Every Woman Must Watch This | PMOS, Periods, Vaginal Health & Women’s Wellness ft Dr Amita Abrol
Author Name:Talk with Manvendra
Youtube Channel Url:https://www.youtube.com/@talkwithmanvendra
Youtube Video URL:https://www.youtube.com/watch?v=Qy69MV8h5Es
Transcript:
(00:00) का जो समय है वो एक सेल्फ हीलिंग का टाइम है। आपने वो समय उसका खत्म कर लिया क्योंकि देखो आपने अपनी जिंदगी के साथ जो करना था कर लिया। लेकिन बी स्ट्रिक्ट विथ योर चाइल्ड। आप सोचो कि हां ये जो मांग रही है मैं दे दूं। पैकेट फूड दे दूं ये दे दूं। कोई बात नहीं जिंदगी जिंदगी जी लो। देखो हॉस्पिटलों में बेड की कमी नहीं है। डॉक्टरों के पास पेशेंस की कमी नहीं है। महिलाओं को रात में इनर वियर्स पहन के नहीं सोना चाहिए। वरना इट कैन कॉज कैंसर। आई थिंक आपने भी वो रील देखा होगा। तो ये सच है क्या? ये बात मतलब है। लड़कियां आजकल ना वेट लॉस को लेके बहुत इनसिक्योर
(00:30) हैं। और मेरी एक रिसेंटली एक फ्रेंड है। तो मुझे याद है मतलब अभी पडकास्ट चल रहा है तो मुझे याद आया उसने ₹1.5 लाख का ट्रीटमेंट ले लिया है और वो रुपए उसने खर्च कर दिए। हां ऐसा ही कुछ किया है मशीनों के थ्रू वेटवेट कम करने का और कुछ नहीं हुआ। वो जो पेट था उतने का उतना ही है। मतलब ऐसा वो बताती है अभी। तो मेरा ये क्वेश्चन है कि ये जो इनसिक्योरिटी को बिजनेस बना दिया गया है और ये वेट लॉस के लिए महिलाएं जो अलग-अलग चीजें यूज कर रही हैं। सेलों्स में आप देखिए स्लिमिंग किट बेची जा रही है। तो पहले तो कुछ ये बताइए कि भैया ये
(00:59) इनसिक्योर फीड करना सही है कि नहीं? ये नेचुरली ही वेट ऐसा बन जाता है एक टाइम के बाद या फिर अगर कोई नेचुरली वेट लॉस करना चाहे तो कैसे कर सकता है? देखिए आपको लोग ना नहीं ना कहते जैसे माएं हैं किचन में लगी हैं। गेस्ट आके खाना बना रही हैं। थक गई है फिर भी किसी ने कुछ मांग लिया। चल यार चले जा या लर्न टू से नो क्योंकि वो ना जब आप बाहर नहीं ना कहते वो ना आपके अंदर जब रहता है वो अंदर ही अंदर एंजायटी और आपको पता नहीं कितना स्ट्रेस हॉर्मोन आपके इंक्रीस कर देता है हाय डॉक्टर अमिता मैम स्वागत है आपका टॉक वि मानवेंद्र के इस पॉडकास्ट में
(01:32) थैंक यू सो मच मैम सबसे पहले हम शुरू करते हैं अभी रिसेंटली पीसीओडी का नाम चेंज हुआ है पीओएमओएस किया गया है तो ये नाम चेंज होने के बाद मैं देख रहा था कि बहुत सारी डॉक्टर जो है ना बहुत खुश हो रही थी बट बट एज ए नॉर्मल जनता हमें नहीं समझ में आया भाई नाम ही चेंज हुआ है इतना क्या है तो क्यों ऐसा हो रहा है देखो कई सालों से ना गलत चीजें चल रही थी मतलब रॉन्ग डायग्नोस हो रहा था इस बेसिस पे पहले क्या होता था पीसीओडी यानी पॉलीिसिस्टिक ओवेरियन डिजीज तो डॉक्टर्स क्या करते थे अल्ट्रासाउंड में देखते थे अच्छा सिस्ट नहीं है ये ठीक
(02:01) है इसको सिस्ट नहीं है पीसीओडी नहीं है दे से ठीक है पीरियड्स इर्रेगुलर है लेकिन अल्ट्रासाउंड में तो आपके सब कुछ नॉर्मल है तो वो उस चीज का इलाज ही नहीं करते थे या वो सिर्फ जो मेडिसिन देते थे जैसे ओनली ली रिगार्डिंग योर सिस्ट जैसे मैंने आपको पहले भी बताया था हमारे पिछले पडकास्ट में भी कि नरथिस्टेरोन या सिर्फ पिल दे दी कि जो उनकी सिस्ट पे काम करे किसी ने ये सोचा ही नहीं कि इट इज अ होल बॉडी जबकि आयुर्वेद ये 5000 वर्ष पुराना जानते मतलब मुझे प्रैक्टिस करते आज 18 साल हो गए हैं और मेरी प्रैक्टिस में मैं स्टार्टिंग से
(02:33) जो है गठ पे फोकस किया है। तो इसका अब नाम है पॉली एंडोक्राइन मेटाबॉलिक ओवेरियन सिंड्रोम। यानी अब जाके आफ्टर 10 साल बाद लसेट ने यह रिसर्च डाला है कि ये सिर्फ ओवरी का डिजीज नहीं है। इसमें सिर्फ आपको ओवरी की मेडिसिन नहीं देनी है। इसमें आपको पूरा सिस्टम ठीक करना है। इसमें क्या हो रहा है? देखो इंसुलिन रेजिस्टेंस बढ़ रही है। तो इसीलिए यह मेटाबॉलिक सिंड्रोम है। एंडोक्राइन आ गया यानी हॉर्मोंस इनवॉल्व है। तो इसमें आपका डाइजेशन इनवॉल्व है। हॉर्मोन इनवॉल्व है। लाइफस्टाइल इनवॉल्व है। इंसुलिन रेजिस्टेंस इनवॉल्व है। इसीलिए ये पूरा हेड टू टो इनवॉल्व है। नॉट
(03:08) ओनली यूट्रस। तो इसीलिए अब जब इसका नाम चेंज हुआ है तो अब डॉक्टर्स को भी यह यकीन है कि हां अगर हम इसको ब्रॉड स्पेक्ट्रम में ट्रीट करेंगे तो पेशेंट पक्का ठीक होगा। ठीक है मैम। ये बात मैं आपकी समझा। मैम एक और क्वेश्चन है मेरा कि आजकल पीएमओएस या इर्रेगुलर पीरियड्स यह बहुत ही ज्यादा छोटी-छोटी ऐज में भी बच्चियों को हो रहा है। जबकि अभी मैं एक गायनी का मैंने पॉडकास्ट किया था तो उन्होंने ये बोला था कि एक्चुअल में इतनी जल्दी तो पीरियड्स भी नहीं आने चाहिए। पर बहुत सारी लड़कियों को किसी किसी को बहुत जल्दी आ जा रहे हैं। किसी के साथ ये हो रहा है कि पीरियड्स
(03:40) बहुत इर्रेगुलर हो जा रहे हैं। तो ये अचानक से ऐसा क्या हुआ लाइफस्टाइल में या फिर क्या ऐसी प्रॉब्लम है जिसकी वजह से चीजें देखने को मिल रही है? बच्चे हमेशा अपने मां-बाप को फॉलो करते हैं। अगर आपको अपने बच्चे को हेल्दी बनाना है, सबसे पहले आपको खुद को चेंज करना है। मेरे सामने बहुत ओपीडी में ऐसे केसेस हैं जिसमें पेरेंट्स कहते हैं, इट्स आवर लाइफस्टाइल। रात को लेट सो रहे हैं, तो क्या हो गया? इट्स अ लाइफ स्टाइलाइल। बच्चे भी वैसे ही हैं। रात को 11:00 बजे सो रहे हैं। 12:00 बजे सो रहे हैं। 2:00 बजे तक Instagram स्क्रॉल अप कर रहे हैं। देखिए रात को
(04:08) हमारी बॉडी रिसेट करती है। मतलब जैसे आप कंप्यूटर लैपटॉप को रिबूूट करते हैं। हमारी बॉडी का भी एक सिस्टम है कि रात्रि का जो समय है वो एक सेल्फ हीलिंग का टाइम है। आपने वो समय उसका खत्म कर दिया। आप रात को लेटा नाइट सो रहे हो। उससे आपके पेट में वात वृद्धि होगा। बॉडी में पूरा मतलब इनडाइजेशन होगा आपको। तो धीरे-धीरे लाइफस्टाइल सिंड्रोम्स तो आने ही है आपको। तो बेसिकली ये मेटाबॉलिक के साथ-साथ लाइफस्टाइल एक तो खाने को हमें वैसे प्योर नहीं मिल रहा है। जंक की तरफ हम ज्यादा जा रहे हैं। लेट नाइट हम खा रहे हैं। आयुर्वेद कहता है सूर्यास्त के बाद नहीं
(04:40) खाना चाहिए। दो-तीन चीजें ही अगर हम करेक्ट कर दें मतलब सूर्यास्त के बाद खाना कम कर दें और सिर्फ बहुत ही अगर सूप वगैरह लेना है, हल्का ओट्स वगैरह लेना है वो सब ले लें और जल्दी सोएं। मतलब अर्ली टू बेड एंड अर्ली टू राइस। तो उससे ये काफी हद तक ठीक हो जाएगा। मैम अगर कोई पेरेंट इस वीडियो को देख रहा है या कोई ऐसे लोग जो अभी पेरेंट बनने वाले हैं उनको अपनी बेटियों के लिए कुछ ऐसे दो-तीन टिप्स बताइए जो वो करके रखें या वो करते रहें जिससे कि उनके बच्चियों को ये पीरियड्स की प्रॉब्लम, पीएमओएस की प्रॉब्लम, थायराइड की प्रॉब्लम फ्यूचर में ना हो।
(05:14) मैं आपको अपनी बेटी की एग्जांपल देती हूं। मेरी डॉटर आज 12 साल की है। और वो जब भी टिफिन लेके जाती है तो उसने ये कहना मम्मा आप क्या सब्जी रोटी डालते हो? मेरी फ्रेंड तो पास्ता लेके आती है। मेरी वो फ्रेंड फ्रेंच फ्र्राइ लेके आती है। मेयोनीज़ वाले सैंडविच लेके आती है। आई आस्क्ड हर कि प्लक्षा कीप ऑन सीइंग हर नेम इज़ प्लक्षाशा कीप ऑन सीइंग। देखो तुम लोगों को क्या लेके आ रहे हैं। कैसे है। एंड शी टोल्ड मी कि जो पीरियड्स 12 से 13 साल की उम्र में आने चाहिए वो बच्चे जो अपने टिफिन में जल्दी के चक्कर में एक शॉर्टकट मारने के
(05:43) चक्कर में पेटीस डाल दी, ब्रेड डाल दिया। इतना कुछ डाल दिया। बच्चों का पूरा फ्यूचर खराब हो रहा है। अब वो बच्चियां छोटी ऐज में मोटी हो रही हैं। सेकंड थर्ड क्लास में पीरियड शुरू हो रहा है। इज इट द एज? मतलब सात साल के बच्चे को पीरियड आ रहे हैं। उसका एज भी डाउन जाएगा। सीवियर ब्लीडिंग हो रही है। इर्रेगुलर पीरियड्स है। मतलब पीएमओएस ऑलरेडी बनना शुरू हो चुका है। तो मेरे ख्याल से जो पेरेंट्स एक्सपेक्ट कर रहे हैं या जिनकी भी बेटियां हैं आपके माध्यम से मैं उनको यह जरूर बोलना चाहूंगी कि देखो आपने अपनी जिंदगी के साथ जो करना था कर लिया। लेकिन बी
(06:12) स्ट्रिक्ट विथ योर चाइल्ड। आप सोचो कि हां ये जो मांग रही है मैं दे दूं। पैकेट फूड दे दूं ये दे दूं। कोई बात नहीं जिंदगी है। जिंदगी जी लो। देखो हॉस्पिटलों में बेड की कमी नहीं है। डॉक्टरों के पास पेशेंस की कमी नहीं है। यह आपको सोचना है कि आपको अपने बच्चे को एक हेल्दी लाइफ देनी है या नहीं। आपको उसके सामने एग्जांपल सेट करना बहुत जरूरी है। यू हैव टू टेल हर कि आपको पांच तरह की सब्जियां दिन में खानी है। आपको एक दो फ्रूट दिन में खाने हैं। आपको जितना पैक्ड फूड है उसको छोड़ना पड़ेगा। नहीं तो आने वाले टाइम में इनफर्टिलिटी का रेशियो 95% तक
(06:43) चला जाएगा। अभी 65 ऑलरेडी है। मैम मुझे आप तीन ऐसी टिप्स बताइए जो भी पेरेंट बनने वाले हैं या फिर जो पेरेंट हैं कि उनकी बच्ची को पीएमएस, थायराइड, इर्रेगुलर पीरियड्स जैसी प्रॉब्लम फ्यूचर में ना हो तो वो ध्यान रखें। एक तो वो अपने बच्चे को कोई फिजिकल एक्टिविटी ज्वाइन कराएं। ठीक है? मतलब फोन वगैरह स्क्रीन टाइम छोड़ के फिजिकल एक्टिविटी। इदर एनी डांस हो गया, बैडमिंटन है, बास्केटबॉल है, साइकिलिंग है, कुछ भी। सेकंडली अपने बच्चे का लेट नाइट फूड बंद करके। मतलब कोशिश करिए आपका बच्चा 8:00 बजे से पहले जो खाना है खा ले। रात को दूध
(07:12) देने की प्रथा खत्म करिए। दूध देना है आपको शाम को 4:00 बजे से पहले देना है। और तीसरी चीज है जितना भी हो डेली आपका बच्चा कम से कम तीन तरह की सब्जियां जरूर खाए। एक फ्रूट खाए और तीन तरह की सब्जियां। अगर इस न्यूट्रिशन का आप ध्यान रखते हैं तो बच्चा हेल्दी रहेगा। मैम मेरा एक थोड़ा अनऑर्थोडॉक्स क्वेश्चन है हमारे टॉपिक से हटके। क्या जो आज की डाइट आज की डेट में लड़कियों को हार्ट ब्रेक का इशू है, ए्जायटी का इशू है। पर्सनल प्रॉब्लम है, मेंटल प्रेशर है, लाइफ का स्ट्रगल है। यह सब भी कारण बनता है क्या पीरियड्स इर्रेगुलर होने में या
(07:46) पीएमओस या थायराइड जैसी सिचुएशन आने में? 100% देखो ए्जायटी जितना भी रहेगा हमारी बॉडी स्ट्रेस में चली जाती है। कॉर्टिजोल बढ़ जाता है। हमारे ब्रेन में हैप्पी हॉर्मोन भी सीक्रेट होता है और स्ट्रेस हॉर्मोन भी सीक्रेट होता है। जैसे आप एंजायटी में गए हो। जैसे थोड़ा सा भी आपको लगता है किसी चीज का स्ट्रेस आ गया। बॉडी अंडर स्ट्रेस फील करेगी। जैसे कॉर्टिजोल सीक्रेट होगा आपकी बॉडी जो अच्छे हॉर्मोन बनाना है बंद कर देगी। आपका जो मंथली साइकिल है वो इर्रेगुलर हो जाएगा। कई केसेस में ये देखा गया है कि डाइट अच्छी ले रहे हैं सब कुछ ठीक है लेकिन स्ट्रेस
(08:18) इतना ज्यादा है कि उसकी वजह से पीएमओएस हो रहा है। इसीलिए इसको एंडोक्राइन मेटाबॉलिक सिंड्रोम भी बोला गया। बिकॉज़ इट इज़ इनवॉल्व। मतलब आपका पूरा का पूरा ब्रेन इसमें इन्वॉल्व है। हमारा यूट्रस जरूर आपको लग रहा है कि इट्स द लोअर पार्ट ऑफ़ आवर बॉडी। लेकिन रेगुलेट तो ब्रेन कर रहा है। ब्रेन ही हेल्दी नहीं है। ब्रेन इतनी एंजाइटटी में है तो कैसे रेगुलेट होगा? तो आप यह कहना चाह रहे हैं कि अगर कोई लड़की टॉक्सिक एनवायरमेंट में है तो उसका उसके बॉडी पे बायोलॉजिकली भी बहुत इंपैक्ट पड़ेगा। करेक्ट? 100% आप देखो कई बार प्रेगनेंसी में अगर फीमेल खुश नहीं है। अगर उसके
(08:50) आसपास नेगेटिव हो रहा है। फैमिली उसको सपोर्ट ही नहीं कर रही है। वो अकेली जूझ रही है और मोस्टली देखा जाता है पोस्टपार्टम डिप्रेशन में कि जब तक तो बच्चा नहीं हुआ। लड़की जी बहुत अच्छी है, संस्कारी है, सारे काम कर रही है। जैसे बच्चा हो गया उसको भी तो टाइम चाहिए ना अपनी बॉडी को रिसेट करने में। आप मनविंदर जी एक लड़के हो। आप मुझे बताइए पूरे महीने में आपका कितना मूड स्विंग होता है? कम होता है। राइट? एक लड़की का एक जैसी वो है ही नहीं है पूरे महीने में। पहले 10 दिन उसमें कोई और हॉर्मोन है। अगले 10 दिन उसमें कोई और हॉर्मोन है। फिर कभी एफएसएच, एलएच,
(09:23) प्रोजेस्टॉन मतलब अलग-अलग हॉर्मोन फ्लक्चुएट हो रही है। उस हिसाब से उसका मूड वेरिएशन रहता है। ये उसके अपने हाथ में है ही नहीं है। लेकिन लोग क्या कहते हैं? बड़े नखरे करती है। जी इसी को प्रॉब्लम है। मतलब समझते ही नहीं है कि जो लड़की एक में फेस में जा रही है, कई बार तो वो झांसी की रानी जैसा फील करती है और कई बार तो उसको ऐसा लगता है कि मैं ही सबसे दुखी हूं। एक नेगेटिव फज़ आता है। तो एज अ हस्बैंड या एज अ बॉयफ्रेंड या एज अ केयरटेकर या एज अ फादर आप अपने बच्चे को और अपने पार्टनर को इतना सिक्योर फील कराएं कि उसको मतलब उस तरह का पैंपरनेस
(09:55) चाहिए और आफ्टर डिलीवरी भी अकेली बच्चा जो है मां के लिए नहीं है। मतलब बच्चा सबकी जिम्मेदारी है ताकि फीमेल को हीलिंग का टाइम मिले। इसीलिए पोस्टपार्टम डिप्रेशन बढ़ रहे हैं। एंजायटी के कारण कॉर्टिजोल लेवल इनक्रीस हो रहे हैं। थोड़ा मैम ना ये पोस्टपार्टम डिप्रेशन के बारे में मैं आपसे और जानना चाहूंगा। अभी रिसेंटली किियाारा आडवाणी ने भी एक पडकास्ट किया था। तो उसमें वो रो भी दी थी अपनी ये बातें बताते हुए कि जब पति घर में नहीं थे तो उनको बहुत रोना आता था। लोग सपोर्ट करते थे। ऐसे बाहर सुनने के लिए हम लोगों को ऐसा लग सकता है कि अरे ठीक है
(10:26) नहीं थे फिर आ जाएंगे। क्यों रोना? लेकिन एक्चुअल में ये प्रॉब्लम्स होती हैं। तो पोस्टपार्टम डिप्रेशन थोड़ा सा मैम अच्छे से डिकोड करिए कि क्यों होता है। पहली चीज दूसरा कि क्या फील होता है उस समय महिला को जो कि आप भी एक मदर हैं तो आपका भी वो फेस रहा होगा। मुझे लगता है 100% फीमेल्स को होता है। सबको होता है क्योंकि हम एक फ्रीडम वाली लाइफ जीते हैं। अपनी मर्जी से सोना, अपनी मर्जी से उठना, अपनी मर्जी से खाना जब एक बच्चा हो जाता है एज अ मदर हमें उसके हिसाब से भी चलना है। और जो जिस मदर को मोस्टली तो मैं अपने ओपीडी में भी
(10:59) यही कहती हूं कि जब बच्चा उठे उठो जब बच्चा सोए सो जाओ ताकि आपकी नींद भी पूरी हो जाए बच्चे के साथ। अब इसमें कई फैमिली सपोर्ट करती है। कई नहीं करती है। वो कहती है बच्चा सो गया। अब तुम काम करो। बॉडी को रिसेट होने का टाइम ही नहीं मिला। देखो फीमेल की बॉडी मतलब डिलीवरी के टाइम पर इतना दर्द होता है जैसे 100 हड्डियां टूटती हैं। किसी को बोलो वो पेन सह के देखे फिर पता लगे। मतलब इतना ऑलरेडी पेन से जाने के बाद एक छोटी नन्ही सी जान को भी देखना, खुद को भी देखना। तो आई फील कि कम से कम जब तक बच्चा 5 साल का नहीं हो जाता, फीमेल उस पोस्टपार्टम डिप्रेशन में
(11:31) रहती है। अब ये घर वालों के हाथ में है कि उसको डिप्रेशन हो या ना हो। अगर तो आपके पास हाउस हेल्प रखने का है आप रखो। आप जैसे शादी से पहले क्या होता है? आप किसी लड़की को प्रपोज करते हो, डेट करते हो, उसको खुश करते हो ना। जब शादी होगी तो क्या हुआ? टेक हर बुक ग्रांटेड। यह नहीं होना चाहिए। मतलब आप एक फूल लाके दे दो। आपकी वाइफ इतनी खुश हो जाएगी कि पूरा दिन वो अकेले बच्चा संभाल सकती है। उसको छोटी-छोटी खुशियां चाहिए। बड़ी खुशियां नहीं चाहिए। उसको यह दिखना चाहिए कि अगर मैं अपना टाइम सैक्रिफाइस कर रही हूं तो मुझे फैमिली सपोर्ट कर रही है। मुझे
(12:03) फैमिली देख रही है कि मैं रात को जाग रही हूं। अब रात को जागना के लिए फीमेल की जिम्मेदारी नहीं दादा दादी नाना नानी हस्बैंड जो भी है और अगर कोई नहीं है आप न्यूट्रल फैमिली में हो न्यूक्लियर फैमिली में हो तो आप हाउससेल्फ रखो बट यू हैव टू प्रोटेक्ट हर आल्सो शी इज़ आल्सो अ चाइल्ड तो फीमेल को कहीं ना कहीं इग्नोर किया जाता है। मैम मदर बनने के बाद ना एक और टाइप का डिप्रेशन रहता है। वो ब्रेस्ट फीडिंग बहुत सारी महिलाएं नहीं करा पाती हैं। कुछ जैसे आपने बोला आजकल हार्मोन ऊपर नीचे होता है। तो वह महिला भी बहुत ज्यादा डिप्रेशन में
(12:35) चली जाती हैं। क्योंकि मैंने अपने परिवार में एक ऐसा मामला देखा हुआ है। तो उनको ऐसा लगता है कि वी आर नॉट डूइंग इनफ फॉर आवर किड या इस तरीके की भावनाएं आती हैं। तो मेरा यहां पे दो क्वेश्चन है। पहला तो ये कि ये प्रॉब्लम क्यों होती है? दूसरा कि क्या इसका सॉल्यूशन है? और तीसरा कि यह जो प्रॉब्लम है आप इसको देखते हैं क्या ऐसे भी पेशेंट्स आते हैं? ये आपने इतना अच्छा क्वेश्चन किया है कि मुझे लगता है कि जितनी फीमेल्स है ना वो खुल के इस पे बात नहीं करती हैं। जैसे डिलीवरी होती है प्राइम ग्रेविडा बोला जाता है पहली बार डिलीवरी होने को। सेकंड
(13:05) टाइम तो मिल्क प्रोडक्शन अच्छा आता है। फर्स्ट टाइम में क्या होता है कि ब्रेस्ट के निप्पल्स टेक्स टाइम टू ग्रो। मतलब उसमें मिल्क डक्ट है। मिल्क आ रहा है। बच्चे को लैच करना पड़ता है। बच्चा सकिंग करता है। मदर के कांटेक्ट में आता है तो मिल्क प्रोडक्शन होता है। सब में मिल्क प्रोडक्शन होता है। यह बात गलत है कि नहीं होता है। जो फीमेल्स कोशिश नहीं करती हैं जिनके घर वाले साथ नहीं देते हैं वो होता है। मैं आपको अगर अपने बच्चों की एग्जांपल दूं तो मेरी जब नॉर्मल डिलीवरी हुई थी तो हॉस्पिटल में ही डॉक्टर ने बोतल दे दिया था घर वालों को कि भाई इनको दो। मदर अभी
(13:38) ओके नहीं है। मेरे हस्बैंड ने उठा के फेंक दिया। क्योंकि बच्चा पहले एक हफ्ते में जस्ट हाफ स्पून वन स्पून उसकी डाइट होती है। लोग समझते हैं बच्चा भूखा रह जाएगा इसको। फटाफट बॉटल लगा दो। फटाफट बोतल लगा दो। उससे उसकी सारी जिंदगी खराब हो जाती है। अब देखो जो बच्चे बॉटल पे हैं वो सबसे ज्यादा पेट्रिशियन के पास जाते हैं। और जो बच्चे मदर फीट पे है वो कभी नहीं जाते। तो मदर्स को हिम्मत नहीं हारनी चाहिए। कम से कम डिलीवरी होते ही पहले 15 दिन लैचिंग बच्चे को हर दो घंटे बाद करानी चाहिए। निप्पल स्वेल होंगे, पेन होगी। आई कैन अंडरस्टैंड। कोकोनट ऑयल लगाइए। आप हल्का
(14:12) मसाज दीजिए। हॉट फर्मेंटेशन दीजिए। पर बच्चे को लैचिंग जरूर कराइए। एक तो उससे मदर और बच्चे का बॉन्ड अच्छा होता है और पोस्टमार्टम डिप्रेशन हील होता है। एक बच्चा जब मां की गोदी में आ जाता है ना वह सारे दुख भूल जाती है। तो उस चीज में भी बहुत हेल्प करता है। आपके स्ट्रेस लेवल को डाउन करता है और सबसे इंपॉर्टेंट आपका वेट लॉस करता है। आई लॉस्ट 25 kg आफ्टर माय फर्स्ट बर्थ बेबी के। मतलब 85 kg वास माय वेट विद इन 3 मंथ्स विद मदर फीट 25 kg डाउन। सबसे अच्छा वेट लॉस का तरीका है। मतलब जिसको मोटिवेशन चाहिए ना वो यह सोच ले मेरा वेट लॉस हो जाएगा। और मैं जरूर
(14:45) बच्चे को यह करवाऊं। और इन केस जैसे आपने बोला कि जो नहीं करवा पा रहे हैं या जिनका नहीं हो रहा है दे शुड स्टार्ट टेकिंग शतावरी। शतावरी आयुर्वेद में एक ऐसी हर्ब है जो नेचुरल मिल्क प्रोडक्शन बहुत अच्छा करती है। और जीरे का पानी मतलब डिलीवरी होते ही शुरू कर दो जीरे का पानी। जीरे का पानी आप जितना पियोगे मिल्क डक्ट्स डाइलेट होंगी। आपको पेन कम होगा और मिल्क प्रोडक्शन अच्छा होगा। और मैम अगर इन सबके बावजूद भी अगर किसी को नहीं हो रहा है तो फार्मूला मिल्क जो पिलाया जाता है। इज इट सेफ? इज इट एडवाइबल टू टेक? वरना फिर क्या किया जाए?
(15:17) देखो ऑप्शन नहीं है। अगर तो बच्चा वीक है और लो बर्थ वेट के साथ आया तब तो देना ही पड़ेगा। यू डोंट हैव एनी ऑप्शन। लेकिन अगर बच्चा हेल्दी वेट का है तो आप कोशिश कर सकते हैं कि देखो सिक्स मंथ तक तो हम कहते हैं कि बच्चे को काऊ मिल्क नहीं देना चाहिए। क्योंकि उसमें केजीियन नाम का एक प्रोटीन होता है जो बच्चे के लिए सेफ नहीं है और वाटर भी नहीं देना चाहिए। तो स्ट्रिक्टली सिक्स मंथ के लिए अब मदर फीट पे रखना चाहिए या फार्मूला मिल्क में रखना चाहिए? मैम ऐसा क्यों होता है कि लड़कियों को एज ए बॉय मैं समझना चाहता हूं कि उन्हें पता पड़ जाता है कि मेरे पीरियड्स
(15:49) आने वाले हैं। लाइक मैं आपको बता रहा हूं कि जैसे कोई भी फ्रेंड है या कुछ है तो वह बता देती है कि नहीं यार मेरे पीरियड्स आने वाले हैं या वी आई एम वी आई एम गोइंग टू डाउन तो आप लोगों को कैसे पता पड़ता है लाइक बॉडी क्या सिम्टम्स देने लगती है ट्रैकिंग एप अच्छा आजकल तो आई थिंक सो कि इतना काम का बर्डन है कि बॉडी सिग्नल्स तो जिसके तो नार्मल आता है जिसको कोई पेन नहीं है उसको ट्रैक अप करना पड़ता है कि अगर 26 डेज का है तो 26 डेज बाद आता है। हां, जिनको हल्का क्रैंपिंग पेन रहता है, दे स्टार्ट हैविंग पेन इन द थाइस। थाई रीजन में और लोअर बैक पे हल्का सा पेन
(16:23) होता है टू लेट इट गो कि जो एंडोमेट्रियल बना है मतलब यूट्रस की अंदर की लेयर जो थिक हुई है वो वेट करता है कि जैसे प्रेगनेंसी हो। लेकिन जब प्रेगनेंसी नहीं होती तो वही शेड होती है। उसी को पीरियड्स कहते हैं। तो उसके लिए ये है कि जब वो शेडिंग स्टार्ट होने वाली होती है उससे एकद दिन पहले हल्का-हल्का सा हैवीनेस या क्रैंपिंग पेन जो है थाइस या लोअर एब्डोमेन में रह सकता है। मैम अभी मेरा जो अगला टॉपिक है वो भी एक बहुत ही ज्यादा रिलेटेबल है हर महिला के लिए एंड पुरुष के लिए भी वो है इनफर्टिलिटी। आजकल ये बहुत ज्यादा बढ़ रहा
(16:54) है। पर इसमें प्रॉब्लम यह मुझे लगता है कि ज्यादातर केसेस में महिलाओं को ही क्वेश्चन में कर दिया जाता है। बट रियलिटी जो रिसर्च कह रही है या जो पेशेंट्स डॉक्टर के थ्रू बताया जाता है क्योंकि इंडिया में जो डाटा भी देखेंगे तो मैन बड़े एज में शादी करते हैं। महिलाएं जो शादी करती हैं कम ऐज में करती हैं। तो डाटा भी यही सपोर्ट करता है कि ज्यादा प्रॉब्लम्स मैन में होने के चांसेस हैं इंस्टेड ऑफ वुमेन। पर परिवार में, समाज में थोड़ा सा महिलाओं पर ज्यादा किया जाता है। तो पहले तो मैं आपसे यह जानना चाहूंगा कि इनफर्टिलिटी एक इतनी बड़ी प्रॉब्लम आज
(17:25) की डेट में क्यों बढ़ रही है? फिर वी विल टॉक अबाउट इन डिटेल इसके बारे में। इनफर्टिलिटी के कॉज बहुत सारे हैं। लाइफ स्टाइल चेंजेस है। सेकंडली जितना डिजिटली हम रह रहे हैं जैसे लैपटॉप थाइस में रखते हैं। उसके कारण मेल इनफर्टिलिटी रहता है। क्योंकि आपने सुना होगा कि मेल के जो टेस्टोस्टरॉन हॉर्मोन है जो टेस्टिस है उसके अराउंड जो टेंपरेचर है दैट शुड बी कूल। आयुर्वेद में शुक्र यानी स्पर्म को सौम्य माना जाता है। ठंडा रहना चाहिए। लेकिन जितना हम हीटिंग एरियाज में रहते हैं ज्यादा लोग जो बाइक चलाते हैं या ज्यादा लॉन्ग ड्राइव पे जाते हैं,
(17:58) ड्राइविंग ज्यादा करते हैं, उनमें यह प्रॉब्लम बहुत आती है। बेसिकली आप कह रहे हैं लैपटॉप यहां रखे नहीं है। नहीं टेबल पे। अच्छा हां इफेक्ट करता ही करता है। ठीक है। सेकंडली आपको कोशिश करनी चाहिए कि जींस वगैरह ज्यादा नहीं मतलब चेंज कर करके कभी लोअर कभी कुछ। क्योंकि अगर आप अपने टेस्टिस का टेंपरेचर इतना हीट अप रखेंगे तो स्पर्म मॉर्फोलॉजी खराब होनी ही होनी है। पहले होता था कि बहुत रेयर 10 15% सुनने को मिलता था कि कोई मेन में स्पर्म की आपकी सीमेन मोटिलिटी कम है। आजकल मोटिलिटी कम है और मॉर्फोलॉजी तो ऐसी बिगड़ी हुई है कि अगर किसी की 45% भी
(18:34) स्पर्म काउंट ठीक है। अगर उसकी आप मॉर्फोलॉजी चेक करवाओगे जो कि कई नहीं करवाते हैं। मॉर्फोलॉजी एक्चुअल टेस्ट है जिसमें हमें पता लगता है कि स्पर्म का हेड ठीक नहीं है, टेल ठीक नहीं है। अब वो है ही डेड। है ही नहीं है कुछ। तो फिर मतलब वी हैव टू टेक कि 50-50% हर केस में एक हेल्दी कपल जो प्रेगनेंसी प्लान कर रहा है उसको यह सोचना चाहिए कि अगर मैं अपने पार्टनर फीमेल के टेस्ट करा रहा हूं तो मुझे अपने भी करवाने चाहिए। उसका एक ही टेस्ट है सीमन एनालिसिस और स्पर्मोफोलॉजी। उसी से हमें पता लग जाता है और अगर उसमें कोई कमी है तो उसके लिए मेडिकेशन में जरूर जाना
(19:08) चाहिए। मैम जैसे ना यह इनफर्टिलिटी में कहीं ना कहीं एक बहुत बड़ा कारण होता है। सेक्सुअल लाइफ कपल की अच्छी ना होना भी। बहुत बार होता है लोग दूर-दूर रह रहे हैं। अलग-अलग जगह जॉब कर रहे हैं, कब मिल रहे हैं, कब नहीं मिल रहे हैं। मैम आजकल इनफर्टिलिटी का एक बहुत बड़ा कारण ना लोगों का बहुत दूर रहना भी है, लाइफस्टाइल का भी हो गया। सब बिजी हैं अपने लाइफ में। तो व्हाट इज द आइडियल टाइम प्रेग्नेंट होने के लिए एक महिला के लिए? अगर जिसका साइकिल तो 28 दिनों का है वो 10वें दिन से लेकर 18वें दिन के बीच में मोस्टली इसको आप ब्रॉड स्पेक्ट्रम में ले सकते हैं
(19:40) क्योंकि कई फीमेल्स का 30 दिन का है कई का 35 का भी हो सकता है किसी का 22 24 का भी हो सकता है तो फ्रॉम 20 टू 35 डेज के बीच में जो भी आपका साइकिल है उसमें आप कोशिश करिए जिस दिन पीरियड आए हैं उसको फर्स्ट डे मानना है पीरियड के बाद वाला नहीं पीरियड का फर्स्ट डे इज द फर्स्ट डे उसके बाद से आपको काउंट करना है 10 डे मतलब 10 डेज में उसका ओवुलेशन जो है स्टार्ट होने लगता है। एलएच सर्ज हो जाता है। [नाक से की जाने वाली आवाज़] जब एलएच हॉर्मोन बढ़ती है तो ओवुलेशन होता है। तो आइडियल टाइम जो रहता है ना वो मिड टाइम रहता है। मतलब पीरियड्स के 10थ डे से लेकर
(20:12) 16 टू 18 डे। यह जो एक हफ्ते का टाइम है बहुत क्रूशियल होता है। इसमें कोशिश करिए मतलब जो भी कपल है एटलीस्ट वो डेली क्वाइटस करें या अल्टरनेट डे पे करें टू गेट अ गुड एंड हेल्दी प्रेगनेंसी। मैम बहुत सारी महिलाएं यह प्रॉब्लम ले भी आती हैं कि उनके पति को ईडी की प्रॉब्लम है। बट अभी क्या है कि मैन जो है वह ईगो इतना ज्यादा होता है कि वो उस चीज को एक्सेप्ट नहीं कर पाते हैं या डॉक्टर के पास नहीं जाते हैं। यह बहुत बार मैंने ऐसा बहुत लोगों के थ्रू ये चीजें सुनी है। बहुत बार डॉक्टर्स ये बातें बताते हैं। इवन आप भी इस चीज को मुझे लगता है कि सही
(20:44) बोलेंगे कि ऐसा होता है? तो आप मुझे यह बताइए कि एक महिला को यह चीज कंफर्म कैसे करें? पहले तो वो कि भाई मेरे पति को ईडी की प्रॉब्लम है। इरेक्टाइल डिस्फंक्शन कंफर्म करने के लिए देखिए जो भी आपका पार्टनर है आपको पता लग जाएगा इदर हैविंग अर्ली डिस्चार्ज या इरेक्शन इशू आ रहा है मेल्स में और इसके लिए ये कोई भी चीज छुपाने वाली नहीं है। लोग क्या करते हैं? केमिस्ट के पास जाके ना आई वोंट नेम एनी ब्रांड पर केमिस्ट के पास जाके ना जल्दी से कोई टेबलेट ले लेंगे कि फेल सबसे ज्यादा चलता है। मतलब टेंपरेरी एक ईगो दिखाने के लिए कि आई एम फिट।
(21:18) अरे आप उल्टा कर रहे हो। मतलब हमारी ओपीडी में 25 साल के लड़के आए हैं जो केमिस्ट से ऐसी दवाइयां ले खा रहे हैं और अब वो रो रहे हैं। दे आर इनू डिप्रेशन सुसाइडल अटेम्प्ट्स पे जा रहे हैं। क्यों? क्योंकि अब उनके मैरिज का टाइम है एंड इट्स ऑलमोस्ट जीरो इरेक्शन। तो उसमें आपकी फैमिली कैसे बिल्ड अप होगी जब आप पहले ही गलत डायरेक्शन में जा रहे हो। तो अगर आपको कोई ऐसी समस्या आती है एज अ कपल यू शुड कम टू अ गुड डॉक्टर या काउंसलर। देखो इसमें आपको अच्छी-अच्छी आयुर्वेदिक हर्ब से 100% रिजल्ट मिलते हैं और बहुत अच्छे रिजल्ट मिलते हैं। इसमें इमीडिएटली किसी भी
(21:49) केमिकल पे नहीं जाना चाहिए। ठीक है? मैम एक आइडियल सेक्स टाइम क्या है आपके हिसाब से एज अ डॉक्टर आप क्या बताएंगे? मतलब मिनिमम ये तो है तो फिर ठीक है। इट्सेंट फॉर बॉन्डिंग बिटवीन हस्बैंड एंड वाइफ। मैंने ये देखा है कि जो लोगों में इमोशनल बॉन्डिंग है ना उनका परिवार बहुत सुखी है। वो चाहे 70-80 साल के भी है ना अगर ओल्ड एज भी है। स्टिल दे आर सो कनेक्टेड सो गुड और बच्चे उनसे इंस्पायर हो के एक हेल्दी लिविंग लाइफ रहते हैं। तो आइडियल टाइम इज नॉट एनी मींस आई वुड से एववरी डे इज़ आइडियल व्हेन यू हैव अ गुड बॉन्डिंग। इट्स मोर अबाउट मेंटल कनेक्शन।
(22:25) इट्स मोर अबाउट इमोशनल बॉन्ड। व्हेन यू आर इमोशनली बॉर्न यू आर अंडरस्टैंडिंग योर पार्टनर लाइक शी इज़ नॉट ओके और शी इज़ सेइंग नो शी इज़ सेइंग यस यू आर अंडरस्टैंडिंग एवरीथिंग तो वो सबसे अच्छी चीज है कि अपने पार्टनर का इशारा भी समझना तो आई थिंक कि वो लाइफ सबसे अच्छी है मोस्टली कपल है 15 साल शादी के बाद वो स्पार्क ही खत्म हो जाता है क्यों क्योंकि आप उनको वैसे ट्रीट करना बंद कर देते हो यू टेकन हाफ ग्रांटेड ले आओ एक बुके दे दो एक फूल देखो इट्स वेरीेंट इवन वी सी आवर पेरेंट्स आल्सो कि वो कोशिश ही नहीं करते हैं एक दूसरे को खुश करने की क्योंकि उनको
(22:58) लगता है ठीक है वाइफ है कर रही है हस्बैंड है कर रहा है छोटी-छोटी चीजों में खुश करिए वैसे आप डॉक्टर हैं मैम थोड़ा डॉक्टर से हटके एक क्वेश्चन मैं पूछता हूं एक लड़की के दिल तक पहुंचने का सही तरीका क्या है आई थिंक उसको समझना एक लड़की को अगर आप समझ रहे हैं बिकॉज़ फीमेल नेवर वांट्स अ इंटिमेसी और मोर शी ऑलवेज वांट्स अ वार्म हग इफ समबडी पैट्स ऑन हर बैक आई एम विद यू इट्स इट्स वेरीेंट जब उसको हर वक्त यह फील हो कि हां यार यह मेरे लिए खड़ा है। यह मेरे लिए है। आजकल इतने डवोर्स केस आ रहे हैं। इतने मर्डर केसेस आ रहे हैं। इतना
(23:34) कुछ हम देख रहे हैं। अभी भी इतना हाईलाइट हो रहा है। ट्विशा केस है या दीपिका या कोई भी है। क्यों? हस्बैंड ही साथ नहीं है। फैमिली सारी एक तरफ। आपका हस्बैंड आपके साथ है ना। आप कुछ भी कर सकते हो। तो नॉट ओनली फीमेल। फीमेल को भी हस्बैंड को समझना चाहिए। कई फीमेल्स हैं जिनके हस्बैंड बहुत अच्छे हैं। लेकिन वो टेकन फॉर ग्रांटेड यूजिंग मनी एंड एवरीथिंग। आई फील एज अ कपल अगर आप दोनों फॉर एन एग्जांपल अनुष्का एंड विराट कोहली आप देखो स्पिरिचुअली भी साथ है हम हर चीज में साथ है तो वो एक आइडल कपल अपने आप बन जाता है मैम एक मतलब बुक पढ़ रहा था मैं उसमें
(24:11) साइंटिफिक एक बात लिखी हुई थी कि जब एक लड़की बहुत ज्यादा स्ट्रेस में होती है तो जो ग्लो होता है ना स्किन का जो फेशियल ग्लो होता है वो भी चला जाता है फिर आप चाहे कितना भी इलाज करा लो वो नहीं आ पाएगा तो आप एज अ डॉक्टर ये पहले तो मुझे यह बताइए कि क्या यह सही बात पढ़ी थी कि बकवास पढ़ ली मैंने? बिल्कुल सही पढ़ा है आपने। कोई भी स्ट्रेस में आप चेहरा देख के बता दोगे कि यह बंदा स्ट्रेस में है। आंखें अंदर धस गई हैं। डार्क सर्कल्स आ गए हैं। क्यों? क्योंकि फ्री रेडिकल्स बॉडी के ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस में चली जाती है बॉडी। और दिस इज़ 100%
(24:39) ट्रू। हमारी क्योंकि ब्रेन हॉर्मोनस इस पे काम करती है। हम जितना स्ट्रेस लेते हैं, एंजायटी है, कोई चीज सोची जा रहे हैं, नेगेटिव थॉट अंदर है, तो हैप्पी हॉर्मोन सेक्रेट ही नहीं होगा। वो फेस पे दिखता है। ठीक है मैम। और अगर किसी को एक्ने इन सबके बावजूद भी आ रहे हैं और कुछ वह हर्ब्स चाहता है या कुछ सजेशन चाहता है आपसे तो कुछ बताइए मैम। एक्ने के लिए सबसे अच्छा जो है आप आयुर्वेद में लीवर टॉनिक्स लीजिए। मैं तो बोलूंगी वेट लॉस के लिए भी लीवर टॉनिक्स लीजिए। डोंट गो फॉर एनी सप्लीमेंट जो वेट लॉस कर रहा है। एक्ने के लिए आप लीवर
(25:07) टॉनिक्स में जाइए। जैसे-जैसे आपका लीवर अच्छा होगा आपके एक्ने अपने आप चले जाएंगे। और सबसे इंपॉर्टेंट एक छोटी सी हर्ब ₹150 की मेडिसिन आरोग्यवर्धनी वटी ये अकेली एक ऐसी मेडिसिन है जो आपके लीवर को भी अच्छा करेगी आपके डाइजेशन को भी अच्छा करेगी और आपके पेट की गर्मी को भी दूर करेगी और अगर किसी की बॉडी में ज्यादा हीट है बहुत ज्यादा एक्ने है मार्क्स छोड़ देते हैं तो काम दूधा रस मोती युक्त साथ में इंक्लूड कर लें तो बाकी यह है कि आप पर्सनली जाके किसी भी चिकित्सक को दिखा सकते हैं बट आइडियली ये दोनों मेडिसिनस काफी सेफ हैं। हां, जिसको किडनी की
(25:40) प्रॉब्लम है, वह यह दवाइयां ना ले। मैम, हमारा जब लास्ट पॉडकास्ट हुआ था, तो उस पे ना मुझे काफी सारे कमेंट्स देखने को मिले थे। आजकल क्या हो गया ना मैम? हम सभी लोग सोशल मीडिया को देख रहे हैं। लड़कियां भी देख रही हैं। अब क्या है ना एक बहुत ही फिक्शनल लाइफ हो रही है कि भाई ऐसी बॉडी परफेक्ट है। मेरी कमर इतनी होनी चाहिए। मेरा बॉडी फिगर ऐसा होना चाहिए। अब उसके लिए लोग ना बहुत सारे अलग-अलग तरीके अपना रहे हैं। देयर आर एस्थेटिक ट्रीटमेंट जिससे लोग अपने बॉडी में चीजें एनहांस कर दे रहे हैं या कुछ मतलब उनको जो उनके पास है वो उन्हें कम लग रहा है। तो एज ए
(26:10) डॉक्टर आपके पास भी ऐसे पेशेंट्स आते होंगे। तो मुझे आप पहले तो यह बताइए कि जो लड़कियां इन चीजों को लेके इनसिक्योर फील कर रही है उन्हें करना चाहिए क्या? और दूसरा कि जो छोटी-छोटी प्रॉब्लम्स हैं जिनको आदमी एस्थेटिक ट्रीटमेंट देने की सोच रहा है या कुछ ऑपरेशंस के थ्रू हटवाने की सोच रहा है तो वो ना करके कोई आयुर्वेदिक में इलाज हो तो बताइए। हमें कभी भी किसी को देख के ना परफेक्शनिज्म की तरफ नहीं जाना चाहिए। पता नहीं वो दूसरा बंदा कितने इमंबैलेंस ऑफ़ हॉर्मोन्स। आपको पता है एस्थेटिक्स करवाने के बाद कितना [नाक से की जाने वाली आवाज़]
(26:39) हॉर्मोनल इमंबैलेंस हो जाता है। एक ऐज है। अगर आप टीनएज में बोलोगे कि हां आई एम नॉट गुड या मेरी फिगर अच्छी नहीं है या ब्रेस्ट एनलार्जमेंट नहीं है या मेरे को मेरी बॉडी उतनी अच्छी नहीं है जितनी होनी चाहिए। इट्स अ एज आफ्टर मैरिज हॉर्मोन चेंज होगा। आपका बेबी होगा एवरीथिंग विल बी देयर। तब आप बोलोगे मेरा वेट लॉस नहीं हो रहा है। मेरे को वेट लॉस करना है। मेरे को अपनी फिगर मेंटेन करनी है। तो देयर इज़ अ एज। आई थिंक वी शुड वेट फॉर अ गुड एज। और हम जितना खुश रहेंगे हमारे नेचुरल हॉर्मोन सीक्रेट होंगे और उससे परफेक्ट कोई नहीं है। आप जितने फिल्म स्टार्स को
(27:11) देख लो जिन्होंने ये ट्रीटमेंट्स लिए आर दे हेल्दी? नो उनको बार-बार जाना पड़ता है इन चीजों के लिए। चाहे प्लास्टिक सर्जरीज करवाई है, कुछ भी कराया है। दे आर नॉट गुड। वो इतने बलकी लगते हैं, इतना बेकार लगता है। तो जो परफेक्ट है, जो योगा को फॉलो कर रहे हैं, अपने आप को खुश रख रहे हैं या एंटरप्रेन्योर बन गए हैं या अपनी फील्ड में अच्छा कर रहे हैं। अपने मेंटल लेवल पे जिसने कंट्रोल किया है, उनकी बॉडी अपने आप कंट्रोल में आ जाती है। मैम, अभी आपने ना ब्रेस्ट एन एलार्जमेंट एक टर्म यूज़ किया। लड़कियों में ना दो टाइप की प्रॉब्लम है। एक तो लोग आइडियल कप
(27:40) साइज ढूंढ रहे हैं। मेरा एक प्लास्टिक सर्जन से पॉडकास्ट हुआ था। तो उन्होंने मुझे बताया कि उनके पास सबसे ज्यादा फीमेल आज की डेट में दो तरीके की आ रही हैं। देयर आर वुमेन जो चाह रहे हैं उनका ब्रेस्ट का साइज इंक्रीस किया जाए। एंड देयर आर वुमेन जो उन्होंने बोला कि जेन्युइनली एक प्रॉब्लम होती है कि देयर इज़ अ पर्टिकुलर कप साइज। उससे ज्यादा अगर वुमेन का ब्रेस्ट होता है तो बहुत हैवी फील होता है बॉडी पे। बैक पे इशू आता है। तो ये दो केसेस ऐसे प्रॉब्लम देखने को मिल रही है। तो क्या आयुर्वेद में इनका कोई सॉल्यूशन है? किसी तरीके से जो भी तरीके
(28:06) को मतलब एसिडिक ट्रीटमेंट लेने की जगह कोई आयुर्वेद का रास्ता अपना के यह चीज करी जा सके? मैंने आपको बताया जिनको तो सेगी फील होता है दे कैन स्टार्ट टेकिंग शतावरी। शतावरी इज अ वेरी गुड फीमेल हॉर्मोन जो इस्ट्रोजन सीक्रेट करता है। आप उसको जरूर कंज्यूम करिए। अगर आपको ऐसा फील होता है आप छ महीने लीजिए एक साल लीजिए। इट्स वेरी गुड। आपके मूड को अच्छा करेगा। आपके हॉर्मोनस को अच्छा करेगा। आपकी सिगनेस को दूर करेगा। और जो बहुत ज्यादा एनलार्ज फील करते हैं उनको अगर कम करना है तो दे शुड गो फॉर योगा एंड वर्कआउट्स। उनको एक्सरसाइज अपनी इंक्लूड करनी चाहिए ताकि
(28:36) उनकी बॉडी भद्दी ना लगे। एक जैसा लगे। किसी का पेल्विक एरिया ज्यादा लगता है, किसी का अपर एरिया ज्यादा लगता है। दैट शुड लुक ओके वंस यू आर इनू अ प्रैक्टिस। मैं यह बोलूंगी 24 घंटे में से 30 घंटे अपनी बॉडी को दे दो। आपकी बॉडी अपने आप शेप में आ जाएगी। आयुर्वेद कहता है आपने मुझसे आयुर्वेद में सॉल्यूशन पूछा। आयुर्वेद कहता है दिनचर्या फॉलो करो सब ठीक हो जाएगा। मतलब आप अपनी रूटीन अच्छी कर लीजिए। सब कुछ ठीक हो जाएगा। मैम लास्ट टाइम जो हमारा पडकास्ट हुआ था ना उसमें इर्रेगुलर पीरियड्स के हमारे जो भी कंटेंट थे वो बहुत उठे थे। तो उससे
(29:05) मुझे यह समझ में आया कि एक्चुअल में यह बहुत लार्ज स्केल पर एक प्रॉब्लम बनके उभर रही है। तो कुछ उपचार बताइए इसका कि कैसे इसको सॉल्व किया जाए। आपके माध्यम से लोगों ने अप्रोच भी किया और कई लोग इसको इग्नोर कर रहे थे कि जस्ट इट्स अ पार्ट ऑफ लाइफ। उस चीज में आई थिंक कि आपने भी बहुत बड़ा कंट्रीब्यूशन दिया क्योंकि लोगों को सही नॉलेज मिलना बहुत जरूरी है। कई लोग सोचते हैं कि चल इर्रेगुलर पीरियड्स है। कोई बात नहीं। ब्लीडिंग नहीं हो रही है। बच्चा हेल्दी है। वो चीज़ गलत है। हम कभी भी देखो इर्रेगुलर पीरियड्स एकद दिन ऊपर नीचे होना
(29:35) इज़ ओके। पर एक महीना या 15 दिन ऊपर नीचे होना इज़ नॉट ओके। और कई बार तो ऐसा होता है कि किसी को इतनी सीवियर ब्लीडिंग होती है। 15-15 दिन ब्लीडिंग रहती है। बाद में अल्ट्रासाउंड कराओ तो पता लगता है फाइब्रॉयड है। फाइब्रॉयड इतने बड़े-बड़े साइजज़ के 8आ 10-10 फाइब्रॉइड मतलब एक मुट्ठे जितना यूट्रस है आपका। हम उसके अंदर 8आ 10-10 फाइब्रॉइड कैसे अक्यूमुलेट होंगे? आप खुद सोचो। तो इतना बलकी यूट्रस हो जाता है 5 सें.मी.
(29:59) का, 10 सें.मी. का इतने ज्यादा फाइब्रॉइड्स। तो उन फाइब्रॉइड्स में जब ब्लीडिंग होती है तो खून के कत्थे के कत्थे निकलते हैं। और ऐसे पेशेंट्स को जब छोटा मटर के दाने जितना होता है फाइब्रॉयड तो डॉक्टर्स कहते हैं एलोपैथिक डॉक्टर्स मॉडर्न साइंस। कोई बात नहीं आप चिंता मत करिए। कुछ करने की जरूरत नहीं है। आप जो कर रहे हैं, जो खा रहे हैं, जैसे जी रहे हैं, जियो देखा जाएगा बाद में। अभी आपको इसकी कोई जरूरत नहीं है। विद इन वन ईयर ऐसे पेशेंट्स एक साल के अंदर या दो से तीन साल के अंदर तो 100% है। इतने बलकी यूट्रस एंड सो मेनी फाइब्रॉइड्स इनसाइड। और उनको पता कब चलता
(30:28) है जब उनके पीरियड्स ही नहीं बंद होते। ऐसे-ऐसे पेशेंट भी हैं जिनको 40-40 दिन पीरियड आए। एचबी उनका 5 ग्राम से कम गिर गया। और फिर इमरजेंसी हॉस्पिटल में एडमिट हो के ब्लड चढ़ाया और उसके बाद डॉक्टर ने बोला अब तो इमरजेंसी आपका यूट्रस रिमूव करना पड़ेगा। पर आपको पता है यूट्रस रिमूव करने के बाद आपकी हड्डियां खोखली हो जाती हैं। आप उन महिलाओं से जाकर पूछिए जिनकी हिस्ट्रेक्टमी हुई है यानी जिनका यूट्रस रिमूव हुआ है वो चलते फिरते हाथ लग जाए फ्रैक्चर हो जाता है। एक पेशेंट तो कहती है चलते-चलते मेरा अंगूठा पैर का दीवार पे लगा उससे फ्रैक्चर हो गया। मतलब आप वो
(30:57) नौबत ही क्यों आने दे रहे हो? अगर आपको लग रहा है आपके पीरियड्स का ब्लीडिंग ठीक नहीं है, खून के कत्थे निकल रहे हैं तो इमीडिएटली कांटेक्ट योर डॉक्टर। या इमीडिएटली आप नियर बाय किसी आयुर्वेदिक डॉक्टर को बताइए। आप हमें ऑनलाइन कंसल्ट करिए। इट्स वेरीेंट। देखिए आपका जो पीरियड है ना वो आपका रिपोर्ट कार्ड है। मतलब हर फीमेल को मैं यह कहूंगी कि आपके जो मंथली पीरियड्स है इट्स योर रिपोर्ट कार्ड। वो अगर सही है तो आप ठीक हो। अब कईयों को क्या होता है कि 35 के बाद जाके पीरियड्स का फ्लो ही कम हो जाता है। सिर्फ एक दिन आ रहा है। वो सोचते हैं हां कोई बात नहीं
(31:25) हमारे पीरियड्स तो बंद हो रहे हैं। मेनोपॉज में जा रहे हैं इसलिए हो रहा है। नो दैट इज़ नॉट ओके। उसमें भी यह दिक्कत आती है। उसमें भी कहीं ना कहीं कोई अनडायग्नोस चीज आपके अंदर है या कोई यूट्रिन पॉलिप है या एंडोमेट्रियोसिस है। कुछ ना कुछ तो है। एक छोटा सा अल्ट्रासाउंड होता है। ₹1000 का जाके करा लो। क्यों बड़ी-बड़ी सर्जरीज के लिए वेट करना? तो इस चीज को कभी भी हमें इग्नोर नहीं करना चाहिए। इर्रेगुलर पीरियड्स, हैवी ब्लीडिंग, क्लॉट निकल रहे हैं या पेनफुल पीरियड्स हो रहे हैं या फिर महीने महीने के गैप के बाद आ रहे हैं। नहीं
(31:54) बिल्कुल इग्नोर मत करो। मैम अगर मैं आपसे चार सिम्टम्स पूछूं कि मुझे बताओ कि भैया अगर यह चार किसी में है तो इसका मतलब उस महिला की बॉडी जो है सही नहीं है। चार सिम्टम्स सबसे पहले इर्रेगुलर पीरियड्स पेनफुल पीरियड्स तीसरा ब्लीडिंग या तो अगर आपकी एक दिन है या उससे भी कम है या इतनी है कि एक दिन में आप चार-चार पांच-प पैड यूज़ कर रहे हो या इतनी है कि आप सात-सा 10-10 दिन ब्लीड कर रहे हो तो इसका मतलब आप सही नहीं हो। और चौथा पॉइंट फेशियल हेयर्स। फेशियल हेयर तो सबसे कॉमनली हॉर्मोनल इमंबैलेंस का साइन है। जैसे आपकी बॉडी में इंसुलिन रेजिस्टेंस बढ़ेगा तो ही
(32:30) फेशियल हेयर्स आएंगे। [नाक से की जाने वाली आवाज़] फेशियल हेयर्स क्यों आते हैं? अब मेन के क्यों होते हैं? क्योंकि टेस्टोस्टरॉन ज्यादा है, एंडोरजन ज्यादा है। अब वो जब फीमेल में ज्यादा होगा यानी उसका अपना हॉर्मोन नीचे चला गया और मेल हॉर्मोन बढ़ गया तो उसके फेशियल हेयर्स आने लग जाएंगे। क्या करते हैं? प्लकिंग कराने लग जाएंगे, रगड़ने लग जाएंगे। वो रूट कॉज को तो ठीक करो। तो मैम आजकल क्या है कि जो यंग कपल्स हैं सब सेक्सुअली एक्टिव हैं और जनरेशन चेंज हो रही है। तो अब प्रॉब्लम क्या हो रही है कि अबॉर्शन जैसी प्रॉब्लम्स और ये सब चीजें
(32:53) ना बहुत लार्ज स्केल पे हो रही हैं। और बहुत बार हम सुनने को देखते हैं कि यार किसी ने एक दवाई खा ली है। उस पे फिर लड़कियों को बहुत ज्यादा ब्लीडिंग होती रहती है अबॉर्शन के लिए। तो इज इट सेफ? बिल्कुल भी सेफ नहीं है। और मैं तो यही बोलूंगी कि यह चीज इललीगल है। मतलब हर चीज का एक समय है। आप उसको उस समय के लिए रखेंगे ना तो बहुत अच्छा है। आफ्टर मैरिज आप उस चीज में जाते हैं तो बहुत अच्छा है। लेकिन बिफोर मैरिज अगर यंग जनरेशन में आप जाते हैं। आपको नहीं पता आप बच्चे हो। आपका दिमाग उतना सही नहीं है। हो सकता है किसी को एड्स हो, सिफलिस हो,
(33:24) गनोरिया हो, कैलमाइडिया हो, सेक्सुअली ट्रांसमिटेड डिजीज हो। हाउ कैन यू रिलाई ऑन समबडी? हम तो हमें हमेशा एक सही एज का वेट करना चाहिए। और जो लोग या जो टीनएजर्स या जो यंग कपल्स, अनमैरिड कपल्स इस तरह से करते हैं उन केसेस में इनफर्टिलिटी 100% हो जाती है। क्योंकि इनिशियली जब उन्होंने ये एमटीपी किट्स वगैरह ली होती हैं। उसके बाद उनका हॉर्मोन इमंबैलेंस होना पक्का है। बिकॉज़ आपने आर्टिफिशियली इंड्यूस किया ना। आप अपनी बॉडी के अगेंस्ट गए। आयुर्वेद कहता है बॉडी की सुनो। जो आपकी बॉडी का नेचुरल हॉर्मोन पैटर्न है उस पे रहो। आप
(33:56) आर्टिफिशियल हॉर्मोनस खाओगे। आपका पैटर्न खराब होना ही है। आप अपनी लाइफ भी खराब करोगे और आपके साथ जो जुड़ने वाली फैमिली है उसकी भी लाइफ खराब करोगे। मैम आयुर्वेद में भी कुछ अबॉर्शन का तरीका था क्या पहले? देखिए जिनकी फैमिली कंप्लीट है उनको मैं नेचुरली बताना चाहूंगी कि अगर आपको बार-बार प्रेगनेंसी होती है तो आप कच्चा पपीता खाइए। डेट्स खाइए। अदरक वाली चाय ले लो। वैसे हम चाय मना करते हैं। बट उस टाइम के लिए यू कैन हैव जिंजर। जिंजर टी ले सकते हैं। जिंजर [नाक से की जाने वाली आवाज़] या पपीता। आपको पता है पपीते में या कच्चे पपीते में
(34:26) आयुर्वेद में इसको माना गया है इट्स अ फ्लशिंग आउट मतलब प्रेग्नेंट वूमेन को अगर पपीता खिला दो अबॉर्शन हो जाता है। यह बॉडी में कुछ भी रहने नहीं देता। मतलब पपीते में इतनी प्रॉपर्टीज हैं कि कच्चा पपीता खा के किसी का भी अबॉर्शन या ब्लीडिंग स्टार्ट हो जाती है। तो आप नेचुरली इस तरह से कर सकते हो। मैम मैंने पिछले पॉडकास्ट से हमारे कुछ कमेंट्स उठाए और उससे मैं आपसे क्वेश्चन पूछूंगा। आप मुझे बताइएगा। एक वजाइनल ऑर्डर को कैसे मेंटेन रखा जाए, सही रखा जाए, इस पे काफी औरतों ने क्वेश्चंस पूछा था। तो, आप जरूर इस पे बताइए। देखिए, वाइना के बाहर एक बार्थोलियन
(35:00) ग्लैंड है जो नेचुरल सिकक्रशन करती है जो उसको लुब्रिकेट रखती है और उसका जो अंदर का फ्लोरा है वो थोड़ा सा अल्कलाइन रहता है जिससे आपको जो है इंफेक्शन नहीं होता। लेकिन अगर आपकी बॉडी में एसिडिक बहुत ज्यादा है या अगर आप इंटरकोर्स के बाद जलन फील कर रहे हो, बहुत ज्यादा स्मेल आ रही है इसका मतलब है यू नीड टू रूल आउट टू थिंग्स। बैक्टीरियल इंफेक्शन हो सकता है 100% आप यूरिन टेस्ट करवा लीजिए। उससे आपको क्लियर हो जाएगा। और अगर फिर भी उसमें नॉर्मल आता है और आपको बहुत ज्यादा फाउल स्मेल आ रही है, यू कैन गो फॉर पैप्स। अंदर हो सकता है कोई नेबोथियन
(35:36) सिस्ट या कोई सर्वेसाइटिस हो। क्या जा सकते हैं मैम? आपने क्या बोला कि वो? नेबोथियन सिस्ट ओके या सर्वसाइटिस यानी यूट्रस के मुंह पे स्वेलिंग। तो दो टेस्ट इज़ेंट यूरिन टेस्ट एंड पाप्समेयर। एक कमेंट है कि प्राइवेट पार्ट्स पे काफी इचिंग होती है। तो हाउ टू डील विथ इट? देखिए पहले इचिंग देखिए। अगर इचिंग ब्लैकिश और ग्रेइिश कलर के आपके मार्क्स बन गए हैं वाइना के नियर बाय तो इट कैन बी अ साइन ऑफ़ फंगल इंफेक्शन। तो उसके लिए आप कोई भी एंटीबायोटिक खाने की जरूरत नहीं है। आप ठंडी तहसीर की चीजें खाएंगे तो वह ठीक होगा। वी वाश डिटोल सैबलॉन यूज़ नहीं
(36:10) करना है। उससे वह एरिया बहुत ज्यादा सेंसिटिव हो जाता है। सेकंडली आरोग्यवर्धनी और काम दूधा जैसे मैंने आपको पहले ही बताया बहुत ठंडी दवाइयां है। लीवर को मेटाबोलाइज करती हैं। तो जितना हमारा पेट ठंडा रहता है हमारे जेनेटल पार्ट्स भी उतने अच्छे रहते हैं। कोई सिंथेटिक या जैसे हम आजकल स्पोर्ट्स वियर जिम वियर वअर करते हैं। मेक श्योर यू आर वेयरिंग कॉटन क्लोथ्स फॉर योर जेंटल एरिया। सो दैट इट्स ऑलवेज मॉइस्ट बिल्कुल ना रहे। मतलब उस एरिया को हम ड्राई रख पाएं तो इससे ही हम काफी हद तक उसको कंट्रोल कर लेंगे। मैम एक क्वेश्चन अभी मेरे दिमाग में आया
(36:42) है। एक पडकास्ट बड़ा वायरल हुआ है। क्लिप वायरल हुई है। उसमें यह बोला गया है कि महिलाओं को रात में इनर वियर्स पहन के नहीं सोना चाहिए। वरना इट कैन कॉज कैंसर। आई थिंक आपने भी वो रील देखा होगा। तो ये सच है क्या ये बात? मतलब मैम? जैसे मोस्टली फीमेल सोते वक्त रात को ब्रा या टाइट वेस्ट पहन के सोते हैं। तो उससे क्या होता है कि जितने हमारे ग्लैंड्स हैं वो कंस्ट्रिक्ट हो जाते हैं। अगर ब्लड फ्लो अच्छी तरह नहीं जाएगा तो इट कैन लीड टू कैंसर आल्सो लेटर ऑन और बहुत ज्यादा फीमेल्स आती है ब्रेस्ट में बेनाइन ट्यूमर्स को लेकर यानी गांठे बन गई हैं।
(37:15) बहुत फीमेल्स इससे रिलेट कर पाएंगी कि उनके शरीर में बहुत ज्यादा गांठे बढ़ने लग जाती है। ब्रेस्ट एरिया के अराउंड तो वो डर जाती हैं कि कहीं ब्रेस्ट कैंसर तो नहीं हो रहा। सबसे पहले तो आप रात को अपने जो है लूज फिट मतलब एकदम लूज फिटिंग वाले क्लोथ्स पहन के सो बिल्कुल भी उस एरिया को टाइट मत करो आप सारा दिन वर्क कर रहे हो आपने पहन लिया लेकिन बाई द एंड ऑफ द डे यू शुड बी रिलैक्स सेकंडली अगर छोटी सी भी कोई गांठ फील हो रही है गो फॉर अ मेमोग्राफी और एक्सरे सी कि कहीं वो कैंसरस तो नहीं है और अगर वह कैंसरस नहीं है तो आयुर्वेद में एक ट्रीटमेंट आता है
(37:45) पत्रपिंड श्वेत मतलब हमने बहुत से बेनाइन ट्यूमर्स इस तरह से ठीक किए हैं इट्स जस्ट अ हॉट फर्मेंटेशन ऑन द अफेक्टेड पार्ट तो उससे वो बिल्कुल ठीक हो जाता है। लड़कियां आजकल ना वेट लॉस को लेके बहुत इनसिक्योर हैं। और मेरी एक रिसेंटली एक फ्रेंड है तो मुझे याद है मतलब अभी पडकास्ट चल रहा है तो मुझे याद आया उसने 1.
(38:05) 5 लाख का एक ट्रीटमेंट ले लिया है और वो रुपए उसने खर्च कर दिए सर्जरी हां ऐसा ही कुछ किया है मशीनों के थ्रू वेटवेट कम करने का कुछ नहीं हुआ वो जो पेट था उतने का उतना ही है मतलब ऐसा वो बताती है अभी तो मेरा ये क्वेश्चन है कि ये जो इनसिक्योरिटी को बिजनेस बना दिया गया है और ये वेट लॉस के लिए महिलाएं जो अलग-अलग चीजें यूज कर रही हैं सेलों्स में आप देखिए स्लिमिंग किट बेची जा रही है तो पहले तो कुछ ये बताइए कि भैया ये इनसिक्योर फील करना सही है कि नहीं यह नेचुरली ही पेट ऐसा बन जाता है एक टाइम के बाद या फिर अगर कोई नेचुरली वेट लॉस करना चाहे तो कैसे कर सकता है? देखिए आपके हाथ में है। पहले तो मैं ये
(38:36) बोलूंगी जितने भी सप्लीमेंट्स है ना मार्केट में उसके पीछे मत भागो। उसमें कहीं ना कहीं मेटफॉर्मिन होगा जो शुगर की मेडिसिनस में यूज़ होता है। वो इंसुलिन रेजिस्टेंस पे कम करता है और मोस्टली वेट लॉस के चीजों में वही डला होता है। जो इंस्टेंटली लोग वेट लॉस करते हैं। जैसे आपने ड्रिंक छोड़ी या वो प्रोडक्ट छोड़ा आपका डबल गेन होगा। तो आपको बेस पे काम करना है। बेस पे क्या अपनी बॉडी में वाटर रिटेंशन मत होने दीजिए। ज्यादा वाटर इंटेक या साल्ट इंटेक जो है उसको रिस्ट्रिक्ट करिए। मतलब उतना ही लीजिए जितनी बॉडी को जरूरत है। दूसरा
(39:02) मैं हर महिला को बोलूंगी 40 दिन ये करके देख लो। आप आटा छोड़ दो, चावल छोड़ दो, आलू छोड़ दो, मीठा छोड़ दो। सिर्फ चार चीजें। ये चार चीजें छोड़ दो। 40 दिन बाद आप अपना वेट चेक करो। नेचुरली फोर टू 5 केg वेट लॉस होगा। अगर आप अपनी बॉडी पे मतलब अपने लिए अच्छा खाओ ना। हम कहते हैं इंडियन डाइट में प्रोटीन नहीं है। अच्छा इट्स वेरीेंट कि प्रोटीन हर जगह बिक रहा है। हर जगह प्रोटीन के बारे में आ रहे हैं। वे प्रोटंस आ रहे हैं। हर तरह के प्रोटंस आ रहे हैं। आपको पता है मनविंदर जी लसेट जो है इट्स अ रिसर्च जनरल इसमें लिखा गया है रिसर्चर्स में साइंटिस्ट ने
(39:32) बताया है कि 0.8 ग्राम प्रोटीन ही चाहिए हमारी बॉडी को पर केजी बॉडी वेट। मान लीजिए अगर किसी का 60-70 है तो उसको भाई सिर्फ 50 ग्राम ही चाहिए। इससे ज्यादा नहीं चाहिए। और वो 50 ग्राम हमारी प्लेट में पूरा होता है। बीन से पूरा होता है, दालों से पूरा होता है, पनीर से पूरा होता है, टोफू से पूरा होता है, सोयाबीन से पूरा होता है। इन चीजों से वो पूरा हो जाता है। हां जो लोग जिमिंग कर रहे हैं, एक्स्ट्रा मसल मास बढ़ा रहे हैं उनको 1.
(39:58) 2 टू 1.4 ग्राम चाहिए होता है। वो अगर एक्स्ट्रा कंज्यूम कर रहे हैं तो उनका वो मसल उसको कंज्यूम कर रहा है। बट आपको ये जितने मार्केट में वे प्रोटंस हैं या कुछ भी प्रोटीन के नाम पे बिक रहा है कि हां इंडियंस जो है प्रोटीन कम खाते हैं। फॉरेनर्स को प्रोटीन की ज्यादा नॉलेज है। ऐसा नहीं है। इंडियन की डाइट बहुत अच्छी है। हां अब वो हो गया कि पुरानी जो माताएं होती थी वो खेतों में काम करती थी या घरों में काम करती थी चूल्हे पे पैरों के बल बैठ के तो वो स्लिम रहती थी। तो आजकल क्या है कि हम खा तो रहे हैं लेकिन सिडेंटरी लाइफस्टाइल है। उसको डाइजेस्ट ही नहीं कर
(40:27) रहे। कोई वर्कआउट नहीं कर रहे। कोई फिजिकल एक्टिविटी नहीं कर रहे लेकिन प्रोटीन का ओवरडोज नहीं करना चाहिए। इट कैन लीड टू किडनी डैमेज। इट कैन लीड टू ओवर प्रोडक्शन ऑफ योर यूरिक एसिड आल्सो। मैम चलते-चलते मेरा लास्ट क्वेश्चन है आपसे कि आजकल पीरियड्स के लिए ना बहुत सारे मार्केट में प्रोडक्ट्स हैं। लाइक देयर इज अ पीरियड पेंटी देयर इज हमारा जो नॉर्मल पैड्स होते हैं देन देयर इज टमपोन तो व्हाट डू यू सजेस्ट कि महिलाओं को ये ये वाला यूज़ करना चाहिए। आई थिंक कि देखो जब बॉडी से टॉक्सिंस निकल रहे हैं एंडोमेट्रियम शेड आउट हो रहा है।
(40:56) आप जितना मर्जी किसी चीज को वॉश कर लो। उसमें कुछ ना कुछ तो इंफेक्शन टॉक्सिन रहेगा ही। और जैसे टेमोस यूज़ करते हैं उसके उससे बैक फ्लो जाता है ब्लड का। मेरा पर्सनल यह रिकमेंडेशन है कि यू कैन यूज़ योर पैड एंड थ्रो इट। दिन में एक दो बार पैड चेंज करो, थ्रो करो और कोशिश करो कि हां मुझे पता है सिंथेटिक पैड है उससे भी प्रॉब्लम होती है। लेकिन जितनी मार्केट में चीजें अवेलेबल है आई थिंक उसमें सबसे सेफर वही है कि आप थोड़ा जितना कॉटन बेस्ड पैड यूज़ कर सको वो अच्छा है। पर टेमोस या पीरियड पेंट आई वोंट रिकमेंड बिकॉज़ आप उसको जितना
(41:25) मर्जी धो लो। अब मतलब इतना यू कांट से कि इनफेशियस नहीं है या कोई बैक्टीरियल इंफेक्शन नहीं है कुछ नहीं है तो अननेसेसरी या अननोइंगली किसी और इनफेक्शन की तरफ जाने से अच्छा है जस्ट यूज़ द थिंग एंड थ्रो इट। थैंक यू सो मच अमिता मैम। अब लास्ट में आप आपको कोई मिलना चाहे आपसे कोई ओपीडी लेना चाहे तो कहां पे आ सकता है? कैसे मिल सकता है? और अगर कोई ऑनलाइन कंसल्टेशन लेना चाहे तो कैसे मिल सकता है? देखिए यू कैन कांटेक्ट अस ऑन 9878039127 यह हमारा नीचे नंबर फ्लैश कर रहा है। आप इस पे कांटेक्ट कर सकते हैं। और पर्सनली मिलना हो तो आप हमें कांटेक्ट कर सकते हैं
(42:01) कि किस टाइम पे बिकॉज़ वी हैव 22 क्लीनिक्स। तो हम किस टाइम पे कहां अवेलेबल हैं यह बताना मुश्किल है। तो आप हमारे नंबर पे कांटेक्ट करके आप देख सकते हैं। अगर तो आपके एरिया में है या आपकी लोकेशन में है। तो वी कैन हैव इनपर्सन कंसल्टेशन। अदरवाइज हम ऑनलाइन कंसल्टेशन के लिए अवेलेबल हैं। मैम व्हाट वुड बी द बेस्ट एडवाइस यू वुड गिव टू वुमेन? अपने आप से प्यार करो। मैं तो एक छोटी सी बात बोलूंगी। अपने लिए टाइम निकालो। अपने आप से प्यार करो और ना कहना सीखो। जो लोग ना नहीं ना कहते जैसे माएं हैं किचन में लगी हैं। गेस्ट आके खाना बना रही हैं। थक
(42:34) गई हैं। फिर भी किसी ने कुछ मांग लिया। चल यार चले जा। या लर्न टू से नो। क्योंकि वो ना जब आप बाहर नहीं ना कहते। वो ना आपके अंदर जब रहता है वो अंदर ही अंदर एंजाइटटी और आपको पता नहीं कितना स्ट्रेस हॉर्मोन आपके इंक्रीस कर देता है। तो अपने लिए समय निकालो जो आपको अच्छा लगता है जरूर करो। अपनी बॉडी को आधा घंटा जरूर दो। वो आधा घंटा ये नहीं है कि घर के काम कर लिया मेरी एक्सरसाइज होगी। कई लोग ये कहते हैं डस्टिंग कर ली, पोछा कर लिया, झाड़ू कर लिया, मेरी एक्सरसाइज। नो। दैट [नाक से की जाने वाली आवाज़] इज मींस योगा, एक्सरसाइज या कोई ऐसी चीज जिसमें
(43:01) आपको संतुष्टि हो जिसके आपका मन खुश हो। थैंक यू सो मच मैम। थैंक यू जी
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