Thursday, July 2, 2026

Brain vs Mind | The Truth That Will Change How You Think | Dr. Saad Bashir

Brain vs Mind | The Truth That Will Change How You Think | Dr. Saad Bashir

Author Name:Iffat Omar

Youtube Channel Url:https://www.youtube.com/@IffatOmarOfficial

Youtube Video URL:https://www.youtube.com/watch?v=oAKvepJYs6s



### తెలుగు కీ టేక్‌అవేస్

- ఈ వీడియోలో ప్రధాన idea: **Brain** అంటే biological organ, **Mind** అంటే thoughts, emotions, awareness లాంటి mental process.
- మన brain evolution వల్ల survival కోసం build అయింది; అందుకే **fight-or-flight**, negativity bias, alertness లాంటివి naturally ఉంటాయి.
- Modern life లో ఈ primitive survival mode mismatch అవుతోంది, అందుకే anxiety, stress, overthinking పెరుగుతున్నాయి.
- మన thoughts ఎక్కువగా randomగా వచ్చేవి; **“నేను నా thoughts కాదు”** అని గుర్తించడం చాలా ముఖ్యమని చెబుతున్నారు.
- Negative thought వచ్చిన వెంటనే దానితో identify అవకుండా, దాన్ని distance నుంచి observe చేయడం useful.
- Childhood, parenting, emotional neglect, attachment style లు మన mind development పై పెద్ద ప్రభావం చూపుతాయి.
- Mediation, breathing awareness, and regular practice వల్ల prefrontal cortex, self-control, emotional regulation మెరుగవుతాయని చెప్పారు.
- Happiness ను money తో మాత్రమే కొనలేము; contentment, gratitude, present-moment living ఎక్కువ ముఖ్యమని message.
- “Have to” / “Must” కంటే “Choose to” / “Wish to” mindset healthier గా ఉంటుంది.
- Desire and need వేరు; అవసరాలు తక్కువగా, desires ను consciously handle చేస్తే mind calmer గా ఉంటుంది.

### సింపుల్‌గా అర్థం

ఈ conversation లో Dr. Saad Bashir చెబుతున్నది:  
మన mind ని మానవ history, childhood, environment, and habits shape చేస్తాయి.  
అందుకే thoughts ను blindly trust చేయకుండా, observe చేసి, train చేయాలి.

### ఒక చిన్న ఉదాహరణ

ఎవరైనా మీ గురించి bad comment చేశారని అనుకుందాం. వెంటనే “అందరూ నన్ను dislike చేస్తున్నారు” అనుకుంటే అది thought trap.  
కానీ “ఇది ఒక thought మాత్రమే, proof ఏంటి?” అని ఆగితే reaction control లో ఉంటుంది.

### ఒక ముఖ్యమైన caveat

ఈ వీడియోలో కొన్ని points psychological insight గా useful గా ఉన్నా, కొన్ని claims చాలా broad గా ఉన్నాయి.  
దీనిని **self-help + philosophy** గా చూడాలి; clinical truth గా కాదు.



Transcript:
(00:00) आजकल के अह लड़के लड़कियों को अपना जो पोटेंशियल है ब्रेन का माइंड का दे शुड हैव द अपॉर्चुनिटी टू डेवलप इट टू इट्स मैक्सिमम। बच्चे अपने सर्वाइवल के लिए इसलिए पैदा करते हैं फॉर देयर सर्वाइवल के देयर विल बी आर हेल्पिंग हैंड व्हेन वी वोंट बी एबल टू डू इट। जो पढ़े लिखे लोग हैं जो अपर क्लास मिडिल क्लास में जिनके पास वक्त भी है और तालीम भी है उनको भी बच्चे पालना नहीं आते उसका सर्वाइवल डिपेंड्स ऑन सिंग देयर एंड लिसनिंग टू इट आर फ्यूचर आवर पास्ट आवर मिरी आवर प्रोस्पेरिटी आवर स्केसिटी दीज़ आर ऑल आवर थॉट्स
(00:46) दिमाग इंसान का क्यों बढ़ा होमोसेक्सुअलिटी हैज़ बीन रिकॉर्ड फ्रॉम 10,000 ऑनवर्ड्स वो भी स्टेट ऑफ़ माइंड है जो सोच को डेवलप करने से ही पैदा होती है। सर गरीबों के पास और कुछ है या नहीं? फोन आ गए हैं। हम जानवरों के लेवल पे हैं। अगर हम इंस्टिंक्ट्स के हिसाब से चल रहे हैं। 40 टू 50% ऑफ़ चिल्ड्रन अंडर द एज ऑफ़ फाइव हैव स्टंटेड ग्रोथ। कुछ दबाते हैं एकदम प्रकट करके कोई गंदी सी तस्वीर रह जाती है। एंड आई नो आई अंडरस्टैंड बच्चों के लिए तो इट्स अगर हजार प्लेेंस लैंड कर गए सेफली वो खबर नहीं है जो एक क्रैश होता है वही खबर बनता है। वी ऑल हैव द सेम ब्रेन बट वी ऑल हैव
(01:27) डिफरेंट माइंड्स। जब हमने आग द्या कर ली और खाना पकाना शुरू कर दिया। दैट्स व्हेन हमारी डाइट इतनी बैलेंस्ड हुई कि हमारा दिमाग में पड़ना शुरू हुआ। आप बात कर रही है ब्रेन की। ब्रेन एंड द माइंड आर टू डिफरेंट थिंग्स। अस्सलाम वालेकुम एंड वेलकम टू माय पडकास्ट वंस अगेन। डॉक्टर साद आज हमारे साथ दोबारा है और आज मैंने उनसे दरख्वास्त की कि मैं समझना चाहती हूं हमारे दिमाग को यानी आवर ब्रेन। ऑब्वियसली हम जो करते हैं और जो थॉट्स हमारे जेहन में आते हैं जो अकल हम इस्तेमाल करते हैं वो सम हाउ सम हाउ नहीं
(02:14) ऑब्वियसली रिलेटेड ही ब्रेन से है। और ब्रेन का अगर हम साइंटिफिकली उसको एवोल्यूशनरी पॉइंट ऑफ व्यू से देखें तो हमारा दिमाग पिछले 5 मिलियन इयर्स में ट्रिपल एक्सरसाइज हुआ है। और एववोल्यूशन का यह जिसे कहते हैं कि मकसद जो होता है वो यही होता है के आपकी जो भी जरूरत आप महसूस करते हैं उसके मुताबिक एववोल्यूशन बहुत सालों में उस चेंज को उसप अप्टेशन को आपके जिस्म में आपकी सोच में शामिल कर लेता है। अगर एवोल्यूशनरी हम पॉइंट ऑफ व्यू से देखें तो ये एक पलक झपक का
(02:59) प्रोसेस है। उस ऐज में देखें। लेकिन अगर इंसानी ख्याल से देखें तो मिलियन एंड मिलियन ऑफ इयर्स लगते हैं। इंसानी दिमाग चार गुना क्यों बढ़ा? इसकी क्या वजह है? इसकी क्या जरूरत थी इंसान को? और फिर इंसान मॉडर्न इंसान आज जहां खड़ा है अब दिमाग और हमारी जेनेटिक हिस्ट्री में कुछ कॉन्फ्लिक्ट आते हैं। हमारा ब्रेन बेसिकली फाइट एंड फ्लाइट मोड पे है। और क्योंकि बहुत खतरात थे इंसान को शुरू में जानवरों के और दूसरे ट्राइब्स के तो आज भी वही है। लेकिन हमारी जिंदगी का स्टाइल वो नहीं है। तो जो ए्जायटी आज हम
(03:46) फेस करते हैं, डिप्रेशन आज फेस करते हैं, उसका जेनेटिक से क्या ताल्लुक है? ये सारी बातें मजेदार सी इनेशन मैंने सोचा आज डॉक्टर साद से पूछते हैं। अस्सलाम वालेकुम डॉक्टर साहब। अस्सलाम। थैंक यू फॉर हैविंग। योर क्यूरियस स्टूडेंट इज हियर। सो टेल मी दिमाग इंसान का क्यों बड़ा? आपने सही कहा। बेसिकली आज का जो हमारा दिमाग है उसमें एक तो रेप्टिलियन ब्रेन है जो बड़ा प्रिमिटिव है जो एक रेप्टाइल के लेवल पे एक्ट करता है। फिर हमारा एक इमोशनल ब्रेन है लिंबिक ब्रेन और उसके बाद हमारा रैशन ब्रेन है जो जिसको हम नियोकॉर्टिक्स कहते हैं। प्रीफ्रंटल लोब
(04:28) है। अह पहले हमारी जो लाइफ थी वह रिवॉल्व करती थी जिसको हंटर्स गैदर्स का एक पीरियड था जब सर्वाइवल सबसे ज्यादा इंपॉर्टेंट था और ब्रेन की सबसे बड़ी नीड यह थी टू सर्वाइव और वहां से जो फाइट और फ्लाइट वाला मैकेनिज्म है वो वहां पे ऑपरेटिव था कि जब आप एक ऐसी सिचुएशन में हो किसी ऐसे फेरोशियस एनिमल से आपका वास्ता पड़े तो यू हैड टू चॉइससेस यू कुड आइदर फाइट और रन अवे और फ्लाइट अब उस सिचुएशन में ऑब्वियसली आप भागते थे और जहां पे आप फील करते थे सर्वाइवल के लिए फाइट करना जरूरी है किसी भी सिचुएशन में तो आप फाइट करते
(05:14) थे। एक और जो प्रिमिटिव ब्रेन में और हमें इशू था वो ये था कि हम एक नेगेटिव इंटरप्रिटेशन को प्रेफर करते थे सर्वाइवल के लिए। फॉर एग्जांपल अगर झाड़ी में सरसराहट हो रही है तो हमारे पास दो इंटरप्रिटेशन थी या हवा चल रही है या पीछे कोई सांप है या कोई जानवर है तो जो प्रिमिटिव इंसान था ही वुड प्रेफर द नेगेटिव इंटरप्रिटेशन क्योंकि उसमें सर्वाइवल और सेफ्टी तो इससे कहीं बेहतर था कि वो नेगेटिव इंटरप्रिटेशन से गाइडेंस लेता और अपनी जान बचाता बजाय रिस्क लेने के। अब उस सोसाइटी और उस वक्त तो ये चलता रहा और इट वाज़ इट वाज़ डिपेंडेबल और इट वाज़
(06:01) एडवाइसेबल। आज का जो इंसान है उसके पास वही मैकेनिज्म्स हैं जो प्रिमिटिव ह्यूमन के थे। लेकिन सिचुएशन बहुत बदल गई है। फॉर एग्जांपल अगर आप एक बॉस के साथ बैठे हैं जो आपके साथ लेट्स से वर्बली अब्यूसिव है। तो आप उससे लड़ नहीं सकते। बिकॉज़ यही जॉब है आपके पास। आप भाग भी नहीं सकते बिकॉज़ ही विल फायर यू। यू जस्ट हैव टू सीट देयर एंड बेयर इट। एंड दिस इज वेयर द प्रॉब्लम कम्स अप। नाउ इस वक्त उसका सर्वाइवल डिपेंड्स ऑन सिंग देयर एंड लिसनिंग टू इट। यस। एंड एंड नॉट नोइंग हाउ टू हैंडल इट।
(06:46) और वहीं से फिर स्ट्रेस पैदा होता है। और दूसरी सिचुएशन यह है कि हमारी एववोल्यूशनरी जो प्रैक्टिस है वह यह है कि नेगेटिव इंटरप्रिटेशन को प्रेफर करें। बिकॉज़ सर्वाइवल उसमें है। बट आज की जिंदगी में अगर आप हर चीज का नेगेटिव पहल भी लेंगे। बहुत से लोग लेते हैं। अब सर्वाइवल वाला इशू शायद इतना नहीं है। लेकिन वो जो नेगेटिव इंटरप्रिटेशंस है उससे हमारे रिलेशनशिप्स खराब होते हैं। हमारे मूड्स खराब होते हैं। हमारी लाइफ में प्रोग्रेस खराब होती है। बिकॉज़ हम पॉजिटिव साइड पे जाते नहीं है। एंड इट्स वेरी टॉक्सिक इफ यू लिव विद अ ब्रेन दैट जस्ट बिलीव्स इन
(07:28) नेगेटिव इंटरप्रिटेशंस। सो ये एक दूसरा मसला है हमारे साथ आज की जिंदगी में। डॉक्टर साहब जैसे कि आपने कहा कि इंसान के सर्वाइवल के लिए जरूरी था हर चीज पे शक करना और ये समझना अलर्ट रहना एंड यू नो प्रोबेबिलिटी खतरे की ज्यादा है। सो चाहे उसका बच्चा इस वक्त खेल रहा होगा उसमें लेकिन वो अभी ये नहीं सोचेगा वो यही सोचेगा कुछ खतरा ही है। अब अगर ये हमारी जिबेली सोच है और आज के जमाने में कुछ लोग अगर जिबेली सोच ही उनपे ज्यादा हावी है और वो नेगेटिव ही सोचते हैं और कुछ लोग पॉजिटिव भी सोचते हैं तो क्या उनके जींस में कहीं फर्क है के या ये एक
(08:17) लर्न बिहेवियर है? ये बेसिकली दोनों चीजें इन्वॉल्वड हैं। इसमें जेनेटिक लोडिंग भी है और आपके जो लाइफ के पहले सात साल हैं वो कैसे गुजरे हैं? आपका घर का माहौल कैसा था? आपके वालिदैन का आपके साथ रवैया कैसा था? वो जींस की एक्सप्रेशन को कम भी कर सकते हैं और बढ़ा भी सकते हैं। अब जींस का तो हम कुछ नहीं कर सकते। लेकिन जो अर्ली एनवायरमेंट है उसका बहुत कुछ हो सकता है जो कि हम नहीं करते और वही टाइम होता है जब आपकी पेरेंट्स के साथ या तो सिक्योर अटैचमेंट होती है और आप आगे जाके एक बैलेंस पर्सनालिटी बनते हैं। आप
(09:02) पॉजिटिव होते हैं। आप हर चीज की इंटरप्रिटेशन एक्यूरेट करते हैं। और दूसरा है इनसिक्योर अटैचमेंट। कि अगर आपकी बेसिक इमोशनल नीड्स, केयर नीड्स लव नीड्स पेरेंट्स ने फुलफिल नहीं की तो आप सारी उम्र एक इनसिक्योर अटैचमेंट के विक्टिम बने रहते हैं और फिर आप सिक्योरिटी उन लोगों में ढूंढते हैं जहां से आपको जरा भी उम्मीद होती है। बट वो आपको कंट्रोल करती है दैट इनसिक्योर अटैचमेंट। डॉक्टर साहब अगर सोचा जाए तो ये भी एक मॉडर्न थ्यरी है ना के मां-बाप की वजह से ये हो जाता है। लेकिन इंसान की बेसिक इंस्टेंट इज़ टू सर्वाइव। यस अब पेरेंट्स भी इंसानी और फॉर देयर
(09:47) सर्वाइवल दे एक्ट द वे दे एक्ट तो यहां पे बहुत एक लर्नड बिहेवियर की जरूरत है जो के आप अपनी जिब्ली सोच को किस तरह माइनस करके एक प्रैक्टिकल उस मोड में आते हो। सो हियर व्हाट इजेंट क्या पढ़े इंसान ज्यादा लोगों से बात करें सीखे कुछ लोगों को तो पता भी नहीं है कि वो क्या कर रहे हैं और दे आर कंसीडर्ड नॉर्मल एंड वो नॉर्मली होते हैं बिकॉज़ अगेन एवरीबॉडी इज़ ट्राइंग टू सर्वाइव। अगर किसी के घर में पेरेंट्स का रिलेशनशिप अच्छा नहीं है। वो भी लड़ झगड़ के सर्वाइव करने की कोशिश कर रहे हैं। होंगे ना कि मैं अपना
(10:33) एंगर निकाल लूं। वो अपना एंगर निकाल ले। सो हाउ टू बैलेंस दिस? एंड इतनी इतनी मेहनत और इस कदर पढ़ी लिखी सोच आम इंसान कांट एक्वायर इट। देखिए अगर हम देहात में आज से 50 साल पहले शायद अब भी जो बच्चा पैदा होता है वहां 11 12 बच्चे होते हैं एक ही घर में। कुछ मर जाते हैं, कुछ बच जाते हैं। उसके बाद उसकी 16 17 साल की उम्र में शादी हो जाती है। और उसने वही काम करना है जो उसके दादे परदादे करते आए हैं। देयर इज़ नो कंपटीशन, देयर इज़ नो एक्चुअलाइजेशन। वो कांसेप्ट्स ही नहीं है। सो उस लेवल पे तो प्रॉब्लम नहीं है। बट आज की दुनिया में जहां पे यू हैव कंपटीशन, यू
(11:22) हैव टू एक्सेल इन लाइफ। अदरवाइज यू आर लेफ्ट बिहाइंड। यू विल सर्वाइव बट यू विल बी लेफ्ट फॉर बिहाइंड। एंड सो आजकल के अह लड़के लड़कियों को अपना जो पोटेंशियल है ब्रेन का माइंड का दे शुड हैव द अपोरर्चुनिटी टू डेवलप इट टू इट्स मैक्सिमम। यह बिल्कुल ऐसे है कि एक Mercedes गाड़ी है। उसको आप फर्स्ट गियर में चलाते रहें। तो उसका क्या नुकसान होगा? फायदा तो कोई नहीं होगा। यू वुड वांट योर चाइल्ड कि जो भी उसका पोटेंशियल है ही शुड और शी शुड डेवलप इट टू इट्स मैक्सिमम। एंड दैट इनवॉल्व्स लर्निंग द स्किल्स ऑफ अ गुड लाइफ। सो अब हम सर्वाइवल
(12:06) के मोड में नहीं हैं। घरों में तीन-तीन बच्चे हैं, दो-दो बच्चे। अब सर्वाइवल इज नॉट द इशू? द इशू इज हाउ फार डू यू डेवलप इन योर लाइफ? और आप अपने गोल्स कितने अचीव करते हैं और कितने नहीं करते? सो नाउ इट्स ऑल अबाउट इकोनॉमिक्स राइट बिकॉज़ आप यही चाहते हो कि आपका बच्चा हमसे बेहतर हो। इकोनॉमिक्स यस एंड नो एज अ एज अ साइकाट्रिस्ट मेरा ज्यादा एम्फसिस पर्सनल ग्रोथ पे है। कैन यू डेवलप योर पर्सनालिटी टू इट्स मैक्सिमम। पैसा आ जाएगा। इफ इफ यू हैव दोज़ स्किल्स। बट आई वुडंट से पैसा इज़ एवरीथिंग बिकॉज़ आई यू नो एंड आई नो काउंटलेस मिलियर्स हु आर वेरी अनहैपी।
(12:49) नो देखिए पहले सर्वाइवल आप शिकार करके लाते थे। फिर उसके बाद जब हमने आग दरियाफ कर ली और खाना पकाना शुरू कर दिया। दैट्स व्हेन हमारी डाइट इतनी बैलेंस्ड हुई कि हमारा दिमाग में बड़ना शुरू हो गया। उससे पहले वी वर लाइक व्हाट इतना सा था। और अब कोई इतना साइब हो गया। 1.2 किलोग्राम। सो उससे बहुत फर्क पड़ा इंसान को जब डाइट थोड़ी सी हमने पका के खाना शुरू की। बिकॉज़ प्लांट्स भी अपने सर्वाइवल के लिए बड़ा मुश्किल कर देते थे कि उसको कच्चा खाया जा सके। उसमें बहुत जहर होता था। सो आफ्टर यू नो डिस्कवरिंग कुकिंग
(13:37) उससे बहुत आप में फर्क पड़ा। मेरा एक्चुअली पॉइंट जब आप यह कह रहे हैं ना कि इंसान उसको फुलेस्ट करे, कैपेबिलिटी से करे। इसमें तो फिर आपके एनवायरमेंट का बहुत इस पे फर्क होता है और वहां पे इकोनॉमिक कंफर्ट का भी बहुत फर्क पड़ता है कि एक बच्चा जिसको अक्सर बहुत छोटी उम्र में गरीब लोगों के बच्चे कामों पे लग जाते हैं। बिकॉज़ होता ही ये है कि वो इतने बच्चे अपने सर्वाइवल के लिए इसलिए पैदा करते हैं फॉर देयर सर्वाइवल के दे विल दे आर हेल्पिंग हैंड व्हेन वी वोंट बी एबल टू डू इट। सो हर एक ज़हन में सर्वाइवल तो है। चाहे वह उस तरह करें, उस तरह करें। अब जिस
(14:20) किस्म की मॉडर्न थिंकिंग या जिसे कहते हैं रीज़नेबल थिंकिंग की आप बात करें उसमें एनवायरमेंट की बहुत कंफर्ट की जरूरत है फॉर अ किड एंड इवन द केयर टेकर्स। यस। वो तो मयस्सर नहीं है अक्सर लोगों को। बिकॉज़ हमारी गवर्नमेंट ने ना घर ऐसे दिए हैं, ना इलाज ऐसा दिया, ना स्कूल ऐसे दिए हैं कि इंसान बेसिक नेसेसिटीज से बेफिक्र हो जाए। ऐसे इकोनॉमिक उसमें रट में फंसा इंसान हाउ कैन ही थिंक रीज़नेबली एंड वेरी यू नो कि यूं होना चाहिए। पैसे से कोई फर्क नहीं पड़ता। आपका इस गर्मी में पंखे के बगैर रहना मुश्किल है। आपका खाना तो खाना ही है ना वो तो
(15:06) खाना ही है। एंड द इनफ्लेशन एंड एवरीथिंग एंड डॉक्टर के पास जाना भी एक बहुत जरूरी चीज है। और इवन अगर इस सारे सर्वाइवल मोड की वजह से आपका दिमाग इतना कंफ्यूज हो चुका हुआ है कि आप आज की जिंदगी बेहतर गुजारने की वो रखते ही नहीं हो। हम यह तो उस तक पहुंचना बहुत मुश्किल बात है डॉक्टर साहब अगर अनलेस और अंटिल एवरीथिंग एल्स अराउंड देम इज रियली स्मूथ। लेट मी एकको व्हाट यू सेड आई वास रीडिंग समवेयर कि हमारे मुल्क में 40 टू 50% ऑफ़ चिल्ड्रन अंडर द एज ऑफ़ फाइव हैव स्टंटेड ग्रोथ। दैट मींस उनकी जो फिजिकल और मेंटल और इमोशनल ग्रोथ है वो कभी डेवलप नहीं
(15:52) होगी। दिस इज द बेटर वेबिलिटी बिकॉज़ ऑफ़ प्रॉपर्ली पावर्टी की वजह से बट देन द क्वेश्चन इज़ इफ वी डिसाइड टू प्रोड्यूस चिल्ड्रन एंड वी आर नॉट गिविंग देम द राइट न्यूट्रिशन सेफ्टी इमोशनल केयर देन हु इज एट फौल्ट इज इट राइट टू प्रोड्यूस चिल्ड्रन बिकॉज़ ऑफ़ हैविंग एक्स्ट्रा हैंड्स नॉट एट ऑल ऑब्वियसली इट्स नॉट एंड वी नो दैट बट दैट पर्सन डजंट नो दैट बिकॉज़ ही थिंक्स हिज सर्वाइवल डिपेंड्स ऑन लॉट ऑफ़ हंट्स। बट दैट्स द लोएस्ट लेवल ऑफ लिविंग। एक्साक्ट्ली एंड दैट्स द लिविंग लाइक मेजोरिटी
(16:36) बिल्कुल हां आई एग्री। लेकिन जब तक हमें गोल्स का नहीं पता होगा कि हम मैक्सिमम और ऑप्टिमल से कितना पीछे हैं। वी विल नेवर रियलाइज कि हमें कितनी इंप्रूवमेंट की जरूरत है। सो एक आम इंसान के पास ये लग्जरी ही नहीं है सोचने की। नहीं इफत यहां पे हमारे जो पढ़े लिखे लोग हैं जो अपर क्लास मिडिल क्लास में जिनके पास वक्त भी है और तालीम भी है उनको भी बच्चे पालना नहीं आते दे डोंट नो हाउ टू हाउ टू ब्रिंग अप अ चाइल्ड सिर्फ स्कूल भेज देना और खाना खिलाना इज नॉट एवरीथिंग दे डोंट नो हाउ टू अटेंड टू द इमोशनल एंड साइकोलॉजिकल नीड्स ऑफ़ द चाइल्ड। यह पढ़े लिखे लोगों का हाल
(17:22) है। अनपढ़ तो खैर एक और मसला है। एंड एंड दिस इज व्हाई दीज़ पीपल डेवप इनू वेरी अनहेल्ी माइंड्स। और दूसरी बात है कि आप बात कर रही हैं ब्रेन की। ब्रेन एंड द माइंड आर टू डिफरेंट थिंग्स। ब्रेन जी। ब्रेन इज़ ब्रेन इज वेरी डिफरेंट। हम सब जो हम ब्रेन मसाला भी खाते हैं। वही है ब्रेन। राइट? जो स्कल के अंदर है 1.2 किलोग्राम जो मटेरियल है दैट इज द ब्रेन वी ऑल हैव द सेम ब्रेन बट वी ऑल हैव डिफरेंट माइंड्स एंड दैट्स दैट्स वेयर थॉट्स कम इन लेकिन आपको ये पता है ना कि 20% जो भी हम खाते हैं
(18:07) एनर्जी जी हां वो ब्रेन कंज्यूम बाय ब्रेन उसको इतने खाने की जरूरत है टू सर्वाइव एंड एक्ट एट इट्स फुल अगेन अगर स्टंटेड ग्रोथ्स हो रही है मैल नरिश बच्चे तो वो अपनी अटमोस्ट उस पे तो पहुंच ही नहीं सकता है। तो हियर कम्स रिस्पांसिबिलिटी ऑफ रूलिंग क्लास राइट कि नहीं? इसमें मुझे तो रूलिंग क्लास से कोई होप नहीं है आफ्टर 80 इयर्स। ये तो आई डोंट नो पीपल लाइक यू एंड मी। वी जस्ट हैव टू टॉक अबाउट इट एंड डू समथिंग एंड अर्ज अदर्स टू डू समथिंग अबाउट इट। अदरवाइज हमारे 80% विल सफर फ्रॉम स्टंटेड ग्रोथ और वो उसी लेवल पर रहेंगे कि बस सर्वाइवल ही है। एंड
(18:55) आई मीन व्हाट डस दैट से अबाउट अ नेशन। दैट मींस डॉक्टर साहब कि जो खुशहाल मुल्क होते हैं वहां के लोगों का ब्रेन और हमारे जैसे मुल्कों के ब्रेन में जो फर्क है जो हम कहते हैं वहां लोगों को कैसे पता है और यहां नहीं पता नहीं ब्रेन उनका भी हमारे जैसा है। नो द नरिश दैट फुल नरिशमेंट ब्रेन रिक्वायर्स खाना एटलीस्ट उनको तो मिल रहा है और यहां नहीं मिल रहा। ये तो ये तो बेसिक ही हो गया कि वो अपनी टोटल कैपेसिटी ऑफ़ ग्रोथ पे गया ही नहीं। नहीं देर ब्रेन आर लाइक आवर ब्रेन बट देर माइंड्स आर मोर डेवलप्ड दे थिंक डिफरेंटली अच्छा चल फिर इस पे आ जाते एंड व्हाई
(19:38) देखिए आपकी जो सोच है जिसको हम थॉट कहते हैं जो आपके माइंड का हिस्सा है इट्स नॉट इन द ब्रेन आप ब्रेन का न्यूरोसर्जरी थिएटर में जाएं यू स्प्लिट ओपन द स्कल यू विल फाइंड नो नोवेयर थॉट्स इन द ब्रेन बट देयर आर न्यूरोट ट्रांसमिटर्स इन द ब्रेन देयर आर न्यूरोट ट्रांस नहीं वो साइनप्सिस है वो वो सब कुछ है वो आपके भी हैं मेरे भी हैं बट यू डू नॉट फाइंड थॉट्स इन द ब्रेन द थॉट्स आर मोर मेटाफिजिकल दे आर इन द माइंड एंड लेकिन एक ब्रेन डेवेलप्ड है एक ब्रेन अंडरवेलप्ड है तो थॉट्स में फर्क नहीं आएगा बिलकुल आएगा बट ब्रेन में अनलेस यू हैव
(20:24) मेड अ लॉट ऑफ इंप्रूवमेंट इन योर माइंड यस द सिनेप्टिक कनेक्शन एंड न्यूरल एलाइनमेंट्स विल बी मच डिफरेंट फ्रॉम अ पर्सन हु हैज़ नॉट डेवलप्ड इट। फॉर एग्जांपल जो लोग मेडिटेशन करते हैं उनके जो प्रीफ्रंटल कॉर्टेक्स है दैट इज फ मोर डेवलप्ड देन दोज़ हु डोंट। लेकिन दैट हैप्स विद प्रैक्टिस। मेडिटेशन जी या या उसमें और किसी चीज का ताल्लुक नहीं। नहीं ये तो स्टडीज भी हुई है। पीपल हु हैव जस्ट मेडिटेड। रेगुलरली के कि के उनकी जो फ्रंट प्रीफ्रंटल कॉेक्स है ब्रेन की जो थिंकिंग एबिलिटी है जो कैलकुलेटिंग एबिलिटी है दैट इज मोर डेवलप्ड देन दोज़ हु डोंट
(21:09) सो इज इट फिजिकल और इट इज़ फिजिकल यू कैन सी इट ऑन अ स्कैन इफ इफ यू हैव एंड नॉट एवरीबडी कैन डू दैट देम राइट अनलेस दे प्रैक्टिस रेगुलर मेडिटेशन तो कोई भी कर सकता है इफ दे लर्न एंड दे प्रैक्टिस इट यस ओके यह तो ट्रेनिंग की बात है ना। एक्सरसाइज है एक किस्म की आप कर सकते हैं। तो आज के जमाने में अगेन टू सर्वाइव नाउ आपको जरूरत है अपने प्रिमिटिव थॉट्स को सोचने की, उस पे काबू पाने की और उसको आजकल की जिंदगी के मुताबिक बदलने की। तो ये हमारी जमाने के इंसान पे एक बहुत डबल जिसे कहना चाहिए काम की अब जरूरत है।
(21:58) बिकॉज़ हमारी जो इंस्टिंक्टिव सोच है और जो एक प्रैक्टिकल सोच है उसमें बहुत फर्क है। यस यस। सो नाउ वी नीड ट्रेनिंग। यस। राइट? सो हाउ कैन यू ट्रेन योर ब्रेन? आई थिंक द फर्स्ट थिंग टू अंडरस्टैंड इज़ व्हाट इज अ थॉट वी हैव 60 थाउजेंड थॉट्स इन अ डे दे कैन बी नेगेटिव पॉजिटिव और न्यूट्रल ट्रेजिकली 80% आर नेगेटिव एंड दैट इज बिकॉज़ ऑफ़ आवर बैड अपब्रिंगिंग एंड आर अगेन फाइट एंड फ्लाइट में हमें नेगेटिव सोच ही रखनी है। जी वो भी तो एक वो भी है एंड देन द प्रैक्टिकल
(22:46) जिसे कहना चाहिए कंपैरिजन ऑफ हैव्स एंड हैव नॉट्स नहीं अभी हम उसपे बाद में आते वहां तक भी नहीं है अभी आए अभी सिर्फ थॉट्स है वी हैव दी 60 थाउजेंड थॉट्स व्हिच कम फ्रॉम नोवेयर आप सोचें के एक थॉट को आप ना स्मेल कर सकते हैं ना टच कर सकते हैं ना टेस्ट कर सकते हैं आप क्रिएट भी नहीं करते हो। बनी बनाई थॉट आती है। बट अगेन आपके किसी एक्सपीरियंस हम से वो वो एक सबकॉन्शियस माइंड से हो सकता है आपका एक्सपीरियंस हो जो वो जनरेट करता है। नहीं लाइक जो भी मुझे सोच होते हैं जैसे दिन में इट हैज़ सम रिलेशन विद व्हाटएवर हैव
(23:29) इट मे हैव लेकिन सोच बनी बनाई जाती है। आप खुद सोच नहीं बनाते। ब्रेन ही बना रहे हैं ना। ट्रू बट यू नेवर क्रिएट अ थॉट। इट कम्स फुल्ली फॉर्म इन योर माइंड। आई डिट गेट इट हाउ। आप जब भी कोई चीज सोचती हैं वो बनी बनाई आती है पूरी तरह। यू डोंट कंस्ट्रक्ट इट एंड देन एक्सपीरियंस इट। फॉर एग्जांपल इफ आई से थिंक अबाउट दैट तो वो बनी बनाई सोच आपके ज़हन में आएगी। यू विल नॉट कंस्ट्रक्ट इट एंड डेवलप इट। ओके। दूसरी प्रॉब्लम यह है कि दिस इफेक्ट्स योर केमिस्ट्री, योर फिजियोलॉजी एंड योर साइकोलॉजी। इससे आपके न्यूरोट ट्रांसमिटर्स और हार्मोंस अफेक्ट होते हैं। इससे आपका मूड
(24:13) अफेक्ट होता है। इससे आपके एक्शंस इफेक्ट होते हैं। जस्ट फ्रॉम वन नेगेटिव थॉट। ओके? योर रिलेशनशिप्स आर थॉट्स। व्हेन यू थिंक ऑफ योर पार्टनर, योर फैमिली, योर क्लाइंट्स, योर पेशेंट्स, स्टूडेंट्स, दे आर ऑल थॉट्स। द ओनली वे टू एक्सपीरियंस अ रिलेशनशिप इज इन योर थॉट। यू आर अ थॉट इन समबडी एल्स माइंड। नहीं, आई एम अ थॉट इन समवनस माइंड। मींस मैं कैसी हूं? दैट आईडिया। अगर आप अगर एक आदमी को हम कहें कि मैं इफत को मिल बात करके आया हूं तो इफत इज़ नथिंग बट अ थॉट इन दैट पर्सनस माइंड उस वक्त
(24:59) ठीक है इफ ही डजंट नो मी इवन इफ ही नोस यू ओके यू नथिंग मोर देन अ थॉट बिकॉज़ आई एम नॉट फिजिकली देयर ओके पर वो एक याद है ना कि ओ यार मैं भी खुद को जानता हूं एंड मेनी टाइम्स द ओनली द ओनली रेमेडी टू डेवेलप अ गुड गुड रिलेशनशिप फ्रॉम अ बैड वन इज टू चेंज योर थॉट अबाउट दैट रिलेशनशिप। गिव मी एन एक्स। फॉर एग्जांपल मैं सोचता हूं कि इफत ने मेरे साथ बड़ी ज़्यादती की। बट देन आई से टू मसेल्फ नो शी हेल्प मी इन अदर आइटम्स एंड आई चेंज द थॉट नो इफ इज़ अ गुड पर्सन। सो व्हाट विल हैपन? दिस विल गेट डेवप इंटू अ बेटर रिलेशनशिप। एंड फदर आप कभी सोचा होगा
(25:44) आपने कि व्हेन यू टॉक टू योरसेल्फ हु इज टॉकिंग एंड हु इज लिसनिंग। दैट अगेन इज योर थॉट। सो ये इतनी इंपॉर्टेंट चीज है बिकॉज़ इसी से आपका मूड बनता है। इसी से आपका एक्शन बनता है। इसी से आपकी चॉइससेस बनती है और आपकी लाइफ बनती है। इट ऑल स्टार्ट्स फ्रॉम द थॉट। जिसको हम रैंडमली एक्सपीरियंस करते हैं और उसको मैनेज नहीं करते। एक थॉट तो आपका फौरन इंस्टिंक्टिवली आ गया ना। मतलब अगर मुझे गम लगा है तो मैं एकदम यूं हुई हूं। दैट्स अ रिफ्लेक्स एक्शन रिफ्लेक्स या चल आपने मुझे कोई हर्टफुल बात की है। और एकदम मेरा दिल में कुछ यहां
(26:29) पर नहीं ज़हन में। ज़हन में दिल धड़का है। इधर वो आपकी पप्पिटेशन हो गुस्से से जो होती है। नहीं थॉट पहले आएगी। पप्पिटेशन पर मुझे नहीं पता चलेगा। बिकॉज़ इट्स माइक्रो सेकंड्स। यस। सो जैसे बड़े बूढ़े कहते हैं कि गुस्सा आया और पहले एक मिनट आपने रिएक्शन नहीं देना या पानी पी लेना है या तीन सांस लेने। इज दिस एक्सरसाइज टू फर्स्ट? नहीं हम मैं जाती तौर पे एंगर के सप्रेशन के हक में नहीं हूं। अनलेस इन एन इमरजेंसी जहां जरूरी है। आई बिलीव इन लर्निंग द टेक्निक्स दैट यू डोंट बिकम एंग्री अननेसेसरीली इन द फर्स्ट प्लेस। तो चले अब हम अपनी गुफ्तगू हमें समझ आ गई दिमाग की
(27:12) थोड़ी सी के यह थॉट प्रोसेस क्या है? अब इस पे काबू पाना है। इन दिस मॉडर्न डे हमें इन सब चीजों पे सर्वाइव करने के लिए अब काबू करना है। राइट? कि हम वो जंग नहीं लड़ सकते जो हमारे इंस्टिंक्ट में आती है। हमें अब काम से लड़नी है। अब हमें साइंस की हेल्प से लड़नी है। अब साइंस यू एडवांस हुई है और एवोल्यूशन टेक्स लाइक तो अब कॉन्फ्लिक्ट वो है एनवायरमेंट चेंज हो गई पर दिमाग प्रिमिटिव है। यस। सो इसको बैलेंस करने के लिए अब आप बताएं व्हाट आर द स्टेप्स? एक तो आपने कहा कि एक नरिश्ड अपब्रिंगिंग
(28:00) बहुत जरूरी है। सो पेरेंट्स बेचारे अपनी तरफ से तो सब बेहतरीन ही कर रहे होते हैं अपनी औलाद के लिए। नहीं मेरा नहीं ख्याल बेहतरीन कर रहे हैं। पर क्या वो जानते हैं वो बुरा कर रहे हैं? नहीं जो पेरेंट्स पढ़े लिखे हैं, तालीम याफ्ता है, एडिक्वेट इनकम है। हम अगर उनकी भी बात करें दे हैव नेवर एवर रेड इवन अ पमफलेट और अ एनी बुक ऑन हाउ टू ब्रिंग अप अ चाइल्ड। आई फील वेरी इमोशनल अबाउट इट। बिकॉज़ बहुत जुल्म करते हैं। उनके पास टाइम भी होता है। उनके पास हर किस्म का इंफॉर्मेशन है। बट दे विल नेवर बोदर टू फाइंड आउट कि एक बच्चे की इमोशनल
(28:41) साइकोलॉजिकल मोरल डेवलपमेंट कैसे करते हैं। एंड दिस इज़ अनफॉर्गबल। पर ये भी एक नई चीज है ना डॉक्टर साहब। नहीं अगर हम हर दुनिया की हर नई गैजेट को अडॉप कर लेते हैं तो हम बच्चों को पालने के तरीके कौन से कोई बड़े इतने मुश्किल है दे जस्ट हैव टू नो द बेसिक मेथड्स एंड नॉलेज अबाउट इट दैट्स ऑल जो पढ़ी लिखी बच्चियां हैं और जरा कंफर्टेबल उनकी लाइफ है वो तो बहुत कह रहे हैं आजकल आजकल की बच्चियां आई एम ग्लैड टू हियर जिसे कहते हैं विद नॉलेज विद रिसर्च करने की बहुत कोशिश कर रही है। आई हैव सीन अराउंड हिम लाइक अपनी ही फैमिली की अब जो
(29:27) बच्चियां हमारे बन रही है दे लॉट ऑफ़ डिफरेंस। येट लेट्स टॉक टॉक अबाउट हाउ टू कंट्रोल थॉट्स। पहली चीज जो मोर इंपॉर्टेंट है यू आर नॉट योर थॉट्स। हम थॉट्स के साथ इतना अपने आप को आइडेंटिफाई कर लेते हैं या थॉट्स को अपने साथ या उनके साथ कि हम थॉट और अपने अंदर कोई फासला नहीं रखते। द फर्स्ट थिंग इज टू रिमेंबर आई एम नॉट माय थॉट्स। मेरी थॉट्स ये हैं मैं यह हूं। इफ यू लेट्स से योर फिंगर्स आर योर थॉट्स। नाउ यू आर लुकिंग एट द वर्ल्ड थ्रू योर थॉट्स। ट्राई टू लुक एट योर थॉट्स फ्रॉम ए डिस्टेंस। आप एक एक्सरसाइज करना चाहेंगे मैं देन मे बी यू
(30:12) कुड अंडरस्टैंड राइट सो लेट्स टेक अ डीप ब्रेथ क्लोज योर आइज एंड जस्ट इमेजिन दैट यू आर स्टैंडिंग इन द बालकनी ऑफ अ फोर्थ फ्लोर बिल्डिंग एंड व्हेन यू लुक डाउन देयर इज़ अ लार्ज स्ट्रीट एंड ऑन द स्ट्रीट यू कैन सी डिफरेंट व्हीकल्स गोइंग फ्रॉम लेफ्ट टू राइट यू कैन सी बसेस, कार्स, मोटरबक्स, ट्रक्स ऑल मूविंग फ्रॉम लेफ्ट टू राइट। कीप ऑन वाचिंग देम फ्रॉम द डिस्टेंस एट फोर्थ फ्लोर बालकनी। नाउ जस्ट इमेजिन दैट दिस ट्रैफिक इज़ नॉट
(31:00) ट्रैफिक बट इट्स अ ट्रैफिक ऑफ थॉट्स। ऑल काइंड ऑफ थॉट्स लार्ज स्मॉल न्यूट्रल नेगेटिव पॉजिटिव एंड यू आर वाचिंग देम फ्रॉम द डिस्टेंस राइट ओपन योर आईज दिस इज अ वेरी बेसिक एक्सरसाइज टू हेल्प यू अंडरस्टैंड आई एम नॉट माय थॉट्स इससे क्या हेल्प मिलती है आपको यू कैन हैंडल युवर थॉट्स बेटर व्हेन यू कैन डिस्टेंस योर सेल्फ फ्रॉम देम आई एम नॉट बी अ पार्ट ऑफ देम जब आप उसी का हिस्सा बन जाते हैं, यू कांट हैंडल देम। वंस यू डेवलप यू आर टॉकिंग ओनली अबाउट नेगेटिव थॉट्स। राइट? हां, उन्हें उसी की तो मुसीबत है। लेकिन वो नेगेटिव है या नहीं, यह भी तो
(31:45) इंसान को नहीं पता होता यूजली। ये डिपेंड करता है आपके वैल्यूस और गोल्स के हिसाब से अगर आपके गोल्स और वैल्यूस के हिसाब से वो बैरियर है देन दे आर नेगेटिव थॉट्स। सो एवरीबॉडी हैज़ हज़ ओन पैराडाइम हाउ दे लुक एट इट। सो द फर्स्ट एबीसी इज टू अंडरस्टैंड दैट आई एंड माय थॉट्स आर टू डिफरेंट थिंग्स। सेकंडली थॉट्स मे और मे नॉट बी बेस्ड ऑन रियलिटी। वी अस्यूम आवर थॉट्स आर रियलिटी बेस्ड बट दे आर नॉट। सर स्किफ्रेनिया को भी यही कहते हैं ना कि मे बी यह जब हमारी फाइट एंड फ्लाइट मोड को
(32:31) वाला हमारा जेनेटिक ओवर हो जाता है। इट माइट बी रीज़ फॉर अ स्ोफ्रेनिया आई थिंक इट्स अ थ्यरी आई थिंक नाउ वी नो इनफ अबाउट द कॉज ऑफ़ स्किफ्रेनिया एंड बेसिकली इट्स अ बायोलॉजिकल केमिकल प्रॉब्लम। वही ना कि वो केमिकल आपका जो होता है ज्यादा अगर हो जाए फ्लाइट फ्लाइट में यू हैव स्ट्रेस हॉर्मोनस इनवॉल्वड इसमें डोपामिन ज्यादा इनवॉल्व होती है सो इट हैज़ अ डिफरेंट मैकेनिज्म सो हम हम थॉट्स को बाज औकात एग्जांपल देते हैं मूवी से योर थॉट्स आर लाइक अ मूवी यू डोंट गो टू अ
(33:16) सिनेमा टू वॉच अ मूवी विपन्स एंड एवरीथिंग बिकॉज़ वहां पर बड़े जानवर और बड़े अजीब बैटल्स हो रही है यू डोंट यू नो इट्स अ मूवी एंड द सेम इज वि योर थॉट्स यू शुड कंसीडर देम एस क्लाउड्स दैट आर पासिंग अक्रॉस द स्काई एंड यू आर ऑब्जर्विंग देम यू आर द स्काई बट एक थॉट जो नेगेटिव आता है लाइक अगर मुझे पता चले कि मेरी वहां बैक बाइटिंग किसी ने की है या मेरी बुराइयां वहां हो रही है तो उसके रिजल्ट में मुझे नेगेटिव थॉट ही आना चाहिए उसमें वी हैव अ थॉट व्हिच इज इज़ बोदरिंग यू। उसको फिर हमने एग्जामिन करना है कि यह थॉट रियलिटी बेस्ड है या आपकी न्यूरोटिक
(33:59) थिंकिंग की वजह से है। एंड देन टेक एप्रोप्रियट एक्शन अगेंस्ट दैट। द फर्स्ट थिंग इज़ व्हाट इज़ द प्रूफ दैट पीपल आर बैक बाय यू। ओके, देन यू शुड लर्न हाउ टू डील विद इट। रादर देन बी ऑब्सेस्ड बाय इट। ओके, मिस्टर ए या मिस बी हैज़ टॉक्ड अगेंस्ट यू। यू आर श्योर्ड अबाउट इट। नाउ लेट मी टेक अ फ्यू डीप ब्रेथ्स सो दैट माय ओन एंग्जायटी एंड एंगर डस नॉट कम इन द मिडिल एंड व्हेन आई एम न्यूट्रल देन आई डिसाइड हाउ टू हैंडल दिस इशू नाउ द थॉट इज़ नॉट कंट्रोलिंग यू यू आर कंट्रोलिंग द थॉट एंड द सिचुएशन हम सारी उम्र थॉट्स के कंट्रोल में गुजार देते हैं। वी हैव टू
(34:40) मैनेज आवर थॉट्स दैट वी डोंट बिकम अ स्लेव टू देम। सर इवन बीइंग मैडली इन लव इज आल्सो अ थॉट लव इज एन इमोशन ओके जी हां वो एक और कैटेगरी में है बिकॉज़ उसमें फिर आपका इमोशनल ब्रेन टेक्स ओवर रैशनलिटी फिर सबमर्ज हो जाती है देन यू स्टार्ट थिंकिंग इन इमोशनल लैंग्वेज व्हिच यू कांट हेल्प एट द व्हेन यू गुड इन लव इट्स वेरी डिफिकल्ट टू ओवरकम इट अंटिल गॉड फॉरबिड आपका ब्रेकअप हो जाता है या देन अगेन दैट डिप्रेशन यू गो थ्रू इज़ अगेन द हज यस इट्स वेरी वेरी पेनफुल बिकॉज़ जितनी क्लोज रिलेशनशिप आपकी होगी उतना ही विथड्रॉल सवेयर होता है।
(35:24) व्हाई सर इतना क्यों दुख होता है? वो तो बड़ा अब तो हमें यह भी मालूम है कि व्हेन यू फॉल इन लव इज़ समबडी यू द ब्रेन सेंटर्स दैट आर व्हिच लाइट अप ऑन द स्कैन्स। इन अ पर्सन इन लव आर द सेम जो कोकेन एडिक्शन में होते हैं। वाओ। सो हैप्पी हॉर्मोन या उसमें इसमें भी डोपामिन और वो ऑक्सीटोसिन ये सब इनवॉल्वड है। सो इट्स ऑल अबाउट हॉर्मोनस। इट्स नॉन रोमांटिक वे ऑफ़ सेइंग इट। जो जिनको हम कहते हैं यार इसको कभी किसी अपने आप से इतना प्यार है किसी से कर ही नहीं सकता। तो उसके केमिकल्स में वो वो प्यार नहीं होता। बहुत नार्सिसिज्म है जब आप अपने आप
(36:07) एंड सम पीपल आर लाइक दैट ऑल दे सम नहीं दे आर प्ल दे प्ल्टी ऑफ़ पीपल हु आर सो सेल्फ ऑब्सेस्ड दैट दे डोंट वो तो बड़े बीमार लोग हैं। आई वुडंट कॉल देम हेल्थदी दे आर वेरी अनह एंड मिज़रेबल फॉर एवरीबडी एंड देमसेल्व्स। तो उनके भी तो थॉट्स ही है ना सर। नहीं दे हैव दे हैव अ सीवियर पर्सनालिटी डिसऑर्डर। अह पर्सनालिटी डिसऑर्डर ऑफ़ पीपल हुज़ पर्सनालिटीज़ कॉज़ प्रॉब्लम्स और हार्म टु देम और टु अदर्स और बोथ। और यह बहुत प्रॉब्लमेटिक एरिया है। या इट इज़ बट देन अगर आप सोचो फितरत के बारे में तो हमारी फितरत जो असल है
(36:56) वो इन कायदों में कैद जो हमने सिविलाइजेशन के बाद किया है। उसमें थोड़ा सा कॉन्फ्लिक्ट भी तो है ना। आपकी नेचर है आप फितरत किसको कहती हैं? जिलत को लाइक योर इंस्टिंक्ट जेनेटिक्स जेनेटिक लर्निंग देखिए हमारे यहां एक कांसेप्ट है कि जेनेटिक्स हमें कंट्रोल करती हैं। टू सम एक्सटेंट दिस मे बी ट्रू बट यू कैन हैंडल हाउ फार द जींस आर एक्सप्रेस्ड। एक बीमारी है फिनाल कीटोन यूरिया जिसमें एक खास डाइट से आप खाएं तो जिंदा नहीं रह सकते पर सारी उम्र वो डाइट ना लें तो आप नॉर्मल लाइफ गुजारते हैं। इसी तरह अगर
(37:43) आपको जेनेटिक डिस्प प्रीडिस्पिशन है डायबिटीज के लिए एंड यू टेक प्रिकॉशंस यू मे नेवर गेट इट दिस इज़ हाउ यू मॉडिफाई द इफेक्ट मैं शायद इंस्टिंक्टिव सोच के ही आपसे अभी बात कर रही हूं कि जो ज़हन में एकदम आता है लाइक मैन यूजुअली चीट यू नो दैट्स नहीं अगर आप मोस्टली नंबर में औरतें भी करती हैं। फिर तो हम जानवरों के लेवल पे हैं। अगर हम इंस्टिंक्ट्स के हिसाब से जीते हैं। तो एक्चुअली तो हम जानवर ही थे ना। देन वी नहीं बट आई डू यू थिंक व्हेन अ मैन चीट्स हिस पार्टनर दैट्स बिकॉज़ ही इज़ हेल्पलेस एंड हैज़ टू डू दैट। मेरा नहीं खयाल।
(38:24) ही इज फुली अवेयर ऑफ़ डॉक्टर साहब अगेन मुझे यह लगता है वो जो हार्मोन रिलीज होते हैं ना दे आर सो पावरफुल व्हेन यू चीटिंग दो रीज़ से होती है। आइदर यू हैव अ बैड रिलेशनशिप विद योर पार्टनर एंड यू आर फाइंडिंग एल्स फेयर द सेम रिवॉर्ड्स दैट यू आर मिसिंग इन योर रिलेशनशिप। एक वो और एक रीज़न होता है जब आपकी ड्राइव इतनी ज्यादा है कि यू वांट टू फूल अराउंड। हम यही दो रीज़ंस जनरली होते हैं। हॉर्मोंस बाद में आते हैं। सर टेस्टोस्टरॉन की तो प्रॉब्लम है सारी। नहीं वो उसमें नो डोंट यू थिंक सो नहीं आप हार्मोंस को पहले ला रही हैं। मैं
(39:12) थॉट्स को पहले ला रहा हूं। ओके। लेकिन इतना जल्दी सब कुछ होता है कि जिनके ज़हन डेवलप नहीं होते उनमें जल्दी होता है। बट जिनके जो लोग डेवलप करते हैं अपने आपको दे कैन हैंडल दीज़ थिंग्स। प्लीज रिमेंबर दैट बिटवीन द सोर्स एंड योर रिएक्शन देयर आर अ फ्यू मिली सेकंड्स वेयर यू हैव अ चॉइस हाउ टू रिएक्ट। हमने वो चॉइस छोड़ दी है। हम जानवरों की तरह रिएक्ट करते हैं। बट इफ वी जस्ट सो दिस इज़ व्हाट वी हैव टू डिवेलप। डेवलप यस। सो नाउ दिस इज एन एक्वायर्ड नॉलेज ट्रेनिंग है ट्रेनिंग जहां बाकी इतनी चीजों में ट्रेनिंग लेते हैं व्हाई नॉट पर सर ये तो बेसिक है देन दिस शुड बी
(39:54) पार्ट ऑफ योर कर आई स्ट्रोंगली फ्रॉम लाइक अ वेरी अर्ली बिल्कुल सही कह रहे हैं आप या राइट इसको तो फिर पढ़ाई का हिस्सा डालें के आज का इंसान अपना दिमाग पूरे पोटेंशियल से यूज कर सके सर फिर यहां फिर इकोनॉमिक्स आ गया ना फिर अब अगर आपको वो तालीम ही नहीं मिल रही है मुझे एक बात बताएं बेसिक नीड आपकी होती है रोटी खाना, पेट भरना। जब आपको भूख लगी हो, आपके पास कोई लग्जरी नहीं है। बैठ के फलसफा सोचे या ये करें। और अभी भी वो प्रिमिटिव लाइफ हमारे बहुत सारे घराने फेस कर रहे हैं। जहां पे दिहाड़ी पे बंदा जाता है और पीछे घर वाले बैठ के
(40:30) सही है। रोटी का इंतजार कर रहे होते हैं। वहां क्या वो ब्रेन डेवलपमेंट की बात करेंगे डॉक्टर साहब? नहीं यह आप सही कह रही हैं। 80% का यही हाल है। बट द ट्रेजडी इज कि 80 साल में वो वहीं के वहीं हैं। सर बहुत सारी दुनिया में इट्स सेम। अब तो हमारी दुनिया इतनी पहुंच हालात पे है विद इसकी साइंसी तरक्की से कि अभी गाज़ा में क्या हो रहा है? अभी हमारे हमें यहां भी पता है। ईरान में क्या हो रहा हमें यहां भी पता है अमीर रियासतें किस तरह कंट्रोल कर रही है हमें यह भी पता है। बट इट्स इनकलिटी इज ऑल ओवर द वर्ल्ड। ये इंसान की फितरत ही है।
(41:12) मेरा नहीं ख्याल के डेवलप्ड कंट्रीज में बच्चों को इस तरह इमोशनली नेगलेक्ट करते हैं। उनके हो सकते हैं और मिसाइल है। उनके भी बहुत प्रॉब्लम्स हैं। बट दे आई आई हैव लिव्ड देयर। आई हैव बीन ट्रेंड देयर। द मोमेंट दे फाइंड आउट दे आर एक्सपेक्टिंग अ चाइल्ड दे स्टार्ट रीडिंग मटेरियल अबाउट इट हाउ टू रेज अ चाइल्ड हमारे यहां जो 20% पढ़े लिखे हैं वो भी बोदर ही नहीं करते यहां जो भी सर नॉट नाउ चलिए अच्छी बात है अब हो रहा है अब हो रहा है द न्यू मदर्स इवन अस व्हेन वी हैड आवर किड्स मैंने भी किताब पढ़ी थी एंड एक आपका मॉम्स क्लब भी बन जाता है
(41:55) जिसमें आप बहुत इंफॉर्मेशन एक दूसरे से लेके और उस पे लाइक डॉक्टर साम्या जब वी हैड किड्स एट द सेम टाइम मतलब एक आध महीने का फर्क था बिकॉज़ शी वाज़ अ डॉक्टर तो वो मुझे गाइड करती थी बहुत चीजों में फिर मेरा अपनी कोई वो ठीक है हाउ आई यूज्ड टू टीच माय डॉटर कि मैं चलती हुई गाड़ी में उसको बोट्स पे कहती थी ये ढूंढ के दिखाओ ये कलर ढूंढ के दिखाओ एंड यू नो सो वी यूज्ड टू जस्ट डिस्कस विद ईच अदर और इस तरह इस तरह हमने जैसे मुझे बड़ा किया गया था उससे मैंने बहुत डिफरेंटली नूर जहान को बड़ा किया एंड अब मुझे लगता है नूर जहान मेरे से भी फर्क करेगी बिकॉज़ इनेशन अब और
(42:42) आती जा रही है। सो पढ़े लिखे बट कंफर्टेबल लिविंग वाले लोगों के पास ये लग रही है। आई होप यू आर राइट एंड आई विल बी ओनली टू हैप्पी टू टू सी इफ दिस इज ट्रू। या बिकॉज़ इट ऑलवेज डिपेंड्स कि आपकी औरत कितनी पढ़ी लिखी है। अब हमारे कंफर्टेबल घरों की बच्चियों को हम पढ़ा रहे हैं और एंड तक पढ़ा रहे हैं। मतलब अभी इस पे हमारे इस जगह पे भी लाइक आप है, मैं हूं, वासिफ है, हैदर है। ये भी अपने तई अपने उसमें रहते हुए दे आर डूइंग बेस्ट फॉर देयर किड्स। आई नो दैट। अब ऐसा नहीं है कि वह
(43:25) मैं आपकी बात काट रहा हूं। वासिफ और हैदर को। आई एम श्योर यह सही अपनी तरफ से। लेकिन अगर इनको 10 मिनट आप और मैं दें कि बच्चे पालने में क्या-क्या चीजें इंपॉर्टेंट है और वो इनको नॉलेज मिलती है। नाउ कम्स आवर शोज़। दैट्स द ओनली वे। पर जरूरत इतनी है कि हमारे जब मैं आपसे एवोल्यूशनरी पॉइंट ऑफ व्यू से बात करती हूं। मुझे लगता है मुझे लगता है कि इंसान की हर सोच को उसकी अंडरस्टैंडिंग के लिए वी हैव टू नो द एवोल्यूशन का प्रोसेस ओके टू नो योरसेल्फ कई दफा इतनी घटिया सोच आपके ज़हन में आ जाती है कि आप यूं करके खुद ही यू नो
(44:09) घटिया से घटिया ख्याल आ जाता है। सो यू नीड टू नो कि ऐसा क्यों हो जाता है। आप अपने आपको बहुत ब्लेम करते हो कि इतनी गंदी बात मैंने सोच कैसे ली। बट देयर इज़ अ हिस्ट्री एंड यू अंडरस्टैंडिंग ऑफ़ एवरीथिंग कि तब क्या हुआ था ये हुआ था। वो इन्फ्लुएंस आपके जेनेटिक में आज तक यहां पे चल रहे हैं। टू अंडरस्टैंड योरसेल्फ अ ह्यूमन माइंड। यू नीड टू हैव दैट नॉलेज। और जैसे आई कैन आई एम श्योर व्हेन यू अ पर्सन कम्स टू यू विद अ प्रॉब्लम यू आल्सो यूज़ दैट इनफार्मेशन टू वैल्यूुएट के ये इसके साथ ये क्यों हो रहा है। नो। बट आई थिंक वी वुड फोकस मोर ऑन ह पर्सनल
(44:49) लाइफ बिकॉज़ जींस का हम मॉडिफाई नहीं कर सकते लेकिन जो डैमेज उसकी अर्ली लाइफ में हुआ है उसको हम हेल्प कर सकते हैं किस तरह ओवरकम करने में एंड 90% ऑफ़ पेशेंट्स दैट वी सी आर डैमेज्ड चिल्ड्रन हु हैव ग्रोन अप इनू बट डॉक्टर साहब उसके अगर उसी का पेरेंट आएगा वो भी एक विक्टिम होगा आपके पास दो आएंगे में एक बाप आया, एक बेटा आया एज अ पेशेंट तो आपके पास तो जो आया आपको वही विक्टिम लगेगा। नहीं नहीं नॉट नेसेसरी मेनी टाइम्स द पर्सन हु कम्स टू अस इज़ नॉट द पेशेंट ही थिंक्स ही इज़ द पेशेंट बट द पेशेंट इज़ समवेयर एल्स इन द फैमिली। स्पेशली बच्चों
(45:34) में जब आठ साल का बच्चा पेट में दर्द है या अग्रेशन हो रही है, एकेडेमिक डिक्लाइन है एंड यू एग्जाममिन द होल सिनेरियो। द प्रॉब्लम इज़ बिटवीन द फादर एंड द मदर। देयर रिलेशनशिप इज़ सिक नॉट द चाइल्ड। सो वो जरूरी नहीं कि जो प्रेजेंटिंग पेशेंट है वही मरीज है। द प्रॉब्लम कैन बी एल्सवेयर। यू नो। सो हम ज्यादा एमफेसिस पेशेंट की अर्ली लाइफ पर करते हैं। वही अटैचमेंट इश्यूज आ जाते हैं। डेप्रिवेश आ जाती हैं। ट्रॉमा, सेक्सुअल अब्यूज वो सारा एंड देन वी हेल्प देम ओवरकम देम सो दैट दे कैन लीड नॉर्मल लाइफ एंड एंड बेटर रिलेशनशिप्स इन द फ्यूचर। बिकॉज़ जो वूंड आपका बचपन का है
(46:20) वो अनलेस हील हो। वो आपकी हर थॉट और रिलेशनशिप को इफेक्ट करता है। इवन एस एडल्ट्स फॉर एस लॉन्ग एज यू आर देयर। और आपको पता भी नहीं चलता। इनको हम साइकोलॉजिकल स्कार्स कहते हैं जो नजर नहीं आते। आपको खुद भी नहीं पता बट योर एकशंस एंड योर थॉट्स एंड योर आउट योर मूड्स दे ऑल रिफ्लेक्ट दैट। सो हाउ कैन यू कंट्रोल योर थॉट्स? एक तो मैंने आपको दो बातें बताई कि एक तो यू आर नॉट योर थॉट्स, योर थॉट्स आर नॉट ऑलवेज ऑन रियलिटी बेसिस। करेक्ट। एंड नंबर थ्री इज़ मेडिटेशन जो के आई वाज़ ट्रेंड इन द वेस्ट। बट आई अंटिल दे डिस्कवर्ड किसका साइंटिफिक
(47:04) वैल्यू है। आई वाज़ आई वाज़ डाउटफुल बिकॉज़ ये हमारे सबक्टिनेंट में तो बहुत अरसे से है। आई थिंक इससे बेहतर तरीका सोच कंट्रोल करने का। तो मेडिटेशन हमारे यह सबक्टिनेंट में ईस्ट में यह सेंचुरीज से है। है स्पेशली इन मक्स एंड यू नो जी और बुद्धिस्ट स्कूल ऑफ़ थॉट में ये इस पे बहुत एमफेसिस है। तो उस जमाने में किसी को कैसे ख्याल आ गया मेडिटेशन का? अब मुझे इसका बुद्धिज्म का तो मुझे आईडिया है कि ये 2500 इयर्स इट ऑल स्टार्टेड एंड देयर द कांसेप्ट वाज़ दैट यू जस्ट फोकस ऑन योर ब्रेथ एंड अलव डोंट सप्रेस द थॉट्स अलव देम टू कम एंड लेट देम
(47:52) गो वही जैसे क्लाउड्स ओवर द स्काई एंड देन आफ्टर अबाउट 10-15 मिनट्स यू गेट इंटू अ स्टेट वेयर योर माइंड इज़ कंप्लीटली क्लियर देन दे नो थॉट्स इफ आई वांट टू बी देयर एंड एंड दैट इज द अवेयरनेस जब उसमें थॉट नहीं होती एंड मेरी मेरी लाइफ में और फलसफे में जिस शख्स को अपने थॉट्स कंट्रोल करने कीस्ट्री है ही हैज़ कंट्रोल ओवर ह इमोशन। सो यू थिंक मेडिटेशन शुड बी टॉट इन स्कूल्स। आई सर्टेनली देयर शुड बी अ पीरियड फॉर दैट राइट? वैसे भी इससे आपके अंदर टॉलरेंस आती है, पीस आता है, ट्रेंकिलिटी आती है। यू ओवरलुक इश्यूज दैट आर नॉन
(48:38) क्रूशियल। एंड यू रियली अंडरगो अ वेरी पॉजिटिव साइकोलॉजिकल चेंज। असल में तो सर खुशी की जो स्टेट होती है ना दैट्स व्हाट मैटर्स व्हेन पर्सन इज कंटेंट एंड हैप्पी विद व्हाट दे हैव एंड जब आप यह बात एडमिट भी कर लेते हो कि इतना है इसमें खुश रहना है एंड यू आर वेरी लकी कि यह भी है दैट इज दैट अगेन इज अ थॉट एंड यू हैव टू ट्रेन योरसेल्फ ओके देयर आर टू वेज़ टू बी रिच वन इज टू हैव एवरीथिंग दैट यू वांट और वांट व्हाट यू ऑलरेडी हैव एंड दैट इज अ मच बेटर वे ऑफ़ गोइंग अबाउट इट बिकॉज़ मैंने हजारों मिलिय
(49:25) बिलियर्स बिलियर्स को देखा है मनी डज़ नॉट ब्रिंग हैप्पीनेस आफ्टर अ सर्टेन टाइम इट डजंट एक इल्लुजन है हमारी इट कांट बाय बाय अ गुड फ्रेंड इट कांट बाय लव इट कांट बाय पीस ऑफ़ माइंड एंड येट वी आर इन दैट इलुजन कि शायद ज्यादा पैसा होगा तो आई विल बी हैप्पीियर। सो वो जो आप कह रही हैं कंटेंटमेंट बीइंग हैप्पी विद व्हाट यू हैव वो भी स्टेट ऑफ़ माइंड है जो सोच को डेवलप करने से ही पैदा होती है। और इसको पुराने इंडियन और बुरे सोच में माइंडफुलनेस कहते हैं। मॉडर्न साइकाट्री में इसको कहते हैं प्रेजेंट मोमेंट लिविंग वेयर व्हाटएवर यू आर डूइंग डू इट विल फुल
(50:12) माइंडफुलनेस। एंड बी ग्रेटफुल फॉर इट। सो यू विल हैव एल अपोरर्चुनिटीज टू बी ग्रेटफुल एंड हैप्पी। बट देन अगेन ट्रेनिंग आपने अपने माइंड को ट्रेन करना है। फॉर एग्जांपल हमारी यह पडकास्ट कोई ऐसी मां देख रही है जिसको चले वो हाउसवाइफ है उसके तीन बच्चे एंड ऑल डे यू नो हाउसवाइफ हैव टू वर्क एंड लुकिंग आफ्टर द किड्स टेक इन स्कूल ब्रिंगिंग देम बैक खाना बनाना नाश्ता बनाना सारा दिन इसमें गुजरता है उस औरत का वो तंग भी आ जाती है उसको बच्चों को बार-बार बुलाना और तंग करना हां। सो एक पॉजिटिव माहौल के लिए उसको अपने थॉट
(50:59) कंट्रोल करने हैं। आपने कहा ना शी शी हैस टू वर्क। या या आई वुड से इफ शी कीप्स ऑन सेइंग दिस आई हैव टू डू दिस शी विल बी मिरेबल। इफ शी सेस आई चूज टू डू इट। बिकॉज़ सर आपकी एक आपकी कैपेसिटी भी है। नहीं नहीं। आई चूज टू डू इट बिकॉज़ दिस विल ब्रिंग द बेस्ट ऑफ़ माय किड्स एंड माय फ्यूचर एंड एवरीथिंग। तो बात बहुत बदल जाती है। जब आप हैव टू कहते है ना देन यू थिंक इट्स ये मुसीबत है। बट चूज टू डू इट। बिकॉज़ शी हैज़ अ चॉइस। शी डजंट हैव टू सेंड देम टू स्कूल। दे कैन बिकम नहीं नहीं ये तो नहीं हो सकता। नहीं नहीं नहीं। हो सकता है इफ शी वांट्स
(51:39) टू। ये तो नहीं उसमें बाप भी तो है। सो दे बोथ चूज़ टू डू इट। आप हमेशा हैव की जगह चूस का वर्ड यूज किया करें और मस्ट की जगह विश किया करें। लेट्स मैं आपको एक एक्सरसाइज करवाता हूं। जस्ट क्लोज योर आइज एंड टेक अ डीप ब्रेथ एंड रेट योर हैप्पीनेस एट दिस मोमेंट ऑन अ जीरो टू 10 स्केल वेयर 10 इज मैक्सिमम हैप्पीनेस। एंड नाउ से टू योरसेल्फ। आई विश आई हैड अ मिलियन डॉल टुडे। और देखिए आपकी हैप्पीनेस का स्कोर बदलता है कि नहीं। एंड नाउ से आई मस्ट हैव मिलियन डॉल टू बी
(52:26) हैप्पी। और अब देखिए आपका स्कोर बदलता है कि नहीं। कितना था पहले? एट। अच्छा। बट व्हेन यू सेड आई मस्ट हैव मिलियन डॉलर्स टू गेम। अच्छा चलिए नॉर्मली पीपल बिकम अनहै आफ्टर दे हैव सेड दिस स्टेटमेंट टू देमसेल्व्स जब मस्ट आता है ना मस्ट के बाद भी एट ही था नहीं हो सकता है आपका एट ही हो पर लेकिन मैं मैं उस वक्त ये सोच रही थी के हाफ टू से तो मेरा फेल फोर पे चला जाना चाहिए था ना अगर ये थॉट मैं मान लूं आप नहीं मैं मैं नहीं मानी जब आप मुझसे पूछ रहे थे हम तो मैंने ज़हन में सोचा क्या अगर मैं
(53:13) अपनी जिंदगी में हैव टू ले आऊं तो मेरी तो खुशी बड़ी कम हो जाएगी। तो ये हैव टू और मस्ट तकरीबन एक ही चीज है। ये वही कह रही हूं। सो व्हेन पहले आप मस्ट की जगह हैव टू कह दे। मस्ट बी तो मस्ट बी खुशी कम हो जाएगी। खुशी मेरी कम हो गई ना? जस्ट बाय चेंजिंग हाउ यू थिंक। या या या हैव टू देखिए मुझे लगता है कि बेसिक नेसेसिटीज जब पूरी हो जाए ना उसके बाद जो भी आप करते हो वो तो फिर ख्वाब ही होते हैं ना आई थिंक आप सही कह रहे हैं। वंस योर बेसिक नेसेसिटीज़ व्हाटएवर दे आर। जैसे वो 90 की रिसर्च है यूएस में दे फाउंड दैट इफ यू अर्न $200
(53:57) पर मंथ दैट इज़ बेसिक नेसेसिटीज़। उसके बाद डोंट गो आफ्टर मनी टू बाय हैप्पीनेस। दैट्स आ जाए तो खैर है। बट देयर आर बेटर वेज़ ऑफ़ सीकिंग हैप्पीनेस। जिंदगी की जितनी नेमतें हैं उसमें पैसा बड़ा कम इनवॉल्वड है। पीस ऑफ़ माइंड, ट्रकलिटी, अ सेंस ऑफ अचीवमेंट कुछ भी हो। पेशेंस, लव। यू डोंट रियली नीड टू मच मनी फॉर दैट। सर अगर आप हर इंसान यह सोच ले तो प्रोग्रेस का क्या होगा? अगेन डू यू हैव टू डू इट और इज इट योर डिजायर? वही जो हम पहले भी डिस्कस कर चुके हैं। अगर आप डिजायर और नीड्स को कंफ्यूज
(54:45) कर दें फिर मसले पैदा होते हैं। लेट्स से आई डिजायर दैट यू रिस्पेक्ट मी व्हिच मींस इफ यू डोंट फर्क नहीं पड़ता। बट इफ आई से यू हैव टू रिस्पेक्ट मी। अदरवाइज देयर इज़ नो फ्रेंडशिप तो फिर बात बदल जाती है। दिस इज अ नीड। पर सर ये जरूरी भी तो है। रिस्पेक्ट डिजायर और चीज है। लेट्स से योर हस्बैंड सेस टू यू दैट व्हेन आई कम होम आई वांट यू टू बी ऑल ड्रेस्ड अप फॉर मी। ये उसका डिजायर है। नीड है दैट यू विल नेवर बिट्रे हिम फॉर समवन एल्स। दैट्स अ नीड। सो दिस इज अ डिफरेंस बिटवीन द टू। आप डिजायर्स रखें डोंट मेक देम योर
(55:31) नीड्स अनलेस कि आपके गोल पैराडाइम में वो फिट करते हैं नीड। जितनी नीड्स कम रखेंगे यू विल बी अ हैप्पी पर्सन। सर लेकिन आपको नहीं लगता विद इनफ्लक्स ऑफ ये Instagram एंड ये यू यू आर पुटिंग अ परफेक्ट लाइफ व्हिच नो वन हैज़ एंड दैट मेक्स लॉट ऑफ़ अदर पीपल एंड वी यू एंड आपकी डिजायर्स अगेन थोड़ी सी देखिए ये जो अह सोशल मीडिया है लाइक एनी अदर इंस्ट्रूमेंट इट इट प्रोड्यूसेस बोथ पॉजिटिव एंड नेगेटिव इफ़ेक्ट्स। इसके जो
(56:16) नेगेटिव इफ़ेक्ट्स हैं वो दो हैं। एक के आप वो सारा ग्लैमर देखते हैं जो कि फिक्टशियस है। बट आपके अंदर यह सोच आती है कि काश मैं यह ऐसे होता व्हिच गिव्स राइस टू मिज़री। इक्वली यू सी सो मच रोंग गोइंग ऑन इन द वर्ल्ड। कि आपको लगता है ओ माय गॉड दिस इज अ मिज़रेबल प्लनेट। एंड व्हेन विल आई बी अ विक्टिम सो यू बिकम फियरफुल एंड एशियस बिकॉज़ इन्होंने तो खबरें वो देनी है जो गलत जो चीजें गलत हुई है नॉट के वो कितनी सही हुई है। अगर हजार प्लेेंस लैंड कर गए सेफली वो खबर नहीं है जो एक क्रैश होता है वही खबर बनता है। सो आई आई डोंट थिंक ये रियलिटी आपको
(57:01) दिखाता है। सो यू हैव टू बी बच्चों के साथ आपको कम से कम ख्याल रखना चाहिए बिकॉज़ वो बहुत जल्दी इन्फ्लुएंस होते हैं। सो हमने ये देखा है कि बच्चों के हाथ में फोन बहुत जल्दी पकड़ा देते हैं। आप एज अ साइकेट्रिस्ट आपको क्या लगता है? व्हाट्स द प्रॉपर एज फॉर देम टू बी इंट्रोड्यूस्ड टू दिस। आई आई डोंट थिंक दे शुड बी इंट्रोड्यूस अनलेस दे आर कंसीडर्ड एडल्ट्स। बिकॉज़ हमारे यहां जिस किस्म के घरों के हालात है कि अनसुपरवाइज्ड होते हैं फोन हैंडलिंग ना मां के पास टाइम है। ये मैं अमीरों की बात कर रहा हूं। गरीबों के यहां तो शायद होती
(57:39) नहीं है। एंड गिविंग देम एक्सेस टू अन सर गरीबों के पास और कुछ है या नहीं फोन आ गए हैं। ओके। तो वहां तो और भी जहालत है बेचारों की। बिकॉज़ वहां तो मां-बाप को भी नहीं पता क्या देखना चाहिए। इनको क्या नहीं देखना चाहिए। बट आई आई रियली फील दिस दिस हैज़ टू बी क्लोजली मॉनिटर्ड एंड मे बी 16 टू 18 वुड बी एन एज आफ्टर वि ग्रेजुअली दे शुड बी इंट्रोड्यूस विद पैरेंटल विजिलेंस एट ऑल टाइम्स बिकॉज़ दे दे टू मच देयर इज़ टू मच मटेरियल देयर इज़ टू मच अपॉर्चुनिटी फॉर ऑल काइंड ऑफ़ थिंग्स और हमारे सर आ जाती हैं सर हम कुछ दबाते हैं एकदम प्रोटेक्ट करके कोई गंदी सी तस्वीर रह
(58:24) जाती है। एंड आई नो आई अंडरस्टैंड बच्चों के लिए तो इट्स एंड वी आल्सो हैव टू एडमिट। चाहे कोई माने ना माने। वी आर अ वेरी फ्रस्ट्रेटेड सोसाइटी। अ वेरी फ्रस्ट्रेटेड सोसाइटी। वी डू नॉट नो व्हाट आर आवर लिमिट्स। एंग्री हैं। बहुत एंग्री। एंगर भी और सेक्सुअल फ्रस्ट्रेशन भी। हमारे यहां इतना इस चीज को रिप्रेस और सप्रेस किया जाता है कि व्हनेवर देयर इज एन ओके इट कम्स अप लाइक अ वोल्केनो एंड वी हैव फाउंड नो आंसर्स टू दिस प्रॉब्लम वी डोंट वांट टू बिकॉज़ वी डोंट वांट टू थिंक अबाउट इट बेबी हमारी एक हिपोक्रेसी है वी जस्ट डोंट वांट टू थिंक अबाउट इट
(59:07) गंदी चीज बिकॉज़ आई सी द डर्टी लिनन ऑफ़ सोसाइटी। आई नो व्हाट पीपल डू इन देयर प्राइवेट लाइफ्स चाहे वो टीनएजर्स हैं, चाहे वो एडल्ट्स हैं, चाहे वो एल्डरली लोग हैं। इट्स अ वेरी फ्रस्ट्रेटेड सोसाइटी बिकॉज़ वी डोंट फाइंड एक्सेप्टेबल आउटलेट्स फॉर समथिंग व्हिच इज़ वेरी नेचुरल जेनुइन एंड नीड्स अटेंशन। सर, आई थिंक लेट्स डू आवर नेक्स्ट शो ऑन दिस। ट्रू रीज़ बीइंग अगेन आपकी जिब्लत में सबसे खाने पेट भरने के बाद सेक्स इज़ एन अदर इंपॉर्टेंट यू नो पार्ट ऑफ़ योर लाइफ। इट इज़ इट्स अब्सोलुटली लाइक हैविंग फूड आफ्टर सर्टेन एज। यू नो। सो
(59:53) लेट्स टू अ शो ऑन दैट एंड द द फैक्टर आई वांट टू टॉक टू यू अबाउट इज़ यू नो हमारे यहां पे एक रेड लाइट एरिया होता था। ठीक है पूरी दुनिया में होता है स्पेशली एमस्टरड अब बड़ी कंफ्यूजन है उस उसमें भी के इट्स मोरली रोंग बेचारी औरतें बट देन देयर इज़ अनदर पॉइंट दैट देयर आर वुमेन हु आर विलिंगली डूइंग इट एंड दैट्स दे टेक इट एस देयर बिज़नेस हम तो यहां पे बैठ के मोरल्स बना लेते हैं ना जो हमें मयस्सर होता है उसके मुताबिक एंड देन इट्स अ नेसेसिटी आल्सो। एक पर्टिकुलर सोच में सोचा जाए कि अगर वहां चला जाए मर्द तो
(1:00:38) यह बच्चियों के रेप नहीं होंगे। ये इस तरह के नहीं होंगे। बट देयर इज़ लॉट ऑफ़ कन्फ्यूजन मोरल एंड प्रैक्टिकल। आपकी शायद नॉलेज में हो। हमारी इंडियन हिस्ट्री में तुखलक के जमाने में दिल्ली के बाहर एक इलाका था। उस जहां पे तवाइफें रहती थी और वो टैक्स सर दुनिया का सबसे पुराना प्रोफेशन जी वो रजिस्टर्ड थी टैक्स भी देती थी अपेरेंटली उसका यही नाम था फिर अकबर के जमाने में भी था और फिर जो लश्कर आते थे इंडिया में इन्वेशन करने उनके साथ भी तवाइफों का टोला चलता था और जो लाहौर का रेडलेट एरिया आप कह रही हैं वहां भी छावनी थी तो इसलिए वह वहां पे डेवलप हुआ सो वी
(1:01:24) डू नॉट हैव अ वेरी पार्क पाक साफ हिस्ट्री है सर इवन होमोसेक्सुअलिटी में अगर आप देखें इवन उस्मानिया उसमें हां जी आई मीन ये एकदम इतना बड़ा आई थिंक क्रिश्चियनिटी का जब इन्फ्लुएंस हुआ ना देन इट बिकम अह अह इसमें एक तो लोग समझते हैं दिस इज़ अ रीसेंट फिनोमिनन बट नो होमोसेक्सुअलिटी हैज़ बीन रिकॉर्डेड फ्रॉम 10,000 ऑनवर्ड्स ऑनवर्ड्स एंड 15 रोमन एपरर्स वर ओपनली ग एलेक्जेंडर वो अलेग्जेंडर और ग्रीक सोसाइटी में दिस वाज़ द आइडियल फॉर्म ऑफ़ लव एंड देयर आर रीज़ंस
(1:02:11) टू बिलीव देयर सोक्रेटीस इन प्लेटो व्हेन दीज़ पीपल वर गे एस्पेशली अमंग सोल्जर्स हां जी अमंग सोल्जर्स आई मीन वो जो ड्रेस नहीं उनका वो जो छोटी सी फ्रॉग सी पहन दैट वास डिज़ फॉर दिस फॉर द कन्वीनियंस। सो वी विल टॉक अबाउट ऑल दिस इन आवर नेक्स्ट शो एंड जाने से पहले आई वुड लाइक यू टू गिव योर फाइनल वर्डिक्ट ऑन पावर ऑफ़ थॉट्स। मेरे ख्याल में आई विश दिस एरिया हैड बीन एफसाइज्ड मच अर्लियर बट आई वुड स्ट्रांगली सजेस्ट दैट वी शुड नेवर अंडरएस्टीमेट
(1:02:58) दैट एव्री रिलेशनशिप इज़ आवर थॉट आवर फ्यूचर आवर पास्ट आवर मिरी आवर प्रोस्पेरिटी आवर स्केर्सिटी दीज़ आर ऑल आवर थॉट्स थॉट्स क्रिएट इमोशंस इमोशंस क्रिएट एक्शन एंड योर चॉइस वॉइससेस इन लाइफ प्लीज गार्ड योर थॉट्स यू शुड गेन दैस्ट्री ऑफ वि थॉट हैज़ टू बी डेवलप्ड व्हिच हैज़ टू बी इरेडिकेटेड व्हिच हैज़ टू बी लेफ्ट एज़ इट इज़ जिसको हम साइकाट्री में कहते हैं मेक इट एन इमोशनल गार्डन नॉट अ जंगल वेयर यू डिसाइड व्हिच थॉट्स विल ग्रो एंड प्रॉस्पर एंड योर लाइफ विल चेंज ट्रेमेंडसली डॉक्टर साहब फॉर दैट यू नीड टू नो फर्स्ट यू हैव टू टू एडमिट वेयर यू रोंग। यू हैव
(1:03:45) टू लुक विद इन योरसेल्फ फर्स्ट। एंड दैट इज अ मुश्किल काम। बट वी हैव टू स्टार्ट समवेयर। आई डीड आई डीड जैसे कि मैंने आपको पहले भी बताया था कि माय थॉट प्रोसेस ऑफ रिएक्शन चेंज्ड व्हेन आई ट्राई टू गो एंड द अदर पर्सन शूज फर्स्ट। व्हाई डीड ही डू? एथसी। व्हाई डीड ही डू? क्या वजह उसने मेरे साथ ये किया? मेरे में ऐसी क्या बात थी? व्हाई मी? और क्यों नहीं? यू नो सो सम मुझे माफ़ करने में खैर अपने आपको भी बिकॉज़ आप भी बहुत घटिया हरकतें कर जाते हो। लाइफ
(1:04:28) हम सब करते हैं। एंड सबको पता भी होता है कि हमने क्या गलत किया है। उसको एडमिट करना जो होता है ना और उस पे माफी मांगना इज सच अ फ्रीडम। डॉट बहुत बहुत इट हैज़ चेंज्ड माय लाइफ। आई एम श्योर इट हैज़ चेंज माय लाइफ। हम बिलकुल। तो यही कोशिश होती है मेरी और डॉक्टर साहब की कि हम सोच के दिमाग के साइकोलॉजी के ऐसे प्रैक्टिस पे खुल के बात करें जो हमारी शेप कर रही हैं। नफसा नफसी का आलम है और बहुत जल्दी साइंस ने तरक्की कर ली है और हमारा ज़हन अभी इतनी इंफॉर्मेशन डाइजेस्ट करने के काबिल नहीं है। इसी वजह से दौर में बहुत कन्फ्यूजन,
(1:05:15) डिप्रेशन, स्ट्रेस, ए्जायटी आ गया है कि जिंदगी इतनी तेज हो गई है और यहां पे उसको प्रोसेस करने का अमल अभी भी पुराना है। सो, इसमें बैलेंस करने के लिए हमें डॉक्टर साहब जैसे प्रोफेशनल्स की पर्सनली भी जरूरत होती है और एक टीचर के तौर पे भी उनसे बात करने की बहुत जरूरत होती है। नॉट एवरीबॉडी कैन बी एस द ही एज़ आई एम कि मैं अप्रोच कर सकूं डॉक्टर साहब को इस तरह वह मेरे साथ आके गुफ्तगू भी करते हैं और इसीलिए हम दोनों ने यह स्टार्ट भी किया था कि हमारी गुफ्तगू से अगर आप एक भी हमारे व्यूअर को इतनी सी भी समझ आ जाए तो आई थिंक हमारे
(1:05:59) पैसे पूरे हो गए हैं। सो फॉर मी इट्स अ लर्निंग प्रोसेस एंड इन दिस प्रोसेस आई एम ट्राइंग के मेरे साथ-साथ आप लोग भी सीखें। अगेन जाने से पहले मैं आपको फिर एक दफा रिक्वेस्ट करूंगी। प्लीज हमारे चैनल को जरूर फॉलो करें, सब्सक्राइब करें। इसका सिर्फ एक ही मकसद होता है कि हम उस एल्गोरिदम में आ जाएं के ज्यादा से ज्यादा तर लोगों तक हमारा शो जा सके, इनेशन जा सके। दैट्स द ओनली फेवर आई वांट फ्रॉम यू। कीप वाचिंग आवर शोज़ एंड कीप गाइडिंग अस हाउ टू मेक इट बेटर एंड टेल अस व्हाट डू यू वांट टू नो अबाउट ह्यूमन साइकी। और किसी किस्म की भी प्रॉब्लम तो वी विल
(1:06:39) डिस्कस इट। थैंक यू सो मच।

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