Monday, August 3, 2026

Instagram Reels Are Not What You Think | Digital Heeramandi Explained

Instagram Reels Are Not What You Think | Digital Heeramandi Explained

Author Name:Rashmi Sawarn

Youtube Channel Url:https://www.youtube.com/@rashmisawarn

Youtube Video URL:https://www.youtube.com/watch?v=6e1xcCLgX04



Transcript:
(00:00) सबसे पहले आप यह वीडियो देखें। आप ऐसे क्या देख रहे हो? बोलो ना। मन में मत रखो। सुनो ऐसा मत सोचना कि तुम्हें छोड़ के और कोई गाजर के दुकानदार नहीं है। आज के दिन में बहुत सारे गाजर के दुकानदार होते हैं। पर मैं खाऊंगी तो सिर्फ और सिर्फ तुम्हारी दुकान के गाजर। वो बड़ा हो या छोटा हो। Instagram पर जो कुछ भी आजकल चल रहा है ना उसे सच बोलूं [संगीत] तो इस ऐप को सॉफ्ट फॉर्म इंडस्ट्री घोषित कर देना चाहिए। मतलब हाल कुछ ऐसा है कि Instagram और उल्लू जैसे एप्स में कोई डिफरेंस ही नहीं रहा। और देखा जाए तो इन एप्स में तो सब्सक्रिप्शन लेनी पड़ती है। पर यहां
(00:41) [संगीत] पर आपको वो सारा एंटरटेनमेंट एकदम फ्री में ही मिल जाएगा। और थोड़ा अगर डिटेल में इन चीजों का लुत्फ उठाना है तो कुछ लोगों के पेड सब्सक्रिप्शन भी मिल रहे हैं। बीते [संगीत] कुछ दिनों में मैंने ना चाहते हुए भी थोड़ा समय निकाला और इन अतरंगी महिलाओं के एक्सक्लूसिव कंटेंट को भी बहुत मुश्किल से देखने की कोशिश की [संगीत] जिसे कि यह 399, 499 और 1000 थाउजेंड के सब्सक्रिप्शन [संगीत] पर दिखाती हैं। जिसके बारे में मैं आगे बात तो करूंगी ही लेकिन यकीन मानिए इन कुछ [संगीत] दिनों में मैंने ऐसे ऐसे कंटेंट देखे हैं कि मेरा दिमाग सचमुच कुछ समय के
(01:13) लिए तो काम करना [संगीत] ही बंद कर चुका था। इन सब चीजों को प्रोसेस ही नहीं कर पा रहा था और इवन अभी भी प्रोसेस ही कर रहा है कि किस हद [संगीत] तक लोग गिर चुके हैं सो कॉल्ड व्यूज एंड पैसे कमाने के चक्कर में और जिसे यह लोग कंटेंट बोलकर अपलोड कर रहे हैं उसकी आड़ में बस न्यूडिटी, सेक्सुअलिटी, व्गेरिटी और कॉर्नोग्राफिक कंटेंट को प्रमोट कर रहे हैं। टेक जर्नलिस्ट कोरी डॉक्टरों ने एक टर्म [संगीत] क्वाइन किया इनटिफिकेशन। जिसका मतलब होता है कि योर इंटरनेट एक्सपीरियंस आर नॉट बिकमिंग गुड विथ टाइम [संगीत] बट आर एक्चुअली बिकमिंग वर्स। और देखा जाए तो
(01:47) आज के सोशल मीडिया के जमाने में हम यही एक्सपीरियंस तो कर रहे हैं। [संगीत] आखिर Instagram जैसी एप्स जो कि एक टाइम पर बस एक फोटो शेयरिंग ऐप हुआ करती थी वो आज [संगीत] के समय में क्यों इतने चीप और गिरे हुए कंटेंट को प्रमोट कर रही है? एंड इन कंटेंट की वजह से हमारी जनरेशन पे तो बुरा असर पड़ ही रहा है। सोचो 10 से 12 साल [संगीत] के बच्चे जिनको अब तो पैदा होते ही फोन पकड़ा दिया जाता है उन पे कैसा इंपैक्ट पड़ रहा है? Instagram पे आजकल एक डार्क ह्यूमर के नाम पे कंटेंट वायरल हो रहा है। एंड इस सो कॉल्ड डार्क ह्यूमर के नाम पे
(02:21) क्या दिखाया जा रहा है वो आप खुद ही देख लो। मेरा दोस्त मेरी बोतल के अंदर अपना गर्म पानी डालना चाहता था। पर मैंने मना कर दिया क्योंकि मेरी बोतल में ढक्कन नहीं है ना तो सारा पानी वापस बाहर आ जाएगा। एक दो ही नहीं आपको ऐसे कई नमूने दिखेंगे जो व्यूज और पैसे के लिए बस कुछ भी बनाकर परोसते हैं और लोगों के दिमाग को बौखला कर रख देते हैं। अभी संतूर मॉम के नाम पर मां और बेटे के रिश्ते को तो लोगों ने कंटेंट के नाम पर बदनाम करना शुरू ही किया था कि अब संतूर डैड वाले कंटेंट भी तेजी से लोग बना रहे हैं। जिसमें बाप बेटी के रिश्ते
(02:54) [संगीत] को भी इन लोगों ने बदनाम करने में कोई कसर नहीं छोड़ी है। सो गाइस, मम्मी का बर्थडे का केक बच गया था तो मैं पापा के लिए छुपा के लेके आई हूं क्योंकि पापा का यह फेवरेट केक है। तो यह लीजिए पापा खाइए। अब ऐसे घटिया कंटेंट की वजह से इनको कोई अच्छे ब्रांड डील्स तो मिलेंगे नहीं। तो [संगीत] यह आलतू-फालतू वेबसाइट्स या फिर वेटिंग एप्स को प्रमोट करके पैसे बनाते हैं। [संगीत] ब्रांडेड शूज हैं। भाई ₹50-50 में मिल रहे हैं। लूट लो भाई लूट लो। तो जल्दी से जाओ लिंक पे क्लिक कर लो tlegram चैनल पे और भाई लूट लो। और कुछ ना [संगीत] मिले तो
(03:24) पेड सब्सक्रिप्शन और एक्सक्लूसिव कंटेंट का ऑप्शन तो है ही। जैसे आप इनके पेड सब्सक्रिप्शन देख [संगीत] सकते हो ₹399 पर मंथ। और कितने लोगों ने परचेस कर रखा है? तो अराउंड [संगीत] 8791 लोगों ने। और अगर इसे कैलकुलेट करें तो यह रफली अराउंड 35 [संगीत] लाख महीने का बनता है। मतलब ऐसे अंग प्रदर्शन वाले कंटेंट से यह लोग [संगीत] 3535 लाख महीने के कमा रहे हैं। तभी तो आजकल कोई भी उतर जाता है कॉनेंट [संगीत] के नाम पर कुछ भी बनाने में। मतलब सच में कुछ भी। दादा पोता, बाप, बेटी, मां-बेटा, पति-पत्नी हर रिश्ते का मजाक बनाकर रख दिया है सोशल मीडिया पर। आप
(04:00) इस वीडियो में देखो किस तरीके से बूढ़े लोगों को भी नहीं छोड़ा जा रहा है आजकल [संगीत] की जनरेशन के द्वारा। और यही नहीं दो-ती साल के बच्चे भी जो अभी चलना और बोलना सीख [संगीत] ही रहे होते हैं, उनको भी कंटेंट के नाम पर इस्तेमाल करते हैं। वह भी इनके ही घर वाले। मछली जल की रानी है। [संगीत] उसका जीवन पानी है। वो मछली इस वीडियो में आपने इस छोटी बच्ची को देखा। अब सोचो यह बच्ची बड़ी होकर यह वीडियोस देखेगी [संगीत] तो क्या सोचेगी? क्या यह सब चीजें एक्सेप्टेबल थी जो इससे करवाई गई? जी आरडब्ल्यूएम यानी गेट [संगीत] रेडी विद मी।
(04:37) इस ट्रेंड का तो लोगों ने अलग ही लेवल पर मजाक बनाया हुआ है। लड़कियां तो लड़कियां लड़के भी बिना कपड़ों के इस ट्रेंड को बड़े ही मजे में फॉलो करते हुए अपना [संगीत] कंटेंट बनाते हैं। रेडी होने के नाम पे यह लोग अपने अंडर गारमेंट्स के कलर के साथ अंग प्रदर्शन यानी बॉडी को एक्सपोज करना जानते हैं। बस एक्चुअली पहले व्गैरिटी एक टॉपिक हुआ करता था जिस पे लोग बहुत प्राइवेटली बात करते थे। बट आज की डेट में इनके कई सब टॉपिक्स आने लगे हैं। जैसे कोई डांस में व्गैरिटी फैला रहा है, कोई एक्टिंग [संगीत] में, कोई डार्क ह्यूमर के नाम पे और कोई एस्ट्रोलॉजी के
(05:09) नाम पे। फॉर एग्जांपल आप इन मोहतरमा को देखो। इनका नाम है निधि चौधरी। मुझे समझ में नहीं आ रहा कि मैं निधि कह कर बात करूं या निधि जी कह कर बात करूं? रियल निधि और निधि जी। मैंने देखे कमेंट आ रहे हैं कि मतलब आप क्या एस्ट्रोलॉजी हम म्यूट पे भी देख लेते हैं निधि जी। इतना मजा आ रहा है उनको। हो सकता है कि वो उनको ना आवाज ऐसे जो होता है ना वाइब्रेशन मन ही मन आवाज ऐसे जा रही हो। [संगीत] ये खुद को एस्ट्रोलॉजर बोलती हैं। एंड इनका कहना है कि ये लोगों को एस्ट्रोलॉजी का ज्ञान देती हैं। अब आप [संगीत] खुद ही देख लीजिए कि किस तरह की एस्ट्रोलॉजी
(05:38) बताती हैं ये मैडम। जिन लोगों का भी चंद्रमा कमजोर है। इमोशनल स्टेबिलिटी नहीं है। तो मून को स्ट्रांग करने के लिए आज फिर से एक बहुत ही आसान सी चीज मैं बता रही हूं। मैंने इनका एक रैंडम पोस्ट का कमेंट सेक्शन खोला। तो वहां इनसे एस्ट्रोलॉजी से रिलेटेड कम एंड गंदेगंदे कमेंट्स तो आम थे। एक यूजर ने कमेंट करते हुए कहा कि शी नोस हाउ टू वायरल वीडियो। टुडेज़ गर्ल्स यूजिंग देयर बॉडी फॉर Instagram लाइक अ शॉपिंग मॉल। एक यूजर ने लिखा कि आपके ज्ञान के चक्कर में खूब कमजोर हो रहा हूं। लेकिन यह अपने कंटेंट को बड़े ही बेबाकी के साथ सपोर्ट भी करती हैं।
(06:13) आपने कहीं ना कहीं एस्ट्रोलॉजी को तो रिफॉर्म किया है। जैसे कि हम बात कर रहे थे कि पहले जो एस्ट्रोलॉजर होते थे वो थोड़े से अलग दिखाई देते थे। आपका ये जो ड्रेसिंग सेंस है ये काफी हिट है। साड़ी, ब्लाउज कहीं ना कहीं जब आपने शुरू किया ये एक स्ट्रेटजी थी या किसी ने कोई हेल्प करी कि नहीं? इस तरीके से पैकेजिंग होनी चाहिए। नहीं किसी ने कोई ऐसी हेल्प तो नहीं करी और ना मेरी कोई स्ट्रेटजी थी। मेरा बड़ा शौक था साड़ी पहनने का। हम्म। एक दिन मैंने सोचा कि चलो साड़ी पहन कर हम। इसके बारे में बताते हैं। मैंने सूट में भी लगाई हुई थी वीडियोस। और बस तो वो
(06:46) वीडियो मैंने अपलोड करी। लोगों को पसंद आई। हम और फिर यह सिलसिला चल रहा है और देखा जाए तो सही बोल रही हैं क्योंकि लोग एक्चुअली में इनके कंटेंट को देखने आते हैं और कंटेंट के नाम पे क्या दिखाती हैं वो आप समझ रहे हो समझ रहे हो समझ रहे हो ना मतलब एक तरीके से देखा जाए तो Instagram एक डिजिटल हीरा मंडी बनकर रह गया है। आपको विश्वास नहीं होगा लेकिन कई अकाउंट्स लिटरली आपको [संगीत] पेड सर्विस देने के लिए तैयार होते हैं। ऑनलाइन भी और इवन ऑफलाइन भी। और कई बार तो ऐसे अकाउंट्स के चक्कर में पड़ने की वजह से लोगों के साथ बहुत ही बड़ा स्कैम भी होता है। यानी कि
(07:22) साइबर बुलिंग। दिल्ली पुलिस की साइबर क्राइम यूनिट की वेबसाइट पे बड़े ही क्लियर तरीके से समझाया गया कि किस तरीके से एक्सटॉर्शन फ्रॉड किया जाता है जिसमें मोस्टली मेन को कांटेक्ट किया जाता है वाया Instagram बाय वुमेन हैविंग अट्रैक्टिव प्रोफाइल्स। जो कि इनसे चैट वीडियो कॉल करने के [संगीत] लिए कहती हैं। और जब सामने वाला इंसान अगर एग्री कर जाता है तो वह लेडी [संगीत] सारे इवेंट को रिकॉर्ड कर लेती है एंड विक्टिम को ब्लैकमेल करती है कि पैसे दो वरना हम तुम्हारे रिलेटिव्स और फ्रेंड्स में यह [संगीत] वीडियोस शेयर कर देंगे। एंड
(07:53) लिटरली लोग इनके शिकार भी हो जाते हैं बड़े आसानी से। [संगीत] जैसे कि आप यह न्यूज़ देखिए। अभी रिसेंटली मुंबई के एक डॉक्टर के साथ एक 95 लाख का सिक्सशन स्कैम [संगीत] हुआ। जिसमें कि एक महिला सौम्या अवस्थी जिसके साथ उनकी दोस्ती हुई थी Instagram पे उसने इस डॉक्टर को ब्लैकमेल करना शुरू कर दिया। कॉल चालू होने के बाद उन्होंने कि मतलब ये करो वो करो जैसे कि जैसे उन्होंने मांग की तो तभी उन्होंने मेरा मतलब उनके हंट्स उनके मोबाइल से उनका स्क्रीन रिकॉर्डिंग किया और फिर दो दिन के बाद तुरंत उन्होंने फिर वही वही अकाउंट से मुझे मैसेज आया कि ऐसा-सा आपका मेरे पास
(08:29) ये ऐसा-सा वीडियो है तो आपका ये वीडियो डिलीट करना है तो उन्होंने पैसे की मांग की। तो मैंने बोला कि यार मैं क्यों पैसे दूं? तो फिर उन्होंने मेरा वीडियो भेजा। फिर उन्होंने बोला कि आपके फ्रेंड में इनको इनको मैं अटैक कर रहा हूं। तो फिर मैं इतना पैनिकिक हुआ कि यार मतलब क्या करूं? और ऐसे ही हजारों [संगीत] केसेस हमें आए दिन देखने को मिलते हैं। और इसके अलावा आपको ऐसे [संगीत] वाहियात वीडियोस देखने को मिलेंगे इस डिजिटल हीरा मंडी में जिसमें लिटरली कुछ लड़कियां और इवन कि औरतें तक भी शामिल [संगीत] होती हैं। एंड वो गंदी एंड डबल मीनिंग बातें करती हुई
(09:01) नजर आती हैं। [संगीत] जिसके बारे में मैं यहां पर बोल भी नहीं सकती। और कुछ लड़कियां जो सो कॉल्ड फेमिनिज्म का टैग लेकर चलती हैं यह बोलते हुए कि हमारे कंट्री में वुमेन को ऑब्जेक्टिफाई किया जाता है। लेकिन उसी ऑब्जेक्टिफिकेशन का अगर इन्हें [संगीत] पैसा मिलता रहे तो फिर क्या ही दिक्कत है। यह कुछ भी करने को तैयार हैं। और आजकल तो [संगीत] एक फीमेल सडो फेमिनिस्ट रिसेंटली बहुत ही वायरल हुई। आप समझ ही गए होंगे कि मैं किसके बारे में [संगीत] बोल रही हूं। इन मैडम ने तो एक अलग ही ट्रेंड चला दिया है प्राउड। देखो हमारे [संगीत] देश में फ्रीडम ऑफ
(09:32) स्पीच एंड एक्सप्रेशन आर्टिकल 19 क्लॉज़ वन क्लॉज़ ए के अंडर गारंटीड है। लेकिन इसका [संगीत] मतलब यह नहीं होता कि आप इंटरनेट पर जो चाहे वो बोलो, पोस्ट कर दो, नॉर्मलाइज कर दो। [संगीत] क्योंकि इस आर्टिकल के साथ आर्टिकल 19 क्लॉज़ टू भी आता है जिसमें क्लियर लिखा है कि फ्रीडम [संगीत] ऑफ स्पीच एब्सोल्यूट नहीं है। यानी उसके ऊपर रीज़नेबल रिस्ट्रिकशंस लगते हैं। जैसे डिसेंसी, मोरालिटी, [संगीत] पब्लिक ऑर्डर और सोशल हार्मोनी। मतलब आपको अपनी ओपिनियन देने का हक है। लेकिन आप अगर [संगीत] ऐसी चीजें पोस्ट कर रहे हो जो सोसाइटी के बच्चों को इन्फ्लुएंस करें,
(10:05) [संगीत] को ग्लोरिफाई करे या एक अनहेल्ी ट्रेंड क्रिएट करे तो वो फ्रीडम ऑफ स्पीच नहीं वो सोशल इरिस्पांसिबिलिटी है। देखो इनका व्यू पॉइंट जो भी हो इस वर्ड को लेकर उससे मुझे प्रॉब्लम नहीं है और उनके पर्सपेक्टिव से आपको शायद ठीक भी लगे। लेकिन इनकी वजह से छोटे-छोटे 12 14 साल की लड़कियां तक अपने प्रोफाइल पर प्राउड लिखकर प्राउड फील कर रही हैं। मतलब पता नहीं क्या प्रूफ करना चाहते हैं यह लोग वायरल होने के चक्कर में। बस कुछ भी कंटेंट बना दो बस वायरल होना है एंड पैसे कमाना है। बस [संगीत] यही है आजकल का ट्रेंड। सो कॉल्ड कल्चर
(10:39) एंड ट्रेडिशन तो बस अब नाम का रह गया है और इस वजह से आजकल की जो यंगर जनरेशन है वह भी एक अलग लेवल पर जा पहुंची है। 5 से छ साल की छोटी बच्चियों को आप देखोगे तो व्गर सॉन्ग्स पर व्गर [संगीत] स्टेप्स करते हुए नजर आएंगी। मतलब यह बच्चे तो बहुत छोटे होते हैं। इन्हें अभी सही [संगीत] गलत का पता भी नहीं होता है। लेकिन इनके पेरेंट्स इन्हें बचपन से ही इस तरह के कंटेंट बनाने के लिए सपोर्ट करते हैं। और करते क्यों हैं? क्योंकि पैसा कमाने का एक जरिया बन चुका है सोशल [संगीत] मीडिया। एक एनालिसिस के मुताबिक इंडिया में कंटेंट क्रिएटर्स 20,000 से 2 लाख महीना तक कमा
(11:18) रहे हैं इन्फ्लुएंसरर डील से। अब इतना पैसा देखकर पेरेंट्स का दिमाग खराब ना हो तो क्या हो? वो खुद अपने बच्चे को और कंटेंट बनाने को पुश करते हैं और Instagram पे ऐसे कंटेंट [संगीत] आसानी से वायरल होते हैं। लेकिन सवाल यही उठता है कि Instagram ऐसे कंटेंट को आखिर क्यों प्रमोट करने लगा हुआ है? रिसर्च और रिपोर्ट्स को देखें तो पता चलता है कि Instagram का एल्गोरििदम खुद ही बायस कैरी करता है जो सेमी न्यूड और प्रोवोकेटिव पोस्ट को बूस्ट करता है। जर्मनी की एक इंडिपेंडेंट डिजिटल [संगीत] राइट्स ऑर्गेनाइजेशन ने 2020 में एक इन्वेस्टिगेशन किया था जिसमें उन्होंने
(11:53) Instagram के फीड एल्गोरििदम को एनालाइज किया। इन लोगों ने देखा कि अगर कोई क्रिएटर ने 10 फोटोस पोस्ट की है जिसमें से कुछ रेगुलर फोटो हैं और कुछ बिकनी या शर्टलेस फोटोस हैं तो Instagram का एल्गोरििदम उस यूजर के फॉलोअर्स को बिकनी वाली फोटो ज्यादा बार दिखाएगा। हां, सही सुना आपने। कम कपड़े मतलब ज्यादा रीच। एल्गोरिदम वॉच की इस [संगीत] स्टडी के हिसाब से जिन पोस्ट में औरतों की अंडरगारमेंट्स या बिकनीज़ वाली तस्वीरें थी, उनके फीड में दिखने के चांसेस 54% ज्यादा थे। कंपेयर टू नॉर्मल फोटो। आदमी अगर शर्टलेस फोटो डाल दे तो वह भी 28%
(12:30) [संगीत] ज्यादा प्रोबेबिलिटी से दिखाई जाती है। और जो पोस्ट नॉर्मल होते हैं उनके चांसेस [संगीत] बहुत कम होते हैं वायरल होने के। लगभग 60% तक कम। एग्जांपल के तौर पे देखें तो [संगीत] इस मैडम को देखो। 15 मिलियन से ज्यादा फॉलोअर्स हैं इनके। काफी लोगों ने रोस्ट भी किया है इन्हें। हेट भी मिलता है। लेकिन जब भर-भर के व्यूज [संगीत] और इंगेजमेंट मिल रहा है तो क्या ही दिक्कत है। इंटरनेट पे ऐसे कंटेंट के लिए तो ऑडियंस भारी पड़ी है। यह [संगीत] लोग जो कर रहे हैं वो ऑब्वियसली गलत है। लेकिन ऑडियंस भी तो उन्हें और करने के लिए पुश कर रही है। हर लाइक,
(13:02) शेयर, [संगीत] कमेंट एक नया रीजन बन जाता है इन जैसे क्रिएटर्स को और उसी तरह के कंटेंट [संगीत] बनाने के लिए। किसी को कोई फर्क नहीं पड़ता। और यही तो रियलिटी है। हम फर्स्ट जनरेशन हैं जो इन सबका रियल इफेक्ट देख रहे हैं। और आज तो फर्क [संगीत] नहीं पड़ता लेकिन आज से 20 साल बाद जब यह खुद या इनके बच्चे यह कंटेंट देखेंगे तो पता नहीं क्या सोचेंगे और उन पे क्या [संगीत] इफेक्ट पड़ेगा या मे बी जिस पेज से यह सब चल रहा है और हम भी उस भीड़ का हिस्सा बनते जा रहे हैं। शायद तब तक यह सब कुछ लोगों को भी बहुत आम लगने लगे। जिस [संगीत] तरह YouTube ने अपने
(13:35) कंटेंट अपलोड की पॉलिसी काफी स्ट्रिक्ट रखी हुई है, आई डोंट नो Instagram कभी [संगीत] ऐसी पॉलिसीज लाएगा भी या नहीं। एंड अभी रिसेंटली ऑस्ट्रेलिया ने एक न्यू सोशल मीडिया लॉ इंट्रोड्यूस करते हुए अपनी कंट्री [संगीत] में 16 साल से कम बच्चों के लिए सोशल मीडिया बैन कर दिया है। क्या हमारे देश में भी कुछ स्ट्रिक्टर पॉलिसीज होनी [संगीत] चाहिए या नहीं? आप कमेंट करके अपनी राय जरूर देना। और यहां तक वीडियो देख लिया है तो चैनल को सब्सक्राइब एंड [संगीत] वीडियो को हाइप जरूर करना क्योंकि एक वीडियो बनाने में बहुत मेहनत लगता है [संगीत] एंड यह मुझे मेरे काम को
(14:07) करने के लिए मोटिवेट करता है। और इसके अलावा अगर आप इन सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसेस की डार्क रियलिटी जानना चाहते हो तो यह वीडियो अभी जाकर देखो। थैंक यू सो मच।

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