How You Can Reverse Your Trauma ft. Dr. Riri Trivedi and Dr. Gunjan Trivedi
Author Name:Traya Health
Youtube Channel Url:https://www.youtube.com/@TrayaHealth
Youtube Video URL:https://www.youtube.com/watch?v=JeTlbhLdDtU
Title: How You Can Reverse Your Trauma ft. Dr. Riri Trivedi and Dr. Gunjan Trivedi
Author Name: Traya Health
Description: Are your adult struggles actually rooted in your childhood?
From relationship anxiety and people-pleasing to chronic self-doubt and perfectionism, many of our deepest daily battles aren't random flaws. They are psychological imprints.
In this eye-opening episode of What The Health, host Saloni Anand sits down with pioneering mental health researchers, authors, and therapists Dr. Riri Trivedi and Dr. Gunjan Trivedi to uncover the hidden science of Childhood Trauma, Indian Parenting Dynamics, and Emotional Resilience.
Together, they break down why western models don't capture the reality of Indian households, how emotional neglect and toxic shame secretly shape our nervous system, and the groundbreaking techniques—from ancient Panchakosha wisdom to modern Memory Reconsolidation (RTM)—that can help you rewire your brain.
What is childhood trauma and how does it shape your adult life? Understand the lasting impact of early emotional experiences.
We explain the core concepts of childhood trauma and why these difficult early experiences often leave a permanent imprint on our lives. We discuss how these events define our behaviors and reactions long after the initial event has passed.
Improving your mental health starts with acknowledging how past events shape your current reality. By recognizing these emotional trauma triggers and their long-term trauma effects, you can begin to process how your history influences your daily wellness.
00:00 – What Trauma Really Is (Beyond the Buzzword)
04:10 – The Subtle Imprints: Perfectionism, Control & Addiction
09:22 – Why Your Past Hijacks Your Relationships & Marriage
18:14 – Why Western Trauma Models Fail Indian Families
21:05 – The Panchakosha Framework: Healing Mind, Body & Prana
34:25 – Emotional Abuse & Neglect: The Scars You Cannot See
40:20 – Healthy Guilt vs. Destructive Toxic Shame
43:20 – Gentle vs. Helicopter Parenting: How to Build Resilient Kids
56:30 – Kid Creators & Early Fame: A Silent Mental Health Crisis?
01:07:18 – How Traumatic Memories Can Actually Be Rewired (RTM)
01:11:30 – Answering Viewer Questions: Mother-in-Law Conflicts, Abandonment Issues & Setting Boundaries
Drop your thoughts below: What is one pattern from your childhood that you are actively trying to unlearn today? Let’s start an honest conversation in the comments.
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Transcript:
(00:00) ट्रॉमा होता क्या है? ट्रॉमा अकर्स अंडरस्टैंडिंग ट्रॉमा एवरीवन इज ट्रोमाटाइज्ड चाइल्ड हर्ड ट्रॉमा। क्यों ये इतना ज्यादा हमें डिफाइन करता है? कोई भी बहुत ही मुश्किल अनुभव होता है। तो उसका इंप्रिंट हमारे ऊपर रहता है। बचपन में आपको हर रोज अगर मार पड़ी है, आपको क्रिटिसाइज किया गया है, आपने डोमेस्टिक वायलेंस देखा है, आपको बुलिंग हुआ है, तो आपकी नर्वस सिस्टम परफेक्शनिज्म हुआ। एक लॉक 10 बार चेक करना पड़ता है। आपको बहुत एडिक्शंस है। हर रिलेशनशिप में प्रॉब्लम हो रही है। शो मी द ब्लडी फ़ इनसिक्योरिटी, बहुत क्लिंगी बिहेवियर
(00:42) होना, बहुत पज़ेसिव होना, हर किस्म का डर, सस्िशियस बहुत रहना लोगों पे। या तो फिर ओवर केयरिंग करना, ये सारे सफल। हमारे चाइल्डहुड एक्सपीरियंसेस, [संगीत] एडल्ट, मेंटल हेल्थ को कितना शेप करते हैं? आज के व्हाट द हेल्थ पॉडकास्ट में इसी कनेक्शन को समझाने के लिए हमारे साथ हैं डॉक्टर रीरी त्रिवेदी और डॉ गुंजन त्रिवेदी। डॉक्टर रीरी त्रिवेदी हैज़ बीन वर्किंग एक्सटेंसिवली ऑन चाइल्डहुड ट्रॉमा इनर चाइल्ड हीलिंग एंड इमोशनली अवेयर पेेंटिंग और यह अपने प्लेटफार्म के थ्रू इन टॉपिक्स पर अवेयरनेस क्रिएट करती हैं। एंड विद हर वी हैव डॉक्टर गुंजन त्रिवेदी
(01:19) हु वर्क्स इन ट्रॉमा इनफॉर्म्ड साइकोथरेपी चाइल्डहुड ट्रोमा एंड पीटीएसडी। यह अपनी रिसर्च के थ्रू एविडेंस बेस्ड मेंटल हेल्थ प्रैक्टिससेस को इंडियन नॉलेज सिस्टम के साथ इंटीग्रेट करते हैं। हाउ इंपॉर्टेंट इट इज फॉर स्टडी एंड रिसर्च टू बी डन इंडियन स्पेसिफिक? अभी तक ट्रोमा के रिसर्च और बुक्स भी जो लिखी गई है वो वेस्टर्न लोगों ने लिखी है। वो लोग वहां के नंसेस के हिसाब से कैप्चर करेंगे। पर इंडिया का अलग ही एक सिस्टम है। तो वो उनके क्वेश्चन में कैप्चर नहीं हो पाता। वर योर पेरेंट्स सेपरेटेड और डिवोर्स? इंडियन फैमिलीज़ में तो 10 में से
(01:52) नौ फैमिलीज़ में सेपरेशन और डिवोर्स तो होता ही नहीं। बच्चे को उसका ज्यादा ट्रोमा होता है। पर ये पूरे ग्लोबल क्वेश्चनर में ये तो कैप्चर ही नहीं हुआ। व्हाट द हेल्थ पॉडकास्ट में ये [संगीत] एक्सप्लोर करेंगे चाइल्डहुड ट्रॉमा के पीछे का साइंस। और साथ ही बात करेंगे इंडियन पेरेंटिंग एंड [संगीत] फैमिली डायनामिक्स, जो एक बच्चे के फ्यूचर को शेप करते हैं। टुगेदर दे विल बी [संगीत] आंसरिंग सम ऑफ़ द मोस्ट डिफिकल्ट क्वेश्चन। व्हिच विल मेक यू लुक एट योर चाइल्डहुड एक्सपीरियंसेस [संगीत] लिवल डिफरेंटली। हु वुड यू वांट टू रीच आउट टू यू गाइज?
(02:25) इमोशनल अब्यूज और नेगलेक्ट के जो स्कार्स हैं, उसके घाव हैं वो शरीर पे नहीं दिखते। वो आत्मा पे, मन पे दिखते हैं। इसलिए वह ज्यादा डीप है। टीचर्स क्लास के सामने खड़ा करके बच्चे को बोलते कि तेरे में अक्कल नहीं है। तू डफर है तू लाइफ में कुछ नहीं बन पाएगा। जब भी मैं कुछ गलत करती थी, मस्ती करती थी ना, तो पापा मेरे कपड़े उतार के मुझे बालकनी में खड़ा कर देते थे 2 घंटा ताकि पूरे पड़ोसियों को पता चले कि मैंने कुछ गलत किया। पेरेंट्स को तो यही लगता है कि यार हम तो सुधार रहे हैं ना इसको टोकटोक के तो सुधार रहे हैं। बट दे डोंट सी इट एस
(02:54) इमोशनल। अनफॉर्चुनेटली हमारे देश में यंग जो पपुलेशन है उसमें प्राइमरी कॉज ऑफ़ डेथ इज़ अटेम्प्ट। ये लोग सोच रहे हैं जनरेशन वीक है। यू कैन नॉट जनरलाइज। अगर हमारी यंग जनरेशन जो हमारा डेमोग्राफिक डिविडेंड है उसका प्राइमरी कॉज ऑफ डेथ इज हाउ कैन वी इग्नोर दैट एज अ कम्युनिटी अनएक्सेप्टेबल एक बहुत ही फेमस सीरीज का फेमस डायलॉग है। क्राइसिस के टाइम पर फैमिली काम आती है। बट अनफॉर्चूनेटली कुछ लोगों के लिए शायद फैमिली ही क्राइसिस बन जाती है। और आज के व्हाट द हेल्थ पॉडकास्ट में हम इस बारे में और डिटेल में समझेंगे। हाय आई एम
(03:38) सलोनी आनंद एंड टुडे वी हैव डॉ. रीरी एंड डॉ. गुंजन त्रिवेदी पायनियरिंग मेंटल हेल्थ रिसर्चरर्स, ऑथर्स और वेलनेस स्पेस के कोफाउंडर्स जो स्पेसिफिकली चाइल्डहुड ट्रॉमा, माइंड, बॉडी थेरेपी और इमोशनल वेल बीइंग पर काम करते हैं। डॉ. इरी एंड डॉ. गुंजन वेलकम टू व्हाट द हेल्थ। लेट्स स्टार्ट फ्रॉम ट्रोमा। एंड आई थिंक आपने बुक लिखी है एवरीथिंग अराउंड ट्रॉमास यू नो दैट्स अ वेरीेंट पार्ट ऑफ व्हाट यू गाइस डू हमें बताइए ट्रॉमा होता क्या है फर्स्ट कि अगर कोई भी बहुत ही मुश्किल अनुभव होता है तो उसका इंप्रिंट हमारे ऊपर रहता है एग्जांपल लॉस ऑफ अ फैमिली मेंबर
(04:21) वो पेनफुल होता है तो वो 2 महीने 6 महीने 1 साल 2 साल के बाद रिकवरी होती है फनली हम याद करते हैं मगर उसकी की इंपैक्ट नहीं होती है। उसके बाद अब होता क्या है कि कई लोगों में वो इंप्रिन रहती है। सो सिंपल कि अगर यहां कट गया तो पेन होगा। बॉडी पेन लाएगा टू प्रोटेक्ट इट। हम उसके बाद जब चमड़ी ठीक हो जाएगी पेन चला जाएगा। चला जाएगा। ये फिजिकल इंजरी में साइकोलॉजिकल इंजरी में कई बार वो इंप्रेन रहती है जिसको हम ट्रॉमा कहते हैं। और ट्रॉमा ना बड़ा सब्जेक्टिव है। मतलब अगर आप सिंपल डेफिनेशन पूछो तो ट्रॉमा इज़ एनी पेनफुल इवेंट। एनी पेनफुल इवेंट। जैसे थप्पड़ मार दिया
(04:59) बच्चे को आपने या एक बच्चे ने पापा मम्मी को मार रहे हैं वो देख लिया तो दैट इज ट्रॉमा ओके पर ट्रॉमा सब्जेक्टिव है मतलब एक बच्चा वो चीज देख रहा है उसको शायद बहुत गहरी इंपैक्ट पड़ेगी दूसरा बच्चा शायद देख रहा है उसको कम कम इंपैक्ट पड़ेगी तो पहली चीज ये कि ट्रॉमा इज एनी पेनफुल इवेंट दैट रियली ट्रबल्स यू सेकंड इज़ ट्रॉमा सब्जेक्टिव है सबके लिए उसका अनुभव अलग इंटेंसिटी अलग रहती है और तीसरा जैसे गुंजन ने कहा कि ट्रॉमा झेलने की क्षमता भी सब में अलग-अलग होती है। कई लोग ट्रॉमा से गुजर के हेल्दीली बाहर आ सकते हैं। कई लोग जो नहीं प्रोसेस
(05:34) कर पाते वो लोग वो ट्रॉमा में अटके रहते हैं और वो फिर जिंदगी भर उनको इंपैक्ट करता है। एक उदाहरण के रूप में जैसे भूकंप हुआ था अहमदाबाद में तो जो लोग भी उसका अनुभव किया था उसको ट्रोमेटिक इवेंट थी। उससे दो या 4% लोग 6 महीने एक साल के बाद भी अगर कोई कुछ मूवमेंट हो रही है आसपास में तो दे फील कि वह वापस फिर से हो रहा है। तो उसके तीन मेजर होते हैं एक्सट्रीम फॉर्म में कि आप रीएक्सपीरियंस फिर से अनुभव करते हो। हालांकि वो सिचुएशन 2 साल पहले 10 साल पहले हुई थी। उससे थ्रेट में रहते हो कुछ हो जाएगा हो जाएगा हो जाएगा और वो परिस्थिति को अवॉइड करते हो और
(06:12) ज्यादातर उसमें रोल है सोशल सपोर्ट और अच्छी नींद। नींद से अपने आप हमारा ट्रॉमा इंप्रिड प्रोसेस बॉडी करने के लिए सक्षम है। वाओ बहुत ज्यादा आपने रिसर्च की है। पेपर्स भी पब्लिश किए अराउंड द इंपैक्ट ऑफ चाइल्डहुड ट्रॉमा टू एन एडल्ट राइट एंड कनेक्टिंग मेंटल हेल्थ विद दैट। राइट? थोड़ा समझाइए कि क्यों ये इतना ज्यादा हमें डिफाइन करता है। तो ट्रॉमा की जो इंपैक्ट है वो अ बचपन में चाइल्डहुड से शुरू हो के एडल्टहुड तक उसकी इंपैक्ट ऑब्वियस भी है और सल भी है। तो ट्रॉमा ऑब्वियसली दिखता है जब लोगों को मेंटल हेल्थ इश्यूज होते हैं। जैसे
(06:55) डिप्रेशन है, बायपोलर है, स्किजोफ्रेनिया है। तो पता ही है कि ट्र बट सल एस्पेक्ट्स जो होते हैं ट्रॉमा के वो हमें नहीं समझ आते। जैसे परफेक्शनिज्म हुआ या कंपल्सिवली जैसे किसी ने बोला कि मुझे कंपल्सिव बिहेवियर है। मुझे एक लॉक 10 बार चेक करना पड़ता है। मुझे घर में सफाई ऐसी कि बुक ऐसी से ऐसी नहीं होनी चाहिए वरना मुझे टेंशन हो जाता है। फिर हर रिलेशनशिप में प्रॉब्लम हो रही है। या आप रिलेशनशिप में रिश्तों में वायलेंस वायलेंट बिहेव करते हैं। आप अपने या आपको बहुत एडिकशंस हैं। यू नो सिगरेट छोड़ी तो शराब शुरू कर दी। शराब छोड़ी तो फिर कुछ ड्रग्स पे आ गए। वो
(07:31) निकला तो कुछ और तो एडिकशंस हैं। फिर अ क्रॉनिक हेल्थ इशूज़ हैं। समझो आपको। जैसे बहुत छोटी उम्र से ही ब्लड प्रेशर, डायबिटीज डायग्नोस हो गया, अर्ली थायरॉइड हो गया, ऑटोइम कंडीशंस आ गए। तो ये सारे साइन हैं जब हम हमें वी वुड प्रोब के क्या इनका [गला साफ़ करने की आवाज़] हिस्ट्री है बिकॉज़ सी व्हाट हैपेंस इज ट्रॉमा से आपकी फिजियोलॉजी इंपैक्ट होती है। ट्रॉमा से आपकी नर्वस सिस्टम डिसरेगुलेट होती है। आपके ब्रेन सेंटर्स पे भी इसका इंपैक्ट पड़ता है एस पर न्यूरोसाइंस। तो जो बचपन से अगर आपकी नर्वस सिस्टम इमंबैलेंस में रही है, आपके ब्रेन सेंटर्स अलग तरीके से
(08:06) डेवलप हुए हैं अब्यूज और ट्रॉमा की वजह से तो उसकी इंपैक्ट आपके फिजिकल हेल्थ पे भी पड़ती है, मेंटल हेल्थ पे भी पड़ती है। जब फिजिकल हेल्थ पे पड़ती है तो क्रॉनिक हेल्थ कंडीशंस हो जाएंगे। बट अनफॉर्चूनेटली मेडिकल डॉक्टर्स भी ये लिंकेज नहीं बना पाते क्योंकि उनको सिखाया नहीं गया है कि भ अगर बंदे को बहुत अर्ली ऑटोइ्यून सिचुएशन है तो शुड आई आस्क कि भ व्हाट वास द रीज़न फॉर दिस? और जो उससे भी सल इंपैक्ट है वो है रिश्तों में। जैसे हमने कहा इनसिक्योरिटी बहुत क्लिंगी बिहेवियर होना, बहुत पज़ेसिव होना या हर किस्म का डर, फियर फोबियास बहुत किस्म के
(08:42) होना, चूहे का डर, अंधेरे का डर, पानी का डर, हाइट का डर, हर चीज में डरे हुए रहना, हर चीज में नेगेटिव सोचना या सस्पिशियस बहुत रहना लोगों पे। या तो फिर ओवर केयरिंग करना जिसको हम कोडिपेंडेंसी कहते हैं। ये सारे सल एस्पेक्ट्स हैं ट्रॉमा के। आपने एक बहुत अच्छी बात बताई रूट कॉज लोगों में देखा है कि जब वो एक सर्टेन मेंटल हेल्थ डिफिकल्ट सिचुएशन से गुजर रहे होते हैं वो उसको सिचुएशन को ब्लेम कर देते हैं। फॉर एग्जांपल मेरा बॉस बहुत टॉक्सिक है। या जब से मदर इन लॉ मेरी लाइफ में आई है मेरा सब प्रॉब्लम चल रहा है। राइट? नाउ इज
(09:18) मदर इन लॉ द प्रॉब्लम और मेंटल हेल्थ द प्रॉब्लम? हां। वेरी गुड क्वेश्चन। सो यहां पे हमें थोड़ा सा साइको एडुकेट करना पड़ता है क्लाइंट को क्योंकि देखिए मदर इन लॉ कुड बी अ प्रॉब्लम आई एम नॉट सेइंग नो बट उस प्रॉब्लम के साथ आपकी इमोशनल रेिलियंस कितनी है डील करने के लिए दैट विल बी डिटरमिन बाय आपका चाइल्डहुड कैसा था अगर आपका चाइल्डहुड में ट्रॉमा नहीं था अगर आपका चाइल्डहुड अच्छा था तो आपके अंदर वो कॉन्फिडेंस वो इमोशनल रेिलियंस रहेगा कि कितना भी टॉक्सिक बॉस हो कितना भी स्ट्रेसफुल एनवायरमेंट हो या कितनी भी आपकी सांस परेशान कर रही हो आप अपना सर्
(09:53) सर्वाइव करने का कोप अप करने का तरीका निकाल लोगे क्योंकि आप में आत्मविश्वास है। आप में कॉन्फिडेंस है। आप इमोशनली स्टेबल हैं। पर अगर आपका चाइल्डहुड बैगेज ऑलरेडी है। ट्रॉमा है तो एक तो आपकी नीव ही वीक है। आप वो वीक वाले नीव के साथ अगर आप उस पे कितने भी ब्लॉक्स बनाओगे तो वो गिरने ही वाले हैं। तो यह लोगों को समझाने में तो टाइम लगता है। बिकॉज़ लोगों को लॉजिकली तो यही लगता है कि शादी के बाद ही सारी प्रॉब्लम शुरू हुई। मैम शादी से पहले तो सब कुछ मेरा ठीक था। इसका मतलब शादी इज द प्रॉब्लम, मदर इन लॉ इज अ प्रॉब्लम। फिर उनको समझाना पड़ता है। और इसके लिए मैं एक
(10:26) एक क्लाइंट की कहानी बताऊंगी। ये क्लाइंट मेरे पास आके मुझे क्या बोलती है? हस्बैंड वाइफ दोनों रहते हैं बाहर। दोनों वर्क करते हैं। दो बेटियां हैं। उसका हस्बैंड उसके लिए सब काम करता है। मतलब वो दोनों जॉब तो दोनों करते हैं। बट हस्बैंड घर साफ रखेगा। डिशेस भी कर देगा। खाना भी बहुत अच्छा बनाएगा। फिर जब फ्रेंड्स मिलते थे ना तो हस्बैंड बोलेगा कि मैंने खाना बनाया। मैंने सब किया। तो फ्रेंड्स उसकी तारीफ करेंगे कि तू कितनी लकी है। तेरा हस्बैंड कितना अच्छा है, कितना तो जब भी होगा ना तो वो रात को हस्बैंड के साथ झगड़ेगी। वो क्या बोलेगी कि तुम मुझे नीचा
(10:57) दिखाने के लिए ये सब चीजें कर रहे हो। यू आर ट्राइंग टू प्रूव दैट यू आर बेटर देन मी एंड आई एम नॉट एबल टू मैनेज। दैट इज व्हाई यू आर डूइंग ऑल दिस। ओके? सिनेरियो वन। सिनेरियो टू यही अपने हस्बैंड और बच्चों को छोड़ के इंडिया गई। अपने पेरेंट्स का ध्यान रखने। इंडिया गई 15 दिन रही तो कोई अनापशनाप कुछ नहीं हुआ घर पे सब घर अच्छे से मैनेज हुआ बच्चे अच्छे से मैनेज हुए फिर बच्चों ने ये भी बोला कि मम्मी अगर आपको 10-15 दिन और मम्मी के पास रहना है आप इंडिया में रह जाओ हम लोग ठीक है घर वापस आई घर एकदम क्लीन कुछ गंदा नहीं सबका रूटीन मैनेज था तो इसको
(11:35) ब्रेकडाउन हो गया शी इस सेइंग कि मुझे अभी जीना ही नहीं है मुझे तो मर जाना है क्योंकि मेरी जरूरत ही नहीं है किसी को दिस पीपल डोंट नीड मी आई एम आई एम यूज़लेस। आई एम नॉटेंट। मैं मर जाऊं तो भी इनको कोई फर्क नहीं पड़ेगा मैम। तो मेरा क्या वैल्यू है? अभी इसका रूट कॉज मैं बताती हूं। कोई और उसकी जगह पे होता तो क्या सोचता? अरे यार कितना अच्छा है। मेरे बच्चे कितने इंडिपेंडेंट है। मेरा हस्बैंड कितना सब कर लेता है। मेरी लाइफ तो अच्छी है। मैं एक महीना और रुक जाऊंगी। बट उसने ये नहीं देखा। क्यों? क्योंकि उसका लेंस अलग था। बचपन में शी ग्रू अप विथ अ मदर जो
(12:06) बहुत क्रिटिकल थी। उसको उसको मार भी बहुत पड़ी थी। मदर ने उसको अ पढ़ाई के लिए नानी के पास भेजा। नानी भी बहुत क्रिटिकल थी। तो पूरा बचपन उसका यही सुनसुन के गया कि यू आर नॉट गुड इनफ। तेरे से कुछ होगा नहीं। तू क्यों कुछ नहीं ठीक से कर पा रही। अभी ये चश्मे से जब वो अपने हस्बैंड के बिहेवियर को देखती है, बच्चों के बिहेवियर को देखती है। उसको वो बिहेवियर वो इंटरप्रेट इसी तरह से करती है कि आई एम नॉट गुड इनफ। आर यू गेटिंग दिस? अब्सोलुटली। सो व्हेन शी रियलाइज्ड आल्सो शी से हां बिकॉज़ अभी ये अगर फ्रेंड को बताती तो फ्रेंड भी यही कहती कि अरे तेरे
(12:38) में समझ नहीं है तेरे में अकल नहीं है इतना अच्छा तेरा हस्बैंड है सब कुछ कर रहा है बच्चे इतने अच्छे तू बट शी विल नॉट बी एबल टू सी व्हाट यू एंड आई कैन सी बिकॉज़ हर ट्रोमा हैज़ क्रिएटेड अ लेंस तो उसकी भी सच्चाई सही है। वी एस थेरेपिस्ट कैन नॉट जज कि अरे तुम क्या कह रही हो यार तुम तो गलत कह रही हो। तुम्हारा सोचने का तरीका ही गलत है। नहीं, उसका सोचने का तरीका ऐसा है क्योंकि उसका पूरा बचपन इस किस्म का गया। बचपन में उसके लेंस बन गए कि आई एम नॉट गुड इनफ। आई एम नॉट वांटेड। मम्मी ने ही मुझे कहीं और भेज दिया। तो आई एम नॉट
(13:12) नीडेड। आई एम नॉट इंपॉर्टेंट अबंडनमेंट इश्यूज। तो आप समझो कि यह लेंस से जब परिस्थितियां हम देखते हैं तो यह तो एक सिंपल एग्जांपल है। बट यही चीज लोगों की लाइफ में बार-बार होती है कि जो उनको लग रहा है कि ऑब्वियसली यह प्रॉब्लम है एक्चुअली वो प्रॉब्लम उनको लग रहा है क्योंकि उनका ऑलरेडी अपने ट्रॉमा का एक चश्मा है। वाओ आई थिंक बहुत ही ब्यूटीफुल चीज है क्योंकि यह सिर्फ उन लोगों के लिए यूज़फुल नहीं है जो प्रॉब्लम से गुजर रहे हैं। वो सारे लोग जो उनके आसपास रह रहे हैं। हाउ डू वी बिल्ड एमथी फॉर पीपल अराउंड अस हु आर सफरिंग
(13:49) करेक्ट है ना जब हम ऐसे लोग देखें हम उन्हें कैसे आप जैसे लोगों से कनेक्ट कराएं एनी पॉइंट्स देयर कि एक नॉर्मल इंडियन सिटीजन अपने अराउंड कैसे आइडेंटिफाई करें कि इस पर्सन को हेल्प की जरूरत देखिए दूसरे आइडेंटिफाई करने से नहीं होता है कुछ बिकॉज़ आई विल टेल यू व्हाई किसी को कोई और कहे कि तुम्हें हेल्प की जरूरत है तो बहुत कम लोग हैं जो ओपनली ली सुनते हैं इस बात को। मोस्ट पीपल व से मुझे क्यों तुम्हें जरूरत है? वरना आधी दुनिया की सासे अपनी बहुओं को हमारे पास ले आती है और आधी बहुएं सांसों को हमारे पास ले आती है कि [हंसी] यार इनको फिक्स करो। बट ऐसा
(14:25) नहीं होता है। यू नो अब्सोलुटली राइट। [हंसी] तो [अचानक ज़ोर से सांस लेने की आवाज़] मेरा ये पॉइंट है कि उनको खुद समझना है। पर हां ये डिस्कशन से एम्पैथी आनी चाहिए। हमें लोगों को यह समझना चाहिए कि हर एक इंसान के बिहेवियर के पीछे कोई कारण है। समझो अगर आपके हस्बैंड को गालियां देने की आदत है। आपको लग रहा है कि ये गलत है। बट वो कहां से आई? वो जन्म से तो नहीं था। तो कहीं ना कहीं उनके ग्रोइंग अप में बहुत बच्चे आते हैं कि हमारे फादर इमोशनली अनवेलेबल है। मैडम वो इमोशंस दिखाते ही नहीं है। हमारे लिए कोई कनेक्शन ही नहीं है। फिर मुझे उनको पूछना पड़ता है कि उनका
(14:56) उनका बचपन कैसा था? हां वो अडॉप्टेड थे या हां यू नो उनके पापा तो उनको बहुत मारते पीटते उनके पापा अल्कोहलिक थे। तो ऑब्वियसली फिर अगर आपके पापा ने खुद इमोशंस या लव एक्सपीरियंस नहीं किया है तो उनके लिए वो भाषा कहां से आएगी? दैट डस नॉट जस्टिफाई दैट बिहेवियर बट एटलीस्ट दैट गिव्स यू अ पर्सपेक्टिव कि आप उन लोगों को एक अलग नजरिए से देख सकते हो। एक्सेप्ट कर सकते हो कि हां शायद यह भी हो सकता है। आज मेरी मम्मी मेरे लिए इतनी क्रिटिकल है। लड़कियां कहती है मम्मी हर बात में मेरे को टोकती है। पता चले कि वो मम्मी की हिस्ट्री देखो कि वो मम्मी को इतना बुलिंग
(15:30) किया गया था। इतना उसको सेल्फ वर्थ इतना टॉक्सिक शेम था कि उसने सोच ये सोच के बड़ी हुई कि मेरी बेटी को मैं ऐसा नहीं फील होने दूंगी। मेरी बेटी कॉन्फिडेंट होनी चाहिए। मेरी बेटी टॉप पे होनी चाहिए। तो इस इस चक्कर में वो अपनी बेटी को बार-बार टोक रही है। पर वो भी गलत हो रहा है। हां। तो बिहेवियर गलत है। पर बिहेवियर के पीछे का रीजन क्या है वो समझो आप। तो आपको वो डॉट्स कनेक्ट करना जरूरी है। आपके पास कोई वॉक इन करता है विद अ प्रॉब्लम एंड देन जब आप उनके साथ काम शुरू करते हैं तब पता चलता है कि एक चाइल्डहुड ट्रॉमा था। सोशल मीडिया की वजह से मैं देख रही हूं कि
(16:03) पिछले 10 साल में एक चेंज आया है। 10 साल पहले जब आते थे लोग हमारे पास तो चाइल्डहुड ट्रॉमा ट्रॉमा पे काम करना ऐसा बोलते ही नहीं थे। वो तो कहते थे अरे हमें तो बहुत बार-बार पे गुस्सा आता है। कुछ करना है या हमें तो डिप्रेशन है कुछ करना है। नींद नहीं आ रही है कुछ करना है। अभी बिकॉज़ ऑफ़ सोशल मीडिया एंड बहुत सारी अवेयरनेस हो रही है। नाउ लोग पीपल आर कमिंग एंड सेइंग के आई थिंक आई हैव चाइल्डहुड ट्रॉमा एंड इसके बारे में कुछ करना है हमें। तो ये चेंज आया है धीरे से। नॉट एवरीबडी हु हैज़ चाइल्डहुड ट्रॉमा विल इनवेरिएबली हैव डिप्रेशन एंजाइटटी बिकॉज़
(16:33) देयर आर अदर पाथवेज जिनका रेज़िलियंस ज्यादा है, पीसी ज्यादा है उनको नहीं होगा। बट जिनको डिप्रेशन एंजायटी सुसाइड अटेम्प्ट्स है उनको बहुत ज्यादा संभावना है कि हाई चाइल्डहुड ट्रॉमा है। और ये तो रिसर्च एक्चुअली 30 साल पहले सबसे पहली और दुनिया की सबसे बड़ी रिसर्च डॉक्टर विंसन फेलेटी ने की थी। जो ढाई लाख उनका जो सैंपल साइज था एडल्ट्स थे वो सबसे बड़ी दुनिया की रिसर्च 30 साल पहले हुई। उसके बाद दुनिया भर में बहुत सारे चाइल्डहुड ट्रॉमा के रिसर्च हुए हैं 30 साल में। पर इंडिया से गिनेचुने दो या तीन ही पेपर्स थे। उंगलियों पे भी गिने उससे कम। तो जब
(17:09) मैंने पीएचडी रिसर्च किया तो आई वास शॉक्ड क्योंकि इंडिया में इतना पपुलेशन है बट चाइल्डहुड ट्रॉमा की रिसर्च गिने-चुने दो-तीन ही पेपर्स। सोचो आप भूटान से कहीं तो कहीं से तो ऐसे-से कंट्रीज पाकिस्तान से कहीं से तो पेपर्स हैं पर इंडिया से नहीं थे। अभी पिछले 5 साल से आ रहे हैं। एंड दैट इज सो सरप्राइजिंग बिकॉज़ मुझे ऐसे लगता है कि एज अ कंट्री जिस तरह हमारा एक सोसाइटी प्रेशर होता है कि बाजू वाले शर्मा जी का बेटा 12th में क्लियर कर गया। तुम्हारा क्या हुआ? लोग क्या कहेंगे? राइट? ये सारा जो हमारा इंडिया का एक अलग ही अ सिस्टम है व्हिच आई थिंक इज़ डीपली
(17:46) लिंक टू ट्रोमाज़ दैट इदर वी गेट और वी गो थ्रू। हाउेंट इट इज फॉर स्टडी एंड रिसर्च टू बी डन इंडियन स्पेसिफिक? हां। तो इसमें क्या है कि जो अभी तक ट्रॉमा की रिसर्च आई हुई थी और बुक्स भी जो लिखी गई है वो वेस्टर्न लोगों ने लिखी है। तो वो लोग वहां के नंसेस के हिसाब से कैप्चर करेंगे। पर इंडिया का जैसे आपने कहा कि एक अलग ही एक सिस्टम है। अलग ही कल्चर है। तो वो उनके क्वेश्चन में कैप्चर नहीं हो पाता था। जैसे एक सिंपल बात कहूं कि जब हमने ट्रॉमा रिसर्च इसके बारे में रिसर्च का काम शुरू किया छ सात साल पहले तो हमने देखा कि वहां का 10 पॉइंट
(18:23) क्वेश्चन है। ओके? जो स्टैंडर्ड ग्लोबली सब यूज़ करते हैं। अभी उसमें एक एलिमेंट है ट्रॉमा एलिमेंट वर योर पेरेंट्स सेपरेटेड और डिवोर्स। अगर सेपरेट या डिवोर्स हुए तो मतलब एक ट्रॉमा हुआ है। तो इंडियन फैमिलीज में तो 10 में से नौ फैमिलीज में सेपरेशन और डिवोर्स तो होता ही नहीं है। पर जिंदगी भर मां-बाप लड़ ललड़ के लड़ मर के रहते हैं। तो बच्चे को उसका ज्यादा ट्रॉमा होता है। पर ये पूरे ग्लोबल क्वेश्चनयर में ये तो कैप्चर ही नहीं हुआ। समझो आप। तो इतना बड़ा पॉइंट मिस हो गया। बिकॉज़ हमारे पास क्लाइंट्स आते थे। कहते थे मैम इतना मुझे
(18:53) ट्रॉमा है। मेरे मम्मी पापा का झगड़ा देख के। मुझे लग रहा है अच्छा होता डिवोर्स हो जाते पर जिंदगी भर साथ में रह रहे हैं। जो पीियर आइसोलेशन मैन अनुभव करते हैं उनको बचपन में इमोशनली नेगलेक्ट महसूस किया गया है। मैं स्कूल में था मगर लोग मेरे साथ बात नहीं करते थे या मुझे अलग से बैठना पड़ता था लोग के साथ में उसका इंपैक्ट बहुत स्ट्रांग। तो बोलिंग के भी दो प्रकार हैं। अग्रेसिव और आइसोलेशन। सो, द पॉइंट इज़ दैट वी फेल्ट दैट वी नीड अ क्वेश्चनर दैट रेप्रेजेंट्स आवर इंडियन नो। आप ऑन एन ऑनगोइंग बेसिस क्या करते हैं? प्रडोमिनेंटली हमारा काम दो है। एक तो हम
(19:33) लोग जो हमारे पास मेंटल हेल्थ इश्यूज लेके आते हैं उनका हम पूरा मेजर करते हैं। उनका ट्रॉमा क्या है? उनके क्या प्रेजेंटिंग प्रॉब्लम्स हैं? और हम हमारी जो मॉडालिटीज हैं, टेक्निक्स है, जो रिसर्च बेस्ड हैं वो हम अप्लाई करते हैं जिससे कि वो उसमें से बाहर आ सके। जैसे पीपल कम विद डिप्रेशन, एंजायटी, रिलेशनशिप इशूज़ इंसोमनिया और यू नो ट्रॉमा, इंपैक्ट एंड वी मेजर, वी डू आवर थेरेपीस, इंटरवेंशंस, वी ट्रैक द प्रोग्रेस टिल दे कंप्लीटली रिकवर। दूसरा बहुत बड़ा हिस्सा हमारे काम का है जो हम ट्रेनिंग्स देते हैं। तो हम हमारी टीम ऑफ थेरेपिस्ट हैं जिनको हमें
(20:08) हमने ट्रेन किया है हमारी टेक्निक्स में जो बुक में मेंशन की हुई है। और तीसरा बहुत बड़ा पार्ट है पिलर जो गुंजन हैंडल करते हैं वो है रिसर्च। हमने जैसे कहा कि इंडिया में इसका रिसर्च बहुत नया है। बहुत इनफेंटाइल स्टेज पर है। तो हमारा बहुत ये डिजायर था कि हम कंट्रीब्यूट करें इन इंडिया के ये रिसर्च पूल में। रिसर्च ऑन नॉट जस्ट थ्योरिटिकल एस्पेक्ट्स बट रिसर्च ऑन एक्चुअल टेक्निक्स टू मेजर द इफेक्टिवनेस ऑफ़ द वर्क दैट वी डू। सो दैट दे बिकम मोर मेन स्ट्रीम। एंड एज अ पार्ट ऑफ दिस हमारा ये भी है कि इंडियन नॉलेज सिस्टम्स को भी थोड़ा ले आओ। बिकॉज़ ये सारा
(20:44) रिसर्च माइंड बॉडी का ट्रॉमा का बहुत सारा आई थिंक ये मैं आई इंटरेस्टिंग इन द बुक आपने जो बुक लिखी है उसमें मैंने मैंने सोचा जब आप यहां आएंगे आई विल आस्क आई सॉ दिस ब्यूटीफुल ब्लेंड ऑफ आयुर्वेद और इंडियन एंशिएंट थिंकिंग कमिंग इन राइट सो ये जो पंचकोषा है यह समझाइए इसकी शुरुआत हुई जब हम दोनों ने हमारे योगा टीचर्स ट्रेनिंग ली जो हमने हमने एस व्यासा से ली डॉक्टर नागेंद्र से। तो वहां से हमारी शुरुआत हुई पंचकोश समझने में बिकॉज़ वी आर बोथ योगा थेरेपिस्ट। तो हम हमने योगा पर्सपेक्टिव से समझा कि यार जो भी योग तो हमारे डिजीज को पांच लेयर्स की
(21:29) तरह देखता है। मतलब तैतय उपनिषद में जो लिखा है कि आवर एक्सिस्टेंस ऑफ़ फाइव लेयर्स। अन्नमय कोष व्हिच इज अ फिजिकल बॉडी। प्राणमय कोष जो है हमारा एनर्जी बॉडी। मनोमय कोष जो है हमारा डेली माइंड जहां पर हमारे सारे इमोशंस होते हैं जैसे एंगर, लव, फियर, हेट्रेड वगैरह। विज्ञानमय कोष जो है हमारा हायर माइंड और फिर आनंदमय कोष जो है हमारा ब्लिस। तो ये जो पंचकोषा का स्ट्रक्चर है उसके इर्द-गिर्द हम ने कोशिश की कि सारे हमारे जो प्रॉब्लम्स हैं हम उसको मैप करें। उस तरह से और उसके सॉलशंस भी उस तरह से लाए। बिकॉज़ जैसे मैंने कहा कि ट्रॉमा के रिसर्च में और
(22:03) स्टडी में कहीं ये इंडियन नॉलेज सिस्टम्स नहीं आया था। करेक्ट। तो योगा और पंचकोषा की इस तरह से हमारी शुरुआत हुई और फिर जब हमने बुक लिखी जो गुंजन जिनके प्राइमरी ऑथर है तो इन्होंने फिर बैठ के मैप आउट किया कि किस तरह से ट्रॉमा की हर एक कोष पे इंपैक्ट पड़ती है और उस पे क्या कर सकते हैं। राइट? सो दिस इज द पंचकोष फ्रॉम ट्रॉमा पर्सपेक्टिव। आल्सो सम ऑफ द सेल्फ रेगुलेशन टेक्निक्स जैसे हमने कहा कि ट्रॉमा क्रोनिक ट्रॉमा बचपन में आपको हर रोज अगर आपने मार पड़ी है आपको क्रिटिसाइज किया गया है आपने डोमेस्टिक वायलेंस देखा है आपको बुलिंग हुआ है तो आपकी नर्वस
(22:36) सिस्टम डिसरेगुलेट हो जाएगी तो ट्रॉमा का फर्स्ट प्रोसेस स्टेप है कि नर्वस सिस्टम को रेगुलेट करो तो वो अन्नमय कोष से शुरू होती है | तो ट्रोमा के रिकवरी प्रोसेस में भी हमको चारों कोष पांचों कोष इनवॉल्व करने पड़ते हैं अन्नमय कोष लेवल का भी काम करना पड़ता है व्हेन यू वर्क ऑन द फिजिकल बॉडी हम्म प्राणमय कोष लेवल का भी काम करना पड़ता है। यू वर्क ऑन द ब्रेथ बिकॉज़ ब्रेथ एंड द माइंड। ब्रेथ इज अ ब्रिज बिटवीन योर बॉडी एंड द माइंड। तो ब्रेथ वर्क से भी हमारा माइंड जो है वो रेगुलेट होता है। राइट? फिर आता है मनोमय कोष जहां पर हमारे
(23:08) बिलीव्स हैं, हमारे परसेप्शंस हैं, हमारे थॉट्स हैं। वो लेवल पर भी काम करना पड़ता है। मनोमय कोश लेवल पे वेयर वी डू काउंसलिंग, वी डू यू नो बिलीफ सिस्टम वर्क, वी डू इनर चाइल्ड वर्क, वी डू हिप्नोथेरेपी, वी डू योग निद्रा इन योगा। तो मनोमय लेवल का भी काम करना पड़ता है। विज्ञानमय लेवल का भी काम करना पड़ता है। जैसे गुंजन ने कहा कि टू आइडेंटिफाई इनकंसिस्टेंसीज एंड टू यूज़ अ सेंस ऑफ डिस्क्रीशन कि नहीं ये सही है गलत कैसे करना है। एंड अल्टीमेटली आनंदमय कोष तक जाना है। तो इस तरह से ट्रॉमा की इंपैक्ट भी हर एक कोष पे पड़ती है और ट्रॉमा की
(23:42) रिकवरी प्रोसेस में भी हमें पांचों कोष को इनवॉल्व करना है। तो रिकवरी ज्यादा इफेक्टिव रहेगी। अगर हम सिर्फ अन्नमय पे समझ समझो काम किया तो वी विल ओनली रेगुलेट द नर्वस सिस्टम पर हमारे जो माइंड के प्रोग्राम्स है उसका क्या होगा सिर्फ माइंड पे काम करेंगे तो इवेंचुअली फिजिकल बॉडी रेगुलेट होगा बट द पॉइंट इज कि अगर हम पंचकोषा मॉडल को देखें और अगर पांचों को साथ में एक थेरेपी में इंटीग्रेट करें तो इट विल बी मोस्ट इफेक्टिव सी अगर ट्रॉमा है तो बॉडी से रिलीज करना पड़ेगा हम हां माइंड बॉडी में पंचकोष हमें बोलते हैं कि आप विज्ञान में इसे रिलीज़ करोगे तो
(24:18) बॉडी से रिलीज़ करने की जरूरत नहीं है। यह कंट्रोवर्शियल स्टेटमेंट है। हमारे पास बहुत सारा एविडेंस है। पब्लिश्ड एविडेंस और वो करीम नादर्स मेमोरी रिकंसोलिडेशन वर्क। तो ये पर्सपेक्टिव आपको वेस्टर्न साइंस में नहीं मिलेगा। फॉर अ कॉमन मैन इफ यू कुड विदाउट ऑफ कोर्स विदाउट नेम्स शेयर अ स्टोरी विद अस। समबडी हु केम टू यू विद अ प्रॉब्लम, हाउ यू आइडेंटिफाइड द ट्रोमा। एक यंग लेडी थी वो गेट से आ रही थी वो शी वास ऑलमोस्ट शी वास लिटिल हेजिटेंट टू ओपन द गेट एंड देन एंड देन शी मेड रवी आई डिड नो फिर इरे ने मुझे बुलाया तो वो एक सर्वाइवर थी जिसके आसपास के
(24:59) तीनों लोग कार क्रैश में अनफॉर्चूनेटली मारे गए और उसने देखा कि यह हुआ है मेरे सामने बट वो जब भी भी कार में बैठती थी तो डर लगता था जहां वो अकस्मात हुआ था वो बोलती वहां मैं नहीं रह सकती हूं वो शहर में उस कंट्री में जभी भी वो कॉन्टेक्स्ट होगा कार मूवमेंट ब्रेक वो डरती थी और वो एक इवेंट थी जो बहुत ही खतरनाक इवेंट थी तो ये स्पेसिफिक असेसमेंट होता है पोस्ट ट्रोमेटिक स्ट्रेस डिसऑर्डर उसकी एक शेम होती है कि मैं क्यों सर्वाइव हो गई मैं क्या कर सकती थी ये सब सिचुएशंस होते हैं तो ये काम करना बहुत ही क्रिटिकल है और हमें ये काम आई ये माध्यम से या बहुत सारे
(25:39) माध्यम से लोगों के पास पहुंचाना कि इसका सशंस है एक एक और एक एग्जांपल है कि एक लड़की हमारे पास आई थी कि मदर थी न्यू मदर दो साल की बेटी थेरेपी के लिए क्यों आई है? क्योंकि मुझे मेरी मम्मी जैसा नहीं बनना है। मैं मेरी बेटी को दो साल के फिर भी उसको मैं हाथ उठा लेती हूं उसके ऊपर। मुझे बहुत गुस्सा आता है उस उसके ऊपर। मुझे पता है वो ये जो वुमन हमारे पास आई थी शी इज़ एन आईटी प्रोफेशनल। उसको पता है कि दो साल का बच्चा तो क्या ही मतलब मस्ती करता है। ये तो दे आर डूइंग व्हाट दे आर मेंट टू डू। बट आई कैन नॉट कंट्रोल मायसेल्फ। मेरी
(26:11) रिलेशनशिप्स में प्रॉब्लम है। मेरे भाई के साथ कोई रिलेशनशिप नहीं है। मेरी मदर के लिए मुझे बहुत नफरत और गुस्सा है। बिकॉज़ मेरी मम्मी ने मेरे साथ बहुत बुरा किया था बचपन में। तो ये सब लेके हमारे पास आई थी। रीज़ आई थी ये ले के कि आई वांट टू बी अ बेटर मदर। और उनको डिप्रेशन सीवियर था। एंजायटी भी सीवियर थी। यही सब घर में सब चीजें रखने की और इसकी वजह से मैरिटल इश्यूज भी होने लगे थे। हमारे पास आई। तो हमने असेस किया। तो हम टिपिकली क्या करते? उनके स्कोर्स लेते हैं। वेल बीइंग, ए्जायटी, डिप्रेशन, इंसोमिया, लोनलीनेस, सोशल सपोर्ट ये सबके स्कोर्स हमारे पास
(26:42) होते हैं। उससे हमें एक जैसे हम उसको साइकोलॉजिकल कुंडली बोलते हैं। उससे हमें पता चल जाता है इंस्टेंटली कि कहां काम करना है। फिर हम पूरा उसका चाइल्डहुड का हमने हिस्ट्री लिया। यू विल बी सरप्राइज कि लोग साइकेट्रिक मेडिकेशंस भी 10 साल लेके हमारे पास आते हैं और कहते हैं कि हमारे साइकेट्रिस्ट ने हमने इतना डिटेल में हमारे चाइल्डहुड ट्रॉमा के बारे में नहीं पूछा जितना आप पूछ रहे हो। क्योंकि हम क्या है? हर एक अगर 35 साल की लेडी है तो हम जीरो टू 35 इयर्स की ऐज में हर एक इंसिडेंट क्या हुआ? बचपन कैसा था? प्राइमरी स्कूल, मिडिल स्कूल 360 डिग्रीज
(27:13) हिस्ट्री लेते हैं। उससे हमें पता चलता है कि ये अभी के जो प्रॉब्लम्स है उसकी शुरुआत कहां से हुई? अभी ये लड़की के केस में यही था बहुत सी कि मदर बहुत क्रिटिकल थी। मदर उसको हमेशा बॉडी शेमिंग करती थी कि तू काली ते से कौन शादी करेगा? तू पैदा ही क्यों हुई? मदर को भाई ज्यादा पसंद था। तो भाई के लिए ज्यादा वो था। मदर उसको मारती भी थी और वो ये पढ़ाई में बहुत होशियार थी क्योंकि मार खा खा खा खा खा खा खा खा खा खा खा खा खा खा खा खा खा खा खा खा खा खा खा खा खा खा खा खा खा खा खा खा खा खा खा खा खा खा खा खा खा के उसके पास ऑप्शन नहीं था अगर फर्स्ट रैंक नहीं आया
(27:39) तो मार खाना पड़ता था तो वी मैप्ड उसका ट्रॉमा स्कोर बहुत हाई था फिजिकल मार भी पड़ती थी इमोशनल अब्यूज भी था एकद बार उसको घर के जो सर्वेंट थे उसने इन्हें एप्रोप्रियट टच किया तो सेक्सुअल अब्यूज भी था स्कूल में डार्क थी तो बुलिंग था आइसोलेशन था और क्या है बच्चा जब ये सब चीजें घर में टोलरेट करता है ना तो स्कूल में भी थोड़ा ऐसा अब ये लड़की फर्स्ट आती थी तो बच्चे उसको टीचर्स पैड टीचर्स पैड करके उसको आइसोलेट कर देते थे। तो ये सब हमने मैप किया। फिर हमने अपना काम शुरू किया उसके साथ। काम में हमारा दो स्टेप होता है। एक तो सेल्फ रेगुलेशन हम सिखाते
(28:14) ही हैं कि आपको रोज अपनी नर्वस सिस्टम को ठीक करने के लिए क्या-क्या करना है। उसके बाद हमने उसके चाइल्डहुड पे काम करना शुरू किया। जैसे स्पेसिफिक इवेंट्स उसके थे जो फिजिकल अब्यूज के ट्रॉमा के उसको हम रिलीज रिफ्रेम टूलकिट कहते हैं कि बॉडी में से उसका जो अनप्रोस्ड ट्रोमा है उसको हम रिलीज करवाते हैं। माइंड में उसको रिफ्रेम करवाते हैं। वही चीज किस तरह से हम दूसरे नजरिए से देख सकते हैं। सी रिफ्रेमिंग अकेले आप करो विदाउट रिलीज तो लॉजिकली आप कर समझ जाओगे कि नहीं नहीं ये तो हो गया अभी नहीं। बट बॉडी में जब तक वो बॉडी से
(28:46) नहीं निकलता है कई बार वो एक अटक जाता है प्रोसेस। तो हम रिलीज रिफ्रेम टूलकिट के अंब्रेला में हमारी जो टेक्निक्स हैं जैसे इनर चाइल्ड है, आरटीएम है, विजुअलाइजेशन है, हिप्नोथेरेपी ये सब यूज करके हर चार सेशन के बाद प्रोग्रेस मेजर करते हैं। एम्प्टी चेयर वगैरह करते हैं। अभी उस केस में उसने तीन या चार महीने बाद उसने कहा कि अभी मैं मेरी मम्मी जो लड़की जो लेडी मम्मी के साथ बात नहीं करती थी। अभी शी सेइंग मैं मम्मी के साथ आराम से बात कर पाती हूं विदाउट एनी एंगर विदाउट एनी आउटरेज। भाई के साथ रिश्ता बिल्कुल कटा हुआ था। अभी वो भाई के साथ भी बात करना
(29:24) उसने शुरू किया है। बेटी को मारना सबसे पहले बंद हो गया। बिकॉज़ हमारे क्लीनिक में एक अनरिटन रूल है कि अगर अगर बच्चों की तरफ वायलेंस है तो सबसे पहले उस पे काम करो। दे हैव टू फर्स्ट स्टॉप हिटिंग द चिल्ड्रन। बाकी चीजें पे हम बाद में काम करते हैं। तो ऑब्वियसली वो तो सबसे पहले बंद हो गया। एंड देन शी सेड आफ्टर ऑल ऑफ दिस उसके स्कोर्स बदले। उसके डिप्रेशन कम हुआ, एंजायटी कम हुआ। फिर उसकी शादी पे भी दिखने लगा। देन द हस्बैंड सेड कि ओ नाउ यू आर मच काम अर पर्सन। मैं देख रहा हूं कि मम्मी के साथ बात करके तुम एजिटेटेड नहीं हो। तुम अभी नॉर्मल रह रही हो। तो इस
(29:56) किस्म की हमारे पास हजारों डॉक्यूमेंटेड केसेस हैं जहां पे हम इस तरह का काम करते हैं। ये पर्टिकुलर केस में मुझे सुनके ऐसे लगा कि बहुत सारी चाइल्डहुड में चीजें हुई। हां। कौन है जिन्हें आपके पास हेल्प के लिए आना चाहिए? हु वुड यू वांट टू रीच आउट टू यू गाइज़? हां हां। सो सी नॉट एव्री ट्रॉमा नीड्स थेरेपी। फर्स्ट थिंग जिसको भी चाइल्डहुड ट्रॉमा हुआ है जरूरी नहीं कि सबको थेरेपिस्ट के पास जाना पड़े। बराबर है क्योंकि बहुत से लोग ट्रॉमा के बावजूद भी फंक्शनल हैं अपनी लाइफ में। तो सबसे पहला तो अगर आपकी लाइफ में जा ऊपर ऊपर से सब
(30:32) चीजें ठीक सही चल रही है तो यू डोंट नीड थेरेपी। लेट मी टेल दिस। आई हैव टू टेल दिस वैरी क्लियरली। देन यू शुड पैट योर बैक कि इनस्पाइट ऑफ द ट्रोमा, आई हैव सर्वाइव्ड। आई एम डूइंग फाइन। आई एम हैप्पी इन माय रिलेशनशिप्स और आई डोंट नीड इट। दैट इज ग्रेट। बट इफ यू हैव चाइल्डहुड ट्रॉमा एंड इफ देयर आर अदर साइन लाइक फॉर एग्जांपल यू आर ऑलवेज अनहैपी विथ योरसेल्फ। आपको हर चीज में आपको तकलीफ है। आपको ऑफ एंड ऑन डिप्रेशन रहता रहता है। डिप्रेशन आता है, निकल आते हो, आता है, निकल आते हो, आता है। आपको हर चीज में ए्जायटी हो जाती है। लोग आपको कहते हैं कि
(31:05) तुम बहुत एन्शियस हो यार। हर चीज में क्यों इतनी हाइपर हो जाते हो? आपके हर रिश्ते में आपको कंप्लेन है या उनको आपसे कंप्लेन है। बीवी आपकी खुश नहीं है। बच्चे आपसे खुश नहीं है। लोग कहते हैं कि तुम्हारा गुस्सा नाक पे तुम बार-बार पे भड़क जाते हो। इसकी वजह से आपके रिश्ते ठीक नहीं होते। या तो आपको फिजिकल हेल्थ इश्यूज बहुत बचपन से आप सब कुछ सही कर रहे हो फिर भी आपकी हेल्थ ठीक नहीं है। हां, जैसे आपको अर्थराइटिस है, थायरॉइड है, कार्डियोवस्कुलर इशूज़ जल्दी हो रहे हैं। आप बाकी सब चीजें ठीक कर रहे हो तो या तो फिर आपको काम में जैसे फंक्शनैलिटी इशूज़
(31:34) हैं। जैसे आप उठ के काम ही नहीं कर सकते हो। आप काम पे नहीं जा सकते हो। आप आप हर 30 से आप हर छ महीने साल में नौकरी छोड़ देते हो। आपको एडिकशंस हैं जिससे आप छूट नहीं पा रहे हो। तो ये सारे साइन हैं जो कहते हैं कि मे बी यू नीड हेल्प। एक लेडी आई थी तो बोलती है कि मदर इन लॉ से पटती नहीं। बहुत ही टेंट्स करती है तो मैं छोड़ के कहीं और चले जाती हूं। अब बहुत काम किया। रूट कहां निकला? पापा नहीं मेरे जो दादा थे ग्रैंडफादर उनकी बिहेवियर मुझे बिल्कुल नफरत थी और वही बिहेवियर यहां से दिखती है वो अवेयरनेस इट रिमाइंड्स ऑफ दैट चाइल्ड
(32:13) आई थिंक पैरेंटिंग एक ऐसी चीज है कि मतलब अभी मुझे रियलाइज हो रहा है कि इतनी पावरफुल है और जनरेशनल इंपैक्ट राइट तुम्हारे ग्रैंड पेरेंट ने क्या किया है उसका तुम तुम भुगत रहे हो तो अगर ब्रॉड में ये एग्जांपल से अगर मैं रूट कॉज उसमें बोल तो सरफेस में अगर हम डिप्रेशन देख रहे हैं। एक साइड पे शट डाउन शटडाउन मींस आप जो रूटीनली खुश होकर करते थे वो नहीं कर सकते। नींद हो जाती है। लोग नोटिस करते हैं कि आप दुखी रहते हो। वो सब सिम्टम्स हैं सिंपल वर्ड्स में डिप्रेशन के। और दूसरी तरह एक्सट्रीम अग्रेशन गुस्सा एक्सट्रीम ओवर द टॉप। लोग देखते
(32:48) हैं कि ये गुस्सा छोटी-छोटी चीज में हो जाता है। ये एक स्पेक्ट्रम है। डिप्रेशन में अगर हम देखें जब शुरू किया हमने कि डिप्रेशन कोई अनुभव बचपन में नहीं है और है तो उसमें एक डिफरेंस होता है। फिजिकल अब्यूज में इतना था सेक्सुअल में था। इमोशनल अब्यूज में और बढ़ गया बचपन में। और इमोशन नेगलेक्ट तो और सो सबसे ज्यादा डिप्रेशन जो जो लोग आते हैं उनमें बचपन में पीियर आइसोलेशन और इमोशन नेगलेक्ट के अनुभव बहुत होते हैं। तो ये अगर प्रेजेंटिंग प्रॉब्लम है तो उसका रूट्स ज्यादातर यहां होते हैं। उसके बीच में लोनलीनेस भी होती है। तो ये एक पूरा एक
(33:22) इंटरकनेक्टेड मैश है। एग्रेशन देखो तो जनरली वायलेंट फैमिली एनवायरमेंट होती है बचपन में। अब वो वायलेंस वर्बल भी हो सकती है या फिर फिजिकल भी हो सकती है। डोमेस्टिक वायलेंस भी हो सकती है। सेक्सुअल अब्यूज भी हो सकता है। पर ज्यादातर सॉफ्टर एलिमेंट्स डिप्रेशन में है जो डिफरेंस [गला साफ़ करने की आवाज़] में और वायलेंट एलिमेंट एंगर में और बाकी सब इन बिटवीन है। देखिए लोग आजकल सेक्सुअल अब्यूज और फिजिकल अब्यूज समझते हैं कि ये गलत है। पर इमोशनल नेगलेक्ट इमोशनल अब्यूज के बारे में तो हमारे समाज में किसी को पता ही नहीं है। इनफैक्ट पेरेंट्स को तो यही लगता है।
(33:55) लोगों को लगता है कि यार हम तो सुधार रहे हैं ना इसको। को टोकटोक के तो सुधार रहे हैं। हम उसको बोल रहे कि तेरे बाल ठीक कर, तेरा नाक ठीक कर। तो हम तो उसको सुधारने की कोशिश कर रहे हैं। बट दे डोंट सी इट एज इमोशनल अब्यूज। यू आर अबब्सोलुटली राइट। पेरेंट्स का इरादा हमेशा सही होता है। तारे जमीन पर में एक बहुत इंटरेस्टिंग डिस्लेक्सिया का केस उन्होंने दिखाया। जहां पे फादर डिसिप्लिन ही कर रहा था। पर उसका तरीका इतना गलत आउटकम दे रहा था। आई थिंक एज पेरेंट्स हमें बहुत जरूरत है आपसे सीखने की कि टेक्निक्स क्या होनी चाहिए क्योंकि इरादा तो सबका सही है। इमोशनल
(34:27) अब्यूज और नेगलेक्ट के जो स्कार्स हैं, उसके घाव हैं, वह शरीर पे नहीं दिखते। वह आत्मा पे, मन पे दिखते हैं। इसलिए वह ज्यादा डीप है। हमने जो लोग हमारे पास आए थे सुसाइड अटेम्प्ट को लेके हु हैड अटेम्प्टेड सुसाइड या जिनको सुसाइड करने के विचार आते थे या जो लोग सेल्फ हार्म करते थे। ये पूरे ग्रुप को हमने एग्जामिन किया। उसमें देखा कि सबसे ज्यादा प्रेलेंस ऑफ इमोशनल अब्यूज, इमोशनल नेगलेक्ट था और बुलिंग था। नॉट फिजिकल एंड सेक्सुअल अब्यूज। हां, फिजिकल सेक्सुअल अब्यूज था बट कम मात्रा में था। तो जो लोग आजकल हम देख रहे हैं न्यूज़ में हर दूसरे दिन के
(34:59) आत्महत्या की इसने आत्महत्या की आत्महत्या कौन कर रहे हैं? वी ट्राइड टू आस्क आवरसेल्व्स कि कौन लोग हैं जो इतना ज्यादा सुसाइड अटेम्प्ट के बारे में सोच रहे हैं। उनमें भी हमने कंसिस्टेंट ये पैटर्न देखा कि चाइल्डहुड ट्रॉमा ज्यादा है। फर्स्ट ऑफ ऑल और उसमें भी कौन सा एलिमेंट ज्यादा है? इमोशनल अब्यूज, इमोशनल नेगलेक्ट। मतलब आई एम नॉट लव्ड। मेरी कोई वैल्यू नहीं है। मेरी किसी को जरूरत नहीं है। यह बचपन से बच्चे को लग रहा है। पांच साल के बच्चे को भी लग रहा है कि मैं मैटर नहीं करता हूं। किसी को मेरी पड़ी नहीं है। ये जॉइंट
(35:28) फैमिलीज में भी हो रहा है। मैं मैं कहना चाहूंगी दिस इज नॉट जस्ट अ न्यूक्लियर फैमिली। जॉइंट फैमिली में भी जहां पे 10 बच्चे हैं। इस बच्चे को कोई देखता ही नहीं है। कोई उसको प्यार ही नहीं करता है। कोई उसको उठाता नहीं है। वो रोता रहता है। कोने में किसी को पड़ी नहीं है। ये सब बच्चे इमोशनल नेगलेक्ट महसूस करते हैं। और जो या तो फिर जो बच्चे जिनके मां-बाप घर में लड़ते रहते हैं। पूरा दिन अपने ही प्रॉब्लम से बच्चे की तरफ ध्यान ही नहीं है। तो बच्चा यही फील करता है कि मेरी कोई वैल्यू नहीं है दुनिया में। मैं जीऊं कि मरूं किसी को कोई फर्क नहीं पड़ता है। तो
(35:55) दीज़ आर द वंस हु आर द फर्स्ट वंस टू हार्म देमसेल्व्स एंड थिंक ऑफ किलिंग देमसेल्व्स बिकॉज़ दे रियली डोंट वैल्यू देम। उनको और दूसरा है कि जिसको बार-बार टोका जाता है जिससे टॉक्सिक शेम आती है जिसको ह्यूमिलेट किया जाता है जैसे पड़ोसियों के सामने अरे देखो इसकी मार्कशीट तो देखो हमारा नाम रोशन करके टों्ट मारना यू नो उसको लोगों के सामने ह्यूमिलिएट करना टीचर्स क्लास के सामने खड़ा करके बच्चे को बोलते कि तेरे में अकल नहीं है तू डफर है तू लाइफ में कुछ नहीं बन पाएगा या या तो बोलते कि तू तेरे बाप पे गया है देख एक तो हमारे पास
(36:24) क्लाइंट था जिसके मार्क्स कम आए थे तो पापा ने उसके पूरे बाल मुंडवा दिए उसको पूरे बाल मुंडवा के बिल्डिंग में पूरे घुमाया ताकि उसको शर्म आए गंदे मार्क्स लाने के लिए। फादर ने यह किया होगा सोच के कि बेटा इससे कुछ सीखेगा। बट फादर को यह नहीं पता था कि इस इससे लाइफ लॉन्ग इसमें टॉक्सिक शेम भर गई है। दूसरा एक क्लाइंट मुझे बोला था कि मेरे जब भी मैं कुछ गलत करती थी, मस्ती करती थी ना तो पापा मेरे कपड़े उतार के मुझे नंगा करके बालकनी में खड़ा कर देते थे दो घंटा ताकि पूरे पड़ोसियों को पढ़ता चले कि मैंने कुछ गलत किया है। अभी दीज़ आर मोर हार्मफुल देन
(37:00) फिजिकल अब्यूज। और ये लोग कई बार ना लाइफ में इतने सक्सेसफुल हो जाते हैं। मैं आपको बताऊं दीज़ आर पीपल हु आर रनिंग कंपनीज़। सीईओस होते हैं कंपनी के बड़े-बड़े जॉब करते हैं। बट अंदर से इनको एंजायटी, इनसिक्योरिटी, फियर, कंपल्सिव बिहेवियर्स ये सब चीजें हो जाती है। बिकॉज़ इसके स्कार्स डायरेक्टली ऐसा नहीं होता कि लोग अनसक्सेसफुल हो जाते हैं। बड़े सक्सेसफुल होते हैं। क्योंकि इंसान कोप अप तो कर ही लेता है कुछ भी करके। पर इट कम्स एट अ प्राइस। या तो वो सुन कर देते हैं अपने आपको। नम कर देते हैं। मशीन बन जाते हैं कि अरे जितना करना है करो मारो पीटो। मैं
(37:29) तो करके दिखाऊंगा। पर हैप्पीनेस नहीं होती। उनकी बीवी बच्चे दुखी हैं। उनके फैमिली लाइफ बेकार है। उनके मां-बाप के साथ रिश्ता नहीं है। पैसे बहुत हैं। सक्सेस है। बट अंदर से सब टूटे हुए हैं। अनफॉर्चुनेटली हमारे देश में यंग जो पपुलेशन है उसमें प्राइमरी कॉज़ ऑफ़ डेथ इज़ अटेम्प्ट, सुसाइड और रोड एक्सीडेंस। तो हम लोग जापान में भी तो सोचा कि वहां पे बहुत कॉमन है। इंडिया के एवरेज एशिया से भी ज्यादा है और ग्लोबल से भी ज्यादा। तो सुसाइड अटेम्प्ट के पहले सुसाइड प्लानिंग होता है। प्लानिंग के पहले थॉट्स होता है और उसके रूट्स में ज्यादातर लोगों में
(38:00) सेल्फ आर्म हिस्ट्री। सेल्फ आर्म इज नॉन सुसाइडल सेल्फ इंजरी मगर उससे रिस्क बढ़ता है। तो ये वॉच आउट पॉइंट्स है और दूसरे एंगल से देखें तो ज्यादातर जो काम होता है और वो जरूरी है कि सुसाइड के लिए जैसे ये कॉलेज में पंखे ऐसे हैं कि कोई हैंग नहीं हो सकता है। बहुत अच्छी बात है। रिक्वायर्ड है। मगर 100 में से या हजार में से एक या दो लोग वो अटेम्प्ट क्यों करते हैं वो कोई नहीं पूछता है। वो पंखा ठीक करना जरूरी है। मगर वो कौन जाता है और बाकी क्यों नहीं होते हैं उनके? दे फील कि हमें सोशल सपोर्ट नहीं है। अदर एंड ऑफ़ द स्पेक्ट्रम इज़
(38:32) लोनलीनेस। लोनलीनेस इज़ रूटेड नॉट एज मच इन फिजिकल अब्यूज, सेक्सुअल अब्यूज उससे भी कनेक्टेड है। मगर इमोशनल अब्यूज, इमोशनल नेगलेक्ट एंड पीियर आइसोलेशन। और ये तीन कब होता है? फिजिकल अब्यूज के एनवायरमेंट में। सेक्सुअल अब्यूज, वायलेंट, डोमेस्टिक वायलेंस होता है, पेरेंट्स फाइटिंग होता है। स्कूल में पीियर अग्रेशन होता है। नॉट जस्ट पीियर आइसोलेशन। सो यहां पे काम जरूरी है। अगर हमें इसका लॉन्ग टर्म बेनिफिट लाना है। टेंपरेरी फिक्सिंग यस इट्सेंट। बट 1000 में से दो लोग क्यों वो अटेम्प्ट करते हैं? उसके रूट्स यहां पे हैं। हां ये लोग सोच रहे हैं जनरेशन वीक है।
(39:07) अभी वो कहते हैं अभी नीट एग्जाम की वजह सुसाइड किया बट बाकी सब लोगों ने तो नहीं किया। तो जिन्होंने किया उनका [गला साफ़ करने की आवाज़] क्या अलग था? दैट इज व्हाट वी हैव टू अंडरस्टैंड ना। यू कैन नॉट जनरलाइज बिकॉज़ वही टॉक्सिक बॉस वही टॉक्सिक ऑफिस है। बाकी तो 10 लोग सर्वाइव कर रहे हैं। और ये अनफॉर्चूनेट सिचुएशन इंडिया में चाइल्डहुड ट्रॉमा की सुसाइड से एसोसिएशन रिस्क से का कोई भी रिसर्च नहीं हुआ है। कंबाइन इंपैक्ट और दुनिया में देखो तो भरे पड़े मेटानालिसिस रिसर्च किए हैं। अगर हमारी यंग जनरेशन जो हमारा डेमोग्राफिक डिविडेंड है उसका प्राइमरी कॉज ऑफ़ डेथ इज़
(39:39) सुसाइड। हाउ कैन वी इग्नोर दैट एज अ कम्युनिटी? अनएक्सेप्टेबल? टॉक्सिक शेम कहा आपने। टॉक्सिक शेम और शेम में क्या फर्क है? तो देखिए शेम या शर्म ऐसी चीज है जो हमें होनी चाहिए हेल्दी मात्रा में। अगर शर्म नहीं रही तो हम समाज में नहीं रह पाएंगे। तो हम हम लोगों के साथ नहीं रह पाएंगे। हम अच्छी बिहेवियर नहीं कर पाएंगे। और जानवर और इंसान में एक डिफरेंशिएटिंग फैक्टर है कि वी हैव शर्म। मतलब कि कपड़े के बिना बाहर नहीं जा सकते। लोगों को गालियां नहीं दे सकते। मना हुआ था। दिस इज हेल्दी शेम। तो हेल्दी शेम वो शर्म है जो हमें बाउंड्रीज में रखती है जो हमें
(40:18) रिस्पेक्टेबल बिहेवियर कराती है और यह हमें बच्चों को सिखानी चाहिए। टॉक्सिक शेम वो है जब शर्म इतनी हद तक हम किसी को महसूस कराते हैं कि उसको लग रहा है कि मैं ही प्रॉब्लम हूं। जैसे बच्चे ने समझो कि दूध गिरा दिया। तो हम हेल्दी शेम क्या है? कि अच्छा अगली बार ध्यान रखेंगे। दूध गिर गया। चलो साफ करते हैं। टॉक्सिक शेम मतलब तू यूज़लेस है। हर बार तू गिराता है दूध। तू तो कुछ काम का ही नहीं है। तेरे से हर चीज गिर जाती है। ये हो गया टॉक्सिक शेप। तो बिहेवियर पे अटेंशन नहीं है। इसमें टॉक्सिक शेम में हम इंसान को गलत बताते हैं कि यू आर द प्रॉब्लम। वी आर नॉट सेइंग
(40:48) योर बिहेवियर इज अ प्रॉब्लम। तो टॉक्सिक शेम से जब बच्चा बड़ा होता है तो उसको लग रहा है कि मैं फ्लॉड हूं। आई एम द प्रॉब्लम। आई एम द प्रॉब्लम। और बच्चे बहुत कहते हैं मैं ही प्रॉब्लम हूं। मैं ही खराब हूं। मैं ही पता नहीं क्यों दुनिया में आया हूं। मैं ही मेरे पेरेंट्स के लिए बोझ हूं। दिस इज टॉक्सिक शी। गॉट इट। हाउ विल ऐड द वर्ड गिल्ट? गिल्ट इज अ हेल्दी इमोशन। अगर मैं टाइम पे नहीं आया तो मेरा टाइम पे नहीं आने वाला एक्शन गलत है जिसको मुझे सीख के अगली बार टाइम पे आना है। गिल्ट इज नॉर्मल हेल्दी। अगर गिल्ट नहीं है तो मैं कल भी लेट आऊंगा।
(41:21) परसों भी आऊंगा और एकदम ऐसा मैं सीखूंगा नहीं। जब गिल्ट से शेम होता है तब मुझे ऐसा लगता है कि मैंने कुछ खराब किया। मैं खराब हूं। तब वो एक शिफ्ट होता है कि ब्लेम इज़ नॉट ऑन माय एक्शन बट ऑन मी। सो शेम से वो कंटिन्यू जब गिल्ड से शेम पे आया तब फोकस मेरे ऊपर आया। नहीं कि मेरे एक्शन में और अगर वो टॉक्सिक शेम जो है कि कुछ भी हो किसी ने गलत किया आई विल से सॉरी वो फ़िंग बिहेव के साथ भी कनेक्टेड है तो टॉक्सिक शेर चीज में मैं खुद अपने आप में एक चैलेंज करता हूं कि मैं ही खराब हूं। मैं ऐसा ही हूं हर रोज लेट आता हूं। सब चीज में लेट रहता हूं। नहीं आप खाली
(41:58) लेट आए थे क्योंकि ट्रैफिक आया बारिश आई जो भी था होता है ऐसा उसको स्वीकार करके उससे लर्न करके अगली बार बदलो। तो ये कंटिन्यूम से बहुत सारा कनेक्शन भी हमने लिखा है कि फर्निंग बिहेवियर कि हां सॉरी भी है। बहुत सारे लोग सॉरी सॉरी सही जरूरत है मगर वो बोलते हैं और उसके पीछे आपको दिखता है कि ये टॉक्सिक शेम से गिल्ड से नहीं है। कुछ भी गलत हुआ नो प्रॉब्लम। गिल्ड हेल्प्स यू फिक्स इट मैक्स। और टॉक्सिक शेम मतलब यू आर ब्लेमिंग योरसेल्फ फॉर अदर प्रॉब्लम्स। आल्सो जैसे पेरेंट्स की लड़ाई मेरी वजह से हुई। घर में सब प्रॉब्लम मेरी वजह से ही हो रहे
(42:29) हैं। ऑफिस में सब लोग को मेरे प्रोजेक्ट ठीक से नहीं हुआ। मेरी वजह से ही नहीं हुआ है। सो टॉक्सिक शेम का अगर आपको बैकग्राउंड है ना तो आप सब गलतियों की जिम्मेदारी आप अपने सर पे लेके घूमोगे। हम एंड इट आल्सो अफेक्ट्स अ आइडेंटिटी। हां। सो इसमें सेल्फ एस्टीम कम होती है और टॉक्सिक शेम हो गया, पोर्निंग बिहेवियर हो गया, सॉरी हो गया, कॉन्फिडेंस गया। पूरा कनेक्टेड है। ये सारा सुनकर मुझे तो अब स्ट्रेस हो रहा है। मुझे स्ट्रेस हो रहा है क्योंकि मेरे घर पे दो बच्चे हैं। एंड सडनली पैरेंटिंग सीम्स लाइक अ वे कॉम्प्लिकेटेड रिस्पांसिबिलिटी देन इट वाज़ टू आवर्स एगो।
(43:01) सो आई वांट टू नाउ मूव टू दिस पीस ऑफ व्हाट आर द थिंग्स इट इजेंट फॉर अ पेरेंट टू रिमेंबर सो दैट वी कैन गिव देम अ चाइल्डहुड दैट लीड्स टू अ स्ट्रांग रेिलिएंट एडल्ट करेक्ट वेरी गुड थिंग आई एम वेरी ग्लैड यू सेड द लास्ट पार्ट एक्चुअली जेंटल पैरेंटिंग बोलो जो भी पैरेंटिंग बोलो अल्टीमेटली अगर पैरेंटिंग की वजह से आप बच्चे को प्रोटेक्ट कर रहे हो आप बच्चे को एंटाइटल्ड बना रहे हो। आप बच्चे को सॉफ्ट बना रहे हो तो वो पैरेंटिंग फेल है। और उसके साथ-साथ अगर आप वैसी पैरेंटिंग कर रहे हो जिससे बच्चा ही दूर हो रहा है आपसे कि बच्चा सोच रहा है कि कब मैं तो यार 18
(43:44) का बनूं और भागूं तो वो भी फेल है। वो पैरेंटिंग सही है जहां पे आपका बच्चा आपके बगैर सर्वाइव हो पाए और फिर भी आपके लिए उसके मन में बहुत ज्यादा प्यार हो। व्हिच इज गुड कनेक्शन बट आल्सो विद इमोशनल रेिलियंस। इमोशनल रेजिलेंस मतलब क्या? आजकल पेरेंट्स ये सोचते हैं ना ये सब इन सोशल मीडिया पे देख के कि अरे बच्चे को अब्यूज नहीं होना चाहिए। बच्चे को बुलिंग नहीं होना चाहिए। बच्चे को ये नहीं होना चाहिए। तो दे आर बिकमिंग वेरी प्रोटेक्टिव। हम बिकॉज़ ये जनरेशन ऑफ़ पेरेंट्स हैज़ ग्रोन अप विद आइदर पेरेंट्स जो उनको बहुत मारते पीटते थे, गाली गलौज करते थे। या तो फिर
(44:18) जो पेरेंट्स ने उन पर ध्यान ही नहीं दिया। तो ये जनरेशन ऑफ़ पेरेंट्स अभी ऐसी आ रही है कि बहुत ज्यादा ध्यान दे रहे बच्चे पे। मुझे तो मतलब अपनी करियर गोल्ड मेडलिस्ट बच्चा तो एक तो उसका तो प्रेशर है ही मतलब मैंने सब कुछ छोड़छाड़ के पेरेंट बनने का प्रोजेक्ट लिया है तो वो मुझे बराबर में गोल्ड मेडल लाना है उसमें भी तो ये सबसे पहला गलत प्रिमाइस है क्योंकि इसकी वजह से क्या हो रहा है कि पेरेंट्स बच्चों को ज्यादा हेलीकॉप्टर पेरेंट्स बन रहे हैं या तो जरूरत से ज्यादा परमिसिव पेरेंट्स बन रहे हैं। परमिसिव मतलब क्या? कुछ भी बोलना नहीं,
(44:51) कुछ भी कहना नहीं, बच्चे को जो करना है करो। बच्चे को पूरी फ्रीडम है और गिन चुन के एक आध बच्चे होते हैं या दो बच्चे होते हैं तो पूरा घर उसके इर्द-गिर्द घूमता है। बच्चा ने अगर आज ये सब्जी नहीं खाई, ठीक है बेटा तुम्हारे लिए मैं यह बना देती हूं। सो दिस इज गिविंग राइज टू अ जनरेशन ऑफ चिल्ड्रन जो हम कहते हैं कि सॉफ्ट जनरेशन है, यू नो बिगड़ी हुई जनरेशन है, एंटाइटल्ड है। यह पीढ़ी आगे जाके टॉक्सिक बॉस, टॉक्सिक मदर इन लॉ, टॉक्सिक एनवायरमेंट को नहीं सर्वाइव कर पाएगी। एंड पैरेंटिंग इज अ वेरी सेल्फ गिल्ट, सेल्फ डाउट जर्नी। गणपति फंक्शन चल रहा है। सारे
(45:29) रिलेटिव्स आए हैं। हमारा बच्चा मिस बिहेव कर रहा है। तो सीधा हमारी ऊपर की जनरेशन हमें बोलेगी हां तुम तो कुछ बच्चों को बोलते ही नहीं हो। हमारे तो बच्चे बिल्कुल ऐसे हमारे साथ हमारे तो सुनते थे। हाउ टू बी अ गुड पैरेंट? क्योंकि ये एक बहुत बड़ी रिस्पांसिबिलिटी है। तो पैरेंटिंग का सही यही है कि बैलेंस पैरेंटिंग होनी चाहिए। जो मैंने बुक में पूरा एक चैप्टर इसके बारे में डाला है कि बैलेंस ऑफ बोथ अथॉरिटी भी चाहिए। जैसे अगर गणेश का आपने एग्जांपल दिया तो बच्चे अगर मां-बाप बोले कि नहीं तुमको बैठना है पूजा में बेटा पर तुम 2 घंटा नहीं पर आधा घंटा तुम्हें
(46:01) बैठना पड़ेगा सो स्ट्रक्चर दिया पर उसमें फ्रीडम दिया हम 8:00 बजे सबको खाना है टेबल पे बैठ के हमारे घर में सब लोग 8:00 बजे खाते हैं पर फिर उसमें आपको ठीक है आपको सिर्फ रोटी सब्जी खानी है दाल चावल नहीं खाना है तो चलेगा सो गिव फ्रीडम बट गिव स्ट्रक्चर विद द फ्रीडम हैव बाउंड्रीज हैव रूल्स सो बैलेंस पैरेंटिंग करना करना चाहिए। जहां पे पेरेंट अथॉरिटेटिव है। पेरेंट ने रूल्स बनाए हैं। स्ट्रक्चर दिया है बच्चे को क्योंकि ब्रेन डेवलपमेंट के लिए बहुत जरूरी है। बिल्कुल खुला छोड़ना इज नॉट गुड। पर उसके साथ-साथ बच्चे के साथ कनेक्शन भी है। बच्चा अगर गलती करे तो
(46:37) उसमें से क्या सीख मिली उसकी बातचीत हो। बच्चा गलती करे तो ना झूठ बोले और आपसे छुपाए। तो बच्चे के साथ जो कनेक्शन है जिससे बच्चा सेफ फील करे कि नहीं? मैंने कुछ गड़बड़ किया तो मैं मम्मी को पापा को बता सकता हूं। पर दो बात सुननी पड़ेगी पर बता सकता हूं। हम तो ये वाला जो है दिस इज द राइट पैरेंटिंग। इफ यू वांट योर चिल्ड्रन टू बी इमोशनली रेजिलेंट उनको गलतियां करनी पड़ेगी। मतलब गलतियां करने की फ्रीडम देनी पड़ेगी। उनको इंडिपेंडेंस देना पड़ेगा गलतियां करने का। राइट? उनको गिरने देना पड़ेगा। हां। उसको धोखा दिया फ्रेंड ने। रो रहा है। रोने दो 5 मिनट। फील करने दो
(47:13) सैडनेस। हां। रिश्तेदार गुजर गए तो उसको लेके जाओ। बताओ कि नहीं। लोग मरते हैं। आजकल पेरेंट्स वो भी नहीं बच्चों को एक्सपोज करने देते। हम दे वांट टू प्रोटेक्ट फ्रॉम एवरीथिंग। बच्चा दुखी होना चाहिए। बच्चे को गुस्सा भी आना चाहिए। बच्चे को रोना चाहिए। बच्चे को फ्रस्ट्रेशन आना चाहिए। एग्जाम में फेल हुआ तो लेट हिम सट विद द फेलियर। दैट्स सो ब्यूटीफुल। जस्ट लाइक बच्चे को जब हम बैक्टीरिया वायरस से एक्सपोज़र देते हैं तो इम्यूनिटी बनती है पूरे लाइफ की। पूरा टाइम हैंड सैनिटाइजर लगा के रखोगे तो बच्चे को एलर्जी हो जाएगी। एक्साक्ट्ली। वैसे ही इमोशनली बच्चे को
(47:47) ओवर प्रोटेक्ट करे बिना धीरे-धीरे डोज़ धीरे एप्रोप्रियट डोज़ में हां पांच साल के बच्चे को नहीं बोलोगे कि तुम अकेले जाओ राइट पर आप 10 साल के बच्चे को कह सकते हो कि बेटा दुकान पे जाके लेके आओ ये चीजें ध्यान रखना वरना ये होता है कि बच्चा कभी कॉन्फिडेंट बनेगा ही नहीं जैसे हमारे बच्चे मैंने बुक में मैंने बहुत पर्सनल एनेकडोट्स डाले हैं कि जापान जैसे देश में कोई नहीं जाता था हमारे बच्चे पहले होते थे अकेले स्कूल जाते थे भेजते थे हमारे दिल पे पत्थर रख के देखते पीछे से छुप-छुप के कि क्या कर रहे हैं। बट वी हैड टू गिव दैट इंडिपेंडेंस टू देम।
(48:18) गलतियां भी बच्चों को उम्र के हिसाब से करनी देनी चाहिए। पर मैं यह मानती हूं कि अगर पांचवी में बच्चा फेल हुए तो फिर भी ठीक है। तब उसने फेलियर अनुभव किया और सीखा तो आगे जाके वो फेलियर मैनेज कर पाएगा। आजकल पेरेंट्स क्या करते हैं? बच्चों को 12वीं क्लास तक फेल ही नहीं होने देते। मारते-पीटते, लड़ते, झगड़ते, इमोशनल ब्लैकमेल करके पढ़ातेपढ़ाते बेटा फेल नहीं होना चाहिए। फिर वो बेटा आईआईटी के एग्जाम में फेल होता है, 12th में फेल होता है, टूट पड़ता है क्योंकि उसने कभी फेलियर महसूस ही नहीं। एब्सेंस ऑफ़ नेगेटिविटी इज नॉट प्रेजेंस ऑफ़
(48:46) पॉजिटिविटी। देयर फॉर एलिमिनेटिंग एसेस इज़ नॉट द ओनली अप्रोच। इट्सेंट बट इट इज़ नॉट सफिशिएंट। देन वी लुक्ड एट सर्टन पॉजिटिव एक्सपीरियंसेस एंड रियलाइज़ दैट दोज़ हु हैड हायर डोसेज ऑफ़ पॉजिटिव एक्सपीरियंसेस एज़ ग्रोइंग अप चिल्ड्रन वेर रेज़िलिंट। नाउ द क्वेश्चन कम्स कि जिसका एक्सपोज़र टू चाइल्ड ट्रॉमा इज हाई एंड दिस इज हाई इन मोस्ट ऑफ दिस केसेस आल्सो दिस हेल्प ओ वाओ तो अगर कुछ चाइल्डहुड ट्रॉमा हो भी गया है पर अगर चाइल्डहुड पॉजिटिव एक्सपीरियंसेस आप ले आओ तो वो उसको बहुत अच्छे से नलिफाई कर सकता है नलिफाई द नेगेटिव इंप्रिंट्स एंड ब्रिंग
(49:24) सर्टेन पॉजिटिव कॉम्पोनेंट्स व्हिच आर नॉट प्रेजेंट व्हेन दिस इस नलिफाइड देयर फॉर दिस इस रिक्वायर्ड नॉट ओनली टू नलिफाई दिस बट टू ऐड सर्टेन एक्सपीरियंस यू नीड टू लर्न टू लूज ग्रेसफुली एंड बाउंस बैक। लूजिंग इजेंट लूजिंग शुड नॉट एंड अप एस पनिशमेंट बट अ लर्निंग टू ग्रो एंड गो बैक टू द सेम ओपोनेंट सेम प्लेयर वर्स्ट सिचुएशन एंड फाइंड अ वे फॉरवर्ड। दैट इज़ रेजिलियंस। एंड दैट शुड नॉट कम ओनली इन अ क्लासरूम ऑन अ डिजिटल स्क्रीन बट आउट देयर विथ अननोन अपोनेंट्स और पीपल और सिचुएशन वेयर यू फेस। बच्चे को भेजो तू जा। मैं हूं पीछे।
(50:03) दैट्स इनफ। इफ द चाइल्ड नोस दैट आई कैन फेल एंड आई विल बी सपोर्टेड। दैट्स इनफ। एंड दैट कॉम्बिनेशन इन टर्म्स ऑफ कॉम्प्लेक्स नंबर्स इज़ व्हाट वी हैव एनालाइज़ इन टर्म्स ऑफ़ हाउ चाइल्डहुड एक्सपीरियंसेस बोथ पॉजिटिव एंड नेगेटिव इन्फ्लुएंस लॉन्ग टर्म साइकोलॉजिकल रेज़िलियंस। एबिलिटी एडवांस। अगर रेज़िलियंस है तो जिसको रेज़िलियंस हाई था उनका नोनलीनेस एक्सेप्टेबल था। बिलो देयर वाज़ नो ओनलीनेस। डिप्रेशन लेवल नहीं था। एंग्जायटी नहीं थी। परसेप्शन कि मेरे पास सोशल सपोर्ट है एडल्ट रूल में नॉट बचपन में वो एनवायरमेंटल में है। स्लीप अच्छी
(50:37) थी वेल बीइंग पॉजिटिव था। सो ये कॉम्बिनेशन इजेंट जो पेरेंट्स को समझना जरूरी है। और प्रिवेंशन ऑफ़ एएस शुड नॉट बी द ओनली मंत्र प्रेजेंस ऑफ़ पीसी एसी इज़ एडवर्स चाइल्डहुड एक्सपीरियंससेस पीसी इज़ पॉजिटिव चाइल्डहुड्स व्हनेवर देयर इज़ फेलियर कॉमन रिएक्शन होता है कि बच्चे को शेम कराओ। या तो फिर उसको बोलो कि नहीं नहीं नहीं बेटा तू फेल नहीं तू पास है। मतलब पेरेंट्स का नॉर्मल रिएक्शन आइदर यू प्रोटेक्ट फ्रॉम फेलियर और यू शेम देम फॉर फेलियर। द रियल इफ यू वांट टू मेक देम इमोशनली रेजिलेंट यू हैव टू लेट देम एक्सेप्ट द फेलियर एंड लर्न द
(51:10) लेसन फ्रॉम इट। दैट इज मिसिंग मोस्टली के भई जैसे गुंजन ने कहा मैच हार गए। तो तू बिकम तू हारेगा ही। तेरे से कुछ होगा ही नहीं। इज वन अप्रोच। अदर अप्रोच नहीं बेटा तू हार नहीं गया। तू तो फिर भी मेरा विनर है। चल हम पार्टी करते हैं। मैं तुम्हें प्राइस दिलाता हूं। दिस इज द परमिसिव पैरेंट बोथ बच्चे को हार बोथ आर रोंग तुम हारे हो कैसा लग रहा है हार के क्या फील हो रहा है सामने वाले को क्या लग रहा होगा अभी तुम्हें अगली बार वैसा लगवाना है तो क्या करना चाहिए जो इस बार नहीं किया दिस इज द कन्वर्सेशन बच्चे को गलतियां करने दो
(51:40) बच्चे को वर्दी फील कराओ बच्चे को यह लगना चाहिए कि कोई मेरा सुनने वाला है मैं कहीं बिलोंग करता हूं बच्चे को सोशल एक्सपोज़र दो बच्चे को कम्युनिटी में ऐसा होना चाहिए कि नहीं मेरा ये ग्रुप ऑफ फ्रेंड्स है ये मेरा फैमिली है तो जो सोशल सपोर्ट फील करता है। वो भी एक इंपॉर्टेंट कंट्रीब्यूटर है पॉजिटिव एक्सपीरियसेस का जिससे लोनलीनेस, डिप्रेशन नहीं आती है। आजकल प्रॉब्लम क्या हो रहा है कि न्यूक्लियर फैमिलीज हो रहे हैं और बच्चों की प्ले डेट सब क्यूरेट हो रही हैं। और पेरेंट्स भी कह रहे हैं नहीं बच्चे को फैमिली फंक्शन में नहीं जाना। छोड़ दो ना
(52:08) बच्चे की मर्जी है। तो क्या हो रहा है कि आजकल मैं देख रही हूं कि यंग बच्चों में सोशल एंजाइटटी है। बच्चे नए लोगों को नहीं देखतेदेखते रोने लग जाते हैं। उनको फंक्शनंस में नहीं जाना। उनको क्राउड देख के एंजायटी होने लगती है। समझ इनको यह समझ नहीं है कि एडल्टहुड में इसके बहुत इंप्लिकेशंस है। पर अगर बच्चे को बचपन से आपने रिश्तेदारों में मिलवाने दिया पहले क्या होता था? कोई भी आ जाता था घर पे बैठते थे। सबको हम चायवा देते थे एस चिल्ड्रन नाश्ता देते थे। तो हमारे में ऑलरेडी वो था कि अनजान लोगों से यू नो सेफली बात करो, रिश्तेदारों से बात करो,
(52:38) थोड़ी बहुत कन्वर्सेशन करो। सोशल फंक्शनंस में जाओ। वो आजकल मिसिंग है। तो यह भी एक दिस इज़ एन एलिमेंट ऑफ़ पीसी। बाय द वे वन मोर एलिमेंट ऑफ़ पीसी इज़ पार्टिसिपेटिंग इन कम्युनिटी ट्रेडिशन। सो गणेश पार्टिसिपेट एनीथिंग दैट इज़ कम्युनिटी शुड बी एक्सपोज्ड। चिल्ड्रन शुड बी एक्सपोज्ड देयर विद सपोर्ट विथ पेरेंट बीइंग देयर नॉट कि चलो चलेगा। उसमें फिर लॉन्ग टर्म क्या होता है? सोशल एंजाइटटी इज़ अगेन रूटेड इन सर्टन टाइप्स ऑफ़ चाइल्डहुड एक्सपीरियसेस। कि किसी को मिलना ही नहीं है। आइसोलेटेड मेरी दुनिया है। मेरे रूम में सब चलता है। जो सोशल एंजाइटटी को लेके आते हैं ना हम
(53:08) उनके रूट कॉज ढूंढ ढूंढते हैं तो पता होता है कि बचपन में उनको बहुत कहा गया था कि लोग क्या कहेंगे? लोग क्या कहेंगे? वहां मत जाना, ये मत करना, ये कपड़े मत पहन के जाना। आंटी अभी ऐसा बोलेगी अंकल। तो बचपन से प्रोग्रामिंग आ गया कि लोग मतलब डेंजर। हम यू नो समाज मतलब डेंजर। समाज में मेरी नाक कट जाएगी। अभी देखो आंटी अभी तुम वहां जा रही हो ऐसे कपड़े पहन के जाओगी। तो बचपन से प्रोग्रामिंग हो जाता है कि पीपल इज डेंजरस। सो इफ आई इफ आई गिव स्पेसिफिक एग्जांपल बचपन में मार पड़ी है। रूम में अकेले पड़ी है और लोगों के सामने पड़ी है।
(53:38) तो लोगों के सामने वाली मार की लॉन्ग टर्म इंप्रिंट इमोशनल इंप्रिंट बहुत स्ट्रांग होती है। कोई कंपैरिजन ही नहीं है। तो मार पड़ी एक सिंपल क्वेश्चन है। बट कहां कैसे क्या कॉन्टेक्स्ट में कितनी बार हो ये है वो एक इंपॉर्टेंट कॉम्पोनेंट है। वी डिजिटाइज दैट एंड वी आर एबल टू असेस दैट नाउ। सो पॉजिटिव चाइल्डहुड एक्सपीरियंस आई वांट टू क्लेरिफाई कि जरूरी नहीं है कि पेरेंट्स ही दें। ऐसे लोग हैं जिनके घर में माहौल बहुत टॉक्सिक है। बहुत ज्यादा मतलब फादर पी रहे हैं, मम्मी को मार रहे हैं। घर में पैसे की प्रॉब्लम है। सब पर उनके लाइफ में एक दो ऐसे एडल्ट्स हैं जो
(54:06) उनको ये एक्सपीरियंस दे रहे हैं। जैसे नाना है, नानी है, दादा-दादी है, बुआ है, मासी है, पड़ोसी है जो होता है बेटा आज चल मेरे पास बैठ। चल तुझे क्या खिलाऊं मैं? अच्छा तुझे रोना आ रहा है। उसको प्यार देते हैं। उसको सपोर्ट दे। तो ये लोगों में पॉजिटिव चाइल्डहुड एक्सपीरियसेस की वजह से इमोशनल रेजिडेंस बढ़ती है। तो कोई भी हो चाहे ट्यूशन टीचर हो और लोग हमको कहते हैं कि मैम मेरा लाइफ इतना खराब था बट वो मेरे एक कोच थे ना क्रिकेट के उन्होंने पूरा मुझे तार दिया। या तो मेरी वो दादी थी ना बस मैं उसके पास जाता था। वो दादी ने मेरा आत्मविश्वास टिकाए रखा।
(54:38) बाकी घर पे तो सब ऐसे। सो व्हाट आई ट्राई टू टेल पीपल इज आपके बच्चे भी नहीं है तो भी आप किसी बच्चे के लिए यह पॉजिटिव एक्सपीरियंसेस दो। यू नेवर नो कि आप किस कौन से बच्चे के लिए आप यह सपोर्ट बन सकते हो। कई बार मां-बाप नहीं कैपेबल है। दे सकते। मां-बाप के खुद के इतने ट्रॉमाज़ हैं, इतनी चैलेंजेस हैं। दे आर नॉट एबल टू गिव दैट टू द चाइल्ड बट एनीबडी कैन गिव इट। रिसर्च सेज़ इट डजंट हैव टू बी पेरेंट्स। इट कैन बी एनी एडल्ट। फॉर एग्जांपल एक एडल्ट आया था। काफी रेज़िलियंट था। बट बहुत सारे चाइल्डहुड एक्सपीरियंस। तो मैं समझ रहा था क्या था।
(55:07) तो फादर ने उसको उठाए एक गांव से एक स्कूल से सिटी से स्कूल से इंग्लिश मीडियम स्कूल से सीधा गुजराती मीडियम में डाल दिया 11th में तो इसकी तो बहुत तकलीफ हो गई तो ये तो बहुत डेंजर या एनी स्कूल चेंज मींस प्रॉब्लम या तो ये खराब है या यहां पे प्रॉब्लम हुआ है तो उसने बताया कि मेरे जो पुराने टीचर थे उनको पता चला कि ऐसा हुआ है आके मेरे पापा के सामने मेरे सामने लड़ाई की उन्होंने और वापस मुझे कि यहां मत भेजो मैं उसको ऐसा माध्यम चेंज नहीं कर सकते हो तो बोलते बोलते ऐसे मुझे किसी ने सपोर्ट किया आउट ऑफ नोवेयर और उसकी वजह से
(55:40) मेरा कंटिन्यूटी रहा। ऐसे बहुत सारे एग्जांपल्स हैं। आई थिंक [नाक से की जाने वाली आवाज़] टीचर्स बहुतेंट टीचर्स अब्यूज भी उतने करते हैं और टीचर्स पॉजिटिव भी उतने हैं। मतलब हमारे पास टीचर वाले ट्रॉमा इतने सारे टीचर्स के ट्रॉमा लेके आते हैं लोग। पर उतने ही लोग आते हैं जो कहते हैं कि नहीं वो टीचर की वजह से हमारी लाइफ बनी। तो दे हैव अ वेरीेंट रोल। आई थिंक आपने बहुत सारी चीजें कवर कर दी। किड्स का एक अलग ही एक करियर स्टार्ट हो गया। किड्स इन्फ्लुएंसर्स राइट? एंड इतने ज्यादा क्रिएटर्स हैं जो बच्चे हैं और बहुत ही यंग एज में वो कमा रहे हैं। उनके पेरेंट्स
(56:21) उनका एक बचपन पूरा उसके अराउंड हां क्यूरेट हो गया है। पूरा हर चीज इन लाइफ इज़ नाउ नो नो मोर अबाउट लिविंग एंड मोर अबाउट कंटेंट क्रिएशन। हाउ विल दिस इंपैक्ट किड्स? आई वुड से प्रीटी मच लाइक जो पहले के जमाने में चाइल्ड स्टार्स पर कैसी इंपैक्ट पड़ती जो फिल्म स्टार जो फिल्म्स में बच्चे आते थे पता है हम हमें देखते थे कि इतना क्यूट बच्चा है फिल्म में आता फिर बाद में पता चला कहीं खो गया पता ही नहीं चला डिप्रेशन हो गया ये हो गया वो तो एक तो पहली बात ये कि बच्चों को आप सोशल मीडिया पर डाल रहे हो कंटेंट क्रिएटर्स बना रहे हो तो उसके साथ ऑलरेडी
(56:53) एक पूरा जो जो पब्लिक में रहने के जो रिस्क है वो तो पूरे हैं ही है। जैसे आपको नहीं पता कि आप कंटेंट बना रहे हो पर वह कंटेंट देख कौन रहा है। Instagram पे आईडीज के पीछे पेडो फाइल्स हैं, सेक्सुअल अब्यूजर्स हैं। कैसे-कैसे किस्म के लोग कैसे माइंडसेट वाले लोग आपके बच्चे को बार-बार देख रहे हैं। उसकी रील डाउनलोड करके सेव कर रहे हैं फोन पे। आपको कोई कंट्रोल नहीं है। राइट? पहले तो होता था। चलो घर में रिश्तेदार पांच देखते अभी तो दुनिया भर के कोई भी साइकोस आपके बच्चे की प्रोफाइल देखते हैं, सेव करते हैं तो पहले वो एक तो रिस्क है ही है। दूसरा
(57:28) साइकोलॉजिकल रिस्क ये है कि बच्चे फिर यही प्रोग्राम करने लगते हैं कि अभी कैमरा के आगे सब करो। तो मुझे हंसी भी कैमरा के सामने करनी है, रोना भी कैमरा के सामने तो पूरी जिंदगी उनको कैमरा के लिए क्यूरेट की जाती है। अभी देखिए बच्चे का मन ऐसा है ना कि नेचर ने हमें ऐसे बनाया है कि हम लोग मां-बाप को देख के सीखते हैं। बच्चे का माइंड इस तरह से प्रोग्राम होता है कि इर्द-गिर्द जो होता है उसको देख के वो अपनी सर्वाइवल स्किल सीखता है। लाइफ के बारे में सीखता है। अगर बच्चा जंगल में बड़ा हुआ है ट्राइबल्स में तो उसका अलग चीजें सीखेगा। जो बच्चा बॉम्बे में बड़ा
(57:59) हुआ है अलग चीजें सीखेगा। तो जो बच्चा कैमरा के सामने बड़ा हो रहा है, जो कैमरे के लिए अपनी इमोशंस कर रहा है, उसके मन में भी वो प्रोग्रामिंग हो जाएगा कि कैमरे के लिए ये सब है। तो फिर उसको आगे जाके मेरे हिसाब से ये डिफरेंशिएशन नहीं रहेगा कि मैं ऑथेंटिकली मैं जेनुइनली हूं कौन और मैं कैमरे के लिए हूं वो मैं हूं कि ये मैं हूं। ये दूसरा हिस्सा। तीसरा हिस्सा कि कंटेंट क्रिएटर्स को फिर जब लाइक्स के साथ जुड़ा जाता है तो उनको यही प्रोग्रामिंग हो जाती है कि मुझे कुछ करना पड़ेगा टू गेट लाइक्स एंड वैलिडेट। अगर लोगों ने लाइक्स नहीं दी ये कंटेंट में
(58:36) लाइक नहीं आई मतलब ये मेरा कंटेंट गलत है। मतलब मैं ये ठीक नहीं है। इसमें बहुत लाइक्स आई तो मुझे यह करना है। सो एवरीथिंग इज लिंक्ड टू वैलिडेशन एंड लाइक्स। तो खुद को क्या चाहिए? खुद को क्या करना है? यह समझ नहीं रहती है। और तीसरा कि ट्रोलिंग ऑनलाइन क्योंकि उनके साथ जो भी अभी जैसे मैंने कहा कोई भी इंसान आपकी कंटेंट देखेगा कोई भी कमेंट करेगा कुछ भी लिखेगा बच्चों को इसका भी एक्सपोज़र हो रहा है। बच्चे चलो नेचुरली टैलेंटेड है तो मैं समझती हूं। पर मैं कह रही हूं कि नेचुरल टैलेंट आप नेचुरल तरीके से दिखाओ। पर जब नेचुरल टैलेंट आप कंटेंट
(59:09) को की तरह से डालते हो तो वह एक करियर बन जाता है। बच्चे पे प्रेशर आ जाता है कि अभी वह टैलेंट बार-बार दिखाएं क्योंकि मोनेटाइजेशन होती है। कोलैब्स मिलते हैं। तो यह बच्चा बेचारा 5 साल की उम्र में अपना बचपन खो के कमाने लगता है। दिस इज नो डिफरेंट फ्रॉम चाइल्ड लेबर। इट इज अ वेरी सोफेस्टिकेटेड वर्जन ऑफ़ चाइल्ड लेबर। हालांकि बहुत सी मम्मीियां मुझे ट्रोल करने लगी थी जब मैंने इसके बारे में डाला था कि मैम मेरा बच्चा इतना गिफ्टेड है तो मैं तो दिखाऊंगी सब लोगों को उसमें गलत क्या है ये बच्चा नेचुरल है ब्ल ब्ल ब्ल सब है भाई पर आपका
(59:40) बच्चा गिफ्टेड है अच्छा है तो पास रखो अपने माय पॉइंट इज ये प्रेशर मत डालो बच्चे पे बच्चे ये गलत है बचपन ना चला जाए बचपन ना चला जाए क्योंकि बच्चे का बचपन है कि वो नेचुरली आज आपका बच्चा आजकल के बच्चे इतने मैच्योर्ड बड़ों की भाषा बोलते हैं आप देखो ये काउंटर लोग उसकी तारीफ भी करते तो और भी उसको को बड़ों की भाषा पेरेंट्स बुलवाते हैं। दे मेक फाइव ईयर ओल्ड बिहेव लाइक 15 ईयर ओल्ड 20 ईयर ओल्ड और फिर तालियां पड़ती है तो और होता है। तो ये बच्चा बच्चे की ऑथेंटिसिटी कहां गई? यू आर योर ऑथेंटिक सेल्फ एंड नोबडी इज वाचिंग बट एवरीबडी इज़ वाचिंग दिस चिल्ड्रन
(1:00:15) 24 बाय से। सो वेयर इज़ देयर ऑथेंटिक सेल्फ? दिस इज द कंसर्न आई हैव हैंडलिंग फेम नॉट फॉर एनीबडी। रिसर्च से हैंडलिंग फेम एंड ट्रोमा रिस्पांस हैज़ लॉट ऑफ़ पैरेलल। इट डस नॉट मीन एवरी पर्सन हु इज मैनेजिंग फेम इस गोइंग टू एंड अप दैट वे वन ऑफ़ द कॉमन कॉम्पोनेंट्स इज हाइपरविजिलेंस रिमेनिंग अलर्ट ऑल द टाइम टू थिंग्स रिस्प्ससेस हाइपर विजिलेंस हर कोई मुझे कोई देख रहा है मैं्ट हां आई एम बीइंग वाड ऑल द टाइम नाउ दैट कनेक्ट्स वि दिस होल थिंग दैट हैव टू लर्न टू थ्रो टेंशन दे विल एंड इट इज़ ओके हाउ डू यू रिकवर इज़ हियर दी कैमरा साइड और द फेम साइड टेक्स ओवर। सो देयर
(1:00:59) फॉर द नॉर्मल बिहेवियर दैट अ चाइल्ड हैज़ टू गो थ्रू क्राई, जंप, रन अवे फ्रॉम द रूम आर सप्रेस्ड। लीडिंग टू सर्टन काइंड्स ऑफ़ कन्फ्यूज्ड पर्सनालिटीज़। आई एम नॉट कॉलिंग इट पर्सनालिटी डिसऑर्डर्स। सम कन्फ्यूजन इन पर्सनालिटी एंड सो ऑन सो फोर्थ। देयर इज़ आल्सो अ लॉट ऑफ़ डॉक्यूमेंटेड ग्लोबल रिसर्च ऑन रिस्क रिस्क नॉट कॉजेशन ऑफ एडिक्शन एंड अदर चैलेंजेस। डिप्रेशन। सो कोपिंग विथ फेम हैज़ लॉट ऑफ़ पैरेलल विथ ट्रोमा। एंड इट हेज़ टू बी हैंडल्ड। वी डोंट नो आवर कंट्री वी डोंट लर्न चाइल्डहुड ट्रामा। सो दिस आर मोर सटल फॉर्म्स आर इवॉल्विंग एंड मे नीड
(1:01:34) सम एक्स्ट्रा डेफिनिशंस बट इट्स सीरियस। सी देयर इज़ अ रीज़न व्हाई सेलिब्रिटीज एंड ऑल दिस पीपल डोंट शो देयर चिल्ड्रन फेसेस। देयर इज़ अ रीज़न बिकॉज़ दे कैन बी मिसयड्ड। बट आजकल हमारे देश में जानकारी इतनी कम है, समझ इतनी कम है कि लोग अपने बच्चों के कैसे-कैसे वीडियोस डालते हैं। मतलब एंड दे डोंट नो कि वहां पे क्या पड़ा है। उनको यह नहीं पता कि आप अपने बच्चे को करोड़ों लोगों को एक्सपोज कर रहे हो। तो ये भी एक समझ डालना जरूरी उनको अंदाज ही नहीं है कि इस चीज, ये सब वीडियोस के क्या गलत इस्तेमाल हो सकते हैं। मैं तो यह बेसिक सिक्योरिटी लेवल की बात कर रही हूं। आपकी
(1:02:10) प्रैक्टिस में व्हाट आर द मेजर चैलेंजस दैट यू फेस? एक तो जो कॉम्प्लेक्स ट्रॉमा के साथ आते हैं लोग बहुत ट्रॉमा लेके मतलब वी कॉल देम एस दोज़ हु है आर सीपीटीएसडी कॉम्प्लेक्स पोस्ट ट्रोमेटिक स्ट्रेस सीपीटीएसडी का हमारा असेसमेंट होता है करते हैं उनकी जर्नी बहुत लंबी चलती है तो कॉम्प्लेक्स ट्रॉमा ऐसे लोग हैं जिनको बहुत ट्रॉमा हुआ है चाइल्डहुड में इतना ज्यादा हुआ है तो नम आउट हो गए हैं या तो बिल्कुल डिस्फंक्शनल हो गए हैं लाइफ के हर पहलू में प्रॉब्लम है तो ये लोग जब थेरेपी के लिए आते हैं ना तो बड़ी आशा लेके आते हैं कि हमको मैम कितने महीने में ठीक होगा
(1:02:42) एक महीने दो महीने महीने पर कंसिस्टेंटली रिसर्च ने बताया है कि इनकी थेरेपी इतनी लंबी चलती है जैसे अगर कम ट्रॉमा वाले लोग हैं और ज्यादा ट्रॉमा वाले तो इनके इनका अगर रिकवरी ग्राफ ऐसा है तो इनका रिकवरी ग्राफ थोड़ा सा स्लो उनको बहुत टाइम लगता है। दूसरा ड्रॉप आउट रेट बहुत रहता है। जो कॉम्प्लेक्स ट्रॉमा वाले लोग आते हैं ना उनका सेल्फ साइबोटजिक बिहेवियर होता है। मतलब कभी भी थोड़ा सा खुद के पैर पे कुहाड़ी मारना इट इज़ अ आउटकम। सेल्फ साइबोटाज इज़ एन आउटकम ऑफ़ सीवियर चाइल्डहुड ट्रॉमा। कि आप अपने ही चांसेस को किल करते हो। तो ये लोग को थेरेपी में भी थोड़ा
(1:03:16) प्रोग्रेस दिखाना फिर बंद कर देंगे। कंटिन्यू नहीं करेंगे। तो हम लोग इतने इन्वेस्टेड होते हैं कि यार देखो रिजल्ट मिल रहा है। स्कोर्स अच्छे हो रहे हैं। अरे इसका ये ट्रॉमा ठीक हो गया और फिर पता चला कि बस गायब हो गए। गायब हो गए। गायब हो गए। लिटरली गायब हो जाते हैं। दिखते ही नहीं है। तो ये एक हमारा इशू और तीसरा इशू। तीसरा इशू ये है कि अभी तो खैर अवेयरनेस ज्यादा है। पर लोग यही सोच के आते हैं कि दूसरा वाला सुधरेगा। हम क्योंकि प्रॉब्लम है। हां मतलब मैम आई वांट टू टेक थेरेपी सो दैट आई कैन प्रूव टू यू दैट माय हस्बैंड इज अ प्रॉब्लम।
(1:03:46) [नाक से की जाने वाली आवाज़] यू नो सो प्लीज इवेंचुअली फिक्स हिम। अनदर चैलेंज इज पीपल ब्रिंग अदर पीपल टू अस। मतलब यू नो ये मेरे बच्चे को ठीक करो। ये मेरी बीवी को ठीक करो। वी ऑलवेज से कि भ जिसको प्रॉब्लम है खुद आएगा और उसको खुद ओनरशिप लेनी है अपने प्रॉब्लम की तभी सॉल्व होगा। आपके उसके लाने से दवाई चैलेंज आप पेशेंट है उसको कोई और एडमिट करेगा और डॉक्टर उसको इंजेक्शन देगा तो शायद इंपैक्ट असर होगा उसका पर हमारी थेरेपी का ऐसे असर नहीं होता है तो मेरे हिसाब से ये दो तीन चैलेंज उसमें आई विल स्टेप बैक कि कॉम्प्लेक्स ट्रॉमा पे हम क्यों आए तो चैलेंजेस जो है
(1:04:25) तो ये सिस्टम की फौ्ट है कि हमारे देश में पीटीएसडी सॉल्व करना मास्टर्स तक नहीं है मेंटल हेल्थ प्रोग्राम में अगर कोई मैं गलत गलत बोल रहा हूं तो मुझे कोई लिख सकता है। तो ये एक प्रॉब्लम बहुत सारे लोगों से मिला। ये एक प्रॉब्लम है। तो अगर ये सिंगल इवेंट ट्रॉमा अगर सॉल्व नहीं कर रहे हैं तो मल्टी इवेंट जो बचपन में दिमाग में हो रहा है जो बच्चा नहीं समझ रहा है कि ये क्या है वो वॉर से अलग नहीं है उसको कैसे सॉल्व करना है? तो कॉम्प्लेक्स ट्रॉमा इज नॉट इन डीएसएम5। तो मैं कहां जाऊं? किसके पास जाऊं? एजुकेट द पीपल कि ये एक रिसर्च
(1:04:56) हो रहा है। आप समझो क्योंकि यह काम पीटीएचडी से बहुत अलग है। हम और उसमें रिपीटेड एक्सपोज़र ट्रॉमा। तो ऐसा नहीं है कि सब चाइल्डहुड वाले हैं। अगर किसी से डोमेस्टिक वायलेंस में से कोई मेल या फीमेल है वो रिपीटेड एक्सपोज़र है और वहां से नहीं निकल सकते तो उसका भी लॉन्ग टर्म इंपिट हो सकता है कॉम्प्लेक्स ट्रॉमा। मगर ज्यादातर 80 फॉर 20 ये रूटेड है चाइल्डहुड ट्रॉमा। तो उसकी लॉन्ग टर्म इंपट ये है। जैसे हाईवे मूवी में उन्होंने चाइल्डहुड ट्रॉमा वो भी कॉम्प्लेक्स जो मल्टीपल वे से आ रहा था उसे एक बहुत ब्यूटीफुल तरीके से दिखाया गया है कि कितना कॉम्प्लिकेटेड
(1:05:28) एडल्ट हो सकता है अगर उसके चाइल्डहुड में ट्रॉमा हुआ हो। और हमारा एक दुर्भाग्य है कि हमारे देश में इसके ऊपर कोई काम करने के लिए तैयार नहीं है। टू ऐड टू दिस पॉइंट कि बहुत से लोग ना अभी भी मेंटल हेल्थ प्रैक्टिशनर्स दे सी डिप्रेशन एज अ प्रॉब्लम, एंजायटी एज अ प्रॉब्लम और उसको ठीक करने में लगे रहते हैं। आवर चैलेंज जैसे हमारे पास क्लाइंट्स आते हैं मैम मैं 10 साल से साइकेट्रिक गोलियां ले रही हूं। किसकी? डिप्रेशन की। ठीक है? तो आपकी ट्रॉमा हिस्ट्री ली? हां। थोड़ी बहुत ले ली थी 5 10 मिनट में आधे घंटे में जो भी उस पर काम किया नहीं उस पर
(1:05:59) काम नहीं किया मैम। डिप्रेशन पे काम किया। तो माय पॉइंट इज के रूट मतलब रूट कॉज पे जाना अनफॉर्चूनेटली गलती सिस्टम की है। क्योंकि जो साइकोलॉजिस्ट भी मास्टर्स तक पढ़ के आते हैं उनको ये चाइल्डहुड ट्रॉमा के बारे में इतना डिटेल में सिखाया नहीं जाता। तो कहां से बेचारे पूछ रहे हैं? अभी न्यू सिस्टम में ऐड हो रहा है। व्हिच इज वेरी गुड। सो माय पॉइंट इज कि लोग 10-10 15 साल तक दवाइयां खाते हैं जो सिम्टम सप्रेस करते हैं। रूट कॉज और रूट कॉज इज इन द मेमोरी। सी अंडरस्टैंड आपका पास्ट कहां पे है? आपकी मेमोरी में है। तो मेमोरी पे काम करना चाहिए वह चेंज
(1:06:33) करने के लिए। मेमोरी पे काम नहीं करते हैं लोग। ज्यादातर बात होती है कॉन्शियस माइंड अनकॉन्शियस। व्हिच इज़ेंट बट वो एक्शनेबल नहीं है। वो प्रिंसिपल्स है कांसेप्ट है। या वी नीड एक्शननेबल तो एक्शननेबल थिंग इज़ इवेंट्स। इवेंट्स में भी कौन सी इवेंट्स पे ज्यादा इंप्रिंट है वो भी है। तो अगर डिप्रेशन की बात करें जस्ट टू वी हैव टॉक देयर इन द बुक आल्सो कि उसका मॉडल है तो रूटेड इन चाइल्डहुड। तो चाइल्डहुड और डिप्रेशन कोरिलेशन नंबर जो है वो है। मगर अगर लोनलीनेस यहां है तो लोनलीनेस इज स्ट्रोंगली कनेक्टेड एसोसिएटेड विद डिप्रेशन। लोनलीनेस इज़
(1:07:03) स्ट्रोंगली एसोसिएटेड विथ द कोर। बट चाइल्डहुड ट्रॉमा और डिप्रेशन देखोगे तो कम मिलेगा कंपेरेटिवली। बट वो है क्योंकि ये नहीं होता तो लोनलीनेस कम होता। और उसके बीच में बहुत सारे पैरामीटर्स हैं। इंक्लूडिंग रेजिलियंस, साइकोलॉजिकल रेजिडेंस, सोशल सपोर्ट, एंग्जायटी एंड स्लीप इशज़। तो जो हमारा जो रिकंसोलिडेशन ऑफ ट्रोमेटिक मेमोरी आरटीएम जो प्रोसेस है वो बहुत नया है। वो किसी ने सुना ही नहीं इंडिया में। हमने यूरोपियन जनरल ऑफ ट्रॉमा और डिसोसिएशन में उसके बारे में लिखा है। रिसर्च पब्लिश किया है। इट वर्क्स ऑन मेमोरी बिकॉज़ वी बिलीव कि आपका हर एक बचपन
(1:07:33) का अनुभव। जैसे एक क्लाइंट आया था कि उसको बुलेट का बहुत डर था। मतलब अभी एज एन एडल्ट भी बुलेट की आवाज सुनेगा ना। बुलेट मतलब वो बाइक। जैसे ही बुलेट की आवाज सुनेगा उसको पैनिकिक अटैक आएगा। और एज एक्सपेक्टेड कि बचपन में उसके पापा पुलिस में बुलेट लेके आते थे घर और पीवी के आते थे मारते थे घर में सबको तो उसके बचपन में मेमोरी मेमोरी का क्या एसोसिएशन बन गया कि बुलेट मतलब ट्रॉमा बुलेट मतलब मार अब ये मेमोरी में है समझो आप तो हमने क्या किया मेमोरी रिकंसोलिडेशन करते हैं टेक्निक तो ये जो बुलेट और मार वाले जो इवेंट्स हैं जिसमें
(1:08:07) ये मेमोरी जुड़ गई है कि बुलेट इक्वल टू मार वो हम रिकंसोलिडेट कर देते हैं ताकि बुलेट इज़ नॉट इक्वल टू मार एनीमोर जब हम यह मेमोरी जो ऐसे कंसोलिडेट उसको हम अलग अलग तरीके से रिकंसोलिडेट करते हैं तो फिर वो ट्रिगर करना बंद कर देती है। आई हैव सम सोशल मीडिया मिथ्स हियर विथ मी वेदर दे आर मिथ्स और नॉट मुझे आपकी हेल्प चाहिए तो प्लीज बताइए। इफ यू प्रोकैस्टिनेट अ लॉट यू डेफिनेटली हैव एडीएचडी। नो यूजुअली इट इज़ लिंक टू परफेक्शनिज्म ओर सम काइंड ऑफ फियर्स? हैविंग मूड स्विंग्स मींस यू आर बायपोलर। नो नो मूड स्विंग्स कुड बी बिकॉज़ ऑफ़
(1:08:41) हॉर्मोनल इम्बैलेंसेस। इट कुड बी पीसीओडी, इट कुड बी पोस्टपार्टम डिप्रेशन। देयर आर मेनी रीज़न्स फॉर मूड स्विंग्स नॉट जस्ट बाय पोल। समटाइम्स स्लीप डिस्टरप्शन आल्सो ब्रिंग्स दैट। आई एम सो ग्लैड यू ब्रॅट दैट। [हंसी] इफ यू ओवरथिंक यू हैव एंजायटी। नॉट नेसेसरिली। एंजायटी इज़ फियरफुल थॉट्स। इफ यू आर ओवरथिंकिंग इन टर्म्स ऑफ़ प्लानिंग इन टर्म्स ऑफ यू नो आई डोंट नो क्रिएटिविटी देन इट्स नॉट एंजायटी। देन इट कुड जस्ट बी युवर ऑब्सेस्ड ओर टू मच इनटू समथिंग। या यू आर यू आर जस्ट टू मच इंटू इट। दैट्स नॉट नेसेसरी एंजाइटटी। योर टॉक्सिक एक्स वाज़ डेफिनेटली अ
(1:09:15) नर्सिसिस्ट। ओह गॉड, दिस इज़ बिकम सच अ ट्रेंड नाउ टू लेबल एव्री अदर पर्सन एस नार्सिसिस्ट, आई थिंक वन हैज़ टू बी वैरी केयरफुल विथ दिस। आई डोंट एग्री एट ऑल। नार्सिसिज्म आजकल बहुत लोग ऐसे ही बात करते हैं। रिसर्च बताता है कि जिसको नार्सिसिस्टिक पैराटर्स हैं बिहेवियर में उनको ट्रॉमा एक्सपोज़र ज्यादा है चाइल्डहुड में कंपेयर टू जिसको नहीं है। यू कैन हील योर ट्रॉमा इन वन सेशन। मे बी सम बाबाजी कैन मे बी सम गॉड मैन कैन वि सम बभूती और सम पूड़ी बट नो दैट्स नॉट ट्रू एट ऑल। इनफैक्ट दैट्स वेरी वेरी रोंग। अ कॉम्प्लेक्स ट्रॉमा रिक्वायर्स
(1:09:55) मेनी मेनी मोर सेशंस मे बी सिंपल ट्रॉमा अगेन डिपेंड्स ऑन द कॉम्प्लेक्सिटी वन सेशन तो आई हैव नेवर हर्ड ऑफ इट एवर वी आर यू नो सच अ बिग पपुलेशन अ लार्ज पोर्शन ऑफ़ दिस पपुलेशन हैज़ डायग्नोज़बल मेंटल हेल्थ इशूज़ यस 83% ऑफ़ पीपल हु हैव मेंटल हेल्थ इशू अपेरेंटली डोंट गेट एनी काइंड ऑफ़ हेल्प और ट्रीटमेंट राइट तो एक तरफ है पपुलेशन जहां पे हम चाहते हैं कि लोग मेंटल हेल्थ के बारे में बात करें, अवेयरनेस बढ़े, लोगों के पास आए हेल्प करने, टू सीक हेल्प। एंड [गला साफ़ करने की आवाज़] एट द सेम टाइम वी हैव दिस यंगर जनरेशन। इट्स सो इजी फॉर देम टू जस्ट लेबल थिंग्स।
(1:10:38) सो इजी वन मूड स्विंग एंड मेरे को डिप्रेशन। दे गेट अवे विथ इट। लाइक मतलब कॉलेज में जाके अगर बोले कि नहीं मुझे असाइनमेंट करने में रात भर जाके आई हैव एंजायटी तो यू कैन नॉट पुश देम बिय्ड अ पॉइंट टू सबमिट दैट असाइनमेंट। बिकॉज़ नाउ दे आर गोइंग अंडर द अंब्रेला ऑफ़ मेंटल हेल्थ इशूज़। एवरीथिंग इज़ ट्रॉमा। यू नो एव्री अदर पेरेंट हैज़ बिकम नार्सिसिस्ट एंड अब्यूसिव। तो इट्स वेरी अलार्मिंग। मतलब यू आर वेरी राइट। देयर इज़ अ स्माल सेगमेंट ऑफ द सोसाइटी व्हिच इज़ ओवर यूजिंग, ओवर एनालाइजिंग, ओवर डायग्नोसिंग एंड ले लूजली लेबलिंग एंड टॉकिंग अबाउट मेंटल हेल्थ
(1:11:14) इश्यूज। एंड देयर इज अ ह्यूज सेगमेंट जिनको एक्चुअली जरूरत है समझ की अवेयरनेस की जो बिल्कुल वहां तक की चीजें जा नहीं पा रही है। सो आई हैव सम क्वेश्चंस हियर जो लोगों ने पूछे हैं आपके लिए। अ हाय डॉक्टर रीरी। आई एम अ 38 ईयर ओल्ड वुमेन। आई लॉस्ट बोथ माय पेरेंट्स एट अ यंग एज एंड दैट एक्सपीरियंस मेड मी स्केर्ड ऑफ हैविंग अ चाइल्ड। आई डोंट वांट माय चाइल्ड टू एवर गो थ्रू व्हाट आई डीड। आई वास क्लियर अबाउट दिस विद माई हस्बैंड बिफोर वी गॉट मैरिड बट नाउ ही एंड आर फैमिलीज आर प्रेशराइजिंग मी टू हैव अ बेबी। हाउ डू आई डील विथ दिस
(1:11:51) प्रेशर व्हेन आय एम स्टिल नॉट रेडी टू बिकम अ मदर? आय वुड से दैट फर्स्ट डील विथ द ट्रोमा ऑफ लूसिंग बोथ द पेरेंट्स। नोबडी शुड पोर्स यू फॉर एनीथिंग। वेदर यू हैव अ चाइल्ड ऑर नॉट इज़ अ सेकेंडरी थिंग। इवन इफ देयर वाज नो प्रेशर टू हैव अ चाइल्ड आई वुड स्टिल टेल हर दैट प्लीज हील योरसेल्फ ऑफ दिस ट्रोमा ऑफ लूजिंग बोथ योर पेरेंट्स बिकॉज़ व्हेन यू हैव हील्ड फ्रॉम दैट यू विल बी एबल टू सी मेनी अदर थिंग्स वेरी डिफरेंटली नॉट जस्ट द डिसिशन ऑफ हैविंग अ चाइल्ड एंड डोंट डू इट विथ द ऑब्जेक्टिव ऑफ डिसीजन ऑफ मेकिंग अ चाइल्ड वो ऑब्जेक्टिव से मत हील करो हील इसलिए करो
(1:12:25) बिकॉज़ एनी वूड्स दैट यू आर कैरिंग फिजिकली इफ वी हैव वूड्स डोंट वी फिक्स देम देन इफ यू आर कैरिंग इमोशनली वू इमोशनल वूड्स प्लीज हील फील देम आफ्टर दैट डिसाइड वेदर आर यू रेडी ऑ नॉट एंड इट हैज़ टू बी योर जॉइंट डिसीजन। नोबडी शुड प्रेशराइज यू फॉर अ बेबी। बिकॉज़ एनी चिल्ड्रन हु आर ब्रॉट इंटू दिस वर्ल्ड बिकॉज़ ऑफ़ प्रेशर विल नॉट रिसीव द काइंड ऑफ लव एंड द काइंड ऑफ़ बैलेंस पेरेंटिंग दैट दे डिर्व। हाई डॉक्टर। आई एम 27 एंड इवन टुडे आय गेट एशियस अराउंड अथॉरिटी फिगर्स बिकॉज़ ऑफ़ अ टीचर हु कॉन्सेंटली हूमिलीयेड एंड सिंगल्ड मी आउट इन स्कूल। व्हाई कैन वन डिफिकल्ट
(1:13:03) टीचर स्टे विद अस फॉर इयर्स एंड हाउ डू वी अनलर्न दैट फियर एस एडल्ट्स? वी गेट दिस अनफॉर्चुनेटली वेरी कॉमन। इट्स वेरी कॉमन लाइक आई सेड वंस इफ टीचर ह्यूमिलिएट्स इन फ्रंट ऑफ़ द क्लास इज़ वेरी डिफरेंट बस इज़ टीचर टेकिंग द चाइल्ड असाइज्ड एंड गिविंग द फीडबैक। आप बड़े हो गए पर वो इवेंट आपकी इंप्लसिट मेमोरी में अभी भी है। तो इंप्लसिट मेमोरी मतलब क्या? बॉडी मेमोरी। और जब भी ट्रिगर आया वो एक्टिवेट होगी। हम्म। ट्रिगर नहीं आया तो डोरेंट रहेगी। हाई डॉक्टर इरी। आई ऍम 25 ईयर ओल्ड मेल रिसेंटली मैरिड। आई हैव ऑलवेज बीन कॉल्ड अ मम्मास बॉय। बट आफ्टर मैरिज आई हैव
(1:13:37) स्टार्टेड नोटिसिंग ड्यात माई मदर डज नॉट्ट लेट माई वाइफ एंड मी स्पेंड टाइम अलोन। इवन इनवाइटिंग हरसेल्फ ऑन आर हनीमून। व्हेनएवर आई ट्राइड टू टॉक टू हर अबाउट इट, शी स्टार्टस क्राइंग। सिंस शी इज़ अ सिंगल पेरेंट, वी कांट मूव आउट आइदर, हाउ डु आइ सेट बाउंड्रीज़ विथ माई मदर विदाउट मेकिंग हर फील अबेंडन्ड ओर हर्टिंग माई मैरिज। याह। सो दिस इज़ वैरी कॉमन दिस हैपेंस व्हेन द मदर हैज़ मेड हर एंटायर लाइफ अबाउट द चाइल्ड। मदर हैज़ नो आइडेंटिटी ऑफ़ हर ओन। इफ शी डिड देन आफ्टर द चाइल्ड इज़ लॉजिकली आफ्टर योर चाइल्ड इज़ एन एडल्ट यू नीड टू हैव अ सेपरेट
(1:14:07) आइडेंटिटी फ्रॉम योर चाइल्ड वेर द चाइल्ड ऑपरेट्स लाइक एन यूनिट एंड यू आर अ सेपरेट यूनिट। बट इन दिस केस इट सीम्स दैट द आइडेंटिटी इज़ फ्यूज्ड। नाउ, हाउ कैन ही सेट हेल्दी बाउंड्रीज़ इज़, ही नीड़ टू हैव दिस डिस्कशन विथ हिज़ मदर दैट दिस इज़ नॉट हेल्दी फॉर हिम इन हिज़ मैरिज। ही नीड्स टू सेंड द मदर फॉर थेरेपी और फॉर काउंसलिंग वेयर शी कैन फाइंड आउट हु शी इज इफ नॉट जस्ट द मदर लाइक मदर के अलावा उनकी क्या आइडेंटिटी है उनके क्या शौक है उनको क्या करना है सो शी नीड्स टू आल्सो बी कोच्ड और और साइको एडुकेटेड टू स्टेप ऑफ एंड यू नो दिस इज़ वेरी डीप रूटेड इन मदर्स दैट
(1:14:45) स्पेशली सिंगल मॉम सो शी वुड हैव सिंगल हैंडेडली रेज दिस चाइल्ड सो शी वुड हैव इन्वेस्टेड ओवरली इन्वेस्टेड इन दिस चाइल्ड के भई यही मेरा मेरा सब कुछ है। एंड अनफॉर्चूनेटली क्या होता है कि इसमें लड़का ना बिकम्स अ मैन इन दैट मदर्स लाइफ नॉट अ सन। दैट आइडेंटिटी इज़ मर्ज्ड। सी इफ देयर वाज़ अ हस्बैंड देन द मदर हैज़ अ मैन हु इज़ द हस्बैंड एंड अ सन। व्हेन द मैन इज़ मिसिंग, द सन टेक्स आल्सो दैट पोजीशन ऑफ़ द मेल फिगर इन द मदरस लाइफ। व्हिच कैन बी वैरी टॉक्सिक। इट्स नॉट हेल्दी। द सन हेज़ टू बी अ सन नॉट अ मैन। व्हिच मींस द बाउंड्रीज
(1:15:24) हैव टू बी क्लियरली सेट के भाई मैं बेटा हूं पर मैं बाकी सब आपकी इमोशनल नीड्स जो आपको एक एडल्ट से चाहिए वो नहीं पूरी कर सकता हूं। तो ये बाउंड्रीज स्वज हो जाती है जब मदर्स बहुत जरूरत से ज्यादा अपने बच्चों के लाइफ में बचपन से इनवॉल्व रहती हैं। मदर्स को भी सीखना है कि जैसे बच्चे बड़े हो, टीनएजर्स हो, एडल्ट हो, दे हैव टू स्टेप बैक। एंड आई थिंक हियर देयर माइट बी आल्सो एन एंगल ऑफ़ इंडियन सोसाइटी कॉन्टेक्स्ट। राइट? इन द सेंस दैट बेटा का काम है मेरा ध्यान रखना। बेटी का काम है शादी करके चले जाओ और उसके उसका ध्यान रखना। हां। तो बेटी को मैंने इतना ही किया पर सब
(1:16:01) कुछ पूरी लाइफ मैंने बेटा बेटा को किया और अब मेरा बेटा कैसे मुझे छोड़ सकता है। राइट? ये भी समझना है मदर को कि बेटा अगर अपना परिवार सेट कर रहा है इसका मतलब ये नहीं कि आपको छोड़ रहा है। सी व्हेन मदर इज इनसिक्योर व्हेन द मदर हरसेल्फ इज़ अटैचमेंट इशू सिक्योरिटी इश्यूज शी विल लुक एट एव्री बिहेवियर ऑफ़ द सन एज इफ अरे ये तो मेरे को अबंडन कर रहा है। ऐसा नहीं होता है। हेल्दी बाउंड्री किसको कहते हैं कि आपकी ये जगह ये मेरी जगह जब जरूरत पड़े वी आर टुगेदर बट वी आल्सो हैव टू हैव आवर सेपरेट। तो ये मदर को साइको एजुकेट करना पड़े। जैसे आपने कहा कल्चरली ऐसा है। मां
(1:16:34) सोचती है मैंने पूरी जिंदगी बेटे को दे दी। अभी बाकी की जिंदगी बेटा मुझे देगा। ऐसा नहीं होता है। आई ऐड समथिंग हियर देयर इज़ मेटाफोर दैट इज गोइंग ऑन इन पैरेंटिंग इन दिस फॉर इट। दैट गणेश है तो गणेश को हम इतना सजाते हैं, इतना ध्यान देते हैं ओनली टू लेट हिम गो। करेक्ट? सेम फॉर पैरेंटिंग। सो मच टाइम टेकिंग केयर ऑफ़ द किड्स मेकिंग देम डिपेंडेंट ऑन अस इन अ वे दैट इवेंचुअली वी हैव टू लर्न टू मेक देम इंडिपेंडेंट ऑफ़ अस। एंड दैट्स पैरेंटिंग। आई थिंक दैट्स सच अ ब्यूटीफुल थिंग एंड वेरी हार्ड फॉर पेरेंट्स टू रियलाइज बट वेरी ब्यूटीफुली
(1:17:10) पुट दैट आवर जॉब इज जस्ट टू मेक देम इंडिपेंडेंट दैट्स अबाउट इट आई एम 40 इयर्स ओल्ड वुमेन आई हैव बीन ड्राइविंग फॉर 15 इयर्स बट आफ्टर एन एक्सीडेंट एव्रीथिंग चेंज्ड नाउ आई कांट इवन सिट इन द कार लेट हर ओन ड्राइव हाउ डु आई ओवरकम दिस फियर सो इफ ही वर्क्स ऑन ड्यात इवेंट ऑफ़ ड्याट एक्सीडेंट एंड जस्ट वर्क्स ऑन रिकंसोलिडेटिंग ड्याट मेमोरी विथ एन अ थेरेपिस्ट हु डज आरटीएम देन वन सेशन ऑफ़ आरटीएम मोस्ट लाइकली वुड बी इनफ बिकॉज़ इफ इट्स जस्ट वन इंसिडेंट ही मेंशंड वाओ दैट्स हाउ पावरफुल दैट्स हाउ पावरफुल मेमोरी दैट्स हाउ पावरफुल मेमोरी इज इट इज़ दैट वन इंसिडेंस
(1:17:42) मेमोरी दैट हैज़ हैंडीकैप्ड हिम। मेमोरी को बदलो। 28 ईयर ओल्ड फीमेल आई हैव ऑलवेज थॉट आई हैड अ नार्मल चाइल्डहुड। बट रिसेंटली आई स्टार्टेड रियलाइज़ इट दैट सम थिंग्स आई एक्सपीरियंस ग्रोइंग अप स्टिल अफ़ेक्ट हाउ आइ हैंडल रिलेशनशिप्स। एंड कॉन्फ्लिक्ट्स टुडे। हाउ डू आई नो इफ आई व्हाट आई वेंट थ्रू वाज़ एक्चुअल चाइल्डहुड ट्रामा ऑर व्हाट डू आई डू विथ दैट रियलाइजेशन नाउ? डजंट मैटर इफ इट वाज एक्चुअल ऑर मेड अप एज़ लॉन्ग एज इट इज़ इन योर माइंड, इट इज इन योर हेड एंड इट इज़ प्लेइंग लाइक अ प्रोग्राम यू नीड टू वर्क ऑन इट एंड ओवराइट इट। इट्स वैरी सिंपल।
(1:18:14) सो, इफ देर इज़ एनीथिंग इन योर माइंड, रियल ओर इमैजिनरी दैट यू फील इज कॉजिंग योर करंट लाइफ, करंट बिहेवियर टू बी इम्बैलेंस्ड, देन यू नीड टू वर्क ऑन इट। एंड यू लाइक ही सेड, नीड टू वर्क ऑन रिकंसोलिडेटिंग इट। राइट? टिपिकली इफ योर चाइल्डहुड इज़ अफेक्टिंग योर रिलेशनशिप्स इट मींस दैट यू माइट बी यू नो पीपल प्लीज़र यू माइट बी समबडी हु अवॉइड्स कॉन्फ्लिक्ट हु इू इज़ स्केयर्ड ऑफ कन्फ्रंटेशन यू नो दीज़ काइंड ऑफ़ टिपिकल बिहेवियस कम अप एंड दीज़ आर ऑलवेज रूटेड इन चाइल्डहुड इवेंट्स। सो इफ यू वर्क ऑन योर चाइल्डहुड ट्रोमाज़ रिकंसोलिडेटिंग दोज़ मेमोरीज यूजिंग आइदर
(1:18:46) इनर चाइल्ड थेरेपी ओर आरटीएम देन यू कैन इज़ली ओवरकम दोज़ एंड यू विल सी दैट चेंज हैप्पेनिंग इन योर रिलेशनशिप्स। वी हैव सीन डैट मैजिक हैपेंड विथ 100्स ऑफ क्लैंड्स। एंड इट इज देयर इन द बुक। ऑल द प्रोसेससेस आर गिवेन इन डेप्थ इन द बुक। सो शी कैन एक्चुअली रीड इट एंड देन वर्कआउट डिसाइड। या आई एम 32 आई फील लाइक माई पेरेंट्स हैव ऑलवेज सीन देमसेल्व्स एस द विक्टिम। नो मैटर व्हाट हैप्पेंस? आई एंड अप फीलिंग गिल्टी एंड रेस्पोंसिबल फॉर देयर इमोशंस। आई एम एक्जॉस्टेड बट व्हेनएवर आई ट्राई टू सेट बाउंड्रीज़ आई फील लाइक आई एम बीइंग
(1:19:16) सेल्फिश। हाउ डू आई ब्रेक दिस साइकिल विदाउट अबेंडनिंग माय पेरेंट्स। ऑल ऑफ अस हैव सम फैमिली मेंबर और अ क्लोज फ्रेंड दैट हैस दैट माइट हैव और शो दिस होल विक्टिमाइजिंग बिहेवियर आई एम सेंसिटिव मुझे बुरा लग गया तूने मेरा फोन नहीं उठाया तो अब से मैं तुझे कॉल नहीं करूंगी देयर इज अ रीज़न बिहाइंड दिस मैं बेचारी मुझे बुरा लगता है मेरे साथ ही सब बुरा होता है मैं सफर कर रही हूं मैं रो रही हूं तुम आके मुझे मनाओ ओके टिपिकल विक्टिम बिहेवियर इट कुड हैपन इन अ फैमिली मेंबर इट कुड हैप हैपन वेयरवर नाउ हाउ डू यू हु रियलाइज्ड दैट दिस इज़
(1:19:56) विक्टिम बिहेवियर डिफाइन बाउंड्रीज़ एंड प्रोटेक्ट हाउ मच टू गिव इन हाउ मच टू गिव आउट दैट्स योर क्वेश्चन सो फर्स्ट थिंग इज़ द विक्टिम बिहेवियर टिपिकली कम्स फ्रॉम अ बैकग्राउंड ऑफ इमोशनल नेगलेक्ट सो दोज़ चिल्ड्रन हु हैव बीन इमोशनली नेगलेक्टेड आर द वंस हु डू दिस फॉर अटेंशन द विक्टिम मेंटालिटी इज़ यूजुअली क्रेविंग फॉर अटेंशन ओके एंड दिस क्रेविंग इज़ हैपनिंग बिकॉज़ इट इज़ नॉट मेट इमोशनली नेगलेक्टिंग चाइल्डहुड। तो पहला तो यह आपको समझना है कि जो भी विक्टिम मेंटालिटी में उनको कुछ ना कुछ चाइल्डहुड में नहीं मिला है जो अभी वो लोग आपसे ढूंढ रहे हैं। हैविंग सेड दैट
(1:20:30) आप कैसे बाउंड्रीज ले कर सकते हैं यू हैव टू बी फर्म एंड काइंड एट द सेम टाइम। यू हैव टू से आई अंडरस्टैंड दैट यू आर फीलिंग दिस वे बट बियड दिस आई कैन नॉट डू दिस। या इससे आगे मेरे से नहीं होगा। इनके केस में स्पेसिफिकली पेरेंट्स के लिए हम इतने रिजिड बाउंड्रीज नहीं रख सकते हैं। बिकॉज़ आई डोंट नो इफ शी इज़ अ सिंगल चाइल्ड और शी हैज़ अ सिबलिंग। ये बताया नहीं है। बट इनके केस में इनको समझना है कि पेरेंट्स की भी अपनी हिस्ट्री होगी जिसकी वजह से वो विक्टिम कार्ड प्ले कर रहे हैं। और पेरेंट्स ने शायद इनको भी बचपन से कंडीशनिंग किया हुआ है कि बेटा तुम्हारी
(1:21:05) जिम्मेदारी है। तुम्हारी यू नो पेरेंट्स डू दिस अनकॉन्शियसली। तुम्हारी वजह से हम हैं। हमारी वजह से तुम हो। तुम हमने जो हमारा सब कुछ तुम्हारा तुम्हारा हमको सो पेरेंट्स इंडियन कल्चरल यह है नवांसेस के बाउंड्रीज ब्लड है। तो इट इज वेरी डिफिकल्ट बट शी विल हैव टू साइको एडुकेट द पेरेंट्स। अगर पेरेंट्स के साथ ओपन ऑनेस्ट कन्वर्सेशन करना है कि ये इतनी हद तक यह सही नहीं है। उसके बावजूद अगर पेरेंट्स नहीं समझे तो शी विल हैव टू बी ओके विथ द पेरेंट्स। व्हाटएवर गिल्ट ट्रिपिंग बट शी विल हैव टू क्रिएट अ शील्ड अराउंड हर बाय वर्किंग ऑन
(1:21:40) हर ओन चाइल्डहुड व्हिच आई सस्पेक्ट दिस मस्ट बी कमिंग फ्रॉम देयर ओनली टू मेक श्योर दैट शी डजंट फॉल इनटू द गिल्ट ट्रैप शी शुड बी एबल टू बी ओके पेरेंट्स रो रहे हैं धो रहे हैं बट शी शुड बी एबल टू से आई हैव डन इनफ इससे ज्यादा नहीं होगा एंड शी शुड बी ओके विथ इट एंड दैट विल हैपन व्हेन शी फर्स्ट वर्क्स ऑन हरसेल्फ सो अगेन वी कम बैक टू द सेम थिंग के यू थिंक के वो लोग सुधरेंगे तो मेरी मेरी सिचुएशन सुधरेगी वो नहीं होता है। अगर वो भी खुद अपने आप पे काम करेगी ना इफ शी वर्क्स ऑन ओवरकमिंग अर टॉक्सिक शेम गिल्ट एंड रिस्पांसिबिलिटी ऑफ़ पेरेंट्स व्हिच मे बी
(1:22:13) कमिंग फ्रॉम हर चाइल्डहुड शी विल हैव द करेज टू स्टैंड अप टू हर पेरेंट्स एंड से दैट सॉरी दिस इट रेस्पोंसिबल यस एंड इन अ हेल्दी वे नॉट इन एन अबेंडनिंग वेय इन अ हेल्दी वे। आई एम 29 एंड आई हैव नोटिस दैट आई कॉन्सेंटली फियर पीपल आई लव विल लीव मी। इवन अ डिलेड रिप्लाई और स्मॉल चेंज इन समवन्नस बिहेवियर मेक्स मी ओवरथिंक एंड पैनिकिक। हाउ डू आई स्टॉप दिस फियर ऑफ़ अबेंडमेंट फ्रॉम अफेक्टिंग माय रिलेशनशिप्स। सो दिस इज़ टिपिकली दैट द नर्वस सिस्टम इज़ हाइपरविजिलेंट। मतलब देअर इज़ अ कॉन्सेंट प्रोग्रामिंग दैट समथिंग विल गो अवे। समथिंग विल लीव मी। समबडी विल
(1:22:47) डाई, समबडी विल रन समबडी विल अबेंडन मी। अगेन शी हैस टू वर्क ऑन फर्स्ट स्टेप इज बैलेंसिंग हर नर्वस सिस्टम थ्रू नर्वस सिस्टम रेगुलेशन टेक्निक्स इट कुड बी हम्मिंग ब्रीथिंग ईएफटी योग निद्रा बिकॉज़ व्हेनएवर यू आर कांस्टेंटली थिंकिंग कि अभी कुछ चला जाएगा अभी कुछ चला मींस यू आर इन अ फाइट और फ्लाइट मोड योर नर्वस सिस्टम इज़ इन अ हाइपर स्टेट तो द फर्स्ट लेवल वर्क इज़ एट एन इमोशनल रेगुलेशन लेवल वो जैसे ही वह अपने नर्वस सिस्टम को काम डाउन करेंगे ना ऑटोमेटिकली यह फिजियोलॉजी जब काम होगी तो साइकोलॉजी जी काम होगी। एंड देन एट अ नेक्स्ट लेवल देन शी वुड नीड टू
(1:23:23) फिगर आउट वेयर इज दिस कमिंग फ्रॉम। अगेन व्हाट वर द एक्सपीरियंसेस दैट मेड हर बिलीव और दैट क्रिएटेड अ बिलीफ सिस्टम दैट पीपल विल गो अवे। पीपल विल नॉट स्टे विथ मी। और आई विल बी अबंडेंट। यूजुअली इट कुड बी अ लर्न बिहेवियर फ्रॉम पेरेंट्स। मतलब अगर मां-बाप ही कह रहे हैं अभी मैं मर जाऊंगी। मैं तो भाग जाऊंगी। ये पापा ने ऐसा किया मैं अभी देखो अभी मैं घर छोड़ के चली जाऊंगी। सो व्हेन किड्स ग्रो अप वि एन एनवायरमेंट जहां पे दे हैव ऑलवेज बीन मेड टू फील कि नथिंग इज कास्टेंट नथिंग इज सेफ अभी कुछ चला जाएगा कोई आज या तो उन्होंने
(1:23:54) वाकई में ऐसे अनुभव किए जहां पे बहुत डेथ्स हुई है यू नो देन शी हैज़ टू हील दैट एनीथिंग एल्स अंडरस्टैंड दिस इज़ वेट अ ब्रॉडर लेवल अबेंडन इज़ पार्ट ऑफ़ व्हाट इन साइकोलॉजी इस कॉल्ड बॉर्डर लाइन पर्सनालिटी डिसऑर्डर एंड दैट हैज़ वायलेंस और सम इशूज विथ द पेरेंट बिल्ट इंटू इट एक्सपीरियंस और पर्सनली ओर ऑब्ज़र्व आउट। सो दैट नीड्स टू बी प्रूव्ड। आई वुड से। हाय, आई एम 35 ईयर ओल्ड फीमेल एंड आई हैव नोटिस्ड अ पैटर्न इन ऑल माय रिलेशनशिप। आई स्टार्ट टू पैनिकिक व्हेन अ रिलेशनशिप स्टार्ट्स बिकमिंग रियल एंड आई ट्राई टू पुल अवे। हाउ डू आई ब्रेक दिस पैटर्न?
(1:24:30) आस्क योरसेल्फ व्हाट हैड हैपेंड टू मी? दैट मेड मी बिलीव दिस वे। मैं सबको यही पूछती हूं कि आप क्या जब से पैदा हुए तब से ऐसा है? नहीं है ना? तो क्या-क्या हुआ था आपकी लाइफ में जिससे आपको ये फीलिंग हुई। कब से शुरू हुई? 15 साल से शुरू हुई यह फीलिंग होनी 20 साल से शुरू हुई और यह फीलिंग को आप जब होता है व्हेनएवर इट फील सेफ एंड यू स्टार्ट फीलिंग यू नो कि ओह दिस इज़ नाउ गोइंग फार सो लेट मी नाउ वेयर इज़ दिस फीलिंग कमिंग फ्रॉम व्हाट वर द इवेंट्स दैट लेड टू दैट बहुत सारी चीजें हमने डिस्कस की ट्रॉमाेंस ऑफ़ चाइल्डहुड अवेयरनेस ऑफ कि हम जो भी आज बिहेव कर रहे
(1:25:09) हैं उसका कितना डीप रूटेड रीजनिंग हो सकता है पैरेंटिंग इज देयर एनी इंपॉर्टेंट मैसेज दैट यू वांट टू पास टू एवरीवन हु इज़ वाचिंग दिस वन मेजर टेक अवे दैट यू वुड लाइक फॉर पीपल टू हैव आई वुड से फर्स्ट ऑफ़ ऑल इज़ नॉट ऑल ट्रोमा डजंट नीड थेरेपी ओके सो प्लीज डू नॉट ओवर डायग्नोस एंड प्लीज डू नॉट यूज़ योर ट्रॉमा एज़ योर क्राउन एंड टू टू यूज़ इट एज़ एन एक्सक्यूज टू ब्लेम एंड शेम योर पेरेंट्स और एवरीबडी हु हैज़ कॉज्ड इट। टेक ओनरशिप ऑफ इट। बिकॉज़ ट्रॉमा कैन आल्सो बी हील्ड। बिकॉज़ आवर ब्रेन हैज़ न्यूरोप्लास्टिसिटी। हर एक अनुभव के साथ हमारा ब्रेन का वायरिंग बदलता है। तो अगर
(1:25:55) आपको ट्रॉमा है भी तो उसमें से आप चाहो तो जरूर निकल सकते हो। अगर आपकी ब्रेन की वायरिंग कुछ ट्रॉमा की वजह से एक किस्म की हुई है तो वो न्यूरोप्लास्टिसिटी की वजह से अगर आप जब अनुभव बदलोगे आपके। आपके इंटरनल एक्सपीरियंसेस, एक्सटर्नल एक्सपीरियंसेस बदलोगे तो वो वायरिंग भी बदलेगी। और जब ब्रेन की वायरिंग बदलेगी तो आपकी बिहेवियर भी बदलेगी और आपकी लाइफ भी बदलेगी। तो फर्स्ट ऑफ़ ऑल इज़ डोंट लाइक आई सेड डोंट ओवर डायग्नोस एंड डोंट ट्रीट ऑल ट्रोमा एज़ ऑल पेनफुल एक्सपीरियंसेस एस ट्रोमा। एंड सेकंडली इज़ इफ यू रियली हैव ट्रोमा, प्लीज नो दैट इट कैन बी हील्ड।
(1:26:29) नॉट बाय वर्किंग ऑन द सिम्टम्स बट बाय वर्किंग ऑन द रूट कॉज। दैट इज़ माई मैसेज। मेंटल हेल्थ प्रॉब्लम्स आर नेचुरल आउटकम्स ऑफ समथिंग दैट हैस हैपन टू यू | सो इफ पीपल आर लिसनिंग टू दिस इट इज़ एक्सपेक्टेड दैट यू विल हैव डिप्रेशन इफ देयर आर सर्टेन पैरामीटर्स दैट हैव हैपेंड देयर फॉर डू नॉट लुक एट डिप्रेशन एज़ अ प्रॉब्लम राइट एंड दैट्स द टाइ कनेक्टेड टू द टाइटल लुक एट एज अ आउटकम आउटकम देयर इज़ नथिंग रोंग विथ यू इट एक्सपेक्टेड दैट दिस विल हैपन नथिंग रोंग विथ यू दैट्स अ टाइटल ऑफ़ द बुक बट इट सेस इफ वी गो बैक टू अंडरस्टैंडिंग व्हाट
(1:27:01) हैप्पेंड टू मी इट्स लाइकली दैट व्हेन यू सॉर्ट आउट दैट द आउटकम विल चेंज सो इंस्टेड ऑफ ट्राइंग टू चेंज द आउटकम लुक एट व्हाट हैपेंड एड्रेस दैट आउटकम विल टेक केयर ऑफ इटसेल्फ इट्स नॉट [नाक से की जाने वाली आवाज़] अबाउट व्हाट्स रोंग विथ मी इट्स अबाउट व्हाट हैपेंड टू मी व्हेन आई थिंक आई अब्सोलुटली लव दैट टाइटल एंड द वे यू हैव स्क्रिबल्ड इट आई थिंक बेस्ट वे टू एंड दिस चैट आई थिंक वैरी ब्यूटीफुल एंड बिकॉज़ आफ्टर ऑल दैट आई रियली वांटेड समवन टू कम एंड सेट नो मैटर व्हाट एवरीथिंग कैन बी वर्क्ड ऑन 100% 100% आई थिंक वन मेजर टेक अवे फॉर मी इज
(1:27:39) ह्यूमन माइंड इज अ लॉट ऑफ़ वर्क [हंसी] एंड नो मैटर हु वी आर एंड हाउ ब्लेस्ड आवर लाइफ हैज़ बीन ऑल ऑफ़ अस हैव टू वर्क राइट एंड इन दिस क्वेश्चन यू ब्यूटीफुली यू नो द पेरेंट चाइल्ड क्वेश्चन दैट केम यू ब्यूटीफुली से दैट पेरेंट हैज़ टू डू देयर ओन अह साइको एजुकेशन एंड द चाइल्ड हैज़ टू डू इट्स ओन। सो, देयर इज़ वर्क एवरीवेयर, नो मैटर पार्ट ऑफ़ द पार्टी यू आर। एंड एंड देयर इज़ सम फैबुलस वर्क दैट यू गाइज़ आर डूइंग, हेल्पिंग पीपल वर्क ऑन बिल्डिंग रेजिलियंट स्ट्रांग माइंड्स। सो, थैंक यू सो मच फॉर दैट। आय होप पीपल गो एंड चेक द बुक्स आउट एंड रीड। आई एम स्टार्टिंग द
(1:28:17) पेरेंटिंग बुक राइट टुडे। स्टॉप सेइंग व्हाट्स रोंग विथ मी। व्हाट आई वुड लाइक टू ऐड इज आल्सो स्टॉप सेइंग व्हाट्स रोंग विथ द अदर पर्सन अराउंड यू। राइट? व्हाट्स हैपन टू देम? व्हाट्स हैपन टू देम। लेट्स लेट्स बिल्ड दैट एम्पैेथी कि जो कोई जिस तरह बिहेव कर रहा है इट्स एन आउटकम ऑफ समथिंग दे हैव गॉन थ्रू अस इट्स एन आउटकम ऑफ़ अ वायरिंग एंड एववरीथिंग कैन बी रिवायर्ड सो दे लॉट ऑफ़ होप्स। सो थैंक यू सो मच फॉर कमिंग ऑल द वे हियर फ्रॉम अहमदाबाद एंड शेयरिंग एवरीथिंग विथ अस। थैंक यू। थैंक यू। थैंक यू फॉर द अपोरर्चुनिटी।
Author Name:Traya Health
Youtube Channel Url:https://www.youtube.com/@TrayaHealth
Youtube Video URL:https://www.youtube.com/watch?v=JeTlbhLdDtU
Title: How You Can Reverse Your Trauma ft. Dr. Riri Trivedi and Dr. Gunjan Trivedi
Author Name: Traya Health
Description: Are your adult struggles actually rooted in your childhood?
From relationship anxiety and people-pleasing to chronic self-doubt and perfectionism, many of our deepest daily battles aren't random flaws. They are psychological imprints.
In this eye-opening episode of What The Health, host Saloni Anand sits down with pioneering mental health researchers, authors, and therapists Dr. Riri Trivedi and Dr. Gunjan Trivedi to uncover the hidden science of Childhood Trauma, Indian Parenting Dynamics, and Emotional Resilience.
Together, they break down why western models don't capture the reality of Indian households, how emotional neglect and toxic shame secretly shape our nervous system, and the groundbreaking techniques—from ancient Panchakosha wisdom to modern Memory Reconsolidation (RTM)—that can help you rewire your brain.
What is childhood trauma and how does it shape your adult life? Understand the lasting impact of early emotional experiences.
We explain the core concepts of childhood trauma and why these difficult early experiences often leave a permanent imprint on our lives. We discuss how these events define our behaviors and reactions long after the initial event has passed.
Improving your mental health starts with acknowledging how past events shape your current reality. By recognizing these emotional trauma triggers and their long-term trauma effects, you can begin to process how your history influences your daily wellness.
00:00 – What Trauma Really Is (Beyond the Buzzword)
04:10 – The Subtle Imprints: Perfectionism, Control & Addiction
09:22 – Why Your Past Hijacks Your Relationships & Marriage
18:14 – Why Western Trauma Models Fail Indian Families
21:05 – The Panchakosha Framework: Healing Mind, Body & Prana
34:25 – Emotional Abuse & Neglect: The Scars You Cannot See
40:20 – Healthy Guilt vs. Destructive Toxic Shame
43:20 – Gentle vs. Helicopter Parenting: How to Build Resilient Kids
56:30 – Kid Creators & Early Fame: A Silent Mental Health Crisis?
01:07:18 – How Traumatic Memories Can Actually Be Rewired (RTM)
01:11:30 – Answering Viewer Questions: Mother-in-Law Conflicts, Abandonment Issues & Setting Boundaries
Drop your thoughts below: What is one pattern from your childhood that you are actively trying to unlearn today? Let’s start an honest conversation in the comments.
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#WhatTheHealth #TrayaHealth #ChildhoodTrauma #MentalHealthMatters #ParentingTips #InnerChildHealing #SelfGrowth #Podcast
Transcript:
(00:00) ट्रॉमा होता क्या है? ट्रॉमा अकर्स अंडरस्टैंडिंग ट्रॉमा एवरीवन इज ट्रोमाटाइज्ड चाइल्ड हर्ड ट्रॉमा। क्यों ये इतना ज्यादा हमें डिफाइन करता है? कोई भी बहुत ही मुश्किल अनुभव होता है। तो उसका इंप्रिंट हमारे ऊपर रहता है। बचपन में आपको हर रोज अगर मार पड़ी है, आपको क्रिटिसाइज किया गया है, आपने डोमेस्टिक वायलेंस देखा है, आपको बुलिंग हुआ है, तो आपकी नर्वस सिस्टम परफेक्शनिज्म हुआ। एक लॉक 10 बार चेक करना पड़ता है। आपको बहुत एडिक्शंस है। हर रिलेशनशिप में प्रॉब्लम हो रही है। शो मी द ब्लडी फ़ इनसिक्योरिटी, बहुत क्लिंगी बिहेवियर
(00:42) होना, बहुत पज़ेसिव होना, हर किस्म का डर, सस्िशियस बहुत रहना लोगों पे। या तो फिर ओवर केयरिंग करना, ये सारे सफल। हमारे चाइल्डहुड एक्सपीरियंसेस, [संगीत] एडल्ट, मेंटल हेल्थ को कितना शेप करते हैं? आज के व्हाट द हेल्थ पॉडकास्ट में इसी कनेक्शन को समझाने के लिए हमारे साथ हैं डॉक्टर रीरी त्रिवेदी और डॉ गुंजन त्रिवेदी। डॉक्टर रीरी त्रिवेदी हैज़ बीन वर्किंग एक्सटेंसिवली ऑन चाइल्डहुड ट्रॉमा इनर चाइल्ड हीलिंग एंड इमोशनली अवेयर पेेंटिंग और यह अपने प्लेटफार्म के थ्रू इन टॉपिक्स पर अवेयरनेस क्रिएट करती हैं। एंड विद हर वी हैव डॉक्टर गुंजन त्रिवेदी
(01:19) हु वर्क्स इन ट्रॉमा इनफॉर्म्ड साइकोथरेपी चाइल्डहुड ट्रोमा एंड पीटीएसडी। यह अपनी रिसर्च के थ्रू एविडेंस बेस्ड मेंटल हेल्थ प्रैक्टिससेस को इंडियन नॉलेज सिस्टम के साथ इंटीग्रेट करते हैं। हाउ इंपॉर्टेंट इट इज फॉर स्टडी एंड रिसर्च टू बी डन इंडियन स्पेसिफिक? अभी तक ट्रोमा के रिसर्च और बुक्स भी जो लिखी गई है वो वेस्टर्न लोगों ने लिखी है। वो लोग वहां के नंसेस के हिसाब से कैप्चर करेंगे। पर इंडिया का अलग ही एक सिस्टम है। तो वो उनके क्वेश्चन में कैप्चर नहीं हो पाता। वर योर पेरेंट्स सेपरेटेड और डिवोर्स? इंडियन फैमिलीज़ में तो 10 में से
(01:52) नौ फैमिलीज़ में सेपरेशन और डिवोर्स तो होता ही नहीं। बच्चे को उसका ज्यादा ट्रोमा होता है। पर ये पूरे ग्लोबल क्वेश्चनर में ये तो कैप्चर ही नहीं हुआ। व्हाट द हेल्थ पॉडकास्ट में ये [संगीत] एक्सप्लोर करेंगे चाइल्डहुड ट्रॉमा के पीछे का साइंस। और साथ ही बात करेंगे इंडियन पेरेंटिंग एंड [संगीत] फैमिली डायनामिक्स, जो एक बच्चे के फ्यूचर को शेप करते हैं। टुगेदर दे विल बी [संगीत] आंसरिंग सम ऑफ़ द मोस्ट डिफिकल्ट क्वेश्चन। व्हिच विल मेक यू लुक एट योर चाइल्डहुड एक्सपीरियंसेस [संगीत] लिवल डिफरेंटली। हु वुड यू वांट टू रीच आउट टू यू गाइज?
(02:25) इमोशनल अब्यूज और नेगलेक्ट के जो स्कार्स हैं, उसके घाव हैं वो शरीर पे नहीं दिखते। वो आत्मा पे, मन पे दिखते हैं। इसलिए वह ज्यादा डीप है। टीचर्स क्लास के सामने खड़ा करके बच्चे को बोलते कि तेरे में अक्कल नहीं है। तू डफर है तू लाइफ में कुछ नहीं बन पाएगा। जब भी मैं कुछ गलत करती थी, मस्ती करती थी ना, तो पापा मेरे कपड़े उतार के मुझे बालकनी में खड़ा कर देते थे 2 घंटा ताकि पूरे पड़ोसियों को पता चले कि मैंने कुछ गलत किया। पेरेंट्स को तो यही लगता है कि यार हम तो सुधार रहे हैं ना इसको टोकटोक के तो सुधार रहे हैं। बट दे डोंट सी इट एस
(02:54) इमोशनल। अनफॉर्चुनेटली हमारे देश में यंग जो पपुलेशन है उसमें प्राइमरी कॉज ऑफ़ डेथ इज़ अटेम्प्ट। ये लोग सोच रहे हैं जनरेशन वीक है। यू कैन नॉट जनरलाइज। अगर हमारी यंग जनरेशन जो हमारा डेमोग्राफिक डिविडेंड है उसका प्राइमरी कॉज ऑफ डेथ इज हाउ कैन वी इग्नोर दैट एज अ कम्युनिटी अनएक्सेप्टेबल एक बहुत ही फेमस सीरीज का फेमस डायलॉग है। क्राइसिस के टाइम पर फैमिली काम आती है। बट अनफॉर्चूनेटली कुछ लोगों के लिए शायद फैमिली ही क्राइसिस बन जाती है। और आज के व्हाट द हेल्थ पॉडकास्ट में हम इस बारे में और डिटेल में समझेंगे। हाय आई एम
(03:38) सलोनी आनंद एंड टुडे वी हैव डॉ. रीरी एंड डॉ. गुंजन त्रिवेदी पायनियरिंग मेंटल हेल्थ रिसर्चरर्स, ऑथर्स और वेलनेस स्पेस के कोफाउंडर्स जो स्पेसिफिकली चाइल्डहुड ट्रॉमा, माइंड, बॉडी थेरेपी और इमोशनल वेल बीइंग पर काम करते हैं। डॉ. इरी एंड डॉ. गुंजन वेलकम टू व्हाट द हेल्थ। लेट्स स्टार्ट फ्रॉम ट्रोमा। एंड आई थिंक आपने बुक लिखी है एवरीथिंग अराउंड ट्रॉमास यू नो दैट्स अ वेरीेंट पार्ट ऑफ व्हाट यू गाइस डू हमें बताइए ट्रॉमा होता क्या है फर्स्ट कि अगर कोई भी बहुत ही मुश्किल अनुभव होता है तो उसका इंप्रिंट हमारे ऊपर रहता है एग्जांपल लॉस ऑफ अ फैमिली मेंबर
(04:21) वो पेनफुल होता है तो वो 2 महीने 6 महीने 1 साल 2 साल के बाद रिकवरी होती है फनली हम याद करते हैं मगर उसकी की इंपैक्ट नहीं होती है। उसके बाद अब होता क्या है कि कई लोगों में वो इंप्रिन रहती है। सो सिंपल कि अगर यहां कट गया तो पेन होगा। बॉडी पेन लाएगा टू प्रोटेक्ट इट। हम उसके बाद जब चमड़ी ठीक हो जाएगी पेन चला जाएगा। चला जाएगा। ये फिजिकल इंजरी में साइकोलॉजिकल इंजरी में कई बार वो इंप्रेन रहती है जिसको हम ट्रॉमा कहते हैं। और ट्रॉमा ना बड़ा सब्जेक्टिव है। मतलब अगर आप सिंपल डेफिनेशन पूछो तो ट्रॉमा इज़ एनी पेनफुल इवेंट। एनी पेनफुल इवेंट। जैसे थप्पड़ मार दिया
(04:59) बच्चे को आपने या एक बच्चे ने पापा मम्मी को मार रहे हैं वो देख लिया तो दैट इज ट्रॉमा ओके पर ट्रॉमा सब्जेक्टिव है मतलब एक बच्चा वो चीज देख रहा है उसको शायद बहुत गहरी इंपैक्ट पड़ेगी दूसरा बच्चा शायद देख रहा है उसको कम कम इंपैक्ट पड़ेगी तो पहली चीज ये कि ट्रॉमा इज एनी पेनफुल इवेंट दैट रियली ट्रबल्स यू सेकंड इज़ ट्रॉमा सब्जेक्टिव है सबके लिए उसका अनुभव अलग इंटेंसिटी अलग रहती है और तीसरा जैसे गुंजन ने कहा कि ट्रॉमा झेलने की क्षमता भी सब में अलग-अलग होती है। कई लोग ट्रॉमा से गुजर के हेल्दीली बाहर आ सकते हैं। कई लोग जो नहीं प्रोसेस
(05:34) कर पाते वो लोग वो ट्रॉमा में अटके रहते हैं और वो फिर जिंदगी भर उनको इंपैक्ट करता है। एक उदाहरण के रूप में जैसे भूकंप हुआ था अहमदाबाद में तो जो लोग भी उसका अनुभव किया था उसको ट्रोमेटिक इवेंट थी। उससे दो या 4% लोग 6 महीने एक साल के बाद भी अगर कोई कुछ मूवमेंट हो रही है आसपास में तो दे फील कि वह वापस फिर से हो रहा है। तो उसके तीन मेजर होते हैं एक्सट्रीम फॉर्म में कि आप रीएक्सपीरियंस फिर से अनुभव करते हो। हालांकि वो सिचुएशन 2 साल पहले 10 साल पहले हुई थी। उससे थ्रेट में रहते हो कुछ हो जाएगा हो जाएगा हो जाएगा और वो परिस्थिति को अवॉइड करते हो और
(06:12) ज्यादातर उसमें रोल है सोशल सपोर्ट और अच्छी नींद। नींद से अपने आप हमारा ट्रॉमा इंप्रिड प्रोसेस बॉडी करने के लिए सक्षम है। वाओ बहुत ज्यादा आपने रिसर्च की है। पेपर्स भी पब्लिश किए अराउंड द इंपैक्ट ऑफ चाइल्डहुड ट्रॉमा टू एन एडल्ट राइट एंड कनेक्टिंग मेंटल हेल्थ विद दैट। राइट? थोड़ा समझाइए कि क्यों ये इतना ज्यादा हमें डिफाइन करता है। तो ट्रॉमा की जो इंपैक्ट है वो अ बचपन में चाइल्डहुड से शुरू हो के एडल्टहुड तक उसकी इंपैक्ट ऑब्वियस भी है और सल भी है। तो ट्रॉमा ऑब्वियसली दिखता है जब लोगों को मेंटल हेल्थ इश्यूज होते हैं। जैसे
(06:55) डिप्रेशन है, बायपोलर है, स्किजोफ्रेनिया है। तो पता ही है कि ट्र बट सल एस्पेक्ट्स जो होते हैं ट्रॉमा के वो हमें नहीं समझ आते। जैसे परफेक्शनिज्म हुआ या कंपल्सिवली जैसे किसी ने बोला कि मुझे कंपल्सिव बिहेवियर है। मुझे एक लॉक 10 बार चेक करना पड़ता है। मुझे घर में सफाई ऐसी कि बुक ऐसी से ऐसी नहीं होनी चाहिए वरना मुझे टेंशन हो जाता है। फिर हर रिलेशनशिप में प्रॉब्लम हो रही है। या आप रिलेशनशिप में रिश्तों में वायलेंस वायलेंट बिहेव करते हैं। आप अपने या आपको बहुत एडिकशंस हैं। यू नो सिगरेट छोड़ी तो शराब शुरू कर दी। शराब छोड़ी तो फिर कुछ ड्रग्स पे आ गए। वो
(07:31) निकला तो कुछ और तो एडिकशंस हैं। फिर अ क्रॉनिक हेल्थ इशूज़ हैं। समझो आपको। जैसे बहुत छोटी उम्र से ही ब्लड प्रेशर, डायबिटीज डायग्नोस हो गया, अर्ली थायरॉइड हो गया, ऑटोइम कंडीशंस आ गए। तो ये सारे साइन हैं जब हम हमें वी वुड प्रोब के क्या इनका [गला साफ़ करने की आवाज़] हिस्ट्री है बिकॉज़ सी व्हाट हैपेंस इज ट्रॉमा से आपकी फिजियोलॉजी इंपैक्ट होती है। ट्रॉमा से आपकी नर्वस सिस्टम डिसरेगुलेट होती है। आपके ब्रेन सेंटर्स पे भी इसका इंपैक्ट पड़ता है एस पर न्यूरोसाइंस। तो जो बचपन से अगर आपकी नर्वस सिस्टम इमंबैलेंस में रही है, आपके ब्रेन सेंटर्स अलग तरीके से
(08:06) डेवलप हुए हैं अब्यूज और ट्रॉमा की वजह से तो उसकी इंपैक्ट आपके फिजिकल हेल्थ पे भी पड़ती है, मेंटल हेल्थ पे भी पड़ती है। जब फिजिकल हेल्थ पे पड़ती है तो क्रॉनिक हेल्थ कंडीशंस हो जाएंगे। बट अनफॉर्चूनेटली मेडिकल डॉक्टर्स भी ये लिंकेज नहीं बना पाते क्योंकि उनको सिखाया नहीं गया है कि भ अगर बंदे को बहुत अर्ली ऑटोइ्यून सिचुएशन है तो शुड आई आस्क कि भ व्हाट वास द रीज़न फॉर दिस? और जो उससे भी सल इंपैक्ट है वो है रिश्तों में। जैसे हमने कहा इनसिक्योरिटी बहुत क्लिंगी बिहेवियर होना, बहुत पज़ेसिव होना या हर किस्म का डर, फियर फोबियास बहुत किस्म के
(08:42) होना, चूहे का डर, अंधेरे का डर, पानी का डर, हाइट का डर, हर चीज में डरे हुए रहना, हर चीज में नेगेटिव सोचना या सस्पिशियस बहुत रहना लोगों पे। या तो फिर ओवर केयरिंग करना जिसको हम कोडिपेंडेंसी कहते हैं। ये सारे सल एस्पेक्ट्स हैं ट्रॉमा के। आपने एक बहुत अच्छी बात बताई रूट कॉज लोगों में देखा है कि जब वो एक सर्टेन मेंटल हेल्थ डिफिकल्ट सिचुएशन से गुजर रहे होते हैं वो उसको सिचुएशन को ब्लेम कर देते हैं। फॉर एग्जांपल मेरा बॉस बहुत टॉक्सिक है। या जब से मदर इन लॉ मेरी लाइफ में आई है मेरा सब प्रॉब्लम चल रहा है। राइट? नाउ इज
(09:18) मदर इन लॉ द प्रॉब्लम और मेंटल हेल्थ द प्रॉब्लम? हां। वेरी गुड क्वेश्चन। सो यहां पे हमें थोड़ा सा साइको एडुकेट करना पड़ता है क्लाइंट को क्योंकि देखिए मदर इन लॉ कुड बी अ प्रॉब्लम आई एम नॉट सेइंग नो बट उस प्रॉब्लम के साथ आपकी इमोशनल रेिलियंस कितनी है डील करने के लिए दैट विल बी डिटरमिन बाय आपका चाइल्डहुड कैसा था अगर आपका चाइल्डहुड में ट्रॉमा नहीं था अगर आपका चाइल्डहुड अच्छा था तो आपके अंदर वो कॉन्फिडेंस वो इमोशनल रेिलियंस रहेगा कि कितना भी टॉक्सिक बॉस हो कितना भी स्ट्रेसफुल एनवायरमेंट हो या कितनी भी आपकी सांस परेशान कर रही हो आप अपना सर्
(09:53) सर्वाइव करने का कोप अप करने का तरीका निकाल लोगे क्योंकि आप में आत्मविश्वास है। आप में कॉन्फिडेंस है। आप इमोशनली स्टेबल हैं। पर अगर आपका चाइल्डहुड बैगेज ऑलरेडी है। ट्रॉमा है तो एक तो आपकी नीव ही वीक है। आप वो वीक वाले नीव के साथ अगर आप उस पे कितने भी ब्लॉक्स बनाओगे तो वो गिरने ही वाले हैं। तो यह लोगों को समझाने में तो टाइम लगता है। बिकॉज़ लोगों को लॉजिकली तो यही लगता है कि शादी के बाद ही सारी प्रॉब्लम शुरू हुई। मैम शादी से पहले तो सब कुछ मेरा ठीक था। इसका मतलब शादी इज द प्रॉब्लम, मदर इन लॉ इज अ प्रॉब्लम। फिर उनको समझाना पड़ता है। और इसके लिए मैं एक
(10:26) एक क्लाइंट की कहानी बताऊंगी। ये क्लाइंट मेरे पास आके मुझे क्या बोलती है? हस्बैंड वाइफ दोनों रहते हैं बाहर। दोनों वर्क करते हैं। दो बेटियां हैं। उसका हस्बैंड उसके लिए सब काम करता है। मतलब वो दोनों जॉब तो दोनों करते हैं। बट हस्बैंड घर साफ रखेगा। डिशेस भी कर देगा। खाना भी बहुत अच्छा बनाएगा। फिर जब फ्रेंड्स मिलते थे ना तो हस्बैंड बोलेगा कि मैंने खाना बनाया। मैंने सब किया। तो फ्रेंड्स उसकी तारीफ करेंगे कि तू कितनी लकी है। तेरा हस्बैंड कितना अच्छा है, कितना तो जब भी होगा ना तो वो रात को हस्बैंड के साथ झगड़ेगी। वो क्या बोलेगी कि तुम मुझे नीचा
(10:57) दिखाने के लिए ये सब चीजें कर रहे हो। यू आर ट्राइंग टू प्रूव दैट यू आर बेटर देन मी एंड आई एम नॉट एबल टू मैनेज। दैट इज व्हाई यू आर डूइंग ऑल दिस। ओके? सिनेरियो वन। सिनेरियो टू यही अपने हस्बैंड और बच्चों को छोड़ के इंडिया गई। अपने पेरेंट्स का ध्यान रखने। इंडिया गई 15 दिन रही तो कोई अनापशनाप कुछ नहीं हुआ घर पे सब घर अच्छे से मैनेज हुआ बच्चे अच्छे से मैनेज हुए फिर बच्चों ने ये भी बोला कि मम्मी अगर आपको 10-15 दिन और मम्मी के पास रहना है आप इंडिया में रह जाओ हम लोग ठीक है घर वापस आई घर एकदम क्लीन कुछ गंदा नहीं सबका रूटीन मैनेज था तो इसको
(11:35) ब्रेकडाउन हो गया शी इस सेइंग कि मुझे अभी जीना ही नहीं है मुझे तो मर जाना है क्योंकि मेरी जरूरत ही नहीं है किसी को दिस पीपल डोंट नीड मी आई एम आई एम यूज़लेस। आई एम नॉटेंट। मैं मर जाऊं तो भी इनको कोई फर्क नहीं पड़ेगा मैम। तो मेरा क्या वैल्यू है? अभी इसका रूट कॉज मैं बताती हूं। कोई और उसकी जगह पे होता तो क्या सोचता? अरे यार कितना अच्छा है। मेरे बच्चे कितने इंडिपेंडेंट है। मेरा हस्बैंड कितना सब कर लेता है। मेरी लाइफ तो अच्छी है। मैं एक महीना और रुक जाऊंगी। बट उसने ये नहीं देखा। क्यों? क्योंकि उसका लेंस अलग था। बचपन में शी ग्रू अप विथ अ मदर जो
(12:06) बहुत क्रिटिकल थी। उसको उसको मार भी बहुत पड़ी थी। मदर ने उसको अ पढ़ाई के लिए नानी के पास भेजा। नानी भी बहुत क्रिटिकल थी। तो पूरा बचपन उसका यही सुनसुन के गया कि यू आर नॉट गुड इनफ। तेरे से कुछ होगा नहीं। तू क्यों कुछ नहीं ठीक से कर पा रही। अभी ये चश्मे से जब वो अपने हस्बैंड के बिहेवियर को देखती है, बच्चों के बिहेवियर को देखती है। उसको वो बिहेवियर वो इंटरप्रेट इसी तरह से करती है कि आई एम नॉट गुड इनफ। आर यू गेटिंग दिस? अब्सोलुटली। सो व्हेन शी रियलाइज्ड आल्सो शी से हां बिकॉज़ अभी ये अगर फ्रेंड को बताती तो फ्रेंड भी यही कहती कि अरे तेरे
(12:38) में समझ नहीं है तेरे में अकल नहीं है इतना अच्छा तेरा हस्बैंड है सब कुछ कर रहा है बच्चे इतने अच्छे तू बट शी विल नॉट बी एबल टू सी व्हाट यू एंड आई कैन सी बिकॉज़ हर ट्रोमा हैज़ क्रिएटेड अ लेंस तो उसकी भी सच्चाई सही है। वी एस थेरेपिस्ट कैन नॉट जज कि अरे तुम क्या कह रही हो यार तुम तो गलत कह रही हो। तुम्हारा सोचने का तरीका ही गलत है। नहीं, उसका सोचने का तरीका ऐसा है क्योंकि उसका पूरा बचपन इस किस्म का गया। बचपन में उसके लेंस बन गए कि आई एम नॉट गुड इनफ। आई एम नॉट वांटेड। मम्मी ने ही मुझे कहीं और भेज दिया। तो आई एम नॉट
(13:12) नीडेड। आई एम नॉट इंपॉर्टेंट अबंडनमेंट इश्यूज। तो आप समझो कि यह लेंस से जब परिस्थितियां हम देखते हैं तो यह तो एक सिंपल एग्जांपल है। बट यही चीज लोगों की लाइफ में बार-बार होती है कि जो उनको लग रहा है कि ऑब्वियसली यह प्रॉब्लम है एक्चुअली वो प्रॉब्लम उनको लग रहा है क्योंकि उनका ऑलरेडी अपने ट्रॉमा का एक चश्मा है। वाओ आई थिंक बहुत ही ब्यूटीफुल चीज है क्योंकि यह सिर्फ उन लोगों के लिए यूज़फुल नहीं है जो प्रॉब्लम से गुजर रहे हैं। वो सारे लोग जो उनके आसपास रह रहे हैं। हाउ डू वी बिल्ड एमथी फॉर पीपल अराउंड अस हु आर सफरिंग
(13:49) करेक्ट है ना जब हम ऐसे लोग देखें हम उन्हें कैसे आप जैसे लोगों से कनेक्ट कराएं एनी पॉइंट्स देयर कि एक नॉर्मल इंडियन सिटीजन अपने अराउंड कैसे आइडेंटिफाई करें कि इस पर्सन को हेल्प की जरूरत देखिए दूसरे आइडेंटिफाई करने से नहीं होता है कुछ बिकॉज़ आई विल टेल यू व्हाई किसी को कोई और कहे कि तुम्हें हेल्प की जरूरत है तो बहुत कम लोग हैं जो ओपनली ली सुनते हैं इस बात को। मोस्ट पीपल व से मुझे क्यों तुम्हें जरूरत है? वरना आधी दुनिया की सासे अपनी बहुओं को हमारे पास ले आती है और आधी बहुएं सांसों को हमारे पास ले आती है कि [हंसी] यार इनको फिक्स करो। बट ऐसा
(14:25) नहीं होता है। यू नो अब्सोलुटली राइट। [हंसी] तो [अचानक ज़ोर से सांस लेने की आवाज़] मेरा ये पॉइंट है कि उनको खुद समझना है। पर हां ये डिस्कशन से एम्पैथी आनी चाहिए। हमें लोगों को यह समझना चाहिए कि हर एक इंसान के बिहेवियर के पीछे कोई कारण है। समझो अगर आपके हस्बैंड को गालियां देने की आदत है। आपको लग रहा है कि ये गलत है। बट वो कहां से आई? वो जन्म से तो नहीं था। तो कहीं ना कहीं उनके ग्रोइंग अप में बहुत बच्चे आते हैं कि हमारे फादर इमोशनली अनवेलेबल है। मैडम वो इमोशंस दिखाते ही नहीं है। हमारे लिए कोई कनेक्शन ही नहीं है। फिर मुझे उनको पूछना पड़ता है कि उनका
(14:56) उनका बचपन कैसा था? हां वो अडॉप्टेड थे या हां यू नो उनके पापा तो उनको बहुत मारते पीटते उनके पापा अल्कोहलिक थे। तो ऑब्वियसली फिर अगर आपके पापा ने खुद इमोशंस या लव एक्सपीरियंस नहीं किया है तो उनके लिए वो भाषा कहां से आएगी? दैट डस नॉट जस्टिफाई दैट बिहेवियर बट एटलीस्ट दैट गिव्स यू अ पर्सपेक्टिव कि आप उन लोगों को एक अलग नजरिए से देख सकते हो। एक्सेप्ट कर सकते हो कि हां शायद यह भी हो सकता है। आज मेरी मम्मी मेरे लिए इतनी क्रिटिकल है। लड़कियां कहती है मम्मी हर बात में मेरे को टोकती है। पता चले कि वो मम्मी की हिस्ट्री देखो कि वो मम्मी को इतना बुलिंग
(15:30) किया गया था। इतना उसको सेल्फ वर्थ इतना टॉक्सिक शेम था कि उसने सोच ये सोच के बड़ी हुई कि मेरी बेटी को मैं ऐसा नहीं फील होने दूंगी। मेरी बेटी कॉन्फिडेंट होनी चाहिए। मेरी बेटी टॉप पे होनी चाहिए। तो इस इस चक्कर में वो अपनी बेटी को बार-बार टोक रही है। पर वो भी गलत हो रहा है। हां। तो बिहेवियर गलत है। पर बिहेवियर के पीछे का रीजन क्या है वो समझो आप। तो आपको वो डॉट्स कनेक्ट करना जरूरी है। आपके पास कोई वॉक इन करता है विद अ प्रॉब्लम एंड देन जब आप उनके साथ काम शुरू करते हैं तब पता चलता है कि एक चाइल्डहुड ट्रॉमा था। सोशल मीडिया की वजह से मैं देख रही हूं कि
(16:03) पिछले 10 साल में एक चेंज आया है। 10 साल पहले जब आते थे लोग हमारे पास तो चाइल्डहुड ट्रॉमा ट्रॉमा पे काम करना ऐसा बोलते ही नहीं थे। वो तो कहते थे अरे हमें तो बहुत बार-बार पे गुस्सा आता है। कुछ करना है या हमें तो डिप्रेशन है कुछ करना है। नींद नहीं आ रही है कुछ करना है। अभी बिकॉज़ ऑफ़ सोशल मीडिया एंड बहुत सारी अवेयरनेस हो रही है। नाउ लोग पीपल आर कमिंग एंड सेइंग के आई थिंक आई हैव चाइल्डहुड ट्रॉमा एंड इसके बारे में कुछ करना है हमें। तो ये चेंज आया है धीरे से। नॉट एवरीबडी हु हैज़ चाइल्डहुड ट्रॉमा विल इनवेरिएबली हैव डिप्रेशन एंजाइटटी बिकॉज़
(16:33) देयर आर अदर पाथवेज जिनका रेज़िलियंस ज्यादा है, पीसी ज्यादा है उनको नहीं होगा। बट जिनको डिप्रेशन एंजायटी सुसाइड अटेम्प्ट्स है उनको बहुत ज्यादा संभावना है कि हाई चाइल्डहुड ट्रॉमा है। और ये तो रिसर्च एक्चुअली 30 साल पहले सबसे पहली और दुनिया की सबसे बड़ी रिसर्च डॉक्टर विंसन फेलेटी ने की थी। जो ढाई लाख उनका जो सैंपल साइज था एडल्ट्स थे वो सबसे बड़ी दुनिया की रिसर्च 30 साल पहले हुई। उसके बाद दुनिया भर में बहुत सारे चाइल्डहुड ट्रॉमा के रिसर्च हुए हैं 30 साल में। पर इंडिया से गिनेचुने दो या तीन ही पेपर्स थे। उंगलियों पे भी गिने उससे कम। तो जब
(17:09) मैंने पीएचडी रिसर्च किया तो आई वास शॉक्ड क्योंकि इंडिया में इतना पपुलेशन है बट चाइल्डहुड ट्रॉमा की रिसर्च गिने-चुने दो-तीन ही पेपर्स। सोचो आप भूटान से कहीं तो कहीं से तो ऐसे-से कंट्रीज पाकिस्तान से कहीं से तो पेपर्स हैं पर इंडिया से नहीं थे। अभी पिछले 5 साल से आ रहे हैं। एंड दैट इज सो सरप्राइजिंग बिकॉज़ मुझे ऐसे लगता है कि एज अ कंट्री जिस तरह हमारा एक सोसाइटी प्रेशर होता है कि बाजू वाले शर्मा जी का बेटा 12th में क्लियर कर गया। तुम्हारा क्या हुआ? लोग क्या कहेंगे? राइट? ये सारा जो हमारा इंडिया का एक अलग ही अ सिस्टम है व्हिच आई थिंक इज़ डीपली
(17:46) लिंक टू ट्रोमाज़ दैट इदर वी गेट और वी गो थ्रू। हाउेंट इट इज फॉर स्टडी एंड रिसर्च टू बी डन इंडियन स्पेसिफिक? हां। तो इसमें क्या है कि जो अभी तक ट्रॉमा की रिसर्च आई हुई थी और बुक्स भी जो लिखी गई है वो वेस्टर्न लोगों ने लिखी है। तो वो लोग वहां के नंसेस के हिसाब से कैप्चर करेंगे। पर इंडिया का जैसे आपने कहा कि एक अलग ही एक सिस्टम है। अलग ही कल्चर है। तो वो उनके क्वेश्चन में कैप्चर नहीं हो पाता था। जैसे एक सिंपल बात कहूं कि जब हमने ट्रॉमा रिसर्च इसके बारे में रिसर्च का काम शुरू किया छ सात साल पहले तो हमने देखा कि वहां का 10 पॉइंट
(18:23) क्वेश्चन है। ओके? जो स्टैंडर्ड ग्लोबली सब यूज़ करते हैं। अभी उसमें एक एलिमेंट है ट्रॉमा एलिमेंट वर योर पेरेंट्स सेपरेटेड और डिवोर्स। अगर सेपरेट या डिवोर्स हुए तो मतलब एक ट्रॉमा हुआ है। तो इंडियन फैमिलीज में तो 10 में से नौ फैमिलीज में सेपरेशन और डिवोर्स तो होता ही नहीं है। पर जिंदगी भर मां-बाप लड़ ललड़ के लड़ मर के रहते हैं। तो बच्चे को उसका ज्यादा ट्रॉमा होता है। पर ये पूरे ग्लोबल क्वेश्चनयर में ये तो कैप्चर ही नहीं हुआ। समझो आप। तो इतना बड़ा पॉइंट मिस हो गया। बिकॉज़ हमारे पास क्लाइंट्स आते थे। कहते थे मैम इतना मुझे
(18:53) ट्रॉमा है। मेरे मम्मी पापा का झगड़ा देख के। मुझे लग रहा है अच्छा होता डिवोर्स हो जाते पर जिंदगी भर साथ में रह रहे हैं। जो पीियर आइसोलेशन मैन अनुभव करते हैं उनको बचपन में इमोशनली नेगलेक्ट महसूस किया गया है। मैं स्कूल में था मगर लोग मेरे साथ बात नहीं करते थे या मुझे अलग से बैठना पड़ता था लोग के साथ में उसका इंपैक्ट बहुत स्ट्रांग। तो बोलिंग के भी दो प्रकार हैं। अग्रेसिव और आइसोलेशन। सो, द पॉइंट इज़ दैट वी फेल्ट दैट वी नीड अ क्वेश्चनर दैट रेप्रेजेंट्स आवर इंडियन नो। आप ऑन एन ऑनगोइंग बेसिस क्या करते हैं? प्रडोमिनेंटली हमारा काम दो है। एक तो हम
(19:33) लोग जो हमारे पास मेंटल हेल्थ इश्यूज लेके आते हैं उनका हम पूरा मेजर करते हैं। उनका ट्रॉमा क्या है? उनके क्या प्रेजेंटिंग प्रॉब्लम्स हैं? और हम हमारी जो मॉडालिटीज हैं, टेक्निक्स है, जो रिसर्च बेस्ड हैं वो हम अप्लाई करते हैं जिससे कि वो उसमें से बाहर आ सके। जैसे पीपल कम विद डिप्रेशन, एंजायटी, रिलेशनशिप इशूज़ इंसोमनिया और यू नो ट्रॉमा, इंपैक्ट एंड वी मेजर, वी डू आवर थेरेपीस, इंटरवेंशंस, वी ट्रैक द प्रोग्रेस टिल दे कंप्लीटली रिकवर। दूसरा बहुत बड़ा हिस्सा हमारे काम का है जो हम ट्रेनिंग्स देते हैं। तो हम हमारी टीम ऑफ थेरेपिस्ट हैं जिनको हमें
(20:08) हमने ट्रेन किया है हमारी टेक्निक्स में जो बुक में मेंशन की हुई है। और तीसरा बहुत बड़ा पार्ट है पिलर जो गुंजन हैंडल करते हैं वो है रिसर्च। हमने जैसे कहा कि इंडिया में इसका रिसर्च बहुत नया है। बहुत इनफेंटाइल स्टेज पर है। तो हमारा बहुत ये डिजायर था कि हम कंट्रीब्यूट करें इन इंडिया के ये रिसर्च पूल में। रिसर्च ऑन नॉट जस्ट थ्योरिटिकल एस्पेक्ट्स बट रिसर्च ऑन एक्चुअल टेक्निक्स टू मेजर द इफेक्टिवनेस ऑफ़ द वर्क दैट वी डू। सो दैट दे बिकम मोर मेन स्ट्रीम। एंड एज अ पार्ट ऑफ दिस हमारा ये भी है कि इंडियन नॉलेज सिस्टम्स को भी थोड़ा ले आओ। बिकॉज़ ये सारा
(20:44) रिसर्च माइंड बॉडी का ट्रॉमा का बहुत सारा आई थिंक ये मैं आई इंटरेस्टिंग इन द बुक आपने जो बुक लिखी है उसमें मैंने मैंने सोचा जब आप यहां आएंगे आई विल आस्क आई सॉ दिस ब्यूटीफुल ब्लेंड ऑफ आयुर्वेद और इंडियन एंशिएंट थिंकिंग कमिंग इन राइट सो ये जो पंचकोषा है यह समझाइए इसकी शुरुआत हुई जब हम दोनों ने हमारे योगा टीचर्स ट्रेनिंग ली जो हमने हमने एस व्यासा से ली डॉक्टर नागेंद्र से। तो वहां से हमारी शुरुआत हुई पंचकोश समझने में बिकॉज़ वी आर बोथ योगा थेरेपिस्ट। तो हम हमने योगा पर्सपेक्टिव से समझा कि यार जो भी योग तो हमारे डिजीज को पांच लेयर्स की
(21:29) तरह देखता है। मतलब तैतय उपनिषद में जो लिखा है कि आवर एक्सिस्टेंस ऑफ़ फाइव लेयर्स। अन्नमय कोष व्हिच इज अ फिजिकल बॉडी। प्राणमय कोष जो है हमारा एनर्जी बॉडी। मनोमय कोष जो है हमारा डेली माइंड जहां पर हमारे सारे इमोशंस होते हैं जैसे एंगर, लव, फियर, हेट्रेड वगैरह। विज्ञानमय कोष जो है हमारा हायर माइंड और फिर आनंदमय कोष जो है हमारा ब्लिस। तो ये जो पंचकोषा का स्ट्रक्चर है उसके इर्द-गिर्द हम ने कोशिश की कि सारे हमारे जो प्रॉब्लम्स हैं हम उसको मैप करें। उस तरह से और उसके सॉलशंस भी उस तरह से लाए। बिकॉज़ जैसे मैंने कहा कि ट्रॉमा के रिसर्च में और
(22:03) स्टडी में कहीं ये इंडियन नॉलेज सिस्टम्स नहीं आया था। करेक्ट। तो योगा और पंचकोषा की इस तरह से हमारी शुरुआत हुई और फिर जब हमने बुक लिखी जो गुंजन जिनके प्राइमरी ऑथर है तो इन्होंने फिर बैठ के मैप आउट किया कि किस तरह से ट्रॉमा की हर एक कोष पे इंपैक्ट पड़ती है और उस पे क्या कर सकते हैं। राइट? सो दिस इज द पंचकोष फ्रॉम ट्रॉमा पर्सपेक्टिव। आल्सो सम ऑफ द सेल्फ रेगुलेशन टेक्निक्स जैसे हमने कहा कि ट्रॉमा क्रोनिक ट्रॉमा बचपन में आपको हर रोज अगर आपने मार पड़ी है आपको क्रिटिसाइज किया गया है आपने डोमेस्टिक वायलेंस देखा है आपको बुलिंग हुआ है तो आपकी नर्वस
(22:36) सिस्टम डिसरेगुलेट हो जाएगी तो ट्रॉमा का फर्स्ट प्रोसेस स्टेप है कि नर्वस सिस्टम को रेगुलेट करो तो वो अन्नमय कोष से शुरू होती है | तो ट्रोमा के रिकवरी प्रोसेस में भी हमको चारों कोष पांचों कोष इनवॉल्व करने पड़ते हैं अन्नमय कोष लेवल का भी काम करना पड़ता है व्हेन यू वर्क ऑन द फिजिकल बॉडी हम्म प्राणमय कोष लेवल का भी काम करना पड़ता है। यू वर्क ऑन द ब्रेथ बिकॉज़ ब्रेथ एंड द माइंड। ब्रेथ इज अ ब्रिज बिटवीन योर बॉडी एंड द माइंड। तो ब्रेथ वर्क से भी हमारा माइंड जो है वो रेगुलेट होता है। राइट? फिर आता है मनोमय कोष जहां पर हमारे
(23:08) बिलीव्स हैं, हमारे परसेप्शंस हैं, हमारे थॉट्स हैं। वो लेवल पर भी काम करना पड़ता है। मनोमय कोश लेवल पे वेयर वी डू काउंसलिंग, वी डू यू नो बिलीफ सिस्टम वर्क, वी डू इनर चाइल्ड वर्क, वी डू हिप्नोथेरेपी, वी डू योग निद्रा इन योगा। तो मनोमय लेवल का भी काम करना पड़ता है। विज्ञानमय लेवल का भी काम करना पड़ता है। जैसे गुंजन ने कहा कि टू आइडेंटिफाई इनकंसिस्टेंसीज एंड टू यूज़ अ सेंस ऑफ डिस्क्रीशन कि नहीं ये सही है गलत कैसे करना है। एंड अल्टीमेटली आनंदमय कोष तक जाना है। तो इस तरह से ट्रॉमा की इंपैक्ट भी हर एक कोष पे पड़ती है और ट्रॉमा की
(23:42) रिकवरी प्रोसेस में भी हमें पांचों कोष को इनवॉल्व करना है। तो रिकवरी ज्यादा इफेक्टिव रहेगी। अगर हम सिर्फ अन्नमय पे समझ समझो काम किया तो वी विल ओनली रेगुलेट द नर्वस सिस्टम पर हमारे जो माइंड के प्रोग्राम्स है उसका क्या होगा सिर्फ माइंड पे काम करेंगे तो इवेंचुअली फिजिकल बॉडी रेगुलेट होगा बट द पॉइंट इज कि अगर हम पंचकोषा मॉडल को देखें और अगर पांचों को साथ में एक थेरेपी में इंटीग्रेट करें तो इट विल बी मोस्ट इफेक्टिव सी अगर ट्रॉमा है तो बॉडी से रिलीज करना पड़ेगा हम हां माइंड बॉडी में पंचकोष हमें बोलते हैं कि आप विज्ञान में इसे रिलीज़ करोगे तो
(24:18) बॉडी से रिलीज़ करने की जरूरत नहीं है। यह कंट्रोवर्शियल स्टेटमेंट है। हमारे पास बहुत सारा एविडेंस है। पब्लिश्ड एविडेंस और वो करीम नादर्स मेमोरी रिकंसोलिडेशन वर्क। तो ये पर्सपेक्टिव आपको वेस्टर्न साइंस में नहीं मिलेगा। फॉर अ कॉमन मैन इफ यू कुड विदाउट ऑफ कोर्स विदाउट नेम्स शेयर अ स्टोरी विद अस। समबडी हु केम टू यू विद अ प्रॉब्लम, हाउ यू आइडेंटिफाइड द ट्रोमा। एक यंग लेडी थी वो गेट से आ रही थी वो शी वास ऑलमोस्ट शी वास लिटिल हेजिटेंट टू ओपन द गेट एंड देन एंड देन शी मेड रवी आई डिड नो फिर इरे ने मुझे बुलाया तो वो एक सर्वाइवर थी जिसके आसपास के
(24:59) तीनों लोग कार क्रैश में अनफॉर्चूनेटली मारे गए और उसने देखा कि यह हुआ है मेरे सामने बट वो जब भी भी कार में बैठती थी तो डर लगता था जहां वो अकस्मात हुआ था वो बोलती वहां मैं नहीं रह सकती हूं वो शहर में उस कंट्री में जभी भी वो कॉन्टेक्स्ट होगा कार मूवमेंट ब्रेक वो डरती थी और वो एक इवेंट थी जो बहुत ही खतरनाक इवेंट थी तो ये स्पेसिफिक असेसमेंट होता है पोस्ट ट्रोमेटिक स्ट्रेस डिसऑर्डर उसकी एक शेम होती है कि मैं क्यों सर्वाइव हो गई मैं क्या कर सकती थी ये सब सिचुएशंस होते हैं तो ये काम करना बहुत ही क्रिटिकल है और हमें ये काम आई ये माध्यम से या बहुत सारे
(25:39) माध्यम से लोगों के पास पहुंचाना कि इसका सशंस है एक एक और एक एग्जांपल है कि एक लड़की हमारे पास आई थी कि मदर थी न्यू मदर दो साल की बेटी थेरेपी के लिए क्यों आई है? क्योंकि मुझे मेरी मम्मी जैसा नहीं बनना है। मैं मेरी बेटी को दो साल के फिर भी उसको मैं हाथ उठा लेती हूं उसके ऊपर। मुझे बहुत गुस्सा आता है उस उसके ऊपर। मुझे पता है वो ये जो वुमन हमारे पास आई थी शी इज़ एन आईटी प्रोफेशनल। उसको पता है कि दो साल का बच्चा तो क्या ही मतलब मस्ती करता है। ये तो दे आर डूइंग व्हाट दे आर मेंट टू डू। बट आई कैन नॉट कंट्रोल मायसेल्फ। मेरी
(26:11) रिलेशनशिप्स में प्रॉब्लम है। मेरे भाई के साथ कोई रिलेशनशिप नहीं है। मेरी मदर के लिए मुझे बहुत नफरत और गुस्सा है। बिकॉज़ मेरी मम्मी ने मेरे साथ बहुत बुरा किया था बचपन में। तो ये सब लेके हमारे पास आई थी। रीज़ आई थी ये ले के कि आई वांट टू बी अ बेटर मदर। और उनको डिप्रेशन सीवियर था। एंजायटी भी सीवियर थी। यही सब घर में सब चीजें रखने की और इसकी वजह से मैरिटल इश्यूज भी होने लगे थे। हमारे पास आई। तो हमने असेस किया। तो हम टिपिकली क्या करते? उनके स्कोर्स लेते हैं। वेल बीइंग, ए्जायटी, डिप्रेशन, इंसोमिया, लोनलीनेस, सोशल सपोर्ट ये सबके स्कोर्स हमारे पास
(26:42) होते हैं। उससे हमें एक जैसे हम उसको साइकोलॉजिकल कुंडली बोलते हैं। उससे हमें पता चल जाता है इंस्टेंटली कि कहां काम करना है। फिर हम पूरा उसका चाइल्डहुड का हमने हिस्ट्री लिया। यू विल बी सरप्राइज कि लोग साइकेट्रिक मेडिकेशंस भी 10 साल लेके हमारे पास आते हैं और कहते हैं कि हमारे साइकेट्रिस्ट ने हमने इतना डिटेल में हमारे चाइल्डहुड ट्रॉमा के बारे में नहीं पूछा जितना आप पूछ रहे हो। क्योंकि हम क्या है? हर एक अगर 35 साल की लेडी है तो हम जीरो टू 35 इयर्स की ऐज में हर एक इंसिडेंट क्या हुआ? बचपन कैसा था? प्राइमरी स्कूल, मिडिल स्कूल 360 डिग्रीज
(27:13) हिस्ट्री लेते हैं। उससे हमें पता चलता है कि ये अभी के जो प्रॉब्लम्स है उसकी शुरुआत कहां से हुई? अभी ये लड़की के केस में यही था बहुत सी कि मदर बहुत क्रिटिकल थी। मदर उसको हमेशा बॉडी शेमिंग करती थी कि तू काली ते से कौन शादी करेगा? तू पैदा ही क्यों हुई? मदर को भाई ज्यादा पसंद था। तो भाई के लिए ज्यादा वो था। मदर उसको मारती भी थी और वो ये पढ़ाई में बहुत होशियार थी क्योंकि मार खा खा खा खा खा खा खा खा खा खा खा खा खा खा खा खा खा खा खा खा खा खा खा खा खा खा खा खा खा खा खा खा खा खा खा खा खा खा खा खा खा के उसके पास ऑप्शन नहीं था अगर फर्स्ट रैंक नहीं आया
(27:39) तो मार खाना पड़ता था तो वी मैप्ड उसका ट्रॉमा स्कोर बहुत हाई था फिजिकल मार भी पड़ती थी इमोशनल अब्यूज भी था एकद बार उसको घर के जो सर्वेंट थे उसने इन्हें एप्रोप्रियट टच किया तो सेक्सुअल अब्यूज भी था स्कूल में डार्क थी तो बुलिंग था आइसोलेशन था और क्या है बच्चा जब ये सब चीजें घर में टोलरेट करता है ना तो स्कूल में भी थोड़ा ऐसा अब ये लड़की फर्स्ट आती थी तो बच्चे उसको टीचर्स पैड टीचर्स पैड करके उसको आइसोलेट कर देते थे। तो ये सब हमने मैप किया। फिर हमने अपना काम शुरू किया उसके साथ। काम में हमारा दो स्टेप होता है। एक तो सेल्फ रेगुलेशन हम सिखाते
(28:14) ही हैं कि आपको रोज अपनी नर्वस सिस्टम को ठीक करने के लिए क्या-क्या करना है। उसके बाद हमने उसके चाइल्डहुड पे काम करना शुरू किया। जैसे स्पेसिफिक इवेंट्स उसके थे जो फिजिकल अब्यूज के ट्रॉमा के उसको हम रिलीज रिफ्रेम टूलकिट कहते हैं कि बॉडी में से उसका जो अनप्रोस्ड ट्रोमा है उसको हम रिलीज करवाते हैं। माइंड में उसको रिफ्रेम करवाते हैं। वही चीज किस तरह से हम दूसरे नजरिए से देख सकते हैं। सी रिफ्रेमिंग अकेले आप करो विदाउट रिलीज तो लॉजिकली आप कर समझ जाओगे कि नहीं नहीं ये तो हो गया अभी नहीं। बट बॉडी में जब तक वो बॉडी से
(28:46) नहीं निकलता है कई बार वो एक अटक जाता है प्रोसेस। तो हम रिलीज रिफ्रेम टूलकिट के अंब्रेला में हमारी जो टेक्निक्स हैं जैसे इनर चाइल्ड है, आरटीएम है, विजुअलाइजेशन है, हिप्नोथेरेपी ये सब यूज करके हर चार सेशन के बाद प्रोग्रेस मेजर करते हैं। एम्प्टी चेयर वगैरह करते हैं। अभी उस केस में उसने तीन या चार महीने बाद उसने कहा कि अभी मैं मेरी मम्मी जो लड़की जो लेडी मम्मी के साथ बात नहीं करती थी। अभी शी सेइंग मैं मम्मी के साथ आराम से बात कर पाती हूं विदाउट एनी एंगर विदाउट एनी आउटरेज। भाई के साथ रिश्ता बिल्कुल कटा हुआ था। अभी वो भाई के साथ भी बात करना
(29:24) उसने शुरू किया है। बेटी को मारना सबसे पहले बंद हो गया। बिकॉज़ हमारे क्लीनिक में एक अनरिटन रूल है कि अगर अगर बच्चों की तरफ वायलेंस है तो सबसे पहले उस पे काम करो। दे हैव टू फर्स्ट स्टॉप हिटिंग द चिल्ड्रन। बाकी चीजें पे हम बाद में काम करते हैं। तो ऑब्वियसली वो तो सबसे पहले बंद हो गया। एंड देन शी सेड आफ्टर ऑल ऑफ दिस उसके स्कोर्स बदले। उसके डिप्रेशन कम हुआ, एंजायटी कम हुआ। फिर उसकी शादी पे भी दिखने लगा। देन द हस्बैंड सेड कि ओ नाउ यू आर मच काम अर पर्सन। मैं देख रहा हूं कि मम्मी के साथ बात करके तुम एजिटेटेड नहीं हो। तुम अभी नॉर्मल रह रही हो। तो इस
(29:56) किस्म की हमारे पास हजारों डॉक्यूमेंटेड केसेस हैं जहां पे हम इस तरह का काम करते हैं। ये पर्टिकुलर केस में मुझे सुनके ऐसे लगा कि बहुत सारी चाइल्डहुड में चीजें हुई। हां। कौन है जिन्हें आपके पास हेल्प के लिए आना चाहिए? हु वुड यू वांट टू रीच आउट टू यू गाइज़? हां हां। सो सी नॉट एव्री ट्रॉमा नीड्स थेरेपी। फर्स्ट थिंग जिसको भी चाइल्डहुड ट्रॉमा हुआ है जरूरी नहीं कि सबको थेरेपिस्ट के पास जाना पड़े। बराबर है क्योंकि बहुत से लोग ट्रॉमा के बावजूद भी फंक्शनल हैं अपनी लाइफ में। तो सबसे पहला तो अगर आपकी लाइफ में जा ऊपर ऊपर से सब
(30:32) चीजें ठीक सही चल रही है तो यू डोंट नीड थेरेपी। लेट मी टेल दिस। आई हैव टू टेल दिस वैरी क्लियरली। देन यू शुड पैट योर बैक कि इनस्पाइट ऑफ द ट्रोमा, आई हैव सर्वाइव्ड। आई एम डूइंग फाइन। आई एम हैप्पी इन माय रिलेशनशिप्स और आई डोंट नीड इट। दैट इज ग्रेट। बट इफ यू हैव चाइल्डहुड ट्रॉमा एंड इफ देयर आर अदर साइन लाइक फॉर एग्जांपल यू आर ऑलवेज अनहैपी विथ योरसेल्फ। आपको हर चीज में आपको तकलीफ है। आपको ऑफ एंड ऑन डिप्रेशन रहता रहता है। डिप्रेशन आता है, निकल आते हो, आता है, निकल आते हो, आता है। आपको हर चीज में ए्जायटी हो जाती है। लोग आपको कहते हैं कि
(31:05) तुम बहुत एन्शियस हो यार। हर चीज में क्यों इतनी हाइपर हो जाते हो? आपके हर रिश्ते में आपको कंप्लेन है या उनको आपसे कंप्लेन है। बीवी आपकी खुश नहीं है। बच्चे आपसे खुश नहीं है। लोग कहते हैं कि तुम्हारा गुस्सा नाक पे तुम बार-बार पे भड़क जाते हो। इसकी वजह से आपके रिश्ते ठीक नहीं होते। या तो आपको फिजिकल हेल्थ इश्यूज बहुत बचपन से आप सब कुछ सही कर रहे हो फिर भी आपकी हेल्थ ठीक नहीं है। हां, जैसे आपको अर्थराइटिस है, थायरॉइड है, कार्डियोवस्कुलर इशूज़ जल्दी हो रहे हैं। आप बाकी सब चीजें ठीक कर रहे हो तो या तो फिर आपको काम में जैसे फंक्शनैलिटी इशूज़
(31:34) हैं। जैसे आप उठ के काम ही नहीं कर सकते हो। आप काम पे नहीं जा सकते हो। आप आप हर 30 से आप हर छ महीने साल में नौकरी छोड़ देते हो। आपको एडिकशंस हैं जिससे आप छूट नहीं पा रहे हो। तो ये सारे साइन हैं जो कहते हैं कि मे बी यू नीड हेल्प। एक लेडी आई थी तो बोलती है कि मदर इन लॉ से पटती नहीं। बहुत ही टेंट्स करती है तो मैं छोड़ के कहीं और चले जाती हूं। अब बहुत काम किया। रूट कहां निकला? पापा नहीं मेरे जो दादा थे ग्रैंडफादर उनकी बिहेवियर मुझे बिल्कुल नफरत थी और वही बिहेवियर यहां से दिखती है वो अवेयरनेस इट रिमाइंड्स ऑफ दैट चाइल्ड
(32:13) आई थिंक पैरेंटिंग एक ऐसी चीज है कि मतलब अभी मुझे रियलाइज हो रहा है कि इतनी पावरफुल है और जनरेशनल इंपैक्ट राइट तुम्हारे ग्रैंड पेरेंट ने क्या किया है उसका तुम तुम भुगत रहे हो तो अगर ब्रॉड में ये एग्जांपल से अगर मैं रूट कॉज उसमें बोल तो सरफेस में अगर हम डिप्रेशन देख रहे हैं। एक साइड पे शट डाउन शटडाउन मींस आप जो रूटीनली खुश होकर करते थे वो नहीं कर सकते। नींद हो जाती है। लोग नोटिस करते हैं कि आप दुखी रहते हो। वो सब सिम्टम्स हैं सिंपल वर्ड्स में डिप्रेशन के। और दूसरी तरह एक्सट्रीम अग्रेशन गुस्सा एक्सट्रीम ओवर द टॉप। लोग देखते
(32:48) हैं कि ये गुस्सा छोटी-छोटी चीज में हो जाता है। ये एक स्पेक्ट्रम है। डिप्रेशन में अगर हम देखें जब शुरू किया हमने कि डिप्रेशन कोई अनुभव बचपन में नहीं है और है तो उसमें एक डिफरेंस होता है। फिजिकल अब्यूज में इतना था सेक्सुअल में था। इमोशनल अब्यूज में और बढ़ गया बचपन में। और इमोशन नेगलेक्ट तो और सो सबसे ज्यादा डिप्रेशन जो जो लोग आते हैं उनमें बचपन में पीियर आइसोलेशन और इमोशन नेगलेक्ट के अनुभव बहुत होते हैं। तो ये अगर प्रेजेंटिंग प्रॉब्लम है तो उसका रूट्स ज्यादातर यहां होते हैं। उसके बीच में लोनलीनेस भी होती है। तो ये एक पूरा एक
(33:22) इंटरकनेक्टेड मैश है। एग्रेशन देखो तो जनरली वायलेंट फैमिली एनवायरमेंट होती है बचपन में। अब वो वायलेंस वर्बल भी हो सकती है या फिर फिजिकल भी हो सकती है। डोमेस्टिक वायलेंस भी हो सकती है। सेक्सुअल अब्यूज भी हो सकता है। पर ज्यादातर सॉफ्टर एलिमेंट्स डिप्रेशन में है जो डिफरेंस [गला साफ़ करने की आवाज़] में और वायलेंट एलिमेंट एंगर में और बाकी सब इन बिटवीन है। देखिए लोग आजकल सेक्सुअल अब्यूज और फिजिकल अब्यूज समझते हैं कि ये गलत है। पर इमोशनल नेगलेक्ट इमोशनल अब्यूज के बारे में तो हमारे समाज में किसी को पता ही नहीं है। इनफैक्ट पेरेंट्स को तो यही लगता है।
(33:55) लोगों को लगता है कि यार हम तो सुधार रहे हैं ना इसको। को टोकटोक के तो सुधार रहे हैं। हम उसको बोल रहे कि तेरे बाल ठीक कर, तेरा नाक ठीक कर। तो हम तो उसको सुधारने की कोशिश कर रहे हैं। बट दे डोंट सी इट एज इमोशनल अब्यूज। यू आर अबब्सोलुटली राइट। पेरेंट्स का इरादा हमेशा सही होता है। तारे जमीन पर में एक बहुत इंटरेस्टिंग डिस्लेक्सिया का केस उन्होंने दिखाया। जहां पे फादर डिसिप्लिन ही कर रहा था। पर उसका तरीका इतना गलत आउटकम दे रहा था। आई थिंक एज पेरेंट्स हमें बहुत जरूरत है आपसे सीखने की कि टेक्निक्स क्या होनी चाहिए क्योंकि इरादा तो सबका सही है। इमोशनल
(34:27) अब्यूज और नेगलेक्ट के जो स्कार्स हैं, उसके घाव हैं, वह शरीर पे नहीं दिखते। वह आत्मा पे, मन पे दिखते हैं। इसलिए वह ज्यादा डीप है। हमने जो लोग हमारे पास आए थे सुसाइड अटेम्प्ट को लेके हु हैड अटेम्प्टेड सुसाइड या जिनको सुसाइड करने के विचार आते थे या जो लोग सेल्फ हार्म करते थे। ये पूरे ग्रुप को हमने एग्जामिन किया। उसमें देखा कि सबसे ज्यादा प्रेलेंस ऑफ इमोशनल अब्यूज, इमोशनल नेगलेक्ट था और बुलिंग था। नॉट फिजिकल एंड सेक्सुअल अब्यूज। हां, फिजिकल सेक्सुअल अब्यूज था बट कम मात्रा में था। तो जो लोग आजकल हम देख रहे हैं न्यूज़ में हर दूसरे दिन के
(34:59) आत्महत्या की इसने आत्महत्या की आत्महत्या कौन कर रहे हैं? वी ट्राइड टू आस्क आवरसेल्व्स कि कौन लोग हैं जो इतना ज्यादा सुसाइड अटेम्प्ट के बारे में सोच रहे हैं। उनमें भी हमने कंसिस्टेंट ये पैटर्न देखा कि चाइल्डहुड ट्रॉमा ज्यादा है। फर्स्ट ऑफ ऑल और उसमें भी कौन सा एलिमेंट ज्यादा है? इमोशनल अब्यूज, इमोशनल नेगलेक्ट। मतलब आई एम नॉट लव्ड। मेरी कोई वैल्यू नहीं है। मेरी किसी को जरूरत नहीं है। यह बचपन से बच्चे को लग रहा है। पांच साल के बच्चे को भी लग रहा है कि मैं मैटर नहीं करता हूं। किसी को मेरी पड़ी नहीं है। ये जॉइंट
(35:28) फैमिलीज में भी हो रहा है। मैं मैं कहना चाहूंगी दिस इज नॉट जस्ट अ न्यूक्लियर फैमिली। जॉइंट फैमिली में भी जहां पे 10 बच्चे हैं। इस बच्चे को कोई देखता ही नहीं है। कोई उसको प्यार ही नहीं करता है। कोई उसको उठाता नहीं है। वो रोता रहता है। कोने में किसी को पड़ी नहीं है। ये सब बच्चे इमोशनल नेगलेक्ट महसूस करते हैं। और जो या तो फिर जो बच्चे जिनके मां-बाप घर में लड़ते रहते हैं। पूरा दिन अपने ही प्रॉब्लम से बच्चे की तरफ ध्यान ही नहीं है। तो बच्चा यही फील करता है कि मेरी कोई वैल्यू नहीं है दुनिया में। मैं जीऊं कि मरूं किसी को कोई फर्क नहीं पड़ता है। तो
(35:55) दीज़ आर द वंस हु आर द फर्स्ट वंस टू हार्म देमसेल्व्स एंड थिंक ऑफ किलिंग देमसेल्व्स बिकॉज़ दे रियली डोंट वैल्यू देम। उनको और दूसरा है कि जिसको बार-बार टोका जाता है जिससे टॉक्सिक शेम आती है जिसको ह्यूमिलेट किया जाता है जैसे पड़ोसियों के सामने अरे देखो इसकी मार्कशीट तो देखो हमारा नाम रोशन करके टों्ट मारना यू नो उसको लोगों के सामने ह्यूमिलिएट करना टीचर्स क्लास के सामने खड़ा करके बच्चे को बोलते कि तेरे में अकल नहीं है तू डफर है तू लाइफ में कुछ नहीं बन पाएगा या या तो बोलते कि तू तेरे बाप पे गया है देख एक तो हमारे पास
(36:24) क्लाइंट था जिसके मार्क्स कम आए थे तो पापा ने उसके पूरे बाल मुंडवा दिए उसको पूरे बाल मुंडवा के बिल्डिंग में पूरे घुमाया ताकि उसको शर्म आए गंदे मार्क्स लाने के लिए। फादर ने यह किया होगा सोच के कि बेटा इससे कुछ सीखेगा। बट फादर को यह नहीं पता था कि इस इससे लाइफ लॉन्ग इसमें टॉक्सिक शेम भर गई है। दूसरा एक क्लाइंट मुझे बोला था कि मेरे जब भी मैं कुछ गलत करती थी, मस्ती करती थी ना तो पापा मेरे कपड़े उतार के मुझे नंगा करके बालकनी में खड़ा कर देते थे दो घंटा ताकि पूरे पड़ोसियों को पढ़ता चले कि मैंने कुछ गलत किया है। अभी दीज़ आर मोर हार्मफुल देन
(37:00) फिजिकल अब्यूज। और ये लोग कई बार ना लाइफ में इतने सक्सेसफुल हो जाते हैं। मैं आपको बताऊं दीज़ आर पीपल हु आर रनिंग कंपनीज़। सीईओस होते हैं कंपनी के बड़े-बड़े जॉब करते हैं। बट अंदर से इनको एंजायटी, इनसिक्योरिटी, फियर, कंपल्सिव बिहेवियर्स ये सब चीजें हो जाती है। बिकॉज़ इसके स्कार्स डायरेक्टली ऐसा नहीं होता कि लोग अनसक्सेसफुल हो जाते हैं। बड़े सक्सेसफुल होते हैं। क्योंकि इंसान कोप अप तो कर ही लेता है कुछ भी करके। पर इट कम्स एट अ प्राइस। या तो वो सुन कर देते हैं अपने आपको। नम कर देते हैं। मशीन बन जाते हैं कि अरे जितना करना है करो मारो पीटो। मैं
(37:29) तो करके दिखाऊंगा। पर हैप्पीनेस नहीं होती। उनकी बीवी बच्चे दुखी हैं। उनके फैमिली लाइफ बेकार है। उनके मां-बाप के साथ रिश्ता नहीं है। पैसे बहुत हैं। सक्सेस है। बट अंदर से सब टूटे हुए हैं। अनफॉर्चुनेटली हमारे देश में यंग जो पपुलेशन है उसमें प्राइमरी कॉज़ ऑफ़ डेथ इज़ अटेम्प्ट, सुसाइड और रोड एक्सीडेंस। तो हम लोग जापान में भी तो सोचा कि वहां पे बहुत कॉमन है। इंडिया के एवरेज एशिया से भी ज्यादा है और ग्लोबल से भी ज्यादा। तो सुसाइड अटेम्प्ट के पहले सुसाइड प्लानिंग होता है। प्लानिंग के पहले थॉट्स होता है और उसके रूट्स में ज्यादातर लोगों में
(38:00) सेल्फ आर्म हिस्ट्री। सेल्फ आर्म इज नॉन सुसाइडल सेल्फ इंजरी मगर उससे रिस्क बढ़ता है। तो ये वॉच आउट पॉइंट्स है और दूसरे एंगल से देखें तो ज्यादातर जो काम होता है और वो जरूरी है कि सुसाइड के लिए जैसे ये कॉलेज में पंखे ऐसे हैं कि कोई हैंग नहीं हो सकता है। बहुत अच्छी बात है। रिक्वायर्ड है। मगर 100 में से या हजार में से एक या दो लोग वो अटेम्प्ट क्यों करते हैं वो कोई नहीं पूछता है। वो पंखा ठीक करना जरूरी है। मगर वो कौन जाता है और बाकी क्यों नहीं होते हैं उनके? दे फील कि हमें सोशल सपोर्ट नहीं है। अदर एंड ऑफ़ द स्पेक्ट्रम इज़
(38:32) लोनलीनेस। लोनलीनेस इज़ रूटेड नॉट एज मच इन फिजिकल अब्यूज, सेक्सुअल अब्यूज उससे भी कनेक्टेड है। मगर इमोशनल अब्यूज, इमोशनल नेगलेक्ट एंड पीियर आइसोलेशन। और ये तीन कब होता है? फिजिकल अब्यूज के एनवायरमेंट में। सेक्सुअल अब्यूज, वायलेंट, डोमेस्टिक वायलेंस होता है, पेरेंट्स फाइटिंग होता है। स्कूल में पीियर अग्रेशन होता है। नॉट जस्ट पीियर आइसोलेशन। सो यहां पे काम जरूरी है। अगर हमें इसका लॉन्ग टर्म बेनिफिट लाना है। टेंपरेरी फिक्सिंग यस इट्सेंट। बट 1000 में से दो लोग क्यों वो अटेम्प्ट करते हैं? उसके रूट्स यहां पे हैं। हां ये लोग सोच रहे हैं जनरेशन वीक है।
(39:07) अभी वो कहते हैं अभी नीट एग्जाम की वजह सुसाइड किया बट बाकी सब लोगों ने तो नहीं किया। तो जिन्होंने किया उनका [गला साफ़ करने की आवाज़] क्या अलग था? दैट इज व्हाट वी हैव टू अंडरस्टैंड ना। यू कैन नॉट जनरलाइज बिकॉज़ वही टॉक्सिक बॉस वही टॉक्सिक ऑफिस है। बाकी तो 10 लोग सर्वाइव कर रहे हैं। और ये अनफॉर्चूनेट सिचुएशन इंडिया में चाइल्डहुड ट्रॉमा की सुसाइड से एसोसिएशन रिस्क से का कोई भी रिसर्च नहीं हुआ है। कंबाइन इंपैक्ट और दुनिया में देखो तो भरे पड़े मेटानालिसिस रिसर्च किए हैं। अगर हमारी यंग जनरेशन जो हमारा डेमोग्राफिक डिविडेंड है उसका प्राइमरी कॉज ऑफ़ डेथ इज़
(39:39) सुसाइड। हाउ कैन वी इग्नोर दैट एज अ कम्युनिटी? अनएक्सेप्टेबल? टॉक्सिक शेम कहा आपने। टॉक्सिक शेम और शेम में क्या फर्क है? तो देखिए शेम या शर्म ऐसी चीज है जो हमें होनी चाहिए हेल्दी मात्रा में। अगर शर्म नहीं रही तो हम समाज में नहीं रह पाएंगे। तो हम हम लोगों के साथ नहीं रह पाएंगे। हम अच्छी बिहेवियर नहीं कर पाएंगे। और जानवर और इंसान में एक डिफरेंशिएटिंग फैक्टर है कि वी हैव शर्म। मतलब कि कपड़े के बिना बाहर नहीं जा सकते। लोगों को गालियां नहीं दे सकते। मना हुआ था। दिस इज हेल्दी शेम। तो हेल्दी शेम वो शर्म है जो हमें बाउंड्रीज में रखती है जो हमें
(40:18) रिस्पेक्टेबल बिहेवियर कराती है और यह हमें बच्चों को सिखानी चाहिए। टॉक्सिक शेम वो है जब शर्म इतनी हद तक हम किसी को महसूस कराते हैं कि उसको लग रहा है कि मैं ही प्रॉब्लम हूं। जैसे बच्चे ने समझो कि दूध गिरा दिया। तो हम हेल्दी शेम क्या है? कि अच्छा अगली बार ध्यान रखेंगे। दूध गिर गया। चलो साफ करते हैं। टॉक्सिक शेम मतलब तू यूज़लेस है। हर बार तू गिराता है दूध। तू तो कुछ काम का ही नहीं है। तेरे से हर चीज गिर जाती है। ये हो गया टॉक्सिक शेप। तो बिहेवियर पे अटेंशन नहीं है। इसमें टॉक्सिक शेम में हम इंसान को गलत बताते हैं कि यू आर द प्रॉब्लम। वी आर नॉट सेइंग
(40:48) योर बिहेवियर इज अ प्रॉब्लम। तो टॉक्सिक शेम से जब बच्चा बड़ा होता है तो उसको लग रहा है कि मैं फ्लॉड हूं। आई एम द प्रॉब्लम। आई एम द प्रॉब्लम। और बच्चे बहुत कहते हैं मैं ही प्रॉब्लम हूं। मैं ही खराब हूं। मैं ही पता नहीं क्यों दुनिया में आया हूं। मैं ही मेरे पेरेंट्स के लिए बोझ हूं। दिस इज टॉक्सिक शी। गॉट इट। हाउ विल ऐड द वर्ड गिल्ट? गिल्ट इज अ हेल्दी इमोशन। अगर मैं टाइम पे नहीं आया तो मेरा टाइम पे नहीं आने वाला एक्शन गलत है जिसको मुझे सीख के अगली बार टाइम पे आना है। गिल्ट इज नॉर्मल हेल्दी। अगर गिल्ट नहीं है तो मैं कल भी लेट आऊंगा।
(41:21) परसों भी आऊंगा और एकदम ऐसा मैं सीखूंगा नहीं। जब गिल्ट से शेम होता है तब मुझे ऐसा लगता है कि मैंने कुछ खराब किया। मैं खराब हूं। तब वो एक शिफ्ट होता है कि ब्लेम इज़ नॉट ऑन माय एक्शन बट ऑन मी। सो शेम से वो कंटिन्यू जब गिल्ड से शेम पे आया तब फोकस मेरे ऊपर आया। नहीं कि मेरे एक्शन में और अगर वो टॉक्सिक शेम जो है कि कुछ भी हो किसी ने गलत किया आई विल से सॉरी वो फ़िंग बिहेव के साथ भी कनेक्टेड है तो टॉक्सिक शेर चीज में मैं खुद अपने आप में एक चैलेंज करता हूं कि मैं ही खराब हूं। मैं ऐसा ही हूं हर रोज लेट आता हूं। सब चीज में लेट रहता हूं। नहीं आप खाली
(41:58) लेट आए थे क्योंकि ट्रैफिक आया बारिश आई जो भी था होता है ऐसा उसको स्वीकार करके उससे लर्न करके अगली बार बदलो। तो ये कंटिन्यूम से बहुत सारा कनेक्शन भी हमने लिखा है कि फर्निंग बिहेवियर कि हां सॉरी भी है। बहुत सारे लोग सॉरी सॉरी सही जरूरत है मगर वो बोलते हैं और उसके पीछे आपको दिखता है कि ये टॉक्सिक शेम से गिल्ड से नहीं है। कुछ भी गलत हुआ नो प्रॉब्लम। गिल्ड हेल्प्स यू फिक्स इट मैक्स। और टॉक्सिक शेम मतलब यू आर ब्लेमिंग योरसेल्फ फॉर अदर प्रॉब्लम्स। आल्सो जैसे पेरेंट्स की लड़ाई मेरी वजह से हुई। घर में सब प्रॉब्लम मेरी वजह से ही हो रहे
(42:29) हैं। ऑफिस में सब लोग को मेरे प्रोजेक्ट ठीक से नहीं हुआ। मेरी वजह से ही नहीं हुआ है। सो टॉक्सिक शेम का अगर आपको बैकग्राउंड है ना तो आप सब गलतियों की जिम्मेदारी आप अपने सर पे लेके घूमोगे। हम एंड इट आल्सो अफेक्ट्स अ आइडेंटिटी। हां। सो इसमें सेल्फ एस्टीम कम होती है और टॉक्सिक शेम हो गया, पोर्निंग बिहेवियर हो गया, सॉरी हो गया, कॉन्फिडेंस गया। पूरा कनेक्टेड है। ये सारा सुनकर मुझे तो अब स्ट्रेस हो रहा है। मुझे स्ट्रेस हो रहा है क्योंकि मेरे घर पे दो बच्चे हैं। एंड सडनली पैरेंटिंग सीम्स लाइक अ वे कॉम्प्लिकेटेड रिस्पांसिबिलिटी देन इट वाज़ टू आवर्स एगो।
(43:01) सो आई वांट टू नाउ मूव टू दिस पीस ऑफ व्हाट आर द थिंग्स इट इजेंट फॉर अ पेरेंट टू रिमेंबर सो दैट वी कैन गिव देम अ चाइल्डहुड दैट लीड्स टू अ स्ट्रांग रेिलिएंट एडल्ट करेक्ट वेरी गुड थिंग आई एम वेरी ग्लैड यू सेड द लास्ट पार्ट एक्चुअली जेंटल पैरेंटिंग बोलो जो भी पैरेंटिंग बोलो अल्टीमेटली अगर पैरेंटिंग की वजह से आप बच्चे को प्रोटेक्ट कर रहे हो आप बच्चे को एंटाइटल्ड बना रहे हो। आप बच्चे को सॉफ्ट बना रहे हो तो वो पैरेंटिंग फेल है। और उसके साथ-साथ अगर आप वैसी पैरेंटिंग कर रहे हो जिससे बच्चा ही दूर हो रहा है आपसे कि बच्चा सोच रहा है कि कब मैं तो यार 18
(43:44) का बनूं और भागूं तो वो भी फेल है। वो पैरेंटिंग सही है जहां पे आपका बच्चा आपके बगैर सर्वाइव हो पाए और फिर भी आपके लिए उसके मन में बहुत ज्यादा प्यार हो। व्हिच इज गुड कनेक्शन बट आल्सो विद इमोशनल रेिलियंस। इमोशनल रेजिलेंस मतलब क्या? आजकल पेरेंट्स ये सोचते हैं ना ये सब इन सोशल मीडिया पे देख के कि अरे बच्चे को अब्यूज नहीं होना चाहिए। बच्चे को बुलिंग नहीं होना चाहिए। बच्चे को ये नहीं होना चाहिए। तो दे आर बिकमिंग वेरी प्रोटेक्टिव। हम बिकॉज़ ये जनरेशन ऑफ़ पेरेंट्स हैज़ ग्रोन अप विद आइदर पेरेंट्स जो उनको बहुत मारते पीटते थे, गाली गलौज करते थे। या तो फिर
(44:18) जो पेरेंट्स ने उन पर ध्यान ही नहीं दिया। तो ये जनरेशन ऑफ़ पेरेंट्स अभी ऐसी आ रही है कि बहुत ज्यादा ध्यान दे रहे बच्चे पे। मुझे तो मतलब अपनी करियर गोल्ड मेडलिस्ट बच्चा तो एक तो उसका तो प्रेशर है ही मतलब मैंने सब कुछ छोड़छाड़ के पेरेंट बनने का प्रोजेक्ट लिया है तो वो मुझे बराबर में गोल्ड मेडल लाना है उसमें भी तो ये सबसे पहला गलत प्रिमाइस है क्योंकि इसकी वजह से क्या हो रहा है कि पेरेंट्स बच्चों को ज्यादा हेलीकॉप्टर पेरेंट्स बन रहे हैं या तो जरूरत से ज्यादा परमिसिव पेरेंट्स बन रहे हैं। परमिसिव मतलब क्या? कुछ भी बोलना नहीं,
(44:51) कुछ भी कहना नहीं, बच्चे को जो करना है करो। बच्चे को पूरी फ्रीडम है और गिन चुन के एक आध बच्चे होते हैं या दो बच्चे होते हैं तो पूरा घर उसके इर्द-गिर्द घूमता है। बच्चा ने अगर आज ये सब्जी नहीं खाई, ठीक है बेटा तुम्हारे लिए मैं यह बना देती हूं। सो दिस इज गिविंग राइज टू अ जनरेशन ऑफ चिल्ड्रन जो हम कहते हैं कि सॉफ्ट जनरेशन है, यू नो बिगड़ी हुई जनरेशन है, एंटाइटल्ड है। यह पीढ़ी आगे जाके टॉक्सिक बॉस, टॉक्सिक मदर इन लॉ, टॉक्सिक एनवायरमेंट को नहीं सर्वाइव कर पाएगी। एंड पैरेंटिंग इज अ वेरी सेल्फ गिल्ट, सेल्फ डाउट जर्नी। गणपति फंक्शन चल रहा है। सारे
(45:29) रिलेटिव्स आए हैं। हमारा बच्चा मिस बिहेव कर रहा है। तो सीधा हमारी ऊपर की जनरेशन हमें बोलेगी हां तुम तो कुछ बच्चों को बोलते ही नहीं हो। हमारे तो बच्चे बिल्कुल ऐसे हमारे साथ हमारे तो सुनते थे। हाउ टू बी अ गुड पैरेंट? क्योंकि ये एक बहुत बड़ी रिस्पांसिबिलिटी है। तो पैरेंटिंग का सही यही है कि बैलेंस पैरेंटिंग होनी चाहिए। जो मैंने बुक में पूरा एक चैप्टर इसके बारे में डाला है कि बैलेंस ऑफ बोथ अथॉरिटी भी चाहिए। जैसे अगर गणेश का आपने एग्जांपल दिया तो बच्चे अगर मां-बाप बोले कि नहीं तुमको बैठना है पूजा में बेटा पर तुम 2 घंटा नहीं पर आधा घंटा तुम्हें
(46:01) बैठना पड़ेगा सो स्ट्रक्चर दिया पर उसमें फ्रीडम दिया हम 8:00 बजे सबको खाना है टेबल पे बैठ के हमारे घर में सब लोग 8:00 बजे खाते हैं पर फिर उसमें आपको ठीक है आपको सिर्फ रोटी सब्जी खानी है दाल चावल नहीं खाना है तो चलेगा सो गिव फ्रीडम बट गिव स्ट्रक्चर विद द फ्रीडम हैव बाउंड्रीज हैव रूल्स सो बैलेंस पैरेंटिंग करना करना चाहिए। जहां पे पेरेंट अथॉरिटेटिव है। पेरेंट ने रूल्स बनाए हैं। स्ट्रक्चर दिया है बच्चे को क्योंकि ब्रेन डेवलपमेंट के लिए बहुत जरूरी है। बिल्कुल खुला छोड़ना इज नॉट गुड। पर उसके साथ-साथ बच्चे के साथ कनेक्शन भी है। बच्चा अगर गलती करे तो
(46:37) उसमें से क्या सीख मिली उसकी बातचीत हो। बच्चा गलती करे तो ना झूठ बोले और आपसे छुपाए। तो बच्चे के साथ जो कनेक्शन है जिससे बच्चा सेफ फील करे कि नहीं? मैंने कुछ गड़बड़ किया तो मैं मम्मी को पापा को बता सकता हूं। पर दो बात सुननी पड़ेगी पर बता सकता हूं। हम तो ये वाला जो है दिस इज द राइट पैरेंटिंग। इफ यू वांट योर चिल्ड्रन टू बी इमोशनली रेजिलेंट उनको गलतियां करनी पड़ेगी। मतलब गलतियां करने की फ्रीडम देनी पड़ेगी। उनको इंडिपेंडेंस देना पड़ेगा गलतियां करने का। राइट? उनको गिरने देना पड़ेगा। हां। उसको धोखा दिया फ्रेंड ने। रो रहा है। रोने दो 5 मिनट। फील करने दो
(47:13) सैडनेस। हां। रिश्तेदार गुजर गए तो उसको लेके जाओ। बताओ कि नहीं। लोग मरते हैं। आजकल पेरेंट्स वो भी नहीं बच्चों को एक्सपोज करने देते। हम दे वांट टू प्रोटेक्ट फ्रॉम एवरीथिंग। बच्चा दुखी होना चाहिए। बच्चे को गुस्सा भी आना चाहिए। बच्चे को रोना चाहिए। बच्चे को फ्रस्ट्रेशन आना चाहिए। एग्जाम में फेल हुआ तो लेट हिम सट विद द फेलियर। दैट्स सो ब्यूटीफुल। जस्ट लाइक बच्चे को जब हम बैक्टीरिया वायरस से एक्सपोज़र देते हैं तो इम्यूनिटी बनती है पूरे लाइफ की। पूरा टाइम हैंड सैनिटाइजर लगा के रखोगे तो बच्चे को एलर्जी हो जाएगी। एक्साक्ट्ली। वैसे ही इमोशनली बच्चे को
(47:47) ओवर प्रोटेक्ट करे बिना धीरे-धीरे डोज़ धीरे एप्रोप्रियट डोज़ में हां पांच साल के बच्चे को नहीं बोलोगे कि तुम अकेले जाओ राइट पर आप 10 साल के बच्चे को कह सकते हो कि बेटा दुकान पे जाके लेके आओ ये चीजें ध्यान रखना वरना ये होता है कि बच्चा कभी कॉन्फिडेंट बनेगा ही नहीं जैसे हमारे बच्चे मैंने बुक में मैंने बहुत पर्सनल एनेकडोट्स डाले हैं कि जापान जैसे देश में कोई नहीं जाता था हमारे बच्चे पहले होते थे अकेले स्कूल जाते थे भेजते थे हमारे दिल पे पत्थर रख के देखते पीछे से छुप-छुप के कि क्या कर रहे हैं। बट वी हैड टू गिव दैट इंडिपेंडेंस टू देम।
(48:18) गलतियां भी बच्चों को उम्र के हिसाब से करनी देनी चाहिए। पर मैं यह मानती हूं कि अगर पांचवी में बच्चा फेल हुए तो फिर भी ठीक है। तब उसने फेलियर अनुभव किया और सीखा तो आगे जाके वो फेलियर मैनेज कर पाएगा। आजकल पेरेंट्स क्या करते हैं? बच्चों को 12वीं क्लास तक फेल ही नहीं होने देते। मारते-पीटते, लड़ते, झगड़ते, इमोशनल ब्लैकमेल करके पढ़ातेपढ़ाते बेटा फेल नहीं होना चाहिए। फिर वो बेटा आईआईटी के एग्जाम में फेल होता है, 12th में फेल होता है, टूट पड़ता है क्योंकि उसने कभी फेलियर महसूस ही नहीं। एब्सेंस ऑफ़ नेगेटिविटी इज नॉट प्रेजेंस ऑफ़
(48:46) पॉजिटिविटी। देयर फॉर एलिमिनेटिंग एसेस इज़ नॉट द ओनली अप्रोच। इट्सेंट बट इट इज़ नॉट सफिशिएंट। देन वी लुक्ड एट सर्टन पॉजिटिव एक्सपीरियंसेस एंड रियलाइज़ दैट दोज़ हु हैड हायर डोसेज ऑफ़ पॉजिटिव एक्सपीरियंसेस एज़ ग्रोइंग अप चिल्ड्रन वेर रेज़िलिंट। नाउ द क्वेश्चन कम्स कि जिसका एक्सपोज़र टू चाइल्ड ट्रॉमा इज हाई एंड दिस इज हाई इन मोस्ट ऑफ दिस केसेस आल्सो दिस हेल्प ओ वाओ तो अगर कुछ चाइल्डहुड ट्रॉमा हो भी गया है पर अगर चाइल्डहुड पॉजिटिव एक्सपीरियंसेस आप ले आओ तो वो उसको बहुत अच्छे से नलिफाई कर सकता है नलिफाई द नेगेटिव इंप्रिंट्स एंड ब्रिंग
(49:24) सर्टेन पॉजिटिव कॉम्पोनेंट्स व्हिच आर नॉट प्रेजेंट व्हेन दिस इस नलिफाइड देयर फॉर दिस इस रिक्वायर्ड नॉट ओनली टू नलिफाई दिस बट टू ऐड सर्टेन एक्सपीरियंस यू नीड टू लर्न टू लूज ग्रेसफुली एंड बाउंस बैक। लूजिंग इजेंट लूजिंग शुड नॉट एंड अप एस पनिशमेंट बट अ लर्निंग टू ग्रो एंड गो बैक टू द सेम ओपोनेंट सेम प्लेयर वर्स्ट सिचुएशन एंड फाइंड अ वे फॉरवर्ड। दैट इज़ रेजिलियंस। एंड दैट शुड नॉट कम ओनली इन अ क्लासरूम ऑन अ डिजिटल स्क्रीन बट आउट देयर विथ अननोन अपोनेंट्स और पीपल और सिचुएशन वेयर यू फेस। बच्चे को भेजो तू जा। मैं हूं पीछे।
(50:03) दैट्स इनफ। इफ द चाइल्ड नोस दैट आई कैन फेल एंड आई विल बी सपोर्टेड। दैट्स इनफ। एंड दैट कॉम्बिनेशन इन टर्म्स ऑफ कॉम्प्लेक्स नंबर्स इज़ व्हाट वी हैव एनालाइज़ इन टर्म्स ऑफ़ हाउ चाइल्डहुड एक्सपीरियंसेस बोथ पॉजिटिव एंड नेगेटिव इन्फ्लुएंस लॉन्ग टर्म साइकोलॉजिकल रेज़िलियंस। एबिलिटी एडवांस। अगर रेज़िलियंस है तो जिसको रेज़िलियंस हाई था उनका नोनलीनेस एक्सेप्टेबल था। बिलो देयर वाज़ नो ओनलीनेस। डिप्रेशन लेवल नहीं था। एंग्जायटी नहीं थी। परसेप्शन कि मेरे पास सोशल सपोर्ट है एडल्ट रूल में नॉट बचपन में वो एनवायरमेंटल में है। स्लीप अच्छी
(50:37) थी वेल बीइंग पॉजिटिव था। सो ये कॉम्बिनेशन इजेंट जो पेरेंट्स को समझना जरूरी है। और प्रिवेंशन ऑफ़ एएस शुड नॉट बी द ओनली मंत्र प्रेजेंस ऑफ़ पीसी एसी इज़ एडवर्स चाइल्डहुड एक्सपीरियंससेस पीसी इज़ पॉजिटिव चाइल्डहुड्स व्हनेवर देयर इज़ फेलियर कॉमन रिएक्शन होता है कि बच्चे को शेम कराओ। या तो फिर उसको बोलो कि नहीं नहीं नहीं बेटा तू फेल नहीं तू पास है। मतलब पेरेंट्स का नॉर्मल रिएक्शन आइदर यू प्रोटेक्ट फ्रॉम फेलियर और यू शेम देम फॉर फेलियर। द रियल इफ यू वांट टू मेक देम इमोशनली रेजिलेंट यू हैव टू लेट देम एक्सेप्ट द फेलियर एंड लर्न द
(51:10) लेसन फ्रॉम इट। दैट इज मिसिंग मोस्टली के भई जैसे गुंजन ने कहा मैच हार गए। तो तू बिकम तू हारेगा ही। तेरे से कुछ होगा ही नहीं। इज वन अप्रोच। अदर अप्रोच नहीं बेटा तू हार नहीं गया। तू तो फिर भी मेरा विनर है। चल हम पार्टी करते हैं। मैं तुम्हें प्राइस दिलाता हूं। दिस इज द परमिसिव पैरेंट बोथ बच्चे को हार बोथ आर रोंग तुम हारे हो कैसा लग रहा है हार के क्या फील हो रहा है सामने वाले को क्या लग रहा होगा अभी तुम्हें अगली बार वैसा लगवाना है तो क्या करना चाहिए जो इस बार नहीं किया दिस इज द कन्वर्सेशन बच्चे को गलतियां करने दो
(51:40) बच्चे को वर्दी फील कराओ बच्चे को यह लगना चाहिए कि कोई मेरा सुनने वाला है मैं कहीं बिलोंग करता हूं बच्चे को सोशल एक्सपोज़र दो बच्चे को कम्युनिटी में ऐसा होना चाहिए कि नहीं मेरा ये ग्रुप ऑफ फ्रेंड्स है ये मेरा फैमिली है तो जो सोशल सपोर्ट फील करता है। वो भी एक इंपॉर्टेंट कंट्रीब्यूटर है पॉजिटिव एक्सपीरियसेस का जिससे लोनलीनेस, डिप्रेशन नहीं आती है। आजकल प्रॉब्लम क्या हो रहा है कि न्यूक्लियर फैमिलीज हो रहे हैं और बच्चों की प्ले डेट सब क्यूरेट हो रही हैं। और पेरेंट्स भी कह रहे हैं नहीं बच्चे को फैमिली फंक्शन में नहीं जाना। छोड़ दो ना
(52:08) बच्चे की मर्जी है। तो क्या हो रहा है कि आजकल मैं देख रही हूं कि यंग बच्चों में सोशल एंजाइटटी है। बच्चे नए लोगों को नहीं देखतेदेखते रोने लग जाते हैं। उनको फंक्शनंस में नहीं जाना। उनको क्राउड देख के एंजायटी होने लगती है। समझ इनको यह समझ नहीं है कि एडल्टहुड में इसके बहुत इंप्लिकेशंस है। पर अगर बच्चे को बचपन से आपने रिश्तेदारों में मिलवाने दिया पहले क्या होता था? कोई भी आ जाता था घर पे बैठते थे। सबको हम चायवा देते थे एस चिल्ड्रन नाश्ता देते थे। तो हमारे में ऑलरेडी वो था कि अनजान लोगों से यू नो सेफली बात करो, रिश्तेदारों से बात करो,
(52:38) थोड़ी बहुत कन्वर्सेशन करो। सोशल फंक्शनंस में जाओ। वो आजकल मिसिंग है। तो यह भी एक दिस इज़ एन एलिमेंट ऑफ़ पीसी। बाय द वे वन मोर एलिमेंट ऑफ़ पीसी इज़ पार्टिसिपेटिंग इन कम्युनिटी ट्रेडिशन। सो गणेश पार्टिसिपेट एनीथिंग दैट इज़ कम्युनिटी शुड बी एक्सपोज्ड। चिल्ड्रन शुड बी एक्सपोज्ड देयर विद सपोर्ट विथ पेरेंट बीइंग देयर नॉट कि चलो चलेगा। उसमें फिर लॉन्ग टर्म क्या होता है? सोशल एंजाइटटी इज़ अगेन रूटेड इन सर्टन टाइप्स ऑफ़ चाइल्डहुड एक्सपीरियसेस। कि किसी को मिलना ही नहीं है। आइसोलेटेड मेरी दुनिया है। मेरे रूम में सब चलता है। जो सोशल एंजाइटटी को लेके आते हैं ना हम
(53:08) उनके रूट कॉज ढूंढ ढूंढते हैं तो पता होता है कि बचपन में उनको बहुत कहा गया था कि लोग क्या कहेंगे? लोग क्या कहेंगे? वहां मत जाना, ये मत करना, ये कपड़े मत पहन के जाना। आंटी अभी ऐसा बोलेगी अंकल। तो बचपन से प्रोग्रामिंग आ गया कि लोग मतलब डेंजर। हम यू नो समाज मतलब डेंजर। समाज में मेरी नाक कट जाएगी। अभी देखो आंटी अभी तुम वहां जा रही हो ऐसे कपड़े पहन के जाओगी। तो बचपन से प्रोग्रामिंग हो जाता है कि पीपल इज डेंजरस। सो इफ आई इफ आई गिव स्पेसिफिक एग्जांपल बचपन में मार पड़ी है। रूम में अकेले पड़ी है और लोगों के सामने पड़ी है।
(53:38) तो लोगों के सामने वाली मार की लॉन्ग टर्म इंप्रिंट इमोशनल इंप्रिंट बहुत स्ट्रांग होती है। कोई कंपैरिजन ही नहीं है। तो मार पड़ी एक सिंपल क्वेश्चन है। बट कहां कैसे क्या कॉन्टेक्स्ट में कितनी बार हो ये है वो एक इंपॉर्टेंट कॉम्पोनेंट है। वी डिजिटाइज दैट एंड वी आर एबल टू असेस दैट नाउ। सो पॉजिटिव चाइल्डहुड एक्सपीरियंस आई वांट टू क्लेरिफाई कि जरूरी नहीं है कि पेरेंट्स ही दें। ऐसे लोग हैं जिनके घर में माहौल बहुत टॉक्सिक है। बहुत ज्यादा मतलब फादर पी रहे हैं, मम्मी को मार रहे हैं। घर में पैसे की प्रॉब्लम है। सब पर उनके लाइफ में एक दो ऐसे एडल्ट्स हैं जो
(54:06) उनको ये एक्सपीरियंस दे रहे हैं। जैसे नाना है, नानी है, दादा-दादी है, बुआ है, मासी है, पड़ोसी है जो होता है बेटा आज चल मेरे पास बैठ। चल तुझे क्या खिलाऊं मैं? अच्छा तुझे रोना आ रहा है। उसको प्यार देते हैं। उसको सपोर्ट दे। तो ये लोगों में पॉजिटिव चाइल्डहुड एक्सपीरियसेस की वजह से इमोशनल रेजिडेंस बढ़ती है। तो कोई भी हो चाहे ट्यूशन टीचर हो और लोग हमको कहते हैं कि मैम मेरा लाइफ इतना खराब था बट वो मेरे एक कोच थे ना क्रिकेट के उन्होंने पूरा मुझे तार दिया। या तो मेरी वो दादी थी ना बस मैं उसके पास जाता था। वो दादी ने मेरा आत्मविश्वास टिकाए रखा।
(54:38) बाकी घर पे तो सब ऐसे। सो व्हाट आई ट्राई टू टेल पीपल इज आपके बच्चे भी नहीं है तो भी आप किसी बच्चे के लिए यह पॉजिटिव एक्सपीरियंसेस दो। यू नेवर नो कि आप किस कौन से बच्चे के लिए आप यह सपोर्ट बन सकते हो। कई बार मां-बाप नहीं कैपेबल है। दे सकते। मां-बाप के खुद के इतने ट्रॉमाज़ हैं, इतनी चैलेंजेस हैं। दे आर नॉट एबल टू गिव दैट टू द चाइल्ड बट एनीबडी कैन गिव इट। रिसर्च सेज़ इट डजंट हैव टू बी पेरेंट्स। इट कैन बी एनी एडल्ट। फॉर एग्जांपल एक एडल्ट आया था। काफी रेज़िलियंट था। बट बहुत सारे चाइल्डहुड एक्सपीरियंस। तो मैं समझ रहा था क्या था।
(55:07) तो फादर ने उसको उठाए एक गांव से एक स्कूल से सिटी से स्कूल से इंग्लिश मीडियम स्कूल से सीधा गुजराती मीडियम में डाल दिया 11th में तो इसकी तो बहुत तकलीफ हो गई तो ये तो बहुत डेंजर या एनी स्कूल चेंज मींस प्रॉब्लम या तो ये खराब है या यहां पे प्रॉब्लम हुआ है तो उसने बताया कि मेरे जो पुराने टीचर थे उनको पता चला कि ऐसा हुआ है आके मेरे पापा के सामने मेरे सामने लड़ाई की उन्होंने और वापस मुझे कि यहां मत भेजो मैं उसको ऐसा माध्यम चेंज नहीं कर सकते हो तो बोलते बोलते ऐसे मुझे किसी ने सपोर्ट किया आउट ऑफ नोवेयर और उसकी वजह से
(55:40) मेरा कंटिन्यूटी रहा। ऐसे बहुत सारे एग्जांपल्स हैं। आई थिंक [नाक से की जाने वाली आवाज़] टीचर्स बहुतेंट टीचर्स अब्यूज भी उतने करते हैं और टीचर्स पॉजिटिव भी उतने हैं। मतलब हमारे पास टीचर वाले ट्रॉमा इतने सारे टीचर्स के ट्रॉमा लेके आते हैं लोग। पर उतने ही लोग आते हैं जो कहते हैं कि नहीं वो टीचर की वजह से हमारी लाइफ बनी। तो दे हैव अ वेरीेंट रोल। आई थिंक आपने बहुत सारी चीजें कवर कर दी। किड्स का एक अलग ही एक करियर स्टार्ट हो गया। किड्स इन्फ्लुएंसर्स राइट? एंड इतने ज्यादा क्रिएटर्स हैं जो बच्चे हैं और बहुत ही यंग एज में वो कमा रहे हैं। उनके पेरेंट्स
(56:21) उनका एक बचपन पूरा उसके अराउंड हां क्यूरेट हो गया है। पूरा हर चीज इन लाइफ इज़ नाउ नो नो मोर अबाउट लिविंग एंड मोर अबाउट कंटेंट क्रिएशन। हाउ विल दिस इंपैक्ट किड्स? आई वुड से प्रीटी मच लाइक जो पहले के जमाने में चाइल्ड स्टार्स पर कैसी इंपैक्ट पड़ती जो फिल्म स्टार जो फिल्म्स में बच्चे आते थे पता है हम हमें देखते थे कि इतना क्यूट बच्चा है फिल्म में आता फिर बाद में पता चला कहीं खो गया पता ही नहीं चला डिप्रेशन हो गया ये हो गया वो तो एक तो पहली बात ये कि बच्चों को आप सोशल मीडिया पर डाल रहे हो कंटेंट क्रिएटर्स बना रहे हो तो उसके साथ ऑलरेडी
(56:53) एक पूरा जो जो पब्लिक में रहने के जो रिस्क है वो तो पूरे हैं ही है। जैसे आपको नहीं पता कि आप कंटेंट बना रहे हो पर वह कंटेंट देख कौन रहा है। Instagram पे आईडीज के पीछे पेडो फाइल्स हैं, सेक्सुअल अब्यूजर्स हैं। कैसे-कैसे किस्म के लोग कैसे माइंडसेट वाले लोग आपके बच्चे को बार-बार देख रहे हैं। उसकी रील डाउनलोड करके सेव कर रहे हैं फोन पे। आपको कोई कंट्रोल नहीं है। राइट? पहले तो होता था। चलो घर में रिश्तेदार पांच देखते अभी तो दुनिया भर के कोई भी साइकोस आपके बच्चे की प्रोफाइल देखते हैं, सेव करते हैं तो पहले वो एक तो रिस्क है ही है। दूसरा
(57:28) साइकोलॉजिकल रिस्क ये है कि बच्चे फिर यही प्रोग्राम करने लगते हैं कि अभी कैमरा के आगे सब करो। तो मुझे हंसी भी कैमरा के सामने करनी है, रोना भी कैमरा के सामने तो पूरी जिंदगी उनको कैमरा के लिए क्यूरेट की जाती है। अभी देखिए बच्चे का मन ऐसा है ना कि नेचर ने हमें ऐसे बनाया है कि हम लोग मां-बाप को देख के सीखते हैं। बच्चे का माइंड इस तरह से प्रोग्राम होता है कि इर्द-गिर्द जो होता है उसको देख के वो अपनी सर्वाइवल स्किल सीखता है। लाइफ के बारे में सीखता है। अगर बच्चा जंगल में बड़ा हुआ है ट्राइबल्स में तो उसका अलग चीजें सीखेगा। जो बच्चा बॉम्बे में बड़ा
(57:59) हुआ है अलग चीजें सीखेगा। तो जो बच्चा कैमरा के सामने बड़ा हो रहा है, जो कैमरे के लिए अपनी इमोशंस कर रहा है, उसके मन में भी वो प्रोग्रामिंग हो जाएगा कि कैमरे के लिए ये सब है। तो फिर उसको आगे जाके मेरे हिसाब से ये डिफरेंशिएशन नहीं रहेगा कि मैं ऑथेंटिकली मैं जेनुइनली हूं कौन और मैं कैमरे के लिए हूं वो मैं हूं कि ये मैं हूं। ये दूसरा हिस्सा। तीसरा हिस्सा कि कंटेंट क्रिएटर्स को फिर जब लाइक्स के साथ जुड़ा जाता है तो उनको यही प्रोग्रामिंग हो जाती है कि मुझे कुछ करना पड़ेगा टू गेट लाइक्स एंड वैलिडेट। अगर लोगों ने लाइक्स नहीं दी ये कंटेंट में
(58:36) लाइक नहीं आई मतलब ये मेरा कंटेंट गलत है। मतलब मैं ये ठीक नहीं है। इसमें बहुत लाइक्स आई तो मुझे यह करना है। सो एवरीथिंग इज लिंक्ड टू वैलिडेशन एंड लाइक्स। तो खुद को क्या चाहिए? खुद को क्या करना है? यह समझ नहीं रहती है। और तीसरा कि ट्रोलिंग ऑनलाइन क्योंकि उनके साथ जो भी अभी जैसे मैंने कहा कोई भी इंसान आपकी कंटेंट देखेगा कोई भी कमेंट करेगा कुछ भी लिखेगा बच्चों को इसका भी एक्सपोज़र हो रहा है। बच्चे चलो नेचुरली टैलेंटेड है तो मैं समझती हूं। पर मैं कह रही हूं कि नेचुरल टैलेंट आप नेचुरल तरीके से दिखाओ। पर जब नेचुरल टैलेंट आप कंटेंट
(59:09) को की तरह से डालते हो तो वह एक करियर बन जाता है। बच्चे पे प्रेशर आ जाता है कि अभी वह टैलेंट बार-बार दिखाएं क्योंकि मोनेटाइजेशन होती है। कोलैब्स मिलते हैं। तो यह बच्चा बेचारा 5 साल की उम्र में अपना बचपन खो के कमाने लगता है। दिस इज नो डिफरेंट फ्रॉम चाइल्ड लेबर। इट इज अ वेरी सोफेस्टिकेटेड वर्जन ऑफ़ चाइल्ड लेबर। हालांकि बहुत सी मम्मीियां मुझे ट्रोल करने लगी थी जब मैंने इसके बारे में डाला था कि मैम मेरा बच्चा इतना गिफ्टेड है तो मैं तो दिखाऊंगी सब लोगों को उसमें गलत क्या है ये बच्चा नेचुरल है ब्ल ब्ल ब्ल सब है भाई पर आपका
(59:40) बच्चा गिफ्टेड है अच्छा है तो पास रखो अपने माय पॉइंट इज ये प्रेशर मत डालो बच्चे पे बच्चे ये गलत है बचपन ना चला जाए बचपन ना चला जाए क्योंकि बच्चे का बचपन है कि वो नेचुरली आज आपका बच्चा आजकल के बच्चे इतने मैच्योर्ड बड़ों की भाषा बोलते हैं आप देखो ये काउंटर लोग उसकी तारीफ भी करते तो और भी उसको को बड़ों की भाषा पेरेंट्स बुलवाते हैं। दे मेक फाइव ईयर ओल्ड बिहेव लाइक 15 ईयर ओल्ड 20 ईयर ओल्ड और फिर तालियां पड़ती है तो और होता है। तो ये बच्चा बच्चे की ऑथेंटिसिटी कहां गई? यू आर योर ऑथेंटिक सेल्फ एंड नोबडी इज वाचिंग बट एवरीबडी इज़ वाचिंग दिस चिल्ड्रन
(1:00:15) 24 बाय से। सो वेयर इज़ देयर ऑथेंटिक सेल्फ? दिस इज द कंसर्न आई हैव हैंडलिंग फेम नॉट फॉर एनीबडी। रिसर्च से हैंडलिंग फेम एंड ट्रोमा रिस्पांस हैज़ लॉट ऑफ़ पैरेलल। इट डस नॉट मीन एवरी पर्सन हु इज मैनेजिंग फेम इस गोइंग टू एंड अप दैट वे वन ऑफ़ द कॉमन कॉम्पोनेंट्स इज हाइपरविजिलेंस रिमेनिंग अलर्ट ऑल द टाइम टू थिंग्स रिस्प्ससेस हाइपर विजिलेंस हर कोई मुझे कोई देख रहा है मैं्ट हां आई एम बीइंग वाड ऑल द टाइम नाउ दैट कनेक्ट्स वि दिस होल थिंग दैट हैव टू लर्न टू थ्रो टेंशन दे विल एंड इट इज़ ओके हाउ डू यू रिकवर इज़ हियर दी कैमरा साइड और द फेम साइड टेक्स ओवर। सो देयर
(1:00:59) फॉर द नॉर्मल बिहेवियर दैट अ चाइल्ड हैज़ टू गो थ्रू क्राई, जंप, रन अवे फ्रॉम द रूम आर सप्रेस्ड। लीडिंग टू सर्टन काइंड्स ऑफ़ कन्फ्यूज्ड पर्सनालिटीज़। आई एम नॉट कॉलिंग इट पर्सनालिटी डिसऑर्डर्स। सम कन्फ्यूजन इन पर्सनालिटी एंड सो ऑन सो फोर्थ। देयर इज़ आल्सो अ लॉट ऑफ़ डॉक्यूमेंटेड ग्लोबल रिसर्च ऑन रिस्क रिस्क नॉट कॉजेशन ऑफ एडिक्शन एंड अदर चैलेंजेस। डिप्रेशन। सो कोपिंग विथ फेम हैज़ लॉट ऑफ़ पैरेलल विथ ट्रोमा। एंड इट हेज़ टू बी हैंडल्ड। वी डोंट नो आवर कंट्री वी डोंट लर्न चाइल्डहुड ट्रामा। सो दिस आर मोर सटल फॉर्म्स आर इवॉल्विंग एंड मे नीड
(1:01:34) सम एक्स्ट्रा डेफिनिशंस बट इट्स सीरियस। सी देयर इज़ अ रीज़न व्हाई सेलिब्रिटीज एंड ऑल दिस पीपल डोंट शो देयर चिल्ड्रन फेसेस। देयर इज़ अ रीज़न बिकॉज़ दे कैन बी मिसयड्ड। बट आजकल हमारे देश में जानकारी इतनी कम है, समझ इतनी कम है कि लोग अपने बच्चों के कैसे-कैसे वीडियोस डालते हैं। मतलब एंड दे डोंट नो कि वहां पे क्या पड़ा है। उनको यह नहीं पता कि आप अपने बच्चे को करोड़ों लोगों को एक्सपोज कर रहे हो। तो ये भी एक समझ डालना जरूरी उनको अंदाज ही नहीं है कि इस चीज, ये सब वीडियोस के क्या गलत इस्तेमाल हो सकते हैं। मैं तो यह बेसिक सिक्योरिटी लेवल की बात कर रही हूं। आपकी
(1:02:10) प्रैक्टिस में व्हाट आर द मेजर चैलेंजस दैट यू फेस? एक तो जो कॉम्प्लेक्स ट्रॉमा के साथ आते हैं लोग बहुत ट्रॉमा लेके मतलब वी कॉल देम एस दोज़ हु है आर सीपीटीएसडी कॉम्प्लेक्स पोस्ट ट्रोमेटिक स्ट्रेस सीपीटीएसडी का हमारा असेसमेंट होता है करते हैं उनकी जर्नी बहुत लंबी चलती है तो कॉम्प्लेक्स ट्रॉमा ऐसे लोग हैं जिनको बहुत ट्रॉमा हुआ है चाइल्डहुड में इतना ज्यादा हुआ है तो नम आउट हो गए हैं या तो बिल्कुल डिस्फंक्शनल हो गए हैं लाइफ के हर पहलू में प्रॉब्लम है तो ये लोग जब थेरेपी के लिए आते हैं ना तो बड़ी आशा लेके आते हैं कि हमको मैम कितने महीने में ठीक होगा
(1:02:42) एक महीने दो महीने महीने पर कंसिस्टेंटली रिसर्च ने बताया है कि इनकी थेरेपी इतनी लंबी चलती है जैसे अगर कम ट्रॉमा वाले लोग हैं और ज्यादा ट्रॉमा वाले तो इनके इनका अगर रिकवरी ग्राफ ऐसा है तो इनका रिकवरी ग्राफ थोड़ा सा स्लो उनको बहुत टाइम लगता है। दूसरा ड्रॉप आउट रेट बहुत रहता है। जो कॉम्प्लेक्स ट्रॉमा वाले लोग आते हैं ना उनका सेल्फ साइबोटजिक बिहेवियर होता है। मतलब कभी भी थोड़ा सा खुद के पैर पे कुहाड़ी मारना इट इज़ अ आउटकम। सेल्फ साइबोटाज इज़ एन आउटकम ऑफ़ सीवियर चाइल्डहुड ट्रॉमा। कि आप अपने ही चांसेस को किल करते हो। तो ये लोग को थेरेपी में भी थोड़ा
(1:03:16) प्रोग्रेस दिखाना फिर बंद कर देंगे। कंटिन्यू नहीं करेंगे। तो हम लोग इतने इन्वेस्टेड होते हैं कि यार देखो रिजल्ट मिल रहा है। स्कोर्स अच्छे हो रहे हैं। अरे इसका ये ट्रॉमा ठीक हो गया और फिर पता चला कि बस गायब हो गए। गायब हो गए। गायब हो गए। लिटरली गायब हो जाते हैं। दिखते ही नहीं है। तो ये एक हमारा इशू और तीसरा इशू। तीसरा इशू ये है कि अभी तो खैर अवेयरनेस ज्यादा है। पर लोग यही सोच के आते हैं कि दूसरा वाला सुधरेगा। हम क्योंकि प्रॉब्लम है। हां मतलब मैम आई वांट टू टेक थेरेपी सो दैट आई कैन प्रूव टू यू दैट माय हस्बैंड इज अ प्रॉब्लम।
(1:03:46) [नाक से की जाने वाली आवाज़] यू नो सो प्लीज इवेंचुअली फिक्स हिम। अनदर चैलेंज इज पीपल ब्रिंग अदर पीपल टू अस। मतलब यू नो ये मेरे बच्चे को ठीक करो। ये मेरी बीवी को ठीक करो। वी ऑलवेज से कि भ जिसको प्रॉब्लम है खुद आएगा और उसको खुद ओनरशिप लेनी है अपने प्रॉब्लम की तभी सॉल्व होगा। आपके उसके लाने से दवाई चैलेंज आप पेशेंट है उसको कोई और एडमिट करेगा और डॉक्टर उसको इंजेक्शन देगा तो शायद इंपैक्ट असर होगा उसका पर हमारी थेरेपी का ऐसे असर नहीं होता है तो मेरे हिसाब से ये दो तीन चैलेंज उसमें आई विल स्टेप बैक कि कॉम्प्लेक्स ट्रॉमा पे हम क्यों आए तो चैलेंजेस जो है
(1:04:25) तो ये सिस्टम की फौ्ट है कि हमारे देश में पीटीएसडी सॉल्व करना मास्टर्स तक नहीं है मेंटल हेल्थ प्रोग्राम में अगर कोई मैं गलत गलत बोल रहा हूं तो मुझे कोई लिख सकता है। तो ये एक प्रॉब्लम बहुत सारे लोगों से मिला। ये एक प्रॉब्लम है। तो अगर ये सिंगल इवेंट ट्रॉमा अगर सॉल्व नहीं कर रहे हैं तो मल्टी इवेंट जो बचपन में दिमाग में हो रहा है जो बच्चा नहीं समझ रहा है कि ये क्या है वो वॉर से अलग नहीं है उसको कैसे सॉल्व करना है? तो कॉम्प्लेक्स ट्रॉमा इज नॉट इन डीएसएम5। तो मैं कहां जाऊं? किसके पास जाऊं? एजुकेट द पीपल कि ये एक रिसर्च
(1:04:56) हो रहा है। आप समझो क्योंकि यह काम पीटीएचडी से बहुत अलग है। हम और उसमें रिपीटेड एक्सपोज़र ट्रॉमा। तो ऐसा नहीं है कि सब चाइल्डहुड वाले हैं। अगर किसी से डोमेस्टिक वायलेंस में से कोई मेल या फीमेल है वो रिपीटेड एक्सपोज़र है और वहां से नहीं निकल सकते तो उसका भी लॉन्ग टर्म इंपिट हो सकता है कॉम्प्लेक्स ट्रॉमा। मगर ज्यादातर 80 फॉर 20 ये रूटेड है चाइल्डहुड ट्रॉमा। तो उसकी लॉन्ग टर्म इंपट ये है। जैसे हाईवे मूवी में उन्होंने चाइल्डहुड ट्रॉमा वो भी कॉम्प्लेक्स जो मल्टीपल वे से आ रहा था उसे एक बहुत ब्यूटीफुल तरीके से दिखाया गया है कि कितना कॉम्प्लिकेटेड
(1:05:28) एडल्ट हो सकता है अगर उसके चाइल्डहुड में ट्रॉमा हुआ हो। और हमारा एक दुर्भाग्य है कि हमारे देश में इसके ऊपर कोई काम करने के लिए तैयार नहीं है। टू ऐड टू दिस पॉइंट कि बहुत से लोग ना अभी भी मेंटल हेल्थ प्रैक्टिशनर्स दे सी डिप्रेशन एज अ प्रॉब्लम, एंजायटी एज अ प्रॉब्लम और उसको ठीक करने में लगे रहते हैं। आवर चैलेंज जैसे हमारे पास क्लाइंट्स आते हैं मैम मैं 10 साल से साइकेट्रिक गोलियां ले रही हूं। किसकी? डिप्रेशन की। ठीक है? तो आपकी ट्रॉमा हिस्ट्री ली? हां। थोड़ी बहुत ले ली थी 5 10 मिनट में आधे घंटे में जो भी उस पर काम किया नहीं उस पर
(1:05:59) काम नहीं किया मैम। डिप्रेशन पे काम किया। तो माय पॉइंट इज के रूट मतलब रूट कॉज पे जाना अनफॉर्चूनेटली गलती सिस्टम की है। क्योंकि जो साइकोलॉजिस्ट भी मास्टर्स तक पढ़ के आते हैं उनको ये चाइल्डहुड ट्रॉमा के बारे में इतना डिटेल में सिखाया नहीं जाता। तो कहां से बेचारे पूछ रहे हैं? अभी न्यू सिस्टम में ऐड हो रहा है। व्हिच इज वेरी गुड। सो माय पॉइंट इज कि लोग 10-10 15 साल तक दवाइयां खाते हैं जो सिम्टम सप्रेस करते हैं। रूट कॉज और रूट कॉज इज इन द मेमोरी। सी अंडरस्टैंड आपका पास्ट कहां पे है? आपकी मेमोरी में है। तो मेमोरी पे काम करना चाहिए वह चेंज
(1:06:33) करने के लिए। मेमोरी पे काम नहीं करते हैं लोग। ज्यादातर बात होती है कॉन्शियस माइंड अनकॉन्शियस। व्हिच इज़ेंट बट वो एक्शनेबल नहीं है। वो प्रिंसिपल्स है कांसेप्ट है। या वी नीड एक्शननेबल तो एक्शननेबल थिंग इज़ इवेंट्स। इवेंट्स में भी कौन सी इवेंट्स पे ज्यादा इंप्रिंट है वो भी है। तो अगर डिप्रेशन की बात करें जस्ट टू वी हैव टॉक देयर इन द बुक आल्सो कि उसका मॉडल है तो रूटेड इन चाइल्डहुड। तो चाइल्डहुड और डिप्रेशन कोरिलेशन नंबर जो है वो है। मगर अगर लोनलीनेस यहां है तो लोनलीनेस इज स्ट्रोंगली कनेक्टेड एसोसिएटेड विद डिप्रेशन। लोनलीनेस इज़
(1:07:03) स्ट्रोंगली एसोसिएटेड विथ द कोर। बट चाइल्डहुड ट्रॉमा और डिप्रेशन देखोगे तो कम मिलेगा कंपेरेटिवली। बट वो है क्योंकि ये नहीं होता तो लोनलीनेस कम होता। और उसके बीच में बहुत सारे पैरामीटर्स हैं। इंक्लूडिंग रेजिलियंस, साइकोलॉजिकल रेजिडेंस, सोशल सपोर्ट, एंग्जायटी एंड स्लीप इशज़। तो जो हमारा जो रिकंसोलिडेशन ऑफ ट्रोमेटिक मेमोरी आरटीएम जो प्रोसेस है वो बहुत नया है। वो किसी ने सुना ही नहीं इंडिया में। हमने यूरोपियन जनरल ऑफ ट्रॉमा और डिसोसिएशन में उसके बारे में लिखा है। रिसर्च पब्लिश किया है। इट वर्क्स ऑन मेमोरी बिकॉज़ वी बिलीव कि आपका हर एक बचपन
(1:07:33) का अनुभव। जैसे एक क्लाइंट आया था कि उसको बुलेट का बहुत डर था। मतलब अभी एज एन एडल्ट भी बुलेट की आवाज सुनेगा ना। बुलेट मतलब वो बाइक। जैसे ही बुलेट की आवाज सुनेगा उसको पैनिकिक अटैक आएगा। और एज एक्सपेक्टेड कि बचपन में उसके पापा पुलिस में बुलेट लेके आते थे घर और पीवी के आते थे मारते थे घर में सबको तो उसके बचपन में मेमोरी मेमोरी का क्या एसोसिएशन बन गया कि बुलेट मतलब ट्रॉमा बुलेट मतलब मार अब ये मेमोरी में है समझो आप तो हमने क्या किया मेमोरी रिकंसोलिडेशन करते हैं टेक्निक तो ये जो बुलेट और मार वाले जो इवेंट्स हैं जिसमें
(1:08:07) ये मेमोरी जुड़ गई है कि बुलेट इक्वल टू मार वो हम रिकंसोलिडेट कर देते हैं ताकि बुलेट इज़ नॉट इक्वल टू मार एनीमोर जब हम यह मेमोरी जो ऐसे कंसोलिडेट उसको हम अलग अलग तरीके से रिकंसोलिडेट करते हैं तो फिर वो ट्रिगर करना बंद कर देती है। आई हैव सम सोशल मीडिया मिथ्स हियर विथ मी वेदर दे आर मिथ्स और नॉट मुझे आपकी हेल्प चाहिए तो प्लीज बताइए। इफ यू प्रोकैस्टिनेट अ लॉट यू डेफिनेटली हैव एडीएचडी। नो यूजुअली इट इज़ लिंक टू परफेक्शनिज्म ओर सम काइंड ऑफ फियर्स? हैविंग मूड स्विंग्स मींस यू आर बायपोलर। नो नो मूड स्विंग्स कुड बी बिकॉज़ ऑफ़
(1:08:41) हॉर्मोनल इम्बैलेंसेस। इट कुड बी पीसीओडी, इट कुड बी पोस्टपार्टम डिप्रेशन। देयर आर मेनी रीज़न्स फॉर मूड स्विंग्स नॉट जस्ट बाय पोल। समटाइम्स स्लीप डिस्टरप्शन आल्सो ब्रिंग्स दैट। आई एम सो ग्लैड यू ब्रॅट दैट। [हंसी] इफ यू ओवरथिंक यू हैव एंजायटी। नॉट नेसेसरिली। एंजायटी इज़ फियरफुल थॉट्स। इफ यू आर ओवरथिंकिंग इन टर्म्स ऑफ़ प्लानिंग इन टर्म्स ऑफ यू नो आई डोंट नो क्रिएटिविटी देन इट्स नॉट एंजायटी। देन इट कुड जस्ट बी युवर ऑब्सेस्ड ओर टू मच इनटू समथिंग। या यू आर यू आर जस्ट टू मच इंटू इट। दैट्स नॉट नेसेसरी एंजाइटटी। योर टॉक्सिक एक्स वाज़ डेफिनेटली अ
(1:09:15) नर्सिसिस्ट। ओह गॉड, दिस इज़ बिकम सच अ ट्रेंड नाउ टू लेबल एव्री अदर पर्सन एस नार्सिसिस्ट, आई थिंक वन हैज़ टू बी वैरी केयरफुल विथ दिस। आई डोंट एग्री एट ऑल। नार्सिसिज्म आजकल बहुत लोग ऐसे ही बात करते हैं। रिसर्च बताता है कि जिसको नार्सिसिस्टिक पैराटर्स हैं बिहेवियर में उनको ट्रॉमा एक्सपोज़र ज्यादा है चाइल्डहुड में कंपेयर टू जिसको नहीं है। यू कैन हील योर ट्रॉमा इन वन सेशन। मे बी सम बाबाजी कैन मे बी सम गॉड मैन कैन वि सम बभूती और सम पूड़ी बट नो दैट्स नॉट ट्रू एट ऑल। इनफैक्ट दैट्स वेरी वेरी रोंग। अ कॉम्प्लेक्स ट्रॉमा रिक्वायर्स
(1:09:55) मेनी मेनी मोर सेशंस मे बी सिंपल ट्रॉमा अगेन डिपेंड्स ऑन द कॉम्प्लेक्सिटी वन सेशन तो आई हैव नेवर हर्ड ऑफ इट एवर वी आर यू नो सच अ बिग पपुलेशन अ लार्ज पोर्शन ऑफ़ दिस पपुलेशन हैज़ डायग्नोज़बल मेंटल हेल्थ इशूज़ यस 83% ऑफ़ पीपल हु हैव मेंटल हेल्थ इशू अपेरेंटली डोंट गेट एनी काइंड ऑफ़ हेल्प और ट्रीटमेंट राइट तो एक तरफ है पपुलेशन जहां पे हम चाहते हैं कि लोग मेंटल हेल्थ के बारे में बात करें, अवेयरनेस बढ़े, लोगों के पास आए हेल्प करने, टू सीक हेल्प। एंड [गला साफ़ करने की आवाज़] एट द सेम टाइम वी हैव दिस यंगर जनरेशन। इट्स सो इजी फॉर देम टू जस्ट लेबल थिंग्स।
(1:10:38) सो इजी वन मूड स्विंग एंड मेरे को डिप्रेशन। दे गेट अवे विथ इट। लाइक मतलब कॉलेज में जाके अगर बोले कि नहीं मुझे असाइनमेंट करने में रात भर जाके आई हैव एंजायटी तो यू कैन नॉट पुश देम बिय्ड अ पॉइंट टू सबमिट दैट असाइनमेंट। बिकॉज़ नाउ दे आर गोइंग अंडर द अंब्रेला ऑफ़ मेंटल हेल्थ इशूज़। एवरीथिंग इज़ ट्रॉमा। यू नो एव्री अदर पेरेंट हैज़ बिकम नार्सिसिस्ट एंड अब्यूसिव। तो इट्स वेरी अलार्मिंग। मतलब यू आर वेरी राइट। देयर इज़ अ स्माल सेगमेंट ऑफ द सोसाइटी व्हिच इज़ ओवर यूजिंग, ओवर एनालाइजिंग, ओवर डायग्नोसिंग एंड ले लूजली लेबलिंग एंड टॉकिंग अबाउट मेंटल हेल्थ
(1:11:14) इश्यूज। एंड देयर इज अ ह्यूज सेगमेंट जिनको एक्चुअली जरूरत है समझ की अवेयरनेस की जो बिल्कुल वहां तक की चीजें जा नहीं पा रही है। सो आई हैव सम क्वेश्चंस हियर जो लोगों ने पूछे हैं आपके लिए। अ हाय डॉक्टर रीरी। आई एम अ 38 ईयर ओल्ड वुमेन। आई लॉस्ट बोथ माय पेरेंट्स एट अ यंग एज एंड दैट एक्सपीरियंस मेड मी स्केर्ड ऑफ हैविंग अ चाइल्ड। आई डोंट वांट माय चाइल्ड टू एवर गो थ्रू व्हाट आई डीड। आई वास क्लियर अबाउट दिस विद माई हस्बैंड बिफोर वी गॉट मैरिड बट नाउ ही एंड आर फैमिलीज आर प्रेशराइजिंग मी टू हैव अ बेबी। हाउ डू आई डील विथ दिस
(1:11:51) प्रेशर व्हेन आय एम स्टिल नॉट रेडी टू बिकम अ मदर? आय वुड से दैट फर्स्ट डील विथ द ट्रोमा ऑफ लूसिंग बोथ द पेरेंट्स। नोबडी शुड पोर्स यू फॉर एनीथिंग। वेदर यू हैव अ चाइल्ड ऑर नॉट इज़ अ सेकेंडरी थिंग। इवन इफ देयर वाज नो प्रेशर टू हैव अ चाइल्ड आई वुड स्टिल टेल हर दैट प्लीज हील योरसेल्फ ऑफ दिस ट्रोमा ऑफ लूजिंग बोथ योर पेरेंट्स बिकॉज़ व्हेन यू हैव हील्ड फ्रॉम दैट यू विल बी एबल टू सी मेनी अदर थिंग्स वेरी डिफरेंटली नॉट जस्ट द डिसिशन ऑफ हैविंग अ चाइल्ड एंड डोंट डू इट विथ द ऑब्जेक्टिव ऑफ डिसीजन ऑफ मेकिंग अ चाइल्ड वो ऑब्जेक्टिव से मत हील करो हील इसलिए करो
(1:12:25) बिकॉज़ एनी वूड्स दैट यू आर कैरिंग फिजिकली इफ वी हैव वूड्स डोंट वी फिक्स देम देन इफ यू आर कैरिंग इमोशनली वू इमोशनल वूड्स प्लीज हील फील देम आफ्टर दैट डिसाइड वेदर आर यू रेडी ऑ नॉट एंड इट हैज़ टू बी योर जॉइंट डिसीजन। नोबडी शुड प्रेशराइज यू फॉर अ बेबी। बिकॉज़ एनी चिल्ड्रन हु आर ब्रॉट इंटू दिस वर्ल्ड बिकॉज़ ऑफ़ प्रेशर विल नॉट रिसीव द काइंड ऑफ लव एंड द काइंड ऑफ़ बैलेंस पेरेंटिंग दैट दे डिर्व। हाई डॉक्टर। आई एम 27 एंड इवन टुडे आय गेट एशियस अराउंड अथॉरिटी फिगर्स बिकॉज़ ऑफ़ अ टीचर हु कॉन्सेंटली हूमिलीयेड एंड सिंगल्ड मी आउट इन स्कूल। व्हाई कैन वन डिफिकल्ट
(1:13:03) टीचर स्टे विद अस फॉर इयर्स एंड हाउ डू वी अनलर्न दैट फियर एस एडल्ट्स? वी गेट दिस अनफॉर्चुनेटली वेरी कॉमन। इट्स वेरी कॉमन लाइक आई सेड वंस इफ टीचर ह्यूमिलिएट्स इन फ्रंट ऑफ़ द क्लास इज़ वेरी डिफरेंट बस इज़ टीचर टेकिंग द चाइल्ड असाइज्ड एंड गिविंग द फीडबैक। आप बड़े हो गए पर वो इवेंट आपकी इंप्लसिट मेमोरी में अभी भी है। तो इंप्लसिट मेमोरी मतलब क्या? बॉडी मेमोरी। और जब भी ट्रिगर आया वो एक्टिवेट होगी। हम्म। ट्रिगर नहीं आया तो डोरेंट रहेगी। हाई डॉक्टर इरी। आई ऍम 25 ईयर ओल्ड मेल रिसेंटली मैरिड। आई हैव ऑलवेज बीन कॉल्ड अ मम्मास बॉय। बट आफ्टर मैरिज आई हैव
(1:13:37) स्टार्टेड नोटिसिंग ड्यात माई मदर डज नॉट्ट लेट माई वाइफ एंड मी स्पेंड टाइम अलोन। इवन इनवाइटिंग हरसेल्फ ऑन आर हनीमून। व्हेनएवर आई ट्राइड टू टॉक टू हर अबाउट इट, शी स्टार्टस क्राइंग। सिंस शी इज़ अ सिंगल पेरेंट, वी कांट मूव आउट आइदर, हाउ डु आइ सेट बाउंड्रीज़ विथ माई मदर विदाउट मेकिंग हर फील अबेंडन्ड ओर हर्टिंग माई मैरिज। याह। सो दिस इज़ वैरी कॉमन दिस हैपेंस व्हेन द मदर हैज़ मेड हर एंटायर लाइफ अबाउट द चाइल्ड। मदर हैज़ नो आइडेंटिटी ऑफ़ हर ओन। इफ शी डिड देन आफ्टर द चाइल्ड इज़ लॉजिकली आफ्टर योर चाइल्ड इज़ एन एडल्ट यू नीड टू हैव अ सेपरेट
(1:14:07) आइडेंटिटी फ्रॉम योर चाइल्ड वेर द चाइल्ड ऑपरेट्स लाइक एन यूनिट एंड यू आर अ सेपरेट यूनिट। बट इन दिस केस इट सीम्स दैट द आइडेंटिटी इज़ फ्यूज्ड। नाउ, हाउ कैन ही सेट हेल्दी बाउंड्रीज़ इज़, ही नीड़ टू हैव दिस डिस्कशन विथ हिज़ मदर दैट दिस इज़ नॉट हेल्दी फॉर हिम इन हिज़ मैरिज। ही नीड्स टू सेंड द मदर फॉर थेरेपी और फॉर काउंसलिंग वेयर शी कैन फाइंड आउट हु शी इज इफ नॉट जस्ट द मदर लाइक मदर के अलावा उनकी क्या आइडेंटिटी है उनके क्या शौक है उनको क्या करना है सो शी नीड्स टू आल्सो बी कोच्ड और और साइको एडुकेटेड टू स्टेप ऑफ एंड यू नो दिस इज़ वेरी डीप रूटेड इन मदर्स दैट
(1:14:45) स्पेशली सिंगल मॉम सो शी वुड हैव सिंगल हैंडेडली रेज दिस चाइल्ड सो शी वुड हैव इन्वेस्टेड ओवरली इन्वेस्टेड इन दिस चाइल्ड के भई यही मेरा मेरा सब कुछ है। एंड अनफॉर्चूनेटली क्या होता है कि इसमें लड़का ना बिकम्स अ मैन इन दैट मदर्स लाइफ नॉट अ सन। दैट आइडेंटिटी इज़ मर्ज्ड। सी इफ देयर वाज़ अ हस्बैंड देन द मदर हैज़ अ मैन हु इज़ द हस्बैंड एंड अ सन। व्हेन द मैन इज़ मिसिंग, द सन टेक्स आल्सो दैट पोजीशन ऑफ़ द मेल फिगर इन द मदरस लाइफ। व्हिच कैन बी वैरी टॉक्सिक। इट्स नॉट हेल्दी। द सन हेज़ टू बी अ सन नॉट अ मैन। व्हिच मींस द बाउंड्रीज
(1:15:24) हैव टू बी क्लियरली सेट के भाई मैं बेटा हूं पर मैं बाकी सब आपकी इमोशनल नीड्स जो आपको एक एडल्ट से चाहिए वो नहीं पूरी कर सकता हूं। तो ये बाउंड्रीज स्वज हो जाती है जब मदर्स बहुत जरूरत से ज्यादा अपने बच्चों के लाइफ में बचपन से इनवॉल्व रहती हैं। मदर्स को भी सीखना है कि जैसे बच्चे बड़े हो, टीनएजर्स हो, एडल्ट हो, दे हैव टू स्टेप बैक। एंड आई थिंक हियर देयर माइट बी आल्सो एन एंगल ऑफ़ इंडियन सोसाइटी कॉन्टेक्स्ट। राइट? इन द सेंस दैट बेटा का काम है मेरा ध्यान रखना। बेटी का काम है शादी करके चले जाओ और उसके उसका ध्यान रखना। हां। तो बेटी को मैंने इतना ही किया पर सब
(1:16:01) कुछ पूरी लाइफ मैंने बेटा बेटा को किया और अब मेरा बेटा कैसे मुझे छोड़ सकता है। राइट? ये भी समझना है मदर को कि बेटा अगर अपना परिवार सेट कर रहा है इसका मतलब ये नहीं कि आपको छोड़ रहा है। सी व्हेन मदर इज इनसिक्योर व्हेन द मदर हरसेल्फ इज़ अटैचमेंट इशू सिक्योरिटी इश्यूज शी विल लुक एट एव्री बिहेवियर ऑफ़ द सन एज इफ अरे ये तो मेरे को अबंडन कर रहा है। ऐसा नहीं होता है। हेल्दी बाउंड्री किसको कहते हैं कि आपकी ये जगह ये मेरी जगह जब जरूरत पड़े वी आर टुगेदर बट वी आल्सो हैव टू हैव आवर सेपरेट। तो ये मदर को साइको एजुकेट करना पड़े। जैसे आपने कहा कल्चरली ऐसा है। मां
(1:16:34) सोचती है मैंने पूरी जिंदगी बेटे को दे दी। अभी बाकी की जिंदगी बेटा मुझे देगा। ऐसा नहीं होता है। आई ऐड समथिंग हियर देयर इज़ मेटाफोर दैट इज गोइंग ऑन इन पैरेंटिंग इन दिस फॉर इट। दैट गणेश है तो गणेश को हम इतना सजाते हैं, इतना ध्यान देते हैं ओनली टू लेट हिम गो। करेक्ट? सेम फॉर पैरेंटिंग। सो मच टाइम टेकिंग केयर ऑफ़ द किड्स मेकिंग देम डिपेंडेंट ऑन अस इन अ वे दैट इवेंचुअली वी हैव टू लर्न टू मेक देम इंडिपेंडेंट ऑफ़ अस। एंड दैट्स पैरेंटिंग। आई थिंक दैट्स सच अ ब्यूटीफुल थिंग एंड वेरी हार्ड फॉर पेरेंट्स टू रियलाइज बट वेरी ब्यूटीफुली
(1:17:10) पुट दैट आवर जॉब इज जस्ट टू मेक देम इंडिपेंडेंट दैट्स अबाउट इट आई एम 40 इयर्स ओल्ड वुमेन आई हैव बीन ड्राइविंग फॉर 15 इयर्स बट आफ्टर एन एक्सीडेंट एव्रीथिंग चेंज्ड नाउ आई कांट इवन सिट इन द कार लेट हर ओन ड्राइव हाउ डु आई ओवरकम दिस फियर सो इफ ही वर्क्स ऑन ड्यात इवेंट ऑफ़ ड्याट एक्सीडेंट एंड जस्ट वर्क्स ऑन रिकंसोलिडेटिंग ड्याट मेमोरी विथ एन अ थेरेपिस्ट हु डज आरटीएम देन वन सेशन ऑफ़ आरटीएम मोस्ट लाइकली वुड बी इनफ बिकॉज़ इफ इट्स जस्ट वन इंसिडेंट ही मेंशंड वाओ दैट्स हाउ पावरफुल दैट्स हाउ पावरफुल मेमोरी दैट्स हाउ पावरफुल मेमोरी इज इट इज़ दैट वन इंसिडेंस
(1:17:42) मेमोरी दैट हैज़ हैंडीकैप्ड हिम। मेमोरी को बदलो। 28 ईयर ओल्ड फीमेल आई हैव ऑलवेज थॉट आई हैड अ नार्मल चाइल्डहुड। बट रिसेंटली आई स्टार्टेड रियलाइज़ इट दैट सम थिंग्स आई एक्सपीरियंस ग्रोइंग अप स्टिल अफ़ेक्ट हाउ आइ हैंडल रिलेशनशिप्स। एंड कॉन्फ्लिक्ट्स टुडे। हाउ डू आई नो इफ आई व्हाट आई वेंट थ्रू वाज़ एक्चुअल चाइल्डहुड ट्रामा ऑर व्हाट डू आई डू विथ दैट रियलाइजेशन नाउ? डजंट मैटर इफ इट वाज एक्चुअल ऑर मेड अप एज़ लॉन्ग एज इट इज़ इन योर माइंड, इट इज इन योर हेड एंड इट इज़ प्लेइंग लाइक अ प्रोग्राम यू नीड टू वर्क ऑन इट एंड ओवराइट इट। इट्स वैरी सिंपल।
(1:18:14) सो, इफ देर इज़ एनीथिंग इन योर माइंड, रियल ओर इमैजिनरी दैट यू फील इज कॉजिंग योर करंट लाइफ, करंट बिहेवियर टू बी इम्बैलेंस्ड, देन यू नीड टू वर्क ऑन इट। एंड यू लाइक ही सेड, नीड टू वर्क ऑन रिकंसोलिडेटिंग इट। राइट? टिपिकली इफ योर चाइल्डहुड इज़ अफेक्टिंग योर रिलेशनशिप्स इट मींस दैट यू माइट बी यू नो पीपल प्लीज़र यू माइट बी समबडी हु अवॉइड्स कॉन्फ्लिक्ट हु इू इज़ स्केयर्ड ऑफ कन्फ्रंटेशन यू नो दीज़ काइंड ऑफ़ टिपिकल बिहेवियस कम अप एंड दीज़ आर ऑलवेज रूटेड इन चाइल्डहुड इवेंट्स। सो इफ यू वर्क ऑन योर चाइल्डहुड ट्रोमाज़ रिकंसोलिडेटिंग दोज़ मेमोरीज यूजिंग आइदर
(1:18:46) इनर चाइल्ड थेरेपी ओर आरटीएम देन यू कैन इज़ली ओवरकम दोज़ एंड यू विल सी दैट चेंज हैप्पेनिंग इन योर रिलेशनशिप्स। वी हैव सीन डैट मैजिक हैपेंड विथ 100्स ऑफ क्लैंड्स। एंड इट इज देयर इन द बुक। ऑल द प्रोसेससेस आर गिवेन इन डेप्थ इन द बुक। सो शी कैन एक्चुअली रीड इट एंड देन वर्कआउट डिसाइड। या आई एम 32 आई फील लाइक माई पेरेंट्स हैव ऑलवेज सीन देमसेल्व्स एस द विक्टिम। नो मैटर व्हाट हैप्पेंस? आई एंड अप फीलिंग गिल्टी एंड रेस्पोंसिबल फॉर देयर इमोशंस। आई एम एक्जॉस्टेड बट व्हेनएवर आई ट्राई टू सेट बाउंड्रीज़ आई फील लाइक आई एम बीइंग
(1:19:16) सेल्फिश। हाउ डू आई ब्रेक दिस साइकिल विदाउट अबेंडनिंग माय पेरेंट्स। ऑल ऑफ अस हैव सम फैमिली मेंबर और अ क्लोज फ्रेंड दैट हैस दैट माइट हैव और शो दिस होल विक्टिमाइजिंग बिहेवियर आई एम सेंसिटिव मुझे बुरा लग गया तूने मेरा फोन नहीं उठाया तो अब से मैं तुझे कॉल नहीं करूंगी देयर इज अ रीज़न बिहाइंड दिस मैं बेचारी मुझे बुरा लगता है मेरे साथ ही सब बुरा होता है मैं सफर कर रही हूं मैं रो रही हूं तुम आके मुझे मनाओ ओके टिपिकल विक्टिम बिहेवियर इट कुड हैपन इन अ फैमिली मेंबर इट कुड हैप हैपन वेयरवर नाउ हाउ डू यू हु रियलाइज्ड दैट दिस इज़
(1:19:56) विक्टिम बिहेवियर डिफाइन बाउंड्रीज़ एंड प्रोटेक्ट हाउ मच टू गिव इन हाउ मच टू गिव आउट दैट्स योर क्वेश्चन सो फर्स्ट थिंग इज़ द विक्टिम बिहेवियर टिपिकली कम्स फ्रॉम अ बैकग्राउंड ऑफ इमोशनल नेगलेक्ट सो दोज़ चिल्ड्रन हु हैव बीन इमोशनली नेगलेक्टेड आर द वंस हु डू दिस फॉर अटेंशन द विक्टिम मेंटालिटी इज़ यूजुअली क्रेविंग फॉर अटेंशन ओके एंड दिस क्रेविंग इज़ हैपनिंग बिकॉज़ इट इज़ नॉट मेट इमोशनली नेगलेक्टिंग चाइल्डहुड। तो पहला तो यह आपको समझना है कि जो भी विक्टिम मेंटालिटी में उनको कुछ ना कुछ चाइल्डहुड में नहीं मिला है जो अभी वो लोग आपसे ढूंढ रहे हैं। हैविंग सेड दैट
(1:20:30) आप कैसे बाउंड्रीज ले कर सकते हैं यू हैव टू बी फर्म एंड काइंड एट द सेम टाइम। यू हैव टू से आई अंडरस्टैंड दैट यू आर फीलिंग दिस वे बट बियड दिस आई कैन नॉट डू दिस। या इससे आगे मेरे से नहीं होगा। इनके केस में स्पेसिफिकली पेरेंट्स के लिए हम इतने रिजिड बाउंड्रीज नहीं रख सकते हैं। बिकॉज़ आई डोंट नो इफ शी इज़ अ सिंगल चाइल्ड और शी हैज़ अ सिबलिंग। ये बताया नहीं है। बट इनके केस में इनको समझना है कि पेरेंट्स की भी अपनी हिस्ट्री होगी जिसकी वजह से वो विक्टिम कार्ड प्ले कर रहे हैं। और पेरेंट्स ने शायद इनको भी बचपन से कंडीशनिंग किया हुआ है कि बेटा तुम्हारी
(1:21:05) जिम्मेदारी है। तुम्हारी यू नो पेरेंट्स डू दिस अनकॉन्शियसली। तुम्हारी वजह से हम हैं। हमारी वजह से तुम हो। तुम हमने जो हमारा सब कुछ तुम्हारा तुम्हारा हमको सो पेरेंट्स इंडियन कल्चरल यह है नवांसेस के बाउंड्रीज ब्लड है। तो इट इज वेरी डिफिकल्ट बट शी विल हैव टू साइको एडुकेट द पेरेंट्स। अगर पेरेंट्स के साथ ओपन ऑनेस्ट कन्वर्सेशन करना है कि ये इतनी हद तक यह सही नहीं है। उसके बावजूद अगर पेरेंट्स नहीं समझे तो शी विल हैव टू बी ओके विथ द पेरेंट्स। व्हाटएवर गिल्ट ट्रिपिंग बट शी विल हैव टू क्रिएट अ शील्ड अराउंड हर बाय वर्किंग ऑन
(1:21:40) हर ओन चाइल्डहुड व्हिच आई सस्पेक्ट दिस मस्ट बी कमिंग फ्रॉम देयर ओनली टू मेक श्योर दैट शी डजंट फॉल इनटू द गिल्ट ट्रैप शी शुड बी एबल टू बी ओके पेरेंट्स रो रहे हैं धो रहे हैं बट शी शुड बी एबल टू से आई हैव डन इनफ इससे ज्यादा नहीं होगा एंड शी शुड बी ओके विथ इट एंड दैट विल हैपन व्हेन शी फर्स्ट वर्क्स ऑन हरसेल्फ सो अगेन वी कम बैक टू द सेम थिंग के यू थिंक के वो लोग सुधरेंगे तो मेरी मेरी सिचुएशन सुधरेगी वो नहीं होता है। अगर वो भी खुद अपने आप पे काम करेगी ना इफ शी वर्क्स ऑन ओवरकमिंग अर टॉक्सिक शेम गिल्ट एंड रिस्पांसिबिलिटी ऑफ़ पेरेंट्स व्हिच मे बी
(1:22:13) कमिंग फ्रॉम हर चाइल्डहुड शी विल हैव द करेज टू स्टैंड अप टू हर पेरेंट्स एंड से दैट सॉरी दिस इट रेस्पोंसिबल यस एंड इन अ हेल्दी वे नॉट इन एन अबेंडनिंग वेय इन अ हेल्दी वे। आई एम 29 एंड आई हैव नोटिस दैट आई कॉन्सेंटली फियर पीपल आई लव विल लीव मी। इवन अ डिलेड रिप्लाई और स्मॉल चेंज इन समवन्नस बिहेवियर मेक्स मी ओवरथिंक एंड पैनिकिक। हाउ डू आई स्टॉप दिस फियर ऑफ़ अबेंडमेंट फ्रॉम अफेक्टिंग माय रिलेशनशिप्स। सो दिस इज़ टिपिकली दैट द नर्वस सिस्टम इज़ हाइपरविजिलेंट। मतलब देअर इज़ अ कॉन्सेंट प्रोग्रामिंग दैट समथिंग विल गो अवे। समथिंग विल लीव मी। समबडी विल
(1:22:47) डाई, समबडी विल रन समबडी विल अबेंडन मी। अगेन शी हैस टू वर्क ऑन फर्स्ट स्टेप इज बैलेंसिंग हर नर्वस सिस्टम थ्रू नर्वस सिस्टम रेगुलेशन टेक्निक्स इट कुड बी हम्मिंग ब्रीथिंग ईएफटी योग निद्रा बिकॉज़ व्हेनएवर यू आर कांस्टेंटली थिंकिंग कि अभी कुछ चला जाएगा अभी कुछ चला मींस यू आर इन अ फाइट और फ्लाइट मोड योर नर्वस सिस्टम इज़ इन अ हाइपर स्टेट तो द फर्स्ट लेवल वर्क इज़ एट एन इमोशनल रेगुलेशन लेवल वो जैसे ही वह अपने नर्वस सिस्टम को काम डाउन करेंगे ना ऑटोमेटिकली यह फिजियोलॉजी जब काम होगी तो साइकोलॉजी जी काम होगी। एंड देन एट अ नेक्स्ट लेवल देन शी वुड नीड टू
(1:23:23) फिगर आउट वेयर इज दिस कमिंग फ्रॉम। अगेन व्हाट वर द एक्सपीरियंसेस दैट मेड हर बिलीव और दैट क्रिएटेड अ बिलीफ सिस्टम दैट पीपल विल गो अवे। पीपल विल नॉट स्टे विथ मी। और आई विल बी अबंडेंट। यूजुअली इट कुड बी अ लर्न बिहेवियर फ्रॉम पेरेंट्स। मतलब अगर मां-बाप ही कह रहे हैं अभी मैं मर जाऊंगी। मैं तो भाग जाऊंगी। ये पापा ने ऐसा किया मैं अभी देखो अभी मैं घर छोड़ के चली जाऊंगी। सो व्हेन किड्स ग्रो अप वि एन एनवायरमेंट जहां पे दे हैव ऑलवेज बीन मेड टू फील कि नथिंग इज कास्टेंट नथिंग इज सेफ अभी कुछ चला जाएगा कोई आज या तो उन्होंने
(1:23:54) वाकई में ऐसे अनुभव किए जहां पे बहुत डेथ्स हुई है यू नो देन शी हैज़ टू हील दैट एनीथिंग एल्स अंडरस्टैंड दिस इज़ वेट अ ब्रॉडर लेवल अबेंडन इज़ पार्ट ऑफ़ व्हाट इन साइकोलॉजी इस कॉल्ड बॉर्डर लाइन पर्सनालिटी डिसऑर्डर एंड दैट हैज़ वायलेंस और सम इशूज विथ द पेरेंट बिल्ट इंटू इट एक्सपीरियंस और पर्सनली ओर ऑब्ज़र्व आउट। सो दैट नीड्स टू बी प्रूव्ड। आई वुड से। हाय, आई एम 35 ईयर ओल्ड फीमेल एंड आई हैव नोटिस्ड अ पैटर्न इन ऑल माय रिलेशनशिप। आई स्टार्ट टू पैनिकिक व्हेन अ रिलेशनशिप स्टार्ट्स बिकमिंग रियल एंड आई ट्राई टू पुल अवे। हाउ डू आई ब्रेक दिस पैटर्न?
(1:24:30) आस्क योरसेल्फ व्हाट हैड हैपेंड टू मी? दैट मेड मी बिलीव दिस वे। मैं सबको यही पूछती हूं कि आप क्या जब से पैदा हुए तब से ऐसा है? नहीं है ना? तो क्या-क्या हुआ था आपकी लाइफ में जिससे आपको ये फीलिंग हुई। कब से शुरू हुई? 15 साल से शुरू हुई यह फीलिंग होनी 20 साल से शुरू हुई और यह फीलिंग को आप जब होता है व्हेनएवर इट फील सेफ एंड यू स्टार्ट फीलिंग यू नो कि ओह दिस इज़ नाउ गोइंग फार सो लेट मी नाउ वेयर इज़ दिस फीलिंग कमिंग फ्रॉम व्हाट वर द इवेंट्स दैट लेड टू दैट बहुत सारी चीजें हमने डिस्कस की ट्रॉमाेंस ऑफ़ चाइल्डहुड अवेयरनेस ऑफ कि हम जो भी आज बिहेव कर रहे
(1:25:09) हैं उसका कितना डीप रूटेड रीजनिंग हो सकता है पैरेंटिंग इज देयर एनी इंपॉर्टेंट मैसेज दैट यू वांट टू पास टू एवरीवन हु इज़ वाचिंग दिस वन मेजर टेक अवे दैट यू वुड लाइक फॉर पीपल टू हैव आई वुड से फर्स्ट ऑफ़ ऑल इज़ नॉट ऑल ट्रोमा डजंट नीड थेरेपी ओके सो प्लीज डू नॉट ओवर डायग्नोस एंड प्लीज डू नॉट यूज़ योर ट्रॉमा एज़ योर क्राउन एंड टू टू यूज़ इट एज़ एन एक्सक्यूज टू ब्लेम एंड शेम योर पेरेंट्स और एवरीबडी हु हैज़ कॉज्ड इट। टेक ओनरशिप ऑफ इट। बिकॉज़ ट्रॉमा कैन आल्सो बी हील्ड। बिकॉज़ आवर ब्रेन हैज़ न्यूरोप्लास्टिसिटी। हर एक अनुभव के साथ हमारा ब्रेन का वायरिंग बदलता है। तो अगर
(1:25:55) आपको ट्रॉमा है भी तो उसमें से आप चाहो तो जरूर निकल सकते हो। अगर आपकी ब्रेन की वायरिंग कुछ ट्रॉमा की वजह से एक किस्म की हुई है तो वो न्यूरोप्लास्टिसिटी की वजह से अगर आप जब अनुभव बदलोगे आपके। आपके इंटरनल एक्सपीरियंसेस, एक्सटर्नल एक्सपीरियंसेस बदलोगे तो वो वायरिंग भी बदलेगी। और जब ब्रेन की वायरिंग बदलेगी तो आपकी बिहेवियर भी बदलेगी और आपकी लाइफ भी बदलेगी। तो फर्स्ट ऑफ़ ऑल इज़ डोंट लाइक आई सेड डोंट ओवर डायग्नोस एंड डोंट ट्रीट ऑल ट्रोमा एज़ ऑल पेनफुल एक्सपीरियंसेस एस ट्रोमा। एंड सेकंडली इज़ इफ यू रियली हैव ट्रोमा, प्लीज नो दैट इट कैन बी हील्ड।
(1:26:29) नॉट बाय वर्किंग ऑन द सिम्टम्स बट बाय वर्किंग ऑन द रूट कॉज। दैट इज़ माई मैसेज। मेंटल हेल्थ प्रॉब्लम्स आर नेचुरल आउटकम्स ऑफ समथिंग दैट हैस हैपन टू यू | सो इफ पीपल आर लिसनिंग टू दिस इट इज़ एक्सपेक्टेड दैट यू विल हैव डिप्रेशन इफ देयर आर सर्टेन पैरामीटर्स दैट हैव हैपेंड देयर फॉर डू नॉट लुक एट डिप्रेशन एज़ अ प्रॉब्लम राइट एंड दैट्स द टाइ कनेक्टेड टू द टाइटल लुक एट एज अ आउटकम आउटकम देयर इज़ नथिंग रोंग विथ यू इट एक्सपेक्टेड दैट दिस विल हैपन नथिंग रोंग विथ यू दैट्स अ टाइटल ऑफ़ द बुक बट इट सेस इफ वी गो बैक टू अंडरस्टैंडिंग व्हाट
(1:27:01) हैप्पेंड टू मी इट्स लाइकली दैट व्हेन यू सॉर्ट आउट दैट द आउटकम विल चेंज सो इंस्टेड ऑफ ट्राइंग टू चेंज द आउटकम लुक एट व्हाट हैपेंड एड्रेस दैट आउटकम विल टेक केयर ऑफ इटसेल्फ इट्स नॉट [नाक से की जाने वाली आवाज़] अबाउट व्हाट्स रोंग विथ मी इट्स अबाउट व्हाट हैपेंड टू मी व्हेन आई थिंक आई अब्सोलुटली लव दैट टाइटल एंड द वे यू हैव स्क्रिबल्ड इट आई थिंक बेस्ट वे टू एंड दिस चैट आई थिंक वैरी ब्यूटीफुल एंड बिकॉज़ आफ्टर ऑल दैट आई रियली वांटेड समवन टू कम एंड सेट नो मैटर व्हाट एवरीथिंग कैन बी वर्क्ड ऑन 100% 100% आई थिंक वन मेजर टेक अवे फॉर मी इज
(1:27:39) ह्यूमन माइंड इज अ लॉट ऑफ़ वर्क [हंसी] एंड नो मैटर हु वी आर एंड हाउ ब्लेस्ड आवर लाइफ हैज़ बीन ऑल ऑफ़ अस हैव टू वर्क राइट एंड इन दिस क्वेश्चन यू ब्यूटीफुली यू नो द पेरेंट चाइल्ड क्वेश्चन दैट केम यू ब्यूटीफुली से दैट पेरेंट हैज़ टू डू देयर ओन अह साइको एजुकेशन एंड द चाइल्ड हैज़ टू डू इट्स ओन। सो, देयर इज़ वर्क एवरीवेयर, नो मैटर पार्ट ऑफ़ द पार्टी यू आर। एंड एंड देयर इज़ सम फैबुलस वर्क दैट यू गाइज़ आर डूइंग, हेल्पिंग पीपल वर्क ऑन बिल्डिंग रेजिलियंट स्ट्रांग माइंड्स। सो, थैंक यू सो मच फॉर दैट। आय होप पीपल गो एंड चेक द बुक्स आउट एंड रीड। आई एम स्टार्टिंग द
(1:28:17) पेरेंटिंग बुक राइट टुडे। स्टॉप सेइंग व्हाट्स रोंग विथ मी। व्हाट आई वुड लाइक टू ऐड इज आल्सो स्टॉप सेइंग व्हाट्स रोंग विथ द अदर पर्सन अराउंड यू। राइट? व्हाट्स हैपन टू देम? व्हाट्स हैपन टू देम। लेट्स लेट्स बिल्ड दैट एम्पैेथी कि जो कोई जिस तरह बिहेव कर रहा है इट्स एन आउटकम ऑफ समथिंग दे हैव गॉन थ्रू अस इट्स एन आउटकम ऑफ़ अ वायरिंग एंड एववरीथिंग कैन बी रिवायर्ड सो दे लॉट ऑफ़ होप्स। सो थैंक यू सो मच फॉर कमिंग ऑल द वे हियर फ्रॉम अहमदाबाद एंड शेयरिंग एवरीथिंग विथ अस। थैंक यू। थैंक यू। थैंक यू फॉर द अपोरर्चुनिटी।
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