Author Name:Aptitude India
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Youtube Video URL:https://www.youtube.com/watch?v=uxws2wDPUVA
వీడియోలో ప్రధానంగా చెప్పినది ఏమిటంటే: చిన్ననాట **love and affection** తక్కువగా దొరికిన అబ్బాయిలు పెద్దయ్యాక female గురించి ఒక fantasy కట్టుకుని, సంబంధంలోకి వచ్చిన తర్వాత అమ్మాయిని అదే moldలోకి fit చేయాలని ప్రయత్నిస్తారు [1]. అదే కారణంగా over-care, ఎక్కువ apologize చేయడం, boundaries కోల్పోవడం, relationshipను “నేనే నడిపించాలి” అన్న ప్రయత్నం మొదలై dynamics చెడిపోతాయని వీడియో అంటుంది [1].
## ముఖ్య takeaways
- బాల్యంలో ప్రేమ/ఆప్యాయత తక్కువైతే, మనసులో ఒక ideal female image/ fantasy ఏర్పడొచ్చు [1].
- నిజ జీవితంలో ఉన్న partner ఆ fantasyకి match కాకపోతే, ఆమెను మార్చాలని లేదా “సరిచేయాలని” ప్రయత్నం చేయడం సమస్యకు కారణమవుతుంది [1].
- Relationshipలో partnerను control చేయడం, అవసరానికి మించి care చేయడం, boundaries వదిలేయడం frame బయటకు తీసుకెళ్తుందని వీడియో చెబుతోంది [1].
- Partnerను ఉన్నట్లుగానే accept చేసి, ఆమె మంచి లక్షణాలను enjoy చేయమని సూచిస్తుంది [1].
- Femaleను life centerగా పెట్టకుండా, self-focus, routines, hobbies, activities కొనసాగించాలని అంటుంది [1].
- కలిసి travel, games, classes, కొత్త skills, కొత్త language వంటి activities చేయడం relationshipను aliveగా ఉంచుతుందని చెప్పింది [1].
- Physical activity ద్వారా అదుపు లేని fantasy/energyని healthyగా channel చేయమని సూచిస్తుంది [1].
## ఒక లైన్లో సారాంశం
వీడియో సందేశం: **fantasyతో partnerను మార్చాలని చూడకుండా, boundaries కాపాడుకుంటూ presentలో relationshipను enjoy చేయండి** [1].
## జాగ్రత్తగా చూడాల్సిన విషయం
ఇది ఒక motivational viewpoint; ఇందులో “female psychology” అని సాధారణీకరణ ఎక్కువగా ఉంది, కాబట్టి దీన్ని అన్ని మహిళలకూ వర్తించే సత్యంగా కాకుండా, relationship patternsపై ఒక personal interpretationగా చూడడం మంచిది [1].
Transcript:
(00:00) मैक्सिमम लोग ऐसे होते हैं जिनके मन के अंदर में लस्ट दबा के भरी होती है। वो हमेशा फीमेल्स को ताड़ते हैं। उनके फोटोग्राफ्स को, नेकेड फोटोग्राफ्स को दबा करके और उससे रिलेटेड हरकतें करते हैं। हां, किसी लड़की को डायरेक्ट अप्रोच नहीं कर पाते हैं। और जब एक प्लेटफार्म पे आते हैं, डायरेक्ट अप्रोच करना शुरू कर देते हैं। फिर वो उसकी तकरीबन जो है पूजा करना शुरू कर देते हैं। ऐसा क्यों होता है? इसके पीछे की साइकोलॉजी क्या है? ध्यान से सुन लो। आपको बहुत फायदा होने वाला है। जिन भी लोगों को स्कूल टाइम में जब वह छोटे बच्चे होते हैं घर वालों से या स्कूल
(00:40) वालों से या जो भी उनका एनवायरमेंट होता है, वहां पर अच्छे से लव एंड अफेक्शन नहीं मिलता है। दे आर ऑलवेज क्वाइट। दे आर ऑलवेज थिंकिंग कि मुझे प्यार नहीं किया जाता। आई एम काइंड ऑफ़ अ अनवांटेड पर्सन एटसेट्रा। इस फीलिंग के साथ जो लोग टीनएज तक आ जाते हैं वो जिंदगी में बहुत लस्टी होते हैं। वो अपने मन में वुमेन की एक फेंटसी क्रिएट करते हैं। क्योंकि उनको प्यार नहीं मिला होता है। तो मन ही मन जो है वो वुमेन को लेकर के फेंटसाइज करते हैं। ऐसा होगा फिर ऐसा होगा। ऐसी फीमेल होगी फिर मैं यह करूंगा। फिर हम वहां जाएंगे। द फिजिकल पार्ट आल्सो एवरीथिंग दे फेंटसाइज।
(01:24) और यही फेंटसी करते-करते जब उनको एक फीमेल मिल जाती है तो फिर उस वो फेंटसी वाली फीमेल से उसको कोरिलेट करते हैं। अगर जो फीमेल उनको मिल जाती है रिलेशनशिप में या शादी में वो उससे मैच नहीं करती है तो वो पूरी कोशिश करते हैं कि वो उसके हिसाब से बिहेव करें। वो वैसे ही अपने आपको कंडक्ट करें। राइट? तो यह जब उनके दिमाग में चल रहा होता है तो वह बहुत कोशिश करते हैं उस फीमेल को क्रिकेट करने की, उस फीमेल को सुधारने की, उस फीमेल को अपने हिसाब से मैनेज करने की ताकि उनकी फेंटसी जो दिमाग में बैठी हुई है फीमेल को लेकर के वो पूरी हो जाए। यहां सबसे बड़ी
(02:08) गड़बड़ होती है। ओके? क्योंकि वो फीमेल ठीक है। कुछ चीजें मैच करती होंगी आपकी फेंटसी से। सारी चीजें नहीं मैच करती हैं। तो अगर तो आप फीमेल को जैसी वह मिली है वैसे वैसे उसको एंजॉय कर लो। उसको सुधारने की कोशिश ना करो तो तो आपको रिलेशनशिप में ज्यादा प्रॉब्लम नहीं आएगी। लेकिन अगर आप उसको इंप्रूव करने की कोशिश करोगे, सुधारने की कोशिश करोगे, अपने हिसाब से कोशिश करोगे कि यह इसको ऐसे बात करनी चाहिए, इसको ऐसा करना चाहिए, इसको यह नहीं करना चाहिए। इसको यह करना चाहिए। यह जरूरत से ज्यादा जब आप करना शुरू कर दोगे, उसकी कांट छांट शुरू कर दोगे तो आपको बहुत
(02:47) मुश्किल हो जाएगी। राइट? क्योंकि एक तो वो फीमेल उस कैटेगरी में नहीं आएगी। हां, शुरू-शुर में वह आ सकती है। जब तक वो रिलेशनशिप में नहीं आती है, शादी में नहीं आती है, तो वह उस कैटेगरी में आ सकती है। लेकिन काफी देर तक वह यह हरकतें नहीं करने वाली है। ओके? तो अपनी फेंटसी जरूरत से ज्यादा जो आप करते हो बिकॉज़ आपको लव एंड अफेक्शन नहीं मिला होता है बचपन के टाइम में। यह सबसे बड़ी साइकोलॉजिकल इशू होता है जो आगे चलकर के प्रॉब्लम क्रिएट करता है। इसका कोई इलाज है। हां, इसका इलाज है। ऐसा नहीं है कि इसका कोई इलाज नहीं है। लेकिन
(03:24) थोड़ा सा अपने ऊपर फोकस करो। प्रेजेंट में जियो। आपको एक फीमेल मिली। आप उसके साथ रिलेशनशिप में आए। जस्ट एंजॉय हर व्हाटएवर शी इज गुड एट। ओके? अपनी फेंटसी से उसको मैच मत करो। क्योंकि फेंटसी से मैच करने के चक्कर में उसको इंप्रूव करने के चक्कर में आप अपने फ्रेम से बाहर आ जाते हो। आप उसकी ओवर केयर शुरू कर देते हो। आप उसके लिए बहुत कुछ करना शुरू कर देते हो। आप बीड़ा उठा लेते हो कि इस रिलेशनशिप को मैं चला के रहूंगा। और यह सब कुछ ना आप अपने सबकॉन्शियस से डायरेक्ट होकर कर रहे होते हो। यह कॉन्शियसली नहीं कर रहे होते हो। आपने देखा होगा कई लोग जब रिलेशनशिप में
(04:08) आते हैं तो उनको सुधबुध नहीं रहती है। ब्लाइंड हो जाते हैं। बस लड़की नजर आती है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि बचपन में उनको ज्यादा लव एंड अफेक्शन नहीं मिला होता है। फीमेल की एक फेंटसी उन्होंने अपने दिमाग में बिठा ली होती है। और उसको पूरा करने के लिए सबकॉन्शियसली वो उसके ऊपर काम करते हैं। एंड दे कम आउट ऑफ देयर फ्रेम। दे गो बिय्ड व्हाट इज एक्चुअली इज रिक्वायर्ड। अपनी सारी बाउंड्रीज को डाइलट कर देते हैं। और जब वैसा नहीं होता है तो वह लिटरली उसको रिक्वेस्ट करते हैं। कई बार रो पड़ते हैं। कई बार बहुत कुछ माफियां मांगनी शुरू कर देते
(04:47) हैं। और अगर छोटी सी भी उनसे गलती हो जाए तो बहुत अपोलजाइज करते हैं। यह वाली जो हरकतें आप करते हो ना, इसके कारण आपका पूरा रिलेशनशिप का डायनामिक्स बदल जाता है। इसमें कोई गलती है आपकी? कोई गलती नहीं है भाई। बचपन में लव एंड अफेक्शन नहीं मिला। आप क्वाइट रहे। अपने इमोशंस को बॉटल करते रहे। लेकिन हर इंसान को लव एंड अफेक्शन चाहिए। तो फीमेल की एक इमेज बना ली। अब उस इमेज को आप ढूंढते रहे। फिर कोई फीमेल मिली। वह उसमें फिट नहीं बैठती थी। तो आपने ओवरडू करना शुरू कर दिया रिलेशनशिप में। तो इन सब चीजों को अब साइड में छोड़ दो। बेसिकली आपको करना क्या है?
(05:29) ठीक है? बचपन में आपको लव एंड अफेक्शन नहीं मिला। इसमें आप ज्यादा कुछ नहीं कर सकते भाई। यह सरकमस्ट्ससेस होते हैं जो भी था। ठीक है? आपने एक फीमेल की फेंटसी अपने दिमाग में क्रिएट कर ली। उसमें भी आप ज्यादा कुछ नहीं कर सकते। ठीक है? अगर इसको थोड़ा कट डाउन कर सकते हो। अगर आप अभी टीनएज में हो कोशिश करो इसको कट डाउन कर दो। अपनी आपको फिजिकली एक्टिव कर लो। एनर्जी है यार। वह एनर्जी बैठ करके किसी चीज को फेंटसाइज करने से बेटर है कि आप एक्सरसाइज करना शुरू कर दो। ठीक है? उसको फिजिकली जो है बाहर निकाल दो। नहीं तो कुछ और टेढ़ामेढ़ा करोगे, वाशरूम जाओगे बार-बार।
(06:04) ओके? उसके बाद में जब आप रिलेशनशिप में आते हो, मैरिज हो जाती है आपकी तो जैसी फीमेल मिलती है, जस्ट एंजॉय हर। जो भी वो अब हर फीमेल किसी ना किसी चीज में तो ठीक होती है ना। बस उसके उतने ही मजे लो। उसको बेटर करने की कोशिश मत करो। बिल्कुल कोशिश मत करो। क्योंकि बेटर करोगे तो यू विल गो बिय्ड योर रीच। यू विल कम आउट ऑफ योर फ्रेम टू मेक बेटर। ठीक है? इन चीजों का ख्याल रख लो बस। अगर आप अपने फ्रेम से बाहर नहीं आते हो और कुछ भी ज्यादा उसमें चेंजेस नहीं करते हो तो आपका रिलेशनशिप नहीं गड़बड़ाएगा और आप अपनी बाउंड्रीज को मेंटेन करके रखोगे।
(06:46) राइट? अब ये बाउंड्रीज कौन सी होती हैं? बाउंड्रीज होती हैं। आपका जो जीने का तरीका है, आपका जो कपड़े पहनने का तरीका है, आपका जो बात करने का तरीका है, अपने आप को फोकस बना करके आपको चलना है। फीमेल को सेंटर ऑफ लाइफ नहीं बना देना है। वो ठीक है। एक फीमेल है आपके साथ में। आप मजे लेते हो। उसको भी मजे करवाते हो। आप लोग ट्रैवल भी करते हो। बहुत सारी एक्टिविटीज आप कर सकते हो। आप दोनों ट्रैवल कर सकते हो। आप दोनों कोई गेम खेल सकते हो। आपस में बैडमिंटन खेल सकते हो, स्कश खेल सकते हो। डिपेंडिंग अपॉन जो भी आपको वहां फैसिलिटीज मिलती है। उसके अलावा आप दोनों
(07:25) कोई क्लास जॉइ कर सकते हो, डांस सीख सकते हो, कोई नई लैंग्वेज सीख सकते हो। जहां पर आप दोनों एज अ स्टूडेंट चाहते हो। कुछ ना कुछ एक्टिविटीज आपको करते रहना है। ओके? रिलेशनशिप को डेड नहीं करना है। अगर रिलेशनशिप को डेड कर दोगे कि बस अब शादी होगी, अब मैं शांति से बैठूंगा। ऐसा नहीं होता है भाई। स्पिन में रखना है। कुछ ना कुछ सीखते रहना है। उसको भी सिखाते रहना है। राइट? इस तरीके से आपको एंजॉय करना है। और जो आपने अपने मन में एक फेंटसी बनाई हुई थी। जरूरी नहीं कि वहीं पर उसी खांचे में उसको फिट करना है। यू कैन इवन मेक अ बेटर। जो आपने सोचा भी
(08:06) नहीं था। जो चीजें आपने उसके बारे में सोची भी नहीं थी, यू कैन मेक अ बेटर देन दैट। ताकि आपको आउट ऑफ फ्रेम ना जाना पड़े। क्योंकि आउट ऑफ फ्रेम आप कब जाते हो? आपने एक पिक्चर बना रखी है। उस खांचे में उसको फिट कर रहे हो। वो नहीं होती है तो आप उसको काट छांट करते हो और रिक्वेस्ट करते हो और ज्यादा एफर्ट डालते हो। अब आपने कुछ सोचा ही नहीं हुआ है। ठीक है? और जो दिमाग में फ्रेम बैठा हुआ है उसमें उसको फिट ही नहीं कर रहे हो। बट यू आर डूइंग समथिंग मच बेटर देन दैट। बिकॉज़ जैसे-जैसे बड़े होते जाओगे, पैसे भी होंगे आपके पास में, एनर्जी भी होगी। तो कुछ नया सोच लो कि यार
(08:46) हम ना यह करते हैं। चलो हम वर्ल्ड टूर पर चलते हैं। चलो हम इस तरीके से करते हैं। चलो हम कोई परफॉर्मेंस देते हैं स्टेज के ऊपर में या चलो दोनों बैठ के तैयारी करते हैं। कोई फैंटास्टिक कंपटीशन निकालते हैं। कुछ भी मच बेटर देन व्हाट यू हैड थॉट अबाउट। अपने फीमेल की पिक्चर को लेकर के। ओके? दिस इज व्हाट लाइफ इज ऑल अबाउट। खुद भी मजा आएगा जीने का एंड शी विल आल्सो एंजॉय इट। और यह जो आजकल आप सुनते हो ना टॉक्सिक है, नार्सिस्ट है, रिलेशनशिप खराब हो गया, डिवोर्स पे चला गया। भाई यह कुछ नहीं होने वाला फिर कुछ भी नहीं होने वाला। अगर आप
(09:27) मेरा इस वीडियो को दोबारा देख लो चाहे ओके। फिर क्या? टेक केयर। इट्स योर लाइफ।
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