Sudden Rise of Office Affairs in India
Author Name:Nikita Thakur
Youtube Channel Url:https://www.youtube.com/@nikitaksthakur
Youtube Video URL:https://www.youtube.com/watch?v=EVbTBOe14QQ
Transcript:
(00:00) कॉर्पोरेट अफेयर्स, यानी किसी कॉर्पोरेट कंपनी में अपने कोलीग या फिर बॉस के साथ एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर के ऐसे कई वियर्ड केसेस सुनने मिल रहे हैं। ये ओय में मैं क्या होटल में क्या करने आई हो? ऑफिस जाना था तुम्हें। क्या कर रही है तू यहां पे? किसके साथ आई? आइए किसके साथ? हाथ नीचे। किसके साथ आई है? हाथ नीचे। किसी के भी साथ आई हूं। तुझे क्या मतलब? अरे तेरे को तो मैं बैंड बजाऊंगी मैंने। तू क्या जानता है? इसके और यार इसके आधी उम्र की लड़की है ये। रात को तू इसके साथ वीडियो शूट करता है। ये सारी चीज़े क्या है पापा? आप यह सब
(00:32) साल 2020 गुड़गांव में एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर ने अपने प्रेग्नेंट वाइफ को कोविड लॉकडाउन के पहले उसके घर इंदौर में छोड़ा और वो वापस गुड़गांव आ गया। लेकिन इसके बाद 2 साल तक उसने अपनी बीवी और उसके न्यूबर्न बच्चे से कोई कांटेक्ट ही नहीं किया। इससे परेशान होकर जब वाइफ वापस गुड़गांव आई तब उसे पता चला कि हस्बैंड ने तो उसके ऑफिस की ही एक लड़की से शादी कर ली। दोनों साथ में रह भी रहे हैं और उन्हें लॉकडाउन के बाद तो एक बच्चा भी हो गया था। मुझे कोविड हो गया है और मैं जल्दी मरने वाला हूं। यह शब्द बोल के मुंबई में एक आदमी ने अपने वाइफ का कॉल कट
(01:07) कर दिया। कई दिन परेशान होने के बाद यहां वहां ढूंढने के बाद वाइफ ने फाइनली मिसिंग कंप्लेंट फाइल की। तब फिर पुलिस इन्वेस्टिगेशन से पता चला कि वो आदमी तो मरने का बहाना बना के अपने कोलीग के साथ इंदौर भाग गया था। उसका एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर चल रहा था और इसीलिए उसे अपनी बीवी से कैसे भी करके पीछा छुड़वाना था। लेकिन इनसे भी ज्यादा खतरनाक केसेस हो चुके हैं जहां लोगों ने लिटरली मर्डर जैसे क्राइम्स कमिट कर दिए हैं सिर्फ अपने एक्स्ट्रा मैरिटल ऑफिस अफेयर्स के लिए। चेन्नई के एक पुलिस ऑफिसर ने अपने कोलीग के लिए अपनी बीवी का मर्डर कर दिया। बेंगलुरु में
(01:41) हारिणी नाम की एक औरत ने उसके कोवर्कर के साथ अपना एक्स्ट्रामाइटल अफेयर खत्म करने की कोशिश की। तो उसके कोवर्कर ने जिसका नाम यशस था उसने हरिनी का ही मर्डर कर दिया। और सोनम रघुवंशी वाला हनीमून मर्डर केस तो हम सब जानते हैं। इसमें भी राज जो सोनम का बॉयफ्रेंड था वो एक्चुअली में उसका ऑफिस एंप्लई था। जिसने सोनम के साथ मिलकर राजा का यानी कि उसके हस्बैंड का मर्डर कर दिया। एंड ऐसे सिर्फ इक्केदुक्के केसेस नहीं है। इनका ऑफिशियल स्ट्स भी काफी शॉकिंग है। इकोनमिक टाइम्स में पब्लिश्ड एक सर्वे के हिसाब से इंडिया में 34% एंप्लाइजस का ऑफिस अफेयर रह चुका है।
(02:16) 34% यानी हर तीन में से एक इंसान का अपनी जिंदगी में कभी ना कभी ऑफिस में एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर रह चुका है। व्हिच इज अ वेरी कंसर्निंग फिगर। यह है ग्लैंडन जो कि टेंडर और बंबल जैसी ही एक पॉपुलर डेटिंग ऐप है। मगर सिर्फ शादीशुदा लोगों के लिए। एंड दिसंबर 2024 में ग्लैंडन ने अनाउंस किया कि इंडिया में उनके ऐप के यूज़र्स में एक मैसिव 270% का इनक्रीस हुआ है। व्हिच इज अगेन अ ह्यूज फिगर। इसी ऐप के सर्वे से पता चला कि 25% इंडियंस जो कॉर्पोरेट्स में काम कर रहे हैं वो अपने स्पाउस को चीट कर रहे हैं। एंड सबसे अनफॉर्चूनेट बात यह है कि
(02:56) इन्हें इसका कोई गिल्ट भी नहीं है। सर्वे में 71% वुमेन और 61% मेल्स ने कहा कि वो एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर्स को कोई इमोरल बात नहीं मानते हैं। व्हिच क्लियरली शोज़ कि हमारी सोसाइटी धीरे-धीरे बहुत ज्यादा बदल चुकी है। एंड डाटा की क्या जरूरत है? सोशल मीडिया पे तो ऐसे वीडियोस की आपको भरमार मिल जाएगी जहां एक पार्टनर को चीट करते हुए पकड़ा गया है एंड दूसरा पार्टनर चिल्ला रहा है। घूमली घूमली देख लिया मैंने। क्या हो गया तू? पीछे हो नंगे हाथ पकड़ा ना चल चल। नंगे पकड़ेगा तुझे। क्या नंगे हाथ पकड़ेगा? हैप्पी बर्थडे। क्या कर रहे हो अंकल? बर्थडे। हैप्पी बर्थडे।
(03:32) हैप्पी बर्थडे। मेरा शहर है ये। ये बच्चे का बाप है और ये आज दूसरी शादी कर रहा है। मुझे बोला। मैं तीन दिन के लिए हैदराबाद जा रहा था। हां ये दुनिया कान हो गया। खत्म हो गया। सारा कुछ खत्म हो गया। ये हमारी पत्नी है। शादी मैं पिया इनसे। एक मिनट एक मिनट। शादी हम थी इनसे और आप आ रहे हो यहां डेली। 2020 से चल रहा है। मेरे ऊपर 2020 से चल रहा है। सो आखिर इंडिया में सडनली ऑफिस अफेयर्स इतनी तेजी से कैसे बढ़ रहे हैं? क्या ऐसी कोई गलतियां हैं जो एक पार्टनर कर रहा है रिलेशनशिप में या कर रही है? जिस वजह से दूसरा पार्टनर मजबूर
(04:06) हो जा रहा है एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर करने के लिए? देखो सबसे पहले तो एन अफेयर इज नेवर द स्यूशन एंड अफेयर इज नेवर जस्टिफाइड। लेकिन हां इस सब्जेक्ट पर डेज ऑफ रिसर्च करने के बाद हमें कुछ ऐसे मिस्टेक्स मिले हैं जो कपल्स जाने अनजाने में कर रहे हैं। लेकिन दीज़ मिस्टेक्स आर लिटरली किलिंग देयर मैरिज। इसके अलावा कॉर्पोरेट कंपनी के एंप्लाइजस का वर्क एनवायरमेंट भी एक मेजर रीजन है। इनफैक्ट एक सर्वे से पता चला कि मेजॉरिटी ऑफिस अफेयर्स के पीछे का रीजन है ऑफिस में होने वाली वाइल्ड पार्टीज। एस्पेशली आईटी और बीपीओ सेक्टर्स में जहां
(04:44) नाइट शिफ्ट्स या फिर ग्रेवयार्ड शिफ्ट्स बहुत ज्यादा कॉमन है। सो एक्चुअली इन अनकन्वेंशनल शिफ्ट टाइमिंग्स जैसे कि रात के ग्रेवयार्ड शिफ्ट्स में होता क्या है कि टाइमिंग्स की वजह से मेजॉरिटी एंप्लाइजज़ अपने सोशल सर्कल से कट ऑफ हो जाते हैं। जिस वजह से ऐसा देखा गया है कि कई कॉर्पोरेट एंप्लाइजज़ ऐसे पार्टीज अटेंड करते हैं जिन्हें कहा जा रहा है वाइल्ड पार्टीज। अब यह पार्टीज कंपनी ने ही ऑर्गेनाइज किए हो सकते हैं या फिर कोई एक कोलीग या फ्रेंड ऑर्गेनाइज किया हो सकता है। मगर यहां सबसे कंसर्निंग बात यह है कि अक्सर इन पार्टीज में फिजिकल रिलेशनशिप्स
(05:15) बनते हैं या फिर कैजुअल हुकअप्स होते हैं। टेलीग्राफ ने इंडियन मेट्रो सिटीज में एक सर्वे किया था तो उससे पता चला कि मुंबई के 89% सर्वेड एंप्लाइजस और बेंगलुरु के 74% एंप्लाइजस ने कहा कि हां वह ऐसी पार्टीज अटेंड करते हैं। एंड हां इन पार्टीज में फिजिकल रिलेशनशिप्स या फिर कैजुअल हुकप्स होते हैं। एंड लगभग 19% लोगों ने यह भी बताया कि हां ऐसे ही ऑफिस पार्टीज की वजह से ही उनके ऑफिस अफेयर्स की शुरुआत हुई थी। इनफैक्ट जनरल ऑफ मैरिज एंड फैमिली के एक स्टडी ने तो यह तक सीधा कह दिया कि नाइट शिफ्ट्स किसी भी मैरिटल रिलेशनशिप्स की लॉन्ग टर्म हैप्पीनेस के
(05:51) लिए टॉक्सिक है। क्योंकि उनका ऑब्जरवेशन था कि जिन नाइट शिफ्ट करने वाले कपल्स की शादी को 5 साल से कम हुए थे और उन्हें एक बच्चा भी था वो कपल्स डिवोर्स लेने के लिए सिक्स टाइम ज्यादा लाइकली थे एज कंपेयर टू वो कपल्स जो डे शिफ्ट में काम करते थे। सोचो सिर्फ शिफ्ट के टाइमिंग्स एक अच्छे खासे मैरिज को डिवोर्स तक ला सकता है। एंड यह नाइट शिफ्ट्स एक ग्लोबल प्रॉब्लम है। हां। क्लेयर रीड जो कि यूके की एक लॉ फॉर्म में सीनियर एसोसिएट हैं। उन्होंने बताया कि उनके यहां जितने भी कपल्स नाइट शिफ्ट की वजह से डिवोर्स लेने आते थे उनमें से 80% डिवोर्स वाले कपल्स इनफिडिटी
(06:28) यानी अफेयर्स की वजह से ही डिवोर्स ले रहे थे। बट ऑफ कोर्स इंडियन एंप्लाइजस का सिर्फ एक ही परसेंटेज नाइट शिफ्ट्स में काम करता होगा। मेजॉरिटी एंप्लाइजस तो नॉर्मल डे शिफ्ट्स में ही काम करते हैं। राइट? सो, ऐसे में इन एंप्लाइजस के अफेयर्स के पीछे क्या रीज़ंस हो सकते हैं? वेल, एक बहुत ही इंटरेस्टिंग डाटा सामने आया है इकोनॉमिक टाइम्स के सर्वे में। यह बात पता चली कि 55% वर्क प्लेस अफेयर्स एंप्लई और बॉस के बीच में हो रहे हैं। एंड यही है हमारा रीज़न नंबर टू। अफेयर फॉर करियर ग्रोथ। आज इंडियन जॉब मार्केट इज एट इट्स वर्स्ट।
(07:03) 47% प्रोफेशनल्स उनकी करंट सैलरी से बिल्कुल भी खुश नहीं है। कई लोगों को एजुकेशन लोन भरने में तक प्रॉब्लम्स आ रहे हैं। एंड पिछले 3 सालों में इंडियन बैंक्स के स्टूडेंट्स जिन्होंने लोनस लिए लेकिन अब वो डिफॉल्ट कर चुके हैं। इनकी मात्रा 142% से बढ़ चुकी है। 50% इंडियंस को पिछले साल लिए लोन की ईएमआई भरने में प्रॉब्लम्स हो रही है। एंड द स्केरियर्स डाटा ऑफ ऑल। 75% इंडियंस के पास कोई इमरजेंसी फंड है ही नहीं। यानी अगर किसी दिन अचानक से उनकी जॉब चली गई तो उनके सर्वाइवल पर एक बड़ा क्वेश्चन मार्क आ जाएगा। 75% इंडिया जैसे एक 140 करोड़ की आबादी वाले
(07:40) देश के लिए यह एक बहुत बड़ा नंबर है। वो भी एक ऐसे दौर में जहां छोटे ऑफिसिसेस से लेकर टॉप मल्टीीनेशनल कंपनीज में मास लेऑफ्स जारी हैं। ऑलमोस्ट 40,000 एम्प्लाइजस लॉस्ट देयर जॉब्स। मोर देन 10,000 आर्टिस्ट्स हैव लॉस्ट देयर जॉब्स ओवरनाइट इन इंडिया नाउ फेसिंग फाइनेंसियल डिस्ट्रेस। बिटवीन 60 एंड 80,000 वर्कर्स इन इंडिया लॉस्ट देयर जॉब्स एंड इट्स नॉट ओवर येट। सो अब ऐसे में क्या मुझे सही में प्रूफ करने की जरूरत है कि आखिर क्यों 55% वर्क प्लेस अफेयर्स एंप्लाइजस का उनके बॉसेस के साथ हो रहा है? एक रिसर्च फर्म साइनोवेट ने मुंबई, दिल्ली, पुणे जैसे मेट्रो सिटीज
(08:16) के 500 कंपनीज में जब सर्वे किया उस सर्वे में 44% रिस्पॉनडेंट्स ने एग्री किया कि हां ऑफिस अफेयर उनके करियर में ग्रोथ हासिल करने का सबसे क्विकेस्ट तरीका है। इनफैक्ट 30% यानी हर 10 में से तीन एंप्लाइजस ने तो यह तक एग्री किया कि हां ऑफिस अफेयर की वजह से ही उन्हें जल्दी हक्स और प्रमोशंस मिले हैं। यह केस देखना मुंबई की एक डेवलपमेंट मैनेजर रंजना ने हिंदुस्तान टाइम्स को बताया कि उनकी शादी को 7 साल हो चुके हैं और उन्हें एक 4 साल का बच्चा भी है। लेकिन फिर भी वो अपने ऑफिस में एक जूनियर के साथ एक्स्ट्रा मैरिटल रिलेशनशिप में है। अब इस अफेयर का
(08:52) जस्टिफिकेशन उन्होंने यह दिया कि वो और उसके हस्बैंड सुबह 8:00 बजे निकल जाते हैं और रात को लेट 9:00 बजे घर आते हैं। सो ऐसे में उनके पास एक दूसरे से बात करने का टाइम ही कहां है? इसीलिए उनका मानना है कि अगर उनके ऑफिस अफेयर से उन्हें इमोशनल फुलफिलमेंट मिल रहा है और उनके जूनियर को इससे करियर में ग्रोथ मिल रहा है तो उस अफेयर में गलत क्या है? अब इनका स्टेटमेंट काफी डिबेटेबल है। मेरे तो पल्ले में नहीं आ रहा लेकिन उन्होंने कॉर्पोरेट अफेयर्स का अगला इंपॉर्टेंट रीजन हाईलाइट किया जिससे आज कई इंडियंस अफेयर्स करने के लिए ऑलमोस्ट वनरेबल हो चुके हैं। व्हिच इज
(09:24) ओवरवर्क। आज इंडिया में 70% एम्प्लाइजस ओवरवर्क्ड फील कर रहे हैं। इंडिया के आईटी सेक्टर का ही एग्जांपल ले लो। वहां तो हर चार में से एक एंप्लई हफ्ते में 70 आवर्स काम करता है। मतलब ऑलमोस्ट 10 से 11 घंटे एवरीडे। ऊपर से इंडिया का एवरेज ऑफिस कम्यूट टाइम भी 55 मिनट्स है। मतलब एक एंप्लई के करीब 12 घंटे तो ऑफिस के लिए ही चले जाते हैं। अब मिनिमम 7 घंटे तो किसी को भी सोना पड़ेगा। दो से 3 घंटे ब्रेकफास्ट, डिनर वगैरह के लिए निकाल लो। सो क्या इंडिया में एक कपल को आपस में ठीक से बात करने का भी कोई टाइम मिलता है क्या एक कपल को एक
(09:57) दूसरे को समझने का एक दूसरे से शेयर करने का एक दूसरे को इमोशनली सपोर्ट करने का वाकई में टाइम मिलता भी है एंड नहीं मैं इसके वजह से होने वाले अफेयर्स को बिल्कुल भी जस्टिफाई नहीं कर रही हूं लेकिन जब तक हम प्रॉब्लम्स को अच्छे से समझेंगे ही नहीं तब इसके सशंस कैसे निकलेंगे अब ऑफिस स्ट्रेस ओवरवर्क एंड वियर्ड टाइमिंग्स में आप ऐड कर दो अरेंज्ड मैरिज सेटअप के एडेड इशज़ देखो हर रिलेशनशिप को स्टंग बनाने के लिए यह छह पिलर्स जरूरी है। हाई कॉर्पोरेट स्ट्रेस एनवायरमेंट, वर्क स्ेड्यूल एंड ओवरवर्क की वजह से रिलेशनशिप्स में ट्रस्ट
(10:28) एंड कम्युनिकेशन इशज़ कैसे हो रहे हैं वो तो हमने डिस्कस कर लिया। मगर इंडिया के अरेंज्ड मैरिज सेटअप में यूजुअली शेयर वैल्यूस और गोल्स भी कॉम्प्रोमाइज हो जाते हैं। ऐशली मेडिसन जो भी ग्लडन की तरह ही एक एक्स्ट्रा मैरिटल डेटिंग ऐप है। उन्होंने जब अपने 75,000 इंडियन यूज़र्स का सर्वे किया तब उसमें सामने आया कि 75,000 यूज़र्स में से 80% यूज़र्स की अरेंज्ड मैरिज हुई थी। मतलब उस ऐप में जितने भी लोगों ने लॉग इन किया था एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर करने के लिए उसमें से 80% यूज़र्स की अरेंज्ड मैरिजेस हुई थी। जाहिर है यह कोई कोइंसिडेंस नहीं है। यह डाटा हमारी
(11:03) सोसाइटी की सबसे बड़ी कमजोरी को दर्शाता है। नहीं, अरेंज मैरिजेस में कोई प्रॉब्लम नहीं है। आज भी इंडिया में होने वाली शादियों में से 93% अरेंज्ड ही है। व्हिच इज फाइन। प्रॉब्लम यह है कि द हिंदू की एक रिपोर्ट के हिसाब से हर 10 में से चार लड़कियों का उनकी शादी में कोई से ही नहीं होता है। वो किससे शादी करेंगे, कब शादी करेंगी, यह सब कुछ उनके पेरेंट्स उनके लिए डिसाइड करते हैं और इसीलिए 2010 के एक दूसरे रिपोर्ट के हिसाब से इंडिया में 78% लड़कियां ऐसी थी जो अपने हस्बैंड को शादी के बस 1 महीने पहले से ही जानती थी। और उसमें से भी यह ध्यान से सुनना 78% में से
(11:40) भी 66% औरतें तो ऐसी थी जो अपने हस्बैंड से पहली बार सीधा शादी के दिन पे ही मिल रही थी। अब यह डाटा पुराना जरूर है लेकिन इसी के वजह से आज भी ऐसे कई कपल्स हैं जो 10 साल 20 साल से शादीशुदा तो हैं लेकिन वो एक दूसरे से बिल्कुल भी कनेक्टेड नहीं फील करते हैं। वो एक दूसरे से प्यार नहीं करते हैं। वो एक दूसरे के फर्स्ट चॉइस नहीं है। हां, इतने सालों में उन्होंने साथ रहना सीख लिया है लेकिन उनके इंटरेस्ट, उनके गोल्स एक दूसरे से बिल्कुल भी अलाइन नहीं करते हैं। अब अगर आप एक रनाउंड साइकोलॉजिस्ट डॉक्टर जॉन गॉटमैन की एक स्टडी देखोगे जिसमें
(12:15) उन्होंने लॉन्ग टर्म मैरिज यानी कि 25 से 50 साल की शादी के सक्सेस को पता लगाने के लिए 156 मिडिल और ओल्ड एज्ड कपल्स को स्टडी किया। इस स्टडी में उन्होंने सभी कपल्स से पूछा कि इतने सालों तक एक हैप्पी मैरिज के लिए उनका सोर्स ऑफ हैप्पीनेस क्या था? तो ऑलमोस्ट सभी कपल्स ने मेजरली यह चीजें लिस्ट की। इस लिस्ट में अगर आप देखोगे तो ज्यादातर एक्टिविटीज वही है जो उन्होंने साथ में मिलके की थी। जैसे थिंग्स डन टुगेदर रिसेंटली प्लांस फॉर द फ्यूचर और उनके ड्रीम्स। इन्हें ही तो शेयर वैल्यूस और गोल्स कहते हैं जो दोनों भी पार्टनर्स मिलके उनके लाइफ के लिए
(12:51) प्लान करते हैं। और फिर उन्हें अचीव करते हैं साथ में मिलकर। इनफैक्ट अमेरिकनंस जिनके मैरिजेस का ट्रैक रिकॉर्ड कुछ खास नहीं है। वहां पर भी जब कुछ सक्सेसफुल कपल्स को स्टडी किया गया तो उनमें से भी 64% कपल्स ने यही बताया कि उनकी मैरिज सिर्फ और सिर्फ एक ही चीज की वजह से टिकी रही। शेयरर्ड इंटरेस्ट यानी कि ऐसे कई चीजें थी जो उन्हें हमेशा साथ में करने में मजा आता था और यह उनके लिए एक दूसरे की तरफ कोई ड्यूटी या रिस्पांसिबिलिटी नहीं थी बल्कि यह उनका पैशन था। बट इंडिया में कपल्स का कॉमन इंटरेस्ट या फिर कंपैटिबिलिटी कहां देखी जाती है? शादी के
(13:28) मेजर फैक्टर्स तो सिर्फ कास्ट और इनकम स्टेटस होता है। बट वहीं पे अक्सर वर्क स्पेस में क्या होता है कि सिर्फ क्योंकि नेचर ऑफ वर्क सिमिलर है तो ज्यादा चांसेस हो जाते हैं कि किसी भी इंसान का उसके कोलीग के साथ थॉट ज्यादा मैच करे। उन्हें सिमिलर काम करने में मजा आए और उनका गोल्स, उनके विज़न भी एक दूसरे के साथ ज्यादा अलाइन हो। इसीलिए एक सर्वे में 50% कॉर्पोरेट एंप्लाइजस ने बताया कि वो उनके साथ ज्यादा अट्रैक्टेड फील करते हैं जिनके जॉब्स उनके जॉब्स के साथ सिमिलर हो। बट रीजंस जो भी हो 100 बात की एक बात है कि एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर्स घर बर्बाद कर
(14:03) देते हैं। परिवार तोड़ देते हैं। कपल के मेंटल हेल्थ पर असर तो पड़ता ही है। लेकिन अगर ऐसे रिलेशनशिप्स में बच्चे भी हो जाए तो अपने पेरेंट्स के ऐसे ब्रोकन मैरिजेस की वजह से बच्चों को जिंदगी भर का ट्रामा हो सकता है। स्ट्रेस, एंग्जायटी, डिप्रेशन ऐसे कई केसेस हैं जहां मां-बाप के एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर्स या फिर डिवोर्सेज की वजह से उनके बच्चों ने गलत कदम उठा लिए हैं। सो अब ऐसे में इसके सलूशंस क्या हो सकते हैं? वेल, कुछ ऐसे साइंटिफिक टेक्निक्स हैं जिस पर कई साइकोलॉजिस्ट और रिलेशनशिप काउंसलर्स की एकता है कि राय है कि हां यह
(14:39) टेक्निक्स एक हेल्दी रिलेशनशिप मेंटेन करने के लिए या फिर एक ब्रोकन मैरिज को फिक्स करने के लिए डेफिनेटली काम करती है। सबसे पहला है चैटमैनस फाइव लव लैंग्वेज। 1992 में एंथ्रोपोलॉजिस्ट और मैरिज काउंसलर गैरी चैटमैन ने द फाइव लव लैंग्वेज स्टडी को पब्लिश किया जिसमें उन्होंने पांच ऐसे तरीके बताएं जिससे कपल्स अपने रिलेशनशिप के स्पार्क को मेंटेन रख सकते हैं। पहला है वर्ड्स ऑफ अमेशन यानी रेगुलर अप्रिसिएशंस करना, रोमांटिक टॉक्स करना एक्सट्रा। दूसरा है क्वालिटी टाइम एव्री वीक, एव्री मंथ एंड एव्री ईयर यानी अपने पार्टनर के साथ डेट
(15:13) नाइट्स, स्टेशंस या फिर लॉन्ग ट्रिप्स प्लान करना। तीसरा है गिफ्ट्स। अब इसमें ऐसा जरूरी नहीं है कि गिफ्ट्स बहुत ही एक्सपेंसिव हो पर ऐसी चीजें जिससे आपका पार्टनर एप्रिशिएटेड फील करें। चौथा है एक्ट्स ऑफ सर्विस। यह काफी लोगों का लव लैंग्वेज भी होता है जहां एक पार्टनर दूसरे पार्टनर के लिए कुकिंग हो गया, मसाज या ऐसा उनका कोई भी काम उनके बोले बिना करके उन्हें रिस्पेक्टेड और स्पेशल फील करवाता है। एंड लास्टली फिजिकल टच। अच्छा फिजिकल टच में भी एक सर्वे ने एक इंटरेस्टिंग ऑब्जरवेशन नोट किया। कपल्स जो ऑन एन एवरेज वीक में तीन बार फिजिकली
(15:46) इंटिमेट होते थे, उनके रिलेशनशिप के सक्सेस के चांसेस हायर थे, एज़ कंपेयर टू अदर कपल्स। बट अगेन इंडिया में अनफॉर्चुनेटली कई रीज़ंस की वजह से जैसे फर्स्ट ऑफ ऑल योर सेक्स इज़ अ टैबू। देन स्टेइंग विद इनलॉज़ या फिर बच्चों की वजह से या इन जनरल लाइफस्टाइल रीजंस एंड मोनोटोनी के वजह से कपल्स में फिजिकल अट्रैक्शन ओवर अ पीरियड ऑफ टाइम बहुत कम हो जाता है। इनफैक्ट यही रीज़न हो सकता है कि आज ऑफिस अफेयर्स होने का सिक्स्थ मेजर रीज़न इज लैक ऑफ फिजिकल इंटिमेसी विथ स्पाउस। अगेन यह बिल्कुल भी जस्टिफाई नहीं करता एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर को। बट दिस
(16:22) इज जस्ट समथिंग टू वर्क ऑन। एक और अच्छी टेक्निक है जो कुछ डॉक्टर्स सजेस्ट करते हैं वि इज एस्टैब्लिशिंग नो फोन ज़ोंस। एक न्यूयॉर्क बेस्ड मैरिज कोच पीटर मैकफेदन ने बताया कि उन्होंने 18 सालों में 5000 कपल्स को ट्रीट किया है और बहुत सारे कपल्स का यही कहना होता है कि आई विश ही और शी वुड नॉट लुक एट द फोन व्हेन आई एम टॉकिंग टू हिम। इसीलिए पीटर के हिसाब से इसका एक ही सशन है डिक्लेअ बेड्स एस नो फोन ज़ोंस। ताकि अभी के हेक्टिक वर्क स्ेड्यूल्स में एटलीस्ट सोने से पहले कपल्स आपस में बात कर सकें। उनको कुछ पलों की प्राइवेसी मिल सके। बट हां एक चीज मैं
(16:57) कहना चाहूंगी डेफिनेटली मैं कोई रिलेशनशिप एक्सपर्ट नहीं हूं। साइकोलॉजिस्ट नहीं हूं। डॉक्टर नहीं हूं। बट हां एक बात फॉर श्योर है। अगर कोई भी कपल अपने रिलेशनशिप में स्ट्रगल कर रहा है तो उन्हें कपल थेरेपीस डेफिनेटली लेनी चाहिए। हमारे देश में कई चीजों की तरह यह भी एक बहुत बड़ा टैबू है। लोग कहते हैं कि घर की बात घर में ही रहनी चाहिए। बाहर वालों को क्यों बताना है? बट अभी यह जमाना बदल चुका है। डॉक्टर्स के सामने अपने कंसर्न्स को शेयर करके रिलेशनशिप काउंसलर्स या फिर कोचेस से बात करके एक हेल्दी डिस्कशन करके आपकी मैरिज काफी हद तक इंप्रूव हो सकती है। एंड
(17:31) फाइनली सबसे पावरफुल सलूशन है सही पार्टनर चूज़ करना एंड फिर उनके साथ ग्रो करना, कम्युनिकेट करना और एक मीनिंगफुल रिलेशनशिप को बिल्ड करना। देखो आपकी जिंदगी का सबसे इंपॉर्टेंट फैसला जो आप लोगे वो है कि आप किसके साथ अपना फ्यूचर शेयर करना चाहते हो। मोस्ट स्पाउस फटास्टिक क्योंकि यह कोई छोटी इन्वेस्टमेंट नहीं है। यह आपकी पूरी लाइफ का फाउंडेशन है। इसमें आप वन पर्सन का भी कॉम्प्रोमाइज अफोर्ड ही नहीं कर सकते हो। आपको अपने पार्टनर की स्ट्रेंथ ही नहीं, उनकी सभी कमजोरियां, सभी खामियां भी अच्छे से पता होनी चाहिए। एंड हां, अ परफेक्ट पार्टनर
(18:17) इज अ मिथ। लॉन्ग टर्म रिलेशनशिप्स तब बनती है जब दो लोग फ्लॉस के बावजूद एक दूसरे को एक्सेप्ट करने को और एक दूसरे के लिए ग्रो करने को तैयार होते हैं। आफ्टर ऑल रिलेशनशिप्स में परफेक्शन नहीं प्रोग्रेशन मैटर करता है। होप दिस हेल्प्स। अगर आपको ऐसे वीडियोस पसंद आते हैं तो आप मेरा यह वाला वीडियो भी चेक आउट कर सकते हो। मिलते हैं अगले वीडियो में। तब तक के लिए जय हिंद।
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