Why 93% of Indian Men Are "FOOLED": The Dark Dating TRAP
Author Name:Decoding with Kartik
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Transcript:
(00:00) और फिर आप यह कह रहे हो, "अर मैंने इसे अच्छे से ट्रीट किया है, तो यह चुम्मी क्यों नहीं ले रही मेरी?" तो, अब तो बाई डेफिनेशन ही हरामखोर हो गए ना। और वो चीज़ें लड़कियां भाप लेती है। जो लड़के बहुत ज्यादा सेल्फ कॉन्फिडेंट होते हैं। क्यों लड़कियों को कुछ भी बोल देते हैं? लड़कियां उनसे अट्रैक्ट हो जाती है। और एक लड़का घर से 35 लाइन की स्क्रिप्ट याद करके चला है। उसके बाद में भी उसे रिजल्ट्स नहीं मिल। मेल्स को एक्सप्रेसिव होना चाहिए। हां या ना। तो मुझे ऐसा लगता है पर्सनली कि एक आदमी की सबसे बेस्ट एक्सप्रेसिव पार्टनर है। उसके
(00:28) वॉइस का क्या गेम है? कभी कबभार मेरी आवाज ऐसी हो सकती है कि मैं यहां से बोल रहा हूं। है कि नहीं? कि एक प्रैक्टिस जो मैंने शुरुआत में करी थी वो ये है कि एक तो मैं धीमे बोलता था और दूसरा इंसान क्यों चीट कर रहा है। चीटिंग की साइकोलॉजी बहुत इंटरेस्टिंग है। आप चीटर से पूछोगे तो उन्हें समझ नहीं आता कि मैं गलत क्या कर रहा हूं। जैसे मूवी एक्टर्स बहुत ज्यादा चीट करते हैं अपनी औरतों पे। उन्हें ये समझ ही नहीं आता कि गलत क्या किया मैंने। जो चीटर्स होते हैं वो क्रिमिनल से इतना अलाइन करते हैं। उनकी साइकोपैथी इतनी हाई हो जाती है। उन्हें
(00:56) फील होनी बंद हो जाती है चीजें। अगर आप इतने साइकोपैथिक हो जाओगे, आप अपने पास वालों को कुछ समझोगे ही नहीं। लड़कियों को यह समझने की जरूरत है। उन्हें समझने की जरूरत है कि उनकी औकात से कई गुना बाहर वाले लौंडे उन्हें कभी सीरियसली नहीं लेने देंगे। फीमेल साइकी को समझने की कोशिश कर रहे हैं। इसे बहुत ध्यान से सुनना सभी लोग। बिल्कुल। कि जो यंग लड़कियां हैं उन्हें बेवकूफ बनाना बहुत आसान है। भाई किसी भी इंसान की जो लाइफ है, लाइफ एक्सपीरियंस जो है वो इस चीज पे बहुत ज्यादा डिपेंड करता है कि लोग आपको कैसे देखते हैं। मतलब अगर आप एनलाइटेंड हो या
(01:29) कुछ इस तरीके का सिनेरियो है तो तो आप अंदर जा चुके। आपको फर्क नहीं पड़ेगा। बट मोस्ट ऑफ द पपुलेशन के लिए यह वर्क नहीं करता। तो लोग आपको किस नजर से देखते हैं? किस तरीके से ट्रीट करते हैं? आपकी क्या इमेज है? यह आपका एक्सपीरियंस एक बहुत बड़े लेवल पर डिटरमाइन करता है। तो, ऐसे में खुद को कैसे एनहांस किया जाए? अपने उस ओरा को कैसे एनहांस किया जाए यह बहुत इंपॉर्टेंट होता है। जैसे कि एक एक्सट्रीम एग्जांपल से समझाने की कोशिश करता हूं कि एक एक लड़का अगर किसी लड़की को भी अप्रोच कर रहा है तो वो कप है या फिर वो करिस्मैटिक है यह उसके ओरा पे उसकी स्किल
(02:06) पे उसने किस तरीके से कम्युनिकेट किया है इस पे डिपेंड करता है। लुक्स मेरे ख्याल से बहुत इंपॉर्टेंट रोल प्ले करते हैं। नो डाउट वो फर्स्ट बाईपास होता है आपका। बट स्टिल ये स्किल सेट भी बहुत इंपॉर्टेंट होता है। तो इसको एक इंसान कैसे एनहांस करता है? क्योंकि ये आपके लाइफ के हर चीज में मतलब रोल प्ले करता है। आप दोस्तों के साथ पार्टी में गए हो। ठीक है? आप किस तरीके से किस औररा के साथ घुसे हो वो डिटरमाइन कर देगा वहां पर सब आपको कैसे ट्रीट करने वाले हैं। ठीक है? अब या तो आपके पास उतना पैसा पावर हो जो कि मैक्सिमम ऑडियंस के पास नहीं होती। तो आप
(02:38) कैसे इस चीज को बिल्ड कर सकते हो? सबसे बड़ा जो फियर होता है लड़कों का अप्रोच करते समय हम वो ये होता है अगर इसने मेरी बेइज्जती कर दी तो क्या होगा हम अगर चार लोगों में मेरी इज्जत कम हो गई तो क्या होगा हां सबसे पहले प्रॉब्लम ही समझते हैं प्रॉब्लम क्या है फिर सॉलशन पे जाएंगे आज हम तो प्रॉब्लम ये है कि एक सोशल सिचुएशन में हम मुझे डाउन प्ले कर दिया जाएगा मुझे नीची नजर से देखा जाएगा अगर मुझे रिजेक्ट कर दिया तो अगर इस लड़की ने मेरी बेइज्जती कर दिया मुझे मना कर दिया हम तो मैं सोसाइटी की हरारकी में नीचे नीचे फॉल हो जाऊंगा हम
(03:11) कि मेरी इज्जत कम हो जाएगी थोड़ी सी एग नहीं मेरी इनसिक्योरिटीज बाहर आ जाएंगी कि शायद मैं जो समझ रहा था अपने बारे में कि मैं हूं बदसूरत शायद मैं हूं ही इसलिए कर दिया इसने मुझे रिजेक्ट इसने उसकी दिक्कत ये है कि आपने लड़की के हाथ में पूरा कंट्रोल दे दिया इंटरेक्शन का हम अप्रोच आप कर रहे हो और तय लड़की कर रही है कि आप हो कौन जो एक ऐसा टास्क होना चाहिए जो बहुत हिम्मत जोड़ के कोई इंसान अगर किसी लड़की को अप्रोच कर रहा है जो अपने आप में काफी काफी वैल्यूुएबल स्किल है। काफी वैल्यूएबल टास्क है जिसके लिए दम चाहिए। बेसिकली वो एक ऐसा टास्क बन
(03:45) गया है कि भाई यह डिसाइड करेगी मैं परफॉर्म करूंगा सर्कस में ये नंबर देंगे। तो आपने उनके हाथ में अपनी इज्जत डाल दी है। अगर आप ये सोच रहे हो कि उसके कुछ कहने से आपकी वैल्यू कम हो जाएगी। तो आप कभी उसे अप्रोच कर ही नहीं पाओगे। और ये सिर्फ मतलब मैं बताना चाह रहा हूं लड़का और लड़की का केस नहीं है। आप इसको ऐसे देख लीजिए कि आप जॉब के लिए गए हो और सामने एचआर बैठा है। आप इसको रिप्लेस कर दो किसी भी डायनामिक में। एक्सक्ट्ली प्लीज प्लीज कंटिन्यू। तो होता ये है कि जब आप पब्लिक से वैलिडेशन सीकिंग करते हो हम कि भाई ये मुझे संतावना दे या फिर ये मुझे
(04:18) जो है थोड़ा सा पिटी करे। पिटी पार्टी में आ जाए मेरी हम कि भाई मैंने बड़ी मुश्किल से तेरे को अप्रोच किया है। अब तू हां कर दे। है कि नहीं? तो और फिर जब उसका उल्टा होता है कि वैलिडेशन नहीं मिलती। अब वैलिडेशन मिल गई तो हो सकता है आपको अच्छा लगे। लड़की ने अगर हां कर दिया तो हो सकता है कि आप अपने को चैट समझने लगो। लेकिन उसकी दिक्कत ये है कि ना करने पर आप अपने आप को कीड़ा समझने लगते हो क्योंकि वैलिडेशन आपने दूसरों के हाथ में दे दिया अपनी। अपनी औकात डिसाइड करने का पूरा हिसाब किताब आपने उसको सौंप दिया है। हम इसकी दिक्कत ये है कि फिर आप इतने कंफ्यूज
(04:51) हो जाते हो कि कोई तो अच्छा बोल रहा है, कोई बुरा बोल रहा है। आपकी सेंस ऑफ वर्थ जो है वो खुद से नहीं आती। सेल्फ से डिराइव नहीं हो रही है वो कि मेरी स्किल्स क्या है? मैं दिखता कैसा हूं? मेरे अंदर कॉन्फिडेंस किस चीज का है? कैपेसिटी कितनी है? कैपेबिलिटीज कितनी है? आपकी वर्थ आ रही है उनकी बातों से जिनको आपके बारे में कुछ नहीं पता। जिनको खुद के बारे में कुछ नहीं पता। अगर उस लड़की को ये नहीं पता कि मैं कौन हूं तो वो ये कैसे डिसाइड कर सकती है कि आप कौन हो? लेकिन आपने दे दिया उसके हाथ में ये कि तू बता भैया तू हां कर या ना कर। है कि नहीं?
(05:20) तू ही बताएगी कि मैं कौन हूं। तो वैलिडेशन सीकिंग की दिक्कत यह है कि आप जब अप्रोच करते हो आप डिसीजन उनके हाथ में दे देते हो। पब्लिक के हाथ में दे देते हो और पब्लिक ही डिसाइड करेगी फिर आपका फ्यूचर आपकी वर्थ और आप इसे जितना अपने अंदर बसाओगे इस ओपिनियन को हम जितना आप लोगों की बातें उतारोगे अपने शरीर में उतना ज्यादा आप मेंटली फ्रस्ट्रेट हो जाओगे क्योंकि कोई अच्छा बोलेगा कोई बुरा बोलेगा कोई हैंडसम बोलेगा कोई अगली बोलेगा कोई लंबा बोलेगा कोई छोटा बोलेगा है कि नहीं आप इनमें से कुछ भी नहीं हो उन्हें क्या पता आप कौन हो जब
(05:52) आपको ही नहीं पता और उन्हें ही नहीं पता कि वो कौन है तो आपको कैसे बताएंगे कि आप कौन हो तो वैलिडेशन का फियर, सोसाइटी का फियर जितना आप हटाने की कोशिश करोगे उतना ज्यादा अप्रोच आपके लिए आसान होगी। और ये तब होता है जब आप 100, 200, 300 बार रिजेक्शन फेस कर चुके होते हो। आपको समझ में आ चुका होता है कि भाई इनके कहने से कुछ होता ही नहीं है। हम इस लड़की से मैं दोबारा कभी नहीं मिलने वाला। कि कहां मिलेगी दोबारा मुझे? अगर मैं किसी को अप्रोच कर रहा हूं और उसने मना कर दिया तो होगा क्या? अगर वो जो मना भी कर दे तो दोबारा जिंदगी में शायद ही
(06:24) इसका चेहरा भी देखने को मिले। हम तो फिर क्या करूंगा मैं उसे अप्रोच करके है कि नहीं या फिर रिजेक्ट होके लेकिन इसमें ना एक चीज और समझना चाहूंगा काफी बार यह होता है कि आपने जो बात बताई ये एकदम सही है कि आप अपनी पावर सामने वाले के हाथ में मत दो बट एक चीज और मैं आपसे समझना चाहूंगा कि कहीं ना कहीं ये होता है कि कुछ लोगों के स्किल सेट होते भी उतने ही नीचे लेवल पे हैं। हम अब करंट में अगर आप उस लेवल पे हो बॉटम पे हो तो कोई प्रॉब्लम नहीं है। ग्रोथ होनी चाहिए। दैट्स द पर्सपेक्टिव। जी तो कुछ लोग सबसे पहले तो जब आपको लगे कि
(06:55) यार आपके कम्युनिकेशन रॉक बॉटम पे है तो आइडेंटिफाई कैसे किया जाए खुद को? पहले तो वो आइडेंटिफिकेशन बताओ आप एक बार। जैसे जो क्रीप होता है वो दिखता है। मतलब मेरे हिसाब से तो ऐसे लगता है जैसे बहुत ही फनी वे में कि लड़की वाले एग्जांपल से ही बता दूं। एक बंदा बंदी के पास जाए और एप्रोच ऐसे कर दे कि हाय यू आर लुकिंग ब्यूटीफुल यार। यह नॉर्मली शायद प्रिंसीव कर जाएगा। अब मेरे क्लोथिंग और बहुत सारी चीजों में मैटर करके हो सकता है यह अच्छे वे में चली जाए। एक होता है कि ये बंदा यूं जाए आराम से देख रहा है। हाय यू आर लुकिंग ग्रेट
(07:25) यार। अब ये सेकंड वाला कितना कपी सा लगा। हम और ये कपीनेस एक्चुअली सिर्फ लड़का लड़की के केस में नहीं होती। इंसान ना हर जगह कॉन्शियसली या अनकॉन्शियसली कर रहा होता है। आप वर्क प्लेस पे भी इस तरीके की चीजें कर रहे होते हो। आप अपनी फैमिली में भी इस तरीके की चीजें कर रहे होते हो। आप सोशल गैदरिंग में जब जाते हो तो भी इस तरीके की चीजें कर रहे होते हो। तो सबसे पहले तो इसको आइडेंटिफाई करने के बारे में अगर हम कुछ कर सकें डिस्कशन तो वो करते हैं और फिर एक सॉल्यूशन पे जाएंगे। ये सीधा-सीधा आपकी डेस्पिरेशन पे बेस्ड है। आपकी जो जो हरकतें आप कर रहे हो ना
(07:59) वो इसका रिफ्लेक्शन है कि आपके दिमाग में क्या चल रहा है। अगर आप ये पहले से ही सोच के चल रहे हो कि मैं कुछ करूंगा और मुझे एक्सपेक्टेशन है उस चीज की। तो आप तो बाय डेफिनेशन ये हरामखोर हो गए ना। अगर आप ये कह रहे हो कि लड़की को मैं नाइस इसलिए नहीं बन के दिखा रहा क्योंकि मैं हूं ऐसा इंसान। और फिर आप यह कह रहे हो कि यार ये बदले में तो कुछ कर ही नहीं रही। अगर मैंने इसे अच्छे से ट्रीट किया है तो ये चुम्मी क्यों नहीं ले रही मेरी? अगर मैंने इससे सही से बात करी है तो ये पास क्यों नहीं आ रही मेरी? अगर वो जेन्युइन कॉम्प्लीमेंट ही होता तो
(08:29) दे और चलो। एक्सैक्टली। यस। आपके मन में रिजल्ट ओरिएंटेड चीजें हैं कि भाई मैं ये कर रहा हूं बदले में क्या मिलेगा मुझे? अगर आपकी सोच ऐसी है तो आपसे बड़ा कोई करीब नहीं है। और वो चीजें लड़कियां भाप लेती हैं। लड़कियां सूंघ लेती हैं डेस्पिरेशन को लौंडो की। तो ये चीजें आपको देखना पड़ेगा कि आपकी इंटेंशन क्या है। अगर आप जेनुइनली अच्छे इंसान हो तो आपके दिमाग में कभी ये नहीं आएगा कि इसका रिजल्ट क्या होने वाला है। कुछ मिलेगा कि नहीं मिलेगा। हम ये चीजें जैसे ही आपके मन में आ रही है आपको रिफ्लेक्ट करने की जरूरत है किसी को भी अप्रोच करने से पहले कि भैया मैं कहीं
(08:58) ये तो नहीं सोच रहा कि अगर मैं ऐसे कुछ ऑफर करूंगा तो ये बदले में क्या देगी? है कि नहीं? ये अप्रोच बहुत कपी हो जाती है। ये बेसिस है डेस्पिरेशन का। आप दिखा रहे हो कि आपको आज तक रिजेक्शन ही मिले हैं। आप इंसान ही ऐसे हो जिसको कभी लड़कियां दिखी नहीं है। मिली नहीं है। एलियन है लड़की आपके लिए। क्या आपको लग रहा है कि वो पूरी एक बिजनेस रिलेशनशिप की तरह काम करेगी? मैं पैसे मैं फेवर्स दूंगा। वो हर वो हर स्टेप को इस तरह से ब्रेक डाउन करते हैं क्योंकि जब भी इंसान को रिजल्ट्स नहीं मिलते वो बहुत ही ज्यादा डीप एनालिसिस में चला जाता है कि मैं एक्स करूंगा तो y
(09:27) होगा। आपने लड़कियों के केस में काफी देखा होगा कि जो लड़के बहुत ज्यादा इतने ज्यादा सेल्फ कॉन्फिडेंट होते हैं। इतने ज्यादा कॉकी हो जाते हैं कि वो लड़कियों को कुछ भी बोल देते हैं। उन्हें फर्क नहीं पड़ता। और आपने देखा होगा कि लड़कियां बहुत सारे केसेस में उनसे अट्रैक्ट हो जाती है क्योंकि सबकॉन्शियसली उनकी इंट्यूशन ने बता दिया कि इसे फर्क नहीं पड़ता कि मैं हां बोलूंगी कि ना बोलूंगी यानी कि ये वैलिडेशन बिल्कुल भी नहीं ढूंढ रहा और एक लड़का घर से 35 लाइन की स्क्रिप्ट याद करके चला है कि आज जितनी लड़कियों को अप्रोच करूंगा
(09:57) सबके पास में ये खतरनाक फार्मूला मुझे इस्तेमाल करना है और उसके बाद में भी उसे रिजल्ट्स नहीं मिल रहे क्योंकि वो गया ही एक्सपेक्टेशन की वजह से है वहां पे बिल्कुल और यही कैनेंडम है इस चीज का कि कि आप जितने ज्यादा सोचते हो कि मैं बहुत ज्यादा तैयार हूं। आप एक्चुअली उतने ज्यादा आपके फेलियर्स के चांसेस बढ़ जाते हैं। लेकिन इंसान है जो इतना ज्यादा सेल्फ सफिशिएंट है। इतना ज्यादा सिक्योर है अपने आप में। वो जहां भी जा रहा है कुछ भी बोल देता है। वो जेन्युइनली बोल रहा है जो उसको दिख रहा है वहां पे। तो लोग ये चीज बहुत सबकॉन्शियसली नोटिस
(10:24) करते हैं। ग्रेट। अब अपलिफ्ट कैसे कर सकता है एक इंसान खुद को इन कंडीशन में सोशल उसमें डेकोरम में कि यार मतलब मेरा ओरा ऐसा हो कि आई जस्ट वॉक इन और सामने वाले को फील हो। मतलब कुछ दो तीन टिप्स कि यार ये ये ये करना जो प्रैक्टिकली इंसान आज आज से स्टार्ट कर सकता है। मुझे ऐसा लगता है कि अगर आप जेनुइनली ट्रूली अपने दिमाग से वैलिडेशन का फियर निकाल दो। अगर आप सचमुच एक ऐसे इंसान बन जाओ जो सब छोड़ के जा चुका है जिसको फर्क नहीं पड़ता कि कौन क्या बोल रहा है तो लोग खुद आपका पीछा करते हैं। मेरा ऐसा मानना है कि अगर आप जेनुइनली यू डोंट केयर
(11:03) कि इस इंटरेक्शन का रिजल्ट क्या होने वाला है। सच में ही आपको फर्क नहीं पड़ता। हम तो लड़कियां इस चीज को एक पावर की तरह सेंस करती हैं कि ये इंसान जो है मेरे मना करने से इसके इस पे कोई असर नहीं पड़ने वाला। मेरे हां करने से इस पे कोई असर नहीं पड़ने वाला। तो बेसिकली अपने आप में इतना सिक्योर और सफिशिएंट है। आप ये जो बात बोल रहे हो ना भाई एकदम सही है। इसमें पता है एक चीज और हम समझ सकते हैं वो ये है कि मेरे को फर्क नहीं पड़ता। ठीक है? ये एोगेंस से नहीं आना चाहिए। बिल्कुल नहीं। बिल्कुल। और यहां पर लड़कियों को ये समझना पड़ेगा
(11:34) कि मेजॉरिटी केसेस में ना वो ये जो एोगेंट होते हैं ना कि मेरे को फर्क नहीं पड़ता। तू भाड़ में जा। ये इससे अट्रैक्ट हो जाती हैं। जबकि जेन्युइन केस ये है कि मेरे को फर्क नहीं पड़ता। वो एोगेंस से नहीं इस चीज से आया कि यार मेरे को जेन्युइनली फर्क नहीं पड़ता। इट्स नॉटेंट एक्सक्ट्ली मैं मेरे को अच्छा लगा कि मैं आपको कॉम्प्लीमेंट दूं। आपके इयरिंग्स मुझे अच्छे लगे थे। मैंने कॉम्प्लीमेंट दिया और मैं चला जाऊं। आई जस्ट वॉक अवे। बिल्कुल। और ऐसा नहीं है कि आप वॉक अवे कर रहे हो तो पीछे मुड़-मुड़ के देख रहे हो कि क्या कुछ हो रहा है कि नहीं हो रहा?
(12:02) यही टेक्निक हो गई। इग्नोर कर देना है। यह टेक्निक नहीं है। एक तो लड़के इतने होते हैं हर चीज़ को टेक्निक बना। कोई भी चीज़ सीख लेंगे उसको उसको जब वो तेरी तरफ देखे ना तो मुंह उधर कर लियो। हम्म। फिर देखे चुप कैसे गए। देख रही नहीं देख रही? देख रही तो ये टेक्निक नहीं है। ये एटीट्यूड है कि आप सच में एक ऐसे इंसान हो आपको फर्क नहीं पड़ता। चल ही दो। बिल्कुल। मुड़ के नहीं देखना फिर। हम नहीं ग्रेट। अच्छा अभी ना कंटेंट को जब हम देखते हैं जैसे कि लास्ट लास्ट टाइम भी आपने बताया था कि लोग कंज्यूम कर रहे हैं। ठीक है? उसे इंप्लीमेंट नहीं कर रहे।
(12:36) सिर्फ देखते जा रहे हैं। तो एक चीज बहुत ज्यादा सुनने को मिली है रीसेंट टाइम में वो ये है कि आदमी ना एक्सप्रेसिव नहीं होता। इंसान को मेल्स को एक्सप्रेस करना चाहिए। ठीक है? और मेल्स को मतलब उनको भी पैंपरिंग चाहिए होती है। उनको भी ये चीज चाहिए होती है। उनको भी कभी फ्लावर्स दे दो। उनको भी कभी गिफ्ट दे दो। अब मेरे को इनमें से किसी भी चीज से कोई प्रॉब्लम नहीं है। बट जेनुइनली अगर हम समझें तो मेल्स के ऊपर एक रिस्पांसिबिलिटी होती है जो हर लड़के को समझ में आता है। तो ये थिन लाइन कहां खींची जाए कि यार मेरे को भी वैलिडेशन मिले। ठीक है? मेरे को भी वो फूल
(13:13) दे दे। मैं भी गुगली वुगली कर लूं। और इसकी जगह मैं क्राई बेबी ना बन जाऊं। क्योंकि कहीं ना कहीं एज ए मर्द आपको स्ट्रांग फुट लेना पड़ेगा लाइफ में। क्योंकि आप अपनी फैमिली के फ्रंट में खड़े होगे जब भी कोई वॉर आएगी। वॉर फाइनशियल हो सकती है। है ना? घर में चोर आ गया या कोई और प्रॉब्लम होगी। तो आप इसको कैसे किस तरीके से देखते हो? मैं ये देखता हूं कि बहुत ही सिंपल बात है। जैसे कि मैंने वैलिडेशन की भूख बताई है। ये बहुत ही कैंसरस है। अगर आप ये एक्सपेक्ट कर रहे हो कि सामने वाला आके मुझे पुचकार क्यों नहीं रहा। तो सामने वाला पुचकार देगा तो हो सकता है आप खुश हो
(13:46) जाओ। लेकिन वो गाली देगा तो आपका दिमाग भी खराब हो जाएगा। दोनों केसेस कैंसर हैं। खुशी भी नहीं मिलनी चाहिए आपको किसी और की तारीफ से और दुख भी नहीं होना चाहिए किसी और की गाली से। दोनों चीजें दोनों रूप में आपको अनफेक्टेड रहना है। वही एकमात्र रास्ता है अपने काम को करने का और ऐसा इंसान बनने का जिसकी तरफ लोग नेचुरली खींचे चले आते हैं। आपने अगर इसकी फिक्र करी कि भाई ये बंदी मुझे पूछती नहीं है। यह नहीं करती वो नहीं करती तो वो सच में नहीं पूछेगी। क्योंकि वो डेस्पिरेशन बन जाएगा। जैसे मैंने बताया बंदियां डेस्पिरेशन सूंघ लेती हैं।
(14:16) उनको फर्क नहीं पड़ता कि आप रो रहे हो क्या कर रहे हो। अगर आप डेस्पिरेट हो इस चीज के लिए तो आपको कोई नहीं पूछने वाला। लेकिन आप जेनुइनली मेहनत कर रहे हो तो दुनिया आके खुद पुछेगी के भाई यार तू तो बड़ी मेहनत करता है यार। तू तो सही काम कर रहा है बिल्कुल। तेरे को किसी चीज की जरूरत तो नहीं है। क्योंकि लोग एफर्ट को देखते हैं। लोग एफर्ट को रिवॉर्ड करते हैं। अगर कोई इंसान मेहनत कर रहा है और उसे रिजल्ट नहीं मिल रहे तो लोग खुद आके उससे बात करेंगे। आपका सबसे जो बड़ा डर है ना अकेले रहना वो इस पे बेस्ड है कि कोई मेरी फिक्र नहीं करेगा। किसी को फिक्र
(14:47) करने की को देनी उसके ऊपर क्यों डालनी है फिक्र? तुम खुद की फिक्र करो ना। तुम खुद से रॉल्व करो अपने ट्रामा को या दुख को या ग्रीफ को। तुम्हारे अलावा तुम्हारी दिक्कत और कोई सॉल्व नहीं कर सकता। तो ये मत समझना कि किसी के कुछ कहने से तुम खुश हो जाओगे तो दिक्कत सॉल्व हो जाएगी। दिक्कत तो तुम्हें ही सॉल्व करनी है। और किसी की झूठी तारीफ या संतावना इससे कुछ नहीं होने वाला। हम इससे केवल यह होगा कि एक छोटा सा डोपम एनर्जी बूस्ट मिल जाएगा और उसके हाथ में कंट्रोल चला जाएगा। फिर जब वो बोलेगी कि काम क्यों नहीं करता तू हम तो फिर गुस्सा भी आएगा।
(15:16) इसी वजह से एक्सपेक्टेशंस भी हाई हो जाती है। वो समझ जाता है कि ऐसा करने से ऐसा होगा। वो उसी को ही करने लग जाता है फिर उसके बाद में क्योंकि उसकी हैप्पीनेस उस एक्शन पे डिपेंड हो जाती है। बट यार जो आपका क्लोज वन होता है बाकी दुनिया का चलो मैं केस मानता हूं। बट जो आपका क्लोज वन होता है उससे तो कुछ ना कुछ एक्सपेक्टेशन अपने आप आ जाती है यार। और मैं फिर से एक बार यही चीज समझना चाहूंगा कि एज ए मेल ना बहुत ज्यादा कंटेंट इस चीज पे है कि अब आप एक्सप्रेसिव बन जाओ। आप इसको सही तरीके से देखते हो यस और नो में। चलो आप मेरे को बताओ। लेट मी मेक इट
(15:45) वेरी ईजी कि मेल्स को एक्सप्रेसिव होना चाहिए। हां या ना? बिल्कुल होना चाहिए। डेफिनेटली होना चाहिए। अब ये थिन लाइन कहां खींची जाए? क्योंकि ये सवाल मैंने इसलिए पूछा था एक्सप्रेसिव होने का मैक्सिमम लोग गलत मतलब समझ रहे हैं। जैसे लड़कियां बहुत ज्यादा बबली होती हैं। बहुत ज्यादा एक्सप्रेसिव होती हैं कि यार इसने ये कर दिया, उसने वो कर दिया। मेरे जैसे कपड़े पहन लिए ये हो गया वो हो गया गसिप करना लड़कों का नेचर थोड़ा अलग होता है मोस्ट लड़कों का तो ये थिन लाइन एक लड़का आप कैसे खींचे देखिए मेरे हिसाब से तो एक्सप्रेसिव हो जितना होना है उतना एक्सप्रेसिव हो लेकिन
(16:16) केवल अपनी डायरी के साथ अपनी डायरी में जितने एक्सप्रेशन है आपके जितनी फीलिंग्स इमोशंस वो सब लिखते चलो जर्नल करते चलो जो महसूस कर रहे हो वो लिख दो वहां सब कुछ क्लियर हो जाएगा कोई इंसान तुम्हारी दिक्कत इंसान खुद जब मरा पड़ा है वो उसकी जिंदगी में खुद 40 दिक्कत चल रही है तो वो तुम्हें क्या बताएगा क्या करना है या तो गुरु ऐसा हो मुझे ऐसा लगता है लेकिन लोग क्या करते हैं लोग ये बातें सुनते भी इसीलिए हैं ताकि उनकी बातें सुनी जाए सब लेनदेन चल रहा है यहां पे अगर कोई किसी के दुख सुन रहा है क्यों सुनेगा कोई किसी के दुख सुनने से क्या मतलब है
(16:48) बात तो सही है वो इसलिए सुन रहा है ताकि उसकी बकवास फिर एक्सचेंज में सुनी जाए और सुना सुना के एक दूसरे को ये मंडल ही रच लेते हैं पूरी बिल्कुल तो या तो उसके या तो वो इस लेवल का गुरु है कि उसके पास एक एक्चुअल सशन है कौन है वो साइकोथरेपिस्ट है उसने उसने साइकोलॉजी पढ़ी हुई है। वो भी अपने गिनेचुने एक्सपीरियंस जो कबाड़ी है बेसिकली उनके हिसाब से आपको जो है वाणी बकेगा अपनी। ठीक है? उससे कुछ नहीं होने वाला। या चुपचाप भी सुन लेगा तो एक्सपेक्ट करेगा कि अभी मेरी बात सुने ऐसे तो मुझे ऐसा लगता है पर्सनली कि एक आदमी की सबसे बेस्ट
(17:19) एक्सप्रेसिव पार्टनर है उसकी डायरी। और उसकी पेन वहां जितना एक्सप्रेस करना है करो और बाकी सब लोगों से अच्छे से इंटैक्ट करो। अच्छे से पेश आओ। लेकिन कुछ एक्सपेक्ट मत करो। एक्सपेक्ट करोगे तो फिर वैलिडेशन टिक जाएगी उसके साथ। एक्सपेक्ट करोगे तो बिजनेस रिलेशन बन जाएगा। हम एक्सपेक्ट क्योंकि एक्सपेक्टेशन के बदले में फिर आप भी कुछ देना पड़ेगा ना आपको ये लेनदेन थोड़ी चल रही है यहां पे। बिल्कुल बिल्कुल लेकिन उस भावना से नहीं करना चाहिए कुछ। सही बात है। एकदम एक्सट्रीम केसेस में तो यार देखो होता है कि आदमी भी एकदम फ्रस्ट्रेशन में चला जाता है। हमें कुछ
(17:50) ऐसे केसेस भी देखने को मिलते हैं सोशल मीडिया वगैरह पे। बट इन जनरल मेरे ख्याल से पेन और पेपर इज बेटर रेदर देन एज ए मैन। मतलब वो बोलते हैं ना मैन अप करो यार। मतलब ये चीजें मत करो कि रो रहे हो, चुगलीखोरी कर रहे हो, ये सारी चीजें कर रहे हो। अच्छा एक पर्सनल नोट पे आपसे कनिश भाई समझना चाहूंगा। ठीक आपका कोई भी किसी भी कंटेंट पे कमेंट सेक्शन में जाओ तो एक जीआईएफ बहुत मिलती है अमिताभ बच्चन जी की। अच्छा। ठीक है। तो अगला सवाल ₹ करोड़ के लिए। ठीक है। ठीक है। वॉइस का क्या गेम है? क्योंकि जितना मुझे लगता है ना नेचुरली हो सकता है
(18:26) आपके पास ये जेनेटिकली हो बट आपने इस पर काम बहुत ज्यादा किया है तो उसे डिकोड करके बताओ यार क्योंकि मतलब एक मस्कुलर वॉइस जो होती है एक हैवी वॉइस जो होती है एक मेल की स्पेशली वो बहुत अट्रैक्ट करती है किसी को भी मतलब एक अथॉरिटी देती है हम तो वॉइस का क्या गेम है आपका एक तो जेनेटिक अप्रोच है डेफिनेटली मुझे अपने मां-बाप से कुछ मिला है है कि नहीं और हाइट और स्ट्रक्चर की वजह से रेजोनेंस अच्छी होती है। अगर किसी की चेस्ट बड़ी है तो उसकी आवाज को गूंजने के लिए ज्यादा जगह मिल रही है। रेजोनेट करने के लिए ज्यादा जगह मिल रही है।
(19:00) दूसरा जो सबसे इंपॉर्टेंट स्टेप है वो ये है कि आपका शरीर इस तरीके से डिज़ है कि एक-एक पार्ट एक-एक मसल एक-एक फाइबर को मर्जी के हिसाब से ट्रेन किया जा सकता है, बदला जा सकता है। अब दिमाग ही मैंने बताया अगर मेडिटेशन से थिकर हो जाता है, मोटा हो जाता है, वॉल्यूम में ग्रो कर जाता है, किसने सोचा था कि ऐसा हो पाएगा? तो दिमाग भी मसल की तरह है जो ट्रेन किया जा सकता है। तो मसल कैसे नहीं मसल की तरह होगी और गले में आपकी मसल्स हैं हम तो वो सब कुछ ट्रेन की जा सकती है। सारी प्रैक्टिससेस मैं आपको एक सिंपल वो बताता हूं कि एक प्रैक्टिस जो मैंने शुरुआत में
(19:31) करी थी वो ये है कि एक तो मैं धीमे बोलता था और दूसरा मैं आवाज को अपने चिन्ह के बजाय अपने लंग्स से प्रोड्यूस करता था। हम्। यहां से जब आवाज ओरिजनेट होती है तो गूंजते हुए जाती है। हम् और रेजोनेशन से सॉरी रेजोनेशन से बहुत ज्यादा वॉल्यूम बढ़ सकती है। ओके गले से नहीं छाती से बोलो नीचे। छाती से बोलो। पेट से बोलो बल्कि जब सांस भी लेते हो तो पेट से सांस लेके उसे पूरे विंड पाइप में गूंजते हुए बाहर आने दो। ये इसका सबसे सिंपल स्टेप है जो आप अभी के अभी ट्राई कर सकते हो। आपको महसूस भी होगा कि जब आप बोल रहे हो तो कभी कबभार मेरी
(20:07) आवाज ऐसी हो सकती है कि मैं यहां से बोल रहा हूं। है कि नहीं वंश मॉडलेशन ये चार्ली पिकिकाचू कैसे बन गया एक्सक्ट्ली तो ये कंट्रोल है ऐसा नहीं है कि ये आवाज जो है मैंने बना ली है और फिक्स हो गई है हम्म ये कंट्रोल है कि मैं कभी भी ऐसे भी कर सकता हूं और कभी भी ऐसे भी कर सकता हूं ये सब कुछ मॉडलेशन है द मोनोक लेंगे बायो चेक इट चेक इट आउट चेक इट आउट बेबी चेक इट आउट हैव अ ग्रेट अच्छा अब एक बहुत ही सीन सीरियस कन्वर्सेशन में जाते हैं। ठीक? आज के दिन ना मतलब अब ये कितना सही है, गलत है इस पे भी टिप्पणी कर सकते हैं आप। बट मेजरली मेरे
(20:48) को ये डिकोड करना है कि इसके पीछे की साइकी क्या है? हर इंसान एक चीज बोलता है चाहे वो मेल हो, चाहे वो फीमेल हो, लड़का हो, लड़की हो कि यार मल्टीपल पार्टनर्स वगैरह ना सही चीज तो नहीं है। बैक ऑफ द माइंड सबको कहीं ना कहीं लगता है। ठीक है? अपने खेलने कूदने की उम्र में चाहे आप ये चीज कितनी कर लो बट आफ्टर सर्टेन टाइम पीरियड, ठीक है? हर इंसान एक स्टेबिलिटी में जाना चाहता है एक टाइम पीरियड के बाद। तो यह चीटिंग की साइकोलॉजी क्या है? कैसे वर्क करती है? यह सवाल कहां से आ रहा है? आज के दिन मतलब आप स्कूल कॉलेजेस में देखो। ठीक है? जो लोग
(21:19) रिलेशनशिप में है चार जगह एंड इट कम्स टू बोथ जेंडरर्स। ठीक है? इसके नुकसान क्या है वो बाद में बातचीत कर लेंगे। बट कहीं ना कहीं कुछ तो ऐसा हुआ है जिसकी वजह से इंसान इस दिशा में गया है। आज के दिन हम कॉर्पोरेट को देखें तो मैरिड लोगों के भर-भर के अफेयर हैं यार। हम् जिसको देखो मतलब आप छह लोगों को ऐसे देखो दो के अफेयर आपको दिख जाएंगे 1 महीने के अंदर-अंदर। तो यह साइकी में क्या चेंज आया है? इंसान क्यों चीट कर रहा है? चीटिंग की साइकोलॉजी बहुत इंटरेस्टिंग है। क्या ये सबसे पहले क्या ये मेल और फीमेल के लिए अलग-अलग है? बिल्कुल बिल्कुल अलग है।
(21:50) तो दोनों के लिए बताओ। लेट्स स्टार्ट विद मेल्स। मेल्स का स्टार्ट करते हैं। अगर हम बिल्कुल बेसिस बायोलॉजी पे बात करें हम तो आदमियों की जो स्पर्म काउंट है जो बेसिकली एक ज़ाइगोट प्रोडक्शन है उनका। हम वो मिलियंस ऑफ टाइम्स ज्यादा है औरतों से। एक आदमी अनगिनत बच्चों का बाप बन सकता है। एक औरत मुश्किल से कितने 20 25 इतने बच्चों को जन्म दे सकती है। उनकी मां बन सकती है बेसिकली। अब इस वजह से आदमी की जो टेंडेंसी है वो सेक्सुअल वैरायटी के बेस पे है। इसका मतलब ये है कि आदमी एक औरत के साथ जब तक है तब तक है। हम लेकिन बायोलॉजिकली ड्रिवन है वो अलग-अलग
(22:27) औरतों के साथ रहने के लिए। ओके। इसलिए हमें हिस्ट्री में जब हम जाते हैं तो हमें बार-बार ये चीज़ देखने को मिलेगी कि एक राजा की पांचप पत्नियां हैं। ठीक है? एक कुबे का जो लीडर है उसकी 10-10 पत्नियां राजाओं की तो मुझे लगता है हरम में पता नहीं कितनी 100 200- 200 भी पहुंच जाती थी जो मुगल्स हैं उनकी। हम तो उनसे अय्याश थे यार उनका तो अलग ही गेम था। लेकिन उस अय्याशी के पीछे की जो बायोलॉजिकल बायोलॉजी किस तरीके से वर्क कर रही है? बायोलॉजी इस तरीके से वर्क करती है वहां पे क्योंकि स्पर्म काउंट इतनी ज्यादा है कि वो बायोलॉजिकली मोटिवेटेड हैं अपना सीड
(22:55) ज्यादा से ज्यादा फैलाने के लिए। इसीलिए आदमी जो होते हैं वो कभी भी अपनी बराबरी पर लड़की पसंद नहीं करते। वो करते हैं अपनी लीग से नीचे। क्योंकि जब वो नीचे जाते हैं तो वो कितना भी नीचे जा सकते हैं। उनकी पूरी मोटिवेशन बॉडी काउंट बढ़ाना है और लड़कियों की मोटिवेशन सिलेक्शन प्रोसेस है। उनका काम है सही आदमी चुनना। क्योंकि मौके कम है उनके पास। आदमियों के पास अनगिनत मौके हैं। एक के साथ नहीं चला तो दूसरा, तीसरा, चौथा वो कुछ भी कर सकते हैं और रिस्क भी नहीं है। औरतें अगर एक बार प्रेग्नेंट हो गई तो उसके कॉन्सिक्वेंसेस कितने ज्यादा हैं?
(23:26) सोच नहीं सकता कोई। एक तो सबसे पहले हेल्थ का कॉन्सिक्वेंस है। मौत हो जाती है डिलीवरी में। तो सही बात है। है कि नहीं? लाइफ फॉर अ फीमेल। सेकंड लाइफ है। ऊपर से अगर बच्चा हो गया तो उसे पालेगा कौन? उसका खर्चा कौन उठाएगा? वो माताजी उसका ख्याल रखेंगी या फिर पैसे कमाएंगी उसके उसके बढ़ने के लिए उसके किरंडर गार्डन के लिए स्कूल के लिए। है कि नहीं? ये कॉन्सिक्वेंसेस 100 साल 100 200 साल पहले बहुत ज्यादा थे। लेकिन जब से आपका प्रोडक्शन होना चालू हुआ है अबॉर्शन पिल्स का आई पिल्स का तब से औरतों के लिए भी कॉन्सिक्वेंसेस लगभग ना
(23:56) के बराबर हो गए हैं। तो तब से बॉडी काउंट बढ़ना हो गया है। ऑलमोस्ट क्वाड्रोपल हो गया है मेरे ख्याल से पिछले 40 सालों में। वो इसलिए हुआ है क्योंकि औरतों के पास अब रिस्क नहीं बचा है। किसी को मेट बनाने का, किसी के साथ संबंध बनाने का। कोई रिस्क नहीं है उनके पास। पहले बहुत ज्यादा था। अब बिल्कुल नहीं है। अब तो 1 मिनट में अब तो मेरे ख्याल से एसटीडीज इतने बढ़ने लग गए हैं। औरतें ये भी भूल गई है कि प्रोडक्शन यूज़ करनी होती है। आप मुंबई में देखो कितने एचआईवी के केसेस आ रहे हैं। उत्तराखंड में कितने एचआईवी के केसेस आ रहे हैं। ये पहले थोड़ी होता था।
(24:27) लेकिन रिस्क हट चुके हैं। उन्हें फर्क ही नहीं पड़ता। वो 10 आदमियों के साथ सो जाएं। उन्हें एक पिल खानी है। हम और ज्यादा से ज्यादा क्या हो जाएगा? प्रेगनेंसी के चांस खत्म हो जाएंगे। उसके तो वैसे भी प्लान है नहीं किसी का प्रेग्नेंट होने का, बच्चा पैदा करने का। यार। बट इजंट इट जस्टिफिकेशन कि यार आदमी को तो जो करना है उसको आप बायोलॉजी से जस्टिफाई कर दो। लेकिन फीमेल अगर सेम चीज करे ह्यूमन लेवल पे समझने की कोशिश करते हैं। ठीक है? कि आदमी वो चीज कर रहा है उसको हम बायोलॉजिकली डिफेंड कर रहे हैं। फीमेल जब उस चीज को कर रही है तो अब हम उस
(24:57) पे क्वेश्चन मार्क लगा रहे हैं। क्वेश्चन मार्क नहीं लगा रहा। मैं बायोलॉजिकल मोटिवेशन को डिकोड कर रहा हूं। मैं ये डिफेंड नहीं किया जा रहा। यहां पे एक्सप्लेन किया जा रहा है। कि जो फिनोमिना दिख रहा है हमें वो क्यों है? अब नेचुरली जो चीजें हैं हम असल में क्या करते हैं? एप्पल एंड ऑरेंजज़ को कंपेयर करते हैं और फिर कहते हैं यार ये तो इससे ज्यादा अच्छा है। क्योंकि मैंने अच्छा और गलत तो बोला ही नहीं। मैंने अब तक ये नहीं बोला कि आदमी सही कर रहे हैं या औरतें गलत कर रही है। मैं तो समझा रहा हूं कि बायोलॉजी क्या कह रही है बताइए जरा।
(25:23) क्योंकि अगर हमें बायोलॉजिकल ड्राइव मिली है तो साथ में उसकी चेतना भी मिली है उसे रोकने के लिए। बिल्कुल। डिफेंड उसे वही करेगा जो इसमें मजा ले रहा है। जो कॉन्सिक्वेंसेस नहीं झेलना चाहता। जो इस चीज को डिनाई करना चाहता है कि जो तू कर रहा है वो बहुत सारे लेवल्स पर ठीक नहीं है। वो उस चीज को अपनी बायोलॉजी से डिफेंड करता है। लेकिन फिनोमिना क्यों ओरिजनेट हो रहा है? कहां से उत्पन्न हो रहा है ये? उसकी एक्सप्लेनेशन ये है। बिल्कुल। जिस तरह से इस चीज को फीमेल्स के केस में भी ऐसे यूज़ किया जाता है कि यार ये क्या बात हुई कि तू तो 5 फुट पांच की और तुझे
(25:57) लड़का चाहिए 6 फीट का। हम क्योंकि वो बायोलॉजिकल उसकी सिलेक्शन क्राइटेरिया है उसका कि जितना लंबा लड़का होगा बाय द वे यह भी एक सवाल आता है कि अगर मैं 5 फुट 11 का हूं हम और लड़की है 5 फुट पांच की लेकिन वो 6 फुट दो का लड़का क्यों चाहती है खुद 5 फुट पांच की है वो वो इसलिए है क्योंकि उसे अपने से लड़का अपने से ये इसलिए है क्योंकि उसे अपने से लंबा लड़का नहीं चाहिए उसे और लड़कों से लंबा लड़का चाहिए मैस्कुलर लड़का चाहिए जो प्रोटेक्ट कर सके तो लंबे चौड़े लड़के उसके बायोलॉजिकल डिमांड हम है कि नहीं? अब इसमें सही गलत नहीं है। ये
(26:30) तो मैं एक्सप्लेन कर रहा हूं कि लंबे लड़के क्यों पसंद आते हैं लड़के? हां, हम लॉजिक समझना चाह रहे हैं इस लाइन से। इस लाइन से बिल्कुल ग्रेट। है कि नहीं? मार्कर्स होते हैं कंधे चौड़े हैं। टेस्टोस्टरॉन हाई है। हम बच्चा जो होगा उसके बहुत हेल्दी होने के चांसेस ज्यादा हैं। ऊपर से अगर बच्चा किसी लंबे बाप की संतान है। हम तो वो खुद भी लंबा होगा। तो आगे उसको मेड्स मिलने के चांस भी बढ़ गए। क्योंकि लड़कियां लंबे लड़कियां पसंद करती है। सुंदरता भी इसलिए देखी जाती है कि बच्चा पैदा होगा तो वो भी सुंदर होगा। उसके भी मेटिंग के चांस बढ़ जाएंगे। ज्यादा ऑप्शन
(27:00) होंगे उसके पास है कि नहीं? अच्छे ऑप्शन होंगे। हम तो इसीलिए ये चीजें देखी जाती है। बायोलॉजिकल नीड्स है। बायोलॉजिकल ड्राइव है जो हजारों सालों पहले फॉर्म हो चुकी है पूरी। ये हार्ड वायर्ड है ब्रेन में। इसे ओवरकम करना बहुत मुश्किल काम है। लेकिन ये पॉसिबल नहीं है। तो ये एक्सक्यूज नहीं है। ठीक है? ये सही या गलत नहीं है। ये तो एक्सप्लेन किया जा रहा है कि होता क्यों है जनरली। गॉट इट। अच्छा इसी में जैसे ये तो एक्सप्लेन कर दिया आपने कि मेल्स क्यों चीट करते हैं? फीमेल्स के चीटिंग के क्या रीज़न है? क्योंकि मेरे को ऐसा लगता है वो बहुत ही
(27:26) कंप्लीटली डिफरेंट होता है। हां हम फीमेल्स के जो मेजर कारण आपको देखने को मिलेंगे वो ये हैं कि उनको जैसे आदमियों की एक सेक्सुअल नीड है। वैसे औरतों की इमोशनल नीड्स होती हैं। तो वो पहले इमोशनली चीट करती हैं। फिर फिजिकली चीट करती हैं। आदमी सबसे पहले केवल फिजिकल एस्पेक्ट पे जाते हैं। और औरतें देखती हैं कि अगर यह इंसान इमोशनली मेरे साथ नहीं है तो यह मेरा कैसे हुआ? वो इस वाले लॉजिक पे जा रही हैं। तो जहां से उन्हें ये लैक ऑफ अटेंशन अब कहते हैं ना कि कई लड़कियां कहती है कि तूने तो मुझे यूज़ कर लिया। यूज़ तो दोनों एक दूसरे को कर रहे हैं। अगर लड़का डेट्स
(28:04) पे जा रहा है। वो उसे समय दे रहा है। अटेंशन दे रहा है। तो लड़की भी तो इस तरीके से यूज़ कर रही है लड़के को अपनी अटेंशन को सेटिस्फाई करने के लिए। हम और लड़के की उस सेटिस्फेक्शन कहां से होगी? सेक्सुअल नीड से। हम अब वो दोनों की है लेकिन लड़कियों को इतना फर्क नहीं पड़ता उस चीज से। आदमी मोटिवेटेड है ज्यादा से ज्यादा करने के लिए। तो महिलाओं की इमोशनल नीड्स सेक्सुअल नीड्स को सरबास करती है। ठीक है? तो फिर वो ये कहती है कि भैया अगर ये मुझे इमोशनली सेटिस्फाई नहीं कर पा रहा तो वो एक वॉइड बन गया है। उस वॉइड में जो इंसान आके सही समय पर सही बात कर देगा वो
(28:34) सेटिस्फाई कर देगा। और इमोशनल चीटिंग हो जाएगी। जो बेसिस है फिजिकल चीटिंग का औरतों के लिए मेरे हिसाब से। ओके। जी। वो स्टेप वन बनता है। कि इस इंसान में मुझे इंटरेस्ट यहां से आ रहा है कि यह मेरी इमोशनल नीड्स पूरी कर रहा है। ठीक है? इसमें एक स्टेप और फदर डीप ड्राइव करते हैं। ठीक है? ये काफी कंट्रोवर्शियल हो है। तो अभी एक कल्चर ऐसा देखने को हमें मिलता है कि लड़कियों ने ये इमोशनल स्टेप जो है इसको भी बाईपास कर दिया है कुछ लड़कियों ने। तो ठीक है। दे आर इंटू कंप्लीटली रैंडम हुक अप एंड स्टफ। हम अब उसमें तो कोई इमोशनल नीड भी नहीं आई।
(29:11) आप किसी ऐप पे मिले या कहीं हुए 1 घंटे पहले आपकी बात हुई थी और 2 घंटे बाद आप लोग बिस्तर पे हो। यहां पर दोनों ही गलत हैं। लड़का लड़की मैं जज नहीं कर रहा। बट फिलहाल हम फीमेल साइकी को समझने की कोशिश कर रहे हैं। तो फिर इसको कैसे पर्सीव किया जाएगा? इसको कैसे देखा जाए? इसे बहुत ध्यान से सुनना सभी लोग। बिल्कुल। यहां पे हो क्या रहा है? एंड बाय द वे सॉरी एक बार डिस्टर्ब कर रहा हूं भाई। हम ना इसके कॉन्सिक्वेंसेस भी समझेंगे। लेकिन पहले प्रॉब्लम को तो अच्छे से डिस्कस कर लें। यहां पर हम किसी को पिन पॉइंट नहीं कर रहे हैं कि तू बंदा है या
(29:41) तू गंदी है। ऑब्जेक्टिव ये है कि अच्छे से समझ के लेयर बाय लेयर एक सॉल्यूशन की तरफ बढ़ा जाए ताकि हम एक बेटरमेंट ला सके अपने आसपास क्योंकि एक चीज पे तो हम सब एग्री करेंगे। कल को हमारा बच्चा हो अगर चाहे वो लड़का या लड़की हो तो हम ये हुक अप कल्चर तो नहीं चाहेंगे उसके लिए। हर कोई एग्री करेगा। बड़े से बड़ा प्लेबॉय भी बड़े से बड़ी प्ले गर्ल भी। हम ठीक है? तो यानी कि डीप डाउन हमें अगर ये चीज पसंद नहीं है तो लेट्स स्टार्ट वर्किंग ऑन इट। हुआ ये है पिछले कुछ सालों में बायोलॉजिकल नीड्स जैसे कि मैंने बताया कि औरतों की ये है कि उन्हें एक सेफ और सिक्योर आदमी मिले
(30:20) हम और वो जनरली होता है उनकी लीग से ऊपर क्योंकि वो सिलेक्शन में थोड़ी सी क्रिटिकल है। मौके कम है और इसलिए चुनाव बहुत सही होना आवश्यक है। ठीक है? चुनाव सही नहीं हुआ तो जिंदगी रिस्क पे है पूरी। आदमियों की जिंदगी बिल्कुल रिस्क पे नहीं है। आदमियों की प्राइमल ड्राइव है ज्यादा से ज्यादा पार्टनर्स। हम ये जो डिस्पैरिटी है इंटरेस्ट की हम इससे क्रिएट होता है एक बहुत बड़ा लीग गैप। यानी बड़े से बड़ा आदमी चाहे वेल्थी हो चाहे कुछ भी हो वो 18 साल की एक मैकडोनल्ड में काम करने वाली लड़की को भी पसंद कर सकता है। केवल फिजिकल नीड्स के
(30:52) बेस पे। ये डिस्पैरिटी बन जाती है बहुत बड़ी। इतना बड़ा लीक डिफरेंस बन गया है कि औरतों को जो आदमी चाहिए बहुत आसानी से अवेलेबल है। आप कई औरतों को मैंने ये बात करते हुए सुना है कि उनके सेलिब्रिटी क्रश हैं जैसे ज़न मलिक या फिर ऋतिक रोशन ब्रैंड लीग कूपर। मुझे लगता है कि आपको बहुत हैरानी होगी ये जान के। पर ये सेलिब्रिटी क्रश जो हैं ये आउट ऑफ बाउंड्री है ही नहीं। अगर आप थोड़ा बहुत भी ठीक-ठाक दिखते हो और आपने इन्हें अप्रोच किया तो कोई भी मना नहीं करने वाला। ये मैं आपको लिख के दे रहा हूं कि इनमें से कोई भी फिजिकल एनकाउंटर रिजेक्ट कर ही नहीं
(31:29) सकता। एक्चुअली रिसेंटली ना अभी कुछ महीने पहले ऐसा एक केस भी आया था। एक बहुत बड़ा आर्टिस्ट और एक नॉर्मल लेवल की बंदी चीजें हुई। उसके बाद उसने ऑब्वियसली आर्टिस्ट ने डिच किया होगा। उसप कोई इंटेंशन तो था नहीं। देन वो लड़की राइट कर रही है अपने सोशल मीडिया पे। इसने ऐसा किया इनडायरेक्टली। प्लीज। तो यही होता है। दिक्कत यही है कि आदमी अपनी पूरी औकात छोड़छाड़ के कहीं से भी लड़कियां पकड़ सकते हैं। उनकी दिक्कत यह हो गई है। वो भुला चुके हैं सारी चीजें क्योंकि एक तो अंतरात्मा पे कंट्रोल नहीं है। डिस्ट्रैक्शन इतने ज्यादा है जैसे
(31:59) हमने डोपामिन का डिस्कशन किया है पूरा। और दूसरा लड़कियां हो गई है अवेलेबल बहुत ज्यादा। उनके रिस्क हो गए हैं खत्म। हम तो हिंज पे आते ही अगर एक 6 फुट 4 इंच का एनबीए प्लेयर किसी 18 साल की अनपढ़ औरत को स्वाइप राइट कर रहा है तो फिर वो कहां सोचेगी कि मुझे उसके साथ डेट पे जाना है ऐसा आदमी जो उसके हर एक बॉक्स को चेक कर रहा है ऊपर से रिस्क नहीं है सेक्सुअल एनकाउंटर का कोई प्रेगनेंसी का रिस्क नहीं है कोई खतरा नहीं है जान को तो क्यों ना करे वो उसके लिए कितना ज्यादा मोटिवेटेड डिसीजन है एक छचार के एनबीए प्लेयर मिलियनेियर को
(32:35) स्वाइप राइट करना बल्कि बेवकूफी बन जाएगी ना करना है कि नहीं ऐसा मौका दोबारा कहां मिलने वाला है तो ये लड़कियां जो होती हैं ये इस जाल में फंस गई है अब इनकी जो एनकाउंटर्स हैं वो इतने लीग में बढ़ चुके हैं कि इनके लिए जो सेक्सुअल इंटिमेसी है हम वो देना वो सैक्रिफाइस करना बेसिकली कोई बड़ी बात नहीं है वो वर्थ इट है जैसे लड़की एक बार को सोचेगी कि तीन चार डेट्स पे जाते हैं फिर जाके देखेंगे कि क्या हो रहा है कि सीरियस है कि नहीं पर लीग का डिफरेंस इतना बड़ा है अब एम एनबी एनबीए प्लेयर को एक McDonald वर्कर मिल गई है हम तो वो कहां से फिर ये सोचेगी कि मुझे तीन
(33:09) चार डेट पे जाना है वो इंटिमेडेट हो जाती है उसको डर लगने लगता है कि ये छोड़ के ना चला जाए और उसको चाहिए इंटिमेसी उसकी एक ही डिमांड है और इसकी तो सारी डिमांड फुलफिल हो ही रही है तो वो रुकती नहीं है फिर वो सोचती नहीं है बाईपास हो जाती है सारे लॉजिक रिस्क नहीं है बिल्कुल जान का कोई खतरा नहीं है हम और ये बंदा हर एक बॉक्स को टिक कर रहा है तो वो क्यों ना करे और इस केस में यह हो जाता है फिर कि आप हिंज पे देखोगे या टेंडर का डाटा स्टडी करोगे तो ऑलमोस्ट 80% लड़कियां केवल टॉप के तीन से 4% लोगों को स्वाइप राइट कर रही है बाकी सारे आदमी बैठे हैं वो गए
(33:47) अब वो हो रहे हैं डेस्पपरेट बिल्कुल बहुत ज्यादा बिल्कुल है ना तो लड़कियां जब ऐसे आदमियों से मिलती है जो उनकी लीग से बाहर हैं अब लड़कों के उनका सिलेक्शन क्राइटेरिया जो है वो होता है इस बेस पे कि मुझे इसके साथ लंबे समय तक रहना है या एक रात पे सोना है सिर्फ उसके उसके बेस पे वो सेलेक्ट करते हैं। अब सुंदर लड़कियां जिनकी बॉडी काउंट हाई है उनको कोई रिजेक्ट नहीं करने वाला। अगर केस स्लीपर जोन का है कि मुझे उसके साथ सिर्फ सोना है तो मैं ये देखूंगा ही नहीं कि इसकी लाइफ क्या रही है और लड़कियों को लग रहा है ये तो मिल गया मुझे
(34:16) मेरा मर्द। मेरा कसम मेरा कसम मेरे बच्चों का बाप मेरा राजकुमार। यस। अब एनबीए प्लेयर एक टॉल हॉट सुंदर लड़की को केवल एक रात के लिए पटाना चाहता है तो वो ये तो स्टडी करेगा नहीं कि उसकी बॉडी काउंट क्या रही है? उसके रिलेशनशिप क्या रही है? उसे मतलब ही क्या है उस चीज से? सही बात है। और लड़की को लग रहा है कि ये तो क्या सिक्योर बंदा है। ये तो जज ही नहीं कर रहा मुझे। मैं मायावी हो के आ रही हूं। मैं कोकेन मार के आ रही हूं। इसको फर्क ही नहीं पड़ता। क्यों पड़ेगा उसे फर्क? उसने तुझे रिलेशनशिप की कैटेगरी में ही नहीं डाला। वो तुझे एज अ टाइम पास ट्रीट
(34:48) कर रहा है और तुझे लग रहा है कि मुझे मेरा मर्द मिल चुका है। यार ये बहुत डीप बात बता रहे हो आप जो इस समय समझ रहे हो लड़कियों को यह समझने की जरूरत है। एक्सैक्टली उन्हें समझने की जरूरत है कि उनकी औकात से कई गुना बाहर वाले लौंडे उन्हें कभी सीरियसली नहीं लेने वाले चाहे कुछ हो जाए। उनके क्राइटेरिया लॉन्ग टर्म रिलेशनशिप के लिए हमेशा इस चीज पे बेस्ड रहेंगे कि लड़की सुथरी कितनी है? लड़की का पास्ट क्या रहा है? लड़की बोलने में कैसी है? चलने में कैसी है? हिस्ट्री क्या रही है उसकी? हमेशा। क्योंकि हिस्ट्री इज़ अ वेरी एफिशिएंट प्रेडिक्टर ऑफ़ द फ्यूचर।
(35:17) बिल्कुल। जो आदमी चीट करता है वो कभी सुधर नहीं पाता। वो जिंदगी भर ऐसा रहता है। एक्सक्ट्ली। जिसने कभी पास्ट में चीट किया हो उसके थ्री टाइम ज्यादा चांसेस होते हैं चीट करने के। एक्सक्ट्ली। अब कॉर्पोरेट में भी यही हो रहा है कि अब एक बिल एक मिलेनियर बॉस जब एक एचआर को अप्रोच करेगा। जो हायरार्की में पूरे पूरे फ्लोर का बाप है हम वो जब एक बिल्डिंग का बाप है पूरी बिल्डिंग का जो बाप है सगा वो एक रिसेप्शनिस्ट को अप्रोच कर रहा है तो वो तो पागल ही हो जाएगी वो इंटिमडेट इतना हो जाएगी कि वो डेटवेट की सोच ही नहीं पाएगी उसका दिमाग ये बोलेगा भैया इस आदमी को चाहिए
(35:50) इंटिमेसी मुझे चाहिए ये आदमी हम तो क्या डील बन रही है यहां पे मैं इंटिमेसी दूंगी मुझे पार्टनर मिलेगा हम सिंपल एक्सचेंज है और उसे यह भी पता है कि अगर मैंने इंटिमेसी सैक्रिफाइस नहीं करी एक मिनट नहीं लगेगा और यह दूसरी लड़की से ऐसे मिल जाएगी। मेरी ऐसी सो है। अच्छा इसमें एक दूसरा चीज पूछना चाहूंगा आपसे कि काफी बार फीमेल पर्सपेक्टिव में इसको ऐसे देखा जाता है कि सेम एग्जांपल लेता हूं कि एक रिसेप्शनिस्ट को फॉर एग्जांपल जब एक बॉस अचीव करता है तो वो इतना इंटिमीडेट हो जाती है कि वो ना नहीं कर पाती। इसको इस तरीके से जस्टिफाई किया
(36:23) जाता है। ठीक है? अब ये कितना सही है, कितना गलत है ये केस टू केस वैरी करेगा। बट इन जनरल अगर समझने की कोशिश करें कि यार वो मेरा बॉस है। मेरी नौकरी चली जाएगी। मेरा करियर तबाह हो जाएगा। वो एक लेटर पे लिख देगा। ठीक है? अगर मैं उसे रिजेक्ट करती हूं। उसकी ईगो हर्ट होगी। तो एक बार फीमेल पर्सेक्टिव से समझने की कोशिश करें क्योंकि काफी बार लड़कियां ना इस ज़ोन में जाती हैं। डेफिनेटली। तो यहां पर अगर वो हां करती हैं इस रीजन की वजह से तो भी ये कितना सही और गलत है। हां। मतलब अगर जो मैं कास्टिंग काउच के एग्जांपल देखता हूं एक महिला 10 साल से स्ट्रगल कर रही है।
(36:55) उसे कोई रोल नहीं मिल रहा। घर वाले परेशान कर रहे हैं कि वापस आजा। पैसे नहीं है खर्चने के लिए, नौकरी नहीं है क्योंकि पूरे दिन ऑडिशन चल रहे हैं। अब वो क्या करेगी? एक डायरेक्टर कह रहा है मेरे साथ सो जा पूरी जिंदगी बदल दूंगा। तो वो ऑप्शन कितना लुकटिव है उसके लिए। उसने अपने को एक ऐसी परिस्थिति में डाल दिया है जहां पे उसका फायदा उठाना बहुत आसान हो गया है। वो 10 साल से स्ट्रगल कर रही है। जेब में एक पैसा नहीं है। एक डायरेक्टर कह रहा है केवल फिजिकल कांटेक्ट से आपकी पूरी जिंदगी बदल सकती है। पूरी दुनिया आपको जानेगी। मां-बाप प्राउड
(37:18) होंगे। घर वाले रिश्तेदार जो टोक रहे हैं वो पैर छुएंगे आगे तुम्हारे। तो वो माहौल ऐसा बन गया है। वो कंडीशन ऐसी बन गई है कि औरतों के लिए औरतों को इस चीज के लिए एक्सप्लइट करना बहुत आसान हो गया है। क्योंकि औरतों ने अपनी सारी वैल्यू मॉनिटरी सक्सेस में डाल दी है। वो समझ रही है अगर कुछ बनूंगी नहीं तो मेरी औकात ही क्या है? अरे तुझसे पूछ कौन रहा है? तू है क्या? वो मॉनिटरी सक्सेस को इतनी बड़ा हिस्सा बना चुकी है अपनी वैल्यू का कि उनके लिए सेक्सुअल इंटिमेसी सैक्रिफाइस करना बहुत सिंपल रास्ता बन गया है। वे टू द टगेस्ट शी स्लेप्ड हर वे टू द टॉप। वो
(37:47) सोती रही। अब तुझे यह देखना है भैया तुझे टॉप पर जाना है या तुझे अपना चरित्र मेंटेन करना है। दोनों सही और गलत हो सकते हैं। दोनों में मुझे लगता नहीं है कि कोई दिक्कत है आपके बारे में। लेकिन ये दोनों चीजें बहुत कुछ कहती हैं हम कि आप क्या-क्या कर सकते हो केवल मॉनिटरी सक्सेस के लिए। क्योंकि सबसे कमाल की बात इस केस में ये है कि जो भी लड़के टॉप पे हैं जो टॉप एशलॉन में बैठे हुए हैं जो ये सारे मजे लेते हैं। आप उनसे भी पूछ लो। वो भी कहेंगे भाई सब कुछ कर लिया मैंने पर लड़की तो मुझे ऐसे पास्ट वाली चाहिए एक्सजेक्टली या लड़कियां कभी कबार इस बात को नहीं समझ
(38:21) पाती जो एक फैक्टर अब है जिसकी वजह से फिनोमिना और बढ़ चुका है वो है एक्सेसिबिलिटी इंटरनेट ने दुनिया को इतना छोटा कर दिया है कि अब सच में इंडिया हरियाणा में एक गांव की बहुत सुंदर लड़की सच में एनबीए प्लेयर को मैसेज लिख सकती है सही बात है क्योंकि अब जिस अब इतने ज्यादा दिन भर दिन जितने ऑप्शंस है लड़कियों के पास में उसका कुछ हिसाब ही नहीं है। बिल्कुल। इसलिए जो जो इनफ्लेशन है उनकी ईगो में वो इसलिए ज्यादा बढ़ता जा रहा है क्योंकि अब एक नॉर्मल बहुत ही ज्यादा एवरेज से भी बिलो एवरेज दिखने वाली के भी डीएम में 100 लड़के पड़े हैं।
(38:58) बिल्कुल। ठीक है ना? लेकिन ये बात लड़कियों को भी पता है कि अगर आप उनसे पूछोगे तो वो हमेशा कहती है कि ऑप्शंस तो बहुत है हमारे पास में लेकिन काम करने से रोक कम है। बिल्कुल। एवरीबडी वांट्स टू स्लीप विद मी बट नोबडी इस लाइक वांट टू वाइफ मी। यह बहुत ज्यादा और जिनको जिनकी वाइफ वो बनना चाहती है हम वो भी इतने बेवकूफ नहीं वो भी भनक लगा लेते हैं कि किस तरह की पार्टनर मेरे पास में आ रही है वहां पे सही बात है एक चीज और है जहां पर अब ये बात चली है चर्चा चली है तो आप दोनों का एक बार इनपुट चाहूंगा कि काफी बार ना लड़कियां एक कॉन्फिडेंस जो होता है जैसे फीमेल चाहती
(39:32) है कि यार उसे कॉन्फिडेंट बंदा चाहिए ठीक है जो मतलब कहीं ना कहीं वो इस तरीके से पर्सीव कर रही होती है कि यार ही इज गोइंग टू टेक केयर केयर ऑफ मी। कल को फैमिली के बारे में सोच रही हूं तो ही शुड बी देयर। एक रिस्पांसिबल इंसान, एक कैपेबल इंसान। उस पर्सपेक्टिव से अगर समझें तो कॉन्फिडेंट बंदा देखना कोई बुरी बात नहीं है। लेकिन ये सिर्फ कॉन्फिडेंट बंदा और कॉम्पिटेंसी का एक डिफरेंस होता है। हम ये बहुत बार इवैल्यूएट लड़कियां बहुत गलत तरीके से करती हैं। ये सवाल इसलिए पूछ रहा हूं क्योंकि जो झांसे में लाना चाहते हैं ना लड़के वो इसको एक टूल की तरह यूज़ करते
(40:07) हैं कॉन्फिडेंस को अपने आप को कॉम्पिटेंट प्रूव करने के लिए। हम ये साइकिल कैसे वर्क करती है? सर कॉन्फिडेंस का खेल ऐसा है कि जो यंग लड़कियां हैं उन्हें बेवकूफ बनाना बहुत आसान है। केवल हवाबाजी के चक्कर में। इसलिए आपने स्कूल और टशंस वगैरह की जो लाइफस्टाइल है इसमें जो लड़के सबसे ज्यादा ऊंची ऊंची फेंकते हैं वो सबसे ज्यादा फीमेल्स से अट्रैक्ट करते हैं। क्योंकि यंग लड़कियां होती है बेवकूफ। वो ये देखती है कि अगर ये बोल रहा है तो ये कर कैसे नहीं पाएगा। वो बातों को एक्चुअल टास्क से रिलेट कर लेती हैं। कि कॉन्फिडेंस जो है वो कॉम्पिटेंस का उनमें
(40:41) डिफरेंशिएट करना उनके लिए मुश्किल हो जाता है बहुत ज्यादा। हम तो वो जो बोलते हैं लड़के वो उसे सच मान लेती हैं। बिल्कुल। और बात ह्यूमन नेचर की है ही ऐसी कि इंसान जितनी कॉन्फिडेंस से बोलेगा चीज को वो उतनी ज्यादा सच लगने लगती है। है कि नहीं? सही बात है। क्योंकि इंसान जानता है कि उसके अचीवमेंट्स जैसे हैं उतना ही उसका कॉन्फिडेंस होगा। एक जनरल ट्रेड यही है पर्सनालिटी का कि आदमी ने जो उखाड़ा है उसके बेस पे ही उसकी बातचीत होती है। लेकिन कुछ लड़के बोलने में बहुत तेज होते हैं तो वो बक देते हैं ऐसीऐसी बातें जो उनके पास से बिल्कुल रिलेटेड नहीं है।
(41:12) उसको लड़कियां मिस्टेक कर लेती है कॉम्पिटेंसी में। तो ये तो दिक्कत है मेरे ख्याल से लड़कियों की बहुत बड़ी। उनको एनालाइज करना सीखना पड़ेगा इस चीज को। उन्हें स्टडी करना पड़ेगा। उन्हें पार्टनर सिलेक्शन जिसके लिए वो बनी है जो कुदरत ने उन्हें दिया है कि सिलेक्शन के इंट्यूशन है उनके पास। उनके पास वो सारी चीजें हैं जो उनके मन से सत्य निकलवा सकती हैं कि इसकी औकात है क्या? उसको भी इस्तेमाल करें तो बहुत बेहतरीन रहेगा। नहीं बिल्कुल सही बात कह रहे हैं। अच्छा अब प्रॉब्लम समझ में आई है। अब इसका इंपैक्ट क्या आता है? हमने केस तो डिस्कस
(41:40) कर लिया कि इस तरीके की चीजें हो रही हैं। इसका एक गलत इंपैक्ट आता है हर किसी की लाइफ में। चाहे वो लड़का हो, चाहे लड़की हो। नो डाउट अबाउट दैट। तो लड़कियों के केस में ये किस तरीके से बैकफायर करेगा? जो भी यंग लड़की इस तरीके का या ये पॉडकास्ट देख रही है उसे ताकि समझ में आए। हम कि अगर वो खुले दिमाग से सोच रही है रेदर देन वो यह बोले कि लड़का भी तो चार के साथ कर रहा है मैंने कर लिया तो क्या गलत है आप प्लीज यह देखो उसकी लाइफ भाड़ में जाए आपकी लाइफ पे क्या नेगेटिव इंपैक्ट आने वाला है तो एक लड़की की लाइफ पे इस तरीके की लाइफस्टाइल का फिर क्या इंपैक्ट आता है
(42:12) मुझे ऐसा लगता है कि कोई भी चीज बिना कॉन्सिक्वेंस के नहीं होती बिल्कुल अगर आपने कोई एक्शन लिया तो उसका रिएक्शन भी होगा और इसका तो बहुत ज्यादा घातक रिएक्शन है होता यह है कि आप जब बॉडी अकाउंट अपनी बढ़ाते चलते हो हम तो आप अपनी लॉन्ग टर्म कंपैटिबिलिटी खत्म करते चलते हो। आपके दिमाग में यह पैटर्न इस्टैब्लिश हो जाता है कि इस इंसान से मुझे फिजिकल इंटिमेसी बनाने के लिए कुछ रिक्वायरमेंट खास बची नहीं है। अगर मेरी अर्जस मुझे यहां तक ले जा रही हैं तो मैं इसे क्यों फॉलो ना करूं। कॉन्सिक्वेंसेस दिखने बंद हो जाते हैं। जैसे आप चीटर से
(42:45) पूछोगे तो उन्हें समझ नहीं आता कि मैं गलत क्या कर रहा हूं। अगर आपने किसी जैसे मूवी एक्टर्स बहुत ज्यादा चीट करते हैं अपनी औरतों पे तो वो बिल्कुल भी गिल्ट फ्री होते हैं वो हमेशा। उन्हें यह समझ ही नहीं आता कि गलत क्या किया मैंने क्योंकि दिमाग ट्रेन हो चुका है। अपने पैराटर्स उसने इतने जीरो कर लिए सिलेक्शन के कि कोई भी लड़की आ जाए या सुंदर लड़की आ जाए और लड़की ने ट्रेन कर लिया है कि एनबीए प्लेयर आ जाए और कोई सा भी आ जाए तो उसने अपने दिमाग को ये सिखा दिया है कि मुझे सिलेक्शन प्रोसेस मिनिमम रखना है। क्योंकि इससे मेरी अर्ज
(43:15) सेटिस्फाई होती है। शॉर्ट टर्म प्लेजर के लिए लॉन्ग टर्म फेलियर है। सीधी-सीधी बातें। वो ये देख नहीं पा रहे हैं कि जो चीटर्स होते हैं वो क्रिमिनल से इतना अलाइन करते हैं उनकी साइकोपैथी इतनी हाई हो जाती है। उन्हें फील होनी बंद हो जाती है चीजें। इज्जत करना बंद कर देते हैं लोगों की। और ये रियल लाइफ इंप्लिकेशन बहुत ज्यादा है इन चीजों की। अगर आप इतने साइकोपैथिक हो जाओगे हम तो आप अपने पास वालों को कुछ समझोगे ही नहीं। उसकी रियल लाइफ इम्प्लिकेशन बहुत ज्यादा है। और शादी में टिकना तो फिर नामुमकिन है। ये हो ही नहीं सकता कि जिसकी बॉडी
(43:43) अकाउंट 100 बार हो चुकी है। वो सोच भी पाए कि मैं एक लॉन्ग टर्म रिलेशनशिप मेंटेन कर पाऊंगी या कर पाऊंगा। दोनों के केस में दोनों का डाटा सेम है। आदमी भी इसी लेवल के ठरकी हो जाते हैं बॉडी अकाउंट बढ़ाने के बाद और औरतें भी ऐसी हो जाती हैं। तो अगर आपको ये चाहिए कि भाई मुझे लॉन्ग टर्म स्टेबल अच्छा पार्टनर मेंटेन करना है हम तो ये सब चीजें आपको शॉर्ट टर्म प्रेशर कम करने पड़ेंगे। एक्सैक्टली। इसका ना एक बहुत बड़ा ड्रॉबैक ये भी आता है। आपने जो बोला एकदम सही बात है कि जब आपके मल्टीपल पार्टनर्स होते जाते हैं ना तो ये ह्यूमन टेंडेंसी है कि
(44:13) हमारा माइंड अपने आप चीजों को कंपेयर करता है। राइट? आज मैं आपके साथ पडकास्ट कर रहा हूं। मैं 10 गेस्ट से और मिलूंगा। अब मेरे दिमाग में कहीं ना कहीं बैक ऑफ द माइंड एक चीज आ जाएगी कि यार कनिष्क भाई के साथ तुषार भाई के साथ मेरा जोोन अलग था। उसके साथ मैंने कहीं ना कहीं एक कंपेयर कर दिया। तो ये चीज पार्टनर के साथ भी होती है। जब आपके 10 15 20 पार्टनर्स बन जाते हैं तो आप जब एक सीरियस रिलेशनशिप में जाते हो उस दिन भी ये बैक ऑफ द माइंड में कॉन्शियसली या अनकॉन्शियसली ये कंपैरिजन आता है। ठीक है? आपका जो पार्टनर था चाहे आप लड़के हो
(44:44) या लड़की हो। आपको उसमें एक चीज पसंद हर इंसान में कुछ एक चीज तो अच्छी होगी। अब 10 लोगों की 10 अच्छाइयां आपने देख ली। सबकी वो अच्छाई आप इससे मांगोगे जो आपका करंट पार्टनर है। और ये तो वो सब कुछ नहीं दे सकता। यही प्रॉब्लम है इंडिविजुअलिज्म की। हम जब इंसान अपने आप को हर चीज का केंद्र बना देता है तो उसे लगता है कि वो सारे 10 की क्वालिटी मुझे इसी में चाहिए। बिल्कुल। अगर ये जो इसने गलत किया वो वाला इसमें ये सही करता है। एक्सक्टली। लेकिन यही चीज वो नहीं समझ पाते कि हर कोई बराबर नहीं होता। और जहां तक बात है लास्टिंग रिलेशनशिप्स की उसमें सबसे बहुत
(45:16) ही वाइटल पॉइंट है ये कि हमें समझना होता है कि उबड़ खाबड़ होगा रास्ता आगे का। हमें साथ में इसको भी मेरे नेगेटिव कैरेक्टरिस्टिक्स झेलने हैं। अब मुझे भी इसके नेगेटिव कैरेक्टरिस्टिक्स झेलने हैं। अब ये तो एक पार्ट हो गया जो कि यूथ के लिए था। अब थोड़ा सा ना मैं समझना चाहूंगा टैप इन करना चाहूंगा एक ऐसे डायमेंशन को जिस पर आप दोनों काफी अच्छी बात करते हो और शायद आपने काफी वर्क अराउंड भी किया है कि इंडियन सोसाइटी जो है हमारी इस समय ना एक बहुत ही घोचपच में है। मेरा मतलब ये है कि बहुत ज्यादा कंफ्यूज्ड है। क्या करना है क्या नहीं करना। फॉर एग्जांपल हम हर
(45:48) चीज में क्या है ये ले आते हैं कि यार हमारी हिस्ट्री तो ये रही है। समझ रहे हो? हम सबसे पुरानी सभ्यता हैं। बिल्कुल है और हमें प्राउड होना चाहिए। नो डाउट अबाउट दैट। लेकिन उस एंशिएंट वैदिक नॉलेज का उन एंशिएंट स्क्रिप्चर्स का वो गीता का रामायण का इंप्लीमेंटेशन आम इंसान की लाइफ में कितना सा है मोस्ट ऑफ द केसेस में वो 0% निकल आएगा या एक दो% पे रह जाएगा तो इंडियन सोसाइटी जिस टर्मल से जा रही है इसको आप कैसे देखते हो क्योंकि हमें क्या है प्राउड तो बहुत फील करना है कि हमने ये कर दिया था न्यूटन से पहले हमने ग्रेविटी बता दी थी इससे पहले हमने
(46:22) ये कर दिया था उससे पहले हमने वो बता दिया था हमारे शास्त्रों में सब कुछ लिखा है भाई तू आज के दिन कर क्या रहा है इनमें से तेरी लाइफ में इनमें से क्या है? तो हाउ डू वी सी दिस? हाउ डू वी पर्सीव दिस? इंडियन सोसाइटी में आपने वो बहुत ज्यादा अच्छा पॉइंट यहां पे मेंशन किया है जो जिस भ्रांति में इस टाइम इंडिया है कि वो क्या करता है कि जितनी भी ग्रेट चीजें हैं वो उसे हाईलाइट करता है ताकि जो यथार्थ है ना जो भी जीवन में है इसे ढका जा सके। क्योंकि अगर इतने ही महान स्क्रिप्चर्स हैं तो इस देश की सिविक सेंस इतनी खराब कैसे हो सकती है? कि अगर मुझे इस ट्रेन में
(46:55) चढ़ने नहीं दिया तो मैं इसकी शीशों को इतने बड़े सिलबट्टे से तोडूंगा मैं। जो जो पैसेंजर्स इसमें बैठे हैं इसको गीला करूंगा मैं। ये मैं नहीं चढ़ा तो ये कैसे चढ़ गए इसमें? बिल्कुल। तो ये जो है इंडियन सोसाइटी इस चीज को नहीं समझ पाती। और इसका कारण ये है क्योंकि काफी सारे फिलॉसोफर्स ने मेंशन किया है अपनी किताबों में कि जब भी कोई भी सोसाइटी, कोई भी देश, कोई भी संप्रदाय जब उसका प्रेजेंट एकदम बकवास चल रहा हो हम। तो वो पिछले वाले जो महानता थी पहले कभी हम उसके ट्रपेट्स बजाते हैं सोसाइटी में। ओके? क्योंकि अभी अगर मैं ऐसा कोई भी अगर मैं
(47:32) अपने आसपास देखता हूं अगर आपने देखा होगा इंटरनेट पे सबसे ज्यादा क्लेम्स क्या होते हैं कि हमारे यहां की साइंस सबसे ज्यादा अच्छी रही है शुरुआत से। हम ठीक है? फिलॉसफी में, संस्कृति में। हम ठीक है ना? वॉरियर्स हमारे यहां के सबसे अच्छे रहे हैं। जींस तो अब हो गए खराब। पहले के देखते तुम क्या आदमी होते थे इस देश में। यार कहीं ना कहीं तो देखो मैं इस बात को बहुत सच मानता हूं क्योंकि मैंने काफी इस पे पढ़ा है। काफी रिसर्च की है। तो नो डाउट अबाउट दैट कि जो स्क्रिप्चर्स हैं चाहे हम वेदों को उठाएं चाहे शास्त्रों को उठाएं। नो डाउट बहुत अलग लेवल के हैं।
(48:03) बट प्रॉब्लम ये है कि भाई आम इंसान की लाइफ में तो उनका कोई रोल ही नहीं है आज के दिन। तो आप चौड़ में घूम क्यों रहे हो? यही यही एक गड़बड़ है कि असल में पुराने समय के जितनी भी इसमें कोई शक नहीं है कि फॉर एग्जांपल फिलॉसफी में हम हम ग्रीक से भी आगे थे एक समय पे ग्रीक फिलोसफी का बहुत हां आज के दिन बहुत डंका बजता है बट उनसे भी आगे थे लेकिन उससे भी आगे थे हम इवन अगर आपको पता हो तो एक जर्मन फिलॉसोफर थे आर्थर शपन हावर नाम था उनका ओके उन्होंने कहा था कि सब कुछ बकवास है अगर किसी ने उपनिषद पढ़ लिए हम आप सारी किताबों में आग लगा दो सिर्फ
(48:38) उपनिषद पढ़ लो ओके ये उनका वो था उन्होंने उन्होंने जो वेदांत जो है उपनिषद जो है वेदों का जो फिलोसफिकल पार्ट है वो उपनिषद है जिन वेदांत कहते हैं वेदोकांत जो है वो उन्होंने स्पेशली उसकी ट्रांसलेशन मंगवाई थी एक अ एक फ्रेंच ईरानी फ्रेंच परजन ट्रांसलेशन उन्हें चाहिए थी उन्होंने मंगवाई थी इसीलिए क्योंकि उन्हें पता चला था हम और उन्होंने बहुत ज्यादा वैल्यू दी थी उस चीज को और मैं इसलिए नहीं कह रहा क्योंकि एक वेस्टर्न फिलॉसफर ये बात बोल रहा है हम लेकिन सच में वो बिल्कुल ऐसा बोलते हैं कि फाइनल स्टेज ऑफ ह्यूमन थॉट है वो इतने आगे
(49:12) चले गए थे क्योंकि इसमें कोई शक नहीं है कि इंडियन सोसाइटी ने जिस तरह से इंट्रोस्पेक्शन किया था ह्यूमन का सोल का अपने अंदर जो आंख खोली थी उन्होंने इसलिए शायद ही किसी ने किया हो एक समय पे और जितनी भी हमारे पास में साइंटिफिक नॉलेज है उसकी कई सारी फंडामेंटल चीजें हमारे यहां पे डिस्कवर हो चुकी थी बिल्कुल लेकिन उसके बाद में जो भी हिस्सा बहुत ही ज्यादा चमत्कारी चीजों से रिलेटेड था जैसे बोलते हैं ना कि हमारे यहां का इंसान ना चमत्कार के पीछे पागल है। हम इसीलिए आप किसी भी बड़े से बड़े पडकास्ट पे चले जाओ। वहां पे एक चमत्कारी भाई साहब
(49:49) जरूर आएंगे। चमत्कार की बातें कर। बिल्कुल। ठीक है? कि मैं बताता हूं। अरे यार मैंने सच में लिटरली सबसे बड़े पॉडकास्ट पे वीडियो में देखा जहां पे एक इंसान क्लेम कर रहा है आगे कि मैं आपको हम रात में सोते-सोते कुंडलिनी शक्ति कैसे एक्टिवेट होती है ये सिखा दूंगा। इस धरती पे ऐसे लोग हैं जिनकी जाग के 10 साल तक नहीं हो रही। पर ये भाई साहब सोते-सते भी करवाते हैं। योगी कई-कई लाइफ टाइम लगा देते हैं इस चीज में और आप बेड पे सिखा दो। आप बेड पे सिखा दोगे छ घंटे। और वो कुंडली नहीं करनी भी नहीं है। वो एक और ऐसी टेक्निक है कि कुंडली के बारे में
(50:19) भी नहीं सोचना आपने। अच्छा। वो टेक्निक ही कुछ इस तरह की है। इसको हमने अपनी एक वीडियो में बहुत ही अच्छे से डीबंक किया। बिल्कुल सही बात है। सर बेटे की जो हरकतें हैं हम बाप की पहचान तो उसी से होगी ना। सही बात है। अगर हमारी हरकतें ऐसी है तो दुनिया में तो हमारी बदनामी हो ही रही है। हम तुम कब तक हल्ला मचाओगे कि हमारे शास्त्र में ये लिखा था, वो लिखा था, हम ऐसे थे, वैसे थे। हम दुनिया में कर कौन रहा है चीजें? सही बात है। है कि नहीं? और बदनामी किसकी हो रही है? तुम जो चीजें कर रहे हो वो उसकी बिल्कुल उल्टी है। जो तुम कहते हो कि शास्त्रों
(50:51) में लिखी है। तो तुमने उनमें से कुछ पढ़ा नहीं है। फिर तुम्हें कुछ पता नहीं है उस बारे में। तो तुम हल्ला किस बेस पे मचा रहे हो? बाप की पहचान तो बेटे की हरकतों से होगी ना कि कैसे बाप ने उसको पाला है। तुम्हारी हरकतें अगर दुनिया में बदनाम हो रही है तो वेद भी तो बदनाम हो जाएंगे। तुम्हारे चक्कर में तुम्हारा पूरा ट्रेडिशन अब वो अंग्रेज किसका मजाक बना रहे हैं कि हाथ डाल के चावल में पूरी गंदगी में खाना खाते हैं। गंदगी में हगते हैं और उसको डिफेंड करने लायक भी कोई चीज है नहीं क्योंकि वो वीडियो दिखा रहे हैं और लोग कर रहे हैं ऐसी चीजें।
(51:18) हम और न्यूज़ में हल्ला मचा रहे हैं हम ऐसे थे। हम वैसे थे। अरे जो रिजल्ट है हम वही तो सिस्टम का प्रूफ एफिश एफिशिएंसी कैसे पता लगेगी सिस्टम की? हम रिजल्ट से पता लगेगी ना हम जहां पहुंचे हैं हम वो किसका दोष है? क्या पता सिस्टम शुरुआत से ही गलत रहा हो। ये क्यों नहीं सोचते हो तुम लोग कि अगर हमने हमारी हालत ये हो चुकी है हम तो क्या पता कि हमारे मेथड्स ही गलत रहे हैं। क्या पता हमारे ट्रेडिशंस ही गलत रहे हैं? क्या ऐसा नहीं हो सकता? हर बार आदमी को क्यों दोष दें? अब लोग कहते हैं भाई आदमी ऐसे हैं। भाई हर बार आदमी को दोष देना है।
(51:50) तो जो स्टेप्स आदमी फॉलो कर रहा है वो किसने सिखाए हैं? सोसाइटी किसकी है? कल्चर किसका है? कल्चर कल्चर करते रहते हो हम इंडिया में मुझे लगता है कि सबसे ज्यादा पोर्न या सेकंड या थर्ड नंबर पे है देश जो सबसे ज्यादा पोर्न एक्चुअली एक्चुअली जितनी भी रिलीजियस कंट्रीज हैं बहुत ज्यादा वो एक्चुअली हमेशा टॉप 10 में ही आती है। हां क्योंकि वहां पे सबसे ज्यादा सप्रेस किया जाता है इस सेक्सुअल अर्ज को क्योंकि वो सिन की तरह दिखाया जाता है। एक्चुअली में एक और जो मुझे प्रॉब्लम लगती है कि इंडियंस हमेशा ये सोचते हैं कि वेस्ट कार में एकदम कीड़ा है। ये तो गंदे
(52:24) लोग हैं। संस्कृति ये बच्चे वेस्टर्न होते जा रहे हैं आजकल। खुद शर्ट पट पहन के बैठ के बोल रहे हैं बात। आप कौन सा धोती कुर्ते में? हां ये तो वेस्टर्न होते जा रहे हैं। अब मैं ये सोचता हूं कि मैं वेस्ट में रहता हूं क्योंकि हम मुझे सालों हो गए वेस्ट में रहते हुए। तो मैं ये सोच रहा हूं कि वेस्ट में अगर मैं कहीं पे अपना वॉलेट छोड़ जाता हूं तो मुझे अगले दिन वैसा ही रखा हुआ मिल रहा है वो वहां पे। सही बात है। ठीक है। और हमारे यहां पे जेब में से निकाल लेंगे। मैं आपको एक मैं बताता हूं कि मैं कई बार मैं एक बार बर्लिन सिटी जो कैपिटल है
(53:00) जर्मनी की वहां पे कुछ इंडियन दोस्तों के साथ में था और वहां पे हमने सड़क चलते हुए देखा कि एक पेड़ है जिसको उन्होंने काट के उसको एक शेलफ की तरह बना दिया है। और उसको बना दिया एक छोटी लाइब्रेरी। अच्छा। अब उसका रूल क्या है? कि जो भी टूरिस्ट आता है वहां पे जिसे बुक्स का शौक है वो एक बुक रखेगा और ए बुक निकाल के ले जाएगा। अब सोचो कोई बंदा आ रहा है ऑस्ट्रेलिया से वो एक किताब छोड़ रहा है और दूसरी ले जा रहा है जो शायद कोई पोर्चुगल से आके रख के गया था वहां पे। ओके। तो एक बहुत ही सुंदर सिस्टम उन्होंने बनाया होता है। बहुत सारी ओपन लाइब्रेरीज
(53:31) आपको मिल जाएंगी। हम यहां पर आप ऐसा कर दो। वो लकड़ी में भी आग लगा के भी गायब हो जाएगा। बुक्स तो मिनट से पहले गायब हो जाएंगी। कि यहां पे हर इंसान मंगलवार को प्रसाद चढ़ाने जा रहा है। उस दिन नॉनवेज भी नहीं खा रहा। हम लेकिन हमारा यहां पे चोरी, डकैती, रेप ये मैं देख रहा हूं पिछले 10 साल से कम तो हुए नहीं है। बड़े ही जा रहे हैं। हम तो अगर मैं यथार्थ पे देखूं तो मैं कैसे ये बोल सकता हूं कि हम किसी और से श्रेष्ठ हैं। देखिए अगर जैसे हमने अभी कितनी सारी चीजें डिस्कस की कि बॉडी काउंट बढ़ती जा रही है। ठीक है ना? ना हुक अप कल्चर जो है कैजुअल
(54:05) सेक्स से बहुत ज्यादा नॉर्मल होता जा रहा है और ये वेस्ट में और भी ज्यादा नॉर्मल हो चुका है। ये वहां की प्रॉब्लम है। लेकिन जो बेसिक नेसेसिटीज है जो बेसिक एक एनवायरमेंट होना चाहिए जहां पे एक इंसान ये देख सके कि मेरा सर्वाइवल बिल्कुल ठीक है। बिल्कुल यहां पे ऐसा नहीं है कि मैं गाड़ी चला रहा हूं तो कोई भी आदमी बीच में आके फ्लैट हो सकता है मेरे आगे। क्योंकि उसे ये नहीं पता कि भाई मुझे अब सड़क नहीं क्रॉस करनी चाहिए। यहां पे बोलता है कि गाड़ी सीखने का मतलब है अपने आप को तो बचाना ही है। जो सड़क पे चल रहा है उन्हें भी तुम्हें बचाना है।
(54:33) बिल्कुल। क्योंकि वो तो कफ़न बांध के निकला है घर से। वो तो जलेबी लेके ही आएगा। अब बीच में चाहे टमू उड़ा दे या डंपर उड़ा दे उससे कोई फर्क नहीं पड़ रहा। वो ऐसे हाथ देगा और चला जाएगा आगे को। बिल्कुल यार ये इतना ज्यादा होता है। आप 80 की स्पीड पे आ रहे हो। एक बंदा एकदम से डिवाइडर कूद के और सिर्फ बंदा नहीं आंटियां भी। अंकल भी सबसे ज्यादा देंगे। तुम मैग्नेट हो। मेरी गाड़ी रोक दोगे। और आंटी का तो सबसे ज्यादा मजा आता है मुझे। क्योंकि आंटी बाद में कहती है चलानी ना आती तो देख के चल ले। गाड़ी दे दी सर इसके बाप ने दिख रहा है नहीं सर कि मैं जा रही हूं
(55:06) यहां से अब गलती भी तुम्हारी है फिर उसके बाद में हमेशा बड़ी गाड़ी की है यहां तो गलती इसलिए मैंने भी बहुत सारे ड्राइविंग इंस्ट्रक्टर्स से सुना है यहां पे कि उनके दोस्त कभी कबभार जैसे मेरे बहुत सारे फ्रेंड्स हैं वो इंडिया आ गए जैसे वो कहते हैं यार हमें चलानी है वो कहते हैं तुम 10 मिनट भी सर्वाइव नहीं कर सकते इस ट्रैफिक में क्योंकि उन्हें उन्होंने सीखा है बिल्कुल नॉर्मली चलाना जैसे चलना चाहिए दिस एंड दैट वो कह रहे हैं कि भाई मेरा जो लेफ्ट पंजा है सो चुका है इतना क्लच नहीं दबाया मैंने अपनी जिंदगी में जितना याद आना पड़ रहा है
(55:33) मुझे हम एक्सजेक्टली हम और ये सब इसलिए नहीं है कि भाई पपुलेशन ज्यादा है सड़कें खराब है जब चलाने वाले ही आंख पे पट्टी बांध के चल रहे हैं चलने वाले भी और चलाने वाले भी क्योंकि हमारे यहां पर रेड लाइट आपने देखा होगा रेड लाइट ग्रीन होती भी नहीं है चालू हो जाती है गाड़ी चार पांच सेकंड पहले हो चुकी है हो जाती है कि अब तो पार कर देना अब क्या है अब तो हो ही जाएगी हम और फिर इसमें एक चीज आती है कि ये सोचते हैं कि इंडियन सोचते हैं कि हम एफिशिएंट हैं। हम लकीर के फकीर नहीं बनेंगे। हम सिचुएशन देखेंगे। जब नहीं है तो कर लेता हूं। पार क्या बात हो गई। लेकिन यही कनम
(56:07) है कि अगर इंसान बाय द बुक चलता है तो सारी चीजें अपने आप लाइन में आ जाती हैं। यूरोप में अगर रेड लाइट हो गई और कोई भी नहीं है वो तब भी गाड़ी नहीं चलाएगा आगे को। वो रोक के खड़ा रहेगा। यूरोप से मेरा मतलब लोग प्लीज यह भी समझे वेस्ट से मतलब हमारा यूएसए नहीं है क्योंकि यूएसए में भी बहुत फक्ड अप चीजें हैं। ठीक है? हम वेस्ट की बात जब कर रहे हैं तो हम यूरोप की बात कर रहे हैं मेजरली। नहीं यूरोप नहीं अगर आप मिडिल ईस्ट में जाओगे तो अगर दुबई आप देखोगे हम वहां पे असल में क्या है कि रूल्स की बात की जाए तो इंडिया में बहुत बहुत ही
(56:36) स्ट्रिक्ट रूल्स हैं। इसमें कोई शक नहीं है। जिस-जिस डेप्थ पे रूल्स हैं फॉलो नहीं हो रहे। फॉलो नहीं हो रहे क्योंकि जो इनफोर्स करने वाले हैं उन्हें हम उन्हें भी फर्क नहीं पड़ता। अगर मैं सच में ही चालान को जो महंगा कर रखा है वो ₹100 जिससे उन्हें लगता है कि डर बैठ जाएगा। अगर मैं उसे निरपवाद रूप से सब पे अप्लाई कर दूं कि अब तो करना ही है। सब के सब लाइन पे आ जाएंगे। एक्चुअली इसने एक अन्याय ट्विस्ट ले लिया कि 10,000 का जो चालान था ना पहले वो ₹1000 का था तो पुलिस वाले को आप ₹100 देते थे। अब वो 10,000 का हो गया तो पुलिस वाला 2000 लेगा।
(57:10) उसी अनुपात में अब रिश्वत बढ़ चुकी है। बस रिश्वत बढ़ चुकी है। प्रॉब्लम अभी भी सॉल्व नहीं हुई है। बिल्कुल ये बात तो है। और पता है ये डिस्कशन करने का जो मेजर पर्सपेक्टिव है वो ये नहीं है कि यार हमें वेस्ट को ग्लोरिफाई करना है या इंडिया को डिमीन कर रहे हैं। प्रॉब्लम ये है आप और मैं हिंदुस्तानी हैं। हम यहां बैठे हैं। बेटरमेंट तभी होगा जब हम प्रॉब्लम्स को डिस्कस करेंगे। प्रॉब्लम्स को एक्सेप्ट करेंगे। मतलब वो कबूतर मत बनो कि बिल्ली को देखा और जमीन में मुंह दे दिया कि अंधेरा हो गया। मुझे बिल्ली नहीं दिख रही। मैं बिल्ली को
(57:40) नहीं दिख रहा। तो ये बात एकदम सही। अब जैसे इंप्लीमेंटेशन की थोड़ी देर पहले बात की ना ये एग्जांपल मैं हमेशा देता हूं कि अ हमें ना काफी दुख होता है। जब हम देखते हैं कि यार हर चीज वेस्ट हमारी कॉपी कर रहा है। ठीक? कि यार योग हमारे यहां बना। अब वो कॉपी कर रहे हैं। वो उसके पेटेंट्स लेते जा रहे हैं। ठीक? इस तरीके से जैसे वेस्ट में इस समय ना प्राणायाम को चेंज करके ब्रीथिंग प्रैक्टिससेस नाम से बहुत ज्यादा अब वो ब्रीथिंग प्रैक्टिससेस में अनुलोमविलोम भी कर रहे हैं। है ना वो विपरीत श्वास भी कर रहे हैं। भस्त्रिका प्राणायाम भी कर रहे हैं।
(58:12) भस्त्रिका भी कर रहे हैं। सब कुछ कर रहे हैं। लेकिन अब वो प्राणायाम नहीं रहे। वो हो गए ब्रीथिंग प्रैक्टिस। यस। अब मेरा सवाल सिर्फ ये है। पहली चीज तो नो डाउट अगर हमने उस चीज को पहले किया था तो एक क्रेडिट लेना बनता है। लेकिन उससे भी पहले एक चीज ये बनती है कि आप अपनी लाइफ में उससे बेटरमेंट ला रहे हो। वहां पर लोग उसको ब्रीथिंग प्रैक्टिस बोल के अगर कर रहे हैं तो उनकी लाइफ में एक पॉजिटिव इंपैक्ट आ रहा है। आप प्राणायाम प्राणायाम चिल्लाते रहोगे करोगे नहीं। पॉजिटिव इंपैक्ट क्या है आपकी लाइफ में? सॉल्व कैसे हुआ? बहुत सही बात बोली आपने कि आपके यहां पे
(58:47) बहुत ही इफेक्टिव टेक्निक है जिसे बोलते हैं योग निद्रा बहुत ही फिनोमिनल है जिसे मैं यूज करता हूं क्योंकि मेरे को स्लीपिंग प्रॉब्लम्स रही है काफी सालों तक कैसी प्रॉब्लम्स रही थी मतलब मतलब मेरा ये था कि मैंने एक गलत हैबिट पाल ली थी वो था कि मैं बहुत ज्यादा लेट जिम जाता था अच्छा मैं सारे काम निपटा के रात को 8 9:00 बजे जिम जा रहा था हम और क्योंकि उसके बाद में आपके कॉर्टिजॉल लेवल इतने ज्यादा होते हैंवी लिफ्टिंग के बाद में आप नहीं सो सकते ठीक से अच्छा तो वहां से शुरू हुआ था कि मेरे को स्लीप प्रॉब्लम्स होने लग गई थी क्योंकि दिन तो
(59:18) शुरुआत करनी 8:00 बजे से ही। लेकिन अगर आप नहीं सो रहे सही से तो हर चीज अफेक्ट हो रही थी। बिल्कुल। अब मैं ये देख रहा हूं कि मैं थोड़ा सा देख रहा हूं कि कहां से मैं इस चीज को ठीक कर सकता हूं। और वहां मैं देख रहा हूं कि एंड ह्यूमन की वीडियो आती है एनएसडीआर। ओके। नॉन स्लीप डीप रेस्ट। मैंने कहा ये क्या चीज है भाई? नॉन स्लीप डीप रेस्ट। क्योंकि मैंने कहा स्लीप तो ली नहीं। मैंने इसे डीप रेस्ट ही कर लेते हैं आज थोड़ा सा। सही बात है। तो जब मैंने देखा तो वो बोलता है कि यह योगा निद्रा है। लेकिन मैंने इसे नाम नॉन स्लीप डीप रेस्ट दे दिया है
(59:48) यहां की ऑडियंस के लिए। यस एक्सक्टली। क्योंकि योगा निद्रा है। प्रोनंसिएशन में उन्हें गड़बड़ होती है। अब अपनी भाषा में हम उसे समझा के उसको प्रेजेंट कर देते हैं। सही बात है। और अब पता चल रहा है कि वो एक्चुअली साइकोलॉजी में साइकेटिस्ट जितने भी हैं वो उसे अपनी प्रैक्टिस में यूज़ कर रहे हैं। एज एन ऑफिशियल एक्सरसाइज कि आप ताकि अपना स्ट्रेस रिड्यूस कर सको। हम और आपकी स्लीप क्वालिटी बेहतर हो जाए। योग निद्रा जो था उसका बेसिक जो मोटिव था उसे करने का हम वो ये था कि आप अपनी साइकी में डीप कोई संकल्प सीड कर सकें। अच्छा क्योंकि योगा निद्रा में
(1:00:25) हम निद्रा है वो पर आप सोते नहीं हो उसमें। उसमें आपको संकल्प भी ये लेना पड़ता है शुरुआत में कि मैं सोने नहीं वाला यहां पे। अच्छा हां और उसके बाद में आप ऐसी रिलैक्स स्टेट में आ जाते हैं कि आप बिल्कुल अपनी चितित तक पार करवा सकते हो कोई भी संकल्प। ओके हम तो जैसे फॉर एग्जांपल कोई इंसान सेल्फ एस्टीम प्रॉब्लम से होके गुजर रहा है। हम उसे लगता है कि मैं इनफ नहीं हूं। बहुत सारे ऐसे एक्सपीरियसेस रहे। तो होता क्या है कि आपकी बहुत सारी एक्सपीरियंसेस और रिपीटेड साइकिल्स की वजह से आपकी जो डीप परतते हैं वो कन्विंस हो चुकी है उस फैक्ट से कि आप वर्दी नहीं हो।
(1:00:58) तो अगर हम उसे पेनिट्रेट करना है तो हम दिमाग को इतनी काम स्टेट में ला देंगे। ये आपको जो कांसेप्ट है मैं अभी बहुत शॉर्ट में समझा देता हूं कि हम करते ही क्या है योगा से। आपका जो चित्त है ये बिल्कुल आपकी जो बिल्कुल एक एक डीप पार्ट है आपका हम और उसके ऊपर आप ऐसे समझ लीजिए कि कोई तालाब है। तालाब का जो बिल्कुल तल है नीचे एकदम वो है आपका चित्त। अच्छा। और जो ऊपर पानी है उसके ऊपर अगर मैं कोई स्टोन फेंक दूं तो उससे रिपल्स क्रिएट होते हैं। वो है हमारी वृत्ति बोलते हैं हम उसको। अच्छा वृत्ति का मतलब है कि हम मैं यहां पे बैठा
(1:01:30) हूं मैं आपसे बातें कर रहा हूं। आप मुझसे बातें कर रहे हैं। तो मेरे दिमाग में वृत्तियां क्रिएट हो रही है। हम अब इसके सोर्सेस होते हैं हमारी इंद्रियां जो मैं सुन रहा हूं। इससे वो रिपल्स क्रिएट हो रहे हैं। अगर मेरे पास कुछ नहीं है सोच तो मैं दिमाग में ही फेंटसी चला चला के वृत्तियां डेवलप कर लेता हूं। दिन में लाखों वृत्तियां आती है हमारे दिमाग में। और वृत्त या क्योंकि वो जो सरफेस है वो क्योंकि कभी शांत नहीं होता। आप कभी भी अपने चित्त से नहीं मिल सकते। सुपर कॉन्शियसनेस से नहीं मिल सकते। ओके? और योग में हम यही चेष्टा करते हैं कि
(1:01:59) सारी वृत्तियों को बिल्कुल समाप्त कर दिया जाए। चढ़ गए जिसको बोलते हैं मन शांत होगा तो आप डेप्थ में जाओगे। जैसे हम शून्य पे जाना बोलते हैं कि दिमाग आप जीरो के करीब ले जाने की कोशिश तो करो। बिल्कुल। तो कई सारे योगिक स्कूल्स में से अलग-अलग तरीके से समझाया है। बिल्कुल कि आप अगर आप स्ट्रक्चर वे में जाओगे तो पतंजलि योग सूत्र में आप देखेंगे अष्टांग योगा सिखाई हुई है। तो वहां पे जो होता है यम, नियम, आसन, प्राणायाम। उसके बाद में आता है प्रत्याहार। प्रत्याहार का मतलब है कि मैं फिर अपनी सेंसेस को विड्रॉ करना शुरू कर देता हूं।
(1:02:29) सारी सेंसेस बंद करना चालू कर देता हूं। ताकि जो बाहर का स्टिमुलस है वो वृत्ति बनाना बंद कर दे। बिल्कुल। ग्रेट। अभी ये जो टॉपिक छिड़ा है ना इसको एक स्टेप आगे ले जाके समझना चाहूंगा। इस समय मैं कुछ WHO वगैरह की रिपोर्ट्स भी देख रहा था। तो दे आर सेइंग कि वैसे तो WHO की क्रेडिबिलिटी रिसेंट टाइम में बहुत गिरी है। बट स्टिल लेट्स टेक इट कि आने वाले टाइम में ना 2035 और मे बी 2045 के बाद दे आर एक्सपेक्टिंग कि एक मेंटल हेल्थ पेंडेमिक आएगा हम और इसके साइन हमें दिखने मिल गए हैं। यूएस वगैरह में तो बहुत बड़े लेवल पे हैं। वहां
(1:03:03) पर हर 10 में से तीन लोगों को कुछ ना कुछ मेंटल इशू है। दे आर ऑन द पिल्स। इंडिया में भी अगर हम देखें हमारी जनरेशन तक मेंटल प्रॉब्लम्स बहुत कम देखने को मिलती थी। उसका एक कारण ये भी था कि डिस्कशन बहुत कम था। बट स्टिल द नंबर वाज़ वेरी लेस। अभी हम अगर जनरेशन को देखें तो बहुत कॉमन है। आई एम स्ट्रेस्ड। मुझे ए्जायटी है। मैं डिप्रेशन में हूं। इट्स काइंड ऑफ़ अ फैशन। कि यार तुझे स्ट्रेस नहीं है। तुझे एंजायटी नहीं है। तो ये चीज ना बहुत ज्यादा आ रही है। और इसको ना योगा और प्राणायाम इन सारी चीजों से सॉल्व किया जा सकता है। तो इसका मतलब एक स्ट्रेस और एंजायटी को
(1:03:35) लेके क्या स्टेप एक डायरेक्ट आप बता सकते हो कि यार दिस इज द थिंग यू शुड डू। अगर बात की जाए स्ट्रेस की और ए्जायटी की हम तो जितनी भी यो योगा का आप कोई भी प्रैक्टिस उठाओगे वो आपको वहां पे हेल्प करेगी ही करेगी क्योंकि वहां पे ब्रेथ इन्वॉल्व होने वाली है। मेरे को ऐसा लग रहा है भाई एकदम योगिक ज़ोन में जा चुके हैं। नहीं नहीं नहीं। अरे नहीं इट्स गुड एक्चुअली इट्स अ कॉम्प्लीमेंट। तुरिया ज़ोन में जाने वाला हूं अभी। हां नहीं नहीं मैं ऐसे बात कराऊंगा आपसे। है ना? क्योंकि यूजुअली तुषार भाई बात करते हैं तो एक अलग एनर्जी पे करते हैं।
(1:04:04) अभी उस ज़ोन में है कि देखिए प्लीज प्लीज कंटिन्यू हां तो मैं यही कहने वाला था कि क्योंकि आपके इमोशंस आपकी ब्रेथ से बहुत ज्यादा लिंक्ड है। हम क्योंकि आपने देखा होगा कि एक एक तरह से देखा जाए तो कि रिवर्स इंजीनियरिंग है। अगर मैं गुस्सा हो जाता हूं तो मेरा ब्रीथिंग पैटर्न बदल जाता है। हम मैं रिलैक्स्ड हूं तो मेरा ब्रीथिंग पैटर्न बदल जाता है। अगर मैं डरा हुआ हूं तो मेरा ब्रीथिंग पैटर्न बदल जाता है। बिल्कुल। तो अगर हम ब्रीथिंग पैटर्न से चालू कर दें तो हम अंदर की इमोशनल स्टेट बदल सकते हैं। दोनों कनेक्टेड है तो इसको पकड़ लोगे तो
(1:04:35) ये अपने आप कंट्रोल में आ जाएगा। इसलिए जब भी आप बॉक्सिंग में देखेंगे तो जो कोच वहां होता है वो बार-बार चिल्ला-चिल्ला के बोल रहा होता है कि सांस ले ब्रीथ कर क्योंकि अभी कॉर्टिजोल ज्यादा है, एड्रिनलिन ज्यादा है। सारे चक्षु खुले हुए हैं दिमाग के। क्योंकि बॉडी को पता है कि पूरे डेंजर ज़ोन में हूं मैं अभी। हम तो उसके बाद में बोलते हैं कि ब्रीथ कर। ब्रीथ करने से अंदर अपने आप शांति बढ़ जाएगी। और जहां तक बात है पेंडेमिक की क्योंकि प्रॉब्लम्स बढ़ती जा रही है इसीलिए ही सेल्फ हेल्प का जो मार्केट है ये बहुत ज्यादा बम पे है इस समय
(1:05:05) बिल्कुल अब दिक्कत ये है कि परेशानी ऐसे नहीं कि अब उत्पन्न हो गई अब आप मुझे बताइए कि इस समय परेशानियां है जिनके केसेस हमें ज्यादा देखने को मिल रहे हैं अब आपके हिसाब से आज परेशानियां ज्यादा इंटेंस है या पुराने समय में ज्यादा थी आज तो मैं बोलता हूं ये वो जनरेशन है जो सबसे ज्यादा लग्जरी में जी रही है। एक टाइम ऐसा था कि आप चल रहे हो। कोई तेंदू आ गया खा गया आपको। अरे जस्ट पापाम वाली जनरेशन को देखो यार। पानी भर के लाना होता था। मैंने मेरी मम्मी को, ताई जी को सबको देखा है यार। सुबह-सुबह कम से कम भी नहीं तो 30-40 बाल्टी मटके पानी के वो भर के लाते थे।
(1:05:40) यस। ये थी लाइफ। मेल्स की लाइफ अलग थी। आप बैल के साथ लगते थे काम करने के लिए। बिल्कुल। अगर आज बच्चों को बोल दिया जाए कि बुग्गी जोड़ दे जरा बैल से तो ऐसी तैसी हो जाएगी। समझ में नहीं आएगा। हम तो बाय द वे ये सब वेस्टर्न कल्चर की इन्वेंशंस का खेल है। उन्हीं की मेहरबानी है ये। अगर इनके कल्चर पे डिपेंड होते तो हो जाता काम। आज भी वही कर रहे होते। हल उतरे होते। सिंपल पॉइंट ये है। आज का जो नॉर्मल युवा है हम वो 100 साल पहले के सबसे अमीर आदमी से भी ज्यादा लकी है। सबसे ज्यादा अमीर आदमी के पास भी इतने रिसोर्स नहीं थे जितने आज के एक नॉर्मल
(1:06:14) इंसान के पास। इसको ना आप एक बार गिनाओ। लोगों को समझ नहीं आता फिर भी। वैक्सीनंस आपके बच्चे 10 हो रहे हैं। जिंदा दो बच रहे हैं। आपने ब्लेड पे एक कट लगवा लिया। अगले दिन ही आपकी मौत है। इनफेक्शन इतनी तेज फैलता था। कोई इलाज नहीं थे। हम बल्कि अभी मेरे ख्याल से कुछ 100 साल पहले तक तो टीबी इनक्योरेबल था। मौत एकदम बिल्कुल। डेथ की डिक्लेरेशन हो गई है। डेथ सर्टिफिकेट था। डेथ सर्टिफिकेट है टीबी। हां। जो आज कोई मानता भी नहीं कि कोई ऐसी बीमारी है। उसकी एंटी उसकी मतलब इतनी सारी उसकी दवाइयां बन चुकी है। बेसिकली तो ये जो चीजें हैं ना जिनके लिए हम
(1:06:51) ग्रेटफुल नहीं है। हम ये कारण बन रही है हमारे स्ट्रेस का। हमें यह नहीं पता कि हमारे पास चीजें अवेलेबल कितनी है। इतनी ज्यादा इतना कंफर्ट हो चुका है कि आदमी ने दिक्कतें बनाना चालू कर दिया है। आदमी कंफर्ट कहते हैं ना कि आदमी के पास स्ट्रगल ना हो तो वो स्ट्रगल बना लेता है। तो उस चीज को ग्रेटफुल नहीं है उस चीज का बिल्कुल भी कि आज से 100 साल पहले वाले आदमी जो एक कट से मर सकते थे। हम आज मेरा हाथ टूट जाए, मेरा एक्सीडेंट हो जाए तब भी जिंदा बचने के चांसेस मेरे कितने ज्यादा हैं। मेरा घर कितना हेल्दी है। मेरा घर कितना सेफ है। मेरे परिवार वाले कितने सेफ हैं।
(1:07:24) एक समय पे एक ब्लैक प्लेग आया। उसने पूरा यूरोप साफ कर दिया। गांव के गांव साफ हो गए। एक फीवर डेथ डिक्लेरेशन होता था उस समय पर। और यूथ को इसकी बिल्कुल रियलाइजेशन ही नहीं है। है कि नहीं? अब ये वेस्टर्न कल्चर की जो देन है वैक्सीन से लेकर ये सारी चीजें हम वो अगर आ गए बताने पे कि उनके कल्चर ने क्या दिया है। हां। तो फिर तो तुम्हारे हाथ पैर खड़े हो जाएंगे। तुम कुछ नहीं कर पाओगे। और ये बातें वही करता है ना। उनके लिए ये मैटर ही नहीं करता। हम वो यह कभी एक इसे हवाबाजी की तरह यूज़ ही नहीं करेंगे कि हमने क्या-क्या दिया है। उन्होंने जो दुनिया को दे दे वो दे के भूल
(1:07:56) चुके हैं और काम करने वाले लोग यही करते हैं। हम इतनी सारी चीजें अपने आसपास यूज़ कर रहे हैं। हम आप यहां पे अभी 10 20 इक्विपमेंट्स हैं टेक्नोलॉजी के। सही बात है। कौन सा बनाया हमने? कोई एक चीज नहीं गिना सकता। एक नॉर्मल भारतीय है उसकी जिंदगी में जो किसी भारतीय ने बनाई हो। अब एक इक्वेशन के बेस पे इतने सारे व्हीकल्स चल रहे हैं। पूरी फ्लाइट उस पे चल रही है। न्यूटन की तीन इक्वेशंस पे। लेकिन क्योंकि हमने एक रूडीमेंट्री लेवल पे एक एक सेंटेंस जो था हमने लिख दिया भास्करराचार्य ने। हम उसके नाम पे जो डंका पीटा फिर हमने उसके बाद में कि ये तो साला हमसे चुरा के गया
(1:08:30) है इसको। हम अरे वाह यार अगर तेरे पास था या तो तू उसे डेवलप करता उसे फर्दर डेवलप करता। तूने तो उसकी कब्र खोद दी। कबर खोद दी उसने। जो बढ़ा रहा है उसको भी गाली दे रहा है। हम जिसने सच में उसे यूज़ किया। बाहर वाले क्यों ना यूज़ करें? तुम कर रहे हो क्या उसे यूज़? एक्चुअली ये पॉइंट बहुत सही है कि नो डाउट हम उस चीज को डिसरिस्पेक्ट नहीं कर रहे कि भास्करराचार्य जी ने वो लिखा। पर एक्चुअली ऐसी बहुत सारी साउथ में एक टेंपल है तो उसकी जो बैकयार्ड है पीछे वाली दीवार जो है उस पे ना कुछ क्रेविंग्स बनी हुई है और उसमें पूरा एिएशन को डिस्क्राइब किया हुआ
(1:09:03) है और वो टेंपल जब आप टेस्टिंग वगैरह करते हो तो आपको पता चलता है कि कार्बन डेटिंग वगैरह से कि लगभग कुछ 8000 साल पुराना है। यानी कि 8000 साल पहले उस चीज की बात की गई है। मैं उस चीज की रिस्पेक्ट करता हूं। लेकिन मुझे साथ में यह भी समझना चाहिए कि वो जब था वो हमारे पास होते हुए भी हमने तो नहीं बनाया और अगर हमने बना भी दिया इसमें भी एक आता है कि कौन से ब्रदर्स हैं महाराष्ट्र के थे उन्होंने बना दिया था उस चीज को बट उस चीज को फिर उन्होंने ले लिया इट इज डिबेटेबल बट स्टिल मैं ये बोलना चाह रहा हूं एक आधी चीज को छोड़ के बाकी चीजों में
(1:09:36) हमने हमारे यहां पर वो डेवलप नहीं की और क्योंकि हमारे पास पहले से थी तो हमारी तो रिस्पांसिबिलिटी ज्यादा बनती थी ऑब्वियसली बिल्कुल कि ऐसा कैसे हो सकता है कि आपके पास सारी चीज़ हैं। लेकिन एक भी चीज़ आपके यहां से नहीं आ रही। हम ऊपर से जब हमें पता चलता है कि हमारे पास में कोई ऐसी चीज है हम जो इस नॉलेज से इस एप्लीकेशन से रिलेट की जा सकती है। तब हम एकदम से आके उन्हें चोर बोल देते हैं उल्टा। ये तो चुराया हमसे। ये तो हमें ऐसे लिख दिया था हमने तो इस तरह से। तो ये कितना ज्यादा अनफेयर है। मतलब एक इंसान जो बहुत ही अपने दिमाग में
(1:10:08) शांत एकदम बिल्कुल अपने ठीक दिमाग में बैठा हुआ वो क्या सोचता होगा कि ये क्या लोग हैं भाई ये? कमाल ही कर दिया इन्होंने तो बिल्कुल। नहीं नहीं बिल्कुल सही है। मेरे ख्याल से यहां पर दो सीखने वाली बात है। पहली चीज तो अपनी हिस्ट्री को आप अपनाओ। उस पे प्राउड फील करो क्योंकि वो आपको एक एनर्जी देती है। दूसरी चीज ये समझो कि गड़बड़ आपने की है। आपके पास सब कुछ पहले से था। इसमें कोई डाउट नहीं है। लेकिन आपने उससे दुनिया नहीं बनाई। ये मॉडर्न वर्ल्ड जो हम देखते हैं ये कहीं ना कहीं मेजॉरिटी चीजें वहां से आई हैं। उन्होंने बनाया। तो इसकी हमें
(1:10:38) रिस्पेक्ट भी करनी चाहिए। उनसे सीखना चाहिए। हमारे पास रिच हिस्ट्री है। उनके पास शायद मॉडर्न टेक्निक्स अच्छी हैं। इसका एक मिक्सचर करके हम काफी आगे जा सकते हैं। दैट्स वैल्यू। अच्छा इसी में एक चीज समझना चाहूंगा कि एजुकेशन सिस्टम जो इंडिया का है ये ना कहीं ना कहीं बहुत पैरालाइज करता है। मेरे को पर्सनली ऐसा लगता है कि आप जो क्रिएटिविटी है या किसी भी एक इंसान को बहुत ज्यादा ना दबा देते हो। क्योंकि आप उसको बचपन से एक ऐसी डायरेक्शन में देते हो जैसे घोड़े के आगे यू नहीं लगा देते हैं कि अब तू सीधा ही देख। तो मतलब इंजीनियरिंग डायरेक्शन में
(1:11:10) लगा दिया तो वहीं लगा दिया। तो हाउ डू यू सी? डू यू हैव एनी नॉलेज अबाउट गुरुकुल सिस्टम क्या था? वो कैसे वर्क करते थे? और मॉडर्न एजुकेशन सिस्टम इंडिया का जो करंट है वो कहां लैक करता है? दोनों चीजें एक्चुअली बहुत ज्यादा कंपेरेबल नहीं है क्योंकि दोनों चीजों का टाइम भी बहुत अलग था। और उनका एग्रोच भी बहुत अलग था। एक्सक्ट्ली। उस समय सोसाइटी बहुत अलग हुआ करती थी। इतनी पपुलेशन नहीं थी। मतलब रोटी कपड़ा मकान ही सबसे बड़ी नेसेसिटी थी। आज ये तो वैलिड टेकन केयर है। हम असल में मॉडर्न जो अब जो हमारा एजुकेशन सिस्टम है हम इसमें बहुत ज्यादा लैक है क्रिटिकल
(1:11:42) थिंकिंग की। अब आप मुझे बताइए हम सब स्कूल गए। हम सब ने स्कूल के साथ-साथ ट्यूशन भी पढ़ा है। बिल्कुल। आपने भी पढ़ा होगा, हमने भी पढ़ा होगा। यानी कि एक जगह पे जहां बच्चा जा रहा है, उसे उस तरह की उस तरह से नहीं पढ़ाया जा रहा कि उसे अलग से सेम चीज सीखने के लिए जाना पड़ेगा। यस। क्योंकि ये चीज एक बार मैंने भी जर्मनी में अपने कुछ दोस्तों से डिस्कस की थी और वो कह रहे थे कि तुम स्कूल के बाद में दोबारा क्यों जाते हो उस चीज को पढ़ने? और हमने कहा यार ये तो सही बात बोल रहा है। बिल्कुल हम क्योंकि वहां पे जो टीचर बोल रहा है आपको
(1:12:16) उसे घर जाके खुद ही प्रोसेस करना है। इसे बोलते हैं लर्निंग। अब हमारा जो सिस्टम है वो ज्यादा मेमोराइजेशन पे बेस्ड है। हम कि आप कितना पढ़ के छाप आओगे पेपर में। रट्टू पेट तोते बनाओ। यस। इसीलिए इंसान सोचता नहीं है यहां पे। और उसी वजह से क्वालिटी इंजीनियर्स और डॉक्टर साहब बना ही नहीं सकते। क्योंकि जो इंसान सिर्फ इक्वेशन से न्यूमेरिकल सॉल्व कर सकता है हम वो नहीं वो कभी भी उसे अप्लाई नहीं कर पाएगा जहां पे इंजीनियर्स की जरूरत है। अब हमारे यहां पे बोलते हैं कि इंजीनियर्स को क्या है? ₹00 मिलते हैं। अरे तुम हो क्या 20,000 के लायक? अगर तुम अपनी बीटेक की
(1:12:49) हिस्ट्री उठा लो तो चारों साल तुमने सारे असाइनमेंट टीपे हैं। हम इससे मांग लिया, उससे मांग लिया। पेपर से दो दिन पहले तुम पढ़ने बैठते थे। बिल्कुल बिल्कुल। ठीक है ना? तो जिस इनोवेशन कहां से आएगी? आप सिर्फ एक अच्छे एम्प्लई बन सकते हो क्योंकि जो आपको बोला गया करने के लिए आपने वो कर दिया। एक्सक्टली। गुरुकुल की अप्रोच थोड़ी सी अलग थी क्योंकि गुरुकुल में ये देखा जाता था कि ये किस चीज में एक्सेल कर सकता है? गुरुकुल की अप्रोच बिल्कुल ही अलग थी और उस मामले में सुपीरियर थी। इसमें कोई शक नहीं है। क्योंकि वो देखते थे कि अगर ये
(1:13:19) धनुर्धर बनेगा तो मैं काहे को इसको संहिता पढ़ाने लग जाऊं। अब यहां पे इसमें बात ही वो है। बिल्कुल बेसिक चीजें हां बिल्कुल बेसिक चीजें तो सबको आनी चाहिए। इतनी व्याकरण सबको आनी चाहिए। हम इतना विज्ञान सबको पता होना चाहिए। इतने रीति रिवाज सबको पता होने चाहिए। लेकिन गुरु की जो पहली जो सबसे पहला ऑब्जेक्टिव यही था कि मैं इस बच्चे की स्ट्रेंथ्स को आइडेंटिफाई करूं। क्योंकि हर बच्चा जन्म से थोड़ा अलग होता है। बिल्कुल हम सब बच्चे अलग-अलग एक घर में एक भाई ऐसा इतना निकम्मा है वो। दोनों ही दो सेम मां-बाप की औलाद है। दोनों सेम एनवायरमेंट है।
(1:13:51) सेम है। वो हर तीसरे दिन थाने से छुड़ा के लाना पड़ता है। और एक को पढ़ने के लिए बोलना नहीं पड़ता। वो टॉप कर जाता है हर बार। क्योंकि बच्चे होते ही शुरुआत से अलग है। मॉडर्न सिस्टम में क्या है कि वो देखता है वह चलता है स्लोएस्ट किड के हिसाब से। जो करिकुलम फिक्स्ड है हम वो इस हिसाब से बनाया गया है कि जो स्लोएस्ट चाइल्ड है वो भी कोप अप कर सके इस चीज से। बिल्कुल। इसी वजह से जो क्रिएटिव बच्चे होते हैं जो बहुत ही ज्यादा जो बिल्कुल बॉक्स में नहीं फिट हो सकते। वो हमेशा फेल करते हैं स्कूल में। उनके नंबर्स नहीं आता। आपने बहुत
(1:14:20) स्टोरी सुनी होगी कि ये तो फेलियर था स्कूल में। बाद में लाइफ में बहुत कर दिया। क्योंकि तुम उसे गलत मापदंड से नाप रहे हो। वो था ही गलत जगह पे। वो मैथ इक्वेशन को तीन स्टेप पार करके सोचता था वो। और वो वहां तीन स्टेप पार कर देता था पेपर में तो उसे नंबर नहीं मिलते थे क्योंकि स्टेप के नंबर मिलते हैं यहां तो। अरे यार स्टेप मार्किंग याद दिला दी। ठीक है ना? अब आप सोच रहे हो स्टेप मार्किंग याद आ गई बात। हां बिल्कुल बिल्कुल। तो ये चीज है जो बुनियादी फर्क आपको मिलेगा देखने में। फार्मूला लिख के आ जाओ। हां। फार्मूला लिख दो। नंबर है।
(1:14:49) उसका नंबर दे देंगे क्योंकि टीचर का कुछ तो लिखा है इस हरामखोर ने। सही बात है। सही बात है। तो जो थिंकिंग इनोवेशन के लिए चाहिए हम उसे आप किसी बॉक्स में बंद नहीं कर सकते। एक्सक्ट्ली क्योंकि स्कूल का जो सक्सेस है हम वो आपकी डिसिप्लिन आपकी शो अप करने की एबिलिटी उस चीज का प्रमाण है। इसीलिए एम्प्लाइज में नंबर इसीलिए देखे जाते हैं। आपने जैसे हमने बोला इंटरव्यू में देखी जाती है कि इस बंदे में कुछ बात है। हम वो बात भी इसलिए देखी जाती क्योंकि बाकी का काम तो सबने किया है। यूनिवर्सिटी में नहीं देते आप तो यहां नहीं बैठे होते। आज पेपर देना ही पड़ेगा
(1:15:20) आपको। और इसी वजह से जो बहुत ही ज्यादा इनोवेटिव लोग होते हैं वो कहते हैं भागना पड़ेगा अब यहां से क्योंकि ये मुझे जहां फंसाना चाहते हैं वहां फंस के मैं भी इन्हीं की तरह हो जाऊंगा। मैं इतना स्लो नहीं चल पाऊंगा। तो ये चीज है जो यहां पे ये लैक्ट करती है कि मां-बाप ये नहीं सोचते कि मेरा बच्चा बिल्कुल अलग है। अब आप मुझे बताइए कि अगर आपने इसे फोर्स करके साइंस स्ट्रीम दिला दी। हम ये इंजीनियरिंग पढ़ने जा रहा है। अब कुल मिला के आपको भी पता है कि 80 90% चांस है कि ये भी 20,000 की जॉब ही कर रहा होगा नोएडा में किसी ऑफिस में बैठ के। पर नहीं
(1:15:47) वो सांत्वना मिल जाती है कि भैया हमने तो साइंस दिलाई थी इसको। एक्चुअली भेड़चाल में ना इंसान बहुत ज्यादा सेफ फील करता है कि सब इंजीनियरिंग कर रहे हैं। सब यह कर रहे हैं तो आउट ऑफ द बॉक्स कुछ ना। इसीलिए क्रिटिकल थिंकिंग बहुत लैक करती है हमारे यहां पे। लोग क्रिटिकली नहीं सोचते कभी भी। आपका कोई टेक भाई इस सर बच्चे को ना बचपन से चीजें बोली जाती है कि ऐसा करना है। हम उसे कभी भी ये नहीं बोला जाता कि खुद सॉल्व करें इसे। क्योंकि हमारे जो मां-बाप हैं उस जनरेशन के उसमें मुझे लगता है कि ईगो की प्रॉब्लम बहुत ज्यादा है क्योंकि इनसिक्योरिटीज बहुत हाई हैं। तो वो क्या
(1:16:19) करते हैं? वो बच्चे को अपना बना के ये समझ लेते हैं कि अगर इसने मेरी बात नहीं मानी तो ये मेरा कैसे हुआ? एक्सपेक्टेशन इतनी ज्यादा है बच्चे के ऊपर कि हर एक काम अब बच्चा भैया ऐसे-ऐसे हिल रहा है बैठे हुए। उसके अंदर एनर्जी इतनी ज्यादा है। वो तो हिलेगा। अब चुप बैठा रहे ऐसे। भाई क्यों बैठूं? उसे सॉल्व करने के तरीके बता ना। जैसा कह रही हूं वैसा कर। नहीं तो चांटा पड़ेगा। हम यह सॉल्व कर, वो सॉल्व कर, यह याद कर, वो याद कर। इससे होता क्या है कि बच्चे की सोचने की एबिलिटी खत्म हो जाती है। अगर उसे फॉलो ही करना है तो वो सोचेगा क्यों? अगर उसे बचपन से ये
(1:16:52) सिखाया जा रहा है कि अगर मैंने जैसा इसने बोला वैसा नहीं किया हम तो गाल पे रैबिट आएगा। हम तो मैं सोचना तो बंद ही कर दूंगा ना। फिर इतनी नेसेसरी होती है वो कंडीशनिंग शुरुआत में कि बच्चे को प्रॉब्लम सॉल्विंग सिखाई जाए। बच्चे को बोला जाए कि खुद बता क्या करूं अब मैं। इसको सॉल्व कर इसे यहां जोड़। वो मां-बाप ईगो पे इतना ले जाते हैं कि उन्होंने पूरा रिश्ता जोड़ दिया, बिजनेस रिलेशन बना लिया कि यह साला मेरी बात नहीं सुन रहा तो मेरा बच्चा कैसे हुआ? तुझे बात पता कहां है? तूने कितने बच्चे पाल लिए हैं या अपनी जिंदगी में ऐसा क्या कर लिया है? देश में
(1:17:23) ऐसा क्या हो गया है? कि उस लायक आपकी बात हो के सुनी जाए। और बात की जो इंटेंसिटी है ना कि फॉलो ऑर्डर ही कर रहे हैं। उससे प्रूव हो रहा है कि पेरेंटिंग में कितनी बड़ी कितना बड़ा वॉइड है। जब शुरुआत से बच्चे को फॉलो करना सिखा दिया तो वो सोचना तो भूल ही जाएगा ना। एक्सक्ट्ली। फिर हम क्लेम करते हैं कि इंजीनियर्स ऐसे नहीं बन रहे, वैसे नहीं बन रहे। अरे इंजीनियर्स को किसी ने सोचना कहां सिखाया कि मशीन तोड़ के देखता हूं अंदर क्या है। उसे तो ये बता दिया कि भैया सिस्टम के फार्मूला लिखने के नंबर मिलने वाले हैं। हम वो सोचेगा कि गाड़ी खोल के देखूं।
(1:17:53) अब चाइना में एक सिस्टम है कि वहां पे प्राइमरी एजुकेशन जो ना करवा दे उसे सजा हो जाएगी। उन्होंने प्राइमरी पे फोकस किया है। उन्होंने शुरुआत पे फोकस किया है। यहां पे नेहरू साहब ने बनवा दिया आईआईटीस पहले। हम उन्होंने कह दिया कि हम ऑफिशियल्स तैयार करेंगे। तो हमारी जो बेसिक एजुकेशन की सीढ़ी है उसी में ही वॉइड है बहुत बड़ा। एक्चुअली नीव कमजोर रखी और ऊपर छत बना दी बहुत मजबूत। तो उसका फायदा क्या हुआ? इसी वजह से स्पिरिचुअलिटी काम नहीं कर पाई इस देश में। हां। टाइम में नहीं। उसको का खा तो सिखाया नहीं। पर वो सारे मंत्र याद करके बैठा है।
(1:18:25) क्योंकि उससे आह्वान करके वो वर्षा तो वैसे करवा देगा धन जी। उसे धन कमाना नहीं सिखाया आपने। पर वेस्ट इसलिए जीत गया। क्योंकि उसने सबसे पहले ह्यूमन नीड को बेस पे अगर आप पुरुषार्थ में देखो तो अर्थ जो है धर्म अर्थ काम मोक्ष ये अर्थ जो है अर्थ है चोरी करना क्यों गलत है किसी से एक सिद्ध आदमी कहेगा मुझे क्या जरूरत है ले जा ऐसा नहीं है क्योंकि अगर आप किसी का धन चुराते हो आप किसी का खाना चुराते हो तो वो धर्म कैसे फॉलो करेगा वो सर्वाइव कैसे करेगा हम सब कनेक्टेड है सब कनेक्टेड है तो इंसान का जो काम है जो मटेरियलिस्टिक वर्ल्ड है उसे ककर करना
(1:19:02) पहला प्राथमिक एक ऐसे बहुत ही कम बुद्ध आदमी जो कहेंगे कि मैं पहले सीधा स्पिरिचुअलिटी पे जंप करता हूं। अभी मैं Instagram पे क्योंकि हम स्पिरिचुअलिटी की काफी बातें करते हैं। एक 18 साल का बच्चा मुझे डीएम करके बोल रहा है भैया मुझे सन्यास लेना है। कोई मोनेस्ट्री पता है आपको जहां मैं जा सकता हूं। मैंने कहा अभी तो तेरे पापा भी सन्यास लेने लायक नहीं हुए। तू क्या पूछ रहा है मुझसे? हम क्योंकि आडंबर इतना सुन लिया उसने क्योंकि हवा में ही बातें होती है हमारे यहां पे। स्पिरिचुअलिटी की एक्चुअली बात बहुत ज़्यादा हो रही है ऑनलाइन सिस्टम में लेकिन उसको लेके
(1:19:35) स्टेप्स नहीं लिए जा रहे जो लास्ट डिस्कशन हमने किया था उसमें भी यही बातचीत की थी कि कौन-कौन सी क्रियाएं हैं अगर आपने कंटेंट कंज्यूम कर लिया इससे कुछ नहीं होगा मतलब काम करने की तैयारी काम नहीं है। काम करोगे वही काम है। अगर कोई आपको अंकल पार्क में सैकड़ों मिल जाएंगे जो कहेंगे बेटे अगर हमारे स्क्रिप्चर से एक मेडिटेशन टेक्निक उठा के दे दी ना सारी जिंदगी सॉल्व हो जाएगी और आप उससे पूछो चलो बता दो फिर अब बता भी दो सही बात है मेरे मां-बाप मुझे डांट रहे हैं पढ़ाई पे ध्यान दे पर वो मुझे ये नहीं बता रहे कि ध्यान देना कैसे है क्योंकि सब कुछ बाय
(1:20:09) फोर्स करवाया जा रहा है हम पूरे सिस्टम में ज्यादातर जगहों पे ओबेइंग सिखाई जाती है हम अगर एक बच्चा अपने मां-बाप को बोल दे जो कि बहुत ही धार्मिक है मुझे तो लगता है शायद मैं नास्तिक िक बनूंगा उसकी आफत आ जाएगी उस दिन अरे दिक्कत हो जाएगी क्योंकि डिफरेंट थॉट प्रोसेस आप अलव ही नहीं कर सकते वो ये सोच ही नहीं सकते कि इंसान इस बाउंड्री सीमा के अराउंड भी जाके सोच सकता है कुछ बिल्कुल और इसी वजह से हमारे यहां पे एक जो टॉक्सिक चीज होती है कि जो भी इंसान इस तरह की सोच रखता है जो कि कॉमन वेव ऑफ़ थॉट है जो फील है उसके खिलाफ चला जाए तो उसे
(1:20:42) हम भसम ही कर देते हैं उसे उठने नहीं देंगे कभी भी उसे एंटी नेशनलिस्ट उसे एंटीनेशनलिस्ट का ठप्पा लगा देंगे ये अंग्रे अंग्रेज का बच्चा है। अंग्रेज की औलाद है। साला बहुत उछल रहा है। क्योंकि जो बात है, जो टिप्पणी जिस चीज पे की जा रही है, आलोचना जिस चीज पे की जा रही है, उसको तो इग्नोर कर देंगे पर उसके पीछे का जो चीज है, जो एसोसिएटेड है, उससे जोड़ के उसे गैस लाइट कर देंगे और उसे मार देंगे वहां पे। और ये हिस्ट्री से ही हमें देखने को मिली है काफी ये चीज। नहीं नहीं ग्रेट। इट हैज़ बीन लवली टाइम भाई। मजा आया और इस पॉडकास्ट को बड़े अतरंगी तरीके से किया हम
(1:21:15) लोगों ने। है ना? एंड आई लाइक दैट साइड ऑफ यर्स। कोई एक फाइनल मैसेज जो आपके माइंड में हो ऑडियंस के लिए अप टू यू। सच बोलो। खुद से सच बोलो। हम दिमाग का इस्तेमाल करो। दिमाग का इस्तेमाल करो। किसी भी चीज को सुनने से पहले और जो बोलते हो बोलने से पहले 10 बार खुद से सवाल करो कि आया कहां से है। डाटा है मेरे पास उसको प्रूफ करने के लिए। लोग कह देते हैं कि मैं तो लिख के दे रहा हूं ऐसा ही होगा। अबे तुझे कैसे पता? कहां लिखेगा और उससे होगा क्या? वो कागज को मैं कोर्ट में ले जाऊं। तो लिख के क्या देगा तू? और तुझे क्या पता कि तू क्या बोल
(1:21:47) रहा है? भाई इसने ऐसा इसलिए बोला है क्योंकि ये सोच रही थी। तुझे क्या पता वो क्या सोच रही थी? तू खुद से पूछ तो इसे कहते हैं सुक्रेटिस एनालिसिस। कि आप अपने हर थॉट को तोड़ रहे हो। चल ये मैंने बोला तो क्यों बोला? मेरे दिमाग में क्या आया? अब इसकी बैकिंग क्या है? इसके पीछे का लॉजिक क्या है? डेटा क्या है? थॉट प्रोसेस क्या है? यह खुद से तुम जितना पूछोगे उतना पता लगता चलेगा कि तुम्हारे हर एक शब्द फैब्रिकेटेड है। झूठ, नल, वॉइड कोई उसमें वो नहीं है, अर्थ नहीं है। तो वो जितना तुम सोचोगे उतने अच्छे थॉट्स तुम्हारे दिमाग में आएंगे। हां इसका मेरे
(1:22:19) पास डाटा है। हम ये मैंने करा है या मैंने पढ़ा है या स्टडी देखी है। बिल्कुल। तो अपने शब्दों को सुन के दोहराओ मत। पाइप पर थोड़ी हो तुम टॉयलेट के। यहां से गया और यहां से निकाल दिया। अब लोग WhatsApp पे पढ़ के ऐसे कॉन्फिडेंस से बताते हैं। एक आंटी कह रही है कि संस्कृत तो कोडिंग लैंग्वेज बन गई है। वो तो यूज़ हो रही है। वो तो यूज़ हो रही है। पिछला रॉकेट वैसे नहीं भेजा हमने मंत्र मार्ग है। नासा अब नासा कहीं सुन लिया होगा। संस्कृत कहीं सुन लिया होगा। क्या पता एक ही जगह सुन लिया हो। उसे घोषित ही कर दिया कि नासा में तो चल रहा है ये काम।
(1:22:49) विदाउट वेरिफिकेशन उसका बाजा बजा देते हैं। एक्चुअली जब आप ऐसी कोई टिप्पणी करते हो ना आप बेइज्जती और कराते हो पूरी संस्कृति। जब वो गलत प्रूफ होती है कि जो वैलिडिटी थी भी अब वो भी खो गई कि इनकी बात तो सुनो ही मत। क्रेडिबिलिटी गिरा रहे हो आप। बिल्कुल एक्चुअली आप सनातन की क्रेडिबिलिटी गिरा रहे हो जब ऐसी हरकत अब तुम्हें संस्कृत का कुछ नहीं पता तुम्हें नासा का कुछ नहीं पता दोनों को जोड़ के घोषित ही कर दिया तुमने तो अब कितना ज्यादा लोग प्राउड हो के बोलते हैं कि हम सनातनी है अगर आप पूछो आप सनातन दर्शन के छह दर्शन सब बता सकते हो मुझे कौन है
(1:23:19) आपको किसी पता है आपको पता है मेरे को छह पार्ट जो है सनातन दर्शन के नहीं किसी को भी नहीं पता उसे षट दर्शन बोला जाता है अच्छा जिसमें दोद के पेयर में तीन स्कूल मिलते हैं हमें ठीक है ठीक है तो जैसे कि वेदांत और मीमांसा एक है ठीक न्याय और वैशेषिक ये एक साथ चलते हैं। और योग और सांख्य ये एक साथ चलते हैं। योग्य तो ये छह दर्शन है जो सनातन दर्शन को बनाते हैं। अगर आप इन छह का ज्ञान रखते हो तो आप अपने को सनातन ही बोल सकते हो। बिल्कुल ना तो पतंजलि से लोगों को सीधा बाबा रामदेव ही याद आता है। उन्हें ये नहीं पता कि पतंजलि कौन थे। उन्होंने पूरे मतलब
(1:23:54) उन्होंने यार प्रैक्टिकली लिख के दे दिया आपको सब कुछ कि दिस इज द वे। मतलब वह मेरे ख्याल से पहले ऐसे इंसान थे जिन्होंने इतने अच्छे तरीके से लिखा कि आप बेसिक से शुरू करो और मोक्ष तक का मैं रिटन में रास्ता दिखा सकता हूं तुम्हें। हम तंत्र विद्या सिखाई गई। बिल्कुल कि अगर आपको बिना स्ट्रक्चर के चलना है तो आप तंत्र के रास्ते पे जा सकते हो। हां। एक योग आपको सिखाता है कि सेक्स की अर्ज को कैसे रिप्रेस करना है। उसे कैसे मतलब तंत्र तंत्र सिखाता है। कैसे कैसे? इसी के साथ में एक सिखा रहा है रस्सी जलानी कैसे है और एक सिखा रहा है कि इसी रस्सी को पकड़
(1:24:25) के कैसे ऊपर जाना है लेकिन तंत्र से आप नॉर्मल आदमी से पूछो तो उसे झाड़ फूंक आ जाता है क्योंकि इतना ही सुना है उसने बाहर से देखा भी यही है देखा भी यही है और शिव जी की पूजा कर रहे हैं व्रत रख रहे हैं शिवजी के नाम के भैरव तंत्र का आता भैरव तंत्र का पता ही नहीं है कुछ पूछ लो उनसे कुछ नहीं पता होगा हनुमान जी के नाम के व्रत रख रहे हैं ट्यूसडे को नॉनवेज नहीं खाते जैसे वो तो बैठ के देख रहा है ये ये इसका काम ये जाने वाला था झटका शॉप पे पर गया नहीं हां इसे गोली मार ही देता या बच गया क्योंकि मेरे नाम की इसने छुट्टी ले ली चिकन से।
(1:24:54) कैसी बेवकूफी है? यह प्रूफ है इस चीज का कि हमारी अबब्रिंगिंग कितनी होलो है कि हमें इतनी अकल नहीं है कि हम एक दिन छोड़ के स्वर्ग में जाने की प्लानिंग कर रहे हैं। हम इतना भी लॉजिक बिल्डिंग नहीं है दिमाग में। इतनी सेंस नहीं है। इतनी क्रिटिकल थिंकिंग नहीं है कि इतना सिंपल लॉजिक ना समझ पाए कि एक दिन करने से होगा क्या? सही बात है। रिजर्वेशन मिल जाएगा तुम्हें वहां पे। और तुम हनुमान जी के बारे में बता दो कुछ। तुम ब्राह्मण लिखते हो गाड़ी के पीछे। तुम ब्राह्मणों का ज्ञान दे दो। तो क्या पता तुम्हें किसी भी चीज के बारे में?
(1:25:20) उसका ऐलान क्यों कर रहे हो? वो बदनामी हो रही है ब्राह्मणों की भी। प्रोस्पेक्टिव यहां पर बेइज्जती करना नहीं है। पर्सपेक्टिव ये है कि इंट्रोस्पेक्ट करो भाई। क्योंकि आप जब एक शब्द का इस्तेमाल करते हो कि मैं सनातनी हूं तो आप पूरे सनातन को रिप्रेजेंट करने के लिए आ गए। अब आपकी एक गलती पूरे हजारों साल के इतिहास पे किसी मूर्ख को क्वेश्चन मार्क लगाने का हक दे देती है। ये प्रॉब्लम है। उससे सब फर्ज हो जाता है ना। जैसे कि बाप की पहचान बेटे से होती है। एक्सैक्टली बेटा ऐसी हरकतें करेगा तो बाप की तो बदनामी होगी और क्या होगा? बिल्कुल थैंक यू। थैंक यू सो मच भाई आज के
(1:25:54) टाइम के लिए। नेक्स्ट टाइम कभी फिर से बैठते हैं। तब तक के लिए नमस्कार। नमस्कार देव। नमस्कार। इस पडकास्ट का आपको बेस्ट पार्ट क्या लगा वह मेरे को कमेंट सेक्शन में जरूर बताएं और सब्सक्रिप्शन बटन पर प्लीज क्लिक करें क्योंकि आपका एक सब्सक्रिप्शन हम लोगों को बहुत मोटिवेट करता है ताकि हम ऐसे ही अच्छे-अच्छे गेस्ट को बुलाएं और इस तरीके का क्वालिटी कंटेंट जो आपको इंटरेस्टिंग भी लगे और आपकी लाइफ में कुछ पॉजिटिव इंपैक्ट भी डाले वह बना सकें। सो, स्टे ट्यून।
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