Jagannath Puri ka SACH: Untold History, Mysteries & Real Experiences | Dr Surya Roy | ST EP-172
Author Name:Supertalks by themovingship
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Transcript:
(00:03) पूरी टेंपल अंटिल एंड अनलेस वन गोज़ यू विल नॉट अंडरस्टैंड हाउ इट इज डिफरेंट। कल्कि अवतार की वो जो स्वार्ड है कुछ समय बाद बढ़ती जा रही है। जिस दिन उसका पूरा साइज तैयार हो जाएगा उस दिन मंदिर का झंडा है वो [संगीत] विंड के ऑपोजिट मूव करता है। कई ये बोलते हैं साइंटिफिकली कि एक वर्टेक्स है। अगर वर्टेक्स ऐसा है तो आप मेरे को बताइए। तीन दिशा में एक ही साथ में एक ही पत्ता कैसे जाएगा? इतना भयंकर साइक्लोन आया था। सिर्फ नीलचक्रनी गरुड़ झंडा लेकर उड़ते हैं तब एक सिग्नल दिया जाता है। उससे पहले ध्वजा खुल के चला गया। एक बार ध्वजा में आग भी लग गया था और उसके बाद
(00:47) कुछ जगहें मेंशंड थी अह भविष्य मालिका में। आसमान में दो सूर्य दिखाई देंगे। एक जलता हुआ पिंड बंगाल में गिरेगा। मंदिर की 22 वी सीढ़ी तक पानी आ जाएगा। हां लिखा [हंसी] हुआ है। आठवीं शताब्दी में एस पर मदप्पा जी श्री शंकर इधर आए। ब्रह्मवस्तु वहां पर डाला। पाताल के अंदर थे वो। आज जो जगन्नाथ मंदिर में जो रीति नीति होता है उसका लार्ज एक्सटेंट [संगीत] कंट्रीब्यूशन ऑफ़ आदि शंकरा। मतलब आदि शंकराचार्य जी वहां पर थे। उनको एनर्जी थी। सदाशिव थे। [संगीत] जब बार-बार ये आ रहे हैं तो कुछ तो होगा मंदिर में तभी आ रहे हैं। आपका जो विमान है गर्भग उसके ऊपर दो फ्लोर
(01:27) और हैं। उसमें इं्रिप्शंस भी है। जो जगन्नाथ पुरी का ये जो ट्रेजरी है ये बिलियंस ऑफ डॉलर्स होगा। मंदिर का रत्न भंडार में ऐसेसे रत्न मिले हैं जो नवरत्नों में क्लासिफाई ही नहीं किया जा सकता। धरती के नीचे एक्सैक्टली। गुरु नानक देव जी का जो घटनाएं आती है लोग लाहौर से 2000 मील पैदल चल के आ रहे हैं तीर्थ करने के लिए पूरी में सरदार नानकपंती गुरु नानक देव जी ने पैर जगन्नाथ मंदिर की तरफ किया था ये मक्का मदीना की स्टोरी थी रामाय रामभद्राय रामचंद्राय वेदसे रघुनाथाय नाथाय सीताय पतय नमः अगर कोई भगवान जगन्नाथ को महसूस करना चाहे
(02:13) मन में क्या थॉट आएंगे? आदिआदि अनादि शून्य है। आंखों में देखिए खो जाएंगे। आंसू आएंगे आंखों से और क्या आप मेरी बात मानोगे नहीं। जितनी बार भी गया हूं। एक भी बार ऐसा नहीं हुआ। मैं सो रहा हूं और मेरा नींद नहीं खुला है। या कोई मेरे को आकर जगा के नहीं गया में। कौन आया है मैं नहीं बताऊंगा वो नहीं वो मेरा लगभग 170 एपिसोड हो चुके हैं 2 साल से ज्यादा का समय आज तक मैंने ऐसा किसी एपिसोड के लिए नहीं कहा पहली बार कहने जा
(02:58) रहा हूं मेरे पास शब्द नहीं है आज के एपिसोड के लिए आई एम स्पीचलेस बस इतना कह सकता हूं कि इतिहास के पन्नों में जब भी श्री जगन्नाथ पुरी की बात होगी इस एपिसोड को सुना जाएगा। आंखों से आंसू छलकेंगे। स्कूल्स, इंस्टीटशंस, स्टूडेंट्स, जनरेशंस जो आने वाली हैं उन तक इस इंफॉर्मेशन को पहुंचाना हम सबकी जिम्मेदारी है। दैट्स इट। पिछली बार क्योंकि बहुत से लोगों ने वीडियो को कंज्यूम किया और बहुत से लोग इमोशनल भी थे। आंखों से आंसू पूरे साल चलता रहे।
(03:46) मुझे ऐसा लगता है कि एक ये बहुत ही मैं जैसे आपसे बात कर रहा था ऑफ कैमरा की इससे बहुत कम्युनिटीज जुड़ती हैं और एक पूरे समाज में एक बहुत पॉजिटिव मैसेज आता है। सो अगेन ग्रेटफुल टू यू फॉर व्हाट वी डिड। सर प्रभु की इच्छा है। हम पूरी में इसको बोलेंगे महाप्रभु करो इच्छा। [हंसी] सो अब कुछ-कुछ चीजें हैं जो कि पिछले बार रह गई थी। तो मैं कुछ क्योंकि पहले एपिसोड से कुछ चीजें रहती हैं। वहीं से कुछ चीजों को जोड़ने की कोशिश कर रहा हूं। सबसे पहले अ पिछली बार जब आपने बताया था भविष्य मलिका के बारे में। आपने बताया था कि वो टेक्स्ट
(04:25) है। कई लोगों का यह सवाल था कि वो टेक्स्ट आपने कहां पर पढ़ा? वह टेक्स्ट यह कोई गवर्नमेंट रिकॉर्ड्स में है या यह टेक्स्ट कहीं पर मंदिर के पास है। यह टेक्स्ट कहां पर है? जैसा मैंने बोला था 18,000 के ऊपर टेक्स्ट है और यह अलग-अलग मठों और मंदिरों में रखा गया है। अलग-अलग कोने में उड़ीसा का। तो जो टेक्स्ट मैंने देखा था वह ऑब्वियसली पूरी का किसी मठ में है। नया का मठ में है। नयागढ़ डिस्ट्रिक्ट में हर डिस्ट्रिक्ट में रखा हुआ है कुछ ना कुछ छतिया मंदिर के वहां भी है। जाजपुर में है। काफी जगहों पे है। तो अ एंड दे आर ऑब्वियसली रिटन इन उड़ीसा उड़िया भाषा। हम
(05:12) दूरिया तो मुझे पढ़ना नहीं आता है। तो मैंने ट्रांसलेट करवा के मठ में बैठ के हम उन्होंने वह श्लोक पढ़ के सुनाया है और उनको एक्सप्लेन किया है। मैंने उन दिग्गजों से वो महापुरुषों से हम बैठ के उनको सुना है। राइट? किसी का कमेंट आया था वीडियो पे। उन्होंने लिखा था मैं छतिया से ही हूं। और उन्होंने बोला कि यह जो बातें हैं यह हम खुद फील कर रहे हैं। उसमें उन्होंने एक बात लिखी कि जो उनकी स्वॉर्ड है वो हर साल या कुछ समय बाद बढ़ती जा रही है। वो हर साल बढ़ रहा है। बिल्कुल सही बोला उन्होंने। ये है वो हां वो बात शायद बातों में मेरे दिमाग
(05:48) से ज़हन से उतर गया था। बट वो है। ये ही इज़ राइट दैट इज़ ही इज़ राइट। कैसे थोड़ा सा एक्सप्लेन करें मतलब? क्योंकि मतलब कल्कि अवतार की जो जो वो उसका जो लेंथ है जैसे हम लोग कई जगह पे देखते हैं या सुनते हैं शिवलिंग 1 इंच या 1 सेंटीमीटर 1 मिलमीटर करके हर साल बढ़ रहा है। तो ये तलवार जो है यह भी बढ़ रहा है और जिस दिन उसका पूरा साइज तैयार हो जाएगा बढ़ते-बढ़ते इट विल अस्यूम इट्स कंप्लीट साइज। उस दिन कल्कि भगवान आके उसको उठाएंगे। यही मानना था। मान्यता यही है। ओके यस और इसका यह जो कल्कि भगवान आकर उठाएंगे यह तलवार यह तलवार का कंप्लीट साइज कितना बचा
(06:33) है? इट इज़ अ मतलब मान्यता लेकिन दीज़ आर ऑल लेजेंड्स ओरल ट्रेडिशंस। 12 फीट 12 फीट तक कंप्लीट हो जाएगा। 12 फीट का तलवार होगा। और अभी कितना हो गया? यह तो मैं नहीं बता सकता। कैसे बताऊं वो? तो मैंने मैंने खुद तलवार देखा नहीं। दीज़ आर ऑल कहीं सुनी पाते। दीज़ आर ऑल लेजेंड्स बट इसका प्रमाण क्या है फिर? इसका इसको इसको इसको हम ऑथेंटिकेट कैसे कर सकते हैं? दीज़ आर प्योरली ओरल ट्रेडिशंस। लेजेंड्स एंड लेजेंड इज अ लेजेंड। बट अब जो जैसे जिसने कमेंट किया जो साइज बढ़ रहा है यह तो
(07:22) एविडेंट ही है ना। इससे बड़ा प्रमाण क्या होगा? देखिए दैट इज व्हाई आई एम सेइंग कि भारत का जो इतिहास है जो संस्कृति है ये सब काफी चीजें ओरल ट्रेडिशंस में बसता है। काफी चीजें ओरल ट्रेडिशंस में बसता है। ये आप देखिए ना अभी मैं कुछ दिन पहले ही डॉ. मीनाक्षी जैन का एक पॉडकास्ट देख रहा था। उन्होंने सही बोला उनमें कि और मेरे जो पूज्य गुरु थे जिनसे मैं थोड़ा बहुत पुराणिक टेक्स्ट के बारे में सीखा है डॉक्टर लेट डॉक्टर विवेक देव रॉय मैं खुद उनको महर्षि डॉक्टर विवेक देव रॉय बोलता हूं तो डॉक्टर विवेक देव रॉय एक चीज हमेशा बोलते थे कि आज की डेट में एक्सपर्ट्स
(08:02) हिस्टोरियंस आर्ग्यू करते हैं कि पुराणों में सॉरी हमारे जितने भी महापुराण हैं ये कोई बोलता है 14 सेंचुरी है कोई बोलता है फिफ्थ सेंचुरी है सेकंड सेंचुरी है। लेकिन वो यह भूल जाते जो भारतीय सांस्कृतिक सभ्यता है हम जो गुरु शिष्य परंपरा है वो स्मृति और स्मृति स्मृति और श्रुति से चल रहा है। हम स्मृति और श्रुति से चल रहा है। तो व्हेन दे से चाहे वो डॉ.
(08:32) विवेक देव राय हो चाहे डॉ. मीनाक्षी जैन हो दे आर एब्सोलुटली राइट एंड बैंग ऑन दैट फ्रॉम दैट पीरियड इट वाज़ गेटिंग डॉक्यूमेंटेड इन पार्ट्स। हम बट वो चला आ रहा है स्मृति और श्रुति से। तो ये जो अ ओरल ट्रेडिशन है इसको बोलते हैं ओरल ट्रेडिशन। ओके? कल्चरल हेरिटेज में इसको ओरल ट्रेडिशन बोलते हैं। तो ओरल ट्रेडिशन में ऐसे ही बाय जनरेशंस चल रहा है। अ मेरे पास कुछ-कुछ चीजें हैं। जैसे पिछली बार हमने कुछ मिथ्स को डिबंंग किया था। आज कुछ और चीजें हैं। तो मैं चाहता हूं क्योंकि आपका अपना एक्सपीरियंस है। तो हम उस पे भी क्लेरिटी दें। जो मंदिर का झंडा है वो विंड के ऑोजिट मूव
(09:15) करता है। अब कई कहते हैं कि एक स्पिरिचुअल सिग्निफिकेंस है कि मंदिर ऐसा है। कई ये बोलते हैं साइंटिफिकली कि एक वर्टेक्स है कि मंदिर की बनावट ऐसी थी कि वो ऐसा होता है। इसका सच क्या है? साइंस स्टार्ट्स साइंस एंड्स और वहीं से डिनिटी स्टार्ट होता है। डिनिटी स्टार्ट्स व्हाई साइंस एंड्स जहां तक अ विज्ञान की बात है साइंस इंजीनियरिंग वर्टेक्स की बात बोला आपने अगर वर्टेक्स ऐसा है तो आप मेरे को बताइए तीन दिशा में एक ही साथ में एक ही पत्ता कैसे जाएगा? विंड द विंड डायरेक्शन विल ऑलवेज बी ऑन वन
(10:01) साइड ओनली राइट वो आके क्या तीन जगह तो बिखर नहीं सकते ऐसे आई एम नॉट अ साइंस स्टूडेंट बट आई एम जस्ट ट्राइंग टू पुट इट इन अ वेरी सिंपलिस्टिक टर्म हम एंड नीदर आई एम ट्राइंग टू प्रूव इट्स स्टिविनिटी आई एम जस्ट सेइंग कि जो भी है चाहे वो आवाज समुंदर की आवाज हो चाहे हवा हो हवा की दिशा हो लहरे हो उबाना जो जो है देयर आर डेज़ व्हेन द बाना फ्लोस इन थ्री डिफरेंट डायरेक्शन उसका जो भी तीर उसका लगाते हैं वो लोग बाना का पतित पावन बाना बाना मींस फ्लैग द फ्लैग इट इज़ कॉल्ड द पतित पावन बाना तीन दिशा में उड़ता रहता है किसी किसी दिन वो हवा के उल्टा रहता है किसी किसी दिन वो
(10:45) पीछे पीछे की तरफ उड़ जाता है ये आपने खुद देखा हां मैं बोल तो रहा हूं मैंने तो इसीलिए मैंने बोला कि बाना जिस तरफ उड़ रहा था मैंने मिट्टी उठा के ऐसे किया तो वो उल्टी तरफ जा रहा था मिट्टी। मैंने खुद टेस्ट किया है जो सो नीला चक्र है वो एक तरीके से हर डायरेक्शन से मैंने घूम-घूम के चेक किया। हम इट इज नॉट सो अ जो परछाई मंदिर का नहीं पड़ता है। आई हैड अ डिफिकल्टी प्रैक्टिकल फिजिकल डिफिकल्टी। देयर वर स्ट्रक देयर आर स्ट्रक्चर ऑल अराउंड उतना बड़ा 200 फीट लंबा विमान का वो परछाई जा रहा है कि नहीं आई एम अनेबल टू असर्टेन बिकॉज़ आसपास इतने सारे
(11:30) बिल्डिंग्स हैं। राइट राइट हो सकता है नहीं भी हो सकता है। और कुछ ऐसा है स्पेसिफिक जो कि बात अलग है जैसे आपने ध्वज की बात बताई। ऐसा कुछ आपने कुछ और देखा जो कि अनकॉमन हो। आप मंदिर का रंदनशाला ले लीजिए जहां पर महाप्रसाद बनता है। प्रसाद बनता है। जब वह लगाते हैं कब कभी आप जाएंगे मंदिर में खुद देख सकते हैं। जो नीचे वाला हांडी है वो नहीं पकता पहले। सबसे ऊपर वाला पकता है। अब वो क्यों पकता है उसका आज तक कोई साइंटिफिक एक्सप्लेनेशन कोई साइंटिस्ट नहीं दे पाया है। सो अ पूरी टेंपल अंटिल एंड अनलेस वन गोज़ यू विल नॉट अंडरस्टैंड हाउ इट इज़ डिफरेंट।
(12:15) हाउ थिंग्स इंजीनियर ओवर देयर। इट इज़ इट इज़ रियली डिफिकल्ट फॉर एनीबडी टू एक्सप्लेन। देयर आर अन एक अह आई मीन मतलब ऐसे-ऐसे चीज़ होता रहता है पूरी शहर में कि अह इट इज़ बिय्ड इमेजिनेशन कभी-कभी जो होता है गरदो ध्वजम हरती छेद धर्मे संकट अगतम यदा विष्णु ध्वजम खेगतम तदा कली युगम नासम प्रजति गरुड़ झंडा लेकर जो उड़ते हैं तब तब एक सिग्नल दिया जाता है। क्या यह सच है? यह बेसिकली अह इसकी बात कर रहे हैं कि अगर ऊपर जो पतित पावन बना है उसको लेके कोई
(13:03) बाज अगर चला जाए तो वो तो हम पहले भी देख चुके डिस्कस भी किए थे जब बाज लेके गया था तब कुछ ना कुछ होनी तो होता ही अनहोनी तो होता ही है। पिछली बार आपने बताया था ना कि जब बाज ऊपर घूमता है तो ध्वज को भी लेकर जाता है। नहीं ध्वज को लेकर नहीं जाता। वो एक ही बार हुआ था पिछले तीन-चार सालों में। हां हां हुआ बाज ध्वज को लेके चला गया। एक बार हुआ सेकंड जो सेकंड वेव आया था कोविड का उससे पहले ध्वजा खुल के चला गया। एक बार ध्वजा में आग भी लग गया था। एक बार बाज ऊपर घूमते रहते हैं। तो होता रहता है कुछ। अभी हो रहा है कुछ पांच छ सालों से ऐसा और
(13:42) उसके बाद कुछ ना कुछ होता ही है गलत। अपने आप आग कैसे लग सकती है ऊपर? क्या होता है? एकादशी के दिन उधर दिया जलाया जाता है। हो सकता है वहां से कोई स्प्लिंटर निकल के गया हो। क्वाइट पॉसिबली और बाज ही क्यों वहां पर क्या ये किसी का जैसे को हम कहते हैं देखिए पक्षी तो उधर बहुत है पक्षी कई तरह का पक्षी घूमता है ऊपर जब घूमता है सिर्फ बाज नहीं कई तरह का पक्षी घूमता है बट ले गया था बाज बाज ले गया था बाज कई बार बाज आके बैठा भी है नीला चक्र के ऊपर एक दो बार किसी हमारे हिंदू डटी से हम ये सिग्निफिकेंस ले सकते
(14:26) हैं बाज किसी का कोई व्हीकल या बाज किसी से जुड़ता हो श्री विष्णु का ही है गरुड़ आप श्लोक में ही तो दिया हुआ है हां हां गरुड़ है उसका वाहन है भगवान विष्णु के हर हर देवी देवता का कोई ना कोई वाहन है तो बाज उनका है तो क्या बोलूं मैं इसका मतलब डिफिकल्ट टू एक्सप्लेन सर्टन थिंग्स आई कांट आई मीन मेरे पास इसके अतिरिक्त और कुछ बोलने के लिए कुछ है नहीं। कलयुग के अंत में आसमान में दो सूर्य दिखाई देंगे।
(15:14) एक जलता हुआ पिंड बंगाल में गिरेगा। ओसा तक उसकी भाप आएगी। मंदिर की 22वीं सीढ़ी तक पानी आ जाएगा। यह कहां से प्रेडिक्शन आती हैं? यह सब भविष्य मालिका में ही लिखा हुआ है। लिखा हुआ है। हां लिखा [हंसी] हुआ है। वो तो यह भी लिखा हुआ है कि हीराकुंड डैम फट जाएगा। उड़ीसा का छह डिस्ट्रिक्ट पानी में बह जाएगा। ये भी लिखा हुआ है। ये बट थिंग इज देयर आर मेनी पर्सपेक्टिव्स टू इट। आप इसको कैसे देखते हैं? आई डोंट सी एनीथिंग आउट ऑफ इट। आई डोंट सी एनीथिंग आउट ऑफ इट राइट नाउ।
(15:59) बिकॉज़ हीराकुंड डैम तभी टूट सकता है जब उसके ऊपर कोई जबरदस्त मिसाइल अटैक हो। एंड इंडिया का एक अ शील्ड मिसाइल शील्ड ऑलरेडी उस तरफ है। बिकॉज़ आवर टेस्टिंग सेंटर्स आर देयर। चंद्रपुर हम बालासुर डिस्ट्रिक्ट बालासुर में है ना सारे मिसाइल टेस्टिंग्स वहीं से होता है नोटम वहीं पे जारी होता है तो आई डोंट से एनीथिंग आउट ऑफ इट ऑनेस्टली भविष्य मलिका के रेफरेंस में जैसे हम भविष्य मलिका को जब पढ़ रहे हैं जब आपने भी कहा कि आपने भी ये सब पढ़ा है ये सब अगर आपने पढ़ा है तो इसका रेफरेंस किस किस हिसाब से दिया गया होगा व्हाट डू यू थिंक
(16:44) देखिए ये बोलना बहुत मुश्किल है बिकॉज़ 16वीं शताब्दी में बैठ के जो चीजें लिखा गया है और उन्होंने इसका का रेफरेंस दिया। कुछ घटना तो वाकई होते हुए देखा है। जैसा मैंने बोला पिछली बार कुछ-कुछ घटनाएं तो हुआ है। ठीक है ना? और जनरल बिपिन रावत का ऐसा नहीं जैसे किन्नरों का आत्महत्या करना मंदिर के वहां के वो सब तो मैंने बोला ही है। बट थिंग इज कितना इसमें से फलीभूत होगा ये तो समय ही बताएगा। और उसको लेके यू नो आई एम नॉट एन एस्ट्रोलॉजर नीदर नीदर आई एम अ फ्यूचर प्रेडिक्टर बट थिंग इज दैट वक्त के साथ-साथ ही पता चलेगा कि कितना फलीभूत हो रहा है कितना मिल रहा है कितना
(17:27) नहीं मिल रहा है इसको हम ऐसे हां बट आप अगर बोले तो जलता हुआ सूर्य आके गिरेगा समुंदर में उसका भाप जाएगा यू कैन कंपेयर दैट विथ एन एस्टेरॉइड फॉल एन एस्टेरॉइड कैन कम एंड फॉल इन द सी दैट कैन हैपन हम दैट कैन हैपन अ सिमिलर थिंग हैपेंड आई हैव रेड अ फ्यू ओपिनियंस कि व्हाई डिड द्वारका सबमार्च? द्वारका सबमर्च बिकॉज़ एन एस्टेरॉइड केम एंड फेल इन द सी ड्यू टू व्हिच देयर वाज़ अ सडन इनफ्लेक्स ऑफ़ द वाटर हाइट्स अक्रॉस दैट एंटायर कोस्ट लाइन। उसका सुनामी की तरह जो वाटर लेवल राइज़ हुआ हम यू नो दैट हैपेंड इट वेंट एंड हिट द इजिप्शन एंड सुमेरियन पोर्ट्स आल्सो।
(18:10) हम ठीक है ना? हम सो या दैट कैन बी अ फिनोमन पहले भी हुआ है एस्ट्रॉइड्स कैन फॉल इसमें कोई बड़ी बात नहीं है। वी आर इन अ गैलेक्सी एस्ट्रॉइड्स कैन फॉल मंदिर की सीढ़ियों में क्या कुछ छुपा हुआ है? ऐसा कहीं पर पड़ा कि मंदिर की जो तीसरी सीढ़ी है उसको यमशीला कहा जाता है। जहां पर यम का वास होता है। ठीक है? हां। वो यमशीला जो है 22 पाइ बोलते हैं। सीढ़ी जो है वो 22 पाइ दे 22 स्टेप्स। ओके। और यह सीरिया इतनी पावन है कि यहां पे पिंडदान भी किया जा सकता है। भारत के चार कोने में पिंडदान होते हैं। चार जगहों पे कुरुक्षेत्र, प्रयागराज,
(18:53) गया, जाजपुर काशी में भी होता है। और एक यहां पे आप कर सकते हो। इनका सीरिया का महत्व इतना ही है। और यह बायसीरिया आपको अगर मैं मेटाफिजिक्स और क्वांटम फिजिक्स की हिसाब से दिखाऊं इट इसको इंसानी होशो आवाज को इंद्रियों के ऊपर जाके सुप्रीम कॉन्शियसनेस के साथ कनेक्ट करने का जो थियोलॉजी है उसको समझाता है। दिस 22 स्टेप्स आर द रिप्रेजेंटेशन ऑफ इंद्रियां मन चित्त बुद्धि इनका रिप्रेजेंटेशन है। आप उनको क्रॉस करके सुप्रीम कॉन्शियसनेस को अटेन कर रहे हो। व्हेन यू क्रॉस देम एंड व्हेन यू और जब आप
(19:38) चढ़ते हो सीढ़ियों को आप जमशीला के ऊपर पैर रख के जा रहे हो ताकि अपने कर्म जो है उनको पीछे छोड़ रहे हो कर्म फल को पीछे छोड़ रहे हो ऐसा मान्यता है आई मीन पीपल कैन इंटरप्रेट इट इन मेनी अदर वेज़ आल्सो एक-एक दिग्गज एक-एक पंडित इसको एक-एक तरीके से बोल सकते हैं बट दिस इज व्हाट फ्रॉम अ कॉमन मैनस परेंस आई एम टेलिंग कि कर्म होते हैं इंसान का कर्म फल होते हैं उनको आप समर्पित करके ईश्वरीय शक्ति के पास समर्पित करके करके जो भगवान ने गीता में बोला है कि मुझ में भक्ति करो मुझ में समर्पण करो मैं तुम्हारे सारे पापों का हरण कर लूंगा
(20:14) यही बोला है ना तो इट इज द सेम थियोलॉजी कि आप उनके शरण में जा रहे हो तो अपना कर्म फल सारा वहां पे छोड़ के यमशिला को छोड़ के आप सारे इंद्रियों बुद्धि चित्त मन सब के ऊपर जाकर सुप्रीम कॉन्शियसनेस का दर्शन कर रहे हो उनके साथ कनेक्ट हो रहे हो बट मान्यता यह भी है दैट व्हेन यू कम डाउन यू शुड शुड नॉट अगेन स्टेप ऑन दैट जमशीला। तो इसका मतलब यू आर अगेन पुलिंग योरसेल्फ बैक इनू द सांसारिक चक्र। वंस यू हैव अटेंड दैट डिविनिटी आप मत करो फिर फायदा नहीं है। फिर राइट? इसी को शायद आगे लोगों ने जो इंटरप्रेट किया कि आपके पुण्य जो पुण्य है
(20:52) वो शून्य हो जाते हैं अगर आप इसको लेकर। सो बेसिकली यू आर गेटिंग इंटू दैट साइकिल अगेन। यू वांट टू यू आर योरसेल्फ पुलिंग योरसेल्फ इंटू द साइकिल बैक। राइट? जैसे हमने ध्वज की बात करी जो हमने पिछली बार नीलचक्र की बात की थी। क्या नीलचक्र के भी कहीं पर मूवमेंट देखी गई है इन द पास्ट? नहीं नहीं नीलचक्र का क्या है? देखिए हिस्टोरिकली आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया का रिपोर्ट अगर पढ़ते हैं आप तो नीलचक्र हैज़ बीन ऑलरेडी रिप्लेस्ड ट्वाइस। एक बार तो इतना भयंकर साइक्लोन आया था पूरी के ऊपर। आई थिंक दिस वाज़ समवेयर अराउंड 18 70 टू 80 के बीच
(21:26) में। इतना भयंकर साइक्लोन आया था। सिर्फ नील चक्र नहीं जितने भी बाकी छोटे-छोटे मंदिर हैं उनके ऊपर जो चक्र है वो भी टूट के पर गिर गए थे। इतना भयंकर साइक्लोन हुआ था। हम ठीक है ना? तो अ इट वाज़ रिप्लेस्ड देन ये जो करंट नील चक्र है ये उस टाइम रिप्लेस हुआ। और उससे पहले भी 17वीं शताब्दी में भी एक बार ऐसे हुआ था जब ये रिप्लेस हुआ था। ओके। तो अभी जो नील चक्र है दैट हैज़ दैट वाज़ रिप्लेस सम 250 ऑड इयर्स बैक। ओके? गॉट इट। यह है कुछ जगह मेंशंड थी भविष्य मालिका में। मैं चाहता हूं आप उनके बारे में समझाएं कि उसका रेफरेंस क्या है?
(22:03) जाजपुर यह फ्यूचर कैपिटल बनेगी भारत की। कंतिलो जहां पर विष्यकर्णी प्लांट पाया जाता है। कोनार्क का सन टेंपल। क्या रेफरेंस है इन तीनों का? आपके चेहरे पे स्माइल भी आ गई। [हंसी] कोनार्क सन टेंपल तो अपने आप में एक सब्जेक्ट है। उसको तो हम छोड़ देते हैं। उसके ऊपर कभी और बात करेंगे। राइट। बट जहां तक कांटिलो नीला माधव की बात है अ मान्यता है लोकल द टेक्स्ट स्पीक ऑफ ईशाबरराज विश्वासु ट्राइबल किंग नीला माधव विग्रह अ ब्लू स्टोन अ फोर आर्म्ड विष्णु विग्रह माधव विग्रह
(22:51) अलोंग समवेयर अलोंग दी महानदी बेल्ट समवे सम ऑफ द टेक्स्ट इंडिकेट नाउ इसको हम आर्कियोलॉजिकली कैसे इंटरप्रेट कर सकते हैं? सवाल यह पैदा होता है। है ना? तो सबसे पहले बोल दूं कि आर्कियोलॉजिकली अगर हम देखें उड़ीसा में दो रिवर बेसिन बहुत इंपॉर्टेंट है। हिस्टोरिकली वन इज महानदी वन इज प्राची। अब हम आ जाते हैं महानदी पर बिकॉज़ हमारा फोकस है महानदी के ऊपर। महानदी रिवर बेसीन जो है इट वाज़ फेमस फॉर माधव वरशिप।
(23:37) ऑलवेज दिस साइड दैट साइड इट वास शिवा एंड शक्ति। तो माधव वरशिप जहां तक होता है तो आर्कियोलॉजिकली जितने भी खनन हुआ है चाहे स्टेट आर्कियोलॉजी चाहे एएसआई चाहे कोई कटक यूनिवर्सिटी या जो कोई भी अदर यूनिवर्सिटी डेक्कन कॉलेज जितने भी खनन हुआ है आज तक आर्कियोलॉजिकली जितने भी सरफेस फाइंड्स है आज तक वो पूरा कवर नहीं हुआ है सरफेस फाइंड्स ही इतना है आज भी अगर आप ग्राउंड पेनिट्रेटिंग रडार लगाओगे तो उसके नीचे मंदिर मिलेगा आपको किसी ना किसी इतना जबरदस्त आर्कियोलॉजिकली रिच सेगमेंट है यह। दूसरी बात जब यह खनन हुआ है, हिस्टोरिकली
(24:18) देखा जा रहा है महानदी बेल्ट में, देयर वर थ्री टाइप्स ऑफ़ माधव वरशिप व्हिच वास फाउंड। वन इज़ ऑफ कोर्स नीला माधव। सेकंड इज़ ललित माधव। थर्ड इज़ राधा माधव। प्लीज मार्क दिस। हमारा जो टाई अप है जगन्नाथ संस्कृति से यह नील माधव से टाइड अप है। नीलम माधव का रेफरेंस हमें कहां से मिलता है? देयर आर मल्टीपल टेक्स्ट्स व्हिच गिव दी स्टोरी और पुराणिक कथाएं ऑफ नीला माधव गेटिंग ट्रांसफॉर्म्ड इंटू जगन्नाथ। बट उसका एक ट्राइबल आस्पेक्ट भी है और वो बहुत बड़ा है, इंपॉर्टेंट है और क्योंकि यह सारे एरियाज जो है कहीं ना कहीं सबर लोग
(25:04) रहते थे। चाहे वो खुर्दा के जंगल हो, चाहे कोरापट के जंगल हो, चाहे सलपुर के जंगल हो, चाहे आपका नया घर का साइड हो। ये आप ये कह रहे हैं अगर इसको मैं थोड़ा सा सिंपलीफाई करूं समझने के लिए अपनी बेटर अंडरस्टैंडिंग के लिए। नहीं अभी मत समझिए। अच्छा अभी नहीं समझ। अभी मत समझिए क्योंकि मैंने पूरा बोला नहीं है। नहीं यहां यहां तो मतलब ये वन स्टेप बेबी स्टेप ये है कि आप ये कह रहे हैं कि पहले जो ट्राइब थी उसका नाम था सबर। सबर ट्राइब थी। सबरराज विश्ववासु वहीं से सब सबर आता है। तो पहले एक सबर ट्राइब थी। उस वक्त सबर ट्राइब नहीं था। नाउ इधर भी
(25:33) है। मैं इसीलिए एक-एक करके स्टेप बाय स्टेप आ रहा हूं। सबर जो है हां। सबर जो है एक संस्कृत शब्द है। जिसका मतलब है फॉरेस्ट ज्वेलर। फॉरेस्ट ज्वेलर। लेकिन अलेग्जेंडर कनिंघम डब्ल्यूडब्ल्यू हंटर या जो भी ओरिएंटलिस्ट थे हम इन्होंने क्या किया अपना समझ नहीं पाए उसको एंड उन्होंने उसको बना दिया एक प्रजाति आदिवासी जनजाति हम बट सबर मींस एनीबडी हु इज अ फॉरेस्ट ज्वेलर तो सबर के अंदर मुंडा भी आते हैं सेरा ट्राइब्स भी आते हैं सबर भी आते हैं ओके गॉट इट ठीक है मतलब मल्टीपल ट्राइब्स हैं उसी एक इसको कम्युनिटी ुनिटी बोल सकते हैं। कम्युनिटी एक्चुअली इट शुड बी लाइक अ
(26:15) फॉरेस्ट डलिंग कम्युनिटी। ठीक है? और उनके अंदर क्लैन एंड सबक्स है। ठीक है ना? ठीक है? और इन सब में हां। इन सब में आपका एक होता है कांसेप्ट ऑफ कुल देवता जो हमारा आज कुल देवता का कांसेप्ट आया है। इट कम्स फ्रॉम दैट। ओके। हिस्टोरिक सिग्निफिकेंस इसका सी द कल्चरल कंटिन्यूटी एंड द लिंकेज। ब्यूटीफुल। कुल देवता कुल देवता से पहले कुल देवता के ऊपर होता है ग्राम देवता। हम जो आपका कंतारा में दिखाया गया है ग्राम देवता और ग्राम देवता के ऊपर होता है राष्ट्र देवता हम द स्टेट डाइटी हम जगन्नाथ इज अ राष्ट्र देवता हम एकलिंग जी इज अ राष्ट्र देवता
(26:58) हम एज वेल एज अ कुल देवता फॉर द मोनार्की कोल्हापुर माता लक्ष्मी कुलदेवी एंड अ राष्ट्र देवी तुलसा भवानी कुल देवी एज वेल एज अ राष्ट्र देवी गॉट इट अंडरस्टैंड हम राइट नाउ अब क्या हो रहा है कौन से टेक्स्ट है जो नीला माधव को बताते हैं दे आर स्कंद पुराण उत्कल पर्व नीलाद्री महोदया मादलापाजी सरला दास उरिया महाभारत शिशु कृष्ण दास देवलोतला
(27:44) दीज़ आर द प्राइम टेक्स्ट वि टॉक ऑफ नीला माधव सबरराज विसोवासु ह डॉटर ललिता ललित माधव कम्स फ्रॉम ललिता बिकॉज़ ललिता बीइंग द डॉटर ऑफ सराज विश्वासु वाज़ आल्सो वरशिपिंग नील माधव। सो द कासेप्ट ऑफ ललित माधव कम्स फ्रॉम देर। गॉट इट राइट राइट यहां तक एक कम्युनिटी है जिसमें अलग-अलग ट्राइब्स हैं और पहले वो कम्युनिटी जो थी वो नीला माधव को प्रे करती थी नाउ नीला माधव नीला माधव बीइंग अ ट्राइबल डीटी ओके नीला माधव सिंस ही वास वशिप्ड बाय सबरराज विश्वास अ ट्राइबल लीडर इन अ वैग्र गुहा
(28:32) जंगल के जंगल के अंदर पहाड़ के ऊपर डेंस टोपोग्राफी अह ही ही बिकम्स दी प्राइम एग्जांपल ऑफ डेंडोलट्री। व्हाट इज डेंडोलट्री? डेंडोलैट्री इज द हाईएस्ट फॉर्म ऑफ ट्री वॉरशिप। अभी हाल ही में हमने एक वीडियो देखा था जहां पे एक आदिवासी महिला एक बहुत पुराना पेड़ को काट देने से फूट-फूट के रो रहे थे। है ना? हम दैट इज व्हाट भारत वाज़। हम दैट इज व्हाट भारत वाज़। प्री वशिप इन द हाईएस्ट फॉर्म द वुमेन हु वास क्राइंग एस इफ उसका माता-पिता गुजर गए परिवार का कोई गुजर गया है।
(29:16) है ना? इंटरेस्टिंगली क्या होता है? इट टेक्स अ टर्न दैट जहां पे हमें मिलता है कि रिसर्च के दौरान कि यह जो वृक्ष देवता है सबों का इनका नाम है किटुम। वृक्ष देवता किटुम। किटुंग के 10 अवतार भी मिलते हैं। जैसे श्री विष्णु के 10 अवतार मिलते हैं। किटुंग के 10 अवतार भी मिलते हैं। 10 नाम भी अलग-अलग मिलते हैं। उन नामों में से एक नाम जगंतो भी है। जगता या जगंतो या जगन्नालो। जगन्नालो एंड जगन्नाथ इज अ मच लेटर नेम। इट कम्स इन 14 सेंचुरी।
(30:01) द ओरिजिनल नेम वास पुरुषोत्तम श्री पुरुषोत्तम एंड व्हाट डस इट फ्लोरफॉर्म पुरुषोत्तम कम्स फ्रॉम ऋग्वेद एंड अथर्ववेद ऋग्वेद में सूक्तास है देवी सूक्ता है जो दुर्गा पूजा के टाइम पे भी यूज़ किया जाता है नवरात्रि के टाइम पे यूज़ किया जाता है देवी सुक्ता ऐसी एक है पुरुष सूक्तता पुरुष सूक्त स्पीक्स ऑफ श्री पुरुषोत्तम आदि पुरुष और आदि पुरुष श्री पुरुषोत्तम कौन है? एक ही है भारत में अभी आज की डेट में श्री जगन्नाथ यही पुरुष सुखता जो नारायण को समर्पित है
(30:50) विाउजेंड आईज हियर्स हैंड्स लेग्स माउथ एवरीवेयर आई एम द यूनिवर्स एवरीवेयर एम आई आई एम ही आई एम ही आई एम ही सर्वथा पानी पादम तत सर्वतो शशि मुखम सर्वते श्रुति मल लोके सर्व माते तति मेरे हाथ पैर नाक कान सब है ये अरण्य ये पर्वत ये जलाधार ये समुंदर ये सब मेरे ही हाथ पैर नाक कान है कण कण में हरी तो इनको आपको जोड़ना पड़ेगा यू सी द प्रॉब्लम विस हैपेंड ओरिएंटलिस्ट ने जगन्नाथ को कर दिया आदिवासियों का देवता हम
(31:35) और आदिवासियों का बना दिया एक लिमिटेड कम्युनिटी सबर बोल के बट ऐसा नहीं था दी पारेंस ऑफ द वर्ल्ड दी इफेक्टिवनेस ऑफ द वर्ल्ड काफी बड़ा है। बट वो सीमित कर दिया उसको। किसी ने बोला कि यह खुरदा का जंगल से उठ के आया है। किसी ने बोला महेंद्रगिरी से आया है। अब महेंद्रगिरी हैज़ गॉट अ बिग रेलेवेंस बिकॉज़ वो गुरु परशुराम का जगह है महेंद्रगिरी। और महेंद्रगिरी में आज भी बहुत पुराने-पुराने मंदिर रखा हुआ है जो सेकंड सेंचुरी सीई के है। कुड बी अर्लियर और वहां पे कोई आर्कियोलॉजिकल एक्सकवेशन हुआ नहीं है महेंद्रगिरी में। अगर होगा तो अगर
(32:20) जीपीआर भी लगाएंगे राउंड पेनिट्रेटिंग रडार भी लगाएंगे हो सकता है वहां पे रिमेंस मिले जैसा भुवनेश्वर ओल्ड सिटी ऑफ़ भुवनेश्वर में रिमेंस मिला है जीपीआर लगा के वहां भी मिल सकता है क्वाइट पॉसिबल सम ऑफ द रिमेंस आई हैव सीन इन कंटिलो नीलम माधव एज अ पार्ट ऑफ माय फील्ड वर्क जब मैं गया था उधर कई लोगों ने मैंने कमेंट्स में देखा मैंने बोला कंटिलो नीलम माधव का बात कर रहे हैं बट इट इज नॉट कंटिलो नीलम माधव इट इज द एंटायर महानदी वैली आई एम टॉकिंग अबाउट जहां मैंने घुमा है गाड़ी लेके वे बैक इन 2009 10 11 12 जहां सब सोशल मीडिया आया भी नहीं था मैं अपने इंटरेस्ट
(33:00) से चला घूमता रहता था उधर एंड वहां पर मैंने देखा है लुक एट द कल्चरल कंटिन्यूटी फ्रॉम अ बिग तीर्थ बिग क्षेत्र टू अ स्मॉलर वन जन श्री कृष्ण जन्मभूमि हो काशी हो कामाख्या हो सोमनाथ हो, द्वारकाधीश हो सब जगह आर्कियोलॉजिकल एक्सकवेशंस जहां पर हुआ है यहां पर आर्कियोलॉजिकली देयर आर स्टार्टर्स ऑफ रिमेंस व्हिच आर फाउंड लेयर्स ऑफ रिमेंस राइट कंफर्म बाय के के मोहम्मद कंफर्म बाय बीबी लाल कंफर्म बाय मेनी रनाउंड आर्कलॉजिस्ट सोमनाथ के नीचे जब लास्ट टाइम ग्राउंड पेनिट्रेटिंग रडार लगाया गया था वहां पे दो मंजिल और मिला है बिनी द करंट टेंपल द्वारका काकाधीश में जब
(33:48) लास्ट टाइम खनन हुआ था वहां पे भी रिवेंस मिला है। सो एवरीवेयर द प्लेस हैज़ बीन यूज्ड एज ओनली अ प्लेस ऑफ़ वरशिप। राम राम जन्मभूमि में भी यही निकला था। आर्कियोलॉजिकली आई एम टॉकिंग प्योर आर्कियोलॉजी प्योर साइंस। राइट? एंड आई एम जस्ट ट्राइंग टू कनेक्ट इट फ्रॉम दी टेक्स्ट्स। राइट? नाउ व्हाट हैपेंस व्हेन दिस हैपेंस। दैट मींस दिस प्लेस इज़ कंस्टेंटली ओवर द एजेस बाय जनरेशन आफ्टर जनरेशन। वो चीज को सिर्फ और सिर्फ वशिपिंग के लिए पूजा पाठ के लिए यूज हो रहा है। वो ऐसा ही निदर्शन मुझे महानदी वैली में मिला। महानदी वैली में जहां पर भी मैं
(34:30) मंदिरों में गया। कई सारे मंदिर मेरे को ऐसे मिले। जहां एक में तो मैं खुद आज भी जाता हूं। उसका कहानी भी बड़ा अनोखा है। मैं बताऊंगा। वहां पर मैंने देखा जो गर्भगृह है वहां पर ललित माधव मंदिर है। वह ललित माधव मंदिर में मैं देखा जो मेन डाइटटी है आज की डाइटी वो बहुत बड़ा है। इट्स अ फोर आर्म विष्णु विग्रह बट उसके संग संग एक छोटा सा इतना साइज का मुगुनी पत्थर ब्लैक बसा ब्लैक क्लोराइड स्टोन को वो लोग मुगुनी पत्थर बोलते हैं। इतना सा इसका ब्यूटीफुल माधव विग्रह वह उसका जो कारीगरी है उसका जो शाइन है आई कांट टेल यू इट इज पर मी
(35:17) लुकिंग एट द विग्रह एंड लुकिंग एट दी टेंपल रिमेंस ऑफ द अर्लियर टेंपल व्हिच वास देयर उसका आमलका का पोर्शन उसका बेकी का पोर्शन उसका प्रभा का पोर्शन वो देख के मुझे जो लगा दे शुड बी एटलीस्ट अ सेकंड सेंचुरी रिमेन सेकंड सेंचुरी सी ईजीली वेरी ईजीली और उसका जो विग्रह है इट्स क्लियरली इंडिकेटिंग दैट गॉट इट। सो नाउ दिस इज़ वन आर्कियोलॉजिकल फैक्ट। आई टोल्ड यू अबाउट महेंद्रगिरी। अगर आप महेंद्रगिरी में देखेंगे कई सारे टेक्स्ट ऐसे हैं कई सारे स्कॉलर्स
(36:01) हिस्टोरियन आर्कियोलॉजिस्ट ऐसे भी है जिन्होंने बोला है धौलगिरी जो है भुवनेश्वर के बाहर दया नदी के ऊपर जहां पे हतिफ सॉरी जहां पे अशोक एंड रॉकेटिक भी है वो धौलगिरी देयर वास अ टाइम सबर वहां भी रहते थे तो कई कई सारे मान्यता यह भी है कि जो नीलमादव विग्रह था वह वहीं पर बसता था। कई सारे ओपिनियन है कि खुरदा के जंगल में थे। देयर इज अ स्ट्रांग करंट डे। करंट डे अंडरस्टैंडिंग इज कंटिलो नीला माधव इज़ दैट प्लेस। आई से नो कंटिलोर नीला माधव इज़ नॉट दैट प्लेस। आर्कियोलॉजिकली आई एम गेटिंग अ हिंट ऑफ अ डिफरेंट प्लेस
(36:47) व्हिच इज़ नॉट नीला माधव बट अ ललित माधव टेंपल। अ स्मॉलर लोकेशन व्हिच इज काइंड ऑफ लॉस्ट जहां पर कोई जाता ही नहीं है। आर्कियोलॉजिकल इंडिकेशंस जो मुझे मिल रहा है। मैं किसी की मान्यता में ठेस नहीं पहुंचाना चाहता हूं। मैं खुद नीला माधव मंदिर में जाता हूं साल में एक बार पूजा देने। वो मेरे कुल देवता है कंटेलर नीला माधव। पर मैं जो मेरे को जो आर्कियोलॉजिकली मिल रहा है मैं वह बोल रहा हूं। यह आपको आर्कलॉजिकली कैसे मिल रहा है? क्या बेसिक है? फील्ड स्टडी फील्ड स्टडी में फील्ड स्टडी में ये डॉट्स आप खुद कनेक्ट कर रहे हो मैं खुद
(37:25) ऐसा बाय स्टडिंग द अदर रिपोर्ट्स बाय स्टडिंग द अदर रिपोर्ट्स गॉट इट हालांकि कंटेल और नीलमाव जो है इफ यू लुक एट इट इट इज बिल्ट ऑन अ हिलॉक जिसको बोलते हैं ब्रह्मगिरी ब्रह्मद्री माउंट पर्वत ब्रह्मद्री नॉट ब्रह्मगिरी ब्रह्मद्री ब्रह्मद्री पर्वत बट वो इफ यू लुक एट दैट हिलॉक वहां पे अगर आर्कियोलॉजिकल एक्सकवेशन होगा आई एम डैम श्योर उसमें उसमें लेयर्स मिलेंगे। जैसे मदन मोहन मंदिर में मिलता है लेयर्स द्वादश टेला हम जब उसमें खनन हुआ उसमें जैन आर्टिफेक्ट्स भी निकले बुद्धिस्ट आर्टिफेक्ट्स भी निकले भगवत कल्ट का इं्रिप्शनंस भी निकला
(38:05) इंस्क्राइब्ड ब्रिक्स भी निकला हम जो एसआई का म्यूजियम में रखा हुआ है अभी तो यहां पे भी मिल सकता है हुआ नहीं वो अलग बात है और आज की डेट में आप कर नहीं सकते हो बिकॉज़ इट्स अ फुल फ्लेजेड टेंपल नाउ हम गॉट इट बट द डाइट इज़ वेरी ओल्ड सो एक मानताय ये है कि वह डाइटी विद्यापति आके वहां पर रख दिया था। नीला माधव का डाइटी। दैट इज़ आल्सो वन ऑफ़ दी दिस थिंग। सो लेजेंड्स ओरल ट्रेडिशंस वन हैंड स्क्रिप्चरल अ रेफरेंसेस आर अनदर थिंग। आर्कियोलॉजिकल फाइंडिंग्स आर अनदर थिंग। सो ये तीनों को आपको एक साथ-साथ रख के आपको एक अपना ओपिनियन फॉर्म करना होगा।
(38:46) राइट? राइट? अब मैं एक बार ना अब जैसे मैं आपको कह रहा था कि जो मुझे जितना जितना मैं अक्यूमुलेट कर रहा हूं आप मुझे थोड़ा सा वहां पर आप बताना कि कहां पर कितना चीज वो मैं क्लोजर टू द फैक्ट्स जा पा रहा हूं। कम्युनिटी है जिसके अंदर अलग-अलग ट्राइब्स हैं। हम उनमें से एक ट्राइब है जिसका नाम है सब्र। राइट? और भी ऐसी-ऐसी ट्राइब्स थी। तो पहले ये इसमें यहीं पर एक फॉलो अप सवाल ये है कि जो सब्र ट्राइब है इसको हम कौन से टाइम्स में देख सकते हैं? क्या रेफरेंस मिल सकता है? जो लास्ट लास्ट रेफरेंस मिला है फोर्थ सेंचुरी फिफ्थ सेंचुरी सीई।
(39:25) ओके? बिकॉज़ सबर को दो पार्ट में करेंगे। एक है जो नॉर्थ की तरफ रहते थे। एक है जो साउथ की तरफ रहते थे। राइट? जो साउथ की तरफ रहते थे उनको सेवड़ा या सोरोट भी बोलते हैं। जो नॉर्दन है वो उनको सबर बोलते हैं। इनका फिर से रेफरेंस सबर का रेफरेंस हमें बिलासपुर मध्य प्रदेश का बिलासपुर के जंगल में भी मिलता है। देयर आर मेनी स्कॉलर्स हु हैव सजेस्टेड दैट दी पॉसिबल नीला माधव लोकेशन वाज़ अह 40 कि.मी.
(39:58) फ्रॉम बिलासपुर इन जंगल्स ओके। दैट इज आल्सो अनदर ओपिनियन व्हिच कम्स अराउंड फ्रॉम द हिस्टोरियंस एंड आर्कियोलॉज तो हम ये कह रहे हैं कि फोर्थ सेंचुरी में जब एक कम्युनिटी उस वक्त भगवान जगन्नाथ महाप्रभु का नाम नहीं था उस वक्त नीलमाधव था राइट ओके सो और पुरुषोत्तम क्षेत्र भी था पुरुषोत्तम क्षेत्र भी था यस पुरुषोत्तम क्षेत्र था नीलाचल पर्वत था एंड वहां पे महाभारत में भी है उदास सॉरी सरलदास इसका उड़िया महाभारत में भी है। महाभारत में भी है। मेन महाभारत में जहां पे कृष्ण और अर्जुन दर्शन करने आते हैं। माधव विग्रह। एंड जो आज की जगन्नाथ मंदिर
(40:40) है वहां पे शिलालेख भी है। व्हिच क्लियरली सजेस्ट दैट द करंट जगन्नाथ टेंपल जो है वो तो 11 इट्स अ 12 सेंचुरी साइन। 1150 में उसका कंसक्रेशन हुआ था। हम बाद में बाकी पोर्शनंस बना। राइट? लेकिन उससे पहले भी एक साइट था वहां पे। हम जिसका रेफरेंस हमें मादरप्पाजी में भी मिलता है और वहां पे शिलालेख मिलता है। कॉपर प्लेट्स मिला है व्हिच इंडिकेट्स दैट दैट वाज़ अ फुल फ्लेजेड साइट वेयर माधव वरशिप वाज़ देयर एंड कृष्णा अर्जुन आके एक माउंट के ऊपर दिस इज आल्सो अ हिलॉक। प्लीज अंडरस्टैंड माउंट के ऊपर प्लेटफार्म के ऊपर माधव विग्रह का दर्शन किया है।
(41:22) वाओ अभी अ एक कुछ दिन पहले डॉक्टर मीनाक्षी जैन बोल रहे थे कि अ देयर इज अ प्लेस इन एमपी घोरघाट या सम प्लेस इन एमपी घोर जी से नाम है घोरघाट या क्या है जहां पे अर्लियस्ट फॉर्म ऑफ शक्ति वरशिप मिलता है। आर्कियोलॉजिस्ट एंड हिस्टोरियंस हैव डेली 9000 बीसी। शी इज़ अब्सोलुटली राइट। इट इज़ अ सिमिलर रेप्लिकेशन दैट यू सी फॉर जगन्नाथ। वहां पर पत्थर में पूजा होता था और वह प्लेटफॉर्म्स मिला है उनको आर्कियोलॉजिस्ट को एंड देयर इज नो मतलब मतभेद नहीं है आर्कियोलॉजिस्ट और हिस्टोरियंस के बीच जो नॉर्मली हुआ करता
(42:07) है। ओके। इसमें दे दे आर ऑफ़ द ओपिनियन दैट दिस अह प्लेटफार्म वाज़ यूज़्ड फॉर सम काइंड ऑफ़ रे इट हैड सम राइट अह रेलेवेंस सिग्निफिकेंट रेलेवेंस। और वहां के जो कम्युनिटीज़ हैं जो आदिवासी है, ट्राइबल कम्युनिटीज़ है वो आज भी शीला में माता का पूजा करती है। ओके। एंड इसका चरम इसका चरम निदर्शन हमें मिलता है 64 योगिनी कला पे। 64 योगिनी में एव्री योगिनी हैस इट्स रूट्स एस अ ग्राम देवी इन सम फॉर्म ऑफ द अदर ओके ओके तो जो आप बता रहे हो कि भगवान कृष्ण और अर्जुन जी आए थे जगन्नाथ पुरी तो
(42:53) आप कह रहे हो महाभारत के युद्ध से पहले वो जगन्नाथ पुरी दर्शन करने आए थे युद्ध के बाद युद्ध के बाद जीतने के बाद ओके ओके और तब उनको जो दर्शन हुए थे वो नील माधव के हुए थे नील माधव के हुए थे बिकॉज़ नील माधव वास द डीडी माधव अब वो नील था कि नहीं यह पता नहीं चल रहा है बट नील का मतलब क्या है नील माधव इज द कंबाइंड ट्रिटरी ऑफ जगन्नाथ बलभद्र सुभद्रा ओके नी मींस बलराम ल मींस सुभद्रा माधव इज माधव ओके ओके ऑलराइट और अभी जो आपने बताया कि फोर्थ सेंचुरी में जो कम्युनिटीज थी वो नील माधव को तो प्रे कर रही थी तो साइमलटेनियसली श्री पुरुषोत्तम को भी कर
(43:33) रही थी तो श्री पुरुषोत्तम कैसे आया श्री पुरुषोत्तम धाम में, श्री पुरुषोत्तम धाम में माधव वरशिप ऑलरेडी हो रहा था। हां। एंड देयर इज़ अ हाई पॉसिबिलिटी जो वो साइड बाद में और डेवलप होता गया। बिकॉज़ क्या है आपका मोनार्कीज़ क्या था वो थोड़ा देखना पड़ेगा। बिकॉज़ द मोनार्कीज़ दे लेट से द सोमवंशीज़ और द भौमक वे दे वर इनिशियली टू स्टार्ट विद दे वर शक्ति एंड शिवा शवाइट्स। हम लेटर ऑन द सोमवंशीज़ ट्रांसफॉर्म्ड इंटू वैष्णव। ओके राइट बट दे वर नेवर अगेंस्ट द वैष्णव थियोलॉजी ओके सो वहां पर उस कोने में चल रहा है एंड एंड लेट मी टेल यू दैट
(44:10) इज आल्सो अ शक्तिपीठ और अ सती पीठ विमला माता का पूजा होता था वो उस टाइम भी था तो यहां पे विमला माता के पूजा के संग संग माधव वरशिप भी हो रहा है वहां पे दिस इज वन वे ऑफ़ लुकिंग एट इट द अदर वे जब मैंने महेंद्रगिरी का बोला अब अगर महेंद्रगिरी का आप स्टडी करेंगे महेंद्रगिरी में एक ब्लू स्टोन को पूजा कर रहे हैं एक ब्लू स्टोन को पूजा कर रहे हैं। महेंद्रगिरी पर्वत। महेंद्रगिरी पर्वत। ठीक है? और यह ट्राइब्स ही कर रही थी। ट्राइब्स कर रहा था। नाउ जिस टाइम वो ट्राइब्स पूजा कर रहे हैं नील का उस शिला का ब्लू स्टोन का हिस्टोरियंस लिटरी
(44:50) एविडेंस इंडिकेट टू द फैक्ट दैट क्योंकि महेंद्रगिरी इस क्लोजर टू श्रीशैलम। हम तो वहां से शिवा वशिप जैसे लिंग का पूजा होता था। तो ये लोग भी उसी को रेप्लिकेट करना चालू कर दिए। लुकिंग एट द रेलेवेंस एंड सिग्निफिकेंस लेटर ऑन व्हेन द गंगाज़ ऑक्यूपाइड दैट एरिया एंड बिफोर द गंगाज़ द साइललाडोवास जो साउथ ईस्ट एशियन हिस्ट्री में शैलेंद्र डायनेस्टी है। दिस वाज़ एक्चुअली द साइललाडोवास हु माइग्रेटेड बाय सी सलाडोवा डायनेस्टी का यह कुल देवता थे नीला माधव एंड देयर आर सम दिस थिंग सेलडोवास व शवाइट वरशिपर्स दे वर आल्सो वरशिपिंग दैट ब्लू
(45:36) स्टोन जब गंगाज़ आए गंगाज़ ने उनका नाम डाल दिया उसी स्टोन का नाम डाल दिया गोकर्णेश्वर यह भी एक ओपिनियन है सो ऑल इन ऑल मैं जो आपको समझाने का कोशिश कर रहा हूं देयर हैज़ बीन अ ट्रांजिशन ट्राइबल गॉड ट्री वरशिप वहां से यह आकर मेन स्ट्रीम में मिल रहा है लेकिन एक वैदिक पास्ट भी है लोकल मोनारकीस भी डेवलप कर रहे हैं अपना-अपना फॉर्म्स। हम फिर बुद्धिस्ट भी आ रहे हैं पिक्चर में। हम जैन भी आ रहे हैं। हम तो हम एक मतलब एक घंटा दो घंटा इसको जाना बहुत मुश्किल है। आई एम जस्ट ट्राइंग टू गिव यू द वेरियस पर्सपेक्टिव ऑफ़ द श्री जगन्नाथ कल्चर।
(46:21) राइट? मतलब इसको अगर हम बेसिकली समझे कि अच्छा लास्ट जो रेफरेंस है वो हमें नीलम माधव का ही मिलता है। हम उससे पहले कोई कम्युनिटी कुछ और रीच करती थी। ऐसा कुछ रेफरेंस नहीं है। मैं बोला ना गोार्णेश्वर गोकारणेश्वर जो कि नील माधव से भी पहले था। नील माधव का मतलब नील माधव तो देखिए नील माधव का टाइमिंग डिफाइन करना बहुत मुश्किल है। बिकॉज़ दीज़ आर पुराणिक टेक्स्ट। कौन से टाइम से हो रहा है ऐसे डिफाइन करना बहुत मुश्किल है। बट आई हैव गिवन यू कि कहां से आ रहा है किस तरीके से आ रहा है। आर्कलॉजिकली मैं बोल रहा हूं। बट एंड गोकर्णेश्वर का भी मैंने बोला
(46:57) श्रीशैलम का रेस्पेक्ट में है ना? ओके। राइट। तो इसमें अब ये हम समझ रहे हैं उस टाइम पर हम बोल रहे हैं कि सबके जैसे कुल देवता होते हैं। ग्राम देवता होते हैं और राष्ट्र देवता होते हैं। तो जो राष्ट्र देवता थे जो मेन सेंटर थे वो थे शुरू से जगन्नाथ महाप्रभु। नो हां नो राष्ट्र देवता श्री जगन्नाथ या श्री पुरुषोत्तम बने जाके 12th सेंचुरी में जब इंपीरियल गंगा टूक ओवर कलिंगा ओके उन्होंने उनको राष्ट्र देवता बनाया था और उससे पहले फिर क्या था फिर माधव वरशिप और उन्होंने जैसे बाकी महानदी में चल रहा था कई जगह ललित माधव कई जगह नील माधव कई जगह राधा माधव
(47:40) ओके तो ये अच्छा ये डिस्टिंशन था पहले डिवाइडेड थे बेसिकली मतलब बेसिकली कई सारे जा रहे हैं। ललित माधव के मंदिर जा रहे हैं। कई जा रहे हैं राधा माधव के मंदिर। हां। तो फिर कोई नीला माधव का भी जा रहा है। कोई नील माधव का भी जा रहा है। और एंड पूरी मंदिर में पूरी मंदिर के अंदर एक नीला माधव मंदिर भी है जो आज का मंदिर है। हां नहीं लेकिन वो स्ट्रक्चर आज का नहीं है। ओके। वो स्ट्रक्चर भी कम से कम 400 500 साल पुराना है। ओके। बट टू टू एस्टैब्लिश द लिंकेज वो रखा गया है उधर पे नीला माधव। ओके। मंदिर में तो आप कह रहे हो कि पहले अलग-अलग ये तीन जगह प्रीच किया जा रहा था।
(48:16) फिर 12th सेंचुरी में एक राष्ट्र देवता को यूनिफिकेशन जो उड़ीसा का यूनिफिकेशन हुआ इट हैपेंड अंडर द इंपीरियल गंगाज़ अनंत वर्मन चोरा गंगा देव ने किया था। ओके फ्रॉम देयर यू सी अ मच मोर स्ट्रक्चरर्ड हिस्ट्री ऑफ़ उड़ीसा कमिंग आउट। उससे पहले भी है। सो मंशी ने लिंगराज मंदिर दिया। यति केसरी ने आपको भामाकरास ने आपको ओल्ड सिटी ऑफ भुवनेश्वर देखा जिसका एकाम्र क्षेत्र है। भुवनेश्वर का एक जो महत्व है बिंदु सागर जो है उसको गुप्त काशी बोला जाता है। ओके एकाम्र क्षेत्र इस फुल ऑफ शिवा टेंपल्स वहां पे जीपीआर लगाइए आपको और भी मंदिर मिट्टी के नीचे मिलेगा।
(48:54) हम गॉट इट गॉट इट। वहां पे योगिनी क्षेत्र भी पास में है। हम सो दैट इज व्हाई आई सेड कि महानदी का उस पार जो था वो शैवा शक्तिपीठ से ज्यादा था या पूजा ज्यादा होता था। इस तरफ आपका माधव वरशिप वाज़ मोर। ओके गॉट इट। तो 12थ सेंचुरी से पहले हम अभी के लिए इसको यहां पर रोकते हैं। 12थ सेंचुरी से पहले नील माधव, राधा माधव की वरशिप की जा रही थी। बट अब अगर पुरुषोत्तम क्षेत्र में देखेंगे माधव वरशिप एंड मोर सो मोर क्लोजली नीला माधव। ओके। ओ माधव वरशिप। ओके। गॉट इट। और ये जो आप बता रहे हो दिस इज़ स्पेसिफिकली पूरी। दिस इज स्पेसिफिकली पुरुषोत्तम क्षेत्र।
(49:31) पुरुषोत्तम क्षेत्र का मतलब पुरुषोत्तम क्षेत्र मींस दी एंटायर सरकम्फ्रेंस ऑफ द पुरुषोत्तम क्षेत्र कटिंग इनटू फोर कॉर्नर्स ऑफ अ पुरुषोत्तम क्षेत्र बीइंग द फोर वेपंस ऑफ श्री विष्णु पद्मा चक्र गधा एंड शंख शंख क्षेत्र इज़ पूरी गदा क्षेत्र इज़ जाजपुर अह पद्म क्षेत्र इज़ कोणार्क चक्र क्षेत्र इज भुवनेश्वर अच्छा तभी वो जो हमने स्टार्टिंग शुरू की थी कि जो भविष्य मालिका की मैंने जगहों का नाम लिया वो ये सारी ये ये रेलवें एक्चुअली ये इसी कोऑर्डिनेट से जुड़े हुए हैं। जाजपुर जाजपुर इज नॉट ओनली अ सती पीठ जहां
(50:18) पे मां का नाभि गिरा था महासती का वहां पे आप पंडदान भी कर सकते हैं। बट हिंदू माइथोलॉजी में या हिंदू पुराणों में जो वैतरण्य नदी का वर्णन मिलता है। हालांकि दैट्स अ कॉस्मिक और अ यू नो स्पिरिचुअल इट हैज़ गॉट अ स्पिरिचुअल रेलेवेंस बट फिजिकली वो नदी बैतरणी क्रॉस कर रहा है जाजपुर शहर को वहां का मंदिर के सामने से ही जा रहा है वो और जाजपुर का रेलेवेंस स्पिरिचुअली इतना हाई है कि वहां दैट वास द अर्लियस्ट कैपिटल ऑफ ओसा आल्सो वहां पे वराहा का भी पूजा बहुत होता है वराहा क्षेत्र भी है वो ओ आदि वराह, श्वेता वराह, लक्ष्मी वराह
(51:03) हम कल्पवराह चार फॉर्म्स है बड़ा का। गॉट इट गॉट इट। तो हमने अभी तक इसको यहां पर हम इसको इस बात को रख रहे हैं। 12 सेंचुरी से पहले पुरुषोत्तम के कोऑर्डिनेट्स ये जो जाजपुर जगह आपने बताई। यहां पर अलग-अलग पूजा हो। ये आदि आदि अनादि काल से है। पुरुषोत्तम क्षेत्र का ये जो चार कोऑर्डिनेट्स हैं ये वेदों में डिफाइंड है। पुराणों में डिफाइंड है। राइट। आदि अनाद तो यहां पर हम उस वक्त ये बोल रहे हैं कि अलग-अलग जो ट्राइब्स थी जो कम्युनिटीज थी कुछ नील माधव को पूज रही थी कुछ राधा माधव को पूज रही थी और 12th सेंचुरी में यून नहीं ट्राइब्स जो था
(51:40) ट्राइब्स किटुंग को पूज रहे थे किटुंग को किटुंग वृक्ष देवता किटुंग नीला माधव और किटुंग यही दोनों मिलता है सब जगह तो फिर राधा माधव को भी तो आप बोल रहे हैं वो मोनार्की ने पीपल हैड बिल्ड टेंपल्स फॉर देम द माधव वरशिप वास देयर थ्री फॉर्म्स ऑफ़ माधव वरशिप हैज़ बीन फाउंड बट जहां तक सबरो का या ट्राइबल वरशिप की बात है इट वास मोस्टली नीला माधव और इट वास वृक्ष देवता किडून ओके ओके तो आगे चलकर जो वो जो मोनार्क जो आए उन्होंने आगे जाकर जो वरशिप है वहां पर वो तीन में डिवाइड हो गया राधा राधा माधव लीला यू विल हैव टू गो मोर डीपर ये बहुत फैला
(52:19) हुआ सब्जेक्ट है एंड हिस्टोरियंस एंड आर्कलॉजिस्ट आर वेरी डिवाइडेड इन इन देयर ओपिनियंस ऑन दिस आई एम जस्ट ट्राइंग टू बट योर ओपिनियन इज़ दिस जो आपने दिया कि जो ट्राइब्स हैं वो उनको दिस इज़ माय ओपिनियन राइट दिस इज़ माय ओपिनियन गॉट किटोम एंड नीला माधव नील माधव राइट और आगे चलके जो मोनार्क आए 12 सेंचुरी से पहले उन्होंने डिवाइड की वरशिप को जिसमें नील माधव नहीं उन्होंने डिवाइड नहीं किया वरशिप को फिर उन्होंने वरशिप को डिवाइड नहीं किया वो तो शवाइट थे शक्ति के उपासक थे जैसे बाबा दे वर प्राइमरीली शक्ति वरशिपर्स जोस सोमव वंशी वो वर शवाइट्स प्राइमरी हु
(52:53) कन्व्टेड एट अ लेटर डेट और गव वैष्णविज्म इक्वलीेंस ओके बट दे नेवर स्प्लिटेड माधव वरशिप माधव वरशिप कब कहां कैसे ये तीनों फॉर्म ले लिया ये अब आज तक किसी ने इसको एक पुख्ता पिनपॉइंट नहीं कर पाया कि कैसे तीन में डिवाइड हुआ ये नहीं पता नहीं यू देयर इज नो देयर इज नो आर्कियोलॉजिकल एविडेंस और एपीग्राफिक एडवांस ऑन दिस बस हमें ये पता है कि नील माधव को पूजा जाता था राधा माधव को पूजा जाता था और अ थर्ड कौन? ललित माधव। ललित माधव को पूजा जाता था। हमें ये पता है। और 12th सेंचुरी में हम ये बता रहे हैं कि यूनिफिकेशन हो गया। जिसके बाद हम
(53:34) बोलते हैं जगन्नाथ आज भी यूनिफिकेशन नहीं हुआ। यूनिफिकेशन इज अ रॉन्ग टर्म। फिर आपको मैं ये बोल सकता हूं नील माधव मर्ज द कांसेप्ट ऑफ आई मीन सॉरी द कांसेप्ट ऑफ जगन्नाथ। बिकमिंग द स्टेट डाइटी। राष्ट्र देवता हैपेंड। दैट इज व्हाट हैपेंड। बट राधा माधव वरशिप आज भी होता है। नीला माधव वरशिप आज भी होता है। ललित माधव के मंदिर आज भी मिलते हैं। तो फिर उसकी जरूरत क्या थी? किसकी जरूरत थी? ये दे वांटेड टू यूनिफाई कलिंग फॉर मिलिट्री एंड पॉलिटिकल पर्पस। नहीं यूनिफाई वर्ड आप कह रहे हो नहीं बोलना ना। फिर वो क्या नहीं यूनिफाई पॉलिटिकली एंड मिलिट्रीली
(54:11) नॉट फ्रॉम अ स्पिरिचुअल पर्सेक्टिव। ओके। मिलिट्री एंड पॉलिटिकली इट वास मर्ज टुगेदर यूनिफाइड बाय द गंगास। एंड दे व मैनेजिंग वि सर्टन वैसा किंग्स बट आप स्पिरिचुअल जो है उसको उन्होंने कोई तोड़ा नहीं दे दे बिकम इंपीरियल गंगाज़ बिकम वरशिपर्स ऑफ विष्णु माधव एंड ऑल दैट बट यह भी सच है कि लंगुला नरसिम्हा देवा उनका प्रपोत या दो पीढ़ी बाद तीन पीढ़ी बाद अनंत चोरा गंगादेव के बाद उन्होंने सूर्य मंदिर का भी निर्माण किया क्योंकि उनका मान्यता यह था कि लिंगराज जैसे भव्य मंदिर है शिवा का। जगन्नाथ विष्णु हो गए। एक सूर्य मंदिर भी होना चाहिए। राइट? तो
(54:59) जगन्नाथ जो मंदिर है हमारा जो बना मंदिर बना जिसको आज हम पूजते हैं जो हम विग्रह को देखते हैं। वो विग्रह कब बना है? और जगन्नाथ पुरी जो नाम है जगन्नाथ महाप्रभु ये नाम नील माधव से यहां पर कैसे आया? फिर जो मंदिर है हां। आज जो स्ट्रक्चर को पूजा करते हैं। हां इट इज एन एवोल्यूशन फ्रॉम 12th सेंचुरी टू 14 सेंचुरी। ओके। ठीक है? हां। यहां तक आ गया। पार्ट्स पार्ट्स में बने हैं। हां। करेक्ट। ठीक है। क्लियर है? हम जहां तक सवाल है जगन्नाथ कब बने? जगन्नाथ बने 14वीं शताब्दी में। हम ठीक है। हम क्लियर? क्लियर। उससे पहले पुरुषोत्तम थे। हम हम
(55:43) जो अभी हमने बात करी करेक्ट। ठीक है। आठवीं शताब्दी में एस पर मदप्पा जी श्री शंकर इधर आए। बौद्धों ने उस साइट के ऊपर कब्जा कर रखा था। बौद्धों को तर्क युद्ध में हराया। पुन प्रतिष्ठा किया जगन्नाथ का जो आज का फॉर्म आप देखते हैं। ब्रह्मवस्तु वहां पर डाला सोनपुर से निकाल के जहां पे 14 44 साल 46 साल वो मिट्टी के नीचे गिरे हुए थे। ब्रह्मा वस्तु को नया कलेवर में स्थापित किया। मान्यता यही है एस पर मतलब जी दैट इज द फर्स्ट टाइम इन द फर्स्ट नवक कलेवर हैपेंड और वहां से पूरा मंदिर का जगन्नाथ महाप्रभु का जो पूजा अर्चन रीति
(56:30) नीति है उनका पूरा डिफाइन किया प्रोसेस। तो आज जो जगन्नाथ मंदिर में जो रीति नीति होता है उसका लार्ज एक्सटेंट कंट्रीब्यूशन ऑफ आदि शंकरा और उसी टाइम उन्होंने जगन्नाथ अष्टकम भी रचना किया। मुझे सनुस पुच्छ कटीते दुकुल नेते सहचर कटाक्ष विदते जगन्नाथ स्वामी नयन पगामी भवत में ब्यूटीफुल अहो दीनना नाथे नीत चरण निश्चिन मी जगन्नाथ स्वामी नयन पगामी भवतु बिकॉज़ शंकर आपको एक पॉइंट देखना पड़ेगा व्हाई दिस साइड इज सोेंट शंकर कालाडी से जहां पर वह जन्मे थे मां
(57:18) को छोड़ के आठ साल की उम्र में वह आते हैं ओमकारेश्वर। ओमकारेश्वर में गुरु के पास शिक्षा लेते हैं। फिर वह जाते हैं श्रृंगेरी। श्रृंगेरी में मठ प्रतिष्ठा करते हैं। और वहां से साउथ इंडिया से निकल के वो सबसे पहले कहां पहुंचते हैं? जगन्नाथ पुरी पहुंचते हैं। पुरुषोत्तम क्षेत्र पहुंचते हैं। जगन्नाथ पुरी नहीं बोलूंगा मैं। पुरुषोत्तम क्षेत्र पहुंचते हैं। और वहां पर प्रतिष्ठा करते गोवर्धन पीठ। करते हैं जगन्नाथ अष्टकम का रचना और श्री जगन्नाथ का पुनरुद्धार करते हैं। यह 12th सेंचुरी है फिर ए्थ सेंचुरी नहीं पर आपने कहा था ना कि 12th सेंचुरी
(57:53) में ही वो गंगाज ने किया ओके मिलिट्री एंड पॉलिटिकल यूनिफिकेशन डोंट ओके मिक्स अप ओके सो एथ सेंचुरी में आप कह रहे हो जो ब्रह्म पदार्थ को पहली बार जो आप कह रहे हो नवकलेश्वर हुआ नवकलेबर नवकलेबर हुआ एथ सेंचुरी में हुआ जब पहली बार ब्रह्म पदार्थ को यूज किया गया यस ऐसा कहेंगे हां और उसके बाद 12th सेंचुरी में फिर अच्छा आठ से ए सेंचुरी से 12 सेंचुरी के बीच में क्या हो रहा है माधव वरशिप चल रहा है सोमशी और भामाकरास के उस जमाने में ओके बट जगन्नाथ नाउ नाउ नाउ नो नो हियर आई विल स्टॉप यू हां आदि शंकर का डेट्स को लेके बड़ा प्रॉब्लम है
(58:32) ओके ओके एस पर एपीग्राफिक एविडेंसेस अवेलेबल विथ द शंकराचार्य मट्स हम ही शुड हैव बीन डेटेड एस सेवंथ सेंचुरी बी सीई मैं इसीलिए बोल रहा हूं बहुत कॉम्प्लेक्स है या तो सर देखो एक बात खोलते हैं वो बात और खोल देते हैं वो और [हंसी] ठीक है और मादला पाजी सेज़ एथ सेंचुरी सी क्योंकि अब एथ सेंचुरी से ही सेंस बनेगा जिस बात से हम हैं वहां पे हर कोई रिलेट करेगा एथ सेंचुरी सी अब सेवंथ का आएगा तो और एथ सेंचुरी सी नाइंथ सेंचुरी सी इज द सेम टाइम व्हेन रक्तबाहु अटैक्स जगन्नाथ टेंपल एंड एस पर दी सांझीन कॉपर प्लेट्स इट इट इज़ राष्ट्रकता किंग गोविंदा थ्री
(59:13) दैट वास द फर्स्ट इन्वेज ऑफ़ जगन्नाथ टेंपल ओके इफ आई टेक दी कॉपर प्लेट्स सन इन कॉपर प्लेट्स इं्रिप्शन वो समुंदर के रास्ते आए थे कई लोग बोलते हैं कि वो यवन थे ग हाउ डू आई प्रूव इट अपर प्लेट से ही इज़ द राष्ट्रपिता किंग गोविंद थ्री स्पेसिफिकली नाम दिया हुआ है ओके बट रेफरेंस से रेफरेंस से हम ये मान लेंगे कि जो पहली बार वर्ड कॉइन होता है कि जगन्नाथ महाप्रभु तो वो दैट इज 14 सेंचुरी वो 14 सेंचुरी है वो वो उसमें कोई उसमें कोई डाउट नहीं दौराई नहीं है शक की दौराई नहीं है बट जो 188 सेंचुरी में ब्रह्म पदार्थ आप कह रहे हो कि वो तो वो जो लोकेशन है वो
(59:53) लोकेशन का कुछ सोनपुर सोनपुर ओके सोनपुर पहाड़ों के ऊपर गुफा में गुफा के अंदर आज भी वो साइट है आज भी वहां पर रथ यात्रा होता है आज भी वहां पे एक छोटा सा मंदिर बना हुआ है और उसका पिक्चर भी नेट पे अवेलेबल है सोनपुर में राइट तो मतलब जो विग्रह हम देखते हैं आज वो वहीं पर ही पहली बार उसका विग्रह जहां तक है बहुत अच्छा सवाल है ये विग्रह जो आदि शंकर को मिला था और जो विग्रह आज हम देखते हैं जो फॉर्म बलभद्र सुभद्रा जगन्नाथ महाप्रभु एंड श्री सुदर्शन सामने भूदेवी और सुदेवी है ना हम ये फॉर्म आदि शंकर ने दिया था ओके दिस बट अगर कई सारे आप उड़िया पटचित्र
(1:00:34) देखेंगे जो स्कंद पुराण से प्रेरित है उसमें आप देखेंगे ब्रह्मा और महाराज इंद्रदेव यज्ञ कर रहे हैं। हम हवन कुंड है। हवन कुंड के सबसे ऊपर बैठे हैं श्री जगन्नाथ। उनके पीछे बैठे हैं। साइड में नहीं उनके पीछे यहां यहां पर बैठे हैं सुभद्रा मैया और उनके ऊपर है सबसे ऊपर बलराम। बिकॉज़ बलराम है गुरु तत्व। ओ भगवत पुराण अगर देखेंगे आप अगर भगवत पुराण में कृष्णा इस द परम पुरुष पुरुषोत्तम। ही इज द पुरुषोत्तम कृष्णा देवकी पुत्र कृष्णा चाहे किसी भी नाम से बोलो श्री पुरुषोत्तम सुप्रीम गॉड हेड आई इन द लैंग्वेज ऑफ़ इज कॉल्ड सुप्रीम गॉड हेड ओके लेट मी पुट इट
(1:01:18) लाइक दैट तो पुरुषोत्तम है पुरुषोत्तम से दो ब्रांच निकल रहा है एक ब्रांच है संकर्षण या संकर्षण दूसरा ब्रांच है वासुदेव संकर्षण से निकलता है सदाशिव शिव क्या बात सदा शिव से निकलते हैं शिव जिसको हम पूजा करते हैं इज द शिव द शिवा जो ऋषि मुनि जिसका तप करते हैं शिवा शवा जिसका तप करते हैं दे डू इट टू अटेन द सदाशिव और सदाशिव के ऊपर है बलराम संकर्षण इधर आ जाते हैं वासुदेव वासुदेव से
(1:02:05) अनिरुद्ध अनिरुद्ध से सॉरी वासुदेव से प्रद्युम्न प्रद्युम्न से अनिरुद्ध अनिरुद्ध से वज्रनाभ ऊपर पुरुषोत्तम द भगवत तत्व भगवत कल्ट जिसका पूजा होता था ब्रज में संकर्षण वासुदेव प्रद्युम्न अनिरुद्ध ब्रजणव पंच महावीर जिनका पूजा होता था ब्रज में पंच महावीरास इनके बीच आता है एकनामसा जिनको विष्णु धर्मोत्तर पुराण के मुताबिक एकनामसा इज
(1:02:51) सुभद्रा अ मैनिफेस्टेशन ऑफ भुवनेश्वरी जिसका लिंकेज है एक पता भैरव से कुछ हद तक नाउ यह जो पंच महावीरा है पंच महावीर है या भगवत कल्ट है ये सब ब्रज से निकला है इसलिए टू स्टडी द ब्रजभूमि इज वेरीेंट ओके ओके तो कभी हम जगन्नाथ सीरीज खत्म करेंगे तो हम ब्रजभूमि को डिस्कस करना पड़ेगा तो ये जो आप विग्रह बता रहे हैं एथ सेंचुरी में जो आप बता रहे हैं जो हमें रेफरेंस मिलता है वो ये इस इस विग्रह का रेफरेंस मिलता है? नहीं
(1:03:34) जिसमें आप बता रहे हैं कि ऊपर हां वो स्कंद पुराण में मिलता है। स्कंद पुराण उत्कल पर्व में और कौन सी ईयर की बात है ये? ये तो ये तो आदिआदि अनादि काल से चला आ रहा है। ये तो आपका आदि शंकर ने ये फॉर्म दिया। करंट फॉर्म जो मिलता है आपको और लेकिन वो जो फॉर्म है वो तो स्मृति और श्रुति के हिसाब से चला आ रहा है। जो स्कंद पुराण में ऑलरेडी मिल रहा है आपको। राइट? ठीक है? और आदि शंकर आदि शंकराचार्य ने कब फॉर्म दिया ए सेंचुरी एस पर मतलब पाजी ए सेंचुरी और जो सेंचुरी में आपने बताया जगह क्या थी सोनपुर सोनपुर तो सोनपुर से फिर जो आज जग
(1:04:11) उसको उसको बोलते हैं पाताली श्री क्षेत्र ओके ये पुरुषोत्तम क्षेत्र इस अनदर नेम इज श्री क्षेत्र हम पाताली श्री क्षेत्र पाताली श्री क्षेत्र क्यों क्योंकि पाताल के अंदर थे वो पाताल के अंदर थे पाताल मिट्टी के नीचे थे गार के रखे थे ना हां वही तो खोद के शंकर ने निकाला। उन्होंने ऐसे योग बल में उन्होंने देखा कि वहां पे है। वहां पे जाके खोद के निकाला। ये जो कुरुक्षेत्र में ज्योतिष सर है जहां पे गीता का वाणी हुआ था। किसने हमें दिया है? आदि शंकर ने दिया है अपना योगिक क्रिया से। आओ आओ। मतलब आदि शंकराचार्य जी वहां पर थे। उनको
(1:04:48) एनर्जी वो सदा शिव थे। राइट। वो स्वयं सदाशिव थे। राइट राइट। साक्षात भगवान शंकरा नहीं तो आप सोचिए वो इंसान 32 साल का उम्र में एक आठ साल का लड़का घूम रहा है इधर से उधर भारत का कोनेकोने में जाके उद्धार कर रहा है एक-एक क्षेत्रों का एक-एक तीर्थों का और उस इंसान ने आम जनता के मन में हृदय में भक्ति जगाने के लिए क्या-क्या रचना चना किया जगन्नाथ अष्टकम महषासुर मर्दिनी अगिरी नंदिनी गोविंदाष्टकम भुजे सख्य वेनु जो मैंने बोला जगन्नाथ
(1:05:34) अष्टकम का जगन्नाथ मंदिर के अंदर एक कल्पवट है जो कालापहर ने जला दिया था। अभी जो कल्पवट है वह उसका सैपलिंग से निकला हुआ है। तो कल्पवट में कल्पवट का जो रेफरेंस हमें मिलता है वो मार्कंडेय पुराण में मिलता है। मार्केंडे महर्षि मार्कंडे आठवां चिरंजीवी महर्षि मार्कंडे जो कई लोग बोलते हैं ओम खरेश्वर कई लोग बोलते हैं श्रीशैलम बट एक्चुअली द यू नो दी द दी शिवलिंग व्हिच ही ऐसे किया था जहां से शिव निकले थे वो मार्कंडेय सरोवर में रखा हुआ है बीच में से फटा हुआ है ऐसे बम फूटता है जैसे फट जाता है ना
(1:06:19) ऐसे करक्ट ओपन है मार्कंडेय मुनि जो थे वो आके यहां पे तप किए थे। उन्होंने जगन्नाथ को या नारायण को बाल रूप में यहां पे दर्शन किया था। बट अब बट के पीपल का इसके ऊपर पत्ते के ऊपर एक बालक का रूप में महालक्ष्मी का आदेश में जब प्रलय हो रहा था। इसीलिए शंकराचार्य ने जग वो गोविंदाष्टकम में जब वो जिसको यशराज जी का वो फेमस भजन है पार्ट ऑफ गोविंदाष्टकम बटस पत्रस पुट सयानम बालम मुकुंदम मनसा
(1:07:05) स्वरामि बटस पत्रस पुट सयानम बट पत्र के ऊपर बच्चा बच्चा सोया हुआ है अपना टांग ऐसे टांग का उंगली डाल के ऐसे मुंह में खा रहा है। दैट इज नारायण आदि पुरुष जिनका मुंह में पूरा ब्रह्मांड समा जाता है। ये डिस्क्रिप्शन है। ब्यूटीफुल ब्यूटीफुल ब्यूटीफुल। सो उसको हम यही ले रहे हैं कि आदि शंकराचार्य ने एथ सेंचुरी में वो जो ब्रह्म पदार्थ है वो खुद महसूस किया और मिट्टी से उसको उनको ऊपर उजागर किया। ब्रह्म पदार्थ को कैसे हैंडल करना है, क्या करना है, वो सब वो लिख के गए हैं। आज जो जगन्नाथ मंदिर का रीति नीति चल रहा है, रथ यात्रा का नीति नीति इतने सारे उत्सव
(1:07:46) का रीति नीति है, वो सब शंकरा करके गए हैं। और वो बाद में बाद में कुछ हद तक रामानुजाचार्य ने किया है। इसलिए अब कलश के ऊपर रामानुजाचार्य का तिलक देखेंगे। रामानुज तिलक देखेंगे। ओके। चैतन्य महाप्रभु गुरु नानक कबीर रामानंद किसी ने छेड़खानी कोई नहीं किया रीति नीति के ऊपर जो आदि शंकराचार्य जी ने दी उस थोड़ा बहुत रामानुजाचार्य ने किया था इसलिए वो कुछ डला हुआ है रामानुज तिलक दैट्स इट राइट राइट विग्रह एथ सेंचुरी में बन गया था 14 सेंचुरी में मंदिर बना जहां पर वो विग्रह को रखा मंदिर बना 12वीं शताब्दी में मंदिर तो पहले भी था बट जहां पर
(1:08:25) जो 12वीं शताब्दी का मंदिर बना है इट इज़ इज़ ऑन द सेम साइड वेयर दी एथ एंड नाइन सेंचुरी टेंपल्स वर देयर। ओके। और उसका शिलालेख मिलता है। उसका एपग्राफिक एविडेंस है। कॉपर प्लेट मिला है उसका। ओके। ओके। सोनपुर से जो विग्रह था उसको आज जहां पर मंदिर है वहां पे रख दिया गया। ये बोल सकते हैं। बिल्कुल। मतलब एस पर माता पाजी यस यू कैन इनफ। और ये फिर हुआ 12्थ सेंचुरी में। मतलब फिर इसको ये बोल सकते हैं कौन सा 12थ सेंचुरी में हुआ? ए सेंचुरी में जो विग्रह था आदि शंकराचार्य जी ने जो आदि शंकर ने मंदिर में ले आकर इसी साइट में लाकर रख दिया था
(1:09:03) उसको ए सेंचुरी में हां ओके उन्होंने एस पर मदला पाजी दैट इज व्हाट इट इज सेइंग सो व्हाट आई एम ट्राइंग टू से यू कैन नॉट कनफर एवरीथिंग एज इज फ्रॉम मदला पाजी उसको एज इट इज़ रेप्लिकेट करके आर्कलॉजिकली आप बैठा नहीं सकते हो कुछ चीज़ डजंट मी वो तो सभी के लिए नहीं हो पाएगा ना वो तो किसी के लिए भी नहीं हो पाएगा किसी के लिए हां सो दैट इज व्हाई आई एम सेइंग दैट आर्कियोलॉजिकली क्या है मैंने आपको बताया राइट दैट आर्कियोलॉजिकली दैट साइड एकिस्टेड फ्रॉम सिक्स्थ सेंचुरी भामकारक वहां पे मां का पूजा कर रहे थे माधव वरशिप भी चालू था वहां पे
(1:09:36) माधव वास नॉट द प्राइम डीटी द मदर वाज़ द प्राइम ड्यूटी फिर आया सोमवंशी जिसके टाइम पे माधव वरशिप और थोड़ा आगे बढ़ा एंड माधव वरशिप अस्यूम्ड अ ग्रेटर फॉर्म एंड देन केम इन 11थ सेंचुरी सॉरी 12थ सेंचुरी द इंपीरियल गंगाज़ हु मेड एवरीथिंग चेंज्ड राइट राइट राइट साइटिंग हो गई ये सेंचुरी में फिर 12 सेंचुरी जैसे हर एक मोनार्की का कुल देवता होता है उसी के हिसाब से उसको जैसे चोलास द दे दे मेड द गंगाईकोंडा चोलापुरम द बृहदेश्वर इतना बड़ा शिवलिंग बना दिया इट इज अ सिमिलर थिंग 12 सेंचुरी में हम ये बोल रहे हैं कि मंदिर बन गया पर पहले से जो विग्रह था
(1:10:11) वहां पर था तो आज एक अंडरस्टैंडिंग ये भी है जैसे आप जगन्नाथ मंदिर में 22 से एंट्री करोगे लेफ्ट हैंड साइड में आप जाओगे तो एक सत्यनारायण सत्यनारायण मंदिर मिलता है ओके शिलालेख के हिसाब से मेनी हिस्टोरियंस हैव अह इंडिकेटेड दैट दिस सत्यनारायण विग्रह कुड हैव बीन द ओरिजिनल माधव विग्रह व्हिच वाज़ देयर इन दैट साइट बिफोर दिस करंट टेंपल केम अप। और इसीलिए करंट टेंपल के बाजू में एक आदि नरसिम्हा मंदिर है। इस नरसिंह मंदिर में काफी सारे इं्रिप्शंस हैं। आज भी दैट वास द साइट व्हाट दिस माधव विग्रह वास
(1:10:56) देयर। लेटर द माधव विग्रह मूव्ड आउट। इट बिकम अ आदि नर्स इट्स अ इट बिकम अ नर्सिंग टेंपल। अ स्मॉलर वन एंड द मेन टेंपल केम अप। इंटरेस्टिंग इट्स वेरी कॉम्प्लेक्स एट टाइम्स जगन्नाथ पुरी के ट्रेजर के बारे में क्या पता चलता है? कितना ट्रेजर था जब बार-बार ये आ रहे हैं तो कुछ तो होगा मंदिर में तभी आ रहे हैं लूटने आ रहे हैं। बिल्कुल मैं आपको दो तीन एग्जांपल दे देता हूं। तो आपको ट्रेजरी का हिस्ट्री में जो लिखा गया है जो प्रूफ मिला है जिसका एपग्राफिक प्रूफ भी है आर्कियोलॉजिकल प्रूफ भी है। गजपति प्रताप रुद्र देव सॉरी नॉट गजपति प्रताप रुद्रदेव गजपति
(1:11:40) कपिलेंद्र देव रुद्रे कपिलेंद्र देव यूज्ड व्हेन ही डिफिटेड और केम बैक विक्टोरियस फ्रॉम ह सादर्न इंडिया कैंपेन हम 16 हाथी में भर के सोने सोना दाना हीरे जहरात सब लेके आए थे 16 हाथी 16 एिफेंट लोड्स और वो पूरा लाके डिपॉजिट किया जगन्नाथ मंदिर का रत्न भंडार में और उन्होंने अपने जो ट्रेजरी के मालिक होता है आई एम फॉरगेटिंग द टेक्निकल नेम उनको बोला आप यहां से महाप्रभु के लिए गहने बनाओ। तब इन्होंने
(1:12:27) महाप्रभु का सोने का हाथ, पैर, कवच, शंख यह सब बनाए। और जिनको पहली बार जब कपिल देव राउत के टाइम पर लगाया गया रथ यात्रा के टाइम एकादशी के दिन लगाया गया था उसी से जो करंट फेस्टिवल में अभी जो आप रथ यात्रा देखते हैं उसमें एक दिन एकादशी के दिन सुनावेश होता है महाप्रभु का जब सोने का अटायर में वो होते हैं उनका हाथ पैर भी होता है उसमें शस्त्र भी होते हैं तो यह कपिल देव राउत का टाइम से बना हुआ है और वह सब उस जमाने के 600 साल 700 साल पुराना सोना है आप उनको सामने से देखेंगे तो आपका दिमाग हिल जाएगा। बहुत भीड़ होता है उस देखने के लिए।
(1:13:11) यू कैन अंडरस्टैंड द डिफरेंस ऑफ टुडेेस गोल्ड एंड दैट टाइम्स गोल्ड क्वालिटेटिवली। हम् एक यह होता है। दूसरा एक हमें यह भी मिलता है कोणार्क मंदिर का जो निर्माता है गजपति सॉरी नॉट गजपति लंगुला नरसिम्हा देवा और नरसिम्हा वन लंगुला नरसिम्हा देवा अ जो बंगाल के सुल्तान थे अफगान सुल्तान उसको हरा के फोर एिफेंट लोड्स ऑफ सोना दाना गहना हीरे जरात लेके आए थे जो श्री मंदिर का ट्रेजरी में डाला और उसको पूरा पूरा यूटिलाइज किया था कोणार्क को बनाने के लिए। कोणार्क का कंस्ट्रक्शन था अब चालू हो गया था बट कोनार्क फंड्स तो चाहिए
(1:13:57) था तो उसमें पूरा यूटिलाइज हुआ कोणार्क को बनाने में। एक आई थिंक गजपति रामचंद्र देव जो भोई डायनेस्टी के थे उन्होंने 1000 राम टंका बनाया था। 1000 का राम टंका राम टंका व्हाट इज दैट राम का मार्किंग किया हुआ सोने का कॉइंस ओके ओके लूट लूट तो हुआ अंग्रेजों ने भी लूटा तो अंग्रेजों ने लूटा नहीं उसका कुछ ये नहीं मिलता अंग्रेजों ने लूटा नहीं बाकी तो पहले इस्लामिस्ट ने लूटा है तो उनमें से अ एक पीस आज भी अवेलेबल है। एंड इफ यू लुक
(1:14:47) एट दैट इट इज अनइमिनेबल। कुछ ऐसे भी हीरे जहरात मिलता है जो अब 1978 में तिरुपति से एक स्वर्णकार को बुलाया गया था। ही रिफ्यूज्ड और ही एक्सप्रेस्ड ह रबिलिटी कि मुझसे नहीं होगा। बिकॉज़ ऐसे सोना दाना और हीरे पर्टिकुलरली द डायमंड्स। आई हैव नॉट सीन इन माय लाइफ? हाउ विल आई डू द वैल्यू्यूएशन। इसका मूल्यांकन कैसे करूं? मुझे ही समझ में नहीं आ रहा है यह कौन सा हीरा है। धरती के नीले [हंसी] एक्सजेक्टली एक्सजेक्टली दैट्स द पॉइंट। सीरियसली सीरियसली सीरियसली यू हैव दैट काइंड ऑफ ज्वेल्स आल्सो टुडे। गरुड़ पुराण अगर आप देखेंगे गरुड़ पुराण
(1:15:33) में यह जो नवरत्न का जो अशोक का नवरत्न चंद्रगुप्त मौर्य का नवरत्न अशोका का राजा विक्रमादित्य का नवरत्न अकबर का नवरत्न ये नवरत्न टर्म आता कहां से है यह आता है गरुड़ पुराण से गरुड़ पुराण में नौ रत्नों को डिफाइन किया है नवरत्न बोल के तो व्हिच आर द मेन वंस इसमें में हमारे जगन्नाथ मंदिर का रत्न भंडार में जो रिपोर्ट्स मिलता है ऐसेसे रत्न मिला है जो नवरत्नों में क्लासिफाई ही नहीं किया जा सकता है। मैं इससे ज्यादा और कुछ नहीं बोलूंगा। इट्स अ वेरी सेंसिटिव टॉपिक। आई थिंक वैल्यू में तो जो जगन्नाथ पुरी का
(1:16:20) ये जो ट्रेजरी है ये तो बिलियंस ऑफ डॉलर्स होगा। बिकॉज़ अगर एक अ 19 68 में एक वैल्यू्यूएशन आया था। इफ आई करेक्टली रिमेंबर 78 से पहले 66 से 68 के बीच में दे ट्राइड टू एस्टीिमेट इट इट्स देयर ऑन द इंटरनेट आल्सो दे ट्राइड टू एस्टीिमेट इट दे पुट इट एट 63000 करोड़ बट इवन देन टेकिंग इंटू अकाउंट मेनी ऑफ़ द ज्वेल्स कुडंट बी इवैल्यूएटेड एट ऑल जगन्नाथ मैं आपको एक घटना बताता हूं। एक दो और भी पिछले पडकास्ट में मैंने बताया है। आई डोंट नो इफ समबडी हैज़ हर्ड इट ऑ नॉट। जब
(1:17:04) 1978 में अभी तो जो काउंटिंग खत्म हुआ है 46 इयर्स बाद हुआ है। 46 साल बाद हम तो 1978 में लास्ट टाइम हुआ था उसमें जो स्वर्णकार आया था जिसके जिक्र मैंने अभी-अभी किया। हम हम उन्होंने जो चीता था चीता जो यहां पे पहनते हैं हम सर तीनों का उसमें चीता है तीनों विग्रह में वो बोल रहे थे कि इस चीता में ऐसे हीरे हैं जो मैंने कभी नहीं देखा और यह चीता में इतना तेज है कि कोई आम इंसान इसको पहने तो वो पिघल जाएगा। तो महाप्रभु कैसे पहन के रखा हुआ है? वो तो परबह्म है। तो आप सोचिए उन हीरे जो उन हीरों में क्या तेज है हम
(1:17:50) इतने पावरफुल है। ये भी कहीं पर मैंने सुना कि जगन्नाथ पुरी मंदिर के अंदर कुछ टेंपल कोड्स हैं जो कि मंदिर में छुपे हैं और हर कोई उसे नहीं देख सकता। क्या ये सत्य है? सारे मंदिर सब दर्शनार्थी एक्सेस कर सकते हैं। मैंने ऐसा कोई मंदिर नहीं है जो एक्सेसबल नहीं है और क्लोज टू दी पब्लिक। पॉइंट नंबर वन। पॉइंट नंबर टू जो आनंद बाजार है जहां पर महाप्रसाद भेजा जाता है। उसके बिल्कुल पीछे नॉर्थ गेट के ऊपर जगन्नाथ महाप्रभु के जो गुरु है ईशानेश्वर
(1:18:36) महादेव उनका मंदिर है। दैट इज अ गुड 35 टू 40 फीट अंडरग्राउंड हम 35 टू 40 फीट अंडर ग्राउंड हम नाउ इफ यू आस्क मी आर्कियोलॉजिकली व्हेन आई वेंट देयर और व्हनेवर आई हैव गॉन देयर आई हैव अ फीलिंग लुकिंग एट दी वे इट हैज़ बीन कंस्ट्रक्टेड कि मंदिर का जो नॉर्मल फ्लोर है जहां पर हम लोग घूमते हैं दर्शनार्थी घूमते हैं हो सकता है नीचे हो सकता है और भी कंपार्टमेंट्स हो ईशानेश्वर महादेव को देख के मुझे लगा है यह चीज कुड बी सेकंडली आपका जो विमान है गर्भगृह है उसके
(1:19:23) ऊपर दो फ्लोर और है उसके ऊपर दो फ्लोर और है उसमें इं्रिप्शंस भी है गजपति वीर किशोर देव का और उन फ्लोर्स को लेकिन आप एक्सेस ऑबियस इसलिए नहीं कर सकते हो। इट्स ओनली एसआई हु कैन एक्सेस देम फॉर मेंटेनेंस कंजर्वेशन एक्सट्रा बट है। आई एम नॉट श्योर इफ समबडी नोस इट बट वेरी वेरीरी फ्यू पीपल नो अबाउट इट। देयर आर टू फ्लोर्स। फ्लोर्स में क्या है? कुछ नहीं है। दो वर मेड एक एक में तो इं्रिप्शन है और एक तो नॉर्मल कॉरबेलिंग है एंड वहां पर गणेश का एक आई थिंक विग्रह है। आई थिंक सो इफ आई करेक्टली रिमेंबर अभी तो ज्यादा कुछ नहीं
(1:20:10) है। एंड इट इज नॉट क्लियर व्हाई दे वर मेड आल्सो क्योंकि यू कांट रीच देम। कोई सीडीवीडी कुछ है नहीं। फर्स्ट फ्लोर तक जा सकते हैं। सेकंड फ्लोर में जाने का कोई सीडीवी नहीं है। अच्छा पिछले एपिसोड में आपने एक बात कही थी और काफी लोग शॉक्ड हो गए थे। आपने जाते-जाते आप बहुत सारी चीजें छोड़ के चले गए थे। आपने कहा था कि सोमनाथ मंदिर है उस पर हमला हुआ था हम और वहां पर उस मंदिर को बार-बार उस पर हमला हुआ हम पर जगन्नाथ पुरी का जो मंदिर है हम वो भी बहुत महान है। वहां पर हमला हुआ पर वहां पर एक हिडन आर्मी थी। हम हम कौन है? कहां से आई और क्या कर रही थी? सब
(1:20:52) बताइए। उससे पहले मैं आपको और एक रोचक कहानी बताता हूं। कहानी नहीं इतिहास ऐसा इतिहास जो सुनके आपका रोंगटे खरे हो जाएंगे। लव इट। एक अगर मैं बोलूं महारानी झांसी या ऐसे बोलूं कि 18 57 का जो सिपाही म्यूटनी था हम उसमें जगन्नाथ मंदिर के सेवायत इनवॉल्व था। जो अंग्रेजों के खिलाफ लड़े खूब मारा अंग्रेजों को और पूरा पूरा अपना हम कंट्रीब्यूशन रखा कैसा लगेगा सुन के शॉकिंग है ना जगन्नाथ मंदिर इन्वॉल्व्ड इन सिपाही मूटिनी
(1:21:38) हुआ यूं मनु जो रानी झांसी के पूर्व नाम था रानी लक्ष्मीबाई हम मनु का जो कुलगुरु थे वो थे चाकी खुंटिया हम अ सर्वेटर और अ सिवायत और श्री जगन्नाथ टेंपल चाकी खुंटिया ये नाम ऑब्वियसली उड़ीसा के अंदर बहुत फेमस है उनका स्टचूस भी है ये है उनका घर भी है उनका जो वंशज है वो मेरे परम मित्र भी है उनका नाम है हजूरी नीलकंता कुंठिया वो घर भी है जहां पर वो रहते थे लोग जाते नहीं देखने के लिए मैं मैं यह मैसेज जरूर देना चाहूंगा अगली बार आप पूरी जा रहे तो चाकी कुंटिया का घर दर्शन करके आइए। वो एक तीर्थ से कुछ कम नहीं है।
(1:22:22) ओके। अब जब मैं उनका कहानी बताऊंगा तो आपको समझ में आएगा। राइट? नाउ चाकी खुंटिया जो थे एक तरफ से वो एक रेसलर थे। चैंपियन रेसलर बॉडी बिल्डर, मास्टर सोड्समैन। बेहतरीन घुड़सवार घुड़सवारी आता था। यजुत्सू मालूम था हम और महान पंडित थे। आठ भाषा आती थी उनको। उस जमाने में और यह होते थे कुलगुरु मनुका तो इनका इसलिए पूरी से बनारस या काशी में आवागमन लगा रहता था और मनु का विवाह के पश्चात भी उनका नाता टूटा नहीं। वो मनुका ससुराल में भी जाते थे झांसी में
(1:23:09) और मनु का जो बैटल स्ट्रेटजी रानी लक्ष्मीबाई का जो बैटल स्ट्रेटजी था उसमें चाकी खुंटिया का बहुत बड़ा रोल था जो बैटल फॉरेशंस जो बैटल स्ट्रेटजी जो अटैकिंग अटैक एंड फॉल बैकक ये सब जो मिलिट्री स्ट्रेटजी था इसमें चाकी कुंटिया का बहुत बड़ा रोल रहा था और इसीलिए इतना उनका उनका प्रभाव था। इतना वर्चस्व था रानी झांसी का जिंदगी में। उन्होंने चाकी कुंटिया को 3000 घोड़सवार का नेतृत्व करने के लिए दिया। सोचिए 3000 घोड़सवार उसके अंडर में अंग्रेजों के ऊपर दावा बोलने के लिए यह लड़ते हैं। चाकी कुंटिया महारानी
(1:23:55) लक्ष्मीबाई नाना साहेब सातिया टोपे अ इन सबके साथ ये लड़ते हैं और पकड़ा जाते हैं। पर जैसे बाकी लोगों को फांसी या गोली मार दिया तोपों के साथ बंध के बांध के उड़ा दिया। इनके साथ यह ऐसा नहीं होता है। बिकॉज़ ही इस द पुरोहित ऑफ जगन्नाथ मंदिर। देयर इज अ बिग रिलीजियस सेंटीमेंट अटैच्ड। अंग्रेज इस चीज को भली-भांति चालू थे वो लोग बहुत तो उन्होंने क्या किया? इसको कारागार में इनको डाल दिया। काफी लंबा अरसा कारागार में बिता। मेरे ख्याल से 10 साल के करीब कारागार में बिताए। फिर जैसे वो छूटे कारागार से। वापस मंदिर आकर मंदिर का सेवा
(1:24:37) में नियोजित कर दिया अपने आप को और काफी सारा लिटरेचर पर उन्होंने उनका काफी कंट्रीब्यूशन रहा। मेरे ख्याल से 30 से ऊपर किताब उन्होंने लिखा। फिर उमर के समस वो ही हैड अ नेचुरल डेथ। बट यह है मिलिट्री ट्रेडिशन उस मंदिर का। और यह मिलिट्री ट्रेडिशन बिकॉज़ यह मुझे बताना इसलिए जरूरी था क्योंकि वह ट्रेडिशन आज भी है। वो ट्रेडिशन आज भी है और वो ट्रेडिशन उस जमाने से आ रहा है 12th सेंचुरी से। सो ये जो मिलिट्री ट्रेडिशन है दिस इज ऑलरेडी इन 8 टू न सेंचुरी ओल्ड। तो शुरुआत कहां से हुआ? शुरुआत यहां से हुआ कि अनंत वर्मन चोड़ा गंगादेव जब यह
(1:25:23) करंट मंदिर का निर्माण किया या पुनर्निर्माण किया लेट मी से रिकंस्ट्रक्शन रिसरेक्शन व्हाटएवर यू वांट टू से तो उन्होंने पूरा पुरुषोत्तम क्षेत्र या पूरी शहर जो आज आपका दिखता है वो शाही में बांट दिया शाही मतलब एक-एक लोकालिटी ठीक है जैसे लेट्स से फॉर एग्जांपल लाजपत अ शाही फॉर एग्जांपल फॉर एग्जांपल जो महारी या नाचूनी डांसर्स थे जिनको अंग्रेज ने देवदासी आख्या दिया पूरी में उनको देवदासी नहीं बोला जाता उनको महारी बोला जाता डांसर्स या नाचूनी इनके लिए मार्कंडेय शाही और चुरंगा शाही ओके ऐसे ही बाकी सेवायतों के लिए एक-एक
(1:26:09) जगह कर दिया तो आज आप अगर पर जाएंगे तो आपको सारे शाही के नाम से मिलेगा जैसे नेताजी ये सुभाष का घर है पूरी में। आई डोंट नो इफ पीपल आर अवेयर ऑफ इट। पूरी में जानकीनाथ बोस का घर है जो म्यूजियम बना हुआ है। बंद पड़ा है ड्यू टू सम डिस्प्यूट बट है। वो मूची शाही में है। वहां पर मूची लोग रहते थे उस टाइम। हाथी साल है, गौरसाल है, गौरभट शाही है जो गौरांग महाप्रभु के नाम पर बना हुआ है। मार्कंडेय साही है, आपका बालू बाली शाही है जो समुंदर के किनारे बाली शाही एनी तो ऐसे ही नाम बना ऐसे ऐसे सेवा तो क्या होता है इनका फॉर्मेशन हर एक
(1:26:52) शाही में एक जगह होता है जगह और जगह के नीचे होता है अखाड़ा तो उस टाइम क्या होता था हर शाही से हर शाही से 16 लड़के चुन चुन के बेस्ट ऑफ द बेस्ट इनको भर्ती किया जाता था अखाड़ा में और ये जो अखाड़ा थे यह ना काफी स्पेशलाइज्ड अखाड़ास हुआ करते थे। आज भी ऐसा ही अब ऑब्वियसली आज उतना नहीं है बिकॉज़ ऑफ मेनी मेनी रीज़ंस। बट उस टाइम का जो अखाराज़ हुआ करते थे, यह बहुत जबरदस्त हुआ करते थे। बिकॉज़ इसमें सिर्फ रेसलिंग नहीं सिखाया जाता। उसमें आपका सूट फाइटिंग भी सिखाया जाता था। आई मीन बेसिकली एंटायर वेपन ट्री
(1:27:37) मार्शल आर्ट्स हैंड टू हैंड कॉम्बैट के लिए बॉडी बिल्डिंग एंड पराई भी करवाया जाता था इनको। सो दी पीपल यूज्ड टू फोर अ कोर्स फोर्स। बाद में क्या हुआ? काफी अलग-अलग जो खंडायत थे, खंड राजा थे, जो वैसल किंग्स थे, इन्होंने भी इस मॉडल को रेप्लिकेट करना चालू किया। अपना-अपना आर्मीज़ बनाना चालू किया। तो ओवर अ पीरियड ऑफ़ टाइम दिस पीपल केम टू बी नोन एज खंडायत। ओके? एंड दीज़ खंडायत यूज्ड टू प्रोटेक्ट द टेंपल। जितनी बार आक्रमण हुआ है हां कई बार हार गए हैं। मसाकर हुआ है काला पार के साथ टिक
(1:28:23) नहीं पाए हैं। बट उन्होंने काफी बार लड़ा भी है और बचाया भी है। एक जिक्र ये भी मिलता है जब केशोदा मारू आए थे तब काफी उन्होंने रथों को जला दिया था नैप्थाथा बॉल से और नैप्था बॉल्स बना के मंदिर के मंदिर को फोर्ट की तरह बना लिया था उसने घुस के उसके अंदर दर्शनार्थियों का वेश में उसको पूरा फर्टिफाई कर लिया था मंदिर को हम और उसके अंदर से नफ्ता जलता हुआ नैप्था बॉल्स मार रहे थे तो उसमें काफी सारा रथ लेके जो खंडायत लड़ने के लिए आए थे हम तो उसमें काफी सारा खंडायत जल गए थे जिंदा नुकसान हुआ काफी बचा नहीं पाए हार गए वो
(1:29:08) लोग बट फैक्ट इज ऐसे और भी जिक्र मिलता है ये जितनी बार आक्रमण हुआ है आक्रांत आए हैं चाहे मुगल सल्तनत से हो दिल्ली सल्तनत से हो बंगाल सल्तनत से हो ये खंडायत लड़े हैं और यही खंडायत बाद में जाके अंग्रेजों के साथ भी लड़े हैं। जिसको हम पाइ रेबेलियन बोलते हैं। पाइस दे आर काइंड ऑफ़ सेम यू कैन सी नाउ क्या हुआ कि जब ये लोग लड़ना चालू किए तो ऑब्वियसली देयर हैड टू बी अ प्रोसेस ऑफ देयर इंगेजमेंट आल्सो एंड देयर एंटरटेनमेंट आल्सो। तो आज एक फेस्टिवल
(1:29:54) होता है। हाउ यू नो लुक एट द कल्चरल कंटिन्यूएशन। आज एक फेस्टिवल होता है शाही जाट। अभी होगा नवरात्र आ रहा है। अपना नवरात्रा के दौरान शाही जाट फेस्टिवल होगा। जहां पे हर जगह या अखाड़ा से वो लोग कोई ना कोई पुरानी कैरेक्टर चाहे रावण हो परशुराम हो राम हो देवी मां हो काली हो नरसिम्हा हो ऐसा सच के पूरा अटायर में इट्स अ वेरी हैवी अटायर ऑल ऑफ देम आर वेरी वेल बिल्ट पीपल वेरी हैवी अटायर उसको ले डांस करते हुए ढोल बजाते हुए गाना गाते हुए यह लोग करते-करते अपना जगह से आएंगे अखाड़ा से आएंगे निकल के आकर मंदिर का सिंह द्वार पर टर्मिनेट होता
(1:30:39) वहां पर थोड़ा नाच गाना होता है। देयर आर सो मेनी वीडियोस एंड पिक्चर अवेलेबल फॉर दैट। बट दिस वेर मेड एक्चुअली फॉर दी एंटरटेनमेंट ऑफ दिस पीपल। पूरा दिन भर कसरत कर रहा है, ये कर रहा है, वो कर रहा है। तो इनका भी तो एंटरटेनमेंट चाहिए। और उस टाइम कहां टीवी और ये सब होता था। सो दीज़ व देयर फॉर्म्स ऑफ़ एंटरटेनमेंट। और वो दिस इज़ एन इनटेंजिबल हेरिटेज। तो वह आज भी चला आ रहा है। आई डोंट नो इफ द उड़ीसा गवर्नमेंट हैज़ डॉक्यूमेंटेड इट और नॉट बट इफ इट इज नॉट दे शुड डॉक्यूमेंट इट एंड शाही जाट इज अ लिविंग लिविंग हेरिटेज। इट्स अ लिविंग हेरिटेज
(1:31:20) व्हिच रिफ्लेक्ट्स कि उस जमाने में क्या था और हम लोग कैसे उसको मैनेज करते थे। तो हर बार जितनी बार आक्रांता आए हैं और महाप्रभु को छुपाने के लिए कहीं सोनपुर ले गए कहीं चिल्का का दीपों में ले गया कहीं और कहीं ना कहीं ले गए हैं तो ये खंडायत भी जाते थे सिवायतों के साथ और दे यूज़ टू गिव प्रोटेक्शन टू द डीटी। सो द खंडायस वर नॉट ओनली सेविंग दी टेंपल बट दे वर आल्सो फाइटिंग अगेंस्ट दी इनविडर्स दे वर गिविंग प्रोटेक्शन टू द डीटीस व्हेन दे वर एस्केपिंग यू नो बीइंग मूव्ड टू इंटीरियर लोकेशनेशंस
(1:32:06) एंड ऑब्वियसली यू नो दे यूज्ड टू एक्ट एस अ नॉर्मल टेंपल फोर्स आल्सो राइट यानी खंडायत वो हो गए आप कह रहे हैं हर लोकालिटी से 16 लड़कों को उठाया जाता था उनको ट्रेन किया जा रहा था और जब भी कुछ ऐसा होता था तो वो सब एक्टिव होते थे एक्टिव होते थे और यही चीज बाद में लोकल राजा ने भी किया तो फिर वो लोग खंडपति खंडाधिपति होते थे। ठीक है ना? खंडाधिपति एक खंड सेनापति से नहीं भूपति ओके खंडाधिपति खंडाधिपति या उस वैसल किंग अंग्रेजी में जिसको बोलते हैं वैसल किंग अच्छा ठीक है उनके पास भी फर्सेस रहता था तो एक खंडाधिपति से खंडायत नाम आ गया
(1:32:46) ओके और ये लोग भी उसी फोर्स के साथ कहीं ना कहीं जाके जुड़ गए ये आर्मी कितनी बड़ी होती बड़ा होता था अब उस टाइम की यू नो ऐसा कोई नंबर्स कहीं पे मेरे को मिला नहीं है। बट यू कैन से इट शुड बी अराउंड टू टू 3000 पीपल। बट ये जो लोग हैं कुछ तो इनमें होगा क्योंकि अगर बाकी मंदिरों को अगर लूटा गया और जगन्नाथ पुरी में ऐसा नहीं हो पाया तो नहीं जगन्नाथ पुरी में भी जितनी बार आक्रांता आए हैं लूट तो मचा है। ओके बट क्या मेनी टाइम्स इट हैज़ बीन रपल्ड आल्सो फॉर एग्जांपल फॉर एग्जांपल जो टोडरमल हम जो राजा टोडरमल का अ बेटा था कल्याणमल और जहांगीर के जमाने में उन्होंने दो बार
(1:33:31) आक्रमण किया। पहली बार जब आक्रमण किया तब तो वो लूट के ले गए। दूसरा बार अगला साल दोबारा जब आया तब खंडा ने उनको खुरदा से ही मार के वापस भेज दिया था। या मान लीजिए बंगाल का बंगाल सल्तनत का हुसैन शाह हुसैन शाह जिस साल जिस टाइम पर आक्रमण किया था तब गजपति प्रताप रुद्रदेव बाहर थे। दक्ष दक्षिण में थे लड़ाई कर रहे थे। जैसे ही उनको खबर मिला कि हमला हुआ है हुसैन शाह ने मंदिर को श्री मंदिर को आक्रमण किया है तो वह भाग के आ गए। उनके पास भी खंडाइट्स थे। द फोर्स केम रिइंफोर्समेंट्स केम। तो जैसे ही हुसैन शाह को पता चला कि गजपति
(1:34:09) प्रताप रुद्रदेव आ गए हैं। दुम दबा के भागा। व्हाई? बिकॉज़ ही वास टेलीिफाइड ऑफ़ द खंड्स। दे वर अ मैसिव आई मीन दे वर अ ब्रिलियंट ओवर मशीनरी। इट वाज़ अ ब्रिलियंट वर मशीनरी। अच्छा जगन्नाथ महाप्रभु को लॉर्ड ऑफ द यूनिवर्स क्यों बोलता बोला जाता है? जगतनाथ जगतनाथ अनंत कोटि ब्रह्मांड स्वामी इसीलिए लॉर्ड ऑफ द यूनिवर्स अनंत कोटि ब्रह्मांड और स्वामी अनंत कोटि ब्रह्मांड का स्वामी है वो ब्रह्मांड का स्वामी क्यों बोला जाता है? ब्रह्मांड इसलिए क्योंकि देयर आर मल्टीपल गैलेक्सीस एस पर भागवत पुराण उनका रोम रोम में एक-एक गैलेक्सी बना हुआ है। जैसे भगवत
(1:34:46) पुराण में डिस्क्रिप्शन मिलता है आपका भागवतम में एक घटना है ना जहां पे कृष्ण के सखाओं को चुरा के ले जाते हैं ब्रह्मदेव। फिर जब वापस आते हैं माफी मांगने तब आके देखते हैं कृष्ण बांसुरी बजा रहे हैं और उनके पास हजारों ब्रह्मा और बैठे हैं। हम वो हका रह जाते हैं। ये ये लोग कौन है? तो प्रभु को पूछते हैं कि यह कौन है? यह भी मेरे जैसा दिख रहा है। बोले ये बाकी ब्रह्मांडों का ब्रह्मा है। बोले मैं तो सोचता था मैं ही मैं ही अकेला ब्रह्मा हूं। बोले नहीं तुम एक ब्रह्मांड का ब्रह्मा हूं। ऐसे और भी ब्रह्मांड है। इन सबका बॉस मैं हूं। सारा
(1:35:25) घमंड चकनाच शुरू हो गया। लॉर्ड ऑफ़ द यूनिवर्स। जय जगन्नाथ। अच्छा पिछली बार आपने गुरु नानक देव जी की स्टोरी सुनाई थी और कई कुछ लोगों ने कमेंट किया कि जो आपने स्टोरी बताई है कि गुरु नानक देव जी ने पैर जगन्नाथ मंदिर की तरफ किया था वो जगन्नाथ पुरी की नहीं बल्कि मक्का मदीना की स्टोरी थी। हां मैंने वो देखा है। देखिए ऐसा है दो तीन चीजें मैं बोलूंगा इस सिलसिले में। पहली बात तो यह है कि अह जगह अपना अपना गुरु नानक देव जी का जो घटनाएं आती है या हमारे सामने उनका जो बायोग्राफी हमें मिलता है वो आता है जन्म सखियों से और हर एक जन्म सखी अपने आप के बीच में एक-एक
(1:36:08) जन्म सखी टैली नहीं करता। फॉर एग्जांपल फॉर एग्जांपल उनका जो पूरी आने का डेट्स है मुझे तीन अलग-अलग डेट्स मिला है। देयर आर सर्टेन स्कॉलर्स जन्म सखी से देख के जिन्होंने लिखा है 1506 में वो आए थे। किसी ने लिखा है 1509 में आए थे। किसी ने लिखा है 1510 में आए थे। किसी में लिखा है 1515 में आए थे। अलग-अलग डेट्स निकल के आए। बट मुझे जो मोस्ट ऑथेंटिक लगा है दैट इज 156 बिकॉज़ ऑफ़ दी इंटरेक्शंस ही हैड वि चैतन्य महाप्रभु। द अदर इयर्स चैतन्य महाप्रभु वास ट्रेवलिंग। सो नो वे दिस टू पीपल वुड हैव मेट देयर। ओके? दिस पॉइंट नंबर वन। तो
(1:36:48) जन्म सखी का डेट्स, इवेंट्स, घटनाएं आपस में कंट्राडिक्ट करते हैं। नंबर वन नंबर टू अगेन सॉरी टू से बट यह जो मैंने बताया मंदिर की तरफ है। यह पूरी में आप किसी भी पंडाल से पूछेंगे तो वो आपको यह घटना बता देंगे। हां ये यही हुआ था। इट्स एन ओरल ट्रेडिशन व्हिच इज फ्लोइंग। दूसरा वन ऑफ द वेरी स्ट्रांग हिंज दैट आई हैव इज इसको ट्विस्ट भी किया है। इंडियन हिस्ट्री में अगर जनगण मना वंदे मातरम ये सब ट्विस्ट हो सकता है। एमिशन ओमिशन डिलीशन हो सकता है। ऑल्टरेशन तो यह क्यों नहीं हो सकता? यह भी
(1:37:33) तो पॉसिबल है। यह भी तो पॉसिबल है। राइट? जैसे जन्म सखी एक जन्म सखी बोलता है मक्का मदीना एक जन्म सखी बोलता है पूरी जगन्नाथ जो जगन्नाथ मंदिर के पंडा है पुराने पंडा जो है जो लाइब्रेरियन है इसका रघुनंदन लाइब्रेरी का वो सब लोग बोलते हैं कि नहीं यहीं पे हुआ था ये सो आई विल लीव इट टू समबडी यू वांट टू कंसीडर दिस मक्का मदीना यू आर फ्री टू डू आई पर्सनली टेक इट एस ये वहीं पे हुआ था बिकॉज़ आई एम कन्विंस्ड ऑफ दैट फैक्ट आई एम कन्विंस्ड ऑफ़ दैट फैक्ट मक्का मदीना क्यों नहीं हो मक्का मदीना इसलिए नहीं हो सकता क्योंकि जगन्नाथ महाप्रभु का जो
(1:38:15) थियोलॉजी जो नानक जी ने डिफाइन किया था अपना संध्या आरती का जो मैंने बोला था आपको उसमें उन्होंने जो एस्पेक्ट बताया परब्रह्म का कि वो सर्वव्यापी है उसी चीज का उन्होंने यहां भी बोला था अपना पांडा को बोला था कि वह तो सर्वव्यापी है। कौन सा कोनर है जहां पर वह नहीं है। एट द सेम टाइम ही वास आल्सो गेटिंग इनफ्लुएंस बाय द भगवत पुराण आल्सो और द भगवत गीता आल्सो। और भगवत गीता में भी यही लिखा गया है कि हर कण-कण में है तो देयर इज़ अ हाई पॉसिबिलिटी व्हिच आई फेल्ट दैट ही वुड हैव सेड दिस ओवर हियर। जो अ सिखिज्म में जैसे
(1:39:04) जबजी साहिब है और जो पार्ट है वहां पर कोई रेफरेंस मिलता है कोई लाइन का जो कि जगन्नाथ पुरी से मिलती हो? हां देखिए एक तो मैंने जो संध्या आरती बोला सिख आरती सिख आरती का इसमें श्रीमद् भागवतम क्या जयदेव गोस्वामी का गीत गोविंद का पोर्शन है। ठीक है? आप अगर इसका देखेंगे हाउ इट क्रिएटेड सो मच ऑफ इंपैक्ट ऑन हिम। ईश्वरदास का चैतन्य भागवत देखेंगे वहां पे वो दो पंक्तियां मिलता है जहां पे चैतन्य दास सॉरी ईश्वरदास लिखते हैं कि नानक के साथ विश्वंबर विश्वंभर मींस चैतन्य महाप्रभु और श्रीनिवास आचार्य यह तीनों बैठे हैं। उसी क्राउड में देखा गया
(1:39:50) है संकीर्तन हो रहा है। उसी क्राउड में बैठे हैं जगाई मादाई। उसी क्राउड में बैठे हैं रूप सनातन रूप गोस्वामी सनातन गोस्वामी और ये सारे जगन्नाथ पुरी में एक साथ आप उसका सिग्निफिकेंस समझिए एंड ही इज़ राइटिंग दिस इन द 17 सेंचुरी एंड ऑल दिस इज़ हैपनिंग आफ्टर 8090 इयर्स ही इज़ राइटिंग दिस और इवन 100 इयर्स तो वो ओरल ट्रेडिशन उस टाइम वो फ्लो हो रहा है। घटनाक्रम उस टाइम फ्लो हो रहा है जो आज खो गया है। अगर आप मांगूम मोट और बावली मट इन सबको उस इन सब में जाओगे तो द वहां का जो इंचार्ज है मठाधीश है वो लोग भी आपको यही चीज का पुष्टिकरण करेंगे आपको जिनको डाउट
(1:40:30) है मैं उनको बोलूंगा आप जगन्नाथपुरी जाइए राइट नानक जी का सारा चीज देखिए और फिर अपने इसमें बोलिए एक एक जब वो जब वो ढाका की तरफ से बोट में आके बालासोर में उतरते हैं गुणादेव जी हां बाला बालासुर में उतरते हैं और वहां से भद्रक से होते हुए कटक पहुंचते हैं। भद्रक में एक जगह है भद्रक डिस्ट्रिक्ट में पड़ता है वो उसका नाम है संगत संगत गांव वहां पे उन्होंने जो कुटिया बनाकर रहा कुछ दिन जमीन का टुकड़ा उसको नानक देहा बोलते हैं। आज वहां पर गुरुद्वारा बना हुआ है। और कटक पहुंचने से पहले महानदी के तट पर कालिया बोध करके वह जगह है गांव का नाम। वहां पर उन्होंने
(1:41:18) दांतुन किया था। वहां पे उन्होंने दातुन करके जो पौधा था वो मतलब डांटी जो था उसको उन्होंने गाड़ दिया था। उससे एक बहुत बड़ा पौधा उग गया। तो सॉरी एक पेड़ निकल गया। तो उसमें आज गुरुद्वारा भी है दांतो साहिब दांतन साहिब गुरुद्वारा है सो यह सब नानक दीहा दांतन साहिब कटक में वो जहां पे गजपति महाराज प्रताप रुद्र देव खुद आए उनको रिसीव करने के लिए फिर उनका एंटोरेज गया स्वर्ग द्वार में स्वर्ग द्वार में मर्दाना था उनके साथ मर्दाना बंगा मुस्लिम वो जा नहीं सकता जगन्नाथ मंदिर में उसको लगा था प्यास समुंदर का पानी वो पी नहीं सकता तो मीठा
(1:42:00) पानी चाहिए था तो गुरु नानक जी ने उनको बोला कि वहां पर खोदो। तो उन बाटी का जो होता है उससे वो खोदा वहां से मीठा पानी निकला। उसमें बावली मठ बना हुआ है। बावली से उसको खोदा था और मीठा पानी निकला था। आज भी वो है। जाइए आप। बावली मठ बना हुआ है वहां पे। अब सिखों के लिए बहुत बड़ा तीर्थ है। कटक से पूरी तक का रास्ता जो ओल्ड जगन्नाथ सड़क है उसी को पकड़ के कितने सारे गुरुद्वारा है ओल्ड जगन्नाथ सड़क में जहां से टच किया बैठे रेस्ट लिए जगह गुरु नानक जी वो सब जगह गुरुद्वारा बना हुआ है ओल्ड जगन्नाथ सड़क में आप मानोगे नहीं 1870 में आर्मस्ट्रांग
(1:42:45) एक अंग्रेज थे कलेक्टर थे इफ आई करेक्टली रिमेंबर वो अपना रिपोर्ट में लिख रहे लोग लाहौर से 2000 मील पैदल चल के आ रहे हैं तीर्थ करने के लिए पूरी में सरदार नानकपंती सरदार 2000 किलोमीटर चल के आ रहे हैं जी लाहौर रावलपिंडी कराची यहां से ताकि वो जगन्नाथ पुरी में दर्शन कर सके हां वाओ पूरी का दर्शन किया मंदिर में ये जितने भी मठ है कटक बालासर भद्रक पूरी सब में जब बावली मठ मांगू मठ इन सब में दर्शन किया करके फिर दो-तीन दिन रुकते थे वह लोग यह दो-ती दिन का ही काम करके फिर 2000 मील वो लोग पैदल चल के वापस जाते थे। दिस इज अ लॉस्ट ट्रेडिशन ऑफ द सिक्स।
(1:43:31) कितने सीख जाएंगे आज?क से पैदल जाएंगे। कोई नहीं जाएगा। ट्रेन प्लेन पकड़ के कितने सीख जाते हैं इन माय इन माय लास्ट 15 इयर्स। आई हैव सीन प्रोबेब्ली टू और थ्री सिक्स फैमिलीज़ इन द टेंपल इनसाइड द टेंपल। और उन्हीं का इतिहास इतना बड़ा है मंदिर से जुड़ा हुआ। भाई साहब आपका सिख आरती जो पहला दो स्टैंज़ा है वह वहीं पे संध्या आरती के बाद नानक खड़ा होके गुरु जी खड़ा हो के समझाया उसमें गजपति महाराज भी खड़े थे। सारे पंडा उनको प्रणाम किए कि क्या उनका रेफरेंसिंग है। गगन में थाल जो है और एवरीथिंग इज लॉस्ट टुडे।
(1:44:18) आई रियली वांट टू सी दैट सीक्स फ्रॉम पंजाब फ्रॉम हरियाणा फ्रॉम दिल्ली गोइंग टू पूरी एंड विजिटिंग दिस प्लेसेस एंड इवन ऑब्वियसली विजिटिंग द श्री जगन्नाथ टेंपल दे सो मच ऑफ हिस्ट्री फॉर देम सो मच ऑफ हिस्ट्री अभी तो मैंने पिटारा खोला ही नहीं देयर आर अदर इंसिडेंट्स ऑफ जगह गुरु नानक जी आल्सो इन पूरी आई एम जस्ट टेलिंग द रियल सिग्निफिक िकेंट वंस जो मायने रखता है क्योंकि आई अंडरस्टैंड कि आप पिछले 18 सालों से जगन्नाथ पुरी की यात्रा कर रहे हैं और हर बार आपको एक्सपीरियंस होता है। सो अ अगर मैं कहूं इस एपिसोड के लिए हम एक
(1:45:06) एक्सपीरियंस करना चाहें। जैसे आपने पिछली बार एक एक्सपीरियंस अपना पर्सनल बताया था। तो अगर कोई भगवान जगन्नाथ को महसूस करना चाहे मन में क्या थॉट आएंगे शून्य आदि आदि अनादि शून्य आंखों में देखिए खो जाएंगे आंसू आएंगे आंखों से और क्या चौका आंख सब देखी छ देखो जी रामाय रामभद्राय रामचंद्राय वेदसे
(1:45:52) रघुनाथाय नाथाय सीताय पतय नमः कवंद बाहु छेदक राम कुंभकर्ण सिर छेदक राम राम राम जय राजा राम राम राम जय सीताराम सीताराम जय राजा राम राजा राम जय सीताराम और क्या बस और कुछ नहीं है। खो जाओ। इतना समझने की कोशिश मत करो। स्वयं अनंतनाग ने भी अनंत और वासुकी ने भी कोशिश किया था। खो गए थे। प्रभु भक्ति से समर्पण करो। अहो दीना नीत चरण
(1:46:37) निश्चिन मी जगन्नाथ स्वामी नयन पथकामी भवत नवय जाचे रम्यम सकल जनकम्यम जन बलवधुम नवय जाचे रम्यम और क्या चाहिए ना मुझे रत्न चाहिए ना मुझे ऐश्वर्य चाहिए ना मुझे सुंदर बीवी चाहिए पत्नी चाहिए सिर्फ तुम चाहिए आप इमोशनल क्यों हो जाते हैं जब पे भगवान की बात आती मेरे अंदर से हो जाता है इमोशनल नहीं मैं जब मैं आप लोगों के लिए बोलता हूं जब आप लोगों के लिए बोलता हूं तब यह ऑटोमेटिक होता है मेरा कोई बनावट ही नहीं है अपने आप किसी भी दिन मेरा घर आएंगे मेरे से बात
(1:47:22) करेंगे मैं ऐसे ही बोलूंगा क्योंकि मैं महसूस करता हूं मैं आपको एक छोटी सी घटना बताता हूं गाया का काफी चीजें हमने बात किया गयाधीश से ही एक जुड़ा हुआ कहानी बताता हूं। शुरू शुरू का दिन था जब मैं पूरी जाता था पुरुषोत्तम एक्सप्रेस में या भुवनेश्वर राजधानी में और दोनों चीज गया होकर जाता था। गया मेरे बहुत दिल के करीब है। इसीलिए मैंने वो मंत्र बोला जो चैतन्य महाप्रभु ने बोला था। गया वंदित श्री हरि चरणम तो अनफॉर्चूनेटली दोनों ट्रेन जिस टाइम गया
(1:48:07) स्पर्श करेगा टच टर्म करेगा लेट इन द नाइट या वेरी अर्ली द मॉर्निंग आप मेरी बात मानोगे नहीं एक भी बार आज बहुत साल हो गया मैं ट्रेन से गया नहीं पूरी जितने दिन भी गया हूं जितनी बार भी गया हूं एक भी बार ऐसा नहीं हुआ चाहे रात को 2:00 बजे हो सुबह 5:00 बजे रात को 11:00 बजे को मैं सो रहा हूं और मेरा नींद नहीं खुला है गया में या कोई मेरे को आके जगा के नहीं गया है गया में कौन आया है मैं नहीं बताऊंगा वो नहीं वो मेरा साधना का अंग है नहीं बता सकता लेकिन मैं स्टेशन में उतर के मंदिर की तरफ देख के मैंने
(1:48:53) प्रणाम किया है और ऐसा जब हम जब आपको सीखना है तब आपको सरेंडर करना बहुत जरूरी है और इसका इस भक्ति मार्ग का भक्ति मार्ग में क्योंकि भक्ति मार्ग या प्रेमा भक्ति सबसे ऊपर होता है। सबसे ऊपर होता है। भाव जिसको बोलते हैं। पांच भाव होता है साधना का वात्सल्य भाव आपका भूल रहा हूं मैं एक एक चीज इतना सारा दिमाग में चलता है ना कई बार एक लास्ट
(1:49:39) स्टेज जो होता है जो गोपिका जिस भाव में करते थे माधुुर्य भाव हम उसमें सरेंडर करना बहुत जरूरी है हम 18 साल से ज्यादा हो गया है कि यू आर अ स्पिरिचुअल पर्सन और हम जब स्पिरिचुअलिटी की बात करते हैं भगवान से जुड़ने की बात करते आई से आई एम नॉट अ स्पिरिचुअल पर्सन आई एम नोवेयर नियर इट इफ आई से आई एम अ स्पिरिचुअल पर्सन देन आई एम द बिगेस्ट फूल सिटी इन दिस कोई बोल बोलता है तुम इतने बड़े भक्त हो। उन्होंने बोला मैं कोई भक्त ही नहीं हूं। जिस दिन मैं तुलसीदास की तरह बन पाऊंगा उस दिन मैं अपने को भक्त बना पाऊंगा। नहीं तो एटलीस्ट हम ये बोल सकते हैं हम
(1:50:11) भक्ति मार्ग में हैं। ये ठीक है। हां भक्ति मार्ग में कोशिश कर रहे हैं। कोशिश करें। अ आपको भक्ति ने स्पिरिचुअलिटी ने कैसा इंसान बनाया है एट द स्टेज ऑफ लाइफ। आप क्या बोलेंगे? मुझे बहुत शांत कर दिया है अंदर से। मेरा गुस्सा ठंडा हो गया। पहले मैं बहुत गुस्सा करता था एक टाइम पर। मतलब इतना गुस्सा करता था कंपनी में टेरर था मैं ऑफिस में बट वो अभी नहीं रहा। वो मतलब सारा जो अंदर का गुस्सा था, अह था सब टूट गया है। टूट के बिखर के मिट्टी में मिला दिया है। मिट्टी में मिल गया है। इंसान के लिए जीता हूं। कोशिश करता हूं
(1:50:59) अपनी सीमित क्षमता में जितना हर किसी को मदद कर सकूं। जितना प्रभु की बात, इतिहास की बात, भारतीय सभ्यता की बात, संस्कृति की बात सब तक जनजन में पहुंचाऊं। इसको अपना कर्तव्य मानता हूं, दायित्व भी मानता हूं। महाप्रभु का दिया हुआ काम भी मानता हूं। शोध करता हूं और भी जानने के लिए। अपने आप को एक छात्र मानता हूं। स्टूडेंट फॉर एवर स्टूडेंट क्योंकि आज भी जब जगन्नाथ संस्कृति में पढ़ाई करने जाता हूं आज भी कुछ ना कुछ रोज कुछ ना कुछ नया सीखने को मिलता है और बाकी जगह तो है ही है ऑफलाइन बात कर रहे थे मैंने खुद बोला डॉक्टर मीनाक्षी जैन आई कंसीडर हर माय ग्रुप डॉ
(1:51:44) विवेक देवराय के बारे में बोला बहुत कुछ सीखा है इनसे मैंने उन्होंने बहुत कुछ सिखाया है मुझे और भी लोग हैं बाकी फील्ड स्टडी जब करने जाता हूं। मैंने देखा है कि राजा से रंक आप कहीं भी मुझे डाल दो। मैं सबके साथ घुलमिल जाता हूं। मेरे मैं उससे बहुत कुछ सीखा है मैंने। जो मंदिर का पुजारी है उससे भी सीखा है। जो गांव वाला रथ यात्रा में आता है गांव वाला कालाहांडी से ट्राइबल गांव वाला जगन्नाथपुरी में आता है। रथ यात्रा के दिन पैदल चल के कालाहांडी से या सलपुर से या कोरापुट से और रथ यात्रा के दिन रात को यह लोग बरादंड
(1:52:29) मतलब मंदिर के सामने जो रास्ता है उसमें बैठे पूरा रात वहीं पर गुजारते हैं और कीर्तन करते रहते हैं पूरी रात भर। एक टाइम था कि मैं जाकर उनके साथ रात गुजारता था। रात को 10:00 बजे तक भी मैं रास्ते में गांव वालों के साथ रास्ते में बैठ के एक बड़ा सा दिया जला के उसके पास गोल होके वो लोग बैठ के भगवत कीर्तन करेंगे जगन्नाथ बाबू को। मैं उनके साथ करता था रास्ते के ऊपर बैठ के बहुत अच्छा लगता था। इतना दिव्य अनुभूति होता था। मानो जगन्नाथ उनके बीच बैठा हुआ है। ये फीलिंग होता था। मतलब
(1:53:17) यू यू लूज योरसेल्फ। जब वह आनंद बाजार में बैठ के मालसा में बनाते हैं वह लोग जो मिट्टी के टोकरी होते हैं उसको तोड़ के उसी में खाना खाना होता है मतलब प्रसाद पाना होता है। उसका एक अलग स्वाद होता है। उसमें जो समर्पण है या उसमें जो अपने आप को खो के ईश्वरीय तत्व से जोड़ना वह महसूस होता है। नंगा पैर रथ को खींचना या ब्रज की कुंज गलियों में घूमना कार्तिक के महीने में अकेला है कीर्तन करते हुए हमेशा नहीं अकेला घूमते रहना उसमें जो ईश्वरीय तत्व
(1:54:03) से आपका मुलाकात होता है जो अ रूबरू होता है वह भाषा में नहीं समझाया जा सकता किसी दिन आपको अगर मौका मिले तो आप रथ यात्रा के टाइम जाइए पूरी में रथ यात्रा के दिन शाम को रास्ते में जब वह लोग बैठकर कीर्तन करते हैं या समुंदर के बीच में बैठ के वो लोग कीर्तन करते हैं गरीब गांव वाले दूर-दूर से आके उनके साथ बैठ के समय बिताइए। मैं वहां जाके हर तरीके का लोगों से मिलताजुलता हूं। हर कैटेगरी का लोगों में
(1:54:48) मेरे दोस्त है, मेरे मित्र हैं। हर सिवायत में मेरे मित्र हैं। क्योंकि वह सब मेरे लिए एक ही जैसे हैं। सब महाप्रभु का सेवा करते हैं। महाप्रभु में बसते हैं। कितने जन्मों का पुण्य किया होगा उन्होंने। तब जाकर उनको महाप्रभु का सेवा मिला है। उनको जो घंटुआ है वह भी जो श्रृंगारी है वह भी जो घुंटिया है वह भी जो प्रतिहारी है वह भी जो पूजा पांडा है वह भी। अगर आप सही मायने में कॉन्शियसनेस इन द वर्ड ऑफ मेटाफिजिक्स एंड क्वांटम फिजिक्स इफ आई हैव टू पुट इट यू वांट टू अंडरस्टैंड इट फ्रॉम अ कॉन्शियसनेस थ्योरी
(1:55:33) द वन दैट आई सेड दैट आफ्टर यू क्रॉस द 22 स्टेप्स दैट यू कनेक्ट वि द सुप्रीम कॉन्शियसनेस यू विल हैव टू अंडरगो दिस दीज़ आर स्टेप्स व्हेयर यू ब्रेक योरसेल्फ डाउन अनु परमाणु में तोड़ते हो अपने आप को करके समझते हो एक बार करके देखो वापस मुड़ के देखने का जरूरत नहीं होगा अगर महाप्रभु को मिलना चाहते हो महाप्रभु से उनकी तरह सोचो वो जो सोचते हैं उनकी तरह सोचो बस यही बोलना चाहूंगा और भी बहुत है अथा सागर है बट भक्ति अगर करना है अहो भक्ति को समझना है
(1:56:22) भक्ति की पराकाष्ठा समझना है तो उन गांव वालों से समझो जो 500 600 किलोमीटर पैदल नंगा पैर हाईवे के ऊपर से चलते हुए पोटली बांध के आते हैं। आज भी लाखों लोगों का भीड़ में खड़ा होकर महाप्रभु का दर्शन करते हैं। रात को बरदंड के ऊपर बिताते काटते हैं रात को कीर्तन करते हुए और फिर वापस जाते हैं। भक्ति की पराकाष्ठा है वो। क्या इसलिए कहते हैं कि जो महाप्रभु हैं वो सिर्फ अमीर या ऐसे सिर्फ उन राजाओं के नहीं पर हर किसी के।
(1:57:06) बिल्कुल। दी स्टोरी ऑफ दसिया बावरिया बंधु महंती रघु आरक्षित बलराम दास यही तो प्रमाण है भक्त सलाबेग यही तो प्रमाण है एज ऑलवेज हर एपिसोड में कुछ ना कुछ एक इमोशनल रोलर कोस्टर रहता है जब भी हम मिलते हैं एक हिस्ट्री से लेकर एक्सपीरियंस से लेकर भविष्य मलिका से लेकर जिस ऑथेंटिसिटी के साथ मैंने पिछली बार भी यह कहा था कि आपका जो योगदान है दिस इज़ फॉर द फॉर आवर जनरेशंस टू कम वो आपको कंज्यूम करेंगे और ऑथेंटिसिटी के साथ अपने इतिहास के बारे
(1:57:53) में जान पाएंगे। माइथोलॉजी नहीं इतिहास के बारे में जान पाएंगे और गर्व से भारत को जान पाएंगे। भारत को जान पाएंगे और भारत की आत्मा यस भारत की आत्मा जो है यस अगर भारत की आत्मा को समझना है गांव में जाओ भारत का आत्मा को समझने समझना है तो उनकी लोगों के बीच जाओ तभी जाकर भारत की आत्मा को समझ पाओगे और भारत की आत्मा को आपने समझ पाए तो हे भरत आप तो भागवत भक्ति के पराकाष्ठा में पहुंच जाएंगे वंडरफुल नेक्स्ट एपिसोड रथ यात्रा पे क्या कहते हैं? कर सकते हैं रथ यात्रा के लिए बट मुझे ये
(1:58:40) पता नहीं है कि रथ यात्रा का जो रीति नीति है जो ये है ये कितना बड़ा एपिसोड जाएगा। मैं इतना रीति नीति में विश्वास नहीं रखता हूं। मतलब आई एम नॉट अ यू नो ब्राह्मण हु डस ऑल दिस रिचुअल्स। सो मैं रिचुअल्स में कभी उतना घुसा नहीं। रिचुअल्स महाप्रभु की तरह है। चैतन्य महाप्रभु की तरह है। रिचुअल्स रिचुअल्स की जगह पे भक्ति, इतिहास, संस्कृति एक जगह पे। तो मैं बता सकता हूं रथ यात्रा का इवेंट्स क्या है? हिस्ट्री क्या है? मेन पोर्शनंस क्या है? वो सब बता सकता हूं। बाकी दर्शक बंधु बताएंगे कि वो क्या चुनना चाहते हैं। राइट? राइट। तो हम इसको ऐसा कर लेते हैं
(1:59:15) इस एपिसोड पे 10,000 कमेंट्स जय जगन्नाथ के। विल ब्रिंग अनदर एपिसोड ऑन रथ यात्रा। जय जगन्नाथ। जय जगन्नाथ। थैंक यू। अच्छा आज शुरू करने से पहले आप एक बहुत खूबसूरत सा एक गिफ्ट लाए हैं। तो मैं चाहता हूं कि गिफ्ट हम अपनी पूरी ऑडियंस को समर्पित करें। सो इसको आप खुद ही अनपैक करें और खुद ही थोड़ा समझाएं तो मुझे लगता है बहुत ही खूबसूरत होगा। कैन वी डू दिस टुगेदर? यस। ये अखबार भी उड़िया है। बिल्कुल। ओके। राइट। पूरी का लोकल अखबार है। ये पटचित्र जिन्होंने बनाया हां। जिस नारी ने वो एक अवार्ड विनिंग पटचित्र आर्टिस्ट है। ओके। शी इज़ द वाइफ ऑफ़ अ विश्वकर्मा महाराणा। द
(1:59:59) वन हु बिल्ड्स द चैरियट। ओके। एंड दिस इज़ अ प्योर उड़िया पटचित्रा। यू कैन सी हाउ हैवी इट इज़ ऑल ऑर्गेनिक कलर्स सारे राधा कृष्ण है। टेकन फ्रॉम गीत गोविंद स्पिरिट। हम जयदेव गोस्वामी का गीत गोविंद। और ये आपको कब और किसने गिफ्ट किया था? अ यह मुझे लगभग 2 साल पहले मिला था 2024 में और पूरी में ही पूरी में ही हम पूरी में मिला था सेवायत परिवार से ही मिला है वाओ बट बहुत ही खूबसूरत जब मैंने पहली बार देखा मुझे था कि आई वांटेड एवरीबॉडी टू जस्ट फील दी प्रेजेंस आई मैं जो सजेस्ट करूंगा आप अगर उड़ीसा जा रहे कोई भी उड़ीसा जा रहे हैं तो एक
(2:00:45) पटचित्र जरूर ले आए महाप्रभु का हो कई सारे पटचित्र चित्र मिलता है। जी बहुत खूबसूरत है। बहुत खूबसूरत है। थैंक यू सो मच ऑन बिहाफ ऑफ़ एवरीबडी। मैं इसको बहुत खुशी-खुशी इसको मैं बहुत ही खूबसूरत सी जगह पे फ्रेम करा के बाय गॉड ग्रेस इसको लगाना चाहूंगा। इसको सर वापस पैक कर दें। बिल्कुल। आपको और क्या-क्या गिफ्ट्स मिले हैं? आई एम श्योर आप जब से जगन्नाथ पुरी जा रहे हैं आप तो सबके वहां पे फेवरेट होंगे। [हंसी] तो आपको अभी तक सबसे स्पेशल जो गिफ्ट है वो क्या मिला है? सबसे स्पेशल गिफ्ट जो है एक मुझे भोई महाराणा ने दिया था वो छेनी जिससे छेनी
(2:01:28) ओके जिससे वो रथ को बनाते हैं। नंदीघोष को बनाते हैं। वाओ वाओ वो मेरे पास है एक तो वो कब मिला था आपको? ये भी मुझे मिला था 2024 का रथ यात्रा के दौरान। अच्छा प्लस खंडवा वस्त्र भी है जयदेव गोस्वामी का गीत गोविंद जिसमें छप के रहता है खंडवा वस्त्र है बाकी बहुत कुछ है नव कलेबर का भी चीजें हैं जो लास्ट टाइम नवक हुआ था 2015 में उसका भी चीजें है रखा हुआ सब प्रभु की कृपा है जब आप वापस लेकर आते हो आपको वो एनर्जी खुद महसूस होती है जब आप वापस अपने घर लेकर आते हैं
(2:02:11) बिल्कुल बिल्कुल मेरे जो घर का मंदिर है, मैं कभी यह सब चीजें शेयर नहीं करता हूं मतलब सोशल मीडिया पे कि घर का मंदिर शेयर नहीं करना चाहिए। कई लोग डालते हैं, लेकिन डालना नहीं चाहिए। उससे एनर्जी निकल जाता है। तो एक दफा एक काशी से ब्राह्मण आए थे मेरे मित्र काशी के तो आए थे मेरे मंदिर के अंदर तो आके बोले इधर बहुत एनर्जी है और जो मेरे उड़िया दोस्त उड़िया मित्र है दिल्ली के वो जब मेरे घर में आते हैं बोलते हैं ऐसा लगता है किसी मठ के अंदर आ गए मतलब ड्राइंग रूम में बैठ के बोलते हैं मठ में आ गए ऐसा लगता है राइट तो यू हैव दैट स्पिरिट सो बेसिकली इट कैन
(2:02:56) हैपन टू एनीबडी नथिंग स्पेशल ऑफ मी। आप अगर श्रद्धा से, भक्ति से उनको बुलाएंगे तो वो आते हैं। राइट राइट राइट सर ये जो पिक्चर है यहां पे क्योंकि झूठे बर्तन है इसको मैं अंदर। हां बिल्कुल बिल्कुल इसको आप अपने मनपसंद का फ्रेम से इसको करके राइट राइट। मैं एक बार ना अंदर बिलकुल बिलकुल। आज का पूरा शो देखने के लिए दिल से शुक्रिया। एपिसोड कैसा था मुझे कमेंट सेक्शन में जरूर बताइएगा। चैनल को सब्सक्राइब भी अवश्य करें क्योंकि सुपर टॉक्स एक मूवमेंट है जो हमारे देश का भविष्य उज्जवल बना रहा है।
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