Thursday, June 18, 2026

History Books Lied- Kali Yug, Vedic Science, Ancient India | Rupa Bhaty on Body to Beiing | Shlloka

History Books Lied- Kali Yug, Vedic Science, Ancient India | Rupa Bhaty on Body to Beiing | Shlloka

Author Name:SHLLOKA

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Transcript:
(00:00) ये कलयुग नहीं है। कली का जो टाइम है दैट इज वेरी स्लो। तो आज से 2000 पहले कलयुग एज वी नो इट खत्म [संगीत] हो चुका है। आपके हिसाब से ये कौन सा युग है? अब शनि का टाइम आ रहा है। एज ऑफ़ एक अक्वेरियस से बिकॉज़ अक्वेरियस का लॉर्ड सैटर्न। हां लॉर्ड सैटर्न है। नाउ देयर विल बी लाइक टेक्नोलॉजिकल एडवांसेस ऑलरेडी हम देख रहे हैं कस्प पीरियड में। 500 सीई में हम मेष राशि को बोलते थे कि वो पहली राशि है। लेकिन अभी हम क्या बोलेंगे पहली राशि। अभी एक्वेरियस है। वी आर ऑलमोस्ट इन द एज ऑफ़ एक्वेरियस। यस। क्यों बोला जाता है ये? यानी कि जो सन है वो अब मेष राशि के साथ
(00:34) पहली लग्न में नहीं उग रहा है। चिदंबरम महात्म जो है जिसमें शिव जो है वो सदर्न साइड में देखते हैं इट इज लुकिंग फॉर अगस्त ओनली। ओके। इसीलिए दक्षिणामूर्ति है। यहां पे वर्नल इक्विनॉक्स जब स्लो हुई तो शिव की आंख खुल गई। एक कथा है जिसमें शिवा और पार्वती का विवाह है। काशी में होना है। अगस्त्य मुनि अपने साथ सारे असुरों को लेके सदर्न हेमिस्फयर के लोगों को लेके भी वो वहां पे आते हैं। तो पूरा जो भार है पृथ्वी का वो नॉर्दन हेमिस्फयर में आ जाते हैं। शिव कहते हैं अगस्त मुनि अब आप वापस से साउथ जाइए। असुरों को भी लेके जाइए। रूपा भाटी ऑथर ऑफ इंडसल्स डिसाइफर्ड
(01:15) एस्ट्रोनॉमी के फील्ड में एक वेल नोन फिगर हैं जो एंशिएंट इंडियन क्रोनोलॉजी और उसके अलग-अलग साइंसेस के साथ रिश्ता समझाने के लिए जानी जाती हैं। उन्होंने इस पे एक्सटेंसिव पेपर्स लिखे हैं। जहां वैदिक टेक्स्ट और एस्ट्रोनॉमी के जरिए इंडियन हिस्ट्री और कल्चर [संगीत] के सारे मिस्ट्रीज को डिकोड किया गया है। शिव विवाह हो रहा है जो सदन के जितने भी स्टार्स हैं वो काशी तक दिखाई दे रहे थे। उसके बाद फिर वह धीरे से वापस विंध्या क्रॉस करते हुए अब जो है अगस्त से साउथ जा रहे हैं। तो सारे जो स्टार्स हैं अब वह नीचे आ रहे हैं। हैप्ट ग्रुप यानी कि
(01:46) [संगीत] मेल में जो वाई क्रोमोजोम्स हैं उसके हिसाब से हैप्लोग ग्रुप्स जो है वो बनते हैं। फीमेल का माइटोकांड्रियल डिफरेंट होता है। वो [संगीत] एल से बिलोंग करता है। सदर्न इंडियन में अभी भी एच हैप्लो ग्रुप का कंसंट्रेशन सबसे ज्यादा है। एच हैप्लो ग्रुप का एक चैटनार्ड आदमी है। उसका 75,000 [संगीत] ईयर ओल्ड जेनेटिक कंटिन्यूएशन मिला है। इतना पुराना जींस जो है वो कैरी करना है। इंडोनेशिया में एक वोल्केनो फटा था। उसके बाद एक पूरा कोल्ड स्पेल आ गया था। बिकॉज़ सन रेज कुडंट रीच द [संगीत] अर्थ। आई से जो आप बोल रहे हैं। हमारे जो स्थपतिज हैं वो बजा के देखते
(02:20) हैं। यह मेल पत्थर है तो इसमें से मेल मूर्ति [संगीत] बनेगी। ये फीमेल पत्थर है। इसमें फीमेल मूर्ति बनेगी। उसके बाद उसमें प्राण प्रतिष्ठा होगी। आपने यह भी बोला कि जैसे ह्यूमंस [संगीत] की नाड़ीज होती है, हमारी 72,000 नाड़ियां हैं, वैसे अर्थ की भी नाड़ी होती है। ये क्या है? अगर कोई अश्विनी नक्षत्र में बोर्न होता है, जिसके जो देवता है, अश्विन कुमार हैं तो ही कैन बी अ सर्जन वेरी गुड जो रेकी करते हैं। अब एक क्वेश्चन यह भी आता है कि दो लोग सेम ही हॉस्पिटल में पैदा हुए हैं। सेम टाइम में पैदा हुए हैं। मगर मदर अलग हैं। लेकिन उन दोनों का फेड भी नहीं
(02:55) मिलता। देयर इज अ मैजिक स्क्वायर इंद्र वायु यम करके जो एक मैजिक स्क्वायर बनाते हैं सदर्न इंडिया में वो साइंस जो है वो चाइना को चला गया था। सो दे आर द फ्लाइंग स्टार्स। उस पे उनका जो फंक्शुई है वो वेस्ट है। एंड व्हाई इज इस्लाम अ [संगीत] पार्ट ऑफ़ श? बिकॉज़ रूपा भाटी जी के रिसर्च का मेन ऑब्जेक्टिव ये है कि वो वेस्ट के द्वारा प्रेजेंट किए हुए डिस्टोर्टेड इंडियन हिस्ट्री और वैदिक विज़डम को करेक्ट कर सके। और आज हम उनका बॉडी टू बीइंग पडकास्ट पर तहे दिल से स्वागत करते हैं। एक योगी ने एक बार एक साइंटिस्ट से पूछा क्या यह मुमकिन है कि बिग बैंग सिर्फ एक
(03:32) बार नहीं बल्कि मल्टीपल टाइम्स हुआ हो? तो साइंटिस्ट ने सोचा और फिर कहा कि हां यह बिल्कुल मुमकिन है? फिर योगी ने दोबारा पूछा क्या यह पॉसिबल है कि बिग बैंग 84 टाइम्स हुआ हो? साइंटिस्ट ने फिर सोचा और कहा यह बात मैं फाइनलिटी से तो कह नहीं सकता। फिर योगी ने बोला कि आप यह नंबर नोट कीजिए। कुछ टाइम बाद साइंस इस कंक्लूजन पर आएगा कि बिग बैंग 84 टाइम्स हुआ था। अब 84 का हमारे शास्त्रों में बहुत सिग्निफिकेंस है। कहा जाता है कि 8.
(04:04) 4 मिलियन योनियों के बाद एक मनुष्य जीवन आता है। 84 योगासनास होते हैं। यह भी कहा गया है कि हम 84 क्रिएशन में हैं। यानी कि 83 क्रिएशंस ऑलरेडी हो चुके हैं। एक बहुत ही फेमस कॉस्मोलॉजिस्ट ने हाल ही में यह बात बोली। हम साइंटिफिक डिस्कवरीज में बिलियंस ऑफ डॉलर स्पेंड करते हैं। जैसे कि हग्सबोजॉन का पता लगाना या फिर लॉ ऑफ़ ग्रेविटी। लेकिन यही सारे कांसेप्ट्स हमारे शास्त्रों में हजारों साल पहले मेंशन करी गई हैं। हाल ही में एक बहुत ही फेमस कॉस्मोलॉजिस्ट ने ये बात बोली कि यूनिवर्स का एक टाइम साइकिल होता है जो कि है 20 बिलियन इयर्स। अब अगर तो सृष्टि इस बीच
(04:35) नष्ट होती है या डिस्ट्रॉय होती है वो इसी 20 बिलियन इयर्स के साइकिल में होगी। अब यही चीज बिलियंस ऑफ डॉलर स्पेंड करके पता चली। और यही बात 500 बीसी में ऑलरेडी मेंशन करी गई है। तो आज का पॉडकास्ट वैदिक एस्ट्रोनॉमी पे है। प्लीज इस पॉडकास्ट को पूरा देखिए। हो सकता है आपको इस पॉडकास्ट को बार-बार सुनना पड़े बिकॉज़ चीजें बहुत ही नवांस बहुत ही गहराई से डिस्कस करी गई हैं और अगर तो आप इसी पॉडकास्ट का ऑडियो एक्सपीरियंस चाहते हैं तो स्पॉटिफाई पे बॉडी टू बीइंग टाइप करें। रूपा जी मुझे वैदिक एस्ट्रोनॉमी के कुछ ऐसे धमाकेदार सीक्रेट्स बताइए जो लोग नहीं
(05:13) जानते हो। सब बोलते हैं कली है, कली है, कल युग है। बट मयसुर को जब सूर्यदेव ने यह टेक्स्ट है, सूर्य सिद्धांत जब उन्होंने दिया था। सो दैट टाइम वो कह रहे हैं कि कृतयुग के समाप्त होने के समय पर मुझे यह दिया जा रहा है। और समय के भेद होने की वजह से लेट अस डू सम एडिटिंग। यानी कि जो सूर्य सिद्धांत की अब हम जो डेटिंग जो हमने ऑक्सफोर्ड पेपर में करी थी मैंने और नीलेश जी ने वो 12,000 बीसी की थी। उससे भी पुराना है यह सूर्य सिद्धांत। जी युग को चार पार्ट में सूर्य सिद्धांत में डिवाइड किया गया है। कृतक, त्रेता, द्वापर, कली। तो कृतक के एंड में मयासुर
(05:54) को मिला था। दैट इज़ व्हाई द डेटिंग आल्सो केम टू 13,000 बीसी। नेक्स्ट जो सबसे इंपॉर्टेंट चीज थी जो हमने ऑक्सफोर्ड पेपर में निकाली थी। दैट वाज़ एब्साइडल प्रिसिशन। नाउ व्हाट इज़ एब्साइडल प्रसीशन? तो इसमें एतर्य ब्राह्मण में एक बहुत ब्यूटीफुल वर्स आया है। अचरवेति चरवेति कली शयनो भवती उत्तष् यानी कि जो दूसरा वाला जो युग है वह थोड़ा सा खड़ा होता है। फिर तीसरा जो है वह जागृत होता है। थोड़ा सा चलता है। और जो चौथा युग है जो कृत युग है उसमें आदमी दौड़ता है। यानी कि कली का जो टाइम है दैट इज़ वेरी स्लो। सो एप्साइडल प्रसीजन में अगर आप देखेंगे एलिप्टिकल
(06:36) होता है ऑर्बिट। अर्थ का और सन का जब हम देखेंगे तो अर्थ का ऑर्बिट एलिप्टिकल है। तो हर दिन का भी देखेंगे इवन सीजन का भी देखेंगे। एक साल का अगर हम पहले समझें उसको तो एक साल में एप्साइडल प्रसीजन जब हो रहा है तो वी एक्सपीरियंस विंटर्स स्लीपिंग लाइक ऐसे बट हमें समर्स जो हैं बहुत लंबे लगते हैं। ऐसा होता है ये हम बॉडीली एक्सपीरियंस करते हैं। आपको लगेगा यहां समर्स खत्म ही नहीं हो रहे हैं। विंटर्स तो आए और चले गए। राइट राइट राइट जबकि महीने उतने ही हैं। यस बट द ह्यूमन साइके में उसका इंपैक्ट है कि यह जो महीने हैं मार्च से लेकर के जून
(07:15) तक का महीना तो ऐसा छ महीने का लगता है। इतना लगर लगता है ये और सर्दियां आती हैं और खत्म हो जाती हैं इतनी जल्दी से। जबकि वो भी तीन महीने का ही है। तो भी इतने जल्दी खत्म हो रही हैं। तो हर सीजन को हमने जैसे दो-द महीने में डिवाइड कर लिया। सिक्स सीज़ंस हैं, 12 मंथ्स हैं। तो, जो समर है, वह हमको बहुत लगता है। खत्म ही नहीं हो रहा है ऐसा लगता है। तो, वह इसलिए है क्योंकि एप्साइडल प्रसीजन में वो दोनों एपोएप्स एंड पेरीप्सिस पे हैं। यानी कि अर्थ एक समय पे सन के बहुत पास में जाता है और एक समय में अर्थ सन से थोड़ा सा दूर जाता है और जिस
(07:50) समय में पास में आता है तो वो ऐसा लगता है कि उस समय तीक्ष्ण धूप है। राइट राइट राइट डायरेक्ट। आप देखिएगा कि विंटर्स में आप बाहर बैठेंगे ना तो आपको धूप चुपती हुई लगती है। करेक्ट करेक्ट करेक्ट है ना? तो तब विंटर्स में पास में है लेकिन वो ड्यू टू केप्लर्स लॉ जिसको अब हम केप्लर्र्स बोल रहे हैं। एक्चुअली में वो सूर्य सिद्धांत में ऑलरेडी दिया हुआ है। सो दिस वाज़ द रेवोल्यूशन कि केप्लर्स लॉ इज़ ऑलरेडी देयर। इट वुड अपीयर एज़ इफ द अर्थ हैज़ स्लिप्ड। अपीयर्ड। हां, अपीयर्स। कि जल्दी से निकल गई। तो फिर फील क्यों हो रहा है? फील इसलिए हो
(08:23) रहा है कि वह महीने जल्दी खत्म हो गए। एंड नाउ इट इज़ मूविंग टुवर्ड्स द समर। नाउ समर्स वाला जो पूरा ज़ोन है वह उसमें ऑर्बिट में बहुत ज्यादा लेंथ ले रहा है। जबकि टाइम उतना ही है। यानी कि आप जब उसको एरिया कैलकुलेशन करेंगे उसको आप इस तरह से एरिया बनाएंगे। यहां का एरिया बनाएंगे तो ये छोटा जो ट्रायंगल एरिया बन रहा है और ये जो बड़ा ट्रायंगल एरिया बन रहा है एरिया सेम है। सो इट इज़ रिलेटेड टू टाइम। टाइम इज़ चेंजिंग। टाइम इन द सेंस ओनली रिलेटिव। तो यह एब्साइडल प्रोसीजशन में बड़ा इंटरेस्टिंग एक फिनोमिना जो कि ह्यूमन साइके पे बहुत इफेक्ट देता है और अर्थ पे
(08:55) भी देता है। तो एक जो एनेकडोट है या फिर कथा कह लीजिए पुराणों में कि शिव जो हैं समाधि में हैं और क्यूपिड की तरह मारते हैं वसंत के जो कामदेव और रति और कामदेव जो हैं वो छेड़खानी करते हैं और उनके ध्यान को भंग करते हैं। तो शिव अपनी आंख खोल देते हैं और जो कामदेव है वह जल के वहीं पर भस्म हो जाते हैं। नाउ रति इस रिग्रेटिंग कि ऐसा हो गया है। सो दैट मींस कि उस समय में एप्साइडल प्रसीजन के समय में स्प्रिंग सीजन था वो लगर हो गया और गर्मी बहुत ज्यादा वहां पे आ गई। एंड स्प्रिंग में जितने भी जो पेड़-पौधे हैं वो जलने शुरू हो गए। तो एक
(09:37) पॉइंट ऑफ टाइम अर्थ पे ऐसा आया कि स्प्रिंग सीजन में भी समर्स का बहुत ज्यादा इंपैक्ट क्योंकि स्प्रिंग बहुत लग दिखने लगा था। खच गया था। तो ये कथा जो है ये उससे रिलेट होती है। ओके। सो दिस इ्सल प्रसीजन इज़ आल्सो देयर। नाउ वी हैव एकुअल प्रसीिजशन वेगा एंड कैनोपस इस मेंशंड इन भूगोला अध्याय। वी हैव प्रसीजशन ऑफ इक्विनोक्सिस। 53 अह सेकंड्स का उसमें ऑलरेडी एक श्लोक आया हुआ है कि प्रिसेस हो रहा है। पीछे जा रहा है। नक्षत्र जो है वह पीछे जा रहे हैं। अ जो कि अभी के इसमें आई थिंक इट इज 50.
(10:16) 3 या मैं शायद वाइस ऑफ़ वर्षा बोल रही हूं। सो दोनों में जस्ट 2 कुछ सेकंड्स का ही फर्क है। जो मॉडर्न डेटा है और जो सूर्य सिद्धांत का जो डाटा है। है ना? एंड थर्ड वन इज़ अब्साइडल प्रिसेशन। एंड इसीलिए एतर्य ब्राह्मण में आया कि कली में लोग जो हैं वह स्लो हो जाते हैं। जो इंडस टाइम जो निकला वो जो डार्क एज निकला दैट वाज़ अ वेरी स्लो टाइम जो था उसमें उतने अच्छे से रिकॉर्डिंग भी नहीं कर पाए। उसमें वो अच्छे से पूरी हिस्ट्री भी नहीं लिख पाए इस तरह से। सो दैट कंप्लीटेड वन पोर्शन ऑफ द कली। फिर कली के बाद द्वापर शायद हम लोग अभी द्वापर में हैं या द्वापर
(10:55) या त्रेता इन दोनों के कष्ट में हैं। यह कलयुग है ही नहीं। यह कलयुग नहीं है। दिस कली इज द एसाइडल प्रसीजन। ये छोटा वाला जो टाइम है। दीज़ आर द फीलिंग्स। दीज़ आर नथिंग टू डू विद लाइक इसेरिक नॉलेज ऑफ कलयुग। यह एक जस्ट फ़ीलिंग होती है कि हां जो अब यह जो वर्नल इक्विनॉक्स है इसके समय का जो स्प्रिंग है आजकल बहुत अच्छा है। अह बहुत प्रॉपर्ली जर्मिनेशन होता है। इट इज़ वेरी साइंटिफिक। इसमें आप वो सारी चीजें नहीं जोड़ सकते। बट ऑफ कोर्स अब वो सारी चीजें उग रही हैं। ट्यूलिप्स उग रहे हैं। इतने ब्यूटीफुल चीजें उग रही हैं। आप वो सारी चीजें अपने वातावरण में देख रहे हैं।
(11:34) कामधेनु की तरह जल नहीं रहा है। हर चीज जल नहीं रही है। सो इट गिव्स यू अ वेरी ब्यूटीफुल इंपैक्ट ऑन योर माइंड। इजंट इट? ब्लिसफुल। तो आप कह रहे हैं कि योगास एक साइकोलॉजिकल रियलिटी है। साइकोलॉजिकल रियलिटी है। वो हमारे साइके पे काम करती है। कि हम किस प्रकार से काम कर रहे हैं। नाउ व्हाई वर्नल इक्वनॉक्स? वर्नल मींस स्प्रिंग का टाइम। जर्मिनेशन जो है वो स्प्रिंग में होता है। आपको बीज जो है वो आप देखेंगे कि उस समय जर्मिनेट हो रहे हैं, फल आ रहे हैं। इसलिए स्प्रिंग जर्मिनेशन टाइम बोलते हैं। यही टाइम था कामदेव रति का भी एक दूसरे के साथ में
(12:07) कोपुलेट करने का। यही टाइम था व्हेन यू प्रोक्रिएट यू गिव प्रोजेनीस। सो, यह जो फीलिंग है जो कामदेव के समय में हुआ कि वह भी बेचारे जल के राख हो गए। द्वापर के समय में नाउ दीज़ आर द टाइम्स व्हेन दे वर्नल इक्विनोक्स इज एक्सपीरियंसिंग वेरी नाइस वेदर ड्यूरिंग द स्प्रिंग टाइम इसलिए हम इतने फ्लोरल्स इतना सब कुछ देखते हैं इट विल कंटिन्यू इन त्रेता आल्सो ओके है ना तो आपके हिसाब से ये कौन सा युग है ये द्वापर आप समझ लीजिए हम द्वापर में द्वापर का कौन सा क्योंकि द्वापर 3000 समथिंग इयर्स कम है तो कौन से एकदम इनिशियल स्टेज पे ही हैं द्वापर के
(12:44) है ना और इनिशियल स्टेज कब शुरू हुई होगी इन टर्म्स ऑफ इयर्स 2000 बीसी 2000 इसीलिए कई थ्योरीज भी बनती है ना कि ब्लू बेबीज एंड ऑल मिलियन मिलेनियम या है ना अच्छा बहुत सारे आईडियोलॉजीस जो है ना जबरदस्ती के लगा दिए जाते हैं वो ये भी है उसमें ये भी है एक है क्योंकि उस दौरान ये भी बोल रहे थे वर्ल्ड इज़ गोइंग एंड आपको याद है व्हाई बहुत बोलते थे वर्ल्ड इज़ नॉट गोइंग टू एंड अप बट द युगा इज़ गोइंग टू एंड अप एंड द नेक्स्ट युगा इज़ स्टार्टिंग एंड युगा इज़ नथिंग बट अ फीलिंग ना ये मैं सब जनता के दिमाग से निकलवाना चाहती हूं कि प्लीज
(13:15) डोंट फील कि कोई त्रेता में या कल कलयुग में कोई एक कल्कि आएगा या त्रेता में कुछ होगा ऐसा कुछ नहीं होता है। अवतार हां मतलब वो ऑलरेडी हो चुके हैं। उनके बाद हम उनको बोलते हैं वो अवतरित हुए थे क्योंकि इतना महान काम करके गए हैं तो वी नीड टू टेल पीपल कि इंद्र तुल्य हैं, विष्णु तुल्य हैं। इस तरह से हम वो एक उस उसमें हमारी भावनाएं हम जोड़ देते हैं। है ना? तो आए तो मर्यादा पुरुषोत्तम है ना पुरुषों में उत्तम ही आए थे ना वो। हम हम पुरुष के रूप में ही तो आए थे ना। तो अंश तो हम सभी भगवान का अंश हैं। नहीं है। अहम ब्रह्मास्मि हम नहीं बोलते।
(13:51) तत्वमसी नहीं बोलते। तो ब्रह्म तो सब में है। सब में कॉन्शियसनेस का एक पार्ट है। है ना? क्योंकि वो इतना महान काम किए तो हम उन्हें अवतार मानते ही हैं। यह कंट्रोवर्शियल हो सकता है लोगों को लगेगा। बट वी नीड टू अंडरस्टैंड द रियलिटी बिहाइंड ऑल दोज़ थिंग्स। यह 3000 के ऐसे बनते हैं। लेकिन आपको कृत युग जो है ना वह बहुत बड़ा फील होगा वर्नल इक्विनॉक्स के टाइम पे। क्योंकि वर्नल इक्विनॉक्स उस समय बहुत लंबा खींचेगा। उसी वर्नल इक्विनॉक्स के आसपास की जो स्प्रिंग सीजन है उसमें आप समर्स भी एक्सपीरियंस थोड़ा सा करेंगे। मतलब इतना लंबा फील होगा कि बहुत लंबा
(14:26) वसंत लंबा है तो सारा कुछ खूबसूरत है। बहुत समय तक फूल खिले हुए हैं। है ना? लेकिन ये सारा जो एक्सपीरियंस है ये ट्रॉपिक के आसपास ही है। ट्रॉपिक ऑफ कैंसर और कैप्रीिकॉर्न जो हम बोलते हैं। इनके आसपास में सिर्फ इनके आसपास क्योंकि सोलर पावर ज्यादा है। पावर ज्यादा है तो वहां पे ही दिखाई देते हैं। तो यह सिंपल जो एस्ट्रोनॉमी है वो हम जब पहले समझेंगे ना तो फिर सारे जो हमारे टेक्स्ट है वो भी हमें धीरे-धीरे समझ में आने लगते हैं कि कहां पे क्या हो रहा था। हम हम जैसे लक्ष्मण बोलते हैं कि विंटर्स खत्म ही नहीं हो रहे हैं। उस पे मैंने एक पेपर लिखा है
(15:02) वो इसलिए नहीं बोल रहे हैं कि सीता लक्ष्मण का सीता से क्या लेना देना है या लक्ष्मण का उत्तरा भी वहां पे कहीं हैं तो उनको वो विंटर्स जो है वो बहुत लंबे खींचे हुए लग रहे हैं। तो जस्ट उल्टा है ना हां हमारे टाइम से जस्ट उल्टा हो रहा है। राइट राइट राइट तो इसलिए वो हमें त्रेता युग हुआ ना वो त्रेता युग लाइक 500 सीई में हम मेष राशि को बोलते थे कि वो पहली राशि है। है ना? लेकिन अभी हम क्या बोलेंगे? पहली राशि अभी भी हम एरीज ही बोलते हैं। फर्स्ट राशि एरीज ही है। नहीं अभी एक्वेरियस है। वी आर ऑलमोस्ट इन द एज ऑफ़ एक्वेरियस। यस। क्यों बोला जाता है?
(15:38) हां। ये क्यों बोलते हैं? कई लोगों ने थोड़ा बोलने की कोशिश करी। ब्लवि ने तो उसके पहले यह बोलने की कोशिश करी कि नाउ वी आर हेडिंग टुवर्ड्स करेक्ट दिस। है ना? तो वह क्यों बोल रहे हैं? बिकॉज़ इट हैज़ प्रिसेस्ड। यानी कि जो सन है वह अब मेष राशि के साथ पहले लग्न में नहीं उग रहा है। वर्नल इक्विनॉक्स के दिन। वर्नल इक्विनॉक्स के दिन अब एक्वेरियस के साथ उग रहा है। एंड फॉर 2000 इयर्स। अब वो एक्वेरियस के साथ ही उगेगा। विद इन 300 इयर्स। सो दिस इज़ अ कस्प पीरियड ऑफ़ पाइसिस एंड एक्वेरियस। हम है ना? तो अब हमारी पहली राशि क्या होनी चाहिए? एक्वेरियस होनी चाहिए।
(16:15) तो मैम योग सूत्र में जैसे कहा गया है कि अगस्त मुनि लिव फॉर 400 इयर्स। रामायण में आया दशरथ लिफ्ट फॉर 6ाउज इयर्स। करेक्ट। क्योंकि हमारे पास कांसेप्ट चिरंजीवियों का तो है ही है। लोग आज भी कहते हैं महावतार बाबा जी इसी हनुमान कहते हैं और ये आज के जीव तो है नहीं। ये कभी एक युग में आए होंगे। हम हम तो मैं उस हिसाब से रिलेट करना चाह रही हूं कि उनमें ऐसे कुछ ओके सनातन धर्म को इंटैक्ट रखने के लिए भी ऐसे किद्वंतियों की जरूरत होती है। फॉल्सिफायबल नहीं है। हम जब तक प्रत्यक्ष देख नहीं लेंगे उसको मानते भी नहीं हैं। लेकिन हम उसे नकारते भी नहीं है। क्योंकि
(16:57) अगर एब्सेंट है कोई चीज तो हम यह कह नहीं सकते कि वह नहीं है। वह छह चिरंजीवी हैं। होंगे। यह एक तरीके से सनातन धर्म की रक्षा के लिए भी इस प्रकार की जो किद्वंतियां हैं वह आती हैं। कभी आई होंगी और वह वैसी की वैसी यथावत रह गई हम लोगों की मेमोरी में। मेरे फादर ने खुद ने बताया था। इसलिए मैंने बोला छह चिरंजीवी अब हम देखते हैं तो सात भी सातवां भी मिल रहा है। तो एक और ऐड हो गए उसमें। तो आई रिमेंबर्ड ही टोल्ड मी विभीषण है जब रामायण रामानंद सागर की चल रही थी तो दैट टाइम ही सेड कि यू नो ये विभीषण जो है एक चिरंजीवी हैं। यानी हमेशा ही रहे। इसलिए
(17:36) महाभारत काल में भी अर्जुन जब साउथ जाते हैं तो वह विभीषण से मिलते भी हैं। सो चिरंजीवी इन द सेंस कि एक जो लीनिएज है वो काफी समय तक चली परशुराम जैसे। तो जमद अग्नि राम जो है वह ऋग्वेद में ही आ गए और उसके बाद फिर वो रामायण में भी दिखते हैं। फिर महाभारत में भी दिखते हैं। फिर पूरी उनकी कथा है कि वो क्षत्रियों को इतने बार उन्होंने नरसंहार किया है। तो इतने बार करने के लिए तो कितना लंबा स्पैन होना चाहिए उनके लाइफ का। तो परशुराम का बेटा परशुराम कहलाया। उसका बेटा परशुराम कहलाया। एंड दैट लीनिएज कंटिन्यूड फॉर अ वेरी लॉन्ग टाइम। तो इसलिए वो चिरंजीवी
(18:13) कहलाने लगे। विभीषण की लीनिएज भी काफी लंबी चली होगी क्योंकि रामायण से महाभारत काली 12,000 से 5000 तो ऑलमोस्ट 6000 का गैप हो गया। एक छोटी सी सिंपल सी बात है ह्यूमन इवोल्यूशन हो रही थी। हम है ना? ह्यूमंस इवॉल्व हो रहे थे और उसमें कथाएं बहुत सारी चीजें आती जा रही थी। लोकोक्तिज जो हैं वो भी घुस रही थी। तो एक तरीके का हमारे पास इसलिए 18 पुराण भी आ जाते हैं। महायुग भी आ जाते हैं ना। बड़े वाले जो योगा के जो कैलकुलेशंस हैं वो आपको सूर्य सिद्धांत में मिलेंगे। दैट वाज़ फॉर द एक्यूरेट कैलकुलेशन ऑफ़ द ऑर्बिटिंग ऑफ़ ऑल द प्लनेट्स। अब ये एक्यूरेसी क्यों
(18:50) चाहिए थी? क्या जरूरत है? आसमान में देखो ना फिर मजे करो। हम एक्यूरेसी इसलिए चाहिए थी कि उस पर से वो डिफरेंट साइंसेस पे काम कर रहे थे। और वो जो दूसरा साइंस है वो एस्ट्रोलॉजी है। ओके? इसलिए उनको एक्यूरेसी चाहिए थी। इसलिए भी एक्यूरेसी चाहिए थी कि जैसे मून का साइकिल है इट इज 27.3 डेज का जो साइकिल होता है वो मंथ है। इट इज़ रिलेटेड टू वुमस मेंुरल स है ना इट इज़ आल्सो रिलेटेड टू नेविगेशन व्हाई क्योंकि कब ज्वार भाटा आएगा यानी कि कब हाई टाइड आएंगे तो शिप लगेगी बर्निंग होगी एंड चीजें अनलोड होंगी एंड लोड होंगी। इसलिए हमें तिथि चाहिए। इसमें सोलर वाला
(19:28) काम नहीं करेगा। हम सोलर वाला कहां काम करेगा? सीज़ंस के लिए। हम है ना? तो और यह जो युगा है, यह किस लिए काम करेगा? टू अंडरस्टैंड द साइके ऑफ़ पीपल चेंजिंग। कब स्प्रिंग इतना लंबा हुआ, तो इतना ब्यूटीफुल समय जो कृतिका का निकला। स्प्रिंग काफी लंबे होते थे। तो बहुत खूबसूरत समय था। उसके बाद थोड़ा सा स्प्रिंग छोटा हो गया। समर्स जो हैं धीरे-धीरे बड़े होने लगे। उसके बाद फिर कली के समय में जो है वो डिफरेंट हो गया। तो ह्यूमन साइके पे उसका इंपैक्ट। कितने जो यंग माइंड्स हैं दे आर बैफल्ड कि एक्चुअली में हिंदूइज़्म क्या है? उनको कुछ
(20:04) समझ में नहीं आता। बाकी सारे रिलीजन में वह देख रहे हैं कि ये डिसिप्लिन वे में कुछ चीजें कर रहे हैं। वी आर नॉट बाउंडेड बाय एनी डिसिप्लिन कि हमें हां उल्टा उसमें फ्राइडे को जाना ही है या संडे को मासेस में जाना है या नमाज़ जो है वो फाइव टाइम्स हो रही है। व्हाई डोंट हिंदू फॉलो एनीथिंग? हम व्हाट इज द वे ऑफ़ लाइफ ऑफ़ अ हिंदू? सो वी हैव लॉस्ट दैट। व्हाई पीपल गेट अट्रैक्टेड टू अदर रिलीजन बिकॉज़ ऑफ़ दिस डिसिप्लिन। करेक्ट। उनको लगता है कि हां ऐसा करने से शायद उनको कुछ मिल रहा है, प्राप्त हो रहा है। इसीलिए इतने फैल रहे हैं। इसीलिए इतने
(20:36) सारे हो रहे हैं। वो डिसिप्लिन हमारा खत्म हो गया। हम जो संध्या वर्दन हम करते हैं ना जो सदर्न इंडिया में खासकर कन्नडीगर्स जो हैं वो बिल्कुल वो लोटा लेके बैठ जाएंगे। कहीं पे भी चाहे एयरपोर्ट हो, कहीं पे भी हो। दे विल टेक द वाटर एंड विद द हेल्प ऑफ दैट जो मंत्र संध्या वदनम जो उनको करना है दिन में तीन बार करना है बट शास्त्रों में पांच बार लिखा हुआ है तो नाउ यू कैन एसोसिएट कि पांच बार का नमाज कहां से आया होगा ओ रियली या संध्या वदनम वास सेट टू बी डन फॉर फाइव टाइम्स इन अ डे नमाज वहां से आप कह रहे हैं लिया गया होगा पॉसिबल है क्योंकि हमारा सेंट्रल एशिया जो
(21:14) मैंने अभी इंडस्क्रिप्ट की जो बुक लिखी है इंडस्ट्रीज डिसाइपर्ड उसमें मैंने दिखा है कि हमारा इंपैक्ट जो है वो बहुत दूर तक था, सेंट्रल एशिया तक था, लवांड तक था, इजिप्ट तक था, ग्रीस तक था। हम यू नो आपने एक बात करी थी दैट वी आर इन द एज ऑफ़ अक्वेरियस। एज ऑफ़ अक्वेरियस मुझे याद है 2012 के वक्त ही बहुत ज्यादा चर्चा में था। अच्छा कि लोग कहते थे एज ऑफ़ अक्वेरियस इस अराइविंग। या तो अराइव कर चुका है या नहीं कर कर चुका वो आप मुझे बताना। [गला साफ़ करने की आवाज़] बट ये भी बोला गया था दैट देयर इज़ अ राइज़ इन फेमिनिटी। और कहीं ना कहीं आज मैं देखूं। मेरी आपसे
(21:45) फोन में भी ये बात हो रही थी कि आई एम सीइंग अ डीमैस्कुलेनाइजेशन ऑफ़ मैन। हम व्हिच इज़ अ फेमिनाइजेशन ऑफ़ मेन एंड आई एम सीइंग अ मैस्कुलाइनाइजेशन ऑफ़ वुमेन। वुमेन ज्यादा अल्फा हो रही है। वुमेन ज्यादा एंबिशस हो रही है। गो गेटर हो रही है। मणिपूरक मुझे लग रहा है ज्यादा एक्टिवेट हो रहा है फेमिनिन में। मुझे इसका एस्ट्रोनॉमिकल लॉजिक बताइए। क्या है ये? जो ऐज अब जो हम बात कर रहे हैं कि एक्वेरियस एज आने वाला है। अभी कस्प पीरियड है। ओके। तो बिहेवियर भी कस्प जैसा है। लाइक मैन इज बिहेविंग लाइक वुमेन स्लेंडर। अब आप देखें मॉडलिंग में तो आपको अर्जुन
(22:18) रामपाल और वो वैसे वाले मेन स्क्वायर जॉब वो नहीं दिखेंगे बट फीमेल टाइप बाल भी रख रहे हैं और फीमेल टाइप उनका अपीयरेंस जो है वो फेमिनाइन बहुत ज्यादा दिख रहा है। सो आई थिंक कस्ट पीरियड में पॉसिबिलिटी है कि यह जो जेंडर का जो क्रॉस वो हो रहा है कि मैं तुम्हारी तरह दिखूं और वुमेन आर मोर अल्फा टाइप जो जैसा आप कह रही हैं कि अल्फा मेल जैसा बिहेव कर रही हैं। सो दिस इज़ द प्रॉब्लम इट अपीयर्स टू मी ऑफ़ दिस लोंगिट्यूड व्हिच इज़ बिटवीन द एक्वेरियस एंड पाइसिस। हम अभी तक पूरी तरीके से एक्वेरियस में नहीं आए हैं। इट विल स्टिल टेक सम 300 इयर्स टू गो इनू
(23:02) एक्वेरियस। उसमें क्या होगा? बट ट्रेड्स तो आ गए हैं। अगेन अगेन थिंग्स विल फॉल बैक प्रॉपर्ली। मतलब ऐसा नहीं है कि संधि पीरियड में यह सारी जो प्रॉब्लम्स हैं वो देखने को शायद मिल सकती हैं। दिस कैन बी द फर्स्ट ऑब्जरवेशन जो हम अभी देख रहे हैं क्योंकि पुराना तो कहीं पे भी रिकॉर्डेड नहीं है। किस तरह का होता है करके। सो वी आर एक्सपीरियंसिंग फर्स्ट टाइम ये चीज जो है। ओके। और आपने मुझे फोन पे कहा था कि आगे फ्यूचर में आप देख रहे हैं इस्लाम बढ़ेगा। पॉसिबिलिटी है क्योंकि डिस व्हाट शनि नीड्स इ डिसिप्लिन जैसे संध्या वनम आप तीन बार कर रहे हैं।
(23:37) आपने एक व्रत धारण कर लिया कि मुझे रोज तीन बार करना है। एक टाइम आपने धारण कर लिया कि मुझे इतने बजे ही करना है। सपोजिंगली आपने वो एक दिन में कोई भी एक चीज को डिसिप्लिन में ले लिया। शनि गेट्स स्टेम्ड। शनि लव्स डिसिप्लिन। शनि लव्स हार्ड वर्क। अगर आप हार्ड वर्क नहीं करेंगे, तो आपको उसके रिजल्ट्स नहीं मिलेंगे। बिकॉज़ दे आर डिसिप्लिंड। पांच वक्त की नमाज है और काले कपड़े जो वह पहनते हैं क्योंकि काला शनि का कारक है। जैसे कि हम मेष राशि का जो शुरुआत है जीरो ज़ीरो जो है वो कहां पे है? एंड पॉइंट पे है। प्रिसेस हो रहा है। तो
(24:15) भरणी के बाद कृतिका के बाद भरणी के बाद अश्विनी आता है। अश्विनी के बाद हम पाइसिस एज पूरा निकल गया जिसमें शंकराचार्य जी जैसे लोग आए। फिलॉसोफीज़ हुई। नव्य न्याय आया। न्याय के सारे जो अपने टेक्स्ट हैं वो इसी 2000 साल में लिखे गए। व्हाई? बिकॉज़ पाइसिस इज गवर्न बाय जुपिटर। हां राइट राइट हीलिंग ना। तो जुपिटर क्या है? सन ऑरेंज कलर। सो यू विल सी शंकराचार्य। यू विल सी क्राइस स्टाइल। यू विल सी ऑल दीज़ पीपल हु केम विद ग्रेट फिलॉसोफीज़। सुपर है ना? सो दैट वाज़ द टाइम। अब शनि का टाइम आ रहा है। एज ऑफ़ अक्वेरियस एज ऑफ़ बिकॉज़ एक्वेरियस
(24:54) लॉर्ड सैटर्न है। हां लॉर्ड सैटर्न है। नाउ देयर विल बी लाइक टेक्नोलॉजिकल एडवांसेस। ऑलरेडी हम देख रहे हैं कसपर पीरियड में। 100 साल से ही तो हम सब देख रहे हैं। मैंने तो 1995 में मैंने सोचा नहीं था मेरे पास मोबाइल होगा जिसमें मैं वीडियो कॉल कर पाऊंगी। आपने सोचा था? वो भी विदाउट नेटवर्क। वो भी विदाउट नेटवर्क विदाउट एनी केबल। और सो वी आर एडवांसिंग बिकॉज़ ऑफ़ शनि। शनि तब आए थे अह ऋग्वदिक टाइम पे। सो दैट टाइम वी ट्राइड विद मेटोलर्जी आल्सो। वी ट्राइड विद चैरियट मेकिंग आल्सो। वी ट्राइड विद सो मेनी इनोवेटिव थिंग्स। शॉर्ट बोस एंड
(25:28) एरोस वो सारा उस शनि के पीरियड में आया था। सो एव्री शनि जो था उसके कल्प जो पुष्पक विमान तो थोड़ा बाद का हुआ। बट जो रथ है यानी कि जो चैरियट्स हैं वो उनके ऋग्वेद में आना अरट्टू वुड उन्होंने यूज किया। बिल्कुल हार्ड वुड होता था। उसको उन लोगों ने एक्सेल के लिए और नेवल के लिए यूज किया। जैसे जगन्नाथ पुरी का जो इतने बड़े-बड़े रथ बनते हैं उसमें कहां कोई मेटल की चीज होती है। नहीं होती ना आज भी सीधे वो ठोक ठोक के ठोक-ठोक के वो बना देते हैं। चिजलिंग भी वो एक्स से ही करते हैं। मेटल एक्स से करते हैं। लेकिन उस समय हमारे पास स्टोन एक्स थे। हम स्टोन से भी बड़े आसानी
(26:08) से बना लिया करते थे। सो टेक्नोलॉजिकल एडवांसेस उस समय भी हो रहे थे और वह भी एक शनि का टाइम था। एक्वेरियस का टाइम आज से 26,000 इयर्स पहले भी आया था और उस समय एक कल्प विग्रह भी बना था। सो सम ऑफ़ देम ऑन Twitter सेड मी कि आप कल्पविग्रह के बारे में क्यों बात करें? यू टेल एवरीथिंग वि सो रैशन आपका सब कुछ अप्रोच होता है। एंड सडनली यू आर टेलिंग अबाउट द कल्पविग्रह कि 26,000 बिफोर प्रेजेंट किसी ने पीतल का कुछ बनाया है। दैट इज़ अ मैटेलिक एक छोटी सी स्टैचू है जो सीआईए के पास उन्होंने जमा कर ली थी अमेरिका में। अह जो कि मिली
(26:49) थी तिब्बे में। तिब्बत के एक वुडन बॉक्स में मिली थी। तो वो वुडन बॉक्स का जो वुड है उसको डेट किया गया। कल्पविग्रह को डेट नहीं किया गया था क्योंकि मेटल को कैसे डेट कर पाएंगे उसमें लेकिन उसको डेट किया गया और वह डेट करने पर मिला 26000 बीसीई इतना पुराना और उस बॉक्स के अंदर ये मेटल मिला था तो मेटल तो कभी-कभी हो सकता है बट माय पॉइंट वाज़ कि इट इज़ हैविंग अ दक्षिण कपर्दका यानी कि दक्षिण भाग में ऐसे जो चोटी बना करके इस तरह से रखना ये ऋग्वेद में सिर्फ वशिष्ठों के लिए आया है। अच्छा मतलब जो वशिष्ठ हैं, विश्वामित्र हैं जम जो ऋषिज हैं उनके डिफरेंट-डिफरेंट तरीके
(27:29) होते थे चोटी बनाने के तो जो दक्षिण कपरदक है जो इस तरह से जो चोटी बनाते थे राइट साइड में और उसको चोटी बना के जुड़ा बनाते थे या जो जो जैसा हमको केरला में भी थोड़ा सा दिखाई देता है। वो वो जो चीज थी वो सिर्फ इनका काम था। वशिष्ठों का काम था और त्रत्सुओं का काम था जो कि इक्ष्वाकुक थे। इ्वाकु भी ऐसे ही करते हम इस तरह से तो गुंथी हुई ब्रेडेड चोटी अ राइट साइड में इस तरह से निकली हुई कल्प विग्रह में है। उसके बाद हमें तो कहीं भी कोई भी आइकोनोग्राफी में ये चोटी नहीं दिखाई देती। इंडिया की आप किसी भी मूर्ति को देख लीजिए। आपको वो चोटी वैसे नहीं दिखाई
(28:09) देगी। करेक्ट। ब्रेडेड वाली राइट साइड में इस तरह से निकली हुई। ऐसा कहीं पे भी नहीं दिखेगा। सो आई आस्क दैट Twitter पर्सन कि अब आप बताइए कि एम आई स्पीकिंग रैशनली नाउ? दक्षिण कपरदक को मैं इसमें कर रही हूं। एंड द वुडन बॉक्स इज कमिंग टू 26,000 बीसी एंड माय डेटिंग ऑफ द शराजन वॉर इज़ कमिंग टू 30,000 बीसी। कैन यू कनेक्ट दिस डॉट? सो ही गॉट साइलेंट। सो यू नीड टू टैकल पीपल विथ द लॉजिक आल्सो। जो उसमें फिर एक जो चौथा विस्फोटक चीज था वो अगस्त का था। तो अगस्त का जो डिक्लिनेशन जो उसमें दिया हुआ है दैट इज 80 डिग्री। अगस्त यानी कैनोप स्टार वो
(28:50) सदर्न पोल स्टार है। यानी कि काफी समय तक एक तो नॉर्थ पोल स्टार होता है। दूसरा सदर्न पोल स्टार होता है। तो सदर्न पोल स्टार के पास में अगस्त्य होता है और वो सबसे ब्राइटेस्ट है। इसलिए उसको पोल स्टार की पदवी दे दी गई। सेकंडली पदवी इसलिए भी दी गई क्योंकि हमारा जो इंडियन पेनसुला 8 डिग्री नॉर्थ पे खत्म होता है जहां पे महेंद्रगिरी पर्वत से थोड़ा सा आगे वो वाला जो एरिया है वहां पे वो 8° नॉर्थ तक होता है। तो जब हम 8° नॉर्थ पर खड़े हैं और अगस्त का उगने का जो रेडियस है इक्वेटर पे दैट इज 12° तो जब आप 8° पे देखते हैं तो इट बिकम्स 4° यानी कि आपको 8° नॉर्थ पर 4°
(29:28) से उगता हुआ और 4° में डूबता हुआ दिखाई देगा इन द होल नाइट वो एक्चुअली में ऐसे नहीं है। एक सितारा यहां है एक इधर है। एक बहुत लाइट इयर्स दूर है ऐसा है। लेकिन उसका इंप्रिंट जो है वह हमें ग्लोब में ऐसा दिखाई देता है कि सब वह एक साथ उग रहे हैं और डूब रहे हैं। जैसे कि सन उग रहा है, डूब रहा है। जैसे सन उग रहा है, डूब रहा है। उसी तरह से सारे सितारे भी उग रहे हैं और डूब रहे हैं। तो ये नक्षत्र कहलाए। नक्षत्र का मीनिंग है जो गायब ही नहीं होता। यानी कि वो वहीं पे है। हमेशा से है। तो स्टार्स के लिए नक्षत्र कहा गया है। नक्षत्र को कॉनस्टिलेशंस बोलते हैं।
(30:00) कॉनस्टिलेशंस बोलते हैं और उसके डिफरेंट-डिफरेंट लोंगिट्यूड्स के डिफरेंट कॉन्स्टिलेशंस हैं। जैसे सदन कॉन्स्टिलेशंस अगर मैं बोलूंगी तो सदर्न क्रॉस स्टार है। जिसको त्रिशंकु कहते हैं हम लोग। अगस्त है, लोपा मुद्रा है। इस तरह से बहुत सारे जो सितारे हैं उन वो भी नक्षत्रों की ही कैटेगरी में आते हैं। तो ये क्यों नहीं करता है वेस्टर्न साइंस? वेस्टर्न साइंस भी करता है। वो भी बताते हैं कि इतने सारे स्टार्स जो हैं वेला कॉनस्टिलेशन है जिसमें कि कैनोपस जो है वो बहुत पास में है। तो सारे कॉनस्टिलेशंस जो है उनके पास भी हैं जिस तरह से हमारे पास
(30:33) भी हैं। बट वैसे नेम्स नहीं जैसे मघा नक्षत्र अश्विनी उस तरह से नहीं वो डिवीज़ंस हैं। ओके। सो डिवीज़ंस आर डिफरेंट थिंग्स जो एस्टरिज्म हम बोलते हैं वो उसको डिवीज़ंस बना दिए गए। तो ईज़ करने के लिए हमने उसको नक्षत्र के डिवीज़ंस कह दिए। एक्चुअली में सारे ही सितारे जो है वह ना अक्षरति एति नक्षत्र यानी जो कभी खत्म ही नहीं होते। ओके। सो जो फोर्थ सबसे धमाकेदार चीज थी वो यह थी कि अगस्त जो है उसका डेक्लिनेशन जो है वो 80° है। जबकि 12,000 बीसी में 78 था। जब वो राइज़ होता है तो वो पोल पॉइंट से कितना दूर राइज़ हो रहा है? ओके? यानी उसका जो रेडियाई था वो कितना था? तो
(31:12) रामायण टाइम में 78° उसका डेक्लिनेशन था। दैट मींस 90 - 78 इज़ 12° तो 12° का रेडियाई बन गया। तो वो 12° पोल पॉइंट से 12° दूर से उगेगा एंड 12° दूर पे डूबेगा। ओके? तो ये जब 12° अप आ जाता है मेरीडियन पे तो 12° नॉर्थ जो चिदंबरम है वहां से ये तारा जो है दिखाई देगा। वहां तक दिखाई देगा। उसके आगे नहीं दिखेगा। तो चिदंबरम महात्म जो है जिसमें शिव जो है वो सदर्न साइड में देखते हैं इट इज लुकिंग फॉर अगस्त ओनली ओके इसीलिए दक्षिणामूर्ति है अच्छा अगस्त का शेवाइट्स के साथ में शिव के साथ में जो कनेक्शन है वो इस वजह से है कैनोपस की वजह से
(31:57) मुझे लगा अगस्त मुनि जो मुनि थे अगस्त मुनि तो थे ही सप्तऋषियों में आठवें ऋषि वही है बिकॉज़ वशिष्ठ और अगस्त्य जो है ट्विन बोर्न है तो हम सप्त ऋषि में ही उनको गिनते हैं बिकॉज़ दे आर ट्विंस लेकिन कई अग्नि चैन और दूसरे यजनों में कई बार अगस्त्य को ओमिट किया गया। वो इसलिए क्योंकि वह कुरुक्षेत्र तक दिखाई नहीं दे रहे थे। तो जब वो सितारा वहां तक दिखाई नहीं दे रहा है तो उसको ऑब्लेशन कैसे देंगे? ओके है ना? तो चिदंबरम का जो महात्म यह है कि यानी कि चित्त का जो अंबर है हम शिव का जो है दैट इज़ जब अगस्त है हां शिव का जो स्काई है दैट इज़ जब वह देख
(32:34) रहे हैं वो वेट कर रहे हैं कि कब अगस्त आएंगे। ओके। एंड द मोमेंट जैसे ही 12,000 से 11,000 बीसी आते हैं एंड चिदंबरम से 1 डिग्री ऊपर दिखने लगते हैं। फिर उसके बाद धीरे-धीरे विंध्या पे दिखने लगते हैं। और फिर उसके बाद फिर आगे कुरुक्षेत्र में अब हम लोगों के समय में कुरुक्षेत्र तक दिखाई देते हैं। ओके। तो ये इवॉल्व होता रहेगा। ये इवॉल्व होता रहेगा। फिर वापस वो नीचे की तरफ जाएंगे। फिर वापस से कुरुक्षेत्र से नहीं दिखाई देंगे। फिर विंध्या से नहीं दिखाई देंगे और फिर चिदंबरम तक पहुंचेंगे। फिर वहां से लेकर विंध्या तक नहीं दिखाई
(33:08) देंगे। फिर चिदंबरम के नीचे ही सिर्फ दिखाई देंगे। सो थ्रेशहोल्ड इज चिदंबरम एंड उदग मंडलम। तो उदक मंडलम मींस ऊटी जो आज का ऊटी है। तो उदक वहां से क्या चीज उदक हो रही है? वहां से अगस्त्य उदय हो रहे हैं। इसलिए उदक मंडलम। सो चिदंबरम उस एंड पे और उदक मंडलम इस एंड पे वहां से चित्त से निकल के जो आए हैं और यहां पर उदित हो रहे हैं इस तरह से तो ये पूरे होरजन में वो जो अगस्त हैं वो दिखाई दे रहे हैं। शिव का कौन से बोलेंगे? कौन से योग की बात हो रही है शिव? शिव हमेशा से ही रहे हैं अह जो कि काफी शांत उस तरीके से ऋग्वेद में भी अगर हम कहें कि शिव अगर हैं तो वो
(33:51) शम के नाम से हैं। यानी कि शामयति यानी कि जो बहुत शांत कर देने वाले वैसे जो योगी लोग रहे होंगे। इसलिए उनको आदि योगी कहते हैं ना कि एक कथा है जिसमें शिवा और पार्वती का विवाह है और काशी में विवाह होना है उनका और हिमालय से सारा वो बारात लेकर के चले हैं। एंड देन यहां से अगस्त्य मुनि अपने साथ सारे असुरों को लेके सदर्न हेमिस्फयर के लोगों को लेके भी वो वहां पे आ गए। विवाह हो जाता है। सब हो जाता है। तो पूरा जो भार है पृथ्वी का वो नॉर्दन हेमिस्फयर में आ जाता है। तो शिव कहते हैं अगस्त मुनि अब आप वापस से आप साउथ जाइए और
(34:38) इन असुरों को भी ले जाइए। उनको वहां पे फिर से स्थापित करिए जहां से ये आए थे। ये एक्चुअली में एस्ट्रल वो है। सेलेस्टियल ग्लोब के जितने भी सदर्न स्टार्स हैं वो सब शिव के शादी का जब समय है जब उनका विवाह हो रहा है तो उस समय सारे के सारे एस्ट्रल जो सदर्न क्रॉस है और सदन के जितने भी स्टार्स हैं वो काशी तक दिखाई दे रहे थे। उसके बाद फिर वो धीरे से वापस विंध्या क्रॉस करते हुए अब अब जो है अगस्त से साउथ जा रहे हैं। तो सारे जो स्टार्स हैं अब वो नीचे आ गए हैं। ओके? और यहां पे भी वो वेगा जो है वो घूम करके अब पोलारिस हो गई है। एस्ट्रोनॉमी है
(35:13) क्या? जो प्लरी मूवमेंट्स हैं अर्थ के अराउंड है, मून का या सन के अराउंड है, अर्थ का और बाकी सारे प्लनेट्स का। तो बहुत सारा चीज वेदांग ज्योतिष में ही शुरू हो गया था। नाउ वेदांग ज्योतिष इज़ वन ऑफ़ द सिक्स स्लिम्स ऑफ वेदा। सो जो सबसे धमाकेदार चीज जो वैदिक ज्योतिष में समझ में आई थी वो यह है कि जो कि अभी रिसेंट हम लोग समझते हैं कि जियोसेंट्रिक सिस्टम होता था लेकिन हीलियोसेंट्रिसिज्म जो है वो ऋग्वेद में है। हीलियोसेंट्रिक मींस सन इज़ इन बिटवीन और बाकी प्लनेट्स जो है वो उनके अराउंड रिवॉल्व कर रहे हैं। सो ये सप्तरथ यंजते एकम चक्र ये जो वेद में
(35:53) आया है वो सेवन एस्ट्रोल बॉडीज जो हैं वो सन के अक्रॉस घूम रही हैं। यह आया है। इन ग्रहों का जो इंपैक्ट है हमारे बॉडी के ऊपर, यह तो हम बाद में एस्ट्रोलॉजी में देखते हैं। लेकिन एस्ट्रोनॉमी में हमें यह बहुत यूनिक चीज जो है वो ऋग्वेद के समय से ही मालूम थी। तो यह मेरे लिए बहुत एस्ट्रोनिशिंग बात थी क्योंकि उसके बाद हम सूर्य सिद्धांत में जब आते हैं तो वहां पे वो जियोसेंट्रिक है। जियोसेंट्रिक का मतलब है कि अर्थ बीच में है। बाकी सारे जो प्लेनेट्स एंड सन एंड मून इज़ रिवॉल्विंग अराउंड द अर्थ। तो अर्थ स्टेशनरी हो गया। बाकी सारी जो चीजें हैं वह घूम रही हैं।
(36:31) लेकिन भूगोला अध्याय में जैसे ही हम आते हैं तो वहां पे हम देखते हैं कि इट इज़ ओनली द पोजीशन ऑफ़ अर्थ हैज़ बीन स्वैप्ड विद सन। एंड वो जो पोजीशन है अर्थ की वो वहीं पे है। दैट इज़ सन के बाद मर्यूरी, वीनस। फिर जब अर्थ आता है तो अर्थ की जगह पे हम सन लिख रहे हैं। तो इसका मतलब उनको यह मालूम था कि जो सन है उसके इन दो तरफ में जहां से हम बैठ के देख रहे हैं मरक्यूरी वीनस जो है वह सन की ही परिक्रमा कर रहा है। और सन के बाद में बाकी जो प्लनेट्स हैं वो भी सन की ही परिक्रमा कर रहे हैं। एंड दैट इज व्हाई द मोर एस्टोनिशिंग थिंग केम आउट इज़ कि सन का और
(37:06) मून का कोई रेट्रोगेड मोशन नहीं होता। यह सूर्य सिद्धांत में है। रेट्रोगेट मोशन का मीनिंग है अर्थ से जब हम देखते हैं कोई प्लनेट को फॉर टाइम बीइंग इट अपीयर्स एस वो पीछे जा रहा है। सो उसको रेट्रोगेशन कहते हैं। इस एक्चुअली हो रहा है। एक्चुअली होता है। एक्चुअली होता है। व्हाई बिकॉज़ वी आर इन द मिडिल ऑफ़ बाकी जितने ग्रह हैं सैटर्न, जुपिटर, यूरेनस, प्लूटो वगैरह। और इस तरफ में है सन, मरकरी एंड वीनस। तो हम जब देखते हैं तो रेट्रोगेशन जो मोशन है वो अर्थ के पर्सपेक्टिव से जब हम देखते हैं तो वो हमें ऐसा फील होता है कि ये अब थोड़ा पीछे
(37:41) जा रहा है क्योंकि वो रोटेशन में तो वो पूरा ऐसा ऑर्बिट में घूमने के बाद वो अर्थ के बाजू से जब निकलता है तो उस समय हमें और अर्थ भी खुद भी रोटेट कर रहा है। तो उस समय हमें फील होता है कि ये पीछे जा रहा है। जबकि वो पीछे नहीं जा रहा है। वो अपने ऑर्बिट में तो चल ही रहा है। सेम वहां पीछे नहीं जा रहा है। मगर अर्थ से विजुअलाइजेशन जब करेंगे तो ऐसा फील होता है कि वो जो है प्लनेट थोड़ा सा पीछे गया। जैसे वक्री ग्रह बोलते हैं उसको। तो इसीलिए हमें सूर्य सिद्धांत में दैट वास द सेकंड धमाकेदार चीज कि सपोजिंगली जियोसेंट्रिक है तो फिर तो सन का भी
(38:11) रेट्रोगेट मोशन होना चाहिए। वी डोंट नो सन क्यों आगे पीछे नहीं हो रहा है। वो अकेला ही ऐसा क्यों घूम रहा है पूरा बाकी प्लनेट आगे पीछे घूमते दिखते हैं। लेकिन सन क्यों नहीं हो रहा है? दिखते ही हैं। दिखते ही हैं। एक्चुअल में नहीं होते। तो सन को भी दिखना चाहिए। अगर जियोसेंट्रिक है तो तो वो जियोसेंट्रिक नहीं है। जस्ट वो स्वैप ऑफ अर्थ विथ सन है वहां पे सूर्य सिद्धांत में। आई एम गोइंग टू बी पर्सनली कंडक्टिंग अ क्लासिकल हटी योगा रिट्रीट इन लद्दाख फ्रॉम द 23 ऑफ़ अगस्त अटिल द 31 ऑफ़ अगस्त। व्हेयर आई विल बी गाइडिंग यू थ्रू अ 5000 ईयर ओल्ड पावरफुल क्लासिकल हट योगा
(38:41) प्रैक्टिस फॉर्म व्हिच इज अ गेम चेंजर एंड ह्यूजली ट्रांसफॉर्मेटिव। [संगीत] इफ यू लाइक टू रजिस्टर यू कैन कांटेक्ट द वीडियो स्पेशिंग ऑन स्क्रीन। आई विल सी यू सून एंड नाउ। यू नो अह एक टाइम पे कहा जाता था कि एस्ट्रोलॉजी और एस्ट्रोनॉमी सेम डिसिप्लिन हुआ करते थे। हम्। पर फिर बफोर्केशन आ गई। करेक्शन नहीं हुआ। अ लास्ट करेक्शन जो सूर्य सिद्धांत में हुआ है दैट इज़ 500 सीई के आसपास। हम हम लेकिन फिर भी उसमें करी कली का करेक्शन नहीं हुआ। कृत ही लिखा हुआ है उसमें। ओके। है ना? तो वो 12,000 इयर्स एगो का है। अगर थ्योरिटिकली जो मानते हैं कि 500 सीई में
(39:16) करेक्शन हुआ था तो फिर बृहत संहिता और वराहमीर ने जो लिखा है बृहद जातका वगैरह तो उस समय करेक्शन हुआ है। उसके बाद से अभी तक कोई करेक्शन नहीं हुआ है। नाउ इट्स ऑलमोस्ट लाइक 1700 इयर्स। तो करेक्शन ही नहीं हुआ है। तो कालपुरुष की कुंडली में अभी भी मेष ही बैठे हुए हैं फर्स्ट में। तो जब मेष बैठे हुए हैं और हम जिस लग्न में जन्म ले रहे हैं तो हमारा उस भाव के साथ में कैसा संबंध है वह तो संबंध खत्म हो गया। करेक्ट करेक्ट करेक्ट। इसलिए एस्ट्रोलॉजी पूरी तरह से काम नहीं करती। इसीलिए आज जलेबी है वो। ओके। क्योंकि अब सपोजिंगली कोई मेष लग्न में
(39:50) जन्म ले रहा है। लेकिन भाव में जो है मोक्ष कारक जो है ग्रह अब शनि हो गया है। क्योंकि कैप्रीिकॉर्न है वहां पे। हम बोलते हैं गुरु मोक्ष कारक है क्योंकि नाइंथ और 12th हाउस का स्वामी जो है वह गुरु है। लेकिन अभी मोक्ष कारक ग्रह कौन होंगे? शनि शनि होने चाहिए। यानी जब तक आप फिजिकली अपने आप को टर्मोइल करके काम नहीं कर लेंगे अपने आपको गधों की तरह से निचोड़ नहीं लेंगे तब तक आपको शनि मोक्ष भी नहीं देने वाले हैं। गुरु का मोक्ष का मार्ग अलग टाइप का था। हां। ओके। वाओ। शनि का मोक्ष का मार्ग अलग टाइप का है। यह वापस गुरु में आएगा। लेकिन 4000 इयर्स
(40:30) के बाद में जब सैजिटेरियस आ जाएगा। हम सो ये करेक्शन नहीं हुआ है। हम तो फॉर 1700 इयर्स जब इसमें करेक्शन नहीं हुआ है। हमारे कैलेंडर सिस्टम में नहीं हुआ है। हम चैत्र को वर्नल इक्विनॉक्स के इतने दिनों के बाद मना रहे हैं। विषु इतने दिनों के बाद मना विषु बोल रहे हैं। करेक्ट या है ना? विषु मतलब विशु। हम विशु तो चला गया 2 मार्च को। आ हा हा इस बार गुड़ी पड़वा एक्सक्टली उसी दिन पड़ गया था। राइट राइट राइट कोइंसिडेंटली। सो लूनी सोलर कैलेंडर को अभी तक सोलर के साथ में सिंक नहीं किया गया है। हम हमारे सारे कैलेंडर्स फौल्टी हैं और लूनी
(41:05) सोलर का करेक्शन नहीं हुआ है। क्योंकि विषु हो, बिहू हो, पहला वैशाख हो, कोई भी जो फेस्टिवल्स हैं दे आर सोलर फेस्टिवल्स। दे आर नॉट लूनर फेस्टिवल्स। ओके। मैंने बोला ना लूनार वाज़ ओनली यूज़्ड फॉर मेंुअल साइकिल और द ज्वार भाटा। इससे ज्यादा उसका काम नहीं है लूनार का। बट सोलार का बहुत सारा काम है। पूरी की पूरी जो संवत्सर है वो सोलार के ऊपर है। संवत्सर यानी ईयर। ओके? तो ईयर ईयर कॉन्स्टिट्यूट्स द सीजन। तो आपका वर्नल इक्विनॉक्स के दिन में आपका हाफ वसंत खत्म हो चुका है। और हाफ है। इट इज अ पीक ऑफ वसंत। दैट इज द ईयर बिगिनिंग
(41:48) एंड इन ऑल द ब्राह्मण ग्रंथ दैट इज द ईयर बिगिनिंग दैट इज द पॉइंट ऑफ अग्नि दैट इज द पॉइंट व्हेन द सन विल स्टार्ट अपीयरिंग ऑन इक्वेटर राइजिंग एंड सेटिंग एंड उस दिन इक्वल डे एंड नाइट हो गया एंड डे आफ्टर दैट इट बिकम्स द फर्स्ट डे ऑफ़ द संवत्सर यानी 23 मार्च शुड बी द फर्स्ट डे ऑफ़ द संवत्सर कि इट इज़ दैट सिंपल कार्डिनल पॉइंट्स के ऊपर डिपेंड करता है। सो गवर्नमेंट हैज़ टू टेक द डिसजन देन व्हेन द न्यू ईयर शुड बिगिन। फर्स्ट जनवरी जेस को माने हम यार्ड मार्च को माने हम अंडरस्टुड सबके अपने-अपने कैलेंडर्स हैं। इवन मुस्लिम कैलेंडर इज़ गोइंग रोंग।
(42:28) अच्छा। उनके रमजान रमजान वगैरह जो हैं थोड़े समय के बाद समर सोस्टीज में होने लगेंगे। फिर वो और आगे बढ़ जाएंगे। ऑटोमनल में हो जाएंगे। हमारा जो विषू है वो आफ्टर 2000 इयर्स समर सोस्टिस के दिन में हो रहा होगा अगर अभी करेक्शन नहीं किया तो हम अभी तो अप्रैल में पहुंच गया फिर मई में पहुंचेगा फिर जून में पहुंचेगा मैंने ना पिरामिड पे एक पॉडकास्ट किया था उस पे गेस्ट ने बोला था कि हो सकता बिकॉज़ सप्तऋषिस को सब जगह भेजा गया था आदि योगी ने बोला आप चले जाओ सब जगह तो सिर्फ ब्राजील में भी आपको एक ध्यान लिंग मिलेगा बिहार में भी ध्यान लिंग है वो टूट गया था
(43:02) तो उसका पूरा हो नहीं पाया था जी तो फिर मैंने हम जब पिरामिड्स की बात कर रहे थे तो उन्होंने श्लोक वगैरह बताया। फिर मैंने कहा क्या गुंजाइश है कि सप्तऋषि का इस पे हाथ हो? तो उन्होंने कहा बिल्कुल आपको लगता है डू यू अग्री? अ जो इनिशियल प्रोजेनेटर्स जो है ना वो सप्तऋषि ही है सबके पूरी दुनिया के। पूरी दुनिया के ही समझ लीजिए क्योंकि जो मैं डेट्स बता रही हूं सपोजिंगली 30000 बीसी है या 34500 बीसीई है या 50000 रीक्षक का जो समय है एक राजा रीक्षु है ऋग्वेद में उनका 52 बीसी की डेटिंग आई है। नाउ यू गो टू हैप्लो ग्रुप्स। सो सदर्न इंडियन में
(43:40) अभी भी एच हैप्लो ग्रुप का कंसंट्रेशन सबसे ज्यादा है। आई बिलीव दैट वन ऑफ द सेजेस वास एच हैप्लो ग्रुप व्हिच स्प्रेड टिल स्पेन। स्पेन तक आज भी एच हैप्ल ग्रुप के लोग जो हैं वह आपको वहां तक मिल जाएंगे। सो एच के बच्चे हैं आई जे के एल फिर एम एन ओ पी क्यू आर आर पे आ गए अटक गए। आर इज हैपनिंग ड्यूरिंग 26000 बीसीई के आसपास। इसमें R1 एंड R2 दो हुए। सो R2 खुद जो ज्ञानेश्वर चौबे जी हैं शायद वो बताते हैं कि वो खुद भी R2 वाला बिलोंग करते हैं। सो R1 एंड R2 जेनेटिक्स में से R1A एंड R1 बी ये दो भी आए जो मैक्सिमम यूरोपियंस में
(44:29) मिलते हैं। तो बच्चे तो सब एच हैप्लो ग्रुप के ही हैं। हां हां हां हां और एच हैप्लो ग्रुप का एक चिटनाार्ड आदमी है। उसका 75,000 ईयर ओल्ड जेनेटिक कंटिन्यूएशन मिला है कि इतना पुराना जींस जो है वो कैरी कर रहा है। वन फैमिली इस कैरिंग दैट ओल्ड जीन टिल टू दिस स्टेट। सो डेफिनेटली ये जो हम बोलते हैं ना सप्तऋषि जो प्रलय आया होगा एंड आफ्टर दैट अगेन जो रीपॉपुलेट हुआ पूरा जो वर्ल्ड है वो ये सप्तऋषियों ने किया होगा। डेफिनेटली हम डेफिनेटली मेरे पास कुछ यू नो पॉपुलर एक पॉपुलर YouTube ने यूटबर ने ये बात बोली थी। उन्होंने डिसमिस करी थी
(45:06) एस्ट्रोलॉजी के काफी कुछ ऐसी चीजों के बारे में जो मैं आपसे समझना चाहूंगी कि वेदर इट इज अ मिथ और अ फैक्ट। जैसे कहा जाता है ट्विंस के बारे में फॉर एग्जांपल कि आप एक ट्विंस एक ही टाइम में पैदा होते हैं। एक ही लोंगिट्यूड में पैदा होंगे। एक ही जगह पैदा होते एक ही मां से एक ही मां से पैदा होंगे। कई बार तो आइडेंटिकल ट्विन्स भी होते हैं। जी या इन आवर हाउस आल्सो लाइक माय मदर इन लॉ एंड हर सिस्टर वर आइडेंटिकल ट्विन्स। एंड दे वर आल्सो बोर्न विद इन टू टू 3 मिनट्स के गैप में हुए थे। सो बहुत इंटरेस्टिंग बात जब वो दोनों मुझसे बात
(45:38) करते थे तो यह बताते थे कि यू नो मैं बड़ी हूं बट मैं इन इनके 8 साल के बाद मेरे मेरी शादी हुई देन शी सेड कि एंड उनके भी तीन बच्चे थे इनके भी तीन तो जब मेरी माताजी के जो ये तीन बच्चे हो गए मेरे हस्बैंड एंड उनके भाई बहन उसी के एग्जैक्टली 8-आ साल के बाद में उनके बच्चे हुए इनको बीपी जिस समय हुआ उसके आठ साल के बाद उनको बीपी हुआ। उनको डायबिटीज जब हुआ उसके आठ साल के बाद उनको हुआ। सो थिंग्स हैपेंड वेरी आइडेंटिकल थिंग्स हैपेंड बट दे वर डिस्टेंट अपार्ट यानी वो किसी और शहर में है या किसी और शहर में हैं। लेकिन चीजें बहुत कुछ सिमिलर हुई बट इन अ
(46:20) डिस्टेंट टाइम। तो कई लोग यह बोलते हैं कि जो एस्ट्रोलॉजी है वो एक धंधा है। इट्स जस्ट मतलब पैसे कमाने के लिए है। और खासकर ये जो वीकली वाला जो आता है ना कि मेष राशि के साथ ये हो जाएगा। मिथुन के साथ ये हो जाएगा। वह गलत है। एक्चुअली सबका विमोत्तरी दशा और उसका भुक्ति पीरियड सबका डिफरेंट होता है। तो उसमें अब जो ग्रहों के परिवर्तन हुए हैं अगर आपके उसमें पोजीशन वाइज में प्रॉपर्ली बैठे हैं तो वह उस हिसाब से काम करेंगे और उसके बाद कालपुरुष कुंडली के साथ तो आपको मिलाना ही मिलाना है समझने के लिए और गहराई से जो कि मिसमैच है अभी वह
(47:05) प्रॉपर है नहीं। हम अभी भी मेष राशि को पहले उसमें मान रहे हैं। सेकंडली 2 मिनट से ले 30 सेकंड्स के बीच में अगर फर्क आ गया है मतलब 30 सेकंड्स के ऊपर अगर ट्विंस पैदा हुए हैं दे फेट विल बी डिफरेंट। हाउ? बिकॉज़ D6 चार्ट चेंजेस। एक होता है D1 चार्ट जो लग्न चार्ट है। D9 बोलते हैं नवांमशा। वैसे ही D6 चार्ट होता है। तो यह जो ट्विंस जब होते हैं तो उनका डी6 चार्ट चेंज हो जाता है। अब उस चार्ट के चेंज होने की वजह से आपका ओवरऑल लाइफ का पूरा पर्सपेक्टिव सोच आपका ट्रेड्स उसके हिसाब से बहुत सारे चेंजेस आ जाते हैं।
(47:49) ओके। ऑलदो दोनों सेम नक्षत्र में पैदा हुई हैं। दोनों सिमिलर टाइप का बिहेवियर सिमिलर टाइप का होगा। लेकिन लाइफ की लाइफ एकदम एकदम चेंज हो गई। एक नॉर्थ है तो दूसरा साउथ है। इवन इन आइडेंटिकल ट्विंस इट विल बी देयर। लेकिन कई बार बहुत ही प्रिसाइज अगर दोनों एक साथ पैदा हो गए हैं तो ऐसे भी आइडेंटिकल ट्विंस देखे गए हैं जो कि आइडेंट आइडेंटिकल ट्विन के साथ शादी हुई है उनकी। हस्बैंड्स आइडेंटिकल हां। हस्बैंड्स आर आल्सो आइडेंटिकल एंड वाइफ्स आर आल्सो आइडेंटिकल। एंड देयर चिल्ड्रन आल्सो लुक सेम। मतलब इतना तक भी और लाइफ उनकी लाइफ भी सिमिलर। अच्छा
(48:27) हम तो आइडेंटिकल ट्विंस की लाइफ सिमिलर हो सकती है। हो सकती है। अगर सपोजिंगली बिल्कुल वो 30 सेकंड्स के अंदर-अंदर में ही एक साथ पैदा हुए हैं तो। सो वो एग्जांपल भी मिलता है। ऐसा नहीं है कि वो एग्जांपल नहीं मिलता। बट इट इज करोड़ों अरबों में एक मिलेगा आपको क्योंकि हर एक ट्विंस जो है कम से कम दो-ती मिनट के फासले में ही पैदा होता है। और ये जो कब से टाइम आपने जैसे कहा यू नो एक मिली शोक जी के साथ दो लग्न चार्ट्स एक अम्लिक कॉर्ड काटने काटने पे और वक्त जब लोगों को तो पता ही नहीं है कि क्या चेक करना चाहिए। तो व्हिच इज द ओरिजिनल?
(48:58) ओरिजिनल वन इज व्हेन वी कट? अच्छा आफ्टर कटिंग आफ्टर कटिंग। बट अगर सपोजिंगली हम कट तो उसी समय ही कर देते हैं। जैसे ही वो पैदा होता है तो हम कट करते हैं। कट करते समय हम टाइम नोट करते हैं। बट वो जब संसार में ऑलरेडी आ चुका है और एक घंटे तक वो सबके कनेक्शन में है। सो दोनों लग्न चार्ट उनके वर्क करते हैं। ओके ओके ओके। सो ही इज़ ऑलरेडी तालु इज़ कनेक्टेड विद द होल कॉस्मोस। सो टॉकिंग विद व्हाट इज द लॉजिक कि कट करने की बात कि मदर से कंप्लीटली मतलब वो डिटच हो गया। वहां से अब उसका उसका कोई कनेक्शन नहीं है। अंबिलिकल गॉड से है।
(49:34) अंडरस्टुड जी। अंडरस्टुड। ऐसा क्यों होता है कि जब टाइम ऑफ़ बर्थ सही हो, प्लेस ऑफ़ बर्थ सही हो, सब कुछ प्रिसाइज़ हो, लेकिन फिर भी पंडित कुछ और प्रेडिक्ट करता है और आप निकलते कुछ और हो। ये इसीलिए हो रहा है क्योंकि काल पुरुष की कुंडली चेंज हो गई है ना। उसमें करेक्शंस हुए नहीं है। ओके? जो भाव कुंडली का हम जो एक इंपेशंस जो लेते हैं जो कि कॉन्शियसनेस के ऊपर अपने इंपैक्ट डालती है वह चीज तो मिसिंग हो रही है अभी। ओके कंप्लीटली। ओके। तो इसलिए प्रॉपर प्रेडिकशंस जो है वो नहीं निकल पाते हैं। आपने ये भी बोला कि जैसे ह्यूमंस की नाड़ीज़
(50:09) होती हैं। हमारी 72,000 नाड़ियां हैं। वैसे अर्थ की भी नाड़ी होती है। ये क्या है? जी। एक्चुअली एक दिन में 60 नाड़ी होती है। और चाइनीस मेटाफिजिक्स में इसको 64 का करेक्शन किया गया 16 सेंचुरी में। तो ये जो 64 जो हमारे 32 वास्तु पुरुष मंडल में भी आप देखेंगे तो 32 है 64 खंड जो है वो बनाए जाते हैं वास्तु पुरुष में सिमिलर वे में उनके वहां पे वो हेक्साग्राम बनाते हैं। तो हेक्साग्राम इज़ नथिंग बट दैट मोमेंट ऑफ टाइम व्हिच कैन बी प्लॉटेड ऑन योर वास्तु आल्सो एंड देयर आर फोर टाइप ऑफ नाड़ीज़। तो चार तरह की नाड़ी जो है वह हम अपने फ्लोर प्लान
(50:49) में भी हम उसको लोकेट कर सकते हैं। तो सपोजिंगली वन पर्सन इज बोर्न इन द सेम हॉस्पिटल। अब एक क्वेश्चन यह भी आता है कि दो लोग सेम ही हॉस्पिटल में पैदा हुए हैं। सेम टाइम में पैदा हुए हैं। मगर मदर अलग हैं। लेकिन उन दोनों का फेड भी नहीं मिलता। करेक्ट। है ना? सेम ही नक्षत्र में पैदा हुए हैं। एसेंडेंट भी सेम है। लेकिन उनका घर में उनके घर में अगर वह जो नाड़ी में पैदा हुए हैं और उसका वो अफेक्टेड है वो नाड़ी टॉयलेट के अंदर निकला या किचन के बर्नर के ऊपर है उस नाड़ी का पोजीशन। अगर वो हमारे जन्म की जो नाड़ी है उसको जब हम इसमें घर
(51:28) के नाड़ी में प्लॉट करते हैं तो उसके साथ में हमारा हेक्साग्राम और उसमें मैच हो जाता है। तो सपोजिंगली दैट इज अफ्लिक्टेड। सो इट अफेक्ट्स आवर हेल्थ, इट अफेक्ट्स आवर ग्रोथ यह सारी अफेक्ट्स करती हैं। इट इज़ समथिंग लाइक वेरी इंटरेस्टिंग। देयर इज़ अ मैजिक स्क्वायर। इंद्र वायु यम करके जो एक मैजिक स्क्वायर बनाते हैं सदर्न इंडिया में वो साइंस जो है वो चाइना को चला गया था। सो दे आर द फ्लाइंग स्टार्स। उस पे उनका जो फंक्शुरी है वो बेस्ड है। अच्छा। और उसके बाद उसमें भी है जॉनकंग डागवा करके। तो एसके डीजी डेट सिलेक्शन बोलते हैं हम लोग उसको। सो एक एसकेडीजी करके भी
(52:06) एक कोर्स है। वो बहुत इंटरेस्टिंग है। उसमें ये नाड़ी के बारे में बताया जाता है कि व्हाटएवर यू आर बोर्न विथ दैट नाड़ी सपोजिंगली इफ दैट इज़ प्रॉपर्ली एक्टिवेटेड एट द हाउस प्लान तो फिर आपकी चीजें जो है वो काम करने लगती हैं प्रॉपर वे में। दिस इज़ लॉस्ट इन आवर कंट्री। मतलब हमारे यहां का जो साइंस था जो उनके पास गया ना का वह हम जो है वह लूज कर गए कहीं ना कहीं। तो जब वो दो व्यक्ति पैदा हुआ है तो हेवंस लक लेके तो दोनों सिमिलर टाइप के आए हैं। मगर अर्थ लक दोनों का चेंज हो गया है। हेवंस लक यानी कि नक्षत्रों के लक्स तो हम से सिमिलर टाइप का लेके आए हैं।
(52:46) लेकिन घर जैसे ही घर पहुंचा बच्चा तो उसका वहां पे वहां पे एफ्लिक्शन हो गया। हम वो दूसरे वाले का बच्चे का अलग टाइप का एफ्लिक्शन हो गया। तो वो इफेक्ट उसको अलग टाइप से करेगा। यह बच्चे के ऊपर इफेक्ट अलग अलग टाइप से आएगा। तो वो हम वास्तु वाला जो चीज है वो एस्ट्रोलॉजी के साथ में जो कॉम्बिनेशन था वो भूल गए हैं। अब वास्तु कंप्लीटली डिफरेंट है। एस्ट्रोलॉजी कंप्लीटली डिफरेंट है और एस्ट्रोनॉमी कंप्लीटली डिफरेंट है। ये तीनों जब एक साथ आते हैं तब आपका कंप्लीट एनालिसिस होता है। ओके। ओके। जब तक इन तीनों को आप एक साथ नहीं लाएंगे
(53:21) किसी दो का एक जैसा नहीं निकलेगा। अच्छा एंड सेकंडली अब वो जो दो बच्चे पैदा हुए हैं तो किसी यूबर ने कहा कि वो दो बच्चे एक ही हॉस्पिटल में पैदा हुए एक ही जगह एक ही समय में एक ही नक्षत्र में एक ही लग्न में तो भी डिफरेंट है तो एसेंडेंट लक भी होता है एसेंडेंट लक का मतलब होता है कि आपके माता-पिता का भी लक उसमें आएगा उन दो बच्चों के माता-पिता माता-पिता के तो डिफरेंट है कुंडलियां करेक्ट तो उनकी भी कुंडली देखी जाती है ओके जैसे विवाह में मिलन मिलान के समय में दोनों की कुंडली जैसे से देखी जाती है। वैसे ही बच्चे का भविष्य को पूरी तरीके से
(53:57) देखने के लिए उनके माता-पिता की कुंडली भी देखी जाती है कि अकेले बस बैठकर के हमने सिर्फ आपकी कुंडली देखी। अरे असेंडेंट में तो आपका यह है और यह तो एट्थ हाउस का लॉर्ड आपका लग्न में बैठ गया है तो बड़ा गड़बड़ है। पिताजी माताजी का भी आप कुंडली लेके बैठो। हम उनका देखो कि उनके बच्चे फिफ्थ हाउस में क्या प्रॉब्लम है। उन दोनों के फिफ्थ हाउस का आप पहले देखो और समझने की कोशिश करो कि व्हाई दिस चाइल्ड इज़ सो डिस्ट्रैक्टेड विद फादर एंड व्हाई ही इज़ सो गुड टू मदर या फिर क्या अपने पिताजी का कार्य को वो आगे बढ़ा पाएगा तो पिताजी का भी कुंडली आपको
(54:30) देखना पड़ेगा। ओके। हां। हां। हां। बिकॉज़ इट इज़ सो सिंपल ना। अह हम अह ईश्वर से जब बात करके पिछले जन्म से हम जब अगले जन्म में इसमें आते हैं। सो वी नो व्हाट सीड वी आर। व्हाई? बिकॉज़ वी ओनली चूज़ आवर पेरेंट्स। ये दो के डीएनए से ही मैं आऊंगी। बिकॉज़ मुझे यही भोगना है। करेक्ट। है ना? अब उस समय तो याद रहता है। बाहर निकलते हैं। कॉस्मिक कॉन्शसनेस के साथ जुड़े हुए हैं कि बेटा अब तुम आ गए बाहर। अब तुम जुड़ जाओ और ये सारी चीजें भी हुई। स्लोली एंड ग्रेजुअली आप देखेंगे वो बच्चा कभी-कभी सपने में मुस्कुराता भी है, कभी रोता भी है, कभी अजीब से मुंह बनाता है,
(55:09) कभी ए्जायटी वाले मुंह बनाता है। अपन सोचते हैं ये पता नहीं क्यों ऐसे मुंह बना रहा है। तो वो उनके साथ जो बातचीत चल रही है उसमें रिमोटफुल कंडीशंस उसके आते हैं। कभी उसका कुछ आता है। वो सारे एक्सप्रेशनंस जो है वो हम छ महीने तक काफी ऑब्जर्व करते हैं उनको। 6 महीने के बाद में धीरे-धीरे वह मेमोरीज जो है फेड होने लगती हैं। नाउ द चाइल्ड फॉरगेट्स कि व्हाट सीड आई वास व्हाट ट्री आई हैव टू बिकम? मुझे कौन सा पेड़ बनना है? मैं तो आम का बीज होकर के पैदा हुआ था और मैं नीम बन रहा हूं। हां राइट राइट राइट राइट। तो इसमें हमारे जो सेजेस जो बृहत पराशर
(55:45) होरा शास्त्र लिखा। फिर वराहमीर ने आकर के बहद जातकम लिखा। इतना एक्सरसाइज क्यों किया? सो दैट वी रिकॉग्नाइज व्हाट ट्री वी वांटेड टू बिकम। व्हाट ट्री यू वांटेड टू बिकम? सीड तो पता ही नहीं है कि अब पैदा होने के बाद हम भूल गए कि हम कौन से बीज में पैदा हुए थे। आम का बीज था कि नीम का बीज था। एस्ट्रोनॉमी हमको याद दिलाती है कि दिस वाज़ द ट्री यू शुड हैव बिकम। दिस वाज़ द साइंस पैरेलल साइंस विथ एस्ट्रोनॉमी। एस्ट्रोलॉजी हमको बताती है कि कौन सा ट्री हमको बनना है। सो वी नीड टू अंडरस्टैंड व्हाट काइंड ऑफ़ ट्री वी वांटेड टू बिकम दिस एस्ट्रोलॉजी हेल्प्स अस टू फाइंड आउट
(56:24) दैट ट्री। ओके। कि ट्रॉपिक ऑफ कैंसर जहां-जहां से पास किया है। आपने कहा एक पॉइंट काशी भी उसने पास किया। तो ठीक है। सन की एनर्जी की वजह से आपके पास एक अच्छा अच्छी जगह आ गई जो बहुत एनर्जी है। महाकालेश्वर उज्जैन करके भी यह कहानी है। अहमदाबाद में एक मंदिर है। एम से स्टार्ट होता है वो मंदिर का नाम। मॉडेरा। हां, आई थिंक सन टेंपल। या वो वो भी कैंसर कैंसर पे ट्रॉपिक ऑफ़ कैंसर पे। कहा जाता है कि पिरामिड्स भी बहुत क्लोज हैं। आई थिंक कुछ कुछ डिग्रीज है पर 100 कि.मी.
(56:53) या कुछ के डिस्टेंस पे है। एक पॉइंट ऑफ़ टाइम पे उसके ऊपर से भी गया होगा। एक पॉइंट करेक्ट मैं जब आप काशी बोल रहे थे मेरे दिमाग में वही चल रहा था। क्यों ऐसे हुआ है कि जहां-जहां ट्रॉपिक ऑफ कैंसर गया है, वहां ये कॉन्सक्रेटेड और एनर्जीाइज्ड प्लेसेस आए हैं। क्योंकि वहां पे आपका जो समरसिटी स्टे में आपका शैडो जीरो हो जाता है वहां पे। ओके? सो योर शैडो इज लाइक ओनली थोड़ा सा शैडो हल्का सा दिखाई देता है खुद जब आप खड़े होंगे समस में फिर वहां से वो ट्रोपे लेता है यानी कि नीचे की तरफ फिर आना होता है नेक्स्ट फ्यू इयर्स में तो मैक्सिमम पॉइंट तक पहुंचता है तो सम पीपल
(57:25) वेयर आफ्टर द ट्रॉपिक्स कि ये ट्रोपे कहां से लेती है सन जो है एक एक्सट्रीम पॉइंट तक पहुंचता है फिर वहां से वो यहां से उग रहा है फिर यहां से उग रहा है फिर यहां से उग रहा है फिर वो इतने नीचे से उग रहा है तो ट्रॉपिक ऑफ कैं कैंसर तक गया। फिर वर्नल इक्वनॉक्स के समय इक्वेटर से हो रहा है। यानी कि जब हम कोई आप एक बिल्डिंग को मार्क कर लीजिए। आप रोज सनराइज देखिए वहां से या रोज सनसेट देखिए। एक जगह से सनराइज देखिए। कोई एक बिल्डिंग मार्क कर लीजिए। तो वर्नल इक्विनॉक्स के दिन आपको बिल्डिंग के लेफ्ट साइड में दिखाई देगी। फिर समरसिस
(57:59) तक होते-होते वो बिल्डिंग के राइट साइड में आ जाएगी और रोज वहां पे उगरी और डोब रही है। करेक्ट। सो इट इट टेक्स अ काइंड ऑफ़ पाथ। अब जो हमारे पूर्वज थे वह यह देखना चाहते थे कि कितने एक्सटेंट तक इक्वेटर से कितने दूर और उग रही है और डूब रही है। तो समसोस्टिस पॉइंट उनको मिल गया। समसोस्टिस पॉइंट उनको क्यों चाहिए था ये कार्डिनल पॉइंट? बिकॉज़ दैट यूज़्ड टू डिसाइड कि अब अह जो मानसूनंस हैं वो कब आने वाले हैं। तो इट इज़ एग्जैक्टली इन द सेंट्रल इंडिया 21 जून तक ही जो अपना मसूनंस हैं प्रॉपर्ली जो है वो उस समय तक पहुंचती है। एंड देन द रेंस
(58:37) स्टार्ट। अब कैंसर और जर्मिनी का कसब है। सो 300 इयर्स के बाद में हम उसको ट्रॉपिक ऑफ जर्मिनी बोलना चाहिए। ओके बोल देना चाहिए। बोल देना चाहिए। आ गया बोल्ट जी। हां वो टाइम आ गया है ऑलमोस्ट। ओके। पूरा पूरी तरह से आ जाएगा। पूरी तरह से 300 इयर्स में आ जाएगा। अभी सो ट्रॉपिक ऑफ़ जेमिनी अच्छा। ट्रॉपिक ऑफ़ सैजिटेरियस। ऐसा हो जाएगा। तो जैसे ट्रॉपिक ऑफ कैंसर में अद्भुत जगह निकली वैसे ट्रॉपिक ऑफ कैप्रीिकॉर्न का भी कोई सिग्निफिकेंस है? वहां पर वडवा नल है। यानी कि समंदर के अंदर में वोल्केनोज़ हैं। एंड वहां पर वो अग्नि निकल रही है। वड़वानल
(59:12) का मतलब होता है कि समंदर के नीचे की अग्नि और वो वहां पे पाई गई है। एग्जैक्टली उसी लोंगिट्यूड पे उज्जैन, लंका एंड फिर वडवानल जो नीचे देखते हैं। तो हमारे जो लोग थे जो नेविगेशन में थे और ओशियन के अंदर भी नीचे जो जाते थे देखने के लिए। सो दे हैव सीन दिस एंड दे हैव रिकॉर्डेड इट। टिल दिस डेट मिलेंगे। हां, अभी भी मिलते हैं। अभी भी है। ट्रॉपिक ऑफ कैंसर भी मूव होता है। इट टेक्स अराउंड 20,000 इयर्स टू गो अप एंड अगेन कम बैक लाइक पूरा अब जाके एंड कम बैक टू ट्रॉपिक ऑफ कैंसर जहां पे इनिशियली था। यानी 22° अभी जैसे 23.5° पर है ट्रॉपिक ऑफ कैंसर।
(59:54) हम अ एक पॉइंट ऑफ टाइम था जब वो 25 डिग्रीज तक भी गया। अ यानी कि ट्रॉपिक ऑफ कैंसर काशी विश्वनाथ के ऊपर से गुजर रहे थे। एंड दैट वास हैपनिंग अराउंड 75,000 इयर्स एगो। इसलिए मैंने कहा कि जो काशी में जो शिव का विवाह है यह इतना पुराना एक एपिसोड हो सकता है। एंड दैट इज़ व्हाई ही इज़ आदि योगी। सो, उस वो टाइम था जो टोवा एक्सप्लोजन हुआ था। अह इंडोनेशिया में एक वोल्केनो फटा था। उसके बाद एक पूरा कोल्ड स्पेल आ गया था। बिकॉज़ सन रेज़ कुड नॉट रीच द अर्थ। आइस एज जो आप बोल रहे हैं। एक आइस एज शुरू हुआ उस समय में जो ज्वालापुरम का जो मैंने बताया था ना आपको
(1:00:33) कि ज्वालापुरम के नीचे भी स्टोन टूल्स मिल रहे हैं। ऊपर भी मिल रहे हैं और हमारे पास अंत्यष्टि सूक्त भी है ऋग्वेद में तो हम अंत्यष्टि कर रहे थे सबकी। तो हमें कोई स्कल्स और मास स्केल में मरे हुए लोग नहीं मिलते कहीं पे भी। इवन ड्यूरिंग द टोबा एक्सप्लोजन। बिकॉज़ हमने अंत्यष्टि कर दिया था। अंत्यष्टि कर दिया था। हमें जानवरों के भी नहीं मिलते। जानवरों की भी अंत्यष्टि हो जाती थी। यानी कि उसको पूरा जला दिया जाता था। एंड जो ऐशेस हैं वो गंगा में या किसी किसी भी रिवर में वर्ल्ड के हमने ऐसे करा होगा बिकॉज़ वो तो नहीं स्पेसिफिकली इंडियन टिल अफगानिस्तान।
(1:01:11) हां उसके एंडचिस्तान चाहिए थे स्कल्स। तो मिलते हैं ना? उस टाइम के 75,000 इयर्स। हां, हां। उसके भी पुराने मिलते हैं। इंडिया में ही नहीं मिलेंगे बस आपको। हां, हां हां हां हां। पूरे इंडिया घूम लीजिए। इंडिया में इतना खाना उग रहा था, सब कुछ था, क्लाइमेट इतना अच्छा था। लेकिन लोग नहीं मिलते ना। हां। स्क्रिप्चर्स मिलते हैं। स्क्रिप्चर में एस्ट्रोनॉमी मिल रही है। मगर स्कल नहीं मिल रहा है तो कोरिलेट कैसे करूं? नहीं। क्योंकि अंत्यष्टि कर दे रहे थे। और अंत्यष्टि सूक्त है ऋग्वेद में कैसे करना है करके। हम और इसके पीछे भी साइंस था क्योंकि सड़ रहा
(1:01:47) है कुछ चीज वहां पे और उसके बाद पेंडेमिक हो रहा है, प्लेग हो रहा है, मलेरिया हो रहा है, यह हो रहा है, वो हो रहा है। तो वो देख रहे थे कि कॉर्प्स को ऐसे नहीं छोड़ना चाहिए। इसको जला देना चाहिए। यह भी साइंटिफिकली इवॉल्व हुआ होगा। तो इसीलिए अंत्यष्टि सूक्त आया। जैसे अथर्ववेद में पृथ्वी सूक्त आया। कि किस प्रकार से हमको पृथ्वी का चयन करना है। एंड उस उस पर किस प्रकार से हमको बिल्डिंग लेनी है। पत्थर के जो है डिफरेंट साउंड्स कौन से पत्थरों को जो हमारे जो स्थपतिज हैं उनको मालूम है कि यह यह फीमेल पत्थर है। वो बजा के देखते हैं। यह मेल
(1:02:24) पत्थर है। तो इसमें से मेल मूर्ति बनेगी। यह फीमेल पत्थर है। इसमें फीमेल मूर्ति बनेगी। उसके बाद उसमें प्राण प्रतिष्ठा होगी। एंड देन दे विल एक्ट इन दैट फॉर्म। फीमेल एंड मेल पत्थर पत्थर जी यह स्थपतिस को पता होता है कि कौन सा क्या होता है एक डिफरेंट साउंड साउंड्स के हिसाब से जो उनके प्रिडसर ने उनको सिखाया होता है। सो देयर सो मेनी थिंग्स व्हिच इज वेरी एस्टोनिशिंग व्हेन वी गो एंड लुक इंटू इट कि अरे ये ऐसा भी होता है क्या? सो पत्थर-पत्थर में क्या फर्क है? लेकिन पत्थर में भी वह फर्क होता है। भूमि पूजन के समय में जो वास्तुकार हैं जो
(1:03:05) मिट्टी पूरी निकालेंगे सपोजिंगली उसमें टेस्टिंग है कि मिट्टी को वापस डालें अगर और वो मिट्टी उससे ज्यादा नीचे चली जा रही है जितनी निकाली तो वहां घटनी नहीं चाहिए तो वहां नहीं बनाना है। बिकॉज़ पॉसिबल है कि वहां पे वो संप हो जाए कि नीचे कोई स्ट्रेटा नहीं है ऐसा स्ट्रांग वाला जहां पे बिल्डिंग ये खड़ी हो पाएगी। तो एवरीथिंग इज़ साइंटिफिक ना। हम और उससे अगर ऊपर निकल रही है भर के तो अबंडेंस आएगा तो यह इसेरिक हो गया बट वो ऊपर निकल के आ रही है दैट मींस कि अब थ्रस्ट है एंड द बिल्डिंग विल बी स्टेबल बट हम दूसरा मीनिंग निकाल लेते हैं फिर
(1:03:39) वास्तु शास्त्री के पीछे दौड़ते रहते हैं हजारों लाखों रुपए देते हैं कि भाई अच्छे से वास्तु का हमें बताओ लैंड का चयन करने का बताओ एंड ऑल दिस थिंग्स हम अच्छा दैट वास द रीज़न हां एवरीथिंग हैज़ अ साइंस बिहाइंड आवर हिंदूइज़्म हम ये अगर हम उस लेंस से नहीं देखेंगे तो बच्चों तक हम कुछ भी नहीं पहुंचा पाएंगे। एंड दे विल बी डल्यूशनाइज्ड कि ओके ठीक है हिंदू हैं पैदा हुए हैं मर जाएंगे जला देंगे हो गया ठीक है इतना ही मंदिर जाने का भी कोई ऑब्लिगेशन नहीं है मम्मी बोलती नहीं है कि रोज जाओ मंदिर घर में कोई कभी भूले भट के चले गए मंदिर
(1:04:18) तो चले गए दान पेटी में दान डाल दिया हाथ जोड़ के आ गए बस इतना ही हिंदूइज़्म है इतना ही बचा है अभी ट्रू। मैं एक बहुत ही फेमस कॉस्मोलॉजिस्ट का एक वीडियो देख रही थी। हम प्रोफेसर इन द यूनिवर्सिटी ऑफ़ सम यूके यूनिवर्सिटी और उन्होंने कहा कि जो टाइम साइकिल होता है ना वो 20 मिलियन इयर्स का होता है। एक टाइम साइकिल तो अगर तो सृष्टि का विनाश होगा इफ द वर्ल्ड डाइस वो इसी टाइम साइकिल में होगा। लेकिन ये चीज जो आज बिलियन डॉलर रिसर्च से पता चल रही है ये ऑलरेडी 500 बीसी में मेंशन किया गया है। ओके? 500 बीसी पहले ये चीज आ चुकी है। सेम चीज हग्स बोजॉन के साथ हुआ। इतने
(1:04:57) बिलियन डॉलर रिसर्च आज हुई और हमें पता चला कि दिस वास ऑलरेडी मेंशंड प्रीवियसली। राइट? ग्रेविटी तक मेंशंड है सूर्य सिद्धांत में। मतलब देयर इज़ सो मच। सो मैं पहले तो जानना चाहती हूं ऐसे और क्या चीजें हैं जो सूर्य सिद्धांत में मेंशन है लेकिन आज तक डिस्कवर नहीं हुए हैं। शायद से आगे जाके डिस्कवर होंगी। एक तो मैं वो आपसे जानना चाहती हूं। कुछ तो हमें पता ही है। स्पीड ऑफ़ लाइट हमें पता है। हमें 118 पता है। डायमीटर ऑफ़ अर्थ, मून वो सब। तो ऐसी और क्या-क्या चीजें हैं जो मेंशंड है लेकिन अभी तक साइंस वहां तक पहुंचा नहीं है। ऑसिलेशन वाला एक है अ जो अभी तक लोगों को
(1:05:33) समझ में नहीं आ रहा है। जबकि वो साइनोसाइडल टाइमलाइन जो है वो बताती है। प्रसीजन ऑफ जो इक्विनोक्सिस है उसकी जो कैलकुलेशन उसमें की गई है। वो कैलकुलेशन की जो पद्धति है वो अभी तक कोई समझ नहीं पा रहा है। सो जस्ट दैट मच इज़ रिमेनिंग कि नया साइंस उसको किस तरह से लेकर लेकर के आता है कि व्हाई डिड इट से ऑसिलेशन या फिर वो ऑसिलेशन भी है या साइनोसाइडल साइकिल के बारे में बात कर रहा है प्रिसीशन के टाइम पे। मतलब प्रिसीशन की कैलकुलेशन उसकी उस टाइप की है जैसे कि पाई की कैलकुलेशन दी हुई है ना। बड़ी एक फिगर्स हैं और उसके डिवाइडेड बाय एक छोटी
(1:06:12) फिगर है। तो उसी तरह से प्रिसीजशन का जो है वो कैलकुलेशन है। वो बड़ा डिफिकल्ट है सूर्य सिद्धांत में। तो वो आज तक फॉर लास्ट 100 इयर्स कोई क्रैक नहीं कर पाया है। मुझे थोड़ा टाइम नहीं मिला। मैंने शुरुआत कर दी थी। एंड नीलेश जी ने कहा था यू आर ऑलमोस्ट देयर रूपा मुझे लग रहा है कि आप इसका कुछ ना कुछ निकाल लोगे एक दिन। एंड बीच में फिर वो इंडस भी आ गया और दूसरे भी बहुत सारे रिसर्च जो है पेपर्स जो मैं लिखती रहती हूं तो वो होते रहते हैं। सो द नेक्स्ट ईयर वुड बी लाइक इस साल भी अभी मुझे थोड़ा इसलिए निकलना पड़ रहा है कि आई वांटेड कि ये बुक अब लोग पढ़ें
(1:06:45) एंड फाइंड आउट कि मेसोपोटामिया के साथ में किस तरह से हमारा इंडिया का रिलेशनशिप था। जो मेसोपोटामिया के कोनेफॉर्म टेक्स्ट में जो नाम मिल रहे हैं जैसे अशरानी वो हमारे सील में भी असरानी मिला है। असानी तो सरनेम सरनेम है सिंध का एंड आई इंडस वैली सिविलाइजेशन चानूदारो मोहनजोदड़ो वो सब सिंध के ही हैं। क्योंकि सिर्फ स्क्रिप्ट डिसाइफर कर देना काफी नहीं है। सील क्या कह रहे हैं? सील डिसाइफर करना भी जरूरी है इक्वली। सो इट्स अ ह्यूज स्टडी। मतलब एक-एक दिन मुझे 14 घंटे 121 घंटे देने पड़े हैं। मैं कंटीन्यूअसली बैठी हूं। बीच में मैंने शायद एक महीने का
(1:07:24) ब्रेक लिया था। आई वास टू डिवास्टेटेड एकदम कि आई विल गो मैड बिकॉज़ देयर सो मच ऑफ़ थिंग्स व्हिच हैज़ टू कम आउट और आ नहीं पा रहा है क्योंकि टाइम नहीं मिल रहा है। क्योंकि एक-एक सील के ऊपर मुझे इतनी इतना हिस्ट्री पढ़ना पड़ रहा है। उसको रिसर्च करना पड़ रहा है। उसको कनेक्टिंग ऑफ़ डॉट करना पड़ रहा है कि वो इंडियन सिविलाइज़ेशन के साथ किस तरह से बिहेव कर रहे थे। क्या हो रहा था। सो दिस बुक इज़ ऑल अबाउट कि देयर वाज़ नो आर्यन इन्वज़। देयर वाज़ सिंपल ट्रेडिंग गोइंग ऑन। द सदर्न पॉलिटीज वर्किंग टिल मकरान मगन एरिया मकरान बलूचिस्तान एंड दैट इज व्हाई ब्रह
(1:07:59) लैंग्वेज इज स्टिल देयर जो ब्रही लैंग्वेज है तमिल से मिलतीजुलती और तेलुगु से मिलतीजुलती जो लैंग्वेज है वो अभी भी बलोची लोग बोलते हैं। बिकॉज़ फॉर सच अ लॉन्ग स्ट्रेच ऑफ़ टाइम फॉर 2000 इयर्स जो तमिलियंस हैं वो वहां पे रहे हैं। और आपके आर्यन इमेज था ही नहीं। नहीं कभी हुआ ही नहीं। कभी हुआ ही नहीं। वी आर वेरी इंडीजीनियस पीपल जो चाहे नॉर्थ के हो चाहे साउथ के हो। हम यहीं के लोग हैं। नियोलिथिक पीरियड में हम वापस आए और अपना नॉर्दर्न इंडिया को हमने वापस से इरीगेट किया। वापस से हमने इसको पपुलेट किया। दैट इज़ अ डिफरेंट इशू। हम मगर इन्वेशन नहीं हो रहा था। तो ये बहुत
(1:08:38) ही खूबसूरत किताब है। द इंडस सील डिसाइफर्ड। यू नो ऐसी चीजें आनी चाहिए सामने। बिकॉज़ इसमें सबसे पहले तो बहुत मेहनत गई है। बट दिस इज़ टू द नीड ऑफ़ द आवर। इतनी चीजें जो आपने बताई है जो हमें लगता है रियलिटी में था बट एक्चुअली नहीं है। तो प्लीज दिस इज अ लेबर ऑफ़ लव। सो इंडसली डिसाइवर्ड बाय रूपा भाटी। कैन परचेस इट ऑन। थैंक यू। थैंक यू सो मच रूपा जी। मतलब आप जैसे नगीने कम मिलते हैं। कहीं छुपे हुए होते हमको आप मिल गए। बट मतलब मुझे ऐसा लग रहा था कि आप आई एम अ स्टूडेंट और और पूछने का मन कर रहा था और पूछने का मन कर रहा था। तो बहुत अमेजिंग गया है। बहुत डीप
(1:09:13) कन्वर्सेशन की है। एंड विशिंग यू ऑल द स्ट्रेंथ इन व्हाटएवर यू डू। आपकी बहुत बुक्स लिखते जाइए। पॉडकास्ट में आते रहिए। एंड रियली लुकिंग फॉरवर्ड टू नो कि हमारा यू नो वैदिक विज़डम, हमारा जो इंडिविज़म कितना गहरा है और कितना ऑथेंटिकली आई थिंक प्रॉब्लम तो यही है ना कि इतना सारा ऑथेंटिसिटी इज लॉस्ट। लॉस्ट। बट यू ऑन ऑफ़ दोज ऑथेंटिक वॉइसेस। सो आई एम सो ग्रेटफुल की। थैंक यू सो मच। [हंसी] यू फाउंड इट यूज़फुल एटलीस्ट फॉर यू। लॉट्स। थैंक यू। सो, थैंक यू सो मच एंड ऑल द बेस्ट। थैंक यू फॉर हैविंग नेक्स्ट टाइम। थैंक यू। नमस्कार। नमस्कार।
(1:09:46) इन केस यू वुड लाइक टू बी अ पार्ट ऑफ़ आवर ऑनलाइन एंड इनपर्सन योगा, डाइट एंड स्पिरिचुअल प्रोग्राम्स। यू कैन जॉइन आवर WhatsApp ग्रुप बिलो वेयर वी पोस्ट ऑल आवर अपकमिंग प्रोग्राम्स एंड गिव फ्री टिप्स ऑन हेल्थ, डाइट एंड लाइफस्टाइल। [संगीत]

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