Wednesday, July 29, 2026

Garud Puran Secrets -Death sign, souls size, Pitrilok Station| Prashant Mukund Das on Body To Beiing

Garud Puran Secrets -Death sign, souls size, Pitrilok Station| Prashant Mukund Das on Body To Beiing

Author Name:SHLLOKA

Youtube Channel Url:https://www.youtube.com/@Shlloka_B2B

Youtube Video URL:https://www.youtube.com/watch?v=ohBom_rmGtg



Transcript:
(00:00) 1000 प्रकार के नर्क गौंड पुराण में व्यक्ति की जब मृत्यु हुई तो उसके तीन यमदूतों ने निकालकर उसको शरीर से बाहर खड़ा कर दिया। यम के दूत हाथ में दंड और पाश हंटर रखते हैं। उसको मारते हैं वो चीखता है कि मार क्यों रहे हो? मुंडन होता ही नहीं आजकल। तो पिताजी को छाया नहीं है। छाया नहीं है। चप्पल दान नहीं करे तो पिताजी को चप्पल ही नहीं है। अब वो अति शरीर पिंडदान नहीं किया तो शरीर नहीं है। एक बॉडी मिलती है उसका नाम है यातना। पनिशमेंट बॉडी। ऐसे 16 स्टेशन है। जो भी व्यक्ति की आत्मा शरीर छोड़ती है उसके परिवार में 11 महीने तक
(00:29) उसको हर महीने का भोजन निकालना होता है। 11 महीने बाद आत्मा पहुंची वैतरणी नदी तो वहां एक गाय खड़ी होती है। उसमें पस पीप ब्लड पूरा गंदी नदी है। उस नदी का डिस्टेंस है 1200 कि.मी. डेथ के पहले कुछ सिम्टम्स आते हैं। आपकी जो शैडो जो है ना मिस होने लग जाती है। आपको लग रहा है बहुत ज्यादा पुनर्जन्म हो रहा है? बिल्कुल। और इसका मेन कारण तो मैं नॉनवेज बताता हूं। मांस खा रहे हैं। मांस नहीं है। मांसा। तो अगर मैं बकरे को आज काट रहा हूं तो मैं बकरे को बोल रहा हूं। आज मैं तुम्हें काट रहा हूं। कल तुम मुझे काटना। कई प्रकार की डेथ्स होती है। हर टाइप्स ऑफ
(01:03) डेथ के बारे में मुझे बताइए। आपका कोई प्रिपरेशन नहीं। इसीलिए आत्माएं प्रेत बन रही है। तो उस बच्चे ने बताया कि जब मैं शरीर से निकला तो मुझे एक तांत्रिक ने कैद कर लिया। तो एक दिन उसकी बोतल हवा के जोर से गिर गई। ब्रेक हुई तो मैं आजाद हो गया। एंड देन आई स्टार्टेड रनिंग बैक टू माय होम। लेकिन वहां तब तक तो मेरी बॉडी बॉडी जल चुकी थी। मेरे कल सोल हेड मैं निकल गई। अब मेरे को कोई तांत्रिक ने ट्रैप कर दिया। उसके लिए तो हम जो वैदिक क्रिया करेंगे शमशान में पिंडदान पूजन तेवी वो इसीलिए होता है ताकि कोई आत्मप कर सके। प्रशांत मुकुंद दास जी इस के प्रभावशाली
(01:42) सनातनों में से हैं जो विज्ञान से लेकर भक्ति शास्त्री और भक्ति वैभव जैसी डिग्री से सम्मानित हैं। वो श्रीमद् भागवतम के दिव्य ज्ञानधारा को लोगों तक पहुंचाने के लिए जाने जाते हैं। सिर्फ प्रवचन देने के बजाय वो हर कथा में एक ऐसा एक्सपीरियंस क्रिएट करते हैं कि सुनने वाले की जिंदगी का नजरिया ही बदल जाए। चाहे वो एम्स के डॉक्टर्स हो, इंडियन नेवी के अधिकारी हो या फिर दुनिया का कोई भी आम इंसान। कि अगर आप कीड़े को भी मारते तो आपको कीड़ा बनना पड़ेगा। लिटिल अटैचमेंट टू दी फूड ऑफ़ प्रोडक्ट आल्सो कैन ब्रिंग यू बैक टू दिस मेंटल वर्ल्ड। तो नर्क लोक भवलोक
(02:15) से साउथ डायरेक्शन में है। इसलिए क्रिमिनेशन ग्राउंड में सब लोग एक ही चेक करते रहते हैं। सिर कहां है? क्योंकि नर्क के तरफ सिर कर दिया जो व्यक्ति मदपान करने वाला अल्कोहल। एंजॉय करता था। मोल्टन आयरन उतना गर्म लोहा उस यातना शरीर के मुख में डाल जाएगा। नॉनवेज बनाते थे तो वहां पर कुंभी पाकम नर्क कढ़ाई है बड़ी उसमें फ्राई कह रहा है तड़पते हुए तेल के अंदर चिल्ला रहा है छोड़ दो व्यक्ति भोजन से पहले प्रार्थना मंत्र नहीं बोलता कौवा बनता है दूसरी स्त्री का मेरिटल अफेयर किया उसको तप्त लोह में तपती हुई बॉडी देंगे और कहेंगे लो अभी एंजॉय
(02:50) करो इसको वहां का टाइम पीरियड यहां के टाइम पीरियड से एक साल का डिफरेंस इस से 23 इयर्स से जुड़े एचएच गोपाल कृष्ण गोस्वामी महाराज के दीक्षा शिष्य और स्पिरिचुअल आइकॉन ऑफ एशिया अवार्ड से सम्मानित प्रशांत मुकुंद दास जी ने इंडिया, ऑस्ट्रेलिया, दुबई, लंदन और अमेरिका समिति हजारों से ज्यादा परिवार को काउंसिल किया है और 500 से अधिक भागवत कथाएं को कंडक्ट किया है। आज हम उनको गर्व से बॉडी टू बीइंग पडकास्ट पर स्वागत करते हैं। क्या आप जानते हैं कि सोल का साइज बालों के टिप से भी ज्यादा छोटा होता है? या फिर मरने के 4 से छ महीने पहले डेथ बॉडी को
(03:29) साइंस देना शुरू करता है। क्या है वो साइंस? और बहुत ही पते की बात है कि मरने के बाद सोल 16 स्टेशंस से गुजरता है। क्या है यह स्टेशंस? और इनमें क्या होता है? और यह बिल्कुल मुमकिन है कि जो इंसान अपने स्लीप में पीसफुली मरा है, उसकी डेथ बहुत ही दर्दनाक और जो इंसान एक खूंखार प्लेन क्रैश में या कार क्रैश में मरा हो, उसकी डेथ बहुत ही सुखद हो। आज हम फाइनली गरुड़ पुराण पे एक मास्टर क्लास ल्च कर रहे हैं। वि इज गोइंग टू बी अ थ्री पार्ट सीरीज। इसमें हम डिटेल में बात करेंगे अबाउट एवरीथिंग डेथ एंड बिय्ड। जैसे कि हजार प्रकार के नरक, स्वर्ग, बैकुंठ, सोल के
(04:07) नाइन एग्जिट पॉइंट्स, प्रेथ योनी, डेथ रिचुअल्स, यमराज, यमलोक, एवरीथिंग दैट मेक्स अस क्यूरियस अबाउट डेथ। तो प्लीज इस स्पेशल मास्टर क्लास सीरीज को पूरा देखिए। एंड इफ यू सब्सक्राइब आपको हमारे सारे पॉडकास्ट की नोटिफिकेशंस एडवांस में ही मिल जाएगी। मुझे पॉडकास्ट करते हुए 2 साल हो गए हैं। एंड द टॉपिक दैट आई हैव बीन मोस्ट एक्साइटेड अबाउट हैज़ बीन द गरुड़ पुराण। बट इस दौरान मैं एक ऐसे ऑथेंटिक वॉइस को ढूंढ रही थी जो यह विज़डम बहुत ही इंपैक्टफुल, ऑथेंटिक और सरल भाषा में डिलीवर करे। एंड आई एम सो ग्लैड दैट वी फाइनली गॉट टू मटेरियलाइज दिस। आई होप यू
(04:37) एंजॉय इट। प्रभु जी कहा जाता है कि डेथ के कुछ टाइम पहले से साइन मिलना स्टार्ट हो जाते हैं। जी तकरीबन चार से छ महीने पहले तक भी इंसान को साइन मिल जाते हैं। जैसे कि ब्रेथ में चेंजेस आ रहे हैं। विज़न में चेंजेस आ रहे हैं। अग्नि अपनी शरीर की अग्नि चेंज होने चालू हो जाती है। ये थोड़ा डिटेल में समझाइए कि डेथ के पहले इंसान किस टाइप के साइंस को एक्सपीरियंस करता है? देखिए अगर हम शास्त्र के बेसिस पर जाएं तो डेथ के पहले कुछ सिम्टम्स आते हैं लाइक यम के दूत जो होते हैं उनका प्रकोप दिखने लगता है और आपकी जो शैडो फॉर्म होती
(05:22) है जब हम अपने चलते हैं तो शैडो जो है ना मिस होने लग जाती है। आप बैठेंगे सन के नीचे तो आपको शैडो नहीं दिखेगी लाइट के अंदर तो क्योंकि आदमी वृद्ध होता है तो इतना ध्यान नहीं दे पाता। बट जो उसके फैमिली पीपल है और इतना हम लोग अपनी शैडो पर ध्यान भी नहीं देते हैं। शैडो मिसिंग होता है। दूसरा कोई ना कोई डिसीज क्रॉनिक डिसीज व्यक्ति को पकड़ेगा तो वो भी एक चांस होता है। रिवाइव भी कर सकता है। लेकिन क्रोन डिसीज आल्सो अ सिम्टम कि व्यक्ति के जाने का कोई ना कोई कारण तो बनना चाहिए। तो उसमें से रोग एक कारण है। एक कारण है शैडो का मिस हो जाना। तीसरा
(05:54) कारण है यम के दूतों का दिखना। तो उसको बैड वुमस बुरे स्वप्न आने लग जाएंगे। उसको लगेगा जैसे कोई उसको खींच रहा है। कोई उसको बोल रहा है गेट रेडी तैयार हो जाओ। तो अभी कुछ एक व्यक्ति का शरीर छूटा था हमारे जान पहचान में तो उन्होंने बताया कि मुझे यमदूत की जगह विष्णुदूत दिखाई देते हैं। कमिंग फ्रॉम विष्णु लोका और वह कह रहे हैं कि तुम तैयार हो। तुम्हारा समय आ गया है। सो हमने उनको पूछा किस कलर के दिख रहे थे? कैसे थे? तो बोला गोल्डन फॉर्म था फोर हैंडेड थे और वो बार-बार आकर के बोल रहे तैयार हो जाओ तुम्हारा समय आ गया। तैयार
(06:30) हो जाओ। तो कोई डिवोशनल लाइफ में था तो उसको इस प्रकार के सिम्टम्स आ रहे हैं। कोई डिवोशनल नहीं है तो उसको बताते हैं कि भयानक बड़े तीन यमदूत होते हैं। क्योंकि मनसा वाचा कर्मणा मन से जो कर्म किए वचन से जो कर्म किए और मनसा वाचा वचन से मन से और कर्म तीनों में जो कर्म किए हमने उन तीनों के रेप्लिका प्रतिक्रिया में तीन यमदूत आते हैं टू जस्टिफाई कि भाई इसने मन से जितने किए उसके लिए एक मन का दूत वचन से वचन का और कर्म से कर्म का तीन यमदूत आएंगे एंड देन दे विल विद दंड इन देयर हैंड्स उनके हाथ में एक दंड रहेगा एक हाथ में पाश रहेगा पाश यानी हंटर और उस हंटर
(07:10) से वो दे विल बाउंड दी सोल विद द बॉडी। और फिर बॉडी से अलग करने के लिए उनके वो इतना सटल लेवल पर होता है कि दैट गोस इनसाइड द सूक्ष्म शरीर। उस सोल को सटल बॉडी को पकड़ेगा। अब अब जो आत्मा उसका साइज बताया गया है श्वेताशर उपनिषद में बाल अग्रशत भागस्या शतदा कल्पितस 10,000 पार्ट ऑफ द टिप ऑफ द हेयर। इतनी छोटी आत्मा का साइज श्वेताश उपनिषद में बताया गया है। आत्मा का साइज भी होता है। बाल का 10,000वा हिस्सा माइक्रोस्कोप से भी नहीं दिखेगा। माइक्रोब से भी छोटा है। जैसे क्या भगवान गीता में कहते हैं ममेव अंशः जीव लोके जीव भूत सनातना ऑल दी सोल्स
(07:51) इन दिस वर्ल्ड चाहे वो किसी भी पशु में हो या इंसान में हो। मेड अप ऑफ माइन ममेव अंशा। अब कहते हैं ना पेरेंट्स से जो बच्चे निकलते हैं पेरेंट्स जैसे उनके एट्रिब्यूट्स होते हैं। तो भगवान से निकलने वाले जितनी भी जीवात्मा है भगवान को बोला गया सच्चिदानंद विग्रह सिमिलरली जितनी सोल है वो भी सत चित्त और आनंद है तो आत्मा सत चित्त और आनंद की बनी है। तीन तत्व सारी आत्माएं सारी वर्ल्ड की जितनी भी आत्माएं हैं चींटी से लेकर के ऑस्ट्रेलियन अमेरिकन अफ्रीकन ऊपर स्वर्ग लोक नीचे के लोग सब सतित आनंद एनी धर्म हिंदू मुस्लिम सिख ईसाई कुछ भी हो सो एव्री सोल इज़ सत मींस
(08:29) एटरर्नल वो कभी मरती नहीं चित मींस ऑल नॉलेजेबल यू जस्ट नीड टू रिवाइव दी नॉलेज इट्स ऑलरेडी देयर इन द बॉडी एंड एटरनल ब्लिसफुल ब्लिसफुल है आनंद बोलते हैं ना हे आनंद आत्मा तो आनंद आत्मा में आनंद है ना लेकिन वो आनंद आत्मा क्योंकि शरीर से अपना अपना अनुभव कर रही है। सोच रही है मैं यह शरीर हूं इसलिए वो दुख के अंदर आ गई। तो आनंद एक्सपीरियंस नहीं कर पा रही जो तो अगर तो वो जैसे ही डिस्कनेक्ट आ जाता है कि मैं यह शरीर नहीं हूं तो वो आनंद की तरह आनंद आ जाएगा। अभी प्रश्न उठता है कि आत्मा का कोई स्वरूप होता है कि आत्मा निराकार स्वरूप की होती है। उसका कोई
(08:59) फॉर्म होता है तो शास्त्र प्रश्न करते हैं हाथ पहले बना या दस्ताने पहले बने। तो बोलते हैं कि भाई हाथ पहले बना दस्ताना बाद में बना। तो शरीर तो कपड़े के समान है ना। तो ऊपर एक कवरिंग दिया गया। तो पहले सोल बनी उसके ऊपर के लिए वस्त्र दिया गया। मां की गर्भ में भी कहते हैं जब गर्भ धारण हो गया यानी जीवात्मा पहले आई और फिर वो ग्रो करना शुरू करी। एक महीने में उसके यह शरीर बना, यह शरीर बना, 9 महीने में पूर्ण शरीर बना। तो चेतना जो आई कि मैं गर्भवती हो गई, उसका मेंुअल साइकिल रुक गया। इट मींस कि उसके अंदर एक जीवात्मा ने प्रवेश
(09:34) किया। अगर जीवात्मा ना आए कोई लिविंग बॉडी ना आए तो फिर इसका मतलब वो गर्भधारण ही नहीं कर सकती है और गर्भधारण हुआ मींस कि जीवात्मा यानी जीवात्मा पहले आई अब उसके ऊपर का आवरण बनना शुरू हो रहा है तो जो उंगलियां पांच है तो दस्ताना भी वैसे ही बनेगा तो जिस तरह की हमारे हाथ हैं पैर हैं कान है नाक है ऐसा ही स्वरूप आत्मा का है तो सोल के ऊपर एक सेटल फॉर्म होती है माइंड इंटेलिजेंस एंड ईगो दैट इज सूक्ष्म शरीर और उसके ऊपर फिर आवरण बनता है पंच भौतिक शरीर का तो वो किस फॉर्म में बनेगा उसी फॉर्म में बनेगा जिस फॉर्म की वो बॉडी है। भाई जैसे मैं अपनी दस्ताना पहनता हूं
(10:07) तो साइज चेक करता हूं। तो आत्मा के ऊपर वैसे ही आवरण बनाया जाएगा जैसी आत्मा है। अब प्रश्न ये उठता है कि आत्मा के ऊपर आवरण अगर मनुष्य का दिया गया तो क्या शेर के अंदर आवरण शेर का होता है? इसका उत्तर यह है शास्त्र कहते हैं कि जैसे कोई आदमी एयरप्लेन में फ्लाई करता है। पायलट है वह। उसके कुछ नॉर्म्स हैं बिफोर फ्लाई कि आपको ड्रिंक नहीं करना है, यह नहीं करना है। अदरवाइज आप जर्नी नहीं कर सकते हैं। वो लेकिन नियम तोड़ता है। तो नियम तोड़ने के बाद वो पायलट तो है वो ट्रेंड पायलट भी सब कुछ आता है। बट ही इज़ बोर्न टू द ग्राउंड ड्यूटी। पायलट उसको ग्राउंड
(10:40) ड्यूटी बना दो। पायलट की जगह ग्राउंड फ्लाइंग काट दो उसका। अब ही इज़ ड्राइविंग अ कार ग्राउंड ड्यूटी बट ही इज़ अ पायलट। तो ही वांट्स टू फ्लाई बट ही कांट फ्लाई। सिमिलरली जो आत्मा है वह भगवान चाहते हैं कि वह भजन करके मेरे धाम को आए। लेकिन क्योंकि आत्मा अपने बुरे कर्मों के कारण उस पशु शरीर में फंस जाती है। अंदर से चाहती तो है लेकिन वो फंस गई है। शूज मेरा छह नंबर पहनता हूं तो छह मिलना चाहिए। लेकिन मुझे आठ नंबर का पहना पहन तो लूंगा। अनकंफर्टेबल रहूंगा। तो सोल अनकंफर्टेबल रहती है पशु शरीर के अंदर। जब वो मनुष्य शरीर में आती है तब उसको
(11:14) क्रिया करना, भजन करना, मेडिटेट करना उसको मौका मिलता है। वरना पशु शरीर में कैसे करें? हां हां तो उसकी जर्नी रुकी हुई है। अभी हम बात कर रहे थे प्रभु जी कि किस टाइप के साइंस इंसान एक्सपीरियंस कर सकता है जो मरने वाला हो। क्वेश्चन ये आता है कि अगर तो मेरी अननेचुरल डेथ हो रही है तो भी क्या मैं ये साइंस एक्सपीरियंस करूंगी। नेचुरल डेथ हो रही है तो ठीक है। साइंस मुझे एक्सपीरियंस हो जाएंगे। जैसे अभी आपने कहा अननेचुरल डेथ में भी होती है। देखिए अननेचुरल तो कोई डेथ होती नहीं है। जिसको हम बोलते हैं एक्सीडेंटल डेथ, सुसाइडल डेथ। जब जन्म हुआ उसके साथ ही
(11:46) उसकी मृत्यु निश्चित कर दी गई कि इस दिन इसकी मृत्यु होने वाली है। मैन्युफैक्चरिंग डेट के साथ एक्सपायरी डेट कंपनी लगा कर देती है। कोई भी प्रोडक्ट हो चाहे वो पाउडर हो, चाहे वो मेडिसिन हो, चाहे वो खाने का प्रोडक्ट हो। मैन्युफैक्चरिंग के साथ ही फिक्स्ड होती है कि इतने काल बाद इसको मरना है। एक्सपायरी डेट होती है। अब फर्क इतना होता है कि हमको अनुभव नहीं होता कि हमारी नेचुरल होनी है कि हमारी हॉस्पिटल में होनी है कि हमारी एक्सीडेंट में होनी है। क्या होना है। सिर्फ एक डेथ है जिसको कहते हैं सोसाइडल डेथ जो कि निश्चित नहीं होती
(12:15) है। सोसाइडल डेथ इज अ फ्रेश यूटिलाइटिलाइजेशन ऑफ़ द फ्री विल। भगवान ने हर जीवात्मा को एक सूक्ष्म आजादी दी है। फ्री विल। फ्री विल से वो क्या कर सकता है? जब इंस्टिंक्ट आती है कि मुझे समाप्त करना है शरीर को अगर वो अध्यात्म का पालन करे स्पिरिचुअलिटी का पालन करे तो वो उससे बच सकता है। लेकिन वो स्पिरिचुअलिटी का पालन ना करके अपने इंस्टिंक्ट को फॉलो करता है। अपने माइंड को फॉलो करता है। तो अगर मान लो उसको 80 साल जीना था और उसने 40 पे फ्रस्ट्रेट होकर अपने को फांसी लगा दी तो बाकी के 40 इयर्स ही विल बी लाइक अ घोस्ट। उसको शरीर नहीं मिलेगा। कई लोग
(12:44) बोलते हैं हम अगर बोलते हैं अंतकाल में राम का नाम लेके कृष्ण नाम लेकर मर जाए तो हमारे को अच्छा धाम मिलता है। तो क्या राम बोल के सुसाइड कर लें तो बचेंगे? तो अरे नहीं नहीं ऐसे करने से भी आप घस्ट बनोगे स्पिरिचुअल घोस्ट बनोगे। स्पिरिचुअल हां एंड मेनी स्पिरिचुअल पीपल हु एक्सपीरियंस टेंपल एरियाज में और धामों के अंदर भी घस्ट होते हैं। एक एक माता जी के अंदर एक घस्ट आया और उनकी आवाज चेंज हुई और उन्होंने बोला कि मुझे लेकर चलो मायापुर धाम कोक के पास नवदीप धाम तो वो बोलती है हमने तो हमें तो मालूम ही नहीं है कौन सा धाम है। उनकी फैमिली बोलते
(13:15) बोलते मुझे लेकर चलो नवदीप ले चलो। तो जो वीक सोल्स होती हैं जो कि लोग घबराते बहुत हैं जो डरपोक होते हैं या फियरफुल होते हैं तो उन लोगों को देखते हैं कि ये तो वीक है इसके अंदर बॉडी में जाकर इससे अपने काम करवा सकती हूं तो उसकी जो लॉस्ट डिजायर्स होती हैं वो इसके द्वारा पूरी करवाई तो वो लॉस डिजायर पूरी कराने के लिए आया तो बोले मुझे मायापुर लेके चलो मैं जब पहले जिस शरीर में थी मैं मायापुर जा नहीं पाई तो उन्होंने फिर भक्तों से पूछा इस डिवोटीज से पूछा कि मायापुर नाम की कोई जगह बोले अरे इस का हेड क्वार्टर है 122 कंट्रीज साथ रहती हैं हमारा कोलकाता में
(13:47) 100 एक्स में इतना बड़ा गैप वो है फार्म हाउस है। इतना बड़ा मंदिर कह अच्छा ऐसा कुछ है। बोले आप जाइए वो जैसे ही पहुंचे वो लेडी की आवाज वापस फीमेल वॉइस हो गई। वो जो मेल वॉइस हो गई थी। देन ही वेंट आउट। तो स्पिरिचुअल गोस्ट भी होते हैं जिनको आध्यात्मिक आनंद लेने के लिए शरीर छोड़ दिए थे और इस प्रकार से किसी के ओवर पार करके अपना धाम ट्रैवल किया उन्होंने। जैसे तीन खंड में गरुण पुराण बटा है तो उसका जो मध्य भाग है उसको प्रेत खंड कहते हैं। प्रेत खंड यानी शरीर त्यागने के बाद जो आत्मा है वो प्रेत है। अब उसे भूत प्रेत कह दो। भूत का मतलब
(14:19) क्या? जो भूतपूर्व में शरीर में था और आज शरीर में नहीं। भूतपूर्व प्रधानमंत्री भूतपूर्व मुख्यमंत्री भूतपूर्व। ये भूतकाल में अपनी गद्दी पे था। अब नहीं है। शरीर में था तो इंसान था शरीर में नहीं है तो प्रेत है। तो उसका नाम ही है प्रेत खंड। अच्छा। ओके। तो प्रेत कोई आक्रमण करने वाला प्रेत नहीं होता। प्रेत मींस जो जिसका शरीर नहीं है मृत्यु हो गई तो 13 दिन तक वो प्रेत ही है ना घर के अंदर रहता है यात्रा चल रही है सब प्रेत ही है वो प्रभु जी आज गरुड़ पुराण के बारे में हम आपसे डिटेल में समझना चाहते हैं आपने मुझसे कहा कि गरुड़ पुराण के तीन खंड है
(14:50) गरुण पुराण में लगभग 19000 श्लोक हैं और इसमें चैप्टर्स हैं 275 चैप्टर्स हर पुराण में अध्याय हैं तो गरुण पुराण में 275 अध्याय है तो तीन खंड में इसको विभाजित किया है तो पहला इसका है आचार खंड आचार खंड यानी आचरण बताते हैं कि कैसा होना चाहिए। एक व्यक्ति को भगवान का भक्त होना चाहिए नहीं होना चाहिए। तो बहुत सारी स्टोरीज उसमें आचार खंड में आती हैं। मध्य भाग इसका जो है उसका नाम है प्रेत खंड। उसमें श्मशान की यात्रा मृत्यु मृत्यु के उपरांत फिर उसके डिसीजन उसके कर्म कौन से कर्म पर कैसा योनि इसका बारे में चर्चा करी गई है। एंड देन थर्ड पार्ट इज ब्रह्म
(15:28) खंड। तो जो प्रेत खंड है उसको धर्म खंड भी कहते हैं क्योंकि धर्म बताया गया है मृत्यु के उपरांत का धर्म और मृत्यु में शरीर में जीते जी का धर्म क्या है कि आदमी को गौ दान करना चाहिए भजन करना चाहिए क्रिया करनी चाहिए मेडिटेशन करना चाहिए अगर नहीं कर रहा है धार्मिक नहीं है तो उसको धार्मिक को अलग फल मिल रहा है अधार्मिक को अलग फल मिल रहा है दोनों के डिस्टिंग्विशन किया गया है कि कैसा कैसा फल मिलेगा इसलिए स्वर्ग नर्क और स्वर्ग नर्क के अलावा है वैकुंठ जहां जाने के बाद व्यक्ति को वापस संसार में नहीं आना पड़ता स्वर्ग नर्क से वापसी है लेकिन वैकुंठ चला
(15:57) गया तो वापसी नहीं है। उसका लाइफ साइकिल पूरा हो गया। अच्छा तो जो कहते हैं ना मेक इट योर लास्ट बर्थ मींस डू सम कर्मा यू शुड नॉट कम बैक अगेन। सुपर्ब वरना जन्म मृत्यु चक्र में पुनः पुनः कभी पशु में फिर धीरे-धीरे कन्वेयर बेल्ट से मनुष्य बने फिर मनुष्य बन के फिर अगेन रिसाइकल फिर दोबारा से रिसाइकल रिसाइकल भी होता है। हां तो वापस वापस वापस क्या बात है? मुझे तो लगा कि मनुष्य बनने के बाद वापस नहीं जाएंगे। जाएंगे। अच्छा मनुष्य बनने के बाद वापस हम पशु भाव में जा सकते हैं। जा सकते हैं। इसका तो भागवत के अंदर इतना बड़ा स्टोरी है कि एक राजा थे जिनके नाम
(16:28) पर पूरी पृथ्वी को भारत देश कहा गया। राइट? तो भरत महाराज अपना सब कुछ त्याग कर एट द एज ऑफ 50 वह चले गए थे जंगल में पुलस ऋषि आश्रम पर गंडगी नदी नेपाल के पास। तो वहां वो जप करते थे। ध्यान करते थे और बहुत उत्कृष्ट थे जिसने अपने घर महल द्वार सब छोड़ दिया। यानी अच्छा वैराग्य स्थिति थी और 6 घंटे 7 घंटे एक जगह बैठ के जप करते थे। ध्यान में रहते थे। उन्होंने एक दिन देखा नदी के किनारे गंड की नदी पे एक शेर है वो किसी हिरणी वो गर्भवती है और वो भाग रही और शेर उसको पीछे खाने के लिए दौड़ रहा है। तो उसने नदी को देखकर जंप करी। जब
(17:03) जंप करी तो हवा में ही उसका जो बच्चा था हिरणी का वो डिलीवर हो गया और वह नदी के अंदर गिरा और बहाव के साथ आने लगा नीचे बहते हुए। हिरणी तो उस पार जंप कर गई। लेकिन शेर जो था वो बच्चे को खाने के लिए आने लगा। तो राजा भरत के मन में क्षत्रिय थे तो ही वास वेरी फाइटर। तो उन्होंने डंडे से उससे शेर को भगा दिया और उस बच्चे को बचा के ले आए। ऐसे कंपैशन आदमी बचा लेता है। लेकिन अब उनकी अटैचमेंट हो गई उस हिरण के साथ। हमें अपने घर में डॉग्स पैरेट्स लगते हैं। लोग एक अटैचमेंट होती है। वो अटैचमेंट शुरू हो गई। और जब करे तो वो ऐसे सिर पे हाथ लगाते रहे उसके। वो
(17:36) छोटा सा घूमता रहा। हिरण का बच्चा उनकी कुटिया के अंदर कुछ वर्ष बीतने के बाद एक दिन उसके पांव में चोट लग गई तो उनको बड़ा दर्द होने लगा अब वो उनको पता भी चल रहा है कि मैं इतना अटैच क्यों हो रहा हूं इसके साथ में मुझे दर्द क्यों हो रहा है अब उनको क्या करना चाहिए था उनको अपने गुरु के पास जाना चाहिए था और उनको चर्चा करनी चाहिए थी बट बिकॉज़ ही डिड नॉट वेंट टू ह गुरु अगेन वो अपने आप ही डील करते रहे कई बार होता है ना हमने मेडिटेशन सीख लिया हम स्ट्रगल कर रहे हैं बट हम अपने आप से डील करते हैं कि हमें आता तो है ही है बट यू शुड गो बैक एंड डिस्कस कि आई एम
(18:03) स्ट्रगलिंग विथ दिस प्रॉब्लम ऑब्सकलक ऑफ़ माय स्पिरिचुअल लाइफ हम वो स्ट्रगल करते रहे। उनकी डेथ हुई तो उस समय वह हिरण कहीं और था और वो बुलाते रहे कि हिरण तुम कहां हो? मैं जा रहा हूं। मैं जा रहा हूं। एक बार अपना दर्शन तो दे दो। तो गीता में लिखा है यमं वापपी स्मरण भावम तजंत कलेवरम ताम ताम एवति कंतए सदा तद भाव भाविता। भगवत गीता ए चैप्टर सिक्स नंबर वर्स आठव अध्याय के छह नंबर में लिखा है यम वापपी स्मरण भावम। जब शरीर छूट रहा होगा और तुम जो स्मरण कर लोगे दैट बिकम्स योर तमतम ए ही कंतए कुंती पुत्र तुम्हें वही शरीर मिलने वाला है।
(18:37) यो तो आपका लास्ट थॉट डिटर्मिन योर नेक्स्ट लाइफ। जैसे फोटोग्राफ होती है पिक्चर खींचते हैं। श्लोका जी रेडी हुई अपना सब कुछ किया और जब क्लिक फोटो का टाइम आया तो आपकी नाक पर मक्खी आकर बैठ गई तो और आपने ऐसे कर दिया। सो जब पिक्चर आएगा आप कहेंगे अरे मैडम टेढ़ा हो गया। नाक पे मक्खी आ गई थी। सो आपकी प्रिपरेशन ने हेल्प नहीं किया। आपके लास्ट एक्शन ने हेल्प किया। तो पूरी लाइफ की स्पिरिचुअल प्रैक्टिस इस डिपेंड ऑन द लास्ट में आप करेंगे क्या? कहते हैं जन्मजनम ऋषि तप कर अंत राम कहे आवत नहीं पूरा जीवन तपस्या करी अंत में राम नहीं
(19:04) निकला तो क्या फायदा हुआ द होल प्रिपरेशन इस फॉर द फाइनल एग्जामिनेशन व्हिच इज डेथ मृत्यु ही हमारा निर्णय करेगा असली योनि का क्या है इसीलिए आत्माएं प्रेत बन रही हैं वापस संसार में आ रही है पुनर्जन्म हो रहा है आपको लग रहा है बहुत ज्यादा पुनर्जन्म हो रहा है और इसका मेन कारण तो मैं नॉनवेज बताता हूं। अच्छा प्रभु जी लोग तंत्र के जो मार्ग में होते हैं वह तो नॉनवेज खाते हैं वह तो उनकी साधना का ही पार्ट है। साधना जो है वो तीन गुणों में होती है। तमोगुण, रजोगुण एंड सतोगुण। तमोगुणी साधना जो है वो आपको साधक बनाएगी लेकिन मन को
(19:32) शांत नहीं करेगी। भक्ति मुक्ति सिद्धि कामी सकल अशांतः कृष्ण भक्त निष्काम अते शांत। शांत होने के लिए निष्काम होना पड़ेगा। मुझे कुछ चाहिए नहीं। ना ही मैं फेमस बनना चाहता हूं। ना मैं सिद्ध बनना चाहता हूं कि दुनिया मेरा पूजन करे। ना मैं भोगना चाहता हूं ना बड़े आश्रम चाहता हूं। मैं तो निष्काम हूं। जो ठाकुर जी दे दे उसके सहारे जाए विधि राखे राम ताहे विधि रही तो इति शांत मन तो हम उनकी क्रिया को हम विरोध नहीं कर रहे। कोई भी सब अपने-अपने लेवल पर लगे हुए हैं। पर वो तमोगुणी साधना है। पर बाकी साधनाओं में भी तो आपको लिबरेशन
(20:06) अचीव हो सकती है ना। तो क्या आप कह रहे हैं कि इन साधनों में रिब्थ का चांस ज्यादा है। रिब्थ का चांस ज्यादा है। क्योंकि जैसे जैसे बताया ना कि नॉनवेज खाने से क्या होता है? अमेरिकन रिसर्च कहती है कि जब आप किसी को काटते हैं तो कॉर्टिसोल लेवल हाई होता है और उसके अंदर जो पेन होता है जैसे आपने किसी मुर्गी को काटा हलाल किया झटका जो भी किया जब आप उसे तो उसके अंदर एक फियरनेस होती है दैट फियरनेस कम्स टू दी पर्सन हु इज ईटिंग दी फ्लश इट्स फियर सो सब फियर स्टेट के अंदर रहते हैं क्यों रहते हैं उनकी ईटिंग हैबिट्स आहार शुद्धो सत्व
(20:35) शुद्धि सत्व शुद्धि ध्रुव स्मृति स्मृति को ध्रुव करना है उसके लिए आहार शुद्ध होना चाहिए लोग बोलते हैं पपुलेशन बहुत बढ़ रही है अब प्रकृति का नियम कहता है द लॉ ऑफ नेचर। अगर आज मैंने एक को मारा तो उसको मारने से पहले आप पूछिएगा किसी नॉनवेजर से भी जो काटता हो उसको एक शब्द बोलना होता है मांसाह तो मांस कहते हैं ना मांस खा रहे मांस खा रहे मांस नहीं होता उसका शब्द है मांसाह मांसा शब्द संस्कृत से आया है इसका अर्थ है मांसा जैसे मैंने तुम्हारे साथ किया तुम मेरे साथ करना तो अगर मैं बकरे को आज काट रहा हूं तो मैं बकरे को बोल रहा हूं उसके कान में बोलना
(21:11) होता है बिफोर बलि देने से पहले मामसा आज मैं तुम्हें काट रहा हूं कल तुम मुझे काटना अच्छा लोगों को संस्कृत का मीनिंग नहीं पता तो इसलिए रिचुअल समझ के मांसा तिलक लगाया काट दिया। एक व्यक्ति ने अपने जीवन में अगर 100 मुर्गे खाए तो 100 मुर्गे परशुद्ध से इंसान बने क्योंकि जो जैसा कर रहा है वो इंसान को देख के शरीर छोड़ रहा है। तो अंतकाल का नियम उस पर भी लग गया और वो क्या बन गया? मनुष्य बन गया। जो बुचर है वो उसकी बात हां जो बुचर है और जो खाते हैं जो बुचिरिंग नहीं कर रहे हैं। लेकिन उनके अंदर भी फियर तो आ ही रहा है ना। चेतना तो उनकी खराब हो रही है ना। जब हमने
(21:42) बोल दिया कि सारी सोल भगवान ने कहा ममेव अंश मेरे ही अंश है। जब भगवान ने कह दिया चाहे वो कोई भी हो चींटी से लेकर के सर्व योनि कंतुए अहम बीज पदा पिता कृष्ण गीता में कहा जितनी भी योनियां है सर्व योनि सर्व योनि कंतुए अहम बीज पदा प्रिता मैं सबका पिता हूं। आई एम द फादर सीड गिविंग फादर। तो जब पिता बता रहा है कि मेरे पुत्र हैं तो एक पुत्र दूसरे पुत्र को खा रहा है कि वो बोल नहीं सकता। गूंगा है तो पाप तो लग ही रहा है। एक व्यक्ति ने अगर 100 मुर्गे खाए तो 100 मनुष्य बन गए और मनुष्य एक मुर्गा बना। लॉ ऑफ़ नेचर जैसा तुम कर रहे हो वैसे।
(22:18) तो जब पपुलेशन बढ़ कैसे रही है? नॉन इंटरेस्ट से बन रही है ना। जब मृत्यु होती है तो कहते हैं सोल के नौ एग्जिट पॉइंट्स होते हैं बॉडी। जी जी। ये नौ एग्जिट पॉइंट्स क्या होते हैं? और इन एग्जिट पॉइंट्स से निकलने का सिग्निफिकेंस और आउटकम क्या होता है? तो हमारे शरीर में नौ द्वार हैं। नौ द्वारों का पिंजरा रहता पंछी कौन? नौ द्वारों का पिंजरा रहता पंछी कौन? रहे तो अचरज है। उड़े तो अचरज कौन? एक कवि ने कहा है पिंजरा बनाया आपने। उसमें नाइन गेट लगा दिए और सब खुले हुए हैं। तो अगर उसमें पंछी रह रहा है। ये अचरज की बात है या उड़ गया तो अचरज
(22:58) की बात है। तो आश्चर्य क्या है? रहता रह रहा है रह रहा है वो रह रहा है तो आश्चर्य उड़ गया तो आश्चर्य क्या उड़ जाना क्योंकि नौ द्वार खुले तो हमारी मृत्यु आश्चर्य नहीं है हमारा जीवन आश्चर्य है आज भी जिंदा हो नौ द्वार हैं और उसमें से आत्मा निकल नहीं रही है ये आश्चर्य की बात है दो आंखें हम दो नाक के नतुने चार एक मुंह पांच दो कान सात एक मूत्र विसर्जन एक मल विसर्जन सात दो नीचे सात हाथ ऊपर कितने द्वार हो गए? नौ। दीज़ आर द नाइन गेट्स। ब्रह्म रंद्र इज़ अ 10थ व्हिच इज़ अ क्लोज गेट। इट इज़ इट्स ओनली फॉर द योगीज़ एंड ब्रह ब्रह्म योगीज़।
(23:37) जो अपने ब्रह्म रंद्र को कर सकते हैं, ध्यानंतरण कर सकते हैं। परंतु फॉर अ जनरल क्राउड दोज़ आर नॉट योगीज़ बिकॉज़ वी आर नॉट टॉकिंग ओनली फॉर योगीज़ आर टॉकिंग फॉर जनरल पीपल। सो अगर आदमी की डेथ टाइम पर बहुत जोर का यूरिन हो गया। पूरा बेड गीला हो गया। समझ लीजिए कि मूल धारा से निकला। मूलधारा से। सबसे लोएस्ट फॉर्म। लोएस्ट फॉर्म। निचला। निचला व्यक्ति है वो तो फिर जा ही रहा है नर्क में जा रहा है वो अच्छा 100% 100% नीचे वाले पार्ट्स और नर्क दोनों मूलधारा जो है और मल स्थान वो दोनों मुख खुला रह गया हां बंद करोगे फिर भी बंद नहीं होगा कपड़ा
(24:13) बांध के बंद करना पड़ेगा बंद नहीं होता मुख से निकली आत्मा कान से मैल निकलेगा नाक से निकली नाक से मैल निकलेगा आंख से आत्मा निकली तो आंखें बाहर को ऐसे बड़ी-बड़ी आंखों ऐसे हो जाती है फिर बंद करना पड़े दबा के फिर भी बंद नहीं होती हैं इसको ऐसे क्लिप करना पड़ता है। बंद नहीं होती आंखें। लोअर नहीं होती। आंखें फट जाती हैं। और भ्रमरंद में तो फिर ये स्थान से क्रैक होता है। तो अगर ऊपर के स्थानों में मुख और नेत्र इसका मतलब है कि आत्मा स्पिरिचुअल थी। ओके। नाक और कान यानी स्वर्ग लोक की प्राप्ति। नीचे के द्वार नर्क लोक की प्राप्ति। तो
(24:52) यह द्वारों से ही पता चल जाता है कि आत्मा का कहां पर गति हुई है। क्योंकि जो भजन करता है उसके मल मूत्र से नहीं जाएगी। आत्मा मुख से निकलेगी। उसे भगवान का नाम मिल रहा है और आंखों से उसने भगवान का दर्शन किया है। तो आंखों से निकलेगी। वो प्रभु को देख के छोड़ना चाह रहा है। ये भगवत धाम जाने वाली और जो स्वर्ग जा रही है उसके कान और नाक मैल निकला यहां पर पहुंच दिया क्लीन कर दिया। फिर मेकअप करके आत्मा को तैयार करके मतलब शरीर को ले गए क्रिमिनेशन के लिए। बट एंड टाइम पर पूछिए या परिवार में कोई छूट रही हो तो देख लीजिए या आप तो आप कहते आप
(25:25) क्रिमिनेशन ग्राउंड जाती है पूछा करिए कि भैया कैसे हुई थी तो मैंने भी बहुत जाकर के रिसर्च करके एनालिसिस किया है। कैसे पता करें कौन स्वर्ग गया कौन नर्ग उसकी क्रिया से पता चलता है। अच्छा और भी चीजें होती हैं। जो व्यक्ति शरीर छोड़ा उसकी लोग बुराई कर रहे हैं। जैसे जो आता है ना क्राउड आता है। आपको आप चुप रहकर बस मौन रह के सुनिए कान से कि क्या बातें चल रही है। बोलेंगे अरे हमारा पैसा ले गया बोला था कल दे दूंगा देखो उस नसीब में क्या लिखा था अरे कल ही दे देता तो मेरा क्लीन हो जाता अब बेटे बच्चे देंगे नहीं यानी आदमी नर्क गया है इसने इतने लोन
(25:59) ले रखे हैं लोगों को डिस्टर्ब करके गया है एक आदमी की सुनिए कह रहे हैं जी अच्छे आदमी थे जहां देखो वहां भंडारा जहां देखो वहां मंदिरों में दान पुण्य इतना किया ओो बड़े कृपालु आदमी बड़े दयालु आदमी स्वर्ग गया स्पिरिचुअलिस्ट लोग खड़े हुए हैं आए कह रहे हैं अरे हमको कीर्तन दिया। मैं इतना डिस्टर्ब था। मेरे घर आया। कभी किसी चीज की डिजायर नहीं करी। हमेशा इतने सिंपल हार्ट रहे। हमेशा लोगों को बोले तुम क्रिया करो, तुम भजन करो, तुम यह करो, तुम साधना करो, तुम ग्रंथ पढ़ो। हम लोगों को गीता सिखाई। हम तो उनको अपना गुरु मानते थे। ऐसे बहुत लोग बातें कर रहे हैं।
(26:30) वैकुंठ गया याद और यहां से गए तो इसका क्या मीनिंग होता है? ब्रह्मरंद्र तो यह है फिर योगी है। जो कहते हैं ना जिसने आत्म शरीर से ही योग सिद्धि प्राप्त करी। हमारे स्कॉन के शीला प्रभुपाद जी ने ग्रंथ लिखा इजी जर्नी टू अदर प्लनेट्स। दूसरे ग्रह पर जा सकता है। योगी अपने ब्रह्म रद्द को छिद्र को ऐसे क्रैक करता है। यहां से आत्मा देन ही कैन गो टू डिजायर्ड प्लनेट। अब हमने लास्ट मोमेंट ऑफ डेथ समझ लिया। डेथ इंसान की हो गई। कई प्रकार की डेथ्स होती हैं। हर टाइप्स ऑफ डेथ के बारे में मुझे बताइए। और उनका आफ्टर लाइफ में क्या इंपैक्ट पड़ता है।
(27:06) जैसे कि बहुत के बच्चों की डेथ हो जाती है। कभी बहुत छोटे राइट? कभी स्टिल बोर्न होता है। वहीं से स्टार्ट करते हैं। स्टिल बर्थ हो गया। बहुत छोटे बच्चों की डेथ हो जाती है। सुसाइड हो जाते हैं। मैंने काफी देखा है प्रभु जी कि 28 और 32 के बीच में हम जो एस्ट्रोलॉजिकल में सैटर्न रिटर्न बोलते हैं उस टाइम में मैंने देखा है बहुत लोगों की डेथ होती है। फिर एक तो होता है कि एक्सीडेंट हो गया। अननेचुर डेथ हो गई। फिर एक होता है हमने 84 इयर्स क्रॉस कर लिया जो योगिक शास्त्र में बोला जाता है 84 इयर्स के बाद आपका कार्मिक स्ट्रक्चर
(27:32) थोड़ा डिस्मेंटल होना चालू हो जाता है। बिकॉज़ आपने 10008 मून्स देख लिए होते हैं आपकी बॉडी ने। फिर होता है कि मैं 100 साल 90 नेचुरली जा रहा हूं जो भी अब जैसे मुझे याद है मेरे दादाजी 2020 में गए थे एट दी एज ऑफ़ 100 और 10001 वो वो ना जाने से पहले बोलते थे वो रास्ता नहीं मिल रहा जाने का रास्ता नहीं मिल रहा जाने का योगी नहीं थे वो मिलिट्री पर्सन थे ऐसे बोलते रहते थे वो तो इन अलग-अलग डेथ्स में क्या-क्या आउटकम्स होते हैं मुझे बताइए तो इसमें क्या है कि हमको यह समझना चाहिए जिसकी जितनी ज्यादा लंबी डेथ हुई है तो लोगों की दृष्टि से उसने उतना अच्छा
(28:11) जीवन जिया है। पर कार्मिक दृष्टि से देखा जाए तो उसके सबसे लंबा कार्मिक साइकिल पेंडिंग था। उसको 100 साल तक जीना पड़ा क्योंकि उसके 100 साल का कार्मिक रिएक्शन पेंडिंग था। कोई बच्चा गुजर गया वम के अंदर ही उसको 3 महीने का दंड मिला था संसार में जाने का। तीन महीने बाद उसकी मुक्ति हो गई। लिब्रेटेड सोल। 10 साल का बच्चा था। आया 10 साल में लिब्रेट हो गया। हाउ नेचुरली भी अननेचुरली भी चले जाता है। अननेचुरली भी चला जाता है। एक्सीडेंटली चला जाता है। उसको उतना ही काल था। उसका एग्जांपल मैं दे रहा हूं। महाभारत अभिमन्यु डाइड एट 16 इयर्स ऑफ एज। जबकि
(28:44) द्वापर युग में व्यक्ति की आयु 1000 ईयर होती थी। हम भीष्म पितामह वाज़ 350 इयर्स। अर्जुन वाज़ 150 इयर्स, कृष्णा वाज़ 100 इयर्स, युधिष्ठिर वगैरह 100 इयर्स एंड अबव थे। तो इस तरह से सबकी आयु बड़ी-बड़ी थी। द यंगेस्ट वाज़ अभिमन्यु 16 इयर्स। और वो उतना शक्तिशाली था। उसने मां के गर्भ में ही चक्रव्यूह का ज्ञान पूर्ण ले लिया था। तो जब मां के गर्भ में बच्चा आता है जीवात्मा उसके सबसे पहले जो बनते हैं वो इयर्स बनते हैं। इसलिए वैदिक काल में हम लोग बताते हैं कि जो गर्भवती स्त्री है उसको अधिक से अधिक शास्त्र सुनने चाहिए। पढ़ने नहीं
(29:18) चाहिए क्योंकि आई से नहीं आपके बच्चे को ज्ञान मिल रहा है। कान से मिलेगा क्योंकि वो सुनने की उसकी क्रिया चालू हो गई है। तो अभिमन्यु को अर्जुन ने पूरा चक्रव्यूह का ज्ञान सुनाया एंटरिंग का। एग्जिट का बता रहे थे तो सो गई। सो गई तो उसके कान जब इधर बंद हो गए तो उधर भी बंद हो गए तो निकलना नहीं जाना तो बाय दी कार्मिक रिएक्शन उसको डाल दिया गया चक्रव्यूह में जाओ जाओ जाओ जब डाल दिया चक्रीय में बाहर नहीं निकला तो अनेक आदितिथियों और महारथियों ने मिलकर उसका वध कर दिया अब अर्जुन का पुत्र जहां कृष्ण ही सारथी बने हैं उनके सामने ही
(29:48) बच्चा मर रहा है तो अर्जुन पलट कर पूछ सकते है कि गीता हमको सुनाई और कष्ट भी हमको ही दे दिया ऐसे आपके संग होने का क्या फायदा बिकॉज़ अर्जुन वाज अ निष्काम भक्ता उन्होंने कोई क्वेश्चन नहीं किया गॉड के ऊपर भगवान पे उल्टा उन्होंने एक्सेप्ट किया उस डेथ को तो भगवान ने उनको इस बात को रिवील किया कि अर्जुन डोंट वरी तुम्हारा कोई पुत्र जल्दी नहीं मरा है। यह पुत्र तुम्हारा था ही नहीं। कौन था? जब मैं अपनी लीलाओं को करने के लिए द्वापर युग में आ रहा था तो सभी देवताओं से मैंने एक लेटर डाला कि सब अपनेप पार्टिसिपेट करने के लिए मेरे इस क्रिया में आ जाओ। तो
(30:21) अलग-अलग लोगों से सारे लोग मेरे इस लीला के अंदर सहयोग करने के लिए आए। तो चंद्रमा जो था मून उसके पुत्र की वो मैंने बोला कि तुम भी आओ तो चंद्रमा बोला कि मुझे अपने पुत्र से बड़ा प्रेम है प्रभु इसको लीला में मत लाइए क्योंकि लीला में गया तो द्वापर युग की लीला हजारों वर्षों की होती है तो मेरे को बहुत इतना दिन में रह नहीं पाऊंगा पुत्र के बिना तो भगवान बोले इसको भेज दो क्योंकि सबको थोड़ा-थोड़ा मेरी लीला में पाठ करना बिकॉज़ आई एम गॉड एंड एवरीबडी शुड पार्टिसिपेट बट मैं कुछ ऐसी लीला करूंगा ही विल कम बैकली हम तो जब अभिमन्यु को मारा तो मून तो खुश हो
(30:52) रहा है कि चंद्रदेव को तो उनके पुत्र मिल रहे और यहां पर लग रहा है अर्जुन दुखी हो रहा है क्योंकि ये तो ड्रीम वर्ल्ड है ना यहां पर तो हम कुछ दिनों की लीला करने के लिए आए हैं लेकिन हमारा एटरर्नल तो ऊपर है ना तो ये जो कांसेप्ट नहीं समझते उनको रियल अभी लगता है इंपैक्टफुल अरे तीन महीने का बच्चा मर गया 10 साल का मर गया अरे क्या पता वो जिसने प्रार्थना करी प्रभु से कि मेरे पास ये देवता आ जाए वापस तो वो देवता प्रसन्न हो रहा है ना उसका पुत्र जल्दी आ गया किसी दंड से 10 साल के लिए आया और वो इंसान का कर्म भी कम होता है बिल्कुल ऑब्वियसली वो कोई 80 साल जीरो
(31:19) उससे लंबा कर्म एक और सुंदर सी बात बताता हूं मैं आपको हम हम जैसे हम लोग आशीर्वाद देते हैं ना दीर्घ आयु भवा आयुष्मान आयुष्मान भवा तो एक व्यक्ति को बहुत आशीर्वाद मिलते थे तो उसने अपने गुरु जी से बोला गुरु जी आप मुझे हमेशा दीर्घ आयु भवा कहते हैं आयुष्मान भवा कहते हैं गुरु जी मैं चाहता हूं मैं लंबी आयु जीूं पर चिंता मत करो तुम इस शरीर में अमर रहोगे 300 350 400 जितने साल तक तुम्हें इच्छा मृत्यु है जब चाहोगे तभी मरोगे जैसे भीष्म पितामह को भी था इच्छा मृत्यु का वरदान तो 56 डेज तक तीरों की सैया में पड़े रहे खून खत्म हो चुका है लेकिन वो मर नहीं रहे
(31:55) हैं। बिकॉज़ उनको पावर है इच्छा मृत्यु तो उसको भी मिल गई। अब मिल गई तो वो ऊपर के पहाड़ों और ऋषिकेश से भी ऊपर चला गया। स्वर्ग रोहिणी से भी ऊपर सतोपंत से भी ऊपर चला गया। तो वहां एक कुंड था उस कुंड का जल पी लो तो अमर हो जाओगे। तो उन्होंने गुरुजी ने बोला तुम्हारी योगिक क्रियाएं सारी पूर्ण हो चुकी है। बस तुमको सतोपथंत जाके उस गुफा में इतना जल पीना है तो तुम अमर हो जाओगे। फिर तुम मरोगे नहीं। कहा ठीक है गुरुजी मेरी सारी क्रिया पूर्ण हो रहा। तो ही वास वेरी यंग 50 60 इयर्स का ही था। चढ़ता रहा पहाड़ों पर चढ़ा चढ़ा चढ़ा चढ़ा चढ़ा चढ़ा पहुंच गया। सतोप
(32:29) पहुंचा तो 50 60 साल का इतना यंग भी नहीं था। मिडिल एजेड था। मेहनत करके पहुंचा और जल पीने लगा तो एक आवाज आई रुक जाओ मत पीना। तो देखा कौन बोला? तो देखा कि एक आदमी की आई बॉल्स लटक रही है। ऐसे शरीर के ऊपर से चमड़ी स्किन हट चुकी है। सिर्फ रिब केज है। बैक बोन है। थोड़ा-थोड़ा फ्लैश कहीं-कहीं चिपका हुआ है और लगभग खत्म हो चुका है। मत पीना। तूने क्यों? बोले कौन सा काल चल रहा है? रामचंद्र जी हैं। रामचंद्र जी त्रेता युग में आए थे। रामचंद्र जी चले गए। फिर कृष्ण भगवान का द्वापर युग चला गया। अब तो कलयुग चल रहा है। अच्छा कितने
(33:05) लाख साल बीत गए? लगभग त्रेता युग से 20 लाख वर्ष बीत गए। अच्छा तो बोले फिर आप कौन है? बोले मैं रामचंद्र जी के युग में मैंने इस कुंड का जल पी लिया था। तो जल पीने से क्या हुआ? मेरी आत्मा इस शरीर से अटैच हो गई। लेकिन शरीर तो अपनी डेफिशिएंसी में जा रहा है ना। हड्डियां भी गल रही है, कैल्शियम भी रिड्यूस हो रहा है, खाल भी गल रही है, आई बॉल भी निकल गए हैं। लेकिन मर नहीं रहा हूं। तो कितना लंबा कार्मिक रिएक्शन मिल गया उसको। कभी-कभी दीर्घ आयु दुखदाई भी होती है। हम हम इसलिए दीर्घ आयु नहीं उत्तम आशीर्वाद नहीं है। आप दीर्घ आयु तो बोल दिए।
(33:37) लेकिन कोई 100 साल पर बैड रिटर्न पड़ा हुआ है। यूरिन पास हो रहा है। घर वाले कह रहे हैं मर जाए। और वो आदमी दुखी हो रहा है। कि मैं मरता क्यों नहीं? जैसे आपने कहा मुझे वे क्यों नहीं मिल रहा? रास्ता क्यों नहीं मिल रहा है? ऐसे व्यक्ति बोल रहे होते हैं बुजुर्ग लोग लगता है यमराज हमारा भूल ही गया एड्रेस सो इट्स लाइक दैट तो उस स्थिति में आशीर्वाद देना चाहिए तुम्हारी मति जो है वो भगवान में लगे तो हम लोग बोलते हैं कृष्ण मति रस तुम्हारी मति भगवान में लग जाए तो अभी हम डेथ वाले अगर पार्ट को समझे तो शरीर से जब मृत्यु हुई हमने सिम्टम्स
(34:09) सुन लिए या अब व्यक्ति की जब मृत्यु हुई तो उसके तीन यमदूतों ने निकालकर उसको शरीर से बाहर खड़ा कर दिया अब घर वालों को को लगा कि डेथ हो गई है। हॉस्पिटल में हो, एक्सीडेंट में हो, सुसाइड से हो या जैसे भी हो, शरीर छूट गया, आत्मा बाहर आ गई। यमदूत पक्का आएंगे। यमदूत पक्का आएंगे। जब व्यक्ति नेगेटिव सोल होगा। अच्छा। और देवदूत आएंगे जब पॉजिटिव सोल होगा। और अगर डिवोटी होगा तो विष्णु दूत आएंगे। तो तीन प्रकार के दूत बताए गए मैसेंजर्स। यम, देव, विष्णु। ऐसे तीन लोक भी हैं। देवदूत जो है ले जाएंगे स्वर्ग लोक, विष्णु दूत ले जाएंगे वैकुंठ लोक और यमदूत ले जाएंगे
(34:44) नर्क लोक। डिस्टेंस वही है पर जाने का मेथड अलग-अलग हो जाएगा बिकॉज़ ऑफ योर कर्माज़। तो अब जैसे शरीर से आत्मा बाहर निकली तो व्यक्ति के सर परिवार वालों ने फोन करने शुरू कर दिए कि भाई मृत्यु हो गई मृत्यु हो गई तो सारा परिवार इकट्ठा होना शुरू हो गया। अब उस जीवात्मा को बड़ा कष्ट हो रहा है कि उसका शरीर जो है वो पड़ा हुआ है और वो उसमें दोबारा री एंटर नहीं कर पा रहा। वो चाह रहा है लेकिन अब वो उसके पास इतनी शक्ति नहीं कि वो दोबारा उसमें रिवाइव कर सके। तो उसके आसपास घूमता रहता है अपनी बॉडी के। अपना हाथ देख रहा है। अपना पैर देख रहा है। अपना मुंह देख रहा
(35:14) है। बार-बार कह रहा है। अपनी बॉडी को छू रहा है। लेकिन हमें नहीं दिख रहा। हम लोग तो रो रहे हैं कि ये तो यहां पड़ा हुआ है। हर इंसान ऐसे कर रहा है। हर इंसान जो इंसान अटैच्ड है वही कर रहा है। कौन सा अटैच नहीं है? जो जैसे साधना कर रही हो। साधना तो छोड़ देना। डिवोशनल पार्ट हटा दीजिए। पायस करने वाला और इमायस करने वाला हर आदमी अपनी बॉडी से अटैच्ड है। पुण्य कर्म करते भी क्यों है? धर्म करते हैं ताकि अर्थ मिले। अर्थ मिलता है तो उससे क्या करते हैं? अपने काम इच्छा पूरी धर्म अर्थ, काम, मोक्ष धर्म करते ही इसीलिए हैं कि अर्थ मिले।
(35:39) करेक्ट। मां मुरादे पूरी कर दे। हलवा बांटेंगे नहीं करी तो नहीं बांटेंगे। तो ये जो पूजा कर रहे हैं इसका पर्पस ही है टू गेट समथिंग। तो जो गेट समथिंग है तो मैं अपनी बॉडी में सकुशल स्वस्थ रहूं इसीलिए तो कर रहे हैं। तो स्वस्थ है यानी उसको शरीर से अटैचमेंट है। शरीर से नहीं होगा तो अपने परिवार से होगा। मेरे बच्चे मेरे डिसाइपल्स किसी ना किसी से तो अटैचमेंट है। अब वो उनको देखता रहता है। देखता रहता है। तो परिवार के लोग उस बॉडी को ले जाते हैं। राम नाम सत्य है। राम नाम सत्य करके ले गए। क्रिमिनेशन अब वह अपनी ही बॉडी की छाती पर बैठेगा और बोलेगा कि तुम मत जलाओ
(36:11) इसको मैंने इतने साल इसको प्रिपेयर किया पता नहीं कितने क्रीम पाउडर लोल वोरल सब लगाए और अभी तुम इसको जला दोगे ऐसे मत करो बेटा मैंने तुमको शिक्षा लेकिन कोई सुन नहीं सकता क्योंकि वो सोल के साथ कनेक्शन नहीं है उनका कोई वो तो शब्द सुनते थे शुभ मुंह से निकलने वाले आत्मा की आवाज नहीं सुन सकते तो दैट इज अ ट्रांसपेरेंट बॉडी होती है अब वह उसको ले गए आत्मा शरीर को जला दिया अस्थि विसर्जन कर दिया तो पिंडदान किए जाते हैं वहां पर जब किसी की मृत्यु हो। तो पांच पिंडदान उसी समय करने चाहिए जब उसकी मृत्यु हो जाए। पिंडदान क्या होता है? कुछ आटा लेते हैं और कुछ
(36:47) सीसम सीड्स लेते हैं। तिल लेते हैं। तिल और आटे को मिक्स करते हैं और उस व्यक्ति के नाम लेकर के दान करते हैं कि हमारी ओर से हाथ के लिए पैर के लिए दिया जाता है। अगर यह दान नहीं किए जाए तो 13 दिन बाद जब वो आत्मा को जाना होगा टू यम लोका तो उसके पास कोई बॉडी नहीं होगी। उस शरीर का नाम होता है अतिवाहक शरीर। अति यानी वेरी हाई स्पीड में चलने वाली बॉडी होती है और वह ट्रांसपेरेंट होती है लाइक अ मिरर बॉक्स निकाल के ग्लास विंडो में डाल दिया जाए तो जैसे आपने कपड़ा पहना आप लिविंग बॉडी हो और वही डमी को पहना दो उसका भी एक शरीर है
(37:22) लेडी का वो डमी है तो जैसे आपके ऊपर यह शरीर है ऐसे ही एक ट्रांसपेरेंट बॉडी होती है दिखने में ग्लास जैसा शरीर होता है पर यहां से निकल जाए तो आपको दिखेगा नहीं अब वो अति वाह शरीर बैठा है पेड़ के ऊपर घर के ऊपर सब जगह सेटल हो गया अब वो वो समझ गया कि परिवार वाले अब मुझे नहीं स्वीकार। 13 दिन तक गरुण पुराण पढ़ी जाती है ताकि उसके कर्मों को सुनकर के वो सोल सुनकर के समझे उसने क्या किया और अब उसकी मृत्यु हो चुकी है। उसको स्वीकार कर ले। गीता के पाठ किए जाते हैं ताकि वो समझे कि सच में मृत्यु होती है। तू मर चुका है। अब तुझे
(37:52) शरीर नहीं मिलेगा वापस। तो डिटचमेंट परिवार का हो ना हो। उस आत्मा के लिए डिटचमेंट के लिए गरुण पुराण का पाठ बताया गया। आई एम गोइंग टू बी पर्सनली कंडक्टिंग अ क्लासिकल हठ योगा रिट्रीट इन लद्दाख फ्रॉम द 23 ऑफ़ अगस्त अंटिल द 31 ऑफ़ अगस्त। इफ यू वुड लाइक टू बी अ पार्ट ऑफ दिस मिस्टिकल एक्सपीरियंस व्हेयर यू विल बी लर्निंग क्लासिकल टूल्स ऑफ़ योगा व्हिच आर ऑलमोस्ट 5000 इयर्स ओल्ड फॉर योर होलिस्टिक वेल बीइंग देन यू कैन कांटेक्ट द डिटेल्स फ्लैशिंग ऑन योर स्क्रीन प्लीज शेयर दिस वीडियो अमंग अदर्स आई लुक फॉरवर्ड टू सी यू ऑल ऑफ यू विद नाउ |
(38:20) लोग सोचते है हमारे लिए लोग तो सुन ही नहीं रहे होते कोई कोई खाना बना रहा है कोई रिसेप्शन कर रहा है कोई किसी फैमिली मेंबर से मिल रहा है पंडित जी अपना गरुण प्राण रिचुअल कर रहे हैं पर हो किसके लिए रहा है वो आत्मा बैठकर सुन रही होती है सुनाओ अच्छा ये कर्म का ये मिलेगा मुझे इस कर्म का यह मिलेगा पहले क्यों क्यों नहीं बताया? पहले तुमने सुना पहले पढ़ा कभी ग्रंथ तो इतने सालों से खोला कभी फिर बैठकर वो रोता रहता है। 13वा दिन जैसे ही आया यमदूत फिर आएंगे कहेंगे 13 दिन हो गए। क्लीन सब कुछ प्रीति भोज हो रहा है। सब लोगों का भोजन हो रहा है। सबने भोजन खा
(38:51) लिया। घर की शुद्धि हो गई। क्लीनिंग हो गई। आत्मा की यात्रा प्रारंभ हो गई। अब आत्मा जब चलना शुरू करती है और तीन यमदूत उसको लेकर के ट्रैवल करेंगे। तो इस पूरी यात्रा में 16 स्टेशंस गरुण पुराण में बताए गए हैं। 16 स्टेशन आएंगे। तो लगभग ये जो डिस्टेंस बताया गया 86000 योजन 12 कि.मी.
(39:16) के यूनिट को वन योजन तो ऐसे 86000 * 12 कर लीजिए। इतना डिस्टेंस ट्रेवल करना है एक साल के अंदर आत्मा को उस ग्लास बॉडी के अंदर ट्रांसपेरेंट बॉडी के अंदर। तभी एक गाना आता था ना हाथी हैं ना घोड़े हैं वहां पैदल ही जाना है। अब जैसे ही डेड बॉडी हुई क्रिमिनेशन हुआ आकर के मुंडन किया। बच्चों ने लड़कों ने मुंडन किया जिन्होंने आग लगाई मुंडन हुआ तो जो ये बाल है ना इस बाल को छाता बना के उस सोल के ऊपर लगा दिया गया। आत्मा के उस ग्लास बॉडी के ऊपर वो लगा दिया। चाहता बोले तुम्हारे पुत्र ने तुम्हारे लिए पुत्र ने या तुम्हारी बेटी के पुत्र ने या परिवार जनों ने यह बाल दिए तुम्हारे लिए तो उसको एक
(39:53) जगह पेस्ट करके यम के दूत लगा देंगे छाता आ गया 247 योजन 247 योजन उसको डेली चलना है और 348 डेज में यात्रा पूर्ण होगी यमलोक के गेट पर पहुंचेगी यमलोक के बाहर एक नदी बहती है उसका नाम है वैतरणी वैतरणी नदी के अंदर जल भरा हुआ है वो जल जीवात्मा को अगर पाया पायस कर्म करके गया होगा तो अभी मैं पायस अनपायस तीनों का सारा बताऊंगा। पहले वैतरणी बता रहा हूं। वैतरणी के उस पार यम का लोक है जिसका नाम है संयमपुरी लोक। जब हम गायत्री मंत्र बोलते हैं मैं पूरा बोलूंगा नहीं क्योंकि उसको बोलना नहीं चाहिए। उच्चारण करना नहीं चाहिए। मन में करना चाहिए। सिर्फ तीन शब्द
(40:32) बोल रहा हूं। ओम भू भव स्वाहा। तो भू का मतलब है भूलोक। भव का मतलब है ऊपर एक लोक है संयम बोरी लोक और स्वा का मतलब है स्वर्ग लोक। तो तीन लोगों की चर्चा इस मंत्र में हुई है क्योंकि ज्यादातर लोग स्वर्ग जाने की कामना करते हैं। स्वर्ग लोक वासी हो गए। भूवोक इज अ स्टेशन वेयर डिसीजन इस बी मेड। दैट इज जजमेंट डे स्टेशन प्लेस। जहां पर जजमेंट होगा कार्मिक रिएक्शन जो भी कर्म किए हैं तो उसको भूवोक कहते हैं। और हम जिधर रहते हैं उसको भूलोक कहते हैं। अर्थ प्लनेट तो भू से भूवोक की यात्रा हो जाएगी आपकी 348 डेज में। वैतरणी नदी पार करके आप यमलोक भूवोक
(41:09) पहुंचेंगे जिसको संयमपुरी लाभ भी उसका दिया गया है। एड्रेस संयमपुरी लोग वहां पर यमराज, चित्रगुप्त, यमदूत सब बैठे हुए हैं। अब दोबारा से शुरू करते हैं। यह मैंने आपको बता दिया जहां डेस्टिनेशन है जहां जजमेंट होगा। एक आदमी जिसने पूरा जीवन पाप किए। नॉनवेज खाया, अल्कोहल पिया, परस्त्री संग किया, झूठ बोला, भगवान का कभी स्मरण नहीं किया। चीटिंग प्रोपेंसिटी करी। चाहे वो बिजनेस के लिए जिसके लिए वो चीटिंग से जितनातना चाहा, गेम्स ये अपना समय मटेरियल वर्ल्ड में अधिक लगाया। आसक्त रहा संसार में। कभी भगवान के ईश्वर का स्मरण नहीं किया। कभी कोई योगिक क्रिया
(41:43) नहीं करी। कभी वैदिक ग्रंथ नहीं पढ़े। ऐसा जो कार्मिक गंदा आदमी है वो जो शरीर से निकलेगा तो यम के दूत हाथ में दंड और पाश हंटर रखते हैं। और कुछ यमदूतों के हाथ में मुद्गर होते हैं। वो बड़े वाले वो जो पहलवान लोग नहीं लेते ऐसे घुमाते हैं गधा टाइप का। वो मुद्गर कहलाता है। उनसे उसको दंड देते हैं, मारते हैं। वो चीखता है कि मार क्यों रहे हैं? कह जब शरीर था तुमने क्या कर्म किए? अब चलो। अच्छा परिवार को एजुकेशन नहीं दी तो परिवार ने उसके लिए ना तो मुंडन किया यह भी हो रहा है आजकल मुंडन होता ही नहीं आजकल तो पिताजी को छाया नहीं है छाया नहीं है
(42:18) चप्पल दान नहीं किया तो पिताजी को चप्पल नहीं है अब वो अति शरीर पिंडदान नहीं किया तो शरीर नहीं है अब शरीर नहीं है छाता नहीं है चप्पल नहीं है तो वो जीवात्मा जो इतनी सूक्ष्म थी उसको एक शरीर देता है यातना शरीर जैसे ह्यूमन बॉडी है ना 84 लाख योनि बोलते हैं उन 84 लाख में कुछ योनियों के नाम मैं बता रहा हूं आपको अतिवाहक देव योनि और एक है यातना शरीर जो कि नर्क में रहेगा ना तो यातना शरीर लोग बोलते हैं ना जब शरीर यहां छूट गया तो कष्ट किसको मिलेगा आत्मा तो छोटी होती है एक बॉडी मिलती है उसका नाम है यातना पनिशमेंट बॉडी यातना शरीर
(42:49) सबको मिलती है सबको मिलेगी जिसको भी ले जाना होगा आप जैसे जेल जाते हो तो वो धारी वाला कपड़ा नहीं पहनाते हैं सबको मिलता है चाहे वो डॉक्टर हो इंजीनियर हो नेता हो कर्म के अकॉर्डिंगली मिल रहा है ओके नॉट बाय योर प्रोफेशन तो जैसे आपने कर्म बुरे किए थे यमदूत ले गए परिवार वालों ने कोई पिंडदान नहीं किया कोई छाता नहीं कोई चप्पल नहीं यातना शरीर में खींचा जा रहा है 16 स्टेशन सौरीपुर नगेंद्रपुर क्रोंंचपुर क्रूरपुर शीतढायपुर अति तीव्रपुर ऐसे 16 स्टेशन है। इन स्टेशन पर हर 21 दिन बाद यात्रा जाकर रुकेगी। लगभग 20 से 25 दिन के अंदर यात्रा पहुंचती
(43:25) है। इसलिए बोलते हैं जब किसी की डेथ होती है अमावस का भोजन निकालो, अमावस्या का भोजन निकालो या तिथि पर ब्राह्मण भोजन कराओ, गौ को भोजन कराओ। जो भी व्यक्ति की आत्मा शरीर छोड़ दिया उसके परिवार में 11 महीने तक उसको हर महीने का भोजन निकालना होता है। एक प्लेट बनेगी भोजन निकलेगा गाय को खिलाओ या ब्राह्मण को आपके ऊपर है। वो भोजन उसको वहां मिलेगा स्टेशन पर। ये नहीं किया वो भोजन भी नहीं मिल रहा। भूखा चल रही है आत्मा। अच्छा यातना शरीर में एक बड़ी डिफिकल्टी क्या है? इस बॉडी में पेन होता है तो आदमी मर सकता है। शरीर छूट सकता है। यातना में छूटता नहीं है। दंड
(43:59) मिलेगा कष्ट होगा लेकिन मर नहीं सकता क्योंकि वो ह्यूमन बॉडी नहीं नहीं सकता। भाग नहीं सकता। कुछ नहीं कुछ नहीं कर सकता। अब वो मर ही नहीं सकता वो मर ही नहीं सकता। अब वो चल रहा है। दंड खा रहा है। दंड खा रहा है। दंड खा रहा है। 16 स्टेशन अति श्री ढाईपुर पे हैवी बर्फ पड़ रही है। ठंड लग रही है। कंबल दान नहीं किए हुए। कंबल नहीं मिल रहे। कुछ नहीं मिल रहा। ऐसे कष्ट लेता हुआ पिटता हुआ 16 स्टेशन पार करता हुआ 11 महीने बाद आत्मा पहुंची उस नदी वैतरणी नदी के वैतरणी का मतलब है व्यय मतलब ट्रुथ तरणी मतलब टू क्रॉस ओवर तो क्रॉस ओवर द ट्रुथ्स तो वहां
(44:30) एक गांव गांव खड़ी होती है गाय गाय से पूछा जाता है यह दंडनीय व्यक्ति है इसको पनिशमेंट मिलना है क्या करें इसने कभी गाय दान नहीं दिया गाय सेवा भी नहीं करी इवन गाय का फ्लैश खाया मीट खाया इसने ओो इसको पूछ पकड़वा दो तो पूछ पकड़ता गाय की तो वह जो नदी है वेतरनी वह कैसी दिखती है उसको पूरा उसमें पस पीप ब्लड पूरा गंदी नदी है उसमें से ऐसे पकड़ करके उस पार ले जाया जाएगा मुंह पर उसके पीप लग रहा है पस लग रहा है ब्लड लग रहा है पीता खाता उसको रिकक्रॉस करके और उस नदी का डिस्टेंस है 1200 किलोमीटर 1200 किमी बाद उस पार पहुंचा यमराज बैठे
(45:10) हैं लाइन लगी हुई है लोगों की यमदूत खड़े हुए सब खड़े हुए हैं चित्रगुप्त पढ़ो क्या तुम यह जीवात्मा थे? इस शरीर से आए हो? जी हां। तुमने अपने जीवन में कुछ अच्छे कर्म नहीं किए। मेरे पास शिक्षा ही नहीं थी। इग्नोरेंस इस नॉट डबलेस। शिक्षा नहीं थी लेनी चाहिए थी। तुमने एजुकेशन के लिए शिक्षा थी। इंजीनियरिंग के लिए, बिजनेस के लिए, खाने के लिए, होटल के लिए, ग्रंथ के लिए शिक्षा नहीं थी। यमराज बोलते अब क्या किया जाए? इसका चित्रगुप्त बोले महाराज इसको दंड मिलना चाहिए। तो यमराज उसको भयानक रूप में दिखाई देते हैं। बड़े सींग बड़े खतरनाक एकदम ऐसे मार देंगे। एकदम
(45:46) लालाल आंखें ब्लैक बॉडी पूरा शरीर में दंड ले रखे हैं। और एक हंटर मारते हैं उसको जीवात्मा रोती है। चिघारती है लेकिन कुछ नहीं। कहां भेजाें इसको? नर्क लोक में। तो नर्क लोक भूवोक से साउथ डायरेक्शन में है। इसलिए जब भी डेथ होती है तो क्रिमिनेशन ग्राउंड में सब लोग एक ही चेक करते रहते हैं। सिर कहां है? सिर का है। अच्छा इसलिए करते हैं। नर्थ नर्क इज इन साउथ डायरेक्शन। तो साउथ में सिर रखते हैं। लेकिन जो उसकी दृष्टि है वो साउथ में नहीं पड़नी चाहिए। जीवात्मा की आंखें जो है वो साउथ की तरफ नहीं होनी चाहिए। सिर साउथ को हो सकता है।
(46:19) तो साउथ की तरफ सिर करके रखना चाहिए। अब उन्होंने क्रिमिनेशन हो गया। सब हो गया। आत्मा वहां पहुंच गई। अब नर्क लोक में ट्रेनिंग दी जाएगी। ट्रेनिंग। ट्रेनिंग क्या है? क्योंकि जब संसार में भी तो दुख भोगने आएगा ना। तो जेल का नाम है सुधार ग्रह। प्यूरिफिकेटरी रिफेशन तो रिफ रिफॉर्म करना नॉट टू पनिश करके दंड देकर हड्डी पसली तोड़ के ऐसे थोड़ी ट्रेनिंग देनी है। अब उस जीवात्मा के कर्म ऐसे हैं कि उसको पशु योनि में जाना है। जो मैं बोल रहा था राजा भरत राजा को हिरण बनना था। हम हम तो ऐसा थोड़ी कि राजा मरा हुआ तुरंत हिरण बन गया। हम
(46:51) उसको हिरण बनने की ट्रेनिंग दी जाएगी। हमको अगर पिग बनना है नेक्स्ट लाइफ में तो एक आदमी जो एसी में बैठा है, बढ़िया फूड खा रहा है। एंड नेक्स्ट लाइफ आई वांट टू बी अ पिग तो कैसे बनेगा? उसकी ट्रेनिंग के बिना धूप में रहना वह वैसी आवाज निकालना वह कैसे ट्रेनिंग दी जाएगी? ट्रेनिंग कैसी है? 1000 प्रकार के नर्क गण पुराण में है। जिसमें से मुख्य रूप से हमारे सात नर्कों को मुख्य नर्क बताया है। उनके नीचे फिर छोटे ऐसे हजारों नर्क हैं। इवन जेल में भी आप जाएंगे ना। बैरेक नंबर 1 2 3 4 5 डिफरेंट-डिफरेंट जेल होती हैं। पॉकेट मारने वाले की 3 महीने की जेल छोटी जेल
(47:27) होती है। कुछ जेल होती है जिसमे सुबह जेल में रहते हैं। शाम को छोड़ दिया जाता है। मर्डर वालों को हथकड़ियां डाल के, बेड़ियां डाल के और एक पर्सनल रूम के अंदर फिक्स किया जाता है मर्डरर्स को। तो डिफरेंट-डिफरेंट जेल्स है। ऐसे डिफरेंट-डिफरेंट नर्क है। तो इस नरक के अंदर क्या होता है? महापाप योनियों में जैसे किसी ने ब्रह्म हत्या करी है। भ्रम हत्या नहीं किसी जीव की हत्या करी है। जैसे चींटी मच्छर तो नेक्स्ट लाइफ में उसको मॉस्किटो बनना है। नॉन वेजिटेरियन खाने वाले वो तो फिर जो जो खा रहा है वो तो हां बिल्कुल बिल्कुल वो तो ब्रह्म हत्या
(48:00) का जब भी आप कोई भी एक कर्म करते हो सामूहिक कर्म का फल मिलता है। सामूहिक यानी एक्यूमुलेटिव इफेक्ट्स। जैसे अभी एयरप्लेन क्रैश हुआ एयर इंडिया का। हम सो उसमें क्या है? जैसे किसी ने नॉनवेज बनाया जिस बुचर ने काटा जिसने वो ब्लेड बनाया चाकू उसे पता है ना मैं बुचर नाइफ बना रहा हूं। पर कह रहा है मैं तो नहीं खाता हूं पर बना तो रहे हो। इंटेंशन तो वही है ना। बुचर नाइफाइ बिके पैसे आए उसी से घर चल रहा है। बुचर नाइफ बनाने वाला जिसने देखा होगा ऑटो में वो नेट के अंदर बंद करके जालियों में मुर्गियों को ले जा रहे हैं। जो ले जा रहा है ऑटो वाला जिसने
(48:33) नेट बनाया मुर्गी जाली बनाई जिसने बुचर नाइफ बनाया जिस बुचर ने काटा जिसने शॉप रेंट पर दी जिसने शॉप में खरीदा घर आकर पकाया पकाने के बाद खाया जितने भी लोग इस एक साइकिल में इन्वॉल्व हैं। दे आर कॉल्ड एस सामूहिक कर्मा एक्यूमुलेटिव इफेक्ट। अब प्रकृति क्या करेगी? सबको इकट्ठा एक ही एयरप्लेन में चढ़ा देगी। क्योंकि सबको अपने-अपने कर्मा से अलग-अलग जगह बॉडी ली सबने। उनके कार्मिक रिएक्शनंस उसी जीवात्मा के पेंडिंग चल रहे हैं। तो लाकर के इकट्ठा एक ही परिवार में जोड़ दिया जाएगा। जब जोड़ दिया तो वो अब एक ही प्लेन या एक ही ट्रेन, एक ही ऑटो, एक ही कार में आ
(49:10) जाएंगे। चार होंगे तो एक कार में तो उनका जब वो कभी भी एक्सीडेंट होगा सब के सब सब के सब खत्म होंगे। बिकॉज़ ऑफ उन्होंने एक मुर्गे को इसी प्रकार सामूहिक कर्म किया। सबको सामूहिक कर्म का फल मिलेगा। तो प्रभु जी आपको जो क्लीन क्रैश आपने बात बोला आपको लगता है कि यह एक बहुत बड़ा सामूहिक कर्म था? बिल्कुल इतने सारे लोगों को 300 400 लोगों को इकट्ठा एक जगह लाना तो कोई जैसे आज रेप होता में इतना बड़ा हुआ यह रेप होता है जैसे कितने लोग इन्वॉल्व होते हैं गर्ल को ट्रैप करना पांच लोगों का आना किडनैपिंग करना उसके बाद प्रूफ्स को गुम
(49:38) करना चोरी करना उन वकीलों का जो सहयोग करते हैं जितवाने में कि तुम्हारा कोई कसूर नहीं है उन सबको कार्मिक अकाउंट पकड़ लेता है ना स्वर्ण चोरी करने वाले हैं जो सोना चुराते हैं उनको पतंगा कीट क्रमी जब किसी को दफनाया जाता है तो कीड़े खाते हैं उसको क्रमी कहते हैं। तो ऑनेस्ट कितने लोग हैं वर्ल्ड में हम तो कीड़े बन रहे हैं कि नहीं बन रहे हैं? और जो व्यक्ति मददपान करने वाला अल्कोहल हम जिस नर्क में उसको तकलीफ दी जाएंगी तो उस नर्क का एक नाम दिया गया है। उसका नाम है तप्त लोहा नर्क। तप्त लोहा मतलब लोहे को पिघलाएंगे। मोल्टन आयरन आपने देखा है कभी?
(50:15) हम कितना हीटिंग इफेक्ट 1000 डिग्री एंड प्लस होता है। उतना गर्म लोहा उस यातना शरीर के मुख में डाला जाएगा। जितने ड्रिंक के ग्लास उसने लिए होंगे लाइफ में अब यातना शरीर में मर सकता नहीं और पेन 100 टाइम्स ज्यादा हो रहा है चिल्ला रहा है लीव मी दे विल नॉट लीव मी उसका नाम ही है तप्त लोह नर्क नॉनवेज बनाते थे पकाते थे कढ़ाई के अंदर साथ में होना चाहिए अल्कोहल के साथ में थोड़ा नॉनवेज पकोड़ा तो वहां पर कुंभी पाकम नर्क कुंभी पाकम में कुंभी है कढ़ाई है बड़ी उसमें फ्राई करा ऑइल हमेशा बर्न जलता उबलता रहता है। जो भी यातना शरीर में
(50:54) आया बोले इसका आज चार घंटे पकाना है इसको डाल दिया। अब आदमी वहां पर यातना शरीर में पड़ा है। तड़पते हुए जल तेल के अंदर चिल्ला रहा है। छोड़ दो छोड़ेंगे नहीं। चार घंटे का टाइम पीरियड है। चार घंटे बाद निकाला जाएगा। तो मेंटल लेवल पर पेन होगा क्योंकि बॉडी तो यातना शरीर है। छूट नहीं रही है। ना ब्लड निकल रहा है ना कुछ हो रहा है। यातना मिल रही है मानसिक धरातल पर और वो मन की गति पर कष्ट पाता रहेगा। पाता रहेगा पाता रहेगा। उसके उपरांत जो मद पान पीने वाला था जब उसका जन्म होगा मनुष्य शरीर में आएगा वो तो ट्रेनिंग पीरियड हुआ
(51:25) नर्क में तो असली कष्ट तो संसार में मिलेंगे अच्छा तभी तो ट्रेनिंग पीरियड चल रहा है ये ट्रेनिंग है लोहा हां ये ट्रेनिंग है जब ट्रेनिंग ले के नीचे आया तो गला पूरा छिला हुआ किसी की आवाज़ होगी आपने देखा होगा अब कैसे खराब हो गई वहां पर लोहा तप्त लोहा में गरम-गरम लोहा खाया पिया है ना तो सारा गला खर गया अब बॉडी के अंदर आफ्टर इफेक्ट्स दिख रहे विकृत दांत टेढ़े-मेढ़े दांत हो जाना तो पूरा इसमें बताया गया है कि जो जो जैसा कर्म करेगा उसको क्या होगा अगर कोई व्यक्ति बिना मंत्र के भोजन करता है यानी भोजन से पहले प्रार्थना मंत्र नहीं बोलता
(52:02) कौवा बनता है क्रोध तो पहले उसकी ट्रेनिंग होगी कौवा बनने के लिए चोंच ऐसी होगी तुमको कांकाएं करना है ट्रेनिंग में उसके बाद ही तो करेगा तो ट्रेनिंग इज इन नरक लोका अगर कोई घर का सामान चुराता है किसी के घर का तो ही विल बी व्चर इन नेक्स्ट लाइफ गिद्ध बनेगा मधुमक्खी के शहद की चोरी करता है। बिना मधुमक्खियों को जलाते हैं, मारते हैं, चोरी करते हैं। एंड वी हैव दैट। बिना पैसे के हमने फ्री में ले लिया। हमारे घर के बाहर भी घूमते हैं। ले लीजिए जी शहद ले लीजिए। तो अगले जन्म में मधुमक्खी बनेंगे। गाय की चोरी करते हैं अगर जो लोग अगले
(52:35) जन्म में लेज़र्ड बनते हैं। छिपकली। तो पहले ट्रेनिंग होगी इन सब की। फिर वो नीचे आएंगे। पशुनिया। ये मनुष्य आ रहा है वापस। और पूरी लिस्ट है। ये तो मैं आपको छोटी-छोटी चीजें बता रहा हूं। जो व्यक्ति स्त्री के वस्त्र चुराता है, लेडीज के कपड़े चुरा लिए, उसको श्वेत कुष्ट होगा। वाइट कलर का बॉडी में जैसे कलर वाइट हो जाता है ना पिगमेंटेशन डिकलरेशन ऑफ द बॉडी हो गया। श्वेत कुष्ट होगा उसको। गुरु का अपमान करेगा। जो व्यक्ति अपने अपने गुरु जी को अपमानित कर दिया तो अगले जन्म में वो बौना होगा। डॉफ डॉफ बनेगा। छोटी हाइट का होगा। धर्मपत्नी का त्याग कर दिया।
(53:04) उसको सुख नहीं दिया। संपत्ति नहीं दी। तो शब्द वेदी बहरा बनेगा। ही विल नॉट हैव इयर्स। सुनने योग्य नहीं है। पर स्त्री गमन दूसरी स्त्री का मैरिटल अफेयर किया। उसके साथ सेक्स किया। अनफॉर्चूनेट जीवन होगा। जिधर भी जाएगा जो भी कर्म करेगा इंटरव्यू देगा फेल हो जाएगा। टेस्ट देगा फेल हो जाएगा। मेहनत करेगा बीमार हो जाएगा। खाना खाएगा पेट दर्द होगा। हर जगह उसको अनफॉर्चूनेट का सामना करना पड़ेगा। बिकॉज़ ही हैज़ डन समथिंग रोंग वि दी लेडी इन द लास्ट लाइफ। और नर्क लोक में उसको तप्त लोह में एक तपती हुई बॉडी देंगे। मैलक्वीन गरम गरम जलती हुई बॉडी लेडी की
(53:41) बॉडी देंगे और कहेंगे लो अभी एंजॉय करो इसको वो कहेगा मैं नहीं करना चाहता तू जल रहा है मेरे को छूने में कह रहा अभी करो तुम करना पड़ेगा करना पड़ेगा तो ऐसे ऐसे कर्म से पहले ट्रेनिंग ट्रेनिंग के बाद दोबारा जन रौरव नर्क रू नर्क अंद्र तामिस्त्र तामिस्त्र कुंभी पाकम लिस्ट है000 नर्कों की अलग-अलग डिपार्टमेंट में अलग-अलग कर्मों के लिए और सब एक दूसरे से मिल नहीं सकते हैं उसका अलग चल रहा है ट्रीटमेंट चार घंटे होता नहीं जैसे वैदिक सेंटर पे भी जाते हैं ऑयलिंग हो रही है किसी कहीं पर किसी का मसाज हो रहा है, किसी का पूरा अलग-अलग
(54:11) केबिनस बने हुए हैं। सब जगह अलग-अलग चल रहा है। ट्रीटमेंट शाम को रिपोर्टिंग देनी है। हां इसका 4 घंटे का सेशन हो गया आज ये जल्दी। कितना टाइम चलता है? एस पर द कर्माज़ अल्कोहल अगर एक बार पिया लाइफ में तो एक बार का हुआ ना सेशन। 100 बार पिया 100 बार जो पीता ही रहता था। बैठो जी परमानेंट बैठो। और वहां का टाइम पीरियड, यहां के टाइम पीरियड से एक साल का डिफरेंस है। अच्छा? वी डू वन ईयर हियर, वन डे देयर। ओह माय गॉड। अच्छा। कैजुअल रिलेशनशिप्स। आजकल डेटिंग का बहुत कल्चर चल रहा है यूथ में। राइट? मल्टीपल पार्टनर्स आजकल मैरिजेस में भी ओपन मैरिजेस चल रहे हैं।
(54:43) इसका बताइए। दे विल बिकम डॉग्स इन देयर नेक्स्ट लाइफ। व्हाई? बिकॉज़ यू हैव सीन डॉग्स ऑन द स्ट्रीट्स, दे हैव मल्टीपल पार्ट्स। टेंडेंसी वैसी हो जाएगी। टेंडेंसी वैसी है। इसी प्रकार का कष्ट मिलेगा नर्क में, एंड व्हेन दे कम बैक, दे विल हैव टू बिकम अ डॉग्स बॉडी। दे थिंक्स दैट हैविंग रिलेशनशिप विद एनी फिजिकल पार्टनर इज वेरी कॉमन इज नॉट सो शास्त्र उसको अधिकार नहीं देते हैं। शास्त्र कहते हैं अगर आपको प्रेम है आप प्रेम करें। उसके बाद विवाह करें। विवाह के बंधन में रहकर के कॉम्प्रोमाइज नेचर के साथ में यू कैन एंजॉय द बॉडी। बट आपका प्रो क्रिएशन
(55:19) के लिए विवाह होना चाहिए। गीता में कृष्ण कहते हैं धर्म अविरुद्धो कामो अस्मि। अगर धर्म के विरुद्ध नहीं है तो वह काम भी मैं ही हूं। सो हैविंग सेक्स विथ योर वाइफ कम्स अंडर धर्म अविरुद्ध कामोस्म। धर्म के विरुद्ध जो सेक्स नहीं है। पर ये तो धर्म विरुद्ध है ना क्योंकि आपने पत्नी घोषित नहीं किया। आपने एंजॉय किया किसी बॉडी को और उसके बाद आपने बोल दिया मैं जिम्मेदारी लेने योग्य नहीं हूं। और फिर वो अगर बच्चा हो भी गया तो ऑर्फन एज में दे दिया। अनाथ बना दिया किसी जीवात्मा को। और या फिर लेडी ने कहा मैं सिंगल मदर हो के जी लूंगी। बट उसने भी तो पिता का हाथ हटवा
(55:52) दिया उसके सिर पर से। तो आदमी औरत बोले कि लेडी मैं तो चाहती थी कि मुझे वो पार्टनर लेकिन वो ही नहीं चाहता है। तो तुमने फिर उस क्रिया में गई क्यों? क्या कोई लेडी विदाउट अपनी एग्रीमेंट के इस क्रिया में जा सकती है? तो तुम्हारा भी लिटिल डिजायर तो था। चाहे तुम मुझे फोर्सफुली कुछ भी कह दो। हम चाहे वो पुरुष की गलती हो या स्त्री की गलती हो, संतान उत्पत्ति हुई है। तो यह तुम दोनों की इच्छा से अनुरूप से हुआ है। कहीं ना कहीं कुछ ना कुछ सूक्ष्म इच्छा है। हम सूक्ष्म इच्छा थी एंजॉयमेंट की। लेकिन उसमें फिर यह आ गया। अब तुम्हें लगता है
(56:24) अगर मैं जीव हत्या करती हूं, अबॉर्शन करती हूं तो मुझे पाप लगेगा। तो बेटर है कि मैं सिंगल मदर रहकर जीवन काट लूं। और तुमने उसके पिता का सिर पे से हाथ हटा दिया। एक बच्चे के जन्म होते ही पिता चला गया। स्कूल जाओगे फादर नेम पूछेंगे क्या बोलेगा? तो वो पूरा लाइफ उसकी जो डेवलपमेंट होगा तो उसको हमेशा एक कमी लगेगी। मेरा पिता नहीं था। तो एक लेडी ने अपने एंजॉयमेंट के लिए थोड़ी देर के लिए एक पूरा जीवन किसी आत्मा का खराब कर दिया। आपने अबॉर्शन की बात की। अबॉर्शन में क्या आउटकम होता है? क्योंकि वो भी काफी ज्यादा है क्योंकि कैजुअल सेस की वजह से लोग की
(56:54) टर्म प्रेगनेंसी टर्मिनेट करनी पड़ती है। हां। तो जो जो भी धर्म के विरुद्ध कार्य है अगर प्रेगनेंसी टर्मिनेट कर रहे हैं तो इट इज़ लाइक अ अ मर्डर टू सम जीवात्मा। आप कहे मैंने किसी का मर्डर नहीं किया। यू आर द बिगेस्ट मर्डर ऑफ योर चाइल्ड। आपने एक जीवात्मा के जन्म लेने से पहले ही उसको आपने खत्म कर दिया। लोग बोलते हैं तीन महीने का मार सकते हैं। 20 डेज का मार सकते हैं। 30 डेज का मार सकते। एक दिन भी हुआ जीवात्मा आई और शरीर बनना शुरू हुआ। द मोमेंट यू कम टू नो दैट आई एम अ प्रेग्नेंट लेडी। इट मींस ऑलरेडी देयर इज़ समथिंग इन योर बॉडी व्हिच इज़ लिविंग
(57:27) बीइंग। नॉन लिविंग बीइंग नहीं है। लोगों में आजकल एक है तीन महीने बाद उसमें आत्मा आती है। दिल धड़कता है। ऐसा नहीं होता है। आत्मा आती है तो डेवलपमेंट शुरू होता है। अगर आत्मा नहीं है तो डेवलपमेंट ही नहीं हो सकता है। टेबल कभी छोटी टेबल पैदा कर सकती है। लाइट कभी एक छोटा बल्ब पैदा कर सकती है। वहां जीव आया तब डेवलपमेंट शुरू हुआ। तब साइकिल रुका, पीरियड रुके। अब आपके बच्चा बनना शुरू हुआ। बच्चा बनना शुरू हुआ। अब आपने उसे मार दिया। दंड मिलेगा आपको। पुण्य आत्मा की साइकिल पे आते हैं। अभी हमने नर्क की साइकिल समझ पुण्य क्या पुण्य आत्मा सो वन हु डू गुड कर्मास यानी
(57:59) उसने अपने जीवन काल में बड़े अच्छे धार्मिक कार्य किए मंदिर गया लोगों से मिला भंडारे किए सब्जियां बांटी पू बांटी पानी बांटे रोड पर खड़े होकर लेकिन इसको हम भक्ति नहीं कहते हैं। इसको हम पुण्य कहते हैं। पुण्य और भक्ति में भेद होता है। पुण्य में आप भगवान से कहते हो दे दे और भक्ति में कहते हो ले ले। भक्ति में आप भगवान को अपना संबंधी प्रियतम मानते हो तो मीराबाई ने जैसे कहा कि मेरे तो पति है। पति रूप में संबंध बना सकते हो भगवान से। वात्सल रूप में यशोदा में जैसे प्रेम है कृष्ण के लिए। जिस प्रकार साख्य रूप में अर्जुन ने भगवान से
(58:38) प्रेम किए। दास रूप में हनुमान जी ने राम से प्रेम किए। शांत रूप में शांत रस में तो किसी भी रूप में आप भगवान संबंध जब बनाते हो हनुमान ने आज तक कभी गुरु फोटो नहीं खिंचाया भगवान के साथ हमेशा नीचे बैठे रहते क्यों नीचे बैठेंगे तो भगवान का वर्ध हस्त हाथ उनके सिर पर रहेगा तो ये दास की स्थिति है तो भक्त का प्रेम संबंध होता है और एक पायस पुण्य आत्मा का धार्मिक होता है मंदिर जाता है झंडे भी लगाता है तिलक भी लगाता है बट उसके डिजायर होती है दे दे जैसे पिता से पुत्र मांगता है लेकिन जब प्रियतम बन जाते हो तो आप देते हो क्योंकि वो लव कर रही है प्रेम कर
(59:10) रही है तो आप भगवान को प्रेम करोगे तो कुछ लेके जाओगे। आज खाली हाथ नहीं जाऊंगा। पुष्प माला पत्र कुछ लेके मंदिर जाऊंगा। तो यह कामना है। अब पुण्य आत्मा का हम साइकिल पढ़ रहे हैं। पुण्य आत्मा का शरीर छोटा देवदूत जैसे दूत आएंगे। देवदूत जैसे सुंदर दिखने में होंगे। अच्छा। ब्यूटीफुल बॉडीज। खींचेंगे नहीं। बोले आप बहुत इतना धर्म किए, इतने मंदिर निर्माण किए। आप अच्छे इंसान हैं। तो लोकल ट्रेन नहीं आप एसी कंपार्टमेंट में जाएंगे। सो यू हैव ऑल द फैसिलिटीज़। अच्छा बच्चे भी वैसे ही होंगे पुण्य आत्मा के परिवार में पुण्य करने वाले जी देखिए हमारे पिताजी का
(59:44) पिंडदान प्रॉपर होना चाहिए पंडित जी कुछ भी ले लीजिए बस बेस्ट करिए बेस्ट से बेस्ट पंडित जी बुलाइए ओ पंडित जी आकर के बढ़िया पिंडदान 10 पिंड हो गए आत्मा की यात्रा शुरू हो गई बढ़िया प्रीति भोज हुआ बढ़िया कीर्तन भजन हुए फोर्ट पोस्टर्स लगे शोक समारोह हुए सब हुआ बढ़िया से हो गया 13 दिन बाद आत्मा की यात्रा शुरू 16 स्टेशंस पर जब जाएंगे तो बढ़िया वहां तो फैमिली पंडित जी को छप्पन भोग खिला रही है बढ़िया से तो फूड का हिस्सा यमदूतों देवदूतों के पास मिलेगा। वो बोलेंगे देखिए आपके परिवार ने भोजन खा लीजिए। स्टेशन पर वो आत्मा आराम से भोजन खाएगी। चलने के लिए आपको
(1:00:19) इतने बढ़िया उन्होंने दान में जब सुंदर-सुंदर जूते चप्पल परिवार में बांटे हैं। तो लीजिए आपके लिए चप्पल है। चप्पल पहना दी। तो ही इज़ मूविंग इन वेरी कंफर्टेबल पोजीशन। हर स्टेशन पर कोई हंटर नहीं पड़ रहे। कुछ नहीं बल्कि मालाएं पहनाई जा रही है कि देखिए पुण्य आत्मा जा रहा है। एक पुण्य आत्मा जा रहा है। चलता रहे चलता रहेगा। नाउ रीच टू दी वैतरणी नदी। 11 महीने में गाय खड़ी है। गौ दान भी किया था। हां जी गौशाला बनाई थी हमने। अरे वाह वाह वाह आप गाय की पीठ पर बैठ जाइए। पूछनी पकड़नी है। पीठ पर बैठ जाइए। नीचे जो जल है वो सुगंध निकलेगी। उसमें से आप
(1:00:47) ब्लड सुगंध निकल रही है। सुगंध के साथ वहां पहुंचे तो यमराज भी उनको दिखाई दे रहे हैं बड़े सॉफ्ट नेचर के। यमराज कह रहे ओ वेलकम कैसे हैं आप? अच्छा अच्छा जी ठीक है। तो इनका जरा पढ़िए। बोले अरे इन्होंने तो इतने मंदिर बनाए, इतने दान पुण्य किए, इतने अच्छे इंसान थे। अच्छा अच्छा तो इनको फिर कहां जाएंगे? बोले देवलोक जाए ना स्वर्ग। कहां ठीक है ठीक है तो स्वर्ग की अंदर स्वर्ग लोक चले ऊपर नर्क वाला नीचे गया स्वर्ग वाला ऊपर चला गया क्योंकि ये जजमेंट दी है ना भूवलोक उसके ऊपर स्वर्ग लोक है और नर्क साउथ डायरेक्शन में नीचे है स्वर्ग लोक चलता स्वर्ग गया अब स्वर्ग
(1:01:17) में जैसे ही गए तो एक माला पहनाई वेलकम आप इतने पुण्य आत्मा है देवता के जो लीडर है इंद्र इंद्र ने बोला भाई इनकी पोस्टिंग कहां करी जाए तो एस पर द कर्मा अकाउंट बहुत पुण्य आत्मा होंगे तो साइड पेरफरी में रहेंगे और अगर बहुत ज्यादा पुण्य किए हैं तो इंद्र की कैपिटल सिटी उसका नाम है अमरावती। जैसे इंडिया की कैपिटल दिल्ली है। स्वर्ग की कैपिटल का नाम है अमरावती। वहां पर लुफ्त है। सात सात कुंड है। सब कुछ अच्छे से उनको रखा जाएगा। सात कुंड है जैसे नहाने के लिए और समुद्र है। एक पर्सनल एरोप्लेन है। फ्लाइंग प्लेन है। देवता लोग उड़ सकते हैं। कभी बुखार
(1:01:52) नहीं आएगा बॉडी में। कभी कोई कष्ट नहीं आएगा। कोई रोग नहीं आएगा। कोई स्ट्रेस नहीं होना चाहिए इनको। और हर प्रकार रोज अमृत का एक बूंद पिएंगे ताकि लंबी लोंगजविटी रहे। इनकी लंबी आयु रहे। सभा में बैठेंगे इंद्र की सभा में बैठेंगे या जो भी उनको पोस्टिंग में जॉब दी गई है तुम्हें पेड़ लगाने हैं तुमको सफाई करनी है या तुमको मैनेजमेंट देखना जस्ट पर दी कर्मा उनको प्लेस किया जाएगा लेकिन जो माला पहनाई गई थी पहले दिन ये उतारी नहीं जाएगी इसके पुष्प रोज सूखेंगे प्रतिदिन सूखेंगे पुष्प पुष्प सूखेंगे धीरे धीरे धीरे धीरे जिस दिन माला पूरी
(1:02:26) सूख गई तो फिर उनको किसी पुण्य घर के अंदर जन्म देंगे तो इसको कहा गया पुण्य क्षण पुण्यम मृत्यु लोकम विषती पुण्यों के क्षीण हो जाने पर पुण्य खत्म हो जाने पर मृत्यु लोक में वापस भेजा जाएगा कहां भेजा जाएगा सुचिनाम श्रीमताम गेहाम योगाम भ्रष्ट उपजायते जो योगी थे बड़े पाया साथ में थे बड़े पवित्र थे धार्मिक थे किसी पवित्र घर में अंबानी से घर में जन्म हो गया पैदा होते ही सर वर्कर ही वर्कर है घर के अंदर जॉब की कोई टेंशन ही नहीं है। कोई एंप्लॉयमेंट का टेंशन ही नहीं। गाड़ियां लगी हुई हैं। एक्चुअल में ऐसा हुआ होगा उन लोग के साथ।
(1:02:59) ऑब्वियसली सुचिनाम श्रीमताम या तो पवित्र घर में किसी घर में एकदम पवित्र वातावरण में जन्म होगा या तो किसी श्रीमताम पैसे वाले घर में जन्म होगा क्योंकि पुण्य आत्माएं भोग कर आया है। अब इसको भोगने में अब गरीब आदमी को उठाकर के एसी में बिठा दो तो उसे ठंड लगती है। अरे इतना हम नहीं खा सकते हैं। इतना सब हम नहीं कर पाएंगे। वो बेचारा घबराएगा। ट्रेनिंग हुई ना स्वर्ग में। राजा इंद्र के साथ में कुंडों में नहाना, हवाई जहाजों में उड़ना वो ट्रेनिंग हो गई। अब यू लिव लाइफ लाइक चार्टेड प्लेन है अपना पर्सनल जा रहे हैं आ रहे हैं मीटिंग्स कर रहे हैं यू
(1:03:31) एसी में ही रह रहे हैं कोई मेहनत नहीं करनी रोटी का टेंशन नहीं चांदी के बर्तनों में खा रहे हैं सोने के बर्तन है गिफ्ट दे रहे हैं बड़े-बड़े लिव लाइफ वो सोच ही नहीं सकते कि नर्क भी कुछ होता है दुख भी कुछ होता है लिव लाइक दैट पर मटेरियल वर्ल्ड के जो कष्ट है वो तो आएंगे ना हम जब आप मृत्यु लोक में आ गए हम तो फायदा क्या है वो नर्क गया वो भी वापस आया स्वर्ग गया बस डिफरेंस ये है कि वो गरीबी में आ रहा है अमीर पेन, मृत्यु, शरीर के कैंसर, डिसीजेस, डिप्रेशन ये तो आ ही रहे ना। जो लोग बेटर पोजीशंस में जन्म लिए हैं, दे आर कमिंग फ्रॉम
(1:04:07) स्वर्ग लोका। मतलब फाइनेंशियली बेटर पोजीशन फाइनेंसली बेटर। स्पिरिचुअली बेटर फाइनशियली वेरी हाईली क्वालिफाइड व्यक्ति है। कोई योगी था, स्वर्ग गया, योगिक क्रियाओं से फिर वापस आया है। तो नाउ ही इज़ अ वेल बैलेंस्ड। सारा उसका चक्रास बैलेंस्ड है। उन्होंने एक व्यक्ति है जो निम्न कुल में जन्म लिया है। मदिरा में पड़ा हुआ है। शराब किनारे फुटपाथ पे लेटा हुआ है। वो नर्क से आया दिखाई दे रहा है वो तो आप पर्सप भी कर सकते हैं देखकर किसी को। बट एक एक और फंडा है कि विवेक जैसे बहुत सारे योगीज हैं। उनको बहुत इंटेंस डिजीज हुई थी। वो अपना
(1:04:40) कर्मा सारा इस जन्म में ले लेते हैं। हमारे नीम करौली बाबा ले लीजिए। जो भी थे काफी लोग अपने वो भी थे ना शायद से जिनको कैंसर राम राम कृष्ण परमहंस इनका कैसे आप लॉजिक बताएंगे एक धार्मिक व्यक्ति का कर्तव्य है जो जो स्पिरिचुअलिटी के पाथ पे है वो अपना भी कर्मा लेता है अपने शिष्यों का कर्मा भी लेता है कि तुम मुझे दे दो अपना कर्मा यू बिकम प्योर एंड यू डू साधना तुम मुझे दे दो बिकॉज़ मेरी साधना इतनी स्ट्रंग है आई कैन टेक योर कर्मास अपनी चॉइस से वो उनके कर्मास को भी ले सकता है और वो उसको झेलता है बिकॉज़ ऑफ साधना साधना काटती है भजन भजन
(1:05:10) जो होता है वह पाप और पुण्य दोनों को माइनस कर देगा तो इसलिए जो पायस आदमी है उसकी जो यात्रा हम चर्चा कर रहे आप इसको सुन लीजिए कांसेप्ट को पूरा तो आपको और क्लेरिटी हो जाएगी। स्वर्ग गया स्वर्ग से वापस आया। अब जो स्पिरिचुअल व्यक्ति है थर्ड इसकी साधना की गति कैसी है? स्पिरिचुअल व्यक्ति की शरीर छूटा मरेगा तो कोई भी सन्यासी भी जाएगा। ब्रह्मचारी ग्रस्ता योगी सब जाएंगे। अब जब इसका शरीर छूटा तो इसके डिसाइपल्स या इसके फॉलोअर्स या इसके प्रेमी इसके भक्तजन योगीज सब आसपास खड़े होंगे। एंड एवरीबडी विल चट दी नेम ऑफ द लॉर्ड जो भी गति शिवा कृष्णा रामा बोलेंगे
(1:05:48) उसको सुनते वह शरीर छोड़ेगा उसके साथ विष्णु के दूत आएंगे यमदूत नहीं आएंगे देवदूत नहीं आएंगे विष्णु दूत आएंगे शंख चक्र कमल गधा और फिर वो उसकी बॉडी को लेंगे और एयरप्लेन में रखेंगे व्हिच इज कॉल्ड एस गरुड़ा विमान एंड वी हैव मेनी एग्जांपल्स तुकाराम इन महाराष्ट्र कुछ 500 साल पहले हुए तुकाराम जी मराठी संत संत थे। एंड उनके पूरे विलेज ने उनको गरुण विमान पर बैठकर जाते हुए देखा। उन पर इतनी मूवीस बनती हैं। अभी भी बनती हैं। तुकाराम भजन करते-करते गरुण पर बैठे हैं और स्व शरीर अपनी बॉडी के साथ में ज्यादातर लोग तो बॉडी छोड़कर आत्मा जाती है। स्वरी जा
(1:06:27) रहे हैं। भागवत लोगों ने देखा शरीर। हां जाते हुए हैं। तो अभी हम लोग कुछ महीने पहले तुकाराम की उस स्थली पर गए थे। जहां उन्होंने गरुड़ पर तो वहां पे एक मंदिर बना हुआ है। उसका नाम है वैकुंठ गमन स्थली। यहां से बैकुंठ चले गए। तो पूरा विलेज तो वही है। विलेज ने जाते हुए देखा ग्रुप पर बैठ रहे हैं। तो उनकी वाइफ को बोला गया कि आपके हस्बैंड जा रहे हैं। जैसे मेरी वाइफ को बोलेंगे आज आपके हस्बैंड जा रहे हैं तो कहेगी कि हां तो रोज ही कहीं ना कहीं जाते हैं। तो उनकी वाइफ बोली हां रोज ही कहीं ना कहीं जाते हैं प्रवचन कीर्तन के लिए। तो बोले नहीं
(1:06:57) वैुंठा जा रहा है। कह रहे हां वो जहां जाता है वैुंठा ही होता है। लेकिन बाद में जब उसको जब कई लोगों ने बोला वहां आ के देखा तो ही वास गोइंग बैक। एंड ही वास सेइंग द मंत्र आ जाता आमचा गावा। मराठी में आ जाता आमचा गावा मैं जा रहा हूं अपने गांव तो अपना गांव मींस जहां से हम आए भगवान के घर से तो वहीं वापस जा रहा हूं। अच्छा तो तो जो लोग नॉन रिचुअलिस्टिक हैं या नॉन स्पिरिचुअल है वो कहते हैं नहीं नहीं ऐसा कुछ भी नहीं हुआ 101 लोगों ने ऐसा झूठा भ्रम फैला दिया है। और उनको तो किसी ने मर्डर करके फेंक दिया था पानी में और क्योंकि वो भगवान के बहुत
(1:07:30) ज्यादा भक्त बन रहे थे। तो इस तरह से वहां के जो नॉन रिचुअल लोग ऐसा बोलते हैं। पर जो उनके वंशज हैं मतलब जैसे मैं अपनी दादी के बारे में सही बताऊंगा। मैं अपने पिता के बारे में सही बताऊंगा। तो उनकी अभी सातवीं पीढ़ी है यहां पर। तो आई मेट देम एंड दे सेड आपने बिल्कुल सही बोला है। वो ही उनको वैकुंठ गमन हुआ उनका। तो पांडवाज भागवत के अंदर आता है जो पांच पांडव थे अर्जुन युधिष्ठिर भीम नकुल सहदेव दे ऑल वेंट टू वैकुंठा। भागवतम के प्रथम स्कंद 15वा अध्याय 46 नंबर श्लोक में लिखा है स्व शरीर वैुंठ गमन किए। सब चले गए। परीक्षित महाराज जो
(1:08:07) पांडवों के आखिरी वंशज थे। उन्होंने सुखदेव से भागवत सुना। वहां भी वैकुंठ गमन किए। तो ये वैकुंठ गमन की पूरी भागवत में आपको वैुंठ गमन वैकुंठ गमन मिलेगा। तो उनका कैसे होता है कि गरुड़ आता है। उनको फ्लाइट में बिठाता है और ले जाकर के यमदूत वैतरणी नदी पर तो गाय की जरूरत ही नहीं होगी। तो फ्लाई में जा रहा है ना और वो सीधा यमराज के लोग के वहां पर रुकेगा। तो यमराज के लिए वहां डिसीजन के लिए नहीं रुकेंगे। वहां पर रुकेंगे प्रणाम करने के लिए। क्योंकि यमराज इज वन ऑफ द 12 महाजनास। 12 महाजन है जो धर्म के नियमों का फेरबदल कर सकते हैं। जैसे
(1:08:40) कॉन्स्टिट्यूशन ऑफ इंडिया है उसके लिए कुछ सुप्रीम कोर्ट ही है जो उसके अंदर आगे पीछे कुछ कर सकती है और कोई कॉन्स्टिट्यूशन को चेंज नहीं कर सकता है। ऐसे ही 12 महाजन शास्त्रों में बताए गए हैं। तो यमराज क्योंकि महाजन है और एक भक्त जब आता है तो उनको वो वैष्णव ड्रेस में दिखेंगे। धोती कुर्ता विद अ तिलक विद फोल्डेड हैंड्स एंड प्रइंग थैंक यू सो मच फॉर गोइंग टू वैकुंठा। आई वांट टू पे माय ओबीसेस। मैं उसको प्रणाम करना चाहता हूं। आप कितना सुंदर जीवन जिए, भजन किए। अब आप वैुंठ जा रहे हैं। वह जगत जो कुंठा से रहित है। नो एंजाइटटी। कुंठा मींस
(1:09:12) एंजायटी। वैकुंठा मींस नो एंजायटी। उस लोक में जाने के बाद जाने के बाद इस संसार में वापस जन्म मृत्यु चक्र जो स्वर्ग नर्क से आ रहा था ना वापस वापस। वो साइकिल परमानेंट बंद हो गए। अब आप जीवात्मा सदा वैकुंठ में रहेगी और आनंद में रहेगी। ब्लिसफुल आत्मा सतित आनंद। एटरनल ऑल नॉलेजेबल ऑल ब्लिसफुल। अपने धाम वापस पहुंच गए। तो ये तीन क्रियाओं से मृत्यु के उपरांत होता है। अब जो आदमी जीवन में जैसे कर्म करेगा उसकी वैसी ट्रेनिंग वैसा रिटर्न। तो अभी वैुंठ पे मुझे थोड़ा सीन बताइए। कैसे जैसे आपने मुझे स्वर्ग का बताया क्या-क्या होते हैं? तालाब होते हैं या
(1:09:44) पर्सनल जेट होता है। जी जी जी। सो वैकुंठा एक बार एक शास्त्र है बृहद भागवत मृत। उसमें भगवान कृष्ण जो जब द्वापर में आए तो उनके कुछ ग्वाल बालों ने पूछा कृष्ण तुम कहां से आते हो? तो भगवान ने कहा मैं गोलोक से आता हूं। तो सखाओं से तो मस्तीमस्ती होती थी भगवान ने बोल दिया सा के रूप में गोलोक कह रहे लाला हमको दिखा सकते हो कहां गोलोक है कह रहे चलो दिखा देते हैं कह रहे हैं कि स्वर्ग से भी ऊपर है अरे बहुत ऊपर है चलो फिर दिखाओ तो सारे ग्वाल बालों को लेकर कृष्ण अपना बैकुंठ लोक गोलोक दिखाने जाते हैं तो व्हेन दे आर क्रॉसिंग तो अभी मैं आपको
(1:10:21) पूरा पूरा ऐसे बता रहा हूं वर्टिकल चार्ट बता रहा हूं वी आर ऑन द अर्थ प्लनेट भूलोक भवलोक स्वर्ग लोक तप लोक जनोक महलोक ब्रह्मलोक ब्रह्मा लोक पार हो गया तब मटेरियल वर्ड पूरा हो गया ब्रह्मलोक के ऊपर देयर इज अ ओशियन कॉल्ड कारण सागर कारण सागर इस वहां पर भगवान विष्णु का नाम है करुण दक्षाय विष्णु ही इज़ लाइंग इन दिस फॉर्म आदिशेष हां आदिशेष के ऊपर करुण दक्षाय विष्णु एंड उनकी बॉडी से एव्री पोर से एक-एक बबल निकल रहा है एंड दैट इज वन ब्रह्मांड जिसके अंदर हर ब्रह्मांड में 14 प्लरी सिस्टम है हर एक में एक-एक एक भूलोक है और वो उनकी स्वास से निकल रहा है। ऐसे करते
(1:11:02) हैं और एक ब्रह्मांड बन जाता है। फिर एक ब्रह्मांड बन जाता है। फिर एक ब्रह्मांड बन जाता है। हर ब्रह्मांड में 14 लोक है। हर एक में भूमि है। हर एक में स्वर्ग है। हर एक में मून है। हर एक में सन है। ऐसे वो बबल की तरह हवा में एयर फ्लो कर रहा है। तब कर्ण सागर के ऊपर जब चलते हैं। सो देन अगेन देयर आर 24 वैकुंठास। 24 वैुंठा है उसमें नरसिंह वैकुंठा जहां पर आदि नरसिंघा है नरसिंह रूप में बैठे हैं। देन आदि वराह वैकुंठा वहां वराह रूप में शुक्र रूप में भगवान बैठे हैं। उनकी पूजा हो रही है। नीचे उनके फॉलोअर्स हैं। चतुर्भुज रूप
(1:11:32) में फोर हैंडेड शंख चक्र कमल गधा लेकर वरशिपिंग एंड डांसिंग इन फ्रंट ऑफ लॉर्ड वराह। तो इस प्रकार से ऊपर 24 वैकुंठ पार करके देन कम साकेत लोक। साकेत में लॉर्ड रामचंद्र इस देयर एंड देयर सो मेनी वनर्स एंड सो मेनी सब लोगों की अयोध्या धाम साकेत धाम में रामचंद्र जी इस मूविंग लाइक अ किंग अनुसारा जैसे चल रहा है सब कुछ चल रहा है नित्य उनकी लीला चल रही है देन आफ्टर साकेत देयर कम्स जगन्नाथ पुरी धाम जगन्नाथ पुरी में भगवान जगन्नाथ इज़ देयर एंड उनके जो जैसे आप उड़ीसा में देखते हैं भुवनेश्वर में देखते हैं सेम इज द एटरनल वैकुंठा में आदि जगन्नाथ भगवान बैठे हैं
(1:12:07) जगन्नाथ के ऊपर जब चलते हैं सो देन कम्स द्वारिका नगरी द्वारकाधीश है तो वहां पर द्वारकानाथ बैठे हैं और उनकी जो लीलाएं यहां पर हुई वो सारी लीलाएं यथारूप ऊपर हो रही हैं। देन कम्स मथुरा धाम। मथुरा में जो मथुराधीश की लीला है वहां पे मथुरा धाम एंड देन उसके ऊपर वृंदावन गोलोक वृंदावन। तो वहां पर कााउस हैं एंड राधा कृष्णा इस सिंग इन द सेंटर एंड एट पेटल्स आर देयर इन दी लोटस फ्लावर। उनके अष्ट पंखुड़ियों पर अष्ट सखियां बैठी हैं। एवरीबडीस पर्पस इज़ टू सर्व राधा कृष्णा। बस इतना करना है कि कैसे राधा कृष्ण संतुष्ट हो। यही उनके
(1:12:38) जीवन का भाव है। तो उस उनकी जो पेरीफरी है उसमें था 1000 पेटल्स फिर 100 पेटल्स फिर आठ पेटल ऐसे ऊपर टॉप में है। तो नीचे था 1000 में अनेक अनेक जीवात्मा हैं। उसके ऊपर 100 में है। उसके ऊपर आठ में उनकी मुख्य सखियां हैं। ललिता विशाखा सुदेवी भू देवी रंग देवी तुंग विद्या वो सब बैठी हुई हैं। तो कोई पान खिला रही है भगवान को। कोई चवर कर रही है। कोई पंखा कर रहे हैं। दिस इज़ राधा कृष्ण लोका। सो दिस प्लेटरी सिस्टम इज़ लाइक दिस प्लेनेट। ऐसे ऊपर जाके कर्व ऐसे कर्व है ये ऊपर जा रहा है जा रहा है जा रहा है जा रहा ये है तो हम जो है
(1:13:10) कर्ण सागर जो है उसके नीचे असंख ब्रह्मांडों में से एक ब्रह्मांड के बबल के पृथ्वी के जिसमें 75% पानी है उसकी 25% भूमि है उसमें सात कॉन्टिनेंट में से एक कॉन्टिनेंट एशिया उसकी एक इंडिया इंडिया की एक सिटी दिल्ली दिल्ली के पास यहां छोटी सी एक आत्मा ओ गोलोक जाने का प्लानिंग कर रही है तो दैट कैन बी डन ओनली बाय व्हेन यू आर निष्काम नो डिजायर्स इन लाइफ तब भगवान मान के जाने का कुछ क्वालिफिकेटरी सिस्टम है। ये पास करो, ये पास करो ये। उसमें ये है नो डिजायर्स। एक इंटरेस्टिंग स्टडी थी। आई थिंक व्यूअर्स को भी इंटरेस्टिंग लगेगा। एक डच
(1:13:43) कार्डियोलॉजिस्ट थे प्रभु जी। उन्होंने 30 344 कार्डियाक पेशेंट्स जिन्होंने नियर डेथ एक्सपीरियंस किया था। उनसे पूछा और ये रिकॉर्ड किया उन्होंने। उन्होंने यह देखा कि ये सारे 344 ने कुछ ऐसे डिस्क्रिप्शंस बताए कि एक वाइट लाइट आती है। हम टनल से गुजरते हैं। कोई बाउंड्रीज होती हैं। कुछ तो सीमा का एक्सपीरियंस होता है। तो ये जो होता है ना कि एक नियर डेथ एक्सपीरियंस में जाते हो और मुझे लग रहा है वैसा ही कुछ होता होगा जब एक्चुअली में इंसान लाइफ से डेथ के बीच के ब्रिज में मे बी वो कुछ ऐसे एक्सपीरियंस करता होगा। ये क्या एक्सक्टली है?
(1:14:15) हम तो नियर डेथ एक्सपीरियंस और एक है साइंस में आउटबॉडी एक्सपीरियंस। मेरा भी एक एक्सपीरियंस हुआ है आउट बॉडी एक्सपीरियंस। नियर डेथ तो नहीं है लेकिन आउट बॉडी एक्सपीरियंस है। मैं काफी समय पहले की बात है 2012 में आई वास सफरिंग विद सम इयर डिसीज। तो उस समय इयर से मेरे ना ब्रेन का लिक्विड बाहर आता था। व्हिच इज कॉल्ड एस सेरीब्रियम ऑटोरिया। तो ट्रीटमेंट तो क्या हुआ? उन्होंने क्लीनवलीन किया और बोले पता नहीं चल रहा है। इसके लिए तो ब्रेन सर्जन के पास रिकमेंडेशन है। ब्रेन सर्जन देखेगा। तो मेरे को उसमें लिफ्ट में लेकर आए। अचानक
(1:14:46) ही शरीर से कुछ निकला और नाउ आई एम सिंग ऑन दी व्हीलचेयर बट आई एम सीइंग माय बॉडी फ्रॉम द टॉप ऑफ दी व्हीलचेयर आई एम सीइंग मायसेल्फ ओनली मैं अपनी बॉडी को देख रहा हूं सो मच अटैच्ड होता है ना आत्मा तो तो मैं ऊपर अपनी लिफ्ट के टॉप में हूं और मैं नीचे ऐसे बहुत दूर से ऐसे देख रहा हूं कि एक लटका हुआ बॉडी ऐसे लटका हुआ है। जब कोई डेथ होती है तो लटक जाता है ना ढीला होता है क्योंकि जैसे ही आत्मा निकलती है आदमी ढीला हो जाता है तो मैं ऐसे हो गया तो मेरे साथ जो रिलेटिव्स खड़े थे वो ऐसे करके स्लैप करने लगे अरे क्या हुआ क्या हुआ क्या हुआ क्या हुआ तो मुझे दिख रहा है
(1:15:16) कि वो लेकर दौड़ रहे हैं एंड आई एम फॉलोइंग लाइक अ कैमरा ड्रोन उनको कैरी कर रहा है पीछे पीछे जा रहा है इमरजेंसी में ले जाकर एक बेड के ऊपर लेटाया और वो शॉक्स होते हैं ना वो मैग्नेटिक शॉक्स लगाए तो मैं अभी भी ऊपर हूं और मैं देख रहा हूं लगा रहे हैं और बॉडी ऐसे पड़ा हुआ है और जो डॉक्टर्स मुझे ट्रीट कर रहे हैं वो सारे आ गए वहां पर देन अगेन वो वो लगा रहे हैं। फिर एक झटका आ रहा है। फिर लगा रहे हैं। फिर झटका आ रहा है ऐसे। दो-तीन बार हुआ। थर्ड टाइम उन्होंने कहा लास्ट चांस अगर टक किया तो जो टॉप शॉट था ना वो वापस इन शॉट हो गया। और मैं फिर डॉक्टर को ऐसे
(1:15:45) देख पा रहा हूं अपने और मैंने देखा और वोमिटिंग किया डॉक्टर बोले रिवाइव हो गया। रिवाइव हो गया। एंड फाइनली बाय द मर्स ऑफ़ गॉड आई वास सेव्ड। लेकिन वो मेरा एक्सपीरियंस था। सो यह मैं जानता हूं कि उस समय अगर कोई व्यक्ति बोल रहा है कि मुझे टनल दिख रहा है या यह दिख रहा है। सबके डिफरेंट अनुभव होते हैं। जब व्यक्ति की मृत्यु होती है तो उसको 13 दिन तक उसी स्थान पर रहना होता है। तो लोग स्टोरीज बताते हैं कि मैं मर गया था। फिर मैं यमलोक चला गया। फिर वहां बोले टाइम नहीं है फिर वापस भेज दिया। ऐसा नहीं होता। हो ही नहीं सकता है क्योंकि शास्त्र इसको
(1:16:15) प्रिस्राइब नहीं कर रहे और हम हर चीज शास्त्र से चलते हैं। शास्त्र कहते हैं 13 दिन तक आत्मा उसी स्थान पर रहती है जहां उसकी मृत्यु होती है। सो मैंने भी अनुभव किया कि आई वास फॉलोइंग माय बॉडी। इतनी आसानी से अपनी बॉडी छोड़ी नहीं जाती है। आदमी ऐसा नहीं कि अभी मर मर गया। मर गया और मेरे को बॉडी से डिटचैमेंट हो गया। मैंने उड़ गया। अपनी हवा में ऐसा हो नहीं सकता। इतने साल आप रहे हो 60 70 साल आपकी अंगूठी होती है पेन होता है उससे अटैचमेंट हो जाता है मेरा पेन मेरा बोर्ड मेरी रिंग आप जिस बॉडी में हो उससे अटैचमेंट नहीं होगा जब जलती है ना रोता है वहां बैठ के
(1:16:44) क्रिमिनेशन ग्राउंड में मेरी बॉडी को मत जलाइए प्लीज मत जलाइए हां और एक बच्चे का अभी यहां पर आईबीएम से ने रिकॉर्ड किया था उसका पुनर्जन्म का बल्लभगढ़ फरीदाबाद पलवल के पास उसका रिब्थ हुआ है तो उसने बताया उसका एक्सीडेंट हुआ था ट्रैक्टर से वो बच्चा बताता है कि मैं निकला शरीर से और जब 13 दिन तक मैं अपने घर के पास रहा तो गरुण पुराण में जो लिखा है तो वो उसकी बात मैच हो रही थी। उसने गरुण पुराण नहीं पढ़ा है। वो अपने एक्सपीरियंस बता रहा है और मैं गरुण पुराण पढ़ रहा था तो मुझे वो एक्सपीरियंस मैच हो रहे थे कि 13 दिन तक का बोल रहा है इसका मतलब सही
(1:17:15) बोल रहा है। तभी 13वीं होती है तभी 13 दिन होते हैं। योगिक शास्त्र में ये भी कहा है ना कि जैसे पांच वायु होते हैं। तो पहले अगेन व्यूअर्स के लिए आप मुझे बताइएगा मैं जहां गलत हूं। फर्स्ट 21 टू 24 मिनट्स कहते हैं समान वायु निकलती है। हां। उसके बाद 48 टू आई थिंक 64 मिनट्स आपकी प्राण वायु निकलती है। उसके बाद आपके करीब छ और 12 घंटे के बीच में उद्यान वायु निकलती है। फिर व्याना फिर अपाना अपाना। तो ये करीबन 13 दिन का प्रोसेस है। हां। और मेरे ख्याल से प्राण वायु तक हम बॉडी को रिवाइव भी कर सकते हैं। योगीज़ ने रिवाइव किया हुआ है। बॉडी को किया हुआ है।
(1:17:49) क्या आप इसके बारे में थोड़ा मुझे बता सकते हैं? देखिए रिवाइविंग के तो हम वो नहीं कहेंगे क्योंकि रिवाइव करना ठीक भी नहीं है। मैंने जैसे बताया मैन्युफैक्चरिंग डेट के साथ एक्सपायरी डेट फिक्स है। अगर आप कुछ एक्सटर्नल प्रोसेस या सिद्धि से उस शरीर को पुनर्जीवित करते हो तो उसके लिए वो दुखदाई होगा। जैसे उस बच्चे ने बताया कि जब मैं शरीर से निकला तो मुझे एक तांत्रिक ने कैद कर लिया दिल्ली के अंदर। यह भी मैंने बहुत सुना है। तो तांत्रिक ने जब मुझे कैद कर लिया तो मैं उसकी बोतल में बंद रहा और मैं यह सोच रहा था कि वापस मैं कैसे निकलूं? तो एक
(1:18:20) दिन उसकी बोतल हवा के जोर से गिर गई। ब्रेक हुई तो मैं आजाद हो गया। एंड देन आई स्टार्टेड रनिंग बैक टू माय होम। लेकिन वहां तब तक तो मेरी बॉडी बॉडी जल चुकी थी। सब हो चुका था। तो अब मैं जाऊं कहां? अगर तो बॉडी नहीं जलती तो क्या करता? तो रिवाइव करता ना। वो आत्मा घुसने की कोशिश करती ना। और घुसती तो वो क्या करती? लोगों को परेशान करती क्योंकि वो एक्सटर्नली अब दोबारा रिवाइव कर रही है। जो कि उसकी नेचुरल डेथ के टाइम से एक्स्ट्रा टाइम मांग रहे है। तो आपने कहा एक तांत्रिक था। उसने इसके सोल को कैप्चर कर दिया। किस लिए कैप्चर
(1:18:46) किया होगा? इसलिए कैप्चर किया कि अपने कर्म पूरे कराना। जैसे मैंने बोला ना किसी और पोजेशन बॉडी किसी और पर चढ़ा के मुझे उसके मन को केंद्रित करना है। उसको वशीकरण करना है। अपने कर्तव्य करवाने हैं। सो ये जो सोल्स होती है इनके पास बॉडी तो होती नहीं पर दे कैन डू द वर्क। जैसे मतलब मुझे फ्लैश कार्ड खेलने हैं और मुझे पता करना है उसके फ्लैश कार्ड में क्या है? तो मैं बोलूंगा उधर से खड़े हो के बताओ मेरे को। बिकॉज़ तांत्रिक कैन सी दी सोल ना। तो वो बात कर रहा है। बोले बताओ वो बोलेगा जी इक्का बोल दो तो इक्का बोल के जीत जाएगा
(1:19:11) वो। ऐसी चीजों के लिए यूज़ करते हैं। हां नेगेटिव चीजों के लिए यूज़ करते हैं। वशीकरण के लिए लड़की के ऊपर चढ़ जाओ। बोलो शादी के लिए हां बोल दे। बोलेगी हां बोल देती हूं। ये डिसबॉडी बीइंग से कराते हैं। हां उसी से कराते हैं। और कैसे तांत्रिक और क्या ये तो मैंने बोला ये सिद्धि का क्या फल है जो लोगों के लिए कष्टकारी है। वशीकरण करना टॉर्चर कर रहे हो आप किसी को। और इनकी लेकिन डेथ बहुत पेनफुल होती है ना तांत्रिक्स की। बहुत बुरी। अभी एक थे वो हमारे जानकार थे। ये उन्होंने गोरखनाथ सिद्धि करी थी। तो उसने कुछ सोल भेजी थी किसी को मारने के
(1:19:37) लिए। वो सामने वाला व्यक्ति पावरफुल था। वैदिक था। वैदिक होने के कारण वो सोल उसको अटैक नहीं कर पाए। वो बोली हम तो निकल गए। अब वो री अटैक करने उस पर आई एंड ही डाइड एट द एज ऑफ़ 41 ओनली उसको आकर के सोर्स ने रीअट कर दिया। इसलिए तांत्रिक विद्याएं या जो भी विद्याएं हैं देखने में बड़ी अट्रैक्टिव लगेंग कि हम ऐसा कर सकते हैं, ऐसा कर सकते हैं। पैसा आ सकता है, पावर आ सकती है, कोई भी हमारा हो सकता है। किसी का नाश कर सकते हैं, विनाश कर सकते हैं। बट ये तो सारा डिस्टर्बिंग सोसाइटी क्योंकि कुछ कार्मिक रिएक्शन चल रहे हैं ना नेचुरली भगवान के
(1:20:06) विधा है। आप उस विधा में इंटरफेयर करके अपनी विधा से उसको परिवर्तन करना चाह रहे हैं। इट मींस यू आर इंटरफेयरिंग दी इकोलॉजिकल सिस्टम। करेक्ट। करेक्ट। तो ये प्रिवेंट कैसे करें? जैसे मेरी कल सोल हेड मैं निकल गई। अब मेरे को कोई तांत्रिक ने ट्रैप कर दिया। कोई तरीके उसके लिए तो हम जो वैदिक क्रिया करेंगे शम्मशान में पिंडदान पूजन तेरवी वो इसीलिए होता है ताकि कोई आत्मा ट्रैप ना करे। अच्छा उसके लिए होता है। ओके एक कांसेप्ट है प्रभु जी भैरवी यातना का। लाइफ टाइम्स ऑफ कर्मा बिगिन टू प्ले आउट एक बहुत ही छोटे लेकिन बहुत ही इंटेंस मोमेंट में।
(1:20:40) भगवान गीता में बोलते हैं अंत काले चमामेव स्मरण मुक्तवा कलेवरम अंतकाल जब आता है तो उसमें एक पूरी पिक्चर चलती है एलसीडी स्क्रीन के ऊपर व्हाटएवर यू हैव डन इन योर पास्ट लाइफ दिस लाइफ तो सारा का सारा दिखाते हैं पूर्व में तुम स्त्री थे तुम्हारी आसक्ति एक पुरुष में थी तुम पुरुष बने तुमने पुरुष बन के ये ये कर्म किए और अब तुम्हारे कर्मों का लेखाजोखा यहां समाप्त हो रहा है क्या तुम निश्चय करते हो अगले शरीर में जाकर के अब अब तुम सटल हो गए। तो आदमी कहता है मैंने तो इतने पाप किए हैं। इतने पाप किए हैं। मेरी तो मुक्ति ही नहीं हो
(1:21:17) सकती है। बोले कम से कम अभी भगवान का नाम बोलो। अंतकाल में भगवान का नाम बोलो। लेकिन उसका एनवायरमेंट ही नहीं है। बाहर कोई बोल ही नहीं रहा। तो वो जीवात्मा तो शरीर छोड़ ही रही है तो बोल ही नहीं सकती है। अंतकाल में सारी कार्मिक अकाउंट आकर खड़ा हो जाएगा। जितना झूठ फरेब जो भी किया इसलिए कहते हैं बचपन से कोमार आचरित प्रज्ञा अब कोमार अवस्था से ही बच्चे को वैदिक क्रियाओं में लगा दो। ताकि जब उसका अंतकाल जब भी आए तो उसके दिमाग में जो उसने वैदिक क्रियाएं करी यज्ञ किए पूजा करे धाम किए तीर्थ किए जो भी किया वो सब एक्यूमुलेट हो के इकट्ठा उसको आएगा देन ही
(1:21:49) कैन टेक आउट द गॉड्स नेम और अगर उसने अंत में स्मरण नहीं किया तो उसका आपको बताया मैंने कि उसकी फिर योनि परिवर्तन हो जाएगा हम बताते हैं कि एक राजा थे वो राजा की इच्छा थी राजा ने बड़े इतना उत्तम स्थिति में पहुंच गया था कि उसको भगवान के धाम जाना ही जाना था लेकिन उसकी जब शरीर छूटा उसका मंत्री उसको जानता था कि बड़ा वैदिक व्यक्ति है। अब जब राजा का शरीर छूटा उसने बोला देवता लोग ना पुष्पवृष्टि करेंगे। फ्लावर्स गिरेंगे ऊपर से देखना सारा राज्य इकट्ठा हो गया। राजा जी जाने वाले हैं। क्रॉनिक डिसीज हो गया है। तो जरूर पुष्प गिरेंगे क्योंकि धाम को जाके बड़े नेक
(1:22:26) राजा हैं। पर देखा कि एक भी पुष्प नहीं गिरा। तो मंत्री को बहुत बुरा लगा कि राजा के वर्ड्स पूरे नहीं हुए। और अब सारा राज्य उनको गलत राजा मानेगा। झूठ बोला मानेगा। तो मुझे कुछ करना चाहिए। उन्होंने सोचा राजा इतने ज्ञानी थे। ऐसा क्या हो गया? इन्होंने सारे अटैचमेंट छोड़ दिए थे। कुछ तो अटैचमेंट था जिसके कारण इनको पुष्पवृष्टि नहीं। देखा तो उनके राज्य में जहां शरीर छूटा उसके वहां पर एक विंडो थी खिड़की। खिड़की के बाहर एक बेर का पेड़ था। अब राजा को बेर बड़े पसंद थे खाना। कह रहे इनको बेर पसंद थे। कहीं बेर देखते हुए शरीर छूटा। बेर में कीड़ा तो नहीं बन गए।
(1:22:59) अब 13 दिन तक की 13वीं हुई जब वह आत्मा को डिसीजन हुआ और फिर उस मंत्री ने क्या किया? सारे समाज को बोला कि अभी एक वर्ष बाद हम लोग राजा की जो बरसी करेंगे ना उसमें बेर की भोज लगाएंगे। सारे बेर तुड़वाए उस पेड़ पर जितने थे और सबको चिला बोले इसमें अगर कोई कीड़ा निकले तो मुझे बताइएगा। तो एक बेर में कीड़ा निकला। तो उन्होंने कहा कि इस कीड़े को मैं मारने का पाप ले रहा हूं। क्योंकि अगर आप कीड़े को भी मारते तो आपको कीड़ा बनना पड़ेगा। मैं कीड़े को मारने का पाप ले रहा हूं। लेकिन मैं राजा की मुक्ति चाहता हूं। तो उसने वो कीड़े को मारा। आकाश से पुष्प गिरने लगे।
(1:23:32) ओ लिटिल अटैचमेंट टू दी फूड ऑफ प्रोडक्ट आल्सो कैन ब्रिंग यू बैक टू दिस मेटल वर्ल्ड गॉड प्रभु जी मेरे पास क्विक रैपिड फायर है आपके लिए पहला क्वेश्चन स्लीप में मरना हां क्या एक अच्छी डेथ माना जाता है इसको देखिए एक्सटर्नली और इंटरनली दो प्रकार की डेथ है एक्सटर्नली आदमी सोचता है कि मुझे ज्यादा कष्ट ना हो सोते-सते हम मृत्यु आ गई हार्ट अटैक हुआ रात में अरे पिताजी की बड़ी अच्छी मृत्यु हुई रात को सो रहे थे चले गए किसी की रोड पर हो गई। बड़ी कष्टकारी मृत्यु हुई। एक्सीडेंट हो गया। तड़-तड़प के मरना पड़ा हॉस्पिटल में। इन बोथ द केसेस डेथ इज इनविटेबल।
(1:24:14) मृत्यु दोनों केस में आ रही है। तो एक्सटर्नली जो आप कह रहे हैं ठीक है कि हर आदमी सोचता है कि मेरी थोड़ा सिंपल ज्यादा कष्ट ना हो। लेकिन देखा जाए तो इन दोनों केसेस में आपको पता नहीं चल रहा। कष्ट तो सोल को हो रहा है। सोल को किस चीज का कष्ट होता है? शरीर का कष्ट नहीं होता। सोल को कष्ट होता है अटैचमेंट का। कहते हैं जब मृत्यु आती है 400 बिच्छू डंक मारे इतना कष्ट होता है। अच्छा एक जगह पर स्कर्पियन मारे तो कितना दर्द होता है। स्कर्पियन बाइट 4ाउज स्कर्पियंस लिखा है। 400 बिच्छू डंक मने इतना पेन होता है जब सोल को बॉडी से अलग करते हैं।
(1:24:52) हर सोल को हर सोल को और एस्ट्रिक मार्क में नीचे लिखा है जिसका जितना ज्यादा अटैचमेंट संसार से है। प्रापंचिक संसार में ही रचे पचे बच्चे परिवार में। प्रापंचिक संसार में रचे पचे हैं उतना ज्यादा एंड यू आर फ्री फ्रॉम अटैचमेंट फ्री मूव फ्रॉम वन बॉडी टू अनदर बॉडी। अ सोल रिब्थ का सबसे छोटा टाइम क्या होता है और सबसे बड़ा टाइम क्या होता है? सबसे छोटा टाइम है फोर इयर्स। अच्छा मिनिमम फोर इयर्स वो लेगा रिब्थ होने में। सोल एक साल तो ट्रेवल। हां। एक साल के बाद में उसका बरसी जब कंप्लीट हो गई तो उसके बाद में उसकी प्लेसमेंट टू दी नर्क स्वर्ग और एक लोक है जिसकी हमने
(1:25:31) चर्चा नहीं की पितृलोक जिसमें पितृ श्राद्ध का भोजन पहुंचता है सो पित्रोक जो है दैट इज अ वेटिंग स्टेशन स्टेशन पहुंच गए ट्रेन आई नहीं है आपका टिकट भी बुक है 4 घंटे 5 घंटे लेट है तब तक आप क्या करोगे वेटिंग रूम सो पितृलोक इज अ वेटिंग रूम बिफोर गोइंग टू नर्क और स्वर्ग डिसीजन जन ही नहीं हुआ। इतनी लंबी फाइल है। संयम पुरुष संयमपुरी लोक में आप पहुंचे। वो बोले यम यमराज बोले कि रुको अभी इसका निर्णय होने में टाइम लगेगा। इनको पितृ में बिठा दो थोड़ी देर के लिए। तो पितृक में बैठ जाना इस वेटिंग स्टेशन। इसलिए जो यहां श्राद्ध का भोजन लगाते हैं
(1:26:10) लोग बोलते हैं ना अरे वो तो मर गए होंगे। वो पता है उनको हमारा मिलेगा। अरे तो अभी तो नर्क में भी नहीं गए, स्वर्ग में भी नहीं गए। कोई रिसोंसिबिलिटी नहीं ले रहा उस आत्मा की। अभी तो वेटिंग में ही है। तो उसको भोजन कौन देगा? वही फैमिली के जो लोग हैं वही डिसेंडेंट्स ही उसको अपने एनसेेस्टर को भोजन देंगे। तब वो पितृ का भोजन जाएगा कैसे? यह क्रिया सूक्ष्म होती है। जैसे इंडिया में बैठा व्यक्ति अमेरिका में अपने बच्चे को ₹1 लाख देना चाहता है। इंडियन करेंसी में डालेगा। वहां उसको डॉलर में निकल जाएगा। क्या पैसे ऐसे उड़-उड़ के जा रहे
(1:26:43) हैं अमेरिका? ट्रांसफर हो रहे हैं। एक्सटर्नली तो नहीं दिख रहा ना। आपने तो इस बैंक में दी। इंडियन बैंक में वो इंटरनली क्या हुआ? इंटरनेट से उसके बैंक में शो हो रहा है कि आ गए। अब वो जब Paytm या एटीएम में डालेगा कार्ड तो उसको करेंसी डॉलर में निकल रही है। तो श्राद्ध का भोजन, पूरी, सब्जी, आलू, रोटी जो भी बनाया ब्राह्मण को या गाय को दिया इंडियन। अब सूक्ष्म माइग्रेशन हो रहा है। वाया एयर मीडियम दैट भोजन इज गोइंग टू योर पित्रा। और वो वहां पर जब निकालेगा तो उसको उसके भोजन के रूप में मिल जाएगा। फैमिली मेंबर्स रोते हैं जब किसी की डेथ
(1:27:19) होती है पर सोल को ये रोना पसंद नहीं आता। हां नहीं पसंद है क्योंकि जो हमारे टियर्स होते हैं ना दे बिकम कफ। जैसे कफ है ना हम उसको स्पिट करते हैं। कफ को पीते खाते नहीं है। पर सोल को टियर्स जो है कफ रूप में खाने पड़ते हैं। अच्छा। इसलिए जब परिवार में शरीर छूट जाता है रोना नहीं चाहिए। जितना आप रुदन करेंगे उतना ज्यादा सोल को कष्ट होता है। कफ रूप में उसको भोजन मिलता है। गरुण पुराण कहती है। इमोशनल एंगल भी देखें आप जो मैंने फील किया है। छोटे बच्चे को प्रप में छोड़कर आओ। भाई उसको स्कूल हम ही भेज रहे हैं। अब बच्चा चाह रहा है कि मां मेरे साथ रुक
(1:27:55) जाए। तो मां छोड़कर आती है। बच्चा जोर-जोर से रो रहा होता है। मां को बिल्कुल मन नहीं करता। हार्ट बड़ा हार्ड टोन हार्ट बनकर आती है। दो घंटे बाद सर मैडम को फोन करती है। हाउ इज डूइंग? क्यों फोन करती है? पता करने के लिए कि सेटल हुआ कि नहीं हुआ? सिमिलरली जीवात्माएं जो परिवार में होती हैं, शरीर छोड़ती है तो उसको जब रोते हैं तो बहुत कष्ट होता है। ये क्या कर रहे हैं? ऐसा क्यों कर रहे हैं? तो पूछती है भाई सेटल करने के लिए कोई नहीं है क्या? कोई तो इनको गीता भागवत गरुड़ पुराण सुना दो। बहुत नहीं रो रहे हैं और ज्ञान की बातें कर रहे हैं तो बड़ा पसंद है।
(1:28:31) अच्छा वेरी नाइस। कितने तेरे को संस्कार कितने समझदार थे। जैसे एक चीज और है। द मोर यू आर अटैच्ड यू विल कम बैक अगेन द सेम फैमिली। ओ इसको सोल कॉन्ट्रैक्ट्स बोलते हैं नहीं। अच्छा सेम फैमिली में लोग खुश भी होते हैं। देखो दादा जी से दिख रहा है। अरे दादा जी वापस आ गए। आत्मा तो अच्छा हुआ। उनको मुक्त होना चाहिए था। वो वापस आ गए। कर्म बंधन ऐसे वापस ले आया। इवन टू दी रेप्टाइल्स इन आवर फैमिली लिज़र्ड्स हैं। ये है कोई दादी और सती जो आसक्त थी पर कर्म इतने नहीं थे कि मुक्त हो जाए तो लिज़र्ड बनेगी लेकिन रहूंगी उसी परिवार में। अच्छा
(1:29:04) सो इसलिए आसक्ति बहुत बुरी चीज है। एक बार एक छोटी सी स्टोरी बताकर मैं एंड करता हूं। व्यक्ति था वो हरिद्वार पर रहता था। जप करता था, तप करता था, ध्यान करता था, योग क्रिया करता था। तो नारद मुनि निकले। नारद मुनि भगवान के पास गए। भगवान इतने दुनिया में लोग योगा प्रैक्टिस कर रहे हैं। भक्ति योगा, कर्म योगा, ज्ञान योगा, हट योगा। आप लाते क्यों नहीं उनको अपने धाम में? भगवान बोले वो ऊपर से कर रहे हैं। अंदर से कोई नहीं आना चाहता। नारद जी बोले कैसी बात करते हो? मैंने देखा एक आदमी एकदम आंख बंद करके दिन रात लगा हुआ है। जप कर रहा है। ट्राई कर लो।
(1:29:42) नारद जी उसके पास गए। उसको दिखने लगे। बोला अरे नारद मुनि आपको शास्त्रों में पढ़ा था। मुझे दिख रहा है। थैंक यू फॉर कमिंग। बोले तुम्हारे को भगवान ने बुलाया है। चलोगे घर चलना तो चाहता हूं। पर अभी एक्चुअली क्या है ना मेरे बच्चों की शादी नहीं हुई है। तो मेरा भी बहुत पूरा प्लानिंग है। मैं जाऊं भगवान के धाम नहीं बच्चों की प्लानिंग है। एक बार आप थोड़ा सा काल मुझे दे दीजिए। नारद मुनि बोले ठीक है। नारद मुनि ऊपर चले गए। अब ऊपर का मैंने बताया वहां तो 1 मिनट यहां का कई मंथ्स निकल जाएंगे। वो एक क्षण के लिए ऊपर गए। वापस आए तो यहां वर्ष निकल
(1:30:17) गए। नारद जी वापस आए तो देखने लगे। उस घर में वह आदमी नहीं दिख रहा। जप करता था। ध्यान लगाया त्रिकाल अपनी ज्ञान से उन्होंने देखा सर्वज्ञ नारद मुनि ने अरे उसी घर में एक बुल बन गया बैल तो बोले अरे तुम बैल बन गए हो काशीनाथ जी नारद जी कह रहे अब तो तुम फिर भी गऊ योनि में आ गए हो मनुष्य योनि से बोला रिवर्स साइकिल चल रहा है जो कौ लास्ट योनि से मनुष्य गए मनुष्य काऊ बन गया बोले अब तुम काऊ बन गए रिवर्स योनि में चले गए हो अब तो चलो भगवान बुला कह रहे हैं आपकी बड़ी कृपा हुई। बच्चों की शादी हो गई। लेकिन शादी के बाद ऐसे हो गए कि घर में
(1:30:57) बड़ी गरीबी आ गई है। किसान के खेत में काम करने के लिए ना ट्रैक्टर है ना बुल है। तो एक साइड मेरा बेटा लगता है। एक साइड मैं लगता हूं तो मिलकर हम खेत जोतते हैं। थोड़ा सा समय दे दीजिए। एक बार अनाज उत्पन्न होने लगा। फिर मैं आपके साथ ही चलो। मैंने क्या करना है? भगवान के घर ही जाना है। नारद जी फिर चले गए। फिर ध्यान लगाया वापस आए तो देखा कि उसी घर में एक डॉग बनकर बैठे हुए हैं। कह रहे अरे आप डॉग बन गए हो। काशीनाथ ये क्या किया और नीची योनि में आ गए। कह नारद जी आपकी बड़ी कृपा हुई। इस बार बहुत अच्छी फसल आई। इतना पैसा आया बच्चे इतने लापरवाह हो गए हैं। घर में
(1:31:33) ताला भी नहीं लगाते चले जाते हैं। तो मैं बाहर डॉग बन के घूमता हूं गली में ताकि मेरे बच्चों के घर के अंदर चोरी ना हो। चलोगे काशीनाथ। कह थोड़ा समय दे दीजिए। एक बार बच्चों को मैं बना दूं ना थोड़ा संस्कारी समझदार फिर चलूंगा। ठीक है चल फिर एक क्षणवाद बाद आए यहां कई वृष बीत गए। अब देखा कुत्ता भी नहीं है। फिर ध्यान लगाया तो पता चला कि वो वो जो घर की अंदर जो फूड ड्रेन होती है नाली घर की खाने की सिंक किचन की उसमें कॉकरोच है। तो बोले अरे काशीनाथ तुम कॉकरोच बन गए हो। अब तो चलो। कह रहे नारद जी मैं तो चलना चाहता हूं। लेकिन इसके अंदर जब खाना खाते हैं मेरे
(1:32:11) बच्चे तो अन्न छोड़ देते हैं थाली में। इनके बच्चे इतने लापरवाह हैं। इनको नहीं पता अन्न में अन्नपूर्णा है और अन्न अगर नाली में गया तो अपराध होता है अन्नपूर्णा का। इनको पाप लगेगा। इसलिए मैं कॉकरोच बनके इनका अपराध खत्म करके अन्न ड्रेन का सारा खा जाता हूं। सो थोड़ा समय दे दीजिए। थोड़ी देर में उसका वो आया बच्चा। उसने देखा कॉकरोच। पापा कॉकरोच घर में। अब वो तो दादाजी थे। बच्चे का बच्चा आया। उसने एक डंडा लिया कॉकरोच को मारने के लिए। भागा पीछे भागा हिट लिया। यह लिया वो ले चिक करके मार दिया उसको। तब वो आत्मा बाहर निकली। तब नारद जी बोले
(1:32:48) अब चलोगे कि और पिटना है अभी। कह नारद जी अब समझ गया कोई किसी का नहीं होता। देन ही लिवरेट। सो वी आर सो अटैच्ड। वी डू नॉट वांट टू गो। तो जितना भी हम ज्ञान की चर्चा कर लें ये सब वर्बल रहता है। इंटरनली चेंज नहीं होता कुछ भी। हम हम हम सो वंस हु वांट्स दैट लिबरेशन वो उस पाथ पे चले तो निश्चित रूप से उसकी एक अच्छी मृत्यु हो सकती है। संसार चक्र मुक्त हो सकता है उसका। इन केस यू वुड लाइक टू बी अ पार्ट ऑफ आवर ऑनलाइन एंड इनपर्सन योगा, डाइट एंड स्पिरिचुअल प्रोग्राम्स। यू कैन जॉइन आवर WhatsApp ग्रुप बिलो वेयर वी पोस्ट ऑल आवर
(1:33:26) अपकमिंग प्रोग्राम्स एंड गिव फ्री टिप्स ऑन हेल्थ, डाइट एंड लाइफस्टाइल। ओम

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