Author Name:Dr. Menka Sharma Podcast
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డా. కాశికా జైన్ (డా. మేంకా శర్మ పాడ్కాస్ట్లో) వివరించిన **"నార్సిసిస్ట్ పార్ట్నర్ గుర్తులు & గ్యాస్లైటింగ్ను ఎలా ఎదుర్కోవాలి"** అనే విషయంపై ముఖ్య సారాంశాన్ని తెలుగులో చెక్లిస్ట్గా కింద ఇస్తున్నాను. ఇది చాలా సులభంగా అర్థమయ్యేలా, రోజూ పాటించగలిగేలా రూపొందించబడింది.
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# 🧠 నార్సిసిజం అంటే ఏమిటి?
నార్సిసిస్ట్ అంటే **స్వయం-కేంద్రీకృత**, **నియంత్రణ ప్రియ**, **పైచేయి చేయగల** వ్యక్తి.
| లక్షణం | వివరణ |
|---|---|
| **స్వంత అభిప్రాయం మాత్రమే సరైనది** | వారి సోచేది, తీసుకునే నిర్ణయం మాత్రమే సరైనది. మీ అభిప్రాయం విలువ లేనిదిగా భావిస్తారు. |
| **బయటకు చార్మింగ్, లోపల క్రూరం** | బయటికి చాలా స్వీట్గా, ఆకర్షణీయంగా కనిపిస్తారు. కానీ అంతర్గతంగా **హింసాత్మకంగా**, **క్రూరంగా** ఉంటారు. |
| **మీ అస్తित్వంలేదు** | వారి కంటే మీరు **అస్తిత్వంలో లేని వ్యక్తి**, **రెండు కొట్ల వ్యక్తి**గా భావిస్తారు. |
| **నార్సిసిజం క్యూరబుల్ కాదు** | ఇది **పర్సనాలిటీ డిసార్డర్** (NPD). నార్సిసిస్ట్ **తాను నార్సిసిస్ట్ అని అంగీకరించడు**, **తాను సరైనవాడిని** అని నమ్ముతారు. |
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## ✅ నార్సిసిస్ట్ పార్ట్నర్ గుర్తులు – చెక్లిస్ట్
| # | గుర్తు | వివరణ |
|---|---|---|
| 1 | **స్వయం-కేంద్రీకృతం** | తన అభిప్రాయం, తన నిర్ణయం మాత్రమే సరైనది. మీ అభిప్రాయాన్ని విలువ చేయడు. |
| 2 | **నియంత్రణ ప్రియ** | మీ డ్రెస్, కెరీర్, స్నేహితులు, కుటుంబం – అన్నింటిపై **నియంత్రణ**. |
| 3 | **మానసిక/శారీరక దుర్వినియోగం** | చిన్న విషయాలపై **తిట్టడం**, **తిక్కాడుకోవడం**, **తాళ్లు**, **తాళాలు**, **తెప్పడం**. |
| 4 | **లవ్-బాంబింగ్ & సైలెంట్ ట్రీట్మెంట్** | మొదట్లో **చాలా ప్రేమగా** పట్టించుకుంటారు, ఆపై **అకస్మాత్తుగా మౌనంగా** ఉండిపోతారు, **క్లోజర్ ఇవ్వరు**. |
| 5 | **విక్టమ్ మెంటాలిటీ** | గొడవల్లో **తానే బాధితుడు** అని ప్లే చేస్తారు, **మీపైనే తప్పు** చూపిస్తారు. |
| 6 | **సపోర్ట్ సిస్టమ్ను నాశనం చేయడం** | మీ **స్నేహితులు**, **బంధువులను** మీరు దూరంగా ఉండేలా చేస్తారు, మీ **సపోర్ట్ సిస్టమ్ను నాశనం** చేస్తారు. |
| 7 | **గ్యాస్లైటింగ్** | మీరు **మరింత ఓవర్ రియాక్ట్** చేస్తున్నారు, **డ్రామా** చేస్తున్నారు అని చెప్పి, **మీ మెమరీ**, **బుద్ధిమత్వంపై సందేహం** కలిగిస్తారు. |
| 8 | **ట్రామా బాండింగ్** | కొన్ని రోజులు **చాలా మంచి రోజులు** ఉంటాయి, తర్వాత **దుర్వినియోగం** – ఇది మీను **కన్ఫ్యూజ్** చేసి, వారితోనే **అంటిపెట్టుకుని ఉంచుతుంది**. |
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## 🔥 గ్యాస్లైటింగ్ (Gaslighting) అంటే ఏమిటి?
- మీరు **నిజంగా జరిగిన విషయాన్ని మర్చిపోయినట్లు**, **మీరు తప్పు చేశారని**, **మీ బుద్ధిమత్వం తక్కువ** అని చూపించడం.
- **"మీరు ఓవర్ రియాక్ట్ చేస్తున్నారు"**, **"డ్రామా చేస్తున్నారు"** అని చెప్పి, **మీ నొప్పిని చిన్నదిగా చూపించడం**.
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## 🧭 నార్సిసిస్ట్ పార్ట్నర్తో ఉన్నవారు చేయాల్సిన పనులు – స్టెప్బై స్టెప్ గైడ్
### 1. **నార్సిసిస్ట్ను మార్చలేము అని అర్థం చేసుకోండి**
- నార్సిసిస్ట్ **తాను నార్సిసిస్ట్ అని అంగీకరించడు**, **తాను సరైనవాడిని** అని నమ్ముతారు.
- **నార్సిసిజం క్యూరబుల్ అని కాదు**, ఇది **పర్సనాలిటీ టైప్** (Narcissistic Personality Disorder).
### 2. **వాస్తవాన్ని అంగీకరించండి**
- "మీ పార్ట్నర్ నార్సిసిస్ట్" అనేది **వాస్తవం** – దీన్ని **అంగీకరించాలి**.
- ఎంపికలు:
- **విడిచిపెట్టడం** (మీకు స్వంతంగా నిలబడే సామర్థ్యం ఉంటే)
- **అంగీకరించి, బౌండరీలు పెట్టుకోవడం** (విడిచిపెట్టలేకపోతే)
### 3. **కాథార్సిస్ & హిప్నోసిస్ ద్వారా సప్రెస్డ్ ఎమోషన్స్ విడుదల చేసుకోండి**
- **దాచిన భావోద్వేగాలను** (suppressed emotions) **విడుదల చేయడం** ముఖ్యం.
- **హిప్నోసిస్** ద్వారా **ఎక్కువ కన్నీరు** పెట్టి, **నొప్పిని విడుదల చేయడం** సహాయపడుతుంది.
### 4. **మీ ఆత్మవిశ్వాసాన్ని పునరుద్ధరించుకోండి**
- వారు మీపై **సందేహం** కలిగిస్తారు – **మీపై మీకు నమ్మకం** ఉంచండి.
- "ఇది **వారి అభిప్రాయం**, వారి **నియంత్రణ** కోసం" అని గుర్తించండి.
### 5. **బౌండరీలు (Boundaries) పెట్టుకోండి**
- **"నో" అని చెప్పడం** నేర్చుకోండి.
- చిన్న చిన్న గొడవలకు **భయపడకండి**.
### 6. **నార్సిసిస్ట్ను ఎలా నియంత్రించాలి?**
- వారిని **శబ్దం చేయకుండా**, **తమాశా లేకుండా** ఉంచడం నేర్చుకోండి.
- వారి **నియంత్రణను తగ్గించుకోవడం**, **మీ స్వంత నిలబడే సామర్థ్యాన్ని** పెంచుకోండి.
### 7. **సపోర్ట్ సిస్టమ్ను తిరిగి ఉద్ధరించుకోండి**
- వారు **నాశనం చేసిన స్నేహితులు**, **కుటుంబం**తో **పునర్బంధం** ఏర్పరుచుకోండి.
### 8. **వైద్య సహాయం తీసుకోండి**
- డిప్రెషన్, ఆందోళన, నిద్రలేమి, OCD వంటి లక్షణాలు ఉంటే **వైద్యుడిని సంప్రదించండి**.
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## ⚠️ జాగ్రత్తలు
| జాగ్రత్త | వివరణ |
|---|---|
| **లేబుల్ చేయకండి** | Instagram, Reels చూసి **పార్ట్నర్ను నార్సిసిస్ట్ అని లేబుల్ చేయకండి**. |
| **చిన్న విషయాలపై నియంత్రణ అని అనుకోకండి** | **ప్రేమ**, **కేర్** కూడా ఉండవచ్చు. |
| **నార్సిసిజం అందరిలో ఉంటుంది** | **కొంతవరకు** ఉంటుంది, కానీ **హానికరం కాదు**. హానికరం అయితే మాత్రమే **NPD**. |
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## 💡 ముఖ్య వాక్యాలు (డా. కాశికా జైన్ నుండి)
| వాక్యం | అర్థం |
|---|---|
| "**నార్సిసిస్ట్ మారడు**" | వారు **తాను సరైనవాడిని** అని నమ్ముతారు, మారాలనుకోరు. |
| "**వాస్తవం అంగీకరించాలి**" | మీ పార్ట్నర్ నార్సిసిస్ట్ అని **అంగీకరించి**, మీ **జీవితాన్ని** కొనసాగించాలి. |
| "**బౌండరీలు పెట్టుకోండి**" | "**నో**" అని చెప్పడం, **భయపడకపోవడం** నేర్చుకోండి. |
| "**ఆత్మవిశ్వాసం తిరిగి పొందండి**" | వారి మాటలకు **మీపై సందేహం** వద్దు, **మీపై నమ్మకం** ఉంచండి. |
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## 📋 రోజువారీ చెక్లిస్ట్ (నిత్యం గుర్తుంచుకోండి)
- [ ] నేను **వారి అభిప్రాయాన్ని** నా అభిప్రాయంగా **తీసుకోవడం మానేశాను**
- [ ] నా **ఆత్మవిశ్వాసం** పెంచుకుంటున్నాను
- [ ] నేను "**నో**" అని చెప్పడం నేర్చుకుంటున్నాను
- [ ] నా **సపోర్ట్ సిస్టమ్** (స్నేహితులు, కుటుంబం) తో **సంబంధం** పెంచుకుంటున్నాను
- [ ] నేను **చిన్న గొడవలకు భయపడటం** మానేశాను
- [ ] నా **ఎమోషన్స్** విడుదల చేసుకుంటున్నాను (కన్నీరు, మాట్లాడటం, థెరపీ)
- [ ] నేను **వైద్య సహాయం** తీసుకుంటున్నాను (అవసరమైతే)
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> **మీరు అధీనంలో ఉండకూడదు**, **మీ జీవితం మీద మీకు హక్కు** ఉంది. ఈ గైడ్ను **ప్రింట్ చేసి**, **రోజూ చూసుకోవచ్చు**.
Transcript:
(00:00) नार्सिसिज्म होता क्या है? कैसे पता लगाएं कि आपका पार्टनर नार्सिसिस्ट है? मतलब वो जो सोच रहा है, उसकी सोच सही है। वो जो डिसीजन ले रहा है वही अल्टीमेटली सही है। और आप कहीं एक्सिस्ट ही नहीं करते। आप बिल्कुल उसकी नजरों में दो बॉडी देख तो ऐसे केस में जब एक लेडी आती है तो वो मेंटली पूरी शैटर्ड हो चुकी होती है। टूटी हुई होती है। उसके बाद क्या उसको जीने की चाह रह जाती है? क्योंकि आदमी तो वही रहता है। नार्सिसिस्ट बंदा ही रहता है उसके साथ। आपकी लाइफ का ट्रुथ है कि आपका पार्टनर एक नार्सिस्ट है। तो मतलब नार्सिस्म क्यरेबल नहीं है।
(00:35) देखिए नार्सिस्ट आदमी मानेंगे ही नहीं कि वो नार्सिस्ट है। अगर वाइफ नार्सिसिस्ट है तो हस्बैंड को एडवाइस क्या देना चाहेंगी? अगर हस्बैंड नार्सिसिस्ट है तो वाइफ को कैसे अपनी जिंदगी जीनी चाहिए? ताकि जिंदगी जी सके वो। आर यू श्योर मैम कि आप एक बहुत बोल्ड एडवाइजर 100% नहीं 1000% श्योर हूं क्योंकि आप मेरे पास 5 साल बाद 10 साल बाद फिर आओगे कि मैंने पकड़ लिया कि तुम शुगर डैडी का रोल प्ले कर रहे हो तो हस्बैंड अपने घर पे भी बिल्कुल नॉर्मल अपनी वाइफ के साथ भी ट्रीट करता है। देखिए जैसे शुगर डैडी का तो एक कांसेप्ट है ना ऐज़ शुगर
(01:03) मॉमी भी है ऐसे तो ऐसा नहीं केवल शुगर डैडी शुगर मॉम भी है कि सबसे ज्यादा कार्मिक ड्यूस आपके हस्बैंड के साथ ही थे आपके इसीलिए वो आपके पास आए हैं ताकि आप उसको क्लियर कर सको आपके अंदर खालीपन तो आप हमेशा एक ऐसे पर्सन को अट्रैक्ट करेंगे अपनी लाइफ में जो पर्सन तो वो कौन सा पॉइंट है जिसमें हम कह सकते हैं कि एक्चुअल सोलमेट मिल गया आपको ये समझना ही होगा कि आखिरकार वो आपको क्या सप्लाई ऐसी दे रहा है जो आप अपने लिए नहीं क्रिएट कर सकते अगर कोई अपनी काउंसलिंग करवाना चाहे तो आप उनको क्या कुछ टिप्स दे पाएंगी जो भी एक नार्सिसिस्ट पार्टनर के साथ रह रहे
(01:39) हैं कि उन्हें क्या-क्या स्टेप्स लेने चाहिए घर में ताकि वो पीसफुली रह सकें नमस्कार कशिका जी कैसी हैं आप? नमस्कार मैं बहुत अच्छी हूं। आप कैसे हैं? मैं बिल्कुल ठीक। अ आपके बारे में जितना कहूं कम है। एक तो देखने में आप बहुत प्रीिटी हैं। थैंक यू और ऑफ द कैमरा आपसे बात करके और भी अच्छा लगा। तो सबसे पहले तो यह जानना चाहूंगी कि ऐसा क्या हुआ था आपके साथ या आप अचानक से इतने डेप्थ वाला जो टॉपिक्स होते हैं जैसे नार्सिसिज्म सुसाइडल थॉट्स का आना मैरिज का गिव अप करना ये सब जो टॉपिक्स को लेकर के आज आप
(02:25) हीलिंग्स कर रहे हैं लोगों की तो यह आपके मन में कब आया क्या था आपके मन के अंदर का विचार क्या कोई टर्निंग पॉइंट आया था क्या था मतलब वी वांट टू नो हु यू आर एंड हाउ यू बिकम हु यू आर टुडे सबसे पहले तो अपने बचपन में ही मैंने बहुत सफर किया है ए्जायटी से और जब मैं छोटी थी तो ए्जायटी वर्ड शायद हम लोगों की डिक्शनरी में नहीं था। कोई समझता ही नहीं था कि ए्जायटी क्या होती है। मेरे को एक फ्रीक्वेंट सिम्टम्स बहुत फील होता था और मेरे पेट में बहुत दर्द होता था और बहुत ही अनयूजुअल पेन होता था। जिसको शब्दों में एक्सप्लेन नहीं किया जा सकता। वो इतना
(03:05) सीवियर पेन होता था और होता था साइकोजेनिक पेन यानी कि माइंड क्रिएट कर रहा होता था। लेकिन वो फिजिकल पेन की तरह मुझे टॉर्चर करता था। हफ्ते में तीन दिन मेरे फादर मुझे डॉक्टर के यहां लेकर जाते थे। और उस टाइम जो हमारे शहर के सबसे अच्छे डॉक्टर और सबसे महंगे डॉक्टर थे उनके पास लेकर जाते थे। उनको भी कुछ फाइंडिंग्स नहीं मिलती थी। कभी ऐसा लगता था कि जैसे पेट में कीड़े हैं शायद। कभी कोई बता देता था कि इसकी नाप उतर गई है। कभी कोई कह देता था कि नजर लग गई है। लेकिन किसी को यह नहीं पता था कि मैं क्या सफर कर रही हूं। मेरे इतना तेज पेट में दर्द होता था और
(03:41) मैं दवाइयां खाते-खाते थक गई थी और मेरा कुछ भी इलाज नहीं हो पा रहा था। उसके जो कारण थे वो यह था कि मैं बचपन में बहुत ही ज्यादा पतली थी। एकदम स्किनी। तो मुझे ना बहुत बॉडी शेमिंग का शिकार होना पड़ा। मेरे को सब ऐसे बच्चे चिढ़ाते थे। बिल्कुल डंडी है। ना शक्ल ना अकल। इस तरह से बोलते थे और मैं थोड़ा सा शर्मीली भी थी तो इतना खुलकर नहीं बोलती थी और सब लोग यही बोलते थे बार-बार हमारे क्लोज रिलेटिव कि ये लड़की अपनी जिंदगी में कुछ भी नहीं कर पाएगी। एक बच्चा अगर हजारों बार यह बात सुने कि ये लड़की जिंदगी में कुछ भी नहीं कर पाएगी। ना इसकी शक्ल ना इसकी अकल इसकी
(04:16) तो जल्दी से शादी करनी पड़ेगी और वो भी देखा चाहिए कि कैसे जुगाड़ बिठाना पड़ेगा। तो सोचिए एक छोटे बच्चे के मन पर क्या बीतती होगी। वो कह भी नहीं पाता है और कोई समझ भी नहीं पाता है कि यह ताने ये चिढ़ाना यह बुली करना यह कितना मेंटल हेल्थ को सफर कराता होगा। मैं रोती रहती थी। मेरे अंदर हीन भावना भरती जा रही थी। मेरे को किसी से बात करने में कोई कॉन्फिडेंस नहीं था। किसी के सामने मैं बोल नहीं पाती थी। ना पहनने का मन करता था, ना आने जाने का, ना खाने पीने का मन करता था। बस रोती रहती थी। बचपन में मुझे यह भी नहीं पता था कि हम अपने बारे में
(04:50) कुछ सोच सकते हैं। मुझे यह लगता था कि जैसे भी हम हैं भगवान ने हमें वैसे ही बनाया और ये जो विचार आते हैं ये सब अपने आप आते हैं। जो अच्छे लोग हैं, सुंदर लोग हैं, अमीर लोग हैं, काबिल लोग हैं उन्हें भगवान ने ऐसा बनाया है और हम ऐसे हैं तो हमें ऐसा बनाया और ये हमारी किस्मत है। मुझे यह भी नहीं पता था कि हम अपनी सोच बदलकर अपना जिंदगी बदल सकते हैं। तो एक मौका ऐसा आया कि मैं तकरीबन 12 साल की थी और मैं बहुत परेशान हो गई और उस टाइम पर एक दवाई आती थी ज मारने की ऊना तो मेरी मदर किचन में सबसे ऊपर वाले स्लिप पर उसे रखती थी बच्चों के हाथ से दूर और रात को
(05:26) मैं इतना दुखी थी मैं भगोना उल्टा करके और उस पर चढ़ी और चढ़ने की कोशिश कर रही थी भगोना फिसल गया और मैं गिर गई और उस आवाज से मेरी मदर उठ गई और मांओं को ना समझते हुए देर नहीं लगती है कि ये आधी रात में भगोना उल्टा करके क्या उतारने की कोशिश कर रही है। तो उन्होंने मेरी बहुत हेल्प करने की कोशिश की। मुझे बहुत प्यार दिया सब कुछ। लेकिन वो भी ए्जायटी को दूर नहीं कर पा रही थी। क्योंकि वो किस-किस को रोकेंगी? मैं स्कूल तो जाऊंगी ही। बाहर तो मिलूंगी ही। और जब अपने ही रिश्तेदार सगे रिश्तेदार जिन्हें आप मां-बाप के समान देखते हैं। वही लोग अगर आपको ऐसे नीचा
(06:00) दिखा रहे हैं तो आप किस-किस से लड़ोगे? नहीं लड़ सकते। और उस वक्त मम्मी का प्यार काफी नहीं पड़ रहा था। और मैं बहुत परेशान थी। पढ़ाई में भी वीक होती जा रही थी। फेल भी होने लगी थी एक दो सब्जेक्ट्स में। लेकिन जैसे तैसे पढ़ाई भी चल रही थी और मैं भी बड़ी होती जा रही थी। फिर मेरी एक टीचर मुझे मिली जो बुद्ध की फॉलोअर थी। उन्होंने मुझे बताया कि जो तुम्हारे बारे में दूसरे लोग सोचते हैं वो सच नहीं होता। जो तुम अपने बारे में सोचते हो वो सच होता है। और जो तुम सोचते हो वो तुम बन जाते हो। क्योंकि बुद्ध कहते हैं ना उनकी कोर्ट
(06:33) है व्हाट यू थिंक यू बिकम। फिर वो मुझे अपने घर ले जाती थी और मुझे लिखवाती थी कि लिखो मैं अच्छी दिखती हूं। मैं क्लास में मैम को आंसर कर सकती हूं। मुझे पढ़ाई अच्छे से समझ में आती है। मुझे भी मैम डांस में पार्टिसिपेट करने देंगी। इस तरह से वो मुझे बहुत सारे अफमेशंस जिनको अब मैं वर्ड्स दे पा रही हूं। उस वक्त नहीं पता था। तो उस वक्त वो मुझे ये सब रोज लिखवाती थी। रोज बुलवाती थी और उन्होंने मुझे बहुत प्यार दिया। मेरी सेकंड मदर की तरह। उन्होंने मुझे जन्म नहीं दिया। लेकिन उनका एक बहुत बड़ा कंट्रीब्यूशन है जो मैं आज हूं। तो उन्होंने मुझे सिखाया कि जो हम
(07:07) सोचते हैं वो हम बन जाते हैं और इससे धीरे धीरे धीरे-धीरे मैं इंप्रूव होने लगी। मुझे इस बात पर मेरे बच्चे मन को इस बात पे यकीन आ गया कि जो हम अपने बारे में सोचते हैं वो सच होता है। तो फिर जो बाकी दूसरे लोग बोलते थे ना ये ऐसी दिखती है ये कुछ नहीं कर पाएगी। मुझे लगता था ये झूठ बोलते हैं। और मैं जो सोच रही हूं वो सच है और इसने मुझे ट्रांसफॉर्म कर दिया। तो एक शर्मीली सी बच्ची जो मेहमान आते तो कोने में दुपकने वाली वो बोलने लगी। क्लास में वो इतना इंप्रूव कर गई कि 10थ के बोर्ड से पहले मेरे फादर को बुलाया और मेरी टीचर ने बहुत तारीफ की कि कमाल कर
(07:39) दिया इस लड़की ने तो मतलब इतना इंप्रूव हो गई है ये और फिर उसके बाद मेरी अपने स्कूल में एक अच्छी पोजीशन हो गई और मैं 12th में अपने स्कूल की हेड गर्ल बन गई और उस टाइम पर सिलेक्शन जो हुआ कि आपको असेंबली में स्पीच देनी थी उसके बेसिस पर सिलेक्शन होना था तो 800 बच्चों के सामने और टीचर्स के सामने प्रिंसिपल के सामने आप स्पीच दे रहे हो जो बच्चा बिल्कुल नहीं बोलता और आप अपने स्कूल की हेड गर्ल बन रहे हो। तो यह बहुत ही बड़ा ट्रांसफॉर्मेशन और अचीवमेंट था। लेकिन वो ह्यूमैनिटीज वाले बच्चों को थोड़ा सा हीन भावना की दृष्टि से देखते
(08:11) हैं। सब ये तो फिर उसके बाद ये हुआ कि कुछ भविष्य नहीं है। आप आर्ट्स पढ़ रहे हो, साइकोलॉजी पढ़ रहे हो। क्या ही उसमें भविष्य होगा ऐसे करके। तो फिर कुछ समझदार रिलेटिव्स ने बोला कि इनको कॉमर्स करा दो कि थोड़ा सा बेटर आपको शादी में भी आसानी होगी। कहोगे कि हां हमारी लड़की ने यह कर रखा है। मतलब शुरुआती करियर में बड़े अप्स एंड डाउन्स रहे कि आप ना अपना करियर भी बीच-बीच में चेंज कर रहे हो। ऐसे करते-करते ये सब चलते गए। फिर मेरी शादी मेरे लाइफ में मेरे हस्बैंड आए। मेरी लव मैरिज हुई है। तो भगवान खुद नहीं आते। वो किसी रूप में आपकी लाइफ में एंट्री मारते
(08:46) हैं। तो मेरे हस्बैंड से मिलना और मेरी जिंदगी का एक बहुत ही बड़ा टर्निंग पॉइंट है। उन्होंने बोला तुम्हें जो करना है वो करो। मैं तुम्हारे साथ हूं। जितना पढ़ना है वहां पढ़ो। उन्होंने मुझे चाहे बोर पढ़ने जाना हो, पुणे पढ़ने जाना हो या फॉरेन कंट्री कहीं पर भी जाना हो, उन्होंने मुझे कहीं नहीं रोका। उन्होंने मुझे बोला जितना तुम्हें पढ़ना हो पढ़ो। तो मैंने अपनी मेजर पढ़ाई शादी के बाद कंप्लीट की। उन्होंने हम फैमिली प्लानिंग भी डिले करी इस वजह से कि नहीं इसको जितना पढ़ना है करना। मेरे को डॉक्टरेट कराया। मेरे पास डबल डॉक्टरेट की डिग्री है। खूब
(09:17) उन्होंने मुझे पढ़ाया और साथ दिया और मैं कर ही रही थी और अपना मैं पर्सनालिटी डेवलपमेंट क्लासेस से स्टार्ट किया। फिर मैं क्योंकि उस टाइम पर काउंसलिंग के नाम पर नहीं आते थे लोग पर्सनालिटी डेवलप करने आ जाते थे और काउंसलिंग को बहुत ही ऐसा माना जाता था स्टिग्मा टैबू बहुत ही ना कॉन्फिडेंशियल रहेगा सब कुछ ये कंसर्न बहुत होती थी तो बहुत छुपते-छुपाते लोग आते थे तो काउंसलिंग सम होती थी पर्सनालिटी डेवलपमेंट के बैचेस चल जाते थे तो वो सब चीजें चलती रही और मैं भी अपनी प्रैक्टिस धीरे-धीरे मतलब मेरी बढ़ती चली गई प्रैक्टिस गॉड इज़ सो काइंड टू मी कि
(09:51) मेरा अच्छा हो गया कुछ सालों में फिर उसके बाद एक समय आया मेरी बेस्ट फ्रेंड जो कि अपनी फैमिली से परेशान थी उसकी मैरिज में भी बहुत सारी प्रॉब्लम्स चल रही थी तो वो मुझसे ना डायरेक्टली तो कुछ नहीं कह पाई लेकिन इनडायरेक्टली बोलती थी कि तू इतना बोलती है तेरे को इतनी अकल है तो कुछ वीडियो भी बनाया कर तू तब तक ये YouTube नया-नया सब चल गया था तो उतना मेरा फोकस नहीं था उस टाइम पर वीडियोस वगैरह बनाने का कभी-कभी बनाती थी लेकिन इतना फोकस नहीं था तो उसने उसने मुझसे चारप बार कहा और मैंने कहा हां हां बनाना शुरू करूंगी। ठीक है टाइम निकालूंगी इस
(10:27) तरह से। और एक दो बार मैंने सेंस भी किया कि वो शायद कुछ परेशान है और मैंने समझाने की कोशिश की। उस टाइम वो शायद उस माइंडसेट में नहीं होगी। उसने बोला अपनी डॉक्टरी मेरे सामने मत झाड़। तू मेरी दोस्त है और चल मजे वाली बातें करते हैं। तो कभी वो कुछ बातें करने लग जाए। कभी कुछ मतलब मेरी बातों को घुमा दिया उसने। और मुझे नहीं पता चला कि वो इतना साइलेंटली सफर कर रही है। मैं एक वर्कशॉप के लिए बोर गई हुई थी और मेरा फोन ऑफ था और मैं रात मिडनाइट में आई और सुबह मैं जब उठी तो न्यूज़पेपर में उसकी डेथ की खबर छपी हुई थी। मेरे हस्बैंड
(11:00) ने मुझे बताया कि तुम्हारी फ्रेंड दुनिया से चली गई है। वो मेरे लिए बहुत शॉकिंग था। फिर मुझे वो सारी बातें याद आने लग गई जो उसने मुझसे इनडायरेक्टली कही थी और मेरे दिमाग में वो दो से तीन दिन तक चलती रही। मतलब वो लड़की मेरे दिमाग से उतरी ही नहीं। उसकी बातें उतरी ही नहीं। और वो मुझे बहुत अंदर तक इतनी बुरी तरीके से तोड़ दिया उसने कि फिर मुझे उसके बाद लगा कि नहीं लोग साइलेंटली सफर करते हैं। आपके बाजू में भी कोई इंसान हो सकता है जो अंदर-अंदर स्ट्रगल चल रही हो उसकी सफर कर रहा हो और वो ऊपर से हंस रहा हो फेक स्माइल के पीछे। तो तुम्हें जो ऊपर वाला
(11:37) चेहरा है उसके पीछे के चेहरे पहचानने पड़ेंगे और तुम्हें लोगों की मदद करनी है। उसने मुझे इतना ज्यादा अंदर से शेक कर दिया कि मुझे लगा कि अगर मैं दूसरों की मदद नहीं कर पाई और जो मेरे अंदर मैंने सीखा है या मेरी किसी ने मदद की है मुझे ट्रांसफॉर्म होने में। अगर मैं मदद नहीं करूंगी तो शायद मेरी लाइफ का वो पर्पस सॉल्व नहीं होगा। जैसे अंदर से कोई वॉइस ना आपको झिंझोड़ रही होती है। बोल रही होती है कि करो करो करो करो करो अपने लिए मत जियो आप औरों के लिए भी करो। और फिर उसके बाद छोटे-छोटे कुछ इंसिडेंट्स ऐसे होते गए कि एक बार मेरे क्लनिक पर एक अंकल
(12:11) आए अपने बेटे को लेकर जो गांव के बैकग्राउंड से थे और उनके लिए शायद मेरे क्लीनिक तक पहुंचना मुश्किल था। तो लेकिन वो जैसे तैसे अपने बेटे की वजह से आए और जब वो उठकर जा रहे थे तो मैंने देखा कि उनके पजामे में भी एक छेद हो रहा था। लेकिन मेरी फीस पे कर कर वो आए थे तो कितनी उम्मीद और कितनी उससे आए होंगे कि बस बेटा ठीक हो जाए चाहे हमारा सब कुछ चला जाए। तो कुछ ऐसे वाक्य हो जाते हैं। कुछ ऐसे लोगों से आप मिल जाते हो जो आपको ना अंदर मन तक बिल्कुल हिला देते हैं। आपकी अंतरात्मा कांप जाती है और ऐसा लगता है कि आपको अब मदद करनी है। उसके बाद से मैंने
(12:53) रेगुलर वीडियोस बनानी शुरू की और सॉल्यूशन ओरिएंटेड वीडियोस बनाती हूं। चाहे वीडियो वो 15 मिनट की हो या 1 घंटे की हो। लेकिन मुझे पूरा सशन देना है। बहुत लोगों ने बोला कि इतना कंटेंट फ्री में देते हो। सब कुछ ही वीडियो में बता देते हो। तुम्हारे पास कौन आएगा? मैंने कहा आए या ना आए देने वाले का हाथ भगवान कभी खाली नहीं रखते हैं और अगर रखा भी तो मैं समझ लूंगी कि भगवान ने इसीलिए ही यह सब ट्रांसफॉर्मेशन किया है। तो फिर मैंने उसके बाद से जब बनाना शुरू किया और इतने लोगों की दुआएं मिलती हैं। इतने ईमेल्स हमारे वीडियोस के नीचे
(13:22) कमेंट्स आते हैं। इतना प्यार कि आपकी वीडियो देख के ही घर बैठे हम ठीक हो गए हैं। और मैं कभी किसी वीडियो में नहीं बोलती हूं कि आप मुझे दिखा लो। मैं हमेशा बोलती हूं कि माय डियर वंस आप घर बैठे ही ठीक हो जाओ। उसके बाद से मेरी जिंदगी में जितना सुकून है ना मैं आपको शब्दों में बयान नहीं कर सकती हूं क्योंकि आप ग्रो कर रहे हो आपका नाम हो रहा है आप अच्छा अर्न कर रहे हो वो एक सुकून सेटिस्फेक्शन अलग है और जो मदद करके सुकून मिलता है वो अल्टीमेट है वो अंतरात्मा का सुकून होता है वो बस आप महसूस कर सकते हो शब्दों में बयान भी नहीं कर सकते हो
(13:55) नाइस ब्यूटीफुल बहुत अच्छी स्टोरी और इसमें पूरे में बहुत सारे कांसेप्ट यानी कि इनर चाइल्ड हीलिंग अमेशंस का यूज़, माइंडसेट को कैसे चेंज करना। एक लड़की जो पहले खुद शर्मीली थी, वह पर्सनालिटी डेवलपमेंट की क्लासेस दे रही है। आपके हस्बैंड का आपकी लाइफ में एक सेवियर की तरह एक प्रोटेक्टर की तरह आना जो आपको आगे बढ़ाने में मदद करें। बहुत ही प्यारी स्टोरी है आपकी लाइफ की। एंड सोल जर्नी बोलूंगी इसे रादर। और इतने सब के बाद लास्ट में जो मार्मिक स्टोरी आपने अपनी फ्रेंड की सुनाई वो तो वाकई मेरे गुसबम्स आ गए और ऐसे साइलेंट किलिंग आई
(14:41) थिंक सो बहुत सारे लोग इस तरीके की जिंदगी से गुजर रहे हैं और रिश्तों को लेकर बिल्कुल आप सही कह रहे हैं कि पैसों की उतनी ज्यादा सुकूनियत नहीं मिलती जितना रिश्तों से मिलती है। आपको वो पजामे में वो छोटे से छेद को देखकर के जो अंदर से आपके एक फीलिंग आई कि मुझे उनके लिए कुछ करना चाहिए। अब आप मुझे यह बताइए कि जितने भी लोग आपके पास आते होंगे उनके साथ बहुत सारे इशूज़ होते होंगे। लेकिन आज की डेट में जो सबसे मेजर एक रिलेशनशिप को लेकर के सबके मन में यह क्वेश्चन आता है और खुद ही वो बहुत सारी रील्स एंड वीडियोस देख के डिक्लेअ कर देते
(15:27) हैं, अफर्म कर देते हैं कि मेरे हस्बैंड नार्सिसिस्ट हैं या मेरे जो लवर हैं वह नार्सिसिस्ट हैं। तो मैं एक्चुअल में जानना चाहती हूं नार्सिसिज्म होता क्या है? कैसे पता लगाएं कि आपका पार्टनर नार्सिसिस्ट है? देखिए रील्स में देख के या Instagram पर देखकर या किसी भी वीडियो में सुनकर आप अपने हस्बैंड को या लवर को ऐसे नार्सिस्ट लेबल नहीं करें क्योंकि यह बहुत डेंजरस होता है। आजकल क्या है कि अगर थोड़ा सा भी हस्बैंड या लवर आपका कुछ भी इंटरफेयर करने की कोशिश करते हैं जो कि जेनुइनली कई बार आपके ही फेवर के लिए हो सकता है। तो उसको
(16:04) भी आप अगर उनको कंट्रोलिंग नेचर बताएंगे और छोटी-छोटी बातों पर आप नार्सिस लेबल कर देंगे तो आप ऐसे किसी भी पर्सन के साथ नहीं रह पाएंगे। क्योंकि जहां पर प्यार होता है थोड़ी केयर की वजह से कुछ कंसर्न होती है और सामने वाला अपनी कुछ बात कहता है। लेकिन अगर वह आपके ड्रेस को लेकर या आपके करियर को लेकर कोई अपना ओपिनियन शेयर कर रहा है या किसी भी तरह से कोई एडवाइस दे रहा है तो इसका यह मतलब नहीं है हर बार कि वह आपको कंट्रोल कर रहा है। नर्सेस जो पर्सन होता है वह पर्सन सेल्फ सेंटर्ड होता है। कंट्रोल फ्रीक होता है। डोमिनेटिंग होता है। ऊपर से सुपरफिशियली
(16:39) बहुत चार्मिंग होता है। उसका बिहेवियर बाकी लोगों के साथ बहुत ही ज्यादा ऐसा होता है स्वीट लेकिन वह अंदर-अंदर बहुत हारश होता है। उसका जो कंट्रोल और टोकाटाकी होती है उसके जो कमेंट्स होते हैं वो अनबियरेबल और पेनफुल होते हैं। उसकी लैंग्वेज बहुत गंदी हो जाती है। बहुत हार्श बिहेवियर होता है। और वो डोमिनेंस फिजिकल भी हो जाता है। उसका अब्यूज के रूप में इमोशनल अब्यूज भी होता है और वो अपने आगे किसी को समझता ही नहीं है। मतलब वो मैं से हम पर कभी आ ही नहीं पाता है। वो नार्सिस्ट होता है जो अपने आप को बहुत ही ज्यादा सुपीरियर समझे
(17:16) हम और उसको ऐसा लगे कि उसके बराबर का कोई है ही नहीं। हम मतलब वो जो सोच रहा है उसकी सोच सही है। वो जो डिसीजन ले रहा है वही अल्टीमेटली सही है और आप कहीं एक्सिस्ट ही नहीं करते हैं। आप बिल्कुल उसकी नजरों में दो कौड़ी के हैं। वो आदमी नार्सिस्ट है। लेकिन अगर कोई आपको भी वैल्यू कर रहा है और वो आपके अचीवमेंट से भी बहुत खुश हो रहा है। आपको भीेंस दे पा रहा है लोगों के सामने। लेकिन कभी-कभी वो कुछ सेंस कर रहा है और उस वजह से वो कुछ आपको कह रहा है वो नार्सिस्ट नहीं है। लेकिन मैं ऐसा महसूस करती हूं आजकल देखती हूं अपनी क्लीनिकल प्रैक्टिस
(17:52) में भी कि लोग बहुत जरा-जरा सी बातों पर ऐसे बोल देते हैं। कुछ फीमेल्स आती हैं कि मैम मेरे हस्बैंड नार्सिस्ट है। और जब उनसे डिटेल में बात होती है तो उनके हस्बैंड वो नार्सिस्ट नहीं होते। ऐसे तो नार्सिज्म सब में होता है थोड़ा बहुत। कौन खुद कोेंस नहीं देता? कौन नहीं चाहता मेरी तारीफ हो। कौन नहीं चाहता मैं आगे बढ़े। लेकिन नार्सिसिस्ट अगर कोई भी वाइफ किसी हस्बैंड को बोल रही है या हस्बैंड अपने वाइफ को बोल रहे हैं तो डेफिनेटली उन्होंने कुछ ना कुछ तो सफर किया होगा। कहीं ना कहीं तो ट्रोमा बॉन्ड रहा होगा। कुछ तो ऐसा हुआ होगा कि उनको ऐसा फील हुआ
(18:26) होगा कि उन्हें नेगलेक्ट किया गया है। अचानक से साइलेंट ट्रीटमेंट दे दी गई है। तो जैसे साइलेंट ट्रीटमेंट देने की वजह से भी बहुत सारे लोग समझ नहीं पाते हैं कि उनकी गलती क्या है जिसकी वजह से उन्हें बिल्कुल ब्लॉक कर दिया गया। अचानक से बात करते-करते छोड़ दिया गया। क्लोज़र नहीं दे पा रहे हैं। तो यह सब जब चीजें होती हैं तो देने वाले इंसान के मन में क्या चल रहा होता है और जिसके साथ वो यह कर रहा होता है वो किस परिस्थिति से गुजर रहा होता है? देखिए पहले तो हम बस मिसलेबलिंग से बचाना चाहते हैं। अगर कोई सच में नार्सिस्ट है
(19:03) और आप नार्सिस्ट के साथ रहते हैं तो वो बहुत ही क्लियरली पता चल जाता है। जैसे मैं आपको एक केस बताती हूं। एक लेडी मेरे पास आई डिप्रेशन की शिकायत लेकर। उनको डिप्रेशन था। जब हम कॉजेस जानना चाहते हैं कि आखिरकार इनकी ये हालत कैसे हुई तो पता चला कि वो 22 साल से एक नार्सिस्ट के साथ रह रहे हैं। उनके हस्बैंड रियल में नार्सिस्ट थे। उनकी जब शादी हुई तो शादी की नाइट पर ही सिर्फ जैसे होता है ना कि हस्बैंड वाइफ हल्काफुल्का सा मजाक कर लेते हैं। तो वो अपनी उनके हस्बैंड उनका घूंघट हटा रहे होंगे। तो हल्का सा उन्होंने इस तरीके से पीछे कर लिया कि पहले मेरा गिफ्ट लाओ।
(19:38) तो इसी बात पर उस आदमी ने उनके थप्पड़ मार दिया। फर्स्ट नाइट पर। ओ ठीक है। अब क्या बात थी थप्पड़ मारने की? और इतनी गंदी बात बोल दी कि पहले कीमत चाहिए। तो एक औरत को कितनी तकलीफ से गुजरना पड़ा होगा। मतलब एक हल्का सा मजाक वो आदमी बर्दाश्त नहीं कर पाया। थप्पड़ मारा और इतनी गंदी बात बोल दी। तो उस आदमी के साथ कैसे उस औरत ने शादी शुरू की होगी। लेकिन क्योंकि वो डोमिनेटिंग आदमी था। उसने फिर देखकर कि इसका मूड ऑफ हो गया या इसने रोना चालू कर दिया। थोड़ा सा उसे कवर अप किया और फिर शादी स्टार्ट हो गई उनकी। लेकिन शादी पे जब वो हनीमून पे गए तो वहां
(20:16) पर भी वही तमाशा शुरू हो गया। छोटी-छोटी बातों पर टोकना नहीं यह नहीं पहनना है। वहां क्यों देख रही हो? वो टोकाटाकी शुरू हो गई। और वो शुरुआत में ना बड़ा इनकंसिस्टेंट बिहेवियर होता है। कभी तो बहुत ही ज्यादा ऐसे लव बॉम्बिंग हो रही है पूरी। और कभी बिल्कुल ही साइलेंट ट्रीटमेंट दे रहे हैं या एकदम अब्यूसिव हो जा रहे हैं। शुरुआत में बहुत कंफ्यूज करके रखते हैं। नहीं समझ में आया और इस तरीके से कुछ ही महीनों में वो प्रेग्नेंट हो गई। एक बच्चा आ गया। अब बच्चे के बाद लेडीज आज भी ऐसा है कि फसावा महसूस करती हैं कि अब वो जाए तो कहां जाएं? सेंस कर
(20:47) रही हैं कि हस्बैंड की इजाजत के बिना वह कुछ कर नहीं सकती हैं। हर बात में हस्बैंड का इंटरफेरेंस है, डोमिनेंस है। सुनता वो है नहीं, सुना वो बहुत ज्यादा देता है और हर बात में गलती वाइफ की ही हो रही है। अगर मां-बाप से भी कुछ जेनुइनली प्रॉब्लम कुछ इशूज़ हैं उसको भी नहीं सुन रहा है। वो और उसके मां-बाप सब सही हैं। और मां-बाप और जब उसकी बात आती है तो वही सही है। मां-बाप भी गलत हैं। तो ऐसा इंसान लगातार अब्यूज पे अब्यूज अब्यूज पे अब्यूज किए जा रहा है और आपको कंट्रोल किए जा रहा है। वो आपके हर ओपिनियन को डिस्कार कर रहा है। वो
(21:20) आपको कभी अपने से आगे देख ही नहीं पा रहा है। यह रियल अब्यूज की कहानी है और ऐसे करते-करते उन्होंने सहते-सहते क्योंकि कुछ डेज तो बहुत अच्छे डेज भी आते हैं जिसमें वो दूसरे लोगों के साथ अच्छा व्यवहार कर रहा होता है। दूसरे लोगों के सामने आपके साथ अच्छा व्यवहार कर रहा होता है। तो आपको कंफ्यूज करके रखता है। कभी आप बच्चों की खातिर, कभी आप सोसाइटी की खातिर और कभी वह गुड डेज की खातिर आप कंफ्यूज रहते हैं और उस इंसान के साथ रहते हैं। जब भी कोई लड़ाई होती है तो वह इंसान एकदम से विक्टिडम प्ले करने लग जाता है। वो ऐसा प्ले करता है कि मैंने तो इतना इतना इतना
(21:51) इतना किया लेकिन तुम्हें तो समझ ही नहीं आ रहा है। तुम्हें मेरी जरा सी कमियां तो दिखाई देती है। वो तो तुम हाईलाइट कर देती हो। और जो मैं इतना प्यार करता हूं जो मैं फैमिली के लिए इतना कर रहा हूं वो समझ में नहीं आ रहा है। तो वो क्या करता है? आपको ही गलत ठहरा देता है। वो आपको इतना ज्यादा गिल्ट ट्रिप पर ले जाता है कि आप ही उसको नहीं समझ रहे हैं। वो इनोसेंट है और आप ही बहुत ज्यादा उससे ना नैगिंग करते रहते हैं। इस तरह से वह मैनपुलेटिव होते हैं नार्सिस्ट लोग और हमेशा क्रेडिट खुद ले लेते हैं। खुद उनको फ्रंट पे रहना है।
(22:21) जैसे वही बॉस हैं। वो इस तरह से कंफ्यूज करके रखते हैं और वह आपको अपने ऊपर डिपेंडेंट बना लेते हैं। आपका सर्कल सबसे पहले वह खत्म करवाएंगे। वो इतना रोका-टोकी या आपके ऊपर लड़ाई झगड़ा करके इतना प्रेशर क्रिएट कर देंगे कि आपका फ्रेंड सर्कल आपका बाकी रिलेटिव्स का जो भी आपके फेवर के लोग होंगे उन सबको आपकी नजरों में या तो बुरा बना देंगे या फिर उनसे किसी ना किसी वजह से आपको दूर कर देंगे ताकि आपका सपोर्ट सिस्टम ना हो। कई बार वह आपको इतना गेस करते हैं कि आपको कंफ्यूज करते हैं। आपकी मेमोरी पर डाउट कराते हैं। और आप साइलेंटली सफर करते-करते आपको सिम्टम्स आ
(22:55) रहे होते हैं। आप हेल्प के लिए पुकार रहे होते हो। लेकिन वो उस आपके पेन को मिनिमाइज कर देते हैं कि इसमें कौन सी बड़ी बात है। तुम बहुत ही ज्यादा ना ओवर रिएक्ट कर रहे हो, ड्रामा कर रहे हो और इस तरह से आप फंसे रहते हो और आपकी ट्रामा बॉन्डिंग इसलिए हो जाती है क्योंकि कुछ डज़ गुड होते हैं। वो आपके कई बार पैर भी पकड़ लेता है। जब वो देखता है कि मेरे कंट्रोल से बाहर निकल रही है सिचुएशन या मेरी वाइफ ज्यादा ही भड़क गई है या पुलिस कंप्लेन की धमकी दे रही है तो वो क्या है बिल्कुल ही आपके पैरों में भी गिर जाएगा। क्योंकि वो बाहर सोसाइटी में अपना तमाशा नहीं क्रिएट
(23:26) करवाना चाहेगा। तो वो इतना मैनपुलेटिव होता है और वो कई बार बिल्कुल आपको बहुत अच्छी तरीके से रखेगा जब उसका मन होगा किसी भी चीज के लिए चाहे फिजिकल इंटिमेसी के लिए या उसे आपको लेकर जाना है अपने साथ कहीं पर भी तो वो बहुत ही अलग पर्सन बन जाएगा तो उसकी वजह से आप उसे छोड़ नहीं पाते हो क्योंकि आप कंफ्यूजन में रहते हो कहीं मैं ही तो ओवर एक्सपेक्ट नहीं कर रही हूं कहीं मैं ही तो छोटी-छोटी बातों को बड़ा नहीं बना रही हूं या कभी बच्चों की वजह से और आप ना उससे अलग नहीं हो पाते हो क्योंकि आपकी खुद की स्टैंडिंग नहीं है या आपके पास फैमिली सपोर्ट नहीं है। तो आपके
(23:57) अंदर अगर कॉन्फिडेंस नहीं होता है तो आप स्टैंड नहीं ले पाते हो। आपने बाउंड्रीज नहीं बनाई है। आप वो जो छोटे-छोटे क्लेश होते हैं और कई बार बड़े-बड़े क्लेश उन सब से डर जाते हो। तो आप उस पर्सन के साथ सालों निकाल देते हो और इस चक्कर में आप बीमार हो जाते हो। तो 22 साल उन्होंने पेन झेला है। वो एक दिन भी डिप्रेशन का शिकार नहीं हुई है। वो धीरे-धीरे धीरे-धीरे डिप्रेशन के मुंह में जा रही थी। जब कंडीशन बहुत ही ज्यादा खराब हो गई और वह एक इस ऐज पर पहुंच गई कि अब उनसे बर्दाश्त नहीं हो रहा है। बच्चे भी बड़े हो गए हैं। बच्चों के सामने भी कुछ भी बोल देते हैं।
(24:29) ये तो मैंने आपको एक केस बताया। इस तरह से तमाम केस है। मतलब एक आदमी जैसे ऐसा केस आपके पास आया फॉर एग्जांपल 22 साल पुराना केस। तो लेडी ने सोसाइटी की वजह से बच्चों की वजह से जो ये मेजर ऐज होती है वो तो निकाल दी। उन्होंने बच्चे बड़े हो गए। सोसाइटी भी अब क्या बोलेगी? उनकी तो एज ही चली गई। तो ऐसे केस में जब एक लेडी आती है तो वो मेंटली पूरी शैटर्ड हो चुकी होती है। टूटी हुई होती है। उसके बाद क्या उसको जीने की चाह रह जाती है? क्योंकि आदमी तो वही रहता है। नार्सिसिस्ट बंदा ही रहता है उसके साथ। तो अब अगर वो जीने की उमंग भी
(25:06) आप उसके अंदर डाल देते हैं तो क्या कर पाएगी वो? तो ऐसे केस में अगर कोई इंसान फंसा हुआ है तो आपकी राय क्या होती है? मैरिज को कंटिन्यू करो या मैरिज को खत्म करके अब अपनी जिंदगी जी लो या यह समझाती हैं कि बस अब जो है उसको अडैप्ट कर लो। मतलब क्या आप उसके मेंटल लेवल को क्या मेडिसिन देती हैं या क्या एडवाइस देती हैं कि वो ऐसे इंसान के साथ कंटिन्यू कर पाए। जैसे यही लेडी मेरे पास आई थी तो इनके अंदर ना ऐसा तो नहीं है कि बिल्कुल जीवन जीने की इच्छा खत्म हो गई थी क्योंकि ऐसा पर्सन तो फिर कभी भी किसी भी इलाज के लिए कहीं जाएगा ही नहीं तो कहीं ना कहीं जीवन
(25:49) जीने की इच्छा तो है ही इसलिए ही तो उन्होंने अब ये सोचा कि मैं थेरेपीस लेती हूं लेकिन उनको यह डर था कि मैं कितना भी अपने ऊपर काम करूंगी रहना तो मुझे उसी आदमी के साथ है क्योंकि मैं उसे छोड़ नहीं सकती। मैं टोटली डिपेंडेंट हूं। मेरी अपनी कोई स्टैंडिंग नहीं है। मैंने जितना पढ़ा था, पोस्ट ग्रेजुएशन की थी मैंने। तो अब मुझे कुछ नहीं आता एक तरीके से। मैं इतने सालों में बेकार हो गई हूं। ये उनके शब्द थे कि मैं जाऊंगी कहां जाऊंगी। मेरे मायके में भी कोई सपोर्ट नहीं है। बच्चे अभी इतने भी इंडिपेंडेंट नहीं हुए हैं कि मैं बच्चों के साथ कहीं जाकर रह लूं। और अब इस
(26:22) उम्र में कहां छोड़कर जाऊंगी जब इतने साल निकाल दिए तो। तो ये उनका कंसर्न था। लेकिन अब वो इतना ज्यादा परेशान हो रही थी। उनको नींद नहीं आ रही थी। हर समय घबराहट रहती थी। बिन बात के रोना आता था उनको और अब हस्बैंड की छोटी-छोटी सी बातें भी बहुत ज्यादा बड़ी लगती थी। जो बड़ी-बड़ी झटके सह गई अब वो छोटी-छोटी बातों को भी सह नहीं पा रही थी। लेकिन ठीक होने की कहीं ना कहीं एक चाहत अंदर थी। वो हम पहले देख लेते हैं। तो हम ऐसे पर्सन को सबसे पहले तो जो हो चुका है, जो उसके अंदर सप्रेशन है, उस सप्रेशन को रिलीज़ कराते हैं। हम उसे कथार्सिस प्रोसेस में लेकर
(26:54) जाते हैं। और हिप्नोसिस के जरिए ये कथार्सिस प्रोसेस बहुत ही इजी और बहुत ही इफेक्टिव हो जाता है। तो, हम हिप्नोटाइज करके उस पर्सन को उसे बहुत रुलाते हैं। उसके अंदर जितना भी भरा हुआ होता है क्योंकि हमारे शरीर में वह सारे सप्रेस्ड इमोशंस अलग-अलग जगह स्टोर हो जाते हैं और फिर वो कभी पेन के रूप में कभी किसी और रूप में हमें सता रहे होते हैं। तो उसको हम रिलीज़ कराते हैं एक्सेप्टेंस कि यह आपकी लाइफ का ट्रुथ है कि आपका पार्टनर एक नार्सिस्ट है। अब आप इसे चाहे अपना कोई कर्मा वाली थ्योरी दो। आप इसे कुछ भी दो इसे। लेकिन यह रियलिटी है। इसके आपको
(27:29) एक्सेप्ट करना पड़ेगा और इसके साथ अगर आपको रहना है भाई या तो आप छोड़ने का डिसीजन लो लेकिन आप छोड़ोगे किस बेसिस पर? आपको छोड़ने के लिए कोई तो बेस होना चाहिए ना। तो आप छोड़ नहीं सकते हो। छोड़ नहीं सकते हो तो फिर आपको एक्सेप्ट करना पड़ेगा और आपको धीरे-धीरे अपनी बाउंड्रीज ड्रॉ करनी पड़ेंगी। आपको ना कहना सीखना होगा और छोटे-छोटे क्लेशों से आपको डरना बंद करना होगा। तो धीरे-धीरे हम उन्हें वो कॉन्फिडेंस देते हैं। उन्हें सिखाते हैं कि कैसे नार्सिस्ट इंसान को कंट्रोल में रखा जाता है कि वो शोर मचाकर तमाशा कैसे रखा जाता है? एक नार्सिस्ट इंसान को
(28:02) कंट्रोल में कैसे रखा जाता है? और ये क्या बीमारी होती है? नार्सिसिज्म इज मतलब कोई इलनेस है क्या? ये एक पर्सनालिटी टाइप है। नार्सिस्टिक पर्सनालिटी डिसऑर्डर। तो हम इसको डायग्नोस करते हैं 18 इयर्स प्लस पर। अच्छा। यस। अब ये क्या है कि कुछ तो जेनेटिक फैक्टर भी होता है और कुछ अपब्रिंगिंग फैक्टर भी होता है, एनवायरमेंटल फैक्टर भी होता है। सारा डिटेल में समझेंगे। सो नार्सिस्टिक पर्सनालिटी डिसऑर्डर को डायग्नोस करने के लिए एक व्यक्ति की उम्र 18 साल से ऊपर होनी चाहिए। हम क्राइटेरिया चेक करते हैं जो पर्सनालिटी के क्राइटेरिया होते हैं। सो उसमें जो
(28:38) क्राइटेरियास मैच करते हैं उसके अकॉर्डिंग हम इसको बताते हैं कि इनका जो पर्सनालिटी टाइप है वो यह है। बट थोड़ा बहुत नार्सिस्म सब में होता है जो किसी के लिए भी ऐसा हार्मफुल नहीं होता है। हार्मलेस ही होता है। लेकिन जिनमें ये ट्रेड्स बहुत ज्यादा होते हैं। जिनका पर्सनालिटी टाइप कोर पर्सनालिटी टाइप ऐसा होता है। उनके साथ रहना सच में डिफिकल्ट होता है। तो कुछ लोगों में ऐसा होता है कि पीढ़ियां होती हैं। जैसे उनके एक मेरे पास बच्चा आया था 12 साल का तो उसकी मदर डॉक्टर थी तो वो सेंस कर पा रही थी कि मेरे बच्चे में ये एनपीडी के साइंस है उसके फादर भी नार्सिस
(29:11) थे उसके ग्रैंडफादर भी नार्सिस थे और बच्चे में भी नर्सिज्म के पूरे होते लेकिन क्योंकि 12 साल का था तो हम उसको ऐसे डायग्नोसिस नहीं बना सकते थे पूरा 18 साल मिनिमम उसकी ऐज होनी चाहिए लेकिन सारे के सारे साइंस वही थे तो पूरा उसके फादर से और उसके ग्रैंडफादर से वो सब चीजें देखा उसने और एनवायरमेंट भी दिख रहा है तो जींस भी मिले है और एनवायरमेंट भी देख रहा है वो। वही डोमिनेंस की डॉक्टर है मदर। लेकिन फिर भी मदर को गाली पड़ रही है। कभी भी बेइज्जती कर दी जाती है। बहुत ज्यादा कंट्रोल में रखा जाता है। उसकी इनकम पर भी पूरा कंट्रोल रखा जाता है। हर चीज पर
(29:42) इंटरफेरेंस है। तो बच्चा वो देख रहा है और यह देख रहा है कि घर में पापा की, दादाजी की चलती है। मम्मी चाहे कितनी भी पढ़ी लिखी हो, कुछ भी हो मम्मी की चलती नहीं है। मम्मी को छुपाना पड़ता है। मम्मी की कोई वैल्यू नहीं है। तो उस बच्चे ने क्या किया? मम्मी को कंट्रोल करना शुरू किया। मम्मी को डराना शुरू किया। देखो अगर मेरी बात नहीं मानोगे तो किचन से जाता था और चाकू लेकर आता था कि देखो मैं कट कर लूंगा इस तरीके से और फिर अंदर अंदर हंसता था बेवकूफ बना दिया बेवकूफ बना दिया ये बात मुझे खुद बच्चे ने बताई है क्योंकि बच्चा 12 साल का ही था छोटा था अभी उसमें इतना
(30:10) फिल्टर इतनी समझ नहीं थी कि ये बात डॉक्टर को बतानी है नहीं बतानी है तो उसने ये बात मुझे बता दी कि मैं ना मम्मी को ऐसे डराता हूं और वो इसी टाइप की फिर वीडियोस देखने लगा क्योंकि उसके फादर उस पर भी डोमिनेंस चलाते थे अपनी लेकिन बच्चा खुद नार्सिस्टिक ट्रेड्स डेवलप कर रहा था तो उसको वो डोमिनेंस कहां समझ में आ रही थी कि यह ओके है या मैं भी मम्मी की तरह सह लूंगा तो उसको बहुत गुस्सा आता था लेकिन वो छोटा था तो अभी फादर का कुछ बिगाड़ नहीं सकता था लेकिन अंदर-अंदर ना वो ह्यूमन बम तैयार हो रहा था और उसने मुझे बताया कि मैं बड़ा हो जाऊंगा ना तो अपने
(30:43) फादर को मार दूंगा उसने मुझे यह बोला और उसके अंदर-अंदर गुस्सा भर रहा था लेकिन मम्मी उसके कंट्रोल में आ जाती थी तो अपना गुस्सा वो डिस्प्लेसमेंट यह डिफेंस मैकेनिज्म होता है जिसमें आप कहीं का गुस्सा कहीं निकाल देते हो क्योंकि वो अनकंफर्ट बल फीलिंग्स को आपको रिलीज़ करना होता है। तो पापा पे नहीं चल रही है। नाराज मैं पापा से हूं। लेकिन मैं मम्मी पर निकाल दूंगा। मम्मी को डोमिनेट करूंगा। मम्मी को वो इस तरीके से गाल पे मार भी देता था। धक्का भी दे देता था। चाकू से भी डरा देता था। पूरा कंट्रोल में रहो। मेरे हिसाब से चलो। मैंने मुंह से ये निकाल
(31:12) दिया तो यही होना है। तो ये ऐसे जनरेशन का भी होता है। और एक और मैं बताती हूं कि एक लड़का आया। उसको बचपन में इतना बुली किया गया। इतना सताया कि धीरे धीरे धीरे-धीरे उसने अपने अंदर ये नार्सिस्टिक ट्रेट्स अप्ट कर लिए। कि उसको यह पता चल गया कि डोमिनेंस में पावर है। अब कोई मुझे कुछ नहीं कह सकता। मैं भी दूसरों को इंसल्ट करूंगा। मैं कंट्रोल करूंगा। मैं अपनी स्टैंडिंग दिखाऊंगा। मैं क्रेडिट लूंगा सारे। मैं ही में मैं अपने को ग्लोरिफाई करूंगा। मैं अपने आप को पॉपुलर करूंगा। तो उसने धीरे-धीरे ये नार्सिस्टिक ट्रेड्स कंट्रोल पाने के लिए उस अनकंफर्टेबल
(31:47) फीलिंग से उस पेन से बचने के लिए धीरे-धीरे सीख लिए। ओ ऐसा भी सीख लेते हैं। तो यह अगर किसी ने किसी को देख के कोई ट्रेट अगर अपने अंदर ले आए हैं, दे हैव चेंज देमसेल्फ एंड उसकी वजह से अब उनकी फैमिली लाइफ स्टार्ट होने वाली होती है और आपने उसको बचपन में ही डायग्नोस कर लिया होता है। तो क्या वो इंसान मैरिजेबल इंसान रह जाता है कि आप उसकी फैमिली को यह समझाते हैं कि पहले आप देख लीजिए कि इनका ट्रेड्स पूरी तरीके से खत्म हुआ है कि नहीं। आप जो सफर कर रही हैं ऐसा ना हो कि आने वाली जो लड़की है वह भी सेम सफर करें। क्या एज अ डॉक्टर आप उस फैमिली को यह
(32:28) इंस्ट्रक्शंस देती हैं क्योंकि सोसाइटी क्या करती है कि हमने तो बच्चे को जन्म दे दिया। बच्चा इतना बड़ा हो गया। अब उसकी शादी कर दो। और यह रिपीट पैटर्न्स चलते चले जाते हैं फैमिली में। जैसे आपने अभी बताया दादा के बाद मम्मी, मम्मी के बाद अब वो 12 साल का बच्चा। तो ये पैटर्न ब्रेक करने के लिए अ अगर कोई फैमिली आपके पास आती है तो आप क्या सजेशंस देते हैं? इतनी समझ फैमिलीज में नॉर्मली नहीं होती है और उन्हें लगता है कि मेल डोमिनेंस सोसाइटी तो हमेशा से रही है और घर में आदमियों की चल रही है। अगर खासतौर से मेल नार्सिस्ट हो तो फीमेल नर्सेस से तो तकलीफ
(33:05) हो जाती है लोगों को। लेकिन मेल नर्सेज से तो उनको जनरल मतलब बहुत ही नॉर्मल कर देते हैं। उसे नॉर्मलाइज कर देते हैं। एकदम से ऐसे जनरलाइज्ड वे में उसे देखने लग जाते हैं कि किस घर में आदमियों की नहीं चलती है। आदमियों की तो हमेशा से चलती आई है। हमारे टाइम में तो ऐसा था हम अपने बाऊजी के सामने तो बिल्कुल नहीं बोल सकते थे। ये नहीं बोल सकते थे। तो उन्हीं की हमेशा से चलती आई है। तो वहां पर ना जब मेल कोई नार्सिस्ट होता है तो उसको ऐसा मान लिया जाता है कि ये नार्सिस्ट नहीं है। ये क्या फैंसी टर्म नार्सिस फार्सिस्ट बोल रहे हो
(33:31) तुम। आदमी तो देखभाल कर चलेगा ही ना। उससे तो लगेगा कि अगर परिवार में कुछ गलत हो रहा है तो वो तो कंट्रोल करने की कोशिश करेगा ही ना। वो तो रोकेगा टोकेगा समझाएगा ही ना कि डांटेगा टपटेगा अगर थप्पड़ मार दिया या कुछ बोल दिया तो क्या हुआ सब कुछ वही तो कर रहा है तो वहां पर इसको इस तरीके से जो एक्चुअल में अब्यूज है नॉर्मलाइज कर दिया जाता है तो यह समझना बड़ा डिफिकल्ट होता है कि यह पर्सनालिटी टाइप बहुत ही टिपिकल पर्सनालिटी टाइप है और ऐसे आदमी के साथ रहना बहुत मुश्किल है एक स्ट्रगल है और जो इसका पार्टनर बनेगा एंड इवन आगे आने वाली पीढ़ियां वो भी सफर
(34:06) करेंगी क्योंकि सफर करती करती है। मैं तो इतने सारे क्लाइंट से मिल चुकी हूं। तो उनकी एक स्ट्रगल ही है। बस स्ट्रगल कम हो सकती है। स्ट्रगल खत्म नहीं होती है। ओके? तो मतलब नार्सिज्म क्यरेबल नहीं है। देखिए नार्सिस्ट आदमी मानेगा ही नहीं कि वो नार्सिस्ट है। वो मानता ही नहीं है। आप मानेंगे एक्सेप्ट करेंगे तभी तो आप ट्रांसफॉर्म हो सकते हैं। लेकिन अगर आप यह मानेंगे मैं बिल्कुल ठीक हूं। और मुझे गलत समझा जा रहा है। प्रॉब्लम दूसरे लोगों में है। वो मुझे नहीं समझ पा रहे हैं। उनकी समझ कम है। तो कैसे बदलेंगे आप? आप जबरदस्ती किसी को थोड़ी ना बदल सकते हैं।
(34:41) तो यह जो पर्सनालिटी टाइप है इसके लिए लोगों की यह एक्सेप्टेंस नहीं होती कि यह गलत है या मैं कुछ गलत कर रहा हूं। उनको तो लगता है वह बिल्कुल सही हैं। उनको गलत समझा जा रहा है। वो तो और विक्टिम मेंटालिटी की तरह प्रेजेंट होते हैं आपके सामने कि मुझे गलत कितना समझा जा रहा है। जो मेरा अच्छाई है उसे देखा नहीं जा रहा है। जो मेरे इन इनके हिसाब से गलत लग रहा है उसको हाईलाइट किया जा रहा है। तो इसलिए नार्सिस्ट एक्सेप्ट नहीं करता है। उसे यह लगता है कि मेरे अंदर जो कुछ भी है वो बिल्कुल सही है। मेरा बिहेवियर ठीक है। मेरी सोच ठीक है। मैं बिल्कुल ठीक हूं।
(35:14) मैं जो कर रहा हूं सही तो कर रहा हूं। तो जो इंसान यह मान कर बैठेगा कि मैं बिल्कुल्क सही हूं उसे आप कैसे चेंज करेंगे? वो दूसरे को चेंज करना चाहेगा। वो यह आपसे एक्सपेक्ट करेगा कि आप चेंज हो जाए। और आपने बोला कि जैसे वो 12 साल का बच्चा मेरे पास आया था। मदर तो सेंस कर रही थी कि मेरी लाइफ ही जब हेल जैसी है और यह भी अगर ऐसे ही डेवलप हो गया तो आगे फिर क्यों मैं किसी की लाइफ हूं। लेकिन मदर की चलेगी कहां? मदर की जब वो खुद डॉक्टर होकर हॉस्पिटल भी चला रही है। वो सब कुछ कर रही है। उसकी खुद की नहीं चल रही है। तो आगे कैसे चलेगी उसकी? की जब इतना होल्ड है
(35:47) उसके घर में हस्बैंड का और उसके फादर इन लॉ का उसकी चलती नहीं बेटे के आगे नहीं चल रही 12 साल के बेटे के आगे नहीं चल रही वो डरी डरी सी रहती है तो आप जब ट्रीटमेंट देती हैं तो नार्सिसिस्ट बच्चे को देती हैं या उसकी मां को देती हैं देखिए जैसे ये बच्चा आया तो 12 साल का बच्चा था तो उम्र छोटी है तो बच्चों को थोड़ा सा समझाना कंपैरेटिवली बड़े लोगों के मुकाबले आसान होता है। तो जैसे इस बच्चे को हमने समझाया तो इस बच्चे में इंप्रूवमेंट हमें दिखने लगा। पांच छह सेशन के बाद ही इंप्रूवमेंट दिखने लगा। क्योंकि बच्चे को ये समझाया गया कि आगे के लिए
(36:20) कितना पेनफुल हो जाएगा। उसको बहुत डिफरेंट-डिफरेंट पर्सपेक्टिव से समझाया गया कि मम्मा की लाइफ भी देखो। है ना? और उसको अपनी खुद के लिए भी आगे की कितने स्ट्रगल और पेन है। और जो वो सफर कर रहा था और जो उसके अंदर एक तरीके से अपने फादर के लिए हेट्रेट भरता जा रहा था कि मैं बड़ा होकर इस आदमी को मार दूंगा। और आप एक बात बताइए ऐसे ही तो क्रिमिनल तैयार होते हैं और कैसे तैयार होते हैं उनके साथ कहीं ना कहीं कुछ ना कुछ पहले की स्टोरी जुड़ी हुई होती है ना तो उसको ये सब चीजें समझाया गया फिर हमने हिप्नोसिस का भी सहारा लिया क्योंकि बच्चा बहुत छोटा था तो
(36:50) उसके अंदर इंप्रूवमेंट्स आने लगी लेकिन वो उसी एनवायरमेंट में रह रहा था फिर फादर अब्यूज कर देते थे तो वो बच्चा बैक मार जाता था वो कहता था ये जो समझा रही है बातें तो अच्छी है सब कुछ सही है ना बात इनकी बिल्कुल सही है लेकिन ये जो पेन मेरे घर में मुझे मिल रहा है इसका क्या इसके लिए मुझे मुझे ऐसा ही बनना पड़ेगा। अगर मैं ऐसा बनूंगा तो ही अनकंफर्टेबल फीलिंग से बचूंगा। तो वो बार-बार बैक मार जाता था। और एक दिन उसने अपनी मदर को काफी मार दिया। और उसने इतना मार दिया कि उसकी मदर के लेफ्ट हैंड में चोट लग गई और उनके फ्रैक्चर भी हो गया।
(37:21) इतना ज्यादा मार दिया कि अगर मुझे वहां पर लेके गई तो तेरे बाल काट दूंगा। तू तड़ाक पे और वो और भी गंदी गाली दे देता था। इतना तो मदर का मेरे पास फोन आता है। मेरे टीम के पास फोन आता है कि आप प्लीज मैम को ये मैसेज दे दो। मैं बहुत हेल्पलेस हूं और ऐसे-ऐसे बात हो गई है और इस तरीके से कि मैं जैसे ही इसको दोबारा से थोड़ा अपने काबू में लूंगी मैं सेशन लेने के लिए आऊंगी। नार्सिसिस्ट आदमियों को क्या रिहैबिलिटेशन सेंटर की जरूरत होती है? देखिए उनका ना अब्यूज और डोमिनेंस ऐसा नहीं होता कि वो हर समय कोई सींग लिए हुए हाथ में चाकू लिए हुए आपको डराते फिर रहे
(37:57) हैं। वो बहुत ही कैरिस्मैटिक और बहुत ही चार्मिंग भी होते हैं। दूसरे लोगों को पता नहीं चल पाता कि ये नार्सिस्ट आदमी हैं। वो इतने स्मार्ट मैनपुलेटर होते हैं। वो आपके साथ अकेले में जो बिहेवियर करते हैं आपको जैसे ट्रीट करते हैं या बहुत क्लोज लोगों के सामने जिनके सामने उनकी बात खुल गई है। लेकिन बाकी लोगों से तो उनका बिहेवियर इतना अच्छा होता है ना कि कोई कह ही नहीं सकता। आप उनको बताएंगे तो बोले नहीं नहीं वो तो बहुत जेन्युइन बहुत बढ़िया लोग इंसान है। हमसे तो बड़े अच्छे बोलते हैं। यकीन ही नहीं आता है। तो उनको ऐसे रिहब सेंटर में एडमिट करना और ये सब
(38:29) चीजें नहीं होती है। लेकिन आज आपसे सीखना चाहूंगी कि जो पार्टनर एक नार्सिसिस्ट पार्टनर के साथ रह रहा होता है वो क्या करें कि उसे नार्सिसिस्ट जो ट्रेट्स हैं उसे सहना ना पड़े। तो आप पार्टनर्स के लिए क्या एडवाइस देंगी? अगर वाइफ नार्सिसिस्ट है तो हस्बैंड को एडवाइस क्या देना चाहेंगी? अगर हस्बैंड नार्सिसिस्ट है तो वाइफ को कैसे अपनी जिंदगी जीनी चाहिए? ताकि जिंदगी जी सके वो। दोनों जेंडर्स के बारे में बताएं। देखिए जेंडर कोई भी हो जो नार्सिस्टिक ट्रेड्स होते हैं वो सेम ही होते हैं। अच्छा। जैसे एक लेडी मेरे पास आई थी। उनकी मदद इन
(39:06) लॉ नार्सिस थी। तो उनकी मदर इन लॉ ने इतना बुरी तरीके से उनको टॉर्चर किया। इवन प्रेगनेंसी में भी नहीं छोड़ा। बहुत ही ज्यादा टॉर्चर करती थी। बहुत इतना ज्यादा बुरा बुरा बोलती थी उनको। गंदी गंदी गालियां एक प्रेग्नेंट औरत को दे रहे हो आप। और आप खुद भी एक औरत हो और आपके हिसाब से ही वो उठे बैठे सब कुछ है। अगर वो तैयार होकर अपने हस्बैंड के साथ भी कहीं पर जाने को रेडी है। बिल्कुल घर से निकलने वाली है। तो उस टाइम पर भी आप कोई ऐसी बात कह दे रहे हो या कुछ ऐसा सीन क्रिएट कर दे रहे हो जिसकी वजह से आप वहां पर उनका जाना रोक रहे हो। और हर वक्त आप जो है ना उसको
(39:40) कुछ ना कुछ कुछ ना कुछ कंपैरिजन करके कमियां निकाले जा रहे हो तो नार्सिस्ट कोई भी हो सकता है। लेडीज भी होती है और जेंट्स भी होते हैं और सब में कंट्रोल फ्रीक होते हैं ये लोग इनके आगे ये अपने आगे किसी को कुछ नहीं समझते हैं और इनके अकॉर्डिंग ही सब कुछ होना चाहिए। तो ऐसे तो अगर कोई भी नार्सिस्ट है आपका चाहे वो इनलॉज़ है या आपका हस्बैंड है या वाइफ है कोई भी है तो सबसे पहले तो आपको ना अपने अंदर का खोया हुआ कॉन्फिडेंस डेवलप करना पड़ेगा क्योंकि यह लोग आपको इतना ज्यादा सुनाते हैं और इतना ज्यादा आप पर खुद पे डाउट क्रिएट करवा देते हैं कि आप अपना
(40:16) कॉन्फिडेंस खो देते हो इनके सामने रहकर और आप डाउट करने लग जाते हो तो बहुत सारे लोगों को ना ऑब्सेशंस भी हो जाते हैं। उनको ना ऐसा डाउट होने लग जाता है कि ये काम मैंने ठीक किया नहीं किया उनको डर क्योंकि जब अंदर डर होता है तो बाहर कंट्रोल किया जाती है। तो अब क्या होता है ऐसे लोगों में ना ऑब्सेसिव टेंडेंसीज भी डेवलप हो जाती है जो नार्सिस्ट के साथ रहते हैं। तो जैसे एक लेडी थी तो उनके अंदर ना बार-बार रिचेकिंग की आदत पड़ गई। उनको ऐसा लगता था कि फिर ना मेरी मदर इन लॉ सुनाएगी, मेरा हस्बैंड सुनाएगा तो उनको बहुत डर लगता था। तो वो
(40:44) एक ही काम को चार-चार पांच-पांच बार चेक करने लग गई। तो ये ओसीडी ये ये ओसीडी हो गया उनको इस डर की वजह से। ओके। कि ना अगर मैं चारप बार चेक कर लूं पूरा 100% श्योर हो जाऊं कि हां ठीक है तो वो लोग मुझे कुछ भी सुनाएंगे नहीं तो किसी को डिप्रेशन हो जाता है किसी को ओसीडी हो जाता है किसी को ए्जायटी हो जाता है किसी को इंसोमिया की प्रॉब्लम है किसी को डायबिटीज किसी को थायराइड हो गया किसी को बॉडी में पेन मैनिफेस्ट हो गया है मतलब इस तरीके से और कई बार एक्सट्रीम केस में तो बिल्कुल शटडाउन मोड में चला जाता है इंसान का दिमाग एकदम से नर्वस सिस्टम बिल्कुल
(41:14) ऐसा हो जाता है कि हर समय पैनिकिक एंजायटी वाला फेस और पैनिकिक अटैक पड़ रहे होते हैं इतना ज्यादा टॉर्चर भी हो जाता है। तो कोई भी अगर नार्सिस्ट पर्सन के साथ रह रहा है तो सबसे पहले खोया हुआ कॉन्फिडेंस कि अगर आपको किसी बात के लिए क्रिटिसाइज किया जा रहा है, आपको सुनाया जा रहा है तो आप सबसे पहले लेबल करना शुरू करो कि यह उस पर्सन का ओपिनियन है और वो डोमिनेंस की वजह से ऐसा कर रहा है और आप अपने ऊपर भरोसा रखना शुरू करो। आप उनके कहने की वजह से अपने ऊपर डाउट करना बंद करो। और अगर उसने बिना डाउट करे अपना काम किया तो फिर उन्हें फिजिकल अब्यूज का सामना नहीं करना
(41:50) पड़ता। हर घर में फिजिकल अब्यूज तो नहीं होता है। ज्यादातर वर्बल अब्यूज होता है। फिजिकल अब्यूज किसी किसी घर में होता है। और फिजिकल अब्यूज पेनफुल होता है। तो उसके लिए भी हम बताते हैं। तो जैसे मैं आपको स्टेप बाय स्टेप बताती हूं। तो सबसे पहले हम कहते हैं आप अपना कॉन्फिडेंस गेन करो। दूसरा अगर आपको डाउट मोड में डाल रहा है तो आप डाउट मत करो। अगर आपको लग रहा है कि इन लोगों का कंट्रोल ज्यादा है तो आप उसके एविडेंसेस क्रिएट करो। जैसे एक लेडी थी तो उसके हस्बैंड ने उसको पागल बनाया। उसका ऑफिस में किसी दूसरी लड़की के साथ अफेयर
(42:20) चला गया। तो वो लड़की इंजीनियर थी। लड़का भी इंजीनियर था। दोनों की लव मैरिज हुई थी। और फिर उसके बाद उसके ऑफिस में कोई एक नई एंट्री हुई और उसका उससे अफेयर स्टार्ट हो गया। तो उसने अपनी इंजीनियर वाइफ को इतना गैस लाइट किया। इतना गैस लाइट किया उसने कि उसको कंफ्यूजन में डाल दिया। वो खाना बनाकर जाती थी। उसमें जाकर नमक तेज कर आता था। वो प्रेस कर के हटती थी तो फिर से स्विच ऑन करके प्रेस कपड़े पर ऐसे रखकर आ जाता था और फिर उसको डांटता था कि क्या हो गया तुम्हारे दिमाग को? तुम आजकल बहुत भूलने लगी हो। तुमने कपड़ा जला दिया है।
(42:48) तुमने खाना बिगाड़ दिया। तुम्हें कुछ याद नहीं रहता है। इस तरह से वो उसको कंफ्यूजन में डाल रहा था। उसका कॉन्फिडेंस तोड़ रहा था। धीरे-धीरे धीरे-धीरे तोड़ रहा था। जब उसके घरवाले बहुत परेशान हो गए। अपनी बेटी को ले गए। जब वो एक दिन रो-रो के उसने अपने मां-बाप को बताया कि मेरे साथ ऐसा हो रहा है। मेरा दिमाग खराब हो गया। मेरा प्लीज इलाज कराओ। मैं कभी प्रेस भूल जाती हूं। कभी मैं खाना ऐसा बोल जाती हूं। बहुत रोई। तो मां-बाप को भी यकीन नहीं आया कि इतनी अच्छी लड़की हमारी और ऐसा कैसे कर सकती है? तो जब वो अपने घर ले गए 15 दिन
(43:16) में उसकी कंडीशन थोड़ी नॉर्मल हुई। लेकिन उस लड़की को यकीन नहीं आ रहा था कि मैं ठीक हूं। तो फिर उन्होंने बोला कि चलो ठीक है तुम्हारा इलाज शुरू कराते हैं। जब वो मेरे पास आए तो मैंने उनको बोला कि तुम एविडेंस क्रिएट करना शुरू करो। तुम ना जो है ना अपना जो भी काम किया करो उसकी ना तुम रिकॉर्डिंग कर लो। ठीक है? तो फिर उसके बाद अपने हस्बैंड को देखो जरा क्योंकि जब उसने मुझे बताया कि हस्बैंड लेट आते हैं ऑफिस से फोन छुपा के रखते हैं। फोन पे उनके लॉक रहता है। मुझसे ढंग से बात नहीं करते हैं। उसने बहुत सारी ऐसी चीजें बताई तो मुझे डाउट हुआ। मुझे
(43:46) श्योरिटी नहीं थी कि यही बात निकलेगा। लेकिन डाउट हुआ मुझे कि उसका हस्बैंड कुछ गड़बड़ी कर रहा है। जब घर में दो ही लोग रहते हैं। जिस टाइम वो खाना वगैरह बनाती है ऐसा करती है तो सुबह वो जो बाई आती है घर में वो भी नहीं रहती है कि वो कुछ गड़बड़ कर रही हो। और कोई आता नहीं है तो कौन करेगा गड़बड़? और उससे बात करके मुझे उसकी मेंटल कंडीशन ऐसी नहीं लग रही थी कि वो साउंड माइंड नहीं है या अपना मेंटल बैलेंस खो चुकी है। तो मुझे उसके हस्बैंड पे डाउट हुआ जबकि वो बिल्कुल एग्री नहीं थी इस बात से। उसको लग रहा था कि नहीं मैडम वैसे ही शक कर रही हैं और मेरा
(44:13) हस्बैंड तो इतना प्यार करता है। लव मैरिज हुई है हमारी तो वो तो नहीं कर सकता ऐसा। लेकिन मैंने कहा अगर तुम्हें पता लगाना है तो एक बार डाउट कर कर एविडेंस गैदर करने में क्या प्रॉब्लम है? एक बार करो तो सही। तो फिर बहुत हिम्मत जुटाकर उसने यह किया। चुपचाप से उसने तीनचार अलग-अलग फोन लिए कैमरे वाले और अलग-अलग एरिया में छुपाए। तो एक बैडरूम में हमने उसे छुपाया कि आप वहां छुपाओ। देखो कि बेडरूम में पड़ा पड़ा वो क्या करता है। तो उसमें उसकी वो बात करते हुए रिकॉर्ड हुई जब वो अपनी गर्लफ्रेंड से बात कर रहा था। तो वो उसकी बातें रिकॉर्ड हो गई। उसमें किचन में हमने
(44:46) छुपवाया कैमरा तो पता चला वो खाना बनाकर बाहर गई और फिर हस्बैंड आया और काफी सारा उसमें नमक मिर्ची उसने डाल दिया। एडिशनल उस मिक्स कर दिया। वो सब जब रिकॉर्ड हो गया वो चीज तब वो एविडेंसेस बने। तब उसे पता चला और तब ऑब्वियसली किसी लड़की को गुस्सा क्यों नहीं आएगा? मां-बाप के पास एविडेंसेस आ गए और वही डिवोर्स का बेस बने क्योंकि वो तो उसको बिल्कुल ही खत्म करने की कोशिश कर रहा था। क्योंकि आजकल एकदम से तो खत्म नहीं कर सकते आप। तो दूसरा तरीका निकालते हैं कुछ लोग कि तिल-तिल करके किसी इंसान का कॉन्फिडेंस तोड़ दो। वो वैसे ही
(45:17) खत्म हो जाएगा। ओ उसे रास्ते से हटाना बहुत आसान हो जाएगा। तो ऐसे ऐसे भी मैनपुलेटिव मैनपुलेटिव तो बहुत ही फिर भी ठीक का ठीक वर्ड है। घटिया प्रवृत्ति के लोग हैं जो किसी इंसान की जिंदगी भी बर्बाद कर देते हैं। तो ऐसे भी केसेस आते हैं हमारे पास जहां पर हमें ऐसा देखने के लिए मिलता है। एक मतलब आप आपको बहुत शॉकिंग लगेगा कि कैसे-कैसे केसेस बता रही हूं। मैं एक केस ऐसा आया कि उस घर में इतनी डोमिनेंस थी उस लेडी की कि पूरा बड़ा परिवार था। मतलब जिसमें था कि जेठ भी रहते हैं, आपके देवर भी रहते हैं। 20-25 लोगों का एक बड़ा परिवार है। तो उसमें एक लेडी नार्सिस थी
(45:57) और उसको पूरा घर कंट्रोल करने की इतनी आदत थी, इतनी कंट्रोल फ्रीक थी वो कि घर में एक डॉटर इन लॉ आ गई जिसने आवाज उठानी शुरू करी अपने लिए कि भाई इन्हीं की चाची जी की डोमिनेंस क्यों जलेगी पूरे घर में? उस औरत ने इतनी घटिया हरकत की। मुझे कैमरे पे बोलते हुए भी शर्म आ रही है। उसने अपना यूरिन मिक्स करना शुरू कर दिया खाने में। ओ ओ ओ ओ ओ माय गॉड यस मतलब कितनी शर्मनाक हरकत है। एंड कितनी शर्म व्हाई व्हाट वास द इंटेंशन? बस कंट्रोल करना है और मेरी कोई नहीं सुन रहा है तो अब मैं तुम्हें पनिश करूंगी घटियापन से। इज इट अ पनिशमेंट और इज इट अ ब्लैक मैजिक?
(46:33) ब्लैक मैजिक था या क्या था वो तो मुझे मुझे नहीं पता। लेकिन यह घटियापन की हरकत थी। और यह आपने फिर वो एविडेंस के तरीके से ही निकलवाया। कैमरास वगैरह लगवाकर। ये जो लेडी थी जिसने अपने घर में आवाज उठानी शुरू की थी कि चाची जी की इतनी ज्यादा डोमिनेंस क्यों चलेगी? बहुत ज्यादा परेशान थी। ये खुद भी बहुत स्मार्ट थी। तो इसने मुझसे डिस्कस किया कि मुझे ऐसा लग रहा है कि कुछ गड़बड़ कर रहे हैं क्योंकि आजकल हमारे खाने पीने में भी कुछ अजीब सा हमें महसूस होता है और आजकल उनके तेवर बहुत बदले हुए लग रहे हैं और मुझसे तो ढंग से बात करती नहीं है और घर का माहौल भी बहुत
(47:05) ज्यादा खराब कर रखा है इन्होंने। ये कोई सीवेयर डिप्रेशन में नहीं थी। कुछ नहीं थी। इसको बस थोड़ा सा ओवरथिंकिंग की प्रॉब्लम हो गई थी और बहुत स्मार्ट लेडी थी ये। तो उसने सोचा कि मैं एक बार डिस्कस कर लेती हूं इससे पहले कि मैं किसी बड़ी प्रॉब्लम का शिकार बनूं। तो तब ये मेरे पास आई। इसने मुझसे डिस्कस किया कि क्या मुझे इस तरीके का कुछ करना चाहिए जिससे मैं पता लगा सकूं। तो मैंने कहा हां बिल्कुल अगर आपके मन में ऐसा कुछ डाउट आ रहा है कि वो कुछ ऐसी हरकतें कर रही हैं और कुछ अजीब सा आपको महसूस हो रहा है क्योंकि हमारे अंदर का ना एक विज़डम है एक
(47:34) जो हमें गाइड करता है कि कुछ तो अनयूजुअल कुछ तो गड़बड़ हो रहा है तो जब इसने देखा कि उसने इतनी घटिया हरकत कर रही है मतलब कैसे देखा और अब जो है उसने एविडेंस क्रिएट किया उसका एविडेंस क्रिएट नहीं करा उनके यहां पर उनका थोड़ा पुराने टाइप का घर था तो एक अलमारी थी वो अलमारी इतनी बड़ी थी कि अगर उस अलमारी का सामान अगर आप निकाल दो तो अलमारी के अंदर एक आदमी आराम से बैठ सकता था। ओके। और उसका हल्का सा दरवाजा खुला छोड़कर और ये हरकत मतलब किचन में जाकर आप एक लेडी कैसे अपना यूरिन एक ग्लास में निकाल रही है और फिर डाल रही है। मतलब शर्मनाक से शर्मनाक हरकत है।
(48:10) हरकत है। ऐसे ऐसे लोग भी हैं दुनिया में। मैं कह रही हूं चाहे वो चंद लोग हैं लेकिन है इतने घटिया भी लोग कि अगर उनकी नहीं चल रही है तो वो इतनी नीचता की हरकत भी कर सकते हैं और ये हम लोगों को तभी पता चलता है जब हमारे पास केसेस आते हैं वरना आम आदमी तो सोच भी नहीं सकता कि इतनी कोई घटिया हरकत भी कर सकता है तो अगर आप इतने घटिया लोगों के साथ रह रहे हैं और सच में आपके हालात ऐसे हैं कि आप उनसे दूर हो सकते हैं तो आपको बिना सोचे उनसे दूर हो जाना चाहिए क्योंकि उनकी प्रवृत्ति बदलती नहीं है। बदलते वो औरत पकड़ी गई इतनी शर्मनाक हरकत करते
(48:43) हुए भी लेकिन उसके बावजूद भी वो अपनी अकड़ छोड़ने के लिए तैयार नहीं थी और क्योंकि कोई कैमरा नहीं था उस टाइम कुछ नहीं था उस टाइम सिर्फ एक औरत ने दूसरी औरत को पकड़ा थांगे हाथों तो उसको झुठलाना उस औरत के लिए बहुत आसान था उसने जो उसके बाद सीन क्रिएट करे और जिसने पकड़ा था उसको ही बुरा बनवा दिया घर में मतलब कमाल है कि उनका दिमाग कितना एक्सट्रीम में चलता है ऐसे भी केसेस होते हैं। तो जब भी आप इनको पकड़े तो हमेशा आपके पास एविडेंस होने चाहिए। अगर आपने बिना एविडेंस के, बिना सबूत के इनको पकड़ा तो यह आपको ही झूठा बनवा सकते हैं। अच्छा कैसे पकड़ा जाए?
(49:22) कैसे एक लेडी को यह पता चले कि उसके हस्बैंड का बाहर कोई अफेयर चल रहा है। उसके अ मतलब उसके कैसे ट्रेट्स पता लगाए जाएं? क्या हरकतें उस ऐसे पत पतियों की होती है जिससे कि एक पत्नी को पता चल जाए कि उसका बाहर कोई एक्सटर्नल अफेयर चल रहा है। देखिए जब भी किसी इंसान को कहीं बाहर एंगेजमेंट होगा किसी के साथ तो नेचुरली उसका बिहेवियर ना इस तरह से सबसे पहले इनिशियल चेंजेस दिखाई देने लगेंगे कि वो पर्सन ना आपकी लाइफ में जो चल रहा है उसके साथ बहुत कंफर्टेबल होना शुरू हो जाएगा। मतलब पहले अगर उसको आपका टाइम चाहिए था। आपकी अटेंशन चाहिए थी। अब वह नहीं भी मिल
(49:59) रही है आपसे टाइम या अटेंशन तो उसको फर्क पड़ना ही बंद हो जाएगा। वह अपनी चीजों को थोड़ा सा हाइड करने लगेगा। जैसे फोन वगैरह पहले उसका इधर-उधर पड़ा रहता था तो अब वो थोड़ा सा कॉशियस हो जाएगा उस फोन के लिए। है ना? एकदम से ईसीली थोड़ी ना फ्रीली ऐसे छोड़ देगा। तो उसके लिए अगर उसका पासवर्ड चेंज हो गया है या फिर वह थोड़ा सा फोन का ज्यादा यूज़ करने लगा है तो यह भी एक बहुत कॉमन आजकल साइन देखने के लिए मिलते हैं। कई बार वो पर्सन ऐसा है आपसे फिजिकल डिस्टेंस मेंटेन करना शुरू कर देगा। आपको जो जिन चीजों के लिए पहले थोड़ा सा रोकता टटोकता था,
(50:34) कंसर्न शो करता था, वह धीरे-धीरे धीरे-धीरे कम होने लग जाएगी। सडनली हो सकता है उसके बाहर के इंगेजमेंट्स, ऑफिस मीटिंग बढ़ने शुरू हो जाए। उसकी उसका बाहर ट्रैवलिंग बढ़नी शुरू हो जाए। उसकी ड्रेसिंग सेंस चेंज होनी शुरू हो जाए। जो उसका नॉर्मल बेस लाइन बिहेवियर था उसमें छोटे-छोटे बदलाव आप देखने लग जाओगे। क्योंकि वही सबसे पहले इनिशियल साइन होते हैं कि उसकी लाइफ में कुछ नई एंट्री हो गई है। क्योंकि जब भी कोई नई एंट्री होती है तो वो जो इनिशियल फज़ होता है ना वो बहुत ही चार्मिंग फज़ होता है। तो इंसान बहुत अच्छा दिखना चाहता है। हर तरीके से वो
(51:11) थोड़ा सा अपने को बदलाव ये एकदम सडन उसके कुछ एक्सपेंसेस बढ़ गए हैं। तो कहीं ना कहीं तो उसका एक्स्ट्रा खर्चा हो ही रहा है। तो ये छोटी-छोटी सी चीजें हैं जो बदलाव से आप नोटिस कर सकते हो क्योंकि शुरुआत में आप कुछ इतना बड़ा पकड़ नहीं पाओगे क्योंकि वो इस टाइम पर बहुत अलर्ट मोड में है और बहुत कॉशियस मोड में है। वो सारी कॉल हिस्ट्री डिलीट कर कर ही घर में आएगा। मैसेज भी डिलीट करेगा वो हो सकता है वो आर्काइव में डाल दे चैट को भी है ना या फिर इन्फॉर्म करके आए कि इस वक्त मैं घर पे आ रहा हूं। तो आप ऐसा नहीं है कि फोन चेकिंग करके आसानी से कुछ पकड़ लोगे। इतने
(51:40) स्मार्ट आजकल सब कुछ है। सब इंसान है। और कई बार ना आप उसे पासवर्ड भी बोलोगे खोलने के लिए वह दे देगा। क्योंकि वो घर में जब एंट्री करी है उसने सब तो डिलीट करके आया है वो और प्लस इनफॉर्म भी कर आया है कि इस वक्त मैं घर में हूं या कोई सीक्रेट ऐप है उसके उसमें फोन में जिसके बारे में आपको नहीं पता है जिस पर उनकी बात होती है चैटिंग होती है जहां पर उसने प्राइवेसी सेट कर रखी है तो केवल फोन चेकिंग से आजकल आप नहीं पकड़ पाओगे लेकिन जो उसका बेसलाइन बिहेवियर था उसमें आप बदलाव करके इस बात का अंदाजा लगा सकते हो कि उस पर्सन की
(52:13) लाइफ में कुछ तो चेंज आया है क्योंकि अगर कोई वैसे कैसे ट्रांसफॉर्म होगा? अपनी ड्रेसिंग सेंस अपग्रेड करेगा या अपना लाइफस्टाइल अपग्रेड करेगा। वो आपसे डिस्कस करेगा। आपको इनवॉल्व करेगा और वो आपसे भी चाहेगा कि अगर वो अपग्रेड हो रहा है तो आप भी उस चीज में उसका साथ दो या अपग्रेड हो। लेकिन अगर वो ऑल ऑफ़ अ सडन खुद में ही केवल बदलाव आ रहा है। आप नोटिस करो ना करो। उसको आपके अटेंशन कॉम्प्लीमेंट कुछ नहीं चाहिए। तो इसका मतलब है उसकी लाइफ में कहीं ना कहीं कोई नई एंट्री आई है। सो सडन कुछ भी अगर चेंजेस आ रहे हैं तो उसमें उसके लाइफ में नई एंट्री होने के चांसेस
(52:46) बहुत हाई रहते हैं। ओके। तो अब आपने कहा कि स्टार्टिंग में जब कोई न्यू एंट्री आती है तो उसके पहनावे में चेंजेस आता है। टाइम टेबल में चेंजेस आता है। एक्सपेंसेस में एक्सपेंसेस में चेंजज़ आता है। ट्रेवल में आता है उसके। और फिर बदलता कब है? उसने तो शादी कर रखी है। अभी तो न्यू एंट्री आई है तो दोबारा से वह यौवन खिलकर बाहर आया है। लेकिन अगर फिर वो कमिटमेंट की बात वो सेकंड वाली ने मांग ली तो कहा जाता है कि लोग कमिटमेंट से बहुत डरते हैं और कमिटमेंट के बाद रिलेशनशिप चेंज हो जाते हैं। तो ऐसे केस में क्या वाइफ्स डिवोर्स की तरफ आगे बढ़े या इंतजार करें
(53:27) कि वह दूसरी भी कमिटमेंट मांगे और मेरा हस्बैंड मेरे पास वापस आ जाए। देखिए शादीशुदा आदमी जब दूसरी औरत के साथ इनवॉल्व होता है तो कुछ केसेस में तो ऐसा होता है कि दूसरी फीमेल भी ऑलरेडी मैरिड है। ओ और कुछ केसेस में ऐसा होता है कि वो अभी सिंगल है। मतलब वो यंग गर्ल है। तो बहुत सारे केसेस में जब देखा गया है कि यंग गर्ल है तो एक शुगर रेडी कांसेप्ट भी आजकल बहुत चल रहा है जिसमें अपनी तकरीबन आधी उम्र या उससे भी छोटी लड़कियों को जो है ना गर्लफ्रेंड की तरह मेंटेन करते हैं लोग और बदले में उनके एक्सपेंसेस उठाते हैं। उनके नखरे उठाते हैं और उनसे एक्सचेंज
(54:09) होता है। एक को मिल रहा है कि पैसे मिल रहे हैं। महंगे-महंगे गिफ्ट्स मिल रहे हैं। यू नो लाइक उसका जिंदगी बढ़िया चल रही है। और दूसरे को होता है कि उसको एक बहुत यंग पार्टनर मिल रहा है जिसके साथ वो थोड़ा सा यू नो लाइक लवी डबी रिलेशनशिप सेक्सुअल रिलेशनशिप एक अलग ही जो उसकी लाइफ में शायद अपनी खुद की शादीशुदा लाइफ में जो एक बोर्डम आ गया था या उसको उतना सेक्सुअल प्लेजर नहीं मिल पा रहा था या वाइफ से अटेंशन उतनी नहीं मिल पा रही थी या वाइफ बच्चों में अपनी लाइफ में किसी भी वजह से बिजी है या वाइफ की नेचर ही ऐसी नहीं है कि वो उसको वो थ्रिल
(54:40) वो एक्साइटमेंट दे सके तो उसको वो मिल रहा है तो एक एक्सचेंज चल रहा है तो दोनों को पता है कि दोनों का कुछ भी नहीं होना। ये एक सौदेबाजी चल रही है। तो इसमें तो कोई क्या ही कमिटमेंट मांगेगा। इसमें तो जब तक आप सप्लाई करते रहोगे पैसे की तो दूसरा वाला अपने को अवेलेबल करता रहेगा। लेकिन फिर उसके बाद जब वाइफ यह नोटिस करके हस्बैंड के सामने लाती है कि मैंने पकड़ लिया कि तुम शुगर डैडी का रोल प्ले कर रहे हो। तो हस्बैंड अपने घर पे भी बिल्कुल नॉर्मल अपनी वाइफ के साथ भी ट्रीट करता है। अपनी मैरिड लाइफ को भी वह खराब नहीं होने देना चाहता है। वाइफ्स भी डर रही
(55:14) होती हैं कि अगर वो छोड़ देंगी तो फिर आगे उनकी जिंदगी में क्या होगा? यह जो मेंटालिटी है आज की लेडी की यह आगे चलकर के फिर से सुसाइड की तरफ ही बढ़ेगी। क्योंकि आगे चलकर के उसका हस्बैंड अगर एक का शुगर डैडी बन रहा है तो वो दी एंड तो है नहीं। वो आज एक के साथ है, कल दूसरे के साथ है। वाइफ ऐसे केस में कहीं आपकी आपकी बेस्ट फ्रेंड की तरह सुसाइड करने के लिए तो आगे नहीं बढ़ रही हैं। देखिए जैसे शुगर डैडी का तो एक कांसेप्ट है। है ना? शुगर मॉमी भी हैं। ऐसे तो ऐसा नहीं कि केवल शुगर डैडी है। शुगर मॉम भी है। ओके। जो यंग लड़कों को जो है ना डेट कर
(55:50) रही होती है क्योंकि उनको अपने हस्बैंड से मतलब मैरिड है मगर फिर मैरिड है यस मैरिड है अमीर है तो एक यंग लड़का उन्होंने पकड़ लिया है और उसके साथ उनका लाइफ में एंजॉयमेंट चल रहा है तो इसमें तो कमिटमेंट वाली कोई बात ही नहीं है लेकिन कुछ रिश्ते बहुत सीरियस हो जाते हैं जिसमें कि सच में एक इमोशनल सपोर्ट होता है कि वो पर्सन अपने घर में बिल्कुल अननोटिस्ड था उसको कोई वैल्यू नहीं मिल रही थी उसको इमोशनल कंफर्ट नहीं मिल रहा था ब्लेम शेम किया जा रहा और वो सच में मानसिक तौर पर परेशान था। भावनात्मक तौर पर टूटा हुआ था। और उसकी जिंदगी में कोई
(56:23) ऐसा इंसान आ गया जो उसको अटेंशन, प्यार, केयर दे रहा है। और कहीं ना कहीं दोनों को पता है कि ये बिना कमिटमेंट वाला एक ऐसा रिश्ता है जिसमें बस सुकून है। कि बात कर रहे हैं, परवाह कर रहे हैं। तो हर रिश्ता गलत नहीं होता है। लेकिन सोसाइटी सब रिश्तों को एक तरीके से कहते हैं ना सबको एक लाठी नहीं हांका जा सकता। तो कुछ रिश्ते सुकून के भी होते हैं। जिसमें गंदगी नहीं होती है। जिसमें भावनात्मक सुकून होता है। जिसका पर्पस किसी को सेक्सुअली यूज़ करना नहीं होता है या किसी के साथ फन नहीं होता है। उसका पर्पस सिर्फ इतना होता है कि उसको एक
(56:58) भावनात्मक सुरक्षा मिले। एक इमोशनल सेफ्टी होती है। जहां पर उसे नोटिस किया जा रहा है। कोई है उसे पूछने वाला। जहां पर उसे फ्रीडम है एक्सप्रेशन का। जहां पर उसके होने को कोई सेलिब्रेट कर रहा है। तो कुछ रिश्ते ऐसे भी होते हैं जो जीने की वजह बन जाते हैं। ऐसे ब्यूटीफुल ग्रेसफुल रिलेशनशिप भी होते हैं जहां पर दोनों लोग अपनी-अपनी फैमिली मेंटेन करते हैं। रिस्पांसिबिलिटीज वहां निभाते हैं और प्यार और सुकून एक दूसरे में ढूंढ लेते हैं। और उसको वो नाम देते हैं कि यह मेरा सोल पार्टनर है। लाइफ पार्टनर नहीं है। मेरा सोल पार्टनर है। यह मेरी जिंदगी में
(57:30) ईश्वर ने इसलिए भेजा है ताकि सुकून महसूस हो सके। और उनका एक दूसरे के प्रति बड़ा रेस्पेक्टफुल रिलेशनशिप होता है। बात करने से ज्यादा सुकून मिलता है। नजरों से ज्यादा सुकून मिलता है ना कि यह कि एक दूसरे पर वो कोई फिजिकली यू नो लाइक एक अटैक करने के मोड में रहते हैं। वो चीज आगे चलकर कभी बाय डिफॉल्ट हो जाए। लेकिन वो प्राइमरी मोटिव नहीं होता। वो यह नहीं होता कि ये एजेंडा है और बस इसके होते ही सब खत्म हो जाएगा। तो ऐसे रिश्ते साल दर साल बहुत चल जाते हैं जिसमें वो बहुत ग्रेसफुली उसको रिस्पेक्टफक्टफुली मेंटेन करते हैं और
(58:04) दोनों की कोशिश होती है कि किसी की भी फैमिली में कोई प्रॉब्लम ना आए। तो ना कोई डिमांड्स होती है ना कोई एक्सपेक्टेशंस होती है। बस एक सुकून वाला रिश्ता होता है ऐसा। कुछ रिश्ते ऐसे होते हैं जिससे कि जिसमें कि एक्स्ट्रा जुड़ जाते हैं। चाहे वो सिंगल पार्टनर से जुड़े या फिर मैरिड हो वो भी। आगे चलकर वो इमोशनल इंटिमेसी इतनी स्ट्रांग हो जाती है कि जिसमें एक पर्सन खासतौर से कमिटमेंट चाहने लगता है। वो रिश्ते बड़े पेनफुल हो जाते हैं फिर क्योंकि उसमें आप दे नहीं पा रहे होते कमिटमेंट क्योंकि आपके घर में भी आपका पार्टनर है, सोसाइटी है, बच्चे हैं और सच
(58:35) में इतना सब कुछ छोड़कर सोसाइटी में अपना नाम खराब कर कर नई शुरुआत करना हर एक के बस की बात नहीं होती है। तो वो बहुत पेनफुल हो जाते हैं रिश्ते। और इसके अलावा एक और एंगल भी है कि कुछ लोग सच में ऐसे होते हैं जो सिर्फ सेक्सुअल बेनिफिट के लिए किसी को इमोशनल ट्रैप में लेते हैं पहले। क्योंकि अगर आप किसी से बोलो कि मुझे तुम्हारे साथ फिजिकल होना है तो कोई थोड़ी ना ऐसे आपके करीब आ जाएगा। तो वहां से इमोशनल एंगल से ही स्टार्ट होते हैं वो रिश्ते और किसी को बताया जाता है, महसूस करा जाता है, लव बॉम्बिंग की जाती है बड़े सारे गिफ्ट्स, तारीफें, टाइम देकर और उस
(59:10) पर्सन का जो मेन मकसद होता है, वह होता है इस पर्सन के साथ फिजिकल रिलेशन बनाना और धीरे-धीरे फिर विड्रॉ कर लेना। और वह ऐसा एक इंसान के साथ नहीं, कई लोगों के साथ करता है। और यह मेल फीमेल कोई भी हो सकता है। ज्यादा रेशो मेल्स का होता है। ऐसे तो उसमें वो चीज गलत है। वो चीज तो हर तरीके से गलत है ना। आपने किसी को इमोशनली ट्रैप कर लिया। वो तो यह समझ रहा है कि आप उसमें जेन्युइनली इंटरेस्ट ले रहे हो। ऐसा मेरे पास एक केस आया था। एक लेडी अपने हस्बैंड से बहुत दुखी थी और वो इतना ज्यादा मतलब उनके अब्यूसिव हस्बैंड थे कि वो लेडी
(59:42) बिल्कुल ही सुसाइड की कगार पे थी। उनको लग रहा है मेरे जीने की कोई वजह नहीं है। तब उनकी जिंदगी में एक इंसान आया जिसने बहुत अटेंशन दी। उनको नोटिस किया और उनको अच्छा वैल्यू फील कराया। लेकिन उस इंसान की इंटेंशन गलत थी। लेकिन उसने उस लेडी को इसी तरीके से अपनी तरफ अट्रैक्ट किया। उसको शुरू में बहुत अटेंशन वो दे। उस लेडी को लगा कि शायद भगवान ने मेरी सुन लिया और मेरी जिंदगी में कोई भेज दिया है जो मेरे को अब वापस से जीना सिखा रहा है। और वो लेडी इतना अटैच होती चली गई और कुछ ही महीनों में उनके बीच में फिजिकल इंटिमेसी हो गई। उसके एकद बार के बाद से ही फिजिकल
(1:00:17) इंटिमेसी के उस आदमी ने अपना रंग बदलना शुरू कर दिया। अवॉइड करना शुरू कर दिया। वो औरत जितनी टूटी हुई थी उससे 100 गुना और बुरी तरीके से टूट गई। तो कुछ आदमी ऐसे होते हैं कि जो टूटी हुई औरतों को भी नहीं छोड़ते। उन्हें वो तो ढूंढते हैं। चकनाचूर कर देते हैं। आपको नहीं लगता कि ऐसे लोग ऐसी लेडीज को ढूंढते हैं एंड दे ट्रैप दैट पीपल कि इन जिसके घर में उनको पता ही होता है उनके रेकी कर ली होती है कि यह सिंगल है या घर में इसे प्रॉब्लम है तो इसे पहले इमोशनली ट्रैप करो और उसके बाद फिजिकली इसके ऊपर मतलब अटैक करो। लेकिन ज्यादा डेंजरस क्या
(1:00:54) है? इमोशनल ट्रैकिंग ट्रैपिंग या फिजिकल ट्रैपिंग? इमोशनल ट्रैपिंग। देखिए अगर आपके इमोशंस किसी से बहुत डीपली जुड़ जाते हैं तो फिर वो इमोशंस क्योंकि आप फिजिकल तभी हुए ना जब आप इमोशनल इंटिमेसी स्ट्रांग हुई। एक औरत तभी फिजिकल होगी जब इमोशनल इंटिमेसी बहुत स्ट्रांग होगी। बहुत ही कम परसेंटेज औरतों का ऐसा है जो एकदम फिजिकल इंटिमेसी के मोटिव से किसी एक्स्ट्रा रिलेशनशिप में जाती हैं। मोस्टली उनको इमोशनल नीड बहुत बड़ी होती है उनको। उनको नोटिस, सीन, हर्ट फील कराना, वैल्यूड फील करना यह ज्यादा पसंद होता है। तो जब वो इमोशनली बहुत डीपली
(1:01:31) कनेक्ट हो जाती हैं, तब जाकर वो नेक्स्ट स्टेप लेती हैं। तो जब इमोशंस किसी के हर्ट होते हैं तो उस इमोशनल वंड्स को हील करना बहुत मुश्किल होता है। क्योंकि शरीर है आपने एक बार इससे कुछ किया चलो आप भूल गए। है ना? लेकिन वो जो इमोशंस जो मेमोरीज बार-बार रिप्ले होती हैं आपके अंदर वो चीजें जो उसने बोली होती हैं आपको जो आपसे वादे किए होते हैं जो आपको स्पेशल फील कराया होता है वो आपको अपने आप से नफरत करा रहे होते हैं कि आपने कैसे नहीं पहचाना आपसे इतनी भूल कैसे हो गई आप वो जो रिग्रेट और गिल्ट में फिर जीने लग जाते हैं ना और फिर आपको कई बार अपने आप से
(1:02:04) नफरत होने लग जाती है तो शरीर का एक प्लेजर थोड़ी देर में खत्म हो गया लेकिन वो जो इमोशनल सुकून और सेफ्टी था जब वह छीन गया उससे मन बौखलाता उससे मन बहुत डरता है। तो आप जब भी किसी को इमोशनल ट्रैप में लेकर उसे हर्ट करते हैं तो वह बहुत डैमेजिंग होता है। और हर रिश्ते का एक ना एक पर्पस होता है। कोई इमोशनल सेफ्टी ढूंढ रहा होता है। है ना? कोई मेंटल पीस ढूंढ रहा होता है। कोई फिजिकल सुकून भी ढूंढ रहा होता है। उसको प्लेजर चाहिए होता है। लेकिन जो भी आपका पर्पस है आपको तो क्लियर है लेकिन आपने दूसरे को कन्व नहीं किया। तो दूसरा तो फिर जो आप
(1:02:42) उसके सामने प्रोजेक्ट कर रहे हैं उसे जो दिखा रहे हैं महसूस करा रहे हैं वो तो फिर वही मानकर चलता है ना तो वो बहुत बुरी तरीके से टूट जाता है तो किसी के भी इमोशंस को इस तरह से हर्ट नहीं करना चाहिए अगर आपको किसी इंसान से जो भी चाहिए आप ओपन होकर भी किसी पर्सन से बात कर सकते हैं ना ऐसे भी बहुत लोग हैं जो पहले से ही बोलते हैं कि तुम्हारा और मेरा इमोशनल कोई भी नहीं है और हम लोगों को इस तरीके से हम फ्रेंड्स विद बेनिफिट हैं कि हमें जब एक दूसरे का कंफर्ट चाहिएगा कडल चाहिएगा हम ऐसा करेंगे और हमें सेक्सुअल प्लानर चाहिएगा। हम करेंगे। ऐसे मैंने बहुत सारे
(1:03:13) केसेस देखे हैं जिसमें यंग बच्चियां 22 23 साल की ऐसे होती है। फ्रेंड्स विद बेनिफिट वो बनाते हैं। तो उसमें वो बाहर जॉब कर रही है। वो रहती है वहां पर तो वीकेंड्स पर वो लड़का आता है तो उनको एक दूसरे की नीड होती है तो वो कारल करते हैं। इमोशनल सेक्स भी करते हैं। लेकिन इमोशनल उनके बीच में कोई भी बॉन्ड नहीं है। ऐसा वो किससे बात करें? वो किसी से बात करें। रोज बात हो ना ही हो कुछ नहीं है। जब जरूरत होगी एक दूसरे की तब वो अवेलेबल होते हैं एक दूसरे के लिए। वहां ओपननेस है। वहां किसी को कोई एक्सपेक्टेशन नहीं, किसी को कोई हर्ट नहीं है। किसने मुझे चीट किया? दोनों
(1:03:44) में से कोई भी ब्लेम नहीं कर सकता। दोनों में से किसी भी पर्सन को कोई कंफ्यूजन ही नहीं है। बिल्कुल क्लेरिटी है। तो ऐसी ट्रांसपेरेंसी के रिश्ते मैं ये इसको ये नहीं कह रही हूं कि ये सही है। लेकिन इसमें एक चीटिंग तो नहीं है ना? किसी इंसान को शौक तो नहीं लगेगा ना? उसके लिए एक्सेप्ट करना, रियलिटी में रहना या बाद में ट्रस्ट इशूज़ तो नहीं डेवलप होंगे ना उसको। क्योंकि उसने जो भी कुछ किया गलत या सही उसकी मर्जी से हुआ है। लेकिन जब आप किसी को धोखा देते हैं किसी को इस तरीके से कि हां तुम मेरे लिए बहुत वैलुएबल हो। मैं तुम्हारा साथ कभी नहीं छोडूंगा या
(1:04:17) तुम्हारा साथ कभी नहीं छोडूंगी। तुम ही मेरी दुनिया हो। यह सब आप झूठे वादे बोलते हैं और जब यह सब करते हैं तो वो इंसान आपके उस झूठ को सच मानकर आपको एक बहुत ही इंपॉर्टेंट प्लेस दे देता है अपने अंदर। और फिर आप उसे यहां से नीचे धक्का दे रहे हैं तो आप इतनी ऊंचाई से किसी को धक्का देंगे तो उसको बहुत डैमेज होगा ही होगा। तो यह करना गलत है। देखिए अगर आपको किसी से फिजिकल प्लेजर ही चाहिए तो बहुत आजकल पेड सब कुछ अवेलेबल है। आप क्यों किसी अच्छे भले इंसान की जिंदगी खराब कर रहे हो? क्यों उसको तोड़ रहे हो आप उसको? क्या मतलब आपकी रीच से बाहर थोड़ी ना है कोई
(1:04:51) पेड सेक्स? लेकिन आप सिर्फ उसके लिए किसी इंसान को यूज़ कर रहे हो। यह बहुत गलत बात है। लेकिन अक्सर लोग जस्टिफाई करते हैं कि फैमिली की वजह से, सोसाइटी की वजह से पहले नहीं दिखाई दे रहा था आपको कि आपकी फैमिली है, घर में बीवी है या आपका पति है। बच्चे नहीं तब भी थे बच्चे। आज से 6 महीने पहले, 5 महीने पहले या 2 साल पहले सब लोग ये थे। एक्सिस्ट कर रहे थे। तब आपको नहीं पता था। ऐसे कोई पहले आते हैं कि मेरा बॉयफ्रेंड अब ये बोल रहा है कि मैं अपने घर में स्टैंड नहीं ले पा रहा हूं। उसको पहले नहीं पता था कि इंटरकास्ट लड़की से मैं लव
(1:05:22) कर रहा हूं या मेरे पिताजी कैसे हैं। पिताजी सडनली ऐसे हो गए क्या? पहले भी तो पता था कि फादर नहीं मानेंगे। तो पहले आपने किसी इंसान को इतने सपने क्यों दिखाए? उससे कमिटमेंट क्यों किया? उसे क्यों ऐसी उसको मतलब फेंटसीज़ क्रिएट कराई उसके दिमाग में जिसमें उसने आपको अपना सब कुछ मान लिया। और अब आप उससे कह रहे हैं कि मैं अपनी फैमिली की वजह से तुमसे शादी नहीं कर सकता। क्या नॉनसेंस है यह? आपको सब कुछ जब पहले ही पता होता है तो यह कोई बात नहीं होती कि आप अपनी मजबूरी दिखाकर और सामने वाले को कोई ऐसा रीजन क्रिएट कर रहे हैं, रैशनलाइज करने की कोशिश कर रहे
(1:05:54) हैं। इट्स ऑल बुलट। तो आप एक्सेप्ट कीजिए अपनी गलती कि आपने सच में किसी इंसान के साथ बहुत गलत किया है। लेकिन बात यह है कि अगर आप किसी को मुंह से बोल देंगे सॉरी तो उसे सॉरी से डैमेज थोड़ी ना रिपेयर हो जाएगा। तो यह तो इंसान की अपने अंदर की अंतरात्मा की आवाज जो है ना सुननी चाहिए कि मैं जो करने जा रहा हूं वह सही है या गलत है। क्योंकि पार्टनर किसी का परफेक्ट नहीं होता। आप जब एक इंसान के साथ सालों तक रहेंगे तो उसकी बहुत सारी खामियां आपको दिखाई देंगी और सर्वगुण संपन्न तो आप भी नहीं है। आप में भी बहुत सारी कमियां है।
(1:06:25) तो कोई भी परफेक्ट रिश्ता नहीं होता। कोई भी मैरिज परफेक्ट नहीं होती है। लेकिन उसको मेंटेन किया जाता है। उसको एफर्ट से हम रिस्पेक्ट देते हैं कि मेरा पार्टनर परफेक्ट है। हमारी मैरिज बहुत बढ़िया चल रही है। लेकिन सब में फ्लॉस होते हैं और सब में अप एंड डाउन आते हैं। लेकिन खासतौर से हम भारतीय लोग हैं। हम तो इस संस्कृति में बिलीव रखते हैं कि सात जन्मों का रिश्ता है हमारा। लेकिन मैं यह बिल्कुल नहीं कह रही हूं कि एक नार्सिस्ट के आप पल्ले पड़ गए हो। टॉक्सिक एनवायरमेंट में रहते हो तो आप सात जन्मों की थ्योरी पर बिलीव करके अपनी जिंदगी जहन्नुम कर लो।
(1:06:56) अगर सच में आपके साथ जेन्युइन प्रॉब्लम है तो स्टैंड लो। आपको चाहे पुलिस कंप्लेन करनी हो, किसी एनजीओ का सहारा लेना हो, डिवोर्स लेना हो, कुछ भी लेना हो, आप स्टैंड लो। अपनी जिंदगी कुर्बान करने नहीं आए हो। लेकिन छोटी-छोटी बातों पर आप दूसरे में की तरफ जाने लगो, चीट करने लगो या आप डिवोर्स लेने की सोचने लगो। आप बिल्कुल ही आपके अंदर रेज़िलेंस पावर नहीं है। आप बिल्कुल ही मेंटेन करने के लिए, एफर्ट्स डालने के लिए तैयार नहीं हो। तो, यह आपकी अपनी वीकनेस है। आप हर चीज़ अपने हिसाब से परफेक्ट चाहते हो। आप यह सोचते हो कि कभी कुछ प्रॉब्लम नहीं आनी चाहिए। मेरे कुछ
(1:07:27) एक्स्ट्रा एफर्ट्स नहीं डलने चाहिए। ऐसे शादियां नहीं होती। ऐसे रिश्ते नहीं होते हैं। एफर्ट्स मांगते हैं। हर चीज मेंटेनेंस मांगता है। हर एक उसमें अप एंड डाउन आता है। एक्सट्रीम केसेस में जब मेरे पास भी लोग आते हैं तो मैं बोलती हूं आप इस शादी से बाहर निकल जाओ। सूर और लेटर आपको करना यही पड़ेगा। जिंदगी आप मत गवाओ। तो बहुत सारे लोग बोलते हैं कि आर यू श्योर मैम कि आप ये एक बहुत बोल्ड एडवाइस दे रहे होते हैं। 100% नहीं 1000% श्योर हूं मैं। क्योंकि आप मेरे पास 5 साल बाद 10 साल बाद फिर आओगे। आप आप बोलोगे कि आपने पहले भी समझाया था लेकिन हमने डिले
(1:07:58) कर दिया। जब मैं बिल्कुल देख लेती हूं कि यहां कुछ ही नहीं हो सकता है। तभी मैं यह एडवाइस देती हूं क्योंकि उस टाइम पर हमें आपको बचाना है। आपकी जानकारी है। आपका जीवन बहुत अनमोल है। ईश्वर ने आपको भी एक ही जीवन दिया है ना। इसको भरपूरता से जीना है। सिर्फ इसलिए कि शादी तोड़ना गलत है और निभाओ और अब जो है ना इसी शादी में रहो। टॉर्चरर्स रहो। यह बिल्कुल गलत है। यह बकवास है। यह पुरानी ओल्ड कंडीशनिंग है। जहां पर यह था कि तुम डोली में आई हो और अर्थी में ही जाना। और मैं किसी जेंडर बायस होकर बात नहीं कर रही हूं। तो कोई भी ऑफेंडेड फील ना करें कि मैडम तो फीमेल्स
(1:08:30) का फेवर कर रही हैं। अगर आप किसी फीमेल के साथ ऐसे फंस गए हैं जो गलत है तो आप फौरन उससे अलग हो जाइए। क्योंकि ऐसा एक मेरे को केस याद आ रहा है कि जहां अच्छा गलत है कैसे? मतलब आपने ये जो स्टेटमेंट दिया आपने जज किया गलत है। अब वो गलत है तो उसके लिए गलत है। आपके उस इंसान जो गलती कर रहा है उसके लिए वो गलत ना हो। देखिए मैं कोई नहीं होती हूं जज करने वाले। टॉक्सिसिटी, नार्सिसिज्म, डोमिनेंस, कंट्रोल ये सब बड़े हैवी वर्ड्स हैं आज की डेट में। बहुत टॉक्सिक पार्टनर है। बहुत नार्सिसिस्ट आदमी है। वो मुझे कंट्रोल करना चाह रहा है। वो मुझे कुछ
(1:09:11) करने नहीं देना चाह रहा है। हर समय शक करता है। यह जितने भी हम लोगों ने लेबलिंग किए हुए हैं। और फिर हम कहते हैं कि हम अपनी एनर्जी के अकॉर्डिंगली अपने पार्टनर्स को अट्रैक्ट करते हैं। कभी यह सुनने में आता है कि सबसे ज्यादा कार्मिक ड्यूस आपके हस्बैंड के साथ ही थे आपके। इसीलिए वह आपके पास आए हैं ताकि आप उसको क्लियर कर सको। अगर यह सारे कांसेप्ट्स ट्रू हैं तो क्यों एक इंसान बार-बार एक टॉक्सिक इंसान को ही अट्रैक्ट कर रहा है। चाहे वो शादीशुदा हो या चाहे वो शादीशुदा नहीं हो। ये पैटर्न रिपीटेड क्यों होता है किसी के साथ? देखिए आपने बोला कि टॉक्सिक
(1:09:49) है, कोई कंट्रोल फ्रीक है, कोई नार्सिस्ट है। ये सब एक ही मतलब पर्सनालिटी के ट्रेट्स हैं। क्योंकि अगर किसी को आप नर्सिस्ट बोलें तो वो कंट्रोल फ्रीक होते हैं। डोमिनेंस होती है। वही टॉक्सिक हो जाते हैं। एनवायरमेंट जैसा कर देते हैं। तो एक पर्सन जो आपको आप ना रहने दें और आपको अपने हिसाब से चलाना चाहे। आप उसे नार्सिस्ट कहें, टॉक्सिक कहें, कंट्रोल फ्री कहें, आप उसे डोमिनेंटिंग पर्सनालिटी कहें, कुछ भी कहें। बात एक ही है। मतलब अलग-अलग नाम लग रहे हैं लेकिन है एक ही कि उसकी पर्सनालिटी ऐसी है कि उसको लग रहा है कि मैं सही हूं और आपको हर दिन कुछ ना कुछ
(1:10:23) चेंज करना है। अब एक पर्सन किसी भी ऐसे पर्सन के साथ रिलेशनशिप में आ गया। हम अब या तो उसने खुद अट्रैक्ट किया है लव मैरिज के केस में। हम तो इसमें क्या होता है? हमारा सबकॉन्शियस माइंड ना फैमिलियरिटी देखता है। हम जैसे अगर आप अंदर से इनफीरियर हैं, आपके अंदर खालीपन है तो आप हमेशा एक ऐसे पर्सन को अट्रैक्ट करेंगे अपनी लाइफ में जो पर्सन बोल्ड होगा। जो पर्सन थोड़ा सा कंट्रोलिंग डोमिनेटिंग होगा क्योंकि आपसे वो नहीं होता। आपको उसके साथ लगेगा कि यार मेरी ये जो कमियां है यह मुझे पूरा करेगा। तो आपको ऐसा पर्सन अट्रैक्ट करेगा और वो आपके को फिल करेगा।
(1:11:01) यस। क्योंकि आपके अंदर वह चीज़ कमी है। ठीक है? तो वह चीज़ आपके अंदर नहीं है तो आपको ऐसा लगेगा कि यह पर्सन स्ट्रांग है तो वह आपको बहुत अट्रैक्ट करेगा। या जैसे आपने अपने फादर को देखा है कि डोमिनेटिंग नेचर या इमोशनली अनवेलेबल अनवेलेबल थे वो आपकी मदर के लिए या बहुत कंट्रोलिंग थे। आप कहीं ना कहीं उनसे नाराज हैं या आप ना उनको नापसंद भी करते हैं। लेकिन आपके सबकॉन्शियस माइंड ने बहुत सालों तक वो देखा है। तो वह फ़मिलियर पैटर्न को अट्रैक्ट कर लेता है हमारा सबकॉन्शियस माइंड। क्योंकि फ़मिलियर में हमारा ब्रेन समझता है सेफ्टी है और जो फ़मिलियर नहीं है
(1:11:35) उसे वह अनसेफ ज़ोन में डालता है। मान लीजिए एक लड़का आपकी लाइफ में आया जो आपको बहुत पैंपर कर रहा है। बहुत ज्यादा इमोशनल कंफर्ट दे रहा है। आपके हिसाब से चल रहा है। तो आपको ना वो रेड फ्लैग लगने लगेगा। ऐसा कौन आदमी होता है? जो इतना हमारी चलने देता है या हमारे हिसाब से चलने दे रहा है। जरूर इसको कुछ चाहिए। यह मेरा कुछ बेनिफिट उठाने वाला है। सही आदमी पे भी डाउट करा देता है आपका सबकॉन्शियस माइंड। क्योंकि वो फॅमिली पैटर्न नहीं है। अच्छा। फमिलियर पैटर्न क्या है कि लड़के तो कभी आपकी चलने देंगे लेकिन ज्यादातर अपनी ही चलाएंगे।
(1:12:06) लड़के ऐसे ही होते हैं। सुनते कहां है लड़के या उनको इमोशंस कहां समझ में आते हैं? तो वो फमिलियर लगेगा आपको। और जो ऑोजिट होगा वो आपको अनफेमिलियर लगेगा और अनफमिलियर जो होता है वो हमारा ब्रेन ना अनसर्टेनिटी की वजह से उसको ना डेंजर की तरह लेबल कर देता है कि इसमें जरूर कोई खतरा होगा। आपसे कोई भी ओवरली स्वीट होकर बात करता है तो आपको लगता है क्या बटरिंग चल रही है ये सब ना थोड़ा सा ऐसे इतना स्वीट कौन होता है और आपसे कोई नॉर्मल या थोड़ा सा वैसा बात करेगा लोग तो होते ही ऐसे हैं वो फमिलियर लगता है तो मोस्टली फीमेल्स ऐसे पार्टनर को अट्रैक्ट कर लेती है और
(1:12:40) मेल्स भी ऐसे जो उनकी मदद से मिरर करते हैं तो वो फीमेल्स को अट्रैक्ट कर लेती हैं। ओके। यस। तो जो लड़कियां होती है वो अपने फादर फिगर या ब्रदर या जो भी उनके फादर फिगर टाइप रहे हो जिन मे्स के बीच में वो इनिशियल इयर्स में रही हो तो मोस्टली उसी टाइप के पार्टनर को अट्रैक्ट कर लेती हैं। और लड़के अपनी मदर या एल्डर सिस्टर या जो भी मदरली वाली वो रही हो तो उसी टाइप की फीमेल को अट्रैक्ट कर लेते हैं। ओके। इस तरह से क्योंकि सबकॉन्शियस को वो पैटर्न उनका पहचाना पहचाना सा पर्सनालिटी टाइप पहचाना पहचाना सा लगता है। यह पैटर्न रिपीट इसलिए हो जाता है बिकॉज़
(1:13:17) आपने लर्निंग नहीं ली होती है। आपने इंट्रोस्पेक्शन नहीं किया होता है। आपने अपने आपको समझा नहीं होता है। ओके? तो वो चीज बार-बार बार-बार रिपीट होती रहती है। क्योंकि जब तक आप लर्निंग नहीं लोगे या आप इसे सोल लर्निंग कहो या नहीं इसके बारे में बताइए। व्हाट डू मीन बाय लर्निंग? अभी आपने कहा कि जैसे फादर फिगर के लोगों के साथ वो लड़की रह रही है उसी तरीके का हस्बैंड को अट्रैक्ट करती है। हस्बैंड लड़के के लिए भी आपने कहा अपने मदरली या सिस्टरली एनर्जी को वो अट्रैक्ट करती है। अब आपने कहा कि वो लर्निंग नहीं ली। तो इसमें क्या लर्निंग
(1:13:49) ले? उसने तो जिन-जिन को देखा वो अच्छे थे। अब सेम तरीके के इंसान को जब वो अट्रैक्ट कर लेता है तो थोड़े दिन के बाद वो लव डिमिनिश होने लग जाता है। क्यों? इसके लिए हम थोड़ा सा चाइल्डहुड कंडीशनिंग की बात करते हैं। जैसे जब बच्चा छोटा होता है तो उसके लिए ना उसके मां-बाप ही उसकी पूरी दुनिया होते हैं। अच्छा। तो बच्चा उनके थ्रू ही आया है और बच्चा उनके बीच में ही पल रहा है। तो बच्चे ना जो देखते हैं जो सुनते हैं उस सब चीजों को अपने अंदर अब्सॉर्ब करते रहते हैं। क्योंकि बच्चों का कॉन्शियस माइंड धीरेधी धीरे-धीरे डेवलप होता है। तो
(1:14:24) सबकॉन्शियस माइंड के पास अपना कोई फिल्टर नहीं है। वो एक स्पोंज की तरह है। तो जो भी वो देख रहे हैं अब्सॉर्ब कर रहे हैं। अब एक फीमेल चाइल्ड की बात कर लेते हैं। उसने अपने घर में देखा कि उसकी मदर उसके फादर के आगे झुक कर रहते हैं। जो पापा ने कह दिया वह बिल्कुल ठीक है। बात बातबात पर बच्ची से भी बोलती हूं पापा से पूछेंगे। पापा ने हां कह दिया तो ठीक है। पापा ने अगर ना कह दिया तो फिर ना ही है। मम्मी ने उसके बाद फर्दर कोई बात नहीं कही। तो इस तरीके से उस बच्ची ने देखा और पापा का जबभी भी कुछ स्ट्रेस लेवल आया या कुछ भी आया पापा ने गुस्सा किया तो मम्मी और डर
(1:14:54) गई और मम्मी ने उस टाइम पर कुछ बात नहीं करी। उसने इस तरीके का मान लीजिए सीन अपने घर में देखा है। तो उसकी अपने आप ही सबकॉन्शियस लर्निंग हो जाएगी। उसकी मां बैठकर कभी ये नहीं बोलेगी कि बेटा आदमियों के सामने बोलते नहीं है। वो कभी ऐसी कोई शिक्षा नहीं देगी। लेकिन उस बच्ची ने लगातार इसी तरीके से देखा है। तो उसके अंदर ये प्रोग्रामिंग डिफॉल्ट मोड पर चली गई। अब बच्ची थोड़ी बड़ी हो रही है। उसका स्कूल में बाहर एक्सपोज़र हो रहा है। अब उसके फ्रेंड्स भी मिल रहे हैं। वो दूसरे बच्चों के घर भी जा रही है। वहां पर वो अपनी एक फ्रेंड के घर गई।
(1:15:22) जहां पर उसने ऐसा एनवायरमेंट नहीं देखा। उसने देखा कि उसकी फ्रेंड की जो मम्मी है वह अपने हस्बैंड के सामने स्टैंड लेती है। बोलती है ठीक है सब कुछ और बहुत अच्छी तरीके से अब उसने वह देखा तो उसका माइंड ये उसको यह सजेस्ट कर सकता है कि ये जो लेडी है जो आंटी हैं भाई ये तो बहुत कॉन्फिडेंट है या यह भी सजेस्ट कर सकता है कि यह तो बहुत ज्यादा ऐसी हैं कि डिसिस्पेक्ट करती हैं अपने हस्बैंड की। बहुत ही डोमिनेटिंग आंटी हैं। ये तो सुनती नहीं है ऐसा। अब ऐसा कैसे इंटरप्रेट करेगा उसका दिमाग? ऐसा इंटरप्रिटेट इस बात पर करेगा कि उसकी
(1:15:54) कंडीशनिंग क्या हुई है कि जो औरतें अपने हस्बैंड की बात सुनती हैं, चुप रहती हैं, वह रेस्पेक्ट करती हैं, वह अच्छी औरतें होती हैं या जो स्टैंड लेती हैं, वो बोल्ड और कॉन्फिडेंट औरतें होती हैं। उसकी कंडीशनिंग उसकी कंडीशनिंग पर डिपेंड करेगा कि दूसरे का ये बिहेवियर देखकर वो उसे कैसे इंटरप्रिटेट करेगा। उसका माइंड उसको क्या सजेशंस देगा। मान लीजिए उसकी मदर उसके सामने है कि तेरे पापा के आगे तो मेरी एक भी नहीं चलती है और सब कुछ का चलता है। मैं तो बहुत ही ज्यादा दबादबा सा महसूस करती हूं। मेरी तो जिंदगी खराब हो गई है। तुम लोग हो इस वजह
(1:16:24) से मुझे रहना पड़ रहा है। नहीं तो कब तक इस आदमी को छोड़ के चली जाती। हम तो उसको वो आंटी बहुत ही ज्यादा ऐसा लगेंगे कि बोल्ड और कॉन्फिडेंट है। हम क्योंकि मेरी मदर ऐसा कोई बोल्ड स्टेप ले नहीं पाती है। हम तो अब ये उस पर डिपेंड करेगा कि वो उस पैटर्न को लाइक करती है तो वो अप्ट कर लेगी वहां से कि ऐसा भी हुआ जा सकता है। ओके? स्टैंड लिया जा सकता है। और अगर वो उस चीज को मानेगी कि नहीं इससे तो और कॉम्प्लिकेशंस और प्रॉब्लम आ जाते हैं। मान लीजिए उस लेडी ने स्टैंड लिया लेकिन हस्बैंड ने फिर से डांट दिया और अल्टीमेटली रिजल्ट यही निकला कि वो औरत ही
(1:16:59) चुप हो गई। तो उसका माइंड फिर से ये मैसेज ले लेगा कि कितना भी कर लो आदमियों की ही अल्टीमेटली चलती है। तो क्लेश करने से फायदा ही क्या है? तो आपके सामने लाइफ में कैसे-कैसे इवेंट्स, कैसी-कसी सिचुएशंस आती रहती है, वह आपको शेप देती रहेंगी और आप धीरे-धीरे धीरे-धीरे तैयार होते रहोगे। आपकी लर्निंग होती रहेगी और जब तक आप बिल्कुल मैच्योरिटी के ऐज पर नहीं आओगे, यह कॉन्स्टेंट लर्निंग आपकी चलती रहती है। और जो रिपीटेड सिनेरियोस आपके सामने आएंगे, बार-बार सिचुएशंस जिस तरीके की रिपीट होंगी, जिस-जिस तरीके के एक्सपीरियंसेस और रेफरेंसेस स्ट्रांग आते
(1:17:31) रहेंगे, वो धीरे-धीरे धीरे-धीरे आपके बिलीफ को शेप देने लगेंगे। और परफेक्ट में परफेक्ट पार्टनर कब तक मिलेगा? जैसे टॉक्सिसिटी टॉक्सिक लोगों को आप अट्रैक्ट करते जा रहे हैं क्योंकि आपकी लर्निंग नहीं हुई है। तो वो कौन सा पॉइंट है जिसमें हम कह सकते हैं कि एक्चुअल सोलमेट मिल गया। देखिए जैसे आप बच्चे बड़े हो रहे होते हैं तो कई बच्चे ऐसे होते हैं कि 15 16 साल जब जैसे ही बड़े होने लगते हैं वो तो उनको एक अट्रैक्शन नॉर्मली नेचुरली फील होने लगता है ऑोजिट जेंडर की तरफ। तो जो लड़की अपने आप में बहुत दबी हुई होती है ना तो वो कभी भी सीधे से लड़के की तरफ
(1:18:06) अट्रैक्ट नहीं होगी। वो हमेशा ऐसे जो बहुत ही स्मार्टी और कूल टाइप का लड़का है उसको ज्यादा पसंद करेगी। भले ही वो उसको बिल्कुल भी अच्छी तरीके से ट्रीट नहीं कर रहा है लेकिन वो पसंद उसको ही करेगी क्योंकि उसके अंदर की जो वीकनेस है वो उसे उसमें दिखाई दे रही है कि इसमें वो सब कुछ है जो मेरे अंदर मिसिंग है। ओके कि यहां से जाकर मैं मेरे को यह पूरा कर देगा। मेरा जो अधूरापन है यह पूरा कर देगा। लेकिन एक लड़का जो इतना ज्यादा कॉन्फिडेंट है, जो इतना ज्यादा स्मार्ट है, वो ऐसी लड़की की वैल्यू नहीं कर पाएगा जो बिल्कुल दबी दबी सी ऐसी है।
(1:18:37) तो वो उसको लाइक नहीं करेगा लेकिन वो उसी को चस करेगी। उसी के पीछे भागेगी। ऐसे मैंने बहुत सारे केसेस देखे हैं जहां पर लड़की उसके पीछे कोई ऐसा लड़का है जो उसको पसंद कर रहा है जो उसी की तरह सॉफ्ट और अच्छा है लेकिन वो उसको पसंद नहीं आ रहा। हम और जो लड़का उसको बिल्कुल ही अच्छे से ट्रीट नहीं कर रहा है। डिसिस्पेक्ट करता है। कभी मन आता है, बात करता है और कभी मन आता है, नहीं बात करता है। वह उसके पीछे पागल हो जा रही है। ओके? क्योंकि उसको वो चाहिए जो आपको चाहिए ना जो आपको ऐसा लग रहा है कि आपकी अंदर की वीकनेस है। तो वो आपको दूसरे में अगर कहीं दिखाई दे
(1:19:08) रहा है तो मन उसके पीछे भागता है। मन हमेशा अपने से बेटर के पीछे भागता है। ओके। तो मन इस तरीके से उसकी तरफ खींचा चला जाता है। अब आपको यह समझ में नहीं आ रहा है कि आपको अपने आप को अंदर से भरना है। दूसरे से आप अपने आप को नहीं भर सकते हो। तो पहले तुम अपने आप को अंदर से भरो। अपने साथ बैठो और जानो कि मेरा कौन सा हिस्सा ऐसा है जिसे मेरे अंदर मुझे मिसिंग लगता है और इस इंसान के आने से वो पूरा लगता है तो आप उस इंसान के अंदर कुछ ऐसा ढूंढ लिया होता है आपने जो आपके अंदर मिसिंग होता है और आपने अपने अंदर वो क्रिएट नहीं किया होता है और इसलिए वो
(1:19:46) इंसान आपको बैडली भी ट्रीट करे वो आपको छोड़ के जाने की धमकी दे आप डर जाते हो आप रोते हो आप बिल्कुल पीपल प्लीजिंग मोड में चले जाते हो और सर्वाइवल मोड होता है एक फॉर्न मोड जिसमें आप बिल्कुल पीपल प्लीजिंग मोड में चले जाते हो। तो आपको यह समझना होगा कि उस सर्वाइवल मोड में रहने से आपका काम नहीं बनेगा। आपको ये समझना ही होगा कि आखिरकार वो आपको क्या सप्लाई ऐसी दे रहा है जो आप अपने लिए नहीं क्रिएट कर सकते। हम तो जब आप अपने लिए वो सप्लाई क्रिएट करना शुरू कर दोगे और अपने आप को भरना शुरू कर दोगे और आप भर जाओगे। फिर जाकर आप किसी भी
(1:20:19) टॉक्सिक पर्सन के साथ कभी नहीं जुड़ोगे क्योंकि आप उसे पहचान लोगे। लेकिन जब तक आप इनर वर्क नहीं करोगे, आप अपने अंदर के फिय्स इनसिक्योरिटीज को, अपने अंदर के खालीपन को, अपने अंदर की मिसिंग लिंग्स को नहीं पहचानोगे, उनको क्रिएट नहीं करोगे। तब तक आप बाहर वो चीजें चस करते रहोगे और बाहर आप कितना भी चस करोगे दूसरा कब तक देगा आपको? क्योंकि आपकी जो सप्लाई की डिमांड है, वह कभी कमी नहीं होगी। क्योंकि जब तक आप अपने अंदर से उसकी सप्लाई चालू नहीं करोगे, तो आप तो हमेशा ही खाली रहोगे ना। और कौन कब तक देगा? कब तक आपको अटेंशन देगा, कब तक आपको
(1:20:53) एप्रिसिएशन देगा, कब तक अपना टाइम देगा, कब तक आपको सपोर्ट देगा, कब तक सेफ्टी देगा? नहीं दे सकता वो। उसकी भी देने की एक लिमिट है। हमेशा उसकी गलती नहीं है। तो आप खुद को भरना सीखो। तो जिनके अंदर सेल्फ लव, जिनके अंदर सेल्फ कॉन्फिडेंस, सेल्फ केयर, सेल्फ कंपैशन होता है, जिनकी पॉजिटिव सेल्फ टॉक होती है, जो वर्दी फील करते हैं जो अपने आपको कि हां मैं कुछ हूं। वो लोग कभी भी टॉक्सिक इंसान के साथ जुड़े नहीं रहते। उनकी कोई ड्रामा बॉन्डिंग नहीं होती है। वो सेल्फ रिस्पेक्ट की वजह से अपना डिस्टेंस क्रिएट कर लेते हैं। अपनी बाउंड्रीज़ ड्रॉ कर लेते
(1:21:27) हैं। उनको ना कोई मैनपुलेट कर सकता ना उनको कोई भी इंसान टॉर्चर कर सकता। क्योंकि उनको सेल्फ रिस्पेक्ट, सेल्फ कॉन्फिडेंस इतनी पावर देता है अंदर से कि वो पैटर्न वहीं पर ब्रेक कर देते हैं। लेकिन आजकल सेल्फ लव के वजह से इतने सेल्फ ऑब्सेस्ड हो गए हैं कि लोग कहने लगे मुझे तो शादी नहीं करनी। उन्हें अंदर से इतना डर लगने लगा है कि बार-बार एक ही टाइप के इंसान को वो अट्रैक्ट कर रहे हैं और हैंडल करते-करते वो अंदर से इतने टूट चुके होते हैं कि बार-बार अपग्रेड वर्जन करतेकरते वो इतने अपग्रेड हो के रिजिड एंड स्टबर्न हो जाते हैं कि अब नहीं करना। नाउ आई एम नॉट
(1:22:04) गोइंग टू डू मैरिज एट ऑल। मुझे कोई रिलेशनशिप में भी नहीं जाना है। आपको नहीं लगता है कि किसी चीज की अति या किसी चीज की दुर्गति के बीच का जो बैलेंस है वो मिसिंग है आज की डेट में? बिल्कुल बैलेंस ना होने की वजह से ये सारी प्रॉब्लम्स हैं। देखिए जैसे अगर कोई भी है लड़का या लड़की मैरिज नहीं करना चाहता तो ऐसा नहीं है कि किसी इंसान में बहुत ज्यादा सेल्फ लव है और वो सेल्फ ऑब्सेस्ड हो गया। ऑब्सेशन तो अपने लिए गलत है। वो तो फिर नार्सिस्म की तरफ ही लेकर जाएगा आपको। तो सेल्फ लव होना, हेल्दी सेल्फ लव होना बहुत अच्छा है। जहां पर आप मैं से हम की जर्नी
(1:22:38) तय कर सकते हैं। जहां पर आप यह जानते हैं कि अगर मेरे को खुद से प्यार है तो दूसरे को भी तो अपने से प्यार होगा। अगर मेरी रिस्पेक्ट है तो दूसरे की भी होगी। तो मेरा लाइफ को लेकर कोई सपना है तो दूसरे का भी कोई सपना फेंटसी होगी। तो आप एक विनविन सिचुएशन में और आप एक पार्टनरशिप ढूंढ रहे होते हैं ना कि आप किसी अपने लिए कोई थेरेपिस्ट को या अपने लिए कोई ऐसा कंफर्ट देने वाला ढूंढ रहे होते हैं कि जो आपकी एक्सपेक्टेशंस को बस पूरा करने के लिए आपकी जिंदगी में आएगा। तो आप एक कंपैटिबल पार्टनर को ढूंढ रहे होते हैं। अब क्या होता है इसमें ना सब आपकी
(1:23:11) प्रीवियस कंडीशनिंग रोल प्ले करती है। किसी बच्चे ने अगर अपने घर में एक अनहेल्ी रिलेशनशिप देखा है अपने पेरेंट के बीच में और उसका शादी से विश्वास उड़ चुका है। केवल उसने अपने पेरेंट्स की नहीं देखी है। उसने हो सकता है अपने किसी सिबलिंग की, कजिन की या क्लोज फ्रेंड्स में या क्लोज रिलेटिव में मैरिज को ऐसे देखा हो। पेनफुल और फेलियर ही होती है। तो उसका विश्वास ही नहीं है शादी पर। कोई ऐसा है कि जो ना कमिटमेंट के लिए तैयार ही नहीं है। उसको कमिटमेंट से रिस्पांसिबिलिटीज लेने से डर लगता है क्योंकि उसको लगता है कि वो इतना कैपेबल
(1:23:39) नहीं है कि वो दूसरे इंसान की रिस्पांसिबिलिटीज ले पाएगा या लाइफ में आगे जाकर बहुत कुछ जो आता जाएगा उसको संभाल पाएगा। तो वो तैयार नहीं है। इसलिए वो शादी नहीं करना चाहता है। कुछ की कुछ बहुत हार्ड ब्रेक्स हो गए हैं। उसको ऐसा लगता है कि कोई भी लॉयल पार्टनर होता ही नहीं है। और जब कोई लॉयल ही नहीं है किसी के साथ रहा ही नहीं जा सकता तो मैं ये पेन से क्यों गुजरू? मैं इंडिपेंडेंट हूं, कमा रहे हो या कमा रहा हूं। मैं अपनी लाइफ अच्छे से चला सकता हूं। और कोई भी कैजुअल रिलेशनशिप या मुझे किसी भी तरीके का प्लेजर चाहिएगा तो वो
(1:24:08) आजकल सब कुछ अवेलेबल है। तो उसको इस तरीके की कंडीशनिंग है। तो डिपेंड करता है पर्सन के कैसे लाइफ के एक्सपीरियंसेस रहे हैं। उसके कैसे बिलीफ है, उसकी कैसी कंडीशनिंग हो चुकी है। कुछ लोग बहुत हाईली एंबिशियस होते हैं। उनको लगता है कि अगर हम किसी कमिटमेंट में चले गए तो हम ना अपनी एंबिशंस को पूरा नहीं कर पाएंगे। हम तो इसलिए वह कमिटमेंट नहीं करना चाहते और शादी आपसे कमिटमेंट मांगती ही मांगती है। दोनों पार्टनर कितने भी डिपेंडेंट हो बट एक दूसरे से टाइम तो चाहिए ना वो इमोशनल बॉम्ब तो चाहिए ना कुछ तो पता चले कि आप साथ में हो भले ही आप एक दूसरे के खर्चे
(1:24:39) मत उठाओ। आजकल लड़के लड़कियों का माइंडसेट ऐसा हो चला है कि चलो खर्चे तो हम अपने आप उठा लेंगे। हम इंडिपेंडेंट हैं। लेकिन वो प्यार तो चाहिए, वो रिस्पेक्ट तो चाहिए, वो टाइम तो चाहिए, वो अटेंशन तो चाहिए। लेकिन अगर एक पर्सन बहुत हाईली एंबिशियस है और उसको लग रहा है यार ये फैमिली का और यह सब टाइम आई एम इमोशनल लव ये सब चीजें मेरे एंबिशन से मुझे हटा देंगी। मेरा जो करियर पाथ है मुझे बहुत ग्रो करना है। मैं नहीं चाहता कि उसमें कोई भी हर्डल आए। तो कई बार इसलिए भी नहीं चूज़ कर रहे हैं। कुछ लोगों का पर्पस ड्रिवन होते हैं। उनको ऐसा
(1:25:07) लगता है कि नहीं मेरी लाइफ ना सर्व करने के लिए है। सोसाइटी को मुझे सर्व करना है। तो ये कमिटमेंट से मेरा वो पाथ जो है ना वो हिंडरेंस बन जाएगा ये सब चीजें। तो लोगों के अलग-अलग पर्पस होते हैं। किसी की एक अ रिलेशनशिप फेलियर हो गई है। शादी फेल हो गई है। अब वो दोबारा करने के लिए तैयार नहीं है। उसने सिंगल रहना चूज़ किया। तो लोगों का बहुत अलग-अलग सब्जेक्टिव मैटर होता है ये कि कोई पर्सन आज जिस स्टेट में पहुंच गया है उसके पीछे की बड़ी सारी लेयर्स होती हैं। उसे जाने बिना यह बताया नहीं जाता जा सकता सही-सही कि यह पर्सन सही सोच रहा है या इस पर्सन की सोच को
(1:25:42) इसको अपग्रेड करना है। लेकिन अगर आप सेल्फ ऑब्सेस्ड ही हो गए हैं और आप सोच रहे हैं मुझे किसी की जरूरत नहीं है तो आप गलत सोच रहे हैं। क्योंकि आपको कभी ना कभी उस रिश्ते की जरूरत महसूस जरूर होती है। चाहे वो आपको मिडिल एज में या आपको ओल्ड एज में महसूस हो। आपको महसूस होती है कि नहीं अपना कोई खास रिश्ता होता तो जिंदगी में कुछ अलग ही सुकून होता। चाहे आपके कितने भी दोस्त हो, आपके बहन, भाई, मां-बाप किससे भी कितनी अच्छी बॉन्डिंग हो, लेकिन पार्टनर के साथ जो ब्यूटीफुल रिलेशनशिप होती है वो किसी और के साथ हो ही नहीं सकती है। तो वो कहीं ना कहीं लोगों को
(1:26:15) लगता है और यह भी लोगों के एक्सपीरियंसेस ही मैंने सुने हैं। जिसमें एक लेडी थी वो 47 इयर्स की थी और मैरिज नहीं की थी। उनको उनके अर्ली ऐज में लगता था कि मैरिज नहीं करना है। और मतलब उनको लगता था मैं अपनी लाइफ बहुत अच्छे से चला लूंगी। तो उनके भाई की भी शादी हुई। उसके बच्चे भी हुए तब भी सबने बोला कि अब कर लो अब कर लो जब 30ज में थी लेकिन नहीं नहीं नहीं नहीं नहीं बिल्कुल नहीं करना है ऐसे करते-करते लेकिन उन्होंने बोला कि 40 होते ही मुझे अपने डिसीजन पे रिग्रेट फील होने लगा कि जैसे ही मैंने 40 क्रॉस किया मुझे नहीं पता
(1:26:47) मैडम मेरे अंदर क्या हुआ लेकिन मुझे अपने डिसीजन पे बहुत रिग्रेट फील होने लगा और मुझे महसूस होने लगा कि मैंने बहुत गलत सोचा उस टाइम पर और बहुत गलती करी और शादी नहीं की और अभी भी मैं पार्टनर तलाश रही हूं क्या मुझे अब शादी कर लेनी चाहिए व्हाई नॉट आप 47 हो अभी अभी बहुत जिंदगी पड़ी है। क्यों नहीं शादी कर लेनी चाहिए? कर लेनी चाहिए आपको कि आपकी इस पूरी स्टोरी को सुनकर के मुझे मेरी एक केस की स्टोरी याद आ गई कि मेरे बहुत ही क्लोज रिलेटिव हैं। वो भी शादी नहीं की उन्होंने। काफी बड़ी ऐज हो गई उनकी। ही क्रॉस्ड 57 एंड एट द ऐज ऑफ़ 50 वो मेरे पास
(1:27:21) आए कि मुझे ना अब शादी करने का मन कर रहा है। मैंने कहा बिल्कुल बहुत अच्छी बात है। कभी भी किसी ऐज में मन कर सकता है। तो वो जॉगिंग करने लगे। थोड़ा हेल्थ के प्रति अवेयर होने लग गए। ऑफिस वॉक करके जाने लग गए घर से। सीढ़ियां चढ़ने लग गए अपने फ्लैट पर जाने के लिए। लिफ्ट अवॉयड कर रहे थे। मतलब काफी अच्छे ट्रैक पर आ गए। मैंने भी उनके लिए कुछ गर्ल्स प्रपोज किए कि आप पहले मिलना शुरू कीजिए। लेट्स चेक कि आपका मेंटल लेवल मैच करता है कि नहीं। यू वोंट बिलीव 9 साल लग गए। नाइन इयर्स। कितनी बार वो अपने हेल्थ के प्रति अवेयर हुए। कितनी बार उन्होंने जॉब छोड़ने का
(1:28:02) सोचा। कितनी बार उन्होंने अपनी रीज़ंस ऐसे दिए। मुझे मेरे भाई के बच्चों को पालना है। मुझे पहले उसको सेटल करना है। मेरी बहनों की रिस्पांसिबिलिटी मेरे ऊपर है। मैं सुनती रही। सुनती रही। सुनती रही। बहनों की शादियां हो चुकी हैं। उनके बच्चे हो चुके हैं। उनकी रिस्पांसिबिलिटी आपको क्यों उठानी है? आपके भाई की शादी हो गई है। उनके दो बच्चे हैं। उनको स्कूल में पेरेंट टीचर मीटिंग में आपको जाने की क्या जरूरत है? लेकिन जब यह चीजें होती चली गई एक दिन मैंने उनको बोला कि आज मैं पूरा संडे आपके साथ इन्वेस्ट करती हूं। आप ऐसा करें हर
(1:28:38) 200 कदम के बाद या 300 कदम के बाद आप मुझे एक फोन करें और आपके मन में जो जो थॉट्स आ रहे हैं ना आप बस मुझसे बातें करें। मैंने वो पूरा संडे मुझे आज भी याद है 9 घंटे मैंने उन्हें दिए और टाइम के साथ मैं चेक करती रहती थी कि 200 कदम या 300 कदम चलो हाफ एन आवर तक हो ही चुका होगा करके मैं हाफ एन आवर के बाद उनके फोन आते थे कि हां ठीक है मैं करना चाहता हूं शादी अ बहुत हो गई रिस्पांसिबिलिटी मैं अब अपने बारे में सोचूंगा फिर चलते थे थोड़ी देर बाद अह ठीक है आप ढूंढना शुरू कीजिए मैं करूंगा शादी करते करते शाम हुई करूंगा शादी
(1:29:24) करूंगा शादी मतलब पूरे 9 घंटे में वो इसी चीज को एफर्म करते रहे मैंने अपने जान पहचान के मेरी कोई टीचर थी मैंने उनसे बोला कि एक बार आप उनसे मिलिए शी वाज़ आल्सो अनमैरिड ही वाज़ आल्सो अनमैरिड और दोनों की ऐज प्रीटी नियरिंग टू 50ज तो मैंने कहा बिल्कुल अच्छा मैच है दोनों सिंगल है दोनों दोनों को मैंने भेजा। उसके बाद जब वो वापस आए तो वो जिनके जिन जो मेरी टीचर थी उनसे मैंने पूछा क्या रिव्यूज थे? तो उन्होंने बोला नहीं आप उन्हीं से बात कीजिए। उन्हीं से पूछिए। मैंने कहा ओके फाइन शी इस फीलिंग शाई। मैंने उनसे पूछा कि आपके क्या रिव्यूज थे?
(1:30:03) तो आंसर यह मिल रहा है। आई थिंक सो वो शादी के लिए तैयार नहीं है। मैंने कहा ओके। थोड़े दिन बाद फिर मैंने पूछा कि क्या आप शादी के लिए तैयार नहीं है? मैंने टीचर से पूछा। उन्होंने बोला नहीं आई थिंक सो वो तैयार नहीं है। मैंने ना दो हफ्ते तक किसी से नहीं पूछा। एक दिन मैंने उन्हें घर बुलाया और मैंने बोला कि आप शादी क्यों करना चाहते हैं? आपको रीजन पहले मुझे बताना होगा। तैयार हैं या नहीं तैयार हैं? यह तो बाद की बात है। आप बिलीव नहीं करेंगे। 9 साल के बाद और तीन-4 महीने ये सारी चीजों का प्रोसेस होने के बाद पता यह चला कि एट
(1:30:46) द एज ऑफ 62 आई एम हियरिंग कि नहीं मैं शादी के लायक नहीं हूं। मैं लिव इन में रहना चाहता हूं। एंड दैट वाज़ द एंड ऑफ द काउंसिलिंग व्हेन आई एक्चुअली टोल्ड हिम। आज आपने अपने फ्लॉस को एक्सेप्ट किया है। आज तक आपने हमेशा मेरी बहन का संभालना है। मेरे भाई के बच्चे संभाल आपने रीज़ंस दे दे के अपने आपको महान बनाया हुआ था। क्योंकि पूरी सोसाइटी में आप एक बहुत रिस्पांसिबल बेटे, रिस्पांसिबल ब्रदर का रोल दिखा रहे थे। लेकिन जब फैक्ट में आपके सामने आपको कोई पार्टनर के सामने खड़ा कर दिया गया और उसके बाद आपको समझाया गया कि शादी के बाद
(1:31:29) देखो घर लेना पड़ेगा। तुम ऑफिस से आओगे तो उसको उतने पैसे देने पड़ेंगे। ये रेट्स हैं सब्जियों के। ये हैं ग्रेंस जो तुम्हारे किचन में जाएंगे। जब आपके सामने वो क्लियरली सारा चार्ट रखा गया देन यू रिलाइज नहीं। शादी नहीं करनी है। सिर्फ लिवनी ही ठीक है। तो इस तरीके के जब लाइव डेमोंस्ट्रेशन दिखाना पड़ता होगा आपको या किसी को फैक्ट्स के साथ रूबरू करवाना पड़ता होगा तो आपके सामने तो बहुत सारे ऐसे कमिटमेंट्स फेल भी आपने होते हुए देखे होंगे 100% लेकिन जैसे डेस्टिनी की बात की जाती है कि डेस्टिनी हम लिखते हैं या डेस्टिनी ऊपर
(1:32:12) हमारे लिए लिख करके भेज दिया जाता है आकाशा के थ्रू व्हाटएवर तो यह जो डेस्टिनी की बात आती है। हम इस डेस्टिनी पर अगर बिलीव करें तो हम अपने कर्म करने छोड़ दें कि जो लिखा है वही होगा। और अगर हम कर्म करते हैं तो हमारे कार्मिक ड्यूस क्रिएट हो जाते हैं। अगर हम इन्हीं कार्मिक ड्यूस को जनरेशन दर जनरेशन भुगत रहे होते हैं तो क्या यह एक ट्रोमा हम अपने जनरेशन से कैरी करते हुए आते हैं? यानी आज आप जो यहां बैठी हैं आपके जो भी ट्रोमाज़ रहे होंगे चाइल्डहुड ट्रोमाज़ क्या वो सेम ट्रोमा आपकी मम्मी के भी रहे होंगे? क्या वो सेम ट्रोमा आपकी दादी के भी रहे होंगे या नानी
(1:32:55) के भी रहे होंगे? लेकिन क्योंकि आपने लर्निंग की, आपने हील किया तो आपने आज अपने आप को इस मुकाम तक पहुंचाया। क्या आपके पास ऐसे जो केसेस आते हैं आप उन्हें बायोलॉजिकली, साइकोलॉजिकली या फिर कार्मिक लॉजिकली कैसे हैंडल करती हैं? जब आप पूरा स्टडी करती हैं किसी के लाइफ को तो आप कंक्लूजन पे आने से पहले क्या यह देखती हैं कि वो एक इंटर जनरेशनल ट्रोमा है और उस ट्रोमा को हील करने के लिए हमें पूरा ट्रोमाग्राम या जीनोलॉजी पूरा बनाना पड़ेगा और क्या थेरेपीस आप यूज करती हैं जिससे कि एक इंसान इस ट्रोमा को ब्रेक कर सके। इट्स अ लॉन्ग क्वेश्चन मैं
(1:33:41) आराम से बैठ जाती हूं। जी देखिए क्या है कि कोई भी पर्सन अगर हमारे पास आता है तो डेफिनेटली वह माइंडसेट कर कर आता है कि अब उसको चेंज होना है क्योंकि वह तभी आता है। अब जब वो पर्सन आता है तो मेरी एक नेचर है कि मैं उस पर्सन से उसकी पूरी लाइफ के बारे में जानती हूं। फॉर एग्जांपल अगर कोई पर्सन मान लीजिए 30 साल का है। तो मुझे उसकी पूरे 30 साल की हिस्ट्री जाननी है। उसका मैं चाइल्डहुड जानूंगी। उसकी फैमिली के बारे में जानूंगी। उसकी स्कूलिंग कैसे रही? कॉलेज टाइम में कैसे रहा? वो वर्किंग है, नॉन वर्किंग है क्या? उसके बिलीव्स
(1:34:16) को, उसके फिय्स को, उसकी हैबिट्स को, उसके लाइफ स्टाइल को पूरा उसकी फूड हैबिट्स को, उसके स्लीपिंग पैटर्न को मतलब हर एक डिटेल को मुझे जानकर उसका एक स्केच बनाना होता है। क्योंकि पहली मीटिंग में मुझे यही जानना होता है कि वो पर्सन जो आज चैलेंजेस मेरे पास लेकर आया है, उसके पीछे क्या-क्या वजह रही क्योंकि कारण जानकर ही आप निवारण कर सकते हो। और जब तक आप रूट तक नहीं पहुंचोगे तो ऊपर से एक पेड़ के अगर आप पत्ते कितने भी छाटते रहोगे लेकिन जड़ में आप जब तक दवा नहीं डालोगे तो बार-बार पत्ते खराब ही होते रहेंगे तो आप पत्ते तोड़ना एक नेवर एंडिंग प्रोसेस बन जाएगा
(1:34:53) तो मुझे डालनी होती है जड़ में दवा तो मैं वो देखती हूं तो जब मैं फैमिली के भी बारे में बात करती हूं तो उसकी मदर उसके फादर और उसने किसको सबकॉन्शियसली ज्यादा मॉडल किया है किसको कॉपी ज्यादा किया है अगर वो ग्रैंड पेरेंट्स के साथ रहे या फिर पूरा एक जॉइंट फैमिली थी। तो कौन-कौन सी ऐसी पर्सनालिटीज़ थी जिन्होंने बहुत इंपॉर्टेंट सिग्निफिकेंट रोल प्ले किया जिससे वह बहुत इन्फ्लुएंस रहा पर्सन। तो वो सब चीजें या उसके क्लोज फ्रेंड्स या जिससे भी उसकी बहुत ज्यादा एक इमोशनल बॉन्डिंग थी तो उन सबका इंपैक्ट बहुत होता है और उसका एनवायरमेंट कैसा था। तो वो सब चीजें जानने
(1:35:28) के बाद जब हम स्केच बनाते हैं तो हमें पता चलता है कि बहुत सारे केसेस में ऐसा होता है कि जैसे एक लड़की आई थी तो उसने हमेशा अपनी मदर को सप्रेशन मोड में ही देखा था और उसने सप्रेशन मोड में अपनी मदर को देखा क्योंकि उसकी जो दादी थी वो बहुत ज्यादा डोमिनेटिंग थी। पता चला कि उसकी जो दादी थी उनकी जो सास थी वो बहुत डोमिनेटिंग थी। तो उनके परिवार में ऐसा था कि घर की औरतों को औरतें ही डोमिनेट करके रखती थी। तो वो अपनी सास से त्रस्त थी। तो उसने सोचा अब मैं सास बन गई तो मैं अपनी बहू को भी ऐसे दबा के रखूंगी। लेकिन उसकी मदर तो सप्रेस्ड थी।
(1:36:02) हां उसकी मदर सप्रेस थी। तो वो जो लड़की मेरे पास आई थी तो उसकी मदर सप्रेस थी। लेकिन उसकी सास ने तो जो सप्रेशन था वो तो या तो अग्रेशन के रूप में निकलेगा या डिप्रेशन के रूप में निकलेगा। ओके। तो वो जो सप्रेशन था वो अग्रेशन के रूप में निकलता था कि अच्छा ऐसा ही बहुओं को तो ऐसे ही रहना होता है। सास की ही चलती है। तो जो मेरे साथ हुआ मैंने उसी पैटर्न को कॉपी कर लिया और मैंने आगे अपनी बहू पर वही अप्लाई कर दिया। यानी कि मैंने उस चेन को ब्रेक करने की कोशिश नहीं की। कि अगर मैं खुलकर नहीं जी तो मेरे घर में आने वाली बहू खुलकर जी सकती है। या जो मेरे को
(1:36:37) पेन हुआ वो कितना पेनफुल होता है कि हर बार कोई गलती निकाले जा रहा है। डांटे जा रहा है। बुरा बोले जा रहा है या पति से शिकायत लगाया जा रहा है। कितना दुख होता है। आपने कभी बैठकर यह रियलाइज ही नहीं किया कि यह कितना पेनफुल होता है और इस पेन की चैन को यहीं पर ब्रेक करना है और आप बस इग्नोरेंस में जीते रहे और आप वही चीजें जो आपके साथ हुई आगे आप करते रहे। तो आप खुद पेन में थे और आपने वो पेन आगे ट्रांसफर कर दिया इस तरह से। लेकिन कोई ना कोई तो ऐसा होगा ना जो अवेयर होगा। तो वो जो लेडी थी जिसकी वो बेटी थी। अब उन्होंने देखा कि सबकॉन्शियसली वो भी
(1:37:13) कभी-कभी अपनी बेटी के साथ ऐसे ही डोमिनेटिंग बिहेवियर कर जाती थी। उसको डांट देती थी और ऐसा कर रही थी कि वो ट्रॉमा था जो उनके अंदर जो पेन था इमोशनल वो गुस्से के रूप में निकल जाता था। लेकिन उनको धीरे-धीरे रियलाइज होने लगा कि ये गलत कर रही हूं मैं। मेरी बच्ची का कोई कसूर नहीं है उसमें। आज मैं अपनी बेटी के साथ कर रही हूं। कल को मेरे बेटे की बहू आएगी तो मैं उसके साथ भी करूंगी ऐसा। तो उनको अंदर-अंदर इस बात का रियलाइजेशन होने लगा क्योंकि वो ये जो ब्रह्मा कुमारी की संस्था है उससे जुड़ गई थी और मेडिटेशन वगैरह करती थी तो थोड़ा सा उनको अंदर से
(1:37:45) रियलाइजेशन होने लग गया और उनको लगा कि मैं गलत कर रही हूं तो वो अपनी बेटी की काउंसलिंग कराने के लिए आई थी तो पहले उनकी बेटी मेरे कैबिन में आई तो फिर मुझे पता चला मदर भी आई है तो मैंने मदर को बुलाकर भी बात करा और तब पता चला और उनकी मदर काफी समझदार उस टाइम पर लग रही थी बात करने से कि उनको ये समझ में आ गया था कि कोई तो है जिसको बदलाव करना चाहिए कि जब मुझे इतनी तकलीफ होती है बार-बार मेरे दिमाग में वही बातें चलती रहती है। मुझे कभी नींद नहीं आती है। बिन बात का गुस्सा आ जाता है। तो उन्होंने कहा कि मैडम मेरी बेटी के साथ ऐसा ना हो तो इसे मेरी तरह
(1:38:17) दबून मत रहने देना आप। उनके एग्जैक्ट यही वर्ड्स थे कि मैं तो बहुत ज्यादा दबू हूं। मैं दब के रह गई। मेरे से बोला नहीं जाता उन लोगों के सामने। लेकिन मैं चाहती हूं कि यह आत्मविश्वास से भर जाए। यह अपने लिए स्टैंड ले। कल को इसके साथ वो ना हो जो मेरे साथ हुआ है। तो वो अपनी बेटी को इसलिए काउंसलिंग कराने के लिए लेकर आई थी। तो एक रियलाइजेशन आपकी पूरी वो चली आ रही चैन को तोड़ देता है। तो जब वो अपनी बेटी के लिए इतना अवेयर हो गई थी तो सोचिए ना वो कल को आने वाली बहू के लिए भी अवेयर होंगी। और फिर मैंने उनको बोला कि आप भी वंडेड है। आप भी आप जब बेटी के लिए हिम्मत
(1:38:52) कर सकती है तो अपने लिए भी हिम्मत करो। आपके अंदर भी वो जो दुख तकलीफ भरी हुई है। आप भी दो चार सेशंस लो और आप भी अपने अंदर के वो पेन को रिलीज करो। और आप माफ करके लेट गो करके रहना उसी एनवायरमेंट में है। लेकिन आप अपने अंदर एक इमोशनल बाउंड्रीज क्रिएट कर सकती हैं। और अपने लिए एक साइकोलॉजिकल सेफ्टी बना सकती हैं। और कैसे वो जो आपके ऊपर वहां से डोमिनेंस आएगा उसको कैसे आपको हैंडल करना है वो मैं सब आपको सिखा दूंगी। और फिर आप उसी घर में रहेंगी लेकिन आप पर उतना फर्क नहीं पड़ेगा। और डेली कैसे वॉश आउट करना है वो मैं आपको सब सिखा दूंगी। तब जाकर आप हील
(1:39:27) होंगी। तब जाकर यह जो आप बिन सोचे समझे बच्चों पर नाराज हो जाती हैं या आपको डर है कि आगे आप भी ऐसे ही ना करने लगे तो यह सब चीजें खत्म हो जाएंगी। तो यह रियलाइजेशन के मोमेंट से ही वो चैन ब्रेक होती है। अब आपने मेरे से पर्सनल भी पूछा था कि मेरा कुछ ट्रॉमा मेरा चाइल्डहुड में ही था। चाइल्डहुड में ही मैंने अपने ऊपर काम कर लिया था। फिर मैंने यही सब चीजें पढ़ी और इतने सालों तक मैंने साइकोलॉजी पढ़ी। तो मेरे साथ क्या हुआ कि मैं पढ़ती गई और ट्रांसफॉर्म होती गई। बढ़ती गई, बदलती चली गई और आज भी हर दिन आप सीखते चले जाते हो। तो मैं जब किसी को काउंसिल
(1:40:01) करती हूं, थेरेपीस देती हूं तो उसका बेनिफिट मुझे भी मिल रहा होता है। क्योंकि आप जो बोल रहे होते वो सुन भी रहे होते हो और कैसे दूसरा इंसान अगर अपना ट्रॉमा एक्सप्रेस कर रहा है, अपना पेन एक्सप्रेस कर रहा है और अपने आप को कैसे आपको सेफ रखना है ये सब चीजें हम ट्रेनिंग में सीख लेते हैं और धीरे-धीरे हमें लाइफ के एक्सपीरियसेस से सीखते रहते हैं। तो कैसे अपने को डिटच रखना है, कैसे बचाना है, अपनी एनर्जी को क्लीन रखना है और दूसरे इंसान को बिना इमोशनली डीपली कनेक्ट हुए मतलब उसके इमोशंस को हम प्रोसेस करने लग जाएंगे तो हम हेल्प करने लायक नहीं
(1:40:34) बचेंगे। तो वो एक कैसे बाउंड्री बनाकर उसको हेल्प करनी है वो सब चीजें हो गई। लेकिन मैंने अपने घर में अपनी मदर को बहुत मेरी मदर बहुत सीधी थी। वो कभी भी किसी के सामने ऐसे जैसे जवाब दे देना या किसी को डिसरिस्पेक्ट करना ऐसा नहीं था। तो मेरे घर में ऐसा नहीं था कि मेरी दादी उनको कोई ट्रॉमा देती रहती थी। लेकिन यस पहले की लेडीज ऐसी थी अपनी सास के सामने बोलती नहीं थी। मतलब घर में उनको ये था कि बड़े जो है उनकी रिस्पेक्ट करके चल रही हैं। तो कई बार बहुत अनफेयर भी हो ही जाता था। जिसको मदर मेरी बहुत रिस्पेक्टफुली और ग्रेसफुली संभाल लेती थी और कई बार अपनी
(1:41:09) बहुत सारी इच्छाएं उन्होंने सप्रेस भी की है। उन्होंने कभी अपने लिए स्टैंड नहीं लिया। उन्होंने कभी यह रियलाइज नहीं किया कि उनके साथ अनफेयर हो रहा है। ये इनजस्टिस हो रहा है। उन्हें स्टैंड लेना चाहिए। लेकिन मैंने क्योंकि ऐसा देखा था कि मेरी मदर के सीधेपन का फायदा उठाया जा रहा है और उनके साथ इनजस्टिस हो रहा है। और वो कितना घर का काम करती हैं और सबके लिए अवेलेबल होती है। अगर उनको बाथरूम भी जाना है और मेरे दादा जी ने चाय मांगी है तो अपना बाथरूम भी रोक कर पहले चाय देंगी और बाद में जाएंगी अपने आप को फ्री करने के लिए। और तब भी उनको उतनी रिस्पेक्ट
(1:41:40) नहीं मिल रही थी कि जितनी मिलनी चाहिए थी। सब बोलते ऐसे थे कि यह देवी है कि इसको जो है ना मंदिर बना देना चाहिए। लेकिन ऐसी क्या देवी है कि जिसकी जीते जागते आप इज्जत नहीं कर पा रहे हैं। जिसको वो चीज जो सम्मान डिर्व करती है वो मिल नहीं पा रहा है। मरने के बाद आप फोटो पे माला तो सबकी चढ़ जाती है। तो वो कोई इज्जत नहीं होती। जीते जाते इंसान की इज्जत होती है। तो मैंने जो एज अ चाइल्ड लर्निंग ली कि मुझे अपनी मदर की तरह इस तरह से नहीं जीना है कि जहां पर वो सही बात को भी नहीं बोलती है। रिस्पेक्ट में कवर कर देती है। और मैंने यह कि मुझे सिर्फ यह घर के कामों
(1:42:13) में अपने को इन्वॉल्व नहीं रखना है। मुझे अपनी एक स्टैंडिंग बनानी है। तो वो चीज अंदर से थी। भले ही रास्ता आपको थोड़ा सा देर से मिलता है लेकिन जब आपके अंदर रास्ता ढूंढने की चाहत होती है तो आपको एक दिन रास्ता मिल ही जाता है। तो जो जो भी गलतियां मेरी मदर से हुई वो गलतियां मुझे कभी नहीं करनी है। यह मैंने बचपन में ही मैसेज रिसीव करना तभी शुरू कर दिया था जब मेरी टीचर ने मुझे हेल्प करनी शुरू कर दी और जब मुझे पता चल गया था कि हम अपनी सोच बदलकर अपनी पूरी डेस्टिनी बदल सकते हैं। अपनी लाइफ की स्क्रिप्ट खुद लिख सकते हैं। अपनी जिंदगी बदल सकते हैं। तो ये मुझे पता
(1:42:46) चल गया था। जब तक नहीं पता था 12 13 साल की उम्र तक तब तक बात अलग थी। लेकिन उसके बाद मुझे पता चल गया था कि ये जो सारे दूसरे लोग हैं ये अपने अपने हिसाब से कुछ भी बोलते रहते हैं। इनकी बातों में दम नहीं है। दम उस बात में होगा जो मैं सोचूंगी जो मैं चाहूंगी। रियलाइज करने के बाद जब आपने बोला कि मैं अपनी डेस्टिनी खुद लिखूंगी। मैं अपनी रियलिटी खुद क्रिएट करूंगी और वापस से आपको अपनी मम्मी के घर ही जाना पड़ा। जहां पर आपने फिर देखा कि एक सप्रेस्ड लेडी है और दोबारा से आप उनकी मदद इन लॉ यानी अपनी दादी को कंट्रोल कैसे करता हुआ देख रही
(1:43:19) थी। लेकिन अब आप चेंज हो रही हैं। आप बदल रही हैं। आप अपनी रियलिटी चेंज कर रही हैं। तो क्या आप जब अपनी रियलिटी चेंज कर रही थी तो क्या बदलाव आपकी मम्मी में भी आ रहा था? ऑफ कोर्स मैंने अपनी मदर को बहुत बार ऐसा बोला कि अब आपको यहां पर बोलना चाहिए और अगर आप नहीं बोलोगे तो आपकी जगह मुझे बोलना पड़ेगा और मैं बोलने लगी थी जहां पर भी अनफेयर होता हुआ दिखाई देता था तो वहां पर रिस्पेक्टफुली क्योंकि मेरी मदर का था कि अगर तुम्हें कुछ बोलना भी है तो रिस्पेक्टफुली बोलना है तो ठीक है इतना हम आपका जो दिए हुए संस्कार है उसकी इज्जत
(1:43:52) जरूर रखेंगे रिस्पेक्टफुली बोलेंगे लेकिन सामने वाले को मैसेज जरूर कन्व कर देंगे कि यहां पर आप गलती पर है अब हमारी मम्मी अकेली लिए नहीं है और हम उनके साथ हैं। तो मैंने बोलना शुरू किया और उस के ऊपर बहुत रिएक्शन भी आता था लोगों का पर जब आप ट्रांसफॉर्म हो रहे होते हैं ना आपके अंदर वो फायर होती है तो फिर वो फायर की वजह से आप रुकते नहीं हो। आप बोलते हो और जब आप बोलते हो तो आप दूसरे के लिए प्रोटेक्टिव शील्ड बनते हो। तो हमने मम्मी को जीना सिखाया कि आपके अंदर जो शौक है उनको थोड़ा-थोड़ा पूरा करना शुरू करो। लेकिन उस वक्त के जो हालात थे उस हिसाब से वह करने
(1:44:26) लगी थी। जो बिल्कुल भी नहीं करती थी वह करने लगी थी। लेकिन क्योंकि उनकी खुद की बेसिक नेचर ऐसी थी बहुत ही सॉफ्ट बहुत ही काइंड हार्टेड अपने परिवार के लिए नहीं वो तो पड़ोसियों का भी अगर पता चल जाए कोई दुख हो तो पूरे पड़ोसियों का भी घर कई-कई दिनों तक संभाल लेती थी। अपना घर तो छोड़िए और अगर घर के बाहर भी कोई मांगने वाला भी आता था तो उसको गरम-गरम बैठकर नाश्ते कराए जा रहे हैं पूरे। मतलब इतना काइंड हार्टेड वो थी। तो ऐसे लोगों को बहुत ज्यादा भी आप ऐसा नहीं है कि उनको हर समय स्टैंड या लेने के लिए आप फायरी मोड में आप उनको डाल सकते हो और खासतौर से जब
(1:45:00) बच्ची है और पढ़ रही है मेरा क्वेश्चन यही था कि सप्रेस्ड इंसान जिस इंसान को जन्म देता है और वो हमेशा इसके ऑोजिट बनना चाहेगा क्योंकि उसे ऐसा सप्रेशन पसंद नहीं वो रिबेलियन ना बन जाए। देखिए ऐसा नहीं है कि वो पर्सन एकदम से रिपेलियस हो जाएगा या उसके ऑोजिट बनना चाहेगा। बहुत सारी लड़कियां ऐसी हैं जो अपनी मदर को ही मॉडल कर लेती हैं और वो भी अपनी मदर के जैसी हो जाती हैं। लेकिन आपका एक्सपोज़र जैसे मेरा एक्सपोज़र हो गया। उन टीचर ने मुझे सिखा दिया कि आप जो सोचते हो आप वो बनते हो। जो तुम सोचोगी वो तुम्हारे बारे में सच होगा। तो मेरे अंदर वो
(1:45:34) ट्रांसफॉर्मेशन वहां से आ गया। तो मैं सोच पाई। अगर मुझे ये नहीं पता होता तो मैं तो अपनी मदर को ही कॉपी करने वाली थी ना फिर। आप लकी थी। आपको टीचर मिल गई। मैं लकी थी। सच में लकी। आप लकी थी। आपको टीचर मिल गई। लेकिन इस पडकास्ट के थ्रू अगर कोई अपनी काउंसलिंग करवाना चाहे तो आप उनको क्या कुछ टिप्स दे पाएंगी जो भी एक नार्सिसिस्ट पार्टनर के साथ रह रहे हैं कि उन्हें क्या-क्या स्टेप्स लेने चाहिए घर में ताकि वो पीसफुली रह सकें। एनी लाइफ सजेशंस दैट यू वुड लाइक टू गिव टू दी ऑडियंस। सबसे पहले हर इंसान को अपने आपकोेंस देनी चाहिए।ेंस
(1:46:13) इन द सेंस हेल्दीेंस। देखिए अब्यूज अगर आपके साथ लगातार हो रहा है तो यह आपकी चॉइस है कि आप उस अब्यूज को अलव कर रहे हो। आपके साथ तब तक कोई रिपीिटेटिवली अब्यूज नहीं कर सकता जब तक आप उसे अलव नहीं करोगे। एक बार कर सकता है कोई। एक बार आपको कोई चीट कर सकता है, एक बार कोई आपको इंसल्ट कर सकता है। लेकिन अगर आपके साथ दोबारा यह हो रहा है तो यानी कि आपने ही उसको लाइसेंस दिया है। जब पहली बार आपके साथ कोई भी बदतमीजी करे उसी वक्त आपको गलत को गलत कहना है। क्योंकि हम लोग क्या होते हैं? चलो छोड़ो। यह जो चलो छोड़ो है ना यह बहुत गलत है। अरे कोई बात
(1:46:56) नहीं। या फिर हम ना जबरदस्ती रैशनलाइज करने की कोशिश करते हैं और हम उस इंसान का अच्छा पार्ट याद करने की कोशिश करते हैं। नहीं अच्छा पार्ट है उसके लिए ग्रेटफुल हो। लेकिन जब अच्छा इंसान भी गलत हरकत कर रहा है तो उस टाइम पर वहीं पर उस चीज के लिए स्टैंड लो। सबसे पहले तो आपको यह समझना है कि अगर गलत हो रहा है तो गलत को गलत कहना ही है। क्योंकि जब तक आप सामने वाले को एक क्लियर मैसेज कन्व नहीं करोगे कि आपको समझ है कि क्या गलत है और क्या सही है जब तक सामने वाला रुकेगा नहीं। आपने बोल दिया वो तब भी नहीं रुक रहा है तो आपका स्ट्रांग रिएक्शन आना चाहिए उस
(1:47:33) बात के लिए कि अगर मुझसे बात करनी है तो रेस्पेक्टफुली बात करनी है। आवाज आपकी धीमी होनी चाहिए और यह वर्ड्स रिपीट नहीं होने चाहिए। आपने एक सॉफ्ट वार्निंग दे दिया है। अब सामने वाला या तो इस बात को समझ जाएगा या फिर वो नहीं समझेगा और वो आप पे और डोमिनेंस चलाएगा। नार्सिस्ट डोमिनेंस चलाएगा। वो सोचेगा कि अच्छा आप ऐसा बोल के उसको ब्लेम करने की कोशिश कर रहे हैं। डोमिनेंस चलाएगा तो फिर आप वहां से उससे वहीं पर कम्युनिकेशन ब्रेक कर दीजिए कि मैं तभी बात कर पाऊंगी जब सही टोन में और सही तरीके से बात होगी। तो आप वहां पर अगर कम्युनिकेशन की चैन तोड़
(1:48:09) देंगे। आप एक स्ट्रांग बाउंड्री बना देंगे कि मुझसे अगर बात करनी है तो रिस्पेक्टफुली ही बात करनी होगी। अदरवाइज मैं बात करने के ज़ोन में नहीं हूं। वो पर्सन फिर भी अगर बहुत बदतमीजी दिखाता है और किसी भी तरीके से डायरेक्ट और इनडायरेक्ट तरीके से आपको अब्यूज करता है तो आप उसे सॉफ्ट थ्रेट से स्टार्ट करें कि अगर यह बदतमीज़ यहां पर नहीं रुकी है तो मुझे इसके लिए अननेसेसरी स्टैंड लेना पड़ेगा। लोगों को इनवॉल्व करना पड़ेगा या फिर अगर मुझे इससे ज्यादा तकलीफ होगी तो मुझे इसकी कंप्लेन करनी पड़ेगी। नार्सिस्ट आदमी अपने आप को एक्सपोज कराने से बहुत
(1:48:40) डरता है। वो बाहर के तमाशा ना हो जाए। कहीं चार लोगों में बात ना खुल जाए या कंप्लेन ना हो जाए क्योंकि वह अंदर से बहुत इनसिक्योर होता है। तो वह बाहर से डोमिनेंस और कंट्रोल दिखाकर अपनी अंदर की उस इनसिक्योरिटी को हाइड करना चाहता है और अपने आपको स्ट्रांग दिखाना चाहता है। तो वो इस तरीके से जब आपकी सॉफ्ट थ्रेट्स आती है तो उससे कई बार इनिशियली ये मैसेज रिसीव कर लेता है कि अगर मैंने ज्यादा जरूरत से ज्यादा वो किया तो बात आगे बिगड़ जाएगी और वो गड़बड़ हो जाएगी। अब इससे क्वेश्चन आया कि नार्सिसिस्ट आदमी जैसे आपने कहा कि वह डरता है। एक्सपोज्ड होने
(1:49:13) से डरता है। इसका मतलब उसने भी तो अपने फैमिली में कुछ तो देखा होगा कि आज वो ये नार्सिसिज्म लेकर आ गया है। जैसे वो 12 साल के बच्चे के लिए आपने बताया। तो अ वाकई ये भी जनरेशनल ट्रोमा ही हुई। देखिए कोई भी चीज है तो वो हमारे पास पास होकर ही आ रही है। हम मतलब हमारे बड़ों से आ रही है क्योंकि वही तो हमारे प्राइमरी केयरटेकर होते हैं ना। हम तो हम अपने प्राइमरी केयर टेकर को ही तो सबसे ज्यादा क्योंकि उसके साथ रहते हैं। उसके बिहेवियर पैटर्न्स उसका थॉट प्रोसेस हम सब सबकॉन्शियसली वही सब चीजें कॉपी करते रहते हैं। तो अब वो सब चीजें आई हमारी फैमिली से ही
(1:49:48) है मेनली क्योंकि उन्होंने ही मेजर रोल प्ले किया है। बच्चा रहता किसके साथ साथ उन्हीं लोगों के साथ रहता है। तो सब चीजें जनरेशन टू जनरेशन ही पास होती है। हमारे पास जो जेनेटिक मेमोरी होती है हमारी आप अगर बायोलॉजिकली उसमें देखो हमारी हाइट, शकल, सूरज सब कुछ मैच करती है ना हमारे घर वालों से। तो हमारे अंदर की वो प्रोग्रामिंग जो हमारे पास जेनेटिक मेमोरी है। लेकिन एपिजेनेटिक्स भी तो है हमारे पास। जहां एनवायरमेंट चेंज करके आप अपने जींस का एक्सप्रेशन भी चेंज कर सकते हो। क्योंकि एनवायरमेंट सबसे बड़ा है। आप ये देखिए कि एक शायद मूवी अगर मुझे ठीक से याद है उसका
(1:50:18) नाम था परवरिश मूवी जिसमें एक डाकू का बच्चा पुलिस वाले के यहां पलता है। तो वो शरीफ ही बंद। तो एनवायरमेंट जिस माहौल में आपकी परवरिश हुई है वो बहुत ज्यादा इंपॉर्टेंट है। तो जींस का रोल है। लेकिन अगर आपका एनवायरमेंट कंप्लीटली चेंज होगा या आज आप चेंज करना शुरू कर दीजिए। आप चेंज होना शुरू हो जाएंगे। आप अपने लाइफ स्टाइल में चेंज करते हैं। आप अपने डाइट में चेंज करते हैं। आप अपनी सोच में चेंज करते हैं। आप अपने फ्रेंड्स को चेंज कर देते हैं। आप जिन लोगों के साथ उठते बैठते थे उन्हें चेंज कर देते हैं। आप सब कुछ चेंज करते ही आप चेंज हो जाते
(1:50:49) हैं। आप अपना ऑफिस का प्लेस चेंज कर लेते हैं। आप सिटी चेंज कर लेते हैं। आप कंट्री चेंज कर लेते हैं। आप ड्रेसिंग सेंस चेंज कर लेते हैं। आप चेंज हो जाते हैं। तो आप कुछ भी चेंज करेंगे तो बदलाव से बदलाव तो आएगा ही। लेकिन अगर आप अवेयर ही नहीं है। एक्सेप्ट ही नहीं कर रहे हैं रियलिटी को। कोई एक्शन ही नहीं ले रहे हैं। तो तीन ए ये ट्रिपल ए बहुत जरूरी है। सबसे पहले आपका अवेयर होना, एक्सेप्ट करना और फिर एक्शन लेना। बहुत सारे लोग अवेयर होते हैं और एक्सेप्ट भी कर लेते हैं लेकिन एक्शन नहीं लेते। उनकी लाइफ में कुछ नहीं बदलता।
(1:51:18) बहुत सारे लोग अवेयर ही नहीं होते हैं। इग्नोरेंस में जी रहे होते हैं। डिनायल में जी रहे होते हैं कि नहीं कुछ भी नहीं है। ये तो सब नॉर्मल है। तो उनका क्या होगा? जब तक अवेयर ही नहीं होंगे। चलो अवेयर हो गए। अब एक्सेप्ट नहीं कर रहे हैं। डिनायल में है अभी भी। तो उनका भी कुछ नहीं हो सकता। दो स्टेप आपने कर लिए। अब एक्शन नहीं ले रहे हैं। सोच रहे हैं कि अपने आप ही मैजिकली कुछ बदल जाएगा या कभी भाग्य बदलेगा। कभी ग्रह दशा बदल जाएगी और कभी जो भगवान ने लिख रखा होगा आज दुख लिखे हैं तो कल को सुख लिखेगा। ऐसे थोड़ी ना होता है जादू से। आप एक बात बताइए अगर
(1:51:46) आपका भाग्य भी है तो भाग्य के साथ कर्म भी तो करना पड़ता है ना। इसको ऐसे एग्जांपल से मैं समझाती हूं कि बैंक का लॉकर होता है। तो उसमें दो चाबी होती है। एक होती है वहां के मैनेजर के पास। पहले वो लगाता है और फिर आप अपनी चाबी लगाते हो। मतलब इसमें दो चाबियां होती है। एक जो वहां होती है और एक हमारे पास होती है। पहले हम अपनी चाबी लगाते हैं। वो चाबी लगाता है साथ में। दोनों साथ में घूमती है। तब जाके लॉकर खुलता है और आपका खजाना खुलता है। तो ऐसे ही हमारा जो खजाना है वो तभी खुलेगा जब भाग्य के साथ-साथ आप कर्म की चाबी लगाओगे। आप भाग्य के भरोसे बैठोगे और
(1:52:16) कितना भी बढ़िया भाग्य लिखा होगा। बिना कर्म के वो अनलॉक कैसे होगा? आप सिर्फ यह सोचोगे कि जो है वह सब ग्रह चाल या कार्मिक वो है। पुराने कर्म चले आ रहे हैं। यह सब वह है जो लोग बचना चाहते हैं। जो रिस्पांसिबिलिटी नहीं लेना चाहते वो लोग इस तरीके की थ्योरीज में ज्यादा बिलीव करते हैं और उसको प्रमोट भी करने वाले बहुत लोग हैं। तो जो चीज का ज्यादा प्रमोशन होता है उस पे यकीन भी आ जाता है। तो यहां पर मैं किसी भी थ्योरी या किसी के बिलीफ को चैलेंज या खराब नहीं बता रही हूं। मैं एक रियलिटी एज अ साइकोलॉजिस्ट बता रही हूं कि आप जब तक एक्शन नहीं लेंगे
(1:52:51) कुछ भी नहीं बदलेगा। आपको एक्शन तो लेना ही पड़ेगा। जब मेरे पास लोग आते हैं तो हम उनको थेरेपीस कराते हैं। जैसे एक बहुत ही पॉपुलर थेरेपी सीपीटी जिसमें हम उनके डिस्टोर्टेड थिंकिंग पैटर्न्स को पकड़ना सिखाते हैं। यानी कि आप कितना डिस्फंक्शनल वे में सोच रहे हैं। कहां आप एक दो इवेंट के बेसिस पर अब आप जनरलाइज कर रहे हैं। मान लीजिए आपने एक बिज़नेस स्टार्ट किया। अब वो नहीं चला। आपने अपनी कमियां नहीं देखी कि वो क्यों नहीं चला। लेकिन आपने उस एक फेलियर को ऐसे बोल दिया यार बिजनेस नॉट फॉर मी। मेरे से बिज़नेस कभी नहीं होगा। आपने उसे जनरलाइज कर दिया। आपको बैठकर
(1:53:25) उसको इन डेप्थ स्क्रूटनाइज़ करना था कि आखिरकार क्या फ्लॉज़ रहे। किसकी वजह से नहीं चला कि आपने देखा देखिए शॉक में डाल लिया था। आपका ट्रू पैशन था नहीं था। आपने सही जगह इन्वेस्ट किया था। आपने सही स्ट्रेटजी लगाई थी या नहीं लगाई थी। आपने उसे जनरलाइज़ कर लिया। या डिस्टोर्टेड थिंकिंग पैटर्न है। माइंड रीडिंग कर रहे हैं आप कि दूसरे लोग मेरे बारे में ऐसा-सा सोचते हैं। वो तो मुझसे जलते हैं। आपको कैसे पता आपने कैसे दूसरे का माइंड रीड कर लिया है? तो हम ऐसे तमाम बहुत सारे डिस्टोर्टेड थिंकिंग पैटर्न बताते हैं कि आप अभी ऑल अ नन ज़ोन में हो। बिल्कुल ब्लैक
(1:53:55) एंड वाइट तो कुछ नहीं होता। सब कुछ ग्रे होता है। किसी इंसान को आपने बहुत ही अच्छा गॉड लाइक डिक्लेअ कर दिया और किसी को बिल्कुल आपने शैतान डिक्लेअर कर दिया। ना कोई भगवान है ना कोई शैतान है। सबके अंदर मिक्स है। कभी वो आपको अच्छा लगेगा तो भगवान जैसा लगेगा क्योंकि वो आपके फेवर की बात कर रहा है। जब वो आपकी बात नहीं मानेगा कुछ अनएक्सेक्टेड होगा तो आपको शैतान लगने लग जाएगा, बुरा लगने लग जाएगा। तो हम सब मिक्स हैं। तो आपके ये खुद के डिस्टोर्टेड थिंकिंग पैटर्न्स हैं। और आप इन डिस्टोर्टेड थिंकिंग पैटर्न से मैनपुलेट होकर अपने ही बायोलॉजिकल इमोशनल
(1:54:25) केमिस्ट्री के हाथों एक पपेट की तरह घूमते रहते हैं और आपका बिहेवियर अकॉर्डिंगली वैसे ही हो जाता है। तो जैसे ये बहुत ही पावरफुल थेरेपी क्योंकि ये ब्यूटीफुली बताती है कि आपके थॉट्स इमोशंस हैं। बिहेवियर में क्या कनेक्शन है। तो हमारे पास जो भी लोग आते हैं तो हम तरह-तरह की साइकोथरेपीस किसी को फियर फोबियाज़ हैं। किसी को किसी चीज़ को ट्राई करने से डर लगेगा। हम उसको एक्सपोज़र कराते हैं। उसके बिलीफ सिस्टम को एक्सेस करके बिलीफ को चेंज करा के उसको ना उस सिचुएशन में फेस करने के लिए तैयार करते हैं। ऐसी एक्सेप्टेंस एंड कमिटमेंट थेरेपी है। उसको
(1:54:56) बोलते हैं जो लाइफ की रियलिटी है एक्सेप्ट करो। अगर थॉट्स भी आ रहे हैं कुछ खराब तो उसे एक्सेप्ट करो। जो भी कुछ हो गया एक्सेप्ट करो। एंड अपने थॉट से डिटच होना सीखो। क्योंकि थॉट्स जस्ट मेंटल इवेंट्स हैं। एक कॉग्निटिव हैपनिंग है जो ऑटोमेटिकली हो रही है। एंड यू आर द विटनेस। तो उनसे डिस्टेंसिंग मेंटेन करा के जो लाइफ में वैल्यूुएबल है एनर्जी शिफ्ट करो उस तरफ क्योंकि बिना एक्शन लिए कुछ भी नहीं होगा। आप घंटों तक मेडिटेट करो या कोई नाम जप करो या आप किसी भी कार्मिक थ्योरी में किसी भी कोई भी आप किसी भी हीलिंग मोडालिटीज में बिलीव कर
(1:55:30) लो। आपको एक्शन तो लेना ही पड़ेगा। एक्शन लेने के बाद ही सब कुछ चेंज होगा। आप किसी से कोई रेमेडी भी पूछ कर आते हो तो आप उस रेमेडी को करने के लिए भी तो कुछ एक्शन ले रहे हो और उसके बाद आपका बिलीफ बन गया कि अब मैंने यह कर दिया है। अब मेरे सारे काम सीधे-सीधे हो जाएंगे। तो आप तब भी एक्शन लेते हो। तब भी आपको अपनी दुकान पर जाकर बैठना पड़ेगा। तब भी आपको नौकरी पर जाना पड़ेगा। तभी भी आपको अपने पार्टनर से अच्छे से बात करनी पड़ेगी। तभी भी आपको अपने लिए स्टैंड लेना पड़ेगा। खाली किसी कोने में कुछ रख देने से या कुछ मंत्र जाप
(1:55:58) या कुछ चाट लेने से या कुछ पहन लेने से थोड़ी ना अपने आप कुछ चेंज हो जाएगा। तो एकशंस कर्म प्रधान है। इस भौतिक संसार में कर्म प्रधान होते हैं। तो बेसिकली हम अपनी थेरेपीस के जरिए उसको एक्शन ओरिएंटेड बनाते हैं कि आपकी लाइफ में जो भी चैलेंजेस हैं सब दूर हो जाएंगे। आपकी जिंदगी पूरी तरीके से बदल जाएगी। बट टेक एकशंस। डिफिकल्ट होंगे। ए्जायटी होगी आपको। डर लगेगा आपको। अनसर्टेनिटी रहेगी। बट अनसर्टेनिटी डेंजरस नहीं है। और लाइफ में हमेशा आपकी ग्रोथ तभी होगी। आप तभी इवॉल्व होंगे, तभी डेवलप होंगे, तब आप कुछ नया ट्राई करोगे। क्योंकि
(1:56:36) न्यूरोप्लास्टिसिटी का जो कांसेप्ट है कि हमारे अंदर इतने अनयूज्ड न्यूरॉन्स हैं कि जब आप कुछ नए एक्शंस लेते हैं, नया सोचते हैं और एक्शंस लेते हैं तो नए न्यूरॉन्स में फायरिंग वायरिंग होती है। आपके नए पैटर्न्स बनते हैं। तो जैसे ही कुछ बदलते हैं आप तो आपकी पूरी जिंदगी बदल जाती है। तो वो चाहे जनरेशन ट्रॉमा की चैन हो वो आपको तोड़नी है तो आपको एक्शन लेने पड़ेंगे। डिसाइड करना पड़ेगा कि जो मेरे साथ होता है अब मुझे वो ना तो सहना है और ना आगे ट्रांसफर करना है। आपको ए्जायटी है तो आपको उस ए्जायटी को फेस करते हुए जो उसके चैलेंजेस के रूट कॉज हैं उनको एड्रेस
(1:57:06) करना पड़ेगा। आप डीप ब्रीथिंग करोगे आप मेडिटेशन करोगे एंजाइटटी थोड़ी देर के लिए सेटल हो जाएगी। बट इट विल कम बैक। लेकिन जब आप रूट कॉज को ही खत्म कर दोगे तो इट विल नेवर कम बैक। कुछ और चीज के लिए आ सकता है हल्काफुल्का। लेकिन उस सेम चीज के लिए कभी नहीं आएगा। और जब आप अपना पैटर्न ही बना लोगे कि नो मैटर बाहर की दुनिया में कुछ भी मेरे सामने आए। मुझे चूज़ करना है कि कैसे रिसोंड करना है इस सिचुएशन को। लेकिन लोग रिएक्ट करते हैं, रिसोंड नहीं करते हैं। उन्हें पॉज लेना नहीं आता है। वो एकदम बौखला जाते हैं। हाथ पैर छोड़ने लग जाते हैं। तो उसकी वजह से प्रॉब्लम को
(1:57:40) माइंड मैग्नीिफाई कर देता है। क्योंकि जिस पर भी आपका रिएक्शन आता है तो माइंड सोचता है कि ये डेंजरस सिचुएशन है। वो तुरंत सर्वाइवल मोड में चला जाता है और आपका प्रिमिटिव ब्रेन आपका अमकडेला सब हाईजैक कर लेता है आपके अदर ब्रेन के पार्ट को और उस टाइम आपकी रैशन थिंकिंग काम नहीं करती है और आपके अंदर पैनिकिक क्रिएट हो जाता है और उस पैनिकिक की वजह से आपका माइंड मैग्नीिफाइंग ग्लास हाथ में ले लेता है और छोटी-छोटी चीजों को कैटस्ट्रोफिक इंटरप्रिटेशन यानी कि राई का पहाड़ बना के वॉस्ट केस सिनेरियोस प्रेजेंट कर देता है आपके सामने और फिर वो जो भूत है जो सिर्फ
(1:58:10) आपके मन की कल्पना है वो बहुत बड़ा हो जाता है और जितना विशालकाय कल्पना होगी आपकी आपकी उतना आप बौने लगोगे उतने छोटे लगोगे तो जितने आपका आपने अपना साइज तो बौना कर लिया और कल्पनाओं का साइज इतना बड़ा हो गया तो फिर आप तो डरोगे ही डोगे ना तो हमारा मन कितना भी इवॉल्व हो गया हो लेकिन अभी भी उसमें दो डाउन साइड्स हैं एक बेटर सेव देन सॉरी वो कहता है कि बाद में पछताने से अच्छा है अभी अगर लग भी रहा है ना तो इस पर भी एक्शन लेना शुरू कर दो बाद में देखेंगे क्या सच था क्या झूठता है और दूसरा इमेजिनेशन रियलिटी को अभी भी वह एक ही मानता
(1:58:46) तो पूर्वजों के समय से जब जंगल में रहते थे और झाड़ियां हिलती थी तो ऐसा लगता था शेर आ गया है। तो इंसान का दिमाग इवॉल्व ही अनसर्टेनिटी में हुआ है और अनसर्टेनिटी आज भी है और हमेशा रहेगी। बट अनसर्टेनिटी का मतलब लोगों ने यह मान लिया है कि डेंजर है और यही सारी प्रॉब्लम की जड़ है। इसलिए लोगों को फियर ऑफ अननोन बहुत सताता है। इसीलिए उनको ए्जायटीज होती है। इसीलिए उनको जो चल रहा है ना वो सेफ फील होता है। इसीलिए एक औरत या आदमी अपनी टॉक्सिक रिलेशनशिप को छोड़ना नहीं चाहता। वो सोचता है अगर अगला भी ऐसे मिल गया तो या आगे जाके क्या भरोसा है तो वो सोचता है यह जो
(1:59:21) है अब्यूज है टॉक्सिक है बट जाना पहचाना है तो ब्रेन जाने पहचाने में सेफ्टी और अननोन में डेंजर अस्यूम करने लग जाता है इस वजह से लोग साल दर साल अपनी उसी स्टेट को मेंटेन करते रहते हैं और वो उसको छोड़ते ही नहीं है। लेकिन जिसने भी चूज़ किया रिस्क लेना क्योंकि हम मनुष्य और पशु में एक ही अंतर है। पशु अगर किसी बात पर बिल्कुल उसका मेंटल बैलेंस हिल भी गया है तो वह अपने लिए कुछ चूज़ नहीं कर सकता। लेकिन हम इंसान अपने लिए चूज़ कर सकते हैं। हमारे पास पावर ऑफ़ चॉइस है जो हमें श्रेष्ठ बनाती है और हमें मनुष्य जीवन मिला है तो हमें कोई भी चीज इतना नहीं
(2:00:00) तोड़ सकती कि हम मौत को चुने। हम चुन सकते हैं जीवन क्योंकि हमारे पास चुनाव की शक्ति है। एक पल लगता है आपको चुनना कि मुझे अब्यूज नहीं सहनी है। एक लेडी का केस मुझे याद आ रहा है। उसके हस्बैंड ने उसको इतनी गंदी बात बोल दी थी। उसने बोला कि तू अगर कोठे पे भी जाकर बैठ जाएगी ना तो तेरे को तब भी कुछ नहीं मिलने का। तब भी तेरा कुछ नहीं हो सकता। वो बात उसको इतनी चुभ गई। उसने कहा मैं सड़क पर जाके चाहे ट्रक के नीचे आ जाऊंगी या कुछ भी कर लूंगी। अब इस घर में नहीं रहना। वो एक मोमेंट था उसका चूज़ करने का कि अगर इस इंसान ने मुझे
(2:00:35) इतनी गंदी बात बोल दी है और इतना घटिया ये मेरे बारे में सोचता है तो शर्मनाक है अगर मैं इस घर में जरा सा बेटों को तो वो लेडी कोई स्टैंडिंग नहीं थी उसकी मतलब वो कोई फाइनेंसियली इंडिपेंडेंट नहीं थी कोई ऐसा नहीं था बहुत कॉन्फिडेंट या बहुत स्किल्ड थी कि अगले दिन से ही जाकर अपना सर्वाइवल के लिए कुछ भी कर लेगी। उसने कहा मैं मर जाऊंगी लेकिन अब यहां नहीं रहना। और उसने यह डिसाइड करके जब वो घर छोड़ा उसने बोला कि मेरा एक महीना बहुत पेनफुल रहा। मतलब मुझे बार-बार कभी ऐसा लग रहा कि मैंने गलत कर लिया गुस्से में निकल आई। ये इतना द्वंद चला मैडम मेरे को कि
(2:01:09) मेरे को संभलते संभलते एक महीने के बाद मैं थोड़ा-थोड़ा संभलना शुरू हुई और जो इनिशियली दो चार लोग मेरी जिंदगी में थे। उन्होंने मुझे कुछ हेल्प किया और मैं ऐसेसे अब करके ये मैं कोर्स कर रही हूं। उसने टीचिंग का कोई कोर्स ज्वाइन किया था कि मुझे अब टीचर बन जाना है और आगे अपनी जिंदगी को करना है। जब मेरे पास आई थी तब तक वो टशंस वगैरह पढ़ाने लगी थी। उस अर्निंग हैंड बन चुकी थी। लेकिन रह-रह कर उसको भविष्य की चिंता थी। थोड़ी एंजायटी थी। तो मुझसे वो डिस्कस करने आई थी कि मुझे कैसे संभालना चाहिए अपने आप को। तो तब उसने मुझे बताया तो देखो ना उसने चूज़
(2:01:38) किया तो उस इंसान जिसकी इतनी घटिया सोच अपनी वाइफ के बारे में थी उससे पीछा छुड़ा पाई। करेक्ट। नहीं तो वहीं पर नर्क में पड़ी रहती। अब ट्यूशन पढ़ाने लगी, अर्निंग हैंड बन गई। धीरे-धीरे अपने आप को स्कूल की जॉब के लिए तैयार कर रही थी। तो आगे चलकर हो जाएगा। मैंने उसको बोला आप अपना YouTube चैनल खोलो। आप YouTube पर पढ़ाओ। शुरू में एकदम चैनल ग्रो नहीं करेगा लेकिन आगे-आगे चलके आपकी एसेट बनती रहेगी वो और आपके पास टशंस भी आएंगे और आपके पास YouTube से अर्निंग भी आएगी। आपको लोग जानेंगे भी। उसको वो चीज क्लिक कर गई। उसने बोला मैं
(2:02:09) अभी इतनी कॉन्फिडेंट नहीं हूं लेकिन मैंने कहा तैयार करके तो बना सकती हो। इतने कंटेंट क्रिएटर हैं जो तैयार करके बनाते हैं। जिस टॉपिक पर वीडियो बनानी है तैयार करो और बनाओ अपना और फोन सही बना लो। उसको वो बात एकदम क्लिक कर गई। उसने कहा हां मैडम ये बिल्कुल सही बात है कि माई-बाप मेरा YouTube बनेगा। तो चूज़ किया उसने तभी मैं हेल्प कर पाई। लेकिन अगर वो चूज़ ना करती तो हम मनुष्य के पास चूज़ करना है। आपके पास किस ऐज ग्रुप के लोग ज्यादा आते हैं? मेरे पास जो आते हैं तकरीबन 20 साल की उम्र से लेकर जो मैक्सिमम जो लोग आते हैं वो 45 की एज के ज्यादा लोग आते हैं।
(2:02:44) 20 टू 45 20 टू 45 के सबसे ज्यादा क्लाइंट्स होते हैं। और ऐसे आने को तो 72 इयर्स 83 इयर्स इस तरीके के भी मैंने देखे हैं क्लाइंट्स। लेकिन उस ऐज तक आते-आते कम लोग जो है ना हेल्प सीक करते हैं। लेकिन ये वाली जो एज ग्रुप है 20 साल से लेके 45 साल तक इसके सबसे ज्यादा वो होते हैं। और ये प्री मैरिज के ज्यादा ट्रोमास होते हैं। यानी टॉक्सिक पार्टनर्स उन्होंने शादी से पहले अट्रैक्ट किए होते हैं। डिप्रेशन एंग्जायटी के प्रॉब्लम्स होते हैं या शादी के बाद उनको रियलाइजेशन की प्रॉब्लम होती है और तब वो आपके पास थेरेपी के लिए आते हैं। जब कोई हमारे पास
(2:03:21) आता है तो वो बोलते हैं मुझे बहुत ए्जायटी है। डिप्रेशन है या अपने इशूज़ बताता है वो। तो अब हम जब पूरा जानते हैं तब पता चलता है कि उसके पहले चार ब्रेकअप हो चुके थे या अभी वो एक अब्यूसिव मैरिज में है या किसी ने अपना बच्चा खो दिया है तो उसकी वजह से उसका ट्रॉमा उससे बर्दाश्त नहीं हो रहा है। इसलिए वो उस पर्सन को डिप्रेशन आ गया है। एक इंसान ने मेरे पास जो आया था उसको इस बात का ट्रॉमा हो गया था कि उसके मदरफादर में झगड़ा हो गया था और उसकी मदर ने उसकी आंखों के सामने ही आग लगा ली थी। मतलब वो आग लगाई इतने में वो लोग उठकर आते
(2:03:52) और इतने में वो मतलब मदर बिल्कुल आग का गोला बन गई थी तो बचा नहीं पाए तो वो अपनी आंखों से देखा वो सीन तो उस बात का ट्रॉमा क्योंकि अपनी आंखों से आप मदर को तड़पते हुए देख रहे हो। उन्होंने गुस्से में आग तो लगा ली लेकिन वो आग से चीखें जो निकल रही थी और बिल्कुल आग का गोला बन गई थी। वो बहुत बुरी तरह से जल गई थी। उनको बचाया नहीं जा सका। तो अलग-अलग स्टोरीज होती हैं लोगों की। लेकिन जब वो आते हैं तो इनिशियली वो ऐसे ही टर्म्स यूज़ करते हैं कि ए्जायटी है, डिप्रेशन है या मुझे ऑब्सेशन है। इस तरीके के वो है या मुझे नींद नहीं आती है। कुछ लोग लेमन लैंग्वेज
(2:04:23) में बताते हैं और कुछ लोग टर्म्स को यूज़ करते हैं। फिर पता चलता है कि यह जो कंडीशन में आज है इसके पीछे की स्टोरी क्या है? और जो होकर घटित होकर खत्म हो गया होता है तो उसे हमें एक्सेप्ट ही कराना होता है। और क्योंकि कोई घटना या कोई इवेंट या पर्सन कभी रिस्पांसिबल नहीं होता। आप उसे कैसे पर्सव कर रहे हैं? उसे आपने एक्सेप्ट किया है। उस एनर्जी को चैनलाइज़ किया या वह स्टक है। इस बात पर डिपेंड करता है कि आप उसमें कितने टाइम तक अटके रहेंगे। डेथ हर घर में होती है। ब्रेकअप सबके होते हैं। तो कुछ लोग निकल जाते हैं और कुछ लोग फंस जाते हैं।
(2:04:55) क्योंकि आप अपने आप से क्या कहते हो? अपने आप को क्लोज़र देते हो या नहीं देते हो? क्या मीनिंग निकालते हो? जैसे एक लड़की थी तो उसका जो पार्टनर था वो चीटर था। उसके साथ-साथ और भी दो लड़कियों को डेट कर रहा था वो। तो उसको ना पता चला। उसको बहुत दिक्कत हुई। बहुत ज्यादा डिप्रेस हुई वह। जब मेरे पास आई मैंने उसको बोला तुम इस नज़रिए से क्यों नहीं सोचती हो कि तुम इतनी लकी हो और गॉड तुम्हारे साथ है कि तुम बच गई। सोचो तुम ऐसे ही चीटर लड़के से शादी कर लेती और शादी के बाद उसके ऐसे अफेयर्स कंटिन्यू रहते तो तुम फंस जाती। क्योंकि
(2:05:25) तुमने अपनी मर्जी से शादी की होती तो तुम्हारी फैमिली भी सपोर्ट नहीं करती और बच्चे हो जाते तो और ज्यादा बुरी तरह से पेन में आ जाती। तुम। तुम लकी हो। उसने इस पर्सेक्टिव से सोचा नहीं था कि मैं यह भी कह सकती हूं कि मैं लकी हूं। वो यह मान रही थी हाय मेरे साथ चीटिंग हो गई या मेरे साथ चीटिंग हो गई। मेरी किस्मत कितनी खराब है। मेरे अंदर क्या कमी है? क्यों मेरे होते हुए इसने दूसरी लड़कियों को भी अप्रोच किया? वो अपने अंदर कमी ढूंढ रही थी। तो मैंने उसको समझाया जरूरी नहीं कि तुम में कमी हो। हो सकता है ये उसका पैटर्न हो। उसने अपने जो भी लोग उसके थे
(2:05:56) मेजर रोल प्ले करा जिन लोगों ने उसकी लाइफ में हो सकता है उसने ये देखा हो कि नॉर्मल है कि एक लड़की के होते हुए बाहर भी रिलेशन बनाना इस तरीके से उसको नॉर्मल लगता हो। तो जरूरी थोड़ी ना है तुम्हारी कमी है। तुम तो अपने को लकी भी तो मान सकते हो। उसने बोला मैडम मैंने कभी इस नजरिए से सोचा ही नहीं। मैं तो अपने अंदर कमी ढूंढ रही थी। तो कई बार हम एक नजरिए से सोचते हैं फिक्स माइंडसेट से कि अगर मेरे साथ चीटिंग हो रही है तो मुझ में कमी होगी। लेकिन जब हम दूसरा उसको पर्सेक्टिव देते हैं सोचने का। एक डिफरेंट एंगल से सोचो कि और क्या मीनिंग क्रिएट कर सकते
(2:06:26) हो। तो रैशनलाइज जैसे ही हम करना शुरू करते हैं तो इमोशनल बैलेंस आ जाता है। क्योंकि इमोशनल माइंड जब हम पर हावी होता है तो रैशन माइंड काम करना टेंपरेरीली बंद कर देता है। तो हम उसके रैशन माइंड को एक्टिव करने के लिए और उसकी अनकंफर्टेबल फीलिंग को रिलीज करने के लिए उसको रैशनलाइजेशन सिखाते हैं। तो उसने जब ये उसके दिमाग में क्लिक किया उसने कहा बिल्कुल सही है। उसने उस दिन से ही अपने इमोशंस को रिलीज कर दिया और इस बात को समझ लिया कि ये जो चीटिंग मेरे साथ एक्सपीरियंस हुआ है ये मेरे फॉल्ट की वजह से नहीं हुआ और मैं तो सच में लकी हूं कि
(2:07:01) मैं बच गई और उसका इमोशनल पेन जो डिप्रेशन में उसको डाल रहा था वो खत्म हो गया। इतना मोमेंट्री ट्रांसफॉर्मेशन भी होता है। आपके पास कोई रेप केसेस भी आए हैं? जी बिल्कुल आए हैं। हर तरीके के केसेस आते हैं हमारे पास। एक लड़की जिसका 9 साल में उसकी कजन ने ही रेप किया वो मेरे पास आई थी। 9 साल की बच्ची का रेप उसको रेप का ढंग से मतलब भी नहीं पता था कि क्या है लेकिन उसके लिए बहुत ही अनकंफर्टेबल था और उसने खुलकर तो कभी बताया नहीं क्योंकि उसको समझ में नहीं आ रहा था मेरे साथ क्या हुआ लेकिन गुमसुम चुपचुप रहने लगी और कुछ महीनों के बाद उसकी मदर को जब लगा कि
(2:07:37) लड़की में बहुत ज्यादा इस तरीके से बदलाव है तो उसकी मदर ने उससे पूछा तो तब उसने अपनी मदर को बताया अनफॉर्चूनेटली उसकी मदर ने उसको यह बोला कि इस बात को यहीं दबा दो हम तो उस बच्ची के अंदर मदर के लिए हेट्रेट पैदा हो गई। ओके। कि ये कैसी मां है? कि मेरा इमोशनल पेन समझने के बावजूद भी यह मेरे लिए स्टैंड लेने की बजाय कि मेरे को इतना ह्टों कर रहा है। वो सीन उसके दिमाग में बार-बार घूम रहे थे और वो बहुत ज्यादा परेशान थी। नींद खुल जाती थी। उसको ऐसे ही सपने आ रहे थे। मेरे लिए स्टैंड लेने की बजाय ये कह रही है इस बात को यही दबा दो
(2:08:07) और भूल जाओ। एक जनरलाइज्ड स्टेटमेंट पास कर दिया कि इस बात को भूल जाओ। किसी से कहना मत। तो क्या हुआ कि वो जो ट्रॉमा था वो तो था ही। एक हेट्रेट मदर के लिए और ऐड हो गई। और वो उस नफरत के साथ बड़ी हो रही थी कि मेरी मदर ने मेरे लिए स्टैंड नहीं लिया और उसके अंदर का पेन भी बढ़ता जा रहा था और मदर से बिहेवियर भी बहुत ज्यादा खराब होता जा रहा था। जब वो 14 की हुई तो उसने मुझे बताया कि 14 की हुई तो फिर वो जो लड़के उसकी क्लास में थे उनकी तरफ बाय डिफॉल्ट इस उससे अट्रैक्ट होने लगी कि अब मुझे इनका बदला लेना है। इनसे बदला लेना है। और
(2:08:41) उसने लड़कियों से फ्रेंडशिप की और लड़कों को जानबूझ के चीट करने लगी। लड़कों को यूज़ करने लगी। और फिर वो लड़कों को किस करती थी, बैड टच करती थी और डंप कर देती थी। बदला ओ यस इस तरीके से और उसने एक लड़के के साथ नहीं कई लड़कों के साथ किया और जब वो 19 इयर्स की थी जब वो पहली बार मेरे पास आई कि मेरे को ऐसे-ऐसे ना अब बहुत अंदर से तकलीफ होने लगी है और मैं ये बहुत रिपीटेडली कर चुकी हूं और अब मैं जान चुकी हूं कि ये गलत है। लेकिन मैं इसे रोकना चाह रही हूं लेकिन मुझसे रुकता नहीं है ये कि ये बार-बार बार-बार हो रहा है और मुझे
(2:09:15) अब इससे प्रॉब्लम होने लगी है। मेरी स्टडीज भी अफेक्ट होती है और मुझे डे ड्रीमिंग भी बहुत ज्यादा होने लगी है। मेरे को कंसंट्रेशन नहीं होता है और मैं बहुत परेशान रहती हूं और मैं करना नहीं चाहती अब ऐसा जितना करना था मेरे अंदर से वो निकलना था वो सब निकल गया है लेकिन अब मेरा एक हैबचुअल पैटर्न हो गया है मुझसे कंट्रोल नहीं हो रहा है आप मुझे उससे बाहर निकालो ये था तो आप ये देखो 14 साल की ऐज से उसने इस तरह से लड़कों से बदला लेना शुरू किया और 19 इयर्स पे वो फर्स्ट टाइम मेरे पास आई लेकिन उसके पेरेंट्स ने सपोर्ट नहीं किया तो वो दो-तीन सेशंस लेकर
(2:09:43) फिर उसने मुझे बोला कि मैम मेरे पेरेंट्स बिल्कुल भी मुझे सपोर्ट नहीं कर रहे हैं और बोल रहे हैं तुम पागल हो गई हो क्या तुम सेशंस ले ये वो कि आप मुझे थोड़ा सा टाइम दो। मैं किसी भी तरीके से पेरेंट्स को कन्विंस करूंगी या किसी और तरीके से हेल्प लूंगी और फिर मैं रिज्यूम करूंगी। और यही हुआ कि कुछ महीनों के बाद फिर वो उसने रिज्यूम किया और फिर उसने अपना पूरा ट्रीटमेंट कराया और उसके बाद उसका वो पैटर्न हमने हिप्नोथेरेपी से सॉल्व किया। उसके अंदर से जो पेन था जो 9 साल की उम्र में कजन ने उसके साथ हरकतें की थी तो वो सब चीजें हमने उसको रिलीज कराई और जितना
(2:10:14) उसने और लड़कों के साथ गलत किया था उसके लिए उसको माफ कराया क्योंकि वो खुद से एक टाइम के बाद अंदर गिल्ट फील होने लगा था। खुद से नाराज होने लगी थी। मदर को भी माफ कराया ये समझते हुए कि उन्होंने जो उन्हें सही लगा वो स्टैंड नहीं ले पाई क्योंकि उसको यह समझ में आ गया था कि मेरी मदर ने मेरे लिए नहीं कभी अपने लिए भी कोई स्टैंड नहीं लिया तो इसलिए वो सपोर्ट नहीं कर पाई। तो इस तरीके के बहुत टिपिकल केसेस भी आते हैं और ये एक नहीं ऐसे कई सारे ऐसे केसेस हैं। टिपिकल केस के बारे में और बताइए जिसमें कोई सुसाइडल अटेमप्ट करने वाला था लेकिन
(2:10:44) आपके साथ थेरेपी लेने के बाद उसके माइंडसेट में चेंजेस आए। एनी एनी टिपिकल थिंग व्हिच हैपेंस इन डे टू डे लाइफ। तो ऐसे बहुत सारे केसेस हैं जो कई बार हमें भी ओवरवेल कर देते हैं क्योंकि जब कोई इंसान बिल्कुल ही अपनी लाइफ को कई बार खत्म करने के ऑलरेडी अटेमप्ट कर चुका है और वो बस आपके सामने बैठते ही ये बोलते हैं कि आप मेरी आखिरी उम्मीद हो अगर यहां से भी मेरे को निराशा मिली तो फिर मेरे को यकीन आ जाएगा कि अब मेरा कुछ नहीं हो सकता। तो एक केस के बारे में आपको जिक्र करती हूं। यह एक लेडी थी जो ऑलरेडी मेरे पास आने से पहले चार बार अपनी लाइफ लेने
(2:11:21) की कोशिश कर चुकी थी। एक बार तो वो एक मंजिल से कूद भी गई थी और उनकी बैक बोन में भी बहुत ज्यादा इंजरी हुई थी और सात महीने वो बेड पर भी रही थी उसके बाद और कई बार उन्होंने अपनी नस भी काटने की तरह-तरह से अपने आपको बहुत सेल्फ हार्म करने की कोशिश की थी। मेडिसिंस भी चल रही थी बहुत कुछ। तो कुछ समय के बाद वो ना मेरी वीडियोस देखने लगी YouTube पर। तो मैं बहुत डिटेल वीडियो बनाती हूं और काफी रूट कॉज की और चाइल्डहुड की पूरी बात करती हूं। तो वीडियो सुनते-सुनते ही उनके मन में खुद का पूरा स्केच बन गया कि उनके साथ जो हुआ है वो सब क्यों हुआ और बचपन से
(2:11:54) लेकर पूरा उनके माइंड में उनकी फिल्म ना रिवाइंड हो गई पूरी की पूरी और वो समझ गई और उन्होंने घर पे ही पूरे रजिस्टर भर डाले पूरे नोट्स बना डाले कि मैं मैडम से जरूर मिलूंगी उससे पहले वर्किंग करके जाती हूं पूरी तरीके से और आप यह मानिए कि उनको 50 60% अपनी लाइफ का पूरा का पूरा गेम समझ में आ गया कि क्यों उनकी ऐसी हालत हुई है ये सब चीजें करके वो वर्किंग करके और मेरे पास आई और फिर उन्होंने बोला कि मैंने आपकी बहुत सारी वीडियोस देखी है और उससे मैंने ये नोट्स बनाए हैं। उन्होंने मुझे पूरी अपनी पूरी बात बताई। उन्होंने एक शब्द जो था जो
(2:12:25) थोड़ा सा एक ओवरवेलम करने वाला और एक कहते हैं ना आपके ऊपर एक रिस्पांसिबिलिटी ऐसी रख दी। उन्होंने एक लाइन बोली कि आप मेरी आखिरी उम्मीद हो और अगर यहां से भी मैं निराश हो गई तो इस बार मैं इस तरह से दुनिया से जाऊंगी कि कोई मुझे बचा ना पाए। तो आपके ऊपर भी एक साइकोलॉजिकल प्रेशर आ जाता है और आपको सामने वाले की इतनी बड़ी उम्मीद पर खरा उतरने के लिए मतलब एक अपने आप ही एक अनकॉन्शियस प्रेशर आता है। तो जब मैंने उनसे पूछा तो लेकिन मेरे को यह पता था कि ये जीना चाहती हैं और यह बहुत वर्किंग कर कर आई हैं। तो यह जो मैं बताऊंगी वो जरूर कर लेंगी। तो मैंने उनको
(2:13:02) एक सेफ्टी का एहसास कराया कि अब आप यहां आ गई है और ईश्वर ने अगर आपको यहां तक पहुंचा दिया है और आपको चार बार बचाया है तो इसका मतलब है कि आपको जीवन जीना है और बहुत बेहतरी से जीना है और आप ट्रांसफॉर्म होंगे और आप लोगों को हील करेंगी। तो मैंने उनको ना एक ऐसा पर्पस दे दिया और उनको एक कॉन्फिडेंस दे दिया। फिर उसके बाद उन्होंने मुझे पूरी डिटेल स्टोरी बताई बचपन से लेकर कि जब वो पैदा हुई थी तो वो तीसरी बहन थी। तो ऑलरेडी दो बेटियां थी तो उनको बचपन से ही एक दुत्कार मिली अपने घर में तीसरी लड़की होकर रखी गई तीसरी लड़की हो तो उनको कोई पसंद नहीं करता था तो उनके
(2:13:36) अंदर बचपन से ही ऐसा था कि वो कभी खुश नहीं होती थी मतलब उन्हें खुशी रियल खुशी क्या होती है वो नहीं अगर दूसरों के सामने हंस भी रही है तो उनको ऐसा लगता था कि बस आर्टिफिशियल सा ही चल रहा था सब कुछ और जब अनवांटेड की फीलिंग आपके मन में बचपन से ही बैठ जाती है कि आप अनवांटेड हो लड़का चाहिए था और आप फिर पैदा हो गए हो तो उस फीलिंग के साथ वो बड़ी हुई। उन्होंने कई बार अपने साथ अनफेयर भी महसूस किया कि उनके साथ बहुत अनफेयर हो रहा है। दोनों बड़ी बहनों के ही कपड़े, किताबें सब कुछ उनका कभी उन्हें बचपन का यह याद नहीं है कि उनके लिए कुछ नया आया हो या उनको
(2:14:07) कोईेंस मिली हो या उनको ले जाया गया हो। शर्म आती थी मां को भी तीन-तीन बेटियों को एक साथ ले जाने में और तीन के बाद डॉक्टर ने बोल दिया था अगला बच्चा हो नहीं सकता। इसलिए नेक्स्ट ट्राई हुआ नहीं। तो सारा ये था कि ये लड़का हो जाता, ये लड़का हो जाता। मतलब ये बहुत था। तो पूरा बचपन एक ऐसी तरीके से गुजरा तो कोई इंसान कभी खुश ही नहीं होगा तो उसे पता ही नहीं है। तो वो कैसे एक मोन एक्सेप्शन में यस मैं थी वो स्कूल में भी फिर वही बुझे बुझे चुपचुप सहना कॉलेज लाइफ भी ऐसी थी कभी खास कोईेंस मिली नहीं शादी भी हो गई शादी भी परिवार
(2:14:41) हस्बैंड अच्छे थे लेकिन वो एडजस्टमेंट इश्यूज बहुत ज्यादा आए वो सब में उनको कोई खुशी ही नहीं मिलती थी तो अंदर अंदर उनके ना इतना सूनापन था खालीपन था और फिर उनको कभी यह लगता था कि मुझे कुछ करना चाहिए ताकि कोई मुझे भी पूछे मेरे को कोई खुशी मिले वो मिलती नहीं थी तो उसी ना खुशी के चक्कर में उनको ऐसा लगता लगता था कि बेकार है सब जिंदगी एक निराशा भर गई थी तो इस वजह से उन्होंने कई बार अपना एक बार हाथ काटने की कोशिश करी एक बार वो छत से कूद गई थी एक बार उन्होंने पूरी हार पिक की दो बोतल पी ली थी इस तरीके से और एक बार उन्होंने जो स्वेटर में रखते हैं ना
(2:15:12) गोलियां वो गोलियां खा ली थी उन्होंने नेप्थिलियन हां वो गोलियां रखते हैं तो वो खा ली थी कि उनको लगा कि कुछ ना कुछ ऐसे करूं कि शायद कुछ अंदर रिएक्ट कर जाए और मैं मर जाऊं लेकिन छत से कूदने के बाद वो जो फर्स्ट फ्लोर की छत से कूदी थी वहां से भी उनको मतलब जीवन था तो बच गई। तो तब वो बैड रिडन रही 7 महीने तक और पड़े-पड़े उनको बहुत रियलाइजेशंस हुए। फिर उन्होंने मेरी वीडियोस भी देखी। तो उनको लगा कि मुझे समझ में आ गया कि ये मेरे साथ क्यों हो रहा है। तो फिर वो जब मेरे पास आई तो उन्होंने बोला आप मुझे जीना सिखाओ। आप मुझे खुश
(2:15:43) होना सिखाओ कि हस्बैंड अच्छे हैं। घर में भी सब पैसा वैसा सब कुछ ठीक है। लेकिन मुझे खुशी नहीं होती है। तो सबसे पहले उनकी एकिस्टेंस पे जो क्वेश्चन था या जो रिजेक्शन था मां की तरफ से भी और जो फैमिली की तरफ से भी उस चीज के लिए हमने उनका इनर चाइल्ड भी हील किया और मदर वूम में जाकर भी जो उनकी मदद बहुत एशियस रहती थी। तो हमारी एक थेरेपी होती है जिसमें हम मदर वूम तक ट्रेवल कराते हैं। तो उसमें भी हमने उनको हीलिंग दी और उनके इनर चाइल्ड को भी हीलिंग दी। वो जो उनके अंदर सप्रेशन था जो वो बातें उनको यहां थी सप्रेस थी उनके दिमाग में पूरी बैठी हुई थी तो वो
(2:16:18) चीजें जो फ्लैशबैक्स उनको कभी-कभी आते थे कि बचपन में मेरे साथ ये सब चीजें हुए हैं। तो सबसे इनर चाइल्ड को हील किया और धीरे-धीरे क्योंकि इसमें ऐसा नहीं होता कि ओवरनाइट ट्रांसफॉर्मेशन हो जाता है। तो धीरे-धीरे उनके अंदर की एनर्जी चेंज होने लगी और फिर उनसे पूछा गया कि आपका लाइफ का क्या प्लान है? आप क्या करना चाहते हो? फिर उन्होंने बहुत सारी चीजें बताई जो बचपन में वही खुलकर नहीं बोल पाती थी। उनकी लिस्ट बनवाई मैंने कि आप 100 चीजें जो करना चाहते हो जिंदगी में उसकी लिस्ट बनाओ और उसको एक-एक करके आप पूरा करना शुरू करो क्योंकि आपका चुनाव होगा और जब
(2:16:47) आप खुद इन्वॉल्व होकर उसको करोगे तो आपके अंदर से रियल वो हैप्पीनेस आपको फील होनी शुरू होगी। तो जो फीलिंग थी ना अनवांटेड की उसको हमने सेल्फ एक्सेप्टेंस से रिप्लेस करके हट पाया। और क्योंकि इतने सालों में अब मदर भी उस बात को कि चलो जब तो छोटी थी जब लड़के की चाहत थी अब तो हमारी लाडली है दुलारी है ऐसे करने लगे थे और पूछने लगे थे वो लोग भी लेकिन वो इनर चाइल्ड के पास जो इमोशनल मेमोरी थी वो जब तक हम उसका पेन नहीं रिलीज कराते हैं जब तक ऊपर से वो बातें बनावटी लगती है तो जैसे ही उसका इमोशनल पेन हमने रिलीज कराया तो जब वो अपने मायके जाती थी और अब मर
(2:17:21) अच्छी तरीके से उनको ट्रीट करती थी तो उन्हें मदर के साथ भी कनेक्टिविटी फील होने लगी। मदर को भी माफ करवाया, दादी को भी माफ करवाया। वो सारा हीलिंग प्रोसेस जब हमने हिप्नोसिस के जरिए उनको करवाया और उनकी एनर्जी चेंज करी और वो जो 100 चीजों की लिस्ट बनवाई थी जब उन्होंने करना शुरू किया बोला अच्छा ऐसी होती है हैप्पीनेस ऐसे फील होती है खुशी तो हम उनके सेल चक्रा पे भी हमने काम किया कि सेल चक्र आपका प्लेजर से आपके जो है ना इमोशन से एसोसिएटेड है उनके सोलर प्लेक्सेस को भी स्ट्रेंथ किया रूटक को भी एमावर किया तो वो भीक बैलेंसिंग अलाइनमेंट किया तो
(2:17:54) बेसिकली मैं साइकोलॉजिकल हीलिंग के साथ-साथ एनर्जी बॉडी को भी हील करती हूं। तो बहुत सारे चेंजेस करके कलेक्टिव एफर्ट से जब ट्रांसफॉर्म हो गई तो उन्होंने मुझे गले लगा के उनको बोला कि मतलब आप मुझसे उम्र में ज्यादा ऐसा नहीं है कि बहुत बड़े हो कि मैं आपको मां ऐसे पुकार रही हूं। बट यू आर लाइक माय मदर। तो आई वांट टू हग यू। तो बहुत सारे लोग आते हैं जब ट्रांसफॉर्म हो जाते हैं इतना तो दे हग मी एंड यू नो लाइक एक एनर्जी है। बहुत ज्यादा बहुत शब्दों में बताया नहीं जा सकता। आई कैन अंडरस्टैंड इट। मैं बिल्कुल कोरिलेट कर पा रही हूं। क्योंकि मैं भी इसी तरीके से
(2:18:29) ट्रांसफॉर्म करती हूं लोगों को और बिल्कुल आपसे बात करके ना ऐसा लग रहा है जैसे मैं बिल्कुल अपनी एनर्जी से बात कर रही हूं। बहुत अच्छा लग रहा है आपसे बात करके और डेफिनेटली हमारे पास आपके पास केसेस इतने सारे आते होंगे कि हर केस में एक नई चीज अपने आप को भी सीखने का मौका मिलता है। जानने का मौका मिलता है कि संसार में किस प्रकार के दुखों से ग्रसित है दुनिया और आश्चर्यचकित स्टोरी सामने आती हैं। आपके सामने मेल मेंबर्स आए हैं कभी अपने प्रॉब्लम्स को लेकर के या ज्यादातर फीमेल्स ही आती हैं। मेल्स भी बहुत आते हैं और अच्छा हुआ आपने
(2:19:05) ये सवाल पूछा क्योंकि इस बारे में बात करना भी बहुत जरूरी है। एक मेरे पास मेल आए थे और उनकी ऐज 68 इयर्स थी। मुझसे आते ही बोले मैडम आप मुझे रुला दो। यूजुअली फेल्स आकर इस तरीके की बातें एकदम से नहीं बोल। वो कहते हैं मुझे हंसा दो। हां। बोले मैम मुझे रुला दो। मैं बहुत सालों से रोना चाहता हूं। और मैं चाहता हूं लेकिन मैं रो नहीं पाता। मेरे आंसू यहां अटक जाते हैं कहीं। आप मुझे रुला दो। मैं आपकी बहुत सारी वीडियोस देखकर आया हूं और आप मुझे रुलाओ। कुछ भी करो आप मुझे बिल्कुल अपने वश में कर लो। मतलब वो हिप्नोथेरेपी को ऐसे बोल रहे थे
(2:19:40) कि लेमन लैंग्वेज में कि आप कुछ भी करो बस आप मुझे रुला दो। तो फिर पहले सेशन में हमने कहा ठीक है कि आप मुझसे बात करेंगे ना तो आपकी वो लेयर्स अपने आप ही खुलती चली जाएंगी और आप मेरे सामने फ्रीली एक्सप्रेस करेंगे। तो वो जब मैं उनसे बात उनके लाइफ के बारे में जानती रही तो बेसिकली क्या था कि वो बहुत ही इमोशनल व्यक्ति थे और बहुत प्यार और एक यू नो एक अटेंशन एक केयर चाहते हैं लेकिन उनके घर में उनकीेंस खत्म हो गई थी तो उनको वो प्यार वो केयर वो अटेंशन नहीं मिल रही थी जब तक वो बहुत ज्यादा अर्न कर रहे थे सब पूरी फैमिली का टेक केयर कर रहे थे तो
(2:20:14) उनकी थोड़ी बहुत पूछ थी उस वक्त भी इतनी नहीं थी लेकिन जैसे ही वो थोड़े से ऐसा हुआ कि बीच में बीमार हो गए थे उसके बाद वो इतने फंक्शन नहीं रहे। इतना नहीं कर पा रहे थे फैमिली को। तो सबसे पहले वाइफ ने उनकीेंस खत्म कर दी। तो वाइफ जैसे कि सुख के साथ ही थी। जैसे ही थोड़ा सा दुख आया उसके बाद वाइफ एकदम से पूरी तरह से बदल गई थी। तो वो बात उनको बहुत ज्यादा हर्ट की और इमोशनल व्यक्ति को तो और भी ज्यादा हर्ट करती है। बच्चे भी अपनी-अपनी लाइफ में बिजी हो गए थे। तो ये इमोशनल नेगलेक्ट उनको बहुत हैवी लग रहा था और उनके अंदर बहुत कुछ जमा हो गया था। जब ये सब चीजें
(2:20:46) बताई तो उनकी आंखें कई बार भरने को हुई लेकिन रो नहीं पाए। तो बहुत ही को बोला भी तो जाता है ना कि यू हैव टू बी वै स्ट्रांग। आप रो नहीं सकते। वो कंडीशनिंग उनकी बिल्कुल थी कि अगर रोता है आदमी तो वो कमजोर होता है और लेकिन मैं हमेशा कहती हूं कि मर्द को भी दर्द होता है और लड़कों को रोना बहुत जरूरी है। उनको इतना बोझ अपने कंधों पर लेकर जाना जरूरी नहीं है कि आप बहुत स्ट्रांग हो। स्ट्रांग होने का यह मतलब नहीं होता कि आप रो नहीं सकते हो। अगर आप रो रहे हो, अपने इमोशंस को एक्सप्रेस कर रहे हो तो आप और भी ज्यादा स्ट्रांग हो। अगर आप दबा रहे हो
(2:21:16) उसे तो आप कमजोर हो। तो जब मुझे लगा कि इनके आंसू आ ही नहीं रहे हैं तो मैं बहुत जेंटली अपनी सीट से उठकर उनके सोफे के पास ही जाकर दूसरी सीट थी उस पर बैठी और मैंने बहुत जेंटली रिस्पेक्टफुली उनके हाथ को पकड़ा बिकॉज़ सर आज आप अपने दिल की बात एक्सप्रेस कर दीजिए। मेरा एक जेंटल टच था और उनकी आंखों से टप टप टप टप टप टप आंसू निकलने शुरू हो गए। एकदम टप टपाच बच्चे की तरह रोने लगे और एक बार रोए तो इतना रोए सुबकस सुबक कर रोए इतना बिलक बिलक कर रोए बोलने लगे कि आज मुझे इतना हल्का महसूस हो रहा है इतना हल्का महसूस हो रहा है कि मैं
(2:21:52) आपको बता नहीं सकता इतना इतना बिलक बिलख कर रोए कि मैं आपको मतलब बता नहीं सकती इतना ज्यादा कितनी तकलीफ भरी हुई थी कि लगातार 15 20 मिनट रोते ही रहे सुबकियां आने लगी लेकिन वो रोते ही रहे रोते ही रहे और मैंने भी उनको को बिल्कुल नहीं रोका बीच में कि आज आप जितना रोना है रो जितना रोना है रो और जब वो खुद ही अपने आप चुप होए बस हाथ मैंने अपना हाथ नहीं हटाया क्योंकि हाथ उनके लिए शायद एक मदरली सपोर्ट था कि हाथ जो यह सपोर्ट है कि मैं आज फ्री हूं कोई मुझे जज नहीं कर रहा है मैं यहां रो सकता हूं और आप ये देखिए कि तकरीबन 15 20 मिनट हुए थे क्योंकि मेरे
(2:22:29) सीधे हाथ में घड़ी पहन थी तो मेरी नजर मेरी घड़ी पे थी तो इतना टाइम हो गया था और तब जाके वो खुद ही रोए तो मैंने धीरे से अपना हाथ हटाया और उसके बाद उनको यह था कि मैडम बहुत हल्का महसूस हो रहा है। और उसके बाद फिर और खुलकर अपने दिल की बातें बताने लगे सारी चीजें और बात करते करते ही वो बातें उनके लिए इतनी थेरेपी देने वाली हो गई कि उनके दिमाग में सेट होती चली गई और उन्होंने अपने लिए जीना सीख लिया। उन्होंने कभी अपने लिए जिया नहीं था। क्योंकि उनकी कंडीशनिंग ऐसी थी कि कुछ भी करो बस परिवार के लिए डेडिकेटेड रहो। अपनी फीलिंग्स को छुपाओ। मर्द रोते नहीं है।
(2:23:04) मर्द शिकायत नहीं करते हैं। जो भी है संभालना है। स्ट्रांग बने रहो। ये सब जो फिजूल की कंडीशनिंग थी इस सब से मैंने उनको दूर किया और उनको उनके लिए जीना सिखाया और 68 की ऐज में वो मुरली बहुत अच्छी बजाते हैं। तो उन्होंने मुरली बजानी शुरू करी। अपनी कॉलोनी में प्रोग्राम ऑर्गेनाइज करने शुरू करे। कैंडल्स लगा के जो मुझसे सीखे थे मेडिटेशन। आज वो मेडिटेशन कराते हैं वहां पर लोगों को। पूरा एंबियंस क्रिएट करते हैं। पूरा कैंडल से जलाकर, मुरली सुनाकर, मेडिटेशन कराते हैं और बहुत और बेहद खुश हैं। और वो सॉन्ग्स गाते हैं और अब उनके इतने काफी
(2:23:36) फॉलोवर्स हो गए हैं और उन्होंने अपना सारा चैनल वर्णन बना लिया। मैंने कहा आप अपना पैशन जियो ना, अपनी लाइफ जियो। आपके अंदर इतना अच्छा टैलेंट है। बोले मेरे घर वालों ने कभी मेरी मुरली बजाने की या मेरे गाना गाने की कभी तारीफ ही नहीं की। लेकिन अब वो अपनी जिंदगी अपने हिसाब से अपनी खुशी के हिसाब से जी रहे हैं और वो सब कर रहे हैं। ड्रेसिंग चेंज जो ड्रेसिंग सेंस है हमने उसकी उनकी वो इंप्रूव करवाई और कैसे अगर आपको कोई पूछ नहीं रहा है कि आपकी पसंद से क्या होना चाहिए क्या आप कहना शुरू करो। अपने लिए स्टैंड लेना शुरू करो। अपने आपको एक्सप्रेस करना शुरू करो। अपनी
(2:24:08) फीलिंग्स को डेली पेपर को बताओ। पेपर आपको कभी जज नहीं करता। अगर आप लिख नहीं सकते हो तो वॉइस जनरलिंग करो। आप कैसे ग्रेटट्यूड में रह सकते हो वो सब चीजें जब हमने लॉन्ग उनके साथ बहुत सारे सेशंस किए और बताया तो उनको ये चीज समझ में आ गई कि आदमी और औरतों में कुछ खास फर्क नहीं होता इमोशनल लेवल पर एक ही होता है औरतें आसानी से थोड़ा रो लेती है उनका मन इसलिए हल्का हो जाता है लेकिन आदमी क्योंकि रोते नहीं है तो उनके मन पर बड़ा बोझ हो जाता है पर वो अपने आपको ऊपर से दिखाते रहते हैं स्ट्रांग हो स्ट्रांग स्ट्रोंग हो और एक एक आदमी की कहानी नहीं है ऐसे बहुत लोगों
(2:24:42) से मैं मिल चुकी हूं जो कभी अपनी तकलीफ बताए नहीं, किसी को रोना चाहते थे, रोए नहीं। लेकिन यह मेरे लिए बहुत हार्ट टचिंग था क्योंकि उन्होंने आते ही मुझसे कहा था कि मुझे आप रुला दो। और उन्होंने मुझसे हमेशा यही कहा कि आपके पास आकर ना कि आप मुझसे बहुत छोटे हो उम्र में लेकिन आपके पास आकर मुझे मदरली फीलिंग आती है कि हालांकि मैं जानता हूं कि आप लोग किसी से रिश्ता नहीं जोड़ते हो कि आप लोग प्रोफेशनल ज़ोन में रहते हो। लेकिन पता नहीं क्यों आपके पास आती आपकी एनर्जी में मुझे मदरली फीलिंग आती है। मुझे इतना सेफ फील होता है कि आपसे बात करना इतना
(2:25:15) कंफर्टिंग होता है कि मैं यहां पे आकर कुछ भी बोल देता हूं। मैं इतना पूरी लाइफ में नहीं बोला जितना आपके साथ सेशंस में बोल देता हूं। और फिर वो ऐसा नहीं कि मेरे सामने ही बोलने लगे। फिर वो ट्रांसफॉर्म ही हो गए। पर अब मैं आपको बताया है कि कैसे वो दूसरे लोगों को भी मदद कर रहे हैं, हील कर रहे हैं। और उनका एक ही मैसेज है मेनली बॉयज के लिए कि भाई खुलकर बोलो खुलकर अपने आपको एक्सप्रेस करो। रोना रोना कोई वीकनेस नहीं है बल्कि रोना तो आपकी ना एक ऐसी अभिव्यक्ति है जो बहुत खूबसूरत है और आपको हल्का कर देती है। जिस तरह से आप खुलकर हंस सकते हो, रो क्यों नहीं सकते
(2:25:48) हो? जिस तरह से आप ना किसी दूसरे की बात सुन सकते हो, अपनी बात भी कह सकते हो। बट हां, यहां पर यह जरूर ध्यान रखना चाहिए कि आप किसके सामने बात कह रहे हो। क्योंकि लोग सुन लेते हैं और कई बार एक की चार बनाकर और मजाक लोग जज करने लग जाते हैं। तो आपको एक अनकंडीशनल इंसान के सामने बैठना होगा जो आपको जज ना करें। जो जज ना करे आपको और अगर आपको रास्ता ना दिखा सके तो आपको रास्ता भटकाए ना। बिल्कुल। आपको दबना ना सिखाए क्योंकि बहुत सारे लोगों के सामने आप बताओगे और वो कैसे कहेंगे? आपके पेन को मिनिमाइज कर देंगे। अरे यार यह तो घर-घर की कहानी है। तो होता
(2:26:21) है। छोड़ो यार इस बात को क्यों दिल पे ले रहे हो? नहीं। किसी के लिए बहुत जरा सी बात भी बहुत बड़ी होती है। तो उसके नजरिए से देखो कि उसके लिए वो बात कितनी है। तुम्हारे लिए हो सकता है कि वो बात छोटी हो। लेकिन हो सकता है उसके लिए वो बात बहुत बड़ी हो। किसी के लिए लाखों का नुकसान भी कुछ नहीं होता और किसी के ₹1 भी गिर जाते हैं। उसको तकलीफ होती है कि हयात ₹10 का नुकसान हो ₹10 का नुकसान हो गया। तो उस इंसान के नजरिए से देखो ना कि वो चीज उसके लिए बड़ी है। बहुत जैसे एक बच्चा एक मदर लेकर आई थी तो क्लास में वो कुछ बोल रहा था।
(2:26:54) तो बोलते बोलते जैसे कुछ बच्चे ऐसे होते हैं ना बीच में रुक जाते हैं डर की वजह से या कुछ वर्ड को गलत प्रोनाउंस कर देते हैं। तो इस पे क्लास हंसने लग गई और टीचर ने भी थोड़ा सा मजाके अंदाज में बोल दिया उसको। तो वहां पर वो बच्चे के लिए वो एक्सपीरियंस एक ट्रॉमा बन गया और उसे हेजिटेशन होने लगी और जब वो बड़ा हो गया कॉर्पोरेट में भी पहुंच गया जॉब करने के लिए तो उसको पब्लिक प्रेजेंटेशन देने में जो भी उसके पास आती थी कि मीटिंग में अब आपको अपनी प्रेजेंटेशन देनी है तो उसको बड़ी हेजिटेशन होती थी क्योंकि उसका इनर चाइल्ड फिर से वही फियर क्रिएट करता था
(2:27:24) क्योंकि वो अभी भी वही फिफ्थ सिक्स्थ क्लास में अटका हुआ था तो वहां पर वो अब बड़ा होने के बाद भी कॉर्पोरेट में जॉब हासिल करने के बाद भी वैसे नॉर्मली अगर अकेला काम कर रहा है तो बढ़िया से कर लेगा लेकिन जहां पर 10 लोगों के सामने उसको कुछ प्रेजेंटेशन देनी है तो वहीं पर ही वो हेजिटेट करने लग जाता था क्योंकि उसका इनर चाइल्ड के लिए वो ट्रोमेटिक एक्सपीरियंस था और कोई क्या कहे ये मामूली सी बात है अरे बच्चे तो सब पे हंसते हैं कोई बात नहीं छोड़ दो इसे नहीं उस पर्सन के लिए अगर ये मैटर करता है तो ये छोटी बात नहीं है ये बड़ी बात है तो फिर हमने उसको भी
(2:27:54) थेरेपी से वापस उसको उसी ऐज में पहुंचाया और वहां पर उस इवेंट का इवेंट तो हम नहीं चेंज कर सकते मीनिंग चेंज करवा दिया उसके लिए और फिर वो नए मीनिंग से वो इनर चाइल्ड से वो फियर रिलीज कराया और तब जाकर वो लड़का कॉन्फिडेंटली अब किसी भी मीटिंग में 10 लोग क्या 100 लोगों के सामने भी अपनी बात कॉन्फिडेंटली करवाता है। आपसे अगर रिक्वेस्ट करूं कि आज आप हमारे पडकास्ट में इनर चाइल्ड हीलिंग मेडिटेशन करवा दीजिए ताकि आपके इस मेडिटेशन से शायद सुनने वालों बहुत सारे लोगों को इनर चाइल्ड हीलिंग मिल सके। जी वैसे तो इस पर डिटेल मेडिटेशन मैंने
(2:28:27) ऑलरेडी बनाया हुआ है मेरे चैनल पे केजी टॉक्स पर। एक बहुत डिटेल एप्रोक्सिममेटली 30 मिनट्स का ये मेडिटेशन है क्योंकि ये एक लॉन्ग मेडिटेशन होता है और बहुत शॉर्ट में इसको एकदम से तो नहीं कराया जा सकता। आपसे बात करके बहुत कुछ सीखने का भी मौका मिला लोगों को और बहुत सारी चीजें सामने आई। वाकई बहुत दुख की बात है कि एक इंसान दूसरे इंसान को कितना टॉर्चर कर रहा है। जबकि वो जानता है कि वसुधैव कुटुंबकम जो तुम हो वो मैं हूं। जो मैं हूं वो तुम हो। लेकिन फिर भी जानते हुए इंसानियत पता नहीं कहां मर गई है। एक छोटे बच्चे को अनजाने
(2:29:06) में ही मां-बाप सही लेकिन किस प्रकार दबाते हैं कि वही बच्चा अपने एडल्ट रिलेशनशिप में भी वही टॉक्सिसिटी ढूंढ रहा होता है क्योंकि वो उसका कंफर्ट ज़ोन बन जाता है। और आपके इतने सारे जो आपने अपने एग्जांपल्स दिए आपकी जितने भी क्लाइंट्स के उन सब से वाकई और सुनने का मन कर रहा था मेरा बिकॉज़ वो लाइव एग्जांपल्स थे आपके और बहुत सारे हमारे जो पडकास्ट सुनने वाले हैं इससे रिलेट भी कर रहे होंगे। आपकी आपकी स्टोरी क्या है? कहीं आपके अंदर भी कोई ऐसा हिडन ट्रोमा है कोई ऐसा दुख है जिसे आप कह नहीं पाए हो शायद दुनिया की वजह से, परिवार की वजह से, अपने पार्टनर्स
(2:29:47) की वजह से क्या आप भी एक नार्सिसिस्ट इंसान के साथ रह रहे हैं। क्या आप भी एक ट्रोमा बॉन्ड में फंसे हुए हैं? जरूर हमें कमेंट्स करें। और फिर अगर आपको जरूरत पड़े तो मिज जैन के पास जरूर जाएं। उनकी थेरेपी और उनके चैनल्स के लिंक्स आपको डिस्क्रिप्शन में मिलेंगे। उनके पास जाएं अपनी थेरेपी लें और मुझे पूरी उम्मीद है कि आप इस पॉडकास्ट तक शायद इसीलिए ही पहुंचे हो क्योंकि अब आपको रियलाइजेशन करवाने का समय आ गया है। थैंक यू वेरी मच फॉर जॉइनिंग अस एंड थैंक यू वेरी मच फॉर बीइंग इन आवर पडकास्ट। थैंक यू।
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