Tuesday, June 2, 2026

DEAR INDIANS - Khud Ka ASLI Past JAANO 🇮🇳 | Gene Pool Secrets | Dr. Niraj Rai On TRS

DEAR INDIANS - Khud Ka ASLI Past JAANO 🇮🇳 | Gene Pool Secrets | Dr. Niraj Rai On TRS

Author Name:Ranveer Allahbadia

Youtube Channel Url:https://www.youtube.com/@ranveerallahbadia

Youtube Video URL:https://www.youtube.com/watch?v=XRvIm8A9430



డా. నిరాజ్ రాయ్ (జన్యు శాస్త్రవేత్త) మరియు రణ్వీర్ అల్లాహ్ బాదಿಯా మధ్య జరిగిన **"ప్రియమైన భారతీయులకు - మీ అసలైన అంతర్గత చరిత్రను తెలుసుకోండి"** సంభాషణ నుండి ముఖ్యమైన తీసుకోవలసిన అంశాలు తెలుగులో ఇక్కడ ఉన్నాయి:

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## 🧬 1. భారతీయ జన్యు కోడ్ (Genetic Code) సమస్యలు
*   **జన్యుపరమైన భారం (Mutation Load):** భారతదేశంలో **55-60% మంది** జనాభా వద్ద **జన్యుపరమైన మార్పులు (Mutations)** ఎక్కువగా ఉన్నాయి. ఇది వారిని రోగాలకు గురి చేస్తుంది. 
*   **అంతర్వివాహాలు (Inbreeding):** ఒకే కులంలో పెళ్లిళ్లు చేసుకోవడం వల్ల **జన్యుపరమైన లోపాలు** పెరిగాయి. ఇది భారతదేశంలో **అతిపెద్ద సమస్య**. ఇది రోగాలను తరతరాలకు తీసుకువెళ్తుంది. 
*   **హృదయ వ్యాధి మ్యుటేషన్:** భారతదేశానికి **ప్రత్యేకమైన మ్యుటేషన్** ఉంది. **9 కోట్ల మంది** భారతీయులకు **హృదయాక్రమణ (Heart Attack)** రావడానికి **5 రెట్లు ఎక్కువ** అవకాశం ఉంది. ఇది **35,000 సంవత్సరాల** క్రితం మొదలై, **2,000 సంవత్సరాల** క్రితం కుల వ్యవస్థ వల్ల మరింత పెరిగింది. 

## 🧬 2. DNA మరియు ప్రోటీన్ రహస్యాలు
*   **DNA పొడవు:** మీ శరీరంలోని మొత్తం DNA ని విప్పితే, అది **సౌర వ్యవస్థ వ్యాసం కంటే రెండు రెట్లు** ఎక్కువ ఉంటుంది. 
*   **DNA భాగం:** మానవ DNAలో కేవలం **2% మాత్రమే** ప్రోటీన్లను తయారు చేస్తుంది (కార్యాచరణ). **98% DNA** ప్రస్తుతం అర్థం కాలేదు, కానీ అది **మెమరీ కార్డ్** వంటిది (చరిత్రను నిల్వ చేస్తుంది). 
*   **ప్రోటీన్:** ప్రోటీన్ అనేది శరీరం యొక్క **నిర్మాణం**. ఇది మసల్స్, ఎముకలు, ఎంజైమ్‌లు, మెదడు సిగ్నలింగ్ కోసం ఉపయోగపడుతుంది. 
*   **మాతృ DNA:** మీ DNAలో **50% తండ్రి నుండి, 50% తల్లి నుండి** వస్తుంది. కానీ **మైటోకాండ్రియల్ DNA** కేవలం **తల్లి నుండి మాత్రమే** వస్తుంది. 

## 🏥 3. రోగాలు మరియు సమస్యలు
*   **క్యాన్సర్:** భారతీయ తరం (90s బర్న్) **క్యాన్సర్** కు **ఎక్కువ అవకాశం** ఉంది. ఇది **ఘాటైన వృద్ధి** చెందుతోంది. 
*   **హృదయ వ్యాధి:** **సడెన్ కార్డియాక్ అరెస్ట్** భారతదేశానికి ప్రత్యేకం. ఇది **యూరోపియన్ల** కంటే భిన్నంగా ఉంటుంది. 
*   **తాత్కాలిక వైరస్లు:** వైరస్లు **డైనాసోర్ల కంటే పాతవి**. వైరస్లు **ఇమ్యూనిటీని** పెంచుతాయి (సర్వైవల్ ఆఫ్ ది ఫిట్టెస్ట్). 

## 🍽️ 4. ఆహారం మరియు జన్యువులు
*   **शाकाహారం vs మాంసాహారం:**
    *   **శాకాహారం:** ప్రోటీన్ సరిపోతుంటే, శాకాహారం కూడా **సరిపోతుంది**. కానీ **విటమిన్ D3, B12** సప్లిమెంట్స్ తీసుకోవాలి. 
    *   **మాంసాహారం:** మాంసంలో **విటమిన్ D3, B12** సహజంగా ఉంటాయి. మాంసాహారులు **ఇవెల్యూషన్** సమయంలో ఎక్కువగా ఉండేవారు. 
*   **ఆహారం మార్పు:** **5000 సంవత్సరాల** క్రితం **కృషి విప్లవం** వల్ల మానవులు **ఆహారం** మార్చుకున్నారు. **అన్నం, గోధుమ, మిల్లెట్లు** ప్రధాన ఆహారంగా మారాయి. 

## 🧪 5. జన్యుపరమైన సాంకేతికత (Genetic Technology)
*   **జన్యు ఎడిటింగ్:** **CRISPR** వంటి సాంకేతికత ద్వారా **సికెల్ సెల్ ఎనీమియా, థాలసీమియా** వంటి రోగాలను **క్యూర్** చేయవచ్చు. 
*   **ఎంబ్రియో ఎంపిక (Embryo Selection):** **IVF** సమయంలో **ఎంబ్రియోలను** పరీక్షించి, **రోగాలు లేని ఎంబ్రియోను** ఎంచుకోవచ్చు. ఇది **భారతదేశంలోని రోగాలను** తగ్గించే ఏకైక మార్గం. 
*   **స్టెమ్ సెల్ థెరపీ:** **స్టెమ్ సెల్స్** ద్వారా **పేను, గాయాలను** నయం చేయవచ్చు. కానీ ఇంకా **పరిశోధన** జరుగుతోంది. 

## 😊 6. ముఖ్యమైన సందేశం: **ఆనందంగా ఉండండి**
*   **ఆనందం:** **ఆనందంగా ఉండటం** అనేది **జన్యువులకు** మంచిది. **హార్మోన్స్** (సెరోటోనిన్) **DNA**తో **సంభాషిస్తాయి**. 
*   **మోడ్:** **ఎపిజెనెటిక్స్** (Epigenetics) **మూడ్**పై ఆధారపడి ఉంటుంది. **ఆనందంగా ఉంటే**, **జన్యువులు** **సరైన 방식으로** పనిచేస్తాయి. 
*   **స్ట్రెస్:** **స్ట్రెస్** తీసుకోకూడదు. **స్ట్రెస్** వల్ల **గట్ మైక్రోబయోమ్** (పేటలో బ్యాక్టీరియా) **తగ్గుతుంది**. ఇది **కాన్సర్, హృదయ వ్యాధి**కి కారణమవుతుంది. 

## 🌍 7. చరిత్ర మరియు వైవిధ్యం
*   **భారతీయ వైవిధ్యం:** భారతదేశంలో **అన్ని రకాల వ్యక్తులు** (మసక్యులర్, దుబ్బల) **సర్వైవ్** అయ్యారు. **యూరోప్, ఆఫ్రికా**లో కేవలం **శక్తివంతమైన వ్యక్తులు** మాత్రమే సర్వైవ్ అయ్యారు. 
*   **ప్రయాణం:** **ఎక్కువ ప్రయాణం** చేస్తే **ఇమ్యూనిటీ** **పెరుగుతుంది**. ఎందుకంటే **వేర్వేరు వైరస్లను** ఎదుర్కొంటారు. 

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### 🌟 ముఖ్యమైన సూత్రం:
> **"40% జనాభా **హృదయ వ్యాధి**కి **ఎక్కువ అవకాశం** ఉంది. ఇది **భారతదేశానికి ప్రత్యేకమైన మ్యుటేషన్**."** 

> **"ఆనందంగా ఉండండి. **ఆనందం** అనేది **జన్యువులకు** మంచిది. **హార్మోన్స్** **DNA**తో **సంభాషిస్తాయి**."** 

> **"ఒకే కులంలో పెళ్లిళ్లు చేసుకోవడం **అతిపెద్ద సమస్య**. ఇది **రోగాలను** **తరతరాలకు** **తీసుకువెళ్తుంది**."**



Transcript:
(00:00) आप मानते हो एज अ जेनेटिक साइंटिस्ट कि पूरे भारत का जेनेटिक कोट खराब हो रहा है। लाइक 55% लोग बीमार है और जो लोग बीमार है वो बीमार बच्चे को ही जन्म देंगे। अगर मैंने कुछ ऐसे जेनेटिक मॉडिफिकेशन करी तो एक साल के बाद मैं भी कैप्टन अमेरिका टाइप बन पाऊंगा क्या? डेफिनेटली आप बन सकते हो। आप बहुत कुछ कर सकते हो अपने बॉडी के साथ। तो हमारे अंदर काफी सारे सिलेक्शंस एंड इडप्टेशन है जिससे कि हम 100 कि.मी.
(00:21) दौड़ सके आज की डेट में भी। वाओ। आने वाले टाइम में दिखेगा इंडिया में कि जो लोग वेल डूइंग फैमिलीज हैं उनके बच्चे ज्यादा गोरे होंगे। माय गॉड। ये जो जेनेटिक एडिटिंग की टेक्नोलॉजी आ रही है उसमें से हाइट बदल सकता है। यस। बट वो बढ़ाते कैसे हैं? लोग करते हैं ऐसे बच्चों के। यस लोग करते हैं बट इट्स नॉट गुड। गोत्र सिस्टम पे जेनेटिक स्टडीज हुई है क्या? पहले गोत्र सिस्टम ये था कि आपको डिजीज से बचाना है। ऋग्वेद जो [संगीत] ग्रुप्स ने लिखा उनको इस बारे में नॉलेज थी कि जेनेटिक इनब्रीडिंग कितना हानिकारक होता है हेल्थ के लिए। हजारों सालों से जो म्यूटेशंस हो
(00:51) रहे हैं इकट्ठा हो रहे हैं। सेम कास्ट में शादियां करने से तो वो भी तो जाएंगे ना नेक्स्ट जनरेशन में। 9 [संगीत] करोड़ लोगों को ज्यादा हार्ट अटैक के चांसेस हैं। रिस्क फैक्टर्स फाइव टाइम ज्यादा है। ये इंडिया का बिगेस्ट प्रॉब्लम है। बिगेस्ट चैलेंज है। अभी एज अ जेनेटिक साइंटिस्ट [संगीत] लाइफ स्पैन्स का सच क्या है? मैं नहीं मानता हूं कि इवोल्यूशन जो हो रहा है अभी इंडिया में या पूरे वर्ल्ड वाइड ह्यूमन एकिस्टेंस को बचाने [संगीत] में हेल्प करेगा वो। अभी मोर प्रोन टू कैंसिल। एक साइंस और हिस्ट्री के ऑलस्टार लौट चुके हैं टीआरएस पर। डॉक्टर नीरज राय के रील्स
(01:23) बहुत ही वायरल जाते हैं क्योंकि ये बहुत ही बुद्धिमान इंसान है। इनके नॉलेज की साइज बहुत ज्यादा बड़ी है। बहुत ज्यादा वाइड है। ही इज़ एक्चुअली अ जेनेटिक साइंटिस्ट पर भारतीय हिस्ट्री पर बहुत ज्यादा रिसर्च कर रहे हैं विथ द बेस ऑफ जेनेटिक स्टडीज। ऑब्वियसली अलग-अलग कम्युनिटीज की बातें करी हमने। भारतीय होने के नाते हमारे बॉडीज, हमारे मन अलग कैसे इसकी बातें करी। दिस इज जस्ट अ वेरी सेल्फ अवेयरनेस ओरिएंटेड पडकास्ट फॉर ऑल ऑफ इंडिया। एंजॉय करो। मुझे ऐसे नडी कन्वर्सेशंस करने में बहुत मजा आता है। आई एम श्योर यू आर गोइंग टू एंजॉय डॉ. नीरज
(01:59) राय ऑन स्किल हाउस ब्रिंग्स यू द रणबीर शो। [संगीत] [संगीत] बहुत ही ज्यादा एक्साइटेड हूं। डॉक्टर नीरज राय लौट चुके तीन साल बाद। वेलकम सर। थैंक यू रणवीर। अ शुरुआत में ही एक फैक्ट मैं शेयर करना चाहूंगा। बहुत ही इंटरेस्टिंग है क्योंकि आज बायोलॉजी, जेनेटिक, साइंस और हिस्ट्री तीनों की बातें होंगी। बहुत इंटरेस्टिंग एपिसोड है इंडिया के नजरिए से। तो द स्टार्टिंग फैक्ट इज इफ यू अनवाउंड ऑल द डीएनए इन योर बॉडी इट वुड स्ट्रेच ट्वाइस
(02:46) द डायमीटर ऑफ द सोलर सिस्टम। यस करेक्ट। इवन जो हमारे पेट में जो बैक्टीरिया है उसके भी अगर हम स्ट्रेच को खोल दें तो वो भी जो है एक बार जो है सन के का जो है चक्कर लगा सकता है। वाह वाह। अ जेनेटिक साइंस की बात की जाए तो ये जो हमने डीएनए का स्टैंड खोला है जो सोलर सिस्टम से ज्यादा बड़ा है। ट्वाइस द साइज ऑफ़ सोलर सिस्टम। इसी में आपका सब्जेक्ट है। यस। तो मतलब इट्स एन इनफाइनाइटली लॉन्ग सब्जेक्ट। आप सीखते ही जाओगे। यस। राइट? जो हमारा जो डीएनए का जो रहस्य है वो भी एक तरह से इनफाइनाइट ही है। अभी भी अभी भी रहस्य है। हम उसको समझने की कोशिश
(03:22) कर रहे हैं। लेयर बाय लेयर उसको और जो है अंडरस्टैंडिंग हमारी बढ़ती जा रही है। बट बहुत सारी ऐसी चीजें हैं जो अभी भी अननोन है। तो इन परसेंटेज कितना सीखे हैं? हमारे बॉडी में ट्रिलियंस ऑफ सेल्स हैं। जिसमें से सिर्फ 2% हर सेल का जो सिर्फ 2% डीएनए काम करता है। 98% डीएनए का कोई रोल नहीं होता है। मोस्टली कोई रोल नहीं होता या कोई ऐसे रहस्यमय रोल। यस। हो सकता है रहस्यमय रोल हो बट अभी हमारी अंडरस्टैंडिंग नहीं है वहां तक। ओके। सो जो हमारा डीएनए होता है उस डीएनए का मतलब होता है कि एक प्रोटीन को कोड करना। जैसे हम कुछ सोच रहे हैं। तो हमारे अंदर
(03:52) सपोज़ दैट कि कुछ एक हार्मोनल इमंबैलेंस हुआ। एक स्पाइक कप हुआ एक हार्मोन का या जब हम खाना खाते हैं तो हमारे जो पेट में जो जितने तरह के एंजाइम्स बनते हैं सबका अपना रोल होता है और उसका जो मेन जो उसका जो फाउंडेशन है वो प्रोटीन और प्रोटीन बनाता है हमारा डीएनए तो डीएनए ही एक मास्टरमाइंड है जैसे हमारा ब्रेन मास्टरमाइंड है वैसे डीएनए होता है सिल्क का मास्टरमाइंड ओके ये बहुत ही डीप और साइंटिफिक पॉडकास्ट बनेगा बट सरलता से शुरुआत करता है अ आप खुद बनते हो एक स्पर्म और एक एग से हां हां तो पापा से 50% % डीएनए आता है। मम्मी से
(04:26) 50% डीएनए आता है। करेक्ट टिल हियर यस। फिर वो कंबाइन होके थोड़े बहुत परम्यूटेशन कॉम्बिनेशंस के साथ आपका ओरिजिनल डीएनए होता है। आपके फिंगरप्रिंट की तरह है। तो हर इंसान का एक अलग डीएनए होगा। ठीक है? तो किसी के थूक से, किसी के बाल से हम आइडेंटिफाई कर सकते हैं कि ये किस इंसान का डीएनए है। ठीक है? अभी आपने लगातार प्रोटीन शब्द का इस्तेमाल करा। प्रोटीन अक्सर लोग समझते हैं एज अ फूड। हम हम प्रोटीन खाओ बट बॉडी के अंदर के प्रोटंस उनका रोल कुछ अलग होता है। यस सरल सवाल आपके लिए यह है सर कि ये जो इनसाइड द बॉडी प्रोटीनंस हैं ये होते ही
(05:03) क्या है? यस काफी अच्छा सवाल है रणवीर जैसा कि आपने बोला कि 50% डीएनए आता है फादर से 50% आता है मदर साइड से। तो मैं थोड़ा सा चेंज करना चाहूंगा। मदर साइड से थोड़ा सा ज्यादा आता है। अच्छा मदर्स के साइड से आता है। एक डीएनए बोलते हैं उसको माइटोकांड्रियल डीएनए। हम्म। वो सिर्फ मदर से ही आता है ऑफस्प्रिंग में। वो फादर साइड से नहीं आता है। ओके? ठीक है? और वो काफी इंपॉर्टेंट होता है वो जो डीएनए छोटा सा टुकड़ा होता है डीएनए का। एक सर्कुलर फॉर्म में डीएनए होता है। ठीक है? दूसरा जो आपका जो सवाल था प्रोटीन ये जो पूरा दुनिया है ना ये प्रोटीन ही एक
(05:36) बेसिस है इवॉल्यूशन का। प्रोटीन को आप डिफरेंट नाम दे सकते हो। जैसे मसल मसल पावर क्या होता है? प्रोटीन का अच्छा इवॉल्यूशन। ओके? से सपोज दैट कि एक लीनिएज है 10,000 इयर्स से। एक वॉरियर क्लैन है। वो वॉरियर क्लैन क्यों बना? क्योंकि उनके बॉडी में प्रोटीन ज्यादा हो रही है। ज्यादा सिंथेसिस हो रही है। या उनके जो मसल्स मास है ज्यादा है। प्रोटीन इज अ टाइप ऑफ सेल। इट्स अ कॉम्प्लेक्स मॉलिक्यूल। कॉम्प्लेक्स मॉलिक्यूल। जैसे कार्बोहाइड्रेट होता है, फैट होता है, फैटी एसिड्स होते हैं वैसे ही होता है प्रोटीन। जैसे कि हमारे जो शरीर में
(06:05) एंजाइम्स होते हैं ना वो प्रोटीन होते हैं। अपना काम किया फिर वो डिग्रेड हो जाएंगे। सेल में चले जाएंगे। फिर से वो सेल जो है उनको छोटे-छोटे टुकड़ों में तोड़ देगी। फिर से उनको असेंबल करेगी। हम ठीक है? ये तो एक कंटीन्यूअस प्रोसेस है। तो जब आप एग खाते हो, पनीर खाते हो, ठीक है? वो ब्रेकाउन हो रहा है आपके पेट में, आपके डाइजेस्टिव सिस्टम में इंटू अमाइनो एसिड्स। फिर वो रिफॉर्म होते हैं और प्रोटीनंस बनाते हैं बॉडी के अंदर। सो सिर्फ 20 तरह के होते हैं अमाइनो एसिड्स। उन्हीं 20 तरह से आपको मिलियन टाइप्स ऑफ कॉम्बिनेशंस में बनते हैं
(06:37) पेप्टाइड्स। वो पेप्टाइड्स डिफरेंट फोल्डिंग फोल्ड करते हैं। फोल्ड करके डिफरेंट तरह के प्रोटंस बनाते हैं। वो प्रोटीन एक फंक्शन करता है। तो हर एक प्रोटीन का अपना एक फंक्शन होता है। जैसे हमारा मसल्स है। मसल्स का जो फंक्शन क्या होता है? स्ट्रेंथ। हमारा जो बोन है बोन भी एक तरह का जो है एक प्रोटीन होता है। उसका अपना अलग फंक्शन होता है। ब्रेन में जितने हमारे प्रोटंस हैं उनका सिग्नलिंग में मोस्टली होता है फंक्शन होता है। तो हर एक पार्ट बॉडी के पार्ट का जो प्रोटीन का अलग फंक्शन होता है। वाओ। तो वन ऑफ़ द अरर्लियस्ट जो इवॉल्यूशन जब
(07:06) लाइफ बन रही थी तो प्रोटीन ही बना सबसे पहले। हम ठीक है? और प्रोटीन वो कॉम्प्लेक्स होता गया। कॉम्प्लेक्स होता गया और हमारे आज के जो जो हायर ऑर्गेनिज्म है लाइक प्राइम एड्स या जो ह्यूमंस हैं उनमें सबसे ज्यादा कॉम्प्लेक्स फॉर्म में प्रोटंस मिलते हैं। ओके ओके पता है वो लेगो टॉय आता है ना लेगो ब्लॉक्स तो किसी भी लेगो को कंस्ट्रक्ट करने के लिए एक मैनुअल रहता है कि ये ब्लॉक को ऐसे रखो उसके ऊपर ये ब्लॉक रखो तो कैन यू से कि जो हमारे डीएनए में है वो इंस्ट्रक्शन मैनुअल है और ब्लॉक से प्रोटीन है करेक्ट वे टू पुट इट ओके तो आपके पापा और आपके मम्मी से जो
(07:43) डीएनए मिला है और आपके बॉडी के अंदर कंबाइन हुआ है वो आपका यूनिक इंस्ट्रक्शन मैनुअल है कि आपके नाक की साइज क्या होगी आपके कान की साइज क्या होगी आपकी हाइट क्या होगी वगैरह करेक्ट यही है ओके इसी की स्टडी से हमें खुद के इतिहास के बारे में भी बहुत कुछ पता चलता है करेक्ट टू से जैसे कि मैंने बताया 98% ऑफ़ जो डीएनए होता है उसका कोई रोल नहीं होता है बट उसका काफी रोल होता है टू अंडरस्टैंड आवर इवोल्यूशन हमारी जो हिस्ट्री है उसको समझने में काफी हमें हेल्प मिलती है ये हमारा मेमोरी कार्ड है अ यस बिल्कुल आप उसको बोल सकते हो हमारा
(08:16) मेमोरी कार्ड है और प्रोटीन का तो इवोल्यूशन जो है चलता जा रहा है, चलता जा रहा है। हर एक डिफरेंट ऑर्गेनिज्म का डिफरेंट स्पीड से इवोलेशन हो रहा है। और जो डीएनए है वो काफी होता है इनफेटिव हमारे फील्ड में। क्योंकि जो डीएनए का में होते हैं होते हैं चेंजेस ओवर द टाइम। जैसे एक जनरेशन में कुछ चेंजेस होंगे। जी और सेकंड जनरेशन में भी कुछ चेंजेस होंगे। तो हम उन चेंज को देखते हैं और ये पता लगाने की कोशिश करते हैं कितने जनरेशन पहले से ये चेंजेस हो रहे हैं। ठीक है? और होते हैं ट्रेड्स। जैसे कि यूरोपियंस हैं उनके अलग ट्रेड्स हैं। साउथ एशियन है
(08:47) उनके अलग ट्रेड्स हैं। ऑलदो हमारा जो डीएनए बिल्कुल ही सेम होता है। 99.9% डीएनए सेम होता है। यूरोपियंस, अमेरिकनंस, साउथ एशियंस। हम सब एक थे अबाउट 1 लाख इयर्स पहले। तो हमारा जब डीएनए जब पास होता है ना डीएनए बनता है मदर से एंड फादर से जब डीएनए फर्टिलाइज होता है जब एग एंड स्पर्म तो उस उस फर्टिलाइज के जो होता है प्रोसेस उसमें कुछ होते हैं चेंजेस। उसको बोलते हैं कि म्यूटेशंस। तो हम उन म्यूटेशंस के पैटर्न पर देखने की कोशिश करते हैं कि कौन सा ह्यूमन की जो ब्रांच है लीनियज है किस वाले लीनियज से कब जो है अलग हुई वो एनसेेस्टल नोड कौन से थे जैसे
(09:22) कि जो डीएनए का जो सीक्वेंसिंग है उससे ये चला पता है कि अफ्रीकंस जो हैं वो हमारे सबसे ज्यादा एनसेेस्टल पापुलेशन है तो अफ्रीकनंस से ही सारी पापुलेशन इवॉल्व हुई है डिफरेंट डायरेक्शंस में माइग्रेशंस हुए एंड देन लोकल फील होता है अडप्टेशन साउथ एशिया में आए फिर ईस्ट एशिया में गए अमेरिका में गए यूरोप में गए तो ये हमें चलता है पता है कि डिफरेंस कितने हो रहे हैं एक जनरेशन में जो कि एक नेचुरल फिनोमना है। वो 98% जो रहस्यमय डीएनए है। हां वेयर आर वी नाउ इन दैट स्टडी? यस। तो देखिए इस संसार में नेचर कुछ भी बनाता है उसका जो है कुछ ना कुछ पर्पस
(09:54) होता है। जो 98% जो डीएनए है उसमें से जो है अभी चलना स्टार्ट हुआ है कि कुछ होता है कंट्रोल जिसको बोलते हैं एक्सप्रेशन जो होता है ना हमारा जो प्रोटीन का एक्सप्रेशन उसमें वो कुछ कंट्रोल करता है कुछ हद तक बट नॉट ऑल द 98% डीएनए उसमें से कुछ डीएनए आए हैं अ हमारे एनसेेस्टर्स के भी जो एसेेस्टर्स हैं जैसे चिंपैंजी मंकीज़ ओके उनमें वो जो है वायरस ने उनको इनफेक्ट किया उन मंकीज़ को और जो वायरस का जो होता है डीएनए उनको उनके अंदर इंटीग्रेट हो गया लाइक वाओ तो उसको बोलते हैं रेट्रो वायरसेस। यानी कि जो हमारे पूर्वजों को बीमारियां
(10:29) हुई थी वो बीमारियां भी अभी हम में यस। तो आप आपके डीएनए से हम बता सकते हैं कि कितने परसेंट रेट्रो वायरसेस हैं। ठीक है? अप टू 6% जो डीएनए हमारा आता है वो होता है वायरसेस से आते हैं। और वो वायरसेस जो है भी काफी यूज़फुल होते हैं इवोल्यूशन में। सपोज़ दैट कि 100 लोगों को एक वायरस ने इनफेक्ट किया रेट्रोवायरस। उसमें से 99 लोग खत्म हो गए। एक सर्वाइव किया। उसको भी फिर इनफेक्शंस हुए। ऐसे करते-करते हजारों लाखों सालों में कुछ ऐसे आते हैं आरएनए या डीएनए के सीक्वेंसेस जो काफी होते हैं यूज़फुल होते हैं इस ह्यूमन के लिए। फॉर एग्जांपल यू नो लाइक एचआईवी
(11:02) इनफेक्शन एचआईवी भी होता है एक तरह का रेट्रो वायरसेस। बट कुछ लोगों में इसको बोलते हैं इलीट क्लास या इलीट डीएनए होता है। एक ऐसा म्यूटेशन उसके अंदर हुआ उस डीएनए के अंदर जो कि रेट्रो वायरसेस से आए हैं कि उनको एचआईवी इनफेक्शन होने के बाद भी उनको बीमारी नहीं होगी। यह काफी कम फ्रीक्वेंसी मिलती है।01% लोगों में वो डीएनए वायरस से जो आया है वह उनको इम्युनिटी देती है अगेंस्ट एचआईवी वायरस। कोई पर्टिकुलर देश है। हां हां लाइक मोस्टली नॉर्दर्न यूरोप में ये रिपोर्ट किया गया है। कुछ-कुछ सदन यूरोपियंस पॉपुलेशन में भी है। वाह वाह।
(11:37) जैसे कहते हैं कि चिंपैंजी हमारे बहुत करीबी कजिन है। यस। ऐसे मान सकता हूं। अ पर एक चिंपैंजी की साइज ह्यूमन से आधी साइज जितनी होती है। हम पर उनके छोटे से बॉडी में इतना ज्यादा मसल है कि उनकी स्ट्रेंथ शायद हमसे तीन गुना चार गुना ज्यादा है। सिक्स टाइम्स सिक्स टाइम्स। तो टेक्निकली हम भी बंदर से ही निकल के आए हैं। हम हमारे कोई पूरे बंदर हुए होंगे जो हमसे भी ज्यादा तगड़े हुए होंगे। हम तो क्या हमारे वो 98% डीएनए के अंदर सुपर ह्यूमन स्ट्रेंथ की एबिलिटी है क्या? है नहीं हो सकती है। कुछ ऐसे एक्सपेरिमेंट्स किए गए हैं जिससे ये चलता है पता कि उस
(12:16) 98% के अंदर जो कुछ एबिलिटी होगी जो कि हमें एक एडिशनल स्ट्रेंथ देती होगी। बट जो दो 2% डीएनए हैं उनके अंदर भी उतनी एबिलिटी होती है कि वो भी हमें चिंपैंजी इतना मस्कुलर बना सके। वाओ यस बट ओके। तो मेरे जैसा एक इंसान जो फिट है बगैर अगर मैंने कुछ ऐसी जेनेटिक मॉडिफिकेशन करी अभी एट एज 32 तो क्या एक साल के बाद मैं भी कैप्टन अमेरिका टाइप बन पाऊंगा क्या? देखिए ये तो आपको ओवर द पीरियड ऑफ़ टाइम लाइक लास्ट 5000 इयर्स से जो है हमारी जो हमारा डाइटरी पैटर्न चेंज हो चुका है हमारा एनवायरमेंट चेंज हो चुका है वो भी एक फैक्टर है बट अगर आप बचपन से करोगे
(12:53) डेफिनेटली आप बन सकते हो अगर बचपन से जेनेटिक ऑल्टरेशन करी अल्टरेशन नहीं आप जो है अपने मसल्स का अच्छे से यूज़ करना चाहिए लाइक यूज़ एंड डिसयूज़ ऑफ़ ऑर्गन्स आप मसल्स को अपना अच्छे तरीके से यूज़ करो देखिए ह्यूमन कैन रन अप टू 100 किमी इन अ डे हम 100 कि.मी. हम दौड़ सकते हैं विथ अ स्पीड ऑफ़ 9 टू 10 कि.मी. पर आवर जो हमारे इंसेस्टर्स थे वो दौड़ते थे। हमारा जो बॉडी का शेप है जो बाय पीडियल लोकोमोशंस है वो दौड़ने के लिए बनाया था कि आप दौड़ दौड़ करके आप शिकार करो। कुछ ऐसे भी ट्रेट्स हैं हमारे हार्ट में। यू नो लाइक देयर इज़ अ डिजीज कॉल्ड कार्डियोमापैथी। एक
(13:24) म्यूटेशन म्यूटेशन होता है हमारे जीन में। उसकी वजह से क्या होता है कि हमारा हार्ट हो जाता है डलेट। उससे म्यूटेशन मिलता है इंडिया में। तो वो भी एक एक सिलेक्शन था। सिलेक्शन ट्रेड था जिसकी वजह से हमारा हार्ट जो है ज्यादा ब्लड को पंप कर सके बट उसकी वजह से बीमारी होती है। हार्ट अटैक भी होता है उसकी वजह से। 5% इंडियंस दे हैव दैट म्यूटेशंस। तो हमारे अंदर काफी सारे सिलेक्शन एंड अपेशन है। ऑलरेडी है हमारे बॉडी में जिससे कि हम 100 कि.मी.
(13:50) दौड़ सके आज की डेट में भी। वाओ। बट ह्यूमन नहीं दौड़ दौड़ पाएगा अभी क्योंकि हमारा उस तरह से ना तो डाइट है ना तो एनवायरमेंट है ना तो हमारी उस तरह की ट्रेनिंग है बट वि द प्रॉपर ट्रेनिंग यू कैन रन अप टू 100 किलोमीटर इन अ डे इन 24 आवर्स ओके ओके वाओ तो सुपर ह्यूमन एबिलिटीज एक्चुअली हमारे बॉडी के अंदर छिपे हुए हैं। छिपे हुए हैं। उसी 2% डीएनए में ही है वो बट हमें उसे पहचानना है और और सुपर पावर जाना है तो मे बी वो 98% डीएनए में छुपा हुआ है। वो एक संसार का रहस्य है जिसको हम जानने की कोशिश कर रहे हैं। आपको लगता है कि अगले 100 सालों में ऐसी टेक्नोलॉजीस
(14:23) निकलेंगी जिसकी वजह से वो 98% का डीएनए खुलेगा दुनिया के सामने। हां मुझे लगता है कि आने वाले नॉट 100 इयर्स बट आने वाले 20 25 30 सालों में चल जाएगा पता हमें कुछ हद तक। क्यों? क्योंकि जो हमारा जो टेक्नोलॉजी है अभी काफी एडवांस हो गई है विद द एआई। हम एआई से बहुत सारे रहस्यों को समझ सकते हैं। आपको मान लीजिए कि हमें एक परम्यूटेशन कॉम्बिनेशन लगाने हैं जिसमें कि हमें मिलियंस ऑफ देने हैं पैराटर्स। आप मिलियंस छोड़िए आपको देने हैं बिलियंस पैराटर्स कि बेस्ट पॉसिबल पैराटर्स में कौन सा ट्रेड्स को हमें जानने में हेल्प मिल सकती है तो
(14:59) आप दे सकते हो एआई के थ्रू बट जो अभी तक संभव नहीं था तो आने वाला जो 10 20 साल है वो काफी ऐतिहासिक होने वाला है इन टर्म्स ऑफ ऑल द फील्ड इसे ह्यूमन जीनोम प्रोजेक्ट कहते हैं। ह्यूमन जीनोम प्रोजेक्ट तो ऑलरेडी खत्म हो चुका है। अब नेक्स्ट लेवल का प्रोजेक्ट आ रहा है। अब हम बोलते हैं जीनोम एडिटिंग टू क्योर अ डिजीज वी कैन चेंज आवर एंटायर लाइक डीएनए। हम डीएनए के अंदर जो म्यूटेशंस हैं लाइक सिक सेल एनीमिया, थैलेसीमिया वी कैन क्योर इट यूजिंग द एडिटिंग। तो ह्यूमन जीनोम कंप्लीट हुआ मतलब क्या? लाइक हम आपके बॉडी को समझ चुके हैं कि
(15:31) आपके पास दो हाथ है, दो पांव है इस तरह से। बट हम अब आपके बॉडी के अंदर नहीं पहुंच पाए हैं कि उसका फंक्शन कैसे है। वैसे ह्यूमन जीनोम है। हम डीएनए को समझ चुके हैं। डीएनए का जो सीक्वेंसेस है उसको समझ चुके हैं। बट उनका रोल क्या है और उसको हम कैसे चेंज कर सकते हैं विद एनवायरमेंट। यू नो डीएनए जो एनवायरमेंट से बात करता है उसे डिस्कस करता है उसके अकॉर्डिंग वो एक्सप्रेस करता है। ओके? कुछ ऐसे भी प्रोटंस हैं जो कि आपका एनवायरमेंट अच्छा नहीं है तो नहीं होंगे एक्सप्रेस। अगर एनवायरमेंट अच्छा है तभी होंगे एक्सप्रेस वो। जैसे कि लाइक हैप्पी हॉर्मोंस हैप्पी
(16:05) हॉर्मोंस हैं। लाइक सिरोटोनिन वो तभी ज्यादा बनेगा जब आप खुश रहोगे। खुश का मतलब कि एनवायरमेंट जो आपके अंदर जो बॉडी के अंदर जो केमिकल्स हैं वो भी एक तरह का एनवायरमेंट है। डीएनए उसको एज अ एनवायरमेंट ट्रीट करता है। तो वो इट्स लाइक मॉलिक्यूलर क्रॉस टॉकिंग। मॉलिक्यूल आपस में बात करते हैं। उसके हिसाब से हमारा जो डीएनए होता है वो एक्सप्रेस होता है। अगर मॉलिक्यूलर क्रॉस टॉकिंग में नहीं हो रही है आप खुश हैं। बट आपका एनवायरमेंट सडनली सडनली चेंज हो गया। लाइक आप चले गए लद्दाख में अबाउट 18,000 मीटर फीट के ऊंचाई पे। तो आपके मॉलिक्यूल्स तो हैप्पी
(16:38) हैं। आपका डीएनए भी सब कुछ सही है। बट वहां पे एक और फैक्टर इंपॉर्टेंट रोल प्ले करते हैं। लाइक एपीजेनेटिक्स। हमारे डीएनए के अंदर कुछ ऐसे होते हैं मॉडिफिकेशंस कि वह उनको एक मिलता है गाइडलाइंस मिलती है कि भले ही तुम्हारा सीक्वेंस यह है बट अब तुम्हें एक्सप्रेशन अपने चेंज करने हैं। ठीक है? तो उसके हिसाब से वो चेंज करता है। तो देयर आर मेनी कंट्रोलिंग थिंग्स इन आवर डीएनए। फॉर एग्जांपल जैसे कहते हैं ना कि अगर हाइट बढ़ानी है तो बास्केटबॉल ज्यादा खेलो। नहीं बढ़ेगा उससे। नहीं बढ़ेगा। नहीं आप खुश रहो तो हो सकता है बढ़ जाए। ओके। एपिजेनेटिक्स इज़ मोर रिलेटेड टू मूड।
(17:11) यस। एपीजेनेटिक इज़ मोर रिलेटेड टू द क्विक रिस्पांस। अगर आपका एनवायरमेंट खराब हो गया है तो क्विक रिस्पांस। जैसे आपको ऊंचाई पे जाना है तो ऊंचाई पे ऑक्सीजन कम है। हाइपोक्सिया काइंड ऑफ सिचुएशन हो जाएगा। उससे कॉप अप करने के लिए एपिजेनेटिक इंपॉर्टेंट रोल प्ले करता है। एपिजेनेटिक्स की बातें बहुत हो रही है आजकल। हर जगह लोग एपिजेनेटिक्स की बातें करते हैं क्योंकि लोग फैमिली प्लानिंग कर रहे हैं। तो कहते हैं कि अगर जब बच्चा मां के पेट में है तो अगर मम्मी खुश रहेगी तो बच्चे के अंदर एपिजेनेटिक्स अच्छे से एक्सप्रेस करता है। करेक्ट रॉन्ग
(17:41) सही है। और फैक्टर्स होते हैं। बट एपिजेनेटिक भी एक होता है। इंपॉर्टेंट रोल प्ले करता है। ओके। एपिजेनेट्स इज़ बेसिकली कि जब से आप मम्मी के पेट में हो अंटिल से यू आर ग्रोइंग यस। यस। आपके ग्रोइंग अप इयर्स में आपके बचपन टीनएज। एपीजेनेटिक्स का होता है रोल बट उसके अलावा भी होता है मॉलिक्यूलर क्रॉस टॉकिंग जैसे डीएनए आपका किस तरह के प्रोटंस को कोड कर रहा है तो एपीजेनेटिक तो आपको आपको सर्वाइवल में आपको हेल्प करता है जैसे कि आप बहुत एक्सट्रीम कंडीशन में आप हो तब आपको हेल्प करेगा बट साथ में आपका अगर आप खुश रहोगे तो कुछ ऐसे हॉर्मोंस बनते हैं
(18:17) वो हॉर्मोन भी जाके डीएनए से बात करेगा ठीक है और एक एक दैट वी कॉल सिग्नलिंग पाथवे ओके तो एपीजेनेटिक्स प्लस सिग्नलिंग पाथवे प्लस आपका जो एनवायरमेंट एंड डीएनए का जो क्रॉस टॉकिंग है ऑल प्ले टुगेदर। तो यहां इस पूरे चीज का सार क्या है कि खुश रहना चाहिए। डेफिनेटली खुश रहना चाहिए। और ऐसी एनवायरमेंट चुननी चाहिए जहां आप खुश रहोगे। फिर आपके जेनेटिक सुपर पावर्स खुद को एक्सप्रेस करेंगे। नेचर ने जो बनाया है कुछ ऐसे हॉर्मोन्स बनाए जैसे एडिनलीन हुआ। बोलते हैं एडिनलीन रश हो गया। तो एडिनलीन जो बना है वो एक बहुत ही एक ऐसा वो उसको बोलते हैं ब्रह्मास्त्र वो तब बनना चाहिए
(18:55) जब बिल्कुल आप कठिनाई में हो जैसे कि एक शेर ने एक हिरन पे अटैक कर दिया तो वो हिरन के अंदर बनना चाहिए एडिनलीनिन ताकि वो दौड़ सके और एफिशिएंसी के साथ बट हमारे बॉडी में एडिनलीन जो है डेली बनता है 10 बार 12 बार दैट इज वेरी लाइक वो काफी जो है हानिकारक होता है हेल्थ के लिए हानिकारक होता है यस सेम लॉजिक है सेइंग कि स्ट्रेस इतना मत लो स्ट्रेस तो बिल्कुल नहीं लेना चाहिए जो आज के हमारे जो इंडिया में हम बोलते हैं हैप्पी इंडेक्स काफी पीछे चला गया तो मुझे लगता है और जाना चाहिए पीछे क्योंकि हम इतने परेशान है इतने स्ट्रेस लिए हुए हैं
(19:27) कि वो स्ट्रेस ह्यूमन नहीं उसको कैरी कर सकता है हमारा इवोल्यूशन ही नहीं हुआ है कि उस स्ट्रेस को कैरी करने के लिए इंडिया ज्यादा दुखी हो चुका है बहुत हर कोई दुखी है मैं मैं जितने लोगों से मिलता हूं और हर कोई वर्क प्रेशर में है। तरह-तरह के जो है यहां पे परेशानियां हैं। हम्। तो आप मानते हो ऐज़ अ जेनेटिक साइंटिस्ट कि क्योंकि हम दुखी हैं भारतीय होने के नाते तो पूरे भारत का जेनेटिक कोड खराब हो रहा है। जेनेटिक कोड हमारा तीन तरह से खराब हो चुका है। एक तो हमारा काफी इनब्रीडिंग हुई है। जैसे कि हम जो है हमारा जो म्यूटेशंस
(19:56) लोड बढ़ गया है। हमारे जितने भी डीएनए हैं। अबाउट 55 टू 60% लोग इंडिया में ऐसे हैं पॉपुलेशंस जिनके अंदर जो म्यूटेशन लोड काफी ज्यादा हो चुकी है। ठीक है? पहला रीज़न तो ये हो गया। दूसरा है स्ट्रेस। यू नो स्ट्रेस से हमारा जो है जो गट माइक्रोबोम होता है ना हमारे पेट के अंदर बैक्टीरिया होते हैं अप टू 1 केg बैक्टीरिया एक नॉर्मल हेल्दी इंसान के अंदर उसका जो क्वांटिटी है ना वो काफी कम हो जाएगा अगर आप स्ट्रेस में हो लॉन्ग टर्म स्ट्रेस में अबाउट वन डे या टू डे तो जो बैक्टीरिया का जो वेट है ना एंड टाइप एंड डायवर्सिटी वो फ्रॉम 1 केg टू आ जाएगा
(20:27) 100 ग्राम इसलिए एग्जाम के टाइम पेट खराब हो जाता है लोगों का। हां वो भी एक वो भी एक रीज़न है। बट हमारा जो है गट माइक्रोबायोम जो इवॉल्व हुए है करोड़ों सालों से जो हमारे अंदर बैक्टीरिया है ना वह करोड़ों सालों से हमारे अंदर है। आप उसको आप उसको फोर्सफुली कम कर रहे हो। उसके बहुत सारे कॉन्सक्वेंसेस हैं। लाइक कैंसर के लिए रिसोंसिबल है, हार्ट डिजीज के लिए रिसोंसिबल है, हेयर फॉल के लिए है। हम देयर आर मेनी मेनी फैक्टर्स। अगेन ह्यूमन प्रैक्टिकल इनपुट योर इज़ खुश रहो जिंदगी में। यस। खुश रहो, हेल्दी रहो। नहीं हेल्दी तो आपके कंट्रोल में नहीं है
(20:58) बट आप खुश रह सकते हो। मतलब आप मानते हो कि जो लोग फिटनेस ओरिएंटेड हैं, जिम जाते हैं, योगा करते हैं, टाइम पे सोते हैं, खाना अच्छे से खाते हैं। उनके जेनेटिक प्रोफाइल को क्या होता है? उनके भी लाइफ में एपिजेनेटिक्स वर्क कर रहे हैं। यस एपिजेनेटिक भी है। उनका जो है मॉलिक्यूलर क्रॉस टॉकिंग भी है। डिफरेंट-डिफरेंट केमिकल्स जो उनके बॉडी के अंदर बन रहे हैं जो कि रोल प्ले करते हैं अभी 20%। तो 20% तो आप अपने बॉडी को ये हेल्थ को आप सही रख सकते हो बाय योरसेल्फ। बट 80% जो होता है फैक्टर वो होता है आपका जेनेटिक इनहेरिटेंस। उसको आप चेंज नहीं कर
(21:29) सकते हो। ओके। यस। बट क्या ऐसी टेक्नोलॉजीस आ रही है क्या जिसकी वजह से वो 80% भी बदलेगा? बिल्कुल आप चेंज कर सकते हो। क्योंकि मैं कल ही एक रूम में था जहां स्टेम सेल्स की बातें हो रही थी। तो दो-ती साल पहले एक बहुत मशहूर डॉक्टर आए थे शो पर स्टेम सेल डॉक्टर। जहां किसी भी इंजरी में ना वो स्टेम सेल इंजेक्ट कर देते हैं। स्टेम सेल आपके बोन मैरो से ही खींचे जाते हैं बाहर। फिर इंजेक्ट किया जाता है। मतलब लैब में एक अ थोड़ा सा वर्क करके। बट कल जिस रूम में मैं था वहां लोग कह रहे थे कि अभी द न्यू टेक्नोलॉजी इज स्टेम सेल ड्रिप हम
(22:03) जहां बेसिकली स्टेम सेल्स कोई थर्ड पार्टी से एक्सट्रैक्ट किए जाते हैं। जैसे जब एक फीिटस पेट में होती है तो उसमें बहुत ज्यादा एक्टिव स्टेम सेल्स हैं। तो फीिटस से स्टेम सेल निकाल के फिर उसे लैब में मल्टीप्लाई किए जाते हैं। एंड देन दैट कैन बी यूज़ एज अ ड्रिप। वो स्टेम सेल एक बायोलॉजिकल ऑलमोस्ट एआई लाइक टूल है जो आपके बॉडी में जहां भी दर्द है वहां जाकर खुद को मल्टीप्लाई करेगा एंड इट कैन हील दैट पेन आल्सो इट कैन हील एक्चुअली स्टेम सेल्स का जो तो काफी टाइम से चल रहा है स्टेम सेल लोग प्रिजर्व करते हैं फ्रॉम द अम्बिकल कॉर्ड
(22:36) तो अगर आपके पास स्टेम सेल है आपका खुद का जो कि प्रिजर्व है -80 में या -120 सेंटीग में थ्रू आउट योर लाइफ तो कुछ बीमारियां ऐसी हैं जो आपको नहीं हो अगर हो गई है तो आप उसको स्टेम सेल से थेरेपी कर सकते हैं बट स्टेम सेल थेरेपी हैज़ लॉट ऑफ अदर लाइक इम्लिकेशंस जो कि बहुत ही बहुत सफल नहीं है। पूरा रिसर्च नहीं हुआ अब तक। रिसर्च हुआ है बट स्टेम सेल हर एक इंसान का अपना पर्सनल होता है। खुद का होता है। तो वो स्टेम सेल आपके बॉडी में काम करेगा नहीं करेगा दैट इज अ डिफरेंट क्वेश्चन। हम बट अगर जब इंसान मरने वाला है तो डेफिनेटली लोग ट्राई करते हैं। उसके अलावा
(23:07) भी बहुत सारे टेक्निक्स आ गए हैं। लाइक जेनेटिक एडिटिंग। तो उसके थ्रू भी हम बहुत सारा जेनेटिक एडिटिंग करके हम इंसान को बचा सकते हैं। लाइक डिफरेंट टाइप ऑफ कैंसर्स। थर्ड है कि एम्ब्रियो सिलेक्शन। अभी आज के डेट में इंडिया में क्या है कि वी आर ओवर बर्डन विद द म्यूटेशंस। इतने म्यूटेशंस हो गए हैं कि हमारा जो सर्वाइवल है इंडियंस का वो काफी मतलब दूसरे फेज में जा चुका है। आप समझ रहे हैं ना? एक 55% लोग बीमार हैं। और जब जो लोग बीमार हैं वो बीमार बच्चे को ही जन्म देंगे। तो उसमें क्या है कि हम ऑप्ट कर सकते हैं लाइक एम्ब्रियो सिलेक्शन या डोनर सिलेक्शंस से
(23:42) कोई स्पर्म दे रहा है या ऊसाइट्स दे रहा है वी कैन स्क्रीन देम लाइक मोस्टली जो आईवीएफ के केसेस हैं अभी भी जो चल रहा है इंडिया में 50 टू 60% लोग डोनर का यूज़ करते हैं जैसे मुझे फॉर एग्जांपल लाइक मुझे एक एग चाहिए और बट माय स्पर्म इज नॉट दैट गुड तो हम स्पर्म लेंगे फ्रॉम द डोनर से बट हमें पता नहीं है कि वो डोनर का जेनेटिक प्रोफाइल क्या है इट्स सो रैंडम तो अगर हमें एक लिस्ट हो लाइक 100 डोनर्स की या 200 डोनर्स की जेनेटिक प्रोफाइलिंग हो तो वी कैन फाइंड अ बेस्ट मैच। बट ये फॉर दैट एग अवेलेबल है अभी टेक्नोलॉजी। इसमें टेक्नोलॉजी तो है ही नहीं। आप जिस
(24:21) डोनर से आप स्पर्म ले रहे हो आप उससे ना ले के आप बेस्ट डोनर से अपना स्पर्म लो। उसके पहले आप जेनेटिक कॉम्पैटिबिलिटी देख लो। ओके? कि जो बेस्ट फिटेड जो आपके लिए डोनर कौन सा होगा? आई थिंक दोनों दोनों पार्टीज का जीनोम और फिर उसको मैच वो एक हो गया टेक्निक दूसरा आपने मान लीजिए कि लाइक आपके किसी कपल का एक भी अच्छा है एंड स्पर्म भी अच्छा है लाइक वि द एम्ब्रियो लाइक फर्टिलाइजेशन के बाद जो एम्ब्रियो बनते हैं ना वी कैन पिक पिक अ बेस्ट एम्ब्रियो ओके लाइक जनरली एट टू 10 एम्ब्रियोस बनते हैं तो उसमें से हम जो है ना एक लिस्ट बना सकते हैं वी कैन स्क्रीन ऑल द एम्ब्रियोस
(25:01) फॉर द जेनेटिक टेस्टिंग और उसमें बता सकते हैं कि इस एम्ब्रियो में जो प्रोबेबिलिटी हार्ट की वो ज्यादा है इस एम्ब्रियो में डायबिटीज की प्रोबेबिलिटी ज्यादा है। इस एम्ब्रियो में टॉल लाइक शॉर्ट हाइट की प्रोबेबिलिटी ज्यादा है। लाइक डिफरेंट ट्रेड्स का एक लिस्ट बना सकते हैं। एंड वी कैन प्रेजेंट दैट लिस्ट टू द पेरेंट्स। मतलब बेसिकली पेरेंट्स को पता चल सकता है बच्चे के जन्म के पहले भी। एज इन पहले कंसेप्शन से पहले भी। यही एक तरीका है कि इंडिया से हम जितनी बीमारियां हैं उसको हम रिमूव कर सकते हैं। क्योंकि जो म्यूटेशन हमारे बॉडी में हो चुके हैं
(25:31) वो ऑलरेडी स्प्रेड आउट हो चुका है। लाइक को वायरसेस अब सेकंड वेव में या फर्स्ट वेव में आप कोना को आप चाहो कि रोक लो इट्स नॉट पॉसिबल। हमारे जो म्यूटेशंस है ना डीएनए में वो ऑलरेडी स्प्रेड आउट हो चुके हैं ना। जो मतलब जैसे कि हमारे अंदर कुछ एक डायबिटीज का एक म्यूटेशन है एक जीन है। जी वो हमारे बच्चे में भी जाएगा। उस बच्चे का शादी होगा तो उसमें भी उसके नेक्स्ट जनरेशन में जाएगा। तो इट्स ऑलरेडी प्रोपगेटिंग हम और जो हजारों सालों से जो मटेशंस हो रहे हैं इकट्ठा हो रहे हैं बिकॉज़ ऑफ़ इनब्रीडिंग सेम कास्ट में शादियां करने से वो भी तो फैली हुई है पूरे इंडिया की
(26:03) सोसाइटी में हम तो वो भी तो जाएंगी ना नेक्स्ट जनरेशन में हम तो आप उसको कैसे रोकोगे मुझे याद है हमारे पहले एपिसोड में इनब्रीडिंग ही पूरी थी थी हां ये इंडिया का बिगेस्ट प्रॉब्लम है बिगेस्ट चैलेंज है अभी इसको कोई ध्यान नहीं दे रहा है बट लोगों का क्या है कि शादियां की है धूमधाम से बच्चे पैदा किए बच्चे पैदा करने के बाद आप देखो अगर कुछ अगर अगर आपकी किस्मत खराब है अगर बच्चे के अंदर टाइप वन डायबिटीज अगर उसको हो गया लाइक पे पनक्रियाज में बीटा सेल्स तो है बट इंसुलिन नहीं बन रहा है आप क्या करोगे इस तरह के केसेस आ रहे हैं आज की डेट में
(26:34) किसी को देख के ऐसे बता सकते हैं क्या कि ये इनब्रेड इंसान है नहीं अब बहुत सारे ऐसे वो है ना कम्युनिटीज हैं जो हमें पता है जैसे पारसीज हो गए जस हो गए इंडिया में लाइक कुछ कम्युनिटी अग्रवाल कम्युनिटी ऑफ़ नॉर्थ इंडिया कुछ मारवाड़ी कम्युनिटीज हैं गुप्ताज हैं बनियाज हैं लाइक दे आर हाईली इनब्रेट पॉपुलर सिंधीज हैं तो ये काफी इनब्रेड हैं। मतलब स्पेशली इन कम्युनिटीज के लिए उनके कम्युनिटी से बाहर शादी हां क्योंकि हमने बस इन कम्युनिटीज के बारे में हमें बहुत ज्यादा नॉलेज नहीं है क्योंकि हमें डेट हमारे पास नहीं है। बट दे आर द कम्युनिटीज
(27:06) इनको ज्यादा दे आर वेरी मच वरेबल। मुझे लास्ट टाइम भी यही बात हुई थी। तो किसी बनिया कम्युनिटी ने या वो टैब कम्युनिटी ने रीच आउट किया आपको? हां, लोग हमें फोन करते हैं। बोलते हैं कि हम जो है आप अपना चाहते हैं जेनेटिक स्क्रीनिंग करवाना। बट दे आर नॉट सीरियस। इंडिया में लोग सीरियस तब होते हैं ना जब प्रॉब्लम आती है सामने जैसे कुछ लाइफ थ्रेटिंग डिजी लाइक लोग क्या बोलते हैं कि हम जो अरे कुछ नहीं होगा हमारे बच्चे को या हम पूजा पाठ कर रहे हैं या कुछ हमने कुछ मंत्र जाप करवा लिया नहीं होगा लोगों को लगता है ना हमारे बच्चे में नहीं होगा
(27:37) हम बट ये गलती करते हैं जिसको होता है आप उससे पूछिए उसकी लाइफ कितनी हेल हो जाती है हम लाइक देयर आर मेनी सिंड्रोम्स जो कि इंडिया स्पेसिफिक है इंडियन इंडियन लोगों लाइक 40जी लाइक सडन कार्डियक अरेस्ट कार्डियोमापैथी जो मैं बताया ना डिलेशन होता है 25 बेस पेयर का दैट इज एक्सक्लूसिव टू इंडिया वो म्यूटेशन पूरे वर्ल्ड में कहीं नहीं है। वाओ तो 6% इंडियंस में अबाउट 9 करोड़ लोगों में के डीएनए में एक चेंज है जिसको बोलते हैं मायोसिन बाइंडिंग प्रोटीन डिलीशन उस डिलीशन की वजह से 9 करोड़ लोग को ज्यादा हार्ट अटैक के चांसेस हैं। रिस्क फैक्टर्स
(28:14) नॉर्मल के कंपेयर में फाइव टाइम ज्यादा है। पांच गुना अबाउट 35 थाउजेंड इयर्स पहले इंडियंस में वो म्यूटेशन अपीयर हुआ सपोज दैट 5000 इयर्स सो मान लीजिए कि एक ड्यूरिंग द प्रोसेस ऑफ़ स्पर्मेटोजेनेस स्पर्म बन रहा है या ठीक है या एक बन रहा है उसमें जो है एक एरर हुआ वो एरर हमारा जो डीएनए मैकेनिज्म है उसको पहचान नहीं पाया वो पास हो गया उससे एक बच्चा बन गया वो बच्चा उसको कैरी कर रहा है दैट इज कॉल्ड हेटेरोजाइगस म्यूटेशंस उसकी शादी हुई उससे भी जो है तीन चार बच्चे हुए ऐसे करते-करते वो पूरे इंडिया में फैल गया हो। कोई कम्युनिटी है जहां ये ज्यादा है?
(28:50) नॉर्थ ईस्ट में थोड़ा सा कम मिलेगा बट कश्मीर से लेकर के और श्रीलंका तक है। वाओ 9 करोड़ लोगों के अंदर म्यूटेशंस हैं बट हमें पता नहीं है वो। इसीलिए तो लोगों को यंग एज में एंड देन काफी फिट लोगों को भी हो रहा है ना आर्ट अटैक। क्यों हो रहा है? क्योंकि डॉक्टर्स को पता नहीं है। डॉक्टर्स को पढ़ना चाहिए। डॉक्टर्स क्या पढ़ता है? डॉक्टर जो किताब पढ़ता है ना हरिसन या जो मेडिसिन का किताब पढ़ता है ना वो पढ़ता है जो लिखे होते हैं यूरोपियंस यूरोप में तो होता ही नहीं है वो हम आपको इंडिया में जो रिसर्च हो रहे हैं उसको भी पढ़ना चाहिए ना इंडियन काउंसिल ऑफ
(29:23) मेडिकल रिसर्च है जो इंडियन जो आर्टिकल्स हैं क्योंकि इंडियन शरीर अलग होता है बहुत बहुत मामलों में यस जैसे कि जैसे हमारा जो जेनेटिक मेकअप है वी हैव लॉट ऑफ म्यूटेशन लोड इसको बोलते हैं रिसेसिव म्यूटेशन का लोड ज्यादा है यही वो पाकिस्तान टू बांग्लादेश टू पाकिस्तान बांग्लादेश और श्रीलंका नेपाल नहीं नेपाल में भी जो नीचे प्लेन नेपाली है उनमें भी है तो मतलब हमारे जींस काफी खराब है यस इनफीरियर जीन क्वालिटी इनफीरियर तो नहीं बोलेंगे बट खराब इन टर्म्स ऑफ बीमारी के चांसेस ज्यादा है जेनेटिक जो जेनेटिक बर्डन ज्यादा है और ये पिछले 35,000 सालों से हो रहा है
(30:00) यस हो रहा है बट जो ज्यादा हुआ वो पिछले 2000 सालों में हुआ जब पापुलेशंस बन गई ना डिफरेंट कास्ट बन गए और शादियां कास्ट में होने लगी तब ज्यादा हो गया मतलब एक्सलरेट हो गया ये प्रॉब्लम होपफुली अगले 100 सालों में टूटेगा ये प्रॉब्लम कैसे टूटेगा जब हम सब लैटिना से शादी करेंगे [हंसी] हां तब उसका है लैटिना या अफ्रीकन दैट्स द ओनली सलूशन दैट्स ओनली सलूशन या तो आप शादी करो तो आप एक जेनेटिक स्क्रीनिंग डालो आप ठीक है जेनेटिक स्क्रीनिंग से आपको चल जाएगा पता है कि आपकी प्रोबेबिलिटी आपको जो ऑफस्प्रिंग है उसमें क्या प्रोबेबिलिटी
(30:33) है हम कितना महंगा होता है एक जेनेटिक टेस्ट करना तो जो हार्ट वाला जो प्रॉब्लम है ना वो आप कर सकते हो ₹1000 में बस यस वो ₹00 35000 का टेस्ट कौन सा होता है वो अभी वो भी काफी रिड्यूस हो गया है लाइक यू कैन डू इन 56000 नाउ पर उसमें मिलता क्या है आपको आपको एक आपको प्रॉपर रिपोर्ट मिलेगा जेनेटिक मैपिंग यस कि आप आर यू प्रोन टू कैंसर यस वगैरह पूरा लिस्ट मिलेगा क्या बात और सिर्फ थूकना होता है थूकना होता है लाइक ब्रेस्ट कैंसर काफी प्रिविलेंस इंडिया में बट ब्रेस्ट कैंसर का तो कम से कम आप स्क्रीनिंग करा लो हम आप मानते हो कि जो मेरी जनरेशन है 90ज
(31:07) बोर्न ऑन एंड लेटर हम अभी मोर प्रोन टू कैंसर देखिए कैंसर का जो जो है ना प्रोबेबिलिटी काफी तेजी से बढ़ रही है लाइक एक्सप्पोनेंशियल ग्रोथ हो रहा है तो कैंसर का डायग्नोसिस के मतलब कोई डायग्नोसिस है नहीं है मतलब कैंसर जो होता है ऑनसेट के बाद ही चलता है पता लोगों को बट आप जो है नॉर्मल जो होता है ना सीबीसी काउंट्स आप अगर करा रहे हो एव्री थ्री मंथ्स में तो आपको चल जाएगा पता लाइक द लिंफोसाइट न्यूट्रोफिल्स का जो रेश्यो है एंड देन एंड देयर फॉर देयर आर डिफरेंट काइंड ऑफ़ एंटीबॉडीज उससे चल जाता है पता कि आपका कुछ इस तरह की इरेबिलिटीज है या नहीं है।
(31:45) एंड दे आर अदर जेनेटिक स्क्रीनिंग आल्सो दैट यू कैन गो फॉर दैट। रेगुलर ब्लड टेस्ट करने हैं। रेगुलर ब्लड टेस्ट एज वेल एज जेनेटिक स्क्रीनिंग वंस इन योर लाइफ टाइम एंड देन फॉलोइंग दैट रेगुलर ब्लड टेस्ट। ओके? मेरे आसपास मैं देख रहा हूं। कुछ लोग जो मेरे ऐज के जिनको कैंसर अचानक से हो गया। पिछले एक दो साल हो गए। यस। तो हर हर आप तीन महीने में आप कर सकते हो ब्लड टेस्ट अपना। आप यह हटा वायरस न्यूज़ फॉलो कर रहे हो? नहीं, यह तो आउटब्रेक्स है। तो हमारे जो एनसेेस्टर्स में तो कितने लाइक लाखों टाइम लाखों आउटब्रेक्स हुए हैं। तो वायरस
(32:16) आउटब्रेक से कुछ नहीं होने वाला है। ठीक है? आउटब्रेक एक तरीका होता है कि आप जितने भी लो इम्युनिटी के जो लोग हैं उनको आप इरेडिकेट करो और जो उससे अडॉप्ट कर रहे हैं उनको आप वो आगे बढ़े। वाओ। मतलब नेचुरल सिलेक्शन ऑफ़ नेचर। यस यस। यहां सर्वाइवल ऑफ़ द फिटेस्ट। लिटरली लाइक कम्युनिटी बेस्ड वो भी होता है ना अप्टेशन फॉर डिफरेंट काइंड ऑफ वायरसेस लाइक जो कुंभ होता है अगर आप कुंभ में जा रहे हो मिलियंस ऑफ लोग जा रहे हैं तो आप ना कम्युनिटी वो मिलती है इम्युनिटी मिलती है आप एक्सचेंज करते हो डिफरेंट फ्लू वायरसेस के फॉर एग्जांपल मैं लखनऊ में
(32:50) मुझे एक फ्लू हुआ एंड मेरे अंदर ओ एंटीबॉडी बन बन गई उस फ्लू के लिए ठीक है नॉर्मल मैकेनिज्म में मैं साउथ में गया साउथ का जो फ्लू है उसको थोड़ा सा अलग स्ट्रेन गया है तो साउथ का भी फ्लू मेरे अंदर बॉडी में आया तो मेरा जो एंटीबॉडी है काम कर जाएगा बट हमारा हमारे जो मेमोरी जो होते हैं ना बी सेल्स उनको उनके मेमोरी में आ गया कि ये भी एक तरह का वायरस है। फिर मैं हैदराबाद में गया। मैं अगर फ्रीक्वेंटली ट्रेवल कर रहा हूं तो मेरे अंदर जो फ्लू के चांसेस होता है वो थोड़ा कम हो जाएगा। क्योंकि हमारी जो मेमोरी बेस होती है ना उनको सारा का सारा जो है
(33:19) आईडिया लग जाता है। कितने तरह के फ्लूस है इंडिया में। तो क्या ज्यादा ट्रेवल करने से आपकी इम्यूनिटी बढ़ती है? यस मुझे ऐसा लगता है। आई एम लाइक इट्स देयर इज नो सच काइंड ऑफ़ रिसर्च बट आइडियली या प्रिंसिपली या साइंटिफिकली बट मान लो आप ट्रेवल कर रहे हो। आप हैदराबाद गोवा गए हम आप एयर से दूसरों की एंटीबॉडीज ले रहे हो अपने नहीं तो आप आपने फ्लू लिया आपका एंटीबॉडी बन गया हां ठीक है आपने कहीं और गए आपका उसके खिलाफ ही एंटीबॉडी बना बट एंटीबॉडी तो बना ठीक है वो तो प्रोटेक्शन मैकेनिज्म है बट जो मेमोरी में आया ना हमारे इम्यून मेमोरी
(33:48) में कि ये भी एक फ्लू वायरस है इम्यून मेमोरी हां क्योंकि ये उसको उसका जो कोड है हमारा जो इम्यून सिस्टम है ना वो पहचान गया तो अगर वो मान लीजिए कि आता है लखनऊ में कहीं से घूम करके दो साल बाद तो वो मेमोरी में रहेगा तो जो हमारा जो सीवेयरनेस है वो बहुत कम होगा तो वायरसेस ज्यादा पुराने हैं या डायनासोर? वायरस ऑफ कोर्स मोर देन डायनास यस वायरस बैक्टीरिया हम हम जो जो हमारा डीएनए है वो बैक्टीरिया से मैच करता है अबाउट 30% हमारा डीएनए मैच करता है बनाना से मैच करता है 45 50% चिकन से मैच करता है 70% अरे वाह तो ये ये पहले इवॉल्व हुए नहीं बनते गए हम
(34:24) उससे डवर्सिफाइड होते गए कॉम्प्लेक्सिटी बढ़ती गई ओके एक अजीब सा सवाल है सर दो इंसान को ले लेते एक प्योर वेजिटेरियन है जिंदगी भर और एक नॉर्मल नॉन वेजिटेरियन है जो वीकेंड्स को नॉनवेज खाता है तो क्या वो डाइट चॉइससेस की वजह से दोनों केिंदगियां बदलेंगी? अस्यूमिंग कि प्रोटीन इंटेक सेम है। वेज वाले ने भी प्रोटीन खा लिया। पनीर खाया, चने खाए वगैरह कुछ बदलेगा? क्योंकि ये नॉनवेज वाले ने जानवर का डीएनए अपने अंदर लिया है। कुछ बदलता है? देखिए बदलेगा नहीं। वो तो पर्सेंट टू पर्सन डिपेंड करता है। अगर आप प्रोटीन इंटेक आपका प्रॉपर हो रहा है। आप जो वेस्ट
(35:01) डाइट ले रहे हो उसमें वो है नॉन कंटमिनेटेड नॉन केमिकली ट्रीटेड है। तो मेरे हिसाब से वो भी इक्वली गुड है विथ द मीट। बट मीट में एडवांटेज यह होता है कि इनके अंदर विटामिन डी3 एंड B12 भी आपको सप्लीमेंट के रूप में मिलता है। क्योंकि आप जो फ्लोरा है फ्लोरा को आप किसी ने खाया है तो उसके अंदर सारा उसके जो विटामिनस है एंड एवरीथिंग हैज़ लीड्स टू दैट नो लाइक द कंज्यूमर आप उसको खा रहे हो तो आपका ट्रैफिक लेवल बढ़ गया तो इट्स ऑलवेज जो ह्यूमन है जो ह्यूमन जो हमारे इंसेस्टर्स हैं वो भी मीट खाते हुए इवॉल्व हुए हैं। तो इसमें दो चीजें सीखनी है। एक
(35:37) तो हमारे आपके इंसेस्टर्स ने क्या किया है आप उसको फॉलो करो। आपको कुछ चेंज नहीं करना है। और प्लांट में अगर आप खा रहे हो तो आपको सप्लीमेंट्स भी साथ में लेना होगा। अदरवाइज प्लांट्स में उतने सप्लीमेंट्स नहीं है। उतने आपके विटामिंस नहीं है जो आपके बॉडी को चाहिए। अभी थोड़ा हिस्ट्री में घुसते हैं। हिस्ट्री ऑफ़ डाइट्स इन इंडिया। हम आपने इस टॉपिक को स्टडी करा है? बहुत अच्छे से किया है। कि हमारे पूर्वज क्या-क्या खाते थे? यस। जितनी भी खुदाइयां होती है ना इंडिया में आर्कियोलॉजिकल एक्सकवेशंस होते हैं उसमें बहुत सारे वो मिलते हैं चूल्हे
(36:07) मिलते हैं लाइक 4000 5000 6000 इयर्स पहले चूल्हे मिलते हैं उन चूल्हों के पास में ना जो ग्रेन हम यूज़ करते थे उस समय वो ग्रेन जल जाते हैं उन चूल्हों से और एक बार अगर ग्रेन जल गया ना कार्बोनाइज्ड हो गया तो उसके मॉर्फोलॉजिकल फीचर्स हो जाते हैं बिल्कुल इंटैक्ट वो भी खराब नहीं होगा कभी वो ओके प्रिजर्व यस तो हमें हमें जो है डिफरेंट पार्ट ऑफ इंडिया में डिफरेंट तरह के मिलते हैं पैटर्न्स मिलते हैं जैसे राइस राइस बहुत कॉमन है। राइस गंगा प्लेन से लेकर के कश्मीर से लेकर के उड़ीसा से लेकर के साउथ इंडिया। तो राइस वाज़ स्टेपल्ड डाइट। फिर
(36:40) मिलते हैं मिलेट्स मिलते हैं। मिलेट में आपका ज्वार हो गया, रागी हो गया, बाजरा हो गया। ठीक है? ये सारे मिलेट्स मिलते हैं। गेहूं के एविडेंसेस मिलते हैं। अबाउट 3ाउ टू 4000 इयर्स पहले गेहूं का कल्टीिवेशन स्टार्ट हो गया। कहां से गेहूं? कहां से आया गेहूं? ये नॉर्थ ईस्ट ऑफ इंडिया। बट गेहूं से पहले वो था जौ था। मतलब गेहूं तो बाद में आया बट जौ बहुत पहले से है। अबाउट 5000 इयर्स पहले से लोग जौ खा रहे हैं। तो यह तो पता हमें चल गया कि ये हमारे स्टेपल डाइट थे। साथ में हमें मिलते हैं कट मार्क्स। बहुत सारे एनिमल के तो एनिमल वाज़
(37:10) स्टेपल डाइट। आप 6 7000 इयर्स जाओगे ना जब से की सिविलाइजेशन स्टार्ट हुआ तब से भी लोग एनिमल को बड़े चाव से खाते थे। बड़े एनिमल्स को। आपको लगता है तब भी उतने ही वेजिटेरियन और नॉन वेजिटेरियन। नहीं नहीं नहीं मोस्टली वेजिटेरियन वो थे। नॉन वेजिटेरियन थे। मोस्टली हम नॉन वेजिटेरियन देखिए क्या हुआ कि आप नॉनवेज अगर खा रहे हो तो आपको हंटिंग करना होगा या तो आपको जो है एनिमल का डोमेस्टिकेशन करना होगा बट आपकी जब पापुलेशन बढ़ती है ना तो आप उसको कंट्रोल नहीं कर पाते हो आपके पास फूड की कमी होने लगती है तो इंडिया में भी यही हुआ लास्ट 5000 इयर्स से एग्रीकल्चर का
(37:41) रिवॉल्यूशन हुआ क्योंकि हमारे पापुलेशन बढ़ रही थी बहुत फास्ट हर एक कपल्स के ना 8-आ बच्चे 10-10 बच्चे हो रहे थे और सारे बच्चे सर्वाइव कर रहे थे क्योंकि नेचर में क्या होता है नेचुरल कंडीशंस में आप सर्वाइवल रेट काफी कम होता बच्चे को कोई बीमारी हो जाएगी या बच्चे को कोई शिकार कर लिया नहीं सर्वाइव कर पाए जंगल में लाइक इन द एनोमेटिक फॉर्मेट बट सिविलाइजेशन फॉर्मेट में क्या होता है कि आप बच्चे सर्वाइव कर जाएंगे आप अस्यूम करो कि अबाउट 5000 इयर्स पहले एक कपल के पांच बच्चे हुए लोएस्ट मैं बता रहा हूं उन पांच से कितने हो गए 25 हो गए ना
(38:13) हम 25 से कितने हो गए 225 [हंसी] सिर्फ 75 इयर्स में उन 225 को भी आप मल्टीप्लाई करो 225 से 100 इयर्स में कितना हो गया पापुलेशन कितना हो तो जो शिफ्ट था ना एग्रीकल्चर की तरफ वो इसका रीजन वही है। यूरोप क्यों नहीं शिफ्ट किया एग्रीकल्चर की तरफ? साउथ अमेरिका क्यों नहीं किया? क्यों नहीं ईस्ट एशिया किया? क्योंकि वहां पापुलेशन कंट्रोल थी। पापुलेशन एक्सप्लोजन नहीं हुआ। अब आप उसके पीछे सोचो कि एक्सप्लोजन क्यों हुआ इंडिया में? बट यूरोप में क्यों नहीं हुआ? क्योंकि हमारी सोसाइटी बड़ी एक ना वेल सिविलाइज्ड सोसाइटी बनी। इसमें या फिर आप
(38:49) लेके आओ ऋग्वेद को लेके आओ। जिसमें कि आप एक दूसरे को आप हत्या नहीं कर सकते हो। एक दूसरे को मार नहीं सकते हो। एक रूल सेटअप हुए। ओके? ठीक है? रूल सेटअप हुआ। उसको रूल को लोग फॉलो करना स्टार्ट किए। उसकी वजह से ना यहां पे मैके नहीं हुए। लोग एक दूसरे को मारे नहीं। सबको सर्वाइवल के चांस मिला। आप छोटा मोटा पतला आप देखो इंडिया में कितनी डायवर्सिटी है ना। हर कोई सर्वाइव किया। मस्कुलर भी सर्वाइव किया। जो दुबले पतले हैं। ये सब ये सब ट्रेट्स हैं। जेनेटिक ट्रेट्स हैं। ठीक है? ओके। वर्सेस अफ्रीका और यूरोप यहां सिर्फ हट्टे-खट्टे लोग सर्वाइव
(39:20) क्योंकि डिफरेंट डिफरेंट लेयर ऑफ़ सिलेक्शन हुआ। इस वजह से आज भी वह हमसे ज्यादा हट्टे-खट्टे हैं। यस ओके इतने सारे सवाल हैं। तो फॉर एग्जांपल सर इस पॉडकास्ट की शुरुआत से पहले आपने कहा कि आपकी शुरुआत हुई थी एज अ जेनेटिक साइंटिस्ट बट अभी आप हिस्ट्री आर्कियोलॉजी में घुस चुके हो। स्पेसिफिकली क्या पढ़ रहे हो और आपको सबसे मजेदार क्या लग रहा है? तो हमने एक रिसर्च स्टार्ट किया अबाउट थ्री इयर्स पहले कि हमने देखा कि इंडिया का हमें मैपिंग करना है कि हमारे जो एनसेेस्टर्स थे ना उनका कट माइक्रोबायोम क्या रहा होगा? कट माइक्रोबायोम मतलब कितने तरह के
(39:53) बैक्टीरिया हजारों तरह के होते हैं बैक्टीरिया पेट के अंदर। कुछ बैक्टीरिया ऐसे होते हैं जिसका वो होते हैं ओबेसिटी के लिए होते हैं रिसोंसिबल। कुछ बैक्टीरिया होते हैं जिसके लिए कुछ जैसे हाइपरटेंशन के लिए होते हैं रिसोंसिबल। कुछ बैक्टीरिया होते हैं कैंसर के लिए होते हैं रिसोंसिबल। तो अगर हम गट माइक्रोबायोम को समझ गए तो हम अपने हेल्थ को सही कर सकते हैं। तो हमने क्या किया कि ऐसे लोगों को चूज़ किया उस स्टडी में जो कि काफी इंडजीनस है जो कि एनसेेस्टल्स हैं या वो अभी एग्रीकल्चर बेस्ड सब्सिस्टेंस पैटर्न है उनका या वो हंटिंग गैदरिंग करते
(40:19) हैं लाइक अंडमान निकोबार के ट्राइब्स हो गए उड़ीसा के ट्राइब्स हो गए बोन या नॉर्थ ईस्ट के ट्राइब्स हो गए तो उनको हमने सैंपलिंग किया उनके कट माइक्रोब स्टूल सैंपल लिया हमने उन्हीं एन60 वाले जो उन्हीं के जो लोग जो सिटी में आ गए जो कि कोक चिप्स और ये ना प्रोसेस फुल खाना शुरू किए उनका भी सैंपल लिया हमने हमने देखा डिफरेंसेस क्या डिफरेंस वाज़ ह्यूज कितना इन परसेंट लाइक 5 10% डिफरेंसेस है और वो डिफरेंसेस से हमें जब उसको मैप किया तो चला पता कि ऐसेऐसे बैक्टीरिया है ना सिटी में आप अगर सिटी के खाना खा रहे हो आप प्रोसेस फूड खा रहे हो प्रोसेस फूड का
(40:54) मतलब हुआ आप रेस्टोरेंट में खाना खा लिए आप गए आपने चिकन बिरयानी खा लिया एंड रोटी खा लिया और आपने एक चिकन खा करी खा लिया उसमें आपके पास अपने बॉडी के अंदर इतने सारे केमिकल जाएंगे कि आपको अंदाजा भी नहीं होगा अच्छी जगह जगहों की मैं बात कर रहा हूं क्योंकि चिकन में केमिकल डाले जाते हैं। केमिकल भी है। एंड देन ऑल लाइक टेस्ट एनहांसर डालते हैं। फिर उसको स्टोरेज करते हैं चिकन को लाइक फॉर वन डे टू डज़ जो स्पाइसेस होते हैं स्पाइसेस को करते हैं प्रोसेस करते हैं। तो लाइक देयर आर मेनी फैक्टर्स। मतलब वेजिटेरियंस भी बचेंगे नहीं।
(41:23) हां। तो उसमें हमने देखा है होता है बैक्टीरिया मेगामोनस। वो मेगामोनस बैक्टीरिया रिस्पांसिबल है आपके ओबेसिटी के लिए एंड डायबिटीज के लिए। और वो मेगा मोनोस मिलता है मोस्टली सिटीज में मिलता है। उसी एनसेेस्ट्री के लोग उन्हीं के जो कजिंस हैं जो रहते हैं गांव में उनमें नहीं मिला हमें। बहुत ही कम मिला। टाइम टू मूव बैक टू विलेज। यस ये लॉजिक है। ये लॉजिक यही है। बहुत सारे शहर के लोग ऐसे सोच रहे हैं आजकल। विलेज नहीं कह रहे बट स्माल टाउन कह रहे हैं। स्माल टाउन में नहीं है। आप बिल्कुल जाओ ना। आप चले जाओ। मध्य प्रदेश के दिन बिल्कुल
(41:55) ऐसे लैंडस्केप में जहां कुछ भी ना हो। इट्स क्रेजी कि वहां के लोग यहां आना चाहते हैं शहरों में और यहां के लोग वहां जाना चाहते हैं। अभी यूएस में, कनाडा में हमारे जो फ्रेंड्स हैं, यूरोप में, उनका भी यह मैं देख रहा हूं जो पैटर्न्स कि 45 के ऐज में लोग दे आर मूविंग दे आर स्विचिंग देयर जॉब एंड वो फिर जा रहे हैं ग्रीस में जा रहे हैं रोमानिया में, बुल्गरिया में वो जा रहे हैं फॉर्म ले रहे हैं वहां पे या ऑस्ट्रेलिया में जा रहे हैं लोग। सो या मैं एक और स्टडी पढ़ रहा था अमेरिका के बारे में। ये जो बच्चों में ऑटिज्म होता है ना
(42:26) ऑटिज्म की मात्रा बहुत बढ़ रही है। बहुत ज्यादा। आई थिंक इट्स समथिंग लाइक वन इन सेवन [नाक से की जाने वाली आवाज़] किड्स और वन इन 10 किड्स कुछ अजीब नंबर है ऐसा मतलब वन इन 10 किड्स में अगर ऑटिज्म है दैट्स इनसेन और ये अभी होने लगा है इस नए जनरेशन में मतलब डेफिनेटली कुछ खाने में कुछ तो होगा खाना है एनवायरमेंट स्ट्रेस है पर प्लस क्या है ना ऑटिज्म के बहुत सारे होते हैं लेवल होते हैं ऑटिज्म लाइक सीवियर ऑटिज्म लेकर के बहुत ही माइल्ड ऑटिज्म तो मे बी जो अब माइल्ड ऑटिज्म को भी हम डायग्नोस कर पा रहे हैं अभी अदरवाइज पहले तो जैसे आप
(43:00) इंडिया में देखो लोग बोलते हैं वो बेवकूफ है वो गांव में या कहीं पे वो भी उसके अंदर भी ऑटिज्म है बट उसको हम पहचान नहीं पा रहे हैं। उसको हम डायग्नोस नहीं कर पा रहे हैं। उसको हम उस कैटेगरी में नहीं रख पा रहे हैं। वैसे यूएस में भी है। इट्स नॉट लाइक सडनली सडनली बढ़ रहा है। डेफिनेटली बढ़ रहा है बिकॉज़ ऑफ़ द एनवायरमेंट। वहां भी जो खानपान है वो भी काफी चेंज हो गया है। यूएस में भी लाइक मोस्ट जंक फूड तो यूएस वाले लोग खाते हैं। तो एक एक वो रीजन है। तो मैंने जो लोगन पे ये बात सुनी थी कि वो कह रहे थे कि जो हाई लेवल ऑटिस्टिक बच्चे होते हैं उन पे
(43:29) स्टडीज हो रही है। और उनमें फॉर लैक ऑफ बेटर और सुपर पावर्स पाए जा रहे हैं। हम्म पॉसिबल टेलीपैथी ये वो तो जो रोगन का कहना ये था कि कुड दिस बी नेक्स्ट स्टेज ऑफ़ ह्यूमन एवोल्यूशन। यस। यस। कि हमारे पोतेपोते की जनरेशंस सारे ही ऑटिस्टिक होंगे और सारे थोड़े से एनहांस्ड होंगे। यस बिल्कुल आप सही बोल रहे हो। या दिस कैन बी अ वे ऑफ़ इवोल्यूशन। अगर ऑटिज्म बच्चे जो माइल्ड ऑटिज्म बच्चे हैं वो अगर ज्यादा इंटेलिजेंट हैं, शार्प हैं तो डेफिनेटली एक एक डिफरेंट डायरेक्शंस है इवोल्यूशन का। जैसे कि मैंने बताया ना अगर हमारे अंदर एक म्यूटेशन है। हमारा हार्ट में हाइपरट्रोफी
(44:07) हो गया, हार्ट बढ़ गया। जी जी जिसकी वजह से हमें ना हार्ट अटैक के चांसेस भी हैं। बढ़ गया है। बट एट द सेम टाइम वह इवॉल्व भी तो हुआ। उसकी जो रनिंग स्पीड है, उसका जो स्टेमिना है, वह बढ़ गया नॉर्मल लोगों से। तो, उसको शिकार ज्यादा मिलेगा। तो इसीलिए इंडिया में वो इसीलिए वो जो इंडिया में ना 5% क्यों हुआ? क्योंकि वो ज्यादा सर्वाइव किए वो जो नॉर्मल हार्ट वाले थे वो सर्वाइव कम किए होंगे। तभी उसकी फ्रीक्वेंसी कितनी हो गई? 6%। हम्म। क्योंकि वो बैड ट्रेट है बट वो सिलेक्शन भी दे रहा है साथ में आपको। मतलब बैड ट्रेड नहीं ग्रेट ट्रेड है। कुछ बैड चीज़
(44:39) नहीं मतलब अह हेल्थ वाइज़ तो बैड है वह क्योंकि हो सकता है कि उसमें 100 में से छह मर जाएं। पर 94 तो वो जिंदा हो रहे हैं ना। उनको शिकार ज्यादा मिला क्योंकि ज्यादा देर तक रन कर लिए वो। वाओ ओके। भारत के ही पर्सेक्टिव से दो सवाल पूछना चाहूंगा। पहले तो -5000 इयर्स हमारे जो पूर्वज थे उनकी शक्ल, उनकी अकल वो कैसे हम हम अलग थे हमसे या हम जैसे ही दिखते थे? देखिए जो फीचर्स थे हमारे जैसे ही रहे होंगे डेफिनेटली। उसमें कुछ ज्यादा चेंज नहीं हुआ है। बट उनका जो इंटेलिजेंस लेवल थोड़ा ज्यादा रहा होगा क्योंकि उन्होंने डिस्कवरी की। उन्होंने एग्रीकल्चर को समझा। उन्होंने
(45:19) मानसून को फील किया। उन्होंने मल्टीपल क्रॉपिंग स्टार्ट की कि जॉब के बाद हमें ना चना बोना है। ठीक है? वो टेक्नोलॉजी को अभी हमें लगता है कि इट्स वैरी ईजी टेक्नोलॉजी। पर ग्रेन को इकट्ठा करना, उनको बचाना, उनको एक साल के लिए प्रिजर्व करना, फिर से कल्टीवेट करना, फिर मानसून की इंटेंसिटी यहां कम होने वाली है। उस एरिया में ज्यादा होने वाली है। उसको समझना, कॉपर की स्मेल्टिंग करना, कॉपर से चीजों को बनाना आई थिंक दे आर फार फार बेटर देन फार फार स्मार्टर देन अस। जैसे महाभारत और रामायण के लोअर में एक बात है कि शायद उनके लाइफ स्पैन्स बहुत
(45:54) लंबे हुए रहेंगे। तो एज अ जेनेटिक साइंटिस्ट लाइफ स्पैन का सच क्या है? देखिए लाइफ स्पैन तो अभी बढ़ रहा है क्योंकि देखिए आप अगर 100 लोगों में अगर 10 लोग भी अगर नहीं सर्वाइव कर पाए बिकॉज़ ऑफ़ द कोलेरा या प्लेग तो आपका एवरेज एज तो कम हो जाएगा ना हम हम बट अभी क्या है कि हमारा जो एवरेज एज बढ़ता जा रहा है बट हमारा जो क्वालिटी ऑफ़ लाइफ वो कम होती जा रही है। अगर मान लीजिए कि 60% लोग बेड रीडर हैं या वॉक नहीं कर पा रहे हैं या प्रॉपर उनको किस किसी मेडिकेशंस में है तो क्वालिटी ऑफ़ लाइफ तो डाउन हो गया ना बट एवरेज एज बढ़ गया आपका हम हम
(46:30) सो अभी इंडिया में वो वो अभी हम इससे जूझ रहे हैं। हम भले ही बोलते हैं कि हमारा एवरेज एज बढ़ता जा रहा है। जी बट जो क्वालिटी ऑफ़ लाइफ वो बहुत तेजी से डाउन हो रही है। व्हाट आर वी इवॉल्विंग इंटू? अभी नेक्स्ट स्टेज क्या है? नेक्स्ट स्टेज में देखिए हमारा जो क्रेनियल कैपेसिटी है ना वो इवॉल्व कर रही है। बड़ी होती जा रही है। दिमाग दिमाग तो उसमें जो हमारा जो क्रेनियम होता है ना वो काफी थिक होता है। इतना मोटा होता है। आपने देखा किसी कुत्ते को एक्सीडेंट होते हुए कुत्ता को आपने हिट किया वो सड़क पर गिरा या कोई गाय गिरी कभी उसका ब्रेन हैमरेज होता है क्या? नहीं
(47:03) होता है ना क्योंकि उनका जो क्रेनियम थिकनेस काफी ज्यादा होता है। अभी ह्यूमन का क्या हुआ कि हमारा क्रेनियम तो वही है बट थिकनेस की वजह से थिननेस हो रहा है। उस थिननेस की वजह से ना कैपेसिटी बढ़ जा रही है। जैसे हमारा जो क्रेनियल कैपेसिटी मान लीजिए कि 1200 सीसी क्यूब है। ओके? बट हमारा जो क्रेनियम थिन हो गया तो उससे हमारा हो गया 1350 या 1400 चला गया। आपका जो ब्रेन तो इवॉल्व हो रहा है बट आपका जो स्ट्रेंथ है बॉडी की वो कम होती जा रही है। वाओ। ठीक है? तो इवोल्यूशन डिफरेंट डायरेक्शंस में हो रहा है। ठीक है? इवोल्यूशन का मतलब
(47:34) होता है कि हम किसी बीमारी से लड़ करके उस पे उस पे उसके लिए हमारे अंदर इम्यूनिटी आ गई और फिर हम आगे बढ़े। उसको हम बोलते हैं इवोल्यूशन। इवोल्यूशन का मतलब ये नहीं होता है कि आपने बस सर्वाइव कर गए बाय योर ब्रेन। तो मैं नहीं मानता हूं कि इवोल्यूशन जो हो रहा है अभी इंडिया में या पूरे वर्ल्ड वाइड वो हम लॉन्ग टर्म ह्यूमन एक्सिस्टेंस को बचाने में हेल्प करेगा वो। ठीक है? वो एक तरह से ह्यूमन को एक डिफरेंट डायरेक्शन में ले जा रहा है और इस तरह से तो ह्यूमन का जो अस्तित्व है वो मुझे लगता नहीं है कि हजार 2000 साल भी हम जी पाएंगे।
(48:08) मतलब क्या होगा फिर? फिर ये होगा बीमारियां होंगी। फिर हमारा इम्युनिटी डाउन होगा जैसे कोविड जब इनफेक्शन हुआ तो उसमें हमारे अंदर बहुत सारे ऐसे सिलेक्शन थे जो कि वो जो डीएनए था अब वो आया था वहां से आया था नीरथल से। यू नो देयर आर अनदर होम्स दे वेयर इन यूरोप अबाउट 45 50ाउज इयर्स एगो तो कुछ वो डीएनए पास किए ह्यूमंस में और वो यूरोपियंस में भी थे साउथ एशियंस में भी थे तो यूरोपियंस में ना कुछ ब्रांच खत्म हो गई क्योंकि वो सर्वाइव नहीं कर पाए लाइक देयर आर लाइक 10 ब्रांचेस ऑफ़ नियर द साउथ डीएनए इन यूरोपियंस तो उसमें से सिर्फ तीन सर्वाइव कर पाई बाकी एक्सटिंक्ट
(48:48) हो गए वो ब्रांचेस बट जो इंडिया में जो थे जो हम जो कैरी करते हैं वो जो डीएनए वो सारी ब्रांचेस सर्वाइव की तो कुछ ब्रांचेस ऐसे हैं जो हमें एक वो दी एडिशनल इम्यूनिटी उस इम्युनिटी की वजह से हमने कोविड 19 के खिलाफ अच्छे से सर्वाइव कर पाए इंडियंस आर मोर रेजिस्टेंस यस ठीक है तो दिस इज़ कॉल्ड इवोल्यूशन दिस इज़ कॉल्ड सिलेक्शन ठीक है सिलेक्शन का मतलब ये है कि आप आप जो है सर्वाइवल रेट आपका बढ़ रहा है बट जो अभी का जो इवोल्यूशन का डायरेक्शन है वो दिस दैट वी कांट कॉल इट्स इवोल्यूशन हम हम ओके इस सेम एम कॉन्स को मैं थोड़ा ब्रेक डाउन करना चाहूंगा। बेसिकली हर किसी को वो
(49:25) एववोल्यूशन की मैप पता है कि बंदर से हम बने केवन, केव मैन से हम बने इंसान बहुत कॉमन स्कूल में सिखाया जाता है। जो हमें नहीं सिखाया जाता वो ये है कि हम जो होमोसेपियंस हैं हमारे साथ ही और तीनचार टाइप के ह्यूमन बीइंग्स थे। निहंडल उनमें से एक है। डेनिसोवन उनमें से एक है। और आई थिंक ऑस्ट्रोलोपैथिक था। और एक एक और इंडोनेशिया में छोटा आदमी हां बट जो मिक्सिंग हुई है वो हमारी हुई है डेनिस से एंड नियरथल से ये नोन है बेसिकली अ शायद 5 6000 साल पहले पांच अलग टाइप के ह्यूमन बीइंग्स होते थे और उनमें से सिर्फ हम बचे हैं हम वी आर द ओनली वन व्हिच हैव सर्वाइव्ड द
(50:08) होमोसेपियंस हैव सर्वाइव्ड अ जब मैंने उन पांचों के बारे में स्टडी करा तो फॉर एग्जांपल निया एंड ड्थल्स में वो ब्लू आइज की जीन है। यस तो जिस भी इंसान में आज ब्लू आइस की जीन है मतलब दे आर कैरिंग नंडोसल डीएनए यस लेक्टिब्स दे हैव मोर डेनिस साउथ ईस्ट पापुआ यगुनिया में भी डिनस है बट जो पापुआ युगुनिया में उनको ऐसा कुछ ट्रेड नहीं मिला जैसे कि वो ज्यादा एडवांटेजेस हो उनको बट तिबंस में है वो एडवांटेजेस क्योंकि वो एक जीन है इपास वो आया डेनिस वन से आया बट जो मार्फ फीचर्स है ना वो तो फिर चेंज होते रहते हैं ह्यूमन में मतलब चेहरे चेंज होते रहते हैं की वजह से
(50:47) यस मान लीजिए कि अगर आप चले जाओ 2000 साल पहले हम 2000 साल पहले अगर आप सोसाइटी नहीं बनी है ठीक है लड़की अपने इंटरेस्ट से किसी को चूज़ कर रही है तो डेफिनेटली कुछ अगर उस समय का होता है पैरामीटर सेक्सुअल सिलेक्शन का तो वो अपने हिसाब से चूज़ करेंगे ठीक है मैटिंग पार्टनर बट जो मैटिंग पार्टनर चूज़ नहीं हो पा रहे हैं वो तो फिर खत्म हो जाएगा ना हम लाइक इंडिया इंडिया आप देखो कि यहां पे जो मैट्रिमोनियल साइट्स होती है ना हमने एक दूसरे सर्वे मिलियंस ऑफ मैच मेकर्स जो एप्लीकेशनेशंस होते हैं उसमें 85 टू 90% लोगों में क्या मांगते हैं कि हमें जो ब्राइड है वो गोरी
(51:27) चाहिए तो इस तरह से आप सिलेक्शन कर रहे हो जो गोरा करने का जो जीन होता है ना लाइक देयर आर मेनी जींस लाइक एसएस एसएलसी 452 जीन बोलते हैं उसको उसका सिलेक्शन हो रहा है उसके एक होते हैं एरिल्स बोलते हैं डीएनए को बोलते हैं एरिल्स ए एंड एजी एंड जीजी जीजी जो होता है कोट वो ब्लैक कलर के लिए होता है। ए जी होता है वो ब्राउन के लिए होता है। ए ए होता है वो होता है गोरे के लिए होता है। तो मेरे अंदर जी एल है बट मैंने ए ए ब्राइट को चुना जो मेरे बच्चे होंगे उनमें प्रोबेबिलिटी क्या हो जाएगी? ए ज्यादा हो जाएगी ना हम तो इसको बोलते हैं सिलेक्शन होता है। तो
(52:02) ये अभी स्टार्ट हुआ है पिछले 50 सालों में ना बट आपको आने वाले टाइम में दिखेगा इंडिया में कि जो लोग वेल डूइंग फैमिलीज़ हैं या जो ज्यादा कैपेबल लोग हैं उनके बच्चे ज्यादा गोरे होंगे। ओह वाओ क्योंकि वी आर सेलेक्टिंग इट म गॉड यस ये नेचुरल सिलेक्शन हमारे आंखों के सामने हो रही है और जैसे कि आपका होता है ना ब्यूटी लाइक सुंदरता का क्या होता है कि नाक लंबी होनी चाहिए बट ऐसा नहीं है हमारे जो सिस्टर्स हैं उनकी नाके लंबी नहीं थी बट अभी ये जो हमारे माइंड में ये आ गया है कि नाक लंबी होनी चाहिए होरा होना चाहिए लंबा चेहरा होना चाहिए ठीक है इस तरह के जो ट्रेड्स
(52:33) हैं वो हो रहे हैं सिलेक्ट हो रहे हैं ओके जो आपने ये फेयरनेस और सांवलेपन के बारे में बताया अ मुझे याद है स्कूल में हम हाइट के बारे में पढ़ते थे हम कि हाइट भी एक डोमिनेटिंग जीन है। और अगर मान लो एक पेरेंट की हाइट छोटी है, एक पेरेंट की हाइट ज्यादा है तो बच्चे की हाइट मोस्ट लाइकली ज्यादा ही रहेगी। क्योंकि अगर एक भी पेरेंट टॉल है तो बच्चा टॉल हो जाता है। यस यस इट्स करेक्ट। करेक्ट। यस। तो इन सेइंग दैट मैथमेटिकली स्पीकिंग सारे भारतीय ज्यादा लंबे चौड़े हो रहे हैं क्या? हम हां हो रहा है डेफिनेटली। क्योंकि आप जो लंबाई का भी होता है ना सिलेक्शन हो रहा
(53:09) है ना। आप सोचो कि 100 में से ऐसे दो लोग हैं जिनकी शादियां नहीं हो पा रही है। छोटे लोग हैं बिकॉज़ ऑफ़ द शनेस। बट जो लंबे जितने भी हैं 100 की शादियां हो रही है। तो आप सोचो कि 3000 साल बाद आपको ना दिखेगा वो 5% के फॉर्म में दिखेगा। 5000 इयर्स के बाद आपको दिखेगा 10% के फॉर्म में दिखेगा वो। क्योंकि हम उसको सेलेक्ट कर रहे हैं। 2% लोग ज्यादा सेलेक्ट हो रहे हैं। दैट इज़ अ बिग नंबर। या ये मेरी एक खुद की ऑब्जरवेशन है। मेरे बहुत सारे क्रिकेटर फ्रेंड हैं। मैंने देखा है कि उनमें से ना ऑलमोस्ट सों के पेरेंट्स उनसे ज्यादा छोटे
(53:41) हैं। हम मतलब सारे क्रिकेटर्स उनके पेरेंट्स से ज्यादा लंबे हैं। हम हम और फिर वो जो बास्केटबॉल की थ्योरी होती है कि हाइट बढ़ाने के लिए बास्केटबॉल ज्यादा किया। आई जस्ट वंडर कि क्या हो रहा होगा। हम तो देखिए इसमें भी है ना इसमें भी जो आपका सैंपल साइज है ना छोटा है अगर आपने सैंपल साइज को बढ़ा लेंगे ना 100 लोगों से बात करेंगे देन हम उस पे कुछ निकल के आएंगे कंक्लूजन तो ऐसा नहीं है क्या हो सकता है कि थाउजेंड्स ऑफ प्लेयर ऐसे हो बट आप जो देख रहे हो वो सिर्फ 10 ही हो ओके तो इसका कोई जेनेटिक बेसिस नहीं है एंड इट ऑल डिपेंड्स अपॉन ग्रोथ हार्मोन
(54:12) जैसे कि आपका ने बोला ना कि डोमिनेंट जीन है एक प्रोटीन बनाएगा इसको बोलते हैं ग्रोथ हॉर्मोन इस लाइक प्रोटीन ग्रोथ हॉर्मोन अगर जैसे कि हाइट फाइव 8 है थोड़ा सा बढ़ गया अगर 1% ज्यादा बढ़ गया तो उस इंसान की हाइट क्या हो जाएगी? 510 हो जाएगी। जस्ट 2 इंच का तो मैटर होता है। बट वो बढ़ाते कैसे हैं? आप उसको चाहो तो इंड्यूस कर सकते हो। इंजेक्शन मारो। यस। लोग करते हैं ऐसे बच्चों से कर सकते हैं। बट इट्स नॉट गुड। इट्स नॉट एडवाइजबल क्योंकि वो जॉब ही फिर ऐसे ग्रो हो जाएगी। एक्रोमेगाली राइट? लोग करते हैं। वाओ। तो ये जो जेनेटिक एडिटिंग की टेक्नोलॉजी आ
(54:46) रही है उसमें से हाइट बदल सकता। यस। बट आपको बच्चों में ही करना पड़ेगा बिफोर फ्यूजिंग ऑफ योर लॉन्ग बोनस। जब लॉन्ग बोन एक बार फ्यूज हो गया तो फिर लंबाई नहीं बढ़ सकती है। बट कैसे करेंगे जेनेटिक? ओके ये जो क्रिसपर टेक्नोलॉजी है जिससे आप एक्चुअली जींस को ऑल्टर कर सकते हैं। ये होता कैसे है? पिल होती है, इंजेक्शन होता है। क्या है? इसमें आपको टोटल टोटल सेल्स खुलेंगे। सो टोटल डीएनए को और उसमें क्या होता है कि एक एंजाइम होता है। किस पर? कैश। कैश इज़ अ एंजाइम। उस वो कैश आपके बॉडी के सेल्स में जाएगा। एंड उसका एक होता है कॉम्प्लीमेंट्री साइट होता है। हम उसको
(55:21) बोलते हैं कि तुम्हें इसी पोजीशन में जाना है। उस 2 3.5 बिलियन बेससेस में से आपको प्रिसाइज़ली आपको इस वाले जगह पे जाना है। ठीक है? इस क्रोमोजोम के इस वाले आर्म पे यहां पे जा आपको बाइंड करना है। एंड देन यू हैव टू कट इट। कट करके आपको फिर इसको रिप्लेस करना है। लाइक टी है। आपको सी चाहिए वहां पे तो टी को कट करेगा सारे सेल्स में। एंड वहां पे सी को रिप्लेस कर देगा वो। बट ये होता है आज भी दुनिया में। हां। लाइक सिंगल सेल एनीमिया एंड थैलेसीमिया एक होता है एक म्यूटेशन की वजह से होता है एंड पहला सिंगल सेल एनीमिया का ट्रीटमेंट हुआ था अभी दो साल पहले यूके
(55:52) में पहली बार दो साल पहले यस मतलब 2024 में लाइक अबाउट 1.5 इयर्स पहले यस डम यानी कि अभी डिजीजसेस क्योर हो रहे हैं यस यू कैन ट्रीट थैलेसीमिया इट्स वैरी पेनफुल डिजीज सिगल एनीमिया इट्स वै पेनफुल डिजीज दैट यू कैन क्योर दोज़ डिजीजेस शायद 10 साल बाद ये क्रिस्पर टेक्नोलॉजी और भी ज्यादा यस अभी तो काफी कॉस्टली है अभी तो लाइक 50 मिलियन 50 मिलियन एक पेशेंट को क्योर करने में वाओ 50 मिलियन बट वो पहला पहला था ट्रीटमेंट इट्स अ ब्रेक थ्रू ब्रेक थ्रू हमेशा जो होता है ना पहला डिस्कवरी हो तो वो एक्सपेंसिव होती है बट इन 10 इयर्स वो प्राइस ड्रॉप
(56:31) हो के आ जाएगा $50 पे उतना वर्क यस आ जाएगा यस जब पहला जीनोम सीक्वेंसिंग होता हुआ था ना हमारा डीएनए सीक्वेंसिंग उसमें लगे थे $100 करोड़ और अभी होता है हो जीोम सीक्वेंसिंग होता $2 में मान लो कि मैं एक बच्चा हूं जिसको एक ऐसे थैलेसीमिया मेजर टाइप इलनेस है और मेरे पेरेंट्स आईपीएल टीम ओनर है उन्होंने दिए है 350 करोड़ फिर क्या होता है मतलब फिर डॉक्टर क्या करेंगे मुझे एक पिल देंगे जिसकी वजह से वो नहीं नहीं पिल नहीं लाइक प्रोसेस लाइक पिल नहीं है इंजेक्शन लाइक एवरीथिंग विल बी थ्रू द थ्रू लाइक इंट्रावेनस पर एक एक ही इंजेक्शन
(57:10) लाइक इट विल बी मल्टीपल बहुत ज्यादा हर सेल को ऑल्ट फिल्टर करना है तो हड्डियों में एक मसल में एक मोस्टली सेल्स हु आर एक्सप्रेसिंग तो ऑलमोस्ट लाइक ऑल सेल्स ऑल वाइटल सेल्स वाओ मतलब पूरे बॉडी में इंजेक्शन यस पूरे बॉडी में नहीं मतलब एक जगह जाएगा वो वैस्कुलर सिस्टम है एंड देन गो टू द मतलब ब्लड फ्लो के थ्रू ओके ओके तो वो जो जीनोम सीक्वेंस है बेसिकली हम उसे ऑल्टर कर रहे हैं। यस राइट? कि ये थैलेसीमिया मेजर की जीन ही निकाल फ्री एक्सप्रेस ही नहीं होगा। लेकिन आप बहुत कुछ कर सकते हो अपने बॉडी के साथ। हां ये पूछ रहा हूं। परमिशंस नहीं मिलते
(57:43) हैं ना। जैसे चाइना ने तो अपने ऐसा लोग बोलते हैं कि उसने एम्ब्रियोज़ बनाए उसने तो यू कैन डू लॉट ऑफ़ एडिटिंग। यू कैन मेक अ सुपर ह्यूमन। आप आप बना सकते हो 10 फीट लंबा सुपर ह्यूमन, मोर इंटेलिजेंट। क्योंकि हमें पता है इंटेलिजेंसी का जीन क्या होता है? स्किन के जीन क्या होता है? आपका नोज का जो तीखापन है उसका जींस क्या है? आई कलर के जींस क्या है? यू कैन चेंज एवरीथिंग इफ यू वांट। बट यू वोंट गेट परमिशन फॉर इट। परमिशन नहीं मिलते ना आपको? अथॉरिटीज परमिशन देना होगा। कौन दे रहा है परमिशन? गवर्नमेंट तो दी है। देयर इज़ अ गवर्नमेंट
(58:16) अथॉरिटी लाइक इंडियन गवर्नमेंट अथॉरिटीज है। इंटरनेशनल अथॉरिटीज हैं। तो आपको इस तरह के एक्सपेरिमेंट करने के लिए मॉनिटरिंग बॉडीज भी होती हैं। एथिकल प्रमोशनंस लेने होते हैं। आपको लगता है चाइना ने सीक्रेटली किया होगा। यस। किया होगा ना कहीं तो। डेफिनेटली किया होगा। चाइना ने किया होगा। किसी को बिना बताए। यस। कहां? हम तो नहीं कर रहे। हम तो नहीं कर रहे। और पीछे ऐसा वो 10 फुट आदमी घूम रहा है। बना सकते हो आप। आप कुछ भी अभी तो आप कुछ भी कर सकते हो। जैसे कि क्या लाइक मसल गेन आप किसी को अब ज्यादा मसुल बनाना है लाइक देयर आर लाइक वेज़ आप कर
(58:46) सकते हो उसको विदाउट स्टेरॉइड यस क्या है वे जेनेटिक साइंस में समझाओ मतलब एक कोई पर्टिकुलर काइंड ऑफ़ लाइक आप मान लीजिए एम्ब्रियोस है ठीक है आपने फर्टिलाइजेशन करा है आईवीएफ उसमें से हमने बनाया एट एम्ब्रियोस यू डू व्हाटएवर इरिटिंग यू वांट मतलब एटलीस्ट तगड़ा बच्चा तो मिलेगा हां तगड़ा क्या और तगड़ा और बीमारी रहित तगड़ा और बुद्धिमान यस बुद्धिमान में नहीं किसी भी स्पीशीज का क्या होता है? अस्तित्व क्या होता है? कि वो ऑफस्प्रिंग प्रोड्यूस कर सके। अगर एक अ एक इंसान ने अपने डीएनए को पास कर दिया इन द फॉर्म ऑफ़ ऑफस्प्रिंग बच्चे पैदा कर दिए।
(59:23) उसका नेचर में काम खत्म हो गया। वो जिस पर्पस के लिए आया वो अपना पर्पस पूरा कर दिया। अब वो नेचर के लिए कोई उसका कोई महत्व नहीं है। नेचर उसको बाहर फेंक देगी। जाओ। बट ह्यूमन का एज क्यों ज्यादा हुआ? क्योंकि ह्यूमन में वह सिलेक्शन हुआ। क्योंकि हमने तो अपने बच्चे पैदा कर लिए। अब अब जो है अपने जो बच्चों के बच्चे हैं ना उनको भी आप फैसिलिटेट करो। उनके केयर करो। जब वो जाएंगे शिकार करने के लिए तो आप उसको केयर करो। इसीलिए हमारी उम्र ज्यादा हो गई। लाइक हमारा डीएनए लाइक मोर लाइक लाइक चिंपैंजी नो लाइक 95 99% हमारा डीएनए चिंपैंजी से मैच करता है। पर उनका लाइफ
(59:58) स्पैन कम होता है। क्यों? क्योंकि उनमें वो ट्रेड नहीं सिलेक्ट हुआ। हमें वो हुआ कि हमें हमें थ्री टू फोर जनरेशन रिप्रोडक्शन को फैसिलिटेट करना है। हमने अपने बच्चों के ग्रैंड जो ग्रैंड सन के भी बच्चों को भी हेल्प करना है उनके सर्वाइवल में। इसीलिए हमारा एज बढ़ गया। हम एंडोरेंस के यस। ओके। यही जीनोम के बारे में थोड़ा सा बात करते हैं। जैसे एक कंजेक्चर होता था कि आपकी उंगली की लेंथ किसी और लेंथ को डिसाइड करती है। इज दैट ट्रू? नो नो इट्स नॉट दैट ट्रू। ये सब कुछ क्या है? नेचर गवर्न कर रही है। हमारा जीन क्या है? हम जीन को नहीं गवर्न कर रहे हैं ना।
(1:00:40) हमारा एनवायरमेंट हमारे जीन को एक्सप्रेस कर रहा है। वो बोल रहा है कि आप यहां जाओ। आप इसके साथ मैट करो। कुछ रिसर्च ऐसे हुए हैं कि एक किसी ब्रोथल में एक मेल को ले जाया गया और बोला गया कि फॉर 10 मैटिंग पार्टनर दिखाया गया। वो मोस्टली जो एवरेज टाइम होता है ना एक मेल को पिक करने में वो लगता है वन सेकंड। हम क्योंकि उसका जीन बोल रहा है कि तुम्हें वो तुम्हें वो वो पिक करना है क्योंकि जो उसके और उसके बीच में जो डायवर्सिटी होगी ना वो मैक्सिमम होगी। ओके यानी कि अगर कोई आपको अट्रैक्टिव लग गया यस उसके पीछे जेनेटिक साइंस का रोल है।
(1:01:17) यस गो बैक टू कॉलेज जहां किसी पे क्रश फॉर्म हो गया तो चांसेस आर कि वो आपकी कम्युनिटी से नहीं है। हां अगर क्रश फॉर्म हुआ है तो इट मींस कि कहीं ना कहीं आप बायोलॉजिकली फिट हो। आपके जो ऑफस्प्रिंग होंगे कहीं ना कहीं वो ज्यादा डवर्स होंगे। हम्म। सो आई हैड अ फॉलो अप क्वेश्चन एक कि जेनेटिक्स और सेक्सुअलिटी का क्या मतलब रोल होता? बिकॉज़ देयर वाज़ अ वेरी इंटरेस्टिंग पर्सपेक्टिव व्हाई एवोल्यूशन जिसमें कहा गया था कि सेम सेक्स सेक्सुअल बिहेवियर माइट बी मेंटेंड इन पपुलेशंस बिकॉज़ दे मे ऑफर अ मी मेटिंग एडवांटेज और हायर फर्टिलिटी टू हेट्रोसेक्सुअल
(1:01:46) रिलेटिव्स टू कैरी देम। क्या? बेसिकली जो जो लोगों को सेम सेक्स प्रेफरेंस है दैट इज़ बिकॉज़ दे हैव बीन जेनेटिकली कोडेड कि जो उनके सुपीरियर जेनेटिक्स वाले रिलेटिव्स हैं सो दे डोंट गेट लाइक अ कॉम्पटीशन ओवर देयर इज़ व्हाट द रेसिस बेसिकली सेस सो इज़ देयर अ प्ले इन लाइक समवन बीइंग लाइक अट्रैक्टेड टू द सेम सेक्स इन जेनेटिक्स आई थिंक व्हाट आर ट्राइंग टू से इज समय के साथ होमोसेक्सुअलिटी बढ़ रही है वो बढ़ेगी बढ़ेगी देखिए क्या होता है कि आप कोई भी होता है स्पीशीज में जब नंबर बढ़ता है लोगों में जब पापुलेशन बढ़ती है तो ऐसे ना अन वियर्ड काइंड ऑफ़ ट्रेट्स आते हैं।
(1:02:22) फॉर एग्जांपल एक बर्ड है उसकी पापुलेशन बढ़ गई भयानक रूप से। मतलब कि जो इकोलॉजी है उसको सस्टेन नहीं कर पा रही है। तो बर्ड्स जाके हर 5 साल में ना सुसाइड कर लेती है। क्योंकि उसको पापुलेशन मेंटेन करना है उसको। दिस इज़ आल्सो लाइक बिकॉज़ ऑफ़ सम म्यूटेशंस इन द इन आवर बॉडी। हम मतलब होमोसेक्सुअलिटी जैसे पता है मुझे बुरा लगता है। और होमोसेक्सुअलिटी तो मुझे लगता है मैक्सिमम लोगों में होती है। मतलब मैक्सिमम मतलब मेरे मतलब दो से 5% लोगों के बीच में होती है। बट कुछ कुछ लोगों में काफी डोमिनेंट होती है। कुछ में नहीं होती है। और होम सेक्सुअलिटी में ये नहीं होता
(1:02:56) है कि वो बंदा या बंदी जो है वो रिप्रोडक्टिवली रिप्रोडक्टिवली एक्टिव नहीं है। वो दे कैन प्रोड्यूस ऑफस्प्रिंग हम बट वो नहीं करते हैं। तो नेचर में म्यूटेशन ज्यादा है बट वो ऑफस्प्रिंग नहीं पता कर पाते हैं। इसीलिए उनकी फ्रीक्वेंसी उतनी नहीं हो पा रही है। अगर वह ऑफस्प्रिंग प्रोड्यूस कर सकते थे तो तो फिर फिर तो आज 40 50% लोग होते हैं होमोसेक्सुअल होते हैं। हम बट जो माइल्ड होमोसेक्सुअल हैं जो कि ऑफस्प्रिंग कर रहे हैं उनकी फ्रीक्वेंसी तो है सोसाइटी में माइल्ड होमोसेक्सुअल। सो बहुत सारे ऐसे वुमेन लड़कियां होती हैं दे अट्रैक्ट लाइक
(1:03:28) वो प्राइमरी तो मेल अट्रैक्ट करेगा बट उनके अंदर थोड़ा सा वो होता है बिहेवियर दे अट्रैक्ट टुवर्ड्स सेम सेक्स जैसे मेल में भी होता है फीमेल में भी होता है हम बट जो एक्सट्रीम वाले हैं वो पास नहीं कर पा रहे हैं ना अपने जनरेशन वो अपने डीएनए को पास नहीं कर पा रहे हैं हम हम मेल ह्यूमन एंड फीमेल ह्यूमन आर डिफरेंट या इन टर्म्स ऑफ लाइक देयर फिजियोलॉजिकल पैरामीटर्स देयर एक्सप्रेशन प्रोफाइल्स दे आर लाइक लाइक मैटिंग पैटर्न देयर सिलेक्शंस वाह वाह ओके मतलब पर्सनालिटी हमारे ही ना कि जैसे जो औरतें होती है उनका जो लेफ्ट टेंपोरल लोब एंड राइट टेंपरल लोब जो उनका
(1:04:09) जो सोचने का तरीका होता है बहुत सारे मैंने मैं देखता रहता हूं ऐसे टॉक्स कि फीमेल उनका सोच अलग होता है दे आर वै स्मार्ट दे कैन बी लाइक वो फोकस ज्यादा हो जाती हैं दे कैन इज़ली मूव आउट सो हम बहुत सारे बातें करते हैं ना लाइक फीमेल वर्सेस मेल में। सो लाइक वो उनका जो जेनेटिक एक्सप्रेशनंस होते हैं जो उनका बॉडी का मैकेनिज्म होते हैं जो डीएनए का मेकअप है दे दे आर ऑल रिसोंसिबल बिहाइंड दैट बिहेवियरल चेंजेस हम हम तो दैट इज कमिंग फ्रॉम देयर डीएनए इट्स नॉट लाइक देयर बिहेवियर हम हम इसका कोई जेनेटिक बेसिस नहीं है बट आप अगर उसको एनालिसिस करोगे ना बाय डीएनए
(1:04:47) सीक्वेंसिंग डेटा के बेसिस पे एंड द एक्सप्रेशन डेटा के बेसिस पे तो मेल चिंपैंजी एंड मेल ह्यूमन दे आर मोर क्लोज बिकॉज़ दे आर जो मेंटालिटी है दे जो बॉडी मैकेनिज्म है जो उनका फिजियोलॉजी है दे आर मोर क्लोज टू ईच अदर कंपेयर टू मेल ह्यूमन एंड फीमेल ह्यूमन फीमेल ह्यूमन एंड फीमेल चिंपैंजी नहीं फीमेल ह्यूमन ओ एंड मेल मेलन यस आपको लगता है 1000 साल बाद भी मेल और फीमेल्स रहेंगे हम 80% के आसपास वनरेबल है एक्सटिंशन के लिए हम और उसमें से 80% नेचुरल है बट 10% आप और ऐड कर दीजिए तो अभी हम वनरेबल हो गए 90 20% टुवर्ड्स एक्सटिंशन क्योंकि हम खुद भी
(1:05:29) रिसोंसिबल हो गए हैं अपने एक्सटिंशन के लिए। 80% तो नेचर ने हमने बोला कि आप खत्म हो जाओगे। 10% जो हमारे जो चेंजेस हैं जो मैनमेड चेंजेस हैं वो हमें रिस्पांसिबल बना रहा है एक्सटिंशन के लिए। हम हम तो अभी जो प्रोबेबिलिटी है 90% चांसेस हैं एक्सटिंशन के इन नेक्स्ट 100 मे बी 1000 इयर्स। अनलेस हमारी बुद्धि उस हद तक बढ़ जाए। अह कि एजीआई बने और एजीआई से जीन के बारे में पता चले और फिर बहुत सही जेनेटिक एडिटिंग हो जाए। आप जितना जेनेटिक एडिटिंग करोगे आप ह्यूमैनिटी को उतना आप चोट पहुंचाओगे। क्योंकि जो जो नेचर होता है वो क्या बोलता
(1:06:07) है कि जिसको सिकल सेल एनीमिया हुआ है या थैलेसीमिया हुआ है वो एक बैड ट्रेट है। वह आगे ना जा पाए। वो खत्म हो जाए। लाइक डायबिटीज वो आगे ना जाए ट्रेट। बट हम इंसानों ने क्या किया कि डायबिटीज में भी हम उनको बचा रहे हैं। जिनको बीमारियां है उनको भी बचा रहे हैं। तो हम उन ट्रेड्स को उन डीएनए को हम पास कर रहे हैं। दिस इज अगेंस्ट नेचर। तो हर तरह के जो हमारे जो बैड डीएनए हैं उनको हम फोर्सफुली जो है नेक्स्ट जनरेशन में पास कर रहे हैं। नॉट ओनली पास कर रहे हैं। उसको हम प्रोपगेट भी कर रहे हैं। मल्टीपल कॉपीज़ बना रहे हैं। लाइक एक बच्चा हुआ,
(1:06:40) पांच बच्चे हुए, पांच से 50 हुए। तो हम उसको ना फोर्सफुली जो है उसको नेचर को दे रहे हैं हम। तो इसीलिए मैं बोल रहा हूं 80% तो नेचर हमको करेगा एक्सटिंक्ट। 10% हम खुद रिसोंसिबल हैं। तो आपको क्या लगता है एज अ साइंटिस्ट क्या होगा? और आने वाले टाइम में यही होने वाला है कि हम जो है ज्यादा कमजोर होंगे। मसल्स की रिक्वायरमेंट हमारी रही नहीं। क्योंकि पहले क्या था? आज के अगर आप जाओगे 5 लाख इयर्स 50 लाख साल से लेकर अभी तक जैसे ह्यूमन डवर्सिफाइड हुआ है चिमजी से। कोई भी एक लीनिएज ह्यूमन की वो कैसे सर्वाइव की? बिकॉज़ ऑफ़ मसल पावर।
(1:07:11) तो जो मसल है ना वह एक ऐसा प्रोटीन है कि वह हमारा जो सर्वाइवल में काफी सबसे ज्यादा उसका स्ट्रांगेस्ट रोल है। बट उस मसल पावर की अब कोई जरूरत नहीं रही। अब तो कुछ भी नहीं रहा ना मसल पावर की कोई जरूरत नहीं है। तो वो तो ट्रेड खत्म हो जा रहा है। जिसके पास मसल पावर है उनको भी उतना ही मौका मिल रहा है रिप्रोडक्शन करने का। जिसके पास नहीं है उनको भी उतना ही मिल रहा है। इट ऑल डिपेंड ऑन योर ब्रेन और योर इंटेलिजेंस। तो इंटेलिजेंस हो गया है सबसे बड़ा एक सिलेक्टेड ट्रेट हो गया है नॉट द मसल पावर हम ओके अभी सबके फेवरेट सेक्शन में एंटर करते
(1:07:48) हैं भारतीय कम्युनिटीज जैसे पिछली बार मैंने आपसे एक पूछा था पंजाबियों के बारे में आपने कहा कि वो लैक्टोज डाइजेस्टिंग जीन ज्यादा होती है लैक्ट लैक्टेज पर्सिस्टेंस लैक्टेज पर्सिस्टेंस तो बेसिकली दूध ज्यादा पी सकते हैं ओवर द जनरेशंस पंजाबीज की फिजिकल साइज बड़ी है। यस बट बहुत सारे रिक्वेस्ट आए दूसरे कम्युनिटीज के बारे में। हम आप कोई हाईलाइट करना चाहोगे? देखिए जो अभी नए-नए जो रिसर्च आया है ना हमारे जो हमने और भी रिसर्च करते रहते हैं और हमने जो है काफी सारा पब्लिकेशंस भी कर रहे हैं इसके ऊपर। हां। तो क्या हुआ है कि एक पूरे इंडिया में जो
(1:08:22) पैटर्न ये है नॉर्थ वेस्ट ऑफ इंडिया लाइक पंजाब, गुजरात, राजस्थान, हरियाणा इनके अंदर जो लैक्टोज को ब्रेकडाउन करने का जीन है। ठीक है? क्या हुआ कि लास्ट फोर 5000 इयर्स में ना बहुत सारे फेमिनस हुए जिसमें सारे एनिमल्स मर गए और सूखा पड़ गया। खेतीबाड़ी भी नहीं रही। तो प्रोटीन कहां से हम लेंगे? तो प्रोटीन को लेने का एक सबसे जो एकमात्र तरीका था कि वहां की जो लोकल ब्रीड्स थी ना काऊ जो कि वो सर्वाइव करती थी। आप उनका आप जो है मिल्क कंज्यूम करिए। तो यू विल हैव द प्रोटीन बट सेकंड ग्रेडर प्रोटीन नॉट द फर्स्ट ग्रेडर प्रोटीन। तो उनके अंदर सिलेक्शन हुआ। उनके
(1:08:58) अलावा दो कम्युनिटी ऐसी भी है। एक टोडा कम्युनिटी टोडा ट्राइब्स हैं तमिलनाडु में। दे हैव उनके अंदर जो लैक्टोस को डाइजेस्ट करने का जो जीन है ना मैक्सिमम है पूरे वर्ल्ड में। वाओ एंड गुर्जरर्स गुर्जर जो कश्मीर में एंड सम पार्ट ऑफ़ जम्मू में जो गुर्जरर्स हैं जो लाइक ट्रेडिशनल पेस्टल ग्रुप है हम उनके अंदर भी मैक्सिमम है पूरे वर्ल्ड में। हम बट उसके अलावा पंजाबीज में सबसे ज्यादा पंजाबीज़ में रोर्स में रोअर एंड चार्ट्स में। इसीलिए वो क्या किया कि ओवर द टाइम लाइक पिछले लास्ट 5000 इयर्स से उनको प्रोटीन की कमी नहीं होने पाई। एट द सेम टाइम जो अदर कम्युनिटीज हैं दे
(1:09:37) सर्वाइव्ड ऑन मिलेट्स या जो ना पुअर ग्रेड ऑफ़ कार्बोहाइड्रेट। तो आप 5000 सालों का सिर्फ एक छोटा सा टाइम है। उसमें आप देखो कि 5000 साल में कैसी ट्रांसफॉर्मेशन हो गया है। एक जो कम्युनिटी काफी हट्टी कट्टी तगड़ी हो गई। बिकॉज़ ऑफ़ सिंगल म्यूटेशन। हम ओबीसी 30 टू 40% लोगों के म्यूटेशन की वजह से कितने स्ट्रांग हो गए। अब जिनके अंदर म्यूटेशन नहीं था वो हो सकता है कि कमजोर हो गए या हो सकता है कि उन्होंने दे हैव फॉर्म अ डिफरेंट कम्युनिटी बट जो 30 40% म्यूटेशन हैं दे फॉर्म अ डिफरेंट कम्युनिटी हम लाइक कुछ ग्रुप्स है ना पंजाब में भी दे
(1:10:09) और सभी नहीं हटे हैं 30 40% ही है बट उनमें आप देखोगे तो मैक्सिमम जो है लैक्टोज का वो म्यूटेशन हुआ है हम एंड देयर अदर इवेंट कॉल्ड फाउंडर इफेक्ट लाइक जेनेटिक मोटर नेम अगर आपके अंदर कोई ट्रेड अच्छा नहीं है आप नहीं ब्रेकडाउन कर सकते हो डेोज का तो कम्युनिटी खत्म हो जाएगी ओवर द टाइम। ठीक है? जिसके अंदर म्यूटेशन है वही सर्वाइव करेगी। तो इस तरह के बॉटल लिंक्स भी इंडिया में बहुत सारे हुए हैं। कौन से भारतीय स्टेट के लोग सबसे ज्यादा मिक्स्ड हैं? सबसे ज्यादा मिक्स्ड हैं। सबसे ज्यादा डवर्स। तो अगर हम स्टेट की बात नहीं करेंगे। हम
(1:10:43) साउथ वर्सेस नॉर्थ की बात करेंगे। तो नॉर्थ में ज्यादा मिक्सिंग हुई है। साउथ में कम हुई मिक्सिंग। क्योंकि एशिया से लोग आते गए। इन्वेशनंस होते गए। यस यस। ओके। यस। ओके। बट नॉर्थ इंडियंस में मिक्सिंग तो हुई है बट मेजर मिक्सिंग जो है ना ईरान से है सेंट्रल एशिया से है एंड लोकल जो उनको बोलते हैं अंदमानीज डीएनए वो भी सबके अंदर है सबसे पहले अंडमानी टाइप के थे लोग फिर बाद में जो है ईरान वाला मिक्सिंग हुआ फिर बाद में सेंट्रल एशिया से मिक्सिंग हुआ ठीक है सो नाउ लाइक वी हैव थ्री मेजर इंसेस्ट्री बट साउथ इंडिया में क्या है कि मोस्टली दे
(1:11:16) हैव द ओंगे वाला इंसेस्ट्री है यानी ईरान वाला है सेंट्रल एशिया का उतना नहीं है जितना कि नॉर्थ इंडिया में है ठीक है 360 बट सरप्राइजिंगली इंडिया में आप देखोगे इतने इन्वज़ंस हुए ना इन्वज़ंस जो है ना जब 4500 इयर्स पहले हमारे पास टेक्नोलॉजी आ गई कॉपर के डेडली वेपन्स बनाने का हम बहुत खतरनाक वेपन्स मतलब कि वो वेपंस पूरी दुनिया में आपको नहीं मिलेंगे हम 8 केजी के एंटीना सोर्स हॉर्बोंस तरह-तरह के बुल को मारना है तो उसके लिए अलग वेपन है एलीिफेंट को मारना है तो अलग वेपन है उस समय इन्वज़ नहीं हुआ वो उस समय से लेकर के लास्ट 2000 इयर्स इन्वज़न नहीं हो पाया
(1:11:52) इंडिया में। बट 2000 के बाद ऐसा क्या हुआ इंडिया में कि उसके बाद इन्वज़न पे इन्वज़ हुआ। लाइक हंस आए, कुशांस आए, देन एलेक्जेंडर की आर्मी आई। कुछ तो वैसा हुआ होगा इंडिया में जिसकी वजह से जो है इतना सारा इन्वज़न हुआ। आपको क्या लगता है? हमें लगता है कि पापुलेशन डेमोग्राफी मतलब इतनी पापुलेशन बढ़ गई। एंड दिस किंगडम्स कॉन्फ्लिक्ट्स बिटवीन डिफरेंट किंग किंगडम्स। वह एक मेजर जो है एक रीजन था इन्वज़ का और उसके पहले तक जो हमारी सोसाइटी थी काफी स्ट्रिक्ट थी एंड देन वी वर फॉलोइंग द ऋग्वेद्स वेरी स्ट्रिक्टली तो उसके पहले की जो सोसाइटी थी दे वर लाइक
(1:12:36) काफी क्या बोलते हैं उसको ओरिएंटेड एलाइंड सोसाइटी थी लाइक दे यूज्ड टू फॉलो सम काइंड ऑफ़ स्ट्रिक्ट रूल्स बट उसके बाद जो जब ये महाजनपदा और जितने भी डायनेस्टीज बनने स्टार्ट हुई ना किंगडम किंग आपस में झगड़े तो वो एक मेजर रीज़न था क्योंकि हर कोई अमीर हो गया हर कोई प्रोस्परस हो गया दुनिया भर के साथ ट्रेड हो रही थी और फिर ह्यूमन ईगो आ गया बीच में फिर उसके बाद ना इंडिया में एक डिफरेंट सोसाइटी बनी जो अभी भी चल रही है लाइक मोस्टली एग्रीकल्चर बेस्ड क्योंकि जो जो हमें वेपंस मिलते हैं ना मोस्टली मिलते हैं अप टू 3000 इयर्स पहले तक उसके बाद
(1:13:11) नहीं मिलते हैं वेपंस उतने ज्यादा ओके दैट्स वी कॉल ओसीपी ऑक्रेट कलर पोटरी कल्चर 4500 इयर्स से 3000 के बीच में हमें सबसे ज्यादा मिलते हैं वेपंस। उसके बाद से वेपंस मिलने बंद हो जाते हैं। कम हो जाते हैं। मतलब उसके पहले हम योद्धा थे। उसके हां उसके पहले थे। हम हम योद्धा थे। उसके पहले मुझे लगता है कि सेटल्ड सोसाइटी बन गई। लाइक एग्रीकल्चर बेस्ड, पेस्टल बेस्ड, प्रोस्पेरस सोसाइटी जो जो कि इन्वज़न कभी देखा ही नहीं था। अचानक से सेकंड, थर्ड सेंचुरी, बीसी के आसपास से लेकर के फोर्थ सेंचुरी एडी तक इन्वज़न की मतलब वन बाय वन इन्वज़न स्टार्ट हो गया। हम
(1:13:45) और ये लोग आते थे सेंट्रल एशिया से यस मोस्टली सेंट्रल एशिया जो सिल्क रूट का रास्ता है सिल्क रूट तो वो तो ट्रेडिंग का रास्ता है ट्रेड के लिए बट दे इनवेटेड थ्रू अदर रूट्स ओके एंड दे मिक्स्ड विद लोकल पपुलेशंस फोर्सफुली हम हम बहुत सारे रुक गए यहां पे दैट्स व्हाई ना लाइक हम कंफ्यूज हो जाते हैं अपने डीएनए में कि बहुत सारे अलग-अलग तरह की इंसिस्टिटी मिल रही है एंड देन इंडिया में भी काफी माइग्रेशंस हो रहे थे नॉर्थ से लोग साउथ में जा रहे हैं हमने एक अभी स्टडी की लद्दाख में और हमें हमने देखा कि अबाउट 3000 इयर्स पहले नॉर्थ इंडियंस जाके
(1:14:18) लद्दाख में बस गए हैं। 3000 इयर्स पहले इसका ना तो कोई एविडेंस है ना तो कोई पोर्ट्री का एविडेंस है ना तो कोई लिटरे लिटरेरी एविडेंसेस है। बट माइग्रेशंस दिख रहा है मेजर माइग्रेशंस जेनेटिक स्टडीज से यस तो जो आज की डेट में लद्दाखस हैं लद्दाखस में हमें मिल रहा है नर्थ इंडियन हिस्ट्री हम नॉर्थ इंडियन मतलब हरियाणा पंजाब दिल्ली के रीजन से बट फिर ओवर द इयर्स उनकी लुक बदल जाती है यस वेदर की वजह से ये वो ओके ओके वाओ जैसे कि हम कहते हैं कि अगर किसी के ब्लू आइज हैं तो शायद इनके नियांडोथ पूर्वज रहे होंगे अकॉर्डिंग टू जेनेटिक स्टडीज उसी
(1:14:55) तरह कुछ ऐसे ट्रेट है क्या? जैसे इंडियन ट्राइब्स हैं या जो नॉर्थ ईस्ट के ट्राइब्स हैं वो अल्कोहल को डाइजेस्ट बहुत ईली नहीं कर पाते हैं। जो एशियंस में भी ये ट्रेड पाए जाते हैं। हां। तो बट वो डिस्पाइट ऑफ़ दैट वो काफी कंज्यूम करते हैं। हम हम तो ये ट्रेड भी आया है बिकॉज़ ऑफ़ देयर एनसेेस्टर्स। ठीक है? बट एट द सेम टाइम जो नॉर्थ इंडियंस हैं या नार्थ ईस्ट ऑफ़ इंडिया, दे हैव लाइक सम काइंड ऑफ़ सिलेक्शंस टु ब्रेक डाउन द अह अल्कोहल। लाइक वी हैव मोर एक्सप्रेशन ऑफ लै अल्कोहल डिहाइड्रोजेनेस दे जीन तो बट इंडिया में पता ही नहीं लोगों को उड़ीसा के ट्राइब
(1:15:33) छत्तीसगढ़ ट्राइब्स पूरा अपना वो महुआ पिए जा रहे हैं एंड मोस्टली जो लीवर की प्रॉब्लम हो रही है उसी महुआ की वजह से हो रही है हम अ बंगालीज के बारे में कोई स्पेशल जेनेटिक स्टडीज है नहीं नहीं बंगाली एंड बिहारी आर सेम वेरी सिमिलर वेरी सिमिलर कोई डिफरेंस नहीं है ओके ओके व्हिच अदर ग्रुप्स आर सेम महाराष्ट्रियंस किससे महाराष्ट्र भी मिलता है नर्थ इंडिया से नर्थ इंडिया तो महाराष्ट्र में कई सारे ग्रुप्स हैं लाइक चितवन चितपवन ब्राह्मण्स हैं एंड एंड दिस कोकन ब्राह्मण है दे हैव लाइक मोर नॉर्थ वेस्ट इंडियन जीन लाइक मोस्ट जीन फ्रॉम द हरियाणा
(1:16:12) ओके तो यस वो माइग्रेशन हुए हैं एंड थोड़ा सा जो है इधर से आपका सिंध रीजन पाकिस्तान रीजन का भी उनके अंदर एनस्ट्री है ठीक है भले ही वो मराठी है बट जेनेटिकली दे आर मोर क्लोजर टू हरियाणा वाओ हरियाणा एंड देन अदर अदर एक्सट्रीम नर्थ ईस्ट ऑफ साउथ एशिया यानी कि आप कह रहे हो कि जेनेटिक स्टडीज के मुताबिक आप ऐसे बता सकते हो कि कभी ह्यूमन माइग्रेशंस हुए हैं। यही एंथ्रोपोलॉजी है। लाइक केरला केरला में लोग बोलते हैं कि जैसे कुर्गीज़ हैं नायर्स वो बोलते हैं कि मेरे जो पूर्वज थे वो वारियर्स थे वो ईरान से आए थे। बट वो लोकल जो वहां के ट्राइब्स
(1:16:43) हैं उनसे मैच करता हूं डियर है। ठीक है? तो आप जो जितने भी ओरल हिस्ट्री होती है ना आप उसको डिस्प्रूव कर सकते हो। प्रूव या डिस्रूव कर सकते हो। लाइक जो नर्थ इंडिया में जो ब्राह्म्स हैं वो बोलते हैं कि हम तो अलग हैं बट दे आर सेम लाइक ब्राह्मिस चमार एंड यादवास दे आर बिट डिफरेंट बट चमार ब्राह्मिस एंड लाइक कोई ज्यादा डिफरेंस नहीं है राजपूत और मराठा के डीएनए मैच करता है राजपूत लाइक इट्स अ लोकल फॉर्मेशन लाइक राजपूत का भी जो फॉर्मेशन है ना लाइक इट्स अ डिफरेंट ग्रुप एंड महाराज जो मराठाज़ हैं लाइक दे आर डिफरेंट जेनेटिक मेकअप बट वो
(1:17:18) बाद में काफी सारा मिक्सिंग हुई है वो बट अगर आपको देखना हो कि मराठा एंड राजपूत ऑफ़ उत्तर प्रदेश तो यू कैन सी लाइक दे हैव अ डिफरशिएशन उनको दे कैन यू कैन पुट देम एन डिफरेंट प्लेसेस ओके बट कुछ ग्रुप्स हैं तमिल ब्राह्मस दे विल हैव मोर लाइक नॉर्थ इंडियन एनटी इट्स कमिंग फ्रॉम अबाउट 35 40 जनरेशन बिफोर प्रेजेंट मतलब लाइक कितने साल पहले अबाउट 700 800 इयर्स पहले लाइक सम माइग्रेशन माइग्रेशन तो कंटीन्यूअस प्रोसेस थी ना लाइक ड्यूरिंग द टाइम ऑफ़ शंकराचार्य एथ सेंचुरी एडी नाइन सेंचुरी एडी में भी काफी मूवमेंट्स हो रहे हैं साउथ से लेकर नॉर्थ से नर्थ से साउथ में
(1:17:49) तो ये जो मिक्स मिक्सिंग का पैटर्न मिक्सिंग का इवेंट्स है। लेकिन अ कंटीन्यूअस प्रोसेस लाइक नर्थ ईस्ट इंडिया में काफी सारे नॉर्थ इंडियन माइग्रेशन किए हैं। लाइक यू कैन सी इन अरुणाचल प्रदेश अरुणाचल में हम लोगों को दिख रहा है नॉर्थ इंडियन एन हिस्ट्री हम बट दे लुक लाइक अ कंप्लीटली यू नो तिब्बत बर्मन बट उनके अंदर डीएनए वाइज़ लाइक दे हैव द नॉर्थ इंडियन एनसे हिस्ट्री इन सम प्रोपोशन हम लाइक नागाज़ नागाज़ को क्या बोलते हैं कि दे आर तिब्बत बबंस एंड नागाज़ आर लाइक मोर को क्लोज टू द ईस्ट एशियन बट हमने जब उनका देखा एन हिस्ट्री देखा वी हैव गॉट सम
(1:18:19) सैंपल्स डेटिंग बैक टू 4ाउ इयर्स बिफोर प्रेजेंट हमने उसका जब डीएनए देखा ना तो हमें चला पता है कि जो वो जो डीएनए है एंड जो मॉडर्न नागाज़ हैं उसमें बहुत डिफरेंसेस हैं। हम आज के सिनेरियो में क्या बोलते हैं कि नागाज़ देखो वो तो नॉर्थ ईस्ट इंडियन है वो तो क्लोज टू द ईस्ट एशिया बट ऐसा नहीं है। नागा वहां पर बहुत पहले से है। एंड देन द नागालैंड एक ऐसी जगह हो सकती है कि हो सकता है कि वहां तिब्बत बर्मन जो लैंग्वेज ना जो पूरा का पूरा हिमालयन रेंज में लेकर के साउथ ईस्ट एशिया म्यांमार सम पार्ट ऑफ़ चाइना जो बोलते हैं लैंग्वेज आज के टाइम में हो सकता है वहां
(1:18:52) इवॉल्व हुई हो। उसमें हम काम कर रहे हैं अभी। नागालैंड में यस मतलब नागालैंड उसका ओरिजिन पॉइंट है उन सारे पपुलेशन हो सकता है ये डाटा तो हमारा वही सजेस्ट कर रहा है गोत्र सिस्टम पे जेनेटिक स्टडीज हुई है क्या हां हमने किया है काफी सारा काम किया है उसका एक जेनेटिक बेसिस है गोत्र सिस्टम का एंड इट्स नॉट वेरी एंशिएंट सो अप टू 2000 इयर्स बिफोर प्रेजेंट गोत्र सिस्टम में शादियां हो रही थी फ्रीली दूसरे ग्रुप में जब ये जब इन्वज़न स्टेट हुआ ना स्टार्ट हुआ एंड देन फर्स्ट जब मुगल्स आए उसके बाद से काफी स्ट्रिक्ट हो गया गोत्र सिस्टम गोत्र
(1:19:24) मतलब कि आपको एक गोत्र में करना है। गोत्र काफी स्ट्रांग हो गया। इन द फॉर्म कास्ट में बन गया वो। अदरवाइज उसके पहले गोत्र सिस्टम यह था कि आपको डिजीज से बचाना है। जस्ट टू इंक्रीस द जेनेटिक डायवर्सिटी। मतलब ओरिजिनल लॉजिक ये था कि खुद के गोत्रों में शादी नहीं करनी। यस। दिस वाज़ फॉर जेनेटिक डायवर्सिटी। पर यह काफी सरप्राइजिंग है कि ऋग्वेद में जो भी ऋग्वेद को लिखा जो ग्रुप्स ने लिखा उनको इस बात इसके बारे में नॉलेज थी कि जेनेटिक इनब्रीडिंग या जेनेटिक मिक्सिंग इन सेम ग्रुप कितना हानिकारक होता है हेल्थ के लिए हम हम इसका यही बेसिस है गोत्र सिस्टम
(1:19:58) बनाने का देखिए गोत्र यूरोप में क्यों क्यों नहीं हुआ क्योंकि यूरोप की पापुलेशन कभी इतनी बढ़ी ही नहीं कि गोत्र बनाने की ही जरूरत पड़े बट इंडिया में जब एक्सप्लोजन हो रहा था ना पापुलेशन तब बढ़ रही थी रूप से उस समय जरूरत पड़ा कि गोत्र हमें बनाना चाहिए जस्ट टू मेंटेन द जेनेटिक हेटेरोजेने या आप एक्सैक्टली समझा सकते हो कि इसका लॉजिक क्या है कि जेनेटिक स्टडीज से हम इंसानों की जर्नी इंसानों की माइग्रेशन ये वो कैसे समझते हैं या क्या होता है कि जैसे मान लीजिए कि आपकी शादी होती है कल को आपके बच्चे होंगे आपका एसे हिस्ट्री होगा उसप ना आपकी एन
(1:20:32) हिस्ट्री कहां से आ रही है आपके फादर साइड से हां आपके फादर कहां के थे पंजाब पंजाब नो एंड उनके ग्रैंड फादर भी पंजाब के होंगे तो बट आपकी अगर वाइफ मान लीजिए कि गुजरात से मान लीजिए ठीक है तो आपके जो बच्चे में वो दिखेगा ना एक साइड वो दिखेगा पंजाब से ठीक है फिर जब उनके बच्चे होंगे वो कहीं और से शादी कर लिए तो हमने एक जनरेशन को माना है 25 साल मान लीजिए एवरेज 25 साल तो हमने हमें हमें अगर दिख रही है कि मान लीजिए कि परसेंटेज ऑफ़ आपका जो डीएनए है ना002% आ रहा है पंजाब से उस बच्चे में आज के 100 जनरेशन के बाद फिर हम मल्टीप्लाई कर देंगे
(1:21:08) 25 साल से कि 02 कब जो अभी है कितने जनरेशन में हुआ होगा 100 को माना 100 से 50 हुआ 50 से 12.5 हुआ लाइक 25 से करते तो फिर हम उसको बताते हैं कि इतने जनरेशन पहले ये मिक्सिंग हुई होगी हम हम ओके तो यही ध्यान में रखते हुए और कहां से माइग्रेशंस हुए हैं इंडिया में फ्रॉम इंडिया एंड इंटू इंडिया देखिए इंडिया में इंडिया से ये लोग जा रहे थे ओमान जा रहे थे इंडिया से ईरान जा रहे थे ईरान यहां से जा रहे थे मेसोपोटामिया जा रहे थे सीरिया जा कर रहे थे ड्यूरिंग इंडस टाइम तो आज के 5000 साल पहले जो मैरिटाइम ट्रेड था ना बहुत पीक पे था। अभी
(1:21:48) आपको पता है कि एक अभी शिप गया था स्टिच शिप एक प्राइम मिनिस्टर के इकोनमिक एडवाइजर हैं संजू सनी। हां हां हां तो ओल्ड स्कूल शिप बनाई। हां विदाउट नेल्स हम हम और एग्जैक्टली उन्होंने उसी टाइम में पहुंचा जो कि रिकॉर्डेड था कि इतने दिन लगते हैं बिल्कुल वहां तक पहुंचने में। तो उस समय टेक्नोलॉजी काफी एडवांस थी ट्रेडिंग की तो लोग जाते थे और अगर जा रहे हैं वहां पे तो अपने कुछ सिग्नेचर भी छोड़ा उन्होंने पॉटरी लाइक हड़प्पन पॉटरी मिलती है ओमान में तो वो तो एविडेंसेस हैं केरला में एक साइट है पटनम जहां पे हमें वो मिलते हैं काफी सारे पॉटरी स्टेट मिलते
(1:22:25) हैं रोम के तो जो हमने वहां के लोगों को जब वो किया डेटिंग किया एएमएस डेट तो चला पता है कि उनका जो डेट आ रहा है 2500 साल पहले का तो 2500 साल पहले रोमंस आ रहे थे वहां पे एंड आ ही नहीं रहे थे वहां से सेटल भी वो वहां के लोगों से मिक्सिंग भी किया उन्होंने थोड़ा इटालियन डीएनए थोड़ा सा है अभी भी है वहां पे कहां केरला में केरला में वाओ और फिर केरला में जस भी आए जस भी आए लगभग नाइन 10थ सेंचुरी में है उनका भी वहां पे जेनेटिक कंट्रीब्यूशन है लाइक पारसी आए इंडिया में एट सेंचुरी में गुजरातियों में आपको पारसी दिखेगा उनका भी उसमें दिखेगा
(1:22:57) कुछ कुछ सिग्नेचर्स तो पारसी जब आए इंडिया में तो सेकंड अप टू टू जनरेशन उन्होंने लोगों से शादियां की बट उसके बाद से उन्होंने शादियां करनी बंद कर अगेन वो फिर से एंडोगमिक प्रैक्टिस से स्टार्ट कर दिया क्योंकि उनको अपना रिलजन बचाना था। सिक्स सेव सेंचुरी में क्या हुआ कि अरब्स ने इनवेट किया ईरान पे सारा वहां पे कन्वर्जन स्टार्ट हो गया। तो जो जरस्टियन रिलजन है ना पारसी का जोरस्टियंस वो अपने रिलजन को बचाने के लिए कुछ लोग मूव किए। तो सबसे जो सैक्रेड प्लेस था वो इंडिया था उस समय वो इंडिया सबसे पहले आए गुजरात में। एक जगह संजान वहां पे
(1:23:31) उन्होंने अपने कॉलोनी बनाई और वहां के राजा से हेल्प मांगी। राजा ने उनको दे दिया लैंड कि आप ये लैंड लो यूज़ करो अपना बट मोस्टली वो मेल थे फीमेल बहुत कम थी उसमें तो उनको जो है शादी करने का भी राइट मिला वहां पे डिस्पाइट ऑफ़ देयर डिफरेंट लैंग्वेज ठीक है शादियां भी की लोकल से और सर्वाइव की तो अभी तब से पारसी हैं गुजरात में आज देखिए पारसी कितने प्रोस्परस कम्युनिटी है हम हम पारसी में जेनेटिक स्टडीज हुई है यस मैंने किया है तो क्या-क्या निकला पारसी में काफी ज्यादा वो है एंडोगमिक जो जींस हैं जो काफी जो मैक्सिमम है पूरे इंडिया में पारसीज में ही है रिसेसिव जींस
(1:24:11) जो होता है ना जो वो लोड काफी ज्यादा है उनके अंदर क्योंकि पारसी जो है शादी दूसरे कम्युनिटी में नहीं कर सकते हैं अगर आपने कर लिया तो आपको कम्युनिटी छोड़ना पड़ेगा दैट्स व्हाई देयर साइज वाज़ अबाउट 10000 इन 2002 अभी उनके जो पापुलेशन साइज है 50000 के आसपास है हाफ हाफ तो वन ऑफ़ द मोस्ट वनरेबल कम्युनिटी ऑफ़ द वर्ल्ड पारसीज़ हैं स्मालेस्ट रिलजन ऑफ़ द वर्ल्ड और उसमें एक और वो आपको बड़ा इंटरेस्टिंग फाइंडिंग मिलता है कि जो ईरान के जो पारसी हैं जब अरब से आए तो पूरा फोर्सफुली मिक्स कर दिया तो जो अभी भी वहां जो पारसी को जो फॉलो कर रहे हैं
(1:24:47) ना जो जोस्टियन रिलजन को भले ही वो रिलजन फॉलो कर रहे हैं बट जेनेटिकली जेनेटिकली दे आर अरब्स हम हम ठीक है बट जो इंडिया में आए वो तो पारसी तो है ही बट जेनेटिकली दे आर एनसेेस्टर टू द जोरियंस इन ईरान हम मतलब जो फर्स्ट सेंचुरी में जो रहे हैं हमारे जो रशियंस उनसे सबसे ज्यादा क्लोजनेस है जो इंडियन जो जो इंडियन जो पारसीज हैं हम आई वुड अस्यूम कि अर्बन इंडियन सेंटर्स में रहने से [नाक से की जाने वाली आवाज़] शायद बच्चे ज्यादा हेल्दी हो रहे होंगे बिकॉज़ ऑफ क्रॉस कम्युनिटी यस यस राइट यस राइट तो अभी आने वाले टाइम में क्या होगा जो
(1:25:25) अर्बन सेटअप में है वो ज्यादा बच्चे हेल्दी होंगे क्योंकि जो अवेयरनेस है वो अर्बन लोगों में पढ़े लिखे लोगों में ज्यादा है एक तो आपका जो है शादियां होंगी डवर्स जेनेटिकली डवर्स लोगों से आपका प्रॉपर हेल्थ केयर होगा आपका जो है डाइटरी जो पैटर्न भी चेंज हो रहा है इंडिया में जो अर्बन सेटअप में है लोगों को पता है क्या खाना चाहिए क्या नहीं खाना चाहिए बट गांव में जो परिस्थिति है जो वो शायद अभी टाइम लगेगा उसको चेंज करने में आप मानते हो कि ट्रॉमा भी पास ऑन होता है ट्रॉमा दुख पीड़ा देखिए उसके लिए ना बहुत सारे जींस होते हैं ऐसे जीन जो होता है डीएनए ना बहुत
(1:26:02) सारे ट्रेड्स के रिसोंसिबल होता है। लाइक देयर इज़ अ कॉज ऑफ़ डीएनए कॉल्ड क्रिमिनल जीन। लाइक ना जो अग्रेशन या जो क्राइम करने का जो मेरा बाप चोर है जीन [हंसी] तो वो भी होता है। वो भी होता है बहुत आसान होता है। एंड देयर आर मेनी क्रिमिनल ट्राइब्स रिकॉर्डेड बाय ब्रिटिशर्स इन इंडिया। मैं उनका नाम नहीं लेना चाहता हूं। बट दे हैव स्टडीड दे हैव एनालाइज्ड। तो वैसे ही ट्रॉमा का भी होता है। अगर आप बहुत जेनेटिकली आप क्रोनिक डिप्रेशन में हो आप तो उसके लिए भी जींस होते हैं रिसोंसिबल वो भी पास होगा। डेफिनेटली पास होगा। दे पीढ़ी दर पीढ़ी पास होती ही रहती रहती है।
(1:26:36) जेफरीस्टीन के एक लिस्ट में उसका ईमेल था दैट ही क्लेम दैट हिज अ जुवियस एनसेेस्ट इज व्हाट कॉज्ड ह डेवियंस दैट ही वास् ब्लेमिंग इट फॉर अ लॉट ऑफ लाइक यू नो ह प्रॉब्लम्स। सो जैसे आपने कहा कि ट्रॉमा आपको आसान होता है तो कुड दैट हैव आल्सो शेप्ड हिम टू व्हाट ही वाज़। यस यस यस हो सकता है। डेफिनेटली हो सकता है। देखिए एक तो होता है आपका जेनेटिक जेनेटिकली भी प्राइस होता है। एक होता है ट्रामा अगर है आपके आप अगर आप ट्रॉमा वालों के साथ रहोगे ना दो साल तो आपके अंदर जो एपिजेनेटिक होगा बिहेवियर वो भी जो है आपका कहीं ना कहीं वो इफेक्ट करेगा तो वो देयर
(1:27:10) इज़ एनवायरमेंट उसका रीज़ क्या है? उसका मैकेनिज्म क्या है? दैट वी डोंट नो बट आपका एनवायरमेंट सोचो कि आप किस हद तक इफेक्ट कर रहा है आपको? आप मानते हो वीट स्मोकिंग से जींस बदलते हैं? देखिए जो वीट स्मोकिंग एंड आशीष एंड हीरोइंस इनका एक कैटामिन भी होता है कैटामिन। ये क्या करते हैं कि नए नर्व्स को ना जनरेट करते हैं। मैंने इस रिसर्च किया है कि अगर आप साल में एक या दो बार ले रहे हो तो इट्स लाइक वेरी गुड फॉर योर हेल्थ। तो आपके ना ब्रेनेंस के जो होते हैं नर्व्स वो होंगे रीजनरेट होंगे तो नॉट ओनली कैटामिन इट्स लाइक द सेम नो सेम फैमिली के
(1:27:52) होते हैं हशीस हो कुकीन हो कैटामिन हो दे आर लाइक सेम मॉलिक्यूल बट उसमें थोड़ा सा मॉडिफिकेशन करते हैं एंड देयर इज़ अनदर थेरेपी नाउ इज़ नाउ इट्स इन प्रैक्टिस दैट्स कॉल्ड हाइपोक्सिया थेरेपी अगर आप हाइपोक्सिया में जाते हो ना फॉर वन आवर्स तो आपके जितने न्यूरॉन्स है ना वो होंगे रीजनरेट होंगे रीजेनरेट रीजनरेट होंगे एंड आपके जो हैप्पी हॉर्मोंस आएंगे ना वो उसका एक्सप्रेशन बढ़ जाएगा। तो अभी जर्मनी में क्या हो रहा है? हाइपोक्सिस चेंबर बनते हैं। लेकिन वहां जाते हैं लोग 16 टू 17% ऑक्सीजन के एनवायरमेंट में बैठते हैं ताकि आपके जो
(1:28:25) हैप्पी हार्मोंस बने और डिप्रेशन से खत्म हो जाएगा। डिप्रेशन कम हो जाएगा। हम हम क्योंकि इसीलिए बोलते हैं ना आप रनिंग कर रहे हो स्लो रनिंग फॉर वन आवर। तो आपको क्या होगा? हाइपोक्सिया होगा। ओके? दैट्स वेरी गुड फॉर योर हेल्थ। हम हम स्प्रिंट नहीं करना है आपको। आपको वन आवर रनिंग करनी है जिसमें कि आपको हाइपोक्सिया इंड्यूस हो। हम सेम रीज़न जब स्पोर्ट्स खेलते हो यस तो खुशी फील होती है। हम ओके तो आप देख रहे हो ना कि जीन जो हमारा है वो कैसे एनवायरमेंट से बात कर रहा है ना हम ऑक्सीजन कम हो रहा है तो हमारा जो जो जेनेटिक प्रोफाइलिंग है ना एपिजेनेटिक वो
(1:29:00) चेंज हो रहा है। जो जीन बना रहा है ना सिरोटोनिन को उसका एक्सप्रेशन बढ़ जा रहा है। कुछ तो ड्राइविंग फोर्स होगा ना। ये मैं बिहारी एल्गोरििदम्स के लिए नहीं कर रहा। बट ये मैंने नोटिस करा है कि मेरे बिहारी ब्रोस बहुत स्मार्ट है। हम बहुत ज्यादा तेज उनका दिमाग चलता है। तो वो वो इसलिए हुआ है क्योंकि वो जो उनका जो जीन एंड एनवायरमेंट का इंटरेक्शन है ना वो अर्ली टाइम से जो है काफी एक्टिव फेज में होता है। बिहार में काफी जो बच्चे होते हैं उनका जो होता है एनवायरमेंट पढ़ना है ये करना है वो करना है। ठीक है? तो दे आर वैरी फोकस्ड सिंस द
(1:29:34) चाइल्डहुड क्योंकि कंपेटिटिव एनवायरिटीशन एनवायरमेंट है। आप एट द सेम टाइम आप देखो हरियाणा के जो बच्चे होंगे उनका खेल को दौड़ भाग में होगा वो ज्यादा वो टेंशन नहीं लेते हैं वो तो वो वो इंडिपेंडेंटली इवॉल्व होते हैं। उसमें जिनका अच्छा आईक्यू हो खुद ही वो अपना निकल जाएगा वो। पता है ब्रॉक लेसनर कौन है? हां हां वो ना वो एफ आपको लगता है ब्रॉक लेसनर को देख के कि जेनेटिकली मॉडिफाइड इंसान है। क्योंकि उसका जो प्रोटीन जो प्रोटीन एसिमिलेशन होता है ना बॉडी में ऐसे आपने प्रोटीन खाया आपने 200 ग्राम तो सारी प्रोटीन नहीं होगी आपकी बॉडी में
(1:30:05) अब्सॉर्ब। एक एक इंसान को जो कि नॉर्मल बैठा हुआ है कुर्सी पे 80 केg के इंसान को कम से कम 100 ग्राम प्रोटीन चाहिए पर डे। जो स्पोर्ट्स कर रहा है एथलेटिक्स इनवॉल्व है उसको चाहिए कम से कम 200 ग्राम चाहिए प्रोटीन। आप इंडियंस में कहां रिक्वायरमेंट कैसे पूरी कर पाओगे? प्रोटीन की कमी इंडिया में है। कुछ कम्युनिटी ऐसी होती है जो काफी स्मार्ट होती हैं। जैसे कि बंगालीज हैं। दे नो कि हमें प्रोटीन खाना है। तो वो देखिए फिश खाते हैं डेली बेसिस पे। हम हम नीड ऑफ द आवर फॉर एंड प्रोटीन तो प्रोटीन की जो स्केसिटी इंडिया में ना मतलब पूरे वर्ल्ड में है
(1:30:39) हमेशा से ओके जाने से पहले एक चीज पूछना चाहूंगा कि अब क्या पढ़ रहे हो अभी करेंटली क्या हो रहा है अभी हम एक ल्च कर रहे हैं डेटाबेस गट माइक्रोबायोम का इंडिया का ओके तो हम पूरे इंडिया का मैप किया हुआ डेटाबेस है साउथ एशियन गट माइक्रोबायोम सांभर वो ल्च करने वाले हैं अभी नेक्स्ट मंथ ओके एंड देयर आर मेनी अदर प्रोजेक्ट्स इंडस वैली का एंड सनौली में एक वो मिला था रथ मिला था चैरियट उसके जो वारियर्स थे वो कौन थे एंड इंडिया श्रीलंका का क्या रिलेशन है कब इंडिया से श्रीलंका माइग्रेट किए कब कब हुआ है ये इंडिया से श्रीलंका ये ज्यादा अर्ली नहीं है अबाउट 1000 बीसी
(1:31:16) लाइक 3000 इयर्स पहले सिनलीज इज़ अ एलट ग्रुप ऑफ नॉर्थ इंडियंस वो माइग्रेट किए श्रीलंका में कहां से उत्तर प्रदेश मोस्ट लाइकली हां सच सच में यस वाओ पर उसके पहले क्या था श्रीलंका में श्रीलंका में उसके पहले तो वो तमिल थे बट एक ग्रुप गया और वो ग्रुप इतना एलिट था कुछ ही लोग थे वो कि श्रीलंका के लोगों ने उनके लैंग्वेज को अडॉप्ट कर लिया और सिनलीज बोलना स्टार्ट कर दिया श्रीलंका में अभी 60% लोग क्या बोलते हैं सिलीज बोलते हैं तो करेंटली फोकसेस ऑन ग बायोम गट माइक्रोबायोम एंड देन सिलेक्शंस एंड लाइक एंटायर जेनेटिक मैपिंग ऑफ
(1:32:03) इंडिया। नाउ वी हैव मोर डाटा। सो हमारे पास अबाउट 10,000 लोगों का डाटा आ गया पूरे इंडिया से। सो प्रॉपर मैपिंग ऑफ डिजीज लैंडस्केप, सिलेक्शंस एंड देन अप्टेशंस टुवर्ड्स डिफरेंट एनवायरमेंट, ग्लूटेन टॉलरेंस तो अभी पूरा उस पे पब्लिकेशंस आ रहे हैं। आई थिंक मॉडर्न प्रॉब्लम सॉल्व हो पाएंगे शायद। हां, इंडिया में हो जाएंगे। पर इंडिया में जो जेनेटिक रिसर्च से ज्यादा है ना कि आप उसको लोगों तक पहुंचाना। दैट्स अ मेजर क्वेश्चन। जो लोग अब तक नहीं समझे कि अरेंज मैरिज को ना कहो। यस। लोगों को यह नहीं पता है कि दूध नहीं पीना चाहिए। लोगों को यह नहीं पता है कि
(1:32:37) ग्लूटेन गेहूं नहीं खाना चाहिए। आटा नहीं खाना चाहिए। हम इसको प्रॉब्लम है। हम डायबिटीज वाले अभी भी गेहूं खाते हैं। तो ये सब प्रॉब्लम्स अभी इंडिया में उसको चेंज करना है। हम पिंपल्स का कुछ निकला है क्या? जेनेटिक स्टडीज में से? पिंपल्स इज़ लाइक हार्मोनल इमंबैलेंस एंड यू गट माइक्रोबायोम प्रोफाइल। हम अगर आपका कॉन्स्टिपेशन है या आपका पेट नहीं साफ हो रहा है [नाक से की जाने वाली आवाज़] दैट वन कैन बी वो रीजन हो सकता है और दूसरा है आपका हार्मोनल इमंबैलेंस हम तो हार्मोनल इमंबैलेंस होता है योगा से कर लोगे आप योगा इज अ बेस्ट थेरेपी
(1:33:07) कनेक्टिंग हॉर्मोनल इमंबैलेंस यस स्टडीज हां स्टडीज हो स्टडीज हो रहे हैं इस जो है ओके योगा से आप अपने हार्मोन को बैलेंस कर सकते हो हम ये एक्सपीरियंशियली मैं कंफर्म कर सकता हूं वेटिंग फॉर द स्टडीज टू कम या क्योंकि सिरोटोनिन जो है वो तो प्रूवन कि आपको जो हैप्पी हार्मोन्स बन रहे है ना योगा से बन रहे हैं। बट दे अगर एक हार्मोन अगर चेंज हो रहा है इसका मतलब अदर भी सो रहे होंगे। ग ओके डॉक्टर नीरज राय थैंक यू मजा आया फिर से। थैंक यू सो मच। अगले साल फिर से मिलेंगे और बहुत सारी चीजें जानेंगे आपसे। थैंक यू सो मच। थैंक यू सर। थैंक यू सो मच।
(1:33:43) इंटेंशन सेटिंग करते हैं हम। अक्सर ना मेरी इंटेंशन सेटिंग ऑडियंस के लिए होती है, दुनिया के लिए होती है। हम बहुत रेयरली मैं कोई एपिसोड खुद के लिए कर रहा होता हूं। ये उनमें से एक है। अच्छा हां। आई एम जस्ट ये मेरे खुद के इंटरेस्ट का है। तो मजा आने वाला है। मतलब मैं झूठ भी नहीं कह रहा। यहां एक्चुअली आज बहुत टाइम के बाद मैं ऑडियंस के बारे में नहीं सोच रहा हूं। तो देखते हैं क्या होता है। लेट्स सी। आई एम जस्ट मतलब आपके साथ बस कॉफी पीनी है, बातें करनी है। ऐसा मेरा भी वही है इंटेंशन। जस्ट चिलिंग। यस। [संगीत] [संगीत]
(1:34:35) [संगीत]

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