SHIVA KE RAAZ: Meditation, Chakra, Kundalini Activation, Spirituality| Sādhvi A. Trivedi Supertalks
Author Name:Supertalks by themovingship
Youtube Channel Url:https://www.youtube.com/@supertalksbytms
Youtube Video URL:https://www.youtube.com/watch?v=Qh8OnzPOpS0
Title: SHIVA KE RAAZ: Meditation, Chakra, Kundalini Activation, Spirituality| Sādhvi A. Trivedi Supertalks
Author Name: Supertalks by themovingship
Description: Kundalini is not a concept. It is a force that exists inside every human being. And most people will live their entire lives without ever knowing it is there.
In this episode of Supertalks, Raghav sits down with Sadhvi Amruta Trivedi, a revered spiritual master, philosopher and Tantrik rooted in the sacred tradition of Maha Siddhas. Counted among the rare few who have diligently preserved and propagated the ancient wisdom of Kashmir Shaivism. She received initiation as a child, has authored multiple books including Shiva Beyond Shiva and Shiva Tatva and carries a depth of knowledge that most people spend decades searching for.
This is not a theoretical conversation about spirituality. This is a practical guide to the most powerful energy that lives inside you.
We begin with the purpose of life. How Sadhvi ji received her guru and her initiation as a child. And why that early awakening shaped everything that followed.
We then go deep into Kundalini. What it is. How it is connected to Shiva and Shakti. Why it is represented by a serpent coiled at the base of the spine. How Kundalini activation through meditation works. The different kinds of Vayus in the body including Prana Vayu and how they relate to the life force. The challenges and difficulties that come with sadhna. And what Kundalini Tantra says about how to navigate them safely.
The seven chakras explained. Muladhara, Svadhisthana, Manipura, Anahata, Vishuddha, Ajna and Sahasrara. What each one represents. How to activate each one. And what happens when they open.
When Kundalini activates, life changes. Anxiety dissolves. Overthinking stops. Clarity arrives. A sense of direction and purpose that was missing suddenly appears. Anyone who meditates sincerely can begin this journey. But it must be approached with awareness because if done incorrectly, it can also be dangerous.
This episode is for anyone who has ever felt that there is more to life than what they can see.
About the Guest:
Sadhvi Amruta Trivedi is a revered spiritual master, philosopher and Tantrik in the tradition of Maha Siddhas and Kashmir Shaivism. Author of Shiva Beyond Shiva and Shiva Tatva. She received initiation as a child and is one of India's most authentic voices on Kundalini, Tantra and Vedic spirituality.
Related Links
Upcoming Event (18 October | Mumbai): Amaratak.org/events
Competitions: amaratak.org/competitions
Disclaimer: This video is produced strictly for educational and informational purposes. The views and opinions expressed by the guest are solely their own and do not reflect the stance of this channel. We hold no intention to defame, discredit, or cause harm to any individual, brand, product, country, or profession referenced in this content. All media assets featured in this video are the property of their respective owners and are used purely for illustrative and informational purposes. Our aim is to present balanced perspectives that empower our audience to make well-informed decisions.
Guest Suggestion Form: https://forms.gle/EcXwKgHsxYEmS85q8
---------
Read about Raghav's NGO at https://skchildrenfoundation.org
---------
Follow our whatsapp channel: https://whatsapp.com/channel/0029Vb7U...
---------
Subscribe to our other YouTube channel:
Clips Channel: / @supertalksclips
---------
Follow Supertalks on Social Media Platforms
Instagram: / supertalks.co
Facebook: https://www.facebook.com/profile.php?...
---------
Follow Raghav on Social Media Platforms
Instagram: / themovingship
Facebook: / themovingship
Twitter: https://x.com/themovingshipsk
---------
Listen to Supertalks on Spotify: https://open.spotify.com/show/0Uss3VL...
---------
Join as a monthly member for priority replies & exclusive loyalty badges:
/ @supertalksbytms
Business Enquires at partnership@supertalks.in
---------
Timestamps :
00:00 Introduction
03:33 Sadhvi Amrutha Trivedi x Raghav Sharma
04:05 Sadhvi ji's Spiritual Journey
06:58 What Is Kundalini Diksha?
08:11 Biggest Challenge in Kundalini Sadhana
08:47 Hidden Power of Kundalini Shakti
11:44 Why Is Kundalini Awakening Kept Secret?
14:08 Kundalini, Seven Chakras & Union of Shiva and Shakti
16:52 Five Pranas & Five Koshas Explained
22:14 Signs of Kundalini Awakening & Inner Transformation
24:38 Narada Muni’s Story: The Power of Patience in Spirituality
28:33 Why Is Kundalini Represented as a Serpent?
33:30 Kundalini Experiences, Body Heat & Traditional Practices
37:48 How Kundalini Awakening Changes You
41:22 The Third Eye, Intuition & Higher Awareness
44:40 How to Begin Your Kundalini Journey
49:19 Meditation for Beginners: How to Get Started
52:21 Mantras, Meditation & Controlling Your Thoughts
54:45 Kashmir Shaivism & Acharya Abhinavagupta
55:27 Lord Shiva’s Greatest Lesson: Vairagya
59:34 Ending
Transcript:
(00:00) जय भोले। जय भोले। व्हाट इज पर्पस ऑफ़ लाइफ? खुद को जानना। शिव को जानना। शिव कौन है? खुद ही। तो शिव हम कैसे बनते हैं? ये जो कुंडलिनी स्पेशल क्यों है? बहुत रहस्यमय ऊर्जा है। तो अगर कुंडलिनी बाहर है तो पूरे जगत का निर्माण करेगी। पर जिस दिन वो कुंडलिनी अंदर अंतर्मुखी हुई, उस दिन वो आपको जगा देगी। जिसकी कुंडलिनी एक्टिवेट हो जाती है उनके अंदर खुद में क्या चेंज आने लग जाता है? फियर है, इमोशनल टर्म ऑइल है वो चले जाता है और क्रिएटिविटी इतनी आएगी कि यू कैन नॉट स्टॉप योरसेल्फ फ्रॉम क्रिएटिंग थिंग्स। यू विल हैव ट्रेमेंडस एनर्जी।
(00:38) आपको यह पता नहीं चलेगा कि इस एनर्जी को मैं रोकूं कैसे। क्या सही है क्या गलत है पता चलने लग जाएगा। क्या कुछ ऐसी जनरलाइज्ड चीजें हैं जो कि हम बता सकते हैं? तो कुछ लोग आए थे जिन्होंने कभी कोई दीक्षा नहीं ली है और वो मुझसे बात कर रहे हैं कि उनको दीक्षा चाहिए कुंडलिनी की। आई हैव सीन इन देयर आईज दे हैव ऑलरेडी एक्टिवेटेड देयर कुंडलिनी थ्रू ओनली हाउ डूड दे स्टार्ट देयर जर्नी टू कुंडलिनी एक्टिवेशन। डिटचमेंट है क्या? बहुत अगर जिसमें लगाव है किसी भी चीजों में तो वो साधना में बाधक बन जाता है। आपका मन बार-बार वहीं भटकता है।
(01:10) व्हाट इज द मोस्ट डिफिकल्ट पार्ट अबाउट कुंडलिनी? बहुत बार सुनने में आया होगा आपके भी कि यह जो तंत्र में कुंडलिनी में जाते हैं उनका माइंड स्टेबल नहीं रहता है। थोड़े डिस्टर्ब हो चुके होते हैं। इफ यू आर नॉट प्रिपेयरिंग फॉर इट वेल देन यू कैन नॉट हैंडल इट। और जो ऑनलाइन सुन के भी ये साधना स्टार्ट कर रहे हैं किसी भी चक्कर में फोकस रख के। सो दैट इज हाइली डेंजरस एंड वन शुड नॉट डू दैट। अगर मैं कहूं कि आपके शरीर के अंदर एक ऐसी पावरफुल चीज है जो कि इस वक्त सो रही है और अगर आप उसे एक्टिवेट कर लेते हैं यू बिकम नॉट ओनली दी मोस्ट पावरफुल वर्जन ऑफ
(01:57) योरसेल्फ बट लाइफ को आप क्लेरिटी से जिएंगे कैसा रहेगा? मैं बात कर रहा हूं कुंडलिनी शक्ति की जिसको आप अक्सर सुनते हैं हमारे बहुत सारे टेक्स्ट में वर्णन है। कितने सारे ऋषि बात करते हैं कि उनकी कुंडलिनी जागृत थी। ऑनेस्टली कुंडलिनी कोई सुपर नेचुरल या हमसे कोई दूर चीज नहीं है। कुंडलिनी पार हम सबके अंदर है। इस वक्त सोई है। आज का एपिसोड उसे जगाने की कोशिश करेगा। प्रेजेंटिंग साध्वी अमृता त्रिवेदी जी बचपन से ही गुरु से दीक्षित हैं। खुद कश्मीरी शेवज्म की नॉलेज लेकर आती हैं। शी इस इंडियास वन ऑफ द प्रोफाउंड
(02:41) वइसेस जो कि मैं कहूंगा सिर्फ साधना के बारे में बता नहीं रही बल्कि बचपन से उन्होंने साधना को जिया है। आज हम एक्सप्लोर करने वाले हैं कैसे आपको कुंडलिनी को समझना चाहिए और किस तरीके से आप अपनी कुंडलिनी को जागृत कर सकते हैं। वर्किंग रियली हार्ड टू ब्रिंग एपिसोड्स लाइक दिस। आपसे बस यह वादा चाहता हूं कि इस फेस्टिव सीजन में हमने आपको प्रॉमिस किया है कि ऐसे स्पिरिचुअल कन्वर्सेशन देते रहेंगे। आई वांट यू टू शेयर एव्री एपिसोड विद योर फैमिली मेंबर। क्योंकि ये सिर्फ हमारी सिर्फ आपके लिए नहीं बल्कि हमारे पूरे देश की एंशिएंट विज़डम को भी
(03:19) फैलाने का काम करती है। मेक श्योर यू सब्सक्राइब बिकॉज़ सुपर टॉक्स सिर्फ एक पडकास्ट चैनल नहीं है। पिछले 10 सालों से हम 200 से ज्यादा अंडर प्रिविल बच्चों के लिए एक एंज चलाते हैं। तो जब भी आप सब्सक्राइब करते हैं मैं प्रॉमिस करता हूं इस तरह के खूबसूरत कन्वर्सेशन लाता रहूंगा। व्हाइल दिस आल्सो हेल्प्स इन नेशन बिल्डिंग। व्हाट इज योर पर्पस ऑफ़ लाइफ? माय पर्पस आई डोंट हैव अ पर्पस। ऑनेस्टली देयर इज नो पर्पस एंड आई बिलीव कि हमारा पर्पस ही यह है जानना कि कोई पर्पस नहीं है। बट देन अगेन इट इज़ इनू एक्सिस्टेंशियलिज्म कहीं ना कहीं के लिए
(03:48) भाग देयर इज़ एम देयर इज़ पर्पस। बट जब हम कहीं नहीं भागते हुए रुक जाए एक जगह बैठ जाएं। जब हम जान जाए कि हम कौन हैं। खुशी कहीं बाहर नहीं है। हम ही है जो हमारे जॉय का सोर्स है। दैट इज स्पिरिचुअलिटी। दैट इज ट्रू। हम यस। आपने मुझे वो आंसर बहुत अच्छा दिया। आई रियली लाइक इट। मैं आपसे जब पूछा कि आप कब से साधना कर रहे हैं? आप कब से स्पिरिचुअलिटी में हैं? आपने बोला कि स्पिरिचुअलिटी की तो कोई उम्र ही नहीं होती। तो आप आपका जब बर्थ हुआ था तभी दीक्षा हो गई थी। आप बता रहे थे। जी। कैसे? मेरे बर्थ के कुछ दिनों में जब मैं मेरे गुरु महाराज से मिली थी तभी उन्होंने
(04:28) दीक्षा दी थी। और उसके बाद में धीरे-धीरे चीजों मैं प्रैक्टिस करती गई। मुझे पता नहीं था मेडिटेशन क्या होता है। वर्ड इतना बड़ा वर्ड है बट आई यूज्ड टू मेडिटेट हम जैसे कि हम बहुत सारी चीज डेली में करते हैं। हमें उसका डेफिनेशन हमें उसका वर्ड या किस लैंग्वेज में उसको क्या बोलते हैं पता नहीं है। बट वी डू इट। सो सिमिलरली और मेरे पास एक छोटी सी मैगजीन थी गुरु महाराज की जो वो पढ़ा करते थे और जब मुझे पढ़ना आता नहीं था उस टाइम से मैंने उसको संभाल के रखा था। कुछ-कुछ सालों में बार-बार उसे खोल के देखती थी कि क्या लिखा है इसमें। समझ में ही नहीं आ रहा है।
(05:02) हिंदी में थी। तो बहुत बड़े-बड़े वर्ड्स थे। ठीक है? फिर उसको रख देती थी। फिर कुछ टाइम बाद पढ़ती थी। तब पढ़ना सीख लिया। तब थोड़े बहुत अक्षर पढ़ पा रही थी। ऐसे करके कुछ-कुछ साल में उसे पढ़ती रही, देखती रही। और एक दिन पता चला कि इसमें जो चीज लिखी है वो कहीं-कहीं समझ आ रही है। हम क्या है? कुंडलिनी के बारे में, चक्रों के बारे में है। तंत्र है। तंत्र जो प्रैक्टिकल जो हम प्रैक्टिस कर रहे हैं वो तब समझ में अच्छा ये तो मैं प्रैक्टिस करती हूं। यह उसी बारे में है। फिर कुछ टाइम बाद जब उस मैगजीन को फिर से वो बुक को फिर से खोला तो फिर नई चीज समझ में आने
(05:36) लगी। जैसे अब आपकी बचपन की जो बुक है जो आपने बहुत साल पहले पढ़ी हो फिर से आप खोले और पढ़ो तो बदल चुका है। उसका जो अर्थ है वो बदल गया। एक बुक आज आप पढ़ेंगे एक साल बाद फिर से पढ़ेंगे। आपको नई चीज समझ में आएगी। क्या बदला? हम वर्ड्स वही है। सेंटेंसेस वही है। हम बदला है आपकी समझ। तो हमारी जब समझ हमारी जो सोचने की शक्ति बदलती रहती है। हम नई-नई चीज समझते हैं। देखने का नजरिया बदल जाता है। देखने का नजरिया बदल जाता है। और फिर बहुत बाद में जब कुंडलिनी की दीक्षा हुई मेरी तो उस टाइम पे गुरु महाराज भी दूसरे गुरु जी से हुई। गुरु एक नहीं होते।
(06:13) गुरु देखिए मेरे एक गुरु है जो है भगवान शिव। जय जय भोले। जय भोले। तो वो मेरे प्रिय गुरु है। वो तो इंटरनल गुरु सभी के गुरु है ना वो। तो राइट बट धरती में जब जैसे हमारे हम स्कूल जाते हैं तो हमारे एक क्लास टीचर होते हैं। वो हमारे एक क्लास टीचर है। बाकी सब्जेक्ट सिखाने के लिए बहुत सारे टीचर्स होते हैं। वैसे ही अगर मैं लोगों को कुछ सिखा रही हूं तो मुझे भी चीजें आनी चाहिए। अगर मुझे आनी चाहिए तो मैं सीखूंगी और सीखने के लिए बहुत सारे गुरुओं के पास जाके बहुत सारी चीजें सीखनी पड़ी। तो इसलिए बहुत सारे गुरु है। तो जब मैंने कुंडलिनी की दीक्षा
(06:48) ली तब मुझे पता चला कि जो मैं ऑलरेडी प्रैक्टिस कर रही थी जो उस बुक में लिखा था बस इसी के स्टेप्स का फॉर्मेशन थोड़ा सा डिफरेंट है। प्रैक्टिससेस वही है। कुंडलिनी को जी कुंडलिनी की दीक्षा लेने का मतलब क्या होता है? वो सिखाते हैं। दीक्षा का मतलब क्या है? आपका नया जन्म। आज नई शुरुआत। एक रास्ता जो आपने चुना है आज उस पर चलने का पहला कदम है। तो दीक्षा में आपको यह सिखाते हैं कि किस चीज की दीक्षा ले रहे हैं आप उस बारे में पहले आपको बताते हैं और वो रास्ता कैसा है, कितना मुश्किल है, कितना सरल है। पहले आपको उससे अवगत कराते हैं। अब देखते हैं
(07:24) कि आप रेडी हो क्या उस दीक्षा के लिए? हम फिर उसके बाद में आपको प्रोसेस सिखाते हैं। प्रोसेस मतलब सिर्फ यह थ्यरेटिकल नहीं जो बुक में हम पढ़ते हैं। बुक में अगर आप सिर्फ कुंडलिनी तंत्र की दीक्षा की बात कर रहे हैं तो बुक में या जो हम बात कर रहे हैं डिस्कशन में जो ऑनलाइन में कुछ नहीं है वो। हम तंत्र और कुंडलिनी बहुत गुढ़ विद्या है। हम तो ये जो गुढ़ विद्या की दीक्षा होती है बहुत कम लोगों को मिलती है। अगर जो उसके लिए रेडी है। राइट? बहुत इंटेंस प्रैक्टिस है और फिर आपको प्राण को कैसे कंट्रोल करना है? आपको मन को कैसे नियंत्रण करना है?
(08:01) आपकी जो सोच है उसको कैसे आपको शिफ्ट करना है? आपके जो प्राण है उसको डायरेक्शन कैसे देना है। आप वो सीखते हैं। फिर आपकी साधना शुरू होती है। तो दीक्षा वो है। कुंडलिनी के बारे में जैसे आप बता रहे हो सब बताते हैं कि सबसे मुश्किल क्या है और सरल क्या है? क्या सबसे मुश्किल है? व्हाट इज द मोस्ट डिफिकल्ट पार्ट अबाउट कुंडलिनी? देखिए, जब आप साधना करते हैं, तो सबसे मुश्किल जो आपका शत्रु है, हां। वही आपका सबसे अच्छा मित्र है। वह है मन। जब आप साधना करने बिगिन कर रहे हैं, तो वही शत्रु बनके आपके सामने खड़े होता है। क्योंकि मन क्या है? मन है थॉट्स। हर जगह
(08:38) भटक रहे हैं। उसको कैसे नियंत्रण लाना है? फर्स्ट जो सबसे डिफिकल्ट स्टेप आती है साधना में वो यह है। थॉट्स को कंट्रोल करना। थॉट्स को कंट्रोल करना। कुंडलिनी स्पेशल क्यों है? मतलब व्हाई अक्सर लोग जब बोलते हैं कि कुंडलिनी हमें एक्टिवेट करनी है। कैसे कुंडलिनी को समझ सकते हैं? क्या होता है कुंडलिनी? मैं स्टार्ट करूंगी यही बोलने से कि जो कुंडलिनी है, कुंडलिनी तंत्र वो बहुत गुण विद्या है। बहुत रहस्यमयी है, बहुत सीक्रेटिव है। पर रहस्यमय मैं इसलिए नहीं बोल रही कि आप रहस्य मान के उसे छोड़ दें। क्योंकि कई बार रहस्य का मतलब यह होता है
(09:17) कि यह हमें ना जानने वाली चीज है। हम पर कुंडलिनी आपको जानने वाली चीज है। अगर एक चीज है जो आपको जाननी चाहिए आपके लाइफ में तो वो यही है कि कुंडलिनी क्या है? क्योंकि कुंडलिनी एक ऐसी ऊर्जा है जो आप ही है। आप ही की ऊर्जा है। कुंडलिनी ही समस्त संसार की संरचना की रचना की ऊर्जा है। सबका स्त्रोत है। जब यह कुंडलिनी ऊर्जा बहिर्मुखी है। अगर बाहर की तरह प्रवाहित है हो रही है। बाहर के डायरेक्शन में तो पूरे समस्त संसार की रचना करती है। एंटायर यूनिवर्स यू कुड से और योर स्पेसिफिक वर्ल्ड जो आपने आपके आसपास बनाई है। आपकी सोच से जो मैनिफेस्ट हुई है। तो
(09:58) अगर कुंडलिनी बाहर है तो पूरे जगत का निर्माण करेगी। पर जिस दिन वह कुंडलिनी अंदर अंतर्मुखी हुई खुद को देखने लगी उस दिन वह जग जाएगी। उस दिन वह आपको जगा देगी। तो कुंडलिनी एक बीज की तरह है। जब बीज को आप बोते हैं जमीन के नीचे तो आपको नहीं पता कि उसमें कितना पोटेंशियल है। वो कितना बड़ा पेड़ बन सकता है। उसमें कितने फल फूल लगेंगे। कुछ नहीं पता आपको। बस वो एक छोटा सा बीज है अभी जो अंकुरित नहीं हुआ है और वो धरती के नीचे है वही कुंडलिनी है। इसलिए कहते हैं कुंडलिनी सो रही है। कुंडलिनी हमारे शरीर में जो मेरुदंड है स्पाइनल कॉर्ड स्पाइनल कॉर्ड
(10:41) के बेस में मेरुदंड के मूल में मूल आधार में एक सर्पिनी की तरह कुंडलिनी मार के कुंडली मार के मतलब ऐसे रोटेट हो के गोल होके सो रही है। सो रही है। इसलिए उसे पता नहीं है कि वो कौन है। वो जाग सकती है और वो कितना उसका पोटेंशियल है उसे वो पता नहीं है। इसीलिए कहा है वो बीज है। वो सोती हुई वो सर पे नहीं है। तो सबको जानना चाहिए इसके बारे में। सो हम इसको ये कह रहे हैं कि ऐसी एनर्जी जो इस वक्त सोई हुई है और हमें उसको एक्टिवेट करना है ताकि हमें अपने बारे में ही अपनी-अपनी एकिस्टेंस का सच पता लग सके। कुछ ऐसा हमें अपना सच पता लग सके। या यू आर देयर
(11:23) ऑलमोस्ट ओके हमें खुद का बोध हो सके कि हम क्या हैं। राइट जब आपने दीक्षा हासिल करी कुंडलिनी की तब आपने वो साधनाएं करना शुरू किया और हम आपने कुंडलिनी को एक्टिवेट किया। ऐसा कह सकते हैं? देखिए मैं आपको यह बताती हूं कि जो कुंडलिनी है अगर उसके बारे में जानने से पहले यह जान लीजिए कि उसको इतना छुपा के क्यों रखते हैं ओके क्योंकि वो बहुत जन्मों के साधना का परिणाम है कुंडलिनी का जागरण तो जब आप यह प्रश्न पूछ रहे हैं कि कुंडलिनी आपने जगाया जब आपकी दीक्षा हुई तो उस टाइम एक्सपीरियंस हो गए जाग गई तब से साधना
(12:08) शुरू ऐसा नहीं होता है कुंडलिनी जागना इसका मतलब यह है कि आप बहुत बहुत जन्मों से साधना कर रहे हैं और उसकी साधना की परिपक्वता से आपको साधना में जो भी क्या बोले साइंस या जो भी चेंजेस है या कुंडलिनी का जागरण ये सब के पास आप पहुंचते हैं। हम तो जब मेरी साधना बहुत साल हो गए अभी तो पर जब दीक्षा हुई थी तब पहले से जो मैं प्रैक्टिस कर रही थी मैंने उसके स्टेप्स में चेंजेस किए बस जैसे कि जो फर्स्ट में मैं साधना करने के लिए स्टार्ट कर रही हूं तो जो मुद्रा है उसको बाद में करते हुए आसन को पहले करते हुए बस थोड़े वो चेंजेस बाकी वही है
(12:50) पर कुंडली की दीक्षा भी बार-बार होती है ओके जैसे कि अगर मैं कभी किसी को दीक्षा दे रही हूं तो एक बार उनकी सिर्फ बिगिनिंग की दीक्षा है और उसके पहले भी प्रिपरेटरी चीज है कि उनके बॉडी को वह प्रिपेयर कर सके क्योंकि बहुत बार सुनने में आया होगा आपके भी कि यह जो तंत्र में कुंडलिनी में जाते हैं उनका माइंड स्टेबलाइज स्टेबल नहीं रहता है। थोड़े डिस्टर्ब हो चुके होते हैं। दैट इज़ द सेम रीज़न। इफ यू आर नॉट प्रिपेयरिंग फॉर इट वेल। देन यू कैन नॉट हैंडल इट। सो कुंडलिनी की दीक्षा भी बहुत बार होती है। पहले प्रिपरेटरी है। फिर उसके बाद में आप साधना स्टार्ट करते हैं।
(13:28) और जैसे-जैसे आप आगे बढ़ रहे हैं साधना में तो चेंजेस आते हैं। आपको मुद्रा चेंज करनी पड़ती है। आसन चेंज करेंगे, मंत्र चेंज करेंगे, प्राणायाम चेंज करेंगे। राइट? सो इस पे जब हम बोल रहे हैं कि कुंडलिनी को एक्टिवेट करना है। सो इज इट कि मैंने एक जो जैसे आपने बताया कि पहले प्रिपेयर किया फिर हमने एक्टिवेट किया। तो इसको हम ये कह रहे हैं कि एक बार जब कुंडलिनी एक्टिवेट हो जाती है तो इट इज परमानेंट। इट इज परमानेंट। फिर वो एक्टिवेट हो चुकी है। ऐसा नहीं है कि वो फिर सो जाती है। नहीं नहीं ऐसा नहीं है फिर सो जाती है। और ऐसा नहीं है कि बीच रास्ते में अटक जाती
(14:01) है। ये सब कुछ नहीं है। बट फिर आप बोलते रहे कि बार-बार करना पड़ता है कुंडलिनी की प्रैक्टिस। वो जो जो साधनाएं वो प्रैक्टिससेस बार-बार कंटिन्यू रखनी पड़ती। साधना में क्या है? देखिए जो कुंडलिनी है अगर जग भी गई मूलाधार में है तो साधना में जो प्रैक्टिस है वह यही है कि आप उसे डायरेक्शन देते हैं एनर्जी को आप एनर्जी को डायरेक्शन देके जिस भी चक्र है उधर तक लेके जा रहे हैं और वहां पे रोक के फिर साधना कर रहे हैं पर जिस दिन या जिस भी क्षण आप साधना बंद करते हैं तो फिर से नीचे आ जाती है राइट राइट ओके अब मुझे वो आईडिया समझ आ
(14:37) रहा है कि हमारी बॉडी के सात चक्र हैं तो तो आप कह रहे हो जब कुंडलिनी एक्टिवेट होती है तो वो सबसे बेस वाले चक्र में होगी। जब हम प्रैक्टिससेस अपनी और इंटेंस कर रहे हैं तो वो कुंडलिनी ऊपर वाले चक्रों में आ रही है। एंड अल्टीमेट गोल वही है कि मैं हम कुंडलिनी को अपने सहस्त्रारण सहस्त्र सहस्त्र थाउजेंड पेटल्ड लोटस। तो ये जो चक्र है उसे हम लोटस के सिंबॉलिज्म से देखते हैं क्योंकि लोटस के पेटल्स हैं। तो एनर्जी के जो मंत्र है वो मंत्र की क्या पोटेंसी है? हम उस हिसाब से उसके पेटल्स डिजाइन होते हैं। तो सहस्त्रार में जैसे जो नियरेस्ट ऑर्गन
(15:12) है यहां पे ब्रेन है। ब्रेन के कितने सारे डायरेक्शन में नाड़ियां हैं। हम हम तो इसीलिए उसमें सहस्त्रार है। दैट्स सो नाइस। राइट? तो आइडियली तो दिस यही है जो लाइफ का पर्पस है कि हम अपनी कुंडलिनी को अपने सहस्त्रार चक्र तक लेकर जाएं। राइट? लाइफ का पर्पस ये है खुद को जानना। खुद को जगाना। अब खुद कौन हैं हम? जैसे जो मेरी बुक से अगर आप देखेंगे कश्मीर शविज्म पे लिखी है तो लेट्स टॉक अबाउट कश्मीर शविज्म। कश्मीर शविज्म में क्या है लाइफ का पर्पस? शिव को जानना। अब शिव कौन है? खुद ही। अगर हम खुद शिव है तो एक दिन ऐसा आता है जब हम जाग जाते हैं
(15:49) और हमें याद आता है कि ये तो हम ही हैं। हम तो शिव हम कैसे बनते हैं? ये जो कुंडलिनी शक्ति है हम इसे हम सहस्त्रार में ले जाते हैं और सहस्त्रार में वास है शिव का। तो द यूनियन ऑफ शिवा एंड शक्ति दैट इज द पर्पस ये कितना अच्छा थॉट है कि वो शिवा है और वो शक्ति जो है वो वहां पर जा रही है पर सिर्फ थॉट से ही काम नहीं चलेगा ना हम करना भी तो पड़ेगा जी राइट वही कोशिश कर रहे हैं दैट्स व्हाट वी आर ट्राइंग टू डू हम ओके सो इसका मतलब ये है कि अब जो मुझे अभी तक जहां तक मैं बेस एक लेकर आया हूं कि आप बचपन से इसकी प्रैक्टिससेस कर रहे थे साधना की और जब आपकी कुंडलिनी की
(16:33) दीक्षा हुई उसके बाद आपने अपनी प्रोसेससेस में कुछ जो पहले कर रहे थे बाद में आप मान एक मुद्रा पहले कर रहे थे अब वो पहले कर ली तो कुछ प्रोसेस सेम ही था बट सीक्वेंसिंग आपने कहीं ना कहीं चेंज करी और उसके बाद जब हम बोलते कि कुंडलिनी एक्टिवेट हो रही है तो आप यह बोल रहे हैं कि वो कुंडलिनी हमारे कुंडलिनी को हम डायरेक्शन दे रहे हैं। यह पता कैसे चलता है कि जो कुंडलिनी नीचे से शुरू हो रही है। अब वो हार्ट चक्र तक पहुंच गई। यह कैसे पता चलेगा? ओके। तो हम चक्रों की बात करेंगे। चक्र के पहले मैं आपको एक फाउंडेशन क्लियर करने के लिए
(17:06) समझाती हूं कि हम डायरेक्शन कैसे देते हैं हम चक्रों के थ्रू। तो डायरेक्शन के लिए सबसे पहले जो साधना में आपको फोकस करना होता है वो है जो कोश है आपकी जो बॉडी बनी है वो लेयर से बनी है। जो सत्य है वह छुपा हुआ है। और जो इग्नोरेंस की लेयर है उसको हटाते हैं। अब उसको कैसे हटाएंगे? प्राण के थ्रू। प्राण दो मुख्य प्राण हैं। प्राण अपान। उसमें हम पढ़ने के बाद में जब प्रैक्टिस करते हैं, डिटेल में जाते हैं तो पता चलता है कि पांच प्राण हैं जिसे हमें कंट्रोल करना है। तो पांच प्राण में अगर मैं बहुत बेसिक वर्ड्स में समझाऊं तो फर्स्ट है अ प्राणवायु। यह वायु है। पर
(17:49) वायु का मतलब यह नहीं है कि सब सिर्फ सांस की बात हो रही है। प्राण ऊर्जा। ठीक है? तो जब मैं वायु कहूं तब भी आप समझिए कि मैं एनर्जी की ही बात कर रही हूं। कुंडलिनी से ही रिलेटेड है। तो फर्स्ट है प्राण वायु जिसमें हम जो शरीर में हमको प्राण लेना है जो हमें एनर्जी चाहिए जो थॉट्स आइडियाज और जो भी हमको एक पर्सनालिटी को आइडेंटिटी को हम बनाए रखने के लिए इस शरीर को जिंदा रखने के लिए जो भी हमें जरूरत है वह बाहर से खींचने की जो शक्ति है वह है प्राणवायु या प्राण ऊर्जा। फिर आती है अपान। अपान मतलब छोड़ना। जिसे हमें जिसकी जरूरत नहीं है। जैसे कि कार्बन
(18:28) डाइऑक्साइड कि हम एक्सेल कर रहे हैं। अब कितनी बार हम इन्हेल कर सकते हैं? एक ही बार इन्हेल के बाद एग्ेल तो आएगा। तो जो छोड़ने की शक्ति है इसमें हो सकता है कि प्राण या ऐसे आइडियाज, थॉट्स, मान्यताएं, बंधन जो भी है जो हमें नहीं चाहिए आगे बढ़ने के लिए। वो छोड़ने की शक्ति। फिर है व्याना जो एक्सपेंशन कि जब हमने सब चीज छोड़ दिया है जो गलत है जो हमें रोक रहा था। वह छोड़ने के बाद हम थोड़े लाइट हो चुके हैं। हम अभी आगे बढ़ रहे हैं साधना में। तो हमारा एक्सपेंशन होता है। विवेक जो शक्ति है इंटेलेक्ट वो बढ़ता है। अब हम समझने लग गए हैं कि ओके क्या सत्य है और
(19:06) क्या झूठ है। क्या ज्ञान है क्या अज्ञान है। उसके बाद में आता है उदान। उदान मतलब जो जो शक्ति है अब हम उसे डायरेक्शन दे रहे हैं। ऊपर उठाना अब चालू किया है कुंडलिनी का। तो जब भी एनर्जी का अपसर्च ऊपर के डायरेक्शन में होता है हमारे बॉडी में वो एग्जिस्ट कर रहा है उदान वायु से। उसके बाद में है समाना कि अब जाके जब शक्ति सहस्त्रार में पहुंच चुकी है और फिर शिव के साथ जब यूनियन हो रहा है तो दो जो अब एक बन गए हैं डलिटी अब सिंगल हो गए हैं जो द्वैत से अद्वैत तक हम आ चुके हैं। गेय ज्ञान और ज्ञाता अब तीन नहीं रहते हुए एक
(19:53) बन गए हैं। जब हमारे पास ड्यूलिटी अंधकार या रोशनी ऐसे दो कांसेप्ट अच्छा या बुरा ऐसे दो कांसेप्ट नहीं होते वह सिर्फ सिंगुलर एक अद्वैत में पहुंच गए हैं। वो है समाना। तो यह एनर्जी है जो पंच वायु की तरह वर्क कर रही है हमारे बॉडी में। अब इसके बाद में हम आते हैं पंचकोषों की तरफ। फर्स्ट है अन्नमय कोष। जो हम बॉडी देखते हैं लोगों की जो फिजिकल अपीयरेंस है जिस जिसे पोषण की जरूरत पड़ती है बड़े होने के लिए और इस अर्थ पे एकिस्ट करने के लिए यह सब अन्नमय कोष है। हम जब इसको भेजते हैं जब हम यह समझ पाते हैं कि हम सिर्फ इतने ही नहीं है। हम इतने सीमित नहीं है और भी
(20:38) कुछ है। तब हम पहुंचते हैं प्राणमय कोष में जो हम सांस ले रहे हैं जो हमें इस शरीर के साथ में जोड़े रख रहा है जब तक हमारा समय है तब तक वो है प्राणमय कोष। उसके बाद में हम आते हैं मनोमय कोष। अब यह दिखता नहीं है। यह हम देख के नहीं बता सकते कि मनो मनोमय कोश किधर है या एग्जिस्ट कर रहा है नहीं कर रहा है। बट हम अनुभव कर सकते हैं हमारे अंदर। हमारी सोच चल रही है। जो विचार है वह आ रहे हैं। इमोशंस आ रहे जा रहे हैं। वेव्स की तरह वह आते हैं मनोमय कोष से। तो ये बॉडी से सटल बॉडी की तरफ हम जा रहे हैं। तो जब मनोमय कोष को हम भेदते हैं। फिर आता है
(21:19) विज्ञानमय कोष जो है रोशनी की दुनिया। एक जगत जहां पर सिर्फ सत्य एक्सिस्ट कर रहा है। पर आप भी एक्सिस्ट कर रहे हैं। अभी अभी आप है और सत्य है। ड्यूलिटी अभी भी कहीं है। पर आप समझ गए हैं कि मैं कौन हूं और मुझे कैसे आगे बढ़ना है। साधना करते हुए जब हम बात कर रहे हैं सिर्फ कुंडलिनी साधना की। उसको भेद के आप पहुंचते हैं आनंदमय कोश में। जहां पर सिर्फ सत्य है। जहां पर आपकी और सत्य के बीच में जो डिफरेंस है वह खत्म हो जाता है। और तब जो शक्ति है वो शिव के साथ यूनियन हो जाता है उनका। अब यह जो मैं बात कर रही हूं एक-एक चक्र को भेदना यह अपने आप होता है। कब
(22:01) होता है? जब आप साधना करते हैं कुंडलिनी की चक्रों के थ्रू। तो जब आप यह पूछ रहे हैं, आपके क्वेश्चन भी फिर से आते हैं कि चक्रों का कैसे पता चले कि कौन सा चक्र एक्टिवेट हो रहा है, कौन सा नहीं? तो हम जब शक्ति एकदम मूलाधार में है, सो रही है तब हम रहेंगे आनंदमय कोष में तब हमें प्राणों के बारे में भी प्राणों के कंट्रोल के बारे में कुछ नहीं पता है। एकदम बेसिक में हम स्टार्ट कर रहे हैं। और जब हम जगाते हैं साधना के थ्रू शक्ति को तब साधना सिर्फ होनी चाहिए मूलाधार में। और जो ऑनलाइन सुन के भी यह साधना स्टार्ट कर रहे हैं किसी भी चक्कर में फोकस के
(22:42) सिर्फ फोकस की बात नहीं कर रही हूं मैं अगर वह साधना प्रैक्टिस कर रहे हैं कहीं बुक से पढ़ के सो दैट इज हाइली डेंजरस एंड वन शुड नॉट डू दैट तो जब दीक्षा लेते हैं तो साधना स्टार्ट होती है मूलाधार से जब मूलाधार में साधना करके एक टाइम हो चुका है और धीरे-धीरे जो आपका अज्ञान है उसके बादल जा रहे हैं जो सूर्य की किरण आप पर पड़ रही है जो आपको अब आसमान दिख रहा है खाली जब आपको बहुत शांति महसूस हो रही है तब आप समझ सकते हैं कि मूलाधार अब धीरे-धीरे एक्टिवेट होने लगा है। हम तो आपका जो भय है जो फियर है जिसका कोई मीनिंग नहीं है। बस किसी भी चीजों से डर
(23:21) लग रहा है वो खत्म हो जाता है। वो उसकी जड़ से जो भय है वह चले जाता है। उसके बाद में जो बहुत छोटे-मोटे डिस्ट्रेस है, इमोशनल आपके पास बैगेजेस है, वह चले जाएंगे। इतना जो ओवरथिंकिंग करना कि अब मैं क्या करूं? आगे क्या होगा? मुझे यह कैसे करना है? वह सब थॉट्स नहीं आएंगे। तो जो एक मेंटल क्लेरिटी है वो अपने आप आने लगेगी। लाइफ में जो आप डिसीजन ले रहे हैं तो आपको पता होगा कि यह सही है यह गलत है। यह मेरे लिए सही है। यह समाज के लिए सही है। ये जो क्लेरिटी है ये खुद आने लग जाती है। सो इसका मतलब यह भी एक सब्जेक्टिव हुआ कि आपकी साधना कितनी इंटेंस है और आपकी साधना
(24:06) में कितना सीरियसनेस है। उसी के हिसाब से कोई जो कुंडलिनी होगी वह मूलाधार से अह उसके अगले चक्र की तरफ जाएगी। राइट? क्योंकि ऐसा हो सकता है कि किसी की किसी की कुंडलिनी मूलाधार से अगले चक्र में एक महीने में चली गई। हो सकता है किसी एक साल तक ना जाए। पॉसिबल हो सकता है किसी के एक जन्म में ना जाए। मूलाधार भी एक जन्म में नहीं हो पाए। ऐसा भी हो सकता है। हो सकता है। हो सकता है। तो इसमें बुरा मानने की या अपने आप को बहुत पीछे समझने की कोसने की जरूरत नहीं करते हुए साधना करनी चाहिए। क्योंकि एक एक स्टोरी है बहुत छोटी सी है। तो एक नारद मुनि जो भगवानों के ऋषि हुआ
(24:46) करते थे। वो जंगल से जा रहे थे। अब वहां पर उन्हें एक पहले एक आदमी मिलता है जो बहुत नाच रहा है, खुश है और वो भगवान को देखता है जब नारद ऋषि आ रहे हैं पूछते हैं कि अच्छा भगवान आप कहां जा रहे हैं? वो बताते हैं कि मैं स्वर्ग की तरफ जा रहा हूं। तो पूछते हैं ऋषि से कि आप यह पूछ के बताइएगा जब स्वर्ग में आप जाएंगे भगवान से मिलेंगे तो आप पूछ के बताइएगा कि मुझे मोक्ष कब मिलेगा? बोलते ठीक है पूछ के बताऊंगा जब आऊंगा तब फिर वह और आगे बढ़ते हैं तो वहां पर एक साधु बैठे हैं जो साधना कर रहे हैं ध्यान कर रहे हैं वो जब नारद मुनि नारद मुनि को देखते हैं वो भी
(25:26) यही सवाल पूछते हैं कि आप कहां जा रहे हैं अच्छा जा रहे हैं तो मुझे पूछ के बताइएगा कि मुझे मोक्ष कब मिलेगा तो नारद ऋषि बोलते हैं ठीक है बताता हूं वो आगे बढ़ गए फिर कुछ महीने साल बीते उनका फिर से आना हुआ उसी जंगल में फिर वो पहला आदमी मिला जो पागलों की तरह नाच रहा है, खुश है। और फिर वही दूसरा आदमी भी है जो बहुत साधना कर रहे हैं। तो जब वो उल्टे वापस रास्ते आ रहे थे तो पहले उनको यह आदमी मिले जो बैठ के साधना कर रहे थे। उन्होंने पूछा कि अच्छा भगवान से मिले तो आपको क्या बताया? तो नारद मुनि कहते हैं कि मुझे बताया कि आपके तीन जन्म लगेंगे फिर आपको मोक्ष मिल
(26:06) जाएगा। तो बहुत दुखी हो गए कि अरे भाई तीन जन्म और मतलब एक जन्म काफी नहीं है। तीन और बचे हैं। तो बोला कि हां मुझे तो अब यही बताया है। तो बहुत दुखी है। उन्होंने साधना तो रोक दी। बहुत बैठ के दुखी हो रहे हैं। रो रहे हैं। नारद ऋषि आगे बढ़े। तो फिर ये आदमी है जो नाच रहा है। वो रोकता है कि अरे रुकिए रुकिए। बताइए भगवान ने क्या बताया? तो नारद मुनि बोलते हैं कि हां मतलब बताया तो है पर उन्होंने यह बोला कि जो पेड़ है तुम्हारे पीछे इतना बड़ा इमली का पेड़ या बरगद का पेड़ जो भी है उस पेड़ में जितने पत्ते हैं उतने जन्म लगेंगे और फिर मोक्ष मिलेगा और यह आदमी और
(26:48) नाचने लगा और कूदने लगा तो ऋषि भी बड़े अचंभित हो गए। उन्होंने पूछा कि अरे जब पहले मैं जिस आदमी से मिला तीन जन्म में बोला तो वो तो रो रहा है। उसकी आवाज तो मुझे यहां तक आ रही है रोने की। और तुम इतने खुश क्यों हो रहे हो? तो बोलता है कि अच्छा इसका मतलब ये है कि मेरे लिए मोक्ष पॉसिबल है। मैं मिल मिल सकता है मुझे मोक्ष। ठीक है इतने टाइम लगेगा। पर मुझे भी मिल सकता है। तब वहां पे यह कथा आती है कि भगवान ने वो सुना और भगवान ने उसी टाइम बोला कि तुम्हें मैं अभी मोक्ष देता हूं। तो डिसपॉइंट मत होना कभी भी कि जब भी साधना कर रहे हैं और ऐसा लगे कि
(27:28) अभी बहुत बाकी है। मेरी कुछ प्रगति नहीं हो रही है। जल्दी रिजल्ट नहीं मिल रहे हैं। तो इस आदमी को याद करना कि जो पागलों की तरह नाच रहा था और उसे उसे क्षण मोक्ष मिल गया। आई फील कि जब भी हम भगवान से कनेक्ट करते हैं स्पिरिचुअलिटी में स्पेशली जब हम किसी वजह से करते हैं सो वह एक कहीं ना कहीं मुझे लगता है कि एक आपका मन कहीं ना कहीं करप्ट है कि मुझे कुछ मिल जाएगा। यह हो जाएगा तो उसके लिए मैं कर रहा हूं। पर अगर यह मुझे लगता है इफ दिस बिकम्स अब एक एक वे ऑफ़ लिविंग बनता है आज के लिए। इस इस क्षण के लिए तो आप बिना किसी रिजल्ट के
(28:15) लिए कर रहे हो और फिर एक साल एक जन 100 जन आप सोचोगे नहीं इस सेकंड में जो मैं फील कर रहा हूं वही इतना पावरफुल है दैट आई एम जस्ट लॉस्ट इन द प्रोसेस आई थिंक इट्स अ ब्यूटीफुल थॉट टू थिंक अबाउट अब्सोलुटली हम जब इसके बारे में मैंने पढ़ रहा था जो कुंडलिनी है हम इसको को स्नेक्स की तरह क्यों रिप्रेजेंट किया जाता है? देखिए कुंडली साधना अलग-अलग परंपरा में अलग तरह से प्रैक्टिस की जाती है। ओके? तो जब आपको जिस परंपरा से आप दीक्षा ले रहे हैं अगर आपके गुरु ने आपको बताया है कि कुंडलिनी को सिर्फ स्नेक की तरह देखो तो वो उस पे डिपेंड करता है। कहीं पे
(29:01) सिर्फ एनर्जी की तरह देखते हैं। जैसे कि यह जो अक्षुरिका उपनिषद में जो फ्रंट कवर में है वो मैं आपको बताई थी ये कुंडलिनी शक्ति है। सो ब्यूटीफुल। हम सो यह जो शक्ति है हम इसको आइकोनोग्राफी के लिए उसमें जो उन्होंने मुद्रा आसन यह सब रिप्रेजेंट किया है। तो यहां पे वही शक्ति को देवी के जैसे दिखाया गया है। हम तो कई बार शक्ति को सर्पिणी की तरह दिखाते हैं। कई बार सिर्फ ऊर्जा की तरह देखते हैं। जैसे कश्मीर शैविज्म में या फिर शाक्त सांख्य की जो बहुत जो समयाचार में दिव्याचार में अगर आप जाएंगे तो सिर्फ एनर्जी है। उनका फॉर्म नहीं है
(29:42) हम तो एक वो है और दूसरा जो जहां से यह सर्पिनी का या सर्प का आईडिया आया है हम वो आया है भुजंग दीक्षा से हम जब आपकी दीक्षा होती है इस शरीर के साथ अगर आप दीक्षा ले रहे हैं तो वो एक मानव गुरु चाहिए आपको एकिस्टिंग लाइव गुरु आपके सामने होना चाहिए जो आपको गाइड कर सके पर आप साधना करते हो आगे बढ़ते हो तो कई बार ऐसा होता है आपको मंत्र खुद रिवील होते हैं। आपके एक्सपीरियंसेस नए-नए आते हैं। जैसे हम जो ऋषियों की बात करते हैं ऋषि वेद द सीियर जिनको मंत्र खुद सामने दिखे। मंत्र के दृष्टा है ऋषि यह सब कुंडलिनी एक्टिवेशन के बाद
(30:26) उन्होंने मंत्र बनाए नहीं है तो वैसे ही जब कुंडलिनी की साधना करते हैं तो बहुत सारे एक्सपीरियंसेस होते हैं उसमें से जो एक एक्सपीरियंस है जिसको सेल्फ दीक्षा भी कहा जाता है वो एक दीक्षा का नाम है भुजंग जहां पे जो मेरुदंड है स्पाइनल कॉर्ड है वहां पे मूवमेंट फील होती है लोगों को तो जो मूवमेंट डाउन से अप फील होती है सो दे फील लाइक देयर इज़ एनर्जी व्हिच दे कैन फील इट इज़ फ्लोइंग अप। दे कैन सेंस इट। तो जब वो होता है उसे भुजंग दीक्षा के नाम से बोलते हैं। वहां से वो टर्म आया है कि कुंडलिनी एक सर्प है और वो उनकी गति नीचे से ऊपर होती है।
(31:05) मैं यह सोच रहा था कि सांप क्यों दिया? व्हाई स्नेक? बिकॉज़ दे फेल्ट लाइक हाउ द मोमेंट ऑफ़ एनर्जी इज हाउ इट इज़ गोइंग फ्रॉम डाउन टू अप दे सेंसड इट। और कुछ लोगों को लगता है कि इट इज़ लाइक इंसेक्ट। सो वो ऐसे हो सकता है सेंस ऐसा है कि जैसे सांप चलता है ऐसा ऐसा हो सकता है ऐसा भी हो सकता है कुछ लोगों में उनको चक्र फील हो रहे हैं सो दे आर ओनली डूइंग द साधना फोकसिंग ऑन द चक्रा और कुछ लोगों को लग रहा है कि वो सर्प के जैसे हैं तो इसलिए वो वैसे बोलते हैं एक्सपीरियंसेस जब कुंडली जागरण होता है जैसे कुछ लोगों को एक्सपीरियंस होता है कि
(31:40) उनको आवाज सुनाई दे रही है नॉट फ्रॉम द सेंसेस ऑफ दिस इयर्स कि बाहर की एक्सटर्नल जो ग्रॉस आवाज है वो नहीं सल अंदर ही एक गूंज है जो हमारा पूरा ब्रह्मांड है वह वाइब्रेट कर रहा है कंटीन्यूसली स्पंद जो कश्मीरी टेलिविज्म में स्पंद की जब बात करते हैं स्पंद और प्रत्याभिज्ञ स्पंद यह है कि भगवान शिव वाइब्रेशन है और वही पूरे कॉस्मोस में व्याप्त है तो वो जो वाइब्रेशन है वह खुद अंदर सुनाई देने लगता है सल सेंसेस के थ्रू वह भी एक एक्सपीरियंस है कुंडलिनी जागरण का तो कुछ लोगों को वैसा एक्सपीरियंस होता है कुछ लोगों को अंदर लाइट्स दिखते
(32:18) अब लाइट हमको एक्सटर्नल जो लाइट है जैसे सन है या आर्टिफिशियल लाइट है यह सोर्स चाहिए होता है बाहर की जो मटेरियलिस्टिक वर्ल्ड है इसको देखने के लिए अगर यहां पे लाइट्स नहीं होंगे तो हमारे जो ये आइस है ग्रॉस आइस दो दो आंखें यह नहीं देख पाएगी कि यहां पे टेबल है ये माइक है पर अंदर जो आप माइंड में किसी भी ऑब्जेक्ट को देख पा रहे हो कभी सोचा है कि यह लाइट कहां से आ रहा है आपको ऑब्जेक्ट दिख कैसे रहा है माइंड में क्योंकि माइंड में अगर आप सोचिए टेबल यू कैन सी अ टेबल। यू डू नॉट सी अ लाइट फॉलिंग ऑन द टेबल। सो वेयर इज द सोर्स? तो अंदर जो मन में हम
(32:55) देखते हैं वह स्वयं का प्रकाश है। वह चेतना का प्रकाश है। अंदर जो चीज देखते हैं उसके लिए बाहर की लाइट की जरूरत नहीं है। तो यह जो एक्सपीरियंस लोग जब लाइट देख पाते हैं वो खुद का अंदर का लाइट है। कि बाहर जब अंधेरा होता है अगर कोई साधना कर रहा है बाहर बिल्कुल अंधेरा है। लाइट का कोई सोर्स नहीं है। और साधना में समाधि में जब जाते हैं तो अंदर आज्ञा चक्र में खुद एक लाइट जलने लगता है। तो वह भी एक दीक्षा है। सेल्फ दीक्षा जिसे आप कुंडलिनी जागरण का एक साइन कह सकते हैं। तो ऐसे बहुत सारे हैं। मैं अगर सारे अगर बताऊंगी साइन यहां पे तो दीक्षा के समय लोग आके
(33:35) मुझसे बोलेंगे कि हां ये ये साइन मुझे दिखे। अब हम दीक्षा के लिए रेडी है। राइट? एक जनरलाइज यह बोल सकते हैं कि ज्यादातर जितना मैंने कुंडलिनी के बारे में पढ़ा वहां पे ज्यादा लोगों ने कहा था कि हीट जरूर फील होती है। तो अब जैसे काफी अलग-अलग चीजें हैं जो किसी को भी फील हो सकती हैं। क्या कुछ ऐसी जनरलाइज चीजें हैं जो कि हम बता सकते हैं इफ हीट इज वन ऑफ़ देम कि अगर कुंडलिनी एक्टिवेट होती है तो बॉडी में हीट बहुत महसूस होती है। कुंडलिनी एक्टिवेट होती है तो आई वुड नॉट से कि तब हीट जनरेट होती है। एनी साधना यू आर डूइंग व्हिच इज रिलेटेड टू प्राण और और
(34:10) यू नो द एनर्जी का कंट्रोल दी साधना एनी इंटेंस साधना रिलेटेड टू तंत्र और यू आर चटिंग बीज मंत्र एनी शक्ति बीज मंत्र देन हीट विल बी जनरेटेड क्योंकि जो मंत्र है वो बहुत पोटेंसी के मंत्र होते हैं। तांत्रिक मंत्र की बात करें तो जब वो चैंट कर रहे हैं। अब आपकी जो मेंटल फ्रीक्वेंसी है अभी तक आप जहां पे थे उसे आप चेंज कर रहे हैं। क्रिएट इट इज़ नॉट समथिंग सुपर नेचुरल जो भी साधना कर रहे हैं तंत्र की साधना कर रहे हैं उनमें तो हीट जनरेट होती है। देन देयर आर सो मेनी वेज़ योर गुरु विल टीच कि उस हीट को कैसे हम शांत कर सकते हैं।
(34:50) सर्टन थिंग्स लाइक वेरिंग सिल्वर एंड डूइंग दिस ये सब हीट को कम करने के लिए ही है। ये क्या मुद्रा? दिस है ना? यू डू और आपने साधुओं को देखा होगा। वो फूल पहनते हैं, फूल की माला दिखाने के लिए नहीं है। उससे भी जो टेंपरेचर है बॉडी का वो कम हो जाता है। सफेद कपड़े पहनना और आपने अोरियों को देखा है। चांदी बहुत पहनते हैं। वो शांत करता है। आपने क्यों लगाया है ना? इसीलिए लगाया। इसीलिए जब हम कुंडलिनी की साधना करते हैं, शक्ति की साधना करते हैं। तो जब हीट बहुत जनरेट हो जाती है। हां। हां तो एक तो ये है जो सल एनर्जी है सल हीट है पर अगर वो इतनी ज्यादा हो जाती है तो कि
(35:30) बॉडी भी आपकी बहुत गर्म होने लग जाती है तो फिर आप इसे ऐसी चीजों को यूज़ करते हैं ये आपको महसूस कब हुआ पहली बार कि आपको बहुत हीट हो रही है और आप आपको अप्लाई करना चाहिए व्हेन डिड यू फील ये तो इट हैज़ बीन फाइव सिक्स इयर्स फ्रॉम नाउ ए इफ आई एम एक्यूरेट फाइव सिक्स इयर्स से मैं यह लगाने लगी एंड मुझे मैंने पढ़ा हुआ था जब आयुर्वेददा पढ़ रही थी तो क्या-क्या आपके बॉडी के लिए ठंडा है क्या गम है उसमें आता है बट आई यू नॉट अप्लाई इट एंड देन आई स्टार्टेड अपाइंग क्योंकि मैं जब ट्रेवलिंग ट्रेवलिंग कर रही हूं तो बहुत बार ऐसा होता है कि आप बहुत गर्म जगह पे
(36:11) ऑलरेडी हो हम तो मैं साउथ इंडिया में थी और वहां पे बहुत गर्मी थी देन आई स्टार्टेड अप्लाइंग इट एंड हेंस आई आई डू सो मेनी थिंग्स व्हिच विल मेक मी फील यू नो लिटिल काम और थोड़ा शीतल आयेदा के बहुत सारे चीजें जैसे कि मैं बहुत अभी तो साल हो गए हैं जब आई ड्रिंक दिस अर्जुन अर्जुन का जो ट्री है उसकी जो छाल है उसका पाउडर फॉर्म में दैट आई ईट और ड्रिंक एवरीडे आई वेयर सो मेनी सिल्वर थिंग्स आई वेयर वाइट ओनली जैसे आपने देखा कि मैं वाइट पहन के आई थी यहां पे कैमरा के लिए या इवेंट के लिए रिट्रीट के लिए आई वेयर शॉल व्हेन आई एम मीटिंग पीपल अदरवाइज आई डोंट इवन वेयर एनी
(36:53) कलर क्योंकि वाइट जो है वो भी बहुत आपको शांत कर देता है। हम फिर जो अघोरी काजल लगाते हैं जो भी तंत्र कर रहे हैं आप देखेंगे कि वो काजल लगा रहे हैं। जरूरी नहीं है कि वो सिर्फ वुमेन ही हो। मैन यू मीट इन इन फोटो इन वीडियोस यू मस्ट हैव सीन जो अघोरी मैन भी है वो भी बहुत काजल लगाते हैं। वो भी आपको बहुत ठंडा करता है। ओ मुझे ये नहीं पता था कि काजल का ये भी एक रीजन हो सकता है। ओके ओके। सो काजल मतलब बॉडी को ठंडा रखता है। दिस इज आईडियाज। क्योंकि जब आप हीट बहुत है तो आप आंखों में देख सकते हैं कि आइज बहुत पिंक हो जाती है, रेड हो जाती है। जब बहुत हाई
(37:32) टेंपरेचर में भी जैसा फील होता है। इट इज द सेम थिंग सेम हीट यू फील। यू वोंट रियलाइज व्हाट टेंपरेचर पीपल आर फीलिंग अराउंड यू। व्हेन यू सी देम देन यू रियलाइज अरे दे आर द वैरी कामर इन दिस टेंपरेचर एंड व्हाई एम आई फीलिंग सो हॉट इन हियर। राइट राइट। तो जब आंखों में काजल लगाते तो आंखें ठंडी होती है। जिसकी कुंडलिनी एक्टिवेट हो जाती है हम उनकी पर जैसे आइज का तो हमने जो डिस्कस कर लिया जिसकी कुंडलिनी एक्टिवेट हो जाती है उनके अंदर खुद में क्या चेंज आने लग जाता है? हां जैसे मैं आपको बता रही थी उसी को कंटिन्यू कर सकते हैं। जैसे मूलाधार में
(38:02) मैंने आपको बताया था कि जो फियर है जो इमोशनल टर्मल है वो चले जाता है। तो दैट हैज़ टू बी देयर। उसका ध्यान रखना है कि यह हो रहा है क्या? देन देयर विल बी जस्ट हायर वी गो मूलाधार से सेकंड चक्र में जाएंगे। सेकंड चक्र में यू विल हैव क्रिएटिविटी कि आपके पास बहुत सारे आइडियाज आने लग जाएंगे और क्रिएटिविटी इतनी आएगी कि यू विल यू कैन नॉट स्टॉप योरसेल्फ फ्रॉम क्रिएटिंग थिंग्स। बहुत सारे आइडियाज आएंगे। हो सकता है कि आप क्रिएटिव पर्सन नहीं हो अभी तक। हाउ वुड यू नो दैट क्रिएटिविटी इज फ्लोइंग थ्रू यू नाउ? बाय ट्राइंग टू क्रिएट समथिंग बाय इंडल्जिंग
(38:43) इन डिफरेंट एक्टिविटी नॉट जस्ट एक्टिविटीज इन क्रिएटिव एक्टिविटीज म्यूजिक प्ले कर सकते हैं। आप कोई नया इंस्ट्रूमेंट को उठाइए और देखिए कि अभी आप में क्या चेंजेस आ रहे हैं। पहले आपको जितना टाइम लगता था सीखने में अभी कंपैरेटिवली कितना लग रहा है। तो वो चीज है। उसके बाद में हम अगर नेवल चक्रा में आते हैं देन दैट इज़ अबाउट एनर्जी। यू विल हैव ट्रेमेंडस एनर्जी। आपको यह पता नहीं चलेगा कि इस एनर्जी को मैं रोकूं कैसे। इतनी एनर्जी है। इतनी सारी एनर्जी मैं क्या-क्या काम करूं। तो वो जो बहुत एनर्जी है वो यहां पे आएगी। देन वी आर गोइंग हायर टू अ हार्टक।
(39:19) हार्टक में जैसे मैं बात कर रही थी प्राण की और कोषों की तो जो चक्र भेदन है वह भी आप यह समझिए कि आप धीरे-धीरे अपने पास तक आ रहे हैं। अपने सत्य तक आ रहे हैं। तो यहां पे जो भेद है कि मैं अलग हूं, सामने वाले लोग अलग हैं। मैं और समाज मेरी फिलॉसफी, दूसरों की फिलॉसफी उसको छोड़कर अभी हम आ जाते हैं हम पर कि हम एक ही हैं। मैं यह सामने वाले की बात सुन सकता हूं। तो जो एक्सेप्टेंस है, जो एमथी है और दूसरों के इमोशन को समझने की जो क्वालिटी है, दूसरों के पेन को समझने की अगेन एमथी वह आ जाती है। वह अभी तक आप में हो सकता है कि बिल्कुल आपने एक्सपीरियंस नहीं की हो। देन
(40:03) तो इट इज़ वेरी वेल फॉर यू कि आप देख सकते हैं कि इतना चेंजेस कैसे आ गया मुझ में। क्योंकि चेंजेस बहुत आते हैं। इट्स नॉट लाइक हां मुझे बहुत सोचना पड़ेगा बैठ के। फिर एनालाइज़ करना पड़ेगा। कुंडलिनी एक्टिवेशन इज़ नॉट दैट सल। हम वो बहुत बड़े-बड़े इंट्यूटिवनेस भी बढ़ जाती है इंसान की। जब हम आगे आगे आएंगे उस चक्र पे तो ये हार्ट चक्र अगर एक्टिवेट हो रहा है दैट इज देयर एंड यू विल फील वेरी हैप्पी जॉय फॉर नो रीज़। तब आपको लगेगा कि खुश होने के लिए मुझे रीज़ नहीं चाहिए। हम अगर दूसरे मुझसे खुश होंगे तभी मैं खुश होऊंगा। ये तो मीनिंगलेस है।
(40:38) तो खुशी अंदर से आती है। देन वी आर गोइंग टू विशुद्धि थ्रोट चक्र। तो आपने जो एक्सपीरियंस किया है आप सिर्फ वही बोलेंगे। हम और आप जो बोलेंगे वो आपने एक्सपीरियंस किया है या कहीं ना कहीं सत्य से ही आ रहा है। आप वही बोलेंगे और अगर आपने जो बोला है वो सत्य होगा। मतलब मैं ये नहीं बोल रही कि जो बोल दिया वो सच हो जाएगा। ऐसा कुछ जादू मंत्र नॉट अबाउट दैट कि फैक्ट पे ही बेस्ड रहेगा। एनालिटिकल होगा। ये काम हो जाएगा। 8:00 बजे तक हो जाएगा। या यू कैन यू कैन से दैट। तो मैं आपको यह ट्राई कर रही हूं कि जो सुनने वाले हैं वह फिर बहुत ज्यादा सुपर नेचुरल और अनबिलेबल
(41:18) थिंग में ना जाते हुए प्रैक्टिकल में रहे इसलिए मैं क्लेरिफाई कर रही हूं। उसके बाद में जब आज्ञा चक्र में आते हैं दिस चक्र आज्ञा चक्र और थर्ड आई एज इट इज कॉल्ड इट इज़ अबाउट द थिंग यू वर आस्किंग कि जो इंट्यूशन है वो बढ़ जाता है क्योंकि जो एनिमल्स हैं वो इंस्टिंक्ट पे काम करते हैं। अभी क्या लग रहा है? अभी भूख लग रही है। अभी नींद आ रही है। और अगर आप देखेंगे तो बहुत सारे जो ह्यूमंस हैं इंसान है वो भी उसी में है आजकल इंस्टिंक्ट में। नाउ व्हाट इज़ इंट्यूशन? ह्यूमन और एनिमल में यही डिफरेंस है। इंट्यूशन और इंस्टिंक्ट। तो इंट्यूशन बहुत बढ़ जाएंगे।
(41:56) क्या सही है, क्या गलत है पता चलने लग जाएगा। एंड दैट अगेन इज नॉट समथिंग सुपर नेचुरल। हम दैट इज योर ओन सेंस जो अभी तक डीएक्टिवेटेड थी। अभी आप एक्टिवेट कर रहे हैं। यू कैन सी थ्रू। जब सिद्धियों की बात होती है तो सिद्धियां भी ऐसी नहीं है कि बाहर से आपको कुछ मिलती है। आप ही जाग रहे हैं कि अरे मेरे लिए तो यह पॉसिबल है। हम दैट इज देयर। तो जब आज्ञा चक्र तक आते हैं तो अज्ञान इतना कम हो चुका है कि अब साधना बहुत सरल लगने लगती है। अब लाइफ इजी हो जाती है अगर यहां तक पहुंच गए तो। एंड देन कम्स सहस्त्रार। सहस्त्र आज्ञा तक आज्ञा चक्र तक की यहीं तक की
(42:36) दीक्षा होती है। इसके बाद दीक्षा नहीं है। इसके बाद आपको खुद ही कुंडलिनी को डायरेक्ट करके सहस्त्रार तक ले जाना है। और फिर जो एक्सपीरियंस होते हैं वो है कुंडलिनी के सहस्त्रार तक पहुंचने के। शिव से यूनियन होने के एक्सपीरियंस। सो इसी एक्सपीरियंस को मैं कह रही थी कि सेल्फ दीक्षा है। यह दीक्षा आपकी खुद जो आपकी आत्मा या कुंडलिनी या शिव आप जिसमें भी मानते हैं। राइट? तो ऐसे मानते हैं कि वो आके आपको दीक्षा दे रहे हैं। दैट इज दी अल्टीमेट। राइट? तो जो इंट्यूटिवनेस से हम बात कर रहे हैं वो कह रहे हैं हम आज्ञा चक्र से एक्टिवेट होती हैं और हमें चीजों के बारे
(43:13) में पहले से अंदर से फील होने लग जाता है जैसे जानवरों को भी लगता है कई बार आई रिमेंबर अभी रिसेंटली आई वेंट टॉस्कास्ट दिल्ली में हॉस जगह है सो वहां पे मैं वहां पे ना एक लेक है बहुत खूबसूरत सी लेक मैं उस लेक के पास जाकर बैठ गया सो वहां पर मैं बैठकर ये सोच रहा था कि जो जिस लेक में बतख है वो क्या सोच रही होंगी बाद में मैं भी सोच रहा था मैं क्यों सोच रहा था पर बट आई वास थिंकिंग अबाउट इट तो मैं उसको ऑब्जर्व करने लगा जो वो डक थी तो वो डक जो थी वो घूम रही थी बस हम घूम रही थी तो फिर मैंने ये सोचा शायद वो उस वक्त उसको भूख लग रही है और वो अपना
(43:53) खाने के लिए आसपास जा रही है और यही उसका थॉट प्रोसेस है अबाउट इस वक्त कोई डेंजर आ रहा है पीछे कोई मेबी मारने के लिए आ रहा है तो मैं भी भाग जाऊंगी इस वक्त भूख लग रही है तो खाना खा लिया। इस वक्त अगर मेरे को यह स्टेप लेना है तो मैंने कर दिया। तो मुझे लगा मे बी देयर इज नो ओवरथिंकिंग, देयर इज़ नो इनसिक्योरिटी। इट्स अब्सोलुटली इस वक्त मुझे क्या करना है एंड आई डू इट। और आई थिंक शायद वह जो आपने आगे चक्र की बात करी हमने कि जब वह हम एक्टिवेट कर रहे हैं उस थॉट में जब आ रहे हैं तो इट इज सिंपली दैट आपके माइंड में इतनी क्लेरिटी है दैट यू
(44:35) नो व्हाट टू डू एंड व्हाट नॉट टू डू यस यू गॉट इट राइट अब हम एक ये चीज में आ जाते हैं कि आज हमने एक्सपीरियसेस सुने और सरफेस लेवल पर कहीं ना कहीं हमने समझने की कोशिश करी थोड़ा सा डीप भी गए। अब मैं यह जानना चाहता हूं कि जो लोग आज इस पडकास्ट को सुनके एक्साइटेड हो गए हैं अबाउट मैं भी कुंडलिनी को एक्टिवेट करके दिखाऊंगा अपनी लाइफ में। हाउ डू दे स्टार्ट द जर्नी टू कुंडलिनी एक्टिवेशन? स्टार्ट विद मेडिटेशन। हम ध्यान कीजिए। हम ध्यान में आप धारणा से स्टार्ट कर सकते हैं। धारणा जो है आप किसी भी ऑब्जेक्ट ऑफ कंसंट्रेशन किसी भी आपको देवी देवता के जो
(45:20) चित्र है या कोई सिंबल है जिसमें आप बिलीव करते हैं। एनीबडी एनीथिंग एनीबडी किसी पे भी आप ध्यान आपका कंसंट्रेट कीजिए। आपका जो मन है उसको पहले शांत करना सीखिए। हम क्योंकि अगर मन शांत नहीं है देन ऑल द साधना एंड कुंडलिनी बहुत दूर की चीज़ हो जाती है। तो पहले धीरे-धीरे आप सत्य के पास आइए। इसको हम थोड़ा और प्रैक्टिकल बेस करें। आप ये सोचो कि आपके शिष्य बैठे हैं। एक सेशन चल रहा है और आज आपको बताना है कि कुंडलिनी एक्टिवेट करने के लिए प्रैक्टिकली आप सुबह उठ के इतने बजे करें, इतनी देर करें। यह मंत्र पढ़ें या मे बी बिकॉज़ आपकी अपनी रीजर्नी है। और जो आज
(45:57) आपको सुनेंगे जो इस कन्वर्सेशन का पार्ट बनेंगे। मुझे लगता है वो कहीं ना कहीं हमारी एनर्जी से भी कनेक्ट करेंगे। सो जो जिसको फॉलो कर रहा है वो करें। बट जिस पाथ में आप हैं हम आप किस शक्ति को अ रिप्रेजेंट करते हैं? जो आपके शिष्य हैं वो किस तरह से प्रैक्टिससेस करते हैं? देखिए मैं कभी भी किसी को भी किसी के भी ऊपर अपने बिलीफ थोपूंगी नहीं। राइट? और जो भी गुरु है वो भी यही ध्यान रखते हैं कि हम जो बिलीव कर रहे हैं वही दूसरों को दें। वो बहुत गलत हो जाता है। सो व्हाटएवर दे बिलीव इन अगर कोई शक्ति की साधना कर रहे हैं तो उनकी जो जो अगर साधना
(46:34) नहीं भी कर रहे अगर एकदम बिगिनर भी है अगर उनका लगाव कोई देवी देवता से है कोई शक्ति से है तो साधना उन्हीं के ही बारे में बताई जाती है। इसीलिए सबके लिए साधना अलग होती है। अगर कोई किसी भगवान से जिनका लगाव है मैं अगर उन्हें किसी और की ही दीक्षा दे दूं। किसी और का ही मंत्र दे दूं तो उनका ध्यान लगने वाला नहीं है। उन्हें फिर नया सीखना पड़ेगा। उनका ध्यान कहीं और जा रहा है और साधना कहीं और जा रही है। ऐसा नहीं होता है। सो दीक्षा सबके लिए अलग बहुत सारे रीज़ंस है। एक रीज़न यह है कि सब लोग के जो थॉट्स है सब लोग के टेंपरामेंट बहुत अलग है।
(47:09) कनेक्शन दीक्षा अलग है। तो जितने भी साधक हैं जिन्होंने मुझसे दीक्षा ली है, हर एक की दीक्षा अलग है। ओह! दीक्षा ऐसे नहीं है कि मतलब मैं बैठी हूं और मैं बोलूं यह मंत्र सब लोग जपेंगे या यह ध्यान सब लोग करेंगे। यह मुद्रा में बैठेंगे। नहीं सबके लिए अलग होती है। आप किसकी करते हैं साधना? शिवा मेरी जो साधना है वह दिव्याचार में आती है। जहां पे आप किसी देवी देवताओं के फॉर्म की साधना ना करते हुए हम आप किसी की पूजा पाठ या कर्मकांड ना करते हुए समयाचार दिव्याचार यानी मतलब अंदर आपकी साधना चलती है जिसमें है पूरा तंत्र जो प्रैक्टिकल तंत्र है जैसे शिवा बियों्ड
(47:49) शिवा जो फर्स्ट बुक है उसमें शिव को कैसे दर्शाया है उसमें शक्ति क्या है और जैसे ये सेकंड बुक का उपनिषद की बात कर रहे हैं तो इसमें जो मैंने एक्सप्लेन किया है भले ही बाहर एक शक्ति का स्वरूप है पर अंदर तो साधना की पद्धति है कि ध्यान कैसे करना है धारणा कैसे करनी है हम बहुत प्रैक्टिकल है तो मेरी जो साधना है मेरी फिलॉसफी वो यही है कि अगर मैं किसी को बता रही हूं साधना करना तो मैं उनको ये भी मेरा काम है बताना कि उसे अप्लाई कैसे करना है प्रैक्टिकल क्या है क्योंकि सिर्फ थ्यरी से आप कहीं आगे बढ़ नहीं सकते राइट सो दैट इज व्हाई आई प्रैक्टिस इन दैट्स
(48:26) व्हाट आई प्रैक्टिस इन पर अगर मेरे पास में कोई ऐसे साधक आ रहे हैं जो भक्ति के हैं जिन्हें भक्ति पसंद है जो भगवान के नाम जप कर रहे हैं तो मैं उनको दीक्षा नहीं दे सकती। हम मैं उनको दीक्षा यही दूंगी जो मैं प्रैक्टिस कर रही हूं। हम जहां पे प्रैक्टिकल साधना है। राइट तो जो दीक्षा के लिए आ रहे हैं उनको भी पहले ये समझना पड़ेगा कि उन्हें किस जगह जो अभी कंफ्यूज्ड है। जी हो सकता है बहुत आई आई फील काफी मैं शिव को भी मानता हूं। शक्ति को हां मानता हूं सभी के हैं। पर अब होता है ना कि आप मुझसे पूछो कि एक बताओ। शायद वह जवाब ना मिले तो
(49:02) फिर तो वह गुरु का काम है कि आपको गाइड करें आपको गाइड करें क्योंकि अल्टीमेटली सच ये है कि भगवान मानने की चीज नहीं जानने की चीज है हम तो ये जो साधना का पाथ है वो यही है कि आप जानने के लिए आगे बढ़ो आप में वो क्यूरियोसिटी आए ओके सो इसको हम यहां पर ले लेते हैं कि कुंडलिनी एक्टिवेशन का फर्स्ट पार्ट है मेडिटेशन आप जिसको भी मानते हैं आप नहीं भी क्लियर है तो आप जिनको भी स्ट्रांगली जिसकी तरफ आप अट्रैक्ट हो रहे हैं। अब आप बोल रहे हो मैं सभी की तरफ स्टंगली अट्रैक्ट हो रहा हूं। तो ऐसे कभी शुरू ही नहीं हो पाएगा। तो मे बी शिव और मे बी
(49:36) राधा और जो भी आपको फील हुआ तो आप कह रहे हो कि मैं उनके पिक्चर सामने लगा के लाइक दिस आप कह रहे हैं कि मैं मेडिटेशन शुरू कर रहा हूं ऑन अ डेली बेसिस। कितनी देर? डेली बेसिस जितना आप कंफर्टेबल हैं। 5 मिनट 10 मिनट और मेडिटेशन के लिए कोई टाइम नहीं होता है। ऐसा नहीं है कि आप ब्रह्म मुहूर्त में उठ के बैठ के इसी आसन में करें। जब आप स्टार्ट कर रहे हैं मेडिटेशन तो आप यह ध्यान दीजिए कि दिन में ऐसा कौन सा समय है जब आपकी सांस ऑटोमेटिकली शांत हो जाती है। जब आपका मन खुद इतना चंचल नहीं होता है मोस्टली वो होना चाहिए शाम के समय शाम का जो प्रदोष काल है सनसेट हो
(50:15) रहा है तो जब प्राण वायु है जो सूर्य में सूर्य नाड़ी में मतलब राइट साइड के बॉडी में जो प्राण चलते हैं उसकी जगह धीरे-धीरे लेफ्ट में आती है। हम्म। जब भी हम कुछ काम कर रहे हैं जहां पे बहुत फिजिकल एफर्ट चाहिए, बहुत मेंटल एफर्ट चाहिए तो आप नोटिस करेंगे कि हमारी जो ब्रीथिंग है वो राइट नस्ट्रिल से होती है। और जब भी हम सोते हैं, शांत है, मेडिटेशन कर रहे हैं तब लेफ्ट नस्ट्रिल से तो पहले तो आप यह देखेंगे कि ऐसा दिन में कौन सा टाइम है जब आपकी चंद्र वायु, चंद्र नाड़ी चल रही है। जब आप शांत हैं और आप वो टाइम फिक्स करेंगे मेडिटेशन का।
(50:51) देख रहा हूं मेरी कौन सी एक्टिव है अभी। ओके। राइट तो मे इवनिंग का हो गया बहुत सहज हो जाएगा तो जो मैम लेफ्ट नस्ट्रिल कब हमारी ईली फ्लो हो रहा है तो लेफ्ट इज चंद्र नाड़ी ताकि आपको बहुत ज्यादा एफर्ट नहीं देने पड़े कामनेस से हो जाएगा यस और जब यह सहज खुद ही सली हो रहा है शांत आपका मन हो रहा है अगर आपने वही टाइम चूज़ किया तब आप ज्यादा देर बैठ सकते हैं आसन पे और फिर आपका आसन है आसन आप अगर साधना के पथ पे आपको तंत्र में आगे बढ़ना है या कुंडलिनी के में आपको आगे बढ़ना है तो अभी से साधन आसन ये जो साधना में यूज़ होने वाली सब चीजें उन पे आप ध्यान दीजिए। तो
(51:29) स्टार्टिंग कर रहे हैं अगर सिर्फ मेडिटेशन से अभी उस रास्ते में जाने के लिए तो बेस्ट इज़ कुशा का आसन। कुशा जो घास है उसका आसन। हमेशा आसन हमें नेचुरल जो चीजों से बना रहता है ऑर्गेनिक वो यूज़ करना चाहिए। नॉट प्लास्टिक और एनीथिंग। उस पे बैठिए। और उसके बाद में जो भी मैंने आपको सिंबल बोले हैं कि कोई भी देवी देवता हो सकते हैं उससे कोई फर्क नहीं पड़ता है कि आप भगवान में मानते हैं या नहीं मानते हैं। जो तंत्र है वो आपसे यह नहीं पूछता कि आप कौन से भगवान में मानते हैं। तंत्र में आपको खुद का सत्य जानना है। आपको क्यूरोसिटी होनी चाहिए।
(52:04) राइट? जहां पर भी आपका मन शांत हो रहा है। जो आपको पसंद है वो सामने रख के उसे देखिए। जैसे जो बहुत सारे लोग देवी देवताओं को रखते हैं। अपने गुरु के पिक्चर्स रखते हैं और जो हिंदू नहीं है जीसस क्राइस्ट के पिक्चर रख सकते हैं जो क्रिश्चियन है। इट डज नॉट मैटर। अब जैसे कई बार हमने एक चक्र के ऊपर एपिसोड भी किया था इन द पास्ट तो उसमें उन्होंने बताया था कि हर चक्र का एक मंत्र होता है। हम तो जब आप मूलाधार में है तो इस पर्टिकुलर मंत्र को नहीं नहीं जब चक्रों का मंत्र होता है पर दीक्षा लेनी होती है आपको। ओके। तो आपको गुरु बता सकते हैं कि मंत्र
(52:39) को कैसे पढ़ना है क्योंकि जो मंत्र है चक्रों के बीज मंत्र है तो उसका प्रोनंसिएशन जो उसका एनंसिएशन है वो बहुत परफेक्ट होना चाहिए। तो अभी ये जो हम मेडिटेशन कर रहे हैं उसमें हमें चक्र के जो बीज मंत्र है इनकी जरूरत नहीं पड़ेगी फॉर गुण नहीं नहीं नहीं पहले आपको मेडिटेशन सीखने की जरूरत है शांत खुद रखने की खुद के जो विचार है अगेन व्हेन यू विल सीट फॉर मेडिटेशन थॉट्स आर गोना कम यू कैन नॉट स्टॉप देम तो सबसे बेस्ट थिंग, सबसे इजी थिंग एंड द ओनली राइट थिंग टू कंट्रोल योर थॉट्स इज दिस कि आप जब बैठेंगे और जब आपके विचार आ रहे हैं
(53:16) तो उन्हें कंट्रोल करने की कोशिश मत कीजिए। क्योंकि जो थॉट्स है जो मन है वो एक छोटे बच्चे की तरह है। आप उसे जितना पकड़ के पास में लेके आएंगे उतना वो बाहर भागेगा। राइट? राइट? जब उसे छोड़ देंगे, स्वतंत्र छोड़ देंगे, जब उस बच्चे को पता चल जाएगा कि उसके पास फ्रीडम है तो वो नहीं भागेगा। तो मन भी वैसा है। अब मन को जितना पकड़ेंगे उतना भागेगा। मन को छोड़ दो। हम विचार आ रहे हैं आने दो, जाने दो। बस उसे देखो। बी अवेयर। बी अवेयर ऑफ द वन हु इज एबल टू सी द थॉट्स। हम क्योंकि जो इंटेलेक्ट है, इंटेलिजेंस है, सबसे जो हायर इंटेलिजेंस है, इट इज़ नॉट
(53:52) इमोशनल इंटेलिजेंस। इट्स नॉट सम मोरल इंटेलिजेंस और दीज़ ग्रॉस थिंग्स। इट इज़ द इंटेलिजेंस बाय व्हिच यू कैन सी योर ओन थॉट्स। तो आप बैठ के शांत होकर आपके खुद के थॉट्स को देखिए। थॉट्स आ रहे हैं, आने दीजिए, जा रहे हैं, जाने दीजिए। डोंट होल्ड देम। राइट? सो इसको हम यहां पे अभी के लिए इसको हम पॉज कर रहे हैं कि आप मेडिटेशन की जर्नी स्टार्ट करें। देन वैराग्य का जब मन में डिटचमेंट फील हो रही है तब हम एक हायर गाइडेंस लेंगे। जिसके बाद हम और इन डेप्थ एक कॉन्वर्सेशन करेंगे। इसमें हम मे बी वी गो डीपर इनू कुंडलिनी बट उससे पहले हम सब
(54:33) प्रॉमिस ये करेंगे कि हम फर्स्ट स्टेप पे आ रहे हैं। सिर्फ सुन नहीं रहे और यह नहीं कि और क्या होगा पहले हम एक स्टेप पर आएंगे उसके बाद हम आगे की जर्नी के बारे में मे बी वी विल एक्सप्लोर थैंक यू सो मच ये मैंने आपकी बुक्स देखी हैं। शिवा बियों्ड शिवा ब्यूटीफुल ट्रुथ नेवर स्पोकन शैवज़्म बियड इट सरफेस लेवल इंटरप्रिटेशन शविज़्म में वो अभिनव गुप्ता जी को तो आई आई एम श्योर आपने बहुत इंटेंसली पढ़ा होगा आपने कब पढ़ा उनको पहली बार अभिनव गुप्ता कश्मीर शविज़्म के आचार्य रहे हैं और अभिनव गुप्ता एक ऐसे आचार्य हैं कश्मीर शविज के जिन्होंने बहुत ज्यादा
(55:06) कश्मीर शविज्म को इन डेप्थ एक्सप्लेन किया है एक्सप्लोर किया है और सैड बात है मैम इंडिया में ही नहीं पता लोगों को ही नहीं पता सोड और कश्मीर शविज्म में जब उन्होंने एक्सप्लेन करना स्टार्ट किया उसके पहले तंत्र बिखरा हुआ था। हम जैसे हम देखते हैं वेदव्यास ने वेदों को बहुत अच्छे संक्षिप्त ले आए हैं। कैटेगराइज करके समझाया है। अभिनव गुप्त वास द वेदव्यास ऑफ कश्मीर शविज्म। वंडरफुल। आई वांट यू टू लीव वन थॉट ऑफ़ शिवा जो कि इस एपिसोड के बाद भी सब सोचे उस बात के बारे में। एनीथिंग अबाउट? द मोस्ट ब्यूटीफुल थिंग वन कैन एक्सपीरियंस इन दिस लाइफ व्हिच भगवान शिव
(55:43) रिप्रेजेंट इज वैराग्य। जो वैराग्य है, डिटचमेंट है, उसका वैराग्य का कमल आपके जो लाइफ है, उसमें खिल जाने दीजिए। दैट इज वेरी ब्यूटीफुल। आई कैन आल्सो नर अ लिटिल स्टोरी दैट। अ वैराग्य समझाने के लिए मेरे दादा जी ने बहुत सालों पहले जब मैं छोटी तब यह स्टोरी सुनाई थी कि एक नाथ साधु थे नाथ परंपरा के। वो भिक्षा के लिए बहुत यंग मंक थे वो। भिक्षा के लिए रोज समाज में नगरों में ज्यादा करते थे और बुलाते थे अलख निरंजन तो जो सुनते थे वो आते थे और भिक्षा उनको देते थे ऐसे घरों के सामने जाकर खड़े होते थे वो तो एक बार वो एक ऐसे नगर में से गुजर रहे थे जहां पे एक घर था
(56:28) और वहां पे एक महिला रहती थी बहुत धनी महिला थी और अभी-अभी उनका आना हुआ था वहां पे शादी होकर नई नई-नई आई थी तो उन्हें उन्होंने फर्स्ट टाइम यह भिक्षु को देखा वो देखा उन्होंने उन्होंने बाहर से कि कौन है यह भिक्षु? अच्छा मैं जाके भिक्षा देती हूं। जब देखने देखा उन्होंने पास में जाकर भिक्षा देते हुए उन साधु की आंखें तो साधु की आंखें वो महिला को इतनी सुंदर लगी कि वो बहुत अट्रैक्टेड फील करने लगी उन आंखों से। फिर वो अंदर चली गई। पर हमेशा वो वही सोचे जा रही है कि वो भिक्षु फिर से कब आएंगे? वो साधु फिर से कब आएंगे? मुझे
(57:04) उन्हें फिर से देखना है। दूसरे दिन फिर से वह साधु आए भिक्षा के लिए। तो पहले से ही यह दरवाजे पर खड़ी है भिक्षा लेकर भिक्षा देने के लिए जो भी उन्होंने बनाया है भोजन सुबह से उठकर जल्दी-जल्दी बनाया कि उनको मैं देख पाऊं। फिर वो आए जैसे ही उन्होंने सुना अलख निरंजन वो नगर के उस कॉर्नर से यहां से खड़े होकर वेट कर रहे हैं। जब वो आए तो उन्हें भिक्षा दी और फिर उनकी आंखों में देख रहे हैं और उन्होंने थोड़ी हिम्मत जुटाई और बोला कि साधु जी आपकी आंखें बहुत सुंदर लगी मुझे। तब उन्होंने साधु ने कुछ नहीं बोला। कोई रिप्लाई ही नहीं किया। वह चले गए। अपने
(57:43) रास्ते चले गए। अब यह जो महिला है यह सोच रही है कि उन्होंने कुछ बोला नहीं। मैं क्या करूं? क्या उन्हें अच्छा नहीं लगा? नहीं बोलना चाहिए था। वो सोच में है और नेक्स्ट डे फिर से वो वेट कर रही है उन साधु को देखने के लिए। तो जो नाथ साधु है वो फिर से आए। इस बार वो जब चल के आए तो थोड़ा कुछ अलग लगा। महिला को ये देख के कि ये इतने अलग क्यों चल रहे हैं? क्या बात है? ठीक है। फिर भी वह बहुत खुश है। बहुत एक्साइटेड है। जब वह आए भिक्षा पात्र लेकर तब भिक्षा देने की जगह यह महिला ने पूछा कि क्या हुआ आप? कुछ कुछ हुआ है क्या? आप ऐसे नीचे क्यों देखकर खड़े हैं? तो उनका
(58:20) मुंह नीचे था। तो उन्होंने जो भिक्षा पात्र है वो उन महिला के हाथ में दिया और बोला कि यह लीजिए। और महिला ने वो भिक्षा पात्र खोला। तब वह कहते हैं कि यह लीजिए। आपको जो आंखें मेरी पसंद आई थी यह रखी है उस पात्र में तो उन्होंने अपनी आंखें निकाल के भिक्षा पात्र में रख के दे दी कि यह आपकी हुई। एक साधु का इस समाज में कुछ नहीं है। इस संसार में कोई लेना देना नहीं है। उन्होंने अपना अलख निरंजन बोला और वह अपने रास्ते चले गए। तो उन्होंने अपनी जो आंखें हैं वह सामने उस महिला को देकर उस महिला की दृष्टि को जगा दिया। इसे कहते हैं
(59:03) दृष्टि दान। यह उस वैराग्य के उस पहलू को समझाता है कि एक साधु का जीवन जो एक साधु का मन है वह कहीं भी अटका हुआ नहीं है। साधु मुक्त है। तो वैसे ही हर एक साधक को मुक्त होना चाहिए। इसलिए मैंने कहा जो वैराग्य है वह भागना नहीं वह जागना है। आप रहिए संसार में रहिए और इसमें जो भी भोग विलास की चीजें यह आसपास होते हुए भी आपका मन आपके शिव में, आपके सत्य में निरंतर बनाए रखिए। बहुत-बहुत सुंदर। धन्यवाद साध्वी जी। हर हर महादेव।
Author Name:Supertalks by themovingship
Youtube Channel Url:https://www.youtube.com/@supertalksbytms
Youtube Video URL:https://www.youtube.com/watch?v=Qh8OnzPOpS0
Title: SHIVA KE RAAZ: Meditation, Chakra, Kundalini Activation, Spirituality| Sādhvi A. Trivedi Supertalks
Author Name: Supertalks by themovingship
Description: Kundalini is not a concept. It is a force that exists inside every human being. And most people will live their entire lives without ever knowing it is there.
In this episode of Supertalks, Raghav sits down with Sadhvi Amruta Trivedi, a revered spiritual master, philosopher and Tantrik rooted in the sacred tradition of Maha Siddhas. Counted among the rare few who have diligently preserved and propagated the ancient wisdom of Kashmir Shaivism. She received initiation as a child, has authored multiple books including Shiva Beyond Shiva and Shiva Tatva and carries a depth of knowledge that most people spend decades searching for.
This is not a theoretical conversation about spirituality. This is a practical guide to the most powerful energy that lives inside you.
We begin with the purpose of life. How Sadhvi ji received her guru and her initiation as a child. And why that early awakening shaped everything that followed.
We then go deep into Kundalini. What it is. How it is connected to Shiva and Shakti. Why it is represented by a serpent coiled at the base of the spine. How Kundalini activation through meditation works. The different kinds of Vayus in the body including Prana Vayu and how they relate to the life force. The challenges and difficulties that come with sadhna. And what Kundalini Tantra says about how to navigate them safely.
The seven chakras explained. Muladhara, Svadhisthana, Manipura, Anahata, Vishuddha, Ajna and Sahasrara. What each one represents. How to activate each one. And what happens when they open.
When Kundalini activates, life changes. Anxiety dissolves. Overthinking stops. Clarity arrives. A sense of direction and purpose that was missing suddenly appears. Anyone who meditates sincerely can begin this journey. But it must be approached with awareness because if done incorrectly, it can also be dangerous.
This episode is for anyone who has ever felt that there is more to life than what they can see.
About the Guest:
Sadhvi Amruta Trivedi is a revered spiritual master, philosopher and Tantrik in the tradition of Maha Siddhas and Kashmir Shaivism. Author of Shiva Beyond Shiva and Shiva Tatva. She received initiation as a child and is one of India's most authentic voices on Kundalini, Tantra and Vedic spirituality.
Related Links
Upcoming Event (18 October | Mumbai): Amaratak.org/events
Competitions: amaratak.org/competitions
Disclaimer: This video is produced strictly for educational and informational purposes. The views and opinions expressed by the guest are solely their own and do not reflect the stance of this channel. We hold no intention to defame, discredit, or cause harm to any individual, brand, product, country, or profession referenced in this content. All media assets featured in this video are the property of their respective owners and are used purely for illustrative and informational purposes. Our aim is to present balanced perspectives that empower our audience to make well-informed decisions.
Guest Suggestion Form: https://forms.gle/EcXwKgHsxYEmS85q8
---------
Read about Raghav's NGO at https://skchildrenfoundation.org
---------
Follow our whatsapp channel: https://whatsapp.com/channel/0029Vb7U...
---------
Subscribe to our other YouTube channel:
Clips Channel: / @supertalksclips
---------
Follow Supertalks on Social Media Platforms
Instagram: / supertalks.co
Facebook: https://www.facebook.com/profile.php?...
---------
Follow Raghav on Social Media Platforms
Instagram: / themovingship
Facebook: / themovingship
Twitter: https://x.com/themovingshipsk
---------
Listen to Supertalks on Spotify: https://open.spotify.com/show/0Uss3VL...
---------
Join as a monthly member for priority replies & exclusive loyalty badges:
/ @supertalksbytms
Business Enquires at partnership@supertalks.in
---------
Timestamps :
00:00 Introduction
03:33 Sadhvi Amrutha Trivedi x Raghav Sharma
04:05 Sadhvi ji's Spiritual Journey
06:58 What Is Kundalini Diksha?
08:11 Biggest Challenge in Kundalini Sadhana
08:47 Hidden Power of Kundalini Shakti
11:44 Why Is Kundalini Awakening Kept Secret?
14:08 Kundalini, Seven Chakras & Union of Shiva and Shakti
16:52 Five Pranas & Five Koshas Explained
22:14 Signs of Kundalini Awakening & Inner Transformation
24:38 Narada Muni’s Story: The Power of Patience in Spirituality
28:33 Why Is Kundalini Represented as a Serpent?
33:30 Kundalini Experiences, Body Heat & Traditional Practices
37:48 How Kundalini Awakening Changes You
41:22 The Third Eye, Intuition & Higher Awareness
44:40 How to Begin Your Kundalini Journey
49:19 Meditation for Beginners: How to Get Started
52:21 Mantras, Meditation & Controlling Your Thoughts
54:45 Kashmir Shaivism & Acharya Abhinavagupta
55:27 Lord Shiva’s Greatest Lesson: Vairagya
59:34 Ending
Transcript:
(00:00) जय भोले। जय भोले। व्हाट इज पर्पस ऑफ़ लाइफ? खुद को जानना। शिव को जानना। शिव कौन है? खुद ही। तो शिव हम कैसे बनते हैं? ये जो कुंडलिनी स्पेशल क्यों है? बहुत रहस्यमय ऊर्जा है। तो अगर कुंडलिनी बाहर है तो पूरे जगत का निर्माण करेगी। पर जिस दिन वो कुंडलिनी अंदर अंतर्मुखी हुई, उस दिन वो आपको जगा देगी। जिसकी कुंडलिनी एक्टिवेट हो जाती है उनके अंदर खुद में क्या चेंज आने लग जाता है? फियर है, इमोशनल टर्म ऑइल है वो चले जाता है और क्रिएटिविटी इतनी आएगी कि यू कैन नॉट स्टॉप योरसेल्फ फ्रॉम क्रिएटिंग थिंग्स। यू विल हैव ट्रेमेंडस एनर्जी।
(00:38) आपको यह पता नहीं चलेगा कि इस एनर्जी को मैं रोकूं कैसे। क्या सही है क्या गलत है पता चलने लग जाएगा। क्या कुछ ऐसी जनरलाइज्ड चीजें हैं जो कि हम बता सकते हैं? तो कुछ लोग आए थे जिन्होंने कभी कोई दीक्षा नहीं ली है और वो मुझसे बात कर रहे हैं कि उनको दीक्षा चाहिए कुंडलिनी की। आई हैव सीन इन देयर आईज दे हैव ऑलरेडी एक्टिवेटेड देयर कुंडलिनी थ्रू ओनली हाउ डूड दे स्टार्ट देयर जर्नी टू कुंडलिनी एक्टिवेशन। डिटचमेंट है क्या? बहुत अगर जिसमें लगाव है किसी भी चीजों में तो वो साधना में बाधक बन जाता है। आपका मन बार-बार वहीं भटकता है।
(01:10) व्हाट इज द मोस्ट डिफिकल्ट पार्ट अबाउट कुंडलिनी? बहुत बार सुनने में आया होगा आपके भी कि यह जो तंत्र में कुंडलिनी में जाते हैं उनका माइंड स्टेबल नहीं रहता है। थोड़े डिस्टर्ब हो चुके होते हैं। इफ यू आर नॉट प्रिपेयरिंग फॉर इट वेल देन यू कैन नॉट हैंडल इट। और जो ऑनलाइन सुन के भी ये साधना स्टार्ट कर रहे हैं किसी भी चक्कर में फोकस रख के। सो दैट इज हाइली डेंजरस एंड वन शुड नॉट डू दैट। अगर मैं कहूं कि आपके शरीर के अंदर एक ऐसी पावरफुल चीज है जो कि इस वक्त सो रही है और अगर आप उसे एक्टिवेट कर लेते हैं यू बिकम नॉट ओनली दी मोस्ट पावरफुल वर्जन ऑफ
(01:57) योरसेल्फ बट लाइफ को आप क्लेरिटी से जिएंगे कैसा रहेगा? मैं बात कर रहा हूं कुंडलिनी शक्ति की जिसको आप अक्सर सुनते हैं हमारे बहुत सारे टेक्स्ट में वर्णन है। कितने सारे ऋषि बात करते हैं कि उनकी कुंडलिनी जागृत थी। ऑनेस्टली कुंडलिनी कोई सुपर नेचुरल या हमसे कोई दूर चीज नहीं है। कुंडलिनी पार हम सबके अंदर है। इस वक्त सोई है। आज का एपिसोड उसे जगाने की कोशिश करेगा। प्रेजेंटिंग साध्वी अमृता त्रिवेदी जी बचपन से ही गुरु से दीक्षित हैं। खुद कश्मीरी शेवज्म की नॉलेज लेकर आती हैं। शी इस इंडियास वन ऑफ द प्रोफाउंड
(02:41) वइसेस जो कि मैं कहूंगा सिर्फ साधना के बारे में बता नहीं रही बल्कि बचपन से उन्होंने साधना को जिया है। आज हम एक्सप्लोर करने वाले हैं कैसे आपको कुंडलिनी को समझना चाहिए और किस तरीके से आप अपनी कुंडलिनी को जागृत कर सकते हैं। वर्किंग रियली हार्ड टू ब्रिंग एपिसोड्स लाइक दिस। आपसे बस यह वादा चाहता हूं कि इस फेस्टिव सीजन में हमने आपको प्रॉमिस किया है कि ऐसे स्पिरिचुअल कन्वर्सेशन देते रहेंगे। आई वांट यू टू शेयर एव्री एपिसोड विद योर फैमिली मेंबर। क्योंकि ये सिर्फ हमारी सिर्फ आपके लिए नहीं बल्कि हमारे पूरे देश की एंशिएंट विज़डम को भी
(03:19) फैलाने का काम करती है। मेक श्योर यू सब्सक्राइब बिकॉज़ सुपर टॉक्स सिर्फ एक पडकास्ट चैनल नहीं है। पिछले 10 सालों से हम 200 से ज्यादा अंडर प्रिविल बच्चों के लिए एक एंज चलाते हैं। तो जब भी आप सब्सक्राइब करते हैं मैं प्रॉमिस करता हूं इस तरह के खूबसूरत कन्वर्सेशन लाता रहूंगा। व्हाइल दिस आल्सो हेल्प्स इन नेशन बिल्डिंग। व्हाट इज योर पर्पस ऑफ़ लाइफ? माय पर्पस आई डोंट हैव अ पर्पस। ऑनेस्टली देयर इज नो पर्पस एंड आई बिलीव कि हमारा पर्पस ही यह है जानना कि कोई पर्पस नहीं है। बट देन अगेन इट इज़ इनू एक्सिस्टेंशियलिज्म कहीं ना कहीं के लिए
(03:48) भाग देयर इज़ एम देयर इज़ पर्पस। बट जब हम कहीं नहीं भागते हुए रुक जाए एक जगह बैठ जाएं। जब हम जान जाए कि हम कौन हैं। खुशी कहीं बाहर नहीं है। हम ही है जो हमारे जॉय का सोर्स है। दैट इज स्पिरिचुअलिटी। दैट इज ट्रू। हम यस। आपने मुझे वो आंसर बहुत अच्छा दिया। आई रियली लाइक इट। मैं आपसे जब पूछा कि आप कब से साधना कर रहे हैं? आप कब से स्पिरिचुअलिटी में हैं? आपने बोला कि स्पिरिचुअलिटी की तो कोई उम्र ही नहीं होती। तो आप आपका जब बर्थ हुआ था तभी दीक्षा हो गई थी। आप बता रहे थे। जी। कैसे? मेरे बर्थ के कुछ दिनों में जब मैं मेरे गुरु महाराज से मिली थी तभी उन्होंने
(04:28) दीक्षा दी थी। और उसके बाद में धीरे-धीरे चीजों मैं प्रैक्टिस करती गई। मुझे पता नहीं था मेडिटेशन क्या होता है। वर्ड इतना बड़ा वर्ड है बट आई यूज्ड टू मेडिटेट हम जैसे कि हम बहुत सारी चीज डेली में करते हैं। हमें उसका डेफिनेशन हमें उसका वर्ड या किस लैंग्वेज में उसको क्या बोलते हैं पता नहीं है। बट वी डू इट। सो सिमिलरली और मेरे पास एक छोटी सी मैगजीन थी गुरु महाराज की जो वो पढ़ा करते थे और जब मुझे पढ़ना आता नहीं था उस टाइम से मैंने उसको संभाल के रखा था। कुछ-कुछ सालों में बार-बार उसे खोल के देखती थी कि क्या लिखा है इसमें। समझ में ही नहीं आ रहा है।
(05:02) हिंदी में थी। तो बहुत बड़े-बड़े वर्ड्स थे। ठीक है? फिर उसको रख देती थी। फिर कुछ टाइम बाद पढ़ती थी। तब पढ़ना सीख लिया। तब थोड़े बहुत अक्षर पढ़ पा रही थी। ऐसे करके कुछ-कुछ साल में उसे पढ़ती रही, देखती रही। और एक दिन पता चला कि इसमें जो चीज लिखी है वो कहीं-कहीं समझ आ रही है। हम क्या है? कुंडलिनी के बारे में, चक्रों के बारे में है। तंत्र है। तंत्र जो प्रैक्टिकल जो हम प्रैक्टिस कर रहे हैं वो तब समझ में अच्छा ये तो मैं प्रैक्टिस करती हूं। यह उसी बारे में है। फिर कुछ टाइम बाद जब उस मैगजीन को फिर से वो बुक को फिर से खोला तो फिर नई चीज समझ में आने
(05:36) लगी। जैसे अब आपकी बचपन की जो बुक है जो आपने बहुत साल पहले पढ़ी हो फिर से आप खोले और पढ़ो तो बदल चुका है। उसका जो अर्थ है वो बदल गया। एक बुक आज आप पढ़ेंगे एक साल बाद फिर से पढ़ेंगे। आपको नई चीज समझ में आएगी। क्या बदला? हम वर्ड्स वही है। सेंटेंसेस वही है। हम बदला है आपकी समझ। तो हमारी जब समझ हमारी जो सोचने की शक्ति बदलती रहती है। हम नई-नई चीज समझते हैं। देखने का नजरिया बदल जाता है। देखने का नजरिया बदल जाता है। और फिर बहुत बाद में जब कुंडलिनी की दीक्षा हुई मेरी तो उस टाइम पे गुरु महाराज भी दूसरे गुरु जी से हुई। गुरु एक नहीं होते।
(06:13) गुरु देखिए मेरे एक गुरु है जो है भगवान शिव। जय जय भोले। जय भोले। तो वो मेरे प्रिय गुरु है। वो तो इंटरनल गुरु सभी के गुरु है ना वो। तो राइट बट धरती में जब जैसे हमारे हम स्कूल जाते हैं तो हमारे एक क्लास टीचर होते हैं। वो हमारे एक क्लास टीचर है। बाकी सब्जेक्ट सिखाने के लिए बहुत सारे टीचर्स होते हैं। वैसे ही अगर मैं लोगों को कुछ सिखा रही हूं तो मुझे भी चीजें आनी चाहिए। अगर मुझे आनी चाहिए तो मैं सीखूंगी और सीखने के लिए बहुत सारे गुरुओं के पास जाके बहुत सारी चीजें सीखनी पड़ी। तो इसलिए बहुत सारे गुरु है। तो जब मैंने कुंडलिनी की दीक्षा
(06:48) ली तब मुझे पता चला कि जो मैं ऑलरेडी प्रैक्टिस कर रही थी जो उस बुक में लिखा था बस इसी के स्टेप्स का फॉर्मेशन थोड़ा सा डिफरेंट है। प्रैक्टिससेस वही है। कुंडलिनी को जी कुंडलिनी की दीक्षा लेने का मतलब क्या होता है? वो सिखाते हैं। दीक्षा का मतलब क्या है? आपका नया जन्म। आज नई शुरुआत। एक रास्ता जो आपने चुना है आज उस पर चलने का पहला कदम है। तो दीक्षा में आपको यह सिखाते हैं कि किस चीज की दीक्षा ले रहे हैं आप उस बारे में पहले आपको बताते हैं और वो रास्ता कैसा है, कितना मुश्किल है, कितना सरल है। पहले आपको उससे अवगत कराते हैं। अब देखते हैं
(07:24) कि आप रेडी हो क्या उस दीक्षा के लिए? हम फिर उसके बाद में आपको प्रोसेस सिखाते हैं। प्रोसेस मतलब सिर्फ यह थ्यरेटिकल नहीं जो बुक में हम पढ़ते हैं। बुक में अगर आप सिर्फ कुंडलिनी तंत्र की दीक्षा की बात कर रहे हैं तो बुक में या जो हम बात कर रहे हैं डिस्कशन में जो ऑनलाइन में कुछ नहीं है वो। हम तंत्र और कुंडलिनी बहुत गुढ़ विद्या है। हम तो ये जो गुढ़ विद्या की दीक्षा होती है बहुत कम लोगों को मिलती है। अगर जो उसके लिए रेडी है। राइट? बहुत इंटेंस प्रैक्टिस है और फिर आपको प्राण को कैसे कंट्रोल करना है? आपको मन को कैसे नियंत्रण करना है?
(08:01) आपकी जो सोच है उसको कैसे आपको शिफ्ट करना है? आपके जो प्राण है उसको डायरेक्शन कैसे देना है। आप वो सीखते हैं। फिर आपकी साधना शुरू होती है। तो दीक्षा वो है। कुंडलिनी के बारे में जैसे आप बता रहे हो सब बताते हैं कि सबसे मुश्किल क्या है और सरल क्या है? क्या सबसे मुश्किल है? व्हाट इज द मोस्ट डिफिकल्ट पार्ट अबाउट कुंडलिनी? देखिए, जब आप साधना करते हैं, तो सबसे मुश्किल जो आपका शत्रु है, हां। वही आपका सबसे अच्छा मित्र है। वह है मन। जब आप साधना करने बिगिन कर रहे हैं, तो वही शत्रु बनके आपके सामने खड़े होता है। क्योंकि मन क्या है? मन है थॉट्स। हर जगह
(08:38) भटक रहे हैं। उसको कैसे नियंत्रण लाना है? फर्स्ट जो सबसे डिफिकल्ट स्टेप आती है साधना में वो यह है। थॉट्स को कंट्रोल करना। थॉट्स को कंट्रोल करना। कुंडलिनी स्पेशल क्यों है? मतलब व्हाई अक्सर लोग जब बोलते हैं कि कुंडलिनी हमें एक्टिवेट करनी है। कैसे कुंडलिनी को समझ सकते हैं? क्या होता है कुंडलिनी? मैं स्टार्ट करूंगी यही बोलने से कि जो कुंडलिनी है, कुंडलिनी तंत्र वो बहुत गुण विद्या है। बहुत रहस्यमयी है, बहुत सीक्रेटिव है। पर रहस्यमय मैं इसलिए नहीं बोल रही कि आप रहस्य मान के उसे छोड़ दें। क्योंकि कई बार रहस्य का मतलब यह होता है
(09:17) कि यह हमें ना जानने वाली चीज है। हम पर कुंडलिनी आपको जानने वाली चीज है। अगर एक चीज है जो आपको जाननी चाहिए आपके लाइफ में तो वो यही है कि कुंडलिनी क्या है? क्योंकि कुंडलिनी एक ऐसी ऊर्जा है जो आप ही है। आप ही की ऊर्जा है। कुंडलिनी ही समस्त संसार की संरचना की रचना की ऊर्जा है। सबका स्त्रोत है। जब यह कुंडलिनी ऊर्जा बहिर्मुखी है। अगर बाहर की तरह प्रवाहित है हो रही है। बाहर के डायरेक्शन में तो पूरे समस्त संसार की रचना करती है। एंटायर यूनिवर्स यू कुड से और योर स्पेसिफिक वर्ल्ड जो आपने आपके आसपास बनाई है। आपकी सोच से जो मैनिफेस्ट हुई है। तो
(09:58) अगर कुंडलिनी बाहर है तो पूरे जगत का निर्माण करेगी। पर जिस दिन वह कुंडलिनी अंदर अंतर्मुखी हुई खुद को देखने लगी उस दिन वह जग जाएगी। उस दिन वह आपको जगा देगी। तो कुंडलिनी एक बीज की तरह है। जब बीज को आप बोते हैं जमीन के नीचे तो आपको नहीं पता कि उसमें कितना पोटेंशियल है। वो कितना बड़ा पेड़ बन सकता है। उसमें कितने फल फूल लगेंगे। कुछ नहीं पता आपको। बस वो एक छोटा सा बीज है अभी जो अंकुरित नहीं हुआ है और वो धरती के नीचे है वही कुंडलिनी है। इसलिए कहते हैं कुंडलिनी सो रही है। कुंडलिनी हमारे शरीर में जो मेरुदंड है स्पाइनल कॉर्ड स्पाइनल कॉर्ड
(10:41) के बेस में मेरुदंड के मूल में मूल आधार में एक सर्पिनी की तरह कुंडलिनी मार के कुंडली मार के मतलब ऐसे रोटेट हो के गोल होके सो रही है। सो रही है। इसलिए उसे पता नहीं है कि वो कौन है। वो जाग सकती है और वो कितना उसका पोटेंशियल है उसे वो पता नहीं है। इसीलिए कहा है वो बीज है। वो सोती हुई वो सर पे नहीं है। तो सबको जानना चाहिए इसके बारे में। सो हम इसको ये कह रहे हैं कि ऐसी एनर्जी जो इस वक्त सोई हुई है और हमें उसको एक्टिवेट करना है ताकि हमें अपने बारे में ही अपनी-अपनी एकिस्टेंस का सच पता लग सके। कुछ ऐसा हमें अपना सच पता लग सके। या यू आर देयर
(11:23) ऑलमोस्ट ओके हमें खुद का बोध हो सके कि हम क्या हैं। राइट जब आपने दीक्षा हासिल करी कुंडलिनी की तब आपने वो साधनाएं करना शुरू किया और हम आपने कुंडलिनी को एक्टिवेट किया। ऐसा कह सकते हैं? देखिए मैं आपको यह बताती हूं कि जो कुंडलिनी है अगर उसके बारे में जानने से पहले यह जान लीजिए कि उसको इतना छुपा के क्यों रखते हैं ओके क्योंकि वो बहुत जन्मों के साधना का परिणाम है कुंडलिनी का जागरण तो जब आप यह प्रश्न पूछ रहे हैं कि कुंडलिनी आपने जगाया जब आपकी दीक्षा हुई तो उस टाइम एक्सपीरियंस हो गए जाग गई तब से साधना
(12:08) शुरू ऐसा नहीं होता है कुंडलिनी जागना इसका मतलब यह है कि आप बहुत बहुत जन्मों से साधना कर रहे हैं और उसकी साधना की परिपक्वता से आपको साधना में जो भी क्या बोले साइंस या जो भी चेंजेस है या कुंडलिनी का जागरण ये सब के पास आप पहुंचते हैं। हम तो जब मेरी साधना बहुत साल हो गए अभी तो पर जब दीक्षा हुई थी तब पहले से जो मैं प्रैक्टिस कर रही थी मैंने उसके स्टेप्स में चेंजेस किए बस जैसे कि जो फर्स्ट में मैं साधना करने के लिए स्टार्ट कर रही हूं तो जो मुद्रा है उसको बाद में करते हुए आसन को पहले करते हुए बस थोड़े वो चेंजेस बाकी वही है
(12:50) पर कुंडली की दीक्षा भी बार-बार होती है ओके जैसे कि अगर मैं कभी किसी को दीक्षा दे रही हूं तो एक बार उनकी सिर्फ बिगिनिंग की दीक्षा है और उसके पहले भी प्रिपरेटरी चीज है कि उनके बॉडी को वह प्रिपेयर कर सके क्योंकि बहुत बार सुनने में आया होगा आपके भी कि यह जो तंत्र में कुंडलिनी में जाते हैं उनका माइंड स्टेबलाइज स्टेबल नहीं रहता है। थोड़े डिस्टर्ब हो चुके होते हैं। दैट इज़ द सेम रीज़न। इफ यू आर नॉट प्रिपेयरिंग फॉर इट वेल। देन यू कैन नॉट हैंडल इट। सो कुंडलिनी की दीक्षा भी बहुत बार होती है। पहले प्रिपरेटरी है। फिर उसके बाद में आप साधना स्टार्ट करते हैं।
(13:28) और जैसे-जैसे आप आगे बढ़ रहे हैं साधना में तो चेंजेस आते हैं। आपको मुद्रा चेंज करनी पड़ती है। आसन चेंज करेंगे, मंत्र चेंज करेंगे, प्राणायाम चेंज करेंगे। राइट? सो इस पे जब हम बोल रहे हैं कि कुंडलिनी को एक्टिवेट करना है। सो इज इट कि मैंने एक जो जैसे आपने बताया कि पहले प्रिपेयर किया फिर हमने एक्टिवेट किया। तो इसको हम ये कह रहे हैं कि एक बार जब कुंडलिनी एक्टिवेट हो जाती है तो इट इज परमानेंट। इट इज परमानेंट। फिर वो एक्टिवेट हो चुकी है। ऐसा नहीं है कि वो फिर सो जाती है। नहीं नहीं ऐसा नहीं है फिर सो जाती है। और ऐसा नहीं है कि बीच रास्ते में अटक जाती
(14:01) है। ये सब कुछ नहीं है। बट फिर आप बोलते रहे कि बार-बार करना पड़ता है कुंडलिनी की प्रैक्टिस। वो जो जो साधनाएं वो प्रैक्टिससेस बार-बार कंटिन्यू रखनी पड़ती। साधना में क्या है? देखिए जो कुंडलिनी है अगर जग भी गई मूलाधार में है तो साधना में जो प्रैक्टिस है वह यही है कि आप उसे डायरेक्शन देते हैं एनर्जी को आप एनर्जी को डायरेक्शन देके जिस भी चक्र है उधर तक लेके जा रहे हैं और वहां पे रोक के फिर साधना कर रहे हैं पर जिस दिन या जिस भी क्षण आप साधना बंद करते हैं तो फिर से नीचे आ जाती है राइट राइट ओके अब मुझे वो आईडिया समझ आ
(14:37) रहा है कि हमारी बॉडी के सात चक्र हैं तो तो आप कह रहे हो जब कुंडलिनी एक्टिवेट होती है तो वो सबसे बेस वाले चक्र में होगी। जब हम प्रैक्टिससेस अपनी और इंटेंस कर रहे हैं तो वो कुंडलिनी ऊपर वाले चक्रों में आ रही है। एंड अल्टीमेट गोल वही है कि मैं हम कुंडलिनी को अपने सहस्त्रारण सहस्त्र सहस्त्र थाउजेंड पेटल्ड लोटस। तो ये जो चक्र है उसे हम लोटस के सिंबॉलिज्म से देखते हैं क्योंकि लोटस के पेटल्स हैं। तो एनर्जी के जो मंत्र है वो मंत्र की क्या पोटेंसी है? हम उस हिसाब से उसके पेटल्स डिजाइन होते हैं। तो सहस्त्रार में जैसे जो नियरेस्ट ऑर्गन
(15:12) है यहां पे ब्रेन है। ब्रेन के कितने सारे डायरेक्शन में नाड़ियां हैं। हम हम तो इसीलिए उसमें सहस्त्रार है। दैट्स सो नाइस। राइट? तो आइडियली तो दिस यही है जो लाइफ का पर्पस है कि हम अपनी कुंडलिनी को अपने सहस्त्रार चक्र तक लेकर जाएं। राइट? लाइफ का पर्पस ये है खुद को जानना। खुद को जगाना। अब खुद कौन हैं हम? जैसे जो मेरी बुक से अगर आप देखेंगे कश्मीर शविज्म पे लिखी है तो लेट्स टॉक अबाउट कश्मीर शविज्म। कश्मीर शविज्म में क्या है लाइफ का पर्पस? शिव को जानना। अब शिव कौन है? खुद ही। अगर हम खुद शिव है तो एक दिन ऐसा आता है जब हम जाग जाते हैं
(15:49) और हमें याद आता है कि ये तो हम ही हैं। हम तो शिव हम कैसे बनते हैं? ये जो कुंडलिनी शक्ति है हम इसे हम सहस्त्रार में ले जाते हैं और सहस्त्रार में वास है शिव का। तो द यूनियन ऑफ शिवा एंड शक्ति दैट इज द पर्पस ये कितना अच्छा थॉट है कि वो शिवा है और वो शक्ति जो है वो वहां पर जा रही है पर सिर्फ थॉट से ही काम नहीं चलेगा ना हम करना भी तो पड़ेगा जी राइट वही कोशिश कर रहे हैं दैट्स व्हाट वी आर ट्राइंग टू डू हम ओके सो इसका मतलब ये है कि अब जो मुझे अभी तक जहां तक मैं बेस एक लेकर आया हूं कि आप बचपन से इसकी प्रैक्टिससेस कर रहे थे साधना की और जब आपकी कुंडलिनी की
(16:33) दीक्षा हुई उसके बाद आपने अपनी प्रोसेससेस में कुछ जो पहले कर रहे थे बाद में आप मान एक मुद्रा पहले कर रहे थे अब वो पहले कर ली तो कुछ प्रोसेस सेम ही था बट सीक्वेंसिंग आपने कहीं ना कहीं चेंज करी और उसके बाद जब हम बोलते कि कुंडलिनी एक्टिवेट हो रही है तो आप यह बोल रहे हैं कि वो कुंडलिनी हमारे कुंडलिनी को हम डायरेक्शन दे रहे हैं। यह पता कैसे चलता है कि जो कुंडलिनी नीचे से शुरू हो रही है। अब वो हार्ट चक्र तक पहुंच गई। यह कैसे पता चलेगा? ओके। तो हम चक्रों की बात करेंगे। चक्र के पहले मैं आपको एक फाउंडेशन क्लियर करने के लिए
(17:06) समझाती हूं कि हम डायरेक्शन कैसे देते हैं हम चक्रों के थ्रू। तो डायरेक्शन के लिए सबसे पहले जो साधना में आपको फोकस करना होता है वो है जो कोश है आपकी जो बॉडी बनी है वो लेयर से बनी है। जो सत्य है वह छुपा हुआ है। और जो इग्नोरेंस की लेयर है उसको हटाते हैं। अब उसको कैसे हटाएंगे? प्राण के थ्रू। प्राण दो मुख्य प्राण हैं। प्राण अपान। उसमें हम पढ़ने के बाद में जब प्रैक्टिस करते हैं, डिटेल में जाते हैं तो पता चलता है कि पांच प्राण हैं जिसे हमें कंट्रोल करना है। तो पांच प्राण में अगर मैं बहुत बेसिक वर्ड्स में समझाऊं तो फर्स्ट है अ प्राणवायु। यह वायु है। पर
(17:49) वायु का मतलब यह नहीं है कि सब सिर्फ सांस की बात हो रही है। प्राण ऊर्जा। ठीक है? तो जब मैं वायु कहूं तब भी आप समझिए कि मैं एनर्जी की ही बात कर रही हूं। कुंडलिनी से ही रिलेटेड है। तो फर्स्ट है प्राण वायु जिसमें हम जो शरीर में हमको प्राण लेना है जो हमें एनर्जी चाहिए जो थॉट्स आइडियाज और जो भी हमको एक पर्सनालिटी को आइडेंटिटी को हम बनाए रखने के लिए इस शरीर को जिंदा रखने के लिए जो भी हमें जरूरत है वह बाहर से खींचने की जो शक्ति है वह है प्राणवायु या प्राण ऊर्जा। फिर आती है अपान। अपान मतलब छोड़ना। जिसे हमें जिसकी जरूरत नहीं है। जैसे कि कार्बन
(18:28) डाइऑक्साइड कि हम एक्सेल कर रहे हैं। अब कितनी बार हम इन्हेल कर सकते हैं? एक ही बार इन्हेल के बाद एग्ेल तो आएगा। तो जो छोड़ने की शक्ति है इसमें हो सकता है कि प्राण या ऐसे आइडियाज, थॉट्स, मान्यताएं, बंधन जो भी है जो हमें नहीं चाहिए आगे बढ़ने के लिए। वो छोड़ने की शक्ति। फिर है व्याना जो एक्सपेंशन कि जब हमने सब चीज छोड़ दिया है जो गलत है जो हमें रोक रहा था। वह छोड़ने के बाद हम थोड़े लाइट हो चुके हैं। हम अभी आगे बढ़ रहे हैं साधना में। तो हमारा एक्सपेंशन होता है। विवेक जो शक्ति है इंटेलेक्ट वो बढ़ता है। अब हम समझने लग गए हैं कि ओके क्या सत्य है और
(19:06) क्या झूठ है। क्या ज्ञान है क्या अज्ञान है। उसके बाद में आता है उदान। उदान मतलब जो जो शक्ति है अब हम उसे डायरेक्शन दे रहे हैं। ऊपर उठाना अब चालू किया है कुंडलिनी का। तो जब भी एनर्जी का अपसर्च ऊपर के डायरेक्शन में होता है हमारे बॉडी में वो एग्जिस्ट कर रहा है उदान वायु से। उसके बाद में है समाना कि अब जाके जब शक्ति सहस्त्रार में पहुंच चुकी है और फिर शिव के साथ जब यूनियन हो रहा है तो दो जो अब एक बन गए हैं डलिटी अब सिंगल हो गए हैं जो द्वैत से अद्वैत तक हम आ चुके हैं। गेय ज्ञान और ज्ञाता अब तीन नहीं रहते हुए एक
(19:53) बन गए हैं। जब हमारे पास ड्यूलिटी अंधकार या रोशनी ऐसे दो कांसेप्ट अच्छा या बुरा ऐसे दो कांसेप्ट नहीं होते वह सिर्फ सिंगुलर एक अद्वैत में पहुंच गए हैं। वो है समाना। तो यह एनर्जी है जो पंच वायु की तरह वर्क कर रही है हमारे बॉडी में। अब इसके बाद में हम आते हैं पंचकोषों की तरफ। फर्स्ट है अन्नमय कोष। जो हम बॉडी देखते हैं लोगों की जो फिजिकल अपीयरेंस है जिस जिसे पोषण की जरूरत पड़ती है बड़े होने के लिए और इस अर्थ पे एकिस्ट करने के लिए यह सब अन्नमय कोष है। हम जब इसको भेजते हैं जब हम यह समझ पाते हैं कि हम सिर्फ इतने ही नहीं है। हम इतने सीमित नहीं है और भी
(20:38) कुछ है। तब हम पहुंचते हैं प्राणमय कोष में जो हम सांस ले रहे हैं जो हमें इस शरीर के साथ में जोड़े रख रहा है जब तक हमारा समय है तब तक वो है प्राणमय कोष। उसके बाद में हम आते हैं मनोमय कोष। अब यह दिखता नहीं है। यह हम देख के नहीं बता सकते कि मनो मनोमय कोश किधर है या एग्जिस्ट कर रहा है नहीं कर रहा है। बट हम अनुभव कर सकते हैं हमारे अंदर। हमारी सोच चल रही है। जो विचार है वह आ रहे हैं। इमोशंस आ रहे जा रहे हैं। वेव्स की तरह वह आते हैं मनोमय कोष से। तो ये बॉडी से सटल बॉडी की तरफ हम जा रहे हैं। तो जब मनोमय कोष को हम भेदते हैं। फिर आता है
(21:19) विज्ञानमय कोष जो है रोशनी की दुनिया। एक जगत जहां पर सिर्फ सत्य एक्सिस्ट कर रहा है। पर आप भी एक्सिस्ट कर रहे हैं। अभी अभी आप है और सत्य है। ड्यूलिटी अभी भी कहीं है। पर आप समझ गए हैं कि मैं कौन हूं और मुझे कैसे आगे बढ़ना है। साधना करते हुए जब हम बात कर रहे हैं सिर्फ कुंडलिनी साधना की। उसको भेद के आप पहुंचते हैं आनंदमय कोश में। जहां पर सिर्फ सत्य है। जहां पर आपकी और सत्य के बीच में जो डिफरेंस है वह खत्म हो जाता है। और तब जो शक्ति है वो शिव के साथ यूनियन हो जाता है उनका। अब यह जो मैं बात कर रही हूं एक-एक चक्र को भेदना यह अपने आप होता है। कब
(22:01) होता है? जब आप साधना करते हैं कुंडलिनी की चक्रों के थ्रू। तो जब आप यह पूछ रहे हैं, आपके क्वेश्चन भी फिर से आते हैं कि चक्रों का कैसे पता चले कि कौन सा चक्र एक्टिवेट हो रहा है, कौन सा नहीं? तो हम जब शक्ति एकदम मूलाधार में है, सो रही है तब हम रहेंगे आनंदमय कोष में तब हमें प्राणों के बारे में भी प्राणों के कंट्रोल के बारे में कुछ नहीं पता है। एकदम बेसिक में हम स्टार्ट कर रहे हैं। और जब हम जगाते हैं साधना के थ्रू शक्ति को तब साधना सिर्फ होनी चाहिए मूलाधार में। और जो ऑनलाइन सुन के भी यह साधना स्टार्ट कर रहे हैं किसी भी चक्कर में फोकस के
(22:42) सिर्फ फोकस की बात नहीं कर रही हूं मैं अगर वह साधना प्रैक्टिस कर रहे हैं कहीं बुक से पढ़ के सो दैट इज हाइली डेंजरस एंड वन शुड नॉट डू दैट तो जब दीक्षा लेते हैं तो साधना स्टार्ट होती है मूलाधार से जब मूलाधार में साधना करके एक टाइम हो चुका है और धीरे-धीरे जो आपका अज्ञान है उसके बादल जा रहे हैं जो सूर्य की किरण आप पर पड़ रही है जो आपको अब आसमान दिख रहा है खाली जब आपको बहुत शांति महसूस हो रही है तब आप समझ सकते हैं कि मूलाधार अब धीरे-धीरे एक्टिवेट होने लगा है। हम तो आपका जो भय है जो फियर है जिसका कोई मीनिंग नहीं है। बस किसी भी चीजों से डर
(23:21) लग रहा है वो खत्म हो जाता है। वो उसकी जड़ से जो भय है वह चले जाता है। उसके बाद में जो बहुत छोटे-मोटे डिस्ट्रेस है, इमोशनल आपके पास बैगेजेस है, वह चले जाएंगे। इतना जो ओवरथिंकिंग करना कि अब मैं क्या करूं? आगे क्या होगा? मुझे यह कैसे करना है? वह सब थॉट्स नहीं आएंगे। तो जो एक मेंटल क्लेरिटी है वो अपने आप आने लगेगी। लाइफ में जो आप डिसीजन ले रहे हैं तो आपको पता होगा कि यह सही है यह गलत है। यह मेरे लिए सही है। यह समाज के लिए सही है। ये जो क्लेरिटी है ये खुद आने लग जाती है। सो इसका मतलब यह भी एक सब्जेक्टिव हुआ कि आपकी साधना कितनी इंटेंस है और आपकी साधना
(24:06) में कितना सीरियसनेस है। उसी के हिसाब से कोई जो कुंडलिनी होगी वह मूलाधार से अह उसके अगले चक्र की तरफ जाएगी। राइट? क्योंकि ऐसा हो सकता है कि किसी की किसी की कुंडलिनी मूलाधार से अगले चक्र में एक महीने में चली गई। हो सकता है किसी एक साल तक ना जाए। पॉसिबल हो सकता है किसी के एक जन्म में ना जाए। मूलाधार भी एक जन्म में नहीं हो पाए। ऐसा भी हो सकता है। हो सकता है। हो सकता है। तो इसमें बुरा मानने की या अपने आप को बहुत पीछे समझने की कोसने की जरूरत नहीं करते हुए साधना करनी चाहिए। क्योंकि एक एक स्टोरी है बहुत छोटी सी है। तो एक नारद मुनि जो भगवानों के ऋषि हुआ
(24:46) करते थे। वो जंगल से जा रहे थे। अब वहां पर उन्हें एक पहले एक आदमी मिलता है जो बहुत नाच रहा है, खुश है और वो भगवान को देखता है जब नारद ऋषि आ रहे हैं पूछते हैं कि अच्छा भगवान आप कहां जा रहे हैं? वो बताते हैं कि मैं स्वर्ग की तरफ जा रहा हूं। तो पूछते हैं ऋषि से कि आप यह पूछ के बताइएगा जब स्वर्ग में आप जाएंगे भगवान से मिलेंगे तो आप पूछ के बताइएगा कि मुझे मोक्ष कब मिलेगा? बोलते ठीक है पूछ के बताऊंगा जब आऊंगा तब फिर वह और आगे बढ़ते हैं तो वहां पर एक साधु बैठे हैं जो साधना कर रहे हैं ध्यान कर रहे हैं वो जब नारद मुनि नारद मुनि को देखते हैं वो भी
(25:26) यही सवाल पूछते हैं कि आप कहां जा रहे हैं अच्छा जा रहे हैं तो मुझे पूछ के बताइएगा कि मुझे मोक्ष कब मिलेगा तो नारद ऋषि बोलते हैं ठीक है बताता हूं वो आगे बढ़ गए फिर कुछ महीने साल बीते उनका फिर से आना हुआ उसी जंगल में फिर वो पहला आदमी मिला जो पागलों की तरह नाच रहा है, खुश है। और फिर वही दूसरा आदमी भी है जो बहुत साधना कर रहे हैं। तो जब वो उल्टे वापस रास्ते आ रहे थे तो पहले उनको यह आदमी मिले जो बैठ के साधना कर रहे थे। उन्होंने पूछा कि अच्छा भगवान से मिले तो आपको क्या बताया? तो नारद मुनि कहते हैं कि मुझे बताया कि आपके तीन जन्म लगेंगे फिर आपको मोक्ष मिल
(26:06) जाएगा। तो बहुत दुखी हो गए कि अरे भाई तीन जन्म और मतलब एक जन्म काफी नहीं है। तीन और बचे हैं। तो बोला कि हां मुझे तो अब यही बताया है। तो बहुत दुखी है। उन्होंने साधना तो रोक दी। बहुत बैठ के दुखी हो रहे हैं। रो रहे हैं। नारद ऋषि आगे बढ़े। तो फिर ये आदमी है जो नाच रहा है। वो रोकता है कि अरे रुकिए रुकिए। बताइए भगवान ने क्या बताया? तो नारद मुनि बोलते हैं कि हां मतलब बताया तो है पर उन्होंने यह बोला कि जो पेड़ है तुम्हारे पीछे इतना बड़ा इमली का पेड़ या बरगद का पेड़ जो भी है उस पेड़ में जितने पत्ते हैं उतने जन्म लगेंगे और फिर मोक्ष मिलेगा और यह आदमी और
(26:48) नाचने लगा और कूदने लगा तो ऋषि भी बड़े अचंभित हो गए। उन्होंने पूछा कि अरे जब पहले मैं जिस आदमी से मिला तीन जन्म में बोला तो वो तो रो रहा है। उसकी आवाज तो मुझे यहां तक आ रही है रोने की। और तुम इतने खुश क्यों हो रहे हो? तो बोलता है कि अच्छा इसका मतलब ये है कि मेरे लिए मोक्ष पॉसिबल है। मैं मिल मिल सकता है मुझे मोक्ष। ठीक है इतने टाइम लगेगा। पर मुझे भी मिल सकता है। तब वहां पे यह कथा आती है कि भगवान ने वो सुना और भगवान ने उसी टाइम बोला कि तुम्हें मैं अभी मोक्ष देता हूं। तो डिसपॉइंट मत होना कभी भी कि जब भी साधना कर रहे हैं और ऐसा लगे कि
(27:28) अभी बहुत बाकी है। मेरी कुछ प्रगति नहीं हो रही है। जल्दी रिजल्ट नहीं मिल रहे हैं। तो इस आदमी को याद करना कि जो पागलों की तरह नाच रहा था और उसे उसे क्षण मोक्ष मिल गया। आई फील कि जब भी हम भगवान से कनेक्ट करते हैं स्पिरिचुअलिटी में स्पेशली जब हम किसी वजह से करते हैं सो वह एक कहीं ना कहीं मुझे लगता है कि एक आपका मन कहीं ना कहीं करप्ट है कि मुझे कुछ मिल जाएगा। यह हो जाएगा तो उसके लिए मैं कर रहा हूं। पर अगर यह मुझे लगता है इफ दिस बिकम्स अब एक एक वे ऑफ़ लिविंग बनता है आज के लिए। इस इस क्षण के लिए तो आप बिना किसी रिजल्ट के
(28:15) लिए कर रहे हो और फिर एक साल एक जन 100 जन आप सोचोगे नहीं इस सेकंड में जो मैं फील कर रहा हूं वही इतना पावरफुल है दैट आई एम जस्ट लॉस्ट इन द प्रोसेस आई थिंक इट्स अ ब्यूटीफुल थॉट टू थिंक अबाउट अब्सोलुटली हम जब इसके बारे में मैंने पढ़ रहा था जो कुंडलिनी है हम इसको को स्नेक्स की तरह क्यों रिप्रेजेंट किया जाता है? देखिए कुंडली साधना अलग-अलग परंपरा में अलग तरह से प्रैक्टिस की जाती है। ओके? तो जब आपको जिस परंपरा से आप दीक्षा ले रहे हैं अगर आपके गुरु ने आपको बताया है कि कुंडलिनी को सिर्फ स्नेक की तरह देखो तो वो उस पे डिपेंड करता है। कहीं पे
(29:01) सिर्फ एनर्जी की तरह देखते हैं। जैसे कि यह जो अक्षुरिका उपनिषद में जो फ्रंट कवर में है वो मैं आपको बताई थी ये कुंडलिनी शक्ति है। सो ब्यूटीफुल। हम सो यह जो शक्ति है हम इसको आइकोनोग्राफी के लिए उसमें जो उन्होंने मुद्रा आसन यह सब रिप्रेजेंट किया है। तो यहां पे वही शक्ति को देवी के जैसे दिखाया गया है। हम तो कई बार शक्ति को सर्पिणी की तरह दिखाते हैं। कई बार सिर्फ ऊर्जा की तरह देखते हैं। जैसे कश्मीर शैविज्म में या फिर शाक्त सांख्य की जो बहुत जो समयाचार में दिव्याचार में अगर आप जाएंगे तो सिर्फ एनर्जी है। उनका फॉर्म नहीं है
(29:42) हम तो एक वो है और दूसरा जो जहां से यह सर्पिनी का या सर्प का आईडिया आया है हम वो आया है भुजंग दीक्षा से हम जब आपकी दीक्षा होती है इस शरीर के साथ अगर आप दीक्षा ले रहे हैं तो वो एक मानव गुरु चाहिए आपको एकिस्टिंग लाइव गुरु आपके सामने होना चाहिए जो आपको गाइड कर सके पर आप साधना करते हो आगे बढ़ते हो तो कई बार ऐसा होता है आपको मंत्र खुद रिवील होते हैं। आपके एक्सपीरियंसेस नए-नए आते हैं। जैसे हम जो ऋषियों की बात करते हैं ऋषि वेद द सीियर जिनको मंत्र खुद सामने दिखे। मंत्र के दृष्टा है ऋषि यह सब कुंडलिनी एक्टिवेशन के बाद
(30:26) उन्होंने मंत्र बनाए नहीं है तो वैसे ही जब कुंडलिनी की साधना करते हैं तो बहुत सारे एक्सपीरियंसेस होते हैं उसमें से जो एक एक्सपीरियंस है जिसको सेल्फ दीक्षा भी कहा जाता है वो एक दीक्षा का नाम है भुजंग जहां पे जो मेरुदंड है स्पाइनल कॉर्ड है वहां पे मूवमेंट फील होती है लोगों को तो जो मूवमेंट डाउन से अप फील होती है सो दे फील लाइक देयर इज़ एनर्जी व्हिच दे कैन फील इट इज़ फ्लोइंग अप। दे कैन सेंस इट। तो जब वो होता है उसे भुजंग दीक्षा के नाम से बोलते हैं। वहां से वो टर्म आया है कि कुंडलिनी एक सर्प है और वो उनकी गति नीचे से ऊपर होती है।
(31:05) मैं यह सोच रहा था कि सांप क्यों दिया? व्हाई स्नेक? बिकॉज़ दे फेल्ट लाइक हाउ द मोमेंट ऑफ़ एनर्जी इज हाउ इट इज़ गोइंग फ्रॉम डाउन टू अप दे सेंसड इट। और कुछ लोगों को लगता है कि इट इज़ लाइक इंसेक्ट। सो वो ऐसे हो सकता है सेंस ऐसा है कि जैसे सांप चलता है ऐसा ऐसा हो सकता है ऐसा भी हो सकता है कुछ लोगों में उनको चक्र फील हो रहे हैं सो दे आर ओनली डूइंग द साधना फोकसिंग ऑन द चक्रा और कुछ लोगों को लग रहा है कि वो सर्प के जैसे हैं तो इसलिए वो वैसे बोलते हैं एक्सपीरियंसेस जब कुंडली जागरण होता है जैसे कुछ लोगों को एक्सपीरियंस होता है कि
(31:40) उनको आवाज सुनाई दे रही है नॉट फ्रॉम द सेंसेस ऑफ दिस इयर्स कि बाहर की एक्सटर्नल जो ग्रॉस आवाज है वो नहीं सल अंदर ही एक गूंज है जो हमारा पूरा ब्रह्मांड है वह वाइब्रेट कर रहा है कंटीन्यूसली स्पंद जो कश्मीरी टेलिविज्म में स्पंद की जब बात करते हैं स्पंद और प्रत्याभिज्ञ स्पंद यह है कि भगवान शिव वाइब्रेशन है और वही पूरे कॉस्मोस में व्याप्त है तो वो जो वाइब्रेशन है वह खुद अंदर सुनाई देने लगता है सल सेंसेस के थ्रू वह भी एक एक्सपीरियंस है कुंडलिनी जागरण का तो कुछ लोगों को वैसा एक्सपीरियंस होता है कुछ लोगों को अंदर लाइट्स दिखते
(32:18) अब लाइट हमको एक्सटर्नल जो लाइट है जैसे सन है या आर्टिफिशियल लाइट है यह सोर्स चाहिए होता है बाहर की जो मटेरियलिस्टिक वर्ल्ड है इसको देखने के लिए अगर यहां पे लाइट्स नहीं होंगे तो हमारे जो ये आइस है ग्रॉस आइस दो दो आंखें यह नहीं देख पाएगी कि यहां पे टेबल है ये माइक है पर अंदर जो आप माइंड में किसी भी ऑब्जेक्ट को देख पा रहे हो कभी सोचा है कि यह लाइट कहां से आ रहा है आपको ऑब्जेक्ट दिख कैसे रहा है माइंड में क्योंकि माइंड में अगर आप सोचिए टेबल यू कैन सी अ टेबल। यू डू नॉट सी अ लाइट फॉलिंग ऑन द टेबल। सो वेयर इज द सोर्स? तो अंदर जो मन में हम
(32:55) देखते हैं वह स्वयं का प्रकाश है। वह चेतना का प्रकाश है। अंदर जो चीज देखते हैं उसके लिए बाहर की लाइट की जरूरत नहीं है। तो यह जो एक्सपीरियंस लोग जब लाइट देख पाते हैं वो खुद का अंदर का लाइट है। कि बाहर जब अंधेरा होता है अगर कोई साधना कर रहा है बाहर बिल्कुल अंधेरा है। लाइट का कोई सोर्स नहीं है। और साधना में समाधि में जब जाते हैं तो अंदर आज्ञा चक्र में खुद एक लाइट जलने लगता है। तो वह भी एक दीक्षा है। सेल्फ दीक्षा जिसे आप कुंडलिनी जागरण का एक साइन कह सकते हैं। तो ऐसे बहुत सारे हैं। मैं अगर सारे अगर बताऊंगी साइन यहां पे तो दीक्षा के समय लोग आके
(33:35) मुझसे बोलेंगे कि हां ये ये साइन मुझे दिखे। अब हम दीक्षा के लिए रेडी है। राइट? एक जनरलाइज यह बोल सकते हैं कि ज्यादातर जितना मैंने कुंडलिनी के बारे में पढ़ा वहां पे ज्यादा लोगों ने कहा था कि हीट जरूर फील होती है। तो अब जैसे काफी अलग-अलग चीजें हैं जो किसी को भी फील हो सकती हैं। क्या कुछ ऐसी जनरलाइज चीजें हैं जो कि हम बता सकते हैं इफ हीट इज वन ऑफ़ देम कि अगर कुंडलिनी एक्टिवेट होती है तो बॉडी में हीट बहुत महसूस होती है। कुंडलिनी एक्टिवेट होती है तो आई वुड नॉट से कि तब हीट जनरेट होती है। एनी साधना यू आर डूइंग व्हिच इज रिलेटेड टू प्राण और और
(34:10) यू नो द एनर्जी का कंट्रोल दी साधना एनी इंटेंस साधना रिलेटेड टू तंत्र और यू आर चटिंग बीज मंत्र एनी शक्ति बीज मंत्र देन हीट विल बी जनरेटेड क्योंकि जो मंत्र है वो बहुत पोटेंसी के मंत्र होते हैं। तांत्रिक मंत्र की बात करें तो जब वो चैंट कर रहे हैं। अब आपकी जो मेंटल फ्रीक्वेंसी है अभी तक आप जहां पे थे उसे आप चेंज कर रहे हैं। क्रिएट इट इज़ नॉट समथिंग सुपर नेचुरल जो भी साधना कर रहे हैं तंत्र की साधना कर रहे हैं उनमें तो हीट जनरेट होती है। देन देयर आर सो मेनी वेज़ योर गुरु विल टीच कि उस हीट को कैसे हम शांत कर सकते हैं।
(34:50) सर्टन थिंग्स लाइक वेरिंग सिल्वर एंड डूइंग दिस ये सब हीट को कम करने के लिए ही है। ये क्या मुद्रा? दिस है ना? यू डू और आपने साधुओं को देखा होगा। वो फूल पहनते हैं, फूल की माला दिखाने के लिए नहीं है। उससे भी जो टेंपरेचर है बॉडी का वो कम हो जाता है। सफेद कपड़े पहनना और आपने अोरियों को देखा है। चांदी बहुत पहनते हैं। वो शांत करता है। आपने क्यों लगाया है ना? इसीलिए लगाया। इसीलिए जब हम कुंडलिनी की साधना करते हैं, शक्ति की साधना करते हैं। तो जब हीट बहुत जनरेट हो जाती है। हां। हां तो एक तो ये है जो सल एनर्जी है सल हीट है पर अगर वो इतनी ज्यादा हो जाती है तो कि
(35:30) बॉडी भी आपकी बहुत गर्म होने लग जाती है तो फिर आप इसे ऐसी चीजों को यूज़ करते हैं ये आपको महसूस कब हुआ पहली बार कि आपको बहुत हीट हो रही है और आप आपको अप्लाई करना चाहिए व्हेन डिड यू फील ये तो इट हैज़ बीन फाइव सिक्स इयर्स फ्रॉम नाउ ए इफ आई एम एक्यूरेट फाइव सिक्स इयर्स से मैं यह लगाने लगी एंड मुझे मैंने पढ़ा हुआ था जब आयुर्वेददा पढ़ रही थी तो क्या-क्या आपके बॉडी के लिए ठंडा है क्या गम है उसमें आता है बट आई यू नॉट अप्लाई इट एंड देन आई स्टार्टेड अपाइंग क्योंकि मैं जब ट्रेवलिंग ट्रेवलिंग कर रही हूं तो बहुत बार ऐसा होता है कि आप बहुत गर्म जगह पे
(36:11) ऑलरेडी हो हम तो मैं साउथ इंडिया में थी और वहां पे बहुत गर्मी थी देन आई स्टार्टेड अप्लाइंग इट एंड हेंस आई आई डू सो मेनी थिंग्स व्हिच विल मेक मी फील यू नो लिटिल काम और थोड़ा शीतल आयेदा के बहुत सारे चीजें जैसे कि मैं बहुत अभी तो साल हो गए हैं जब आई ड्रिंक दिस अर्जुन अर्जुन का जो ट्री है उसकी जो छाल है उसका पाउडर फॉर्म में दैट आई ईट और ड्रिंक एवरीडे आई वेयर सो मेनी सिल्वर थिंग्स आई वेयर वाइट ओनली जैसे आपने देखा कि मैं वाइट पहन के आई थी यहां पे कैमरा के लिए या इवेंट के लिए रिट्रीट के लिए आई वेयर शॉल व्हेन आई एम मीटिंग पीपल अदरवाइज आई डोंट इवन वेयर एनी
(36:53) कलर क्योंकि वाइट जो है वो भी बहुत आपको शांत कर देता है। हम फिर जो अघोरी काजल लगाते हैं जो भी तंत्र कर रहे हैं आप देखेंगे कि वो काजल लगा रहे हैं। जरूरी नहीं है कि वो सिर्फ वुमेन ही हो। मैन यू मीट इन इन फोटो इन वीडियोस यू मस्ट हैव सीन जो अघोरी मैन भी है वो भी बहुत काजल लगाते हैं। वो भी आपको बहुत ठंडा करता है। ओ मुझे ये नहीं पता था कि काजल का ये भी एक रीजन हो सकता है। ओके ओके। सो काजल मतलब बॉडी को ठंडा रखता है। दिस इज आईडियाज। क्योंकि जब आप हीट बहुत है तो आप आंखों में देख सकते हैं कि आइज बहुत पिंक हो जाती है, रेड हो जाती है। जब बहुत हाई
(37:32) टेंपरेचर में भी जैसा फील होता है। इट इज द सेम थिंग सेम हीट यू फील। यू वोंट रियलाइज व्हाट टेंपरेचर पीपल आर फीलिंग अराउंड यू। व्हेन यू सी देम देन यू रियलाइज अरे दे आर द वैरी कामर इन दिस टेंपरेचर एंड व्हाई एम आई फीलिंग सो हॉट इन हियर। राइट राइट। तो जब आंखों में काजल लगाते तो आंखें ठंडी होती है। जिसकी कुंडलिनी एक्टिवेट हो जाती है हम उनकी पर जैसे आइज का तो हमने जो डिस्कस कर लिया जिसकी कुंडलिनी एक्टिवेट हो जाती है उनके अंदर खुद में क्या चेंज आने लग जाता है? हां जैसे मैं आपको बता रही थी उसी को कंटिन्यू कर सकते हैं। जैसे मूलाधार में
(38:02) मैंने आपको बताया था कि जो फियर है जो इमोशनल टर्मल है वो चले जाता है। तो दैट हैज़ टू बी देयर। उसका ध्यान रखना है कि यह हो रहा है क्या? देन देयर विल बी जस्ट हायर वी गो मूलाधार से सेकंड चक्र में जाएंगे। सेकंड चक्र में यू विल हैव क्रिएटिविटी कि आपके पास बहुत सारे आइडियाज आने लग जाएंगे और क्रिएटिविटी इतनी आएगी कि यू विल यू कैन नॉट स्टॉप योरसेल्फ फ्रॉम क्रिएटिंग थिंग्स। बहुत सारे आइडियाज आएंगे। हो सकता है कि आप क्रिएटिव पर्सन नहीं हो अभी तक। हाउ वुड यू नो दैट क्रिएटिविटी इज फ्लोइंग थ्रू यू नाउ? बाय ट्राइंग टू क्रिएट समथिंग बाय इंडल्जिंग
(38:43) इन डिफरेंट एक्टिविटी नॉट जस्ट एक्टिविटीज इन क्रिएटिव एक्टिविटीज म्यूजिक प्ले कर सकते हैं। आप कोई नया इंस्ट्रूमेंट को उठाइए और देखिए कि अभी आप में क्या चेंजेस आ रहे हैं। पहले आपको जितना टाइम लगता था सीखने में अभी कंपैरेटिवली कितना लग रहा है। तो वो चीज है। उसके बाद में हम अगर नेवल चक्रा में आते हैं देन दैट इज़ अबाउट एनर्जी। यू विल हैव ट्रेमेंडस एनर्जी। आपको यह पता नहीं चलेगा कि इस एनर्जी को मैं रोकूं कैसे। इतनी एनर्जी है। इतनी सारी एनर्जी मैं क्या-क्या काम करूं। तो वो जो बहुत एनर्जी है वो यहां पे आएगी। देन वी आर गोइंग हायर टू अ हार्टक।
(39:19) हार्टक में जैसे मैं बात कर रही थी प्राण की और कोषों की तो जो चक्र भेदन है वह भी आप यह समझिए कि आप धीरे-धीरे अपने पास तक आ रहे हैं। अपने सत्य तक आ रहे हैं। तो यहां पे जो भेद है कि मैं अलग हूं, सामने वाले लोग अलग हैं। मैं और समाज मेरी फिलॉसफी, दूसरों की फिलॉसफी उसको छोड़कर अभी हम आ जाते हैं हम पर कि हम एक ही हैं। मैं यह सामने वाले की बात सुन सकता हूं। तो जो एक्सेप्टेंस है, जो एमथी है और दूसरों के इमोशन को समझने की जो क्वालिटी है, दूसरों के पेन को समझने की अगेन एमथी वह आ जाती है। वह अभी तक आप में हो सकता है कि बिल्कुल आपने एक्सपीरियंस नहीं की हो। देन
(40:03) तो इट इज़ वेरी वेल फॉर यू कि आप देख सकते हैं कि इतना चेंजेस कैसे आ गया मुझ में। क्योंकि चेंजेस बहुत आते हैं। इट्स नॉट लाइक हां मुझे बहुत सोचना पड़ेगा बैठ के। फिर एनालाइज़ करना पड़ेगा। कुंडलिनी एक्टिवेशन इज़ नॉट दैट सल। हम वो बहुत बड़े-बड़े इंट्यूटिवनेस भी बढ़ जाती है इंसान की। जब हम आगे आगे आएंगे उस चक्र पे तो ये हार्ट चक्र अगर एक्टिवेट हो रहा है दैट इज देयर एंड यू विल फील वेरी हैप्पी जॉय फॉर नो रीज़। तब आपको लगेगा कि खुश होने के लिए मुझे रीज़ नहीं चाहिए। हम अगर दूसरे मुझसे खुश होंगे तभी मैं खुश होऊंगा। ये तो मीनिंगलेस है।
(40:38) तो खुशी अंदर से आती है। देन वी आर गोइंग टू विशुद्धि थ्रोट चक्र। तो आपने जो एक्सपीरियंस किया है आप सिर्फ वही बोलेंगे। हम और आप जो बोलेंगे वो आपने एक्सपीरियंस किया है या कहीं ना कहीं सत्य से ही आ रहा है। आप वही बोलेंगे और अगर आपने जो बोला है वो सत्य होगा। मतलब मैं ये नहीं बोल रही कि जो बोल दिया वो सच हो जाएगा। ऐसा कुछ जादू मंत्र नॉट अबाउट दैट कि फैक्ट पे ही बेस्ड रहेगा। एनालिटिकल होगा। ये काम हो जाएगा। 8:00 बजे तक हो जाएगा। या यू कैन यू कैन से दैट। तो मैं आपको यह ट्राई कर रही हूं कि जो सुनने वाले हैं वह फिर बहुत ज्यादा सुपर नेचुरल और अनबिलेबल
(41:18) थिंग में ना जाते हुए प्रैक्टिकल में रहे इसलिए मैं क्लेरिफाई कर रही हूं। उसके बाद में जब आज्ञा चक्र में आते हैं दिस चक्र आज्ञा चक्र और थर्ड आई एज इट इज कॉल्ड इट इज़ अबाउट द थिंग यू वर आस्किंग कि जो इंट्यूशन है वो बढ़ जाता है क्योंकि जो एनिमल्स हैं वो इंस्टिंक्ट पे काम करते हैं। अभी क्या लग रहा है? अभी भूख लग रही है। अभी नींद आ रही है। और अगर आप देखेंगे तो बहुत सारे जो ह्यूमंस हैं इंसान है वो भी उसी में है आजकल इंस्टिंक्ट में। नाउ व्हाट इज़ इंट्यूशन? ह्यूमन और एनिमल में यही डिफरेंस है। इंट्यूशन और इंस्टिंक्ट। तो इंट्यूशन बहुत बढ़ जाएंगे।
(41:56) क्या सही है, क्या गलत है पता चलने लग जाएगा। एंड दैट अगेन इज नॉट समथिंग सुपर नेचुरल। हम दैट इज योर ओन सेंस जो अभी तक डीएक्टिवेटेड थी। अभी आप एक्टिवेट कर रहे हैं। यू कैन सी थ्रू। जब सिद्धियों की बात होती है तो सिद्धियां भी ऐसी नहीं है कि बाहर से आपको कुछ मिलती है। आप ही जाग रहे हैं कि अरे मेरे लिए तो यह पॉसिबल है। हम दैट इज देयर। तो जब आज्ञा चक्र तक आते हैं तो अज्ञान इतना कम हो चुका है कि अब साधना बहुत सरल लगने लगती है। अब लाइफ इजी हो जाती है अगर यहां तक पहुंच गए तो। एंड देन कम्स सहस्त्रार। सहस्त्र आज्ञा तक आज्ञा चक्र तक की यहीं तक की
(42:36) दीक्षा होती है। इसके बाद दीक्षा नहीं है। इसके बाद आपको खुद ही कुंडलिनी को डायरेक्ट करके सहस्त्रार तक ले जाना है। और फिर जो एक्सपीरियंस होते हैं वो है कुंडलिनी के सहस्त्रार तक पहुंचने के। शिव से यूनियन होने के एक्सपीरियंस। सो इसी एक्सपीरियंस को मैं कह रही थी कि सेल्फ दीक्षा है। यह दीक्षा आपकी खुद जो आपकी आत्मा या कुंडलिनी या शिव आप जिसमें भी मानते हैं। राइट? तो ऐसे मानते हैं कि वो आके आपको दीक्षा दे रहे हैं। दैट इज दी अल्टीमेट। राइट? तो जो इंट्यूटिवनेस से हम बात कर रहे हैं वो कह रहे हैं हम आज्ञा चक्र से एक्टिवेट होती हैं और हमें चीजों के बारे
(43:13) में पहले से अंदर से फील होने लग जाता है जैसे जानवरों को भी लगता है कई बार आई रिमेंबर अभी रिसेंटली आई वेंट टॉस्कास्ट दिल्ली में हॉस जगह है सो वहां पे मैं वहां पे ना एक लेक है बहुत खूबसूरत सी लेक मैं उस लेक के पास जाकर बैठ गया सो वहां पर मैं बैठकर ये सोच रहा था कि जो जिस लेक में बतख है वो क्या सोच रही होंगी बाद में मैं भी सोच रहा था मैं क्यों सोच रहा था पर बट आई वास थिंकिंग अबाउट इट तो मैं उसको ऑब्जर्व करने लगा जो वो डक थी तो वो डक जो थी वो घूम रही थी बस हम घूम रही थी तो फिर मैंने ये सोचा शायद वो उस वक्त उसको भूख लग रही है और वो अपना
(43:53) खाने के लिए आसपास जा रही है और यही उसका थॉट प्रोसेस है अबाउट इस वक्त कोई डेंजर आ रहा है पीछे कोई मेबी मारने के लिए आ रहा है तो मैं भी भाग जाऊंगी इस वक्त भूख लग रही है तो खाना खा लिया। इस वक्त अगर मेरे को यह स्टेप लेना है तो मैंने कर दिया। तो मुझे लगा मे बी देयर इज नो ओवरथिंकिंग, देयर इज़ नो इनसिक्योरिटी। इट्स अब्सोलुटली इस वक्त मुझे क्या करना है एंड आई डू इट। और आई थिंक शायद वह जो आपने आगे चक्र की बात करी हमने कि जब वह हम एक्टिवेट कर रहे हैं उस थॉट में जब आ रहे हैं तो इट इज सिंपली दैट आपके माइंड में इतनी क्लेरिटी है दैट यू
(44:35) नो व्हाट टू डू एंड व्हाट नॉट टू डू यस यू गॉट इट राइट अब हम एक ये चीज में आ जाते हैं कि आज हमने एक्सपीरियसेस सुने और सरफेस लेवल पर कहीं ना कहीं हमने समझने की कोशिश करी थोड़ा सा डीप भी गए। अब मैं यह जानना चाहता हूं कि जो लोग आज इस पडकास्ट को सुनके एक्साइटेड हो गए हैं अबाउट मैं भी कुंडलिनी को एक्टिवेट करके दिखाऊंगा अपनी लाइफ में। हाउ डू दे स्टार्ट द जर्नी टू कुंडलिनी एक्टिवेशन? स्टार्ट विद मेडिटेशन। हम ध्यान कीजिए। हम ध्यान में आप धारणा से स्टार्ट कर सकते हैं। धारणा जो है आप किसी भी ऑब्जेक्ट ऑफ कंसंट्रेशन किसी भी आपको देवी देवता के जो
(45:20) चित्र है या कोई सिंबल है जिसमें आप बिलीव करते हैं। एनीबडी एनीथिंग एनीबडी किसी पे भी आप ध्यान आपका कंसंट्रेट कीजिए। आपका जो मन है उसको पहले शांत करना सीखिए। हम क्योंकि अगर मन शांत नहीं है देन ऑल द साधना एंड कुंडलिनी बहुत दूर की चीज़ हो जाती है। तो पहले धीरे-धीरे आप सत्य के पास आइए। इसको हम थोड़ा और प्रैक्टिकल बेस करें। आप ये सोचो कि आपके शिष्य बैठे हैं। एक सेशन चल रहा है और आज आपको बताना है कि कुंडलिनी एक्टिवेट करने के लिए प्रैक्टिकली आप सुबह उठ के इतने बजे करें, इतनी देर करें। यह मंत्र पढ़ें या मे बी बिकॉज़ आपकी अपनी रीजर्नी है। और जो आज
(45:57) आपको सुनेंगे जो इस कन्वर्सेशन का पार्ट बनेंगे। मुझे लगता है वो कहीं ना कहीं हमारी एनर्जी से भी कनेक्ट करेंगे। सो जो जिसको फॉलो कर रहा है वो करें। बट जिस पाथ में आप हैं हम आप किस शक्ति को अ रिप्रेजेंट करते हैं? जो आपके शिष्य हैं वो किस तरह से प्रैक्टिससेस करते हैं? देखिए मैं कभी भी किसी को भी किसी के भी ऊपर अपने बिलीफ थोपूंगी नहीं। राइट? और जो भी गुरु है वो भी यही ध्यान रखते हैं कि हम जो बिलीव कर रहे हैं वही दूसरों को दें। वो बहुत गलत हो जाता है। सो व्हाटएवर दे बिलीव इन अगर कोई शक्ति की साधना कर रहे हैं तो उनकी जो जो अगर साधना
(46:34) नहीं भी कर रहे अगर एकदम बिगिनर भी है अगर उनका लगाव कोई देवी देवता से है कोई शक्ति से है तो साधना उन्हीं के ही बारे में बताई जाती है। इसीलिए सबके लिए साधना अलग होती है। अगर कोई किसी भगवान से जिनका लगाव है मैं अगर उन्हें किसी और की ही दीक्षा दे दूं। किसी और का ही मंत्र दे दूं तो उनका ध्यान लगने वाला नहीं है। उन्हें फिर नया सीखना पड़ेगा। उनका ध्यान कहीं और जा रहा है और साधना कहीं और जा रही है। ऐसा नहीं होता है। सो दीक्षा सबके लिए अलग बहुत सारे रीज़ंस है। एक रीज़न यह है कि सब लोग के जो थॉट्स है सब लोग के टेंपरामेंट बहुत अलग है।
(47:09) कनेक्शन दीक्षा अलग है। तो जितने भी साधक हैं जिन्होंने मुझसे दीक्षा ली है, हर एक की दीक्षा अलग है। ओह! दीक्षा ऐसे नहीं है कि मतलब मैं बैठी हूं और मैं बोलूं यह मंत्र सब लोग जपेंगे या यह ध्यान सब लोग करेंगे। यह मुद्रा में बैठेंगे। नहीं सबके लिए अलग होती है। आप किसकी करते हैं साधना? शिवा मेरी जो साधना है वह दिव्याचार में आती है। जहां पे आप किसी देवी देवताओं के फॉर्म की साधना ना करते हुए हम आप किसी की पूजा पाठ या कर्मकांड ना करते हुए समयाचार दिव्याचार यानी मतलब अंदर आपकी साधना चलती है जिसमें है पूरा तंत्र जो प्रैक्टिकल तंत्र है जैसे शिवा बियों्ड
(47:49) शिवा जो फर्स्ट बुक है उसमें शिव को कैसे दर्शाया है उसमें शक्ति क्या है और जैसे ये सेकंड बुक का उपनिषद की बात कर रहे हैं तो इसमें जो मैंने एक्सप्लेन किया है भले ही बाहर एक शक्ति का स्वरूप है पर अंदर तो साधना की पद्धति है कि ध्यान कैसे करना है धारणा कैसे करनी है हम बहुत प्रैक्टिकल है तो मेरी जो साधना है मेरी फिलॉसफी वो यही है कि अगर मैं किसी को बता रही हूं साधना करना तो मैं उनको ये भी मेरा काम है बताना कि उसे अप्लाई कैसे करना है प्रैक्टिकल क्या है क्योंकि सिर्फ थ्यरी से आप कहीं आगे बढ़ नहीं सकते राइट सो दैट इज व्हाई आई प्रैक्टिस इन दैट्स
(48:26) व्हाट आई प्रैक्टिस इन पर अगर मेरे पास में कोई ऐसे साधक आ रहे हैं जो भक्ति के हैं जिन्हें भक्ति पसंद है जो भगवान के नाम जप कर रहे हैं तो मैं उनको दीक्षा नहीं दे सकती। हम मैं उनको दीक्षा यही दूंगी जो मैं प्रैक्टिस कर रही हूं। हम जहां पे प्रैक्टिकल साधना है। राइट तो जो दीक्षा के लिए आ रहे हैं उनको भी पहले ये समझना पड़ेगा कि उन्हें किस जगह जो अभी कंफ्यूज्ड है। जी हो सकता है बहुत आई आई फील काफी मैं शिव को भी मानता हूं। शक्ति को हां मानता हूं सभी के हैं। पर अब होता है ना कि आप मुझसे पूछो कि एक बताओ। शायद वह जवाब ना मिले तो
(49:02) फिर तो वह गुरु का काम है कि आपको गाइड करें आपको गाइड करें क्योंकि अल्टीमेटली सच ये है कि भगवान मानने की चीज नहीं जानने की चीज है हम तो ये जो साधना का पाथ है वो यही है कि आप जानने के लिए आगे बढ़ो आप में वो क्यूरियोसिटी आए ओके सो इसको हम यहां पर ले लेते हैं कि कुंडलिनी एक्टिवेशन का फर्स्ट पार्ट है मेडिटेशन आप जिसको भी मानते हैं आप नहीं भी क्लियर है तो आप जिनको भी स्ट्रांगली जिसकी तरफ आप अट्रैक्ट हो रहे हैं। अब आप बोल रहे हो मैं सभी की तरफ स्टंगली अट्रैक्ट हो रहा हूं। तो ऐसे कभी शुरू ही नहीं हो पाएगा। तो मे बी शिव और मे बी
(49:36) राधा और जो भी आपको फील हुआ तो आप कह रहे हो कि मैं उनके पिक्चर सामने लगा के लाइक दिस आप कह रहे हैं कि मैं मेडिटेशन शुरू कर रहा हूं ऑन अ डेली बेसिस। कितनी देर? डेली बेसिस जितना आप कंफर्टेबल हैं। 5 मिनट 10 मिनट और मेडिटेशन के लिए कोई टाइम नहीं होता है। ऐसा नहीं है कि आप ब्रह्म मुहूर्त में उठ के बैठ के इसी आसन में करें। जब आप स्टार्ट कर रहे हैं मेडिटेशन तो आप यह ध्यान दीजिए कि दिन में ऐसा कौन सा समय है जब आपकी सांस ऑटोमेटिकली शांत हो जाती है। जब आपका मन खुद इतना चंचल नहीं होता है मोस्टली वो होना चाहिए शाम के समय शाम का जो प्रदोष काल है सनसेट हो
(50:15) रहा है तो जब प्राण वायु है जो सूर्य में सूर्य नाड़ी में मतलब राइट साइड के बॉडी में जो प्राण चलते हैं उसकी जगह धीरे-धीरे लेफ्ट में आती है। हम्म। जब भी हम कुछ काम कर रहे हैं जहां पे बहुत फिजिकल एफर्ट चाहिए, बहुत मेंटल एफर्ट चाहिए तो आप नोटिस करेंगे कि हमारी जो ब्रीथिंग है वो राइट नस्ट्रिल से होती है। और जब भी हम सोते हैं, शांत है, मेडिटेशन कर रहे हैं तब लेफ्ट नस्ट्रिल से तो पहले तो आप यह देखेंगे कि ऐसा दिन में कौन सा टाइम है जब आपकी चंद्र वायु, चंद्र नाड़ी चल रही है। जब आप शांत हैं और आप वो टाइम फिक्स करेंगे मेडिटेशन का।
(50:51) देख रहा हूं मेरी कौन सी एक्टिव है अभी। ओके। राइट तो मे इवनिंग का हो गया बहुत सहज हो जाएगा तो जो मैम लेफ्ट नस्ट्रिल कब हमारी ईली फ्लो हो रहा है तो लेफ्ट इज चंद्र नाड़ी ताकि आपको बहुत ज्यादा एफर्ट नहीं देने पड़े कामनेस से हो जाएगा यस और जब यह सहज खुद ही सली हो रहा है शांत आपका मन हो रहा है अगर आपने वही टाइम चूज़ किया तब आप ज्यादा देर बैठ सकते हैं आसन पे और फिर आपका आसन है आसन आप अगर साधना के पथ पे आपको तंत्र में आगे बढ़ना है या कुंडलिनी के में आपको आगे बढ़ना है तो अभी से साधन आसन ये जो साधना में यूज़ होने वाली सब चीजें उन पे आप ध्यान दीजिए। तो
(51:29) स्टार्टिंग कर रहे हैं अगर सिर्फ मेडिटेशन से अभी उस रास्ते में जाने के लिए तो बेस्ट इज़ कुशा का आसन। कुशा जो घास है उसका आसन। हमेशा आसन हमें नेचुरल जो चीजों से बना रहता है ऑर्गेनिक वो यूज़ करना चाहिए। नॉट प्लास्टिक और एनीथिंग। उस पे बैठिए। और उसके बाद में जो भी मैंने आपको सिंबल बोले हैं कि कोई भी देवी देवता हो सकते हैं उससे कोई फर्क नहीं पड़ता है कि आप भगवान में मानते हैं या नहीं मानते हैं। जो तंत्र है वो आपसे यह नहीं पूछता कि आप कौन से भगवान में मानते हैं। तंत्र में आपको खुद का सत्य जानना है। आपको क्यूरोसिटी होनी चाहिए।
(52:04) राइट? जहां पर भी आपका मन शांत हो रहा है। जो आपको पसंद है वो सामने रख के उसे देखिए। जैसे जो बहुत सारे लोग देवी देवताओं को रखते हैं। अपने गुरु के पिक्चर्स रखते हैं और जो हिंदू नहीं है जीसस क्राइस्ट के पिक्चर रख सकते हैं जो क्रिश्चियन है। इट डज नॉट मैटर। अब जैसे कई बार हमने एक चक्र के ऊपर एपिसोड भी किया था इन द पास्ट तो उसमें उन्होंने बताया था कि हर चक्र का एक मंत्र होता है। हम तो जब आप मूलाधार में है तो इस पर्टिकुलर मंत्र को नहीं नहीं जब चक्रों का मंत्र होता है पर दीक्षा लेनी होती है आपको। ओके। तो आपको गुरु बता सकते हैं कि मंत्र
(52:39) को कैसे पढ़ना है क्योंकि जो मंत्र है चक्रों के बीज मंत्र है तो उसका प्रोनंसिएशन जो उसका एनंसिएशन है वो बहुत परफेक्ट होना चाहिए। तो अभी ये जो हम मेडिटेशन कर रहे हैं उसमें हमें चक्र के जो बीज मंत्र है इनकी जरूरत नहीं पड़ेगी फॉर गुण नहीं नहीं नहीं पहले आपको मेडिटेशन सीखने की जरूरत है शांत खुद रखने की खुद के जो विचार है अगेन व्हेन यू विल सीट फॉर मेडिटेशन थॉट्स आर गोना कम यू कैन नॉट स्टॉप देम तो सबसे बेस्ट थिंग, सबसे इजी थिंग एंड द ओनली राइट थिंग टू कंट्रोल योर थॉट्स इज दिस कि आप जब बैठेंगे और जब आपके विचार आ रहे हैं
(53:16) तो उन्हें कंट्रोल करने की कोशिश मत कीजिए। क्योंकि जो थॉट्स है जो मन है वो एक छोटे बच्चे की तरह है। आप उसे जितना पकड़ के पास में लेके आएंगे उतना वो बाहर भागेगा। राइट? राइट? जब उसे छोड़ देंगे, स्वतंत्र छोड़ देंगे, जब उस बच्चे को पता चल जाएगा कि उसके पास फ्रीडम है तो वो नहीं भागेगा। तो मन भी वैसा है। अब मन को जितना पकड़ेंगे उतना भागेगा। मन को छोड़ दो। हम विचार आ रहे हैं आने दो, जाने दो। बस उसे देखो। बी अवेयर। बी अवेयर ऑफ द वन हु इज एबल टू सी द थॉट्स। हम क्योंकि जो इंटेलेक्ट है, इंटेलिजेंस है, सबसे जो हायर इंटेलिजेंस है, इट इज़ नॉट
(53:52) इमोशनल इंटेलिजेंस। इट्स नॉट सम मोरल इंटेलिजेंस और दीज़ ग्रॉस थिंग्स। इट इज़ द इंटेलिजेंस बाय व्हिच यू कैन सी योर ओन थॉट्स। तो आप बैठ के शांत होकर आपके खुद के थॉट्स को देखिए। थॉट्स आ रहे हैं, आने दीजिए, जा रहे हैं, जाने दीजिए। डोंट होल्ड देम। राइट? सो इसको हम यहां पे अभी के लिए इसको हम पॉज कर रहे हैं कि आप मेडिटेशन की जर्नी स्टार्ट करें। देन वैराग्य का जब मन में डिटचमेंट फील हो रही है तब हम एक हायर गाइडेंस लेंगे। जिसके बाद हम और इन डेप्थ एक कॉन्वर्सेशन करेंगे। इसमें हम मे बी वी गो डीपर इनू कुंडलिनी बट उससे पहले हम सब
(54:33) प्रॉमिस ये करेंगे कि हम फर्स्ट स्टेप पे आ रहे हैं। सिर्फ सुन नहीं रहे और यह नहीं कि और क्या होगा पहले हम एक स्टेप पर आएंगे उसके बाद हम आगे की जर्नी के बारे में मे बी वी विल एक्सप्लोर थैंक यू सो मच ये मैंने आपकी बुक्स देखी हैं। शिवा बियों्ड शिवा ब्यूटीफुल ट्रुथ नेवर स्पोकन शैवज़्म बियड इट सरफेस लेवल इंटरप्रिटेशन शविज़्म में वो अभिनव गुप्ता जी को तो आई आई एम श्योर आपने बहुत इंटेंसली पढ़ा होगा आपने कब पढ़ा उनको पहली बार अभिनव गुप्ता कश्मीर शविज़्म के आचार्य रहे हैं और अभिनव गुप्ता एक ऐसे आचार्य हैं कश्मीर शविज के जिन्होंने बहुत ज्यादा
(55:06) कश्मीर शविज्म को इन डेप्थ एक्सप्लेन किया है एक्सप्लोर किया है और सैड बात है मैम इंडिया में ही नहीं पता लोगों को ही नहीं पता सोड और कश्मीर शविज्म में जब उन्होंने एक्सप्लेन करना स्टार्ट किया उसके पहले तंत्र बिखरा हुआ था। हम जैसे हम देखते हैं वेदव्यास ने वेदों को बहुत अच्छे संक्षिप्त ले आए हैं। कैटेगराइज करके समझाया है। अभिनव गुप्त वास द वेदव्यास ऑफ कश्मीर शविज्म। वंडरफुल। आई वांट यू टू लीव वन थॉट ऑफ़ शिवा जो कि इस एपिसोड के बाद भी सब सोचे उस बात के बारे में। एनीथिंग अबाउट? द मोस्ट ब्यूटीफुल थिंग वन कैन एक्सपीरियंस इन दिस लाइफ व्हिच भगवान शिव
(55:43) रिप्रेजेंट इज वैराग्य। जो वैराग्य है, डिटचमेंट है, उसका वैराग्य का कमल आपके जो लाइफ है, उसमें खिल जाने दीजिए। दैट इज वेरी ब्यूटीफुल। आई कैन आल्सो नर अ लिटिल स्टोरी दैट। अ वैराग्य समझाने के लिए मेरे दादा जी ने बहुत सालों पहले जब मैं छोटी तब यह स्टोरी सुनाई थी कि एक नाथ साधु थे नाथ परंपरा के। वो भिक्षा के लिए बहुत यंग मंक थे वो। भिक्षा के लिए रोज समाज में नगरों में ज्यादा करते थे और बुलाते थे अलख निरंजन तो जो सुनते थे वो आते थे और भिक्षा उनको देते थे ऐसे घरों के सामने जाकर खड़े होते थे वो तो एक बार वो एक ऐसे नगर में से गुजर रहे थे जहां पे एक घर था
(56:28) और वहां पे एक महिला रहती थी बहुत धनी महिला थी और अभी-अभी उनका आना हुआ था वहां पे शादी होकर नई नई-नई आई थी तो उन्हें उन्होंने फर्स्ट टाइम यह भिक्षु को देखा वो देखा उन्होंने उन्होंने बाहर से कि कौन है यह भिक्षु? अच्छा मैं जाके भिक्षा देती हूं। जब देखने देखा उन्होंने पास में जाकर भिक्षा देते हुए उन साधु की आंखें तो साधु की आंखें वो महिला को इतनी सुंदर लगी कि वो बहुत अट्रैक्टेड फील करने लगी उन आंखों से। फिर वो अंदर चली गई। पर हमेशा वो वही सोचे जा रही है कि वो भिक्षु फिर से कब आएंगे? वो साधु फिर से कब आएंगे? मुझे
(57:04) उन्हें फिर से देखना है। दूसरे दिन फिर से वह साधु आए भिक्षा के लिए। तो पहले से ही यह दरवाजे पर खड़ी है भिक्षा लेकर भिक्षा देने के लिए जो भी उन्होंने बनाया है भोजन सुबह से उठकर जल्दी-जल्दी बनाया कि उनको मैं देख पाऊं। फिर वो आए जैसे ही उन्होंने सुना अलख निरंजन वो नगर के उस कॉर्नर से यहां से खड़े होकर वेट कर रहे हैं। जब वो आए तो उन्हें भिक्षा दी और फिर उनकी आंखों में देख रहे हैं और उन्होंने थोड़ी हिम्मत जुटाई और बोला कि साधु जी आपकी आंखें बहुत सुंदर लगी मुझे। तब उन्होंने साधु ने कुछ नहीं बोला। कोई रिप्लाई ही नहीं किया। वह चले गए। अपने
(57:43) रास्ते चले गए। अब यह जो महिला है यह सोच रही है कि उन्होंने कुछ बोला नहीं। मैं क्या करूं? क्या उन्हें अच्छा नहीं लगा? नहीं बोलना चाहिए था। वो सोच में है और नेक्स्ट डे फिर से वो वेट कर रही है उन साधु को देखने के लिए। तो जो नाथ साधु है वो फिर से आए। इस बार वो जब चल के आए तो थोड़ा कुछ अलग लगा। महिला को ये देख के कि ये इतने अलग क्यों चल रहे हैं? क्या बात है? ठीक है। फिर भी वह बहुत खुश है। बहुत एक्साइटेड है। जब वह आए भिक्षा पात्र लेकर तब भिक्षा देने की जगह यह महिला ने पूछा कि क्या हुआ आप? कुछ कुछ हुआ है क्या? आप ऐसे नीचे क्यों देखकर खड़े हैं? तो उनका
(58:20) मुंह नीचे था। तो उन्होंने जो भिक्षा पात्र है वो उन महिला के हाथ में दिया और बोला कि यह लीजिए। और महिला ने वो भिक्षा पात्र खोला। तब वह कहते हैं कि यह लीजिए। आपको जो आंखें मेरी पसंद आई थी यह रखी है उस पात्र में तो उन्होंने अपनी आंखें निकाल के भिक्षा पात्र में रख के दे दी कि यह आपकी हुई। एक साधु का इस समाज में कुछ नहीं है। इस संसार में कोई लेना देना नहीं है। उन्होंने अपना अलख निरंजन बोला और वह अपने रास्ते चले गए। तो उन्होंने अपनी जो आंखें हैं वह सामने उस महिला को देकर उस महिला की दृष्टि को जगा दिया। इसे कहते हैं
(59:03) दृष्टि दान। यह उस वैराग्य के उस पहलू को समझाता है कि एक साधु का जीवन जो एक साधु का मन है वह कहीं भी अटका हुआ नहीं है। साधु मुक्त है। तो वैसे ही हर एक साधक को मुक्त होना चाहिए। इसलिए मैंने कहा जो वैराग्य है वह भागना नहीं वह जागना है। आप रहिए संसार में रहिए और इसमें जो भी भोग विलास की चीजें यह आसपास होते हुए भी आपका मन आपके शिव में, आपके सत्य में निरंतर बनाए रखिए। बहुत-बहुत सुंदर। धन्यवाद साध्वी जी। हर हर महादेव।
No comments:
Post a Comment