Saturday, August 8, 2026

Ageless Body And Mind Ka HIDDEN FORMULA | With Jitendra adhia | Ep 03

Ageless Body And Mind Ka HIDDEN FORMULA | With Jitendra adhia | Ep 03

Author Name:Aasan Raahen

Youtube Channel Url:https://www.youtube.com/@Aasan_Raahen

Youtube Video URL:https://www.youtube.com/watch?v=Kp0tbDR5N98



Transcript:
(00:00) एजलेस बॉडी पे लोगों को काम करना है। कल से वो क्या स्टार्ट कर सकते हैं या आज अभी से क्या स्टार्ट कर सकते हैं? पहला तो लोगों को यही पता नहीं कि हमारी तीन टाइप की ऐज होती है। एक होती है कैलेंडर एज। दूसरी होती है हमारी मेंटल एज और तीसरा है हमारी बायोलॉजिकल एज। ये तीन अलग-अलग एज होती है। और ऐसा देखा गया है कि हमारी बायोलॉजिकल एज मेंटल एज को फॉलो करते हैं। ज्यादातर दर्शकों को ये भी नहीं पता होगा कि हमारे दो मन होते हैं। कॉन्शियस माइंड एंड सबकॉन्शियस माइंड। 10% इज कॉन्शियस माइंड। 90% इज सबकॉन्शियस माइंड। और यह 10% का भी 10% यूज़ करते हैं।
(00:28) तो टोटल माइंड पावर का सिर्फ 1% यूज़ करते हैं। तो सोचते हो कि सिर्फ 1% माइंड पावर इस्तेमाल करके दुनिया कहां से कहां पहुंच गई है। तो अगर ज्यादा इस्तेमाल करेंगे तो क्या होगा? हार्व यूनिवर्सिटी में एक रिसर्च हुई है। हैप्पीनेस के ऊपर हुई है। और ये हैप्पीनेस की रिसर्च ये कहती है कि मैक्सिमम हैप्पीनेस आती है बॉन्डिंग से। रिलेशनशिप से आती है अच्छे रिलेशनशिप से। और जो इंसान हैप्पी रहता है वो एगलेस भी बनता है ऑटोमेटिक। क्या हमें अवेयरनेस क्रिएट करना है कि हाउ फ़ास्ट आई एम एजिंग। मैं कितना स्पीड से जा रहा हूं मिथ की तरफ। अगर हमें पता चल जाए, टेक्निकली पता
(00:55) चल जाए, टेस्टें पता चल जाए कि हमारी एजिंग बहुत फील्ड से हो रही है, तो हम उसको स्लो कर सकते हैं। दूसरा यह है कि अवेयरनेस के बाद एक और भी स्टेप है। अगर आप धनवान है तो। हेलो दोस्तों, आज मैं आपसे एक सवाल पूछना चाहती हूं कि कितने लोग यंग दिखना चाहते हैं? वैसे सभी की चाहत होती है यंग दिखना। और दूसरा यह सवाल है कि कितने लोग यंग होना चाहते हैं? दोनों में डिफरेंस है। कितने लोग यंग होना चाहते हैं? कितने लोग यंग दिखना चाहते हैं? तो आज हम इसी सब्जेक्ट पर बात करेंगे जो हमारे आज के गेस्ट हैं। इसी सब्जेक्ट को प्रमोट कर रहे
(01:41) हैं। इसी इसी सब्जेक्ट पर उन्होंने रिसर्च किया हुआ है। उनकी आज 130वीं बुक उन्होंने ल्च की है जो यह एजलेस बॉडी पर जो आप लोगों के सवालों के जवाब देगी जिसमें आपको बहुत ज्यादा इंटरेस्ट है। तो आज हम स्वागत करते हैं अपने पडकास्ट में डॉक्टर जितेंद्र अडिया जी का। नमस्कार डॉक्टर नमस्कार थैंक यू। तो स्वागत है आपका हमारे पडकास्ट में। तो आज आपकी नई बुक जो ल्च हो रही है एजलेस बॉडी। आज हम थोड़ा सा इस पर बात करेंगे। बिल्कुल। कि हम एजलेस बॉडी क्या है? अच्छा इसके पहले दर्शकों को एक सवाल पूछते हैं। जी कि हमारी दोनों की ऐज क्या है? गेस करें
(02:22) वो। जी। और लास्ट में हम बता देंगे हमारा एक्चुअल एज क्या है और उन्होंने गेस क्या किया है। तो पता चला कि वो सही गेस किया या गलत गेस किया। जी। जी तो दर्शकों को हम बोलते हैं कि आप गेस करिए हमारी दोनों की ऐज। जी। ठीक है। आप हमारी ऐज गेस करिए। कमेंट में लिख के बताइए कि कितनी गेस की आपने और आखिर में हम रिवील करेंगे हमारी एज दोनों की। ठीक है। ज्यादा मत लिखना है। हम दोनों यंग हैं। एजलेस हैं। जी। तो डॉक्टर साहब ये बताइए सबसे पहले तो हम एक छोटा सा सवाल मैं क्योंकि आपने सबकॉन्शियस माइंड पे काफी रिसर्च की है। इतने सालों से आप इसको रिसर्च कर रहे हैं
(02:57) और सबको अवेयर कर रहे हैं इससे। तो सबकॉन्शियस माइंड में हम एक मन मन पे बात करते हैं। तो मन कहां से शुरू होता है? कहां खत्म होता है? क्या है? वेरी गुड। पहले तो लोगों को यही पता नहीं कि मन क्या है। जी। इवन हमारे मेडिकल डॉक्टर को भी पता नहीं रहता है। क्योंकि हमें मेडिकल कॉलेज में ये सिखाया नहीं जाता है। हमें सिर्फ दिमाग के बारे में सिखाया जाता है। मन के बारे में नहीं सिखाया जाता। और ज्यादातर लोगों को तो ये भी डिफरेंस पता नहीं है कि मन और दिमाग अलग-अलग चीजें हैं। जी। दोनों एक ही समझ लेते हैं। जी। तो कंप्यूटर की भाषा में अगर समझे तो
(03:30) दिमाग है वह हार्डवेयर है और मन सॉफ्टवेयर है। सिंपल है। जी दिमाग पदार्थ है और मन है वो शक्ति है। शक्ति दिखती नहीं है। जैसे बिजली है वो शक्ति है और दिखती नहीं है। मगर बिजली का इस्तेमाल करते हैं। जी बिजली के लिए हमारे पास दो ही चॉइस होती है। इस्तेमाल करो या नहीं करो। नहीं करो तो काम में नहीं आती। करो तो फायदा होता है। तीसरे भी ऑप्शन है गलत इस्तेमाल करोगे तो शौक लगेगा और मर जाओगे। जी मन का भी ऐसा है या उसका इस्तेमाल करो या नहीं करो या गलत इस्तेमाल करो जैसा बिजले का होता है। तो मन है वो एक शक्ति है और दिमाग है वो एक पदार्थ है जिसको आप देख
(04:08) सकते हैं, छू सकते हैं, काट सकते हैं, नाश कर सकते हैं, फोटो निकाल सकते हैं, ऑपरेशन कर सकते हैं। पदार्थ के साथ सब कुछ होता है। मन जो एक शक्ति है उसके साथ इसमें से कुछ भी नहीं होता। मन को देख नहीं सकते, छू नहीं सकते, फोटोग्राफ नहीं निकाल सकते, ऑपरेशन नहीं कर सकते, नाच भी नहीं कर सकते। कुछ भी नहीं होता है। तो यह दोनों में फर्क है। जी। और भगवान ने हमें सबको 100% माइंड पावर दिया है। मगर कहते हैं कि हम हमारे माइंड पावर का 10% से ज्यादा कभी इस्तेमाल नहीं करते हैं। इसका रीजन क्या है? हमारे दो मन होते हैं। ज्यादातर दर्शकों को यह भी नहीं
(04:42) पता होगा कि हमारे दो मन होते हैं। कॉन्शियस माइंड एंड सबकॉन्शियस माइंड। चेतन मन अवचेतन मन दो मन होते हैं हमारे तो 10% इज कॉन्शियस माइंड 90% इज सबकॉन्शियस माइंड और हम सब लोग सिर्फ कॉन्शियस माइंड को ही जानते हैं जो 10% होता है और ये 10% का भी 10% यूज़ करते हैं तो टोटल माइंड पावर का सिर्फ 1% यूज़ करते हैं। जबकि 90% पावर वाला जो सबकॉन्शियस माइंड है उसके बारे में जानते नहीं इसलिए इस्तेमाल नहीं करते हैं। तो सोच लो कि सिर्फ 1% माइंड पावर इस्तेमाल करके दुनिया कहां से कहां पहुंच गई है। जी। तो अगर ज्यादा इस्तेमाल करेंगे तो क्या
(05:14) होगा? तो मेरा हमेशा का मिशन रहा है कि मैं ज्यादा से ज्यादा लोगों को यह सिखाऊं कि ये सबकॉन्शियस माइंड को कैसे इस्तेमाल करें ताकि आपके सपने भी पूरे हो और देश का भी भला हो। तो मैं जो प्रेरणा का जन किताब लिखी है जो बेस सेलर बनी है वो इसके ऊपर है पावर ऑफ सबकॉन्शियस माइंड के ऊपर तो इसका इस्तेमाल करके आप एजलेस भी बन सकते हैं बहुत सारा धन कमा सकते हैं अपने सपने पूरे कर सकते हैं नाम कमा सकते हैं ब्रांड बना सकते हैं सब कुछ होता है जी ये है तो ब्रांड बनाना नाम कमाना फेम मनी ये सब तो सभी बात जी सबको चाहिए लेकिन सबसे पहले सबको चाहिए
(05:50) कि वो उनकी उम्र कम दिखे या कम कैसे एजलेस कैसे बने या मतलब मन से कैसे हम कब को पा पहली बात तो बताऊं कि हमारी तीन टाइप की एज होती है। जी। एक होती है कैलेंडर एज जो हमारे बर्थ सर्टिफिकेट में लिखी रहती है। आधार कार्ड में और पासपोर्ट में लिखी रहती है। जिसको हम कहते हैं कैलेंडर एज। जी। दूसरी होती है हमारी मेंटल एज। मेंटली हम अपने को कैसा फील कर रहे हैं? कितना यंग फील कर रहे हैं। जी। ये है। और तीसरा है हमारी बायोलॉजिकल एज। हमारे बॉडी की सेल की ऐज क्या है? ये तीन अलग-अलग एज होती है और ऐसा देखा गया है कि हमारी बायोलॉजिकल एज मेंटल एज को फॉलो
(06:25) करती है। वो जन्म तारीख को फॉलो नहीं करती है। इसलिए आपने देखा होगा जैसे आप है आपके जन्म तारीख के हिसाब से जो एज है उससे बहुत आप यंग दिखती हो। तो आपका बॉडी ने वो कैलेंडर एज को फॉलो नहीं किया। आपका जो मेंटल स्टेटस है उसको फॉलो किया है। तो जो एजलेसनेस है वो माइंड से शुरू होती है। वहां कैलेंडर से शुरू नहीं होती है। तो हम अगर माइंड को समझ ले और माइंड को यंग फील करवाए तो बॉडी के जो हर एक सेल हमारे माइंड को फॉलो करता है तो हम मैंने यही लिखा है कि माइंड को कैसे एजलेस बनाए ताकि हमारी बॉडी ऑटोमेटिकली एजलेस बन जाए। क्योंकि बॉस तो वही है माइंड है। राजा है
(07:00) शरीर का। जी जी। ऐसा है। मतलब टाइम को हम इमोशन से कंट्रोल कर सकते हैं। जो टाइम है मतलब हमारा जो एज बिल्कुल बिल्कुल कम दिख रही है एज हमारी। हम तो क्या हम ये जो टाइम है इसको इमोशन से कंट्रोल करते हैं। माइंड के देखिए हमारा जो बॉडी है ना माइंड माइंड क्या काम करता है? माइंड विचार करता है। जैसा विचार करता है ऐसी इमोशंस होती है। माइंड में हमारी एक बिलीफ सिस्टम रहती है। जो एक्चुअली वो विचारों का एपिसेंटर है। वहीं से विचार बनते हैं। फिर हमारी हैबिट्स होती है। जी आदतें होती है। तो ये चार चीजें ऐसी होती है जो हमारे माइंड में रहती है। उसको हम
(07:36) सही तरीके से समझेंगे और उसको कंट्रोल करेंगे तो हमारी बॉडी एलेस हो जाएगी। यही सब बातें इसके अंदर मैंने लिखी है कि हमारे विचार हमारे बॉडी को कैसे प्रभावित करते हैं। हमारी इमोशंस कैसे प्रभावित करते हैं। हमारी बिलीफ सिस्टम कैसे प्रभावित करते हैं? हमारी डेली हैबिट कैसे प्रभावित करते हैं? तो ये चारों चीजों को समझने से मॉडिफाई करने से बॉडी पे रिजल्ट दिखेगा आपको। इंटरनली आप यंग हो जाओगे। सिर्फ दिखोगे नहीं रियली यंग हो जाओगे। आपका शरीर का हर सेल वैसे रिसोंड करेगा जैसे आप यंग हो। जी। ऐसा है। तो मैं अभी आपसे यह पूछना चाहती हूं कि
(08:10) जैसे इस एजलेस बॉडी पे लोगों को काम करना है। कम एज का दिखना है। तो कल से वो क्या स्टार्ट कर सकते हैं या आज अभी से क्या स्टार्ट कर सकते हैं? बहुत अच्छा क्वेश्चन पूछा। आज तक आपने सबसे पहले ही यह सवाल पूछा है। क्रिएट दी अवेयरनेस। अवेयरनेस क्रिएट करो। क्योंकि क्या होता है कि हमारी लाइफ ऑटो पायलट पे चलती रहती है। एक मास ट्रांस में हम रहते हैं। मूर्छा में रहते हैं। हम क्या खाते हैं? क्या बोलते हैं? क्या काम करते हैं? कहां से गुजरते हैं पता ही नहीं हमेशा। तो पहले तो अवेयरनेस क्रिएट करो कि मेरी बॉडी कैसी है? कैसे रिसोंड कर रही है। मैं मिरर
(08:44) में देखता हूं जो बायोलॉजिकल एलर्जी आपको मिरर में दिखती है। जी तो मिरर में दिखता हूं तो मैं कितना एज का दिखता हूं। मेरी कैलेंडर एज से बड़ा दिखता हूं या छोटा दिखता हूं। पहले अवेयरनेस क्रिएट करिए। सबसे पहला स्टेप है। उसके बाद डिसाइड करिए कि मुझे ये ऐज को कम करनी है। मेरी बॉडी की ऐज को कम करनी है बायोलॉजिकल। दूसरा यह है कि अवेयरनेस के बाद एक और भी स्टेप है। अगर आप धनवान है तो आज नई टेक्नोलॉजी आ गई है जो आपके बॉडी के हर सेल की स्पेसिफिक एज बता देंगे कि आपका हर सेल की एज कितनी है? बायोलॉजिकल एज यानी बालों की ऐज कितनी
(09:16) है? स्किन की कितनी है? हार्ट की कितनी है? लंग की कितनी है? इंटेस्टाइन की कितनी है? लीवर की कितनी है? किडनी की सभी की ऐज बता सकते हैं। ऐसी टेस्ट होती है। सबकी एज अलग-अलग होती है। अलग-अलग होती है। सबकी एज अलग-अलग होती है। और ये आपको बता देते हैं। और एजिंग की आपकी स्पीड क्या है? वो भी बता देंगे ताकि आप यह भी प्रेडिक्ट कर सकते हैं कि मैं कब मर जाऊंगा। ऐसा ये आजकल टेक्नोलॉजी आ गई है। ऑनलाइन सब होता है। हम एजलेस से बात कर रहे हैं। अभी नहीं कहने का मतलब यह है कि देखो आप एज को रोक दोगे। एजिंग को रोक दोगे तो लंबा जिओगे।
(09:47) ये बुक में मैंने सिर्फ यंग दिखने की बात नहीं की है। हाउ टू लिव लगर फील स्ट्रंगर एंड लुक यंगर। ये तीनों चीज की बात की है। लंबा जिया कैसे जाए और एनर्जी के साथ कैसे जिया जाए और यंग कैसे दिखे? ये तीनों की बात की है। बुक का टाइटल सिर्फ एयरलेस बॉडी है। मगर मेरा पूरा मेडिकल नॉलेज का ज्ञान इसके अंदर आ गया है। तो जो किताब ये पढ़ेंगे जो ये सीखेंगे उनको ये तीनों फायदा होने वाला है। लंबा भी जिएंगे। मगर कहने का मतलब ये है कि हमें अवेयरनेस क्रिएट करना है कि हाउ फास्ट आई एम एजिंग। मैं कितना स्पीड से जा रहा हूं डेथ की तरफ। हम
(10:21) अगर हमें पता चल जाए टेक्निकली पता चल जाए टेस्ट से पता चल जाए कि हमारी एजिंग बहुत स्पीड से हो रही है तो हम उसको स्लो कर सकते हैं ब्रेक लगा सकते हैं रिवर्स भी कर सकते हैं हमारी ऐज को आज मान लो आपकी बायोलॉजिकल एज 50 की है और आपको 40 की करनी है तो एक किताब में हमने लिखी है वो टेक्नोलॉजी से आप कर सकते हैं। टेक्नोलॉजी यानी सिस्टम को फॉलो करके आप 10 साल कम भी कर सकते हैं। आज भी कर सकते हैं। इट इज़ नेवर लेट। ऐसा हो सकता है। तो पहले तो अवेयरनेस क्रिएट करिए। फिर अगर आपके पास पैसा है जैसे मैंने Google पर देखा 52,000 चार्ज है उसका टेस्ट का। मगर आजकल जो
(10:54) गाड़ियां ले घूमते हैं उनके लिए अगर हेल्थ की अवेयरनेस है तो 52,000 खर्चा करेंगे। Tata की एक कंपनी है 1mg करके उसकी वेबसाइट पे जाएंगे तो दिखेगा। दिल्ली में ही उनकी हेड ऑफिस है। तो टेस्ट करवा लीजिए और फिर समझ लीजिए कि मेरी ऐज बहुत फास्ट हो रही है। मैं जल्दी मर जाऊंगा। मुझे लंबा जीना है तो मुझे स्लो डाउन करना पड़ेगा। बेसिकली क्या है कि इंटरनली आपको हेल्दी रहना है और एजलेस रहना है तो आपको लाइफस्टाइल में बहुत चेंज करना पड़ेगा। हमारी जो बॉडी है ना लाइफस्टाइल को फॉलो करती है। कुछ लाइफस्टाइल ऐसी होती है जो एजिंग को फास्ट
(11:26) करती है। कुछ लाइफस्टाइल एजिंग को स्लो करती है। तो आपको तो टेस्ट ही पता चल जाएगा। मिरर में देख के पता चल जाएगा कि आप यंग दिखते हो कि बूढ़े दिखते हो। लोगों के कॉम्प्लीमेंट से पता चलता होगा। आपको अभी तक बहुत लोगों ने बोला होगा कि आप बहुत यंग दिखते हो। जी मुझे भी बहुत ऐसी कॉम्प्लीमेंट मिलती है। तो कहने का मतलब है कि लोगों के रिस्पांस से भी पता चल जाता है कि आप यंग दिखते हो। तो बायोलॉजिकल एज को घटाने का एक निश्चय करिए। एक डिसीजन लीजिए और फिर सिस्टम को फॉलो करिए। अपनी लाइफ स्टाइल को फॉलो करिए। जी। और हमारा एजिंग का सबसे बड़ा दुश्मन है ना
(11:58) यानी इललेस का वो है हमारा कंफर्ट ज़ोन। ज्यादातर लोग क्या करते हैं? शुरुआत में स्ट्रगल करते हैं, पढ़ाई करते हैं, डिग्री लेते हैं, नौकरी या धंधा मिल जाता है, शादी हो जाती है। एक एक लेवल का स्टैंडर्ड बन जाता है। फिर वो कंफर्ट जोन में चले जाते हैं। बाद में उनको स्ट्रगल नहीं करनी होती है, मेहनत नहीं करनी होती है। सोफा पे बैठे रहना है, गाड़ी में घूमना है, डाइनिंग टेबल पे बैठे रहना है, टीवी देखते रहना है, बॉडी को श्रम नहीं देना है। तो उसकी वजह से हमारी लाइफ स्टाइलाइल गलत होने से हमारी एजिंग फास्ट हो जाती है। और बॉडी का नियम है। उसको जितना एक्टिव
(12:29) रखोगे ना इतना एजलेस रहेगा। जितना उसको आराम दोगे ना उतना वो एजिंग फास्ट होगी। आजकल सबकी जिंदगी आराम वाली हो गई है। मेहनत ज्यादा नहीं करते हैं। जी तो एजिंग को स्लो करने का सबसे पहला फंडा ये है कि मन को शांत कर दो और बॉडी को एक्टिवेटेड रखो। मन जितना शांत रखोगे बॉडी जितना एक्टिवेटेड रखोगे एक्सरसाइज करके योगा करके कोई काम करके तो आपका बॉडी यंग रहेगा और मन शांत रखना है। हमारा उल्टा हो जाता है। बॉडी को हम आराम देते रहते हैं पूरा दिन। बॉडी से कुछ नहीं करते और माइंड एजिटेटेड रहता है। 24 घंटा चलता रहता है। यह चाहिए वो चाहिए इसको मिलना है उसको
(13:07) करना है। तो इसलिए हमारा एजिंग फास्ट हो रहा है। इसलिए सभी बीमारियां हो रही है। स्ट्रेस भी उसी से क्रिएट होता है। और स्ट्रेस है वो हमारा सबसे बड़ा एजिंग का दुश्मन है। यानी जितना स्ट्रेस में जिओगे इतना एजिंग आपका फास्ट होगा। और आजकल आपको पता है कि ज्यादातर लोग स्ट्रेस में जीते हैं। बच्चे भी स्ट्रेस में जीते हैं। यंगस्टर भी जीते हैं। मैरिड लोग भी जीते हैं, बूढ़े लोग भी जीते हैं। जी। तो स्ट्रेस आल्सो बिगेस्ट दुश्मन है। तो जितना स्ट्रेस मैनेजमेंट करोगे उतना आपका अच्छा रहेगा। एजिंग स्लो हो जाएगी। एक-एक गोल रखो कि मुझे एजिंग को स्लो करना है और
(13:39) रिवर्स करना है। एंड इट इज पॉसिबल। जी। ऐसा सब साइंस के अंदर लिखा है। इतनी हमने रिसर्च की है किताब लिखने के लिए। मेरे साथ कोऑथर है वो भी डॉक्टर है। एमडी डॉक्टर है। किन्नरी गुप्ता करके लेडी है। वो भी आपके जैसी है। जितनी उम्र है उससे 20 साल कम लगती है वो। ऐसा है। तो हम दोनों एग्जांपल है उसके। दोनों मेडिकल डॉक्टर है। दोनों एमडी है। तो दोनों ने हमने बहुत सारी रिसर्च करके इसके अंदर सब चीजें निकाल के लाई है। यानी वो मक्खन निकाला है उसके अंदर से दही के अंदर से हमने। तो ये सब बातें हैं जो लोगों को अभी तक पता नहीं थी। कुछ चीजें तो मुझे भी नहीं
(14:10) पता थी जो मुझे अभी ये किताब लिखने के टाइम पे पता चली। वो इसका भी रोल होता है। इसका भी रोल होता है। जब लिख रहे थे तब पता चला। जी। तो वो चीजें क्या है? बहुत सारी चीजें जैसे मैंने बताया इवन मैंने वाइन का लिखा है कि किसी को पता नहीं था कि वाइन है वो एंटी एजिंग है। रोज एक गिलास वाइन पियोगे तो आपकी एज कम होगी। बाकी का दारू नहीं मगर सिर्फ रेड वाइन। उसके अंदर कुछ तत्व रहते हैं जो आपको एंटी एजिंग करते हैं। ये मुझे भी पता नहीं है। वैसे मैं रेड वाइन का शौकीन हूं। मगर मुझे पता नहीं था कि मेरा एंटी एजिंग ये दवाई है एक टाइप की।
(14:41) तो लाइफ स्टाइलाइल इज अ मेडिसिन जो एजलेस बनाने के लिए वैसे आपको कुछ ज्यादा करने की जरूरत नहीं है। मगर इसको समझ लोगे तो यह सब हो जाएगा। तो बेसिक प्रिंसिपल मैंने बताया बॉडी को कंटीन्यूअसली चलाते रहो। मेरी वाइफ मुझे बहुत बार कहती है कि अब इतना क्यों भागदौड़ करते हो? हमारे पास बहुत पैसा है। यानी इनफ पैसा है जो हमें कभी यानी गरीब नहीं बना देंगे। बोलता हूं मैं सिर्फ पैसे के लिए नहीं भागता हूं। मैं हेल्थी रहने के लिए भागता हूं। क्योंकि शरीर को घर में बिठा रखोगे। मैंने रिटायर हो जाऊंगा तो क्या करूंगा? घर में बैठा रहूंगा या सोता
(15:11) रहूंगा और क्या करूंगा? तो मेरी तो एजिंग फास्ट होगी। जल्दी मर जाऊंगा। लंबा जीना है तो शरीर को चलाना ही पड़ेगा। हम तो माइंड और बॉडी दोनों को जितना एक्टिव रखोगे ना उतना अच्छा रहता है। वो यंग रहता है। चैलेंज करते रहना चाहिए। इसमें हमने बहुत सारी बातें लिखी है। सबकॉन्शियस माइंड का प्रोग्रामिंग की बातें लिखी है कि हमारी बिलीफ सिस्टम हमारे सबकॉन्शियस माइंड के अंदर होती है। जिसको एनएलपी की टेक्निक से चेंज कर सकते हैं। फिर न्यूरोप्लास्टिसिटी का साइंस समझाया हुआ है कि जो न्यूरॉन्स है जैसे मैं मेडिकल कॉलेज में पढ़ता था तब
(15:43) ऐसा मानते थे कि हमारे जो नर्वस सिस्टम होती है उसके सेल होते हैं जिसको न्यूरॉन्स कहते हैं। वो हमको जब बचपन में जो हम इस दुनिया में आया था हमको मिला है वह संख्या सेम रहती है। बढ़ते नहीं है। उसमें कुछ नहीं कर सकते। डैमेज हो गया तो फिर रिपेयर भी नहीं होता है। मगर अभी नया साइंस आया है जिसको न्यूरोप्लास्टिसिटी कहते हैं। बोलते हैं ब्रेन है वो सबसे एडप्टेबल ऑर्गन है बॉडी का। यानी वो हमारी सिचुएशन के हिसाब से कंटीन्यूअसली चेंज हो जाता है। सिचुएशन उनको अच्छी दो एनवायरमेंट अच्छा दो तो ग्रो भी करता है। नए ब्रेन सेल बनते हैं।
(16:15) न्यूरॉन्स बनते हैं। न्यूरॉन्स के बीच में इंटरकनेक्शन बढ़ता है। उसकी क्वालिटी इंप्रूव होती है। ये न्यूरोप्लास्टिसिटी में समझाया है। जी। तो ये सब चीजें अभी नहीं है। तो हमने क्या किया? न्यूरोप्लास्टिसिटी पावर ऑफ सबकॉन्शियस माइंड एनएलपी के जरिए बताया कि हम बॉडी की एज को कैसे रिवर्स करेंगे और कैसे उनको मेंटेन करेंगे एजलेसली ऐसा बायोलॉजिकल एज को खास करके। जी। तो एज लेस बॉडी के लिए हमारे जो डेली रूटीन के फूड हां फूड हमारा सबसे बड़ा दुश्मन है। सबसे बड़ा सबसे बड़ा दुश्मन है। पैकेज फूड खाओगे ना तो आपका एज को नुकसान करता है।
(16:52) यानी जो पैकेट में आजकल ऑनलाइन मंगवाते हैं ना हम सब ये चीज कभी भी नहीं खानी है। मेरे घर में मैं रेस्ट्री करता हूं। कभी-कभी आ जाता है। मगर पसंदस्ट फूड है। आजकल पहली पसंद है। लोग बाहर जाके खाना पसंद करते हैं। तो यह अवेयरनेस ही नहीं है कि मैं ये फूड खा रहा हूं। उसमें मुझे क्या नुकसान होता है ये पता नहीं और जानते हुए भी करते हैं। लेकिन जब आप बताएंगे कि एजलेस बॉडी इसको खाने से ही मतलब इसको खाने को बंद करने से होती है कि जो हम बाहर जो खा रहे हैं फास्ट फूड खा रहे हैं या तो इन सब से दूरी बना लें तो हमें एजलेस बॉडी मिल सकती है।
(17:25) बिल्कुल। आज आप देखो हेयरलेस बॉडी बनाने के लिए कुछ चीजें बंद करनी है। कुछ चीजें चालू करनी है। जी उसमें फास्ट फूड को ब्रेक मार देना है। जी कभी कबाड़ खा लिया मजबूरी से खा लिया तो ठीक बात है। मगर घर में डेली फास्ट फूड आता रहे अपना पैकेज फूड आता रहे वो गलत है। जी तो नहीं मंगवाना चाहिए इसे। तो इससे छुटकारा करिए। होटल के फूड है वो बहुत डेंजरस है क्योंकि उसमें नमक ज्यादा रहता है। नमक हमारे बॉडी को जरूरत से ज्यादा नुकसान करता है। आप देखेंगे ना सभी जगह होता है और मैं ढूंढ रहा था आज मैं रेस्टोरेंट में गया। मैं बोला नमक कम हो
(17:59) ऐसी कौन सी चीज है? बोले कोई ऐसी चीज नहीं है। बोला फ्रेश बना दो। बोले नहीं हमारे यहां बनी बनाई रहती है। ये टेस्ट है कि आपको कितना बासी खाना देते हैं। अच्छा जितना फ्रेश फूड खाते हैं उतना आपका एजिंग को फायदा होता है। एंटी यानी एजिंग को फायदा होता है। और जितना पुराना खाओगे उतना नुकसान करता है। तो मैं उसको पूछता हूं कि नया बना दो ना। बोला नहीं हमारे यहां नया नहीं बनता। तो इसका मतलब वो डीप फ्रिज में से ला के गर्म करके हमें देता है। यही मतलब हुआ ना? जी। मैं दो दिन से मैंने यही टेस्ट किया जो भी रेस्टोरेंट में जाता हूं।
(18:29) कि मुझे बिना नमक का कुछ दे दो। चलो। बोले हमारे पास कोई भी नहीं है। कल मैं एयरपोर्ट पे था। वहां भी मैंने पूछा दो-तीन रेस्टोरेंट में के बिल्कुल बिना नमक का आपके पास क्या है? बोले कुछ भी नहीं है। बोला बना दो। बोले नहीं हमारे यहां बनता नहीं है। वो तो पहले से बन के प्रीप प्रिपयर्ड फूड होता है। हम तो सिर्फ आपको गरम देके खिलाते हैं सर। जी तो दैट इज बैड। जी। तो जितना बाहर खाने का करोगे उतना आपका नुकसान करेगा। तो जिनको भी एज कम करनी है, रिवर्स करनी है प्लीज ये जंक फूड को बंद कर दो। होटल का खाना बंद कर दो। नेचुरली खाओ। देखो दुनिया में ऐसे बहुत सारे कंट्रीज
(19:04) हैं जहां पे कुछ ऐसे एरियाज है वहां मोर देन 100 इयर्स वाले लोग ज्यादा है। एक फेमस किस्सा आपने सुना होगा जापान में ओकेनावा करके आइलैंड है। वहां पे 100 से ज्यादा यानी सेंटनेरियन जिसको कहते हैं वो बहुत ज्यादा है। जी तो उनकी स्टडी हुई कि कैसे ये है उनकी लाइफ स्टाइल देखी गई है। उसके ऊपर एक किताब लिखी गई है जिसका नाम है इकी गाय। जी जी इकी गाय। तो उसमें देखा है कि वो नेचुरल लाइफ जीते हैं। नेचर के साथ ज्यादा रहते हैं। मेहनत करते हैं। नेचुरल फूड खाते हैं। होटल में नहीं जाते, जंक फूड नहीं खाते, पैकेज फूड नहीं खाते। रिलेशनशिप का बहुत बड़ा रोल है। जितना आप
(19:40) कम्युनिटी के साथ रिलेशन में रहोगे ना इतना एगलेस बनते हैं। किसी को पता ही नहीं है। हार्व यूनिवर्सिटी में एक रिसर्च हुई है। हैप्पीनेस के ऊपर हुई है। जी। तो उसकी बाय प्रोडक्ट भी पता चली के लोग हैप्पी कैसे होते हैं। तो रिसर्च 85 इयर्स तक चली। पूरी दुनिया में उनके सैंपल्स देखे गए हैं। और यह हैप्पीनेस की रिसर्च यह कहती है कि मैक्सिमम हैप्पीनेस आती है बॉन्डिंग से, रिलेशनशिप से आती है। अच्छे रिलेशनशिप से और जो इंसान हैप्पी रहता है वो एजलेस भी बनता है ऑटोमेटिकली। क्योंकि देखोगे कि आज कोई भी इंसान को मैं हैप्पी नहीं देखता हूं। मैं ढूंढता रहता
(20:15) हूं। हर घर में दुख है। किसी को पैसे का दुख है, किसी को रिलेशनशिप का दुख है, किसी को कुछ बीमारी का दुख है। जी। नोबडी इज़ हैप्पी। तो नेचुरली जिनकी मेंटल स्टेट ऐसी है कि जो अनहैपी है नेचुरली वो तो एजिंग फास्ट ही होगी उनकी। तो हार्व यूनिवर्सिटी की रिसर्च ये कहती है कि हैप्पीनेस के लिए सबसे ज्यादा बॉन्डिंग चाहिए। तो दुनिया में जितने भी ऐसे पॉकेट्स है जहां पे ज्यादा सेंटरियंस है वहां यह देखा गया है कि वो क्लोज कम्युनिटी में रहते हैं। एक दूसरे को सपोर्ट करते हैं। नेचर के साथ बने रहते हैं। खुले हवा में रहते हैं। सनराइज लेते
(20:50) हैं। ऑक्सीजन लेते हैं। शुद्ध पानी पीते हैं। हमारे यहां तो पोल्यूटेड हवा, पोल्यूटेड पानी, पोल्यूटेड फूड ये सब कुछ पोल्यूटेड है। और ये पोल्यूशन से क्या होता है? टॉक्सिन हमारी बॉडी में जाता है और यह टॉक्सिन हमारे बॉडी से बाहर नहीं निकलता है तो वह हमारे एजिंग को फास्ट कर देता है क्योंकि हमारी लाइफ स्टाइलाइल ऐसी है कि टॉक्सिन जाता है मगर निकालने का टाइम भी नहीं है हमारी लाइफ स्टाइल भी ऐसी नहीं है जी तो उसकी वजह से होता है तो तो एजिंग का दो अंदर इफेक्ट होती है एक होती है इनफ्लेमेशन सूजन पूरे बॉडी के हर सेल को टॉक्सिन की वजह से
(21:24) सूजन आती है तो हम बूढ़े होने लगते हैं ये इसकी वजह से इनफ्लेमेशन और दूसरा ऑक्सीडेशन प्रोसेस। ऑक्सीडेशन यानी कहीं लोहा बाहर पड़ा है तो उसमें पानी लगता है, हवा लगती है तो जंग आ जाती है। हम तो हम बोलते हैं ये क्या जंग खा गई। तो वो जंग क्या होता है कि ऑक्सीजन हवा में रहता है। वो फेरस यानी लोहे के साथ मिलके फेरस ऑक्साइड बनता है जिसको हम जंक कहते हैं। तो वैसे ही हमारे बॉडी में सेल है उसकी ऑक्सीडेशन प्रोसेस होती है। यानी हमारे शरीर का भी डके होता है। जंक खाती रहती है। तो उससे बचाना चाहिए। तो इसके लिए एंटीऑक्सीडेंट या गोली खानी चाहिए।
(22:01) सप्लीमेंट खाना चाहिए। अभी आपने ग्रीन टी पिया वो एंटीऑक्सीडेंट है। जी तो वो आपको बचाते हैं ऑक्सीडेशन प्रोसेस से या ऐसे फूड आते हैं जो खाना चाहिए जो एंटीऑक्सीडेंट है। मगर हमारे फूड ज्यादा नकली रहता है तो उसमें एंटीऑक्सीडेंट नहीं रहता है। जी तो ऐसे कौन से हमारे डेली रूटीन के फूड हैबिट होने चाहिए जो तो जैसे जिसमें फल फूल और सलाड ज्यादा खाना चाहिए। मेरा तो रूटीन ऐसा है कि मेरा टोटल फूड का 50% मैं सलाड एंड फ्रूट्स खाता हूं। और धीरे-धीरे मैं प्रोग्रेस कर रहा हूं। 50 का 60% 70% और दो चार साल में मेरी इच्छा है कि मैं 100% इसके ऊपर जीना शुरू कर दूं और आदमी
(22:40) जी सकता है। ओनली फ्रूट्स एंड सैलाड के ऊपर जी सकता है। रामदेव बाबा वही करते हैं। वो खाना नहीं खाते हैं। सिर्फ फ्रूट्स एंड सैलाड के ऊपर जी। डेरी प्रोडक्ट्स लोग डेयरी प्रोडक्ट्स भी नहीं लेने हैं और जो हां डेयरी प्रोडक्ट बहुत नुकसान करती है नुकसान डेरी प्रोडक्ट इसलिए तो विगन मूवमेंट चल रही है आपको पता है हां जी क्योंकि जितने भी इनफैक्ट ऐसे कहते हैं कि जितने भी वाइट फूड है ना सब वाइट पोइजन है मैदा दूध घी बटर चीज पनीर ये सब चीजें आपके लिए टॉक्सिन का काम करता है ये नहीं खाना चाहिए मैं अवॉयड करता हूं एक्सेप्ट मिल्क प्रोडक्ट
(23:11) यानी जो चाय में डालता हूं वो भी बाकी मैं पनीर और चीज से दूर रहता हूं घी घी से दूर रहता हूं, मक्खन से दूर रहता हूं। मैंने कहा ये सारा कुछ हम घर पे बनाए तब भी तब भी सेम है। सभी घर में बनाए या बाहर से खाए ये तो वैसे घर में बनता भी नहीं है। दूध तो गाय से आया आएगा ना। घर में कहां बनेगा? घर में तो हम गर्म करके ही पीते हैं ना। जी जी तो घर में बनाया हुआ बाहर से आया हो। जी कोई फर्क नहीं पड़ता। इसलिए तो विघन मूवमेंट बहुत चल रही है। रिसर्च हुए जो विघन होते हैं उनका एजिंग स्लो हो जाता है। ऐसा है। अच्छा। मगर क्या होता है कि सालों का हमारा मास
(23:44) प्रोग्रामिंग है। है ना? बचपन से हमको सिखा गया है के दूध पियो नहीं तो वीक हो जाएगा। दूध में से कैल्शियम मिलता है। मेरी वाइफ आर्गुममेंट करती है दूध के लिए। बोला दूध नहीं पऊंगी तो कैल्शियम कहां से मिलेगा? बोला दूध आया कहां से? गाय से आया ना? गाय ने किसका दूध पिया था? उसका कैल्शियम कहां से आया जो आपको मिला? वो तो घास फूस से आया। है ना? तो फिर ऐसा जरूरी है कि हम दूध पिए तो ही कैल्शियम मिलेगा। उनको अगर घास फूस से कैल्शियम मिला है तो हमको क्यों नहीं मिलेगा? सलाड से क्यों नहीं मिलेगा? जी। है ना? मगर ये हमारा मास प्रोग्रामिंग है
(24:16) क्योंकि सदियों से जनरल सन से हमको यह बताया गया है कि दूध अच्छा है। हमें मेडिकल कॉलेज में सिखाया जाता था। मैं खुद सिखाता था। मैं मेडिकल कॉलेज में प्रोफेसर था कि मिल्क इज अ कंप्लीट फूड। हम हम ऐसा फार्मूला ही बताते थे कि मिल्क में एक्सेप्ट विटामिन सी बाकी सब न्यूट्रिएंट होते हैं। ऐसा मैं सालों से सिखाया हूं। तो मेरा भी एकदम स्ट्रांग प्रोग्रामिंग था। तो अभी भी मैं रिमूव करने की कोशिश कर रहा हूं। जी के मिल्क इज अगेंस्ट आवर हेल्थ। आज लोगों को समझाना मुश्किल है क्या दूध खाना बंद करो देखो मारेंगे आपको क्या पागल जैसी बातें कर रहे हैं
(24:49) हमारे बुजुर्ग खाते आए हम खाते आए हमें कहां कोई नुकसान दिखता ही नहीं है जी बट रिसर्च साइंस ये कहता है कि दूध नहीं खाना चाहिए विघन रहना चाहिए ओके और इसी में फूड मतलब एक हेल्थ सप्लीमेंट्स जो मार्केट में बहुत बड़ा मार्केट है हेल्थ सप्लीमेंट्स का बहुत बड़ी इंडस्ट्री है सप्लीमेंट्स की जी बहुत बड़ी इंडस्ट्री इसका कारण है कि हम जो जंक फूड खाते हैं ना जितना भी जंक फूड खाएंगे उसमें एक्चुअल न्यूट्रिशन नाश होता है। तो एजलेस बॉडी के लिए क्या बहुत सारे न्यूट्रिएंट है। देखिए मेरी बात करूं तो मैं कितना लेता हूं। इसमें मैंने 11 सप्लीमेंट की बात की है। मैं लेता हूं
(25:22) पहले तो बी12 लेता हूं। विटामिन डी3 लेता हूं। फिर एक सीब थोन करके एक नया है। आपको पता होगा उसमें ज्यादा विटामिन सी रहता है। ओमेगा थ्री 67 न सब रहता है। तो वो लेता हूं मैं। उसके बाद शिलाजीत लेता हूं। अश्वगंधा लेता हूं। त्रिफड़ा लेता हूं। मैग्नीशियम लेता हूं। कोलाजन लेता हूं और ये लेता हूं। कोलेजन हां ग्लूटथियन लेता हूं। जी इतने सप्लीमेंट में लेता हूं। इतना नेचुरल फूड खाने के बाद भी जी क्योंकि उसका कोई नुकसान तो नहीं है। जी मगर डेली तो हम मेजर नहीं कर सकते कितना लेवल है। मैंने इसका करवाया था बी12 का और डी3 का तो कम आया था। तब से मैं अलर्ट हो
(26:00) गया। दोनों शुरू कर दिया। फिर धीरे-धीरे पता चला कि नहीं ग्लटाथन स्किन के लिए अच्छा है। जी। मैग्नीशियम हमारे जॉइंट के लिए अच्छा है। नींद भी अच्छी आती है मैग्नीशियम से। जी। तो वो खाना चाहिए। तो ऐसेसे करते-करते ऐड होता गया तो मैं आजकल इतने ये खाता हूं। सप्लीमेंट खाता हूं और सीबकथ थोन के ऊपर तो मुझे काफी विश्वास आ गया है क्योंकि काफी मैंने रिसर्च देखी। इवन एस्ट्रोनॉट्स के साथ सीबोन भेजते हैं। जी तो मैं रेगुलरली सीबकथोन का ऑइल है वो मसाज करता हूं और उसका पल्प आता है उसको पानी में डाल के पीता हूं। आप लेते हो कि नहीं? सीबकथ थोन
(26:33) कोइंसिडेंटली सर जितने सप्लीमेंट्स आप लेते हैं ना सेम उतने ही सप्लीमेंट्स मैं भी लेती हूं। ज्यादा होंगे। हां जी। वेरी गुड। हां। तो आजकल जरूरी हो गया क्योंकि पहले हम नेचर के साथ रहते थे। नेचुरल फूड खाते थे। इतना जंक फूड नहीं हुआ करता था। तो इसलिए ये सब आजकल जरूरी है कि सप्लीमेंट लेना ही चाहिए। जी जीने के लिए। जी। तो ये एजलेस मतलब हमारी उम्र को कम करने, कम दिखाना और कम होना। तो कम होने में क्या हमारा सबकॉन्शियस माइंड काम करता है? बिल्कुल। आप प्रोग्रामिंग कर सकते हैं। कैसे इसको कैसे प्रोग्राम करते हैं? हां। एक इसकी थ्यरी है क्वांटम फिजिक की
(27:10) कि जो इलेक्ट्रॉन होते हैं वो एक्चुअली इलेक्ट्रॉन है ही नहीं। वो कोई पार्टिकल नहीं है। जी एक्चुअली क्वांटम फिजिक्स जो बात करती है वो इलेक्ट्रॉन लेवल तक बात करती है कि जैसे मायकेज हमें पदार्थ के रूप में दिखता है। बट एक्चुअली इट इज नॉट पदार्थ। वो तो अल्टीमेटली एनर्जी है। हमें ऐसा भ्रम होता है कि ये एक सॉलिड चीज है। जी। तो यह जो इलेक्ट्रॉन होता है उसकी भी ऐसी रिसर्च हुई कि जब उसके सामने देखते हो तब वह दिखता है बाद में डिसअपीयर हो जाता है। तो अवेयरनेस इट इज़ ओनली अवेयरनेस। इलेक्ट्रॉन इज़ आल्सो नॉट अ रियल थिंग। इट इज़ अवेयरनेस।
(27:43) हम तो जितना आप अवेयरनेस करोगे ना तो उतना इफेक्ट होता है। ऑब्जर्वर इफेक्ट उसको कहते हैं। हम तो आप सबकॉन्शियस माइंड का प्रोग्रामिंग करना है तो आप आंखें बंद करते हैं। विजुअलाइज करोगे। विजुअलाइजेशन इज़ अ प्रोग्रामिंग लैंग्वेज फॉर सबकॉन्शियस माइंड। जी आज सब लोग जानते हैं 30 साल पहले जब मैंने शुरू किया तब लोग मुझे पागल कहते थे कि विजुअलाइन का बकवास कर रहा है ऐसा लोग बड़े-बड़े ट्रेनर बोलते थे कि डॉक्टर आया बकवास कर रहे हैं विजुअलाइजेशन से कुछ नहीं होता ये नहीं होता आज सब लोग सपोर्ट कर रहे हैं और मेरी विजुअलाइज नाम की किताब है वो एक
(28:14) ही आदमी ने 5 लाख कॉपी खरीदी ये भी मेरा रिकॉर्ड है वर्ल्ड रिकॉर्ड है कि एक ही ऑथर की एक ही बुक एक ही आदमी ने 5 लाख कॉपी खरीदी हो ये विजुअलाइजेशन है मेरी जो इंडिया में किसी की थी नहीं अभी भी नहीं है विजुलाइन के ऊपर सिर्फ मेरी इंडिया में किताब है। तो कहने का मतलब है कि जब आप विजुअलाइज करते हैं तो आप अवेयरनेस क्रिएट करते हैं और अपने सबकॉन्शियस माइंड में प्रोग्राम देते हैं अपनी एललेस बॉडी का हम अपने आप को यंग देखें और फील करें कि आप यंग है हम तो सब अपना जो बॉडी के जो बायोलॉजी है वो उसको फॉलो करना शुरू करेगी। जैसे-जैसे
(28:46) प्रोग्रामिंग करते जाओगे ऐसे सबकॉन्शियस माइंड का रोल है। ओके? और यंग जैसा एक्टिविटी भी करो। मैं तो यंग जैसा एक्टिविटी करता हूं। मैं जितने लोगों के साथ काम करता हूं सब मेरे से 20 30 साल छोटे ही है। तो बहुत सारे लोग पूछते हैं सर आप इतने यंग कैसे रहते हो? मैं मेरे से ज्यादा यंग लोगों से मैं काम करता हूं। तो उससे क्या होता है कि उनकी मेंटल फ्रीक्वेंसी से मैच होना पड़ता है। तो जैसे माइंड यंग फील करेगा ऐसा बॉडी भी फील करेगा जी और बॉडी रिसोंड करेगा। ऐसा होता है। अभी मैं एक शादी में गया था एक साल पहले। वहां हिमानी करके एक ट्रेनर है। आपने शायद
(29:18) नाम सुना होगा तो। तो हम सब दोस्त मिले थे। संतोष नायर आए थे। काफी ट्रेनर आए थे। एक ट्रेनर की बेटी की शादी थी तो डिस्को हो रहा था। मैं वैसे डिस्को शौकीन नहीं हूं। मगर मैं डिस्को का प्रोग्राम था। मैं रात को 2:00 बजे तक डिस्को में था। डांस कर रहा था एट दिस एज ऐसा। तो यंगस्टर के साथ मैं रहता हूं। ऐसा तो जितना यंगस्टर जैसा फील करोगे, एक्टिव रहोगे और वैसा सोचना शुरू करोगे तो आपके बायोलॉजी ऑटोमेटिकली क्लिक होगी। मतलब मैं जैसे जैसा हमारा माइंडसेट होगा वैसे हमारी बॉडी की एनर्जी होगी और वैसा हमारा बायोलॉजी होगी। बायोलॉजी होगी।
(29:54) बिल्कुल जी वही तो हमें माइंड को ही ट्रीट करना है। अभी मैं दुबई में एक वर्कशॉप अटेंड करने जा रहा हूं। लिमिटलेस ब्रेन करके बहुत अच्छा है। और वहां उनका मेरा पडकास्ट भी है और बाद में हम डिस्कस करने वाले हैं। उनकी कुछ फ्रेंचाइजी यहां लेके आने वाला हूं मैं जो अभी इंडिया में नहीं आई है। ये इंग्लिश के ऊपर ही बहुत सारी टेक्नोलॉजी आ गई है दुबई के अंदर। इंडिया वाले बहुत पीछे दुबई के सामने दुबई तो मालूम है दुनिया की हर चीज पहले लाते हैं वो लोग तो मेरी एक स्टूडेंट है जो 13 साल की थी तब से मुझे फॉलो कर रही है अभी वो न्यूरोलॉजिस्ट करके काम कर रही है
(30:27) तो वो बोलती है हम दोनों मिलके इंडिया में रिवोल्यूशन करते हैं एजलेसनेस के ऊपर करते हैं मैं बोला चलो करते हैं ये जी तो ये एजलेस ब्रेन हमारी ब्रेन की उम्र और शरीर की उम्र दोनों शरीर की उम्र तो रिवर्स कर सकते हैं हम सबकॉन्शियस माइंड से क्या हमारे ब्रेन की ऐज भी होती है जो हम उसको रिवर्स कर सकते हैं ब्रेन की एज होती है। उसको आप रिवर्स कर सकते हैं। इसके लिए मैंने कहा ना न्यूरोप्लास्टिसिटी का एक साइंस आया हुआ है। जी कि ब्रेन में होता क्या है? एक्चुअली ब्रेन के सेल रहते हैं जिसको हम न्यूरॉन्स कहते हैं। उसका कनेक्शन होता है। उसको पूछ
(30:58) रहती है, वायर रहते हैं जिससे वो एक दूसरे के साथ जुड़े रहते हैं। उनको सपोर्ट देने के लिए एक माध्यम रहता है जो एक लिक्विड माध्यम रहता है जो उसको सपोर्ट करता है ब्रेन सेल को रहने के लिए। जैसे हम चेयर पे बैठे हैं। चेयर हमें सपोर्ट कर रही है बैठने के लिए। ऐसा रहता है। एक्चुअली एव्री न्यूरॉन्स जिसको ब्रेन सेल कहते हैं इज अ एकदम मॉडर्न कंप्यूटर है। हाईफाई कंप्यूटर है। ईच न्यूरॉन इज अ कंप्यूटर। ऐसे हमारे शरीर में 100 बिलियन न्यूरॉन्स होते हैं। 100 बिलियन अरब जी। और 80 बिलियन तो सिर्फ दिमाग में रहता है। बाकी बॉडी में होते हैं। नर्व्स में
(31:35) होते हैं, स्पाइनल कॉर्ड में रहते हैं। यह सब जगह रहते हैं। ये इतने 100 बिलियन न्यूरॉन्स कंटीन्यूअसली एक्टिव रहते हैं। और एक-एक न्यूरॉन दूसरे 2000 न्यूरॉन के साथ कनेक्टेड रहते हैं और कंटीन्यूअसली कम्युनिकेशन करते रहते हैं। एक ही न्यूरॉन्स यहां भी कम्युनिकेट करेगा, उनके साथ करेगा, उनके साथ करेगा। तो कितना अजीब भगवान ने ब्रेन बनाया हुआ है। जी। तो ब्रेन जब यंग आदमी रहता है तो उनके न्यूरॉन्स की हेल्थ अच्छी रहती है। उनकी कनेक्टिविटी अच्छी रहती है। उनका कम्युनिकेशन अच्छा रहता है। जैसे-जैसे एज आगे बढ़ती है तो कम्युनिकेशन स्लो होता
(32:09) है। न्यूरॉन्स की साइज कम होती है। न्यूरॉन्स डाई हो जाते हैं। संख्या कम होती है। तो हमें अगर इसका ब्रेन का एज कम करना है तो यह जो न्यूरोप्लास्टिसिटी का सिद्धांत है वह अपनाने पड़ेंगे। उसमें यह कहते हैं एक न्यूरोजेनेसिस करके एक कांसेप्ट है कि हम नए न्यूरॉन जनरेट कर सकते हैं। न्यूरॉन्स के जो कनेक्शन होते हैं उसको इंप्रूव कर सकते हैं। नए कनेक्शन बना सकते हैं। यानी जितने ज्यादा न्यूरॉन्स आएंगे नए बन के आएंगे जितने कनेक्शन ज्यादा रहेंगे जितनी कनेक्टिविटी इंप्रूव होगी उतना यंग बनेगा आपका ब्रेन। तो उसके लिए कुछ एक्सरसाइज है
(32:47) न्यूरोप्लास्टिसिटी की। वो एक्सरसाइज करते जाओगे तो यहां पे आपका ब्रेन यंग बनता जाएगा। जैसे आप कोई भी हो डिस्को में जाओ घूमने को जाओ यंग लोगों से बात करो किसी के प्यार भरा रिलेशनशिप रखो। ये सब चीज आपके ब्रेन को यंग बनाता है। उसको चैलेंज किया करो। पजल खेलो। ये सब नया इंस्ट्रूमेंट सीखो, नई लैंग्वेज सीखो। तो आपका ब्रेन यंग बनता जाता है। तो हम कोई भी एज में यंग बना सकते हैं अपने ब्रेन को। और ब्रेन को यंग बनाया तो नेचुरली बॉडी उसको फॉलो करती है। तो बेसिकली तो हमारा फोकस वही रहता है। हमारी जो बिलीफ है इसलिए क्या होता है? मैंने कहीं पढ़ा था
(33:25) व्हाट इज ओल्ड एज जब हम बूढ़े होते हैं तो ब्रेन बिकम्स दिस वन नैरोअर एंड वेस्ट बिकम ब्रॉडर। जी ये ये बढ़ती जाती है और ये नैरो होता जाता है। यंग का क्या होता है? यह ब्रॉड होता है और यह नैरो रहता है। तो हमें इसको फिर से ब्रॉड करना है तो हमें स्टिमुलस देना पड़ेगा ब्रेन को जो न्यूरोप्लास्टिसिटी में एक्सरसाइज है वो करवानी पड़ेगी। जी तो आप लोगों से बात करो, सेमिनार अटेंड करो, किताब पढ़ो, नए इंस्ट्रूमेंट सीखो, नई लैंग्वेज सीखो, ब्रेन को कंटीन्यूअसली पजल खेलो। जी। तो इससे क्या होगा कि आपका ब्रेन को चैलेंज मिलती रहेगी, स्टिमुलस मिलता
(34:01) रहेगा। जैसे-जैसे स्टिमुलस मिलेगा, न्यूरॉन्स नए क्रिएट होंगे, न्यूरॉन्स की हेल्थ अच्छी रहेगी, कनेक्टिविटी बढ़ेगी तो आपका ब्रेन है वो यंग बनता जाएगा। ऐसा होता है। ये पूरा न्यूरोप्लास्टिसिटी करके एक नया साइंस है। उसकी एक्सरसाइज भी होती है। ये आपको Google पे मिल जाएगा। मेरी किताब भी आ रही है। न्यूरोप्लास्टिसिटी के ऊपर एक आ रही है किताब। जी। ऐसा है। तो पहले हम मन से यंग हो फिर बॉडी यंग। ब्रेन को यंग करो। ब्रेन को यंग करोगे मन यंग हो जाएगा। और बाद में ये हो जाएगा। अच्छा ब्रेन और मन अलग-अलग है। मन अलग-अलग है। फिर मन यंग हो गया।
(34:33) ब्रेन इज अ हार्डवेयर। हार्डवेयर को भी आप यंग करते हो और ये सॉफ्टवेयर को अपग्रेड करते हैं। जैसे हमारे फोन में जैसे iPhone है तो उसमें आता है ना अपग्रेड आता है ना? आप अपग्रेड करते हैं ना? बिल्कुल इसको भी हमें अपग्रेड करना है। तो उसकी भी टेक्निक कुछ है। जी। ऐसा है। और हमारी जो बिलीफ सिस्टम होती है वो और हमारे मन में रहती है। तो बिलीफ सिस्टम चेंज करनी पड़ती है। क्या 60 साल की उम्र हो गई तो बूढ़े तो हो ही जाएंगे। हां ऐसा लोग बोलते हैं अभी तक मुझे मोतिया नहीं आया है। मेरे से छोटे-छोटे लोगों को मोतिया आता है। मोतिया
(35:03) आता है ना जनरल एज के साथ घुटने घिस जाते हैं। ऑपरेशन करवाने पड़ते हैं। मेरी दो बहनों को नहीं रिप्लेसमेंट करना पड़ा है। हम मेरे से कम लोगों का मैंने नहीं रिप्लेसमेंट देखा है। नहीं मुझे मौत किया है। नहीं नहीं रिप्लेसमेंट किया है। ये एजिंग प्रोसेस है। मगर वो जो मान लेते हैं और उसको लेट गो करने देते हैं कि वो तो होता ही रहेगा। एज होगी तो ये सब होने वाला है। है ना? है ना? तो इसके लिए हमें ये सोचना चाहिए कि नहीं हमें हमें कोई हम बीमार नहीं होंगे। हमें कोई बीमारी नहीं होगी। ऐसा मन में थॉट रखना चाहिए। मैं बोलता हूं ना हमारी बायोलॉजी हमारे
(35:32) थॉट्स को, हमारी बिलीफ को, हमारी एडबिट को, हमारी इमोशन को फॉलो करती है। तो ये चार चीजों के ऊपर अगर आप फोकस करोगे वो यंगस्टर जैसी कर दोगे तो आपकी बॉडी एलेस बन ही जाएगी। काम तो यहीं करना है आपको। पहले मन में काम करें फिर बॉडी से काम। बॉडी पे ऑटोमेटिकली इफेक्ट आएगी। मन ही तो बॉडी का राजा है। जी जी। ऐसा है। जी। तो इसीलिए मैं यह जो सेलिब्रिटीज होते हैं यह अपने इनका रूटीन एक होता है। फूड हैबिट अच्छी होती है। इनकी रूटीन हैबिट अच्छी होती है। इनकी योगा वगैरह या जिम वगैरह करते हैं। तो ये सेलिब्रिटीज को यंग दिखने के लिए वो ऐसा करते हैं यंग होने के
(36:07) लिए ऐसा करते हैं। नहीं नहीं मैक्सिमम लोग तो जैसे रेखा है। जी वो मेरी ऐज की है। मगर कितनी यंग दिखती है। कितनी खूबसूरत दिखती है। मुझे लगता है वो कोई कॉस्मेटिक का यूज़ नहीं करती है। वो योगा करके मेडिटेशन करके अपनी बॉडी को मेंटेन किया उसने। अच्छा। अक्षय कुमार भी ऐसा ही है। मगर कुछ सेलिब्रिटीज ऐसे हैं जो कॉस्मेटिक सर्जरी करवाते हैं। अपने बोटक्स लगवाते हैं, फीलर लगवाते हैं। क्या-क्या करते हैं और हॉलीवुड में तो बहुत ज्यादा है। मैंने पूरा चैप्टर लिखा है कि ये सेलिब्रिटीज कैसे-कैसे करते हैं। और वो डेंजरस भी है। अब माइकल जैक्सन का एग्जांपल वर्ल्ड फेमस
(36:42) है। जी। इनकी इच्छा थी 150 साल जीने की। मैंने पहला चैप्टर माइकल जैक्सन के ऊपर लिखा है कि 150 इयर्स जीना था। उसने 12 डॉक्टरों को 24 आवर्स घर पे एंप्लॉय किया था जो उनकी बॉडी को मॉनिटरिंग करते थे। ठीक है? अच्छा। उसने जितनी भी टेक्नोलॉजी अवेलेबल थी उसने सब यूज़ कर डाली। उसने मोर देन 20 सर्जरीज करवाई बॉडी के ऊपर। और जितने भी कॉस्मेटिक लेटेस्ट आती थी उनके पास आती थी। सप्लीमेंट लेता था। ऑक्सीजन चेंबर्स में सोता था। ऐसा भी एक टेक्नोलॉजी है कि ज्यादा ऑक्सीजन लोगे तो आप यंग हो जाओगे। तो माइकल जैक्सन ये करता था। अभी ब्रियन जॉनसन है वो भी कर रहा है ये सब चीज़ और
(37:19) आजकल ऑक्सीजन चेंबर का फैशन अभी इंडिया में भी धीरे-धीरे आ रहा है कि डेली आधा घंटा ऑक्सीजन चेंबर में जाके सो जाओ तो आपको प्योर ऑक्सीजन मिलेगा तो आपकी बॉडी यंग हो जाएगी। ऐसा ये टेक्नोलॉजी आई है। तो माइकल जैक्सन ये भी करता था। मगर प्रॉब्लम क्या था? ये सभी चीजें बाहर से यंग दिखने के लिए हुआ करती थी। ज्यादातर सेलिब्रिटीज यह नहीं जानते हैं कि बाहर से यंग दिखने से अच्छा है अंदर से ये बनो। इस चक्कर में क्या होता है? उनकी ए्जायटी बढ़ जाती है। उनको साइकोलॉजिकल प्रॉब्लम होता है। नींद का प्रॉब्लम होता है। माइकल जैक्सन को भी यही हुआ था। एंग्जायटी,
(37:52) डिप्रेशन, नींद का प्रॉब्लम। सोच लो 100 नींद की गोली खाने के बाद भी उनको नींद नहीं आती थी। हम और उसको एनस्थेसिया लेके सोना पड़ता था। अच्छा उनका डेथ कैसे हुआ? एनस्थेसिया का ओवर डोस हो गया। उससे उनका डेथ हो गया। सोच लो प्रोपोफोल करके एक एनस्थेसिया होता है जो डेंजरस होता है। उससे ही उनको नींद आती थी। उनका डॉक्टर उनको रोज रात को सोने के लिए देता था और उठने के लिए उनको फिर इंजेक्शन देना पड़ता था। इतना आर्टिफिशियल उसने लाइफ बना दिया था। तो अंदर बॉडी को जो नुकसान हो रहा था वो देख भी नहीं पा रहा था। उनको तो बस अच्छा दिखना था, अच्छा परफॉर्म
(38:25) करना था, वाहवाह करवाना था, नाम और फेम कमाने थे। तो ज्यादातर ये 100 वर्ल्ड में है सेलिब्रिटीज मॉडल्स एंड एक्टर्स। आपने बहुत सुना होगा कितने लोगों ने क्या ऑपरेशन करवाया। दो तीन तो एग्जांपल है जिसमें मर गए लोग। अभी शेफाली जरीवाला का है। वो जो इंजेक्शन ले रही थी उसकी गोली भी आती है। मगर ज्यादा इफेक्ट के लिए वो इंजेक्शन ले रही थी। वो इंजेक्शन का उनका डेथ हुआ। जी शेफाली जरी वाला का। जी जी। तो ये माइकल जैक्सन जी के लिए जो आपने अभी बताया कि ऑक्सीजन मास्क लगाते थे। ऑक्सीजन चेंबर में सोते थे वो तो। यदि ऐसा होता तो आप और हम यहां मास्क लगा
(38:55) के बैठे होते। ऑक्सीजन मास्क लगा। हां। नहीं। वैसे तो पहले ये टेक्नोलॉजी इतनी कॉमन नहीं हुई है। कॉस्टली टेक्नोलॉजी है। जी समझे ना? और इसका अभी भी मैंने रिसर्च देखा उसका अभी तक कोई अप्रूव्ड रिजल्ट नहीं है कि होगा ही ऐसा और ओवरऑक्सीजन होने से नुकसान भी होता है। साइड इफेक्ट भी है तो अंडर कंट्रोल होना चाहिए। ऐसा होता है। ऐसा नहीं कि घर में लाके आपने मास्क पहन के बैठ जाओ। ऐसा नहीं होता है। इट शुड बी अंडरस्टिक मेडिकल ऑब्जरवेशन। ऐसा है। आजकल रेड थेरेपी भी आई है। रेड लाइट थेरेपी आई है। तो वो लोग करते हैं यंग दिखने के लिए। जी
(39:25) बट उससे अच्छा है कि आपके लाइफ स्टाइल चेंज करो। आपका ब्रेन को ठीक करो। एडलेस बनाओ। अपने माइंड का रीोग्रामिंग करो। तो फिर अंदर से ही आप एडलेस हो जाओगे। फिर ये चक्कर में पड़ने की जरूरत ही नहीं है। मैंने तो कभी सोचा भी नहीं कि कभी मैं ऑक्सीजन चेंबर में जाके सोऊंगा यंग दिखने के लिए रेड लाइट थेरेपी लूंगा। ऐसा मैंने तो सोचा नहीं है। इंटरनली जो होता है एज अ मेडिकल प्रोफेशन वही मैं करता हूं। जी। ऐसा होता है। और एक दूसरी चीज कि एनस्थसिया लेते थे सोने के लिए माइकल जैक्सन जी तो ये एनस्थसिया क्या सिर्फ नींद लाने के लिए देते थे? नींद एज पे फर्क डालती है?
(40:00) हां एनस्थेसिया मीन बेहोश हो जाना। उनको नींद नहीं आती तो तो बेहोश हो के पड़े रहते थे। तो क्योंकि बॉडी को आराम की जरूरत होती है। लोग नींद की टेबलेट्स ले लेते हैं या नींद की टैबलेट उसको कोई भी टेबलेट इफेक्ट नहीं करती थी माइकल जैक्सन को। तो ये नींद और एज कनेक्ट करते हैं आपस में। ऑफकोर्स देखो इनफ नींद लेना हमारी एजलेस बॉडी के लिए बहुत जरूरी है। मैं 8 घंटा नींद का मेरा नियम है जो मेरा एवरेज मेंटेन हो जाता है कि मैं रोज 8 घंटा सोता हूं। मेरा स्लीप साइकिल 10 टू सिक्स का है यूजुअली कभी 11:00 बजे सोया तो 7:00 बजे उठता हूं।
(40:33) 30 में से 29 दिन में ये फॉलो करता हूं। एक दिन कोई ना कोई कारण से लेट हो जाता है। मगर मेरा यूजुअली ये फॉलो करता हूं। क्योंकि जब हम सो जाते हैं तब स्लीप में हमारी बॉडी की रिपेयरिंग मैकेनिज्म चलती है। जब हम पूरा दिन एक्टिविटी करते हैं सेल का ब्रेकडाउन हो जाता है। उसको रिपेयर करने के लिए टाइम चाहिए जो नींद में ही होता है। आप नींद कम करोगे तो ये जो रिपेयरिंग प्रोसेस है वो स्लो हो जाएगी। नहीं होगी तो बैकलॉक जमा होगा। टॉक्सिन जमा होगा जो आपको एजिंग को फास्ट कर देगा। ऐसा है। जी। नींद का बहुत बड़ा रोल है इसके अंदर। और
(41:05) आजकल की जनरेशन ठीक से सोती नहीं है। मैंने देखा है। जबरदस्त प्रॉब्लम है। ये सोशल मीडिया का इफेक्ट है। रात को 2 3:00 बजे तक मैं तो मेरे जैसे मेरे स्टूडेंट ट्रेनर हैं। उनका देखता हूं। रात को 2:00 बजे ऑनलाइन होते हैं। मैं बोला कमाल की बात है। मतलब मुझे कैसे पता चलता है कि मैंने 9:00 बजे मैसेज किया और रात को 2:00 बजे उनका रिप्लाई आया तो समझ गया कि वो ऑनलाइन होंगे। रात को 2:00 बजे। समझा ना? तो ये डेंजरस है। सोशल मीडिया ने इतना हालत खराब कर दिया कि सोच भी नहीं सकते। फायदा भी। अच्छा स्क्रीन टाइम ये आपका एजिंग फास्ट करता है।
(41:35) जितना ज्यादा स्क्रीन के ऊपर देखोगे उतना आप बूढ़े जल्दी हो जाओगे। स्क्रीन को जितना अवॉयड करोगे उतना अच्छा है। तो ये जब से मुझे पता चला तब से मैंने बहुत कम कर दिया मेरा स्क्रीन टाइम नहीं देखता हूं ज्यादा मैं। बहुत जरूरी न्यूज़ देखता हूं या कोई रिसर्च देखता हूं। बाकी मैंने बंद कर दिया। ये सोशल जो सीरियल वीरियल फिल्म देखना मैंने बंद कर दिया स्क्रीन टाइम के लिए। और जो काम ही यही करते हैं उनका काम ही है डेस्कटॉप पे बैठ के उनका। वो तो अपनी लाइफ को रिस्ट में रखे। जी। सबसे ज्यादा अनहेल्दी लाइफस्टाइल तो कंप्यूटर ऑपरेटर की होती है। दो कारण है।
(42:05) एक तो स्क्रीन के सामने बैठे रहने का। जी। तो उनकी जो बॉडी की रिदमम है वो चेंज हो जाती है। फिर बैठे रहने से बॉडी की मूवमेंट नहीं होती है। जी। अब हमारा मसल होता है ना जो बॉडी को शेप देता है जिससे हम यंग फील करते हैं। वो मसल का नियम है। 30 साल के बाद वो उसका मसल लॉस चालू हो जाता है। हमारे नेचुरली। हम हम उसको बचने के लिए हमें एक्सरसाइज करनी पड़ती है। अगर 30 साल के बाद हमने एक्सरसाइज नहीं किया तो एव्री ईयर वन और 2% आपकी मसल लॉस हो जाता है। वीक होने लगते हैं आप। जैसे वीक होंगे तो आपका चलने में फर्क होगा। आपका बॉडी का पोश्चर में फर्क होगा।
(42:37) हम तो इसलिए एक्सरसाइज तो नेसेसरी है। जितना फूड नेसेसरी है उतना एक्सरसाइज नेसेसरी है। जो नहीं करते हैं बैठे रहते हैं। एक्सीडेंटरी लाइफ स्टाइल है। वो अपने आप का बड़ा नुकसान कर रहे हैं। क्योंकि जंक फूड से फैट बढ़ता है और मसल का लॉस होता है। जी तो तो बुढ़ापे की तरफ जा रहे हैं वो सब। जी ऐसा है। तो फैट का परसेंटेज भी मेंटेन करना चाहिए। आजकल तो बॉडी एनालिसिस आता है। स्मार्ट वॉच में सब कुछ आ गया है ये सब चीजें। उसमें आपको बताते हैं फैट का परसेंटेज क्या है? मसल मास का क्या है? आपका एचआरवी क्या है? आपका हार्ट रेट क्या है? ये सब चीज चेक करना चाहिए।
(43:09) अभी मुझे कोई बता रहा था 38,000 के मेरे एक दोस्त ने बेल्ट लिया जो इतने सारे एजिंग के सभी मॉनिटर करते हैं पैरामीटर्स को। एवरी डे बेसिस पे और आपको वन करते रहते हैं। जी ऐसा तो मैं बोला कि मैं अभी दिल्ली से आता हूं ना थोड़ा स्टडी करता हूं। फिर मैं भी खरीदूंगा तो घड़ी के बदले में भी मेरा मॉनिटरिंग चालू कर दूंगा। क्योंकि लोगों को जो सिखा रहा है वो हमें तो करना ही चाहिए ना। हां बॉडी एक्टिव है ना? जैसे मैंने बताया कि बॉडी के हर पार्ट की एज की टेस्ट होती है तो मैं अभी करवाऊंगा। वो अभी बेल्ट निकला है उसका पूरा चेक कर लूंगा कि अच्छा वर्थ है तो मैं खरीद लूंगा
(43:43) 38,000 का क्या प्रॉब्लम है? जी हमारे शरीर के लिए तो हम कुछ भी खर्चा करने को तैयार रहते हैं ना। जी जी बीमार हो के खर्च करने से अच्छा पहले खर्च कर लिया जाए। हां बाद में करना पड़ता है। मैं वही बोलता हूं कि जितना टाइम आप आराम करते हो ना घर के अंदर हम इतना टाइम आपको आईसीयू में भी गुजारना पड़ेगा। समझ लेना कि क्या आप बॉडी को एक्सरसाइज नहीं करवा रहे हैं। जी ये होता है। तो एक्सरसाइज में आप योगा को ज्यादा इफेक्टिव मानते हैं एजलेस बॉडी के लिए या फिर जिम? देखो पहली बात ये है कि एक्सरसाइज ज्यादातर लोग करते नहीं है और करते हैं वो
(44:14) रॉन्ग करते हैं। रॉन्ग यानी मेरे मेरे वर्कशॉप होते हैं। उसमें मैं लोगों को पूछता हूं कितने लोग एक्सरसाइज करते हैं? तो यूजली 10% ऑफ द पार्टिसिपेंट हाथ ऊपर करते हैं। 90% तो कुछ नहीं करते हैं। फिर मैं पूछता हूं क्या करते हो? तो कोई बोलता है मैं एक घंटा चलने को जाता हूं। कोई बोलता है मैं योगा करता हूं, कोई बोलता है जिम करता हूं। जी। हम ये तीनों चीज एक ही करते हैं। एक्चुअली तीनों का कॉम्बिनेशन होना चाहिए। जिसको मैं होलिस्टिक एक्सरसाइज कहता हूं। क्योंकि सबके अलग-अलग इफेक्ट है। हम हम आप अगर जोगिंग करते हैं तो आपके मसल्स को
(44:47) और ब्रीथिंग को फायदा होगा। हम लंग्स एंड कार्डियक कैपेसिटी बढ़ जिसको कार्डियो कहते हैं। ट्रेड मिल में करते हैं। तो लंग्स एंड हार्ट के एक्सरसाइज है वो ज्यादातर। जिमिंग करते हैं तो मसल पावर बढ़ता है। मसल की साइज बढ़ती है। वह भी हमारे लिए जरूरी है। और तीसरा है योगा। तो फ्लेक्सिबिलिटी क्या जरूरी है। मैंने कितने सालों तक योगा को नेगलेक्ट किया। तो मैं धीरे-धीरे रियलाइज किया कि मेरी बॉडी स्टिफ होती जा रही है। तो अब मैंने एक योगा टीचर रखा है जो मेरे से योगा भी करवाता है और मेरा स्ट्रेचिंग भी करता है। क्योंकि मैं देखा कि मैं खड़े रह के नीचे
(45:20) जमीन पे हाथ नहीं लगा सकता हूं बेंड हो के। हम तो मेरी बैक काफी स्टिप हो गई है। तो मैंने गोल रखा है कि मैं इतना फ्लैक्सिबल हो जाऊं कि मैं नीचे जमीन पे हाथ लगा सकूं। ऐसा है। मेरे से पद्मासन नहीं होता है। सुखासन ही होता है। इसका मतलब फ्लेक्सिबिलिटी नहीं है यहां पे। तो ये मैंने नेगलेक्ट किया था। मुझे पता नहीं था। किसी ने सिखाया नहीं था। तो मैं लोगों को कहता हूं कि एक्सरसाइज जरूर करिए और तीनों एक्सरसाइज करिए। कार्डियो एक्सरसाइज भी करिए, मसल के पावर के लिए भी करिए, बॉडी शेप के लिए भी करिए और फ्लेक्सिबिलिटी के लिए करिए। कोई भी
(45:52) चीज को नेगलेक्ट करना ये है क्योंकि वो जिम में जिनका डेथ हो गया उसने शायद कार्डियो के ऊपर ज्यादा ध्यान नहीं दिया था। तभी तो उनका हार्ट बंद हो गया ना एक सिद्धार्थ शुक्ला करके हुआ था। जी जी और भी किसी का हुआ था। तो उन्होंने हार्ट को ध्यान नहीं दिया। 40 साल में हार्ट कैसे बंद हो जाता है? सिर्फ वो मसल बनाने के चक्कर में पड़े होंगे। और मैंने देखा है बहुत सारे एक्टर्स और ये मॉडल्स होते हैं वो स्टेरॉइड की दवाई खाते हैं। मसल बनाने दैट इज डेंजरस। वो बॉडी को नुकसान करते हैं। ये तो बिल्कुल बंद कर देनी चाहिए। इट इज नॉट अ सप्लीमेंट। इट इज अ मेडिसिन जो आपको
(46:24) बहुत नुकसान करती है मगर खाते हैं लोग। जी। तो डॉक्टर साहब जैसे योगा और जिम और ये ब्रीथिंग ये दोनों सांस लेने की प्रक्रिया तो स्किन पर कौन सी चीज एज को कम करती है? शांत मन। शांत मन स्किन पे असर करता है। असर करता है। यानी मेडिटेशन। मेडिटेशन। मेडिटेशन। दूसरी बात है कि एंटीऑक्सीडेंट्स। ओके। एंटीऑक्सीडेंट स्किन के ऊपर इफेक्ट करता है। ग्लटाथन करता है। इसलिए मैंने ग्लटाथन लेना शुरू किया। आपकी स्किन को फेयर भी बनाता है और शाइनी भी बनाता है। ग्लो आता है उसकी वजह से। तो ये सप्लीमेंट में ही मिलता है या हमारी बॉडी प्रोड्यूस करती है कोलेजन और
(47:01) ग्लटाथन। हां। बॉडी प्रोड्यूस करती है। बॉडी प्रोड्यूस करती है। मगर जब मैग्नीशियम तो बाहर से खाना पड़ता है। कोलेजन आई थिंक बॉडी में बनता है। मगर आजकल ये सब हमारी लाइफ स्टाइल से नहीं होता है। इसलिए हमें सप्लीमेंट के रूप में लेना पड़ता है ये सब चीजें। जी। यह है। दूसरा है कि हमारा हैप्पीनेस के लिए चार हॉर्मोन होते हैं। जी। यह चारों के चारों हॉर्मोन बॉडी में ही पैदा होते हैं। तो हमें ऐसी लाइफ स्टाइलाइल जीनी चाहिए जिसमें हम चारों का चार फैक्ट्री चालू रखें। कौन? ये हॉर्मोन का नाम है डोपामिन। डीओएस दवाई का डोज़ रहता है ना। डी याद रखने के लिए
(47:37) डोपामिन जो हैप्पीनेस का हार्मोन है। कोई हमारी तारीफ करे तो इमीडिएटली डोपामिन रिलीज होता है। ब्लड में आता है। हमें गुड फील गुड होता है। कुछ मिठाई खाते हैं हमें फील गुड होता है। वो डोपामिन से होता है। फिर ओ यानी ऑक्सीटॉसिन। जी वो बॉन्डिंग से आता है। लव से आता है। लव ये है। कोई आपको टच करे और हग करे। तो यह लव है ऑक्सीटोसिन कहते हैं। एस यानी सिरोट्रोनिन जो हमारे मूड को कंट्रोल करता है या जो डिप्रेशन वाले लोग रहते हैं उनका सिरोट्रोनिन कम हो जाता है। इसलिए वो डिप्रेशन में जाते हैं। सिरोट्रोनिन है और ई है वो एंडोरफिन है।
(48:15) नेचुरल मॉर्फिन है। एंडोरफिन यानी अंदर से बनने वाला मॉर्फिन ऐसा नाम रखा है। तो एंडोरफिन कहते हैं उसको। हम तो मॉर्फिन है वह पेन किलर है तो एंडोरफिन हमारे शरीर में एक मॉर्फिन बनता है जिसको एंडोरफिन कहते हैं। तो हमारी लाइफस्टाइल ऐसी रहनी चाहिए कि चारों के चारों हॉर्मोन है जो हमारे बॉडी में नेचुरली प्रोड्यूस हो। बाहर से बाहर से तो वैसे मिलना मुश्किल है। बाद में फिर साइकेट्रिस्ट के पास जाओगे वो सिरोटोनिन के लिए आपको दवाई देगा। मगर लाइफस्टाइल अच्छी रहे तो अच्छा है। तो चारों के चारों हॉर्मोन अगर हमारी फैक्ट्री अच्छी चलती रहे तो हैप्पीनेस की
(48:47) फीलिंग आएगी और हैप्पीनेस की फीलिंग आपको एजलेस बनाएगी। आपकी स्किन के ऊपर ग्लो लाएगा और यह सब कुछ करेगा। जी और मेडिटेशन का बहुत बड़ा रोल है। जी। मेडिटेशन तो करना ही चाहिए। जितना फूड जरूरी है, इतना एक्सरसाइज, मेडिटेशन जरूरी है। मगर लोग इसका इंपॉर्टेंट नहीं समझते हैं। और एक दुख की बात मैंने देखी है कि इंडिया के बहुत सारे यूनिवर्सिटी में गया हूं। कहीं भी मैंने योगा और मेडिटेशन का डिपार्टमेंट नहीं देखा है। और दुनिया के भी मैंने बहुत सारे कंट्रीज में मैंने यूनिवर्सिटी देखी। अमेरिका की सब टॉप यूनिवर्सिटी में मैं पर्सनली गया हूं। इवन
(49:20) इंग्लैंड की ऑक्सफोर्ड उसके बाद यहां हार्व स्टैनफोर्ड कैंब्रिज अपना ड्यूक येल प्रिंस्टोन बर्कली ये सभी यूनिवर्सिटी में मैंने पर्सनली जाके देखा है कि वहां क्या डिपार्टमेंट होते हैं तो अमेरिका के सभी यूनिवर्सिटी में योगा एंड मेडिटेशन का डिपार्टमेंट है और कोर्स चलते हैं और मैंने अभी तक इंडिया में कोई ऐसी यूनिवर्सिटी जनरल यूनिवर्सिटी नहीं देखी अभी अहमदाबाद में एक योगा यूनिवर्सिटी हुई अलग बात है मगर कॉमर्स के कॉलेज में कहीं योगा शिखर है ऐसा नहीं क्या साइंस कॉलेज में मेडिकल कॉलेज में सिखा रहे हैं? नहीं देखा। डॉक्टर्स को तो सबसे पहले सिखाना
(49:54) चाहिए। मैं तो बोलता हूं हर मेडिकल कॉलेज में योगा और मेडिटेशन का डिपार्टमेंट होना चाहिए। जी स्कूल से स्टार्ट होना चाहिए। स्कूल से स्टार्ट होना चाहिए। मोदी साहब ने काफी इनिशिएटिव लिया है। जी मगर इतना अभी तक पेनिट्रेट नहीं हुआ है। रामदेव बाबा ने बहुत मेहनत की। बाद में मोदी साहब ने की। जी है ना? जी। तो अच्छा है। दोनों का कंट्रीब्यूशन इसमें अच्छा है। जी जी। और मुझे मैं भी लेट शुरू किया। मुझे भी इसका येेंस पता नहीं था पहले। मैं जिम के ऊपर ज्यादा डिपेंडेंट था। बाद में लेटली रियलाइज हुआ कि मेडिटेशन का और प्राणायाम का बहुत बड़ा रोल है।
(50:26) मतलब आपने एजिंग में प्राणायाम का बहुत बड़ा रोल है। चक्र बैलेंसिंग का बहुत रोल है। खास करके हम ये करते हैं ना अनुलोम मिलन उसका बहुत बड़ा रोल है। अच्छा। तो हमारी पैरासिंैथेटिक सिस्टम होती है ना उसको एक्टिवेट करता है। तो उसकी वजह से हमारी बॉडी एडलेस बनने लगती है। अनुलोम मिलन से। तो ये सब आप करते हैं। मैं सब कुछ करता हूं। जी। प्राणायाम करता हूं। हम चक्र बैलेंसिंग भी मैं करता हूं रेगुलरली। हम हम चक्र बैलेंसिंग तो मेरा फेवरेट सब्जेक्ट है। मैंने प्रोग्राम रिकॉर्ड करके मेरे प्लेटफार्म पे रखा है। मेरा एक गुनी गुरु करके प्लेटफार्म है। जहां मेरे सब
(50:59) रिकॉर्डेड कोर्सर्सेस हैं। तो मैंने चक्र बैलेंसिंग का भी रखा है वहां पे। जी और बहुत लोग तारीफ करते हैं वो प्रोग्राम को। बहुत मतलब जिसने इसको एक्सपीरियंस किया हुआ है वही बता सकता है कि ये क्या चीज है। बहुत सारे मैंने एक्सपीरियंसेस किए लाइफ में और सीखता गया। से मेरी ग्रोथ का एक कारण है कि मेरा लर्निंग एटीट्यूड सीखने की मुझे बहुत तमन्ना है और लर्निंग एटीट्यूड था तो मुझे पढ़ने का शौक था। कॉलेज के दिनों से मैं ऐसी किताबें पढ़ता हूं सेल्फ हेल्प की किताब और जैसे सबके लाइफ में होती है मेरी पहली किताब थी डेल कार्नेगे की हाउ टू विन फ्रेंड एंड इनफेंट
(51:30) पीपल आपको पता होगी जो बहुत पुरानी किताबें मैंने 10थ या 11 स्टैंडर्ड में पढ़ी थी तब से मुझे पता चला कि किताब पढ़ने से हमारे जीवन में बदलाव आ सकता है हम तो मैं बहुत सारी किताबें पढ़ी लर्निंग एटीट्यूड मेरा रहा सीखता गया मैं कोई भी सब्जेक्ट के ऊपर बात करो मैं आपसे वो टॉपिक पे डिस्कस कर सकता हूं जी सेक्स से लेके स्पिरिचुअलिटी तक कोई भी सब्जेक्ट पे बात करो। मैंने धन के ऊपर पांच किताबें लिखी है। हेल्थ के ऊपर लिखी है। सभी के सबकॉन्शियस माइंड के ऊपर लिखी है। अब एनएलपी पे लिख रहा हूं। बहुत सारे सब्जेक्ट है मेरे। जी। रिलेशनशिप के ऊपर मेरी किताबें हैं।
(52:06) जी जी बहुत कुछ है। डॉक्टर साहब आपका जीनियस और यंग माइंड। यंग माइंड है। क्रिएटिव। जी हां। इसलिए एजलेस होने का ये भी है कि मुझे लर्निंग एटीट्यूड है। देखिए बुढ़ापे में क्या होता है? मेरे से छोटी उम्र के लोग भी मेरे से 20 साल छोटे हैं। ये मोबाइल फोन यूज़ करना नहीं जानते हैं। जानते हैं तो सिर्फ डायल करना जानते हैं। उनको सेव करना भी नहीं आता है कुछ मैसेज। मेरे से 20 साल छोटे हैं। और जबकि मैं सब Apple के प्रोडक्ट यूज़ करता हूं। घड़ी से लेके फोन, टेबलेट, डेस्कटॉप, डेस्कटॉप, मेरा लैपटॉप सब कुछ Apple का है जो डिफिकल्ट है। अच्छा।
(52:39) Apple से लोग डरते हैं कि ज्यादा डिफिकल्ट है। और मुझे सबसे आसान लगता है। लर्निंग एटीट्यूड की वजह से। मैं चैट, जेपीडी कितने टाइम से याद करता हूं। जब से मार्केट में आया तब से यूज़ करता हूं। आजकल लोगों को पता भी नहीं चैट जीपीटी क्या है हम ये नई टेक्नोलॉजी यूज करने से डर जो होता है डर है उसका नहीं डर नहीं है वो नहीं सीखना है बस अपने दरवाजे बंद करके रखें नहीं सीखना नहीं बनेगा एक न्यूरो प्लास्टिसिटी की स्विच रहती है कुछ लोगों की ऑफ रहती है वो सीखना चाहते नहीं सुधरना चाहते नहीं कंफर्ट ज़ोन से बाहर नहीं आना चाहते डर रहता है कि मैं कुछ सीखूंगा तो मुझे
(53:10) कंफर्ट ज़ोन से बाहर आना पड़ेगा सही वो 16 का डायलॉग है ना अंग्रेज के जमाने के जेलर है वो इसी के लिए है कि हम कुछ सीखने को तैयार नहीं है जी सर यह बुक में मैं एक चैप्टर है 23 एजलेस एजलेस बैंक अकाउंट यह मैं पहली बारी सुन रही हूं ये क्या चीज है ये क्या है एज बैंक वै गुड क्वेश्चन जी ये मेरा आईडिया है कहीं आपको और बुक में नहीं मिलेगा जी जैसे हम पैसे का बैंक अकाउंट ऑपरेट करते हैं आप जब कमाना शुरू करते हैं तो बैंक में जाके अकाउंट ओपन करते हैं तो ओपनिंग बैलेंस डालते हैं बाद में डिपॉजिट या विड्रॉल करते हैं जी अगर डिपॉजिट ज्यादा किया और विथड्रॉल कम
(53:47) किया तो आपका बैलेंस बढ़ेगा जी दैट इज अ फाइनेंसियल बैंक अकाउंट। हां जी। ठीक है। हम तो वो बैंक में जाके आप करते हैं और मनी से ट्रांजैक्शन करते हैं। वैसा ही एक हमारा खुद के साथ हमारी बॉडी के साथ एक अकाउंट होता है जो इनविज़िबल होता है। दिखता नहीं है। उसमें भी डिपॉजिट्स एंड विड्रॉल होते हैं और उसमें भी एक बैलेंस बनता है। हम और इसको मैंने नाम दिया एजलेस बैंक अकाउंट। अब क्या होता है? हमारी अच्छी-अच्छी आदतें हैं। जी। वो इसमें डिपॉजिट का काम करेगी और बुरी आदतें हैं। बुरी आदत यानी दारू पीना, सिगरेट पीना, ज्यादा स्क्रीन टाइम यूज़
(54:23) करने का, रात को सोना नहीं, जंक फूड खाना ये सब बुरी आदत है। तो जितनी बुरी आदतें हैं हमारी लाइफ स्टाइल में ये सब चीजें इसमें विड्रॉल का काम करती है। हम्। और अच्छी आदत है। जैसे योगा करना, प्राणायाम करना, अच्छी नींद लेना, फ्रेश फ़ूड खाना, सप्लीमेंट लेना, एक्सरसाइज करना, मेडिटेशन करना, प्राणायाम करना ये सब चीजें इसमें डिपॉजिट का काम करती है। जी। तो, इसमें जितना बैलेंस बढ़ेगा, इतना आपका बॉडी एजलेस होती जाएगी। और जितना उसका बैलेंस कम होता जाएगा, इतना एजिंग फास्ट होगा आपका। तो हमें क्या करना है कि हमें जो भी एक्टिविटी करते हैं, कुछ
(54:59) भी खाते हैं, कुछ भी एक्टिविटी करते हैं, तो अपने आपको पूछना है कि यह मेरे अकाउंट में मैं डिपॉजिट कर रही हूं या मैं विड्रॉल कर रही हूं। अगर आपका विड्रॉल बढ़ेगा तो आपका एजिंग फास्ट होगा और डेथ भी जल्दी आ जाएगा। अगर आपने डिपॉजिट बढ़ाते रहे, बैलेंस बढ़ाते रहे तो आपका एज स्लो हो जाएगा। आप रिवर्स भी कर पाएंगे और फिर आप लंबा भी जिओगे और स्ट्रांग भी फील करोगे। तो यह बैंक अकाउंट के हिसाब से मैंने समझाया है कि ऑलवेज कोई भी एक्टिविटी करते हो तो अपने आप को सोचो और जान लो कि कौन सी एक्टिविटी मेरे अकाउंट में डिपॉजिट करेगी कौन सी विड्रॉल
(55:33) करेगी। ओनली डिपॉजिट के ऊपर फोकस करो। विड्रॉल से बचते रहो तो आप ऐसे ही यंग हो जाओगे। एक ये कांसेप्ट आपको यंग कर देगा। अगले चैप्टर अगले इस किताब में मैंने ज्यादा नहीं दिया है। मगर अगले चैप्टर में दूंगा कि कौन सी एक्टिविटी डिपॉजिट करती है, कौन सी एक्टिविटी विड्रॉल करती है। तो सिर्फ डिपॉजिट के ऊपर आपको फोकस करना है। तो कुछ थोड़ा सा अभी कुछ हैबिट्स ऐसी बताएंगे आप जो मैंने कहा ना रेग देखो आप इर्रेगुलर स्लीप लेते हैं। तो विथड्रॉल है। ओके। रेगुलर स्लीप लेना चालू करो। ओके। तो डिपॉजिट हो जाएगी। बैलेंस बढ़ेगा। आप जंक फूड खाते हैं बंद कर दो। फ्रेश फूड
(56:07) खाना शुरू करो। हम डिपॉजिट हो जाएगा। हैबिट चेंज करो। बुरी हैबिट है। अच्छी हैबिट आप वरी करते हैं। चिंता करते हैं। एंगर वाला आपका नेचर है। एजिटेटेड माइंड है। तो विड्रॉल है। मेडिटेशन करके मन को शांत करो। ये ग्रेटट्यूड फील करो। ग्रेटट्यूड से आपका एंटी एजिंग दवाई है। एक्चुअली ग्रेटट्यूड फील करना। ग्रेटट्यूड जर्नल बनाना। ये सब भी ये है। उसके बाद में आपका मेडिटेशन करो, प्राणायाम करो। ये डिपॉजिट करेगा आपके लिए। जिम में जाके एक्सरसाइज करो। योगासन करो। बॉडी को बैलेंस में रखो। योगासन का एक फायदा है बॉडी का बैलेंस मेंटेन करता है। अब
(56:46) बुढ़ापे में क्या होता है कि सबसे ज्यादा दुख कहां से स्टार्ट होता है कि धीरे-धीरे जैसे एजिंग होता है तो बैलेंस निकल जाता है। तो आपने देखा होगा आपके फैमिली में भी देखा होगा कि बुढ़ापे में कोई बाथरूम में गिर जाता है या रात को गिर जाता है क्योंकि बैलेंस मैकेनिज्म बिगड़ने लगती है। हम तो उसकी वजह से गिरते हैं। फिर फ्रैक्चर होता है। फ्रैक्चर होता है। खास करके नेक ऑफ द फीमर का होता है तो हॉस्पिटल में लेके जाते हैं। 6 महीना बेड में रहना पड़ता है और मसल लॉस होता है। तो यह बैलेंसिंग मैकेनिज्म बिगड़ जाती है। मसल का पावर खत्म हो जाता है। क्योंकि
(57:18) मैंने कहा ना मसल लॉस होता है। 30 साल के बाद शुरू हो जाता है मसल लॉस। तो गिर जाते हैं। गिर जाते हैं तो फिर बेड में बेड में और मसल लॉस होता है। फिर और बैलेंसिंग मैकेनिज्म बिगड़ती जाती है। तो ऐसे एजिंग एकदम फास्ट होने लगती है। एक ही फॉल के बाद एजिंग फास्ट होती है। अभी मेरे ससुर गिर गए थे 15 दिन पहले। अभी तक आईसीयू में थे। अभी बाहर आया आईसीयू से जनरल बोर्ड में आया तो यही था उनको ब्रेन एमरेज हो गया गिर गए बैलेंस की वजह से बैलेंस नहीं मेंटेन करने का दो ही रीज़न है बैलेंसिंग मैकेनिज्म बिगड़ी है और मसल का जो टोन है वो लूज़ हो गया है इसलिए आप मेंटेन नहीं कर
(57:51) सकते तो उसके लिए मर जाते हैं तो बॉडी का बैलेंस कैसे बना के रखें तो वही योगा करते हैं योगा से मतलब जिम वगैरह नहीं है सिर्फ योगा बिल्कुल योगा से ही होता है योगा योगिक एक्सरसाइज से अच्छा और मैंने इसलिए योगा किया और मेरा अभी इतना अच्छा बैलेंस हो गया कि मुझे लगता लगता है कि मैंने ये बहुत अच्छा काम किया और वो एक वृक्षासन करके होता है। ऐसा हाथ करके पांव को आधा ये करके सबसे डिफिकल्ट है। मैं बहुत लंबा तक ऐसा खड़ा रह सकता हूं। जी ऐसा तो काफी मैंने ये किया बैलेंसिंग के लिए है वो ताड़ासन भी है और ये रुक्सन भी है बैलेंसिंग के लिए।
(58:22) जी बहुत सारी एक्सरसाइज है बैलेंसिंग के लिए। जी जी तो ये करता रहता हूं। तो ये करना जरूरी है। एंटी एजिंग भी है वो। जी। से एजिंग यानी नॉट ओनली स्किन के रिंकल नहीं है वो एजिंग नहीं है। एव्री सेल ऑफ योर बॉडी शुड बी वर्किंग लाइक अ यंग पर्सन। उसमें आपके मसल के जो फंक्शन है वो भी यंग जैसी होनी चाहिए। आपका लिवर भी यंग आदमी जैसा फील करे और काम करे। आपकी किडनी भी ऐसा काम करे। उसको ये करते हैं। पूरा बॉडी के हर सेल को यंग बनाना है आपको। सिर्फ स्किन को नहीं। स्किन को बनाने के लिए तो कॉस्मेटिक है ही। और लोग उसी को यूज़ करते हैं।
(58:56) जी। समझे ना? जी। ये सब बातें हैं। तो सर आपने बताया कि एजिंग कम करने के लिए हमें फूड हैबिट्स पे ध्यान देनी चाहिए। हमारी डेली रूटीन हैबिट्स पे ध्यान देनी चाहिए। हमारी स्लीप साइकिल पर ध्यान देना चाहिए। और एक्सरसाइज के ऊपर ध्यान एक्सरसाइज हां सप्लीमेंट लेना चाहिए। सप्लीमेंट हां जी सप्लीमेंट लेने चाहिए। एक्सरसाइज मेडिटेशन करना चाहिए। तो ये अब मैं यहीं पे आ रही हूं कि योगा का एक पार्ट होता है विजुअलाइजेशन मेडिटेशन। प्राणायाम योगासन एक अलग चीज हो गई वो फ्लेक्सिबिलिटी के लिए और थोड़ा सा तो यह जो प्राणायाम है और मेडिटेशन है और
(59:36) विजुअलाइजेशन है ये किस तरह से एज को कम करने के लिए काम करते हैं देखो पहली बात तो ये है कि योगा को आठ पार्ट में डिवाइड किया है पतंजलि ऋषि ने जिसको अष्टांग योग कहते हैं। जी उसमें पहला है यम जी यानी दूसरों के साथ कैसे बिहेव करना नियम ओके खुद के साथ कैसे बिहेव करना ये नियम है हम उसके बाद आता है आसन जो बॉडी को कंट्रोल के लिए होता है पहले दो है हमारे बिहेवियर को कंट्रोल करता है फिर आसन हमारी बॉडी को कंट्रोल करता है फिर आता है प्राणायाम जो हमारे ब्रेथ को कंट्रोल करता है जो हमें माइंड के साथ जोड़ते हैं बॉडी माइंड का कनेक्शन तो ब्रीथिंग होता है
(1:00:13) जी उसके बाद आता है प्रत्याहार जिसमें हम हमारे जो फाइव सेंसेस है उसको कंट्रोल करते हैं। उसके बाद आता है धारणा फोकस करना। फिर आता है ध्यान जिसको मेडिटेशन कहते हैं। और फिर होता है समाधि। ऐसे अष्टांग योग है। और ये अष्टांग योग जो भी करेगा ना उसकी बॉडी ऑटोमेटिकली एजलेस हो जाएगी। और मेरा आगे का जो सब्जेक्ट है मैं पतंजलि योगूत्र के ऊपर ही करने वाला हूं। और मेरी नई बुक आ रही है वो पतंजलि योगूत्र ही है। तो मैंने देखा कि जीवन के हर प्रॉब्लम का सॉल्यूशन पतंजलि योगूत्र में है। और बियों्ड माइंड पावर है सब कुछ। मैं इतने सालों से माइंड पावर सिखाता था।
(1:00:50) मैं देखो डॉक्टर बनने के बाद मैंने 25 साल मेडिकल डॉक्टर का काम किया। यानी शरीर का डॉक्टर का काम किया। फिर मैंने माइंड पावर की ट्रेनिंग शुरू की। पावर ऑफ सबकॉन्शियस माइंड, विजुअलाइजेशन ये सब 25 साल 50 साल चले गए। अब मैं आत्मा का डॉक्टर बनना चाहता हूं। बॉडी का डॉक्टर, माइंड का डॉक्टर, अभी आत्मा का डॉक्टर जो पाताल योग सूत्र के थ्रू और एक जीवन विद्या करके उसके थ्रू मैं करूंगा। तो अभी आगे का मेरा पूरा जीवन है। यह दोनों सब्जेक्ट में जाने वाला है। इसके अलावा एजलेस बॉडी के अलावा जो मैं आगे जाकर कर रहा हूं। जी तो वो जीवन जीने का बड़ी मजा आती है। अभी
(1:01:24) मुझे ऐसा पैसे का वो दूसरे लोगों का जैसा ये नहीं है। जितना कमा लो वैसा कमा लो। जी। हैप्पी जितना मिला उससे। बहुत हैप्पी हूं ऐसा। तो यह होता है तो आपको लाइफ में बैलेंस में रहना बहुत जरूरी है। रिलेशनशिप का बहुत बड़ा रोल होता है एंटी एजिंग के लिए। अच्छी रिलेशनशिप रखनी बहुत जरूरी है। जी ऐसा मैंने एक किताब पूरी लिखी है जिसका नाम है स्नेह का जरना। वो रिलेशनशिप के ऊपर है और रिलेशनशिप बैंक अकाउंट मैंने बनाया उसमें। जैसे फाइनेंसियल अकाउंट रहता है। जैसे आज हमारे दोनों की दो पहचान हुई। पहली बार हम मिले। तो हमारा दोनों के बीच में एक अकाउंट
(1:01:57) स्टार्ट हुआ जिसको हम इमोशनल बैंक अकाउंट कहते हैं। आज आपने जो मेरे साथ बिहेवियर किया उससे कुछ डिपॉजिट हुआ। जी। मैंने जो किया उससे डिपॉजिट हुआ। आगे मिलते रहेंगे तो डिपॉजिट विड्रॉल चलता रहेगा। उससे एक बैलेंस बनेगा। ये जो बैलेंस है वो बैलेंस ऑफ ट्रस्ट बिटवीन टू पीपल है। हम तो हमारे बीच में एक दूसरे के ऊपर ट्रस्ट है कि नहीं वो डिपेंड करता है कि आज हमने कैसा बिहेव किया ऐसा। हम समझे ना? हम तो ऐसे डिपॉजिट विड्र चलता ही रहता है। तो हमें अगर सबसे रिलेशनशिप अच्छी रखनी है तो जैसे मैंने एजलेस बॉडी अकाउंट कहा वैसे रिलेशनशिप का अकाउंट को भी माइंड करना
(1:02:33) चाहिए कि हमेशा हर इंसान के साथ हमारा डिपॉजिट होना चाहिए ज्यादा और बैलेंस ज्यादा होना चाहिए। बिकॉज़ यू नेवर नो कब उनकी फेवर की जरूरत पड़ेगी। जी। तो मेरी हमेशा कोशिश रहती है कि सबके साथ मेरा अच्छा अकाउंट रहे। अभी ये आशीष जी के साथ मेरी आज से एक साल पहले मुलाकात हुई जी तब से कंटिन्यूसली आई मेक श्योर कि मैं डिपॉजिट ही करता रहूं विड्रॉल नहीं करूं और डिपॉजिट करूंगा तो क्या फायदा होगा कि मैं आधी रात को भी फोन करूंगा फोन उठा के मुझे रिसोंड करेंगे अगर मेरा बैलेंस कम है तो वो फोन बंद कर देंगे या मुझे ब्लॉक कर देंगे ऐसा होता है तो बहुत सारे बैंक अकाउंट
(1:03:06) होते हैं एक कॉन्फिडेंस बैंक अकाउंट होता है कि कॉन्फिडेंस कैसे बढ़ता है वो हमारे खुद के साथ हम डिपॉजिट और विथड्रॉल करते रहते हैं कुछ एक्शन ऐसे रहते हैं जो डिपॉजिट करते हैं कुछ एक्शन विथड्रॉल करते हैं और उसका बैलेंस है वो कॉन्फिडेंस का बैलेंस है। यह होता है इसको बहुत सारे बैंक अकाउंट मैं जानता हूं जो मैं सिखाता हूं लोगों को। मतलब हर बैंक अकाउंट के साथ एक पडकास्ट होना चाहिए। हां बिल्कुल होना चाहिए। या जी आपने इतनी सारी जानकारियां दी हैं इतनी सारी और मैं ये जानना चाहती हूं कि आपका कोई एक ऐसा मिथ है क्या जो टूटा कि नहीं?
(1:03:42) एजिंग को रिवर्स करने के लिए हम नहीं करना। ये अभी कर रहे हैं वो सही है। मैं भी ज्यादातर यही मानता था जी कि एजिंग इज अ टाइम बाउंड प्रोसेस। जी जैसेजैसे टाइम जाएगा ऐसे हम बूढ़े होते जाएंगे, वीक होते जाएंगे। ये तो इनएविटेबल है। हम मगर ये किताब शुरू करने के बाद जब हमने रिसर्च किया तो पता चला कि ऐसा जरूरी नहीं है। आप एचिंग को बहुत स्लो कर सकते हो, रोक सकते हो, रिवर्स भी कर सकते हो। ये मुझे पता नहीं था। हम इसके जब रिसर्च किया किताब के लिए तब पता चला कि रिवर्स भी हो सकती है। इतना पता था कि आप स्लो कर सकते हो। मगर रोक दो और रिवर्स करो ये मुझे नहीं
(1:04:21) पता था। ये मेरी मिथ टूट गई इसका करने से। अच्छा। और फिर ग्स का कैसे रिलेशन है हमारी एजिंग के साथ। जी। ये भी मुझे पता नहीं था। बहुत सारी चीजें पता नहीं थी। इसके ऊपर काम करने से ये सब चीजें पता चली। जी मतलब जब आप मेडिकल से सबकॉन्शियस माइंड की तरफ आए तब ये चीजें आपको पता चली। धीरे-धीरे पता चलने लगी ये सब कुछ। जी ऐसा है। तो हम सबकॉन्शियस माइंड का पावर कैसे बढ़ा सकते हैं? सबकॉन्शियस माइंड का पावर तो इतना ही है जो सबको इक्वल दिया गया है। हमें तो ये सीखना है कि सबकॉन्शियस माइंड के पावर को ज्यादा से ज्यादा इस्तेमाल कैसे करें।
(1:04:58) ओके? हां। पावर की क्वांटिटी तो सबके सेम है। सबको 100% पावर दिया है। जो इंसान ये पावर को जानता है और उसका इस्तेमाल करता है उनके जीवन में खुशियां होती है। संघर्ष बंद हो जाता है। जब से मैं सबकॉन्शियस माइंड को सीखा और इस्तेमाल करना शुरू किया तब से मेरे जीवन में संघर्ष है नहीं। स्ट्रगल है ही नहीं। हम मुझे जो चाहिए वह आसानी से मिल जाता है। आसानी से काम करना पड़ता है मगर संघर्ष नहीं करना पड़ता है। तो यह सबकॉन्शियस माइंड से होता है। तो इसलिए मैंने 25 साल तक सबकॉन्शियस माइंड ही लोगों को सिखाया और दुनिया में ऐसे लाखों करोड़ों लोग हैं जो कहते हैं कि
(1:05:33) डॉक्टरिया आपके सीखने के बाद मेरे जीवन में पॉजिटिव परिवर्तन आया और ऐसा परिवर्तन जो हमें ऑब्वियसली दिखता है। मेरे एक स्टूडेंट ने मुझे 20 लाख का कार गिफ्ट किया। अभी मुंबई के एक डायमंड बिजनेसमैन ने मेरी वाइफ के लिए डायमंड के इयरिंग ये दिए। एक बार मुझे 20 साल पहले एक डायमंड बिजनेसमैन ने मुझे डायमंड की अंगूठी गिफ्ट किया था। तो ये बड़ी-बड़ी ये घड़ी भी मुझे मेरी एक स्टूडेंट ने गिफ्ट किया है। तो उनको कितना फायदा हुआ होगा कि मैं ऐसा इतनी बड़ी-बड़ी गिफ्ट देते हैं। फॉरेन की ट्रिप गिफ्ट मिलती है मुझे। मैं हार्डली कभी मेरे पैसे
(1:06:05) से फॉरेन गया हूं। दूसरे के पैसे से गया हूं। लोग मुझे लेके जाते हैं फॉरेन कि इनके साथ जाने का मजा आता है। ऐसा तो ये बताता है कि हमने लोगों के लाइफ में कितना पॉजिटिव कंट्रीब्यूशन किया है कि लोग खुशी-खुशी हमारे लिए ये सब कुछ करते हैं। ऐसा तो मजा आता है सब कि हम अच्छा काम कर रहे हैं। तो ये सबकॉन्शियस माइंड का पावर मैंने जिनको अभी सिखाया बड़े-बड़े लोग अमित शाह के जो बेटा है जय शाह आईसीसी का अभी चेयरमैन है। कितना बड़ा आदमी है। वो मेरा एक जमाने में स्टूडेंट था। अभी इलेक्शन के टाइम पे मुझे अहमदाबाद में मिल गया। मुझे पता नहीं था मेरा स्टूडेंट था
(1:06:36) क्योंकि स्कूल में था तब मेरा प्रोग्राम अटेंड करने को आया करता था। मैं तो 35 साल से इस फील्ड में हूं। जी तो अभी तो वो बड़ा आदमी बन गया। तो मुझे बोला सर मैं आपका स्टूडेंट हूं। मैं बोला कैसे कब कहां मेरे पास पड़े? बोले मैं आपका पर्सनालिटी डेवलपमेंट का वर्कशॉप अटेंड किया है। उसकी वजह से ये सब कुछ कर पा रहा हूं। तो मैं तो हैरान हो गया। ऐसे बहुत सारे लोग हैं। हमारे विजय रूपाणी करके सीएम थे। बाद में बताया कि मैं आपके बहुत सारे प्रोग्राम अटेंड किए थे। सबकॉन्शियस माइंड को सबसे जल्दी ट्रेंड करने का क्या तरीका है? या जल्दी ट्रेंड करने का।
(1:07:04) हां। उसको ट्रेंड किया जा सकता है क्या? हां, प्रोग्रामिंग करते हैं। इसको हम कहते हैं प्रोग्रामिंग करने का। ओके। सबकॉन्शियस माइंड की प्रोग्रामिंग। हां। उसके सिस्टम फॉलो करो। देखिए सबकॉन्शियस माइंड इज अ प्रोग्रामेबल कंप्यूटर एंड कॉन्शियस माइंड इज अ प्रोग्रामर। और प्रोग्रामिंग की पांच लैंग्वेज होती है। ये पांच लैंग्वेज आपको पता होनी चाहिए। इंटेंशन, आइडेंटिफिकेशन, विजुअलाइजेशन, एमेशन एंड फीलिंग। पांच नहीं दो यूज़ करोगे ना तो भी आपका फायदा होगा जो कॉमन है। विजुअलाइजेशन एंड एफमेशन। तो आपने एक गोल डिसाइड कर लिया। अभी आपका सबसे बड़ा गोल क्या है? बताइए।
(1:07:36) सबसे बड़ा गोल उसके ऊपर ही बात करते हैं। और आप अचीव कर लोगे जल्दी जल्दी। बोलो करोड़पति बनना है। कितने रुपए चाहिए बताओ? कितने चाहिए? 100 करोड़। 100 करोड़। 100 करोड़ ना। ठीक है। आपने एक डिसाइड कर लिया तो आपने इंटेंशन क्रिएट किया। हम्। अब आपको सबकॉन्शियस माइंड में एक गोल ट्रांसफर करना है। तो आपको एक विज़न बोर्ड बनाना है, लिखना है या पिक्चर बनाना है और उसका प्रिंट निकालना है और अपने बेडरूम में लगाना है। रात को सोते समय उसको देख के उसके बारे में सोचते-सचते सो जाना है और सुबह उठकर फिर से उसको थोड़ी देर देखना है। यानी विजुअलाइज करना
(1:08:11) है। आपके सबकॉन्शियस माइंड में चला जाएगा। विज़न बोर्ड नहीं बनाओगे तो 10% सक्सेस मिलेगी और विज़न बोर्ड बनाओगे तो 90% सक्सेस मिलेगी। विज़न बोर्ड बनाने का नहीं बनाने का इतना बड़ा डिफरेंस है। तो आपको 100 करोड़ इनकमिंग नेक्स्ट फाइव ईयर ऐसा लिख के आपको विज़न कितना 5 साल में चाहिए 10 साल में 100 करोड़ कितना पांच साल जितनी जल्दी एक साल में मिल जाता नहीं एक साल देखो गोल शुड बी लॉजिकल ऑलवेज यानी टाइम पीरियड शुड बी लॉजिकल से मैं गरीब घर में पैदा हुआ था मेरे घर में साइकिल भी नहीं थी तब मैंने Mercedes विजुअलाइज किया था अब आज कोई साइकिल वाला Mercedes विजुअलाइज़
(1:08:47) करेगा तो दूसरे दिन या दूसरे महीने तो नहीं आएगी ना एक नेचुरल पीरियड रहता है प्रोसेस रहती है मेरी 20 साल के बाद आई जब मेरे पास साइकिल थी और Mercedes थी उसके बीच में 20 साल का पीरियड था। तो एक साल तो बहुत जल्दी हो जाता है। बट फाइव टू 10 इयर्स यू कैन कीप इट। पांच साल। इट इज़ नेवर ए इलॉजिकल गोल। इट इज़ एन इलॉजिकल टाइमलाइन। लोग इसलिए फेलियर होते हैं कि उत्साह में जल्दी लिख देते हैं कि मुझे अगले साल मशीन। मैंने हां। तो ये क्वेश्चन आ गया है कि ना कि नहीं इतने जल्दी नहीं लालच अच्छी बात नहीं है। नहीं लॉजिकल टाइम लिमिट होनी चाहिए।
(1:09:18) हां जी। है ना? तो आपका अभी तक का बैकग्राउंड देख के मैं बताता हूं। 10 साल में भी अगर आपके पास 100 करोड़ आ गया तो अच्छी बात है ना हम हम है ना हम हम देखिए तो इसका मतलब 10 साल में 100 करोड़ तो एक साल में 10 करोड़ हुआ तो प्रैक्टिकली महीने का 1 करोड़ हुआ जी है ना जी तो अभी आप जो एक्टिविटी करते हो तो उसे लॉजिकली सोचिए कि एक्टिविटी से आएगा कि नहीं वैसे आ भी सकता है ऐसा कि नहीं एक ही आपका पडकास्ट क्लिक हो गया यही पडकास्ट क्लिक हो गया तो आप कर सकते हैं जी तो फिर विजुअलाइज करना है तो सबकॉन्शियस माइंड में वो पिक्चर चला जाएगा। सबकॉन्शियस माइंड आपके लिए प्लानिंग
(1:09:56) करेगा। आपके लिए ओपोरर्चुनिटी क्रिएट करेगा। आपको इंट्यूशन के जरिए बताएगा कि आप यह काम करो। उसकी वजह से आपका इनकम चालू हो जाएगा। हम और राइट टाइम पे राइट इंसान की आपको मदद दिलवा देगा सबकॉन्शियस माइंड और आप अपने गोल तक पहुंच जाओगे। जैसे हो सकता है आपने 100 करोड़ का गोल दिया है सबकॉन्शियस माइंड को। तो ये टीम से आपकी पहचान हुई। ये टीम ने आपको प्रमोट किया। आपको बताया कि यह पडकास्ट लाइन में आ जाओ और पडकास्ट लाइन में ऐसे बहुत सारे लोग हैं जो महीने का करोड़ से ज्यादा कमाते हैं। हम है ना? मैंने इसकी गिनती किया था कि एक घंटे का
(1:10:29) व्यूअरशिप में ₹200 देता है Google वाला। हम अब मेरा एक पडकास्ट है। एक आदमी ने किया उसका 3 लाख व्यूअर्स आए। हम अगर हम मान ले कि 3 लाख लोगों ने 1 घंटे का देखा है तो 3 लाख घंटे का उनको 200 के हिसाब से कितना मिल सकता है? सोच लो। हम एक घंटे का व्यूअरशिप का Google ₹200 देता है हम और हम ऐसा प्रिज्यूम करें मान लो 3 लाख छोड़ो 1 लाख लोगों ने पूरा देखा एक घंटा हम तो ₹1 लाख * ₹200 हम कितना रुपया हुआ ₹ करोड़ एक ही पडकास्ट से Google देगा एक महीने में ये एक महीने में हुआ है अच्छा
(1:11:11) एक ही महीने में हुआ है ये ये सिर्फ विजुअलाइजेशन से मैनिफेस्टेशन से नहीं तो यह हो सकता है कि आपका पडकास्ट इतना फास्ट होने लगे कि हर पडकास्ट के व्यूअरशिप आपकी 2 लाख, 3 लाख, 5 लाख होने लगेगी। हां। तो ये पॉसिबिलिटी मतलब सबकॉन्शियस माइंड सबकॉन्शियस माइंड करेगा ये क्रिएट। ओके। ओके। आपको राइट इंसान के साथ पॉडकास्ट होगा। राइट वे में होगा। आपके माइंड में राइट क्वेश्चन आएगा। आपका एडिटर अच्छा होगा। जो अच्छा एडिट करके देगा और फिर लोगों को अट्रैक्ट करेगा देखने के लिए। ये सब बैकग्राउंड वर्क सबकॉन्शियस माइंड करता है। ऐसा रहता है।
(1:11:46) अच्छा। सबकॉन्शियस माइंड ऑलवेज बैक लाइन में काम करता है। फ्रंट में काम नहीं करता है। फ्रंट में तो हमें मेहनत करनी पड़ती है। जब सबकॉन्शियस माइंड हमें इंडिकेशन देता है तो आपको उसका एक्शन लेना पड़ता है। ऐसा होता है। ये मेरा पडकास्ट कैसे शुरू हुआ? अहमदाबाद में एक मुझे एक मेरा चाहक मिला जो पडकास्टर है जिनका 1 मिलियन फॉलोअ है इंस्टा पे। हम विरल साखिया करके है। तो बोले सर मैं आपका फॉलोअर हूं। मैं बहुत सालों से मैं आपको फॉलो करता हूं। मुझे आपका पडकास्ट करना है। बोला ठीक है कब करना है? कहां करना है? तो बोला आप रेडी हो ना? मैं बोला हां बोले
(1:12:20) मुंबई आ जाओ। तो मेरा मुंबई जाना नहीं हुआ। यहां दिल्ली आना हुआ। बोला यार अभी मुंबई तो नहीं आने वाला दिल्ली में। बोले मैं दिल्ली में करवा देता हूं। कोई बात नहीं। तो उन्होंने चित्रेश को फोन किया कि डॉक्टर अडिया करके आ रहे हैं उनका पडकास्ट लो। तो चित्रेश ने शुरू कर दिया। तो उनके थ्रू 20 जितने पडकास्ट हो गए। फिर अमित कुमार को फोन किया। अमित कुमार ने किया। उनका हो गया। फिर सुमांशु करके उनको किया। हम तो धड़ाधड़ मेरे पडकास्ट बनने लगे फटाफट। तो सबकॉन्शियस माइंड ने मेरे लिए अपॉर्चुनिटी क्रिएट किया। मैंने वह अपॉर्चुनिटी को पहचाना और मैंने एक्शन
(1:12:50) लेना शुरू किया। हम तो एक्शन तो आपको लेना ही है ना। बट राइट लोगों का मुझे एनवायरमेंट मिलने लगा। मुझे पॉडकास्ट के बारे में कुछ भी नहीं पता था। मैंने कभी किया ही नहीं था। ये सबकॉन्शियस माइंड को मैंने कमांड दिया कि मेरा सोशल मीडिया पे ज्यादा प्रेजेंस करना है मुझे। क्या करूं? तो सबकॉन्शियस माइंड ने यहां खींच के लाया मुझे। तो इसके लिए कोई प्रैक्टिस होती है? या स्पेशली कुछ ऐसी प्रैक्टिस होती है कि सिर्फ बैठकर हमें मेडिटेशन नहीं आप रिलैक्सेशन का ट्रैक है मैं आपको भेजूंगा मेरा रिलैक्सेशन करोगे ना तो आपका कॉन्शियस माइंड डाउन हो जाएगा सबकॉन्शियस माइंड
(1:13:21) एक्टिवेट हो जाएगा वहां विजुअलाइज के कमांड है तो आप विजुअलाइज करो कि 10 साल में आपके पास 100 करोड़ आ रहे हैं और आपका ये पॉडकास्ट का बिज़नेस बढ़ता जा रहा है और हर पडकास्ट का 5 से 10 लाख व्यूअर्स मिलते हैं आपको ऐसा विजुअलाइज करना शुरू करो ये सब कुछ पूरी कायनात आपको उससे मिलाने की कोशिश में लग जाएगी शाहरुख खान का डायलॉग है ना बिल्कुल सही है वो और दूसरी बात है माइंड पावर का शॉर्टकट बोल रहे थे ना जी ये 100 करोड़ का फिगर को 24 घंटे में दो घंटा माइंड में घुमाओ कम से कम ऐसा देखा गया है कि जो आपका विचार डोमिनेंट बना देते हो ना वो जल्दी से मैनिफेस्ट होता है
(1:13:57) तो खाते पीते उठते बैठते ट्रैवल करतेकरते 100 करोड़ 100 करोड़ अपने अंदर ये फिगर को घुमाया करो जल्दी आपको रिजल्ट मिलेगा फास्ट मिलेगा उससे पहले भी मिल सकता है हमको बस 100 करोड़ का फिगर माइंड में घुमाते रहो और बिंदास बोला करो लोगों को शर्माओ मत बोलो पहले तो जाके हस्बैंड को बोल दो मुझे 100 करोड़ 10 साल में कमाना है और मैं कमा के दिखाऊंगी जी अपनी बेटी को सिखाओ नौकरी क्यों करती हो मेरे साथ जॉइन हो जाओ हम दोनों मिलके कमाते हैं ₹100 करोड़ हम नौकरी तो करना नहीं चाहिए मैं मेडिकल कॉलेज की नौकरी छोड़ के आया हूं मैं एमबीबीएस एमडी का एग्जामिनर रह चुका हूं
(1:14:32) मेडिकल कॉलेज में इतना बड़ा पोस्ट से मैं इसके अंदर आया हूं सोच लो मतलब नौकरी नहीं करना चाहिए चाहिए बिज़नेस करना चाहिए। नौकरी में कभी 100 करोड़ कमा ही नहीं सकते। नौकरी तो नौकरी यानी गुलामी लिख दी आपने अपनी। नाम से ही नौकरी नौकरी करना करना नहीं किया। गुजराती में वही बोलते हैं। करी करी ना नौकरी जी किया मगर कुछ नहीं किया। हम हम तो जब से मुझे रियलाइज हुआ मैंने नौकरी छोड़ दी। मुझे पेंशन नहीं मिल रहा है। मैं थोड़ा सा कंटिन्यू करता तो आज मुझे 2 लाख का पेंशन मिलता था। मगर मैंने छोड़ दिया। जैसे मुझे रियलाइज हुआ कि यह गलत है नहीं करनी चाहिए। तो
(1:15:04) मैंने बंद कर दिया। तो बस यह सीक्रेट को रख लो। उठते बैठते सोते खाते पीते 100 करोड़ 100 करोड़ 100 करोड़ यहां हैमरिंग करना चालू करो और एक एमेशन का पेज लिखो हम कि मैं 100 करोड़ कमा रही हूं 100 करोड़ कमा रही हूं 100 करोड़ कमा रही हूं या 100 करोड़ का अमाउंट मेरे तरफ खींच रहा है खींच रहा खींच रहा ऐसा विजुअलाइज करो यू विल बी सरप्राइज ऐसेसे ओपोरर्चुनिटी क्रिएट होगी जो आपने सोची भी नहीं होगी जी और होगा मगर ओपोरर्चुनिटी को पहचानना है काम आपको करना है कॉन्शियस माइंड को और आपके शरीर को करना है सबकॉन्शियस माइंड आपको बैकग्राउंड में हेल्प करेगा। ये समझ
(1:15:41) लेना। जी समझा ना? जी जी। एंड जब 100 करोड़ हो जाए तो मुझे एक पार्टी देना अच्छी। बिल्कुल बिल्कुल सर। मेरे कितने कितने स्टूडेंट है YouTube पे मैं आपको दिखाऊंगा। एक सौजी भाई धोकिया करके डायमंड के बिजनेसमैन है सूरत के अंदर। यहां कृष्णा डायमंड ज्वेलरी के शोरूम्स है यहां पे। तो आज से 25 साल पहले मेरे प्रोग्राम में आए थे। 2000 के साल में उनका 300 करोड़ का सिर्फ बिजनेस था। आज उनका $1 बिलियन डॉलर को क्रॉस कर दिया उसने बिजनेस और मेरी एडवाइस से वो पब्लिक प्रोग्राम में बोलते हैं कि इनकी वजह से मेरा सब कुछ हुआ है। अच्छा अभी उनके बेटे की शादी थी
(1:16:17) तो मैं वहां गया था तो सबको बता रहे थे ये सब डॉक्टरिया की वजह से है। ऐसा वो सबको बोलते हैं ऐसा हम तो यहां तक वो पहुंच गया। आपने उसका किस्सा सुना होगा आज से 5 साल पहले उसने दिवाली पे सब अपने मैनेजर को कार गिफ्ट किया था। 1200 1200 कार उसकी बात कर रहा हूं। हूं। सौजीव भाई धोकिया नाम है। 25 साल से मेरे स्टूडेंट है। वो 300 करोड़ में से आज बिलियन पे पहुंच गए। उनको पद्मश्री मिला। मोदी साहब उनके ऑफिस का इनोगेशन के लिए गए थे। कोई प्राइम मिनिस्टर कोई पर्सनल ऑफिस का इनोगेशन करे वो दुनिया में पहली बार हुआ। ये इनके साथ हुआ है।
(1:16:51) तो आपने उन्हें सबकॉन्शियस माइंड को। करना कैसे? ये विजुअलाइजेशन, विज़ बोर्ड ये सब सिखाया था मैंने आज से 25 साल पहले। ये 25 साल का नतीजा है इनका। अच्छा। अच्छा। ऐसा है। उनका कृष्णा डायमंड ज्वेलरी का बिज़नेस ही आज अह 200 मिलियन का है। और 100 अह उनकी फ्रेंचाइजी आउटलेट है। ऐसा ये हालत है। ऐसे मेरे पास बहुत एग्जांपल है। मिलियन और बिलियनर लॉटरी लगी मिलियन डॉलर के हिसाब भी मेरे पास है। एक टीनो पटेल करके अमेरिका में ऑल के मेरे प्रोग्राम में आया था। वह लॉटरी के टिकट बेचता था। मुझे पूछा उसने कि क्या लॉटरी भी लग सकती है सबकॉन्शियस माइंड से? ट्राई करो क्या
(1:17:30) फर्क पड़ेगा। उसने मेरे प्रोग्राम में बैठ के विजुअलाइज़ किया था कि मुझे यह जैकपॉट लगा है और उनको मिला था लॉटरी और एक महीने के बाद ही उसने मुझे फोन किया डॉक्टर ऑडिया थैंक यू एंड गुड न्यूज़ है कि मैं मुझे लॉटरी लगी है $1 मिलियन की। बोला गप्पे मत मार। बोले नहीं नहीं वेबसाइट पे जाके देखो। फिर मैंने फ्लोरिडा लॉटरी के वेबसाइट पे जाके चेक किया टीनो पटेल डाला तो पता चला कि उनका न्यूज़ सही था। तो ये सब कुछ होता है सर। आपने अभी तक शुरू नहीं किया लगता है सबकॉन्शियस माइंड का पावर इस्तेमाल करना नहीं मैंने शुरू किया यह मैं यह नो दसेल्फ
(1:18:04) जो रिट्रीट होता है मसूरी में अनुराग ऋषि का अनुराग ऋषि का किया आपने अटेंड हां वो मैंने जब अटेंड किया तब मतलब मेरा इंट्रोडक्शन सबकॉन्शियस माइंड से वहीं से स्टार्ट हुआ। अच्छा कितने टाइम पहले किया? अप्रैल था। अच्छा अभी का है। मैं तो 35 साल से सबकॉन्शियस माइंड की बातें कर रहा हूं। लेकिन तब से अब तक भी मैं जो देख रही हूं चमत्कार जिसको मतलब बिलीव करना थोड़ा सा कठिन हो जाता है। तो मैं ये देख रही हूं। नहीं बिलीव तो करना ही पड़ेगा। चीजें सच में जो आप कह रहे हैं ना कि जब सबकॉन्शियस माइंड हमारे लिए सारी प्लानिंग करता है और चीजें अट्रैक्ट होती है इजीली।
(1:18:38) बहुत मेहनत नहीं करना पड़ती। तो ये मैं एक्सपीरियंस स्ट्रगल नहीं करना पड़ता है। स्ट्रगल नहीं करना पड़ता। मेहनत करके पैसा मिलता है। मगर लोग क्या करते हैं? स्ट्रगल करने के बाद भी कुछ लोगों को पैसा नहीं मिलता है। हां। ऐसा होता है। हां जी। तो बिना स्ट्रगल का नॉर्मल मेहनत करके 100 करोड़ कमाना भी आसान है। अगर बिलीव करोगे तो हम ये नेपोलियन हिल का एक सेंटेंस है। व्हाटएवर अ ह्यूमन माइंड कैन कंसीव एंड बिलीव इट कैन अचीव। इंसान जो सोचता है और मानता है वो पाता है। मानना जरूरी है। कंडीशन अप्लाई होती है ना। हम ये नेपोलियन इल का फेमस सेंटेंस है।
(1:19:14) हम तो आप मान लो कि आप 10 साल में 100 करोड़ कमाओगे। हम और यह आपका अच्छा बिज़नेस है क्योंकि आपका प्रेजेंटेबल लुक है। आप इंटरव्यू अच्छा लेती हो और एजलेस का एग्जांपल हो। अच्छा लोगों को बता दो अपनी एज आपकी ऐज बता दो। मेरे भी बता दो आप ही कितना अच्छा गेस किया उन्होंने पता चलेगा। तो कमेंट आए हैं कितने पता नहीं। लेकिन डॉक्टर साहब की ऐज 73 75 फाइव? यस। अच्छा मतलब मैंने अभी भी जानने के बाद भी तीन दो साल कम कर दिए। हां, दो साल कम कर दिया। और आपकी एज बतानी है तो बता दो। लोग बताते नहीं है मगर आप बता सकते हैं तो बता दो। अच्छा मेरी ऐज मैं बता दूं। डॉक्टर साहब
(1:19:52) से थोड़ी छोटी हूं मैं। थोड़ी सी छोटी है। सोच लो फिर आई एम 49 शी इज 49 और दिखती कितनी है देख लो। दोनों एजलेस बॉडी के एग्जांपल है। आपको भी ऐसा बनना है ना? सर का रूटीन साइंस मेरा रूटीन थोड़ा मैच करता है। हां रूटीन भी हमारा मैच करता है। मैच करता है। गुड। तो अगर आपको एजलेस बनना है तो यह साइंस को सीखिए, प्रैक्टिस करिए। आप भी हमारे जैसे बन जाएंगे। कम से कम 20 साल का तो डिफरेंस दिखेगा ही आपके अंदर। डेफिनेटली। जी मजा आ गया आपसे बातें करने का। लवली। थैंक यू सर। आप हमारे पडकास्ट में पर इतनी अच्छी नॉलेजेबल चीजें आपने सबसे इंपॉर्टेंट जो दुनिया भाग रही है उसके
(1:20:35) पीछे। एजलेस बॉडी। मैं फिर से आपकी बुक एक बार। इसकी हम लिंक दे देंगे नीचे कमेंट बॉक्स में ताकि लोग खरीद सके। Amazon पे ऑलरेडी अवेलेबल हो गई है ये। ओके। तो ये और भी भाषाओं में ल्च होने वाली है। अभी इंग्लिश में है। ये आप जरूर खरीदें और इससे आपको डेफिनेटली बहुत ज्यादा फायदा होगा। तो सर बहुत-बहुत धन्यवाद आपका यहां आने के लिए और अपनी नॉलेज हमें देने के लिए। थैंक यू सर।

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