Food as Medicine | Let Food Be Your First Medicine | Healthy Eating ~ ABK Sir #ottbharat
Author Name:OTT Bharat by Abhimanyu Kumawat
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Youtube Video URL:https://www.youtube.com/watch?v=z27V1v461HU
Transcript:
(00:09) साथियों ओटी भारत यानी कि ओजस्वी तेजस्वी तपस्वी भारत एक मिशन है। हिंदुस्तान के नौजवानों को हिंदुस्तान के हर एक नागरिक को ओजस्वी तेजस्वी तपस्वी बनाने का। मेरी जिंदगी का हर एक क्षण और मेरे शरीर का हर एक कण इस मिशन के लिए समर्पित रहेगा और मेरे प्रयास में परिश्रम में समर्पण में भत्ति बराबर की कमी आपको कभी महसूस नहीं होगी। मुझे पता है कि अगर भारत का हर एक नागरिक चाहे वो नौजवान हो चाहे वो बालक बालिका हो चाहे वो वृद्ध व्यक्ति हो अगर ओजस के साथ में तेजस के साथ में और तपस्वीता के साथ में जीता है तो शायद भारत पूरी दुनिया में एक सर्वशक्तिमान राष्ट्र
(00:51) के रूप में स्थापित हो पाएगा। आप सभी ओटीटियंस का इस चैनल पर इस प्लेटफार्म पर स्वागत है। आइए भारत को ओजस्वी तेजस्वी तपस्वी भारत बनाते हैं और इस यात्रा को शुरू करते हैं। साथियों नमस्कार बहुत-ब बहुत बहुत नमस्कार। आप सभी का स्वागत है इस एक बेहतरीन सेशन में जिसका नाम है वर्ल्स मेडिसिन और आप देख रहे हैं ओटीटी भारत यानी कि ओजस्वी तेजस्वी तपस्वी भारत। मेरे से अक्सर सभी लोगों की शिकायत रहती है विशेष तौर से ओटीटियंस की कि आपसे मुलाकात बड़े लंबे दौर से होती है।
(01:40) और मैं भी मानता हूं कि जितना फ्रीक्वेंटली मुझे आपसे मिलना चाहिए, बात करनी चाहिए, मैं नहीं कर पाता। और कारण यही निकल के आता है कि मैं उस कंटेंट में कॉम्प्रोमाइज नहीं करना चाहता। मैं चाहता हूं कि जब कोई सेशन कोई भी इंसान भारत का हो, भारत के बाहर का हो जब सेशन देखे तो सिर्फ उसकी नॉलेज में चेंज ना आए। उसकी जिंदगी बदल जानी चाहिए। और जब आपके लक्ष्य बड़े होते हैं तो आपको लंबे समय तक चलना और लंबे समय तक जलना होता है। किसी छोटे-मोटे काम को करके आप थोड़े समय
(02:30) में लाइमलाइट में रहेंगे फिर गायब हो जाएंगे। मैं वो चीज नहीं चाहता। खैर शुरुआत करते हैं। आज का मुद्दा है फूड एज मेडिसिन। आई होप आप सभी लोग अपने परिवार तक इस [गला साफ़ करने की आवाज़] चीज को पहुंचाएंगे। अपनी जिंदगी में इंप्लीमेंट करेंगे और शांति और सुकून से एक मूवी की तरह इस एपिसोड को एंजॉय करेंगे। क्योंकि जिंदगी में हमने हजारों घंटे रील्स देखने में गुजार दिए हैं। लेकिन जिंदगी नहीं बदल पाई है। क्योंकि जिंदगी देखने के लिए दो-दो फीट के 100 गड्ढे नहीं 200 फीट का एक ही खोदना होता है। यानी कि 200 रील्स देखने से
(03:15) जिंदगी नहीं बदलती। एक डीप सेशन थॉट्स को इन डेप्थ बदल देता है और यही ओटीटी भारत काम करता है जिसका लक्ष्य है कम से कम 10 करोड़ भारतीयों की जिंदगी को हमेशा के लिए बदल देना। शुरुआत करते हैं। देखिए सबसे पहली बात फूड जो है वो सिर्फ हम यह कहें कि एक फ्यूल है तो अब यह कहना गलत होगा। फूड को सिंपली फ्यूल बोल देना एक सही बात नहीं क्योंकि फूड से आगे की चीज है और मैं एक चीज की श्योरिटी आपको दे सकता हूं आज भारत
(04:01) कितनी सारी समस्याओं से पीड़ित है। आज हार्ट डिजीज मैं मतलब इतना दुख भरी बात है कि आज के तीन दिन पहले मेरे एक दोस्त की डेथ हो गई। बिकॉज़ ऑफ हार्ट इश्यूज। ही वास वेरी यंग। वेरी यंग और मैं सच बता रहा हूं जब मैंने यह न्यूज़ सुनी मैं नॉर्मल नहीं हो पाया दो दिन तक हिज नेम इज सौरभ और वो दो-तीन गली के आगे ही रहता है। रहता था। आई वास वेरी शॉक्ड। तो मैं इतनी सारी चीजें देखता हूं। अपने भारत देश में चीजें देखता हूं। अपने यार दोस्तों में चीजें देखता हूं। तो मेरा मन तड़प उठता है कि यार ये सब क्यों? और मैं इन्हीं चीजों का कलेक्टिव इंफॉर्मेशन, कलेक्टिव
(04:47) एक्सपीरियंस आप तक पहुंचाने का प्रयास करता हूं। तो इसको सिंपली फूड बोल देना एक कहीं ना कहीं जस्टिफिकेशन नहीं होगा। इनरियल इनरियल फूड एक इंफॉर्मेशन है। एक इंफॉर्मेशन है जो आपकी जेनेटिक्स को बदल देता है। मतलब आपको जिंदगी में जेनेटिकली क्या मिला है उसको बदलकर मैं एक चीज पहले ही बता देता हूं कि यह सेशन थोड़ा डिफरेंट है। थोड़ा लॉजिकल है। और थोड़ा सा पेशेंस वाला है। शांति से बैठिएगा क्योंकि आज हम बहुत सारी चीजों का पोस्टमार्टम करने वाले हैं। डीएनए करने
(05:31) वाले हैं। ब्लैक एंड वाइट [गला साफ़ करने की आवाज़] करने वाले हैं जो भारत में चलता है और वहां कुछ नहीं होता है। खैर इंफॉर्मेशन इसे कहा जाए कहीं ना कहीं सच होगा। क्या ये हमारी जेनेटिक्स यानी हमारे अनुवांशिकी से भी ज्यादा इंपॉर्टेंट है? तो मैं कहूंगा हां। क्या ये हमारी जेनेटिक्स को बदल सकता है? मैं कहूंगा हां। क्या फूड एक मेडिसिन है? मैं कहूंगा बिग यस यस ट्रूली फूड इज मेडिसिन दुनिया में दो टाइप के लोग हैं वो जो कचरे की तरह खाना खाते हैं और खाने की तरह दवाइयां लेते हैं दूसरे वो जो खाने को ही दवाई मान के खाते हैं और
(06:13) जिंदगी भर स्वस्थ रहते हैं। कुछ लोग हैं जो 35 की उम्र में दवाइयां शुरू कर देते हैं और कुछ लोग हैं जिनको 95 साल की उम्र तक भी मेडिकल स्टोर का मुंह नहीं देखना पड़ता। आज भारत में सुबह दोपहर शाम कभी भी देख लीजिए किसी भी मेडिकल स्टोर पर यह सीन दिखता है। भीड़ लगी हुई है हर तरफ। खैर, हम बहुत सारी चीजों को आज डिस्कस करने वाले हैं। इनफाइनाइट चीजें हैं मेरे पास। शुरुआत करते हैं। देखिए मैं इस सेशन को स्टार्ट करूं उससे पहले एक चीज बहुत अच्छे से समझा देता हूं कि आपकी जिंदगी में जो आपका शरीर है जो आपकी बॉडी है वो आपका ट्रू बिजनेस है।
(06:58) दैट इज ट्रू बिजनेस। दैट इज ओनली स्टार्टअप। मतलब मैं यह कहूंगा कि अगर कहा जाए कि हमारे शरीर में हम रहते हैं। बाकी सारी चीजें किराए की है। आपका मकान किराए का है। आपका घर किराए का है। और मैं अगर यह कहता हूं कि आपका परमानेंट रेजिडेंस कौन सा है? आपका परमानेंट एड्रेस क्या है? तो लोग आधार कार्ड ढूंढने लगते हैं। जब मैं लोगों से पूछता हूं कि बताओ आपका परमानेंट एड्रेस कौन सा है? दिस सर्च फॉर आधार कार्ड। दिस सर्च फॉर वोटर आईडीज। दिस सर्च फॉर द पैन कार्ड। आपका रियल एड्रेस जो है ना वो क्या है? वो आपकी बॉडी है। परमानेंट एड्रेस इज़ योर बॉडी। एंड नो वन
(07:47) नो वन अंडरस्टैंड दिस। देखो ओटीटी भारत मिशन इसीलिए है बिकॉज़ इट इज़ बियड द एंबिशंस। और इसका एक ही गोल है जो इंसान ओटीटी भारत पर आएगा शारीरिक रूप से फिजिकली मेंटली स्पिरिचुअली सेक्सुअली वो कहीं ना कहीं हमेशा के लिए बदल जाता है। तो आज मैं कुछ ऐसी बातें आपको बताने वाला हूं जिससे आपको हार्ट अटैक जैसी संभावनाएं ना के बराबर हो जाएगी। बॉडी में जो सूजन होता है ऐसे कैंसर होता है वह चीजें सिग्निफिकेंटली डिक्रीज हो जाएंगी। आप कुछ ऐसी चीजें समझेंगे जिससे आपकी रोज की जिंदगी का सरोकार है। बाकी रीज़ देखकर तो जिंदगी कट ही रही है।
(08:33) मजा आ ही रहा है। और मैं चाहता हूं कि हम ये समझ लें कि खाना जो है ना वो सिर्फ भूख नहीं मिटाता। इसका काम भूख मिटाने का नहीं है। यह सिर्फ भूख नहीं मिटाता। यह फ्यूचर बनाता है। अगर मैं कहूं कि हमारा फ्यूचर किस चीज से डिसाइड होता है तो द मोस्टेंट आस्पेक्ट विल बी द फूड। दैट इज द ओनली आस्पेक्ट इन द रीज़न अगर मैं दुनिया के सबसे पीक सक्सेसफुल लोगों को देखता हूं। इफ यू सी एनीवन? एंड यू आस्क देम कि आपकी जिंदगी में आपने इतना कुछ
(09:20) हासिल कर लिया। क्या खाते हैं ऐसा? है ना? बिकॉज़ वी नो कि रोनाल्डो रोनाल्डो बना खाने की वजह से बना। विराट कोहली विराट कोहली बना खाने की वजह से बना। मेसी मेसी बन पाया खाने की वजह से बन पाया। इस दुनिया में जो एक्सट्रीम परफॉर्मेंस हैं जो अपने फील्ड में बहुत बड़े खिलाड़ी हैं। दे अंडरस्टैंड दैट फूड इज द फ्यूचर। फूड इज द मेडिसिन। लेकिन आज हमारा देश सही डायरेक्शन में नहीं है। और सिर्फ आज नहीं किसी भी देश की सरकार को इस बात की रत्ती बराबर चिंता नहीं है कि उस देश के नागरिक क्या खा रहे हैं। उनको आप चंदा दो वो आपको धंधा देंगे।
(10:04) किस फूड पैकेट में क्या कचरा पैक हो रखा है? नो वन नोज़ क्या पड़ी है उनको? उनको पता है हम टेंपरेरी हैं। हमें चंदा लेना है। उनको धंधा देना है। हमारी सरकार आनी चाहिए। दैट्स इट। व्हिच गवर्नमेंट केयर्स नो वन एंड इन रियल व्हेन गवर्नमेंट स्टॉप केयरिंग देश के लोगों के हालात तो आपको पता ही है। खैर स्टार्ट करते हैं। हिपोक्रेटस हिपोक्रेटस एंड हिपोक्रेसी ये हमको आज समझ लेना जरूरी है। हिपोक्रेटस एक वो इंसान है जो
(10:54) जीसस से पहले पैदा हुए यानी ईसा मसीह से पहले पैदा हुए और उस इंसान ने 2000 साल पहले कहा था यूज़ योर फूड एज अ मेडिसिन बिफोर योर मेडिसिंस बिकम योर फूड एंड राइट नाउ इट इज़ हैपनिंग ए 35 ईयर ओल्ड इज़ वेकिंग अप एंड कंज्यूमिंग मेडिसिंस कोलेस्ट्रॉल की दवा है। यह बीपी की दवा है। यह नींद की दवा है। यह शुगर की दवा है। यह एसिडिटी की दवा है। यह शांत रहने की दवा है। यह परेशान ना होने की दवा है। और दवा है, दवा है, दवा है। दैट्स इट। व्हाट ही टोल्ड 2000 साल पहले 2000 आपको पता है
(11:41) कि जब मैं मेडिकल कॉलेज में था बिकॉज़ मेरा प्रोफेशन अब टीचिंग हो गया है। मेरा बैकग्राउंड एमबीबीएस का रहा है। और जब आप मेडिकल कॉलेज में जाते हैं तो जो एलोपैथिक मेडिसिन के फाउंडर हैं दैट इज़ हिपोक्रेटस। तो हम एक हिपोक्रेटिक ओथ लेते हैं। और हिपोक्रेटिक ओथ में बहुत सारी चीजें होती हैं। हिपोक्रेटस के स्टेटमेंट्स को मॉडर्न मेडिकल साइंस बहुत सीरियसली लेती है बिकॉज़ ही इज़ द फादर ऑफ मॉडर्न मेडिकल साइंस। बहुत इंटरेस्टिंग बातें इन्होंने बोली जिसमें से एक मैंने आपको बताई दैट यूज़ योर फूड एज अ मेडिसिन बिफोर यू स्टार्ट योर मेडिसिन एज अ फूड। उन्होंने यह भी कहा कि
(12:22) पैदल चलना दुनिया की सबसे बड़ी दवा है और आज हम टॉयलेट जाने के लिए रैपिडो का यूज़ करते हैं। रैपिडो बुक करते हैं और फिर टॉयलेट जाते हैं। ये आज हमारे हालात हैं। हमें ऑफिस में, कार में, घर में हर तरफ कुर्सी तो चाहिए। सोफा चाहिए, बिस्तर चाहिए। हमें पता ही नहीं कि हमारे दो पैर भी हैं। मुझे तो समझ नहीं आता गवर्नमेंट ने पल्स पोलियो की दवा क्यों पिलाई भारत के लोगों को समझ ही नहीं आता मुझे। उनको पैरों का यूज़ करना ही नहीं है। खैर 200 साल पहले इन्होंने कहा कि भाई फूड इज मेडिसिन। और आज
(13:08) इस समय में जब मैं देख रहा हूं तो गलीगली मुझे एक ही चीज दिखती है। हर गली हर गली मेडिकल स्टोर क्यों पता है? एक समय था आप मान लीजिए 20 इयर्स एगो या 25 इयर्स एगो मान लीजिए मेडिकल स्टोर हॉस्पिटल्स के आसपास होते थे कि जहां हॉस्पिटल होगा वहां पर मेडिकल स्टोर्स होते थे। हां अब आज के 15 16 साल पहले जब मेडिकल स्टोर किसी एरिया में खुलता था ना तो लोग सोचते अरे यार मेडिकल स्टोर खुल गया यहां पे। एंड नाउ इट इज द नीड। बिकॉज़ वी ऑल स्टार्टेड लिविंग अगेंस्ट द
(13:56) नेचर। वी ऑल स्टार्टेड लिविंग अगेंस्ट द नेचर। एंड दैट्स व्हाई वी आर स्ट्रगलिंग। आज आप कहीं भी चले जाओ, किसी भी मोहल्ले में चले जाओ, आपको वहां डायबिटीज का पेशेंट मिल जाएगा, बीपी का हाइपरटेंशन का पेशेंट मिल जाएगा, कोलेस्ट्रॉल का मिल जाएगा, फैटी लीवर का मिल जाएगा। और इंफेक्शन के तो कहने ही क्या वह तो चल ही रहे हैं। जवाब ही नहीं है। क्योंकि हमने क्या कर लिया है ना? हमने डाइट को इतना कॉम्प्लिकेटेड कर लिया है। घटिया
(14:42) खाना खाकर हम शरीर को डस्टबिन मानते हैं। आज शरीर क्या है? डस्टबिन। डोमिनोज ने बोला कि दो पिज़्ज़ा सिर्फ 199 का मिलेगा। अरे भाई और हम बस पीछे पड़ गए। वह रोटी के ऊपर जो सब्जियां लगाकर बेच रहे हैं जिसमें मैदा है पता है मैदा के बारे में आज मैं बहुत बात करने वाला हूं। बहुत डिटेल में बात करने वाला हूं। और हमारा पेट सड़ गया है। वी आर सफरिंग फ्रॉम कॉन्स्टिपेशन। बहुत समय से हमारा पेट ही ठीक नहीं है। हमारा दिमाग कैसे ठीक रहेगा? मैं तो हमेशा कहता रहा हूं कि सक्सेसफुल लोगों के पास में खराब पेट खराब करने का टाइम ही नहीं होता।
(15:27) आई डोंट थिंक कि सक्सेसफुल लोग खराब पेट को हैंडल कर सकते हैं। बिल्कुल नहीं कर सकते। लेकिन हमने हमारे शरीर को डस्टबिन मान रखा है। और मैं यही बात कहता हूं कि oटीt भारत पर जितने लोग जुड़े हुए हैं हम देश को बदलने की बात नहीं करें। हम दुनिया को बदलने की बात नहीं करें। हम खुद को बदलें। हम खुद का ख्याल रखें। हम खुद मजबूत बने। हम खुद ताकतवर बने। बाकी सब हम खुद बदल देंगे। हमें पूरी दुनिया बदलनी है। बस खुद को नहीं बदलना। एंड दैट इज व्हाई वी स्ट्रगल। तो हमने क्या कर लिया है कि पहले तो हम रियल फूड खाते थे। और अब हम फूड के नाम पे
(16:07) क्या खाते हैं? पैकेट्स। पैकेट्स। और ये पैकेट्स क्या करते हैं? ये पैकेट्स तीनचार चीजें आपके शरीर में बढ़ा देते हैं। क्या बढ़ाते हैं? सूजन। इनफ्लामेशन। आज हमारे देश के हालात ऐसे हैं कि कैंसर पॉलिसी शुरू हो गई है। कैंसर वर्ड ऐसा होता था कैंसर हो गया है। नॉट इट्स कॉमन कैंसर इज़ नथिंग बट द स्वेलिंग इनफ्लामेशन। क्रॉनिक इनफ्लामेशन सूजन को बढ़ाने वाला फूड है। या फिर ऐसा फूड है। मतलब मैं सूजन की बात करूं उससे पहले तो मैं यह कहूंगा कि क्यों हो क्यों रहा है यह? क्योंकि खाने में क्या है? भयंकर
(16:52) चीनी। भयंकर तेल, भयंकर नमक, पाम ऑयल सब में यूज कर रहे हैं। कोई कुछ क्वालिटी का उसमें है नहीं कंटेंट। मैदा कोई फाइबर नहीं और शरीर क्या है? डस्टबीन है। मतलब रियल फूड तो प्योरली मिसिंग है। तो जब आप यह फूड लेते हो तो क्या होता है? सूजन पैदा होगी। इनफ्लामेशन पैदा होगा। फैट बढ़ेगा। फैट बढ़ रहा है। सूजन बढ़ रहा है। अब यह सूजन के ही तो डिफरेंट-डिफरेंट फॉर्मेट्स हैं। सूजन के डिफरेंट-डिफरेंट फॉर्मेट्स हैं। कैंसर इज़ नथिंग बट द क्रॉनिक इनफ्लामेशन।
(17:39) और इंसुलिन बढ़ रहा है, मोटापा बढ़ रहा है और क्या कम होता जा रहा है? हीलिंग और रिपेयर वह बढ़ने की जगह ड्रॉप हो रहा है। और हमें किसी को समझना ही नहीं है। ये किसी को नहीं समझना। हम क्या कर रहे हैं? हम यह सब करके 30 की उम्र में दवाइयां शुरू कर रही हैं। 30 प्लस इयर्स की ऐज में हम मेडिसिन के साथ में खुश हैं। चलो भाई साहब हमको लगता है कि डॉक्टर्स महंगे अस्पताल फॉरेनर सप्लीमेंट्स है ना ब्लू बेरीज अवकाडोस
(18:27) इनसे है ना और बड़े अस्पताल ऑटिस कोकिलाबेन टाटा हॉस्पिटल्स एमबीबीएस एमडी डीएम डॉक्टर्स वो हमें ठीक करेंगे ना वो जो तुम्हें दवाइयां लिख रहे हैं ना वो खुद पहले दवाइयां लेके आ रहे हैं। कोई ठीक ही नहीं है। क्यों? लैक ऑफ डिसिप्लिन। वी आर नॉट ईटिंग फूड। वी आर ईटिंग एडिक्टिव सब्सटेंस पैक्ड इन द पैकेट्स। मैं उसकी कहानी भी समझाऊंगा आप लोगों को। और ये जो लोग हैं ना जो वास्तव में रियल फूड ले रहे हैं। जो वास्तव में हीलिंग और रिपेयर पे ध्यान दे रहे हैं। ये कैसे होगा? उसकी बात भी हम लोग करेंगे। ये लोग ये कोई इन्होंने कोई ब्लूरी नहीं खाया है।
(19:08) कोई हवकैडो नहीं खाया है। लेकिन फिर भी ये 95 इयर्स तक बिना दवाई जी रहे हैं बिना दवा और किसी को नहीं समझना किसी को नहीं जानना कि ऐसा क्यों ये ये सब क्यों है हम पैकेट्स बन चुके हैं एक फ्लैट में एक कमरे में कैदे कभी याद है धूप में कब बैठे थे 20 मिनट कभी याद है सांप हवा में कब बैठे थे घंटा भर कभी याद है कभी 5 किमी पैदल गए थे कहीं बिना कैब के कभी याद है कि कोई बाहर का अच्छा खाना
(19:56) बिना पैकेट के मंगाया था हम पोल्ट्री फार्म के मुर्गे हो चुके हैं जिसकी कोई गारंटी नहीं है जिसकी कोई वारंटी नहीं है और इसलिए अब हमारी कोई एक्सपायरी डेट भी नहीं बची। कौन कब मर जाए किसी का नहीं पता। बिकॉज़ वी आर नॉट डिसिप्लिन इनफ। आज हमारे दुनिया में हमारे देश में जिस चीज ने सबसे ज्यादा तबाही मचा रखी है, दैट इज यूपीएफ। यहीं से हमको समझना पड़ेगा कि यह सब क्यों हो रहा है। तो, उसका रीजन है अल्ट्रा प्रोसेस्ड फूड। और फिर हम देखिए आप
(20:43) इन चीजों को समझ जाएंगे तो आप दुनिया को समझा पाएंगे। आप ट्रू ओटीियन बन पाएंगे और रील से ज्ञान प्राप्त करते रहेंगे जिंदगी भर तो कुछ भी कनेक्ट नहीं हो पाएगा। आई वांट दैट यू कनेक्ट थिंग्स बिकॉज़ व्हेन थिंग्स आर कनेक्टेड यू लर्न बेटर यू लर्न फॉर एवर यू लर्न परमानेंटली। आपको मैं एक चीज़ बताऊं। अल्ट्रा प्रोसेस फूड्स जिनको हम लोग कह सकते हैं पैकेट्स। यह सब पैकेट्स में आते हैं। नेचर कभी प्लास्टिक के पैकेट में नहीं करता लेकिन ये पैकेट्स में आता है। पता है ये फूड नहीं है। ये न्यूट्रिशन भी नहीं है। ये एडिक्शन है। जब से हमने पता है एक समय
(21:30) था जब दुकानों पर सिर्फ कुछ एक चीजें पैकेट्स की फॉर्म में पैक होती थी। एक समय था आज क्या रह गया ऐसा जो पैकेट में ना आता हो? क्या रह गया वैसा? एवरीथिंग इज पैकेज्ड प्रोसेस्ड इन एएडिक्टिव। कंपनीज को इन बात से कुछ परवाह नहीं है कि आपको उस फूड का एडिक्शन हो रहा है। आपको फायदा हो रहा है कि नहीं हो रहा है। उनको इस चीज की चिंता नहीं है। पता है कंपनीज़ एक कांसेप्ट पे काम करती है। दुनिया में कोई सी भी कंपनी होगी कांसेप्ट पे काम करेगी। वो कांसेप्ट क्या है? मैं बता देता हूं एक बार आपको। एनी कंपनी इज़ देयर। लेट्स सी कोई सी भी कंपनी है।
(22:14) कंपनी के लिए जैसे आपने ये एडवरटाइजमेंट बहुत देखा होगा। दिस वन बहुत देखा होगा आपने और आपको यह भी पता होगा कि ये न्यूट्रिशन नहीं है। आपको अच्छे से पता है यह जहर है। और उससे बड़े दुख की बात यह है कि जिनको आप हीरो मानते हो। हीरो मींस लाइफ सेवर जो हमारी जिंदगी बचाएंगे जो हमको सही तरीके से गाइड करेंगे वही लोग हमें किस रास्ते पर भेज रहे हैं आपको पता है बोलो जुबा केसरी है ना हर तरफ इनके होर्डिंग्स लगे हैं। हर तरफ इनके पोस्टर्स लगे हैं।
(22:58) ये ऐसे करते हैं। मैं उस फील्ड में काम करता हूं जहां लोग ऐसे करते हैं। खैर इसकी बात करेंगे हम। ये ये सब लोगों ने देखा है। कंपनीज़ दो तरीके से काम करती है। कंपनीज़ के लिए एक कांसेप्ट होता है कैग सीएसी। हमारा देश धीरे-धीरे थोड़ा सा इन चीजों को भी समझे कि कैग क्या होता है? आरआर क्या होता है? तो हम ज्यादा बेटर चीजों को समझ पाएंगे। और एक होता है आरआर। कैग मतलब होता है कस्टमर एक्विजिशन कॉस्ट। यानी कि किसी भी इंसान को हमारा कस्टमर बनाने में कितना पैसा लगा? फिर जब वह हमारा कस्टमर बन गया उसे उसकी आदत लग गई तो वह रिकरिंग रेवेन्यू देने लगता है।
(23:40) यानी कि बार-बार खरीदता है। यह पहली बार है ना जिसमें कई गाने भी बने हैं। ऐसा पहली बार हुआ है 17 18 सालों में। तो कस्टमर एक्विजिशन कॉस्ट यानी सीएसी को कैग बोलते हैं और आरआर यानी रिकरिंग रेवेन्यू यानी कि कितनी बार खरीदा। अब कंपनियां उनको पता है कि कस्टमर ऐसे हमारे चुंगुल में नहीं आएगा। उन्होंने क्या बोला? बोलो जुबा केसरी। ये केसर बेच रहे हैं और बेचने के लिए तीन नमूनों को लेके आए। तीन नमूने आए कि भाई देखो हम केसर खाते हैं। इसलिए हमारी बॉडी इतनी जबरदस्त है। हम हमारी स्किन इतनी ग्लोइंग है। हम बहुत जबरदस्त एक्टर्स हैं। हालांकि
(24:23) हम टीप के स्क्रिप्ट बोलते हैं। लेकिन वी हैव ग्रेट मेमोरी एज वेल। और बहुत सारी बातें हैं। हम किंग हैं और पता नहीं क्या-क्या है। तो लोगों को लगता है कि हां यार अटेंशन तो चला गया उनका। एंड दे लाइक इट। अब जब एक बार एक बार उसने गलती से उस चीज को टेस्ट कर लिया। हां। जुआ केसरी के नाम पर उसने जो विमल इलायची बेची मैं किसी ब्रांड को टारगेट नहीं कर रहा हूं। और कर रहा हूं तो कर रहा हूं। मेरे देश को बचाने के लिए जो करना पड़े वह करना पड़ेगा। मुझे उसकी रत बराबर चिंता नहीं। अब जब वह एक बार उसको खा लेगा तो उसमें क्या है? उसमें निकोटीन है। हां
(25:06) उसमें स्टार वाला फील है। कई लोग को मैंने ऐसे तक देखे हैं जो यूं करके यहां से थूकते हैं गैप में से। ऐसा यूं करके यहां से थूकते हैं। दे फील लाइक स्पिटिंग कोबरा। दे फील अमेजिंग। गुटखा खाने वाले को कैंसर नहीं होता है। लेकिन एक दिन होता है। सिगरेट पीने से हाथों हाथ कुछ नहीं होता है। लेकिन एक दिन होता है। और उनको पता है कि निकोटीन टेस्ट अब उसको बार-बार बार-बार बार-बार वापस यह खरीदने को मजबूर करेगा। आपको क्या लगता है? बाकी कंपनीज जो पैकेट्स में चीजें बेच
(25:54) रही है, वह फूड बेच रही है। वह न्यूट्रिशन बेच रही है। नेवर दे नो कि अगर वो फूड और न्यूट्रिशन बेचेंगे, तो एक ही बार बेच के रह जाएंगे। रिकरिंग रेवेन्यू नहीं आएगा। बार-बार कस्टमर नहीं आएगा। तो कंपनीज़ कभी भी फूड और न्यूट्रिशन नहीं बेचती। कभी भी नहीं बेचती। नेवर दे सेल वन थिंग दैट इज़ नॉन एज एडिक्शन। वह एक ही चीज को बेचते हैं आदत क्योंकि आदत लगेगी तभी आप बार-बार और यह इट इज वैलिड फॉर एवरीथिंग फॉर द एव्री चॉकलेट ब्रांड एव्री बिस्किट ब्रांड एव्री नमकीन ब्रांड एव्री चिप्स ब्रांड एव्री कोल्ड ड्रिंक ब्रांड जो भी चीजें हैं सोडा कोल्ड ड्रिंक
(26:41) नूडल्स स्नैक्स जितनी भी चीजें सारी की सारी अब आप तो ये कह सकते हैं कि सर पैकेट्स में तो और भी बहुत कुछ आता है। पैकेट्स में दाल भी आती है। Amul दूध भी बेचता है। बहुत सारे ब्रांड्स घी भी बेचते हैं पैकेट्स में। नमक भी पैकेट्स में आता है। बहुत सारी चीजें पैकेट्स में आती है। तो इसका मतलब तो सारे पैकेट्स ही खराब है। ऐसा बिल्कुल नहीं है। जब कंपनी किसी भी चीज को एडिक्शन बनाना चाहती है तो उसमें वो कुछ चीजें जोड़ देती है। जो उस चीज को एडिक्शन बनाते हैं और उसके बाद आपकी हेल्थ कितनी बर्बाद होती है। आपका फूड मेडिसिन बनता है कि आपका
(27:28) मेडिसिन फूड बन जाता है। उसकी उन्हें तनिक भी चिंता नहीं है। उसमें वो डालते हैं प्रिजर्वेटिव्स यानी कि जो उस चीज को लंबे समय तक जिंदा रखेंगे ताकि आप जल्दी मर जाएं। उनके लिए प्रोडक्ट ज्यादा इंपॉर्टेंट है। प्रोडक्ट खराब नहीं होना चाहिए। आप मरते हैं तो उसकी तनिक भी चिंता उनको नहीं होगी। या आपको पता है प्रिजर्वेटिव्स कलर्स ऐसे कलर्स जो हमारा शरीर डाइजेस्ट भी नहीं कर पाए। इमल्सिफायर्स टेस्ट एनहांसर्स स्वाद को बढ़ाने वाली चीजें जो आपके शरीर को 10 सेकंड का टेस्ट देगी। 10 सेकंड्स ऑफ टेस्ट
(28:12) कि भाई कितना बढ़िया था यार यह बिस्किट। क्या मजे आ गए। उससे फाइबर निकाल लिया है। बिकॉज़ फाइबर जो है उससे टेस्ट इतना अच्छा नहीं रहेगा। आपको उसका फील नहीं आएगा। और फाइबर हेल्थ के लिए अच्छा होता है। बट कंपनीज के लिए वह एडिक्टिव सब्सटांस की तरह नहीं है। और 10 सेकंड का टेस्ट है और उसके बाद में 10 घंटे की ब्लास्ट हो गया आपके शरीर में। ब्लास्टिंग हो गया है। कैसे ब्लास्टिंग हो गया है कि भाई अब बॉडी फ्रस्ट्रेट हो रही है कि इस मेरे गवार मालिक ने इस शरीर में क्या डाल दिया है। मुझे समझ में नहीं आ रहा। प्रोसेसिंग यू नो लो एनर्जी। मूड
(28:56) स्विंग्स, हॉर्मोनल इश्यूज है ना, कॉन्स्टिपेशन। अब आप देख लो ना यह कितना कॉमन हो गया है। हॉर्मोन इश्यूज कितने कॉमन हैं। हॉर्मोन इश्यूज, कॉन्स्टिपेशन, हां, मूड, स्विंग्स। आज क्यों इतना लोगों का टेंपरामेंट कम हो गया है? क्योंकि हम किस चीज पे जी रहे हैं? हम जी रहे हैं नकली खाने पे और नकली कंटेंट पे। 2 मिनट की रील और 2 मिनट का फूड। हमारा टेंपरामेंट ही नहीं है किसी का। एवरीवन इज सुपर हाइबर। कोई किसी को मार दे रहा है, कोई किसी को टक्कर दे दे रहा है। कोई किसी की हत्या कर दे रहा है। कोई किसी को कुछ समझ नहीं रहा है। एंड एवरीवन इज़ ट्राइंग
(29:37) टू डिस्ट्रॉय ईच एंड एवरीवन। क्योंकि कोई किसी को डिस्ट्रॉय करने का बात है। जब वो खुद को डिस्ट्रॉय कर चुका हो। अब जब हम यह करते हैं तो एक नया गेम शुरू हो जाता है। इस 10 घंटे की ब्लास्टिंग से पता है क्या होता है? एक गेम शुरू होता है जिसको बोलते हैं क्रॉनिक इनफ्लामेशन। और यह आपको समझ लेना बहुत जरूरी है क्योंकि जितनी भी मॉडर्न या लाइफस्टाइल डिजीजसेस हैं, हार्ट इशूज़, डायबिटीज, कोलेस्ट्रॉल, हाइपरटेंशन, फैटी लिवर, कैंसर सब यहीं से कंट्रोलोल्ड है। दैट इज क्रॉनिक इनफ्लामेशन। लंबे समय तक बने रहने वाली सूजन। और हम उस सूजन के नेचुरल ट्रीटमेंट
(30:20) पे बात करेंगे। कैसे आप सूजन को ठीक कर सकते हैं? कैसे प्रॉब्लम से बच सकते हैं? बहुत सारी बातें। क्रॉनिक इनफ्लामेशन यह दिस इज द फाउंडेशन ऑफ डिजीजेस। लंबे समय तक बने रहने वाली सूजन को बोलते हैं क्रॉनिक इनफ्लामेशन। अ मेडिकल साइंस में जब मैं एमबीबीएस कर रहा था तो पैथोलॉजी में एक बुक है रॉबिंस पैथोलॉजी जो यहां कोई एमबीबीएस का स्टूडेंट होगा जो सेशन को देख रहा होगा उसने शायद देखा होगा कभी पढ़ा होगा कभी रॉबिंस पैथोलॉजी रॉबिनस पैथोलॉजी में एक ही शब्द यूज़ होता है बार-बार इनफ्लामेशन इनफ्लेमेशन एक्यूट इनफ्लेमेशन क्रॉनिक इनफ्लेमेशन आपको कहीं
(31:03) चोट लग गई कहीं घाव हो गया तो वहां तो एक्यूट इनफ्लामेशन होती है इंस्टेंट सूजन आ जाती है वो रिकवरी के लिए होती क्रॉनिक इनफ्लेमेशन भी बॉडी ट्राई तो रिकवरी का ही करती है। लेकिन जब उसको ठीक नहीं कर पाती है। हर दिन मालिक कचरा फेंके जा रहे हैं शरीर में तो फिर वो बॉडी का आउट ऑफ कंट्रोल चला जाता है और वो बीमारी में कन्वर्ट हो जाता है। सब कुछ बीमारी में कन्वर्ट हो जाता है। तो लंबे समय तक रहने वाली सूजन लंबे समय तक जिससे जितनी भी जो मॉडल लाइफ स्टाइलाइल डिजीज हैं देखो ब्लड प्रेशर हर कोई लगभग अल्टरनेट घर में इसकी दवा चल रही है। आप
(31:46) में से बहुत सारे लोग ऐसे होंगे जो सेशन को देख रहे होंगे एंड दे नो वेरी वेल दैट माय फादर इज़ सफरिंग फ्रॉम ब्लड प्रेशर। माय मदर इज़ सफरिंग फ्रॉम शुगर। माय ब्रदर इज़ सफरिंग फ्रॉम कोलेस्ट्रॉल इशू। माय बिग ब्रदर हैव फैटी लीवर। यह सब इनफ्लामेशन है। हां। तो बीपी हो गया, शुगर हो गया, कैंसर हो गया। हां, थायराइड के इशूज़ हो गए। सब अपने को लगता है ना दवाइयां इसको ठीक कर देगी। कभी दवाइयां इनको ठीक नहीं कर पाती। देयर आर सर्टेन वेज़। हम उसकी जरूर से बात करेंगे। तो, यह सब हो रहे हैं और इसके कारण मैं आपको बता देता हूं। देखो फूड जो
(32:30) है ना फूड या तो होता है डिस्ट्रयर या फूड होता है हीलर या तो वो बॉडी को ठीक करेगा या डिस्ट्रॉय करेगा अब हम जो फूड ले रहे हैं ना वो मोस्टली डिस्ट्रयर मोड में ही है। क्या ले रहे हैं हम लोग? यूपीएफ अल्ट्रा प्रोसेस फूड जिसमें नमक ज्यादा है, तेल ज्यादा है, मैदा ज्यादा है। उसके बाद हम हमारा असली पैटर्न सबको पता है। हम एक्सेस में मोबाइल स्क्रीन यूज़ करते हैं। एक्सेस मोबाइल बस सुबह से शाम तक उसमें चडी वुड, कौवा वुड
(33:15) हां बस यही करते रहते हैं। बस चलाते रहते हैं। 24 घंटे रीले चल रही है। उस फोन की रील्स उड़ाने के चक्कर में हम खुद नीचे बैठ गए। हमेशा के लिए हमेशा के लिए नीचे बैठ गए। तो फिर हम स्क्रीन्स के अलावा हम लेस स्लीप हम कम सो रहे हैं। हम लो फाइबर कंज्यूम कर रहे हैं। हमारे खाने में फाइबर कहां बचे? है ही नहीं फाइबर। को हमें स्मोकिंग या फिर अल्कोहल की लत पड़ चुकी है और हम कुर्सी पर बैठे रहना चाहते हैं। हमें मेहनत नहीं करनी है। सिंग सिंग आपको शायद पता नहीं होगा। रीसेंट रिसर्च ये कहती है सिंग इज द न्यू स्मोकिंग। सिंग इज द न्यू स्मोकिंग।
(34:01) और सब कुर्सी के पीछे भागे जा रहे हैं। भागे जा रहे हैं। भागे जा रहे हैं। भागे जा रहे हैं। जब पता है आप यह सब करते हैं ना तो बॉडी बहुत बहुत बहुत बहुत बहुत बहुत बहुत बहुत बहुत बहुत ट्राई करती है कि यार मैं उसको ठीक करूं, ठीक करूं, डैमेज कंट्रोल करूं, डैमेज कंट्रोल करूं। लेकिन एक दिन ऐसा आता है कि वो हाथ खड़े कर देती है कि भाई अब मेरे से डैमेज कंट्रोल नहीं होगा। अब बहुत हो गया। अब मेरे बस की बात नहीं है। अब तू अपना देख और उसी दिन यह बीमारियां डायग्नोस होती है। चल ये बहुत समय से रही होती है। उसी दिन ये बीमारी डायग्नोस होती है। केयर नहीं
(34:36) इट्स इनफ नाउ। अब अपने से ये काम नहीं हो पाएगा। और जब ये क्रॉनिक इनफ्लेमेशन होता है ना लंबे समय तक सूजन बनी रहती है। बहुत दिक्कतें होती है तो शरीर में एक और दिक्कत हो जाती है कि हमारा एक हमारे पूर्वज जो है जो हमारा जिसको हम लोग कहते हैं पितृ दोष कि हमारे पूर्वज हमसे नाराज हो गए। है ना? एक चीज होती है उसको बोलते हैं हम गट माइक्रोबायोम। गट माइक्रोबायोम। हालांकि मैं इसमें थोड़ा सा इसको एक्सप्लेन करूंगा। मैंने इन डिटेल में एक सेशन में इसके बारे में बता रखा है। गट माइक्रोबायोम के बारे में और वो सेशन आप लेटर ऑन देख सकते हैं। यह कुछ
(35:23) सेशन था जो मैंने ओटीटी भारत पे ही लिया था। माइक्रोबायोटा कैसे साइकोबायोटा बनता है। बहुत सारी चीजें यहां पर मैंने डिस्कस की थी। ये उसका क्यूआर कोड है। आप चाहें तो इसका फोटोग्राफ ले सकते हैं फॉर द लेटर व्यू। बट मैं यहां पर भी इसका क्रक्स एक बार बताने का प्रयास करता हूं। कैसे क्रॉनिक इनफ्लामेशन जो है वह इसे डिस्टर्ब करती है। आजकल तो भाई मार्केट में जमाने भर की दवाइयां चल रही है। यह बग वो बग ये सब ये सब माइक्रोबायोम के लिए बिक रहे हैं। कि प्रोबायोटिक्स इसमें है। स्पोर्स इसमें है। यह खा लो, वो खा लो, योगर्ट खा लो,
(36:00) फलाना गट खा लो। इससे हो जाए। योगर्ट अगर इन ग अगर इन दवाइयों से सही होती ना तो सबकी गट सही हो चुकी होती जबकि सबकी खराब है क्योंकि इससे ठीक नहीं होती है वो कैसे समझाऊं मैं कैसे समझाऊं कि ये भी सब मार्केटिंग है सब मार्केटिंग है सब सबको पैसा कमाना है इस किसी को इस बात की चिंता नहीं है कि सामने वाले लोग ठीक हो रहे हैं कि नहीं हो रहे नो वन केयर इज और आपको तो अपने शरीर की वैसे भी चिंता नहीं है आप तो कम से कम इस देश के जागरिक जागरूक नागरिक हो तो आप थोड़ा सा समझते समझते हो कि भाई बिकॉज़ मैं यह मानता हूं कि oटीt भारत से कनेक्टेड लोग वही हैं जो
(36:38) देश के मतलब वन ऑफ द मोस्ट समझदार लोगों में आते हैं। ये लोग रील एडिक्ट नहीं है। ये लोग समझदार हैं। इनको कॉनसेप्चुअल चीजें समझ में आती है। ये लॉन्ग टर्म में सोचते हैं और ये जिंदगी बदलना चाहते हैं। मैं आपको ये बताना चाहता हूं कि रीसेंट रिसर्च ये कहती है कि हमारे शरीर में जितनी कोशिकाएं हैं, जितनी सेल्स हैं उन सेल्स को 10 से मल्टीप्लाई कर दो। उतने माइक्रोबायोम है। मतलब उतने बैक्टीरियास हैं, उतने वायरस हैं, उतने फंगस हैं। इनको कंपाइल करके हम लोग कहते हैं माइक्रोबायोम 10 गुना है। और रीसेंट रिसर्च ये कहती है कि ये हमारा फ्यूचर
(37:23) डिसाइड करते हैं। इतना ही नहीं यह विटामिन सिंथेसाइज करते हैं। विटामिन बी हां विटामिन बी की कमी होगी। पेट खराब है तुम्हारा इसलिए विटामिन बी की कमी होगी। सप्लीमेंट से वैसे पूरी नहीं होगी। पेट ठीक करना पड़ेगा। कैसे ठीक करना पड़ेगा? मैं सब बातें बताऊंगा। पहले मैं चीजों को कनेक्ट कर देना चाहता हूं ताकि टेंपरेरी इंपैक्ट नहीं आए। कोई चीज शुरू होती है एक दिन करते हो फिर छोड़ देते हो। तो उससे फायदा नहीं होगा। मैं कुछ चीजें ऐसी बताऊंगा जिसमें आप एक चीज शुरू करो। बस जस्ट वन थिंग एंड विल चेंज फॉर एवर। फिर यह क्या करते हैं? विटामिंस। फिर
(37:59) इम्यूुनिटी। इम्यूुनिटी यहां से कंट्रोल है सारी। कौन कौन कर रहा है मेरी इम्युनिटी को डिसाइड? डाबर चवनप्राश। वाह वाह। जब डावर चवनप्राश नहीं था उससे पहले तो सब लोग मर जाते होंगे। हां। जब चवनप्राश नहीं था तो उससे पहले तो लोग जिंदा ही नहीं रहते होंगे। है ना? मेरे दादा तो 99 इयर्स के हो गए मरे थे और उनको ध्यान भी नहीं कि डाबरच क्या होता है। हमें फैंसी चीजें चाहिए। डब्बे में पैक हो के आ रहा है। ऊपर वाले का कोई चमत्कार होगा। वी स्टॉप बिलीविंग ऑन आवरसेल्फ इन द टाइम ऑफ मार्केटिंग। वी जस्ट बिलीव ऑन कि शायद इसमें कोई अलादीन का चिराग निकल आए।
(38:40) लेकिन इसमें कोई पैसे वाला निकलता है जो डब्बे से बाहर निकलता है और हमारे पर्स में हाथ डालकर वापस पैसे खींच कर चला जाता है। नथिंग चेंजेस इम्यूनिटी विटामिंस मैंने बोला कौन सी विटामिन? तो K2 उसके अलावा बी कॉम्प्लेक्सेस में सारे थोड़ी बहुत अमाउंट में B12 भी जो हमारी बॉडी में एब्सॉर्ब नहीं होगी। लेकिन हां मैं ये कहूंगा कि अभी इस पे रिसर्च होनी बाकी है। मैं सच कह रहा हूं कि जिस इंसान का पेट ठीक है ना उसे किसी मल्टीविटामिन की भी जरूरत नहीं है। बोलो लिख लो इस बात को। जिस इंसान का पेट ठीक है उसका शरीर रोटी से हां बशर्त वो रोटी थोड़ा बहुत
(39:25) मिक्स चीजें उसमें डाल के बनी हो। रोटी से भी विटामिन निकाल लेगा। रोटी से भी इम्युनिटी निकाल लेगा। जिंक विटामिन सी नहीं चाहिए उसको इम्युनिटी के लिए। पेट खराब है। जमाने भर का कचरा डाले जा रहे हो उसमें। फोकस मूड कंसंट्रेशन यह तो सब यह डिसाइड कर रहे हैं। हम क्या सोच रहे हैं कि मेडिटेशन का सेशन ले लेंगे और हमारा मूड फोकस कंसंट्रेशन ठीक हो जाएगा। किसी को ना तो समझना है। अच्छा सबको क्या लगता है कि ये एक आया है। शॉर्ट आया है। शॉर्ट से ना ग से हो जाता। अच्छा फिर तो सब भारत में सब भारत में 70% लोगों का पेट खराब है। तो शॉर्ट से ही ग ठीक हो जाता तो
(40:08) फिर तो सबका हो जाता। तो हो क्यों नहीं रहा है फिर? और जब किसी एक के शॉट ने किसी एक के प्रोडक्ट ने किसी का गट ठीक कर दिया है तो इतने सारे ब्रांड्स की क्या जरूरत है? अरे जब किसी एक धर्म से ऊपर वाला मिल जाता तो 10 10 15 ब्रांचेस क्यों खुली है? ऊपर वाला सिर्फ खुद के प्रयास से मिलता है। किसी धर्म से नहीं मिलता। पूरे दम से पूरे मन से भगवान को ऊपर वाले को याद करोगे वो आएगा। पूरे दिल से हाथ जोड़ोगे। खैर और मैं आपको यह कहना चाहता हूं कि
(40:57) जब हम जिंदगी में कोई बात करते हैं हम कहते हैं कि यार गट फीलिंग अंदर से कैसा लग रहा है? आप बिलीव नहीं करेंगे दोस्तों आज जो मैं कह रहा हूं कि किसी इंसान की विल पावर कितनी है? उसकी डेस्टिनी क्या है? वो क्या बनना चाहता है? उसकी विल पावर और उसकी डेस्टिनी भी उसकी गट डिसाइड करती है। उसकी डेस्टिनी पेट डिसाइड करता है। और हम जितना बर्बादी हमने हमारे पेट की करी है। शायद यही तो है सब कुछ। एक आपने एक्सिस का नाम सुना होगा। मैंने हमेशा इसकी बात करता हूं। जीबीए एक्सिस। गट ब्रेन एक्सिस। पता
(41:41) है अब गट ब्रेन साइकोसोमेटिक एक्सिस और सेक्सुअल एक्सिस भी कहलाता है। यानी जिसका पेट ठीक है उसका दिमाग ठीक रहेगा। उसी का सारा सिस्टम ठीक रहेगा। चाहे कार्डियोवस्कुलर सिस्टम हो, चाहे रेस्पिरेटरी सिस्टम हो, चाहे ब्लड फ्लो हो, चाहे कुछ भी हो। सारी की सारी चीजें लेकिन हमने क्या कर लिया है ना? हमने सत्यानाश कर लिया। कैसे? अब ये जो माइक्रोबायोम है ना देखो दुनिया में क्या होता है भाई? दुनिया में यह होता है ना कि यार दो टाइप के लोग हैं। अच्छे भी हैं, बुरे भी हैं। अच्छे लोग भी हैं, बुरे लोग भी हैं। तुम जैसा बिहेव करोगे, वैसी ताकतें
(42:25) एक्टिवेट हो जाती हैं। समझ रहे हो? जैसे मान लो कहीं पर किसी एक डिस्ट्रिक्ट में तुम्हारा राज्य है। तुम वहां गए हो। तुम्हारे वहां के तुम वहां के राजा हो। सिस्टम तुम्हारा है। और तुमने बोल दिया कि यार जितने लुच्चे लफेंगे लोग हैं ना उनको लाओ यार। मेरे को अच्छा लगता है उनसे मिलना। उनको सम्मान दो। रिस्पेक्ट दो उन्हें। मेडल दे दो। 15 अगस्त पे नाम लिखा आने वाली है। मैं उनको दिल्ली में सम्मानित कराऊंगा। क्या होगा? उनकी संख्या बढ़ जाएगी। जो अच्छे
(43:11) लोग थे वो भी कहेंगे भाई साहब हम भी लुच्चे लफंगे कैसी बात करते हैं आप? बहुत पहले हमारे दादा लुच्चे लफंगे थे। हमारे पापा बहुत बड़े लुच्चे लफंगे थे और हमारा कहना ही क्या? ऐसे ही हमारे माइक्रोबायोम में दो तरीके के बैक्टीरिया हैं। एक गुड और एक बैड। बैड बैक्टीरिया। गुड बैक्टीरिया। जब हम क्वालिटी फूड खाते हैं। जैसे हमने फ्रूट्स खाए, हमने अनाज खाए, हमने दालें खाई, हमने सब्जियां खाई। हमने वो सब बोरिंग फूड खाया जो हमें बेकार लगता है। हमने बीज खाए तो यह ग्रो करते हैं। लेकिन हमने कबाड़ा किया। हमने अल्ट्रा प्रोसेस फूड खाए। हमने
(43:53) नमक खाया बहुत ज्यादा। हमने तेल खाया। मोबाइल चलाया। सोने का ध्यान नहीं रखा। स्ट्रेस बहुत ज्यादा हो गया। नेचर के साथ टाइम स्पेंड नहीं किया। हम बैठे रहे तो डिसबायोसिस हो जाता है। डिसबायोसिस का मतलब होता है कि आपकी बॉडी में बैड बैक्टीरियाज बढ़ गए हैं। अब आपका पेट खराब होगा और पेट खराब होने का मतलब है आपका फ्यूचर खराब होगा। मैं फिर कह रहा हूं सक्सेसफुल लोगों के पेट खराब नहीं होते। मैं तो यह मानता हूं कि इस दुनिया में बदनसीब वही है जिसका पेट खराब है। बदनसीब लोगों के ही पेट खराब होते हैं। अब कुछ लोग ऐसे होते हैं बेचारे जैसे मैं
(44:34) अपनी बात करता हूं ना दोस्तों मुझे ये पता भी नहीं था 2017-1 में मतलब बहुत समय ऐसा हो गया है ना जब से मैं कोविड के आसपास से 7 साल हो गए मुझे अब गेहूं खाए हुए मुझे पता भी नहीं था कि मुझे गेहूं से एलर्जी है और मेरा पूरा गट डिस्ट्रॉय हो गया था पूरा गट उससे मुझे एलर्जी इश्यूज स्किन इशू इशूज़, फोकस यूज़, ब्रेन फॉग बहुत सारी चीजें होंगी। फिर मेरी फैमिली में मेरी मौसी ने जब चेकअप कराया तो उनको पता लगा कि यार उनको सिलियक है, गेहूं से दिक्कत है। फिर समय के साथ मुझे पता लगा और मैंने ये सब चीजें छोड़ दी। हर वो इंसान अनलकी है बेचारा जिसका पेट
(45:21) खराब है या जिसको यह पता ही नहीं कि पेट कैसे ठीक करना है क्योंकि ये आपका एक्सेस इंजन है। असली इंजन है। आयुर्वेदा हमेशा कहता रहा है कि हर बीमारी पेट से शुरू होती है और एलोपैथी मानती है। मॉडर्न साइंस भी मानती है। मॉडर्न मेडिकल साइंस मानती है कि एव्री इशू इज़ गट इशू। एंड गट इज डिसाइडेड बाय द फूड। हमने क्या मान रखा है ना कि कचरा है। कचरा पेटी है हमारा पेट। हां। जितना हो सके उतना कचरा इसमें डालते रहो। बस चलता रहे, चलता रहे, चलता रहे। हमें उससे कुछ फर्क नहीं पड़ता। कुछ फर्क नहीं पड़ता। मतलब मैं आपको एक बात बताना चाहता
(46:05) हूं। ये जो गट बैक्टीरियास है ना ये गट माइक्रोबायोम ह्यूमन लाइफ आने के कई साल पहले से मतलब इंसान जब इस धरती पर आए उससे कई साल पहले से ये इस धरती पर हैं। मतलब हमारे असली पूर्वज ये हैं। ये हमारे असली पूर्वज हैं। असली पूर्वज। और अगर आप इनका ध्यान नहीं रखेंगे ना जैसे मैंने बोला फ्रूट्स, वेजिटेबल्स, फाइबर्स, सीड्स है ना। बहुत सारी चीजें मैंने यहां बताई और मैं भी उसको डिस्कस करूंगा। तो इनका ध्यान नहीं रखोगे तो आपको असली पितृदष लगेगा। और पितृदष यह कहता है एस्ट्रोलॉजी के आज तो
(46:51) एस्ट्रोलॉजी का टाइम भी चल रहा है। पितृदष ये कहता है कि आप सक्सेसफुल नहीं हो सकते। तो असली पितर तो आपकी यह है। खैर कुछ बातें करते हैं। की पॉइंट्स की तरफ चलते हैं और सॉलशंस पे क्या हम कर सकते हैं? आज के सेशन से मैं क्या सीख के जा सकता हूं? आज क्या नया है जो मेरी जिंदगी में अप्लाई करना चाहिए? की टेक अवेस। देखो सवाल यह है कि मैं जितने लोग लाइव देख रहे हैं एक सवाल आप सभी से पूछना चाहता हूं और फिर हम आगे बढ़ेंगे। एसेंस में जाएंगे। द अमृत ऑफ द सेशन दैट वी शुड लर्न। मैं आपसे पूछना
(47:40) चाहता हूं। एक इंसान है। एक इंसान है। वो 50 साल की उम्र तक जिया। और जब वो मरा तब वो करोड़पति था। दूसरा इंसान है जो 70 साल की उम्र में जाकर करोड़पति बना जिसने थोड़ा पेशेंस रखा लेकिन वो मरा 100 साल का। किसे आप ज्यादा सक्सेसफुल मानेंगे? मैं तो कहूंगा कि आप अस्पताल में अरबों खरबों रुपए देके भी एक मिनट नहीं खरीद सकते। साल तो बहुत दूर की बात है। अब मैं फिर रिपीट
(48:25) कर रहा हूं। मैं मतलब यह चीज बता देना चाहता हूं दोस्तों कि आपका एसेट आपकी हेल्थ है। आपका एसेट आपकी एनर्जी है। जिस दिन आपको कभी पैरालिसिस हो गया। जिस दिन आप पड़ गए बिस्तर पर जिस दिन आप किसी काम के नहीं रहे। घरवाले यह बोलना शुरू कर देंगे कि अच्छा हुआ। अच्छा हुआ या अच्छा हो यह मर जाए। इसकी सुधर जाएगी जिंदगी। तो जिंदगी में कुछ भी अगर करना है, महान करना है, सबसे टॉप प्रायोरिटी खुद को रखो। आज
(49:10) फ्रेंड्स डे है। दुनिया में बहुत कम दोस्त ऐसे होते हैं जो यह सब सिखाते हैं। बाकी दोस्तों गुटखा खाना सिखाते हैं, दारू पीना सिखाते हैं, सिगरेट पीना सिखाते हैं। कोई दोस्त जूस पीना नहीं सिखाता, ड्राई फ्रूट्स खाना नहीं सिखाता। मां-बाप सिखाते हैं। शायद असली दोस्त हैं वह। और मैं तो हमेशा प्रयास करता रहता हूं कि मेरे जितने भी दोस्त हैं, आप सभी ओटीएंस हम कुछ अच्छा मिलकर कर पाएं हमारी लाइफ में हमेशा प्रयास करते रहते हैं। तो बात यही है बात ले दे के बात एक ही मुद्दे पर आकर टिकती है और उस मुद्दे का नाम है हेल्थ। तो हेल्थ क्या सिर्फ फूड से हेल्थ आ जाती है? क्या
(49:56) क्योंकि आजकल की जो हमारी जेंजी जनरेशन है उसको यह परसेप्शन हो गया है कि भाई इस ब्रांड का यह सप्लीमेंट तगड़ा चल रहा है और इससे हेल्थ आ जाएगी। पक्का जिंदगी बदल जाएगी और हमेशा हमेशा के लिए जो है तुम कुछ अलग बन जाओगे। तुम कुछ डिफरेंट बन जाओगे। अब जैसे मैंने यहां कहा कि दालें हैं, फ्रूट्स हैं, ड्राई फ्रूट्स हैं, सब्जियां हैं, सब कुछ है। मैं एक और सवाल पूछना चाहता हूं। एक और सवाल पूछना चाहता हूं। क्या फूड इज ओनली हेल्थ? क्या फूड इज ओनली मेडिसिन? सवाल यह है कि मान लो एक इंसान है। एक इंसान है जिसका नाम है
(50:42) रमेश। रमेश को दुनिया के हर एक कोने से लाकर एक एग्जोटिक फूड दिया जाता है कि भाई आपको ब्लू बेरीज खानी है। अवकडो लेना है। ये टॉप क्वालिटी के प्रोटीन सोर्स है। ये लेने हैं। लेकिन आपको सोना 4 घंटे 4 घंटे सोना है। पूरे दिन बैठना है। फोन चलाना है। स्ट्रेस में रहना है। किसी से बात नहीं करनी है। धूप में नहीं जाना है। हवा से बहुत दूर रहना है। कमरे में बैठे रहना है। आपको लगता है कि वह जो एग्जोटिक फूड्स हैं, जो महंगे फूड्स हैं, वर्ल्ड क्लास सप्लीमेंट्स हैं, भाई, यह सप्लीमेंट रोनाल्डो लेता है, आप भी लो। यह सप्लीमेंट मेसी लेता है, आप भी लो। यह पानी विराट
(51:20) कोहली पीता है, आप भी लो। ये मशरूम मोदी जी खाते हैं, आप भी खाओ। नो। फूड इज़ नॉट ओनली वे ऑफ़ मेडिसिन। दुनिया में और भी है। [गहरी सांस लेने की आवाज़][अचानक ज़ोर से सांस लेने की आवाज़] मैं लगभग लगभग हर चीज पर सेशन ले चुका हूं। क्लिप के ऊपर ही मैंने सेशन लिया है। दोस्तों मैं कुछ बताना चाहता हूं। हेल्थ किसी भी डब्बे में, किसी भी पैकेट में पिक हो के नहीं आती। हेल्थ एक डिसिप्लिन है, एक लाइफ स्टाइल है। मैं जब हेल्थ की बात करता हूं तो मैं बहुत स्ट्रांग इस चीज का बिलीवर हूं। बहुत स्ट्रांग इस चीज का बिलीवर हूं कि डाइट एक
(52:05) बहुत बड़ा फैक्टर है। फूड एक बहुत बड़ा फैक्टर है। और कुछ फूड जो हमेशा हमेशा के लिए हमको हमारी जिंदगी में इंप्लीमेंट करने चाहिए। उसके बाद हम जरूर से करेंगे। लेकिन अगर मैं स्लीप को बोल दूं कि स्लीप की कोई वैल्यू नहीं है तो मैं बेवकूफ हूं। अगर मैं कहूं कि कम स्ट्रेस की कोई वैल्यू नहीं है तो मैं बेवकूफ हूं। अगर मैं कहूं अच्छे रिश्तों की कोई वैल्यू नहीं है तो मैं बेवकूफ हूं। अगर मैं कह दूं कि हवा की धूप की कोई वैल्यू नहीं है। धूप में जाना ही नहीं है तो मैं बेवकूफ हूं। आप याद करो ना। हमको पता है क्या लगता है कि हम एक छोटी सी गुफा में अंधेरे कमरे
(52:46) में बैठे रहेंगे और सप्लीमेंट्स लेते रहेंगे आइसोलेट रहेंगे किसी से बात नहीं करेंगे क्योंकि हमको तो यही सिखाया गया है दैट है ना सक्सेस के लिए अकेले रहना पड़ता है और किसी से बात नहीं करनी पड़ती है मेरे कई साइकेट्रिस्ट दोस्त हैं जो कहते हैं कि यार पहले हमारे पास मेंटल इश्यूज वाले लोग बहुत कम आते थे आजकल बहुत ज्यादा हो गए हैं बिकॉज़ पीपल आर लिविंग अलोन देयर मेंटल हेल्थ इज़ इज़ देयर रिलेशन आर सो सुपरफिशियल। मतलब मुझे याद भी नहीं है कि आपने जितने लोग यहां सेशन देख रहे हैं आप में से कभी किसी ने बैठ के किसी की डीप टॉक सुनी हो, किसी को समय दिया हो, किसी
(53:25) की शांति से कोई बात सुनी हो, अपने घर वालों के साथ बैठे हो, बिना स्क्रीन को स्क्रॉल किए हुए। हां, मुझे पता है। ओटीटी भारत के लोग आते हैं। बैठते हैं, सुकून से सुनते हैं। चीजें सीखते हैं। अपनी लाइफ में इंप्लीमेंट करते हैं। इट इज आवर डीप रिलेशन। मैं इस बात को 100% एग्री करता हूं कि ओटीटी भारत पर जितने भी लोग हैं वह बहुत डीपली बातें सुनते हैं। मतलब हमको ये समझ लेना चाहिए ना कि किसी एक प्लेट जबरदस्त एग्जोटिक सैलेड से सलाद खाने से जिंदगी में हेल्थ नहीं आती और एक दिन बर्गर खाने से हेल्थ खराब नहीं होती है। एक लाइफस्टाइल है। इट्स अ प्रोसेस। इट्स
(54:03) टेक टाइम। तो ये सारी चीजें हैं। यह सारी ही चीजें हैं जो हमें समझ लेनी चाहिए, इंप्लीमेंट करनी चाहिए और यह मान लेना चाहिए कि बहुत सारे प्रोसेस जब एक माली से पूछा गया कि इतना सुंदर बगीचा कैसे बना? तो उसने कहा कि मैंने समय पर यहां की खरपतवार हटाई, पानी दिया, धूप दी, इनकी ट्रिमिंग करी तभी बगीचा बन पाया। हेल्थ भी ऐसी ही है। हेल्थ कोई किसी चमत्कारिक सप्लीमेंट पर बेस नहीं है कि ये ले लोगे तो बस अमर हो जाओगे। खैर अब कुछ ऐसे मुद्दे हैं, कुछ वंडर ड्रग्स, सम वंडर फूड्स जो मैं चाहता हूं कि आप अपनी लाइफ में एज
(54:49) अ मेडिसिन यूज़ कर सकते हैं जिससे आप कभी बीमार ना हो। मैं फिर एक चीज रिपीट कर देता हूं। जब मैं इस चीज की बात करता हूं तो ग्रेजुअली अपनी लाइफ में स्टार्ट करें। मतलब ऐसा ना हो कि एकदम से कोई चीज स्टार्ट कर दिया और बहुत सारी चीजें एक साथ कर दी। उससे कभी चमत्कारिक परिवर्तन नहीं आते। आप जब तक जो चीजें मैं आपको बताता हूं उनको अपनी लाइफस्टाइल का पार्ट नहीं बनाएंगे। कुछ नहीं होगा। आदत होनी चाहिए। आपको नहीं पता होगा कि इस दुनिया में जो लोग लंबा जी रहे हैं वह ब्लू बेरीज के दम पर नहीं जी रहे हैं। वह किसी एक्स व जेड सप्लीमेंट के दम पे नहीं जी रहे हैं।
(55:31) वो एग्जोटिक सैलेड के दम पे नहीं जी रहे हैं। वो उनका खाना किसी फाइव स्टार से नहीं आ रहा है। दे आर ईटिंग सिंपल फूड। दे हैव डीप रिलेशन। दे आर स्पेंडिंग टाइम विद द नेचर। दे टेक लेस स्ट्रेस। दे टेक मोर स्लीप। दे डोंट ईट इन पैकेट्स। दे दे आर नॉट क्रॉनिकली इनफ्लेम्ड। उनमें परमानेंट सूजन नहीं आ रखा है। वह पैकेट से खाना नहीं खा रहे हैं। रियल खाना खा रहे हैं। उनके असली दोस्त हैं। WhatsApp स्टेटस वाले नकली फेक दोस्त नहीं जो पीछे से खंजर घोंपने वाले दोस्त मुझे जिंदगी में बहुत मिले हैं। बहुत यही मिले हैं सिर्फ। क्योंकि मैंने एक चीज
(56:06) समझ ली जितना आप दूसरों का अच्छा करते जाओगे उतना लोग आपका बुरा करते जाते हैं। खैर अब अगर मैं चाहता हूं कि मुझे सूजन कम करनी है। देखिए सूजन जो है ना सूजन क्रॉनिक इनफ्लामेशन हार्ट इशूज़ के लिए कैंसर के लिए और जितने भी ये चीजें हैं ना इनके लिए सबसे ज्यादा जिम्मेदार है। सूजन इनफ्लेमेशन मैं कैसे अब जब मैं कहता हूं सर रिलेशन उसके बारे में इन डेप्थ बताओ मैं आप समझते हैं कि फैमिली कन्वर्सेशन इज़ वेरीेंट टॉकिंग टू योर पेरेंट्स टू योर सिबलिंग्स अब तीन बच्चे हैं घर में तीनों बैठे हैं एक रूम में तीनों फोन में देख रहे हैं नो वो इज
(56:49) टॉकिंग टू ईच अदर किसी के पास में टाइम नहीं है उसका सुख जानने का उसका दुख जानने का वी आर ऑल बिजी टू टॉकिंग समवन एल्स हु इज अवे फ्रॉम एंड वी डोंट हैव टाइम फॉर समवन हु इज़ सिंग इन फ्रंट ऑफ अस। खुद अब अपनों की परवाह किसे है? बस दूसरों के बारे में जानना है सबको। हां। विराट कोहली कितने रुपए लीटर का पानी पीता है? अरे तेरे पापा को तूने पानी कब पानी के लिए कब पूछा था आखिरी बार? कब तुमने कहा था कि मम्मी मैं आपके लिए एक गिलास पानी ले आऊं? विराट कोहली ₹700 लीटर पानी पीता है। सूजन कैसे कम करें? ये एक इंपॉर्टेंट मुद्दा है। सूजन कैसे कम करें? तो जब मैं
(57:32) सूजन की बात करता हूं ना तो मैं कहूंगा कि बहुत छोटा सा 1/4 चम्मच 1/4 चम्मच और 1/4 चम्मच क्या-क्या लेना है? हल्दी अदरक पाउडर अदरक का जो सोंठ का पाउडर होता है अदरक का पाउडर आता है पिसा हुआ सोंठ पाउडर और दालचीनी एक चौथाई चम्मच एक चौथाई चम्मच ज्यादा नहीं सिर्फ एक ही एक चौथाई चम्मच और चुटकी भर काली मिर्च चुटकी भर काली मिर्च इसको अपनी लाइफ का गोल बना लो यार मुझे यह चीज परमानेंटली करनी है। लाइफ टाइम करना है। किसी भी केस में नहीं छोड़ना है। मैं
(58:20) गारंटी के साथ में कहता हूं। देखो ये जो चीज है ना ये जो दालचीनी है ना ये इंसुलिन की नकल करती है। मतलब इंसुलिन जैसा ही काम करती है। ये कभी शुगर को स्पाइक नहीं होने देगी। मैंने एक सेशन लिया था इंसुलिन रेजिस्टेंस और इतना बड़ा टॉपिक है आज पता है हम लोग बात तो करते हैं कि देशवासियों को वैक्सीन लगा देंगे डिफरेंट-डिफरेंट टाइप के टीके लगा दिए हां मोदी जी आए थे वो कहते थे भाइयों बहनों मैंने देश के लोगों को कोरोना जैसी महामारी से बचाया है और हम ये मानते रहे हैं कि गवर्नमेंट इज रिस्पांसिबल बिहाइंड ऑल द हार्ट इश्यूज दैट हैपन आफ्टर द कोविड। बट पता है उसका
(59:03) सच्चा रीज़ क्या है? गवर्नमेंट ने वही किया जो पूरे वर्ल्ड में हो रहा था। सब जगह वैक्सीनेशन हो रहा था। द मेन रीज़न इज़ दैट उन दो-ती सालों में हमने दबा के कार्बोहाइड्रेट खाया है। मैदा, मैदा, चीनी, मैदा, चीनी, मैदा, आटा, चीनी, मैदा, आटा। और वो भी उस वक्त अचीवमेंट होता था। जिसकी वजह से भारतीयों को ये दिक्कत हुई है। इंसुलिन रेजिस्टेंस इंसुलिन रेजिस्टेंस उसके ऊपर मैंने पूरा सेशन लिया है। मैं एक बार आपको दिखा देता हूं। आपके पास जब समय हो तो गट रिसेटिंग का मैंने आपको दिखाया। ये सेशन भी आपको एक बार देख लेना चाहिए। हालांकि इसका थंबनेल
(59:37) थोड़ा चेंज हो गया होगा। ये उसका क्यूआर कोड है। इसके बारे में एक बार आपको जरूर से देखना चाहिए। जिसमें नॉन अल्कोहलिक फैटी लिवर डिजीज और पुअर मेमोरी और बहुत सारी बातें हो रखी है। खैर मैं वापस यहीं पर आता हूं। एक सिंपल चेंज पहला चेंज तो हमको ये करना है। हमने क्या किया? हमने परमानेंटली पाउडर दालचीनी का। अच्छा दालचीनी भी दो टाइप की आती है। एक सीएलन दालचीनी आती है जो अंदर वाली छाल से आती है। एक बाहर वाली छाल से आती है। अब अंदर वाली छाल की है। बाहर वाली छाल की है। अंदर वाली छाल की महंगी आती है। बाहर वाली छाल की थोड़ी
(1:00:17) सस्ती आती है। वो थोड़ी सी ज्यादा क्वांटिटी में हिपेटोटॉक्सिक हो जाती है थोड़ी सी। है ना? मे बी बिकॉज़ ऑफ क्यूमेरिन सब्सटांस की वजह से उसमें एग्जैक्ट मुझे नाम नहीं पता। बट हां 1/4 1/4 1/4 1/4 वन ज्यादा नहीं तो यह इतना लंबे टाइम तक लो। अभी सर्दियां आ रही है। छ महीने लो चाहो तो 6 महीने बंद कर दो बट लो। देखो दोस्तों आज मुझे बड़े भारी दिल से कहना पड़ रहा है कि आज हम जिस संसार में रह रहे हैं वहां मिलावट, अशुद्धि, टॉक्सिसिटी, पेस्टिसाइड्स, हर्बीसाइड्स, इंसेक्टिसाइड्स भरे पड़े हैं। आज हमारी
(1:01:05) जरूरत है। आज हमारे में से हर कोई जहर कंज्यूम कर रहा है। आज हम अगर अच्छा खाना भी खा रहे हैं। मैं मैं मान लो मैं तो मैं तो सिर्फ लौकी खा रहा हूं। बाबा जी ने बोला हैं लौकी खाओ। मैं लौकी खा रहा हूं। मान लो इवन दैट लौकी इज फुल ऑफ इंसेक्टिसाइड्स, पेस्टिसाइड्स। तो हम जहर तो खा रहे हैं। जब हम जहर खाएंगे तो सूजन आएगी। हमें प्रयास ये करना है कि उस सूजन को हम कैसे काट पाएं। तो एक ये अभी मैं क्या करता हूं? जैसे मैं तो अभी अदरक पाउडर और दालचीनी पाउडर काफी टाइम से ले रहा हूं। मुझे 3-4 महीने हो गए। मैं हमेशा मेरा नियम है। मैं वही चीज
(1:01:44) ले आता हूं जो मैं कर रहा हूं। मैं हाइपोथेटिकल इसका उसका यहां का वहां का ज्ञान नहीं देता हूं। इससे मुझे ज्यादा काम फील होता है। मुझे बेचैनी जैसा फीलिंग नहीं आता है। मैं ज्यादा शांत रह पाता हूं। और मुझे फायदा हुआ है। लेट मी बी वेरी क्लियर अबाउट दैट। लाइफस्टाइल होनी चाहिए। एक दिन में चमत्कार नहीं होगा। यह उम्मीद मत रखना दैट सिंगल डे वाओ चमत्कार निरंतरता में है। पानी की बाल्टी से चट्टाने नहीं टूटती है। पानी की बूंद जब चट्टान पर रोज रोज गिरती है तब चट्टान तड़कती है तब चट्टान भड़कती है और फिर टूट जाती है। एक चीज काली मिर्च क्यों बोला?
(1:02:29) हल्का सा चुटकी भर ज्यादा नहीं। क्योंकि काली मिर्च से ही हल्दी का अब्सॉर्प्शन हजार गुना बढ़ जाता है। मैं सिर्फ हल्दी यूज़ करूंगा। चुटकी भर काली मिर्च नहीं लूंगा तो हल्दी इफेक्टिव नहीं है। ठीक है? एक चीज हो गई। फिर मान लो किसी का पेट बहुत टाइम से खराब है। किसी को कॉन्स्टिपेशन है। अब मैं कितनी क्वालिटी का फूड ले लूं। अगर मेरे खाने में मेरे पेट में वो शक्ति ही नहीं है। वो ताकत ही नहीं है। तो मैं किसी भी केस में खाने को अब्सॉर्ब नहीं कर पाऊंगा। हां। मतलब मैं इतने सारे बातें आपको बताता हूं। यह बातें मेरी जिंदगी का अनुभव है। बीइंग अ डॉक्टर मैंने
(1:03:14) चीजें बहुत कुछ सीखी है। लेकिन मुझे पता है कि मैं वो नहीं सीख पाया जो मुझे सीख लेना चाहिए था। बहुत लोग नहीं सीख पाते। अनुभव जो सिखाते हैं, खुद को लगी हुई ठोकरें जो सिखाती है, वो मैं आपको सिखाता हूं। बिकॉज़ वन डे आई वास सफरिंग लाइक हेल। मतलब मैं आए दिन कभी गैस्ट्रोलॉजिस्ट के पास में और कभी साइकेट्रिस्ट के पास में जाता ही रहता था क्योंकि जिसका पेट खराब उसका दिमाग खराब जिसका दिमाग खराब उसका पेट खराब फिर एक चीज को मैं बहुत वंडरफुल चीज मानता हूं जिसको आप चाहे तो सुबह यूज़ कर सकते हैं चाहे तो आप रात को यूज़ कर सकते हैं ईसब गोल
(1:03:51) ईसबग गोल और उससे पहले मैं ये कहूंगा कि जिसका पेट बहुत लंबे टाइम से खराब है जिसको क्रॉनिक कॉन्स्टिपेशन है लंबे समय से कब्ज है लंबे समय से मैं इस चीज को जानता हूं कि भारत में कॉन्स्टिपेशन एक बहुत बड़ी दिक्कत है। कॉन्स्टिपेशन, पाइल्स बहुत सारे लोगों को भारत में इनफाइनाइट पीपल देखो आज हमको ये सिखा दिया गया है कि भाई किसी को बॉडी बनानी है ना बॉडी मसल्स बनानी है ना प्रोटीन लो। हां आजकल तो ऐसी रीस चलती है मार्केट में कि आज तुम्हारा प्रोटीन इंटक्ट पूरा हुआ कि नहीं हुआ? आज तुमने 200 ग्राम प्रोटीन लिया कि नहीं?
(1:04:35) अरे 200 ग्राम प्रोटीन उसका किडनी फट जाएगा। वो सिर्फ प्रोटीन ही ले रहा है। बैठा-बठा सो रहा है। आज तुम्हारा 150 ग्राम प्रोटीन हुआ कि नहीं हुआ? एक बात बताता हूं। इसको देखो। इसको जानते हो? ये हॉर्स है। यानी कि घोड़ा। यह होर्स है। कभी इससे पूछा है तेरा प्रोटीन पूरा हुआ है क्या? पूछा है इससे कि तूने आज कितना प्रोटीन लिया? बता बे। हम घोड़े की जो बॉडी है ना जो मसल्स है जो उसमें मस्कुलरिटी है ना ये प्रोटीन की नहीं है। मैं सोच रहा था एक दिन बैठा-बठा। मैंने कहा हाउ यार हाउ दिस फोर्स इज़ सो मस्कुलर। हाउ समझ में आया?
(1:05:24) ओस बिल्ड ए मस्कुलर बॉडी ऑन ग्रास। कि उनका डाइजेस्टिव सिस्टम ऐसा है कि उनके जो गट बैक्टीरियाज़ हैं ना वो ग्रास जो जिसमें बहुत सिग्निफिकेंट फाइबर है वो होर्सेस को सीधा डाइजेस्ट नहीं कर सकते। तो बैक्टीरिया जो है ना वो जो बहुत सारे बैक्टीरियास हैं वो इस फाइबर को फैटी एसिड्स में कन्वर्ट करते हैं एनर्जी के लिए और इसी ग्रास से वो प्रोटीन बनाते हैं। उससे मसल रिपेयर होता है। समझ रहे हो तुम लोग? ग्रास से बैक्टीरिया प्रोटीन बना रहे हैं। और तुम्हें लगता है कि तुम वे प्रोटीन के दो स्कूप लेके कॉन्स्टिपेशन में जाके बॉडी बना लोगे।
(1:06:06) हम तो सिक्स एगवाइट्स लेते हैं। क्यों? क्योंकि किसी अमेरिकन बॉडी बिल्डर का वीडियो देखा था। वह सिक्स एगवाइट्स लेता है। आर यू डूइंग द वर्कआउट? उसके बाद तुम्हारा पेट ठीक रहता है भाई? फाइबर्स और घोड़े लगातार चरते रहते हैं। घास खाते रहते हैं। फिर भी उनका इंसुलिन स्टेबल रहता है। स्ट्रेस हॉर्मोन लो रहते हैं। बिकॉज़ दे आर कंज्यूमिंग फाइबर्स। फाइबर्स फाइबर्स। तो मसल बिल्डिंग इनकी कैसे हो रही है? ना तो यह ग्रेंस खा रहे हैं, अनाज खा रहे हैं, ना यह मीट खा रहे हैं। तो कौन कर रहा है इनकी मसल बिल्डिंग? इनके बैक्टीरियास कर रहे हैं। बैक्टीरिया किस पे पनपते हैं?
(1:06:43) फाइबर पे पनपते हैं। अब तुम्हारा गटी अगर ठीक नहीं है तो गेम ही खत्म है। तो मैं क्या करूंगा कि लंबे समय से अगर कब्ज है तो आयुर्वेदा में एक ट्रीटमेंट होता है कैस्टर ऑयल। कैस्टर ऑयल यानी कि अरंडी का तेल। है ना? कैस्टर ऑयल अरंडी तेल होता है। हफ्ते में एक बार हफ्ते में एक बार तीन चम्मच ज्यादा नहीं जल्दबाजी नहीं पेशेंस। अपने शरीर पे अप्लाई किया धैर्य बनाए रखें और रैंडम चीजें ना करने लग जाएं। पेशेंस। मैंने क्या बोला? हफ्ते में एक बार वंस से ए वीक रोज नहीं करने का। दूध सूट होता है दूध में।
(1:07:28) पानी सूट होता है पानी में। वैसे इसको दूध में ही लेते हैं। मिक्स करके लो। आपका जो पुराना बहुत समय से लगता है कि पेट में कचरा जमा हुआ है। दैट विल क्लियर। यू विल फील मोर कंसंट्रेटेड, मोर कंपोज्ड, मोर हैप्पी, मोर फोकस्ड, मोर डिटरमाइंड विद मोर विल पावर। हां, धीरे-धीरे छोटे-छोटे परिवर्तन से हमको जादू चाहिए सबको। बेटा छोटी-छोटी चीजें जब हमारी जिंदगी में आएंगी तो हम बड़ा बदलाव ला पाएंगे। मतलब अगर मैं कहता हूं कि मान लो किसी इंसान को 100 साल जीना है। हां उसका सबसे मजबूत ऑर्गन कौन सा होना चाहिए?
(1:08:13) या वो किस चीज में किस्मत वाला होना चाहिए? पेट के मामले में। जिसका पेट ठीक होगा वो 100 साल अपने आप जिएगा। नो वीट अमेरिकन पिस्तेस बिकॉज़ यू नो बुमराह आउट स्विंग इन स्विंग अमेरिकन पिस्तेसिस दैट्स ओके बुमराह इज़ यू नो ही डिर्व सैल्यूट बिकॉज़ ही इज़ अ ग्रेट मतलब देश की सेवा करने वाला इंसान है वो अमेरिकन पिस्तेसिस वी नीड वी नो वी ईट काजू कैलिफोर्नियन काजू अरे भाई पेट ठीक है कहा खाक काजू कुछ काम करेगा योर ब्रेन पावर हार्ट पावर डाइजेस्टिव पावर, सेक्सुअल पावर, मसल पावर वह सब बनी ही पेट से है। तो मैं करूंगा। फिर अगर मुझे लगना अगर अगर अगर मेरे को
(1:09:01) लगता है कि मुझे रोटी भी हजम हो वो भी मेरे लिए प्रोटीन का काम करे तो मुझे अपनी लाइफ में फाइबर थोड़ा सा बढ़ा लेना चाहिए। मैं कैसे यूज़ कर सकता हूं? ईसब गोल जो आता है ये गोल्डन गोल्ड फाइबर है। ईसब गोल पता है अमेरिका अमेरिका वालों को रिसेंटली ध्यान चला। इसके बारे में सर्च करना। मैं जितनी बातें बोलता हूं ना उनके बारे में पढ़ते रहा करो कि जो सर कह रहे हैं डॉक्टर साहब जो कह रहे हैं ओटीटी के जो फाउंडर कह रहे हैं उसमें कितना सच है। आजकल तो इतनी फैसिलिटीज हैं। अमेरिका वाले पागल हो गए इसके पीछे ये सब गोल के पीछे कि यार गजब
(1:09:33) की बात है यार। हम तो पूरा गोलमोल घूम लिए। हमको कुछ पता ही नहीं लगा। मतलब इतना सुपर्ब सप्लीमेंट है फाइबर का यह कि इसको आप और अमेरिकन जिस चीज को एक्सेप्ट करते हैं ना वह बहुत रेयरली चीजों को एक्सेप्ट करते हैं क्योंकि वो खुद अपने जहर में घुले हुए हैं। उनके पास भी बहुत जहर है। कभी-कभी अमृत पहुंचता है उनके पास में। सुबह खाना और उसको दही में मिला के खा लो। दही प्लस ईसब गोल कॉन्स्टिपेशन नहीं होगा। पेट बिल्कुल शांत हो जाएगा। रात को दूध या पानी के साथ इसप गोल एक-एक चम्मच। योर गट विल क्लियर। योर गट विल बी क्लियर। और आपका पेट साफ
(1:10:10) होगा ना, आपको जिंदगी में सुकून फील होगा। आप महसूस करोगे कि धरती पे ही स्वर्ग है। मरने की जरूरत नहीं है उसके लिए। तो इस चीज पे आयेदा हमेशा हमेशा इस चीज की बहुत बात करता है। इस चीज के बारे में हमेशा बोलता रहता है। है ना? मैंने बता दिया। एक तो कैस्टर ऑयल बता दिया। यह सब गोल बता दिया। दालचीनी, हल्दी, जिंजर और काली मिर्च का पाउडर बता दिया। अगर किसी को लगता है कि भाई हमारा ब्रेन हेल्थ के लिए हमको कोई सप्लीमेंट बताओ। है ना? ब्रेन हेल्थ के लिए। ब्रेन हेल्थ के लिए हमें कोई सप्लीमेंट बताओ। फूड के तौर पे हम लोग क्या ले सकते हैं? वैसे बहुत सारी
(1:10:53) चीजें हैं जो आयेदा में भी बताई गई है। बहुत सारे सप्लीमेंट्स हैं जैसे अश्वगंधा है, ब्रह्मी है, संपुष्पी है, आंवला है, गिलोय है, जटामांसी है, तुलसी है और बहुत सारी चीजें ऐसी मिलती है। मैं ऐसा एक प्लान कर रहा हूं तेजस अमृत फॉर द ब्रेन हेल्थ। क्योंकि मैं मानता हूं कि रियल सप्लीमेंट्स, रियल फूड्स विदाउट एल्ट्रेशन ये चीजें होनी चाहिए। खैर, इसकी हम लोग बात करेंगे बाद में भी। ब्रेन हेल्थ के लिए अलसी के बीज अलसी के बीज नहीं अल्स फ्लेक्स सीड और अखरोट ये अगर आपके पास में पैसा थोड़ा कम है तो अलसी के बीज से भी काम चल जाएगा। देखो ये
(1:11:32) परसेप्शन छोड़ दो। ये जो परसेप्शन है ना क्या कि बाहर के एग्जोटिक ब्लू बेरीज यू नो अवोकडोस दे आर अमेजिंग। हमारा लाइफ हमारा सब कुछ जो बनेगा ना वह बनेगा किससे जो हम हमारे देश में देख रहे हैं हमारे आसपास देख रहे हैं। हम इसी देश में पैदा हुए हैं तो आसपास की जो चीजें हैं जो हमारे नेचर में हैं वही हमको सूट करने वाली है। बाकी हमको कोई सूट नहीं करने वाला। ठीक है? तो इसके लिए हो गया हमारा। फिर वर्कआउट रोज करो। पसीना हमको बहाना है। भाई यह है ना? यह मैंने यहां मेंशन नहीं किया था। वर्कउ
(1:12:18) आज हम इतने सारे टॉक्सिन से घिरे हुए हैं। अगर हम पसीना नहीं बहाएंगे ना तो जहर इकट्ठा होता चला जाएगा। और वह जहर हमें इतना बीमार कर देगा जितना ना तो कोई सिगरेट कर सकती है ना शराब कर सकती है ना कुछ कर सकती है। फिर मान लो किसी को लगता है कि यार हमारे बहुत सारे हमको लगता है हमको हार्ट इशूज़ हो सकते हैं। कुछ और हो सकता है। लहसुन की एक कली और शहद। लहसुन की एक कली। प्लस शहद आधा एक चम्मच बहुत रहेगा टेस्ट को ठीक करने के लिए। इसको ऐड करो और इसको कंज्यूम करो तो आपका थोड़ा सा बीपी कंट्रोल रहेगा और हार्ट हेल्थ ठीक रहेगा। देखो मैं फिर
(1:13:00) कह रहा हूं कोई भी चीज एक साथ शुरू मत करो। अभी जैसे मान लो सर इन इनमें से हम लोग क्या कर सकते हैं? तो मैं इसके साथ में जाऊंगा। ई सब गोल और सूजन को ठीक करो। पेट ठीक करो, सूजन ठीक करो। बस बाकी सब तो अपने आप हो जाएगा। बाकी किसी की चिंता करने की जरूरत ही नहीं है। अगर मान लो मुझे लगता है कि सेक्सुअल हेल्थ मेरा इशू है। भाई आजकल मेल सेक्सुअल हेल्थ एक बहुत बड़ा इशू बन गया है। मेल सेक्सुअल हेल्थ और मेल सेक्सुअल हेल्थ जो है वो वैसे तो एक्सरसाइज टाइम पर सोना, डीप रिलेशंस, हवा, धूप बहुत सारे फैक्टर्स पर डिपेंड करता है।
(1:13:43) लेकिन उसके अलावा आयुर्वेद में जो एक कहीं ना कहीं नेचुरल चीज है उसमें विथानिया सोमनीफेरा अश्वगंधा काली मूसली सफेद मूसली सेमल मूसली है ना बहुत सारी [गला साफ़ करने की आवाज़] चीजें ऐसी है इनको कंपाइल करके ये पूज्य समृद्ध हमने बनाया था जो सीमन की विस्कोसिटी पे काम करता है मतलब इसके फीडबैक बहुत जबरदस्त है और आज मैं खुश हूं कि मैं कम से कम 1000 लोगों की सेक्सुअल इश्यूज को ठीक कर पाया हूं। मेल सेक्सुअल इश्यूज फीमेल सेक्सुअल इश्यूज पे हम लोग काम कर रहे हैं। और मुझे पक्का यकीन है कि अगर हम इन अच्छी चीजों को प्रमोट करेंगे, हमारे देश में आगे
(1:14:26) लाएंगे तो दवाओं से हमारा देश बचेगा और वास्तव में हम लोग जिनको नाइट फॉल हो रहा था, जिनको इरेक्टाइल डिस्फंक्शन था, बहुत सारी चीजें हम इसको सिग्निफिकेंटली फायदा मिला है इस ओजस अमृत के इस्तेमाल से। ओज समृद्ध यह ओज समृद्ध और यह गजब की चीज है। जिन लोगों ने इस्तेमाल किया है वह अपना फीडबैक कमेंट सेक्शन में दे देंगे। सब लोगों को पता लगेगा। जो लोग पोर्न एडिक्शन में रहे और उनको फ्रीक्वेंट नाइट फॉल होने लगे। सीमन विस्कोसिटी डिक्रीज हो गया। सेक्सुअली बहुत वीक हो गए। उनके लिए बहुत जबरदस्त चीज है। और मैं वैसे तो आप लोगों को इन
(1:15:07) सबका आईडिया ही होगा। लिंक का पता ही होगा। बट फिर भी एक बार मैं भी आईडिया देता हूं। यह ओज समृत के फीडबैक से आप जाके दो एक बार जिन लोगों ने यूज़ किया उनसे रियलिस्टिक फीडबैक भी ले सकते हैं। ये इसका लिंक है ओज समृत का और मैं मानता हूं कि हर चीज के लिए हमें यह समझ लेना है कि अगर हम नेचुरल रहेंगे। हम उन चीजों से कनेक्टेड रहेंगे जो हमारी लाइफ में पैकेट्स में बंद हो के नहीं आती। हां जो रियलिस्टिक है, जो नेचुरल है तो वो कहीं ना कहीं हमारी हेल्प करती है। अब जैसे एलोपैथी की बात करते हैं। है ना? एलोपैथी में क्या है ना? वो लोग सेक्सुअल इलनेस के
(1:15:53) लिए क्या यूज़ करते हैं? सिडनोफिल। हां। उससे कई लोगों को कार्डियक अरेस्ट आ गया। कई लोग मर गए। कुछ लोग होटल्स में मरे मिले। आप इनके बारे में पढ़िए। आर्टिकल जब देखेंगे तो आप पाएंगे। तो बहुत सारी चीजें हैं। खैर ये एक तेजस अमृत है। इसके बारे में एक डिटेल में हम लोग कभी बात करेंगे। प्लान करेंगे इसको और मेंटल हेल्थ के लिए हम लोग इस पे काम कर रहे हैं। तो मैं आपको जरूर से बताऊंगा। खैर फिलहाल एक बार नहीं आता। चलिए अब जितनी बातें हमने करी है कि हमें पैकेट्स में चीजें यूज़ नहीं करनी है। हमने [गला साफ़ करने की आवाज़]
(1:16:39) मोबाइल फोन का यूज़ नहीं करना है। हमें धूप में समय गुजारना है। नेचुरल एयर में रहना है। बहुत सारी चीजें हमने डिस्कस करी। हमको मॉडर्न साइंस के एक्सपेरिमेंट को नेचुरली क्योर करने का प्रयास करना है और हम इसी तरफ आगे बढ़ रहे हैं। तेजस अमृत एक जो क्योंकि ओटीटी भारत ओजस्वी तेजस्वी तपस्वी है ना ये ओजस अमृत था और ये तेजस अमृत था। तीसरी चीज गट हेल्थ के लिए रहेगी और यहीं पर हमारा जो जो प्रोडक्ट का जो मामला है जो रेंज है वो हम लोग उसको फिनिश कर देंगे क्योंकि मुझे लगता है कि ये तीन चीजों की तो जरूरत है मेंटल हेल्थ सेक्सुअल हेल्थ ग हेल्थ तो ये तेजस अमृत
(1:17:23) है और इसके क्या कंपोजीशन है एक बार मैं आपको बता देता हूं इसमें अश्वगंधा है ब्राह्मी है संपुष्पी है ये कंसंट्रेशन फोकस मेमोरी के लिए है क्या फायदे हैं इसके मेंटल क्लेरिटी डी फोकस सस्टेन कंसंट्रेशन कामनेस इमोशनल बैलेंस रेिलियंस मेमोरी लर्निंग कॉग्निट की परफॉर्मेंस और बहुत सारी चीजों में यह फायदा करता है और इसका भी हम लोग जो है वो एक लिमिटेड वर्जन बना रहे हैं। लिमिटेड प्रोडक्ट बना रहे हैं इसके। मैं एक बार इसका लिंक आपको प्रोवाइड कर देता हूं क्योंकि इस महीने के एंड तक इसकी डिलीवरी हम लोग शुरू कर देंगे। यह तेजस अमृत है। ये यहां पर ये
(1:18:00) रहा तेजस अमृत। यहां से आप स्कैन कर सकते हैं। और मैं एक चीज की श्योरिटी दे सकता हूं दैट हर्ब्स हम लोग एज इट इज़ देते हैं। एज इट इज़। उसमें कोई मॉड्यूलेशन नहीं है। उसमें कोई टेस्ट एनहांसर नहीं है। कोई प्रिजर्वेटिव नहीं है। एज़ इट इज़ उसको कंज्यूम करेंगे तो ज्यादा इंपैक्टफुल रहेगा। ठीक है? अभी फिलहाल मैं आप सभी से एक रिक्वेस्ट करता हूं कि अपनी प्रोफाइल फोटो को oटीt भारत की प्रोफाइल फोटो बना लें। जो भी आपने फोटो बना रखी है वो। एक बात दूसरी बात इस सेशन का फीडबैक जरूर से दें क्योंकि वह मेरे लिए मोटिवेशन है। तीसरी बात आप अगला
(1:18:36) सेशन किस चीज पर चाहते हैं वो भी बता दें क्योंकि जब तक आप मुझे आईडिया नहीं देंगे मेरे लिए आपकी आपसे बात करना समझ क्योंकि सब चीजें मुझे ही करना पड़ता है। मैं मेरे पास कोई बहुत बड़ी टीम नहीं है। हम एक दो लोग हैं जो मिलके काम करते हैं। मेरे पास कोई 50-60 लोग कंटेंट रिसर्च के लिए नहीं है। यह मेरा मेडिकल बैकग्राउंड है जो मुझे हेल्प करता है इस सब चीजों में और किसी भी चीज पर अगर मैं आपकी हेल्प कर पाऊं तो मैं 100% प्रयास करूंगा कि मैं इन डिटेल डीप सेशन ले पाऊं। oटीt भारत के लाइव सेक्शन में जाकर जब आप चैनल पे जाएंगे oटीt भारत पे लाइव में जाकर बहुत
(1:19:13) सारे सेशंस आप देख सकते हैं। मैंने बहुत सेशंस लिए हैं। इस सेशन का फीडबैक आप और क्या चाहते हैं वो oटीt भारत की प्रोफाइल फोटो ये चीजें जरूर से चेंज कर दें। आज का सेशन कैसा लगा ये जरूर से बता दें। नमस्कार करता हूं। प्रणाम करता हूं। जरूर से मिलता रहूंगा। बार-बार मिलता रहूंगा। मिशन जिंदा रहेगा। मैं फिर रिपीट कर रहा हूं। मिशन कभी खत्म नहीं होना चाहिए। मिशन इज़ वेरी वेरीरीेंट फॉर अस। और मैं चाहता हूं कि दुनिया रियल चीजें यूज़ करें। अगर आप हमसे मतलब मुझसे WhatsApp पर जुड़ना चाहते हैं तो यह नंबर है ओटीT भारत का। यह हमारा मिशन है। मिशन फॉर
(1:19:52) पावरफुल भारत। आज की यात्रा को यहीं समाप्त करते हैं। मैं फिर रिपीट कर देता हूं। इस दुनिया में बीमारी को ठीक करना महान बात है लेकिन बीमारी से बचाए रखना महान बात है। मैं हूं डॉ. अभिमन्यु कुमावत और आप देख रहे थे ओटीटी भारत। नमस्कार प्रणाम शुभ रात्रि।
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