Sunday, August 2, 2026

22 y/o Sadhak on Maa Tripura Sundari, Sri Vidya Tantra & Death | Adi Suyesh | Supertalks 179

22 y/o Sadhak on Maa Tripura Sundari, Sri Vidya Tantra & Death | Adi Suyesh | Supertalks 179

Author Name:Supertalks by themovingship

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Transcript:
(00:00) भगवान जो सब कुछ कर सकते हैं वो भी सीमित है। मां ललिता रसुंदरी की बात करते हैं। जो भी उनके बारे में जानता है उसका यह आखिरी जन्म होता है। शिव ही उसको जान सकते हैं या वह व्यक्ति जो शिव को जानने के करीब है। हमें इस एग्जिस्टेंस को उसके एंटायरिटी में जानना होगा। हमने अपने आप को भी उस पूर्णता में खो दिया तो वह अंतिम जन्म होगा या नहीं? देवी को जानने के प्रोसेस में इंसान शिव बन जाता है। आपका श्री विद्या स्टार्ट करने की वजह क्या थी? मुझे मृत्यु क्या है वो जानना था। मृत्यु के बाद क्या होता है वो जानना था। क्या जवाब मिला?
(00:44) श्री विद्या का सबसे पुराना तंत्र है नृत्य शोधशिका अर्णव। उसी का एक पाठ है योगिनी हृदय तंत्र। तो उसके अकॉर्डिंग जो उनकी जो श्री विद्या के उपासक हैं उनके घर में सोना बहुत होता है। जो वो काल भैरव की साधना करते हैं। उनकी बॉडी में से हीट निकलने लग जाती है। तिब्बतन बुद्धिज्म में इसको कहते हैं तुम हो और क्योंकि ये नहीं बताया जाता मेल साधक को तो इसलिए ये वेल नोन भी नहीं है। तो वो व्यक्ति भोग और योग दोनों को प्राप्त होता है। दे आर लिटरल बीइंग्स जो एक्सिस्ट करते हैं लाइक ह्यूमंस लाइक ह्यूमंस। और कैसे पता लगता है वो योगिनी
(01:20) योगिनी आपका सर काट देती है। पूजा विषयोपभोग रचना निद्रा समाधि स्थिति संचार प्रयो प्रदक्षिण विधि मैं इसे पूरा कंप्लीट नहीं कर पाया। दोस्तों आज के गेस्ट मैं यह कहूंगा कि सुपर टॉक्स की जर्नी में अभी तक के वन ऑफ द मोस्ट नॉलेजेबल गेस्ट्स होने वाले हैं। इनकी उम्र तो सिर्फ 22 साल है। और जैसे हम मानते हैं ना कि सोल्स ट्रैवल करते पिछले
(02:05) जन्म से इस जन्म तक। ही इज़ वन ऑफ दोज़ ओल्ड सोल्स जो कि अपने दादा की मृत्यु के बाद सवाल करते हैं मृत्यु पर जिससे यह तंत्र तक पहुंचते हैं और तंत्र से श्री विद्या तक। श्री विद्या को माना जाता है वन ऑफ द प्यरेस्ट फॉर्म्स ऑफ तंत्र। और श्री विद्या के जो सेंट्रल डटी हैं उनका नाम है मां ललिता त्रिपुरा सुंदरी। आज के पडकास्ट में हम समझेंगे कि मां ललिता त्रिपुरा सुंदरी को क्यों बोला जाता है गॉडेस ऑफ डिजायर्स क्यों बोला जाता है कि जिसने मां को जान लिया उसका यह
(02:52) आखिरी जन्म होता है ऐसी मां है जो कि इच्छाएं भी पूर्ण करती हैं और मोक्ष तक भी लेकर जाती हैं। श्री विद्या क्या होती है? श्री यंत्र क्या होता है? प्रेजेंटिंग फॉर द वेरी फर्स्ट टाइम ऑन सुपर डट्स आदि सुरेश जी आप इनकी तस्वीरें देखिए 22 साल की उम्र में श्मशान में साधना करना विज्ञान भैरव तंत्र कैसे हिज होलीनेस दलाई लामा जी इनसे मिलते हैं। ये मैं आपको इसलिए बता रहा हूं क्योंकि इस पूरी कॉन्वर्सेशन को आपको इस भावना से महसूस करना होगा। दैट ही इज़ हैविंग एन एक्सपीरियंस
(03:38) ऑफ़ एट टु नाइन इयर्स। जब हम बच्चे थे तब यह इस विद्या को ले रहे थे। अक्सर कहता हूं कि पडकास्ट को फैमिली के साथ देखना। आज आपसे रिक्वेस्ट करूंगा इसको अकेले में देखना। पूरी कॉन्शियसनेस, अवेयरनेस और अटेंशन से। ऐसा एक्सपीरियंस होने वाला है दैट यू विल आपके जहन में रहेगा। आप साधना नहीं करते या करना चाहते हो यह आपका एक स्टार्टिंग पॉइंट होगा और तंत्र से आप इंट्रोड्यूस होंगे और कहीं ना कहीं उसकी गहराई को छू जरूर पाओगे। थैंक यू सो मच हमेशा की तरह सुपर टॉक्स को
(04:22) प्यार देने के लिए। बिकॉज़ वी आर नॉट जस्ट अ पॉडकास्ट चैनल। जब भी आप हमारी वीडियोस देखते हैं, मेंबरशिप प्रोग्राम्स का हिस्सा बनते हैं। आप एक मूवमेंट को सपोर्ट कर रहे हैं क्योंकि पिछले 9 सालों से हम एक एनजीओ चलाते हैं फॉर अबाउट 200 अनपिड चिल्ड्रन। सो हम दोनों मिलकर अपने देश को आगे लेकर जा रहे हैं। थैंक यू सो मच। आपकी लाइफ में देवी कब आई? शक्ति कब आई? देवी कब आई? देवी गई कब थी? नहीं। देवी क गई कब थी शायद जैसे अभी हम डिस्कस कर रहे थे ना वो शुरू से थी हमेशा से थी और है और रहेंगी बिल्कुल पर मेरी पहचान अब से हुई
(05:06) हां तो वो आपके लिए कब था शुरू से था पहले भैरव थे वो हाउ डू यू किस जन्म की हम बात कर रहे हैं जिस जन्म की आप चाहो शक्ति को हम आपको समझना होगा कि हम धरती पर आए हैं ही इसीलिए क्योंकि हमारी अपनी स्वतंत्र शक्ति माया शक्ति बन गई। हम स्वतंत्र शक्ति यानी द एनर्जी ऑफ फ्रीडम। हमारी अपनी स्वतंत्रता से हमने चुना बंधन में आना। तो जो हमारी अपनी स्वतंत्रता थी, वह माया बन गई। तो माया देवी हमारे साथ हमेशा से है जब से हम बने हैं जीव अब यही माया देवी के स्वतंत्र स्वरूप को हम चखना चाहते हैं हम
(05:53) कि देवी बंधन में तो रख दिया आपने अब वापस मुक्ति की तरफ ले चलो तो वो कब से आई आप शायद ऐसा सवाल होगा आपका कि माया से तो हम समझते हैं माया को माया से तो हम रोज डील कर रहे स्वतंत्र के बारे में कब समझ आया कि ऐसा कुछ है उसका ग्लिं्स कब मिला? तो वो तो जितना मुझे मेमोरी है पास्ट लाइफ का भी तब से था। शक्ति से सबसे अधिक कनेक्टेड रहा मैं। इनफैक्ट भैरव से भी अधिक देवी से क्योंकि जो उनका स्वरूप है ना जो उनके गण है योगिनी वो काफी रहा है उनका इन्फ्लुएंस
(06:41) मेरे ऊपर तो इसीलिए जैसे आपने भैरव का एक्सपीरियंस बताया था हम्म क्या कभी देवी का एक्सपीरियंस मैंने तभी भी आपको बताया था ये एक्सपीरियंस मेरे लिए उतना वैल्युएबल है नहीं मैटर नहीं करता प्रपंच है हुआ बट हां हुआ है। मैं उसको इतना मैटर करता ही नहीं मेरे लिए कि मैं आपको बताऊं वो। श्योर मेरे लिए शक्ति यानी स्वतंत्रता। अगर मैं बताने चलूं तो मैं बहुत सारी चीजें हैं बताने के लिए। जैसे जो आम लोगों के लिए है देवी का दर्शन। तो बहुत सारे उनके सबोर्डिनेट बीइंग्स हैं।
(07:27) हुआ है अनुभव। मगर वह उनकी वास्तविकता नहीं है। उनके बारे में बात करना देवी का अपमान है। देवी यानी क्या? वो आनंद शक्ति। देवी यानी वो स्वतंत्र शक्ति, वो चित शक्ति। जिसके कारण हम हैं यहां पर वो है देवी। इस कैनवस के ऊपर जो रंग है वो है देवी। देवी के अलग-अलग फॉर्म्स हैं। हम आपने देवी को क्या नाम दिया? नाम मैंने नहीं दिया। नाम अपमान है। नाम लोगों ने दिया तो मैं उसी नाम से रेफर करता हूं। किस नाम से रेफर करता? श्री श्री विद्या त्रिपुर सुंदरी पराशक्ति
(08:14) परावाक। तो अगर कोई कोई एक नाम है जो मेरे सबसे करीब है देवी का तो वह है परा। जस्ट पड़ा। पढ़ा यानी सुप्रीम। उनका कोई क्लासिफिकेशन हो ही नहीं सकता। नाम देना उनको लेबल करना होगा। लेबल हम नहीं कर सकते। तो सिर्फ पढ़ा हाईएस्ट फॉर्म ऑफ आदि पराशक्ति थर्ड ऑफ 10 महाविद्या हम इनकी कुछ मैंने चित्र देखे मां के हम और ब्रह्मा विष्णु महेश हम मां सिंहासन के ऊपर और बाकी सब नीचे हां रूलर ऑफ द थ्री वर्ल्ड्स मदर ऑफ द यूनिवर्स हां
(08:56) द गॉडेस ऑफ़ डिजायर्स हां जो इनके बारे में जान पाता है उसका यह आखिरी जन्म होता है। यस। कौन है मां ललिता त्रिपुरा सुंदरी? कौन नहीं है मां ललिता त्रिपुरा सुंदरी? वो हर कुछ है। तो यह टेबल यह भी देवी हैं। यह कप यह भी देवी हैं। यह माइक यह भी देवी हैं। इस माइक के अंदर जो इलेक्ट्रिसिटी है और जो डाटा ट्रांसफर हो रहा है, वह भी देवी हैं।
(09:41) लेकिन क्या वही देवी हैं? नहीं। अगर हम उन्हें सच में जानना चाहते हैं तो हमें इस एकिस्टेंस को उसके एंटायरिटी में जानना होगा। अगर हम आदि सुयश या किसी भी इंडिविजुअल को सच में जानना चाहते हैं तो उसके हर एक बॉडी पार्ट को जानना होगा। किसी एक बॉडी पार्ट से जान के हम उसको उसकी पूर्णता में नहीं समझ सकते। तो देवी को जानने के लिए यू हैव टू अंडरस्टैंड द एंटायरिटी ऑफ़ द कॉस्मोस। सब कुछ का यूनियन या सब कुछ का कलमिनेशन देवी है। सब कुछ ही देवी है। किसी भी चीज की विशेषता देवी है। किसी का भी धर्म या गुण देवी है। जिसकी जिस चीज की भी आप
(10:24) इमेजिनेशन कर सकते हैं। जो सच में है या जो नहीं है जो वास्तव में एक्सिस्ट करता है या जो आपके दिमाग में है वो सब देवी हैं। जो शिव है वो उनके बैकग्राउंड है। शिव वह प्रेत शैया है। वह प्रेत आसन जिसके ऊपर वह विराजमान है। शिव वह कैनवस है जिसके ऊपर यह चित्र चल रहा है। शिव वो स्क्रीन है जिसके ऊपर यह मूवी चल रहा है और वो मूवी देवी हैं। ऐसा ये क्यों कहा जाता है? जब भी हम मां ललिता सुंदरी की बात करते हैं हम तब ऐसा क्यों कहा जाता है कि जो भी इनके बारे में जानता है हम
(11:07) उसका ये आखिरी जन्म होता है। ऐसा क्यों और ऐसा ऐसा मां के अलग-अलग फॉर्म्स हैं। राइट? 10 महाविद्या है। मां काली भी है। मां त्रिपुरा सुंदरी को मदर ऑफ द यूनिवर्स बोला जा रहा है। हां व्हाई? लिखा है। हालांकि सारे रूपों को मदर ऑफ द यूनिवर्स कहा जाता है। लेकिन जो एग्जैक्ट श्लोक है जो ये कहता है वो कहता है कि अथवा शंकर स्वयं यानी आइदर यू आर लॉर्ड शिवा। या अथवा पश्चिमम जन्म या तो यह आपका अंतिम जन्म है या लास्ट जन्म है
(11:53) या तो आप स्वयं शंकर हैं या तो यह आपका पश्चिम जन्म यानी अंतिम जन्म है। तो ही आप देवी को जान सकते हैं। शिव ही उसको जान सकते हैं या वह व्यक्ति जो शिव को जानने के करीब है या जो शिव होने के करीब है वही देवी को समझ सकता है। क्योंकि देवी को समझने का अर्थ यह नहीं है कि आप किसी एक रूप को समझ रहे हैं। देवी को समझने का क्या अर्थ है? अभी हम जैसा हमने समझा यू हैव टू अंडरस्टैंड द एंटायरिटी ऑफ़ इट। राइट? राइट? और वो आप तभी समझेंगे जब आप खुद उस एंटायरिटी में डिॉल्व हो जाएंगे। हम्। और इसी एंटायरिटी का पार्ट आप भी हैं। जब हम कहते हैं कि हमें एंटायरिटी ऑफ़
(12:39) एक्सिस्टेंस को समझना है कि सब कुछ अभेद रूप से देवी हैं। हम तो जब हम अभेद की बात करेंगे तो उस अभेद में हम भी तो आते हैं। हम तो हम भी उसके साथ एक हो जाएंगे। उस पूरे एक्सिस्टेंस के साथ। राइट? हम भी उसका एक पार्ट बन जाएंगे। तो उस प्रोसेस में देवी को जानने के हमने अपनी आइडेंटिटी को भी विलीन कर दिया। हमने अपने आप को भी उस अस्तित्व की पूर्णता में खो दिया तो वह अंतिम जन्म होगा या नहीं? बिल्कुल होगा। देवी को जानने के प्रोसेस में इंसान शिव बन जाता है। वाह वाह शिव ही देवी को जान सकते हैं और किसी में सामर्थ्य नहीं है। सो यानी हर इंसान को
(13:23) शिव बनना पड़ेगा। तब जाकर देवी के बारे में कुछ समझ आएगा। बिल्कुल जब भी मां की बात होती है तब श्री विद्या तंत्र की भी बात की जाती है। हम क्या होता है श्री विद्या तंत्र और ऐसा क्यों बोला जाता है कि अगर इसकी प्रैक्टिस ठीक नहीं हुई तो यह एक अच्छा साइन नहीं होता। इट्स नॉट गुड। ऐसा क्यों? ओके। इसके ऊपर हम आते हैं अपने प्रीवियस आंसर को खत्म करते हुए। हमने कहा कि इंसान ने अपने शरीर को मुक्त करने की तमाम कोशिशें की। लेकिन वह मुक्त नहीं हो पाया।
(14:08) तो इस तरह से हमको यह समझ में आता है कि दिस इज नॉट द वे। तो शरीर कभी मुक्त नहीं हो सकता। मन कभी मुक्त नहीं हो सकता। हमें शरीर से मुक्त होना होगा। शरीर को मुक्त करने की कोशिश नहीं करना है। हमें इस आइडेंटिफिकेशन से मुक्त होना होगा। क्योंकि जब हम किसी भी चीज से आइडेंटिफाई करते हैं तो उसकी सीमाओं को हम अपना सीमा मान लेते हैं। इज इट नॉट द केस? यस। जब आप एक एंप्लई से आइडेंटिफाई करते हैं तो उस एंप्लई के जो लिमिटेशंस है उसको अपना मान लेते हो। जब आप भारत के नागरिक से आइडेंटिफाई होते हो। तो भारत की जो सीमाएं हैं उसको आप अपनी
(14:42) सीमा मान लेते हो। हम कि इसके बाहर जो रहते हैं वो हमारे दुश्मन है। हम है या नहीं? करेक्ट। तो किसी का आइडेंटिफिकेशन ले हम उसकी सीमाओं को अपनी सीमा बना लेते हैं। तो इससे मुक्त होने का क्या तरीका है? कि आइडेंटिफिकेशन लो ही मत। सारे आइडेंटिफिकेशन को छोड़ दो। इवन ईश्वर भगवान जो सब कुछ कर सकते हैं वो भी सीमित हैं। जो सब कर सकते हैं ओमनीपोटेंट वह भी सीमित है। कैसे? बताइए कैसे वह सीमित है? अगर वह सब कुछ कर सकते हैं तो मुश्किल है। लेकिन ये एक ग्रीक पैराडॉक्स
(15:31) भी है। वो भगवान वो ईश्वर जो सब कर सकता है क्या वो एक ऐसा पत्थर बना सकता है जो इतना भारी हो कि वो भी ना उठा पाए। अगर वह इतना भारी है कि वह भी नहीं उठा सकता तो ईश्वर सब नहीं कर सकता। और अगर वो उठा सकता है तो वह ऐसा पत्थर नहीं बना सकता जो वो भी ना उठा पाए। तो इवन अगर आपके पास दुनिया की सारी पावर आ जाए तब भी आप सीमित हैं। तो उस ईश्वर को भी बनने की कोशिश ना करना। वह भगवान बनने की भी कोशिश मत करो। कुछ नहीं बनना है हमें। वी हैव टू लीव ऑल आइडेंटिफिकेशन। कौन है जो सारी सीमाओं से
(16:18) परे? बताइए कौन है जो सारी सीमाओं से परे? कोई नहीं। मैंने बताया वो भगवान भी बंदा है। तो कौन है जो सारी सीमाओं से परे है? कोई नहीं। और हमें वही बनना है। कोई नहीं। बी नथिंग। तभी आप सारी सीमाओं से मुक्त हो सकते हैं। एंड दिस इज द एंटायर एम ऑफ तंत्र एस वेल कि तुम अपनी सारी सारे के सारे आइडेंटिफिकेशंस को छोड़ दो। सारे के सारी कंडीशनिंग्स को तोड़ दो। सबसे ऊपर उठ जाओ। अब आपके चेहरे पर स्माइल आ गई। आनंद
(17:04) राइट कुड यू रिपीट द क्वेश्चन सवाल यह है कि श्री विद्या को हाईएस्ट तांत्रिक प्रैक्टिस क्यों बोला जाता है? हां और ऐसा क्यों बोला जाता है कि श्री विद्या का अगर उपयोग ठीक से नहीं हुआ तो यह एक हद तक हानिकारक हो सकता है। मैं इसको इस तरह से अप्रोच करता हूं। राइट? सारे के सारे तांत्रिक प्रैक्टिसेस का अगर ठीक से यूज ना किया जाए तो यह हानिकारक है। व्हाई? गुड क्वेश्चन। इसका रीजन है कि तांत्रिक प्रैक्टिससेस में इस तरह की चीजें यूज़ होती है आयु तांत्रिक प्रैक्टिससेस में जिसका अगर रेगुलेटेड यूज़ ना किया जाए तो वह आपको प्रगति के बदले गिरा देगा नीचे।
(17:48) तंत्र जैसे इस संसार रूपी जंगल से निकलने के लिए तंत्र एक शेर का वाहन है। शेर सबसे अच्छा जानवर है। अगर आपको इस जंगल में नेविगेट करना है तो लेकिन शेर के ऊपर चढ़ाई करना उतना ही रिस्की भी है। अगर फिसले तो वह शेर आपको अपना निवाला बना लेगा। तो तंत्र की कुछ प्रैक्टिससेस हायर तंत्र में इनिशियली आप श्री विद्या को शुरू करते हो दक्षिणाचार विधि से। दक्षिणाचार इज द राइट हैंड पाथ। जहां पर आप रेगुलेटेड कंट्रोलोल्ड वे में चीजें करते हो। पोरिटीज को फॉलो करते हो। सारे नियमों को फॉलो करते हो। फिर आप सम्याचार की तरफ बढ़ते हो। जो आपको समय दीक्षा को
(18:27) दिया जाता है और आप सब तरह के नियमों का पालन करते हो। तब आप बनते हैं वीर। फिर आप वामाचार में एंटर करते हैं। वामाचार इज़ द लेफ्ट हैंड पाथ। लेफ्ट हैंड पाथ में आपके सारे कंडीशनिंग्स जो अब तक बन गए थे उन सबको तोड़ा जाता है। जो आपकी पोरिटी और इंप्योरिटी का कांसेप्ट था उन सबको खत्म किया जाता है। एंड देन यू एंटर इंटू कालाचार। द ओनली रूल ऑफ़ कोलाचार इज़ दैट देयर इज़ नो रूल्स। जो भी आपने लर्न किया है उन सबको अनलर्न कराया जाएगा। और उसको करने के लिए एंड इट इज़ डन इन अ वेरी रेगुलेटेड वे। ऐसा नहीं है कि अपने मन से जो करने का है कर लें। गुरु आपको
(19:04) बताता है जैसे अगर आपको आपके अंदर करुणा है जो जगाया जाता है दक्षिणाचार में आपके अंदर करुणा होना आवश्यक है प्रेम होना आवश्यक है तभी आप आगे बढ़ सकते हैं उस करुणा वो करुणा भी आपका बंधन ना बने तो उस करुणा को भी खत्म करना पड़ता है इन द एंड इन द कौलाचार प्रैक्टिस उस करुणा को भी मारना पड़ता है तो आपसे ऐसी चीज कराई जाती है पंचमकार में जैसे बलि आपके अंदर अगर डर है। आपके अंदर अगर शर्म है, एक सर्टेन टाइम तक शर्म सही है, लज्जा सही है। वह आपको ऐसी चीजों करने से प्रिवेंट करता है जो हानिकारक हो सकती है। जो आपको बंधन में रख सकती है। लेकिन एक
(19:47) टाइम के बाद वह शर्म भी बंधन बन जाता है। तो उस शर्म को भी खत्म करना होगा। डर को खत्म करना होगा। तो वहां पे आते हैं कालाचार के प्रैक्टिससेस जो आपको पूरी तरह से सारे कंडीशनिंग्स को ब्रेक करने के लिए। लेकिन उस कालाचार के प्रैक्टिससेस में लोग इनरेगुलेटेड वे में उसको करते हैं। उसको वो बहाने की तरह प्रयोग में लाते हैं अपने आपको अपने लस्ट को या अपने प्लेजर्स को सेटिस्फाई करने के लिए। इनडिसिप्लिन हो जाते हैं और वह उनके पतन का कारण बनता है। बहुत बड़ा डाउनफॉल होता है। जैसे मैंने एक जगह सुना था कि जो काल भैरव की साधना करते हैं उनकी बॉडी में
(20:30) से हीट निकलने लग जाती है। हम तो जब श्री विद्या की प्रैक्टिस करते हैं, साधना करते हैं। ऐसा क्या साधना में एक्सपीरियंस होता है? हीट निकल जाती है, हीट निकलने लगती है। यह इन एव्री साधना लगभग होता ही है। जो भी तपस्या का मार्ग है, तपस्या का मतलब ही होता है टू जनरेट हीट इन द बॉडी। तो जो कुंडलिनी का मार्ग कई लोग कहते हैं ना पसीना भी आने लग जाता है। राइट? हीट इतनी ज्यादा हो जाती है कि उनको हिमालय जाना पड़ जाता है। सच है यह सच है। बॉडी में हीट जनरेट होने लगती है क्योंकि ऐसी प्रैक्टिससेस वो करते हैं। स्पेशली द तांत्रिक्स द नाथ योगीस जो
(21:10) भैरव की उपासना करते हैं। तो इसीलिए वो पहाड़ों पे जाते हैं। ठीक है? नाउ अबाउट द श्री विद्या कि क्या साइन दिखने लगते हैं। सुंदरता अट्रैक्शन हम आप जब उनकी फोटोस को देखते हो तो आपको नहीं लगता कि ये सुंदर है। एक होता है कि जब हम किसी को देखते हैं और ऑब्जेक्टिवली जज करते हैं बेस्ड ऑन देयर रेशियो एंड सिमिट्री एंड समथिंग लाइक दैट। लेकिन जब आप उनको रियल में देखते हो उनके सामने रहते हो तो अंदर से वह सौंदर्य का भाव आता है आपके अंदर वो अट्रैक्शन का। आप उनके बातों से मोहित हो जाते हो। आप उनके एटीट्यूड से, उनके पर्सनालिटी से, उनके
(21:52) चाल ढाल से मोहित हो जाते हो। वह सौंदर्य का भाव आपके अंदर जन्मता है जब आप उनको देखते हो तो इनफैक्ट इन द सौंदर्य लहरी शंकराचार्य लिखते हैं इस तरह से डिस्क्राइब करते हैं कि जो आज सुनने में बहुत अभद्र लग सकता है कि जो इस देवी जिस व्यक्ति पे देवी का एक प्लांस पड़ जाता है उनका एक नजर पड़ जाता है उस व्यक्ति में इतनी सुंदरता आ जाती है कि जो स्त्रियां हैं या जो अपोजिट जेंडर है वो उनके लिए पागल हो जाता है कि वो उनके पीछे भागता है और उनका कपड़ा खुल रहा है। कपड़ा नीचे गिर रहा है। उनको पता भी नहीं चलता। इस पोएटिक वे में डिस्क्राइब
(22:33) किया गया है इसको। बट दैट्स द अट्रैक्शन ऑफ इट श्री विद्या हम क्योंकि उनकी प्रॉपर साधना ऐसी ही होती है। शी इज़ नॉट अ लाइफ डिनाइंग फिलॉसफी। हम हम लिविंग हां राइट। श्री विद्या सुंदर है। वो त्रिपुर सुंदरी है। एस्थेटिक्स वहां बहुत मैटर करता है। एनस्थेटिक्स इज नॉट जस्ट प्लेन एस्थेटिक एस्थेटिक्स। रसवाद का कांसेप्ट है तंत्रों में। इट्स अ प्रॉपर फिलॉसफी कि आपके अंदर वो सौंदर्य रस आए। आप सुंदर बने। ठीक है? एंड और क्या-क्या चेंजेस आते हैं? जैसे सौंदर्य का आता है जो श्री विद्या की
(23:19) प्रैक्टिस करता है वो अट्रैक्टिव बनता है। राइट? और जो उस साधना को प्रैक्टिस करता है क्या चेंज देखने को मिलते हैं यही मैं अभी बता रहा था ना इट्स नॉट अ लाइफ डिनाइंग फिलॉसफी तो वो व्यक्ति भोग और योग दोनों को प्राप्त होता है व्हेन आई से भोग और योग दोनों को यानी स्पिरिचुअल लिबरेशन तो है बट एट द सेम टाइम वो लाइफ को एंजॉय करता है लाइफ को डिनाई नहीं करता लाइफ के किसी भी एस्पेक्ट से वंचित नहीं रहता वो लाइफ को पूरी तरह भोग के मुक्ति को जगता है क्योंकि वो वो देवी जो है वो दोनों को एंबॉडी करती है लाइफ के इन दोनों एस्पेक्ट्स को व्हिच इज प्लेजर एंड
(23:58) लिबरेशन मॉनिटरी वैल्यू एंड धर्म काम अर्थ धर्म और मोक्ष इन चारों को वो एंबॉडी करती है तो उनके जो साधक हैं वह ऐसा नहीं है कि तुम सुख क्यों भोग रहे हो कि तुम अगर साधक हो तो तुम हिमालय पे क्यों नहीं हो कि तुम अब देखना इनफैक्ट ये थोड़ा अजीब लगेगा सुनने में बट इट्स अ वेरी बेसिक जनरलाइजेशन जो मैंने किसी से सुना था। इनफैक्ट ये मेरा अपना ओपिनियन नहीं है। ये जो श्री विद्या के उपासक हैं उनके घर में सोना बहुत होता है। ओ हो बट एक्चुअली दैट्स अ बहुत बेसिक सी बातें हैं। आप इतने हायर फिलॉसफी को इतना नीचे
(24:44) नहीं गिरा सकते। या या उसको आप मटेरियल ऐसे मटेरियलाइज करके उसकी वैल्यू सिर्फ सोने से दें। बट द पॉइंट इज द पॉइंट इज कि वो दोनों में फुलफिल्ड है। भोग भी और मोक्ष भी। राइट? जो वर्ल्डली इंसान है जो मटेरियलिस्ट इंसान है वो हर कुछ वो अपना अर्निंग कमा रहा है। ठीक है? वो अपना फाइनशियली फ्री है। बट वो सब कुछ में भिखारी है। वो अपने इमोशंस में भिखारी है। उसको खुश होने के लिए दूसरे की आवश्यकता है। करेक्ट। उसे प्रेम के लिए दूसरे की आवश्यकता है। सब कुछ में वह भिखारी है। अदर देन ह फाइनेंसियल एस्पेक्ट्स। लेकिन जो योगी है जो श्री विद्या साधक है
(25:24) हम वो मे बी बाहर की दुनिया में हो सकता है कि वो उसको फर्क नहीं पड़ता तो वो अपना अर्निंग नहीं कमा रहा है। वो उस सेंस में बेकार है। उस सेंस में भिखारी है। बट अंदर वो अपने इमोशंस को उसका मालिक है। राइट? वो जब खुश होना चाहता है, वह जब प्लेजर फील करना चाहता है, लव फील करना फील करना चाहता है, तो वह खुद से कर सकता है वो चीज। उसे मांगने की आवश्यकता नहीं है। श्योर लेकिन जो श्री विद्या उपासक हैं वो दोनों हैं। वाओ वाओ इट्स दैट पावरफुल। यस। ये आप साधना कब से कर रहे हो? आप स्वयं अपने लिए श्री विद्या की साधना बहुत समय से। इन फ़ैक्ट त्रिक संप्रदाय
(26:07) सिंह श्री विद्या संप्रदाय उत्पन्न हुई है। ओके। त्रिक दर्शन या तंत्रों का चार एक्सपेंशन है। उत्तर, दक्षिण, पूरब और पश्चिम। तो दक्षिण आम नहीं कहते हैं। दक्षिण एक्सपेंशन वही है श्री विद्या। ओके। तो जब से मैं त्रिक में आया हूं तब से कर ही रहा हूं। तब से आप और अट्रैक्टिव बनते जा रहे हैं। अट्रैक्टिव आई वुड नॉट। इतने सारे इतने सारे लोग आपको प्यार करते हैं। वो आप बताएंगे। आई एम श्योर आपके मैं कमेंट्स पढ़ रहा था और इतने सारे लोग मैंने एक ऐसा भी कमेंट पढ़ा अ किसी ने लिखा था कि मेरी उम्र 60 इयर्स की है पर आपको देखकर हम यह लगता नहीं कि आप की उम्र
(26:54) यह है। मुझे लगता है यू आर एन ओल्ड सोल और मैं आपके चरणों में अपना शीश झुकाता हूं। यह आपके कमेंट्स हैं। एंड आई एम नॉट एक्साजुरेटिंग। मैं कैसा हूं यह मैंने तो देखा नहीं है कभी। तो मैं ये कह रही हूं ये श्री विद्या की कृपा है। मैंने आज तक अपने आप को नहीं देखा। एने ही देखा होगा लेकिन रियलिटी में नहीं देखा। ना आप जो स्क्रीन के उस तरफ से देख रहे हैं वो देख पा रहे हैं। श्योर वो तो पिक्सल्स देख रहे हैं। आप सामने बैठे हैं। आप बताएं आपको क्या लगता है? यह तो महसूस करने का विषय है। तो क्या महसूस होता है? सफर
(27:38) ओके जर्नी आपके अपने एक्सपीरियंस में हम श्री विद्या जैसे जो हमने जैसे भैरव की बात करी कि वहां पर ईंट आती है तो क्या श्री विद्या की साधना में भी कुछ ऐसे एक्सपीरियंसेस होते हैं? हीट जैसे हर जगह आती है। इट्स अ प्रैक्टिकल प्रोसेस। हीट इसलिए नहीं आती क्योंकि वो कुछ मिरेकुलस है या भैरव की साधना से रिलेटेड है। नहीं हीट इसलिए आती क्योंकि आप ऐसी साधना कर रहे हैं। आप वो प्राणायाम कर रहे हैं और वो फिजिकल प्रोसेससेस कर रहे हैं जिसके कारण बॉडी में हीट जनरेट हो रही है। ओके? तिब्बतन बुद्धिज्म में इसको कहते हैं तुम।
(28:23) ठीक है? इट्स आल्सो अ हीट जनरेटिंग प्रैक्टिस। भैरवी ही है। भैरव की ही साधना है। वो भी तंत्र ही है। हम रही बात श्री विद्या की तो उसके जो प्रोसेससेस हैं साधना के जो क्रियाएं हैं उसमें जैसे मैंने कहा एक्सपीरियंस अगर कुछ होते हैं होता है तो वो है वही एस्थेटिक्स एस्थेटिक्स इन द सेंस कि लाइफ सुंदर हो रही है। आपकी खूबसूरत लाइफ खूबसूरत हो रही है। श्री विद्या की साधना में एज मच एज़ आई नो जस्ट लाइक एनी तंत्र साधना बस एक ही रूल है कि देयर शुड बी एन इंटेंस डिसाइड दैट्स इट और इसका अगर कोई जो बिगिनर है जो श्री विद्या में आना चाहता है वो कैसे अपनी जर्नी स्टार्ट कर
(29:10) सकता है व्हाट टू डू जो बिगिनर है वो कैसे अपनी जर्नी स्टार्ट कर सकता है जो बेसिक साधनाएं बताई गई है तंत्र में श्री विद्या की वह तो वही है जो सब कर रहे हैं। क्या कर रहे हैं वह बेसिक साधना जैसे ललिता सहस्त्र नाम का पाठ हम् और जो मंत्र है उनका बेसिक नाम मंत्र उसका जाप वह है अपने स्तर पे जो श्री यंत्र होता है उसका वह विधिवत पूजा करते हैं वह भी है आप अगर मुझसे पूछें कि मेरे हिसाब से क्या है तो वह होगा देवी बनने की कोशिश करना रादर देन उसकी पूजा करना इवन योगिनी हृदय जो उनका स्क्रिप्चर है
(29:59) श्री विद्या का सबसे पुराना तंत्र है नित्य शोदशिका अर्णव उसी का एक पार्ट है योगिनी हृदय तंत्र हम तो उसके अकॉर्डिंग जो उनकी पूजा है वो तीन कैटेगरीज में डिवाइडेड है हम जो सबसे लोएस्ट कैटेगरी है और सबसे अधिक साधक उसी कैटेगरी में फिट होते हैं। हम उसमें आपको अपने शरीर को श्री यंत्र की तरह देखना है। श्री चक्र अपने शरीर में ही आप श्री चक्र को देख रहे हो। आपके टॉप पे जो बिंदु है वो आपका सहस्रार में है एंड सो ऑन। मैं कहूंगा कि यह तो है ही अगर आप इसको कर सकते हो तो। क्योंकि जो यंत्र है वह देवी का बॉडी है। जो मंत्र है वह देवी का सोनिक
(30:43) बॉडी है। और जो देवी का रूप है वह उनका विजुअल बॉडी है। तो देवी के बॉडी से हमें आइडेंटिफाई होना है। देवी के बॉडी से आइडेंटिफाई होने के लिए हम मंत्र से आइडेंटिफाई करने की खुद को कोशिश करते हैं। जो मंत्र हम पढ़ रहे हैं, वह हमारा सेल्फ बन जाना चाहिए। हम उसको उसकी इतनी गहराई में चले जाएं कि हम उस मंत्र से एक हो जाएं। कि मंत्र ही हमारा स्वभाव हो जाए कि जब हम मंत्र जप रहे हैं देयर शुड बी नो इंडिविजुअल। वह एग्जिस्ट ही नहीं करना चाहिए जो मंत्र को रिपीट कर रहा है। बस मंत्र रहे तो वह तरीका है देवी के सोनिक बॉडी से आइडेंटिफाई होने का। जो उनका यांत्रिक
(31:24) बॉडी है उसका भी मैंने बताया। आप अपने बॉडी में यंत्र की कल्पना करते हो। देयर इज़ अ प्रोसेस टू दैट। एक जो मैं बोलूंगा आपको करने के लिए वो होगा ये स्पेशली लड़कियों के लिए। स्पेशली जो फीमेल साधक इसलिए जो मेल्स होते हैं उनको यह बताया भी नहीं जाता और क्योंकि यह नहीं बताया जाता मेल साधक को तो इसलिए यह वेल नोन भी नहीं है। जो आज श्री विद्या तंत्र हैं वो जनरली मेल साधकों के लिए ही बने हैं। क्योंकि आदि शंकराचार्य ने श्री विद्या तंत्र को अपनाया और आज भी जितने भी शंकराचार्य के मठ हैं सब में श्री यंत्र इस्टैब्लिश्ड है। और शंकराचार्य परंपरा अनफॉर्चूनेटली
(32:04) लड़कियों के लिए नहीं है। और यहां पर बहुत लोग थोड़ा ऑफेंड होंगे। बट इट इज ट्रू दैट ब्रह्मसूत्र भाष्य में शंकराचार्य ने लिखा कि वेद या यह साधना स्त्रियों के लिए नहीं है। तो इसीलिए इस पर्टिकुलर एस्पेक्ट को मेंशन नहीं किया गया था। साधना है जो मैं अभी बताऊंगा। लेकिन तंत्रों में यह है बुद्धिस्ट तंत्र भी में भी फॉलो किया गया है। वह है कि अपने अंदर अपने आप को उस टीटी की तरह देखना। आप ध्यान जब कर रहे हो तो आप अपने ही शरीर को देवी का शरीर मानो। आप अपनी कल्पना करो कि आप बैठे हो और उतना ही सुंदरता उतना ही तेज वही अटायर, वही
(32:51) यूनिफार्म, वही कपड़ा जो वह पहनती है। वही कॉम्प्लेक्शन वही हाथ में एक गन्ने का त्रिशूल लिए, एक हाथ में पाश, एक हाथ में अंकुश। उसी फॉर्म में अपने आप को विजुअलाइज करो। आज जो श्री विद्या की साधना शुरू करना चाहता है हम उसमें जो लड़कियां हैं वो खुद को मां के उस रूप में मेडिटेट करें। राइट? खुद को सोचे कि मां का रूप कलर कैसा है। व्हाट इज ही वेयरिंग? व्हाट इज ही होल्डिंग? और साथ में वो मेडिटेट करें। राइट। और जो लड़के हैं वो अपने सर के बीच में से वो श्री यंत्र है। और फिर वो मां का मंत्र राइट।
(33:35) जपे। दैट्स राइट। राइट। मंत्र दोनों जप सकते हैं। दोनों जप सकते हैं। मंत्र क्या है? अगर आप वो भी बता सके। आप अगेन मंत्र के लिए दीक्षा लेना पड़ता है। बट सिंपल मंत्र आप कर सकते हैं जो नाम मंत्र है। ओम श्री मात्रे नमः ओके। ओम श्री मात्रे नमः राइट। तो ये हर रोज कितनी देर प्रैक्टिस करना चाहिए? जितनी देर भी आप कर सकें। बट देयर शुड बी एन इंटेंस आइडेंटिफिकेशन विद दैट मंत्र एंड दैट बॉडी। मंत्र से आप बिल्कुल एक हो जाए। कैसे होता है? जब आपका पूरा फोकस उस मंत्र पे होता है ना तो फिर और कुछ होता ही नहीं है। और कोई थॉट ही नहीं है जो एक
(34:12) आइडेंटिटी का निर्माण करे। आप वो मंत्र बन जाते हो। दैट्स शुड दैट शुड बी योर एम। एक बार में तो नहीं होगा। करते रहिए। वही लक्ष्य है। राइट? ऐसा क्यों बोला जाता है कि जिस जो योगिनी होती हैं वो श्री विद्या के साधकों पर नजर रखती हैं। उनको सुरक्षित रखती है। राइट है। राइट? हां ऐसा है योगिनी देयर आर सम बीइंग्स जिनका जिनका उद्देश्य ही है इस अस्तित्व में कि वो इस ज्ञान को श्री विद्या या तंत्र के ज्ञान को प्रोटेक्ट करके रखती
(34:57) हैं और जो डिर्व करते हैं उनके ऊपर वो ज्ञान डिस्ट्रो करती है। उनको वो ज्ञान प्रदान करती है और जो डिर्व नहीं करते हम उनको उनसे वो ज्ञान को दूर रखती है कि इवन अगर उनके हाथ में वो टेक्स्ट या वो शास्त्र आ जाए तो भी वो उसको समझ नहीं पाएंगे और जो डिर्व करते हैं योगिनी उनके उनको एनलाइटन करती है इन द सेंस कि सारे शास्त्र या साधना वो सही से कर पाएं जो छोटी-मोटी गलतियां भी होती है ना उनसे वो अपने आप करेक्ट हो जाता है जैसे वह कुछ गलत कर रहे हैं तो सबकॉन्शियसली उनको एक पुश या प्रेरित एक प्रेरणा मिलती है कि वह सही करें। योगिनी जब हम बोलते हैं व्हाट इज आवर
(35:38) अंडरस्टैंडिंग ऑफ योगिनी? क्या कोई फिजिकल फॉर्म है या हम इसको समझें कि कोई मे बी इट्स देयर बट नॉट इट्स अ वेरी वास्ट टॉपिक। वास्ट वास्ट टॉपिक योगिनी जब हम कहते हैं ना तो वह इंसान और देवता के बीच का जो बाउंड्री है वह नहीं रहता। योगिनीज आर फिजिकल बींग्स एज वेल जो फीमेल प्रैक्टिशनर्स ऑफ योगा होती है ना जो जैसे योगिनी योगी और योगिनी जैसे योगी होते हैं वैसे योगिनी हालांकि सिद्ध कहा जाता है उनको शास्त्रों में सिद्ध और योगिनी दे आर काउंटर पार्ट्स ऑफ ईच अदर मेल एंड फीमेल काउंटर पार्ट्स
(36:22) तो एक तो वो होते हैं एनलाइटन बीइंग्स फीमेल एनलाइटन बीइंग्स आर कॉल्ड योगिनी हम तो कुछ एनलाइटन बीइंग्स रहते हैं प्राण शरीर में और साधकों को गाइड करते हैं। तो एक तरह से वो योगिनी है। एंड देयर इज़ मच मोर टू इट। हमारे फिजिकल बॉडी के अलग-अलग एनर्जीज़ भी योगिनी कहे जाते हैं। उसके तरफ हम नहीं जाएंगे। जो हमारा मेन क्वेश्चन था उस कॉन्टेक्स्ट में योगिनी यही होते हैं। फीमेल एनलाइटन बीइंग्स जो अभी भी प्राण शरीर में हैं और वो साधकों को गाइड कर रही हैं। जो 64 योगिनी मंदिर हैं हम वहां पे स्कल्स वगैरह क्यों होती है? स्कल वगैरह क्यों होती है? यह तंत्र
(37:10) प्रैक्टिस में आती है। इसलिए यस दैट्स इट। हां स्कल देवी के गले में भी होता है। मुंडमाल कहते हैं उसको। इस कल का बहुत सारा सिग्निफिकेंस है। सबसे बड़ा सिग्निफिकेंस तो है अहंकार। सर सर ऊंचा करके चलते हैं ना जब हमें अभियान होता है तो तो वो सर अपने हाथ में लिया। योगिनी आपका सर काट देती है। अभी भी कहानियां बनी हुई है योगिनी के बारे में कि वह इंसान का सर काट देती है। आज भी डरते हैं लोग गांव में डायन जोगिन बोलते हैं ना डायन जोगिन क्या होता है?
(37:56) अपभ्रंश है डाकिनी और योगिनी का। बौद्ध धर्म में उनको डाकिनी बोलते हैं। डाकिनी यानी जो हवा में उड़ती है और हम लोग उनको योगिनी बोलते हैं। उसी से बन गया डायन जोगिन क्योंकि वो अहंकार का नाश करती है। लोगों को लगने लगा कि वो सर काट देती है। तो अभी भी गांव के लोग डरते रहते हैं उनसे। वो इंसान को मार देती है। उनका खून पी जाती है। वो इंडिविजुअलिटी को मार देती है। आपके जो आपका इंडिविजुअलिटी है आपका अहम भाव उसको खत्म कर देती है। वो हवा में उड़ती है। खिचड़ी कहते हैं हम उसको जो टर्म है खिचड़ी। ख यानी आकाश। औरचड़ी यानी उसमें विचरने वाली जो आकाश
(38:39) में विचरण करती है। द रियलिटी इज कि खिचड़ी हमारे कॉन्शियसनेस को कहा गया है। ख यानी ब्रह्म। ब्रह्म के लिए ख शब्द का प्रयोग किया गया है। खालीपन के लिए ख शब्द का प्रयोग किया गया है। शून्य के लिए ख शब्द का प्रयोग किया गया है शास्त्रों में। श्योर और उस ब्रह्म में जो विचरते हैं वो खींच रही है। हम लेकिन लोगों को लगने लगा कि ये जो डायन है जोगिन है ये हवा में उड़ती हैं। लोगों को अगवाह कर लेती हैं। उनको मार देती हैं। उनका गला काट देती हैं। इसलिए लोग डरने लगते हैं इससे। बट आईडिया यह है कि जो हम कह रहे हैं कि वो गला काट देते हैं। वो
(39:25) जब इंसान के अंदर वो दुष्ट भाव बनते हैं तो इंसान अपने लिए ही मृत्यु का कारण बन जाता है। मृत्यु यहां है ही नहीं। यहां है मुक्ति। उस सर से जिसको हम इतना ऊंचा करके चलते हैं। उस अहंकार से मुक्ति यह जो हम कहते हैं जो योगिनी योगिनी जो आती है हम तो हम ये योगिनी हमारे अंदर ही महसूस करते हैं। ये अंदर भी हैं और बाहर भी हैं। बाहर भी हैं। हां। बाहर कहां पर है? एक्सिस्ट करते हैं। दे आर द दे आर बीइंग्स। दे आर लिटल बीइंग्स जो एक्सिस्ट करते हैं। लाइक ह्यूमंस। लाइक ह्यूमंस। और वो योगिनी है। हां। और कैसे पता लगता है वो योगिनी है?
(40:10) कैसे पता चलता है? दैट्स द थिंग। पता नहीं चलता है बहुत लोगों को। कई सारी एक्सपीरियंसेस हैं। नोटेड एक्सपीरियंसेस ऑफ मेनी तांत्रिक प्रैक्टिशनर्स कि कोई भी रूप में वो आ जाती हैं। उनको गाइड कर देती हैं। और फिर गायब या कोई एग्जांपल कोई जो नोटेड केस है जैसे मैं बौद्ध धर्म का उदाहरण लेता हूं। तो बौद्ध धर्म में एक प्रैक्टिशनर थे। हम तिलोपा और नाडोपा तो वह एक स्कॉलर थे नालंदा के और वो एक दिन बहुत बड़े स्कॉलर थे ही वास अ वेरी प्रोफाउंड स्कॉलर कि उससे कोई डिबेट में जीत नहीं पाता था नालंदा जानते हैं आप बिहार में नालंदा यूनिवर्सिटी जो थी
(40:56) लेकिन उसके अंदर एक्सपीरियंस नहीं था हम वो एक इंटेलेक्चुअल फिलॉसफर थे बस हम तो वो उसको खा रहा था बार-बार तो एक बू बूढ़ी औरत आती है उनके पास एक दिन और वो उनसे पूछती है कि तुम जो बता रहे हो क्या तुम उसको जानते हो? तो बस एक रैंडम क्वेश्चन वो इंसान सोच में पड़ गया। सही में मैं जानता हूं जो मैं बता रहा हूं। तो उसने कहा नहीं। तो वो औरत खुश हुई। और फिर वो कहता है थोड़ा-थोड़ा जानता हूं। फिर वो हंसने लग गई। तो फिर उसने पूछा आप हंस क्यों रहे हैं? तो वह कहती है तुम्हारा घमंड है कि तुम जानते हो। तुम कुछ भी नहीं जानते। जब तुमने कहा कि तुम नहीं जानते हो तो मैं
(41:41) खुश हुई। लेकिन अब जब तुमने कहा थोड़ा-थोड़ा जानते हैं तो तुम अज्ञान में हो। तुम कुछ भी नहीं जानते। तो उसको इतना हिट हुआ वो कि वो रोने लग गया। तो वो कहता है तो मैं क्या करूं? तब वह योगिनी बताती है कि इस पर्टिकुलर विलेज में वह बूढ़ी लेडी जिसको वह पता नहीं था कि योगिनी है कि यहां एक ऐसे रहते हैं उनके पास जाइए आप वो आपको सिखाएंगे और फिर यह बोल के वो गायब हो गए। फिर वो जो स्कॉलर थे वो तलाश में गए उनके उनके तलाश में गए। तिलोपा तिलोपा उनका नाम था और जिनके तलाश में गए थे वो नारोपा थे। तो नारोप्पा की तलाश में वह गए और पूछा उन्होंने जब वह एक गांव में
(42:22) पहुंचे जिस गांव के बारे में उस योगिनी ने बताया उनको तो पूछा उनसे उस गांव में लोगों से पूछा कि नारडूपा नाम का कोई एनलाइटन बीन है क्या यहां पे कोई महासिद्ध नडूपा नाम का कोई सिद्ध तो गांव के लोगों ने कहा यहां कोई नहीं है ऐसा दूर-दूर तक का यहां एनलाइटनमेंट से कोई लेना देना नहीं है किसी का गलत जगह पे आ गए हैं साधु जी आप वापस नालंदा चले जाइए। तो उसने कहा योगिनी ने बताया है उस बूढ़ी लेडी ने हो ही नहीं सकता ऐसा कि ना हो। तो फिर वो और 10 लोगों से पूछता है। तो एक पियक्कर से उसने पूछा कि यहां पे कोई है क्या नारडोपा नाम का महासिद्ध? बोलता महासिद्ध तो नहीं
(43:04) है लेकिन एक है जो मेरे साथ ही पीता है। उसका भी नाम नारोपा है। भिखारी है। वह मछली पकड़ता है, खाता है। तुम उससे मिल लो एक बार। तो वह गया उसके पास भी वह खा रहा था मछली पकड़ के वो मछली पकड़ रहा है एक ब्रिज के नीचे रहता था वो रिवर साइड एक ब्रिज के नीचे मछली पकड़ के खा रहा है तो वो समझ गया वो जो स्कॉलर्स थे स्कॉलर थे तो समझ गए यह तो नहीं हो सकता कोई भी हो यह नहीं होगा इसमें इतना करुणा नहीं है कि यह मछली पकड़ के खा रहा है दिखता कैसा है महासिद्ध हो ही नहीं सकता यह कभी लेकिन उनको गुस्सा भी आ रहा था कि मेरे होते हुए मेरे सामने कोई मछली पकड़ के खा
(43:50) रहा है। कहां गई करुणा? तो वो कहता है जाके तुमको समझ में आ रहा है तुम कितना बड़ा पाप कर रहे हो। तुम उस मछली के कर्म को ले रहे हो। तुम्हारे ऊपर इसका कितना बड़ा कर्म लगेगा। बुद्धिज्म में कर्म का बहुत बड़ा कांसेप्ट है। तो वो कहता है अच्छा ऐसा है जब वो खा रहा होता मछली खा रहा है। बोलता है अच्छा ऐसा है। तो उसने मुंह से मछली निकाला वो जीवित हो गई। बोला लो तो फिर समझा अच्छा यही है। फिर उसने कहा कि मैं मछली को खा के मछली का कर्म काट रहा हूं कि वो एक एनलाइटन बीइंग उसको खा रहा है। वो उसकी सेवा कर रही है
(44:34) और वो मुक्त हो रही है। तो फिर पिलोपा नारोपा की बहुत लंबी ऐसी कहानी चलती है। एंड दे प्रैक्टिस ईच अदर जब तक वो नहीं होते। तो ये जो टीचर थे महासिद्ध उनकी बहन ही थी वो योगिनी इन अ वे कुछ लोग बोलते हैं कि बहन थी कुछ कहते हैं वाइफ थी। कश्मीर में यह घटना घटी थी। इनफैक्ट इसी योगिनी ने बाद में काइंड ऑफ तिब्बतन बुद्धिज्म का जो वज्रयान एस्पेक्ट है ना उसका तिब्बतन बुद्धिज्म का उसके सिक्स प्रैक्टिससेस बताए थे। सिक्स तांत्रिक प्रैक्टिससेस सिक्स ज्वेल्स यानी जो श्री विद्या की प्रैक्टिस करते
(45:20) हैं वो सेफ भी रहते हैं काइंड ऑफ यस सेफ रहते हैं वो जैसे आपने एक वीडियो में बताया था ना कि 12 साइंस की देवीज विद्या वो शक्तिपात का साइन था ओके वो शक्तिपात का साइन था कि अब आपको साधना शुरू करनी चाहिए। दीज़ आर द साइन। जैसे अवेयरनेस हो गया, आंखों से खुशी के आंसू आ रहे हैं। राइट? बट इवन दिस जब किसी को ये अनुभव होता है ना तो ये सबसे बड़ा ट्रैप है जिसमें लोग फंस जाते हैं। सबसे बड़ा ट्रैप है जिसमें लोग फंस जाते हैं कि उनको एक अनुभव हुआ। और वो अनुभव फिर से एक्सपेक्ट करने लगते हैं। और वो अनुभव फिर कभी नहीं होता। और वो सोचते हैं कि क्यों नहीं हो रहा। हम्
(46:01) इनफैक्ट आई हैव सीन पीपल साधक जो मेरे पास आते हैं वह कहते हैं कि 2011 में मेरे साथ यह अनुभव हुआ था। मेरी कुंडली नहीं जाग रही जाग गई थी। फिर कभी नहीं जागी और मैं तब से उस अनुभव को वापस लाने की कोशिश कर रहा हूं। वह हो ही नहीं रहा। यही तो उनकी सबसे बड़ी गलती है कि वो वापस लाने की उसको कोशिश कर रहे हैं। देयर इज द पर्सन हु कंट्रोल्स अलाइव इन इट इन हिम। वो इंसान अलाइव है जो कंट्रोल करना चाहता है। जो नियंत्रण करना चाहता है वो अहंकार है। जब तक वह जीवित रहे वो अहंकार है। तब तक तुम कैसे जाओगे गहराई में ध्यान के? आपको अपनी लाइफ में ऐसा कुछ मे बी श्री विद्या
(46:37) की प्रैक्टिस करते-करते आपको अपनी लाइफ में क्या चेंजेस महसूस हुए? क्या चेंजेस महसूस हुए? स्पेशली श्री विद्या क्योंकि आपने अलग-अलग विधियां और अलग-अलग साधना के प्रोसेस किए हैं। मैं कैसे डिफरेंशिएट करूं अब? कि वो मे बी इट इज डिफिकल्ट बट व्हाट इज श्री विद्या मे बी बिकॉज़ हम अगर श्री विद्या को आज मीन समझना चाह रहे हैं तो इसमें अगर आपका कोई पर्सनल टेक हो तो उससे शायद इस इस कांसेप्ट के बारे में समझने में आसानी हो जो आज शुरू कर रहा है उसको एटलीस्ट ये पता हो कि मे बी दिस इज़ वेयर आई एम गोइंग अगेन मैं आपको बता दूंगा कुछ-कुछ चीजें
(47:19) मैं बताता हूं बट विद दिस डिस्क्लेमर वन वंस अगेन कि जो आपके अंदर एक इंसान रहेगा क्योंकि आप जो मुझसे सुनोगे उसको एक अवधारणा बना लोगे एक कांसेप्ट और आपका माइंड उसको चस करने की कोशिश करेगा करेक्ट और इससे वो माइंड जीवित रहेगा हमेशा के लिए और वो माइंड कभी मरेगा नहीं तो वो अनुभव कभी होंगे नहीं और आप उस सत्य तक कभी पहुंचोगे नहीं तो इसीलिए ना सुनना ही बेटर है बट इफ आई वुड से समथिंग मैं वही बताऊंगा आपके अंदर वह जो एलिमेंट ऑफ कंट्रोल है ना कि मुझे एक पर्टिकुलर आउटकम चाहिए वह खत्म होने लगता है। वो सेल्फ क्लिंगनेस जो हम एक अहम भाव की
(47:58) अवधारणा से इतने चिपके हुए हैं। वो क्लिंगनेस खत्म होने लगता है धीरे-धीरे। आपके अंदर वो भाव आने लगता है कि ना त्याग ना परिग्रही कि ना हम किसी चीज को त्यागे, किसी चीज से भागे ना हम किसी चीज से चिपके। आप एफर्टलेसली लाइफ में फ्लो होने लगते हो। बहने लगते हो। जैसे एक पत्ता जो हवा में बह रहा है। मुझे लगता है वही है सबसे बड़ा साइन। आपका श्री विद्या स्टार्ट करने की वजह क्या थी? क्यों इस साधना में आए? मुझे मृत्यु क्या है? वह जानना था। मृत्यु के बाद क्या होता है वो जानना था। तो इसीलिए मैं तंत्र में आया। और फिर मुझे श्री विद्या मिल गई।
(48:48) क्या जवाब मिला? समझ आया? जो समझना चाहता था वह समझ आ गया। कुछ शेयर कर सकते हैं। समझ आया कि मृत्यु बस एक इल्लुजन है। एग्जैक्ट प्रोसेस समझ आया क्या है मृत्यु का। फिर बाद में यह भी समझ आया कि वह सारे प्रोसेस बस इल्शंस हैं और जो रियलिटी है वह कभी मरता ही नहीं है। सोल यस मृत्यु क्या है? मृत्यु के बाद क्या होता है? यह सीक करते-करते मैंने उसको सीक करना शुरू कर दिया जो मरता है। कौन है जो मरता है? वो मिला ही नहीं। फिर समझ आया ऐसा कुछ है ही नहीं।
(49:32) बाद में समझ आया कि जो रियलिटी है जो मैं वास्तव में हूं वह क्या है और वह कभी मरता ही नहीं है। बहुत लंबा प्रोसेस है। बहुत लंबा जर्नी है। मैं कैसे समझाऊं उसको? सिंपलीफाई नहीं कर सकता मैं इसको। श्री विद्या के कुछ सवाल हैं क्योंकि आपको जो लोग फॉलो करते हैं कोशिश करते हैं कि जितने लोगों के सवाल हैं वो हम एपिसोड्स के माध्यम से सबको हम लें। श्योर चाहिए आज हमारा पहला एपिसोड है, पहला पडकास्ट है। बट
(50:17) हम पूरी कोशिश करते हैं जिसने भी आपको जहां भी कंज्यूम किया है, उसके सवाल हम डिस्कस कर सकें। श्योर व्हाई शुड एनीवन प्रेफर श्री विद्या साधना द मोस्ट और व्हाई शुड आई स्टार्ट विद श्री विद्या साधना एंड व्हाट इज द एंड गोल ऑफ़ श्री विद्या? अगेन यह तो वही बात हो गई कि यह रिलीजन सबसे सुप्रीम है। ऐसा कुछ भी नहीं है। आपको जिससे भी लगाव है आप वह करें। किसी लोभवश मत करें। मैं अगर कहता हूं कि इसके ये ये बेनिफिट्स हैं तो फिर तो वह लोभ देना हो गया। तो आप उस लोभ से करेंगे। अंदर से पूछिए आवाज क्या आ रहा है? मेबी अभी समझ नहीं आ रहा कंफ्यूजन है। तो फिर
(50:58) वही प्रोज़ एंड क्स आप लिख रहे हो क्या कि किस में ज्यादा बेनिफिट्स हैं वो करें। अगर ऐसे हैं तो मत ही करिए। मैं बोलूंगा कि जो आप सर्च कर रहे हैं ना रियलिटी में वो इसी में मिलेगा। मैं आपको कोई लालच नहीं दे रहा। मैं बस बता रहा हूं कि जो आप सच में सीख कर रहे हैं जो पुरुषार्थ है जीवन का वो इसी में मिलेगा। श्री विद्या हां सब में मिलेगा। देयर आर सारे पाथ्स हैं। राइट? बट ये इट इज़ फॉर पीपल टू एक्सपीरियंस देमसेल्व्स क्योंकि ये हम सबकी अपनी इंडिविजुअल जर्नी है। राइट? या लेकिन इसमें भी मिलेगा। दैट्स इट। अब वही है। वही है ना कि
(51:39) मैं कहना चाहता हूं पर सब कह नहीं सकता। अक्सर लोग कहते हैं जब श्री यंत्र बनाया जाता है तब बिजली, घर की इलेक्ट्रिसिटी चली जाती है। ये सब होते हैं रियल में फिनोमिन। नहीं। श्री यंत्र कोई भी बना सकता है। हां। कैसे बनाते हैं? डिपेंड करता है श्री यंत्र अगेन जो मैंने साधना बताई उसमें आप मेंटली बनाते हैं अपने शरीर में। ओके? बाकी आप आप कैसे करते हो? थोड़ा सा वैसे ही आई इमेजिन इट। मैं उसको ड्रॉ नहीं करता। यंत्र बॉडी पे राइट? और फिर पहले समझते हैं कि थोड़ा बहुत समझते हैं कि क्या है यह यंत्र चक्र मंडल। बेसिकली चक्र मींस अ सर्कल हम
(52:22) और अ सर्कल ऑफ इन्फ्लुएंस। तो यह जो है ना देवी का राज्य है इन अ वे देवी का वर्ल्ड है। हम उसके सेंटर में देवी है। ये जो पूरा वर्ल्ड है वो श्री यंत्र है। हम एंड इट इज़ हर सर्कल ऑफ़ इन्फ्लुएंस। तो इसीलिए उसको चक्र कहा जाता है। हम मंडल का भी यही अर्थ होता है। मंडल मींस अ सिस्टम। जैसे सौर्य मंडल सोलर सिस्टम। तो वह सन का सिस्टम है। सन के अराउंड वह रिवॉल्व करता है। तो वह देवी के अराउंड रिवॉल्व करता है। तो आपका पूरा लाइफ आपके अराउंड रिवॉल्व करता है। तो अपने आप को रिप्लेस करके वहां देवी को रख दो। दिस इज द एंटायर कांसेप्ट ऑफ़ चक्र। जो इनर मोस्ट कोर है
(53:04) हम वो सुप्रीम ट्रुथ है सत्य। और जो आउटर मोस्ट कोर है वो है धरती। ओके? वर्ल्ड। तो वर्ल्ड से हम कैसे अंदर जा रहे हैं? मैं फोन में भी खोलूं। हां श्योर। श्री यंत्र है ना हम थोड़ा और इजी होगा। अगर आप देखते हैं इस यंत्र को तो इसके कई सारे सबसे पहले सबसे बाहर अगर आप देखें तो एक स्क्वायर है। हम ये जो स्क्वायर है ना ये धरती का प्रतीक है। जो अर्थ एलिमेंट है ये वाले जो स्क्वायर है राइट। ओके। ये जो स्क्वायर है बाहर ये अर्थ एलिमेंट का प्रतीक है। ओके। इट मींस स्टेबिलिटी हम अर्थ एलिमेंट स्क्वायर है क्योंकि स्क्वायर स्टेबल होता है। अगर आप उसको
(53:48) कहीं पर रख दो तो वो स्टेबल रहेगा। हम तो ये जो अर्थ है यहां पे आके ये चेन रिएक्शन रुक जाता है जो शिव से शुरू हुआ था। मैंने आपको 36 तत्व के बारे में बताया था ना तो ये जो चेन रिएक्शन है जो शिव से शुरू हुआ वो यहां पे आके स्टेबल हो जाता है। तो इसीलिए धरती को स्क्वायर की तरह रिप्रेजेंट किया जाता है। ओके? इसमें चार गेट्स हैं। हम गेट्स टुवर्ड्स द हायर ट्रुथ। तो ये चार गेट्स हैं। चार मार्ग ये वाले गेट्स यस वन हां ये और सभी सारे राइट राइट राइट वन टू थ्री फोर तो ये चार पिलर्स हैं शिव ज्ञान के या चार मार्ग हैं चार एंट्री गेट्स पहला है ज्ञान
(54:27) दूसरा है योग तीसरा है क्रिया चौथा है चर्य इन चारों से प्रवेश किया जा सकता है अंदर चारों की अलग-अलग साधनाएं होती हैं। फाइनली आप अंदर जाओगे तो आपको बहुत सारे पेटल्स दिखते हैं। 16 पेटल्स और उसके अंदर फिर आठ पेटल्स लोटस पेटल्स यस लोटस पेटल्स। इसके अपने भावना उपनिषद में ये बहुत अच्छे से डिस्क्राइब किया गया है कि ये सब क्या हैं? ये अलग-अलग तरह के इमोशंस हैं। हां? 16 टाइप्स ऑफ इमोशंस। 16 टाइप ऑफ़ डिजायर्स। इनफैक्ट 16 टाइप के डिजायर्स होते हैं। उसको आपको क्रॉस करना होगा। वह सारे डिजायर से ऊपर उठना होगा। एंड देन विद इन
(55:09) इट इज़ द एट पाश अष्टपाश हम जो आठ पेटल्स हैं। नहीं नहीं आठ पेटल्स बाहर। बाहर के 16 पेटल्स फिर आप अंदर प्रवेश करते हो तो आठ पेटल्स। हम तो ये जो आठ पेटल्स हैं वो है अष्टपाश। हम अष्टपाश यानी जो आठ बंधन है जो आपको बांध के रखते हैं। पाश यानी रस्सी। हम रिलेशनशिप्स। उसमें आता है भय यानी डर। फिर उसमें आता है ईर्ष्या। फिर उसमें आता है अभिमान जाति और कुल का। फिर उसमें आता है लज्जा, शर्मा। इस तरह के आठ होते हैं। पाश से जो बंधा है वह जीव है। और जो पाश से मुक्त है वह शिव है। ऐसा लिखा है शास्त्रों में। पाश युक्त भवेत जीव पाश मुक्त सदा शिव।
(55:55) इससे जब आप अंदर प्रवेश करते हो तो फिर यह शिव शक्ति का इंटरप्ले है। शिव शक्ति का इंटरप्ले यह त्रिकोण ऊपर वाले त्रिकोण जो इनवर्टेड त्रिकोण है अधोमुख और जो उर्धव मुख इनवर्टेड ट्रायंगल्स एंड द स्ट्रेट ट्रायंगल्स इनका एक इंटरप्ले चल रहा है। खेल चल रहा है शिव शक्ति का। फिर आपको वो डिस्कवर होता है। और फिर आप अलग-अलग स्टेजेस से ऊपर बढ़ते हो शिव शक्ति के। हम्। अह अहम अहम इदम इदम अहम इदम इदम अहम फिर अहम एक पूरा एक प्ले है इनका कि हम और यह दुनिया के बीच का प्ले मेरे और इस दुनिया के बीच का प्ले वो है शिव शक्ति का प्ले। तो हम कभी दुनिया को अपने अंदर देखते हैं।
(56:32) कभी हम अपने आप को दुनिया के अंदर देखते हैं। इट्स अ ब्यूटीफुल प्ले। वो करते हुए फिर हम बिंदु की तरफ पहुंचते हैं। जो हमारी रियलिटी है सेंटर शिव या शक्ति जो सेंटर में एक बिंदु आपको दिखेगा। पहुंचना है। हां। तो बाहर से चक्र पूजा इस तरह से शुरू करते हैं करना। यह एक मैप है। एक पूरा आपका गाइडेड साधना पद्धति है। दिस इज द एंटायर प्रोसेस स्टार्टिंग फ्रॉम द एंड टू द बिगिनिंग। राइट राइट? है ना? ये अवरोहन आरोहन का मार्ग है। यानी ऊपर से नीचे आना, नीचे से ऊपर जाना। तो जब आप श्री विद्या की साधना की बात करते हो तो ये जो बीच का बिंदु है तो आप ये सोचते
(57:13) हो बिंदु यहां पे है। राइट? और फिर इस तरह से इस तरह से ट्रायंगल बनाया ट्रायंगल बनाया और उस तरह से गेट्स आ रहे हैं और फिर आप वो मंत्र का जाप कर रहे हो। राइट लाइक दिस क्योंकि अगेन बॉडी में जो हमारा ये माइक्रोज्म है इसमें जो हायर थ्रुथ है वो ऊपर है। सहस्रार जो लोअर थ्रुथ है वो नीचे है। मूलाधार के पास तो आपको नीचे से ऊपर की ओर उठना है। लोग यूजली अपने टेंपल्स में भी रखते हैं यंत्रों को। हां। व्हाई डू दे कीप इट? क्या होता है? बस प्रतीक है। प्रतीक है और कुछ नहीं। एक सिंबॉलिज्म कि मुझे यह पाना है। जैसे बुद्धिस्ट बुद्धा के स्टैचू को रखते
(57:58) हैं तो क्यों रखते हैं? कि मुझे उनकी तरह बनना है। रॉ थॉट आता है कि यंत्र रखने से मेरी सारी मनोकामना पूर्ण हो जाए। इंसान हर कुछ तो यही करने के लिए कर रहा है कि सारी मनोकामना पूर्ण हो जाए। करेक्ट। हर दूसरे मंदिर में तो यही लिखा रहता है। यहां पे आओ मन में माथा टेको। सारी मनोकामना पूर्ण हो जाएगी। यू नो आई नो कि नहीं होती। होती तो लोग भटकते क्या? एक्सक्टली। और अगर हो ही जाती तो आज तक सबकी हो जानी चाहिए। एक्सक्टली। इट्स अ जर्नी हम ये पूरा मार्ग मनोकामना पूरा करने का
(58:44) मार्ग है ही नहीं। ये पूरा मार्ग है अपने आप को जानने का। हम और जब आप अपने आप को जान लेते हो तो कुछ बचता नहीं। एक्सैक्टली तो आप जीवन को भी उतने अच्छे से एंजॉय करोगे। पर आप अपने योग में तो रहोगे ही। बट श्री विद्या का आपने बताया ना श्री विद्या की यही खासियत है कि वो डिजायर्स भी देंगी और मोक्ष भी देंगी। राइट? इस पूरे प्रोसेस में मैं आपको स्पंदकारिका से एक श्लोक बताता हूं। उस श्लोक का अर्थ है कि ये जो मंत्र हैं ये मंत्र चेतना से ही बाहर निकलते हैं। फिर साधक की जो इच्छाएं हैं उसको पूरा करके वो साधक के मन को लेके वापस चेतना
(59:20) में लौट जाते हैं। ब्यूटीफुल। तो यह सारे देवता या श्री विद्या यह उसी चेतना की अभिव्यक्ति है और जब तक आपकी सारी इच्छाएं पूरी नहीं होती तब तक आप उस मोक्ष को प्राप्त नहीं होगे। जो इच्छाएं वो भी पूरी हो जाएंगी। श्री विद्या की ये ताकत है। राइट? या तो आपकी इच्छाएं वो पूरी हो जाएगी या वो खत्म हो जाएंगी। और फिर वो आपके माइंड को लेके आपके ईगो को लेके बैक टू कॉन्शियसनेस। अच्छा ये कैसे पता चले किसी को कि मुझे श्री विद्या करनी चाहिए कि नहीं? मन नहीं है आपका। अपना अंदर से आवाज आएगी। अब जैसे आज सुनके किसी को अंदर से हुआ है। अगर यह सुनके एक्साइटमेंट हो रही है तो
(59:53) क्या उससे शुरू करना चाहिए? करके देखिए। क्या होगा अधिक से अधिक? कोई चीज जैसे हमने स्टार्टिंग में डिस्कस किया तांत्रिक प्रैक्टिस कई बार हानिकारक भी हो सकती है। तो ऐसे क्या चीज है जो माइंड में रखनी चाहिए जिससे कि हानिकारक नहीं होगा। क्योंकि जो हानिकारक एस्पेक्ट हैं वो बहुत बाद में आते हैं। ओके? एज आई सेड दक्षिणाचार्य जो आगे हमने उसको नौ में डिवाइड किया था ना हम ओके तो वो अलग-अलग चार हैं। राइट स्टार्टिंग फ्रॉम दक्षिणाचार्य तो आपको कोई प्रॉब्लम नहीं है। कर सकते हैं नवरात्रि आ रही है। हम हम तो नवरात्रि में क्या करते हैं आप?
(1:00:34) नवरात्रि में मैं क्या करता हूं? स्पेशल क्या है? स्पेशल उस दिन में पर्टिकुलरली कुछ नहीं है। स्पेशल है कि हम अपने बाकी सारे काम को एक तरफ रख के हम वो डिवोट करते हैं उन नौ दिनों को साधना के लिए। हम ठीक है? हम बस उस दिनों को कि हां ये हमारा रिट्रीट है। एक स्मॉल रिट्रीट कि हम सब कुछ को छोड़ के इस इस नौ दिनों को अपने सेल्फ को जानने, अपनी शक्ति को जानने में लगाएंगे। उन 9 दिन में हम जब देवी की उपासना करते हैं हम क्या कुछ स्पेशल होता है? स्पेशल तो हर दिन ही है। सो उन नौ दिन में क्या है? कहा जाता है कि कुछ स्पेशल होता है। प्लरी
(1:01:18) पोजीशंस हैं ये सब। लेकिन अगर मैं सच बताऊं आपको तो मुझे लगता है कि यह बस एक लोभ है कि इस दिन तुम साधना करोगे ना तो साधना का 10 गुना फल मिलेगा। 100 गुना फल मिलेगा। इसी बहाने लोग करेंगे तो। लेकिन अगर आपको कोई सच में बदलाव देखना है ना तो आपको हर दिन करना होगा। एक दिन दो दिन से नहीं होगा। साल में अगर 9 दिन कर भी लिए तो कुछ नहीं होगा। इन प्लरी मूवमेंट्स के दौरान वो जो पूजा है वो ज्यादा इंपैक्टफुल बन सकती है। बन सकती है। आपकी साधना इंपैक्टफुल बन सकती है। बन सकती है। आपने ऐसा महसूस किया इन द पास्ट नवरात्रि का एक्सपीरियंस और मे बी अदर देन
(1:01:54) नवरात्रि का नहीं मुझे मैंने शिवरात्रि का अनुभव किया है। ओके। शिवरात्रि में ही मुझे कुछ मेजर रियलाइजेशंस हुए थे। शिवरात्रि के ही रात। वाज़ इट बिकॉज़ ऑफ़ प्लनेटरी पोजीशंस और वाज़ इट बिकॉज़ ऑफ़ माय ओन साइकी? कि मुझे लगता था यह दिन महत्वपूर्ण है। यह मुझे नहीं पता। कैसे रियलाइजेशन? जो भी हायर रियलाइजेशंस हुए थे मुझे वो इसी रात हुए थे। जो भी आप कहते हैं एनलाइटनिंग एक्सपीरियंसेस और कुछ रहा है ऐसा शिवरात्रि से कि मेरे दादा जी को हार्ट अटैक आया था शिवरात्रि के रात जिनके मृत्यु के बाद ही मैंने शुरू किया था साधना बहुत सारी चीजें हुई थी इस
(1:02:33) रात तो एक पता नहीं क्या है बट है क्या रियलाइजेशंस रियलाइजेशंस इन द सेंस कि जिस जिन अनुभवों की बात की जाती है ना शास्त्रों मैं उनके डीप में नहीं जाता। जिन अनुभवों की बात की जाती है वो अनुभव की मैं बात कर रहा हूं। अपने स्वयं का ज्ञान ये जो रुद्राक्ष की माला है ये आपके दादा जी की दी। जी। उनको कैसे पता था कि आपको देनी है और यह समय है, यही वक्त है।
(1:03:21) क्योंकि हमारे लीनियज में अह यह शिव ज्ञान का परंपरा चला आ रहा है। शिव ज्ञान इन द सेंस कि सब शिव भक्त रहे। मेरे दादा जी शिव भक्त थे। मेरे परदादा शिव भक्त थे। हम तो बस इन अ वे आप कह सकते हो यह एक प्रतीक है कि वो जो जींस थे वो ट्रांसफर हुए हैं या वो जो परंपरा थी वह ट्रांसफर हुई है। तो दादा जी ने आपको कब दिया यह रुद्राक्ष? यह वास्तव में उनकी मृत्यु के बाद मैंने लिया है। मैंने उनको फिर पहान लिया था उनकी याद में। और क्यों ऐसा फील हुआ?
(1:04:10) मैं उनसे अटैच था और वह मेरे काफी करीब थे। तो उनके मृत्यु के बाद ही फिर मैंने साधना शुरू किया था यह जानने के लिए कि मृत्यु क्या होता है और मृत्यु के बाद क्या होता है। वो जो गैप था वो मुझे पुश कर रहा था इस तरफ। श्मशान में जब वह जल रहे थे। मैंने काफी बार मेंशन किया है। तब से तब के उस दिन के बाद से मैं हर दिन ध्यान करता था। अपने आप हो रहा था यह चीज कि वह चिता दिख रही थी जलती हुई और फिर मैं अपने आप को चिता में देखने लगा कि मैं जल रहा हूं वहां पे और वह पहली साधना थी। बाद में समझ में आया कि विज्ञान भैरव में एक साधना है। फिर वहां से आगे की
(1:04:54) यात्रा शुरू हुई। तो क्योंकि वहीं से शुरू हुई थी वो यात्रा तो मैं उनका माला यूज करता था जाप के लिए। उनके पास जो माला थी सच्चाई यह है कि वह यह माला जला रहे थे उनके चिता पर तो मैंने रख लिया था जब एक व्यक्ति का देहांत होता है तो उनके साथ माला या भागवत गीता भी जलाया जाता है साथ में कि यह उनके साथ जाएगा आफ्टर लाइफ तो मैंने यह रख लिया था एक मेमोरी की तरह तो तो मैं यही समझता हूं कि उन्होंने मुझे दिया। कभी
(1:05:39) उनके जाने के बाद वो हम्म दिखे? आए थे सपने में आए थे। काफी बार क्या कह रहे थे? प्राउड ऑफ यू? वह तो मेरी ही मन की कल्पना है ना सपना। और क्या? मैं उनको देखता था एक अलग रेल में पूरे सब्जेक्ट कॉम्प्लेक्स है बट हमने कोशिश करी आपने इतनी खूबसूरती से इसको समझाने की 1% बट आई एम श्योर कि वो 1% लाखों लाखों लोगों को फ्यूचर में करोड़ों लोगों को आई एम श्योर इंपैक्ट करेगा ऑन बिहाफ ऑफ एवरीबडी आई डोंट थिंक दैट थैंक यू इज अ वर्ड बिकॉज़ यह एक सेवा है जो कि
(1:06:26) मैं करवा भी नहीं रहा जो मुझे आप थैंक यू कहें मैंने यह किया नहीं। राइट? जो भी आया उनकी तरफ से आया। मैंने बस गलतियां की है थोड़ी बहुत। कुछ हो सकता है गलतियां की हो। तो जो गलतियां है वो मेरी है। जो ज्ञान आपको मिला वो शिव का है। देयर इज नथिंग मोर टू से। देयर इज़ नथिंग मोर टू से। अब बस साधना करें। बाकी खुद समझें। सब कुछ एक कन्वर्सेशन में आपको नहीं मिलेगा। और अगर मिलता भी है तो वह अपने अंदर के कन्वर्सेशन में मिलेगा। अपनी बुद्धि के कन्वर्सेशन में मिलेगा शिव से जब बुद्धि कन्वर्स करेगी चेतना से हमारे या किसी और के कन्वर्सेशन से नहीं मिलेगा
(1:07:06) करेक्ट करेक्ट और वही आगम है तंत्र शास्त्र शिव और शक्ति का संवाद यानी बुद्धि और चेतना का संवाद एक अगर श्लोक से आप सब कुछ छोड़ना जाए द लिविंग थॉट एक श्लोक से एक श्लोक से अगर आप छोड़ना जाए आमतौर पर मैं इसे शुरू करता हूं बट आत्मा त्वम गिरजामती सहचरा प्राण शरीरम गृहम पूजा विषय भोग रचना निद्रा समाधि स्थिति संचार प्रद्यो प्रदक्षिणा विधि संचार प्रद्यो प्रदक्षण विधि जी
(1:08:05) शंभू मैं इसे पूरा कंप्लीट नहीं कर पाया। मैं इसका अर्थ बताता हूं। आत्मा तुमने शिव आप आत्मा है। गिरिजा मेरी मति है मां देवी शक्ति और उन्हीं का संवाद है तंत्र शास्त्र जो मेरे प्राण हैं वो कण है शिव के सहचरा और जो मेरा शरीर है वह उनका घर जो मेरी निद्रा है वह समाधि है और जो भी काम हम कर रहे हैं वह सब आपकी पूजा है जहां भी हम चल रहे हैं वह आपकी प्रदक्षिणा है और जो भी
(1:08:53) मैं बोल रहा हूं वह आपकी स्तुति इसके साथ मुझे लगता है इस भावना के साथ वी शुड एंड दिस। ओम नमः शिवाय। आज का पूरा शो देखने के लिए दिल से शुक्रिया। एपिसोड कैसा था मुझे कमेंट सेक्शन में जरूर बताइएगा। चैनल को सब्सक्राइब भी अवश्य करें क्योंकि सुपर टॉक्स एक मूवमेंट है जो हमारे देश का भविष्य उज्जवल बना रहा है।

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