These FOODS are slowly KI*LLING YOU ⚠️
Author Name:Rashmi Sawarn
Youtube Channel Url:https://www.youtube.com/@rashmisawarn
Youtube Video URL:https://www.youtube.com/watch?v=_XUjqy-nPF8
Transcript:
(00:00) 3 मई 2024, मुंबई का ट्रॉम्बे एरिया और एक 19 साल का लड़का प्रथमेश एक छोटे से रोड साइड शोरमा स्टोर पर चिकन शोरमा खाने के लिए जाता है। लेकिन कुछ घंटे बाद कुछ ऐसा होता है जो उसने या उसके परिवार वालों ने कभी सोचा भी नहीं होगा। शोरमा खाने के कुछ ही देर बाद प्रथमेश के पेट में तेज दर्द और कंटीन्यूअस वोमिटिंग होने लगी। यह सब देख उसकी फैमिली तुरंत उसे डॉक्टर के पास लेकर गई। बट उसकी तबीयत में कुछ सुधार नहीं हुआ और देखते ही देखते 2 दिन के भीतर उसकी मौत हो गई। इसके बाद पुलिस ने स्टॉल के ओनर्स को अरेस्ट कर लिया और उनके खिलाफ
(00:36) केस रजिस्टर किया गया और जो फूड सैंपल्स थे उसे फॉरेंसिक लैब में भेजा गया यह पता करने के लिए कि प्रथमेश की जान आखिर किस वजह से गई। और इनिशियल इन्वेस्टिगेशन में यह पता चला कि अनहाइजीनिक मीट और बैक्टीरियल कंटामिनेशन की वजह से प्रथमेश फूड पोइजनिंग का शिकार हुआ था। लेकिन सवाल यह उठता है कि हम जो यह बेझिझक अपनी गलियों में या रोड साइड स्टॉल पे बड़े चाव से यह स्ट्रीट फूड खाते हैं या रेस्टोरेंट से लेकर 10 मिनट डिलीवरी ऐप से जो खाना मंगवाते हैं यह सोचकर कि हमारा समय भी बच रहा है और खाना भी मिल गया। असल में यह कितना सेफ या हार्मफुल हो सकता है हमारी
(01:11) बॉडी के लिए इसको हम इग्नोर कर देते हैं। अ डाइट ऑफ अल्ट्रा प्रोसेस फूड्स कैन इंपेक्ट योर मेमोरी एंड योर मेंटल हेल्थ। इट कैन टेक वन आउटसाइड मील टू बेसिकली नेगेट सेवन टू एट डेज ऑफ द हार्ड वर्क दैट यू पुट इन विद एक्सरसाइज एंड फूड। WHO के अकॉर्डिंग इंडिया में हर जगह खाया जाने वाला स्ट्रीट फूड अक्सर एक हेल्थ हज़ार्ड बनकर सामने आता है। क्योंकि यह इनफेशियस वायरस और बैक्टीरिया से कंटमिनेटेड होता है जो फूड बोर्न डिजीजेसेस का कारण बनता है। इकोनॉमिक सर्वे 2023-24 के अकॉर्डिंग इंडिया में अनहेल्दी डाइट्स एक सीरियस हेल्थ क्राइसिस बन चुका है। सर्वे कहता है
(01:49) कि देश के 54% डिजीजेस का डायरेक्ट कनेक्शन पुअर डाइट से है। सिर्फ एडल्ट ओबेसिटी पिछले कुछ डिकेड्स में तीन गुना ज्यादा बढ़ चुकी है और चाइल्डहुड ओबेसिटी दुनिया में सबसे तेजी से इंडिया में बढ़ रही है। लसेट की एक स्टडी यह प्रेडिक्ट करती है कि 2050 तक इंडिया के 44 करोड़ से भी ज्यादा लोग यानी लगभग 1/3 ऑफ पपुलेशन ओवरवेट या ओबीज हो जाएंगे। जिसमें 21 करोड़ से ज्यादा मेन और 23 करोड़ से ज्यादा वुमेन शामिल होंगी। और आजकल जो हमारे स्ट्रीट फूड के वीडियोस सामने आ रहे हैं अतरंगी हरकत करते हुए और खाने के साथ एक्सपेरिमेंट करते हुए इससे हमारे हेल्थ
(02:27) के साथ तो खिलवाड़ हो ही रहा है बल्कि पूरी दुनिया में भी हमारा मजाक बन रहा है। लेकिन फिर भी हमारा यह पापी पेट रुकने के लिए तैयार ही नहीं है कि हम यह जो बिना सोचे समझे कुछ भी टेस्ट के नाम पर खाए जा रहे हैं वो असल में टेस्ट नहीं एक स्लो पोइजन है। आज इसी सीरियस मुद्दे पे हम बात करेंगे कि कैसे इंडिया का मोस्ट ऑफ द पॉपुलेशन इन अनहेल्ी डाइटरी हैबिट्स की वजह से एक डार्क फ्यूचर की ओर बढ़ता जा रहा है और इस वीडियो को पूरा जरूर देखना। हो सकता है कि आप आगे से एक मोमो का प्लेट और आलू टिक्की खाने से पहले एक बार जरूर सोचेंगे कि यह थोड़ी देर के टेस्ट के
(03:01) चक्कर में क्या हम अपने हेल्थ के साथ खिलवाड़ तो नहीं कर रहे हैं क्योंकि अभी तो सिर्फ यह ट्रेलर है। पिक्चर तो आपको आगे मिलने वाली है। द एपिडेमिक हियर इज वन प्रीवियसली एस्टेटेड मच। अगर आपको खतरनाक बीमारियों से बचना है और लंबा जीवन जीना है तो आपको जंक फूड से बचना होगा क्योंकि जंक फूड आपके जीवन को जल्दी समाप्त कर सकता है। [संगीत] चेंज देन टोबैको अल्कोहल इवन सम काइंड्स ऑफ़ ड्रग्स यस दे आर माउथ वाटरिंग बट इट्स अ स्कैम बिकॉज़ दिस फ़ूड इज़ सीरियसली अनहेल्थी एंड यू ऑलरेडी नो दैट इट्स नॉट अ
(03:46) प्रॉब्लम व्हिच इज़ रिड्यूस्ड इन फैक्ट इट्स प्रॉब्ली इंक्रीज़्ड। सबसे पहले यह कंफ्यूजन दूर करते हैं कि फास्ट फूड, जंक फूड और स्ट्रीट फूड किसको कहते हैं? एक्चुअली फास्ट फूड वो खाना है जो फटाफट बन जाए। जैसे बर्गर, पिज़्ज़ा, फ्र्राइ जो आपको 5 मिनट में मिल जाए और 2 मिनट में खत्म भी हो जाए। जंक फूड नाम ही काफी है। क्योंकि जंक का मतलब ही होता है कबाड़ यानी कि न्यूट्रिशन ऑलमोस्ट जीरो एंड कैलोरीज एट मैक्सिमम लेवल। चिप्स, कोल्ड ड्रिंक्स, चॉकलेट्स, प्रोसेस नमकीन जो खाने में तो मजा आता है पर बॉडी के लिए उतना ही हार्मफुल। और स्ट्रीट फूड हमारा
(04:25) असली देसी स्टाइल का फास्ट फूड जो गली नुक्कड़ पे मिलने वाले छोले भटूरे, गोलगप्पे, पाव भाजी, मोमोज, सस्ता, टेस्टी और हर जगह अवेलेबल होता है। अब डिफरेंसेस जो भी हो, लेकिन इन तीनों में एक चीज कॉमन है। हाई कैलोरीज, लो न्यूट्रिशन और कभी-कभी डायरेक्ट टिकट फॉर हॉस्पिटल। लेकिन अगर मैं आपको अपना बताऊं तो बीते दो ढाई वर्षों में मतलब मेरा जो वेट है वो अभी अराउंड बोलते हैं ना कि 100 किलोग्राम टच करने वाला है। अभी मैं 98 या 99 किलो का हूं। तो इससे मेरी हेल्थ पे भी मुझे काफी असर पड़ा है। और उसके साथ-साथ जो हम गंध खाते हैं बाहर का जो भी गंदा खाना
(05:08) खाते हैं वो धीरे धीरे धीरे एक्यूमुलेट होता है हमारी बॉडी में। और ये टॉक्सिक मटेरियल मैं अपना पर्सनल एक्सपीरियंस बताऊं तो इसकी वजह से मुझे काफी हेल्थ इशूज़ भी फेस करने पड़े हैं। मेरी एक दो सर्जरी भी हो रखी है। तो मतलब फास्ट फूड खाने से शरीर को सच में डैमेज होता है और वो चीज मैंने देखी है अपने शरीर पे होते हुए। प्रॉब्लम तब होती है जब हम यह सोच कर खा जाते हैं कि एक प्लेट मोमोज से क्या ही होगा। पर यह एक प्लेट नहीं है। अब यह हमारी रोज की आदत बनती जा रही है। और अभी कुछ समय पहले ही मोहाली के एक मोमो फैक्ट्री पे रेड किया गया और वहां पे
(05:47) भयानक अनहाइजेनिक कंडीशन के साथ-साथ सड़ी हुई सब्जियां और कुत्ते का सर रेफ्रिजरेटर में पाया गया। अब आप ही सोचो कि मोमो के नाम पे वहां पे क्या परोसा जा रहा था। तो हमको जैसे ही पता चला कि एक और जगह पे भी ऐसा है तो हमने वहां जाके पकड़ा उधर दरवाजा खुलवाया दरवाजाया तो देखा कि काफी सारे लोग अंदर हैं पूरी गंदगी है उस बहुत ना उनके पास कोई सैनिटेशन का सर्टिफिकेट है ना कोई कॉरपोरेशन से कोई परवानगी है ना हमने तो उनको देना ही कहा था क्योंकि जब तक कॉरपोरेशन हमको सर्टिफिकेट सैनिटेशन का नहीं देती हम लाइसेंस इशू नहीं करते फूड
(06:20) सेफ्टी का लाइसेंस इशू नहीं किया जाता अब तो 10 मिनट फूड डिलीवरी एप्स ने सब कुछ और इजी कर दिया है आप सोच रहे होते हो कि फ्रेश खाना आया है। लेकिन असली में वह खाना पहले से बना होता है। फ्रोजन होता है और प्रिजर्वेटिव्स उसमें भर-भर के डाला जाता है। और हमें इस नए ट्रेंड पर कंसर्न दिखाते हुए ऑर्थोपेडिक सर्जन डॉक्टर मानव बोरा कहते हैं कि 10 मिनट फूड डिलीवरी से बने हुए फूड से हमें कैंसर, कार्डियोवस्कुलर डिजीज से लेकर ओबेसिटी और डायबिटीज होने का खतरा काफी गुना बढ़ जाता है। सुबह उठते ही रोज ये जो चाय के साथ हम चार बिस्किट खाते हैं लॉन्ग टर्म में इसका
(06:55) क्या नुकसान होने वाला है हमारे बॉडी में इससे हम अनजान होते हैं। बिस्किट्स आर वर्स्ट एंड चॉकलेट्स। लाइक व्हेन यू हैविंग चॉकलेट्स यू हैविंग इट माइंडफुल्ली यू यूजुअली हैव थ्री फोर चॉकलेट्स इन अ वीक। बट विथ बिस्किट्स यू हैविंग फोर बिस्किट्स अ डे। सो इन अ वीक यू हैविंग 28 बिस्कुट्स। सो 28 बिस्किट्स वर्सेस फोर चॉकलेट्स। सो व्हिच इज द एनिमी? ओह माय गॉड। फर्स्ट थिंग वी गेटिंग अप चाय एंड बिस्किट। या। सो द ब्लड शुगर स्पाइक यू योर स्टमक इज एम्प्टी। अब आप कहोगे कि हम तो अब आटा बिस्किट में स्विच कर रहे हैं। तो कभी बिस्किट खरीदने से
(07:28) पहले चेक किया है उसका इंग्रेडिएंट्स कि उसमें सबसे ज्यादा क्वांटिटी में मैदा और शुगर होता है। और यह जो आटा बिस्किट और मिल्क बिस्किट के नाम पे बिस्किट्स बेचे जा रहे हैं। कभी आप इनके लेवल पर चेक करना कि वीट और मिल्क के नाम पे तो बेवकूफ बनाया जा रहा है। हम इंडियंस तो बस पैकेज पर देखे फोटो से खुश हो जाते हैं कि वाह! कितना हेल्दी आइटम है यह। बट एक्चुअली में उस फोटो के साथ एक डिस्क्लेमर भी होता है जो कोई नहीं पढ़ता कि वो सिर्फ एक रिप्रेजेंटेशनल पर्पस के लिए है। अंदर के सामान की हम गारंटी नहीं दे रहे। कैशू आलमंड कुकीज़ इसमें कितना कैशू और आलमंड्स
(08:03) होगा? 50-60% तो होना चाहिए गुड डे में अगर मैं कैशू और आलमंड देख रहा हूं तो आलमंड 1.4% एंड कैशू 0.4% होल वीट मारी। एंटायर पॉइंट ऑफ़ होल वेट इज़ कि इसमें मैदा नहीं होगा। हम्म। इसमें 52% मैदा है और 19.5% होल। यही चीज अगर आप जापान में देखोगे तो वहां स्ट्रिक्टली यह प्रोहिबिटेड है कि अगर आप कोई भी चीज पैकेट में बेच रहे हो तो पैकेज पे भी सेम साइज और सेम क्वालिटी के प्रोडक्ट्स दिखने चाहिए। मतलब हूबहू मैच करता हुआ जो बाहर आइटम दिखता है वही अंदर होता है। लेकिन इंडिया में इन सब चीजों से हमें फर्क ही नहीं पड़ता। और जो यह गरमागरम समोसा,
(08:40) ब्रेड, पकोड़ा, जलेबी आप हर शाम खुश होके खा लेते हो, कभी ध्यान दिया है कि वह ऑयल का कलर ब्लैक क्यों होता है? क्योंकि वो ऑयल एक या दो नहीं 10 से 15 बार तक रीयूज किया गया होता है। एक्चुअली में जब ऑयल बार-बार गर्म होता है तो उसमें ट्रांस फैट का लेवल डेंजरसली हाई होता जाता है। यह ट्रांस फैट से ही एलडीएल यानी बैड कोलेस्ट्रॉल को बढ़ाते हैं और एचडीएल यानी गुड कोलेस्ट्रॉल को घटाते हैं। देखो कोलेस्ट्रॉल दो तरह का होता है। एचडीएल यानी गुड कोलेस्ट्रॉल और एलडीएल यानी बैड कोलेस्ट्रॉल। यह एचडीएल हमारे बॉडी के लिए जरूरी होता है क्योंकि बेसिकली यह आर्टरीज
(09:15) को क्लीन करके हमारे हार्ट को प्रोटेक्ट करता है। लेकिन जब बॉडी में बैड कोलेस्ट्रॉल की मात्रा बढ़ने लगती है तो हमारी आर्टरीज ब्लॉक होने लगती है। जिससे कि हमें कार्डियोवस्कुलर डिजीज से लेकर हार्ट अटैक तक का भी खतरा बढ़ जाता है। एक सर्वे में पता चला कि दिल्ली और हरियाणा के 25% स्ट्रीट फूड स्नैक्स में हाई लेवल ऑफ ट्रांस फैट पाया गया। WHO कहता है कि दुनिया में हर साल 5 लाख से ज्यादा डेथ्स ट्रांस फैट्स की वजह से होती है। और फिर हम कहते हैं यह तो सब खाते हैं लेकिन सब अगर स्लो पोइजन ले रहे हैं तो क्या हम भी लें? एक्चुअली में जितना ज्यादा हमारे लिए
(09:49) सब कुछ एक्सेसिबल होते जा रहा है, हम उतना ज्यादा अपने हेल्थ के साथ कॉम्प्रोमाइज कर रहे हैं। WHO के गाइडलाइंस के अकॉर्डिंग एक एडल्ट को रोजाना सिर्फ 5 ग्राम नमक लेना चाहिए। लेकिन इंडिया में एवरेज पर्सन 8 से 20 ग्राम साल्ट कंज्यूम कर रहा है। इसका मतलब डबल ट्रिपल लिमिट क्रॉस हो रहा है और इसकी वजह से लोगों में हाई बीपी, हार्ट अटैक, दिल की बीमारियां बढ़ती जा रही हैं। और शुगर वो तो हर स्नैक हर प्रोसेस्ड आइटम के अंदर छुपा होता है। कई बारी लेबल पे लिखा होता है ग्लूकोज़, सुक्रोज़, डेक्सोज़, फ्रुक्टोज़ जिसे मोस्ट ऑफ़ द पीपल समझ ही नहीं पाते कि यह शुगर के
(10:24) ही अल्टरनेटिव्स हैं और हम इसे ओवर कंज्यूम किए जा रहे हैं जिससे कि डायबिटीज, ओबेसिटी और वीक मेटाबॉलिज्म लोगों में देखने को मिल रहा है। आईसीएमआर का एक स्टडी कहता है कि 10.1 करोड़ इंडियंस डायबिटीज से पीड़ित हैं और यह संख्या रोज बढ़ रही है। इसलिए तो इंडिया को दुनिया का डायबिटीज कैपिटल कहा जा रहा है। और इसका मेन रीज़न है इंडिया में कंज्यूम किए जाने वाले प्रोसेस फूड, शुगररी स्नैक्स, सेडेंट्री लाइफस्टाइल और अर्बन डाइटरी हैबिट्स। और यही ओबेसिटी आज के टाइम में टाइप टू डायबिटीज का बिगेस्ट रीजन बन चुका है। इफ वी टॉट 140 करोड़
(10:59) इंडियंस टू बिकम हेल्थ लिटरेट। वी वुड, आई एम श्योर इन द नेक्स्ट 10 इयर्स, वी वुड नो लगर वि द डायबिटीज़ कैपिटल ऑफ़ द वर्ल्ड। और खाने का ट्रेंड ऐसे चेंज हो रहा है कि इवन पनीर जैसी ओरिजिनल डेरी प्रोडक्ट को भी फेक बनाकर मार्केट में सरेआम बेचा जा रहा है। आप सोचो यह जो सस्ता पनीर मोमो या पनीर रोल आपको 40 से ₹50 में स्ट्रीट फूड्स में मिलता है। उसका असल सच क्या है? जरा सोच के देखो। 200 ग्राम अमूल पनीर मार्केट में अराउंड 90 का मिलता है। और यहां भर-भर के आपको पनीर दिया जा रहा है। वह भी सिर्फ 40 से ₹50 में। एक्चुअली में यह मिलावटी पनीर होता है जो दिखने में और
(11:35) टेस्ट में भी काफी हद तक पनीर जैसा ही लगता है। लेकिन असल में यह होता है एनालॉग पनीर जिसे बनाया जाता है सिंथेटिक मिल्क डिटर्जेंट बहुत सारा स्टार्च और वेजिटेबल ऑयल से। जो पनीर मिला है चूने से और क्रीम निकले हुए दूध, पाम ऑयल और मिल्क पाउडर इस तरह से बना करके ये जो पनीर तैयार किया जा रहा है अनहाइजेनिक अनहाइजीनिक कंडीशन में। दिखने में बिल्कुल असली पनीर जैसा लगता है। लेकिन असल में वो फेक होता है। और इसीलिए आजकल फेक पनीर स्कैम को एक्सपोज करने के लिए लोग तरह-तरह के टेस्ट कर रहे हैं लोगों को अवेयर करने के लिए। और सबसे
(12:11) शॉकिंग बात यह है कि बहुत सारे रेस्टोरेंट्स जो एफएसएसआई का लाइसेंस लेकर बैठे होते हैं, उनके यहां भी मिलने वाली पनीर की डिशेस फेक पनीर की सर्व की जा रही होती है। अभी कुछ समय पहले Zomato के बी टू बबी प्लेटफार्म हाइपर प्योर पर एनालॉग पनीर बेचा जा रहा था। गुजरात के वडोदरा और भावनगर में हेल्थ डिपार्टमेंट ने फेक पनीर के सैंपल्स टेस्ट किए जिसमें स्टार्च और सिंथेटिक सब्सटेंसेस पाए गए जिसके बाद कई वेंडर्स के खिलाफ एक्शन भी लिया गया। अब सवाल यह उठता है कि आम जनता यानी हमें क्या करना चाहिए? देखो यह सारी बातें सुनकर बिल्कुल ही बाहर की चीजें खाना या
(12:46) खरीदना हम बंद कर दें। यह तो पॉसिबल नहीं है ना? पर थोड़ा सा कॉन्शियस होना जरूरी है। यह जो हम बाहर के खाने को अपने डेली डाइट का हिस्सा बना रहे हैं, वह हमारे बॉडी के लिए लॉन्ग टर्म में बहुत हार्मफुल होने वाला है। महीने में एक बार दो बार खाना इज ओके बट एटलीस्ट थोड़ा अवेयर रहना जरूरी है। और आपके पास ऑप्शंस अवेलेबल है। आप डीप फ्राइड ऑप्शंस को ग्रिल्ड या स्टीम्ड ऑप्शन से रिप्लेस कर सकते हैं। जिससे कि टेस्ट और हेल्थ दोनों का बैलेंस बना रहेगा। आप जहां भी खाने जाते हो वहां देखो कि स्टाफ्स कितना हाइजीन मेंटेन करते हैं। स्टॉल साफ है या नहीं। पानी फ़िल्टर्ड
(13:18) है या टैप का है। ऑयल का रंग नॉर्मल है या ब्लैक डीज़ल जैसा है? इतना तो चेक कर ही सकते हो ना। और अगर कुछ गलत दिखे तो उसकी रिपोर्ट करो। एफएसएससीआई का फूड सेफ्टी कनेक्ट ऐप है जहां आप डायरेक्टली फोटो अपलोड करके कंप्लेंट भेज सकते हो। देखो आज मैं अवेयर कर रही हूं। कल कोई और आपको सजेशंस देगा। लेकिन आपके हेल्थ की चाबी सिर्फ आपके हाथ में है। सो डिसीजन आपको लेना है कि ऐसे ही हेल्थ के साथ कॉम्प्रोमाइज करते रहना है या एक हेल्दी और ब्राइट फ्यूचर की ओर बढ़ना है। फैसला आपका है। [संगीत]
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