बहन बैठी रही। डॉक्टर हमने बुला लिया। ना बुखार कम हो ना उल्टी बंद हो। सुबह खबर आई कि उनके इनके ग्रैंड फादर गुजर गए। फिर मैंने कहा ये भैरव बाबा को चक्कर है तो मैंने उनसे कहा यहीं से तुम क्षमा मांग लो। फिर लेके गए वहां जाके ठीक हो गए। फिर एक और है निहार मुखर्जी बंगाल के। तो मुझे मैसेज मिला इनका कि रात को मैं यहां घूमूंगा और कुछ बात करूंगा आपसे। कोई कमरे से निकले ना और वह बेचारे सीनियर आदमी तो उनको निकलना पड़ा। सेम कंडीशन 160 डिग्री
(2:26:25) बुखार दो 250 वोल्टी फिर उन्होंने नाक रगड़ी नाक रगड़वाई सुई ठीक हो गए। अच्छा मैंने कहा यार ये खतरनाक चीज है। उधर जावे ही मत कोई नहीं जाता उधर। और भी कुछ लोग गिर पड़े। किसी का फ्रैक्चर हुआ तो 800 साल से ज्यादा पुराने उनका वो है। यहां से पुराने ऐसे गुरु जी नेचुरल जितने भी रिचुअल्स हैं आप इनको मानते हैं वैसे हर क्रिया की प्रतिक्रिया होती है। जो तंत्र बनाना है इन सबको सारे सारे अगर आप ठीक से जानते हैं तो उसका प्रभाव तो अपनी जगह होगा ही। अच्छा श्मशानों में अंदर मंदिर होते नहीं है तो यहां सिर्फ भैरव बैठे हुए थे। 800 साल पुराने राजाओं ने भी नहीं छेड़ा
(2:27:12) उनको। फिर उन्होंने बातचीत करी तो हम भी पूजा करते हैं रोज। उन पर एक बोतल डेली चढ़ती है शराब की। मिला देता हूं मैं तो रोज डेली वन पोर्टल ए डे। वन 28 साल से एक पआ और एक इंग्लिश। तो मेरे ख्याल से 28 साल में मोर और लेस अगर हिसाब लगाएं तो आठ टन बह गई शराब। बाकी फिर शिव जी प्रकट हुए तो स्वयंभू शिवलिंग मिला वह अलग है। जिन जिन से साक्षात्कार हुआ है यहां सिर्फ उन्हीं की पूजा है बस और किसी की नहीं। बहुत सारे तांत्रिक आते हैं मेरे पास।
(2:27:56) जी। जो कहते हैं हमने 15 प्रेत सिद्ध करे हुए हैं। हम कच्चे कलवे सिद्ध है, लिलीपोट सिद्ध है। पैसे इधर से उधर ट्रांसफर कर देते हैं। इन बातों को क्या मानते हो आप? देखिए पैसे ट्रांसफर करने वाले तो एक गुर्जर बाबा ग्वालियर में थे। वो मैंने देखे हैं। तो ये संभव है। संभव है। हां हां। वो कोई भी चीज मंगा देता था। पैसे लाओ कीमत ली हवा में फेंके। पैसे गायब वो चीज गिर गया। अच्छा। हां हां ये देखा हुआ है हम लोगों ने। यह जगह बड़ी भयानक है। एक तो श्मशान में आप बैठे ही हो। पीछे और एक डेढ़ बीघा है हमारी। वो 6 700 साल पुरानी बच्चों की घड़
(2:28:39) जहां मैं आपको इन्होंने बताया था मुझे तो वहां पे कच्चे कलवे जैसी चीजें हैं। बहुत सारी वहां तो बहुत ज्यादा ही चक्कर है। वहां तो जाते ही डर लगता है लोगों को। तो वह जगह हमने पूरी कवर करी हुई है, बाउंड्री करी हुई है। उधर कोई जाता भी नहीं है। अजगर आते जाते रहते हैं। वहां अजगर बहुत आ गए। अभी बताया उन्होंने सात आठ अजगर मिले थे वहां पे। वो अंदर आते हैं तो पकड़वाते हैं। बाहर रहते हैं तो नहीं छेड़ते। मैं मैं आपको सुबह मैंने आपको सुबह बताया था यह एक अखंड
(2:29:31) ध्वनि है। गुरुजी रोज इसी टाइम पर आकर बेनागा यहां इसी प्रोसेस से इनकी पूजा करते हैं। अलग ढंग से पूरे मतलब जैसा कि गुरुजी ने बताया था उस वक्त हम काफी छोटे थे। जब बताया था तब काफी टाइम लगा था इसकी सामग्री इकट्ठी करने में। धोनी के नीचे क्या है? कुछ स्पेशल कुछ भी बना के और कैलकुलेशंस के साथ में उन्होंने ये धोनी बनाई थी। जब स्वयंभू शिवलिंग मिला था स्वयंभू ये क्या है जो बजा रहे हैं? ये हम जो गांधी मैंने आपको बताए थे ना हम उसका सींग है ये। सींग ही बजा रहे हैं। ये तो ये जो आप थाली देख रहे हैं इसमें
(2:30:42) पंचामृत है। शिव जी का प्रिय है। दूध के अंदर भांग भी है जो शिव जी की प्रिय है। दिख रही है मुझे। दूध के अंदर भांग भी है और बाकी जो पांच चीजें जो शिवजी पे चढ़ती है वो दूध भी वहां रखा हुआ है। ये तो भांग बनाई हुई है। दूध वहां रखा हुआ है। वो भी एक सिं है चांदी की जो गुरुजी ने बनवाई है। ये यही स्वयं वो शिवलिंग है जो गुरुजी को मिले थे। बोलो की जय [संगीत]
(2:32:14) एनर्जी एनर्जी यहां पर मेरे को फील हो रही है खुद बहुत ज्यादा एनर्जी शिव की एनर्जी [संगीत] ध्यान चमेली का तेल है
(2:33:05) चमेली का तेल [संगीत] चने चंद चाल [संगीत] हैप्पी मोमेंट हैप्पी मोमेंट जी आ गए
(2:33:58) भैरव जी लेटे हुए हैं। एक राकेश हैपिक शूट हो गया। आंखों में आंसू आ गए मेरी ये देख के। अलग ही एनर्जी, अलग ही फील। रोना आ रहा है अभी बहुत ज्यादा। ऐसा लग रहा है सब कुछ हल्का होता जा रहा है। अगली शिवरात्रि में माल बदल देंगे। ओम
(2:34:58) [संगीत] ट्रैफिक
(2:36:39) बोलो जय महाली अभी इनके पीछे नहीं जाना है बिकॉज़ अभी भैरव के बारे में आपने किसी से सुने होंगे तो ये भैरव पे जा रहे हैं। अभी और भैरव ने बताया था कि बहुत ज्यादा लोग जो भी जाते हैं इनके अलावा जो भी जाता है वहां पे थोड़ी सी पैरानॉर्मल एक्टिविटीज उनके साथ होने लग जाती है। कुछ गलत तो नहीं है [संगीत] बजा रहे हैं।
(2:37:27) अवतार बाबा जी [संगीत]
(2:39:49) रूप हनुमान है ये और गुरु जी इन पर सिर्फ [संगीत] [संगीत] पूजा के पूजा होती है सीधे आ जाते हैं तो आप हमारे साथ चल लेना की पूजा कवर करने के लिए [संगीत] [चीखने की आवाज़]
(2:40:59) आई होप ये पडकास्ट जितना सुंदर हमने इसको बनाया है, जितनी मेहनत हमने इसको बनाने में आपके लिए की है। चाहते हो अगर ऐसी एपिसोड्स और सीरीज देखना तो एव्री वीक मैं आपसे वादा करता हूं टॉप इंडिया के स्पिरिचुअल गुरुस जो ओरिजिनल स्पिरिचुअल गुरुज हैं उनकी कंटिन्यू सीरीज आती रहेगी। सब्सक्राइब करना इतना ज्यादा मैंडेटरी है। लाइक और शेयर करना इतना ज्यादा मैंडेटरी है। कमेंट्स में भरभ के लिख देना हर हर महादेव। मिलता हूं आपसे किसी और पडकास्ट में। क्या था इस पॉडकास्ट का सबसे बेस्ट पार्ट? मुझे जरूर कमेंट्स करके बताएं। [गहरी सांस लेने की आवाज़] हां, अभी हम
(2:41:44) खड़े हैं। इंडिया के सबसे रॉयल श्मशान घाट में सीधे यहां से आपके लिए गुरु जी की सारी डिटेल्स आपको डिस्क्रिप्शन में मिलंगी। जरूर जाके इनसे कनेक्ट करें। मिलता हूं आपसे किसी और पडकास्ट में। तब तक के लिए मेरा प्यार भरा नमस्कार।
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