Gym, Supplements, Muscle Building- Do Not Repeat These Mistakes | Yatinder Singh With GunjanShouts
Author Name:GunjanShouts
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Transcript:
(00:00) हर लड़के की यह विश होती है कि एक अच्छी फिजिक हो। अच्छा दिखे। सो विश इज देयर। नॉलेज अवेयरनेस इज देयर। रिसोर्सेज भी हैं बट तब भी रिजल्ट्स नहीं है। वेयर डू यू थिंक इज द गैप? क्यों नहीं कर पा रहे हैं ये? उनका ब्रेन चाहता है 12 हफ्ते या 16 हफ्ते में ट्रांसफॉर्मेशन हो जाए। बट उनकी बॉडी बोल रही है कि मैं 12 16 हफ्ते में नहीं हो पाऊंगी। ओह हो 40 दिन तो त्यौहारों में निकल गए साल में। बेटा एक काम करो तुम दिवाली मनाओ। भाई की शादी में जाओ। तो कंसिस्टेंसी का सीक्रेट क्या है? यू जस्ट नीड वन थिंग। फिटनेस इस टेबल के ऊपर की बात हो रही है।
(00:36) बॉडी बिल्डिंग इस टेबल के नीचे की बात कर रहे हैं। सो दिखने में तो बहुत ग्लैमरस है। इसका एक अदर साइड भी है। कुछ कॉस्ट्स भी है जो पे करनी पड़ती है। वर्कआउट करना क्या? खुद में एक सैक्रिफाइस नहीं है। 230 किलो वजन आपने यहां रखा। तुम जो ये जाते हो नीचे और जब तुम स्क्वाड के 90° पे हो। तुम्हें यमराज दिखते हैं और तुम्हें लगता है कि अब अगर नीचे रह गया तो भैया स्पाइन तो गई। इस तरह का बदलाव आपने एक्सपीरियंस करा फिटनेस में आने के बाद। जिम में जाके जब थोड़ा सा वर्कआउट किया तो मुझे लगता था कि ये चार दीवारी ये शीशे मुझे जज नहीं करते हैं और जितने भी यहां
(01:11) 20-25 लोग एक्सरसाइज कर रहे हैं। यह मुझे सहयोग करते हैं रेदर देन मेरी हाइट छोटी है या कॉम्प्लेक्शन डार्क है और हम एक अच्छा सा माहौल है। अब मुझे लगता है कि मैं कुछ भी कर सकता हूं। मुझे सिखाया गया कि फिजिकल अर्थ छाती चौड़ी होनी चाहिए, कंधे बाहर होने चाहिए। तो मैंने वो सीख लिया। बट एक चीज मिस हो गई क्या? किसी ने यह बताया ही नहीं कि यहां पे भी प्रेशर पड़ता है। तो मैंने कहा हां इसके लिए क्या करना पड़ेगा? क्योंकि मुझे तो आता ही नहीं है। बट मैं तो इनका माचो मैन हूं। अब माचोम मैन कैसे रो सकता है? मैंने कहा कोई बात नहीं। Google पे
(01:46) जाते हैं माचोमैन की डेफिनेशन पढ़ते हैं। मैंने माचोमैन की जो डेफिनेशन पढ़ी मेरे को बहुत दुख हुआ। मेरे को ऐसा माचोमैन बिल्कुल नहीं। ज्यादा स्टेरॉइड्स लेने की वजह से ये सब होता है। मैं ये कहना चाहता हूं आप फिट बनना चाहते हो। एक अच्छी स्ट्रांग फिजिक चाहते हो। आपके माइंड में इमेज भी है कि मुझे ऐसा बनना है और आपको नॉलेज भी है। आपको सारा ज्ञान है कि मुझे क्या करना है, क्या खाना है, कौन सी एक्सरसाइजज़ करनी है। बट फिर भी नहीं कर पाते। शुरू भी करते हैं तो फिर कुछ ना कुछ प्रॉब्लम आ जाती है। कोई चैलेंज आ जाता है, कोई रीजन बन
(02:21) जाता है और जर्नी वहीं छूट जाती है। और आज के इस एपिसोड में हमने एग्जैक्टली यही सब चीजें डिस्कस की हैं कि किन कारणों की वजह से आपकी ये जर्नी बीच में ही छूट जाती है। कैसे आपने रियल लाइफ चैलेंजिस जैसे कि टाइम नहीं है, मूड नहीं है, एनर्जी नहीं है। इन सब से डील करके आगे बढ़ना है। और जो इमेज आपने सोची है उसको अचीव करना है। और इस डिस्कशन के लिए हु एल्स कैन बी बेटर देन यतिंदर सिंह हु इज मिस्टर इंडिया, मिस्टर एशिया, मिस्टर वर्ल्ड और लाखों लोगों की इंस्पिरेशन। हमारे इन पॉडकास्ट का एक बहुत ही क्लियर मिशन है इंडिया के टॉप फिटनेस एक्सपर्ट्स, हेल्थ एडवोकेट्स,
(03:01) डॉक्टर्स को हम आपकी स्क्रीन पर लेकर आते रहें ताकि आपको मोस्ट क्रेडिबल इंफॉर्मेशन का एक्सेस अपने घर बैठे ही मिल जाए। और इस जर्नी में हमें सपोर्ट करने के लिए आप चैनल को सब्सक्राइब जरूर करें। और चलिए आज का यह एपिसोड शुरू करते हैं। बहुत सारे क्वेश्चंस हैं मेरे आज फिजिकल हेल्थ, बॉडी, फिटनेस और साथ में मेंटल हेल्थ इन सब चीजों को लेकर। बट बिफोर दैट क्योंकि आज आप हमारे चैनल पे आए हो तो हो सकता है मेरी ऑडियंस में कुछ लोग ऐसे हो जिन्हें आपकी स्टोरी के बारे में नहीं पता
(03:45) हो। तो क्या ब्रीफ में एक बार क्विकली आप अपनी स्टोरी हमें बता सकते हो? मैं यूपी के छोटे से शहर सहारनपुर का रहने वाला हूं। एक जॉइंट फैमिली से बिलोंग करता हूं। और हम छोटे शहरों के लोगों को बड़े सपने देखने का अधिकार शायद खुद के मन से नहीं आया कभी या अराउंड की जो सोसाइटी थी जो कल्चर था उसने छोटे शहरों को लोग देख बड़े सपने देखने का अधिकार नहीं दिया बट बहुत छोटे से से ही कुछ तो मिसिंग था वन फाइन डे मैं अकाउंट्स की ट्यूशन पढ़ रहा था और मेरे साथ बैठा लड़का जिसकी थोड़ी फिजिक अच्छी थी मैंने उनसे पूछा भाई साहब आप क्या करते हो
(04:22) उन्होंने बोला बोला मैंने कहा आपकी फिजिक तो अच्छी है। हम तो उन्होंने कहा यार मैं जिम जाता हूं। तब मैंने जिम का पहली बार वर्ड सुना। आई थिंक क्या एज थी आपकी तब? मैं 11th के फर्स्ट ईयर में होऊंगा। अच्छा क्योंकि मैंने 11th जो है वो दो बार में करी है। फर्स्ट ईयर में फेल हो गया था बिकॉज़ ऑफ़ दिस ओनली। एंड ही इंट्रोड्यूस कि यार लिंक रोड पे एक छोटा सा जिम है। वहां तू चल मेरे साथ। अगले दिन उसके साथ गया। वर्कआउट किया और मुझे कुछ तो अच्छा लगा। हम बट फिगर आउट नहीं कर पाया कि यार ये एक दिन अच्छा लग रहा है या यह कंटिन्यू लगता रहेगा बट मैं उसको कंटिन्यू करता रहा
(04:57) महीना दो महीना और मुझे वो अच्छा लगा जो उससे पहले मुझे पढ़ाई से जो मिसिंग आउट था ना थोड़ा सा कहीं ना कहीं मैं मिस कर रहा था वो मुझे मिल गया रीजन बीइंग बचपन से ही थोड़ा हाइट में छोटा था कॉम्प्लेक्शन डार्क था और एक अपने अराउंड ही एक स्ट्रक्चर ऐसा बना लिया कि शायद मैं उतना अच्छा नहीं दिखता हूं और प्रेजेंटेबल नहीं हूं। बट जिम में जाके जब थोड़ा सा वर्कआउट किया तो मुझे लगता था कि ये चार दीवारी ये शीशे मुझे जज नहीं करते हैं और जितने भी यहां 2025 लोग एक्सरसाइज कर रहे हैं ये मुझे सहयोग करते हैं रेदर देन मेरी हाइट छोटी है या कॉम्प्लेक्शन डार्क है और
(05:34) हम एक अच्छा सा माहौल है हम तो बट वहां से मैं फिर सिर्फ एक्सरसाइज करने लगा और वो भी ये था 11th में हूं हम 12th करूंगा कॉलेज जाऊंगा और थोड़ा सा प्रेजेंटेबल दिखूंगा कपड़े पहनूंगा तो अच्छा लगेगा हम बट पता नहीं कैसे मे बी बिकॉज़ बिकॉज़ ऑफ़ जेनेटिक्स और मैं अपने दादा जी को बहुत मानता हूं। चौधरी हुकुम सिंह जी वो आज हमारे बीच में नहीं है। बट आई थिंक अगर आपके पडकास्ट में ये प्रश्न आएगा कि हु इज माय रोल मॉडल या मैं किसको फॉलो करने की कोशिश कर रहा हूं तो मैं अपने दादा जी को फॉलो करने की कोशिश कर रहा हूं। पता नहीं कितना कर पाऊंगा। ही इज़ द ओनली रोल मॉडल
(06:08) आई हैव। रियली। किस तरह से रोल मॉडल देखते हो आप अपने? आज सहारनपुर में जो हमारा घर है जिसमें 4050 लोग साथ में रह सकते हैं वो उनका बनाया हुआ है। लेट्स से मैं 82 बोर्न हूं। ओके। 82 में वो अगले 20 साल के बारे में सोच रहे थे कि उनकी जनरेशन कैसे-कैसे आगे बढ़ेगी। उनको क्या-क्या जरूरत हो सकती है। विजनरी थे वो। विजनरी थे और हाइट में लंबे थे। बहुत हेल्पफुल थे और लड़कियों के प्रति महिलाओं के प्रति उनका जो उनको सम्मान देने की उनकी जो दृष्टि थी वो तो अमेजिंग थी। मैं छोटे से से उनको देखता आ रहा हूं और मैं इस बात से प्रभावित हूं कि वो
(06:46) लड़कियों से जितना जितना हेल्प करते थे गांव में लड़कियों की शादियां करनी हो कुछ भी करना हो तो उनको फॉलो करने की कोशिश कर रहा हूं। बट बिकॉज़ मे बी उनके जेनेटिक की वजह से सम एक दिन सर ने मुझे बोला यतिंदर तुम एक बार टीशर्ट उतारना तो मैंने टीशर्ट उतार दी उन्होंने स्माइल कर दी और उन्होंने कहा पहनो और घर चले जाओ तो वो स्माइल ने सोने नहीं दिया अगले दिन मैंने कहा सर एक बात बताओ कि वो स्माइल के पीछे का रीज़न कह रहे क्योंकि जिन लोगों के साथ तुम वर्कआउट कर रहे हो उनकी तीन महीने में इतनी फिजिक नहीं बनी जितनी तुम्हारी बन चुकी है तो क्या तुम कोई एक्स्ट्रा डाइट
(07:24) ले रहे हो जो मैंने नहीं बताई या तुम कुछ और एक्स्ट्रा कर रहे हो। मैंने कहा नहीं नहीं सर जो आप बताते हो लोहे को जिस तरीके से उठाना है मैं वैसे ही उठाता हूं। आपने बोला क्योंकि मैं इनिशियल लेवल पे वेजिटेरियन था कि इतना पनीर खाना है ये खाना है। वो सब करता हूं। बट फिर उन्होंने बोला कि तेरे को कंपटीशन खेलना चाहिए। 1999 में मैंने पहला कंपटीशन खेला। ये टेबल थोड़ी छोटी है। इससे चार गुना बड़ी टेबल होगी। वो एक स्टेज थी। 2025 लोग थे। मैंने कॉम्पटीशन खेला और मैं लकीली वो कंपटीशन जीत गया। आई थिंक वो एक दिन था जब से मुझे लगा कि यार
(08:00) आई थिंक ये एक चीज है जो मैं आने वाले फदर लाइफ लॉन्ग करना चाहूंगा। दैट्स बॉडी बिल्डिंग। आप लगभग 20 साल के थे उस वक्त ना तो मैंने सोचा नहीं यार ऐसे तो काम नहीं चलेगा। अमर उजाला अखबार आता है सहारनपुर का। उसमें फ्रंट पेज पे फोटो कैसे आएगी? अच्छा तो मैंने उसके बारे में थोड़ा सा पढ़ने की कोशिश की तो मुझे लगा कि अगर मैं मिस्टर सहारनपुर बन जाऊं तो मेरी एक अच्छी सी फोटो आ जाएगी। तो मैं 2001 में मिस्टर सहारनपुर बना और एक फोटो आई अमर उजाला में और वो मैंने अपने दादा जी के सामने रखी और उनकी स्माइल और उनके चेहरे पे वो जो खुशी
(08:38) थी हम आई थिंक मुझे लगता है वो मेरी अब तक के हिस्ट्री का वो बेस्ट डे था जब उन्होंने बोला कि पोता हो तो ऐसा क्या बात है ठीक है ये मेरे खून में है बस जब तुम लोहे से लड़ते हो तो तुम्हें एकदम सब कुछ नहीं मिलता मैं ऐसा मानता हूं और बहुत पुराने टाइम से हमें वैसे ही स्ट्रक्चर किया गया है हम कि जो लोहा होता है हम हैं हम उसमें शनि का वास होता है और वो किसी और के लिए नॉन लिविंग थिंग हो सकती है हम बट यू फील इट अ लिविंग थिंग यानी जब तुम आयरन के साथ वर्जिश कर रहे हो तो तुम उससे कितनी गहराई में जाके बातें कर सकते हो कि तुम्हें क्या चाहिए
(09:21) हम तो वो आयरन भी तुम्हें देगा तो आई थिंक मैंने लोगों से कम कम्युनिकेट किया बट मैंने जिम में रह के 8आ घंटे 99 घंटे रात को 9:00 बजे जिम घुसा हूं और सुबह 4:30 बजे जब मुझे लगा थोड़ी रोशनी हो रही है यानी उससे मुझे पता चला सुबह हो गई यार मैं पूरा बॉडी ट्रेन कर चुका हूं चेस्ट बैक शोल्डर लेग्स मतलब सब जितनी मुझे जितने तरह की मुझे एक्सरसाइज आती थी बट उसमें मेरा यह था कि मैं कम्युनिकेट बहुत बेहतर तरीके से करता था कि मुझे वर्ल्ड चैंपियन तो चलो अब पता चला हमें बट मुझे मुझे लगा कि मुझे अपनी शख्सियत को निखारना है और यह आयरन मुझे वो देगा जो मुझे
(10:00) चाहिए। तो किताबें नहीं पढ़ी ज्यादा और कॉलेज भी इसीलिए चला गया जस्ट बिकॉज़ ऑफ कंपटीशन खेलने थे। बट हां मैंने आयरन को बहुत अच्छे से पढ़ा है। आई थिंक इसीलिए आपको रिजल्ट्स मिले और इसीलिए आपने इतने चैंपियनशिप्स जीते। बिकॉज़ आप उसको एज अ कोई मटेरियल या लोहा नहीं देखते हो आप उससे। बात करते हो। हां। किस तरह की कन्वर्सेशन होती है ये? मतलब क्या आस्क होती है या क्या रिलेशन है आपका? ये बहुत डीप कन्वर्सेशन होती है। जैसे कि लोग हसेंगे। कोई बात नहीं हंसा देते हैं थोड़ा। मैं एक इंसिडेंट बताता हूं। मैं वर्ल्ड चैंपियनशिप की प्रिपरेशन कर रहा था और मैं
(10:42) ये वन वन आर्म रो कर रहा था। 15 16 20 25 कितने किलो कर लिए? ऐसे 50 केg होगा। मैंने वो डंबल को रखा और मुझे बहुत डर लगा। मैं एक कोने में गया छोटे से स्टूल पे मैं बैठ गया। मुझे लगा कि इट्स बी 26 27 इयर्स। 27 साल हो गए हैं मुझे ये करते हुए। हम बट आज भी जब मैं वो डंबल को हाथ में पकड़ के रोइंग कर रहा हूं तो मुझे अपना पहला दिन बिल्कुल याद आ रहा है कि मुझे तब भी वही पैशन था। आज भी वही पैशन है। दिस इज नॉट एट ऑल नॉर्मल। यह कन्वर्सेशन कोई डिमांड नहीं करती। मुझे उनसे कुछ नहीं चाहिए। बट बस मैं कहता हूं कि जब भी मैं तुम्हें इस्तेमाल करूं शारीरिक रूप से मजबूत दिखना
(11:28) चाहता हूं और एक कंपटीशन को खेलना चाहता हूं। वो नॉर्थ इंडिया हो, इंडिया हो, फेडरेशन कप हो, एशिया चैंपियनशिप हो, वर्ल्ड चैंपियनशिप हो। तो प्लीज मैं तुमसे रिक्वेस्ट करता हूं कि मेरे शरीर को उतना स्ट्रांग बनाना कि मैं सिर्फ खेलने के लिए ना खेलूं। मैं जीतने के लिए खेलूं। उन्होंने कहा हम भी तुझसे कुछ नहीं मांगते। बट हम यह चाहते हैं कि अगर तू 100% दे सकता है यानी योर ब्रेन योर बॉडी एंड योर सोल इज कनेक्टेड व्हाइल यू लिफ्टिंग मी तो मैं वो तुम्हें दे सकता हूं जो तुम्हें कोई नहीं दे पाएगा। आज के युग में जब एआई इतना डेवलप हो चुका
(12:06) है और कोई माइक पर बैठ के यह बोल रहा है कि आयरन जो है उसके लिए लिविंग थिंग है तो बहुत सारे लोग कुछ सोच सकते हैं बट मुझे उस सोच से इसलिए फर्क नहीं पड़ता क्योंकि मैंने ऑलमोस्ट 27 साल उसको जिया है। सो यू मीन इस फील्ड ने आपकी आइडेंटिटी को पूरा बदला। जो पहले आपको सेल्फ इमेज इश्यूज थे, सेल्फ डाउट्स थे वो सब चीजों को बदला। एंड 1000% इट रियली मेड यू हु यू आर टुडे। डेफिनेटली और किस तरह का बदलाव आपने एक्सपीरियंस करा फिटनेस में आने के बाद? अब मुझे लगता है कि मैं कुछ भी कर सकता हूं। मुझे यह पता है कि अगर मैं यह कर सकता हूं लोहे से अपना शरीर तराश सकता हूं
(12:49) जो सबसे मुश्किल काम होता है। क्योंकि जब आप पांच दिन बिना नमक खाए रहते हो ना और जब आप पांच दिन लेट्स से अबाउट 300 ml पर डे पानी पे रहते हो तो आपको मतलब आपको अंडरस्टैंड हो जाता है कि योर बॉडी डिमांड्स 3 लीटर ऑफ़ वाटर अ डे बट आप 300 ml पी रहे हो। यानी 2700 ml की जो कमी है वो चौथे दिन तुम्हें कितनी खल रही है तो तुम्हें लगता है कि बिजनेस तो बहुत आसान है बन ही जाएगा बट ये मैं नॉलेज की वजह से या मुझ में कुछ एक्स्ट्रा हुनर है की वजह से नहीं कर पाता हूं इट्स जस्ट बिकॉज़ ऑफ़ बॉडी बिल्डिंग आयरन ने जो कॉन्फिडेंस दे दिया है वो आई थिंक इज अ की
(13:25) ब्यूटीफुल एक बार एक पहाड़ को फतह कर लो तो उसके बाद आपका कॉन्फिडेंस फिर बन ही जाता है कि हां अब ये चीज कर ली है तो फिर अब तो लाइफ में और कुछ भी कर सकते हूं मैं हां कॉन्फिडेंस आ जाता है। वो भी इसलिए आ जाता है कि हम जब छोटे शहरों के लोग बड़े शहरों में आते हैं जैसे हम मतलब गुड़गांव में बैठे हैं तो गुंजन अलग ही तरीके का डर होता है। क्यों? जब मैं इस शहर में आया था लोग लंबी गाड़ियों में घूम रहे थे। बड़े-बड़े बंगलों में रहते थे। मुझे लगता था मैं कैसे सर्वाइव करूंगा? बट मैंने कहा नहीं यार कुछ तो हो जाएगा। हम एंड टच वुड फॉर गॉड ग्रेस आज सब कुछ अच्छा
(14:02) है। मैं बहुत पहले कहीं तो कन्वर्सेशन कर रहा था। इंग्लिश बोलनी नहीं आती अच्छे से। तो मैंने कहा यार यंदर इंग्लिश बोलनी नहीं आती क्या? डजंट मीन कि यार तू अपनी बात नहीं रख पाएगा। तू हिंदी तो जानता है ना। हम्म। तो तू हिंदी में बात कर। हम वो कन्वर्सेशन लोगों को इतनी भाई हम उन्होंने बोला कि इसने दिल से बात करी है हम हिंदी भाषा का प्रयोग ज्यादा किया है बट हमें इसकी बात समझ में आ गई तो मुझे लगता है कि जब भी हम बड़े शहरों में आते हैं तो बहुत सारी चकाचौंध लंबी गाड़ियां बड़े बंगले इंग्लिश बोलने का जो डर फियर है हम लोगों को छोटे शहरों के लोगों को डेली
(14:42) बेसिस में होते हैं बट एक चीज कि करते रहो करते रहो करते रहो और 1000% तुम्हें वो मिल ही जाता है एक दिन हम जो तुम चाहते हो। यतेंद्र मैं एक चीज ऑब्जर्व कर रही हूं। आप एक बॉडी बिल्डर हो। हां जी। जी यूजुअली जब हम इस तरह के किसी इंसान से मिलते हैं ना तो उनका एटीट्यूड और बोलने का तरीका बहुत अलग होता है क्योंकि वो थोड़े से रॉ हो चुके होते हैं थोड़े रफ हो चुके होते हैं बट मैं ऑब्जर्व कर रही हूं कि जो आपका बोलने का लहजा है बात करने का तरीका है वर्ड चॉइस है वो बहुत अलग है वो आपकी फिजिक के साथ जा नहीं रहा अच्छा ये डिफरेंट क्यों है आपको कभी ये फिटनेस
(15:24) सिर पे नहीं चढ़ा मेरे जो मेंटोर है ना गुरु है वो है मिस्टर के एन शर्मा। मैं इस व्यक्ति से बहुत प्रभावित हूं। ठीक है? और जब मैं बोल रहा हूं मैं प्रभावित हूं और मैं अपने दिल को यहां पे टेबल पर रख के दिखा दूं कि कितना प्रभावित हूं तो मेरे पापा को जेलसी हो जाएगी। वो बोलेंगे बेटा जन्म तो हमने तुझे दिया है। बट मैं अपने पापा को भी बोलना चाहता हूं। आई लव यू। बट सेम टाइम जब मैं इस दुनिया में आया और इधरउधर हिल रहा था इतना ज्यादा तो यह इंसान ने आया और मुझे पकड़ा। मैं तो मानता हूं ये दुनिया पूरा जंगल की तरह है। बहुत सारे भिन्न-भिन्न तरह के जानवर रहते
(16:02) हैं। हम तुझे तुम्हें जानवरों से भी बचना है। तुम्हें फल भी खाने हैं। या तो तुम अकेले जाओ ढूंढो फल कहां होगा? हम शेर तो नहीं आ जाएगा। या देयर इज समबडी हु होल्ड योर हैंड एंड बोले बेटा चल। मैं जो जो बोलूंगा बस तेरे को उसको फॉलो करना है। बट तुझे मुझ पर यह भरोसा होना चाहिए कि जब यह जंगल क्रॉस कर लेंगे तो तुझे कुछ होने नहीं दूंगा और तेरा पेट भरा होगा। जब इन्होंने मेरा हाथ थामा और जब हम इन्होंने मुझे बोला यहां पे फल मिलेगा और मैंने फल खाया बहुत मीठा था। दूसरी जगह जब इन्होंने मुझे कहा कि यहां मत रुकना ज्यादा देर रुकना ठीक नहीं है।
(16:43) मैं वहां नहीं रुका। उन्होंने मुझे सिखाया एक्सरसाइज कैसे करने हैं? फिजियोलॉजी क्या होता है? काइनेसोलॉजी क्या होता है? ट्रेनिंग क्या होता है? न्यूट्रिशन क्या होता है? बहुत सारी चीजें पढ़ाई। बट मैंने उनसे जीवन की बहुत सारी बातें ऐसी सीख ली जो मुझे लगता है किसी को भी सरल बनने के लिए काफी है। जैसे एक इंसिडेंट बताता हूं। मैं एक कॉन्टेस्ट जीता। मैंने उनको कॉल किया सर मैं कॉन्टेस्ट जीत चुका हूं। हम्म। उन्होंने बोला आशीर्वाद। फ़ोन काट दिया। मैंने कहा यार मैं इतना बड़ा कॉन्टेस्ट जीता हूं तो यह सिर्फ आशीर्वाद नहीं बोल सकते। तो मैंने उनको दोबारा कॉल किया।
(17:20) मैंने कहा सर मैं कॉन्टेस्ट जीत चुका हूं। उन्होंने कहा हां मैंने वो पहले तुमने अभी तो फोन किया था। बोला ना आशीर्वाद। फिर जब मैंने उनसे कम्युनिकेशन की तो उन्होंने मुझे सिखाया ऐसी जीत तुम्हारे जीवन में बहुत आएंगी। इसको सिर पर मत चढ़ने देना। हम बट बहुत सारे दिन ऐसे आएंगे जब तुम हार जाओगे। उस दिन अपने इमोशंस को कंट्रोल करना। हम कंप्लेंट मत करना और रोना मत। अहंकार, घमंड, सिर पे चढ़ना ये चीजों से बचा लिया। हम अच्छा बॉडी बिल्डर बनने में तो मदद कर ही दी। बट मुझे लगता है कि किसी भी पेशे में अव्वल आने से बेहतर है। हम आप पहले अच्छे इंसान बनो। जिस बैकग्राउंड
(17:58) से मैं आता हूं जिम हम बोलते हैं गुरु का होना बहुत ज्यादा जरूरी है। गुरु अनुशासन सिखाता है और अनुशासन आपके जीवन में आपको बहुत सारे काम करने में सहयोग कर देता है जिसमें तुम्हारे जीतने के चांसेस बढ़ जाते हैं। और नो मैटर वो कौन सी लड़ाई है। फिर वो चाहे फिटनेस का रास्ता हो, कुछ का रास्ता हो, कोई स्पोर्ट हो, कुछ भी हो, हैविंग अ गुरु, इट कैन चेंज योर डेस्टिनी। शॉर्टन योर जर्नी। इतना मुझे हंसी खुद पे भी हंसी आती है कि मैं उनसे सिर्फ 15% बातें करता हूं अबाउट ट्रेनिंग न्यूट्रिशन ये सब बट 85% मैं उनसे बातें करता हूं अबाउट
(18:38) लाइफ अच्छा इतनी आराम से वो मुझे समझा देते हैं या मैं उनकी ज्यादा मानता हूं पता नहीं बट देयर इज उनका मेरा कुछ अलग बॉन्ड है तो इट्स बिकॉज़ ऑफ़ बिकॉज़ ऑफ़ हां जितेंद्र अब कुछ क्वेश्चंस मैं पूछना चाहती हूं प्लीज अपनी ऑडियंस के बिहाफ पे स्पेशली वो लड़के जो अभी अपने टीनएज में हैं या फिर 20ज़ में हैं या किसी भी स्टेज ऑफ़ लाइफ़ में हैं और फिटनेस को पर्स्यू करना चाहते हैं। अच्छा स्ट्रेंथ स्टैमिना बनाना चाहते हैं। अच्छी फिजिक चाहते हैं उनके लिए है। एज वी आर सिंग टुडे इन द एरा ऑफ़ एआई 2026 इतना एडवांस हो चुका है सब कुछ। तो नॉलेज अवेयरनेस इंफॉर्मेशन तो बहुत ज्यादा है।
(19:19) हम जब आपने अपनी फिटनेस जर्नी शुरू करी थी तब इतना कुछ नहीं था। नहीं बट रिजल्ट्स बढ़ने की जगह घट रहे हैं। कंसिस्टेंसी नहीं मेंटेन कर पा रहे लोग। डिस्ट्रैक्शंस बहुत ज्यादा हो रही हैं। तो आपको क्या लगता है कि ये गैप क्यों है? जबकि नॉलेज इतनी ज्यादा है तब भी अभी लोग क्यों नहीं कर पा रहे? स्पेशली दोज़ गाइस जो करना चाहते हैं जिनकी डिजायर है। हर लड़के की ये विश होती है कि एक अच्छी फिजिक हो, अच्छे डोले शोले हो, बाईसेप्स हो और अच्छी ब्रॉड चेस्ट हो, अच्छा दिखे। है ना? अपने लुक्स के लिए भी, अपने कॉन्फिडेंस के लिए भी, अपने स्ट्रेंथ के
(19:58) लिए भी। सो विश इज देयर, नॉलेज, अवेयरनेस इज देयर। रिसोर्सेज भी हैं। जगह-जगह पे जिम्स खुले हुए हैं। पर्सनल ट्रेनर्स हैं। दुनिया भर के सप्लीमेंट्स प्रोटीनंस अवेलेबल हैं। बट तब भी रिजल्ट्स नहीं है। वेयर डू यू थिंक इज द गैप? क्यों नहीं कर पा रहे? उनका ब्रेन चाहता है हम 12 हफ्ते या 16 हफ्ते में ट्रांसफॉर्मेशन हो जाए। हम बट उनकी बॉडी बोल रही है कि मैं 12 16 हफ्ते में नहीं हो पाऊंगी। यू नीड टू अंडरस्टैंड मुझे लगेंगे छ महीने यानी मुझे 12 की बजाय 24 हफ्ते लगेंगे। तो क्योंकि उसका ब्रेन बहुत जल्दी चाहता है। बॉडी उस तरीके से रिसोंड नहीं कर रही होती
(20:36) है। तो उसका कहीं ना कहीं जो कंसिस्टेंसी होनी चाहिए थी वो कंसिस्टेंसी मेंटेन नहीं हो पाती। वन और इतनी इंफॉर्मेशन है, इतनी इंफॉर्मेशन है जब हमारे पास इतनी इंफॉर्मेशन हो जाती है तो यंगस्टर चलो हम तो खैर लाइफ के उस पड़ाव से निकल चुके हैं। बट अगर मैं समझता हूं कि मैं आज उनकी जगह होता तो मैं तो इस जाल में फंस जाता यानी मैं कॉन्टेस्ट की प्रिपरेशन कर रहा हूं फिजिक बनाने के लिए और मैं स्क्वाट मार रहा हूं। तो मैं यह देख रहा हूं कि मैं जो कैमरे से अपने आपको कैप्चर कर रहा हूं और यह रील आएगी तो मैं क्या अच्छा दिख रहा होगा तो मेरा फोकस कहां चला गया
(21:17) कि मुझे अच्छा दिखना है मेरा फोकस ये रहा ही नहीं मैंने कितना नीचे बैठा कब मैंने होल्ड किया सो ट्रू सांस को मैंने रोका और मैंने पुश किया और मैं ऊपर आ गया और मैंने मसल माइंड कनेक्शन जो बनाना था वो बनाया ही नहीं तो दूसरा रीज़न ये है कि डिजिटल मीडिया की वजह से सबको को बॉडी तो बनानी है बट बॉडी इसीलिए नहीं बनानी कि उनको अच्छा लगेगा। वो 10% जनता है। बट मुझे सैड पार्ट ये लगता है 90% जनता को फिजिक अच्छी इसलिए बनानी है क्योंकि उनको Instagram पे नंबर्स ज्यादा चाहिए। उनको लाइक्स चाहिए, व्यूज चाहिए। हम लोग तो बेसमेंट की जिम में जब स्क्वाड मार रहे
(21:56) होते थे तो ये लगता था पवन तूने कितने किए 100 किलो से? उसने बोला 16। मैंने कहा 17 करने हैं। बस यही होता था ना कोई कैमरा था ना कोई नहीं था। और तीसरा क्योंकि ये एक्सेस बहुत ज्यादा है। Google करते हैं फटाफट और वहां से एक इंफॉर्मेशन आ जाती है। बट वो इंफॉर्मेशन मुझ पे काम कर रही है। बट डजंट मीन वो इंफॉर्मेशन गुंजन पे भी काम करे। ठीक है ना? हम तो कोई इनके पास ऐसा नहीं होता कोई टीचर वेल क्वालिफाइड जो उनको बता सके कि यह जो Google से आई है या इंफॉर्मेशन तुम्हें कितनी लेनी है और कितनी को रख देना है अभी के लिए क्योंकि तुम बिगिनर लेवल हो तुम
(22:34) अभी फिजिक को अचीव करने की कोशिश कर रहे हो तो तुम्हें यहां नहीं रहना तुम्हें यहां रहना है तो उससे क्या होता है डिस्ट्रैक्शन बहुत होता है और फिजिक बनाने के लिए जिस तरह की कन्वर्सेशन और जिस तरह का मसल माइंड कनेक्शन होना चाहिए वो आई थिंक यंगस्टर्स में मिस आउट हो हो जाता है। बट आई थिंक इसमें कंसिस्टेंसी इज द मेन कीज कि आप करते रहो। आज नहीं तो कल अगर आप अच्छा न्यूट्रिशन ले रहे हो फिजिक आपकी रिसोंड करेगी। आपने बोला कंसिस्टेंसी ऑफ कोर्स हम सब समझते हैं कि कंसिस्टेंसी के बिना पॉसिबल नहीं है। बट आज की डेट में विद ऑल दीज़
(23:05) थिंग्स हाउ टू स्टे कंसिस्टेंट। अब अगर हम बोले कि यार मोटिवेशन नहीं है। मोटिवेशन कैन नॉट लास्ट लॉन्ग। है ना? मोटिवेशन तो आज है, कल नहीं है। उससे फर्क नहीं पड़ता। तो कंसिस्टेंसी का सीक्रेट क्या है? जब हम सुबह उठते हैं तो हम लेट्स से ब्रश करते हैं तो हम उसके लिए मोटिवेशन क्यों नहीं ढूंढते दांत साफ करने के लिए? क्योंकि वो एक पार्ट ऑफ रूटीन बना हुआ है ना। जब तक आप हम एक्सरसाइज, फिटनेस को दांत साफ करना या शरीर साफ करने जैसा अपनी लाइफस्टाइल में नहीं लाओगे। यस। एक हैबिट की तरह तब तक आई थिंक मोटिवेशन काम नहीं करेगा। मोटिवेशन एक दिन हो सकती
(23:46) है। मैंने चलो इस हफ्ते लेग्स कर ली। बट अगले हफ्ते लेग्स करने के लिए यार मोटिवेशन नहीं कंसिस्टेंसी की जरूरत है। मुझे लगता है कि बिल्डिंग अ बॉडी हम एंड फिटनेस ये दोनों को मिक्स कर दिया है। तो मैं बोलना चाहता हूं कि इफ यू वांट टू कि आपको अच्छा दिखना है। चाहे वो बॉडी फैट कम करना हो, मसल बिल्ड करना हो। यू जस्ट नीड वन थिंग रोज जाओ वर्कआउट करो। हम उसका एक रूटीन होना चाहिए कि कितना करना है, कैसे करना है। बट वो वैसे होना चाहिए कि हफ्ते में जितनी बार ब्रश हुआ, जितनी बार नहाना हुआ, उतनी बार जिम हुआ और वर्कआउट हुआ। हमने बचपन से सीख लिया और
(24:22) मोटिवेटेड रहना चाहिए। अरे युवक आप 24ों घंटे 365 दिन मोटिवेट नहीं रह सकते। बट हां ये है कि आज मन नहीं है तो थोड़ा कर लो। कल मन होगा तो ज्यादा कर लेना। बट लोगों को यह समझ में नहीं आता। अगर 60 मिनट वर्कआउट नहीं किए तो 30 मिनट कर लूं। में भी बहुत फायदा होता है क्योंकि वह दो दिन के ओवरऑल 90 मिनट्स बन जाते हैं। बट अगर आप इस दिन 30 मिनट्स मिस कर देते हो तो 60 मिनट्स बनते हैं। और मैंने तो यह बहुत बार खुद का मेरा एक्सपीरियंस है कि जिस दिन नहीं भी हिम्मत या मन या फॉर एनी रीज़न हेल्थ जिम जाने का नहीं आ रहा ना फिर भी अगर एक बार उठ के
(24:58) चले जाओ ना कि चलो यार कोई बात नहीं 10 मिनट थोड़ा ट्रेडमिल ही करके आ जाएंगे। आई एंड अप डूइंग अ फुल सेशन। ब्लड फ्लो हो जाता है। क्योंकि वो जाके आपको लगता है कि अरे अभी तो मजा आने लगा है। अब तो शुरू है। अब तो सब सही हो रहा है। मूड भी अच्छा हो रहा है। एनर्जी भी आ गई है। थकावट भी उतर गई है। मजा आ रहा है। तो वो कब एक डेढ़ घंटा हो जाता है। आई थिंक वो शुरू करने की देर होती है। शुरू करने की देर होती है। एंड यतेंद्र एट द सेम टाइम मुझे लगता है कि जो हम कंसिस्टेंसी की बात कर रहे हैं कि इसको अपने रूटीन में डालो। एक डेली लाइफ का
(25:27) हिस्सा बनाओ। जिस तरह से ब्रश करना और नहाना है। नॉन नेगोशिएबल हैबिट की तरह इसको डालो। मुझे लगता है इसके साथ-साथ एक माइंडसेट शिफ्ट की भी जरूरत है। फिटनेस इंडस्ट्री में कौन सी सबसे ज्यादा कॉमन मिसइफेशन है जो फैलती है? जिसको भी यह कहा जा रहा है कि 3 महीने में या 4 महीने में बॉडी बन जाएगी। मुझे ही देख लो 26 27 साल वर्कआउट करते हुए हो गए हैं। बस इतनी फिजिक है। बस इतनी सी कैसे ये आइडेंटिफाई कर सकते हैं कि ये एडवाइस सही है या फिर यह मिसइफेशन है। इससे हमें दूर रहना है। मुझे यह लगता है कि जितने भी अगर आप इन पॉडकास्ट के ऑडियो वर्जनंस को
(26:02) एंजॉय करना चाहें ताकि आप अपना काम करते हुए, वॉक करते हुए या फिर ड्राइव करते हुए भी इन एपिसोड्स का पूरा फायदा ले सके तो आप हमें स्पॉटिफाई पे फॉलो कर सकते हैं जिसका लिंक डिस्क्रिप्शन में है। कैन यू गाइड पीपल कि किस तरह का माइंड सेट चाहिए टू बिकम फिट इन रियल सेंस? लेट से अगर मैं आज वर्कआउट नहीं करना चाहता, जिम नहीं जाना चाहता, उसके मेरे अपने 100 और कारण हो सकते हैं। और वर्सेस यार अगर मैं चला जाता हूं और देखता हूं जाके कर लेता हूं कुछ ना कुछ। और जो मैं यह बहाना लगा रहा हूं कि समय नहीं है, टाइम नहीं है, झूठ बोल रहा हूं अपने आप से
(26:40) और अपने आलस से बातें करने की कोशिश कर रहा हूं। उससे बेटर है कि खड़े हो जाओ क्योंकि तुम्हारा माइंड तो तुम्हें घेरेगा। राइट? माइंड तो ऐसे आता है ना घेरते रुक जा रुक जा रुक जा। तो माइंड शिफ्ट की बात ना करें तो यहां पे स्विच कर ले कि तुम यहां आओ एकदम यहां चले जाओ और जैसे आपने बोला कि एक बार जब शुरू करोगे यू विल फील गुड। हैप्पी हार्मोन रिलीज होंगे और तुम्हें अच्छा लगेगा। एंड देन फिर तुम जब अराउंड में देखोगे लोगों को वर्कआउट करते हुए तो कहीं ना कहीं आप जो 10 मिनट करना या 20 मिनट करना चाहते थे वो 60 मिनट हो जाएगा। तो माइंड शिफ्ट की
(27:14) जरूरत नहीं है। आई थिंक खड़े हो और करो सिंपल। वो जो इनर चैटर का टाइम ही मत दो। मत दो। जैसे ही अगर लगे कि कुछ अंदर कन्वर्सेशन शुरू हो रही है, दिमाग बहाने ढूंढ रहा है, वहीं पर उसको शट अप करो और चले जाओ। इतनी देर में पहुंच जाओ। और अगर मैं इसको अपनी भाषा में समझाऊं तो मैं यह कहना चाहता हूं कि माइंड शिफ्ट से ज्यादा जरूरी है अपने साथ समय व्यतीत करने का। आज नहीं तो कल कल नहीं तो साल भर बाद तुम यह फिगर आउट करोगे यार मैंने बहुत सारा समय व्यतीत कर लिया सबके साथ। हम एंड देन हु एम आई? मैं कौन हूं? हम ठीक है? इज दिस इज द स्किन? या फिर जो यह
(27:54) बात कर रहा है या मेरी सोल? तो जब आप जिम जाते हो और किसी भी तरह की वर्जिश करते हो तो आप अपने आप से बात करते हो। हु एम आई? मैं इस दुनिया में क्या करने आया हूं? क्या मैं जो कर रहा हूं वो ठीक है? क्या मुझसे कोई गलती हो गई थी? तो मैं किसी का दिल दुखाया तो उससे क्षमा मांग लूं। तो ये सब आप वर्कआउट के दौरान ही फिगर आउट करते चले जाओगे। और एंड ऑफ योर सेशन आपके बहुत सारे थॉट्स, बहुत सारे ऐसे फियर निकल जाएंगे जो आप घर पर बैठकर सोच रहे थे। तो मुझे यह लगता है कि आपको सबके साथ समय व्यतीत करते-करते अपने साथ भी समय
(28:39) व्यतीत करना चाहिए। रीजन बीइंग तुम अकेले आए अकेले जाना है। यह एक जर्नी है तुम्हारी जो तुम 60 साल जीवन है या 70 है या 80 है या पता नहीं कितना है। बट मुझे लगता है कि इसमें हम खुद को भूल जाते हैं। और यह प्रश्न सबको अपने आप से करना चाहिए कि हु एम आई और मेरा कंट्रीब्यूशन टुवर्ड्स दी सोसाइटी जो होना चाहिए क्या वो मैं कर पा रहा हूं या नहीं? मैं आपको 100% लिख के देता हूं। मुझे सबसे ज्यादा अच्छे आंसर वर्कआउट करते हुए मिलते हैं जो मैं फिगर आउट नहीं कर पा रहा होता। तो इसीलिए भी सबको जिम जाना चाहिए जहां पे आपको ये पता चल जाए कि आप एक्चुअली कौन
(29:19) हो? मैं 110% एग्री करती हूं इस बार। 110% मतलब ये जो आपने बोला ना एक-एक वर्ड के साथ रिलेट भी कर सकती हूं और लाइक डबल स्टैंप जो ब्रेन फॉग हटता है जो माइंड फ्रेश फील करता है नथिंग एल्स कैन गिव यू दैट फीलिंग नथिंग एल्स क्योंकि उस टाइम पे आपके हॉर्मोंस आपका ब्लड सर्कुलेशन जो बॉडी में ऑक्सीजन का सप्लाई है वो इतना अच्छा होता है इतना अच्छा फील करते हो और एक यह जो सेटिस्फैक्शन वाली फीलिंग होती है कि मैं अपने लिए कुछ कर रहा हूं उस टाइम पे दिमाग ऐसा खुलता है और सब चीजों के आंसर्स ऐसे ऐसे ऐसे आते हैं। तो माइंड शिफ्ट से ज्यादा इसको स्विच कर
(29:58) देते हैं कि अपने साथ समय व्यतीत करो। राइट? बीच में आपने एक बात करी थी कि इतना ज्यादा कंटेंट है क्योंकि अब लोग रिलाई करते हैं इंटरनेट पे, सोशल मीडिया पे। यही फिगर आउट करना मुश्किल हो जाता है कि कौन सही एडवाइस दे रहा है और कौन मिसइफेशन फैला रहा है। कैसे ये आइडेंटिफाई कर सकते हैं कि यह एडवाइस सही है या फिर यह मिसइफेशन है। इससे हमें दूर रहना है। बहुत पहले एक ऐड आता था जागो ग्राहक जागो। मुझे यह लगता है कि जितने भी लोग इंटरनेट पर जो भी कुछ देख रहे हैं उनको खुद को पता है वह क्या देख रहे हैं। मैं उनको यह समझाऊं कि क्या देखो क्या ना देखो हम
(30:37) वो इसलिए गलत होगा क्योंकि उनको ऑलरेडी पता है कि वो गलत देख रहे हैं या कि वो सही देख रहे हैं। मुझे ऐसा लगता है मे बी आई एम रोंग कि उनको पता है कि मैं गलत देख रहा हूं तो उसको उससे बचना चाहिए और जो लोग अच्छा देख रहे हैं वो थोड़ा सा मैसेज इधर पास ऑन कर दे कि यार क्या तुम इसके बजाय यह देख सकते हो तुम्हें अच्छा लगे तो देखना वरना तुम वापस अपने पे चले जाना घर में माचिस भी देख के खरीदते जब मैं माचिस सोच समझ के खरीदता हूं तो मैं किसी से भी फिटनेस के हुनर या फिटनेस को कैसे करना चाहिए न्यूट्रिशन कैसे होना चाहिए चाहिए। ट्रेनिंग पैटर्न क्या होने चाहिए?
(31:14) किसी से भी कैसे सीख सकता है? तो आई थिंक ये कंज्यूमर उतने अवेयर हैं। वैसे आपके हिसाब से फिटनेस इंडस्ट्री में कौन सी सबसे ज्यादा कॉमन मिसइफेशन है जो फैलती है। जिसको भी यह कहा जा रहा है कि तीन महीने में या चार महीने में बॉडी बन जाएगी। मैं बनवा दूंगा। 12 हफ्ते में या आठ हफ्ते में सिक्स पैक एब्स आ जाएंगे। किसी ऐसे व्यक्ति के जिसका बॉडी फैट परसेंटेज ऑलरेडी 30 प्लस है। 30 35% बॉडी फैट है। तो मैं उनको कहना चाहूंगा कि पता नहीं मतलब या तो मुझे नॉलेज नहीं है फिर तीन महीने में फिजिक कैसे बनती है। तीन महीने में फिजिक नहीं बनती।
(31:51) हां एक छोटा सा स्ट्रक्चर आ सकता है आपका। बट उस पे आपको बहुत लंबे समय तक साल 2 साल चार साल काम करना पड़ेगा जब तुम्हें एक बहुत ही सुंदर सी स्ट्रक्चर फिजिक मिलेगी। और ये पता है क्यों होती है? क्योंकि सामने वाले को चाहिए। तीन महीने में बनवाओ भैया। मेरे पास ज्यादा टाइम नहीं है। बिकॉज़ मेरे भाई की शादी है। घर में कोई फंक्शन है। मेरा जल्दी जो है टमी कम करो। बिकॉज़ वो कंज्यूमर 90% डिमांड करता है तीन महीने में बॉडी बनाने की। तो यहां पे कुछ लोग आ जाते हैं कि हां हम बनवा देंगे। हम कर देंगे। राइट? बट मैं ये कहना चाहता हूं कि ये तीन-4
(32:24) महीने का काम नहीं है। ये बहुत लंबे समय का काम है। हम लेट्स से मुझे ही देख लो 26 27 साल वर्कआउट करते हुए हो गए हैं। बस इतनी फिजिक है। बस इतनी सी हां। हां तो कह सकते हो तो ये एक मिस वो है। एक्चुअली लोग ना फॉलो जिन्हें करते हैं या जिनकी एडवाइसेस सुनते हैं वो कई बार देखकर इंप्रेस होते हैं। देखकर उनको प्रभावित हो जाते हैं और उनकी बातों में आ जाते हैं। इन्फ्लुएंस हो जाते हैं उनसे। तो देखकर कैसे पता चले कि सामने वाले ने जो बॉडी बनाई है या जो वो फिटनेस है वो नेचुरल है, रियल है या फिर वो एनहांस्ड है। ये मान लेते हैं फिटनेस इंडस्ट्री है
(32:56) पूरी। ठीक है? हम ये इसका सेंटर पॉइंट है। इधर है प्रोफेशनल बॉडी बिल्डिंग यानी जो लोग कमपीट करते हैं। और यहां पे है एक फिटनेस यानी किसी भी लड़के को थोड़ा सा अच्छा दिखना है। कपड़े पहने तो अच्छा लगे या किसी भी फीमेल को बॉडी फैट परसेंटेज को कम करना है। सो दैट उसको अगर आने वाले टाइम में कुछ बीमारियां घेरेंगी उससे वो ओवरकम कर पाए। बट इनको मिक्स इतना कर दिया है तो जब भी आप प्रोफेशनल बॉडी बिल्डिंग की बात करते हो तो उनको छोड़ देते हैं। बट मैं कॉमन पर्सन की जिसको सिर्फ जिम जाना है एक अच्छी फिजिक बनाने के लिए उसको न्यूट्रिशन
(33:35) ट्रेनिंग उसकी स्लीप उसकी हर चीज पे ध्यान रखना चाहिए क्योंकि ऐसा हो सकता है कि यहां पे फिटनेस स्टेबल के ऊपर की बात हो रही है। बॉडी बिल्डिंग स्टेबल के नीचे की बात कर रहे हैं। यानी बहुत सारी यहां पे चीजें हैं। बहुत डिफरेंट चीजें हैं। बहुत डिफरेंट गेम है। तुम इन लोगों से हेल्प ले सकते हो कि क्योंकि इनका बहुत सारा एक्सपीरियंस है कि क्या ये तुम्हें गाइड कर सकते हैं एक नेचुरल तरीके से फिजिक बनाने में। बट हां यहां वाला कोई भी व्यक्ति अगर कॉम्पिटिटिव बॉडी बिल्डिंग करना चाहता है या कॉन्टेस्ट खेलना चाहता है उसको फिर उन सारी चीजों को
(34:13) समझना पड़ेगा जिसके थ्रू बॉडी बिल्डिंग को किया जाता है और जिया जाता है। 90% जनता जो मे बी इस चैनल को देख रही है जो किसी भी फिटनेस प्लेटफार्म को देखती है उनको अगर फिट रहना है तो उनको नेचुरली करनी चाहिए। ठीक है? थोड़े बहुत सप्लीमेंट यूज़ किए जा सकते हैं और तीन महीने में बॉडी नहीं बनानी चाहिए। राइट राइट हम थोड़ा सा ना ये जो आपने दो कैटेगरीज बताई बहुत अच्छा किया आपने बहुत अच्छे से डिफाइन कर दिया तो मान लेते हैं ए कैटेगरी हो गई बॉडी बिल्डिंग वाली और बी कैटेगरी हो गई एक जनरल फिटनेस गुड फिजिक वाली। हम थोड़ा सा बी कैटेगरी को डीप
(34:49) ड्राइव करेंगे। बट एक दो क्वेश्चंस हैं मेरे टाइप ए के लिए भी बॉडी बिल्डिंग वाली। सो दिस लुक्स वेरी ग्लैमरस। स्पेशली जब लड़के देखते हैं कि भाई वो बॉडी बिल्डिंग या कोई चैंपियनशिप जीत रहा है। सो दिखने में तो बहुत ग्लैमरस है एंड यू हैव बीन अ पार्ट ऑफ इट। आई एम श्योर कि ये सिर्फ मतलब दिखने में तो ग्लैमरस है बट इसका एक अदर साइड भी है। कुछ कॉस्ट भी है जो पे करनी पड़ती है। कुछ अनसीन चीजें। किस तरह की कॉस्ट पे करनी पड़ती है? एक्चुअली मैंने इसको किया नहीं है। मैंने इसको जिया है। बहुत सारे सैक्रिफाइस करने पड़ते हैं। एक छोटा सा
(35:25) एग्जांपल लो। दिवाली के दिन हम अपने घर से निकलता हूं। अपने जिम पहुंचता हूं। हम जिम में शाम का समय है। और मेरा वर्कआउट का टाइम है 6। घर में पूजा का टाइम है 7। जिम में कोई नहीं है। तुम अकेले वर्कआउट कर रहे हो। और जब तुम बाहर जाते हो तो सब लोग एक तरह की खुशी मना रहे हैं। ठीक है? और तुम जिम में अकेले लोहे से लड़ रहे हो। जब मैं छोटा था मेरा बहुत मन करता था दिवाली पे लेट से पटाखे चलाऊं। मैं पूजा में फैमिली के साथ बैठूं। बट मैं 99% टाइम ये नहीं कर पाता था। क्यों? इसका ये मतलब नहीं है कि मैं एक दिन छुट्टी नहीं कर सकता था।
(36:07) मैं कर सकता था। बट मुझे पता था कि अगर मुझे कुछ डिफरेंट करना है तो मुझे इस एक्टिविटी से मोहित नहीं होना। ठीक है बट वो किसी बच्चे का आज जैसे मैं हूं आज मैं सोचता हूं यार मैं 10 दिवाली में अगर घर वालों के साथ पूजा कर लेता तो क्या ही फर्क पड़ना था यदि अंदर बट मुझे लगता है कि फर्क पड़ता ये एक तरह का आकर्षण है ठीक है ये तो हम चलो दिवाली की बात कर रहे हैं ऐसे 3600 त्यौहार आते हैं मुझे लगता है कि जब तुम्हें किसी भी ड्रीम के लिए काम करना होता है और तुम त्योहारों में मगन हो हम तो तुम्हें एक दिन नहीं तुम्हें ऐसा एहसास होगा यार ओहो वो 40 दिन तो त्यौहारों में
(36:48) निकल गए साल में अगर बड़े-बड़े त्यौहार भी लगाए। दूसरा सैक्रिफाइस ये है कि जब तुम क्लास में बैठे हो तुम्हें प्रोटीन इंटेक पूरा करना है और तुम दो बोतलों में जो कोल्ड ड्रिंक की बोतल से दूध ले आए हुए हो और तुमने छुपाई हुई है और तुम इंटरवल हो चुका है। सब बच्चे जा चुके हैं हम और तुम चुपचाप उसको पी लेते हो क्लास में बैठ के और दो लड़कियां कहती है आज तुम इतने बड़े हो के दूध पीते हो। यह इस माइक के थ्रू छोटा इंसिडेंट लग सकता है। बट मैं यह कहना चाहता हूं कि जब मैं उस स्ट्रगल को जी रहा था तब वो छोटा नहीं था तो मेरा भी मन करता था मैं कल से नहीं लाऊंगा।
(37:23) बट यार प्रोटीन इंटेक पूरा नहीं होगा तो बॉडी कैसे बनेगी? सैक्रिफाइस। फिर मुझे आज भी याद है कि कोई कंपटीशन जब आ जाता था और घर में मेरे ब्रदर की शादी थी तो मैंने कहा यार अगर मैं शादी में एंजॉय करूंगा तो मैं कंपटीशन से तो भटक जाऊंगा। आप बिलीव करना मेरे घर में सब जा चुके हैं बारात में। हम आई एम द ओनली वन जो घर पे है क्योंकि मेरा नेक्स्ट वीक यानी नेक्स्ट संडे को कॉन्टेस्ट है और मैं यह अपने आप को अलाउ नहीं कर सकता कि मैं बारात में जाऊं फिर वहां से आऊं। और वहां पे जो तीन घंटे जो शादी हो रही है और सब डांस कर रहे हैं उसमें कंट्रीब्यूट करूं। क्योंकि मेरा तो
(38:02) अगले वीक का्टेस्ट है जिसकी प्रिपरेशन मैं पिछले 11 हफ्ते 12 हफ्ते 16 हफ्ते से कर रहा हूं। जब उस ब्रदर ने मुझसे पूछा यार अगर तू मेरी शादी में चला ही जाता तो क्या ही तेरा चला जाता। मैं बोलता हां तू सही कह रहा है कि शायद ना भी कुछ जाता। बट अगर मुझे वर्ल्ड चैंपियन बनना था और यूनिवर्स मुझसे सवाल कर लेता कि बेटा एक काम करो तुम दिवाली मनाओ। भाई की शादी में जाओ। ठीक है ना? और क्लास में जब तुम्हें प्रोटीन इंटेक पूरा करना था दो लड़कियां हंस रही थी तो सिर्फ तुम उस पे फोकस करो। यू डोंट बी अ वर्ल्ड चैंपियन। वर्कआउट करना क्या आप खुद में एक सैक्रिफाइस नहीं
(38:33) है? मैं बताता हूं। 230 किलो वजन आपने यहां रखा। ठीक है? अब आप स्क्वाट करने वाले हो। तुम जो ये जाते हो नीचे और जब तुम स्क्वाट के मतलब 90° पे हो तुम्हें यमराज दिखते हैं यहां पे। और तुम्हें लगता है कि अब अगर नीचे रह गया तो भैया स्पाइन तो गई। तो क्या विकल्प है? एक ही विकल्प है। उठ जाओ। और पता नहीं तुम कैसे उठ जाते हो और फिर जब तुम उठ जाते हो और तुम बार को रीक करते हो वापस रखते हो और तुम अपने आप से बात करते हो कि मैं इतना सक्षम नहीं था कि मैं 230 किलो लिफ्ट कर लूं। ऑलदो मैंने छ साल प्रैक्टिस करी है। बट मेरा पीआर था 200 छ महीने पहले।
(39:14) फिर मेरा पीआर हुआ 210। फिर 2 महीने पहले मेरा पीआर हुआ 220। बट 220 में मेरे को यमराज दिखे और 230 में भी मेरे को यमराज दिख रहे हैं। तो तुम्हें नहीं लगता गुंजन कि यह भी एक अपने आप में सैक्रिफाइस है कि अगर वो बैठ गया उस दिन तो स्पाइन गई और फिर तुम कैसे अपने पूरा जीवन व्यतीत करोगे समझ में नहीं आता। ये एक तपस्या है। मुझे आज भी याद है जब मेरी मॉम लेट्स से हम मैंने नॉनवेज खाना शुरू कर दिया। एग्स उबाल रही है। और मैं सोच रहा हूं मम्मा 10 बोले थे। नौ है इसमें तो। मम्मा ने कहा कि एक थोड़ा खराब निकला था तो मैंने निकाल दिया और मैं गिन रहा हूं यार 30 ग्राम
(39:54) प्रोटीन था। एक अंडे से 3 ग्राम कम हो गया। तो मैं अब या तो एग को मंगाऊंगा फिर उसको एक को बॉईल करूंगा। बट इफ आई वांट टू हैव 30 ग्राम्स ऑफ प्रोटीन तो वो खाना ही है। बट लोगों को लगता है डाइट कंट्रोल करना मुश्किल होता है। एक बार इन बॉडी बिल्डर्स की तपस्या जब देखोगे सबसे डिफिकल्ट होता है कैलोरी सरप्लस ज्यादा खाना। रात को 12:30 बज चुके हैं। आपके सामने ये भरा हुआ जार रखा हुआ है। ठीक है? जिसमें तुमने शेक मिलाया हुआ है। दूध है, केले हैं, अंडे हैं। क्यों? तुम्हारी 1600 कैलोरी रह गई है क्योंकि तुम्हारा डेली का जो चल रहा है वो 4500 कैलोरी का वो है। अब
(40:36) तुम 3000 तो खा चुके हो। अब तुमने 1500 कैलोरी का शेक बना दिया है। अब तुम बैठे हो और तुम टीवी देख रहे हो और तुम उसको पी रहे हो, पी रहे हो, पी रहे हो, पी रहे हो। फिर वो इतना रह गया है और तुम्हें नींद आ गई है और तुम सो गए हो। सपने में ये आ रहा है कि यार मेरा कैलोरी कम तो नहीं रह गया। बॉडी कैसे बनेगी? और तुमने सामने देखा जग में वो शेर बचा हुआ है। और फिर तुमने समय नहीं देखा। तुम उठे और तुमने उसको पिया पिया पिया पिया रखा और फिर सो गए। तो ये कह देते हैं हम बॉडी बिल्डिंग। और मैं ये बॉडी बिल्डिंग की बात नहीं कर रहा। लेट से किसी को डॉक्टर बनना होगा या आपकी
(41:12) खुद की एक जर्नी होगी। लोग सिर्फ आपके ओदे को याद रखेंगे। आपकी जर्नी को याद नहीं रखेंगे। तो ये एक तपस्वी जीवन है। तो एक ही परिभाषा शायद मैं सही से समझा पाया या नहीं समझा पाया पता नहीं बट बट बहुत सारे सैक्रिफाइस हैं। आपने बीच में बोला था कि मैं छोटे-छोटे सैक्रिफाइसेस बता रहा हूं। मेरे हिसाब से ये छोटे-छोटे सैक्रिफाइसेस नहीं है। क्योंकि ये जो डेली के सैक्रिफाइस होते हैं ना सिर्फ यही कि अब इस टाइम पे मुझे यह करना है। यही सबसे बड़े सैक्रिफाइसेस होते हैं। क्योंकि बड़े तो बड़े सैक्रिफाइस तो दिखते हैं। उसके लिए तो हम मेंटली
(41:46) प्रिपेयर भी कर लेते हैं। बट जो डेली के स्ट्रगल है ना बेड से उठना या जो आपने बताया कि राइट अमाउंट ऑफ कैलोरीज लेना यही सबसे बड़े चैलेंजेस होते हैं। और यहीं पर आधे लोग मार खाते हैं। तुम्हारा मन करता है गर्लफ्रेंड बनाऊं। तुम्हारा मन करता है बंक स्कूल बंक मार के कहीं जाऊं। तुम्हारा मन करता है कि अच्छे कपड़े पहन लूं। तुम्हें यह आकर्षण आ रहे हैं। और तुम क्या कह रहे हो? नहीं नहीं नहीं रुक जा रुक जा आकर्षण नहीं करना। क्यों? तेरे को तो मिस्टर सहारन को खेलना है। 43 साल का हो चुका हूं। ये आज बातें कहनी बहुत आसान है। किसी भी 20 साल के
(42:19) लड़के को। बट उस 20 साल के लड़के का गर्लफ्रेंड बनाने से लेके हिल स्टेशन या फिर गोवा जाने से लेके शादियों में जाने से लेके अपने फ्रेंड्स के साथ घूमने से लेके बहुत सारी चीजों का मन करता है। करता है और अब तो और कुछ नहीं तो हर पांच दिन बाद वीकेंड तो आना ही है ना। हां अच्छा हमें तो ये था कि संडे हो ये हो वर्कआउट तो आई थिंक ये छोटे सैक्रिफाइस होते हैं। बट ये वो है इट्स अ ब्रेक। एक ब्रेक लगाई दूसरी ब्रेक। जैसे लेट से यहां पे एक दो तीन चार पांच लोग खड़े हुए हैं जिन्होंने ये सब सैक्रिफाइस कर लिए हैं। हम्म और इधर यूनिवर्स है। यूनिवर्स बोल रहा है
(42:56) कि लास्ट सैक्रिफाइस कर रहा है बेटा। कौन तुम में सतह जा रहा है। अब इन पांचों को नहीं पता वो क्या सैक्रिफाइस है। वो अगर मैं माइक पे बता दूंगा तो लोगों के होश खराब हो जाएंगे कि यार ये सैक्रिफाइस पहले वाले से यूनिवर्स पूछता है भाई तू ये कर पाएगा। बोलता है जी मैं तो ये तो नहीं कर पाऊंगा। दूसरा तू कर पाएगा। जैसे ही उसने तीसरे से पूछा उसने बोला हां जी मैं करूंगा तो उसने यूनिवर्स ने हाथ पकड़ा आ जाओ और फिर चौथे पांचव का तो नंबर ही नहीं आया तो कई बार क्या होता है कि आपको डर लगता है कि यार ये करना है क्या कर दूं क्या यार नहीं नहीं नहीं नहीं नहीं नहीं
(43:35) बट इतना टाइम नहीं होता यूनिवर्स आपको इतना टाइम नहीं देता मुझे बस यही सिखाया गया कि कोई भी सैक्रिफाइस करने से पहले अगर तुम ए बनना चाहते हो तुम्हारे हाथ और जीभ कांपनी नहीं चाहिए। तो मैंने कहा ठीक है जो भी करना पड़ेगा अब बॉडी बिल्डर बनना है, वर्ल्ड चैंपियन बनना है, एशिया चैंपियन बनना है। ये नहीं पता उनको बनने के बाद क्या करना है। बस बनना है। क्यों? जब मैंने इनिशियली जिम शुरू किया था तो एक पोस्टर लगा हुआ था। ये नहीं पता था ये किसका पोस्टर है। जब मैंने अपने सर से पूछा सर ये किसका पोस्टर है। उन्होंने बाद में बताया ये फ्लेक्सिबिलर
(44:06) है। तो मैंने कहा सर ऐसा समझना है। तो उन्होंने बोला फिर ये छोटे-छोटे सैक्रिफाइस जो आएंगे सब करने पड़ेंगे। तो इनको कठोर भी समझते हैं सब और मैं तो बोलता हूं यह कठोर नहीं होते यार ये दिल के बहुत अच्छे लोग होते हैं। आप इनसे डिस्कशन करो तो सही कभी बट क्योंकि वो बॉडी होती है तो इनसे डिस्कशन करने से पहले ही लोग चार जजमेंट बना लेते हैं माइंड में यार रहने दो मत करो बट ये बहुत अच्छे होते हैं दिल के और इट्स नॉट अबाउट बॉडी बिल्डिंग। आप किसी भी स्पोर्ट्समैन से बात करोगे ना आपको बोलोगे क्या प्यारे लोग हैं। ये ए कैटेगरी वाले लोग अपनी फिटनेस को
(44:37) सस्टेन करने के लिए क्या करते हैं? क्योंकि एक बार करना, एक फेस के लिए करना, एक चैंपियनशिप के लिए करना तो समझ में आता है। बट इसको फॉर अ वेरी लॉन्ग टाइम इयर्स ऑन इयर्स सस्टेन करना इतना आसान नहीं है। जैसे आपने बताया फिजिकल इंजरी का डर है और इसके अलावा इतने सारे छोटे बड़े सैक्रिफाइसेस हैं, न्यूट्रिशन है, सप्लीमेंट्स है, इन्वेस्टमेंट है। बहुत ज्यादा खर्चा भी है। आसान नहीं है ये इस तरह का लाइफस्टाइल को मेंटेन करना। तो इसको सस्टेन कैसे किया जाता है? इतने साल आपने कैसे मेंटेन करा इस चीज को? क्योंकि मैं बहुत प्यार करता हूं इस चीज
(45:14) से। तो मुझे लगता है कि जो मेरे जैसे लोग होंगे वो इस चीज से प्यार कर लेते हैं। हम और बिकॉज़ वो उस चीज को सीख जाते हैं कि मेंटेन कैसे रहा जाता है? कंसिस्टेंसी क्या होती है? हार्ड वर्क कितना होता है? एंड अलोंग विद वो बहुत सारे युवा वर्ग को ट्रेन कर रहे होते हैं। उनकी फिटनेस के लिए तो एक एंबियंस सा बना होता है। तो उनके लिए मेंटेन करना आई डोंट थिंक सो इतना मुश्किल होता है। सो वो अगर पैशन है, पागलपन है तो आप उसको सस्टेन तभी कर पाते हो। ऐसा हो सकता है कि थोड़े समय के लिए वह सस्टेन ना कर पाए बिकॉज़ मे बी कोई इंजरी हो गई या मे बी
(45:49) हम उनकी कुछ कुछ भी समस्या चल रही है बट वो उससे ओवरकम कर लेगा क्योंकि उसको वो आता है मतलब फॉर अ लॉन्ग रन में नहीं देखोगे आप कि वो मेंटेन नहीं कर पाया बट बीच-बीच में ऐसे फेसेस आएंगे जब थोड़ा इधर-उधर हिलेगा जाएगा वो नॉर्मल है वो सबके साथ ही होता है। अगर आप 100% नेचुरल तरीके से अपने किसी भी तरह के हेल्थ गोल को पूरा करना चाहते हैं, चाहे वह वेट लॉस या वेट गेन हो या फिर डायबिटीज, पीसीओडी, थायराइड जैसी चीजों को मैनेज करना हो, तो उसके लिए आप हमारे प्रोग्राम आई एम वाओ का बेनिफिट ले सकते हैं। इस प्रोग्राम में आपको एक डेडिकेटेड सर्टिफाइड
(46:25) न्यूट्रिशनिस्ट असाइन होते हैं जो आपके लाइफस्टाइल, आपके चॉइसेस, आपके टेस्ट एंड प्रेफरेंसेस, आप कहां पे रहते हैं? आपकी जॉब क्या है? इन सब चीजों को कंसीडर करते हुए आपके लिए वीकली कस्टमाइज डाइट प्लान क्रिएट करते हैं। इसी के साथ आपको हमारी ऐप का एक्सक्लूसिव एक्सेस मिलता है जिसमें आपको बहुत सारी रेसिपी वीडियोस, वर्कआउट वीडियोस, योगा वीडियोस, मेडिटेशन और बहुत सारी ऐसी सर्विज कॉम्प्लीमेंट्री मिलती हैं। आई एम वाओ की यह कम्युनिटी, डाइटिशियन का सपोर्ट, वीकली कॉल्स, चैट असिस्टेंट इन सब चीजों की मदद से दुनिया भर से हजारों लोगों ने अपने हेल्थ गोल्स
(47:03) को इस प्रोग्राम के थ्रू इजीली अचीव किया है। अगर आप इसके बारे में और डिटेल्स जानना चाहते हैं तो डिस्क्रिप्शन में दिए गए लिंक पर विजिट कर सकते हैं। आपने बोला कि एक चलो छोटे-छोटे सैक्रिफाइसेस हैं। और इसके अलावा आपने भी बताया कि एक फिजिकल रिस्क भी हमेशा रहता है कि अगर आप नहीं कर पाए तो वो नहीं उठ पाए तो या नहीं बियर कर पाए तो एक फिजिकल इंजरी भी हो सकती है। आई थिंक आपको भी कुछ इस तरह की इंजरी हुई थी। हां मतलब इंजरी तो किसी भी स्पोर्ट्स के किसी में भी हो ही सकती है। राइट? तो मेरे को भी हुई स्पाइन इंजरी और काफी मेजर हुई और मेरे को उसकी वजह से
(47:37) इट्स ऑलमोस्ट 2 साल ढाई साल स्पोर्ट्स छोड़ना भी पड़ा। रिहब एक्सरसाइज हुआ। बहुत सारा फिजिक दोबारा से जीरो पे चला गया। वहां से मैंने थोड़ा पढ़ना शुरू किया। फिर स्पाइन का फंक्शन क्या होता है? ग्रूट मसल कैसे और डिटेल्ड में वो भी अपने को ठीक करने के लिए। स्पोर्ट्समैन के लिए सबसे बड़ा रिस्क होता है फिजिकल इंजरी। जब लेट्स से उसको कोई ऐसी इंजरी हो जाए जिससे ओवरकम ना किया जाए। और बहुत सारे स्पोर्ट्समैन जो मेरी बात सुन रहे होंगे वो रिलेट भी करेंगे। कईयों का बहुत मन करता है उस स्पोर्ट्स को करने का। बट द प्रॉब्लम इज कि जो इंजरी
(48:13) उनको हो चुकी है उससे वो हील ही नहीं हो पा रहे तो वो स्ट्रगल बहुत चल रहा है। मैं तो पता नहीं टाच कैसे हील हो गया। बट आई थिंक मैंने 2007 आठ नौ में कोई कान्टेस्ट नहीं खेला। अच्छा हां 2010 में मैंने फिर कमबैक किया। हां और वो तो पता नहीं कैसे एक लकीली मेरे को बहुत ही अच्छे डॉक्टर मिल गए। जिन्होंने मुझे यह बताया कि भाई अपनी हैमस्ट्रिंग को ग्लूट्स को इस तरीके से स्ट्रेंथन करना है। स्पाइन का काम कम हो जाएगा। ये तीन वर्कआउट मत करना। फिर जब मैंने वो सीखा थोड़ा समझा उनसे और उन्होंने थोड़ा एक्स्ट्रा हेल्प कर दिया मुझे। तो 2010
(48:49) में फिर मैंने कंपटीशन खेला दोबारा मिस्टर इंडिया बना। हम उस साल बेस्ट इंप्रूव्ड बॉडी बिल्डर ऑफ द ईयर भी बना। उसके बाद फिर आई थिंक मुझे स्पाइन का पेन अभी मैंने लास्ट स्क्वाड की थी तीन दिन पहले तब भी हुआ था। अच्छा बट अब मैं उसके इतना यूज़ टू हो चुका हूं कि वो पेन मुझे रुकावट नहीं देता किसी तरह की। डॉक्टर सिर्फ एक ही बात बोलते हैं एक्सरसाइज छोड़ दो। हम वो ये नहीं समझते कि किसी भी स्पोर्ट्समैन की उस स्पोर्ट्स को खेलने की भावना जो है तुम्हारे कहने से इतनी टूट जाती है कि उसका लगता है यार ये क्या बोल दिया? एक्सरसाइज छोड़ दो।
(49:26) और ऐसा नहीं है कि फॉर सम टाइम छोड़ दो। अब नहीं अब तुम ये स्पोर्ट्स नहीं कर पाओगे। इट्स अ लाइफ थ्रेटनिंग और ये हो जाएगा वो हो जाएगा। बट मुझे लगता है कि हमारे यहां पे अभी भी उस तरह की फैसिलिटीज नहीं है जहां पे स्पोर्ट्समैन को उनके नजरिए से ट्रीट किया जाए कि वो स्पोर्ट्स को खेलना बंद नहीं कर सकता। बट क्या ऐसे कुछ विकल्प हो सकते हैं जिससे उसकी इंजरी को हील करके उसको वो स्पोर्ट्स खेलने दिया जाए। एक्जेक्टली। प्रॉब्लम को फिक्स करके आगे बढ़ा जाए और उसका एक सशन दिया जाए ना कि प्रॉब्लम को दबा दिया जाए। हां हिंदुस्तान में उस इंफ्रास्ट्रक्चर की तो कमी है जहां
(50:03) डू यू थिंक बाहर अलग अप्रोच अलग होती है क्योंकि ये जो डॉक्टर मुझे मिले थे ये बाहर के ही थे और इन्होंने एक कैंप लगाया हुआ था हम और पता नहीं मेरा फ्रेंड मुझे क्यों उस कैंप में ले गया बट जब मैंने ये देखा कि उन्होंने मुझे एक्सरसाइज करने के लिए मना नहीं किया उन्होंने मुझे थोड़े समय के लिए रेस्ट लेने के लिए कहा और जिस रेस्ट में उन्होंने मुझे जो गाइड किया मैं उसकी वजह से काफी हील हो गया राइट बट बट स्पाइन का पेन आज भी है। अच्छा। हां। मतलब जब भी आप किसी स्पोर्ट्स को खेलते हो तो छोटी-मोटी इंजरीज होना तो स्वाभाविक है। मतलब हो जाती है। नॉर्मल
(50:39) है। एक और आस्पेक्ट की मैं बात करना चाहती हूं। कोई भी जब फिटनेस को बहुत सीरियसली लेता है या रेगुलरली वर्कआउट्स करना, जिम जाना, वेटलिफ्टिंग करना उसको किन बातों का ध्यान रखना है या किस तरह से मेंटल हेल्थ अफेक्ट हो सकती है स्पेशली अगर हम यह ए कैटेगरी की बात करें तो बिकॉज़ बहुत अग्रेसिव रूटीन चाहिए। बहुत अग्रेसिव डिसिप्लिन चाहिए। तो इतने अग्रेशन के बाद और इतने ज्यादा एक्सट्रीम लेवल ऑफ डिसिप्लिन कहीं ना कहीं डीपली अफेक्ट भी करता होगा। एंड मैं यह उस कॉन्टेक्स्ट से पूछ रही हूं। अभी आपकी भी एक रीसेंट
(51:23) वीडियो थी जिसमें आपने अपने वनरेबिलिटीज को शेयर किया था। एंड शायद आपने उसमें अपना एक एक डिफरेंट साइड के बारे में बताया था। तो पहले तो क्या था उस वीडियो में? क्या आपने शेयर किया? क्या फील कर रहे थे आप? एंड बाकी के लोग जो हमें सुन रहे हैं वो किन बातों का ध्यान रखें ताकि वो उस फेज से नहीं गुजरे इफ देयर वास एनी नेगेटिव फेज दैट यू हैव गॉन थ्रू। सो मुझे लगता है कि जिस एरा में मैंने एक्सरसाइज सीखी मुझे सिखाया गया कि फिजिकल हथ यानी छाती चौड़ी होनी चाहिए कंधे बाहर होने चाहिए यानी एक एस्थेटिक फिजिक होना चाहिए जो बाहर से
(52:06) दिखने में सुंदर लगता है और जब तुम स्टेज पे जाते हो तो इस बात पे निर्भरता होती है। तुम जीतोगे या हारोगे कि तुम्हारा बॉडी फैट परसेंटेज कैसा है? तुम्हारे आर्ट्स की विजिबिलिटी कैसी है? तुम्हारी प्रेजेंटेशन कैसी है? कितना कॉन्फिडेंस है? कैसे तुम स्टेज पे आते हो? तो क्या तुम्हारा हो रहा है? तो मैंने वो सीख लिया। लोगों को अच्छा भी लगा। लोगों ने मुझे बहुत पसंद किया। फिर मुझे ओवर द पीरियड ऑफ टाइम समझाया गया क्योंकि तुम इतना ज्यादा डाइट करते हो और ओवर यूसेज ऑफ बॉडी कर रहे हो। तो मेडिकल हेल्थ का ध्यान रखना। यानी तुम्हारे
(52:41) लंग्स, तुम्हारी किडनी, तुम्हारा हृदय सही से काम कर रहा है। तो उसके लिए जनरल ब्लड टेस्ट हो जाते हैं। तो फिर 6 महीने में एक बार ब्लड टेस्ट करा लिया। पैरामीटर्स देख लिए। हां, ठीक है सब कुछ। बट एक चीज मिस हो गई। क्या? किसी ने यह बताया ही नहीं कि यहां पे भी प्रेशर पड़ता है। इसका भी कुछ एक पैरामीटर होना चाहिए जो तुम हर छ महीने में जाओ और इसको चेक करो। तो क्या यह सही से काम कर रहा है? तुम्हें लग रहा है कि यह सही से काम कर रहा है। बट ऐसा हो सकता है कि यह सही से काम ना कर रहा हो। अब क्योंकि मैंने तो एक्सरसाइज करना सीखा हमेशा। वही
(53:23) आगे जनरेशन को सिखा दिया। हम फिर मैंने जनरेशन को दिखा दिया कि थोड़ा मेडिकलली भी अपना ध्यान रखा करो क्योंकि मुझे वो पता था। बट क्योंकि मैं आज बहुत सारे लोगों को ट्रेन कर रहा हूं। ठीक है? जिसमें से 90% लोग वो हैं जो ऑफिस जाते हैं जो सिर्फ फिटनेस के लिए कर रहे हैं और 10% एथलीट भी है। यह आते हैं और यह मेरे सामने बैठते हैं और यह बताते हैं भैया कुछ ना अच्छा सा नहीं लग रहा। ऑफिस जा रहा हूं। फिजिक ठीक है। आपने बोला था ब्लड टेस्ट कराना है। उसमें सब कुछ ठीक है। पर भैया अच्छा सा नहीं लगता। और वो बहुत तेज-तेज़ रोने लगता है। और क्योंकि
(54:01) रूम में वो और मैं ही होते हैं। और 99% ये मेल्स होते हैं। तो मुझे लगा ये इतना क्यों रो रहा है? मैंने कहा तू लास्ट टाइम कब रोया था? कह रहा भैया अलाउड ही नहीं है। मैंने कहा क्यों? कह रहा मम्मी के सामने रो नहीं सकता। पापा के सामने एक इमेज है। घर में अगर रोऊंगा तो कमजोर दिखूंगा। यार दोस्तों के सामने रोऊंगा तो वो भी शायद यह ना कह दे कि अरे अरे कोई बात नहीं आज तेरे को अच्छा नहीं लग रहा। कल अच्छा लगेगा। चल ठीक है। खड़ा हो। यही कहेंगे। ना अच्छा लगना इज़ यहां पे मैं थोड़ा ऊपर आ चुका हूं और यह मैं आपको बता रहा हूं। मैं उसकी काउंसलिंग कर देता हूं
(54:39) जितना मुझे आता है। फिर एक अगले दिन 22 साल का लड़का आता है। अच्छा दिख रहा है। सब कुछ आता है। वो भी रोता है। ऐसे मेरे पिछले सवा साल में इतने इंसिडेंट हो गए कि यह होने के बाद मैं ऐसे हो जाता हूं। यार यह क्या हो रहा है? फिर मैंने थोड़ा पढ़ा, थोड़ा जाना, थोड़ा देखा, थोड़ा सुना। हम और मुझे लगा कि उ इनकी मेंटल फिटनेस दे आर मतलब ये मेंटली फिट नहीं है। तो मैंने कहा हां इसके लिए क्या करना पड़ेगा? क्योंकि मुझे तो आता ही नहीं है। और गुंजन इस माइक पर मैं यह कह रहा हूं क्योंकि मैं इस मतलब इस
(55:28) कॉम्पिटिटिव करियर में इतना बिजी था कि मैंने भी यह ध्यान नहीं दिया कि यह जो 100 लोग आए थे ना तेरे पास अब एक काम करते हैं तू खुद से बात कर। फिर मैंने खुद से बात करी। मैंने कहा 101वां तो मैं हूं। अच्छा नहीं लग रहा यार। बट मैं तो इनका माचोम मैन हूं। अब माचोमैन कैसे रो सकता है? मैंने कहा कोई बात नहीं Google पर जाते हैं। माचो मैन की डेफिनेशन पढ़ते हैं। मैंने माचो मैन की जो डेफिनेशन पढ़ी मेरे को बहुत दुख हुआ। मतलब जितना मुझे समझ में आया कि उनमें बहुत ज्यादा इमोशंस नहीं होते। यह फिजिकली अच्छे दिखते हैं और दुनिया को उस तरीके से प्रभावित करने की
(56:04) कोशिश करते हैं जो कहीं ना कहीं यह कह दो कि दूसरे को दबाने वाला। मेरे को ऐसा माचोमैन बिल्कुल नहीं बनना। मे बी मैंने गलत समझ लिया। बट मुझे था कि मेरे को सर ने जो माचोमैन की डेफिनेशन पढ़ाई है वो तो अलग होती है। ये तो हृदय से बहुत सॉफ्ट होते हैं। ये महिलाओं के प्रति किस तरह का व्यवहार करते हैं? उससे झलकता है माचो मैन क्या होता है? हम उसके नीचे एक लाइन ड्रॉ करी कि क्या आपने यह राइट लेफ्ट में सोसाइटी में उस तरह का कंट्रीब्यूशन करते हैं जो पॉजिटिव होता है? मेरे को ये माचो मैन की डेफिनेशन है। मुझे तीन महीने लगे ये डिसाइड करने में कि
(56:43) क्या मुझे ये वीडियो बनानी चाहिए। इससे क्या होगा? क्योंकि सोचो ना कितने सालों से काम कर रहा हूं फिटनेस में। बट अगर अभी मुझे फिटनेस का एक नया रूप पता चला कि फिजिकल फिटनेस, मेडिकल फिटनेस बट व्हाट अबाउट मेंटल फिटनेस भाई। ठीक है? तो यानी अगर कोई अच्छा फिजिक वाला है, उसका मतलब नहीं है कि वो फिट है। अगर किसी के ब्लड टेस्ट बिल्कुल ठीक है, उसका भी मतलब यह नहीं है कि वो फिट है। और सिर्फ कोई मानसिक रूप से मजबूत है, उसका भी मतलब नहीं है। ओह हो ये तो ट्रायंगल था। हमने तो नीचे की लाइन ही मिस कर दी। सो यह बन गया फिजिकल फिटनेस,
(57:23) मेडिकल फिटनेस एंड मेंटल फिटनेस। और क्योंकि आज के दौर में आप मेरी बात लिख के ले लो। दो साल और होने दो या 2030 आने दो। कितनी पपुलेशन उसमें मेल होंगे, फीमेल्स भी होंगे। सबसे ज्यादा प्रभावित होंगे मेंटल हेल्थ का ठीक ना होना। ठीक है? अब मैंने वो वीडियो बना दी। अब क्योंकि एक अच्छी फिजिक वाला वर्ल्ड चैंपियन जिसने सब कुछ हासिल कर लिया है। जो सब इतने लोगों का रोल मॉडल है जिसको लोग ट्रेनिंग के लिए फॉलो करते हैं। ओ हो ये भैया को क्या हो गया? अरे भैया को कुछ नहीं हुआ। भैया तुम्हें यह समझाना चाहते थे। मेरा फिटनेस एक्सपर्ट कहने का कर्तव्य तब पूरा होता है
(58:10) जब मैं उन 100 को बोलूं मैं तुम्हारे साथ खड़ा हूं। तुम नहीं बोल पा रहे हो ना अपनी मम्मी को पापा को सिस्टर को वाइफ को नहीं बोल पा रहे हो ना कि दर्द हो रहा है मर्द हूं दर्द हो रहा है तो मैं बोलता हूं और जब मैंने स्क्रीन के सामने बोल दिया तो 90% ऑफ समझदार जो जनता थी जो लोग थे जो मुझे मानते हैं उन्होंने बहुत पॉजिटिव लिया उस वीडियो के जब कमेंट बॉक्स में आप जाओगे आप देखोगे कि सब ने बोला भैया ये तो हमारी कहानी है मैंने कहा बट नहीं नहीं ये तो मैं अपनी बात कह रहा हूं ये तुम नहीं नहीं उन्होंने बोला भैया ये सब तो हमारे साथ भी तो हो
(58:45) रहा है बट हम रो नहीं पा रहे हैं। मैं उनसे हाथ जोड़ के आग्रह करना चाहता हूं कि नेक्स्ट टाइम नेक्स्ट टाइम प्लीज प्लीज प्लीज अपनी मेंटल हेल्थ का ध्यान रखना फिजिकल और मेडिकल के साथ। अब क्योंकि मैं मेंटल हेल्थ एक्सपर्ट नहीं हूं। मैं लोगों को यह कहना चाहता हूं जिस तरीके से तुम्हें खांसी, जुकाम, बुखार हो जाता है और तुम एक डॉक्टर के पास जाते हो। बिना इस हिचकिचाहट के लोग क्या कहेंगे? तो तुम जब मेंटली अच्छा फील नहीं कर रहे तो तुम्हें किसी एक्सपर्ट की एडवाइस ले लेनी चाहिए। बट द प्रॉब्लम इज कि मेंटल हेल्थ में मेंटल आता है
(59:27) तो वो मर्द को यह कह दिया जाता है पागल हो गया है। ऐसा नहीं होता। ठीक है ना? तो मैं मेंटल हेल्थ खराब होने को बुखार के लेवल पर लाना चाहता हूं। और अगर मैं यह ला पाया तो मैं समझूंगा कि जो मैं अपने आप को फिटनेस एक्सपर्ट इस दुनिया में कहता फिरता हूं तो यह मेरा कंट्रीब्यूशन पूरा हो गया। बट आप मानो बहुत सारे लोग आज भी हमारे घरों में वहां पर मेंटल हेल्थ को कुछ मानते ही नहीं है। तो मैं उन लड़कों के लिए जो आज जिम जा रहे हैं। जिम जाना चाहते हैं। कोई भी ए या बी कैटेगरी में है। प्लीज इट्स अ हमंबल रिक्वेस्ट ऑफ माइंड कि फिजिकल मेडिकल के साथ-साथ मेंटल हेल्थ जिस
(1:00:10) दिन खराब हो अपने मम्मी से अपने पापा से अपनी बहन से अपने भाई से किसी से भी बात करने में संकोच मत करना वो तुम्हें जज नहीं करेंगे और अगर उससे भी आराम ना आए तो किसी एक्सपर्ट की एडवाइस ले लेना बिल्कुल ठीक है बट गुंजन द प्रॉब्लम इज कि जितने भी लोग समाज में कुछ परिवर्तन लाना करना चाहते हैं और समाज के कुछ लोग या कुछ व्यक्ति उस परिवर्तन को एक्सेप्ट नहीं करना चाहते तो वो परिवर्तन लाने वाले व्यक्ति की टांग खिंचाई जरूर करेंगे। मोर देन वेलकम करो हम बट ये मैं अकेला नहीं कर पाऊंगा। मुझे आपके जैसे फिटनेस एक्सपर्ट्स की बहुत सारे
(1:00:56) ऐसे लोगों की जो फिटनेस से जुड़े हुए हैं जो इस इंडस्ट्री में अच्छा काम कर रहे हैं। मैं उनको भी बोलना चाहूंगा कि आप भी जब किसी को फिजिकली ट्रेन कर रहे हो हम तो उसको मेंटली भी ट्रेन कर दो। बट मैं हर मर्द को कहना चाहता हूं कि तुम्हें अपना दुख बोलने का रोने का अधिकार है। कोई तुम्हें जज नहीं करेगा और जिसको जज करना है करे। बट तुम अपने मन के भाव तो निकालो। तो बस उससे रिलेटेड यह वीडियो थी और उस वीडियो के बाद दिस इज द फर्स्ट कन्वर्सेशन जो मैं कर पा रहा हूं और करना चाहता हूं। आपकी इस वीडियो के बाद मैंने कुछ दो चार वीडियोस देखी। शायद वही लोग जो
(1:01:38) अपॉर्चुनिटी मैक्सिंग करना जानते हैं या चाहते हैं। एंड दे हैड अ पॉइंट ऑफ व्यू कि ज्यादा स्टेरॉइड्स लेने की वजह से यह सब होता है। अगर वो यह कह रहे हैं तो आई डोंट नो किस थॉट से कह रहे हैं या क्यों कह रहे हैं बट इज देयर एनीथिंग दैट यू वांट टू से ऑन दिस? पहली बार मेरी लाइफ में इंटरनेट पे मेरे आलोचक बने हैं। पहली बार मेरे बारे में किसी ने गलत बोला। अच्छा तो नहीं लगा बट क्योंकि ये मुहिम बहुत बड़ी है। बहुत सारे ऐसे लोग आएंगे जो इसमें कुछ-कुछ अपने पॉइंट्स निकालेंगे। बट मैं सबको थैंक यू बोलना चाहता हूं। क्योंकि उन्होंने जो भी कंटेंट डेवलप किया
(1:02:22) मेरी कन्वर्सेशन पे हम वो उनका माइंडसेट है। उनका एक कहना है। बट मैं ये कहना चाहता हूं कि अगर आप उस वीडियो को एक खिलाड़ी के एस्पेक्ट से देख रहे हो तो यू आर रॉन्ग। जब मैंने बोला कि जो 100 लोग मेरे सामने आकर रोए थे उसमें से 90% वो लोग थे जो जिनकी एक फैमिली है जिनका कोई छोटा बिजनेस है कि बहुत बड़ा बिजनेस है कोई सीईओ है कंपनी का कोई कुछ है वो तो एथलीट नहीं है। बट द प्रॉब्लम इज क्योंकि वो एक खिलाड़ी ने बोला है तो यह जाहिर हो जाता है कि यह खिलाड़ी की प्रॉब्लम है। ये खिलाड़ी की प्रॉब्लम नहीं है। और मेरी बात अगर आज समझ
(1:03:01) में नहीं आ रही। जिस खेल को मैं खेलतेखेलते आज यहां पहुंच चुका हूं। मैं यह कहना चाहता हूं वो खेल को मैं बहुत अच्छे से जानता हूं और अपने खेल का पक्का खिलाड़ी हूं। ठीक है? तो मुझे उसके फायदे नुकसान कितना करना है कब छोड़ना है तो उसके इफेक्ट उसके साइड इफेक्ट उसके कुछ भी मुझे प्लीज कोई ना समझाए तो बेहतर है बट क्योंकि मैं इन 90% जनता को 90% सोसाइटी में रह रहे लोग जो ए कैटेगरी से बिलोंग नहीं करते हैं उनको वो मैसेज था कि मानसिक रूप से थोड़ा हमें हमें जब मैं बोल रहा हूं तो मैं अपने आप को भी कह रहा हूं स्ट्रांग बन बनने की जरूरत है। बट गुंजन
(1:03:46) मैं यह कह देना चाहता हूं मैं जो भी कन्वर्सेशन कर करता हूं इंक्लूडिंग टुडे मैं दिल से करता हूं। लेट्स से वो वीडियो अगर मैं नहीं भी बनाता तो मुझे पता है उससे ओवरकम कैसे करना था। बट जब मैं कोई एक वर्कआउट की बाईसेप्स ट्राइसेप्स की वीडियो बनाता हूं कि एक अच्छा कैसे आप आर्म्स को डेवलप कर सकते हो और वेजिटेरियन अगर मसल बिल्डिंग पे है तो 12 हफ्ते उसका डाइट कैसा सा होना चाहिए ये बताता हूं। तो क्या मुझे यह बताने का अधिकार नहीं है कि अगर मैं आज मेंटली रूप से ठीक महसूस नहीं कर रहा और मुझे उसके तरीके नहीं आते ओवरकम कैसे करना है तो तुम
(1:04:19) में से कोई ऐसा है जो ऐसासा महसूस कर रहा है कि तो हमें आज तरीके नहीं पता विल फिगर आउट तरीके और मैं खुद बता रहा हूं मैं छ महीने इस पे काम करके फिर वीडियोस बनाऊंगा जो होंगी स्पेशली मेंटल हेल्थ तो इतना सा कहानी थी बट ठीक है मुझे तो लगता है बहुत ज्यादा करेज चाहिए अपना ये वाला साइड बाहर दिखा दिखाने के लिए क्योंकि अपने सारे खूबियां, अच्छाइयां, अचीवमेंट्स ये सब चीजें तो सब दिखाते हैं और बहुत प्राइड के साथ दिखाते हैं। बट क्या मिसिंग है फेलियर्स कहां लैक कर रहे हैं इनसिक्योरिटीज। इतना ज्यादा वनरेबल होना इसके लिए बहुत गट्स चाहिए। तो ये आसान
(1:04:58) नहीं है। मुझे लगता है द स्ट्रेंथ इज इन डिस्प्ले ऑफ योर वल्बिलिटीज। किसी में स्ट्रेंथ है। वही असली मैचो मैन या वुमेन है जो अपनी इनसिक्योरिटीज को भी शेयर कर सके खुल के। बट मुझे तो कुछ कुछ हंसी भी आई थी। मैं उसके बाद चलो एक हफ्ता तो मैंने कुछ नहीं किया। वो थोड़ा सा मेरे को भी लग रहा था बट मैं जब जिम जाऊं अब लोग मेरे को ऐसेसे ऐसे क्यों देख रहे हो तुम? भैया आप रोते नहीं अच्छा नहीं लगा। मतलब दिल बहुत भारी हो गया। अरे इट्स ओके इट्स अब्सोलुटली ओके तुम मेरे लिए अच्छा सोच रहे हो तो इसीलिए तुमने ऐसा कहा मुझे कि भैया शायद नहीं
(1:05:42) बनाते भैया यार आप तुम्हारे रोल मॉडल हो बट मैं उनको कहना चाहता हूं कि रोल मॉडल सिर्फ बातों से नहीं होता रोल मॉडल एक्शन से होता है और मैं तुम सब लोगों के साथ हूं जितने भी लोग आज अच्छा फील नहीं कर रहे इस पे काम कर लेंगे एक्सक्ट्ली एंड फीलिंग सैड इज जस्ट वन इमोशन मतलब मतलब एक इंसान के छह इमोशंस होते हैं। जिसमें से सैडनेस वन ऑफ द इमोशंस ही तो है। तो अगर हम बाकी के पांच इमोशंस हैप्पीनेस, एंगर, ग्रीफ सब दिखा सकते हैं। इसके बारे में बात कर सकते हैं। सोशल मीडिया पे पोस्ट कर सकते हैं। तो व्हाई नॉट सैडनेस? इट्स मतलब मेरे लिए तो
(1:06:19) यह सब ह्यूमन इमोशंस के उसमें आते हैं। कैटेगरी में आते हैं। एंड इट्स इक्वली गुड टू शेयर एनी ऑफ योर इमोशंस। पे आपने बहुत सारे ना फिटनेस के आस्पेक्ट्स को देखा है। बहुत इस फिटनेस को भी जिया है। आप इतना लोगों को आज एजुकेट भी कर रही हो। तो आपको पता है यार ये छह होते हैं। ठीक है? कभी-कभी कोई ज्यादा कम हो जाता है। बट किसी एथलीट के लिए, किसी माचूम मैन के लिए बड़ा नया है। शायद वही है कि वो वो मेंस की दुनिया में इसकी डेफिनेशन काफी अलग आ जाती है। तो मैं बोलना चाहता हूं मर्द को दर्द हो सकता है। कोई दिक्कत नहीं है। अच्छा यतेंद्र आपने ये सब फील किया इसलिए
(1:06:59) आपने ये सब शो किया और आपने बोला कि आपके बहुत सारे ऐसे स्टूडेंट्स हैं जिन्हें आप काउंसिल करते हो और समझाते हो, बताते हो। इफ यू कुड रिस्टार्ट योर जर्नी ऑल ओवर अगेन अगर आप फिर से स्क्रैच से शुरू करते तो क्या चीजें इस बार आप डिफरेंटली करते कि आपकी मेंटल हेल्थ और फिजिकल हेल्थ दोनों हैंड इन हैंड चलती। तो मैंने अपने आप से बहुत ओवर प्रॉमिस्ड कर लिया हर चीज। अच्छा। ठीक है। नंबर वन YouTube चैनल बनाना है। हिंदुस्तान में वर्ल्ड में पहली रैंकिंग पे आना है। बट किसी एथलीट का क्या बहुत बड़ा सप्लीमेंट ब्रांड होगा? हां, हमारा होगा। तो वह बना लिया।
(1:07:42) फिर घर फैमिली तो है ही। फिर एक दो बिजनेस और बना लिए। तो मुझे लगता है कि मैंने अपने आपको इतना ओवर प्रॉमिस्ड कर दिया। किसी ने नहीं किया। नॉट इवन अ सिंगल पर्सन मुझे यह बोला करने के लिए। ये मैंने ही बोला। ओवर प्रॉमिस कर दिया और फिर रोज ना बर्डन हो रहा है। बर्डन हो रहा है। बर्डन हो रहा है। कह भी नहीं पा रहा हूं किसी को कि यार क्या मैं इसमें से एक दो चीजें छोड़ दूं? हम इधर फोकस करूं। नहीं नहीं नहीं नहीं नहीं नहीं नहीं मैं सब कर सकता हूं। सब मेरे को आता है। तो कई बार हम खुद ये महसूस नहीं कर पाते। हमने अपने आप को ओवर प्रॉमिस कर दिया है। दूसरा
(1:08:22) मेरे मैं अपनी बात कर रहा हूं। हो सकता है बहुत सारे लोग इससे रिलेट करेंगे। मेरा प्रॉब्लम है परफेक्शन। मैं हर चीज की इतनी ज्यादा परफेक्शन में चला जाता हूं कि वह काम जो 2 घंटे में होना होता है वह 10 घंटे में हो रहा होता है। क्यों? मुझे बहुत जो बारीकियां ढूंढनी होती है। नहीं ये ये निकालो ये करो। तो आई थिंक मैं जनरेशन को ये समझाना चाहता हूं परफेक्शन इज नथिंग। ठीक है? क्योंकि वो बढ़ती रहती है। तो वन इज ओवर प्रॉमिस्ड। वन इज कि मुझे लगता है कि इतना परफेक्ट बनने की जरूरत नहीं है। लाइफ को थोड़ा सा ई आउट करो हम और अगर तुम किसी काम को कर रहे हो मन से
(1:09:05) कर रहे हो वो उतना परफेक्ट नहीं भी हो पा रहा तब भी इट्स फाइन। तीसरा मुझे लगता है कि मैंने बॉडी बिल्डिंग से इस स्पोर्ट्स से दिल बहुत ज्यादा लगा दिया और जब मुझे उससे अपने दिल को निकाल के बाकी को देना पड़ा तो मैं दे तो पाया बट वो एक खालीपन रह गया तो मुझे बस फिगर आउट कर लेना था कि इस खालीपन को मैं कैसे भरूं हम फिर अगर मैं अपने बचपन में जाऊं मेरे को बहुत क्लियरली ये इंसिडेंट याद है कहीं 8 10 12 लोग बैठे हैं एक बात चल रही है। जिस बात में मैं बहुत अच्छा मैसेज दे सकता हूं, कैपेबल हूं बट वहां मुझे बोलने नहीं दिया गया। तो
(1:09:49) मेरे अंदर कहीं ना कहीं वो इनसिक्योरिटी इंफिनिरिटी कॉम्प्लेक्स रह गया जो मुझे यह लगा कि जब मैं वर्ल्ड चैंपियन बन जाऊंगा तो मैं इससे ओवरकम कर लूंगा। उसके बीच में बहुत सारा स्ट्रगल था। बहुत सारा हार्ड वर्क था। बहुत सारा सैक्रिफाइस था। बहुत सारी छोटी-छोटी तपस्याएं थी। बट मुझे लगता है कि जब मैं यह सब कर भी रहा था, मुझे थोड़ा-थोड़ा एंजॉय भी करना था। जैसे दो दिन घूमने चला जाता। रिलैक्स। दो दिन जब मन नहीं कर रहा था तो एक्सरसाइज छोड़ देता। कोई बात नहीं। ठीक है। अगर उस दिवाली पे घर के साथ बैठ के अगर मैं यह सोचता कि उसका कंपनसेशन मैं
(1:10:35) बाकी दिनों में कर लूंगा तो सेलिब्रेट कर लेता। कोई बात नहीं क्योंकि वह मोमेंट बाद में नहीं आते। तो मैंने वो इतने मोमेंट मिस आउट कर दिए। आज मुझे लगता है कि यार कर लेता कोई बात नहीं होती। और मुझे यह समझ लेना था कि जो भी मेरे मन में यह इंफिनिटी कॉम्प्लेक्सेस हैं, यह किसी के दिए हुए नहीं है। यह मेरे खुद के मन के बनाए हुए हैं। अब मन को कैसे सही करना है, तो उसके तरीके मुझे आज नहीं फिगर आउट करने थे। मुझे 20 साल पहले जब मुझे लग रहा था मेरा कॉम्प्लेक्शन डार्क है और मैं बाथरूम में खड़ा हो के क्रीम की पूरी डब्बी निकाल के मल रहा था
(1:11:14) और गोरा होने की कोशिश कर रहा था। तब मुझे यह समझ लेना था कि यह बात मैं किसी को बोल दूं क्या इससे कुछ प्रॉब्लम होती है? वो नहीं होती। फिर यह समझ लेना था कि जब यूनिवर्स से इतना कुछ मांगा था तो एक यह भी मांग लेता कि कोई एक सपना बहुत ज्यादा पूरा ना हो उसे 80% पूरा हो जाए। बट क्या मैं 20% अपने लोगों के साथ, अपने अराउंड के साथ खेल लूं, घुलमिल लूं, बात कर लूं। तो ये छोटी-छोटी चीजें हैं जो मैं शायद कर लेता। तो यह वीडियो तक आने की नौबत ना पड़ती है। सो द क्रक्स इज थोड़ा अपने ऊपर लीनियंसी रखना। लिटिल बिट एट लीस्ट और थोड़ा बैलेंस बना के चलना। इतना ही करना
(1:11:59) है बस। बहुत ज्यादा खुद के साथ स्ट्रिक्ट खुद को बहुत ज्यादा हर वक्त सेल्फ जजमेंट्स नहीं करना। आई थिंक दैट्स दैट्स द कंक्लूजन। और जो एक आपने बात बोली वो बहुत इंपॉर्टेंट थी कि हम लोग खुद अपने आप को बहुत ज्यादा अंडरएस्टीमेट करते हैं। अपने आप को ही जज करते हैं। जिसे हम साइकोलॉजी में स्पॉटलाइट इफेक्ट कहते हैं। हमें ऐसा लगता है कि सब हमें ही देख रहे हैं। हमें ही जज कर रहे हैं। हमारे बारे में ही सोच रहे हैं कि मैं कैसे और द रियलिटी इज किसी को कोई फर्क नहीं पड़ता। हर कोई अपनी लाइफ में इतना ज्यादा बिजी है कि किसी के पास टाइम नहीं है आपको देखने
(1:12:33) का कि आप कैसे दिखते हो। आप ऐसे हो, आप वैसे हो। शायद वो इट्स जस्ट 1% और आप उसको 99% बना रहे हो। बट एक सवाल क्योंकि आप बहुत कंटेंट बनाते हो। मुझे डाउट है इस बात पे। क्या मैं आपसे कर लूं? हां बिल्कुल। बहुत ज्यादा कंटेंट बनाने की वजह से ये प्रेशर तो नहीं आता। क्योंकि मुझे स्पोर्ट्स खेलते हुए तो कभी ये प्रेशर नहीं फील हुआ। क्योंकि मैंने यह महसूस किया। मैं कोई तो वीडियो बना रहा था। और मैंने जब वो वीडियो बना के मैं घर आया इट टेक आई थिंक 12 13 आवर्स उस वीडियो को बनाने और यह वीडियो थी हम दारा सिंह जी के बारे में जब मैंने लिखा दारा सिंह जी के
(1:13:10) बारे में बारे में बारे में मैंने इतनी वीडियोस देख ली इंटरनेट पे इतना पढ़ लिया उनके बारे में मैंने 24 पेज तैयार कर लिए और उसमें वो बातें मैंने दारा सिंह जी के बारे में सुनी और लिखी जो बहुत सारे लोगों ने डिजिटल प्लेटफार्म पर नहीं की थी बट उसके बाद मुझे बहुत प्रेशर आ गया और मुझे लगा कि मुझे कैमरे को फेस नहीं करना। और मैंने सच में जो हम जो हमारे शूट्स करते हैं उनको बोला मैं ना आई रिक्वेस्ट यू कि मुझे कंटेंट क्रिएशन से ब्रेक चाहिए। तो यह मैं उसी से पूछ सकता हूं सामने अगर कोई ऐसा कंटेंट क्रिएटर हो जिसने काफी कंटेंट
(1:13:44) बनाया हो। मैं सही कह रहा हूं या मैं गलत कह रहा हूं। ये स्टेज सिर्फ तभी आती है जब हम प्रोसेस को एंजॉय करना बंद कर देते हैं। अगर आप उसको एंजॉय नहीं कर रहे। आप सिर्फ उसको इसलिए कर रहे हो क्योंकि एज अ टास्क आपको करना है। आपके दिमाग में है कि मुझे वीडियो डालनी है इसलिए वीडियो बनानी है। देन इट विल नॉट गिव यू जॉय। इट विल बिकम अ प्रेशर कि यह करना पड़ेगा। और यह क्रिएटिविटी वाला काम तो कभी भी प्रेशर के साथ हो ही नहीं सकता। उससे बेटर है ना करो। उससे बेटर है एक महीना वीडियो मत डालो। आपकी मेंटल हेल्थ भी अच्छी रहेगी। बट अगर वो आपको जॉय दे रहा है, आपको मजा आ
(1:14:19) रहा है, अंदर से कॉलिंग आ रही है कि मुझे करना है, मैं इस प्रोसेस को एंजॉय करूंगा क्योंकि मुझे पता है कंटेंट क्रिएशन का जो पूरा प्रोसेस है ना लोगों के सामने एक फाइनल वीडियो आती है। बट जो पीछे का पूरा प्रोसेस है ना उसमें बहुत बहुत मेहनत है। मुझे पूछो। वो बहुत रिसर्च है, एफर्ट है। वीडियो कैमरा के सामने प्रेजेंट होना और उस तरह से उसको एग्जीक्यूट करना। फिर वो एडिटिंग पोस्ट प्रोडक्शन फिर पूरी टीम आपके साथ अलाइन होना बहुत लंबा एक सो वो पूरा प्रोसेस एंजॉयबल अगर आपको नहीं लग रहा है एट एनी पॉइंट देन इट्स बेटर टू गिव इट अ ब्रेक सो दैट यू कैन कम बैक
(1:14:56) स्ट्रांगर बट इफ यू विल नॉट गिव योरसेल्फ अ ब्रेक यू विल कीप डिसाइंग योरसेल्फ मैंने वही कर दिया कि बनाना है अच्छा बनाना है या तो थोड़ा सा आप ई आउट कर दो खुद को कि ठीक है अभी अभी मेरा वो वाला टाइम नहीं चल रहा कि मैं उस लेवल की चीज बनाऊं तो एटलीस्ट थोड़ा बना लूं, कम बना लूं, थोड़ा छोटा बना लूं। बट आई शुड कीप सर्विंग। या फिर लेट्स टेक अ ब्रेक एंड देन आई विल कम बैक विथ द सेम एनर्जी एंड पेस। जो आपने भी बेसिकली बोला वो बैलेंस करना और खुद को थोड़ा सा थोड़ी सी फ्रीडम भी देनी जरूरी है। आफ्टर ऑल वी ऑल आर ह्यूमन बीइंग्स। वी
(1:15:31) आर नॉट मशीनंस कि बस रोज सुबह आए और चालू हो गए। पता नहीं हमें तो ऐसे ही लगा कि हम एक मशीन है। बस चालू रखो अपने आपको। और करते रहो। बट आई थिंक वहां मैंने गलती कर दी शायद। ठीक है? सीख रहा हूं। सो अभी तक की ये डिस्कशन काफी लंबी और डीप थी। तो हमने ये डिसाइड किया है कि आगे की जो डिस्कशन है जिसमें हम कैटेगरी बी यानी कि वो लोग जिन्हें एक अच्छी फिजिक चाहिए। उनके लिए एग्जैक्टली स्टेप बाय स्टेप क्या ब्लूप्रिंट होगा जिससे वो बिगिनर लेवल से स्टार्ट करके एडवांस लेवल तक पहुंच सकें। किस तरह की डाइट, किस तरह का माइंड सेट, किस तरह का रूटीन उन्हें फॉलो करना चाहिए
(1:16:11) ताकि वह अपनी डिजायर्ड बॉडी को आसानी से अचीव कर सकें। यह सारी कन्वर्सेशन को हम सेकंड पार्ट में अपलोड करेंगे। तो प्लीज बने रहिए। चैनल सब्सक्राइब कर लीजिए ताकि एक भी एपिसोड मिस ना हो। आई विल सी यू नेक्स्ट टाइम इन द नेक्स्ट एपिसोड।
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