LOST HERBS OF INDIA- Cancer, Gut, Immunity Recovery & Natural Sunscreen | Body To Beiing | Shlloka
Author Name:SHLLOKA
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Transcript:
(00:00) जो फेमस संजीवनी लगाया गया था वो एक्चुअली सीख थोन था। क्या ये सच है? हां इसको मॉडर्न संजीवनी बूटी का दर्जा दिया गया है। यूएस में तो इसको मिरेकल वैरी बोला गया है। इट वास बैक इन 2019। मेरी मदर कैंसर से फाइट कर रही थी। किसी ने ये कहा था कि मदर की डाइट में ऐसी चीजों को ऐड करना है जिनमें हाई एंटीऑक्सीडेंट प्रॉपर्टीज हो। हमने ये सीबकथोन मंगाया और यूज़ भी किया। हमने ये देखा कि जो रिकवरी विदाउट सीवकथोन की थी और जो रिकवरी सीवकथोन के देने के बाद थी उसमें एक बहुत ही ड्रास्टिक डिफरेंस था। एंड Apple अ डे कीप्स अ डॉक्टर अवे। एप्पल
(00:28) की जो टीपीसी वैल्यू है अब ये इससे लगभग 20 गुना ज्यादा हुई। बेरी जो पल्प है उस पल्प के अंदर जो विटामिन सी है संतरे से लगभग 30 से 40 गुना ज्यादा है। ओ अच्छा रात में दो बूंदे आपने सीवॉन ऑयल की अगर अपने चेहरे पे लगाई तो आपका पिगमेंटेशन आपकी स्किन के रिंकल्स इलास्टिसिसिटी में बड़ा ही फायदेमंद है। इन 16 वीक पिगमेंटेशन को अराउंड 18% कम कर देता है। तो इट कैन वर्क एज अ सनस्क्रीन आल्सो। आजकल सनस्क्रीन कार्सिनोजेनिक प्रॉपर्टीज है बैक द लेवल पे। यह तो नेचुरल सनस्क्रीन है। इसमें फोटो प्रोटेक्टिव प्रॉपर्टीज हैं। कोई इंसान अपनी डाइट में एक महीने के
(01:01) लिए लगातार ब्लैक राइस को ऐड करता है। मैं गारंटी करता हूं उसको अपने डाइजेशन पे, स्किन पे, वेट पे बहुत ही सिग्निफिकेंट चेंजेस देखने को मिलेंगे। उदित चावला वेल वि इंडिया प्राइवेट लिमिटेड के कोफाउंडर हैं जो हर्ब्स के मामले में अपनी डीप एक्सपर्टीज के लिए जाने जाते हैं। यूनिक और इफेक्टिव नेचुरल इंग्रेडिएंट्स को डिस्कवर करके उन्हें इंपैक्टफुल प्रोडक्ट्स में ट्रांसफॉर्म करना उनकी स्पेशलिटी है। यूएस में इतना बड़ा मार्केट अश्वगंधा का है जिसको आप इमेजिन भी नहीं कर सकते। और इंडिया के अंदर ये अभी भी अंडर यूटिलाइज्ड है। जबकि अगर स्ट्रेस को अगर हमें रिलीव
(01:38) करना है तो इससे ज्यादा बेहतर और कोई चीज नहीं है। कॉर्टिसोल हर समय बॉडी में प्रेजेंट है। सबसे खतरनाक चीज है क्योंकि ये बॉडी को एजिंग भी कर रहा है। बॉडी के अंदर फ्री रेडिकल डैमेज भी कर रहा है। अश्वगंधा का सबसे बड़ा रोल है। ब्रेन वो सिग्नल देता है कि भाई शांत हो जाओ। इतना कॉर्टिसॉल बनाने की जरूरत नहीं है। बेली फैट का जो बेसिक रीजन है जब आप स्ट्रेस में होते हैं। आपका ब्रेन बॉडी को यह सिग्नल देता है कि आप फैट को स्टोर करना शुरू कर दो। आप जितना ज्यादा स्ट्रेस में होंगे उतना ज्यादा फैट स्टोर होगा और वो फैट आपका बेली के अराउंड ही स्टोर होगा।
(02:07) आप अपने स्ट्रेस को कम कर ले जाते हैं तो ऑटोमेटिकली आप अपने बेली फैट को भी कम कर सकते हैं। तो हमारे मेडिसिनल हर्ब्स हर साल उनको लूज आउट कर रहे हैं। जिस तरीके की एजुकेशन एंड अवेयरनेस उन हर्ब्स के अराउंड होना चाहिए था। वो नहीं हुआ। कई बार देखते हैं जब 30 साल 35 साल के होने लगते हैं धीरे से हम चीजों को भूलना शुरू कर देते हैं। वो बहुत ही अर्ली साइन होते हैं कि हमारा ब्रेन एज कर रहा है। यही सारी चीजें आगे चलकर अल्जाइमर, पाकिस्तान डिसीज इनमें कन्वर्ट होती हैं। जामुन का एक्सट्रैक्ट में ये पाया गया कि उसमें जंबोलाइन और जंबोसिन दो ऐसे कंपाउंड होते
(02:37) हैं। ये हमारे पनक्रियाज के बीटा सेल्स को रीजनरेट करने का काम करता है। तो दिस इज हाउ जामुन इज हेल्पफुल इन डायबिटीज। हर्बल प्रोडक्ट इकोसिस्टम को डेवलप करने में भी उनका काफी इंपॉर्टेंट रोल रहा है और एंटरप्रेन्योर होने के साथ-साथ वो एक एजुटर और पब्लिक स्पीकर भी हैं। जिनका मिशन अपनी नॉलेज और इनसाइट एक वाइडर ऑडियंस तक पहुंचाना है। आज हम उनका बॉडी टू बीइंग पडकास्ट पर तहे दिल से स्वागत करते हैं। हमारे पेरेंट्स ने हमें बचपन में दिया है। दिया है। दिया है। ब्राह्मी और शंकु पुष्पी दोनों दिया है। अच्छा तभी आप आईआईटी में गए।
(03:05) राइट। आपने ये हर्ब्स तो सुने ही होंगे। छठ मानसी, गिलोय, मुलेठी, भ्रम्मी। क्या आप जानते हैं कि यह हर्ब्स या तो थ्रेटेंड है या फिर इंडेंजर्ड? आज की डेट पे ऐसे 7000 हर्ब्स हैं जो हमने लूज कर दिए हैं। यह एक्सटिंक्ट हो चुके हैं। अब इसके कई सारे फैक्टर्स हैं। एक सबसे बड़ा फैक्टर है ग्रीन रेवोल्यूशन और दूसरा है ओवर हार्वेस्टिंग। मार्केट में इतने सारे आयुर्वेदिक हर्ब्स हैं कि हम इनको हार्वेस्ट तो कर लेते हैं पर वापस रिप्लेनिश और रीजेनरेट नहीं करते। तो आज के पडकास्ट में हम ऐसे लॉस्ट हर्ब्स की बात करेंगे जो या तो एंडेंजर्ड है या फिर
(03:44) उनकी वैल्यू और सिग्निफिकेंस लोगों को पता नहीं है। यह अवेलेबल जरूर है लेकिन लोग इसके बेनिफिट्स, पावर, यूसेस और एप्लीकेशन के बारे में नहीं जानते। तो आज का पॉडकास्ट हम लॉस्ट हर्ब्स पे करेंगे। इसके दौरान हम हर एक हर्ब का वैल्यू, बेनिफिट और यूजेज समझेंगे। और अगर तो आप नेक्स्ट 40 डेज तक दिए गए हर्ब्स को अपनी डेली लाइफ में इस्तेमाल करते हैं तो एट द एंड ऑफ 40 डेज आपको एक गिफ्ट हैंपर भी मिलेगा और डिटेल्स जानने के लिए पॉडकास्ट को पूरा देखिए यू कैन नाउ आल्सो लिसन टू आवर मास्टर क्लासेस ऑन स्पॉटिफाई फॉलो बॉडी टू बीइंग एंड स्टे ट्यून फॉर मोर एक्साइटिंग
(04:18) मास्टर क्लासेस उदित इंडिया में 900 मेडिसिनल हर्ब्स हैं मेडिसिनल प्लांट्स है उनमें से करीबन 10% ऑलरेडी एक्सटिंक्ट हो चुके हैं। अगर तो स्टैटिस्टिक्स की माने तो हर दो साल में एक मेडिसिनल प्लांट स्पीशी एक्सटिंक्ट हो रहा है। थ्रेटेंट की तो बात ही कुछ और है। इन सबके बीच आपने एक इनिशिएटिव लिया है वेयर यू हैव टेकन द ओनर्स ऑफ़ रिवाइविंग ऐसे कुछ लॉस्ट हर्ब्स। ये हर्ब्स एक्सैक्टली है क्या? इनके बारे में हमें थोड़ा बताइए विद यूजज़। क्योंकि कई लोग जानते भी नहीं है कि ये है क्या और इनको यूज़ कैसे करा जाता है एवरीडे लाइफ में। राइट? आपने बिल्कुल सही बात बोली कि वी आर
(04:56) लूजिंग जो हमारे मेडिसिनल हर्ब्स हैं, हर साल हम उनको लूज आउट कर रहे हैं। और इसके पीछे के कई रीज़ंस हैं। बिकॉज़ जिस तरीके की एजुकेशन एंड अवेयरनेस उन हर्ब्स के अराउंड होना चाहिए था और जो कमर्शियलाइजेशन होना चाहिए था वो दोनों ही नहीं हुआ। और इसकी वजह से हम कई सारी हब्स को लूज़ आउट करते गए। हर एक हब में एक इकोनॉमिक स्पीच भी होती है जो उस लोकल एरिया को बहुत सपोर्ट कर सकती है। राइट? लेट्स से कोई हब उत्तराखंड के किसी एक रीजन को बिलोंग करती है। जब उस हब को उसका जो पोटेंशियल है एजुकेशन और अवेयरनेस से मिलता है तो वहां के लोकल्स के लिए भी एक बहुत अच्छा
(05:31) इकोसिस्टम इकोनॉमिक्स क्रिएट होता है। एक अर्निंग क्रिएट होती है। तो मैं ये बोलूंगा हर एक हब जो हमने लूज आउट करी है उस लूज आउट हब के साथ हमने एक इकोनॉमिक्स को भी लूज आउट किया है। तो यही बात जब हमें रियलाइज हुई कि हमें इन हर्ब्स को रिवाइव करना चाहिए और जब हम खोज रहे थे हर्ब्स के ऊपर काम कर रहे थे कि कौन सी ऐसी हब्स हैं जो साइंटिफिकली बैक्ड हैं जिनके बहुत ज्यादा बेनिफिट्स हैं बट अभी तक लोगों को या तो उनके बारे में एजुकेट ही नहीं किया गया या उनको सिग्निफिकेंस नहीं पता या उनको सिग्निफिकेंस नहीं पता है। तो इसी प्रोसेस में हम कुछ हर्ब्स तक पहुंचे
(06:02) जिसमें से एक हब है सीबकथोन जिस तक हम पहुंचे धीरे से हमें टर्मरिक हम हर एक इंसान जानता है कि टर्मरिक के क्या फायदे हैं? लेकिन फिर हम टमरिक ऑइल तक पहुंचे और तब हमें पता चला कि टमरिक जो हम सुनते आए हैं पाउडर फॉर्मेट वो तो कुछ नहीं है। असली यूज़ केस तो टर्मरिक ऑइल का है। टमरिक इन ऑइल फॉर्मेट इज फार मोर पावरफुल देन टर्मरिक इन दी पाउडर फॉर्मेट। उसके बाद कुकुम। कुकुम एक ऐसी हब है जो शायद एक रीजनल सिग्निफिकेंस ही होल्ड करके रखा और उसके बाहर कभी निकल के नहीं आई। जैसे कोस्टल बेल्ट में गोवा हो गया, महाराष्ट्र हो गया। इस एरिया में कुकुम को सब जानते
(06:38) हैं। सोलकड़ी वगैरह पीते हैं। हां सोलकड़ी फिश करी बनाते हैं। तो उसमें बहुत यूज़ होता है। लेकिन जब आप नदर्न रीजन में आ जाएंगे तो वहां बहुत सारे लोग कुकुम जानते ही नहीं है क्या होता है? इसका क्या यूज़ केस है? इसको कैसे यूज़ करा जाना चाहिए। ऐसे ही कई सारी हर्ब्स हैं। गार्सिनिया कंबोजिया है। कंच बीज है। इस तरह की कई सारी हर्ब्स थी। तो हमने फिर यही ऑब्जेक्टिव लिया कि हमने इन हर्ब्स को आइडेंटिफाई करना है और इनके ऊपर काम करना शुरू करना है। और इसी प्रोसेस में जो सबसे पहली हब हमें एक बहुत ही पोटेंशियल हर्ब मिली वास सीबॉन इट वास बैक इन 2019 जब
(07:12) सीबकथोन के बारे में ऐसे ही कहीं एक रिसर्च पेपर पढ़ते-पढ़ते उसके बारे में पता चला और उस पॉइंट ऑफ टाइम पे मेरी मदर कैंसर से फाइट कर रही थी तो उस प्रोसेस में सीबकथोन के फायदे मैंने पढ़ने शुरू करे क्योंकि किसी ने यह कहा था कि मदर की डाइट में ऐसी चीजों को ऐड करना है जिनमें हाई एंटीऑक्सीडेंट प्रॉपर्टीज हो और फिर कहीं से हमने ये सीबकथोन मंगाया और इसके ऊपर रिसर्च भी हम लोग कर रहे थे और इसको उसको यूज़ भी किया। जब हमने इसको यूज़ किया तो हमने ये देखा कि जो रिकवरी विदाउट सीबकथोन के थी बिना सीबकथोन दिए हुए थी और जो रिकवरी सीबकथोन के देने के बाद थी
(07:45) उसमें एक बहुत ही ड्रास्टिक डिफरेंस था और कहीं ना कहीं फिर जब इसके बारे में और डीप पढ़ना शुरू करा इन डिटेल में हम लोग जब और अंदर तक गए तो हमारी मुलाकात एक पर्सन से हुई जिनका नाम है डॉक्टर ब्रह्म सिंह जी जिनको पद्मश्री अवार्ड से भी सम्मानित किया गया 2014 में। अब देखिए पद्मश्री हमारे कंट्री का फोर्थ हाईएस्ट सिविलियन अवार्ड है जो हर किसी को नहीं मिलता है। लेकिन आप समझिए कि किसी एक इंसान ने लगभग एक हर्ब के ऊपर 20 साल काम किया और 20 साल काम करने के बाद उनको पद्मश्री अवार्ड से भी सम्मानित किया गया। लेकिन ताज्जुब की
(08:17) बात यह है कि इतना सब कुछ होने के बाद भी लोगों को पता ही नहीं था कि सीबॉन होता क्या है और ना ही उसकी कोई कमर्शियलाइजेशन किया गया था। और फिर जब हमने सीबॉन पर काम करना शुरू करा तो हमें यह पता चला कि इसमें तो लगभग 200 से ज्यादा साइंटिफिक रिसर्चेस इस सीबकथोन पर पब्लिश हो चुकी हैं और सिर्फ भारत में नहीं देशों विदेशों में पब्लिश हो चुकी हैं। और काम करते-करते हमें यह भी पता चला कि रशिया ने इस पे खूब सारा काम किया है। और 1920 में से रशिया ने सीबकॉन पे काम करना शुरू किया। और 1980 में जब रशिया अपने स्पेस कॉस्मोनट प्रोग्राम को एग्जीक्यूट कर रहा था तो
(08:55) रशियन कॉस्मोनट्स को स्पेसिफिकली उनको स्ट्रेस से बचने के लिए जो दिया गया वो सीबकथोन जूस दिया गया और यूवी रेडिएशन से बचने के लिए सीबॉन ऑयल दिया गया। और इसीलिए स्पेस में एंड दैट्स व्हाई वी कैन से कि सीबोन वास दी फर्स्ट फ्रूट जूस टू गो इन स्पेस। सीबकथोन स्पेस तक तो पहुंच गया लेकिन अर्थ तक नहीं पहुंचा। यहां पे लोगों को कभी इसका आईडिया ही नहीं लगा कि ये सीबकथोन होता क्या है? और सिर्फ इतना ही नहीं उसके बाद 2008 के बीजिंग ओलंपिक्स जो हुए वहां सीबकथोन नेशनल ड्रिंक बना स्पेसिफिकली एथलीट्स को चाइनीस के जो ओलंपियंस थे उनको स्पेसिफिकली सीबकथोन
(09:31) दिया गया उनकी परफॉर्मेंस को एनहांस करने के लिए और उसके बाद तो फिर धीरे-धीरे करके इंडिया के अंदर में अगर मैं बातचीत करूं तो सीबकथोन पे खूब काम हुआ। अह 1990 में अह से लेके आगे आने वाले समय में अह डीआईएचएआर डिफेंस इंस्टट्यूट ऑफ़ हाई ऑल्टीट्यूड एंड रिसर्च जो कि डीआरडीओ की एक रिसर्च लैब है। उन्हें ये जिम्मेदारी दी गई कि आप कुछ ऐसा करिए कि सियाचीन में पोस्टेड जो आर्मी सोल्जर्स हैं उनके लिए आप कुछ ऐसा खाना बनाइए जो कि लोकली सोर्स्ड हो जिसको हमें कहीं बहुत दूर से ना आना पड़े और जो कि बहुत ही न्यूट्रिशनली डेंस हो। हम क्योंकि आपको पोस्टिंग तक ऊपर तक लेके भी
(10:07) जाना है। तो वहीं पे डीआईएचआर के साइंटिस्ट डॉक्टर ब्रह्म सिंह जी और जो उनकी टीम थी वहां उन्होंने सीवन पे काम करना शुरू करा और मैं आपको बताऊं जब उन्होंने सीबॉन पे काम करा एक साल के बाद उन्होंने एक स्टेटमेंट दिया जो मैंने कई बार डॉक्टर ब्रह्म सिंह जी के मुंह से सुना है और मैं आज उसको रिपीट करना चाहता हूं। उन्होंने कहा कि सीवकथोन इज अ गोल्ड माइन ऑफ लद्दाख। ये लद्दाख की गोल्ड माइन है इन टर्म्स ऑफ हेल्थ एंड इकोनॉमिक्स। फिर सीवकथोन के इस्तेमाल से डीआईएचएआर ने कई सारे ऐसी चीजें बनाई जिनको उन्होंने आर्मी सोल्जर्स को देना शुरू किया जिससे
(10:38) हां हाई ऑल्टीट्यूड में देना शुरू करा क्योंकि हाई ऑल्टीट्यूड में एएमएस की प्रॉब्लम होती है एक्वेट माउंटेन सिंड्रोम होता है ऑक्सीजन बहुत डिप्लीट हो जाती है और उन्होंने वो सारी चीजें वहां पे आर्मी सोल्जर्स को देनी शुरू करी और कई सारी प्रोडक्ट लाइन उसके ऊपर डेवलप करी और सारी रिसर्च को उन्होंने एक जगह पे एक्यूमुलेट किया और सिर्फ इतना ही नहीं जब उन्होंने रिसर्च और करना शुरू करा तो फिर उन्होंने सीबकथोन के कुछ सैंपल एम्स दिल्ली को भी भेजे कि आप भी इसके ऊपर स्टडी करिए कि इसके क्या बेनिफिट्स हैं? इसके क्या फायदे हैं? इससे क्या-क्या फायदा हो सकता है? तो
(11:07) जब सीबकथोन ऑइल को एम्स दिल्ली और एम्स भुवनेश्वर भेजा गया तो प्रीक्लीनिकल स्टडी के बाद ये पाया गया कि सीबकथोन का जो ऑइल है वो हार्ट हेल्थ में कार्डियोवस्कुलर हेल्थ में बहुत ही फायदेमंद है। ये सिर्फ फोक्लोर नहीं है। एम्स दिल्ली और एम्स विश्न का रिसर्च पेपर है जहां ये पब्लिश किया गया कि इसके तो हार्ट हेल्थ में बहुत ही अच्छे फायदे हैं। अगर इसको ऑयल फॉर्मेट में लिया जाए क्योंकि इसमें ओमेगा बहुत अच्छी मात्रा में होते हैं और वो ओमेगा से हमारा कोलेस्ट्रॉल बैलेंस होना शुरू होता है। बैड कोलेस्ट्रॉल कम होते हैं। राइट?
(11:39) गुड कोलेस्ट्रॉल बढ़ाने का काम ये करता है। ट्राईग्लिस्टराइड्स को मैनेज करता है इनका ऑइल। तो अगर सीबकथोन ऑइल अगर कोई ले रहा है तो हार्ट हेल्थ के लिए तो ये एक बहुत ही अच्छा वरदान है। मैंने तो ये भी सुना था ये आपने जो बोला संजीवनी बूटी हां जो लक्ष्मण को बाण लगा था रावण का जो संजीवनी जो फेमस संजीवनी लगाया गया था वो एक्चुअली सीखान था क्या ये सच है? हां इसको मॉडर्न संजीवनी बूटी का दर्जा दिया गया है। उसके पीछे के कई कारण है क्योंकि अगर आप इसकी लोकेशन देखेंगे जहां ये ग्रो होती है तो वो लोकेशन बहुत माउंटेन और माउंटेंस भी नहीं हाई
(12:10) ऑल्टीट्यूड माउंटेंस है। राइट? 10,000 फीट की ऊपर की ऊंचाई पे ये उगती है और इसका काम किसी संजीवनी बूटी से कम नहीं है। तो यह वाकई में मॉडर्न संजीवनी बूटी है और इसको मैं क्या अगर आप जाएंगे चेक करेंगे तो इसको ये टाइटल मॉडर्न संजीवनी बूटी मिरेकल बेरी बहुत कुछ इसको कहा गया है। यूएस में तो इसको मिरेकल बेरी बोला गया है। एक ऐसी बेरी जो मिरेकल कर सकती है। तो इसका नाम ही मिरेकल बेरी है। आयुर्वेदिक शास्त्र जो 5000 साल पुराना है उसमें इसको लाइफ गिवर की उपाधि दी गई है। सीवकथोन को। जी जी। जी। अब अगर बात करेंगे तो सीवकथोन का जो साइंटिफिक नेम है ना इसमें भी एक
(12:42) बहुत अच्छी कहानी है। तो अलेक्जेंडर के कुछ वॉर हॉेर्सेस थे। लड़ाई के घोड़े थे और वो बुजुर्ग हो गए। तो जब वो बुजुर्ग हो गए तो उनको छोड़ दिया गया कि भाई इनको छोड़ देते हैं। ये बुजुर्ग हो गए हैं। अब इनका क्या ही यूज़ है। तो वो एक जंगल गए और उस जंगल में कुछ खाकर आए। जब वो जंगल से कुछ खाकर वापस आए तो यह ऑब्जर्व करा गया कि कुछ दिनों के बाद उनकी स्किन बहुत शाइन कर रही है। तो जब ये देखा गया कि इन्होंने ऐसा क्या खाया है तो पता चला कि ये जी ये पौधा खाया है जिस पौधे का नाम है सीबकथोन तो उसी बेसिस पे इसका साइंटिफिक नेम ही दिया गया हिप्पो फे
(13:13) हिप्पो मतलब हॉर्स फे मतलब शाइन जो एक घोड़े को उसकी स्किन को चमका दे वो पौधा सीबक थोन तो ये तो हमारी स्किन को भी चमकाएगा हमारे बालों को भी चमकाएगा बिलकुल बिल्कुल ये तो इसकी साइंस जो ओमेगा से इसके अंदर है ओमेगा से को ब्यूटी ओमेगा बोला जाता है पूरे प्लांट किंगडम में अगर सबसे ज्यादा ओमेगा से किसी भी चीज के अंदर मिलता है तो वो सीबथोन है। मतलब इससे ज्यादा ओमेगा से किसी और चीज के अंदर नहीं है। और इसकी बहुत पुरानी हिस्ट्री है। ये अगर आप इसकी ज्योग्राफी देखेंगे कहां-कहां उगता है तो ये मंगोलिया, चाइना, लद्दाख, हिमालयन रेंज
(13:49) पिथौरागढ़ भी बोल रहे थे। हां पिथौड़ागढ़ हिमाचल हिमाचल में लाहौल और स्पीती में ये ग्रो करता है। तो जहां नेपाल में भी होता होगा। हां नेपाल में भी है। नेपाल में भी है। अरुणाचल प्रदेश में भी है, सिक्किम में भी है। अच्छा। अच्छा। इन सब जगहों पे इसको जो ग्रोथ है ये कोल्ड डेजर्ट एरिया में उगता है। कोल्ड डेजर्ट मतलब जैसे ही आप बहुत ऊंचाई पे चले जाते हैं तो वहां पे नॉर्मल पौधे उगने खत्म हो जाते हैं क्योंकि एनवायरमेंटल का स्ट्रेस इतना है कि कोई पौधा वहां उग ही नहीं सकता और वहां अगर जहां कोई पौधा नहीं उग पाता है। वहां जो पौधा उगता है वो सीबक खोन है।
(14:19) होता क्या है कि अब इस पौधे को इतने कठिन क्लाइमेट में रहना है। तो सबसे पहले इस पौधे की जो जड़े हैं वो जमीन में 200 फीट अंदर तक जाती हैं। और आप इस पौधे को आसानी से निकाल के एक जगह से दूसरी जगह नहीं लगा सकते। 200 फीट 200 फीट अंदर तक जाती हैं। मैक्सिमम अगर देखा जाए और बहुत ही गहरी इसकी जड़े होती हैं। और इसकी जड़े कई बार वर्टिकली नहीं जाती। इसकी जड़े कई बार हॉरिजॉन्टली भी जाती हैं। हॉरिजॉन्टल मतलब अगर पौधा इधर है 500 मीटर दूर भी उसकी जड़े होंगी। तो आप इस पौधे को निकाल नहीं सकते हैं क्योंकि कई बार पानी की कमी होती है और इस
(14:52) पौधे को सर्वाइव करना है तो यह सोइल से कहीं सारे मिनरल एक्सट्रैक्ट करता है और इसकी हाइट भले ही उतनी ना हो लेकिन इसका रूट सिस्टम बहुत स्ट्रांग है और जब ये बहुत सारी मिनरल्स एक्सट्रैक्ट करता है तो अब उस कठिन एनवायरमेंट में जिंदा रहने के लिए ये पौधा अपने अंदर कई सारे कंपाउंड्स बनाता है। क्यों बनाता है? क्योंकि इसको जिंदा रहना है। अब अभी टेंपरेचर +20° है, +30° है। बर्फ पड़ेगी तो -20 तक जाएगा, -25 जाएगा। तो इस पौधे को खुद जिंदा रखना है अपने आपको। तो इसने अपने अंदर कई सारे कंपाउंड्स बनाए। वो कंपाउंड्स इस पौधे के अंदर आ गए। जब हम एज अ ह्यूमन उन
(15:27) कंपाउंड्स को यूज़ करते हैं तो वो हमारी बॉडी में एज एन एंटीऑक्सीडेंट काम करते हैं और कई सारी बीमारियों को दूर करते हैं। तो ये कंपाउंड्स इस पौधे में बन क्यों रहे हैं? क्योंकि जितना ज्यादा स्ट्रेस होगा हां उतना ज्यादा इन कंपाउंड्स का फॉर्मेशन होगा। राइट? तो वो जो इसकी एनवायरमेंटल सिचुएशन है, आसपास की इसकी स्थिति है, वो स्ट्रेस है, वो ऑक्सीजन की कमी है, वो पानी की कमी है, वो हाई ऑल्टीट्यूड है, ये सारे कारण ही हैं जिन कारणों से ये पौधे के अंदर वो सारे कंपाउंड बनते हैं जो कि एक नॉर्मल प्लांट पे उतने अमाउंट में नहीं बनते या बनते ही नहीं है। तो इसी कारण से
(16:03) ये पौधा एक नॉर्मल पौधे से एक सुपर प्लांट में कन्वर्ट हो जाता है। अंडरस्टुड। अभी आज से कुछ समय पहले हमने जो सीबकथोन था इसका पौधे के कुछ कंपाउंड्स थे वो हमने इंडियन इंस्टट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी आईआईटी जम्मू एंड कश्मीर में हमने एक वेलवि सीबकॉन का सैंपल हमने भेजा कि ये सैंपल है। आप इस पे एक बार टेस्टिंग करके देखिए कि इसमें क्या कंपाउंड्स कितनी मात्रा में है। राइट और वो रिपोर्ट मैं अपने साथ लेकर भी आया हूं। वो रिपोर्ट हमने जो कराई है आप देखिए ये टेस्ट रिपोर्ट है आईआईटी जम्मू एंड कश्मीर की। राइट? ये मैं आपको दूंगा अभी तो आप उसको और डिटेल में देख सकते
(16:34) हैं। तो सबसे पहली जो टेस्ट रिपोर्ट हुई ये देखा गया कि इसके अंदर फिनोलिक कंटेंट कितना है? फिनोलिक कंपाउंड्स। अब आसान भाषा में समझाता हूं कि ये फिनोलिक कंपाउंड्स क्या होते हैं? ये एक ऐसा कंपाउंड है जो पौधे ने अपने लिए बनाया था। लेकिन जब हमारे शरीर में वो कंपाउंड्स जाते हैं तो वो एंटीऑक्सीडेंट्स का काम करते हैं। मतलब हमारी स्किन को बेहतर करना, हमारी इम्युनिटी को बेहतर करना, हमारी बॉडी के अंदर जो एजिंग हो रही है, उस एजिंग को कंट्रोल, रिवर्स करना, ये सारा जो कंपाउंड है, ये पॉलीफिनोल्स करते हैं। तो एक टेस्टिंग होती है टीपीसी टोटल
(17:05) फिनोलिक कंटेंट। मतलब किसी भी फ्रूट में या फल में कितने पॉलीफिनोल्स हैं? तो जब हमने यह टेस्टिंग कराई तो इसको जीएई में नापते हैं। तो जब टेस्टिंग कराई तो सीबकथोन के अंदर वो निकला 349 जैसे बोला जाता है ना सेब एंड एप्पल अ डे कीप्स अ डॉक्टर डॉक्टर अवे राइट तो क्यों? क्योंकि एप्पल में कुछ ना कुछ तो खूबी है। कुछ कंपाउंड्स ही हैं। जो कंपाउंड्स जब हम खा रहे हैं तो वो हमारी बॉडी के अंदर वो काम कर रहे हैं। तो एप्पल की जो टीपीसी वैल्यू है वो है 15.
(17:35) 8 15 आप मान लीजिए राउंड में और सीबकथोन की है 350। तो अब ये इससे लगभग 20 गुना ज्यादा हुई। एवरीडे लिया जा सकता है। बिकॉज़ हर्ब्स होते हैं ना कि हम जिनके स्पेशली मेडिसिनल वैल्यूस होते हैं कहते हैं ना आपको ए्री नहीं लेने चाहिए। तो उसकी क्वांटिटी अगर ठीक रखी जाए। तो हर एक चीज की जो है वो क्वांटिटी है। राइट? अगर आप क्वांटिटी से ज्यादा लेंगे तो वो डेफिनेटली हार्मफुल है। अगर आप आज एप्पल ही ज्यादा कंज्यूम कर लें राइट? क्योंकि उसमें न्यूट्रिशन वैल्यू कम है तो आप ज्यादा खा सकते हैं। लेकिन अगर आप एप्पल ही ज्यादा कंज्यूम कर लें तो उससे भी कई सारी इंडाइजेशन और कई सारी चीजें
(18:05) होनी शुरू हो जाएंगी। तो अति तो हर चीज की बुरी है। हर एक चीज को जिसको लेना है उसको विदिन लिमिट्स ही हमने लेना है। पर अगर तो इतना फेमस है और आपने कहा आई थिंक नरेंद्र मोदी जी ने भी इसके बारे में काफी प्रचालन किया है। एम्स में ये सब सैंपल्स भेजे गए हैं। इसके बावजूद ये इतना प्रेविडेंस में क्यों नहीं है? लाइक पीपल डोंट नो अबाउट इट। क्या कारण है? राइट? तो उसका तो ऑब्जेक्टिव हमारा आज का पडकास्ट ही है। रेयर हाउस जिनको किसी ने पिक ही नहीं किया। उसके पीछे के कारण क्या है? क्योंकि किसी ने कभी इसके कमर्शियल एंगल पे बात ही नहीं करी। उसके दो-तीन
(18:32) कारण है जो मैं बताता हूं। सबसे पहला कारण है ज्योग्राफी। अब अगर ये प्लेन एरिया में होता तो ये बहुत ही एक्सेसबल होता। राइट? बड़े आराम से इसकी सप्लाई चेन डेवलप की जा सकती थी। सप्लाई चेन का मतलब है इसको पेड़ से तोड़ा गया और डिस्ट्रीब्यूट किया गया। वो हो जाता है जो बाकी फलों के साथ होता है। अब यह उगता ही है 10,000 फीट से ऊपर की ऊंचाई पे रिमोट एरियाज में। वहां पर एक एफर्ट चाहिए इसकी सप्लाई चेन को बिल्ड करने के लिए। दूसरा जब आप इसको पेड़ से तोड़ते हैं तो तोड़ने के 8 घंटे में ये खराब हो जाता है। तो आपको इसको किसी ना किसी फॉर्मेट
(19:07) में जहां इसकी प्लकिंग हुई है उसके आसपास ही आपको प्रोसेस करना पड़ेगा। और जब अभी आप इसको उसी एरिया में प्रोसेस करते हैं। राइट? तभी आप इससे वैल्यू एडेड चीजें बनाकर लोगों तक इसको लेके जा सकते हैं। तो सबसे पहला कारण तो इसकी ज्योग्राफी रही क्योंकि बिल्कुल रिमोट लोकेशन पे था। दूसरा इसकी शेलफ लाइफ कि इसको प्रोसेस करना था। आपको उसी लोकेशन पे जाएं ये उग्र है। तीसरा ये मेजरली लद्दाख में हो रहा था। वैसे तो पूरी दुनिया में सबसे ज्यादा सीवकथोन चाइना में है। अच्छा। और भारत दूसरे नंबर पे आता है। लेकिन हम हमारे देश के अंदर अवेलेबल
(19:39) सीबकथोन का 95% अभी तक यूटिलाइजेशन था ही नहीं। और क्या ये थ्रेटेंड स्पीशी है या एंडेंजर्ड स्पीशी है? ये एंडेंजर्ड तो नहीं है बट इसके ऊपर काम नहीं हुआ है। इसका कमर्शियलाइजेशन नहीं हुआ है। तो ये उग भी नहीं रहा होगा। ज्यादा रीजनरेट इसका कल्टीिवेशन नहीं हुआ है। इसको रीजनरेट नहीं किया गया है। चाइना ने तो खूब किया है। चाइना ने तो एयर सीडिंग करी है। चाइना ने अपने हाई ऑल्टीट्यूड रीजन में सइल इरोजन को बचाने के लिए उन्होंने इसके बीज गिराए हेलीकॉप्टर से एयर सीडिंग करी जिससे कि इस पौधे को ग्रो किया जाए, उगाया जाए। बट इंडिया के अंदर क्या है? देखिए किसी भी
(20:10) पौधे पे काम कब होता है जब उसकी कोई कमर्शियल वैल्यू बनती है। राइट? अभी क्या है? हमारे पास पूरे भारत में 11,000 हेक्टेयर सीबकथोन अवेलेबल है जो कि कम क्वांटिटी नहीं है। अच्छी खासी क्वांटिटी है। अब जब तक इस 11,000 हेक्टेयर सीवकथोन का यूटिलाइजेशन नहीं होगा तो कोई इसका कल्टीिवेशन क्यों करेगा? कि कोई क्यों ही इसको उगाएगा? तो पहले तो इसकी कमर्शियलाइजेशन इससे कुछ लोगों तक इसकी जानकारी पहुंचे, वैल्यू पहुंचे तभी तो कल्टीवेशन स्टार्ट होगा। अब अच्छी बात यह है क्या है कि इस साल से इसका कल्टीवेशन स्टार्ट हो रहा है। इस साल से
(20:40) इस साल से हम लोग इसका कल्टीवेशन अब स्टार्ट कर रहे हैं। इस साल से सीबॉन का कल्टीवेशन अब जो है वो स्टार्ट हो रहा है। अभी भी जो हमारे देश में वाइडली ग्रोन सीबकथोन है अभी भी वो ऑप्टिमम लेवल तक यूटिलाइज्ड नहीं है। नहीं है। और सिर्फ इतना ही नहीं फिर हमने कई सारे टेस्ट हमने कराए। डीपीपीएच ऐसे जहां पे इसकी एंटीऑक्सीडेंट कैपेसिटी को देखा गया कि एंटीऑक्सीडेंट क्या होते हैं? हमारी बॉडी में जब भी हम खाना खाते हैं तो कुछ ऐसे एलिमेंट्स बनते हैं जो हमारी बॉडी को डैमेज करते हैं। जिनको फ्री रेडिकल बोला जाता है। मतलब आसान भाषा में समझे तो
(21:07) हमारी बॉडी को एज करने वाले पॉइंट फ्री रेडिकल है। इसको न्यूट्रलाइज एंटीऑक्सीडेंट करते हैं। अगर बात करें सीबकथनो की जो एंटीऑक्सीडेंट कैपेसिटी थी इसकी एंटीऑक्सीडेंट कैपेसिटी कई सारे फ्रूट से पांच गुना से लेके 20 गुना तक ज्यादा है। और अगर यह हमारे देश के लोगों की डाइट का पार्ट बन जाए किसी तरीके से तो जो बोलते हैं ना कि अगर जो हमें वेलनेस अचीव करनी है कई सारी क्या होता है एक होता है बीमारी हो गई है मुझे उससे बाहर आना है लेकिन एक ऑब्जेक्टिव है कि मुझे बीमारी होने नहीं देनी है प्रिवेंटिव प्रिवेंटिव मुझे हेल्थ स्पैन बढ़ाना है
(21:39) वो मेरे जिंदगी के वो साल जहां मैं किसी बिना किसी बीमारी के जिया अगर मुझे उन सालों को बढ़ाना है तो उसमें एक बहुत बड़ा रोल सीबथोन प्ले कर सकता है अगर इसकी जानकारी लोगों तक पहुंचे और यह लोगों की लाइफ स्टाइल का पार्ट बन जाए। अंडरस्टुड एक आम आदमी क्या किस डोजेज में सीवकथोन को ले सकता है और किस फॉर्म में? तो सबसे पहले तो ये समझते हैं कि सीवकथोन किस-किस फॉर्म में है। तो मैं आपको सबसे पहले सीवकथन का प्लांट दिखाता हूं। आप तो वैसे लदाख गए हैं। आपने पहले भी देखा है आप बता रहे थे। लेकिन अगर किसी ने ना देखा हो तो इस तरीके
(22:10) से सीवन प्लांट की एक ब्रांच है जो हमने इसको रखी है। अब आप इसमें ये जो ऑरेंज कलर की चीजें देख रहे हैं ये बेरीज है और इसमें आप ये देख रहे हैं कि बड़े-बड़े कांटे होते हैं। इसमें कांटे भी बहुत होते हैं। तो इसको बेरीज को तोड़ना भी बहुत आसान नहीं है और ये आप देख रहे हैं ये इसकी लीव्स हैं। ये बेरीज ऐसे खाई भी जा सकते हैं। हां लोकल्स तोड़ के खाते हैं। मतलब जब हम पूरा स्टडी कर रहे थे तो हमने लोकल से पूछा कि भाई आप क्या करते हो? बोले कि हम तो कई सालों से खाते आए हैं। और जो लोकल की तिब्बतन मेडिसिनल सिस्टम की जो किताब है उसमें लगभग 30 पन्ने सिर्फ सीबोन के
(22:38) मेडिसिनल बेनिफिट्स पे लिखे गए हैं। और 100 रिक्वापा जो है वो एक तिब्बतन मेडिसिनल सिस्टम ही है। अब वो आयुष का पार्ट बन गया है। राइट? अब वो आयुष के अंदर आता है 100 रिक्वा। उसमें 300 फार्मुलेशंस बनाए गए हैं फार्माकोपिया में अलग-अलग बीमारियों के सीथोन को यूटिलाइज करते हुए। राइट? तो ये तो ट्रेडिशनली तो बड़ा इसका इस्तेमाल तिब्बतन रीजन में तो बहुत होता आया है। लेकिन वहां के लोगों को जानकारी है लेकिन बाकी जगहों तक वो जानकारी पहुंची नहीं। तो ये जो आप देख रहे हैं ये इसकी लीफ्स हैं। यह इसकी बेरीज हैं और इसकी बेरीज के अंदर एक सीड होता है। इसकी बेरी के अंदर
(23:11) जो सीड है उससे ऑयल निकाला जाता है। राइट? और खास बात ये है कि वो इतना छोटा सीड है कि आप उसका ऑयल नॉर्मल तरीके से नहीं निकाल सकते। उसका ऑयल सुपर क्रिटिकल CO2 मेथड से ही निकलता है। उसका जो ऑइल निकलता है उसको हम बोलते हैं सीड ऑइल। और सीवकॉन सीड ऑइल जो है वो हार्ट हेल्थ में बहुत ही फायदेमंद है। तो अब इसको करना क्या है? है सीबकॉन सीड ऑइल या तो कैप्सूल में ले लिया या कहीं से मिल गया तो एक चम्मच सीड ऑइल ले लिया और दिन की शुरुआत खाली पेट जो है आपने एक चम्मच सीबकथोन सीड ऑयल लेके आपने करी। आपने दिन की शुरुआत आपने इस सीड ऑयल
(23:43) से करी। उसके पीछे का कारण ये है कि अगर आपने एक चम्मच सीड ऑयल सुबह लिया है तो जो आपको ओमेगा थ्री की डोज़ चाहिए थी आपकी बॉडी को वो आपको मिल गई। और सबसे खास बात सीबकॉन सीड ऑयल में क्या है? ओमेगा थ्री और सिक्स ना एक प्रॉपर रेश्यो में होना चाहिए। तभी बॉडी को उसका ज्यादा फायदा होता है। सीबोन के सीड ऑइल में नेचुरली ओमेगा थ्री और सिक्स उसी प्रॉपर रेशो में है 2 1 में। तो अगर कोई इसका सीड ऑइल ले रहा है तो इसका बहुत बड़ा फायदा है हार्ट के लिए। अगर कंज्यूम कर रहा है। अगर तो मुझे हार्ट डिजीज नहीं है। मैं बस अपने हार्ट को स्ट्रेंथन करना चाहती हूं
(24:16) तो भी मैं कर सकती हूं। एज अ प्रिवेंटिव। आज कोलेस्ट्रॉल तो बैलेंस हम में से हर एक किसी को रखना है। तो हार्ट में ये क्या काम कर रहा है? हार्ट में कोलेस्ट्रॉल बैलेंस प्रिवेंटिव के लिए यूज़ किया जाता है। प्रिवेंटिव के लिए बच्चे भी यूज़ कर सकते हैं। बच्चे भी यूज़ कर सकते हैं। सेम क्वांटिटी बच्चों के लिए जो है आधा चम्मच हमें देना है। या कैप्सूल फॉर्मेट में है तो कैप्सूल फॉर्मेट में नहीं तो आधा चम्मच हमें देना है। और सबसे खास बात क्या है? सीबोन की सीड ऑइल की बच्चों के लिए बच्चों का अगर आपको ब्रेन डेवलप करना है तो उसमें ओमेगा
(24:40) सबसे पावरफुल चीज है। राइट? मतलब अगर आप कोई भी इंसान कोई भी पेरेंट्स अगर स्टडी करने जाएगा कि मुझे अपने बच्चों की कॉग्निटिव एबिलिटीज डेवलप करनी है, उनके ब्रेन को स्ट्रांग करना है तो हमें डेफिनेटली हमारे बच्चों की डाइट में ऐसी चीजें ऐड करनी है जहां से उन्हें ज्यादा से ज्यादा ओमेगा मिल सके। क्योंकि हमारे ब्रेन के जो सेल हैं और जो मैसेंजर्स हैं, ट्रांसमिटर्स हैं इन सबको बनाने में ओमेगा की जरूरत पड़ती है। ओके? अब वो ओमेगा के कई सोर्सेस हैं। जनरली लोग फिश ऑइल खाते हैं। फिश ऑइल फिश ऑइल कैप्सूल लेते हैं। तो वो फिश ऑइल कैप्सूल किस लिए लेते हैं? वो
(25:15) ओमेगा के लिए ही लेते हैं। राइट? तो कई बार लोग फ्लेक्स सीड ऑइल लेते हैं। वो भी लोग ओमेगा के लिए लेते हैं। जैसे बोला जाता है तिल का तेल बड़ा फायदेमंद है। वो क्यों फायदेमंद है? वो ओमेगा की वजह से फायदेमंद है। उससे कई गुना ज्यादा पावरफुल इसका सीबकॉन का सीड ऑयल है। आप मुझे स्किन का बोल रहे थे। मुझे स्किन का नुस्खा दीजिए। अगर तो मुझे अपनी स्किन को बेटर करना है। शाइन देना है। जैसे वो घोड़ों में शाइन आई थी तो क्या करना है? तो बेरी ऑइल सीबकथोन का बेरी ऑइल। अब जो आप बेरी देख रहे हैं ना ये आपने जो ऊपर ऑरेंज ऑरेंज कलर की बेरी देखी इस बेरी का
(25:43) भी ऑइल निकलता है। तो अब आप ध्यान से समझिएगा सीड ऑइल में ओमेगा थ्री बहुत ज्यादा था। बेरी के ऑयल में ओमेगा से बहुत ज्यादा होता है। और ओमेगा सेवन को बोला जाता है ब्यूटी ओमेगा। तो अगर किसी ने इसके सीवक थोन के बेरी ऑयल की दो बूंदे रात में आप अपने चेहरे पे मसाज कर लो। एक्सटर्नली। हां एक्सटर्नली आप मसाज कर लो। इंटरनली आप ले रहे हो तो वो तो इंटरनली भी हील करेगा। और मैं तो हमेशा बोलता हूं कि किसी को अपना स्किन केयर लगाना नहीं खाना भी चाहिए। रात में दो बूंदे आपने सीवन ऑइल की अगर अपने चेहरे पे लगाई तो आपका पिगमेंटेशन आपकी स्किन के
(26:15) रिंकल्स, इलास्टिसिसिटी इन सारी चीजों में ऑलरेडी इनका ऑइल रिसर्च बैक्ड है कि बेरी ऑइल इन सारी चीजों में बड़ा ही फायदेमंद है। ओके? मैंने जब पूरी रिसर्चेस पढ़ी है तो लगभग 16 हफ्तों में इन 16 वीक ये पिगमेंटेशन को अराउंड 18% कम कर देता है। अगर आप कोई भी इंसान इसको लगातार 16 हफ्ते अप्लाई कर रहा है। इसी तरीके से चीक अप्लिफमेंट में भी ये काफी हेल्प करता है। तो ये तो एक तरीके से नेचुरल स्किन केयर है। अच्छा आपने मुझे ना यूवी रेडिएशन के बारे में बताया। आपने कहा था कि रशियन एस्ट्रोनॉट्स ने जब स्पेस में जाते हैं तो ताकि वो एकदम रेडिएशन से प्रिवेंट करने के
(26:47) लिए ये एज अ प्रिवेंटिव यूज़ करता है। राइट? तो ये तो इट कैन वर्क एज अ सनस्क्रीन आल्सो। ये बिल्कुल बिल्कुल ये तो नेचुरल सनस्क्रीन है। और आजकल सनस्क्रीन को तो आप जानते हो ना बोलते हैं ना कैंसर इस कार्सिनोजेनिक प्रॉपर्टीज है बैक ऑफ द लेवल पे। दिस कैन बी यूज्ड। हां तो ये तो नेचुरल सनस्क्रीन है। इसमें फोटो प्रोटेक्टिव प्रॉपर्टीज है। तो अगर मैं इसकी साइंस में जाऊं तो इसको फोटो प्रोटेक्टिव बोला जाता है। फोटो मतलब जो यूवी रेडिएशन से बचा सके। तो ये स्किन के ऊपर एक तरीके से पूरी एक लेयर क्रिएट कर देता है जो यूवी रेडिएशंस को पास नहीं
(27:12) होने देता है। अंडरस्टुड? तो मैं उसको कैसे यूज़ करूं एज अ यूवी प्रोटेक्टर एज अ सनस्क्रीन। कई लोग क्या करते हैं जो वो अपनी नॉर्मल क्रीम अप्लाई कर रहे हैं उसमें एक से दो बूंद सीबकॉन बेरी ऑयल की वो ऐड कर लेते हैं। यह भी एक तरीका है। लेकिन इससे ज्यादा बेहतर क्या है? इससे ज्यादा बेहतर यह है कि आप एक ड्रॉप सीबकॉन आपने ऑइल लिया। उसको हल्का सा पानी में मिक्स किया और उसको आपने अपने चेहरे पे मसाज कर लिया नहाने के बाद। क्योंकि जनरली नहाने के बाद आपका चेहरा ड्राई होता है। तो वहां पर आपने इसको मसाज कर लिया और उसके बाद यह अपना जो सनस्क्रीन
(27:43) का काम है वो यह कर सकता है। और अगर इसको नाइट रूटीन में ऐड करना है तो नाइट रूटीन में आप रात में इसकी एक दो दो बूंदे आप लगा के सो जाइए। दिन में एक ही बूंद लगाइए क्योंकि हल्का सा यह ऑरेंज टेक्सचर इसमें होता है। यह ऑरेंज कलर होता है जो इसके अंदर आता है। कार्टिनॉइड्स की वजह से आता है तो वो ऑरेंज टेक्सचर होता है। दिन में वो थोड़ा सा एक बूंद भी काफी है। रात में आपने दो बूंद लगाई और अगर आप इसको हेयर में भी अप्लाई करना चाहते हैं इसके हेयर में प्रिवेंटिव है ये। ये प्रिवेंटिव है। ये डैंड्रफ को कम करने का काम करता है। देखिए हेयर फॉल तो कई
(28:09) कारणों से होता है। लेकिन डैंड्रफ को कंट्रोल करने का काम ये करता है। तो उसमें क्या है कि आपने कोई कैरियर ऑयल ले लेना है। कैरियर ऑयल मतलब आपने कोकोनट ले लिया, ससमे ऑयल ले लिया। कोई भी ऑइल आपने ले लिया उसमें दो-तीन बूंदे आपने सीबॉन बेरी ऑयल की डाल दी। तो फेस के लिए बेरी ऑयल लेना है और बालों के लिए आपको बेरी और सीड दोनों का कॉम्बिनेशन लेना है। तो आपने एक दो बूंद बेरी ऑइल की ऐड कर दी। एक दो बूंद सीड ऑइल की ऐड कर दी और आपने अपना कोई कैरियर ऑयल ले लिया, कोकोनट ले लिया, सेस्मय ऑयल आपने ले लिया तो वो तो सबसे ज्यादा बेस्ट है।
(28:36) तो उससे अगर आपने मसाज किया तो उसमें आपका जो डैंड्रफ है उसमें ये काफी फायदेमंद है। अंडरस्टुड राइट? तो ये इसके स्किन पे बेनिफिट्स हो गए। एक और क्वेश्चन है। अगर तो मैंने इसको एक्सटर्नली एज अ सनस्क्रीन यूज़ करा है तो मुझे एक्सटर्नली अब सनस्क्रीन लगाने की जरूरत नहीं है। राइट? जरूरत नहीं है। इसको ये नेचुरली फोटो मैंने बोला नेचुरली ही फोटो प्रोटेक्टेड है। और एक फेमस हॉलीवुड एक्ट्रेस है सलमा हायक। राइट? अगर आप उनकी वीडियोस देखेंगे उन्होंने तो कई वीडियोस में इस बात को कहा है कि ये तो नेचुरल कॉलेजन बूस्टर है स्किन के लिए।
(29:04) तो सलमा हायक की वीडियोस है जहां उन्होंने ये कहा है कि सीबकथोन मेरी डाइट का रेगुलर पार्ट है। मैं सीबकथोन को एज इन द डाइट फॉर्म कैसे-कैसे कंज्यूम किया। तो ये तो ऑइल हो गया। इस ऑइल को आप कंज्यूम भी कर सकते हैं। अगर आपने लगाया तो वो आपकी स्किन का बेनिफिट हो गया। हेयर का बेनिफिट हो गया। आपने इसको कंज्यूम करा तो वो आपका हार्ट का बेनिफिट हो गया और अंदर से स्किन का बेनिफिट भी हुआ। राइट? क्योंकि ओमेगा हार्ट में भी फायदेमंद है। ओमेगा स्किन में भी फायदेमंद है। अब इसका दूसरा जो फॉर्म है वो है पल्प। जो इसका बेरी थी जब आपने उसका जूस निकाल लिया।
(29:33) गुदा जो जो गुदा पल्पिंग कर दी उसकी। अब जो पल्प है उस पल्प की खास बात ये है कि उस पल्प के अंदर जो विटामिन सी है राइट? वो विटामिन सी संतरे से लगभग 30 से 40 गुना ज्यादा है। हम संतरे के अंदर 56 एमg पर 100 ग्राम विटामिन सी होता है। इसके अंदर वो 3000 4000 एमg तक जाता है। तो आप कंपेयर कर लीजिए कितना और सिर्फ विटामिन सी नहीं है। अब कई लोग बोलते हैं विटामिन सी तो चलो मैं आंवला से भी ले लूंगा। करेक्ट। इसके बाद विटामिन ई इसके अंदर एोकाडो से पांच गुना ज्यादा है। विटामिन ए इसके अंदर गाजर से तीन गुना ज्यादा है। इसके अंदर एसटीपी है जो सेरोटेटिनिन बनाता
(30:06) है जो माइंड को रिलैक्स करता है। तो इसके पल्प के अंदर लगभग 190 बायोएक्टिव कंपाउंड है। जैसे होता है ना कि हम मॉल क्यों जाते हैं? क्योंकि मॉल में हमें सारी चीजें एक जगह मिल जाती है। तो सीबथॉन एक तरीके से वही मॉल है जहां कई सारे बायोएक्टिव कंपाउंड्स जो हमारे शरीर को चाहिए वो सारे के सारे एक ही जगह पे मिल जाते हैं। आ हा हा तो ये एक तरीके से इसीलिए इसको फूड की जगह इसको सुपर फूड बोला जाता है। ओ अच्छा। तो इसको सुपर फूड का दर्जा दिया गया है। और अगर कोई इंसान सीबोन पल्प को रेगुलर अपनी डाइट का पार्ट बना के रखता है 101 दिन में तो उसको अपने डाइजेशन और
(30:42) स्किन पे फायदा देखने को मिलेगा। एक महीने में उसको अपनी एनर्जी में फायदा देखने को मिलेगा। और अगर वो तीन महीने लगातार यूज कर रहा है तो अगर उसको हॉर्मोनल इमंबैलेंस था या बहुत ज्यादा स्ट्रेस था या ऑलरेडी शरीर में किसी तरीके का कोई लाइफस्टाइल डिसऑर्डर पहले से चल रहा था तो लगभग 90 दिनों में उसके फायदे दिखने शुरू हो जाते हैं और फिर आती है इसकी पत्तियां इसकी जो लीफ्स हैं कोविड के समय मेंबर ऑफ पार्लियामेंट्स को डीआरडीओ ने मेंबर ऑफ पार्लियामेंट को इसी की पत्तियों से बनी चाय सर्व की थी क्योंकि इसकी पत्तियों के अंदर भी काफी
(31:14) एंटी इनफ्लेममेटरी प्रॉपर्टीज हैं। मतलब बॉडी के अंदर से इनफ्लेमेशन को कम करने की ताकत है और इसकी जो पत्तियां है वो रुमनॉइड अर्थराइटिस जिनको है जिनको जॉइंट पेन की पेन की आर्थराइटिस की रूमनॉइड अर्थराइटिस की समस्या है घुटनों में कभी आपने देखा होगा उंगलियां मुड़ जाती है वो रुनोडइड अर्थराइटिस है उसमें इसकी सीबकथोन लीफ एक्सट्रैक्ट बहुत ही फायदेमंद पाया गया है और माइंड को रिलैक्स करने में भी ये काफी फायदेमंद पाया गया अंडरस्टुड तो बेसिकली ओवरऑल बेनिफिट्स है तो अगर मुझे मॉर्निंग टू नाइट अपना सीबकथोन को अपने रूटीन में इंक्लूड करना
(31:44) होता तो क्या कैसे मैं इसको इंक्लूड करती सुबह से स्टार्ट करते हैं। आपने बोला पहले ऑइल से स्टार्ट करो। हां। सबसे पहले तो मॉर्निंग में आपने ऑइल ले लिया। तो वो आपने ऑइल कंज्यूम कर लिया। कितना ऑइल लिया? हाफ स्पून आपको ऑइल लेना है। बच्चा बड़ा सामान। हां हां। हाफ स्पून या मैक्सिमम वन वन स्पून टू हाफ स्पून। बट हाफ स्पून इज इन एनफ। एम्प्टी स्टमक। एम्प्टी स्टमक आपने ले लिया। उसके बाद सेकंड आपका है कि आपने पल्प ले लिया। कब लेना चाहिए? आप ब्रेकफास्ट के साथ भी ले सकते हो और आप लंच के साथ भी ले सकते हो। और इवनिंग में कितना लिया पल्प? पल्प आपको 5 टू 10 ml
(32:09) लेना है। एक ग्लास पानी में डाइल्यूट करना है। आपको एक गिलास पानी में 5 टू 10 ml लेना है। इससे ज्यादा नहीं लेना है। गॉट इट। गॉट इट। और इवनिंग में आपने सीवकथोन की एक चाय ले ली। अगर आप उसको टी के फॉर्मेट में ले रहे हो। हर्बल इन्फ्यूजन के फॉर्मेट में ले रहे हो। आपने लीव्स को थोड़ा सा बॉईल किया। वार्म वाटर में डाला और ढक के उबालना है। मतलब उसको ओपन नहीं करना उसके लिड को। ढक के आपको उबालना है और आपने उसको फिल्टर करके इवनिंग में एक चाय ले ली। शाम को 4:00 बजे क्योंकि 4:00 बजे तक आते-आते हमारा शरीर थकना शुरू हो जाता है हमारे
(32:37) वर्क से। और हमारे स्ट्रेस हार्मोन उस समय हाई होते हैं। मॉर्निंग में भी हाई होते हैं। इवनिंग तक भी हाई होने शुरू हो जाते हैं। तो वहां पे ये एक तरीके से माइंड को काम करने का काम शुरू करता है। और रात में सोने से पहले आपने दो-तीन बूंद सीवन ऑइल की लेकर अपने चेहरे पे पूरी उसकी मसाज कैरियर ऑइल के साथ मसाज है। करा आपने कैरियर ऑयल के साथ में उसकी मसाज करनी है। ये रहा एक्सटर्नल प्लस इंटरनल एप्लीकेशन। इंटरनल एप्लीकेशन। तो ये पूरा मैं फ्रूट की तरह भी खा सकती हूं। इसको अगर अगर आप चाहे तो इसकी बेरीज को ड्राई किया जाता है और फिर आप इसको ड्राई
(33:04) फॉर्मेट में भी कंज्यूम कर सकते हैं। थोड़ी सी मेहनत ज्यादा करनी होगी। जैसे ड्राई बेरी को आपने अपने सैलेड पे डाल लिया, स्मूदीज़ में ऐड कर दिया तो वहां से भी इसके बेनिफिट हो सकते हैं। तो जो आप पल्प बोल रहे हो इसी को जूस बोलते हैं क्या? जो पल्प में पानी में मिला दिया इसको जूस बोलते हैं। करेक्ट। इसको पल्प बोलते हैं। जूस क्या है? अगर इसको डाइल्यूट कर दिया तो वो जूस हो गया। पल्प मतलब जिसमें से बेरी ऑयल नहीं निकाला गया है। अच्छा। तो वो पल्प है और अगर उसमें से बेरी ऑइल निकाल के उसको डाइल्यूट कर दिया गया है तो वो जूस है। देखिए जब आपने बेरी
(33:29) को पीसा तो उस जो बेरी का ऑयल था वो भी पल्प में चला गया। अब आप चाहे तो उससे आप ऑइल को निकाल भी सकते हैं। लेकिन जब आप ऑइल को निकालेंगे तो उसका आपका वो कुछ तो बेनिफिट आपका कम हो गया ना क्योंकि बेरी ऑइल आपका निकल गया। करेक्ट करेक्ट। राइट? तो अब आपका जो बचा वो जूस है। लेकिन अगर आपने ऑइल नहीं निकाला है तो ओवरऑल आप उसको पल्प बोलेंगे क्योंकि वो कंसंट्रेट है। अंडरस्टुड। जैसे मैं आपको बता रही थी ना लद्दाख में हम बहुत ही रिट्रीव्स रखते हैं। द फर्स्ट टाइम मैं जब इंट्रोड्यूस हुई थी करीबन 202 की बात थी तो वेलकम टिंक लद्दाख में तो आपको मिल जाएगा। ठीक है? वो
(33:58) मीठा था वो पल्पी टाइप तो बिल्कुल भी नहीं था। वो था मतलब जैसे शरबत जैसा कोई भी शरबत था वैसा था। हां हां देखिए बिल्कुल ये मीठा तो बिल्कुल नहीं है। जनरली इसको शरबत के फॉर्मेट में बनाने के लिए बहुत सारी चीनी ऐड कर देते हैं। क्योंकि ट्रेडिशनली ये होता आया है किसी चीज में मीठा ज्यादा मिला दिया जाता है। उसके पीछे का कारण था कि हमारे जो बुजुर्ग थे वो इतनी मेहनत और इतना करेक्ट श्रम करते। श्रम करते थे कि उनको इंस्टेंट एनर्जी की जरूरत होती करेक्ट। तो उनको वो दिया जाता था कि आप जो है इमीडिएटली भाई आप बाहर से आए हैं। थक के
(34:28) आए हैं। बहुत सारा हार्ड वर्क करके आए हैं। बहुत सारी कैलोरीज बन करके आए हैं। ये इमीडिएट शुगर है। ये आपको इमीडिएटली रिलीफ दे देगा। लेकिन अब हम लोगों की लाइफ स्टाइल वैसी नहीं है। तो वो चीजें उस समय के लिए ठीक थी। बट इस समय के लिए बिल्कुल भी ठीक नहीं है इतना शुगर। तो जो इसका नेचुरल टेस्ट है वो मीठा नहीं है। वो बहुत ही खट्टा है। राइट? इसका नेचुरल टेस्ट काफी टंगी है और क्योंकि इसमें जो मैंने आपको बताया था ना कि इसमें विटामिन सी की मात्रा बहुत ज्यादा है तो इसका नेचुरल टेस्ट बहुत टंगी है। पर अगर तो मैं इसमें मैं इसमें हनी मिलाऊं
(34:54) तो तो ठीक है ना आई कैन बिल्कुल अगर आप लोग इसमें हनी मिलाते हैं अपने टेस्ट के लिए हनी मिला सकते हैं बट अगर आप मेरा पर्सनल रेकमेंडेशन पूछेंगे तो कोई नेचुरल चीज हम कंज्यूम कर रहे हैं तो उसको नेचुरल फॉर्मेट में ही करें तो बहुत बेहतर है। बट हां हनी मिला के इसका जो टेस्ट आता है वो बहुत अच्छा होता है। रीज़न ये कि वो खट्टा मीठा हो जाता है। गॉट इट। और दूसरी चीज जो मैंने नोटिस किया था कि मेरा गट हेल्थ बहुत अमेजिंग था पीने के बाद। तो गट हेल्थ पे आई थिंक वो म्यूकस मेमब्रेन को काफी स्ट्रेंथन करता है। तो गट हेल्थ सही रहेगी। बट आल्सो जूस की
(35:20) मात्रा तो ज्यादा होती है ना। तो इसको तो अगर तो मैं बिकॉज़ इट्स ऑलमोस्ट लाइक अ माइल्ड लैक्सिटिव। अगर तो मैं इसको रेगुलरली लूं। हो सकता है मेरी बॉडी डिपेंडेंट हो जाए तो ब्रेक कब करना चाहिए? देखिए इसमें अगर आप इसको फाइव टू 10 ml ले रहे हैं। देखिए मेरा ये शूज को 5 टू 10 ml 5 टू 10 ml इन अ ग्लास इन अ डे। अब अगर आप मेरे को ये बोलेंगे कि इसको ब्रेक कब करना चाहिए? तो मेरा ये आपसे एक सवाल वापस है कि आपकी बॉडी को कौन सा ऐसा दिन आएगा जिस दिन माइक्रोोनट्रिएंट्स की नीड नहीं है। करेक्ट। मेरा ये कहना है कि आज जो हम खाना खा रहे हैं
(35:49) अगर हम उसमें डैम श्योर हैं कि आज मैंने जो लंच किया जो मैंने ब्रेकफास्ट किया या जो मैंने डिनर किया उसमें खाने में इतना न्यूट्रिशन था जो मेरी बॉडी को चाहिए था और मैं इसमें बिल्कुल श्योर हूं। तो मुझे लगता है हमें किसी भी चीज को ऐड करने की जरूरत नहीं है। अंडरस्टुड आप जो खाना खा रहे हैं वही खाएं। बट प्रैक्टिकली अगर मैं आज का खाना देखूं आधे से ज्यादा मील स्किप्ड है। आधे से ज्यादा मील ओवरकक्क्क्ड है और उनको जिस तरीके से उगाया गया है उसमें न्यूट्रिशन है ही नहीं। करेक्ट? तो अब आप ये न्यूट्रिशन कहां से लेंगे? कहीं से तो लेंगे।
(36:21) तो नेचुरल सप्लीमेंट है। तो आपको सुपर फूड्स की तरफ जाना पड़ेगा। तो पहला स्टेप है कि जी आप सुपर फूड पे चले गए। अब सुपर फूड से भी पूरा नहीं हो रहा तो आप सप्लीमेंट पे चले गए। लेकिन आपको फ़ूड से सुपर फूड पे मूव करना पड़ेगा। क्योंकि अगर आप अपनी बॉडी को काफी लंबे समय तक उन न्यूट्रिशन में डेफिशिएंट रखेंगे तो वही आगे आने वाले समय में किसी ना किसी बीमारी का रूप ले लेंगे। राइट? अब मान लीजिए कार है। आप कार में एक डिग्रेडेड फ्यूल डाल के चलाएंगे तो क्या होगा? कुछ दिन कार चलेगी। करेक्ट। लेकिन कुछ समय के बाद उसके इंजन में प्रॉब्लम इसमें प्रॉब्लम आनी शुरू हो
(36:53) जाएगी। बॉडी का फ्यूल फूड है। अब उस फ्यूल में न्यूट्रिशन नहीं है। तो आप क्या करेंगे? तो मेरा अगर मेरे से कोई पूछता है ये सीबॉन कब तक लेना चाहिए या ऐसी नेचुरल चीजें जो सुपर फूड है भले ही वो मोरिंगा हो भले ही वो सीबॉन हो भले ही वो कोई और अच्छी बैरीज हो कब तक लेना चाहिए जब तक आप अपने हेल्थ स्पैन को अचीव करना चाहते हैं तब तक लेना चाहिए अंडरस्टुड राइट हम सेब कब तक खाते हैं हम अनार कब तक खाते हैं जिंदगी भर खाते हैं वैसे ही सीबकथोन भी तो एक फ्रूट ही है ना हम हां बस इसकी क्वांटिटी को लिमिट में रखना है और किसी भी चीज की असली वैल्यू तो तभी
(37:25) निकल कर आती है जब आप उसको रेगुलर लेते हैं। अब आपने बात करी ग की, गट लाइनिंग की तो उसमें दो चीजें हैं। अगर आप सीबकथोन का पाउडर कर्ड में मिला के खाते हैं जो हमारे बैक्टीरियास हैं ये उनके रिप्रोडक्शन को बढ़ा देता है। और अगर आप इसको ऑइल के फॉर्मेट में ले रहे हैं सीबकथोन को तो जो आपकी गट की लाइनिंग है ये उसको रिपेयर करने का काम करता है। तो ऑइल ग की लाइनिंग को रिपेयर करता है और जो पाउडर फॉर्मेट में है अगर आप उसको कर्ड के साथ मिला के खाते हैं तो वो आपके वो प्रोबायोटिक का काम करता है। दोनों का एक गट लाइनिंग को रिपेयर करेगा एक
(37:56) प्रोबायोटिक का काम करेगा और पेप्टिक अल्सर्स में ये बहुत फायदेमंद है। ओके इसकी तासीर ठंडी है बेसिकली इसकी जो तासीर है मतलब ये त्रिदोषिक हर्ब है। ओके तो वात पित्ता कफ वात पित्त कफ ये त्रिद ये तीनों को बैलेंस करते हैं। त्रिदोषिक है अंडरस्टुड अंडरस्टुड तो कोई भी ले सकता है इसको सही आंवला के जैसे ये आंवला के जैसे हां इसका अगर आप इसको टर्मरिक के ऑयल के साथ मिला देते हैं तो इसकी प्रॉपर्टीज अलग हो जाती है। तो फिर इसकी तासीर गरम हो जाती है और फिर इसकी प्रॉपर्टीज इनफ्लेमेशन की साइड पे ज्यादा हो जाती अंडरस्टुड उसमें तो एक इंपॉर्टेंट बात ये है कि
(38:24) सीवकथोन को जब भी हम लें तो उसको कहीं पर भी हम स्टोर करें इसको हम ग्लास के मटेरियल में ही स्टोर करें। उसके पीछे का कारण ये है कि ग्लास सबसे ज्यादा इनर्ट होता है। इनर्ट मतलब सबसे कम रिएक्टिव होता है। राइट? तो वैसे तो आपने कहीं से भी लिया आप अपने घर में रख रहे हैं, फ्रिज में रख रहे हैं, रेफ्रिजरेट कर रहे हैं। जिस भी बोतल में आप इसको लेकर रखें स्पेसिफिकली इसके पल्प को ऑइल तो ठीक है। ऑइल को तो ठीक है। आप ऑइल रखेंगे तो उसमें तो ज्यादा प्रॉब्लम नहीं है। लेकिन इसका पल्प बहुत रिएक्टिव है। तो इसके पल्प को आपको ग्लास की बोतल में रखना है और आपको
(38:56) कंज्यूम भी ग्लास की बोतल में ही करें। तो ग्लास कांच के ग्लास में ही इसको कंज्यूम करें। वो ही इसमें ज्यादा फायदेमंद है। मतलब जनरली प्लास्टिक को हमें इसमें अवॉइड करना चाहिए। ओके ये जरूरी है एनी और कोई डोंट्स कोई प्रेग्नेंट ही ले सकती है ऐसे कुछ इसमें अगर अगर डोंट्स की आप बात करें तो अगर किसी का ब्लड प्रेशर लो रहता है तो उसको सीबक्टोन अवॉइड करना चाहिए क्योंकि ये ब्लड प्रेशर को और लो करने का काम करता है राइट तो इसको अवॉइड करना चाहिए पल्प को अवॉइड करना चाहिए आप ऑइल ले सकते हैं बट पल्प को अवॉइड करना चाहिए क्योंकि ये
(39:27) हाई ब्लड प्रेशर के लिए तो बहुत अच्छा है ओके और ये एक नेचुरल ब्लड थिनर भी है। अच्छा ओके बट लो बीपी में हमें इसको अवॉइड करना है और बाकी प्रेग्नेंट मोमेंट और अगर आप उसकी बात करेंगे तो मेरा ये कहना है कि फसाई की गाइडलाइंस तो हमें अलव नहीं करती है तो उसके ऊपर मैं कुछ कह नहीं सकता हूं वैसे ये फायदे अगर तो ऐसे कुछ है तो डॉक्टर से बेसिकली पता डॉक्टर से अपना प्लान करके आप ले सकते हैं वैसे प्रेगनेंसी में और बच्चों में दोनों में इसके बहुत अच्छे फायदे दिखे ओके ओके नेक्स्ट ऐसे कौन से हर्ब के बारे में आप बात करेंगे मैं एक दिन ऐसे ही बैठा हुआ था और मैं
(39:57) डाटा स्टडी कर रहा था मैं स्टडी कर रहा था कि यूएस में कौन सी ऐसी रॉ हब्स हैं जो यूज़ करी जा रही हैं। तो मुझे यह पता चला कि यूएस के अंदर सबसे बड़ा जो मार्केट है वो हर्ब का है जिसका नाम है अश्वगंधा। राइट? जिसको हम सब जानते हैं। इंडिया में भी ऐसा नहीं है कि अश्वगंधा के बारे में लोगों को पता नहीं है। बट यूएस में इतना बड़ा मार्केट अश्वगंधा का है जिसको आप इमेजिन भी नहीं कर सकते। और इंडिया के अंदर ये अभी भी अंडर यूटिलाइज्ड है। जबकि अगर स्ट्रेस को अगर हमें रिलीव करना है, अगर स्ट्रेस को कम करना है तो इससे ज्यादा बेहतर और कोई
(40:27) चीज नहीं है। क्योंकि जो हमारी एचपीए एक्सेस होती है, एचपीए मतलब हमारा ब्रेन, हमारा पिट्यूटरी ग्लैंड और एड्रिनल ग्लैंड ये एक एक्सेस है। जब भी हम किसी स्ट्रेस की सिचुएशन में आते हैं। मान लीजिए हमारी बॉडी में कोई भी स्ट्रेस हुआ। राइट? तो हमारा ब्रेन हमारे पिट्यूटरी ग्लैंड को सिग्नल देता है। वो हमारे एड्रिनल ग्लैंड को सिग्नल देता है और एड्रिनल ग्लैंड कॉर्टिसोल बनाना शुरू करता है। राइट? कि भाई कोई प्रॉब्लम है एक्टिव मोड में रहो। राइट? कुछ होने वाला है। आपको एक्टिव रहना है। ये नॉर्मल है। अब हम लोगों की जिंदगी ऐसी हो चुकी है कि
(40:57) हमारे पास स्ट्रेस तो बहुत ज्यादा है। राइट? हम कुछ सोच रहे हैं, थॉट्स ले रहे हैं, कुछ भी ले रहे हैं, उससे स्ट्रेस आ रहा है। तो कॉर्टिसोल हर समय बॉडी में प्रेजेंट है। ये कॉर्टिसोल सबसे खतरनाक चीज है क्योंकि ये बॉडी को एजिंग भी कर रहा है। ये बॉडी के अंदर फ्री रेडिकल डैमेज भी कर रहा है। और अगर ये रेगुलर लेवल तक रहे। अब इसमें अश्वगंधा क्या रोल प्ले करता है? अश्वगंधा के अंदर एक कंपाउंड होता है जो हमारे ब्रेन के गाबा को एक्टिवेट कर देता है। हां। ये गाबा का काम कहां होता है? काम करना। मतलब ये ब्रेन वो सिग्नल देता है कि
(41:27) भाई शांत हो जाओ। इतनी बड़ी प्रॉब्लम नहीं है। इतना कॉर्टिसॉल बनाने की जरूरत नहीं है। तो अश्वगंधा साइंटिफिकली स्ट्रेस को रिलीफ करने में यह बहुत अच्छा है। अब इसके दो फायदे हैं। जब हम सुबह जग रहे होते हैं अगर हमें खुश रहना है तो हमें सेरोटोनिन चाहिए। रात में अगर हमें अच्छी नींद चाहिए क्योंकि बहुत सारे लोगों को रात में नींद नहीं आती। तो वही सेरोटोन रात में मेलाटोनिन बन जाता है। राइट? तो अगर हमें डे के टाइम में अपने को स्ट्रेस से बचाना है और कॉर्टिस्टॉल को कम करना है तो ये अश्वगंधा अगर सुबह ले रहे हैं तो ये स्ट्रेस को कम करने का काम करेगा और यही
(41:58) अश्वगंधा अगर हमने रात में लेना शुरू कर दिया तो ये हमारा हमारे को अच्छी नींद मतलब एक साउंड स्लीप के लिए काम कर सकता है। कैसे ले सकते हैं इसको? देखो इसको बच्चों को भी थोड़ा सा दे सकते हैं। बच्चों को पानी में मिला के दे सकते हैं। वो उनकी स्टेमिना और स्ट्रेंथ के लिए काम कर सकता है। ये मार्केट में इन द फॉर्म ऑफ क्या मिलता है? इन द फॉर्म ऑफ़ पाउडर होता है और इन द फॉर्म ऑफ़ कैप्सूल्स होते हैं। राइट? अगर कोई पाउडर ले रहा है तो एक से 3 ग्राम जो है वो यूज़ कर सकता है और अगर इसको एडल्ट पानी में मिलाके वार्म वाटर में और अगर एडल्ट ले रहे हैं तो इसको दूध
(42:27) के साथ भी मिला के लिया जा सकता है और अगर बुजुर्ग ले रहे हैं तो वो इसके साथ घी भी ऐड कर सकते हैं। ओके? तो अगर आपने अश्वगंधा लिया, दूध लिया और उसमें थोड़ा सा घी आपने ऐड कर लिया तो यह कॉम्बिनेशन एडल्ट्स के लिए बहुत अच्छा है और वैसे इसको दूध के साथ भी लिया जा सकता है और इसको गर्म पानी में भी ले सकते हैं और इसको आप खाने के आसपास अपना इसको कंज्यूम कर सकते हैं। बट अगर स्ट्रेस को रिलीफ करना है क्योंकि आज की डेट में स्ट्रेस से ज्यादा बड़ी कोई प्रॉब्लम नहीं है। तो अश्वगंधा एक ऐसी चीज है जो अगर किसी भी इंसान को ये लग रहा है मेरे को स्ट्रेस
(42:54) हिट कर रहा है तो उसको एडप्टोजंस ऐड करने पड़ेंगे और एडप्टोजंस में अश्वगंधा इज वन ऑफ द बेस्ट। ओके? तो आपने कहा सुबह ही ले लो। सब लोग ले सकते हैं। एनी अदर वे हम अश्वगंधा को डाल सकते हैं। इसका बेस्ट फॉर्मेट तो पाउडर है। पाउडर है। इसके कैप्सूल्स भी हैं। एक्सटर्नल एप्लीकेशन कुछ है। एक्सटर्नल एप्लीकेशन तो मैं नहीं बोलूंगा। बेटर ये है इसका इंटरनल एप्लीकेशन ही इसका मेन एप्लीकेशन है कि आप इसको कंज्यूम कर लें क्योंकि इसका मेन जो काम है वो काम ही है आपको स्ट्रेस को कंप्लीट करना, रिलीव करना। ओके। मैंने ये भी सुना है कि पेट की चर्बी
(43:21) में बहुत काम करता है। हां। उसके देखिए पेट की चर्बी होती क्या है? हम्। कई लोग आपने देखे होंगे बहुत एक्सरसाइज़ कर रहे हैं। सब कुछ कर रहे हैं। फिर भी उनका बेली फैट नहीं जा रहा है। हां। वह बेली फैट का जो बेसिक रीज़न है वो बेसिक रीज़न है कि जब आप स्ट्रेस में होते हैं हम तो स्ट्रेस में जब भी आप रहेंगे आपका ब्रेन बॉडी को ये सिग्नल देता है कि आप फैट को स्टोर करना शुरू कर दो। ओके? तो आप जितना ज्यादा स्ट्रेस में होंगे उतना ज्यादा फैट स्टोर होगा और वो फैट आपका बेली के अराउंड ही स्टोर होगा। हम अच्छा। करेक्ट। बेली फैट अगर किसी के पास में है
(43:53) तो जरूरी नहीं है कि वो उसकी डाइट की वजह से है। उसके खाने की वजह से है। कई बार वो स्ट्रेस की वजह से भी बहुत कुछ है। तो अब अश्वगंधा उसमें कैसे रोल प्ले करेगा? अगर आप अपने स्ट्रेस को कम कर ले जाते हैं तो ऑटोमेटिकली आप अपने बेली फैट को भी कम कर सकते हैं। क्योंकि वो जो ब्रेन सिग्नल दे रहा है कि बॉडी स्ट्रेस में है, बॉडी प्रॉब्लम में है तो आप फैट स्टोर करो। वो फैट स्टोर होना बंद हो जाएगा। अंडरस्टुड। लेकिन ये चीज़ है अश्वगंधा को खाली पेट नहीं लेना चाहिए। कई बार देखिए दो तरीके की चीजें हैं। एक कई ऐसी चीजें हैं जो बॉडी के अंदर आपका इनडाइजेशन कर देंगी।
(44:25) ओके? क्योंकि वो एसिडिटी को रेगुलेट करने का काम करती हैं। इसलिए मैंने कहा कि इसको आप दूध के साथ ले रहे हैं तो इसका फायदा अच्छा है। क्योंकि देखिए प्लांट है हम प्लांट में कई सारे एक्टिव्स हैं। कई सारे एक्टिव्स ऐसे होते हैं जो हमारे बॉडी के अंदर जो हमारे शरीर के अंदर वो एक्टिव्स एसिडिटी को रेगुलेट करने का काम करते हैं या इनडाइजेशन क्रिएट करते हैं। इसलिए उससे बचने के लिए बेहतर है कि कुछ चीजों को हम खाने के साथ ही लें। कुछ चीजों को हम खाली पेट लें, कुछ चीजों को हम खाने के साथ ही लें। एक और लॉस्ट हर्ब मैं एक्चुअली ब्लैक राइस
(44:54) के बारे में आपसे समझना चाहती हूं। मैंने ब्लैक राइस हाल ही में जब से मेरा स्पिरिचुअल ट्रांसफॉर्मेशन हुआ तब से खाना चालू किया। तो मैं बेसिकली रेड राइस, बांबू राइस, ब्लैक राइस यही मिलेट्स प्रडोमिनेंटली कंज्यूम करती हूं। उस टाइम जब मैंने स्टार्ट किया था कंसमशन। तो जब मैं पढ़ रही थी इसके बेनिफिट्स के बारे में, तो मैंने देखा था कि यू नो हमारे पास ट्रेडिशनली 4 एंड हाफ लाख वैरायटीज से भी ज्यादा राइस की वैरायटीज थी। हम्। 1970 से 1 लाख एक्सटिंक्ट हो चुकी हैं। हम इसको ब्लैक राइस को एक जीआई टैग का भी उपाधि मिली है। राइट?
(45:24) जग्राफिकल इंडिकेशन। और ऐसी कुछ स्टडीज थी कि जैसे फ्रूट फ्लाई पे जब ये इस्तेमाल किया गया था तो फ्रूट फ्लाई की लाइफ स्पैन 14 टू 20% बढ़ी। जो मसल मास डीजेनरेट होता है वो भी डिले हो गया। हम सो यू नो मैं मतलब एव्री टाइम जब मैं इनको कंज्यूम करती हूं। हमारे पूर्वज पुराने सेटलर्स से कंज्यूम करते थे। मुझे गुस्सा भी आ रहा था। हम कि हमारा चाहे वो ग्रीन रेवोल्यूशन हो, चाहे वो जस्ट ओवर हार्वेस्टिंग हो। आई डोंट नो क्या-क्या फैक्टर्स आके हमारी ये वैरायटीज को या तो एक्सटिंक्ट कर दिया, इंडेंजर्ड कर दिया और उनमें से ब्लैक राइस है। इट्स नॉट रियली अ थ्रेटेंड वैरायटी बट
(45:57) ये एक ऐसी वैरायटी है जिसका सिग्निफिकेंस मच मच लाइक सी बकथों बोला नहीं जाता है, प्रचार नहीं किया जाता है। तो इसके बारे में आप क्या बोलेंगे? नहीं ब्लैक राइस एक बहुत ही बेहतरीन चीज है और मैं यह एक बात कहना चाहूंगा कि अगर कोई इंसान अपनी डाइट में एक महीने के लिए लगातार ब्लैक राइस को ऐड करता है मैं गारंटी करता हूं उसको अपने डाइजेशन पे उसको अपनी स्किन पे और उसको अपने वेट पे बहुत ही सिग्निफिकेंट चेंजेस देखने को मिलेंगे। एक महीने अगर कोई रेगुलर सिर्फ ब्लैक राइस को अपनी डाइट के अंदर ऐड करें। एक तो सबसे अच्छी बात क्या
(46:33) है कि आप इसको एक बाउल से ज्यादा खा ही नहीं सकते हैं। राइट? इसमें इतना कॉम्प्लेक्स फाइबर है कि यह आपके स्टमक को फुल कर देगा और बहुत लंबे समय तक फुल रखेगा। देखिए जब आप नॉर्मल राइस खाते हैं तो आपको थोड़ी देर के बाद फिर वापस भूख लग जाती है। ऐसा क्यों हुआ? प्यास प्यास लगती है और भूख भी जल्दी लग जाती है क्योंकि वो बहुत जल्दी डाइजेस्ट हो गया। मतलब वो बहुत जल्दी ग्लूकोस में कन्वर्ट हो गया। उसका डाइजेशन बहुत जल्दी हो गया। इसी बेसिस पे एक इंडेक्स निकलता है जिसको बोलते हैं ग्लाइससेमिक इंडेक्स। ग्लाइसेमिक इंडेक्स का मतलब होता है कि आपने कोई चीज़ खाई तो
(47:05) वह कितना जल्दी डाइजेस्ट होकर शुगर बनी। आप बता रहे थे कि कई वैरायटीज ऑफ राइस है। तो वाइट राइस का जो जीआई ग्लाइससेमिक इंडेक्स होता है वो लगभग 75 के आसपास होता है। मतलब जितना जीआई होगा उतना जल्दी डाइजेस्ट होगा। जितना जल्दी ग्लूकोस स्पाइक होगा। उतना जल्दी ग्लूकोस स्पा स्पा स्पा स्पा स्पा स्पा स्पा स्पा स्पा स्पाइक होगा। मतलब उतना ज्यादा प्रेशर आपके पैंक्रियास पे आएगा कि तुरंत ही इंसुलिन रिलीज करो। देखिए दो चीजें हैं। एक तो यह है कि मैं आपको बोल रहा हूं कि आप वॉकिंग करिए। हम राइट? और एक मैं आपको बोलता हूं कि आप स्प्रिंट करिए।
(47:32) करेक्ट। तो आप जब वॉकिंग करेंगे तो आप आराम से रहेंगे। अगर मैं आपको स्प्रिंट करने को बोलूंगा तो सांस फूलनी शुरू हो जाएगी। क्योंकि आप अंडर स्ट्रेस आ जाएंगे। ऐसे ही आप अपने पैंकक्रियाज को या तो धीरे-धीरे इंसुलिन रिलीज़ करने के लिए बोलिए तो वो वॉकिंग हो गया। और अगर आपने उसको एकदम प्रेशर डाला स्प्रिंट करने के लिए तो क्या होगा? वो प्रेशर जो आप पनक्रियाज पे इमीडिएटली इंसुलिन स्पाइक करने को बोल रहे हैं वो ओवर अ पीरियड ऑफ़ टाइम डायबिटीज बनता है। तो अब मैं जीआई की बात कर रहा था ग्लाइससेमिक इंडेक्स की। वाइट राइस का ग्लाइसेमिक इंडेक्स 75 है। ब्राउन राइस का
(48:03) अराउंड 50-5 है। और जबकि ब्लैक राइस का जो ग्लाइसेमिक इंडेक्स है वो अराउंड 45 है। मतलब ये वीट और इनसे भी काफी कम है। तो ये इतना स्लो डाइजेस्ट होता है बॉडी में कि आपको बहुत लंबे समय तक भूख नहीं लगने देगा। आपको एकदम इंसुलिन स्पाइक नहीं करेगा। और अगर यह कोई खा रहा है, अगर कोई डायबिटिक पेशेंट इसको खा रहा है या कोई भी अपने वेट लॉस में है, वो इसको खा रहा है। इवन अगर कोई हेल्दी और फिट रहने के लिए इसको खा रहा है, तो इससे ज्यादा बेहतर ब्रेकफास्ट मैं मान नहीं सकता हूं। मतलब दिस इज वन ऑफ द बेस्ट ब्रेकफास्ट। और मणिपुर के अंदर ये लोकली उनका कल्चरल फूड
(48:39) है और लोकली वो इसको चकाऊ बोलते हैं। वो इसकी खीर बना के खाते हैं। तो कई बार ऐसी चीजें आपको देखा तो बड़ा अच्छा फील हुआ कि चलो कहीं तो इसको एक मान्यता मिली रिकॉग्नाइज किया गया और वहां पे भी जो कई लोग खा रहे थे वो भी पूछ रहे थे कि ये क्या है? ये ब्लैक राइस पुटिंग क्या है? और इतनी स्वादिष्ट इसकी ब्लैक राइस की पुडिंग होती है। इतनी बढ़िया इसकी खीर बनती है। अगर आप इसकी खीर बना के खाएं एक तो हेल्थ भी है और टेस्ट भी इसका इतना बढ़िया होता है कि मतलब आपने जिंदगी में ऐसी खीर नहीं खाई होगी जो ब्लैक राइस की खीर है। अगर आप उसकी खीर खाएं और दूसरा
(49:07) फिर इसको कई लोग पीस के इसके आटा से इसकी रोटी भी बनाते हैं, इसकी पूरी भी बनाते हैं। बस क्या है कि इंडिया के अंदर क्या है? इंडिया के अंदर बहुत सारी ऐसी चीजें हैं जिसकी इंफॉर्मेशन ना होने की वजह से वो एक्सपोर्ट हो जाती है। तो अभी भी हमारे यहां का ब्लैक राइस क्या होता है? जितना ग्रो किया यहां कल्टीवेट हुआ और सारा का सारा क्या हो गया? एक्सपोर्ट हो गया। अच्छा। क्यों? क्योंकि इंडिया में उसकी एजुकेशन और अवेयरनेस नहीं है। मणिपुर सबसे ज्यादा ब्लैक राइस एक्सपोर्ट करता है। तभी तो जीआई इसको मिला हुआ है। बट मेरा ये मानना है अगर हमारे देश की अच्छी चीजें हैं तो
(49:37) वो ग्लोब के लिए इस्तेमाल हो लेकिन सबसे पहले हमारे खुद के देश के लिए भी तो इस्तेमाल हो। राइट? कि हम भी तो उसको यूज़ करें। ऐसा नहीं होना चाहिए कि जो बेस्ट वैरायटी है आप उसको एक्सपोर्ट कर दीजिए और जो बाकी बच गया वो हमारे देश के लिए हो। ये आइडियोलॉजी नहीं होनी चाहिए। करेक्ट। तो ब्लैक राइस के साथ कुछ ऐसा ही है और इसकी जो असली ताकत है एक तो इसका डाइजेशन बहुत स्लो है। दूसरी इसकी सबसे ताकतवर चीज है वो है इसका जो ब्लैक कलर है उसका कालापन है तो कई लोग ब्लैक राइस से बड़ा ऐसा होता है अच्छा ब्लैक राइस काला चावल कुछ बड़ा हंसी मजाक के फॉर्मेट में
(50:08) इसको करते हैं। तो देखिए काले रंग को लाइटली मत लीजिए। उसके अंदर कई बार बहुत पोटेंशियल होता है। तो जिसका ब्लैक कलर है वो एंथोसाइनिन की वजह से है। और एंथोसाइनिन एक बहुत ही पावरफुल एंटीऑक्सीडेंट है। राइट? आपके स्किन के लिए एंथोसाइनिन बहुत पावरफुल है। आपके एज रिवर्सल में एंथोसाइनिन बहुत ही पावरफुल एंटीऑक्सीडेंट है। आज लोग विदेशों से मंगा के ब्लैक बेरीज और ब्लू बेरीज खाते हैं। राइट या मैं ब्लू बेरीज खाऊंगा। मैं ब्लैक बेरीज खाऊंगा। हां महंगामहंगा खाते हैं। उनके अंदर भी एंथोसाइनिन ही है। और वो एंथोसाइनिन उससे ज्यादा मात्रा में इस ब्लैक राइस के
(50:42) अंदर है। ओके। तो जो वाइट राइस है वो तो सिर्फ आपको राइस कार्ब्स दे रहा है। लेकिन ये ब्लैक राइस आपको कार्ब्स के साथ-साथ फाइबर दे रहा है। इसका आयरन कंटेंट नॉर्मल राइस के आयरन कंटेंट से लगभग तीन गुना ज्यादा है। और सबसे पावरफुल एंटीऑक्सीडेंट ये एंथोसाइनिन आपको प्रोवाइड कर रहा है। तो ये एज रिवर्सल में भी काफी फायदेमंद है अगर इसको डाइट का पार्ट बनाया जाए। अब कई बार होता है कि रोज खा सकते हैं नहीं खा सकते हैं। सबसे पहली बात तो आप इसको खा ही इतना कम पाएंगे। आप एक कटोरी से ज्यादा वैसे भी इसको कंज्यूम नहीं कर पाएंगे। राइट? तो अगर यह किसी की डाइट का पार्ट
(51:12) बनता है तो बहुत बढ़िया चीज है और चाइना में तो इसको कई सालों से इस्तेमाल करते आए हैं और इसको फॉरबिडन राइस बोला जाता है चारा में। हां मैंने सुना ये फॉरबेडन राइस। फॉरबिडन मतलब ये है कि ऐसा मतलब नहीं है कि खाना बना था। फॉरबिडन राइस मतलब ये था कि चाइना में कई साल पहले ये सिर्फ राजाओं को दिया जाता था। राजगिराने के लोगों को ही दिया जाता था। क्योंकि क्वांटिटी में कम होता था तो राजगिराने के लोगों को ही दिया जाता था। इसका इसलिए इसका नाम ही पड़ गया फॉरबिडन राइस। हम्म। मैंने सुना था कि चाइना में टॉनिक प्रिपेयर होता है जो बूढ़े लोगों को
(51:40) दिया जाता है सेंचुरीज से। हां वही ब्लैक राइस का ब्लैक राइस का टॉनिक निकालते हैं। चाइनीस मेडिसिन चाइनीस मेडिसिन में इसका एक्सट्रैक्ट भी निकालते हैं। इससे एंथोसाइनिन भी एक्सट्रैक्ट होता है और एंथोसाइनिन एक्सट्रैक्ट होकर आप इससे कहीं स्किन केयर प्रोडक्ट्स भी बना सकते हैं। मतलब अगर आप इसका एंथोसाइनिन एक्सट्रैक्ट निकाल लेते हैं तो उसको वो स्किन के लिए भी काफी फायदेमंद है। काफी काफी हेल्पफुल है। तो इसका आप चाहे तो इसको एज अ इडेबल भी यूज़ कर सकते हैं। इसका एक्सट्रैक्ट निकाल के आप इसको स्किन पे भी बहुत अच्छा यूज़ कर सकते हैं। और फिर इससे कई सारे स्नैक्स भी
(52:08) बनाए जा सकते हैं। हेल्दी स्नैक्स भी बनाए जा सकते हैं। अब घर में जो हम मैदे की भुजिया बना रहे हैं, ये सारी चीजें बना रहे हैं। इनको हम बहुत सारा ब्लैक राइस से हम रिप्लेस कर सकते हैं। ब्लैक राइस के लड्डू बड़े जबरदस्त बनते हैं। राइट? इसके लड्डू बनते हैं बड़े टेस्टी और बड़े जबरदस्त होते हैं और न्यूट्रिशियस भी। जैसे वो ब्लैक तिल के लड्डू बनते हैं। ऐसे ही ब्लैक राइस के भी लड्डू बनते हैं। मैं तो काफी समय मणिपुर रहा हूं तो वहां लोकली मैं वहां लोकल्स के साथ वहां पे मैंने खूब टाइम स्पेंड किया है। मतलब पूरा मणिपुर में अंदर तक घुमा हूं। तो वहां तो
(52:32) मैंने अलग-अलग कई सारी डिशेस खाई हैं। ब्लैक राइस खूब अलग है। ब्लैक राइस मणिपुर से ही आता है मेजरली मणिपुर में। मेजर जो ब्लैक राइस है वो मणिपुर में है। उसके बाद फिर कुछ तमिलनाडु में भी होता है। अलग-अलग वैरायटीज है। तमिलनाडु में उसको करपसी बोलते हैं। करपसी मतलब वही काला चावल उसको बोला जाता है। फिर कुछ आपका उड़ीसा में भी होता है। लेकिन जो सबसे जिसमें अरोमा होता है मतलब एक हल्का सा आपको बहुत ही ब्लेस ब्लिसफुल एक स्मेल सा आता है। अरोमा आता है। वो चकाऊ में है। वो मणिपुर के राइस में। जीआई जो मिला हुआ है वो आपके चकाऊ को
(53:02) मिला है। वअर्स के लिए वो होता है जहां पर हम उसको एक उपाधि देते हैं उस फूड को कि वो हवा वो लेबर वो पानी वो मिट्टी का ये प्रोडक्ट है जिसमें खासियत है। करेक्ट मतलब वो उस पर्टिकुलर ज्योग्राफी में ही मिल रहा है और कहीं नहीं मिलेगा। तो इसलिए उसको ज्योग्राफिकल इंडिकेशन दिया जा जाता है कि ये इसी लोकेशन का है। मतलब अगर इसकी लोकेशन आप चेंज कर देंगे तो शायद आपको वो क्वालिटी नहीं मिल पाएगी। समझ गए? लोग कहेंगे कि ब्लैक राइस को कैसे बनाना चाहिए? कुक करना चाहिए। क्या वो रेगुलर वाइट राइस जैसे ही कुक करना चाहिए? देखिए ब्लैक राइस भी दो फॉर्मेट में आता
(53:35) है। एक रॉ होता है और एक बॉयल्ड होता है। तो अगर आप रॉ लेंगे तो उसको उबालना थोड़ा सा ज्यादा पड़ेगा। तो सबसे पहले तो आप उसको रात को भिगो दीजिए। क्योंकि बिना भिगोए आप बनाएंगे तो वो इतना जल्दी पकेगा नहीं। तो जैसे हम घर में राजमा भिगो के रखते हैं, दाल छोले भिगो के रखते हैं। इसी तरीके से ब्लैक राइस को हम रात में भिगो के रख दें और फिर सुबह हम उसको बना लें। बॉईल करके हम इसको नॉर्मल राइस की तरह बना सकते हैं। और फिर हम इसमें कुछ-कुछ चीजें हम ऐड कर सकते हैं। दूसरा हम इसकी पुडिंग बना सकते हैं। इसकी खीर बना सकते हैं। तो इसकी खीर बहुत अच्छी है। तो अगर कई बार
(54:01) क्या होता है कि जब भी हम खाना खाते हैं उसके बाद एक बहुत स्ट्रांग क्रेविंग होती है कुछ मीठा खाने की। तो मीठा खाने की जब बहुत स्ट्रांग क्रेविंग होती है तो ये ब्लैक राइस से ज्यादा बेहतर मैंने कुछ और नहीं देखा। राइट? एक तो इसका कंटेंट भी फाइबर बहुत ज्यादा है। कॉम्प्लेक्स फाइबर है तो डाइजेशन भी बहुत स्लो होगा और बड़ा अच्छा टेस्ट। जब ये मिल्क के साथ कंबाइन करता है तो इसका टेस्ट और बढ़िया हो जाता है। तो इसकी पुडिंग भी बना के खा सकते हैं और इससे कई सारे स्नैक्स भी बन सकते हैं। और रेगुलर चावल की तरह जैसे चावल अपना बिल्कुल वाइट राइस का एक्सजेक्टली हम इससे
(54:28) रिप्लेस कर लें और सारे यूज इसके लिए भी काम कर जाते हैं। मैं देख रही थी कि ग्लोबली अगर तो हम राइस का मार्केट देखें तो 323.5 बिलियन डॉलर्स है। और अगर तो हम ब्लैक राइस का मार्केट देख तो डॉलर 1.2 बिलियन डॉलर्स है। मतलब व्हाट पोटेंशियल? कितना पोटेंशियल है ब्लैक राइस में ना? क्या कारण होता है ये चीजें कर नहीं पाते। अच्छा दे डोंट कम टू द फोर फ्रंट। उसके पीछे का रीज़न ये है कि देखिए कोई भी चीज कमर्शियलाइज कब होती है? हां। कमर्शियलाइज तब होती है जब उसमें कोई एंटरप्रेन्योरल एक्टिविटी होगी। हम राइट? अब देसी काऊ घी है। कितनी अच्छी
(55:01) कमोडिटी थी। कितनी बढ़िया चीज है। राइट? हमारे हेल्थ के लिए बहुत बढ़िया है। लेकिन हुआ क्या कि किसी ने उसके ऊपर काम ही करना शुरू नहीं करा। जब लोगों ने काम किया। पहला काम होता है अ सबसे पहले उसकी साइंस को स्टडी करना। दूसरा काम है उससे वैल्यू एडेड प्रोडक्ट्स बनाना और तीसरा काम है एजुकेशन एंड अवेयरनेस करना। जब तक कोई टीम इन तीनों कामों की जिम्मेदारी नहीं उठाएगी तब तक कोई भी कमोडिटी कमर्शियलाइज नहीं हो सकती। आज जो भी चीज आप और मैं यूज कर रहे हैं। किसी ना किसी ने उस पे रिसर्च किया। किसी ना किसी ने उस पे वैल्यू एडेड प्रोडक्ट्स
(55:36) बनाए और किसी ना किसी ने उसको कमर्शियलाइज किया। राइट? तभी वो काम हुआ। अब आप आलू की बात करते हैं। पोटैटो। पोटैटो तो हमारे देश में हुआ ही नहीं करता था। करेक्ट। आलू तो हमारे देश का है ही नहीं। पीनट्स हमारे देश के है ही नहीं। चाय हमारे देश की चाय हमारे देश की है ही नहीं। अब हुआ क्या? चाय अंग्रेज लेकर आए। रिसर्च किया जी भाई इसमें टेनेंस होते हैं। टेनेंस अगेन एक अच्छे एंटीऑक्सीडेंट बॉडी को मिलते हैं। जी टेनेंट्स हैं। इसको पिए। हमने तो खैर चाय का मजाक बना दिया। उसमें दूध वधू सब कुछ डाल के बनाना शुरू कर दिया। मसाला डाल दिया। चाय को भी हमने
(56:05) टेस्ट बना दिया। एक्चुअली में चाय उन्हीं एंटीऑक्सीडेंट के लिए पी जाती थी। तो उन्होंने पहले इस पे रिसर्च किया जी हां इसके फायदे हैं। फिर उन्होंने इसके ऊपर वैल्यू एडेड प्रोडक्ट बनाए। चाय उगानी शुरू करी, वाइट टी बनाई, ग्रीन टी बनाई, ब्लैक टी बनाई, सीटीसी बनाया। फिर इसका कमर्शियलाइजेशन हुआ। लोगों को चाय पिलाई गई, एजुकेट किया गया। तब जाके चाय ऐसा हमारी जिंदगी में बस गया कि हमारे देश का नेचुरल ड्रिंक बन चुका है चाय। राइट? तो ये क्या है कि ये एक प्रोसेस से गुजरा है। जहां किसी ना किसी ने उसको ये काम किया। आज आप में या कोई भी यही काम ब्लैक राइज
(56:34) में करना शुरू कर दे तो ब्लैक राइज भी वहां पहुंच जाएगा जहां उसको होना चाहिए। जहां आज वो 1 बिलियन पे है वो 1 बिलियन से 10 बिलियन पहुंचेगा, 15 बिलियन पहुंचेगा। मेरा यह मानना है एस एन इंडिविजुअल हमारी सोसाइटी को ऐसे लोगों की जरूरत है जो एजुकेशन एंड अवेयरनेस और रिसर्च और कमर्शियलाइजेशन ऐसी चीजों का करें जिससे जिसका एक पॉजिटिव इंपैक्ट है हेल्थ के ऊपर रादर देन ऐसी चीजों को कमर्शलाइज और एजुकेट करना जिसका नेगेटिव इंपैक्ट है। राइट? क्योंकि कहीं सॉफ्ट ड्रिंक्स आज पूरे देशों को डायबिटिक बना रही है। अब्सोलुटली। तो अगर काम ही करना है तो हम
(57:08) ऐसी चीजों पे काम करें जिनका पॉजिटिव इंपैक्ट हो। अब ब्लैक राइस क्यों नहीं है? क्योंकि ब्लैक राइस को किसी एंटरप्रेन्योर ने पिक ही नहीं किया ना। अब कॉस्टिंग की भी क्या होती है? जब किसी चीज की आप स्केल को बढ़ाते हो, उसके उत्पादन को बढ़ाते हो तो धीरे से उसकी कॉस्ट भी अपने आप कम होने लग जाती है। राइट? बिकॉज़ स्केल के साथ कॉस्टिंग भी आ जाती है, रिड्यूस हो जाती है। और ऐसा नहीं है कि हमारे देश में आज लोग पे करने के लिए रेडी नहीं है। आज हमारे देश में लोग बिल्कुल पे करने के लिए रेडी हैं। राइट? आज 300 ml कोल्ड ड्रिंक पीने के लिए भी लोग 15-20 खर्च
(57:35) करते हैं ना। करेक्ट। राइट? जबकि है क्या उसमें? एक फार्मूला और 90% पानी है। राइट? तो पीपल आर पेइंग इट। जब लोगों तक एजुकेशन और अवेयरनेस पहुंचेगी तो वो चीजें भी पहुंचेंगी। करेक्ट। बट किसी ने अब क्यों नहीं उठाया? कोई उसपे काम ही नहीं कर रहा। कोई उसपे बात ही नहीं कर रहा। कोई उसपे कमर्शियल एंगल से चीजों को सोच ही नहीं रहा है। देख ही नहीं रहा है। तो जब तक वो देखेगा नहीं तब तक वो कमोडिटी या तो गायब हो जाएगी या वैसी की वैसी पड़ी रहेगी। अब मोदी जी ने मिलिट्स पे बात करनी शुरू करी। तो मिलिट्स आ गया वापिस। जो मिलेट्स गायब हुआ था। अब कहां से आ गया
(58:02) मिलिट्स? अब कैसे आ गया मिलिट्स? क्योंकि कमर्शियलाइजेशन होना शुरू हो गया। देश में किसी भी चीज को बढ़ाने का काम एक एंटरप्रेन्योर करता है। अब ये एंटरप्रेन्योर की जिम्मेदारी है कि वो देश में किन चीजों को पिक कर रहा है। करेक्ट। नेक्स्ट लॉस्ट हर्ब क्या रहेगा? नेक्स्ट लॉस्ट हब मैं इसको लॉस्ट तो नहीं बोलूंगा। मैं ये बोलूंगा कि इस पर्टिकुलर हर्ब का एक पार्ट का बेनिफिट हम लोग अभी तक समझ ही नहीं पाए। ओके? जैसे टमरिक हल्दी तो हल्दी हम सब लोगों के घर में यूज़ होती है। तो हल्दी को हम हमारे खाने में रेगुलरली हम लोग यूज़ करते हैं। और जो हम यूज़ करते हैं वो पाउडर
(58:38) फॉर्मेट में यूज़ करते हैं। एक्चुअली हल्दी का जो सबसे इंपॉर्टेंट कंपाउंड है वो है करकुमिन जो सबसे पावरफुल कंपाउंड है। देखिए हर एक चीज के अंदर कोई भी आप हर्ब ले लें, कोई भी प्लांट की मेडिसिन ले लें उसके अंदर कोई ना कोई कंपाउंड होता है जो बहुत ताकतवर होता है और जो उस पर्टिकुलर हर्ब के लिए बेसिकली परफॉर्म कर रहा होता है। हमने ब्लैक राइस पे बात करी तो उसके अंदर कुछ ऐसा कंपाउंड था। ऐसे ही टर्मरिक के अंदर जो सबसे इंपॉर्टेंट कंपाउंड है वो है कर्कमिन। राइट? जो कि बॉडी के अंदर से इनफ्लेमेशन को रिड्यूस करता है। जिसको एंटी कैंसरस भी बोलते हैं। इवन टर्मरिक का
(59:11) जो येलो कलर आता है। वो पीलापन जो आता है वो इसी करकमिन की वजह से ही आता है। राइट? तो कभी आपने देखा होगा कई सारे लोग टर्मरिक से इसको एक्सट्रैक्ट करके इसके कैप्सूल्स भी बनाते हैं। राइट? करकमिन के कैप्सूल्स भी बनते हैं और चीजें भी बनती है। बट ये तो कैप्सूल फॉर्मेट में हो गया। अब मैं नेचुरल बात करूंगा। अगर नेचुरली हमने कर्कमिल ले तो लिया लेकिन एक होता है कि आपने बॉडी को कुछ दिया है लेकिन उससे ज्यादा इंपॉर्टेंट यह है कि बॉडी ने उसको कितना अब्जॉर्ब किया है। उसकी बायो अवेलेबिलिटी कितनी है? बॉडी उसको अब्सॉर्ब कितना कर पा रही है। तो
(59:40) करकमिन को अगर आप पाउडर के फॉर्मेट में ले रहे हैं तो उससे ज्यादा अब्जॉर्प्शन होता है अगर आप करकमिन को ऑयल फॉर्मेट में ले रहे हैं। क्योंकि करकमिन ऑयल के साथ बेटर अब्सॉर्ब होती है रादर देन वाटर और नॉर्मल थिंग्स। राइट? इसीलिए जब आप टर्मरिक को ऑयल फॉर्मेट में लेते हैं तो आपको कर्कमिन का कर्कमिन तो मिल गया लेकिन ऑयल फॉर्मेट में लेने की वजह से आपकी बॉडी में इसका अब्सॉर्प्शन ज्यादा हो गया। तो टर्मरिक का जो ऑयल है वो बहुत ही पावरफुल है। इवन एक्सट्रैक्ट और पाउडर फॉर्मेशन से भी ज्यादा पावरफुल है। दूसरी सबसे खास बात क्या है कि एक्सट्रैक्ट और पाउडर में तो
(1:00:16) कई तरीके के एडल्ट्रेशन हो सकते हैं। करेक्ट? लेकिन आपने हल्दी का जब तेल निकाल लिया या तो पाउडर आपने बना लिया पाउडर जनरली लोग मार्केट से लाते हैं। उसमें कई सारा एडल्टेशन क्या हुआ है आपको कुछ नहीं पता। लेकिन जब आपने कच्ची हल्दी का तेल निकाल लिया और तेल निकाल के आपने जब उसको यूज़ करा है तो उसमें एडल्ट्रेशन की भी कोई गुंजाइश नहीं है। और उसके अंदर करकमिन का अब्सॉर्प्शन भी ज्यादा हो गया। और उसके बाद टर्मरिक के ऑइल में और कहीं ऐसे कंपाउंड्स हैं जिनका रोल जैसे टर्मरिक का रोल जो रोल है वो इन्फ्लेमेशन में था। और जो बाकी कंपाउंड्स हैं उनका रोल होता है
(1:00:46) स्ट्रेस को कम करने पे। तो टर्मरिक ऑयल इज समथिंग जो कि खोया नहीं है बट वही रेयर हर्ब है टर्मरिक लेकिन कभी हम उसके दूसरे फॉर्म को जान ही नहीं पाए। राइट? क्योंकि मैंने ये भी सुना है कि टर्मरिक ना एक्चुअली आपने जैसे बोला वो इजीली अब्सॉर्बेबल है भी नहीं इन कंपैरिजन टू अदर पाउडर। जैसे मैं नीम का पाउडर भी ले सकती हूं। पर वो फिर भी असिमिलेट हो जाएगा। क्योंकि इसकी पेनिट्रेटिव पावर थोड़ी कम है। हमने तो जैसे दादी मां का नुस्खा सुना था ना कि आप काली मिर्च लो, घी लो उसमें टर्मरिक डालो फिर लो तो ज्यादा पेनिट्रेट करेगा। करीबन 2000
(1:01:17) टाइम्स करेक्ट करेक्ट बड़ावा कह रहे हो ये सब झंझट करने की जरूरत नहीं तेल आप आप ऑइल ले लो राइट क्योंकि देखिए आप ऑइल क्यों डाल रहे थे ऑइल आप इसलिए डाल रहे थे क्योंकि आप फैट देना चाह रहे थे जिस फैट में करकेमिन अब्सॉर्ब हो सके और आपने जो काली मिर्च की बात बोली वो बिल्कुल आपने ठीक बोली क्योंकि पिपरीन जो होता है वो अब्सॉर्प्शन को बढ़ा देता है। राइट? मतलब अगर आप काली मिर्च लेते हैं तो उसके अंदर काली मिर्च के अंदर जो पिपरीन है पिपरीन एक कंपाउंड है जो करकमिन के अब्सॉर्प्शन को मल्टीपल टाइम्स बढ़ा देता है। तो ये तो मैं बिल्कुल एग्री करता हूं
(1:01:43) कि हां वो जो दादी दादी मां का नुस्खा था वो बिल्कुल ठीक था। अगर आपको ऑइल कहीं से मिल जाता है तो आप ऑइल एक्सट्रैक्ट भी कर सकते हैं। हल्दी का तेल आप निकाल भी सकते हैं। कहीं आज के समय में घरों में मशीन लगी हुई है ऑइल निकालने की तो उनमें ऑइल निकल जाता है। आप किसी के पास लेके चले जाइए कि भाई ये मेरे पास कच्ची हल्दी है। आप इसका ऑइल निकाल दीजिए तो वहां से ऑइल निकल जाएगा। हां मार्केट में ऑइल ऑइल मिलता है। इसका फूड ग्रेड ऑइल भी मिलता है। और आप सबसे अच्छी बात ये है कि टर्मरिक के ऑयल को आप फेस पे भी अप्लाई कर सकते हैं। और इसको आप अपने बालों में भी अप्लाई कर
(1:02:09) सकते हैं। अगेन बालों में अप्लाई करने के लिए कैरियर ऑयल लगा के आप अप्लाई कर लीजिए। और फेस पे अप्लाई करने के लिए आप इसको जहां पर भी एक्ने है या कोई भी ऐसी चीज है तो आप उस पे फेस पे भी अप्लाई कर सकते हैं। और खाना है तो वो आप फूड ग्रेड ऑइल आते हैं। अगर आप परचेस कर रहे हैं तो टमरिक का फूड ग्रेड ऑइल आप परचेस कर लें। और आप निकलवा रहे हैं एक्सट्रेक्शन करवा रहे हैं तो फिर आप वैसे ही कहीं भी जाके जिस दुकान पे जहां ऑइल निकलता है एक्सट्रैक्शन होता है उसको आप ऑइल दे देंगे तो वैसे ही निकाल देगा। मॉर्निंग टू नाइट टर्मरिक के मुझे यूजसेस
(1:02:33) बताइएगा। कैसे इंसान यूज़ कर सकता है? मान लीजिए कि रात में सोने से पहले आप चाहे तो इसको अपने फेस पे लगा सकते हैं। इवन आप ऐसा भी कर सकते हैं कि आपने सीबॉन ऑइल के साथ ही टर्मरिक ऑइल मिक्स कर लिया। तो दोनों को मिक्स करके भी यूज़ कर सकते हैं। मैं आपको अपने घर पे बताता हूं कि मेरा घर का स्पेसिफिकली सर्दियों के टाइम है या घर में अगर किसी को जॉइंट पेन की समस्या है या जॉइंट में बहुत तकलीफ हो रहा है या दर्द हो रही है। स्पेसिफिकली मेरी मदर के साइड पे मैं क्या करता हूं। उनको सीबकथोन का जो हमारा पल्प है उस पल्प में मैं टर्मरिक ऑइल मिला के
(1:03:01) देता हूं। दोनों का कॉम्बिनेशन तो ये दोनों का जो कॉम्बिनेशन है ये जॉइंट पेन में बहुत अच्छा काम करता है। तो मेरी मदर का मैं उनको टर्मरिक ऑइल और सीबन का कॉम्बिनेशन देता हूं। ओके मैं ना आपसे भ्रम्मी के बारे में चर्चा करना चाहती हूं। गिविंग कि अगेन इट्स सपोज टू बी ब्रेन फूड। राइट? एक ब्रेन टॉनिक की तरह काम करता है। और आज के जमाने में तो मेंटल इलनेस का तो जवाब ही नहीं है। राइट? जवाब ही नहीं है। मैं एक्चुअली एक स्टडी देख रही थी कि 2045 में वर्ल्ड में करीबन 50% लोग ड्रग्स में होंगे फॉर मेंटल इलनेस। हम्म स्टॉप तो छोड़ ही दो डोंट टू स्लो इट डाउन
(1:03:34) तो ये जो ब्रह्मी ब्रेन टॉनिक है व्हिच एक्स अ मेमोरी बूस्टर मेमोरी ऑफ द नर्व्स स्लीप में हेल्प करता है इसके बारे में मुझे कुछ बताइए देखिए ब्रह्मी के अंदर एक कंपाउंड होता है जिसको बैकोसाइट्स बोलते हैं ये बेसिकली वो कंपाउंड है जो हमारे न्यूरॉन्स हैं वो आपस में कम्युनिकेट जो करते हैं राइट वो एक केमिकल मैसेंजर के थ्रू कम्युनिकेट करते हैं। ब्रह्मी का ये बैकोसाइट कंपाउंड उन केमिकल मैसेंजर्स को स्ट्रेंथन करने का काम करता है। इसीलिए ये बोला जाता है कि अगर ब्रह्मी बच्चों को दी जाए तो उनकी मेमोरी बहुत शार्प होती है। तो डेफिनेटली ब्रह्मी
(1:04:03) माइंड के लिए बहुत ही बेहतरीन चीज है। राइट? बच्चों में अगर देखा जाए तो मेमोरी को शार्पन करने में बहुत अच्छा काम करती है। एडल्ट्स में अगर देखा जाए तो ये हमारे स्ट्रेस को रिलीव करने में, माइंड को काम करने में बहुत अच्छा काम करती है। और इवन अगर लॉन्ग टर्म पे अगर कोई इसको यूज़ कर रहा है तो एडल्ट में अगर जाते हैं तो कई सारी ऐसी बीमारियां होती है। पाकिस्तान डिजीज होती है, अल्जाइमर्स होते हैं। इन सारी चीजों से अगर बचना है। राइट? कई बार देखते हैं आपने ये देखा होगा कि लोग जब 30 साल 35 साल के होने लगते हैं धीरे से हम चीजों को भूलना शुरू कर देते हैं। अरे वो
(1:04:32) क्या था वो याद नहीं आ रहा और कभी-कभी लगता है यार मैं मैं मतलब यार मैं फिर फील होता है कि नहीं यार ऐज हो रही है अब राइट वो भूलना जो है वो शुरू कर दिया है वो कई बार बड़े कॉमन से नाम होते हैं लेकिन दिमाग में नहीं आते वो बहुत ही अर्ली साइन होते हैं कि हमारा ब्रेन ऐज कर रहा है राइट तो कई बार ऐसा लगता है यार पहले तो ऐसा नहीं होता था पहले तो मेरे को तुरंत याद रहता था यार अब मैंने भूलना कैसे शुरू कर दिया है वो अर्ली साइन है हमारे ब्रेन के ऐज होने के ओके लेटर ऑन यही सारी चीजें आगे चलकर अल्जाइमर पाकिस्तान इनमें कन्वर्ट होती है। जहां ब्रेन के
(1:05:05) एबिलिटी बाय डे कॉग्निटिव एबिलिटीज कम होती है। जैसे आपने मोहम्मद अली जो बहुत बड़े बॉक्सर हैं। आपने देखा होगा उनकी पूरी बॉडी जो थी वो पूरी कांपती थी। वो वो पाकिस्तान था। राइट? क्योंकि बॉक्सिंग के टाइम में उन्होंने ब्रेन पे इतने पंचेस लिए थे, अपने हेड पे इतने पंचेस लिए थे कि उसका इंपैक्ट था। राइट? क्योंकि वो डैमेज हुआ था। अच्छा। तो अब आज की डेट में हम जितना स्ट्रेस ले रहे हैं हमारे ब्रेन पे कितना लोड डाल रहे हैं। राइट? कितना सारा फ्री रेडिकल फॉर्मुलेशन हमारे ब्रेन के अंदर हो रहा होगा। आप इमेजिन करके देखिए। तो अगर हमें इसको
(1:05:34) प्रिवेंट करना है तो इसमें ब्राह्मी बहुत अच्छा रोल प्ले कर सकता है। रीज़न बीइंग जो केमिकल मैसेंजर्स हैं उनको स्ट्रेंथन करने का काम ब्राह्मी कर सकता है। राइट? और बच्चों में मेमोरी एडल्ट्स में मैं बात करूं अगर कोई एडल्ट्स है तो स्ट्रेस लीव करने का काम और अगर कोई एजेड है तो पाकिस्तान अल्जाइमर से बचने के लिए ये ब्राह्मी बहुत जरूरी है। और ब्राह्मी का तो है ब्रेन, ब्रह्मा और बुद्धि। राइट? तो उसका तो नाम ही डिफाइन करता है कि ब्राह्मी जो ब्रेन के लिए तो वन ऑफ द बेस्ट चीज है। तो इसको हम जूस फॉर्मेट में ऐड कर सकते हैं। कैप्सूल फॉर्मेट में ऐड
(1:06:07) कर सकते हैं। बच्चों के लिए हम इसका एक से दो एमl हम लोग बच्चों का जूस फॉर्मेट में हम लोग इसको ऐड कर सकते हैं। और 10 से 12 ml हम इसको ऐड कर सकते हैं एडल्ट्स के लिए इन द फॉर्मेट ऑफ जूस। और अगर पाउडर फॉर्मेट में ले रहे हैं तो हम 1 ग्राम से 3 ग्राम हम इसको पाउडर फॉर्मेट में हम इसको ऐड कर सकते हैं। राइट? इसको अगर हम चाहें तो इसको हम घी के साथ भी इसको ले सकते हैं। घी के साथ इसका जो भी इसके बेनिफिट्स हैं उनका अब्सॉर्प्शन और ज्यादा हमारा बढ़ जाएगा। और टैब में लिख देंगे तो एक से दो टेबलेट जो है कोई इंसान दिन में ट्वाइस अ डे कोई इंसान कंज्यूम कर
(1:06:38) सकता है। और बच्चों के लिए तो ब्राह्मी इज वन ऑफ द बेस्ट सीन। अच्छा राइट। ओके। ग्रेट। हमारे पेरेंट्स ने हमें बचपन में दिया है। दिया है। दिया है। ब्राह्मी दिया है। बच्चों की ब्रेन मेमोरी के लिए शंकुश भी बहुत अच्छा होता है। हमारे पेरेंट्स तो जब हम छोटे थे तो हमें शंकुश भी पिलाया करते थे लगातार। अच्छा। राइट? उस समय तो ऐसा लगता था कि जब ये पेपर में फेल हो रहे हैं यही बचा सकता है। इसको पी लेंगे तो कुछ हो जाएगा। बट हां इनिशियली जब हम छोटे थे तब समझ में नहीं आता था। बट आई थिंक सो मुझे नहीं पता अब आज के पेरेंट्स क्या कर रहे हैं नहीं कर रहे
(1:07:03) हैं। बट हां लाइक इनिशियली हमारे पेरेंट्स ने हमें रेगुलरली शंकुशपी तो दिया है। अच्छा राइट तो ब्राह्मी और शंकुश रेगुलर है और शंकुष्पी बहुत अच्छा काम करता है ब्रेन मेमोरी। ओके। नेक्स्ट हर्ब कौन सा होगा? नेक्स्ट हर्ब एक बहुत अच्छा हर्ब है जिसका नाम है पुनर्वा। तो जैसे पुनर्वा का मतलब ही है पुनर मतलब दोबारा और अनरवा मतलब रिन्यूल। तो दोबारा से जो बॉडी को रिन्यू कर दे कोई भी ऐसी चीज जो दोबारा से बॉडी को रिन्यू करे उसी बेसिस पे इसको नाम दिया गया है पुनर्वा। पुनरवा का मेन काम ये है कि पुनरवा हमारी बॉडी से एक्स्ट्रा फ्लूइड
(1:07:32) को बाहर निकालता है। राइट? कई बार क्या होता है कि हम में से कई लोगों की बॉडी में ये होता है कि हम एक्स्ट्रा फ्लूइड रिटेन करके रखते हैं हमारी बॉडी में। इसका एक बहुत स्ट्रांग इंपैक्ट और प्रेशर हमारी किडनी पे भी पड़ता है। जितना ज्यादा फ्लूइड हम अपनी बॉडी में रिटेन करके रखेंगे तो उतना ज्यादा प्रेशर हमारी किडनी पे भी पड़ेगा। तो पुनर्वाह का सबसे इंपॉर्टेंट काम ये है कि वो एक्स्ट्रा फ्लूइड को एक्सक्रीट कर देता है हमारी बॉडी से और उसके एक्सक्रीट होने के प्रोसेस में कई सारे टॉक्सिंस भी जो हैं वो उस वाटर के साथ में एक्सक्रीट हो जाते
(1:08:00) हैं। बस क्या है कि जब भी हम पुनर्वा ले रहे हैं तो एक नेगेटिव साइड ये है कि हमें ये देखना है कि हमारी बॉडी ज्यादा डिहाइड्रेट ना हो क्योंकि डयरेटिक है। बॉडी से पानी को ये बाहर निकालने का काम कर रही है। टॉक्सिंस को निकालने का काम कर रहा है। एक्स्ट्रा वाटर को निकालने का काम कर रहा है। किडनी को रिस्टोर करने का काम कर रहा है। मतलब किडनी के हेल्थ के लिए अगर मैं बात करूं तो पुनरवा इज वन ऑफ दी बेस्ट थिंग। ओके। बट जब भी अगर ले रहे हैं और अगर गर्मियों में ले रहे हैं तो थोड़ा सा अपने को हाइड्रेटेड रखना बहुत जरूरी है। तो अगर किसी को भी किडनी
(1:08:32) रिलेटेड कुछ भी इशू है जो बहुत ज्यादा है। आपने देखा होगा ना बहुत बढ़ रहा है। हां जो मतलब क्रॉनिक इशज़ किडनी को लेकर बहुत ज्यादा बढ़ रहे हैं। या कई बार इवन जो हमारी बॉडी का वेट होता है अगर कोई अपनी वेट लॉस की जर्नी पे है तो वेट में एक्सेस वेट एक्सेस वाटर की वजह से भी होता है। वाटर के वेट की वजह से भी होता है। तो एथलीट्स को अगर अपना वेट लॉस करना होता है आखिरी में एक दो किलो अगर उनको रिलीज करना होता है तो बॉडी के वाटर को ही रिमूव करते हैं। पुनरवा को कंज्यूम कैसे करना है? पुनरवा को अगेन पाउडर फॉर्मेट में कंज्यूम कर सकते हैं। इसका एक से 3 ग्राम जो पाउडर
(1:09:01) होता है राइट उसको हम उसी फॉर्मेट में हम लोग पुनरवा को कंज्यूम कर सकते हैं। पाउडर में या पाउडर में और गरम पानी में इन द फॉर्म ऑफ़ पाउडर गरम पानी और मिल्क में। गरम पानी में नहीं मिल्क में नहीं। गरम पानी में हम इसको ले सकते हैं। ये भी कहा है कि क्योंकि पुनरवाह की तासीर ठंडी होती है तो ये वाता को बढ़ाता है बॉडी में हेयर एलिमेंट को। जी तो इसलिए ड्राई जिंजर या साठ के साथ इसको लेना चाहिए। हां हां करेक्ट हां ये बिल्कुल आपने जो कहा है बिल्कुल सही है। अगर इसको हम ड्राई जिंजर और साल्ट के साथ लेते हैं तो जो इसके नेगेटिव इंपैक्ट्स हैं वो हम इसको जैसे
(1:09:32) मैंने कहा कि डयरेटिक है। वाटर भी बॉडी से रिलीज करेगा वो एक पॉजिटिव चीज भी है। राइट? बट कई बार उसी चीज का नेगेटिव इंपैक्ट भी होता है। तो डेफिनेटली जब हम इसको ड्राई जिंजर और साल्ट के साथ लेते हैं तो हम उसके नेगेटिव इफेक्ट को मिनिमाइज कर सकते हैं। अंडरस्टुड? अंडरस्टुड। ये जो सारी ये हर्ब्स की भी हम बात कर रहे हैं इनको रेगुलरली इनडेफिनेटली लिया जा सकता है या पॉज करना चाहिए फिर रिस्टार्ट करना चाहिए। देखिए अगर कोई भी चीज ऐसी आप ले रहे हैं जो आपके माइक्रो न्यूट्रिएंट की नीड को पूरा कर रही है तो तो आप उसको रेगुलर ले
(1:09:56) सकते हैं। मतलब आप उसको फूड के सप्लीमेंट के फॉर्मेट में ले रहे हैं। लेकिन अगर आप किसी चीज को इस फॉर्मेट में ले रहे हैं जो कि आपकी किसी एक इशू को रिसॉल्व कर रहा है। तो मुझे लगता है कि उसको एक स्पेसिफिक टाइम और स्पेसिफिक पीरियड तक लेना चाहिए। जैसे पुनर्वा है उसको आप रेगुलरली नहीं ले सकते। उसको तो आप जब आपको लग रहा है कि मुझे अपनी बॉडी से एक्स्ट्रा फ्लूइड रिमूव करने की जरूरत है तो वो पुनर्वा का काम है। तब आप उसको पुनर्वा ले सकते हैं। शंख पुष्पी हां शंखपुष्पी एक ऐसी चीज है जो रेगुलर बच्चों के लिए दिया जा सकता है ओवर
(1:10:20) अ पीरियड ऑफ़ टाइम उसको हम रेगुलर दे सकते हैं। ब्लैक राइस डेफिनेटली जी बिल्कुल रेगुलर लिया जा सकता है। सीख्तव जी बिल्कुल रेगुलर लिया जा सकता है। टमरिक ऑइल यस उसको रेगुलरली हम लोग हमारी डाइट का पार्ट बना सकते हैं। नेक्स्ट अब क्या होगा? अ नेक्स्ट अब हम कोकम ले सकते हैं क्योंकि अभी गर्मियों का सीजन आ रहा है और आई थिंक सो कोकम इज वन ऑफ दी बेस्ट थिंग क्योंकि मैं तो ये बोलूंगा कि नेचुरल कूलेंट है हमारी बॉडी का एसी है ये और बॉडी को नेचुरली कूल करने का काम कोकम करता है और जनरली गोवा में कर्नाटका में महाराष्ट्र में इसका बड़ा अच्छा सा शरबत बना के लोग
(1:10:51) पीते हैं और बहुत अच्छी ड्रिंक है अब क्या होती है कि जैसे ही सोल कढ़ी हां सोल कढ़ी बनाते हैं तो बहुत अच्छा ड्रिंक है और मैं ये मैं ये चाहूंगा कि जितने भी लोग नॉर्थ साइड पे हैं जनरली ली राजस्थान में, पंजाब में, गुजरात में वो इसका बेनिफिट जरूर लें। इसका शरबत बनाएं और इसको रिप्लेस करें। बहुत सारी चीजें जो हम यूज़ करते आ रहे हैं। कई सारे जो हम ड्रिंक्स यूज़ करते हैं उसमें बहुत फायदेमंद है। और कोकम का सबसे अच्छा फायदा है कि वेट मैनेजमेंट में बहुत अच्छा काम करता है। उसके पीछे का रीज़न यह है कि जो इसमें एचसीए है, यह कार्ब्स को फैट में कन्वर्ट करने से रोकता
(1:11:22) है। तो, वेट मैनेजमेंट भी बहुत अच्छा काम है। और मैंने तो श्रद्धा कपूर के भी कई सारे वीडियोस को के बेनिफिट के ऊपर देखे हैं। राइट? तो अब तो ये सेलिब्रिटी ड्रिंक भी है। मैं ये बोल सकता हूं। तो कोकोम एक ऐसी चीज है जो बहुत अच्छा है बॉडी को कूल करने में और आपके वेट मैनेजमेंट में इन चीजों में बहुत अच्छा है। मैं जब छोटी थी ना मुझे ये मैं बॉम्बे में पैदा हुई। मैंने पहले अपने सेवन इयर्स बॉम्बे में गुजारे हूं। तो वहां बहुत कॉमन है। कैरी बोलते हैं या अमबी बोलते हैं शायद से। यू नो कच्चा आम में थोड़ा नमक मिर्च डाल के खा लो।
(1:11:52) उसके साथ वो जो हॉकर वो बेचता था ना तो वो इमली में ही यही करता था। इमली में नमक डाल के। तो मुझे बहुत अच्छा लगता था। अब मेरी मेरा ना गला बहुत सेंसिटिव था। अच्छा तो मेरी मदर ना क्या करती थी ना अब घर में मैं बोलती हूं वो नहीं चाहती थी कि मैं हॉकर से लूं वो कहती थी बेटा आ जाओ घर में मैं बना लूंगी दे दूंगी अब इमली तो वही है कि ज्यादा हीट है ना गला खराब कर देती थी तो मुझे कोकम देती थी वो कोकम में मिला के कहती इट्स अ वै गुड सब्स्टट्यूट फॉर इमली क्योंकि इमली तो हीट हीट इमली हीट करेगी तो ये उसका सब्स्टट्यूट है जनरली साउथ में यही होता है कई जगहों पे
(1:12:22) फिश करी में इमली की जगह कोकम यूज़ किया जाता है राइट वो खटास देने के लिए वो खटास देने के लिए वो कोकम यूज़ करना चाहिए जैसे मैंने शंकुश भी पिया बचपन में आपने बचपन में कोकुम पिया है। राइट? तो हमारी बचपन की हाव्स निकल के सामने आ रही है। सबसे बेहतरीन तो इसका नक्शा है इसका शरबत। राइट? इसको कुकुम को कु कोकुम को ले लें और इसका शरबत बनाएं और गर्मियों में दोपहर के टाइम, शाम के टाइम जो हम कई सारे पीते हैं राइट। तो उसका रिप्लेसमेंट है ये कोकम। तो शरबत के फॉर्मेट में दी बेस्ट है। बस अवॉयड करें कि बहुत ज्यादा शुगर वगैरह ना ऐड करें।
(1:12:54) अगर हमें करना भी है तो आज के समय में मक फ्रूट आ गया है, फस आ गया है। ये बेटर अल्टरनेटिव है शुगर के। राइट? फॉस एक बहुत अच्छा है। फ्रुक्टली सैक्राइड्स होते हैं। फ्रूट बेस शुगर है। तो हल्का सा उसको ऐड कर लें। टेस्ट भी इसका बिल्कुल शुगर की तरह होता है। तो उसको पूरा ऐड कर लें और उसका शरबत बना के इसको पिए। और अगर कोई इसका रेगुलर ड्रिंक लेता है अगर कोई अपने वेट मैनेजमेंट जर्नी पे है तो वो तो इसका वैसे भी ड्रिंक बना के कर सकता है और अगर कोई इसको टेस्ट के लिए पी रहा है तो वो इसमें कोई स्वीटनर ऐड करके इसका शरबत बना के पी
(1:13:22) सकता है। तो बेस्ट वे जो इसको यूज़ करने का है वो इसका शरबत है। और अगर कोई बिल्कुल वेट मैनेजमेंट के लिए जा रहा है तो जनरली गार्सिनिया कंबोजिया और कुकुम ये दोनों आप मिला देते हैं तो आपका वेट मैनेजमेंट जर्नी और ज्यादा स्ट्रांग हो जाती है। बिकॉज़ गार्सिनिया कंबोजिया अगेन ये फ्रूट है जो श्रीलंका और इन सारी जगहों पे बहुत पॉपुलर है। तो यह हंगर को सप्रेस करने का काम करता है। अगेन इसी इसके अंदर भी सेम कंपाउंड एडसी है वो कोकम में भी है। तो दोनों जब आप साथ में लेते हैं तो इफेक्ट और बढ़िया हो जाता है। ओके? तो गार्सिनिया कंबोजिया हैज़ बीन अ वेरी
(1:13:51) रेगुलर थिंग व्हिच पीपल यूज़ इट फॉर वेट मैनेजमेंट। तो जब आप कंबाइन कर देते हैं मतलब आपने गार्सिनिया कंबोजिया का कोई एफरवेसेंट ले लिया या कुछ ले लिया, कोई एक्सट्रैक्ट ले लिया और वो कोकुम के शरबत में मिला लिया। तो इन दोनों का कॉम्बिनेशन बहुत बढ़िया होता है वेट मैनेजमेंट के लिए। मतलब अगर कोई भी वेट मैनेजमेंट जर्नी पे है तो उसमें ब्लैक राइस वो अपने ब्रेकफास्ट में ऐड कर ले। हां। और कोकुम और गार्सिनिया कंबोजिया वो एज अ ड्रिंक जब भी जो है उसको लंच के टाइम में जब भी उसको बहुत ज्यादा क्रेविंग हो रही है वो ऐड कर ले क्योंकि वो हंगर को सप्रेस
(1:14:21) कर देगा और फैट ऑब्जर्शन भी कर देगा। तो ये ब्लैक राइस कोकम और गार्सीना कमोजी का कॉम्बिनेशन ये पूरा जो कॉम्बिनेशन है ना मतलब ये एक तरीके से बेस्ट टूल है किसी के वेट वेट मैनेजमेंट जर्नी पे अगर कोई जा रहा है तो उसके लिए ये बेस्ट वेट मैनेजमेंट टूल है कि ब्लैक राइस उठा लिया कोकम ले लिया गार्सीना कमजोर लिया दोनों को ऐड कर लिया और अपना अपना वेट मैनेजमेंट जर्नी अगर वो अचीव करना चाह रहे हैं अपने गोल को तो उसमें ये बेस्ट टिप है उनके लिए जो उसको ऐड करना चाहते हैं। थैंक यू थैंक यू फॉर दैट ग्रेट। आयुर्वेद में जामुन की सीड की काफी बात होती है।
(1:14:50) डायबिटिक्स के लिए वो बहुत बढ़िया माना जाता है क्योंकि उसकी एस्ट्रिंजेंट जो प्राइमरी जो रस होता है उसका जी एस्ट्रिंजेंट होता है। करेक्ट इनफैक्ट पाउडर फॉर्म में तो आई थिंक आयुर्वेदिक एक वो भी है डिकॉक्शन कि आप उसको ले तो आपकी डायबिटीज सही रहती है। जामुन एज अ फ्रूट भी हम जानते हैं कि जब खाने के बाद आपकी सडन शुगर स्पाइक होती है वो उसको करता है। स्लो डाउन करता है। लेकिन मैंने हाल ही में ये चीज सुनी है व्हिच इज कॉल्ड जामुन एक्सट्रैक्ट। क्या इसके बारे में जानते हैं? करेक्ट। देखिए कोई भी एक्सट्रैक्ट क्या होता है? कोई भी एक्सट्रैक्ट का मतलब होता
(1:15:19) है कि आपने उस पर्टिकुलर कंपोनेंट से जो उसका मेन पार्ट था वो निकाल लिया। दिस इज एक्सट्रैक्ट। राइट? एक्सट्रैक्ट का काम ही होता है मेन पार्ट को निकालना जिससे कि उस पर्टिकुलर चीज की जो बायो अवेलेबिलिटी है या उसका जो यूसेज है वो कम चीज में हमें ज्यादा बेनिफिट मिल जाए। दिस इज़ एक्सट्रैक्ट। हम तो जो जामुन का एक्सट्रैक्ट निकाला जाता है उसमें ये पाया गया कि उसमें जमोलाइन और जंबोसिन दो ऐसे कंपाउंड होते हैं जो बहुत ही अच्छी मात्रा में होते हैं। और ये दोनों कंपाउंड करते क्या हैं? अब कई बार हम लोग बोलते हैं कि जी भाई जामुन
(1:15:48) एक्सट्रैक्ट डायबिटीज में बहुत अच्छा है। बट मेरा सवाल है क्यों? क्यों अच्छा है? इसके पीछे की साइंस क्या है? तो ये जो चेंबोलाइन और चैमोसेन है ये हमारे पैंकक्रियाज के बीटा सेल्स को रीजनरेट करने का काम करता है। अब ये बीटा सेल क्या होते हैं? ये बीटा सेल पैंकक्रियाज के वो सेल्स हैं जो इंसुलिन जनरेट करते हैं। तो अगर कोई जामुन का एक्सट्रैक्ट ले रहा है तो वो डायबिटीज में उसको कैसे मदद कर सकते हैं कि ये दो कंपाउंड उनके बीटा सेल्स को रीजनरेट करेंगे। अगर वो इस लिमिट तक नहीं पहुंचाएंगे कि जहां रीजनरेशन हो ही नहीं सकता। राइट? अगर वो इन द प्रोसेस है
(1:16:18) रीजनरेट किया जा सकता तो उसको रीजनरेट करेंगे। और जब बीटा सेल रीजनरेट होंगे तो पनक्रियाज की इंसुलिन बनाने की कैपेसिटी वापस से रीजनरेट होना स्टार्ट हो जाएगी। तो दिस इज़ हाउ जामुन इज़ हेल्पफुल इन डायबिटीज। और अगेन जामुन का जो ब्लैक कलर है राइट जो ब्लैक कलर है वो एंथोसाइनिन की वजह से है। तो अगेन वो एक बहुत पावरफुल एंटीऑक्सीडेंट है। तो अगर कोई इंसान जामुन को एज अ फ्रूट जब भी सीजन में जामुन आ रहा है तो वो जब उसको खा रहे हैं तो वो एंथोसाइनिन वाला जो पार्ट है ना वो बहुत अच्छा है। तो जामुन का एक तो सीड का एक्सट्रा डायबिटीज में बट जो ये वाला बेनिफिट है जो
(1:16:51) उसके कलर का बेनिफिट है जो उसके फ्रूट का बेनिफिट है वो अगेन एक पावरफुल एंटीऑक्सीडेंट जामुन देता है। अच्छा। बट आज के समय में अब धीरे से क्या हो रहा है कि एक तो जामुन का मिलना भी कम हो गया है। सीजन बहुत छोटा हो गया है। बहुत सारे लोगों ने कंस्प्शन भी बहुत कम कर दिया है। बट जामुन भी अगेन एक बहुत अच्छा एंटी एजिंग फूड है बिकॉज़ ऑफ़ एंथोसाइनिस। ओके। ओके। जामुन एक्सट्रैक्ट को कंज्यूम कैसे करा जा सकता है? जामुन एक्सट्रैक्ट को अगर किसी को डायबिटिक है, कोई पर्सन डायबिटिक है, तो वो क्या कर सकता है? वो एक कॉम्बिनेशन बना सकता है। जहां वो जामुन, करेला और चराता
(1:17:24) तीनों को मिक्स करके ले सकता है। क्योंकि मुझे लगता है यह तीनों को मिक्स करके इसका इंपैक्ट काफी बेहतरीन आता है। बिकॉज़ करेला के अंदर अगेन पी इंसुलिन पेप्टाइड इंसुलिन है जो एक तरीके से इंसुलिन का बिल्कुल मिमिक कंपाउंड है। तो वो एक शॉर्ट टर्म बेनिफिट देगा और चराता अपने बेटा टेस्ट की वजह से उसके भी कई सारे बेनिफिट है डायबिटीज पे अ तो वो भी डाइजेशन को बहुत अच्छा करता है और जामुन तो डेफिनेटली बीटा सेल को रीजनरेट कर रहा है। तो ये तीनों का जो कॉम्बिनेशन है करेला, जामुन और चिराता ये कॉम्बिनेशन बहुत अच्छा काम करता है। राइट? इसके साथ अगर कोई सीबॉन ऐड कर ले तो
(1:17:54) और अच्छी बात है। रीज़न बीइंग कि सीबॉन का जो बेनिफिट है वो इंसुलिन सेंसिटिविटी में है कि जो भी आपकी बॉडी के अंदर इंसुलिन है वो उसको स्मार्टली यूटिलाइज करेगा। राइट? एक पॉइंट होता है कि आपका इंसुलिन पनक्रियाज कितना रिलीज़ कर रहा है ये एक आस्पेक्ट है। दूसरा आस्पेक्ट है कि दूसरा आस्पेक्ट इंसुलिन रेजिस्टेंस है कि जो इंसुलिन रिलीज़ हुआ वो कितने ग्लूकोस को सेल में पुश कर पा रहा है। तो उस साइड पे सीबक्टोन इज़ बेस्ट। बीटा सेल रीजनरेशन साइड पे जामोन एक्सट्रैक्ट इज़ बेस्ट। तो इनका कॉम्बिनेशन बहुत अच्छा काम करता है। बट अगर कोई जामुन एक्सट्रैक्ट इंडिविजुअली
(1:18:23) लेना चाहता है तो उसको कैप्सूल फॉर्मेट में ले सकता है। बिकॉज़ आई थिंक सो दैट वुड बी वन ऑफ दी बेस्ट वे टू टेक और उसके जो कैप्सूल के डोसेस आते हैं 500 एमg और उस तरीके के डोसेस आते हैं तो उन डोसेस के हिसाब से वो उनको अपनी डाइट में यूज़ कर सकते हैं। ओके। मैं हमारे आयुर्वेदिक डॉक्टर से पूछ रही थी तो उन्होंने कहा कि आप इसको जैसे आप कह रहे हो पाउडर कैप्सूल फॉर्म में आप ले लीजिए। पाउडर टू से 5 ग्राम आपने जैसे कहा एक्सट्रैक्ट 250 और 500 mg होता है। जैसे लोग कहते हैं ना साइड इफेक्ट्स क्या ये नेचुरल हर्ब्स लेने के भी साइड इफेक्ट्स
(1:18:50) होते हैं? देखिए हर नेचुरल हर्ब्स में एक्टिव्स हैं। राइट? मतलब ये प्लांट हैं और इनके अंदर एक्टिव्स हैं। तो एक्टिव्स जो हैं वो हमारी बॉडी में इंपैक्ट करते हैं। अगर हम इनको क्वांटिटी से ज्यादा लेते हैं तो बिल्कुल। इसके हमें साइड इफेक्ट्स देखने को मिल सकते हैं। ऐसे बहुत एक्सट्रीम नहीं बट इनडाइजेशन, एसिडिटी ये साइड इफेक्ट्स हमें देखने को मिल सकते हैं। तो हमें सबसे पहली बात तो किसी भी चीज को रिकमेंडेड डोज़ के अंदर ही लेना है। दूसरा हमें ये देखना है कि किसको खाली पेट लेना है, किसको खाने के साथ लेना है ये बहुत इंपॉर्टेंट है। अगर आप मेरे से
(1:19:20) बोलेंगे बहुत एक्सट्रीम साइड इफेक्ट वो तो नहीं है। राइट? लेकिन अगर आप बोलेंगे कि इनडाइजेशन हो गया, एसिडिटी हो गया, नजिया हो गया। इनसे बचने के लिए बेहतर यह है कि हम उन चीजों को राइट डोजेज में लें और राइट फॉर्म में लें और राइट टाइमिंग पे लें। जो भी टाइमिंग है खाने से पहले खाली पेट खाने के साथ जब हम इन चीजों को फॉलो करेंगे तो जो इनके छोटे वाले साइड इफेक्ट्स हैं हम उनको ओवराइड कर सकते हैं। ओवराइट कर सकते हैं। अंडरस्टैंड। तो एक अशोक अशोक का पेड़ होता है जो जनरली हम लोग अपने घरों में हम आप लगाया करते थे। बड़े-बड़े उसके लंबे से पत्ते होते
(1:19:51) हैं। राइट? नहीं तो अशोक के पेड़ को यह बोला जाता है कि वो दुखों को भगाने वाला एक पेड़ है जो स्वरों को रिमूव करता है और उस पेड़ को जब भी आप कभी भी पूजा देखते होंगे तो आप उसमें देखते होंगे अशोक के पत्ते लगाए जाते हैं। अशोक के पेड़ के पत्ते लगाए जाते हैं। लेकिन पत्ते तो ठीक है लेकिन जो अशोक की छाल है जो पेड़ की बार्क होती है उस वो फीमेल हेल्थ में सबसे ज्यादा बेनिफिशियल मानी गई है। ओके फीमेल हॉर्मोनल बैलेंस में पीसीओएस में पीसीओडी में हमारे आयुर्वेद में उसके बेनिफिट बहुत ही जिक्र किए गए हैं कि अशोक की जो छाल है मतलब आप ये समझिए कि इससे
(1:20:24) ज्यादा बेहतर चीज चाहे शतावरी हो गई एक शतावरी हो गया और एक अशोक छाल हो गया। अगर किसी को भी फीमेल हॉर्मोनल इमंबैलेंस की प्रॉब्लम है और उसकी वजह से मल्टीपल और भी इश्यूज आ रहे हैं तो उसमें ये दो हर्ब्स ऐसी हैं जो डेफिनेटली उनको कंज्यूम करनी चाहिए। तो अगर हम कॉम्बिनेशन में ले रहे हैं तो हम अशोक छाल और शतावरी का कॉम्बिनेशन भी ले सकते हैं। 1: वन के कॉम्बिनेशन में भी इसको ले सकते हैं। अब अगर हम अशोक छाल को अकेले ले रहे हैं तो हम इसका पाउडर ले सकते हैं। तीन से छ ग्राम पाउडर एक गर्म पानी में राइट और खाने से पहले या दूध में गरम
(1:20:55) हां गरम दूध में हम इसको ले सकते हैं। दूसरा अगर इसका डेकोरेशन बना रहे हैं हम तो इसको गर्म पानी में उबाल सकते हैं। 5 से 10 मिनट। 5 से 10 मिनट उबाल लिया। फिर हमने जो जो डिकॉशन बनाया है हमने उसको यूज़ कर लिया। तो तीसरा जो है इसके कैप्सूल्स भी आते हैं। तो कैप्सूल फॉर्मेट भी ले सकते हैं। 250 एमg 500 एमg के हम कैप्सूल्स भी ले सकते हैं। और ये बहुत ही अच्छी हर्ब्स हैं। अगर फीमेल वेलनेस की बात करूं तो ये बहुत ही अच्छी हब्स हैं क्योंकि आज के समय में ये इशूज़ बहुत ही कॉमन हो गए हैं। राइट? तो अगर इनसे आना है तो शतावरी और अशोक चाहल
(1:21:22) का कॉम्बिनेशन इसमें काफी फायदेमंद है। काफी हेल्प कर सकता है। ओके। क्या हमें ये सारी हर्ब्स एक साथ लेनी चाहिए या एक-एक करके लेनी चाहिए? फॉर एग्जांपल कुछ लोग कहते हैं ना पहले 3 मंथ्स में एक हर्ब लूं। फिर दूसरे 3 मंथ्स में एक हर्ब लूं। फिर एक और हर्ब लूं। ऐसे होना चाहिए या सब कुछ एक साथ? देखिए अगर उनका इंपैक्ट कॉम्प्लीमेंट्री है जैसे कुछ ऐसी हब्स होती हैं जो एक साथ मिलकर बहुत अच्छा काम करती हैं। तो उनको तो बिल्कुल आप साथ में ले सकते हैं। राइट? उसके जो रेशियोज़ हैं आप देख सकते हैं। जैसे जामुन एक्सट्रैक्ट मैंने बात करी थी जामुन, करेला और चिराता ये
(1:21:49) तीनों कॉम्बिनेशन में जब आप लेते हैं तो इनके इफेक्ट और बेहतरीन हो जाते हैं। राइट? सीबकथोन और टर्मरिक ऑयल अगर आप एक साथ लेते हैं तो इसका इफेक्ट और बेहतरीन हो जाता है। लेकिन अगर उनके इफेक्ट कॉम्प्लीमेंट्री नहीं है तो फिर हमें उनको अलग-अलग ही लेना बेहतर है। राइट? जैसे पुनर्वाह है तो पुनर्वाह को बेहतर है कि हम अलग ही लें। उसको अलग-अलग लें। तो कुछ हर्ब्स हैं मैटर करता है कि वो कॉम्बिनेशन में कैसे काम कर रही हैं। किस चैलेंज के लिए लिया जा रहा है। अब मान लीजिए कि फीमेल वेलनेस के लिए है तो वहां शतावरी और वहां आपका अशोक छाल ये बहुत
(1:22:20) अच्छा काम कर सकते हैं। वेट मैनेजमेंट के लिए लिया जा रहा है तो वहां पे आपका कोकुम और कार्सिनिया कंबोजिया ये बहुत अच्छा काम कर सकता है। तो मैटर करता है कि किस हमारा ऑब्जेक्टिव क्या है? हमारा पर्पस क्या है? उस हिसाब से हमारा कॉम्बिनेशन है। हम उसको ले सकते हैं। कितने दिनों बाद ये हर्ब्स का असर दिखना शुरू करता है शरीर में? देखिए जो यह ऑब्जर्व किया गया सबसे पहला जो असर आता है किसी भी हर्ब का जनरली बहुत शॉर्ट टर्म पे आता है वो डाइजेशन होता है। राइट? उसके बाद जो असर आता है वो स्किन पे आता है। अच्छा। फिर जो असर आता है वो आपके एनर्जी
(1:22:49) लेवल पे आता है। लेकिन अब हर किसी की बॉडी भी वैरी करती है। किसी पे रिजल्ट जल्दी आ जाते हैं। किसी में देर में आते हैं। लेकिन आप इतना मान के चलिए कि किसी भी चीज को उसका बेस्ट रिजल्ट देने में लगभग 90 दिनों का समय लगता ही लगता है। तो 90 डेज तक किसी ना किसी चीज को हमें कंज्यूम करना है। अब कई बार ऐसा होगा कि कुछ दिन हमने कुछ चीजें ली। हमारे को डाइजेशन बहुत अच्छा लगने लगा। गट हेल्थ हमें बहुत अच्छी लगने लगी। एनर्जी लेवल हमारे बहुत अच्छे होने लगे। बट जो बेस्ट रिजल्ट है वो आपका 90 डेज के पीरियड में ही निकल कर आएगा। जैसे जामुन एक्सट्रैक्ट है आप उसको देखना
(1:23:19) चाह रहे हैं डायबिटीज पे जो बेस्ट निकल कर आएगा वो 90 डेज में ही निकल कर आएगा। तो मैं इसको तीन पार्ट में ब्रेक करता हूं। पहले 15 दिन, एक महीना और 90 दिन। पहले 15 दिन आप उम्मीद रखिए कि डाइजेशन और स्किन अच्छा होगा। एक महीना आप उम्मीद रखिए कि आपकी एनर्जी लेवल और बहुत बढ़िया होगा। और जो आप किसी पर्टिकुलर लाइफ स्टाइल डिसऑर्डर को टारगेट कर रहे हो तो आप उम्मीद करिए कि 90 दिन आपको लगेंगे उसको पूरी तरीके से उसके बेनिफिट को पाने में। अंडरस्टुड गिलोय एक ऐसा हर्ब है जो काफी लोग जानते भी हैं और पूछते रहते हैं कि कैसे कंज्यूम करना चाहिए बिकॉज़ इट इज़ एंटी
(1:23:47) कैंसरस एंटी इनफ्लेमेटरी एंटी डायबिटिक इट प्रोटेक्ट्स द लिवर इसको हम अमृता भी अमृत बोलते हैं नेक्टर बोलते हैं तो गिलोय भी इंडेंजर्ड वैसे स्पीशीज में आता है बिल्कुल इंडेंजर्ड है अब तो धीरे से लेकिन जैसे बाबा रामदेव जी ने इसके ऊपर खूब बात करी है तो उसके बाद तो लोगों को जानकारी हुई है और गिलोय उगाना शुरू कर दिया गया है और गिलोय के जूसेस भी बनने शुरू हो गए हैं राइट जो पैकेज जूसेस आते हैं तो अब तो मैं जैसे पहले भी बोल रहा था जब कोई इंसान किसी पे अवेयरनेस क्रिएट करता है तो कमर्शियलाइजेशन होना शुरू हो जाता है। तो बहुत अच्छा काम किया बाबा रामदेव जी
(1:24:20) गिलोय को वो पहचान दिलाई। अब उसका कमर्शियलाइजेशन भी हो रहा है। कई सारे उसके जूसेस भी आ रहे हैं और फीवर से बचने में, इंफेक्शन से बचने में, इम्युनिटी में इनमें कई इंपैक्ट गिलोय के हैं। और हम चाहे तो गिलोय को जूस के फॉर्मेट में भी ले सकते हैं। नहीं तो गिलोय हम ग्रो भी कर सकते हैं। गिलोय एक ऐसी चीज है जो बड़ा आराम से उग भी जाता है। मैं आपसे पूछना चाह रही थी इनमें से कौन से हर्ब्स हम घर में ही उगा सकते हैं। हां तो गिलोय जो है बड़े आराम से हम अपने घर में भी उगा सकते हैं। गिलोय तो एक ऐसी चीज है जैसे एलोवेरा हो गया, गिलोय हो
(1:24:45) गया। ये वो हर्ब्स हैं जिनको बड़े आराम से हम यूज़ भी कर सकते हैं। ब्रह्मी जटा मानसी जटा मानसी तो मैं नहीं कह सकता हूं बिकॉज़ जटा मानसी हिमाचल में और उन्हीं जगहों पे होता है। राइट? बट गिलोय को तो बड़े आराम से घर में उगाया भी जा सकता है। अपने आसपास उगाया भी जा सकता है। तो गिलोय अगेन फेवर के लिए बुखार में बहुत ही बेहतरीन है। कोविड के समय तो लोगों ने गिलोय को बहुत ज्यादा यूज़ किया था। अगर नहीं उगा सकते तो फिर कोई भी इंसान इसको जूस के फॉर्मेट में ले सकता है। इसको जूस के फॉर्मेट में इसको ले सकता है। वहां जूसेस आते हैं और उस जूस को हम लोग
(1:25:12) हमारी डाइट में ऐड कर सकते हैं। अंडरस्टुड। अगर तो आप पाउडर के फॉर्म में यूज़ कर रहे हैं तो एडल्ट्स थ्री टू सिक्स ग्राम यूज़ कर सकते हैं गरम पानी में। अगर तो बच्चे हैं तो वो एक से दो पिंच ले सकते हैं इसका इन हनी और मिल्क और घी। आई थिंक यू डू अ चैलेंज। ये पॉडकास्ट में हम एक चैलेंज लेते हैं ना कि ये जो सारे आज हमने हर्ब्स डिसकस करे ना इसको मे बी फॉर द नेक्स्ट 40 डेज। 40 डेज को हम ट्रेडिशनल आयुर्वेदिक साइंसेस में मंडला बोलते हैं। बिकॉज़ फिजियोलॉजी एक पूरा साइकिल कंप्लीट करता है। तो इन दैट टाइम जो भी आप अपने सिस्टम में चीज़ डालोगे ना इट विल टेक रूट
(1:25:41) और वो एकदम बैठ जाएगा। सीमित हो जाएगा। तो हम एक मंडला चैलेंज करते हैं विद आई विद दीज़ हर्ब्स दैट वी डिस्कस। क्या हो सकता है वो चैलेंज व्यूअर्स के लिए? तो मंडला चैलेंज हम बिल्कुल ले सकते हैं कि हम लोग मान लीजिए कि हम 40 दिन लगातार सीवकथोन को हमारी डाइट का पार्ट बनाएं। 40 दिन लगातार हम ब्लैक राइस को अपनी डाइट का पार्ट बनाएं। 40 दिन हम अपने बच्चों के लिए ब्राह्मी और शंख पुष्पी को पार्ट बनाए। इवन हम अपने घर के एडल्ट्स के लिए भी ब्राह्मी और शंखपुष्पी को पार्ट बना सकते हैं। इवन 40 दिन का अगर हम ज्यादा स्ट्रेस में हैं
(1:26:09) तो चैलेंज ले सकते हैं कि हम अश्वगंधा को पार्ट बनाए। इवन आई थिंक सो जो हम 10-12 चीजें हम डिस्कस कर रहे हैं। कोई भी पर्सन उसमें से वो दो तीन चीजें पिक कर सकता है। जो उसको कनेक्ट हो रही हैं। राइट? और उन दो तीन चीजों का वो चैलेंज ले सकता है कि यह दो तीन चीजें मुझे 40 डेज के लिए मेरी डाइट का पार्ट बनाना है या मुझे इसको रेगुलर कंज्यूम करना है और मुझे मेरी बॉडी के चेंजेस को भी ऑब्जर्व करके पेन डाउन करना है। मतलब मैंने ये देखा है कि जब हम किसी चीज को ऑब्जर्व करके पेन डाउन करते हैं ना तो हमारा उसमें कंटिन्यूटी और कंसिस्टेंसी का
(1:26:36) हमारा मोटिवेशन और बढ़ जाता है। क्योंकि सबसे बड़ी प्रॉब्लम क्या है? सबसे बड़ी प्रॉब्लम है कि हम बहुत सारी चीजें अपने घर में मंगाते हैं। वो जामुन एक्सट्रैक्ट हमने अपने घर में मंगाया। कोई किसी को सुन के, किसी से पूछ के या किसी के रेकमेंडेशन से फिर वो तीन साल तक हमारे घर में ही पड़ा रहता है। फिर हम एक दिन उसको निकालते हैं और हम उसके पीछे देखते हैं कि भाई एक्सपायर हो गया हम फेंक देते हैं। तो मैंने जो एक सबसेेंट है किसी चीज को समझना और मंगाना इंपॉर्टेंट नहीं है। उसके बाद उसको यूज़ करना भी इंपॉर्टेंट है। क्योंकि मैंने कई बार अच्छी हब्स या
(1:27:03) हेल्थ गिविंग चीजों के साथ में क्या देखा है? आइसक्रीम आपके घर में आज आई है। कल बचेगी नहीं। लेकिन चवनप्राश आपके घर में आज आया तो अगले साल तक आपके फ्रिज में ही रहेगा। वो खत्म होने वाला नहीं है। तो ये भी एक हैबिट है। यह भी एक आदत है जिसको ठीक करना बहुत जरूरी है कि जो आपने बोला कि मंडला तो कम से कम अगर बड़ा लंबा नहीं सोच सकते तो 40 दिन तो हम उसके फोकस करें कि कम से कम 40 दिन में वो हमारी बॉडी में जाकर पूरी तरीके से सेट और फिट हो जाए और हम उसे कनेक्ट कर पाए। कमेंट सेक्शन में बताइएगा कि आप कौन से हर्ब्स इसमें से ले रहे हैं और उसके बाद
(1:27:31) क्या-क्या आपको फायदे महसूस हुए। वंस दोस 40 डेज आर ओवर। तो आप में से जो भी ये 40 दिन का लॉस्ट हर्ब चैलेंज ले रहा है। आपको नीचे दिए हुए डिस्क्रिप्शन में एक ईमेल आईडी मिलेगी। उसमें आप हर 10-10 दिन में हमें फीडबैक दीजिए। हाउ दी हर्ब्स आर वर्किंग फ्यू पॉजिटिव या नेगेटिव। जो भी इस चैलेंज को सक्सेसफुली कंप्लीट कर पाएगा उसको एक गिफ्ट मिलेगा। मिस्टर उदित चावला बहुत मजा आया। सो बहुत अच्छा लगता है यू नो व्हेन यंग पीपल टेक ऑन जैसे आप कह रहे थे ना इनिशिएटिव टुवर्ड्स पॉजिटिव हेल्थ बिकॉज़ यू नो कितना कुछ किया जा सकता है वर्ल्ड में। बट इफ समथिंग अराउंड यू नो
(1:27:59) पॉजिटिविटी और एक तरीके से आप लोगों की हेल्थ, हेल्थ से बड़ी चीज तो कुछ है ही नहीं। राइट? सो बहुत अच्छा लगा। मोर स्ट्रेंथ टू यू इन व्हाटएवर यू डू एंड विश यू ऑल द वैरी बेस्ट थैंक यू सो मच इट वास अ प्लेजर होस्टिंग यू थैंक यू इन केस यू वुड लाइक टू बी अ पार्ट ऑफ आवर ऑनलाइन एंड इन पर्सन योगा डाइट एंड स्पिरिचुअल प्रोग्राम्स यू कैन जॉइन आवर WhatsApp ग्रुप बिलो वेयर वी पोस्ट ऑल आवर अपकमिंग प्रोग्राम्स एंड गिव फ्री टिप्स ऑन हेल्थ डाइट एंड लाइफस्टाइल
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