Monday, August 3, 2026

Dark Reality Of BOLLYWOOD Casting Couch EXPOSED!

Dark Reality Of BOLLYWOOD Casting Couch EXPOSED!

Author Name:Rashmi Sawarn

Youtube Channel Url:https://www.youtube.com/@rashmisawarn

Youtube Video URL:https://www.youtube.com/watch?v=2waSQOdhlTE



Transcript:
(00:00) स्क्रीन टेस्ट होता है। स्क्रीन टेस्ट होता है मॉर्निंग 9:00 बजे से लेके शाम के 6:00 बजे तक का। 6:00 से लेकर लेकर रात को 2-3 बजे तक का स्किन टेस्ट होता है। स्किन टेस्ट मालूम है? स्क्रीन टेस्ट का टाइम अलग और स्किन टेस्ट का टाइम अलग होता है। स्किन टेस्ट क्या होता है? तो मुझे भी लगा यार इतना इजीली कैसे हो गया? मतलब थोड़ा तो इतना इतनी अच्छी किस्मत तो नहीं है अपनी। तो फिर मैं गई तो उन्होंने मुझे अंदर बुलाया। दे सेड कि यू हैव टू कॉम्प्रोमाइज। ही सेड देन यू नो यू हैव टू स्लीप विथ द प्रोड्यूसर। अगर मैं आपको बोलूं कि बॉलीवुड में एंट्री लेने के
(00:29) लिए सबसे ज्यादा जरूरी सिर्फ एक्टिंग आना नहीं बल्कि एक और चीज है जिसके बारे में सालों से बातें होती आती [संगीत] हैं। लेकिन खुल के कोई बात नहीं करना चाहता और वो कड़वी सच्चाई है कास्टिंग काउच। हर साल हजारों लोग एक ही उम्मीद लेकर मुंबई शहर में आते हैं कि शायद अगला सुपरस्टार वही होगा। कोई हीरो बनना चाहता है कोई हीरोइन। लेकिन रियलिटी में हर सपना स्क्रीन तक नहीं पहुंचता। क्योंकि उनके सपने के बीच कास्टिंग काउच और कॉम्प्रोमाइज कल्चर एक्सिस्ट करता है। और यह बात बॉलीवुड के बड़े-बड़े सेलिब्रिटीज भी एक्सेप्ट कर चुके हैं।
(01:01) यू नो व्हेन दे से कास्टिंग काउच डस नॉट एक्सिस्ट इट्स रोंग। कास्टिंग काउच डस एक्सिस्ट। सिर्फ बॉलीवुड ही नहीं साउथ फिल्म इंडस्ट्री से लेकर टीवी इंडस्ट्री तक पावर के मिसयूज के एलिगेशन बार-बार सामने आते रहेंगे। यस आई हैव फेस्ड [संगीत] सेक्सिज्म बिकॉज़ ड्यूरिंग देत टाइम इट वाज़ लाइक इफ यू डोंट गो थ्रू द कास्टिंग काउच थिंग यू विल नॉट गेट वर्क। इवन सिर्फ फीमेल एक्टर्स ही नहीं कई मेल एक्टर्स ने भी खुलकर यह एक्सेप्ट किया है कि उन्हें अपने करियर के स्टार्टिंग में कॉम्प्रोमाइज करने के ऑफर्स मिले थे। जिसमें आयुष्मान खुराना से
(01:31) लेकर रणवीर सिंह तक का भी नाम शामिल था। तो सवाल यह है कि अगर इतने सालों से इतने अलग-अलग लोग अलग-अलग वक्त पर मिलती जुलती कहानियां सुना रहे हैं तो आखिर इस ग्लैमर के पीछे छुपा सच क्या है? आज हम एविडेंस, पब्लिक इंटरव्यूज और वेरीिफाइड रिपोर्ट्स के बेसिस पर जानेंगे कि कास्टिंग काउच आखिर है क्या? इसकी जड़े कितनी पुरानी है और यह सिस्टम इतने सालों से कैसे जिंदा है और इसकी सबसे बड़ी कीमत आखिर चुकाताता कौन है। मुझे कहते हैं कि मुझे तेरे से पर्सनल बात करनी है। मैंने कहा क्या पर्सनल बात करनी है? आप बताइए। तो कहते हैं यहां नहीं
(02:02) रूम में। देखो कई रिपोर्ट्स के मुताबिक एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री में पावर के बदले सेक्सुअल फेवर्स मांगने जैसे एलगेशंस आज के नहीं बल्कि कई डिकेड्स पुराने हैं। 1930 और 40ज के दौरान जब इंडियन फिल्म इंडस्ट्री धीरे-धीरे अपनी पहचान बना रही थी तब कुछ बड़े स्टूडियोज और इन्फ्लुएंशियल फिल्म मेकर्स के पास नए एक्टर्स के करियर पर काफी कंट्रोल होता था। ऑडिशंस का कोई ट्रांसपेरेंट सिस्टम नहीं था। कॉन्ट्रैक्ट्स लिमिटेड लोगों के हाथ में होते थे और इसी पावर इमंबैलेंस की वजह से एक्सप्लइटेशन के एलगेशंस भी सामने आने लगे। उस दौर में सेक्सुअल हरासमेंट
(02:34) जैसे मुद्दों पर खुलकर बात करना भी लगभग टैबू माना जाता था। सोसाइटी कंजर्वेटिव थी और ज्यादातर लोग बदनामी के डर से चुप रहना ही बेहतर समझते थे। इसी वजह से अगर किसी न्यू कमर के साथ कुछ गलत भी होता था तो उसकी आवाज इंडस्ट्री के बाहर बहुत कम पहुंचती थी। लेकिन जैसे-जैसे बॉलीवुड बड़ा होता गया वैसे-वैसे ग्लैमर भी बढ़ता गया। लेकिन इसके साथ पावर का कंसंट्रेशन भी कुछ लोगों के हाथ में ही बढ़ता चला गया। 1960 से लेकर 1990 तक इंडस्ट्री प्रोफेशनल जरूर हुई लेकिन एक्सप्लॉयटेशन के एलगेशंस खत्म नहीं हुए। साल 2005 में इंडिया टीवी के एक
(03:07) स्टिंग ऑपरेशन ने बॉलीवुड को हिला कर रख दिया। इस ऑपरेशन में एक्टर शक्ति कपूर एक अंडर कवर रिपोर्टर से सेक्सुअल फेवर्स के बदले काम दिलाने की बात करते हुए कैमरा में रिकॉर्ड हुए थे। स्टिंग के दौरान उन्होंने इंडस्ट्री के बारे में कई ऐसे दावे भी किए जिनमें उन्होंने कहा कि कास्टिंग काउच बॉलीवुड में एक कॉमन प्रैक्टिस है और इंडस्ट्री की कई बड़ी एक्ट्रेस भी इसका शिकार हुई हैं। हालांकि ये उनके अपने क्लेम्स थे जिन्हें इंडिपेंडेंटली वेरीफाई नहीं किया गया था लेकिन इस स्टिंग के बाद काफी बवाल हुआ था और शक्ति कपूर को कुछ समय के लिए फिल्म
(03:37) एसोसिएशंस की तरफ से सस्पेंशन और इंडस्ट्री से बैकलैश का सामना करना पड़ा। फिर आया साल 2018 जब मी टू मूवमेंट ने सिर्फ हॉलीवुड ही नहीं बल्कि इंडिया की एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री को भी हिला कर रख दिया था। कई एक्टर्स, एक्ट्रेसेस और इंडस्ट्री प्रोफेशनल्स पहली बार खुलकर अपने एक्सपीरियंसेस शेयर करने लगे। कुछ बड़े नामों पर एलगेशंस लगे जैसे एक्ट्रेस तनु श्री दत्ता ने नाना पाटेकर पर सेक्सुअल है हरासमेंट के चार्जेस लगाए। मैं नाम भी लेना चाहती हूं एक्टर [संगीत] नाना पाटेकर। ये नाना पाटेकर ने जब बदतमीजी की मेरे साथ, फिर उसके दिमाग में
(04:08) आया कि वो मेरे साथ एक इंटिमेट [संगीत] स्टेप भी करेगा गाने में जो कि कॉन्ट्रैक्ट के अनुसार था नहीं। पहले दिन से उसने अपनी हरकतें शुरू कर दी [संगीत] थी और फिर मुझे आके वो मुझे पकड़ के खींच रहा है। मुझे डांस सिखा रहा है। तो व्हाट इज ऑल दिस? यू नो। डायरेक्टर साजिद खान पे भी कई महिलाओं ने सेक्सुअल हरासमेंट के आरोप लगाए जिसकी वजह से उनपे एक साल का बैन भी लग गया था। मी टू आरोपी साजिद खान अपने घर पर बुलाकर लड़कियों के कपड़े उतरवाता है। जरा टॉप उठाओ, जरा पैंट्स नीचे करो, जरा घूमो, जरा दिखाओ, अपनी जांगे दिखाओ। साथ ही एक्टर आलोकनाथ पर भी
(04:41) कई वुमेन के द्वारा आरोप लगाया गया उनके सेक्सुअल मिसकंडक्ट बिहेवियर को लेकर। इसके अलावा भी कई बड़े-बड़े नाम सामने आए। जैसे कंगना रानौत ने भी डायरेक्टर विकास बहल पे यह आरोप लगाया कि उनकी मूवी क्वीन के शूटिंग के दौरान उन्हें सेक्सुअल मिसकंडक्ट का सामना करना पड़ा। और अगर आपको लगता है कि इस तरह के केसेस सिर्फ फीमेल एक्ट्रेसेस ने फेस की है तो यह आधा सच है क्योंकि कई मेल एक्ट्रेस ने भी सामने आकर यह एक्सेप्ट किया है कि कास्टिंग काउच बॉलीवुड में एकिस्ट करता है एंड उन्हें भी इसका सामना करना पड़ा था। बॉलीवुड एक्टर रणवीर सिंह ने ओपनली एक
(05:11) इंटरव्यू में यह बात एक्सेप्ट की थी कि शुरुआती के दिनों में उन्हें ऐसे ऑफर्स आए थे लेकिन उन्होंने क्लियरली मना कर दिया। तो नहीं मिला था? अरे मिला सर क्या बात कर रहे हो सर? कमाल है अच्छा वो बताओ क्या मिला? अरे सर देयर वाज़ अ वैरी स्लीज़ी जेंटलमैन इन द नॉर्दन सबब्स यू नो ही कॉल्ड मी केप्ट इट ऑन द साइड ही सेड यू हैव टू बी स्मार्ट यू हैव टू बी सेक्सी जो स्मार्ट है जो सेक्सीी है वो आगे निकल जाता है कल मैं तुम्हें यह ऑफिस में भेजूंगा कल मैं तुम्हें वो ऑफिस में भेजूंगा फिर तुम मुझे कहोगे विद्युत जामाल ने भी एक इंटरव्यू में
(05:40) ओपनली ये बात बोली कि यह सबके साथ होता है यानी दबाया किसी को भी जा सकता है सबके साथ होता है सबके साथ होता है हर जगह होता है हर समय हो रहा होता है फीमेल्स के साथ होता है मेल्स के साथ नहीं होता है एक ऐसा मिसकंसेप्शन दबाया तो किसी को भी जा सकता है। आयुष्मान खुराना को तो डायरेक्टली ऑफर किया गया कि अगर रोल चाहिए तो थोड़ा कॉम्प्रोमाइज तो करना पड़ेगा। अब सवाल यह है कि यह कास्टिंग काउच की ट्रैप में लोग फंसते कैसे हैं? तो देखो जब भी कोई एस्पायरिंग एक्टर या एक्ट्रेस मुंबई एक्टिंग में अपने लक को आजमाने आते हैं तो उनको इस प्रोसेस से गुजरना पड़ता है।
(06:09) ज्यादातर रिपोर्ट्स और विक्टिम्स के पब्लिक इंटरव्यूज के मुताबिक कास्टिंग काउच की शुरुआत अक्सर किसी सीधे सेक्सुअल प्रपोजल से स्टार्ट नहीं होती। सब कुछ एक नॉर्मल प्रोफेशनल अपॉर्चुनिटी की तरह शुरू होता है। कभी किसी ऑडिशन के नाम पर, कभी फोटोशूट के बहाने और कभी किसी असिस्टेंट या कास्टिंग कोऑर्डिनेटर का मैसेज आता है कि सर आपसे मिलना चाहते हैं। अब एक न्यू कमर के लिए यह बिल्कुल नॉर्मल लगता है क्योंकि इंडस्ट्री में नेटवर्किंग और मीटिंग्स का कल्चर आम बात है। लेकिन धीरे-धीरे प्रोफेशनल बातें पर्सनल होने लगती हैं। मीटिंग्स ऑफिस की जगह लेट नाइट
(06:39) डिनर्स, होटल्स या प्राइवेट अपार्टमेंट्स तक भी पहुंच जाती है। और फिर ऐसे डायलॉग सुनने को मिलते हैं। इंडस्ट्री में ट्रस्ट बनाना पड़ता है। सब ऐसे ही आगे बढ़ते हैं या अगर तुम थोड़ा कोऑपरेट करोगी तो मैं तुम्हारी लाइफ बना सकता हूं और इसी पॉइंट पर कई बार बात सीधा या घुमा फिराकर फेवर्स की डिमांड तक पहुंच जाती है। कुछ केसेस में यह डिमांड बिल्कुल खुलकर की जाती है। जबकि कई बार इशारों और प्रेशर के जरिए समझा दिया जाता है कि करियर आगे बढ़ाना है तो इस डील को एक्सेप्ट करना पड़ेगा और यहीं पे यह एस्पायरिंग एक्ट्रेस ट्रैप में
(07:09) फंसना स्टार्ट हो जाती है। और यह कोई छुपी बात नहीं है। बॉलीवुड एक्ट्रेस कंगना रानौत ने बोल्डली इस बात को बताया है कि अगर आपको रोल चाहिए तो आपको इनडायरेक्टर्स प्रोड्यूसर्स को खुश तो करना पड़ेगा। अगर आप अगर आप बहुत सक्सेसफुल हीरोइन भी हैं तब भी अगर आपको फिल्म चाहिए तो आपको खुश करना पड़ेगा या तो डायरेक्टर को या तो हीरो को। इवन विद्या बालन ने भी बताया कि उन्हें एक मूवी के दौरान कॉम्प्रोमाइज करने को कहा गया था। बट उन्होंने स्मार्टली इस चीज को हैंडल किया था। एक्टर गरिमा गोयल ने एक पॉडकास्ट में बताया कि कैसे ऑडिशन के
(07:40) दौरान कास्टिंग [संगीत] काउच के जाल में फंसाया जाता है कि अगर आपको रोल चाहिए तो आपको उस मूवी के फाइनेंसर के साथ सोना पड़ेगा। द एडी कम्स आउटसाइड एंड ही लिटरली अनाउंसेस ओके गर्ल्स दिस इस गोना बी अ वेरी शॉर्ट ऑडिशन। जिसको भी यह ऑडिशन देना है दैट गर्ल हैज़ टू स्लीप विथ द फाइनेंसर ऑफ द मूवी। 90ज एक्ट्रेस मनीषा कोयराला ने भी एक इंटरव्यू में बताया था कि उन्होंने फिल्म मेकर सुभाष घ गई के साथ दोबारा कभी काम नहीं किया। उनके मुताबिक इसके पीछे कुछ ऐसी डिमांड्स थी जिन्हें उन्होंने साफ मना कर दिया था। सुभाष घ गई ने इन एलगेशंस
(08:14) को हमेशा बेसलेस बताया। लेकिन कुछ साल बाद मॉडल रीना गोलन ने भी अपनी किताब में सुभाष घ गई पर सीरियस एलगेशंस लगाए थे। लेकिन सुभाष घ गई ने इन आरोपों को फिर भी डिनाई किया। एक्ट्रेस चित्रांगदा सिंह को लेकर भी एक खबर सामने आई थी कि उन्हें एक मूवी के शूटिंग के दौरान नवाजुद्दीन सिद्दीकी के साथ काफी अनकंफर्टेबल सीन्स करने को बोले गए थे जिसे उन्होंने स्ट्रिक्टली मना कर दिया और वो सॉन्ग को बीच में ही छोड़कर चली गई थी। यानी कि इस तरह के अनकंफर्टेबल फेवर्स काफी आम है बॉलीवुड में। इवन साउथ इंडस्ट्री भी इन सब चीजों में कम नहीं है। इसका एक रिसेंट
(08:44) एग्जांपल देखने को मिला जब नोरा फतेही की फिल्म केडी द डेविल के एक गाने को लेकर कंट्रोवर्सी में आ गई। इस गाने के हिंदी लिरिक्स को लेकर इतना विवाद हुआ कि मिनिस्ट्री ऑफ इंफॉर्मेशन एंड ब्रॉडकास्टिंग के पास लीगल कंप्लेंट तक पहुंच गया। जिसके बाद उस वर्जन को YouTube से हटा दिया गया। बाद में नूरा फतेही ने स्टेटमेंट जारी करके कहा कि उन्हें हिंदी लिरिक्स का असली मीनिंग पता ही नहीं था और उनकी परमिशन के बिना एआई जनरेटेड विजुअल्स और उनकी इमेज का भी गलत इस्तेमाल किया गया। देखो ये इंसिडेंट कास्टिंग काउच का एग्जांपल तो नहीं था लेकिन यह जरूर दिखाता
(09:14) है कि एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री में कभी-कभी आर्टिस्ट की कंसेंट और डिग्निटी को भी नजरअंदाज कर दिया जाता है। और जब बात कास्टिंग काउच की आती है तो 2024 में रिलीज हुई 235 पेज की हेमा कमेटी रिपोर्ट जो मलयालम फिल्म इंडस्ट्री की वर्किंग कंडीशंस की जांच के लिए बनाई गई थी उसने कई चौंकाने वाले खुलासे किए। रिपोर्ट में कहा गया कि इंडस्ट्री के कुछ पावरफुल प्रोड्यूसर्स, डायरेक्टर्स और एक्टर्स का एक ऐसा इन्फ्लुएंस है जिसके डर से कई न्यू कमर्स और वुमेन आर्टिस्ट खुलकर आवाज नहीं उठा पाते हैं। सबसे चौंकाने वाली बात यह थी कि कमेटी के सामने कई वीमेन आर्टिस्ट
(09:46) ने बताया कि उनसे फिल्म में रोल या काम के बदले सेक्सुअल फेवर्स की डिमांड की गई। रिपोर्ट के मुताबिक यह डिमांड्स कई बार उनके इंडस्ट्री में काम शुरू करने से पहले ही सामने आ जाती थी। कई विटनेस ने अपनी बातों के सपोर्ट में WhatsApp चैट्स, ऑडियो रिकॉर्डिंग्स, वीडियो क्लिप्स और स्क्रीनशॉट्स जैसे मटेरियल भी कमेटी के सामने पेश किए। रिपोर्ट में यह भी मेंशन किया गया कि शूटिंग के दौरान कई एक्ट्रेस अपनी अकोमोडेशन में खुद को सेफ महसूस नहीं करती थी। कुछ टेस्टीिमनीज़ में बताया गया कि नशे की हालत में लोग रात को उनके कमरों के दरवाजे खटखटाते थे और कुछ केसेस में
(10:18) जबरदस्ती अंदर घुसने की कोशिश तक की गई। कई विक्टिम्स ने यह सब अपने घर वालों तक को नहीं बताया इस डर से कि कहीं उनका करियर शुरू होने से पहले ही खत्म ना हो जाए। देखो कैमरा के सामने हम सिर्फ यह हीरो या हीरोइन की सक्सेस स्टोरी देखते हैं। लेकिन कैमरा के पीछे ना जाने कितने लोगों की कहानी कभी शुरू ही नहीं हो पाती। कितने सपने ऑडिशन से पहले ही खत्म हो जाते हैं। कितनी आवाजें डर की वजह से कभी बाहर ही नहीं आ पाती। देखो सच यह भी है कि एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री में हजारों लोग अपनी मेहनत और टैलेंट के दम पर भी आगे बढ़ते हैं। कई ऐसे एक्टर एक्ट्रेसेस हैं
(10:49) जिन्होंने अपने टैलेंट के दम पर अपने एक्टिंग का परचम लहराया है और सारे ही प्रोड्यूसर या डायरेक्टर एक जैसे नहीं होते। कई बार ऐसे केसेस भी सामने आए हैं जिसमें एक दूसरे पर झूठे आरोप भी लगाए गए हैं। लेकिन जब टैलेंट से पहले कॉम्प्रोमाइज की कीमत मांगी जाने लगे तब समझ लीजिए कि प्रॉब्लम किसी एक इंसान में नहीं पूरे सिस्टम में है और जब तक सपनों की कीमत डिग्निटी से चुकाई जाती रहेगी तब तक इस मुद्दे पर बात करना बहुत जरूरी रहेगा। अगर आपने यहां तक वीडियो देखा है तो कमेंट में जरूर बताना और वीडियो को लाइक करके चैनल को सब्सक्राइब जरूर कर
(11:19) लेना क्योंकि यह आपके लिए बिल्कुल फ्री है एंड मेरे लिए मोटिवेशन का काम करती है आपके लिए और इंपॉर्टेंट टॉपिक पर वीडियोस लाने के लिए। मिलती हूं अगले वीडियो में किसी और इंपॉर्टेंट टॉपिक के साथ। थैंक यू सो मच। हम्म।

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