Garba or Dating Festival? Reality of Modern Navratri
Author Name:Neha Gupta
Youtube Channel Url:https://www.youtube.com/@NehaGuptaYT
Youtube Video URL:https://www.youtube.com/watch?v=Do9XMg0t6dU
Title: Garba or Dating Festival? Reality of Modern Navratri
Author Name: Neha Gupta
Description: Garba or Nightclub? What Happened to Navratri?
In this video, I talk about the changing culture of Garba, Dandiya, and Navratri in India. From dating culture and couple reels to late-night DJ parties, inappropriate behaviour, and the growing sexualization of religious festivals, are we slowly forgetting the real purpose of Navratri?
#navratri2026 #vulgarity #garba #reality #exposed
Transcript:
(00:00) आज की डेट में गरबा, डांडिया, नवरात्रि का लोगों ने मजाक बना दिया है। अब यह कल्चरल फेस्टिवल नहीं बल्कि एक डेटिंग की जगह बन चुकी है। इस साल गरबा में ऐसी चीजें देखने को मिली जिससे लगता है कि आने वाले समय में गरबा का मतलब ही बदल जाएगा क्योंकि जिस तरह की खबरें सामने आती है कि नवरात्रि के टाइम पे कंडोम्स और कंट्रोसेप्टिव्स की सेल बढ़ जाती है और उन दिनों होटल्स की बुकिंग भी बढ़ जाती है। बहुत जगह गरबा बस एक डीजे नाइट बनकर रह गया है। लेट नाइट तक लाउडस्कर पर आइटम सॉन्ग्स बजाए जा रहे हैं [संगीत] और गरबा को एक ट्रेडिशनल फेस्टिवल के बजाय
(00:37) पार्टी और क्लब जैसा बना दिया है। मुझे तो लगता है कुछ साल बाद नवरात्रि का मतलब भी यही बनकर रह जाएगा। गरबा में अपोजिट जेंडर को ढूंढना, कपल्स के साथ जाना, कपड़ों का शो अप करना और फिर कपल्स के साथ रोमांटिक फोटोस लेना, रील्स बनाना, फिर गरबा डांडिया खेलकर नाइट आउट और रुकअप करना। लोग पहले गरबा डांडिया खेलेंगे। फिर होटल में जाकर अलग तरह का डांडिया खेलेंगे। यही आज नवरात्रि के नौ दिनों की रियलिटी बनती जा रही है। गरबा गुजरात का एक एंशिएंट डांस फॉर्म है जिसे सदियों से सेलिब्रेट किया जा रहा है। नवरात्रि में इसे मां दुर्गा की पूजा और उनकी शक्ति के
(01:12) सेलिब्रेशन के लिए खेला जाता है। आज भी बहुत सी जगहों पर गरबा बहुत ही खूबसूरती और रिस्पेक्ट के साथ मनाया जाता है। यूनेस्को ने 2023 में गरबा को दुनिया की इंपॉर्टेंट कल्चरल ट्रेडिशन की लिस्ट में शामिल किया था। लेकिन कुछ लोगों ने सिर्फ वैलेंटाइंस डे बना के रख दिया है। कई लोग तो गरबा में सिर्फ इसलिए आते हैं क्योंकि उनको एंटरटेनमेंट चाहिए। कुछ लड़के लड़कियों को टाड़ने पटाने आते हैं या भीड़ में लड़कियों को गलत टच करने। जब ऐसे कोई लड़की बैठी दिखती है ना तो उसको ऐसे घूरते हैं, ऐसे घूरते हैं। पता नहीं जैसे क्या ही हो गया। जैसे कुछ लोग
(01:51) ये अंकल खड़े-खड़े मेरी दोस्त की कमर को घूरे जा रहे हैं। तो कुछ लड़कियां भी लड़कों का अटेंशन पाने के लिए आती हैं। लड़की पटा रही है तो आप डांडिया खेलने आइए। अच्छे से लड़की पटा सकेंगे और अच्छे से रोज कर पाएंगे आप लोग। नहीं कर पा रहे हैं। खैर सच कहूं तो इन लोगों को गरबा डांडिया से कोई मतलब ही नहीं होता। नवरात्रि क्यों मनाई जाती है? यह किस चीज का फेस्टिवल है? उन्हें इससे कोई फर्क नहीं पड़ता। गरबा हो रहा है। उसके बाद जब रात के 12:30 1:00 बजे आरती होगी तब आरती में कोई नहीं दिखेगा। पूरा मंडप खाली रहेगा। बाहर फोटो रील्स होंगे और सब गायब हो जाएंगे।
(02:27) मैं ये नहीं कह रही कि आपको नवरात्रि की पूरी हिस्ट्री पता होनी चाहिए। बट एटलीस्ट इतना कॉमन सेंस तो होना चाहिए ना। जब आप किसी रिलीजियस फेस्टिवल में आ रहे हो तो वहां क्या करना सही है, क्या गलत है और किस तरह के कपड़े पहनना एप्रोप्रियेट होगा। कुछ लोगों ने होली को तो पहले ही व्गर फेस्टिवल बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ी और अब नवरात्रि को भी सेक्सुअलाइज किया जा रहा है। कुछ लड़कियां इंटेंशनली कैमरे के सामने प्रोवोकेटिव मूव्स करती है सिर्फ इसलिए ताकि उसकी रील वायरल हो। जब आप किसी रिलीजस फेस्टिवल को इस तरह से सेक्सुअलाइज करने लगते हो तो उस फेस्टिवल
(03:03) की डिग्निटी और रिस्पेक्ट कम होने लगती है। वो व्गेरिटी बन जाती है। आज इंडिया में कुछ लोगों ने बोल्ड होने और कपड़े उतारने को ही आजादी का नाम दे दिया है। बैकलेस ब्लाउज तक तो चलो ठीक था लेकिन अब कुछ लड़कियां सिर्फ ब्रा पहन कर आ रही हैं। आजादी का मतलब यह तो नहीं होगा ना कि तुम बिना कपड़ों के घूमना शुरू कर दो। कहीं पे कुछ भी पहनना शुरू कर दो। आजादी का मतलब होता है इंडिपेंडेंट बनना, अपने पैरों पर खड़े होना, कमाना चाहते हो तो कमाना और अपनी लाइफ के डिसीजंस खुद से लेना। देखो मैं ये नहीं बता रही कि लड़कियों को क्या पहनना चाहिए और क्या
(03:37) नहीं। वो सब उनकी चॉइस है। लेकिन कहां, कब और किस ओके पर क्या पहनना चाहिए ये समझना भी बेसिक कॉमन सेंस है। आप हर जगह कुछ भी पहन कर नहीं जा सकते। हर ओकेजन का अपना एक माहौल होता है। हर प्लेस का एक ड्रेस कोड होता है। अगर आप गोवा के बीच पर जा रहे हो तो वहां शॉट्स या बिकनी पहन रहे हो तो नॉर्मल है। क्लब में जा रहे हो तो वहां शॉट्स पहनना नॉर्मल है। बट वहां बीच पे कुर्ती पहन के घूम रहे हो या साड़ी में क्लब जा रहे हो तो थोड़ा अनयूजुअल या ऑकवर्ड लगेगा। सब लोग आपको घूरने लगेंगे क्योंकि वहां का वो ड्रेस कोड नहीं है। वहां आप पार्टी वियर में जाइए, छोटे कपड़े
(04:14) पहनिए। दैट्स फाइन। कुल मिलाकर यही है कि आप कहां जा रहे हो, किस पर्पस से जा रहे हो, उस जगह और ओके्स की भी तो रिस्पेक्ट करनी चाहिए। अगर कोई ट्रेडिशनल पारंपरिक चीज हो रही है, पूजा पाठ हो रही है तो फिर वहां पे आपको पता है कि आपको कैसे कपड़े पहनने चाहिए। अब ये वीडियो सुनकर बहुत सी लड़कियों का फेमिनिज्म जाग जाएगा। वो कहेंगी माय बॉडी, माय चॉइस। लेकिन अगर आप समझ रहे हो कि मैं इस वीडियो में क्या कहना चाहती हूं तो ठीक है और अगर आपको लगता है कि मैं इस वीडियो में कुछ गलत कह रही हूं तो मैं चाहती हूं कि लड़कियां इस वीडियो पर कमेंट करें और मुझे बताएं कि
(04:48) मैं कहां गलत हूं। देखो मैं यह नहीं कह रही कि डेटिंग गलत है, मॉडर्न कपड़े पहनना गलत है। लेकिन जब किसी फेस्टिवल की आइडेंटिटी उसकी ओरिजिनल पर्पस से ज्यादा दूसरी चीजों के लिए डिस्कस होने लगे तो उस पे बात करना जरूरी है। और आप लोगों का इस टॉपिक को लेकर क्या प्रोस्पेक्टिव है मुझे कमेंट में बताना। और अगर वीडियो अच्छी लगी हो तो सब्सक्राइब करना। मिलती हूं नेक्स्ट वीडियो में।
Author Name:Neha Gupta
Youtube Channel Url:https://www.youtube.com/@NehaGuptaYT
Youtube Video URL:https://www.youtube.com/watch?v=Do9XMg0t6dU
Title: Garba or Dating Festival? Reality of Modern Navratri
Author Name: Neha Gupta
Description: Garba or Nightclub? What Happened to Navratri?
In this video, I talk about the changing culture of Garba, Dandiya, and Navratri in India. From dating culture and couple reels to late-night DJ parties, inappropriate behaviour, and the growing sexualization of religious festivals, are we slowly forgetting the real purpose of Navratri?
#navratri2026 #vulgarity #garba #reality #exposed
Transcript:
(00:00) आज की डेट में गरबा, डांडिया, नवरात्रि का लोगों ने मजाक बना दिया है। अब यह कल्चरल फेस्टिवल नहीं बल्कि एक डेटिंग की जगह बन चुकी है। इस साल गरबा में ऐसी चीजें देखने को मिली जिससे लगता है कि आने वाले समय में गरबा का मतलब ही बदल जाएगा क्योंकि जिस तरह की खबरें सामने आती है कि नवरात्रि के टाइम पे कंडोम्स और कंट्रोसेप्टिव्स की सेल बढ़ जाती है और उन दिनों होटल्स की बुकिंग भी बढ़ जाती है। बहुत जगह गरबा बस एक डीजे नाइट बनकर रह गया है। लेट नाइट तक लाउडस्कर पर आइटम सॉन्ग्स बजाए जा रहे हैं [संगीत] और गरबा को एक ट्रेडिशनल फेस्टिवल के बजाय
(00:37) पार्टी और क्लब जैसा बना दिया है। मुझे तो लगता है कुछ साल बाद नवरात्रि का मतलब भी यही बनकर रह जाएगा। गरबा में अपोजिट जेंडर को ढूंढना, कपल्स के साथ जाना, कपड़ों का शो अप करना और फिर कपल्स के साथ रोमांटिक फोटोस लेना, रील्स बनाना, फिर गरबा डांडिया खेलकर नाइट आउट और रुकअप करना। लोग पहले गरबा डांडिया खेलेंगे। फिर होटल में जाकर अलग तरह का डांडिया खेलेंगे। यही आज नवरात्रि के नौ दिनों की रियलिटी बनती जा रही है। गरबा गुजरात का एक एंशिएंट डांस फॉर्म है जिसे सदियों से सेलिब्रेट किया जा रहा है। नवरात्रि में इसे मां दुर्गा की पूजा और उनकी शक्ति के
(01:12) सेलिब्रेशन के लिए खेला जाता है। आज भी बहुत सी जगहों पर गरबा बहुत ही खूबसूरती और रिस्पेक्ट के साथ मनाया जाता है। यूनेस्को ने 2023 में गरबा को दुनिया की इंपॉर्टेंट कल्चरल ट्रेडिशन की लिस्ट में शामिल किया था। लेकिन कुछ लोगों ने सिर्फ वैलेंटाइंस डे बना के रख दिया है। कई लोग तो गरबा में सिर्फ इसलिए आते हैं क्योंकि उनको एंटरटेनमेंट चाहिए। कुछ लड़के लड़कियों को टाड़ने पटाने आते हैं या भीड़ में लड़कियों को गलत टच करने। जब ऐसे कोई लड़की बैठी दिखती है ना तो उसको ऐसे घूरते हैं, ऐसे घूरते हैं। पता नहीं जैसे क्या ही हो गया। जैसे कुछ लोग
(01:51) ये अंकल खड़े-खड़े मेरी दोस्त की कमर को घूरे जा रहे हैं। तो कुछ लड़कियां भी लड़कों का अटेंशन पाने के लिए आती हैं। लड़की पटा रही है तो आप डांडिया खेलने आइए। अच्छे से लड़की पटा सकेंगे और अच्छे से रोज कर पाएंगे आप लोग। नहीं कर पा रहे हैं। खैर सच कहूं तो इन लोगों को गरबा डांडिया से कोई मतलब ही नहीं होता। नवरात्रि क्यों मनाई जाती है? यह किस चीज का फेस्टिवल है? उन्हें इससे कोई फर्क नहीं पड़ता। गरबा हो रहा है। उसके बाद जब रात के 12:30 1:00 बजे आरती होगी तब आरती में कोई नहीं दिखेगा। पूरा मंडप खाली रहेगा। बाहर फोटो रील्स होंगे और सब गायब हो जाएंगे।
(02:27) मैं ये नहीं कह रही कि आपको नवरात्रि की पूरी हिस्ट्री पता होनी चाहिए। बट एटलीस्ट इतना कॉमन सेंस तो होना चाहिए ना। जब आप किसी रिलीजियस फेस्टिवल में आ रहे हो तो वहां क्या करना सही है, क्या गलत है और किस तरह के कपड़े पहनना एप्रोप्रियेट होगा। कुछ लोगों ने होली को तो पहले ही व्गर फेस्टिवल बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ी और अब नवरात्रि को भी सेक्सुअलाइज किया जा रहा है। कुछ लड़कियां इंटेंशनली कैमरे के सामने प्रोवोकेटिव मूव्स करती है सिर्फ इसलिए ताकि उसकी रील वायरल हो। जब आप किसी रिलीजस फेस्टिवल को इस तरह से सेक्सुअलाइज करने लगते हो तो उस फेस्टिवल
(03:03) की डिग्निटी और रिस्पेक्ट कम होने लगती है। वो व्गेरिटी बन जाती है। आज इंडिया में कुछ लोगों ने बोल्ड होने और कपड़े उतारने को ही आजादी का नाम दे दिया है। बैकलेस ब्लाउज तक तो चलो ठीक था लेकिन अब कुछ लड़कियां सिर्फ ब्रा पहन कर आ रही हैं। आजादी का मतलब यह तो नहीं होगा ना कि तुम बिना कपड़ों के घूमना शुरू कर दो। कहीं पे कुछ भी पहनना शुरू कर दो। आजादी का मतलब होता है इंडिपेंडेंट बनना, अपने पैरों पर खड़े होना, कमाना चाहते हो तो कमाना और अपनी लाइफ के डिसीजंस खुद से लेना। देखो मैं ये नहीं बता रही कि लड़कियों को क्या पहनना चाहिए और क्या
(03:37) नहीं। वो सब उनकी चॉइस है। लेकिन कहां, कब और किस ओके पर क्या पहनना चाहिए ये समझना भी बेसिक कॉमन सेंस है। आप हर जगह कुछ भी पहन कर नहीं जा सकते। हर ओकेजन का अपना एक माहौल होता है। हर प्लेस का एक ड्रेस कोड होता है। अगर आप गोवा के बीच पर जा रहे हो तो वहां शॉट्स या बिकनी पहन रहे हो तो नॉर्मल है। क्लब में जा रहे हो तो वहां शॉट्स पहनना नॉर्मल है। बट वहां बीच पे कुर्ती पहन के घूम रहे हो या साड़ी में क्लब जा रहे हो तो थोड़ा अनयूजुअल या ऑकवर्ड लगेगा। सब लोग आपको घूरने लगेंगे क्योंकि वहां का वो ड्रेस कोड नहीं है। वहां आप पार्टी वियर में जाइए, छोटे कपड़े
(04:14) पहनिए। दैट्स फाइन। कुल मिलाकर यही है कि आप कहां जा रहे हो, किस पर्पस से जा रहे हो, उस जगह और ओके्स की भी तो रिस्पेक्ट करनी चाहिए। अगर कोई ट्रेडिशनल पारंपरिक चीज हो रही है, पूजा पाठ हो रही है तो फिर वहां पे आपको पता है कि आपको कैसे कपड़े पहनने चाहिए। अब ये वीडियो सुनकर बहुत सी लड़कियों का फेमिनिज्म जाग जाएगा। वो कहेंगी माय बॉडी, माय चॉइस। लेकिन अगर आप समझ रहे हो कि मैं इस वीडियो में क्या कहना चाहती हूं तो ठीक है और अगर आपको लगता है कि मैं इस वीडियो में कुछ गलत कह रही हूं तो मैं चाहती हूं कि लड़कियां इस वीडियो पर कमेंट करें और मुझे बताएं कि
(04:48) मैं कहां गलत हूं। देखो मैं यह नहीं कह रही कि डेटिंग गलत है, मॉडर्न कपड़े पहनना गलत है। लेकिन जब किसी फेस्टिवल की आइडेंटिटी उसकी ओरिजिनल पर्पस से ज्यादा दूसरी चीजों के लिए डिस्कस होने लगे तो उस पे बात करना जरूरी है। और आप लोगों का इस टॉपिक को लेकर क्या प्रोस्पेक्टिव है मुझे कमेंट में बताना। और अगर वीडियो अच्छी लगी हो तो सब्सक्राइब करना। मिलती हूं नेक्स्ट वीडियो में।
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