Rajeev Dixit Ji’s 100 Powerful Words Explained | Vagbhatta Ashtanga Hridayam Nichod LIVE
Author Name:OTT Bharat by Abhimanyu Kumawat
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Transcript:
(00:00) साथियों नमस्कार नमस्कार [गला साफ़ करने की आवाज़] आज एक बहुत ही महत्वपूर्ण सेशन लेकिन उससे पहले कई प्रकार की समस्याएं जहां पर मैं हूं वहां पर [गला साफ़ करने की आवाज़] बारिश और तूफान जैसे हालात हैं। इंटरनेट कनेक्टिविटी की थोड़ी समस्या रही लेकिन हमने चीजें ठीक कर ली। आज जिस शख्सियत के बारे में बोलने जा रहा हूं, उस शख्सियत के कर्मों के बारे में आप में से बहुत सारे लोग नहीं जानते होंगे कि उस इंसान ने भारतीयों में भारतीयता जगाने के लिए खुद को जला दिया। उस इंसान का नाम है आदरणीय राजीव दीक्षित। और
(00:45) इंटरेस्टिंग बात यह है कि इन इनके बारे में जितने इनके कर्म मशहूर हैं उतना ही इनके स्वर्ग सिधारने पर विवाद है। तो हम राजीव दीक्षित जी के बारे में आज चर्चा करेंगे। उनके बताए हुए जो बातें हैं जो हमारी जिंदगी में महत्वपूर्ण है और वास्तव में हमारी दैनिक जिंदगी को सुधार सकती है। राजीव दीक्षित जी ने जिंदगी भर वागभट्ट वाग्भट्ट जो हैं वह एक आयुर्वेद के विशेषज्ञ रहे हैं और वाग्भट्ट जो थे वह चरक के शिष्य थे। आई होप आप सब बातें यहां पर देख पा रहे होंगे
(01:32) और मेरी आवाज और सब चीजें आपको विज़िबल होगी। एक बार सभी लोग जय ओटीटी भारत लिख दें चैट सेक्शन में ताकि हम उसको बिल्कुल ठीक है तो भाई अब थोड़ा सा इमोशनल मैटर है मेरे लिए कहीं ना कहीं ये राजीव जी के बारे में बात करना क्योंकि जब इनके बारे में बात होती है तो सबसे पहली बात होती है कि यार राजीव जी कैसे हमें एकदम से छोड़ के चले गए और हर भारतीय यही जानना चाहता है कि क्या हुआ था और उसके बाद में वागभट्ट के बारे में जिन्होंने बातें की वाग्भट्ट चरक के शिष्य रहे और उनकी बातों का प्रसार किया इन्होंने पूरे भारत में
(02:19) अष्टांग रिदमम के नाम से किताब है अष्टांग रिदमम और अष्टांग रिदमम के बारे में इनका ये कहना था कि जैसे आपको गीता याद है, जैसे आपको महाभारत याद है, जैसे आपको रामायण याद है कि किसी और धर्म की जो जो किताबें आपको याद है, इट मे बी कुरान, इट मे बी बाइबल, व्हाटएवर इट इज़। तो आपके धर्म की किताब की तरह आपको अष्टांग रिदमम बेहतरीन जीवन जीने के लिए याद होनी चाहिए। अब समझिए एक बार राजीव दीक्षित जी की मृत्यु अपने आप में एक बहुत ही पेचीदा विषय है जिसके बारे में मैं कहूंगा कि इन्वेस्टिगेशन रिपोर्ट आए तो ज्यादा कहना बेहतर है। लेकिन क्या हुआ
(02:58) था? इनकी मृत्यु हुई थी 30 नवंबर 2010 को 43वें जन्मदिन पर। हां अब तक जन्मदिन की बात है तो कल मेरा भी जन्मदिन है। कल 31 ऑफ मई है। लेकिन ये इनका जन्मदिन था और उसी दिन इनकी मृत्यु हो गई छत्तीसगढ़ के भिलाई में। उनकी मौत आज भी भारत के सबसे बड़े अनसुलझे रहस्यों में से एक मानी जाती है क्योंकि इनको लेकर दो अलग-अलग पक्ष हैं। गवर्नमेंट डॉक्टर्स और ऑफिशियल रिपोर्ट्स ये कहती है कि उनकी डेथ का रीजन कार्डियक अरेस्ट था। और बताया जाता है कि जब छत्तीसगढ़ के बेमत्रा के एक आश्रम में वाशरूम में गए थे। इसके बाद एकदम से वह गिर गए। जब
(03:37) हॉस्पिटल ले गए तो उनको डेड डिक्लेअ कर दिया गया। लेकिन उसके बाद में बात यह आई कि जो उनके सपोर्टर्स हैं अब राजीव जी के सपोर्टर्स शायद मेरी बात को महसूस करवाते होंगे कि उनका भी एक मिशन था कि हमें देश को ओजस्वी तेजस्वी तपस्वी भारत बनाना है। तो उनके समर्थकों ने कहा, उनके फैमिली मेंबर्स ने कहा और जो इंडिपेंडेंट लोग उनके बारे में पढ़ रहे थे, उन्होंने कहा कि यार उनकी मौत नेचुरल नहीं है। उसके पीछे एक फोल प्ले हो सकता है। गहरी साजिश हो सकती है। उनका यह कहना था कि अह जो उनका शरीर था जो उनकी बॉडी थी जो जिन्होंने उनको देखा वो ये कहने लगे कि
(04:20) यार वो उनका शरीर अजीब तरीके से नीला और काला पड़ गया था और ऐसा तब होता है जब शरीर में कोई जहर हो। खैर पोस्टमार्टम नहीं हुई। कितनी एक अजीब सी बात है कि इतनी एक प्रभावशाली शख्सियत के पोस्टमार्टम को नहीं होने दिया गया। को कैसे नहीं होने दिया गया? उसके पीछे कई सारे फैक्टर्स हैं। कहा गया कि ऐसे इंसान की डेथ के बाद में उनका पोस्टमार्टम क्यों नहीं हुआ? पार्थिव शरी को सीधे हरिद्वार ले जाया गया और उनका अंतिम संस्कार कर दिया गया। फिर आगे नाम आता है बाबा रामदेव का। बाबा रामदेव के लिए कहा गया कि उन्होंने अपने इंपैक्ट से उनके
(04:59) पोस्टमार्टम को प्रिवेंट किया। जबकि बाबा रामदेव इसके बारे में कह चुके और उन्होंने कहा कि यार देखो मैंने अपने लेवल पर हमेशा हमेशा प्रयास किया है कि मैं जब उनको हार्ट अटैक आया तो मैं खुद वहां पर था और मैं खुद उनको हॉस्पिटल लेके गया। मैं चाहता था कि उनके वहां पर एंजियोप्लास्टी हो। लेकिन बाद में कुछ ऐसा निकल के आया कि वह खुद नहीं चाहते थे कि कोई एलोपैथिक डॉक्टर उनका ट्रीटमेंट करें। क्योंकि उनका ये मानना था कि मैंने जिंदगी भर आयेदा को प्रमोट किया है। मैं नहीं चाहता कि आखिर में जब मैं मौत से लड़ रहा होता हूं तब मैं एलोपैथी को प्रमोट करूं।
(05:40) तो उस वक्त राजीव दीक्षित जी बाबा रामदेव के साथ मिलकर भारत स्वाभिमान आंदोलन को एक राष्ट्रीय स्तर पर एक राजनीतिक विकल्प के रूप में खड़ा करने का प्रयास कर रहे थे और कुछ लोगों का आरोप है कि रामदेव और उनके करीबियों ने परिवार की पोस्टमार्टम की मांग को दबा दिया और हालांकि पतंजलि और बाबा रामदेव ने इन आरोपों को खारिज किया है। अब एक और मुद्दा यह निकल के आता है कि वह हमेशा ये मानते रहे कि हमारे देश को विदेशी कंपनियां लूट रही है और वह यहां का पैसा बाहर लेके जा रही है। तो उन्होंने लगातार Pepsi, CocaC कोला जितनी ये कंपनीज़
(06:11) हैं, फार्मा कंपनीज़ हैं, एमएसी के खिलाफ खुलकर बोलते थे और स्वदेशी अपनाने की बात करते थे। उनके समर्थकों का मानना है कि वे कई वैश्विक ताकतों की आंख की किरकिरी बन चुके थे और इसी वजह से शायद उनके साथ में पोल प्ले हुआ। फिलहाल कंडीशन यह है कि प्राइम मिनिस्टर ऑफिस पीएमओ ने आदेश दिया है कि इनकी डेथ को इन्वेस्टिगेट किया जाए। अब बात हम तो हमेशा हमेशा कहीं ना कहीं ये जो हम सेशन ले रहे हैं ये उनकी मेहनत को उनके जज्बे को देश के प्रति समर्पण और त्याग को एक श्रद्धांजलि है और हम आज वापस रिवाइव करने का प्रयास कर रहे हैं जो राजीव जी ने हमारे देश को दिया। यह
(06:54) किताब है जिसका नाम है अष्टांग रिदमम और अष्टांग रिधम एक हम कहें कि आयुर्वेदा के महान विद्वान चरक एक बहुत महान विद्वान हैं और आयुर्वेद आपको पता ही है ये इंडियन साइंस है अबाउट द लाइफ है ना उनके शिष्य हैं वागभट्ट तो वागभट्ट ने अपने गुरु के जो जितनी उन्होंने प्रैक्टिकल लाइफ में सीखी चीजें जो एनालिसिस किया जो समझा आयेदा के बारे में उन्हीं चीजों को लिखा इस अष्टांग रिदमम में और जितनी चीजें लोगों के लिए संभव हो पाई कलेक्ट करके उनको एक्सप्लेन करना वापस से इन्हें किताबों के रूप में प्रकाशित किया गया। तो हर एक किताब के
(07:39) राइटर डिफरेंट-डिफरेंट है। लेकिन है ये हष्टांग हृदमी। अब तो हम अब उस मुद्दे पर आ रहे हैं जो राजीव जी ने हमारे देश को सिखाने का प्रयास किया है कि भाई उनका मानना था कि मुझे अष्टांग रिदमम कंठस्थ है और मैं जितनी बातें भूलता हूं वो अष्टांग रिदमम से प्रेरित है। हमारे देश के हर एक व्यक्ति को अष्टांग रिदमम को पढ़ना चाहिए। हृदय में आत्मसात कर लेना चाहिए और अपनी जिंदगी को इसी तरीके से जीना चाहिए जैसा कि इस किताब में कहा गया है। कुछ ऐसे मुद्दे हैं इस पर जो मैं डिसए्री करता हूं क्योंकि मुझे मॉडर्न जो मेडिसिन है उसको भी साथ में लेकर चलना पड़ेगा। बिकॉज़ आई
(08:17) हैव डन माय एमबीबीएस। तो मैं अपना पॉइंट ऑफ व्यू भी वहां पर रखता चलूंगा। सबसे पहली बात है ये कि सर्वेशा मेंव रोगाणाम दुनिया में जितने भी रोग हैं जितने भी रोग हैं उनका कारण है कमजोर अग्नि यानी कि वीक डाइजेशन एंड नाउ इट हैज़ बीन प्रूव्ड साइंटिफिकली एज वेल कि इवन एंग्जायटी द साइकेट्रिक डिसऑर्डर्स द डिप्रेशन दे ऑल स्टार्ट स्टार्ट इन योर गट ऑल ऑटोइ्यून डिजीजेस ऑल स्किन इनफ्लामेटरी इश्यूज दे ऑल स्टार्ट इन योर गट पेट में शुरू होते हैं
(09:02) और पेट में प्रॉब्लम तभी शुरू होती है जब आपकी अग्नि कमजोर हो यानी कि आपका डाइजेशन कमजोर हो। मैं फिर रिपीट कर देता हूं। मैं फिलहाल जहां से सेशन ले रहा हूं यहां पर हालात कुछ अजीब हैं। अजीब इन द सेंस बारिश हो रही है बाहर तेज और मैं उम्मीद करता हूं कि इलेक्ट्रिसिटी कट ना हो। इंटरनेट चलता रहे। ऐसी मेरी दुआ है। अगर इन केस कुछ हज़ार्ड्स आते हैं, कुछ ऑब्स्ट्रक्शंस आते हैं, तो इसका मतलब यह नहीं होगा कि ये चीज वापस से नहीं होगी। मैं हर एक केस में संदेश आप तक पहुंचाने का प्रयास करूंगा। बट हम बेस्ट के लिए सोचते हैं। दैट इज
(09:37) इंपॉर्टेंट फॉर नाउ। तो आज हम लोग जो लोगों का दिमाग सड़ता है या लोगों को जितनी भी दिक्कतें हैं चाहे वो बीपी की हो चाहे शुगर की हो चाहे किसी भी प्रकार की हो दे ऑल स्टार्ट विद द गट वो सब पेट से शुरू होती है बीमारियां पेट में शुरू होती है और उनका ये मानना था कि जो आपकी डाइजेस्टिव फायर है यानी जो पेट की अग्नि है जिसको आज हम एचसीएल पेप्सिन ट्रिप्सिनोजिन डिफरेंट टाइप ऑफ एंजाइम से कोरिलेट करते हैं। अगर आपका पेट ठीक है तो आपकी जिंदगी ठीक रहेगी। अगर आपका पेट ठीक नहीं है तो आपका जीवन छोटा होता चला जाएगा। हो सकता है 50 साल जिएं
(10:19) 60 साल जिएं तो वो पेट छोटा मतलब जीवन जो है वो छोटा होता चला जाएगा। तो हमें अपने डाइजेशन के ऊपर काम करना चाहिए। और एक चीज समझ लेनी चाहिए कि जैसे हमारी आर्टरीज हैं, जैसे हमारी वेंस हैं, वैसे ही हमारा जो आंतें हैं वो भी एक तरीके से नली है। और उस नली की सफाई का सबसे बेहतरीन तरीका यह है कि हम फाइबर लें। क्योंकि वो ब्रश की तरह काम करता है। हमारी आंतों को साफ करता है। जब हमारी आंतें साफ रहेगी तो हमारी जठराग्नि यानी डाइजेस्टिव पावर अपने आप ही अच्छी रहेगी। सबसे महत्वपूर्ण चीज है क्योंकि आपको शायद पता ना हो। मैंने इससे पहले कई पेट के रोगों के ऊपर सेशन
(10:59) लिए हैं। आप oटीt भारत चैनल पर देख सकते हैं और यह हमें समझ लेना पड़ेगा कि पेट के जितने भी रोग हैं वो अगर आपके शरीर में एक बार एंटर हो गए तो बहुत हार्ड डिसिप्लिन मांगते हैं वो हर एक केस में। विशेष तौर से जब हम बात करते हैं कि यार फाइबर कंजमशन होना चाहिए, पानी पीना चाहिए, एक्सरसाइज होनी चाहिए, मूवमेंट होना चाहिए। और जब आपका देखो उन्होंने सिंपली बात कही कि अगर आग तेज है तो लोहा भी पचेगा और आग ठंडी है तो सेब भी सड़ेगा। मतलब जिस चीज़ को रोगी लोग खाते हैं। मतलब हमारे देश में तो ऐसे ही होता है कि फ्रूट को अक्सर रोगी लोग खाते हैं। तो सेब जो
(11:40) सबसे आसानी से पचने वाला फ्रूट है कहीं ना कहीं जिसमें हाई फाइबर कंटेंट है वो भी सड़ने लगता है। वरना आप लोहे की कीलें भी पचा जाएंगे। तो अपने डाइजेशन के ऊपर सबसे इंपॉर्टेंट काम करो। अभी जितने लोग देख रहे हैं ये प्रण लेंगे, शपथ लेंगे। जिनका डाइजेशन कमजोर है। ओटीT भारत पे जो पेट खराब वाले सेशंस हैं उनको देखेंगे और अगले 7 दिन में अपना डाइजेशन रिसेट करने। देखो ये समझ लीजिए ये एक्सिस है। ये ये हमारा सेंट्रल एक्सिस है। ये बीच का एक्सिस है पेट। हाईएस्ट एक्सिस है ब्रेन। यहां से हम जिंदगी में सब कुछ करते हैं। और लोएस्ट
(12:17) एक्सिस है हमारा सेक्सुअल ऑर्गन्स। तो अगर पेट खराब है ना तो आपको सेक्सुअल इश्यूज अपने आप होने लगेंगे। नाइट फॉल है, प्रीमेचर्योर इजगुलेशन है। अह ऑटो सीमेंट डिस्चार्ज है। [हंसी] है ना? और सेक्सुअल थॉट्स भी एक्सेस में आएंगे। फिर ब्रेन भी बेटर काम नहीं करेगा। कंसंट्रेट नहीं कर पाएंगे। फोकस नहीं कर पाएंगे। क्रिएट नहीं कर पाएंगे। नया नहीं सोच पाएंगे। एंथूजियाज्म नहीं रहेगा। जोश नहीं रहेगा। कुछ नया करने का जुनून खत्म हो जाएगा। और आप पाएंगे कि यार मैं मर जाऊं तो बढ़िया है। मैंने अक्सर पेट के रोगियों से ऐसे स्टेटमेंट सुने हैं
(12:50) कि जिंदगी नरक है यार। तो आई जस्ट पेट के रोग को ठीक होने में भी समय लगता है। हालांकि मैं प्रयास करूंगा कि पेट के रोगों के ऊपर मैं एक सेपरेट सेशन जल्द से जल्द वापस एक प्लान करूं जिसमें इरिटेबल बाउल सिंड्रोम है जिसमें जीआरडीए गैस्ट्रोसोफिजियल रिफ्लेक्स उसके अलावा अल्सरेटिव कोलाइटिस है। उसके अलावा पेप्टिक अल्सर है। उसके अलावा ऑटोइन डिजीजसेस है। उसके बारे में अलग से एक बार चर्चा करने का प्रयास करूंगा। लेकिन सबसे महत्वपूर्ण चीज ये है कि अगर हम जैसे मान लो जो लोग फौजी होते हैं जो हमारे देश की बॉर्डर की रक्षा करते हैं उनके पेट के
(13:24) बारे में कभी आप दिक्कतें सुनेंगे नहीं क्योंकि वो भागते हैं। तो जिसके दो पैर चल रहे हैं ना उसकी जिंदगी दौड़ती है। तो हमें इस चीज को कहीं ना कहीं समझने का प्रयास करना है। और अगर पेट में दिक्कत है तो बायोलॉजिकल क्लॉक को फॉलो करना शुरू करें। समय पर उठना शुरू करें। दैट इज मोस्टेंट। ना आप लेट उठेंगे तो वैसे ही चीजें आपके शरीर में सड़ने लगेंगी और एक्सरसाइज करने का प्रयास करें। मैं हमेशा कहता हूं सीढ़ियां चढ़े पानी पिए। फाइबर कंज्यूम करें। खाना खाने से पहले थोड़ा सा फाइबर कंज्यूम करें और आप पाएंगे कि आपको भूख लगना शुरू होगी।
(14:00) क्योंकि जिसे जिस इंसान को पेट में भूख होगी ना उसी को सफलता की भूख होगी। जिस इंसान का पेट भरा हुआ है। जिस इंसान को हमेशा अरे कुछ खाने का मन नहीं कर रहा यार। पेट भरा वो इंसान फिजिकल लाइफ में भी हमेशा भराभरा महसूस करेगा यार क्या करना है यार क्या तो अगर जिंदगी में कुछ हासिल करने की भूख पैदा करनी है ना तो पहले पेट में भूख पैदा करो सिंपल गेम है यार इतने बेसिक-बेसिक चीजें हैं ये अगर मुझे कुछ भी वो शिकार वाली भूख पैदा करनी है ना तो पहले मुझे डाइजेस्टिव फायर पैदा करनी पड़ेगी दैट इज मोस्ट इंपॉर्टेंट एव्री मेंटल फायर एव्री
(14:36) सेक्सुअल फायर एव्री फायर स्टार्ट फ्रॉम द डाइजेस्टिव फायर इफ यू हैव डाइजेस्टिव फायर यू हैव एव्री फायर और अगर यहां का दिया बुझ गया तो दिमाग का बत्ती गायब। हर बत्ती गायब है। फिर कोई पूछेगा भी नहीं आपको। अब हर बत्ती गायब है। इसमें समझ गए होंगे आप लोग मैं कौन-कौन सी बत्तियों की बात कर रहा हूं। फिर आगे देखो क्या कह रहे हैं ये? ये राजीव दीक्षित जी ने यही सारी बातें यही सारी बातें बोली। यही सारी बातें बोली है स्ट्रांग रिदमम से जो मैं वापस से एक सेशन के माध्यम से उनकी संपूर्ण बातों को यहां लाने का प्रयास कर रहा हूं। चलिए आगे यहां चलते हैं। ये कह
(15:17) रहा है विरुद्धपि च आहारम विद्याद्वश गरोपम मतलब दूध के साथ में मछली दूध के साथ में खट्टे फल। आजकल तो शेक में चल रहा है भाई। आजकल शेक में लोग कुछ भी बना देते हैं। कुछ भी ऑरेंज भी पीस रहे हैं। हम तो ऑरेंज शेक दूध के साथ में चल रहा है। उसके अलावा उन्होंने यह एक बहुत इंटरेस्टिंग बात कही। इसके ऊपर बहुत कंट्राडिक्टरी स्टेटमेंट्स हैं लोगों के। उनका कहना है कि बराबर मात्रा में शहद और घी मिलाना जहर के समान है। जहर के समान है। और ऐसा शायद उनकी ऑपोजिट प्रकृति की वजह से कहा गया कि इसकी प्रकृति अलग है। इसकी प्रकृति अलग है।
(15:55) इसका नेचर अलग है। और ठीक है? और इनका ये कहना है कि आप ऐसी चीजें मिक्स करोगे कि दूध के साथ मछली खा ली। हां। पहले खाई मछली उसके बाद आपने दूध पी लिया या फिर आपने क्या किया? पाइनएप्पल शेक बना दिया। दूध डाल के उसमें हां शानदार पीस लिया। ओो पाइनएप्पल शेक मजा आ गया। एंड देन यू एंड अप विद द ऑटोइ्यून डिजीज एंड द स्किन डिजीज। सो डिफरेंट काइंड ऑफ़ कॉम्बिनेशन विल एंड अप मेक यू अ डिफरेंट कंपोज़शन योरसेल्फ। आप ये महसूस करेंगे कि आप उन कंपोजशन के चक्कर में खुद ही कुछ अलग बन गए हैं। तो भाई जितने भी कैफेस हैं, जितने भी रेस्टोरेंट्स हैं, जितने भी जूस शॉप्स
(16:36) हैं वो जो भी कॉम्बिनेशन वो जो लिखा होता है उनके कुछ ऑड लिखा होता है तो आप पहले ऑर्डर करते हो। अच्छा ये ऑड है। ओके? क्या है ये? अंगूर शेक। वाओ अंगूर शेक। दिस इज़ दैट्स नाइस। पहली बार सुना अंगूर शेक। ये तो ग्लीस लाइए। और फिर आइसक्रीम मिला दी अंगूर में। आइसक्रीम मिला। अगेन अ मिल्क कंटेंट। तो यू एंड अप बीइंग यू नो डिस्ट्रइंग योर ओन हेल्थ। खैर फिर आगे समझिए। ये कहते रहे हैं कि जैसे इसको पढ़ लेते हैं एक बार। तक्रम सककर्ष दुर्लभम यथा सुरणा अमृतम। यानी कि जैसे स्वर्ग में इंद्र के लिए अमृत है। वैसे ही धरती पर इंसानों के लिए अमृत छाज है। और
(17:21) यह पाइल्स और आईबीएस जैसी कई बीमारियों को ठीक करने का दम रखती है। अगर इसको सही मात्रा में सही तरीके से इस्तेमाल किया जाए तो कहीं ना कहीं जो हमारे डाइजेस्टिव ट्रैक्ट के डिसऑर्डर्स हैं वो कहीं ना कहीं अल्सरेशन से कुछ में ऊपर अल्सरेशन हो जाते हैं। कुछ में नीचे अल्सरेशन हो जाते हैं। क्योंकि आपका डाइजेशन जो है या तो एसिड एक्सेस में सीक्रेट हो रहा है। एसिड कमजोर है। इससे खाना सड़ रहा है और फिर वहां पर अल्सरेशन हो जा रहा है। तो छाछ को इनको इन्होंने कहा है कि धरती का अमृत है। छाछ। आज के टाइम में जो पैकेट छाछ के मिलते हैं एक बहुत अजीब सी बात है। मैं
(17:56) देख रहा हूं आजकल दुकानों के बाहर छाछ के पैकेट्स पड़े होते हैं। 45 46° 27° एमआरआई का टेंपरेचर है। वो प्लास्टिक ऐसा है जो 46 7° टेंपरेचर टोलरेट नहीं कर सकता। वो छाछ के साथ में वो प्लास्टिक मिक्स हो जाता है। फिर आप प्लास्टिक फिर वो थोड़े टाइम बाद में उसको फ्रिज में रख देते हैं कि भाई वो फ्रिज वाली छाछ खत्म हो गई। अब ये वाली छाछ हमको देनी है। तो उसमें क्या होता है? फिर प्लास्टिक मिक्स हो रखा है। फिर उस छाछ को अंदर ले जाके ठंडा करते हैं। फिर आप लेके आ जाते हो वाओ ठंडी-ठंडी। जबकि उसमें प्लास्टिक मिक्स हो रखा है। दैट इज़ वेरी
(18:28) वेरीरी डेंजरस फॉर यू। आई होप यू अंडरस्टैंड। तो उसको समझ लेना है कि उसको अपन दही जो है अगर घर पर जमाएं और फिर छाछ पे तो दैट इज दैट इज दैट इज मोर वैल्यूुएबल। फिर यह देखो यहां पर चलिए आगे चलते हैं। फिर यहां पर आपकी चैट ऑफ है। मुझे अभी ध्यान चला मुझे माफ करिएगा। हमारे साथियों ने पता नहीं कैसी-कसी नई-नई सेटिंग्स करते हैं। उन्होंने चैट ऑफ की हुई है। हम इसको ऑन कर देते हैं एक बार। चैट ऑफ नहीं करनी थी। बड़ा अफसोस हुआ मुझे जानकर कि चैट ही ऑफ की हुई है आज।
(19:37) आई होप यस ठीक है ऑलराइट चलिए आई होप यस एवरीथिंग इज ऑडिबल एंड विज़िबल ठीक है एक्सरसाइज एक थोड़ा सा कंट्राडिक्टरी स्टेटमेंट है। अब यहां एक बार इसको समझने का प्रयास करते हैं। हमारी टीम थोड़ी सी कमजोर टीम है क्योंकि हम थोड़े छोटे शहर से हैं। तो छोटे शहर में थोड़ी कमजोर टीम है। उसको
(20:23) माफ कर देना। यहां चलते हैं। एक्सरसाइज की हाफ कैपेसिटी थ्योरी। मतलब यह अष्टांग रिदमम में लिखा गया है। क्या सोच के लिखा गया है? क्यों लिखा गया है? अब देखो कई पैरामीटर्स हैं। कुछ लोग ये बोल देते हैं कि सर अह वागभट्ट ने ये कहा है वाग्भट जी का यह कहना है। फिर राजीव दीक्षित जी ने ये कहा है कि जब आपके अह जो आर्म पिट्स हैं अह जो आपके आम पिट्स हैं उनमें थोड़ा सा हल्का-हल्का पसीना आ जाए, तो एक्सरसाइज रोक देनी चाहिए। वरना एक्सरसाइज उसके बाद में हार्मफुल होती है। ऐसा उन्होंने कहा है। अब देखिए डिफरेंट-डिफरेंट गोल्स हैं।
(21:02) अगर मान लो किसी को ओलंपिक में जाना है। कोई बॉक्सर है या कोई पहलवान है, कोई आर्मी वाला बंदा है, कोई डिफरेंट स्पोर्ट्समैन है, फुटबॉल वाला है। अब मान लो फुटबॉल वाला कोई है ना फुटबॉलर भाग रहा है ग्राउंड में और भागते-भागते उसके आपस में जो है वो पसीना आ गया। अब वो गोल करने वाला था और रुक गया कि यार यहां पसीना आ गया। वाग्भट्ट जी ने बोला था अब यहां पसीना आ गया तो अब आगे नहीं बढ़ना है रुक जाओ तो समझ लीजिए इनके नियम नॉर्मल लोगों के लिए है जो नॉर्मली जिंदगी जीना चाहते हैं यहां समझ लीजिए अपनी ताकत से आधा व्यायाम करो जैसे ही माथे या आंख में
(21:42) पसीना आ जाए मुंह से सांस लेनी पड़े वर्कआउट रोक दो हद से ज्यादा जिमिंग ओज का नाश करती है विशेष तौर से जब आराम ना किया जाए। अब आपका गोल क्या है? अगर आपको सिंपली नॉर्मल जिंदगी जीनी है तो आप वागभट्ट जी और जो राजीव जी का स्टेटमेंट है इस पे आप चलिए क्योंकि मेरे पास में इस स्टेटमेंट को लेकर बहुत कंट्राडिक्शन स्टेटमेंट्स आ चुके हैं। कमेंट्स आ चुके हैं। सर राजीव दीक्षित जी ने ये कहा था आप कैसी बातें कर रहे हैं पसीना बहाओ। मैं अभी भी उसी चीज पे टिका हुआ हूं। अगर आपको योद्धा बनना है तो बस नहाना पड़ेगा। सामान्य जिंदगी जीनी
(22:22) है तो फिर आप इस नियम का पालन कर सकते हैं। और भारत में आपको पता है थोड़ी सी गर्मी ज्यादा होती है तो कहीं ना कहीं इस चीज को हम लोग कंसीडर कर सकते हैं। देखिए क्या कह रहे हैं। कह रहे हैं कि सिर पर गर्म पानी डालने से अंधापन आता है और गंजापन आता है। उष्णन सिर से है स्नानम दुल हृदम केश च सुशाम। मतलब नहाते समय गर्दन के नीचे नीचे गुनगुना पानी ठीक है लेकिन सिर पर कभी भी गर्म पानी नहीं डालना चाहिए। सिर पर गर्म पानी डालने से आंखों की रोशनी कमजोर होती है और बाल तेजी से झड़ते हैं। अब फिर से आपकी चॉइस है। गर्म पानी पीना चाहिए। मैं इस पे 100% एग्री करता हूं।
(23:04) लेकिन गर्म पानी से नहाने को मना करता है। और आज बहुत इंटरेस्टिंग बातें निकल के आ गई है। आजकल एक ट्रेंड चल रहा है आइस बाथ और इसमें कहा गया है कि आइस बाथ वो एक चीज है जिससे आपकी बॉडी में अच्छा फील करवाने वाले हॉर्मोंस बहुत तेजी से सीक्रेट होते हैं। आपको आइस बाथ करने से आपकी लाइफ बढ़ती है। आप कहीं ना कहीं एक शॉक थेरेपी में जाते हो तो आपकी बॉडी एडप्ट करती है और बेटर होती जाती है समय के साथ में। ये अब बोल दिया गया है। तो भयंकर ठंडे पानी से नहाने को आजकल एक फैशन बन गया है कि बर्फ उसमें है और हम उसमें रिकवरी के लिए गए एक्सरसाइज करने के बाद
(23:46) वर्कआउट करने के बाद कुछ लोग नॉर्मली ऐसा भी करते हैं। अलग-अलग चॉइस होती है लोगों की। लेकिन ये आजकल चल रहा है। उन्होंने पहले ही कहा था कि भाई गर्म पानी को जो है वो सर पर नहीं डालना चाहिए। ऐसीऐसी बात उन्होंने कही है। अब उसके अलावा वो क्या कहते हैं? वो यह भी कहते हैं कि भाई अन्यन पूर धर्मम तो तू तृतीयकम चतुर्थमेव शेष्यत यानी कि ठूस ठूस कर खाना खाना बंद करो। ये कहीं ना कहीं एक बेवकूफी है। क्या है? पेट को चार भागों में बांट लो। दो ठोस खाने से हमने भर लिए। एक पानी के लिए और एक भाग पूरी तरह खाली रखो और तभी खाना खाया हुआ एनर्जी में
(24:29) बदलेगा। सड़ेगा नहीं। फैट में कन्वर्ट नहीं होगा। और इसलिए मैं बार-बार कहता रहा हूं कि मेरी जो टेक्निक है खाने की वो डिफरेंट है। मैं दो रोटी ठूस के सब्जी रोटी खा के मैं ऐसा तब होता है जब मैं ट्रैवल कर रहा हूं। मान लो तो मैं एक बार में खाना खा लेता हूं। का ऑप्शन नहीं है। मोस्ट ऑफ़ द टाइम मेरा खाने का तरीका फिक्स है। मैं एक मेरा मेरी डाइट जो है वो कहीं ना कहीं ब्लेंड डाइट होती है। लिक्विड फॉर्मेट में होती है। मैं उसको बनाता हूं अपने स्तर पर और मैं उसी का इस्तेमाल करता हूं। इससे मुझे लगता है कि मेरा कंसंट्रेशन, मेरा फोकस, मेरी मेमोरी, मेरी
(25:01) क्लेरिटी ऑफ़ द थॉट्स, मेरे वर्ड्स और मैं जो बात करना चाहता हूं, जो मेरी एनर्जी मुझे चाहिए होती है, कहीं ना कहीं वही रहती है जो मुझे जरूरत है। तो, आप ये समझ लो। एक चीज़ बहुत अच्छे से समझ लो। अब मैं इसका एक और फैक्ट आपको बता देता हूं जो इनका कहा गया है। ये ये चीज कि भाई अगर ये कहते रहे हैं कि भोजनाग्र विषम वारी भोजनते विषम भोजन मध्य अमृतम वारी ये भी इसी का हिस्सा है कि आप जो खाना खा रहे हो ना तो खाने से पहले पानी नहीं पीना चाहिए। आप ज्यादा पानी पियोगे तो आपको दिक्कत करेगा। खाने के एंड में भी पानी पियोगे तो दिक्कत
(25:44) करेगा। खाने के बीच-बीच में खाने के बीच-बीच में पानी अमृत के समान होता है। क्यों? क्योंकि आपका मैं इस चीज को एज एन मेडिकल स्टूडेंट एज अ डॉक्टर मैं आपको बता दूं। ये आपकी नली है। अब समझना इस कांसेप्ट को। आज मैं इस दुनिया के कांसेप्ट को क्लियर कर देना चाहता हूं जो आपके दिमाग में से क्लियर नहीं। हमारे शरीर में दो टाइप की नली है। एक जिसको हम बोलते हैं आर्टरी। एक जिसको हम बोलते हैं वेन। इनमें कौन सी चीज बहती है? लिक्विड बहता है। मानते हो नहीं मानते हो? हमारी आंतें भी एक तरीके से नली है। इन नली में तुम ठोस खाना भर दोगे। तो ये मूवमेंट ही इनका बंद हो जाता
(26:27) है। फिर तुम लोग आके बोलते हो कि साहब आईबीएस हो गया। इन डॉक्टर साहब की दवा चल रही है। उन डॉक्टर साहब की दवा चल रही है। हमको तो इरिटेबल वॉवल सिंड्रोम बता दिया। हमको आईबीएस सी है। हमको आईबीएस डी है। हमको आईबीएस अल्टरनेट वाला है। कभी कॉन्स्टिपेशन है। कभी डायरिया है। हमको पेप्टिक अल्सर है। हमें क्रॉस डिजीज है। हमें पता नहीं क्या-क्या क्या-क्या क्या-क्या है। खाने का सिंपल रूल कर लो कि जब खाना यहां से नीचे उतरे तो लिक्विड बन के उतरे। अब वो लिक्विड कैसे बन सकता है? मैंने खाना खाया थोड़ा सा। थोड़ा चबाया। शांति से सुकून से थोड़ा चबाया। बढ़िया। थोड़ा सलाइवा
(27:04) रिलीज हुआ। सलाइवा उस खाने के साथ में मिक्स हुआ। और मैंने एक छोटा सा घूंट पानी का पिया। अब वो और लिक्विड हो गया। नीचे चला गया। सुकून ही सुकून जिंदगी में। और जहां पेट में सुकून है तो जिंदगी में जुनून है। लेकिन हम ये मैगी खा रहे हैं। फटाफट फटाफट। ये बर्गर उठाया। ये खा गए। पिज़्ज़ा फाड़ा ये खा गए। ठूस दिया पेट में। क्यों? बोले पास वाला खा जाता हम। बड़ी मुश्किल से पैसे बचा के पिज़्ज़ा लेके आए। मम्मी ने ₹200 दिए मर जाते हैं एंड यू एंड अप बीइंग अ प्रॉब्लम फॉर योर ओन बॉडी एंड दिस इज़ हाउ वी डिस्ट्रॉय योरसेल्फ अंडरस्टैंड दिस दैट ओवर गट सिस्टम बीइंग अ
(27:50) डॉक्टर आई एम सेइंग ऑल दिस अंडरस्टैंड दिस बिकॉज़ जो टेक्स्ट बुक्स में लिखा गया है वही सच है क्या कि मुझे ऐसी लॉक लेनी है मुझे पेंटाप्राजोल डोपेडोन लेनी है मुझे ओमेप्राजोल डोपेडोन लेनी है वहां। ठीक है। आपको दिक्कत हो गई। मान लो किसी ने आपने अंधाधुंध खा लिया तो उसके लिए वो सॉल्यूशन है। दैट इज ओनली सॉल्यूशन इज़ योर रॉन्ग परसेप्शन। डाइटरी चेंजेस से हर चीज हो जाती है। और डाइटरी चेंजेस अगर आपके सही नहीं है तो फिर किसी भी दवा से कोई चीज ठीक नहीं होती है। तो ये यही कह रहे हैं कि बीच में घूंट घूंट पीना डाइजेशन बूस्टर है। अमृत के
(28:26) समान है। कैसे? अगर फूड लिक्विड फॉर्म में गया है तो आपका जो स्टमक है, आपका जो पेट है वहां से फटाक से खाना आगे रिलीज हो जाएगा। तो अब से नियम क्या बनाएंगे? जब खाना खाने बैठेंगे तो कम से कम दो पानी के छोटे गिलास ले बैठेंगे और खाना खाते-खाते हल्का-हल्का उनको पीते रहेंगे। विशेष तौर से रात के समय ऐसा करते हैं और दोपहर में आप दो छाछ के गिलास ले बैठ जाइए। खाते-खाते उनको पीते रहिए और वह लिक्विड फॉर्म में जाएगा। कुछ अल्सरेशन नहीं होगा। डाइजेशन बेटर होगा। एनर्जी बेटर रहेगी। और मेरा तो यह कहना है कि एक साथ खाना खाने बैठे ही ना। बढ़िया से खाने को उसमें तो
(29:08) रोटी तो नहीं आ सकती। एक खाने का एक प्रॉपर शेक बनाएं। मैं तो हमेशा कहता हूं लिक्विड डाइट है तो लाइफ सॉलिड है। इफ यू वांट सॉलिड लाइफ यू शुड हैव लिक्विड डाइट। और यह प्रूवन फैक्ट है। ये प्रूवन फैक्ट है। खाना एक साथ जाएगा तो हमारे शरीर का सारा खून उसको पचाने में लग जाएगा। दिमाग में हमारे खून नहीं जाएगा तो हमारा पाचन कमजोर होगा। हम फिर क्या हो जाएंगे? आलसी हो जाएंगे। खाने के बाद में कुछ लोगों को 1 घंटा सोना पड़ता है। दो घंटा सोना पड़ता है। रेस्ट करना पड़ता है। काम नहीं कर पाते हैं। जिनको 12 घंटे 14 घंटे 16 घंटे काम करना है। उनका खाना लिक्विड फ्यूल की
(29:46) क्वालिटी ना जैसे एक टेमो है। टेमो में तो बेकार क्वालिटी का फ्यूल आता है। लेकिन एरोप्लेन में थोड़ी ना बेकार क्वालिटी का फ्यूल डाल सकते हो। वहां बहुत हाई क्वालिटी का फ्यूल होता है जो फट से जलता हो। क्योंकि एरोप्लेन को एनर्जी चाहिए। तो उस केस में आप कैसी क्वालिटी का लाइफ चाहते हैं? आपको ऑटो बनना है। आपको टेमो बनना है। तो वैसी तीन रोटी ठूस के खा लो। फिर आप आराम करो। फिर आवाज भी आपस में फट फट फट फट फट वाली आएगी। हां। ये आप लोग समझते हो। और आपको एरोप्लेन बनना है तो यू शुड हैव द क्वालिटी डाइट ताकि आप सुबह से लेकर शाम तक सुपर कंसंट्रेटेड रह पाएं।
(30:19) आपकी एनर्जी बेहतर रहे। आई होप ये समझ पा रहे होंगे। मैं क्या कहने का प्रयास कर रहा हूं और मैं फिर रिपीट कर रहा हूं। मैं हमेशा हमेशा यही प्रयास करता हूं, प्रयत्न करता हूं, दुआ करता हूं कि मेरे देश के जितने लोग हैं, जितने भी लोग हैं वो सुखी रहें, वो खुश रहें, वो आनंद में रहें, वह बेहतर रहें। क्योंकि मुझे पता है मैं जो आप लोगों के लिए लेके आता हूं उसको रेडी करने में मुझे थोड़ा प्रयास लगता है और मैं जिंदगी का जो समय आपको दे रहा हूं वो समय अब कभी नहीं आएगा। ₹200 ₹300 ₹500 ₹600 जो भी मैं जितना कमाता हूं ₹150 ₹200 वो तो कभी भी अगर खो भी गया तो आ जाएगा।
(30:57) लेकिन ये जिंदगी का समय जो आपको दे रहा हूं वो तो कभी नहीं आएगा। वैसे मेरा कल जन्मदिन है। मैं आपको भी बता दे रहा हूं। आगे चलते हैं। फिलहाल 30 मई है। कलिक कल 30 मई है। तो ये क्या कह रहे हैं कि खाना खाने के तुरंत बाद पानी पी लिया ना तो वो वेट गेन हो जाएगा क्योंकि बॉडी में खाना पचेगा ही नहीं। है ना? और खाने से पहले पानी पी लिया तो पतले हो जाओगे क्योंकि खाना नहीं खा पाओगे। सिंपल कांसेप्ट्स हैं। ये इनका इनका कहना है। ठीक है? धरती के छाछ वाली बात हमने कर ली। हां। खाना खाने को बेहतर करो। अब हम लोगों को किताबों में क्या सिखाया गया? सारी बातें
(31:33) सिखा दी ना कभी हमको पढ़ना सिखाया गया हमको पढ़ाया पढ़ना कभी नहीं सिखाया मैंने इसके ऊपर भी सेशन लिए कि पढ़ाई कैसे करें हमको कमाना सिखा दिया स्कूल ने कॉलेज ने कमाए कैसे हां तो बचाना नहीं सिखाया और खाना कमाना सिखा दिया लेकिन पचाना और खाना नहीं सिखाया तो इस चीज को हमको समझ लेना है कि हमको लिक्विड ही लिक्विड तरीके से ही वह खाना नीचे उतरना चाहिए। ऐसे नहीं कि ऐसे ऐसे ऐसे खा गए। शांति से और सुकून से काम करना है। ठीक है? अब थोड़ा सा हम आगे चलते हैं। फिर ये सभी को पता होगा कि हमारे शरीर में तीन
(32:20) टाइप के दोष होते हैं। एक वात होता है, एक कफ होता है, एक पित्त होता है। जिनकी हम आगे चर्चा करेंगे कि जब इंसान छोटा होता है तो उसमें कफ प्रवृत्ति होती है। उसकी खांसी जुकाम बहुत ज्यादा होता है। जब बड़ा हो जाता है तो उसमें जोश आता है, ऊर्जा आती है। गुस्से में रहता है। थोड़े पिंपल्स हो जाते हैं। हां वो पित्त प्रकृति की वजह से होता है। थोड़ा सा इनडाइजेशन रहता है। एसिडिटी रहती है। वो पित्त फिर जब बुढ़ापा आता है तो वात प्रकृति हो जाती है। नींद नहीं आती है। शरीर कमजोर हो जाता है। हड्डियों में दर्द होता है। वो वात प्रवृत्ति होती है। तो इन्होंने वागभट्ट
(32:55) जी ने यही बताया कि हमारे शरीर में वात, कफ, पित्त और तीन नाम के पिलर्स हैं। इनमें बैलेंस होना चाहिए। कोई एक ऊपर नीचे हुआ तो उसकी वजह से डिफरेंट-डिफरेंट प्रॉब्लम्स हो जाएंगी। ठीक है? ये तीन हमारे खंबे। लेकिन हम हमने क्या किया? आज आज का बेसिक प्रण क्या ले रहे हैं कि हम हमारे पेट को ठीक करने का प्रयास करेंगे। ये आपको मुझे प्रॉमिस करना पड़ेगा। और जिसको बहुत दिक्कत है, जो दवाइयां ले रहे हैं, वह खाने के साथ में दो छोटे ग्लास या तो पानी के या छाछ के या किसी भी चीज के जो लिक्विड फॉर्म में हो ले बैठेंगे। जब आपने खाने का प्रॉपर स्वाद ले लिया उसको
(33:36) अच्छे से चबा लिया तो फिर हम उसको घूंट एक घूंट थोड़ा सा लेके और लिक्विड फॉर्मेट में लेंगे। ठीक है? तो इससे आपका स्वास्थ्य अच्छा रहेगा। ये देखो ये कितनी जबरदस्त बात है। अब आज तो इसको हर कोई कहने लगा है दैट इट द सिरियन रिदमम। हां क्या [नाक से की जाने वाली आवाज़] है यह कि भ्रम मूर्त उतष्टतेत स्वस्तो रक्षमार्थ आयुष यानी कि लंबी और स्वस्थ आयु चाहने वाले व्यक्ति को ये संस्कृत में लिखा हुआ है ना और ये इसका इंटरनल मीनिंग है। कॉस्मिक कनेक्शन मतलब सिरार्डियन रिदमम की बात यहां पर हो रही है। तो लंबी और स्वस्थ आयु चाहने वाले
(34:17) व्यक्ति को सूर्योदय से 45 मिनट पहले उठना चाहिए और उठने की शर्त क्या होती है? टाइम पर सोना भी चाहिए। अब मान लो तुम कहीं से ट्रैवल करके आए, 1:00 बजे सोए, फिर तुम 5:00 बजे उठ गए, फिर पूरे दिन नहीं सोए और कई दिन तक यही चलता रहा। तो ये बेवकूफी है। लेकिन हमारा प्रयास ये होना चाहिए कि हम समय पर सो जाएं और जब समय पर सो जाएंगे तभी समय से उठ पाएंगे। जैसे मान लो मुझे यहां से मैं जहां पर हूं वहां से मुझे दिल्ली जाना है। हां दिल्ली हम सभी ओटीट्स को चलना है। वैसे उसमें कोई रत्ती बराबर का संदेह नहीं है। देश तो हमको संभालना ही है। उस चीज को दिमाग से
(34:57) गायब नहीं करने देना। [अचानक ज़ोर से सांस लेने की आवाज़] मुझे मान लो यहां से दिल्ली जाना है। अब मान लो मुझे दिल्ली पहुंचना है 3:00 बजे। तो मैं यह सोचूंगा कि 1:00 बजे निकलूूंगा और शटाक से अपनी कार को बहुत तेजी से चलाऊंगा और 3:00 बजे पहुंच जाऊंगा। तो बेवकूफी है। मुझे 3:00 बजे पहुंचना है तो मुझे यहां से 6 घंटे लगते हैं तो 9:00 बजे चलना पड़ेगा। और अगर मैं 8:00 बजे निकल गया तो मैं शांति से पहुंचूंगा। मैं 7:00 बजे निकल गया तो मैं मजे करते हुए पहुंचूंगा। मैं 6:00 बजे निकल गया तो मैं आनंद में पहुंचूंगा कि यार क्या बात है? क्या सफल
(35:29) था ये तो हर चीज को एंजॉय किया। हर चीज के मजे किए और फिर भी काम के समय में पहुंच गए। तो इस चीज को समझ लेना। अपने आपको फोर्स नहीं करना है। यह वाग्भट जी की बातें हैं कि लंबी और स्वस्थ आयु चाहने वाले व्यक्ति को सूर्योदय से 45 मिनट पहले उठना चाहिए। ऐसे व्यक्ति की बुद्धि और एनर्जी नेक्स्ट लेवल की होती है। और ये सही बात है भाई। इसमें तनिक मात्र का संदेह नहीं है कि ऐसे व्यक्ति की बुद्धि और एनर्जी नेक्स्ट लेवल की होती है। ये सच है। अब इसमें ये बेवकूफियां ना हो कि अगर ऐसा होता तो अखबार बांटने वाला सबसे अमीर होता। देखो हर चीज को अमीरी से हम नहीं
(36:03) तोलेलें तो बहुत बढ़िया रहेगा। जिंदगी में आप जिस भी स्तर पर हो मान लो आप गरीब हो तब भी आपकी हेल्थ बेटर हो जाएगी। मान लो आप अमीर हो तब भी आपकी हेल्थ बेटर हो जाएगी। एनर्जी अच्छी हो जाएगी। तो अमीरी गरीबी से हम लोग टोलते रहते हैं। कई बार मैंने सुना है ये। है ना? कि सुबह उठने से हमारे जीवन में यश आता है। धन आता है तो फिर अखबार बांटने वाले के पास में पैसा ये सब बेवकूफियां हम नहीं करेंगे। चलिए फिर क्या कहते हैं वागभट्ट जी? ये कहते हैं कि और राजीव दीक्षित जी जिन्होंने इनकी बातों को फैलाने का प्रयास किया। ठीक है? चलिए
(36:38) दिन में सोना और रात में जागना बर्बादी है जो तो हम आजकल करते ही हैं क्योंकि रात में हमें Instagram देखना है फिर कुछ रील्स देखनी है और फिर कई डिफरेंट-डिफरेंट चीजें हमको देखनी है। रात्रि जागरण रुक्षम स्निग्धम दिवा स्वप्नाम यानी कि रात को देर तक जागने से शरीर में रूखापन ए्जायटी और गैस्ट्रिक इश्यूज होते हैं। कैन यू बिलीव दिस? कैन यू बिलीव दिस? कि इन लोगों ने क्या रिसर्च की थी यार उस वक्त लैब नहीं होती थी। अंधाधुंध फंडिंग नहीं होती थी बिलियन डॉलर्स की कि तुम रिसर्च करो। एक्सपीरियंस और लिखा उसको लोगों की भलाई के लिए। ये
(37:20) लोग स्वर्ग में होंगे पक्का। बिकॉज़ दे डिड समथिंग ग्रेट फॉर द पीपल। मतलब खुद के लिए तो यार जानवर भी जीते हैं ना दोस्त। दूसरों के लिए जीए तो बात है और मुझे पक्का पता है जितने भी ओटीटी भारत के लोग हैं ओटीटियंस जितने भी हैं ओजस्वी तेजस्वी तपस्वी भारत के जितने लोग हैं इनका यह प्रयास तो रहता होगा कि मैं यहां से जो बातें सीखता हूं वो कम से कम 10 लोगों को और बताऊं कम से कम उनकी जिंदगी थोड़ी बेहतर कर दूं ऐसी उम्मीद तो मैं आपसे करता हूं और हां YouTube पर जितने भी लोग इन सेशंस को देखते हैं अपनी फोटो में ओटीटी भारत जरूर से लगाना क्योंकि वह भी एक
(37:57) बतलाने का तरीका है उससे आप कहीं कहीं भी कमेंट करते हैं, अपनी बात शेयर करते हैं। तो आपका एक अलग स्टैंडर्ड है। यह मैं देखता हूं। ओटीटी भारत के लोग बहुत ही सज्जन व्यक्ति हैं। कोई बदतमीज नहीं है इनमें। हमेशा आपस में रिसेस्पेक्ट करते हैं। नया सीखना चाहते हैं। खुद की जिंदगी बेहतर करते हैं और लोगों को भी बेहतर बनाते हैं। चलिए तो रात को देर तक जागने से शरीर में रूखापन, ए्जायटी और गैस जिससे पूरा जेंजी परेशान है। जेंजी क्या? मैं तो कहता हूं पूरा इंडिया परेशान है। कोई किसी को कहे कि इंडिया को क्या दिक्कत है? तो इंडिया को दो ही दिक्कत है। एक तो
(38:33) ए्जायटी की और एक गैस की। क्या दिक्कत है? क्या कह रहे हैं? मैं आप भाई जितने भी जो लोग आप कमेंट्स करते हैं ना इनको मैं बीच में देख लूंगा और उसके बाद में आपके जो भी सवाल होंगे उनको मैं बता दूंगा। हां। अभी थोड़ा सा यहां समझने का प्रयास करते हैं। दिन में सोने से कफ बढ़ता है। जिन लोगों को एलर्जी की दिक्कत है ना एलर्जी है। बार-बार लेबोसजीन लेते हैं। मॉन्टलकास फेक्सोफनाडीन लेते हैं। मॉन्टलकास लेबोसजीन लेते हैं। वो पता है क्यों है? क्योंकि आपको रोज आधा घंटा सोने की आदत लग चुकी है। और खाना खाते ही छाछ पीते आप लोग बढ़िया सो जाते हो। फिर आपको लगता है कि
(39:08) यार नाक क्यों बह रहा है? छींके क्यों आ रही है? वो इसीलिए सब होता है क्योंकि आप दिन में सोते हो। तो इस चीज को हमको समझ लेना है। फिर इन्होंने यह भी कहा कि गाय का घी सुपर फूड है। बाकी सारे सुपर फूड बकवास है। क्या कहते हैं ये कि गाय का पुराना घी है ना? पुरानी गाय का घी नहीं गाय का पुराना घी एक फैट नहीं है। सिर्फ यह एंटी एजिंग है। इससे तुम्हारी याददाश्त यानी मेमोरीज, स्पर्म काउंट, जॉइंट्स की चिकनाई और चेहरे का ग्लो एक साथ बढ़ता है। गाय का घी गाय का शुद्ध घी शुद्ध गाय का घी नहीं गाय तो शुद्ध ही होती है गाय का शुद्ध घी है ना
(39:54) और पुरानी गाय का घी नहीं गाय का पुराना घी इतनी हिंदी समझ में आती होगी आपको पुरानी गाय होती नहीं है गाय का पुराना घी और शुद्ध ऑब्वियस सी बात है शुद्ध होना चाहिए आज हमारे देश में घी में लोग आलू मिला के बेच रहे हैं लोगों को भालू बना दे रहे हैं। खुद को लालू बना दे रहे हैं और खुद को चालू समझ रहे हैं। सबका सबके ऊपर चाबुक पड़ेगा एक दिन। किसी को समझ में नहीं आती बातें। सबके ऊपर चाबुक पड़ेगा। जितना बुरा करोगे बर्बाद हो के रहोगे और अच्छा कर रहे हो। लोग तुम्हारा बुरा भी कर रहे हैं तो एक दिन ऐसा होगा कि तुम तुम्हारे पास में
(40:38) और लोगों का अच्छा करने की शक्ति आ जाएगी। लेकिन जो तुम्हारा बुरा कर रहे थे ना उनके पास से बुरा करने की शक्ति खत्म हो जाएगी। ये इसी प्रिंसिपल पे संसार चलता है। तुम लोगों का अच्छा करो। उनकी ऊर्जा को बढ़ाओ। अच्छा कैसे करेंगे किसी का? उनकी ऊर्जा को बढ़ाओ। ऊर्जा कई प्रकार की होती है। मानसिक ऊर्जा, शारीरिक ऊर्जा, आर्थिक ऊर्जा, आध्यात्मिक ऊर्जा, हां? आर्थिक ऊर्जा भी एक ऊर्जा है। मानसिक ऊर्जा भी एक ऊर्जा है। कई बार आपकी मानसिक ऊर्जा मान लो निम्नतम स्तर पर पहुंच गई और आपने सोच लिया कि नहीं मुझे इस धरती पर रहना ही नहीं है। अब फिर आपको किसी ने आकर कुछ कहा
(41:11) कि नहीं नहीं ऐसा। इस बात को समझो। ऐसा नहीं होता है। यह गलत है। और फिर तुम बेहतर बन गए। तुमने सोचा कि नहीं नहीं यार यह सही कह रहा है। तो उसने आपको मानसिक ऊर्जा दी। हम लोग यह समझते हैं कि आर्थिक ऊर्जा ही सब कुछ ऊर्जा है। अब तुम सोचो किसी की मानसिक ऊर्जा बिल्कुल लो होगी, डाउन हो गई। उसने सोच लिया मैं तो ये संसार छोड़ के जाऊंगा। बहुत हो गया। अब उसका बैंक अकाउंट जितना बैंक बैलेंस पड़ा वो किस काम का? तो मानसिक ऊर्जा दो सा लोगों को आर्थिक ऊर्जा अगर तुम सक्षम हो तो वो दो और जो भी तुम जिस भी प्रकार की ऊर्जा लोगों को दे सकते हो। से तुम्हारी
(41:43) जिंदगी बेहतर होती है। देखो अपने आप को बेहतर महसूस करवाने का सबसे अच्छा रास्ता क्या है? दूसरों को अच्छा महसूस करवाओ। उनको उनकी बेइज्जती मत करो। क्योंकि दूसरों की बेइज्जती कैसे करोगे आप? खुद की इज्जत को खोकर। ये बहुत सिंपल कांसेप्ट है। दूसरों की ऊर्जा कैसे डाउन करोगे आप? खुद की ऊर्जा को खत्म करके। दूसरों को ए्जायटी कैसे दोगे आप? खुद खुद एशियस होके। तुम दूसरों को डिप्रेस करोगे। तुम पहले डिप्रेस हो जाओगे। पक्की सी बात है। तो खैर यहां पर हम बात कर रहे थे कि हम अपने आप को बेहतर करें और अपने आसपास वालों को बेहतर करने का प्रयास करें।
(42:16) जितनी भी हमारे में शक्ति है उतना हम कर दें। बाकी तो ऊपर वाले की इच्छा है। खैर अब यहां समझिए एक बार क्या कह रहे हैं वागभट्ट जी? ये कह रहे हैं कि पैर के तलवों की मालिश करो। आंखें बेहतर होगी। ऐसा कह रहे हैं ये। अब आंखें तो सबकी खराब हो गई है। सब तो मोबाइल स्क्रीन में देखते रहते हैं। कोई यही से बातें कर रहा है। आजकल तो कई लोग यही के पीछे पागल हो रखे हैं। सुबह से शाम उसी से बातें कर रहे हैं। वो चाहे तुमसे बात ना कर रहा हो और वो अपनी टोन में बात कर रहा है। देख भाई ऐसी बात नहीं है। मैं तेरे को ठीक कर देख बहन सुन मैं तेरे को ठीक करके देता हूं।
(42:48) हां। तो ओवर स्क्रीन का यूज़ हो रहा है। अभी जैसे मैं आपसे बात कर रहा हूं। स्क्रीन के माध्यम से कर रहा हूं। आप मुझे देख रहे हैं स्क्रीन के माध्यम से देख रहे हैं। तो पैर के तलवों की मालिश करने से आंखें बेहतर होती है। हां ऐसा इनका कहना है। और यहां पर जो ये मैंने एक एडिशनल चीज ऐड की है। यहां पर इसी का ये हिंदी मतलब लिखा गया है। ठीक है? देखो ये होता है पैर और अभ्यंग मतलब होता है मसाज करना, मालिश करना। चक्षु मतलब होता है नेत्र। खैर, उससे कोई मतलब नहीं है। मैं थोड़ा संस्कृत जानता हूं। इसलिए मैं उसको मैंने डायरेक्ट ही लिख दिया।
(43:33) लेकिन मैं आपको सा थोड़ा सा बातें बता रहा हूं। अच्छा उन्होंने एक और बात कही जो मैं यहां पर लिखी हुई है। सेपरेटली आपको बता दे रहा हूं कि खड़े होकर या चलते हुए पानी पीने से शरीर के फ्लूइड्स का बैलेंस बिगड़ता है। जिससे आगे जाकर जॉइंट खराब हो सकते हैं। अब देखो ये बातें पता है कौन सी है? यह वह बातें हैं जिनको मॉडर्न मेडिकल साइंस एक्सेप्ट करता है। दैट यस हमारा रास सिस्टम जो किडनी का फिल्टरिंग सिस्टम है वो डिस्टर्ब होता है खड़े-खड़े पानी पीने से। यू कैन सर्च एंड रिसर्च ऑन दोज़ थिंग्स। तो हम बैठ के पानी पीने का प्रयास
(44:09) करें। जब जब हो पाए तब जब हमें याद आ जाए तब स्ट्रांग और हार्ड एंड फास्ट रूल नहीं है कि प्लेटफार्म पे खड़े हैं। बैठने की जगह नहीं है। किसी की गोद में जाके बैठ गए। नहीं नहीं बोला गया है कि बैठ के पानी पीना है तो हम तो जो है बैठ के पानी पिएंगे। ट्रेन में चल रहे हैं। ट्रेन में बैठने की जगह नहीं है। नहीं नहीं हम ओटीटियन हैं। हमको सर ने बोला है कि पानी बैठ के पीना है और आंटी कोई बैठी है उनकी गोद में जाकर बैठ गए। तो उस केस में तुम गलत कर दोगे। तो हमें जबजब संभव हो ये सब आइडियल सिचुएशन है। जब-जब संभव हो तब-तब हमें ये काम करना है।
(44:47) फिर ये कह रहे हैं कि देखो यही बात हमारे कुछ साथी कि खड़े होकर पानी पीने से हम लोग कहीं ना कहीं कहीं ना कहीं अपने सिस्टम को जो है वो डिस्टर्ब कर लेते हैं। अब देखो वहां पहले से पहले बात क्या हुई थी कि पैर के तलुओं की मालिश किस तेल किस तेल से करनी है यह भी वागभट्ट जी ने बताया तिल का तेल वैसे तो तेल तो कोई सा भी हो तेल तो कोई अच्छी बात नहीं होती है और तेल कम से कम ही यूज़ करना चाहिए मैं जो ब्लेंड खाना यूज़ करता हूं उसमें तो तेल कम ही होता है ना के बराबर ही होता है रिफाइंड तेल के जमाने चल रहे हैं इतने केमिकल्स उसमें यूज़ करते हैं कि उसकी वैल्यू खत्म
(45:29) कर दी मतलब आज मैं एक एक बहुत इंपॉर्टेंट बात अगर आप लोगों से करूं ना आज सब लोगों को पता है ना एक बात तो कि हमारे देश में किसी भी व्यक्ति का ब्लड टेस्ट करवा लो किसी भी व्यक्ति का सबका कोलेस्ट्रॉल डिस्टर्ब 25 साल के लोग 32 साल के लोग 36 साल के लोग 38 साल के लोग 40 साल के लोग स्टंट डलवा के आते हैं खुशी-खुशी कि हमारे पड़ोसी के भी डला था हमारे भी डल गया क्योंकि स्टंट मतलब इंसान ने मेहनत करी जिंदगी में आगे बढ़ने के लिए कई स्टंट दिखाए हैं तो उनको स्टंट डला है। ऐसे थोड़ी ना डल जाता है स्टंट। जो लोग थड़ी पे बैठे रहते हैं टाइम पास करते थे। स्टंट
(46:10) डलवाने के लिए बहुत स्टंट दिखाने एक बेवकूफी है। तेल हमें कंज्यूम कम से कम करना है। वैसे वागभट्ट जी ने तिल के तेल को बेहतर बताया है। ब्लेंड खाने की खासियत क्या है? उसमें तेल कहां से आएगा? अलसी के बीज से तेल आएगा। थोड़ा सा अखरोट डाल लिया उससे तेल आएगा। थोड़ा सा ड्राई फ्रूट डाल लिया उससे तेल आएगा। बीज से और ड्राई फ्रूट से तेल आएगा उसमें ब्लेंड खाने में तेल से तेल नहीं आएगा हां फॉर्च्यून अडानी विलमर वहां से तेल नहीं आएगा वो खतरनाक तेल है कच्ची घाणी जब तक बैल जो है वो तेल निकाल रहा था तो हमारी जिंदगी में तेल नहीं निकलता था जब से बैल ने तेल निकालना
(46:48) बंद कर दिया है हमारी जिंदगी में खेल शुरू हो गए हैं। है ना? तो भाई इन्होंने तिल का तेल बेहतर बताया है। अब पॉसिबल नहीं है किसी के लिए कि नहीं सर अब घर में सभी के लिए खाना बनता है तो क्या करें? खाना पड़ता है। सही बात है। तो घर वालों को बोलो कि तेल को बदल बदल के इस्तेमाल करें। कभी सोयाबीन का लेके आ गए। कभी सरसों का लेके आ गए, कभी तिल का लेके आ गए। कभी कोई और भी मिलता है तो उसको लेके आ गए। तेल और अनाज बदलते रहने चाहिए। ऐसा माना जाता है कि उनको बदलते रहने से हमारे शरीर की सर्विस अपने आप होती रहती है। हम बेहतर होते रहते हैं। तो यह भी चीज लिख लेना अलग
(47:28) से कि तेल और आटे को बदल-ब के ही खाने का प्रयास करना है। ताकि मेरे पास कई ऐसे मैसेज आते हैं। कई ऐसे कमेंट आते हैं कि पिताजी को स्टंट डल गया है। किसी को हार्ट अटैक आ गया है। किसी को कोलेस्ट्रॉल की दिक्कत है। किसी को फैटी लिवर हो गया है। किसी को पेट की दिक्कत है। किसी को किडनी फेल हो गया है। जमाने भर की समस्याएं मैं सुनता हूं तो थोड़े-थोड़े थोड़े-थोड़े परिवर्तन से जिंदगी में बहुत बड़े झटके नहीं लगते हैं। अचानक से एक्सीडेंट जो होते हैं वो उनकी संभावनाएं बहुत कम हो जाती है। चलिए आगे चलते हैं। अब देखो इन्होंने क्या कहा? इन्होंने ये कहा कि
(48:11) फलों का राजा जो है ना वो सेब वेव नहीं है। अब मॉडर्न मेडिकल साइंस तो यही कहती है। एन एप्पल ए डे कीप डॉक्टर रवे ऐसा आपने सुना होगा। लेकिन वागभट्ट जी क्या कह रहे हैं कि मुनक्का खाओ। मुनक्का आप सब लोगों को पता होगा मुनक्का जिसको किशमिश थोड़ी अलग चीज होती है। मुनक्का अलग चीज होता है। आई होप आपको थोड़ा सा पता होगा इसके बारे में। तो वैसे तो और कुछ नहीं है। बट थोड़ा सा अगर मुनक्का ना हो तो हमारा किशमिश से भी काम चल जाएगा। आयुर्वेद में मुनक्का यानी सूखे अंगूर को सभी फलों में सर्वश्रेष्ठ माना गया है। ये फेफड़ों को देखो जैसा जैसा फ्रूट है ना
(48:50) वैसा फीचर है। आपको पता है हमारे फेफड़ों में एल्वुलाइज होती है। एल्वलाइस होती है। वो एल्वलाइस पता है अंगूर जैसी होती है। हां अंगूर जैसी होती है। तो हमारे जो जो फेफड़ों में जो अंगूर है ना उनको ठीक करता है ये। पित्त को शांत करता है। कब्ज को ठीक करता है। ऐसा कहा जाता है जैसे पुराने टाइम में लोग कहते थे कि उसको बहुत समय से कब्ज है तो क्या करेंगे? दूध में मुनक्का उबाल लेंगे और पी लेंगे। उनको चबा देंगे और बीज को थूक देंगे। मुनक्का का जो बीज होता है उसको चबाने मत बैठ जाना। उसको थूक देना है। ठीक है? और मान लो किसी को दूध
(49:23) पीने में दिक्कत है तो उसको दूध में वैसे मैं तो दूध पीना अवॉइड करता हूं। किसी को मान लो घर वाले जबरदस्ती कहते हैं कि दूध पी, दूध पी बेवकूफ कहीं का पागल। दूध से जो है आती है बुद्धि। चाहे वो भैंस की क्यों ना आती हो। लेकिन दूध को टेस्टी बनाना है मान लो तो मैं थोड़े से उसमें ड्राई फ्रूट डाल लूंगा मैंने दो-तीन बादाम डाल लिए उसमें दो-तीन चार पांच 10 मुनक्के डाल लिए 10 तक 10 तक मुनक्के डाल सकते हो आराम से कोई दिक्कत नहीं है और फिर दूध उसके बाद में ठंडा करके पियो बहुत टेस्टी लगता है मैं बहुत पुराने टाइम में हमारे घर में जब किसी की
(49:57) तबीयत खराब हो जाती थी तो जॉइंट फैमिली थी 60 70 लोग थे पता है हम लोगों का ये सिस्टम होता था कि दो रोटी रोटी जब मिलती थी ना तो दो में से पहली रोटी ही चुबड़ी हुई मिलती थी क्योंकि 60 70 लोग थे तो पहली रोटी चुपड़ी हुई मिलती थी। दूसरी कोरी खानी पड़ती थी बच्चों को क्योंकि जो जितने बड़े लोग थे जो घर के लिए कमा रहे थे उनको दोनों रोटियां चुपड़ी मिलती थी। बच्चों को एक चुपड़ी मिलती थी एक कोरी मिलती थी। मेरी मम्मी जब कभी ये ये सेशन देखेंगी तो उनको पता होगा मैंने क्या बोला है। वो हसेंगी इस बात पे। वो कहेंगे कि इसको आज तक ये सारी बातें याद है। मैं भूल
(50:34) गई लेकिन मुझे सारी बातें याद है। तो जब घर में किसी की तबीयत खराब हो जाती थी तो क्या होता था उस केस में? उसके लिए थोड़े से बादाम आते थे। थोड़े से मुनक्के आते थे। कई चीजें आती थी। जो थोड़ा सा दूध वो मिल जाता था। उसको दूध जब पिलाते थे तो हमको मजे आते थे। तब तब से वो टेस्ट याद है। अब तो दूध मैं अवॉइड करता हूं। मैं नहीं पीता हूं। मुझे थोड़ा समझ में कम आता है। कभी कबभार बहुत रेस्ट केस में ऐसा हो जाता है। अनार के लिए क्या कहा? उन्होंने कहा कि दाढ़ी दाढ़ी मतलब क्या होता है? दाढ़ी फलम। अनार के लिए कहा गया दाढ़ी फलम। कि हमारे हार्ट के लिए सबसे बढ़िया
(51:12) है ये। हमारे डाइजेशन को ठीक करता है। खून को बढ़ाता है और आर्टरीज को ब्लॉक होने से प्रिवेंट करता है। अनार। अनार को बहुत अच्छा बोला। कि अगर नार बनना है, शेर बनना है तो अनार पियो। हां। ऐसा उन्होंने कहा और अनार को भी बहुत अच्छा फ्रूट बताया। ड्राई फ्रूट्स में तो किसको बताया? मुनक्का को। हम हम लोग काजू बादाम के पीछे पागल हो रखे हैं ना। मुनक्का को बोला कि सबसे बढ़िया ड्राई फ्रूट है। मुनक्का को लिख लो। मुनक्का सबसे बढ़िया। और सस्ता भी आता है थोड़ा सा। हां। अखरोट, बादाम, काजू तो बहुत महंगे हो गए हैं। जब से जसप्रीत बुमराह लेके आए हैं। हां। क्या ले आए हैं
(51:51) वो? अमेरिकन पिस्ताची क्या बोलते हैं उसको? पिस्ता को। हां तब से ऐसा हो गया है। और बाकी ये एक है और देखो यार खाना पीना अपनी तरह है। खाना पचना चाहिए। अगर खाना पच रहा है ना तो रोटी भी अनार है। रोटी भी अनार है। हां। और खाना नहीं पच रहा है भाई तो अनार भी जहर है। अनार भी जहर है। फिर क्या करोगे? तो पचाने के लिए भागो। पचेगा उसी को जो दौड़ता है। अब दो टाइप के लोग होते हैं। एक वो जो रोटी के लिए भागते हैं। दूसरे वो जो रोटी को पचाने के लिए भागते हैं। तो हमें क्या करना है? रोटी के लिए तो भागना है
(52:37) लेकिन रोटी खाने से पहले भी भाग लेना है। तो दोनों चीजें बैलेंस हो जाएंगी। बहुत बढ़िया। थोड़ा सा आगे चलते हैं। उनका क्या कहना था? वो कहते हैं कि भाई अब देखो इंडिया में अभी क्या चल रही है? भारत सरकार ने भी इस चीज को नेशनल लेवल पर इंटरनेशनल लेवल पर भारत को देखा कि इंडियंस फिजिकली वीक हैं। उतने मस्कुलर नहीं है जितने कि यूरोपियंस हैं, अमेरिकनंस हैं और भारत में प्रोटीन की डेफिशिएंसी है। क्वासियोर्कल और मेरिस्मस के पेशेंट्स इंडिया में सिग्निफिकेंटली मिलते हैं। अफ्रीका में तो बहुत ज्यादा मिलते हैं। अफ्रीका में तो बहुत बुरे
(53:08) हालात हैं। लेकिन भारत में भी प्रोटीन की डेफिशिएंसी है। अब बहुत सारे प्रोटीन बाहर आ गए हैं। बहुत सारे प्रोटीन पाउडर आ गए हैं। डिफरेंट-डिफरेंट चीजें आ गई है। प्रोटीन पाउडर दो-तीन स्कूप लोग डालते हैं। एकदम से बॉडी को शॉक लगता है कि यह क्या आ गया? एकदम से किडनीज़ के ऊपर लोड पड़ता है। जिसकी वजह से किडनी फेलर के पेशेंट्स भी बढ़ रहे हैं। हालांकि जब मैं यह बात कहूंगा कि ये डॉक्टर बेवकूफ है। इसको ये नहीं पता कि किडनी फेल नहीं होती। इन रियल सच्चाई ये है कि कोई भी बाहर की आर्टिफिशियल चीज उतनी अच्छी नहीं होती जितना हम समझते हैं। तो मैं सब चीज का
(53:38) एक्सपेरिमेंट कर चुका हूं। मुझे ये ना सिखाया जाए कि वे प्रोटीन क्या होता है? कि जीन प्रोटीन क्या होता है? हां। मैं सोई प्रोटीन क्या होता है? पी प्रोटीन क्या होता है? पीनट प्रोटीन क्या होता है? आई एम अवेयर अबाउट एवरीथिंग। एवरीथिंग। हां, मुझे सबके बारे में मालूम है। मैंने हर एक का इस्तेमाल करके देखा है। वो एक्सपेरिमेंट आपको बता रहा हूं। तो मूंग की दाल और भाई जिस किसी को जिस किसी को एक मेरा दोस्त है उसको जेनेटिकल मतलब उसके पिताजी को भी डायबिटीज है और उसके दादाजी को भी शुगर की दिक्कत थी। तो मैंने उसको बोला कि जब शुगर की
(54:17) दिक्कत है तो शुगर क्यों खाना? बोले शुगर तो नहीं खाता, टॉफी नहीं खाता, मिठाई नहीं खाता, चीनी गुड़ भी नहीं खाता, मीठी चाय भी नहीं पीता। मैंने कहा बेवकूफ है। चावल भी शुगर है, रोटी भी शुगर है। जो तू खाता है सब शुगर ही तो है। आलू शुगर है। आलू की सब्जी तो आज ही खाई थी भाई। तो वो शुगर है। मैंने उसको बोला मूंग के चीले खाया कर। मूंग के चीले और दही खा। मूंग के चीले और दही खा। शाम को थोड़े से थोड़ा सा थोड़ा सा पनीर और मूंग की दाल खा ले पी ले और सो जा। वो मैटफॉर्मिन शुरू ही करने वाला था। मेरा दोस्त है आईआईटी से पास आउट है। बोले भाई
(54:54) यार थैंक यू सो मच। मेरा अब फास्टिंग तो 100 के नीचे आ गया है। खाना खाने के बाद 120 30 120 30 के आसपास रहता है। तो अब इंडियंस को ये नहीं पता कि शुगर की दिक्कत जो हो रही है वो शुगर से हो रही है। इनको लगता है चीनी शुगर है। अरे रोटी शुगर है। चाय में जो तुम पी रहे हो वो शुगर चावल हम तो खाते वही हैं। हां। तो मूंग की दाल को बेस्ट बोला। तो मूंग की दाल के चीले और उन्होंने यह भी बोला कि भाई वागभट्ट जी ने क्या बोला कि सभी दालों में मूंग की दाल बेस्ट है। सीधी सी बात है हम खिचड़ी खिलाते हैं जब किसी की तबीयत ठीक नहीं होती क्योंकि ईजीली डाइजेस्ट हो जाती है
(55:30) सभी को बड़ी आसानी से पच जाती है। प्रोटीन मूंग में काफी सिग्निफिकेंट है और शरीर को लगता है यह प्रोटीन इसका तो सभी [गला साफ़ करने की आवाज़] दालों में मूंग की दाल बेस्ट है और यह इजीली डाइजेस्टेबल है। आंखों के लिए अच्छी है और शरीर में यूरिक एसिड नहीं बढ़ाती है। यूरिक एसिड तो सभी के बढ़े हुए हैं। आज के जमाने में यूरिक एसिड बढ़ा हुआ है। गुस्सा बढ़ा हुआ है। एंग्जायटी बढ़ी हुई है। फ्रस्ट्रेशन बढ़ा हुआ है। भारत में बहुत बुरे हालात हैं भाई। रोड पे जाओ तो कोई तुम्हारे से ओवरटेक करना चाहे उसको ओवरटेक करने दो। पागल और सनकी लोग बहुत घूम रहे हैं। हर
(56:08) कोई समझदार नहीं बचा हमारे देश में। 160 करोड़ लोगों में से 150 करोड़ का पारा हाई है। ओडिटियंस नहीं है ना वो ओडिटियंस शांत रहते हैं। और जो थार लेके घूम रहा हो मुझे माफ़ करना तुम्हारे में से किसी के पास थार हो तो वो गवार है। वो दिमागी रूप से सटिया हुआ है। उसको लगता है कि Instagram की रील में ही जिंदगी काटनी है। तो मैं जब मैं और रक्षित ट्रैवल करते हैं और जब हमको कोई पीछे से थार आती हुई दिखती है तो मैं रक्षित को बोलता हूं रक्षित गाड़ी साइड में लगा दे। हम इसको सैल्यूट मारेंगे और इसको जाने देंगे क्योंकि ये बोफोर्स तोप
(56:44) से भी खतरनाक मानता होगा खुद को। तो ऐसे हालात हैं और हम हम दोनों उस पे हंसते हैं। मैंने कहा ये गवार लोग हैं। तो भाई थोड़ा सा टेंपरामेंट लोगों का बिल्कुल बिगड़ा हुआ है। उस चीज का अपने को ध्यान रखना है। तो यूरिक एसिड के अलावा और भी कई चीजें हमारे देश के लोगों की बढ़ी हुई है। तो हाथ जोड़ के चलना है। फिर क्या कह रहे हैं ये? ये कह रहे हैं उड़द की दाल जो है ना जैसे मूंग की दाल तो भाई कमजोर हो। पाचन ठीक नहीं है। लेकिन अगर पाचन तगड़ा है तो बहुत तगड़ा है कि 10 कि.मी.
(57:14) भाग रहे हो या 1 घंटा सीढ़ी चल रहे हो या 40 मिनट सीढ़ी चढ़ रहे हो तो भाई उड़द की दाल खाओ। क्या कह रहे हैं कि उड़द की दाल पचने में तो भारी है और ऑब्वियस सी बात है सबसे भारी है यार। उड़द की दाल को पचाना कोई मजाक थोड़ी ना है। हां। लेकिन ये मांस यानी कि बॉडी में मसल्स को बढ़ाती है और टेस्टोस्टरॉन बूस्टर है और किसी को कमजोरी है, किसी को पतलापन है, किसी को वीकनेस है तो उड़द की दाल खाओ। मैं फिर कह रहा हूं। किसी को कमजोरी क्यों है? क्योंकि वो एक्सरसाइज नहीं करता। अब परसेप्शन क्या बन जाता है? देखो समझना। अब कैसे परसेप्शन खराब होता है? क्या कहेंगे
(57:52) लोग कि ओडीटी भारत में हमको बताया गया राजीव दीक्षित जी ने भी बताया वागभट्ट जी ने भी बताया क्या बताया जी कि उड़द की दाल खाओ उससे शरीर में ताकत आ जाएगी मैंने खाई मेरा तो पेट खराब हो गया तो पेट खराब होगा ना पहले पेट को तैयार करो यार एक बात बताओ अगर ये खाने से वो खाने से ये खाने से ये सब हो जाता तो कबूतर को तुम मांस खिलाओ तो कबूतर क्या बन जाता शेर बन जाता तो कबूतर तो शेर नहीं बनता है पहले खुद खुद के पाचन में शक्ति लाओ। पाचन में जब शक्ति आती है तो शरीर में शक्ति आती है। अब हम इस चीज को समझते नहीं है। जब पाचन में ही शक्ति
(58:29) नहीं होगी तो शरीर में शक्ति नहीं आएगी। चाहे हम कुछ भी खा लें, कुछ भी पी लें उससे फर्क नहीं पड़ेगा। फिर तो उड़द की दाल अब जैसे पता है आपको शायद नहीं पता होगा। जब प्राचीन काल में पहले किसी की नईनई शादी होती थी तो जो सास होती है सास सास नहीं सासू सासू सासू माता सासू माएं क्या करती थी अपने जो जवाई हैं उनके उनके लिए सर्दियों में उड़द के लड्डू बना के भेजती थी कि भाई यह सांप को खिलाना बिकॉज़ दैट वाज़ द कंसीडर्ड टू बी द टेस्टोस्टरॉन बूस्टर फॉर अ बेटर सेक्सुअल लाइफ।
(59:14) चलिए आगे चलते हैं भाई। क्या कहते हैं वागभट्ट जी? हरी सब्जी खाओ लेकिन जरूरत से ज्यादा मत खाओ। और आजकल क्या हो रहा है? आजकल तो बहुत बुरे हालात हैं। हरी सब्जी मतलब आदमी का शरीर पीला पड़ जाए। ऐसी हरी सब्जियां हैं। जहर जहर जहर। मैं देखो एक चीज बहुत क्लियरली बता देना चाहता हूं। सभी ओडिटियंस को सभी भारतीयों को सभी मेरे साथियों को एक चीज रट ली जाए दिमाग में। क्या रट ली जाए भाई? कि हम जहर में जी रहे हैं। हम जहर में जी रहे हैं। और हम जहरीले होते जा रहे हैं। दिमागी तौर से, शारीरिक रूप से, आध्यात्मिक रूप से। हम जहरीले बन
(59:53) रहे हैं। उस जहर को निकालने का हम सभी नीलकंठ हैं। हम सब ने जहर पिया है। हम वाटर पोल्यूशन है हमारे देश में। साउंड पॉल्यूशन हमारे देश में चार बोतल बोर्ड का काम मेरा रोज उसका भी हनी सिंह जी को ब्रांड एंबेसडर बना दिया गया है नशा मुक्ति अभियान का। उन्होंने तो जिंदगी भर गाने ही नशे पे गाए हैं। अभी एक लस्सी लेके आ गए। चलो बना दिया। खैर जो भी है पानी में पोल्यूशन, हवा में पोल्यूशन, साउंड पोल्यूशन, खाने में जहर, सब्जी में जहर, फ्रूट अभी आम आ रहे हैं। बढ़िया पके हुए। उनमें क्या है? कैल्शियम कार्बाइड पानी में घोलते हैं। आम डुबोते हैं। लो
(1:00:35) पका हुआ आम मिथाइलन गैस है वह। जहर ही जहर कार्सिनोजेनिक सब्सटांस है वह। तो हम जब सभी नीलकंठ बन चुके हैं। सभी महादेव भारत के सभी लोगों को महादेव डिक्लेअर कर देना चाहिए कि सब लोग जहर में जी रहे हैं। उन हालात में पसीने बहाना पहली शर्त है। तुम लोगों को नहीं पता होगा। अगर ये पूछा जाए कि हमारे शरीर का एक्सक्रीटरी ऑर्गन कौन सा है? किस हमारे ऑर्गन से जहर बाहर निकलता है? तो लोग क्या कहेंगे? किडनी जबकि सच्चाई क्या है? 70% टॉक्सिंस फेफड़ों से बाहर निकलते हैं ब्रीथिंग से। तो पसीना जब बहाओगे तो ब्रीथिंग कैसी होती है? तेज हो जाती है। और जब ब्रीथिंग तेज
(1:01:16) होती है तो सारे टॉक्सिंस निकल जाते हैं। हरी पत्तेदार सब्जियां न्यूट्रिशियस तो है लेकिन ये ड्राइंग एजेंट। बिल्कुल सही बात है। ड्राइंग होती है। ड्राइंग क्यों होती है? क्योंकि ऑयल को सोख लेती है। फाइबर है ना यार? समझो। बिल्कुल बेसिक सी बात समझो। फाइबर है तो जैसे मान लो कोई हार्ट का पेशेंट है किसी का कोलेस्ट्रॉल ज्यादा है तो उसके लिए तो बहुत बढ़िया है। लेकिन ये वागभट जी कहते हैं कि नॉर्मल इंसान को फिर समझना। अब यही बात है ना कि हम किसी इंसान की कही हुई बातों को दो मतलब निकाल लेते हैं। क्या कह रहे हैं? इनको हमेशा घी या तेल के
(1:01:49) साथ में खाना चाहिए। अब मान लो कोई इंसान चला गया घर पे कि मैं तो ओटीटी भारत का सेशन देख के आया हूं। जाते अपनी पत्नी को बोल दिया कि मैं डॉक्टर अभिमन्यु जी की बात सुनता हूं। उनकी बातों को फॉलो करता हूं। अब आज देख मेरे को बोला है कि हरी सब्जी मैं ले आया हूं। अब इसमें बढ़िया सा तेल डाल और [हंसी] गोदी में घी लगा दे। अब मैं खाऊंगा। हां। तो उस केस में क्या होगा? तो उसके लिए अच्छी थोड़ी ना है ये। ये इसमें फाइबस कंटेंट है जो आपके कोलेस्ट्रॉल को कम करता है। लेकिन नॉर्मल इंसान को जो है इसको अब ये तड़का लग रहा है। इसमें जो भी लग रहा
(1:02:23) है ये आप देखें। ये इनका कहना है। चलिए आगे चलते हैं भाई। यहां पर क्या अब यहां समझो बड़ी बड़ी इंटरेस्टिंग बात है ये। गेहूं वर्सेस जौ क्या कहते हैं कि गेहूं जो है वो शरीर का वजन बढ़ाता है। जबकि जो जो है अब जो ऑब्वियस सी बात है ज्यादा फाइबर है तो स्वभाव से रूखा रूखा का मतलब क्या? हाई फाइबर कंटेंट। समझिएगा इसका मतलब हाई फाइबर कंटेंट है तो एक्स्ट्रा फैट कोलेस्ट्रॉल को और कफ को स्पंज की तरह सोख लेता है। ठीक है? अब देखो भाई मैं तो गेहूं नहीं खाता। मुझे तो एलर्जी है। अब मैं एक कैसी बात बताऊं पता है एक समय था जब सभी लोग
(1:03:10) मैं गांव में रहता था। मैं सुनता था, देखता था। सभी लोग बाजरा, मक्का, जौ यही खाते थे। जब कोई मेहमान आता था ना तब गेहूं और चावल दिखते थे। अरे भाई आज तो गेहूं और चावल क्या टेस्टी टेस्टी गेहूं में थोड़ा उसमें चावल में थोड़ा सा बुरा डाला, घी डाला, थोड़ी सी दाल डाली। आ हा हा क्या टेस्ट आया। और बाकी समय पर लोग क्या खाते थे? मेहमान के आने पर ये खाते थे। जो खाते थे, जो चना को पीस लिया, उसके बाद में बाजरा, मक्का, अभी सब लोग को वही खाना पड़ रहा है। क्यों? क्योंकि गेहूं खाया बढ़िया खूब शानदार ग्रीन रिवॉल्यूशन हुआ हमारे देश में। मैं कैसे समझाऊं कि एक
(1:03:51) जो नॉर्मल मुर्गा है एक मुर्गा है मान लो चिकन बहुत सारे लोग खाते हैं। हां चिकन जो है एक नॉनवेज फूड है बहुत सारे लोग। अब पोल्ट्री का चिकन और जंगली चिकन कितना डिफरेंस होगा? ग्रीन रिवॉल्यूशन में क्या होगा? गेहूं जो पहले का था और आज का जो गेहूं है कितना अंतर हो गया? वो ग्रीन रिवॉल्यूशन आ गया है साहब। इसमें खाद, इसमें खाद, उसमें टॉक्सिन, उसमें पेस्टिसाइड, इसमें हर्बीसाइड, इसमें इंसेक्टिसाइड। खत्म हो गया सारा गेम। गेहूं तो बुरा मत मानना। जहर है। [गहरी सांस लेने की आवाज़] हमारे देश में डायबिटीज, हमारे देश में बीपी गेहूं की वजह से। तो अगर गेहूं खाते
(1:04:34) हो तो पसीना बहाओ। पसीना बहाना पड़ेगा। और एक बड़ी इंटरेस्टिंग बात यह है कि हमारे देश में विशेष तौर से नॉर्थ इंडिया में जो एक सिलियक बेल्ट बोलते हैं उसको सिलियक बेल्ट सिलियक डिजीज गेहूं खाने वालों को जिनको एलर्जी डायग्नोस तक नहीं होती राजस्थान में यूपी में वो डायग्नोस्ट तक नहीं हो रही है और लोगों का काम चल रहा है। चलो आगे चलते हैं। उष्णोदक उबले पानी की ताकत क्या है? दीपन पाचनम कंठे लघु उष्णोदक क्या होता है कि अगर पानी हल्का सा गर्म हो तो पानी हमारे लिए बेटर होता है। इससे क्या होता है? देखो गर्म पानी होगा तो खाना उसमें जल्दी से गल जाएगा। वो
(1:05:16) तेजी से जैसे मान लो तुम दो गिलास लेके बैठे हैं। हल्का सा ज्यादा नहीं कि सब जल जा रहा है अंदर। बिल्कुल हल्का सा कैसे चेक करें कि सर कौन सा पानी पीना है? जिस पानी में आपकी फिंगर टिप कंफर्टेबल हो। आपने हल्का सा पानी गरम किया और फ़िंगर टिप कंफ़र्टेबल है ना, तो मतलब उसमें आपका बॉडी कंफ़र्टेबल है। थोड़ा-थोड़ा घुंट-घूंट करके पियो। आप यह देखोगे कि गरम पानी पीने से इतने फायदे हैं। इतने फायदे हैं, इतने फायदे। पूरे दिन नहीं पी सकते, सिर्फ़ सुबह पी लो। सिर्फ़ सुबह पी लो, कोई दिक्कत नहीं होगी। तो, उनका यही कहना था। अब देखो अजीब
(1:05:51) से कांसेप्ट हैं ये कि नॉर्मल पानी पचने में 3 घंटे लगता है लेकिन पानी को उबालकर जब आधा रह जाए तो सिर्फ एक घंटे में बच जाता है ये पानी कफ, मोटापा और गैस को खत्म करता है। अब इस चीज को तो मॉडर्न मेडिकल साइंस कभी भी नहीं मानेगा। वो क्या कहेगा कि क्या बकवास है? पानी गर्म कर लिया। आधा हो गया। फिर वो पानी पच जाता है पानी को पचने में। एलोपैथी क्या कहता है कि पानी सीधा 1 सेकंड में डाइजेस्ट हो जाता है। सीधा आपके डाइजेस्टिव सिस्टम को ट्रेवल करके खत्म हो जाता है। बट इनका ये कहना है अब जब एक्सपेरिमेंट किया होगा तभी कहा होगा। इतनी सारी बातें बोली वो भी सच
(1:06:24) है। तो क्या पता ये भी सच हो। मैं इस चीज को फिलहाल एग्री कम कर रहा हूं। लेकिन हां मैं ल्यूक वार्म वाटर के बेनिफिट्स को जानता हूं। ल्यूक वार्म वाटर एंग्जायटी को खत्म करता है। एशियसनेस कम करता है। थिंकिंग को क्लियर करता है। स्किन को बेटर करता है। डाइजेशन को इंप्रूव करता है। गले को ठीक रखता है। बहुत सारे उसके फायदे हैं। इसमें रति बराबर का संदेह नहीं है। ल्यूक वार्म वाटर क्या होता है? ल्यूक वार्म जिसमें आपकी फिंगर टिप ठीक हो। लिख लो इसको। ल्यूक वार्म वाटर पीना है। गर्मी में सिर्फ सुबह-सुबह पिए और सर्दी में तो पूरे दिन पी सकते हैं।
(1:06:58) गर्मी में तो सुबह-सुबह ही पीना काफी रहेगा। फिर बासी खाना ना खाएं। क्या कहते हैं वागभट जी? कि पके हुए भोजन को 48 मिनट्स में खा लें। राजीव दीक्षित जी ने इस चीज को बहुत बार कहा कि फ्रिज जो है वो कंपनियों की देन है। क्या कहते हैं? फ्रिज जो है वो कंपनियों की देन है। कंपनियों ने खुद के खाने को सड़ने से बचाने के लिए फ्रिज बनाया। फिर जब किसी को ध्यान चला कि कंपनियां फ्रिज बना के खुद के खाने को सड़ने से बचा रही है तो उसने फ्रिज को ही घर-घर तक पहुंचा दिया। अब फ्रिज तो आ गया कि अब चार दिन की सब्जी, पांच दिन की सब्जी गरम कर करके खाएंगे। एक बार में
(1:07:36) अच्छा सा पनीर की सब्जी बना लो। फिर चार दिन तक खाएंगे। फिर पांचव दिन हॉस्पिटल जाएंगे। फिर 10 दिन तक हमें हॉस्पिटल वाले खाएंगे। तो जितना मजा लोगे उतनी दिक्कत है। ये कहते हैं कि अगर फ्रिज में रख लिया तो आंतों में चिपकता है और तामसिक ऊर्जा को बढ़ाता है। तो अच्छी बात नहीं है। 48 मिनट्स के भीतर। अभी तो हम ब्लिंकिट स्पिगी zomato तो कब से बना हुआ है? कोई भी नहीं जानता है भाई। कोई भी नहीं जानता है। बट फ्रेशनेस की बात है। ताम अब देखो तामसिक ऊर्जा मान लो किसी में बढ़ गई। सुस्ती बढ़ गई किसी में। हां। किसी में अह डाइजेस्टिव इश्यूज आ गए तो उसको ठीक करने
(1:08:20) का रास्ता तो एक ही है। क्या रास्ता है? रास्ता एक ही है। वर्कआउट करो। दुनिया में हजार बीमारी हो। इलाज एक। पसीना बहाओ और पसीना तो बहाना पड़ेगा। पसीना तो बहाना पड़ेगा। देखो तिल का तेल वात का काल ये कह रहे हैं कि सभी तेलों में तिल का तेल सर्वश्रेष्ठ है। यह अंदरूनी और बाहरी रूखेपन को खत्म करता है और हड्डियों को फौलाद बनाता है और वात दोष का परम शत्रु है। वात दोष का परम शत्रु। आजकल तो एक ऑयल पुलिंग का कांसेप्ट आ गया जिसमें तो एक चम्मच तेल मुंह में डालो और ऐसे ऐसे करते रहो। वो थोड़ी देर में दो चार से पांच मिनट में बिल्कुल ऑयल बिल्कुल येलो
(1:09:04) से वाइट हो जाता है। तो बोलते हैं कि आपके गम्स की हेल्थ के लिए अच्छा है। आपके बकल कैविटी को ठीक रखता है। पता है एक रीसेंट रिसर्च हुई है। क्या कहती है वो कि अगर तुम्हारे मसूड़े खराब हैं तो तुमको हार्ट अटैक आने की संभावनाएं ज्यादा है। बताओ कि यहां दांतों से ही वह बैक्टीरियाज अंदर आर्टरीज में जाते हैं और उनको ब्लॉक करते हैं। इंटरेस्टिंग फैक्ट ना। मेडिकल साइंस धीरे-धीरे इवॉल्व हो रही है। यह लोग बहुत पहले से इवॉल्व थे। इनको पता था। खैर अब देखो क्या कहते हैं ये? यह कहते हैं कि हरड़ इंसानों की माता है। यह इनका बड़ा ही
(1:09:46) वायरल स्टेटमेंट है। बड़ा ही फेमस स्टेटमेंट है कि एक तो एक बार तो इंसान की खुद की मां उसका उतना ध्यान नहीं रखती जितनी हरड़ यानी कि हरितकी रखती है। भाई आयुर्वेद में ये कॉम्बिनेशन बहुत जबरदस्त चलता है। हरड़, दहेड़ा, आंवला जिसको त्रिफला बोलते हैं। त्रिफला चूर्ण बोलते हैं। त्रिफला उसमें तीन फलों में एक फल है हरड़। और यह कहते थे कि जिसको शतायु होना है, जिसको 100 साल जीना है, उसको हरण का सेवन करना चाहिए या फिर त्रिफला लेना चाहिए। हरण क्या कहते हैं? हरित की मनुष्य नाम माते हितकारिणी माता के समान हितकारिणी है। यानी कि वाग्भट कहते हैं कि
(1:10:27) कभी-कभी सगे मां-बाप गुस्सा हो सकते हैं। लेकिन पेट में गई हरड़ कभी भी शरीर का बुरा नहीं करती है और टॉक्सिंस को रिलीज करती है। आप देखो हमारे देश में किसी भी बड़े ऋषि का योगी का आप इंटरव्यू देखें। जो 100 120 साल जिया वो बार-बार त्रिफला की बात करेंगे। बाद बात बाद हरण की बात करेंगे और इसकी तारीफ करेंगे। चलिए आगे चलते हैं। त्रिफला जिसकी मैंने बात अभी कही कि हरण, भेड़ा, आंवला का कॉम्बिनेशन होता है त्रिफला। एंटी एजिंग का बाप है। एक्सट्रीम स्टेटमेंट है ये। एंटी एजिंग का बाप में बहुत सारे फैक्टर्स आएंगे। बट ये भी एक फैक्टर है। रात में गर्म पानी से लो
(1:11:07) तो पेट साफ होगा। और सुबह अगर शहद के साथ में लिया जाए तो शरीर मजबूत बनता है। शरीर में ताकत आती है। शरीर में शक्ति आती है। क्या? त्रिफला, हरड़, भेड़ा, आंवला। शरीर को पोषण मिलता है। भाई देखो आयुर्वेद का बहुत सारा फोकस रहा है पेट को ठीक करने पर। और पता है विदेशों में क्या मानते हैं? कि अगर तुम हफ्ते में हफ्ते में दो से तीन बार भी फ्रेश हो रहे हो तो तुम्हारा पेट सही है। और आयुर्वेदा किस बात पे बात करता है कि दस्त करवा के उल्टी करवा के कैसे भी करवा के पेट को साफ करो।
(1:11:54) पंचकर्मा जो इनका होता है। कहते हैं ये बॉडी को साफ रखो। अब देखो इस चीज को समझो। कैसे? मान लो एक तुम्हारे पास में एक बर्तन है। बर्तन में रोज चाय बनती है। चाय बनती है लेकिन धोया नहीं जाता है। हां तो क्या होगा? बर्तन थोड़े टाइम में खराब हो जाएगा। एक वही बर्तन है जिसमें बहुत समय से चाय बन रही है। लेकिन उसको उसको हाथों हाथ धोया जाता है। तो बर्तन लंबा चलेगा। बस तो इसी की बात जो है वो कही गई है। पेट पेट पेट और पेट की बात कही गई है। देखो पेट के लिए फिर एक चीज यहां पर कही गई है। जैसे मैंने बोला शुरू में ही बोला कि अहम
(1:12:31) क्या बोला था कि अगर तुम्हारा मंदागनी है तो गेम खत्म है। इन्होंने एक देखो क्या बोल दिया है? वोमिटिंग थेरेपी इज द बेस्ट डिटॉक्स। मतलब यह शरीर से जो और इन्होंने कहा हमेशा यह बात कही है कि शरीर में अगर तुम फास्टिंग करो फास्टिंग करो, फास्टिंग करो तो लंबा जिओगे। और अब आजकल के लोगों को जिनको नोबेल प्राइज मिल रहा है, किस चीज का नोबेल प्राइज मिल रहा है? इसी बात का नोबेल प्राइज मिल रहा है कि फास्टिंग करने से हमारे बॉडी की इम्यून सिस्टम बेटर होता है। कैंसर फाइटिंग कैपेसिटी आती है। ये सब बातें पहले बोल गए। तो रात को खाना कम
(1:13:19) खाओ। रात को खाना बॉडी रिपेयर मोड में चली जाती है। रिपेयर मोड में जब चली जाएगी बॉडी उसको खाना दोगे। रात को 2:00 बजे जोमato से ऑर्डर करके खाना खाते हो तुम तो शरीर को बर्बाद कर रहे हो। क्या कहते हैं? आंवला अकाल बुढ़ापे पर ब्रेक लगाने का रास्ता है। क्या कहते हैं? आंवला दुनिया का सबसे बड़ा एंटीऑक्सीडेंट है। एंटीऑक्सीडेंट दवाओं का बड़ा मार्केट है। खूब लोग एंटीऑक्सीडेंट दवाएं बेचते हैं। आंवला खा लो। अब देखो बड़ी इंटरेस्टिंग बात है। ये विटामिन सी का ऐसा सोर्स है जो गर्म करने पर भी नष्ट नहीं होता। नॉर्मली विटामिन सी एस्कोर्बिक एसिड होता है।
(1:13:57) एस्कोर्बिक एसिड में क्या क्या नेचर होता है? 70° के ऊपर वो डैमेज हो जाएगा। मतलब ज्यादा हाई हीट को टोलरेट नहीं कर पाता। आंवले का चवनप्राश बनता है। उसको पूरा हीट करते हैं। घी के साथ में हां आंवले की प्रोसेसिंग होती है। मेरे पिताजी बहुत चवनप्राश बनाते थे पहले। अब तो उन्होंने बंद कर दिया है। मैं वहीं से ये सब चीजें पढ़ा हूं, सीखा हूं, जा रहा हूं अलोंग विद एमबीबीएस। लेकिन एक हमेशा एक आयुर्वेदिक डॉक्टर हमेशा क्या चाहता है कि उसका बेटा एमबीबीएस डॉक्टर बने। तो अब गलती से मैं एमबीबीएस करने चला गया। तो मुझे दोनों ज्ञान हो गए थोड़े-थोड़े। तो दोनों ज्ञान
(1:14:28) आप तक पहुंचाने का प्रयास करता हूं। आंवला जो है वो सबसे बड़ा एंटीऑक्सीडेंट है और बुढ़ापे पर ब्रेक लगाने का रास्ता है। चाहे स्किन हो चाहे हेयर्स हो। ये डिफरेंट-डिफरेंट चीजें हो। आंखों, बालों, स्किन को कभी भी बूढ़ा नहीं होने देता। देखो त्रिफला में कितनी-कितनी तारीफ की गई है उसकी। बहुत जबरदस्त तारीफ की गई है जिसका कोई जवाब नहीं है। खैर अब आगे समझते हैं। क्या कहते हैं वागभट्ट जी? ये देखो प्ये सती गदार तस किम औषधम निशवेण प्ये अस्ति गदार तस किम औषधम निशवेण यानी
(1:15:15) खानपान सही है तो दवा की क्या जरूरत है? और खान-पान सही नहीं है तो दवा की क्या जरूरत है? मतलब अगर खानपान ठीक है तो दवा की जरूरत नहीं है। और अगर खान-पान ठीक नहीं है तो दवा लेके क्या करोगे? क्या करोगे? दवा लेके कुछ ठीक नहीं होगा। पता है चार मिर्ची बड़े खा के ओम्याप्राजोल ले रहे हो और पेट खराब रहता है। मिर्ची बड़ा खा के ओमप्राजोल इनो चार समोसे खा के तो दवा नहीं कर सकती आहार और मैं हमेशा कहता हूं कि शरीर में शक्ति अगर जिंदा रखनी है ना तो खाने को
(1:16:02) लिक्विड फॉर्म में लो ब्लेंड फूड में लो और मैं फिर रिपीट कर रहा हूं इस सेशन को अपने मां-बाप को दिखाना अपने घर वालों को दिखाना समस्त लोगों को दिखाना ताकि अवेयरनेस हो पाए हमारे हमारे देश में कुछ नहीं पता आजकल के लोगों को कुछ भी नहीं पता बर्गर खा के कोल्ड ड्रिंक पी लेते हैं इसको बोलते हैं हरामखोरी क्यों गलत खाना खा लिया तो हरामखोर हुआ ना वो नहीं समझे इतना टॉक्सिन टॉक्सिन फिर बोलते हैं एनर्जी नहीं है स्पार्क नहीं है ओरा नहीं बन रहा वाइब नहीं आ रही कुछ नहीं आएगा दूसरों की रील देखते थे जिंदगी काट दोगे।
(1:16:49) बस हम क्या कह रहे हैं? खानपान सही करो। ब्लेंड फूड खाओ। देखो अगर आपको स्पाइसी लाइफ चाहिए ना स्पाइसी लाइफ तो खाना बिना स्पाइस का खाओ। और अगर आपको ब्लेंड लाइफ चाहिए, रूखी-सखी जिंदगी चाहिए, जिंदगी में कुछ हो ही ना, तो फ़ूड शुड बी स्पाइसी। वाओ! कि खाना खाओ बस उसको पचाते रहो। पेट पर हाथ घुमाते रहो। बस हां उसी में आधी जिंदगी बीत जाएगी। चलिए आगे चलने का प्रयास करते हैं। क्या कहते हैं ये? फिर एक और बहुत इंपॉर्टेंट बात त्रिकुटी मेटाबॉलिज्म का बूस्टर है। इसकी
(1:17:34) बात हम लोग करेंगे। एक चीज और देखी जाए। ओजस ओजस अमृत जो शब्द है ना जो भी हमने बनाया वो उसी से इंस्पायर्ड है। हां उसी से इंस्पायर्ड है। [अचानक ज़ोर से सांस लेने की आवाज़] ओजस तुम्हारी अस्थि ढाल है। अब ओजस का मतलब क्या है? कि सातों धातुएं होती है। इनका मानना है कि अस्थि, मज्जा, मांस, रक्त, शुक्र यानी वीर्य से मिलके सात धातुएं हैं। उन सातों के जब परफेक्ट कॉम्बिनेशन हो रहा है। परफेक्ट उनका निर्माण हो रहा है। तो उनसे मिलकर ओज बनता है। जिसको हम आज क्या बोलते हैं? इम्यून सिस्टम। कोविड में कितने लोग मर गए हैं? हां।
(1:18:20) पता है हर इंसान को जो एचआईवी के वायरस से कांटेक्ट में आता है। एचआईवी नहीं होता। किसको होता है? जिसका इम्यून सिस्टम कमजोर हो। अभी आप देखो 40 साल के बाद में आपको एचआईवी के पेशेंट्स बहुत दिखेंगे। क्यों? इम्यून सिस्टम ड्रॉप हो गया। इम्यून सिस्टम। अब इसका मतलब ये नहीं है। समझ गए होंगे इसका मतलब क्या मैं कह रहा हूं। जो गवर्नमेंट जो इनिशिएटिव्स होते हैं, गवर्नमेंट प्रोटोकॉल्स होते हैं कि आप ऐसा कुछ कभी भी करते हैं, तो यू शुड हैव द प्रोटेक्टिव मेजर्स विद यू। खैर तो बड़े से बड़ा भी वायरस और बड़े से बड़ा बैक्टीरिया भी आपका नुकसान नहीं कर सकता।
(1:19:01) अगर आपका ओज ठीक है तो तो जिसका ओज मजबूत है तो उस पर कोई वायरस असर नहीं कर सकता। कोई बैक्टीरिया असर और एक चीज समझ लो यह धरती न्यूक्लियर बम से नहीं डिस्ट्रॉय होगी। एटम बम नहीं मार पाएंगे इस धरती को। इस धरती को मारेगा वायरस। यह लिख लो। यह धरती वायरस से खत्म होगी। और वायरस कोई ऐसा आएगा जिसके सामने अपना इम्यून सिस्टम कुछ नहीं कर पाएगा। हां, उससे पहले कई कमजोर वायरस आएंगे कोविड जैसे और वो कई कमजोरों को निपटाते हुए चलेंगे आगे और हम लोग निपटते चले जाएंगे। चलिए फिर क्या कहते हैं? थ्री का टू। थ्री का टू मतलब सौठ, काली मिर्ची और पिपली। ये तीन
(1:19:47) चीजें हैं। क्या-क्या है? सौठ है, काली मिर्ची है और पिपली है। अभी तो मेटाबॉलिज्म इतना बूस्ट हो गया है कि मेरा मार्कर थोड़ा नीचे गिर गया। ये जिद्दी फैट को हटाता है, कफ को सुखाता है और ठंडे पड़ चुके। मेटा देखो मेटाबॉलिज्म ठंडा पड़ गया है ना। तो उसका रास्ता क्या है? हम एक्सरसाइज करेंगे। सबसे बेहतर रास्ता तो वही है। पेट से संबंधित अगर कोई आपको इशूज़ हैं तो वह मेरा वीडियो एक बार जरूर से देखना। गट रोगों में या पेट के रोगों में मुझे पता है भारत के 90% लोग ऐसे हैं मतलब आज मैं भारत के 90% गैस्ट्रो एंट्रोलॉजिस्ट को तो चैलेंज दे सकता हूं
(1:20:26) कि भाई तुम लोगों से कोई बीमारी ठीक नहीं होती। 90% एक मेरा दोस्त भी है। एक दिल्ली में है वह बेसिक बीमारी ठीक नहीं। क्यों? क्योंकि वह बेचारे क्या करें? उन उनके पास तो वही कंटेंट है जो किताबों में लिखा हुआ है। तो वो बोल देते हैं कि भाई ऐसा-सा करो। अब लोग नहीं मानते। लोग क्या करते हैं? उनकी बात थोड़े दिन सुनेंगे। फिर वही कचौड़ी, जलेबी, समोसा। तो पेट की बीमारी को ठीक करना बहुत मुश्किल। क्यों? क्योंकि रोज खाना खाना है। अंदर घाव हो गए तो फिर वो ठीक नहीं होंगे। तो ब्लेंड फूड मैं उसके ऊपर एक सेशन लूंगा और अब मेरी आपसे यही विनती रहेगी कि हम राजीव
(1:21:09) दीक्षित जी ने जो प्रयास किया इतना बेहतरीन इंसान इतना गजब का व्यक्ति उन्होंने जो प्रयास किया वो अतुल्य है। वो तो हमेशा अमर रहेगा। लेकिन हमारे सेशंस की लिमिटेशन होती है। मुझे पता है आप ये बातें हमेशा सुनते रहना चाहते हैं। हां या ना? तो अभी सेशन का तो हम अंत करेंगे और आप सभी का बहुत-बहुत धन्यवाद जितने लोगों ने मुझे जन्मदिन की मुबारक दी। हैप्पी बर्थडे बोला। आशीर्वाद दिया। देखो जन्मदिन वही होता है जिस दिन हमें पता लग जाए कि हम क्यों पैदा हुए हैं और
(1:21:53) मैं इस चीज को जान चुका हूं समझ चुका हूं कि मैं इस देश के लोगों को ऊर्जावान करने के लिए पैदा हुआ। अगर देश के लोग ऊर्जावान होंगे, ऊर्जा किसी देश की सबसे बड़ी करेंसी होती है। हमें डॉलर की चिंता नहीं करनी है। हमें गिरते रुपए की चिंता नहीं करनी है। हमें गिरती ऊर्जा की चिंता करनी है। और मैं इस देश की ऊर्जा को बढ़ाना चाहता हूं। ओजस्वी तेजस्वी तपस्वी भारत वही एक मिशन है। आप सभी को प्रणाम करता हूं। जितने भी लोग देख रहे हैं कृपा करके अपनी प्रोफाइल को ओटीटी भारत का बनाएं। हमारे देश में हम आगे प्रयास करेंगे कि हम राजनीतिक स्तर पर कुछ ऐसे परिवर्तन लाने
(1:22:38) का प्रयास करें जिससे हमारे देश के हालात बदल सके। इस सेशन को मैं यहीं समाप्त करता हूं। आपके प्रेम के लिए आपके प्यार के लिए बहुत-बहुत शुक्रिया। oटीt भारत जैसा कि मैंने पिछली कम्युनिटी पोस्ट में बताया था कि हम क्या प्रयास करेंगे? हमारा यह प्रयास रहेगा कि हम हर एक राज्य के एक स्टेट एंबेसडर्स बना दें जल्द से जल्द ताकि वो स्टेट एंबेसडर्स उस राज्य में और उन स्टेट एंब एंबेसडर्स को थोड़ा बहुत पैसा भी देना पड़ेगा क्योंकि वो वहां पर ओटीटी भारत का प्रचार प्रसार करेंगे। हम एक मजबूत संगठन बना पाएंगे और एक बेहतर काम कर पाएंगे देश को ऊर्जावान
(1:23:17) बनाने के लिए। इस सेशन को मैं यहीं अंत करता हूं। आप सभी को प्रणाम करता हूं और सेशन कैसा आपको लगा? क्योंकि आपके जब शब्द पढ़ता हूं कमेंट में तो मुझे बहुत अच्छा लगता है। हम आजकल सारे कमेंट पढ़ने लगा हूं शांति से बैठ के। और अगला सेशन आप किस चीज पे चाहते हैं? प्लीज मुझे डिटेल्ड फॉर्मेट में बताइएगा कि हमें इस चीज के ऊपर जानना है, इस चीज के बारे में सीखना है। तो मैं जरूर से आपके लिए सेशन लेके आऊंगा। आप सभी को प्रणाम करता हूं। शुभ रात्रि। बहुत-बहुत शुक्रिया। बहुत-बहुत धन्यवाद। थैंक यू सो मच।
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