Sunday, August 2, 2026

Delhi का काला सच: Life of a Sex Worker, Human Trafficking & Forced Sex | Yogita Bhayana | ST-132

Delhi का काला सच: Life of a Sex Worker, Human Trafficking & Forced Sex | Yogita Bhayana | ST-132

Author Name:Supertalks by themovingship

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Transcript:
(00:00) एवरेज दिल्ली में कितने बलात्कार होते हैं दिल्ली? बलात्कार को नहीं दिखाते, हत्या दिखा देते हैं। 15 से 20 केसेस मिनिमम रिपोर्ट हो पा रहे हैं। हजारों केसेस ऐसे होंगे जो रोज रिपोर्ट नहीं होंगे। डेडलाइट एरियाज में बलात्कार हुआ है कि नहीं? इसकी पुष्टि कैसे होती है? दिस इज द ओल्डेस्ट प्रोफेशन इन दिस वर्ल्ड। बलात्कार एक ऐसी चीज है व्हेन हमारे देश के अंदर कौन सी स्टेट में सबसे ज्यादा बलात्कार हो रहे हैं? जब यह पूरा रैकेट गवर्नमेंट के साथ मिलके चला जाता है। कुछ दिन पहले ही हमारे पास एक केस आया हमारी हेल्पलाइन नंबर पर बोल नहीं सकती
(00:40) मुंह बंधेरा है। उसके सिगरेट के दाग थे। उसके काटा गया था जगह-जगह से। 40 साल के आदमी ने उसका बलात्कार किया था वो आठ साल की बच्ची का। मैम, ये भूख किसकी है? ये सेक्स की इतनी भूख बढ़ चुकी है क्या देश में? क्या हो रहा है? आपने मुजफ्फरपुर शेल्टर कांड सुना होगा। ज्यादा कंज्यूमर्स जो थे वहां के पॉलिटिशियंस थे। वहां एक दो बच्चियों के कंकाल मिले थे। पूरा शेल्टर डिक किया गया तो बहुत सारे कंकाल मिले। लड़कियों को ना ऑक्सीटॉक्सिन दिया जाता है। जिससे कि उनके हार्मोन्स चेंज हो जाते हैं। बड़े लगते हैं साइज बढ़ाने के लिए। वो जो शेल्टर चला रहा था वो पॉलिटिशंस को
(01:12) लड़कियां सप्लाई करता था। यही इंजेक्शंस लगा के चाहे नींद के चाहे हार्मोन्स। वो लेबर है और उसका बलात्कार करके मुंह तक कुचल दिया गया पत्थर से। चार साल की बच्ची। आपने स्टेटमेंट जरूर सुनी होगी कि लड़कियों के छोटे कपड़े थे इसीलिए उसका रेप हो गया। यही आप उर्फी उर्फी जावेद की बात करें तो वो अल्गैरिटी है बिकॉज़ शी इस ट्राइंग टू व्हाई वुड आई वॉच उर्फी जावेद मैम नाउ उर्फी सेस दैट मेरे बूब्स हैं तुम मत देखो आंखें बंद कर लो। बट वो कर क्यों रही है? उसका एजेंडा क्या है? मतलब आंख पूरे ही कपड़े उतार दो। उर्फी की बहनों ने उन्हें कहा था कि अगर
(01:45) लड़के ऐसे ना हो तो हम पूरा भी उतार देंगे। दैट इज अ प्रॉब्लम ना। आप अपने आप को मत बनाओ। इसको आप कहीं ना कहीं से आर यू आल्सो लिंकिंग दिस टू समथिंग लाइक [संगीत] दोस्तों महाभारत में जब मां द्रौपदी का चीरहरण हो रहा था तब भगवान श्री कृष्ण स्वयं आए और उन्होंने मां की रक्षा करी। आज कलयुग है। भगवान श्री कृष्ण हमारी सोच बनकर आएंगे और हमें मिलकर गलत के खिलाफ आवाज उठानी होगी। आज एक कोशिश करने जा रहे हैं। हमारे साथ हैं योगिता भयाना जी। एक सोशल एक्टिविस्ट हैं। इनकी एक एनजीओ है जिसका नाम है परी जिसके द्वारा जो रेप विक्टिम्स हैं, सर्वाइवर्स हैं उनके लिए
(02:31) आवाज उठाती हैं। जस्टिस के लिए गुहार लगाती हैं। आज जो मैम ने कहानियां सुनाई है, आपकी रूह कपा देगी। आपको डराना नहीं चाहते बल्कि आपको सच के साथ अवगत कराना चाहते हैं। रेड लाइट एरियाज में क्या हो रहा है? किस तरह से सेक्स ट्रेड हमारे देश में पुलिस और पॉलिटिशियंस के इनवॉल्वमेंट के साथ हो रहा है। दिमाग हिला देगा। लड़कियों को ऑक्सीटॉक्सिन दिया जा रहा है। किस तरह से? मुजफ्फरपुर में शेल्टर होम्स के अंदर लड़कियों को बेहोश करके उनके साथ सेक्स किया जा रहा है। बहुत हिम्मत चाहिए। पर कहते हैं कि शिव भी शक्ति के बिना शव बन जाता है। इसी शक्ति
(03:14) को साक्षी मानकर मैं आपको आज चैलेंज कर रहा हूं कि इस पूरे एपिसोड को एंड तक देखिएगा क्योंकि हमने सिर्फ प्रॉब्लम्स ही नहीं बल्कि सलूशंस के बारे में डिस्कस किया ताकि हम अपनी आवाज सरकार तक पहुंचा सकें। चैनल को सब्सक्राइब जरूर करें दोस्तों। जैसे योगिता जी एक एनजीओ चला रही हैं। वैसे हम भी एक एनजीओ चला रहे हैं एस के चिल्ड्रन फाउंडेशन के नाम से जिसमें 200 से ज्यादा अंडर प्रिविल बच्चों को हर रोज फ्री ऑफ कॉस्ट एजुकेशन पिछले आठ सालों से दी जा रही है। तो ऐसे चैनल्स को सब्सक्राइब करके आप ऐसा नॉलेजेबल कंटेंट ही नहीं ले रहे बल्कि आप अपने देश में एक
(03:45) बदलाव भी लेकर आ रहे हैं। जय हिंद। हमने मैम एक पॉडकास्ट किया था अतुल शर्मा जी के साथ तो वो जो सेक्स वर्कर हैं उनको रेस्क्यू कर रहे हैं। काफी काफी सालों से। उन्होंने मुझे बताया था कि राघव लड़कियों को ना ऑक्सीटॉक्सिन दिया जाता है जिससे कि उनके हार्मोनस चेंज हो जाते हैं। हार्मोन चेंज होने लगते हैं। साइज बढ़ाने के लिए तो ये ऐसे आपने कोई केस कभी एनकाउंटर किया है? ऑफ कोर्स क्या है? क्या जैसे आठआ साल की 99 साल की बच्चियों के यहां पर बहुत सारे अबडक्शन हो रहे हैं। मिसिंग हो रही है बच्चियां। अगर आठ साल से नीचे की बच्चे का अगर हम बोलते हैं कि मिसिंग गई है।
(04:17) मिसिंग बच्चों के साथ मेरा काफी काम रहा है। तो तो हम कहते हैं कि हो सकता है कहीं मार दिया हो बलात्कार करके। बट आठ साल के ब्रैकेट से ऊपर अगर कोई मिसिंग होता है तो वो मतलब सेक्स स्टेट के लिए ही है और वो ऑक्सीटोसिन वाला ही है और ये आज से नहीं है ये सबको पता है यह पूरा का पूरा रैकेट पुलिस की नजर में चलता है पुलिस के साथ में चलता है बेटी उठाई जाती है तो पुलिस वाले की मदद से उठाई जाती है और ऐसे घर की उठाई जाती है कि जो जुबान ना खोल पाए है ना एक गरीब आदमी की बेटी उठा ली जाती है कि वो पुलिस के चक्कर काटता रहेगा कितने
(04:48) लोग हम तक पहुंच पाते होंगे हमारी संस्था के हम लोग के पास तो बहुत कम लोग आते और हमारे पास आ भी गए तो तब भी बेटियों को लाए हम ढूंढ के बट हमें पूरा मतलब एग्जॉस्ट होना पड़ता है। अपना कंज्यूम होना पड़ता है एक बेटी को रेस्क्यू करने में क्योंकि प्रशासन मिला हुआ है। आप समझ रहे हैं? एक गरीब की बेटी को उठा लेंगे तो वो वापस नहीं आएगी। 8 साल की बेटी 9 साल की मतलब यह एक एज ब्रैकेट है जिनको बड़ा करने के लिए उनके पास पूरे केमिकल्स हैं और उनकी लाइफ कम हो जाती है। दे हार्डली लिव मोर देन 30 इयर्स क्योंकि केमिकल्स की वजह दे डोंट लिव लगर बाय द
(05:24) वे। तो बहुत बहुत बुरा हाल है और यह सब सबको पता है। बट वी डोंट हैव एनी अथॉरिटी टू स्टॉप इट। हमारे पास ना रिसोर्सेज है, ना पावर है, ना सत्ता है इसे रोकने के लिए। और इसे रोकने वाले जो लोग हैं और ज्यादातर इस तरह के नेक्सेस के कंज्यूमर पॉलिटिशियंस हैं। आपने मुजफ्फरपुर शेल्टर कांड सुना होगा। उसमें भी उन बच्चों के साथ ऐसा ही होता था और ज्यादा कंज्यूमर्स जो थे वहां के पॉलिटिशियंस थे। थोड़ा बताना केस के बारे में। उस केस में क्या हुआ था कि एक रिपोर्टर ने रिपोर्ट किया था। उनको हाईलाइट हमने यहां पर किया। छोटी सी खबर बनाई। बहुत अपनी जान
(06:07) को रिस्क करके और वहां एक दो बच्चियों के कंकाल मिले थे। तो जब पूरी बात बनी बड़ी हुई तो पूरा पूरा शेल्टर डिक किया गया तो बहुत सारे कंकाल मिले। फिर वहां बस्ट हुआ रैकेट कि वो जो शेल्टर चला रहा था वो पॉलिटिशंस को लड़कियां सप्लाई करता था। यही इंजेक्शंस लगा के चाहे नींद के चाहे हॉर्मोंस के तो वो छोटी-छोटी बच्चियां 8 साल 10 साल जो कि शेल्टर में रहती है ना जिनके मां-बाप नहीं होते ऑर्फन गर्ल्स या जो क्राइम कॉन्फ्लिक्ट्स वाली होते हैं। शेल्टर फॉर गर्ल्स यंग गर्ल्स एडलेसेंट्स तो वो शेल्टर था। वहां पर ज्यादातर लोग जो जाते
(06:45) थे आप एक फिल्म देखिए भक्षक इट इज़ बेस्ड ऑन दैट पर्टिकुलर उसमें वुमेन एंड चाइल्ड मिनिस्टर का हस्बैंड इनवॉल्वड था बिहार के। तो अ मूवी इज़ मेड ऑन दैट। इट वाज़ हाईलाइटेड बाय अस। तो ये है तो दिस इज़ वन केस व्हिच ब्रोक्स इट्स ओन थिंग बट बहुत सारे ऐसी जगह पर बहुत ऑर्गेनाइज तरीके से क्राइम हो रहा है। सोडमाइजिंग्स वेरी कॉमन सो दिस इज़ वैरी डार्क बट नोबडी वांट्स टू टॉक अबाउट इट। नोबडी वांट्स टू वर्क ऑन इट क्योंकि इसमें बड़े-बड़े लोग इनवॉल्व्ड हैं। मैम मिनिस्टर का नाम क्या था?
(07:29) ओ मुझे अभी एस सच उनका नाम याद नहीं आ रहा। एक नहीं थे बहुत सारे लोग जाते थे वहां। बिहार के? हां मतलब वो पॉलिटिशियंस के लिए रैकेट था मेनली मतलब आप ऐसा बता रहे हो कि वहां पे उन्होंने सेटअप किया हुआ था सर लोग जाते थे पॉलिटिशियन आते थे और बिकॉज़ रात को या बच्चियों को बेहोश करके ले जाया गया जाता था बेहोश करके मतलब उनको नींद में नींद की दवा खिला के ऐसा बेहोशी की हालत में उनको ले जाया भी जाता था पॉलिटिशियंस के घर यू यू मस्ट वॉच पक्षक ओ अच्छा अच्छा मतलब वो जबरदस्ती करती होंगी कि मुझे नहीं जाना ना तो उसको बेहोश करके उसके घर ले जाते थे।
(08:07) फिर वो उठती थी तो वो उसको याद ही नहीं होता होगा कुछ। यही है। मतलब मैं मतलब ये भी हो सकता है कि बेहोशी में भी सेक्स करें वो। हां बेहोशी में हां तो दिस इज वै कॉमन। तो वहां के तो दो शेल्टर एक शेल्टर होम में तो एक विक्टिम्स हमारे हम उसको सपोर्ट कर रहे हैं। तो वो भी यही बताती हैं। तो बट ये वो चीजें हैं जो सामने आ गई हैं। बट ऐसे बहुत सारी शेल्टर होम्स हैं जहां पे ये सब हो रहा है और सुप्रीम कोर्ट ने कमेटी भी बिठाई थी शेल्टर्स की जांच के लिए। वो बहुत एक्टिव नहीं है वो कमेट। मतलब जब कुछ होता है तो बहुत सब हाईलाइट हो जाता है।
(08:44) कमेट बनती है। होता कुछ नहीं कमेट। नहीं वो सुप्रीम कोर्ट की मॉनिटर्ड कमेटी थी बट कुछ नहीं किया उन्होंने। एंड आई आल्सो पोस्ट माय नेम कि मेरा नाम भी डाला जाए उसमें बट हमारी चिट्ठियां तो फेंक दी जाती है फाड़ के मैम उस विक्टिम ने क्या बताया थोड़ा बताओ ना वही बताया उन्होंने अभी वो विटनेस है उस पूरे उस केस की द गर्ल हैज़ रिवील्ड लॉट ऑफ़ थिंग्स द सेम जो आपने ऑक्सीटॉसिन की बात की इंजेक्शन दिए जाते हैं शरीर बड़ा करने के लिए खाना नहीं दिया जाता टॉर्चर किया जाता है फिर उन्हें रात को पता ही नहीं होता वो रात को कहां थी उनको जबरदस्ती
(09:17) खाने में दवाई डाल के दी जाती एंड उसमें से फिर यू नो कुछ बेटियों को भेजा जाता है। कुछ लोग आते भी हैं शेल्टर में। मैम मैम आई एम श्योर कि इनमें बहुत सारे प्रेगनेंसी के भी केसेस होते होंगे। हां जी। तो उसमें क्या होता है? दे गिव द मेडिसिनस। वो प्रेगनेंसी कर्व करने की मेडिसिनस उनको लगातार दी जाती है। दैट्स व्हाई आई एम सेइंग इफ यू सी दिस मूवी यू विल गेट ऑल द आईडिया व्हिच आई एम टॉकिंग अबाउट। एंड दिस इज़ बेस्ड ऑन दैट शेड्टर हार्म व्हिच आई एम टॉकिंग अबाउट। तो ये दवाइयां भी उनको रेगुलर दी जाती हैं। बट देन दे डोंट हैव गुड लाइफ हेल्दी लाइफ
(09:50) ना। दे आर यंग गर्ल्स। सो इट्स अबाउट नॉट ओनली फिजिकल टॉर्चर इट इज़ अबाउट प्लेइंग वि देयर लाइफ्स। मेंटल टॉर्चर तो है ही है बट इट कट्स देयर लाइफ स्पैन। तो मैम जो जैसे रेड लाइट एरिया और यह सब चीजें काफी एक लीगलाइज सिस्टम में आ चुकी हैं। कहीं ना कहीं हर जगह चल रहा है। जैसे जीबी रोड के बारे में बहुत लोग बात करते हैं और जैसे उस वक्त अतुल मैम ने बताया था कि उनके शहर में तो उनका अड्डा बना हुआ है सेंटर में। तो बहुत आम है मेरठ की वो हैं तो उन्होंने वहीं का बताया था कि अह कबाड़ी खाना है। कबाड़खाना यहां पे तो चलता रहता है यह। तो हर स्टेट में ऐसा-सा
(10:31) मुझे अभी रिसेंटली कोई बता रहा था कि अ पंजाब में जालंधर में भी बहुत सारी ऐसी जगहें हैं जहां पर ऐसे-से हिडन काम हो रहे हैं। तो जब ये रेड लाइट एरियाज में ऐसी चीजें होती हैं तो यहां पे बलात्कार हुआ है कि नहीं इसकी पुष्टि कैसे होती है? देखिए रेड लाइट एरियाज या प्रोस्टट्यूशन की बात करें। दिस इज़ द ओल्डेस्ट प्रोफेशन इन दिस वर्ल्ड। ठीक है? और बलात बलात्कार एक ऐसी चीज है व्हेन इट इज डन ऑन यू यू नो इट्स लाइक वेरी डिवास्टेटिंग आपकी इच्छा के विरुद्ध अगर आपसे एस्टैब्लिश किया जाता है फिजिकल कांटेक्ट तो उसको आप बलात्कार बोलते हो तो देयर आर
(11:13) टू डिफरेंट थिंग्स तो प्रॉस्टिट्यूशन एंड रेप्स आर नॉट कनेक्टेड दैट वे ठीक है बट एट द सेम टाइम जब आपको जबरदस्ती प्रॉस्टिट्यूशन में धकेला जाता है दैट इज़ रिपीटेड रेप फॉर श्योर तो यह आपको डिफरेंशिएट करना होगा कि लीगल तो नहीं है बट वैसे सबको पता है यहां हो रहा है। बट मेरा प्रॉब्लम सिर्फ वहां आ जाता है जब आप बच्ची को ट्रैफिक करके लाते हो इसी काम के लिए। दैट इज रॉन्ग है ना? पर जो महिलाएं अपनी इच्छा से जा रही है मैं उसमें मेरा कोई ऑब्जेक्शन नहीं है। बिकॉज़ दे वांट शॉर्टकट्स इट्स देयर ओन पैरोगेटिव। उसके लिए आप किसी को गलत नहीं ठहरा सकते हो। वो
(11:50) मैं उस चीज़ के लिए मैं आई एम नॉट अगेंस्ट दैट। बट आई एम अगेंस्ट फोर्स्ड प्रॉस्टिट्यूशन स्पेशली जब यह पूरा रैकेट गवर्नमेंट के साथ मिलके चला जाता है तो उसमें ब्रेक करने में वी वांट टू हेल्प गवर्नमेंट व्हिच दे डोंट वांट डेफिनेटली एंड आई एम ऑल फॉर दैट बट अगर आप अपनी इच्छा से जा रही हैं तो दैट्स अ सेपरेट थिंग तो मैम गवर्नमेंट कैसे इन्वॉल्व होती है ऐसे रैकेट्स में आप बताइए ना एक किसी मंत्री की भैंस चोरी हो जाती है तो वो ढूंढ के ले आते हैं आपको लगता है कि कोई बच्ची को अगर ट्रैफिक करके लाया जा रहा है तो किसी को पता नहीं है। एवरीबॉडी इज
(12:30) मैनेज्ड। मैम इंडिया में कहां पर हो रहा है सबसे ज्यादा ये? सेक्स रैकेट की बात की जाए। शेल्टर होम्स आर द बेस्ट प्लेसेस इन लोगों के लिए। वहां पर शक भी नहीं जाता है। वहां पर रखी जाती है ऐसी लड़कियां जो ऑर्फन है जो घर से भाग गई हैं या जो डेस्टिट्यूट हैं, मेंटली अनस्टेबल है इन टर्म्स ऑफ मेंटली चैलेंज्ड हैं। दे आर दैट सॉफ्टेस्ट टारगेट। तो शेल्टर होम्स अपने आप में ही बहुत बड़े सेंटर्स हैं इस सब क्राइम्स के। दिल्ली में है। दिल्ली में हमने खुद छापा मारा था पीछे इधर। अह दिल्ली में एक आश्रम था किसी बाबा का। हालांकि गवर्नमेंट के अंडर ही चलते
(13:07) हैं सारे आश्रम। उसके अंदर कितनी बच्चियों के बलात्कार हुए थे इधर रोहिणी में और उसके अलावा गवर्नमेंट रन शेल्टर्स में अब्यूज और ये सब बहुत होता है बट एज आई सेड आई डोंट हैव अथॉरिटी टू गो सरकारों की अथॉरिटी ऑडिट करने की कोई जाता ही नहीं चेक करने और जो जाता है वो खा पी के जेब गरम करके आ जाते हैं। नोबडी केयर्स अबाउट द डॉटर्स। तो यह हर शेल्टर होम में बहुत नॉर्मल है। बट आप सोचिए कि दूरदराज गांव में जहां पर किसी की आवाज ही ना हो कौन रिपोर्ट करेगा? हु विल बी द रिपोर्टर कौन बताएगा जो शेल्टर से ही बताएगा कोई एक बहुत बड़ा
(13:51) साहसी इंसान निकल के आ भी गया तो जिस तरह से बिहार में हुआ वो खबर दब गई थी वो तो हमने यहां पे हाईलाइट कर दी दिल्ली में तो उसको बड़ा बनना पड़ा तो इट इज वै चैलेंजिंग फॉर अ पर्सन टू टेक पंगा विद यू नो इन सब लोगों के साथ पंगा लेना आसान नहीं होता है। सो पूरा का पूरा रैकेट है और सरकारी संरक्षण में है। यू गेट माय पॉइंट? इन लोगों के नाक के नीचे नहीं है। इन लोगों की वजह से है। अगर मैं आपसे पूछूं कि अभी एक वुमेन के पर्सपेक्टिव से देश में टॉप तीन चीजें ऐसी क्या है जो कि खराब है या गलत है? पहली बात तो आप बताइए एग्जिस्टेंस जो है।
(14:35) पहली बात तो उन्हें आने नहीं दिया जाना। अब जाके सेक्स रेशो थोड़ी ठीक हुई है। अभी भी सेक्स डिटरमिनेशन की बात की जाए तो पहला तो एकिस्टेंस की बात है। पहले तो उन्हें आने ना देने पर जो इतनी रोक है जो रेजिस्टेंस है कि बच्चों भी पैदा हो तो लड़का पैदा हो। यह बात काफी बदली है। आप और हम अग्री करेंगे। बट बिकॉज़ आप यंग जनरेशन है। यू माइट नॉट अंडरस्टैंड कि अभी तक भी लोग लड़की नहीं चाहते हैं। बट चीजें इसमें थोड़ी सी बदली हैं। पहला तो उसको आने दिया जाए। तो मैं यह चाहती हूं कि यह जो लड़के का मोह है कि हमें लड़की चाहिए ही नहीं। पेट में ही गिरा दी। तो पहले आएंगी
(15:15) तो चलो पहले तो सर्वाइवल की बात है। आने देना ही उसको अपने आप में एक स्ट्रगल है। उसका यहां जन्म लेना ही स्ट्रगल है। नंबर वन नंबर टू अधिकार अधिकारों की बात है। प्रॉपर्टी अभी भी 80% से ज्यादा पुरुषों की है। एसेट्स रिसोर्सेज पे जो कब्जा है, पोजीशंस पे जो कब्जा है, अ हर तरफ सत्ता पे जो कब्जा है, है ना? पावर में डिसीजन मेकिंग में हर तरफ पुरुष 80 से 90% है। सिर्फ 10% अगर किसी का योगदान है तो महिलाओं का है डिसीजन मेकिंग स्पेस में। ठीक है? तो अधिकारों की बात की जाए तो अधिकार पहला था हमने क्या बोला? पहला
(16:00) एकिस्टेंस कि उनको आने दिया जाए। सर्वाइवल मतलब उनको पैदा ही होने दिया जाए। फिर उनके अधिकार उन्हें मिले। तीसरा डेफिनेटली डिग्निटी, सेफ्टी ओके? और जो यशु पर हम काम करते आए हैं कि अगर एक जीवन में एक महिला बिना मलेस्ट हुए, बिना छेड़छाड़ हुए, बिना बलात्कार हुए अपनी जिंदगी काट गई तो यह एक बहुत बड़ा रिकॉर्ड है और वो होता नहीं है हमारे देश में। मैं आपको एक भी ऐसा केस एक भी ऐसी महिला से नहीं मिला सकती जिसके साथ छेड़छाड़ ना हो या बलात्कार ना हुआ हो या बलात्कार तो एक बहुत नेक्स्ट लेवल की बात कर रहे हैं हम। मलेस्टेशन, छेड़छाड़,
(16:38) स्टॉकिंग, अनकंफर्टेबल वह हर दिन होती है। तो उसके बिना अगर कोई अपनी जिंदगी जी जाए, अभी तक तो मुझे कोई ऐसी महिला नहीं मिली है। अराउंड द वर्ल्ड और हिंदुस्तान में तो जरूर। तो ये अगर तीन चीजों में वो एग्जिस्ट कर जाए तो तो बात है ना इंसान होके पैदा होकर अपना जीवन जीने की। नहीं तो आप डर-डर के ही रोज जी रहे हो। अब कौन है? आपके अधिकार मिल रहे हैं। आप रोज छिड़ रहे हो सड़कों पर और पहली बात तो आने ही नहीं दिए जा रहे हो। तो दिस इज हाउ डिफिकल्ट इट इज टू बी अ वुमेन और अ गर्ल इन दिस कंट्री। पिछले 17 सालों में अभी तक का ऐसा कौन सा
(17:15) केस था जो कि आपके लिए बहुत ही इमोशनल या मैं कहूं कि आपका दिल टूटा हो। मेरा तो हर केस पे ही दिल टूटता है। जहां पर अगर आप छोटे बच्चों की बात करते हैं। अगर हम बात करें कि एक साल, दो साल, दो महीना और आठ साल की बच्ची, गूंगी बहरी बच्चे आप बताइए कि क्यों नहीं दिल टूटेगा? हर बार जब मैं केस को मिलके आती हूं तो दिल टूटता है और बहुत ज्यादा दिल टूटता है। अभी मैं रिसेंटली एक बच्ची को मिली जिसके जो बोल नहीं सकती मुंह बंधेरा है। उसके सिगरेट के दाग थे। उसके काटा गया था जगह-जगह से। उसके कम से कम 70 काटने के निशान थे। उसको मार दिया गया था अपनी तरफ
(17:50) से। वो बच गई पर जली हुई मिली। अब वो अपना दुख भी बयान नहीं कर पा रही थी। हम हॉस्पिटल में मिलके आए। वो बोल भी नहीं पा रही उसको कहां जल रहा है। कहां दर्द हो रहा है। आठ साल की बच्ची है। वो क्या करेगी? वो कोई भी मेल आ रहा था उसके रूम में हॉस्पिटल में डॉक्टर तो वो डर रही थी। देखिए दर्द भी हो रहा है तो बता भी नहीं पा रही। उसको दर्द कहां हो रहा है। उसकी मेजर सर्जरी हुई थी। उसकी प्राइवेट पार्ट्स की सर्जरी हुई थी। एक नहीं मल्टीपल सर्जरी हुई थी। है ना? एक 40 साल के आदमी ने उसका बलात्कार किया था। वह आठ साल की बच्ची का और रात भर बलात्कार किया
(18:24) था और उसको मरने के लिए फेंक दिया था। तो उसकी पीड़ा के सामने बताइए हम क्या बात करेंगे? है ना? तो उस दिन यह अभी रीसेंट है तो इस तरह के तो बहुत केस आते हैं। लगातार ऐसे ही आते हैं। अब वो जब अपनी पीड़ा कोई बता भी ना पाए कि मेरे को यहां दर्द हो रही है। मुझे यह दवा चाहिए या मैं मेरे साथ क्या हुआ? तो उससे बड़ा क्या है बताइए? हाउ कैन यू डिफाइन दैट पेन? इट इज बिय्ड वर्ड्स। तो व्हेन यू कम बैक होम हाउ कैन यू बी नॉर्मल? इनसेन ना टू बी नॉर्मल। सो इस आगे चलकर जब ऑपरेशन हुआ या जब ये आपको बच्ची मिली तब फर्स्ट रिएक्शन क्या था इसका?
(19:04) इस बच्ची का वो तो बेहोश पड़ी थी। पहले तो हॉस्पिटल में ही उसको पता भी नहीं होगा ना उसके साथ हुआ क्या? देखिए एक आठ साल की बच्ची को क्या मालूम कि वो क्या हो रहा है उसके साथ। है ना? जो बोल पाते हैं वो थोड़ा बहुत बता देते हैं कि ऐसे एक अंकल ने मुझे ये किया वो किया मतलब अपनी बच्चों वाली लैंग्वेज में बट ये गूंगी भरी बच्ची क्या ही बताएगी है ना तो वो बहुत ही उसको पता ही नहीं उसकी आंखें बस शॉक में थी और रोई जा रही थी वो उसके और जब वो होश में आई क्योंकि मल्टीपल सर्जरीज हुई तो वो बेहोश थी तीन-चार दिन तो आईसीयू में थी और कहते हैं ना नेल इन द
(19:41) कॉफिन वो सरकारी हॉस्पिटल्स का हाल हालात आपको मालूम है हमारे देश में और आप मानेंगे मैं और मेरी टीम जब पहुंचे हैं अस्पताल में उसको मिलने के लिए तो 15 लोग उसी कमरे में थे जिस कमरे में वो हॉस्पिटल सर्जरी के बाद इमीडिएट लाई गई और उसको बहुत पेन हो रहा था जैसे मैंने अभी बताया जला जगह-जगह से जलाया भी दी गई थी और कटने के निशान थे सर्जरी हो रखी थी प्राइवेट पार्ट की तो जब मैं वहां उस कमरे में पहुंची साथ ही में एक साथ वाले बेड पर बहुत जोर-जोर से एक आदमी चिल्ला रहा था उसकी टांगे में एक्सीडेंट में कट गई थी। उसके बाजू में कोई और किसी बीमारी से
(20:19) ग्रसित था। तो वो 15 लोगों के रूम में वार्ड में थी और दीवारें गिर रही थी। एसी तो बिल्कुल चल ही नहीं रहे थे। थे ही नहीं। पंखे भी खराब थे और यह बहुत गर्मी अभी थोड़े दिन पहले की बात है। और खिड़कियों पे जाले लगे हुए थे। बहुत ही बुरे हालात में वो कमरा था और उसको इंफेक्शन का भी डर था। तो मैंने उन्हें बोला कि आप इन्हें आईसीयू में शिफ्ट कीजिए। सरकारी हस्पताल की बात है। तो मैंने वहां डॉक्टर्स को रिक्वेस्ट की कि हम खर्चा देखेंगे। आप आईसीयू में शिफ्ट कीजिए। तो मुझे बताया गया ये आईसीयू है। तो आप सोच सकते हैं कि हमारे देश के
(20:56) हॉस्पिटल्स का क्या हाल है? तो मैंने कहा आपका ये आईसीयू है। ये क्योंकि दिल्ली की बात नहीं है। दिल्ली के सरकारी हॉस्पिटल के आईसीयू फिर भी थोड़ा बहुत आईसीयू दिखते हैं थोड़ा बहुत। यह किसी और स्टेट के किसी यूपी के एक छोटे से जिले की बात है। तो फिर मैं उस दिन मुझे लगा इसकी हीलिंग जो एक हफ्ता 10 दिन महीना में होने वाली थी इसको एक साल लग जाएगा। अब क्या कर सकते हो? कहां-कहां बदल सकते हो? पहले तो उसके साथ इतना गलत हुआ। फिर उसके साथ इस तरह इलाज के लिए आप सोचिए। छतें टपक रही थी वहां पर। हम तो क्या हीलिंग होगा उस बच्चे का?
(21:31) और साथ वाले बेड पे जो इतनी जोर-जोर से चिल्ला रहा है पेन में उसको देख के उसकी पीड़ा और बढ़ेगी या कम होगी? राइट? सो ये जो जितने भी बलात्कार के केसेस हमारे देश में हो रहे हैं और यह काफी देर से चल भी रहा है। आप देखते हो कि कोलकाता के ऊपर सब ने बहुत आवाज उठाई। जस्टिस जस्टिस फिर सुप्रीम कोर्ट ने ही बोल दिया कि वापस चले जाओ काम पे। सभी डॉक्टर्स वापस चले गए। और फिर से मैं देखता हूं कि फिर से कोलकाता में फिर केसेस शुरू हो जाते हैं। तो मैम रेप के लिए जस्टिस की कब तक कैंडल्स जलती रहेंगी और प्रोटेस्ट होता रहेगा और जस्टिस नहीं
(22:08) मिलेगा। देखिए में जो हुआ वो रोज हो रहा है हमारे देश में। हर हर स्टेट में हो रहा है। हर डिस्ट्रिक्ट में हो रहा है। दिल्ली में हो रहा है लगातार। ठीक है? ये क्योंकि वो डॉक्टर बेटी के साथ हुआ था और पढ़े लिखे लोगों की सपोर्ट थी। बाहर बाहर बात आ गई। बट यहां पर हमारी बेटियों के साथ रोज होता है। जस्ट बिकॉज़ वो पढ़ी लिखी नहीं होती या उनके लिए बोलने वाला कोई नहीं होता। ऐसा नहीं है। दिल्ली जैसे शहर में रोज बलात्कार की और हत्या की घटनाएं होती हैं। रोज एव्री सिंगल डे दिल्ली में बता रही हूं छोटे-छोटे बच्चों की भी। तोक में वो
(22:41) न्यूज़ बना अच्छी बात है। कुछ-कुछ केसेस पॉलिटिकल रीजंस से न्यूज़ बन जाते हैं। जब मैं कह रही हूं पॉलिटिकल रीजन से क्योंकि वहां किसी और सरकार की गवर्नमेंट की सरकार है यहां कोई एजेंडा चलते हैं पॉलिटिशियंस के तो वो एक दूसरे को नीचा उतार दिखाने के लिए वो हाईलाइट कर देते हैं। हाईलाइट तो हर केस होना चाहिए मेरी नजर में। बट जहां पर पॉलिटिकल एजेंडा होता है वो जरूर हाईलाइट करते हैं। पर हाईलाइट होने से भी समस्या का समाधान तो नहीं निकलता। हम बलात्कार तो अभी भी हो रहे हैं। तो जब तक यह सरकारें अपना पॉलिटिश पॉलिटिक्स को भुनाना बंद नहीं करेंगे इन केसेस पर और सच
(23:17) में काम करेंगे। आपने आज तक सुना पार्लियामेंट में चर्चा हुई है कि रेप कैसे रुके? मैम मैं तो जब भी वो खोलता हूं तब वो लड़ाई करते हैं। उसके बाद वो सेशन खत्म हो जाता है। स्थगित कर देते हैं। आज तक एक बार भी ऐसी चर्चा सुनी कि बलात्कार बंद होने चाहिए। आईए इस पे चर्चा करते हैं। किसी ने इनिशिएटिव लिया? सिर्फ राजनीति करते हैं। राजनीति रोटियां सेकते हैं। बच्चियों की इज्जत पर रोटियां सेकते हैं वो लोग। बट करने के लिए इच्छाशक्ति ही नहीं है। क्योंकि उनको फर्क ही नहीं पड़ता। क्योंकि दे आर इन अ वेरी प्रोटेक्टिव एनवायरमेंट। है ना? खुद तो
(23:47) घोड़ा गाड़ी गाड़ी जो भी है उनको बहुत सिक्योरिटी गार्ड्स ले चलते हैं। बट हमारी छोटी-छोटी बच्चियां सुरक्षित नहीं है और उसकी किसी को परवाह नहीं है। यहां पर एक आज ही मैं अभी किसी से बात करके आ रही थी। एक बड़े नेता के महिला नेता के ऊपर किसी ने अभद्र टिप्पणी की। गलत टिप्पणी की। बहुत उसके अगेंस्ट हमने भी बोला पूरी आज पार्लियामेंट स्थगित हो गई उसके चक्कर में। एक अभद्र टिप्पणी के चक्कर में जो कि गलत है। और यहां हमारी बेटियों की रोज इज्जत जा रही है। इज्जत मतलब मैं गलत वर्ड बोल रही हूं। इज्जत नहीं बोलना चाहिए। मतलब उनके साथ गलत हो रहा है। क्योंकि ये
(24:24) भी एक बदलाव करने की जरूरत है कि इज्जत करने वाले की नहीं जानी चाहिए। मतलब जिसके साथ हुआ उसकी नहीं जो कर रहा है। रहा है वो गलत तो जो इनकी वर्ड में एक नॉर्मल वर्ड में चलता है इज्जत चली गई उस एंगल में मैं बता रही हूं कि रोज हमारी बेटियों की उसके साथ गलत हो रहा है बलात्कार हो रहा है छेड़छाड़ हो रही है उस पे कोई चर्चा ही नहीं है तो ये हमारे देश का दुर्भाग्य है कि हमारे पास ऐसे राजनेता हैं जो सिर्फ और सिर्फ राजनीति में बने रहने के लिए राजनीति करते हैं और उनको ऐसे गंभीर मुद्दों पर बात भी नहीं करनी है। मैम आपने अभी बोला एक बहुत बड़ा क्लेम है
(24:58) कि दिल्ली में हर रोज बलात्कार हो रहे हैं और बढ़ भी रहे हैं। मैं आपसे यह जानना चाहता हूं कोई दिल्ली का केस अगर आप शेयर कर सकें। एक नहीं है हजारों केस है। कोई कोई एक केस जो शायद ज्यादा स्पेसिफिक आपके लिए ज्यादा हाईलाइटेड था जो कि ज्यादा ही एक्सट्रीम केस रहा। दिल्ली में अभी पिछले कुछ दिन पहले ही हमारे पास एक केस आया हमारी हेल्पलाइन नंबर पर। उस बेटी को चार साल की बेटी है। उनकी वो लेबर है और उसका बलात्कार करके मुंह तक कुचल दिया गया पत्थर से। 4 साल की बच्ची का ऐसा पत्थर से मुंह कुचला कि आप सोच भी नहीं सकते। बलात्कार करके हत्या हो
(25:33) जाती है। एक एक और बच्ची है। यह भी पिछले साल का केस है। लैंड लॉर्ड ने जो किराएदार हैं इमीग्रेंट्स जो माइग्रेट करके आते हैं लेबर्स उनकी ही बेटी के साथ तीन साल की बेटी के साथ और वो सीसीटीवी फुटेज भी सामने आई है कि वो ले गया अपनी गाड़ी में बिठाकर उसको और मतलब उसको उसने बलात्कार करके नाले में फेंक दिया। ठीक है? और जब वह नाले में फेंका उसने पहले उसने उसकी गर्दन दबाई और वह नहीं मर रही थी तो उसने उसकी गर्दन ट्विस्ट करके उसको गंदे नाले में फेंक दिया और आज तक पुलिस सभी सबूत ढूंढ रही है। तो आप ये हमारे दिल्ली के हार्ट में हो रहा है।
(26:14) छोटी-छोटी बच्चियों को इस तरह से किसी का मुंह नोच दिया जा रहा है। किसी के किसी को नाले में फेंक दिया जा रहा है। ये तीन दिन पहले भी एक बच्ची का शव मिला है। मैं छोटे बच्चों की बात बता रही हूं आपको। आप सोचिए और हत्या वाले मामले हैं ये और दिल्ली में तो ऐसे हजारों केस आप साल के मान के चलिए बट बलात्कार को नहीं दिखाते हत्या दिखा देते हैं एक तीन चार साल की बच्ची की हत्या करने के पीछे क्या मंशा होगी क्योंकि ये बलात्कार वर्ल्ड को दबाना चाहते हैं तो हत्या दिखा देते हैं हत्या हाईलाइट हो जाती है बट उस बच्ची के साथ क्या टॉर्चर हुआ होगा और यह करने वाले
(26:51) यहीं है ना हमारे आसपास और यह दिल्ली है बट किसी का ध्यान ही नहीं है इस तरफ। लगभग दिन में एक ऐसा केस तो होता ही है मिनिमम। बलात्कार तो बहुत होते हैं क्योंकि अस्पताल में अगर आप जाएंगे सरकारी अस्पताल में छोटे-छोटे बच्चों के बलात्कार की घटनाएं आप दिन में एक अस्पताल में तीन से चार केस आते हैं सरकारी अस्पताल में। एवरेज दिल्ली में कितने बलात्कार होते हैं दिल्ली? रिकॉर्ड पे नहीं आते ना? जैसा कि मैंने आपको बोला रिकॉर्ड एफआईआर में तब्दील हो जाए। बड़ा मुश्किल है। ली अगर आप कोई नंबर दे सके बलात्कार तो बच्चियों की छोटी बच्चियों के
(27:29) लड़कियों के इन टोटल कितने बलात्कार होते हैं दिल्ली में? मैं बच्चियों की इसलिए बोल रही हूं कि लड़कियां तो फिर भी आके रिपोर्ट कर देती हैं। अ छोटे बच्चे बोल नहीं पाते हैं। है ना? तो ये भी प्रॉब्लम है। तो उनको धमकाना आसान होता है। स्कूल्स में मोलस्टेशंस होते हैं। तो नंबर बताना मेरे लिए थोड़ा सा मुश्किल है। बट जो रिपोर्ट हो पाते हैं जिसमें एविडेंट ब्रूटिटी है। ब्लीडिंग हो रही है। है ना? सर्जरी की जरूरत है तो वो तो अस्पताल जाते हैं तो हस्पताल वाले 15 से 20 केस पर डे होंगे मिनिमम इन दिल्ली जो अस्पताल तक पहुंचते हैं और जो अस्पताल तक नहीं पहुंचते हैं
(28:05) जिसमें ब्रूटिटी ऐसी फिजिकल नहीं है मतलब है मोलेस्टेशन और बलात्कार है बट पेनिट्रेशन ऐसा है कि ब्लीडिंग नहीं है या व्हाटएवर रीज़ वो रिपोर्ट नहीं हो पाते। मतलब मैं आपको खुले शब्दों में बता रही हूं। 15 से 20 केसेस मिनिमम रिपोर्ट हो पा रहे हैं और हजारों केसेस ऐसे होंगे जो रोज रिपोर्ट नहीं हो पाते हैं। मतलब मैम लड़कों के साथ भी जी बलात्कार के केसेस बढ़ रहे हैं। बढ़ रहे हैं। जी जो बच्चे होते हैं अ उसमें बॉयज एंड गर्ल्स में आई वुड से हर तीन में से अगर एक बच्ची के साथ हो रहा है तो हर पांच में से एक बेटे के साथ भी हो रहा है।
(28:47) मैम ये भूख किसकी है? ये सेक्स की इतनी भूख बढ़ चुकी है क्या देश में? क्या हो रहा है? आई थिंक ये पहले से ही थी और ऐसा नहीं है कि बढ़ चुकी है क्योंकि आबादी बढ़ी है तो प्रोपोशननेटरी आपने पहले भी सुनाई थिंक आप और हम तो बहुत छोटे होंगे या नहीं भी होंगे। तब बहुत सारे केसेस आए थे। रंगा बिल्ला केस आपने सुना होगा जिसमें छोटे-छोटे बच्चों के बलात्कार करके मार दिया गया बॉय एंड गर्ल दोनों का। और यह सब बहुत सालों से होता आ रहा है। ऐसा नहीं है। अब मुझे नहीं मालूम वो भूख पहले से ही है या भूख बड़ी है या वो सोच की बात है, मानसिकता की बात है। बट जो मुझे समझ में
(29:18) आता है ये है कि एप्रोप्रियट टू द पपुलेशन वो संख्या उनकी भी बढ़ती है, क्रिमिनल्स की भी बढ़ती है। तो जिस तरह से 200 करोड़ टच करने वाले हैं हम। तो उस हिसाब से क्राइम भी बढ़ रहा है। पर अनफॉर्चूनेटली क्राइम प्रिवेंशन नहीं हो रहा है। इसको रोकने के लिए कोई काम नहीं हुआ ना आज तक। किसी ने आवाज नहीं उठाई। कोई बोलता ही नहीं है। यह शर्म की बात मानी जाती थी। तो दैट इज आल्सो अनदर रीज़न कि इस पे काम ही नहीं हुआ। सरकारें तो जैसा कि मैंने आपको बताया उनके लिए प्रायोरिटी नहीं है इस पे काम करना। और संस्थाएं भी बहुत कम है। हमारे जैसी संस्थाएं कम है जो इस पे काम
(29:55) कर रही हैं और कर भी रही है तो हमें कोई सपोर्ट नहीं है। अनफॉर्चूनेटली इस पे कोई जैसे फाइनशियल सपोर्ट हो तो हम और अवेयरनेस करें। हम हम और बातचीत करें इस इशू पर तो कोई सपोर्ट सिस्टम भी नहीं है। गवर्नमेंट में भी नहीं है और प्राइवेट लोग भी इसको डार्क सब्जेक्ट समझ के हमें सपोर्ट नहीं करते हैं। मम्मी रंगा बिल्ला क्या केस था? बिल्ला केस राजेंद्र नगर में एक पायलट थे हम और उनके दो छोटे बच्चे थे। एक बेटी और एक बेटा। वो आकाशवाणी में अपना सॉन्ग रिकॉर्ड सीखने जाते थे या म्यूजिक ऐसा कुछ था। छोटे ही थे दोनों। शी मस्ट बी अराउंड 16 ईयर ओल्ड
(30:32) गर्ल एंड 14 या 12 ईयर ओल्ड बॉय। तो वो राजेंद्र नगर से दूरदर्शन तक ये आकाशवाणी तक जा रहे थे कनोट प्लेस। तो वो जो धौलाकों वाला पैच है वहां पर इनका अबडक्शन हो जाता है और दोनों बच्चों को गाड़ी में आधा घंटा घुमाया जाता है। एक किसी ने ट्राई भी किया उसको रेस्क्यू करने का। बट फिर वहीं पर उनका बलात्कार करके मार दिया जाता है दोनों को। एंड दिस हैपेंड इन 80। तो उनको फांसी की सजा मिली थी रंगाबिला को। यह बहुत फेमस केस था। इनफैक्ट दिस इज द केस व्हिच आई एक्चुअली ट्रिगरर्ड माय थॉट्स आल्सो। बिकॉज़ मैं तो जब नहीं जानती थी बट इसके बारे में मैंने बहुत रिसर्च की
(31:08) पढ़ा। तो दिस दिस टर्न आउट टू बी कि वो अच्छे घर के बच्चे थे तो बाहर आ गई बात। उन्होंने फाइट किया जस्टिस के लिए। बट गरीब तबके में ये आज भी बहुत होता है। बट ये लोग के पास ना रिसोर्सेज होते हैं, ना पैसा होता है, ना इतना वो लोग स्ट्रांग होते हैं कि वो लड़ पाते हैं अपने लिए। एक रेपिस्ट की मेंटालिटी क्या होती है? उसकी मेंटालिटी यह है कि यह लड़की या यह बेटी या यह जो भी है एक शरीर है और मुझे अभी उसके ऊपर जो भी उसका मानसिकता हो या कंट्रोल नहीं है या वो गलत बात है कि कंट्रोल तो खैर एक एक शब्द है कि भाई नहीं है। बट उसे लगता है कि वह बच जाएगा। कि यह
(31:50) मैंने कर दिया यह तो कौन बोलेगा जाके? कैसे बोल पाएगी? यह तो बेजुबान है। यह छोटी है या यह मेरा हक है। महिलाओं को जो हमने दिखाया ना आज तक वो ऐसा ही दिखाया है कि दे आर बॉडी। दे आर बॉडी। दिमाग है ही नहीं, कुछ है ही नहीं। बस शरीर है। तो जब तक हमने वो प्रोजेक्शन पे काम ऐसा किया कि उसको सिर्फ और सिर्फ बॉडी दिखा दिया, तो वो बॉडी की तरह ही रह गई ना फिर। आप अभी बाहर चले जाओ। आप गली में निकल जाओ। द वे मैन विल मेक कमेंट बॉयज विल कमेंट ऑन द गर्ल्स। इट विल नॉट इट वुड नॉट बी बिय्ड बॉडी। इट विल नॉट बी अबाउट देयर इंटेलिजेंस
(32:35) अबाउट एनीथिंग एल्स। इट विल बी ऑल अबाउट देयर बॉडी पार्ट्स। एंड यू नो इट वेरी वेल। यू आर इन दिल्ली। हमारे देश के अंदर अगर मैं आपसे पूछूं कि कौन सी स्टेट में सबसे ज्यादा बलात्कार हो रहे हैं तो वो क्या होगा? सी एस पर एनसीआरबी जो एनसीआरबी का डाटा है वो राजस्थान को नंबर वन बताते हैं। ठीक है? और बिकॉज़ राजस्थान इज़ अ फेयरली बिग स्टेट तो वो राजस्थान को बताते हैं। बट हमें केसेस आते हैं यूपी से भी आते हैं। हरियाणा से आते हैं। दिल्ली मैं तो आपको दिल्ली का ही बता रही हूं। दिल्ली से आते हैं बराबर। मध्य प्रदेश से आते हैं। साउथ
(33:10) से कम आते हैं। साउथ में थोड़ा कम है क्योंकि एजुकेशन लेवल ज्यादा है। थोड़ा बेटर है। नॉर्थ ईस्ट से सबसे कम आते हैं। क्योंकि वहां मैट्रियाकल सोसाइटी है। तो इसीलिए आपको एनालाइज करना बहुत जरूरी है कि बलात्कार वहां कम होते हैं जहां पर महिलाओं को बराबरी के अधिकार है। तो वहां जो नॉर्थ ईस्ट में स मातृसत्ता पितृसत्ता बराबर है। इसीलिए रीजन है कि वहां महिलाओं को बराबर समझा जाता है। शरीर नहीं और इसीलिए उनको वहां पर वायलेंस कम है। हर तरह की सेक्सुअल वायलेंस, डोमेस्टिक वायलेंस हर तरह की वायलेंस कम है। मैं ये नहीं बोलूंगी जीरो है। बट यहां
(33:46) के मुकाबले काफी कम है। अगर यहां 100 केस आते तो वहां एक केस आता है। नॉर्थ ईस्ट इतना अच्छा है। इतना सेफ है महिलाओं के लिए। उसको उसका क्रेडिट नहीं मिला। और हमने तो कभी खैर उन्हें अपना देश का हिस्सा भी नहीं माना। अनफॉर्चूनेटली मेन स्ट्रीम में ही नहीं समझा उनको। हाउ डेरोगेटरी वर्ड्स आर यूज्ड फॉर नॉर्थ ईस्ट पीपल हियर बट उनसे सीखने के लिए बहुत कुछ है। श्योर मतलब मैम इनडायरेक्टली आप ये कह रहे हो जैसे अगर अभी हम बाहर जाएं एवरेज बाहर दुकान में कुछ लेने जाएं तो हमें दिखेगा कि एक मेल है वहां पर और अगर हम नॉर्थ ईस्ट में जाएं तो हमें ज्यादातर दिखता है
(34:24) लड़कियां भी बहुत ज्यादा मेन स्ट्रीम काम कर रही हैं। तो आप कह रहे हो कि जहां पर इक्वलिटी होती है वहां पर बलात्कार कम होते हैं। कोई भी वायलेंस कम होती है। कोई भी वाय कम होता है। इज दिस अ सिमिलर स्टेट जो पहाड़ी इलाके हैं वहां पे भी ऐसा है? बिकॉज़ वहां भी बहुत सारी लेडीज़ दिखती हैं जब हम जाए तो। हां मैट्रियाकल सोसाइटी में फर्क कम होता है। इसीलिए वहां पर कम है। बट डोमेस्टिक वायलेंस है वहां पर जो मेरी स्टडी है पहाड़ी इलाकों में। पहाड़ी इलाकों में जैसे कोई स्टेट जैसे उत्तराखंड हिमाचल वहां शराब थोड़ा ज्यादा पी जाती है। एंड और मारपीट होती है
(34:53) महिलाओं में। वो केसेस ज्यादा है बट बलात्कार के केसेस कम है। सो मे बी अल्कोहल तो हर जगह प्रयोग होती है बट कई वो एक अपब्रिंगिंग है मानसिकता है क्योंकि इसलिए मैं नॉर्थ ईस्ट का एग्जांपल अलग से दे रही हूं क्योंकि वहां मैट्रियाकल सोसाइटी है। ठीक है? उत्तराखंड में चाहे महिलाएं काम करती दिखेंगी। हां उनके डिसीजन मेकिंग में भी काफी है। बट इफ दैट्स व्हाई इफ आई हैव टू रेट आफ्टर नॉर्थ ईस्ट दैट विल बी दीज़ एरियाज। बट हाउ एवर नॉट एनीवेयर क्लोज टू नॉर्थ ईस्ट मैम व्हिच इज द वर्स्ट स्टेट इन इंडिया वर्स्ट देखिए वर्स्ट मैं आपको जैसे बता
(35:29) रही थी अगर आप एनसी एनसीआरबी के डाटा के हिसाब जाएंगे तो राजस्थान बोली जाती है बट वर्स्ट तो मैं दिल्ली बोलूंगी ना आप बताइए राजधानी है पावर सेंटर है और आप यहां पर ही बलात्कार रोक के नहीं दिखा पा रहे हैं तो वर्स्ट तो यही हुआ ना हमारी राजधानी यहां तो सबसे सुरक्षित होना चाहिए यहां पर तो इतनी आबादी है और लोग दिखते हैं गांव भी नहीं है ओके मैम जो एक रेप विक्टिम होता है उसकी आफ्टर लाइफ कैसी होती है? डिपेंड करता है। देखिए बहुत सारी लड़कियां हैं जो कोप अप कर लेती हैं एंड दे डू व्हाट दे वांट टू डू। देयर आर एग्जांपल्स दे लिव नॉर्मल लाइफ। बट मोस्ट ऑफ देम दे
(36:06) आर शेटर्ड। वो जिंदगी भर कहीं ना कहीं उनके ये साथ चलती है सच्चाई। और छोटे बच्चों के साथ एक यह है कि दे गो थ्रू अ लॉट जो फिजिकल इंजरीज है उनकी बट मेंटली वो हील कर जाते हैं क्योंकि छोटे बहुत होते हैं तो उनको याद नहीं रहता बाद में है ना थोड़ा बहुत रहता है हल्काफुल्का उनकी काउंसलिंग्स हेल्प करती हैं बट जो थोड़ी सी बड़ी बच्ची है ना वो थोड़ा ज्यादा इस चीज को कैरी करती हैं पूरी लाइफ तो आई थिंक हमको हर केस का अलग-अलग समझ के उनके ऊपर काम करना पड़ता उनको काउंसलिंग्स करानी पड़ती है। उनकी रिहबिलिटेशन प्रोसेस सबके अलग-अलग होते हैं। पढ़ाई नहीं कर
(36:46) पाते, फोकस नहीं कर पाते। तो दीज़ आर द थिंग्स। कोई मैम ऐसा इंडिया का केस है जिसमें कोई बहुत बड़ा कोई पॉलिटिशियन इनवॉल्वड हो। बहुत बड़ा ये तो अपने आप में बहुत बड़ा केस था जिसमें जो आपने बताया बिहार वाला बहुत बड़ा पॉलिटिशियन इनवॉल्व हो तो वो बाहर ही नहीं आएगा। वेरी अनफॉर्चूनेट तो इनवॉल्व तो होते हैं पर आता नहीं है बाहर। आप देखिए ना ये कुलभूषण बृजभूषण सॉरी तो आप बताइए खत्म ही गॉट बेल ही इज आउट ही इज इक्विटेड खत्म हो गया वो आपको क्या लगता है वो रेसलेस झूठ बोल रही थी और एक छोटी बच्ची ने भी उस पे मोस्टेशन का सिस्टर्स वो गार्ड सिस्टर्स तो मेजर थी जो एक माइनर
(37:23) बच्ची ने पॉक्सो केस लगाया था वो भी खत्म हो गया उसके अगेंस्ट बच्ची ने केस वापस ले लिया और पॉक्सो केस में ऐसा होता नहीं है ठीक है तो हमारे सामने इतना बड़ा एग्जांपल है कितने प्रोटेस्ट हुए, सब कुछ हुआ। फिर भी नथिंग हैपेंड अगेंस्ट हिम। ही स्टिल अ फ्री मैन। आपके पास कुछ प्रूफ है बृजभूषण के अगेंस्ट? मेरे पास नहीं है। बट आई मेट दीज़ रेसलर्स। मैंने मैं प्रोटेस्ट में थी और लगातार मैंने अब प्रूफ किसी के पास मुलस्टेशन का नहीं होता है। ठीक है? सबसे बड़ी बात है बलात्कार को प्रूफ करना। इज़ नॉट दैट इजी अनलेस देयर आर फिजिकल इंजरीज़। मोलस्टेशन
(38:00) और स्टॉकिंग और जो है हरासमेंट उन्होंने सहा उसको प्रूफ नहीं कर सकते। कुछ-कुछ प्रूफ उन्होंने दिए थे कोर्ट में जो कि बिल्कुल खारिज हो गए और ही इज़ अ फ्री मैन नाउ तो अभी कुछ कहना भी बेकार है क्योंकि उसको कोर्ट नहीं छोड़ दिया तो हम क्या बोल सकते हैं मैम तो फिर एक बात बताओ ना ये जो मदस्टेशन है ये जो जितनी बातें हैं मतलब अगर आप उस एंगल से देखो तो कभी भी वो प्रूव ही नहीं हो सकती अब जैसे मान लो उन्होंने बोला कि भाई एक लड़के ने मेरे को छेड़ा क्या डेफिनेशन है छेड़ा की कैसे है अब मान लो वो इतना डार्क है कि वो जो ऑलरेडी सफर
(38:29) कर रहा है वो क्या ही बताएं तो फिर मैम प्रूव कैसे होगा व्हाट इज अ प्रैक्टिकल अप्रोच हां तो उसमें लीगली ली तो यह है कि ओनस जो है ऑन द मैन है वो प्रूफ करे कि उसने नहीं किया। लॉ यह कहता है लॉ यह कहता है कि अगर आपने लड़की ने रिपोर्ट कर दी कि मेरे साथ छेड़छाड़ बलात्कार कुछ भी हुआ है तो उसको एफआईआर में रजिस्टर करना पड़ेगा और यह ऐसा नहीं किया है या नहीं हुआ है वो लड़का प्रूफ करेगा ओनर्स उसके ऊपर है। वो प्रूफ कर दे कि मैंने नहीं किया है। तो टेक्निकली टोनर्स इज़ ऑन द मैन। लड़की की स्टेटमेंट एज इट इज ली जाती है। बट बहुत कम लड़कियां झूठ बोलेंगी कि हुआ है।
(39:06) अगर सच में कौन चाहेगा? हालांकि मिसयूज है। मैं उस चीज को डिनाई नहीं कर रही हूं। आई एम नॉट सेइंग कि मिसयूज नहीं है। बट ऑन एन एवरेज एक पुलिस वाले के पास इतनी कॉमन सेंस होती है कि उसे समझ में आता है। बट एनी हाउ उसको तो रजिस्टर करना ही पड़ेगा। जैसे मैंने बोला लॉ कहता है। बट जजेस आर आल्सो नाउ वेल इक्विप्ड टू नो कि यह सच है या नहीं है। और इतनी तो हमारी एडवांस टेक्नोलॉजीस भी हैं। फोन का लोकेशनेशंस होते हैं। देयर आर 100 अदर थिंग्स जिससे आप जान सकते हो कि वो दोनों उस लोकेशन पे थे कि नहीं थे। आजकल तो सब कुछ आसान है ना टेक्नोलॉजी।
(39:41) मैम जैसे कई बार ये चीज बाहर आती है कि जब कोई लड़की रेप के लिए रिपोर्ट करती है तो उसको मार्क्स दिखाने पड़ते हैं। पुलिस कहती है ये जिस तरह दिखाया जाता है। क्या होता है? व्हाट हैपेंस? एक्सैक्टली आफ्टर अ गर्ल गोस थ्रू समथिंग लाइक रेप? यह तो बहुत ही एक फिल्मी कहानी है कि वो उसको मार्क्स दिखाने पड़ते हैं। ये वो ये सब होता है उसमें आपकी डॉक्टरी जांच में मेडिकल जो होते हैं तो पुलिस हैज़ नो ड्यूटी टू डू मेडिकल। मेडिकल जो होता है वो हॉस्पिटल में होता है। आजकल बहुत डिफाइंड है और डॉक्टर्स द्वारा होता है। ठीक है? और महिला है तो महिला डॉक्टर
(40:14) द्वारा ही होगा। और इसमें यह भी बहुत डिफाइंड है कि प्रोसीजर्स क्या है? एसओपीस क्या है? तो पुलिस स्टेशन भी जाने की जरूरत नहीं है एक महिला को अपना बलात्कार दर्ज कराने के लिए। तो शी कैन डायरेक्टली गो टू हॉस्पिटल। वहां पर एक वन स्टॉप सेंटर है जहां पर उसको सब तरह की मदद काउंसलिंग, गाइडेंस, वकील, पुलिस सब वहां मिलना चाहिए। ये एक रूल बना हुआ है और ये लागू हो गया था निर्भया के बाद से पूरे इंडिया में। उसकी इंप्लीमेंटेशन नहीं है। आज भी दिल्ली की एक या दो हॉस्पिटल में आपको वन स्टॉप सेंटर खुले मिलेंगे। इसीलिए जब किसी महिला या बेटी के साथ बलात्कार होता है तो
(40:51) किसी को पता ही नहीं है। इसकी कोई अवेयरनेस कोई फैलाई नहीं इन्होंने। इसीलिए मैं सरकारों से थोड़ी नाराज हूं कि जो चीज ये कर सकते थे वो करना चाहिए था। इन्होंने कोई अवेयरनेस नहीं दी इस चीज के बारे में। तो आइडली पुलिस स्टेशन जाने की जरूरत नहीं है। बट फिर भी लोग पुलिस स्टेशन जा रहे हैं। फिर भी लोग पुलिस के थ्रू जाते हैं क्योंकि उन्हें पता नहीं है। सो पुलिस कांट डू मेडिकल। वो उनको भेजना ही पड़ता है मेडिकल कराने के लिए। कौन से हॉस्पिटल हैं जो दो आप बता रहे हो दिल्ली में? नहीं नहीं हर हॉस्पिटल में होता है गवर्नमेंट। पर कह रहे हो ना इंप्लीमेंटेड नहीं है।
(41:21) इंप्लीमेंटेड तो किसी भी हॉस्पिटल में बहुत अच्छे से नहीं है। बना होगा। अच्छा आप ये भी बड़ी मजे की बात है। अगर आप किसी सीनियर डॉक्टर से या गार्ड से या किसी से भी पूछोगे रिसेप्शन पे कि वन स्टॉप सेंटर कहां है? तो उनको पता ही नहीं होगा वन स्टॉप सेंटर क्या है। ये आप चाहे सदर जंग चले जाएं चाहे आप एम्स में चले जाए। वहां पर भी 100 बार सोचना पड़ेगा। बट है वहां पर और बिल्कुल खाली होता है। वहां पे कोई आता नहीं है क्योंकि उन्हें पता ही नहीं है लोगों को। होगा क्या कहीं पर है एक्टिव कोई जा सकता है बहुत अच्छा एक्टिव मतलब एम्स में फिर भी
(41:49) कमरा बना हुआ है ठीक-ठाक सा और शब्द जंग में भी है जिसे ढूंढना पड़ता है कमरे को हमें एक बार एक विक्टिम को मैं खुद ही ले गई थी तो हम कमरा ही ढूंढे जा रहे थे कहां है बताओ हां तो वही है कि है फॉर नेम सिक और ये दो बड़े अस्पताल है दिल्ली के बाकी तो फिर मैम और जो मेडिकल की आप बता रहे हो बात कर रहे हो कि जब एक रेप होता है तो मेडिकल में किस तरह से क्या एसओपीस होते हैं जो उनको गवर्नमेंट को फॉलो करने होते हैं गवर्नमेंट गवर्नमेंट को यह फॉलो करना पड़ता है कि उसको ऑफ कोर्स मार्क्स क्या है? इंजरीज क्या है? और डीएनए कलेक्शन पुलिस वाले भी याद आ जाते हैं। फॉरेंसिक
(42:20) कलेक्शन उसके कपड़े कपड़ों पे दाग या कोई निशान ये सब फॉरेंसिक का हिस्सा है। और उसकी एविडेंस कलेक्शन होती है। फिर वो कोर्ट में पेश होती है। और दिस इज़ हाउ द प्रोसीडिंग हैपन। मैच होता है डीएनए। है ना? राइट? कि एक्यूज़ को उसी यहां पर पकड़ा अगर नहीं पकड़ा गया तो पकड़ता है तो मैच होता है। बहुत सारी टेक्निकिटीज हैं उसमें और बहुत सारे लीगल एसओपीस हैं। मैम कभी फेक रेप केस भी होता है क्या? हां होते हैं। कैसे होता है फेक रेप केस? फेक रेप केस वो पढ़ी लिखी वो महिलाएं हैं जिन्हें बदला लेना है किसी लड़के से और क्या किसी से वेंडेटा है तो वो बस बोल
(42:58) देते हैं कि हुआ है। एज द लॉ सेज़ कि ओनर्स इज़ ऑन द एक्यूज़ टू प्रूव इट। अब प्रॉब्लम यही है कि हर लॉ का मिसयूज़ है। बट यहां पर मिसयूज़ कर रहे हैं। मैं तो उस चीज़ को डिनाई नहीं कर रही हूं। बट अगर आप देखें कि हालात क्या है जो कि मैंने अपनी इतनी देर में आपको बताया कि कितनी बुरी गंभीर हालात है तो उसको देखा जाए तो ठीक है मिसयज है तो मैं उस चीज हम आगे ये मिसयूज कैसे होता है एक फेक रेप केस आगे क्या होता है उन्होंने बोल दिया कि रेप हुआ अब उन्होंने मार्क्स भी दिखा दिए मार्क्स बनाना कोई बड़ी बात नहीं फिर आगे मार्क्स नहीं भी हो इट इज नॉट नेसेसरी कि
(43:30) हर बलात्कार में आपको मार्क्स मिले ओके ठीक है बलात्कार अपने आप में एक जगन्य घटना है। वी डोंट हैव टू कैरी मार्क्स है ना मार्क्स अ तो बट ओनली थिंग इज़ कि उसमें फिर अरेस्ट होता है और वो प्रूव करता है कि नहीं हुआ जजेस मैंने बताया ना कि आजकल इतना प्रूफ इतना टेक्नोलॉजी एडवांस है तो आई थिंक फेक केसेस को आराम से अलग कर पा रहे हैं। ऐसा नहीं है कि नहीं कर पा रहे हैं। राइट राइट? सो मैम अगर ये कोई मैं तो कहती हूं जिन्होंने फेक केस किया उन पे रिवर्स पेनल्टी लगनी चाहिए। उनको रिवर्स जेल होना चाहिए। होना चाहिए। ऐसी लड़कियों को भी जेल जाना चाहिए जो फेक केस
(44:05) करती है। आजकल में एलुमिनी वगैरह का भी बहुत ज्यादा चला है ना ये। हां वो सब है। मतलब एलुमिनी और मेंटेनेंस इज अ डिफरेंट बॉल गेम ऑल टुगेदर। वो एक डोमेस्टिक वायलेंस का हिस्सा है। पर अगर किसी ने फेक रेप केस किया क्योंकि रेप एक गंभीर मामला है। और अगर किसी ने बोला कि मेरे साथ बलात्कार हुआ और उसके साथ नहीं हुआ तो मुझे लगता है उस लड़की प्रूव हो गया अगर उसके साथ नहीं हुआ तो शी शुड गो टू जेल। जाना चाहिए। ये लॉ भी होना चाहिए। राइट राइट राइट। मैम अब जब सब कुछ है अब लॉ तो आप बता रहे हो मोस्टली अब किसी मिनिस्टर से बात कर लो उनकी स्पीच सुन लो
(44:37) आपको ऐसा फील होगा कि यार देश में तो कुछ कमी है ही नहीं ना किसी लॉ में कोई कमी सब कुछ कितना अच्छा चल रहा है ये हो रहा है वो हो रहा है वो हो रहा है तो हमारे लॉ में कमी कहां है फिर लॉ में तो कोई कमी नहीं है लॉ तो बहुत अच्छे हैं हमारे इंप्लीमेंटेशन में कमी है ना इंप्लीमेंटेशन कैसी होगी एग्जीक्यूशन में कमी है और ये लोग की जो दिखावटी बातें हैं ना उसमें कमी है कि ये लोग सच को सच माने कि हां हो रहे हैं बलात याद कर और देश में जो समस्या है उसको समस्या को समझें और उसको उस तरह से निपटे। बहुत सारे फालतू के इश्यूज को लेकर यह लोग हंगामा
(45:07) खड़ा करते रहते हैं। पर जहां बेटियों की बात आती है वो लोग नहीं इसको समझते। उनको समझना पड़ेगा और लॉ अच्छे हैं। उनको इंप्लीमेंट करने के लिए जो पुलिस है वही पुलिस एक वीआईपी ड्यूटी भी कर रही है। वही पुलिस फालतू के काम भी कर रही है नेताओं के। तो मुझे लगता है एक डेडिकेटेड टास्क फोर्स होनी चाहिए पुलिस की जो इन केसेस की एक्सपर्टी रखती हो। ओके मैम एक नैरेटिव अक्सर अगर आप आज भी गांव में जाओगे तो अक्सर लोग बोल देते हैं कि वो लड़की ऐसी हरकतें कर रही थी जिसकी वजह से उनके अंदर वैसा आ गया तो वो लड़की ऐसे कपड़े ही क्यों डालती है जिससे कि आपने स्टेटमेंट
(45:44) जरूर सुनी होगी कि कानों से मैंने तो जा के सुनिए जा के सुनिए लाइव सुनी है कि लड़कियों के छोटे कपड़े थे इसीलिए उसका रेप हो गया तो इस पे आपको क्या लगता है तभी तो मैं बार-बार मानसिकता और सोच बदलने की बात करती हूं कि ये ये जो सोच उनमें आई है वो ओवरनाइट तो आई नहीं है। ये हमारे समाज से आई है। और ये हम वो कहीं ना कहीं वो टीवी पे भी वही देखते हैं कि एक बहू की क्या ड्यूटी है। एक बेटी की क्या ड्यूटी है? इतने कपड़े पहनने हैं वो एकता कपूर ने भी साड़ी और ज्वेलरी बना दी है तो वह पहननी है और इस तरह से दिखना है इस तरह से लगना है जहां पे औरत ने कुछ थोड़ा सा अलग
(46:16) किया बाहर निकली या बोलने लगी या छोटे कपड़े पहन लिए तो और या सिगरेट पी ली या जो भी है तो उन्हें लगता है कि ये अवेलेबल है ये कैरेक्टरलेस है तो ये जो सोच की बात है ना यह सोच का नैरेटिव भी तो हमने सोसाइटी ने ही बनाया ना और खाली महिलाओं पुरुषों ने नहीं बनाई महिलाएं भी इसमें भागीदारी हैं। तो कहीं ना कहीं वो सोच बदलेगी तो घटनाएं भी कम होंगी। तो यह सोच सिर्फ गांव के पुरुषों में नहीं है। आज शहर के पुरुषों में भी है और यह सिर्फ पुरुषों में नहीं है। महिलाओं में भी है यह सोच। तो यह बिल्कुल मानसिकता पे काम करने की जरूरत है। और हाउ डू वी चेंज द माइंडसेट लोगों
(46:50) का माइंडसेट कैसे बदले? शुरू से कैसे आप परवरिश करते हो? एक बेटे की बेटी की बराबरी रखते हो या नहीं रखते। ये वहां से शुरू होता है। तो वहां से ही बदलेगा। तब भी यह सब ठीक होगा। चाहे वो सुरक्षा चाहे वो रेप्स की बात हो चाहे वो डोमेस्टिक वायलेंस की बात हो या किसी भी तरह की आप मैम इससे ना लोग एक बात के साथ इसको अटैच करते हैं कि इससे वी आर आल्सो प्रमोटिंग सॉफ्ट पोर्न कि अब अगर आप इंटरनेट देखेंगे तो लोग ये एक नैरेटिव देते हैं स्पेशली जो अगर बात करोगे किसी से इस बात के बारे में कि आप Instagram खोल लो देखो एक सॉफ्ट पोर्न है एक तरह से लड़कियां दे आर सेलिंग
(47:24) देमसेल्व्स व्गैरिटी है तो हाउ डू यू डिफरशिएट इन व्गैरिटी इज़ डिफरेंट ऑब्जेक्टिव िफिकेशन इज डिफरेंट और अपनी मर्जी से कुछ जो पहनना और जो मतलब एक सहजता से जो पहनना है वो अलग है। एक एक अगर आप ट्रिगर हो रहे हो कुछ देख के तो यह आपकी प्रॉब्लम है। यू नो इट्स टू डू बट डेफिनेटली व्गैरिटी है। व्गैरिटी डेफिनेटली एग्रवेट द प्रॉब्लम। क्योंकि आप जैसा कि मैंने बोला कि आप बॉडी से बिय्ड जाने की बात कर रहे हैं। यू आर नॉट टॉकिंग अबाउट द बॉडी। तो जहां लड़कियां खुद ही अपने आपको एक दिखा ही रही हैं कि आई एम अ बॉडी। आई एम आई वांट टू बी कंज्यूम्ड एंड
(48:00) आई एम द प्रोडक्ट। तो ये ये चीज बदलनी है। यू डोंट प्रोजेक्ट योरसेल्फ एज अ प्रोडक्ट। यहां पर गलतियां हैं। मैं ये नहीं बोलूंगी छोटे कपड़े की गलती है। आप मैं अभी उड़ीसा गई थी। वी वर डूइंग अवेयरनेस विद मछुआरा कम्युनिटी। मैंने देखा उन्होंने साड़ी पहनी हुई थी और साड़ी में मतलब ब्लाउज नहीं होता उनके। एंड देन दे वेयर इट एंड समटाइम दे डोंट वेयर एनीथिंग। दे जस्ट वेयर अ धोती बट नोबडी वास लुकिंग एट देम एज वेलयर वो उनका वो है कल्चर है इवन आई वास लिटिल फीलिंग लिटिल कि ये अच्छा ऐसा यहां है तो बट इट इज़ अ नॉर्मल लाइफस्टाइल दैट्स नॉट व्गैरिटी यही
(48:40) आप उर्फी उर्फी जावेद की बात करें तो वो व्गैरिटी बिकॉज़ शी इज़ ट्राइंग टू ब्रांड हरसेल्फ मे बी टू ल्योर और व्हाटएवर मुझे नहीं पता व्हाट इज द सेंस ऑफ़ डूइंग इट मैं उन मच्छरों के लिए नहीं बोलूंगी यू गेट माय माय पॉइंट आप प्रोजेक्शन पे मुझे ऑब्जेक्शन है। आपके प्रोजेक्शन पे मुझे ऑब्जेक्शन है कि यू आर प्रोजेक्टिंग योरसेल्फ समवेयर टू गेट दैट अटेंशन दैट टेल्स यू दैट ओके आई एम टेंपटिंग। ठीक है? वो गलत है। वो वो गलत इसलिए है कि वो आप ही के लिए गलत है। यू डोंट बी द बॉडी। यू बी द माइंड, यू बी योर सोल। यू नो आप खुद ही को उस स्तर पर ले जा रहे हो।
(49:22) और उसको तो कोई छू नहीं पाएगा। है ना? बट वो छोटे बच्चों पर उतरेगा वो बहुत इन्फ्लुएंस होता है। बहुत इनफ्लुएंस होता है और वो उन्हीं को आइडल मान लेते हैं कि वो भी ऐसे करती है। तो व्हाई नॉट दिस इज नॉर्मल। हां दिस इज नॉर्मल एंड कहीं ना कहीं मतलब आई वांट टू व्हाट आई वांट टू से इज कि वो गलत वैसे गलत नहीं है कि वो अपना शरीर है। वो उसको उसके साथ कुछ भी करें। बट जब व्हेन शी वांट्स टू से कि मैं मतलब मैं यही हूं। एंड दिस इज़ आई वांट टू इंप्रेस मैन। तो जब आप इंप्रेस करने पर ही लगोगे अपनी पूरी जिंदगी इंप्रेस करने पर ही लगा दोगे तो मैन विल आल्सो कंज्यूम यू
(49:58) ना दे विल आल्सो टेक यू एस दैट तो वो कहानी वहां कहीं ना कहीं खत्म होनी चाहिए इसको आप कहीं ना कहीं से आर यू आल्सो लिंकिंग दिस टू समथिंग लाइक रेप अब्सोलुटली यस ओके अब्सोलुटली यस रेप्स क्यों हो रहे हैं कि आपने मैंने जैसा कि शुरू में ही बताया आपको कि यू वांट टू प्रोजेक्ट योर लाइक आपने महिला को सब एक्स कमोडिटी समझा हां दैट्स व्हाई यू थिंक कि उसको कोई फर्क ही नहीं पड़ेगा जो भी मैं उसके साथ कर लूं। अब कमोडिटी आपने समझा उसने भी अपने आप को कमोडिटी समझाया एक्सजेक्टली तो उसने ओके ओके तो ये मेरा पॉइंट है तो वो कहीं ना कहीं
(50:35) ब्रेक करना पड़ेगा ना व्हाई शी थिंकिंग शी इज़ अ कमोडिटी मैं वो मछरा औरत ने भी कुछ नहीं पहना था शरीर पे बट शी डिड नॉट थिंक ऑफ हरसेल्फ एस कमोडिटी गॉट इट है ना ये पॉइंट मतलब मैम माय योर सिंपल पॉइंट इज कि जब आप एक चीज को ल्योर करने के लिए कर रहे हो जैसे वो जो मछरा है उड़ीसा वाली लेडी है उनको फील भी नहीं हुआ कि इसमें कुछ है। राइट। सो उर्फी के केस में आप ऐसा बता रहे हो जैसे आजकल खुशी कपूर की बहुत ज्यादा वीडियोस वायरल हो रही हैं। आपने देखा होगा वो पैप्स के सामने वो कह रहे हैं मेरी बॉडी है। कुछ भी मैं डालूं क्या फर्क पड़ता है? तुम मत देखो। अपनी आंखें बंद कर
(51:06) लो। तो आप ये कह रहे हो कि कहीं ना कहीं यही लोग जो दूसरे को ल्योर करना चाह रहे हैं वो ही सोसाइटी में प्रॉब्लम क्रिएट कर रहे हैं। मे बी लर आल्सो इज नॉट द राइट वर्ड। मतलब आप लार्जर गुड नहीं कर रहे हो वुमेन के लिए। यू नो यू फॉर वुमेन आल्सो। हां। कैसे? आप एक बात बताओ आप अपने आपको एक यू हैव प्रोजेक्टेड एज अ प्रोडक्ट ऑफ योरसेल्फ ना आपने अपने को प्रोडक्ट बना दिया टू बी कंज्यूम्ड व्हाई वुड यू डू दैट पैकेजिंग कि मेरे को दिखाना ही है दिखा के ही मैं वायरल होंगी वीडियो में मतलब इफ आई रिवील अ पार्ट ऑफ़ माय बॉडी ओनली आई विल गेट वायरल अटेंशन मुझे तभी मिलेगी है ना
(51:44) दे आर नॉट ट्राइंग टू अट्रैक्ट वुमेन फॉर श्योर व्हाई वुड आई वॉच उर्फी सावंत मैम नाउ उर्फी सेज़ दैट ये मेरे बूब्स हैं तुम मत देखो आंखें बंद कर लो। अनफॉलो कर दो। मुझे फॉलो क्यों करते हो? आई एग्री विद हर। वो भी ठीक कह रही है अपनी जगह कि आप अनफॉलो करते हो। बट वो कर क्यों रही है? उसका एजेंडा क्या है? उसका मिशन क्या है? उसका मिशन क्या है? टू ल्योर टू प्रोजेक्ट हरसेल्फ टू सर्टेन मैन व्हाट व्हाट एक्स अल्टीमेटली व्हाट डस शी वांट? उसको चाहिए क्या? उसको तो अपने YouTube पे वायरल करना है और व्हाटएवर वाज़ अह मनी शी वांट्स टू। हो सकता है उसको उससे खुशी मिलती हो।
(52:20) आई डाउट आई डाउट आई डाउट कि आप एक पर्सनल स्पेस में तो फिर आप पूरा ही दिखा दो मतलब आप पूरे ही कपड़े उतार दो फिर अगर आपको ऐसा लग रहा है तो आप उतार दो पूरे कपड़े उर्फी की बहनों ने कहा था कि अगर लड़के ऐसे ना हो तो हम पूरा भी उतार देंगे लड़कों की सोच तो लड़के तो ऐसे हैं तो फिर तभी तो बोल रही हूं फिर तो इतना भी क्यों कर रहे हो दैट इज अ प्रॉब्लम ना आप अपने आप को प्रोडक्ट मत बनाओ मैं तो यही कहूंगी स्विमिंग स्विमिंग एक बात बताओ स्विमिंग चैंपियनशिप्स होती हैं। इससे भी छोटे बिकनी में हमारी महिलाएं स्विम करती हैं। इंडियन एथलीट्स होती हैं।
(52:57) करती हैं। करने दो उसमें कोई दिक्कत नहीं है। बट दे आर नॉट हैविंग दैट एजेंडा कि देमसे एक्सक्टली मतलब मे बी आई डिड वांट टू यूज़ दिस वर्ड कि वो टेंप्टेशन क्रिएट नहीं कर रही हैं। और टेंप्टेशन मैं ये नहीं कह रही हूं कि उन्होंने क्रिएट की तो वो जस्टिफाइड है। मैं वो भी नहीं कह रही हूं कि जो वी आर नॉट रेडी एज अ सोसाइटी। आप समझो टू एक्सेप्ट। 100% लिटरेसी तो नहीं है हमारी। 10% 20% है। अब इनको ये समझना पड़ेगा। इनको थोड़ा समझना ये पड़ेगा कि इंडिया में अभी इतने सारे स्कूल ही नहीं गए। गवार कह सकती हूं मैं कहूंगी कि ऐसे लोग हैं जो बैठे हैं कि
(53:38) किसी ताक में एक बच्ची मिल जाए उन्हें और वो बलात्कार कर दे। ऊपर से तुम ये सब करो। अभी तैयार नहीं है हमारी सोसाइटी। अगर हो सकता है हम फुल एडवांस हो बाहर की तरह जहां पोर्नोग्राफी तो आप होटल के अंदर ही देख सकते हो मे बी उस सोसाइटी में इफ दे वॉक लाइक दैट इज़ नॉट अ प्रॉब्लम बट यहां पर अगर आप अगर आपको कुछ अलग करना ही था तो आप यह भी कह सकते हैं माय माइंड आई वांट टू वर्क विथ देम माय बॉडी इफ माय बॉडी इज माइन माय माइंड इज आल्सो माइन तो यू शुड हैव कंट्रीब्यूटेड इन अ बेटर वे ना आपको फेमिनिस्ट ही तो दिखाना है अपने आपको तो
(54:10) कोई और अच्छा तरीका भी अपना सकते हो आई मीन मे बी दिस इज देयर वे ऑफ फेमिनिज्म बट देयर आर बेटर वेज़ ऑफ फेमिनिज्म यू शुड एमावर वुमेन इन टर्म्स ऑफ हो सकता है किसी बेटी के लिए आप लड़ाई कर लो तो दैट इज़ अ बेटर एमावरमेंट देन दिस बट उनकी खुद की सोच है तो आई डोंट वांट टू गो अगेंस्ट दैट बट एट द सेम टाइम इट इज़ नॉट हेल्पिंग एनीथिंग इससे कुछ अच्छा नहीं हो रहा है खराब हो रहा है यह कंफर्म है बहुत अच्छा नहीं हो रहा है तो उनको यह समझ नहीं है तो आई विल गिव हर बेनिफिट ऑफ़ डाउट ओके टू एंड दिस एपिसोड मैम हम एक छोटा सा सेगमेंट आपके किसी टीममेट के साथ भी लेना
(54:52) चाहेंगे जिसमें शी कैन शेयर समथिंग मोर अबाउट कि किस तरह के कॉल्स आते हैं। सो बिफोर यू लीव टुडेज एपिसोड, आई वांट यू टू आप अपने एंड से जितने भी लोग आज का एपिसोड देख रहे हैं, आप उनको क्या मैसेज देना चाहेंगे? गर्ल्स एंड बॉयज बोथ। सी मुझे देखिए अगेन अगर मैं गर्ल्स और बॉयज का अलग-अलग मैसेज दूं तो अच्छा नहीं होना चाहिए। बिकॉज़ वी टॉक अबाउट इक्वलिटी। बट अभी फिलहाल क्योंकि एज अ सिचुएशन डिमांड्स गर्ल्स को मैं यह बोलूंगी कि स्पीक अबाउट योर असॉल्ट। डू नॉट कीप मॉम। बात अपनी अगर आपके साथ कुछ गलत हुआ है तो बताओ और मिसयूज मत करो क्योंकि मिसयूज से
(55:30) नुकसान हो रहा है। डू नॉट मिसयज द लॉ बट यूज़ द लॉ फॉर श्योर। अगर आपके साथ गलत हुआ तो यूज़ करिए उस लॉ को। बोलिए अपने असॉल्ट के बारे में बताइए। अपने अब्यूज के बारे में बताइए और दूसरी महिलाओं को भी मदद कीजिए। ठीक है? बॉयज के साथ डेफिनेटली मैं यह बोलना चाहती हूं कि डू नॉट ट्रीट वुमेन एज ऑब्जेक्ट्स। ट्रीट देम एज इक्वल। वी डू नॉट वांट टू बी रेस्पेक्टेड एस देवी बट वी वांट टू बी रेस्पेक्टेड एज इक्वल और रिस्पेक्ट थ्रू वर्ड्स थ्रू एक्शन तो यू डोंट हैव टू बी लाइक अ फेमिन इन टर्म्स ऑफ कि आपको बहुत कोई महान बनना है यू जस्ट
(56:06) ट्रीट देम एज नॉर्मल डू नॉट डू ऑल दोज़ ऑब्जेक्टिफिकेशन वर्ड्स जो बहुत कॉमन है बॉयज के लिए तो मैं यह भी कह सकती हूं कि जिस तरह से आप लड़की आपके सामने से निकल के गई है और चार दोस्त खड़े हैं आप किस तरह से कमेंट करते हैं थोड़ा सा अब थोड़ा सा मुझे लगता है वो डिजिटलाइज हो गया है। अब लोग एक दूसरे को रील भेजते हैं और फिर वो कमेंट करते हैं। हो सकता है मैंने बिकॉज़ आई डोंट आई एम नॉट इनू दैट स्पेस। तो थोड़ा रिस्पेक्ट रखिए। जी दैट्स व्हाट आई वांट टू से। मैम मैं खुद पिछले आठ साल से एक एनजीओ चला रहा हूं छोटे बच्चों का। तो आई अंडरस्टैंड
(56:35) एज जब आप एक एनजीओ चला रहे होते हैं तो सोसाइटी जो हमें लगता है वैसी हमें रिसोंड करेगी। वैसी करती नहीं है। इन मेनी वेज़ बी नॉट जस्ट फाइनेंससेस बट अदरवाइज़ आल्सो। मुझे खुद बहुत लोग कहते थे अभी बहुत तुम बीमारी छोटी है। अभी ये कर लो वो लो। फिल एनजीओ बनाना। फिर मैंने जब आपको बाहर बताया कि मुझे ऐसा लगता है जब हम बूढ़े हो जाएंगे तब तो हम किसी नहीं है। लायक ही नहीं रहेंगे ना। तो ये हम अपना सेकंड काम क्यों बनाएं? बट द वे यू आर डूइंग इट आई वुड लाइक टू कमड यू ऑन बिहाफ ऑफ़ एवरीबडी और जो आप कर रहे हैं। आई एम श्योर कि यू आर डायरेक्टेड बाय अ हायर सोल
(57:07) एंड दिस इज अ पर्पस जिसके लिए आप आए हैं। थैंक यू सो मच फॉर व्हाट यू डूइंग एंड माय बेस्ट विशेस आर ऑलवेज विथ। थैंक यू सो मच। गुड लक विद योर वर्क आल्सो। इस एनजीओ के साथ जुड़े हुए हैं। आप कंप्लेंट्स लोगों की सुनते हैं। डेली बेसिस पे आपको बहुत सारे कॉल्स आते हैं। तो अभी के हिसाब से अ अगर मैं रेप की बात करूं तो कौन सी स्टेट से सबसे ज्यादा आपको कॉल्स आ रहे हैं? आप ये नहीं बोल सकते कौन सी स्टेट से आ रहे हैं? हर जगह से आते हैं, दिल्ली से आते हैं, हरियाणा से आते हैं, पंजाब से, पंजाब की तरफ से आते हैं, एमपी से आते हैं। मतलब एक जगह का हम वैसे भी हम खाली
(57:44) दिल्ली का नहीं करते। हम पैन इंडिया कर रहे हैं। कोई आप मुझे केस बताओ कोई ऐसा जिसमें आपका कॉल आया और आपने क्या किया और वोट दिया केस बताती हूं। एक हमारे पास अभी थोड़ा टाइम पहले ही एक 16 साल की लड़की का केस आया था। 16 साल की लड़की है तो उसके पापा का कॉल आया था। तो उसके पापा ने मुझे बताया कि ऐसे-ऐसे मेरी बेटी है तो उसके साथ गलत हुआ है। तो हमें समझ नहीं आई किस तरह से गलत हुआ है। तो जब हम पहुंचे वहां पे तो हमें जाके पता चला कि वो 16 साल की लड़की थी और उसकी फैमिली है। मतलब नीचे ताया वो लोग रहते हैं ऊपर ताया चाचा ऐसे
(58:20) करके तीन बिल्डिंग थी। तो ऐसे रह रहे थे वो लोग। तो लड़की को पांच घर के लड़के ही घर की फैमिली के ही भाई जो जिनको हम भाई बोलते हैं वही उस लड़की के साथ गलत कर रहे थे और उसके मां-बाप को पता भी नहीं चला जब तक उनको पता चला लड़की 8 महीने प्रेग्नेंट थी तो जब उनको पहले लगा उसके पापा से मैंने मतलब पूछा कि आपको ऐसे पता नहीं चला 8 महीने तक लड़की मतलब ऐसे थी तो आपको बिल्कुल भी फीलिंग नहीं हुई कि आपकी बच्ची प्रेग्नेंट है तो उन्होंने यही बोला कि हमें लगा कि बच्ची है, खा पी रही है, मोटी हो रही है। तो हमने इस चीज का तो ध्यान ही
(58:59) नहीं दिया। जैसे ही हम लोग हॉस्पिटल गए हैं तब जाके हमें पता चला कि ये लड़की तो प्रेग्नेंट है 8 महीने। फिर उन्होंने जब पुलिस में कंप्लेंट कराई पहले तो पुलिस कंप्लेन नहीं ले रही थी। फिर परी फाउंडेशन में जैसे मैंने बताया कि हमें कॉल आया हमने ग्राउंड पे जाकर देखा। फिर हमने मैम से बात की। योगिता मैम ने फिर उन लोगों के एनसीडब्ल्यू से बात करी। फिर वहां से बात करके हमने वहां से लेटर भिजवाई। तब जाके पुलिस वालों ने इन लोगों को अरेस्ट किया और अरेस्ट करने के बाद भी उन्होंने यह कहा कि यह फैमिली अ डिस्ट्रीब्यूट है। उसका कुछ फाइनेंशियल डिस्ट्रीब्यूट है। जबकि
(59:39) ऐसा कुछ नहीं था। उस लड़की के साथ सच में घर के पांचों जो भाई थे, वह सब उसके साथ गलत कर रहे थे। तो जब हमें पता चला फिर जैसे हम फर्स्ट टाइम उनको सबसे पहले हमने फाइनेंशियली पहले हम लोग ग्राउंड पर गए फाइनेंशियली हेल्प दी फाइनेंशियली हेल्प के बाद फिर हमने उनको लॉयर दिया जो लॉयर है वो सारा उनका केस देख रहा है गवर्नमेंट भी लॉयर देती है लेकिन हम लोग एनजीओ की तरफ से एक और लॉयर देते हैं जो सारे केस का ध्यान रखते हैं वो हमारे मतलब हमारे साथ हमारी टीम है लॉयर की ना जो हमारे पूरी टीम के अंदर ही वो काम करते हैं उसके अलावा हम उसकी लड़की को चाह रहे हैं
(1:00:20) पढ़ाई के लिए उसे स्कूल में कहीं डाल दें। बट अभी हमें पता चला कि सारे एक्यूज़्ड बेल पे बाहर आ गए हैं। ओस्को का केस था बट वो लोग सारे बाहर आ गए हैं। और अब हम यही कोशिश कर रहे हैं कि उसको पढ़ाने की उसकी एडमिशन भी नहीं हो पा रही क्योंकि वो ऑलरेडी 16 साल की है। वो कभी स्कूल गई नहीं है। ओके। अब हमने उसको होम ट्यूशन लगवा के दी है। तो वो लड़की घर से ही पढ़ाई कर रही है। अब क्योंकि एनजीओ से एसोसिएटेड हैं। काफी साल से आप भी काम कर रहे हैं। बहुत सारे केसेस हैं और लोगों की बात सुनते हैं। अभी एक आपने बात बोली कि भाइयों के साथ पढ़ाई
(1:00:53) बहुत ही एक कल्चरली देखोगे तो इट्स अ वेरी डिस्टोर्टेड थॉट। नहीं होता है। राइट? तो मैंने कहीं पर एक लड़की की बात सुनी थी कि इंडिया में जो भी लड़की है उसने या तो अपनी फैमिली में या तो कहीं फैमिली से बाहर कुछ ना कुछ फेस किया ही होगा। ये सच है? बिल्कुल सच है। आप कोई भी लड़की उठा लो। मैं कह रही हूं पूरे इंडिया में कोई भी लड़की उठा लो। कहीं ना कहीं उसको कहीं ना कहीं 1 मिनट के लिए, 2 मिनट के लिए, 5 मिनट के लिए ऐसी फीलिंग आई होगी कि वो वहां पर अनसेफ है। चाहे वो बस हो, चाहे वो मीटिंग हो, चाहे वो ऑफिस का काम हो। क्योंकि लड़कियों को खुद पता चलता है। वो
(1:01:34) खुद फील कर लेती हैं। मुझे नहीं लगता कि हमें लड़कियों को समझाना चाहिए। अब लड़कों को भी समझाना चाहिए कि उनको भी कंफर्ट ज़ोन देना चाहिए सामने वाले को। अगर आज हम इतने आगे बढ़ गए हैं। हम सोचते हैं कि लड़कियों का सुनना चाहिए। मुझे लगता है कि दोनों को एक दूसरे का सुनना चाहिए। दोनों को एक दूसरे की रिस्पेक्ट करनी चाहिए। लड़कों को लड़कियों की और लड़कियों को लड़कों की। जब इक्वल रिक्वेस्ट आ वो रिस्पेक्ट आएगी तो चीजें शायद चेंज हो जाए। आपने कभी खुद पर्सनली कुछ फील किया? एक्सपीरियंस किया? ऑफ कोर्स मैंने खुद फील किया है। तभी तो
(1:02:06) मैं इस फील्ड में आई थी। कैसे कोई बताओ क्या हुआ था? क्या हुआ था कि जैसे हम पार्टी करने गए हुए थे रात को पार्टी के बाद 247 में खाना खाने चले गए दिल्ली की बात हां जी जीकेएम एन ब्लॉक में खाना खाने चले गए दिल्ली की ही बात है शायद वो अगर मेरा ये सुनेंगे तो उनको भी एहसास होगा कि मुझे ऐसे नहीं बोलना चाहिए था हम हम लोग खाना खाने गए वहां पे कुछ लड़के आ गए उन्होंने बदतमीजी करी मतलब मुझसे गलत तरीके से उन्होंने कुछ मतलब कुछ बोला अब्यूज अब्यूज नहीं गया। आई वास सेइंग कि कितना चार्ज करोगे ऐसा कुछ करके? तो मेरे को गुस्सा आ गया। मैंने कहा तुम्हें हम यह
(1:02:44) लोग लग रहे हैं क्या? तो हमारी थोड़ी बहसबाजी होगी। हमने पुलिस को बुला लिया। पुलिस आई। यह जीके की बात है। पुलिस आई। पुलिस ने मतलब उन लोगों को भी लिया और हम लोग भी पुलिस स्टेशन पहुंचे। पहुंचने के बाद ऑफिसर हमें बोल रहे हैं कि यू आर रॉन्ग। मैंने उनको बोला आप हमें बोल रहे हो। आपकी अगर बहन होती तो तो उनका जवाब क्या आता? हमारी बहनें इतनी रात को बाहर नहीं निकलती। यह एक पुलिस ऑफिसर की सोच थी। तो उस दिन मुझे बहुत दुख हुआ कि इतनी बड़ी पोस्ट पे बैठे हुए जो ऑफिसर हैं वो ऐसे बोल रहे हैं कि हमारी बहनें इतनी रात को नहीं निकलती। मतलब हम किसी की बहन नहीं
(1:03:22) है। अगर हम इतनी रात को निकल रहे हैं इसका यह मतलब नहीं है कि हम गलत हैं। दुनिया इतनी आगे चली गई। लड़के अगर रात को निकलते तो उनसे कोई क्वेश्चन नहीं करता कि इतनी रात को हमारे भाई तो बाहर नहीं निकलते। सबके लड़के भाई बाहर निकल सकते हैं। लड़कियां क्यों नहीं निकल सकती? सो मैम अब जितने भी लोग ये वीडियोस देख रहे हैं डायरेक्टली और इनडायरेक्टली कहीं ना कहीं वो आई थिंक बहुत आज के एपिसोड से उन सबने बहुत कुछ जाना होगा और सीखा भी होगा। मैं आपसे बस यह रिक्वेस्ट करूंगा कि आप अपने अगर नंबर्स और डिजिट्स शेयर कर दें। सो दैट अगर कोई भी दे वांट टू कनेक्ट
(1:03:54) विद यू और वो अगर कोई किसी और का केस भी है अगर तो उन तक आपकी फाउंडेशन के बारे में बता सके। ये हमारी बुक है। इसको हमने पीडीएफ भी बना रखा है। वेबसाइट पे है। आप वेबसाइट पे जाके चेक कर सकते हैं। इंग्लिश में भी है और हिंदी पे भी है। इसमें सब हमने लिख रखा है। क्या राइट्स हैं? आप किस तरह से विक्टिम की हेल्प कर सकते हो। किस तरह से आप हमें कांटेक्ट कर सकते हो। इस पे फोन नंबर भी लिखा हुआ है और इस पे वो भी है। आप वेबसाइट पे जाके प्लीज इसको चेक करिए। फोन नंबर भी बता दीजिए लिखा हुआ है। तो फोन नंबर है 9871918। आप इस पे कॉल कर लीजिए। आपको सारी इन मिल
(1:04:29) जाएगी जो जो चाहिए होगा। परफेक्ट। बाकी जो भी डिटेल्स होंगी, हम वेबसाइट और हर एक चीज की इंफॉर्मेशन अपने डिस्क्रिप्शन में भी दे देंगे। थैंक यू सो मच फॉर योर टाइम। एंड माय बेस्ट विशेस टू परी फाउंडेशन। एंड यू एंड योगिता मैम एज वेल। थैंक यू। थैंक यू, थैंक यू।

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