Thursday, May 14, 2026

Geopolitics Explained- America, Iran, Pak W@r & Chanakya Theory | Brig. Rajpurohit on Body to Beiing

Geopolitics Explained- America, Iran, Pak W@r & Chanakya Theory | Brig. Rajpurohit on Body to Beiing

Author Name:SHLLOKA

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Transcript:
(00:00) आचार्य चाणक्य ने देख के पता लगाया कि अभी विनाश होने वाला है। ये युद्ध जो मेरे ख्याल से शांति से सुलझ सकता था अब महायुद्ध के तौर पर सामने आ गया। एंड डोंट बी सरप्राइज्ड अगर ये विश्व युद्ध में कन्वर्ट हो जाए। आचार्य चाणक्य कहते हैं प्रिपेयर फॉर वॉर। ईरान जमीन के ऊपर जितना है जमीन के नीचे भी तकरीबन उतना ही है। यहां इनके मिसाइल के बेसिस है। जो सामने दिख रहा है वो इजराइल और अमेरिका के फाइटर्स ने बर्बाद कर दिए। उसके बावजूद मिसाइल्स निकल निकल के जा रही हैं। और ट्रंप साहब हर बार बोलते हैं आई हैव डिस्ट्रॉयड। आई हैव ऑब्लिटरेटेड। आचार्य
(00:31) चाणक्य ने कहा जब आप दुश्मन के साथ अधूरा काम करते हो तो दुश्मन पैदा होता है। दुश्मन मजबूत बनता है। अगर हमने पाकिस्तान जीतना है तो उसप अटैक करने की जरूरत नहीं है। हालात देख लीजिए पाकिस्तान के अंदर। खैबर पख्तून बलूचिस्तान लोग कहने लग गए कि भारत आप हमको मदद करो। हम तो इनसे निकलना चाहते हैं। आप हमको इंटरनेट देती है। आपको मालूम है इनके चिप्स कहां से आते हैं? कंपनी से। चाइना से। क्या इनफेशन जा रही है वो भी नहीं पता हमको। कल अगर आपका इंटरनेट बैंकिंग साइट बंद हो जाती है, आप क्या करेंगे? जितने भी फ्रॉड के केसेस कीप फेक बहुत सारे लोगों
(01:02) को डिजिटल अरेस्ट कर लिया है, मात्र एक चिप लगा देना पूरे देश को नुकसान पहुंचा सकता है। वी हैव टू बी वेरी केयरफुल ऑफ दिस। ब्रिगेडियर प्रोफेसर जीवन राज पुरोहित हमारे देश के वो सैनिक हैं जो कैंबोडिया के खून से सने जंगलों में खमेर रोग के सबसे खतरनाक कमांडर्स के सामने बिना हथियार के बैठ गए और उन्हें शांति की मेज पर लाए। वो एक ऐसे सैनिक हैं जिन्होंने कश्मीर में आतंकवादियों के खिलाफ जुझारू लड़ाई लड़ी और सियाचन के 20,000 फीट की बर्फ में अपने जवानों के साथ खड़े होकर भारत की सीमा की रक्षा की। स्ट्रेट ऑफ हार्मोस। ये जो 21 नॉटिकल
(01:40) माइंस का एरिया है ये बहुत ही छोटा एरिया है। इसके अंदर से कोई एयरक्राफ्ट कैरियर नहीं निकल सकता। पर अगर वो आते हैं तो ईरान जहां से मर्जी मिसाइल मारे इसलिए अमेरिका भी इसके अंदर नहीं आना चाहता। उन्होंने कहा हम बाहर की तरफ से नेवल ब्लॉकेड लगा देंगे और अंदर की तरफ से ईरान ने ब्लॉक कर दिया तो कोई तेल बाहर जा नहीं सकता और हम जो घर के अंदर गैस इस्तेमाल करते हैं एलपीजी वो 90 95% हमारा वहीं से आता है। तो फूड प्राइसेस बढ़ेंगे। जो हीलियम और ऑयल बेस्ड प्रोडक्ट्स हैं जितने भी पैकेजिंग के आइटम्स बनते हैं देश के अंदर उन सबका रॉ मटेरियल वहीं से आता है।
(02:07) तो पैकेजिंग की कॉस्ट बढ़ने लगेगी। और स्टेट ऑफ हॉर्मोस उसी रिसोर्स एक रिसोर्स का नतीजा है जिसपे ये युद्ध हो रहा है। तो तेल है। तेल नहीं वो डॉलर है मैडम और ट्रंप उसको छोड़ना नहीं चाहता। यूएई ने बोला है कि अब मैं गल्फ जीसीसी उसका मेंबर नहीं बनूंगा। सबको समझ में आ रहा है कि यार पैसा तो अमेरिका बना रहा है। हम तो तेल निकाल रहे हैं और रेगुलेटेड फॉर्म में बेच रहे हैं। तो मेरी दुकान मैं जो मर्जी चीज बेचूं ना आप क्यों बीच में आते हैं? पहले ये हेजमिनी यूएस ने एक्सरसाइज ही क्यों करी? दैट वाज़ अ बिग गेम दैट दे प्लेड एंड दे
(02:34) प्लेड वेल। तो ये पूरा विश्व कप तकरीबन हर चीज को डॉलर के टर्म्स पे काउंट करता है। और जब तक आप और मैं डॉलर्स के अंदर अपना बिजनेस करेंगे उसका जो भी फायदा कमीशन अमेरिका को जाना है वो जाएगा। भारत ने रशिया से मिलियंस ऑफ बैरल का तेल खरीदा रूबल्स के अंदर। चाचा ट्रंप सहन नहीं कर पाए। उन्होंने जम्मू के बांध में एक रात में 10,000 से ज्यादािंदगियां बचाई और अपने सैनिक का यूनिफार्म उतारने के बाद भी आज इंडस्ट्री के सीनियर लीडर्स, सीईओ, सीएचआरओस और मैनेजिंग डायरेक्टर्स के साथ काम करते हैं। इस साल सेना दिवस पर उन्हें वैक्शंस अचीवर्स अवार्ड से भी सम्मानित
(03:10) किया गया है। तीन बार वीरता के लिए सेना अध्यक्ष से सम्मानित राजपुरोहित जी चाणक्य के अर्थशास्त्र के एक जीते जागते दूत हैं। आज हम ब्रिगेडियर जीवन राजपुरोहित का बहुत गर्व से बॉडी टू बीइंग पॉडकास्ट पर स्वागत करते हैं। मैं नहीं चाहता कि सारे भारत में वापस आ जाएं। मैं चाहता हूं कि आप जहां जाएं वहां भारत खड़ा कर दें। आई एम नॉट बीइंग सरकास्टिक और आई एम नॉट बीइंग वेरी कट्टर हिंदू। आई एम बीइंग अ नेशनलिस्ट। एक फौजी हूं सारी जिंदगी मैंने देखा है। ये हाथ खून से रंगे हुए हैं। उन मिलिटेंट को मारा है मैंने जो जनाजा पढ़ के निकलते हैं उस
(03:39) इलाके से। तो उनका तो मकसद बहुत क्लियर है। श्रोका जी, आपने हिला दिया, जगा दिया मेरे को। तो ये मैं कहने पर बाध्य हो गया। अभी वक्त है। निकल गया तो वापस नहीं आया। पिछले कुछ सालों में हमने बहुत ज्यादा ग्लोबल अनरेस्ट देखा। चाहे वो रशिया वर्सेस यूक्रेन हो, गाज़ा की बॉम्बिंग्स हो या फिर ऑनगोइंग यूएस ईरान टेंशंस। अब फिलहाल स्ट्रेट ऑफ हॉर्मोस चोक्ड है जो कि वर्ल्ड का 20% ऑयल रेट कंट्रोल करता है और इंडिया का 85 टू 95% एलपीजी यहां के थ्रू पास करता है। इसके रहते ऑयल का प्राइस $10 से ज्यादा बढ़ चुका है और ग्लोबली 30 मिलियन लोग पॉवर्टी लाइन पे धकेले गए हैं।
(04:16) कल को व्हाट इफ द रेड सी एंड द स्टेट ऑफ़ मलाका ब्लॉक्ड हो जाए जिसके थ्रू चाइना का 80% ग्लोबल ट्रेड पास होता है। व्हाट विल दिस लीड टू? अ ग्लोबल वॉर अ वर्ल्ड वॉर। अब ये सारी चीजें जो प्ले आउट कर रही हैं यह चाणक्य ने अपने अर्थशास्त्र में 2300 साल पहले ऑलरेडी प्रेडिक्ट कर लिया था। तो आज जो हम ग्लोबल स्टेज पे प्ले आउट करता हुआ देख रहे हैं वो है अर्थशास्त्र इन इट्स लाइफ फॉर्म। तो चाणक्य ने सिर्फ वॉर को ही प्रेडिक्ट नहीं किया। उन्होंने पावर का एल्गोरिदम लिखा। और इस पावर के एल्गोरिदम को हम आज के एपिसोड में डिकोड करेंगे इन दिस चाणक्यास अर्थशास्त्र
(04:53) स्पेशल मास्टर क्लास एक बहुत ही दिग्गज गेस्ट के साथ। तो प्लीज इस पॉडकास्ट को पूरा देखिए और इन द कमेंट सेक्शन प्लीज मुझे बताइएगा व्हिच पार्ट यू फाउंड मोस्ट इंटरेस्टिंग। एंजॉय। यू कैन नाउ आल्सो लिसन टू आवर मास्टर क्लासेस ऑन स्पॉटिफाई फॉलो बॉडी टू बीइंग एंड स्टे ट्यून फॉर मोर एक्साइटिंग मास्टर क्लासेस। ब्रिगेटर पुरोहित आज जो हम वॉर्स देख रहे हैं यह नए नहीं है बस इनके नाम नए हैं क्योंकि ये सब चाणक्य ने अपने अर्थशास्त्र में 2300 साल पहले प्रेडिक्ट कर दिया था। चाहे हम रशिया यूक्रेन देखे, इंडिया पाकिस्तान देखे, गाज़ा बॉमिंग्स देखे बाकी
(05:32) सारी चीजें। आज की सिचुएशन ऐसी है कि स्ट्रेट ऑफ हॉर्मोन्स हैज़ बिकम अ कंट्रोल कॉरिडोर। यानी कि कुछ शिप्स जा पा रही है, कुछ शिप्स नहीं जा पा रही हैं। उनमें से इंडियन शिप्स बिल्कुल जा पा रही हैं। इसके बारे में भी हम चर्चा करेंगे कि क्यों इंडिया को वो सेंक्शन मिला है। बट ऑल ऑफ़ दिस हैज़ लेड टू अ लॉट ऑफ़ राइफ इन द ग्लोबल इकॉनमी। क्योंकि 20% ऑफ ऑयल ट्रेड वो पर्टिकुलर स्टेट कंट्रोल कर रहा था। इसके चलते ही अबाउट 30 मिलियन पीपल धकेल दिए गए हैं इनू पॉवर्टी लाइन वर्ल्ड ओवर। और यह सारी सिचुएशन चाणक्य ने बहुत ही विस्तार में प्रेडिक्ट करी थी अपनी अर्थशास्त्र
(06:03) में 2300 साल पहले। यू आर अ मास्टर ऑफ चाणक्यस अर्थशास्त्र। आई वांट टू अंडरस्टैंड एंड द व्यूअर्स वुड लाइक टू अंडरस्टैंड फ्रॉम यू इन डिटेल। और मुझे नहीं लगता ये पॉडकास्ट इस प्रकार का जो आज होने वाला है। ये कभी इससे पहले हुआ हो। सो थैंक यू। थैंक यू सो मच श्लोका। पहले तो मैं बता दूं मैं चाणक्य का चेला हूं। उसका स्टूडेंट हूं। अर्थशास्त्र का स्टूडेंट हूं। मास्टर नहीं। तो स्टूडेंट को स्टूडेंट के तौर पर ट्रीट करें तो लर्निंग बेहतर होगी। हम शेयर ज्यादा बेहतर कर पाएंगे। जहां तक चाणक्य की बात और आज के हालात जिनको आप प्रेडिक्शन के तौर पर
(06:34) बोलना चाहते हैं। मैं ये कहना चाहूंगा कि आचार्य चाणक्य ने इन हालात को या ऐसे हालात जब जब भी आएंगे आ जाए चाहे भूत में आए हो या भविष्य में आएंगे। उन हालात को देख के पता लगाया जा सकता है कि अभी विनाश होने वाला है या शांति आने वाली है। जो हालात अब हम देख रहे हैं यह अधर्म से रिलेटेड है और जबजब धर्म का नाश हुआ है विश्व की शांति को झटका लगा है और सिविलाइजेशन या सभ्यता विनाश की ओर अग्रसर हुई है। और यह जो आप देख रहे हैं युद्ध यह विनाश का अवश्यभावी एक बहुत बड़ा खतरा आचार्य चाणक्य ने बोला था। अच्छा और जब जब जैसा मैंने बोला अधर्म को छोड़ के जाएंगे
(07:18) जब अधर्म ही छोड़ दिया जिस चीज के लिए युद्ध होना चाहिए धर्म के लिए युद्ध होना चाहिए आप धर्म लाइए राम ने धर्म युद्ध लड़ा कृष्ण जी ने धर्म युद्ध का संचालन किया या दुर्योधन और अर्जुन ने लड़ा लेकिन वो धर्म आधारित था दुर्योधन जब जब धर्म से हटकर के अलग गया उसको उसका भुगतान करना पड़ा आज भी वही हालात है ट्रंप प्रेसिडेंट जरूर बन गए हैं लेकिन उन्होंने अधर्म की राह नहीं छोड़ी। एक आर्ट ऑफ डीलिंग किताब लिख लेने से, एक बिजनेसमैन होने से आप एक राजनीतिज्ञ या सामरिक दृष्टि के ज्ञाता नहीं बन सकते। तो उस दृष्टि को ध्यान में रखते हुए अगर आप इस चीज को स्टेट ऑफ
(07:59) हार्मोंस, ईरान, मिडिल ईस्ट इन सब एरिया के ऊपर उस टेंपलेट को लगाएं तो आप देख सकते हैं कि ये ये युद्ध होने वाला है। और कुछ समय पहले कई टीवी चैनल्स पे जब मैं गया और मैंने बोला कि जी ये होने वाला है। तब तक तो ये युद्ध इतना हुआ भी नहीं था। अच्छा। तब सिर्फ बात चल रही थी इजराइल और गाजा के युद्ध की। हमास वाली कहानी चल रही थी। नेदन याू जी ने बोला कि ये जो मुस्लिम कौम है, मुसलमान है, ये धर्म की लड़ाई हुई धर्म जो भारत में कहते हैं धर्म नहीं है। रिलीजन की लड़ाई है। एक तरफ जूस है दूसरी तरफ मुस्लिम्स हैं और दोनों एक दूसरे के
(08:32) जानी दुश्मन है। कट्टर हैं। काट के खा जाना चाहते हैं एक दूसरे को। काट के इंसान खा सकते हो आप। किसी की विचारधारा काट के नहीं खा सकते। और जिस विचारधारा के लिए आप लड़ रहे हो वो युद्ध कैसे खत्म हो सकता है? आप बताएं। कैसे खत्म हो सकता है? वो विचारधारा आज से पांच साल पहले भी थी और आज भी है। हम आप देखिए कि इजराइल ने इन सभी मुस्लिम नेशंस के साथ में पिछले पांच दशकों में कम से कम सात बार युद्ध कर लिया है। अलग-अलग में चाहे वो इजिप्ट के साथ हो, चाहे सेनाई डेजर्ट का वॉर हो, सेवन डेज वॉर हो, क्या शांति नहीं आ सकती थी? क्या वहां समझदार लोग नहीं थे? आपके और
(09:06) मेरे जैसे तो इंसान है। वही तो लीडर है। और अगर हम मिलकर के शांति नहीं ला सके तो आज आप समझते हैं कि ट्रंप जो तलवार लेकर के लगा हुआ है कि ईरान को काट देगा, काट देगा। कैसे शांति आ सकती? आचार्य चाणक्य की समझदारी और उनका विश्लेषण इसी बात का को दिखाता है कि अगर आप देखते हैं कि इस राजमंडल थरी के तहत एक उदासीन देश किसी और देश को मदद करने के लिए बहुत दूर से आकर के युद्ध के अंदर शामिल हो सकता है। तो सोचने की जरूरत है। मैं आपको उदाहरण दे के बताता हूं। इजराइल एक देश है। राजमंडल थ्यरी कहती है कि अगर वो विजि इशू बनता है यानी एक कनकरिंग नेशन
(09:46) बनता है। वो नेशन जिसकी जिज्ञासा है कि जी मैं जीतूंगा। मैं हर हाल में जीतूंगा। जैसे सिकंदर ने अपनी प्रतिज्ञा की कि मैं विश्व को जीत कर चलूंगा। तो सिकंदर अपने आप में एक कॉनकरिंग किंग के तौर पर चला था। जिसको आचार्य चाणक्य ने विजिग इशू कहा। ओके कि अगर आप विजिग इशू राजा हैं आपका देश जीतना चाहता है तो सबसे पहले उसको अर्थशास्त्र के मुताबिक समझना पड़ेगा कि स्टेट क्राफ्ट होता क्या है हम उससे क्या फायदा होगा या युद्ध में सीधे चले जाए और उनका बहुत सीधा सा था कि राजा जिम्मेवार है प्रजा के रक्षा के लिए पालन के लिए और योगक्षेम के लिए हम मतलब सब
(10:27) समझते हैं आप समझते हैं रक्षा से क्या मतलब है कि पिता होने के नाते मुझे अपने परिवार की रक्षा करनी है। राजा होने के नाते उसकी जिम्मेवारी है कि अपने प्रजा की रक्षा करें और रक्षा में सिर्फ प्रजा ही नहीं है। वहां के एनिमल्स भी शामिल है। वहां का एनवायरमेंट भी शामिल है। फॉरेस्ट भी शामिल है, टेरिटरी भी शामिल है। आज के कॉन्टेक्स्ट में अगर कहूं कि अगर भारत की रक्षा करनी है तो भारत पूरे समग्र भारत राष्ट्र की जिम्मेवारी है कि हमारी बाउंड्री को सुरक्षित रखें, लोगों को सुरक्षित रखे, हमारी रिसोर्सेज को सुरक्षित रखें। आजकल एनवायरमेंट,
(11:02) रिसोर्सेज, ज्योग्राफी इनका बहुत महत्व बढ़ गया है। और स्टेट ऑफ हार्मोंस एक रिसोर्स का नतीजा है जिस पे ये युद्ध हो रहा है। वो तेल है। वो तेल नहीं वो डॉलर है मैडम। तेल के जरिए डॉलर है और ट्रंप उसको छोड़ना नहीं चाहता। तो ट्रंप अगर अपने देश की रक्षा करना चाहता है या नितिन याू इजराइल की रक्षा करना चाहता है तो ये तीन प्रिंसिपल उनको अपनाने हैं। अपने देश की रक्षा करनी है। देशवासियों का लालनपालन करना है। जैसे एक मां अपने बच्चे की करती है। एक पिता अपने परिवार का लालनपालन करता है। सिर्फ खाना दे देने से या दुश्मन से बचा देने से
(11:35) बच्चा अच्छा सिटीजन नहीं बन जाता। हम उसको संस्कार देने होते हैं। उसको पढ़ाना होता है। उसको अनुशासन देना होता है। उसको जिम्मेवारियां समझानी होती हैं। हम यही काम राजा का है। कि वो देशवासियों का लालनपालन कर सके। और नितिन याू अगर ये करते हैं तो अपने देशवासियों के लिए कर रहे हैं। वेरी गुड। ट्रंप क्या कर रहे हैं? किसी और की खिचड़ी खुद चले पकाने। ट्रंप का यहां पे क्या लेनदेन है? ना तो उनका देश है ना उनकी प्रजा है। किसकी रक्षा कर रहे हैं? किसकी पालना कर रहे हैं? कोई नहीं है। और तीसरा मैंने बोला योगक्षेम। तो आप खुद समझती हैं कि योग
(12:09) मतलब जोड़ना, समाज को जोड़ना, क्षेम मतलब सारे संस्कारों को जोड़ के समाज को एकजुट करके उसकी वेलफेयर ओरिएंटेड सारे काम करना। तो जो राजा इस चीज को कर पाए, उसका राष्ट्र उन्नत राष्ट्र होगा। और यह यह फंडामेंटल है जो अपने पहले चैप्टर के पहले भाग में अर्थशास्त्र में आचार्य चाणक्य लिखते हैं। तो नितिन याू साहब की जो जिज्ञासा है ना हम मुझे रक्षा पालना और योगक्षेम तक तो समझ में आती है कि जी आप अपने देश को बहुत अच्छा प्रोग्रेस करें। लेकिन ये कहना कि जी मैं जो उस पूरे इलाके के मुसलमान देश हैं उनको खत्म कर दूंगा और अपना ग्रेटर
(12:49) इजराइल बना दूंगा। मेरा 2000 साल वाला पुराना ड्रीम रिवाइव कर दूंगा। और उसको करने के लिए अगर मुझे किसी की मदद लेनी पड़े तो मैं लूंगा। और उन्होंने मध्यमा और उदासीन राजमंडल थ्यरी के अंदर जानेंगे। वो दूर के राष्ट्र जिनके पास ताकत हो। ये तीन चीजें अगर है तो आपका देश बहुत अच्छा प्रोग्रेस करेगा। भारत ने ये किया है। अंग्रेजों के आने से पहले तकरीबन 27% जीडीपी हमारी पूरे विश्व की 27% जीडीपी हमारी अकेले की थी। जिस दिन अंग्रेज छोड़ के गए 3% थी। क्यों? क्योंकि हम काम कर रहे थे उसी अर्थशास्त्र चाणक्य और हमारे पुरखों की दिए हुए संस्कारों पर हम काम कर रहे हैं
(13:27) और वो संस्कार उन्हीं गांवों के अंदर उन्हीं स्कूलों के अंदर गुरुकुल में दिए जाते थे। उसी गुरु शिष्य परंपरा के जरिए दिए जाते थे। लेकिन जब इसको लेकर के मॉडर्न जमाने में 21 सेंचुरी के अंदर जब से सेकंड वर्ल्ड वॉर खत्म हुआ है मतलब कहानी तो फर्स्ट वर्ल्ड वॉर और अंग्रेजों के पूरे विश्व को जीतने के साथ शुरू हो गई थी कि उन्होंने पूरे विश्व को कंट्रोल करना चाहा कि साहब हमारा वर्चस्व सभी जगह है। सेकंड वर्ल्ड वॉर के बाद में तकरीबन अमेरिका ने डोमिनेंस ले लिया और वो समझने लगे कि मैं विश्व का सबसे बड़ा राष्ट्र हूं और मेरा ही राष्ट्र बाकी सब मेरे
(13:59) गुलाम है। हम सो टू से या और उस गुलामी में चाहे उसको मिलिट्री पावर इस्तेमाल करना है इकोनमिक पावर इस्तेमाल करे वो करेगा और उसने किया सर विद रिस्पेक्ट टू द करंट जियोपॉलिटिकल सिचुएशन तो हमारे पास है यूएस ईरान इजराइल इंडिया चाइना रशिया ये जो सारा अनरेस्ट हो रहा है ये चाणक्य ने कैसे इन्वजन किया था वो चाणक्य के कुछ सीक्रेट्स हमें बताइए। पहला तो जो चाणक्य ने बोला वह कोई सीक्रेसी नहीं है। उसने खुलकर के बताया अर्थशास्त्र उसने लिखी है। उसने लिख के बताया कि मैंने वेदों से कितना लिया है। मेरा अन्वक्ष के कितना है? मेरी साइंस
(14:33) कितनी है और ये खुलकर के हर जगह है। राजा को यह करना चाहिए। मंत्री को ये करना चाहिए। प्रजा को ये करना चाहिए। जिन्होंने बहुत खुद करके लिखा है और उनके जो कुछ एक प्रिंसिपल्स थे उन्होंने बहुत अच्छे तरीके से ना केवल बनाए हैं बल्कि अपने ही जीवन में उनको लागू किया है। तभी जो पाटलिपुत्र जो मगधनानंद के अत्याचारों से भरा हुआ था उन्होंने धनानंद जैसे राजा को निकाल फेंका। वो बड़ा पावरफुल होता था वो। हम वैसे निकाल फेंकना बहुत आसान नहीं है। और उसके पास क्या था? अपनी धोती और एक कपड़ा कोई पावर नहीं थी। तो जो व्यक्ति एक धोती लेकर के निकले और मन में इरादा मजबूत हो
(15:12) तो वो कुछ भी कर सकता है तो हम कर सकते हैं। यह सबसे बड़ा सीक्रेट है। क्या हमारे पास वो इरादा है? और उसके बाद में हम क्या पॉलिसीज फॉलो कर रहे हैं उसके ऊपर है। मैं आपको याद दिलाना चाहूंगा। आचार्य चाणक्य ने लिखा। आपने पूछा ना स्पेसिफिक क्या है? उन्होंने लिखा सुखस्य मूलम धर्म सुख का मूल धर्म है। अब धर्म से जाति नहीं है। धर्म का मतलब है आपकी ड्यूटी क्या है? आपकी जिम्मेवारियां क्या है? आपका पुत्र धर्म क्या है? आपकी पुत्री धर्म पुत्री है तो पुत्री धर्म क्या है? पत्नी है तो पत्नी धर्म धर्म क्या है? मैं पिता धर्म क्या है? मेरा पुत्र धर्म क्या
(15:44) है मेरा? भ्राता धर्म क्या है? देश धर्म क्या है मेरा? राष्ट्र धर्म क्या है मेरा? तो धर्म के अंदर बहुत सारी चीजें आती हैं। तो सुख का मूल वो कहते हैं धर्म है। अगर आप सुख चाहते हो तो ये सब धर्म कीजिए। दूसरा वो कहता है धर्मस्य मूलम अर्थ धर्म का मल। ये जब ये पूरा जो धर्म आप निभाएंगे जो जिम्मेवारियां निभाएंगे इसका आधार है अर्थ इकॉनमी या सीधे शब्दों में मुल्ला पैसा पैसा फेंको तमाशा देखो वो कहता है इस पैसे को आप धर्म में लगाएं तमाशा मत देखें तो धर्मस्य मूलम अर्थ के दो तीन मीनिंग है सिर्फ पैसा ही नहीं है अर्थ का मतलब है मीनिंग ऑफ लाइफ आप इस
(16:23) धरती पर आए हैं क्या मतलब है किस मकसद से आए हैं ईश्वर ने किसी कारणवश भेजा है आपको वो अर्थ पहचानिए अगर वो अर्थ पहच पहचान लेंगे तो आपका जीवन सफल होगा। वो कोई भी अर्थ हो सकता है। कोई भी नहीं कुछ भी हो सकता है। मैं फिल्म स्टार बनना चाहता हूं। मैं एक सैनिक बनना चाहता था। मैं सारी जिंदगी सैनिक रहा और मुझे बहुत गर्व है कि मैं सैनिक बना और देश के लिए कुछ कर पाया। मेरा अर्थ हम अर्थ का मतलब ये भी है कि इस धरा पर आप आए हो। क्या देकर जा रहे हो? और अर्थ का मतलब है पैसा इकॉनमी। कि आप इतनी जो मेहनत कर रहे हो उसके लिए आपको वो मुआवजा मिल रहा
(16:53) है। वो पैसा मिल रहा है। उसका आप इस्तेमाल कैसे कर रहे हो? सुय्य में इस्तेमाल करें ना कि गलत कार्य में। और अर्थ का मूल क्या है? अर्थ का आधार क्या है? अर्थस्य मूलम राज्य अर्थ का मूलम है। अर्थ का मूल है। अर्थ का आधार है राजा या राज्य। अगर राष्ट्र बहुत अच्छा है तो आप पैसा कमा सकते हैं। आप अपनी जिंदगी का मतलब निकाल सकते हैं। आप अपना जो चाहते हैं वो कर सकते हैं। वरना अंग्रेजों ने हमको स्लेव बना के रखा ना। सारे अर्थवर्थ सब खत्म कर दिए उन्होंने। तो अर्थस्य मूलम राज्य है। और राज्य का मूलम क्या है? राजस्य मूलम इंद्रिय जय
(17:32) अगर आप राज्य को बहुत खूबसूरत तरीके से चलाना चाहते हो तो राजा के लिए है कि वो अपनी इंद्रियों पर विजय पाए अपनी लालसा के ऊपर विजय पाए और अगर वो लालसा पे अपनी ग्रीड के ऊपर विजय पा सकते हैं तो वो सब कुछ हासिल कर सकते हैं और इसके ऊपर आप जिस मर्जी फील्ड में चले जाएं अगर आप ये चार लाइनें फॉलो करते हैं यू विल नेवर गो रॉन्ग धन पे ही आ जाए तो यू विल नेवर गो। करेक्ट सर। राजमंडल थ्योरी में यह भी कहा गया है कि जो राजमंडल थ्योरी को ग्रहण करे, उसका मंथन करे वो स्टेट कभी गलत हो ही नहीं सकता। एब्सोलुटली फिनोमिनल कहने को बहुत आसान
(18:08) लगता है। लेकिन उसने बोला कि कोई भी इंसान या कोई भी देश विश्वविजय नहीं कर सकता या अकेला बहुत बड़ा देश नहीं बन सकता। आइसोलेशन विल नेवर मेक यू अ ग्रेट पर्सन। इट इज ऑलवेज इंटरेक्शन। और जब इंटरेक्शन होता है वो बोलते हैं जी आपका पड़ोसी कभी आपका दोस्त नहीं हो सकता। नेबर हमेशा एनिमी रहेगा। और नेबर का नेबर हमेशा आपका फ्रेंड रहेगा। हां। उन्होंने बोला क्यों नहीं रह सकते यार? आप नेबर नेबर की दोनों लेडीज बेस्ट फ्रेंड्स हैं। सारी जिंदगी बहुत बढ़िया निभाती है। नेबर कैन बिकम योर बेस्ट फ्रेंड। पर आचार्य चाणक्य ने बोला ना ना। ऐसा नहीं है। क्योंकि नेबर वो इंसान या वो
(18:44) देश है जिससे छोटा-मोटा खटपट तो चलता ही रहेगा। आप अपने गांव में देख लीजिए। आपका पड़ोसी है तो पानी कहां से जा रहा है? बच्चे कहां खेल रहे हैं? एक दूसरे की जगह चले गए तो छोटा-मोटा झगड़ा चलता रहता है। खेत के अंदर बाढ़ है। इधर से उधर जानवर चला गया, उधर से इधर आ गया। वो खटपट चलती रहती है। हिंदुस्तान और बांग्लादेश के बीच में इतने सारे पॉकेट्स थे जो उनके हमारे इलाके में थे और हमारे बांग्लादेश के इलाके में थे। हमने 111 पॉकेट्स उनको दिए। उन्होंने तकरीबन 90 के आसपास हमको वापस अपने लौटाए। तो ये पड़ोसी देश के साथ में रिश्ता बना करके रखने से ही बात बनेगी।
(19:16) आपको बहुत कुछ सहन करना पड़ेगा। तब आपका पड़ोसी आपका अच्छा मित्र बन सकता है। मित्र लेकिन बन सकता है पड़ोसी देश। हां बन सकता है। लेकिन उसके लिए जो सैक्रिफाइसेस करने होंगे वो दोनों को बहुत जबरदस्त कर रहे हैं। वो कई दफे कर नहीं पाते। और पाकिस्तान जैसे दो देश तो बिल्कुल भी नहीं। आप देखिए नेपाल हमारा हम देश है सदियों से हमारे साथ रहा है लेकिन खटपट चलती है नेपाल के साथ खटपट चलती रहती है उनका वो वो लैंड लॉर्ड कंट्री है उनका सब कुछ हमारे इलाके से जाता है इसके बावजूद भी खटपट है उनके साथ में तो उस खटपट को कैसे निपटाए आचार्य चाणक्य ने बोला है कि आपका
(19:53) राज्य दूसरे राज्य से पड़ोसी राज्य से हीन राज्य हो सकता है या बलवान राज्य हो सकता है या सम राज्य हो सकता है मतलब आपका पड़ोसी देश आपसे बड़ा बराबर का या छोटा हो सकता है। उनका धर्म दोनों का तीनों का अलग-अलग है। अगर हम तीनों का अपना-अपना धर्म निभाएंगे तो वो अच्छे पड़ोसी के तौर पे रह सकते हैं। वरना नहीं रह सकते। अब मेजॉरिटी क्योंकि कारण है कि नहीं रह सकते तो उन्होंने बोला कि पड़ोसी के साथ दोस्ती बहुत मुश्किल है और वो इन जनरल आपका एनिमी रहेगा। तो आप विश्व के अंदर कोई भी दो देश ले लीजिए जो पड़ोसी हैं और उनके अंदर देखिए खटपट। अज़रबजान
(20:30) अर्मेनिया यूक्रेन रशिया हमने देखा है। रशिया चाइना दोस्त होने के बावजूद भी उनके अंदर बहुत सारी प्रॉब्लम्स हैं। चाइना वियतनाम दोनों कम्युनिस्ट कंट्रीज हैं। प्रॉब्लम्स हैं। चाइना इंडिया इंडिया बांग्लादेश इंडिया म्यांमार इंडिया पाकिस्तान वो कहता है जड़ सारी हमारे पास है। पर ऐसा नहीं है। आप देख गल्फ कंट्रीज के अंदर चले जाइए। वहां पर भी ऐसा ही है। मेक्सिको, अमेरिका, अमेरिका, कनाडा हर जगह ये सिर्फ क्या ज्योग्राफी के बेसिस पे एनिमिटी एनिमोसिटी होती है या फिर शेयरर्ड हिस्ट्री या फिर रिलीजन ये सभी मैटर करता है। वो सब शामिल है। जब हम कहते हैं पड़ोसी
(21:03) राज्य या राष्ट्र मैं कई दफा सवाल पूछ पूछता हूं कि जी देश और राष्ट्र में क्या फर्क है? कंट्री और नेशन में क्या फर्क है? हालांकि नेशन इक्विवेलेंट शब्द नहीं है राष्ट्र का। राष्ट्र बहुत बड़ा शब्द है। कंट्री के अंदर लोग और टेरिटरी शामिल है। हम राष्ट्र के अंदर लोग शामिल है। जानवर, पशु, पक्षी, हमारे फॉरेस्ट, हमारी नदियां, हमारे पहाड़ शामिल है। टेरिटरी शामिल है। हमारी कल्चर शामिल है। संस्कृति शामिल है। और फिर आप जो बोल रहे ना इमोशन शामिल है। वो तब राष्ट्र बनता है। और अगर उस राष्ट्र के आपने बीच में से दो टुकड़े कर दिए तो आधा हिस्सा तो संस्कृति
(21:37) का उधर चला गया। और अगर जाति पर डिफरेंट है तो और ज्यादा झगड़ा बढ़ेगा। इसलिए आचार्य चाणक्य ने बोला कि पड़ोसी आपका दोस्त नहीं हो सकता। लेकिन वो यह बोलता है अगर एक समझदार बुद्धिमान राजा है और उसे अच्छे तरीके से ट्रेन किया गया है तो वो इनको बहुत अच्छे तरीके से मैनेज कर सकता है। इसीलिए मैंने ये एक्सप्लेनेशन दिया था। अब मैं पहले सवाल पे आता हूं कि जी अगर ये पड़ोसी है तो पड़ोसी का पड़ोसी क्या होगा? भारत का पड़ोसी पाकिस्तान पाकिस्तान का पड़ोसी अफगानिस्तान। तो जिस तरह से हिंदुस्तान और पाकिस्तान में तकलीफ है उसी तरह पाकिस्तान
(22:14) और अफगानिस्तान के बीच में चाहे बलोच का इलाका ले लो चाहे ऊपर खैबर पख्तवा ले लो झगड़ा चलता है एलईटी के उनके आपस में झगड़ा चलता रहता है करेक्ट क्योंकि भारत और चीन के नेबर्स होने की वजह से झगड़ा है चीन का पड़ोसी देश है मंगोलिया हम उनका खटपट चलता रहता है उनका आपस में झगड़ा है मंगोलिया हमारा बहुत अच्छा दोस्त है इसी तरह भारत का ईस्ट में पड़ोसी बांग्लादेश बांग्लादेश के बाद म्यांमार, म्यांमार के बाद में अगर आप जाओ और कंसेंट्रिक सर्किल बनाओ। आचार्य चाणक्य ने बहुत अच्छा बनाया कि अपने आप को आप सेंटर में बिंदु रखो और अपने आप को बोलो जी मैं
(22:49) कॉनकरिंग नेशन हूं या कॉनकरिंग किंग हूं। उसको उन्होंने नाम दिया विजिग इशू। तो विजिग इशू होने के नाते वो कहता है जो मेरे पड़ोसी देश हैं उनका मैं सर्किल बना दूं। तो भारत को बीच में रख के आप एक सर्किल बनाइए। पाकिस्तान, चीन, भूटान, बांग्लादेश, म्यांमार, नीचे श्रीलंका, शेशेल्स ये कंट्रीज लेके वेस्ट में पाकिस्तान होते हुए अफगानिस्तान टच करते हुए बना दीजिए। तो ये सारे कंट्रीज हमारे इमीडिएट नेबर हुए जहां पे कि दोस्ती का निभाना बहुत मुश्किल है। तो ये जनरली एनिमी हुए। और इनका जो नेक्स्ट सर्कल बनाएंगे आप तो इन देशों के जो
(23:23) पड़ोसी देश हैं उनका अगर आप लाइन खींचे वो सारे देश हमारे दोस्त हैं। आ हा हा और उसके बाद जो एक सर्किल बनाएंगे मैं अभी चौथी लाइन पे आ गया हूं। चौथा जो लाइन बनाएंगे वो आपके दुश्मन तो इस तरह से देखा कि पहला तीसरा पांचवा जो कंसेंट्रिक सर्किल बनेगा वो सब आपके दोस्त होंगे। और दूसरा चौथा छटा वो आपके दुश्मन होंगे। यह इन जनरल चाणक्य ने बहुत सिंपल सी बात लगाई है। आप विश्व का नक्शा लगा करके लाइनें खींच के देख लीजिएगा कि फ्रांस हमारा दोस्त क्यों है? आपको समझ में आ जाएगा। तुर्की हमारा दुश्मन क्यों है? समझ में आ जाएगा। दैट इज वन थिंग। देन ही सेड कि अगर इस
(24:06) पूरी कहानी के अंदर आपके नजदीक लेकिन थोड़ा दूर बहुत अगर मजबूत कोई राष्ट्र है तो वो आपको डेवलप करना चाहिए एज अ फ्रेंड। इसको उन्होंने नाम दिया मध्यमा। हमारे केस के अंदर रूस बहुत पावरफुल देश है। हमारे साथ उसका कोई कनेक्ट नहीं है। कंसेंट्रिक सर्किल में हमारा दोस्ती की लाइन में आता है। तो वो हमारा एक नेचुरल अलय बन सकता है। फिर उन्होंने बोला एक उदासीन दूर का देश लेकिन पावरफुल देश ऑस्ट्रेलिया है, ब्राजील है, अमेरिका है, कनाडा है। ये दूर के देश आपके साथ बाउंड्री नहीं मिलती है। लोगों का सोच विचार सब कुछ अलग-अलग है। लेकिन अगर आप उनके साथ रिश्ते अच्छे
(24:46) मेंटेन करेंगे डगुनिया के लिहाज से तो आप उनको बहुत अच्छा दोस्त बना सकते हैं। तो हालांकि अमेरिका ने हमेशा भारत को एक्सप्लइटेशन की नजर से देखा लेकिन उसके बावजूद भी हमने उसको ठीक-ठाक कंटेन करके रखा। चीन भी यही करने की कोशिश कर रहा है कि वो किसी तरह से दोस्ती का हाथ बढ़ाए रखें। वरना दुश्मनी तो कभी भी कर लो आप। तो इस तरह से यह जो ये जो असेसमेंट किया है यह जो यूएस करता है नेट असेसमेंट की कारवाई जिसके अंदर कि वो इकोनमी पॉलिटिक्स सोसाइटी इन सब को चीजों को शामिल करते हैं। उसके बजाय जो राजमंडल थ्यरी या मंडल थ्योरी है। ये बहुत विस्तृत थ्यरी है। और
(25:25) इसके साथ में अगर आप अपना स्पाइस सिस्टम को ऐड कर दो अपने रिसोर्सेज को ऐड कर दो, अपनी ट्रेड रिलेशंस को ऐड कर दो तो आप बहुत मजबूत राष्ट्र बन सकते हैं। किसी हालत में आप हार नहीं सकते। विजुग इशू प्योर विजुग इशू हो और मैं आपको यहां जिओपॉलिटिक्स की एक बहुत बड़ी बात यही बता देना चाहता हूं ताकि दर्शकों को ये पता हो कि युद्ध हो क्यों रहा है। हम तो ये समझने की जरूरत थी कि 1950 में के आसपास जब ये सेकंड वर्ल्ड वॉर खत्म हुआ अमेरिका का वर्चस्व शुरू हुआ तब उन्होंने कहा जी हमारे पास दुनिया का सबसे ज्यादा गोल्ड है जो पूरी इकॉनमी है इसके बेसिस पे
(25:59) कह सकती है कि हमारा एक आउंस गोल्ड की कीमत बाहर के बराबर कितनी होगी और उस मुताबिक ट्रेड चल सकता है। वाटर सिस्टम का एक बहुत एडवांस फॉर्म चला और 1970 के दशक तक ये चला और उसके बाद जब ये तेल की इकॉनमी शुरू हो गई इधर ईरान के अंदर अपनी प्रोग्रेस चल रही थी इजराइल दो-तीन युद्ध लड़ चुका था इन्हीं मुसलमान देशों से तब ये बात आई कि जी गोल्ड इनका रिजर्व्स कम हो रहे थे तो उन्होंने प्रपोज किया कि डॉलर को क्यों ना इस्तेमाल कर लिया जाए हमारी करेंसी सबसे स्ट्रांगेस्ट है और जिसने भी लेनदेन करनी हो डॉलर में करें और अपना तेल बेचे और ले यह बात सब ने मंजूर
(26:38) भी कर ली। उसका लॉन्ग टर्म जो प्लान था अमेरिका का वो ये रहा कि जी डॉलर जब तक खरीदा और बेचा जाएगा कोई भी कमोडिटी एसेट रिसोर्सेज डॉलर में लेनदेन की जाएगी तो इनकम का कुछ हिस्सा अमेरिका के पास जाएगा। वो अपने डॉलर प्रिंट करके दुनिया में बेच सकते हैं। उसके जरिए सारी दुनिया सामान खरीद सकती है। और यह समय बहुत बहुत लंबे समय तक ये कहानी चली और इस डॉलर के भरोसे सारे तेल का जो ट्रेड है जो 40% दुनिया का तेल इस इलाके में होता है मिडिल ईस्ट के अंदर वो सारी कहानी इसी डॉलर के बेस पे चल रही थी। इसीलिए पेट्रोल डॉलर बड़ा फेमस हुआ।
(27:13) ब्लैक डॉलर, पेट्रो डॉलर। अब हालात यहां हो गए कि जी अमेरिका की सारी इकॉनमी का आधार यही पेट्रो डॉलर है। यहां तेल बिकेगा तो अमेरिका को इनकम होगी क्योंकि डॉलर्स में हो रही और अगर यह नहीं हुआ तो अमेरिका को नुकसान होगा। हम तो अब समय आया जबकि यूनपोलरिटी या अमेरिका का पूरे विश्व पर पूरी तरह से वर्चस्व साबित था। अब धीरे-धीरे भारत, चीन, रशिया ये सब चल रहे हैं। आपको 1960 के दशक का और अर् वाइल यूएसएसआर के साथ जो इनका ऑलमोस्ट न्यूक्लियर वॉर होते-होते बचा और इन देशों का भी उभर करके ऊपर आना यह अमेरिका को मंजूर नहीं था कि वो यूनिपोलर
(27:55) कंट्री रहना चाहता था। पूरे विश्व में उनका दबदबा रहे। और जब ये लोग ये बाकी देश बढ़ने लगे तो वो अमेरिका को मंजूर नहीं है। वो विश्व का पुलिसमैन बन गया। जहां भी कुछ हो जाए तो वहां जाकर के पहुंच जाना। अपने एडवांटेज की चीज रख लेना। बाकी सिविलाइजेशन सफर करती रहे उसका कोई मतलब नहीं। और जब ये चीज बीच में आने लगती है तो देश फिर अपना-अपना इंटरेस्ट भी ध्यान में रखने लगते हैं। और इसी की वजह से गल्फ के अंदर बहुत सारे देशों ने रूबल्स के अंदर या युवान के अंदर चाइनीस करेंसी के अंदर तेल खरीदना और बेचना शुरू कर दिया। अब जब ये हालात आ गई कि यहां उनका तेल अभी
(28:27) दूसरे में बिकेगा तो नेचुरली डॉलर की कीमत कम होगी। जो अमेरिका ने अपने बेसिस बना रखे हैं इस पूरे इलाके के अंदर वो बेसिस भी इसीलिए हैं। कहने को प्रोटेक्शन है लेकिन वह अपनी इकॉनमी की सुरक्षा करते हैं और अपने जरिए इस पूरी इकॉनमी को चलाते हैं। तो सबसे बड़ा बिजनेसमैन इस इलाके में बैठकर के अमेरिका पैसे कमा रहा है और बाकी देशों को इनफैक्ट अगर मैं कहूं नुकसान हो रहा है तो गलत नहीं होगा। क्योंकि अगर मुझे भारी पैसा दे के अपने देश के लिए तेल खरीदना पड़ रहा है क्योंकि मैं डॉलर में खरीद रहा हूं। बजाय इसके कि मैं उनको पैसे में रुपए
(29:03) के अंदर या सऊदी अरेबिया से ईरान से किसी से भी अपना तेल लूं बेचूं और आपस के अंदर हमारा अपना बा सिस्टम करें आप अपना रियल में करें मैं अपना रुपए के अंदर करूं क्या तकलीफ है बंदरबाट क्यों करने की जरूरत है करेक्ट अब बंदरबाट करने आओगे तो ईरान को भी नुकसान होगा सऊदी अरेबिया को नुकसान होगा मुझे भी नुकसान होगा हम आप देखिए जरा कल की ही बात है 40 नोट कर लीजिए आप यूएई ने बोला है कि अब मैं जो गल्फ जीसीसी है उसका मेंबर नहीं बनूंगा पिछले 30-40 साल से वह उनका मेंबर है कि हम एक तादाद के अंदर ऑयल प्रोड्यूस करेंगे और उस मुताबिक इसको रेगुलेट करेंगे। उसके
(29:37) मुताबिक सऊदी अरेबिया रोज के तकरीबन 4 लाख बैरल तेल निकालता है। 4 मिलियन बैरल निकालता है। यूएई को 3 मिलियन निकालना चाहिए और देशों को उन्होंने प्रोपोर्शनल रेट दे रखा है कि आप इतनाइतना निकालेंगे ताकि तेल की रेट मेंटेन रहे। अब जब हालात ये आ गए और सबको समझ में आ रहा है कि यार पैसा तो अमेरिका बना रहा है। हम तो तेल निकाल रहे हैं और रेगुलेटेड फॉर्म में बेच रहे हैं। तो मेरी दुकान मैं जो मर्जी चीज बेचूं ना आप क्यों बीच में आते हैं? कल ही यूएई ने किया। वहां गल्फ में हंगामा हो रहा है। उसने कहा मैं तीन क्यों? मैं तो 5 मिलियन बैरल निकालूंगा और
(30:09) बेचूंगा जिसने जो मर्जी करना है कर लें। तो पहले ये हैजेमनी यूएस ने एक्सरसाइज ही क्यों करी? कैसे करने दिया उसको कि डॉलर में ये सारा चलेगा व्यापार। दैट वाज दैट वाज़ अ बिग गेम। है ना? दैट वास अ बिग गेम दैट दे प्लेड एंड दे प्लेड वेल। एक तो इन्होंने सेकंड वर्ल्ड वॉर के बाद अपनी इकॉनमी को स्ट्रांग किया। मिलिट्री को स्ट्रांग किया। और ये स्ट्रांग हो जाने के बाद जब उन्होंने गोल्ड स्टैंडर्ड बोलते थे 1950 के अंदर और उसके बाद में जब डॉलर बीच में आ गया तो तो ये पूरा एरिया पूरा मतलब गल्फ ही नहीं पूरा विश्व तकरीबन हर चीज को डॉलर के
(30:41) टर्म्स पे काउंट करता था। और जब तक आप और मैं डॉलर्स के अंदर अपना बिजनेस करेंगे उसका जो भी फायदा कमीशन अमेरिका को जाना है वो जाएगा। मिलेगा उसको। तो अमेरिका को तो चाहे अफ्रीका में तेल बिक रहा हो या वहां की गोल्ड माइन आ रही हो जब तक कि डॉलर चलेगा उसको एडवांटेज होगा। अब जब कह दिया जी मुझे डॉलर की जरूरत नहीं है। भारत ने रशिया से मिलियंस ऑफ बैरल का तेल खरीदा रूबल्स के अंदर। हां ओके या तो चुलमुल हुई उसको। हां चाचा ट्रंप सहन नहीं कर पाए। तो उन्होंने रशिया का खैर यूक्रेन वॉर भी बीच में आ गया था। उसके जरिए सेंश लगाने शुरू कर
(31:17) दिए। वही वही चीज और जगह भी हो रही है। तो यह जो डोलराइजेशन ऑफ द एंटायर वर्ल्ड एंड कंट्रोलिंग द एंटायर इकॉनमी हम वाज़ अ बिग स्टेप बाय देम। नाउ ट्रंप एंड अमेरिका इस फाइंडिंग इट डिफिकल्ट। वो कह भी नहीं सकते कि जी हम तो अपने डॉलर के लिए लड़ रहे हैं। क्योंकि वो सेल्फिश हो जाएगा। वो सेल्फिश हो जाएगा। दुनिया कहेगी यार तुम कहते हो कि हम वेलफेयर करेंगे। हमको प्रोटेक्शन और वेलफेयर की जगह तो आप तो पैसा केयर कर रहे हो अपना। दैट इज़ नॉट एक्सेप्टेड बाय द वर्ल्ड। सो इन दैट हाफ पीपल अंडरस्टैंड तो यह चलता गया। अब जब लोगों को समझ में आ रहा है
(31:52) तो यह गेम खुल रहा है। फिर बाकी देश चीन, रूस ये सब उभर कर आ रहे हैं। इनकी अपनी पावर है। इनका अपना वर्चस्व है। वो उनको मंजूर नहीं है। तो यूएस का वहां पे कोई लेनदेन नहीं है। अदर देन दी बिनेस। हां, ओके। लेकिन वो यहां पर हाजिर है। वो इजराइल को सपोर्ट कर रहा है। इजराइल के बहाने इस पूरे इलाके को कंट्रोल कर रहा है। क्यों वो अफगानिस्तान में बैठे 20 साल? उससे पहले रशिया क्यों बैठा है इस इलाके के अंदर? हां। तेल, पैसा। तो ये जो ट्रंप साहब ने गेम खेला ये ट्रंप और उनके पहले भी प्रेसिडेंट्स ने ओवरऑल तो स्ट्रेटजी देश की यही रही ना
(32:27) कि भ जहां से मर्जी पैसा लाओ। हां हां। अपने देश को महान बनाओ। जी। ट्रंप भी इसी बहाने जीता था। मागा मेक अमेरिका ग्रेट अगेन। उसने कभी ये नहीं कहा कि मेक द वर्ल्ड ग्रेट अगेन। जैसा हम अर्थशास्त्र में बोलते हैं। वेलफेयर ऑफ द एंटायर नेशन स्टेट। हम हम तो अपने जानवर और पशु पक्षी और प्लांट्स की भी रक्षा करते हैं। उनको कोई मतलब नहीं है। हम एनवायरमेंट ट्रीटी से ट्रंप साहब ने एग्जिट कर लिया है। तो वो सिर्फ वहां पर है जहां पे उनको पैसा मिल सकता है। वो इकॉनमी को कंट्रोल कर सकते हैं। गुड थिंग इज व्हिच आई मस्ट एप्रिशिएट कि उन्होंने
(33:00) अपनी इकॉनमी, अपनी मिलिट्री फोर्सेस, अपनी टेक्नोलॉजी इनको बहुत सुपीरियर बनाया। बहुत मेहनत की। जहां से मर्जी ब्रेन ड्रेन करवाया। अपने देश में लेकर के आए और उन्होंने वो सब क्रिएट किया। वो बहुत बड़ा काम किया जिसकी वजह से ये इतने पावरफुल बने। हम कल अगर जैसे चीन है जिस तरह से वो बढ़ रहा है हम करेक्ट। चीन विल चीन इज़ अ वर्ल्ड पावर। तो आप उसको धक्का देके नहीं कह सकते जी आप चलिए। हम दिस इज़ अ टाइम व्हेन द नैरेटिव इज़ चेंजिंग। अ न्यू वर्ल्ड ऑर्डर इज़ इमर्जिंग। और ये जो नया विश्व उभर करके आएगा वो मल्टीपोलरिटी पे आएगा कि आप भी ग्रो कीजिए। हम भी ग्रो करें और साथ मिलकर
(33:40) के ग्रो करें। हम हम तो सर ये राजमंडल थ्योरी के हिसाब से मुझे इंडिया पाकिस्तान इंडिया चाइना समझ आता है। बट अमेरिका ईरान एक तो आपने डॉलर वाली बात बता दी कि वो डॉलर था स्टेट ऑफ होमस पैसा इनवॉल्व था। और क्या कारण है कि ये एनिमेट्री है। आप नब्स पकड़ने में माहिर हैं। कॉम्प्लीमेंट्स बहुत सिंपल बात है कि अगर आप जिओपॉलिटिक्स को देखें और जिओ स्ट्रेटजी को देखें ना जिओ शामिल है। ज्योग्राफी शामिल है। मिडिल ईस्ट के अंदर तेल है, पेट्रो डॉलर है, डॉलर है। यह कहानी हमको समझ में आ गई। क्या ईरान मिडिल ईस्ट का हिस्सा है? अगर हम इसी को ज्योग्राफी के तौर पर देखें तो
(34:19) मिडिल ईस्ट के देशों से यह तकरीबन 1800 2000 कि.मी. पूर्व में है। ईस्ट में है। तो ईरान मिडिल ईस्ट का तो हिस्सा ही नहीं है। देयर फॉर ईरान इज नॉट पार्ट ऑफ दी ऑयल डिप्लोमेसी जो अमेरिका खेल रहा है। दूसरा ईरान अपने आप में बहुत बड़ी सभ्यता रहा है। पुराने समय में जो अफगानिस्तान, ईरान की सभ्यता थी। बहुत समृद्ध सभ्यता थी। ये तो इस्लाम के आने के बाद में और सिक्स्थ सेंचुरी एडी के बाद में धीरे-धीरे पूरा इलाका इस्लामिक एरिया बन गया। वरना ये सभ्यता बहुत मजबूत सभ्यता थी। और उस सभ्यता के जो गुण समाज में होते हैं वो इतनी आसानी से जाते नहीं है।
(35:02) हम अब भारत को ले लीजिए ना। हमने इतनी मार खाई है। हजार साल तक लोगों ने हमको बाहर से आकर त्रस्त किया है। लेकिन हम आज भी उतने ही मजबूत है अंदर से कि फिर निकलेंगे। फिर निकलेंगे। और ये जो फिर निकलने वाली जो मंशा है ये ईरान में भी उतनी ही मजब और इसको धार्मिक रूप से खेला है अयतुल्लाह खुमेई और इनके कट्टरपंथियों ने और इस चीज को समझते हुए कि ये इस पूरे इलाके में अकेला शिया देश है हम बाकी सब सुन्नी है करेक्ट करेक्ट करेक्ट जादती है ना मेजॉरिटी ये शिया है और बाकी शियाज और जगह कम है तो ये उनके नेचुरल एनिमीज़ हो गए विद इन इस्लाम
(35:42) और ऑयल कंपटीशन है ही विश्व का चार से पांच% जो तेल है ईरान के अंदर निकलता है और यह मिडिल ईस्ट से दूर है। अमेरिका के काबू में नहीं है। अपनी इनकी सभ्यता है। बाहर निकलने की और हिम्मत रखते हैं। इराक से दुगना इलाका है और इससे कहीं ज्यादा गुना तेल इसके पास है। तो इराक को तो उन्होंने ध्वस्त कर दिया। ईरान को जब इन्होंने ऑयल पकड़ने, इकॉनमी पर काबू करने और अपना डॉलर का वर्चस्व बनाए रखने के लिए जब प्लान किया तो उन्होंने अपने नेट असेसमेंट में गलती कर दी। जो अमेरिका के थिंकर्स हैं वो अब खुलकर के बोलने लगे। आप सुनिए जॉन मर्शिमर को सुनिए। जेफरी
(36:26) सैक्स को सुनिए, कर्नल विल्सन को सुनिए। उनके अपने रिपब्लिकन और कांग्रेस लीडर्स को सुनिए। खुलकर के आने लगे हैं कि जी ये तो बहुत बड़ी गलती कर दी। कैसे उन्होंने वेनेजुएला समझ के ईरान पे अटैक कर दिया। और दूसरा क्या उनको मालूम नहीं है कि ईरान पिछले 40 साल से ये सब कर रहा है? जब उनके पास इतनी इंटेलिजेंस है कि वो 40 लीडर्स इकट्ठे हैं और उनको एक जगह स्ट्राइक करके मार सकता है तो क्या उसको पता नहीं है कि उसके पास कितना न्यूक्लियर बम है या नहीं है? कितनी मिसाइल्स है? कहां-कहां है? ये ये अचानक पता चल रहा कि नहीं ईरान के पास
(37:02) ये भी है वो भी ऐसा क्यों रोजाना नए सिरे से खबर आती है कि जी ईरान के पास ये भी है और उनकी मिसाइल पे मिसाइल निकली जा रही है इधर टॉम हॉक और ये खत्म हो रहे हैं और इनकी मिसाइल फिर भी चल रही है मतलब देश के अंदर दम है जिसको वो पहचान नहीं पाए हैं। क्या ये अंडर वाटर जो मिलिट्री सिटी है इसके कारण? अ ईरान के पास जो अंडर वाटर मिलिट्री सिटी बोलेंगे इसको। देखिए ईरान जमीन के ऊपर जितना है ना जमीन के नीचे भी तकरीबन उतना ही है। चाहे वह पहाड़ों में उनकी टनल्स हो जहां पर उन्होंने यूरेनियम एनरचमेंट प्लांट लगा रखे हैं। चाहे नताश है, फदो है, इशान है
(37:37) और या इनके मिसाइल के बेसिस है। ये सब इन्होंने अंडरग्राउंड बना रखे हैं। क्योंकि जो सामने दिख रहा है वो तो इजराइल के फाइटर्स ने और अमेरिका के फाइटर्स ने बर्बाद कर दिए। उसके बावजूद भी अगर मिसाइल्स निकल-निकल के जा रही हैं और इजराइल को जवाब दे रही हैं और सऊदी अरेबिया बहरेन यूएई के ऊपर फायर कर रहे हैं और एक्यूरेट फायर कर रहे हैं। मतलब इतना रेजिलियंस है कि वो इतनी मार खाने के बावजूद भी अपनी ताकत को बरकरार रखे हुए हैं। जो इनके पास हजारों की तादाद में पहले कहते थे जी कि इनके पास ढाई 3000 मिसाइलें होंगी और 34 हजार के आसपास इनके
(38:14) ड्रोंस होंगे। अब वो हमने इतना मार दिया वैसे बर्बाद हो गए कुछ इन्होंने फायर कर दिया है तो खत्म है और ट्रंप साहब हर बार बड़बोला काम यही करते हर बार बोलते हैं जी आई हैव डिस्ट्रयड आई हैव ऑब्लिटरेटेड व्हाट ऑब्लिटरेटेड आचार्य चाणक्य ने कहा जब आप दुश्मन के साथ अधूरा काम करते हो तो दुश्मन पैदा होता है। दुश्मन मजबूत बनता है और एग्जैक्टली वही हुआ। अमेरिका ने कभी पूरी तौर पे ईरान से लड़ाई नहीं लड़ी। या पूरी तरह से उसको छोड़ने दिया। अभी संधि कर ले। दोस्ती कर ले तू भी तेल कमा हम भी कमाएंगे और दोनों मिलकर के काम करते हैं। ऐसा ट्रीटी क्यों नहीं बनाया?
(38:50) भाई आचार्य चाणक्य ने तो यही कहा ना संधि की तरफ काम करो शांति की ओर काम करो। विग्रह की तरफ क्यों काम करते हो? नीति शास्त्र यही कहता है। नीति शास्त्र ध्यान है ना आपको क्या है? साम दाम दंड भेद। अब्सोलुटली सारा हिंदुस्तान यही गलती करता है। यह साम दाम दंड भेद नहीं है दोस्तों। चाणक्य नीति या नीति शास्त्र के अंदर लास्ट के दो शब्दों को बदली करो। साम दाम भेद और फिर दंड। क्योंकि आचार्य चाणक्य कहते हैं कि दंड का तो इस्तेमाल करना ही नहीं चाहिए। दंड का इतना खौफ होना चाहिए कि बाकी सब चीजों से अपना काम हो जाए। जब सिकंदर भारत में आकर
(39:27) के युद्ध नहीं कर पाया उसको वहीं से इंडस्ट्री ही वापस भगा दिया इन्होंने। किस वजह से? साम दाम और भेद से दंड का तो इस्तेमाल करने का जरूरत ही नहीं पड़ा और ट्रंप साहब इसका उल्टा काम कर रहे हैं और अगर दंड ही लगा दिया तो तो काम अधूरा रहेगा ही जो अगला बात करना चाह रहा है वो बात भी नहीं करेगा तो अगर ईरान के साथ उन्होंने काम करना है तो ट्रेड रिलेशंस दोस्ती का हाथ बढ़ा के करें ना कि दम दिखा के कितनी देर नाचेगा उसके नाम पर वो नहीं हो सकता बिल्कुल नहीं हो सकता अब तो वो सांप के मुंह में छछूंदर का कहानी बन गया है ना निगला जाए ना छोड़ा जाए। वो रोज
(40:04) धमकी देता है कि मैं यह कर दूंगा मैं तीन से चार बार वो नेवल ब्लॉकेट से पहले और उसके बाद धमकी दे चुका है कि मैं बर्बाद कर दूं। भाई इतने दिन से क्या कर रहा था? बर्बाद ही तो कर रहा था। पर वो अगला बर्बाद हुआ नहीं। और दूसरी बात जो ईरान ने गेम खेला बहुत गजब का गेम खेला कि उसने आमने-सामने का प्रकाश युद्ध किया ही नहीं। आचार्य चाणक्य ने बोला कि जब युद्ध होगा, विग्रह होगा तो प्रकाश युद्ध के तौर पे होगा। आचार्य चाणक्य कहते हैं प्रकाश युद्ध मतलब ओपन वॉर ओपन वॉर करेक्ट आमने सामने की लड़ाई तो ईरान ने तो किया ही नहीं वो कहता है जी
(40:36) मैं आपके बराबर हूं ही नहीं आमने सामने की लड़ाई करूंगा तो पिटूंगा मार खाऊंगा तो मैं करूंगा ही नहीं फिर क्या किया ब्लॉक कर दिया स्टेट ऑफ हॉर्मस को जो जो ये तो ब्लॉकेड नेवल ब्लॉकेड किया इन्होंने जिसकी बात हम कर चुके हैं कि जी वो बाहर से नहीं आने देना तो ईरान कह रहा है यहां से भी कोई बाहर नहीं जाएगा जो मर्जी कर ले अब वो धमकी दिए जा रहा है ईरान चुप बैठा है कि ठीक है आप आ जाओ और मारेंगा मार लो कितना देर आचार्य चाणक्य कहते हैं कि कोर्ट कूट युद्ध या गढ़ युद्ध के तौर पर काम करेंगे तो वो सफल होंगे और ईरान ने वही किया। ट्रंप साहब को
(41:08) शायद खबर नहीं है और खबर है तो वो समझ नहीं रहे। कूट युद्ध कहता है जी कंसील्ड वॉरफेयर छुप करके कोई भी वॉर करना। अच्छा गढ़ युद्ध कहता है साइकोलॉजिकल वॉरफेयर। अच्छा हां जो आचार्य चाणक्य ने बोला वो उन्होंने अपनी उसके अंदर तीन किस्म के युद्ध बोले हम् प्रकाश युद्धम प्रकाश युद्ध ओपन वॉर कूट युद्धम मतलब कंसील्ड वॉरफेयर गोरिल्ला वॉरफेयर और तीसरा उन्होंने बोला तशनीम युद्धमति तशनीम कहते हैं साइलेंट वॉरफेयर साइकोलॉजिकल वॉरफेयर तो उन्होंने तीन किस्म के वॉर अर्थशास्त्र के अंदर लिख के बताए अब आप इस कूट युद्ध को और तशनीम युद्ध को आप दो भागों में और बांट सकते हो
(41:51) कि कूट युद्ध और गढ़ युद्ध तो एक तो जितने भी गोरिल्ला वॉर अफेयर है, टेररिस्ट एक्टिविटीज है, जो ईरान के प्रॉक्सीस हैं। यह उनके कंसील्ड वॉर का हिस्सा है कि जी चुपचाप वो मारेंगे कि दूसरे के थ्रू मारेंगे। हां। जैसे उसने धमकी दे दिया। ईरान ने धमकी दे दिया तुम हमारे यहां पे अटैक करो। मैं रेड सी बंद कर दूंगा। अच्छा। रेड सी का बंद करने का मतलब हुआ स्वेज कैनाल बंद हो जाएगा। यानी 12 से 15% के बीच का वहां पे जो ट्रेड निकलता है वो भी बंद हो जाएगा। हम तो 20 से 22% ये और 12 13% वो। तो तकरीबन विश्व का 33 34% तेल जो पूरा इस इलाके से
(42:27) जाता है वो बंद हो जाएगा और वो अगर बंद हो जाता है तो विश्व को तकलीफ होगी। तो अगर ट्रंप साहब ये समझते तो वो शायद ये ना करते और दूसरा जो गढ़ युद्ध है गढ़ युद्ध मतलब साइकोलॉजिकल वॉरफेयर या नेटिव वारफेयरिव कॉग्निटिव वारफेयर हां ये सब करना ईरान ने देखा कि मैं इनसे डायरेक्ट वॉर कर नहीं सकता। प्रकाश युद्ध ओपन वॉर कर नहीं सकता। साथ उन्होंने क्या किया जो बेससेस है पूरे गल्फ रीजन के अंदर अमेरिका के बेससेस हैं तकरीबन 13 बेससेस हैं अलग-अलग जगहों पर और वहां पे उनके एयर बेससेस हैं मिलिट्री पर्सनल है उनके एसेट्स हैं मिसाइल्स हैं एयरक्राफ्ट्स हैं
(43:05) उन्होंने वो आइडेंटिफाई किया और वहां पे मिसाइल्स मारना शुरू किया तो यूएई ने हल्ला मचाया मार दिया मार दिया अमेरिका जी आओ हेल्प करो तो ट्रंप साहब कहां हेल्प करने आए जब पैक्ट हुआ था तब कहा था जी हम आप हमको एयरबेस देंगे तो हम आपको सुरक्षा कवच देंगे जब एक्चुअली इसने मारा तो वो सुरक्षा कवच बहुत लिमिटेड रहा। सऊदी अरेबिया का आरम को रिफाइनरी की हम बात कर रहे थे। उसको मारा वो बचा भी नहीं पाए। तो इस तरह से यह जो कंसील्ड वॉरफेयर कूट युद्ध और ग युद्ध। अच्छा इसके बाद बड़ी मजे की बात यूएई और जगहों के अंदर जो उनके एयर बेससेस थे वहां से उन्होंने अपने
(43:36) मिलिट्री सोल्जर्स को हटा के होटल्स के अंदर रखना शुरू कर दिया कि आप वहां से ऑपरेट करो। तो जो ईरान के एजेंट्स हैं उन्होंने बताया जी यहां कि मिलिट्री इनकी इन होटल्स में शिफ्ट हो गई है। तो ईरान ने डिक्लेअ किया कि जहांजहां पर अमेरिका का टेक्नोलॉजी पार्क है, अमेरिका के बैंक्स हैं, अमेरिका के सोल्जर होटल में रुके हुए हैं। हम वहां मारे तो जो डायरेक्ट वॉर होना चाहिए वो अभी असिमेट्रिक वॉर हो गया। जिसमें ईरान ने अपना टारगेट चेंज कर लिया। अमेरिका उसी टारगेट पे मारे जा रहा है। उसने उसके शिप्स डूबा दिए, फाइटर्स मार दिए। लेकिन
(44:06) बराबरी का युद्ध तो हो ही नहीं रहा। और इस चक्कर के अंदर यह युद्ध लंबा खींच रहा है। जितना ज्यादा युद्ध लंबा खींचेगा उतना ज्यादा नुकसान अमेरिका को होगा। ईरान को उन्होंने बोला मैं तुमको स्टोन एज में भेज दूंगा। ट्रंप ने स्टेटमेंट दिया था। जी कि इतना हम मारेंगे। हम सब बर्बाद कर देंगे। कर दे। कर दे बर्बाद। क्यों नहीं किया? अल्टीमेटली किसी भी युद्ध की किसी भी सास बहू की लड़ाई की कहानी खत्म होती है प्यार पे। बातचीत के शांति वार्ता के ऊपर तो अल्टीमेटली टेबल पर आकर के बात करनी ही पड़ेगी। तभी बहू को भी शांति मिलेगी और सास भी
(44:46) शांति से जा पाएगी। आपको लगता है ये हो पाएगा गिवन कि दुबई ट्रंप बिहेव कर रहे हैं। देयर इज नो ऑप्शन। इवेंचुअली ऐसा ही होगा। अच्छा। आप देखिए जितनी बार भी अभी दो बार पाकिस्तान जो मीडिएटर बनने की कोशिश कर रहा था। हां। उल्टा चोर कोतवाल को डांटे तो हालांकि उसकी वो बातें फेल हो गई। लेकिन अच्छी बात ये है कि दोनों तीनों तरफ से कोशिश तो हुई बात करने की। अभी नया एक्टर बीच में आ गया है। रशिया जो बीच में आया है। ईरान के फॉरेन मिनिस्टर रशिया गए। पुतिन से बात की। पुतिन ने स्टेटमेंट दिया कि हमारा पैक्ट है और इनका यूरेनियम हम ले लेंगे। अमेरिका को
(45:23) यूरेनियम एनरचमेंट पे शक था ना वो हम ले लेंगे। चलो हमारी जिम्मेवारी यू जो इंटरनेशनल एजेंसी है एटॉमिक एनर्जी आईआईए उनके रेप्स भेजिए। हम उसी के सब तहती बिल्कुल सही तरीके से करके हमारे पास ले आएंगे यूरेनियम तब तो शांति हो सकती है। अब अमेरिका के ट्रंप साहब जवाब नहीं देंगे क्योंकि क्योंकि उनको ये यूरेनियम से मतलब नहीं है। उनको ट्रेड से पैसे से इन सब से मतलब है। तो वो तो चाहते हैं कि जी किसी ना किसी तरीके से ये सब कुछ खुद हथिया ले तब बात बने। वो हो नहीं सकता। वो हो नहीं सकता। इसलिए युद्ध लंबा खींचेगा। जैसे रशिया और यूक्रेन का चल रहा है। जब-जब
(45:58) नींद खुलती है, ब्रेकफास्ट करके फायर करते हैं, फिर बैठ जाते हैं। वही चीज़ शायद यहां पर हो। लेकिन ये ये यूएन के अमेरिका के लिए बहुत कॉस्टली है। वो अफोर्ड नहीं कर सकता आफ्टर अ सर्टेन पीरियड ऑफ़ टाइम। ऑलरेडी हालात बहुत बुरे हैं सर। क्या हालात बुरे हैं? क्या हो रहा है अंदर से इंटरनली यूएस में? अ सबसे बड़ी बात तो ये है कि जो इनकी जो जितने भी युद्ध का असला है मटेरियल है गंस है चाहे मिसाइल्स हैं उनका मैन्युफैक्चरिंग एंड सप्लाई चेन वो उसको तो मेंटेन करना है ना इनकी बनाने की काबिलियत अगर 100 मिसाइल है तो इन्होंने 8000 से पहले तो फायर कर दिया
(46:33) और एक-एक मिसाइल बनने में समय लगता है तो वो ऑलरेडी क्रिटिकल स्टेज पे आ चुके हैं। इससे ज्यादा वो फायर करेंगे तो उनके पास फायर करने को मिसाइल्स नहीं रहेगी। ये बहुत बड़ी समस्या है। दूसरा ये कितने समय तक आप अपने 500 सैनिकों को चाहे आर्मी के हो, नेवी हो, एयरफोर्स हो उनको कितने समय डिप्लॉय करके रखें? तीसरा उनके खुद के घर में भी मिड टर्म इलेक्शंस आ रहे हैं नवंबर में। चौथा ट्रंप साहब की अपनी पॉपुलैरिटी इनके इतिहास में सबसे अह लोएस्ट प्रेसिडेंट के तौर पर हो रखी है। लोग उनको मैडम मैन कहते हैं। तो इन सब चीजों को देखते हुए ये ये मेरे
(47:05) ख्याल से जो ये डिक्टेटर टाइप एक्टिविटीज है वो नहीं चलेगी। और समझदार राजा कभी भी तैश में आकर के इमोशंस में आकर के युद्ध नहीं करता। चाणक्य ने कहा है कि राजा को दो चीजें हमेशा स्टेट क्राफ्ट से अलग रखनी चाहिए। क्या? इमोशन और रिलीजन। अच्छा इन दो चीजों को अगर आपने राजा ने स्टेट में आने दिया वो स्टेट नष्ट हो जाएगा। यही हो रहा है। सर हमने रीसेंट टाइम्स में किस टाइप के साइलेंट वॉर्स देखे हैं? क्योंकि आपने बोला कूट युद्ध और गुण युद्ध साइलेंट वॉर्स में से आता है। तो एक बहुत फेमस वॉर था चिप वॉर जहां पर यूएस ने चाइना का एक्सेस हाई एंड एडवांस चिप्स से ब्लॉक कर
(47:45) दिया गया था। व्हिच सेट दैट इकॉनमी बैकपाइप ऑलमोस्ट 10 इयर्स। आई थिंक अभी भी वो 10 इयर्स पीछे ही चल रही है। एस फार एस दैट इज कंसर्न। राइट? इसके बारे में थोड़ा बताइए। शिप वॉर वो है जो दिखाई नहीं देता और जो वॉर या युद्ध दिखाई ना दे वो कूट युद्ध या गढ़ युद्ध के तौर पे कहा जा सकता है या जैसा चाणक्य ने कहा तुषनीन युद्ध के तौर पर देखा जा सकता है। अब बहुत अच्छी बात तो यह है कि टेक्नोलॉजी ने बहुत एडवांसमेंट कर लिया है। और इतना प्रोग्रेस कर जाना कि एआई और टेक्नोलॉजी इंसान से ज्यादा और बेहतर सोचने लगी है। यह अपने आप में दो विरोधाभास लाता है।
(48:24) हम एक तो ये कि आप इसका इस्तेमाल अच्छे कामों के लिए कितना कर सकते हैं और दूसरा है कि ये कैसे विनाश ला सकता है। मैं आपको एग्जांपल देता हूं। एक दिन की बात है जब लेबनान के अंदर हजबुल्लाह के सारे लोगों ने अपना-अपना सेट खोला और 4000 वो वॉकी टॉकी जो इस्तेमाल करते थे वो उड़े और उतने हजबुल्लाह के कमांडर्स मारे गए। आप पेजर ब्लास्ट बोल रहे हो? पेजर ब्लास्ट तो जो पेजर पेजर ब्लास्ट उन्होंने किया यह क्या था? सिंपल चिप वॉर हम कि जो इजराइल ने यह आइडेंटिफाई किया कि हजबुल्ला लेबनान ईरान ये जिस कंपनी से पेजर खरीद रहे हैं वो इनके मारफत जाए और
(49:08) उस पेजर के अंदर उन्होंने वो चिप और वो बारूद लगा दिया जो कि जब यह चाहे तब उड़ा सके। अब इसी चीज को एक बहुत प्रैक्टिकल मैं एग्जांपल के तौर पे देता हूं जो कि वॉर नहीं है लेकिन हम पैसा देते हैं उसका। आपके घर का टीवी है, फ्रिज है, आपके पास आता है। आपके पास एक वारंटी लिखा हुआ आता है। जी तीन साल की वारंटी, 10 साल की गारंटी एंड ऑल दैट। लेकिन जिस दिन की वारंटी गारंटी खत्म हो जाती है, आप देखिए कि वो खराब हो जाता है। करेक्ट। क्यों? क्योंकि उसके अंदर जो चिप डली हुई है, उसके अंदर लिखा हुआ है डीएक्टिवेट। हां। इतनी तारीख इतने बजे। इसी को आप मिलिट्री
(49:44) टर्मिनोलॉजी में अगर आप ले लो भारत की जो हर जगह तार फैलाती है, तार देती है। आप और हमको इंटरनेट देती है। आपको मालूम है इनके तार और इनके चिप्स कहां से आते हैं? चाइना से। कंपनी से आते हैं। चाइना से। जी। अब उसने उस बी की पूरी प्रणाली जो हमने टेक्नोलॉजी ले रखी है, उनके सारे इक्विपमेंट उनसे ले रखे हैं। कौन से चिप ले रखी है? क्या आपको मालूम है? हम क्या इनफेशन जा रही है उन चिप्स के थ्रू? वो भी नहीं पता हमको। अब्सोलुटली 2015 में हमारा नदर्न इलेक्ट्रिसिटी ग्रिड बैठ गया था दो-तीन दिन के लिए। हम क्यों? क्योंकि सब कोई एक सर्किट खराब हो
(50:20) गया। किसने किया? नो वन नोज़ एक्चुअल गुड युद्ध वाले हैं उनको मालूम है कि किसने किया? तो कल अगर आपका इंटरनेट बैठ जाता है। आपकी गवर्नमेंट की जितनी भी साइट्स है वो बंद हो जाती है। आपकी बैंकिंग साइट बंद हो जाती है। आप क्या करेंगे? तो जब तक हम अपना अंदरूनी चिप, अपनी खुद की टेक्नोलॉजी अपने भरोसे पर ना बना लें तब तक हमको किसी और पर निर्भर रहना होगा और दुश्मन इसका फायदा उठा सकता है। जब भी कोई कार्य होगा तो आचार्य चाणक्य ने बोला है उद्यमेन ही सिद्धयंती उद्यम से ही सिद्धि मिलेगी। कार्याण न मनोरथ कोई भी कार्य इच्छा से इच्छा रखने
(51:01) से नहीं होता। उसके लिए काम करना पड़ता है। तो अगर हम चाहे चिप वॉर है चाहे दूसरा है। इसके लिए हमको सिद्ध सिद्धि हासिल करने के लिए हमको वो मनोरथ करना पड़ेगा। हमको वो उद्यम करना पड़ेगा। वो मेहनत करनी पड़ेगी। आपको लगता है चाणक्य के लेंस के थ्रू विश्व युद्ध हो सकता है या होने वाला है? मैं असेसमेंट के तौर पे बोलूंगा। कोई प्रेडिक्शन नहीं करना चाहूंगा। आचार्य चाणक्य ने एक बहुत छोटा सा प्रिंसिपल दिया है। लोगों ने उस प्रिंसिपल के ऊपर पीएचडी किया है। षडगुण्य थ्योरी बोलते हैं। षड मींस छह गुण वाली फॉरेन पॉलिसी आप फॉरेन पॉलिसी लगाए चाहे घर में भी लगाए
(51:37) वो हर जगह एप्लीकेबल है। आपके अपने परिवार में वो लागू है। मेरे परिवार में लागू है। देशों के आपसी रिश्तों में लागू है। शट गुन्ने बहुत सिंपल तरीके से बोलता है कि आप चुनिए आपको क्या चाहिए। एक तरफ शांति है, एक तरफ युद्ध है और सारी दुनिया, सारे रिश्ते चाहे पर्सनल हो, चाहे नेशनल हो, वह सब इन्हीं दोनों के बीच में घूमते हैं। मैं आपका और मेरा ही एग्जांपल लेता हूं कि आप और मैं क्या करना चाहते हैं। शांति से पॉडकास्ट कर रहे हैं ना? हाथापाई तो नहीं कर रहे हैं। तो, हमने तय किया कि हम शांति से बातचीत के जरिए करेंगे। साथ में चाय का आनंद
(52:08) लेंगे और मजे से पॉडकास्ट करेंगे। हमने तय किया। ठीक है? यही बात अगर हमारी बिगड़ जाए और मैं आपको अपशब्द बोलूं आप मुझे लांछन दें और ये बात थोड़ी सी बिगड़ने लगे तो क्या हो? इसका एंड रिजल्ट ये होगा कि हम लड़ पड़ेंगे। करेक्ट वो विग्रह हुआ। वो वॉर हुआ युद्ध हुआ। ठीक है? भारत और पाकिस्तान के बीच में हमने पांच युद्ध लड़े हैं। तब भी हमारे पास संभावना थी कि शांति और विग्रह या युद्ध के बीच में कोई भी रास्ता अपना लूं। शांति चल रही थी। करेक्ट। आचार्य चाणक्य कहते हैं कि अगर शांति आप चाहते हैं तो उसको उसको मेंटेन करना पड़ेगा और शांति से आगे बढ़ के आपको
(52:47) समश्रय करना पड़ेगा। वो अलायसेस समश्रय मतलब अलायसेस बनानी पड़ेगी जिससे आपको शांति बहाल किए रख सकते हैं। और तीसरा इस सब के बाद फिर आपको एक आसन लेना पड़ेगा। आसन इज न्यूट्रलिटी कि मैंने और आपने तय किया कि जी हर महीने एक ऐसा पडकास्ट करेंगे और हम ऐसेसे इनवाइट करेंगे। इसके अलावा हम यहां कोलबोरेशन करेंगे वहां कोलबोरेशन करेंगे। हमने क्या किया? संधि किया। शांति संधि हो गई। फिर हमने समश्रय किया अलायसेस की। इंडिया पाकिस्तान के बीच में वाटर संधि है। इंडस रिवर ट्रीटी। हां। भारत और पाकिस्तान के बीच में इंडस वाटर ट्रीटी है। ये बहुत आराम से संधि के तौर
(53:25) पर चल रही थी। अब जैसे ही युद्ध हुआ हमने ये जो समश्रय संधियां चल रही थी या अलायसेस चल रही थी इसको थोड़ा सा हमने न्यूट्रलिटी से ऑफेंसिव की ओर कदम उठाया ऑफेंस यानी कि वॉर एंड ऑल ऑफ़ दैट नॉट रियली वॉर मतलब वॉर तक पहुंचने से पहले गाली गलौज भी तो करेंगे कभी कबभार तंग भी तो करेंगे उसके बाद में फिर कहीं जाके वॉर करेंगे तो हम कहते हैं जी कि सबसे पहले संधि किया शांति किया उसके बाद उसके लिए हमने अलायंसेस की चाहे वो इकोनमिक अलायसेस हैं चाहे डिफेंस पैक्ट है पाकिस्तान ने सऊदी अरेबिया से किया था। एक दूसरे पर अगर हमला हुआ तो हम एक दूसरे
(53:59) की मदद करेंगे। नाटो ने किया। ये सब उस समश्रय में आता है। अलायसेस के अंदर आता है। और उसके बाद में फिर आप आसन लीजिए। आप योगासन करवाती हैं। आसन लेती हैं। आसन मतलब क्या? स्थिरता। आप स्थिरता देते हैं अपने रिश्तों में। चाहे पर्सनल सास बहू के रिश्ते हो या इंडिया पाकिस्तान के रिश्ते हो या या गल्फ की कंट्रीज के रिश्ते हो। उनको आपने स्थिर बनाना है, स्टेबलाइज करना है। सिर्फ एमओयू साइन करने कर देने से शांति बहाल नहीं हो जाती। उसके ऊपर एक्शन करना पड़ता है। आचार्य चाणक्य कहते हैं कि अगर आपने यह आसन ले लिया वो न्यूट्रलिटी मेंटेन कर ली
(54:34) है ताकि आप बिल्कुल डोमिनेंट पोजीशन पर रहे बिना किसी युद्ध के। अब तक कोई युद्ध की बात नहीं चली है। अब आचार्य चाणक्य कहते हैं कि आप य कीजिए। य मतलब प्रिपेयर फॉर वॉर। कि इन सब के दौरान आपका युद्ध के लिए हमेशा तैयारी चलता रहना चाहिए क्योंकि कौन सा ट्रीटी कब फेल हो जाए कौन देशण कब अपना आसन बदल कर ले और जैसे ही वो स्थिरता मिटे या टूट जाए तो वो युद्ध में परिवर्तित हो सकती है तो आप तैयार है क्या बी प्रिपेयर फॉर द वॉर बी प्रपयर्ड फॉर द वॉर ऑलवेज एवरी टाइम फौज में कहते हैं ना द मोर यू स्वेट इन पीस दे लेस यू ब्लीड इन वॉर
(55:13) करेक्ट चालू कीजिए उसको लगाइए तो यन चलते रहना चाहिए और य के साथ में वो कहता है अगर विग्रह की तरफ जाते हैं युद्ध की तरफ जाते हैं तो एक स्टेज और कहता है वो कहते हैं द्वैदि भाव द्वय मतलब दो भाव द्वैदि भाव दो अलग-अलग भाव मैं एक तरफ आपसे प्यार से बात कर रहा हूं और दूसरी तरफ यकीन करूंगा कि अगली बार आपको यह स्टूडियो ना मिले द्वैदि भाव पाकिस्तान क्या कर रहा है सामने से कुछ नहीं बोल रहा लेकिन ट्रंप के साथ जाकर के दोस्ती बना रहा है क्या कहना चाहता है भाई उसको मारना हिंदुस्तान को मारना तो इजराइल क्या कर रहा है? उसने वो खुल के बोलता है जी मैं
(55:48) तो मारूंगा वॉर करूंगा और कोई द्वैदी भाव नहीं है। खुल के बोलूंगा उसने द्वैदि भाव नहीं दिखाया। ईरान क्या कर रहा है? द्वैदी भाव वो कहता है जी मैंने तो पिछले 40 सालों से कोई युद्ध नहीं लड़ा। मैं युद्ध लड़ना भी नहीं चाहता। हम तो अपना शांति से प्रोग्रेस करना चाहते हैं। लेकिन साइमलटेनियसली वो क्या कर रहे हैं? एच क्यूब, हजबुल्ला, हमास, हुतीज इन सबको उन्होंने प्रॉक्सीस को खड़ा कर रखा है। हम ताकि उसकी तरफ से वो लड़ाई लड़ सके। तो यह द्वैदि भाव चलता रहेगा जब तक दुनिया है द्वदी भाव होगा और द्वैदि भाव के बाद में फिर जब यह सब फेल हो जाए तब विग्रह की
(56:24) स्थिति आती है या युद्ध की स्थिति आती है तो आप ये देखिए ये जो छह स्टेजेस हैं संधि या शांति समश्रय आसन यन द्वैदि भाव और विग्रह इस षटगुण्य थ्यरी को आप जिंदगी में कहीं लागू कर लीजिए वेस्ट एशिया में लगा लीजिए भारत पाकिस्तान पे लगा लीजिए भारत बांग्लादेश के ऊपर लगा लीजिए यूक्रेन वॉर तौर के ऊपर लगा लीजिए। आपको वही इसमें कहीं ना कहीं त्रुटियां मिलेंगी। और इनके ऊपर अगर आप चल के कहते हैं कि साहब ट्रंप साहब अब बताएं आप कहां पर हैं? ट्रंप साहब ने क्या किया? उन्होंने तो खुलकर के चुनौती दे दी है कि जी मैं तो नेवल ब्लॉकेड करके रखूंगा।
(56:58) हम आपने जो करना है कर लें। स्टारर्स की बात स्टेट ऑफ़ हार्मोर्स की बात कर रहा हूं। बहुत सिंपल सी बात है। अगर पहली बात तो अगर आपने ज्योग्राफी या नक्शा नहीं देखा तो ईरान और ये जल डमरू मध्य जिसको बोलते हैं या स्ट्रेट ऑफ हॉर्मोस। हॉर्मूस, जल, डमरू, मध्य इसका नक्शा देखें। इसका नक्शा देखेंगे तो यह अरेबियन सागर, सी ऑफ ओमान इससे होकर के जो समुद्र है वो एक अंदर तक आ जाता है और जितना अंदर आता है वो एक स्ट्रेट बनाता है और जहां पे नूज़ है जहां से वो अरेबियन सी के अंदर खुलता है उसको स्ट्रेट ऑफ होमस बोलते हैं। हम तो इस लंबे समुद्री रास्ते के दोनों तरफ
(57:35) देश हैं। पूर्व में ईरान है। पश्चिम के अंदर काफी सारे देश हैं। इराक है, बहरेन है, यूएई है, ओमान है और इनके फिर पश्चिम के अंदर सऊदी अरेबिया है। और जो स्टेट ऑफ हरमूस है ये 21 नॉटिकल माइल्स का समुद्री इलाका है जो उत्तर के अंदर या उत्तर पूर्व के अंदर ईरान के पास है और पश्चिम या या दक्षिण पश्चिम की तरफ ओमान है। ये जो 21 नॉटिकल माइंस का एरिया है ये बहुत ही छोटा एरिया है। सारे शिप्स को इधर से निकलना पड़ता है। और जितना भी तेल शिप्स को मतलब 100% 80 90% शिप्स 100% ओके जितना भी तेल बहरेन का निकलेगा इधर से निकलेगा
(58:17) हम यूएई का निकलेगा अरब का हालांकि रेड सी के अंदर से काफी निकलता है लेकिन इधर भी उनके कुछ एक है फिर ओमान का सारा तेल इनके सारे तेल के जितने भी पोर्ट्स हैं इसके साइड में यहीं पे बने हुए हैं खर्ग आइलैंड जिसको इजराइल ने ठोका था और बोला था जी कि मैं और ऐसे कर दूंगा फिर ट्रंप ने बोला नहीं जी वो मत करो एनर्जी है और उसके चक्कर में जब इजराइल ने खर्ग आइलैंड के ऊपर अटैक किया जहां पे ईरान का 90% ऑयल प्रोसेस होता है और उसके एवज के अंदर ईरान ने सऊदी अरेबिया की अरमको को मारा था वहां पे मिसाइल मारी थी। तो ये जो एक स्ट्रेट है ये एक तो बहुत
(58:52) संकरा है। तो सिर्फ इतना ही हो सकता है कि जहांजहां पोर्ट है वहां पे शिप्स जाएं अपना तेल भरे और तेल भर के वापस एक दी गई दिशा के अंदर बाहर निकल के आए। फिर गल्फ ऑफ ओमान से निकल के बाहर अरेबियन सागर में चले जाए। फिर वहां से उनको चाहे अफ्रीका में जाना है, चाहे भारत में आना है, चाहे फिलीपींस जाना है या चाइना जाना है। वो सब स्टेट ऑफ मलक्का हो के ईस्ट में चले जाते हैं। अब मजे की बात ये है कि स्ट्रेट ऑफ हॉर्मोस जो 21 नॉटिकल माइल मैंने बताया समुद्री भाषा के अंदर या नेवल वॉरफेयर की भाषा के अंदर हम कहते हैं जी 12 नॉटिकल
(59:24) माइल कोस्ट से 12 नॉटिकल माइल तक का जो कोस्टल एरिया का पानी है समुद्री पानी वो उस देश का पानी। उसके बाद में फिर ओपन वॉटर्स है और 200 नॉटिकल माइल्स के बाद में ओपन ओशन है। तो अगर मैं इसको इस 21 नॉटिकल माइंस को ओमान और ईरान के बीच में 12 12 किलो नॉटिकल माइल्स को डिवाइड करूं तो कितना हो गया? 24 12 नॉटिकल माइन ओमान के 12 नॉटिकल माइल् ईरान के तो 24 नॉटिकल माइल हो गए। इसकी चौड़ाई है 21 तो तीन नॉटिकल माइल्स तो फिर भी ओवरलैप हो रहे हैं। तो जितने भी शिप्स निकलेंगे इसी में से निकलेंगे। हम और यह इतना छोटा है कि इसके अंदर से कोई
(59:59) एयरक्राफ्ट कैरियर नहीं निकल सकता। अच्छा अगर आपने एयरक्राफ्ट कैरियर घुसाया तो वो एयरक्राफ्ट कैरियर शिप तो चला जाएगा। लेकिन पूरा बेड़ा जो फैला हुआ होता है, डिस्ट्रयर होते हैं, फ्रिगेट्स होते हैं। 20 से 30 तक शिप्स उसके साथ में चलते हैं। वो सब यहां से निकल कर के अंदर जाके खड़कग आइलैंड को अटैक नहीं कर सकते। और अगर वो आते हैं तो ईरान को क्या करने की जरूरत है? ठग से जहां से मर्जी मिसाइल मारे। उनके पास बोट टाइप ड्रोंस तैयार हो गए। वह उनको आराम से मार सकता है। इसलिए अमेरिका भी इसके अंदर नहीं आना चाहता। नहीं आ सकता। वह ट्रंप को मालूम
(1:00:32) है। हम तो उन्होंने क्या किया? उन्होंने कहा जी ऐसा करें कि हम अंदर नहीं जाएंगे। हम बाहर की तरफ से नेवल ब्लॉकेड लगा देंगे। और किसी भी शिप को बाहर नहीं आने देंगे। बाहर वाले को किसी को अंदर नहीं आने देंगे। एंड रिमेंबर ये पहला नहीं है। 1988 के अंदर भी अमेरिका ने यही किया था। रिजल्ट हालांकि कुछ नहीं हुआ और अंदर की तरफ से ईरान ने ब्लॉक कर दिया। तो कोई तेल बाहर जा नहीं सकता। बाहर का तेल आ नहीं सकता। मैं कहूं जो एलपीजी है इंडस्ट्रियल गैस है वो तकरीबन 80 85% यहीं से निकलता है। भारत का हम चीन का तकरीबन 90% और हम आप और मैं जो घर
(1:01:07) के अंदर गैस इस्तेमाल करते हैं वो 90 95% हमारा वहीं से आता है। तो वो सारे शिप रुक गए। अब आने वाले समय में देखिएगा जब ये फसलों का टाइम आएगा तो हमारी 75% फर्टिलाइजर वहीं से आते हैं। हम आ उर्वरक वो बंद हो जाएंगे तो तो फूड प्राइसेस बढ़ेंगे। इसके अलावा जो हीलियम है या और ऑयल बेस्ड प्रोडक्ट्स हैं जितने भी पैकेजिंग के आइटम्स बनते हैं देश के अंदर उन सबका रॉ मटेरियल वहीं से आता है। तो पैकेजिंग की कॉस्ट बढ़ने लगेगी। अब तक तो हम हम संभाल रहे थे। अब धीरे-धीरे अगर और लंबा चलता है तो ये ये समस्या खड़ी हो जाएगी। आचार्य चाणक्य अपने सातवें चैप्टर
(1:01:42) में बोलते हैं कि संधि विग्रह योगसस्त तुल्ययाम वृद्धो संधि मुपयात कहने का मतलब है अगर संधि और युद्ध विग्रह इन दोनों में समान तौर पे अगर आपको लाभ मिल रहा है संधि मतलब शांति शांति ओके सो शांति प्लस युद्ध शांति और युद्ध मैं आपके साथ शांति से बैठ के काम कर रहा हूं या मैं लड़ कर के आपके साथ मिलकर के काम कर रहा हूं तो अगर दोनों के अंदर हम सिमिलर आपके एडवांटेज अगर मिल रहे हैं तो आप क्या प्रेफर करेंगे? शांति। शांति। करेक्ट। उसने यही बोला है। 27 फरवरी 2026 को दूसरी वार्ता चल रही थी अमेरिका और ईरान के बीच डिप्लोमेटिक बात चल रही
(1:02:26) थी। 28 फरवरी को उन्होंने खमीनी को उड़ा दिया। खमेनी को उड़ा दिया। 40 उनके मार दिए। क्यों? अब अगर संधि से बात चल रही है, प्यार से बात चल रही है तो उसको जारी रखो ना। क्योंकि इजराइल ने कह दिया, किसी और ने कह दिया कि जैसे वेनेजुला को उड़ाया था वैसे ही यहां भी उड़ा देंगे और ईरान खत्म हो जाएगा। तो आपने फिर डीप स्टडी नहीं किया है। आचार्य चाणक्य कहते हैं अगर मैं उनकी दृष्टि से देखूं तो वो वो अपनी सप्तांग थ्यरी सप्त अंग सात अंग किसी भी देश के अंदर किसी भी परिवार के अंदर चाहे आपका मेरा परिवार हो चाहे देश हो सात ऐसे अंग है जिनको कि बराबर
(1:03:03) मेंटेन करना है ध्यान रखना है और उस देश का कोई भी अगर एक अंग कमजोर हो गया तो वो हिस्सा देश का अपंग हो जाएगा। मैं आपसे एक सवाल पूछता हूं। देश के अंदर सबसे इंपॉर्टेंट आदमी कौन है? राजा, प्राइम मिनिस्टर या कैबिनेट या उसके मिनिस्टर्स या जनता? लोग, जनता लोग लोकतंत्र के अंदर कहते हैं जी लोक हम सबसे इंपॉर्टेंट हम आचार्य चाणक्य नहीं कहते। आचार्य चाणक्य कहते हैं कि इन सात अंगों में से सबसे बड़ा और सबसे इंपॉर्टेंट अंग है राजा। गवर्नेंस। गवर्नमेंट किसकी है? गवर्नमेंट कैसी है? चाहे वो राजा एक सिंगल राजा हो चाहे कम्युनिस्ट का ग्रुप हो जो
(1:03:44) कम्युनिज्म चला रही है या चाहे लोकतांत्रिक प्रणाली हो जहां पे कि पार्लियामेंट है। ये जो चीज है ये सबसे इंपॉर्टेंट है। क्योंकि लोग बेशक चुन ले लेकिन ये जो अनुशासन चलाना कार्य को चलाना ये सब काम तो उस राजा का है। उस पार्लियामेंट का है। और अगर वो दूषित है उनके दिमाग में अगर कीड़ा है देश अच्छा नहीं चल सकता। आचार्य चाणक्य कहते हैं कि बहुत समझदारी से राजा को चुनना चाहिए। बहुत समझदारी से पार्लियामेंट के मेंबर्स और प्राइम मिनिस्टर को चुनना चाहिए। अगर वो अच्छे हैं तो पूरा देश अच्छा चले। तो आप अगर इसी चीज़ को यहां लगाएं तो उन्होंने
(1:04:19) कहा जी जो राजा है ईरान के केस में हालांकि आयातुल्लाह खोमेन सबसे बड़े लीडर हैं उनके या थे और उनकी जो काउंसिल ऑफ मिनिस्टर है जिसके अंदर 80 सदस्य होते हैं वो 80 सदस्यों की टीम मिलके पूरे देश को चलाती है और उसके साथ में उनका जो मिलिट्री विंग है आईआरजीसी ईरान रेवोलशनरी गार्ड कोर यह है जो उनको सपोर्ट करके या उनके साथ लग के देश को चलाते तो जब तक ये ये कहते हैं इस नेतृत्व को समाप्त कर तो अमेरिका ने तो पूरी कोशिश किया और अगर ये छोटा-मोटा देश होता तो शायद हो जाता हम मैं कई दफा सोचता हूं कि क्या अगर ऐसा भारत के साथ हुआ तब क्या होगा कि हमारे
(1:05:02) टॉप 40 50 सीनियर लीडर्स हर डिपार्टमेंट के न्यूट्रलाइज हो जाए क्या होगा? क्या हम ईरान की तरह मजबूत खड़े रह पाएंगे? या जिस तरह से हमारी लोकतांत्रिक प्रणाली है हम बिखर जाएंगे? अमेरिका तो वही चाहता था ईरान में। फिर उसने अंडर एस्टीमेट किया सोच के कि वेनेजुएला जैसा हाल इनका भी हो जाएगा। जी जी। तो यह जो बात हुई वो ईरान की बहुत बड़ी खूबी है कि पिछले 40-50 सालों में उन्होंने अपनी राजा की या जो जो सप्तांग थरी का सुपरमोस्ट अंग है उसको बहुत मजबूत बनाए रखा। हम पर फिर भी देखो ना अमेजिंग इतना पिटने के बाद भी आई ईरान हैज़ बीन रेिलिएट। सो
(1:05:40) रेिलिएंट। ये नई कहानी है। बहुत अच्छा पकड़ा आपने। सिर्फ रेजिलियंस युद्ध के अंदर शामिल नहीं हो जाता है। जो ईरान के प्रोक्सी ग्रुप्स हैं। हजबुल्ला है लेबनान के अंदर। पेलेस्टाइन गाजा उसके अंदर हमास है और यमन के अंदर हुतीज़ है। ये बहुत पोटेंट फोर्स है इनकी। हम देखिए सब मुसलमान दहाड़े मार मार करके मस्जिद से चिल्लाते हैं। हम टेररिस्ट नहीं है। अरे मानता हूं मैं टेररिस्ट नहीं है आप। बहुत अच्छी बात है। लेकिन मुझे दुनिया में एक भी टेररिस्ट बता दो जो मुसलमान ना हो। हिंदू टेरर तो उन्होंने नाम देकर के निकालने की कोशिश की थी। हिंदू टेररिज्म
(1:06:17) नहीं है। जहां-जहां पे भी टेररिज्म हुआ है, चाहे वह 91 हुआ हो, चाहे यूरोप के अंदर फ्रांस के अंदर हुआ हो, चाहे पाकिस्तान से ओसामा बिन लादिन को पकड़ा हो, चाहे हिंदुस्तान के कश्मीर में हो। सब जगह मुसलमान टेररिस्ट है। एंड मेक नो मिस्टेक्स। और आप आप और मैं हिंदू है ना? धार्मिक लोग हैं। अच्छे विचारों के लोग हैं। कट्टरता नहीं है। लड़ाई भी हो गई तो कल फिर दोस्ती करने आ जाएंगे। आंटी जी गलती हो गई बता देना। मैडम दोस्ती कर दो। यार भाई तू रहने दे यार। हम ये सोच के करते हैं। वो कट्टर मुसलमान नहीं करता है। देयर इज नो मॉडरेट मुसलमान एंड कट्टर
(1:06:51) मुसलमान व्हिच आई डिफरशिएट। दे ओनली वन मुसलमान जो कुरान की आयत पढ़ता है। जो फतवा लगाता है और उन्हीं फतवे के चक्कर में वो मासूमों को मारता है। आप देख लीजिए। जबजब भी नरसंहार हुआ है। मैं खुल के बोल रहा हूं। सारे मुसलमान पॉलिटिशियंस, लीडर्स और सब आई एम ओपन टू फेस देम एनीवन एनी टाइम। कि जब-जब नरसंहार हुआ है तब-तब बुद्धिजीवी मुसलमान दुम दबा के मुंह के अंदर कपड़ा डाल के अंदर घुस गए हैं। किसी की जुबान नहीं खुली। बताइए मुझे एक भी। एक भी मुसलमान नेता का नाम बता दो। साइंटिस्ट का नाम बता दो। टीचर का, प्रोफेसर का नाम बता दो जो खुलकर के सामने
(1:07:28) आया हो और बोला हो कि जी ये इस्लाम ने गलत किया, नरसंहार किया। परसों की बात है बांग्लादेश के अंदर एक प्रिस्ट को लटका दिया। किसी ने कुछ नहीं बोला। किसी की गलती नहीं है। अरे प्र था ही ऐसा। भाई साहब आपने मौलवी को तो नहीं लटकाया पिछले दो साल में। कितने मौलवियों को आपने लटकाया बता दो। जीरो। पंजाब, राजस्थान इस पूरे वेस्टर्न बेल्ट के अंदर सारे मौलवी लगा रखे हैं उन्होंने। तो ओवरऑल कांसेप्ट अगर आप देखें तो मैं ये कहना चाहता हूं कि इस्लाम की कट्टरता इतनी ज्यादा है कि वो अपने अलावा बाकी सबको काफिर समझते हैं। जो इस्लाम को नहीं मानता वो काफिर है। जो
(1:08:00) इस्लाम को नहीं मानता उसको मर जाना ठीक चाहिए। उसको कोई जगह नहीं है इस धरती पर। ये इनका कांसेप्ट है। इसलिए जो कांसेप्ट है ना कि मुसलमान बच्चे पैदा करता जाए। एक एक स्त्री वो स्त्री नहीं है। इंसान नहीं है। उसके अंदर आत्मा नहीं है। वो सिर्फ बच्चा पैदा करने की मशीन है। दुख होता है मुझे ये कहते हुए। लेकिन वो सिर्फ पापुलेशन के जरिए आप देखिएगा बहुत सारे देश जो क्रिश्चियन थे वो अभी इस्लामिक स्टेट बन गए हैं। और आने वाले समय में आधा यूरोप आपको इस्लाम का मिलेगा। और अगर भारत नहीं जागा आज भी सो रहा है भारत मैं जगाना चाहता हूं सबको आपके माध्यम से कहना चाहता
(1:08:38) हूं सारे भारतीयों को भारतीय नेताओं को सबको कि जागो मैं यह नहीं कहता कि आप हिंदू बने या मुसलमान बने आप भारतीय बने और अगर कोई मुसलमान या कोई और धर्म का व्यक्ति महिला इसके खिलाफ जा रहा हो तो मुझे भारतीयता को सुरक्षा देनी है और अगर इस इसमें कोई मुसलमान आड़े आए चाहे क्रिश्चियन आड़े आए चाहे कोई और आड़े आए उसको दूर करना हमारा धर्म है। आई एम नॉट बीइंग सरकास्टिक और आई एम नॉट बीइंग वेरी कट्टर हिंदू। आई एम बीइंग अ नेशनलिस्ट। एक फौजी हूं। सारी जिंदगी मैंने वो जिया है और मैंने देखा है ये हाथ खून से रंगे हुए हैं। उन मिलिटेंट को मारा है मैंने जो
(1:09:13) जनाजा पढ़ के निकलते हैं उस इलाके से। तो उनका तो मकसद बहुत क्लियर है। शोका जी आपने हिला दिया। जगा दिया मेरे को। तो ये मैं कहने पर बाध्य हो गया। आप समझ रही है ना? दर्शक समझ रहे हैं ना? अभी वक्त है। निकल गया तो वापस नहीं आएगा। और ये सिविलाइजेशन फिर एक पूरा साइकिल लेगी घूम करके आने में। आपकी वैदिक जो साइकिल बोलती है ना युग एक युग। अब जब ये युग वापस आएगा तब ये धर्म वापस आएगा। तो हमें अधर्म की तरफ ना जाकर के अभी अपने धर्म को लागू करना है और आचार्य चाणक्य ने जो जो स्टेट क्राफ्ट बोला है, योगक्षेम की नीति बोली है, धर्म शास्त्र की बात की है। वो बहुत
(1:09:51) जरूरी है हमें समझने की। उन्होंने बहुत कहा ना धर्म अर्थ काम और मोक्ष धर्मशास्त्र की बात इसी तरह करते हैं हम आप यही पढ़ाती है सिखाती हैं और पूरा हिंदुस्तान मानता है इस बात को करते कितने लोग हैं मेरा सवाल वहां पर है मेरा सवाल जो आज की जनरेशन जो जो नेतृत्व में है उनसे है कि हम में से कितना फॉलो करते हैं मेरा सवाल नेक्स्ट जैन से है नई जनरेशन से है कि आप बहुत अच्छे हैं यू आर प्रोफेशनल्स बट यू आर मोस्ट सेल्फिश प्रोफेशनल्स आप बनिए वर्ड सेल्फिश को हटा के नेशनलिस्ट प्रोफेशनल बनिए हम बी द बेस्ट इन योर फील्ड परसों वबू ने जो स्टेटमेंट दिया ना
(1:10:33) करेक्ट बहुत खूबसूरत बात क्या खूबसूरत बात कही एक भारतीय के तौर पे मैं तो उसके अंदर सिर्फ एक बात ऐड करना चाहूंगा कि श्रीधर बंबू ने बोला जी सारे भारतीय वापस आ जाओ मैं थोड़ा सा उसमें बदलाव कहना चाहूंगा अगर वेंंबू साहब सुन रहे हो तो सर सुने आप भी मैं नहीं चाहता कि सारे भारत में वापस आ जाए मैं चाहता हूं कि आप जहां जाएं वहां भारत खड़ा कर दें। हां ब्यूटीफुल और अगर आपने वहां भारत खड़ा कर दिया तो आप धर्म शास्त्र को वहां स्थापित कर देंगे। इंसानियत को स्थापित कर देंगे। आप योगक्षेम की बात करेंगे। आप अर्थशास्त्र की बात करेंगे। दैट इज वेयर अर्थशास्त्र
(1:11:06) एक्चुअली अप्लाई ऑन ग्राउंड एवरीवेयर। और ये हम आज से नहीं करते आए हैं। सदियों से करते आए हैं। चाहे राम का जमाना हो, कृष्ण का हो या चौलास का एंपायर हो या खुद अशोका का एंपायर हो। तो हमने यही बात पूरे विश्व में फैलाई है और हमें वही करनी चाहिए। सर चाणक्य ने एक और लॉ दिया था लॉ ऑफ द फिश जिसको हम मत्स्य न्याय बोलते हैं कि बड़ी मछली छोटी मछली को खा जाएगी यार मॉडर्न मत्स्य न्याय हमारे इतिहास के अंदर कहा गया है ओके नाम ही मत्स्य न्याय इसीलिए है और जो मॉडर्न जमाने में कहते हैं कि बिग फिश विल ईट दिस स्मॉलर फिश व्हिच इज ट्रू फिजिकली
(1:11:45) इट इज ट्रू लेकिन मत्स्य न्याय के साथ में एक और चीज जो आचार्य चाणक्य ने कही है कि समझदार राजा सिर्फ सिर्फ मत से न्याय पर निर्धारित नहीं रखता अपनी बात को किक क्योंकि मैं बड़ा हूं इसलिए मार दूंगा। एक बहुत इंटरेस्टिंग चीज सुनाता हूं मैं आपको। आचार्य चाणक्य कहते हैं कि जब आपने किसी दूसरे देश पर हमला करना है और उसको जीतना है क्योंकि आप विजिग इशू हैं। आप विश्व को जीतना चाहते हैं। विश्व को जीतने के लिए एक तो है कि अगर आप दूसरे पड़ोसी राज्य के ऊपर हमला करना चाहते हैं तो हमला इस किस्म से हो कि वहां के लोग अपने राजा के खिलाफ रिवोल्ट कर दें
(1:12:23) और आपके देश में शामिल हो जाए। बिना युद्ध पड़ोसी राज्य आपके अंदर शामिल हो गया। यह आचार्य चाणक्य कहते हैं। तो यहां पे तो मत से न्याय है ही नहीं। देखिए इसी चीज को उन्होंने कितना आसान कर दिया। और कैसे किया? आजकल तो टेक्निकल जमाना है। एआई है, टेक्नोलॉजी है, सब कुछ हो सकता है। जो नैरेटिव प्ले करने वाली कहानी आज भी बहुत होती है। उस जमाने में वो ये नैरेटिव प्ले करते थे। जो इनका एबोरेट स्पाई सिस्टम था। वह पड़ोसी राज्य के अंदर इस किस्म से नैरेटिव फैलाते थे कि अब आपके राजा के साथ आपको रहने से नुकसान ही नुकसान है। इसलिए आप
(1:13:04) हमारे साथ जुट जाए और साथ में उनके स्पाइस जाकर के उनके जो इंपॉर्टेंट लोग हैं उनको न्यूट्रलाइज करते जाएं। उनकी सेना के अंदर विद्रोह करवा दें। तब आप आपने उस देश को कमजोर कर दिया। और इसके बाद एक और बात है कि जब आचार्य चाणक्य कहते हैं कि आपका राष्ट्र रक्षा पालन और योगक्षेम से जुड़ा है तो जिस देश को आपने हथिया लिया है, कैप्चर कर लिया है उन लोगों का क्या होगा? उन लोगों की रक्षा पालन और योगक्षेम भी तो आपकी जिम्मेवारी है। अगर वह लोग आपको राजा मानते ही नहीं और अपने पुराने राजा के प्रति वफादार हैं तो वो तो दिल से कभी आपके साथ नहीं
(1:13:50) जुड़ेंगे। तो क्या आपका उस पड़ोसी राज्य को जीतना फलदायक हुआ? नहीं। फलदायक तब होगा जब कि वहां के लोग भी कहने लगे जी आप अति उत्तम। हम्म। मगध ही एक राज्य है। भारत ही एक राज्य है। और ध्यान रहे इतिहास के अंदर सीमाएं बदलती रहती है राष्ट्र की। हां। और राष्ट्र एक जीवित ऑर्गेनिज्म है। जीवित प्राणी है। जिसकी सीमाएं बढ़ती है और घटती रहती है। डिपेंडिंग ऑन कि राजा कैसा है, कितना अच्छा है। हम तो अगर हमने पाकिस्तान जीतना है तो उसपे अटैक करने की जरूरत नहीं है। आने वाले समय में मैं कहता हूं युद्ध नहीं होना चाहिए। हम हमने वहां हालात ऐसे कर देने चाहिए
(1:14:29) कि वहां के लोग ही कहे हमें तो भारत में भेज दो यार ओके तो मैं समझता हूं कि पाकिस्तान भारत में बहुत आसानी से बिना युद्ध के आ सकता है। हमें सिर्फ चाणक्य बनने की जरूरत है। सर चाणक्य ने यह भी बोला था कि वेल्थ फ्लो बहुत इंपॉर्टेंट है। आप उतना आर्मी पे ना फोकस करें। आप पैसे पे फोकस करें। आप टैक्स पे फोकस करें, ट्रेड पे फोकस करें, रिसोर्सेज पे फोकस करें। क्योंकि जो ट्रेजरी है वो आपकी बरक्कत की रूट है। अगर तो आप उसको सींचेंगे तो आपकी कंट्री स्टेबल रहेगी और प्रोस्पर करेगी। मुझे इसके बारे में थोड़ा बताइए। जी बिल्कुल सही। चाणक्य क्या आज भी ले
(1:15:04) लीजिए दी फाइट बिटवीन बटर एंड गन हैज़ ऑलवेज बीन देयर। हम कि आज भी हम इस बात पे झगड़ते हैं कि देश की जितनाखा जितना पैसा है वो कहां लगाया जाए। बटर पे यानी खाने और देश के भले के लिए लगाया जाए या गन बनाने के लिए किया जाए जिसको प्रोटेक्शन दिया जा सके। अगर आप देश को प्रोटेक्ट नहीं कर सकते तो जितना मर्जी वेल्थ क्रिएट कर लो। कोई ना कोई आके खा जाएगा। करेक्ट। और अगर आपने प्रोटेक्शन दे दिया और वेल्थ का ध्यान रखा तो दोनों ग्रो होगा। देश ग्रो होगा। चाणक्य ने रूल निकाला था कि अगर आपकी जिम्मेवारी या मेरी जिम्मेवारी मैं जो बांध बनाया है बांध से जो पानी
(1:15:46) इरीगेशन के लिए खेतों को सींचने के लिए लगाया है और कल आपके खेत की बारी थी आज मेरे खेत की बारी है और मैं उस पानी को आपके खेत में जाने से रोकता हूं या आपका खेत भर गया और पानी ओवरफ्लो हो रहा है। चाणक्य ने उसका दंड लिखा हुआ है कि मैं उस दंड का भागी होगा क्योंकि मैंने वह पानी वेस्ट किया देश का। जिस खेत में जाना चाहता था वहां नहीं गया तो मुझे 2 टका या 12 टका पे करना होगा पेनल्टी के तौर पर वो इस इस गहराई तक गए कि पानी का इस्तेमाल कैसे होगा वो देश के कोष में शामिल होगा क्योंकि फसल अच्छी होगी दूसरा उन्होंने कहा अगर कैलेमिटी आ जाती है चाहे
(1:16:26) मैनमेड कैलेमिटी है या गॉड मेड कैलेमिटी है ऐसी जब भी कैलेमिटी आए देश में तो राजा को अपना कोष खोल देना चाहिए और पीड़ित लोगों को पूरी मदद करनी चाहिए। जितने भी देश के समृद्ध लोग हैं उनको आह्वान करके बुला करके उनके साथ जुट करके पीड़ित लोगों को सोसाइटी को मदद करें। उसके बाद उन्होंने यह भी कहा है कि अगर कोई लोग नहीं देते हैं और किसी ने गलत तरीके से पैसा इकट्ठा कर रहा है तो राजा उनसे छीने और छीन करके निडी लोगों को दे। जरूरतमंद लोगों को दे। तो यहां तक वो कहता है कि कोष का इस्तेमाल करें और जैसे ही यह डिजास्टर या केमिटी या यह प्रभाव कम हो
(1:17:10) जाता है राजा फिर यत्न करे कि प्रजा से और दूसरे सोर्सेस से कोष को वापस भरे। सर आपने अपनी लाइफ में एज अ मिलिट्री पर्सन एंड इवन अदरवाइज चाणक्य चाणक्य की नीति को कैसे अप्लाई किया है? थ्रू ऑपरेशंस, थ्रू एनीथिंग एल्स। सच बताऊं श्लोका जी तो उस समय जब मैं ये यंग यंग ऑफिसर था तब तक मैं चाणक्य का नाम तक जानता था उसके अलावा चाणक्य नीति या नीति शास्त्र या कोई और प्रिंसिपल्स नहीं जानता था। ये तो बहुत बाद में मुझे प्यार हुआ। फिर अर्थशास्त्र को मैंने तकरीबन 10 बार पढ़ा होगा। और अब भी जब भी मौका मिलता है तो निकाल कर के जहां मुझे जरूरत होती है
(1:17:51) वो चैप्टर निकालता हूं। उसको देखता हूं। उसका एप्लीकेशन दिखाता हूं और लगाने की कोशिश करता हूं। एक बहुत छोटा सा उदाहरण देना चाहता हूं। मैं अपनी यूनिट के साथ में यूएन मिशन कंबोडिया में था। यंग कैप्टन था। पलटन का एडजुटेंट था। एडटेंट हैज़ गॉट ऑल द एडमिनिस्ट्रेटिव एंड पार्ट ऑपरेशनल कंट्रोल। तो मुझे बताया गया कि हम लोग कंबोडिया में थे। कंबोडिया में आपको ध्यान है कि पोलपोट ने पूरी जनरेशन को वॉश आउट कर दिया था। ऑलमोस्ट 2 लाख से ज्यादा उन्होंने नौजवानों को एक लाइन पे पहाड़ के ऊपर चढ़ाया और वहां से धकेल करके नीचे गिराया।
(1:18:23) आज भी वहां पर मुंडियों का म्यूजियम बना हुआ है। क्योंकि वो चाहता था कि एक जनरेशन को समाप्त करके अपनी सोच की जनरेशन निकाल करके कैंबोडिया में रूल करें। तो मुझे एक जो टास्क मिला तब मुझे समझ में नहीं आता लेकिन अब समझ में आता है। मुझे बोला गया ये जो ये खमेर है पोलपॉट के जो सैनिक हैं सो कॉल्ड टेररिस्ट या राइवल ग्रुप इनके पास बहुत सारे वेपन्स हैं। तुम ऐसा करो इनसे बातचीत करके ना ये वेपन रखवा लो। जब तक यह लोग वेपन नहीं रखेंगे, सरेंडर नहीं करेंगे तब तक हम डेमोक्रेटिक प्रोसेस नहीं शुरू कर सकते। यह नालायक कहीं भी जाकर के
(1:18:59) गोली चला देते हैं। किसी को भी मार देते हैं और कोई जो डेमोक्रेटिक बात शुरू होती है वो वो फेल हो जाती है। तो मैं चल लिया। तो जब मैं उनके साथ नेगोशिएशन के लिए बातचीत के लिए नेगोशिएशन शब्द भी नहीं आता था। दाम अभेद जो आचार्य चाणक्य ने कहे समझ में भी नहीं आते थे। जब मैं उन कमरे में जाता था तो मुझे मालूम था कि वापस आने की जिंदा रहने की गारंटी नहीं है। आप दुश्मन के खेमे में जा रहे हो। और उन राइवल ग्रुप या टेररिस्ट के पास जा रहे हो जिसके पास हथियार नहीं है और वो कहता है जी आप यूएन मिशन वाले हो। आप हथियार लेके नहीं जाओगे।
(1:19:33) तो जब मैं अंदर गया बातचीत किया तो मुझे एक बात बहुत क्लियर थी। बहुत क्लियर थी कि आप वापस आऊं ना आऊं। लेकिन उस अंधेरे में भी ना एक मन में वो दिया था कि मैं तो दिया जला के चलूं हम चाहे अंधेरा ही क्यों ना हो और जब मैं वो दिया लेके चल रहा हूं तो मुझे और किसी की रोशनी की जरूरत नहीं है। मैं अपने दिए से ही काम चला लूंगा। और मैं रोशनी दूंगा लेने की जरूरत नहीं है। और उस दिन मुझे समझ में आया कि मुझे जो बनना है ना वो मुझे बनना है। अंधेरे को नहीं। और जब मैंने उनसे बात की तो यही समझ के बात की एंड कई राउंड चले नेगोशिएशंस के और अगले
(1:20:19) सप्ताह 10 दिन के अंदर मेरे पास 1000 हथियार थे। तब मैंने किसी इनाम को लेकर के या मकसद को लेकर के ये काम नहीं किया। मैंने सिर्फ इसलिए किया कि मुझे सैनिक के तौर पर एक कार्य दिया गया है और मुझे करना है। ये तो बाद में समझ में आया कि यार ये चाणक्य नीति चल रही थी वहां पर। हां। सामधाम की बात चल रही थी। भेद की बात चल रही थी कि कैसे मैं उनको मना सकूं। तो अपनी जिंदगी के अंदर यहां भी हो चाहे लाइन ऑफ कंट्रोल पे हो बहुत बहुत सारी जगह हुआ कि जब मैं देखता था कि मैं ये कर रहा हूं और बाद में समझ में आया कि ओहो ये कर रहा है। और जब ये होने लगा तो मैं उसको और
(1:20:57) पढ़ने लगा तो अब तो शिष्य हूं उनका। सर चाणक्य की अर्थशास्त्र 2300 ईयर ओल्ड पुरानी ट्रीटीज है। राइट? ऑन स्टेटमेंटशिप, ऑन स्टेट क्राफ्ट, मिलिट्री। और यह सिर्फ अह स्टेट पे ही लागू नहीं होता। यह पर्सनल लाइफ्स पे भी लागू होता है। तो, यह चाणक्य अर्थशास्त्र एग्जैक्टली कहां से आया? और इसकी थोड़ा बैकग्राउंड हमको बताइए। जी। जी। बहुत-बहुत धन्यवाद। आपने यह सवाल किया। मैं आपको शेयर करना चाहूंगा कि चाणक्य को सब जानते हैं। अर्थशास्त्र का नाम सब जानते हैं। पर इन दोनों को कोई पहचानता नहीं है। हां, नाइस। ये बड़े दुख की बात है क्योंकि हम उसको
(1:21:40) बहुत कम पढ़ते हैं। आचार्य चाणक्य ने 2300 साल पहले या 300 बीसीई में यह शास्त्र लिखा। आचार्य चाणक्य ने अपने अर्थशास्त्र के पहले ही चैप्टर के अंदर लिखा है कि यह मेरी अपनी कोई बहुत बड़ी इजाद नहीं है या डिस्कवरी नहीं है। मैंने जो कुछ अर्थशास्त्र में लिखा है मैंने तीनों वेदों से लिया है। हालांकि चारों वेद थे। लेकिन ऋग्वेद, यजुर्वेद और सामवेद ये तीन मुख्य जिसको त्रई बोला उन्होंने। तर से सारी का सारा ज्ञान लिया है। उसको कंपाइल किया है। और स्पिरिचुअल और प्रैक्टिकल नॉलेज सिस्टम जो अथर्ववेद के थे वो एसोसिएटेड रिसोर्सेज अवेलेबल थी और वो
(1:22:20) उसका इस्तेमाल कर सकते थे। चौथा जो उन्होंने शामिल किया वो शामिल किया अनविक अन्विक्क्ष की जो उन्होंने खुद लिखा और कहा जी जो भी फैक्ट से आधारित चीजें हैं और जिसके आधार पर मैं यह ले रहा हूं वो मैंने इसके अंदर लिखी है। तो इस तरह से अर्थशास्त्र जो है एक आर्ट भी है और एक साइंस भी है। दोनों का कॉम्बिनेशन है। मैं जहांजहां भी बातचीत करता हूं लोग मुझसे कहते हैं यार अर्थशास्त्र मतलब इकॉनमी रिलेटेड। अच्छा फाइनेंशियल मैनेजमेंट के बारे में होगा। लीस्ट रियलाइजिंग कि भाई साहब माफ़ कीजिएगा। ये ये कोई फाइनेंसियल मैनेजमेंट या इकॉनमी
(1:22:57) की किताब नहीं है। ये एसओपी है एक राजा के राज्य को चलाने की। सो अगर आपने एक राज्य को बहुत खूबसूरत तरीके से चलाना है। आपने अपनी इंडस्ट्री को बहुत बढ़िया तरीके से चलाना है। यू मस्ट रीड अर्थशास्त्र। मैं तो कहता हूं हमारा प्रोडक्ट है। चाणक्य नाम का प्रोडक्ट है। एक बार इस्तेमाल तो करें। नाइस। अब कहने को तो कह दिया लेकिन ये बहुत बड़ी किताब है। संस्कृत में लिखी गई थी। उस समय के अंदर और आर श्यामा शास्त्री थे जिन्होंने 1905 के अंदर इसी किताब को का अंग्रेजी का अनुवाद किया था और 1915 तक ये किताब पब्लिश हो के आ गई। उसके बाद बाकी
(1:23:34) सारी दुनिया ने अपनी भाषाओं में इस किताब को रखा। भारत के अंदर इसका प्रचलन थोड़ा कम रहा और अब मेरे ख्याल से बहुत सारी भाषाओं के अंदर अर्थशास्त्र अवेलेबल है। मैं दर्शकों को बताना चाहूंगा कि ये स्टेट क्राफ्ट की किताब है। गवर्नेंस की किताब है। ग्रोथ की किताब है। खुशहाली की किताब है। इसको इस निगाह से पढ़ें। जीवन सुधर जाएगा। अब आप कहेंगे जी मेरा क्या है इसके अंदर? मैं कहूं आप कुछ मत करो। इसको मत पढ़ो अर्थशास्त्र को। आप इसके पहले चैप्टर के अंदर राजा की दिनचर्या देख लो। अच्छा। उसने राजा की दिनचर्या लिखी है कि कितने बजे उठेगा दिन में क्या-क्या करेगा
(1:24:09) और कितने बजे सोएगा ओके आप सिर्फ उसकी दिनचर्या फॉलो करके देख लीजिए एक महीना अच्छा जितने भी लीडरशिप कोर्सेज हैं एचआर की बातें हम कहते हैं जी आप तीन दिन में किसी भी चीज को रिपीट करेंगे तो यू आर लाइकली टू डू इट नेक्स्ट डे अगर आपने 7 दिन में कर दिया तो आपकी आदत बनने लगी हैबिट फॉर्मेशन होगी और अगर 21 दिन कर दिया तो वो चीज आपका पक्का 100% हैबिट बन जाएगा कहते हैं ये मॉडर्न साइंस है जी नहीं यह अर्थशास्त्र में लिखा हुआ है और अर्थशास्त्र में वो कहते हैं कि आप इस प्रक्रिया को जस्ट फॉलो कर लीजिए और राजा के लिए लिखा गया है कि 3:00 बजे उठेंगे
(1:24:43) 3:00 से लेकर 5 तक अपना स्वाध्याय करेंगे उसके बाद 5 से 6:30 तक अपना व्यायाम करेंगे फिर गौशाला और अपना जो पर्सनल है वहां जाकर करेंगे फिर 7:30 बजे वो दफ्तर में आ जाएंगे दरबार में आ जाएंगे अब दरबार में भी आ जाएंगे सबकी सुनेंगे और सबसे पहले किसको सुनेंगे अबला नारी विधवा युवा पीड़ित उनको सुनेंगे। फिर वृद्धों को सुनेंगे। आपको बता रहे हैं कि दुनिया के अंदर आप सबसे पहले उनसे जाकर बात कीजिए जो पीड़ित है। तो आप कहां से शुरू करेंगे? अपने घर में ही करो ना। जो मां बीमार है, दादी बीमार है, दादा जी को तकलीफ है, नानी जी को तकलीफ है। आप उनसे जाकर बात कीजिए। भाई
(1:25:24) जो नाराज है उससे बात कीजिए। करिए तो सही। उसके बाद वह कहते हैं आप अपने ऑफिस में जाइए और अपना ऑफिशियल काम शुरू कीजिए। और उसके बाद सबसे पहले आपका फाइनेंस मिनिस्टर आपके पास आएगा और कोष की बात करेगा। बताएगा कि राज्य में कितना कोष है जो आप थोड़ी देर पहले बता रहे थे कि कोष में दम है। अल्टीमेटली तो मनी मेक्स दी मेयर गो। हम तो ये एक बहुत बड़ी चीज है जो हम इससे ले सकते हैं। दूसरा जो चाणक्य नीति की हमने बात किया कि सारा जिंदगी में काम ये जो चारों धर्म है ना साम दाम और भेद से हो जाते हैं। आपको लड़ाई करने की जरूरत नहीं है। आप सिर्फ इसको समझिए और अप्लाई कीजिए।
(1:26:02) और फिर अगर कोई चीज नहीं हो पाती है ना तो आप षडगुण्य पे जाइए। नहीं तो आपका सारे काम हो जाएंगे। और डगुण्य में आपको द्वैदि भाव तक जाने की जरूरत नहीं है। संधि यानी शांति, समश्रय यानी अलायंसेस और तीसरा है आसन। न्यूट्रलिटी। ये तीन मेंटेन कर लेंगे आपके दुश्मन अपने आपके दोस्त बन जाएंगे। सुपर। इन तीनों को अगर हम कंबाइन कर सके, किसी भी तरीके से, अपनी जिंदगी में ढाल सके, अपने दोस्तों की जिंदगी में ढाल सके, मेरे ख्याल से जिंदगी बहुत खूबसूरत है। सुपर करेक्ट। सर चाणक्य के हिसाब से क्या वॉर का कोई भी परमानेंट सॉल्यूशन है और
(1:26:41) मैं इसलिए पूछ रही हूं क्योंकि गिवन हम एक वैदिक सोसाइटी है। हमने तो यह भी बोला है कि टाइम भी लीनियर नहीं है। टाइम भी साइक्लिकल है। सब कुछ साइक्लिकल है। संसार ही साइक्लिकल है जब आप संसार में आए हो। तो युग आएंगे वापस आते रहेंगे। आइस एजज आया था। सब पूरी दुनिया तबाह हुई थी। फिर क्रिएट होगी। जैसे हम योग योग शास्त्र में कहते हैं कि वे 84 क्रिएशन है। जी ऐसे जी। मुझे एक मेम याद आ रहा है जिसमें कि WhatsApp के ही यूनिवर्सिटी के अंदर यह निकला था। आज भगवान आते हैं कहते हैं कि हे मैनकाइंड यू आर फाइटिंग वॉर स्टॉप फाइटिंग कि दोस्तों ये लड़ना बंद करो। मैं तुमको बहुत
(1:27:17) अच्छे युग में ले चलूंगा। आप युग और साइक्लिक उसकी बात कर रहे हैं। तो उसने कहा सबसे बढ़िया तरीका है कि मैं आपके सारे हथियार नष्ट कर देता हूं। तो वो जितने भी फाइटर एयरक्राफ्ट्स हैं, सबमरींस हैं, नेवल शिप्स हैं वो सब नष्ट कर देता है और अब उसके साथ बिल्कुल साधारण इंसान बना देता है। तो वो उसके ऊपर लिखा हुआ आता है स्टोन एज और जो मॉडर्न मैन है वो सोसाइटी स्टोन एज में निकल के वापस पत्थर को रगड़ रही है। चिंगारी से आग निकालने की कोशिश कर रही है। और आग के साथ में धीरे-धीरे पत्थर को तैयार करके कुल्हाड़ी तैयार करते हैं। और कुछ ही दिनों में दो
(1:27:52) गुट बन जाते हैं जो कुल्हाड़ी से फिर लड़ने लगते हैं। गॉड अगेन अपीयर्स ही सेज़ तुम नहीं सुधरोगे तो इंसान की प्रकृति में शामिल है कि युद्ध तो होगा। अच्छा अल्फा मेल इज ऑलवेज वांटिंग टू डोमिनेट दी अह एंटायर ग्रुप। करेक्ट। तो जब ये ट्रंप साहब अल्फा मेल बनने की कोशिश कर रहे हैं कि जी मैं सब किसी को भी मार दूंगा। तो मतलब युद्ध तो अवश्यभावी है। हमारी प्रकृति में शामिल है कि जी मैं अच्छा बनना चाहता हूं। जो हमारा इतिहास कहता है हमारे वेद कहता है कि अहम ब्रह्मास्म मैं यह क्यों नहीं कहता कि यार आप भी ब्रह्मा है हम इस प्रकृति से काम करते हैं
(1:28:30) जी और इस प्रकृति से साथ में शांति से प्रोग्रेस करना चाहते हैं। ट्रंप साहब कहते हैं कि जी आप सब छोड़ो हम ब्रह्मास्म नहीं मैं तो सिर्फ अकेला ब्रह्मा हूं बाकी सबको मैं जीतूंगा तो हमारा अहम ब्रह्मास्म और उसका कहना कि मैं सुपर क्लास हूं। इसमें बहुत जमीन आसमान का फर्क है। रही बात कि शांति के साथ क्यों नहीं रह सकते? तो ये आप बिल्कुल ठीक बोल रही हैं और मैं आपकी इस बात से सहमत हूं कि युग की जो साइक्लिक समयबद्ध प्रणाली है इसको शायद हम नहीं रोक पाएंगे। जो हम रोक सकते हैं वो इंसान के तौर पर एक दूसरे के प्रति परस्पर प्यार
(1:29:05) प्रेम भाव से ही कर सकते हैं और वो सब में समभाव नहीं होता। हम्म। तो जब तक ये जीवन है वर्ल्ड इनविटेबल है। हां लेकिन अगर हम ये कहें कि वसुधैव कुटुंबकम तब तो बात बन सकती है। लेकिन अगर हम ये कहें कि मागा तो नहीं बन सकती। सिर्फ मैं ही मैं लेता जाऊं तो मैं रावण कहलाऊंगा। और फिर कोई ना कोई राम पैदा होगा। तो वो समझने की जरूरत है। और इतनी समझ हालांकि हमने यूनाइटेड नेशंस बना लिया। बहुत सारे ट्रीटीज बना लिए। शांति की कितनी वार्ताएं चलती हैं। इसके बावजूद भी युद्ध होते हैं। तो मैं समझता हूं कि इस प्रकृति के नियम को और मनुष्य प्रकृति
(1:29:43) को यह समझने की जरूरत है कि हमारे धरा पर 75% चीजें नेगेटिव है। जो 25% पॉजिटिव है ना जो आप अपने योगा के जरिए हमको सिखाती हैं उस पर गौर करने की जरूरत है। और जितने ज्यादा गौर करेंगे तो मेरे ख्याल से चीजें ठीक होंगी और आशा पे जिंदगी कायम है। होप इज ऑलवेज ऑलवेज देयर कि होगी शांति होगी। तो फ्यूचर में चाणक्य फ्यूचर के बारे में क्या प्रेडिक्ट करते हैं? अब इसके आगे क्या होने वाला है? बहुत बहुत ही गढ़ सवाल है कि इसके आगे क्या होने वाला है? चाणक्य भी नहीं रहे। वो अपने सिर्फ प्रिंसिपल्स छोड़ के गए हैं। और दुख की बात यह है कि चाणक्य की जो
(1:30:27) अर्थशास्त्र है जी उसका भी हमारे पास सिर्फ 60% हिस्सा हमारे पास है। अच्छा और क्योंकि ये इसमें 10,000 श्लोक हुआ करते थे। हमारे पास आज की तारीख में जो ओरिजिनल अर्थशास्त्र है मैसूर के लाइब्रेरी में है। जब कभी आप जाएं दर्शकों से कहना चाहूं तो मैसूर के अंदर मैसूर की लाइब्रेरी में जरूर जाएं और वहां रखी हुई अर्थशास्त्र को ओरिजिनल फॉर्म में जरूर देख के आए। दैट इज ओनली 60% ऑफ व्हाट इज अवेलेबल टोटल अर्थशास्त्र का 60% हिस्सा हमारे पास है। तकरीबन 6000 श्लोक हैं उसमें। बाकी 40% बाकी समय के काल में समा गए क्योंकि दो दो सदियों तक तो 200 साल तक तो ये ये
(1:31:10) अर्थशास्त्र भारत में ही नहीं थी। अच्छा। बाकी जर्मनी से आई और कहीं से आई और फिर जो ये श्यामा शास्त्री थे जिन्होंने इसका इंग्लिश रूपांतर किया। उन्होंने और उसके फादर ने वो लाइब्रेरियन थे मैसूर। स्टेट लाइब्रेरी के अंदर खुद डॉक्टर थे और उनको इसके प्रति बड़ा लगाव था। तो उन्होंने बहुत मेहनत की। अगर हम इस 60% को भी मान ले और इसको फॉलो कर लें तो हम उसी पर जाएंगे। सुखस्य मूलम धर्मः और अंत में राजस्य मूलम इंद्रिय जयम। जब तक इंद्रिय जय नहीं होती। जब तक ग्रीड इज द ब्रीड ऑफ ऑल दी प्रॉब्लम्स। एंड जब तक हम इंद्रिय जय नहीं करते। खुद
(1:31:48) को समझ नहीं पाते। चाहे वह सीईओ है किसी भी कंपनी का या सैनिक है या आप और मैं है आम भारतीय हैं। जब तक हम यह ना समझें कि मैं अपने ऊपर अपने स्वयं के ऊपर नियंत्रण ना करूं तब तक शायद सब फेल है। और शांति की वार्ता या भविष्य की वार्ता जब इस परिपेक्ष में कर रहे हैं तो हर देश प्रोग्रेस करना चाहता है और उसमें कोई गुनाह नहीं है। आप करें प्रोग्रेस करें। किसी और को मार के ना करें। करेक्ट। मिलकर के करें। योग्य क्षमा के हिसाब से करें। तब आप प्रकृति का भी ध्यान रखेंगे, मनुष्य का भी ध्यान रखेंगे, मैन्युफैक्चरिंग का भी ध्यान होगा,
(1:32:23) सर्विसिंग इंडस्ट्री भी अच्छा काम करेगी। आप कमाओ यार 10% 20% जो कमाना है कमाओ। हम लेकिन करप्शन करके और आप 50% खा भी लोगे तो वो कहीं और निकलेगा। हम ये निश्चित है। जैसे योग में भी कहते हैं ना सर इफ आई सी माइसेल्फ इन यू, इफ आई हैव द एबिलिटी टू इंक्लूड यू एज अ पार्ट ऑफ़ मी, मैं आपको भी वैसे ही ट्रीट करूंगा। अब्सोलुटली। ऐसा विन विन हो गया। बरकत है। हां। अगर ये विनविन आ जाए तो इससे ज्यादा बढ़िया कुछ हो ही नहीं सकता। ब्रिगेडियर जीवन राजपुरोहित जी थैंक यू सो मच। यू नो ऐसे बहुत मेरे ख्याल से पहला पहले आप स्पीकर हो शायद से YouTube में
(1:32:58) जिसने चाणक्य के अर्थशास्त्र पे एक पॉडकास्ट किया है और इतनी खूबसूरती से मिलिट्री विज़डम को वैदिक विज़डम के साथ जोड़ के यह खूबसूरत सा कंकक्शन हमको दिया है। एंड उसके चेरी ऑन द केके की यू वन ऑफ़ द मोस्ट ब्रिलियंट स्पीकर्स आई हैव इंटरेक्टेड विथ इट। तो सर आपकी बुक लीड लाइक अ लेजेंड। आप वेरी क्विकली ब्रीफली अगर तो व्यूअर्स को बताएं कि इसमें एक्सैक्टली है क्या और ये नोबिलिटी क्या है इस बुक के पीछे? जी थैंक यू वेरी मच। एक फौजी होने के नाते लिखना ना आमतौर पे बहुत बड़ी समस्या होती है। पर मैंने हिम्मत की कि अपनी सर्विस के दौरान मैं अपनी एमफिल और पीएचडी कर पाया।
(1:33:34) और फिर मुझे एहसास हुआ श्लोका जो हम सुनते थे ना दैट पेन इज माइटियर देन दी स्वर्ड। हां। वो मुझे पता चला कि यार एकेडमिक वर्ल्ड और यह ज्ञान का समुद्र कितना बड़ा है और मैं सैनिक होने के नाते सिर्फ तलवारबाजी ही किए जा रहा था। सो आई स्टार्टेड रीडिंग एंड अंडरस्टैंडिंग। अब ये मेरी चौथी किताब है जो मैंने लिखी है और मैं इसके अंदर बहुत सिंपल से दो-तीन सवालों के जवाब खुद से पूछना चाहता हूं और मैं जो भी लीडर्स हैं आप और मैं सभी लीडर्स हैं। लेवल का डिफरेंस है सिर्फ। उन लीडर्स के लिए तीन सवाल है। पहला सवाल व्हाई आर यू डूइंग व्हाटएवर आर यू आर
(1:34:12) डूइंग? दूसरा मेरा सवाल है हु डू यू लीड फॉर? आप किसके लिए आप किसकी तरफ देखते हैं जब आप ग्रोथ या मेंटोरशिप चाहते हैं? और तीसरा सवाल मैं करता हूं अपने आप से। हाउ डू यू अचीव दैट? और इसको दिखाने के लिए टोटल सात चैप्टर्स हैं। मैं हर चैप्टर के बाद में मैंने एक इंस्ट्रूमेंट लिखा हुआ है। 15 क्वेश्चंस हैं। अगर आप उन क्वेश्चंस को सॉल्व करेंगे तो आप अपनी लीडरशिप का अपने सेल्फ आइडेंटिफिकेशन के लिए वो हिस्सा आपको पता चल जाएगा। हां। तो इन सबको मिलाकर के एक छोटी सी किताब लिखने की कोशिश की है। जस्ट अबाउट 122 पेजेस लेकिन नो फ्रिल्स
(1:34:50) नथिंग जो एक्चुअल है जो आप और हम कर सकते हैं वही चीज मैंने देने की कोशिश की है। ओके। तो व्यूअर्स सर की बहुत बेहतरीन बुक है लीड लाइक अ लेजेंड। ये आपको Amazon पे मिलेगी। दिस इज अ ब्यूटीफुल फ्यूजन एंड मैरिंग टुगेदर ऑफ मॉडर्न लीडरशिप एंड अर्थशास्त्र। तो आप इसको परचेस करिएगा, पढ़िएगा। एंड थैंक यू सो मच सर। वंस अगेन, विशिंग यू ऑल द वैरी बेस्ट, नमस्ते। थैंक यू वेरी मच। आई ऍम सो अब्लेड्ड। इन केस यू वुड लाइक टू बी अ पार्ट ऑफ आवर ऑनलाइन एंड इनपर्सन योगा, डाइट एंड स्पिरिचुअल प्रोग्राम्स, यू कैन जॉइन आवर Whatsapp ग्रुप बिलो वेर वी पोस्ट आल आवर
(1:35:24) अपकमिंग प्रोग्राम्स एंड गिव फ्री टिप्स ऑन हेल्थ, डाइट एंड लाइफस्टाइल।

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