Friday, September 18, 2026

SEX education by Padma Shri Dr. Prakash Kothari | World AIDS Day | An initiative of Study IQ

SEX education by Padma Shri Dr. Prakash Kothari | World AIDS Day | An initiative of Study IQ

Author Name:StudyIQ IAS

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Title: SEX education by Padma Shri Dr. Prakash Kothari | World AIDS Day | An initiative of Study IQ

Author Name: StudyIQ IAS

Description: New StudyIQ Channel -    / @studyiqupsccse   | Subscribe Now for Exclusive Videos and Amazing Content. In this video, Padma Shri Dr. Prakash Kothari shares essential insights on sex education, especially pertinent on World AIDS Day. Join this Study IQ's initiative to foster awareness and understanding around sexual health, guided by the expertise of a distinguished medical professional. This session by Study IQ aims to contribute to a broader conversation on health and well-being, promoting education and awareness on critical topics.

Timestamps:
00:00:00 Sex Education Complete Information
00:01:28 Introduction to Sex Education
00:28:36 Increasing Pleasure
00:52:07 Male Sex Organ
01:07:41 Sexual Myths
01:40:32 Male Sexual Problems and Solutions
03:06:25 Female Sexual Problems and Solutions
03:54:24 Anatomy and Physiology of Sexual and Reproductive Organs
04:14:34 Methods of Sexual intercourse
04:39:12 Menstruation & Pregnancy
05:15:41 Marriage and Sex life
05:40:19 Sex Addiction
05:59:48 STI-Sexually Transmitted Infections
06:35:00 Kamasutra-Ancient Yet Modern
07:04:47 Condoms Types and Uses
07:27:19 Understanding Relationships
07:54:41 Sex enhancing medicines
08:16:50 Changing trends of Sex
08:38:15 Contraception
09:10:58 Sexuality and Growing Old
09:26:36 Having safe first Sexual Experience
09:56:55 Gender Identity and Sexual Orientation-LGBTQ
10:23:44 Before and after sex
10:41:19 Sexual Hygiene
10:53:38 Tips for A Better Sex Life
11:22:05 Sexual Pleasure enhancing mechanisms
11:41:11 HIV-AIDS
12:04:48 Love, Sex and etc
12:33:51 Male Sexuality
12:47:52 Female Sexuality
13:01:36 Enhancing Sexual Health in Natural Way


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Transcript:
(00:06) आज हम एक बहुत ही महत्त्वपूर्ण और संवेदनशील विषय पर बात करने जा रहे हैं और वह है यौन शिक्षा यानी सेक्स एजुकेशन समाज में यह विषय आमतौर पर एक टैबू माना जाता है जिसके कारण हम इस पर खुलकर बात करने से झिझक हैं दोस्तों सेक्सुअलिटी मानव जीवन का एक बुनियादी पहलू है फिर भी यह अक्सर एक गुप्त रहस्य बना हुआ है जो बंद दरवाजों और वर्जित बातचीत के पीछे छुपा हुआ है लेकिन आज के दौर में इसे खुलकर और संवेदनशीलता से समझना जरूरी है सेक्स एजुकेशन ना केवल जनसामान्य के स्वास्थ्य के लिए महत्त्वपूर्ण है बल्कि यह हमें बेहतर और समझदार रिश्तों की ओर मार्गदर्शन प्रदान
(00:49) करता है एंड हु बेटर टू गाइड अस थ्रू दिस सेंसिटिव टॉपिक देन द एस्टीम पद्मश्री अवॉर्डी डॉक्टर प्रकाश कोठारी दोस्तों डॉक्टर कोठारी इ अ रिनाउंड सेक्सोलॉजिस्ट हु हैज डेडिकेटेड हिज एंटायस फेलिंग मिथ्स एंड प्रमोटिंग हेल्थी कन्वर्सेशन अराउंड सेक्सुअल हेल्थ सो वेदर यू आर क्यूरियस सीकिंग गाइडेंस और सिंपली ओपन टू अंडरस्टैंडिंग द इंट्रीकेसीज ऑफ ह्यूमन रिलेशनशिप्स दिस मैराथन वीडियो ऑन सेक्स एजुकेशन इज फॉर यू लेट्स एंबार्क ऑन दिस इनलाइटनिंग जर्नी टुगेदर प्रमोटिंग अंडरस्टैंडिंग एंपैथी एंड रिस्पेक्ट फॉर एवरीवनस चॉइसेज तो चलिए इस यात्रा को आरंभ
(01:32) करते हैं ऋषि वात्सायन का ये कहना है कि सेक्स और सेक्सुल डिजायर एक नदी के बाड़ के जैसी चीज है जिसे आप रोक नहीं सकते लेकिन चैनला जरूर कर सकते हैं और सही चैनेलाइज करने का एक मात्र जरिया है और वह है सेक्स एजुकेशन वेलकम टू द कोर्स ऑफ सेक्स एजुकेशन एक खास चीज समझ ले कि सेक्स एजुकेशन का मतलब म ये नहीं है कि हमें लोगों को वो चीज सिखानी है जो वो नहीं जानते हैं लेकिन सेक्स एजुकेशन का मतलब यह है कि हमें उस तरह का आचरण करना सिखाना है जिससे वोह अभ्यस्त नहीं है माने इस तरह का वर्तन करना सिखाना है जिस तरह से वो बर्ताव नहीं करते कहने का मतलब है इट चेंज
(02:19) ऑफ बिहेवियर व्ट आई वा टू टेल यू ट सेक्स एजुकेशन डज नॉट मीन टीचिंग पीपल टू नो व्ट दे डू नॉट नो बट इट मीस टीचिंग देम टू बिहेव एज दे डू नॉट ब है इस कोर्स का यह पहला लेक्चर है मैं कुछ अपने बारे में भी आपको बताना चाहूंगा मैं खुद एक मेडिकल डॉक्टर हूं और साथ में मैंने इसी विषय में पीएचडी भी की है मैं करीबन 50 से ज्यादा साल से सेक्सुअल मेडिसिन की ये प्रैक्टिस कर रहा हूं और मैं इस विषय में 500 से अधिक मरीज आज तक देख चुका हूं फिलहाल जो हम लोग डिस्कशन करेंगे वो पूरा साइंटिफिक होगा वैज्ञानिक होगा और साथ-साथ
(03:08) मेरे तजुर्बे का इसमें पूरा निचोड़ भी हो इससे पहले लेक्चर में माने यही पहले लेक्चर में हम डिस्कस करेंगे कि सेक्स एजुकेशन क्यों कब किसे कौन और कैसे देना चाहिए इस पर ध्यान केंद्रित करें इसे हम कहते हैं कि भाई फाइ डब्लू ऑफ सेक्स एजुकेशन माने व्ट इज सेक्स एजुकेशन वई सेक्स एजुकेशन इज नेसेसरी टुडे वन इट शुड बी गिवन द आइडियल टाइम हु शुड गिव एंड म टू गिव अभी हम शुरुआत करते हैं सेक्स एजुकेशन क्या है उसका आयाम क्या
(03:59) है व्हाट इज सेक्स एजुकेशन पहले हम जान ले कि सेक्स एजुकेशन का मतलब लोगों के दिमाग में ऐसे रहता है कि जैसे सेक्स में मजा ज्यादा कैसे आए सिर्फ यही सेक्स एजुकेशन है लेकिन सेक्स एजुकेशन का मतलब सिर्फ यह नहीं सेक्स एजुकेशन में आता है रिप्रोडक्टिव सिस्टम मतलब प्रजन के अवयवों की जानकारी जिसमें एक्सटर्नल पार्ट्स भी होते हैं और इंटरनल पार्ट्स भी होते हैं एक्सटर्नल पार्ट अगर पुरुष में देखा जाए तो ष्ण ट पीनस और अंड कोस जिसे अंग्रेजी में हम लोग टेस्टिकल्स कहते हैं और स्त्रियों में
(04:46) पहले क्लिटोरिस उसके नीचे यूरेथ्रा और वजाइना जिसे योनि कहते हैं इंटरनल पार्ट्स अगर देखा जाए तो पुरुष के अंदर रहते हैं वास डिफरेंस और शुक जिसे शुक्र नलिका कहते हैं जो अंडकोष से निकलती है सेमिनल वेसिकल जि शुक्र कहते हैं पुस्त ग्रंथि यानी प्रोस्टेट और यूरेथ्रा यानी मूत्र मार्ग स्त्रियों में जो इंटरनल पार्ट रहते हैं उसे कहते हैं ओवरी अंडाशय कहते हैं उसमें से फैलोपियन ट्यूब नजदीक में यानी अंड वाहिनी कहते हैं और उसके बाद यूटरस माने
(05:31) और गर्भाशय का मुंह नीचे जिसे सर्विक्स कहते हैं जो योनि मार्ग में खुलता है जिससे वजाइना कहते यही पार्ट्स डायरेक्टली और इनडायरेक्टली रिक्रिएशन के लिए भी काम आते हैं और प्रोक्रिएशन के लिए भी काम आते हैं माने आनंद भी प्रदान करते हैं और गर्भधारण भी इसके साथ-साथ गर्भ धारण कैसे होता है और गर्भ निरोध कैसे किया जाता है इसका भी ज्ञान सेक्स एजुकेशन में दिया जाता है गर्भधारण मतलब कंसेशन ए गर्भ निरोध मतलब कांसेप्शन बच्चा कैसे पैदा होता है और बच्चा कैसे पैदा ना हो उसकी भी
(06:18) जानकारी दी जाती है सेक्स एजुकेशन के आयाम साथ में साइको सेक्सुअलिटी का भी ज्ञान दिया जाता है इसका मतलब है कि सेक्स सिर्फ एक शारीरिक क्रिया नहीं है इसमें शारीरिक और मानसिक दोनों क्रियाओं का मिलाप है दोनों क्रियाओं का समन्वय है सेक्स एजुकेशन में यह भी देखा जाता है कि सेक्सुअल ओरिएंटेशन उसका मतलब है कि आप किस तरह से आकर्षित होते हैं कुछ लोग सजातीय होते हैं कुछ लोग विजातीय होते हैं कुछ लोग दोनों होते हैं और कुछ लोग को बिल्कुल ही किसी के प्रति आकर्षण नहीं होता साथ में सेक्सुअली ट्रांसमिटेड इंफेक्शन इंक्लूडिंग एचआईवी एड्स इससे कैसे बचना है
(07:07) इसकी भी जानकारी सेक्स एजुकेशन के तहत दी जाती सेक्स एजुकेशन के अंदर आपसी संबंध यानी रिलेशनशिप इंटीमस प्यार मोहब्बत और मोहब्बत की आखिरी मंजिल ट सेक्स इस सबका विवरण उसमें आ जाता है उसमें और एक बात है वो भी सिखाई जाती है और वह है वन एंड वेयर वन शुड नॉट हैव सेक्स वेर एंड वन वन शुड नॉट इंडल इन सेक्स मतलब कब और कहां सेक्स नहीं करना चाहिए इसकी भी जानकारी दी जाती सेक्स एजुकेशन में हर एक पहलू पर ज्ञान दिया जाता है सेक्स एजुकेशन का मतलब यह नहीं है
(07:54) कि सिर्फ बच्चे पैदा करने का ज्ञान यह एक गलत फहमी है जो दूर की जाए अब हम दूसरे डब्लू प आते वई सेक्स एजुकेशन इ नेसेसरी टुडे माने सेक्स एजुकेशन की जरूरत आज क्यों है 100 साल पहले तो इसकी जरूरत बिल्कुल नहीं थी फिर आज क्यों है मैं जहां भी लेक्चर देने के लिए जाता हूं चाहे वह स्कूल्स हो कॉलेजेस हो प्राइवेट क्लब हो कहीं भी मुझे यह सवाल लोग अक्सर करते हैं डॉक्टर साहब हमारे जमाने में तो सेक्स एजुकेशन की जरूरत थी नहीं आज क्यों है तो मैं इस तरह से उनको एक्सप्लेन करता हूं कि 100 साल पहले लोगों की शादियां 13 और 14 साल की उम्र में हो जाती
(08:41) ी उस वक्त कुछ नियमों का चुस्त पालन करना पड़ता था जैसे कि बॉयफ्रेंड के साथ जाना नहीं है उसको हाथ लगाना नहीं है उससे कोई शारीरिक संबंध बनाना ही है ऐसे कुछ नियमों का चुस्त पालन करना पड़ता था लेकिन ये चुस्त पालन कुछ हफ्तों या महीनों के लिए ही करना पड़ता जो मुमकिन था क्योंकि फिर उनकी कुछ हफ्तो में शादी हो जाती थी कुछ महीनों में शादी हो जाती थी आज लोगों की शादियां 30 साल के इर्दगिर्द होती है लेकिन अंकुश के नियम देखे जाए तो वही के वही है अब यह नहीं करना वो नहीं करना किसी को हाथ लगाना नहीं किसी को हाथ लगाने देना
(09:27) नहीं यह सब नियमों का पालन कुछ हफ्तों या महीनों के लिए तो मुमकिन है लेकिन 1515 साल के लिए इस नियमों का चुस्त पालन करना एक आम इंसान के लिए लगभग नामुमकिन इंपॉसिबल है इसलिए लड़का लड़की फिजिकल बन जाते हैं करीब ज्यादा जोश पकड़ती है काम इच्छा जो है उसमें इजाफा होता है बढ़ जाती है और इसलिए स्वाभाविक है कि काम विषयक संबंध भी बढ़ जाते इसी वजह से आप देखेंगे कि अनिच्छी गर्भावस्था अनवांटेड प्रेगनेंसी जिसे कहते हैं टीनेज मदरहुड यानी कुमार मातृत्व सेक्सुअली ट्रांसमिटेड इंफेक्शन एचआईवी एड
(10:14) जैसी खतरनाक बीमारियां फैलने में काफी बढ़ावा हुआ है उसे रोकने का एक मात्र उपाय है सेक्स एजुकेशन साथ ही साथ प्यूबर्टी मतलब यवन प्रवेश का जो टाइम था वह अब जल्दी हो गया है माने लड़कियों को 11 12 की उम्र में महावारी याने मेंसस आ जाती है और लड़कों को 11 12 की उम्र में स्वप्न मेंथ याने स्लीप एमिशन या स्वप्न स्खलन कहते हैं वो हो जाता है एक तरफ शरीर में बदलाव आ रहा है हार्मोन बढ़ रहे हैं जिसके लिए उनका डिजायर बढ़ रहा है काम इच्छा बढ़ रही है जो से जुनून बढ़ रहा है और साथ ही साथ इंटरनेट टीवी प्रिंट इलेक्ट्रॉनिक मीडिया
(11:00) सोशल मीडिया यह सब और उत्तेजना बढ़ाते हैं ऐसे दृश्य दिखाई देते हैं कि उत्तेजना और बढ़ती जाती है जिससे कामेच्छा और बढ़ती जाती है और ऐसे माहौल में इस कामेच्छा को वह कैसे चैनला इज करें वह उनको पता ही नहीं क्योंकि यह युवक युवतियों को सेक्स एजुकेशन दिया ही नहीं जाता ऐसे माहौल में कई बार व्यक्ति की कामेच्छा उसका डिजायर उसकी ख्वाहिश कंट्रोलेबल हो जाती है और वह रेप जैसी हरकत कर बैठता है सेक्सुअल क्राइम कर बैठता है तो अगर उनको सेक्स एजुकेशन का ज्ञान पहले से दिया जाता तो व अपनी कामेच्छा को अपनी ख्वाहिश को अपने
(11:46) डिजायर को सही तरीके से चैनला इज कर सकते और सेक्सुअल क्राइम जैसी हरकतों से बच सकते साथ ही साथ अपने शरीर में जो बदलाव आते हैं उससे वह घबराते नहीं बेवजह फिकर चिंता में ना आ जाते वो अच्छी तरीके से उस बदलाव को हैंडल कर सकते इसलिए आज सेक्स एजुकेशन की अहम जरूरत है जो 100 साल पहले नहीं एक दूसरा एंगल हम अगर देश की इकोनॉमी पर नजर डाले तो कितना भी अच्छा बजट आए हम कितनी भी तरक्की करें लेकिन वह कामयाब नहीं रहेगी क्योंकि बढ़ती हुई जनसंख्या और एचआईवी एड्स की रोकथाम में ही यह सब
(12:33) इकोनॉमी खत्म हो जाएगी पूरी इकोनॉमी इसमें खर्च हो जाएगी जिन देशों में सही तरीके से सेक्स एजुकेशन दिया गया है वहां बढ़ती हुई जनसंख्या और एचआईवी एड्स की रोकथाम में भी काफी सफलता मिली इसलिए यह सेक्स एजुकेशन हमारे देश में वर फूटिंग यानी कि युद्ध स्तर पर देना जरूरी लेकिन आप किसी को भी पूछेंगे कि भाई यह ज्ञान आपको कहां से मिला मैं मेरी और आपकी बात कर रहा हूं हम दोनों एक ही जवाब देंगे गली के दोस्तों से प्रॉब्लम यह है कि गली के दोस्त जो जानकारी देते हैं उसमें अवाए ज्यादा और
(13:20) हकीकत कम होती उसी की वजह से कई बार तो यह गलिया ही सेक्स एजुकेशन की लाइब्रेरी बन जाती है और कई बार तो आपने देखा होगा ले भी बन जाती है तो यह सेक्स एजुकेशन आज के दिन में क्यों देना चाहिए इसके बारे में मैंने कहा अब हम आते हैं तीसरे डब्लू प और वह है यह सेक्स एजुकेशन कब देना चाहिए वन दिस सेक्स एजुकेशन शुड बी गिवन सेक्स एजुकेशन का कोई राइट या रंग टाइम नहीं होता हकीकत में सेक्स एजुकेशन की शुरुआत पालने से ही होती है सबकॉन्शियसली पेरेंट्स आर प्रोवाइड सेक्स एजुकेशन फ्रॉम द वेरी बिगिनिंग माता-पिता बच्चों को किस तरह से उठाते हैं कैसे स्पर्श करते हैं
(14:06) बच्चे को कैसे प्यार करते हैं बच्चे के साथ किस तरह का बर्ताव करते हैं ये उनके सेक्स एजुकेशन का एक इनडायरेक्ट आधार बन जाता है कई बार माता-पिता के आपसी संबंध भी उसकी जिज्ञासा को आवश्यक जानकारी और मार्गदर्शन प्रदान कर सकते हैं लगभग तीन साल के इर्दगिर्द जब बच्चा नहाता है ज उसे कपड़े पहनाते हैं ज उसके शरीर पहुंचते हैं जब बच्चे अपने प्राइवेट पार्ट को हाथ लगाते हैं तब उनको अच्छा लगता है दे प्लेजर वैल्यूज इवॉल्व इ लेकिन पेरेंट्स को उन्हे सिखाना चाहिए कि यह प्राइवेट चीज है और यह प्राइवेटली करना बेहतर है जैसे दूसरी टेबल मैनर सिखाते हैं
(14:54) उस तरह से यह भी सिखाए खास करके उस वक्त जब श का भी आप प्रयोग करते हैं इस्तेमाल करते हैं तो सही शब्द का इस्तेमाल करें मिसाल के तौर पर पिनिस शष्ण वजाइना योनि मार्ग ध्यान रहे अगर आपको यह ऑकवर्ड नहीं लगता है तो बच्चे को भी ऑकवर्ड नहीं लगेगा और यह बेहतर है कि बच्चा सही शब्द का इस्तेमाल करे इस उम्र में यह भी बता दे कि अगर कोई आपको अलग तरीके से स्पर्श करता है माने आपकी प्राइवेट पार्ट को या अंडकोष को या योनि मार्ग को कोई विचित्र या स्ट्रेंज तरीके से स्पर्श करता है टच करता है तो आप उनको तुरंत ना बोल सकते हैं आप तुरंत उनको
(15:42) अटका सकते हैं और साथ ही साथ उनको यह भी बताना चाहिए कि अगर इस तरह का कोई टच करने की कोशिश भी कर रहा हो तो वह आपको आके इफॉर्म करें आपको आके बताए चाहे वो कोई भी हो आपका चाचा मामा टीचर क्यों ना हो कोई भी हो सकता है जनरल टर्म में लोग उसे गुड टच या बैड टच कहते कुछ लोग उसे ओके टच या नॉट ओके टच कहते हैं लेकिन अगर मुझे पूछा जाए तो अपने दिमाग में यह बात बिल्कुल क्लियर हो जानी चाहिए कि यह स्पर्श या तो सही है या गलत है फिर जब बच्चा पाच सात साल का होता है उसकी उम्र तब होती है तब पेरेंट्स के प्रति एक हीरो वशिप आ
(16:28) जाती ने जो मां-बाप ने कहा वो सब सत प्रतिशत सही है इस वक्त वो द्विधा में रहते हैं कि ये नॉर्मल है कि नहीं उनको यह फिक्र लगी रहती है कि उनका दोस्त उनसे अलग है डिफरेंट है उस वक्त यह बताना जरूरी है कि हर एक व्यक्ति अलग होती है एवरी इंडिविजुअल इज डिफरेंट यह उनको एक जिम्मेदार वयस्क बनने में खास मदद करती है इस दौरान उनके खेल भी कुछ ऐसे बन जाते हैं जैसे वह घर-घर खेलते हैं या डॉक्टर डॉक्टर खेलते हैं हम सबने खेला होगा इसमें ज्यादातर लड़कियां मां का रोल करती है और लड़के बाप का रोल करते हैं लेकिन पेरेंट्स
(17:15) को यह ध्यान रखना होगा कि यह खेल खेल तक ही सीमित रहे इस खेल के दौरान कभी ऐसा भी हो सकता है कि किसी लड़के लड़किया को एक दूसरे के नाम से चिड़या जा सकता है तो उस वक्त ऐसी बातों को रोकना बेहतर होगा सेक्स एजुकेशन एक ऑन गोइंग प्रोसेस है और बढ़ती उम्र के साथ आप उसी की भाषा में योग्य दान दे सकते हो जरूरी नहीं है कि एक ही लेक्चर में उसे पूरा ज्ञान दिया जाए बच्चों की उम्र के अनुसार वह समझ सके वैसी भाषा में उसको यह समझाना बेहतर होगा हां अगर किसी को फॉर्मल सेक्स एजुकेशन देना है तो युवावस्था आए उससे पहले दे
(18:04) देना चाहिए इसी को हम किशोरावस्था कहेंगे वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन डब्ल्यूएचओ भी यही कह रहा है कि सेक्स एजुकेशन शुड बी गिवन इन प्री एडलेस यर्स यानी यवन प्रवेश से पहले यह ज्ञान दे देना चाहिए हैरत की बात यह है कि ऋषि वात्सायन ने 1600 साल पहले अपने ग्रंथ काम सूत्र में यही कहा है कि यह ज्ञान प्राग यवने यानी यवन के पहले ही दे देना चाहिए इस उम्र में लड़के लड़कियों को खास करके महावारी माने मेंस्ट्रुएशन और लड़कों को स्लीप एमिशन स्वप्न खलन या निंद्र स्खलन के बारे में बताना जरूरी होता है इस चीजों
(18:51) की अगर उनको पहले से ही जानकारी दे दे तो वे बेवजह की फिकर चिंता एंजाइटी से मुक्त हो जाए और शारीरिक और मानसिक रूप से उसे बेहतर तरीके से अपना सक इसी उम्र में हमें सेक्स विषयक गलत बियों को भी दूर करना चाहिए जिसे सेक्सुअल मिथ कहते हैं खास करके हस्त मैथुन के बारे में वीर्य के बारे में प्राइवेट पार्ट की साइज के बारे में अक्षत कौमार्य के बारे में और दूसरी गलत बियो के बारे में भी ज्ञान दे देना चाहिए इस उम्र में लड़कियां खास करके ब्रेस्ट साइज के बारे में चिंतित रहती है और लड़के अपने प्राइवेट पार्ट की साइज के बारे में चिंतित र यह एहसास
(19:39) दिलाना जरूरी है कि कोई भी दो व्यक्ति कभी भी एक समान नहीं होती नो टू इंडिविजुअल्स आर अलाइक अलकता एक सामान्य चीज है अलकता का मतलब अब नॉर्मल नहीं बीइंग डिफरेंट इज नॉर्म जैसे ही वे थोड़े और बड़े हो जाते हैं तब लड़की गर्भवती कैसे बनती है और कैसे गर्भवती ना बने उसके लिए भी जानकारी देनी जरूरी आगे बढ़ते हैं तो फिर सेक्सुअली ट्रांसमिटेड इंफेक्शन से कैसे बच सकते हैं इसकी भी जानकारी देना जरूरी इस उम्र में कई बार युवा दुविधा में रहते हैं कि
(20:24) शारीरिक संबंध बनाए या ना बनाए ऐ माहौल में मेरी अमेरिकन दोस्त और साइकोलॉजिस्ट डॉक्टर जूडी कुरियां की की राय मुझे बहुत अच्छी लगी उनका यह कहना है कि कोई भी डिसीजन लो तो तीन आर दिमाग में रखने के बाद डिसीजन ले और वह तीन आर आए राइट रिस्पांसिबिलिटी और रिस्पेक्ट सेक्स करना या ना करना यह आपका राइट है आपका हक है आप किसी को भी कभी भी हां या ना कह सकते हो लेकिन राइट के साथ रिस्पांसिबिलिटी यानी जिम्मेदारी जुड़ी रहती है यह करने के बाद क्या होगा यह सोच के आगे बढ़ मिसाल के तौर पर
(21:11) अगर संबंध तो बना दिया लेकिन अगर एचआईवी हो गया तो प्रेगनेंट हो गई तो और क्या तो राइट और रिस्पांसिबिलिटी एक साथ चलती है रिस्पांसिबिलिटी के साथ-साथ आपको आपके खुद के लिए और तीसरा आर माने रिस्पेक्ट मान आदर भी होना बिल्कुल जरूरी है आपके खुद के लिए और सामने वाले व्यक्ति के लिए भी उतना ही आदर भाव और सम्मान होना जरूरी है अगर यह तीन आर दिमाग रख के यह तीन आर अगर आप बराबर दिमाग में रख के सोच समझ के आप जो भी डिसीजन लोगे ज्यादातर वो सही होगा अब हम चौथे डब्लू के बारे में बात करेंगे हु
(21:59) शुड गिव सेक्स एजुकेशन ये सेक्स एजुकेशन कौन दे सकता है हकीकत में सेक्स एजुकेशन वही दे सकता है जो व्यक्ति जानकार हो इस विषय में माहिर हो सेक्सुअल मैटर में नॉलेजेबल और साथ ही साथ व सेक्सुअलिटी के सब्जेक्ट में सामाजिक मर्यादा में रहकर बात कर सके और यह गान देते समय एक बात का अवश्य ख्याल रखना चाहिए कि उसे अपने व्यक्तिगत विचार दूसरों पर नहीं लादने चाहिए यकीनन मां-बाप से बेहतर सेक्स एजुकेशन कौन दे सकता है लेकिन कब अगर वह सेक्सुअली लिटरेट हो तो यह बात बिल्कुल
(22:44) सही है कि एक मां 100 शिक्षकों के बराबर होती है बशर्ते वह सेक्स एजुकेशन की जानकार हो तो अभी हम पांचवे डब्लू पर आते सेक्स एजुकेशन किसको देना चाहिए म शुड बी गिवन दिस सेक्स एजुकेशन शुड बी गिवन टू होम यह ज्ञान लड़का और लड़की दोनों को देना चाहिए मैं जहां भी लेक्चर देता हूं तो मेरे लेक्चर के बाद कुछ सवाल तो मुझे लोग जरूर पूछते हैं इस सवालों को हम फ्रीक्वेंसी क्यू एक नजर यह सवाल पर भी डाल देते हैं पेरेंट्स मुझे पूछते हैं कि डॉक्टर साहब
(23:28) अगर बच्चा हमने पूछे कि मैं कहां से आया तो क्या जवाब दे जवाब बड़ा आसान है जब बच्चा यह सवाल करे तो आप जवाब में कह सकते हैं कि तुम्हारी मां के शरीर के अंदर एक खास जगह है गर्भाशय तुम वहां से आए हो यदि बच्चे को एक बार यह विश्वास हो जाएगा कि आप उसके सवालों के जवाब देते समय अमित्री पूर्ण और सख्त रुख नहीं अपनाते हैं तो वह आपको एक स मार्गदर्शक मानने लगेगा बच्चे की उम्र जैसे जैसे बढ़ती जाए वैसे वैसे उसके द्वारा पूछे गए प्रश्नों के उत्तरों के बारे में अतिरिक्त जानकारी भी उसे आप देना चाहिए आप दे सकते हैं यह जानकारी उसके विकास काल के अनुरूप होनी
(24:17) चाहिए कई बार जरूरत पड़े तो आप एक लाइन ड्राइंग एक चित्र भी बता सकते हैं कि मां के पेट से आप इस जगह से आप बाहर आए थे यदि मां-बाप बच्चे को उसकी समझ से कभी ज्यादा ज्ञान दे दिया तो यह बच्चे के लिए कभी नुकसान दे नहीं होगा कभी नहीं होगा हकीकत के अंदर इससे फायदा हो सकता है कि इससे बच्चा और सवाल पूछने से वह कतराए नहीं और एक रास्ता सवाल पूछने का और खुला बन जाएगा कई बार ऐसे लोग पूछते हैं डक्ट साहब क्या सेक्स एजुकेशन देने से काम इच्छा और बढ़ जाती है और अनवांटेड प्रेगनेंसी और
(25:03) सेक्सुअली ट्रांसमिटेड इंफेक्शन में वृद्धि तो नहीं हो जाएगी बिल्कुल नहीं हकीकत में सेक्स एजुकेशन की समझदारी से अपनी काम इच्छा को सही तरीके से चैनला करना आसान हो जाता है यह हकीकत है कि जिन देशों में सही ढंग से यौन शिक्षा दी गई है याद रखना सही ढंग से वहां अनचाहे गर्भ और यौन रोगों की संख्या में काफी कमी पाई गई अगर ये सेक्स एजुकेशन अगर आप चाहते हैं कि फॉर्मल तरीके से किसी को देना हो तो उसकी शुरुआत कैसे करें कई बार लोग पूछते हैं डॉक्टर साहब कैसे दे ये एजुकेशन हमको देना है लेकिन कैसे दे कोई माहौल तो बनना चाहिए यह समझ लीजिएगा अगर किसी बच्चे को
(25:50) स्वप्नम थु हो गया निंद्रा स्खलन हो गया या किसी कुत्ते को पिल्ले आ गए या कोई कंडोम की एडवर्टाइज नजर में आ गई या उधर दिखाई दी तो यह देखने के बाद बच्चे के दिमाग में बहुत से सवाल आ सकते हैं आप इसी का सहारा लेकर सेक्स एजुकेशन की शुरुआत कर सकते हैं और साथ में कई बार यह भी आपको बता दूं कि सेक्स एजुकेशन सेक्सुअल क्राइम को भी कम कर सकता एक बार एक लेक्चर के बाद मुझे बहुत अच्छा सवाल पूछा सवाल इस तरह था कि क्या सेक्स एजुकेशन सेक्सुअल क्राइम्स को कब कर सकता है कभी-कभी मुझे ऐसा भी पूछा जाता है कि आपके तजुर्बे में कोई ऐसा
(26:34) केस आया है कि सेक्स एजुकेशन की कमी की वजह से कोई गंभीर समस्या बन गई हो हां मेरे पास एक केस आया था मुझे अभ भी याद है मैं आपसे शेयर करना चाहूंगा उसने मस्तराम की एक किताब पढ़ी मस्तराम की किताब पढ़ने के बाद उसकी काम इच्छा काफी प्रबल हो गई जोश जुनम काफी बढ़ गए और संतुष्टि के लिए उसके पास कोई पार्टनर मौजूद नहीं था कामेच्छा इतनी प्रबल हो गई कि वह अपने आप को कंट्रोल नहीं कर सका हर एक पुरुष कभी ना कभी ऐसे माहौल से गुजरता है इत्तफाक से यह इंसान ने रेप का सहारा ले लिया तो मैंने उसको स्वाभाविक तरीके से पूछा अरे भाई अगर आपकी एक्साइटमेंट इतनी
(27:19) बढ़ गई होगी तो आप खुद को सेटिस्फाई करने के लिए कोई और रास्ता क्यों नहीं चुना जैसे कि हस्त मैथु ने उसने बोला डॉक्टर साहब हस्तम कैसे करता उससे तो नामर्दी आ जाती है टीवी हो जाता है कभी-कभी आदमी होमोसेक्सुअल बन जाता है यह पुरुष हस्तमैथुन के बारे में फैली हुई गलत फियों का शिकार था और ऐसे सिचुएशन में यह व्यक्ति तीव्र काम इच्छा से वशीभूत होकर सब नैतिक बंधनों को तोड़कर अपनी काम इच्छा की पूर्ति के लिए वो बलात्कार कर बैठा अगर उसको यह पता होता कि हस्तम तुने सामान्य प्रक्रिया है और उसे कोई नुकसान नहीं होता तो यह सेक्सुअल क्राइम से बच जाता सेक्स
(28:05) एजुकेशन हकीकत में हस्त मैथु और दूसरी प्रचलित गलत धारणाओं से छुटकारा दिलाता है और व्यक्ति को अपने यौन आवेग को एक सही तरीकों से चैनला इज करने का मार्ग दिखाता है अगर सेक्स एजुकेशन सही तरीके से दिया जाए तो व्यक्ति एक जिम्मेदार युवा या वयस्क बन जाती है बन सकती है अपनी मैरिड लाइफ बेहतर बना सकती है और साथ ही साथ अपना पेरेंट हुड भी अच्छी तरीके से निभा सकती चाहे किसी की समस्या शारीरिक हो कि मानसिक एक बात आपको अवश्य देखने को मिलेगी और वह है एंजाइटी फिकर चिंता मेरे विदेश
(28:54) के और देश के तजुर्बे में मैं एक चीज दावे से कह सकता हूं कि अनलाइक वेस्ट अपने देश में यह एंजाइटी फिक्र चिंता है वो ज्यादातर सेक्स विषयक गलतफहमियां की वजह से ही होती है मैं हजारों मरीज देख चुका हूं और मैं जब उनकी हिस्ट्री लेने के बाद आखिर में एक प्रश्न पूछता हूं कि आपकी समस्या का कारण आपको क्या लगता है आप यकीन नहीं मानेंगे 10 में से सात लोग कहेंगे डॉक्टर साहब हस्त मैथुन की वजह से मैं अपनी खुद की बात करूं तो यह हस्त मैथुन का गिल्ट यानी अपराध भावना की समस्या से मैं खुद भी पीड़ित था हालांकि मैं मेडिकल स्टूडेंट था
(29:37) फिर भी यह अपराध भावना से निकलने के लिए मुझे खुद को करीबन 10 साल लग गए मैं कई डॉक्टरों से मिला कई साइक से मिला सबने कहा प्रकाश फिक्र मत करो यह नॉर्मल है लेकिन इन बातों से मेरी फिक्र कम नहीं हुई यहां तक कि मैं अपनी बीमारी के लिए दिल्ली तक दवाखाने में जाकर आया वहां एक हकीम साहब को मिला हकीम साहब ने मुझे तपास प्राइवेट पार्ट देखने के बताया उन्होंने बताया एक सटीक सवाल पूछा मुझे क्या तुमने बहुत मास्टरबेशन किया है क्या मुझे भरोसा हो गया कि हकीम साहब ने मेरी बीमारी की जड़ पकड़ ली इसके लिए वह सही इलाज भी कर सकेंगे हकीम ने मुझे बताया कि मेरे पास
(30:21) इलाज तीन तरह का है इलाज हो जाएगा लेकिन तीन तरह का है एक मामूली इलाज है जिसको श इलाज कहते हैं दूसरा बादशाही इलाज कहते हैं थोड़ा महंगा है और तीसरा जो सबसे महंगा है वो आलम शही इलाज है अगर तुम इलाज अभी नहीं करोगे तो पुराने किए हुए हस्तमैथुन की वजह से तुम नामर्द बन जाओगे और किसी काम के नहीं रहोगे तुम मैं सचमुच भयभीत हो गया मेरी हैसियत मुश्किल से मामूली इलाज कर सकूं उतनी थी मैंने पैसे दे दिए हकीम जी ने दो महीने का कोर्स दिया दो महीने मैंने बराबर इलाज किया दवाइयां बराबर ली मेरे में कोई फर्क नहीं पड़ा मैं वापस हकीम जी से मिलने को दिल्ली गया हकीम
(31:08) जी से मिला और मैंने कहा मुझे कोई फर्क नहीं महसूस नहीं हो रहा है डॉक्टर साहब उन्होंने वापस मुझे एग्जामिन किया और कहा कि तुम्हारा मर्ज काफी पुराना है और उसके लिए इलाज थोड़ा ज्यादा महंगा होगा महंगा कोर्स ले लो तो बेहतर होगा मेरे जैसे वहां पर बहुत से मरीज बैठे थे सभी ज्यादातर मेरे जैसे निराश थे मुझे भी ऐसा महसूस हुआ कि और पैसे गवाने का कोई फायदा नहीं है और मेरे पास ज्यादा पैसे थे भी नहीं हकीकत में ना तो मुझे कुछ बीमारी थी ना उनके पास कोई इलाज था सही तरीके से देखा जाए तो इन जैसे नीम हकीम और तथाकथित सेक्सोलॉजिस्ट की कार्य प्रणाली ऐसी रहती
(31:55) है लोगों की नासमझ और एंजाइटी का नाजायत फायदा उठाते हमारा आज का टॉपिक यही है हस्त मैथुन यानी मास्टरबेशन आज के इस टॉपिक में पहले हम क्या देखने वाले हैं एक नजर हम उस पर डाल देते हैं व्ट इज मास्टरबेशन इट न इंटेंशनल सेल्फ स्टिमुलेशन डन बाय वनसेल्फ टू वनसेल्फ एंड वि यूजुअली पसू टू द पॉइंट ऑफ ऑर्गेजम माने हस्तम में व्यक्ति हेतु पूर्वक आनंद के लिए जननांगों को उत्तेजित करता है और अमूमन उत्तेजना की चरम सीमा माने ऑर्गेजम तक पहुंचता है कुछ लोगों को मास्टरबेशन यह शब्द असभ्य लगता है तो उसे
(32:42) पोलाइट कुछ लोग स्व मैथुन भी कहते हैं हाउ डू पीपल इल्ज इन मास्टरबेशन लोग कैसे हस्तमैथुन करते हैं बच्चे जब अपने प्राइवेट पार्ट को हाथ लगाते हैं तो उस वक्त उनको एक आनंद की अनु होती होती है उनको मजा आती है क्योंकि उसमें प्लेजर वैल्यूज इवॉल्व होती है इसके लिए वो कई बार बार-बार ऐसा करते हैं किशोरावस्था में थोड़ा फर्क पड़ता है ये क्रिया के साथ-साथ कल्पना भी जुड़ी रहती है और जब जोश जुनू बढ़ता है तब वो क्लाइमैक्स तक पहुंचते हैं ऑर्गेजम तक पहुंचते हैं उन्हें बेहद आनंद का एहसास होता है लेकिन कई बार
(33:28) शुरुआत में उनको वर स्राव नहीं होता क्योंकि उस वक्त उनके हार्मोन अल्प मात्रा में होते हैं जब हार्मोन सही मात्रा में आ जाते हैं तो चरम आनंद के एहसास के साथ-साथ उनको अक्सर वीर्य का स्खलन भी होता है हालांकि यह जरूरी नहीं है एडल्स में ज्यादातर हस्तमैथुन की क्रिया के वक्त व्यक्ति अपनी मनपसंद व्यक्ति के साथ सहवास कर रहा है ऐसे रंगीन कल्पना या सहवास का दृश्य एक दिमाग में लेकर आता है व्ट आर द मेथड्स ऑफ मास्टबेशन माने पुरुषों में हस्तमैथुन करने की सबसे सामान्य क्रिया जो है वह है यह समझ लो कि यह पुरुष की
(34:14) इंद्रिय है यह स्त्री का योनि मार्ग है लेकिन जब हस्तमैथुन करता है पुरुष तब यह पुरुष की इंद्रिय है यह हाथ गोल गहरा बनाकर योनि समान बन जाता है और वास के वक्त जो मूवमेंट करता है उसी तरह से मूवमेंट करता है तब उसे बेहद आनंद का एहसास होता है कुछ लोग अपने शिष्ण को अपनी मैट्रेस या तकिया के साथ संभोग क्रिया जैसी नकल करके चर्म सीमा तक पहुंचते हैं बहुत कम लोग ऐसे भी है कि आगे पीछे की मूवमेंट की बजाय साइड टू साइड मूवमेंट करते हैं कुछ पुरुष कभी-कभी अपने शिष्ण पर वाटर जेट का स्प्रे करके भी उत्तेजना बढ़ाते हैं और चर्म सीमा पर पहुंचते हैं
(34:57) कई बार स्त्रियों में भी यह तरीका अपनाया जाता है स्त्रियों में भी हस्त मैथुन एक सामान्य क्रिया है अक्सर ज्यादातर महिलाएं अपनी उंगली से क्लिटोरिस को स्पर्श करके उत्तेजना में इजाफा करती है अक्सर यह करने में अपनी मनपसंद कल्पना भी जुड़ी रहती है कई बार महिला अपनी दोनों थाइज को अपनी झांग को आपस में रगड़ है जिसके दबाव से योनि मुख और क्लिटोरिस प आता है जो दबाव उस पर आता है और उसकी उत्तेजना और जोश और बढ़ता है और वह क्लाइमेक्स तक पहुंचती है कुछ महिलाएं साथ ही साथ अपने स्तन और निपल्स को भी सहला है जिससे उत्तेजना में इजाफा हो और वह आसानी से चर्म सीमा तक
(35:42) पहुंचे कई बार ऐसा भी पाया गया है कि स्त्रियां अपने अंडर गारमेंट्स पजामा गाउन वगैरह को झांग के बीच में रगड़ करर ज्यादा उत्तेजित होकर चरम सीमा तक पहुंचती है कुछ-कुछ औरतों में अपने योनि मार्ग में कोई वस्तु डालकर आगे पीछे करती है बिल्कुल सहवास की नकल करके कुछ औरतें ऐसी भी होती है सेक्स टॉय या पर्सनल मसाजर का इस्तेमाल करके अपनी संतुष्टि पा लेती है ऑब्जेक्ट या सेक्स टॉय के उपयोग के बाद अक्सर हायमन या योनि पटल फट सकता है लेकिन इसका विस्तृत विवेचन हम दूसरे लेक्चर में करेंगे क्या हस्त मैसून से नुकसान होता है बिल्कुल नहीं जिस तरह से सहवास से कोई नुकसान नहीं
(36:26) होता उसी तरह से हस्तमैथुन से भी कोई नुकसान नहीं होता व्यक्ति को सिर्फ इतना कह दो कि हस्तमैथुन नॉर्मल है फिक्र मत करना मगर फिक्र मत करना कहने से किसी की फिक्र कम नहीं होती इवन इफ यू आर नॉर्मल यू नीड टू बी कन्विंस्ड ट यू आर नॉर्मल एक जमाने में केम हॉस्पिटल में सेक्सुअल मेडिसिन की प्रैक्टिस करता था पूरे भारत में वह एक मात्र हॉस्पिटल थी कि जिसमें एकल मेडिसिन का डिपार्टमेंट था कई बार तो ओपीडी में 150 से 200 मरीज आ जाते थे मैंने वहां पेशेंट्स देखने की कार्य पद्धति बनाई थी पहले दिन लोगों की हिस्ट्री पूछता था उनकी समस्याओं की
(37:10) जानकारी लेता था दूसरे सेशन में उनका प्रॉब्लम क्यों हुआ उसका एहसास उनको कराता था और साथ ही साथ सेक्स विषय गलत फियों को भी दूर करता था उसी के साथ कौन सी एग्जामिनेशन करना जरूरी है क्यों करना जरूरी है उसकी आवश्यकता समझाता था उस पर टिप्पणी करता था और बाद में लास्ट में उनकी एग्जामिनेशन करके इलाज का मुआयना देता था उन गलत फियों में हस्तमैथुन की गलत फहमी अहम होती थी मैं पेशेंट को बताता था कि हस्तमैथुन एक नॉर्मल प्रक्रिया है एक साधारण प्रक्रिया है यह ऐसी चीज है जिससे आप अनिनी गर्भावस्था और सेक्सुअली
(37:56) ट्रांसमिटेड इंफेक्शन माने गर्मी परम की बीमारियों से दूर रह सकते हो और अगर हस्तमैथुन पर ज्यादा रोकथाम लगाई जाए तो शायद समाज में बलात्कार की संख्या बहुत बढ़ जाएगी हस्तमैथुन फायदेमंद है यह एक साधारण प्रक्रिया है आप बिल्कुल फिक्र मत करो यकीन मानिए फिक्र मत करो कहने से एक भी पेशेंट की फिक्र कम नहीं हुई थी क्योंकि केम हॉस्पिटल एक प्राइवेट हॉस्पिटल नहीं बल्कि जनरल फ्री हॉस्पिटल थी तो मरीजों को वहां मुफ्त देखा जाता था उसके लिए वही मरीज घुमा फिरा के तीन चार सेशन के बाद वापस आ जाते थे और मुझे बताते कि डॉक्टर साहब आपने लेक्चर तो बड़ा
(38:38) बढ़िया दिया आपने यह भी कहा हस्तम त नॉर्मल है फिक्र मत करो लेकिन हमारे अंदर की वह फिक्र वह चिंता वह एंजाइटी वह अपराध भाव अब भी मौजूद है जितना पहले था और यह सिर्फ एक मरीज की कहानी नहीं थी ज्यादातर हर एक मरीज की यह कहानी थी तब मुझे लगा कि मुझे मेरी ट्रीटमेंट की कार्य पद्धति में कुछ बदलाव करना पड़ेगा आई विल हैव टू चेंज माय मोड ऑपरेंडी उसका मतलब मैं यह जिस तरह से एक्सप्लेन कर रहा था उसमें कुछ बदलाव लाना जरूरी थी और मैंने अपनी ट्रीटमेंट में बदलाव लाया लेकिन उस वक्त मुझे यह एहसास हुआ कि एग्जांपल्स कैरी मच मोर वेट देन जस्ट वर्ड्स माने शब्दों के साथ-साथ
(39:25) अगर उदाहरण देने से बात आसानी से समझा सकते हैं और वह असरकारक भी बनती है मैं बस एक ही सवाल पूछता था क्या इंटरकोर्स से कोई प्रॉब्लम होता है पेशेंट जवाब देगा नहीं डॉक्टर साब मास्टरबेशन से हां डॉक्टर साहब ध्यान रहे संभोग के दौरान शिष्ण जो क्रिया योनि मार्ग में करता है बिल्कुल वही क्रिया हस्त मैथुन के दौरान अपनी मुट्ठी में करता है कहने का मतलब यह है कि दोनों क्रियाओं का व्याकरण एक समान है और आप मेरी बात से सहमत होंगे कि अगर आपको हिंदी आती है तो मैं मराठी आसानी से सिखा सकूंगा क्योंकि
(40:10) लिपि एक है इस ग्रामर ऑफ द एक्शन इज सिमिलर पेशेंट अक्सर पूछते लेकिन डॉक्टर साहब जरूरत से ज्यादा कर लिया तो ज्यादा कर लिया तो हस्तमैथुन के मामले में जरूरत से ज्यादा ऐसी कोई चीज नहीं है एक बार क्ला के बाद ज्यादातर पुरुष तुरंत उत्तेजित नहीं हो सकते और ऐसे भी ज्यादा बोलने वाले की जबान कमजोर नहीं होती और चुप रहने वाले की जबान ताकत वाली नहीं बनती बो नहीं लेकिन सर जबान और प्राइवेट पार्ट में तो फर्क है मैं इस तरह उनको एक्सप्लेन कर देता देखो जबान में भी खून ज्यादा शिष्ण में भी खून ज्यादा जवान में भी हड्डी नहीं श में
(40:56) भी हड्डी नहीं जवान भी सेंटर में प्राइवेट पार्ट भी सेंटर में ज्यादातर लोग गलतफहमी से दूर हो जाते थे और उनकी गलतफहमी जड़ मूल से निकल जाती थी फिर भी कुछ लोगों में गलत बती ज्यादा डीप होती थी तो उनको मैं समझाता हूं कि सिस्टम में स्ट्रटेड मसल्स तो होते ही नहीं है तो कमजोरी का सवाल ही नहीं होता हड्डी भी नहीं होती है फ्रैक्चर हो नहीं सकता मैं ऐसे कई लोगों को जानता हूं जो लगातार 15-15 साल से रोजाना हस्तमैथुन करते थे मैंने ऐसे कई लोगों का शारीरिक परीक्षण किया है जब मैंने उनका शरीर का परीक्षण
(41:39) किया उनका खून और हार्मोन संबंधी जांच की और वीर्य का विश्लेषण किया तो मुझे कोई एनोर्म नहीं मिली उनके जननांगों में भी कोई गड़बड़ी नहीं थी और उनकी प्रजनन की क्षमता भी सामान्य थी शादी के बाद भी उनका वैवाहिक जीवन सुखमय था दिस रिमाइंड्स मी ऑफ सर पीटर उस्ती जो एक ऑस्कर अवार्ड विनर थे और जिन्होंने इंदिरा गांधी का अपने पंत प्रधान का आखिरी इंटरव्यू लिया था वह उनकी एक फिल्म बना रहे थे प्लेनेट उसनो नाम से जो यूके की चैनल फोर और पब्लिक ब्रॉडकास्टिंग सिस्टम यूएसए से दिखाई जाती
(42:24) थी ही केम टू इंटरव्यू मी एट हॉस्पिटल मेरे साथ वो करीबन चार घंटे बैठे जिस तरह से मैं गलतफमिया दूर करता था वो बड़े ध्यान से सुन रहे थे और बहुत प्रभावित भी हो गए और उन्होंने आखिर में मुझे सिर्फ इतना ही कहा डॉक्टर साहब डॉक्टर कोठारी बेहतर होता कि अगर मैं आपको कुछ अरसे के पहले मिला होता कुछ क्वेश्चंस दिमाग में आते हैं अक्सर लोग मुझे पूछते हैं मैं सोचा आपके साथ भी शेयर करूंगा एक प्रश्न पूछते कि क्यों कुछ लोगों को हस्त मैथुन सहवास से ज्यादा पसंद आता है ऐसा क्यों हस्त मैथु करते वक्त व्यक्ति रंगीन कल्पनाओं का इस्तेमाल करता है और आप मेरी बात से सहमत
(43:11) रहेंगे कि हकीकत से हकीकत की कल्पना हमेशा ज्यादा रंगीन होती है एंड मास्टरबेशन इज समथिंग दैट यू आर हैविंग सेक्स विद समवन म यू रियली लव इसलिए लोगों को कई बार मास्टरबेशन ज्यादा पसंद आता है एक दूसरा सवाल आता है कि क्या नियमित हस्त मैथुन करने से इंद्रिय की साइज माने शिष्ण की लंबाई बढ़ सकती है बिल्कुल नहीं क्योंकि शिश्न में मांस पेशिया होती ही नहीं है अगर मास पेशिया होती तो यकीनन ज्यादा हस्त मैथुन करने के बाद शिश्न पाव जितना बड़ा हो जाता है कभी कभी मुझे ये भी पूछा जाता है कि कभी हस्तम थ ना करने का
(43:56) दावा करने वाले के बारे में आपकी क्या राय है अक्सर यह दावा सही नहीं होता अगर कुछ व्यक्ति मानसिक अस्वस्थता से पीड़ित हो तो वह सही तरीके से हस्त मैथु कर ही नहीं सकती क्योंकि व फैंटेसी के द्वारा अपनी कल्पना की सफर में अंजाम तक यानी ऑर्गेजम तक नहीं ले जा सकते अगर मेरे पास कोई पेशेंट आएगा और कहेगा कि मैंने हस्तमैथुन नहीं कर सकता है और मैं ने हस्तमैतून के दौरान फैंटेसी नहीं करता हूं या मैं ऑर्गेजम तक नहीं पहुंच सकता हूं तो मैं ऐसी व्यक्ति में सस्पेक्ट करूंगा कि शायद यह मानसिक अस्वस्थता से ज्यादातर थॉट डिसऑर्डर से पीड़ित है और उसकी मैं डिटेल
(44:43) से चेकिंग करूंगा कई बार बच्चे को हस्त मधुन करते देखकर उसके माता-पिता गड़ जाते हैं उनको पता नहीं पड़ता उनको क्या करना चाहिए मैं बताता हूं माता-पिता को समझना चाहिए यह कोई मनोरोग की निशानी नहीं है हस्तमैथुन बच्चे की यौन चेतना और मानसिक विकास के क्रम का एक दौर है माता पिता अपने बच्चे को अस्त मैथुन करते देखकर चिंता में पड़ जाते हैं उन्हें चिंता रहित होकर इस समस्या को उसी ढंग से हल करना चाहिए जिस ढंग से वह बच्चे को टेबल मैनर सिखाते हैं बच्चे को डांटने से फटकार में से सजा देने से या बात का जब बतंगड़ बनाने से कोई लाभ नहीं होगा उन्हें यह मानकर चलना होगा
(45:31) कि हस्तमैथुन के माध्यम से बच्चे की कामुकता की अभिव्यक्ति एक सामान्य घटना है और उसे लेकर बच्चे के मन में डर बैठाना बिल्कुल गलत है वह हानि करर साबित हो सकता है उन्हें खास तौर पर बच्चे से यह तो कभी नहीं कहना चाहिए कि हस्त मैथुन से उसका यौन जीवन नष्ट हो जाएगा वह पागल हो जाएगा उसकी जननेंद्रिय विकृत हो जाएगी यह कभी नहीं कहना चाहिए हस्तमैथुन की घटना को लेकर उन्हें बच्चे से ऐसी कोई बात नहीं कहनी चाहिए जिससे वह चिंता ग्रस्त हो जाए बच्चे के कोमल मन पर ऐसी बातों का बहुत गहरा प्रभाव पड़ता है और उनके गंभीर परिणाम भी हो सकते हैं काम इच्छा तो उसमें
(46:15) सदा उत्पन्न होती ही रहेगी और वह उसकी पूर्ति के लिए कोई ना कोई नया तरीका अपनाता ही रहेगा इस मामले में उन्हें जिद्दी और कठोर नहीं बनना चाहिए नहीं तो बच्चे की असफलता ही उनको हाथ लगेगी इस बात के सही होने की पुष्टि वह अपने बचपन के दिनों को याद करेंगे तो वह मेरी बात से बिल्कुल सहमत हो जाए कुछ लोग फिर भी पूछते हैं क्या हस्तमैथुन का कोई इलाज की आवश्यकता है डॉक्टर साहब मास्टरबेशन कोई बीमारी नहीं है जिस तरह से सहवास के लिए कोई इलाज की आवश्यकता नहीं है उस तरह तरह से मास्टरबेशन के लिए भी उसकी कोई इलाज की
(47:01) आवश्यकता नहीं हां एक बात और है मास्टरबेशन अगर कंपल्सिव मास्टरबेशन बन जाए कंपल्सिव का मतलब है कि अगर कोई आदमी बेहद ज्यादा खाता है उसको ट्रीटमेंट की जरूरत है या जरूरत से ज्यादा सफाई करता है उसको ट्रीटमेंट की जरूरत है जरूरत से ज्यादा बोलता है उसको ट्रीटमेंट की जरूरत है अक्सर उसकी मूल समस्या दिमाग में होती है मानसिक अस्वस्थता कीय निशानी है इसका बेहतर इलाज सही साइकेट्रिस्ट कर सकता है तब उसके इलाज की जरूरत है मास्टरबेशन पर से डज नॉट रिक्वायर एनी ट्रीटमेंट एट ऑल आयुर्वेद के महा ग्रंथ चरक संहिता सुसुर संहिता अष्टांग हृदय में
(47:47) भी कहीं भी मास्टरबेशन बीमारी है ऐसा उल्लेख नहीं किया गया है ऋषि वात्सायन ने भी अपने कामसूत्र में हस्तमैथुन गलत है या बीमारी है ऐसा उल्लेख किया नहीं हस्तमैथुन के इलाज की जरूरत कब रहती है अगर कोई हस्तमैतून प्राइवेटली करने के बजाय पब्लिक में करता है अगर उसके शिष्ण को या योनि मार्ग को कुछ इंजरी होती है व्यक्ति को अगर कंपल्सिव मास्टरबेशन है माने मास्टरबेशन करने के लिए वह विवस हो जाता है तो इन तीन कंडीशन में हस्त मैथुन को अब नॉर्मल माना जाएगा और उसको इलाज की आवश्यकता रहेगी हस्तमैथुन के फायदे हैं
(48:35) देखो अनचाही प्रेगनेंसी और सेक्सुअली ट्रांसमिटेड इंफेक्शन से वो आपको दूर रखता है समाज के लिए एक सुरक्षा प्रदान करता है खास कर के जो पुरुष अपनी उत्तेजना को कंट्रोल नहीं कर सकते उन पुरुषों के लिए ये एक सेक्सुअल सेफ्टी वाल्व है महावारी के दर्द के दौरान हस्तमैथुन कई बार राहत प्रदान कर सकता है चौथा ज्यादातर पुरुष और स्त्री के सेक्सुअल डिस्फंक्शन की ट्रीटमेंट प्रोग्राम में यह एक महत्त्वपूर्ण इंटरमीडिएट स्टेप है सेक्सुअल टेंशन में भी यह रिलीज प्रदान कर सकता है हस्तम थु के दौरान जब व्यक्ति फैंटेसी करता है तो वह किस तरह से की फैंटेसी करता है उसकी
(49:22) जानकारी से चिकित्सक निदान कर सकता है कि व होमोसेक्सुअल है हेट्रोसेक्सुअल है बायसेक्सुअल है फेटिश है या वो कोई पैराफीलिया से पीड़ित है और अगर वह सचमुच फैंटेसी नहीं कर पाता तो शायद यह थॉट डिसऑर्डर या मानसिक अस्वस्थता के और इशारा करता है क्या व्यक्ति को हस्तमैथुन करना ही चाहिए जरूरी नहीं कुछ लोग हस्तमैथुन नहीं करते कुछ लोग धार्मिक या व्यक्तिगत कारण से मैथुन नहीं करते इट ओके उनकी सेक्सुअल लाइफ भी संतोष जनक हो सकती है लेकिन अगर मुझे पूछा जाए तो मैं यह कहूंगा इफ यू डोंट यूज इट यू मे लूज इट मे वेल बी ट्रू
(50:09) और दूसरा इटस डिसयूज वि लीड्स टू अट्रोफी एंड नॉट द यूज शिथिलता हमेशा बिन उपयोग से आती है उपयोग से नहीं क्या मैथु से टेढ़ापन आ सकता है बिल्कुल नहीं जैसे मैथु से या टर कोर्स से शिष्ण में टेढ़ापन नहीं आता उसी तरह हस्त मैथुन से भी टेढ़ापन नहीं आता शिश्न में थोड़ा टेढ़ापन यह सामान्य चीज है श के टेढ़े पन की विस्तृत बातचीत हम अगले लेक्चर में करेंगे लेकिन थोड़ा टेढ़ापन एक नॉर्मल प्रक्रिया है किसी की इंद्र 90 का कोन नहीं बनाती हां मेरे पास एक बहुत इंटरेस्टिंग केस आया था मैं आपसे शेयर करना चाहूंगा वह चार साल का बच्चा था और
(50:54) रात को व जिस तरह से बड़ा आदमी सहवास करता है उसी तरह से वह नींद में पलंग में थ्रस्टिंग करता था ऊपर नीचे यह समझ लो कि वह सहवास की नकल करता था यह देख के उसके माता-पिता चिंतित हो गए थे कि बच्चे क्रेजी है पागलपन आ गया है और उनको ऐसा लगा कि दे हैव गट अ क्रेजी चाइल्ड और एक मानसिक अस्वस्थता है उसको माने उनका बच्चा कोई बड़ो बड़े मनोविकार से पीड़ित है और उसे तुरंत इलाज की जरूरत है हकीकत में यह एक नॉर्मल प्रक्रिया है यहां इलाज की जरूरत बच्चे को नहीं मां-बाप को थी उनको यह समझना जरूरी था कि यह प्रक्रिया नॉर्मल है और कई बार ऐसी हरकतें नींद में अगर कोई
(51:42) बच्चा करे तो उसे नॉर्मल समझना चाहिए यह कोई बीमारी नहीं है उसके लिए उसको कोई इलाज की आवश्यकता नहीं एंड में मैं इतना ही कहना चाहूंगा कि हस्तमैथुन बीमारी नहीं है इसके लिए उसका इलाज की आवश्यकता नहीं है जिस तरह से मैथु बीमारी नहीं है उस तरह से हस्त मैथु भी बीमारी नहीं है हकीकत में अगर मुझे पूछा जाए तो हस्त मैथुन मैथुन का एक प्रकार है इसके लिए इलाज की कोई आवश्यकता एक दूसरी गलतफहमी के बारे में बातचीत करने वाले हैं और वह गलतफहमी है द बिगर इज बेटर जितना बड़ा उतना बेहतर आपको शायद अंदाजा तो आ ही गया होगा कि मैं
(52:27) किसकी बात करने जा रहा हूं दोस्तों मैं बात करने जा रहा हूं पिनी साइज माने शिष्ण की लंबाई चौड़ाई इन सब चीजों के बारे में शिष्ण के लंबाई को लेकर फैली हुई चिंताएं मानव जाति जितनी ही पुरानी है यह जानना जरूरी है कि जिस तरह दो आदमी के नाक की लंबाई कान की लंबाई माथे की चौड़ाई आंखों की गहराई अलग-अलग होती है उसी तरह से आदमी आदमी के शिष्ण की लंबाई मोटाई में भी अंतर अवश्य होता है हम इस लेक्चर में जो टॉपिक डिस्कस करने
(53:14) वाले हैं वह है एक स्त्री को संतुष्ट करने के लिए शिष्ण की लंबाई कितनी होनी चाहिए शिष्ण की चौड़ाई कितनी होनी चाहिए क्या व्यक्ति का सामान्य शरीर और शिष्ण की साइज में कोई संबंध होता है क्या छोटे लिंग वाले पुरुष से गर्भधारण में कोई दिक्कत आ सकती है सुसुप्त अवस्था में इंद्रिय की लंबाई कितनी होनी चाहिए इरेक्ट पिनिस का झुकाव लेफ्ट पर रहता है या राइट पर रहता है क्या थोड़े से टेढ़े पन की वजह से संभोग में कोई दिक्कत आ सकती लिंग में बेहद टेढ़ापन आने के कारण क्या हो सकता है
(53:59) अगर एक व्यक्ति का लिंग छोटा हो तो सहवास के लिए कौन सी पोजीशन बेहतर हो सकती है तो आज आते हैं हम पहले सवाल पर एक स्त्री को संतुष्ट करने के लिए शिष्ण की लंबाई कितनी होनी चाहिए शिष्ण यानी लिंग यानी पिनिस की सामान्य लंबाई कितनी होनी चाहिए ताकि वह अपने फीमेल पार्टनर को सहवास के दौरान प्रदान कर सके इसके लिए योनि मार्ग की रचना की जानकारी आवश्यक है योनि मार्ग की कुल लंबाई हालांकि सही शब्द हो सकता है गहराई सामान्यत 6 इंच होती है सेंसेशन यानी कि संवेदना बाहर के
(54:45) हिस्से में जिसे बाहरी भग लेबिया मेजोरा कहते हैं वहां ज्यादा होती है और योनि मार्ग के शुरुआत में व थर्ड में यानी पहले दो इंच में ज्यादा होती है अंदर का 4 इंच जो गर्भाशय के करीब होता है उसमें सेंसेशन बिल्कुल नहीं होते हैं वह संवेदना रहित होता है वह भाग में बिल्कुल संवेदना नहीं होती इससे दो चीज की जानकारी मिलती है कि अगर आपकी पार्टनर को काम उत्तेजित करना है एक्साइट करना है जोश जुन में ज्यादा ले आना है तो आपका ध्यान आपको आपका पर्ष आगे के 2 इंच में ही सीमित करना पड़ेगा
(55:30) क्योंकि अंदर का 4 इंच में तो कोई सेंसेशंस ही नहीं है और आज के जमाने में तो लोग अक्सर टाइम मैनेजमेंट की बातें करते हैं अंदर के 4 इंच में स्पर्श करना मतलब इट्स वेस्ट ऑफ टाइम सो इट्स एडवाइजेबल टू कंसंट्रेट ओनली ऑन द आउटर एस्पेक्ट एंड आउटर वन थर्ड ऑफ वजाइना तो बेहतर यही होगा कि आप बाहरी हिस्सा और बाहर के 2 इंच में ही अपना लक्ष्य केंद्रित करें और अंदर के 4 इंच में स्पर्श ना करें या कम करें और दूसरा लॉजिकल आंसर इसमें यह निकलता है अगर उत्तेजित शिष्ण यानी कि इरेक्ट पिनिस की लंबाई दो इंच या उससे ज्यादा हो तो काफी
(56:16) है पार्टनर संतोष के लिए काफी है क्योंकि ज्यादातर हर एक स्त्री के लिए सहवास में जरूरी चीज है संतोष ना कि सिर्फ शिष्ण की लंबाई बिगर द बेटर इज अ गॉडजिला लॉजिक जितना लंबा उतना बेहतर यह गलत फहमी है कुछ स्त्रियों के दिमाग में काम तृप्ति के लिए शिष्ण की कोई खास लंबाई का होना जरूरी है ऐसी कल्पना होती है वह यह गलत धारणा से पीड़ित होती है कि लंबे शिष्ण वाला पुरुष छोटे शिष्ण वाले पुरुष से स्त्री को ज्यादा काम सुख प्रदान कर सकता है मैं इस बारे में बस इतना ही बताऊंगा कि इट इज नॉट
(57:02) द लेंथ ऑफ द वेव बट इट इज द मोशन ऑफ द ओशन दैट मैटर्स शिष्ण की चौड़ाई कितनी होनी चाहिए चौड़ाई का कोई खास महत्व नहीं है योनि बहुत लचीली होती है वजाइना इज हाईली इलास्टिक अगर कोई डॉक्टर तपास के लिए योनि मार्ग में उंगली प्रवेश करता है तो वह उतनी ही चौड़ी होती और जब डिलीवरी के समय बच्चा यनि मार्ग में से बाहर आता है तो उसकी चौड़ाई बच्चे की साइज के अनुसार बढ़ जाती है लोग पूछते हैं कि सुसुप्त अवस्था में शिष्ण की लंबाई कितनी होनी चाहिए सुसुप्त या शिथिल शिष्ण की लंबाई का बिल्कुल महत्व नहीं है उसका
(57:48) उपयोग सिर्फ पिशाब करने के लिए किया जाता है ना कि सहवास सुसुप्त अवस्था में शिन की ल लंबाई चौड़ाई कितनी भी हो उससे कोई फर्क नहीं पड़ता अक्सर सुसुप्त अवस्था में सुन्नत किया हुआ शिष्ण लंबा दिखाई देता है स्पेशली इन कंपेरिजन विद दोज जिन्होने खाना या सुन्नत नहीं की होती है जिसने तना की हुई होती है जब वह उत्तेजित होता है तो उसके लिंग की लंबाई में ज्यादा इजाफा नहीं होता और साथ ही साथ जिन्होने खाना नहीं की होती है उनके शिष्ण की लंबाई दुगना या उससे भी ज्यादा बढ़ जाती है कहने का मतलब यह है कि उत्तेजित अवस्था में लिंग की
(58:35) लंबाई कोई विशेष फर्क नहीं दिखाता चाहे खात ना की हो या तना ना की हो अक्सर शादीशुदा लड़कियां मुझे पूछती है क्या छोटे लिंग से गर्भधारण में दिक्कत आ सकती है जवाब है बिल्कुल नहीं छोटे लिंग की बात छोड़ दो अगर योनि मुख के ऊपर भी किसी ने कुछ र्य छिड़क दिया तो उससे भी गर्भ रह सकता है दूसरा प्रश्न पूछते हैं लोग क्या वैक्यूम अपेट से इंद्रिय की लंबाई बढ़ सकती है जी नहीं यह गलत फहमी है मेरे हर एक लेक्चर में एक सवाल तो लोग जरूर पूछेंगे आज तक हर एक जगह पर कि बाजार में मिलने वाले जो लिंग वर्धक तेल है उससे
(59:22) शिष्ण यानी लिंग की लंबाई और चौड़ाई में कुछ फायदा हो सकता है बाजार में जो ऑयल उपलब्ध है कई तरह के लिंग वर्धक तेल है वह मैंने मरीजों को तीन-तीन महीनों के लिए मालिश करने के लिए दिए थे उसके बाद जब मैंने व सबकी मैंने जांच की पूछताछ की कि कितना फायदा हुआ तो आखिर में यह निष्कर्ष पर पहुंचा कि फायदा तो हुआ मालिश से उसमें कोई शक नहीं है लेकिन हाथ की मांसपेशियों में ना कि पुरुष के प्राइवेट पार्ट में शिष्ण की उत्तेजना का मूल कारण है उसमें खून का भाव खास करके यह खून का भाव होता है
(1:00:08) कॉरपोरा के बनोसा में जिसकी विस्तृत चर्चा हम एनाटॉमी ऑफ पिनिस और फिजियोलॉजी ऑफ इरेक्शन में जरूर करेंगे लेकिन उस कॉरपोरा कैवरनोसा के ऊपर तो एक कवरिंग आ जाता है एक आवरण आ जाता है जिसे ट्यूनिका जीनिया कहते हैं यह आवरण को भेद कर तेल का अंदर पहुंचना लगभग नामुमकिन है इसलिए तेल अमूमन कारगर नहीं होते यह भी लोग पूछते हैं कि इरेक्ट पिनिस का झुकाव लेफ्ट पर रहता है या राइट पर रहता है ज्यादातर पुरुषों में थोड़ा लेफ्ट पर रहेगा क्योंकि ज्यादातर पुरुष में जो लेफ्ट अंडकोष है वह नीचे रहता है और राइट कंपेरटिवली ऊपर पर रहता
(1:00:55) है इसके लिए लेफ्ट पर थोड़ी जगह बनी रहती है और पुरुष जब अंडर गारमेंट पहनते हैं उस समय अक्सर अपना फिनिस लेफ्ट साइड पर ही पार्क करते हैं क्योंकि वहां पार्क करने के लिए बड़ी सहूलियत रहती है इसके लिए ज्यादातर पुरुष में उत्तेजित शिश्न थोड़ा लेफ्ट पर ही झुका हुआ रहता है कुछ लोग को यह फिक्र जरूर बनी रहती है कि क्या थोड़े से टेढ़े पन की वजह से संभोग में दिक्कत आ सकती है जी नहीं शिष्ण का थोड़ा टेढ़ापन यानी थोड़ा दाएं या थोड़ा बाएं झुकाव यह सामान्य है इससे योनि प्रवेश में कोई दिक्कत नहीं आती मिसाल के तौर पर आपको आपके घर में प्रवेश करना है जरूरी चीज है
(1:01:41) प्रवेश करना थोड़े दाएं रहो या थोड़े बाए रहो तो प्रवेश में कोई फर्क नहीं पड़ता उसी तरह शिष्ण का एंगल थोड़ा 90 डिग्री के ऊपर भी हो सकता है या थोड़ा नीचे भी हो सकता है यह बिल्कुल सामान्य है इससे भी योनि प्रवेश में कोई फर्क नहीं पड़ता अगर आपको दरवाजे में से घर के अंदर प्रवेश करना है तो जरूरी चीज यह है कि प्रवेश करना सर थोड़ा ऊपर रख के कि नीचे रख के जाओ तो प्रवेश में क्या फर्क पड़ता है हां कभी-कभी ज्यादा कर्वेचर हो और योनि प्रवेश करने में दर्द होता हो या दिक्कत आ जाती हो तो बात और है तो वो दिक्कत दूर करना आवश्यक है ज्यादातर यह बेहद टेढ़ापन होने
(1:02:30) का कारण कॉरपोरा केवर नोसा में जन्मजात असामान्य ता और उसके ऊपर कवरिंग जिसे बक्स फेसिया कहते हैं उसमें कुछ गड़बड़ी तीसरा कारण होता है उसमें कॉर्डी विथ हाइपोस्पर्मिया की वजह से सिस्ट में थोड़ा टेढ़ापन बन जाता है और ज्यादातर टेढ़ापन का मुख्य कारण है पायरोस डिजीज इस बीमारी में कॉरपोरा कैवरनोसा और उसके कवरिंग के बीच में एक प्लाक एक गांठ एक गट्ठा सा विकसित होता है जिससे इरेक्शन में तो कमी आ जाती है और लिंग में भी थोड़ा टेढ़ापन आ सकता
(1:03:16) है और जिसकी वजह से योनि प्रवेश में दिक्कत आ जाती है कभी-कभी योनि प्रवेश नामुमकिन भी बन जाता है ऐसे सिचुएशन में यूरोलॉजिस्ट से कंसल्ट करना बेहतर होगा जो आपको आगे रास्ता बता सकेगा क्या लोग पूछते हैं कि क्या सर्जरी से पिनिस लंबा हो सकता है यह एक आम सवाल है लिंग का आकार बढ़ाने का एक मात्र उपाय है सर्जरी लेकिन लिंग की असली लंबाई को बढ़ाना मुश्किल है क्योंकि अगर आप लिंग की लंबाई बढ़ाओ तो साथ ही साथ आपको यूरेथ्रा यानी कि मूत्र मार्ग को भी बढ़ाने की जरूरत रहेगी जो प्रक्रिया आसान नहीं है इस सर्जरी की प्रक्रिया को लोग फिनाइल कॉस्मेटिक सर्जरी
(1:04:02) कहते हैं मेरे तजुर्बे में परिणाम बहुत आशा जनक नहीं होते सच पूछे तो व्यक्ति को काउंसलिंग और अपने दृष्टिकोण में बदलाव लाने की जरूरत रहती है एक दूसरा आम प्रश्न क्या बड़े इंद्रिय वाला आदमी अपने पार्टनर को फीमेल पार्टनर को ज्यादा संतुष्ट दे सकता है यह जरूरी नहीं है एन आर्चर इज नोन बाय हि एम एंड नॉट द लेंथ ऑफ हि एरो माने एक धनुर्धर अपने निशाने से पहचाना जाता है ना कि तीर की लंबाई से आर्मी में अक्सर लोग कहते हैं कि इट इज नॉट द लेंथ ऑफ द बैरल बट द चार्ज बिहाइंड दैट मैटर्स हम सभी के दिमाग में एक चीज
(1:04:49) रहती है एक सवाल हमेशा घूमता रहता है क्या व्यक्ति का सामान्य शरीर और शिष्ण की साइज में कोई संबंध होता है जवाब है बिल्कुल नहीं व्यक्ति के सामान्य शरीर से उसके शिष्ण की साइज का अंदाजा लगाना नामुमकिन है अगर व्यक्ति का लिंग सचमुच छोटा हो तो उसके लिए कौन सी पोजीशन बेहतर हो सकती है रेर एंट्री यानी पीछे से सहवास वुड बी अ बेटर पोजीशन फॉर हिम और इसकी विस्तृत जानकारी हम आपको सेक्सुअल के लेक्चर में देंगे पिनिस साइज के बारे में एक बड़ा इंटरेस्टिंग केस मेरे पास आया था जो मैं आपसे शेयर करना चाहता हूं कुछ न्यूजपेपर
(1:05:35) में मेरी कॉलम चलती है उस वक्त मुझे किसी ने यह सवाल पूछा था सवाल कुछ इस तरह से था कि मैं एक रिच अमीर डायमंड मर्चेंट हूं मेरी इंद्रिय की साइज उत्तेजित अवस्था में न इंच है अभी मेरी शादी होने वाली है मुझे इंस्टेंट मेरे पिनिस की साइज बढ़ानी है मैं कितना भी पैसा खर्च कर सकता हूं आप अवश्य कोई उपाय बताएं मैंने उनको जवाब दिया कि देखो योनि मार्ग की कुल लंबाई 6 इंच है आगे के एक तिहाई हिस्से में माने न थर्ड के अंदर दो इंच में ही सिर्फ सेंसेशन है माने स्पर्श का एहसास सिर्फ दो इंच में ही होता है अंदर का 4 इंच बिल्कुल सेंसेशन रहित होता
(1:06:20) है तो अगर आपकी पिनिस साइज उत्तेजित अवस्था में दो इंच या उससे ज्यादा है तो काफी है और कोई इलाज की खास आवश्यकता नहीं है जिसने प्रश्न पूछा था वह डायमंड मर्चेंट था और एडिटर साहब से वह अच्छी तरह से जान पहचान थी शायद तो उन्होंने मुझे फिर से कहा कि डॉक्टर साहब आपने आपका जवाब इतना संतोष काक नहीं है आप दोबारा उन्हें जवाब दीजिएगा तो मैंने दोबारा लिखा कि योनि मार्ग की लंबाई सामान त 6 इंच होती है आगे के न थर्ड में ही सेंसेशन है अंदर का 4 इंच बिल्कुल संवेदना रहित है इससे अगर आपका शिन की साइज दो इंच या उससे ज्यादा है तो पार्टनर सेटिस्फेक्शन के लिए काफी
(1:07:07) है हां अगर आपको इंद्रियस की साइज इंस्टेंट बढ़ानी हो तो एक मात्र उपाय है उपाय है एक मात्र उपाय और वह है जो मैग्नीफाइंग ग्लास आप डायमंड सॉर्ट आउट करने के लिए इस्तेमाल करते हैं उसी का इस्तेमाल इंद्रिय की साइज देखने के लिए भी करें जब जी चाहे तब उसका इस्तेमाल कर सकते हो यह एक ही सेफ और श्यर उपाय है साथ में एक छोटी सी नोट भी लिखी थी कि कृपया इस मैग्नीफाइंग ग्लास का इस्तेमाल डायरेक्ट सनलाइट में ना करें नहीं तो कभी जखम हो सकता है वी आर कंटिन्यूइंग विथ सेक्सुअल मिथ्स क्योंकि आप किसी भी मरीज की सेक्स
(1:07:53) की समस्या देख लीजिएगा चाहे वह प्रॉब्लम शारीरिक हो या मानसिक लेकिन एक चीज आपको उसमें अवश्य मिलेगी और वह है एंजाइटी फिक्र चिंता खास करके इस एंजाइटी की जड़ में नकारात्मक भावनाएं शर्म अपराध भाव और भय जुड़ा हुआ रहता है जिसका असर व्यक्ति के सेक्स परफॉर्मेंस पर पड़ता है और इस वजह से नाकामियों यानी फेलर बार-बार बढ़ते जाते हैं पश्चिम की बात रहने दो हम हमारे देश की बात करते हैं हमारे देश में यह एंजाइटी की खास वजह होती है सेक्स के बारे में फैली हुई मन गणन बातें और गलत धारणाएं जो
(1:08:41) रोगी के मन के अंदर घर कर जाती है और यही गलत धारणाएं एंजाइटी की जड़ बन जाती है जैसे कि हस्त मैथुन की पुरानी आदत या वीर्य शय से होती हुई समस्याएं ब्रह्मचर्य पेशाब के साथ वीर्य या धात का जाना अक्षत कौमार्य इत्यादि यह समस्याएं पीढ़ी दर पीढ़ी चली आ रही है और उसके कारण जो सचमुच सेक्स प्रॉब्लम है जो वास्तविक में सचमुच यौन समस्या है उससे ज्यादा काल्पनिक यौन समस्याओं की संख्या बेहद बढ़ जाती है और साथ ही साथ लोगों को अनावश्यक मानसिक परेशानियां और तथाकथित यौन विशेषज्ञों का
(1:09:26) शोषण भी सहना पड़ता है इसका एक दुश्चक्र बन जाता है और वह उससे बाहर आना व्यक्ति के लिए अमूमन नामुमकिन हो जाता है यह गलतफमिया हर एक जगह पाई गई चाहे व व्यक्ति गरीब हो या अमीर हो पढ़ी लिखी हो या अनपढ़ हो चाहे वह डॉक्टर हो या ना भी हो इसके पहले के दो लेक्चर में हमने हस्त मैथु और शिष्ण की लंबाई के बारे में बताया कि हस्त मैथु एक सामान्य चीज है फायदेमंद है लेकिन नुकसान दे तो हरगिज नहीं और दूसरा पेनिस की साइज के बारे में बताया कि अगर किसी के पिनिस की साइज उत्तेजित अवस्था में 2 इंच
(1:10:12) या उससे ज्यादा है तो विजातीय पार्टनर के संतोष के लिए काफी है और उसमें बच्चे पैदा करने की क्षमता भी बरकरार रहती है इसके अलावा हस्त मैथु और इंद्रिय की लंबाई से जुड़ी हुई विस्तृत बातें अगर आपको जानना है तो आप वो लेक्चर देख सकते हैं रेफर कर सकते हैं अभी हम अपना ध्यान केंद्रित करेंगे और सामान्य और असामान्य गलतफहमियां पर खास करके वीर्य के बारे में सीमन के बारे में वीर्य के बारे में सबसे बड़ी गलतफहमी है कि वरय एक खास चीज है और उसका संचय करना अति आवश्यक है साथ में लोग यह भी मानते हैं कि वीर्य उसका व्यय करने से
(1:10:57) वीर्य का व्यय करने से पुरुष संभोग करने की क्रिया में असमर्थ हो जाता है और उसको बुढ़ापा जल दिया जाता है उससे जुड़ा हुआ एक दूसरा भी मित है कि वीर्य का संचय करने से बदन रिष्ट पुष्ट होता है और जिंदगी लंबी होती है वीर्य के बारे में एक सर्वसामान्य मित आपको हर जगह मिलेगा कि एक बूंद वीर्य मतलब 100 बूंद खून और एक खून के लिए उससे अनेक गुना पौष्टिक आहार यह जानना बिल्कुल जरूरी है कि वीर्य एक रस है जो प्रजनन के अवयवों से बनता है और यह बनता है निकलने के लिए नहीं कि जमा होने के लिए दुनिया का कोई भी आदमी इसे
(1:11:43) जमा नहीं कर सकता यह 24 बा से बनता ही रहता है जिस तरह से आप पेशाब अनिश्चित समय तक रोक नहीं सकते वीर्य का भी भी बिल्कुल वैसा ही है इस प्रक्रिया को समझने के लिए प्रजनन के अवयव की रचना को समझना आवश्यक है पुरुष के अंदर दो अंडकोष रहते हैं और हर एक अंडकोष में दो तरह के सेल्स होते हैं एक में से हार्मोन बनता है जो डायरेक्ट खून में जाता है और जिसकी वजह से पुरुष को दाढ़ी मूंछ बगल में बाल प्राइवेट पार्ट में बाल आते हैं मर्दाना आवाज होती है और काम इच्छा जात होती सेक्सुअल डिजायर जागृत होता है यह सब मर्दानगी के लक्षण है
(1:12:30) जो ज्यादातर हॉर्मोन पर डिपेंडेंट है दूसरी तरह के जो सेल्स होते हैं उसमें से शुक्र जंतु बनते हैं शुक्र जंतु शुक्र नलिका द्वारा शुक्र से होकर प्रोस्टेट में पहुंचते हैं और फिर मूत्र मार्ग से वह बाहर आते हैं 99 पर का जो विर्य है वो सेमिनल वेसिकल्स और प्रोस्टेट ग्रंथ का स्राव है शुक्र जंतु सिर्फ एक परट पे से भी कम रहते हैं अगर किसी व्यक्ति में एक भी शुक्र जंतु ना हो तो उसके सेक्स करने की क्षमता में कोई फर्क नहीं पड़ता यह रिय 24 बा से बनता रहता है आप नहीं निकालो तो अपने आप निकल जाएगा मिसाल के तौर पर एक गिलास पानी
(1:13:16) से पूरा भरा हुआ है और पानी डालोगे तो क्या होगा अरे स्वाभाविक है कि ओवरफ्लो हो जाएगा छलक जाएगा उसी तरह से अगर आप संभोग नहीं करोगे हस्त मैथु नहीं करोगे तो स्वप्न मैथु या निंद्रा मैथु के जरिए स्लीप एमिशन हो जाएगा बाहर आ जाएगा उसे लोग नाइट फॉल या नाइट एमिशन भी कहते हैं यह नॉर्मल है यह कोई बीमारी नहीं है इसके लिए इसके इलाज की कोई आवश्यकता नहीं है सवाल यह पैदा होता है कि तो फिर रियस खलन के बाद कमजोरी क्यों लगती है जहां तक मेरा ख्याल है कि जब से हम पैदा हुए तब से मेरे घर में या आपके घर में कान पर हाथ लगाओ नाक पर हाथ लगाओ मुंह पर हाथ लगाओ सर पर
(1:14:00) हाथ लगाओ कोई कुछ कहने क गया लेकिन अगर प्राइवेट पार्ट को हाथ लगा दिया सब कहेंगे अरे ऐसा गंदा करता है म तभी से हमारे दिमाग में एक ख्याल डाला गया है एक ख्याल घुसाया गया है कि ये कोई खास चीज है और उसमें से निकलती हुई हर एक चीज खास है हकीकत में जैसा हाथ है पांव है आंख है वैसे ही ये शरीर का एक अंग है यह कोई खास चीज नहीं है और उसमें से निकलती हुई चीज भी कोई खास नहीं है और साथ ही साथ एक बूंद विर्य माने 100 बूंद खून और एक बूंद खून माने इतना खाना इतना पौष्टिक आहार की आवश्यकता है यह गलत धारणा से पुरुष की चिंता और बढ़ जाती है और एंजाइटी का शिकार
(1:14:44) हो जाता है और वह बेवजह चिंता तूर मायूस बन जाता है वह अपने आप को कमजोर महसूस करता है यह कमजोरी सरासर मानसिक है शारीरिक बिल्कुल नहीं आप इसमें कितनी कैलोरी य करते हैं अरे जितनी पाव ग्लास मीठे दूध में होती है उससे भी कम अभी एक दूसरा सवाल यहां पैदा होता है कि फिर जिसे सेलिबेसी और ब्रह्मचर्य कहते हैं उसका क्या फायदा फिर सेक्स से पहरे करने का फायदा क्या कोई फायदा नहीं है कहते हैं कि सेलिबेसी या सेक्स से परहेज करने से बदन रुष्ट पुष्ट होता है और बेहतर एथलेट बनने के लिए और लंबे आयुष्य के लिए
(1:15:29) ब्रह्मचर्य अनिवार्य है यह एक गलत धारणा है यह एक मिथ्या धारणा मैं कई ऐसे लोगों को जानता हूं जो खेलकूद में अव्वल आए हैं और जिन्होंने मैच के आधे घंटे पहले वीर्य स्कन किया था मेरे एक मित्र डॉक्टर डल पमेय जो किंजी के एसोसिएट थे उन्होंने मुझे कहा था कि वो एक ऐसे ओलंपिक गोल्ड मेडलिस्ट को जानते हैं कि जिन्होंने गेम शुरू होने से आधे घंटे पहले ही वीर्य स्खलन किया था हकीकत में ओनली थिंग ट्रू अबाउट सेलिबेसी इ दैट ट सेलिबेसी इज नॉट हेरेडिटरी माने ब्रह्मचर्य के बारे में सिर्फ एक ही चीज सही है और वह है कि
(1:16:14) ब्रह्मचर्य अनुवंशिकथा मेरे ख्याल से जहां तक भगवान तक पहुंचने की बात है जितने भी भगवान हैं महावीर शंकर राम बुद्ध जीसस क्राइस्ट मोहम्मद पैगंबर सब के सब शादीशुदा थे जब भगवान खुद शादीशुदा है तो भक्त का तो सवाल ही पैदा नहीं होता ब्रह्मचर्य का असली संस्कृत शब्दार्थ है ब्रह्म माने क्रिएटर ऑफ यूनिवर्स और चर्यता है उसकी खोज में इन सर्च ऑफ ब्रह्मचर्य माने ब्रह्मा की कोज सामान्यत सेक्स में ब्रह्मचर्य का अर्थ जो
(1:17:02) आम लोग समझते हैं वह है कि भाई व्यक्ति का अविवाहित रहकर मैथुन से परेज करना जो सरासर गलत अभी हमने वीर्य और सेलिबेसी के बारे में जानकारी ली आगे हम देखते हैं धात सिंड्रोम के लिए क्या मूत्र के साथ जो शुक्र जंतु धात जाता है उसका कोई उपाय पेशाब के साथ वीर्य जाता है ऐसी गलत भीम का शिकार बहुत से लोग साथ ही साथ कई बार अखबार में एडवर्टाइजमेंट भी देखेंगे या रेलवे ट्रैक पर होर्डिंग देखेंगे कि पेशाब के रास्ते से वीर्य या धात जाता हो तो इलाज के लिए हमको
(1:17:45) आके इससे पुरुष सचमुच मानने लगता है कि यह बहुत बड़ी बीमारी है और जब वह अपने आप को को इससे पीड़ित देखता है तो वह बेहद चिंता तूर हो जाता है एंजाइटी और डिप्रेशन में चला जाता है ऐसी अवस्था में मैंने लोगों को 10-10 15-15 पाउंड वजन भी कम होते हुए देखा है यह धात या वीर्य की वजह से नहीं सिर्फ उसकी चिंता की वजह से हकीकत यह है कि शरीर विज्ञान की क्रिया के अनुसार एक नॉर्मल आदमी में मूत्र के साथ वीर्य का जाना असंभव है जब व्यक्ति को वीर्य स् कलन होता है तब पहले मूत्राशय का द्वार बंद होता है और उसके बाद ही वीर्य झटके से
(1:18:32) बाहर निकलता है लिहाजा वीर्य और मूत्र सामान्यत कभी एक साथ नहीं मिल सकते असल में जिसे वीर्य समझ लिया जाता है वह हकीकत में प्रोस्टेट और मूत्र मार्गी ग्रंथियों का स्राव होता है जब कोई व्यक्ति सौज के लिए बैठता है और मल त्याग के लिए थो थोड़ा सा प्रेशर करता है तो यह दबाव यह प्रेशर मलाशय से होकर प्रोस्टेट और मूत्र नलिका तक जाता है और लिस लिस्ट पदार्थ की कुछ बूंदे जमा होकर बाहर निकल आती यह प्रक्रिया बिल्कुल वैसी है जैसे माथे पर 10 बूंद है पसीने की और 11वी मिलते ही पसीना नीचे टपक पड़ता है बस यही क्रिया मूत्र मार्ग में होती ये गलत वी
(1:19:18) हिंदुस्तान पाकिस्तान बलूचिस्तान अफगानिस्तान तुर्किस्तान ऐसे डेवलपिंग कंट्रीज में ही आपको देखने की मिले जब मैं अमेरिका और यूरोप में था तब एक भी मरीज मुझे ऐसा नहीं मिला मैं सोच में पड़ गया था कि ऐसा क्यों फिर मैं वो निष्कर्ष प वो नतीजे पर पहुंचा कि इसका कारण हमारी सच पद्धति है माने हमारी टॉयलेट जाने की रीत विकसित देशों में लोग बिल्कुल कामड़ का प्रयोग करते हैं उसके लिए उस पर बैठकर जब वह सौज क्रिया करते हैं तब वो सामने सीधा देखते हैं हमारे देश में अक्सर लोग उकड़ मार के बैठते हैं और सोच करते हैं जिसकी वजह से वह सोच करते
(1:20:03) समय नीचे देखते हैं और तब वह लिस पदार्थ टपकते देखते हैं और उसे गलती से वह वीर्य और शुक्र जंतु समझ लेते हैं वीर्य कोई खास चीज है और उसके बह जाने से कमजोरी आ जाएगी नामर्दी आ जाएगी यह गलत धारणाएं उनके दिमाग में तो पहले ही से होती है इसलिए कमजोरी का सास होने लगता है और लेकिन साथ ही साथ जब अखबारों में एडवर्टाइजमेंट पढ़ते हैं कि यद आपको पेशाब के रास्ते से वि निकल जाता हो तो तो आप हमसे इलाज करवाए ऐसे शीर्षक वाले विज्ञापन पढ़ने के बाद उनकी चिंता और बढ़ जाती और फिर वह बीमार ना होते हुए भी अपने आप को बीमार समझने लगते हैं हकीकत में यह बीमारी है ही नहीं
(1:20:48) अगर किसी को भी यह बात पर संदेह है कि यह लिसा पदार्थ शुक्र जंतु है स्पर्म है तो इस पदार्थ का यूरिन का परीक्षण करवा ले इसमें आपको एक भी शुक्र जंतु नहीं मिले मैंने विश्व स्तर पर कुछ अहम रिसर्च मिसाल के तौर पर ऑर्गेजम का एक नया क्लासिफिकेशन दिया सेक्सुअल ग्राउंडिंग का एक नया कंसेप्ट दिया वात्सायन कौन था और उसने कब काम सूत्र लिखा यह सब मेरी विश्व स्तर की रिसर्च है लेकिन अगर मुझे पूछा जाए कि तुम्हारी सबसे लोकोपयोगी रिसर्च कौन सी है तो मैं कहूंगा कि यह धात सिंड्रोम वाली क्योंकि इसकी वजह से ही मैंने मेरे बहुत से देशवासियों को यह गलत
(1:21:33) विमियो से मुक्ति दिला सका हूं और उनकी एंजाइटी और मायूसी दूर कर सका हूं नोट यहां एक बात की क्लेरिटी में जरूर करना चाहूंगा यह खास नोट कीजिएगा कि मल त्याग के लिए हमारी उकड़ बैठने की पद्धति कमोड की पद्धति से बेहतर है लोग कहते हैं कि मूत्र मार्ग से धात जाने से पुरुष नामर्द हो जाता है पुरुष जब मल त्याग करता है तो उसे थोड़ा प्रेशर प्रोस्टेट और यूरेथ्रा पर आता है और जैसे माथे पर 10 पसीने की बूंदे हैं और 11वीं मिलते ही एक धारा के रूप में टपक पड़ती है बस उसी तरह से प्रोस्टेट और यूरेल ग्रंथि का स्राव भी टपक पड़ता है और कुछ चिकनाहट
(1:22:20) की बूंदे बाहर निकल कर आ जाती लेकिन इसमें कोई शुक्र जंतु नहीं होते हकीकत में यह गलत धारणा हमारी टॉयलेट करने की पद्धति से पैदा हुई पश्चिमी देशों में यह समस्या है ही नहीं क्योंकि वह कमर का इस्तेमाल करते हैं और जो कमोर पर बैठता है वह सीधा देखता है और जो उकड़ मारकर टॉयलेट बैठता है वह नीचे देखता है जिसने देखा व बस गया जो नहीं देखा वो बच गया एक सवाल दूसरा भी आता है कि क्या महिलाओ को भी स्वप्न मैथुन होता है जी हां होता है स्वप्न मैथुन के दौरान चरम सीमा के वक्त आनंद का एहसास भी होता है लेकिन पुरुषों की तरह उन्हें स्खलन नहीं होता यह
(1:23:06) प्रश्न मेरे यहां आई हुई हर एक महिला को मैंने पूछा है उससे मैं इतना जरूर कह सकता हूं कि स्लीप ऑर्गेजम की अनुभूति होने में पुरुषों का प्रमाण विशेष है स्त्रियों से का थोड़ा कम दूसरा एक प्रश्न आम होता है कि क्या र्य पतला माने नामर्दी की एक निशानी है नहीं ऐसा बिल्कुल नहीं वीर्य का गाढ़ापुरा होगा या आपकी कामो तेजना तीव्र नहीं है तो वीर्य में थोड़ा पतलापन आएगा और कुछ खानपान की वजह से भी वीर्य गाढ़ा पतला हो सकता है लेकिन इससे पुरुष उस की कामुकता
(1:23:54) या कामशक्ति से कुछ लेना देना नहीं दूसरा सवाल है क्या वीर्य का संचय करने से वह खेलकूद में ज्यादा माहिर हो जाता है वह दीर्घायु होता है यह भी एक गलत वहमी है अगर यह सही होता तो हर ब्रह्मचारी दीर्घायु होते और ओलंपिक के खिलाड़ी होते लेकिन ऐसा बिल्कुल नहीं है क्या वीर्य की मात्रा और उसका रंग महत्त्वपूर्ण है बिल्कुल भी नहीं जैसे जैसे पुरुष की उम्र बढ़ती है वैसे वि का रंग सफेद में से हल्का सा पीला होता है उम्र बढ़ने के साथ वीर्य की मात्रा थोड़ी कम हो और वीर्य के गाड़े में से थोड़ा पतला बनता है लेकिन वीर्य का पीले होने से पतला होने से या कम
(1:24:38) होने से उसकी काम इच्छा और कामशक्ति पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता कई बार लोग पूछते हैं कि क्या नामर्द के लिए सीमन एग्जामिनेशन जरूरी है वीर्य की तपास जरूरी है बिल्कुल नहीं अगर वीर्य में एक भी शुक्र जंतु नहीं हो तो भी उसकी काम इच्छा और काम शक्ति पर कोई विपरीत असर नहीं पड़ती पुरुष की काम शक्ति और बच्चा पैदा करने की क्षमता यह दोनों बिल्कुल अलग-अलग चीज और वह टेस्टीज में मौजूद अलग-अलग सेल्स पर निर्भर कर स्पर्म्स की कमी की वजह से या ना होने की वजह से व्यक्ति की काम इच्छा और कामशक्ति पर कोई प्रभाव
(1:25:23) हां कभी-कभी लोग बताते हैं कि वीर्य में खून आ जाए तो उसकी आम वजह क्या हो सकती है मेरे तजुर्बे में कई बार व्यक्ति बहुत टाइम तक संभोग ना करे या तो कई बार बहुत कम समय में ज्यादा संभोग करे तो ऐसी प्रक्रिया पाई जाती माने टू फ्रीक्वेंसी हरकत हो हो सक कभी कभार ऐसा हो भी जाए तो याद रखना चाहिए कि आपकी सेक्सुअल लाइफ आप रेगुलर बना दें ज्यादातर रेगुलर सेक्स लाइफ से ही यह समस्या दूर हो जाएगी उसके बाद भी अगर आपकी समस्या बरकरार रहे तो आप
(1:26:10) किसी यूरोलॉजिस्ट से कंसल्ट कर सकते दूसरा क्या ब्रह्मचर्य या सेक्स से परहेज फायदेमंद हो सकता है कुछ लोगों को यह गलतफहमी होती है के शारीरिक और मानसिक सुख के लिए सेक्स से परहेज जरूरी है ताकि वह अपनी एनर्जी गवाए नहीं इसलिए वह ब्रह्मचर्य से इस तथा कथक एनर्जी को बचाने की कोशिश करते हैं क्योंकि एक सामान्य इंसान के लिए लगभग नामुमकिन है और जब वह इसमें असफल होते हैं उनका ब्रह्मचर्य जब टूट जाता है तो व्यक्ति एक अपराध भाव और हीन भावना से ग्रसित हो जाती है 24/7 उस उसे यह लगता रहता है कि मुझसे कुछ गलत हो गया ऐसी हरकतें जब बार-बार होती है
(1:26:58) तब व्यक्ति और ज्यादा मायूस बन जाता है ऐसी हालत में व्यक्ति डिप्रेशन में चली जाती है उसको रात को नींद नहीं आती तो आंख जल्दी खुल जाती है बड़ा चिड़चिड़ा बन जाता है और उसका मन किसी भी चीज में नहीं लगता और वह मानसिक रूप से अस्वस्थ बन जाता है जब कई बार पुरुष अपने प्राइवेट पार्ट का बिल्कुल इस्तेमाल नहीं करता तो कभी-कभी प्राइवेट पार्ट में शिथिलता भी आ सकती है कहते हैं कि इट द डिसयूज वि लीड टू अट्रोफी एंड नॉट द यूज कहने का मतलब है बिन उपयोग से शिथिलता आ सकती है उपयोग से नहीं मेरे लेक्चर का एक किस्सा मुझे याद आ रहा है जहां मुझे एक नेता ने सवाल किया था
(1:27:43) कि महात्मा लोग तो ब्रह्मचर्य की बातें करते हैं उसका क्या तब मैंने उनको जवाब दिया था और इतना ही कहा था कि महात्मा माहिर हो होते हैं रिलीजन में या पॉलिटिक्स में सेक्सुअल साइंस में नहीं अगर मैं धर्म की और पॉलिटिक्स की बात करूं और आप माने तो इसमें गलती मेरी नहीं है गलती आपकी हमने अगले लेक्चर में र्य और उसके महत्व के बारे में बात की इसके अलावा और भी कुछ सामान्य गलतफहमियां है जिसके लिए भी लोग अक्सर चिंतित रहते हैं उसके बारे में बात करेंगे खास करके एक बहुत ही आम गलत प्रेमी है जिसकी वजह से मैंने कितनी शादियां टूटते हुए देखी है मैं बात करने
(1:28:28) जा रहा हूं अक्षत योनि पटल के बारे में कौमार्य के बारे में आमन के बारे में योनि पटल एक मेंब्रेन होती है एक छोटा सा पतला टिशू होता है योनि मार्ग के बाहरी हिस्से में लगा हुआ रहता है कुछ औरतों में यह होता है और कुछ औरतों में पैदाइशी नहीं भी होता है लेकिन अगर योनि पटल रहता है तो उस में छेद अवश्य रहता है ताकि महावारी का खून इसमें से ही बाहर आ सके अगर यो नी पटल त्री में रहता है तो कई बार पहले संभोग के दौरान पेनिट्रेशन के वक्त थोड़ा बहुत खून निकल सकता है लेकिन अगर यह योनि पटल पैदाइश नहीं है या किसी वजह से फट गया है
(1:29:13) तो पहले संभोग के वक्त खून नहीं भी निकलता पहले सहवास में खून का निकलना जरूरी नहीं है लेकिन अफसोस की बात है कि लोग इसका ताल्लुक स्त्रियों की पवित्रता या अपवित्र के साथ जोड़ते हैं एक कहावत है कि दे वर्जिन इंडिविजुअल्स हु आर नॉट चेस्ट एंड चेस्ट इंडिविजुअल्स हु आर फिजियोलॉजिकली नॉट वर्जिन कहने का मतलब यह है कि अक्षत योनि वाली अनेक स्त्रियां पवित्र नहीं होती और कई पवित्र स्त्रियां अक्षत योनि वाली लड़की वर्जिन हो तो पहले सहवास में खूल निकलना ही चाहिए यह जरूरी नहीं अक्षत
(1:30:00) योनि का संबंध कुछ लोग ऐसी स्त्री से जोड़ते हैं जिसने कभी मैथु ना किया हो और जिनका पर्दा जिल्ली हायमन बरकरार हो कुछ लोगों के दिमाग में यह रहता है कि पहले संभोग के वक्त हर एक स्त्री को आमतौर पर हाईमैन पटना ही चाहिए और रक्त स्राव होना ही चाहिए हकीकत में या हायमन तेल कूद के दौरान व्यायाम करते समय या टेंपोन जो महावारी के वक्त खून के बहाव रोकने के वाला टिशू जो इस्तेमाल किया जाता है या मास्टरबेशन की वजह से भी यह फट सकता है घुड़सवारी साइकिलिंग और कुछ स्पोर्ट्स एक्टिविटीज की वजह से भी ये हायमन पट सकता है यही कारण है कि हर एक कुंवारी लड़की को
(1:30:46) प्रथम संभोग के वक्त रक्त स्राव का होना बिल्कुल जरूरी नहीं हकीकत में बेवजह से लोग एक छोटे से टिश्यू के लिए बहुत बड़ा इशू खड़ा कर देते यह स्त्रियों का जननांग का दृश्य है ए यह दृश्य में ऐसी लड़की है जिसने कभी भी सहवास नहीं किया इसके लिए उसका हाईमैन अक्षत है दिखाई देता है बी यह चित्र के अंदर लड़की ने सहवास किया है उसके लिए हाई मैन है ही नहीं सी तीसरे चित्र में इस लड़की ने कभी भी इंटरकोर्स नहीं किया फिर भी उसको हायमन नहीं है कहने का तात्पर्य यह है कि हर एक स्त्री को पहले संभोग में खून निकलना ही चाहिए यह जरूरी नहीं यह एक
(1:31:36) गलत फहमी है जो दूर की जाए कुछ कम्युनिटीज में ऐसा भी है कि शादी के पहली रात के बाद सुबह लड़के को खून वाली चद्दर बतानी पड़ती है और लोगों को एहसास दिलाना पड़ता है कि मेरी औरत पाक यानी पवित्र वर्जिन थी नापाक माने पवित्र नहीं यह गलतफहमियां सिर्फ अनपढ़ और गरीब लोगों में नहीं है पढ़े लिखे और अमीरों में भी प्रभावित उसमें भी प्रचलित है अक्सर ज कॉलेज में लेक्चर होता है तो कई बार कुछ लड़कियां यह सवाल पूछती है कि हमने पहले किसी से संभोग किया है और यह बात हमारे होने वाले पति जान तो नहीं जाएंगे बताना या नहीं बताना यह आपकी मर्जी
(1:32:17) की बात है लेकिन अगर आप खुद इंकार करें कि मैंने कभी किसी के साथ संभोग नहीं किया है तो कोई भी साबित नहीं कर सकेगा कि आपने पहले कभी सहवास किया था दूसरा एक सवाल पूछते कौन ज्यादा कामुक पुरुष या स्त्री पुरुष स्त्रियों से ज्यादा कामुक होते हैं यह एक गलत फहमी ज्यादातर स्त्रियों के मन में ऐसा रहता है कि पुरुष अधिक कामुक होते हैं और कई बार यह भावनाओं का जन्म की जड़ एक्स्ट्रा मेरिटल अफेयर्स फ्रीक्वेंसी ऑफ मास्टरबेशन और सेक्सुअल क्राइम्स और बलात्कार जैसी चीजें पुरुषों में ज्यादा दिखाई देती है इसलिए ऐसा एहसास होता है लेकिन यह हकीकत
(1:33:04) नहीं कुछ पुरुषों में भी यह गलतफहमी रहती है कि स्त्रियां पुरुषों से ज्यादा कामा तुर रहती है कई बार यह भावना उनके दिमाग में इसलिए आती है कि एक ही मैथु के दौरान स्त्रियां कई बार चरम सुख की अनुभूति कर सकती है जो कि पुरुष एक बार चरम सुख के बाद तत्काल उत्तेजित नहीं हो सक लेकिन पर्याप्त उत्तेजना मिलने पर स्त्री कई बार चरम यन सुख की अनुभूति के बाद भी बार-बार यह चरम सुख की एहसास उसकी अनुभूति कर सक अंग्रेजी में कहा जाए तो फॉर वुमन टू बी मल्टी ऑर्गेजम इन इनबिल्ट थिंग वाइल इन मैन इट इ नॉट हकीकत में कामेच्छा का आवेग
(1:33:52) व्यक्ति की शारीरिक जरूरत पर और मानसिक आवेग पर आधार रखता है लेकिन याद रहे कि कामेच्छा का आवेग सिचुएशन पर डिपेंड करता है मूड पर डिपेंड करता है आपकी सामाजिक परिस्थिति पर डिपेंड करता है और आपके पार्टनर के रिस्पांस पर भी डिपेंड करता है हकीकत में कामुकता या कामेच्छा दो कान के बीच में होती है दिमाग दो पांव के बीच एक और सवाल आता है कई बार कि सुन्नत किया हुआ पुरुष सेवा ज्यादा लंबा चला सकता है यह गलत फहमी कुछ लोग सुन्नत खासना माने सरकमसीजन कराते हैं क्योंकि वह पार्ट खुला रहे वहां स्मैग्मा जमा ना हो और रोज चमड़ी पीछे लेकर साफ
(1:34:40) करने की आवश्यकता ना रहे लेकिन साथ ही साथ एक डिसएडवांटेज भी यह होता है कि आगे के भाग पर अगर कुछ जखम या इंफेक्शन हो गया तो आपको कोई प्रोटेक्शन नहीं मिलता जो कि नॉन सरकम साइज पुरुष में चमड़ी उस पार्क को कवर करती है प्रोटेक्ट कर जखम के ऊपर चमड़ी आ जाने से परेशानियां कम महसूस होती कुछ ऐसे भी रिपोर्ट आए हैं कि जिन लोगों में खाना करवाई होती है उन लोगों में शिष्ण का कैंसर होने के चांसेस बेहद कम होते हैं लेकिन जो यह धारणा है कि जो आदमी ने खात कराई हुई रहती है वह संभोग की क्रिया भी चला सकता है यह एक गलत फहमी है जो दूर किया जाए दूसरी एक ये भी लोग मानते
(1:35:28) हैं कि भाई नसबंदी से नामर्द कीी आ जाती है कुछ लोग नसबंदी नहीं करवाते क्योंकि उनके दिमाग में यह धारणा रहती है कि नसबंदी करवाने से कामेच्छा और काम शक्ति खत्म हो जाएगी हकीकत में अंडकोष में दो तरह के सेल्स रहते हैं एक में से हार्मोन बनते हैं जो व्यक्ति की काम इच्छा और काम शक्ति ये हार्मोन पर निर्भर रहती है जो डायरेक्ट खून में चला जाता है और दूसरे में से शुक्र जंतु बनते हैं जो शुक्र नलिका द्वारा शुक्रापिंड दी जाती है ताकि पुरुष को क्लाइमेक्स के दौरान वीर्य तो निकलता है लेकिन शुक्र जंतु उसमें शामिल नहीं होते नसबंदी के बाद
(1:36:14) कामेच्छा कामशक्ति और चर्म सीमा के दौरान का आनंद पहले के जैसा ही रहता है नसबंदी के बाद वीर्य की मात्रा लगभग पहले जितनी ही होती है क्योंकि पूरे सीमन के अंदर शुक्र जंतु 1 प्रत प माने 1 पर से भी कम होते हैं उसी तरह स्त्रियों में भी ट्यूबेक्टमी माने स्त्री नसबंदी के ऑपरेशन के बाद काम इच्छा और कामशक्ति और चर्म सीमा का आनंद ऑपरेशन के पहले जैसा था वैसा ही रहता है पर उनमें बच्चा पैदा करने की क्षमता नहीं होती इसकी विस्तृत चर्चा हम फैमिली प्लानिंग प लेक्चर में अवश्य करेंगे कई बार पुरुष और स्त्री की कामेच्छा नसबंदी के बाद बढ़ भी जाती है
(1:37:01) क्योंकि उनको यह एहसास हो जाता है कि अभी प्रेगनेंसी का कोई खतरा ही नहीं है और हम कभी भी बिंदास सेवास कर सकते हैं ज्यादा बार सहवास और सेक्स पावर एक मात्र बैरोमीटर है ऐसा लोग पूछते हैं मुझे एक पेशेंट ने पूछा था कि हफ्ते में कितनी बार संभोग करते हैं तो पावर अच्छा माना जाता है मैंने उसे कहा कि कितनी बार करते हो वह जरूरी नहीं है कैसे करते हो वह जरूरी है आप सहवास को लेकर किसी स्टैंडर्ड के बारे में ना सोचे कुछ लोगों का यह मानना है कि हफ्ते में बस एक या दो बार सहवास करना चाहिए कुछ लोग मानते हैं कि महीने में एक या दो बार करना चाहिए वह स्टैंडर्ड है मैं
(1:37:44) आपको एक सवाल पूछू आपका नॉर्मल बॉडी टेंपरेचर इंसान का कितना होता है सब कहेंगे 98.4 अब 10 लोगों को चेक कर लो एक में भी आपको मुश्किल से मिलेगा अलग-अलग लोगों की अलग-अलग फितरत है और अलग-अलग प्रक्रिया होती है इसके लिए बेहतर यही होगा किसी स्टैंडर्ड या गिनती के चक्कर में ना पड़कर बस सहवास का ही इच्छानुसार आप आनंद उठाए अ बात यह नहीं है कि कोई कितनी बार सहवास करता है बल्कि अहम बात यह है कि उसे कितना एंजॉय करता है कितना संतोष दायक होता है हकीकत में संभोग सही तरीके से सम भोग होना चाहिए माने सरखा भोग होना चाहिए अपने यूनियन मिनिस्टर और
(1:38:31) मेरे अच्छे दोस्त एनर्जी मिनिस्टर श्री वसंत साठे ने मेरी फर्स्ट इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस ऑफ ऑर्गजम के लेक्चर में एक उन्होंने बहुत अच्छी बात बताई थी यह कॉन्फ्रेंस 1991 में हुई उन्होंने बताया कि संस्कृत में जो भी शब्द सम से शुरू हुए हैं वो बहुत अच्छे और मीनिंगफुल भी है उन उनका कहना था कि जो हम लोग बातचीत कर रहे हैं फिलहाल उसको कहते हैं संवाद माने अच्छी बातचीत मेरे साथ उस वक्त पंडित रविशंकर भी बैठे थे उनको और इशारा करके उन्होंने बताया कि जो अच्छा संगीत रहता है उसे वो सम गीत कहते हैं उसी तरह और एक शब्द और है संसद वेर गुड पीपल आर सपोज टू
(1:39:12) गो उसी तरह से उन्होंने कहा कि सम भोग माने सरीखा भोग माने दोनों को समान आनंद मिलना चाहिए कांसेप्ट ऑफ इक्वलिटी एंड म्यूचुअल इज देयर यह सही शब्दों में सभोग होना जरूरी है एक भोग या विषम भोग नहीं होना चाहिए संभोग का मतलब है समान भोग या समान आनंद इसमें दोनों को बराबर का आनंद मिलना चाहिए यह वो आनंद है जिसका एहसास दो लोग एक साथ कर मि लेकर मिलते हैं एक साथ मिलकर करते हैं दोनों को चरम सुख पर पहुंचना जरूरी है लेकिन यह जरूरी नहीं कि कि दोनों को चर्म से ऊपर एक ही साथ पहुंचे लास्ट मिसकनसेप्शन कोई मुझे पूछे
(1:39:58) सबसे बड़ा मिसकनसेप्शन कौन सा है तुम्हारी जिंदगी में कौन सा आया मैं कहूंगा एक सेक्सोलॉजिस्ट हमेशा माहिर पेशेवर विशेषज्ञ होता है यह सबसे बड़ा मिसकनसेप्शन है आपको यह बताऊं मैं कि यह सबसे बड़ी गलतफहमी सेक्सोलॉजिस्ट के बारे में पूरी जानकारी हासिल करने की बाद ही उसके पास इलाज करवाना चाहिए उसका क्वालिफिकेशन उसका तजुर्बा उसके बारे में आपके फैमिली डॉक्टर की राय इत्यादि की जानकारी के बाद ही उसे कंसल्ट करना बेहतर होगा मेरा जो अनुभव है वह मैं आपके साथ शेयर करने जा रहा हूं मेरे तजुर्बे में अगर कोई डॉक्टर
(1:40:47) पेशेंट की सही तरीके से पूछताछ करेगा अगर वो टेलीफोन कंसल्टेशन भी करेगा तो 10 में से न पेशेंट का डायग्नोसिस यानी कि निदान सही तरीके से कर सकेगा मैंने सेक्सुअल मेडिसिन की प्रैक्टिस करीबन 51 साल पहले शुरू की थी स्वाभाविक है कि मैं उस वक्त बहुत ही नया था और मुझे खास किसी की गाइडेंस भी सही तरीके से नहीं मिली मैं उस वक्त अजीब तरह से प्रश्न पूछता था पेशेंट को कि भाई आपका कैसा है आपकी सेक्सुअल लाइफ कैसी है आज मुझे ऐसा लगता है कि यह प्रश्न वैसे ही है जैसे मिसाल के तौर पर आपका मूत्र जीवन कैसा है
(1:41:33) आपका शोच जीवन कैसा है आज मुझे अपने आप पर भी हंसी आती है लेकिन मेरी शुरुआत सचमुच वैसे ही थी उसके बाद मैंने विश्व विख्यात सेक्सोलॉजिस्ट मास्टर्स इन जॉनसन जो अमेरिका के हैं उनके नीचे मैंने मेरी अंडर ग्रेजुएट और पोस्ट वर्कशॉप की ट्रेनिंग ली थी उनका मॉडल डायग्नोसिस के लिए यूज करने की काफी कोशिश की लेकिन मुझे जमा नहीं बहुत अस्पष्ट और लंबा लगा फिर मैंने अमेरिका के एक दूसरे मशहूर सेक्सोलॉजिस्ट थे जिनका नाम था हार्टमैन एंड फिथियन वो भी एक हस्बैंड वाइफ पैर थी और एक उसके बाद एक न्यूयॉर्क की बड़ी सेक्स थेरेपिस्ट
(1:42:19) काफी मशहूर थी जिसका नाम था हेलन सिंगर कप्लान उनका मॉडल ट्राई किया लेकिन वह भी मुझे इतना जमा नहीं और डायग्नोसिस के लिए मुझे सूटेबल नहीं लगा वजह यह थी कि केएम अस्पताल में जहां मेरी ओ पीढ़ चलती थी हा बाय दवे वो भारत की एक मात्र ओ पीढ़ थी एक मात्र सेक्सोलॉजी का डिपार्टमेंट था वहां कभी-कभी करीबन 150 से 200 मरीज की ओ पीड़ में आ जाते थे इसके लिए मजबूरन मुझे एक नया मॉडल विकसित करना पड़ा और इत्तफाक से मैं वह कर भी सका यह मॉडल में मैं सिर्फ चार प्रश्न पूछता हूं और चार प्रश्न
(1:43:05) पुरुष को और चार प्रश्न स्त्री को वजह उसकी यह थी कि पुरुष और स्त्री दोनों के सेक्स चक्र में माने सेक्सुअल रिस्पांस साइकिल में चार चरण होते हैं चार पैरामीटर्स होते हैं उस में सबसे पहला डिजायर माने काम इच्छा दूसरा इरेक्शन माने शिष्ण में तनाव मजबूती तीसरा पेनिट्रेशन उसका मतलब योनि प्रवेश और चौथा ऑर्गेजम उसका मतलब चर्म सीमा क्लाइमेक्स स्त्री में भी उसी तरह चार चरण होते हैं वो है डिजायर माने काम इच्छा खवाहिश
(1:43:51) दूसरा होता है लुब्रिकेशन माने योनि मार्ग में गीलापन चिकनाहट तीसरा है पेनिट्रेशन माने योनि प्रवेश और आखिर का जो चौथा है वह ऑर्गेजम यानी क्लाइमेक्स जिसे हम हिंदी में चर्म सीमा या सुकून कहते हैं मैं करीबन 55000 से ज्यादा मरीज देख चुका हूं और दावे के साथ इतना कह सकता हूं कि 99 पर की जो समस्या होती है इन्हीं चार पैरामीटर के आसपास घूमती रहती है यह मॉडल बहुत ही सरल है और बड़ी आसानी से सेक्स समस्या का निदान हो सकता है वैसे ही जैसे आप पेट की तकलीफ का निदान कर रहे हो या कोई दमा की
(1:44:38) बीमारी का निदान कर रहे हो बस उसी तरह आप सेक्स समस्या का भी निदान कर सकते हो और वह भी कुछ मिनटों में फिर से मैं कहता हूं यह चार चरण ये चार पैरामीटर है काम इच्छा पुरुष में रेक्शन और स्त्री में लुब्रिकेशन तीसरा है योनि प्रवेश और चौथा है ऑर्गेजम ज्यादातर पुरुषों में ऑर्गेजम माने आनंद के एहसास के बाद तुरंत वीर्य स्खलन होता है हालांकि वो जरूरी नहीं स्त्रियों में सिर्फ आनंद का एहसास होता है स्त्रियों में स्खलन नहीं होता पहला चरण जो है उसकी बात करते हैं वो है कामेच्छा यानी सेक्सुअल डिजायर
(1:45:24) अंग्रेजी में कहते तो डिजायर क्या है भाई डिजायर इज एन इंस्टिंक्चुअल इंक्लिनेशन टुवर्ड्स सेंशुअल ग्रेटिफुली डिजायर है कि नहीं वो कैसे मालूम करेंगे बड़ा आसान है अगर एक व्यक्ति वक्ति के दिमाग में सेक्सुअल विचार आते हैं सेक्सुअल सपने पड़ते हैं या दिन में भी कभी उसको सेक्स के बारे में खयालात आते जाते रहते हैं या वह कभी कभार हस्तमैथुन कर लेता है या कभी-कभी सहवास कर लेता है उसका मतलब यह हुआ कि उसकी कामेच्छा बरकरार
(1:46:09) है और कामेच्छा में अमूमन कोई प्रॉब्लम नहीं है यदि किसी व्यक्ति के पास यह यौन विचार और योन सपने हैं तो याद रखें कुल मिलाकर उसके पास एक अच्छा हार्मोनल प्रोफाइल है और उसकी मानसिक यौन प्रक्रिया भी ज्यादातर नॉर्मल है काम इच्छा या तो ज्यादा हो सकती है या कम हो सकती है ज्यादा कब होती है इसमें मानसिक कारण भी होते हैं और शारीरिक कारण भी होते हैं कुछ मानसिक बीमारियां होती है जिसमें ये काम इच्छा बेहद बढ़ जाती है मिसाल के तौर पर मेनिया हाइपोमेनिक जोफ्रे निया जहां कई बार
(1:46:54) डिजायर काफी बढ़ जाता है मेनिया आपको मालूम एक मूड डिसऑर्डर है डिप्रेशन के बिल्कुल अपोजिट व्यक्ति बड़ी बड़ी बातें करता है ओवर फ्रेंडली दिखेगा ज्यादा रिस्क उठाने वाली हरकतें करेगा हाइपोमेनिक थोड़ी कम मात्रा में होती है स्जो फ्रेनिया तो आपको मालूम है कि एक थॉट डिड एक बिहेवियरल डिसऑर्डर है माने विचार और वर्तन का डिसऑर्डर है उसमें कुछ चीजों का आभास होता है कुछ चीजें नहीं होने पर भी वह है ऐसा आभास होता है य फिक्स फॉल्स बिलीव्स ज लूजन इट्स अ थिंकिंग और व्ट यू
(1:47:40) कॉल ए अ थॉट डिसऑर्डर उसको कभी-कभी लुसने होते हैं वो बेफिक्र हो जाता है बिंदास हो जाता है और उस वक्त कभी कभ उसकी ख्वाहिश भी बेहद बढ़ जाती है उसी तरह से कई बार आदमी समझो शराब पी ले या कुछ ड्रग्स का सेवन करें जैसे हशीश है मर जोवाना है उसके बाद भी व्यक्ति की ख्वाहिश बेहद बढ़ सकती है डिजायर कम भी हो सकता है कम कब होता है खास कर के आदमी जब डिप्रेशन में आ जाता है डिप्रेशन में आदमी को नींद देरी से आती है सुबह आख जल्दी खुल जाती है भूख नहीं लगती मन उदास रहता है कभी-कभी जिंदगी खत्म करने के भी ख्याल आ जाते हैं और उसका हर चीज में से इंटरेस्ट
(1:48:26) कम हो जाता है उसको खाने की भी इच्छा नहीं होती बाहर घूमने जाने की भी इच्छा नहीं होती काम पर जाने की भी इच्छा नहीं होती उसी तरह उसकी सेक्स करने की भी इच्छा नहीं होती ऐसी कंडीशन में ख्वाहिश डिजायर बहुत कम हो जाता है डिप्रेशन में अक्सर एक ट्रायड रहता है ज्यादातर यह तीन सिम्टम्स का ट्रायड अक्सर दिखाई देता है वो है हेल्पलेसनेस होपलेस और वर्थलेस दूसरी होती है एंजाइटी जब भी कोई व्यक्ति बेहद फिक्र चिंता में है और फिक्र चिंता के माहौल से गुजरता है तो भी उसकी काम इच्छा कम हो जाती है क्योंकि स्वाभाविक है कि यू कांट
(1:49:12) बी एंसिस एंड सेंसुअस एट द सेम टाइम माने एक ही अवस्था में चिंतित और उत्तेजित दोनों साथ में होना लगभग नामुमकिन है और भी कुछ मानसिक बीमारियां हैं मिसाल के तौर पर ओसीडी जिसे ऑब्सेसिव कंपल्सिव डिसऑर्डर कहते हैं अमोन व्यक्ति परफेक्शनिस्ट टाइप का होता है और कई बार क्लीनलीनेस फ्रीक भी होता है मतलब हर चीज उसको साफ सुथरी चाहिए और एक ही चीज वह बार-बार करता है मने रिपीटेशन बार-बार करता है जब तक वह रिपीट ना करे उसे चैन नहीं आता मतलब रात को उसे दरवाजा बंद करने के लिए बोला तो वह चार पांच बार चेक करेगा जब तक वह चार पांच बार
(1:49:56) चेक नहीं करता तब तक उसको चैन सुकून नहीं आएगा यह सब एक तरह के मानसिक अस्वस्थता के लक्षण है एक व्यक्ति के दिमाग में यह चीज बार-बार करने का विचार इतना हावी हो जाता है कि उसके दिमाग में सेक्सुअल थॉट्स के प्रवेश की संभावना बहुत ही कम हो जाती है यह लोग ज्यादातर क्लीनलीनेस फ्रीक होते हैं उतना ही नहीं स्वच्छता ये मेरा जन्मसिद्ध हक है ऐसा उनका बर्ताव रहता है यहां तक कि वह अपने पार्टनर के प्राइवेट पार्ट को हाथ लगाने से भी कतराते हैं सही डायग्नोसिस करने पर इन सबका इलाज संभव है निदान सही नहीं होगा तो सही चिकित्सा का तो सवाल ही पैदा नहीं होता है कई बार
(1:50:45) स्किजीनियस खत्म हो जाता है देर वुड बी टोटल ब्लंटिंग ऑफ सेक्सुअल डिजायर इलाज तभी संभव हो सकता है जब निदान सही हो कामेच्छा कम होने के एक आम कारण भी है कि आजकल जो दवाइयां इस्तेमाल होती है चाहे वह ब्लड प्रेशर के लिए हो मानसिक अस्वस्थता के लिए हो डिप्रेशन के लिए हो या कई बार कुछ आयुर्वेदिक दवाइयां जिसमें खास करके सर्पगंधा और गांजा का इस्तेमाल किया जाता है वह भी व्यक्ति की इच्छाएं कम कर सकता है ऐसी कौन सी शारीरिक समस्या है जिसमें डिजायर की गड़बड़ी हो सकती है ऐसा देखा जाता है कि अंडकोष में से पुरुष का
(1:51:33) हार्मोन बनता है उसके बाद वह लीवर में जाता है जहां मेटाबोलाइज्ड और फिर वह टारगेट ऑर्गन में जाता है तो कोई भी गड़बड़ी अगर टेस्टीज यानी वृषण में हुई या लीवर में हुई तो व्यक्ति की कामेच्छा में कमी आ सकती है यह कामेच्छा की कमी आहिस्ता आहिस्ता आती है ओवरनाइट नहीं आती अचानक नहीं आती लेकिन कुछ वक्त ऐसा भी होता है कि व्यक्ति की कामेच्छा अचानक बढ़ जाती है या अचानक कम हो जाती है कई बार व्यक्ति बहुत वक्त से अगर सेक्स से लिप्त रहा हो और अपनी काम इच्छा को बहुत दमन करने की कोशिश की हो ऐसी व्यक्ति में
(1:52:18) भी कभी कभ अचानक काम बढ़ सकती है मैं जब केएम अस्पताल में प्रैक्टिस करता था तो कुछ ऐसे भी केस आए थे कि उन्होंने बताया कि डॉक्टर साहब मेरी कमच्छा अचानक बढ़ गई है अक्सर किसी व्यक्ति को ब्रेन ट्यूमर की शुरुआत होती है तो भी ऐसी परिस्थिति निर्माण हो सकती है कभी-कभी बेहद काम अच्छा बढ़ने के पीछे ब्रेन ट्यूमर जैसी बेहद खतरनाक बीमारी भी हो सकती है आप पूछेंगे कि कामेच्छा अचानक कब कम हो जाती है हमारे तजुर्बे में खास करके जब आपसी संबंध में दरार आ जाती है तब कामेच्छा अक्सर अचानक कम हो जाती है कई बार जब व्यक्ति को पता पड़ जाता है मालूम पड़
(1:53:03) जाता है कि मेरे पार्टनर का अफेयर किसी दूसरे व्यक्ति के साथ है तब कामेच्छा अचानक गायब हो जाती है अक्सर दोनों अंडकोष यानी दोनों टेस्टिकल्स को किसी वजह से निकाल देने पड़े तो भी काम इच्छा में कमी आ सकती है कई बार एंटी डिप्रेशन की गोलियां उसमें खास करके अगर वो ट्राइस साइक्लिक एंटी डिप्रेशन रही तो उसके बाद भी अचानक काम इच्छा में कमी आ सकती है हां और एक बात हमें याद रखनी चाहिए कि अगर व्यक्ति का प्रोलेक्टिन हार्मोन बढ़ जाए तो भी व्यक्ति की ख्वाहिश कम हो सकती है ज्यादातर पारंपारिक या ट्रेडिशनल एंटीसाइकोटिक दवाएं प्रोडक्टिव हार्मोन का
(1:53:49) स्तर बढ़ा सकती ऐसे सिचुएशन में दवाइयां बदली भी जा सकती है ताकि चिकित्सा का लक्ष्य वही रहे मानसिक अस्वस्थता की जगह स्वस्थ भी बनी रहे लेकिन कोई सेक्सुअल साइड इफेक्ट ना हो यह मुमकिन है कई बार व्यक्ति को अपने पार्टनर में इंटरेस्ट कम हो जाता है चाहे वह डिस्कवरी ऑफ अफेयर की वजह से हो कि पार्टनर की कुछ हरकतों की वजह से हो तो भी कामेच्छा कम हो सकती है और ऐसे केस को सुलझाने में जरा मुश्किलात जरूर आती है लेकिन सॉल्व हो सकते हैं अगर किसी की कामेचा बहुत ही कम हो गई हो कुछ इन्वेस्टिगेशन भी मदद रूप हो सकते हैं मिसाल के तौर पर सीबीसी माने कंप्लीट
(1:54:35) ब्लड काउंट जिसे कहते हैं उसमें हीमोग्लोबिन कम रहा तो भी इच्छा कम हो जाती है थकान के साथ-साथ व्यक्ति को सेक्स करने का मन ही नहीं होता लीवर फंक्शन टेस्ट से लीवर का पता पड़ सकता है कि उसमें कुछ गड़बड़ी तो नहीं कुछ हार्मोन होते हैं मिसाल के तौर पर प्रोलेक्टिन जो बताया आपको और दूसरा है टेस्टोस्टरॉन माने पुरुष हार्मोन जो बहुत कम हो जाए तो भी कामेच्छा का कमी का कारण बन सकता है कई बार मालूम ना पड़े तो साइकोलॉजिकल टेस्टिंग यह एक मनोवैज्ञानिक परीक्षण है जिसकी वजह से व्यक्ति की पर्सनालिटी का पता पड़ सकता है क्योंकि कुछ पर्सनालिटी
(1:55:18) डिसऑर्डर में भी काम में कमी आ सकती है सही निदान से ही सही इलाज मुमकिन है हकीकत में क्या है ब्रेन एंड नव स्टिमुलेटिंग है वह जरा फैसिलिटेट करते हैं माने सही परफॉर्मेंस के लिए यह सब चक्कर पूरा जरूरी है इसमें कहीं भी गड़बड़ी हुई तो सेक्स चक्र में गड़बड़ी हो सकती है सेक्सोलॉजी एक ऐसी ब्रांच है दोस्तों कि पूरी बदन की रचना इसके अंदर जुड़ी हुई रहती है इसके लिए एक अच्छे
(1:56:05) सेक्सोलॉजिस्ट को पूरे बदन का पूरी सिस्टम का अच्छा ज्ञान होना बिल्कुल आवश्यक है यह बड़ा पेचीदा विषय है मैं इसे सरल और इंटरेस्टिंग बनाने की पूरी कोशिश कर रहा यह इवेलुएशन आपको कहीं किताबों में या इंटरनेट पर उपलब्ध नहीं होगा यह मेरे 50 साल का तजुर्बा मैं आपके सामने रख रहा हूं हमने पहले बात की डिजायर की डिजायर का इलाज भी मुमकिन है जो मानसिक या शारीरिक प्रॉब्लम है वह डायग्नोज करने के बाद उसी दिशा में अगर इलाज किया जाए तो डिजायर में इंप्रूवमेंट हो सकता है समस्या शारीरिक हो या मानसिक वो अवस्था ठीक करने के बाद उसके
(1:56:55) इलाज की शुरुआत में इस तरह से करता हूं ट्रीटमेंट की शुरुआत में सेंसेट फोकस एक्सरसाइजस प्लेजरिंग सेशंस काफी कारगर होते हैं सेंस फोकस एक्सरसाइज याने इट्स सेंसुअस इंटरप्ले बाय अवॉइडिंग सेक्सुअल इंटरेक्शन उसका मतलब है कि पेनिट्रेटिव सेक्स पर माने इंटर उस पर प्रतिबंध लगाया जाता है कितनी भी उत्तेजना आ जाए लेकिन आपको पेनिट्रेशन नहीं करना है यहां इलाज सिर्फ स्पर्श से किया जाता है स्पर्श की भी एक भाषा होती है कौन सा स्पर्श अच्छा लगता है और कहां स्पर्श अच्छा लगता है वह खुद को जानना जरूरी है और वह जानने के बाद
(1:57:44) अपने पार्टनर को भी बताना जरूरी है पसंदीदा स्पर्श कई बार काम इच्छा बढ़ाने का असरकारक जरिया बन सकता है सहवास को यानी पेनिट्रेटिव सेक्स को इसलिए प्रतिबंध किया है ताकि पुरुष को ऐसा ख्याल ना आए कि अगर मैं पेनिट्रेट ना कर सका तो अगर मैं सहवास नहीं कर सका तो वैसे स्त्री के दिमाग में भी यह चीज ना आए यह फिक्र ना आए किई स्यास के दौरान मुझे ज्यादा दर्द होगा तो माने सहवास के विषय की फिक्र चिंता एंजाइटी से दोनों को मुक्त किया जाता है किसने सही कहा है कि व्हाट एवर इ सेंशुअल कैन बी सेक्सुअल बट व्ट एवर इ सेक्सुअल नीड नॉट बी सेंसुल कहने का मतलब यह है कि
(1:58:31) मोहब्बत की आखिरी मंजिल हम बिस्तरी हो सकती है लेकिन हम बिस्तरी की आखिरी मंजिल मोहब्बत हो वह जरूरी नहीं है द क्रक्स सेक्स कैन बी द क्लाइमेक्स ऑफ लव बट लव नीड नॉट बी द क्लाइमेक्स ऑफ सेक्स ज्यादातर डिजायर ख्वाहिश कामेच्छा जिसे कहते हैं वो दो कान के बीच में होती है तो पांव के बीच में नहीं यह सब आपको काम इच्छा के बारे में बताया हम बात करेंगे अब इरेक्शन के बारे में शिष्ण की उत्तेजना के बारे में ज्यादातर लोग ऐसा कहते हैं कि कामेच्छा के बाद ही इरेक्शन होता है मैं इस विचार से सहमत नहीं कामेच्छा से डायरेक्ट इरेक्शन हो वो
(1:59:18) मुमकिन नहीं अब मेरी बात पर ध्यान दीजिएगा मिसाल के तौर पर मैं यहां हूं मेरी पत्नी सामने बैठी है और आप वहां बैठे हैं हम लोग तीनों वहां पर है मुझे मेरी वाइफ के साथ सहवास करने की बेहद इच्छा हुई डिजायर हुआ लेकिन मुझे इरेक्शन नहीं हुआ नहीं होगा क्योंकि आप बैठे हैं इसका मतलब डिजायर तो है सहवास करने का मन भी है लेकिन रेक्शन नहीं होता क्योंकि मेरे अंदर सेक्सुअल ग्राउंडिंग नहीं हो रहा है माने आई एम अनेबल टू पर्सीव द स्टिम इनपुट सेक्सुअल मुझे उत्तेजना मेंक संदेश तो आते हैं लेकिन
(2:00:03) मुझे उत्तेजना मेंक संदेश की अभिव्यक्ति नहीं हो रही है इरेक्शन नहीं हो रहा है क्योंकि आप मौजूद है जब आप चले जाओगे तो सेक्सुअल ग्राउंडिंग शुरू हो जाएगा यही उत्तेजना मेंक संदेश मुझे उत्तेजना की अभिव्यक्ति कराएंगे और मुझे इरेक्शन भी हो जाएगा क्योंकि मेरे में सेक्सुअल ग्राउंडिंग शुरू हो गया है यह एग्जांपल इस चीज की पुष्टि करता है कि उत्तेजना की अभिव्यक्ति यानी इरेक्शन सिर्फ ख्वाहिश नहीं होता लेकिन सेक्सुअल ग्राउंडिंग से होता है सेक्सुअल ग्राउंडिंग का मतलब है सेक्सुअल अराउजल नहीं है इनफैक्ट सेक्सुअल ग्राउंडिंग इज अ प्री कर्सर ऑफ सेक्सुअल
(2:00:47) अराउस पुरुष को किस तरह इरेक्शन होता है विचार से ख्याल से देखने से या स्पर्श से दिमाग में एक सेक्स का सेंटर होता है जब वो उत्तेजित होता है तब वह मैसेजेस वह संदेश स्पाइनल कॉर्ड के जरिए संभवत सेक्स सेंटर ऑफ द स्पाइन में आते हैं इस दौरान खून का बहाव तो होता है लेकिन प्राइवेट पार्ट में थोड़ा विशेष होता है और व्यक्ति को उत्तेजना की अभिव्यक्ति यानी पुरुष को इरेक्शन होता है हां जरूर इसके साथ हाथ ही सही मात्रा में हार्मोन और सही वातावरण एंबिएंस का होना जरूरी है ध्यान रहे एक व्यक्ति अगर एक परिस्थिति में ठीक से उत्तेजित होती है उसको ठीक से
(2:01:33) इरेक्शन होता है और दूसरी परिस्थिति में नहीं होता है तो यह समस्या मानसिक है शारीरिक नहीं शारीरिक बिल्कुल नहीं एक व्यक्ति को सुबह दोपहर हस्तमैथुन करते वक्त कोई रोटिक या पोन क्लिप दे सही इरेक्शन होता है लेकिन सहवास के दौरान नहीं होता है तो यह समस्या मानसिक है शारीरिक नहीं है मैं मेरे पेशेंट को इस तरह से समझाता हूं कि भाई देखो यह मेरा हाथ है यहां से मैंने काट के नीचे करक दिया कोनी से नीचे रख दिया कोनी का आगे का हिस्सा अगर नीचे बढ गया फराम नीचे गिर गया तो फिर 10 बार मैं अपने बाजू को अपने आम को उठाऊंगा तो फराम एक बार भी नहीं उठेगा
(2:02:18) अगर एक बार उठ तो आप मानेंगे कि मेरा हाथ टूटा हुआ था नहीं मानेंगे उसी तरह से एक व्यक्ति में एक अवस्था में शिष्ण की उत्तेजना ठीक से आती है और दूसरी अवस्था में नहीं आती है तो इसका मतलब है कि यह प्रॉब्लम सिचुएशन का है परिस्थिति का है मानसिक है शारीरिक हरगिज नहीं अगर इरेक्शन अचानक बंद हो जाता है या उसमें कमी आ जाती है तो ज्यादातर यह प्रॉब्लम मानसिक ही होता है ज्यादातर शारीरिक समस्या बदन में आहिस्ता आहिस्ता आती है मिसाल के तौर पर डायबिटीज या ब्लड प्रेशर ओवरनाइट थोड़ी ही आते है व आहिस्ता आहिस्ता आते है अगर व्यक्ति को इरेक्शन आता है तो उसमें तीन
(2:03:01) चीज महत्व की होती है एक तो उत्तेजित शिष्ण की मजबूती स्टिफैन कितना कोण बनाता है और तीसरा है इरेक्शन माने वो कड़क पन ठहरता है बरकरार रहता है कि या तुरंत नर्म हो जाता है यह तीनों चीजें अहम है स्टिफैन क्योंकि मजबूती के बगैर प्रवेश मुमकिन नहीं है बहुत टेढ़ापन होगा तो भी प्रवेश मुमकिन नहीं है और वह सस्टेन नहीं कर सकता ठहरता नहीं है और प्रवेश के पहले ही अगर नर्म हो जाता है तो भी प्रवेश मुमकिन नहीं है समस्या कहां है वह जानने के बाद इसका
(2:03:47) इलाज आसानी हो सकता है आज के जमाने में इरेक्शन की समस्या का इलाज ना हो यह मुमकिन नहीं है यह और बात है कि ट्रीटमेंट का ऑप्शन व्यक्ति को पसंद आए या ना भी आए लेकिन व्यक्ति की उम्र अगर 90 साल की भी हो तो भी इलाज मुमकिन है अभी हम इरेक्शन की बात आगे करते हैं कि इरेक्शन की समस्या तीन टाइप की होती है यह मेरे तदब की बात करता हूं और काफी अच्छा तजुर्बा है एक तो व्यक्ति को इरेक्शन होता ही नहीं अगर होता है तो भी थोड़ा बहुत होता है समझो 10 पर उसमें इतनी स्टिस कभी भी नहीं आती कि वह योनि प्रवेश कर सके ऐसी व्यक्ति के लिए
(2:04:36) पीना इंप्लांट माने कृत्रिम लिंग बिठाने की सर्जरी कभी-कभी यह एक मात्र उपाय रहता है दो तरीके के इंप्लांट होते हैं एक थ्री पीस और दूसरा एक वन पीस वन पीस इंप्लांट में आदमी यह हद तक पहुंच जाता है कि वह आसानी से सहवास कर सके लेकिन उस इंप्लांट का कड़क पन इरेक्शन हर वक्त बना रहता है और थ्री पीस इंप्लांट जो होता है उसमें पुरुष का शिष्ण सुसुप्त अवस्था में नॉर्मल हो जाता है नरम हो जाता है और जब चाहो तब और जितनी चाहो तब उत्तेजना यानी कड़क पन इरेक्शन हो सकता है वन प्लीस इंप्लांट थ्री पीस इंप्लांट के कंपैरिजन में काफी
(2:05:23) सस्ता है ध्यान रहे कई बार कुछ दवाइयों की वजह से भी इरेक्शन में गड़बड़ी आ सकती है तो कोई भी सर्जरी कराने से पहले यह जरूर चेक करवा ले कि यह उत्तेजना की कमी का कारण कोई दवाई तो नहीं है उसमें अक्सर ऐसा होता है कि जिस दिन से आपने दवाई शुरू की बस उसी दिन से आपको यह प्रॉब्लम शुरू हो जाता है यहां सिर्फ दवाई बदलने से ही कमजोर इरेक्शन की समस्या पूरी तरह से दूर हो जाती है दूसरे टाइप का जो इरेक्टाइल डिस्फंक्शन होता है जो इरेक्शन में गड़बड़ी आती है उसमें पेशेंट आके ऐसा बयान करेगा डॉक्टर साहब इच्छा तो बहुत होती है इंद्रिय में तनाव भी आता है लेकिन इतना
(2:06:03) तनाव नहीं आता है जिससे मैं योनि प्रवेश कर सकूं ऐसी कंडीशन में गड़बड़ी चाहे नर्व्स में हो या खून के बहाव में हो या हॉर्मोन की थोड़ी बहुत कमी की वजह से हो पीडी फ ग्रुप की दवाइयां इसमें बेहद कारगर होती है जिसमें ज्यादातर तीन टाइप की दवाइयां उपलब्ध है एक है सिल्डेनाफिल दूसरी है वर्डेन फिल और तीसरी है डेला फिल यह दवाइयां इरेक्शन पैदा नहीं करती अगर व्यक्ति को जीरो इरेक्शन है तो इससे कोई फायदा नहीं होगा लेकिन अगर किसी को 25 पर इरेक्शन आता है तो यह दवाइयां आपको 90 95 पर
(2:06:49) इरेक्शन तक आसानी से ले जा सकती है ज्यादातर सभी दवाइयां अगर सहवास के एक घंटे पहले ली जाए थोड़ा फोर प्ले किया जाए और अगर पुरुष को 25 या 30 फीसद इरेक्शन आ गया है तो वह आसानी से 95 पर 90 पर तक ले जा सकती है सिडना फिल की असर चार से 6 घंटे रहती है वडना फील की असर 10 से 12 घंटे रहती है और टेड फील की असर 18 से 24 घंटे तक रहती है इसकी साइड इफेक्ट भी हो सकती है जैसे किसी को एसिडिटी सर दर्द थोड़ी बहुत सर्दी ऐसे मामूली साइड इफेक्ट हो सकती है सिल्डेनाफिल से कई बार हेडेक यानी सर दर्द बहुत ज्यादा होता है उस तरह
(2:07:37) टेरिल फील से कई बार बॉडी बदन का दर्द हो जाता है जिसे मैंने पहले सिल्डेनाफिल लिख के दी है अगर मेरे पास ऐसा कोई मरीज आया और बताने लगा कि डॉक्टर साहब मुझे सर सर दर्द होता है तो मैं ऐसे मरीज को बदल के टेटला फिल या वर्डेन फिल लिख के दूंगा क्योंकि इसमें सर दर्द होने की संभावना बहुत कम होती है उसी तरह मैंने टेटेल फिल लिख के दी है और पुरुष आक मुझे बताएगा डॉक्टर साहब मुझे बहुत बॉडी एक होता है बहुत बदन दर्द होता है उसे मैं सिल्डेनाफिल या डेना फिल लिख के दूंगा यह दवाइयां काफी कारगर है मैं करीबन 15000 मरीजों को यह दवाइयां दे चुका हूं मुझे
(2:08:16) कोई जानलेवा साइड इफेक्ट मिली नहीं मेरे तजुर्बे में वर्डेन फील ज्यादा असरकारक है और उसकी साइड इफेक्ट भी मुझे कंपेरटिवली कम मिली हां यह गोलियां कुछ कंडीशन में नहीं ली जाती जैसे मिसाल के तौर पर कोई पुरुष ऐसी दवाई लेता हो जिसमें नाइट्रेट्स हो ये ब्लड प्रेशर में दी जाने वाली दवाई है या अल्फा ब्लॉकर्स हो जो अक्सर प्रोस्टेट की गड़बड़ में दी जाती है यह पीडी फाई की गोलियां बहुत कारगर है मैंने कम से कम 400 से ज्यादा शादियां टूटने से बचाई होगी क्योंकि डिवोर्स का एक मुख्य कारण है कि सेक्सुअल इनकंपैटिबिलिटी माने शादी का उद्देश्य सफल नहीं हो पा रहा है माने नॉन
(2:09:01) कंजमेशन ऑफ मैरिज जिसे कहते हैं य पर उस को इच्छा होती है लेकिन या तो तनाव सही नहीं आता या तो अगर आ भी जाता है तो प्रवेश के पहले ही नर्म हो जाता है इसकी वजह से व योनि प्रवेश नहीं कर सकता ऐसे वक्त यह पीडी फाई की दवाइयां शिष्ण में आई हुई स्टिफ्ट से जुड़ी हुई रहती है पेशेंट आके बताता है डॉक्टर साहब मुझे इच्छा तो बहुत है लेकिन शिसन में सही कड़क पन या तनाव किसी भी वक्त नहीं आता है चाहे वह सवास का वक्त हो सुबह का टाइम हो पिक्चर देखने के बाद हो या हस्तमैथुन करने के वक्त हो यह समस्या की जड़ तक जाना जरूरी है कि कि किस
(2:09:49) वजह से यह हुआ लेकिन प्रॉब्लम की वजह कुछ भी हो पीडी फाई की दवाइयां अमूमन कारगर होती है खास करके डायबिटीज इरेक्टाइल डिस्फंक्शन कई बार पुरुष हार्मोन जिसे टेस्टोस्टरॉन कहते हैं उसकी कमी की वजह से भी ये इरेक्टाइल डिस्फंक्शन की समस्या हो सकती है अभी 100 साल पहले भी ऐसी समस्याएं थी उस वक्त सिंथेटिक हार्मोन मौजूद नहीं थे उस वक्त लोग क्या देते थे उस वक्त लोग उड़द की दाल का सेवन किया करते थे माने हफ्ते में दो बार दो कटोरी काली उड़द की दाल जिसमें हींग और लहसुन का गाय की घी में तड़का लगा के लोग अक्सर लंच टाइम में
(2:10:36) खाया करते थे लंच टाइम में इसके लिए क्योंकि उड़द थोड़ा वायु बनाता है तो इसके लिए लंच टाइम में खाएंगे तो बेहतर रहता है जिसकी वजह से हार्मोन में इजाफा होता है और एक और चीज साथ ही साथ हार्मोन बढ़ाने के लिए रात को सोते वक्त एक चम्मच सूखी मेथी के दाने आधे गिलास पानी के साथ निकल जाते ध्यान रहे मेथी चबाने की नहीं है या पानी में भिगोने के भी नहीं है निगल जाने की है उड़द और मेथी दोनों से हार्मोन में इजाफा होता है ऐसे मशहूर वैधराज बापा लाल कहा करते थे मैं भी मेरे मरीजों को जिसमें हार्मोन की कमी होती है या जिसकी उम्र 50
(2:11:21) के ऊपर होती है उनको मैं यह दोनों चीज खाने की अक्सर सलाह देता हूं दो तीन महीने के बाद अगर इससे फर्क नहीं पड़ा तो मार्केट में सिंथेटिक टेस्टोस्टरॉन भी उपलब्ध है वह गोली के फॉर्म में भी है इंजेक्शन के फॉर्म में भी है और जेल के फॉर्म में भी उपलब्ध है मेरे तजुर्बे में जेल और इंजेक्शन ज्यादा प्रभावकारी रहे और टेस्टोस्टरॉन का जो सल्ट होता है वो टेस्टोस्टरॉन अन डेकनेट हार्मोन कंपेरटिवली काफी सेफ और इफेक्टिव रहा है अगर किसी की उम्र 45 साल से ज्यादा हो तो उनको ब्लड टेस्ट में पीएसए टेस्ट माने टोटल पीएसए जिसे प्रोटिक स्पेसिफिक एंटीजन
(2:12:09) कहते हैं वह करवाना चाहिए अगर यह रिपोर्ट नॉर्मल है तो ही वह सिंथेटिक हार्मोन टेस्टोस्टेरोन का इस्तेमाल कर सकते अगर किसी पुरुष में हार्मोन की कमी हो तो पीडी फाई की गोलियां भी जितनी हद तक काम करनी चाहिए उतनी हद तक काम नहीं करती और हार्मोन का लेवल नॉर्मल हो जाने के बाद वह फिर से बेहतर काम करना शुरू कर देती इरेक्शन में तीसरी टाइप है वह जो प्रॉब्लम होता है उस वक्त को इच्छा होती है इंद्रिय में कड़क पन भी आ जाता है लेकिन प्रवेश के पहले व कड़क पन बिल्कुल नरम हो जाता है इसके कई कारण हो सकता है मानसिक और शारीरिक दोनों मानसिक कारण में
(2:12:52) मुख्य है एंजाइटी मिसाल के तौर पर कोई सहवास कर रहा है और समझो कि दरवाजे पर टक टक किसीने नॉक कर दिया वो डर की वजह से कई बार इंद्रिय नॉर्मल हो जाती है सुसुप्त अवस्था में आ जाती है फिर जब पुरुष दोबारा सहवास करने को जाता है तो उसके दिमाग में यही खल पहले से आ गया है कि वोह फिर से कोई आ जाएगा तो और वह ख्याल मात्र से कई बार व्यक्ति का कड़क आता ही नहीं और आ गया तो आने के बाद फिर से दर्भ हो जाता है इसमें ऐसा है कि समझो कि परीक्षा के लिए आप बैठे हो एक बार फेल हो गए दोबारा ज्यादा पढ़ाई की होगी तो भी फिर आपको आत्मविश्वास नहीं
(2:13:33) होगा कॉन्फिडेंस नहीं रहेगा कुछ लोगों में अक्सर यह फिक्र मंडराती रहती है कि दोबारा फेल तो नहीं हो जाऊंगा बार-बार ऐसा फेल होने के बाद यह समस्या की जड़ थोड़ी गहरी हो जाती है और पुरुष को एंजाइटी के कुछ लक्षण दिखाई देते हैं मिसाल के तौर पर दिल की धड़कने तेज हो जाना हाथ कांपने लगना पसीना आ जाता हलक गला सूख जाना इसमें कोई भी सिम्टम्स हो सकते हैं यह एंजाइटी कम करना जरूरी है क्योंकि यू कैन नॉट बी एंसिस एंड सेंसुअस एट द सेम टाइम माने एक व्यक्ति एक ही अवस्था में चिंतित और उत्तेजित दोनों का साथ में होना नामुमकिन है ध्यान रहे ज्यादा कैफीन शराब और तंबाकू
(2:14:24) यह एंजाइटी में इजाफा कर सकती है तो बेहतर यही होगा कि अगर आपको इस टाइप का प्रॉब्लम हो तो इसका सेवन बंद किया जाए और कम से कम कम किया जाए कई बार उसको यह भी कहना पड़ता है कि जब ऐसी एंजाइटी का एहसास हो तो आप लंबा सांस लीजिएगा कई बार ऐसे लंबे सांस लेने से भी एंजाइटी कम हो जाती है फिर भी अगर यह एंजाइटी के सिम्टम्स चालू रहे तो कुछ समय के लिए सहवास के एक घंटे पहले एंटी एंजाइटी दवाई ले सकते हैं मिसाल के तौर पर क्लोना जपाम एमडी एमडी का मतलब है माउथ डिसोल्व 0.
(2:15:06) 25 मिलीग्राम अगर यह 15 मिनट के पहले आप यह गोली जबान के नीचे रख लेते हो तो ज्यादातर यह एंजाइटी के सिमटम्स ये घबराहट के सिमटम्स दूर हो जाते हैं और शिष्ण का योनि प्रवेश आसानी से हो सकता है यह दवाई की असर 12 घंटे तक रहती है कई बार ऐसी अवस्था में पीडीएफ आई की दवाइयां भी ले सकते हैं यह भी इरेक्शन सस्टेन करने में सहायता रूप हो सकती है अगर जरूरत पड़े तो एंटी एंजाइटी की गोली और पीडी फाई की गोली साथ में भी ले सकते हो यह सिनर्जेटिक एक्शन करती है ज्यादातर यह गोलियां सहवास के एक घंटे से पहले ले ले सकते हैं और भूखे पेट बेहतर असर करती है ज्यादा में
(2:15:52) ज्यादा 24 घंटे में आप यह गोलियां एक बार ले सकते हो आपके डॉक्टर की परामर्श के बाद ही इस दवाइयों का सेवन करें कई बार पीडी फाई और एंटी एंजाइटी दवाइयां दोनों कारगर नहीं होती क्योंकि एंजाइटी बेहद इंटेंस हो जाती है ऐसे सिचुएशन में कई बार इंट्रा फिनाइल इंजेक्शन माने इंद्रिय में जो कॉरपोरा कैवरनोसा होता उसमें देने वाला इंजेक्शन कारगर हो सकता है इसमें जो सिरिंज यूज की जाती है वह नॉर्मल इंसुलिन सिरिंज होती है जिसमें जो दवाई का इस्तेमाल किया जाता है वह ज्यादातर पेपा वन हाइड्रोक्लोराइड या पेपा वन हाइड्रोक्लोराइड विथ क्लोर
(2:16:38) प्रोजन या और प्रोस्टा ग्लैन इवन का इस्तेमाल किया जाता है यह इंजेक्शन लेने के बाद थोड़ा बहुत फोर प्ले करने के बाद या किसी रोटिक चित्र वगैरह देखने के बाद पुरुष के शिष्ण में तनाव आ जाता है यह तनाव इतनी हद तक आ सकता है कि अगर आप आसानी से प्रवेश कर सको और अगर आप तनाव आने के बाद आप चाहो कि कुछ समय के बाद उसको मुझे बिठाना है या फ्रेस स्टेट में लाना है तो भी आपके लिए मुश्किल हो जाएगा माने व्यक्ति का इरेक्शन बरकरार रहेगा मजबूती और सस्टेन भी ठीक रहेगी इसमें डॉक्टर डोज एडजस्ट कर सकता है और मरीज को इंजेक्शन कैसे लेना वह सिखा सकता है जिस
(2:17:25) तरह एक डायबिटीज का म मरीज इंसुलिन का इंजेक्शन लेता है उसी तरह यह इंजेक्शन भी लिया जाता है हालांकि प्राइवेट पार्ट होते हुए भी इसमें दर्द का एहसास बेहद कम होता है ध्यान रखने वाली बाबत इसमें एक है कि कई बार यह इरेक्शन अगर चार पाच घंटे के बाद भी बरकरार रहे तो यह कंडीशन को प्रायएपस म कहते हैं इसमें इरेक्शन और ज्यादा मजबूत बनता है साथ में दर्द भी होने लगता है फिर इसे बिठाने के लिए नॉर्मल करने के लिए आपको यूरोलॉजिस्ट की सहाय ले सकते हैं या फिनाइल फ्रिन नाम की दवाई आती है जिसका इंजेक्शन अगर आप कॉरपोरा केवर नौसा में सही तरीके से लेते
(2:18:10) हो तो भी प्राय पिसम दूर हो जाता है और यह शिश्न नॉर्मल फ्लेसिंग अवस्था में वापस आ जाता है मुझे यहां एक मेरे मरीज की याद आती है उसकी जब पहली बार शादी हुई थी तब पहली रात को उस उत्तेजना बिल्कुल ही नहीं हुई उसके बाद उसने कई बार कोशिश की लेकिन एंजाइटी इतनी ज्यादा आथ कि उसकी वजह से इरेक्शन ही नहीं होता था यह पुरुष को हस्त वेतन करने के वक्त मैं शिने में बिल्कुल उत्तेजना सही तरीके से आ जाती थी और क्लाइमेक्स भी ठीक तरीके से पहुंच सकता था आखिर में लड़की के साथ वह सहवास नहीं कर सका लड़की चली गई डिवोर्स हो गया जब दूसरी शादी हुई यही इंजेक्शन उसके लिए कारगर बना
(2:18:58) पहली रात आराम से सहवास कर सका तीन चार बार इंजेक्शन की मदद से वह आसानी से सहवास कर सका उसके बाद आत्मविश्वास वापस आ गया और उसके बाद उसको इंजेक्शन की बिल्कुल जरूरत ही नहीं पड़ी पेपर पेपा वन का इंजेक्शन बहुत सस्ता आता है जब वायग्र और देशी वायग्र इंडिया में नहीं आई थी बहुत से मरीजों जो केएम हस्पताल में आते थे जिनकी आर्थिक स्थिति ठीक नहीं होती थी मैं उनको अक्सर यही इंजेक्शन देता था और उनकी पर्सनल लाइफ सेक्सुअल लाइफ इस वजह से काफी संतोष जनक बन गई थी इंजेक्शन की कीमत पा रुपया से भी कम थी पेपा वन और क्लोर प्रोमजीन का
(2:19:46) कॉमिनेशन बहुत बहुत ही कारगर है और बहुत ही सस्ता है और इसे रेफ्रिजरेटर करने की भी जरूरत नहीं है वो आम रूम टेंपरेचर में रह सकता है इंजेक्शन कैसे लेना कहां लेना कितना लेना वह दो या तीन सेशन में आपका डॉक्टर आपको आसानी से सिखा सकता है ताकि अपने आप यह इंजेक्शन जब चाहो तब ले सको मैं नॉर्मली यह इंजेक्शन जरूरत पड़े तो हफ्ते में दो बार लेने की सलाह देता हूं दूसरा एक आम कारण है जो अक्सर अपने देश में देखा जाता है कि पुरुष को इच्छा होती है इंद्रिय में कड़क पन आता है और जब वह सहवास की कोशिश करता है तो योनि मार्ग में
(2:20:32) प्रवेश के वक्त जब चमड़ी थोड़ी पीछे आ जाती है तब उसको बेहद दर्द होता है जिसे फाइमोसिस कहते हैं हमारे यहां सेक्स एजुकेशन की कमी की वजह से अभाव की वजह से बहुत से लोग जिनकी खात्मा नहीं की होती है वो उनको मालूम ही नहीं होता कि शिष्ण के अग्र भाग की चमड़ी को पीछे लेकर रोज साफ करनी चाहिए कुछ लोगों ने यह चमड़ी कभी भी पीछे ली नहीं होती उनको योनि प्रवेश के दौरान काफी दर्द होता है और दर्द की वजह से कड़क इंद्रिया तुरंत नर्म हो जाती है बार-बार ऐसी हरकत होने के बाद उसमें एंजाइटी भी साथ में बढ़ जाती है कुछ लोगों में बाद में इतनी एंजाइटी बढ़ जाती है कि
(2:21:20) वह भूल जाते हैं कि उन्हे उनको दर्द हुआ था सिर्फ एंजाइटी और उनके सिम्टम्स ही याद रहते हैं यह समस्या का अगर तुरंत समाधान करना हो तो मैं उन्हें कंडोम पहनने की सलाह देता हूं एक बार व्यक्ति ने कंडोम पहन लिया फिर चमड़ी का आगे पीछे होना मुमकिन ही नहीं होता है पॉसिबल ही नहीं होता है और दर्द भी गायब हो जाता है साथ ही साथ योनि प्रवेश में भी कोई दिक्कत नहीं होती हां हा अगर कोई परमानेंट सॉल्यूशन चाहता है तो उसको रोज चमड़ी पीछे लेकर साफ करना चाहिए जरूरत पड़े तो नारियल का तेल इस्तेमाल कर सकते हैं ताकि चमड़ी आसानी से पीछे सरखा सके अगर फिर भी उन्हें
(2:22:03) दर्द का एहसास बरकरार रहे तो खाना जिसे सुन्नत जिसे सरकमसीजन कहते हैं वह एक मात्र उपाय होता है यह बड़ा आसान ऑपरेशन है कोई भी सर्जन कर सकता है इसमें हॉस्पिटल में एडमिट होने की भी जरूरत नहीं है एक बार मेरे पास एक ऐसा मरीज आया था कि मैंने उसे तना कराने की सलाह दी लेकिन उसे किसी धार्मिक वजह से तना नहीं करनी पड़ी वह नहीं करना चाहता लेकिन वह चाहते थे कि उनको बच्चा हो लेकिन दर्द की वजह से बिगर कंडोम पहने वह सहवास नहीं कर सकता था फिर फिर भी उनको बच्चे की चाहत थी तो मुझे पूछा कि डॉक्टर साहब और कोई उपाय
(2:22:48) है कि जिससे यह पहनने के बावजूद भी बच्चा हो सकता है यह कंडोम पहनने के बावजूद भी बच्चा हो सकता है और तना करने के लिए हमारे गुरुजी हमें मना करते हैं मैं क्या करूं मैंने एक कॉमन सेंस का बहुत ही सिंपल उपाय बताया मैंने कहा सिर्फ इतना का कि कंडोम पहनने के बाद कंडोम के आगे के हिस्से में जहां एक पाउच रहता है वहां उसमें छेद करके फिर सहवास करें जिसकी जैसे सहवास में भी आसानी रहेगी दर्द भी नहीं होगा और सीमन भी बाहर डिस्चार्ज हो जाएगा उसको बच्चा भी हो गया यह हमने बात की जहां व्यक्ति को इच्छा होती है इंद्रिय में तनाव आता है लेकिन सहवास करने के पहले
(2:23:34) शिष्ण नरम हो जाता है शिष्ण बैठ जाता है तब की बात है दूसरी एक कंडीशन क्या हो सकती है कि आदमी को इच्छा तो होती है तनाव भी आता है यनि प्रवेश की कोशिश भी करता है लेकिन योनि प्रवेश होता नहीं है और शिष्ण भी बैठता नहीं है शिष्ण का तनाव उसका कड़क पन वैसा ही रहता है यह समस्या खास करके इन लोगों में पाई जाती है जिनको पता ही नहीं कि प्रवेश कहां करना इन लोगों को समझाने की जरूरत रहती है कि भाई स्त्री में तीन छिद्र रहते हैं एक यूरेथ्रा जो सबसे ऊपर होता है जिसमें से पेशाब आता है जिसमें उंगली का प्रवेश भी मुमकिन नहीं है इसलिए
(2:24:19) प्र शष्ण का प्रवेश तो संभव ही नहीं है दूसरा है वजाइना जिसे योनि मार्ग कहते हैं वहां मासिक स्राव होता है बच्चा भी वहीं से आता है और सहवास भी वही होता है और तीसरा है गुदा द्वार याने टॉयलेट का द्वार जो बहुत नीचे है तो एक ही जगह प्र पर प्रवेश मुमकिन है और वह है योनि मार्ग सामान्य बिन अनुभवी आदमी सर मानव शरीर की रचना से परिचित नहीं रहते तो ऐसे सिचुएशन में अगर मैं सलाह देता हूं कि जब पुरुष को उत्तेजना आ जाए तो प्रवेश का काम खुद ना करे अपनी पार्टनर को ही करवाने दे क्योंकि उसको मालूम है कि
(2:25:05) कहां और कब प्रवेश कराना है कई बार लोग सवाल पूछते हैं डॉक्टर साहब क्यों ऐसा मैंने उनको समझाता हूं कि अंधेरा है अंधेरे में मुझे खाना खाना है तो मैं निवाला अपने मुंह में तो डाल सकूंगा आसानी से लेकिन अगर सामने के मुंह में डालने गया तो नाक पे लगा गाल पे लगा दाढ़ी पे लगा कहीं भी लग सकता है उसी के लिए कहां प्रवेश कराना है वह आपकी स्त्री पार्टनर बेहतर समझती है क्योंकि औरत अपनी खुद की शरीर रचना खुद की एनाटॉमी बेहतर जानती है यहां पर दो लाभ हो सकते हैं एक तो सही जगह पर पेनिट्रेशन होता है और उसकी कोई फिक्र नहीं रहेगी और दूसरा
(2:25:51) प्रवेश का काम बिगर एंजाइटी आसान हो जाएगा कई बार यह होता है कि पुरुष को इच्छा होती है शि में तनाव भी आता है लेकिन बिन अनुभव की वजह से उनको सही सेक्सुअल पोजीशन का ख्याल नहीं होता कुछ औरतें सहवास के दौरान ना समझ की वजह से अपने दोनों पांव के घुटने ऊपर उठाने की बजाय बिल्कुल रखती है ऐसे में शुरुआत में योनि प्रवेश कभी-कभी मुश्किल हो जाता है कुछ परस ऐसे भी होते हैं कि जिनको सहवास करना और कैसी पोजीशन लेना उसका आता पता ही नहीं होता है मेरे पास ऐसे कितने ही मरीज आए होंगे जो अपने दोनों पांव अपनी वाइफ के दो पांव के
(2:26:37) बाहर रखकर सहवास करने की कोशिश करते हैं वह खुद पत्नी के दोनों पांव के बीच में आने की बजाय वह पत्नी को अपने दोनों पांव के बीच में रखकर सहवास करता था मेरी हॉस्पिटल प्रैक्टिस में 10 में से एक पेशेंट को सहवास की पोजीशन का सही पता नहीं होता मैं इसके लिए मेरी क्लिनिक में हर एक पेशेंट से उसकी सहवास की प्रक्रिया के बारे में पोजीशंस के बारे में पूछता हूं और कुछ-कुछ केसेस में मुझे यह मेल फीमेल डॉल्स जो जानकारी लेने में बहुत मदद रूप होती है ताकि वह मुझे बता सके कि वोह एग्जैक्ट कि पोजीशन से सहवास करते हैं अपने यहां यह पोजीशंस की पूछताछ बहुत
(2:27:22) आवश्यक है कोटल हिस्ट्री इज वेरी इंपोर्टेंट इन अवर पार्ट ऑफ द वर्ल्ड दिस इज अनफॉर्चूनेटली नॉट इंक्लूडेड इन द वेस्टर्न हिस्ट्री एट ऑल कई बार पुरुष को इच्छा होती है इंद्रिय में तनाव भी आता है लेकिन वह प्रवेश नहीं कर पाता इंद्रिय का कड़क पन बरकरार रहता है ऐसी परिस्थिति मेरी तजुर्बे में दो कंडीशन में आई एक अगर बेहद टेढ़ापन हो वो टेढ़ापन की मुख्य वजह पायरोनिन पैदाइशी तकलीफें पैदाइशी तकलीफें तो बचपन से ही रहती है बचपन से ही टेढ़ापन मौजूद होता है लेकिन पायरो डिसीज जवानी के
(2:28:10) बाद शुरू होता है पायरोस डिसीज में एक प्लाक एक गांठ पिनिस में बन जाती है जिसकी वजह से खून के बहाव में तो गड़बड़ी होती है लेकिन शिष्ण में टेढ़ापन इतना आ जाता है इतना आ जाता है कि प्रवेश के वक्त बेहद दर्द होता है या प्रवेश मुमकिन ही नहीं होता कई बार इसका निदान शारीरिक तपास से अगर ना हो तो गांठ और प्लाक की मौजूदगी का निदान रेडियोलॉजिस्ट डॉपलर या कलर डॉपलर से बड़ी आसानी से कर सकते हैं ये पायरोनिन इलाज के लिए कुछ दवाइयां उपलब्ध है लेकिन मेरे तजुर्बे में यह दवाइयां ज्यादा कारगर नहीं पाई बेहतर यही होगा कि आप किसी अच्छे
(2:28:58) यूरोलॉजिस्ट को कंसल्ट करें और फिर आगे बढ़े याद रहे लेकिन सर्जरी तभी करवाए जबी प्रवेश मुमकिन ना हो या प्रवेश करने में बेहद दर्द हो अगर प्रवेश होता है तो होल्ड ऑन दूसरी एक कंडीशन है जहां कामेच्छा इंद्रिय में तनाव भी बराबर है टेढ़ापन भी नहीं है लेकिन वह प्रवेश करने की कोशिश करता है लेकिन प्रवेश नहीं कर पाता इरेक्शन उसका बरकरार रहता है मेरे पास एक 33 साल का युवक आया था जिसकी यह तीसरी शादी थी पहली दो बीवियां ने उसे तलाक दे दिया था तीसरी शादी उसने जिसके साथ की थी वह एक समझदार नर्स थी
(2:29:47) यह मरीज की मैंने खून की हार्मोन की जांच करवाई और सभी जांच करवाई सब नॉर्मल निकले एक एन पीटीआर नाम का टेस्ट आता है जिसे नॉकटर्न फिनाइल टमस रिजट मॉनिटरिंग कहते हैं जिसमें पुरुष रात को पुरुष को सोना पड़ता है शिष्ण पर इलेक्ट्रोड लगाए जाते हैं और रात के दौरान हर पुरुष को दो चार बार इरेक्शन होता ही होता है यह ठीक से होता है कि नहीं इसकी जांच करने का मशीन है इससे दो चीज की मालूमात होती है एक कड़क पन ठीक से आता है कि नहीं और दूसरा कड़क पन कितने समय तक रहता है यह टेस्ट भी करवाया वो भी नॉर्मल था मैंने नर्स को
(2:30:34) समझाया कि उसका हर एक टेस्ट नॉर्मल है और फिर बाद में उसको पूछा कि उसको कोई मानसिक अस्वस्थता तो नहीं तब मुझे नर्स ने बताया कि यह मानसिक रूप से संपूर्ण स्वस्थ लेकिन जब वह प्रवेश करने की कोशिश करते हैं तब वह इंद्रिय उनकी मुड़ जाती है माने देर इज बकलिंग ऑफ द पिनिस अभी इसकी जांच करने का भी एक तरीका है जिसमें एक्सियल प्रेशर नापा जाता है इससे पुरुष का एक्सल प्रेशर करवाया तो वह काफी कम था फिर बाद में यह मालूम पड़ा कि पहली शादी से पहले किसी गर्लफ्रेंड के साथ वह सहवास करता था और उस दौरान ओवर एक्साइटमेंट ने उसने कुछ अजीब सी पोजीशन
(2:31:18) ट्राई करने की कोशिश की उसमें वह गलत तरीके से सहवास में प्रेशर देने की वजह से उसको एक कड़क करके आवाज आया और शिष्ण में बहुत दर्द हुआ और उसके बाद उसकी प्राइवेट पार्ट उसका शिश नरम हो गया और दो-तीन घंटे के बाद जब देखा तो वहां सूजन भी आ गया था उसका यह प्रॉब्लम तब से शुरू हो गया था इस कंडीशन को फ्रैक्चर ऑफ पिनिस कहते हैं हालांकि पुरुष के इंद्रिय में शिष्ण में कोई हड्डी नहीं होती फिर भी उसे फ्रैक्चर ऑफ पिनिस कहा जाता है इसका इलाज दवाई गोलियों से मुमकिन नहीं है उसके लिए सर्जरी एकमात्र उपाय था और वह भी यूरोलॉजिस्ट वुड बी द बेस्ट
(2:32:04) पर्सन किसी भी पुरुष के प्रॉब्लम की ट्रीटमेंट शुरू करने से पहले हमेशा यह ख्याल रखना चाहिए कि स्त्री पार्टनर की भी तपास आवश्यक रहती है खास करके दो चीज के लिए रूल आउट करनी चाहिए एक तो वेनिस मस और दूसरा ऑब्स्ट्रक्टिव वजाइनल पैथोलॉजी वजाइनल में ऐसा होता है कि स्त्री प्रवेश चाहे तो भी शिष्ण प्रवेश के दौरान उसके दोनों पांव एंजाइटी की वजह से जकड़ जाते हैं एकदम करीब आ जाते हैं और प्रवेश नामुमकिन हो जाता है यह अक्सर डर की वजह से होता है और दूसरा है योनि मार्ग में कोई रुकावट कोई अवरोध तो नहीं मिसाल के
(2:32:48) तौर पर मुझे दरवाजे में से बाहर जाना है कम से कम साइज और वो लेवल ऐसा होना चाहिए कि मैं उसमें से बाहर जा सकूं कई बार स्त्रियों की यह दो समस्याओं की वजह से भी पुरुष सो कॉल्ड नामर्दी का शिकार हो जाता है मैरिज कंजमेट नहीं होता है और उसका पूरा ब्लेम अमूमन पुरुष पर ही आ जाता है मैं ऐसे किस्सों में पुरुष की प्रेजेंस में स्त्री की एग्जामिनेशन करता हूं अगर स्त्री को तपास करवाने में कोई हिचकिचाहट हो तो मैं स्त्री को कुछ डायलेटर दे देता हूं जो बिल्कुल पुरुष के शिष्ण की तरह होते हैं और छोटे से बड़ी
(2:33:34) साइज तक भी होते हैं तो स्त्री खुद अपने घर में अपने पुरुष से तपास करवाती है एग्जामिन करवाती है डायलेटर प्रवेश करने के बाद यह जांच कर सकते हैं कि योनि मार्ग में कोई रुकावट तो नहीं इसमें दो फायदे हैं एक तो स्त्री में कोई रुकावट वाली चीज नहीं है वह कंफर्म हो जाता है और दूसरा पुरुष को स्त्री के प्राइवेट पार्ट की रचना की मालूमात हो जाती है और कहां प्रवेश करना उसका आईडिया पूरा मिल जाता है उसके बाद ही माने स्त्री की एग्जामिनेशन के बाद ही फीमेल पार्टनर की एग्जामिनेशन बाद ही अपनी ट्रीटमेंट के लिए आप आगे बढ़ सकते हैं हमने डिजायर की बात की इरेक्शन की बात
(2:34:23) की इरेक्शन के बाद प्रवेश क्यों नहीं होता उसकी बात की अभी हम बात करने जा रहे हैं कि प्रवेश हो गया तो फिर आगे क्या दिक्कत आ सकती है कई बार प्रवेश के बाद एंजाइटी की वजह से कोई डिस्ट्रक्शन की वजह से कोई आवाज की वजह से कड़क इंद्रिय यूनि प्रवेश के बाद भी नर्म हो सकती है मेरे पास एक केस आया था कि पति पत्नी के बाजू के कमरे में नई नई शादी हुई थी और उनके बाजू के कमरे में उनके माता-पिता का कमरा था जैसे ही पति प्रवेश करने के बाद आगे पीछे की मूवमेंट शुरू करते थे तो खटिया में चू चू की आवाज होती थी पिताजी
(2:35:09) सुन लेंगे तो कैसा लगेगा यह ख्याल से ही लड़के का कड़क शिष्ण नरम हो जाता यहां इलाज का जरिया दवाई गोलियों का नहीं था सिर्फ खटिया बदलने का था और प्रॉब्लम सॉल्व हो गया प्रवेश के बाद शिष्ण के नरम होने के शारीरिक कारण भी हो सकते हैं यह तो मानसिक कारण था किसी भी कारण के बाद प्रवेश के बाद मूवमेंट करते वक्त अगर दर्द हुआ तो कड़क श नर्म हो जाता है यह दर्द सेक्सुअली ट्रांसमिटेड इंफेक्शन की वजह से हो सकता है मूत्र मार्ग में स्ट्रक्चर की वजह से हो सकता है या इंद्रिय के अग्रभाग में कोई इंफेक्शन हुआ वहां दर्द हुआ तो भी
(2:35:55) हो सकता है इतना ही नहीं बॉडी के किसी भी पार्ट में मूवमेंट के कारण अगर दर्द होता है तो कड़क शिष्ण की नर्म होने की संभावना बनी रहती इसका सही तरीके से सुनके अगर सही तरीके से इलाज किया जाए जो मुमकिन है इंफेक्शन हो तो उसे ट्रीट किया जाए मूत्रमार्ग की गड़बड़ी हो स्ट्रक्चर हो उसकी भी ट्रीटमेंट उपलब्ध है तो आराम से प्रॉब्लम सॉल्व हो सकता है दर्द निकल जा सकता है दर्द निकल जाएगा तो एंजाइटी निकल जाएगी तो आप का सहवास भी आसानी से हो सकता है दूसरी एक कंडीशन है जिसमें प्रवेश के बाद कड़क शिष्ण नर्म हो जाता
(2:36:38) है नॉर्मल डिलीवरी माने बच्चा जब आता है उस नॉर्मल डिलीवरी से उसके बाद योनि मार्ग की दीवारों में थोड़ा लूस पन आ जाता है ये लूस पन कई बार औरतों में बढ़ती हुई उम्र में भी आ सकता है उसकी वजह से पुरुष के शिश्न और स्त्री के योनि मार्ग की जो पकड़ है वो ढीली हो जाती है और उसकी वजह से भी कड़क शिश्न नर्म हो जाता है यह मैं इस तरह से अपने मरीजों को समझाता हूं ताकि क्लेरिटी ज्यादा बने कि भाई यह पुरुष का इंद्रिय है यह पुरुष का शिष्ण है और यह स्त्री का योनि मार्ग है अगर से मैं सहवास करता हूं तो इस तरह से करता हूं उसी तरह से हस्तमैथुन के दौरान
(2:37:23) यह पुरुष की इंद्रिय है शिष्ण है और हाथ योनि मार्ग के फॉर्म में फोल्ड हो जाता है और मैं हस्तम तुन इस तरह से करता हूं मने दोनों क्रिया एक समान है दोनों में कोई अंतर नहीं लेकिन अगर हस्तमैथुन के दौरान मुझे चरम सीमा पर पहुंचना है तो कम से कम हाथ की पकड़ तो मेरी सही होनी चाहिए अगर हाथ में यह लूज पन रखूंगा तो मैं क्लाइमेक्स पर पहुंच ही नहीं सकूंगा उसी तरह से योनि मार्ग की दीवार भी अगर लूज रहेगी तो वही हाल सहवास के दौरान भी हो सकता है माने लूज पन की वजह से कड़क शिश्न नर्म हो जाएगा अगर तुरंत उसका इलाज करना है तो मेरे तजुर्बे में यह एक पोजीशन मुझे
(2:38:10) ज्यादा मदद रूप हुई है वह है पुरुष के योनि प्रवेश के बाद स्त्री अपनी टांगे क्रॉस कर देती है जिसे वुमन लेगस क्रॉस पोजीशन कहते हैं माने प्रवेश के बाद स्त्री अपनी एक एड़ी माने एंकल दूसरी एड़ी पर रख देती है जिससे पकड़ मजबूत हो जाती है इसे अंग्रेजी में वुमन ले क्रॉस पोजीशन कहते हैं यह पोजीशन में पकड़ मजबूत हो जाती है ग्रिप बेहतर बन जाती है और चर्म सीमा पर आसानी से पहुंच सकते हैं इसकी विस्तृत चर्चा हम सेक्सुअल पोजीशन के क्लास में करेंगे अगर कोई स्त्री को इसका परमानेंट इलाज करवाना हो तो पेल्विक फ्लोर
(2:38:55) मसल एक्सरसाइज से हो सकता है इसे की गल्स एक्सरसाइज या की गल्स कसरत भी कहते हैं यह एक्सरसाइज बड़ी आसान है मिसाल के तौर पर अगर आपको पेशाब करने की अर्ज हुई पेशाब करने की इच्छा हुई और किसी कारण वश अगर आपको रोकना पड़ा तो आप क्या करते हो बस वही यहां करनी है यह मसल्स का जो संकुचन किया आपने जो कंट्रक्शन किया उसे पीसी मसल्स यानी पीबो कक्सी जिस मसल्स कहते हैं 20 बार सुबह और 20 बार शाम को कुछ हफ्तों के लिए करीबन 10 से 12 हफ्ते अगर आप करोगे यह एक्सरसाइज तो योनि मार्ग की दीवारें जो ढीली हो गई है वो फिर से मजबूत हो सकती है
(2:39:43) अगर इससे भी किसी को फायदा ना हुआ तो सर्जरी भी की जा सकती है जहां योनि मार्ग की दीवारों को ठीक करके चौड़ाई कम की जा सक दूसरी बात है कि आफ्टर पेनिट्रेशन आफ्टर टू एंड फ्रो मूवमेंट के बाद जब जोश या एक्साइटमेंट और बढ़ता है चरम पर आता है तब व्यक्ति को ऐसा एहसास होता है कि अब मैं क्लाइमेक्स के करीब पहुंच चुका हूं इस वक्त प्रोस्टेट यूरे में प्रोस्टेट सेमिनल वेसिकल्स जिसे शुक्रापिंड नेविटेक हैं और उसके एक सेकंड के बाद कुछ
(2:40:50) नायु का कंट्रक्शन होता है संकुचन होता है और झटके के साथ विर का स्खलन होता है जब यह झटके लगते हैं उसी वक्त वह उसके मूत्र द्वार से बाहर आ जाता है और साथ ही साथ उस वक्त उसको दिमाग में बेहद आनंद का एहसास भी होता है माने काम सुख काम परम सुख में परिवर्तित हो जाता है और गैस का वह एक्सपीरियंस करता है ध्यान रहे यह बेहद आनंद की अनुभूति दो कान के बीच में होती है दो पांव के बीच में नहीं आनंद की अनुभूति और वीरय स् कलन दोनों अलग-अलग चीजें हैं विरय स् कलन ना भी हो तो भी बेहद आनंद जिसे ऑर्गेजम कहते हैं उसका
(2:41:37) एहसास आप कर सकते हो यह ऑर्गेजम ये आनंद की प्रक्रिया में कुछ गड़बड़ी कभी कवा हो सकती है मैंने यह 50 55 हज मरीज जो देख चुका हूं उसमें मैंने चार तरह की गड़बड़ियां देखी है आईव कम अक्रॉस फोर वरायटी ऑफ ऑर्गेजम डिस्टरबेंसस इन माय क्लिनिकल प्रैक्टिस मेन एज वेल एज वुमन उसपे माने कि ऑर्गेजम पर अगर आप जल्दी पहुंच जाते हैं तो उसे अर्ली ऑर्गेजम कहते हैं जिसमें आपको चरम आनंद का एहसास जरूरत से जल्दी हो जाता है दूसरा होता है डिलेड ऑर्गेजम जिसमें आनंद का एहसास जरूरत से ज्यादा
(2:42:24) देरी से होता है तीसरा है इंपेयर्ड ऑर्गेजम जिसमें आपको आनंद का एहसास तो होता है लेकिन उसमें कुछ कमी महसूस होती है कुछ कमी आ जाती है और चौथा है एब्सेंट ऑर्गेजम माने आनंद का एहसास आपको बिल्कुल होता ही नहीं अक्सर लोग अर्ली ऑर्गेजम को प्रीमेच्योर इजेकुलेशन या सििक रस कलन कहते हैं मैं अर्ली ऑर्गेजम को प्रीमच इजेकुलेशन तो हरगिज नहीं कहूंगा क्योंकि उसके कुछ कारण और भी है यवन से पहले बहुत से लड़के सहवास में या हस्त मैथुन में सक्रिय होते हैं वह चरम सीमा पर पहुंचते हैं लेकिन उस वक्त विरय
(2:43:08) स् कलन नहीं होता ठीक वैसे ही एक पुरुष प्रोस्टेट का ऑपरेशन हो गया और ऑपरेशन के बाद भी वो ऑर्गेजम पर तो पहुंचता है लेकिन इजेकुलेशन बाहर नहीं आता वीर्य बाहर नहीं आता उसी तरह कुछ दवाइयां मिसाल के तौर पर कार्मा मस पीन या टेसिस जैसे सेवन के बाद कभी-कभी पुरुष ऑर्गेजम तक पहुंचता है लेकिन उसको विर्य बाहर नहीं आता विरस कलन होता ही नहीं है अगर यह पुरुष जल्दी क्लाइमैक्स तक पहुंच जाते हैं जल्दी ऑर्गेजम पर पहुंच जाते हैं तो आज के मनोचिकित्सक यूरोलॉजिस्ट सेक्सोलॉजिस्ट हम सब उसे प्रीमच एजकुलेशन कहते हैं हालांकि जक तो है ही नहीं फिर भी उसे प्रीमच
(2:43:50) एजकुलेशन कहते हैं माने अनहोनी को आप होनी बनाने की बात कर रहे हैं इससे मरीज भी कंफ्यूज हो जाता है और डॉक्टर भी खुद भी कन्फ्यूज रहता है क्योंकि यहां स्खलन तो होता ही नहीं फिर भी आप उसे स्खलन कह रहे हो स्खलन ना होने के बाद भी उसे शीघ्र स्खलन कहना यह एक विरोधाभास है यह अजीब गलत फहमी है ऐसा कहना एक गुनाह है इसके लिए अर्ली ऑर्गेजम शब्द यह बेहतर शब्द है और यह एक मात्र सही शब्द है जो हकीकत में एजेक्ट समस्या को फोकस करता है अरली ऑर्गेजम यानी शीघ्र चरमोत्कर्ष एक बहुत ही
(2:44:37) सामान्य समस्या है 50 पर से अधिक लोग यह समस्या से पीड़ित होंगे पुरुषों में ऑर्गेजम की तकलीफ इरेक्टाइल डिस्फंक्शन से भी मुझे ज्यादा नजर आई है अर्ली ऑर्गेजम के मुख्य चार कारण होते एक तो पुरुष का जो शिष्ण के आगे का हिस्सा रहता है जो लाल भाग रहता है वह ज्यादा सेंसिटिव रहता है दूसरा प्रोस्टेट में कुछ इंफेक्शन रहा तो तीसरा डायबिटीज की शुरुआत हो तो भी अक्सर ऐसी हरकत हो सकती है और चौथा व्यक्ति में जोश जुनू इतना बढ़ जाता है कि वह अपने आप को कंट्रोल नहीं कर पाता और अपनी इच्छा से पहले ही वह चर्म सीमा पर
(2:45:23) पहुंच जाता है चारों का इलाज मुमकिन है एक कारण हो सकता है दो हो सकते हैं तीन हो सकता है या चारों चार भी हो सकते हैं समझो अगर आगे का हिस्सा ज्यादा सेंसिटिव हो तो तो बाजार में कुछ क्रीम और स्प्रे उपलब्ध है जो एनेस्थेटिक क्रीम कहा जाता है और एनेस्थेटिक स्प्रे के नाम से प्रचलित है योनि प्रवेश के 10 15 मिनट पहले ये क्रीम या स्प्रे आगे के लाग लाल भाग पर लगा दिया और फिर चार पाच मिनट के बाद उसे साबुन या पानी से बराबर धो देना चाहिए इससे आगे के लाल भाग शन हो जाता है उसकी संवेदना कम हो जाती और कुछ पुरुष उसके बाद अपना सहवास
(2:46:05) लंबा चला सकते हैं माने जो अरली ऑर्गेजम है वो विलंबित ऑर्गेजम में परिवर्तित हो सकता है बाजार में कुछ डीले कंडोम्स भी ऐसे उपलब्ध है इस कंडोम में पहले से ही एनेस्थेटिक द्रव्य मौजूद होता है कुछ कुछ लोगों में यह भी फायदेमंद साबित हो सकता है दूसरा जो मैंने प्रोटिक इंफेक्शन की बात की वो कई बार प्रोस्टेट में इंफेक्शन हो जाने के बाद यह अर्ली ऑर्गेजम की समस्या शुरू हो जाती है यह समस्या उनमें पहले से नहीं होती बाद में शुरू होती है सही एंटीबायोटिक्स की वजह से ये इंफेक्शन को कंट्रोल में लाना या इसका इलाज करना मुमकिन है और उसके बाद शीघ्र
(2:46:52) ऑर्गेजम पहले की स्थिति में आ सकता है यह समस्या बहुत कम लोगों में देखी जाती तीसरी समस्या है डायबिटीज की शुरुआत में कभी कभार यह प्रेजेंटिंग सिमम हो सकता है जिस लोगों में यह समस्या पहले से ही नहीं बल्कि बाद में शुरू होती है उन्होंने डायबिटीज रूल आउट करना चाहिए अगर कोई पुरुष को डायबिटीज है तो उसको कंट्रोल करना जरूरी है लेकिन कई बार कंट्रोल करने के बावजूद भी अर्ली ऑर्गेजम की समस्या में कोई ज्यादा फर्क नहीं पड़ता और चौथा जो कारण है जो आम कारण है उनमें कुछ लोगों में यह समस्या पहले ही से होती है और उनमें एक्साइटमेंट यानी जोश जुनू इतना
(2:47:37) बेहद बढ़ जाता है कि जब भी वो सहवास करने जाते हैं तो कई बार योनि प्रवास के पहले योनि प्रवेश के दौर दन या योनि प्रवेश के तुरंत बाद पुरुष क्लाइमेक्स पर पहुंच जाता है और डिस्चार्ज हो जाता ज्यादातर ऐसे मामलों में डिपॉक्सिटिन-60 मैंने कई बार क्लोमी प्रमी 10 से 25 मिलीग्राम की गोली सहवास के छ आठ घंटे के पहले दी होगी बहुत लोगों को और ज्यादातर
(2:48:25) मामलों में यह शीघ्र ऑर्गेजम विलंबित ऑर्गेजम में परिवर्तित हो जाता है यह गोलियां परमानेंट क्यर नहीं है जब तक पुरुष लेता है तब तक ही काम करती है यह टेंपररी इलाज है परमानेंट इलाज में पीसी एक्सरसाइज या वजली और अश्विनी मुद्रा कभी कभी कारगर बन सकती है यह कसरत बड़ी आसान है यह समझ लो कि आपको पिशाब लगी है और आपको रोकना है तो आप क्या करते हैं जो मसल्स आपने कंटक्ट किए संकोचन किए वो पीसी मसल्स है जिसे प्यूब कक्सी जस मसल से जाने जाते हैं आपको वही चीज करनी है सुबह और शाम को माने समझो आप सांस लो सांस पकड़ रखो पीसी मसल कांट्रैक्ट करो जैसे पेशाब
(2:49:14) लगी हो और आपको रोकना है जो करते हो वही क्रिया करो पाच सेकंड पकड़ रखो फिर रिलीज करो फिर पा सेकंड आराम करो ऐसी क्रिया 10 बार सुबह और 10 बार शाम को करने से आठ से 12 हफ्तों में शीघ्र ऑर्गेजम में विलंब लाना कुछ लोगों में मुमकिन हो जाता है मास्टर्स एंड जॉनसन जो अमेरिका के विश्व विख्यात सेक्सोलॉजिस्ट थे जब मैं 1973 और 19 75 में उनके वहां था वो लोग स्क्विज या स्टॉप स्ट टेक्निक का इस्तेमाल करते यह टेक्नीक में आपका पार्टनर ज्यादातर हस्तमैथुन से आपको उत्तेजित करता है और आप जब ऑर्गेजम या चरम के करीब
(2:50:02) पहुंचने वाले हो तब उससे कुछ सेकंड पहले आप आपके पार्टनर को सिग्नल दे देते हो जैसे कि उसका पांव दबा दिया या किसी तरह से कह दिया कि अब मैं चरम पर पहुंचने वाला हूं तो उस समय वह औरत अपना हाथ हटा लेती है फिर जब भी आपकी उत्तेजना कम हो जाती है तब आप दोबारा उसे सिग्नल देते हो तब वह फिर से उत्तेजना शुरू कर देती है यह हरकतें तीन चार बार की जाती है इसे स्टॉप स्टार्ट टेक्निक कहते हैं अहम बात यहां पर यह है कि चरम सीमा पर पहुंचने से पहले उस संवेदना की अनुभूति का एहसास उसका एक्सपीरियंस यही ट्रीटमेंट का उद्देश्य है
(2:50:49) उसकी जड़ है मास्टर्स एंड जॉनसन स्टॉप स्टक टेक्निक के बजाय अक्सर स्क्विज टेक्निक का इस्तेमाल करते थे स्क्विज टेक्निक में पुरुष जब सिग्नल देता है उस वक्त स्त्री अपना अंगूठा फ्रेन पर रख देती है और तर्जनी माने पहली उंगली जिसे इंडेक्स फिंगर कहते हैं वो लाल भाग पर और मध्यमा दूसरी उंगली उसे मिडल फिंगर कहते हैं वो जरा कॉरपोरा कैवरनोसा के एंड पर रख देती है माने इंडेक्स फिंगर के बिल्कुल करीब और नीचे वहां पर रख के दबाव डालती है यह दबाव करीबन तीन से चार सेकंड तक होना चाहिए मिसाल के तौर पर दो बार आप लंबा सांस लेकर छोड़ दो तब तक रहता है फिर यह
(2:51:37) दबाव स्कवीज एकदम से छोड़ दिया जाता है इस तरह से तीन चार बार स्कवीज दी जाती है ध्यान रहे यह स्क्विज देते समय मूवमेंट सिर्फ उंगलियों में होनी चाहिए रिस्ट या कलाई में बिल्कुल नहीं मेरे अनुभव में यह ट्रीटमेंट बहुत कारगर नहीं लगी एक हकीम साहब का कहना था कि यूनानी सिस्टम ऑफ मेडिसिन में भी शीघ्र स्खलन के इलाज का एक आसान तरीका बताया है उनका ये कहना है कि अगर किसी को शीघ्र स् कलन से निजात पानी हो तो रुक रुक के पेशाब करो यह आदत डाल दो अगर यह आदत बना दोगे तो रुकावट में भी फर्क पड़ जाएगा
(2:52:24) उनका यह मानना है कि दिमाग यह नहीं समझता कि आप पेशाब निकाल रहे हो या सीमन या वीर्य निकाल रहे हो दिमाग को तो ऐसा ही एहसास होता है कि वह एक लिक्विड जा रहा है अगर पेशाब में कंट्रोल आ जाएगा तो साथ ही साथ सीमन में भी कंट्रोल आ जाएगा यह तरीका अपनाने में कोई नुकसान नहीं है अगर एक व्यक्ति की शादी हो गई है अगर उसको सीग्र कलन की समस्या है अगर मैंने बताई हुई हर चीज उसने आजमाई फिर भी उसको संतोष जनक समाधान नहीं हुआ तो एक चीज तो वो जरूर कर सकता है कि सहवास से पहले माने प्रवेश से पहले ही फोर प्ले में थोड़ा ज्यादा टाइम गुजारे और अपने पार्टनर को एक
(2:53:12) या दूसरी तरह से संतोष दे दे सुकून देवे चाहे वह हस्त मैथु हो मुख मैथु हो वाइब्रेटर हो कुछ भी हो जरूरी चीज यह है संतोष उसे क्लाइमेक्स तक पहुंचा दे उसे सेटिस्फेक्शन दे दे और उसके बाद वह योनि प्रवेश कर सकते हैं संभोग सही तरीके से सम भोग होना चाहिए विषम भोग नहीं होना चाहिए माने बोथ द पार्टनर्स नीड टू बी सेटिस्फाइड मैंने केएम अस्पताल में एक स्टडी की किया था करीबन 100 मरीजों को यह प्रश्न पूछा था कि उन्हें कौन सी पोजीशन बेहतर लगती है और क्यों ज्यादातर लोगों ने यह बताया था कि उन्हें फीमेल सुपीरियर
(2:53:57) पोजीशन यानी स्त्री ऊपर और पुरुष नीचे यह पोजीशन ज्यादा अच्छी लगती है क्योंकि यह पोजीशन में शीघ्र चरम सीमा थोड़ी बहुत विलंबित चरम सीमा में परिवर्तित हो जाती बहुत से अक्सर जब वह क्लाइमैक्स पर पहुंच जाते हैं उसके बाद वह मुंह फेर के सो जाते हैं उनको यह पता ही नहीं होता कि अपने पार्टनर को भी संतोष देना चाहिए मेरे यहां पाकिस्तान से एक बहुत मशहूर शायर रेफरेंस लेकर आए थे वह अपनी पार्टनर के साथ आए थे उनके पार्टनर की उम्र उनसे न थर्ड थी एक तिहाई थी और वह भी शायरा थी मैंने उनसे पूछा शायर साहब को कि क्या समस्या है तो शायर
(2:54:46) साहब ने जवाब दिया कि डॉक्टर साहब मुझे तो कोई समस्या नहीं लगती लेकिन मोहतरमा को लगती है आप उन्हीं से पूछ लीजिएगा मैंने मैडम से पूछा कि मैडम क्या तकलीफ है उन्होंने बताया कि डॉक्टर साहब मैं बयान नहीं कर सकती मुझे शर्म आती है तो मैंने जब बताया कि देखो अगर आप मुझे बताएंगे नहीं तो मैं आपका इलाज कैसे करूंगा आखिर में वो मान गई उन्होंने मुझे सिर्फ इतना ही बताया कि डॉट साहब मैं अपने अंदाज में बात करती हूं मैंने बोला स्वागत है डॉक्ट साहब बात कुछ ऐसी है कि वो तो नहा के चल दिए और लहरें तड़पती रह गई शायर साहब के दिमाग में यह था कि औरत सिर्फ एक
(2:55:32) बच्चा पैदा करने वाला मशीन है उसके अलावा और कुछ भी नहीं उनको भी संतोष की जरूरत है सुकून की जरूरत है ऐसा उनको पता ही नहीं था वह बेहद इ अच्छे इंसान थे ब बेहद अच्छे इंसान थे जब उनको यह पता पड़ा तो व बहुत दुखी हो गए लेकिन उसके बाद उन्होंने तय कर लिया कि पहले मैं अपनी पार्टनर को सुकून दे दूंगा सेटिस्फाई कर लूंगा और उसके बाद ही प्रवेश करूंगा कम वट में यह हमने अर्ली ऑर्गेजम की बात की उसी तरह से एक व्यक्ति अगर देरी से ऑर्गेजम पर पहुंचती है तो वर्तमान वर्गीकरण या करंट क्लासिफिकेशन उसे रिटा देड इजेकुलेशन कहते
(2:56:19) हैं हकीकत में रिटा देड का मतलब है दिमागी तौर पर मंद कमजोर और जिसका इलाज काफी मुश्किल है या लगभग नामुमकिन है मिसाल के तौर पर रिटारडेड चाइल्ड रिटारडेड ग्रोथ हकीकत में यह विलंबित ऑर्गेजम यानी डिलेड ऑर्गेजम है डिलेड ऑर्गेजम यह शब्द बेहतर है यह समस्या पर 100% फोकस करता है हर एक विलंबित ऑर्गजम का केस मुश्किल नहीं होता अक्सर विलंबित ऑर्गेजम के अंदर कई बार हार्मोन की कमी होती है कई बार सेंसेशन की कमी होती है अक्सर ऐसे केसेस में जितनी उत्तेजना चाहिए उतनी नहीं मिलती है फिर भी व्यक्ति आखिर में चर्म सीमा पर तो पहुंच
(2:57:03) जाती है लेकिन बहुत देर के बाद खास करके इलाज में मानसिक या शारीरिक रूप से उत्तेजना में इजाफा वही उसका एक मात्र उपाय जो व्यक्ति विलंबित स्खलन से ग्रसित है उसे अपनी पसंद और नापसंद सामने वाले को बताना चाहिए ताकि पार्टनर वही चीज उसके लिए करे जिसमें उसकी खुद की उत्तेजना ज्यादा बढ़े कुछ पोजीशंस में भी इससे मदद रूप हो सकती है जिसमें पुरुष की ग्रिप या पकड़ ज्यादा मजबूत होती है ताकि मूवमेंट करते वक्त ज्यादा फ्रिक्शन ज्यादा घर्षण हो ताकि उत्तेजना और बढ़े और वह जल्दी क्लाइमेक्स पर पहुंच जाए मेरे तजुर्बे में दो पोजीशन खास करके मदद रूप हुई है एक है
(2:57:50) वुमन लेगस क्रॉस पोजीशन और दूसरी पोजीशन है रेयर एंट्री माने पीछे से योनि मार्ग में सहवास इन दोनों में भी फ्रिक्शन ज्यादा होता है अगर इसमें भी समझो कामयाबी ना मिले तो पुरुषों के लिए एक हाई स्पीड वाइब्रेटर्स आते हैं जो इसमें काफी कारगर होते हैं कई बार जब कपल्स को संतान प्राप्ति की प्रॉब्लम होती है और जहां नेचुरली पुरुष के सीमन की आवश्यकता होती है और वह नहीं दे पाते ऐसे सिचुएशन में ऑर्गेजम इजेकुलेशन तक पहुंचने में ये हाई स्पीड वाइब्रेटर्स काफी कारगर साबित हो सकते हैं डिलेड ऑर्गेजम के बहुत पेशेंट मेरे पास आए होंगे उसमें से कितने मरीज तो
(2:58:34) ऐसे थे जिन्हें संभोग की गतिविधियों का ज्ञान ही नहीं था कुछ मरीज ऐसे थे कि वो जिस पोजीशन में सहवास करते थे वही पोजीशन में प्रवेश के बाद बिना मूवमेंट पड़े रहते थे और सिर्फ चरम सीमा अभी आएगी अभी आएगी इसका इंतजार करते थे उनको यह पता ही नहीं था कि चरम सीमा के लिए योनि प्रवेश के बाद टू एंड फ्रो माने आगे पीछे मूवमेंट करने की जरूरत है ताकि उनका जोश जुनून बढ़कर क्लाइमेक्स तक पहुंचे उनको सहवास के बारे में बिल्कुल जानकारी ही नहीं थी उनके लिए योनि प्रवेश या पेनिट्रेशन माने सहवास उनको एक मात्र इलाज की जरूरत थी वह थी एजुकेशन की सहवास कैसे किया जाता है और
(2:59:22) योनि प्रवेश करने के बाद चरम तक पहुंचने के लिए आगे पीछे मूवमेंट की भी जरूरत होती है उसका ज्ञान उनका इलाज ना कोई दवाई ना कोई गोली थी उनका इलाज सिर्फ एक ही था और वह था सेक्स एजुकेशन चरम सीमा के वक्त अगर आनंद में कमी होती है तो उसे पेड ऑर्गेजम कहते हैं और अगर आनंद का बिल्कुल एहसास नहीं होता तो उसे एब्सेंट ऑर्गेजम कहते हैं यह प्रॉब्लम अक्सर मेरे तजुर्बे में ड्रग्स लेने के बाद खास करके ब्राउन शुगर और कोकेन लेने के बाद हो सकते हैं मेरे पास जो मरीज आए थे जिन्हें यह समस्या थी उनमें ऐसे ड्रग्स लेने वाले कुछ लोग थे कुछ
(3:00:08) लोगों में स्नायु के मसल्स की समस्या थी जिसे मायोपैथी कहते हैं और कुछ लोगों में विटामिन b12 की कमी भी पाई गई थी इस समस्या में अच्छे रिजल्ट मुश्किल से मिलते हैं इसके ट्रीटमेंट में तीन चीज अहम रहती है नंबर एक किसी भी तरह से उत्तेजना माने जोश बढ़ाने की कोशिश करनी चाहिए नंबर दो विटामिन बी12 अगर कमी हो तो पूरी करनी चाहिए और नंबर तीन पेल्विक फ्लोर मसल एक्सरसाइज यह एक्सरसाइज हर एक ऑर्गेजम प्रॉब्लम के लिए सहाय रूप हो सकती है चाहे वह ऑर्गेजम अर्ली हो डिलेड हो इंपेयर्ड हो या एब्सेंट हो यह
(3:00:55) पीसी एक्सरसाइज दीर्घ काल तक करने से उससे फायदा ही होगा नुकसान हरगिज नहीं होगा फ्रेंड सच बताऊं तो ऑर्गेजम का यह एक ही वर्गीकरण है जो मिथक प्रचार नहीं करता सटीक है बिल्कुल समस्या पर ही फोकस करता है और यह विश्व का एक मात्र वर्गीकरण ऐसा है जिसमें पुरुष और महिला के ऑर्गेजम डिस्फंक्शन की समानता शामिल है दिस इज द ओनली क्लासिफिकेशन इन द वर्ल्ड च है गट मेल एंड फीमेल पैरेललिज्म हमने डिजायर की बात की इरेक्शन की बात की पेनिट्रेशन और ऑर्गेजम पर भी चर्चा की अब हम बात करने जा रहे हैं वह है सेक्सुअल
(3:01:44) रिपस का बिन जरूरी लेकिन ऑर्गेजम के साथ अक्सर जुड़ा हुआ कंपोनेंट जिसे इजेकुलेशन या स्खलन कहते हैं क्लाइमेक्स तक पहुंचने से पहले अंडकोष में से शुक्र जंतु और शुक्र शय और प्रोस्टेट का स्राव प्रोस्टेट यूरेथ्रा में पहुंच जाता है जब प्रोस्टेट यूरेथ्रा में आता है तब उसी वक्त मत्र शय का द्वार बंद हो जाता है और उसके तुरंत बाद कुछ स्नायु के कंट्रक्शन वजह से वीर्य लन झटके से बाहर आ जाता है ज्यादातर वीर्य की मात्रा दो से पा एमएल तक होती है लेकिन ये खलन में से भी कुछ समस्याएं हो सकती है एक आनंद सही लेकिन सीमन कम मात्रा में बाहर आता
(3:02:32) है इसमें आनंद का एहसास कायम रहता है लेकिन वीर्य की मात्रा कम हो जाती है बढ़ती उम्र के साथ ऐसा हो सकता है पुरुष का हार्मोन टेस्टोस्टेरोन लेवल में अगर कमी हो तो भी ऐसा हो सकता है और मूत्राशय का द्वार अगर सही तरीके से बंद ना होता हो तो थोड़ा बहुत वीर्य सीमें ब्लेडर में चला जाता है तो भी यह समस्या हो सकती है दूसरा आनंद संपूर्ण होता है लेकिन रय बाहर बिल्कुल नहीं आता ऐसी व्यक्ति को ख्वाहिश तो होती है शिष्ण में तनाव भी ठीक से आता है यह योनि प्रवेश भी ठीक से कर सकता है और चर्म सीमा के वक्त का आनंद का एहसास भी
(3:03:17) उसे होता है उसको झटका तो लगता है लेकिन वीर्य बिल्कुल बाहर नहीं आता इसकी तीन चार वजह हो सकती है एक तो वीर्य अंदर बनता ही ना हो कई बार कुछ दवाइयों के सेवन से भी ऐसा हो सकता है या कुछ प्रोस्टेट आदि के कुछ ऑपरेशन के बाद भी ऐसा हो सकता है कई बार योगन प्रवेश से पहले यानी प्री एडोलसेंट यर्स में भी यह परिस्थिति रह सकती दूसरी परिस्थिति जो है जिसमें वीर्य बनता है ऑर्गेजम के टाइम का आनंद का एहसास भी होता है झटके भी लगते हैं लेकिन वीर्य बाहर आने की बजाय मूत्र मार्ग के द्वार
(3:04:03) में गड़बड़ी होने की वजह से य बाहर आने की बजाय मूत्राशय में यूरिन ब्लेडर में चला जाता है देर इज अ ड्राय रन माने एन इंडिविजुअल हैज डिजायर गेटस रेक्शन रिच ऑर्गजम बट इंस्टेड ऑफ सीमन कमिंग आउट इन एंटीग्रेड फैशन इट गोज इन द रेट्रोग्रेड फैशन इट गोज इन द ब्लेडर माने आनंद तो मिलता है लेकिन वीर्य का स्खलन बाहर नहीं होता अगर कोई पुरुष को यह कंफर्म करना हो तो वो ऑर्गेजम के बाद का जो यूरिन आता है उसी को टेस्ट करवाएगा तो उसमें काफी मात्रा में उसको स्पर्स मिलेंगे स्पर्म्स मिलेंगे इसे अंग्रेजी में रेट्रोग्रेड इजेकुलेशन कहते हैं तीसरी परिस्थिति है जो
(3:04:42) काफी रेर है जिसमें इजेकुलेटरी डक्ट होते हैं वह ब्लॉक हो जाते हैं आखिरी एक परिस्थिति ऐसी होती है कि मूत्र मार्ग में खंड खड्डे की वजह से वीर्य तुरंत बाहर आ जाने की बजाय थोड़े वक्त के बाद बाहर आता है ऐसी सिचुएशन में व्यक्ति को कामेच्छा ठीक से होती है शिष्ण में तनाव भी ठीक से आता है ऑर्गेजम के आनंद का एहसास भी मिलता है वीर्य भी ठीक से बनता है बलड नेक भी ठीक से बंद होता है झटके भी ठीक से लगते हैं लेकिन वीर्य उसी वक्त बाहर आ जाने की बजाय थोड़ी देर के बाद में बाहर आता है कई बार मूत्र मार्ग में अगर खड्डा पड़ गया हो तो वीर्य पहले
(3:05:28) खड्डे में भर जाता है और उसके बाद खड्डे में भर जाने के बाद आहिस्ता आहिस्ता बाहर आता है अगर यह समस्या की जड़ कंफर्म करवानी हो तो रेडियोलॉजिस्ट के पास जाकर असेंडिंग यूरेथ्रा फी करवा सकते हैं इसमें पेशाब की जगह में डाय डालने के बाद कुछ तस्वीरें ली जाती है एक्सरे में आपको खड्डे में भरी हुई डाई मिलेगी सेक्सुअल प्रॉब्लम का डायग्नोसिस और ट्रीटमेंट की हमने बात की लेकिन एक बात आपको बता दूं कि डायग्नोसिस और ट्रीटमेंट आसान नहीं है सेक्सुअल प्रॉब्लम का डायग्नोसिस और ट्रीटमेंट आसान नहीं है मजाक नहीं है कोई
(3:06:13) जादू नहीं है डॉक्टर के खुद के लिए एक चैलेंज है और वह चैलेंज दो चीज पर निर्भर करती है एक सेक्सोलॉजिस्ट विषय में उसका ज्ञान और दूसरा वह इस विषय के आयाम के साथ कितना कंफर्टेबल है फीमेल सेक्सुअल प्रॉब्लम्स के बारे में डिस्कस करने जा रहे हैं फीमेल सेक्सुअल वेल बीइंग यह किसी भी महिला के लिए कोई लगजरी नहीं है यह उनका बेसिक ह्यूमन राइट है माने बुनियादी मानव अधिकार है और उनके इस अधिकार का सम्मान भी आवश्यक है जैसे आप सभी जानते हैं कि ख्याल से कल्पना से देखने से स्पर्श से या सुनने से
(3:07:01) दिमाग में जो एक सेक्स का सेंटर होता है और जब वह उत्तेजित होता है तो यही मैसेजेस माने यही संदेश संभवत सेक्स सेंटर ऑफ स्पाइन में जाता है और साथ ही साथ उस वक्त बदन में खून का बहाव होता है और योनि मार्ग में यह खून का बहाव थोड़ा विशेष होता है उसकी वजह से योनि मार्ग में गीलापन होता है लुब्रिकेशन होता है उसी तरह से पुरुष में यह विशेष खून के बहाव से इरेक्शन होता है यह गीलापन स्त्री की कामोत्तेजना का एक बैरोमीटर है जब यह कामोत्तेजना और बढ़ती है एक्साइटमेंट और बढ़ता है तब स्त्री चर्म पर पहुंचती है
(3:07:48) क्लाइमैक्स पर पहुंचती है उस वक्त स्त्री को एक बेहद आनंद का एहसास होता है जिसे ऑर्गेजम या चरमोत्कर्ष के रूप में जाना जाता है क्लाइमेक्स के दौरान क्या होता है जब उत्तेजना पीक पर पहुंचती है तब अमूमन स्त्री को ऑर्गेजम का एहसास होता है कि बस अब और नहीं इनफ एंड नथिंग मोर ज्यादातर महिलाओं को यह आनंद के दौरान योनि मार्ग में संकुचन यानी कंट्रक्शन का भी अनुभव होता है लेकिन ध्यान रहे सभी को नहीं मैं जब महिला मरीजों की जांच करता हूं तो उनकी हिस्ट्री लेता हूं और इस
(3:08:34) हिस्ट्री में निदान के लिएने डायग्नोसिस के लिए मरीज महिला को चार प्रश्न पूछता हूं कामेच्छा याने खवाहिश उसके बाद उत्तेजना माने योनि मार्ग में गीलापन जिसे हम लुब्रिकेशन कहते हैं तीसरा है प्रवेश माने योनि प्रवेश और चौथा है ऑर्गेजम क्लाइमेक्स जिसे चरम सीमा कहते हैं ज्यादातर 99 पर की महिलाओं के सेक्सुअल प्रॉब्लम्स इसी चार चरण के इर्दगिर्द घूमते रहते हैं यह मॉडल बहुत ही आसान है इस मॉडल की विशेषता यह है कि आप बहुत ही कम समय में महिला सेक्सुअल
(3:09:19) प्रॉब्लम का निदान कर सकते हो और निदान सही होगा तो ही सही इलाज संभावित है जिस तरह से आप डाइजेस्टिव प्रॉब्लम डायग्नोज करते हो जिस तरह से आप रेस्पिरेटरी प्रॉब्लम डायग्नोज करते हो इसी मॉडल से उसी तरह से आप सेक्सुअल प्रॉब्लम्स भी डायग्नोज कर सकते हो और वह भी चंद मिनटों में यह मॉडल बहुत संक्षिप्त है लेकिन इससे निदान बहुत सटीक रूप से होता है यह विशेष मॉडल काफी मरीजों में आजमाया गया है हम पहले बात करेंगे पहले चरण की यानी फर्स्ट पैरामीटर की और वह है डिजायर जिसे कामेच्छा
(3:10:03) डिजायर माने कामेच्छा क्या है कामेच्छा यानी सेक्सुअल डिजायर अंग्रेजी में कहे तो डिजायर इंस्टिंक्चुअल इंक्लिनेशन टुवर्ड सेंशुअल ग्रेटिफुली के अंदर सेक्सुअल डिजायर है कि नहीं वो कैसे मालूम करेंगे बड़ा आसान है अगर एक स्त्री के दिमाग में सेक्सुअल विचार आते जाते हैं अगर सपने पढ़ते हैं या दिन में भी उसे सेक्स के बारे में कभी कभी कभार खयालात आते रहते हैं या वह कभी कभार हस्तमैथुन कर लेती है या किसी के साथ बाय
(3:10:50) चान सहवास भी कर लेती है तो उसका मतलब यह हुआ कि उसकी कामेच्छा बरकरार है और कामेच्छा में कोई प्रॉब्लम नहीं है यदि किसी स्त्री के पास यह यौन विचार और यौन सपने हैं तो याद रखें कुल मिलाकर उसके पास एक अच्छा हार्मोनल प्रोफाइल है और उसकी मानसिक यौन प्रक्रिया भी ज्यादातर नॉर्मल है काम इच्छा ऐसा है या तो ज्यादा होती है या तो कम होती है तीसरी चीज तो हो नहीं सकती कम ज्यादा कब होती है इसमें मानसिक कारण भी होते हैं और शारीरिक कारण भी होते हैं कुछ मानसिक बीमारियां होती है मिसाल के तौर पर मेनिया हाइपो मेनिया स्जो
(3:11:37) फ्रेनिया जहां कई बार डिजायर काफी बढ़ जाता है मैं आपको मालूम है एक मूड डिसऑर्डर है माने डिप्रेशन के बिल्कुल अपोजिट व्यक्ति बड़ी-बड़ी बातें करता है ओवर फ्रेंडली देखेगा ज्यादा रिस्क उठाने वाली बातें करेगा हाइपोमेनिक थोड़ी कम मात्रा में होती थोड़ी कम इंटेंस होती है स्जो फ्रेनिया एक थॉट और बिहेवियरल डिसऑर्डर माने विचार और वर्तन का डिसऑर्डर है उसमें कुछ चीजों का उसे आभास होता है कुछ चीजें नहीं होने पर भी वह है ऐसा उसे लगता है श फिक्स फॉल्स बिलीव्स श लूजन इट्स थिंकिंग और थॉट
(3:12:26) डिसऑर्डर उसको लुसने होते हैं वह बेफिक्र हो जाती है बिंदास हो जाती है और उस वक्त कभी कभ उसकी ख्वाहिश बहुत बढ़ जाती है उसी तरह से कई बार स्त्री शराब पी लेती है या तो ड्रग्स का सेवन करती है जैसे हशीश मेरवाना तो उसके बाद भी उसकी ख्वाहिश कभी कभ बेहद बढ़ जाती है डिजायर कम कब हो जाता है खास कर के डिप्रेशन एंजाइटी ओसीडी या स्किफ इन मानसिक बीमारियों में डिजायर बहुत कम हो सकता है खास कर के स्त्री जब डिप्रेशन में होती है डिप्रेशन में स्त्री को नींद देरी से आती है और
(3:13:11) सुबह आंख जल्दी खुल जाती है भूख नहीं लगती मन उदास रहता है कभी-कभी जिंदगी खत्म करने के ख्याल भी आ जाते हैं और उसका हर चीज में से इंटरेस्ट बहुत कम हो जाता है उसको खाने की भी इच्छा नहीं होती बाहर घूमने जाने की भी इच्छा नहीं होती काम प जाने की भी इच्छा नहीं होती और उसी तरह उसकी सेक्स करने की भी इच्छा नहीं होती ऐसी कंडीशन में काम इच्छा यानी ख्वाहिश भी बहुत कम हो जाती है डिप्रेशन में एक ट्रायड रहता है ज्यादातर यह तीन सिम्टम्स अक्सर दिखाई देते हैं हेल्पलेसनेस होपलेस एंड वर्थलेस दूसरी कॉमन चीज होती है जहां यह चीजें ख्वाहिश या कम इच्छा कम हो जाती है वह है
(3:13:57) एंजाइटी जब भी कोई स्त्री बेहद फिक्र चिंता के माहौल से गुजरती है तो भी उसकी काम इच्छा कम हो जाती है क्योंकि यू कांट बी एंसिस एंड सेंसुअस एट द सेम टाइम माने एक ही अवस्था में चिंतित और उत्तेजित साथ में होना लगभग नामुमकिन है और भी कुछ मानसिक बीमारियां हैं मिसाल के तौर पर ओसीडी ऑब्सेसिव कंपल्सिव डिसऑर्डर कहते हैं अमूमन वर्स थी परफेक्शनिस्ट टाइप की होती है और उसको हर चीज साफ सतरी चाहिए और एक ही चीज वह बार-बार करती है माने रिपीट करती रहती है जब तक वह रिपीट ना करें उसे चैन नहीं आता मतलब रात को उसे दरवाजा बंद करने के लिए बोला तो वह चार पांच बार चेक
(3:14:45) करेगी जब तक वह चार पांच बार चेक नहीं करेगी तब तक उसको चैन नहीं आएगा यह सब एक तरह के मानसिक अस्वस्थता के लक्षण है एक व्यक्ति के दिमाग में यह चीज बार-बार करने का विचार इतना हावी हो जाता है कि उसके दिमाग में सेक्सुअल थॉट्स के प्रवेश की संभावना ही बहुत कम हो जाती है और यह लोग ज्यादातर क्लीनलीनेस फ्रीक होते हैं स्वच्छता यह मेरा जन्म दक है ऐसा उनका बर्ताव रहता है यहां तक कि कई बार वह अपने पार्टनर के प्राइवेट पार्ट को हाथ लगाने से भी कतराते हैं कई बार स्जो फ्रेनिया में भी डिजायर बहुत बढ़ जाता है या तो बहुत खत्म हो जाता है कम हो जाता है दरल
(3:15:29) बी टोटल ब्लंटिंग ऑफ सेक्सुअल डिजायर सही डायग्नोसिस करने पर अमूमन इन सबका इलाज संभव है निदान सही होगा तो इलाज भी सही होगा कामेच्छा कम होने का एक आम कारण यह भी है कि आजकल जो दवाइयां इस्तेमाल होती है चाहे वो ब्लड प्रेशर के लिए हो मानसिक अस्वस्थता के लिए हो कि डिप्रेशन के लिए हो या कई बार कुछ आयुर्वेदिक दवाइयां जिसमें सर्पगंधा और गांजा का इस्तेमाल किया जाता है यह सब आम इच्छा कम कर सकती है दूसरा एक सवाल उभर के आता है कि ऐसी कौन सी शारीरिक समस्या है जिसमें डिजायर की गड़बड़ी हो सकती
(3:16:13) ऐसा देखा जाता है कि ओवरीज में स्त्री हार्मोन बनता है और वह डायरेक्ट खून में जाता है और उसी हार्मोन की वजह से उसमें स्त्री पन यानी फीमेलस आ जाती है अगर ओवरीज या लीवर में कुछ गड़बड़ी हुई तो कामेच्छा में गड़बड़ी आ सकती है लेकिन कुछ वक्त ऐसा भी होता है कि स्त्री की कामेच्छा अचानक बढ़ जाती है या अचानक कम हो जाती है कई बार स्त्री बहुत वक्त से सेक्स से लिप्त रही हो और अपनी कामेच्छा को बहुत दमन करने की कोशिश की हो ऐसी स्त्री में भी कभी कभ अचानक कामेचा बड़ सकती है मैं जब केम अस्पताल में प्रैक्टिस करता था तब कुछ ऐसे भी केस आए
(3:16:58) थे उन्होंने बताया कि डॉक्टर साहब मेरी काम इच्छा अचानक बढ़ गई है अक्सर किसी महिला को ब्रेन ट्यूमर की शुरुआत होती है तो भी ऐसी परिस्थिति निर्माण हो सकती है कभी कभी बेहद काम इच्छा बढ़ने के पीछे बेहद खतरनाक बीमारी भी हो सकती है आप मुझे अक्सर पूछेंगे कि अचानक काम इच्छा कम कब हो जाती हमारे तजुर्बे में खास करके जब आपसी संबंध में अचानक दरार आ जाता है तभी कामेच्छा में अचानक कमी आ सकती कई बार जब एक स्त्री को पता पड़ जाता है कि मेरे पार्टनर का अफेयर किसी दूसरी व्यक्ति के साथ है तब उसकी कामेच्छा अचानक गायब हो
(3:17:45) जाती है कई बार स्त्री का अपने पार्टनर में इंटरेस्ट अचानक कम हो जाता है चाहे वह डिस्कवरी ऑफ अफेयर की वजह हो या पार्टनर की कुछ हरकतों से और ऐसे केस जो होते हैं उसको सुलझाना बड़ा आसान नहीं होता कई बार अक्सर ओवरीज को निकाल देने के बाद भी काम इच्छा में कमी आ सकती है कई बार एंटी डिप्रेशन की गोलियां खास करके ट्राई साइक्लिक डिप्रेशन की गोलियां लेने से अचानक काम इच्छा में कमी आ सकती है एक और बात हमें याद रखनी चाहिए कि अगर व्यक्ति का प्रोलेक्टिन लेवल बहुत बढ़ जाए तो भी स्त्री की काम इच्छा काम इच्छा खवाइश कम हो सकती है ज्यादातर पारंपरिक या
(3:18:32) ट्रेडिशनल एंटीसाइकोटिक दवाएं प्रोलेक्टिन हॉर्मोन का स्तर बढ़ा सकती है ऐसे सिचुएशन में दवाइयां बदली जा सकती है ता चिकित्सा का लक्ष्य वही रहे मानसिक स्वस्थ भी बनी रहे और कोई सेक्सुअल साइड इफेक्ट न रहे यह मुमकिन है अगर किसी की काम इच्छा सचमुच बहुत कम हो गई हो तो कुछ इन्वेस्टिगेशन भी मदद रूप हो सकते हैं मिसाल के तौर पर सीबीसी जिसे कंप्लीट ब्लड काउंट कहते हैं जिसमें अगर हीमोग्लोबिन कम हो गया हो तो थकान के साथ-साथ स्त्री की कामेच्छा भी कभी कभ कम हो सकती है लीवर फंक्शन टेस्ट से लीवर की समस्या का पता पड़ सकता है कुछ हार्मोंस
(3:19:19) होते हैं मिसाल के तौर पर प्रोलेक्टिन कई बार बहुत बढ़ गया हो या एस्ट्रोजन माने स्त्री हॉर्मोन बहुत कम हो गया हो तो भी यह कामेच्छा के कमी का कारण बन सकता है साइकोलॉजिकल टेस्टिंग यह एक मनोवैज्ञानिक परीक्षण है जिसकी वजह से व्यक्ति की पर्सनालिटी का पता पड़ सकता है कुछ पर्सनालिटी डिसऑर्डर्स में भी कामेच्छा कम हो सकती है सही निदान से ही सही इलाज मुमकिन है हकीकत में ब्रेन ए नव स्टिमुलेटिंग परफॉर्मेंस के लिए सहायता करते हैं इसमें
(3:20:16) कहां भी गड़बड़ी हुई तो सेक्स चक्कर में गड़बड़ी हो सकती है सेक्सोलॉजी एक ऐसी ब्रांच है कि पूरे बदन की रचना इसके अंदर जुड़ी हुई रहती है इसके लिए एक अच्छे सेक्सोलॉजिस्ट को पूरे बदन के हर एक सिस्टम का सही ज्ञान होना आवश्यक है यह विषय बड़ा पेचीदा विषय है मैं सरल और इंटरेस्टिंग बनाने की पूरी कोशिश कर रहा हूं यह इवेलुएशन जो मैं आपको बता रहा हूं वह आपको कहीं किताबों में या इंटरनेट पर नहीं मिलेगा यह मेरे 50 साल का तजुर्बा मैं आपके सामने रख रहा हूं हमने पहले बात की डिजायर की डिजायर का इलाज भी मुमकिन है जो भी मानसिक या शारीरिक प्रॉब्लम है वह
(3:21:05) डायग्नोज करने के बाद उसी दिशा में अगर इलाज किया जाए तो डिजायर में इंप्रूवमेंट हो सकता है समस्या शारीरिक हो कि मानसिक वह अवस्था ठीक करने के बाद ही उसकी ट्रीटमेंट की शुरुआत होती है इस ट्रीटमेंट की शुरुआत में प्लेजरिंग सेशन यानी सनसेट फोकस एक्सरसाइज होती है जिसमें खास होता है सेंसुअस इंटरप्ले बाय अवॉइडिंग सेक्सुअल इंटरेक्शन उसका मतलब है कि पेनिट्रेटिव सेक्स पर इंटरकोर्स पर प्रतिबंध लगाया जाता है कितने भी उत्तेजित हो जाए लेकिन पेनिट्रेशन नहीं करना साथ ही साथ स्पर्श बातचीत और माहौल के जरिए जोश जुनून बढ़ाया
(3:21:54) जाता है ज्यादातर यहां इलाज स्पर्श से किया जाता है स्पर्श की भी एक भाषा होती है कौन सा स्पर्श अच्छा लगता है और कहां स्पर्श अच्छा लगता है वह जानना जरूरी है और अपने पार्टनर को बताना भी उ जरूरी है पसंदीदा स्पर्श कई बार काम इच्छा बढ़ाने का असरकारक जरिया बन सकता है सहवास को यानी पेनिट्रेटिव सेक्स को इसलिए मना किया है ताकि पुरुष को ऐसा ख्याल ना आए कि अगर मैं पेनिट्रेट ना कर सका तो अगर मैं सहवास ना कर सका तो वैसे स्त्री को भी ऐसा दिमाग में ना आए कि सहवास के दौरान मुझे ज्यादा दर्द होगा तो माने सहवास के विषय की फिक्र
(3:22:38) चिंता एंजाइटी से दोनों व्यक्ति मुक्त हो जाते किसने सही कहा है कि व्हाट एवर इज सेंशुअल कैन बी सेक्सुअल बट व्हाट एवर इज सेक्सुअल नीड नॉट बी सेंशुअल कहने का मतलब यह है कि मोहब्बत की आखिरी मंजिल हम बिस्तरी हो सकती है लेकिन हम बिस्तरी की आखिरी मंजिल मोहब्बत हो वो जरूरी नहीं द क्रक्स इज सेक्स कैन बी द क्लाइमैक्स ऑफ लव बट लव नीड नॉट बी द क्लाइमेक्स ऑफ सेक्स ज्यादातर डिजायर दो कान के बीच में होता है दो पांव के बीच में नहीं डिजायर के बाद दूसरा चरण है अपना लुब्रिकेशन लुब्रिकेशन क्या है लुब्रिकेशन
(3:23:25) माने योनि मार्ग में गीलापन जब ख्वाहिश होती है जोश बढ़ता है उत्तेजना बढ़ती है तो स्त्री के योनि मार्ग में खून का भाव बढ़ता है कंजेशन बढ़ता है और उसकी वजह से योनि मार्ग में गीलापन पैदा होता अगर उत्तेजना कम होगी तो गीलापन भी कम होगा कई बार महिलाएं आके ऐसा बताती है कि डॉक्टर साहब हमें कामेच्छा तो होती है ऐसा लगता है कि जोश भी बढ़ रहा है लेकिन नीचे कुछ ब्लॉक जैसा आ गया है जैसे कुछ होता ही नहीं ऐसा एहसास होता है ऐसी स्थिति अक्सर मैंने जो महिलाएं ज्यादा सिगरेट स्मोकिंग करती थी ज्यादा शराब पीती थी जिनको ब्लड प्रेशर कंट्रोल में नहीं रहता
(3:24:12) या डायबिटीज कंट्रोल में नहीं रहता था या जिन महिलाएं लंबे समय से हार्मोन की कमी से पीड़ित थी ऐसी स्थितियों में देखा जाता था यह कंपेरटिवली रेर कंडीशन है लेकिन बहुत ही जरूर है लुब्रिकेशन कम ज्यादा होना यह भी एक समस्या है कुछ केसेस में लुब्रिकेशन बहुत ज्यादा होता है लुब्रिकेशन कम होना यह एक आम समस्या है लेकिन मेरे पास कुछ महिलाएं समस्या लेकर आई थी कि उत्तेजना के वक्त उनको इतना लुब्रिकेशन हो जाता है इतना लुब्रिकेशन हो जाता है कि वो बेहद परेशान हो जाती है और उनका पार्टनर भी परेशान हो जाता है और दोबारा सहवास करने से कतराते हैं मेरे तजुर्बे में मुझे आज
(3:24:58) तक इसका कोई ठोस कारण नहीं मिला उसके लिए एक मात्र इलाज है जब भी जरूरत से ज्यादा लुब्रिकेशन हो जाए तो आप टिश्यू पेपर से उसे पहुंच डाले यह टिश्यू पेपर एक मा उसका कारगर उपाय है दूसरा जब गीलापन बहुत कम होता है हमारे देश में उसका मुख्य कारण है फोर प्ले की कमी माने सहवास के पहले जो क्रिया की जाती है उसमें लोग कम समय गुजारते हैं मोस्ट मेन यूज देर पार्टनर स्लीपिंग पिल्स अक्सर अपने यहां लोग स्त्रियों का उपयोग एक नींद की गोली की तरह करते हैं इसका इलाज बहुत आसान है थो थोड़ा टाइम फोर पले में ज्यादा व्यतीत
(3:25:44) करें और पुरुष सिर्फ यह समझ ले कि मजा सिर्फ मंजिल में नहीं सफर में भी है कई बार ज्यादा मजा सफर में होती है अगर सफर सुहाना होगा तो मंजिल भी सुहानी बनेगी कम लुब्रिकेशन का दूसरा कारण होता है इंफेक्शन यह इंफेक्शन या संक्रमण बैक्टीरियल फंगल माने मलियल भी हो सकता है या ट्राइक मोनल भी हो सकता इसमें कई बार महिला को प्राइवेट पार्ट में बहुत खुजली इचिंग की समस्या होती है और कई बार अपने अंडर गारमेंट पर धब्बे भी पड़ जाते हैं इसका इलाज आपका गायनेकोलॉजिस्ट बड़ी आसानी से कर सकता है अक्सर दही जैसे सफेद डिस्चार्ज फंगल इंफेक्शन में होते
(3:26:32) हैं और पीला डिस्चार्ज ट्राइक मोनल इंफेक्शन में होता है एग्जामिनेशन से यह पता पड़ जाता है कि यह इंफेक्शन किस टाइप का है और अमूमन आठ या 10 दिन में इसका इलाज हो जाता है दवाई में खाने की गोली भी होती है और योनि मार्ग में रखने के लिए भी गोली का इस्तेमाल किया जाता है अक्सर इलाज के दौरान गायनेकोलॉजिस्ट यह सलाह देते हैं कि आप सहवास ना करें ताकि इंफेक्शन का पिंगपिंग ना हो गीलापन का कम होने का तीसरा कारण है एस्ट्रोजन की कमी माने फीमेल हार्मोन की कमी जो अक्सर मेनोपॉज के बाद पाई जाती कुछ खाद्य पदार्थ ऐसे होते हैं जिससे एस्ट्रोजन हार्मोन में इजाफा हो सकता है
(3:27:19) मिसाल के तौर पर सोयाबीन और ग्रीन लीफ वेजिटेबल्स दो तीन महीने यह खाने के बाद भी अगर फर्क ना पड़े तो एस्ट्रोजन के सिंथेटिक क्रीम भी उपलब्ध है जिसे योनि मुख के इर्दगिर्द लगाने से यह समस्या दूर हो सकती है आपके गायनेक कहां कब कैसे और कितना ना क्रीम लगाना इसकी विस्तृत जानकारी दे सकते हैं टेस्टोस्टेरोन जो पुरुष हार्मोन है वह भी जितना पुरुष में महत्त्वपूर्ण है उतना ही स्त्री की उत्तेजना में भी विशेष रूप से निपल्स क्लिटोरिस और योनि के बाह्य हिस्से की संवेदनशीलता काफी हद तक टेस्टोस्टरॉन पर निर्भर करती है स्वाभाविक रूप से आप महिला
(3:28:07) को सिंथेटिक टेस्टोस्टेरोन तो दे नहीं सकते लेकिन ऐसा आहार वह जरूर ले सकती है जिसमें टेस्टोस्टरॉन विशेष मात्रा में हो मिसाल के तौर पर हफ्ते में एक दो बार दो कटरी काले उड़द की दाल गाय के घी में लहसुन और हींग का तड़का लगा के लंच टाइम के दौरान ले सकते हैं मेथी दाना भी कारगर साबित हो सकता है एक से दो चम्मच मेथी दाने माने करीबन 5 से 10 ग्राम रात को सोते समय आधे गिलास पानी के साथ निगल जाए चबाए नहीं भिगोए नहीं मशहूर व बापा लाल का कहना था कि मेथी में टेस्टोस्टरॉन बहुत अच्छी मात्रा में उपलब्ध होता है हमने डिजायर माने काम इच्छा की बात की योनि
(3:28:53) मार्ग में गपन की भी बात की अब हम योनि प्रवेश के बारे में बात करेंगे योनि प्रवेश में दो चीज हो सकती है या तो योनि प्रवेश नहीं होता या होता है योनि प्रवेश ना होने की तीन वजह हो सकती है पहला है जजम दूसरा है स्त्री के प्राइवेट पार्ट की रचना या एनाटॉम के ज्ञान की कमी और तीसरा है गलत पोजीशन वजम एक ऐसी कंडीशन है कि पुरुष जब योनि प्रवेश करने की कोशिश करता है तो स्त्री के योनि मार् के बाहरी एक तिहाई हिस्से में इवोलेट कंट्रक्शन होते हैं माने अनैच्छिक संकुचन होते हैं स्त्री की प्रवेश कराने की इच्छा होते हुए भी डर की
(3:29:40) वजह से वह अपनी दोनों टांग के करीब ले आती है जुड़ जाती है और शिष्ण प्रवेश नामुमकिन हो जाता है कभी-कभी तो प्रवेश के ख्याल से भी वेज स्मस हो सकता है प्रॉब्लम सचमुच वेजनिया कि नहीं वह डॉक्टर की पूछता से मा मालूम पड़ सकता है हिस्ट्री टेकिंग से अंदाजा लगा सकते हैं और फिजिकल एग्जामिनेशन से भी इसकी जांच की जा सकती है इस इलाज में समस्या की जड़ पर खास ध्यान देना चाहिए ये मांस पेशियां जो अनिच्छु हो गई है जो इवोलेट हो गई है उसको वॉलंटरी करना है उसको स्वैच्छिक बनाना है यह बड़ा आसान
(3:30:25) है आप सांस ले और पकड़ रखें और यह समझ ले कि अगर आपको पेशाब लगी है और आप रोकना चाहते हो तो आप क्या करोगे बस यही चीज आपको करनी है पाच सेकंड के लिए आप होल्ड करें फिर रिलीज कर दे फिर 5 सेकंड विश्राम करें यह आपने अनैच्छिक संकुचन को अपने आप स्वैच्छिक बना दिया इन वॉलंटरी को वॉलंटरी बना दिया ऐसा दिन में 10 बार सुबह और 10 बार शाम को करने से तीन चार दिन में यह मसल्स ये मास पचिया नियंत्रित हो जाती है इन वॉलंटरी में से वॉलंटरी बन जाती है अनैच्छिक में से
(3:31:10) स्वैच्छिक बन जाती है अब वह आपके नियंत्रण में है आपके कंट्रोल में है सचमुच यह प्रॉब्लम यह समस्या दो कान के बीच में है माने डर फिक्र एंजाइटी की वजह से दो पैरों के बीच में नहीं उन्हें यह समझाया जाता है कि वजाइना यानी योनि एक इलास्टिक अंग है और वह छोटा या बड़ा किसी भी प्रकार के शिष्ण के प्रवेश के लिए सक्षम है वजाइना इज कैपेबल ऑफ अकोमोडेटिंग एनी वैरायटी ऑफ पिनिस बिग और स्मॉल बिकॉज इट्स लास्टिक अक्सर यह लोगों ने सुना होता है कि जब पहली बार योनि प्रवेश होगा तब बेहद दर्द होगा और बहुत ही खून निकलेगा इसी वजह
(3:31:57) से जब भी पुरुष प्रवेश करने की कोशिश करता है वह प्रवेश के पहले या प्रवेश के वक्त स्त्री के हृदय की धड़कने बढ़ जाती है पसीना आ जाता है गला सूख जाता है घबराहट से महसूस होती है ये सब एंजाइटी के लक्षण आ जाते और बिगर सोचे रिफ्लेक्टली अपनी दोनों पांव एकदम करीब आ जाते हैं और शिष्ण का प्रवेश असंभव बन जाता है इसकी ट्रीटमेंट बड़ी आसान है नंबर एक अनैच्छिक कंट्रक्शन को स्वच्छ बना दो नंबर दो दिमाग में यह चीज बराबर बैठ जानी चाहिए कि योनि मार्ग और योनि एक इलास्टिक अंग है जब डॉक्टर तपास के लिए अपनी उंगली डालता है तो उतना चौड़ा होता है और जब डिलीवरी के
(3:32:43) समय बच्चा पहर आता है तब योनि मार्ग बच्चे के आकार जितना विस्तृत हो जाता है इस तरह से उसको समझाने से उसकी एंजाइटी काफी हद तक कम हो जाती है फिर जब डॉक्टर एग्जामिनेशन करते हैं तो सबसे पहले स्त्री को बता देते हैं कि स्त्री को खुद अपनी ही उंगली को योनि प्रवेश करवाना है उस वक्त पहले स्त्री लंबी सांस लेगी फिर योनि मार्ग को कांट्रैक्ट करेगी फिर होल्ड करेगी फिर रिलैक्स करेगी तो उसका मतलब यह हुआ कि अपना योनि मार्ग के मसल्स जो है जो मांसपेशियां जो है जो इवोलेट थी अब वॉलंटरी बन गई है जो अनैच्छिक थी वह स्वैच्छिक रूप से कंट्रोल
(3:33:27) में आ गई है रिलैक्स होने के बाद स्त्री अपनी उंगली का योनि प्रवेश करवा सकती है अगर यह योनि प्रवेश हो गया अगर आधी भी उंगली अंदर चली गई तो यह काफी है उसका का मतलब यह होता है कि अब आपका मेंटल ब्लॉक मेल्ट होना शुरू हो गया पिघलना शुरू हो गया है उस उंगली को वही रहने दो और कंट्रक्शन और रिलैक्सन की प्रैक्टिस करो दूसरी बार यही चीज फिर से करो और अपनी पूरी उंगली डाल दो उसके बाद तीसरी बार अगर वह आराम से पूरी उंगली डाल सकती है तो उस वक्त उस उंगली की साइज के या उसके कम साइज के ही वजाइनल डायलेटर उनको बताएं और उससे
(3:34:16) योनि प्रवेश करवाएं ऐसे आहिस्ता आहिस्ता डायलेटर की साइज बढ़ाई जाती है और यह डायलेटर की साइज तब तक बढ़ाई जाती है जिसकी साइज उसके पार्टनर के शिसन जितनी हो ध्यान रहे कि योनि मार्ग की चौड़ाई उतनी ही बढ़ानी है जितना उसके पार्टनर का शिष्ण है अगर जरूरत से ज्यादा चौड़ी हो गई तो सहवास के दौरान शिष्ण और योनि मार्ग की पकड़ ढीली हो जाएगी और आनंद में कमी महसूस हो सकती है डायलेटर प्लास्टिक के भी आते हैं ग्लास के भी आते हैं और रबर के भी आते हैं मुझे रबर के डायलेटर ज्यादा यूजर फ्रेंडली लगे हैं मैं वही इस्तेमाल करने
(3:35:05) की आपको सलाह दूंगा अपने पेशेंट को भी वही सलाह देता हूं कि आप आप रबर के इस्तेमाल करें रबर के डायलेटर इस्तेमाल करें दूसरा कारण यह होता है कि बहुत से पुरुष और स्त्रियों को कब कहां और कैसे सहवास करना उसको पता ही नहीं होता दोनों पार्टनर को ये समझना चाहिए कि मूत्र मार्ग बहुत छोटा होता है जिसमें उंगली भी नहीं जा सकती तो शि ने कहा तो सवाल ही पैदा नहीं होता गुदा मार्ग बहुत नीचे है वहां डायरेक्ट प्रवेश करना डिफिकल्ट है सेंटर में योनि मार्ग है इसके लिए वह शिष्ण केवल योनि में ही जाएगा और योनी प्रवेश महिला को ही करवाना चाहिए क्योंकि
(3:35:54) अपनी शरीर रत्ना के ज्ञान से वह ज्यादा परिचित है और शिष्ण का प्रवेश कहां कराना उसकी मालूमात पुरुष के कंपैरिजन में स्त्री को बेहतर होती है तीसरी चीज है कुछ लोगों को पोजीशन का पता नहीं होता बिन अनुभव की वजह से उनको सही सेक्सुअल पोजीशन का ख्याल ही नहीं होता कुछ औरतें सहवास के दौरान ना समझ की वजह से अपने पाव घुटने को उठाने की बजाय फ्लैट रखती है ऐसे में शुरुआत में प्रवेश मुश्किल हो जाता है कुछ पुरुष भी ऐसे होते हैं कि जिनको बिन अनुभव की वजह से सहवास कैसे करना वो पोजीशन का कोई अता पता ही नहीं होता मेरे
(3:36:40) पास ऐसे इतने ही मरीज आए होंगे कि जो अपने दोनों पांव स्त्री के दोनों पांव से बाहर रखकर सहवास करने की कोशिश करते हैं वह खुद स्त्री के दोनों पांव के बीच में आने के बजाय वह स्त्री को अपनी दोनों पांव के बीच में लेते हैं मेरी हॉस्पिटल प्रैक्टिस में 10 में से एक पेशेंट को सहवास की सही पोजीशन कौन सी होती है उसका आता पता नहीं होता है मैं इसके लिए मेरी क्लिनिक में हर एक पेशेंट से उसकी सहवास की प्रक्रिया के बारे में पोजीशन के बारे में पूछता हूं और कुछ कुछ केसेस में मुझे यह मेल और फीमेल डॉल्स जानकारी लेने में बहुत मदद रूप होती
(3:37:24) है ताकि वह एग्जैक्ट बता सके कि उनकी सहवास करने की पोजीशन कौन सी है य सी कॉइटल हिस्ट्री इज वेरी इंपॉर्टेंट इन अवर पार्ट ऑफ द वर्ल्ड दिस इज नॉट इंक्लूडेड इन द वेस्टर्न हिस्ट्री टेकिंग फॉर्मेट यह हमने बात की कि पेनिट्रेशन क्यों संभव नहीं होता अगर पेनिट्रेशन हो गया तो उसके बाद की संभवत समस्या कौन सी हो सकती है इसमें तीन तरह के सिचुएशन निर्माण होने के चांसेस रहते हैं एक तो प्रवेश पेनफुल यानी दर्दनाक बन सकता है जो एक सामान्य समस्या है दूसरा प्रवेश बड़े आसानी से हो जाता है और योनि मार्ग में जाने के बाद उसका एहसास
(3:38:12) ही नहीं होता और तीसरा नॉर्मल तरीके से स्त्री को चरम सीमा का एहसास होता है जब प्रवेश दर्दनाक या पेनफुल होता है उसे डिस्पर यूनिया कहते हैं यह जानना जरूरी है कि दर्द कब होता है और कहां होता है अगर प्रवेश के पहले ही दर्द होता है तो यह सिर्फ मानसिक है फोबिक है य स्त्री का एक वहम है स्त्री को कोई शारीरिक समस्या नहीं है और उसका वहम का इलाज करना जरूरी है दूसरा अगर प्रवेश के वक्त दर्द होता है तो वहां पूछने की जरूरत है कि दर्द प्रवेश की शुरुआत में होता है मध्य में होता है या प्रवेश करने के बाद अंत में होता है
(3:39:01) अगर शुरुआत में हो तो ज्यादातर उत्तेजना की कमी माने अक्सर संभोग के पहले की क्रिया फोर पले में अगर पुरुष ज्यादा टाइम नहीं गुजारता है तो सही गीलापन नहीं होता है और सही गीलापन नहीं होगा तो प्रवेश के दौरान फ्रिक्शन यानी घर्षण ज्यादा होगा और घर्षण की वजह से स्वाभाविक है कि उसको दर्द भी होगा इसके अलावा भी और कुछ कारण हो सकते हैं जैसे कि कई बार ऑपरेशन के बाद वगैरह लेकिन प्रमुख कारण है फोर प्ले में कमी आमतौर पर जब मिडल में या मध्य में दर्द होता है तो अक्सर उसे नजरअंदाज किया जाता है लेकिन सबसे आम कारणों में एक है
(3:39:47) वह है लिवेटर एनाई माल्ज योनि मार्ग में मध्य में जब दोनों तरफ हम एग्जामिन करेंगे तो बीच में साइड में स्त्री को दर्द का एहसास होगा जब स्त्री सहवास करती है तो शुरुआत में उसकी इच्छा तो होती है कीला पन भी होता है लेकिन मध्य में दर्द होने की वजह से कई बार वह क्लाइमेक्स पर नहीं पहुंच सकता और हर वक्त दर्द की वजह से सेक्स के प्रति उसकी दिलचस्पी कम हो जाती है उसकी कामेच्छा में कमी आ जाती है और अक्सर पेनिट्रेटिव सेक्स करने से या संभोग करने से व इतराती है लास्ट में डीप थ्रस्ट डिस्पर या माने जब पुरुष शिष्ण का संपूर्ण प्रवेश अंदर कर देता है और मूवमेंट करते
(3:40:35) वक्त योनि मार् के आखिरी हिस्से में स्त्री को दर्द होता है यह दर्द उसको अक्सर एंडोमेट्रियोसिस माने गर्भाशय की कुछ गड़बड़ी की वजह से पेल्विक इंफ्लेमेटरी डिसीज की वजह से और कई बार ऑपरेशन के बाद भी यह समस्या हो सकती है इससे भी चर्म सीमा तक पहुंचने में स्त्री को मुश्किलात आ सकती है यह समस्या बार-बार होने से उसकी काम इच्छा में कमी आ जाती है और सेक्स के प्रति अरुचि पैदा होती है सही निदान करने के बाद इस का इलाज आसानी से हो सकता है डिस्पर या माने सहवास के दौरान दर्द ये एक ऐसी चीज है जिसे स्त्री की
(3:41:21) ख्वाहिश गीलापन और क्लाइमेक्स की क्षमता पर सभी पर विपरीत असर पड़ सकता है तुरंत आसानी से सहवास हो उसके लिए अक्सर कुछ लुब्रिकेशन मदद रूप हो सकते हैं माने मिसाल के तौर पर नारियल का तेल भी अग अगर चाहे तो उपयोग कर सकते हैं जिसकी वजह से घर्षण यानी फ्रिक्शन बहुत कम हो जाएगा और जिसकी वजह से प्रवेश में आसानी होगी और दर्द का एहसास भी बहुत कम हो जाएगा लेकिन उसकी जड़ का इलाज करने के लिए दर्द कब और कहां होता है वह जानने के बाद ही सही इलाज मुमकिन है और यह इलाज आसानी से हो सकता
(3:42:07) है प्रवेश के बाद कई बार एक दूसरी समस होती है कि पुरुष अक्सर ऐसी कंपलेन करता है कि डॉक्टर साब प्रवेश के बाद मुझे ऐसा लगता है कि मेरा शिष्ण योनि मार्ग में खो गया है और स्त्री भी कई बार ऐसी कंपलेन करती है कि डॉक्टर साहब मुझे अंदर कुछ है ऐसा एहसास ही नहीं होता जब योनि मार्ग की दीवारें बहुत ढीली हो जाती है तब ऐसी परिस्थिति निर्माण हो सकती है इसकी वजह से शिष्ण और योनि मार्ग की जो पकड़ में कमी आ जाती है और वेदना का एहसास बहुत कम हो जाता है यह समस्या अक्सर नॉर्मल डिलीवरी के बाद तुरंत देखी जाती है या कभी कभी मेनोपॉज के बाद भी देखी जाती
(3:42:51) है अगर तुरंत इस समस्या को दूर करना हो तो कुछ पोजीशन कारगर हो सकती है एक है वुमन लेग्स क्रॉस और दूसरी है रेर एंट्री वमन लेगस क्रॉस पोजीशन में प्रवेश के बाद स्त्री अपना एक एंकल दूसरे एंकल पर रख देती है ताकि पगड़ मजबूत हो जाए दूसरी पोजीशन है जहां पुरुष पीछे से योनि मार्ग में सहवास करता है परमानेंट इलाज के लिए पेल्विक फ्लोर मसल की एक्सरसाइज जिसमें पहले स्त्री सांस लेती है फिर सांस रोकती है फिर अगर आपको जैसे पेशाब लगी हो और आपको रोकना चाहते हो तो
(3:43:36) आप क्या करोगे बस वही करें और पाच सेकंड आप पकड़ रखिएगा होल्ड कीजिएगा फिर रिलीज करें पा सेकंड आराम करें यह एक्सरसाइज को पीसी एक्सरसाइज कहते हैं पबो कक्सी जिस मसल एक्सरसाइज कहते हैं या किगल एक्सरसाइज कहते हैं 20 बार सुबह और 20 बार शाम को अगर आ से 12 हफ्ते करो तो पकड़ फिर से मजबूत होने की संभावना हो जाती है यह कसरत इसके लिए कारगर होती है कि मूत्र मार्ग और योनि मार्ग दोनों एक ही मसल्स के आवरण में लिपटे हुए रहते हैं माने वजाइना एंड यूरेथ्रा बोथ आर कवर्ड बाय सिंगल मसल अगर
(3:44:23) यह भी कारगर ना हो तो स्त्री सर्जरी भी करवा सकती है जिसमें यनि मार्ग की दीवारें सही तरीके से रिपेयर हो सकती है अगर स्त्री को कोई समस्या नहीं होती है तो वह सहवास के दौरान फिर आसानी से चरम सीमा पर पहुंचती है ऑर्गेजम यानी क्लाइमेक्स पर पहुंच जाती है इस वक्त जोश जुनून इतना बढ़ जाता है कि स्त्री को एहसास होता है कि बस अब और नहीं इनफ एंड नथिंग मोर हाउ मच टाइम ड वी एंजॉय नॉट मोर देन हाफ मिनट पर वीक एंड नॉट मोर दन हाफ एन आर पर यर बट स्टिल इट्स एन इंपोर्टेंट फिनोमिना हम कितना टाइम ऑर्गेजम में एंजॉय करते हैं एक सफ्ते में
(3:45:07) आधे मिनट से भी कम और एक वर्ष में आ घंटे से भी कम लेकिन फिर भी यह एक महत्त्वपूर्ण घटना है द मैथमेटिक्स ऑफ मिजी एंड हैप्पीनेस चीफ डिपेंड्स अपॉन दिस कहने का मतलब यह है कि औरत का दुख और सुख का गणित ज्यादातर इसी पर निर्भर होता है क्या होता है ऑर्गेजम के वक्त अगर आप विदेशी किताब पढ़ेंगे तो लिखा होगा कि इस वक्त तुम्हारे पल्स रेट में वृद्धि हो जाती है दिल की तड़क तेज हो जाती है स्वच्छ स्वास की क्रिया बढ़ जाती है आंखें की पुतलिया माने आईबॉल ज्यादा फैल जाते हैं मगर दोस्त अगर यह सब आप चेक करने जाएंगे तो देर विल बी मोर वर्क एंड लेस प्लेजर माने ऐसी हरकत
(3:45:50) होगी जिसमें काम ज्यादा और आनंद कम ऑर्गेजम की मिसाल एक चीक की मिसाल की तरह है एक बार स्त्री को ऑर्गेजम का एहसास हो गया तो उसको पता पड़ जाता है कि ऑर्गेजम के दौरान क्या होता है स्त्री को ऑर्गेजम हुआ कि नहीं यह उसे अपनी बोली में पूछना जरूरी भी है अगर गुजराती लड़की आती है तो मैं पूछता हूं कि तुमने संतोष यो मराठी आती है तो मैं पूछता हूं तुम्हारा समाधान जाला कना है उर्दू में सुकून पंजाबी में तसल्ली तमिल में तृप्ति तेलुगु में संतृप्ति कश्मीरी में खुशी सिंधी में कहते हैं मजो आयो शांति मिली बंगाली में कहते हैं भालो लागलो कि ना नॉर्थ में अक्सर
(3:46:36) पूछते हैं कि तू जड़ गई अरे एक बार झोपड़ पट्टी से एक औरत आई केएम हॉस्पिटाल में और जब मैंने पूछा कि आपको क्या समस्या है तो उसने जवाब दिया कि डॉक्टर साहब हमारे शौहर माने मेरे पति जल्दी खत्म हो जाते हैं और मैं नशे में नहीं आते माने वह चरम सीमा को एक नशा माने इंटॉक्सिकेशन समझती थी दूसरा एक इंसीडेंस मुझे याद आ रहा है मेरे एक मित्र श्रेष्ठ संगीतकार कल्याण जी आनंद जी माने कल्याण जी मुझे रजनीश से मिलने ले गए बातचीत के दौरान रजनीश ओसो ने बताया कि डॉक्टर साहब कोई भी भारतीय भाषा में चरम सीमा के लिए सही शब्द नहीं है सही तरीके से
(3:47:22) डिस्क्राइब नहीं किया है तो मैंने होशो को बताया कि शायद आपके फंडामेंटल जितने चाहिए उतने क्लियर नहीं है तो कल्याण जी ने गुस्से से मेरा हाथ दबाया और बोले तू किसके साथ बात कर रहा है तुझे मालूम है तब ो ने हंसकर कल्याण जी से कहा डॉक्टर कोठारी को बोलने दो आपको पता है मैंने पूछा कि मलालम में क्या कहते हैं मैंने थोड़ा सा पॉज लिया और बताया कि मलाम में मलालम में उसे कहते हैं रति मूर्छा रति का मतलब है इंटरकोस और मूर्छा का मतलब है ट्रांस ो यह सुनकर बेहद खुश हो गए और मुझे दोबारा मिलने की इच्छा प्रदर्शित की संक्षिप्त
(3:48:08) में अगर कहा जाए तो ऑर्गेजम का एहसास दो कान के बीच में दो पांव के बीच में नहीं होता हां ज्यादातर औरतों को ऑर्गेजम के दौरान योनि मार्ग के बाहरी एक तिहाई हिस्से में संकुचन यानी कि कंट्रक्शन का एहसास होता है लेकिन यह हर एक औरत को हो वह जरूरी नहीं लेकिन बेहद आनंद का एहसास हर एक औरत को होता है अभी आनंद के एहसास में चार डिस्टरबेंस यानी चार गड़बड़ियां चार परेशानियां हो सकती है जैसे पुरुष की प्रॉब्लम होता है व वैसे ही बिल्कुल वैसे ही एक अगर चर्म का एहसास अपेक्षा से जल्दी हो जाता है तो उसे
(3:48:54) अर्ली ऑर्गेजम कहते हैं दूसरा अगर चर्म का एहसास अपेक्षा से देरी से होता है तो उसे डिलेड ऑर्गेजम कहते हैं तीसरा आनंद का एहसास तो होता है लेकिन आनंद का एहसास अपेक्षा से कम मात्रा में होता है जिसे इंपेयर्ड ऑर्गेजम कहते हैं और आखिरी चौथा चर्म सीमा के दौरान आनंद का कोई एहसास ही नहीं होता इसे एब्सेंट ऑर्गेजम कहते हैं यह दुनिया का एक मात्र क्लासिफिकेशन है जहां मेल और फीमेल क्लाइमेक्स की परेशानियां सही ढंग से डिफाइन और डिस्क्राइब की गई है और पुरुष और स्त्री की ऑर्गेजम की समस्या का वर्गीकरण में
(3:49:40) संपूर्ण समानता भी है अर्ली ऑर्गेजम माने शीघ्र चरमोत्कर्ष स्त्रियों में भी पुरुषों की तरह यह समस्या होती है कि वह सहवास के दौरान अपनी अपेक्षा से जल्दी चर्म अवस्था पर पहुंच जाती है और फिर उनके बाद उसको सहवास में अमन रुचि नहीं रहती अगर यह अर्ली ऑर्गेजम को डिलेड ऑर्गजम में बदल देना हो तो सहवास से पहले डिपॉक्सिटिन-60 60 मिलीग्राम की एक गोली दो घंटे पहले एक गिलास पानी से ले इससे कुछ स्त्रियों में अर्ली ऑर्गेजम डिलेड ऑर्गेजम में परिवर्तित हो सकता है अगर यह कारगर ना हो तो क्लोमी प्रन 10 से 25 मिलीग्राम की एक
(3:50:29) गोली सहवास के छ से आठ घंटा पहले लेने से भी अर्ली ऑर्गेजम में डिले हो सकता है दूसरा है डिलेड ऑर्गेजम यहां व्यक्ति को चरमोत्कर्ष का एहसास तो होता है लेकिन अपनी अपेक्षा से बहुत देरी के बाद जिसे डिलेड ऑर्गेजम कहते हैं अगर कोई स्त्री में कुछ हार्मोन की कमी हो तो उसकी पूर्ति की जा सकती है किसी भी तरह से उत्तेजना में इजाफा होगा तो स्त्री ऑर्गेजम को जल्दी पहुंचेगी कई बार वुमन लेगस क्रॉस पोजीशन और रेर एंट्री पोजीशन में सहवास करने से शिष्ण और योनि की पकड़ मजबूत बन जाती है फ्रिक्शन यानी घर्षण ज्यादा होता
(3:51:15) है उत्तेजना बढ़ती है और ऑर्गजम का विलम काफी कम हो सकता है ऑर्गजम के दौरान अगर हर वक्त आनंद में कमी या आनंद की बिल्कुल अनुभूति ना होती हो तो उसे इपेड ऑर्गेजम और एब्सेंट ऑर्गेजम कहते हैं उसके कई कारण हो सकते हैं मिसाल के तौर पर अगर महिला को कोई ड्रग लेती हो या किसी हार्मोन की कमी हो या विटामिन बी12 की कमी हो तो पर्याप्त रूप से इसे पूरी करने के बाद यह समस्या कभी-कभी दूर हो सकती है इंपेयर्ड ऑर्गेजम या एब्सेंट ऑर्गेजम की ट्रीटमेंट आसान
(3:52:00) नहीं होती ध्यान रहे पेल्विक फ्लोर मसल्स की एक्सरसाइज ऑर्गेजम के सभी विकारों में फायदेमंद साबित हो सकती चाहे वो अर्ली ऑर्गेजम हो डिलेड ऑर्गेजम हो इंपेयर्ड ऑर्गेजम हो या एब्सेंट ऑर्गेजम हो डिलेड इंपेयर्ड और एब्सेंट ऑर्गेजम में अगर हार्मोन की कमी हो तो उनके लिए मैं अक्सर कुछ वक्त दो-तीन महीने के लिए खाने पीने की चीजों में ज्यादा हार्मोन हो उसका सूचन करता हूं मिसाल के तौर पर अगर एस्ट्रोजन की कमी हो तो सोयाबीन ज्यादा लेने की एडवाइस करूंगा और अगर उनको निपल्स में या क्लिटोरिस में या बाह्य भाग में स्पर्श जन्य उत्तेजना की
(3:52:46) कमी हो तो ज्यादातर हफ्ते में एक दो बार दो कटोरी उड़द की दाल काली उड़द की दाल गाय के घी में लहसुन और हींग का तड़का लगाकर खाने से भी टेस्टोस्टेरोन की मात्रा में इजाफा हो सकता है और रात को एक या दो चम्मच साबूत मेथी के दाने आधे गिलास पानी के साथ निगल जाए से भी टेस्टोस्टरॉन में इजाफा होता है अगर इसमें फायदा ना हो तो स्त्री के लिए सिंथेटिक एस्ट्रोजन मार्केट में उपलब्ध है वह डॉक्टर की सलाह के नीचे ले सकते हैं लेकिन सिंथेटिक टेस्टोस्टरॉन स्त्री हरगिज नहीं ले सकती यहां पुरुष को दो चीजें ध्यान में रखनी चाहिए कि पुरुष
(3:53:34) को ऑर्गेजम के वक्त स्खलन होता है स्त्री को नहीं होता है दूसरा पुरुष एक बार ऑर्गेजम पर पहुंच गया तो फिर दोबारा तुरंत उसके लिए ऑर्गेजम पर पहुंचना मुश्किल होता है लगभग नामुमकिन होता है लेकिन महिलाएं ऑर्गेजम के बाद अगर उनको पर्याप्त उत्तेजना दी जाए तो कुछ महिलाएं बार-बार ऑर्गेजम तक पहुंच सकती है यह मल्टी ऑर्गेजम की क्षमता हर एक स्त्री में मौजूद नहीं होती हमारी अस्पताल प्रैक्टिस में 10 से 12 प्रतित महिलाओं को मल्टी ऑर्गेजम का एहसास होता था फीमेल सेक्सुअल प्रॉब्लम का निदान और उपचार इतना आसान
(3:54:22) नहीं है इतना सहज नहीं है हकीकत में यह चिकित्सक के लिए एक चुनौती है हम बात करने जा रहे हैं एनाटॉमी एंड फिजियोलॉजी ऑफ सेक्सुअल एंड रिप्रोडक्टिव ऑर्गन ऑफ बोथ मेल एंड फीमेल यानी कि यौन और प्रयोजन के अंगों की शारीरिक रचना और उसकी क्रिया का विज्ञान हमने बाहरी और आंतरिक जननांग के बारे में बात की थी सेक्सुअल और बच्चे पैदा करने वाले अंगों को जननांग अंगों के रूप में भी जाना जाता है आज हम पुरुष और महिला के सेक्सुअल और रिप्रोडक्टिव अंगों पर चर्चा करेंगे सबसे पहले पुरुष के जो
(3:55:10) बाय जनांग है जिसे एक्सटर्नल जेनिटल्स कहते हैं उसके बारे में बात करेंगे और वह है शिन यानी पिनिस और अंडकोष जिसे स्क्रोटम कहते हैं पुरुष का शिश्न तीन स्पंजी सिलेंडर से बना हुआ रहता है दो कॉरपोरा कैवरनोसा और एक कॉर्पस पोंजियो समम दोनों कॉरपोरा कैवरनोसा ऊपर होते हैं और कॉर्पस स्पंजसम नीचे होता है जब भी कोई पुरुष उत्तेजित होता है तो कॉरपोरा के बनोसा में खून का बहाव ज्यादा तेज होता है और पुरुष को इरेक्शन होता है कॉरपोरा कैवरनोसा और कॉरपोरा स्पंजसम एक आवरण में लिपटे हुए
(3:55:58) रहते हैं जिसे ट्यूनिका अल्बूजीनिया कहते हैं सबसे ऊपर का जो आवरण होता है वह चमड़ी होती है तीनों सिलेंडर एक दूसरे से बंधे हुए रहते हैं और पिनिस एक ही सिलेंडर है ऐसा हमें आभास होता है पिनिस के आगे का हिस्सा एक शंकु आकार में समाप्त होता है जिसे ग्लैस पिनिस या पिनिस हेड कहा जाता है इन शॉर्ट कॉरपोरा कैवरनोसा में खून के बहाव से पिनिस में इरेक्शन होता है कॉर्पस स्पंजियोसिस है और उसमें से से पेशाब करते वक्त पेशाब बाहर आता है और सहवास करते वक्त वीर्य
(3:56:44) यानी सीमेंट बाहर आता है खतना न किए हुए पुरुषों में यह ग्लांस पिनिस लूस चमड़ी से ढका हुआ रहता है जिसे पपूज कहते हैं यह प्रेप में प्रेप शल ग्रंथियां रहती है जिसमें से पीले सफेद रंग का एक चीज जैसा एक श्राव निकलता है जिसे स्मैग्मा कहते हैं यह स्मैग्मा को स्नान कर समय नियमित रूप से चमड़ी पीछे लेकर पानी से साफ करना आवश्यक है पुरुष का लिंग जब सुसुप्त अवस्था में होता है तब उसे अंग्रेजी में फ्लेस पिनिस कहते हैं जब उसमें खून का बहाव ज्यादा होता है तो पिनिस उत्तेजित होता है और उसमें कड़क पन आ जाता है और
(3:57:30) उसे इरेक्शन कहते हैं गम वागन मेरे अच्छे दोस्त 1985 में सेवंथ वर्ल्ड कॉन्फ्रेंस सबसे सालाजी में हिस्सा लेने के लिए वह खास कोपनहेगन से दिल्ली आए थे वागन विश्व का पहला व्यक्ति था जिसने यह बताया था कि इरेक्शन होने की वजह आर्टरी के प्रवाह में वृद्धि और वेनस जो खून ड्रेन करती है उसके प्रभाव में कमी पुरुष के अंदर ज्यादातर कल्पना से जिसे फैंटेसी कहते हैं उससे या स्पर्श से या देखने से या सुनने से में सेक्स का सेंटर होता है जो उत्तेजित होता है और उत्तेजित होने के बाद यह मैसेजेस रीड में माने स्पाइन में रहे हुए संभवत
(3:58:19) सेक्स सेंटर ऑफ द स्पाइन में जाते हैं इस प्रक्रिया के दौरान प्राइवेट पार्ट में खून का बहाव तेज हो जाता है और पुरुष को इरेक्शन होता है और महिला के योनि मार्ग में गीलापन होता है पुरुष का पीना इरेक्शन और स्त्री का वजाइनल लुब्रिकेशन यह 100% खून के बहाव की वजह से होता है साथ ही साथ सही मात्रा में हार्मोन और उचित माहौल या वातावरण की भी जरूरत रहती है पुरुष का दूसरा बाहरी अंग है अंडकोष की थैली जिसे स्क्रोटम कहते हैं इस थैली में दो अंडकोष होते हैं आमतौर पर एक अंडकोष ऊपर और दूसरा नीचे रहता है यूजुअली लेफ्ट
(3:59:08) इज लोअर यानी लेफ्ट अंडकोष नीचे रहता है और राइट थोड़ा ऊपर रहता है यह अंडकोष में दो तरीके के सेल्स होते हैं एक में से हार्मोन बनता है जो डायरेक्ट खून में जाता है जिसकी वजह से पुरुष को दाढ़ी मूछ छाती पर बाल बगल में बाल प्राइवेट पार्ट में बाल मर्दाना आवाज और सेक्सुअल डिजायर जिसे कामेचा कहते हैं वो पैदा होती है और दूसरी टाइप के जो सेल्स होते हैं वो स्पर्म्स यानी शुक्राणु पैदा करते हैं जो शुक्र नलिका से होके जिसे वास डिफरेंस कहते हैं उसके द्वारा शुक्र शय में पहुंचते हैं और जब उत्तेजना चर्म के करीब पहुंचती है तो उस वक्त शुक्र नलिका और शुक्र का द्रव्य
(3:59:56) इजेकुलेटरी डक्ट द्वारा प्रोस्टेट यूरेथ्रा माने पुस्त ग्रंथि के अंदर प्रोस्टेट के द्रव्य के साथ जमा होता और साथ ही साथ उसी वक्त मूत्राशय याने यूरिनरी ब्लेडर का द्वार बंद हो जाता है इसे एमिशन फेज कहते हैं जिस वक्त पुरुष को ऑर्गेजम माने इजेकुलेटरी इनएविटेबिलिटी का एहसास होता है मिसाल के तौर पर अब मुझे चर्म अवस्था या स्खलन अवस्था या ऑर्गेजम हो ही जाएगा ऐसी फीलिंग होती है उसके तुरंत बाद यानी कि स्प्लिट सेकंड लेटर दो मसल्स बल्बोकैवरनोसस और ो केनोसिस मसल्स का कंट्रक्शन होता है संकुचन होता है और
(4:00:42) अक्सर इसी वक्त दिमाग में पुरुष को बेहद आनंद का एहसास भी होता है जिसे ऑर्गेजम या क्लाइमेक्स के रूप में जाना जाता है और इस दौरान आमतौर पर वीर्य झटके से मूत्र मार्ग के जरिए शिष्ण में से बाहर आ जाता है वीर्य स्खलन हो जाता है ध्यान रहे यह आनंद दो कान के बीच में होता है दिमाग ना कि दो पाव के बीच हालांकि स्खलन यानी वीर्य की मौजूदगी के बगैर भी पुरुष को क्लाइमेक्स यानी आनंद का एहसास हो सकता है मिसाल के तौर पर यवन प्रवेश से पहले यानी प्री प्यूबर्टल एज में जब व्यक्ति क्लाइमेक्स पर पहुंचती है तो कई बार आनंद का एहसास तो
(4:01:28) संपूर्ण होता है झटके भी लगते हैं लेकिन रियस खलन नहीं होता ऐसी घटना अक्सर प्रोस्टेट सर्जरी के बाद भी देखी जाती है कुछ सिचुएशन में ऑर्गेजम का एहसास के बगर भी पुरुष को स्खलन हो सकता है इन शॉर्ट ऑर्गेजम कैन अकर विदाउट एजकुलेशन एंड एजकुलेशन कैन अकर विदाउट ऑर्गेजम कहने का तात्पर्य यह है कि चरम सीमा का एहसास यानी ऑर्गेजम और वीरय स् कलन दोनों अलग-अलग चीजें हैं और एक दूसरे ऊपर निर्भर नहीं है एक और बात पर भी ध्यान देना जरूरी है कभी-कभी पुरुष टेलीफोन पर अपने पार्टनर के साथ कुछ इरोटिक बातें करता है कुछ सेंसुअस
(4:02:15) बातें करता है और कभी कभी किसी के ख्याल से जब उत्तेजित हो जाता है तो कई बार एक ट्रांसपेरेंट सा लिक्विड चिपचिपी लिक्विड के कुछ बूंदे शिस्ट में से बाहर उभर आती है इसे कापस ग्ला फ्लूइड या प्री कम या प्री इजेकुलेशन फ्लूइड कहते हैं लेकिन कुछ पुरुष उसे विर्य समझ लेते हैं और अक्सर सहवास के दौरान जो कि टू एंड फ्रो मूवमेंट होती है वह मूवमेंट करना बंद कर देते हैं यह सोच के कि अभी मुझे डिस्चार्ज हो गया अभी मुझे विध स्खलन हो गया तो संभोग समाप्त होना ही चाहिए और वो टू एंड फ्रो मूवमेंट बंद करके संभोग समाप्त कर देते हैं क्योंकि उनके दिमाग में यह ख्याल रहता
(4:03:00) है कि सीमन के डिस्चार्ज के बाद अक्सर सहवास समाप्त हो जाता है यहां पुरुष कई बार कपस ग्लैंड फ्लूइड को गलती से वीर्य समझ बैठता है वीर्य माने सीमन और कपस का द्रव दोनों अलग अलग चीज है मिसाल के तौर पर कापस ग्रंथि का द्रव्य दो या तीन बूंद होता है र्य दो से तीन मिलीलीटर होता है कपस ग्लैंड का द्रव्य ट्रांसपेरेंट होता है वीर्य सफेद और हल्का पीला सा होता है कपस गला फ्लूइड की कुछ बूंदे धीरे-धीरे से उभर आती है माने इट ज आउट और वीर्य झटके
(4:03:47) से बाहर आता है माने सीमेंस क्वट आउट यह बात हुई पुरुषों के बारे में अभी हम स्त्रियों के बारे में बात करेंगे महिला में बाहरी दिखने वाले जो जननांग है उसमें मोनस पबिस द लेबिया मेजोरा द लेबिया माइनोरा और क्लिटोरिस प्यूबिक बोन के ऊपर फेटी पैड जैसा रहता है उसे मोनस पबिस कहते हैं मोनस पबिस जब नीचे उतरता है तो वह दो स्पंजी हिस्सों में अलग हो जाता है उसे आउटर लिप्स या लेविया मेजोरा या बाहरी बगो कहते हैं इनका काम है अंदर के भाग यानी क्लिटोरिस योनि मार्ग वगैरह को इंफेक्शन और टोमा से प्रोटेक्ट
(4:04:35) करना उनकी रक्षा करना लेबिया मेजोरा सेंटर में एक दूसरे को मिलते हैं जब इस लेबिया मेजोरा को अलग किया जाता है तब जो दिखता है वह है लिबिया माइनोरा जिसे इनर लिप्स भी कहते हैं उसके खुलने से तीन चीज सामने आती है सबसे ऊपर क्लिटोरिस होता है यह सबसे संवेदनशील अंग है इट एक्सट्रीमली सेंसिटिव अक्सर इसे स्पर्श करने से ज्यादातर महिलाओं में बेहद आनंद की अनुभूति होती है उत्तेजना में काफी इजाफा होता है उसके नीचे होता है मूत्र द्वार होता है जिसे यूरे कहते हैं एक छोटा सा छेद होता है जहां से पिशाब बर आता है
(4:05:23) वह इतना छोटा होता है कि जिसमें एक छोटी उंगली का जाना भी नामुमकिन है उसके बराबर नीचे योनि मुख रहता है जहां सहवास होता है महिलाओं को महीना भी यहीं से आता है और प्रेगनेंसी के दौरान बच्चा भी इसी जगह से बाहर आता है योनि द्वार आमतौर पर एक पतली मेंब्रेन एक झिल्ली से ढका हुआ रहता है जिसे लोग हाइमन कहते हैं जिसमें एक या ज्यादा छेद भी हो सकते हैं महावारी के दौरान जिसमें से खून बाहर आता है कई बार यह हायमान पैदाइशी होता भी नहीं है या तो खेलकूद की गतिविधियों में या टेंपोन का
(4:06:09) इस्तेमाल करते समय या हस्तमैथुन करते वक्त भी कभी-कभी यह फट भी सकता है सबसे नीचे टॉयलेट का द्वार है जिसे गुदा द्वार कहते हैं सहवास के वक्त कई बार लोग यह दुविधा में रहते हैं कि शिसन ने सही जगह पर प्रवेश किया या नहीं ध्यान रहे मूत्र द्वार बहुत छोटा है उंगली भी नहीं जा सकती और शिष्ण प्रवेश का तो सवाल ही पैदा नहीं होता उसी तरह टॉयलेट का द्वार गुदा द्वार बहुत नीचे है प्रवेश अगर होता है तो एक ही जगह होता है और वह है योनि मार्ग योनि एक 6 इंच की ट्यूब होती है जिसका मुख मूत्र द्वार के नीचे होता है और
(4:06:57) उसका आखिरी हिस्से में गर्भाशय का मुंह आता है जिसे सर्विक्स कहते हैं सर्विक्स बच्चे के जन्म के वक्त सुविधा के लिए थोड़ा खुल जाता है कल्पना से जिसे फैंटेसी कहते हैं उससे या देखने से स्पर्श से या सुनने के बाद स्त्री के दिमाग में जो सेक्स का सेंटर होता है वह सेक्स का सेंटर उत्तेजित होता है और उसके बाद यह मैसेजेस यह संदेश संवित सेक्स सेंटर ऑफ द स्पाइन तक पहुंचते हैं माने यह संदेश रीड की हड्डी के अंदर मौजूद सेक्स सेंटर में पहुंचते हैं इस दौरान स्त्री के प्राइवेट पार्ट में खून का बहाव
(4:07:42) तेज हो जाता है और योनि मार्ग में गीलापन पैदा होता है यह गीलापन या लुब्रिकेशन 100% खून के बहाव कंजेशन से होता है जिस तरह से पुरुष में खून के बहाव से इरेक्शन होता है उसी तरह से स्त्री के योनि में गीलापन होता है हकीकत में यह गीलापन स्त्री की उत्तेजना का एक बैरोमीटर है जब उत्तेजना एक्साइटमेंट और बढ़ जाती है और चर्म पर पहुंचती है तब महिला को बेहद आनंद का एहसास होता है जिसे ऑर्गेजम या क्लाइमेक्स कहते हैं य आनंद के एहसास के साथ-साथ ज्यादातर महिलाओं के योनि मार्ग
(4:08:27) में एक लयात्मक संकुचन भी होता है लेकिन ध्यान रहे यह संकुचन का एहसास सब में हो वो जरूरी नहीं है स्त्री को आनंद का एहसास अवश्य होता है और यह एहसास दो कान के बीच में होता है दो पांव के बीच में नहीं यह कहा जाता है कि कुछ स्त्रियों के योनि मार्ग में एक जगह रहती है जिसे जी स्पॉट कहते हैं वह आमतौर पर योनि मुख से करीबन डेढ़ या दो इंच अंदर योनि की ऊपरी दीवाल पर स्थित होता है कहते हैं कि वहां स्पर्श करने से उत्तेजना में इजाफा होता है और एक छोटे से नोड्यूल के आकार में उभर आता है और इसके घर्षण से उत्तेजना में इजाफा
(4:09:16) होता है और स्त्री त्वरित या जल्दी ऑर्गेजम पर पहुंच जाती है शुरुआती हायमन माने योनि मुख से लेके योनि मार्ग के अंत तक की करीबन लंबाई 6 इंच होती है और योनि मार्ग के अंत में गर्भाशय का मुंह होता है जिसे सर्विक्स कहते हैं यह गर्भाशय में ही गर्भ पलने की तैयारियां होती है अगर गर्भ बन गया तो बच्चा यहां पलता है और गर्भ ना बना तो वह सब कुछ महावारी के समय गर्भाशय में से सर्विक्स से होकर और फिर योनि मार्ग से होते हुए बाहर आ जाता है यूटरस यानी गर्भाशय के दोनों और ओवरीज यानी
(4:10:02) अंडाशय रहते हैं जिसमें दो तरह के सेल्स रहते हैं एक में से हार्मोन उत्पन्न होता है जो डायरेक्ट खून में जाता है जिसकी वजह से स्त्री में सेकेंडरी सेक्सुअल करैक्टर डिवेलप होते हैं जैसे कि स्तन बगल में बाल प्राइवेट पार्ट के ऊपर बाल और कामेच्छा सेक्सुअल डिजायर और यही हार्मोन गर्भाधान प्रसव और मासिक चक्र के उत्पादन और नियमन में भी महत्त्वपूर्ण भूमिका प्रदान करते हैं दूसरी तरह के सेल्स हैं जो अंडा पैदा करते हैं और यह अंडे फेलोपियन ट्यूब में जाते हैं यह फेलोपियन ट्यूब गर्भाशय के ऊपरी हिस्सों में दोनों तरफ जुड़ी हुई रहती है जब पुरुष के स्पर्म्स यह अंडे को
(4:10:49) फेलोपियन ट्यूब में मिलते हैं तो वह फेलोपियन ट्यूब से होते हुए गर्भाशय में पहुंचते हैं और गर्भाशय के एंडोमेट्रियम यानी अंदर के आवरण में उसका पोषण होता है और यह एंब्रियो गर्भ बच्चे के रूप में विकसित होता है जब बच्चा पूर्ण विकसित हो जाता है तो गर्भाशय के संकुचन के साथ-साथ सर्विक से होकर नॉर्मल डिलीवरी के दौरान योनि मार्ग से बाहर आ जाता है अगर गर्भ नहीं ठहरता तो यह सब कुछ एंडोमेट्रियम खून सर्वाइकल म्यूकस यनि मार्क का सेक्रेशन सब कुछ मेंसिस के द्वारा बाहर आ जाते हैं कुछ आम सवाल है जो हमें पूछे जाते हैं एफ
(4:11:37) क्यूज है माने फ्रिक्वेंटली आस्क क्वेश्चन एक सवाल अक्सर लोग पूछते हैं कि कुछ पुरुषों और महिलाओं को लगता है कि संभोग के दौरान सर्विक्स को छूने से ही उन्हें अधिक आनंद मिलता है यह गलतफहमी है जब एक महिला उत्तेजित होती है तो सर्विक्स अपने आप ऊपर खींचा जाता है शायद यह क्रिया में कई बार क्लिटोरिस बेहतर स्टिमुलेटिंग ऐसा लगता है दूसरा एक आम प्रश्न लोग पूछते हैं कि क्या हायमन फिर से स्थापित किया जा सकता है हां इसे हाइमनोप्लास्टी के रूप में जाना जाता है जो आमतौर पर एक सर्जरी है और अक्सर
(4:12:26) प्लास्टिक सर्जन के द्वारा की जाती है कुछ संस्कृति ऐसी है कि जहां उन्हें तथाकथित कौमार्य का प्रमाण दिखाने की आवश्यकता होती है कि एक महिला को पहले संभोग में खूल निकलना ही चाहिए हालांकि तथ्य यह है कि संभोग के पहले प्रयास में रक्त का निकलना बिल्कुल जरूरी नहीं है कई बार औरतें पूछती है कि डॉक्टर साहब संभोग करते वक्त मेरे पति मुझे अच्छी तरह से उत्तेजित करते हैं वह जानते हैं कि मुझे क्लिटोरिस की उत्तेजना से ज्यादा पसंद है लेकिन यह करते समय कुछ समय के बाद वो टेंशन में आ जाते हैं क्योंकि उन्हें क्स दिखता ही नहीं ऐसा क्यों क्या मेरे
(4:13:09) साथ कुछ गलत है हो रहा है सामान्य अवस्था में क्लिटोरिस आमतौर पर अपने सामान्य स्थान पर दिखाई देता है जो मूत्र मार्ग के ठीक ऊपर होता है लेकिन जब एक महिला उत्तेजित हो जाती है एक्साइट होती है तो कभी कभ क्लिटोरिस ऊपर उठ जाता है छिप जाता है और दिखाई नहीं देता यह नॉर्मल है बेहतर यही होगा कि स्पर्श युक्त उत्तेजना उसी जगह में आपके पति जारी रखे चाहे क्लिटोरिस दिखे या ना दिखे बेवजह इसे खोजने की कोशिश ना करें एक नजरिया मैंने भारतीय पुरुषों में आम देखा है जो मैं आपसे शेयर करना चाहूंगा ज्यादातर भारतीय पुरुष जब शादी
(4:13:57) करते हैं और पहली रात को अगर उनकी वाइफ को ब्लीडिंग नहीं हुआ तो वो हायमन खोजने की कोशिश करते हैं हायमन क्यों नहीं दिखता हायमन किधर हैन किधर है जब उन्हें हायम नहीं दिखता तो वह महिला के चरित्र पर शंका करना शुरू कर देते हैं यह गलत धारणा की वजह से मैंने कितनी शादियां टूटती हुई देखी है हकीकत में हर एक स्त्री को पहले सहवास के दौरान हायमन का फटना जरूरी नहीं है और खून का निकलना भी जरूरी नहीं है यह एक गलत धारणा है जिसे दूर किया जाए वास्तव में बेवजह पुरुषों ने एक छोटे से टिश्यू को बड़ा इशू बना दिया है अब हम जो बात करने जा रहे हैं वह है सेक्सुअल पोजीशंस
(4:14:44) के बारे में कई बार कुछ लोग सेक्सुअल पोजीशंस को पोर्नोग्राफी से ही रिलेट कर लेते हैं लेकिन इस लेक्चर के अंत तक आपको ऐसा एहसास हो जाएगा कि सेक्सुअल पोजीशन को देखने का अपना नजरिया बदलना चाहिए यह 1992 की बात है चाइना में 92 में मुझे द सेक्सोलॉजिस्ट ऑफ एशिया का अवार्ड से सम्मानित किया था यह अवार्ड मुझे एशियन फेडरेशन फॉर सेक्सोलॉजी की ओर से दिया जा रहा था जिस होटल में यह इवेंट था वहां पर मुझे अवार्ड के पहले एक लेक्चर देने के लिए कहा
(4:15:29) गया था उस लेक्चर का शीर्षक था सेक्स मिथ्स एंड रियलिटीज जिस तरह से हमारे देश में लोग हस्त मैथन वीर्य का महत्व ब्रह्मचर्य शिष्ण की साइज वगैरे गलतफहमियां से शिकार है चाइना में भी बिल्कुल वैसा ही हाल था इस लेक्चर में एशिया के डेलिगेट्स तो थे ही लेकिन जिस होटल में मैं यह इवेंट कर रहा था उस होटल में जितने भी शोरूम थे वह लोग भी लेक्चर सुनने के लिए आ गए थे क्योंकि लेक्चर का शीर्षक इंटरेस्टिंग भी था और अट्रैक्टिव भी था हॉल काफी भरा हुआ था लोगों को लेक्चर बहुत ही पसंद आया
(4:16:20) मीडिया भी थी लेक्चर खत्म होने के बाद और अवार्ड रिसीव करने के बाद मैं होटल के एक शोरूम में गया जो बराबर लेक्चर हॉल के सामने ही था शोरूम पुरानी चीजों का था एंटीक्विटीज का का था मैं अंदर गया उसके मालिक ने मुझे चाय कॉफी ऑफर किया और मुझे उसने बताया कि डॉक्टर कुठारी थैंक यू वेरी मच फॉर गिविंग अ वंडरफुल टॉक एंड क्लियर अवर एज ओल्ड डाउट्स फिर उसने बताया कि जिस गलतफहमी की समस्या से मैं 25 साल से पीड़ित था आपने मुझे उससे मुक्त कर
(4:17:04) दिया यह मेरी शोरूम है और मेरे शोरूम में से आपको जो भी एक चीज पसंद आए आप मेरी तरफ से गिफ्ट मान के ले सकते हैं और अगर आप लेंगे तो मुझे बेहद खुशी होगी मैं भी एक छोटा मोटा आर्ट कलेक्टर हूं और एंटीक्विटीज में थोड़ा बहुत जानकार भी हूं तो मैंने यह चीज वहां से ली यह 18वीं सदी की काहा है आयुरी का है 14.5 सेंटीमीटर लंबाई है 7.
(4:17:42) 5 सेंटीमीटर चौड़ाई है और सिर्फ 5 सेंटीमीटर उसकी मोटाई है माने कि थिकनेस सिर्फ 5 मिलीमीटर है जिसमें आठ कपल्स है जो अलग-अलग तरीके से सहवास कर रहे हैं य यह बेहद बारीक नक्शी काम का एक अद्भुत नमूना था उसने कहा सर दिस इज माय फेवरेट पीस मैंने उसे बहुत कहा कि कम से कम आप इसकी कॉस्ट ले लो तो मुझे खुशी होगी उसने अपनी किताब खोली कॉस्ट देखी और मुझे बताया कि डॉक्टर साहब कॉस्ट लेने जैसी नहीं है आप एंजॉय कीजिएगा 18वीं सदी के इस आईवरी पीस को आप देखेंगे तो आप जान
(4:18:30) जाएंगे कि लोग अलग-अलग सेक्स पोजीशन पहले के जमाने से आजमाते थे इसलिए क्योंकि सेक्स जीवन में एकरसता ना रहे और कुछ नयापन कुछ नोवेल्टी बनी रहे अगर हम आज की बात करें तो आज के जमाने में जहां एड्स जैसी बीमारियां मल्टीपल पार्टनर से संग करने से फैलती है वहां इस बात पर ध्यान देना जरूरी है कि ज्यादा पार्टनर के साथ क्यों संग होता है क्योंकि सेक्स जीवन में नोवेल्टी लाने के लिए अक्सर एक रास्ता यानी मोनोटोनी तोड़ने के लिए मेरे ख्याल से नोवेल्टी लाने के लिए अपने सेक्स जीवन को बेहतर बनाने के लिए एक पुरुष अलग-अलग
(4:19:19) पार्टनर से सहवास करने की बजाय एक पुरुष एक पार्टनर के साथ मल्टीपल पोजीशन में सहवास करे यह यकीनन बेहतर विकल्प है जब भी मैं सेक्सुअल पोजीशन पर लेक्चर देता हूं तो लोगों के दिमाग में अक्सर य खल आ जाता है कि मैं कोई पोर्नोग्राफी की बात करने जा रहा हूं लेकिन कई बार ऐसा भी होता है जब किसी भी तरह का इलाज मुमकिन नहीं होता तो कई बार सेक्सुअल पोजीशंस का वैज्ञानिक उपयोग एक मात्र इलाज साबित हो सकता है मुझे इसका पहला अनुभव हुआ था करीबन आज से 40 साल पहले मुझे सौराष्ट्र के रॉयल फैमिली का एक कपल रिफर किया गया
(4:20:08) उनको बच्चा चाहिए था लेकिन प्रॉब्लम उनका यह था कि वह सही तरीके से सहवास नहीं कर सकते थे जब मैंने उनके रिपोर्ट देखे तो पुरुष का सीमन रिपोर्ट बिल्कुल नॉर्मल था क्वांटिटी ऑफ स स्पर्म भी ठीक थी स्पर्म्स की मूवमेंट भी ठीक थी हर चीज नॉर्मल थी स्त्री को मेंसस भी सही होती थी बिल्कुल रेगुलर थी लेशन भी नॉर्मल था और उनके फैलोपियन ट्यूब की भी जांच की गई थी जिसमें भी कोई दिक्कत नहीं थी लेकिन उनको और उनके दिमाग में सिर्फ यही था कि हमारा वंश आगे बढ़ना चाहिए और हमें बच्चा नॉर्मल तरीके से ही चाहिए मैंने जब दोनों की शारीरिक तपास की दोनों
(4:20:54) नॉर्मल थे पुरुष को ख्वाहिश ठीक से होती थी उसके शिष्ण में तनाव ठीक से आता था तनाव रहता भी था उसका स्खलन भी ठीक से होता था प्रॉब्लम सिर्फ इतना ही था कि दोनों काफी ओबेस थे दोनों का वजन बहुत था वदन बहुत मोटा था दोनों की सहवास की क्षमता तो नॉर्मल थी लेकिन सहवास के वक्त पुरुष का प्राइवेट पार्ट का मिलना मुश्किल था क्योंकि दोनों का पेट बीच में आ जाता था यहां प्राइवेट पार्ट्स की बजाय दोनों के पेट का ही मिलन होता था यह एक मैकेनिकल प्रॉब्लम था जिसकी वजह से शिष्ण और योनि का मिलन नहीं हो रहा था माने प्रवेश नामुमकिन बन गया था ऋषि वात्सायन
(4:21:43) ने ऐसी अवस्था में खास कर के जहां दोनों के पेट बहुत बड़े हो और मोटे पेट की वजह से अगर पेनिट्रेशन में रुकावट आती हो तो उसके लिए उन्होंने अपने काम सूत्र में लिखा है कि ऐसी सिचुएशन में कपल्स को अइब आसन का प्रयोग करना चाहिए संस्कृत में ऐब का मतलब है हाथी कहने का मतलब यह है कि हाथी जिस तरह से सहवास करता है उसी तरह से पीछे से सहवास यानी पीछे से योनि प्रवेश करना चाहिए आवासन में सहवास पीछे से किया जाता है ताकि पेट के अवरोध की समस्या अपने आप दूर हो जाती है चाहे बड़ा पेट खुद का हो पार्टनर का हो या दोनों का हो ऋषि का कहने
(4:22:32) का मतलब यह था कि पुरुष को पीछे से सहवास करना चाहिए यह कपल को मैंने ना कोई दवाई दी ना कोई इंजेक्शन दिया सिर्फ सामान्य बुद्धि से सामान्य सलाह दी कि आप योनि प्रवेश पीछे से करेंगे तो आपके पार्टनर का पेट बीच में जो रुकावट पैदा करता है जो मैकेनिकल ऑब्स्ट्रक्शन पैदा करता है वह नहीं आएगा और इस पोजीशन में प्रवेश आप आसानी से कर सकेंगे उनका सहवास हुआ और उनको दो बच्चे भी हुए यह बात अगर कोई मुझे पूछता है कि सबसे बेहतर पोजीशन कौन सी है उसका जवाब मैं कहूंगा कि जिस पोजीशन में प्रवेश आसानी से हो दोनों
(4:23:19) में से किसी भी पार्टनर को डिस्कंफर्ट ना हो मूवमेंट्स करने में दोनों को सहूलियत हो और जो पोजीशन दोनों के लिए आनंददायक हो वह पोजीशन कपल के लिए बेहतरीन पोजीशन मानी जा सकती है ज्यादातर अगर मूल पोजीशन देखी जाए तो मेरे तजुर्बे में पांच या छह पोजीशन होती है बाकी सब जो पोजीशंस बताई गई है वो उसके वेरिएशंस है अलग-अलग पोजीशंस के अलग-अलग फायदे हैं अलग-अलग पोजीशंस का इस्तेमाल करने से व्यक्ति के काम जीवन में एक नयापन आता है एक नोवेल्टी आती है जो से जुनून में इजाफा होता है और कुछ शारीरिक समस्याओं में अगर सही पोजीशन का इस्तेमाल
(4:24:05) किया जाए तो वह समस्या कम हो जाती है और कई बार पूरी तरह से खत्म हो जाती है मिसाल के तौर पर अगर किसी व्यक्ति को कमर दर्द का प्रॉब्लम हो समझो जब भी एक पुरुष सहवास करने की कोशिश करता है तो मूवमेंट के दौरान या मूवमेंट के बाद उसको कमर के निचले हिस्से में काफी दर्द होने लगता है यह दर्द कोई स्पाइन के प्रॉब्लम की वजह से या किसी और वजह से भी हो सकता है ऐसे में पुरुष ऊपर और और स्त्री नीचे पोजीशन की बजाय उसकी रिवर्स पोजीशन करें माने विपरीत आसन का प्रयोग करें जिसमें स्त्री ऊपर और पुरुष नीचे होता हो तो इसमें पुरुष को मूवमेंट होती ही नहीं और मूवमेंट की वजह
(4:24:52) से होने वाला दर्द का एहसास कम होता है या बिल्कुल नहीं होता है क्योंकि वह मूवमेंट करता ही नहीं है मूवमेंट करने वाली व्यक्ति ऊपर है जो उसकी स्त्री है जब पुरुष नीचे रहता है और स्त्री ऊपर होती है तब पुरुष के कमर के मसल्स अपने आप रिलैक्स पोजीशन में आ जाते हैं मेरे पास कितने ही ऐसे केस आए होंगे कि पुरुष इस कंप्यूटर युग में कंप्यूटर के सामने बैठकर अपनी गर्दन नीची करके घंटों तक एक जगह बैठे रहते हैं जिसकी वजह से उनको सर्वाइकल स्पोंडिलोसिस या गर्दन के दर्द की समस्या होती है कई बार तो यह समस्या इतनी ज्यादा होती है कि सहवास के
(4:25:34) बाद उनके दोनों हाथ सुन हो जाते हैं और दोनों हाथों में कमजोरी और दर्द का एहसास होता है कई बार यह दर्द इतना बढ़ जाता है कि पुरुष दोबारा सहवास करने से घबराता है कि अगर वापस दर्द आ गया तो मैं दूसरे दिन ऑफिस नहीं जा सकूंगा काम नहीं कर सकूंगा इसके लिए कई बार कामेच्छा होते हुए भी काम इनवर्टेड कमास में नहीं कर पाता माने वह सहवास की प्रक्रिया से दूर भागता है ऐसे समय में अगर पार्टनर अंडरस्टैंडिंग ना हो तो रिश्तों में दरार आ जाती ऐसे प्रॉब्लम्स के मेरे पास कई केस आए होंगे कि जहां शादी तो बरकरार रहती है लेकिन रिश्ते खत्म हो जाते हैं ऐसी सिचुएशन में
(4:26:19) अगर पुरुष नीचे और स्त्री ऊपर आ जाए तो कोई मूवमेंट का प्रश्न ही उत्पन्न नहीं होता और सहवास भी आसानी से हो जाता है और सहवास के बाद कोई दर्द भी नहीं होता ऐसा ही एक दूसरा केस आया था एक चाइनीज स्त्री और एक अफ्रीकन पुरुष दोनों फॉरेन स्टूडेंट्स भारत में आकर पढ़ाई के लिए आए थे दोनों साथ में कॉलेज में पढ़ते थे दोनों में मोहब्बत हो गई और बाद में दोनों ने लव मैरेज कर दिया शादी के बाद मालूम पड़ा कि पुरुष का शिश्न बहुत लंबा है बहुत बड़ा है और स्त्री पार्टनर का योनि मार्ग कंपेरटिवली काफी छोटा है इसमें ना कोई दवाई मदद कर सकती है ना कोई सर्जरी
(4:27:08) या ऑपरेशन मदद कर सकता है ना तो आप लिंग को काट के छोटा कर सकते हो ना तो आप योनि मार्ग को सर्जरी से लंबा या ज्यादा कहरा कर सकते हो एक ही चीज आपको मदद कर सकती है वह है यौन स्थिति या सेक्सुअल पोजीशन ऋषि वात्सायन ने अपनी किताब काम सूत्र में ऐसी समस्या के लिए एक आसन सजेस्ट किया है जिसका नाम है इंद्राणी आसन यह इंद्राणी आसन में स्त्री पीठ के बल सोती है और पुरुष के थोड़े शिष्ण प्रवेश के बाद अपने दोनों घुटने अपने छाती के करीब लेके अपने दोनों पांव पुरुष की छाती
(4:27:54) के ऊपर रख देती है इसकी वजह से सहवास के दौरान स्त्री खुद पेनिट्रेशन का लेवल और आगे पीछे की मूवमेंट कंट्रोल कर सकती है इससे सहवास भी ठीक से होता है दर्द भी नहीं होता है और दोनों को संतोष की अनुभूति भी होती है दूसरी एक आम पोजीशन है जो हम लोग सब आजमाते हैं जो है मेल सुपीरियर पोजीशन यह पोजीशन में अक्सर स्त्री नीचे पीठ केबल सती है अपने पांव का घुटना थोड़ा ऊपर रखती है और पुरुष उसके दो पांव के बीच में आकर योनि प्रवेश करता है यह पोजीशन में पुरुष संपूर्ण तरीके से योनि प्रवेश कर सकता है
(4:28:41) कहते हैं कि यह पोजीशन में बच्चे पैदा करने के चांसेस भी ज्यादा होते हैं और कई बार ऑर्गेजम के बाद माने पुरुष के क्लाइमेक्स के बाद भी अगर थोड़े समय तक वह सहवास कंटिन्यू करना चाहे तो वह कर सकता है जब यह पोजीशन में पुरुष खलन करने के बाद स्त्री अपनी दोनों घुटने छाती के करीब लाकर 10 15 मिनट तक उसी पोजीशन में रहती है तो कहते हैं कि इस पोजीशन में गर्भ रहने की क्षमता ज्यादा बढ़ जाती है यह एक ऐसी पोजीशन है जिसमें पुरुष स्त्री की योनि की गहराई तक प्रवेश कर सकता है माने डीप पेनिट्रेशन इज वेरी इजी इन दिस पोजीशन ध्यान रहे अगर पुरुष का वजन बहुत ज्यादा
(4:29:30) हो और स्त्री प्रेगनेंसी के आखिरी महीने में हो तो यह पोजीशन स्त्री के लिए कंफर्ट नहीं होती कई बार यह पोजीशन में पुरुष की मूवमेंट तो काफी अच्छी रहती है लेकिन स्त्री की मूवमेंट थोड़ी रिस्ट्रिक्टर बात हमने की मेल सुपीरियर पोजीशन की जिसे आमतौर पर मिशनरी पोजीशन या मैट्रिमोनियल पोजीशन या मैन ऑन टॉप पोजीशन कहते हैं अभी हम बात करने जा रहे हैं बिल्कुल उससे अपोजिट पोजीशन की जिसे फीमेल सुपीरियर पोजीशन या वुमन ऑन टॉप पोजीशन कहते हैं फीमेल सुपीरियर पोजीशन में स्त्री ऊपर आती है और स्त्री के दोनों पांव के बीच में पुरुष के दोनों पांव आते
(4:30:17) हैं यह पोजीशन स्त्री को अक्सर ज्यादा पसंद होती है क्योंकि कब कितनी और कैसी मूवमेंट करनी वह सब उसके खुद के कंट्रोल में होता है और वह वही करती है जो उसे ज्यादा पसंद है जो उसे ज्यादा एक्साइट करती है जो उसे ज्यादा उत्तेजित करती है केएम हॉस्पिटल में हमने एक सर्वे किया था करीबन 100 महिलाओं को यह प्रश्न पूछा गया था कि कौन सी पोजीशन उन्हें ज्यादा आनंददायक लगती है 75 पर महिलाओं ने इसका जवाब दिया था कि अगर उनके बस में होता तो वह फीमेल सुपीरियर पोजीशन में ही सहवास करती
(4:31:04) क्योंकि यह पोजीशन में वह शिष्ण के प्रवेश की गहराई और मूवमेंट दोनों अपने तरीके से रेगुलेट कर सकती है और यहां पर क्लिटोरिस के साथ फ्रिक्शन भी ज्यादा इंटेंस होता है जिसकी वजह से वह चर्म सीमा पर कंपेरटिवली आसानी से पहुंच सकती है यह पोजीशन के कुछ बेमिसाल फायदे हैं अगर किसी पुरुष को डर लगता हो कि शायद उसका उत्तेजित शिष्ण प्रवेश से पहले नरम तो नहीं हो जाएगा ऐसे सिचुएशन में यह पोजीशन काफी कारगर होती है इसके लिए हर सेक्स थेरेपी की बिहेवियर मॉडिफिकेशन प्रोग्राम में मेल सुपीरियर
(4:31:49) पोजीशन पर आने से पहले फीमेल सुपीरियर पोजीशन से ही गुजरना पड़ता है क्योंकि यह पोजीशन में मुझे परफॉर्म करना है उसकी फिक्र उसकी एंजाइटी जिसे परफॉर्मेंस एंजाइटी कहती हैं वह बिल्कुल नहीं होती और उस उसका कॉन्फिडेंस भी बना रहता है यह पोजीशन फीमेल पोजी सुपीरियर पोजीशन पुरुष को खोया हुआ कॉन्फिडेंस वापस लाने में काफी सहायता रूप साबित हो सकती है अक्सर यह पोजीशन में अगर कोई पुरुष अर्ली ऑर्गेजम की शिकायत सी पीड़ित है तो वह चर्म सेवा पर जल्दी पहुंच जाता है तो कुछ केसेस में फीमेल सुपीरियर पोजीशन में अर्ली ऑर्गेजम की समस्या में थोड़ा विलंब
(4:32:36) थोड़ा डिले संभावित है स्त्री के प्रेगनेंसी के आखिरी महीनों में भी स्त्रीय पोजीशन में आराम से सहवास कर सकती है और पुरुष का वजन स्त्री के गर्भ में पल रहे शिशु पर नहीं आता प्रेगनेंसी और यौन संबंध की विस्तृत जानकारी आपको हमारे मेंस्ट्रुएशन और प्रेगनेंसी के लेक्चर में जरूर मिलेगी कई बार जब दोनों पार्टनर्स थके हुए हो तो साइड टू साइड पोजीशन बेहतर साबित हो सकती है इस पोजीशन में किसी को किसी का वजन का बाहर उठाना नहीं पड़ता यह पोजीशन लेट प्रेगनेंसी में भी अपनाई जा सकती है अगर पुरुष और स्त्री की हाइट में बहुत
(4:33:22) असमानता हो तो भी यह पोजीशन सेक्स के लिए बेहतर मानी जाती है एक छोटी सी असुविधा है इसमें कि यह पोजीशन में विगस मूवमेंट माने तेजी से आगे पीछे की टू एंड फ्रो मूवमेंट जरा मुश्किल होती है अभी हम सिटिंग पोजीशन की बात करते हैं पुरुष यह पोजीशन में कुर्सी पर बैठता है या पलंग की एज पर बैठता है और स्त्री अपने दोनों पांव पुरुष के कमर के इर्दगिर्द फैला के उस पर फेस टू फेस सामने बैठ जाती है यह पोजीशन में उनको करीब और ज्यादा महसूस होती है दोनों ज्यादा इंटीमेट बन सकते हैं बॉडी कांटेक्ट बेहतर
(4:34:08) बन सकता है और स्त्री को क्टल स्टिमुलेशन का एहसास भी इसमें बेहतर होता है शादी के बाद शुरुआत के दिनों में सहवास के लिए यह पोजीशन लोग विशेष पसंद करते हैं क्योंकि पेनिट्रेशन करने में काफी सहूलियत रहती है यह पोजीशन में एक ही असुविधा है ज्यादा तेज टू एंड फ्रो मूवमेंट इसमें पॉसिबल नहीं है अभी जो पिक्चर देख रहे हैं आप यह रेर एंट्री पोजीशन का है एक शिल्प है जो मैं आपको दिखा रहा हूं यह शिल्प करीबन 2000 साल से ज्यादा पुराना है आम लोग उसे स्लैंग में डॉगी पोजीशन भी कहते हैं माने यह पोजीशन कोई आज के जमाने की नई खोज नहीं
(4:34:57) है हर एक पोजीशन में कुछ लाभ होते हैं कुछ असुविधा भी होती है यह पोजीशन में दो फायदे अक्सर मुझे अपने प्रैक्टिस में नजर आए एक तो अगर एक पुरुष की इंद्रिय कंपैरेटिव बहुत छोटी है तो यह पोजीशन में वो ज्यादा आनंददायक और बेहतर सहवास कर सकता है और साथ ही साथ अगर कोई पुरुष को ऑर्गेजम में डिले होती है मतलब अगर चर्म सीमा पर पहुंचने में थोड़ा विलंब होता है तो यह पोजीशन में वह विलंब कम हो जाता है और कुछ पुरुष बेटर फ्रिक्शन की वजह से ज्यादा उत्तेजना की वजह से ऑर्गेजम पर आसानी से जल्दी पहुंच सकते हैं कुछ औरतों को भी यह पोजीशन ज्यादा पसंद होती है
(4:35:42) क्योंकि औरतों को सहवास का आनंद तो पेनिट्रेशन की वजह से मिल ही जाता है लेकिन साथ ही साथ पुरुष उसके प्राइवेट पार्ट उसको ब्रेस्ट उसके क्लिटोरिस को ज्यादा सहूलियत से विशेष उत्तेजना प्रदान कर सकता है इसमें एक मामूली असुविधा है कि अगर वह क्लोज एंब्रेस लेकर किसिंग करना चाहे तो वह संभव नहीं होता एक और पोजीशन जो हमें प्राइवेट प्रैक्टिस में कुछ विलंबित चरमोत्कर्ष यानी डिलेड ऑर्गेजम के केसेस सुलझाने में मदद रूप हुई है वह है वुमन लेगस क्रॉस पोजीशन यह पोजीशन में शिष्ण प्रवेश के बाद स्त्री अपना एक एंकल माने टकना दूसरे एंकल
(4:36:30) पर रख देती है यह रखने से शिष्ण और योनि की पकड़ ग्रिप ज्यादा मजबूत बन जाती है और फ्रिक्शन भी ज्यादा हो जाता है इसकी वजह से और जोश बढ़ता है और विलंबित ऑर्गेजम यानी डिलेड ऑर्गेजम अपनी इच्छा अनुसार थोड़ा जल्दी हो सकता है दिस आर द मेन पोजीशंस वच वी हैव कम अक्रॉस इसके अलावा भी पोजीशंस है जिसमें वेरिएशंस हो सकते हैं काम सूत्र में रति रहस्य में और अनंग रंग में अलग-अलग बताए गए हैं अभी भी नए नए पोजीशन निकल रहे हैं मिसाल के तौर पर स्पून पोजीशन एटस ज्यादातर पांच या छह बेसिक पोजीशन रहती है
(4:37:19) बाकी सब में बेसिक पोजीशन से थोड़े ही बहुत वेरिएशन दिखाई देते हैं अलग-अलग पोजीशन अपनाने का बेसिक उद्देश्य जो है वह है एक रास्ता यानी मोनोटोनी दूर करने का आनंद बढ़ाने का गर्भ रहे उसके लिए और गर्भ ना रहे उसके लिए भी यह पोजीशन फायदेमंद हो सकती है यह पोजीशंस का मकसद सिर्फ उत्तेजना में इजाफा करना वह नहीं है कई बार कपल्स की समस्याओं को सुलझाने का यह एक मात्र बेहतरीन उपाय बन सकता है और वाचीन युग में जहां एड्स जैसी खतरनाक बीमारी का खतरा हो वहां एक पुरुष और मल्टीपल पार्टनर्स के बजाय एक पुरुष एक
(4:38:07) पार्टनर और मल्टीपल पोजीशंस यह यकीनन बेहतर विकल्प बन सकता है जहां तक कल्चर की बात है सबसे पुराना कल्चर चाइना और भारत में ही मिलेगा मेरे अजीज दोस्त और चाइना के मशहूर इरोटिक आर्ट कलेक्टर डॉक्टर दलील ली कहते थे कि चाइना में एक जमाने में ऐसी प्रथा थी कि शादी के वक्त हम अपनी बेटियों को एक विशेष पेपर का स्क्रॉल गिफ्ट देते थे उसमें अलग-अलग तरीके सेक्सुअल पोजीशन दिखाई देती थी बिन अनुभवी लोगों के लिए यह एक सेक्स एजुकेशन का बेहतरीन जरिया था यह स्क्रॉल मुझे डॉक्टर लू ने ही गिफ्ट दिए
(4:38:53) थे इस लेक्चर के अंत में मेरी बात से आप सहमत होंगे कि किसी भी तरह का ज्ञान कभी भी हानि करर नहीं होता और साथ ही साथ इस विषय में कुतुल तो हर एक को रहती है लेकिन इस बात से कोई इंकार नहीं कर सकता कि अज्ञान से विकृत कोतुहल बढ़ता है और ज्ञान से ही विकृत कोतुहल कम होता है मेंसिस के बारे में बात करेंगे माने मेंस्ट्रुएशन स्त्रियों में च मार्क्स द बिगिनिंग ऑफ प्यूबर्टी मासिक धर्म यवन की शुरुआत का प्रतीक है और यह मासिक धर्म आमतौर पर 10 से 15 साल की उम्र के बीच में शुरू होता है हमें मालूम है कि स्त्री में दो ओवरीज
(4:39:40) होती है और हर एक ओवरीज में दो तरह के सेल्स होते हैं एक में से हार्मोन बनता है और दूसरा में से अंडा बनता है जिससे बच्चा पैदा होता है अंडाशय से हर महीने में अमूमन एक अंडा पैदा होता है वह अंडा जब परिपक्व हो जाता है तब फर्टिलाइजेशन की उम्मीद में वो फैलोपियन ट्यू के माध्यम से गर्भाशय की ओर जाता है इस दौरान गर्भाशय की दीवारें भी थोड़ी थिक हो जाती है सहवास के बाद अगर पुरुष के स्पर्म्स अंडे से मिलते हैं तो वह फर्टिलाइज हो जाता है और यह फर्टिलाइज अंडा आहिस्ता आहिस्ता
(4:40:26) गर्भाशय की ओर जाता है और गर्भाशय की दीवार में यह इंप्लांट हो जाता है और यहां यह एंब्रियो माने भ्रूण परिपक्व होता है और बच्चे के रूप में नौ महीने तक विकसित होता रहता है अगर यह अंडा फर्टिलाइज नहीं होता तो गर्भाशय का अंदर का लेयर गर्भाशय से अलग हो जाता है और योनि मार्ग से मेंसिस के रूप में बाहर आ जाता है मेंसिस में इसके साथ कुछ ब्लड कुछ सर्वाइकल म्यूकस और कुछ योनि मार् के स्राव भी मिले हुए होते हैं उसके बाद एक नई मेंसिस की फिर से शुरुआत
(4:41:11) हो जाती है यह मेंसस की प्रक्रिया हर महीने यवन प्रवेश के बाद और मेनोपॉज आने तक यानी रजो निवृत्ति आने तक चलती रहती है यह मेंसिस का चक्र अमूमन 28 दिनों का होता है यह कभी कम ज्यादा भी हो सकता है अभी में जो स्क्रीन पर एक टेबल बता रहा हूं जिससे मासिक चक्र की घटनाएं समझना बड़ा आसान हो जाएगा दिन एक से पांच जब मासिक शुरू होता है तो पहले दिन को मासिक चक्र का पहला दिन माना जाता है मेंसिस का पीरियड लगभग पाच दिन चलता है पहले दो दिन ब्लीडिंग कंपेरटिवली ज्यादा
(4:42:00) होता है दिन 6 से 14 डिंग बंद हो जाता है और यूटरस के अंदर के लेयर जिसे एंडोमेट्रियम कहते हैं गर्भ रुकेगा ऐसी उम्मीद से उसके प्रिपरेशन में लग जाता है जिसमें अक्सर अंदर का लेयर ज्यादा तिक हो जाता है रक्त और पोषक तत्त्वों से यह लेयर और ज्यादा समृद्ध बनता है अभी दिन 14 से 25 तक 14 दिन के इर्दगिर्द ओवरी से अंडा निकलता है और वह फैलोपियन ट्यूब से होकर गर्भाशय की ओर जाता है इस दौरान अगर स्पर्म्स अंडे को फैलोपियन ट्यूब में मिल जाते हैं तो
(4:42:47) फर्टिलाइजेशन शुरू हो जाता है और यह फर्टिलाइज अंडा गर्भाशय की ओर बढ़ता है और आखिर में गर्भाशय की दीवार में इंप्लांट हो जाता है और गर्भ वहां बच्चे के रूप में विकसित होता है पलने लगता है दिन 25 से 28 अगर अंडा स्पर्म से फर्टिलाइज नहीं होता और गर्भाशय में इंप्लांट नहीं होता तो कुछ हार्मोन में बदलाव की वजह से गर्भाशय के अंदर का लेयर अन फर्टिलाइज अंडा और दूसरी चीजों के साथ मेंसिस के रूप में बाहर आ जाता है और मेंसिस के पहले दिन की फिर से शुरुआत हो जाती है अभी मैं बताने जा रहा हूं कि
(4:43:35) लड़कियों में मेंसिस का पहला अनुभव कैसा होता है यह लड़की के जीवन की एक बड़ी घटना है और कुछ लड़कियां अक्सर इस दिन को याद रखती है कि उनका मासिक धर्म कब शुरू हुआ था उसमें कोई शक नहीं कि मासिक धर्म यह यवन प्रवेश की पहली और एकमात्र निशानी है साथ में यह भी कह सकते हैं कि यह एक अच्छे स्वास्थ्य की भी निशानी है फिर भी कई बार यह मेंसिस की शुरुआत कुछ लड़कियों में एक बेहद चौकाने वाली हरकत हो जाती है एंजाइटी क्रिएट करने वाली हरकत बन जाती है अगर उनको मेंसिस के बारे में पहले से बताया नहीं जाता तो अक्सर वह घबरा जाती है
(4:44:21) कंफ्यूज हो जाती है और अपने शरीर में कुछ अलग सा हो रहा है ऐसा सोचकर वह अपने आप को बेहद दुखी और एंसिस महसूस करती है और अपने आप को कोसती रहती है कि मेरे साथ ही ऐसा गलत क्यों हो रहा है हकीकत में यह सब कंफ्यूजन यह एंजाइटी तब पैदा होती है कि जब लड़की को पहले से उनकी माताओं ने या उनकी बड़ी बहनों ने मासिक र्म के बारे में पहले से एजुकेट नहीं किया होता जब सेक्स एजुकेशन नहीं दिया होता है तभी ऐसी हरकतें होती यह समझाना आवश्यक है कि मासिक हर एक औरत को आता है
(4:45:05) मासिक यह बात का संकेत करता है कि अभी आपका वदन मैच्योर हो रहा है और यह मासिक प्रजनन की क्षमता का भी संकेत है माने इट्स अ साइन ऑफ फर्टिलिटी एज वेल कि अभी आप सहवास करने के बाद प्रेगनेंट हो सकती हैं मेंसस की शुरुआत 10 से 15 साल की उम्र के दरमियान हो सकती है लेकिन आमतौर पर महिला का शरीर 18 से 20 साल की उम्र में गर्भ धारण के लिए तैयार होता है इसलिए अगर आपको गर्भ धारण करना हो अगर आपको प्रेगनेंट बनना ही है तो 18 साल के बाद की
(4:45:51) उम्र आपके लिए बेहतर होगी लोग पूछते हैं कि मां को अपनी बेटी को मेंसस में क्या होता है उसके बारे में कैसे बताना चाहिए अगर कोई मां अपनी बेटी को मासिक धर्म में मेंसिस में क्या होता है यह बताना चाहती है तब उसे उसके बारे में स्पष्ट तरीके से समझाना चाहिए कि जब आपको शुरुआत में मासिक आएगी तो आप अपनी योनि से थोड़ी मात्रा में रक्त बह रहा है ऐसा अनुभव करेंगी मासिक का खून जैसे नल से पानी निकलता है उस तरह नहीं बहता बल्कि धीरे-धीरे टपकता है और अक्सर आपको अपने प्राइवेट पार्ट में गीले पन का एहसास भी
(4:46:37) होता है लेकिन मुमकिन है कि तब तक आपके अंडर गारमेंट खून से गिले हो चुके हो और ऐसा अचानक भी हो सकता है अगर आपके साथ ऐसा होता है तो आप शांत रहे घबराए नहीं क्योंकि यह एक नॉर्मल प्रक्रिया है यह एक साधार प्रक्रिया है और यह प्रक्रिया से अमूमन हर एक लड़की गुजरती है साथ-साथ में आपको उन्हें मेंस्ट्रुअल हाइजीन प्रोडक्ट की जानकारी भी देनी चाहिए जिससे मेंसस की सिचुएशन वह आसानी से हैंडल कर सके इसके उपयोग के बाद ना तो आपके कपड़े गिले होंगे या ना तो खून अचानक टपकने
(4:47:24) लगेगा यह मेंस्ट्रुअल हाइजीन प्रोडक्ट मार्केट में अलग-अलग तरीके के उपलब्ध है इसमें खास तौर पर पैड्स टेंपस और कप्स का इस्तेमाल किया जाता है अगर यह हकीकत लड़की को पहले ही से मालूम होती है तो वह अपने बदन में होते हुए चेंज से घबराएगी नहीं वह अपने आप को सही तरीके से हैंडल कर सकेगी और किसी किस्म की एंजाइटी पैदा नहीं होगी यह एक सेक्स एजुकेशन का प्रकार है यहां पर समझाया जाता है कि अगर आपको अचानक मैसस हो जा तो ऐसे सिचुएशन में अपने आप को किस तरह से पेश आना
(4:48:10) चाहिए अभी तक हमने बात की मेंसिस के बारे में अब बात करेंगे मेंसिस के वक्त इस्तेमाल किए जाने वाले सैनिटरी पेड्स टेंपस और कप्स के बारे में पहले हम बात करेंगे सैनिटरी पेड्स की मासिक धर्म के वक्त महिलाएं जो प्राइवेट पार्ट के इर्दगिर्द एक बड रखती है या शोषक कपड़ा या सैनिटरी तौलिया रखती है जिसकी वजह से बहता हुआ खून एब्सर्ड हो जाता है अपने यहां यह सैनिटरी पेड सबसे ज्यादा प्रचलित है सैनिटरी पेड्स का उपयोग करना बड़ा आसान है आजकल मार्केट में अलग-अलग कंपनियों के
(4:48:56) सैनिटरी पैड्स बहुत सारे ऑप्शन के साथ मिलते हैं इन प्रोडक्ट के ऊपर व सैनिटरी पैड कैसे उपयोग करें इसकी जानकारी लिखी हुई रहती है इसके साथ-साथ आपको एक महत्त्वपूर्ण चीज ध्यान में रखनी चाहिए कि इस सैनिटरी पैड का उपयोग महावारी के समय में आप कितने घंटे तक करें क्योंकि एक सैनिटरी पैड आप पूरा दिन 24/7 नहीं चला सकते कुछ घंटों के बाद उसका बदलना जरूरी रहता है सैनिटरी पैड कब बदलना है यह महिला को होने वाला ब्लीडिंग और सैनिटरी पेड की क्वालिटी पर डिपेंड होता
(4:49:40) है बाजार में थिन अल्ट्रा थिन क्वालिटी के सेंट्री पैड उपलब्ध है साथ-साथ नॉर्मल और हैवी बिल्डिंग के लिए अलग वरायटी भी उपलब्ध है दोस्तों भारत जैसा देश आज भी 50 प्रतिश गांव में बसा हुआ है अपने देश में हर महिला को अच्छी क्वालिटी के सैनिटरी पैड के लिए खर्चा करना इतना आसान नहीं होता सरकारी अस्पताल में सैनिटरी पेड्स दिए जाते हैं यह महिलाएं इसकी पूछता सरकारी अस्पतालों में भी कर सकती है इसके अलावा आजकल बहुत सारी सार्वजनिक महिला शौचालयों में एनजीओस द्वारा सैनिटरी पेड्स
(4:50:28) के वेंडिंग मशीन लगाए जाते हैं यह एक अच्छे बदलाव की शुरुआत है लेकिन ध्यान रखें कि सैनिटरी पेड्स समय-समय पर बदलते रहने से आपके प्राइवेट पार्ट का हाइजीन अच्छी तरह से बना रहेगा हमारे देश में बहुत सारी महिलाएं सैनिटरी पेड की जगह नॉर्मल सा कपड़ा रखकर महावारी में काम चला लेती हैं उनको भी यह ध्यान रखना चाहिए कि यह कपड़े समय समय पर बदलना और तुरंत धो अति आवश्यक है अभी हम दूसरी चीज की बात करते हैं वह है टेंपस टेंप से कॉटन का गोल सिलेंडर होता
(4:51:15) है जो थोड़ा थिक होता है उसकी वजह से योनि मार्ग में फिट बैठता है कॉटन के होने की वजह से उसे कोई तकलीफ नहीं होती टेंपोन के इस कॉटन सिलेंडर से एक धागा बंधा हुआ रहता है उस धागे को खींच कर टेंपोन योनि मार्ग से बाहर निकाला जा सकता है जैसे ही महावारी के दौरान खून निकलने लगता है टेंपोन में वह खून एब्सर्ड हो जाता है और जैसे जैसे खून एब्स हो जाता है वैसे-वैसे स्पंज की तरह टेंपोन फैल जाता है इसी कारण अंदर का खून बाहर नहीं आ पाता टेंपोन का यह एक महत्त्वपूर्ण फायदा
(4:52:05) सैनिटरी पैड और टेंपस में यही फर्क है कि सैनिटरी पैड में खून योनि मार्ग से बाहर आने के बाद एब्सर्ड होता है जिसकी वजह से कभी-कभी महिलाओं को चमड़ी में रेसिस या डिस्कंफर्ट महसूस हो सकता है लेकिन टेंपस में यह खून योनि मार्ग के अंदर ही एब्सर्ड खून को योनि मार्ग के बाहर आने से रोकता है यह टेंपोन का एक प्लस पॉइंट है वेस्टर्न कंट्रीज में सैनिटरी पेड्स के कंपैरिजन में ज्यादातर महिलाएं टेंपस का इस्तेमाल करती हैं टेंपोन के उपयोग से योनि मार्ग में हायमन फटने के चांसेस भी रह सकते हैं
(4:52:53) यह टेंपोन का एक सो कॉल्ड माइनस पॉइंट है जो औरतें अपनी वर्जिनिटी के बारे में हाईमैन को अक्षत रखना आवश्यक मानती है और जिनके लिए हायमन का इंटैक्ट रहना महत्त्वपूर्ण है उन्हें टेंपस का उपयोग नहीं करना चाहिए तीसरी चीज है कप्स सैनिटरी पैड और टेंपोन के अलावा कप्स का उपयोग भी महावारी में किया जाता है कप्स अक्सर सिलिकॉन के बनाए हुए होते हैं और योनि मार्ग के अंदर रखे जाते हैं महावारी के दौ दौरान योनि मार्ग से निकलता हुआ खून य कप में जमा हो
(4:53:38) जाता है जैसे सैनिटरी पैड अलग अलग साइज के होते हैं वैसे ही कप्स भी अलग-अलग साइज के होते हैं सैनिटरी पैड्स टेंपोन और कप्स में सबसे बड़ा फर्क यह है कि कप्स के अलावा बाकी के दोनों डिस्पोजेबल है माने एक बार उपयोग करने के बाद दोबारा उपयोग नहीं कर सकते लेकिन कप्स का उपयोग आप ज्यादा बार कर सकते हैं दोबारा उपयोग से पहले कप्स को सही तरीके से धो लेना आवश्यक है मेंसस के दौरान और भी तकलीफें हो सकती है मिसाल के तौर पर सब ज्यादातर बोलते हैं मेंसस में के दौरान क्रेम्स होती है तो
(4:54:24) उसे राहत पाने के लिए क्या करें अपने पेट के नीचे और पीठ पर हल्के से मालिश करें और गर्म पानी की थैली रख सकते हैं आरामदायक स्थिति में लेटने की कोशिश करें और धीमी धीमी गहरी सांस ले अपने डॉक्टर के सलाह के अनुसार दर्द निवारक दवाइयों का उपयोग भी कर सकते हैं कई बार पेट में क्रम के अलावा महिला में चिड़चिड़ापन बेचैनी थकान और स्तन में दर्द का भी अनुभव हो सकता है महिला को अपने पार्टनर को यह सिम्टम्स के बारे में बता देना चाहिए अपनी पसंद और नापसंद के बारे में बताना जरूरी
(4:55:14) है ताकि पार्टनर समझ सके कि उसे आगे क्या करना है और क्या नहीं करना इससे दोनों की लव मेकिंग की प्रक्रिया और सहवास का अनुभव बेहतर बन सकता है आमतौर पर पूरे पीरियड्स के दौरान करीबन दो या तीन बड़े चम्मच खून का बहाव होता है हां लेकिन कई बार उससे अधिक भी खून जा रहा है ऐसा लगता है क्योंकि इसमें अलग-अलग दूसरे स्राव भी जुड़े होते हैं अलग-अलग महिलाओं में मेंसिस के दौरान रक्त स्राव का टाइम और क्वांटिटी दोनों अलग-अलग हो सकते हैं कुछ चीजें अगर आप अपनाएं तो आपके
(4:56:01) पीरियड्स ज्यादा आरामदायक और कंफर्टेबल बन सकते हैं खास करके आप यह ध्यान रखें कि आपका पीरियड कब आने वाला है ताकि यू आर नॉट कॉट अनवेयर दूसरा अचानक पीरियड आ जाएगा और आपको पता ही नहीं होगा तो आप कोई प्रिकॉशंस भी नहीं ले सकेंगे बेहतर यही होगा कि आप आपकी पर्स में या बैग में एक सैनिटरी पेड जरूर रखें तीसरा पीरियड के दौरान नमक का सेवन कम करें और पानी ज्यादा पिए चौथा एक चीज का हमेशा ख्याल रखें कि हमारे देश में टॉयलेट क्लीन करने के लिए
(4:56:47) हम लोग टिशू पेपर नहीं लेकिन पानी का इस्तेमाल करते हैं तो टॉयलेट धोते समय आप यह जरूर ख्याल रखें कि धोने की क्रिया आगे से पीछे की डायरेक्शन में हो माने योनि से टॉयलेट ास की र एक ही डायरेक्शन में हो उससे रिवर्स नहीं नहीं तो टॉयलेट का इंफेक्शन योनि मार्ग में फैल सकता है अगर किसी को मेंसस हैवी हो माने ज्यादा खून जा रहा हो तो आयुर्वेद का यह कहना है कि ऐसी व्यक्ति को उस वक्त बाजरा यानी पल मिलेट्स उस दौरान नहीं खाना चाहिए और आखिर में अक्सर लोग पूछते हैं कि क्या मासिक के
(4:57:33) दौरान कर सकते हैं जवाब में मैं सिर्फ इतना ही कहूंगा कि अगर दोनों पार्टनर्स की सम्मति है दोनों की रजामंदी है तो मेंसिस के दौरान आप निश्चित रूप से सहवास कर सकते हो अक्सर लोगों के दिमाग में यह गलत धारणा रहती है कि मेंसस का खून गंदा होता है अशुद्ध होता है लेकिन हकीकत में यह शुद्ध खून है क्योंकि यह खून में तो बच्चा पलने वाला था इसलिए अगर किसी व्यक्ति को मेंसिस के दौरान सहवास करना हो तो वह इत्मीनान से सहवास कर सकते हैं मेडिकली इट इज सेफ टू इल्ज इन सेक्सुअल इंटरकोर्स ड्यूरिंग
(4:58:19) मेंसस कुछ लोग तो मासिक धर्म के दौरान सेक्स करना ज्यादा पसंद करते हैं क्योंकि योनि में गीलापन ज्यादा होने की वजह से वह उत्तेजना में इजाफा महसूस करते हैं और दूसरा गर्भ रहने की संभावना ही नहीं रहती इसके लिए लोग ज्यादा बिंदास होकर सहवास कर सकते हैं तीसरा अगर मासी आने से पहले कुछ औरतों को कंजेशन माने खून के जमाव की वजह से पेडू और कमर में परेशानी और दर्द का एहसास होता है इस वक्त यदि कोई महिला ऑर्गेजम पर पहुंचती है तो यह कंजेशन थोड़ा बहुत रिलीव हो सकता
(4:59:04) और महिला को इस परेशानी में से राहत मिल सकती है अमूमन यह कंजेशन क्लाइमेक्स के बाद ही कम हो जाता है और दर्द में भी कई बार बहुत राहत मिल सकती है आयुर्वेद की एक अच्छी बात बता रहा हूं मैं आपको आयुर्वेद में एक बहुत बड़ा अच्छा अच्छा कांसेप्ट है और वह है अनही औषध माने फूड इज मेडिसिन आयुर्वेद कहता है कि अगर किसी महिला को बहुत ज्यादा ब्लीडिंग हो और खून की कमी महसूस करती हो तो उसके इलाज के साथ-साथ अपने खानपान में भी जिस पदार्थ में आयन ज्यादा हो वैसे पदार्थ खाना बेहतर
(4:59:47) होगा मिसाल के तौर पर ग्रीन लीफ वेजिटेबल्स खजूर गुड बीटरूट इत्यादि दोस्तों अभी हमने बात की मेंसस की अब हम बात करने जा रहे हैं प्रेगनेंसी की प्रेगनेंसी यह बड़ा निर्णय है अगर प्रेगनेंसी प्लान नहीं की है और कोई महिला अचानक प्रेगनेंट हो जाए तो वह दुविधा और टेंशन में आकर कंफ्यूज हो सकती है प्रेगनेंसी के लक्षण क्या हो सकते हैं पीरियड का मिस होना यह एक मात्र अहम लक्षण है दूसरे लक्षणों में वोमिटिंग
(5:00:33) नशिया थोड़ी बहुत थकान सांस फूलना तन में हल्का सा दर्द थोड़ी बहुत गर्भवती है तो सबसे पहले होम प्रेगनेंसी टेस्ट करवाए प्रेगनेंसी टेस्ट का कीट ज्यादातर हर एक केमिस्ट की दुकान पर मिलता है यह एक तरह का यूरिन टेस्ट है जिससे पता पड़ सकता
(5:01:18) है कि आप प्रेगनेंट हो कि नहीं यदि आपका प्रेगनेंसी टेस्ट नेगेटिव आया तो बेहतर होगा कि आप तीन दिन के बाद दोबारा प्रेगनेंसी टेस्ट करवाए और कंफर्म करें आपके गायनेकोलॉजिस्ट आपका ब्लड टेस्ट भी करवा सकते हैं जो ज्यादा सेंसिटिव होता है और वह फ्यूचर में आपको पेल्विस का अल्ट्रासाउंड टेस्ट कराने की सलाह भी दे सकता है गर्भवती होने के बाद क्या होता है जब महिला प्रेग्नेंट हो जाती है और प्रेगनेंसी कंटिन्यू रखने का निर्णय ले लेती है तो एक ए बच्चे के रूप में विकसित
(5:02:06) होने की शुरुआत हो जाती है अधिकांश प्रेगनेंसी का समय नौ महीना होता है लेकिन कुछ विभिन्न कारणों की वजह से कम ज्यादा भी हो सकता है गर्भावस्था के पहले तीन महीने दूसरे तीन महीने और तीसरे तीन महीने इसे फर्स्ट सेकंड और थर्ड ट्राइमेकर कहा जाता है और यह हर एक ट्राइमेकर में कुछ विशिष्ट विशेषता होती है ध्यान रहे भारत में जन्म से पहले अपने बच्चे की लिंग का पता लगाना माने लिंग का परीक्षण करवाना एक गुनाह माना जाता है यह सरकार का कन्या भ्रूण हत्या के मामलों को कम करने का एक
(5:02:51) बेहतर प्रयास है नौ महीने की अवधि के अंत में नियत तारीख के आसपास महिला को लेबर पेन का एहसास होता है माने गर्भाशय में कुछ कंट्रक्शन संकुचन की वजह से होने वाला दर्द शुरू हो जाता है और अंत में यह कंट्रक्शन की वजह से बच्चा सर्विक्स से होते हुए योनि मार्ग के जरिए बाहर आ जाता है बच्चा एक तो नॉर्मल तरीके से योनि मार्ग से बाहर आ सकता है या कई बार कुछ कारणों की वजह से सिजेरियन सेक्शन जिसे सी सेक्शन भी कहते कते हैं उसके माध्यम से भी बाहर लाया जाता है सी सेक्शन में ऑपरेशन
(5:03:39) से बच्चे को बाहर निकाला जाता है अगर कोई पूछे के प्रेगनेंसी के नौ महीने दौरान व्यक्ति सेक्स कर सकता है या नहीं आमतौर पर एक स्वस्थ महिला प्रेगनेंसी के दौरान पूरे नौ महीने जब चाहे तब सेक्स कर सकती है हां कभी भी यदि किसी किस्म की एंजाइटी दर्द या रक्त श्राव हो तो सेक्स से अवश्य परहेज करना चाहिए बस ध्यान रखने वाली बात इतनी है कि अगर प्रेग्नेंट महिला ने पहले कभी अपने आप ही हैबिल एबॉर्शन से बच्चे गवा दिए हो तो उसने प्रेगनेंसी होने के
(5:04:25) बाद माने कंसीव होने के बाद तुरंत तीन महीने तक सेक्स नहीं करना चाहिए अगर किसी महिला का गर्भाशय का मुंह खुला हो जिसे इनकम्पेटिबल सुपीरियर पोजीशन में सहवास ना करें जिससे उसका वजन गर्भ में पल रहे बच्चे पर डायरेक्ट पड़ सकता है इसलिए दूसरी पोजीशन में सहवास करें मिसाल के तौर पर पुरुष
(5:05:11) नीचे स्त्री ऊपर साइड टू साइड पोजीशन या रेर एंट्री पोजीशन एक और पोजीशन प्रेगनेंसी में बेहतर साबित हो सकती है जिसमें पुरुष कुर्सी पर बैठा है स्त्री भी उसकी गोदी में फेस टू फेस पोजीशन में बैठी है वह अपने दोनों पैर पुरुष के पांव के इर्दगिर्द रख के फेस टू फेस पोजीशन में बैठकर सहवास करते हैं यह पोजीशन ज्यादातर स्त्रियों को पसंद आती है दूसरी एक चीज कई बार लोग पूछते हैं कि भाई वीर्य का स्खलन योनि मार्ग में करने से गर्भ में या महिला को कोई दिक्कत तो नहीं होगी बिल्कुल नहीं वीर्य का स्खलन योनि मार्ग में करने के
(5:05:58) बाद ना तो महिला को कोई दिक्कत होगी ना कोई बच्चे पर विपरीत असर होगी हां अगर डॉक्टर ने किसी भी कारण महिला को सेक्स करने की मनाई की हो तो किसी दूसरे तरीके से भी मिसाल के तौर पर मास्टरबेशन से या ओरल सेक्स से भी चरम सीमा पर पहुंचने की कोशिश ना करें क्योंकि विश्व विख्यात सेक्सोलॉजिस्ट विलियम मास्टर का कहना है कि हस्त मैथु के वक्त गर्भाशय में जो कंट्रक्शन जो संकुचन होते हैं वो संभोग के दौरान के कंट्रक्शन की तुलना में बहुत अधिक तीव्र होते हैं इन शॉर्ट अगर आपको सहवास की मनाई की है तो
(5:06:47) ध्यान रहे कि किसी और तरीके से भी आप क्लाइमैक्स पर ना पहुंचे दूसरा साथी एक सवाल जुड़ा हुआ होता है कि भाई अगर डिलीवरी हो गई तो डिलीवरी के बाद फिर से कब सहवास शुरू करना चाहिए यह कुछ कारणों पर निर्भर रहता है अगर योनि से खून बह रहा हो या तो एपीसोम स्कार जो बच्चे को आसानी से बाहर निकालने के लिए किया हुआ एक सर्जिकल कट का जखम होता है वह अगर पूरी तरह से भरा ना हो तो तीसरा महिला को सेक्स करने की डिजायर ही ना हो उसको इच्छा ही ना हो अमूमन ये तीनों चीजें चार से छ हफ्ते
(5:07:36) में समाप्त हो जाती है और उसके बाद सहवास आसानी से हो सकता है कई बार स्त्री की काम इच्छा बहुत कम हो जाती है कई बार हार्मोन की सिस्टम में जो बदलाव आता है उसकी वजह से कामेचा में कमी आ सकती है ब्रेस्ट मिल्क फीडिंग के दौरान भी कामे छाव में बदलाव आ सकता है मानसिक रूप से देखा जाए तो स्त्री का प्यार बच्चा और हस्बैंड दोनों में डिवाइड हो जाता है बच्चे को संभालना यह अक्सर महिला की प्रायोरिटी बन जाती है कई बार नए बच्चे की देखभाल में मां इतनी इवॉल्व हो जाती है कि या तो वह थक जाती है या उसके पास सेक्स के लिए समय ही
(5:08:23) नहीं रहता कई बार ऐसी औरतें भी मेरे तजुर्बे में आई है कि अपने बच्चे की देखभाल की मेहनत से या फिक्र से उनकी कामेच्छा में कमी आ जाती है और वह पूर्ण रूप से सेक्स में इवॉल्व नहीं हो सकती कई बार स्त्री को प्रेगनेंसी के बाद डिप्रेशन आ जाता है जिस वक्त उसको रात को नींद देरी से आती है सुबह आंख जल्दी खुलने लगती है मन उदास रहता है बेवजह रोना आ जाता है और उनकी हर एक काम की इच्छा कम या खत्म हो जाती है इसके साथ-साथ सेक्स की इच्छा भी कम हो जाती है इसका इलाज मनो चिकित्सक द्वारा काउंसलिंग या दवाई से बड़ी आसानी से हो सकता
(5:09:11) है कई बार एक दूसरी चीज भी देखी है कि नॉर्मल डिलीवरी के बाद योनि मार्ग में थोड़ा ढीलापन आ जाता है वजाइना थोड़ा लूज पड़ जाता है सहवास के दरमियान पुरुष के प्राइवेट पार्ट और स्त्री के प्राइवेट पार्ट की जो पकड़ होती है वो थोड़ी लूज हो जाती है मजबूती बहुत कम हो जाती है जिसकी वजह से सहवास के दौरान का जो आनंद आता है वह आनंद में कमी आ जाती है जिसकी वजह से पुरुष को सहवास करने की पहले जैसी इच्छा नहीं रहती ध्यान रहे रीजन कोई भी हो इलाज मुमकिन है बशर्ते पति और पत्नी दोनों को प्रॉब्लम सॉल्व करने का इरादा पक्का हो देखिए दोस्तों
(5:10:01) डिप्रेशन का इलाज मुन योनि मार् की पकड़ अगर लूज हो गई हो तो वह एक्सरसाइज से ठीक हो सकती है पोजीशन बदलने से भी यह प्रॉब्लम तुरंत सॉल्व हो सकता है मिसाल के तौर पर वुमन लेग्स क्रॉस पोजीशन बच्चे का काम स्त्री और पुरुष दोनों डिवाइड कर सकते हैं पति और पत्नी साथ में सेंसेट फोकस एक्सरसाइज कर सकते हैं जिस में पेनिट्रेटिव सेक्स पर प्रतिबंध लगाया जाता है और एक दूसरे को बातों से और टच से स्पर्श से उत्तेजना का आदान प्रदान किया जाता है यहां स्पर्श और बातों से उत्तेजना में यानी एक्साइटमेंट
(5:10:50) में इजाफा किया जा सकता है अक्सर लोग पूछते हैं कि भाई गर्भपात क्या है गर्भपात एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें प्रेगनेंसी इस ट इसमें महिला के बदन से भ्रूण को अलग किया जाता है गर्भपात दो तरीके के होते हैं एक नैसर्गिक गर्भपात जिसे हम नेचुरल अबॉर्शन कहते हैं और दूसरा है ऑपरेशन से किया हुआ गर्भपात जिसे हम अननेचुरल या अनैसर्गिक गर्भपात कह सकते हैं नैसर्गिक गर्भपात में अगर महिला दुर्बल हो या किसी शारीरिक परेशानी या कमजोरी से पीड़ित या उसका बदन बढ़ते हुए गर्भ को धारण करने
(5:11:36) में सक्षम नहीं है तो ऐसे कारणों की वजह से भ्रूण उसके गर्भाशय में कुछ हफ्ते या महीनों के बाद टिक नहीं पाता उसके कारण उसे नैसर्गिक गर्भपात हो जाता है कभी-कभी कोई महिला को हैब चुअल अबॉर्शन से पीड़ित होती है बिचल अबॉर्शन का मतलब है कि उस महिला को गर्भ तो रहता है लेकिन गर्भ रहने के बाद बार-बार पहले तीन महीने में ही वह गर्भ गिर जाता है इसमें आप गायनेकोलॉजिस्ट की सलाह ले सकते हैं गर्भ कात का ऑपरेशन कब किया जाता है इफ इट इज अनवांटेड प्रेगनेंसी माने ये गर्भावस्था
(5:12:22) अनिच्छे निय है तब कई बार प्रेगनेंसी चालू रखने से महिला को अपने शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को खतरा हो या अगर भ्रूण में कुछ जन्म जात दोष माने कुछ कंजे निट एनोर्म हो या प्रेगनेंसी किसी बलात्कार की वजह से हुई हो कभी-कभी अपने यहां डोमेस्टिक वायलेंस या एक्सीडेंट में गर्भवती महिला के पेट को मार लग सकता है जिससे उसके गर्भ को धोखा पहुंच सकता है ऐसे सिचुएशन में अगर डॉक्टर अबॉर्शन की सलाह देता है तो आप अर्शन करवा सकते हैं लेकिन ध्यान रहे कि अबॉर्शन जैसे मामले में कोई भी ऐसी हरकत
(5:13:09) ना करें जो मेडिकली सजेस्टेड ना हो हमारे देश में गर्भपात लीगल है लेकिन उसके कुछ नियम भी है खास करके अबॉर्शन कब करवा सकते हैं और कौन करवा सकता है अगर आपका इरादा अबॉर्शन के लिए है तो बेहतर यही होगा कि आप किसी सक्षम गायनेकोलॉजिस्ट की सलाह ले सवाल साथ में यह भी पैदा होता है कि अबॉर्शन के बाद सहवास कब वापस शुरू कर सकते हैं ज्यादातर उसके लिए तीन चार जरूरी चीजें ध्यान में रखनी चाहिए अबॉर्शन के बाद अगर ब्लीडिंग बंद हो गया हो किसी
(5:13:55) किस्म का दर्द और जखम ना हो और शारीरिक रूप से और मानसिक रूप से महिला सहवास के लिए कंफर्टेबल हो स्वस्थ हो तो यकीनन सहवास शुरू कर सकते हैं अक्सर अबॉर्शन के बाद गिल्ट और मैंने कुछ गलत किया है या मेरे से कुछ गलत हो गया है या मैंने हत्या की है ऐसी बातें सहवास से पहले दिमाग में मंडराती रहती है और यह महिला में काफी एंजाइटी पैदा कर सकती है अच्छी तरह से यह समस्याओं का काउंसलिंग करके डिस्कस करके यथार्थ मानसिक शांति प्रदान करके अगर अपराध भावना हो तो उसे दूर करके उसके बाद सहवास कर सकते हैं
(5:14:45) ऐसी सिचुएशन में फोर प्ले में ज्यादा टाइम व्यतीत करना जरूरी है और जभी आपकी पार्टनर की पूरी तरह से कंफर्टेबल हो जाए तभी आप इत्मीनान से सहवास कर सकते हो कई बार महिलाओं को यह काफी परेशान करता है एक विचार हमेशा उनको परेशान करता है कि दोबारा ऐसा हो गया तो यह प्रॉब्लम दोबारा होने का भय उनके मन से निकालना जरूरी है जब भी वह बय मुक्त हो जाए तभी वह सही तरीके से सहवास का आनंद जरूर ले सकते हैं प्रेगनेंसी या अबॉर्शन आप जो भी निर्णय लो इट हैज टू बी अ
(5:15:30) जेवी य दोनों का डिसीजन होना चाहिए क्योंकि यह आपका और आपके पार्टनर का जॉइंट वेंचर है क्योंकि इसमें पैदाइश से लेकर पालने तक की जिम्मेदारियां भी आप दोनों को ही निभानी है दो ऐसे लोगों का मिलन एक जिसे जन्मदिन कभी याद नहीं रहता और दूसरा जो उसे कभी नहीं भूलता संस्कृत में विवाह शब्द का अर्थ है लग्न यानी मिलन जहां तक अपने देश की बात है हमारे यहां यह मिलन सिर्फ दो व्यक्तियों का नहीं अक्सर दो परिवारों का मिलन होता है विवाह एक ऐसी संस्था है जिसमें आमतौर पर सेक्सुअल रिलेशन को स्वीकृति दी जाती है यह है
(5:16:17) विवाह की आम संजना लेकिन ओशो की वाणी से आई हुई विवाह की एक और संजना में आपसे शेयर करना चाहता हूं उनका कहना था कि यह सजना ज्यादातर प्रैक्टिकल है ो कहते थे कि मैरिज इज अ ट्रैप यू विल बी ट्रेप्ड बाय द वुमन एंड द वुमन विल बी ट्रैप्ड बाय यू इट इज अ म्यूचुअल ट्रैप एंड देन लीगली यू आर अलाउड टू टॉर्चर ईच अदर फॉर एवर जोक्स अपार्ट कहते हैं जब आपको सेक्स के लिए कोई पार्टनर नहीं चाहिए कुछ कमाने के लिए कोई पार्टनर नहीं चाहिए खाना बनाने के लिए किसी की जरूरत नहीं है सिर्फ एक मात्र चीज जब आपको अपने पार्टनर में ढूंढते हैं तो
(5:16:58) वो है कंपेनिया शिप एक कपल जो साथ में खाता है जो साथ में पीता है जो साथ में घूमने को जाता है आम तौर पर वह जीवन भर साथ साथ रहता है आपसी समझदारी कंप्रोमाइज विश्वास और प्रेम यह शादी के महत्त्वपूर्ण अंग है विवाह एक पति और पत्नी के लिए उनकी प्राकृतिक क्षमताओं से आगे बढ़ने के अवसर लाता है उनके संयुक्त प्रयास सुंदरता और गहराई की एक सिंफनी बना सकता है जो जीवन भर चलती रहती है हां कुछ लोगों के लिए संपत्ति और रूप भी प्राथमिकता हो सकती है क्योंकि खुशी माने हैप्पीनेस यह हर एक की
(5:17:44) दिमागी अवस्था है ख्याल अपना अपना पसंद अपनी अपनी कई लोगों के मन में यह सवाल हमेशा उठता है कि मैरिज अच्छा और सफल कैसे बन सकता है चाइना में मुझे 1992 में द सेक्सोलॉजिस्ट ऑफ एशिया का एक अवार्ड मिला था उस वक्त चाइनीज एसोसिएशन के प्रेसिडेंट ने मुझे अवार्ड के साथ-साथ एक किताब भी प्रेजेंट की थी उस किताब का टाइटल था की फॉर सक्सेसफुल मैरिज माने सफल शादी की चाबी एक हजार पन्ने की वह किताब थी मैं किताब लेकर होटल आया जब मैंने किताब खोली तो पहले से आखिरी पन्ने तक हर एक पन्ने पर एक ही शब्द लिखा था और वह था एडजस्टमेंट
(5:18:29) एडजस्टमेंट और एडजस्ट कहने का तात्पर्य यह है कि सफल मैरिज अचानक नहीं बनते उसे बनाना पड़ता है व बनाने में सबसे महत्व की चीज है आपसी समझदारी माने म्यूचुअल अंडरस्टैंडिंग और समझौता आज विवाह का विरोधाभास यह है कि बहुत से लोग सफल और सुखी विवाह तो चाहते हैं फिर भी बहुत से लोग इसके लिए जैसा करना चाहिए वैसा उचित व्यवहार नहीं करते ऐसा नहीं है कि शादीशुदा कपल्स रो या खुशी नहीं चाहेंगे बात सिर्फ इतनी है कि एक अच्छी शादी में खुश और संतुष्ट होने के अलावा और भी बहुत कुछ है शेड गोल्स साथ में बुने हुए सपने संघर्ष और त्याग यह सब
(5:19:17) वैवाहिक जीवन को ज्यादा मजबूत बनाते हैं साइकोलॉजी के प्रोफेसर एरनो लेजस ने सफल शादी के लिए कुछ गोल्डन रूल्स पेश किए थे उसमें से जो मुझे पसंद है और मेरी प्रैक्टिस में जो मुझे मदद रूप हुए हैं वह मैं आपके सामने रख रहा हूं उनका कहना है कि व्यक्ति को क्रिटिसाइज ना करें उसकी जो स्पेसिफिक बिहेवियर है उसी की बात करें माइंड रेप ना करें जैसे कि तुम मेरे बारे में क्या सोचते हो यह मुझे मालूम है ऐसा खयाली पुलाव ना पकाए अवॉइड सेइंग यू ऑलवेज यू नेवर तुम हमेशा ऐसा करते हो या ऐसा करती हो तुम कभी भी ये नहीं करते इत्यादि कौन सही है कौन गलत है कौन अच्छा है कौन
(5:20:04) बुरा है वैसी बातें बंद करें शाति में महत्व की चीज है व्हाट इज राइट एंड नॉट हु इज राइट अगर कोई विवाद हो जाए या मतभेद हो जाए तो कंप्रोमाइज या समझौता ढूंढने की कोशिश करें जब आप आर्गुमेंट में उतर आए तो आप ये हरगिज ना कहे कि आप सेल्फिश हो आप इनकंसीडरेट हो कि आप मुझे नजरअंदाज कर रहे हो ऐसा कहने की बजाय आप यह कह सकते हो कि मुझे बेहद दुख होता है जब आप मुझे नजरअंदाज करने की कोशिश करते हो जो भी कहो स्पष्ट कहो अपनी बात में ऑनेस्ट रहो वही कहे जो आप कहना चाहते हो सर्क वे में या टोटिंग वे में किसी का दिल हर्ट हो जाए
(5:20:49) ऐसी बातें ना करें कहते हैं कि तलवार के जखम भर सकते हैं लेकिन शब्दों के जख्म नहीं भरते हैं और अंत में आई काउंट ऑन यू यू काउंट ऑन मी माने मैं भरोसा करता हूं तुम भरोसा करती हो ऐसे कह के विश्वास जताना यह बेहतर विकल्प होगा यह सब चीजें एक अच्छे सहजीवन के लिए आवश्यक है शादी रोमांस का पूर्ण विराम नहीं होना चाहिए लेकिन उसे अल्पविराम समझकर आगे बढ़ना चाहिए हकीकत में सही रोमांस की शुरुआत शादी के बाद ही होती है क्योंकि आप एक दूसरे के करीब आ चुके होते एक दूसरे के पसंद नापसंद जानते हो हकीकत में यह रोमांस का सुवर्ण काल बन सकता है क्योंकि देर इज
(5:21:35) इनफ अफेक्शन अंडरस्टैंडिंग वम आफ्टर हैविंग स्पेंट इनफ टाइम टुगेदर शादी के बाद अक्सर एक स्पार्क एक फायर बरकरार रहना चाहिए माने साथ साथ जीना कुछ पुरानी सुनहरी यादें याद करना और साथ ही साथ नई यादें बनाना कभी-कभी एक दूसरे को कुछ सरप्राइज देना एक दूसरे ने किए हुए फेवर्स याद कर सकते हो आभार प्रद कर सकते हो साथ में कुछ नयापन लाने के लिए नई चीजों का इस्तेमाल कर सकते हो लेकिन यह नयापन लाने के लिए बातचीत सोच समझ से करनी चाहिए कई बार पुरुष अनजाने में अपनी पत्नी से कह देते हैं आज तू पंजाबी ड्रेस पहनना पत्नी को ऐसा अक्सर लगने लगता है कि क्या मेरी
(5:22:20) खूबसूरती अब पहले से कम हो गई है क्या मैं दूसरी रेस में आकर्षक नहीं लगती हूं यही बात अगर पुरुष थोड़े अलग अंदाज से कहे कि डार्लिंग चलो कुछ ऐसा करते हैं कि अपनी लाइफ कुछ और एक्साइटिंग बने क्या करें आपकी पत्नी आपके सुझाव को बड़ी मोहब्बत से स्वीकार करेगी और आपकी इच्छाओं को साकार करने के लिए वह खुशी खुशी तैयार हो जाएगी कभी-कभी ऐसा सजेशन आपकी पत्नी से भी आ सकता है उस वक्त पुरुष पार्टनर को भी यह सजेशन खुले दिल से स्वीकार करना चाहिए विवाह में कहते हैं कि सेक्स कितना महत्त्वपूर्ण है हाउ इंपोर्टेंट दि सेक्स शादी सेक्स एक इंपॉर्टेंट चीज है प्यार
(5:23:06) विश्वास आपसी संबंध और सेक्स यह चार पिलर्स है अक्सर जिसके ऊपर शादी टिकी हुई रहती है लव आपसी संबंध विश्वास और सेक्सुअल रिलेशनशिप अहम तो है लेकिन सबसे ज्यादा अहम है प्रेम प्रेम करना सहज है लेकिन निभाना तेज है भारत में अक्सर प्रेम की पराकाष्ठा माने प्रेम की आखिरी मंजिल सहवास होती है लेकिन सहवास की आखिरी मंजिल प्रेम हो व जरूरी नहीं हां इसमें भी अब बदलाव आ रहे हैं लेकिन एक बात जो पूरब और पश्चिम दोनों में सच है वह है कि पुरुष अक्सर प्यार देता है सेक्स पाने के लिए और
(5:23:55) स्त्री सेक्स देती है अक्सर प्यार पाने के लिए सफल विवाह की चाबी क्या है अगर कोई पूछे तो क्या जवाब देंगे मेरे तजुर्बे में सफल विवाह की चाबी यह है एक्सेप्टेंस एंड एप्रिसिएशन माने स्वीकृति और प्रशंसा अनकंडीशनल लव बिना शर्त प्रेम इफेक्टिव कम्युनिकेशन प्यार भरा खुला संवाद केयरिंग एंड अफेक्शन देखभाल और लगाव कंपेनिया साथ दोस्ती और समझौता ट्रस्ट एंड रिस्पेक्ट विश्वास और सम्मान लर्न टू इग्नोर ट्रियल थिंग्स माने
(5:24:41) छोटी-छोटी बातों को नजरअंदाज करना सीखो माने बात का बेवजह बतंगड़ ना बनाए छोटी-छोटी चीजों को इग्नोर करो यह क्यों हुआ वो क्यों हुआ ऐसा क्यों नहीं हुआ यह चीजों को नजरअंदाज करना सीखो इसके बारे में किसीने क्या खूब कहा है कि यह धूप ही का करिश्मा दिखाई देता है यह दूप ही का करिश्मा दिखाई देता है और चलकती रेत पर दरिया दिखाई देता है और किसी भी रिश्ते को नजदीक से ना देखो तुम पहाड़ दूर से अच्छा दिखाई देता है जर्मन सोशल साइकोलॉजिस्ट एरिक फ्रोम ने एक और बात बताई है कि लोग अक्सर आकर्षण को प्रेम समझ लेते हैं लोगों के दिमाग में यह रहता है कि जब व किसी से
(5:25:26) आकर्षित हो जाते हैं और उनकी काम इच्छा बढ़ जाती है और उनको एक शारीरिक संतोष की जरूरत रहती है तब वह अक्सर समझ बैठते हैं कि वह उसके प्रेम में है उसी की मोहब्बत में है लेकिन हकीकत में प्रेम एक स्ट्रांग फीलिंग है एक डिसीजन है एक जजमेंट है एक प्रॉमिस है वचन है दूसरी एक आम शिकायत जो पार्टनर में मिलती है वह है सेक्सुअल डिसेटिस्फेक्शन की कई बार जीवन की भागदौड़ में और पैसे कमाने और करियर बनाने की रेस में पुरुष इतना उलझा हुआ कहता है कि उसके लिए सेक्स सेकेंडरी बन जाता है इंटरकोर्स के वक्त पुरुष फोर पले में उचित समय नहीं
(5:26:10) गुजारता और जब भी वह फोर प्ले की शुरुआत करता है तो वह सिर्फ पार्टनर के प्राइवेट पार्ट को हाथ लगाकर उत्तेजित करने की कोशिश करता है उन्हें यह भी समझने की आवश्यकता है कि बदन में और भी जगह है जहां स्पर्श से कामेच्छा ज्यादा बढ़ सकती है उत्तेजना में इजाफा हो सकता है कई बार ऐसा भी हो सकता है कि एक पार्टनर जल्दी क्लाइमेक्स पर पहुंच जाता है इसका इलाज आसान है लेकिन अगर इरा ना करवाए तो भी उसको यह ख्याल रहना चाहिए कि यह हकीकत में सम भोग होना चाहिए विषम भोग नहीं होना चाहिए माने एक ही पार्टनर को संतोष मिले और दूसरे को ना मिले ऐसा नहीं होना चाहिए
(5:26:56) अगर एक पुरुष जल्दी से क्लाइमैक्स पर पहुंच जाता है तो उसे र को संतुष्टि देना आवश्यक है जरूरी है अगर सहवास के दौरान मुमकिन नहीं हो तो उसे और तरीके से भी अपने पार्टनर को संतोष दे देना चाहिए चाहे वह मुख मैथु हो या हस्त मैथु हो या कोई पर्सनल मसाजर हो या वाइब्रेटरी क्यों ना हो अहम चीज है संतोष ना कि सिर्फ संभोग सहवास पूर्ण हो जाने के बाद भी पुरुष क्लाइमैक्स पर पहुंच गया स्त्री भी क्लाइमैक्स पर पहुंच गई तो उसके बाद भी पुरुष को थोड़ा समय आफ्टर प्ले में बिताना चाहिए अगर सहवास के बाद पुरुष थोड़ा समय नहीं बिताए तो स्त्री को ऐसा एहसास होगा
(5:27:44) कि उसका इस्तेमाल एक खिलौने या नींद की गोली की तरह किया जा रहा है आफ्टर प्ले के दौरान पुरुष अपनी बाहों में अपनी पार्टनर को ले सकता है उसे बटरफ्लाई किसस दे सकता है उस बदन को सहला सकता है अच्छी बातें कर सकता है उसको कौन सी क्रिया उसे ज्यादा अच्छी लगी उसका जिक्र करके उसे अप्रिशिएट कर सकता है आप फोर प्ले और प्ले ट इ इंटरकोस बिना प्यार और मोहब्बत से कर सकते हो लेकिन आफ्टर प्ले अमूमन बिना प्यार और मोहब्बत करना मुमकिन नहीं और इस बात का एहसास अक्सर हर स्त्री को होता भी है पुरुष और
(5:28:30) स्त्री दोनों अपने खुद के शरीर का ख्याल रखना चाहिए ताकि दोनों को एक दूसरे की और अट्रैक्शन आकर्षण बना रहे बेवजह वजन ना बढ़ जाए ताकि अपना अट्रैक्शन कम ना हो वो बरकरार रहे एक दूसरे को अच्छे लगे अट्रैक्टिव लगे सहवास से पहले स्वच्छ रहे दातुन कर ले ब्रश कर ले ताकि तंबाकू सिगरेट शराब की स्मेल या कोई बदबू अपने पार्टनर को रिपेल ना करें ये सब चीजें जोश जुनून बढ़े में डायरेक्टली या इनडायरेक्टली सहायक बन सकती है वन कॉमन क्वेश्चन ऑफें पीपल आस्क क्या शादी से पहले हमको सेक्स करना
(5:29:15) चाहिए कई बार एंगेजमेंट के बाद लोग यह सवाल पूछते हैं कि डॉक्टर साहब जिस व्यक्ति से मेरी शादी होने वाली है वह कैसा परफॉर्मर है क्योंकि मेरे लिए सेक्स बहुत महत्व की चीज है अगर वो ठीक से परफॉर्म नहीं कर सकता तो मेरी तो जिंदगी बर्बाद हो जाएगी इसके लिए कुछ लड़कियों का यह ख्याल ऐसा होता है कि जो शादी से पहले कोर्टशिप पीरियड में ही शारीरिक संबंध बनाना बेहतर मानती क्योंकि उनको अपनी फ्यूचर की जिंदगी की शादी के बाद की जिंदगी की फिकर लगी रहती है और उनके लिए उनकी सेक्सुअल लाइफ जिंदगी में दूसरी चीजों से जैसे फ्लैट है पैसा है गाड़ी है इन इन चीजों से बहुत
(5:29:58) बढ़कर होती है और कुछ महिला के लिए शादी से पहले संभोग करना व एक गुनाह समझती है उनका यह मानना होता है कि सेक्सुअल इंटरकोर्स तो शादी के बाद ही होना चाहिए इसका डिसीजन महिला को खुद लेना है जो पहले बताया था वह तीन आर दिमाग में रखकर डिसीजन लोगे तो बेहतर होगा उसमें पहला आर है सहवास करना या ना करना यह आपका राइट है आपका हक है लेकिन सहवास करने के बाद दूसरा आर माने रिस्पांसिबिलिटी यानी जिम्मेदारियां भी उसके साथ जुड़ी रहती है उसका भी उनको एहसास होना चाहिए और साथ ही साथ तीसरा आर जो एक दूसरे के प्रति
(5:30:45) रिस्पेक्ट माना जाता है वह बरकरार रहना चाहिए यह तीनों आर दिमाग में रखकर अगर कोई व्यक्ति डिसीजन लेती है तो ज्यादातर वह डिसीजन उसके लिए गलत नहीं होगा अक्सर दूसरा एक प्रश्न लोग पूछते हैं हनिमून सिस्टाइटिस क्या है जब सेक्स संबंधों की शुरुआत होती है और स्त्री कभी कभी पूरी तरह से उत्तेजित नहीं होती है मने लुब्रिकेट नहीं होती है तब शिष्ण प्रवेश के दौरान थोड़ा फ्रिक्शन ज्यादा होता है और मूवमेंट करने से वह फ्रिक्शन और ज्यादा बढ़ जाता है और यह घर्षण की वजह से यूनि मार्ग थोड़ा बहुत छिल जाता है और कई बार ये छिलने की वजह से वहां थोड़ा बहुत
(5:31:27) इंफेक्शन हो सकता है आप तो जानते ही कि मूत्र द्वार और योनि द्वार एक दूसरे के बिल्कुल करीब होते हैं उसके लिए कई बार यह इंफेक्शन मूत्र मार्ग से होकर ब्लेडर तक चला जाता है जिसे सिस्टाइटिस कहते हैं क्योंकि य हनीमून के दौरान होता है उसके लिए उसको हनीमून सिस्टाइटिस कहते हैं यह सिचुएशन में जब स्त्री यूरिनेट करती है पेशाब करती है तो उसे जलन या कई बार दर्द महसूस होता है कई बार यह इंफेक्शन यूरिन की जांच में भी सामने नहीं आता फिर भी उसका उपचार एंटीबायोटिक के सेवन से अच्छी तरह से हो सकता है इस दौरान अगर ज्यादा पानी पीने से
(5:32:07) इंफेक्शन जल्दी कंट्रोल में भी आ जाता है और हनीमून सिस्टाइटिस की समस्या में तुरंत राहत मिल सकती है कई बार शादी में मोनोटोनी की वजह से कुछ समय के बाद बोर डम आ सकता है वैवाहिक जीवन में दांपत्य संबंधों में कुछ बोरियत आ गई है उसका एहसास दोनों पार्टनर को करना जरूरी है दोनों पार्टनर्स को होना जरूरी है तो ही आगे रास्ता निकल सकता है इस समस्या का जानना उसको पहचानना उसे स्वीकारना यह दोनों पार्टनर्स के लिए अनिवार्य है कई बार ऐसे मुद्दे को सेवल बातचीत करने से ही समाधान मिल जाता है अक्सर एक ही समय में एक ही जगह एक ही
(5:32:56) तरह से संबंध कायम रखने में रिश्ते में मोनोटोनी और उदासीनता किसी में भी आ सकती है वैसे ही कई बार अचानक नई जगह में नए तरीके से नए प्रयोग से कुछ कामुक तस्वीरें या इरोटिक लिटरेचर पढ़ के या कुछ फिल्म देख के आपकी मुरझाई हुई कामेच्छा फिर से खिल उड़ती है कई बार साथ में स्नान करने से वाइब्रेटर के प्रयोग से अपनी खुद की काम क्रीड़ा आईने में देखने के बाद एक एक्साइटिंग माहौल पैदा हो सकता है जो खुद बेडरूम की बोरियत दूर करने में और उत्तेजना को बढ़ाने में सहायक हो सकता है ज्यादातर जोश और जोश जुनून दो कान के बीच में होता है
(5:33:42) दिमाग पार्टनर के बीच कम्युनिकेशन की कमी हमारे देश में बोरियत का एक दूसरा आम कारण है और उसे दूर करने के लिए खास आवश्यकता है कम्युनिकेशन यानी बातचीत अपनी पसंद नापसंद बताना यह भी अहम चीज है कोई विवाद हो तो खुले मन से शांति पूर्वक एक दूसरे को एडजस्ट होते हुए उसका सलूशन लाने की कोशिश करें यहां बातचीत सॉल्यूशन का एक महत्त्वपूर्ण जरिया बन सकती है शादी के कुछ समय के बाद आप सेंसेट फोकस एक्सरसाइज का प्रयोग कर सकते हैं मैं नॉर्मली मेरे पेशेंट्स को हर तीन-चार महीने के बाद दो-तीन दिन के लिए यह एडवाइस
(5:34:27) करता हूं जो एक तरह का प्लेजरिंग सेशन है जिसमें पेनिट्रेटिव सेक्स वर्जित है एक दूसरे को स्पर्श करने के बाद उत्तेजना जागृत करें कहां और कैसा स्पर्श पसंद है या ना पसंद है वोह अपने पार्टनर को बताएं ताकि आपका पार्टनर वही करेगा जो आपको ज्यादा पसंद है इससे स्वाभाविक है कि उत्तेजना में इजाफा होगा साथ ही साथ इस सेंसर्ड फोकस एक्सरसाइज में पेनिट्रेटिव सेक्स पर प्रतिबंध किया गया है ताकि मुझे परफॉर्म करना है या परफॉर्म करते वक्त मुझे दर्द होगा तो ऐसी एंजाइटी से दोनों पार्टनर मुक्त रहते हैं इस तरह के प्लेजरिंग सेशंस मोनोटोनी को तोड़कर
(5:35:14) संवेदना बढ़ाकर जोश जुनून पहले से बेहतर बना सकते हैं इत्तफाक की बात यह है कि ऋषि वात्सायन ने भी अपने कामसूत्र में डायरेक्टली या इनडायरेक्टली ऐसा ही जिक्र किया है लोग कहते हैं कि सेक्स सिर्फ एक शारीरिक क्रिया है लेकिन मैं उससे सहमत नहीं हूं सेक्स के दौरान और सेक्स के बाद जो बेहद आनंद और लाजवाब मानसिक शांति मिलती है उसका कोई इनकार नहीं कर सकता इसलिए मेरे ख्याल से लार्जली सेक्स इ लार्जली अ सेरेब्रल फिनोमिना सेक्स ज्यादातर एक मानसिक प्रक्रिया है कुछ पुरुष या स्त्री वर्क
(5:36:00) होते हैं वह अपने काम में बेहद आनंद का अनुभव करने लगते हैं कई बार बात इस हद तक पहुंच जाती है कि घर लौटने की बजाय वह अपना टाइम ऑफिस में ही गुजारते हैं ऐसे सिचुएशन में अक्सर एग्जीक्यूटिव अपने पार्टनर को और बच्चे को एक ड्यूटी समझ के एक टोकन लव जैसा देते हैं बाकी उनका दिल तो काम के अंदर ही उलज हुआ रहता है क्योंकि सक्सेस यानी अपने पेशे में सफलता यह उनकी सब से बड़ी प्रायोरिटी बन जाती है कई बार ऐसा भी होता है कि अपने काम में ही उनको अपने फेवरेट ऑब्जेक्ट मिल जाते हैं और जिनके साथ वह इमोशनली कनेक्ट हो जाते हैं इवॉल्व हो जाते हैं और फिर उनका
(5:36:42) आकर्षण वहीं पर ही बना रहता है और घर के आकर्षण और आपसी संबंध में थोड़ी बहुत दूरियां आ जाती है जैसे कि प्लेजरस आर शेयर्ड ड्यूरिंग वर्क प्लेस लीविंग द प्रेशर एट होम यहां अक्सर शादी तो बरकरार रहती है लेकिन रिश्ते खत्म हो जाते हैं दीप्ति मिश्रा ने यह माहौल को दो लाइन में बड़ी अच्छी तरह से समेट लिया है वह कहती है कि दिल से अपनाया नहीं दिल से अपनाया नहीं और गैर भी समझा नहीं यह भी एक रिश्ता है जिसमें कोई भी रिश्ता नहीं यह बात हुई फेवरेट वर्क सिचुएशन की कई बार वर्क सिचुएशन फेवरेबल होने की बजाय
(5:37:27) एडवर्स हो जाती है तो वर्क सिचुएशन टेंशन वाला हो जाता है अपने सीनियर्स या अपने कलीग्स की बिहेवियर अगर परेशान जनक हो और हर काम में उसको क क्रिटिसाइज किया जा रहा हो तो कई बार यह ऑफिस के प्रॉब्लम्स बेडरूम्स तक पहुंच जाते हैं जब कोई व्यक्ति तनाव में होती है तो उसका उत्तेजित होना मुश्किल हो जाता है फिक्र एंजाइटी बनी रहती है ऐसी अवस्था में जब वह रिलैक्स नहीं हो सकता तो सहवास करना भी उसके लिए नामुमकिन हो जाता है सिचुएशन कुछ भी हो कुछ चीजें एग्जीक्यूटिव्स को अवश्य मदद रूप हो सकती है कम से कम जब आप घर जाए तो दो घंटे के लिए आप फोन आप साइलेंट पर
(5:38:15) रखें अगर आप फोन नहीं लेंगे तो दुनिया का काम रुकने वाला नहीं है ध्यान रहे कि आपका पार्टनर सुबह से आपको कुछ बताने के लिए कुछ बात करने के लिए कुछ बच्चे के गाइडेंस के लिए तड़प रहा और आप अनजाने में आपके मोबाइल की वजह से उसको बिल्कुल नजरअंदाज कर रहे हो अगर आप बिल्कुल वक्त ही नहीं दोगे तो यह घटन उसमें और गहरी बनती जाएगी और ऐसे सिचुएशन में कई बार पार्टनर डिप्रेशन में चला जाता है एंजाइटी में चला जाता है और कहीं और सहारा ढूंढने जाता है और कई बार मजबूरन एक्स्ट्रा मटल अफेयर्स कर बैठता है बेंजामिन फ्रेंकलिन ने एक बहुत बात इसके
(5:39:00) बारे में कहिए वह कहते हैं कि जहां शादी बिना प्रेम के बन जाती है वहां बिना शादी का प्रेम होने में भी देर नहीं लगती जब आप शादी करते हो तो यह एक जीवी है जॉइंट वेंचर है मोहब्बत की गतिविधियों को पुनर्जीवित करने के लिए बहुत मदद रूप हो सकता है शादी एक ट्रायंगल है उसके तीन पहलू है तीन डायमेंशन है एक रिक्रिएशन मन आनंद दूसरा प्रोक्रिएशन माने बच्चा पैदा करना और तीसरा है रिलेशनल माने आपसी संबंध का संबंध माने रिलेशंस अच्छे होंगे तो आपको सेक्स में आनंद भी बेहतर मिलेगा माने रिक्रिएशन एंगल भी बेहतर बनेगा और यह
(5:39:47) दोनों के फल स्वरूप प्रोक्रिएशन एस्पेक्ट भी अगर आप चाहते हो तो अमूमन अपने आप उभर कर आ जाएगा हकीकत में पूरे संबंध में एक चीज हमेशा न रखनी चाहिए कि मैरिज शुड बी बॉन्डिंग एंड नॉट जस्ट बाइंडिंग एक सफल विवाह में यह जरूरी नहीं है कि आप एक दूसरे से कितने कंपैटिबल हो बल्कि जरूरी यह है कि आप एक दूसरे की इनकंपैटिबिलिटी को किस तरह से निपट हो कैसे हैंडल करते हो मैरिज वास इज एंड नेवर विल बी परफेक्ट जैसे शराब ड्रग्स या तंबाकू जैसे नशीली पदार्थ का व्यसन होता है उसी तरह सेक्स का
(5:40:33) भी व्यसन कई लोगों को हो सकता है जिसमें उन्हें सेक्स संबंधित विविध प्रवृत्तियों की लत लग जाती है और वह लोग उसी में रहना पसंद करते हैं गुडमैन नाम के रिसर्चर ने बताया है कि जिस तरह ड्रग एडिक्ट में आत्म संयम का अभाव होता है वह खुद को कंट्रोल नहीं कर सकता नशीली पदार्थों का सेवन उसके लिए एक मजबूरी बन जाता है बाद में कंपल्शन बन जाता है और संतुष्टि के लिए वही चीज वह बार-बार करता रहता है ठीक उसी तरह की मनस्त सेक्स एडिक्ट की भी हो जाती यह मानसिक समस्या जैसे कंपल्सिव खर्च करना माने स्पेंडिंग कंपल्सिव चोरी करना माने स्टीलिंग या तो कंपल्सिव जुआ खेलना गैलिंग
(5:41:20) के जैसा बिल्कुल वैसा ही हो सकता है कई बार सेक्स एडिक्ट की काम वासना कंपेरटिवली आम लोग लोगों से अधिक नहीं होती वो उतनी रहती है मगर अपनी काम वासना को तृप्त करने की स्टाइल अप्राकृतिक अमानवीय गैर कानूनी या कई बार आपत्ति जनक हो सकते अपने सेक्स के इस नशे का बार-बार अनुभव लेने के लिए वह बेताब हो जाते हैं कांस नाम के एक दूसरे थेरेपिस्ट ने सेक्स एडिक्टो का तरह-तरह के भिन्न प्रकार बताए हैं जिसमें पार्टनर होते हुए भी सिर्फ फैंटेसी में डूबे रहने
(5:42:05) वाले पार्टनर होते हुए भी अकेले सेक्स एंजॉय करने वाले फ्लर्ट और सेडक्शन के पीछे पड़े रहने वाले पैसों से सेक्स खरीदने वाले अनजान व्यक्ति के साथ सेक्स की मजा लूटने वाले पोर्न का अति सेवन करने वाले सिर्फ बच्चे या बूढ़े व्यक्तियों से ही सेक्स का आनंद लेने वाले विकृत वर्तन से ही रोमांचित होने वाले अन्यों का एक्सप्लोइटेशन करने वाले बगैर लोगों का समावेश इन एडिक्ट के आयाम में होता है सेक्स एडिक्ट के जीवन साथी को को एडिक्ट कहा जाता है जो अपार निराशा बेबसी और वेदना का अनुभव करता है आजकल हर
(5:42:54) व्यक्ति फिर वह बूढ़ा हो या बच्चा अनपढ़ हो या पढ़ा लिखा गरीब हो या अमीर अपने साथ मोबाइल फोन तो रखता ही है और घंटों तक शायद पूरे दिन उसका इस्तेमाल करता रहता है इस मोबाइल फोन और इंटरनेट पर उपलब्ध पॉर्नोग्राफिक मटेरियल से समाज में सेक्स एडिक्ट्स की संख्या बेहद बढ़ गई पोर्न इंडस्ट्री सस्ते मनोरंजन के लिए बच्चों के साथ सेक्स जानवरों के साथ सेक्स भाई बहन या माता पुत्र के साथ सेक्स वगैरह कुछ भी दिखाते हैं सेलफोन की उपलब्धि से आज लाखों लोग मोबाइल फोन में पोन मटेरियल देखने में समय गुजारने लगे हैं और उसी पोर्न एडिक्शन
(5:43:40) की बात मैं यहां आज डिटेल में करने जा रहा हूं हकीकत में पन एडिक्शन है क्या टैक्स की इच्छा यानी काम इच्छा तो हर एक में होती है कभी-कभी यह ज्यादा भी होती है और कभी कम भी होती है अगर व्यक्ति चाहे तो अपनी ज्यादा कामेच्छा को सही तरीके से चैनेलाइज कर सकता है लेकिन कुछ लोगों में यह आदत लत में बदल जाती है और चैनेलाइज नहीं कर पा जिस तरह शराब या तंबाकू की लत वाले आदमी को अगर शराब या तंबाकू ना मिले तो वह बेचैन हो जाता है ऐसे ही इस लत में भी फंसे हुए जो इंसान होते हैं बिना पौन
(5:44:25) देखे उन्हें चैन नहीं पड़ता उनकी ख्वाई उनकी कामेच्छा उनका डिजायर अनकंट्रोलेबल हो जाता है उनकी प्यास बिना पौन देखे छिप ही नहीं डिजायर कंपल्सिव बन जाता है एक ऐसी लत है जिसमें व्यक्ति का कामा वेग जरूरत से बेहद ज्यादा हो जाता है और आखिर में वह इंसान व्यक्तिगत रूप से सामाजिक रूप से आर्थिक रूप से पारिवारिक रूप से पूरी तरह बर्बाद हो जाता है जिस व्यक्ति को पन का एडिक्शन होता है वो बाहर से तो बिल्कुल नॉर्मल इंसान की तरह लगता है सिर्फ उसके अंदर एक अलग सी वासना भरी अनदेखी प्राइवेट लाइफ जीवित
(5:45:11) रहती है पोन एडिक्शन सेक्स एडिक्शन का ही एक हिस्सा है और यह एक मानसिक बीमारी है कुछ लोगों को ऐसी लग भी होती है जिसे पैराफीलिया कहते हैं कि जब तक वोह बच्चे या जानवरों के साथ सहवास ना करे या इस टाइप के पन ना देखे तब तक उन्हें चैन नहीं पड़ता ऐसे लोग परिवार के लिए और सुरक्षित समाज के लिए खतरनाक साबित हो सकते कुछ ऐसे भी लोग होते हैं कि जो पन देखकर सिर्फ अपनी कल्पनाओं में खोए हुए रहते हैं और वह खुद के लिए ऐसी स्थिति निर्माण करते हैं जो वास्तव में चिंताजनक या खतरनाक बन सकती है सवाल यह पैदा होता है कि लोग
(5:45:57) पोर्नोग्राफी देखते क्यों है भाई क देखते हैं पोर्नोग्राफी देखने की मुख्य वजह है कि उनको उत्तेजना में इजाफा करना है सेक्सुअली ज्यादा उत्तेजित होना है ताकि वह अपनी मनचाही सेक्सुअल एक्टिविटी में इवॉल्व हो सके और ज्यादा संतुष्टि प्राप्त कर सके उनके लिए पोर्नोग्राफी एक उत्तेजित होने का जरिया है चाहे वह कल्पना हो या हकीकत दूसरा सवाल यह पैदा होता है क्या पोर्नोग्राफी देखना फायदेमंद है कि नुकसान काक बड़ा पेचीदा सवाल है यह हकीकत है कि पोर्नोग्राफी थी पोर्नोग्राफी है और पोर्नोग्राफी
(5:46:41) रहेगी ऐसा नहीं कि सिर्फ पुरुष ही पोर्नोग्राफी के एडिक्ट होते हैं महिलाएं भी हो सकती हैं चाहे वह स्त्री हो या पुरुष अगर वह पोर्नोग्राफी के गुलाम हो गए उसमें दिखाए हुए दृश्यों से अपने आप को या अपने पार्टनर को कंपेयर करने लगे तो अल्टीमेटली उनका जीवन निराशा मय फिक्र चिंता से बेवजह एंजाइटी से और चीजों से फिक्र चिंताओं से भर ही जाएगा यह एक द्विध्रुव जान बचा सकती है और अगर किसी कने के हाथ में रही तो वो जानलेवा साबित हो सकती अगर एक व्यक्ति सेक्सुअली लिटरेट
(5:47:29) नहीं है उसे सही सेक्स एजुकेशन नहीं मिला है तो यह पन उसके लिए यकीनन नुकसान कारक होगी लेकिन अगर एक व्यक्ति सेक्सुअली लिटरेट है उसे सही सेक्स एजुकेशन मिल चुका है तो यह फिल्म उसके लिए और उसके पार्टनर की उत्तेजना में इजाफा कर सकती है और चंद किस्सों में तो ये एक साइकोलॉजिकल सेक्स टॉनिक के तौर पर भी काम कर सकती है अगर समझो कि जिसे सेक्स एजुकेशन नहीं मिला है वह आदमी जब पन फिल्म देखता है कि एक पुरुष का शिष्ण 12 इंच लंबा है और वह आधे घंटे तक कंटीन्यूअस सहवास की मूवमेंट कर रहा है तो वह चिंतित हो जाएगा व इफरिट
(5:48:17) कॉम्प्लेक्शन और एंजाइटी भी आ सकता है उसे ऐसा महसूस होगा कि उसने उसका प्राइवेट पार्ट तो बहुत छोटा है और वह थोड़े ही टाइम के लिए सहवास कर सकता है लेकिन अगर उसे सही सेक्स एजुकेशन दिया गया है तो उसे पहले से ही मालूमात होती है कनी मार् की कुल लंबाई 6 इंच है आगे के न थर्ड माने एक तिहाई हिस्से में ही सेंसेशन है अंदर का 4 इंच तो बिल्कुल बिगर सेंसेशन वाला है संवेदन हीन है और उसको यह हकीकत पहले से मालूम होती है कि अगर एक शिन की लंबाई उत्तेजित अवस्था में 2 इंच या उससे ज्यादा कितनी भी हो फीमेल पार्टनर सेटिस्फेक्शन भी काफी है
(5:49:03) साथ में उसे यह भी पता होता है कि अगर वह 30 मिनट के बजाय समझो तीन मिनट में डिस्चार्ज हो गया तो भी वह एक या दूसरे तरीके से अपने पार्टनर को तो संतोष दे ही सकता है क्योंकि उसने सेक्स एजुकेशन में पढ़ा है कि महत्व की चीज है संतोष सिर्फ संभोग नहीं वह आप किसी भी तरीके से दे सकते हो और यह पोर्नोग्राफी देखकर उसे किसी किस्म की एंजाइटी नहीं होगी किसी किस्म की इफरिट कॉम्प्लेक्शन एडिक्शन के डायग्नोसिस के लिए यह जानना जरूरी है कि उसके मेन सिम्टम्स क्या होते हैं व्यक्ति के दिमाग
(5:49:49) में पोर्न के विचार घूमते रहते हैं यहां तक कि जब तक वो पोन ना देखे तब तक उसे सहवास के लिए जोश नहीं आता उत्तेजना नहीं आती सही संतोष ही नहीं मिलता यह आदत उसके लिए एक लत में परिवर्तित हो जाती है एक कंपल्सिव घटना बन जाती है वो पन कहां भी कभी भी और कैसे भी देखने की कोशिश करता है पन देखना उसके लिए एक ऑब्सेशन एक कंपल्शन बन जाता है क्या पर्नोग्राफी के एडिक्शन से शादी को नुकसान पहुंच सकता है ऐसे सवाल आते हैं हां यकीनन पहुंच सकता है आपसी संबंध में दरार आ सकती है कई बार
(5:50:35) पार्टनर्स को ऐसा एहसास होता है कि उनकी खूबसूरती में थोड़ी बहुत कमी आ गई है वह पहले जितनी आकर्षित नहीं रही है क्या उसके लिए उनके पार्टनर को उनसे ज्यादा पोर्नोग्राफी में इंटरेस्ट आता है इस तरह की एक गलत फहमी और गिल्ट निर्माण हो सकता है लेकिन इस पन एडिक्शन का इलाज भी मुमकिन है आजकल ऑनलाइन सेक्स एडिक्शन एक बढ़ती हुई लेटेस्ट समस्या है जिसमें बहुत से लोग इसमें डूबे हुए हैं और इससे मुक्ति पाने के लिए ऑनलाइन डी एडिक्शन प्रोग्राम भी मौजूद है लेकिन मेरे ख्याल से इसकी ट्रीटमेंट में यह ऑनलाइन प्रोग्राम से
(5:51:20) आपको ज्यादा फायदा फायदा होना मुश्किल है क्योंकि यह तो वैसी बात हो गई कि जैसे कोई मैखाने में बैठकर शराब मुक्ति का इ इला कर रहा हो जो ज्यादातर मेरे ख्याल से मुमकिन नहीं होता अगर यह व्यसन आपको छोड़ना ही है तो पहले आपको दिल से स्वीकार करो कि मुझे यह एडिक्शन है और इसका इलाज मुझे करवाना है कोई अच्छा दोस्त और समझदार परिवार का सदस्य कोई मदद लो शर्म मत करो हिच किचाओ मत हो सके तो अपने पार्टनर को भी इफॉर्म कर दो क्योंकि इफ देर इज अ विल देर इज अ वे समस्या की सही वजह जानने के बाद ही काउंसलिंग और बिहेवियर थेरेपी के जरिए
(5:52:05) इसका इलाज आसानी से हो सकता है ऐसे लोगों को अकेले नहीं रहना चाहिए परिवार का कोई भी सदस्य उनके साथ हो या कोई दोस्त जो उसको ठीक करने की मंशा रखता हो वैसा शख्स उसके साथ रहे तो बेहतर है खुली हवा में लंबे वॉक्स उसको मदद रूप हो सकते हैं बेहतर होगा कि पोन को हटा के किसी दूसरी चीज में वह अपना ध्यान केंद्रित करें ताकि पोन की लत से वह आहिस्ता आहिस्ता दूर हो सके साथ ही साथ वह कोई हॉबी भी विकसित कर सकता है जैसे संगीत हो आर्ट हो किसी और किस्म की कला हो या कोई खेल
(5:52:49) हो यह आपका ध्यान पन से हटाएगा डाइवर्ट कर देगा योग अभ्यास मदद रूप हो सकते हैंस करके योगा अभ्यास में प्राणायाम अनुलोम विलोम और शवासन ज्यादातर मदद रूप हो सकते हैं एक ख्याल रखना चाहिए कंप्यूटर का उपयोग टाइम पास के लिए हरगिज ना करें कंप्यूटर ऐसी जगह पर रखे जहां लोग आते जाते हो अपने आप को इतना बिजी रखो कि पन देखने का समय ही आपको ना मिले और खास फैमिली के साथ हमेशा ज्यादा टाइम गुजारी पोर्न एडिक्शन से छुटकारा पाने के लिए माने ट्रीटमेंट शुरू करने से
(5:53:34) पहले आप यह भी साइकेट्रिस्ट से चेक करवा ले कि आपको और कोई ऑब्सेशन या डिप्रेशन या कोई मेजर साइकेट्रिस्ट बीमारी तो नहीं अगर किसी को और कोई साथ में व्यसन हो जैसे चरस का अफीम का या शराब का तो उसे छोड़ना भी बहुत जरूरी है वरना यह वसन सेक्सुअल एडिक्शन को और ज्यादा इंटेंस कर सकता है याद रहे पॉर्नोग्राफिक एडिक्शन छूट सकता है अंडरस्टैंडिंग और एक प्यार भरा पार्टनर इसका बेहतरीन वैक्सीन बन सकता है कई बार कुछ दवाइयां भी पॉर्न एडिक्शन से छूटने के लिए काम आ सकती है ध्यान रहे परहेज
(5:54:22) कामेच्छा और सेक्स नहीं करना है करना है तो सिर्फ पोर्नोग्राफी से ही परहेज करना है दोस्तों पौन देखना और पौन व्यसन में एक फर्क है एक कपल अपनी सेक्स लाइफ को थोड़ा एक्साइट करने के लिए थोड़ा और रोमांचित करने के लिए कभी-कभी पन मटेरियल देख ले तो वह ठीक है पर एक व्यक्ति घंटों तक पन देखता ही रहे बगैर पोन देखे वह सो ना सके और पन देखने के बाद उत्तेजित होकर किसी महिला के साथ वह गलत हरकत करने को मजबूर हो जाए तो उसे पोर्न एडिक्शन समझा जाएगा इसमें वह
(5:55:10) अपने रिश्ते समय पढ़ाई व्यवसाय और प्रतिष्ठा को बर्बाद कर सकता है पन मटेरियल में व्यभिचार विकृति गैर कानूनी चीजें वगैरे भी दिखाई जाती है क्योंकि पन बनाने वाले सस्ते मनोरंजन के जरिए पैसे कमाते हैं वो उसके सामाजिक परिणाम या व्यक्ति पर होने वाले मानसिक असर की ख्याल नहीं रखते वो बिल्कुल उसे नजरअंदाज कर देते हैं अगर इंसान का स्वयम पे काबू नहीं है तो उसने अपने स्मार्टफोन में भी पॉन साइट को ब्लॉक कर देना चाहिए कई लोग ऐसा मानते हैं कि शहर में अकेले रहकर
(5:55:55) मजदूरी करने वाले कुछ युवाओं के पास जब सेक्स पार्टनर उपलब्ध नहीं होता है तो वह प्रोफेशनल सेक्स वर्कर के पास जाते हैं या एक्स्ट्रा मेरिटल अफेयर्स में इवॉल्व हो जाते हैं कुछ लोगों के दिमाग में यह ख्याल अक्सर आता है कि यह सब करने के बजाय पन देखकर हस्त मैथुन करे तो बुरा क्या है लेकिन यह सोच कभी कभ आपत्ति जनक साबित हो सकती है ध्यान बस यही रखना है कि पोन देखना उसके लिए कंपल्सिव ना बन जाए पन देखना पन का प्रसार करना पन मटेरियल का संग्रह करना पन का उत्पादन करना किसी को पन दिखाना
(5:56:42) बेचना खरीदना या प्रेरित करना बगैर चीजें इलीगल है पन का कंपल्सिव उपयोग विवाहित जीवन को नष्ट कर सकता है कभी कभ पन एडिक्स के पार्टनर आकर बता कि डॉक्टर साहब मेरा हस्बैंड 2400 घंटे अपने लैपटॉप में न्यूड तस्वीरें देखा करता है मैं क्या करूं तो कई बार कुछ और आके बताते हैं कि डॉक्टर साहब वह मेरे साथ सेक्स करने की बजाय फिल्म के क्लिप देख के खुद को मास्टरबेट करता है और मुझे बिल्कुल हाथ तक भी नहीं लगाता कई बार एडिक्ट खुद आके बताते हैं कि डॉक्टर साहब मेरी पार्टनर आक मुझे कितना ही उत्तेजित करे कितना ही स्पर्श कर कर जब
(5:57:28) तक मैं पोन नहीं देखता मुझे इरेक्शन नहीं आता वजह उसकी यह होती है कि पोर्न एडिक्शन से एडिक्ट व्यक्तियों में सेक्स को देखने का एक ऐसा सेक्सुअल ग्राउंडिंग बन जाता है एक ऐसा नजरिया डिवेलप होता है कि जो सिर्फ शारीरिक वासना शांत करने का एक मात्र माध्यम बन जाता है और इसमें इंटिमेसी या पारस्परिक प्रेम पलायन हो जाता है वो अदृश्य हो जाता है पौन से समाज में सेक्स विद मल्टीपल पार्टनर्स बलात्कार ग्रुप सेक्स सेक्सुअल क्राइम्स वगैरे चीजों में काफी बढ़ावा हो सकता है परिवार में जो ऑब्जेक्शनेबल है वैसे इंसेस जैसे व्यवहारों को भी बढ़ावा
(5:58:16) मिल सकता है जज रिश्ते वैल्यूज उसके लिए कुछ मायने नहीं रखते इसलिए यह बात अवश्य ध्यान में रखिए कि अगर किसी के घर में कोई पोर्न एडिक्ट या सेक्स एडिक्ट है तो वह बात छुपाने की कोशिश ना करें उसका अच्छे से इलाज करवाएं सेक्स एडिक्शन से उसे दूर करने का पूरा प्रयत्न करें और उसे बर्बादी से बचाएं सेक्स एजुकेशन की मदद से आप इसे डायग्नोज तो कर ही सकोगे लेकिन साथ ही साथ में इलाज की सही इलाज की परामर्श भी दे सको कई बार फ्रिक्वेंटली आस्क क्वेश्चन में कई बार ऐसा सवाल लोग पूछते हैं कि रोटि और पोर्नोग्राफी में क्या फर्क है या
(5:59:04) खजुराहो के शिल्प और पोर्नोग्राफी क्या एक जैसी चीज है मेरे ख्याल में रोटि का और पोर्नोग्राफी में एक बारीक थिन लाइन है एक बारीक भेद है रोटि का में व्यक्ति रोमांस को एंजॉय करता है सफर की मजा लेता है और मजा लेने के बाद सुहानी सफर को एंजॉय करने के बाद अपने मुकाम या क्लाइमेक्स पर पहुंचता है पोर्नोग्राफी में यह रोमांस जरा क्रूड होता है और साथ ही साथ सफर का सही आनंद लिए बगैर आखिरी मुकाम पर बेहद जल्दी पहुंच जाता है मेरे ख्याल से इन दोनों का काम व्यक्ति की उत्तेजना में इजाफा करना है
(5:59:49) उसमें कोई शक नहीं इस्तेमाल कैसे करना वो आपके हाथ में बात करेंगे ट्रांसमिटेड इंफेक्शन के बारे में प्रारंभ में उने 1990 के दशक तक इन रोगों को सेक्सुअली ट्रांसमिटेड डिसीज यानी एसटीडी और वीडी यानी नीरिल डिसीज कहा जाता था रियल शब्द लैटिन शब्द है जो वेनेरिस से आया हुआ है जो प्रेम की रोमन देवी वीनस से संबंधित है यह जानना जरूरी है कि वीडी या एसटीडी के बजाय आज उसे एसटीटीआई क्यों कहने लगे मतलब जिसे डिसीज कहा जाता था उन्हें
(6:00:36) इंफेक्शन क्यों कहने लगे क्योंकि ज्यादातर मामलों में आप संभोग के माध्यम से इंफेक्शन एक व्यक्ति से दूसरी व्यक्ति में ट्रांसफर कर रहे हैं ना कि डिसीज या बीमारियों को उदाहरण के लिए यदि कोई एचआईवी पॉजिटिव है लेकिन एड्स से पीड़ित नहीं है उसे एड्स की बीमारी नहीं हुई है तब वह सिर्फ इंफेक्शन को ही ट्रांसफर करेगा ना कि एड्स को इसलिए मेडिकल साइंस ने सेक्सुअली ट्रांसमिटेड इंफेक्शन यानी एसटीआईओ करना ज्यादा उचित समझा है पहले जान लेते हैं कि एससीआई क्या है जैसे हमने अभी डिस्कस किया कि एसटीआईएसफाया
(6:01:28) यह इंफेक्शन संभोग के माध्यम से फैलते हैं जब कोई इंफेक्शन सेक्सुअल इंटरकोस के दौरान एक व्यक्ति से दूसरी व्यक्ति में फैलता है तो वह व्यक्ति को कुछ सावधानियां जरूर बरतनी चाहिए कुछ अवेयरनेस कुछ एजुकेशन देना जरूरी है ताकि उसके प्रसार से उसके फैलने फैलाने से वह बचे एंड इट स्प्रेड कैन बी प्रीवेंटेड अब आप सोच रहे होंगे कि अगर यह एसटीटीआई है माने संभोग से होने वाला इंफेक्शन है तो क्या इसका मतलब यह है कि अगर मैंने कभी सेक्सुअल इंटरकोर्स किया ही नहीं तो मुझे एससीआई कभी हो ही नहीं सकता इसका
(6:02:14) स्पष्ट उत्तर हां या ना में नहीं है सबसे पहले यदि आप पेनिट्रेटिव सेक्स नहीं करते तो आपको एसटीआईएसफाया लेकिन अगर आप गुदा मैथु एनल सेक्स या मुख मैथु ओरल सेक्स करते हैं तो आपको इंफेक्शन हो सकता है ऐसा इसलिए है कि मुंह और गुदा क्षेत्र की चमड़ी जो म्यूकस मेंब्रेन है वो बहुत नाजुक होती है प्रवेश से यानी पेनिट्रेटिव सेक् से ये टेर हो सकती है यह कट सकती है और बॉडी फ्लूइड यानी शरीर के तरल पदार्थ भी ट्रांसफर हो सकते हैं जिसकी वजह से एक व्यक्ति का
(6:02:59) इंफेक्शन दूसरे व्यक्ति में ट्रांसफर हो सकता है इसलिए ओरल एंड एनल सेक्स कभी कभ एक समस्या पैदा कर सकते हैं आइए अभी थोड़ा डिटेल में इन एसटीआईआईआईजी वायरल फंगल और पैरासाइटिक बैक्टीरियल इंफेक्शन में आते हैं गोनोरिया सिफिलिस क्लेरिया लिंफो ग्रेनमा वेनेरियम ग्रेनमा नालय और शक्र वायरल इंफेक्शन में आते हैं
(6:03:48) जेनिटल वट्स हर्पिस सिंपलेक्स एचआईवी और मोलुस्कम कंटे जियोस कैंडिया सिस एक फंग इंफेक्शन है और अंत में पैरासाइटिक इंफेक्शन जिसमें लाइस केबीस और ट्राइक मोनिस शामिल है लेकिन सबसे अधिक देखे जाने वाले एसआई कौन से हैं सबसे कॉमन है हर्पिस जेनिटस और उसके बाद वायरल वट्स जिसे जेनिटल वट्स भी कहते हैं वह सबसे ज्यादा है क्योंकि वह लाइलाज है इसलिए यह बारबार होते ही रहते हैं इसके अलावा कई बार महिलाओं में तो यह दिखाई भी नहीं देते यानी इंफेक्शन के कोई भी लक्षण बिल्कुल ही
(6:04:33) नहीं दिखाई देते इसलिए इसका निदान माने डायग्नोसिस करना काफी मुश्किल है और जब डायग्नोसिस ही नहीं होता तो स्वाभाविक है कि इलाज कैसे मुमकिन होगा लेकिन एक सवाल उठता है कि यह एसटीआईएसफाया माने एवरी डे 10 लाख से ज्यादा एसटीआईओ हैं हर साल यह एसटीआईएचएल कैंसर में भी वृद्धि होती है यह आंकड़े यकीनन चौकाने वाले हैं लेकिन उसकी वजह क्या है उसका मुख्य कारण है
(6:05:21) सेक्स एजुकेशन का अभाव और आम जनता में जागरूकता की कमी खास करके युवा पेढ़ी में अब अगर हम किशोरों में सेक्सुअल डिजायर के बारे में सोचते हैं तो हर जगह से और भिन्न-भिन्न प्रकार के मीडिया से प्रिंट मीडिया हो या इलेक्ट्रॉनिक मीडिया हो सेक्सुअल स्टिमसन यौन उत्तेजना मेंक दृश्यों के बमब 24 बा से होती ही रहती है उनकी कामेचा और जोश पकड़ती रहती है लेकिन सेक्स एजुकेशन की कमी के कारण उनके पास सही तरीके से चैनला इज करने के रास्ते मौजूद नहीं है उसे निपटने के लिए आवश्यक नॉलेज नहीं है इसलिए बगैर सोचे समझे काम
(6:06:09) इच्छा से वशीभूत होकर सेक्सुअल एक्टिविटी में इवॉल्व हो जाते हैं और एसटीआईओ में एसटीटीआई के बढ़ते मामलों का एकमात्र मुख्य कारण है यह एक मात्र मुख्य कारण दूसरा एक कारण जो हम देखते हैं वह है लोगों का मोबिलाइजेशन लोग अब सालों से विदेश में काम कर रहे हैं या अपने घर से कई दूर काम कर रहे हैं उसकी वजह से हफ्तों तक परिवार और पार्टनर से दूर रहते हैं लेकिन काम इच्छा तो बनी ही रहती है जैसे जैसे काम इच्छा बढ़ती है वह अक्सर या तो एक्स्ट्रा मेरिटल अफेयर्स के माध्यम से या पेड सेक्स
(6:06:57) के मा माम से अमूमन अपनी काम इच्छा की पूर्ति करने की कोशिश कर लेते हैं इसके लिए भी यह इसमें इजाफा हो सकता है तीसरा आसानी से सेक्स की उपलब्धता शादी से पहले संभोग ना करने या सेक्स के मामले में रूढ़िवादी होने की हमारी पुरानी परंपराएं बदल गई है और लोग मल्टीपल पार्टनर के साथ सेक्सुअल रिलेशन में शामिल होते इस वजह से भी एसटीआईएचएल पुराने समय में एक व्यक्ति अपना पूरा जीवन अपने एक ही साथी के साथ बिताता था लेकिन
(6:07:46) अब तलाक और सेपरेशन के मामले बढ़ते जा रहे हैं यूरोप हो अमेरिका हो या भारत पहली और दूसरी बार के तलाक के परसेंट बढ़ रहे हैं इससे एक्स्ट्रा मटल अफेयर्स में और इजाफा होता है बढ़ोतरी होती है जिसकी वजह से भी यह एससीआई बढ़ सकते हैं अब इन सभी सिचुएशन में एसटीआईओ जा सकता है और वह है संभोग के दौरान सुरक्षा माने कंडोम का उपयोग लेकिन सेक्स की चाहत के जोश में कई लोग भूल जाते हैं और कई लोग जानते हुए भी सुरक्षा का इस्तेमाल नहीं करते यह भी एक
(6:08:34) कारण है कि हमारे समाज में यह एसटीआईएसफाया इंफेक्शन पर सिफिलिस प्राइमरी सिफिलिस उसमें जेनिटल्स में माने शिष्ण पर एक सिर्फ एक शंकर आता है एक जखम होता है जो गो होता है उसे हाथ लगाने से खून नहीं आता और बिल्कुल दर्द भी नहीं होता इसके साथ-साथ लिंफ गलैंड्स में भी थोड़ा स्वेलिंग आ जाता है इसका इनक्यूबेशन पीरियड एवरेज एक महीने तक का होता है यूजुअली बिटवीन ना एंड 90 डेज मैंने आज सहवास किया होगा तो तीन महीने के दौरान
(6:09:19) में कभी भी यह शंकर आ सकता है वीडीआरएल या टीपीएचए ब्लड टेस्ट के जरिए उसका निदान हो सकता है इसका इलाज खास तौर पर इंजेक्टबल पेनिसिलिन से होता है यह इंजेक्शन लेने से पहले टेस्ट दोष देना आवश्यक है अगर किसी व्यक्ति को पेनिसिलिन की एलर्जी है तो दूसरी एंटीबायोटिक्स मिसाल के तौर पर टेट्रासाइक्लिन या एरिथ माइसिन से भी इलाज किया जा सकता है एक और एसटीटीआई है जिसे गोन कोकल इ या गोनोरिया कहते हैं इसमें पुरुष को पेशाब करते वक्त बेहद जलन होती है दर्द होता है
(6:10:05) और यूरेथ्रा में से थिक पस जैसा डिस्चार्ज निकलता है स्त्री को भी कई बार बहुत जलन होती है और कई बार स्त्री को बिल्कुल सिम्टम्स नहीं होते गोनो कोकल इंफेक्शन का इनक्यूबेशन पीरियड करीबन दो से छ दिन तक का होता है इसका इलाज एजो माइसिन या सिप्रोफ्लोक्सासिन या दूसरी एंटीबायोटिक से हो सकता है अभी हम तीसरे बैक्टीरियल एसटी आई के बारे में बात करते हैं वह शक्र इड इसमें शिष्ण पर जहां ग्लैस पेनिस है माने लाल भाग है वहां से जब चमड़ी पीछे लेते हैं उसके इर्दगिर्द बहुत अल्सर हो जाते हैं जहां टच करने से भी दर्द होता है
(6:10:51) और खून भी निकलने लगता है कई बार पुरुष को चमड़ी प लेने में भी काफी दिक्कत आ सकती स्त्री में इस टाइप के अल्सर्स लेबिया की इर्दगिर्द होता है इसका इनक्यूबेशन पीरियड दो से 10 दिन तक का होता है कुछ केसेस में एक बाजू पर लिंफो में स्वेलिंग भी हो जाता है लिंफ नोड बड़े हो जाते हैं एक बड़ी सॉफ्ट गांठ सी बन जाती है इसके इलाज में खास करके यह अल्सर्स को एंटीसेप्टिक सॉल्यूशन से बार बार साफ करना चाहिए और इसके इलाज में एजो माइसिन एरिथ माइसिन सिप्रोफ्लोक्सासिन या दूसरी एंटीबायोटिक्स कारगर होती है एक और
(6:11:38) बैक्टीरियल इंफेक्शन है जिसे लिंफो ग्रोमा वेनेरियम कहते हैं इसमें प्राइवेट पार्ट पर एक जखम हो जाता है और कई बार यह जखम अपने आप हील हो जाता है लेकिन अगर ट्रीटमेंट ना की तो जखम के इर्दगिर्द जो लिंफो वो बड़े हो जाते हैं एक साथ मिल जाते हैं और साथ मिलकर एक बड़ी गांठ बन जाती है माने दे गेट मैटेड एंड फॉर्म एन इंग वाइनल बबो और यह गांठ इंग वाइनल लिगामेंट के दोनों बाजू बन जाती इसका इनक्यूबेशन पीरियड पा से 25 दिन तक का होता है और इसकी ट्रीटमेंट के लिए टेट्रासाइक्लिन सिप्रोफ्लोक्सासिन या एरिथ मासिन जैसी एंटीबायोटिक कारगर होती है एक
(6:12:27) और तकलीफ होती है जिसे ग्रेनमा इंगवा नाल कहते हैं इसमें एलिवेटेड बीफ रेड पेनलेस अल्सर्स होते हैं इसमें सक्रो इड की तरह दर्द नहीं होता हाथ लगाने से ब्लीड हो सकता है इनका इनक्यूबेशन पीरियड करीबन तीन हफ्तों से तीन महीने तक का हो सकता है इसकी ट्रीटमेंट में एंटीबायोटिक्स होती है मिसाल के तौर पर डॉक्सीसाइक्लिन एजो माइसिन टेट साइक्लिन ऐसी दवाइयां काफी कारगर होती है अब हम बात करेंगे वायरल इंफेक्शन की दूसरी एक बहुत ही कॉमन बीमारी है जेनिटल हर्पिस जब उसकी शुरुआत होती है तब काफी दर्द होता है और लिंफ प्लांट्स
(6:13:13) में भी स्वेलिंग आ जाता है अक्सर शिष्ण के ऊपर छोटे-छोटे वेसिकल्स अंगूर के झुमके की तरह दिखाई देते हैं जैसे क्लस्टर बस्टर्स एक बार ठीक होने के के बाद भी यह समस्या दोबारा अपने आप उभर सकती है खास कर के कोई स्ट्रेस के बाद बदन की इम्युनिटी कम हो जाए तब या कई बार सहवास के बाद भी अक्सर यह देखा गया है कि स्त्रियों में महावारी के बाद यह बीमारी उभरती है इसका इनक्यूबेशन पीरियड पा दिन से सात दिन तक का होता है हर पिस सिंपलेक्स वायरस के लिए एचएसवी ब्लड टेस्ट करवा सकते जिसमें अगर किसी व्यक्ति को आईजीजी
(6:14:00) पॉजिटिव रहा तो उसका मतलब है कि उसे पहले हर पीस हो गया था और अगर आईजीएम पॉजिटिव है तो उसका मतलब यह होता है कि वह अभी हर्पिस के इंफेक्शन से गुजर रहा है ज्यादातर इसके इलाज में य साइक्लो वर कारगर रहती है एसाइक्लोवीर की खाने के लिए गोलियां भी दी जाती है और लगाने के लिए ए साइक्लो वर का मलम का भी इस्तेमाल किया जाता है यह दवाइयां के इस्तेमाल से बीमारी की अवधि कम हो सकती है और सीवियरटी भी कम हो सकती है लेकिन यह बीमारी जड़ से निकलनी मुश्किल है क्योंकि यह लाइलाज दूसरी एक आम वायरल बीमारी है
(6:14:47) हर्पिस की तरह वह भी लाइलाज है जिसे जेनिटल वट्स के नाम से जाना जाता है यह भी एक वायरस का इंफेक्शन है जिसमें छोटे-छोटे पिंक कलर के पेपस होते हैं जो आगे बढ़कर उनका ग्रोथ बिल्कुल एक छोटे फूल गोभी जैसा हो जाता है इनका इनक्यूबेशन पीरियड कुछ हफ्तों से कुछ महीनों तक होता है और यह इनक्यूबेशन पीरियड में भी यह इंफेक्शन स्प्रेड कर सकते हैं माने एक्चुअली महिला को सिम्टम्स नाना होते हुए भी अपने पार्टनर को यह इंफेक्शन स्प्रेड कर सकती है अगर यह संख्या में कम है और छोटी है वट छोटी है तो इसको दूर करने के लिए पोडो
(6:15:33) फाइन का सॉल्यूशन लोकली लगा सकते हैं और अगर जरूरत पड़ी तो इलेक्ट्रो कटरी या क्रायो पसी भी इसे निकाला जा सकता है यहां एक चीज ध्यान में रखनी चाहिए कि यह वट्स यह मत से ह्यूमन पेपिलोमा वायरस से होते हैं यानी एचपीवी से जो स्त्रियों में सर्वाइकल कैंसर का कारण भी बन सकते हैं ऐसे वट्स का इलाज करते समय यह ध्यान रखना चाहिए कि आपके पार्टनर का भी सर्वाइकल कैंसर के लिए टेस्टिंग करवाना जरूरी है और एक वायरल एसटीटीआई है जिसे मोलुस्कम कंटे जियोस हम कहते हैं यह पॉक्स वायरस के कारण होता है यह बच्चों में निकट संपर्क के
(6:16:21) माध्यम से फैलता है और एडल्ट्स में सेक्सुअल कांटेक्ट के जरिए फैलता है यह अक्सर गोल आकार के मोती जैसे सफेद पेपस होते हैं और परपल्स के सेंटर में एक डॉट जैसा दिखाई देता है यह इसकी एक खास विशेषता है कई बार एडल्ट्स में यह एचआईवी का मार्कर भी हो सकता है इसलिए अगर सिमटम्स दिखाई दे तो एचआईवी इंफेक्शन चेक करवाना जरूरी होगा इसका इनक्यूबेशन पीरियड एक हफ्ते से लेकर छ महीने तक हो सकता है मोलुस्कम कंटे जिसम के उपचार में शार्प इंस्ट्रूमेंट से उसे क्यूरेट किया जाता है निकाला जाता है या जरूरत पड़ने पर
(6:17:06) क्रायोथेरेपी या लेजर काम भी इस्तेमाल कर सकते हैं कभी-कभी फिनोल के लोकल एप्लीकेशन से भी उसे दूर किया जाता है आखिर में जो वायरल एसटीटीआई की मैं बात करने जा रहा हूं वह है एचआईवी इंफेक्शन जिसको ह्यूमन इम्यून डेफिशियेंसी नाम खुद बताता है कि यह वायरस आपकी इम्यून सिस्टम को कमजोर कर देता है ताकि दूसरे इंफेक्शन आपको बड़ी आसानी से अटैक कर सके इसके सिमम शुरुआत में कुछ भी नहीं होते काफी समय के बाद अचानक वेट लॉस माने वजन गिरने की शुरुआत हो जाती है करीबन आपका फिलहाल वजन से 10 का वजन और गिर जाता है
(6:17:52) बिना कारण आपको हफ्तों या महीनों तक जुलाब होते रहते हैं और बिना कारण आपको लंबे समय तक बुखार आता जाता रहता है या बुखार बना रहता है हैरत की बात यह है कि इंफेक्शन लगने के बाद आपको कोई सिम्टम्स नहीं होते और इनक्यूबेशन पीरियड भी करीबन 90 दिन तक का होता है और उसके बाद ही उसके आसार खून में दिखाई देते हैं माने यू बिकम सिरो पॉजिटिव ओनली आफ्टर 90 डेज बीमारी की पूरी क्यर होना मुमकिन नहीं है यह लाइलाज है लेकिन एडवांस मेडिकल साइंस से इसे लंबे वक्त तक मैनेज करना मुमकिन हो गया है
(6:18:37) एचआईवी की विस्तृत जानकारी हम एक अलग लेक्चर में करेंगे अभी हम बात करते हैं कैंडिया सिस यानी फंगल इंफेक्शन की अक्सर इसमें लाल रंग का इरप्शन बेहद खुजली के साथ दिखाई देता है इरप्शन के इर्दगिर्द बर्निंग जलन और पिशाब के वक्त भी कभी कभार जलन हो सकती है साथ में कभी कभ कर्डी वाइट डिस्चार्ज भी हो सकता है इसके साथ प्राइवेट पार्ट की चमड़ी जब पीछे लेते हैं तो एक सूजन की वजह से उसमें दिक्कत हो सकती है जिसे बनो प्रोस्टा इटिस कहते हैं इनक्यूबेशन पीरियड करीबन एक हफ्ते से कम
(6:19:24) होता है इसका इलाज एंटीफंगल दवाइयों से होता है कॉट्री मेजोल और निट का लोकल एप्लीकेशन काफी कारगर होता है अगर यह समस्या बार-बार हो तो ओरली ट्रा कोनजल की गोली का इस्तेमाल किया जाता है अभी हम बात करने जा रहे हैं प्यूबिक लाइज यानी जू की वह अक्सर प्यूबिक हेर्स में पाई जाती कई बार आप अपनी आंखों से इसका देख सकते हैं अरे कभी-कभी तो जू के अंडे भी दिखाई देते हैं आमतौर पर इलाज के लिए ओवर द काउंटर जू के शैंपू उपलब्ध है जिसमें 1 पर परमेन या पैथीन होता है अगर यह कारगर
(6:20:14) ना हो तो आइवर मेक्टिन की खाने की गोलियां और मेलाथियान स्कवीज आमतौर पर इसमें बेहद खुजली होती है और रात को खुजली और ज्यादा बढ़ जाती है यह स्किन टू स्किन कांटेक्ट से या सेक्सुअल कांटेक्ट से फैलता है खास तौर पर उंगलियों के बीच में और जननांगों पर इसके पेपस पाए जाते हैं इसका इनक्यूबेशन पीरियड करीबन एक महीना होता है ट्रीटमेंट में रात को पूरे बदन पे माने गले से लेकर पांव तक कामा बेंजीन हेक्सा क्लोराइड या परमेन का लोशन
(6:21:05) लगाया जाता है यह काफी कारगर होता है खुजली कम करने के लिए एंटी हिस्टामिन का इस्तेमाल किया जाता है एक और पैरासाइटिक इंफेक्शन है जिसे ट्राइक मोनिया सिस कहते हैं स्त्रियों में योनि मार्ग में पीले रंग का बदबू भरा माने फाउल स्मेलिंग डिस्चार्ज होता है और साथ में खुजली भी चलती है इसका इनक्यूबेशन पीरियड एक से चार हफ्ते तक होता है उसका इलाज मेट्रोनेट सोल और उस टाइप की दूसरी दवाओं से आसानी से हो जाता है कुछ केसेस ऐसे भी होते हैं जिसमें एसटीटीआई के लक्षण बिल्कुल मौजूद नहीं होते माने दे मे नॉट बी नोटिसेबल एट ऑल
(6:21:51) मिसाल के तौर पर सिफिलिस का जो अल्सर होता है उसमें बिल्कुल दर्द नहीं होता है और कई बार बिगर इलाज किए यह चला भी जाता है उसी तरह से हर पिस जेनिटस में कुछ स्त्रियों में कोई भी सिम्टम्स दिखाई नहीं देते और उसका डायग्नोसिस एक डॉक्टर के लिए भी सचमुच एक चुनौती बन जाता है एक सवाल यह पैदा होता है कि क्या हम ब्लड टेस्ट के जरिए सब एसटीटीआई का निदान कर सकते हैं सब डायग्नोसिस करना मुमकिन नहीं है हां सिफिलिस का डायग्नोसिस वीडीआरएल टेस्ट से हो सकता है दूसरा भी एक टेस्ट है जिसका नाम है टीपीएचए वो ज्यादा सेंसिटिव साथ
(6:22:37) में कई बार एक दिमाग में यह भी प्रश्न आता है कि मैं एसटीआईआईआईजी डॉक्टर से करवाना बिल्कुल आवश है मिसाल के तौर पर कई बार अगर किसी व्यक्ति को नोरिया हो गया उसे ट्रीटमेंट नहीं करवाई तो यह गनोर की समस्या अंडकोष के अंदर एक सूजन और दर्द पैदा कर सकती है और एपिड माइटिस के रूप में उभर सकती है और यह इंफेक्शन पूरा यूरिनरी ट्रैक्ट तक पहुंच सकता है उसी तरह से अगर आपने सिफिलिस को इग्नोर कर
(6:23:23) दिया और इसका इलाज करवाना भूल गए तो यह बीमारी आगे बढ़कर आपके हार्ट और ब्रेन पर असर कर सकती है इतना ही नहीं कई बार यह जानलेवा भी साबित हो सकती है इसलिए बेहतर यही होगा कि अगर बीमारी का निदान हो गया डायग्नोसिस हो गया तो इलाज तुरंत करवा देना चाहिए यहां पर कई बार लोग देसी उपचार करवाते हैं कुछ बुजुर्गों और दोस्तों द्वारा बताया हो इलाज का करवाते हैं अक्सर यह बीमारी ठीक होने की बजाय उसमें ज्यादा मुश्किले पैदा हो सकती है यह एसआई की बीमारी के साथ इस तरह से खिलवाड़ करना बिल्कुल सेफ नहीं बेहतर यही
(6:24:10) होगा कि किसी क्वालिफाइड डॉक्टर के साथ मिलके उसका तुरंत इलाज करवाया जाए अब तक हमने एसटीटीआई की टाइप उसके कारण उसके सिमटम्स और इलाज के बारे में बात की अब हम जो बात करने जा रहे हैं वह है एसटीआईधाम यह कहावत है कि प्रिवेंशन इज बेटर देन क्यर माने एसटीआईधाम एसटीआईएसफाया और एसटीआईआईआईजी
(6:25:25) के जितने ज्यादा पार्टनर से आप सहवास करोगे एसटीटीआई के चांसेस उतने ही ज्यादा बढ़ते रहेंगे अगर समझो यह मुमकिन नहीं है तो बेहतर यही होगा कि किसी भी पार्टनर के साथ आप सहवास करो तो कंडोम का इस्तेमाल अवश्य करें यह ज्यादातर 99.9 पर सेफ्टी प्रदान करता है कंडोम सिर्फ एसटीटीआई से सुरक्षा प्रदान करता है इतना ही नहीं वो साथ-साथ अनवांटेड प्रेगनेंसी भी प्रिवेंट करता है माने एक कंकर से हम दो पंछी मार सकते हैं कंडोम के बारे में डिटेल डिस्कशन हम एक और लेक्चर में करने वाले हैं लेकिन फिर भी कुछ पॉइंट्स में जरूर बताना
(6:26:09) चाहूंगा मिसाल के तौर पर आप ऐसा कंडोम चूज कीजिए जो आपको बराबर फिट बैठता हो और सहवास के दौरान उसके फिसलने के चांसेस कम हो इससे आपको एसटीआईओ के चांसेस बिल्कुल कम हो जाते साथ ही साथ कंडोम पर आप ऑयल या ऑयल बेस लुब्रिकेंट ना लगाए क्योंकि इससे कंडोम फटने के चांसेस ज्यादा हो जाते हैं ज्यादातर कंडोम्स प्री लुब्रिकेटेड आते हैं फिर भी अगर आपको लुब्रिकेशन लगाना है तो वाटर बेस जेली या लुब्रिकेंट का इस्तेमाल कीजिए कंडोम का इस्तेमाल सेक्सुअल इंटरकोर्स के दौरान ओरल सेक्स के दौरान और एनल सेक्स के दौरान हर वक्त
(6:26:57) अवश्य कीजिएगा इससे एसटीआईओ के चांसेस बिल्कुल कम हो जाते हैं यह सब चीजें सेक्स एजुकेशन का एक हिस्सा है कंडोम कैसे इस्तेमाल करना क्यों इस्तेमाल करना और कब इस्तेमाल करना इसकी जानकारी सेक्स एजुकेशन में दी जाती है एक जमाने में महर्षि वादसा ने कहा था कि यह ज्ञान यह सेक्स एजुकेशन प्राग यवन है यानी यवन के पहले दे देना चाहिए इत्तफाक की बात यह है कि आज वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन भी यही कह रहा है कि यह ज्ञान यवन प्रवेश से पहले दे देना चाहिए मिसाल के तौर पर नाइंथ या 10थ के क्लास
(6:27:45) में ताकि वह सेक्स की गलतफहमियां से दूर रह सके और उनके लिए सही क्या है और गलत क्या है उसका फैसला होशियारी से कर सकते उम्र के हर पड़ाव पर यह ज्ञान जरूरी है ताकि किसी भी सिचुएशन में वह अपनी काम इच्छा को सही तरीके से चैनला इज कर सके अक्सर एक पेचीदा सवाल कई बार लोग पूछते हैं कि डॉक्टर क्या फेथ फुल पार्टनर्स में भी एसटीआईओ आप सिर्फ यही होगा कि ज्यादातर पॉसिबल है मिसाल के तौर पर अगर आप आपके पार्टनर के साथ वफादार है फिर भी आपको
(6:28:32) दूसरे माध्यमों से जैसे कि एक दूषित कंटेम सिरिंज से एचआईवी हेपेटाइटिस और सिफलिस जैसे एचटीआईबी कारणवश आपको ब्लड ट्रांसफ्यूजन की जरूरत पड़ी और ब्लड ट्रांसफ्यूजन में कोई ऐसी व्यक्ति का ब्लड आ गया जो एसआई से पीड़ित थी तो भी एसआई हो सकता है बेहतर यही होगा कि ऐसे सिचुएशन में आप कोई रेपुटेड लेबोरेटरी में जाए जहां डिस्पोजेबल सिरिंज और नीडल्स इस्तेमाल होती हु वहां ही टेस्टिंग करवाए ताकि सेफ्टी आपकी बरकरार रहे साथ ही साथ अगर आपको ब्लड ट्रांसफ्यूजन की जरूरत
(6:29:18) पड़े तो आप सही ब्लड बैंक से ही ब्लड ले अगर आप यह सूचनाएं सही तरीके से फॉलो करेंगे तो एसटीटीआई इंफेक्शन से अमूमन पूरी तरह से बच सके अभी हम बात करते हैं एसटीआईआईआईजी रहती है ये सिर्फ आपकी सेफ्टी के लिए नहीं आपके पार्टनर की सेफ्टी के लिए भी खास कर के जब कोई एचआईवी और हर्पिस इंफेक्शन से
(6:30:04) पीड़ित हो जाता है तो उसे जीवन भर अपने पार्टनर के साथ सेक्सुअल लाइफ में कुछ प्रिकॉशन लेना आवश्यक हो जाता है मिसाल के तौर पर कंडोम का उपयोग हर सहवास के वक्त अवश्य करना चाहिए चाहे वो वजाइनल सेक्स हो ओरल सेक्स हो या एनल सेक्स क्योंकि ओरल और एनल सेक्स में बॉडी फ्लूइड का आदान प्रदान होने की संभावना ज्यादा रहती है इसके लिए चांसेस ऑफ एसटीटीआई और बढ़ जाते हैं कुछ एसटीआईओ प्रवेश करने में मुश्किलात आ सकती है खास करके गोनोरिया और सेंकड में
(6:30:52) स्त्रियों में भी अगर वह हर्प से पीड़ित है तो कामेच्छा में बदलाव नहीं आता लेकिन योनि प्रवेश के दौरान कभी कभ दर्द का एहसास हो सकता है और दर्द की वजह से कामेच्छा कम हो जाती है और दोबारा सहवास करने का दिल नहीं होता कुछ स्त्रियों में यह फिक्र बनी रहती है कि क्या एसआई हेरेडिटरी या आनुवंशिक तो नहीं हकीकत में एसआई वंशा नहीं होते लेकिन अगर जन्म देते वक्त स्त्री को एक्टिव इंफेक्शन है तो वह इंफेक्शन जन्म देते वक्त बच्चे को ट्रांसमिट हो सकता है मिसाल के तौर पर अगर किसी स्त्री को डिलीवरी के वक्त नोरिया की
(6:31:36) बीमारी है तो यह बीमारी बच्चे में भी आ सकती है बच्चे का सही और सावधानी से इलाज करना आवश्यक बन जाता है क्योंकि यह एसटीटीआई की वजह से कभी-कभी बच्चे में खतरनाक परिणाम भी आ सकते हैं उसी तरह से जन्म देते वक्त अगर स्त्री हर्पिस से पीड़ित है तो यह इंफेक्शन बच्चे में ट्रांसमिट हो सकता है और यह बीमारी कभी-कभी जानलेवा भी साबित हो सकती है क्योंकि उस वक्त बच्चे में कोई इम्युनिटी तो मौजूद होती नहीं मतलब साफ है कि बाय चांस जन्म के समय अगर आप किसी एसटीआईओ के आंकड़ों के मुताबिक 2016 में
(6:32:25) में करीबन 10 लाख गर्भवती महिलाएं सिफिलिस से पीड़ित थी जिसकी वजह से करीबन दो लाख बच्चे मृत पैदा हुए थे इसलिए प्रेगनेंसी के दौरान मां और बच्चे दोनों की देखभाल बहुत ही महत्वपूर्ण है बेहतर यही होगा कि हर गर्भवती महिला अपने नजदीकी हेल्थ केयर सेंटर में जाए और कोई समस्या हो तो उसका निदान करवाके इलाज करवाए यह सावधानी बरतने से आप एक खुशहाल और कॉम्प्लिकेशन बगैर बच्चे को जन्म दे सकेगी और सुखी मातृत्व का अनुभव भी कर सके हां यह बात सही है कि एसटीटीआई से कुछ
(6:33:11) स्टिग्मा अटैच है इसलिए इसका निदान और इलाज करवाना कभी-कभी मुश्किल बन जाता है कई बार डॉक्टर के पास जाने में भी लोग शर्म महसूस करते हैं लेकिन ध्यान रहे अमूमन डॉक्टर्स के साथ जो भी बातचीत हो जाती है वह गोपनीय रहती है और अक्सर जो लोग एससीआई की ट्रीटमेंट करते हैं वह स्किन स्पेशलिस्ट होते हैं तो जब आप स्किन स्पेशलिस्ट डॉक्टर के पास जाते हैं तो लोगों की नजर में यह जरूरी नहीं कि आप सिर्फ एसटीटीआई के लिए ही जा रहे हो आप अपने स्किन प्रॉब्लम के लिए भी उनको कंसल्ट कर सकते हो बेहतर यही होगा कि इलाज से परहेज ना करें साथ में यह भी ध्यान
(6:33:52) रखें कि जो भी दवाइयां मेंशन है वह आपके डॉक्टर को कंसल्ट करने के बाद ही ले सेल्फ मेडिकेशन हरगिज ना करें कौन सी दवाई कितने डोज में कब लेनी है कितने समय तक लेनी है वह सब आपके डॉक्टर ही बता सकते हैं कई बार लोगों को ऐसा लगता है कि एक बार हमारा एसटीआईआईआईजी सेफ सेक्स प्रैक्टिस करना बहुत ही आवश्यक कुछ आम सवाल आते हैं जिसे एफ क्यूस कहते हैं अक्सर एक सवाल लोग पूछते हैं क्या मुझे सार्वजनिक शौचालय का उपयोग करने से
(6:34:38) एसटीटीआई हो सकता है बिल्कुल नहीं दूसरा एक कॉमन क्वेश्चन लोग पूछते हैं क्या एक साथ एक से अधिक एसटीआईएसफाया उसी तरह से यदि आपको एक एसटी आई है और आपके पार्टनर को दूसरा है तो दोनों एक दूसरे को अपने अपने एसटी आई से इफेक्ट कर सकते हैं ऑल रिलीजस स्क्रिप्चर टीच यू टू लव ईच अदर बट ओनली कामा सूत्र टीचस यू हाउ टू माने हर एक धर्म की किताब कहती है कि आप प्यार करो एक दूसरे से प्यार करो लेकिन कामसूत्र एक ही किताब है ऐसी है जो बताती
(6:35:26) है कैसे कामसूत्र में ह्यूमन सेक्सुअलिटी के दोनों पहलू का वर्णन किया है आर्ट एज वेल एस साइंस माने सेक्स एक कला भी है और एक विज्ञान भी कामसूत्र के रचयिता महर्षि वात्सायन कौन थे और कहां के रहने वाले थे और कब उन्होंने कामसूत्र लिखा उस पर अब तक अंधेरे के बादल छाए हुए थे महर्षि वात्सायन वत्स गोत्र के थे और उनके कुल का नाम था वात्सायन और उनका नाम था मलनाथ हम बात करते हैं कि महर्षि वात्सायन
(6:36:14) कहां के रहने वाले थे इस पर लोगों ने अलग-अलग अभिप्राय दिए हैं सर रिचर्ड बर्टन अरबत नोट और मुखराज आनंद का यह मानना था कि वह बनारस के रहने वाले थे हरिप्रसाद शास्त्री ने बताया कि वह पाटली पुत्र के थे डॉक्टर बी एन बासू ने बताया कि वह उज्जैन के थे प्रोफेसर एच सी चकले दार का यह मानना था कि महर्षि बादसा नगरकर रिपब्लिक जयपुर स्टेट के रहने वाले थे हकीकत में वात्सायन लाट प्रदेश साउथ स्वेस गुजरात के रहने वाले थे और उस शहर का नाम नगरकर जिसे आज लोग नगरा कहते हैं जिस तरह से पहले लोग
(6:37:05) मोडे रक को आज मोढेरा कहते हैं जैसे कि पहले लोग गोदर को आज गोधरा कहते हैं उसी तरह से नगर को आज नगरा कहते हैं प्रोफेसर चकले दार ने बताया कि वात्सायन नगरकर हने वाले थे वह नगरकुरनूल जयपुर वाला नगर रिपब्लिकन स्टेट था लेकिन उनकी यह फम बिलीफ थी कि यह नगरकर स्टेट होना चाहिए और रिपब्लिकन नहीं जब गुजरात स्टेट में नगर का एक्सक वेशन हुआ तो वहां से मोनार्किकल स्टेट के कॉइंस और दान पत्र मिले जो रिप्रेजेंट करता है
(6:37:51) कि वह नगर एक मोनार्क स्टेट था प्रोफेसर चकले दार के समय में गुजरात वाले नगर का उत्खनन माने एक्सक वेशन हुआ ही नहीं था नगर माने आज का नगरा वह खंभात से करीबन 3 किलोमीटर दूर जिसे आज लोग कैंबे तालुका कहते हैं और जो खेड़ा जिला ट इज कैरा डिस्ट्रिक्ट साउथ वेस्ट गुजरात में है हकीकत में वात्सायन ने इस नगर का उल्लेख लेख अपने काम सूत्र में भी किया है बादशाह ने नागरिक शब्द का प्रयोग करते वक्त नगरकर के निवासियों का वर्णन किया है लेकिन अन्य लेखकों ने नागरकर्नूल
(6:38:55) के शहर में रहने वालों का उल्लेख काफी डिटेल्स में किया है उनके प्रेडिसेसर बा भव्य वह भी लाट प्रदेश के माने वेस्ट गुजरात के रहने वाले थे ऋषि बादशाह ने कामसूत्र कब लिखा देश विदेश के स्कॉलर्स और इतिहासकारों का मानना है कि ऋषि बादशाह ने कामसूत्र 400 बीसी से लेकर सि एडी तक माने 1000 साल के पीरियड में लिखा होगा डॉक्टर उमेंद्र वर्मा का कहना है कि उन्होंने 400 बीसी में लिखा सर रिचर्ड बर्टन और मुल्क आज आनंद बताते हैं कि कामसूत्र फर्स्ट टू सिक्स
(6:39:43) सेंचुरी एडी में लिखा होगा प्रोफेसर एच सी चकले दार का मानना था कि उन्होंने कामसूत्र थर्ड सेंचुरी एडी में लिखा गया है डॉक्टर बी एन बासू फोथ सेंचुरी कहते हैं प्रोफेसर ए बी कित फोर्थ और फिथ सेंचुरी कहते हैं प्रोफेसर आर स मजमुदार फोर्थ टू फिथ सेंचुरी एडी कहते हैं हमारा माने डॉक्टर रवि कोठारी और डॉक्टर प्रकाश कोठारी का यह मानना है कि ऋषि वात्सायन ने कामसूत्र 351 से 375 एडी के बीच में ही लिखा होगा एमिनेंट स्कॉलर्स और हिस्टोरियंस ने दिए हुए 1000 साल के पीरियड को हमने सिर्फ
(6:40:30) 25 साल तक सीमित किया है इस पीरियड की रिसर्च के पीछे हमारे पास इनफ एविडेंसेस है मिसाल के तौर पर लिटरेरी साहित्यिक एविडेंस है हिस्टोरिकल ऐतिहासिक एविडेंस है एपीग्राफिक एविडेंसेस है निमेट माने सिक्का शास्त्र का एविडेंस है और आर्कियोलॉजिकल एविडेंसेस भी है और इस सब की वजह से हम यह नतीजे पर पहुंचे हैं कि कामसूत्र 351 एडी से 375 एडी के बीच में ही लिखा गया है जो एविडेंसेस मैं आपको बताने वाला हूं यह विश्व स्तर पर एक लैंडमार्क रिसर्च है पहले मैं लिटरेरी एविडेंस की बात कर
(6:41:16) रहा हूं तंत्र खय का जो पंचतंत्र का कश्मीरी वर्जन है जो 300 एडी में लिखा गया था उसमें महर्षि वात्सायन का जिक्र नहीं है उसी का पहलवी वर्जन जो 550 एडी में लिखा गया था उसकी इंट्रोडक्शन में ही ऋषि वात्सायन का नाम है इसका मतलब साफ है कि 300 एडी से 550 एडी यानी यह 250 साल के पीरियड के बीच में ही कामसूत्र लिखा गया है अभी मैं आपको हिस्टोरिकल एविडेंस की बात कर रहा हूं ऋषि वात्सायन ने खुद कामसूत्र में कुछ
(6:42:03) राज घराने के सेक्स स्कैंडल्स का जिक्र किया है खास करके कुंतल सात करनी और आभीर कोट राजा जिन्होंने फर्स्ट सेंचुरी एडी और थर्ड सेंचुरी एडी में राज किया था उसका मतलब यह हुआ कि कामसूत्र थर्ड सेंचुरी एडी के बाद ही लिखा गया है मतलब कि फोर्थ सेंचुरी एडी में ऋषि बादशाह ने खुद कामसूत्र में वत्स गुल्म स्टेट का जिक्र किया है और जिसका फॉर्मेशन ही राजा सर्व सेन पहले ने 330 एडी से 355 एडी में किया उसका मतलब स्वाभाविक है कि उसके बाद ही कामसूत्र लिखा गया है महाकवि
(6:42:47) बास जो 300 एडी में हो गए उनका मशहूर ड्रामा आभ मरक उसमें बाव का जिक्र है बाव वात्सायन के प्रेडिसेसर थे लेकिन वात्सायन का जिक्र नहीं है उसके बाद महाकवि कालिदास जो 376 से 413 में चंद्रगुप्त दूसरे माने विक्रमादित्य के समय में हुए थे उन्होंने वादसा और उसके काम का जिक्र किया है इससे यह तय हो जाता है कि कामसूत्र लेटर हाफ ऑफ द फोर्थ सेंचुरी में ही लिखा गया है मेरे पास और भी ज्यादा डिटेल्स है लेकिन इससे काफी क्लियर हो जाता है कि ऋषि
(6:43:33) बादशाह ने कामसूत्र 351 से 375 एडी के दौरान ही लिखा है कई बार सवाल यह उत्पन्न हो सकता है कि दूसरे लोग यह नतीजे पर क्यों नहीं पहुंचे वजह उसकी यह है कि शायद कामसूत्र या यशोधर लिखित जय मंगला टीका जो कि संस्कृत में है उसका ठीक से अध्ययन नहीं हुआ और दूसरा जो खास मुद्दा मुझे लगता है वह यह है कि उस वक्त गुजरात के नगरा का उत्खनन ही नहीं हुआ था अभी हम कामसूत्र ग्रंथ के बारे में बात करते हैं कि कामसूत्र की रचना कैसे हुई वह जानना
(6:44:19) बिल्कुल जरूरी है शास्त्र ऐसा कहता है कि सबसे पहले ब बमा प्रजापति ने एक लाख अध्यायों में जीवन तत्व के लिए धर्म अर्थ और काम की रचना की मनु स्वयंभू के पुत्र ने धर्म को अलग करके मनुस्मृति की रचना की उसी तरह से बृहस्पति ने अर्थशास्त्र की रचना की और नंदी जो महादेव के अनुचर थे उन्होंने 1000 अध्यायों में कामशास्त्र की र चना की श्वेत केतु ऋषि उद्दालक के पुत्र ने उसे 500 अध्याय में सीमित किया इसको फिर से ब्र ऋषि के पुत्र
(6:45:08) बाव जो लाट प्रदेश वेस्टर्न गुजरात के थे उन्होंने 150 अध्याय में सीमित किया और इस शास्त्र को सात अधिकरण में विभाजित किया इन सात अधिकरण को सात एक्सपर्ट ने फिर से अपना एक्सपर्ट टच दिया उसके बाद आखिर में ऋषि वाद साय ने अपने अभिप्राय के साथ इसे फिर से संपादित किया काम सूत्र में सात अधिकरण है 36 अध्याय है 64 प्रकरण है और 1250 सूत्र में संपादित किया गया है कामसूत्र ग्रंथ का नाम लेते ही लोगों के दिमाग में पहला ख्याल आता है कि एक
(6:45:53) मात्र सेक्सुअल पोजीशन की किताब है लेकिन ऐसा नहीं है कामसूत्र में सिर्फ सेक्सुअल पोजीशन का डिस्क्रिप्शन नहीं है बल्कि वह पूरे काम सूत्र का एक छोटा सा हिस्सा है हमारी हिंदू फिलोसोफी में धर्म अर्थ काम और मोक्ष यह चार पुरुषार्थ का जिक्र किया है किंतु काम सूत्र में सिर्फ धर्म अर्थ और काम की बात करता है वह मोक्ष की बात नहीं करता काम सूत्र के पहले अध्याय का पहला सूत्र है धर्मार्थ कामे भयो नव माने धर्म अर्थ कामे भयो नव मतलब कि धर्म अर्थ और काम को नमन करता हूं ऋषि बादशाह
(6:46:44) ने काम सूत्र में जो कुछ लिखा है उसमें कुछ बातें सचमुच अद्भुत है जिसकी हम जरूर चर्चा करेंगे मुझे देश विदेश से आज भी कामसूत्र पर लेक्चर देने के लिए बुलाया जाता है कामसूत्र की पॉपुलर इतनी है कि जितने भी देशों में छपी है वहां सब जगह बेस्ट सेलर बनी है अक्सर सवाल पैदा होता है कि सेक्स एजुकेशन की जरूरत मानव को ही क्यों पशु पक्षियों में क्यों नहीं पशु पक्षी सिर्फ प्रोक्रिएशन यानी प्रजनन के लिए सहवास करते हैं लेकिन इंसान रिक्रिएशन और प्रोक्रिएशन माने आनंद और प्रजनन दोनों के
(6:47:30) लिए सहवास करते हैं पशु पक्षी कुछ ऋतु में ही सहवास करते हैं इंसान सभी ऋतुओं में सहवास करते पशु पक्षी जब जोश में आ जाते हैं तो किसी के साथ भी सहवास कर लेते हैं इंसान में कोड ऑफ कंडक्ट रहता है मैरेज जैसा एक इंस्टिट्यूट रहता है उसके दायरे में रहकर ही सब कुछ करना पड़ता है इसके लिए सेक्स एजुकेशन इंसान में अति आवश्यक है कामसूत्र पुराना जरूर है लेकिन इसमें नयापन भी कम नहीं देखिएगा कामसूत्र और वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन का सेक्स एजुकेशन का
(6:48:18) प्रोग्राम सेक्स एजुकेशन किसे और कब देना चाहिए ऋषि वात्सायन का कहना है कि यह ज्ञान सिर्फ पुरुषों को ही नहीं औरतों को भी देना चाहिए और यह ज्ञान प्राग यौवना माने प्री एडोलसेंट यर्स में ही देना चाहिए वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन डब्ल्यूएचओ बी आज की तारीख में यही कह रहा है कि यह ज्ञान प्री एडोले सेंट माने युवावस्था के पहले ही देना चाहिए क्योंकि उस उम्र में बदन में हॉर्मोन ज्यादा रहते हैं ज्यादा हॉर्मोंस की वजह से कामेच्छा ज्यादा होती है और कामेच्छा ज्यादा होगी तो काम विषयक संबंध भी ज्यादा बनेंगे और
(6:49:05) अगर काम विषयक संबंध ज्यादा बनेंगे तो स्वाभाविक है कि एसटीआईएसफाया अनवांटेड प्रेगनेंसी की समस्या से काफी राहत मिल सकती है माने जो बात ऋषि बादशाह ने 1600 साल पहले कही थी वही बात आज वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन दोहरा रहा है ऋषि बाद सायन ने इसमें और भी कहा है कि यह ज्ञान युवावस्था से पहले सिर्फ लड़कों को ही नहीं बल्कि लड़कियों को भी दे देना चाहिए और बेहतर है कि यह ज्ञान वह शादी से पहले जब वह अपने पिता के
(6:49:53) घर में हो तभी ले ले अगर उसकी शादी हो गई हो तो यह ज्ञान उसको शादी के बाद भी लेना चाहिए जैसे बाकी विद्याओं का ज्ञान आवश्यक माना जाता है वैसे ही काम को भी उन्होंने विद्या का दर्जा दिया है विद्या का स्थान दिया है और यह विद्या प्राप्त करना जरूरी समझा है यह बात हुई सेक्स एजुकेशन प्रोग्राम और कामसूत्र की अभी हम कामसूत्र और मास्टर्स एंड जॉनसन की ट्रीटमेंट प्रोग्राम के बारे में बात करेंगे आपको यह सुनक हैरत होगी कि दोनों में इतना साम्य कैसे
(6:50:40) है कामसूत्र और मास्टर स जॉनसन सेंसेट फोकस वात्सायन अपने इस सूत्र में कहते हैं कि शादी के बाद पहले तीन दिन सहवास ना करें लेकिन पत्नी के साथ बातचीत करें प्रेम प्रदर्शित करें उसे जानने की उसे पहचानने की कोशिश करें उसके हृदय में अपना स्थान अपना विश्वास स्थापित करें लेकिन पेनिट्रेटिव सेक्स अवॉइड करें अमेरिका के विश्व विख्यात सेक्स थेरेपिस्ट मास्टर एंड जॉनसन हेलन सिंगर कप्लान और विश्व के दूसरे सेक्स थेरेपिस्ट भी अपनी सेक्स थेरेपी की ट्रीटमेंट प्रोग्राम की
(6:51:26) शुरुआत में पेनिट्रेटिव सेक्स यानी इंटरकोस पर प्रतिबंध लगाते हैं और एक दूसरे को जानने की और पहचानने की गतिविधियां एडवाइस करते हैं स्पर्श कहां और कैसे करना एक दूसरे को बात करके बताना एक दूसरे की पसंद और नापसंद का एहसास कराना एक दूसरे में विश्वास करना यह शुरुआत के दिनों की ट्रीटमेंट की कार्य पद्धति रहती है कभी-कभी तो ऐसा महसूस होता है कि ऋषि बादसा की जनरल एडवाइज ही मास्टर्स एंड जॉनसन की शुरुआत की ट्रीटमेंट प्रोग्राम की कार्य पद्धति बन गई है आगे कहते हैं
(6:52:11) कामसूत्र और मास्टर्स एंड जॉनसन का नॉन जेनिटल सेंसेट फोकस वान कहते हैं कि शुरुआत में सहवास से दूर रहे और चुंबन आलिंगन आदि में कोई जबरदस्ती ना करें अगर आलिंगन करें तो भी वह थोड़े वक्त के लिए और अधिक परिचय ना होने की वजह से यह आलिंगन यह स्पर्श ऊपरी अंगों तक ही सीमित रखे माने सीने तक ब्रेस्ट आदि तक सीमित रखे नाभि के नीचे आगे ना बढ़े मास्टर्स एंड जॉनसन की ट्रीटमेंट प्रोग्राम की शुरुआत में सहवास मनाए और सिर्फ आलिंगन और स्पर्श ऊपरी हिस्सों पर
(6:52:57) ही केंद्रित करने का बताया है और अपने जेनिटल्स को टच ना करने का सुझाव दिया है यहां क्लियर बताया जाता है कि वह फोर पले सिर्फ नॉन जेनिटल फोर पले होना चाहिए माने स्पर्श मात्र सीना और उसके इर्दगिर्द हिस्सों तक ही सीमित होना चाहिए नाभि के नीचे नहीं मास्टर्स एंड जॉनसन की शुरुआत की ट्रीटमेंट पद्धति जिसे नॉन जेनिटल सेंसेट फोकस कहते हैं वह बिल्कुल वात्सायन के कन्या सापुता इस तीसरे अधिकरण के सूत्रा अनुसार ही है अभी हम बात करते हैं कामसूत्र और मास्टर्स एंड जॉनसन जेनिटल सेंसेट फोकस इसके बाद ऋषि बताते हैं कि जब
(6:53:46) जो से जुनून बढ़ने लगे तो आहिस्ता आहिस्ता अपने हाथ से उसके को सहला वस्त्रों पर भी हाथ फेरे और अपना हाथ सीने से लगाते हुए नीचे की तरफ आगे बढ़े और नीचे लगी हुई साड़ी की गांठ को छोड़ने की कोशिश करें और साथ में अनुरूप वार्तालाप भी करें और चुंबन और आलिंगन से भी उसको और उत्तेजित करने की कोशिश करें और नाभी के नीचे बांधी हुई साड़ी की गांठ खोले और जननांग को स्पर्श करें संभोग के पूर्व की जो क्रियाएं हैं वो करें मास्टर्स एंड जॉनसन अपनी ट्रीटमेंट प्रोग्राम में नॉन जेनिटल
(6:54:33) फोरप्ले के बाद ब्रेस्ट आदि पार्ट को सहलाने के बाद जब आगे बढ़ते हैं तब वह दूसरे दिन जेनिटल फोरप्ले माने जननांगों को स्पर्श करने का आदेश देते हैं और उस तरह से उत्तेजना बढ़ाने की सलाह देते हैं कई बार मुझे ऐसा लगता है कि मास्टर्स एंड जॉनसन की ट्रीटमेंट प्रोग्राम की जड़ में मुझे हर जगह महर्षि वादसा नजर आते हैं मास्टर्स एंड जॉनसन की सनसेट फोकस एक्सरसाइज और कप्लान का प्लेजरिंग सेशन वात्सायन के आदेश के अनुसार बनाया हो ऐसा आभास होता है और हम आगे बात करते हैं
(6:55:19) कामसूत्र और शिगर स् कलन ऋषि बात न कहते हैं कि अगर पुरुष जल्दी स्खलित हो जाता है जिस वजह से कई बार स्त्री मायूस हो जाती है तो यह अनुराग पुनर स्थापित करने के लिए संभोग से पहले अपनी उंगली से स्त्री को द्रवित करें और उसके बाद ही सहवास की शुरुआत करें कई बार शीघ्र स्खलन जिसे अर्ली ऑर्गेजम या प्रीमच इजेकुलेशन कहते हैं उसका इलाज मुश्किल होता है या तो इलाज में काफी समय लग जाता है उस दौरान आज के सेक्स थेरेपिस्ट भी संतोष महत्व की चीज समझते हैं सिर्फ संभोग नहीं इसके लिए
(6:56:07) सहवास शुरू करने से पहले अपनी स्त्री पार्टनर को एक या दूसरी तरह से उत्तेजित करके माने ज्यादा लुब्रिकेट करके या उनको चर्म सीमा पर लाने के बाद ही पेनिट्रेटिव सेक्स यानी सहवास शुरू करने की राय देते हैं अभी हम बात करते हैं कामसूत्र और मुख मैथुन माने ओरल सेक्स की ऋषि वातन कहते हैं कि अगर किसी पुरुष में उम्र की वजह से या मोटापा की वजह से या थकान की वजह से इंद्रिय में शिथिलता आ गई हो तो कई बार मुख मैथु से वह उत्तेजना फिर से प्राप्त कर सकते हैं आज के जमाने में भी ओरल यानी मुख
(6:56:54) मैथु उत्तेजना प्रदान करने के लिए एक बेहतरीन वेरिएशन माना गया है सेक्स थेरेपी की ट्रीटमेंट प्रोग्राम में कई बार व्यक्ति को इच्छा होती है लेकिन अगर शिस में सही तनाव नहीं आता या प्रवेश से पहले इंद्रिय शिथिल हो जाती है तो उस वक्त मुख मैथु उत्तेजना फिर से रिगेन करने में काफी सहायक हो सकता है मुख मैथु ऐसे सिचुए में एक बेहतरीन वेरिएशन माना जा सकता है अभी हम बात करते हैं कामसूत्र और हस्त मैथु ऋषि वातन कहते हैं कि कुछ पुरुषों को अगर स्त्रियां नहीं मिलती है तो वह अलग-अलग तरीके से अपनी काम इच्छा को शांत करते हैं
(6:57:43) मिसाल के तौर पर कृत्रिम योनि से स्त्रियों की बनी प्रतिमा से या हस्तमैथुन से अर्वाचीन युग में भी अगर पुरुष कोई पार्टनर ना मिले तो किसी अनजान व्यक्ति से सहवास करके कोई खतरनाक एड्स जैसी या एससीआई जैसी बीमारी या अनवांटेड प्रेगनेंसी का शिकार होने से बेहतर है कि वह हस्तमैथुन से या आर्टिफिशियल वजाइना जिसे मेल मास्टरबेटर्स कहते हैं उससे या इन्फ्लेट बल लव डॉल से जो एक पुराने जमाने की स्त्रियों की बनी प्रतिमा का नया स्वरूप है उसका सहारा लेकर अपनी कामेच्छा को शांत करें वात्सायन ने
(6:58:31) हस्त मैथुन को कामेच्छा को शांत करने का एक विकल्प बताया है कोई बीमारी नहीं और वाचीन युग का विज्ञान यह गवाही देता है कि हस्तमैथुन से कोई नुकसान नहीं होता क्योंकि जो क्रिया पुरुष का शिष्ण सहवास के दौरान योनि मार्ग में करता है वही क्रिया वह हस्तमैथुन के दौरान मुट्ठी में करता है जैसे सहवास से कोई नुकसान नहीं होता वैसे हस्तमैथुन से भी कोई नुकसान नहीं होता अभी हम बात करते हैं कामसूत्र और आफ्टर प्ले की संभोग के बाद की क्रिया की ऋषि वातन कहते हैं कि सहवास हो जाने के बाद अपने प्राइवेट पार्ट की सफाई करें
(6:59:18) पेशाब कर ले फिर जब वापस आए तो पुरुष अपने पार्टनर को आलिंगन चुंबन प्रदान करें और मीठी प्यार भरी बातें करें जो कई बार दोबारा कामेच्छा उत्पन्न करने में सहायक हो सकती है आज भी ज्यादातर डॉक्टर्स यह सलाह देते हैं कि सहवास हो जाने के बाद पेशाब कर देने से बैक्टीरियल इंफेक्शन प्रिवेंट हो सकते हैं या कम हो सकते हैं यह एक अच्छे हाइजीन का तरीका है साथ ही साथ सहवास के बाद तुरंत उठक चले जाना या पलट के सो जाना कई बार अपने पार्टनर को ऐसी फीलिंग प्रदान कर सकता है कि उसे एक
(7:00:04) ऑब्जेक्ट की तरह यूज किया जा रहा है उसका इस्तेमाल किया जा रहा है ऋषि वात्सायन ने फोर प्ले एक्टिविटी और आफ्टर प्ले एक्टिविटी दोनों को बहुत महत्व दिया है और दोनों के ऊपर कामसूत्र में अलग-अलग च लिखे कई बार लव प्ले किसेस और आलिंगन मुरझाए हुए रिस्पांसस को जगा सकती है और रिपीट परफॉर्मेंस मुमकिन भी बना सकती है अभी हम बात करते हैं कामसूत्र और कृत्रिम लिंग की आर्टिफिशियल पिनिस की ऋषि वासन कहते हैं कि किसी का शिष्ण बहुत छोटा हो या उम्र के लिहाज से या अधिक मोटापा से
(7:00:51) या थकान से अगर शिष्ण में शिथिलता आ गई हो और उस वक्त अगर वह सहवास के काबिल ना हो तो वह अपने पार्टनर को कृत्रिम लिंग से संतोष दे सकता है यह कृत्रिम लिंग सोना चांदी तांबा लोहा हाथी दांत होन माने पशुओं के सिंग से बनाए जाते हैं ऋषि वातन का कहना है कि अगर कोई स्त्री लकड़ी के बनाए हुए साधन से संतुष्ट होने वाली हो तो वह लकड़ी के साधन का प्रयोग भी कर सकती है उनका यह कहना था कि लकड़ी के कृत्रिम लिंग की साइज पुरुष के प्राइवेट पार्ट जितनी हो और उसके आगे का
(7:01:39) भाग थोड़ा रफ हो तो बेहतर है अक्सर यह माना जाता है कि महत्व की चीज संतोष है सिर्फ संभोग नहीं अगर संभोग हो तो भी वह सम भोग होना जरूरी है माने दोनों को सरीखा भोग होना जरूरी है इक्वल भोग माने दोनों को संतोष मिलना आवश्यक है अगर कोई पुरुष किसी भी वजह से सहवास नहीं कर सकता चाहे वह नामर्द हो थका हुआ हो उसका मूड ना हो तो उसे अपने पार्टनर को किसी और तरीके से भी संतोष दे देना चाहिए चाहे वह मुख मैथुन हो हस्त मैथुन हो या कृत्रिम लिख हो या आज के जमाने के वाइब्रेटर्स हो सेक्स का
(7:02:27) आनंद सिर्फ एक परफॉर्मेंस का जरिया नहीं है लेकिन दोनों पार्टनर्स के आनंद का सुख का समन्वय है अभी हम बात करते हैं बहु चर्चित जी स्पॉट की कामसूत्र और जी स्पॉट ऋषि वात्सायन का कहना है कि अगर स्त्री को जल्दी उत्तेजित करना है या सुकून देना है तो संभोग से पहले स्त्री के योनि मार्ग में अपनी उंगलियां हाथी की सूंड की तरह माने गज हस्त बना केर घुमानी चाहिए जिसकी वजह से उसे पर्याप्त गीलापन आ जाए और उसके बाद ही सहवास शुरू करना चाहिए गज हस्त का मतलब उन्होंने बताया है
(7:03:15) अनामिका और जेष्ठता माने पहली और तीसरी उंगली साथ में मिलाकर और उसके ऊपर मध्यमा माने मिडिल फिंगर रख के जो आकार बनता है उसे गज हस्त कहते हैं बेरी कमसर और वेबली पपल इन दोनों अमेरिकन वैज्ञानिकों का मानना है कि स्त्री को ज्यादा उत्तेजना प्रदान करने के लिए अगर स्त्री के योनि मार्ग के ऊपरी हिस्सों में करीबन डेढ़ इंच के इर्दगिर्द अगर उंगली फिरा जाए तो उससे उसका जोश ज्यादा बढ़ता है और एक छोटी सी टेंपररी गांठ सी उभरती है एक नोड्यूल सा उभरता है इस जगह को व जी
(7:04:02) स्पॉट कहते हैं जी स्पॉट पर उत्तेजना प्रदान करने का गज हस्त शायद बेहतरीन तरीका हो सकता है अफसोस यह है कि गज हस्त किस तरह से बनाना चाहिए उसके बारे में कामसूत्र के ज्यादातर भाषांतर कारों में एक मत नहीं है कामसूत्र के अध्ययन के बाद ऐसा लगता है कि मॉडर्न रिसर्च वात्सायन की लिखी हुई बातों को री सर्च करती है या री कन्फर्म करती है हम जो आज प्रिसक्राइब करते हैं वह शायद सदियों पहले प्री स्क्राइब हो चुका था वात्सायन
(7:04:48) का काम सूत्र प्राचीन तो है लेकिन चीन भी है यह एक ऐसा विषय है जिस पर ना केवल हमारे देश के किशोरों और युवाओं के साथ बल्कि देश की प्रगति में योगदान देने वाले प्रत्येक पुरुष और महिला के साथ चर्चा करने की आवश्यकता है आप सोच रहे होंगे कि यह कौन सा विषय है जिस पर मैं चर्चा करना चाहता हूं यह छोटा लेकिन बहुत ही इंपॉर्टेंट विषय है विषय है कंडोम हां आप पूछ सकते हैं कि कंडोम का देश की प्रगति के साथ क्या संबंध है मैं आपसे एक सीधा प्रश्न पूछता हूं कि
(7:05:34) देश की प्रगति में दो सबसे बड़ी बाधाएं कौन सी है एक तो बढ़ती हुई जनसंख्या और दूसरा है सेक्सुअली ट्रांसमिटेड इंफेक्शन एंड एचआईवी एड्स का स्प्रेड जब तक इन दोनों को नियंत्रण में नहीं लाया जाता चाहे कोई भी सरकार हो कितना भी अच्छा बजट दे वह बजट देश के विकास के लिए कारगर नहीं हो सकता क्योंकि ज्यादातर बजट यह दोनों समस्याएं सुलझाने में ही खर्च हो जाएगा कंडोम यह एक मात्र ऐसी चीज है जो बढ़ती हुई जनसंख्या और सेक्सुअली ट्रांसमिटेड इंफेक्शन को रोकने में मदद
(7:06:19) रूप हो सकती है इसलिए आज के लेक्चर में मैं मेरा ध्यान सिर्फ कंडोम पर केंद्रित करूंगा हकीकत में कंडोम क्या है कंडोम एक रुकावट डालने वाला गर्भ निरोधक है जो पुरुष के शिष्ण पर पहना जाता है या तो स्त्री के योनि मार्ग में बिठाया जाता है जिसकी वजह से स्खलन के बाद शुक्र जंतु गर्भाशय और फेलोपियन ट्यूब तक पहुंच नहीं सकते और स्त्री बीज को मिल नहीं सकते साथ ही साथ शरीर में होने वाले एक्सचेंज ऑफ बॉडी फ्लूइड को भी रोकता है जिसकी वजह से एसटीआईओ एचआईवी एड्स के
(7:07:05) इंफेक्शन को रोका जा सकता है लेकिन अफसोस की बात यह है कि भारत में कंडोम का उपयोग अपने पड़ोसी देशों की तुलना में से भी बहुत कम है मिसाल के तौर पर चीन श्रीलंका पाकिस्तान उनकी तुलना में भी ये काफी कम है यह जानना जरूरी है कि कम उपयोग की वजह क्या हो सकती है अक्सर मैं पेशेंट को य पूछता हूं कि आप कंडोम क्यों इस्तेमाल नहीं करते हैं वह कुछ कारण जरूर बताते हैं अहम कारण यह बताते हैं वो कहते हैं कि कंडोम जाड़े माने बहुत थिक होने की वजह से हमें सेंसेशन में उतनी मजा नहीं आती उतना आनंद नहीं आता माने महसूस आनंद थोड़ा बहुत कम
(7:07:52) हो जाता है प्लेजर गेट्स एंपर दूसरा कई बार कंडोम में एक अजीब तरह के रबर की या लेटेक्स की स्मेल आती है जिससे उसको इस्तेमाल करने का दिल नहीं होता तीसरा कई बार लोग बताते हैं कि विदेश के स्टैंडर्ड जैसी कंडोम की ये क्वालिटी नहीं है मुमकिन है कि कुछ और भी कारण हो सकते हैं लेकिन अगर व्यक्ति को उसके लिए सही कंडोम चुनना है तो उसे क्या-क्या चीजों पर ध्यान रखना चाहिए जवाब में मैं कहूंगा कि इसमें बहुत से पहलू है मिसाल के तौर पर कौन सी मटेरियल है उसकी थिकनेस कितनी है उसकी साइज कितनी है वह स्पर्श से हाथ लगाने से
(7:08:42) कैसी उत्तेजना प्रदान करता है वह सुगंधित है कि नहीं या तो अगर थोड़ा सा सहवास लंबा चलाना हो या डिले करना हो तो उसमें कुछ व्यवस्था है कि नहीं यह सब चीजें दिमाग में रख के आपकी जरूरियत के मुताबिक आप कंडोम सिलेक्ट कर सकते हैं जिस तरह आप कपड़े खरीदते हो तब आपका चॉइस आपकी कंफर्ट आपका कलर देख के आप डिसीजन लेते हो ठीक उसी तरह से आप अपनी चॉइस का कंडोम भी खरीद सकते हो जिसमें कंडोम की बनावट कंडोम का आकार कंडोम की पर्टिकुलर सरफेस कंडोम की फ्लेवर और अगर आप चाहो कि सहवास लंबा चलाने में सहायता
(7:09:30) कर सके उस टाइप का कंडोम चाहिए तो भी आपके चॉइस का कंडोम बाजार में आसानी से मिल सकता है हम हर एक चीज पर नजर डालते हैं पहली बात है मटेरियल ज्यादातर कंडोम दो टाइप के मटेरियल से बनते हैं एक है लेटेक्स और दूसरा है नॉन लेटेक्स नॉन लेटेक्स कंडोम्स में पॉली आइसोप्रन और पॉली यूरेन मटेरियल से बने हुए कंडोम बाजार में उपलब्ध है लेटक्स कंडोम से जब व्यक्ति सहवास करती है तब वह कंपेरटिवली थोड़ा थिक यानी जाड़ा कंडोम होता है इसलिए नेचुरल फील इतनी ज्यादा नहीं आती और कुछ
(7:10:17) लोग यह भी कंप्लेन करते हैं कि लेटेक्स कंडोम से एक अलग तरीके की स्मेल एक बदबू आती है कई बार इससे एलर्जी भी हो सकती है हमारे यहां ज्यादातर लेटेक्स कंडोम का ही इस्तेमाल होता है क्योंकि वह कंपेरटिवली बहुत सस्ते होते हैं जब भी आप लेटेक्स कंडोम यूज करते हैं तब साथ में आप ऑयल बेस लुब्रिकेंट जैसे कि वैसलीन या बेबी ऑयल का इस्तेमाल नहीं कर सकते इसके इस्तेमाल करने से कई बार कंडोम बस्ट हो सकता है फट सकता इसके लिए अगर आपको कोई लुब्रिकेंट यूज करना ही है तो वाटर बेस लुब्रिकेंट यूज कीजिएगा ऑयल बेस लुब्रिकेंट यूज करने से लेटेक्स कंडोम ब्रेक हो सकता है वह हरगिज
(7:11:06) इस्तेमाल मत कीजिएगा पॉली आइसोप्रन कंडोम लेटेक्स कंडोम से बहुत पतले होते हैं और उनकी टेंसा स्ट्रेंथ भी लेटेक्स से ज्यादा है माने लेटेक्स कंडोम से ज्यादा स्ट्रेच कर सकते हैं आप कम कंपेरटिवली वह लेटेक्स कंडोम से ज्यादा पतले होने की वजह से हीट ट्रांसफर ज्यादा होता है और नेचुरल फीलिंग का एहसास भी बेहतर होता है जिन व्यक्तियों को लेटेक्स कंडोम से एलर्जी हो वह यकीनन इसका इस्तेमाल कर सकते हैं लेटक्स कंडोम जैसी स्मेल भी पॉली आइसोप्रन कंडोम में नहीं आती अगर कोई पॉली आइसोप्रन कंडोम यूज कर रहा है तो उसे ये
(7:11:51) ध्यान में रखना चाहिए कि ऑयल बेस लुब्रिकेंट के बजाय उसे वाटर बेज या सिलिकॉन बेज लुब्रिकेंट ही यूज करना चाहिए तीसरी टाइप का जो कंडोम है वह है पॉली यूरिथल जो बेहद पतला है माने इंसान के बाल से भी पतला बन सकता है जिसकी वजह से बेहतर ही हीट ट्रांसफर होती है और एक नेचुरल फील का भी एहसास बेहतर होता है एक अच्छी बात इसमें यह है कि इसमें कोई दुर्ग गंद नहीं आती और लेटेक्स कंडोम के मुकाबले में ज्यादा स्ट्रेच भी हो सकता है और साथ ही साथ उसकी फिटिंग भी जितनी चाहिए उतनी संतोष काक मिल सकती है अगर किसी को लेटेक्स एलर्जी हो तो पॉली यूरिथल कंडोम
(7:12:40) यूज कर सकते हैं एक एडवांटेज जो लेटेक्स और पॉली आइसोप्रन में नहीं है वह यह है कि पॉली यूरिथल बेस्ड लुब्रिकेंट का इस्तेमाल आराम से कर सकते हो यह कंडोम पहनने के बाद कुछ लोगों को तो ऐसा एहसास भी हुआ है कि कंडोम है ही नहीं माने देर इज ऑलमोस्ट नथिंग हां एक बात जरूर है कि लेटेक्स और पॉली आइसोप्रन के कंपैरिजन में पॉली यूरिथल कंडोम थोड़े महंगे जरूर है दूसरी चीज यह है कि कंडोम जितना पतला हो उतना बेहतर तभी एक तरह की नेचुरल फीलिंग आ सकती है हकी हकीकत में खास करके यह कंडोम पूरा का पूरा पतला होना आवश्यक है लेकिन अक्सर ऐसा नहीं
(7:13:30) होता जो टीट एंड होता है माने जो पाउच एंड होता है माने कंडोम का जो हिस्सा शिष्ण के आगे के लाल भाग को ग्लांस पिनिस को जो कवर करता है वह हिस्सा अक्सर कंपैरिजन में थोड़ा जाड़ा थिक होता है उसकी वजह से ससे का जो आनंद आना चाहिए उसमें कमी आ जाती हमारे देश में केमिस्ट के शॉप में जो कंडोम उपलब्ध है उनकी जड़ाई अमूमन थिकनेस समझ लो 05 से 06 मिलीमीटर तक होती है लेकिन विदेश में इतने पतले कंडोम भी अवेलेबल है कि जिनकी थिकनेस इससे आधी
(7:14:16) होती है वह कंडोम एक ऐसा एहसास कराते हैं कि जैसा आपने कुछ पहना ही नहीं है कई बार अक्सर लोग पूछते हैं क्या कंडोम पहनने से सहवास के नेचुरल आनंद में कमी आ सकती है आ सकती उसमें कोई शक नहीं है अगर कंडोम थोड़ा थिक होगा थोड़ा मोटा होगा जाड़ा होगा तो सहवास के दौरान हीट ट्रांसफर कम होती है उसमें कमी आ जाती है और उसकी वजह से आनंद का एहसास भी कम हो सकता है बेहतर यही होगा कि आप मार्केट में से कोई पतला कंडोम चुनिए दूसरा डर अक्सर लोगों को यह रहता है कि क्या सहवास के दौरान कंडोम फट सकता है मेरा जवाब होगा बिल्कुल नहीं
(7:15:04) अमूमन फटने की कोई गुंजाइश है ही नहीं क्योंकि कंडोम की बनावट में उन्हें एक पर्टिकुलर टेस्टिंग से गुजरना पड़ता है और वो टेस्टिंग ज्यादातर यह भरोसा दिलाता है कि सहवास के दौरान कितना भी ज्यादा फ्रिक्शन हो कंडोम फट नहीं सकेगा कुछ लोग सहवास के दौरान कंडोम फटने के डर की वजह से डबल पंडो पहन के सहवास करते हैं इसकी बिल्कुल जरूरत नहीं है और हकीकत में यह नुकसान काक हो सकते हैं क्योंकि दो कंडोम के बीच में और फ्रिक्शन ज्यादा होता है जिसकी वजह से फटने के चांसेस और ज्यादा बढ़ जाते हैं कंडोम के आकार उसका शेप मेरे तजुर्बे में मैंने दो
(7:15:48) वैरायटी के शेप्स देखे एक तो कंडोम के टीट एंड पर माने जो लाल भाग के आगे कंडोम होता है वहां वीर्य स्खलन के बाद वीर्य को स्टोर करने के लिए एक टीट होता है एक पाउच होता है एक सॉर्ट ऑफ रिजरवायर होता है जिसमें स्खलन के बाद वीर्य भरा हुआ दिखाई देता है प्रारंभ में स्खलन के बाद वीर्य को स्टोर करने के लिए कंडोम को मोटे टी टन के साथ बनाया जाता था लेकिन हाल के अध्ययनों से यह पता चला है कि टीट एंड की हकीकत में जरूरत है ही नहीं और सीमेंट डिस्चार्ज कंडोम के अंदर पूरे लिंग में फैल जाता है यह जो दूसरे टाइप के
(7:16:35) कंडोम होते हैं उनमें यह टीट एंड पर या टीट या रिजर्वॉयर होता ही नहीं है वह बिल्कुल प्लेन रहता है और बिल्कुल नेचुरल फीलिंग देता है उनका पतलापन हर जगह एक समान रहता है और और यह संभोग के दौरान अधिक नेचुरल फीलिंग दे सकता है अभी साइज की बात करते हैं जहां तक साइज का सवाल है आपको वही कंडोम सिलेक्ट करना है जो आपके उत्तेजित शिष्ण पर ठीक से फिट होता हो कई बार अगर कंडोम लूज रहा तो संभोग के वक्त कंडोम फिसल जाने का डर रहता है विथ माने चौड़ाई अलग-अलग तरीके की हो सकती है लेकिन
(7:17:21) सामान्यतः सब जगह 53 मिलीमीटर चौड़ाई वाला कंडोम आपको आसानी से मिल सकता है कुछ देश में बड़ी चौड़ाई वाले कंडोम भी उपलब्ध है वह अक्सर किसी के शिष्ण की साइज ज्यादा बड़ी हो उसके लिए सूटेबल रहते हैं यदि आप अपने रेक्ट पिनिस के आकार के अनुसार उचित फिटिंग के कंडोम का सिलेक्शन नहीं करते हो तो संभोग के दौरान कंडोम के फिसलने की संभावना बनी रहती है कंडोम में सामान्यत चार आकार उपलब्ध है जैसा कि आप स्क्रीन पर देख सकते हैं इन चार आकारों में
(7:18:05) से 53 मिलीमीटर की चौड़ाई वाला कंडोम सबसे कॉमन देखा जाता है कंडोम का सही तरीके से कैसे इस्तेमाल किया जाता है एसटीआईआईआईजी या साथी को संक्रमित करने से बचने के लिए कंडोम का प्रयोग करना बेहद अनिवार्य है इसका इस्तेमाल करते वक्त कुछ सावधानियां जरूर लेनी चाहिए ध्यान रखें कि जब भी आप सेक्सुअल इंटरकोर्स करते हो तो हर वक्त नया कंडोम इस्तेमाल करें दूसरा जिस कंडोम की एक्सपायरी डेट बीत चुकी हो उस कम का उपयोग ना
(7:18:52) करें तीसरा कंडोम के पैकेट को कोने से फाड़े और सावधानी पूर्वक कंडोम को बाहर निकाले ताकि उपयोग से पहले ही उसको नुकसान ना पहुंचे चौथा यह याद रखें कि इस्तेमाल करने से पहले उसे फुलाकर जांचने की जरूरत नहीं है क्योंकि पैक करने से पहले ही कंडोम की जांच हो जा चुकी होती पांचवा इस्तेमाल के वक्त उसे खोले पहले से ना खोले छठवां यदि जरूरत हो तो लिंग पर केवल वाटर बेस लुबिन कंठ का ही इस्तेमाल करें सातवा एक हाथ से कंडोम की रिम पकड़े और दूसरे हाथ से उसकी टिप पकड़कर हवा निकालकर इरेक्ट शिष्ण के आगे भाग पर
(7:19:40) रखें शिष्ण के टिप से पकड़ते हुए इसे आखिर तक खोले कंडोम का सिर्फ ऑर्गेजम या इजेकुलेशन से पहने नहीं लेकिन पेनिट्रेशन से पहले शिष्ण पर पहनना चाहिए लुब्रिकेटेड कंडोम का इस्तेमाल करें कंडोम का इस्तेमाल करते वक्त पेट्रोलियम जेली ग्रीज या किसी ऑयल बेस लुब्रिकेंट का उपयोग ना करें और संभोग पूर्ण होने पर माने स्खलन के बाद कंडोम का बेस पकड़े और लिंग को योनि मार्ग से बाहर निकाले कंडोम को सावधानी से निकाले ताकि वीर्य बा ना छलके यदि कंडोम लीक हो जाए या फट जाए तो परेशान ना हो दूसरे इमरजेंसी गर्भ निरोधक
(7:20:30) उपायों के लिए आप अपने डॉक्टर से संपर्क करें अभी हम कंडोम का एक दूसरा एंगल देखते हैं जो एंगल को देख के अक्सर ज्यादा लोग कंडोम खरीदते हैं वह है कंडोम का टेक्सचर वो काफी महत्व का है क्योंकि यह आपके पा की उत्तेजना में काफी इजाफा कर सकता है ज्यादातर मैंने चार तरीके के टेक्सचर देखे हैं एक बिल्कुल सादा जिसमें कोई डिजाइन नहीं होती कोई टेक्सचर नहीं होता दूसरा होता है डॉटेड जिसमें आपको हर जगह डॉट डॉट बिंदु बिंदु मिलेगा तीसरे हैं रिबड और चौथे हैं डॉटेड एंड रिप
(7:21:15) कंबाइन कुछ कॉमिनेशन ऐसे रहते हैं जो अगर सही तरीके से इस्तेमाल किया जाए तो फीमेल पार्टनर के आनंद में काफी इजाफा हो सकता है उतना ही नहीं लेकिन उनको अगर चरम सीमा पहुंचने में देरी होती हो तो उत्तेजना बढ़ा के कम टाइम में वह चरम सीमा पर पहुंच सकती है यहां अगर आपको सिलेक्शन करना है तो होशियारी से करना है अगर कोई कंपनी के कंडोम के ऊपर यह डॉट बेहद नजदीक है और जरूरत से ज्यादा है तो व टिंग ंग फिनी के बजाय एक यूनिफॉर्म फीलिंग देंगे माने जो टेक्सचर करने का रियल पर्पस होता है वह निकल जाता है माने बहुत से कंडोम स्टडी
(7:22:00) किए हैं एक ही व्यक्ति को तरह-तरह के कंडोम देके कौन से कंडोम उनको बेहतर लगे कौन से कंडोम में उनके पार्टनर को उत्तेजना ज्यादा लगी वह नोट करने की कोशिश की मेरे तजुर्बे में यह डॉट्स एक साथ न रखने के बजाय थोड़े-थोड़े अंतर से रखा जाए तो उत्तेजना और ज्यादा बढ़ सकती है और सिर्फ डॉट की जगह या और कोई शेप की जगह जिस कंडोम पर इनवर्टेड वी की डिजाइन थी उसमें अपने पार्टनर को उत्तेजना में ज्यादा इजाफा हुआ था दूसरा एक फैक्टर जो आज ज्यादा चर्चा में ज्यादा वोग में है व है अलग-अलग फ्लेवर्स के अलग-अलग सेंट के
(7:22:48) कंडो आजकल तरह के सेंट मौजूद है मिसाल के तौर पर चॉकलेट स्ट्रॉबेरी एपल यहां तक कि लोगों ने पीना कोलडा के सेंट भी इसमें ऐड किया है कुछ कंपनियों ने कंडोम सेंटेड आते हैं तो कुछ कंपनियों के अंदर यह रियल फ्लेवर्स का इस्तेमाल करते हैं अगर यह फ्लेवर्ड कंडोम है तो अक्सर ओरल सेक्स के लिए ही काम आते हैं सिर्फ मुख मैथन के लिए ही इस्तेमाल किए जाते हैं पीनो वजाइनल इंटरकोर्स के लिए नहीं पिनो वजाइनल इंटरकोर्स में अगर इस्तेमाल किया तो थोड़ी बहुत योनि मार्ग में दिक्कत आ सकती है पीनो वजाइनल इंटरकोर्स में फ्लेवर्ड कंडोम
(7:23:33) के इस्तेमाल से यनि मार्क का जो पीएच लेवल होता है वह डिस्टर्ब हो जाता है और कई बार इंफेक्शन पैदा कर सकता है सेंटेड या फ्लेवर्ड कंडोम का एक फायदा यह है कि इससे लेटेक्स की कभी कभ जो दुर्गंध आती है व दूर हो जाती है व नष्ट हो जाती कुछ कंडोम्स ऐसे भी आते हैं जो इलाज में मदद रूप हो सकते हैं मिसाल के तौर पर अगर एक पुरुष क्लाइमेक्स पर जल्दी पहुंच जाता है और उसके पार्टनर को क्लाइमेक्स पर पहुंचने से ज्यादा देर लगती है तो बाजार में ऐसे कंडोम्स भी उपलब्ध है कि जहां कंडोम के अंदर कुछ एनेस्थेटिक दवाइयां लगाई हुई होती है जिसकी वजह से पुरुष के
(7:24:16) आगे के लाल भाग की संवेदना कम हो जाती है और एक पुरुष जो शीघ्र चरम सीमा पर पहुंच जाता है वह पुरुष सहवास के दौरान च चरम सीमा पर देरी से पहुंचेगा माने एक पुरुष जो शीघ्र स्खलन से पीड़ित होता है वो विलंबित स्खलन में परिवर्तित हो जाता है यह एनेस्थेटिक दवाई कंडोम के अंदर के हिस्से में रहती है उसके लिए उसकी महिला पार्टनर की संवेदना में कोई कमी नहीं आती हां कुछ किस्सों में ऐसा देखा गया है कि पुरुष की संवेदना एकदम कम हो जाती है तो उसकी उत्तेजना भी कभी-कभी कम हो जाती है माने अक्सर ऐसा होता है कि एक पुरुष कभी एक कमी पूरी करने के लिए एक कमी कम करने
(7:25:04) की कोशिश में दूसरी कमी पैदा कर देता हैन अ मैन इ ट्रांग टू करेक्ट वन एरर बा कमिटिंग अनदर एरर बेहतर यही होगा कि जब भी आप कंडोम सिलेक्ट करने को जाए तो आप दोनों तरह के कंडोम इस्तेमाल करें लेटेक्स के बने हुए और पॉली यूरेथ्रा जाता है और जो ओपन एंड है वो योनि मुख के बाहर रखा जाता है फायदा यह है
(7:25:50) कि फीमेल कंडोम अगर कोई लड़की चाहे तो आठ घंटे पहले भी अपने योनि मार्ग में फिट कर सकती है इससे शुक्र जंतु की रोकथाम तो हो ही जाती है और साथ ही साथ एसटीआईओ एचआईवी एड्स का प्रिवेंशन भी हो जाता है परेशानी इसमें यह है कि शुरुआत में बिठाने में एडजस्ट करने में थोड़ी बहुत दिक्कत आ सकती है कई बार सहवास के दौरान थोड़ी बहुत आवाज भी ये कर सकता है फीमेल कंडोम को पहनना मेल कंडोम को पहनने जितना आसान नहीं है ध्यान रहे पुरुष और स्त्री कंडोम दोनों एक साथ में इस्तेमाल नहीं किया जाता क्योंकि इससे कंडोम फटने का खतरा और बढ़ जाता है
(7:26:35) कंडोम के उपयोग पर एक बिन जरूरी कलंक है कि वह संभोग के दौरान आनंद के पहलू को बेहद कम कर देता है लेकिन यह गलत फहमी है ज्यादातर उत्तेजना और चरम सीमा का एहसास दो कान के बीच में होता है दिमाग दो पांव के बीच में नहीं अगर कभी भी किसी अनजान व्यक्ति के साथ आप सहवास करना चाहते हो तो कंडोम का उपयोग अवश्य करें आज की तारीख में भारत में लगभग चार से 6 परसेंट पुरुष कंडोम का इस्तेमाल करते हैं यदि इस परसेंटेज को हम ज्यादा बढ़ा सके तो हम बढ़ती हुई जनसंख्या
(7:27:20) और एसडीआई एचआईवी एड्स के बढ़ावे पर रोक लगा सकेंगे अंडरस्टैंडिंग रिलेशंस बिटवीन यू एंड मी मन रिश्तों की समझ मेरे और आपके बीच इस लेक्चर में हम बात करेंगे कि किसी के साथ बनाए रिश्ते में आपकी जगह क्या है उस रिश्ते को बनाए रखने में आपका योगदान क्या है और वह रिश्ता कैसा होना चाहिए अगर इनिशियल स्टेज की बात करें तो कभी-कभी एक उम्र में दोस्तों में ग्रुप में किसी के साथ अट्रैक्शन निर्माण होता है आकर्षण निर्माण होता है चाहे वह व्यक्ति विजातीय हो या सजातीय अगर आप चाहते हो कि उस
(7:28:08) अट्रैक्शन को रिलेशन में परिवर्तित करें तो आपके लिए यह जानना जरूरी है कि क्या दूसरे व्यक्ति को भी ऐसा लगता है ड ही और शी हैव द सेम फीलिंग अबाउट दैट रिलेशनशिप क्या उसके मन में भी आपके लिए कुछ स्पेशल भावनाएं विकसित हो रही है ऐसी हालात में जरूरी है कि आप अपने उस दोस्त के इस विषय में अकेले में बात करें उनके सामने अपनी भावनाएं संयमित भाषा में रखें जैसे कि मुझे बहुत अच्छा लगता है कि जब हम साथ रहते हैं या बातें करते हैं आप मेरे लिए सिर्फ दोस्त ही नहीं हो उससे बढ़कर हो
(7:28:55) कुछ खास हो क्या आपको भी ऐसा लगता है फोन या मैसेजेस पर ऐसी बातें करना ठीक नहीं होगा क्योंकि आपको उसके रिएक्शन का पता ही नहीं पड़ेगा जब आप ऐसे सवाल पूछते हो तब उसका जवाब आपको तुरंत मिले ऐसी अपेक्षा ना रखें इस वक्त ड्रामे िक लैंग्वेज वेज में उनके साथ पेश ना आए जैसे प्यार मोहब्बत की फिल्मी बातें माने मुझे तुमसे बहुत प्यार हो गया है या मैं तुम्हें हमेशा खुश रखूंगा वगैरे वगैरे जब कोई भी दो व्यक्ति एक साथ रिश्ता बनाने का निर्णय लेते हैं तो वह निर्णय लेना उनके लिए बहुत चुनौती
(7:29:41) पूर्ण होता है खास करके अपने देश में और स्त्रियों के लिए तो खास यह डिसीजन उन्हें बेहद कंफ्यूजन में डालने वाला उनके दिमाग में सैकड़ों सवाल एक साथ में खड़े करने वाला हो सकता है सामाजिक आर्थिक पारिवारिक और जिम्मेदारियां और दूसरे ख्यालात उन्हें और कन्फ्यूजन में डालते हैं आई लव यू डू यू लव मी यस आई लव यू टू ऐसे डायलॉग तो आजकल फिल्मों में भी इस्तेमाल नहीं होते तो रियल लाइफ में भी ऐसे टाइप का डिस्क शशन होने की उम्मीद या ख्यालात ना रखें तो ही बेहतर होगा ऐसी हालात में उन्हें टाइम और स्पेस देना बहुत
(7:30:29) जरूरी है इसके बाद ही कोई भी लड़की या लड़का किसी के साथ रिश्ते बनाने का निर्णय ले सकती है और जब दो व्यक्ति साथ आके कोई भी रिश्ता बनाने का निर्णय लेते हैं तो जीवन के बहुत खूबसूरत मोड़ पर अपने आप को खड़े पाते हैं अब इससे आगे का सफर जिस पर निर्भर होता है बस वही बातें हम इस लेक्चर में करने वाले हैं आप तो जानते ही हैं कि मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है मैन इज अ सोशल एनिमल उसे समाज में रहना है रिश्ते बनाना उसे अच्छा लगता
(7:31:13) है हम में से बहुता लोग ऐसे हैं कि जिन्हें यह रिश्ते कायम तौर पर रखना ही अच्छा लगता है इसके बावजूद कुछ लोग ऐसे भी होते हैं कि जिन्हें लॉन्ग लास्टिंग रिलेशनशिप में अटके रहना अच्छा नहीं लगता वह लोग कोई कमिटमेंट रिस्पांसिबिलिटी लेना ही नहीं चाहते उन्हें अक्सर शॉर्ट टर्म रिलेशनशिप में ही ज्यादा कंफर्ट मिलती है ज्यादा सुकून मिलता है रिलेशन चाहे लॉन्ग लास्टिंग हो या शॉर्ट लास्टिंग कोई भी यह चाहता है कि जब तक वह किसी के साथ रिलेशन में रहे तो वह रिलेशन के उसके आनंद में रहे उसके लिए रोज
(7:31:59) की लाइफ में अच्छे मोमेंट्स क्रिएट करें और उसके पीछे अच्छी मेमोरीज अच्छी यादें भी छोड़ दे लेकिन ऐसे रिलेशन बनना यह कोई एक रात में होने वाला चमत्कार नहीं है यह दोनों एंड से होने वाला हार्ड वर्क है दोनों एंड मतलब दोनों पार्टनर्स रिलेशनशिप तो बहुत टाइप की हो सकती है लेकिन मेरी प्रैक्टिस में ज्यादातर मैंने तीन टाइप की रिलेशनशिप देखी है पहली टाइप वर्किंग क्लास माने जैसे कोई जॉब करता है कोई प्यून याने क्लार्क या कोई एग्जीक्यूटिव व जैसे टाइम टू टाइम ऑफिस जाता है मतलब सुबह टाइम पर उठना नाश्ता करना गाड़ी पकड़ना जॉब पर
(7:32:47) जाना शाम को वापस आना वाइफ को स्कूटर पर घुमाने के लिए ले जाना बच्चे को एक थोड़ा सा टोकन लव दे देना रात को वाइफ के साथ कभी सेक्स करना कभी ना करना कभी सेटिस्फेक्शन मिला कभी सेटिस्फेक्शन नहीं भी मिला यह उनका एक रूटीन बन जाता है सुबह फिर से ऑफिस के लिए तैयार यह संबंध ऐसे रहते हैं कि दीप्ति मिश्रा के शब्दों में कहे तो दिल से अपनाया नहीं दिल से अपनाया नहीं और गैर भी समझा नहीं यह भी एक रिश्ता है जिसमें कोई भी रिश्ता नहीं लेखक विचारक श्री गुणवंत शाह ऐसे रिश्तों को चलती का नाम गाड़ी टाइप का
(7:33:34) रिश्ता बताते हैं दूसरी टाइप एक ऐसी है कि दे जस्ट डोंट बदर अबाउट देर पार्टनर इसमें पुरुष पार्टनर अक्सर अपने स्त्री पार्टनर को एक नींद की गोली की तरह इस्तेमाल करता है ही यू लाइक अ स्लीपिंग पिल उस घर में पुरुष पार्टनर का बर्ताव माने उसकी एटीट्यूड ऐसे रहते है कि जैसे सिर्फ मेरा ही चलेगा मैं कहूं वही होगा उसके पार्टनर को सेटिस्फेक्शन मिला के नहीं उसकी वो कोई परवाह नहीं है यहां औरत क इस्तेमाल एक ऑब्जेक्ट की तरह किया जाता है इस टाइप के रिलेशंस में अक्सर ऐसा होता है कि जब पुरुष का काम खत्म हो गया
(7:34:21) तो वह उसके बाद तुरंत दूसरी साइड पर पलट के सो जाता है और अपनी स्त्री पार्टनर को असंतोष में तड़पता छोड़ देता है ऐसी एक स्थिति से गुजर रही एक पाकिस्तानी शायरा ने अपना दर्द मुझे कुछ इस अंदाज में सुनाया था जो मैं आपके साथ शेयर करने जाऊंगा कि डॉक्टर साहब बात कुछ ऐसी है कि बस वह तो नहा के चल दिए और लहरें तड़पती रह गई यह बीमारी अक्सर पुरुषों में देखी जाती है यहां शादी तो बरकरार रहती है लेकिन रिश्ते खत्म हो जाते हैं ऐसे रिश्तों के बारे में सूर्य भानु गुप्त ने एक शेर लिखा
(7:35:08) था जो मुझे याद आ रहा है कि कुछ हदों से यूं गुजर गए रिश्ते कुछ हदों से यूं गुजर गए रिश्ते रह गए लोग मर गए रिश्ते तीसरी टाइप की जो रिलेशनशिप है वो एक अजीब तरीके की है इसमें दोनों को एक दूसरे के प्रति बेहद प्रेम होता है त्याग की भावना होती है समर्पण की भावना होती है दोनों पार्टनर के मन में यही होता है कि वह दोनों एक दूसरे को किस तरह ज्यादा खुश करें दोनों को एक दूसरे के सुख में संतोष आनंद मिलता है दूसरे के सुख में उसे अपना सुख का एहसास होता है यह बहुत अहम चीज है
(7:35:57) यहां दोनों का टोटल एक्सेप्टेंस होता है यहां पर अपने पार्टनर की खामियां भी उसकी खामिया में भी खूबियां दिखाई देती है छोटी-छोटी समस्या होती है लेकिन वह दोनों उसे इग्नोर करते हैं नजरअंदाज करते हैं बेवजह बात का बतंगड़ नहीं बनाते दोस्तों छोटी-छोटी चीजों को इग्नोर करना सीख लेना बिल्कुल जरूरी है क्योंकि एक शायर खलील धनतेजवी ने एक बड़ी अच्छी चीज चार लाइना लिखी है कि यह धूप ही का करिश्मा दिखाई देता है यह धूप ही का करिश्मा दिखाई देता है और सुलगती रेत पर दरिया दिखाई देता है किसी
(7:36:44) भी रिश्ते को नजदीक से ना देखो तुम पहाड़ दूर से अच्छा दिखाई देता है ऐसा कहा जाता है कि रिश्ता चाहे कोई भी हो उसे संवारने के लिए बेहतर बनाने के लिए संवाद माने कम्युनिकेशन का होना बहुत जरूरी है लेकिन संवाद सही तरीके से संवाद होना चाहिए संस्कृत में जो भी शब्द सम से शुरू हुआ है वह अच्छा माना जाता है मिसाल के तौर पर संगीत सम गीत अच्छा गीत उसी तरह संवाद माने संवाद माने अच्छी बातचीत जब कभी किसी भी रिश्ते में दरार पड़ने की नौबत आती है तो संवाद ही एकमात्र ऐसा
(7:37:34) माध्यम है कि अगर वह सही तरीके से और समझदारी से इस्तेमाल किया जाए तो वह रिश्ता टूटने से अमूमन बचा सकता है अपने लिए सही व्यक्ति को ढूंढ उसके साथ पूरी जिंदगी बिताना पूरी जिंदगी तक उसके साथ खुश रहना और उसे भी खुश रखना अक्सर यह चीजें किसी परिक कथाओं में मिलती है वास्तविकता में नहीं रिश्ता बनाना मुश्किल नहीं है लेकिन निभाना मुश्किल है हर रिश्ते में सफलता आसानी से नहीं मिलती एक सही साथी का पाना मिलना मुश्किल जरूर है लेकिन वह साथी मिल जाने के बाद आप
(7:38:24) उसके साथ जिंदगी भर कैसे संबंध बनाए रखते हो वह ज्यादा जरूरी है वह ज्यादा मुश्किल है इस पर आपके वैवाहिक जीवन की नाव चलती है इसी के ऊपर रिलेशनशिप की सफलता या निष्फल निर्भर रहती है एक सुखी और सफल विवाह में विश्वास समझदारी प्यार देखभाल सहयोग और सहानुभूति के अलावा और कोई मुख्य चीज है तो वह है कम्युनिकेशन संवाद चाहे व अरेंज मैरिज हो लव मैरिज हो या लिव इन रिलेशनशिप हो आपकी इमोशंस आपका प्यार कई बार एक दूसरे को व्यक्त करना भी
(7:39:13) जरूरी है एक्सप्रेस करना भी जरूरी है ध्यान रहे एट टाइम्स टू एक्सप्रेस इज मोर इंपोर्टेंट देन टू इंप्रेस कई बार लोग इस तरह के आर्गुमेंट करते हैं कि हमारा प्यार तो दिल से है उसे व्यक्त करने की क्या जरूरत है लेकिन मैंने देखा है कि यह लोग मन ही मन में जरूर चाहते हैं कि उसका पार्टनर अपनी मोहब्बत का इकरार करे इजहार करे उसे एक या दूसरी तरीके से एक्सप्रेस करें उसे वर्बलाइज करें हां जीवन में तनाव अवश्य आने वाले हैं चाहे वो बच्चों की शिकायत हो पैसों की कमी हो रोज मरा की जिंदगी का तनाव हो या
(7:40:01) बिजनेस या ऑफिस के टारगेट का प्रेशर हो यह सब जीवन में आते जाते रहते हैं लेकिन ऐसे सिचुएशन में भी कोशिश आपकी यही होनी चाहिए कि आप हो सके तो तनाव मुक्त रहे अगर आप तनाव मुक्त रहेंगे तो यह सब समस्याओं को आसानी से निपट सकोगे उनसे आगे बढ़ने का रास्ता आप बड़ी आसानी से निकाल सकोगे अगर किसी भी कारण से आप टेंशन में है तनाव में है तो उसका हल निकालने के लिए पार्टनर के साथ ऑनेस्टली खुल के बात करना जरूरी है भले वह चीज पार्टनर के किसी बिहेवियर की वजह से ही क्यों ना हो दोनों पार्टनर्स को एक दूसरे
(7:40:48) के प्रति एक तरह का इमोशनल और फिजिकल बंड डिवेलप करने का प्रयास करना चाहिए समय समय पर एक दूसरे के प्रति कुछ कह के या कुछ करके प्यार दिखाना जरूरी है ऑफ एक्शन स्पीक लाउडर देन वर्ड्स एक दूसरे को गले लगाना प्यार से छूना अपने पार्टनर को जिन चीजों में रुचि है वही चीज उसके साथ करना यह जरूरी है सिर्फ उस उसको कंपनी देना इतना काफी नहीं है लेकिन साथ-साथ सपोर्ट भी देना जरूरी है यह सब चीजें आपकी शादी के फाउंडेशन को ज्यादा मजबूत बना सकती है मैरिज नीड्स टू बी बॉन्डिंग एंड नॉट जस्ट
(7:41:34) बाइंडिंग जब आप यह सब चीजें ध्यान में रखेंगे तो आपके पार्टनर के दोस्त और वर्क रिलेशंस को समझने का नजरिया भी बदल जाएगा फिर उस रिलेशंस में अविश्वास नहीं होगा एक्स्ट्रा पजेसिवनेस भी कम हो जाएगी अविश्वास और हद से बढ़कर पजेसिवनेस डोमेस्टिक डिस्टरबेंस को बढ़ावा देती है जिससे रिश्ता बॉन्डिंग नहीं बनता बाइंडिंग बनके ही रह जाता है रिश्ते को गहरा बनाने में इफेक्टिव कम्युनिकेशन काफी मदद रूप हो सकता है कम्युनिकेशन माने संवाद संवाद दो तरह के हो सकते हैं एक
(7:42:21) बातचीत के द्वारा और दूसरा बातचीत के बगैर बगैर बातचीत याने सिर्फ इशारों से अपने एक्सप्रेशन से अब हम बात करते हैं बातचीत के द्वारा संवाद की वर्बल कम्युनिकेशन में बातचीत करते वक्त कुछ और एस्पेक्ट का भी ध्यान रखना जरूरी है सही विचार की सही अभिव्यक्ति करो बात करते वक्त आवाज का टोन कण प्रिय रखो और बातचीत रैशनल होना आवश्यक है जो भी बात की जाए उसका इंटरप्रिटेशन सही होना जरूरी है सही कम्युनिकेशन में एक बहुत महत्व की चीज है आप कैसे बोलते हो वह तो
(7:43:09) जरूरी है लेकिन क्या बोलते हो वह ज्यादा जरूरी है अगर आपका पार्टनर कुछ कह रहा है तो उसे सिर्फ सुनो नहीं उसे ध्यान से सुनो माने डोंट हियर हर काइंडली लिसन टू हर दूसरी बात हमने बात की थी बातचीत बगैर का संवाद नॉन वर्बल कम्युनिकेशन यह बिगर शब्दों का संवाद सहज प्रक्रिया नहीं है कहते हैं कि जो पार्टनर्स इशारों से बात करते हैं या जो स्पर्श की भाषा जानते हैं वो पार्टनर्स एक दूसरे को सिर्फ जान नहीं है अच्छी तरह से पहचानते भी है और वह अक्सर दिल की गहराइयों से जुड़े हुए होते हैं बिना
(7:43:57) शब्दों के संवाद में स्पर्श मौन आंखों के इशारे कोई संकेत चेहरे पर प्रकट होने वाले रिएक्शन यह सब शामिल होते हैं कई बार ऐसा भी होता है कि आप बोल कुछ अलग रहे हो लेकिन मतलब कुछ अलग निकल रहा है कई बार ऐसा भी होता है कि आप प्रिटेंड कर रहे हो कि आप आपकी पत्नी की बात ध्यान से सुन रहे हो आप उसकी हां में हां भी मिला रहे हो लेकिन उसी वक्त आपका ध्यान फोन पर आए हुए किसी मैसेज को रिप्लाई देने में व्यस्त हो जाता है ऐसे हाफ हार्टेड कम्युनिकेशन अगर बार-बार होते रहे तो रिश्तों की मजबूती कमजोर होती जाएगी शायद
(7:44:45) रिश्तों में दरार पड़ना भी शुरू हो सकता है ऐसे हाफ हार्टेड कम्युनिकेशन से बचे आप उनकी बातें पूरी सुने आपके पार्टनर को पूरा बोलने दें उसका कन्वर्सेशन बीच में रोक कर उसे इंटरप्ट ना करें अगर आप सच हो तो भी उस वक्त जवाब देने की कोशिश ना करें अगर आप इंटरप्ट करने जाएंगे तो यह संवाद बेवजह आर्गुमेंट या विवाद में बदल जाएगा ऐसा सिचुएशन में इतना अवश्य करें सिर्फ आई टू आई कांटेक्ट नहीं बल्कि आईबॉल टू आई बॉल कांटेक्ट बनाए रखें इससे आपकी पार्टनर को एहसास हो जाएगा कि आप उसकी बात गौर से
(7:45:33) सुन रहे हो जरूरत पड़े तो अपने फेशियल एक्सप्रेशंस या अपना सर हिला के उसे ऐसा एहसास करा सकते हो कि आप उन्हें सम्मान से केयरफुली सुन रहे हो ऐसी फीलिंग आपके पार्टनर में आना आवश्यक है जब आप बात करते हो तो आपका टोन कर्ण प्रिय रखें शांति से बोलने की कोशिश करें बोलने से पहले सोचिए बिना सोचे ना बोले योग्य शब्दों का ही प्रयोग कीजिएगा क्योंकि एक बार मुंह से निकले हुए शब्द कमान के तीर के जैसे होते हैं जिसे आप वापस नहीं ले सकते तीर और शब्द दोनों ही घाव तो करते हैं लेकिन फर्क
(7:46:22) सिर्फ इतना है कि समय के साथ तीर के घाव तो भर जाते हैं लेकिन शब्दों के घाव नहीं भरते कई बार ऐसा भी हो सकता है कि आप जो कह रहे हो और आपका पार्टनर जो कह रहा है दोनों अपनी अपनी जगह सही हो शायद देखने का नजरिया अलग है ऐसी हालात में आप एक दूसरे के प्रति सम्मान की नजर से देखो एक दूसरे को रिस्पेक्ट करते हुए प्रॉब्लम का ऐसा सॉल्यूशन ढूंढो कि जो दोनों को मान्य हो बोथ आर एग्री एबल आज के जो रिलेशंस होते हैं चाहे वह अरेंज मैरिज हो लव मैरिज हो या लिविन हो बातचीत के दौरान इन चीजों का प्लीज अवश्य
(7:47:12) ख्याल रखें पार्टनर के सामने अपने विचार या भावनाएं स्पष्ट तरीके से बताए ताकि आपके पार्टनर को भी आपकी बातों पर आसानी से यकीन आ जाए वही बोलो जो आप हकीकत में कहना चाहते हो अगर किसी चीज का आपको क्लेरिफिकेशन चाहिए या विस्तृत में जानकारी चाहिए तो आपके सवाल ओपन एंडेड होने चाहिए जो आपके पार्टनर को अभिव्यक्त होने में मदद करें ना कि उसे और उलझा जाए पार्टनर को ठीक तरह से अभिव्यक्त होने के लिए समय दे अपनी अपेक्षाएं ऑनेस्टली बताएं पार्टनर की अपेक्षाएं भी
(7:47:58) जान ले गुस्से से कभी डिस्कशन ना करें क्योंकि गुस्से में अक्सर मानसिक असंतुलन की वजह से आप ना कहने की चीज कह दोगे सही कौन है वो जानना जरूरी नहीं है सही क्या है वो जानना जरूरी मुद्दे पर डिस्कशन कीजिए एक दूसरे पर नहीं बातचीत के दौरान टौंटिंग करना कंपेयर करना निंदा करना यह सब चीजें अवॉइड कीजिएगा दोस्त या परिवार के बीच पार्टनर की शिकायत या निंदा करके उसे शर्मिंदा ना करें पार्टनर की सीक्रेट्स
(7:48:44) दूसरों से शेयर ना करें उसका विश्वास बनाए रखे पार्टनर को पूरा सुने बिना किसी कंक्लूजन पर ना पहुंचे अपने विचार दूसरों पर न थोपे पुरानी गलतियों को हो सके तो बेवजह याद ना करें कहते हैं कि उसने एक छोटी सी भूल की याद रख के हमने बड़ी भूल यह बात ध्यान में रखना जरूरी है कि कम्युनिकेशन एक माध्यम है जिस के उचित उपयोग से किसी भी प्रॉब्लम का सॉल्यूशन निकाला जा सकता है लेकिन लंग लास्टिंग मैरिज के लिए कम्युनिकेशन के साथ-साथ और चीजें भी
(7:49:30) आवश्यक है मिसाल के तौर पर एक दूसरे को एक्सेप्ट करो एक दूसरे को अप्रिशिएट करो एक दूसरे के प्रति हमेशा कमिटेड रहो स्नेह सहयोग समझौता और विश्वास बरकरार रहना चाहिए रिश्ते में समझदारी और शाश्वता होना जरूरी है और सबसे जरूरी है एक दूसरे का रिस्पेक्ट सम्मान अक्सर कई बार बच्चे होने के बाद रोमांस पीछे पड़ जाता है लेकिन रिलेशन में रोमांस महत्व की चीज है इसलिए कभी कभार डेट पर जाना मोहब्बत ली बातें करना घर के काम एक साथ करना एक दूसरे को
(7:50:18) सरप्राइज देना ऐसी चीजें रिलेशन में स्पार्क बनाए रखती है और एक जरूरी बात एक दूसरे से सिर्फ चिपक के रहने से रिलेशन नहीं बनते एक दूसरे को स्पेस देना भी जरूरी है और उस स्पेस का रिस्पेक्ट करना भी उतना ही जरूरी व्यक्ति चाहे कोई भी हो एक लिमिट के बाद उसके इमोशनल फाइनेंशियल पर्सनल लेवल पर उसने हमेशा एक काल्पनिक बॉर्डर खींची हुई रहती है उस लाइन को हो सके तो क्रॉस ना करें शायद उसे यह पसंद नहीं आएगा और यह ध्यान में रखो कि
(7:51:05) रिलेशनशिप यह चीजें करने से काफी बेहतर बन सक कठिनाइयां और चुनौतियां तो हर जगह रहती है अगर साथ मिलकर आप निपटा रहोगे उसका सामना करते रहोगे तो वह चुनौतियां आसान हो जाएगी और आप दोनों को और ज्यादा करीब लाएगी दो कंपैटिबल लोग अगर एक साथ आते हैं तो इसका मतलब यह नहीं कि उनका मैरिज सफल हो जाएगा सफल मैरिज बनाने की मास्टर की है इट इ नॉट इंपॉर्टेंट हाउ कंपैटिबल यू आर बट हाउ डू यू हैंडल ईच अदर इनकंपैटिबिलिटी इन सब के बावजूद भी कुछ रिलेशंस पेचीदा बन जाते
(7:51:50) हैं ऐसे रिलेशंस टिपिकल या सही या गलत के दायरे से बाहर रहते हैं मेरे पास एक ऐसा ही केस आया था वह व्यक्ति शादी सुधा था और वह किसी और स्त्री को भी प्रेम करता था और उसने मुझे यह भी कहा कि डॉक्टर साहब मेरा यह दूसरा रिलेशनशिप काफी गहरा है मैं मेरी पत्नी और गर्लफ्रेंड दोनों को बेइंतहा चाहता हूं और मैं किसी को छोड़ना नहीं चाहता आई एम इन डीप लव विद बोथ ऑफ देम लेकिन इसके लिए मुझे समाज स्वीकृति नहीं देता मैं क्या करूं वह नाजुक मिजाज का आदमी था जब वह मेरे पास आया तब वह एंटी डिप्रेशन की आठ
(7:52:40) गोलियां तो ले ही रहा था फिर भी मैं वो मानसिक रूप से काफी परेशान था मेरे दोष से तो उसके साथ हो गए थे और दो सेशन बाकी थे उसने कहा कि डॉक्टर साहब मैं सैटरडे संडे ओशो को मिलने के लिए पुन जा रहा हूं आपको कोई तराज तो नहीं मैंने कहा देखो मुझे कोई तराज तो नहीं है तुम जा सकते हो लेक्चर सुन सकते हो लेकिन जो कुछ भी सुनो वह सिर्फ सुनो मानो मत वो पुन गए ओशो के साथ उन्होंने मुलाकात की उन्होंने ु को बताया कि मैं शादीशुदा हूं और एक स्त्री के साथ डीप रिलेशनशिप में भी हूं मैं दोनों को बेइंतहा चाहता
(7:53:26) हूं मैं मनो चिकित्सक से मिल चुका हूं उन सब ने कहा कि वन मैन कैन नॉट सर्व टू मास्टर आपका एक साथ दो व्यक्ति के साथ प्रेम करना नामुमकिन है तुम्हारी गर्लफ्रेंड का प्रेम तुम्हारा वहम है उसने ओसो से पूछा मैं बड़ा कंफ्यूज हूं डिस्टर्ब हूं डिप्रेस्ड हूं पशो मैं क्या करूं पशो ने आराम से यह बात सुनने के बाद कि सिर्फ इतना ही कहा कि बहते जाओ तैरने की कोशिश मत करो तहरो ग तो थक जाओगे इतना सुनने के बाद वह स्वस्थ हो गया हैरत की बात है कि एंटी डिप्रेशन की सभी गोलियां
(7:54:13) उसने छोड़ दी बंबई आकर उन्होंने मुझे ये पूरी दास्तान सुनाई और कहा डॉक्टर साहब अब मुझे कोई डिप्रेशन नहीं है नींद भी आराम से आ रही है और हंसते हुए कहा कि डॉक्टर साहब अब मैं सिर्फ बहे जा रहा हूं तैरने की कोशिश नहीं करता अब मैं काफी स्वस्थ हूं कई बार दो घंटे की साइकोथेरेपी की बजाय दो लाइन ज्यादा बेहतर काम कर सकती है बीमार होता है वो स्वस्थ बनना चाहता है और जो स्वस्थ होता है वह ज्यादा तंदुरुस्त होना चाहता है जितनी पुरानी मानव सभ्यता है उतना ही पुराना अंधविश्वास है और उतनी
(7:55:01) ही पुरानी कामोत्तेजक दवाइयों की कहानी है ये एक इतिहास है ऐसी बिलीफ है कि सेक्स टॉनिक एक ऐसी चीज है जिससे काम इच्छा में बढ़ावा होता है या व्यक्ति का परफॉर्मेंस या काम शक्ति बेहतर हो सकती है हम इसी के दायरे में बात करेंगे माने काम इच्छा और काम शक्ति के इर्दगिर्द सेक्स टोनिक आमतौर पर तीन प्रकार से काम करते हैं एक मानसिक अवस्था में बदलाव लाते हैं च टल्स मेंटल स्टेट मिसाल के तौर पर शराब मेरवाना चरस अफीम इस टाइप की दवाएं शराब के सेवन के बाद अमन व्यक्ति की फिक्र चिंता एंजाइटी कम हो जाती है मैं सहवास अच्छी तरह से नहीं कर सकूंगा ऐसी फिक्र से
(7:55:49) भी उसे मुक्ति मिल जाती है और ऐसे सिचुएशन में वह चिंता और फिक्र के बगैर कभी कभ ज्यादा आक्रमक तरीके से सहवास कर सकता है लेकिन अगर शराब का प्रमाण थोड़ा ज्यादा हो गया तो कई बार व्यक्ति को इरेक्शन ही नहीं आता वह उत्तेजित ही नहीं हो सकता और साथ ही साथ रोजाना शराब पीने की आदत पड़ गई तो वह लिवर और नर्व्स को काफी नुकसान पहुंचा सकती है और शराब खुद एक नामर्दी का कारण बन सकती है शेक्सपियर ने अपने नाटक मैकबेथ में शराब के बारे में बहुत ही सही कहा है शेक्सपियर कहते हैं कि शराब काम इच्छा तो जगाती है लेकिन काम को बिगाड़ी है इट प्रवोक्स डिजायर बट टेक्स
(7:56:37) अवे द परफॉर्मेंस ड्रग्स के मामले में भी अक्सर ऐसा ही होता है ड्रग्स लेने के बाद व्यक्ति को थोड़े वक्त के लिए फिक्र चिंता तो दूर हो जाती है लेकिन अगर उसने सहवास दो मिनट भी किया होगा तो कई बार उसे ऐसा आभास होता है कि उन्होंने सहवास दो घंटे तक किया अक्सर इसमें टाइम डिस्टॉर्शन इफेक्ट आ जाती ड्रग्स के सेवन से आदत तो पड़ी जाती है लेकिन आदत के साथ-साथ उसको इरेक्शन और ऑर्गेजम दोनों रिस्पांस में गड़बड़ी आ सकती है और एक बार अगर गड़बड़ी आ गई तो ड्रग्स बंद करने के बाद भी इलाज मुश्किल हो जाता है दूसरा तरीका है कुछ दवाइयां ऐसी भी है जिसका काम करने का
(7:57:22) तरीका कुछ अलग है यह दवाइयां प्राइवेट पार्ट में खून का बहाव बढ़ा के उत्तेजना में इजाफा करती मिसाल के तौर पर यहि बेन यह यहि बेन अफ्रीका में एक वृक्ष की छाल में से बनाई जाती है मेरे तजुर्बे में यह मुझे इतनी कारगर नहीं लगी और उसमें समस्या यह है कि यह सिर्फ प्राइवेट पार्ट में खून का बहाव नहीं बढ़ाती बल्कि पूरे बदन में खून का बहाव बढ़ाती है मेरे तजुर्बे में यह बहुत कारगर साबित नहीं और तीसरी दवाई है जो एक तरह की मक्खी से बनाई जाती है जिसे स्पेनिश फ्लाई कहते हैं इस मक्खी को ड्राई करके उसका पाउडर बनाया जाता है और यह पाउडर ड्रिंक के साथ लिया जाता है यह
(7:58:08) पाउडर जब मूत्र मार्ग में पहुंचता है तब बेहद जलन और व्यक्ति को दर्द का एहसास होता है इरिटेशन इतनी हद तक बढ़ जाता है कि व्यक्ति उत्तेजित तो होता है लेकिन उसमें मजा या आनंद नहीं होता और कई बार दवाई का उत्तेजित करने वाला डोज और मृत्यु तक पहुंचने वाला डोज बेहद करीब होते हैं कहने का मतलब यह है कि द मार्जिन बिटवीन द थेरेपी डोज एंड द लीथल डोज इज वेरी वेरी नैरो हेंस इट्स बेस्ट टू अवॉइड इतिहास में हर एक संस्कृति में अलग-अलग प्रकार के खाद्य पदार्थ उत्तेजना बढ़ाने के लिए माने सेक्स टोनि के रूप में देखे गए हैं मिसाल के तौर पर गाजर सतावर केले राइनो होन माने
(7:58:53) गेंडे का सिंह अक्सर इन खाद्य पदार्थों का या जड़ी बूटियों का आकार ज्यादातर उत्तेजित शिन से मिलता जुलता रहता है 1960 में जिनस नाम की एक जड़ीबूटी बेहद कामोत्तेजक है ऐसा माना जाता था यह पौधा है जिसकी जड़ पुरुष के जननेंद्रिय से बिल्कुल मिलती जुलती है इसलिए ऐसे माना गया कि यह जड़ीबूटी काम शक्ति बढ़ाने में भी सहायक हो सकती है सच्चाई तो यह है कि यह कामोत्तेजना बढ़ाने में डायरेक्ट जिनसन की कोई भूमिका नहीं है अगर कुछ काम करता है तो वह है उसका आकार इट वर्क्स ऑन द प्रिंसिपल्स ऑफ सेक्सुअल सिग्नेचर उसका आकार देखकर व्यक्ति को ऐसा आभास होता है
(7:59:40) कि यह सोच बन जाती है कि काम इच्छा और काम शक्ति बढ़ाएगा हकीकत में यह सिर्फ श्रद्धा और सूचन की प्रक्रिया के द्वारा काम करती है जब मैंने 1992 में मुझे द सेक्सोलॉजिस्ट ऑफ एशिया का अवार्ड चाइना में दिया गया था तब मैं कुछ दिन वहां पर ठहरा उनकी दवाइयों के बारे में जानकारी ली तब उधर जिनस के बारे में मैंने काफी पूछताछ की उन्होंने बताया कि जिनस हमारे यहां पैदा तो होता है लेकिन हम लोग खाते नहीं है हम लोग इसे जापानीज लोगों को खिलाते हैं पौधा उगता तो है चीन में लेकिन बिक्री जापान में होती है और वह भी बहुत ऊंची कीमत पर ऐसा ही कुछ समय के बाद
(8:00:25) विटामिन ई एक बेहतरीन सेक्स टॉनिक है ऐसी अफवा मार्केट में आई यह गलतफहमी अराउंड 1970 के दौरान चूहों पर किए गए एक वैज्ञानिक अध्ययन के बाद फैली इन प्रयोग में इन चूहों को चुना गया था जिनमें विटामिन ई का अभाव था और साथ ही साथ जननेंद्रिय के संबंधित भी कुछ थोड़ी बहुत समस्याएं थी जब इन चूहों को विटामिन ई दिया गया तो उनकी समस्याएं कम होती दिखाई दी और फिर से वह उछल कुद करने लगे इसी आधार पर कुछ लोगों ने यह निष्कर्ष निकाला कि विटामिन ई के सेवन से पुरुषों की समस्या का भी हल निकल जाएगा उनकी कामशक्ति
(8:01:10) में भी इजाफा होगा और वह भी ज्यादा उछल कूद कर सकेंगे वह चूहो में तो हुआ लेकिन पुरुषों में बिल्कुल नहीं हुआ अफसोस अभी हम बात करते हैं एलोपैथी और सेक्स टोनिक्स कई बार किसी पुरुष में हार्मोन टेस्टोस्टरॉन की कमी होती है तो उसकी काम इच्छा और काम शक्ति दोनों में कमी आ सकती अक्सर 50 60 साल के बाद जब पुरुष हार्मोन में कमी आती है तब उनकी कामेच्छा और इरेक्शन की क्वालिटी में कुछ लोगों में थोड़ा बहुत फर्क जरूर पड़ता है यह फर्क अचानक नहीं पड़ता यह आहिस्ता आहिस्ता आता है हालांकि स्त्रियों में मेनोपॉज के बाद
(8:01:55) पीरियड अचानक बंद हो जाते हैं और फीमेल हार्मोन एस्ट्रोजन में भी गिरावट जो आती है वह अचानक आ जाती पुरुषों में हार्मोन की गिरावट आहिस्ता आहिस्ता स्लोली आती पुरुष हार्मोन टेस्टोस्टरॉन मार्केट में उपलब्ध है मार्केट में जो टेस्टोस्टरॉन उपलब्ध है उसमें मेरी नजर में बेहतर है टेस्टोस्टरॉन अन डेकनेट ये हार्मोन गोलियां इंजेक्शन और जेल तीनों मीडियम में उपलब्ध है मेरे ख्याल से इंजेक्शन और जेल गोलियों से ज्यादा इफेक्ट अगर किसी की उम्र 45 साल से ऊपर हो तो उसे अपना प्रोस्टेट का टेस्ट करवा लेना चाहिए ब्लड एग्जामिनेशन से पीए
(8:02:41) से टेस्ट करवाना चाहिए अगर वह नॉर्मल रहा तो आपकी डॉक्टर की सलाह से आप यह हार्मोन ले सकते हो काम इच्छा और काम शक्ति की कमी में यह हार्मोन फायदा पहुंचा सकता है दूसरी चीज यह है उसने नए जमाने में एक हलचल बचा दी और वह है पीडी फ माने वायग्रा और उस जैसी दूसरी दवाइयां इसमें तीन तरह की खास दवाइयां है एक है सिल्डेनाफिल जिसे वायग्रा कहते हैं दूसरी है वर्डेन फिल और तीसरी है डला फील वायग्रा 50 और 100 मिलीग्राम में उपलब्ध है वडना फील और टेला फील 10 और 20 मिलीग्राम में उपलब्ध यह दवाइयां सहवास के
(8:03:29) एक घंटे पहले ली जाती है भूखे पेट बेहतर काम करती 24 घंटे में एक बार ले सकते हैं यह दवाइयां काम इच्छा बढ़ाती नहीं है उससे डिजायर या ऑर्गेजम पर कोई असर नहीं होता यह इरेक्शन को क्रिएट नहीं करती माने इरेक्शन पैदा नहीं करती लेकिन आए हुए तनाव में काफी इजाफा कर सकती कहने का मतलब यह है कि अगर किसी को 30 पर इरेक्शन आ गया तो वह 95 पर तक आराम से ले जा सकता इसलिए यह गोली लेने के बाद थोड़ा फोर पले जरूरी है ताकि थोड़ा जोश जुनून बढ़े शिष्ण में थोड़ी बहुत स्टिफ्ट आ जाए तो यह गोलियां शिष्ण में
(8:04:15) मजबूती तो बढ़ाती है और साथ ही साथ सस्टेन करने में भी काफी मदद रूप होती अगर आज देखा जाए तो डिवोर्स का सबसे कॉमन कारण क्या है वह है सेक्सुअल इनकंपैटिबिलिटी माने पुरुष को इच्छा होती है लेकिन मजबूती प्रवेश कर सके उतनी नहीं आती या तो प्रवेश हो सके उतनी अगर आ भी गई तो किसी कारण वर्ष प्रवेश के पहले ही आई हुई स्टफ चली जाती है और शिष्ण नरम हो जाता है यह दवाइयां ऐसे सिचुएशन में बहुत कारगर है मैंने केई एम अस्पताल में सैकड़ों शादियां इन गोलियों की मदद से टूटने से बचाइए हां अगर कोई व्यक्ति ब्लड प्रेशर की
(8:05:00) गोली ले रहा हो जिसमें नाइट्रेट हो या प्रोस्टेट की तकलीफ की वजह से अल्फा ब्लॉकर्स की गोलियां ले रहा हो तो यह दवाइयां नहीं ली जा सकती यह दवाइयां प्रिस्क्रिप्शन ड्रग है और आपके डॉक्टर की सलाह के अनुसार ही आपको लेना चाहिए कुछ औरतों में भी स्त्री हार्मोन की कमी की वजह से उत्तेजना यानी कि गीलापन लुब्रिकेशन आने में कमी हो सकती है इसकी वजह से क्या होता है कि प्रवेश के वक्त स्त्री को दर्द होता है जिसे डिस्पर या कहते हैं यह दर्द की वजह से दोबारा उनको सहवास करने की इच्छा कम हो जाती मिसाल के तौर पर अगर आपने एक कप चाय पी अगर चाय
(8:05:40) अच्छी लगी तो दोबारा पीने का दिल होगा अगर अच्छी नहीं लगी तो आप कोई बहाना बना लेंगे कि चाहे अवॉइड कर लेंगे तो डिस्पर या की वजह से कई बार कामेच्छा में कमी आ सकती है इसे दूर करने के लिए माने एस्ट्रोजन की कमी को दूर करने के लिए एस्ट्रोजन क्रीम भी उपलब्ध है जो प्राइवेट पार्ट के इर्दगिर्द लगाने के बाद कुछ हफ्तों में फिर से लुब्रिकेशन शुरू हो सकता है साथ ही साथ सहवास भी बिना दर्द मुमकिन होता है और कामेच्छा फिर से जागृत हो जाती क्रीम की बजाय स्त्री हार्मोन की गोली भी उपलब्ध है अगर जरूरत पड़े तो वो भी ली जा सकती है वह
(8:06:21) भी कारगर साबित हो सकती कोई भी हार्मोन की दवा अपने डॉक्टर की सलाह अनुसार ही लेने चाहिए दूसरी बात है जो आम लोग मानते हैं कि भाई होम्योपैथी में कोई सेक्स टोनिक है कि नहीं होम्योपैथी एक होलिस्टिक साइंस है उसमें इंडिविजुअलाइजेशन और रेशन इजेशन बिल्कुल आवश्यक है जिसमें माइंड बॉडी और सोल माने मरीज का दिमाग उसका शरीर और उसका आत्मा तीनों को कंसीडर करके दवाई दी जाती है होम्योपैथी में कोई दवाई सबके लिए एक ही हो ऐसा अमूमन नहीं होता जब तक मरीज और डॉक्टर एक दूसरे से आमने सामने बात नहीं करेंगे तो दवाई का कारगर होना मुश्किल है
(8:07:08) न्यूजपेपर में कॉलम पढ़ के या रिमोट कंट्रोल से होम्योपैथी में इलाज अमूमन नामुमकिन है बिल्कुल मुमकिन नहीं फायदा होता है किसको जो कॉलम लिखता है उसको ना कि जो दवाई लेता है दूसरी बात है खास जो आयुर्वेद और आयुर्वेद में सेक्स टॉनिक बहुत है अब हम आयुर्वेदिक सेक्स टोनिक्स पर नजर डालते हैं मेरे पास करीबन 55000 से अधिक मरीज आ चुके होंगे और वह ज्यादातर कोई ना कोई सेक्स टॉनिक लेने के बाद ही मेरे पास आते हैं मैंने हर एक मरीज को यह प्रश्न अवश्य पूछा था कि आपने कोई दवाई ली जो आपको कारगर महसूस हुई तो ऐसा मरीज मुझे आज तक
(8:07:54) नहीं मिला जिसने कहा हो कि डॉक्टर साहब यह दवाई लेने से मैं बिल्कुल ठीक हो गया आयुर्वेद एक बेशक बेहतरीन विज्ञान है अगर सही तरीके से इस्तेमाल किया जाए तो बाजार में जो आयुर्वेदिक औषधियां खास करके हर्बल सेक्स टोनिक्स उपलब्ध है उनका कारगर होना मुझे बहुत मुश्किल लगता है क्योंकि वह बेसिक आयुर्वेदिक प्रिंसिपल को वायलेट करते हैं माने आयुर्वेदिक नियमों का ही उल्लंघन करती है आयुर्वेद में एक नियम है कि जब तक आप मरीज की प्रकृति और विकृति का पता ना कर लो माने फिजियोलॉजी और पैथोलॉजी की जांच ना कर लो जो पर्सनली मेले बगैर
(8:08:40) मुमकिन नहीं है तो उसको दवाई देना खतरनाक साबित हो सकता है इसलिए की हर एक समस्याओं के लिए एक ही दवाई हो यह आयुर्वेद में मुमकिन नहीं है अलग-अलग मरीज की तकलीफ के लिए उनकी अलग अलग से फिजियोलॉजी और पैथोलॉजी जानने के बाद ही दवाई दे सकते हैं दूसरी चीज है हर्बल दवाइयां बनाते वक्त समझिए कि आज पौधा तोड़ा तो उसकी असर छ और आठ महीने में कम हो जाती है मार्केट में जो दवाई मिलती है वह मैन्युफैक्चर करने के बाद कैप्सूल में भरी जाती है फिर उसका बॉटलिंग होता है फिर वो होलसेलर के पास जाती है फिर डिस्ट्रीब्यूटर के पास जाती है फिर आखिर में रिटेलर के पास दुकान
(8:09:26) में आती है इसमें ही करीबन 12 महीने तक निकल जा सकता है तो दवाइया में कितनी ताकत बची रहेगी उस पर अवश्य शक पैदा होगा उतना ही नहीं हैरत की बात तो यह है कि आज तक मैंने आयुर्वेदिक दवाई की कोई भी बोतल ऐसी नहीं देखी है जिस पर यह लिखा हो कि प्लांट या पौधा कब तोड़ा था तीसरी बात है आयुर्वेद कहता है कि जिस तरह आप गंदे कपड़े पर बराबर रंग नहीं चढ़ा सकते क्योंकि रंग चढ़ाने के लिए पहले कपड़े को साफ सुथरा होना बिल्कुल जरूरी है उसी तरह वाजीकरण माने सेक्स टोनिक देने से पहले शरीर का शुद्धिकरण करना बहुत जरूरी है जो पंचकर्म से ही किया जा सकता है सेक्स
(8:10:10) टॉनिक के सेवन के पहले आजकल कोई पंचकर्म नहीं करवाता अरे भूल जाओ पंचकर्म की बात कोई मामूली जुलाब भी एडवाइस नहीं करता चौथी चीज है स्टोरेज के बाबत स्टोरेज के बारे में बात करेंगे आयुर्वेद के अनुसार औषधि के निर्माण के बाद उसे या तो कांच या मिट्टी के बर्तन में स्टोर करना चाहिए ताकि उसका असर बरकरार रहे आजकल ज्यादातर हर्बल टॉनिक या तो एनिमल बेस जिलेटिन कैप्सूल में दिया जाता है या एलुमिनियम फाइल में या प्लास्टिक के डिब्बे में रखा जाता है जो आयुर्वेद के नियमों के अनुसार नहीं है यह कुछ कारण मैंने बताए जिसकी वजह से ऐसा लग रहा है कि आयुर्वेद के मूल
(8:10:56) सिद्धांतों पर समझौता किया गया है इसके लिए इस सेक्स टोनिक की कारगर होने पर स्वाभाविक है कि शक पैदा होगा मेरे 55000 मरीज के अनुभव से मैं यह निष्कर्ष पर पहुंचा हूं कि बाजार में जो उपलब्ध हर्बल सेक्स टॉनिक है वो कारगर नहीं क्योंकि इन दवाइयों का स्टोरेज उसकी एक्सपायरी डेट की अवधि उसके सेवन की विधि आयुर्वेद की बेसिक प्रिंसिपल्स और उसके सिद्धांतों को फॉलो नहीं करते मेरे अनुभव में ज्यादातर दवाइयां या गोलियां दी जाती है तो अक्सर पैकेट के ऊपर जो घोड़े या सांड का चित्र होता है वह असर करता है ना कि दवा जब डॉक्टर दवाई लिखता है तब मरीज के दिमाग
(8:11:44) में एक बात तय हो जाती है कि उसके बदन में कुछ ना कुछ कमी है और वह कमी पूरी करने के लिए डॉक्टर ने दवा लिखी है ऐसा करने से बेवजह मरीज की नैतिक हिम्मत को कभी-कभी धोखा पहुंच सकता है वह मरीज ना होते हुए भी अपने आप को मरीज मानने लगता है हकीकत में इट इज नथिंग बट एक्सप्लोइटेशन ऑफ द डेस्प्रिंग कि शादी की रात को बाजार में एक पान मिलता है जिसे पलंग तोड़ पान के नाम से मशहूर है कहते हैं कि अगर यह पान आप खा लोगे तो आपकी सुहाग रात काफी सफल हो जाएगी मैं ऐसे
(8:12:31) मरीजों को भी शादी के दूसरे दिन मिला हूं कुछ लोग तो पान खाने के बाद सीधे सो सो ही गए थे कुछ ने बताया कि उन्हें बहुत अच्छा लगा और वह बड़े लंबे टाइम तक सेक्स करते रहे लेकिन जब उनके पार्टनर को मैंने पूछा तो उन्होंने फरमाया कि डॉक्टर साहब यह उनका वहम है हकीकत में वह आधी मिनट को आधा घंटा समझ बैठे थे मेरे तजुर्बे में यह पलंगतोड़ पान नुकसान ज्यादा और फायदा कम करता है यह पलंगतोड़ पान बड़ी महंगी कीमत पर बिकते हैं इसमें अक्सर दुकानदार कथे में कोई नशीला पदार्थ जैसे कि कोकेन की अफीम की चरस कुछ मिला देता है इसको खाने के बाद टाइम डिस्टॉर्शन इफेक्ट होने की
(8:13:15) वजह से व्यक्ति को सिर्फ अच्छी असर का भ्रम होता है आभास होता है इसके रेगुलर सेवन से एक आदत पड़ जाती है और मसल्स में कमजोरी आ जाती है और कुछ समय के बाद वह अक्सर नामर्दी का शिकार हो जाते हैं बेहतर यही होगा कि ऐसी चीजों से आप दूर रहिए अक्सर लोग मुझे पूछते हैं डॉक्टर साहब बाजार में जो यह उपलब्ध तेल है जो लगाने से कुछ फायदा हो सकता है क्या कृष्ण की लंबाई बढ़ सकती है क्या मजबूती में इजाफा हो सकता है क्या मैंने बहुत से पेशेंट को फॉलो अप किया कि कोई पर्टिकुलर ऑयल या क्रीम लगाने से कुछ साइज में फर्क पड़ता है कि नहीं अगर मेडिकल दृष्टिकोण से देखा
(8:13:58) जाए तो यह क्रीम या ऑयल फायदेमंद नहीं हो सकता क्योंकि जोश बढ़ने पर खून का भाव शिन में होता है और उसके बाद सिस्टम में मजबूती आती है शिष्ण पर एक कवरिंग आता है जिसे ट्यूनिका अल्बूजीनिया कहते हैं उस कवरिंग के बाद चमड़ी आती है माने आप कितना भी ऑयल या क्रीम लगाएं वह ऑयल चमड़ी और ट्यूनिका अल्बूजीनिया को भेद कर अंदर तक कॉरपोरा कैवरनोसा तक नहीं पहुंच सक इसका माना यह हुआ कि कितना भी ऑयल या क्रीम लगाने से शिष्ण की साइज में लंबाई में मजबूती में उससे कोई फायदा होना मुश्किल है कुछ मरीज को मैंने करीबन तीन महीने के
(8:14:46) लिए फॉलो अप किया था ताकि यह जानने के लिए कि इस तेल मालिश से या क्रीम के मालिश से कुछ मजबूती में फायदा हुआ है कि नहीं तीन महीने के बाद मैं यह निष्कर्ष पर पहुंचा कि शिष्ण की मजबूती और लंबाई में तो कोई फर्क नहीं पड़ा हां लेकिन कुछ लोगों के हाथ के मसल्स में ज्यादा मजबूती आ गई कई बार लोग पूछते हैं कि हमें सहवास करने से खास कर के डिस्चार्ज करने के बाद थकान लगती है तो हम क्या करें यह थकान मानसिक भी हो सकती है या शारीरिक भी हो सकती मानसिक इस वजह से की कई बार ऐसा लगता है कि इतना वीर्य का व्यय हो गया तो मुझे कमजोरी आ जाएगी और शारीरिक उसके लिए कि
(8:15:34) क्लाइमेक्स और ऑर्गेजम के दौरान बदन के जो बड़े मसल्स होते हैं वो स्पेज मस में आ जाते हैं और थकान का एहसास कुछ लोगों में हो सकता है मशहूर आयुर्वेदाचार्य श्री बापा लाल वैद्य का कहना था कि अगर किसी को इस तरह की कमजोरी लगे तो एक गिलास गाय के दूध में एक चम्मच गाय का घी डालकर स्वादानुसार मिश्री माने रॉक शुगर रिफाइन शुगर नहीं डालकर आप पी ले तो शारीरिक और मानसिक रूप से फिर से आप त्वरित स्वस्थ हो जाए वजह उसकी यह बताई उन्होंने कि आयुर्वेद कहता है कि गाय का घी मानसिक शांति प्रदान करता है एसिडिटी और कब्स की शिकायत को दूर करता है कोलेस्ट्रॉल नहीं
(8:16:20) बढ़ाता और आयुर्वेद का कहना है कि गाय का घी भैंस का नहीं वह उसकी वजह बताते हैं कि जो ताकत सांड में होती है वह भैंस के पड़े में नहीं होती आयुर्वेद में घी को रसायन माना गया है रसायन का मतलब है जो जवानी को बरकरार रखे और बुढ़ापे को दूर करें अगर कोई पूछे कि च इज बेस्ट सेक्स टोनिक किसीने क्या खूब कहा है कि एक आकर्षक समझदार और प्यार भरा पार्टनर सबसे बेहतर सेक्स टॉनिक बन सकता है मानव विकास के साथ-साथ साइंस और टेक्नोलॉजी का भी विकास हो रहा है और साथ ही साथ यह भी होना स्वाभाविक है कि इंसान के सेक्सुअल रिलेशंस में भी
(8:17:09) टेक्नोलॉजी का समावेश हो जाए पहले के जमाने में मस्तराम जैसी काम किताबें आती थी बाद में कलरफुल मैगजीन आने लगे उसके बाद पॉन फिल्म्स और वेबसाइट का दौर चला और आज तो सेक्सुअल रिलेशंस के लिए वर्चुअल रियलिटी माने आभासी वास्तविकता का मीडिया यूज होता है इन सबका मेन सोर्स है इंटरनेट आज हम इसी साइबर सेक्स के बारे में बात करेंगे लेकिन सबसे पहले मैं एक बात बिल्कुल साफ कर दूं कि मेरा उद्देश्य साइबर सेक्स के बारे में जानकारी देना है ना कि उसे बढ़ावा देना मेरा मकसद इस विषय
(8:17:54) को संपूर्ण निष्पक्ष रीत से पेश करना है तो चलिए शुरुआत करते हैं सबसे पहली बात हमारे दिमाग में यह आती है कि साइबर सेक्स क्या है साइबर सेक्स केवल एक ही चीज नहीं है इसमें बहुत सारे एस्पेक्ट शामिल है बल्कि यह शब्द इंटरनेट द्वारा सेक्स के अलग-अलग गतिविधियों के लिए इस्तेमाल किया जाता है बस इनमें एक ही कॉमन चीज है तो वह है तमाम गतिविधियां इंटरनेट या इलेक्ट्रॉनिक नेटवर्क पर होती है दूसरे शब्दों में कहे तो साइबर सेक्स पूरी तरह से आभासी माने वर्चुअल है और इसमें सेक्सुअल सेटिस्फेक्शन के लिए उपभोग
(8:18:40) कर्ता को किसी भी प्रकार का शारीरिक संपन्न नहीं करना पड़ता इस कोविड पेंडम के कारण सेक्सुअल प्लेजर का सेक्सुअल आनंद का यह स्वरूप तेजी से लोकप्रिय हो गया इस दौरान लोगों को अलग-अलग रहने के लिए मजबूर होना पड़ा था क्वारंटाइन जैसे कई मामलों में या लॉकडाउन में भी अपने साथी से दूर होना पड़ा था ऐसी स्थिति में व्यक्ति के साथ प्रत्यक्ष शारीरिक संबंध संभव नहीं थे उस वक्त उनके पास एक ही ऑप्शन था साइबर सेक्स यह ऑप्शन उनके लिए सहज और सेफ था भले ही साइबर सेक्स कोविड पेंडम में काफी पॉपुलर हुआ हो लेकिन वह
(8:19:29) पहले ही से काफी पॉपुलर था कई चीजें साइबर सेक्स के तहत आती है जैसे फोन सेक्स सेक्सटिंग माने सेक्सुअल मैसेजेस भेजने के लिए एसएमएस या ट का यूज करना वर्चुअली साथ में रहकर पोन फिल्म देखना या कैमिंग करना सबसे आधुनिक तरीका है लंबी दूरी से सेक्स टॉय का इस्तेमाल इसे टेली डीलडो निक्स कहा जाता है यह सब साइबर सेक्स का ही एक हिस्सा माना जाता है चलो इसी के बारे में थोड़ी अधिक चर्चा करते हैं फोन सेक्स इसे साइबर सेक्स का सबसे पहला स्वरूप कहा जा सकता है इसमें फोन पर खुले तौर पर इरोटिक सेक्सुअल बातचीत होती है इस बातचीत के
(8:20:18) दौरान दोनों पार्टनर्स डर्टी बात करते हैं बातें करते वक्त सो मैथु या हस्त मैथु से खुद को सेक्सुअली सेटिस्फाइड किया जा सकता है फोन सेक्स के लिए बहुत सारी पेड सर्विसेस भी बाजार में उपलब्ध है लेकिन जैसे कि आपको मालूम होगा कि बहुत सारे ऑनलाइन फ्रॉड पैसों की हेराफेरी करने का मुख्य माध्यम आज इंटर नेट और फोन हो गया है तो इससे जरूर केलफुल रहना चाहिए सेक्सटिंग यह शब्द सेक्स और टेक्स्ट शब्दों को मिलाकर बना है यह करीब-करीब फोन सेक्स जैसा ही होता है फर्क सिर्फ यह है कि बातचीत यहां
(8:21:03) प्रत्यक्ष नहीं होती वह की जाती है लेकिन मैसेजेस के जरिए जब आप किसी मैसेजिंग पप के जरिए इरोटिक या सेक्सुअल मैसेजेस भेजते हैं तो इसे सेक्सटिंग कहा जाता है चाहे वह एसएमएस हो या लेवल मान सकते हैं इससे आगे आता है साइबर
(8:21:49) सेक्स इसमें आप प्राइवेट चैट फोरम के जरिए इंटरनेट पर सेक्सुअल इंटरेक्शन कर सकते हो साइबर सेक्स में आप अपनी हरकत बयान करते हैं और एक दूसरे के साथ सेक्सुअल मैसेज फोटो और वीडियो शेयर करते हैं दोनों पार्टनर्स इससे काम सुख की अनुभूति प्राप्त कर सकते हैं दूसरी चीज है साथ में पोन देखना जब कोई भी दो पार्टनर लॉन्ग डिस्टेंस रिलेशनशिप में होते हैं तो वह इंटरनेट के जरिए एक साथ पोन फिल्म देखते हैं उस वक्त इंटरनेट के जरिए या फोन पर एक दूसरे से कामुक बातें करते हैं दोनों साथी एक साथ पन फिल्म देखकर खुद की उत्तेजना
(8:22:35) में इजाफा लाते हुए क्लाइमैक्स तक पहुंच सकते हैं कैमिंग साइबर सेक्स का सबसे लोकप्रिय तरीका टाइमिंग बन चुका है इसमें खर्च भी करना पड़ता है और इसी में सबसे ज्यादा फ्रॉड भी होते हैं इंटरनेट पर उपलब्ध ऐसी सर्विसेस में वेबकैम का इस्तेमाल होता है ऐसी सर्विसेस देने वाली वेबसाइट पर अवेलेबल मॉडल्स में से आप कोई भी मॉडल सिलेक्ट कर सकते हैं ऑनलाइन पेमेंट के बाद ही उपभोक्ता उनके साथ ऑनलाइन सेक्स कर सकता है और वह ऑनलाइन मॉडल से अपनी खुद की काम इच्छा की संतुष्टि करता है लेकिन बहुत बार ऐसा हो
(8:23:22) सकता है कि दूसरी तरफ कोई एक्चुअल मॉडल हो ही नहीं बल्कि बट द्वारा ऑपरेट होने वाला प्रोग्राम है जो आपको वास्तव में लग रहा है कि कोई लाइव मॉडल है टेली डिल डोनेक्स इंटरनेट के जरिए इसमें सेक्स टॉय का इस्तेमाल किया जाता है लॉन्ग डिस्टेंस से ऑपरेट होने वाले इस सेक्स टॉय को टेली डिलोनिक्स के रूप में जाना जाता है यह सेक्स टॉय स्क्रीन के दूसरी साइड की पार्टनर या मॉडल ने पहनी हुई रहती है इसमें पार्टनर या उपभोग करता रिमोट से सेक्स टॉय का वाइब्रेशन कंट्रोल कर सकता है यह वाइब्रेटर एक प के जरिए फोन से
(8:24:10) जुड़ा हुआ होता है और उस ऐप में सेक्स टॉय के वाइब्रेशन कंट्रोल करने की सुविधा होती है टेली डीलडो दोनों पार्टनर्स को दूर होते हुए भी करीब होने का एहसास और स्पर्श का आवास करा सकते हैं अभी हम बात करने जा रहे हैं वर्चुअल रियलिटी माने वी आर सेक्स की आमतौर पर वर्चुअल रियलिटी वाले उपकरण का इस्तेमाल वीडियो गेम के लिए होता है इस प्रकार वीआर गेम्स खेलने के लिए जो हेडसेट या गॉगल्स पहने जाते हैं वह तो हम सबको मालूम है बस इसी तरह के हेडसेट वी आर सेक्स में भी इस्तेमाल किए जाते हैं फर्क
(8:24:56) सिर्फ इतना है कि वह हेडसेट या गोगल्स ऐसे प्रोग्रामिंग से जुड़े रहते हैं जहां गेमिंग की बजाय पोर्न होता है जिसके द्वारा कोई भी व्यक्ति वह हेडसेट पहनने के बाद उस प्रोग्राम में मौजूद काल्पनिक व्यक्ति के साथ सेक्स कर सकता है साइबर सेक्स में क्या-क्या आता है इसका यह पूरा लिस्ट नहीं है टेक्नोलॉजी हमेशा आगे बढ़ रही है इसलिए साइबर स्पेस पर भी इरोटिक सेक्सुअल बातों के लिए अलग-अलग तरीके इन्वेंट हो रहे हैं फिलहाल साइबर सेक्स के फायदे और नुकसान के बारे में थोड़ी चर्चा करते हैं सबसे पहले
(8:25:41) देखते हैं कि साइबर सेक्स से फायदा क्या है सबसे पहला और अहम फायदा यह है कि सेक्सुअली ट्रांसमिटेड इंफेक्शन माने एसटीआईओ होता है क्योंकि इसमें दोनों पार्टनर्स एक दूसरे से दूर रहते हैं यह एक इंटरनेट द्वारा होने वाला सेक्स है इसमें शामिल दोनों व्यक्तियों का एसटीआईएचएल खुद के सेटिस्फेक्शन के लिए साइबर सेक्स का उपयोग कर रही है तो उसे प्रेगनेंट होने का भी डर नहीं रहता हालांकि खतरा इसमें भी होता है और अगर खबरदारी न रखें तो यह खतरा
(8:26:29) बहुत भारी हो सकता है लोग अगर अपनी कोई भी जानकारी या फोटोस दूसरों के साथ शेयर करते हैं तो वह फोटोस लीक भी हो सकते हैं साइबर सेक्स में शामिल होने से पहले आपको प होना चाहिए कि आप अपनी प्राइवेसी को खतरे में डाल रहे हैं टेक्नोलॉजी इतनी एडवांस हो गई है कि आपको मालूम भी नहीं पड़ेगा कि किसी स्पाइवेयर या मालवेयर का सहारा लेक आपके मोबाइल से आपके पर्सनल डिटेल्स फोटोज और आपके बैंक अकाउंट और पासवर्ड चुराए गए हैं और फिर चाहे वह फोटोस हो या पासवर्ड्स अक्सर उनका गलत इस्तेमाल ही होता है ऐसे
(8:27:16) बहुत सारे केसेस भी हुए हैं जिनमें साइबर सेक्स में हिस्सा लेने वाले व्यक्तियों को पैसों के मामले में फंसाया गया है जिसमें दूसरी व्यक्ति आपके न्यूड फोटो को सेव करती है वीडियो सेक्स करते समय स्क्रीनशॉट ले लेती है या आपकी फिल्म बनाती है और बाद में आपको ब्लैकमेल करके पैसे मांगती है समाज के डर से कितने लोगों ने लाखों रुपए इसमें गवाए हैं अगर किसी के यह सेक्सुअल चैट्स या न्यूड फोटोस लीक होते हैं तो उस पर कंट्रोल करना अमक नामुमकिन है इसलिए ध्यान रहे कि साइबर सेक्स में आप अपना हर कदम बेहद सावधानी से उठाए ठुकराए गए
(8:28:02) प्रेमियों के कई उदाहरण मैंने अपनी प्रैक्टिस में देखे हैं जो अपने पार्टनर से बदला लेने के लिए एक दूसरे के न्यूड इमेजेस या वीडियोस वायरल कर देते हैं माइनर बच्चों को भी ब्लैकमेल करने के और उनसे जबरन वसूली के काफी उदाहरण भी सामने आए हैं यदि आप या आपके करीबी लोगों के साथ ऐसा होता है तो तुरंत लोकल साइबर क्राइम यूनिट में कंप्लेन करनी चाहिए पुलिस का साइबर क्राइम विभाग ऐसे मामलों को हल करने में काफी मददगार साबित हो सकता है साइबर सेक्स में बहुत सारे इल्लीगल कारोबार भी शामिल होते हैं जैसे कि माइनर बच्चे और लड़कियों का
(8:28:48) इस्तेमाल इनका ह्यूमन ट्रैफिकिंग माने मानव तस्करी फिर उनकी फिल्म बना के सेक्सुअल एक्सप्लोइटेशन किया जाता है और वह फिल्म ऑनलाइन बेची जाती है साइबर सेक्स क्राइम का यह सबसे आम रूप है जिसे सेक्स ओवर वीडियो भी कहते हैं ऑनलाइन बेचे जाने वाले सेक्स बिजनेस में रेप और हिंसा भी भी शामिल है दुनिया भर में कई विकृत मानसिकता के लोग भारी कीमत अदा करके यह लाइव सेक्स के दृश्य देखते हैं आम लोग जो इंटरनेट इस्तेमाल करते हैं वहां ऐसी वेबसाइट नहीं होती ज्यादातर डार्क वेब द्वारा ऐसी लाइव
(8:29:35) सेक्स का नियंत्रण होता है जो आमतौर पर नॉर्मल लोगों को इजली एक्सेसिबल नहीं होता डार्क वेब का नेटवर्क दुनिया भर में फैला हुआ है इंटरनेट द्वारा की गई कोई भी सेक्सुअल एक्टिविटी साइबर सेक्स है और वह साइबर क्राइम के अंडर में ही आती है इसमें सॉफ्ट पोन से लेकर डार्क वेब तक सब कुछ शामिल है बदलते टेक्नोलॉजी के साथ-साथ सेक्स बेचने के तरीके भी बदलते रहते हैं 1995 से लेकर 2021 तक वह यह बताते हैं कि सेक्सुअल कंटेंट देखने के लिए जो इंटरनेट ट्रैफिक होता था वह इन 21 सालों में 5 पर
(8:30:24) से लेकर 80 पर तक बढ़ गया है लगभग 5 साल पहले भारत के सुप्रीम कोर्ट ने पॉन वेबसाइट के ऊपर बंदी डाली थी माने बैन किया था पॉन दिखाने वाले वेबसाइट का प्रसारण भारत में बिल्कुल रुकवाया गया था लेकिन आज भी पन देखने वाले लोगों में भारत पहले पांच देशों में है ऐसा क्यों क्योंकि बंदी के बावजूद भी टेक्नोलॉजी द्वारा लोग हमेशा अलग-अलग रास्ता ढूंढ ही लेते हैं क्योंकि पन देखने के लिए लोग काफी बेताब रहते हैं कई बार तो मजबूर भी रहते हैं दूसरी वजह यह है कि पिछले कुछ सालों में भारत में इंटरनेट बहुत ही सस्ता हो
(8:31:09) गया है इसके लिए भी पन देखने में थोड़ा बहुत इजाफा हुआ हुआ है इससे विपरीत स्वीडन और फिनलैंड जैसे देशों में पाया गया जहां इंटरनेट की पहुंच बहुत ज्यादा है फिर भी पन देखने वाले लोगों की संख्या भारत के कंपैरिजन में कम है क्योंकि इसका मेन कारण है सेक्स एजुकेशन लोग कम उम्र में ही सही तरीके से सेक्स एजुकेशन प्राप्त कर लेते हैं ताकि सही क्या है और गलत क्या है उसका फैसला वह खुद सही तरीके से ले सकते हैं अफसोस की बात यह है कि हमारे यहां सेक्स एजुकेशन नहीं दिया जाता उसके लिए उसकी कुत वलता
(8:31:55) बनी रहती है सेक्सुअल स्टिमसन है लेकिन उसको चैनेलाइज कैसे करना उसका रास्ता नहीं मिलता उसकी मेन वजह है सेक्स एजुकेशन का अभाव सेक्स एजुकेशन की कमी स्कैंडिनेवियन देशों में तो सेक्स को इंसानों की आम जरूरत के रूप में स्वीकार किया गया है लेकिन हमारे यहां ऐसा नहीं है इस वजह से लोग अज्ञान में गलत रास्ता अपनाते हैं और फिर साइबर सेक्स के ट्रैप में फंस जाते हैं कुतु हल तो हर एक को रहता है लेकिन यह हकीकत है कि अज्ञान से विकृत कुतुल बढ़ता है और ज्ञान से विकृत कुतु हल कम होता है इसके लिए सेक्स
(8:32:41) एजुकेशन बहुत अहम है एक प्रश्न उभर के आता है कि अगर कोई साइबर सेक्स के ट्रैप में फंस गया तो क्या करें भारत में हमारे पास साइबर सेल है जो साइबर अपराध को हैंडल करता है लोकल साइबर क्राइम ब्रांच में आप कंप्लेन कर सकते हो इसके अलावा अपने फैमिली की मदद लेना बहुत जरूरी है क्योंकि ऐसी घटनाएं आपको मेंटली डिस्टर्ब कर सकती है उस वक्त अपनों का साथ और सपोर्ट होना बहुत जरूरी है बहुत बार लोग साइबर सेक्स के ट्रैप में फस जाते हैं लेकिन कंप्लेन नहीं करते उनको समाज का डर रहता है लेकिन अगर आपके दोस्त और आपका परिवार आपके साथ
(8:33:26) है तो किसी सक्षम साइबर सेल अधिकारी की मदद से आपको कंप्लेंट दर्ज करवानी चाहिए एक अहम सवाल यह पैदा होता है कि साइबर सेक्स अपराधों से सुरक्षित रहने का तरीका क्या है कोई इसे कैसे रोक सकता है अगर आप इंटरनेट पर पन साइट्स नहीं देखते या ऐसी फिल्म्स बनाने में आपका कोई सहयोग नहीं है या वैसी कोई भी एक्टिविटी नहीं करते जो साइबर सेक्स के दायरे में आती है तो आपके साइबर सेक्स के शिकार होने के चांसेस अमूमन नहीं है इसके अलावा कुछ सावधानियां है जिनका पालन करना चाहिए पहला ऐसी वेबसाइट से दूर रहे जो आपको मालूम
(8:34:14) नहीं है जो ऑथेंटिक नहीं है डाउटफुल है ऐसी वेबसाइट सेक्सुअल कंटेंट या पोर्नोग्राफी फोटो दिखा के इंटरनेट सर्फिंग करने वालों को अक्सर आकर्षित करने का प्रयास करती दूसरा कभी भी किसी भी वेबसाइट पर अपनी व्यक्तिगत जानकारी ना दें बहुत सारी वेबसाइट्स आप जो डाटा सर्व करते हैं वह ट्रैक करती है ऐसी वेबसाइट्स ईमेल कांटेक्ट डिटेल्स बैंक डिटेल्स और पासवर्ड भी ट्रैक कर सकती है और हैक भी कर सकती है ऐसी फिशिंग वेबसाइट से सिक्योरिटी के लिए आप किसी भी अच्छी कंपनी का इंटरनेट
(8:35:00) प्रोटेक्शन सॉफ्टवेयर मोबाइल लैपटॉप या डेस्कटॉप कंप्यूटर में यूज कर सकते हैं सावधानी से इंटरनेट सर्फिंग करना चाहिए यह आपके लिए सबसे बेत विकल्प है साइबर सेक्स य एक लत है जैसे कोई शराब धुम्रपान ड्रग्स आदि नशीली चीजों का एडिक्ट होता है वैसे ही कोई पोर्न और साइबर सेक्स का भी एडिक्ट हो सकता है ऐसे एडिक्शन वाले लोग कभी-कभी हाइपरसेक्सुअल भी हो जाते हैं हाइपरसेक्सुअल का डिक्शनरी अर्थ है कि जिस व्यक्ति को सेक्सुअल एक्टिविटी में बेहद जुड़ाव रहता हो और सेक्सुअल एक्टिविटी किए
(8:35:45) बगैर वह रह नहीं सकता ऐसे व्यक्ति की स्वास्थ्य पर तो विपरीत असर होती ही है लेकिन समाज के लिए भी हाइपरसेक्सुअल व्यक्ति हानिकारक साबित हो सकता है अगर कोई व्यक्ति साइबर सेक्स एडिक्ट है तो उसे वास्तविक सेक्स के बजाय वर्चुअल सेक्स में ज्यादा रुचि निर्माण होने की संभावना बढ़ सकती है वह किसी के साथ प्रत्यक्ष संभोग करते सम समय उतना उत्तेजित नहीं होता जितना साइबर सेक्स से उत्तेजित होगा साइबर सेक्स एडिक्ट दिन में कई बार साइबर सेक्स के जरिए खुद को संतुष्ट करने की कोशिश करते रहता है यह एक गंभीर समस्या है जिसका इलाज आप मनो चिकित्सक द्वारा करवा सकते
(8:36:33) हैं और उस व्यक्ति में इंप्रूवमेंट ला सकते हैं सेक्स या पोन की चाहत एक स्वाभाविक है लेकिन यह चाहत जब एक लत बन जाती है एक कंपल्शन बन जाती है एक एडिक्शन बन जाती है तब उसे मनो चिकित्सक को कंसल्ट करने की आवश्यकता रहती है सिंपल भाषा में अगर मैं कहूं तो मैं पन देखता हूं मुझे पन देखना ही है मैं पन देखे बगैर नहीं रह सकता जब व्यक्ति ऐसे हालात में आ जाती है तब उसे इलाज की आवश्यकता रहती साइबर सेक्स से एसटी आई मतलब सेक्सु ट्रांसमिटेड इंफेक्शन से सुरक्षा जरूर मिलती है क्योंकि एक्चुअल सेक्सुअल इंटरकोर्स होने
(8:37:21) का सवाल ही पैदा नहीं होता यह अच्छी बात है लेकिन बुरी बात यह भी है कि एक अंडरवर्ल्ड यह साइबर सेक्स को चला रहा है इसी के कारण रेप माइनर बच्चों का शिकार क्रेडिट कार्ड धोखाधड़ी फिशिंग हमले इन सब की संख्या बढ़ रही है हाल ही में ग्रेमी अवार्ड विजेता एक सिंगर ने घोषणा की कि वह 12 साल की उम्र से साइबर सेक्स की दीवानी हो चुकी थी अंत में मैं बस इतना ही कहना चाहूंगा कि अगर साइबर सेक्स को संतुलित तरीके से और सावधानी से इस्तेमाल किया जाए तो इसके कुछ फायदे जरूर हैं
(8:38:08) लेकिन इतना निश्चित करें कि आपकी कामेच्छा उन जरूरतों में नहीं बदलनी चाहिए जो बाद में एक लत बन जाए एक कंपल्शन बन जाए कर्ब निरोध क्या है कंट्रा सेप्शन किसे कहते हैं एक ऐसा उपाय है जिससे आप अनचाहे गर्भ रोक सकते हैं इन शॉर्ट इट्स वन वे बाय चच वन कैन अवॉइड अनवांटेड प्रेगनेंसी कर्ब निरोधक आज क्यों महत्त्वपूर्ण है भारत जैसे देश में बढ़ती हुई आबादी को कंट्रोल करना बहुत ही आवश्यक है और यह वॉर फूटिंग पर होना चाहिए मतलब युद्ध स्तर पर होना चाहिए पॉपुलेशन माने जनसंख्या से अगर
(8:38:55) कंपेयर करें तो बेसिक इंफ्रास्ट्रक्चर और रिसोर्सेस की उपलब्धता बहुत ही कम है और दूसरी तरफ आबादी तो बढ़ती जा रही है और बढ़ती जा रही है 50 साल के पहले भारत की आबादी करीबन 58 करोड़ थी आज 50 साल के बाद बाद यह पॉपुलेशन 139 करोड़ से ज्यादा है माने 200 टके से ज्यादा पॉपुलेशन की ऐसी ग्रोथ में हर एक व्यक्ति को सोशल और इकोनॉमिक ग्रोथ के पूरे फायदे मिलना लगभग असंभव है इसलिए यह याद रखना जरूरी है कि कुटुंब नियोजन में ही कुटुंब कल्याण है माने परिवार नियोजन से ही खुद का फैमिली
(8:39:41) का समाज का और देश का फायदा हो सकता है देश का भला हो सकता है तो अभी बात जब परिवार नियोजन पर आई है तो यह जानने की जरूरत है कि उसके लिए गर्भ निरोधक कौन से और कैसे इस्तेमाल करते हैं सामान्यत गर्भ निरोधक के तीन मेन प्रकार है पहला प्रकार है बैरियर मेथड दूसरा है हार्मोनल मेथड और तीसरी है सर्जिकल मेथड अभी हम हम थोड़ा और डिटेल में यह तीनों के प्रकार देखते हैं पहला है बैरियर गर्भ निरोधक माने मेल कंडोम और फीमेल कंडोम डायफार्मा कल कप्स स्पर्मिसाइड
(8:40:28) सपोजिटरीज जिससे स्पर्म्स मर जाते हैं और स्पंस यह गर्भ निरोधक बैरियर कॉन्ट्रासेप्टिव की कैटेगरी में शामिल है दूसरा है हार्मोनल गर्भ निरोधक इस कैटेगरी में शामिल है कॉन्ट्रासेप्टिव पिल माने गर्भ निरोधक गोलियां पैच रिंग इंप्लांट और इंजेक्शन इमरजेंसी कंट्रा सेप्शन के लिए भी एक विशेष गोली भी मार्केट में उपलब्ध है कॉपर टी जैसे इंट्रा यूटन डिवाइस भी इसी कैटेगरी में आते हैं जब तक आप कंसेप्ट आप इनका इस्तेमाल कर सकते हैं और
(8:41:13) जब आप बच्चा चाहते हो तब इन गर्भ निरोधक को उनका इस्तेमाल आप बंद कर सकते हो तीसरा टाइप है सर्जिकल कंट्रा सेप्शन माने ऑपरेशन से गर्भ निरोध इसे हम परमानेंट कंट्रा सेप्शन मेथड भी कह सकते हैं क्योंकि इससे होने वाला गर्भ निरोध स्थाई होता है परमानेंट होता है इस ऑपरेशन में वासेक्टोमी और ट्यूबेक्टमी शामिल है अब हम प्रत्येक गर्भ निरोधक तरीके की थोड़ी डिटेल्स में जानकारी लेंगे इससे यह तय करना आसान होगा कि कौन सी मेथड आपके लिए ज्यादा सूटेबल है पहला है मेल कंडोम पुरुष कंडोम अनचाहे गर्भ और एसटीटीआई इंफेक्शन
(8:42:00) से बचने के लिए कंडोम का इस्तेमाल बेहद आवश्यक है पुरुष कंडोम लेटेक्स या सिंथेटिक रबर का बनाया होता है और यह आवरण यह कंडोम संभोग में प्रवेश के पहले पुरुष के शिष्ण पर पहना जाता है यह कंडोम शुक्राणु और दूसरे बॉडी फ्लूइड का आदान प्रदान रोकता है जिससे अनवांटेड प्रेगनेंसी और सेक्सुअली ट्रांसमिटेड इंफेक्शन से प्रोटेक्शन मिलता है हमने कंडोम के बारे में एक अलग लेक्चर में उसके प्रकार फायदे नुकसान यह सबके बारे में विस्तार से बातचीत की है आप चाहे तो उसे जरूर देख सकते हैं फिर हम बात करने जा रहे हैं फीमेल कंडोम
(8:42:46) की महिला कंडोम फीमेल कंडोम एक पॉली यूरेन का शीट पाउच होता है करीबन 17 सेंटीमीटर लंबा होता है और दोनों तरफ फ्लेक्सिबल रिंग होती है फीमेल कंडोम एक तरफ से खुला होता है और दूसरी तरफ से बंद होता है जो बंद भाग है वह योनि मार्ग में डाला जाता है और जो खुला भाग है वह महिला के प्राइवेट पार्ट पर बाहरी जननांग माने एक्सटर्नल जेनिटल्स पर छाया हुआ रहता है यह अनवांटेड प्रेगनेंसी तो प्रिवेंट करता ही है लेकिन साथ ही साथ एचसीआई भी प्रिवेंट करता है फीमेल कंडोम में फायदा यह है कि सहवास से आठ घंटे पहले भी स्त्री इसे पहन सकती है डिसएडवांटेज यह है कि
(8:43:34) महिला कंडोम लगाना उतना आसान नहीं है इतना आरामदायक नहीं है जितना कि पुरुष कंडोम यह कंडोम ज्यादातर 99 पर इफेक्टिव हो सकते हैं बशर्ते उनका सही तरीके से इस्तेमाल किया जाए ध्यान रहे कि एक ही वक्त महिला और पुरुष कंडोम का उपयोग साथ ही साथ नहीं करना चाहिए क्योंकि इससे कंडोम फटने के चांसेस बढ़ जाते हैं अब हम बात करते हैं डायफार्मा कल कप्स की डायफार्मा कल कप्स यह सिलिकॉन के बने हुए रहते हैं बिल्कुल मेंस्ट्रुअल कप की तरह और इस का दोबारा इस्तेमाल भी हो सकता है सहवास के पहले यह योनि मार्ग के अंदर डाले जाते हैं ताकि
(8:44:21) गर्भाशय का मुंह सर्विक्स कवर हो जाए और डालते समय स्परमसाइडल जेली भी लगाई जाती जिससे प्रिवेंशन की क्षमता और बढ़ जाती डायाफ्राम और सर्वाइकल कब के आकार में थोड़ा सा फर्क होता है अलग-अलग साइजेस में यह कप्स उपलब्ध है टूटेल साइज चूज करने के लिए आपका डॉक्टर आपको मदद कर सकता है अनवांटेड प्रेगनेंसी को रोकने के लिए इसकी एफिशिएंसी कंडोम के कंपैरिजन में काफी कम है गर्भ निरोध के लिए एक और मेथड है जिसे कॉन्ट्रासेप्टिव सपोजिटरीज माने गर्भ निरोधक सपोजिटरीज कहते हैं इसमें शुक्राणु को इनफेक्टिव
(8:45:09) करने वाला एक केमिकल रहता है यह सपोजिटरी सहवास से 5 मिनट पहले योनि मार्ग में रखी जाती है और उसकी असर करीबन एक घंटे के लिए रहती है यह सपोजिटरी के कुछ केमिकल एक्शन की वजह से शुक्राणु इनफेक्टिव हो जाते अगर एक घंटे के बाद स्त्री को दोबारा सहवास करना है तो उसे दूसरी सपोजिटरी का इस्तेमाल करना पड़ता है कुछ ऐसे भी किस्से आए हैं के यह सपोजिटरी लोग योनि मार के रखने की बजाय कुछ लोग मुह से निकल जाते थे और कुछ लोग गुदा में डालते थे इसलिए इस्तेमाल से पहले उसमें लिखी हुई इंस्ट्रक्शन पढ़ लेना बिल्कुल जरूरी अभी हम स्पोंज की बात करेंगे रुकावट पैदा करने
(8:45:57) वाला कॉन्ट्रासेप्टिव में स्पंज भी शामिल है सपोजिटरी की तरह स्पंज को भी योनि में सर्विक्स तक डाला जाता है इसका फायदा यह है कि सहवास के 24 घंटे पहले भी इसे डाल सकते हैं और वो इफेक्टिव रहता है ध्यान रहे कि सहवास के छ घंटे के बाद तक इसे आप कभी भी रिमूव कर सकते हो कभी भी निकाल सक यह बात हुई पुरुष और स्त्री में रुकावट पैदा करने वाले माने बैरियर कॉन्ट्रासेप्टिव मेथड्स अब हम कुछ हार्मोनल मेथड जो कंट्रा सेप्शन गर्भ निरोध पैदा करते हैं उसकी बात करते हैं कॉन्ट्रासेप्टिव पिल्स गर्भ निरोधक
(8:46:42) गोली यह गर्भ निरोधक गोली एक सामान्य गर्भ निरोधक विकल्प है कि जो डॉक्टर के प्रिस्क्रिप्शन से आसानी से उपलब्ध इसे ओसी पिल माने ओरल कॉन्ट्रासेप्टिव पिल्स भी कहते हैं गर्भ निरोधक गोली दो टाइप की होती है एक जिसमें एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन हार्मोन का कॉमिनेशन होता है और दूसरी जिसमें सिर्फ प्रोजेस्ट्रोन होता है अपने डॉक्टर से कंसल्ट करके आप खुद के लिए कौन सी गोली सूटेबल है वह सिलेक्ट कर सकते यह गोलियां शरीर के कुछ नेचुरल हार्मोन में बदलाव लाके प्रेगनेंसी प्रिवेंट करती है यह दो तरीके से काम करती है एक तो ओवुलेशन में
(8:47:30) रुकावट लाके और दूसरा गर्भाशय का मुंह माने सर्विक्स का म्यूकस गाढ़ा करते जिसकी वजह से स्पर्म्स का फैलोपियन ट्यूब तक पहुंचना असंभव हो जाता है या कभी-कभी गर्भाशय की लाइनिंग को इस तरह से बदल देती है कि फर्टिलाइज अंडा वहां इंप्लांट ही नहीं हो सकता यह गोलियां मेंसिस के पहले दिन से ली जाती है और 21 दिनों तक ली जाती है आखिरी सात दिन के लिए गोली लेने की जरूरत नहीं रहती है और बराबर सात दिन के बाद आपका मेंसस फिर से आ जाता है तब आप फिर से गोली लेने की शुरुआत कर सकते हैं जब आप पहली बार गोली शुरू करो तो पहले 10
(8:48:18) दिन के लिए सहवास के दौरान आप कंडोम का इस्तेमाल जरूर करें हालांकि मेंसिस की दूसरी साइकिल से आपको कंडोम या दूसरा कोई एडिशनल प्रोटेक्शन लेने की जरूरत नहीं गर्भ निरोधक पिल्स के बारे में कुछ आम गलतफहमियां है जैसे कि इससे कैंसर होता है इसे बंद करने के बाद फिर से आप प्रेगनेंट नहीं बन सकते और छ महीने लगातार ओसी पिस लेने के बाद कुछ महीनों का गैप जरूरी होता है 35 साल के बाद आप ओसी पिस नहीं ले सकते हैं यह सब भ्रांतियां है हकीकत नहीं है हां लेकिन कुछ मामले ऐसे हैं जिसमें यह
(8:49:05) गोली नहीं ली जा सक अगर किसी व्यक्ति को एक्टिव थो एमलिक डिसऑर्डर या अगर किसी को लिवर की बीमारी हो या अगर हार्मोन पर निर्भर कुछ ट्यूमर से व्यक्ति ग्रसित हो या बिना वजह योनि मार्ग में से ब्लीडिंग होता हो किसी को वेरिकोस वेनस हो ब्लड कोटलिंग मैकेनिज्म में कोई गड़बड़ी हो अगर कोई प्रेगनेंट हो तो यह कंडीशन में यह ओसी पिल्स नहीं लेनी चाहि यह ओसी पिल्स अक्सर 95 पर प्रोटेक्शन प्रदान करती है और एक प्रोटेक्शन के बारे में बात करते हैं जिसका नाम है वजाइनल रिंग एक छोटी नरम प्लास्टिक की रिंग होती है जिसे स्त्री
(8:49:51) अपनी योनि में रख सकती है यह रिंग एस्ट्रोजन और प्रोजेस्ट्रोन हार्मोन को निरंतर खून के प्रवाह में रिलीज करती जिससे गर्भावस्था में रुकावट पैदा होती है यह रिंग आपको लगातार तीन हफ्ते तक पहननी पड़ती फिर अगर आप पीरियड चाहते हो तो उस रिंग को एक हफ्ते के लिए बाहर निकालनी पड़ती है और पीरियड के बाद नई रिंग फिर तीन हफ्ते तक रख सकते हैं लेकिन अगर कोई स्त्री पीरियड नहीं चाहती है तो वह रिंग तीन हफ्ते की बजाय चार हफ्ते वहां पर रख सकती है और चार हफ्ते के बाद वह तुरंत नई रिंग इस्तेमाल कर सकती और फिर से एक नया चार सप्ताह का गर्भ निरोधक चक्र शुरू हो
(8:50:39) जाता है सहवास के दौरान इसको निकाला जा स है लेकिन सहवास पूरा होने के बाद तुरंत रिंग वापस बिठाई जाती है ताकि आप फिर से प्रेग्नेंट ना हो प्रेगनेंसी प्रिवेंट करने में यह करीबन 91 से 99 पर तक इफेक्टिव हो स अभी हम बात करने जा रहे हैं इंप्लांट की प्रत्यारोपण इस प्रोसीजर में एक पतला रोड का इस्तेमाल होता है वह महिला के अपर आम में मेडिकल एक्सपर्ट की निगरानी में बिठाया जा इंप्लांट किया जाता है इसकी अवधि करीबन तीन साल तक है यह स्टेडी प्रोजेस्ट्रोन हार्मोन रिलीज करता रहता है भारत में इसका इस्तेमाल कम होता है प्रेगनेंसी प्रिवेंट
(8:51:28) करने में यह करीबन 99 पर तक इफेक्टिव है ऐसे इंजेक्शन भी आते हैं इंप्लांट की तरह हर तीन महीने प्रोजेस्ट्रोन हार्मोन का इंजेक्शन दिया जाता है नॉर्मली ये इंजेक्शन बटक्स पर दिया जाता है और अनवांटेड प्रेगनेंसी रोकने के लिए यह 95 पर तक इफेक्टिव हो सक एक पैच भी आता है इस प्रोसीजर में स्त्री ट्रांसडर्मल पैच का उपयोग करती यह पैच रक्त प्रभाव में हार्मोन छोड़ती है रिंग के समान पैच तीन हफ्तों तक लगाया जाता है फिर उसे निकालना पड़ता है ताकि स्त्री को अपनी मेंसस आ जाए
(8:52:14) और चौथे हफ्ते के बाद एक नया पैच लगाया जाता है पैच का इफेक्टिव 91 से 99 पर तक प्रभावी हो सकता है अभी हम देखते हैं आईयूडी आईयूडी का मतलब है इंट्रा यूटन डिवाइस उसे इंट्रा यूटन कॉन्ट्रासेप्टिव डिवाइस माने आईयू सडी भी कहते हैं हकीकत में यह एक ऐसा उपकरण है जो गर्भाशय में बिठाया जाता है यह मेडिकेटेड भी हो सकते हैं या नॉन मेडिकेटेड भी हो सकते हैं जो मेडिकेटेड आईयूसीडी है वह प्रोजेस्ट्रोन हार्मोन रिलीज करते हैं और जो नॉन मेडिकेटेड आय आईयूसीडी रहते हैं वह कॉपर आयन रिलीज करते हैं दोनों का काम करने की पद्धति एक ही है
(8:53:04) यह सर्वाइकल म्यूकस को ज्यादा गाढ़ा बना देती है और स्पर्म्स के लिए अंडे तक पहुंचना नामुमकिन बना देती है साथ ही साथ फर्टिलाइज्ड एग को भी गर्भाशय के अंदर इंप्लांट होने में रुकावट डालती है आईयूडी के फायदे में यह उपकरण एक ही बार लगाया जाता है और इसकी कोई शारीरिक और मेटाबॉलिक साइड इफेक्ट नहीं है इसकी गर्भ निरोधक एफिशिएंसी भी काफी अच्छी है और उसका ड्यूरेशन ऑफ एक्शन भी काफी लंबा है डिसएडवांटेज सिर्फ इतना है कि आईडी डालने के बाद कुछ स्त्रियों में ज्यादा ब्लीडिंग होता है पीरियड के वक्त दर्द ज्यादा होता है पी आईडी माने पेल्विक इन्फ्लेमेटरी
(8:53:53) डिसीज के किस्से ज्यादा पाए जाते और एक्टोपिक प्रेगनेंसी के चांसेस भी थोड़े ज्यादा हो हां कुछ ऐसे केसेस भी हैं जहां आईडी का उपयोग नहीं किया जा सकता अगर कोई महिला को ब्रीडिंग ज्यादा हो रहा हो या किसी की यूटन कैविटी अब नॉर्मल हो या किसी को ब्लीडिंग हो रहा है लेकिन उसकी वजह पता नहीं है या किसी को पेल्विक इंफेक्शन है या किसी को पहले एक्टोपिक प्रेगनेंसी हो चुकी है तब आईयूडी बिठाया नहीं जाता तो फिर कॉपर टी क्या है यह एक टी शेप कॉपर माने तांबे का बनाया हुआ आईयूसीडी है यह प्रेगनेंसी को तो प्रिवेंट करता है
(8:54:39) लेकिन एक्टोपिक प्रेगनेंसी के चांसेस इसमें रहते हैं कॉपरटी को बिठाना और उसे निकालना बड़ा आसान और यह एक ओपीडी प्रोसीजर है यह ऐसे तो काफी सेफ है लेकिन कुछ किस्सों में ज्यादा ब्लीडिंग हो सकता है या पीरियड के दौरान पेनफुल ब्लीडिंग भी हो सकता आईयूडी लगभग 99 पर अनवांटेड प्रेगनेंसी से सेफ्टी प्रदान करता है उसे एक बेहतर कॉन्ट्रासेप्टिव मेथड के रूप में जा ना जाता है अगर समझो किसने यह कॉन्ट्रासेप्टिव सेक्स कर बैठे तो उसे क्या करना चाहिए अगर ऐसा है तो वह इमरजेंसी कॉन्ट्रासेप्टिव
(8:55:26) पिल इस्तेमाल कर सकता है या आईडी का इस्तेमाल कर सकता है अगर किसी से अनप्रोटेक्टेड सेक्सुअल इंटरकोस हो गया कंडोम का इस्तेमाल नहीं किया या कंडोम फट गया या कभी कभी किसी ने जबरदस्ती सेवास बना दिया या कोई लगातार तीन दिन तक ओसी पील्स लेना ही भूल गया उस वक्त उन्हें इमरजेंसी कॉन्ट्रासेप्टिव ट्रीटमेंट का सहारा लेना चाहिए इसमें एक गोली लेने की होती है यह गोली हार्मोन पील है जिसका नाम है एल एनजी लेवोनॉर्जेस्ट्रेल अनप्रोटेक्टेड सेस के बाद जितनी जल्दी हो सके उतनी जल्दी यह गोली लेनी चाहिए लेकिन ज्यादा में ज्यादा अनप्रोटेक्टेड सेक्स के
(8:56:13) 72 आवर्स तक ले सकते हैं उसके बाद नहीं इससे ओवुलेशन फर्टिलाइजेशन और इंप्लांटेशन या तो होता ही नहीं या डिले हो जाता है यह पिल का सक्सेस रेट करीबन 98 पर है यह दवाई किसी भी केमिस्ट के वहां बिगर प्रिस्क्रिप्शन मिल सकती है यह इमरजेंसी पिल्स काफी मात्रा में अनवांटेड प्रेगनेंसी कम कर सकती ताकि महिला अबॉर्शन से बच सके प्रेगनेंसी प्रिवेंट करने का दूसरा तरीका किसी को अपनाना है तो वह है कॉपर्टी आईयूडी अनप्रोटेक्टेड सेक्स के पाच दिन में आप इसे लगा सकते हैं जिस तरह से जो पुरुष
(8:57:00) मल्टीपल पार्टनर के साथ सहवास करते हैं वह अक्सर अपने पास कंडोम हमेशा अपने खिसे में रखते हैं रेडी रखते हैं उस तरह जरूरत पड़े तो स्त्रिया भी डायाफ्राम या स्पर्मिसाइड सपोजिटरी का इस्तेमाल इमरजेंसी में कर सकती है कैजुअल सेक्स के दौरान अनवांटेड प्रेगनेंसी का डर खौफ दोनों पार्टनर्स पुरुष और स्त्री को रहता है अगर दोनों पार्टनर अपने सेफ्टी के लिए कॉन्ट्रासेप्टिव साथ में कैरी करते हैं तो यह बेहतर विकल्प होगा और इमरजेंसी कंट्रा सेप्शन की जरूरत कम हो जाएगी इमरजेंसी कंट्रा सेप्शन यह कॉन्ट्रासेप्टिव
(8:57:53) मेथड्स अनवांटेड प्रेगनेंसी को प्रिवेंट करने में काफी कारगर साबित हो सकती है यह सिर्फ कैजुअल सेक्स वाले कपल्स को ही नहीं पूरे समाज को मदद रूप और लाभ काक साबित हो सकती है अंत में एक और मेथड है जिसे फर्टिलिटी अवेयरनेस मेथड कहते हैं जिसे रिवर्सिबल मेथड ऑफ कंट्रा सेप्शन भी कहते हैं ये अक्सर ओवुलेशन के टाइम पर डिपेंड करती है कुछ दिन ऐसे होते हैं जो ओवुलेशन के इर्दगिर्द होते हैं जहां प्रेगनेंसी के चांसेस ज्यादा रहते हैं और कुछ दिन ऐसे होते हैं जो ओवुलेशन से दूर होते हैं जहां प्रेगनेंसी के चांसेस नहीं रहते हैं या कम
(8:58:37) रहते हैं लेकिन हकीकत में यह मेथड रिलायबल नहीं है भरोसा पात्र नहीं है इसलिए बेहतर यही होगा कि इसे आप फॉलो ना करें अभी हम कंट्रा सेप्शन की रिवर्सिबल मेथड से इरिवर्सिबल मेथड पर आते हैं उसे पुरुष में वासेक्टोमी कहते हैं और स्त्री में ट्यूबेक्टमी कहते हैं वासेक्टोमी या नसबंदी क्या है यह कंट्रा सेप्शन यानी गर्भ निरोधक की परमानेंट मेथड इसे लोकल एनेस्थीसिया में किया जाता है लगभग 1 सेंटीमीटर का छेद दो छोटे चीरे पुरुष के अंडकोष के बेस पर लगाए जाते हैं इससे स्पर्मेटिक कॉर्ड पर पहुंचना आसान हो जाता
(8:59:22) है जिसमें वाज या शुक्र नलिका होती है शुक्र नलिका करीबन 1 सेंटीमीटर का हिस्सा दोनों तरफ से काट दिया जाता है और कटे हुए हिस्सों को अलग-अलग बांध दिया जाता है ताकि शुक्राणु उनमें से गुजरने में कामयाब ना हो इसके बाद चीरो को बंद किया जाता है इसमें अस्पताल में भर्ती होना अनिवार्य नहीं है और मरीज ऑपरेशन के बाद अपने घर जा सकता है यह प्रोसीजर काफी आसान होता है वासेक्टोमी के बाद पुरुष की काम इच्छा काम शक्ति और चरम सीमा का आनंद पहले जैसा ही रहता है सिर्फ बच्चे पैदा करने की क्षमता नहीं रहती यह ऑपरेशन फीमेल स्टेरलाइजेशन
(9:00:09) के कंपैरिजन में काफ काफी आसान होता है हां वासेक्टोमी उन लोगों में नहीं करनी चाहिए जो ऐसा सोचते हैं कि बच्चा पैदा करने की क्षमता और मर्दानगी दोनों एक ही चीज है अगर कोई व्यक्ति ऐसी गलतफहमी का शिकार हो तो उसे ऑपरेशन के पहले ऑपरेशन क्या है ऑपरेशन कैसे होता है ऑपरेशन में क्या रिस्क है और यह समझाया जाता है कि मर्दानगी और बच्चा पैदा करने की क्षमता अंडकोष में मौजूद अलग-अलग सेल्स पर निर्भर रहती है नसबंदी के बाद काम इच्छा कामशक्ति और क्लाइमैक्स के आनंद का एहसास जैसे पहले था वैसा ही
(9:00:53) रहेगा सिर्फ बच्चे पैदा करने की क्षमता नहीं रहेगी ऑपरेशन के बाद वीर्य की क्वांटिटी वीर्य की मात्रा भी लगभग उतनी ही रहेगी क्योंकि पूरे वीर्य के अंदर शुक्र जंतु का प्रमाण करीबन 1 पर ही होता है 99 पर का सीमन का द्रव्य सेमिनल वेसिकल्स और प्रोस्टेट में से आता है यह हकीकत पूरी समझाने के बाद ही वासेक्टोमी करवाना चाहिए जब तक किसी व्यक्ति को इसके बारे में कोई शंका हो तो शंका का निवारण करने के बाद ही ऑपरेशन करवाना चाहिए ऑपरेशन के बाद कुछ दिनों के लिए एथलेटिक सपोर्टर या टाइट फिटिंग अंडरवेयर पहनना उचित होगा जिसकी वजह से ऑपरेशन के
(9:01:38) बाद होने वाले स्वेलिंग और डिस्कंफर्ट में काफी राहत मिल कई बार लोगों के दिमाग में यह रहता है कि ऑपरेशन के बाद जो स्पर्म्स उत्पन्न होते हैं उसका क्या होता है स्पर्म्स का बनना अंडकोष में चालू ही रहता है लेकिन यह स्पर्म्स एप डा मिस में डिजनरेट होते हैं और फिर यहां रिअब्जॉर्ब हो जाते अक्सर कुछ लोगों के दिमाग में यह रहता है कि नसबंदी के बाद पुरुष हार्मोन टेस्टोस्टेरोन में भी कमी आ जाती और पुरुष की की मर्दानगी पर विपरीत असर होती है यह हकीकत नहीं हमने इंस्टिट्यूट ऑफ रिसर्च एंड रिप्रोडक्शन आईसीएमआर में एक स्टडी किया था जिसमें
(9:02:22) वासेक्टोमी के सेक्सुअल साइड इफेक्ट क्या होते हैं उसका समावेश जिनमें वासेक्टोमी करने के बाद जिन्हें 14 दिन हुए थे वैसे भी थे और जिन्हें ऑपरेशन के बाद 14 साल हुए थे वैसे भी पुरुष निष्कर्ष यह निकला कि नसबंदी के बाद पुरुष का टेस्टोस्टरॉन हार्मोन लेवल बिल्कुल नॉर्मल था और पुरुष की कामेचा शष्ण की मजबूती और चरम सीमा माने क्लाइमेक्स का आनंद जैसे पहले था वैसा ही था उसमें कोई बदलाव नहीं आया आपको सुनकर हैरत होगी कि कुछ लोगों में कामेचा ज्यादा बड़ी थी शायद उसकी वजह यह हो सकती है कि वाइफ प्रेग्नेंट होने का चांसेस का
(9:03:08) खौफ दिमाग से बिल्कुल निकल गया था मेरे ख्याल से अगर वाक टमी को अपने देश में ज्यादा पॉपुलर बनाना हो ज्यादा एक्सेप्टेबल बनाना हो तो ऑपरेशन के पहले पति और पत्नी दोनों को ऑपरेशन के प्रोसीजर के बारे में उसके रिस्क के बारे में और ऑपरेशन के बाद के रिजल्ट के बारे में सही तरीके से समझाना चाहिए और साथ में यह भी समझाना चाहिए कि इससे सिर्फ बच्चा पैदा करने की क्षमता पर असर होती है मर्दानगी जैसे पहली थी वैसे ही बरकरार रहेगी शुक्र नलिका को काटने या बांधने के बाद पुरुष की काम इच्छा कामशक्ति और चरम सीमा के आनंद
(9:03:54) पर कोई विपरीत असर नहीं पड़ता है और सीमन की क्वांटिटी भी लगभग पहले जितने ही रहेगी ऐसा समझाने के बाद शायद लोग वाज टोमी को ज्यादा आसानी से अपनाएंगे नसबंदी कॉन्ट्रासेप्टिव रिवर्स भी करवा सकता है माने फिर से जुड़ भी सकती है और स्त्री के नसबंदी के कंपैरिजन में पुरुष नसबंदी ज्यादा आसान है ज्यादा सरल है सवाल यह पैदा होता है कि वाज अष्टमी के बाद विदाउट प्रोटेक्शन
(9:04:39) पुरुष कब सेवास कर सकता अगर सुविधा हो तो सीमन के दो रिपोर्ट जो दो दो हफ्ते के बाद करवाए हो जिसमें स्पर्म्स नेगेटिव या स्पर्म्स एब्सेंट आए हो या पुरुष का अगर 10 बार वरय स्खलन हो गया हो तो पुरुष विदाउट प्रोटेक्शन सेवास कर सकता है अभी हम स्त्री की नस बंधी या ट्यूबेक्टमी की बात करते हैं ट्यूबेक्टमी स्त्रियों में किए जाने वाला एक परमानेंट गर्भ निरोधक कॉन्ट्रासेप्टिव प्रोसीजर है इसमें दोनों फैलोपियन ट्यूब्स को काट के फिर बांध दिया जाता है ताकि अंडे के मार्ग में रुकावट आ जाए और स्पर्म्स का
(9:05:26) अंडे से मिलना नामुमकिन हो जाए यह ऑपरेशन के बाद स्त्री की काम इच्छा कामशक्ति और क्लाइमेक्स का आनंद जैसे पहले था वैसा ही रहेगा ऑपरेशन के तुरंत बाद स्त्री अगर चाहे तो अनप्रोटेक्टेड सेक्स भी कर सकती है हां ट्यूबेक्टमी के बाद भी स्त्री का मासिक चक्र और मासिक स्राव की मात्रा पहले जैसी थी वैसी ही सामान्य रहेगी अगर कोई व्यक्ति चाहे तो ट्यूबेक्टमी को भी पलटा जा सकता है माने रिवर्स किया जा सकता है इसमें माइक्रो सर्जिकल टेक्निक का इस्तेमाल किया जाता है लेकिन इसकी सफलता का आधार
(9:06:12) ट्यूबेक्टमी की टेक्नीक उसका ड्यूरेशन माने दोनों ऑपरेशन के बीच की अवधि और सर्जन की कुशलता पर निर्भर होती है अक्सर लोगों के मन में पैदा होने वाले कुछ आम सवालों पर एक नजर डालते हैं लोग पूछते हैं क्या संभोग के बाद वजाइनल डू से सफाई एक सुरक्षित गर्भ निरोधक उपाय है बिल्कुल नहीं उसका उपयोग सिर्फ वजाइना क्लीनिंग के लिए है लोकल साफ सफाई के लिए है लेकिन गर्भ निरोध के लिए बिल्कुल नहीं है दूसरा प्रश्न होता है क्या क्लाइमैक्स के पहले योनि में से लिंग को तुरंत बाहर निकालना एक सुरक्षित गर्भ निरोधक उपाय है नहीं स्खलन से पहले लिंग योनि से बाहर
(9:07:01) निकालना इसे कटस इंटरप्टस कहते हैं आमतौर पर यह क्रिया र्य स्खलन योनि से बाहर हो उसके लिए की जाती हालांकि इसमें असफल होने के चांसेस बहुत ज्यादा है क्योंकि कुछ पुरुष अपने क्लाइमैक्स पर पहुंचने का अनुमान हर बार सही तरीके से नहीं कर सकते और अमूमन पुरुष ऐसा करते वक्त तनाव में भी आ जाते हैं और इस तनाव के कारण वह काम तृप्ति का आनंद भी खो बैठते हैं और कई बार योनि में थोड़ा बहुत वीर्य स्खलन हो भी जाता है इसके लिए यह गर्भ निरोध की सेफ मेथड नहीं तीसरा प्रश्न होता है कि आईयूडी लगाने के तुरंत बाद सेक्स करना सेफ है हां बिल्कुल सेफ
(9:07:48) है बशर्ते महिला की सहमति होनी चाहिए चौथा सवाल है कि क्या गर्भ निरोधक पिलक लेने से वजन बढ़ जाता है आमतौर पर नहीं लेकिन कुछ औरतों में अपनी शारीरिक रचना के आधार पर थोड़ा बहुत वेट गेन हो सकता है लेकिन आज की तारीख में अल्ट्रा लो डोज माने ओरल कॉन्ट्रासेप्टिव पिल्स जो आती है उसमें हार्मोन की मात्रा बहुत ही कम होती है जिसकी वजह से वेट गेन बढ़ने का चांसेस बहुत कम होता है और एक सवाल है क्या ब्रेस्ट फीडिंग के दौरान ओरल कॉन्ट्रासेप्टिव पिल्स ली जा सकती है हां प्रोजेस्ट्रोन ओसी पिल्स आप जरूर ले सकते हैं और एक प्रश्न यदि कोई स्त्री अगर गर्भ
(9:08:34) निरोधक पील्स लेना भूल जाए तो उसे क्या करना चाहिए इसकी जानकारी अमूमन हर एक ओरल कॉन्ट्रासेप्टिव पिल के साथ दी जाती है आमतौर पर इस स्थिति में गोली लेना भूलने के बाद 12 घंटे के भीतर याद आ जाए तो हो सके उतनी जल्दी गोली ले लेनी चाहिए और फिर नियमित रूप से लेना शुरू कर देना चाहिए यदि गोली लेना भूलने की बात 12 घंटे के बाद याद आए तो एक गोली तुरंत ले लेनी चाहिए और अगली गोली निर्धारित समय पर ले लेनी चाहिए लेकिन ध्यान रहे अगले पाच दिनों तक एडिशनल प्रोटेक्टिव मेजर्स लेना बिल्कुल आवश्यक
(9:09:21) है और एक प्रश्न कि ओरल कॉन्ट्रासेप्टिव पिल्स की साइड इफेक्ट क्या है कुछ स्त्रियों में थोड़े समय के लिए नशिया चक्कर स्तनों में दर्द सिर दर्द थोड़ा वेट गेन भूख में कमी स्किन ऑयली हो जाती है और पिंपल्स हो जाते हैं स्राव और वजाइनल डिस्चार्ज की शिकायत भी हो सकती यदि ओरल कॉन्ट्रासेप्टिव पिल्स लेने के बाद महिला को उल्टी आए तो क्या करना चाहिए यदि गोली लेने के तीन चार घंटे के भीतर उल्टी आए तो संभव है कि दवा का एब्सन पूरी तरह से नहीं हुआ है उल्टी के बाद एक और गोली तुरंत लेने की आवश्यकता होती है फिर
(9:10:08) अगली गोली नियत समय पर ले लेनी चाहिए लेकिन अगर उल्टी गोली लेने के चार छ घंटे के बाद होती है तो उसका मतलब यह हुआ का दवा का एब्स पूरी तरह से हो जाता है और तुरंत दूसरी गोली लेने की आवश्यकता नहीं होती यदि मरीज लगातार होने वाली उल्टियां के कारण दूसरी गोली लेने की स्थिति में ना हो तो पिल्स लेने की प्रक्रिया नियमित होने तक करीबन पाच दिनों तक दूसरा किसी एडिशनल प्रोटेक्शन का इस्तेमाल उसे अवश्य करना दूसरा एक प्रश्न होता है कि क्या ट्यूबेक टोमी से मेंसिस में कोई दिक्कत आ सकती है बिल्कुल भी नहीं मेंस्ट्रुअल
(9:10:54) साइकिल और मेंस्ट्रुअल फ्लो में कोई बदलाव नहीं आता क्योंकि वह तो हार्मोन डिपेंडेंट है जो ओवरीज में से डायरेक्ट खून में जाता है उम्र का बढ़ना एक साधारण प्रक्रिया है अंग्रेजी में कहते हैं कि टू ग्रो ओल्ड इ नर्मल इट प्रोग्रेसिव मैचरिंग डिस्पाइना चरल स्लो डाउन हाउ एवर टू एज पैथोलॉजिकल बुढ़ापा कब शुरू होता है किसीने बहुत अच्छा कहा है कि साइंस ऑफ जिरियाट्रिक्स ट इ ओल्ड एज बिगिन न द साइंस ऑफ पीडियाट्रिक्स ट यंग एज एंडस बहुत से लोगों के दिमाग में यह ख्याल रहता है कि अगर बढ़ती उम्र में हम ज्यादा सेक्स
(9:11:41) करेंगे तो हमें और कमजोरी आ जाएगी और वीर्य का भंडार जल्दी ही समाप्त हो जाएगा यह गलत फहमी की वजह से कई एल्डरली इंडिविजुअल्स को सेक्स से परहेज की अवस्था में ले आते हैं हकीकत में यह समझना आवश्यक है कि बिन उपयोग से शिथिलता आती है उपयोग से नहीं इफ यू डोंट यूज इट यू मे लूज इट मे वेल बी ट्रू किसी भी चीज का इस्तेमाल से माने वप्र से वृद्धि होती है और बिन वपराज से या बिन इस्तेमाल से शिथिलता आती है अगर आप दो महीने तक पथरी में पड़े रहे कोई मूवमेंट ना करें और फिर अगर अचानक कोई कहे कि आप दौड़ तो आप दौड़ते ही चक्कर
(9:12:28) खाके गिर जाओगे क्योंकि आपने मूवमेंट की ही नहीं इस तरह से बदन का कोई भी पार्ट का उपयोग अनिवार्य है इंक्लूडिंग प्राइवेट पार्ट र याने सीमन भी 24 बा से बनता रहता है अगर आप मैथु इंटरकोस नहीं करेंगे हस्त मैथु या मास्टरबेशन नहीं करेंगे तो वह स्वप्न मैथु के जरिए अपने आप निकल जाएगा जिस तरह से आप अनिश्चित समय तक पेशाब नहीं रोक सकते उस तरह से वीर्य का रोकना भी असंभव है य 24 बा से बनता रहता है अगर आप नहीं निकालो तो वैसा ही पड़ा रहेगा और ट्रिगर आएगा तो
(9:13:16) वीर्य अपने आप बाहर निकल जाएगा मिसाल के तौर पर आपके मुंह में लार आई सलाइवा आया आपके मुंह में समझोगे थूक आया थोड़ा तो आपने बाहर थूक दिया थोड़े समय में वापस मुंह में थूक आ ही जाएगा क्योंकि बदन तुरंत थूक तैयार करने में लग जाता है वीर्य का भी बिल्कुल वैसा ही दूसरा एक बदलाव बढ़ती उम्र के साथ मैंने देखा है कि जैसे जैसे उम्र बढ़ती है वैसे-वैसे पुरुष को उत्तेजना आने में थोड़ा वक्त लगता है इरेक्शन आता है लेकिन आहिस्ता आहिस्ता लेकिन उस वक्त अगर आप आपका ध्यान केंद्रित करोगे कि इरेक्शन आता
(9:14:02) है कि नहीं इरेक्शन आता है कि नहीं तो इरेक्शन नहीं आएगा और अगर आप बेफिक्र हो जाएंगे तो इरेक्शन अपने आप आ जाएगा मिसाल के तौर पर मैं आपसे एक सवाल पूछूं कि आप सांस ले रहे हो क्या आप सांस ले रहे हो आप जवाब दोगे हां लेकिन पहले आपको एहसास नहीं था कि आप सांस ले रहे हो अब आपको एहसास हो गया कि आप सांस ले रहे हो मने जितना ध्यान केंद्रित करोगे होता है कि नहीं होता है कि नहीं इरेक्शन आता है कि नहीं इरेक्शन आता है कि नहीं तो एंजाइटी की वजह से इरेक्शन नहीं आएगा जितने बेफिक्र हो जाओगे तो इरेक्शन अपने आप आ जाएगा कहने का तात्पर्य यह है कि एक
(9:14:44) ही अवस्था में चिंतित और उत्तेजित साथ में होना मुमकिन नहीं अंडर रिलैक्स कंडीशंस इरेक्शंस विल अकर ऑटोमेटिक बट इफ यू आर वड अबाउट इट और कंसर्न्ड अबाउट इट इट विल हैव अ इब इन्हेबिटिंग इफेक्ट ऑन द इरेक्शन मेरे कहने का तात्पर्य यह है कि यू कांट बी एंसिस एंड सेंसुअस एट द सेम टाइम ये समझना जरूरी है कि बढ़ती उम्र के साथ इरेक्शन आएगा लेकिन आहिस्ता आहिस्ता गेटिंग इरेक्शन विल बी अ स्लो प्रोसेस क्योंकि ऑल बॉडी फंक्शंस आर स्लो मिसाल के तौर पर आपको यहां से सामने के फुटपाथ पर दौड़ के जाना
(9:15:27) है 10 साल के पहले जितनी स्पीड से जाते थे उतनी स्पीड से आज नहीं जा सकोगे लेकिन चल के जरूर जा सकोगे मरने के आखरी दम तक उसी तरह से पुरुष इरेक्शन तो आएगा लेकिन आहिस्ता आहिस्ता स्त्री को योनि मार्ग में भी चिकनाहट तो होगी लेकिन आहिस्ता आहिस्ता इसलिए बढ़ती उम्र में हमेशा फोर पले में थोड़ा ज्यादा टाइम गुजार है बस दिमाग में इतना ही रखिएगा कि इरेक्शन जरूर आएगा सिर्फ थोड़ा सा वक्त और लगेगा और याद रहे मजा और आनंद सिर्फ मंजिल में हो वो जरूरी नहीं सफर भी इतना ही सुहाना और आनंददायक
(9:16:14) हो सकता है पुरुषों में कई बार ऐसा भी होता है कि सहवास करने को गए और एक बार उ उत्तेजना ना आई या सहवास करने को गए और प्रवेश से पहले ही इंद्रिय नरम हो जाए तो कई पुरुष यह मान लेते हैं कि अभी हम गए काम से एक बार फेल हो गए तो अभी हम कभी कामयाब होंगे ही नहीं यह समझ लेते हैं कि एक बार की निष्फल का मतलब सेक्स लाइफ का अंत माने वन फेलर इन मेकिंग इट मींस एन एंड टू सेक्स लाइफ हकीकत में यह समझना जरूरी है कि निष्फल एक सामान्य चीज है और निष्फल का मतलब अंत नहीं मैं अक्सर मेरे मरीजों को यह उदाहरण
(9:17:01) देता हूं कि समझो एक क्रिकेटर ने पहली इनिंग में डबल सेंचुरी मारी लेकिन दस दूसरी इनिंग में जीरो में आउट हो गया उसका मतलब यह थोड़ा ही है कि वह तीसरी इनिंग खेल नहीं सकेगा अगर उसने संकल्प किया तो वह तीसरी इनिंग में भी सेंचुरी मार सकता है ऐसे माहौल में व्यक्ति का मनोबल अगर मजबूत हो तो निष्फल उसको बहुत असर नहीं करती लेकिन अगर फिर भी दिमाग में नेगेटिव ख्याल आए कि मैं सहवास नहीं कर सकूंगा तो उस वक्त अगर पुरुष लंबे सांस ले और आहिस्ता आहिस्ता धीरे-धीरे छोड़े तो भी कई बार एंजाइटी काफी कम हो जाती है अगर ऐसे सिचुएशन में उसको एहसास हो कि उसकी दिलक
(9:17:49) दिल की धड़कन और तेज हो रही है गला सूख रहा है उसको पसीना आ रहा है उसके हाथ पांव थोड़े बहुत थरा रहे हैं उसके दिमाग में पहले से यह ख्याल आ जाता है कि मैं सहवास नहीं करूंगा यह सब एंजाइटी के सिम्टम्स है तो कई बार शॉर्ट एक्टिंग एंटी एंजाइटी की गोली एक घंटे पहले से से अगर ले ली जिससे एंजाइटी के सिमटम्स बिल्कुल दूर हो जाते हैं और वह सहवास पहले की तरह कर सकता है इतना ही नहीं कई बार अगर जरूर जरूरत पड़े तो साथ में वह वायग्र टाइप की गोली भी ले सकता है तो आए हुए तनाव में भी इजाफा होगा और इरेक्शन सस्टेन करने में भी यह गोली
(9:18:31) सहायता रूप हो सकती है और बाद में वह आसानी से सहवास कर सकता है तीन चार बार सहवास गोली के सहारे से कर लिया उसके बाद कॉन्फिडेंस वापस आ गया तो यह गोली की मात्रा आधी करके कुछ समय के बाद अमूमन बगैर गोली से भी वह ठीक से सहवास कर सकेगा यह सब गोलियां आपके डॉक्टर की सलाह के अनुसार ही लेनी चाहिए कई बार बढ़ती उम्र के साथ-साथ स्त्रियों को मेनोपॉज आ जाता है जिसे रजो निवृत्ति भी कहते हैं कई स्त्रियां मेनोपॉज माने सेक्सुअल लाइफ का अंत मेनोपॉज इज द एंड ऑफ सेक्स लाइफ ऐसी गलत
(9:19:17) धारणा से ग्रसित होती है हकीकत में मेनोपॉज के बाद महावारी बंद हो जाती है बच्चा पैदा करने की क्षमता बंद हो जाती है लेकिन सेक्सुअल लाइफ बरकरार रहती है हां कुछ फर्क जरूर पड़ता है कभी कभ मेनोपॉज के चार पाच साल के बाद थोड़ी काम इच्छा कम हो सकती है गीलापन में भी कमी आ सकती है जिसकी वजह से योनि प्रवेश पेनफुल हो सकता है और काम इच्छा और कम हो जाती है लेकिन चरम सीमा यानी कि क्लाइमेक्स का आनंद तो पहले जैसा ही रहता है उसमें कोई चेंजेज नहीं आते जरूरत पड़ने पर कुछ खानपान में फीमेल हार्मोन जिसमें ज्यादा हो वैसा खाना
(9:20:04) ले सकते हैं अगर दो तीन महीने आपने ऐसा खाना ले ले लिया बाद में फयदा ना हुआ तो बाजार में जो एस्ट्रोजन क्रीम उपलब्ध है वह प्राइवेट पार्क के इर्द गद लगाने से कुछ हफ्तों में गीलापन फिर से होने लगेगा और सहवास के दौरान जो दर्द होता था उसमें पूरी राहत मिल सकती है जिससे कामेच्छा फिर से खिल उठती है और वह आसानी से सहवास का आनंद उठा सकती है जिस तरह स्त्रियों में मेनोपॉज आता है कहते हैं कि पुरुषों में भी आता है लेकिन मैं इस बात से पूरी तरह से सहमत नहीं हूं क्योंकि स्त्रियों में हार्मोन अचानक बंद हो जाते हैं महीना
(9:20:49) अचानक बंद हो जाता है पुरुषों में हार्मोन आहिस्ता आहिस्ता कम होते हैं अचानक बंद नहीं होते इस उम्र में हार्मोन का संचार सही रहे उसके लिए खानपान में कुछ बदलाव करना बेहतर होगा कुछ आयुर्वेदा आचार्यों का य ऐसा मानना है कि हफ्ते में दो बार अगर दो कटोरी काले उड़द की दाल लहसुन और हींग का गाय के घी में तड़का लगा के सेवन करें तो हार्मोन का संचार बरकरार रहता है साथ में कुछ लोगों का ऐसा भी कहना है कि अगर रात को सोते वक्त एक चम्मच मेथी के दाने एक गिलास पानी के साथ निगल जाए चबाए नहीं साबूत मेथ निगल जाए तो भी हार्मोन
(9:21:36) बरकरार रहते हैं अगर इससे फायदा ना हो तो वह सिंथेटिक हार्मोन कृत्रिम हार्मोन जो कि मार्केट में उपलब्ध है वह अपनी डॉक्टर के सलाह के अनुसार सेवन कर सकते हैं यह सिंथेटिक हॉर्मोन लेने के पहले अगर पुरुष की उम्र 45 साल से ज्यादा है तो उसे अपना पीएसए माने प्रोस्टेट स्पेसिफिक एंटीजन टेस्ट करवा लेना चाहिए अगर यह नॉर्मल हो तो हार्मोन ले सकते हैं वरना नहीं जैसे जैसे पुरुष की उम्र बढ़ती है वैसे वैसे पुरुष के वीर्य में भी कुछ बदलाव आता है पहले जो वीर्य सफेद आता उसमें थोड़ा
(9:22:25) पीलापन दिखाई देगा पहले जो वीर्य गाढ़ा आता था उसमें थोड़ा पतलापन दिखाई देगा पहले जो वीर्य की मात्रा बहुत ज्यादा थी अब वो कम दिखाई देगी ध्यान रहे वीर्य के पीले होने से पतले होने से या कम होने से पुरुष की सेक्सुअल लाइफ पर कोई फर्क नहीं पड़ता अरे हां एक बात बताना भूल गया पुरुष हार्मोन स्त्रियों में भी उतना ही आवश्यक है उनको सिंथेटिक हार्मोन तो दे नहीं सकते लेकिन नेचुरल फॉर्म में उड़द की दाल और मेथी अवश्य दे सकते हैं स्त्रियों की की क्लिटोरिस की और प्राइवेट पार्ट की
(9:23:13) सेंसिटिविटी खास करके पुरुष हार्मोन पर निर्भर होती है अक्सर लोग ऐसा समझ बैठते हैं कि 60 साल के बाद सेक्स संभवत नहीं है लेकिन यह गलतफहमी है हकीकत में यह तो सेक्सुअलिटी के गोल्डन यर्स बन सकते हैं यह तो सेक्सुअलिटी का एक सुवर्ण काल है क्योंकि अब दोनों पार्टनर एक दूसरे को जानते हैं अच्छी तरह से पहचानते हैं एक दूसरे की पसंद नापसंद भी जानते हैं बिकॉज देर इज इनफ अफेक्शन वम एंड अंडरस्टैंडिंग आफ्टर हैविंग स्पेंट अ लाइफ टाइम टुगेदर मोहब्बत काफी परिपक्व हो जाती है क्योंकि जिंदगी के काफी साल एक दूसरे के साथ
(9:24:02) गुजारे हैं इस दौरान हकीकत में सहवास की क्वालिटी पहले से बेहतर हो सकती है हां कभी-कभी एक रस्ता की वजह से थोड़ी काम इच्छा में कमी आ सकती है इस उम्र में कई बार बच्चों की फिक्र की वजह से आर्थिक समस्या की वजह से अपनी खुद की बीमारियों की वजह से मायूसी या डिप्रेशन कभी-कभी आ जाता है इस डिप्रेशन में हर चीज की इच्छा कम हो जाती है खाने की इच्छा कम हो जाती है पीने की इच्छा कम हो जाती है पिक्चर देखने की इच्छा कम हो जाती है उस तरह से सेक्स में भी काम इच्छा कम नजर आती है इस दौरान अपनी सेहत का ख्याल रखना
(9:24:48) चाहिए शराब स्ट्रेस और स्मोकिंग ये तीनों से दूर रहना चाहिए योगाभ्यास खास करके प्राणायाम अनुलोम विलोम और शवासन ज्यादा मदद रूप हो सकते हैं और साथ ही साथ सेंसेट फोकस एक्सरसाइजस बेहद मदद रूप हो सकती है इसमें पेनिट्रेटिव सेक्स पर प्रतिबंध लगाया जाता है और दोनों को मोहब्बत प्यार के सागर में डुबोया जाता है और कैसा और कहां स्पर्श करने से अच्छा लगता है उसका आदान प्रदान किया जाता है क्योंकि स्किन एक सबसे बड़ा सेक्स ऑर्गन है और उसमें स्पर्श की भी एक
(9:25:35) अपनी खामोश भाषा होती है अक्सर यह सोई हुई तमन्ना को सोए हुए रिस्पांसस को जगाने में यह सनसेट फोकस प्लेजरिंग सेशन काफी मदद रूप हो सकते हैं दोनों पार्टनर्स अगर चाहे तो मरने के आखिरी दम तक सहवास का आनंद उठा सकते हैं डॉक्टर वेंडे वेल्ड जो सफल शादी के मार्गदर्शक या गुरु माने जाते हैं उनका कहना है कि काम इच्छा और कामशक्ति लंबी उम्र तक बरकरार रहती है और अगर कोई व्यक्ति उसका इस्तेमाल सही तरीके से करता रहे तो उसकी शारीरिक क्षमता अंत तक बेहतर रहती
(9:26:19) है इस उम्र में सेक्स ज्यादातर मानसिक ज्यादा और शारीरिक कम होती है सोच और संकल्प मजबूत होना जरूरी है एक जवान भी सोचे कि मैं बूढ़ा हो गया हूं तो वह बूढ़ा बन जाता है लेकिन एक बूढ़ा भी अगर सोचे कि मैं जवान हो तो वह जवान बन जाता है कहते हैं कि सेक्स दो आत्माओं और शरीरों का मिलन है ऐसे दो शरीरों का मिलन जो एक दूसरे के लिए कामुक रोमांटिक और आनंददायक वातावरण बनाने के साथ-साथ आते हैं इसका प्रभाव ना सिर्फ उनके शरीर को बल्कि दिमाग को भी सुखद आनंद पहुंचाता है इसलिए कहा
(9:27:06) जाता है कि पुरुष में स्खलन और स्त्री में लयात्मक संकुचन तो पैरों के बीच होता है लेकिन काम इच्छा काम अनुभूति और चर्म सीमा या क्लाइमेक्स का एहसास दो कानों के बीच होता है और वह है दिमाग जीवन में सेक्स सिर्फ बच्चा पैदा करने का तरीका ही नहीं है बल्कि आपसी प्यार और मोहब्बत की एक प्रमुख भूमिका भी निभाता है एक साथ-साथ बिताया गया समय निसंदेह एक स्ट्रेस बस्टर है और अपने पार्टनर के साथ पूरी तरह से करीब आने का एक बेहतरीन तरीका भी है आमतौर पर एक बार जब कोई व्यक्ति युवावस्था में प्रवेश करता है तो यौन
(9:27:53) आकर्षण विकसित होने लगता है आमतौर पर उस उम्र में आप किसी से मिलते हैं उनकी ओर आकर्षित होते हैं प्यार में पड़ते हैं और आखिर में जब दोनों रिश्ते को अलग स्तर के ले जाने के लिए तैयार होते तब आप सहवास करते हैं जब आप अपने साथी के साथ यौन संबंध रखते हैं तो वह पहला अनुभव भावनाएं उत्तेजना और शारीरिक संतुष्टि निसंदेह सबसे अच्छा अनुभव है जो कभी भी हो सकता है पहले सेक्स या तो किसी के लिए बेहद अच्छा अनुभव होता है या किसी के लिए ब्रेकिंग पॉइंट भी बन सकता है आप दूसरे व्यक्ति को बहुत स्पष्ट रूप से देखते हैं
(9:28:41) उसे स्मेल करते हैं यानी संगते हैं उनका स्वाद देते हैं उन्हें सुनते हैं उन्हें महसूस करते हैं और आप उन्हें समझते हैं अपने साथी को पूरी तरह से नगन देखने का यह पहला अनुभव अपने बदन का उनके बदन से स्पर्श घर्षण महसूस करना पहली बार एक सुंदर कविका की तर हो सकता है आपने अपने पार्टनर के बारे में बहुत सोचा होगा और कल्पनाएं भी की होगी लेकिन जब बात हकीकत की आती है तो यह किसी सपने के सच होने जैसा होता है पहला यौन अनुभव सभी के लिए ऐसा ही होना चाहिए क्योंकि यह व्यक्ति के दिमाग पर एक महत्त्वपूर्ण असर डालता है एक
(9:29:29) खूबसूरत और रोमांटिक अनुभव आपको आजीवन खूबसूरत यादें देगा यदि बाय चांस पहला अनुभव अच्छ नहीं है तो यह क्रिया या साथी या दोनों के प्रति नापसंद की पैदा हो सकती है इतनी हद तक की कभी कभ सेक्स के प्रति वह व्यक्ति टोमा में भी जा सकती है घृणा पैदा हो सकती रिलेशनशिप चाहे लिविन हो लव मैरिज हो या अरेंज मैरिज हो अक्सर जब सहवास की पहली रात होती है हम उसे सुहाग रात कहते हैं अगर अरेंज मैरिज है तो सुहाग रात में कई बार ऐसे भी होता है कि पति-पत्नी या दोनों
(9:30:16) पार्टनर जिंदगी में पहले मिले ही ना हो और बेडरूम में पहली बार मिल रहे हो दोनों एक दूसरे को बिल्कुल ना जानते हो ना एक दूसरे को पहचानते हो अक्सर उनको एक दूसरे की पसंद या नापसंद का भी ख्याल नहीं होता हम उसी की बात करते हैं कि अरेंज मैरिज में पहली रात को क्या होता है अक्सर यह चीज लव मैरिजस और लिविंग में भी थोड़े बहुत बदलाव के साथ हो सकती है मेरे पास कई बार ऐसे भी मरीज आते हैं कि पहली रात को जब रिसेप्शन के बाद वह सुहागरात मनाने बेडरूम में जाते हैं तो दोनों काफी थके हुए रहते हैं तीन या चार घंटे तक वह अपनी जगह पर खड़े रहते हैं बैठते हैं वापस उठते
(9:30:59) हैं वापस खड़े रहते हैं ऐसा सिलसिला रिसेप्शन में चलता रहता है और उसके बाद कुछ शादी की रस्में होती है जो भी एक एक डेढ़ घंटा और निकल जाता है उसमें शादी खत्म होने के बाद जब वह अपने कमरे में जाते हैं तो लड़की के दिमाग में और लड़के के दिमाग में सुहाग रात का एक अलग टाइप का चित्र रहता है अक्सर यह ज्ञान उन्होंने मस्तराम या दूसरी रोटिक किताबों से या इंटरनेट से या ब ब्लू फिल्म से प्राप्त किया होता है जब वह सहवास करने के लिए जाते हैं तब थकान की वजह से कई बार पुरुष को उत्तेजना ही नहीं आती और अगर उत्तेजना आ भी गई तो कमर का दर्द या किस मस्कुलर
(9:31:43) पेन की वजह से आया हुआ इरेक्शन वापस नरम हो जाता है और एक बार अगर नरम हो गया तो अक्सर पुरुष भयभीत हो जाता है और उसे आगे क्या करना उसका बिल्कुल ख्याल ही नहीं रहता है वह जैसे जैसे ज्यादा उत्तेजना लाने की कोशिश करता है वैसे वैसे उतना ही वह ज्यादा नर्वस बनता जाता है उसका ध्यान सिर्फ प्राइवेट पार्ट पर ही रहता है किरे कब आएगा इरेक्शन कब आएगा वह अपने ही खेल का खिलाड़ी के साथ-साथ एक दर्शक स्पेक्टर भी बन जाता है वह चिंता तूर बन जाता है स्त्री पार्टनर को भी काफी एक्सपेक्टेशन रहते हैं और जब पुरुष सहवास नहीं कर सकता तो वह और अपसेट हो जाती है और उनको अपसेट
(9:32:30) देखने के बाद पुरुष भी और ज्यादा अपसेट हो जाता है और तभी फिक्र एंजाइटी चिंता उस पर हावी हो जाती आती है कई बार ऐसे भी होता है कि अरेंज मैरिज के मामलों में जहां कपल्स ने पहले कभी सेक्स किया ही नहीं है वो पहली रात को नग्न होने या एक दूसरे के प्रति करीब आने में थोड़ी बहुत शर्म महसूस करते हैं ऐसी स्थिति में पुरुष या तो अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पाता या ओवर एक्साइटमेंट के कारण उसे अर्ली ऑर्गेजम माने शीघ्र स् कलन हो जाता है या कभी-कभी बिल्कुल इरेक्शन ही नहीं होता ऐसी स्थिति चिंता या आकर्षण की कमी के कारण हो सकती है इससे पुरुष पर एक बड़ा विपरीत प्रभाव
(9:33:15) पड़ सकता है जैसे वह आत्मविश्वास खो देता है या साथी के सामने शर्मिंदगी महसूस कर सकता है दूसरी और महिला भी इसके कारण चिड़चिड़ापन या असंतुष्ट महसूस कर सकती है और यह धारणा बना सकती है कि सेक्स उबाऊ है या इंटरेस्टिंग नहीं है पहली बार महिलाओं के साथ ऐसा भी हो सकता है कि वह पार्टनर के सामने नग्न होने में बहुत शर्माती हो या हो सकता है कि पार्टनर के प्रति आकर्षण की कमी के कारण ठीक से उत्तेजित ना हो और समान रूप से इस क्रिया में भाग ना ले रही हो इससे पुरुष भी इरिटेट हो सकता है इसे पहले यौन अनुभव के आधार पर जीवन भर के लिए
(9:34:01) दोनों के मन में एक गलत धारणा निर्माण हो सकती लेकिन सभी एक जैसी समस्याओं से से नहीं गुजरते कुछ के लिए यह जीवन भर का सबसे अच्छा अनुभव भी हो सकता है इसके लिए केवल दो भागीदारों के बीच पूर्ण विश्वास आपसी कंफर्ट की स्तर की आवश्यकता होती दोनों को शारीर रूप से एक दूसरे की ओर आकर्षित होना चाहिए और कोशिश करनी चाहिए कि वह दोनों एक दूसरे के अपीर से आपस में कोई दोष ना खोजे एक बार जब मोशनल बॉन्डिंग हो जाता है तो फिजिकल क्लोज भी स्वाभाविक रूप से आ आई जाती है सुखद
(9:34:46) वातावरण म्यूजिक एक रोमांटिक जगह अमूमन एक सही मूड सेट करने में मदद रूप हो सकती दूसरा सिचुएशन दोस्तों ऐसा भी देखने में आया है कि कभी पुरुष को बाय फोर्स शादी करवाई जाती या तो जिससे शादी की वह लड़की बिल्कुल पसंद नहीं होती वह अपनी वाइफ से बिल्कुल आकर्षित नहीं होता या तो पुरुष खुद होमोसेक्सुअल होता है और शादी के पहले उसको बताया जाता है कि एक बार तुम शादी कर लो तो सब कुछ ठीक ठाक हो जाएगा लेकिन यहां ठीक ठाक होने का प्रश्न ही उपस्थित नहीं होता क्योंकि उसका आकर्षण सिर्फ सजातीय व्यक्तियों के साथ ही होता है या अगर लड़की उसे पसंद ही नहीं है तो वह आकर्षित
(9:35:30) कैसे होगा और आकर्षण ही नहीं हो तो उत्तेजना कहां से आएगी और पुरुष के लिए यह उत्तेजना ज्यादा तकलीफ की बात होती है क्योंकि उसको प्रवेश से पहले शिष्ण में सही उत्तेजना यानी मजबूती आना बिल्कुल आवश्यक है जब मजबूती ही नहीं है तो प्रवेश मुमकिन ही नहीं है शादी सेक्सुअली सफल होने का सवाल ही पैदा नहीं होता अगर कुछ बार शादियां सफल हो भी गई तो ऐसी शादियों का अंत दुर्भाग्य पूर्ण होता है फिर भी ऐसे सिचुएशन में लड़की को थोड़ा एडवांटेज होता है अगर लड़की को पुरुष के प्रति आकर्षण नहीं है या वह खुद लेस्बियन है और उसके मन के खिलाफ उसकी शादी हुई है तो ऐसी
(9:36:17) सिचुएशन में अपने पुरुष पार्टनर के साथ सेक्स करने में उसका मन नहीं होगा तो भी उसे पेनिट्रेशन करवाने के लिए कोई ज्यादा दिक्कत नहीं होगी अगर वजाइना में गीलापन नहीं होता या कम है तो थोड़ा बहुत लुब्रिकेशन लगाकर भी प्रवेश करवा सकती है लेकिन ऐसी शादियों का अंत अमूमन सुखमय नहीं होता मेरे अनुभव में एक तीसरा सिचुएशन यह भी आया है कि पुरुष को पहली रात को बेहतर सवास की क्षमता के लिए पलंग तोड़ पान खिलाया जाता है जिसमें अक्सर चरस अफीम जैसी नशीली चीजें रहती है तो वह पुरुष आधा तो नशे में ही रहता है और वह क्या कर रहा है उसका भी उसको पता ख्याल
(9:37:00) नहीं रहता अक्सर व कुछ किए बिगर ही सो जाता है या तो दो मिनट का सहवास उसे दो घंटे जैसा लगता है बेहतर यही होगा कि ऐसी नशीली दवाइयों से और पलंग तोड़ पान से आप दूर ही रहे कई बार स्त्री पार्टनर भी उन्होंने सुना होता है कि पहली रात को बहुत पेन होगा बहुत खून निकलता है जिसकी वजह से वह पुरुष के करीब आने से इतराती है और जब भी पुरुष नजदीक आने की कोशिश करता है तब एक या दूसरा बहाना बनाने के व बाद वो दूर चली जाती है कई बार तो लड़कियां यह भी बताती है है कि इतनी जल्दी क्या है कुछ लड़कियां अगर सहवास नहीं करना चाहती तो बताती है कि मैं मेंसिस में हूं कई बार यह
(9:37:45) बताती है कि मैं थकी हुई हो किसी भी तरह से वह सहवास को अवॉइड करने की कोशिश में रहती है कई बार वह ऐसे भी बोलती है कि अगर मैं प्रेगनेंट हो जाऊंगी तो अभी अपने को बच्चा नहीं चाहिए थोड़ा टाइम के बाद करेंगे ऐसे समय में बेहतर यही होगा कि पुरुष ऐसी सिचुएशन में अपनी स्त्री के साथ अच्छी तरह से मोहब्बत से पेश आए गुस्से ना हो जाए और उसे समझाने की कोशिश करें अगर उसके दिमाग में कुछ गलतफहमी है तो उसे समझा के दूर करें जरूरत पड़े तो उस रात कुछ भी ना करें सिर्फ साथ में सो जाए उस रात पेनिट्रेटिव सेक्स अवॉइड करें दूसरे दिन डॉक्टर से मिलकर गलतफहमियां दूर करने
(9:38:29) के बाद फिर आगे बढ़े यहां यह समझना जरूरी है सहवास का चार अक्षर का पर्याय शब्द है बातचीत अगर स्त्री पार्टनर को सेक्स एजुकेशन मिला है तो गलतफहमियां से वह दूर रहेगी और बेवजह फिक्र चिंता उसको बिल्कुल नहीं होगी सेक्स एजुकेशन जैसे पुरुष को देते हैं वैसे ही स्त्री को भी देना जरूरी है नहीं तो कई बार ऐसा होता है कि स्त्री यह समझती है कि मेरा हस्बैंड शादी के बाद मुझे सब कुछ सिखाएगा इसलिए कई बार पति को डबल रोल करना पड़ता है एक पति का और दूसरा टीचर का और ऐसी सिचुएशन में कई बार ऐसा भी देखा है कि शादी के बाद हस्बैंड वाइफ रिलेशन के बजाय
(9:39:17) पति-पत्नी में स्टूडेंट टीचर रिलेशनशिप डिवेलप हो जाती है बेहतर यही होगा कि स्त्री खुद सेक्स एजुकेशन लेले मेरी मेडिकल प्रैक्टिस में कुछ कपल्स ऐसे भी आए थे जिनको बहुत फिक्र थी क्योंकि उनकी कम्युनिटी में दूसरे दिन सुबह उनको खून से रंगा हुआ कपड़ा दिखाना पड़ता था ताकि सब लोगों को मालूम पड़े कि लड़की पाक थी पाक का मतलब है वर्जिन थी ऐसी सिचुएशन में यह फिक्र लड़कियों को ज्यादा रहती है कि अगर खून नहीं निकला तो क्या यह समझना जरूरी है कि पहली बार या पहले संभोग के वक्त खून का निकलना या ब्लीडिंग होना ही चाहिए यह बिल्कुल जरूरी नहीं है यह गलत
(9:40:02) फहमी है जिसे दूर करना आवश्यक है और वह एक मात्र सेक्स एजुकेशन की वजह से ही पॉसिबल अगर स्त्री को ब्लीडिंग ना हो तो पुरुष अपने दिमाग में बेवजह डाउट ना पैदा करें क्योंकि ट्रस्ट बहुत ही इंपॉर्टेंट चीज है शादी में विश्वास भरोसा एक बहुत बड़ी चीज है और यह मैरिज का एक अत स्तंभ है कई बार ऐसा भी होता है कि पुरुष जब पहली बार सहवास करने की कोशिश करता है तो अचानक चमड़ी पिनी सेड के पीछे आने के बाद बेहद दर्द होता है और ज से चमड़ी जॉइंट हुई रहती है माने फेनमैन लगता है यह खून देखने के बाद दोनों पार्टनर
(9:40:49) अक्सर घबरा जाते हैं लेकिन इसका इलाज बड़ा आसान है जहां से खून निकल रहा हो वहां अगर आप कोई कपड़ा दबा दोगे तो खून निकलना कुछ मिनटों के बाद अपने आप बंद हो जाएगा और अक्सर आठ 10 दिन के बाद यह जखम भर जाता है और थोड़ा बहुत लुब्रिकेशन लगाकर आप फिर से आराम से सहवास कर सकते हो अमूमन बाद में सहवास में कोई परेशानी नहीं होती अगर फिर भी कोई परेशानी हो तो आपकी सर्जन केराई ले सकते हैं हकीकत में अगर कोई पहली बार सहवास कर रहा हो चाहे वह पहली रात हो या पहली बार हो एक चीज खास ध्यान में रखनी चाहिए कि
(9:41:37) उसे फोर पलेन में यानी योनि प्रवेश के पहले की क्रियाओं में थोड़ा ज्यादा टाइम गुजारना चाहिए अपने पार्टनर के साथ बातें करनी चाहिए उसको क्या पसंद है क्या नहीं पसंद है वह जानना जरूरी है शुरुआत थोड़ी रोमांटिक बातचीत से करनी चाहिए और हाथ पकड़ते हुए थोड़ी चंचल छेड़खानी के साथ बात आगे बढ़नी चाहिए आगे थोड़ी बढ़ानी चाहिए जैसे कि आप सुंदर दिखती हो और और यू हैव अ वेरी नाइस फिगर और यह कहते हुए गर्दन से शुरू करते हुए कामुक तरीके से उंगली से उसे गाल को आप सहला सकते हो सामान्य विचार यह है कि साथी को कामुक स्पर्श और बातचीत के साथ सहज होने दिया
(9:42:25) जाए इस तरह की हरकत महिलाएं अपने पार्टनर के साथ भी उसके बालों में या हाथ के साथ कर सकती है एक बार जब दोनों सहज हो जाए तो धीरे-धीरे से गर्दन को चूमना शुरू करें और देखें कि पार्टनर इससे उत्तेजित हो रहा है या नहीं आप उनके सांस लेने के तरीके से या दिल की धड़कन से समझ जाएंगे धीरे-धीरे किस करना शुरू करें एक बार जब दोनों पार्टनर किस कर रहे हो तो पुरुष धीरे-धीरे अपने हाथों को पीठ से शुरू करते हुए महिला के शरीर पर ले जाना शुरू कर सकता है और फिर धीरे-धीरे उन्हें स्तनों पर आगे की ओर ले जा सकता सकता है जबकि पुरुष साथी ऐसा कर
(9:43:10) रहा हो महिला साथी को भी उसे चूमना चाहिए और स्पर्श कर सकती है और पारस्परिक क्रिया कर सकती है एक बार जब दोनों उत्तेजित हो जाए तो बत्ती बुझा सकते हैं और धीरे-धीरे हल्के से एक दूसरे के कपड़े अलग करना शुरू कर सकते हैं बाद में अपने पार्टनर को पूछ सकते हैं कि क्या उन्हें कोमल स्पर्श पसंद है या कठोर उत्तर के आधार पर आप निपल को सेहलाना शुरू कर सकते हैं ध्यान रहे कि पुरुषों को भी निपल्स होते हैं तो महिला पार्टनर भी हमेशा ऐसा ही करने की कोशिश कर सकती बाद में सोने की स्थिति में आगे बढ़े और धीरे-धीरे नीचे की
(9:43:57) ओर बढ़े पार्टनर को बताएं कि आप वजाइना में एक उंगली डाल रहे हैं जब फोर प्ले ठीक से हो जाए तो योनि मार्ग में गीलापन भी ठीक से होगा और इस गीलापन का एहसास पुरुष अपनी एक उंगली योनि मार्ग में डालकर कर सकता है गीलापन य स्त्री की उत्तेजना का बैरोमीटर है धीरे-धीरे एक उंगली से शुरू करें और देखें कि क्या पार्टनर को यह पसंद है अगर एक उंगली आसानी से प्रवेश हो जाती है तो बाद में दूसरी उंगली भी साथ में डाल सकते हैं अगर स्त्री को थोड़ा डिस्कंफर्ट या दर्द जैसा महसूस हो और प्रवेश में दिक्कत होती हो तो लुब्रिकेंट का सहारा ले सकते हैं
(9:44:38) मिसाल के तौर पर नारियल के तेल लगाने से लुब्रिकेशन हो जाता है और प्रवेश में आसानी भी हो जाती अगर कोई आराम से दो उंगलियां को योनि में डाल सकता है तो आमतौर पर लिंग डालना अधिक आसान हो जाता है शिष्ण प्रवेश में कोई दिक्कत नहीं होती यहां ध्यान रखना चाहिए कि स्त्री अगर पीठ के बल पर सोई हुई है उसने दोनों पांव अलग सेपरेट किए हुए हैं उसने घुटने थोड़े ऊपर उठाए हैं और जब पुरुष अपनी उंगली का प्रवेश करता है तो उंगली का प्रवेश सीधा ना करें उसकी डायरेक्शन डाउन वर्ड और फॉरवर्ड होनी चाहिए माने उंगली की दिशा नीचे की तरफ आगे प्रवेश करना चाहिए अगर वह
(9:45:26) सीधा डालने की कोशिश करेगा तो उसको स्त्री की हड्डी शायद एक रुकावट बन सकती है इसलिए उंगली प्रवेश की दिशा डाउन वर्ड एंड फॉरवर्ड ही होनी चाहिए अगर पुरुष दोनों उंगलियां आसानी से प्रवेश कर सकता है तो वह थोड़ी देर उंगलियां आगे पीछे करके स्त्री को आनंद का एहसास दिला सकता है और साथ ही साथ क्लिटोरिस और इर्दगिर्द पार्ट को भी सहला करर उसे ज्यादा उत्तेजित कर सकता है जब दो उंगलियां आसानी से प्रवेश हो सकती है तो स्त्री को एक तरह का कॉन्फिडेंस आ जाता है कि अब ष्ण प्रवेश में भी कोई दिक्कत नहीं होगी और दो उंगलियां की चौड़ाई और शिष्ण की चौड़ाई
(9:46:12) अमूमन एक समान होती एक बार जब आपको लगने लगे कि महिला तैयार हो रही है तो आप पेनिट्रेशन माने योनि प्रवेश कर सकते हो शुरुआती दिन के लिए कोई मिशनरी स्थिति से शुरू कर सकता है या महिला को फीमेल सुपीरियर पोजीशन में बैठने दे सकता है यानी वुमन ऑन टॉप पोजीशन में इससे महिला को आत्मविश्वास मिलेगा कि वह अपनी गति और लय के अनुसार आगे बढ़ सकती है वुमन ऑन टॉप पोजीशन में स्त्री को अपनी वर्जिनिटी खोने के दौरान दर्द की चिंता या डर नहीं रहता वजान मस का अनुभव करने वाली महिलाओं के लिए यह स्थिति ज्यादा सहायक होती है क्योंकि वुमन ऑन टॉप
(9:46:57) पोजीशन होने से भय और चिंता के कारण स्त्री दोनों पैरों को एक साथ लाने का सवाल ही नहीं उठ सकता क्योंकि उसके पैरों के बीच में तो पुरुष लेटा हुआ होता है और पुरुष का शरीर संभोग के दौरान स्त्री के दोनों पैरों को एक साथ लाने की क्रिया को अटका कर सकते हैं रुकावट कर सकते हैं वुमन ऑन टॉप पोजीशन में योनि द्वार ठीक से खुल सकता है ताकि शिसन आसानी से अंदर प्रवेश कर सके अगर प्रवेश के बाद दर्द होगा तो वह रुक भी सकती है तो स्त्री को किसी किस्म की एंजाइटी फिक्र चिंता बिल्कुल नहीं होगी और व प्र के बाद पुरुष आगे पीछे मूवमेंट कर सकता है या स्त्री को ऐसे करने के लिए
(9:47:44) प्रोत्साहित कर सकता है महिला को जब तक सुकून का एहसास ना हो तब तक वह यह क्रिया आराम से कर सकती है जब उत्तेजना और आगे बढ़ेगी जब जोश जुनू और आगे बढ़ेगा तो स्त्री एक मुकाम पर पहुंचेगी जहां उसको सुकून का यानी बेहद आनंद का एहसास होगा स्त्री को एक ऐसी फीलिंग होगी कि बस अब और नहीं माने इनफ एंड नथिंग मोर और कुछ वक्त के लिए वह बेहद खुश नजर आए अगर ऐसी फीलिंग आ गई तो हम ऐसा समझ सकते हैं कि अमूमन उसे सुकून मिल गया आप इस वक्त उसे पूछ भी सकते हो कि तुझे सुकून मिला ड यू रीच
(9:48:32) क्लाइमैक्स अगर यह मिल गया है तो ठीक है और अगर नहीं मिला है तो आप उसे और तरीके से उत्तेजित करके सुकून का एहसास दिला सकते हो मिसाल के तौर पर ओरल सेक्स या मास्टरबेशन से अगर एक बार सुकून मिल गया तो उसके प्राइवेट पार्ट भी रिलैक्स हो जाते हैं और उस वक्त पुरुष स्त्री के दोनों पांव के बीच में आके फेस टू फेस यानी मिशनरी पोजीशन में सहवास करने की कोशिश कर सकता है मिशनरी पोजीशन में जब सहवास करने का टाइम आए और अगर पुरुष इन एक्सपीरियंस हो तो सहवास के तौर तरीके से समझो वो वाकिफ ना हो तो उसके लिए बेहतर यही होगा कि वह उत्तेजित शिष्ण स्त्री के
(9:49:18) हाथ में दे दे क्योंकि उसे बेहतर पता है कि प्रवेश कहां कराना है मिसाल के तौर पर ऐसे टाइम में कई बार स्त्री शर्माए या हाथ में लेने से कई बार हिच किचा है तो आप हंसी मजाक में एक उदाहरण दे सकते हो कि अंधेरे में खाने का निवाला मैं मेरे मुंह में तो डाल सकता हूं लेकिन आप अगर आपके मुंह में डालने गया तो कहीं नाक पर लगे या आंख पर लगे या दाढ़ी पर लगे त्री को यह बात सही लगेगी क्योंकि प्रवेश कहां प्रवेश कराना कितना प्रवेश कराना कब और कैसे प्रवेश कराना है वह खुद बेहतर जानती है और प्रवेश के बाद पुरुष फिर से आगे पीछे मूवमेंट कर सकता है जब तक
(9:50:06) स्त्री चाहे तब तक शुरुआत में यह मूवमेंट थोड़ी सॉफ्ट माने आहिस्ता आहिस्ता करनी चाहिए ज्यादा तेज और रफ नहीं बेहतर यही होगा कि उसे पूछ ले कि उसे किस टाइप की मूवमेंट ज्यादा पसंद है यह भी दोनों पार्टनर्स को क्लाइमैक्स तक पहुंचने में काफी मदद कर सकती है हां यदि कोई पार्टनर क्लाइमैक्स पर जल्दी पहुंच गया उदाहरण के लिए महिला संभोग के दौरान क्लाइमेक्स तक नहीं पहुंच सकती है तो पुरुष साथी हमेशा उसे संतुष्ट करने के लिए अन्य तरीकों का उपयोग कर सकता है जो कि उसकी उंगलियों मुंह या कुछ अन्य सेक्स टॉय जैसे वाइब्रेटर आदि का उपयोग कर सकता
(9:50:53) है इसी तरह यदि पुरुष क्लाइमैक्स तक नहीं पहुंच पाता है तो महिला साथी उसे संतुष्ट करने के लिए हस्त मैथुन या मुख मैथुन का उपयोग कर सकती है दोनों पार्टनर को समान रूप से इस क्रिया में भाग लेना चाहिए और एक दूसरे को सहज महसूस कराना चाहिए यदि महिला साथी अधिक शर्मिली है तो वह उसे और कोई तरीके से संतुष्टि दे सकता है चाहे वह मुख मैथु हो हस्त मैथु हो या कोई और तरीका दोनों को साथ में ही क्लाइमेक्स पर पहुंचना चाहिए यह जरूरी नहीं है लेकिन पहुंचना जरूरी है जरूरी चीज यह है कि सही अर्थ में सम भोग यानी सरीखा इक्वल आनंद
(9:51:42) होना आवश्यक है हमेशा याद रखें कि सेक्स में फोर पले उतना ही महत्त्वपूर्ण है जितना की प्ले यह दोनों पार्टनर को उत्तेजित करता है और आपको एक दूसरे की पसंद और नापसंद का अंदाजा देता है सेक्स के दौरान बातचीत करते हैं ताकि रोमांटिक माहौल बना रहे आप पहली बार पार्टनर के साथ क्लोज कनेक्शन महसूस कर रहे हो बातचीत शर्म और एंजाइटी को कम करने में मदद करेगी एक बार जब दोनों पार्टनर पूरी तरह से संतुष्ट हो जाएं तो बस एक दूसरे की बगल में लेट जाएं एक दूसरे से बातें करते हुए आप एक दूसरे को गले लगा सकते हो पार्टनर
(9:52:29) से पूछ सकते हैं कि उन्हें क्या पसंद आया क्या वह संतुष्ट हैं बाद में आप एक साथ स्नान करने भी जा सकते हो या स्पून पोजीशन में सो सकते हो सहवास के दौरान अलग-अलग पोजीशंस भी ट्राई कर सकते हैं हर एक पोजीशन ट्राई करने के बाद जो पोजीशन आप दोनों को ज्यादा अच्छी लगे ज्यादा कंफर्टेबल लगे वह पोजीशन आप फ्यूचर के लिए अपना सकते हैं शादी के बाद कई बार सहवास के लिए पहले बिगिनिंग कौन करें इनवाइट कौन करें हमारे यहां ज्यादातर यह रसम है कि पुरुष ही सहवास के लिए पहले इनवाइट करता है लेकिन जमाना बदल चुका है बदलाव हर जगह
(9:53:17) महसूस हो रहा है और अगर स्त्री भी कभी सहवास के लिए इनवाइट करे तो पुरुष को इस चीज को बड़ी मोहब्बत से अपना लेना चाहिए कुछ हस्बैंड ऐसे होते हैं कि वह अपने पार्टनर पर चक करना शुरू करते हैं कि अरे एक लड़की होके ऐसा मुझे इनवाइट करती है उसको यह सब किसने सिखाया लेकिन पुरुष को समझना चाहिए कि सेक्सुअल राइट यह स्त्रियों का बेसिक ह्यूमन राइट है और उसका सम्मान करना आवश्यक है उसे शक की निगाह से ना देखे महर्षि वात्सायन ने अपने काम सूत्र में एक बहुत अच्छी बात बताई कि जब शादी हो तो उसके बाद पहले तीन चार दिन पेनिट्रेटिव सेक्स ना करें सिर्फ एक दूसरे
(9:54:05) को जान ले एक दूसरे को पहचान ले तुझे क्या पसंद है वह जान ले मुझे क्या पसंद है वह बता दे शायद उनके दिमाग में ऐसा ही था कि व्हाट एवर इ सेंशुअल कुड बी सेक्सुअल एंड व्हाट एवर इ सेक्सुअल नीड नॉट बी सेंशुअल उनका इरादा शायद यह हो सकता है कि मोहब्बत की आखिरी मंजिल हम बिस्तरी या सहवास हो सकती है लेकिन सहवास की आखरी म ल मोहब्बत हो यह जरूरी नहीं महर्षि बादशाह ने पूरा चैप्टर आफ्टर प्ले लिखा है जो सूचित करता है कि आफ्टर प्ले भी फोर प्ले जितना ही महत्व का है अब
(9:54:51) जब पहले यौन अनुभव की बात आती है तो थोड़ा संवेदनशील विषय पर चर्चा करते हैं जहां ज्यादातर लोगों को सबसे अच्छा कामुक अनुभव होता है और कुछ लोग ऐसे भी होते हैं जो विपरीत और जबरदस्ती वाले यौन अनुभव से गुजरते हैं सेक्स जब एक सुखद और आरामदायक वातावरण में किया जाता है तो सेक्स सकारात्मक प्रभाव डाल सकता है बल्कि बलपूर्वक और अप्रिय तरीके से सेक्स का पहला अनुभव आमतौर पर किसी पर भी बुरा और नकारात्मक प्रभाव डाल सकता है फिर वह युवा लड़का हो
(9:55:37) या लड़की वयस्क पुरुष हो या महिला वह व्यक्ति अपने जीवन में सेक्स के प्रति सिर्फ घुणा ही महसूस कर सकता है और आखिर में इन नकारात्मक प्रभावों को अपने पार्टनर पर भी थोक प है ऐसी सिचुएशन में कोई यह भी सोचना शुरू कर देगा कि सेक्स एक अप्रिय और बुरा कार्य है तो दोस्तों अंत में मैं यही कहना चाहूंगा कि पहली बार सेक्स करने का फैसला करना या अपना कौमार्य होना एक व्यक्ति के जीवन का एक महत्त्वपूर्ण क्षण होता है और हो सकता है यह बिल्कुल वैसा ना हो जैसा आपने सोचा था
(9:56:24) इसलिए यदि आपका पहली बार एक अच्छा अनुभव था तो इससे बेहतर कुछ नहीं हो सकता लेकिन अगर आपका पहली बार का अनुभव ऐसा नहीं था जैसा आपने सोचा था तो आप हमेशा एक अच्छे चिकित्सक से परामर्श कर सकते हैं हालांकि पहली बार सेक्स करना आपके जीवन का एक बड़ा मिल का पत्थर है अगर कभी उसमें खामियां भी आ जाए तो सेक्स एजुकेशन की मदद से उन खामियों को खूबियों में बदल सकते हो समाज आज ग्लोबल बन रहा है और इस ग्लोबल वर्ल्ड में लोग करीब आते जा रहे हैं डिजिटल या सोशल माध्यम से आज बहुत सारे लोग अपनी
(9:57:13) पर्सनल लाइफ बिंदास ओपनली शेयर करते हैं बहुत सारे लोग आज खुल के अपने सजातीय आकर्षण को या अन्य सेक्सुअल ओरिएंटेशन को भी खुले दिल से बयान करते हैं ताकि पूरी दुनिया पढ़ सके और इनसे जुड़ सके इसका एक फायदा यह हुआ है कि आज बहुत सारे लोग ज्यादातर युवा पीढ़ी इस विषय पर ओपनली बात कर सकती है खुले दिल से चर्चा कर सकती है अपना सेक्सुअल ओरिएंटेशन छिपा के रखने का प्रमाण पहले के कंपैरिजन में काफी कम हो गया है लेकिन आज भी हमारे देश में ज्यादातर
(9:57:58) गांव में आम तौर पर इन विषयों पर चर्चा या डिस्कशन खुलेआम नहीं होता और अगर कोई सजातीय आकर्षण रखता है या रखती है या अगर किसी को किसी पर आकर्षण होता ही नहीं तो इस स्थिति को हैंडल करना उनके लिए बेहद टेंशन वाला हो जाता है बेहद तनावपूर्ण बन जाता है जब यह बच्चे बड़े होते हैं उनको समझ आती है और वह एडोले सेंस में यानी किशोरावस्था में आते हैं तब यह खुद के सेक्सुअल ओरिएंटेशन को लेकर कंफ्यूजन में रहते हैं और मनो मन सवाल करते हैं मैं अलग क्यों हूं क्या मुझ में कुछ
(9:58:44) गलत है ऐसे सवालात से यह हमेशा परेशान रहते हैं और कभी कभ समाज की गलत सोच का शिकार भी बन जाते हैं आज भी हमारे समाज में सेक्स और जेंडर के बारे में सोचने का नजरिया जितना चाहिए उतना प्रोग्रेसिव नहीं है आज के इस लेक्चर में हम जेंडर और सेक्स के कई पहलुओं पर नजर डालने वाले हैं यह याद रखना चाहिए कि जेंडर और सेक्स यह दोनों अलग है दोनों में फंडामेंटल डिफरेंस यह है कि सेक्स दो पैरों के बीच में होता है और जेंडर दो कानों के बीच में होता है माने
(9:59:32) सेक्स इज बिटवीन द टू लेग्स एंड जेंडर इज बिटवीन द टू इयर्स माने दिमाग पहले हम बात करते हैं सेक्स के बारे में बच्चे का जब जन्म होता है तब उसके जेनिटल्स माने जननांग हार्मोस और क्रोमोसोम्स के आधार पर बच्चे का सेक्स तय होता है वह स्त्री है कि पुरुष है कि इंटरसेक्स है किसके मन में सवाल उठ सकता है कि यह कैसे तय किया जाता है यदि बच्चे को पिनिस माने शि टेस्टिकल्स माने अंडकोष साफ दिखाई देते हैं और यदि वह बच्चा एक्स वाय क्रोमोसोम के साथ पैदा हुआ है तो उसका सेक्स मेल माने पुरुष है ऐसा माना
(10:00:20) जाएगा यदि किसी बच्चे का जननांग योनि है और वह बच्चा एक्स एक्स क्रोमोसोम से पैदा हुआ है तो उसका सेक्स फीमेल माने महिला है ऐसा माना जाएगा लेकिन अगर बच्चे की ज की पहचान में किसी भी कारण से अस्पष्टता है ना वो स्पष्ट रूप से पुरुष है ना वो स्पष्ट रूप से स्त्री है तो इसका मतलब उस बच्चे के क्रोमोसोम्स में एक एक्स्ट्रा एक्स या एक एक्स्ट्रा वाय क्रोमोसोम का समावेश हुआ है इस केस में यह बच्चा इंटरसेक्स है ऐसा माना जाएगा अभी हम बात करते हैं जेंडर के बारे
(10:01:06) में जेंडर और सेक्स यह दोनों एक दूसरे से अलग हैं आप पूछेंगे वो कैसे जबकि सेक्स बायोलॉजिकल है जेंडर साइकोलॉजिकल है आपका सेक्स स्त्री हो या पुरुष लेकिन आप अपने खुद को क्या समझते हो क्या महसूस करते हो इसी पर आपका जेंडर निर्माण होता है इसी पर आपका जेंडर तय होगा जेंडर आइडेंटिटी का महत्व इसी पर निर्भर है आपके जेंडर से आप साइकोलॉजिकली डीप कनेक्टेड रहते हो किसी का जेंडर पुरुष होता है किसी का जेंडर
(10:01:53) स्त्री होता है तो कोई ट्रांसजेंडर या एजेंडर भी हो सकता है आइए जेंडर आइडेंटिटी को थोड़ा डिटेल्स में समझने की कोशिश करते हैं स जेंडर अगर बाय बर्थ माने जन्मत आपका सेक्स मेल है और आप खुद को मेल ही मानते हो इसका मतलब आपको खुद की जेंडर आइडेंटिटी मेल ही लगती है यानी आपका सेक्स और जेंडर एक साथ अलाइन होता है इसी को सिस जेंडर कहते हैं उसी तरह से अगर किसी का सेक्स बाय बर्थ फीमेल है और वह खुद को
(10:02:40) फीमेल ही मानती है इसका मतलब उसे उसकी जेंडर आइडेंटिटी फीमेल ही लगती है यानी उसका सेक्स और जेंडर एक साथ अलाइन हो रहा है वह व्यक्ति सिस जेंडर है अभी हम ट्रांसजेंडर की बात करते हैं अगर बाय बर्थ आपका सेक्स मेल है लेकिन आपको एहसास होता है कि आप फीमेल हो और आप खुद को फीमेल ही मानते हो इसका मतलब आपका सेक्स और जेंडर एक साथ अलाइन नहीं होता इसी को ट्रांसजेंडर कहते हैं इसी तरह से जन्मत अगर किसी का सेक्स फीमेल है और वह खुद को मेल मानते हैं क्योंकि उनको
(0:03:29) एहसास होता है कि उनको साइकोलॉजिकली ऐसे लगता है कि वह अंदर से मेल है इसका मतलब है वह ट्रांसजेंडर है क्योंकि उनका सेक्स और जेंडर एक साथ अलाइन नहीं होता सरल शब्दों में कहा जाए तो द बॉडी ऑफ अ मेल एंड माइंड ऑफ अ फीमेल और वाइस वर्सा सेक्स और जेंडर आइडेंटिटी के मिसमैच होने का कारण से ट्रांसजेंडर को बेहद मानसिक तनाव और एंजाइटी से गुजरना पड़ता है जिसे जेंडर डिस्फोरिया कहते हैं इसलिए कभी-कभी ट्रांसजेंडर व्यक्ति हार्मोन ट्रीटमेंट और ऑपरेशन की मदद लेते हैं ताकि उनका
(0:04:17) बायोलॉजिकल सेक्स उनके जेंडर आइडेंटिटी से मैच हो जाए ऐसे ऑपरेशन द्वारा पुरुष से महिला होना कंपेरटिवली आसान है लेकिन महिला से पुरुष होना कंपैरेटिव मुश्किल है ट्रांस का निदान कैसे किया जा सकता है यह निदान आसान नहीं है ट्रांससेक्सुअलिज्म को होमोसेक्सुअल ओरिएंटेशन ट्रांस वेस्टिज और दूसरी साइकिक कंडीशन से अलग करने के लिए मनो चिकित्सक द्वारा डीली इन्वेस्टिगेट करना पड़ता है फिज को यह पता होना चाहिए कि जेंडर
(0:05:04) ट्रांस्पोजिशन या जेंडर आइडेंटिटी में बदलाव कभी-कभी किसी पर्सनालिटी डिसऑर्डर से भी आ सकता है कभी-कभी कुछ केसेस में ऐसे भी हो सकता है कि आयुष्य के उत्तरार्ध में माने बुढ़ापे में अचानक से जेंडर आइडेंटिटी में बदलाव आ सकता है जिसका कारण कोई दिमागी परेशानी हो सकती है इसलिए जेंडर रिअसाइनमेंट सर्जरी मतलब लिंग परिवर्तन सर्जरी करने से पहले इन सभी एस्पेक्ट डीप इन्वेस्टिगेशन होता है और सर्जरी से पहले व्यक्ति को कुछ सालों तक अंडर ऑब्जर्वेशन भी रखा जाता है हमने बात की सिस जेंडर की और ट्रांसजेंडर के बारे में अब हम देखेंगे
(0:05:53) नॉन बाइनरी और ए जेंडर किसे कहते हैं नॉन बाइनरी बाय बर्थ आपका सेक्स क्लियर है मतलब स्पष्ट रूप से मेल या फीमेल है आप मेल या फीमेल है लेकिन आपकी साइकोलॉजिकल जेंडर आइडेंटिटी ही क्लियर मेल है या नहीं फीमेल है बल्कि इन दोनों के बीच है कभी आपको लग सकता है कि आप मेल हो और कभी आपको लग सकता है कि आप फीमेल हो इसे नॉन बाइनरी कहते हैं अब बात करते हैं ए जेंडर किसे कहते हैं यह सवाल पूछ सकता है कि क्या यह मुमकिन है कि किसी का जेंडर
(0:06:42) आइडेंटिटी मेल या फीमेल दोनों से अलाइन ना करता हो हां हो सकता है समझिए कि बाय बर्थ आपका सेक्स क्लियर है मतलब स्पष्ट रूप से मेल या फीमेल है लेकिन आपकी जेंडर आइडेंटिटी मेल या फीमेल या नॉन बाइनरी से किसी से भी अलाइन नहीं करती तो वह व्यक्ति ए जेंडर माने जेंडरलेस माना जाता है अभी हमने जेंडर आइडेंटिटी की बात की अभी सेक्सुअल ओरिएंटेशन को समझने से पहले हम बात करेंगे अट्रैक्शन के बारे में इमोशनल अट्रैक्शन और सेक्सुअल अट्रैक्शन के बारे में दोनों अलग-अलग है और एक के
(0:07:29) बिना दूसरा हो सकता है किसी के प्रति इमोशनली अट्रैक्ट हो इसका मतलब है उसके साथ एक इमोशनल अटैचमेंट एक जुड़ाव एक लगाव महसूस करना लेकिन यह जुड़ाव यह लगाव महसूस करने के साथ-साथ उस व्यक्ति के प्रति जब आप सेक्सुअली भी अट्रैक्ट होते हो मतलब उसके साथ सेक्सुअल संबंध बनाने की इच्छा जुड़ जाती है तब उसे सेक्सुअल अट्रैक्शन कहा जाता है मैं यहां पर एक नया डायमेंशन ऐड करना चाहता हूं जो है सेक्सुअल ग्राउंडिंग दुनिया भर के रिसर्चर का यह मानना है कि
(0:08:17) डिजायर लीड्स टू अराउजल मतलब कामेच्छा से कामोत्तेजना प्राप्त होती है लेकिन मैं इस विधान से सहमत नहीं हूं क्योंकि डिजायर और अराउजल के बीच में एक महत्त्वपूर्ण कड़ी है जिसका नाम है सेक्सुअल ग्राउंडिंग सेक्सुअल ग्राउंडिंग का मतलब अराउजल माने उत्तेजना नहीं है इनफैक्ट सेक्सुअल ग्राउंडिंग इज द प्री कर्सर ऑफ अराउ बाय एंड लार्ज एवरी अराउस स्टेट इज द मेनिफेस्टेशन ऑफ पर्टिकुलर सेक्सुअल ग्राउंडिंग यानी सेक्सुअल इंटरेक्शन में अराउजल यानी उत्तेजना मेंक स्थिति सेक्सु
(0:09:05) ग्राउंडिंग के बिना मुमकिन नहीं यह कांसेप्ट समझाने के लिए मैं आपको एक सिंपल उदाहरण देता हूं समझिए कि मैं यहां हूं मेरी वाइफ भी यहां मौजूद है और आप भी यहां है मुझे मेरी वाइफ के साथ संबंध बनाने का दिल है पर मुझे डिजायर तो है लेकिन मुझे इरेक्शन नहीं होता क्योंकि आप यहां मौजूद है इसलिए आई एम नॉट सीविंग द स्टिम इनपुट सेक्सुअल माने मुझे सेक्सुअल ग्राउंडिंग नहीं हो रहा है लेकिन जब आप चले जाते हो तब मुझे इरेक्शन होना शुरू हो जाता है क्योंकि आई एम
(0:09:55) पर्सीवियर हो गया है यह पूरी तरह से स्पष्ट करता है कि अराउजल इज द मेनिफेस्टेशन ऑफ सेक्सुअल ग्राउंडिंग एंड नॉट डिजायर माने उत्तेजना माने इरेक्शन का कारण डिजायर नहीं बल्कि सेक्सुअल ग्राउंडिंग है इसे और सिंपल बनाने के लिए हम एक फ्लो चार्ट देखते हैं पहले फ्लो चार्ट में आप ह्यूमन सेक्सुअल रिस्पांस का पुराना मॉडल देख सकते हैं आप में डिजायर माने काम इच्छा जागृत हुई काम इच्छा से पुरुष में इरेक्शन और स्त्री में लुब्रिकेशन आया और फिर वह ऑर्गेजम पर
(0:10:41) पहुंचे अब हम देखते हैं नया फ्लो चार्ट जिसमें सेक्सुअल ग्राउंडिंग का समावेश है आप में डिजायर माने काम इच्छा जागृत हुई उसके बाद यू स्टार्टेड पर्सीवियर हुआ जिसकी वजह से आपको सेक्सुअल राउजल हुआ माने पुरुष में इरेक्शन और स्त्री में लुब्रिकेशन और फिर बाद में ऑर्गेजम पर पहुंच अगर सेक्सुअल ग्राउंडिंग का यह कांसेप्ट आप समझ लेंगे तो व्यक्ति चाहे कोई भी हो व सिस जेंडर हो ट्रांसजेंडर हो नॉन बाइनरी हो या एजेंडर हो उसका सेक्सुअल ओरिएंटेशन समझने में
(0:11:30) आपको काफी आसानी होगी तो आइए अब सेक्सुअल ग्राउंडिंग के जरिए सेक्सुअल ओरिएंटेशन समझते हैं अभी हम हेट्रोसेक्सुअलिटी को देखते हैं हेट्रोसेक्सुअलिटी में आपका सेक्सुअल ग्राउंडिंग अपोजिट सेक्स के साथ होता है मतलब पुरुष को महिला के साथ और महिला को पुरुष के साथ होमोसेक्सुअलिटी मने ग और लेस्बियन स बात करते हैं होमोसेक्सुअलिटी में आपका सेक्सुअल ग्राउंडिंग से सेक्स के साथ होता है मतलब पुरुष को पुरुष के साथ और महिला को महिला के साथ अब कोई यह सवाल कर सकता है कि व्यक्ति में
(0:12:16) होमोसेक्सुअलिटी क्यों रहती है वह क्यों होमोसेक्सुअल होते हैं उन्हें सेम सेक्स के साथ ही सेक्सुअल ग्राउंडिंग क्यों होता है इसके बारे में कई थिरी है जैसे कि व्यक्ति के जीनस की थिरी उसकी आदतें जिस माहौल में वह पले बड़े हैं और यहां तक कि माता-पिता का उनके साथ व्यवहार और हार्मोन थरी लेकिन इनमें से कोई भी थरी कंप्लीट या भरोसा पात्र नहीं है हाल ही में एक ऐसी थिरी आई है कि यह जेनेटिक भी हो सकता है छठी शताब्दी के प्रसिद्ध खगोल शास्त्री ज्योतिषाचार्य और
(0:13:03) आयुर्वेदाचार्य वरा मर का भी यही कहना था उन्होंने अपने प्रसिद्ध ग्रंथ बृहत जातक में लिखा है के समलैंगिकता पैदाइशी होती है माने यू आर बोनट वे होमोसेक्सुअलिटी के बारे में एक सेक्सुअल मिथ ऐसा भी है कि कोई अगर एक बार समलैंगिक संबंध का अनुभव करता है तो वह जीवन भर के लिए समलैंगिक ही हो जाता है लेकिन यह एक गलतफहमी है कभी-कभी ऐसा भी हो सकता है कि आपने किसी के साथ क्यूरियोसिटी से कुतुल से या जोश में समलैंगिकता का अनुभव किया है लेकिन इसका मतलब यह नहीं
(0:13:49) है कि एक बार होमोसेक्सुअलिटी का अनुभव किया माने आप जीवन भर के लिए होमोसेक्सुअल बन गए पुराने जमाने में लोग सोचते थे कि अगर कोई बच्चा ऐसे माहौल में पला बड़ा होता है कि जहां मां बहुत डोमिनेटिंग है हावी होती है और पिता उसकी तुलना में कमजोर है ऐसे माहौल में बच्चे समलैंगिक बन सकते हैं लेकिन इस दावे में कोई तथ्य नहीं है एक और गलत धारणा यह है कि यदि आपका लड़का सिर्फ लड़कों वाली स्कूल में जाता है और आपकी लड़की सिर्फ लड़की वाली स्कूल में जाती है तो भी यह समलैंगिक बनने के चांसेस ज्यादा रहते हैं यह यह गलत फहमी है यह
(0:14:36) मिसकनसेप्शन है यह गलत फहमी है जिसे दूर करना जरूरी है होमोसेक्सुअलिटी के बारे में एक और थरी सामने आई थी जो थी हार्मोन थिरी इसमें कहा गया है कि पुरुषों में होमोसेक्सुअलिटी की वजह है टेस्टोस्टरॉन में कमी मतलब पुरुष हार्मोन की कमी इस थिरी पर मैंने और मेरे सहयोगियों ने रिसर्च किया हमने इंस्टिट्यूट ऑफ रिसर्च इन रिप्रोडक्शन आईसीएमआर में समलैंगिक पुरुषों के कुछ ब्लड सैंपल्स चेक किए उनमें से किसी में भी टेस्टोस्टरॉन का स्तर कम नहीं था हमारी इस रिसर्च ने और कई और लोगों की रिसर्च ने भी हर्मन थिरी को
(0:15:25) खंडित किया अब तक हमने हेट्रोसेक्सुअलिटी और होमोसेक्सुअलिटी के बारे में बातचीत की अब हम देखते हैं बायसेक्सुअलिटी को बायसेक्सुअलिटी में आपका सेक्सुअल ग्राउंडिंग मेल और फीमेल दोनों के साथ होता है सिंपल लैंग्वेज में कहे तो कुछ लोगों को चाय पसंद है कुछ लोगों को कॉफी पसंद है तो कुछ लोग ऐसे भी है कि जिनको चाय और कॉफी दोनों पसंद है तो बायसेक्सुअलिटी में चाय और कॉफी दोनों पसंद है वो वाली बात आ जाती है मैं इसका इवेलुएशन कैसे करता हूं वह आपसे शेयर कर रहा हूं मैं मेरे क्लिनिकल प्रैक्टिस में जो तरीका अपनाता हूं वह बता रहा
(0:16:13) हूं इससे आप खुद भी बड़ी आसानी से इवेलुएट कर पाओगे अगर एक मेल को स्वप्न मैथुन होता है तो मैं उसे पूछता हूं कि सपने में आप किसे देखते हो सिर्फ पुरुष सिर्फ स्त्री या दोनों फिर मैं उसे पूछता हूं कि जब तुम हस्तम करते हो मास्टरबेशन करते हो तब किसे फेंटे साइज करते हो सिर्फ पुरुष सिर्फ स्त्री या दोनों मैं एक और भी सवाल पूछता हूं कि अगर आपने इससे पहले किसी के साथ संतोष काक सहवास किया है तो वह व्यक्ति सिर्फ पुरुष था सिर्फ स्त्री थी या दोनों थे अगर उस मेल को मैं
(0:17:04) मैंने पूछे हुए तीनों सवालों का जवाब सिर्फ पुरुष है तो इसका मतलब वह मेल अमूमन होमोसेक्सुअल हो सकता है अगर उसके तीनों सवालों का जवाब सिर्फ स्त्री है तो इसका मतलब वह हेट्रोसेक्सुअल हो सकता है और अगर उसके इन तीन सवालों का जवाब मेल और फीमेल दोनों है तो इसका मतलब वह है कि वह बायसेक्सुअल हो सकता है यही मेथड से कोई स्त्री भी अपना इवेलुएशन कर सकती है जब सबकॉन्शियस और कॉन्शियस माइंड दोनों का निर्देश सिर्फ एक ही दिशा की ओर
(0:17:50) रहता है तो अमूमन यह इवेलुएशन काफी प्रेसा इज होता है सही होता है अभी हम बात करते हैं पेन सेक्सुअल की लोग अक्सर पन सेक्सुअलिटी और बाय सेलिटी को एक दूसरे के साथ कंफ्यूज करते हैं लेकिन एक बात ध्यान में रखें बायसेक्सुअल का सेक्सुअल ग्राउंडिंग केवल पुरुष और महिला तक ही सीमित रहता है लेकिन पन सेक्सुअल उनसे अलग होते हैं वह सभी सेक्स के व्यक्तियों के साथ यहां तक कि नॉन बाइनरी और एजेंडर व्यक्तियों के साथ भी सेक्सुअल ग्राउंडिंग एक्सपीरियंस करते हैं अभी हम सेल्स की बात करते हैं व्यक्ति एसेक्सुअल तब होती है जब
(0:18:41) किसी भी व्यक्ति के साथ उसे सेक्सुअल ग्राउंडिंग का अनुभव नहीं होता इसका मतलब उसे किसी भी व्यक्ति के प्रति सेक्सुअल उत्तेजना की अनुभूति नहीं होती भावनात्मक माने इमोशनल रूप से उनको किसी से लगाव हो सकता है लेकिन उनके साथ सेक्सुअल ग्राउंडिंग की अनुभूति नहीं होती 50 से अधिक वर्षों के मेरे अनुभव में आज तक मेरे पास सिर्फ दो महिलाएं ऐसी आई थी जिनको बच्चे होते हुए भी वह एसेक्सुअल थी अभी हम बात करते हैं एरोस की एरोस का मतलब है ए रोमांटिक एंड एसेक्सुअल कहते
(0:19:29) हैं कि एरोस व्यक्ति वह है जिसे किसी भी व्यक्ति के साथ ना तो सेक्सुअल ग्राउंडिंग का अनुभव होता है ना तो रोमांटिक या इमोशनल अटैचमेंट का मेरे तजुर्बे में मैंने आज तक ऐसा कोई मरीज नहीं देखा है अब हम देखते हैं एक ऐसे मिसकनसेप्शन को जिसमें माना जाता है कि व्यक्ति का जेंडर आइडेंटिटी या सेक्सुअल ओरिएंटेशन बदल सकते हैं इसका नाम है कन्वर्जन क्योर लेकिन इसकी शुरुआत में ही मैं बता देना चाहता हूं कि यह नामुमकिन है कन्वर्जन क्यर का इस्तेमाल समलैंगिकता ठीक करने के लिए नहीं
(0:20:16) किया जाना चाहिए क्योंकि यह पॉसिबल ही नहीं है समलैंगिकता माने होमोसेक्सुअलिटी यह कोई बीमारी या मानसिक बीमारी है ही नहीं दुनिया भर में कई ऐसे लोग हैं जो इस गलतफहमी से पीड़ित है कि कन्वर्जन की ओर से होमोसेक्सुअल व्यक्ति हेट्रोसेक्सुअल हो सकता है लेकिन अगर मुझे पूछा जाए तो इट इज नथिंग बट एक्सप्लोइटेशन ऑफ द डिस्परेयूनिया बहुत बार ऐसी ट्रीटमेंट से उन व्यक्तियों
(0:21:07) के लैंगिकता में तो कुछ बदलाव नहीं आता बल्कि वह एंजाइटी और डिप्रेशन में चले जाते हैं और सुसाइड तक भी कर बैठते हैं हकीकत में पूछा जाए तो एक सजातीय व्यक्ति एक या दूसरी तरह से अपनी संतुष्टि पा लेता है तो वह बेहतर है बजाय कि वह संतुष्टि से वंचित रह जाए या किसी विजातीय से शादी करके खुद की और सामने वाले की जिंदगी बर्बाद करें माता-पिता और टीचर्स का यह कर्तव्य है कि वह बच्चों को ऐसा माहौल दे और ऐसा मार्गदर्शन दे जिसमें बच्चों को अपनी जेंडर आइडेंटिटी और सेक्सुअल ओरिएंटेशन
(0:21:54) समझने के लिए फ्रीडम मिले सुरक्षितता मिले और प्यार मिले जिसे अपने शरीर में खास करके युवावस्था में आने वाले बदलाव को समझने में उन्हें आसानी हो सेक्सुअल प्रेफरेंस एक व्यक्ति का बेसिक ह्यूमन राइट है और इसका सम्मान करना बिल्कुल आवश्यक है आगे बात करते हैं द डिफिकल्टी इन कमिंग आउट दुनिया भर में कई युवा इस समय भी दुविधा का सामना कर रहे हैं वे जानते हैं कि वे सिस जेंडर नहीं है वे जानते हैं कि वो हेट्रोसेक्सुअल नहीं है लेकिन वह अपने माता-पिता या अपने दोस्तों के सामने खुद
(0:22:40) को व्यक्त करने से घबराते हैं दे आर अनेबल टू कम आउट ऑफ द क्लोसेट क्यों उसका जवाब है डर वे डरते हैं कि उनके माता-पिता कैसे रिएक्ट करेंगे उनके दोस्त कैसे रिएक्ट करेंगे वे अपने परिवार के गुस्से भरे रिएक्शन से डरते हैं उन्हें डर है कि उनके स्कूल या कॉलेज में यह समझने के बाद बुली किया जाएगा उनको देखने के नजरिए में बदलाव आ जाएगा उन्हें जैसे हैं वैसे स्वीकारा नहीं जाएगा सेक्सुअल ओरिएंटेशन और जेंडर आइडेंटिटी को लेकर अभी भी हमारे समाज में बहुत सारा कंफ्यूजन है बहुत सारे टैबूस है
(0:23:29) जब तक हम इस विषय पर ओपन माइंड से बात नहीं करेंगे तब तक हमारे बच्चे हमारे साथ खुलकर बात करने में सुरक्षित महसूस नहीं करेंगे और खास करके यंग जनरेशन को अपनी कामुकता के बारे में कंफ्यूजन का सिलसिला बना रहेगा एक हेल्दी सेक्स लाइफ के लिए इन तीनों की क्या अहमियत है उसके ऊपर आज नजर डालेंगे किसी भी सेक्सुअल इंटरेक्शन के लिए फोर प्ले प्ले और आफ्टर प्ले प्ले ये तीन सरल शब्द अत्यंत महत्त्वपूर्ण होते हैं इनमें से सिर्फ प्ले वाले पहलू को ही लोग अक्सर ज्यादा महत्व देते हैं प्ले माने एक्चुअल
(0:24:15) संभोग इंटरकोर्स लोग इंटरकोर्स को इतना महत्व देते हैं कि फोर प्ले और आफ्टर प्ले को कभी-कभी अनदेखा कर देते हैं लेकिन यह हमेशा याद रखना चाहिए कि बिना फोर पले के सेक्स करना माने वार्म अप किए बिना व्यायाम करने जैसा है एक्सरसाइज विदाउट वार्म अप और वार्म अप किए बिना व्यायाम करेंगे तो उसका अंतिम परिणाम अधिक संतोष जनक नहीं होगा उसी तरह से फोर पले बिना प्ले यानी फोर प्ले बिना सहवास होता है तो परिणाम अधिक आनंददायक नहीं होता पहले समझ लेते हैं कि सहवास या संभोग क्या है सहवास या संभोग सिर्फ बदन से बदन का मिलन नहीं
(0:25:00) है वह एक इमोशन का मोशन में बदलाव है काम भावना और काम क्रीड़ा का आदान प्रदान है उसका संगम है कोई पूछेगा कि इस पूरी प्रक्रिया में फोर प्ले कितना महत्त्वपूर्ण है तो उसका जवाब है यह अत्यंत महत्त्वपूर्ण है यह काम इच्छा को बढ़ाता है और यही प्ले की शुरुआत का ट्रिगर है सवाल यह पैदा होता है कि कैसे अरे भाई ब्रेन में सेक्स का सेंटर होता है देखने से स्पर्श करने से सुनने से या कल्पना के जरिए जब भी यह सेक्स सेंटर उत्तेजित होता है तो वह संदेश वह मैसेजेस संभवत सेक्स सेंटर ऑफ स्पाइन तक जाता है इस प्रक्रिया के दौरान पूरे शरीर में रक्त
(0:25:45) का प्रवाह बढ़ जाता है खास करके महिला और पुरुष के प्राइवेट पार्ट में यह प्रवाह विशेष बढ़ता है और जिसकी वजह से पुरुषों में इरेक्शन होता है और महिलाओं में वजाइना में नमी यानी गीलापन आता है यह प्रक्रिया से सहवास आसान और आरामदायक बन जाता है इस तरह दोनों पार्टनर्स के बीच सेक्सुअल कंपैटिबिलिटी बनाए रखने में फोर प्ले एक अहम भूमिका निभाता है फोर पले कैसे ज्यादा इंटरेस्टिंग बन सकता है फोर पले वह क्रिया है जिसमें आप अपनी सभी इंद्रियों का इस्तेमाल एक दूसरे में चाहत का जुनून जोश पैदा करने के लिए कर सकते हैं जस्टी स्पर्श गंध ध्वनि और स्वाद इन
(0:26:32) पांचों इंद्रियों का इस्तेमाल करके आपका सेक्सुअल इंटरेक्शन और ज्यादा इंटरेस्टिंग बना सकते हो उसे एक नए स्तर पर ले जा सकते हो उसे एक नया आयाम दे सकते हो सबसे पहले अपनी पसंद या नापसंद एक दूसरे को बता सकते हैं ताकि आपका पार्टनर वही करेगा जो आपको पसंद है इससे जोश जुनून और बढ़ेगा कहते हैं कि व्ट एवर इ सेंशुअल कुड बी सेक्सुअल एंड व्हाट एवर इ सेक्सुअल नीड नॉट बी सेंस आप एक दूसरे में कामेच्छा बढ़ाने के लिए जितनी कोशिश करेंगे उतना ही सफर मजदार बनेगा याद रहे सफर जितना सुहाना मंजिल उतनी ही आनंददायक
(0:27:19) होगी इसके बाद हम स्पर्श की बात करेंगे फोर पले में सबसे महत्त्वपूर्ण अगर कुछ है तो वो है स्पर्श याद रखें स्किन इज द लार्जेस्ट सेक्सुअल ऑर्गन ऑफ द होल बॉडी त्वचा चमड़ी मानव शरीर का सबसे बड़ा सेक्स अवयव है यह सबसे संवेदनशील भी है इसके लिए अपने साथी के शरीर को जान लीजिएगा पहचान लीजिए पता करें कि उसे कहां छुआ जाना पसंद है और कैसे छुआ जाना पसंद हल्के से या शक्ति से आपको यह पता लगाना होगा कि उसे क्या उत्तेजित करता है और क्या नहीं उन्हें कौन सा कैसा टच पसंद है हम दोस्तों से मिलते हैं तो हाथ मिलाते हैं क्या है
(0:28:05) टच हम छोटे बच्चे को चुम्मी देते हैं वो क्या है टच कोई अच्छा काम करता है हम पीठ पर शाबाश ही देते हैं वो क्या है टच किसका इंतकाल हो जाता है आप हाथ फिरा के उनके सगे वालों को आश्वासन देते हो वो क्या है टच अरे गांव में लोग मिलते हैं गले मिलक राम राम करते हैं वो क्या है वो भी तो टच है क्रिकेट या फुटबॉल की और देखिएगा वहां लोग खेल के पहले हडलॉक टच संवेदनशीलता के लिए एक महत्व की चीज है टच रिलीज हार्मोन कॉल्ड ए ऑक्सीटोसिन स्पर्श से ऑक्सीटोसिन नामक हार्मोन रिलीज होता है इसे लव हार्मोन भी कहते हैं यह कामेच्छा और उत्तेजना बढ़ाने में भी सहाय
(0:28:52) रूप होता है फोर प्ले को एक खेल बना दे जैसे मैंने कहा है कि स्पर्श फोर पले का एक बहुत ही महत्त्वपूर्ण हिस्सा है इसलिए कुछ खेलों के ज जरिए भी स्पर्श का इस्तेमाल किया जा सकता है तेल में एक आदमी दान लेता है तो दूसरा दान देता है मिसाल के तौर पर एक साथी अपने शरीर पर कहीं स्टिकर छुपाए और दूसरा केवल स्पर्श के जरिए उसके शरीर पर उसे ढूंढने की कोशिश करें और वह भी तब जब उसने कपड़े पहन रखे हो तब कई बार ऐसा खेल मैकेनिकल नहीं लगता और उत्तेजना में इजाफा करने में बेहद मदद रूप हो सकता है फोर प्ले के दौरान आनंद बढ़ाने में और एक इमोशनल बॉन्ड स्थापित
(0:29:37) करने में चुंबन की भी महत्त्वपूर्ण भूमिका है होठों के आसपास की नर्व्स के ज्ञान तंतु बहुत सेंसिटिव होते हैं अगर किसी को इस जगह पर अपने साथी द्वारा उत्तेजना मिले तो ज्यादातर उत्तेजना में काफी इजाफा हो सकता है इसके अलावा भी बहुत सारी जगह हैं जहां चुंबन करने से आपके पार्टनर को उत्तेजना मिल सकती है गर्दन कान स्तन निपल्स जागों के भीतरी भाग आदि पर आप किस कर सकते हैं किस करते वक्त अलग-अलग जगह पर होठों का प्रेशर बदलते रहे बेहतर यही होगा कि उसे पूछ ले कि चुंबन का कौन सा तरीका उसे ज्यादा पसंद है उत्तेजना बढ़ाने के लिए आप सेंसुअस मसाज का भी इस्तेमाल कर
(0:30:24) सकते हैं उसमें जरूरत पड़े तो पर्सनल वाइब्रेटर सुगंधी तेल या क्रीम का भी इस्तेमाल कर सकते हैं कई बार अच्छी एरोमा इंद्रियों को ज्यादा सक्रिय करती मूड बनाती है व्यक्ति को रिलैक्स भी करती है और साथ ही साथ अगर कोई बदबू हो तो उसको भी दूर करती है अब हम एक अहम चीज के बारे में बात करेंगे और वह चीज है बातें करना बातें करें कई बार सेक्स के दौरान सबसे महत्त्वपूर्ण दो अक्षर का शब्द है बात बात करने से ही तो बात आगे बढ़ती है आपको यह समझने में मदद मिलेगी कि आपके साथी को क्या पसंद है और क्या नापसंद अगर
(0:31:13) एक पार्टनर बात करने में संकोच करता है तो दूसरा पार्टनर उसे बात करने के लिए प्रोत्साहित कर सकता है ताकि वह अपनी भावनाओं खुले दिल से बता सके बात करने से दिल हल्का होता है और साथ ही साथ एंजाइटी भी कम होती सही पूछा जाए तो सहवास का चार अक्षर का पर्याय शब्द है बातचीत यानी कम्युनिकेशन फोर प्ले में दोनों पार्टनर को सिर्फ जेनिटल्स माने जननांग पर फोकस करना जरूरी नहीं है बेहतर यही होगा कि शुरुआत में छुआ छाई का खेल यानी स्पर्श बदन के दूसरे अंग पर रखें और आखिर में जेनिटल्स पर फोकस करें यह हकीकत है कि स्त्रियों को अमूमन निपल्स और
(0:32:00) क्लिटोरिस का स्पर्श ज्यादा पसंद आता है लेकिन स्त्रियों को भी यह ध्यान रखने की जरूरत है कि पुरुषों को भी निपल्स होते हैं ध्यान रहे देर इ एस सच नो डेफिनेट प्रिसक्राइब पैटर्न ऑफ मेकिंग लव मोहब्बत करने के लिए कोई खास तरीका निर्धारित हो ऐसा जरूरी नहीं आफ्टर प्ले इससे पहले कि हम वास्तविक प्ले की और बढ़े आइए आफ्टर प्ले की चर्चा करते हैं यह भी फोर प्ले के जितना ही महत्त्वपूर्ण है हालांकि पेनिट्रेटिव सेक्स को सबसे संतोष जनक रूप माना जाता है लेकिन यह हमेशा सच नहीं होता ऐसी कई महिलाएं हैं जो बताती है कि डॉक्टर साहब
(0:32:46) ऑर्गेजम और चरमोत्कर्ष के बाद ज्यादा उन्हें तब खुशी मिलती है जब वह अपने पार्टनर के द्वारा आफ्टर प्ले में थोड़ा रोमांस पाती है जब उनका पार्टनर ऑर्गेजम के बाद उनके करीब आता है उनको अपने बाहु पाश में ले लेता है या से किसिंग करता है बातें करता है उसके अच्छे कोऑपरेशन का अच्छे रिस्पांस का जिक्र करता है तब कामसूत्र के लेखक ऋषि वात्सायन ने भी आफ्टर प्ले पर बहुत जोर दिया उन्होंने यहां तक कहा है कि आफ्टर प्ले अगर फोर पले से ज्यादा महत्त्वपूर्ण नहीं है फिर भी उसके बराबर तो जरूर है उन्होंने अपने काम सूत्र में आफ्टर प्ले के बारे में एक पूरा
(0:33:31) चैप्टर लिखा है संभोग शारीरिक क्रिया पूरी होने के बाद अधिकांश लोगों को गले लगाना सहलाने और दूसरे के साथ बात करने की जरूरत होती आप आंखों के आसपास आइब्रोज पर या कॉलर बोन पर बटरफ्लाई किस कर सकते हैं डॉक्टर रिचर्ड ज क्रॉस ने भी क्या खूब कहा है कि आफ्टर प्ले में सबसे महत्त्वपूर्ण चीज क्या है प्ले कई पुरुष अपने पार्टनर को सिर्फ नींद की गोलियों के रूप में इस्तेमाल करते ये पुरुष अपने ऑर्गेजम पहुंचने के बाद अपने पार्टनर की संतुष्टि की परवाह नहीं करते महिला काम भावना अधूरी रह जाती है कामोत्तेजना के बाद उसके
(0:34:17) पेल्विक रीजन में कई बार कंजेशन हो जाता है रक्त का प्रवाह जम जाता है अगर वो रिलीज ना किया जाए तो उसे लोअर एडोम माने पेट के निचले हिस्से या पीठ के निचले हिस्से में भी दर्द हो सकता है यह दर्द मेंसिस होने वाले दर्द जैसा ही होता है जैसे मेंसिस पूरी होने के बाद दर्द गायब हो जाता है उसी तरह से अगर पुरुष अपने पार्टनर को एक या दूसरी तरह से चर्म सीमा पर ले आता है तो उसका पेल्विक कंजेशन भी दूर हो जाता है और उसका दर्द भी गायब हो जाता है अगर जरूरी हो तो यह काम आफ्टर प्ले में भी आप कर सकते हैं आफ्टर प्ले से कपल्स के बीच एक मोहब्बत बंड तैयार होता
(0:35:01) है लेकिन अफसोस कई बार पुरुष संभोग के बाद तुरंत सो जाते हैं या कुछ पुरुष बस नहाने चले जाते हैं यह सही नहीं बेहतर यही होगा कि एक अच्छे इमोशनल बॉन्डिंग के लिए अपने पार्टनर के साथ आफ्टर प्ले में थोड़ा टाइम व्यतीत करें यह बहुत ही जरूरी चीज है यी आफ्टर प्ले से एक हेल्दी सेक्सुअल लाइफ बनती है सच कहे तो बिना प्यार के फोर पले और प्ले तो हो सकता है लेकिन बिना प्यार आफ्टर प्ले होना मुमकिन नहीं अक्सर महिलाओं को यह प्यार का एहसास होता है चलो प्ले के बारे में बात करते मेरे बहुत सारे पेशेंट
(0:35:47) हमेशा एक सवाल मुझे पूछते हैं डॉक्टर साहब संभोग का समय माने उसकी अवधि कितनी होनी चाहिए संभोग कितनी देर चलना चाहिए इसका कोई स्टैंडर्ड टाइम नहीं है यह पार्टनर पर निर्भर करता है आप संतुष्टि होने तक संभोग जारी रखा जा सकता है जरूरी नहीं कि लंबे समय तक संभोग करने से ही अधिक आनंद मिले यह एक मित है एक गलत फहमी है महत्त्वपूर्ण यह नहीं है कि यह कितनी देर चलता है बल्कि यह है कि दोनों पार्टनर के लिए संभोग कितना आनंददायक हुआ दोनों को कितना संतोष मिला वो आवश्यक है साथ ही साथ यह भी समझने की जरूरत है कि चूंकि संभोग का उद्देश्य
(0:36:35) आनंद है इसलिए एक कपल जितनी बार चाहे उतनी बार संभोग कर सकता है बशर्ते दोनों पार्टनर की रजामंदी हो दोनों पार्टनर की ख्वाहिश संभोग कितना करते हो वह महत्व का नहीं है कैसे करते हो वह महत्व का है हकीकत में संभोग सम भोग होना जरूरी है संभोग कैसे करते हो संभोग कैसे करते हो उसकी जानकारी भी बहुत आवश्यक है अगर मेरे पास 10 पेशेंट आते हैं तो 10 में से एक पेशेंट ऐसा होता है कि उसे संभोग की गतिविधियों का कुछ अता पता ही नहीं होता कुछ लड़कियां अनजाने में सहवास के दौरान घुटने ऊपर उठाने की बजाय बिल्कुल फ्लैट
(0:37:20) रखती है ऐसी पोजीशन में शिष्ण का योनि प्रवेश कभी-कभी मुश्किल हो जाता है कुछ पुरुष अपने पांव स्त्री के पांव के बाहर रख के योनि प्रवेश करने की कोशिश करते हैं जो नामुमकिन है कुछ ऐसे भी लोग मेरे पास आए हैं कि जो प्रवेश के बाद मूवमेंट किए बगैर बस पड़े रहते हैं और ऑर्गेजम अभी होगा अभी होगा उसका इंतजार करते हैं उन्हें ये पता ही नहीं होता कि प्रवेश के बाद टू एंड फ्रो मूवमेंट करना आवश्यक है और उसके बाद ही पुरुष का जोसे जुनून बढ़ता है और पुरुष क्लाइमैक्स पर पहुंचता है पुरुष को क्लाइमेक्स के साथ-साथ ज्यादातर वीर्य स्खलन होता है लेकिन स्त्री में
(0:38:04) आनंद का एहसास तो होता है लेकिन पुरुषों की तरह वीर्य स्खलन नहीं होता लेकिन कुछ स्त्रियों में योनि मार्ग में लयात्मक संकुचन का एहसास जरूर होता है लेकिन सबको हो यह जरूरी नहीं लेकिन पुरुष और स्त्री दोनों को आनंद का एहसास अवश्य होता है दोनों में आनंद दो कान के बीच में होता है दिमाग दो पांव के बीच में नहीं ऑर्गेजम इ बिटवीन द टू इयर्स एंड नॉट बिटवीन द टू लेग्स मेरे अमेरिकन अजीज दोस्त प्रोफेसर जॉन मनी अपने लेक्चर के एंड में एक किस्सा सुनाया करते थे कि आई आस्क माय क्लाइंट्स व्हाट डू यू डू आफ्टर हैविंग एजकुलेट माने सहवास पूरा होने के बाद आप
(0:38:48) क्या करते हो उनका जवाब कुछ इस तरह से मिला उनको किसने कहा कि हम नहाने चले जाते हैं किसने कहा कि मैं सिगरेट पीता हूं किसीने कहा कि मैं टर्न होकर सो जाता हूं लेकिन इसमें से बहुतों ने कहा कि हम कपड़े पहन के अपने घर जाते हैं किसी ने भी यह नहीं कहा कि मैं आफ्टर प्ले में टाइम गुजारता हूं आफ्टर प्ले इज इंपॉर्टेंट कुछ सवाल आम होते हैं जिसे हम फ्रीक्वेंसी होता है कि क्या कामुक साहित्य पढ़ने से यौन उत्तेजना बढ़ाने में मदद मिल सकती है जरूर कामू कहानियों से अधिक यौन उत्तेजना बढ़ सकती है पार्टनर के बीच रोमांटिक
(0:39:33) बातें या कामुक फिल्म देखने से भी कामेच्छा और उत्तेजना में और बढ़ावा हो सकता है दूसरा एक सवाल होता है कि क्या सहवास के दौरान अन्य पार्टनर के बारे में कल्पना करना एक सामान्य घटना है जी हां कुछ लोगों में सहवास के दौरान अपने फैंटेसी पार्टनर के बारे में कल्पनाएं करना यह बिल्कुल आम बात है लेकिन यह अमूमन कोई बताता नहीं है इस तरीके का सहारा लेने वालो का यह दावा है कि उनकी कामोत्तेजना के स्तर को ये चीजें बढ़ाती है क्योंकि अक्सर हकीकत से हकीकत की कल्पना ज्यादा रंगीन होती है कुछ महिलाएं संभोग के दौरान क्लाइमेक्स तक क्यों नहीं पहुंचती है ऐसी
(0:40:19) फिक्र उनको होती कि क्यों नहीं पहुंची फोरप्ले और कामेच्छा में कमी फीलिंग यानी जज्बात को पसंदीदा महसूस में बदलने की कमी उत्तेजना या गीलापन में कमी प्रवेश के दौरान दर्द यह सब कारण क्लाइमेक्स तक पहुंचने में दिक्कत पैदा कर सकते हैं उसी तरह बहुत बार महिलाएं उनको किस तरह की उत्तेजना पसंद है वह बताने में हिचक है शर्माती है साथ ही साथ अपने पार्टनर को सेटिस्फाई करने का डर भी बहुत बार उनके सर पर मंडराता रहता है उससे आने वाली चिंता एंजाइटी उन्हें आमतौर पर क्लाइमेक्स तक पहुंचने में रुकावट या मुश्किलात पैदा कर सकती है क्योंकि चिंता और उत्तेजना दोनों
(0:41:07) एक साथ नहीं जा सकते अंत में एक बात हमेशा याद रखें कि आपका पार्टनर कितना ही खूबसूरत हो कितना ही इंटेलिजेंट हो या स्वभाव से कितना ही अच्छा क्यों ना हो लेकिन यह जरूरी नहीं कि वो बिस्तर में भी इतना ही बेहतर हो सेक्सुअल हाइजीन क्या है सेक्सुअल हाइजीन का तात्पर्य है एक स्वस्थ सेक्सुअलिटी का विकास और उसे बनाए रखना शारीरिक स्वच्छता ना कि सिर्फ खुद के फायदे के लिए है बल्कि एक अच्छा सेक्सुअल रिलेशन डेवलप करने में वह अहम पार्ट प्ले कर सकती है सेक्सुअल हाइजीन के इस लेक्चर में हम प्रीटल हाइजीन माने सहवास के पहले
(0:41:54) का हाइजीन एंड पोस्ट कोटल हाइजीन माने सहवास के बाद का हाइजीन इन दोनों के बारे में डिस्कस डिकस करेंगे सेक्सुअल हाइजीन सिर्फ इंफेक्शन को दूर नहीं करती बल्कि आपके काम जीवन में भी बहुत बड़ा सुधार ला सकती है दुर्भाग्य की चीज यह है कि बहुत से लोग सेक्सुअल हाइजीन का महत्व नहीं जानते जिसका असर उनके सेक्सुअल लाइफ पर पड़ता है पुरुष और स्त्री दोनों अपने प्राइवेट पार्ट्स को प्रतिदिन साफ करना अनिवार्य है जब आपका प्राइवेट पार्ट स्वच्छ होता है और उसके प्रति आप अधिक कंसर्न्ड होते हो तो किसी समस्या का या
(0:42:39) चमड़ी में होने वाला कोई फंगल इंफेक्शन का पता पड़ जाता है और कई बार उससे बचाव भी होता है हर दिन व्यक्ति को स्नान करना जरूरी है स्नान करते वक्त पानी कुनकुना हो तो बेहतर है जो भी साबुन आप इस्तेमाल करें वो ज्यादा स्ट्रांग नहीं होना चाहिए ताकि वो बदन को और प्राइवेट पार्ट को इरिटेट ना करें नहाते समय पुरुष को अगर उसने सुन्नत नहीं करवाई है तो लाल भाग के ऊपर की चमड़ी पीछे खींच कर अपना शिष्ण जैसे दूसरे अंग साफ करते हैं उसी तरह साफ करना चाहिए कई बार वहां पर सफेद रंग का मैल लगा हुआ रहता है जिसे स्मैग्मा कहते हैं कई बार बहुत
(0:43:27) दिनों तक यह स्मैग्मा साफ नहीं होता है तो वह चमड़ी के साथ चिपक जाता है और कई बार उससे बदबू भी आ सकती है इस बदबू की वजह से आपका पार्टनर करीब आने से अक्सर कतरा है सहवास करने से भी वह दूरियां बना सकता है और अपने पार्टनर की कामेच्छा पर भी यह विपरीत असर पड़ सकती है मैग्मा का बनना एक सामान्य प्रक्रिया है एक दूसरे तरह का मैल है जिस तरह से दूसरे अंग साफ करते हैं उसी तरह इसको भी साफ करना आवश्यक है महिला को भी अपने प्राइवेट पार्ट्स को साफ करना जरूरी महिला को योनि के अंदर से साफ करने की आवश्यकता नहीं होती क्योंकि योनि अंदर
(0:44:14) से स्वयं साफ होती रहती है स्त्री जब अपनी सोच क्रिया करती है माने टॉयलेट को जाती है संडास को जाती है तो साफ करने का तरीका गुदा द्वार से योनि द्वार की तरफ नहीं होना चाहिए उसके अपोजिट दिशा में होना चाहिए ताकि गुदा द्वार से कोई इंफेक्शन योनि मार्ग में ना आए पुरुष और स्त्री दोनों को नियमित अपने प्राइवेट पार्ट के बाल हर दो हफ्ते में या तो ट्रिमर से कैची से या रेजर से काटना चाहिए या अगर आप चाहो तो हेर रिमूवर से दूर करना जरूरी है तो भी दूर कर सकते हैं आजकल लेजर के उपयोग से भी लॉन्ग टर्म के
(0:45:00) लिए हेर मंग ट्रीटमेंट हो सकती है बाल काटने के बाद चमड़ी की सेंसिटिविटी माने संवेदनशीलता और भी बढ़ती है जिससे अक्सर फोर पले माने प्रीटल एक्टिविटी में दोनों को आनंद में इजाफा हो सकता है कई बार प्राइवेट पार्ट के बाल नहीं काटने से वहां पसीना जमा होता है जो जल्दी सूखता नहीं है और कई बार बदबू आती है और इसमें फंगस इंफेक्शन भी हो सकता है यह समस्या गर्मी की सीजन में ज्यादा होती है बदबू और फंगल इंफेक्शन से कई बार यह मुमकिन है कि आपका पार्टनर सहवास करने से भी विमुख हो जाए
(0:45:46) मेरे पास कुछ केसेस ऐसे भी आए थे कि जिन्होंने बताया था कि उनके धर्म में प्राइवेट पार्ट के बाल काटने की मनाई है हमारे देश में गर्मी ज्यादा पड़ती है और यहां गर्मी की मौसम में बाहर का का तापमान ज्यादा रहता है इसलिए पसीना भी खूब निकलता है खास करके ज्यादा बाल वाली जगह पर पसीना ज्यादा जमा होता है इसलिए वहां फंगल इंफेक्शन का खतरा भी बढ़ जाता है इसलिए नियमित प्राइवेट पार्ट के बाल काटना बहुत ही आवश्यक लेकिन अगर किसी वजह से आप बाल नहीं काट सकते या बाल काटना नहीं चाहते तो प्राइवेट पार्ट की साफ सफाई पर ध्यान देना बिल्कुल जरूरी है नहाते समय प्राइवेट
(0:46:34) पार्ट और उसके आसपास के भाग को साबुन से साफ करें जरूरत पड़े तो यह क्रिया दिन में दो बार करें और बाद में ड्राई कपड़े से बराबर पहुच भी ले कुछ लोगों को दूसरे लोगों की तुलना में पसीना ज्यादा आता है वह लोग अगर चाहे तो डिओडरेंट का इस्तेमाल कर सकते हैं जिससे पसीना कंट्रोल में रहता है खास कर के अपने देश में गर्मियों के सीजन में जब पसीना ज्यादा आता है तो वह पसीना एब्सर्ड मटेरियल से बने अंडरगारमेंट यूज कर सकते हैं सिंथेटिक टाइट अंडर गारमेंट्स पहनने की बजाय लूज कॉटन के अंडर गारमेंट्स पहनना बेहतर होगा जिसकी वजह से दाद खाज
(0:47:22) खुजली और दूसरे फंगल इंफेक्शन की समस्याओं से आप बच सकते हैं कुछ महिलाएं रेगुलर तौर पर अपने प्राइवेट पार्ट में वजाइनल और डन का इस्तेमाल करती है यह एक व्यक्तिगत पसंद का मामला है यह अनिवार्य नहीं है हकीकत में कई बार वजाइनल डु और डिओडरेंट से वजाइनल फ्लोरा में बदलाव आ सकता है और इंफेक्शन का खतरा बढ़ सकता है जिसकी वजह से खुजली और दर्द युक्त सूजन भी हो सकता है कई बार महिलाएं अपनी योनि की तीव्र गंथ जो आमतौर पर किसी ना किसी इंफेक्शन के कारण होती है उसको छुपाने के लिए डन का इस्तेमाल करती हकीकत
(0:48:09) में इंफेक्शन के मूल कारण का पता करना चाहिए और उसका इलाज करना चाहिए जिससे दुर्गंध जड़ से दूर हो जाए कुछ केसेस मेरे पास ऐसे भी आए थे कि स्त्री अपने पति को चुंबन करने में और करीब आने में हिचक थी अक्सर जब पति तंबाकू गुटका खाता है तो वह उसके मुंह में उसकी दुर्गंध बनी रहती है तो कई औरतों को यह पसंद नहीं होता और वह सहवास करने से विमुख हो जाती है या सहवास के प्रति उनका इंटरेस्ट कम हो जाता है बेहतर यही होगा कि सहवास करने से पहले माने फोर प्ले से पहले दोनों पार्टनर अपने दांतों को ब्रश कर ले
(0:48:58) और धुम्रपान और गुट का सेवन अगर करना ही है तो इसका सेवन सहवास के बाद करें कई बार ऐसा भी होता है कि सारा दिन काम करने के बाद फिर चाहे वह पुरुष हो या स्त्री जब आपका पार्टनर आपके पास आता है तो उनके शरीर से आने वाली बदबू आपको करीब होने से रोक सकती है ऐसे में उन्हें यह बात प्यार से समझाई जा सकती है कि सफाई की कमी उनके बीच की दूरियों को बढ़ा रही है कई बार बदबू की जड़ उस जगह पर आने वाला पसीना होता है अगर साफ सफाई रखी जाए तो पसीना नहीं आएगा संभोग से पहले अगर कुनकुन पानी से स्नान
(0:49:45) कर ले तो उससे शरीर की बदबू के साथ-साथ थकावट भी दूर हो जाएगी और खून का बहाव भी थोड़ा बढ़ेगा इसे एक करीब का माहौल बनने की भी शुरुआत हो सकती है कुछ महिलाओं को योनि मार्ग से सफेद पानी जाने की शिकायत होती है इसकी वजह से भी बदबू की समस्या हो सकती है अगर महिला को सफेद पानी जाने की समस्या है उसे अपने अंडर गारमेंट्स ने धब्बे पड़ जाते हैं या प्राइवेट पार्ट्स में उसके आसपास खुजली होती है तो हो सकता है कि वजाइना में कुछ इंफेक्शन हो इसके लिए किसी गायनेकोलॉजिस्ट को दिखाए अमूमन सिर्फ दो हफ्ते के इलाज से यह समस्या ठीक
(0:50:32) हो जाती है ध्यान रहे इस ट्रीटमेंट के दौरान सहवास ना करें नहीं तो इंफेक्शन का आदान प्रदान होता रहेगा माने पिंग पंगिरा सहवास के बाद महिला और पुरुष अगर प्राइवेट पार्ट को धोना चाहे तो जरूर धो सकते हैं लेकिन सहवास के बाद तुरंत ऐसा करने की आवश्यकता नहीं है परफ्यूम टिश्यू पेपर्स अवॉइड करें क्योंकि यह कभी-कभार चमड़ी को इरिटेट कर सकते हैं हां सहवास के बाद आप यूरिन पास जरूर कर सकते हैं इससे आप छोटे मोटे इंफेक्शन से दूर रह सकते हो क्योंकि पेशाब के रास्ते से बैक्टीरिया बाहर निकल जाते हैं और इंफेक्शन के चांसेस
(0:51:19) कम हो जाते हम जब प्राइवेट पार्ट को साफ करने की बात करते हैं तब उससे पहले हाथ और उंगलियां भी सही तरीके से साफ करना जरूरी है कई बार ऐसा भी हो सकता है कि अगर अपने प्राइवेट पार्ट को पुरुष सही तरीके से स्वच्छ नहीं रखता तो आपसी करीब में भी दरार आ सकती है दूरत आ सकती है और कई बार अगर स्त्री क्लीनलीनेस फ्रीक हुई तो काम जीवन में भी बड़ी गड़बड़ी पैदा कर सकती एक केस मुझे याद आ रहा है एक कपल मुझे रिफर किया गया था शादी के दो साल के बाद हस्बैंड की यह कंप्लेंट थी कि उसकी वाइफ को सेक्स में से इंटरेस्ट निकल गया है वह
(0:52:06) काफी डॉक्टरों को कंसल्ट कर चुका था किसने एंटी एंजाइटी लिख के दिया तो किसने एंटी डिप्रेशन की दवाई लिख के दी किसने सनसेट फोकस एक्सरसाइज बताई लेकिन कोई इलाज उसको कारगर नहीं हुआ लड़की बस यही बता रही थी कि मुझे मन नहीं होता है मैं मेरे हिस्ट्री टेकिंग में आखिर में एक दो सवाल हमेशा पूछता हूं कि आपको क्या लगता है आपकी समस्या का कारण क्या है और दूसरा सवाल होता है कि कोई ऐसी चीज है जो मैंने आपको नहीं पूछी लेकिन आप बताना चाहते हैं जब मैंने यह सवाल पूछा तो आखिर में उन्होंने जवाब दिया कि डॉक्टर साहब सब कुछ ठीक है बस एक ही चीज
(0:52:53) है वह जब शराब पी के मेरे करीब आते हैं और मुझे किस करने की कोशिश करते हैं तब मुझे एक नौश जैसी फीलिंग आ जाती है और यह फीलिंग मैं बर्दाश्त नहीं कर सकती यह शराब की फीलिंग मैं बर्दाश्त नहीं कर सकती बस इसी कारण से मेरी काम मर जाती है और मेरा सहवास से इंटरेस्ट बिल्कुल निकल जाता है उस केस में इलाज सिर्फ इतना ही था कि वह सहवास से पहले शराब ना ले सेक्सुअल हाइजीन या क्लीनलीनेस बहुत जरूरी है क्योंकि बदन का यह हिस्सा अन एक्सपोज भी है और दूसरे अवयव की तुलना में ज्यादा सेंसिटिव भी है सेक्सुअल हाइजीन ठीक तरीके
(0:53:40) से ना रखने से रिश्तों में दरार आ सकती है सेक्स एजुकेशन का मतलब यह नहीं है कि हमें लोगों को वह चीज सिखानी है जो वह नहीं जानते लेकिन सेक्स एजुकेशन का मतलब यह है कि हमें उस तरह का आचरण करना सिखाना है जिससे वह अभ्यस्त नहीं है सही सेक्स एजुकेशन से समाज में सेक्सुअल क्राइम्स एचआईवी एड्स एससीआई और अनवांटेड प्रेगनेंसी की संख्या में काफी कमी आ सकती है दोस्तों यह सेक्सुअल टिप्स मेरे आज तक के तजुर्बे का पूरा निचोड़ है मैं आपको आश्वस्त करना चाहूंगा कि यह टिप्स ना सिर्फ आपकी
(0:54:26) सेक्सुअल हेल्थ को बल्कि उसके साथ आपकी ओवरऑल हेल्थ को भी एनहांस करेगी चलो तो आगे बढ़ते हैं इस लेक्चर में पहले हम कुछ देखेंगे जनरल टिप्स मेरी हॉस्पिटल प्रैक्टिस में मैंने करीबन 55000 से अधिक पेशेंट देखे हैं उम्र के इस मोड पर भी मेरी प्राइवेट प्रैक्टिस में आने वाले पेशेंट्स में हर उम्र के लोग रहते हैं जिसमें महिलाएं भी है शादीशुदा लोग भी हैं और हां यंग एज के पेशेंट भी बहुत सारे हैं अक्सर मैंने देखा है कि बहुत सारे केसेस में जब उनकी शादी नजदीक आती है तो वह टेंशन में आ जाते हैं
(0:55:12) कि अब मेरा क्या होगा मैं शादी के बाद ठीक से सहवास कर पाऊंगा या नहीं अगर पेशेंट महिला है तो उसे लगता है कि मैं ठीक तरीके से सहवास कर पाऊंगी या नहीं कर पाऊंगी कुछ यंग पेशेंट ऐसे होते हैं जो खुद को ब्लेम किया करते हैं कि मेरी यह हालत मेरे बचपन की की हुई गलतियों का नतीजा है उन सबके दिमाग में एक खौफ रहता है कि बचपन में ज्यादा मास्टरबेशन करने से या ज्यादा सेक्स करने से कम उम्र में सेक्सुअली कमजोर हो जाएंगे इस खौफ में रहने वाले उन सब लोगों को मैं बताना चाहूंगा कि हकीकत में जो लोग शुरुआत में
(0:55:58) ज्यादा सेक्सुअली एक्टिव होते हैं वही लोग लंबी उम्र तक सेक्सुअल लाइफ एंजॉय कर सकते हैं कुछ लोग मेरे पास आते हैं और पूछते हैं कि डॉक्टर साहब हमें एक अच्छा सा सेक्स टॉनिक बताइए ऐसे लोगों को मैं एक खास टिप देता हूं एक समझदार आकर्षक और अफेक्शनेट सेक्स पार्टनर यह सबसे बेहतरीन सेक्स टॉनिक हो सकता है इसके अलावा यह टिप्स पर भी ध्यान रखिएगा कि पुरुषों के हार्मोन के इंजेक्शन से अमूमन स्पर्म्स की क्वांटिटी बढ़ने के बजाय कम हो सकती है अगर मेंसिस में कोई सहवास करना चाहे और
(0:56:46) दोनों पार्टनर की रजामंदी हो तो सहवास आराम से कर सकते हैं और एक टिप स्त्री क्लाइमैक्स पर पहुंची कि नहीं वह जानने का सबसे बेहतर तरीका है उसे पूछ लेना उसी से मेली जुड़ एक टिप है स्त्री और पुरुष दोनों को एक साथ ऑर्गेजम हो यह आइडियल परफॉर्मेंस की निशानी नहीं है और बच्चा पैदा करने के लिए भी इसकी आवश्यकता नहीं और एक टप के सहवास के पहले ज्यादा हैवी खाना ना खाएं और खाने के तुरंत बाद सहवास ना करें
(0:57:31) अक्सर सहवास के बाद कुछ स्त्रियों को लोअर एडोम में दर्द होता है और इसका मुख्य कारण सहवास नहीं है बल्कि सहवास अधूरा रह गया है वह है क्योंकि उस सहवास में स्त्री उत्तेजित तो हुई है खून का भाव भी हुआ है लेकिन चर्म सीमा पर पहुंची नहीं है इस वजह से उसे पेल्विक कंजेशन हुआ है जो उसके लोअर एब्डोमेन में डिस्कंफर्ट या या दर्द का मेन कारण है इस वक्त पुरुष अपनी स्त्री को एक या दूसरी तरह से अगर चर्म सुख पर पहुंचा दे तो वह डिस्कंफर्ट और दर्द अमूमन दूर हो
(0:58:15) जाएगा आइए अब आगे देखते हैं कुछ बेडरूम एटिकेट्स के टिप्स ड्राइंग रूम एटिकेट्स के जैसे कुछ बेडरूम एटिकेट्स भी होते हैं जैसे डिनर के दरमियान टेबल मैनर होते हैं उस तरह से कुछ बेडरूम मैनर्स भी होते हैं मिसाल के तौर पर काम क्रीड़ा के दौरान कंप्लेन इंक्वायरी झगड़ा मांग डाउट शंका इन चीजों से दूर रहे नहीं तो कई बार फोर प्ले बोर प्ले बन जाता है उस वक्त किसी को खुजली पसीना फर्टिंग जैसी हरकतें हो तो वो आनंद में अवरोध ला
(0:59:01) सकती है बेहतर है कि इन हरकतों से बचे हालांकि यह सच है कि कई बार ओरल सेक्स और विवस बातें उत्तेजना का कारक बन सकती है उसमें इजाफा ला सकती है लेकिन अगर पार्टनर को ओरल सेक्स या विवस बातें पसंद ना आती हो तो जबरदस्ती ना करें बेहतर यही होगा कि इसे अवॉइड करें दूसरी एक चीज के सहवास से पहले तंबाकू गुटका सिगरेट शराब अगर पार्टनर को पसंद ना हो तो उसका सेवन ना कर अगर दोनों पार्टनर के बीच में किसी भी
(0:59:48) कारण से मतभेद हो या मनभेद हो तो सहवास के वक्त उस विषयों पर बातचीत अवॉइड करें सहवास से पहले स्नान कर ले और अगर पसंद हो तो जरूर आकर्षक लॉन्जरी पहने सहवास के दौरान बिल्कुल खामोश ना रहे बातचीत जरूर करें क्योंकि यह बेडरूम है लाइब्रेरी नहीं दोस्तों कहते हैं कि मिथ्स आर फैंटेसी शेयर्ड बाय द होल कल्चर एंड दे एक्जिस्ट बिकॉज दे हैव अ कॉमन मास ऑफ ईल लेकिन साथ-साथ इस गलतफहमियां से बचना भी आवश्यक है ताकि हम बेवजह की फिक्र चिंता एंजाइटी का शिकार ना हो जाए मैं ऐसे
(1:00:35) 10 सिचुएशन आपको बता रहा हूं कि जहां आपको कोई फिकर चिंता करने की जरूरत नहीं है किसी सेक्सोलॉजिस्ट को कंसल्ट करने की भी जरूरत नहीं है मिसाल के तौर पर कभी अचानक अगर आपको इरेक्शन ना आए यह सामान्य चीज है किसी भी उम्र में अगर स्वप्न मैथुन हो स्लीप मिशन हो किसी को भी यह हो सकता है यंग एज में बहुत हस्तमैथुन किया हो या सेक्सुअली एक्टिव रहे हो चौथी टप प्राइवेट पार्ट पर अगर तिल हो या उसका कलर थोड़ा अलग सा हो शिष्ण में
(1:01:21) थोड़ा टेढ़ापन हो स्तन की साइज में थोड़ी असमानता हो सहवास के बाद कई बार पूरा सिमन योनि में से वारा आ जाता है नॉर्मल है अगर निपल्स के इर्दगिर्द कुछ बाल हो सुसुप्त अवस्था में शिष्ण अगर बहुत छोटा दिखाई दे शिष्ण की उत्तेजना के लिए सिर्फ ख्याल नहीं स्पर्श भी जरूरी बने यह सब नॉर्मल चीजें हैं इसके लिए डॉक्टर को कंसल्ट करने की सेक्सोलॉजिस्ट को कंसल्ट करने की जरूरत बिल्कुल नहीं है कुछ कॉमन बीमारियां है जिस दौरान कई बार व्यक्ति कंफ्यूज हो जाती है कि सहवास करें
(1:02:09) या ना करें मैंने ऐसे किस्से भी देखे हैं कि एक पार्टनर को बीमारी है मिसाल के तौर पर हार्ट अटैक आया तो उसके पार्टनर को कई बार ऐसा लगता है कि सहवास करने से शायद कोई जान लेवा तकलीफ हो जाएगी तो हार्ट अटैक के कुछ समय बाद अक्सर व्यक्ति नॉर्मल हो जाता है फिर भी खौफ की वजह से या तो वह सहवा से दूर रहते हैं या सहवास करने की इच्छा होते हुए भी वह सहवास करने से कतराते हैं ऐसे सिचुएशन में अक्सर एंजाइटी ज्यादा बढ़ जाती अपना सामाजिक सिचुएशन ऐसा है कि ऐसी बातें डिस्कस की नहीं
(1:02:56) जाती ना किसी को वह कह सकते हैं और ना ही यह तकलीफ सह सकते हैं इसलिए कुछ आम बीमारियों में सेक्सुअल एक्टिविटीज के बारे में मैं टिप्स दे रहा हूं हम पहला लेते हैं सेक्स एंड हार्ट डिसीज इस पर सबसे बेहतर एडवाइस आपको कार्डियोलॉजिस्ट भी दे सकता है बशर्ते वह सेक्स के मामले में जानकार हो हार्ट अटैक के चार छ हफ्ते के बाद व्यक्ति अमूमन सेक्सुअल एक्टिविटीज कर सकता सता है अगर हार्ट अटैक के चार छ हफ्ते के बाद कोई व्यक्ति टू फ्लाइट्स ऑफ स्टेयर केस माने दो माला अगर बिना रुके आसानी से चढ़ सकता है तो उसे ज्यादातर
(1:03:44) सेक्सुअल एक्टिविटीज करने में कोई दिक्कत नहीं आती फिर भी इसका डिसीजन कार्डियोलॉजिस्ट बेहतर ले सकता है हालांकि ऐसे सिचुएशन में कुछ प्रिकॉशंस कुछ सावधानियां जरूर लेनी चाहिए मिसाल के तौर पर सहवास के पहले बहुत ज्यादा शराब और बहुत हैवी खाना नहीं खाना चाहिए क्योंकि हार्ट को डबल काम करना पड़ेगा दूसरा आप सेक्सुअल एक्टिविटी सुबह में करें तो शायद बेहतर होगा क्योंकि आप उस वक्त थके हुए नहीं रहेंगे तीसरा रोजाना की जो फिजिकल एक्सरसाइज करते हैं वो आप चालू रखें ताकि सेक्सुअल एक्सरसाइज बदन के
(1:04:30) लिए कोई अनयूजुअल इवेंट ना बन जाए बाकी तो आपको पता ही है कि नाइट्रोग्लिसरीन की टेबलेट जो आती है चेस्ट पेन के समय जरूरत पड़े तो जबान के नीचे रख सकते हो वह अपने पास आप हैंडी रख सकते हैं हां अक्सर आपने पढ़ा होगा कि सहवास के दौरान जब व्यक्ति क्लाइमेक्स पर पहुंचता है तो उसके हार्ट रेट डबल हो जाते हैं उसका ब्लड प्रेशर डबल हो जाता है लेकिन ध्यान रहे ऐसे मोमेंट्री चेंजेज कभी जानलेवा नहीं होते आपने कभी सुना है कि व्यक्ति का सहवास करते करते उसका इंतकाल हो गया नहीं हार्ट अटैक ड्यूरिंग सेक्सुअल एक्टिविटी के इंसीडेंसेस
(1:05:15) इतने ही होते हैं कि किसी को पेशाब करते वक्त हार्ट अटैक आया या किसी को टॉयलेट करते वक्त हार्ट अटैक आ गया बस उतना ही अंत में इतना ध्यान रखिएगा कि सेक्सुअल एक्टिविटी की राय दे में आपके डॉक्टर का जवाब क्लियर होना चाहिए हां या ना में होना चाहिए करो लेकिन लिमिट में करो ऐसा ओपिनियन नहीं होना चाहिए क्योंकि सेक्स में कोई लिमिट तो होती नहीं है या तो करो या ना करो अभी हम बात करते हैं सेक्स एंड लिवर डिसीज इसमें मेन होते हैं एक्यूट और क्रॉनिक इंफेक्शन एक्यूट वायरल इंफेक्शन
(1:06:00) और क्रॉनिक वायरल एक्टिव इंफेक्शन दोनों इफेक्स होते हैं बेहतर यही होगा कि सहवास के दौरान यह ध्यान रखें कि बॉडी फ्लूइड एक्सचेंज ना हो मिसाल के तौर पर किसिंग ना करें ओरल सेक्स ना करें और सहवास के दौरान कंडोम का उपयोग जरूर करें पार्टनर को अगर वैक्सीनेट किया जाए तो बेहतर होगा क्रॉनिक लिवर डैमेज ज्यादातर शराब की वजह से या दवाओं की वजह से या कुछ लीवर की बीमारियों की वजह से हो सकता है जिसमें अक्सर हार्मोन इंबैलेंस हो जाता है पुरुष में फीमेल हार्मोन थोड़ा ज्यादा हो जाता है और
(1:06:47) मेल हॉर्मोन थोड़ा कम हो जाता है जिसकी वजह से अक्सर पुरुष में कामेच्छा और इरेक्शन में गड़बड़ी आ सकती है ऐसे सिचुएशन में इरेक्शन के लिए पीडी फाई माने वागरा टाइप की गोली कारगर हो सकती है लेकिन गोली से बेहतर विकल्प हो सकता है स्ट्रिप या फिल्म का जो जबान के नीचे रखी जाती है और जो मुंह में से डायरेक्ट एस हो जाती यह भी जानना जरूरी है कि हर लीवर का क्रॉनिक इंफेक्शन जरूरी नहीं कि इफेक्टिव हो अभी हम बात करने जा रहे हैं सेक्स एंड किडनी डिसीज
(1:07:31) आप तो जानते ही है कि सेक्स में चार चरण होते हैं डिजायर इरेक्शन पेनिट्रेशन और ऑर्गेजम क्लाक्स किडनी फेलर में एनीमिया हो सकता है यूरेमेट में गड़बड़ी भी हो सकती है माने गुनाडा और इरेक्शन दोनों में कमी आ आ सकती है इरेक्शन की कमी दूर करने के लिए पीडी फाई लो डोज में ली जा सकती है अक्सर चर्म सीमा तक पहुंचने में भी कभी-कभी काफी देर लगती है इसका मूल कारण है टेस्टोस्टरॉन पुरुष हार्मोन की कमी अगर जरूरत पड़े तो
(1:08:21) पुरुष हार्मोन टेस्टोस्टरॉन अन डेकनेट जेल या इंजेक्शन के फॉर्म में ले सकते हैं जिससे काम इच्छा कामशक्ति और डिलेड ऑर्गेजम की समस्या में फायदा हो सकता है चरम सीमा पर पहुंचने के बाद चर्म सीमा का आनंद बरकरार रहता है किडनी ट्रांसप्लांट के बाद भी व्यक्ति चाहे तो सहवास कर सकती है और अगर जरूरत पड़े तो पीडी फाई की गोलियां ले सकते हैं अभी हम बात करते हैं एक दूसरी कॉमन चीज की कॉमन बीमारी की व है सेक्स एंड अस्थमा के विषय में अस्तमा में सेक्सुअल एक्टिविटी पर कोई डायरेक्ट विपरीत असर नहीं पड़ती
(1:09:07) लेकिन हां सांस लेने में दिक्कत हो सकती है देयर इज शॉर्टसचेंज से पहले ब्रोंकोडायलेटर का इस्तेमाल कर सकते हो चाहे वह पंप के फॉर्म में हो सिरप के फॉर्म में हो या गोली के फॉर्म में हो जिसे सांस फूलने की समस्या में काफी राहत मिल सकती है लॉन्ग टर्म बेनिफिट के लिए ब्रीदिंग एक्सरसाइज मदद रूप हो सकती है और प्राणायाम खास करके अनुलोम विलोम विथ इंस्पिरेट्री होल्ड माने सांस लीजिए सांस रोकिए और बाद में सांस छोड़िए इसमें सांस ज्यादा टाइम के लिए
(1:09:53) रोकना जरूरी है सांस लेना रोकना और बाद में छोड़ना यह रेश 142 में होना चाहिए माने पा सेकंड सांस ले 20 सेकंड रोके और 10 सेकंड छोड़े तो यह ज्यादा मदद रूप हो सकता है दूसरा अगर पुरुष पार्टनर को अस्तमा है तो सहवास के दौरान फीमेल सुपीरियर पोजीशन उसके लिए बेहतर होगी क्योंकि उसमें कम एक्सर्शन की वजह से सास फूलने की समस्या कम हो सकती अभी हम बात करने जा रहे एक दूसरी कॉमन बीमारी की वह है डायबिटीज माने सेक्स एंड डायबिटीज की वजह डायबिटीज एक काफी कॉमन बीमारी जिसमें
(1:10:40) अमूमन सेक्स की परेशानियां होती रहती है चाहे शुरुआत में हो या बाद में हो लेकिन कुछ ना कुछ परेशानियां अक्सर दिखाई देती सेक्सुअल रिस्पांस में चार चरण रहते हैं एक रहता है डिजायर यानी ख्वाहिश दूसरा रहता है इरेक्शन माने शिष्ण की मजबूती तीसरा रहता है पेनिट्रेशन माने योनि प्रवेश और चौथा रहता है सुकून माने क्लाइमेक्स यह समस्या में डिजायर बरकरार रहता है इच्छा में कोई गड़बड़ी नहीं होती अक्सर कुछ सालों बाद कृष्ण की मजबूती में कमी आ सकती है उसके लिए प्रवेश कभी कभ मुश्किल
(1:11:28) हो सकता है ऑर्गेजम माने क्लाइमेक्स में कोई फर्क नहीं पड़ता कुछ केसेस में रेट्रोग्रेड इजेकुलेशन हो सकता है मतलब ऑर्गेजम के बाद जब र्य स्खलन होता है तो र्य बाहर नहीं आता लेकिन ब्लेडर नेक डिस्टरबेंस की वजह से वीरियो बाहर आने की बजाय यूरिनरी ब्लेडर माने पेशाब की थैली में चला जाता है ऑर्गेजम के दौरान आनंद पहले जैसा ही रहता है लेकिन वीर्य स्खलन खाली बाहर नहीं होता है मजबूती वापस लाने के लिए अक्सर पीडीएफ आई जैसी दवाइयां काफी कारगर हो सकती है इससे अमूमन सहवास ठीक तरीके से हो सकता है इसमें खास करके ब्लड शुगर कंट्रोल में
(1:12:18) रखना जरूरी है और आयुर्वेद कहता है कि रोजाना एक चम्मच आंवला पाउडर या एक दो चम्मच जूस का सेवन करने से डायबिटीज के कॉम्प्लिकेशन में राहत मिल सकती है अक्सर लोगों को जॉइंट पेंस होता है तो अभी हम बात करने जा रहे हैं सेक्स एंड आर्थराइटिस की आर्थराइटिस में अक्सर बदन के जॉइंट्स में दर्द या सूजन हो सकता है आमतौर पर दो किस्म के आर्थराइटिस देखे जाते हैं एक है रूमेटॉन आर्थराइटिस और दूसरा है ऑस्टियोआर्थराइटिस रूमेट आर्थराइटिस में पेन सुबह में ज्यादा होता है और ऑस्टियोआर्थराइटिस में पेन शाम
(1:13:04) को ज्यादा होता है बेहतर यही होगा कि रूमेट आर्थराइटिस वाले शाम को सहवास करें और ऑस्टियोआर्थराइटिस वाले सुबह को सहवास करें यह करने से ही आपको काफी रा राहत मिल जाती है साथ ही साथ सहवास के पहले अगर कुनकुन पानी से स्नान कर ले तो दर्द में भी थोड़ी बहुत कमी आ सकती है और फ्रेशनेस भी जदा फील होगी साथ ही साथ सहवास के एक घंटे पहले शॉर्ट एक्टिंग पेन किलर ले ले तो दर्द में भी राहत हो जाएगी और आप सहवास ठीक से कर सकोगे ध्यान रहे कि पेन किलर भूखे पेट ना ले हमने देखा कि कुछ बीमारियों में सेक्सुअल लाइफ पर क्या असर
(1:13:50) पड़ती है और हमें क्या प्रिकॉशन लेना चाहिए अब हम देखते हैं कि कुछ कॉमन ऑपरेशंस के बाद व्यक्ति की सेक्सुअल लाइफ पर क्या असर पड़ सकती है अभी हम बात करने जा रहे हैं सेक्स एंड प्रोस्टेट टोमी प्रोटेक्टो का ऑपरेशन अमूमन पुरुष की बढ़ती उम्र में किया जाता है जब प्रोस्टेट बड़ा हो जाता है तब अमूमन पिशाब शुरू करने में थोड़ा टाइम लगता है थोड़ी दिक्कत होती है कभी कभ पेशाब आसानी से नहीं होता और ज्यादातर करने के लिए पुरुष को रात को कई बार उठना पड़ता है जिसकी वजह से उसकी नींद
(1:14:37) डिस्टर्ब हो जाती है इसके लिए अक्सर बढ़े हुए प्रोस्टेट का ऑपरेशन किया जाता है आजकल यह ऑपरेशन बड़े आसान हो गए हैं और उसमें नए नए तरीके से यह ऑपरेशन किए जाते हैं लेकिन ऑपरेशन के बाद आपको मालूम है कि सेक्स में चार चरण होते हैं कामेच्छा इरेक्शन पेनिट्रेशन और ऑर्गेजम और चरम सीमा चरम सीमा के साथ अमूमन विर्य स्खलन भी होता है प्रोटेक्टो के ऑपरेशन के बाद काम इच्छा बरकरार रहती है माने जैसे पहली थी वैसे लेकिन कभी कभ इरेक्शन में गड़बड़ी हो सकती है जो दूर करने में पीडी फाई की गोलियां काफी कारगर साबित हो सकती है
(1:15:25) जिससे इरेक्शन में मजबूती आ जाती है और पेनिट्रेशन में सहूलियत हो जाती जब वह ऑर्गेजम पर पहुंचता है तो ऑर्गेजम का आनंद माने चर्म सीमा का आनंद वैसा ही रहता है जैसे पहले था लेकिन वीरय स् कलन बाहर नहीं होता उसकी बजाय वीरय स्खलन यूरिनरी ब्लेडर में होने लगता है इट विल बी रेट्रोग्रेड जशन माने पुरुष की सहवास करने की क्षमता वही रहेगी लेकिन बच्चा पैदा करने की क्षमता नहीं रहेगी क्योंकि उसको ख्वाहिश रहेगी इंद्रिय में तनाव आएगा सहवास भी कर सकेगा क्लाइमेक्स पर पहुंचेगा लेकिन इट विल बी ड्राय रन माने कुछ डिस्चार्ज बाहर नहीं आएगा वो ब्लैडर में चला जाता है यह
(1:16:10) अक्सर प्रोटेक्टो के बाद हो सकता है ऐसे ही फीमेल्स में एक ऑपरेशन होता है जिसे इक्टोमी कहते हैं अभी हम इक्टोमी की बात करने जा रहे हैं स्त्री के सेक्सुअल रिस्पांस में चार चरण रहते हैं काम इच्छा योनि मार्ग में गीलापन पेनिट्रेशन या प्रवेश और चर्म सीमा या क्लाइमेक्स हिस्टेक टमी के ऑपरेशन में गर्भाशय निकाल दिया जाता है जिससे बच्चा पैदा करने की क्षमता समाप्त हो जाती लेकिन उनकी काम इच्छा योनि मार्ग में गीलापन योनि प्रवेश और चरम सीमा माने क्लाइमैक्स में कोई
(1:16:56) बदलाव नहीं होता हां अगर साथ में अंडा से माने ओवरी रिमूव की गई हो तो फीमेल हार्मोन में कमी की वजह से कुछ समय के बाद कामेच्छा में कमी आ सकती है गीलापन में भी कमी आ सकती है जिसकी वजह से योनि प्रवेश शायद थोड़ा पेनफुल हो सकता है और क्लाइमेक्स में भी थोड़ी बहुत गड़बड़ी हो सकती है यह कमी फीमेल हार्मोन के उपयोग से अमूमन दूर हो जाती है कुछ लोग फ्रिक्वेंट पूछा करते हैं कुछ सवाल कि सिगरेट स्मोकिंग करने वालों को उनकी सेक्सुअल लाइफ के लिए आप क्या टिप्स देना चाहे देखिए सिगरेट हो पाइप हो बीड़ी हो या
(1:17:42) गुटका हो टोबेको इन एनी फॉर्म इम कहने का मतलब यह है कि किसी भी किस्म का तंबाकू का सेवन आपके लिए नुकसान काक ही होगा ख्याल से देखने से या स्पर्श से दिमाग में सेक्स का सेंटर रहता है जब व उत्तेजित होता है तो यह मैसेजेस सेक्स सेंटर ऑफ स्पाइन में जाते हैं रीड की हड्डी में जाते हैं वहां पहुंचने के दौरान प्राइवेट पार्ट के ब्लड फ्लो में इजाफा होता है और पुरुष को इरेक्शन होता है और स्त्री को लुब्रिकेशन होता है तंबाकू में निकोटीन होता है निकोटीन एंजाइटी को बढ़ाता है और कई बार एंजाइटी सेक्स के लिए बेहद हानिकारक हो सकती है इट कैन पैरालाइज द सेक्सुअल
(1:18:26) रिस्पांस साथ ही साथ तमा के लंबे टाइम के सेवन से बदन में खून गाढ़ा होता है और ब्लड वेसल्स का डायमीटर नरो हो सकता है कम हो सकता है जिसे लोग एथेरो स्क्लेरोसिस कहते हैं जिसकी वजह से प्राइवेट पार्ट में खून का बहाव में कमी आ सकती है और इससे पुरुष के इरेक्शन में और स्त्री के लुब्रिकेशन में गड़बड़ी हो सकती है और अगर एक बार तंबाकू से नामर्द कीी आ गई तो इस कला उसका इलाज मुश्किल बन जाता है और कई बार वायग्र जैसी दवाइयां भी काम नहीं करती बेहतर यही होगा कि किसी भी तरह के तंबाकू के सेवन से आप बचे चाहे वह गुटका हो या
(1:19:13) सिगरेट दूसरा एक फ्रीक्वेंसी में प्रॉब्लम आ सकता है अगर प्रॉब्लम आए तो उसके सुझाव के लिए कुछ टिप्स जरूर अक्सर ओबेसिटी की वजह जेनेटिक भी हो सकती है खाने के इंबैलेंस की वजह से भी हो सकती है हार्मोन डिस्टरबेंस की वजह से भी हो सकती है और लाइफ स्टाइल चेंजेज की वजह से भी हो सकती है मिसाल के तौर पर एक ही ज जगह पर काम करना कसरत ना करना ऐसी वजह से भी मोटापा आ सकता है जिसकी वजह से बदन को एक्सरसाइज नहीं मिलती और मसल्स फ्लेशी हो जाते हैं और मसल्स जल्दी थकान महसूस करते हैं इसके इलाज में डायट पर ध्यान देना
(1:19:59) चाहिए वॉकिंग अवश्य करना चाहिए कम से कम 5 मिनट के लिए ऐसी एक्सरसाइज करनी चाहिए जो थ्रस्टिंग के लिए माने संभोग के दौरान की मूवमेंट के लिए जो मसल्स उपयोग में आते हैं वह टोन अप हो जाए यह मसल्स है ग्लूटस मैक्सिमस ग्लूटस मीडियस हैमस्ट्रिंग्स और थोड़ी मात्रा में क्वाड्री सेप्स इससे आपकी सेक्सुअल एक्टिविटी की मूवमेंट ब रहे साथ ही साथ कई बार ऐसा होता है कि एक व्यक्ति का या दोनों पार्टनर का पेट बहुत बढ़ गया हो बहुत मोटा हो गया तो सहवास में मैकेनिकल ऑब्स्ट्रक्शन आ सकता है और सहवास कभी नामुमकिन भी हो जाता है ऐसे सिचुएशन
(1:20:46) में ऋषि वात्सा ने अ आसन का इस्तेमाल करने की सलाह दी है अ माने हाथी हाथी की तरह सहवास करना चाहिए ज्यादातर ईसन में सहवास पीछे से होता है ताकि पेट की वजह से आने वाला मैकेनिकल अवरोध दूर हो जाता है लोग अक्सर पूछते हैं कि बढ़ती उम्र में अच्छे संबंध के लिए आप क्या टिप्स देना चाहेंगे वेल टिप्स नीड टू बी टेलर्ड अकॉर्डिंग टू इंडिविजुअल नीड्स लेकिन जनरल अगर कहा जाए तो अपने पार्टनर को फ्रीक्वेंसी अप्रिशिएट करते रहना
(1:21:31) चाहिए यह रिलेशनशिप में एक स्पार्क जगाए रखता है दूसरा बदलाव कामेच्छा जगाने में काफी मदद रूप हो सकता है चाहे वह सहवास का स्थान हो या डिफरेंट पोजीशन हो और अंत में मैं यही कहूंगा कि बढ़ती उम्र के साथ-साथ सोच जवान रखना जरूरी है ऋषि वान कहते हैं आ सप्तती यवनम माने यवन 70 इयर्स तक होता है और अगर मुझे पूछा जाए तो सेक्स ज नो एक्सपायरी डेट सेक्स टॉयज एक ऐसा उपकरण है कि जिसमें काम सुख में माने सेक्सुअल प्लेजर में
(1:22:18) इजाफा होता है इसका इस्तेमाल एक व्यक्ति अकेले में भी कर सकती है और दोनों पार्टनर साथ मिलकर भी अधिकांश सेक्स टॉयज पुरुष और स्त्री के प्राइवेट पार्ट से मिलते जुलते रहते हैं आई मीन दे रिजल आदर पिनिस और वजाइना और इसमें दो वरायटी रहती है एक वाइब्रेटिंग और दूसरी नॉन वाइब्रेटिंग माने कंपन के साथ और कंपन के बगैर यह सेक्स टॉयज कोई नए जमाने की रिसर्च नहीं है पुराने जमाने में भी इसका इस्तेमाल होता था ऋषि वात्सायन ने अपने ग्रंथ काम सूत्र में बहुत ही विस्तार से लिखा है कि अगर कोई पुरुष नामर्द कीी से पीड़ित हो या थका
(1:23:07) हुआ हो या अगर सहवास करने के काबिल ना हो या उसके शिष्ण की साइज बहुत ही कम हो तो उसे अपद्रव्य माने कृत्रिम लिंग का उपयोग करना चाहिए और अपने पार्टनर को संतोष दे देना चाहिए उसी तरह ऋषि वादसा ने कामसूत्र में पुरुष के खुद के आनंद के लिए कृत्रिम योनि का भी उल्लेख किया है उन्होंने संतोष महत्व की चीज बताई है किसी भी तरह से अपने पार्टनर को सुकून दे देना चाहिए संतोष देना चाहिए यह आवश्यक बताया है अपने लेक्चर में हम आगे देखेंगे कि सेक्स टॉयज ये किससे बनते हैं इसका इस्तेमाल करने का
(1:23:53) तरीका क्या है इसके फायदे क्या है और इसके नुकसान क्या है मेरी खुद की प्रैक्टिस में प्रॉब्लम सॉल्व करने में यह सेक्स टॉयज कहां तक मदद रूप पहले देखते हैं कि सेक्स टॉयज कौन से मटेरियल से बनते हैं सेक्स टॉयज बहुत सारे मटेरियल से बनते हैं फिलहाल जो मार्केट में उपलब्ध है वह अक्सर सिलिकॉन के ग्लास के मेटल के यूजर फ्रेंडली रबर के या हार्ड प्लास्टिक से बने हुए होते हैं पुराने जमाने में भी के हाथी दांत के लकड़ी के एनिमल हन के सेक्स टॉय बनाए जाते थे मेरे अपने पर्सनल कलेक्शन में भी कुछ मुगल टाइम
(1:24:40) के हाथी दांत के बनाए हुए कुछ सैकड़ों साल पहले स्टोन और मेटल के बनाए हुए सेक्स टॉयज मौजूद है कामसूत्र के मुताबिक अपने यहां पहले से गोल्ड सिल्वर कॉपर लेड माने शीशे के और लकड़ी के कृत्रिम लिंग का उपयोग किया जाता था वात्सायन इस विषय में कहते हैं कि लकड़े के लिंग का आगे का हिस्सा थोड़ा रफ होना चाहिए जिससे शायद उत्तेजना में इजाफा हो सकता है उनके मुताबिक लकड़े का कृत्रिम लिंग बेहतर माना जाता था हालांकि यह हुई पुराने जमाने की
(1:25:23) बात लेकिन आज के जमाने में सेक्स टॉय भारत में इलीगल है सेक्स टॉ बेचना एक शिक्षा पात्र गुनाह माने पनिशेबल ऑफेंस है अंडर सेक्शन 2921 ऑफ इंडियन पिनल कोड सेक्स टॉयज बेचने वाले को सजा हो सकती है कहते हैं कि सेक्स टॉयज के बारे में जो कानून है वह चाहिए उतना क्लियर नहीं है ज्यादातर सेक्स टॉयज में प्रॉब्लम यह बना रहता है कि उसका बेचने का तरीका कुछ अलग होता है अक्सर उसमें उत्तेजना क्मक वल्गर तस्वीरें और ग्राफिक्स का उपयोग किया जाता है शायद सेक्स टॉयज को अपने यहां अश्लील या ऑबसीन
(1:26:09) प्रोडक्ट इसीलिए माना जाता होगा यह सेक्स टॉयज मेरे पेशेंट्स में उनके प्रॉब्लम सॉल्व करने में कहां-कहां उपयोगी हुए हैं वह मैं आपके साथ शेयर करने जा रहा हूं कई महिलाएं ऐसी थी कि उनको काम इच्छा तो होती थी योनि मार्ग में गीलापन भी होता लेकिन चरम सीमा माने क्लाइमैक्स पर पहुंचने के लिए आधे पौने घंटे से भी ज्यादा समय लगता था और पुरुष अमूमन इतना लंबे तक कंटीन्यूअस इंटरकोर्स नहीं चला सकता और वह स्वाभाविक है कि स्त्री से पहले ही चरम सीमा पर पहुंच जाएगा माने ही विल क्लाइमैक्स अर्लिंग पार्टनर ऐसी सिचुएशन में विश्व के ज्यादातर सेक्सुअल मेडिसिन एक्सपर्ट यह
(1:26:57) मानते हैं कि पुरुष की ही ट्रीटमेंट करनी चाहिए स्त्री की नहीं विश्व विख्यात अमेरिकन सेक्स थेरेपिस्ट विलियम मास्टर जिनकी निगरानी में मैंने अपनी अंडर ग्रेजुएट और पोस्ट ग्रेजुएट वर्कशॉप की थी एक जमाने में 1973 और 75 में उनका भी यही मानना था उनका कहना था कि एक पुरुष अगर अपनी स्त्री पार्टनर को 50 पर सहवास के एक्सपीरियंस में माने अगर 10 बार इंटरकोस करता है और अगर पांच बार अपनी पार्टनर को संतोष नहीं दे सकता क्लाइमेक्स पर उसे नहीं पहुंचा सकता तो वह शीघ्र स्खलन से पीड़ित है ऐसा मान के चलना चाहिए और उस पुरुष का इलाज करवाना चाहिए हकीकत में ऐसी
(1:27:43) सिचुएशन में पुरुष का इलाज मुश्किल ही नहीं नामुमकिन है क्योंकि 45 मिनट तक कंटीन्यूअस सहवास करना किसी भी पुरुष के लिए अमूमन नामुमकिन है अगर पुरुष दूसरे तरीके भी इस्तेमाल माल करें जैसे कि मुख मैथुन या हस्त मैथुन तो भी स्त्री पार्टनर को आसानी से संतोष देना शायद मुश्किल होगा हकीकत में ट्रीटमेंट की जरूरत स्त्री को है उसके डिलेड माने विलंबित ऑर्गेजम के प्रॉब्लम के लिए स्त्री का इलाज करवाना जरूरी है ना कि पुरुष का ऐसे सिचुएशन में अगर वो स्त्रियां वाइब्रेटर का इस्तेमाल करती है तो 45 मिनट के बजाय वह सिर्फ पाच मिनट में चर्म सीवा पर पहुंच जाती थी और
(1:28:32) उनको सुकून भी मिल जाता था और इससे दोनों पार्टनर्स काफी खुश रहते थे जब महिलाओं को सहवास में संतोष नहीं मिलता तो उनके स्वभाव पर एक विपरीत असर पड़ सकती है उनके स्वभाव में चिड़चिड़ापन आ जाता है छोटी-छोटी बात पर बेवजह वह इरिटेट हो जाती अपने पति और बच्चों पर बेवजह गुस्से हो जाती है और घर का पूरा माहौल अशांत बना देती है ऐसे सिचुएशन में सेक्स टॉयज उनके लिए संतोष और मानसिक शांति प्रदान कर सकते हैं क्योंकि अगर एक स्त्री उत्तेजित हो जाए और उसके बाद उसे क्लाइमेक्स या ऑर्गेजम ना हो सुकून ना मिले और वह आधे में ही रह जाए तो वह काफी अपसेट हो जाती
(1:29:21) काफी निराश फील करती है और अगर ऐसी हरकत बार-बार होती है तो वह स्त्री अमूमन डिप्रेशन चली जाती है और अमूमन मानसिक रूप से अस्वस्थ बन जाती है ऐसी अवस्था में एक ही चीज है जो उसे स्वस्थ बना सकती है और वह है सुकून और उसके लिए सुकून का एक मात्र जरिया कभी-कभी सिर्फ सेक्स टॉयज ही हो सकता है दूसरे किस्से के बारे में अब हम बात करते हैं जहां सेक्स टॉयज काफी मदद रूप हुए थे मेरे पास कई महिलाएं ऐसी आई थी जिन महिलाओं के पति का देहांत हो गया था बच्चे बड़े हो गए थे लेकिन उनकी काम इच्छा स्वाभाविक रीत से बरकरार थी और उनके
(1:30:09) पारिवारिक माहौल में दूसरी शादी के लिए वह सोच भी नहीं सकती थ लेकिन संतोष हर एक व्यक्ति के लिए जरूरी है आवश्यक है उसके पास संतोष लेने के दो ही विकल्प थे या तो किसी व्यक्ति से सहवास करें जो अपनी समाज व्यवस्था में मान्य नहीं है और दूसरा अपने आप को सुकून पा ले और अपने आप सुकून पाने में सेक्स टॉयज काफी मदद रूप बन सकते कई बार ऐसे भी सिचुएशन आते हैं कि जहां पति काम के लिए पैसे कमाने के लिए विदेश जाते हैं खास करके ऐसे सैकड़ों लोग गल्फ कंट्रीज में काम करने के लिए जाते हैं उनकी महिलाएं अपने संतोष के लिए क्या
(1:30:54) करें एक्स्ट्रा मेरिटल अफेयर सोसाइटी में एक्सेप्ट नहीं है साथ ही साथ उसमें एसटीआईओ प्रेगनेंसी का भी खतरा रहता है ऐसे सिचुएशन में सेक्स टॉयज और वाइब्रेटर्स मदद रूप हो सकते हैं सोसाइटी के दायरे में रह के वह अपने आप को संतोष प्राप्त कर सकती है किसी अनजान व्यक्ति से सहवास करके अनिनी गर्भावस्था माने अनवांटेड प्रेगनेंसी एसटी आई और एचआईवी जैसी खतरनाक बीमारियों से बच सकती है अगर हम अपने आप को इस सिचुएशन में देखेंगे तो लगेगा कि सेक्स चॉइस से स्व संतोष लेना यकीनन एक बेहतर विकल्प है कई
(1:31:43) बार ऐसे केसेस भी आ जाते हैं जिसमें पुरुष को कामेच्छा होती थी शिष्ण में उत्तेजना भी ठीक से आती थी लेकिन वह चरम सीमा माने क्लाइमेक्स पर पहुंच नहीं सकता था हालांकि उसे स्वप्न रेगुलरली होता था लेकिन जागृत अवस्था में कभी भी विरय स्खलन नहीं हुआ था जागृत अवस्था में कभी भी क्लाइमेक्स का अनुभव नहीं किया था अगर वह क्लाइमेक्स पर पहुंचेगा नहीं तो उसे अमूमन वीरय स्खलन होगा नहीं अगर विरय स्खलन नहीं होगा तो बच्चा पैदा करने का तो सवाल ही पैदा नहीं होता हमारे देश में शादी के दो साल अगर निकल गए तो फैमिली के बुजुर्ग बड़े लोग
(1:32:28) पूछते हैं कि आपने बच्चे के लिए क्या प्लानिंग किया है ऐसी सिचुएशन में अक्सर स्त्री को ही दोषी ठहराया जाता है कि उसी में कुछ कमी है जिसकी वजह से बच्चा नहीं हो रहा है और डॉक्टरों को कंसल्ट करना शुरू हो जाता है हकीकत में इजेकुलेशन ना होने का प्रॉब्लम उसके पति का है इलाज उसके पति को करवाने की जरूरत है ऐसे सिचुएशन में पुरुष को इजेकुलेशन तक पहुंचने के लिए एक मात्र उपाय है जो यूरोलॉजिस्ट और एंड्रोलॉजिस्ट अपनाते हैं और वह है हाई स्पीड वाइब्रेटर जो शिश्न के वेंट्रल सरफेस माने नीचे वाले भाग पर रखकर वाइब्रेट किया जाता है और जिसकी हाई स्पीड
(1:33:14) कंपन की वजह से पुरुष इजेकुलेशन तक आसानी से पहुंच सकता है वह वीर्य स्त्री की योनि में ट्रांसफर करके महिला आसानी से प्रेग्नेंट हो सकती है दो चार बार वाइब्रेटर के इस्तेमाल करने के बाद कभी-कभी ऐसा भी होता है कि पुरुष की जिगर माने हिम्मत खुल जाती है ऑर्गेजम की फीलिंग का एहसास हो जाता है उसको अनुभव हो जाता है और अक्सर बाद में बिना वाइब्रेटर यूज किए भी वह इजेकुलेशन तक पहुंच जाता है माने बिना वाइब्रेटर उसे विद स्खलन होने लगता है और बच्चा पैदा करने के लिए किसी डॉक्टर के पास जाने की जरूरत भी नहीं रहती
(1:34:00) ऐसे सिचुएशन में बच्चा पैदा करने का एक मात्र उपाय है हाई स्पीड वाइब्रेटर इसका प्रयोग मुझे पहली बार 1985 में सेवंथ वर्ल्ड कॉन्फ्रेंस ऑफ सेक्सोलॉजी न्यू दिल्ली में कोपनहेगन के डॉक्टर गोम वागन ने बताया था और तब उन्होंने हाई स्पीड वाइब्रेटर के इस उपयोग के बारे में बात की थी कुछ लोग हैंडीकैप होते कुछ लोगों ने शादी नहीं की होती है किसी को पार्टनर नहीं होता है वह क्या करें काम इच्छा तो हर एक में बनी रहती है कामेच्छा की मिसाल एक नदी के बाड़ जैसी होती है आप बाड़ को रोक नहीं सकते लेकिन चैनला इज
(1:34:45) जरूर कर सकते हो उसी तरह ऐसे सिचुएशन में पुरुष लाइलाज हो जाता है उसके पास संतुष्टि का और कोई रास्ता दिखाई नहीं देता आई सिचुएशन में सेक्स टॉयज काम इच्छा की पूर्ति के लिए सहायक हो सक यह सेक्स टॉयज कृत्रिम योनि के फॉर्म में भी होते हैं और उसे मेल मास्टरबेटर्स कहा जाता है यह तरह तरह के शेप्स में आते हैं मिसाल के तौर पर योनि के शेप में मुंह के शेप में गुदा के शेप में अंदर का मटेरियल सॉफ्ट और उत्तेजना प्रदान करने वाला होता है इत्तफाक की बात यह है कि महर्षि वादसा ने 1600 साल पहले अपने कामसूत्र में भी ऐसी
(1:35:33) ही कृत्रिम योनि का जिक्र किया है सेक्स टॉयज में इन्फ्लेट बल लव डॉल्स भी शामिल है जो फुलाने से एक फुग्गे की तरह लाइफ लाइक माने पाच से 6 फुट तक एक फीमेल लव डॉल तैयार हो जाती है जिसके प्राइवेट पार्ट में वाइब्रेटर भी जुड़ा हुआ रहता है कई बार एक व्यक्ति अकेला है अपंग है एचआईवी एड्स से ग्रसित है या और कोई एसटीआईआईआईजी करना या एड्स जैसे खतरनाक बीमारी से
(1:36:23) पीड़ित करने से बेहतर है कि वह किसी इन्फ्लेट बल डॉल्स का सहारा ले ले ताकि वह अपने आप को संतोष पा सके और साथ में एक सुरक्षित समाज की रचना में भी सहायता कर सके आप यह सुनके हैरान होंगे कि 1600 साल पहले ऋषि वात्सायन ने ऐसी डॉल्स का भी जिक्र किया था जिसे वह प्रतिमा कहते थे प्रतिमा माने स्टैचू या डॉल उस वक्त भी यह लव डॉल्स मौजूद थी आज मॉडर्न जमाने की इन्फ्लेटेड लव डॉल्स और कुछ भी नहीं वह बिल्कुल पुराने जमाने की प्रतिमा का एक प्रतीक ही तो है मैं आज तक करीबन 55000 मरीज देख चुका हूं बहुत सारी महिलाएं नॉर्मल इंटरकोर्स
(1:37:13) के दौरान क्लाइमेक्स पर नहीं पहुंच सकते उनको थोड़ा एक्स्ट्रा उत्तेजना की आवश्यकता रहती है ज्यादातर यह उत्तेजना क्लिटोरिस को सहला कर लेना पसंद करती ऐसे सिचुएशन में भी सेक्स टॉयज मदद रूप हो सकते हैं मेरे यहां आने वाली लेडीज पेशेंट में 10 से 12 परट पेशेंट मल्टी ऑर्गेजम थी माने पुरुष एक बार क्लाइमेक्स पर पहुंचने के बाद फिर से तुरंत सहवास करने के लिए उत्तेजित नहीं हो सकता वह असमर्थ हो जाता है लेकिन कुछ स्त्रियों को क्लाइमेक्स पहुंचने के बाद थोड़ी एक्स्ट्रा उत्तेजना की आवश्यकता होती है ताकि वह दोबारा
(1:37:58) क्लाइमेक्स पर पहुंच सके कहने का मतलब है देर आर 10 टू 12 पर ऑफ द वमन हु आर मल्टी ऑर्गेजम ऐसे सिचुएशन में पुरुष करे तो क्या करें सेक्स टॉयज ऐसे सिचुएशन में बेहद कारगर हो सकते हैं आज के जमाने में महिलाएं भी काम करती है जॉब या एजुकेशन के लिए अक्सर अपने घर से दूर रहती है जब व्यक्ति अकेला रहता है जवान होता है जब व्यक्ति की काम इच्छा और जोश जुनून बढ़ता है तो किसी अनजान व्यक्ति के साथ सहवास करके एसआई एचआईवी एड्स या अनवांटेड प्रेगनेंसी के शिकार बनने से पॉकेट
(1:38:44) वाइब्रेटर्स बेहतर विकल्प हो सकता है खुद के लिए भी और सुरक्षित समाज के लिए भी हां सेक्स टॉयज के इस्तेमाल के साथ-साथ कुछ प्रिकॉशन लेना भी जरूरी है पर्सनल यूज के लिए वही चुनना चाहिए जिसका स्पर्श आपको बेहतर लगे और आसानी से क्लीन हो सके यह सेक्स टॉयज आप तक ही सीमित रखिए शेयर ना करें जब भी आप इस्तेमाल करें उसके ऊपर कंडोम का इस्तेमाल अवश्य करें क्योंकि कंडोम एप्टिक होते हैं अगर आप लुब्रिकेंट लगाना चाहे तो वाटर बेस लुब्रिकेंट ही लगाएं अक्सर वाइब्रेटर्स में स्पीड होती है शुरुआत स्लो स्पीड से करें याद रखें
(1:39:34) सेक्स टॉयज आपके लिए और आपके पार्टनर के लिए एक नई फोर प्ले एक्टिविटी भी प्रदान कर सकता है सेक्स टॉयज तरह तरह के आते हैं तरह-तरह के शेप के आते हैं शिष्ण के शेप के आते हैं योनि के शेप के आते हैं वाइब्रेटिंग आते हैं नॉन वाइब्रेटिंग आते हैं योनि मार्ग में जी स्पॉट स्टिम्युलेट करें ऐसे आते हैं और पी स्पॉट सिमट करें ऐसे भी आते हैं यह सेक्स टॉयज में उसी तरह की कंपन होती है जो सलोन में या ब्यूटी पार्लर्स में इस्तेमाल किए जाने वाले हेड मसाजर्स या फेस मसाजर्स में होती है सेक्स टॉयस में भी कंपन तो वही होती है सिर्फ शेप प्राइवेट पार्ट्स का होता है जब हम
(1:40:22) वाइब्रेटर सरक लगाते हैं और मसाज लेते हैं या फेस को लगाते हैं या वाइब्रेटर से बैक मसाज लेते हैं तो कोई कुछ नहीं कहता लेकिन अगर प्राइवेट पार्ट्स को लगाते हैं तो मेरे घर में या आपके घर में सब लोग कहेंगे ऐसा गंदा करते म पहले से हमारे दिमाग में यह बात बिठाई जाती है फिक्स कर दी जाती है कि प्राइवेट पार्ट्स कोई खास चीज है और उससे जुड़ी हुई हर एक चीज भी खास है हकीकत में यह कोई खास चीज नहीं है जैसे हाथ है पांव है दूसरे अंग है वैसी य आम चीज है अगर सेक्स टॉय का सही इस्तेमाल प्राइवेटली आप अपने पर्सनल आनंद के लिए सीमित रखते हो
(1:41:09) तो यह आपके लिए और आपके पार्टनर के लिए यकीनन फायदेमंद हो सकता है नुकसान दे हरगिस नहीं एचआईवी एड्स यह बीमारी लाइलाज होने की वजह से या इस विषय में जानकारी कम होने की वजह से यह द जा रही है इसकी रोकथाम जरूरी है और वह भी वॉर फूटिंग पर यानी युद्ध स्तर पर अक्सर लोग इस बीमारी के लिए दो शब्द फ्रीक्वेंसी सिंड्रोम और यह बीमारी होती है एचआईवी से माने ह्यूमन इम्यूनो डेफिशियेंसी
(1:41:57) जो स्लोली बदन के इम्यून सिस्टम को जो इंफेक्शन से बचने के लिए काम आती है उस इम्यून सिस्टम को कमजोर कर देता है जिसकी वजह से आम इंफेक्शन भी जानलेवा साबित हो जाता है एचआईवी और एड्स में फर्क इतना है कि एचआईवी एक वायरस है जिसकी वजह से एड्स होता है एड्स एचआईवी का एडवांस स्टेज है एचआईवी होने के बाद बदन की डिफेंस सिस्टम इतनी कमजोर हो जाती है कि मामूली इंफेक्शन भी व्यक्ति के लिए जानलेवा बन जाते हैं शुरुआत में तो खून की तपास में भी सब कुछ नॉर्मल दिखाई देता है क्योंकि इस वायरस का इनक्यूबेशन पीरियड
(1:42:43) थोड़ा लंबा होता है करीबन 90 दिन का इस दौरान भी व्यक्ति इफेक्टिव होता है और अपना इंफेक्शन दूसरे को ट्रांसमिट भी कर सकता है यह हकीकत है में बहुत ही डेंजरस स्टेज है क्योंकि पेशेंट और उसका पार्टनर दोनों को इस रिस्क का अंदाज नहीं होता इसलिए वह कोई प्रिकॉशन भी नहीं लेता यह बीमारी ऐसी है कि जब तक व्यक्ति की इम्यून सिस्टम कमजोर नहीं पड़ जाती तब तक एचआईवी का पता ही नहीं पड़ता सिर्फ देखने से व्यक्ति के एचआईवी का स्टेटस का अंदाजा लगाना मुमकिन नहीं कई बार लोग पूछते हैं कि ऐसा हो सकता है कि सालों तक व्यक्ति एचआईवी पॉजिटिव रहने के
(1:43:31) बाद भी एड्स डेवलप नहीं होता है और अपने आप व एचआईवी नेगेटिव भी बन जाता है हकीकत में ऐसा होना मुमकिन नहीं है एक बार अगर व्यक्ति एचआईवी पॉजिटिव हो गई तो बाद में कभी ना कभी उसका अंजाम एडस होना ही होना है चाहे वह दो साल लगे कि 10 साल लगे या उससे ज्यादा भी लगे एक बार व्यक्ति एचआईवी पॉजिटिव हो गई तो जीवन भर एचआईवी पॉजिटिव ही रहेगी अभी आप जानना चाहेंगे कि यह एचआईवी एक दूसरे को ट्रांसमिट कैसे होता है असुरक्षित सहवास यानी अनप्रोटेक्टेड सेक्सुअल एक्टिविटी चाहे वह सजातीय हो कि विजातीय चाहे वह योनि मैथु से हो मुख मैथु
(1:44:20) से हो या गुदा मैथु से हो जहां भी बॉडी फ्लूइड का एक्सचेंज होता है वहां एचआईवी ट्रांसमिट हो सकता है जैसे कंटेम नीडल्स सिरिंस इंजेक्शंस नोज या यर पियर्सिंग टैटूइंग एक्यूपंक्चर इन सबसे भी एचआईवी इंफेक्शन ट्रांसमिट हो सकता है मां से बच्चे को फैल सकता है प्रेगनेंसी के दौरान डिलीवरी के दौरान या एचआईवी ग्रसित माता के दूध के जरिए भी हो सकता है इफेक्टेड ब्लड और ब्लड प्रोडक्ट से भी फैल सकता है कई बार आर्टिफिशियल इनसेमिनेशन के दौरान इफेक्टेड सीमन से भी फैल सकता है इसलिए बेहतर यही होगा कि
(1:45:07) स्पर्म बैंक को भी डोनर्स का एचआईवी स्टेटस जानने के बाद ही सीमन लेना चाहिए कुछ हाई रिस्क ग्रुप भी होते हैं जिसमें एचआईवी इंफेक्शन से ग्रसित होने के चांसेस ज्यादा होते हैं मिसाल के तौर पर मेल होमोसेक्सुअल्स जो कपल्स गुदा में में ज्यादा इंटरेस्ट रखते हैं कमर्शियल सेक्स वर्कर्स जो लोग ड्रग्स के आदि है और नीडल शेयर करते हैं ऐसे पेशेंट्स कि जिनको बार-बार ब्लड ट्रांसफ्यूजन लेना पड़ता है या डायलिसिस करवाना पड़ता है हाईरिस ग्रुप में जो व्यक्ति मल्टीपल सेक्सुअल पार्टनर्स रखते हैं या जो एसटीटीआई से ग्रसित होते हैं वह भी शामिल हो जाते हैं
(1:45:52) यह वायरस इंफेक्शन दो टाइप के रहते हैं एक एचआईवी वन और दूसरा एचआईवी टू सबसे ज्यादा लोग एचआईवी वन से ग्रसित होते हैं करीबन 80 प्र एचआईवी टू से ग्रसित होने वाली मात्रा करीबन 6 पर रहती है और एचआईवी वन और एचआईवी टू दोनों से ग्रसित होने वाली मात्रा करीबन 14 टक्के के आसपास रहती है एचआईवी का इनक्यूबेशन पीरियड दो से 12 वीक तक हो सकता है लेकिन ध्यान रहे इस दौरान भी वह दूसरों को इफेक्ट कर सकते हैं अगर एचआईवी के लिए किसी को ब्लड टेस्ट करवाना है तो बेहतर है कि असुरक्षित सेक्सुअल
(1:46:40) कांटेक्ट के 90 दिन के बाद ही करवाए यह टेस्ट को एलाइजा टेस्ट कहते हैं और यह टेस्ट एचआईवी वन और एचआईवी दो दोनों का निदान करता है अगर इनक्यूबेशन पीरियड में भी कोई टे टेस्ट करवाना चाहे तो एक ऐसा स्पेशल टेस्ट है जिसे पीसीआर टेस्ट कहते हैं उससे भी एचआईवी का निदान हो सकता है अगर कोई जानना चाहे कि शुरुआत में एचआईवी के सिमटम्स क्या रहेंगे सबसे आम सिमटम्स रहते हैं वजन में गिरावट समझो आपका वजन 80 किलो है तो करीबन 8 किलो तक वजन में गिरावट आ सकती है बहुत लंबे टाइम तक जुलाब और खांसी भी हो सकती
(1:47:25) है और लंबे वक्त के लिए फीवर हो सकता है और पूरे बदन में लिंफ ग्ला माने ग्रंथियों में बढ़ावा और दर्द भी हो सकता है अगर किसी व्यक्ति को एड्स है तो उसका एचआईवी टेस्ट पॉजिटिव आएगा ही हां बीमारी अगर बहुत आगे बढ़ गई है तब इम्यून सिस्टम अगर नॉन रिएक्टिव हो जाए तब कोई एंटीबॉडीज प्रोड्यूस ही नहीं होता और जब कोई एंटीबॉडी ही प्रोड्यूस नहीं होगा तो मुमकिन है कि यह टेस्ट नेगेटिव आ सकता है ऐसी संभावना एड्स के काफी एडवांस स्टेज में हो सकती है वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन का कहना है कि इसमें चार स्टेजेस होते हैं स्टेज वन इसमें कोई सिमम नहीं होते
(1:48:11) लेकिन पूरे बदन में लिम एडिनो पथी हो सकती है माने शरीर में अलग-अलग जगह पर ग्रंथियां बढ़ सकती है और उसमें दर्द हो सकता है स्टेज टू इसमें वजन में गिरावट पाई जाती है साथ में बारबार ख में फंगल इंफेक्शन हो सकते हैं सेबोक डर्मेटाइटिस माने सर में डेंड्रफ हो सकता है और बार-बार मुं में छाले हो सकते हैं और साथ में अपर रेस्पिरेटरी ट्रैक्ट इंफेक्शन माने खांसी जैसी शिकायत भी हो सकती है यह स्टेज में भी व्यक्ति अपना कामकाज कर सकता है अपनी सामान्य गतिविधि कर सकती है स्टेज थ्री इस स्टेज में वजन में ज्यादा गिरावट हो सकती है बदन के कुल वजन से 10 पर से
(1:48:59) ज्यादा वजन कम हो सकता है बिना कारण जुलाब हो सकते हैं उसी तरह बेवजह बुखार आती जाती रहती है मुंह में फंगल इंफेक्शन हो सकता है टीबी हो सकता है निमोनिया या दूसरे बैक्टीरियल इंफेक्शन हो सकते हैं इस स्टेज में व्यक्ति थोड़ा बहुत बैड डन हो जाता है स्टेज फोर जब ये स्टेज में पेशेंट आता है तो समझा जाता है कि उसे एड्स हो गया इस स्टेज में व्यक्ति ज्यादातर बैड रिन हो जाती है एचआईवी इंफेक्शन के स्टेज वन से स्टेज फोर तक हमने यहां बात की मैंने मेरी हॉस्पिटल प्रैक्टिस में कई पेशेंट ऐसे देखे हैं जो स्टेज वन में ही आ
(1:49:45) जाते थे उन्हें यह डाउट रहता था कि शायद वह एचआईवी से ग्रसित तो नहीं हुए हैं तो मैं उन्हें पूछता था कि आपको ऐसा क्यों लग रहा है आप एचआईवी की जांच क्यों करवाना चाहते आते ज्यादातर उनमें पढ़े लिखे लोग रहते थे लेकिन उनका जो जवाब रहता था वोह चौकाने वाला रहता था वो कहते थे कि डॉक्टर साहब हमने शराब पी थी या कोई बोलता था ड्रग्स दिया था और जोश में होश गवा बैठे और अनप्रोटेक्टेड सेक्स कर बैठे अक्सर जब व्यक्ति खास करके शराब या ड्रग्स के नशे में होता है तो उसने अपनी जिम्मेदारियों का ख्याल नहीं रहता और अक्सर व रिस्की बिहेवियर में इंडल्स करता है और असुरक्षित
(1:50:31) सहवास कर बैठता है यह रिस्क जरूर कम हो सकता है अगर व्यक्ति सिर्फ एक ही पार्टनर रखे यानी मोनोगामिस्ट के दौरान हमेशा कंडोम का इस्तेमाल करें कंडोम का उपयोग सही वक्त पर और सही तरीके से करना आवश्यक है दोस्तों कंडो में एक मात्र चीज ऐसी है जिसकी वजह से आप एचआईवी इंफेक्शन की रोकथाम कर सकते हो साथ में दूसरे एसटीआईधाम कर सकते हो और साथ ही साथ अनवांटेड प्रेगनेंसी से भी आप दूर रह सकते हो यह भी जानना जरूरी है कि एचआईवी कब नहीं फैलता माने शरीर के बाहर एचआईवी
(1:51:19) वायरस मर जाता है किसी को मिलने से शेक एंड करने से या किसी की प्लेट में से खाने से या कॉमन टॉयलेट में जाने से एचआईवी स्प्रेड नहीं होता ध्यान रहे मच्छर के काटने से भी एचआईवी का स्प्रेड नहीं होता अगर कोई व्यक्ति एचआईवी पॉजिटिव है तो उसके साथ आप खा सकते हो उसे कपड़ा पहना सकते हो उसकी देखभाल भी कर सकते हो बशर्ते आप प्रॉपर प्रिकॉशन लो तो अगर हम किसी एचआईवी इफेक्टेड व्यक्ति को मिल ले या अगर हमारे घर में कोई एचआईवी इफेक्टेड व्यक्ति है तो हमें पर्सनल तौर पर कुछ प्रिकॉशन लेना आवश्यक
(1:52:04) बन जाता है सबसे आसान और अच्छा तरीका है कि आप अपने हाथ साबुन और पानी से धो डाले इससे आप अपने आप को प्रोटेक्ट कर सकते हो और सामने वाले को भी दूसरे इंफेक्शन से प्रोटेक्ट कर सकते हो स्किन क्रीम या मॉइस्चराइजिंग क्रीम हाथ में लगाए रखें कट्स और एब्रेजन की संभावना इससे कम हो जाएगी अगर आप एचआईवी इफेक्टेड व्यक्ति की नर्सिंग केयर करते हो तो बेहतर होगा कि आप ग्लाउज का इस्तेमाल करें और कहीं भी आपको लगे कि आपके हाथ में कोई कट है या कोई रश है या स्किन में कोई गड़बड़ी है तो उसके ऊपर आप पट्टी बांध दे अगर आपके घर में कोई
(1:52:51) एचआईवी इफेक्टेड व्यक्ति है तो उसका शेविंग रेजर टूथ ब्रश नेल कटर या पियर्स ज्वेलरी और ऐसी कोई भी पर्सनल आइटम शेयर ना करें जब भी आप ल्री करते हैं तो जिस तरह से दूसरी ल्री करते हैं वैसे ही करें लेकिन उसमें एक बड़ा चम्मच ब्लीच डाल दे तो प्रोटेक्शन ज्यादा बढ़ जाएगा कपड़े धोने के लिए गर्म पानी की बजाय नॉर्मल रूम टेंपरेचर का पानी इस्तेमाल करें एक सवाल लोग कॉमनली पूछते हैं डॉक्टर साहब किसिंग से एचआईवी स्प्रेड हो सकता है क्या ड्राई किसिंग से बिल्कुल नहीं लेकिन वेट किसिंग रिस्की हो सकता है अगर मुंह में कोई अल्सर रहा कोई कट रहा
(1:53:38) कोई छाला रहा तो एचआईवी ट्रांसमिट होने के चांसेस बढ़ जाते दूसरा एक आम सवाल लोग पूछते हैं कि अगर व्यक्ति एचआईवी पॉजिटिव रही तो ओरल सेक्स सेफ है बिल्कुल भी नहीं स्त्री के योनि मार् के गीलापन में और पुरुष के कापर गला फ्लूइड और सीमेन में एचआईवी वायरस काफी मात्रा में होते हैं अगर कोई भी पार्टनर के प्राइवेट पार्ट पे या मुंह में कहीं भी क्रैक रही अल्सर रहा कट रहा तो एक पार्टनर से दूसरे में एचआईवी का इंफेक्शन ट्रांसफर होने के चांसेस ज्यादा बढ़ जाते हैं मैं जहां भी लेक्चर देने को जाता हूं चाहे वो मेडिकल हो कि नॉन मेडिकल हो वहां
(1:54:25) एक प्रश्न लोग अवश्य पूछते हैं कि डॉक्टर साहब ना तो मैं होमोसेक्सुअल हूं ना मैं कोई आईवी ड्रग्स लेता हूं फिर भी मुझे एचआईवी टेस्टिंग करवाने की जरूरत है क्या ध्यान रहे आपको एचआईवी टेस्ट करवाने की जरूरत तब रहती है अगर आपको एक से ज्यादा सेक्सुअल पार्टनर हो या कभी आपने अनप्रोटेक्टेड सेक्सुअल इंटरकोर्स किया हो या अगर आपने कोई ब्लड ट्रांसफ्यूजन लिया हो या ऑर्गन ट्रांसप्लांट करवाया हो अगर आप प्रेग्नेंट हो या प्रेगनेंसी प्लान कर रहे हो और आखिर में अगर आप हेल्थ कॉन्शियस हो तो आपको एचआईवी टेस्ट करवा लेना चाहिए कुछ लोग पूछते हैं कि सेफ
(1:55:10) सेक्स क्या है कोई भी सेक्सुअल एक्टिविटी जब दो अन इफेक्टेड इंडिविजुअल्स में होती है उसे सेफ सेक्स माना जा सकता है या किसी भी सेक्सुअल एक्टिविटी में अगर एक्सचेंज ऑफ बॉडी फ्लूइड नहीं होता तो उसे भी सेफ सेक्स मान सकते हो कंडोम का इस्तेमाल भी एक सेफ सेक्स के रूप में जाना जा सकता है हस्तमैथुन भी एक सेफ सेक्स सेक्सुअल प्रैक्टिस है तो सवाल यह उत्पन्न होता है कि क्या कोटस इंटरप्टस सेफ सेक्स नहीं है बिल्कुल नहीं कोटस इंटरप्टस में माने वो सहवास की एक ऐसी प्रक्रिया है कि जिसमें पुरुष खलन अवस्था
(1:55:57) से पहले योनि मार्ग से शिष्ण बाहर निकाल लेता है ताकि खलन योनि मार्ग में ना हो लेकिन कई बार प्रवेश के बाद जब पुरुष थोड़ा एक्साइट होता है थोड़ा उत्तेजित होता है तब खलन से पहले ही एक दो गुन चिकनाहट के बर आ जाते हैं जिसका एहसास कई बार पुरुष को होता ही नहीं है क्योंकि वह उभर के बाहर आते हैं झटके से बाहर नहीं आते और अक्सर इसका उसको अंदाजा लगना मुश्किल होता है इसे कॉपर्स ग्ला फ्लूइड कहते हैं जिसमें एचआईवी वायरस हो सकता है इसके लिए सहवास की यह क्रिया सेफ नहीं है दूसरा एक प्रश्न अक्सर होमोसेक्सुअल पूछा करते हैं कि हम सजातीय तो हैं लेकिन
(1:56:44) एचआईवी एड्स का रिस्क किस तरह से कम हो सकता है हां रिस्क यकीनन कम हो सकता है अगर आप एक मात्र फेथ फुल पार्टनर रखें और जब भी आप सेक्सुअल रिलेशनशिप बनाए चाहे वो ओरल सेक्स हो या आनल सेक्स हो कंडोम का इस्तेमाल अवश्य करें आप गे हो या लेस्बियन हो प्राइवेट पार्ट के सेक्रेशन माने प्राइवेट पार्ट से निकलते हुए स्राव मुंह में लेने से बचे दूसरा एक प्रश्न लोगों के मन में अक्सर मंडराता है कि एनल सेक्स वजाइनल सेक्स से ज्यादा रिस्क क्यों आए इसका कारण बहुत सिंपल है एनस माने गुदाद्वार की जो चमड़ी होती है वह यूनि
(1:57:30) मार्क के कंपैरिजन में बेहद नाजुक होती है इसलिए उसमें कट होने का या टेर होने का या फट जाने का चांस ज्यादा होता है इसलिए एचआईवी वायरस का इंफेक्शन डायरेक्ट और आसानी से ट्रांसमिट हो सकता है एक और सवाल कि अगर किसी व्यक्ति को एसटी आई है तो उसको एचआईवी होने का रिस्क ज्यादा होता है जवाब होगा कि हां बिल्कुल ज्यादा क्योंकि एसटीआईओ माने अल्सर्स पड़ जाते हैं जिसकी वजह से एचआईवी की डायरेक्ट एंट्री वहां पर हो सकती है अक्सर कई बार बॉयफ्रेंड गर्लफ्रेंड में तकरार होती है खास करके जब पुरुष पार्टनर कंडोम पहनने से इंकार करता है तो लड़की क्या करें ध्यान रहे जब भी आप
(1:58:17) सहवास करते हो तो दोनों की म्यूचुअल कंसेंट से दोनों की रजामंदी से करते हो और उस वक्त आप आपके पार्टनर को समझा सकते हो कि अनप्रोटेक्टेड सेक्स से क्याक समस्या हो सकती ज्यादातर लोग समझ जाते हैं अगर फिर भी वह ना समझे और आपको डिसीजन लेना ही है तो आप दिमाग में तीन आर रख के फिर डिसीजन लीजिएगा वह है राइट रिस्पांसिबिलिटी एंड रिस्पेक्ट अगर आपका बॉयफ्रेंड बिगर कंडोम पहने आपके साथ सहवास करना चाहता है तो उसके साथ बिगर कंडोम सहवास करना या ना करना यह आपका हक है राइट है लेकिन राइट के
(1:59:03) साथ रिस्पांसिबिलिटी भी जुड़ी हुई रहती है अगर कंडोम नहीं पहनो ग तो उसका परिणाम क्या हो सकता है उसकी पूरी जिम्मेदारी जानकारी आपको होनी चाहिए ऐसी रिस्क टेकिंग एक्टिविटी में अनवांटेड प्रेगनेंसी भी हो सकती है एचआईवी एड्स या दूसरे एसआई भी हो सकते हैं यह आपको मालूम होना चाहिए और साथ ही साथ एक दूसरे का रिस्पेक्ट बरकरार रखते हुए आप तीन आर दिमाग में रख के जो भी डिसीजन लोगे ज्यादातर सही होगा सहवास के दौरान फैलने वाले एचआईवी से कैसे सुरक्षा मिल सकती है यह भी एक आम सवाल है बेहतर यही होगा कि आप अनजान व्यक्ति से सहवास ना
(1:59:50) करें और मल्टीपल पार्टनर्स अवॉइड करें दूसरा ऐसी कोई भी एक्टिविटी नाना करें जिसमें एक्सचेंज ऑफ बॉडी फ्लूइड हो तीसरा और आखिरी हर वक्त कंडोम का इस्तेमाल करें सावधान रहे सतर्क रहे क्योंकि सावधानी में ही सुरक्षा है और सुरक्षा ही एड्स का एकमात्र इलाज है कई बार लोग पूछते हैं कि सब जो दोनों पार्टनर्स एचआईवी इफेक्टेड है तो सहवास के दरमियान उन्हें कोई प्रिकॉशन लेने की जरूरत है हां बिल्कुल जरूरत उन्हें सहवास के दौरान कंडोम अवश्य इस्तेमाल करना चाहिए ताकि वह पार्टनर के थ्रू प्रेगनेंट ना हो और पार्टनर का वायरल
(2:00:37) लोड ना बढ़े कुछ महिलाओं को प्रेगनेंसी के दौरान मालूम पड़ता है कि वह खुद एचआईवी पॉजिटिव है फिर भी वह बच्चे को जन्म देने का रिस्क लेना चाहते या कुछ महिलाएं मैं एचआईवी से ग्रसित हूं यह जानते हुए भी वह खुद प्रेग्नेंट होना चाहती है क्योंकि वह मातृत्व का एहसास करना चाहती है क्या यह मुमकिन हो सकता है यह मुश्किल है लेकिन मुमकिन है आपको इस विषय के एक्सपर्ट डॉक्टर को मिलना चाहिए वह आपको ऐसी दवाइया दे सकेगा जिससे आपका वायरल लोड कम हो जाएगा साथ ही साथ आप जब बच्चा डिलीवर कर रही हो तब ज्यादातर इंफेक्शन तब होता है जब एमनियोटिक सेक् माने कि एमनियोटिक थैली
(2:01:24) या जिसे वाटर ब्रेक कहते हैं तब होता है बेहतर यही होगा कि आप सिजेरियन से ही डिलीवरी करवाएं बच्चा आ जाने के बाद उसे ब्रेस्ट फीड ना करें और बच्चे को प्री च्यूड फूड माने खुद का चबा हुआ खाना ना दें सीडीसी सेंटर फॉर डिसीज कंट्रोल अमेरिका का ये कहना है कि बच्चे के जन्म के बाद उसे चार से छ हफ्ते के लिए एंटीवायरल ड्रग्स देना उचित होगा एक जमाना था जब एचआईवी पर इतनी दवाइयां उपलब्ध नहीं थी उसके बावजूद अमेरिका में एचआईवी ग्रसित गर्भवती माता से होने वाले बच्चे को
(2:02:10) एचआईवी ट्रांसफर होने की मात्रा 25 पर थी और आज मॉडर्न मेडिसिन की उपलब्धता से यह रिस्क 1 पर तक आ गया है लोग पूछते हैं क्या एड्स के लिए कोई न कारगर है एजुकेशन एक मात्र वैक्सीन है और सुरक्षा एक मात्र इलाज है माने एजुकेशन इज द ओनली वैक्सीन एंड प्रिवेंशन इज द ओनली क्यर लेकिन कुछ एंटीवायरल ड्रग मौजूद है जिसकी वजह से एचआईवी ग्रस्त व्यक्ति की क्वालिटी ऑफ लाइफ बेहतर बन सकती है और क्वांटिटी ऑफ लाइफ की बात करें तो कुछ और वर्ष जिंदगी में जुड़ सकते हैं अब हम
(2:02:56) एचआईवी इफेक्टेड व्यक्ति की सेक्सुअल लाइफ के बारे में बात करें जितने केसेस मैंने देखें उसमें पुरुष और स्त्री दोनों की कामेच्छा और चर्म सीमा के आनंद में कोई बदलाव नहीं आया हां जब तबीयत ठीक नहीं रहती थी बुखार आता जाता था ज्यादा जुलाब होते थे शरीर की ताकत में थोड़ी बहुत कमी आ जाती थी तब इरेक्टाइल फंक्शन में थोड़ी बहुत कमी अवश्य आ जाती मैंने ऐसे भी बहुत पेशेंट देखे हैं कि जो अनजान व्यक्ति के साथ अनप्रोटेक्ट सेक्सुअल इंटरकोस करने के बाद इतने डर गए थे कि बात मत पूछो 90 दिन के बाद उनका एचआईवी टेस्ट नेगेटिव आने के बावजूद भी हर
(2:03:45) 15 दिन में एक बार एचआईवी टेस्ट करवाते कुछ लोग बेहद एंजाइटी में आ गए थे तो कुछ लोग मेजर डिप्रेशन में चले गए उनका आठ 10 पाउंड वजन भी कम हो गया सिर्फ इसी खौफ से कि मुझे एड हो गया तो लोग क्या सोचेंगे समाज क्या सोचेगा और यह बीमारी तो लाइलाज है मेरा क्या होगा मैं आपसे एक हकीकत शेयर करने जा रहा हूं इसमें कोई शक नहीं है कि एचआईवी एड्स की बीमारी लाइलाज है लेकिन साथ में यह भी जान ले कि एचआईवी ग्रसित हो जाना इतना आसान नहीं है कुछ इंटरनेशनल रिसर्च के अनुसार अनप्रोटेक्टेड
(2:04:30) सेक्सुअल इंटरकोर्स यानी असुरक्षित सहवास में एचआईवी पॉजिटिव होने के चांसेस सिर्फ वन इन थाउ रहते हैं लेकिन यह बीमारी लाइलाज है इसके लिए आप सावधान रहे सतर्क रहे और आपका सुर सुरक्षित रहना बेहद आवश्यक हर एक इंसान इस मोड़ से इस सफर से कभी ना कभी गुजरता जरूर है कई बार ऐसा महसूस होता है कि लव और सेक्स दोनों एक दूसरे पर निर्भर है लेकिन ऐसा नहीं प्यार सेक्स के बिना हो सकता है और सेक्स प्यार के बिना हो सकता
(2:05:16) है अगर दोनों साथ में हो तो वह रिश्ता काफी खूबसूरत बन जाता है संबंध सुहाना बन जाता है कभी-कभी जिंदगी में ऐसा भी होता है कि आपका प्यार आपकी चाह किसी और से होती है और जिंदगी में कोई और आ जाता है तब जिंदगी इतनी सुहानी नहीं रहती मेरस के कवि भरत भूषण ने ऐसी ही सिचुएशन को नजर में रख के शायद लिखा होगा कि जिंदगी विसंगतियों के द्वार पर इस तरह रोई चाहों में कोई और बाहों में कोई कहते हैं कि अच्छी रिलेशनशिप के लिए मोहब्बत की आखिरी मंजिल हम बिस्तरी यानी सहवास हो सकती है
(2:06:04) लेकिन सहवास की आखरी मंजिल मोहब्बत हो वह जरूरी नहीं प्यार मोहब्बत एक बहुत पावरफुल फीलिंग है जिसमें दो व्यक्ति एक दूसरे में डिसोल्व हो जाते हैं पिघल जाते हैं इस हद तक कि सामने वाले की खामियां भी खूबिया नजर आती है लव महत को शब्दों में बयान करना मुश्किल है किसी ने क्या खूब कहा है कि मोहब्बत क्या है और तासीर मोहब्बत किसको कहते हैं मोहब्बत क्या है और तासीर मोहब्बत किसको कहते हैं तेरा मजबूर कर देना मेरा मजबूर हो जाना सेक्सुअल डिजायर या सेक्सुअल लव में एक इंपल्स होता
(2:06:49) है जिसका आखिरी धय शारीरिक संबंध होता है अगर सीधे शब्दों में कहे तो सेक्सुअल लव का अंतिम े इंटरकोर्स होता है लेकिन जब यही सहवास आप जिसे प्यार करते हो जिसे मोहब्बत करते हो उसके साथ होता है तो एक अजीब संतोष होता है अजीब सुकून का एहसास होता है इसमें सिर्फ शारीरिक संतोष नहीं लेकिन शारीरिक और मानसिक दोनों संतोष शामिल होते हैं दो दोनों की शांति का एहसास होता है जैसे ही व्यक्ति युवावस्था में आती है तभी उसके हार्मोन में इजाफा होता है जिसकी
(2:07:36) वजह से जोश जुनून बढ़ता है और साथ ही साथ इंटरनेट और फिल्मों की असर दिमाग पर हावी हो जाती है और लव एंड सेक्स दोनों के लिए एक अनरियलिस्टिक एक्सपेक्टेशन डिवेलप होते हैं जब कोई खूब खूबसूरत व्यक्ति के साथ मिलाप होता है और आपको ऐसा एहसास होता है कि आपको उससे प्यार हो गया है तो कई बार व्यक्ति उसमें खो जाता है लेकिन यह शायद खिंचाव हो सकता है सिर्फ आकर्षण हो सकता है यह आकर्षण सिर्फ कुछ समय तक ही रहता है और फिर यह जादू टूट जाता है जिस तरह से शराब का नशा उतर जाता
(2:08:26) है वैसे ही यह आकर्षण का नशा भी उतर जाता है जब आपको प्यार होता है तो सिर्फ सूरत से नहीं होता उसमें सीरत से भी प्यार होता है सीरत माने स्वभाव पर्सनालिटी व्यक्ति की पर्सनालिटी से भी आपको मोहब्बत होती है एंड द केमिस्ट्री बिटवीन द टू पार्टनर्स इज इरिप्लेसेबल यहां पर यह प्यार अन कंडीशनल होता है यह प्यार कोई शर्तों पर नहीं होता है दोनों के बीच में एक कंफर्ट जोन होता है एक दूसरे के लिए त्याग की भावना होती है माने अपने पार्टनर की खुशी में खुद की खुशी का एहसास होता है और एक दूसरे की पसंद नापसंद
(2:09:15) का भी एहसास मौजूद होता है यहां पर बार-बार आई लव यू कहक रिपीटेड वर्बल अ की जरूरत नहीं रहती एक दूसरे की मौजूदगी और एक दूसरे की अंडरस्टैंडिंग ही सब कुछ बयान कर देती जहां सिर्फ अट्रैक्शन होता है वहां पर हर चीज एक परिकथा जैसी होती अट्रैक्शन आहिस्ता आहिस्ता कम हो जाता है खत्म हो जाता है उसके बाद एक दूसरे की कंपनी इंटरेस्टिंग लगने की बजाय बोरिंग लगने लगती है और कई बार व्यक्ति व रिलेशनशिप से बाहर निकल जाने की भी कोशिश करता है यहां
(2:10:02) शादी और संबंध तो बरकरार रहता है लेकिन रिश्ता खत्म हो जाता जब भी आप सचमुच एक दूसरे के प्यार में होते हो एक दूसरे को चाहते हो तो अट्रैक्शन या शारीरिक आकर्षण बहुत कम मायने रखता है आपकी एक दूसरे के साथ की केमिस्ट्री बरकरार रहती है और संबंध जीवन भर बना रहता है और सेक्स एक फन या आनंद का जरिया बन जाता है माने सिर्फ अपीयरेंस से आकर्षण से या मटेरियल चीजों से जो रिलेशनशिप बनी रहती है वह समय के साथ-साथ या कभी-कभी फाइनेंशियल क्राइसिस में कम हो सकती है या
(2:10:50) खत्म भी हो सकती लेकिन जब आपका प्यार सिर्फ आकर्षण पर या मटेरिया चीज पर निर्भर नहीं होता तब जो भी वक्त आप अपने पार्टनर के साथ गुजारते हो वह काफी रंगीन होता है और वह आप दोनों अच्छी तरह से एंजॉय कर सकते हो इट्स द क्वालिटी ऑफ टाइम दैट मैटर्स एंड नॉट द क्वांटिटी अगर आप सचमुच किसी के प्यार में हो तो आउटर अपीयरेंस और मैटेरियलिस्टिक चीजें बहुत मायने नहीं रखती इसमें कोई एक्सपेंसिव रेस्टोरा में जाने से कि डिजाइनर कपड़े पहनने से या महंगी ज्वेलरी पहनने से आपके प्यार
(2:11:36) में इजाफा नहीं होता या तो कोई सिंपल जगह पर जाने से या किसी ऑर्डिनरी रेस्टोरा में खाने से वह प्यार कम नहीं हो जाता हकीकत में आप कहीं भी जाओ आप एक दूसरे की मौजूदगी और कंपनी इतनी एंजॉय करोगे कि एक सिंपल आउटिंग भी रोमांटिक इवेंट में बदल जाएगा प्यार वाले रिश्ते में जब सेक्स की बात आती है वहां एस कंपेयर टू कैजुअल हुकप यह काफी एंजॉयबल और फुलफिलिंग रहता है जब भी आपका सेक्सुअल एनकाउंटर आप जिससे प्यार करते हो उसके साथ होता है तो वह काफी रोमांचक होता है समझिए
(2:12:24) कि आपकी सेक्सुअल रिलेशनशिप एक कैजुअल हुकप है या वन नाइट स्टैंड है तो वह शारीरिक संतोष का एक मात्र जरिया बन जाता है और क्लाइमेक्स हो जाने के बाद पूरा का पूरा नशा उतर जाता जब सेक्सुअल रिलेशनशिप में प्यार शामिल होता है तब दोनों में एक दूसरे पर एक ट्रस्ट एक विश्वास विराजमान होता है एक सेंस ऑफ सिक्योरिटी पैदा होती है जब आप आप ऐसी व्यक्ति के साथ सेक्स कर रहे हो जिससे आपको मोहब्बत है तब आपको उसमें यह फिक्र नहीं रहती कि आपको किसी भी तरह से कोई जज करने वाला है कि आपको किसी जरूरतें पूरी करने की है यह सब चीजों का
(2:13:11) दिमाग पर टेंशन नहीं रहता क्योंकि एक दूसरे को आप प्यार करते हो एक दूसरे को आप समझते हो एक दूसरे पर आप भरोसा करते हो जब आप किसी अनजान व्यक्ति से सेक्स करते हो तो इसमें इनसिक्योरिटी की फीलिंग हमेशा बनी रहती कि यह मेरे बारे में किसी को बता तो नहीं देगा मेरे फोटोस और वीडियोस किसी के साथ शेयर तो नहीं करेगा और जो लोग वन नाइट स्टैंड वाले होते हैं वहां प्यार मोहब्बत नहीं होती वहां सिर्फ फिजिकल नीड सेटिस्फाई करने का एक मात्र धय बना रहता है और ऐसे संबंध में आपको एक खालीपन महसूस होगा और करीब और रोमांस की फीलिंग की हर जगह कमी महसूस होगी वन नाइट स्टैंड और
(2:13:59) कैजुअल हुकअप्स में आपको हमेशा नए तरीके अपनाने की फिक्र बनी रहती है ताकि दोबारा जल्दी मिलन हो सके जब मोहब्बत होती है तो इन चीजों की फिक्र नहीं रहती यह सब नेचुरल तरीके से अपने आप आ जाता है मैरिज में मैरिटल रिलेशनशिप बनाए रखने में सेक्स जरूर एक अहम हिस्सा प्रदान करती है और वह अक्सर एक अत स्तंभ बन सकता है बिगर सेक्स अमूमन शादियां बोरिंग बन जाती है और कई बार लोग अपना सुकून पाने के लिए एक्स्ट्रा मेरिटल अफेयर्स में भी इंडल्स करने लगते हैं शादी का मतलब सिर्फ सेक्स नहीं है
(2:14:47) लेकिन सेक्स शादी का एक महत्व का हिस्सा जरूर है हम कुछ ऐसे पहलुओं पर पर बात करेंगे कि जिसमें हम पॉइंट आउट कर सकेंगे कि यह रिश्ता प्यार भरा है या वासना भरा रिश्ते में मोहब्बत है या सिर्फ सेक्स की अभिलाषा जब आप किसी के साथ प्यार में होते हैं तब आप उसे सिर्फ शारीरिक नहीं बल्कि भावनात्मक रूप से पाने के लिए भी तपते हैं लेकिन जब उस रिश्ते में सिर्फ वासना होती है तो आपके पास अपने साथी के लिए जो इच्छा होती है वह ज्यादातर शारीरिक होती है फिजिकल होती है उस इच्छा में गहराई
(2:15:35) नहीं होती एक प्यार भरे रिश्ते में शारीरिक आकर्षण के पीछे अधिक फीलिंग होगी भावनाएं होंगी सिर्फ कामुक रिश्ते में सेक्स वह हो सकता है कि जो चंद वक्त के लिए आपको अपने साथी की करी बियत महसूस कराता है लेकिन प्यार करने वालों में यह नजदीकियां सेक्स के बाद में भी बरकरार रहती है या बढ़ भी सकती है सेक्स के बाद आप दोनों एक दूसरे के बाहों में सुकून से सो सकते हो एक गहराई का अनुभव कर सकते हो इससे विपरीत जहां सिर्फ वासना का वास होता है वहां यह भावनाएं अक्सर क्लाइमेक्स के
(2:16:25) बाद बुझ जाती दूसरा प्यार वाले रिश्ते में आप उनके दोस्तों और परिवारों को जानना चाहते हो आप उनके माता-पिता से मिलना चाहते हो साथ ही साथ आप उन्हें अपने माता-पिता और दोस्तों से भी मिलवा चाहते हो इसका मतलब है कि आप उस रिश्ते को लंबे समय तक देख रहे हो आपके साथी के जीवन में जो दूसरे महत्त्वपूर्ण लोग हैं उनसे मिलना मिलवा प्यार वाले रिश्ते में बहुत ही स्वाभाविक है इससे विपरीत जहां वासना है वहां आप आपके साथी के जीवन में महत्व की
(2:17:11) भूमिका निभाने वाले लोगों को कम या बिल्कुल नहीं मिलवा जाएंगे और ज्यादा महत्व भी नहीं देंगे और एक चीज प्यार भरे रिश्ते में आप फेलर उ से डरते नहीं हो अपनी नाकामयाब खुल के बताते हो उसका मतलब है कि आप और आपके साथी ने विश्वास का एक स्तर स्थापित कर लिया है लेकिन जो लोग वासना में है उनमें ऐसा नहीं होता वह बेवजह खुद को हमेशा स्ट्रांग बताने की कोशिश करते हैं फेलर से डरते हैं क्योंकि उन्हें यह चिंता बनी रहती है कि इससे शायद उनका रिश्ता समाप्त ना हो जाए और एक चीज जब आप प्यार में होते
(2:17:58) हैं तो आप अपने साथी की गलतियों को नजरअंदाज कर देते हैं आप उनके फिगर या उनके लुक्स के बारे में ज्यादा परवाह नहीं करते आप उनको अपने पूरे दिल से प्यार करते हैं उनकी खामिया को स्वीकार करते हैं और वासना भरे रिश्ते में आप किसी भी गलती या किसी भी चीज को एक इशू बना केर उस रिश्ते को आसानी से छोड़ सकते हो और एक चीज प्यार भरे रिश्ते में आप समझौता करने के लिए तैयार रहते हो आप हमेशा अपनी साथी की जरूरतों को प्राथमिकता देते हो मान लीजिए कि आपका साथी नौकरी के लिए एक नए शहर में जाना चाहता
(2:18:42) है और उसने पहले ऐसा कभी नहीं किया है तो आप उस प्यार भरे रिश्ते में हमेशा उसे एंकरेज करोगे उसे सपोर्ट करोगे क्योंकि आप उस रिश्ते को लॉन्ग टर्म के लिए देख रहे हो वासना भर रिश्ते में इससे विपरीत होगा क्योंकि उसमें स्वार्थ की भावना अहम है ना कि त्याग जब भी रिश्ता प्यार भरा रहता है तब आप आपके साथी की जिंदगी में होने वाली हर एक महत्व की घटनाओं में शामिल होते हो उसके आयोजन में हिस्सा लेते हो इन आयोजनों में एक साथ भाग लेकर एक मजबूत और गहरा संबंध बनाते हो इससे विपरीत जब आपके संबंध
(2:19:31) में प्यार नहीं है और सिर्फ वासना ही वासना है तब उस रिश्ते के बाहर आपके साथी से जुड़े हुए बाकी लोगों से उसकी दुनिया से आप कोई संबंध रखना नहीं चाहते बहस करना किसी भी रिश्ते में नॉर्मल है लेकिन जब रिश्ते में सिर्फ वासना शामिल होती है तो आप आप ज्यादातर बहस से बचने की कोशिश करते रहेंगे ताकि उस साथी को खो ना दे यहां स्वार्थ की भावना आहम है लेकिन जब आपका रिश्ता प्यार भरा है तब आप किसी भी समस्या का समाधान निकालने के लिए आपके साथी के साथ बहस कर सकते हैं उस वक्त बहस से आप घबराए नहीं क्योंकि उस समस्या का समाधान
(2:20:19) उसका सॉल्यूशन आपके गहरे संबंध के लिए इंपॉर्टेंट है इसका मतलब यह नहीं है कि एक प्यार भरे रिश्ते में सेक्स के लिए कोई जगह नहीं है या सेक्स की कोई अहमियत नहीं है जैसे कि सिर्फ सेक्स कोई भी प्यार भरे रिश्ते की नीव नहीं हो सकती वैसे यह भी समझना जरूरी है कि सेक्स को हम पूरी तरह से नजरअंदाज भी नहीं कर सकते वह एक प्यार भरे रिश्ते का महत्व का हिस्सा भी है सेक्स प्यार और चाहत एक्सप्रेस करने का एक महत्व का जरिया भी है आप आपके साथी से शादी के कुछ साल के बाद भी उस तरह से
(2:21:07) फिजिकली अट्रैक्ट होते हो जैसे कि अक्सर पहले हुआ करते थे या उसके साथ रोमांस में उसी तरह की दिलचस्पी रखते हो जैसे पहले हुआ करती थी तब आपके साथी को ऐसा भी महसूस होता है उसका पार्टनर भी उसमें इंटरेस्टेड है उसको दिलो जान से चाहता है लेकिन जब कोई अपने साथी से लव मेकिंग करना चाहता है लेकिन उसका साथी उसको यह करने से मना करता है और जब ऐसा बारबार होता है तब उसका यह अर्थ निकल सकता है कि शायद अब आपके पार्टनर को आप में उतना इंटरेस्ट नहीं रहा उतना आकर्षण नहीं रहा आद में ऐसी हरकतें अमूमन एक्स्ट्रा
(2:21:57) मेरिटल अफेयर्स को बढ़ावा भी दे सकती है पार्टनर को ऐसा लग सकता है कि अब वह अनवांटेड है शायद उसकी जरूरत नहीं है इसलिए वह अपनी जरूरतें पूरी करने के लिए कुछ और तरीके बाहर भी ढूंढ सकता है या खुद को उस रिलेशनशिप से विड्रॉ करने की कोशिश भी कर सकता है जिससे दोनों के बीच में एक तनाव एक दरार बढ़ती जाती जरूरी नहीं कि हर एक शादी की सफलता सेक्सुअल एक्टिविटी पर ही निर्भर होती है हर एक कपल के प्रेफरेंस और प्रायोरिटी अलग होते हैं जब तक सेक्सुअल एक्टिविटी में हिस्सा ना लेना एक दूसरे को
(2:22:44) म्यूचुअल एक्सेप्टेबल है और आपका प्यार बरकरार है तब ऐसे रिश्ते में सेक्स न होते हुए भी रिश्ते स् माने रह सकते हैं अमूमन एक्स्ट्रा मेरिटल अफेयर्स व्यक्ति को आनंद देने के बजाय उसकी चिंता बढ़ाने वाली भी हो सकते हैं कुछ लोगों का ऐसा मानना है कि अ फ्लावर इन समवन एल्स गार्डन लुक्स मोर अट्रैक्टिव बट व्हेन व्हेन यू इग्नोर योर ओन हेंस वन शुड ट्राई टू कल्ट वेट हिज ओन गार्डन माने दूसरों के बगीचे का फूल हमेशा ज्यादा खूबसूरत लगता है लेकिन कब जब आप अपने बगीचे के फूल की अवहेलना करते हो तब उसे इग्नोर करते हो तब बेहतर यही
(2:23:32) होगा कि आप अपने ही बगीचे को खूबसूरत बनाए ऐसे सिचुएशन में व्यक्ति को अपने रिलेशनशिप में प्यार और मोहब्बत की जोत हमेशा जलती रहे इसके लिए प्रयास जारी रखने चाहिए जो कपल्स एक दूसरे के साथ प्यार भरे ते में रहते हैं ऐसा देखा गया है कि ज्यादातर वह सेक्सुअल एक्टिविटी में भी ज्यादा इंटरेस्ट बनाए रखते हैं उससे उनकी एक दूसरे के प्रति प्यार की भावना अधिक गहरी हो सकती है इससे विपरीत जो कपल्स आपसी संबंध में सेक्स को एक कैजुअल एक्ट के तौर में लेते हैं
(2:24:20) उन्हें सेक्स के बाद एक लोनली आ जाती एक खालीपन आ जाता है और ऐसा बार-बार होने के बाद रिश्ते में एक दरार पैदा हो सकती है और पास होते हुए भी दूरियां बढ़ जाती अंत में मैं यही बात आपको बताना चाहूंगा कि एक प्यार भरे हेल्दी रिलेशनशिप में आपसी विश्वास और कंफर्ट हो तो दोनों के बीच सेक्सुअल लाइफ भी अच्छी बन सती अच्छा रिश्ता बनाना बहुत आसान नहीं है अच्छे रिश्ते अच्छी रिलेशनशिप बनाने के लिए व्यक्ति को कभी बहरा कभी गूंगा और कभी
(2:25:09) अंधा भी बनना पड़ता है रिश्ता अपने आप बनता नहीं बनाना पड़ता है अगर कोई पूछे कि सिर्फ दो लाइन में सेक्स विथ लव और सेक्स विदाउट लव में क्या अंतर है वो बताएं मेरा जवाब यही होगा कि सेक्स विदाउट लव में सेंशुअल प्लेजरस यानी जोश जुनून के दिए की जगमगाहट अक्सर सेक्स के बाद बुझ जाती है और सेक्स विथ लव में जोश जुनून के दिए की जगमगाहट सेक्स के बाद भी बरकरार रहती अपने यहां
(2:25:54) सेक्स एजुकेशन के तहत लव एंड सेक्स दोनों के लिए प्रीमेट काउंसलिंग यकीनन फायदेमंद हो सकता है अब कोई यह सवाल पूछ सकता है कि प्रीमेट काउंसलिंग में और क्याक बताना चाहिए व्ट वुड यू लाइक टू फोकस इन प्री मेरिटल काउंसलिंग प्री मेरिटल एडवाइस में माने शादी के पहले की एडवाइस में ज्यादातर सहवास की गतिविधियां और पहली बार जब आप सहवास करते हो तो क्याक ध्यान रखना चाहिए क्या एक्सपेक्ट करना चाहिए और क्या नहीं एक्सपेक्ट करना चाहिए उसकी जानकारी होना जरूरी साथ ही साथ फोर प्ले और आफ्टर प्ले की अहमियत क्या है और कितनी है वह भी बताना जरूरी है सेक्सुअल हाइजीन का
(2:26:42) महत्व सुखी दांपत्य जीवन के लिए कितना आवश्यक है वह समझाना चाहिए अगर बच्चा प्लान करते हो तो कौन से पहलुओं का ख्याल रखना चाहिए उसकी जानकारी देनी चाहिए बच्चे कैसे पैदा होते हैं और अनवांटेड प्रेगनेंसी के लिए क्या सावधानी बरतनी चाहिए माने कंसेप्ट और कंट्रा सेप्शन यह दोनों की जानकारी आवश्यक है साथ ही साथ शादी में कम्युनिकेशन की अहमियत एक दूसरे की जरूरतें एक दूसरे की पसंद नापसंद उम्र के साथ होने वाले बदलाव ये सब चीजें शादी के पहले काउंसलर या डॉक्टर के साथ डिस्कस
(2:27:29) करना बेहतर होगा हमने अलग-अलग चैप्टर्स में इसकी डिटेल्स ऑलरेडी डिस्कस की है इसके अलावा उन्हें यह बताना जरूरी है कि शादी के पहले दो ब्लड टेस्ट करवाना बहुत ही आवश्यक एक एचआईवी जिससे एड्स का पता पड़ता है और दूसरा थैलेसीमिया अगर दोनों पार्टनर्स को पता ना हो और दोनों थैलेसीमिया माइनर ट्रेट्स वाले रहेंगे तो बच्चा शायद थैलेसीमिया मेजर वाला पैदा हो सकता है जो बेहद समस्या पैदा कर सकता है कभी-कभी मुझे सवाल पूछा जाता है कि अगर सेक्स एजुकेशन नहीं दिया गया है
(2:28:18) या प्रीमेट काउंसिल नहीं किया है तो शादी के बाद कोई समस्या आ सकती है आपने इतने सारे पेशेंट को काउंसिल किया है आपके अनुभव में कोई यादगार केस हां है एक कपल था पति की उम्र 45 थी और पत्नी की उम्र 43 साल की थी 43 साल की उनकी शादी को 20 साल हो चुके थे फिर भी मैरिज कंजमेट नहीं हुआ था एक गायनेकोलॉजिस्ट ने मुझे ये केस रिफर किया था केस कुछ इस तरह था पति को सेक्सुअल डिजायर था इरेक्शन भी ठीक से होता था लेकिन वह पेनिट्रेट नहीं कर सकता था इसलिए
(2:29:07) वह मैरिज कंजमेट नहीं कर सका पेनिट्रेशन ना करने के बावजूद भी उसका इरेक्शन बना रहता था उसको हस्तमैथुन करने में कोई आपत्ति नहीं होती थी उसकी पत्नी को ना तो वनिस मस था ना तो योनि मार्ग में कोई अवरोध था मुझे मिलने से पहले वह कई डॉक्टर्स को मिल चुके और डॉक्टर्स का यह कहना था कि यह पुरुष कोई मानसिक बीमारी से पीड़ित है मैंने पुरुष की संपूर्ण जांच की वह शारीरिक और मानसिक रूप से संपूर्ण स्वस्थ था उसका शिष्ण और अंडकोष बिल्कुल सामान्य थे मैं मेरी
(2:29:53) हिस्ट्री टेकिंग के दौरान मैं सहवास की गतिविधियां के बारे में भी पूछता हूं सहवास किस पोजीशन में करते हैं वह जानने के लिए कॉटन की बनी हुई मेल और फीमेल डॉल्स का मैं इस्तेमाल करता हूं जब मैंने उनसे पूछा कि आप किस तरह से सहवास करते हो वह मुझे इस डॉल्स के जरिए बताइए जिस तरह से उन्होंने बताया उस वक्त मुझे पता चला कि पुरुष अपना पांव अपने पांव स्त्री के पांव के बाहर रख के पेनिट्रेट करने की सहवास करने की कोशिश करता था जिसमें पेनिट्रेशन बिल्कुल नामुमकिन था यह केस में इलाज सिर्फ इतना ही था कि वह सही पोजीशन में
(2:30:40) सहवास करें माने स्त्री के दोनों पांव के बीच में रहकर पेनिट्रेट करने की कोशिश करें स्त्री के दोनों पांव के बाहर नहीं बस इतना करने से ही व मैरिज कंजमेट कर सके कोटल हिस्ट्री विदेश के हिस्ट्री टेकिंग फॉर्मेट में इंक्लूडेड नहीं है जो यहां खास जरूरी है इनके केस में इलाज सिर्फ यही था सही पोजीशन 20 साल की समस्या दो दिन में दूर हो गई लेकिन उसकी वाइफ ने मुझे पूछा कि डॉक्टर साहब हमारे बच्चे का क्या हमें बच्चा कब होगा मैंने बताया कि मेरी
(2:31:24) स्पेशलिटी संबंध से माने सेक्स से मिले जुले समस्याओं तक सीमित है बच्चे के लिए आप अपने गायनेकोलॉजिस्ट से मिले मैंने गायनेकोलॉजिस्ट को फोन लगाया और उन्हें बताया कि सेक्सुअल प्रॉब्लम सॉल्व हो गया है वो सहवास बराबर कर सकते हैं अभी वह बच्चे की उम्मीद कर रहे हैं गायनेकोलॉजिस्ट ने मुझे फोन पर बता दिया कि डॉक्टर साहब 43 उम्र में बच्चे होने के चांस बहुत ही कम है और आप उन्हें कह दे कि बेहतर यही होगा कि उनके पैसे और मेरा टाइम दोनों बर्बाद ना करें अगर मैं यह बात वह महिला को बताता तो शायद वह कोलप्पा यह ट्रीटमेंट करवाने का उसका एक
(2:32:12) मात्र मकसद बच्चे की चाह ही थी मैंने बच्चे होने के चांसेस कौन से दिन ज्यादा होते हैं कौन सी पोजीशन बेहतर होती है यह सब समझा के उन्हें घर भेजा एक सप्ताह के बाद उनके पति ने मुझे फोन किया कि डॉक्टर साहब संबंध तो बराबर बन रहा है लेकिन मेरी वाइफ को पीरियड आने वाला था वो नहीं आया है तो मैंने कहा कि कई बार नई नई सहवास की शुरुआत होती है तब कभी-कभार पीरियड आने में दो-चार दिन प्लस माइनस हो सकता है आप तीन-चार दिन के बाद मुझे दोबारा फोन करें चार दिन के बाद उनका फिर से फोन आया कि डॉक्टर साहब अभी तक वाइफ को पीरियड नहीं
(2:32:57) आया तब मैंने उन्हें उनकी वाइफ का यूरिन लेके मेरी क्लिनिक में आने को कहा और वह यूरिन प्रेगनेंसी टेस्ट के लिए दो अलग-अलग लेबोरेटरी में भेजा रिपोर्ट दोनों जगह से प्रेगनेंसी पॉजिटिव आया मैं बेहद खुश हो गया मैंने उसी गायनेकोलॉजिस्ट को फिर से फोन किया जिसने मुझे यह केस रिफर किया था और उसे बताया कि इस महिला का प्रेगनेंसी रिपोर्ट पॉजिटिव है गायनेकोलॉजिस्ट भी ताज्जुब हो गई शी वाज प्लेजट सरप्राइज शायद वह महिला पहले ही सहवास में पहले ही इंटरकोस में प्रेग्नेंट हो गई
(2:33:44) थी नौ महीने के बाद महिला की डिलीवरी हुई डिलीवरी नॉर्मल हुई गेस व्ट शी हैड ट्विंस मैं उस प्रश्नों पर चर्चा करने वाला हूं उन सवालों के जवाब देने वाला हूं जो मेल सेक्सुअलिटी से तो जुड़े हुए हैं मगर थोड़े अलग है ऑफ बिट है थोड़े हटके हैं चलो तो शुरू करते हैं एक आम प्रश्न जो सब कुछ होता है कि क्या न्यू बोर्न लड़कों का सरकमसीजन माने खतना करवानी जवाब है निश्चित रूप से नहीं हालांकि खतना कराने के कुछ फायदे हैं और नुकसान भी है
(2:34:32) मिसाल के तौर पर खतना किए हुए पुरुषों को शिश्न का कैंसर का खतरा कम होता है साथ ही साथ उन्हें यूरिनरी ट्रैक इंफेक्शन माने मूत्र मार्गी इंफेक्शन और कुछ एसटीआईएसफाया की ना होने की वजह से कई बार अगर शिष्ण के लाल भाग पर हर पीस हो गया या और कोई जखम हो गया तो उनके लिए कोई सुरक्षा कवच कोई शील्ड नहीं रहता कुछ लोगों में यह भी गलतफहमी रहती है कि जिन्होंने खतना करवाई हुई होती है वह सहवास लंबा चला सकते हैं लेकिन यह हकीकत नहीं है यह गलतफहमी है जब तक कोई निश्चित
(2:35:19) मेडिकल कारण ना हो तो न लड़कों में खतना प्रोत्साहित नहीं करना चाहिए अगर करवानी ही पड़े तो वह मेडिकल सुपरविजन में ही करवानी चाहिए कई बार लोग यह भी पूछते हैं अगर हमें शिन की साइज बढ़ानी हो तो कितनी उम्र तक बढ़ सकती है आमतौर पर यवन प्रवेश की शुरुआत में पुरुष हार्मोन माने टेस्टोस्टेरोन में उछल आता है और धीरे-धीरे यह हार्मोन का स्तर स्थाई हो जाता है उस समय तक यानी अमूमन 18 साल की उम्र तक शिष्ण की साइज बढ़ सकती मैंने एक पूरा लेक्चर पिनी साइज पर लेने के बाद भी
(2:36:06) कुछ लोगों के दिमाग में एक शंका रहती है कि क्या सचमुच दो इंच की साइज स्त्री के संतोष के लिए काफी है जवाब में सिर्फ यही कहूंगा कि हां यह सही है ज्यादातर विश्व की किसी भी का योनि मार्ग करीबन 6 इंच ही होता है आप मेरी एक बात से सहमत होंगे कि जब भी कोई गायनेकोलॉजिस्ट स्त्री के योनि मार्ग की तपास करता है तब वह अपनी उंगली डाल केर तपास करता है ताकि वह योनि मार्ग की अंदरूनी भाग को भी बराबर जांच सके आपने कभी किसी गायनी डॉक्टर की उंगली 5 इंच से ज्यादा लंबी देखी है मैंने तो नहीं देख
(2:36:54) यह समझ लो कि अगर योनि मार्ग की गहराई 6 इंच है तो भी आगे के न थड हिस्से में ही सेंसेशन है संवेदना है अंदर का 4 इंच बिल्कुल संवेदना रहित है माने उसमें सेंसेशन है ही नहीं इससे यह क्लियर हो जाता है कि पुरुष का शिष्ण उत्तेजित अवस्था में दो इंच या उससे ज्यादा हो तो वह स्त्री के संतोष के लिए काफी है एनीथिंग फ्रॉम 2 इंच और मोर इज गुड इनफ फॉर फीमेल पार्टनर सेक्सुअल सेटिस्फैक्ट्रिली हो तो वह क्या
(2:37:57) नपुसंक नहीं एक अंडकोष वाली व्यक्ति की काम इच्छा काम शक्ति और क्लाइमेक्स के वक्त का आनंद और बच्चे पैदा करने की क्षमता में कोई कमी नहीं होती अभी हम एडोले सेंटस की बात करते हैं उनसे कुछ उनके कुछ प्रश्न लेते हैं कई बार यवन प्रवेश के दौरान पुरुष कंप्लेन ले आते हैं कि उनकी चेस्ट बढ़ गई है यह क्या है इसे गायनेको मेस्टिया कहते हैं जो जवानी में कभी कभ पाई जाती है और कई बार एक दो साल में अपने आप ठीक भी हो जाती है हां लेकिन कई बार ज्यादा शराब पीने से लिवर की खराबी
(2:38:43) से किसी और वजह से कि हार्मोन के इंबैलेंस की वजह से और कुछ दवाइयों की वजह से भी ऐसा हो सकता है गायनेकोमैस्टिया के मामूली केसेस को सिर्फ रिएश्योरेंस की जरूरत रहती है अगर गायनेको मेस्टिया दवाइयों की वजह से है तो दवाइयां कम करने से या बंद करने से इसमें फर्क पड़ सकता है लेकिन कुछ किस्सों में यह गायनेको मेस्टिया बहुत बड़ी हो जाती है या व्यक्ति को मानसिक तरीके से बहुत परेशान करती है ऐसे सिचुएशन में प्लास्टिक सर्जरी से इसे आसानी से दूर किया जा सकता है अभी बात शराब की निकली है तो शराब के
(2:39:31) बारे में बात करते हैं कुछ लोग जरूर ऐसा बताते हैं कि थोड़ा शराब पीने से वह सेक्सुअली ज्यादा बेहतर परफॉर्म कर सकते हैं यह बात बिल्कुल सही है कि थोड़ी मात्रा में शराब व्यक्ति की फिक्र चिंता एंजाइटी को दूर करता है और ऐसे सिचुएशन में व ज्यादा कॉन्फिडेंस से अमूमन बेहतर सहवास कर सकता है लेकिन अगर शराब की मात्रा थोड़ी ज्यादा हो गई तो कई बार इरेक्शन आता ही नहीं ऐसे सिचुएशन में पुरुष और फिक्र करने लगता है कि इरेक्शन क्यों नहीं आता क्यों नहीं आता और अपना ध्यान अपने प्राइवेट पार्ट पर केंद्रित करता है माने ही बिकम स्पैक्टेटर ऑफ हि ओन
(2:40:17) परफॉर्मेंस तब एंजाइटी और बढ़ जाती है और ऐसे सिचुएशन में पुरुष रेक्टल डिस्फंक्शन का एहसास करता है और एक बार फेल हो जाने के बाद मैं दोबारा फेल हो जाऊंगा ऐसा ख्याल उसके दिमाग में मंडराता रहता है जिसकी वजह से वह इरेक्शन पाने में फिर नाकामयाब हो जाता है और इरेक्टाइल डिस्फंक्शन का सिलसिला बरकरार रहता है साथ ही साथ श्रब का नियमित सेवन करने से लीवर खराब हो जाता है और नर्व्स पर भी उसकी विपरीत असर होती है इससे आई हुई नामर्दी का इलाज कई बार मुश्किल हो जाता है शराब की
(2:41:01) आदत कब लत में परिवर्तित हो जाती है उसका पता ही नहीं पड़ता शराब की मात्रा छोटी हो या बड़ी वह नुकसान कारक है ही इसके बारे में शेक्सपियर का स्टेटमेंट बिल्कुल सही है शेक्सपियर कहते हैं कि इट प्रवोक्स द डिजायर बट टेक्स अवे द परफॉर्मेंस माने शराब कामेच्छा तो जगाता है लेकिन काम को बिगाड़ होता है अब कुछ दूसरे सेक्सुअल पैटर्न के बारे में बात करते हैं लोग कई बार पूछते हैं क्या ओरल सेक्स नॉर्मल है ओरल सेक्स दोनों फेथ फुल पार्टनर्स के दरमियान होती है तो वह बिल्कुल नॉर्मल है सेफ है और अक्सर उत्तेजना वर्धक भी है महर्षि
(2:41:49) वात्सायन ने अपने काम सूत्र में लिखा है कि अगर एक पुरुष थका हुआ हो और उसे सहवास करने के लिए सही उत्तेजना ना आती हो तो ओरल सेक्स से उसकी उत्तेजना वापस आ सकती है और अमूमन सहवास के काबिल भी बन सकता है जब पुरुष और स्त्री दोनों एक साथ एक दूसरे को ओरल सेक्स करते हैं तो ऐसी प्रक्रिया को महर्षि बादसा ने ल कहा है ओरल सेक्स को आज भी लोग नॉर्मल समझते हैं और काम उत्तेजना के लिए एक अच्छा वेरिएशन भी मानते हैं ओरल फैक्स के दौरान दोनों पार्टनर्स को अच्छा
(2:42:35) हाइजीन रखना चाहिए मिसाल के तौर पर वह अपने प्राइवेट पार्ट्स साफ रखें और प्राइवेट पार्ट्स के बाल नियमित काटे तो बेहतर होगा इतना ही नहीं अगर ओरल सेक्स के दौरान पुरुष ने यनि स्राव माने वजाइनल लुब्रिकेशन निगल लिया और स्त्री ने वीर्य यानी कि सीमन निगल लिया तो भी कोई हानि नहीं होगी ओरल सेक्स के बाद हम दूसरे वेरिएशन की बात करते हैं वह है एनल सेक्स कुछ लोग एनल सेक्स क्यों पसंद करते हैं उसकी पसंदगी का कुछ कारण जरूर है न्यूरोलॉजिकल उत्तेजना की प्रणाली एक्सटर्नल जेनिटल्स में और एनल रीजन में एक समान होती है उसके लिए दोनों तरफ आनंद
(2:43:23) एक सा मिलता है दूसरा योनि की कंपैरिजन में गुदा की पकड़ ज्यादा मजबूत होती है इसके लिए कुछ पुरुषों को ज्यादा आनंद का एहसास होता है तीसरा पुरुष अपनी स्त्री पार्टनर के ब्रेस्ट और क्लिटोरिस को एडिशनल उत्तेजना आसानी से प्रदान कर सकता है चौथा इसमें गर्भ धारण का कोई खतरा ही नहीं रहता और आखिर में कुछ लोगों के लिए यह नवीनता प्रदान करता है लेकिन ध्यान रहे गुदा मैथुन के दौरान हमेशा कंडोम का इस्तेमाल करना चाहिए और लुब्रिकेशन की मात्रा भी ज्यादा क्वांटिटी में होना
(2:44:09) जरूरी है अक्सर लोग मुझे प्रश्न पूछते हैं कि डॉक्टर साहब 10 साल पहले हम सिर्फ सोचते थे और तनाव आ जाता था इरेक्शन आ जाता था लेकिन आज सोचने के साथ-साथ हमें लोकल स्टिमुलेशन भी करना पड़ता है क्या यह उम्र का तकाजा है या कोई बीमारी है क्या है हकीकत में यह बात बिल्कुल सही है कि युवावस्था में कामुक ख्याल से या उत्तेजित चित्र देखने से तुरंत इरेक्शन आ जाता था लेकिन कुछ वर्षों के बाद यह क्षमता कम हो जाती है और हर एक व्यक्ति को इरेक्शन के लिए उत्तेजना के लिए अमूमन लोकल स्टिमुलेशन की आवश्यकता रहती है यह बिल्कुल सामान्य चीज है यह कोई बीमारी
(2:44:55) नहीं है इसके लिए कोई इलाज की आवश्यकता भी नहीं है सिर्फ आप ज्यादा ध्यान इरेक्शन पर केंद्रित ना करें ध्यान केंद्रित करेंगे तो उना नहीं आएगी बेफिक्र हो जाएंगे तो अपने आप आ जाएगी मिसाल के तौर पर आपको एक सवाल पूछूं आप सांस ले रहे हैं आप सांस ले रहे हैं अभी देखिए पहले आपको इसका एहसास नहीं था अब एहसास हो गया म जितना ध्यान करोगे उतनी उत्तेजना कम आएगी और जितने बेफिक्र हो जाओगे उत्तेजना अपने आप आ जाएगी कहने का मतलब है कि युग कैन नॉट बी एंसिस एंड सेंसुअस एट द सेम टाइम माने एक ही अवस्था में चिंतित और उत्तेजित होना मुश्किल है यह
(2:45:38) बात नॉर्मल है यह कोई बीमारी नहीं है सामान्यत यह देखा गया है कि पुरुष की प्रकृति पॉली एरोटिक होती है माने उनकी रुचि एक से अधिक स्त्रियों में रहती है कई बार पेशेंट खुद मुझे पूछते हैं कि डॉक्टर साहब मेरी शादी हो गई है मेरी वाइफ भी बेहद सुंदर है लेकिन फिर भी मुझे अब किसी और के साथ सोने का दिल होता है जो मेरी वाइफ से आधी भी खूबसूरत नहीं है ऐसा क्यों यह जवाब देने में मैं अक्सर फिलोसोफर नित का सहारा लेता हूं नित कहते हैं कि पुरुष की उत्सुकता किसी भी स्त्री में तब तक रहती है जब तक वह उसे जीत नहीं
(2:46:27) लेता जीतने के बाद उसका एक्साइटमेंट और उत्सुकता कम हो जाती है या समाप्त हो जाती क्योंकि पुरुष का मेन इंटरेस्ट विजय है और एक मात्र विजय है और काम वासना तो सिर्फ विजय का एक क्षेत्र है पत्नी में इंटरेस्ट समाप्त हो जाने की वजह वह जीती जा चुकी है उसमें जीतने का अभी कुछ बाकी नहीं रहा है लेकिन और स्त्री जो इतनी खूबसूरत नहीं होती फिर भी उस तरफ पुरुष मोहित हो जाता है आकर्षित हो जाता है वजह उसकी यह है कि वह स्त्री अभी जीती जा सकती है उस स्त्री को जीतना अभी बाकी
(2:47:16) है और पत्नी जीती जा चुकी है स्त्री की स्थि इससे विपरीत होती है पुरुष के जितनी करीब होती है वह उतनी ही पुरुष में लीन होती है स्त्री पत्नी होने में उत्सुक होती है प्रेमिका होने में नहीं अमूमन पुरुष की मजबूरी यह होती है कि वह प्रेमी होने में उत्सुक होता है पति होने में नहीं इसलिए पुरुष को पुरुष कहा जाता है और स्त्री को प्रकृति कहा जाता है फीमेल सेक्सुअलिटी माने स्त्री का
(2:48:02) मुक्ता यह प्रश्न जो फीमेल सेक्सुअलिटी के इर्दगिर्द होते हैं ज्यादातर इसके जवाब जानने के लिए लोग काफी उत्सुक रहते हैं कई बार इन संदेह को दूर करने के लिए सिर्फ एक्यूरेट इंफॉर्मेशन ही जरूरी रहती है जो व्यक्ति को पूरा आराम पहुंचा सकती सबसे पहले शुरू करते हैं मासिक धर्म से संबंधित कुछ प्रश्न कुछ लोगों का यह मानना है कि जिन लड़कियों का मासिक धर्म जल्दी आता है वह संभोग भी जल्दी करने की कामना रखती लेकिन यह हकीकत नहीं है सहवास का समय निर्भर होता है व्यक्ति की काम
(2:48:48) इच्छा उसकी परिस्थिति और उसका सोशल कल्चरल बैकग्राउंड पर ना कि मासिक धर्म की शुरुआत पर दूसरा सवाल मेंसस से जुड़ा हुआ है वह है कि क्या मासिक चक्र के अलग-अलग फेजस में स्त्री की कामेच्छा में उतार चढ़ाव हो सकता है यह सवाल के जवाब में मैं यही कहूंगा कि उतार चढ़ाव जरूर होता है कुछ महिलाओं को मेंसस आने के पहले और कुछ महिलाओं को मेंसिस आने के दौरान तो कुछ महिलाओं को ओवुलेशन के टाइम पर काम इच्छा में उतार चढाव देखा जाता है अभी महिलाओं के ऐसे विषय को स्पर्श करते हैं जिसके
(2:49:35) बारे में महिलाओं और पुरुषों दोनों को अनगिनत प्रश्न और संदेह रहते हैं महिला और पुरुष दोनों को यह चीज का संदेह रहता है कि क्या हर महिला अपने तनों को स्पर्श से उत्तेजित करवाना पसंद करती है अमूमन महिलाओं को स्तन को स्पर्श ज्यादा पसंद आता है लेकिन सबको नहीं ब्रेस्ट स्त्री का एक महत्त्वपूर्ण इरोजन जोन माना जाता है उत्तेजना इस पर भी निर्भर होती है कि कहां और कैसे स्पर्श करना है कई बार उत्तेजना देने के दौरान उसे दर्द का एहसास
(2:50:22) भी हो सकता है और उसको कामेच्छा बढ़ने के बजाय कम भी हो सकती है या कई बार गायब भी हो जाती है बेहतर यही होगा कि उसे पूछ ले कि उन्हें कैसा स्पर्श पसंद है कुछ ऐसा वक्त भी होता है जहां ब्रेस्ट को हाथ लगाने से उसको दर्द का एहसास होता है खास करके मेंसस के पहले या प्रेगनेंसी के दौरान कई बार ओरल कॉन्ट्रासेप्टिव पिल्स लेने के बाद या कुछ हार्मोस की गड़बड़ी की वजह से कभी कभ ब्रेस्ट टेंडर बन सकती है इसी के साथ-साथ एक दूसरा क्वेश्चन खड़ा होता है कि बाजार में मिलती हुई दवाइयां और क्रीम क्या सचमुच ब्रेस्ट बढ़ाने में
(2:51:09) उपयोगी है जवाब यही होगा कि बिल्कुल नहीं जिस तरह से क्रीम लगाने से या मसाज करने से शिष्ण में कोई फर्क नहीं पड़ता उसी तरह से ब्रेश में भी तेल लगाने से या मसाज करने से कोई फर्क नहीं पड़ता ब्रेस्ट के साथ एक दूसरा सवाल भी अक्सर जुड़ा हुआ रहता है और उसे जानने के लिए अक्सर लोग बेताब रहते हैं लोगों के दिमाग में यह रहता है कि ब्रेस्ट जितनी बड़ी होगी उतना ही उसका सेक्सुअल परफॉर्मेंस भी बेहतर होगा हां अगर किसी पुरुष को बड़ी ब्रेस्ट ज्यादा पसंद है तो उसको बड़ी ब्रेस्ट देखकर मुमकिन है कि वह
(2:51:55) ज्यादा एक्साइट हो ज्यादा उत्तेजित हो लेकिन साथ ही साथ यह भी हकीकत है कि नर्व्स जो सेंसेशंस प्रदान करती है उसका फैलना बड़ी ब्रेस्ट में ज्यादा दूर दूर हो जाता है और छोटी ब्रेस्ट में नर्व्स ज्यादा फोकस्ड रहती है ज्यादा कंसंट्रेटेड रहती है जिसकी वजह से छोटी ब्रेस्ट वाली स्त्रियां बड़ी ब्रेस्ट वाली स्त्रियों के कंपैरिजन में ज्यादा आसानी से और जल्दी उत्तेजित हो सकती है हां उत्तेजना बढ़ाने के और भी कारण हो सकते हैं लेकिन जहां तक परफॉर्मेंस की बात है ब्रेस्ट बड़ी हो कि छोटी परफॉर्मेंस पर कोई विशेष फर्क नहीं
(2:52:42) पड़ता ब्रेस्ट जितनी बड़ी उतना परफॉर्मेंस बेहतर ये एक गलतफहमी है जिसे दूर किया जाए इसके साथ साथ एक और सवाल जुड़ा हुआ रहता है क्या फिलहाल जो ब्रेस्ट साइज है उसको बढ़ाने का कोई उपाय है देखिए ब्रेस्ट साइज में तो कोई बढ़ावा नहीं हो सकता हां ब्रेस्ट के नीचे जो मसल्स रहते हैं जिसे पेक्टरलिस मेजर कहते हैं अगर एक्सरसाइज से यह डिवेलप किए जाए तो थोड़ा बहुत ब्रेस्ट की साइज बड़ी है ऐसा आभास हो सकता है लेकिन हकीकत में ब्रेस्ट के नीचे जो मसल्स है उसमें इजाफा होता है ब्रेस्ट टिश्यू में नहीं अगर किसी
(2:53:29) को ब्रेस्ट सचमुच बढ़ानी है तो इसका एक मात्र उपाय है प्लास्टिक सर्जरी लेकिन ऑपरेशन करवाने से पहले ऑपरेटिव प्रोसीजर जान लेना चाहिए क्या क्या रिस्क इवॉल्व है उसका जायजा लेना चाहिए और ऑपरेशन के बाद आउटकम क्या आएगा यह भी जानकारी ले लेनी चाहिए और उसी के बाद ही ऑपरेशन के बारे में सोचना चाहिए इसके साथ-साथ यह भी ख्याल रखना चाहिए कि यह पेक्टरलिस मेजर की एक्सरसाइज ढले हुए स्तन को ऊपर उठाने में कोई मदद नहीं कर सकती क्योंकि स्तन में निपल्स को छोड़कर मांसपेशियां होती ही नहीं ऐसी सिचुएशन में आपके स्तन के अनुरूप
(2:54:17) प्रॉपर ब्रेसर पहन सकते हो ताकि यह प्रॉब्लम कम से कम लगे क्या दोनों स्तन के आकार में अगर भिन्नता हो तो उसे उपचार की आवश्यकता है यह जानना जरूरी है कि असमानता का मुख्य कारण क्या है नेचुरल है या कोई बीमारी की वजह से अगर कोई बीमारी की वजह से है तो बीमारी का कारण डायग्नोज करके सही उपचार करना चाहिए अगर असमानता फिजियोलॉजिकल है तो ज्यादातर काउंसिलिंग के सिवाय कोई उपचार की आवश्यकता नहीं हो कई बार अगर असमानता मामूली है तो
(2:55:03) बेसियर के अंदर पेड़ का उपयोग ही काफी हो जाता है लेकिन अगर दोनों ब्रेस्ट में असमानता बहुत ज्यादा है तो सर्जरी एक मात्र उपाय रहता है जिससे असमानता को समानता में परिवर्तित किया जाता है कई बार महिलाओं को अपने स्तन के निपल के आसपास कुछ बालों के बारे में संदेह होता है कि स्तन पर बाल कोई विकृति तो नहीं कोई बीमारी की निशानी तो नहीं एक महिला की निपल्स के आसपास कुछ बाल का होना यह सामान्य है और इसके लिए कोई उपचार की आवश्यकता नहीं है हां अगर कोई चाहे तो उसे इलेक्ट्रोलिसिस के द्वारा हटाया जा सकता है निपल्स के साथ जुड़ा हुआ एक और सवाल भी
(2:55:52) है कि कुछ स्त्रियों में इनवर्टेड निपल्स होते हैं या तो एक निपल में या तो दोनों निपल आवश्यकता पड़ने पर इसे आसानी से बाहर की ओर खींचा जा सकता है और इससे लव मेकिंग में अमूमन कोई समस्या पैदा नहीं होती एक आम प्रश्न है कई बार ब्रेस्ट और पेट के ऊपर प्रेगनेंसी के बाद स्ट्रेच आ जाते हैं लोग पूछते हैं कि इसमें कोई कारगर दवाई होती है अफसोस स्ट्रेच मार्क्स को हटाने के लिए कोई दवाई कार करनी होती यह स्ट्रेच मार्क सिर्फ प्रेगनेंसी के दौरान पड़े ऐसा जरूरी
(2:56:37) नहीं है यह कई बार वजन में उतार चढ़ाव हुआ या कोई बीमारी के बाद भी स्ट्रेच मार्क आ सकते हैं कई बार स्ट्रेच मार्क समय के साथ-साथ अपने आप कम हो जाते हैं लेकिन उसका पूरी तरह से निकलना मुश्किल है अक्सर आपने अखबार में पढ़ा होगा कि एक वर्जिन माने कुमारिका प्रेगनेंट हो गई अक्सर लोग पूछते हैं कि क्या यह मुमकिन है हां यह मुमकिन है अगर सहवास नहीं भी किया हो लेकिन सीमेन योनि मार्ग पर छिड़क दिया हो तो सीमेन की एक बूंद में भी लाखों शुक्र जंतु होते हैं हाइमन माने जिसे लोग जिल्ली भी कहते हैं
(2:57:22) उसमें छेद तो रहते ही है तो कई बार एक बूंद भी उसमें से चला गया तो शुक्र जंतु योनि मार्ग में प्रवेश करके गर्भाशय में से आगे बढ़कर अंडे को मिल सकते हैं और प्रेगनेंसी ठहर सकती है उस तरह से एक कुंवारी का भी पेनिट्रेशन ना होते हुए भी हायमन बरकरार होते हुए भी गर्भवती बन सकती है पेस्ट और नीपल्स के बारे में तो हमने बात की अब हम बात करते हैं सहवास की और उससे जुड़े हुए जेनिटल पार्ट्स के क्या सहवास से पहले या सहवास के दौरान क्लिटोरिस को स्टिमुलेटिंग
(2:58:20) ऐसा होता है कि वो सहवास के दौरान सिर्फ सहवास से ही क्लाइमेक्स पर पहुंच जाती है लेकिन ज्यादातर स्त्रियों में क्लाइमेक्स तक पहुंचने के लिए थोड़ा एडिशनल क्लीटोरल स्टिमुलेशन की जरूरत रहती है यह स्टिमुलेशन नॉर्मल माना जाता है अब जरा कुछ हट के बात करते हैं एक केस मेरे पास आया था उस कपल में पत्नी का ये कहना था कि उसका पति उसके साथ काफी अच्छे से पेश आता सहवास में भी संतुष्टि देता है लेकिन जब वह स्त्री चर्म सीमा पर पहुंचती थी तब अचानक वह बातूनी हो जाती थी वह कुछ ना कुछ बोलने लगती थी जो काफी हद तक कभी कभ
(2:59:06) अश्लील भी होता था उस शब्दों से उसके पति नाखुश हो जाते थे और संबंध बनाने से कतराते थे उसका जननली कहना था कि यह आवाज यह बोल वह जानबूझ के नहीं कर रही है यह खुद बखुदा आता है यह उसकी फितरत है दरअसल मेरे पास ऐसे कई केस पहले भी आए थे इसमें मेरा तजुर्बा ऐसा है कि जो महिलाएं अमूमन सामान्यत शांत और शर्मीली होती है ज्यादातर मामलों में वह चरम सीमा पर पहुंचते ही बातूनी हो जाती है इस तरह जो महिलाएं सामान्य रूप से ज्यादा बात नहीं होती है वह क्लाइमेक्स पर अक्सर खामोश सी
(2:59:52) हो जाती है अपने जज्बात जताने का तरीका हर एक का अलग-अलग हो सकता है मैंने उस महिला को कहा कि चूंकि यह बीमारी नहीं है आपको कोई इलाज की आवश्यकता नहीं है लेकिन आप आपके पति को जब उनका मूड अच्छा हो तब यह बात जरूर बता दीजिए कि यह शब्द स्पॉन्टेनियसली निकल रहे हैं और अगर इसे रोका गया तो शायद अपने आनंद में कमी आ सकती है इसलिए बेहतर होगा कि इन शब्दों की कंप्लेन करने के बजाय इसका लुत्फ उठाया जाए इसका आनंद उठाया जाए ध्यान रखिए कि यह नॉर्मल है अमूमन यह आदत सिर्फ महिलाओं में नहीं
(3:00:40) बल्कि पुरुषों में भी हो सकती है दोस्तों अब एक आखरी सवाल जिस तरह से पुरुष में सरकमसीजन होता है क्या उस तरह स्त्रियों में भी होता होता है हां यह प्रक्रिया खास करके अफ्रीका में सुदान और केनिया में काफी प्रचलित है यह फीमेल सरकमसीजन में क्लिटोरिस लेबिया मेजोरा और लेबिया मानोरा काट दिए जाते हैं जिसकी वजह से बाद में संभोग काफी पेनफुल हो सकता है लेकिन हैरत की बात यह है कि ऑर्गेजम दौरान का आनंद बिल्कुल बरकरार रहता है कुछ और कम्युनिटीज में क्लिटोरिस और क्लीटोरल हुड में छेद या कट
(3:01:27) किया जाता है इसके पीछे उनका इरादा यह रहता है कि इस तरह का सरकमसीजन करने से स्त्रियों की काम इच्छा बढ़ेगी नहीं और स्त्रियां कंट्रोल में रहेगी लेकिन यह गलत फहमी है बेहतर सेक्सुअल हेल्थ क्या है वो तो आप इंटरनेट से जान सकते हो माने यू कैन गेट इंफॉर्मेशन अबाउट द वट पार्ट फ्रॉम द इंटरनेट बट वम गोइंग टू टॉक इज अबाउट हाउ टू माने कैसे ज्यादा तंदुरुस्ती कैसे हासिल कर सकते हैं हम तीन चीजों पर अपना ध्यान केंद्रित करेंगे एक है डायट दूसरा है एक्सरसाइज और तीसरा है योग डायट में पहली चीज आती है
(3:02:15) खाना कैसे खाए आयुर्वे कहता है कि खाना बराबर चबा के खाएं और खाते समय इतना अवश्य याद रखें कि पेट को दांत नहीं होते मन स्टमक डज नॉट हैव टीथ चवा के खाना बहुत जरूरी है इसलिए आप जितना चबाए उतना डाइजेशन बेहतर होगा और डाइजेशन जितना बेहतर होगा तो ही सही मात्रा में खाना एबस होगा सही मात्रा में एसमिल होगा तो ही शरीर को पोषण प्राप्त होगा तो ही बदन को लगेगा एक बड़ा आम प्रश्न है खाना
(3:03:01) खाते वक्त पानी कब पीना चाहिए खाने के पहले खाने के साथ या खाने के बाद खाने के पहले और खाने के तुरंत बाद ज्यादा पानी ना पिए इस दौरान ज्यादा पानी पीने से आपके डाइजेस्टिव जूसस डाइल्यूट हो जाएंगे कमजोर हो जाएंगे इसके लिए हाजमा ठीक से नहीं होगा और अगर हाजमा ठीक से नहीं होगा तो शरीर को सही पोषण प्राप्त नहीं होगा आयुर्वेद का कहना है कि हाजमा माने डाइजेशन उन महत्व की चीजों में से है जिस पर आपका शरीर स्वस्थ या अस्वस्थ बन सकता
(3:03:48) है अगर आपको पानी पीना ही है तो थोड़ा बहुत पानी मुंह साफ करने जितना खाने के दौरान पी सकते हो इससे मुंह में से टाइलिन नाम का रस ज्यादा बहेगा और कार्बोहाइड्रेट्स माने स्टार्च को डाइजेस्ट करने में ज्यादा सहाय रूप होगा आयुर्वेद एक ही ऐसा विज्ञान है जहां यह कंसेप्ट है कि अन्न ही औषध हम माने फूड मेडिसिन आयुर्वेद का कंसेप्ट है कि आहार विहार और औषध माने अगर आप आहार से ठीक ना हो विहार माने लाइफ स्टाइल चेंजेज से ठीक
(3:04:33) ना हो तो फिर औषध का इस्तेमाल कर सकते हो लाइफस्टाइल कुछ ऐसी रखें कि सुबह में दातुन करने के बाद एक चम्मच आंवला का सेवन करें या तो आंवले का जूस ले लें या तो पाउडर फॉर्म में ले ले लेकिन उसके बाद आधे घंटे तक आप और कुछ ना खाए आमला रसायन है रसायन का मतलब है जो जवानी बरकरार रखता है और बुढ़ापे को दूर ढकेल होता है आमला एंटीऑक्सीडेंट के साथ-साथ एंटी डायबिटिक भी है माने डायबिटीज के कॉम्प्लिकेशंस में कमी ला सकता
(3:05:18) है खाने में जब आप सलाड खाते हैं तो आप सलाड कच्चा ना ले कच्चा सलाड हल्का भून के ले ताकि डाइजेशन भी आसान होगा और पित्त भी नहीं बढ़ेगा सलाड में एक चम्मच कच्ची हल्दी के छोटे-छोटे टुकड़े करके अवश्य ले हल्दी को आयुर्वेद में कोमला कहते हैं वह एंटीऑक्सीडेंट है और बाई और आंतरिक चर्बी कम करती है साथ में वर्ण माने कॉम्प्लेक्शन भी अच्छा करती मेरे शादीशुदा पेशेंट्स को अक्सर हफ्ते में दो बार काले उड़द की दाल खाने की सलाह देता
(3:06:05) हूं यह दाल साबूत हो तो बेहतर है जिसमें हींग और लहसुन का गाय के घी में तड़का लगा के हफ्ते में दो बार खाने की मैं सराह देता हूं पच में भारी होने के कारण मुमकिन हो तो इसे लंच टाइम में खाना बेहतर रहेगा हींग और गाय का घी उड़द दाल से निर्माण होने वाले गैस माने वायु को कम कर देता है आयुर्वेद के अनुसार उड़द में पुरुष हार्मोन अच्छी मात्रा में होते हैं यह पुरुष हार्मोन से काम इच्छा और काम शक्ति में इजाफा होता है
(3:06:51) यह पुरुष के लिए तो फायदेमंद होते ही हैं साथ ही साथ स्त्रियों के प्राइवेट पार्ट की सेंसिटिविटी माने संवेदना बढ़ाने में भी फायदेमंद होते हैं मशहूर वैधराज बापा लाल वैद का कहना था कि सोयाबीन और मेथी में अच्छी मात्रा में स्त्री हार्मोन होते हैं स्त्री को खास करके मेनोपॉज के बाद खाने में सो लेना चाहिए दिन में करीबन 20 ग्राम सोयाबीन खाना चाहिए और रात को सोते समय एक चम्मच सूखे मेथी दाना पानी के साथ निगलना बेहतर होगा ध्यान रहे मेथी दाना चबाए नहीं और पानी में भिगोए भी नहीं मेथी
(3:07:40) दाना पानी के साथ निगलना चाहिए अगर मुझे पूछा जाए कि सबसे बेहतर सेक्स टोनिक क्या है ज्ञानी लोगों का कहना है कि एक अंडरस्टैंडिंग अट्रैक्टिव एंड अफेक्शनेट पार्टनर कैन बी द बेस्ट सेक्स टोनिक लेकिन दूसरा अच्छा सेक्स टोनिक गाय का घी हो सकता है गाय का घी उत्तम रसायन भी है और वाज करर भी है वाज मत का मतलब होता है इट प्रोवाइड सेक्सुअल स्ट्रेंथ आयुर्वेद एक्सपर्ट्स का मानना है कि रात को सोते समय एक कप दूध में एक चम्मच गाय का घी और
(3:08:29) स्वादानुसार मिश्री मिलाकर पिया जाए तो काफी गुणकारी होता है अर्थ घटन यह हो सकता है कि गाय का घी एंजाइटी कम करता है मानसिक शांति प्रदान करता है एसिडिटी कम करता है और कब्स की शयत भी दूर करता है गाय के घी से कोलेस्ट्रॉल नहीं बढ़ता और साथ में बेहतर सेक्सुअल स्ट्रेंथ भी प्रदान करता है ध्यान रहे प्रसिद्ध आयुर्वेदिक आचार्य कहते हैं गाय का घी भैंस का नहीं मेरे तजुर्बे में कई लोग यह समस्या लेकर आते हैं कि डॉक्टर साहब सहवास के बाद हमें बहुत थकान का एहसास होता
(3:09:17) है मेरे ख्याल से इस परेशानी में एक कप दूध एक चम्मच गाय का घी और स्वादानुसार मिश्री लाभकारी बन सकता है आयुर्वेद में घी माने गाय का घी और तेल माने तिल का तेल खाने में नियमित तौर पर अगर तेल इस्तेमाल करना है तो तिल का तेल इस्तेमाल करें आयुर्वेदा आचार्यों का कहना है कि आप मैले कपड़े पर रंग नहीं चढ़ा सकते कपड़ा साफ सुथरा होना जरूरी है उसी तरह दवाइयों की बेहतर असर के लिए आपका शरीर निरामल विदाउट इंप्योरिटीज होना जरूरी है
(3:10:06) ना कि साम साम अवस्था माने स आम माने इंप्योरिटीज के साथ आपका शरीर साम है कि निरामय वो जानने का एक बहुत आसान तरीका है अगर आपकी जिवा माने टंग पर सफेद वाइट कोटिंग आ गया है जिसे आप साफ करने की कोशिश करेंगे तो भी नहीं निकलेगा या जब भी आप टॉयलेट में जाते हो तब आपका स्टूल्स माने मल टॉयलेट में बैठ जाएगा तैरे नहीं यह साम अवस्था है निरामया टंग पर कोटिंग नहीं होगा और स्टूल्स माने मल टॉयलेट के पानी में
(3:10:53) तैरे साम अवस्था में से निरामला के लिए प्रभा शंकर वैद का कहना था कि त्रिफला पाउडर रोज रात को एक चम्मच सोने के पहले गुनगुने पानी के साथ सात दिन तक लिया जाए तो अक्सर साम अवस्था निरामल जाती है कहते हैं कि सेक्सुअल पोटें इ इन सेपरेबल फ्रॉम द टोटल वाटलिफ्टार सेक्स माने आपकी सेक्सुअल ताकत आपकी कुल ताकत से अलग नहीं है जो सारे शरीर के लिए अच्छा वह सेक्स के लिए भी अच्छा पुरुष और
(3:11:40) स्त्री में सेक्स चक्र में चार चरण होते हैं काम इच्छा पुरुष में इरेक्शन और स्त्री में लुब्रिकेशन योनि प्रवेश की क्षमता चरम सीमा का आनंद और पुरुषों में चरम सीमा के आनंद के साथ वीर्य का स्खलन यह चारों चरण के लिए खास जरूरी चीज है एनर्जी एनर्जी दो जगह से मिलती है एक तो आहार में से माने कार्बोहाइड्रेट फैट्स और प्रोटीन में से और दूसरी ऑक्सीजन में से खाना ऑक्सीजन की मौजूदगी में एनर्जी में कन्वर्ट होता है इसलिए खुली हवा में सांस लेना घूमना
(3:12:28) कसरत करना बेहतर माना जाता है जितना ऑक्सीजन ज्यादा मिलेगा उतना ही फूड का एनर्जी में कन्वर्जन ज्यादा होगा बेहतर होगा कि आपकी लाइफ स्टाइल में भी कसरत और योग भी शामिल करें कसरत में दो चीजें महत्व की है एक है वॉकिंग माने चलना और दूसरा है पेल्विक फ्लोर मसल की एक्सरसाइज माने स्ट्रेंथ निंग द पेल्विक फ्लोर मसल्स हम पहले वॉकिंग की बात करते हैं वॉकिंग में महत्व की चीज है कब चलना कहां चलना और कैसे चलना कब चलना चाहिए सुबह को चलना बेहतर है
(3:13:16) खास करके सूर्य प्रकाश में उसमें दो फायदे हो सकते हैं सूरज उगने के बाद पड़ों में फोटोसिंथेसिस की क्रिया गतिमान होती है मतलब कि पेड़ वातावरण का कार्बन डाइऑक्साइड ग्रहण करके ज्यादा ऑक्सीजन वातावरण में छोड़ते हैं इसलिए हरियाली में चलना बेहतर माना गया है दूसरा कारण है सूरज की किरणों में नेचुरली विटामिन डी प्राप्त होता है और कहते हैं कि विटामिन डी पुरुष हार्मोन टेस्टोस्टरॉन में इजाफा कर सकता है अब हम बात करते हैं कहां चलना चाहिए पार्क में चलना सबसे बेहतर क्योंकि वहां
(3:14:02) काफी क्वांटिटी में आपको ऑक्सीजन मिल सकता है अगर वह मुमकिन ना हो तो कोई भी पोल्यूशन फ्री जगह या कम पोलूशन वाली जगह चलने के लिए बेहतर रहेगी अभी हम बात करते हैं कैसे चले बिना रुके चलना बेहतर है हफ्ते में पाच दिन बिना रुके 30 से 40 मिनट वॉक करें इतनी स्पीड से चले कि आपको थोड़ा बहुत पसीना आ जाए लेकिन बहुत देर तक बहुत तेज ना चले चलने का एक दूसरा भी तरीका है जिसे एचआईआईटी कहते हैं एचआईआईटी का मतलब है हाई इंटेंसिटी इंटरवल ट्रेनिंग
(3:14:49) इसमें थोड़े वक्त के लिए फास्ट बाद में थोड़ा स्लो फिर से फास्ट फिर से स्लो इस टाइप का वकिंग पैटर्न रहता है इससे टाइप टू डायबिटीज वाले मरीजों में शुगर बेहतर कम होती है और दूसरा इट इंप्रूव्स लिवर इंसुलिन सेंसिटिविटी लेकिन ध्यान रहे कि इस टाइप की वॉकिंग आपको किसी निष्णात ट्रेनर की निगरानी में ही करनी चाहिए और इसके लिए डॉक्टर की रजामंदी जरूरी है कहते हैं वॉकिंग से हार्ट ब्रेन और पूरे शरीर में ब्लड सप्लाई ऑक्सीजन ज्यादा पहुंचता है और ऑक्सीजन ज्यादा पहुंचने की वजह से
(3:15:36) कुछ फायदे जरूर होते हैं मिसाल के तौर पर इसकी वजह से ब्रेन एक्टिविटी स्टिमुलेटिंग अगर ब्रेन को सही मात्रा में ऑक्सीजन नहीं मिला तो उसकी वजह से कई बार कंसंट्रेशन कम हो सकता है यादास कमजोर हो सकती है व्यक्ति बेचैन हो जाता है डिप्रेसिव थॉट्स आ सकते हैं और जोश में भी कमी आ सकती दूसरा ऑक्सीजन की वजह से एनर्जी लेवल बढ़ते हैं ऑक्सीजन से एंजाइटी भी कम होती है और इम्यून सिस्टम ज्यादा स्ट्रांग होती है
(3:16:19) ऑक्सीजन से स्ट्रेस लेवल भी कम होते हैं प्रसिद्ध मॉलिक्यूलर बायोलॉजिस्ट डॉक्टर स्टीफन लेवाइन का कहना है कि ऑक्सीजन की कमी यह ज्यादातर डिजनरेटिव डिसीज की जड़ मानी जाती है वह कहते हैं कि फेफड़े में आए हुए ऑक्सीजन को सेल्स तक पहुंचाने की शरीर की जो क्षमता होती है वही आपके तंदुरुस्ती का राज है और यह क्षमता उम्र के साथ-साथ कम होती जाती है वकिंग से या एक्सरसाइज से ब्लड सर्कुलेशन बढ़ता है जो कि ऑक्सीजन के ट्रांसफर मैकेनिज्म में काफी इजाफा करता है इसलिए वॉकिंग बहुत
(3:17:05) फायदेमंद है वकिंग के बाद हम आगे देखते हैं पेल्विक फ्लोर मसल एक्सरसाइज इसमें दो टाइप की एक्सरसाइज होती है एक पेल्विक फ्लोर के अग्र भाग के लिए माने एंटीरियर पोर्शन ऑफ पेल्विक फ्लोर और दूसरी है पेल्विक फ्लोर के पीछे के भाग के लिए माने पोस्टीरियर पोर्शन ऑफ पेल्विक फ्लोर यह एक्सरसाइज पुरुष और स्त्री दोनों में की जा सकती है इंटीरियर पेल्विक फ्लोर मसल एक्सरसाइज में पुरुष अपने प्राइवेट पार्ट को ऊपर खींचता है मिसाल के तौर पर अगर आप पेशाब कर रहे हो अगर आपको पेशाब रोकना है तो आप क्या करोगे बस वही चीज
(3:17:52) आपको करनी है इसमें पेल्विक फ्लोर के इंटीरियर मसल्स कांट्रैक्ट होते हैं तब आप पा सेकंड के लिए होल्ड करें फिर रिलीज करें और फिर 5 सेकंड के लिए आराम करें और फिर से यही सिलसिला शुरू करें ऐसा 10 बार सुबह और 10 बार शाम को करने से करीबन 12 से 24 हफ्तों में अच्छी तरह से यह मसल्स टोन अप हो जाते हैं अभी हम पोस्टीरियर पेल्विक फ्लोर मसल एक्सरसाइज की बात करते हैं समझिए कि आप कहीं बैठे हैं और अचानक आपको ऐसा लगा कि गुदा द्वार से गैस पास हो रहा है और आपको
(3:18:38) इसे रोकना है तो आप उस वक्त क्या करेंगे गुदा द्वार के मसल्स को आप कांट्रैक्ट करेंगे बस वही चीज आपको यहां करना है इसमें पोस्टीरियर फ्लोर मसल्स इवॉल्व होते हैं जब भी आप यह कांट्रैक्ट करें तब पाच सेकंड के लिए होल्ड करें फिर रिलीज करें और फिर 5 सेकंड के लिए आराम करें और फिर से यह सिलसिला शुरू करें ऐसा 10 बार सुबह और 10 बार शाम को करने से करीबन 12 से 24 हफ्तों में ये मसल्स अच्छी तरह से टोन अप हो जाएंगे इसके कुछ बहुत अच्छे फायदे हैं इरेक्शन की क्वालिटी ज्यादा मजबूत हो सकती
(3:19:25) है शीघ्र क्लाइमेक्स में थोड़ी बहुत रुकावट हो सकती है क्लाइमेक्स के दौरान आनंद में कमी हो तो आनंद में इजाफा हो सकता है और अगर आपको पेशाब रोकने में समस्या होती हो तो उसमें भी फायदा हो सकता है अब हम आगे बढ़ते हैं योग की तरफ हमें यह बात हमेशा ध्यान रखनी चाहिए कि योग इज अ वे ऑफ लिविंग अ हेल्दी लाइफ योग यह विश्व को भारत की देन है और आज विश्व स्तर पर योग को अपनाया जा रहा है योग को हम तीन तरीके से डिवाइड कर सकते
(3:20:11) हैं एक जो शारीरिक तंदुरुस्ती प्रदान करता है दूसरा जो मानसिक तंदुरुस्ती प्रदान करता है और तीसरा जो शारीरिक और मानसिक दोनों तंदुरुस्ती प्रदान करता है योग इन फिजिकल हेल्थ माने योग शरीर स्वास्थ्य के लिए जो शारीरिक क्षमता प्रदान करते हैं वह है सूर्य नमस्कार वजली मुद्रा अश्विनी मुद्रा और वज्रासन सूर्य नमस्कार आपकी हार्मोन सिस्टम को बैलेंस करता है रेगुलेट करता है वजली और अश्विनी मुद्रा आपकी पेल्विक फ्लोर मसल्स को बेहतर बनाते
(3:20:57) हैं और वज्रासन डाइजेशन में मदद रूप होता है और प्राइवेट पार्ट में भी खून के बहाव में इजाफा करता है अभी बात करते हैं योग इन मेंटल हेल्थ माने योग मानसिक स्वास्थ्य के लिए सवासन शांति प्रदान करता है एंजाइटी फिक्र चिंता कम करता है एंजाइटी की वजह से बढ़े हुए ब्लड प्रेशर में भी कमी ला सकता है अभ योग इन फिजिकल एज वेल एस मेंटल हेल्थ माने जो योग शारीरिक और मानसिक क्षमता दोनों साथ में बढ़ाता है वह है प्राणायाम अनुलोम विलोम इसमें सांस
(3:21:43) लेना सांस रोकना और सांस बाहर निकालना यह खास तरीके से किया जाता है इसका रेशियो ट हो तो बेहतर है माने मिसाल के तौर पर 5 सेकंड आपने सांस लिया जिसको पूरक कहते हैं 20 सेकंड सांस रोका जिसे कुंभक कहते हैं और 10 सेकंड सांस बाहर निकाला जिसे रेचक कहते हैं ऐसे 10 राउंड अनुलोम विलोम करने से शारीरिक और मानसिक समस्याओं में काफी राहत मिल सकती है
(3:22:28) फिलहाल मॉडर्न मेडिसिन की नई रिसर्च यह कंफर्म करती है कि सांस को रोकना माने इंस्पिरेट्री होल्ड बदन में बेहतर ऑक्सीजन प्रोवाइड करता है और ऑक्सीजन इज द एनर्जी सोर्स ट फ्यूल सेल फंक्शन च मींस लेस ऑक्सीजन लेस एनर्जी मोर ऑक्सीजन मोर एनर्जी इन दैट केस प्राणायाम विथ एन इंस्पिरेट्री होल्ड विल प्रोवाइड मोर एनर्जी माने इस तरह का प्राणायाम अनुलोम विलोम इस तरह से करने से एक बीमार इंसान स्वस्थ बन सकता है और एक स्वस्थ इंसान ज्यादा तंदुरुस्त बन सकता है
(3:23:13) योगाभ्यास कोई सही जानकार व्यक्ति से सीखना बेहतर होगा इस लेक्चर में हमने जिन चीजों पर डिस्कशन किया जो नेचुरल तरीके की बात की उसे आप बीमारी प्रिवेंट कर सकते हो और आप मेरी बात से सहमत होंगे कि प्रिवेंशन इज ऑलवेज बेटर देन क्यर अगर हम नेचुरल तरीके से माने नैसर्गिक तरीके से बीमारी को दूर कर सकते हैं या प्रिवेंट कर सकते हैं तो भला दवाइयों का इस्तेमाल क्यों करें याद रखिए सेक्सुअल हेल्थ शरीर की कूल हेल्थ से अलग नहीं है जो पूरे शरीर के लिए अच्छा वह सेक्स के लिए भी
(3:23:59) [संगीत] अच्छा

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