Author Name:Metabolic Dr.K
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డా. కిషోర్ (డా. మెటబాలిక్ డా. K) మరియు అభిషేక్ మధ్య జరిగిన సంభాషణ ఆధారంగా, **భారతీయ शाकाహార సమతుల్య ఆహారంలో (Indian Vegetarian Balanced Diet) ఉన్న సమస్యలు మరియు దానిని ఎందుకు మానేయాలో** సంబంధించిన ముఖ్యమైన తీసుకోవలసిన అంశాలు తెలుగులో ఇక్కడ ఉన్నాయి:
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## 🚨 1. ప్రధాన సమస్య: భారతీయ షాకాహార ఆహారం "డయాబెటిక్ జెనిక్" (Diabetogenic)
* **ఆధారం:** మనం తినే అన్నం, రొట్టె, దాల్, పనీరు, సోయాబీన్ వంటివి **డయాబెటిస్కు కారణమవుతాయి**. ఇవి మానవ శరీరానికి సరైన ఆహారం కావు.
* **కారణం:** ఒక వ్యక్తి యొక్క **మొత్తం రోజువారీ శక్తి (Energy)లో 70-80%** మీట్ (মাంసం) మరియు గుడ్ల నుండి రాకపోతే, ఆ ఆహారం మానవులకు సరైనది కాదు.
* **ఫలితం:** ఈ ఆహారంపై ఉన్న ప్రతి ఒక్కరికి **డయాబెటిస్ తప్పకుండా వస్తుంది**. కేవలం టైమింగ్ మాత్రమే వేరు.
## 🧬 2. మానవులు "కార్నివోర్స్" (Carnivores) - కాలక్రమేణా మార్పు
* **ప్రకృతి సిద్ధాంతం:** మానవులు ప్రకృతి వశాత్తూ **కార్నివోర్స్ (మాంసాహారులు)**. మనం **అలవాటు (Omnivore)** గా మారాము, కానీ జీవశాస్త్రపరంగా **ఫాకల్టేటివ్ కార్నివోర్స్ (Facultative Carnivores)**.
* **ఫాకల్టేటివ్ కార్నివోర్:** మాంసంపై ఆధారపడతారు, కానీ మొక్కలపై కూడా జీవించగలరు (ఉదా: కుక్కలు).
* **ఆబ్లిగేట్ కార్నివోర్:** కేవలం మాంసంపై మాత్రమే జీవించగలరు (ఉదా: పులులు).
* **మన స్థానం:** మనం **అలవాటు** ప్రకారం శాకాహారుల్లా మారాలి, కానీ **ఆరోగ్యకరమైన జీవితం కోసం** మాంసాహారులలా (Obligate Carnivore వైపు) మారాలి.
* **కుక్కల ఉదాహరణ:** కుక్కలు కూడా ప్రస్తుతం ప్యాక్డ్ ఫుడ్ (ధాన్యం) తినడం వల్ల డయాబెటిస్, ఊబకాయం బారిన పడుతున్నాయి. అవి మాంసం తింటే ఆరోగ్యంగా ఉంటాయి.
## 🍽️ 3. ఆధునిక షాకాహార ఆహారం వల్ల మార్పులు
* **ధాన్యం (Grains) సమస్య:** గోధుమ, అన్నం వంటివి తీసుకోవడం వల్ల **"వీట్ బెల్లీ" (Wheat Belly)** ఏర్పడుతుంది. పేట బయటకు వస్తుంది. ఇది **వీచ్చుల కొవ్వు (Visceral Fat)**.
* **మాంసం బెల్లీ (Meat Belly):** మాంసం తినేవారికి పేట వస్తుంది కానీ, అది **వీచుల కొవ్వు కాదు**. ఇది సాధారణంగా కనిపించదు.
* **గుడ్లు మరియు మాంసం:**
* డా. K రోజుకు **24-30 గుడ్లు** తింటారు. వీటిని ఒకేసారి తింటారు.
* మాంసం (ముఖ్యంగా మటన్) **1.25 - 1.5 kg** (ఎముకలతో సహా) రోజుకు తింటారు.
* మాంసానికి **పైవరిపరిమితి (Upper Limit) లేదు**. ఆకలి వచ్చినంత తినవచ్చు.
## 🩺 4. రోగాలకు పరిష్కారం: మాంసాహార ఆహారం (Carnivore Diet)
* **డయాబెటిస్ రివర్స్:** షాకాహార ఆహారం వదిలి, మాంసం మరియు గుడ్లు తీసుకుంటే డయాబెటిస్ **రివర్స్ అవుతుంది** (కేవలం కంట్రోల్ కాదు). బ్లడ్ సుగర్ 70-100 రేంజ్కి వస్తుంది.
* **ఇతర రోగాలు:**
* **PCOS/PCOD:** ఇది కేవలం అండాశయ సమస్య కాదు, ఇది **మెటబాలిక్ డిసార్డర్**. మాంసాహార ఆహారం వల్ల పూర్తిగా క్యూర్ అవుతుంది. గర్భం धరించలేని మహిళలు సహజంగా గర్భం ధరిస్తున్నారు.
* **ఆటోఇమ్యూన్ రోగాలు:** రుమటాయిడ్ ఆర్థరైటిస్, సోరియాసిస్, ఇక్జిమా, IBS, IBD వంటివి మాంసాహార ఆహారం వల్ల సరిపోతాయి.
* **మెంటల్ హెల్త్:** బైపోలర్, ఆందోళన (Anxiety) వంటివి కూడా ఆహారం మార్చడం వల్ల సరిపోతాయి.
* **కంటి చూపు:** 5 రోజుల్లోనే కంటి చూపు మెరుగుపడింది అనే కేసులు ఉన్నాయి.
## ❌ 5. సప్లిమెంట్స్ అవసరం లేదు
* **సప్లిమెంట్స్ అవసరం లేదు:** మీ ఆహారం సరైనది అయితే, **వేరు ప్రోటీన్ విటమిన్ ప్లస్** వంటి సప్లిమెంట్స్ అవసరం లేదు. సప్లిమెంట్స్ తీసుకోవాల్సి వస్తే, మీ ఆహారం తప్పు అని అర్థం.
* **B12 ఇంజెక్షన్:** B12 ఇంజెక్షన్లు వేసుకుంటే ప్రయోజనం లేదు. ఆహారం (ఫుడ్ మ్యాట్రిక్స్) ద్వారా లభించే పోషకాలు సప్లిమెంట్స్ ద్వారా సాధ్యం కావు.
## 🏥 6. ఆరోగ్యrends వ్యవస్థలో లోపాలు
* **మెడిసిన్ కంటే ఆహారం ముఖ్యం:** మందులు ఇవ్వడానికి కాకుండా, ఆహారాన్ని మార్చడం వల్ల **8-10 మందులు** ఆపేస్తారు.
* **టెస్ట్స్ మరియు కమీషన్లు:** చాలా డాక్టర్లు అనవసరమైన టెస్ట్స్ రాస్తారు, పాత్లాబ్లతో కమీషన్లు తీసుకుంటారు. డా. K ఎటువంటి కమీషన్లు తీసుకోడు, డిజిటల్గా పనిచేస్తాడు.
* **పర్సనల్ ట్రైనర్లు:** పర్సనల్ ట్రైనర్లు కూడా షాకాహార ఆహారం వల్ల కన్స్టిప్ేషన్, పైల్స్, డయాబెటిస్ బారిన పడుతున్నారు.
## 🌟 7. ముఖ్యమైన సందేశం
* **"మీరు ఇప్పటికే చనిపోతున్నారు":** మీరు షాకాహారులు అయినా, నాన్-వెజ్ అయినా, మీ ఆహారంలో **ధాన్యం (గోధుమ, అన్నం)** ప్రధానంగా ఉంటే, మీరు డయాబెటిస్ బారిన పడతారు.
* **మార్పు తప్పనిసరి:** "మీరు ఎప్పుడైనా గుడ్లు, మాంసం తినాల్సి వస్తుంది." ఇది తప్పనిసరి. అది వేళ రాకపోయినా, ముందు రావచ్చు.
* **సాంస్కృతిక ఆహారం కాదు:** మనం తినే ఆహారం (అన్నం, రొట్టె) కేవలం **సాంస్కృతిక ఆహారం (Cultural Eating Pattern)**, ఇది మన ప్రకృతికి సరిపోదు.
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### 📋 ముఖ్యమైన సూత్రం:
> **"మీరు 70-80% శక్తిని **మాంసం మరియు గుడ్ల** నుండి పొందకపోతే, ఆ ఆహారం **మానవ శరీరానికి సరైనది కాదు**."**
> **"డయాబెటిస్ కంట్రోల్ కాదు, **రివర్స్** అవ్వాలి. బ్లడ్ సుగర్ 70-100 రేంజ్లో ఉండాలి."**
> **"సప్లిమెంట్స్ అవసరం లేదు. మీ **ఆహారం సరైనది అయితే**, సప్లిమెంట్స్ అవసరం లేదు."**
Transcript:
(00:00) आप यह बार-बार दावा कर रहे हो कि जितना भी फ़ूड हम खा रहे हैं, चाहे पनीर हो गया, चाहे सोयाबीन हो गया, यह सब जो है, यह कहीं ना कहीं डायबिटीज का कारण बन। ये सूटेबल फूड नहीं है ह्यूमन बीइंग्स के लिए। मैं ये कहता हूं जब तक आपका जो टोटल डेली एनर्जी है वो 70 टू 80% ऑफ द टोटल डेली एनर्जी अगर आपका मीट और एग से नहीं आ रहा है तो वो डाइट ह्यूमन बीइंग्स के लिए एप्रोप्रियट। डॉक्टर किशले द मेटाबॉलिक डॉक्टर साइकोलॉजी और मेटाबॉलिज्म को सिर्फ समझा नहीं अप्लाई किया। मेडिसिन से पहले लाइफस्टाइल और डाइट को वेपन बनाया जिसका प्रूफ इनके पेशेंट्स खुद हैं।
(00:38) डॉक्टर अपने करियर में अपने मेडिकल प्रैक्टिस की वजह से थोड़ी कमा रहे हैं। उनका तो कट्स और इंसेंटिव से पैसा बनता है। और ये सारे डॉक्टर्स का ना पैथ लैब वाला बोलता है कि भाई तुम्हारे पास कस्टमर आ रहा है। मेरे पास भेजोगे तो मैं तुम्हें कट्स दूंगा। 40% पर पेशेंट। मैंने एमबीबीएस किया। देन उसके बाद डीएनबी जॉइन किया टाटा मोटर्स हॉस्पिटल में जनरल मेडिसिन में। वहां पे रेजिडेंसी कर रहा था। मुझे पता लग जाता था कैसे काम होता है हॉस्पिटल में क्योंकि आपको पता होना चाहिए ना उस सिस्टम के बारे में। अब कौन सा ऐसा डॉक्टर है जो अपने सिस्टम में रहकर अपने
(01:02) ही सिस्टम पे उंगली उठाएगा। या तो आप सिस्टम में हो तो आप उसे बियर करो आराम से आप झेलो और या तो आप सिस्टम से बाहर हो जाओ। तो मुझे लगता है अब मैं खुल के जो भी बोल सकता हूं मैं बोलता हूं आराम से। अब मुझे क्या खतरा हो सकता है आप ये बताइए। अगर मैं बोल रहा हूं इस तरह से। मुझे कोई नौकरी से निकाल नहीं सकता। मेरा कोई मुंह बंद नहीं कर सकता। कर दो। उसके बाद ये पेशेंट आएंगे मेरे पास। इस फील्ड में इस मेटाबॉलिक स्पेस में मेरे जैसा काम करने वाला इंडिया में कोई डॉक्टर नहीं है। मैं बता रहा हूं आज आपको। हां, एक बार बॉडी बता दूं सर आपकी। बॉडी तो कुछ ऐसी है।
(01:26) देखिए पूरा अंडा बना हुआ है वो। पहले बताओ ओबेसिटी होती क्या है? इसको मतलब कैसे पहचाना जाए कि किसी को ओबेसिटी है? तो जब आपका बीएएमआई 30 से एक्सीड करेगा या 30 या 30 से ज्यादा होगा तब आप बोलोगे ये ओबीज है। तो किसी भी इंसान को अगर आप देखते हो जिसका सबकटेनियस फैट ज्यादा नहीं है, मसल मास भी ज्यादा नहीं है। लेकिन पेट बाहर है थोड़ा। तो उनका जो भी थोड़ा बहुत ज्यादा है वो विसरल फैट ज्यादा है जिसकी वजह से पेट उनका बाहर है। राजू श्रीवास्तव, सिद्धार्थ शुक्ला, पुनीत राजकुमार, केके सिंगर और अभी तो रिसेंटली सुष्मिता सेन को भी हार्ट अटैक आया है।
(01:58) और ये जिनका नाम लिया वो तो सब अमीर हैं। सब डाइट फॉलो करते हैं। सबके पास डाइटिशियन है, न्यूट्रिशन है। सबके पास सब कुछ है। फिर भी हार्ट अटैक से मर गए हैं। कैसे? किसी भी इन सेलिब्रिटीज के पास कोई भी वैसा डाइटिशियन न्यूट्रिशन है जो जो जिसके पास एक्चुअल विज़डम है विथ रिगार्ड्स टू हेल्थ न्यूट्रिशन ह्यूमन मेटाबॉलिज्म नहीं है। टाइप वन और टाइप टू डायबिटीज की बात करते हैं हम। तो ये कितनी खतरनाक बीमारी है टाइप वन डायबिटीज होना। एक्चुअली बहुत खतरनाक है क्योंकि इंसुलिन डिपेंडेंट हो आप। अब आपको इंसुलिन लेना ही पड़ेगा। रोज चाहिए और पूरी लाइफ तक देखिए।
(02:26) हाई कोलेस्ट्रॉल होते हुए भी लोगों को हार्ट अटैक हो रहा है। लो कोलेस्ट्रॉल होते हुए भी लोगों को हार्ट अटैक हो रहा है। और दोनों में आप अगर कॉमन डिनोमिनेटर देखोगे तो उसमें कॉमन डिनोमिनेटर में होता है डायबिटीज। डॉक्टर किशले सर बहुत-बहुत स्वागत है आपका। शुक्रिया। कैसे हैं सर आप? बहुत अच्छा हूं। पिछली बार पॉडकास्ट में आए ज्यादा हैंडसम दिख रहे हैं आज आप। मैं बीबी ब्लैक पैन हूं शायद इस वजह से।
(03:10) पता है मैंने आपको पॉडकास्ट में क्यों बुलाया सर? हां। आपने पूछा ही नहीं मेरे से। जरूर प्लीज बताइए आप हुआ क्या कि जब हमने पॉडकास्ट किया और आपने मीट को प्रमोट करने की बात करी और डायबिटीज कंट्रोल करने की बात करी तो उसके बाद मैंने बहुत सारे पॉडकास्ट किए तो मेरे शो पे कम से कम भी 10-15 गेस्ट ऐसे आए जिन्होंने हमारा पॉडकास्ट देखा और वो उस बात पे एग्री कर रहे थे या कि जो डॉक्टर क्रिस्टले सर जो बोल रहे हैं वो सही है। उन्होंने कहा मेरे को विश्वास नहीं हो रहा। तो उन्होंने बोला मेरी बात कराओगे क्या? तो मैंने बोला बात करा दूंगा
(03:44) सब कुछ कराऊंगा मैं पर मेरे को एक बार ऑफिस बुलाना पड़ेगा सर और फिर बात करनी पड़ेगी कि ये सही है या नहीं है। तो मैंने आपको इसलिए बुलाया कि मेरे को अभी बहुत सारे क्वेश्चंस मेरे रह गए हैं। जी अच्छा उससे पहले मैं एक सवाल करता हूं। इतने सारे गेस्ट आए उन्होंने तो एग्री किया। हम आप एग्री किया। आपने मैं स्टिल अभी भी एग्री नहीं कर रहा हूं। आप नहीं कर रहे हो? नहीं मैं नहीं कर रहा हूं। क्योंकि हुआ क्या? उर्वशी रोतला का भी एक वीडियो आया था थोड़े दिन पहले तो उनको भी टाइप टू डायबिटीज हुई तो उन्होंने बोला मैंने मैंने लाइफ स्टाइलाइल में चेंजेस किया खूब मेहनत करी
(04:15) और वेजिटेरियन भी खाया सैलेड खाया बहुत सारी चीजें खाई तो मेरी डायबिटीज पूरी ठीक नहीं हुई रिवर्स हो गई ओके तो आज अपन बात करेंगे सारे पेशेंट्स के लिए डायबिटीज के बारे में बात करेंगे हेल्थ के बारे में बात करेंगे टाइप वन डायबिटीज के बारे में बात करेंगे टाइप टू डायबिटीज के बारे में बात करेंगे होती क्यों है उस पे बात करेंगे कितने लाख लोग इसमें इनवॉल्व है। कितने लाख लोगों को बीमारियां है? होती क्यों है? वो करेंगे। क्योर कैसे हो सकती है वो भी बात करेंगे वो। जी जरूर। बहुत-बहुत स्वागत है सर आपका। धन्यवाद। उससे पहले एक और लाइन मैं बोलना
(04:47) चाहूंगा कि जो भी एग्री कर रहे हैं ना मुझसे वो तभी एग्री करते हैं जब सारी चीजें फेल हो जाती हैं। हम राइट? तो जितने भी गेस्ट आए उन्होंने बताया कि डॉक्टर कृष्ण ने जो बात कह रहे थे वो वो सारी बातें सही है हम क्योंकि वो सारा कुछ करके देख चुके हैं और शायद वो भी डायबिटिक होंगे मे बी और क्योंकि वर्क नहीं किया वो सारी चीजें अल्टीमेटली ये डाइट वर्क कर रही है करेक्ट तो इसलिए वो एग्री कर रहे हैं और अभी शायद आप डायबिटिक नहीं हो हम राइट इसलिए आप एग्री नहीं करते हो बट अल्टीमेटली जो डायबिटिक हो जाएंगे और बाकी सारी चीजें फेल हो जाएंगी
(05:20) हम तो वो मेरी बात से एग्री करेंगे और वो समय आएगा जब आप भी एग्री करोगे क्यों मेरे को डायबिटीज क्यों करा रहे हो आप? नहीं नहीं मैं करा नहीं रहा हूं। आप तो कह मेरे को एग्री कराओगे। ये डाइट जो है ना वो ये डाइट एक्चुअली डायबिटोजेनिक डाइट है। इस डाइट पे हर एक को डायबिटीज होना है। तो मैं अवेयर कर रहा हूं आप। होना ही है। होना ही है। वो होगा। अरे यार आप मजाक कर रहे हो सर। क्यों? बस इतने लोग मतलब आप समझो कि अभी मैं वृंदावन जाके आया। वहां पे हजारों लाखों लोग वेज खा रहे होंगे। हम वहां तो नॉनवेज प्रमोट ही नहीं करते हैं। वहां पर लोग रह रहे होंगे। तो आप बोल रहे
(05:55) हो कि सबको डायबिटीज ही होगा क्या? मैक्सिमम लोगों को हो रहा है और होगा। टाइमिंग सबकी अलग-अलग है। बस कौन सी ऐज में सबसे ज्यादा डायबिटीज असर करता है? मतलब क्योंकि मैं तो स्टडी करा है आपको बुलाने के पहले कि भैया बच्चों में भी होता है, बूढ़ों में भी होता है, जवान में भी होता है। तो ऐसी कोई ऐज तो फिक्स है नहीं कि डायबिटीज इस टाइम पे हो जाएगा। तो कोई कैसे पता पड़ेगा कि इसको डायबिटीज है या नहीं है? टाइप टू डायबिटीज का तो एक सर्टेन ऐज था। हम हम मानते थे कि भाई जब तक आप हम 40 के ऊपर नहीं जाओगे 50 के ऊपर नहीं जाओगे आपको टाइप टू डायबिटीज नहीं होगी
(06:27) हम बट अब तो अर्ली 20 लेट 20ज में भी आप देख रहे हो टाइप टू डायबिटीज बहुत कॉमन हो गया है राइट अब कोई ऐज नहीं होता किसी भी डिजीज का अब ऐज नहीं होता जो हम बुक में पढ़ते हैं ना ये एज रिलेटेड डिजीज है डीजनरेटिव डिजीज है वो डिजनरेशन अब आपका अर्ली 20ज में ही हो रहा है जिस तरह की हम डाइट ले रहे हैं वेजिटेरियन डाइट आप इतना वेजिटेट मैं तो बोल रहा हूं कि मैं मैं प्योर वेज मैं प्योर वेज रहूंगा हमेशा जिंदगी भर मैं तो सोच रहा हूं कि अब तो वो भी छोड़ दूं। क्या बोलते हैं? लहसुन प्याज भी छोड़ दूं मैं तो लहसुन प्याज भी छोड़। ओके देखिए वो जो कसमें वादे आप खाते हो ना वो
(07:00) सारे टूटते हैं। खाने के लिए लोग खाते हैं बट वो टूटते भी हैं। बहुत चीजों के लिए आप कमिटमेंट करते हो ना बट कहीं ना कहीं लगता है कि नहीं अब मैं नहीं कर सकता हूं। ये वो रिलेशनशिप में भी होता है। सात फेरे लोग लेते हैं डिवोर्स भी होता है ना। हम् तो बस वही बात है। अभी आप कसम खा रहे हो कि हां भाई मैं नहीं खाऊंगा। यह नहीं खाऊंगा। सब कुछ छोड़ दूंगा। मैं डेरी भी छोड़ दूंगा। बट अल्टीमेटली एक ऐसा दिन आएगा जब आपको अंडे मीट खाने पड़ेंगे। किसने देखा है? पर वो तो आजकल बी12 के इंजेक्शन लग गए ना। मैंने पहले भी बात करी थी कि इंजेक्शन
(07:29) लगवा लेंगे पर नहीं खाएंगे। हां आइसोलेटेड वे में आप न्यूट्रिएंट को आप फुलफिल कर सकते हो। हां। बट जो फूड मैट्रिक्स के तहत जो आप न्यूट्रिएंट्स जो आपको मिल रहा है वो पॉसिबल नहीं है ना सप्लीमेंटेशन के थ्रू। तो आप ये आप ये बार-बार दावा कर रहे हो कि जितना भी फूड हम खा रहे हैं चाहे वो चावल हो गया, चाहे रोटी हो गई, चाहे दाल हो गई, चाहे पनीर हो गया, चाहे सोयाबीन हो गया। ये सब जो है ये कहीं ना कहीं डायबिटीज का कारण बनेंगे। मैं सारे फूड को डायरेक्टली डायबिटोजेनिक नहीं बोल रहा हूं। बट क्योंकि ये आपका मेन फूड नहीं है। मतलब मैं ये आप रिलाई नहीं कर सकते हो। इस
(08:04) फूड पे आप रिलाई नहीं कर सकते हो एनर्जी वाइज। लॉन्ग टर्म हेल्थ के लिए। ये सूटेबल फूड नहीं है ह्यूमन बीइंग्स के लिए। मैं ये कहता हूं आपको खाना है सब कुछ खाओ आप बट मैं हमेशा कहता हूं कि जब तक आपका जो टोटल डेली एनर्जी है वो 70 टू 80% ऑफ द टोटल डेली एनर्जी अगर आपका मीट और एग से नहीं आ रहा है तो वो डाइट ह्यूमन बीइंग्स के लिए एप्रोप्रियट नहीं है। पूरा सनातन धर्म अगेंस्ट हो जाएगा ना आपके अगर आप नॉनवेज को प्रमोट करोगे और वेजिटेरियन को बोलोगे इससे आपको होगा ही होगा तो पूरा सनातन धर्म हम पूरा सनातन धर्म जो वेजिटेरियन को प्रमोट
(08:37) करता है वो आपके अगेंस्ट हो जाएगा ना क्योंकि मैं तो एक्चुअली मानता भी नहीं हूं कि मैं किस धर्म से हूं। मेरा धर्म क्या कहता है? मुझे कोई लेना देना नहीं है। क्योंकि जिस समय मैंने डॉक्टर की डिग्री करी उसके बाद मैंने ये डिसाइड कर लिया कि मुझे एज अ प्रोफेशनल क्या करना है? हम मैं डॉक्टर केस लिए बंदा हूं। हम अल्टीमेटली मेरा जो सेवा करने के लिए हां पेशेंट को बेटर करने के लिए पेशेंट के हेल्थ को इंप्रूव करने के लिए सिर्फ पिल्स प्रिस्राइब करने के लिए नहीं। राइट? तो मैं पिल्स प्रिस्राइब ही नहीं करता हूं यूजुअली अपने पेशेंट्स को। क्योंकि मेरे
(09:11) पास जितने पेशेंट्स आते हैं, वह ऑलरेडी 12, 15, 20 मेडिसिनस खा रहे होते हैं। ऑलरेडी खा रहे हैं। ऑलरेडी खा रहे हैं वो। तो अब मैं क्यों एडिशनली उनको ऐड करूं? क्योंकि साइड इफेक्ट्स ऑलरेडी उनको हो रहा होता है इतने सारे पॉलीफार्मेसी पे। तो मेरा काम होता है डाइट को बदलना। हम और डाइट को जब बदलता हूं पेशेंट्स इंप्रूव करता है। मेडिसिन की रिक्वायरमेंट कम हो जाती है। बहुत सारी मेडिसिन बंद भी हो जाती है। छ महीने में लगभग छ से आठ मेडिसिन 10 मेडिसिन तो बंद हो ही जाती है। और आज मेरे पापा को अगर डायबिटीज है, शुगर हो गई है। तो वह वेज छोड़ के नॉनवेज खाना स्टार्ट कर
(09:44) देंगे। जी तो आप यह बोल रहे हो वो कंट्रोल हो जाएगा। बिल्कुल हो जाएगा। कंट्रोल हो जाएगा कि रिवर्स हो जाएगा? कंट्रोल हो जाएगा रिवर्स हो जाएगा। वो देखिए कंट्रोल तो हम एक किसी भी चीज को हम कंट्रोल कह सकते हैं ना। अगर आपका ब्लड शुगर 300 के अराउंड रह रहा है पूरे दिन और आप अगर 200 पे उसको ला के मेंटेन कर रहे हो वो भी एक कंट्रोल है काइंड ऑफ। हम लेकिन वो कंट्रोल क्योंकि आपके लॉन्ग टर्म हेल्थ के लिए अच्छा नहीं है। वो स्टिल प्रॉब्लमेटिक है क्योंकि आपको कॉम्प्लिकेशंस होंगे उस पे क्योंकि स्टिल वो 200 है। नॉर्मल जो फास्टिंग ब्लड शुगर है हमारा 70
(10:16) टू 100 110 होना चाहिए। उससे ऊपर होना नहीं चाहिए। वो स्टिल आपका 200 रह रहा है। तो कंट्रोल तो हुआ ही पहले से बेटर हुआ है। लेकिन क्योंकि वो एनफ नहीं है आपके लिए। कॉम्प्लिकेशंस आपको होंगे लॉन्ग रन में। तो इसलिए रिवर्सल का मतलब होता है अब आपका ब्लड शुगर उस रेंज में आ गया जहां पर अब आप खुद को डायबिटिक नहीं बोलोगे हम जैसे फास्टिंग ब्लड शुगर आपका 70 टू 100 के अराउंड है या 110 है और पीपी जो है आपका 140 के ऊपर नहीं जा रहा है हम तो ये रिवर्सल हो गया क्योंकि डायबिटीज की डायग्नोसिस जो है वो ब्लड शुगर को देख के ही हो रही है
(10:47) तो जब आपका ब्लड शुगर 140 के ऊपर जा ही नहीं रहा है खाने के बाद पोस्टपेंडियल और फास्टिंग आपका 110 के ऊपर जा ही नहीं रहा है तो आप क्या बोलोगे डायबिटिक हूं मैं नहीं नॉर्मल पेशेंट नॉर्मल नॉर्मल हो गए वो अलग बात है कि आपको खाना यही चीज है बस बट डायग्नोसिस आपके पास डायबिटीज का स्टिल नहीं है चलो है ना वापस बात करते हैं कि ये पडकास्ट चलो अपन दो टाइप के लोगों के लिए बना रहे हैं क्या दो लोगों के लिए बात कर रहे हैं क्या जिनको डायबिटीज होने वाला है जो कि आप क्लेम कर रहे हो कि ऐसी बात करेंगे तो ऐसा हो जाएगा मैं अभी एक बंदे ने पूछा कि सर
(11:22) कि पहले तो एमबीबीएस का वो रजिस्ट्रेशन नंबर लिख देना डॉक्टर तो मैंने मैंने कमेंट भी पढ़ता हूं ध्यान से। कभी-कभी कुछ अच्छे कमेंट भी आते हैं कि भाई कि हां क्या पता मैं भी गलत हो सकता हूं अंकल। तो आपका रजिस्ट्रेशन नंबर भी लिख देंगे हम। हां जरूर आपकी मैं दे दूंगा। कहां से एमबीबीएस करी? क्या एमबीबीएस करी यार? सीनियर कौन थे? सीनियर कौन थे? और दोस्त थे या नहीं थे या आप आइसोलेटेड रहते थे। हां तो पहले हो गई जो होने वाला है जिनको और जिनको है। तो आप तो बोल रहे हो कि जिनको होने वाला है वो सब वेजिटेरियन हैं। नहीं मैं ये नहीं कह रहा हूं। मैं कभी इस
(11:54) तरह की बातें नहीं करता हूं। मैं ये कह रहा हूं कि अगर आप नॉन वेजिटेरियन भी हो हम तो क्योंकि आपका जो प्राइमरी जो प्रिंसिपल फूड है वो स्टिल रोटी और चावल है, ग्रेंस है, सीरियल्स है तो वो काहे का नॉन वेजिटेरियन होने से क्या फर्क पड़ जाएगा आपको? आप तो हफ्ते में ऐसे भी एक दो बार खा रहे हो। तीन से चार पीसेस खा रहे हो। डेली बेसिस पे आप खा क्या रहे हो? रोटी चावल तो खा रहे हो। तो वेजिटेरियन होना नॉन वेजिटेरियन होने में फर्क कहां है फिर इसमें? नहीं फर्क है। कोई कंट्रीब्यूशन जो है ना एनर्जी वाइज मीट का बहुत कम है आपकी डाइट में। हम
(12:24) तो इसलिए उससे कोई डिफरेंस नहीं आता। कितना मीट खाना चाहिए? मीट उतना खाना चाहिए जहां पे आपको लगे कि अब मैं कुछ नहीं खा सकता हूं। मैं तो वैसे ही खाता हूं कर ले प्यास भर के अल्टीमेटली। बोलते हैं ना यहां यहां तक आ गया खाना। क्योंकि कोई अपर लिमिट नहीं है ना मीट का कि आपको इतना ही खाना है। अंडे का कोई अपर लिमिट नहीं होता। कि आपको इतना ही खाना है। जैसे मेरा जो अंडे का इंटेक है, मैं आपको बता दूंगा। जिस दिन मैं मीट नहीं खाता हूं, मेरा इंटेक है 24 टू 30 होल एग्स। 30 अंडे आप खाते हो। 30 अंडे, 30 अंडे। 30 एक दिन में एक बार में। वन मील में
(13:01) होता है मेरा वो। कहां जाता कहां है सर वो। अब तो देख ही रहा होगा कहां जा रहा है। मैं क्या बताऊं आपको। सर 30 अंडे वो आदमियों को एपच हो जाता है। मुझे नहीं होता ना। मुझे बहुत अच्छे से डाइजेस्ट होता है। मेरा एब्डोमेन पेट बहुत अच्छा फील करता है। मुझे कोई गैस नहीं होता। मुझे कोई ब्लोटिंग नहीं होती कभी। बहुत अच्छा फील करता हूं। कोई कॉन्स्टिपेशन नहीं है। कुछ नहीं है। एक बार ही खाता हूं बस। अब जिस दिन मैं एग्स नहीं खाता हूं हम उस दिन मटन खाता हूं। तो मटन का मेरा इंटेक होता है 1.25 टू 1.
(13:33) 5 kg के अराउंड बोन वेट के साथ। सिर्फ मसल मीट की बात नहीं कर रहा हूं। बोन वेट भी होता है उसमें। हम तो इफेक्टिव वे में अगर आप मसल मीट को देखते हो तो मे बी मेरा 800 900 ग्राम तो रहता है हम और उसके साथ उसका जो फैट होता है मटन का वो भी होता है मटन को पकाने का तरीका क्या है सर रेड मीट आप रेड मीट को प्रमोट करो रेड मीट क्या है पहले तो मेरे को आईडिया नहीं बताओ रेड मीट का मतलब हुआ जो भी रूमिनेंट मैमल्स है ना जिसे हम कहते हैं ना फोर चैमबर्ड स्टमक हम थोड़ा वाले जितने जानवर हैं जैसे गोट लैंप फिर इवन बफेलो हम कााउस ये सारे सारे रेड मीट में आता है।
(14:08) इवन कैमल हॉेज ये सारा रेड मीट है क्योंकि ये रूमिनेंट मैमल्स हैं। ये ग्रेस करते हैं। पूरे दिन भर आप देखते होंगे ना जुगाली करते रहते हैं ये लोग। मुंह चलाते रहते हैं। हम तो इनका जो डाइजेशन है पूरे दिन चलता रहता है और दिन भर ग्रेस करते हैं। ये दिन भर खाते रहते हैं। तो हर्बीवोस और कार्निवोस में यही डिफरेंस है। कार्निवोस दिन भर नहीं खाते। हम वो वन मील लेते हैं। एक बार खाते हैं और उसके बाद एक दो दिन तीन दिन वो डिपेंड करता है उनके पास फूड कब अवेलेबल होगा। उस हिसाब से खाएंगे। बट जो हर्बी बोल्स हैं वो दिन भर ग्रेस करते हैं ग्रासेस पे, लीव्स पे। तो आप
(14:40) हर्बी बोरो या कार्न बोरो लिखिए क्या बोले? बाय नेचर बाय डिज़ाइन ह्यूमन बीइंग्स क्या है फिर? क्या है? ह्यूमन बीइंग्स ह्यूमन बीइंग्स हैं। मतलब बाय डिज़ाइन क्या है? कार्नवोर है या हर्बीवोर हैं? वो मेरा सवाल आप तो से है ही नहीं। मैं तो मानता हूं। ह्यूमन बीइंग्स मानता हूं। नहीं मतलब कुछ तो हैं ईटिंग पैटर्न को अगर हम कंसीडर करें तो आप स्पेसिफाई तो करोगे ना कि ह्यूमन बीइंग्स कावोस है या फिर हर्बीवोस है तो ईटिंग में तो बहुत सारे जैसे साधु संत है जो महात्मास है वो तो खाते ही नहीं सालों सालों तक नहीं खाते मैं देखिए मैं साधु संत और महात्माओं की
(15:12) बात नहीं कर रहा हूं मैं इन जनरल बात कर रहा हूं हम भी जानवर हैं सोशल एनिमल है हम हमें आप किस कैटेगरी में रखते हो बुद्धि वाली कैटेगरी में रखते हैं बुद्धिजीवी हां बुद्धिजीवी हैं ह्यूमन बीइंग बटर भी बट स्टिल कार्नवोर हो सकते हैं हर्बीवोर हो सकते हैं ओमनीवोर हो सकते हैं किसी में तो आप डालोगे तो कौन से क्लास मैं क्या डालूंगा आप बताओ आपने किस में डाला है मैं तो कार्निवोर ही बोलता हूं ह्यूमन बीइंग्स को है ही कार्नवोर ह्यूमन बीइंग्स कार्निवोर ही है मैं बताऊंगा डिटेल में आपको चलिए मैं एक्सप्लेन कर देता हूं आपको एक तो क्लासिफाई जब हम करते हैं ना
(15:44) एनिमल्स को तो हम कैटेगराइज करते हैं हर्बीवोस ओमनीवोस कार्निवोर्स ये तीन तो हम लोग बचपन से भी पढ़ते आ रहे हैं हर्बीवोस में हम किसको पढ़ते हैं कौन-कौन से हैं उसमें एग्जांपल्स वेज वाले जो भी सर जितने भी हैं ये सब लीव्स भी तो वैरी जाती है। हां। कााउस, बफेलोस, हॉेज इवन आपका जो गोट है ये सारा हर्बीवोस हो गया। इवन डियर जंगल में जो डियर है हर्बीवोस है। अब आता है कार्निवोस। कार्निवोर्स का मतलब होता है जो मीट खाता है। हम कितना खाता है इस पे बात नहीं होगी। ठीक है। जो मीट खाता है वो कार्निवोर है। हम और अच्छा खासा खाता है। हम वो कार्नवोर होता है। ऐसा नहीं कि एक दो
(16:23) पीसेस खा के हम कार्निवोर बोलेंगे। हम जैसे ह्यूमन बीइंग्स खाते हैं खुद को नॉन वेजिटेरियन बोलते हैं। लेकिन वो नॉन वेजिटेरियन होना कार्नवोर नहीं हुआ। बाय डिज़ाइन आप कार्निवोर हो। लेकिन नॉन वेजिटेरियन होते हुए भी आप कार्निवोर नहीं हो। मतलब कार्निवोरियस स्टाइल ऑफ ईटिंग नहीं है आपकी। वो मैं कह रहा हूं। हम तो कार्निवोर में भी अब दो क्लासिफिकेशन होता है। दो सब क्लासेस होते हैं। फैकल्टेटिव कार्निवोर्स ऑब्लिगेट कार्निवोर्स। ठीक है? फैकल्टेटिव कार्निवोर्स का मतलब हुआ कि आप मीट पर रिलाई करते हो लेकिन आप प्लांट बेस्ड मटेरियल पर भी आप सबिस्ट कर लेते हो
(16:57) खुद को एनर्जी वाइज। ठीक है? मतलब आप फ्लेक्सिबल हो काइंड ऑफ। आप मीट भी खाते हो, अच्छा खासा खा सकते हो। लेकिन अगर मीट अवेलेबल नहीं है तो आप प्लांट बेस्ड मटेरियल पे भी अच्छे से सर्वाइव कर लोगे। ठीक है? ये हुआ फैकल्टेटिव कार्निवोस। ऑब्लिगेट कार्निवोस होता है जो सिर्फ और सिर्फ मीट पे ही रिलाई कर सकता है। वह प्लांट मटेरियल्स को डाइजेस्ट नहीं कर सकता। उसका जो डाइजेस्टिव सिस्टम है वह डिजाइन नहीं है। प्लांट मैटर्स को डाइजेस्ट करने के लिए, यूटिलाइज करने के लिए, एनर्जी के लिए। तो ऑब्लिगेट कार्नवर्स में आते हैं लायंस, टाइगरर्स ये सारे इवन कैट्स
(17:33) ये सारे ऑब्लिगेट कार्निवोस हैं। ह्यूमन बीइंग्स को अगर आप देखते हो तो आप उस पॉइंट ऑफ व्यू से उस पर्सपेक्टिव से अगर आप देखोगे तो ह्यूमन बीइंग्स एक फैकल्टेटिव कार्निवोर्स है। हम क्योंकि हम प्लांट बेस्ड मटेरियल पे भी हम अच्छा खासा सक्सेस कर लेते हैं। एनर्जी डिराइव कर लेते हैं और ठीक-ठाक रह भी लेते हैं। वो अलग बात है। ऑप्टिमली हेल्दी नहीं है हम। हम लेकिन हम सर्वाइव कर लेते हैं अच्छा खासा। लेकिन मीट का जो पोर्शन है वह हमारा हैवी भी हो सकता है तो भी कोई प्रॉब्लम नहीं है। मतलब हम फ्लेक्सिबल हैं। तो अगर आप फैकल्टेटिव कार्निवोर होते हुए भी
(18:07) हम अगर आप ज्यादा से ज्यादा मीट पे ही रिलाई करते हो तो भी कोई प्रॉब्लम आपको नहीं होगी। तो बाय डिज़ाइन आप भले ही फैकल्टेटिव कार्निवोर हो लेकिन अगर आप ऑब्लिगेट कार्नवोर बन जाओगे तो वो आपके लिए बेटर हो जाएगा। जैसे डॉग्स का एग्जांपल मैं लेता हूं। डॉग्स एक फैकल्टेटिव कार्निवोर है। देखो कि डॉग्स बहुत सारे डॉग्स जो है फ्रूट्स भी खाता है, रोटी भी खाता है, राइस भी खाता है, कैट्स नहीं खाता। हम कैट्स नहीं खाती है। दूध तो पीती है, दूध पीती है। वो स्टिल एनिमल प्रोडक्ट है। हम कैट्स उस तरह से प्लांट बेस्ड मटेरियल नहीं खाती जिस तरह से डॉग्स खाते हैं।
(18:40) हम इसलिए कैट्स को ऑब्लिगेट कार्नवोर बोला गया है। डॉग्स फ्लेक्सिबल है। ह्यूमन बीइंग्स फ्लेक्सिबल हैं। पिग्स फ्लेक्सिबल हैं। तो ये सारे जो जानवर हैं ना ये फैकल्टेटिव कार्निवोर्स हैं। हम लेकिन अब आप फार्म रेस पिग्स की बात करोगे तो उनको स्वय खिलाया जाता है। कॉर्न खिलाया जाता है। तो आप खिला रहे हो उसका यह मतलब नहीं है वो हर्बीवोर्स हो गया या ओमनीवोर्स हो गया वो स्टिल कार्नवोर है क्योंकि आप जिस तरह से फीड देते हो उस पे वो काइंड ऑफ सक्सेस कर लेता है वो सर्वाइव कर लेता है खुद को मेंटेन कर लेता है तो आपको लगता है कि नहीं ये तो खा ही रहा है
(19:14) वेजिटेबल मैटर प्लांट बेस्ड फूड तो ये ओमनीवोर होवे या हर्बीवोर है ऐसा नहीं है आपने जबरदस्ती बनाया है उसको तो आप ये कह रहे हो इंसानों को भी जबरदस्ती बनाया है जबरदस्ती हम खुद के लिए वैसा हमने एग्रीकल्चर जब से किया तो उसके बाद से हमारे डाइट में प्लांट बेस्ड फूड ज्यादा से ज्यादा हो गया और उसके बाद मीट पे हम रिलाई नहीं करते और क्योंकि यह सडनली यह प्रॉब्लम नहीं आती हमें मेटाबॉलिक प्रॉब्लम नहीं आती। जैसे ही हम डाइट लेंगे प्लांट बेस्ड फूड तो ऐसा नहीं आज हमने खाया और कल बीमार हो गए हम। ये तो सालों साल लगते हैं और जब तक सालों साल लगेंगे
(19:43) आपको बीमारी होने में तब तक वो एक एडिक्शन का पार्ट बन जाता है। फिर आपके वो कल्चर में आ जाता है। हैबिट में आ जाता है। उसको चेंज करना फिर बहुत डिफिकल्ट होता है। तो वो कल्चरल ईटिंग पैटर्न है ये सब। ये बाय डिज़ाइन हमारा ये खाना है नहीं। राइस और वीट और यह सोए समझ रहे हैं? तो यह कल्चरल ईटिंग का पार्ट है। ठीक है? तो वही मैं बता रहा हूं। तो फैकल्टेटिव कार्निवोस जो डॉग्स हैं अब उनको भी आप देखते होंगे ये पैकेज फूड दिया जाता है घर में। अब हां। वो भी ये सीरियल्स बेस्ड और ग्रेन बेस्ड होता है। वो भी ओबीज़ हो रहा है और डायबिटिक हो रहा है।
(20:17) कुत्ते भी हां कुत्ते भी हो रहे हैं। उनको भी हार्ट डिजीज होता है। डायबिटीज होता है। हां डायबिटीज। हां कुत्तों को। हां बिल्कुल। किसी भी डॉग का आप देखोगे शेप स्टमक का आप देखोगे एक ऐसे करके ऊपर पीछे जा जो हैं उसका जो पोर्शन होता है ना वो बहुत श्रंकन होता है हम लेकिन आजकल के कुत्तों को आप देखोगे जो घर पे मतलब पेट है उसका पूरा फ्लैट है ऐसा स्टमक हम्म आप डॉबरमैन को देखो उनका पेट कैसा होता है पूरा पीछे की तरह ऐसा उठ जाता है वो है ना नॉर्मली आजकल के जो कुत्ते हैं जो घर डॉबरमैन भी वैसा पेट है नहीं अब वैसा डॉगरमैन का पिलाया नहीं जाता उनको वैसा
(20:54) अब तो आप पैकेज फूड खिला रहे हो उनको। प्लांट बेस्ड फूड खिला रहे हो। हम तो कुत्ता अगर बाय डिज़ फैकल्टेटिव कार्निवोर है। इसका यह मतलब नहीं है कि हमें उसे देना ही देना है प्लांट बेस्ड फूड। आप उसे ऑब्लिगेट वे में खिलाओ। जहां पे वो ज्यादा से ज्यादा मीट खाए हम तो वो कहीं ज्यादा बेटर होगा। तो अगर हम लॉन्ग टर्म ऑप्टिमल मेटाबॉलिक हेल्थ के लेंथ से देखें खुद को तो हम ऑब्लिगेट कार्निवोर्स हैं। अगर सर्वाइवल स्टैंड पॉइंट से देखें खुद को तो हम एक फैकल्टेटिव कार्निवोर्स हैं। हम दैट्स इट। तो जीने में कोई फर्क पड़ेगा क्या? आप मीट खाते हो, मैं मीट नहीं खाता। आप लंबा
(21:31) जिओगे, मैं कम जिऊंगा। ऐसा कुछ है या आप हेल्दी लाइफ जिओगे, मैं हेल्दी लाइफ नहीं जिऊंगा। नहीं देखिए इस पे कोई क्लेम तो नहीं कर सकता ना कि मैं ज्यादा आपसे जिऊंगा। हां। बट जो भी करंट सिचुएशन में मैं खुद में जैसा फील करता हूं मैं मेरा जो वेल बीइंग है मैं जिस तरह से मैं फील करता हूं अपने हेल्थ को लेकर के अपनी बॉडी को लेकर के तो उससे आपको समझना है मैं क्या बताऊंगा कि मैं उससे लंबा जिऊंगा या आप मुझसे लंबा जिओगे कॉम्प्लेक्स तो फील हो रहा है मेरे को देखो सीधा बात है क्योंकि ऐसे दिख रहा है आपके ऐसे मेरे दिख नहीं रहे ऐसे बैठ जाता
(22:02) हूं और ज्यादा दिख रहे हैं अब तो वही मतलब 15 16 इंच के बाईसेल्स दिख रहे हैं मेरे 12 भी नहीं होंगे तो इसलिए मैं क्लेम नहीं करता हूं मैं कहता हूं कि आप खुद को देखो और मुझे देखो। उसके बाद आप खुद सोच लो कौन ज्यादा जिएगा। हम क्योंकि मैं ना ड्रग्स करता हूं ना ही मैं बॉडी बिल्डिंग के लिए कभी मैंने एनाबॉलिक स्टेरॉइड्स लिया है। हम तो ऐसा कुछ लिया नहीं है। जो भी है नेचुरल है। सप्लीमेंट्स मैंने खाए हैं पहले वे प्रोटीन और ये 50 तरीके के सप्लीमेंट्स अब मैंने बंद कर दिया। हां। तो इफेक्ट पड़ेगा आप पे। वे प्रोटीन ये सारे सप्लीमेंट्स को लेने
(22:32) के बाद मुझे समझ आ गया कि इनका कोई यूज़ नहीं है बॉडी में। अगर आपकी डाइट अच्छी है तो आपको नॉट इवन अ सिंगल सप्लीमेंट यू एक्चुअली रिक्वायर हम आपको जरूरत ही नहीं है एक भी सप्लीमेंट की सप्लीमेंट खाने नहीं चाहिए खाना ही नहीं चाहिए जरूरत ही नहीं है आपका खाना ही सही नहीं है आप सप्लीमेंट तभी लेते हो जब आपका खाना सही नहीं होता हम और आप खा रहे हो सप्लीमेंट इसका मतलब आपका खाना सही नहीं है और मैं बता रहा हूं ये रियलिटी है अभिषेक जी मैं जिम में जाता हूं जिम के सारे ट्रेनर्स जो हैं फिजिकल ट्रेनर्स जो पीटी बने हैं हम क्लाइंट्स के उन उन सभी के पास कुछ ना कुछ
(23:05) प्रॉब्लम है। खुद उस पर्सनल ट्रेनर के पास। किसी को कॉन्स्टिपेशन हो रखा है, किसी को पाइल्स हो रखा है, किसी को डायबिटीज है और वो ट्रेन कर रहा है अपने क्लाइंट्स को। तो पीछे बिहाइंड द सीन्स वो मुझसे बात करते हैं कि सर मुझे कुछ बता दो। वो बट आप किसी को बोलना मत कि मुझे यह प्रॉब्लम है। है ना? यही तो विडंबना है सर। आप तो मेरे को पीछे से नहीं बोलोगे कि कोई बात नहीं अभिषेक जी आप तो खाओ वेज खाओ नहीं मैं पीछे से मैं तो सामने से बोलूंगा आप मत खाओ वेज वेजिटेरियन डाइट पे आप मत रहो प्रॉब्लम है वो और आपको खुद ही रियलाइज होगा एक पॉइंट पे
(23:41) आकर राइट और एक क्लास हमारा एक ओमनीवोर रह गया था उसको मैं कंप्लीट कर देता हूं हर्बीवोस हो गया उसमें फैकल्टेटिव हो गया ऑब्लिगेट हर्बीवोर में भी हो गया उसी तरह से कार्नवोर में मैंने जैसे बताया फैकल्टेटिव ऑब्लिगेट सेम उसी तरह से हर्बीवोर में भी होता है हमारा फैकल्टेटिव ऑब्लिगेट हम एक ओमनीवोर हमने जबरदस्ती इस टर्म को लाया है। इसका कोई मतलब नहीं होगा। नया टर्म है। जबरदस्ती आपने घुसाया है। एक एक टर्म डाल दो क्योंकि आप ह्यूमन बीइंग्स के लिए कार्निवोर टर्म यूज़ नहीं कर सकते। हम अच्छा नहीं लगता। हमारा जो धर्म है सनातन धर्म ये सब डिस्टर्ब हो जाता है। इमोशनली
(24:14) हर्ट हो जाते हैं सब लोग। तो इसलिए एक ओमनीबोर डाल दो। हम अब ओमनीबोर में कुछ पता ही नहीं लग रहा है कि मीट का जो रिक्वायरमेंट है, मीट आप कितना खा रहे हो, कितना नहीं खा रहे हो। फैकल्टेटिव में हमें पता है अच्छा खासा है। हम स्टिल ह्यूज अमाउंट में मीट खा रहे हैं। ऑब्लिगेट में तो खा ही रहे हैं डेफिनेटली क्योंकि हम सब्सिस्ट ही नहीं कर सकते प्लांट बेस्ड मटेरियल पे हम फूड पे लेकिन ओमनीवोर में कोई डेफिनेशन ही नहीं है कि आप कितना मीट खाओगे तब आपको ओमनीवोर कहलाओगे। कुछ डेफिनेशन नहीं है। बस आप दोनों चीज खाद को तो आप ओमनीवोर हो गया।
(24:46) तो उस तरह से सारे नॉन वेजिटेरियन ओमनीवोर कह कह सकते हैं खुद। तो ऐसे क्लासिफिकेशन क्यों बनाते हो? जिसका कोई एग्जैक्ट डेफिनेशन ही नहीं है हमारे पास। हम फैकल्टेटिव कार्निवोर में स्टिल हमें पता है कि आपका जो बल्क है वह मीट है आपकी डाइट बाय डिजाइन। लेकिन अगर वो अवेलेबल नहीं है तो आप प्लांट बेस्ड फूड पे भी सब्सिस्ट कर सकते हो। ऑब्लिगेट में क्या है कि आप सब्सिस्ट ही नहीं कर पाओगे। लायंस के पास अगर डियर नहीं होगा, मीट नहीं होगा उनके पास तो वो लीव्स और ग्रासेस खाकर नहीं सर्वाइव कर पाएगा। नहीं कर पाएगा। ह्यूमन बीइंग्स कर पाते हैं। यही डिफरेंस
(25:17) है। तो ये तो अच्छी बात हो गई ना? अच्छी बात हो गई। लेकिन तभी तक ना जब तक आप हेल्दी हो। हम्। आप जब बीमार हो गए, तो मैं क्या बोलूंगा? आप घास फूस खाओ या मीट खाओ। मेरा पॉइंट यह है कि जब आप बीमार हो गए, हां। आप मेरे पास कब आते हो? हेल्दी होते हुए आते हो या पेशेंट बनके आते हो? पेशेंट बनके आएंगे। हां। डॉक्टर के पास कोई भी इंसान तभी आता है जब वो पेशेंट हो जाता है। तो जैसे ही आप आ गए मतलब आप पेशेंट हो मेरे लिए। और पेशेंट को वही एडवाइस मिलेगी जो एक्चुअली उसके हेल्थ के लिए सही हो। राइट हो। जिससे उसकी हेल्थ इंप्रूव करे। हम्।
(25:51) तो उस समय मीट खाना है। मैं थोड़ी बोलूंगा कि राइस और वीट खाओ। देखिए साफ़ यह होता है मीट का मीट बेली क्या होता है? वो इधर दिखता है। और वीट बेली क्या होता है वो आपको दिखता होगा सभी लोगों को। यही फर्क है। मैं आपको बोल ही नहीं रहा हूं क्योंकि मुझे आपका पेट एक्चुअली नहीं दिख रहा। पर मैं वेज हूं। हां, वही मैं कह रहा हूं। प्योर वेज हूं मैं। वीट बेली आपको रोड पर दिख जाएगा। हां। सारा वीट बेली है वो। वीट खा के जिनका भी पेट बाहर है उसको वीट बेली बोलते हैं। हां। और मेरा जो पेट है वो मीट बेली है। मतलब बेली दिखता ही नहीं है। तो मीट बेली यही होता है।
(26:24) तो आपकी तरह पेट करने के लिए मीट बेली बनना पड़ेगा। मीट खाना पड़ेगा। मीट ईटर होना पड़ेगा। कार्नवोर होना पड़ेगा। वो भी ऑब्लिगेट। तो एक बात बताओ आपकी बात मान भी लेते हैं। चलो ठीक है। अगर मान लो एक मान ली डॉक्टर साहब की बात मान पहली बात तो आपके पास किस तरह के पेशेंट्स आते सिर्फ डायबिटीिक वाले ओबेसिटी वाले मेरे पास सारे स्पेक्ट्रम के पेशेंट्स आते हैं। जैसे लाइक तीन चार अगर मेन अगर कैटेगराइज करना हो डायबिटीज ओबेसिटी हाइपरटेंशन फैटी लिवर पीसीओएस ऑटोइ्यून डिजीज में जैसे आपका मस्कुलर स्केलेटल सिस्टम एनकाइलोजिंग स्पॉन्डिलाइटिस रूमटॉइड
(26:56) अर्थराइटिस सोराइसिस एग्जिमा ग इश्यूज है आईबीएस है आईबीडी है सारे पेशेंट्स मेंटल इश्यूज बायपोलर है किसी को किसी को एंजाइटी हो रखी है जनरलाइज्ड एंजाइटटी डिसऑर्डर है सारे पेशेंट्स आ रहे हैं सर माफ करो इतनी बीमारियों का नाम ले लिया आपने इतनी बीमारियां भी है क्या इतनी है इतनी है डेफिनेटली है तो इतनी सारी बीमारियां एक साथ और मेरे स्ट्रीम में सबसे मुझे एज अ प्रैक्टिसिंग जो मैं डॉक्टर हूं मुझे खुद को लेकर के मैं इसलिए बहुत अच्छा फील करता हूं क्योंकि मुझे ऐसा लगता है कि आप अगर जनरल मेडिसिन करते हो तो आप एमडी होते हो जनरल फिजिशियन होते हो
(27:36) हम तो आप एक्चुअली इन पेशेंट्स को आप डील नहीं करते हो डायरेक्ट जनरल मेडिसिन आप देखते होंगे हम कि वो एमडी किया हुआ है तो वो सिंपली बोलता है कि हां भाई पेशेंट आता है फिर वो अगर उसको कुछ ऐसा लगता है कि गट इश्यूज है उसके साथ तो वो कहता है तुम एक बार गैस्ट्रो एंट्रोलॉजिस्ट से जाकर कंसल्ट कर लो हम अगर कोई मेंटल इशू है तो बोलता है साइकेटिस्ट से जाके कंसल्ट कर लो मैं वो काम नहीं करता हूं मैं कहता हूं तुम जो भी हो मेरे पास आए हो सही जगह आए हो मैं इलाज करूंगा तुम्हारा क्योंकि सारी बीमारियों का जो एक्चुअली इलाज वो डाइटरी इंटरवेंशन से ही होगा। ठीक?
(28:10) चाहे वो ऑटोइ्यून कुछ भी हो। बीमारी भी क्यों ना हो, कुछ भी हो। नहीं सर क्योंकि मेरे तो एक किसी फ्रेंड को है अर्थराइटिस्ट डॉक्टर ने बोला नॉनवेज तो नहीं खाते हो ना? बोला नहीं खाते। हां ये बढ़िया बात है। दूध तो नहीं तो हां दूध तो नहीं। ठीक है। ये भी बढ़िया बात है। तो इसका मतलब अब क्या है? अब तो सब सेट ही है। हां। तो पेशेंट बढ़िया है। बाय तो बढ़िया हुआ। बढ़िया चीज बढ़िया नहीं है ना? इसलिए बढ़िया नहीं है क्योंकि वो मेरे पास नहीं आया पेशेंट अभी तक। अच्छा चलो ठीक है मैं अब अपने पॉइंट वापस आता हूं कि मैंने पूछा कि आपसे कितने आपके
(28:42) पास किस टाइप के पेशेंट्स आते हैं कौन-कौन सी बीमारी के लिए आते हैं बट मैंने चलो मान लो डॉक्टर किसले सर की बात मान भी ली तो दुनिया के अंदर 108 अरब की आबादी है और इंडिया के अंदर 140 करोड़ लोग हैं तो घर में मान लो सब लोग अगर बोले कि हम चलो कल से मीट खाएंगे और ताकि बीमारी नहीं होगी हम कार्निवोर बन जाएंगे और हमको किसी भी तरह का कुछ भी नहीं होगा यह सब कोई बीमारी नहीं होगी तो क्या कोई नई तरह की बीमारी पनप सकती है? क्या? कोई कैंसर डिजीज हो गया, कोई अदर डिजीज हो गई जिसकी कोई कल्पना ही नहीं कर सकता। कोई अदर डिजीज पनप गई तो मैं आपको
(29:13) एक इसका बहुत सिंपल आंसर बोलता हूं। हम आपने इससे पहले मेरे से क्या क्वेश्चन पूछा था कि आपके पास कौन-कौन से बीमारी के पेशेंट्स आते हैं? हम मैंने क्या बोला? सारे लिस्ट आपको बता दूं। और आपने बोला इतने सारे पेशेंट्स आते हैं। तो आप खुद सोचो जिस डाइट पे ये सारी बीमारियां ठीक हो रही हैं। हां। अब इसी डाइट से यह सारी बीमारियां कैसे हो जाएंगी? कोई नई बीमारी आ गई। कौन सी नई बीमारी है? सारी बीमारियां मैंने आपके सामने नाम ले लिया। और अगर कुछ रह गया है तो वो भी आप इंक्लूड कर लो उसी बीमारी में। चलो आंखों में धुंधलापन हो गया। मोतियाबिंद हो गया।
(29:44) ये ठीक हो रहा है। धुंधलापन ब्लरी विज़ अभी रिसेंटली फाइव डेज पहले मेरे एक पेशेंट ने स्टार्ट किया है ये डाइट। कार्निवो डाइट। हम फाइव डेज में ही उनका जो विज़न है वो इंप्रूव कर गया। प्रूफ है ये आपके पास। वो पेशेंट खुद बता। एक आदमी पे प्रूफ करना, 10 आदमी पे प्रूफ करना और 10,000 पे प्रूफ करना हां। या 10 लाख पे प्रूफ करना ये अपने आप में एक डिफरेंट चीज है ना सर। तो आज एक कह रहा है, 10 कह रहा है, 100 कह रहा है। यही धीरे-धीरे मल्टीप्लाई होगा ना समय के साथ। अभी-अभी तो मैंने शुरू किया है। मैंने एक अच्छा अभी-अभी शुरू किया है। तो
(30:15) मैं मुझे इस फील्ड में काम करते हुए फाइव इयर्स हुए हैं मोस्टली ऑनलाइन क्योंकि मैं डिजिटली ही काम करता हूं। मेरा कोई क्लनिक नहीं है, कुछ नहीं है। और मुझसे कोई पेशेंट पूछता भी है कि सर मैं आपके टाउन से ही हूं। मैं मिलना चाहता हूं। मैं बोला नहीं मिलने मिलने का काम मत करो यार। मैं डिजिटल डाइट डॉक्टर हूं। मुझे उसी तरह ट्रीट करो और मैं भी तुम्हें डिजिटली ट्रीट करूंगा। हां। कुछ मिलने का सीन मत रखो। मैं वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग करूंगा। वीडियो कॉल पे कर लूंगा कनेक्ट। जो करना है डिजिटली करेंगे हम। ठीक होने से मतलब है तुम्हें तुम ठीक हो
(30:46) जाओगे। कुछ तो देखते होगे आप कि जैसे मान लो एक पेशेंट आया तो पहले उसके ब्लड रिपोर्ट तो देखते होगे। वो सब करा लेते जिस देखते हो सारा कुछ ऑनलाइन हो जाता है। हां आप और डिस्कस कर लेता हूं मैं। हां वीडियो कॉल पे। मान लो उसको कुछ हो गया एकदम से। फिर वो आपको कंसल्ट करेगा डॉक्टर साहब मैं तो ये मीट खाया और मुझे एपच हो गया। मेरे को चक्कर आ रहे हैं। बीमार होने लग गया हूं। मैं अभी और टेंशन हो रही है मेरे को ज्यादा मीट खाने से। मेरे पास ऐसे पेशेंट्स आते हैं जो मेरे प्लान में रहकर कभी मुझे कंप्लेन नहीं करते कि सर मुझे आपके डाइट पे ये प्रॉब्लम हो रही है। कभी
(31:14) नहीं करते। शायद मैं बहुत ज्यादा स्मार्ट हूं। मुझे आता है कि जो काम मैं एक्चुअली कर रहा हूं उसे मुझे पता है एक्सपर्टीज हम और कोई कंप्लेन नहीं आता। मेरे पेशेंट्स कभी इस तरह से कंप्लेन नहीं करते। थोड़े बहुत कुछ सिम्टम्स आते हैं उनको बिकॉज़ दे आर चेंजिंग देयर डाइट। हम तो ट्रांजिएंटली कुछ प्रॉब्लम्स उनको होंगे। बट वो आफ्टर अ पीरियड ऑफ़ वीक और सो लगभग उनके सारे प्रॉब्लम्स चले जाते हैं। छोटे-मोटे वो सब आते हैं। वो इतना सीरियस नहीं होता कि उसके लिए वो डाइट छोड़ देंगे। टेरेबल साइड इफेक्ट नहीं होते कभी भी नहीं। मेल फीमेल दोनों नॉनवेज दोनों को नॉन
(31:51) वेजिटेरियन होना है। हां, इंसान ही है दोनों। अच्छा ह्यूमन बीइंग्स हैं। और लड़कियों को तो ऐसे आई थिंक आप कौन सा पेड़ कौन सा पेट था आपका? मीट बेली बेली। मीट बेली पसंद है। वीट बेली पता नहीं लड़कियों को तो वीट बेली भी बहुत का मुझे अभी तो कुछ आप देखते होगे सोशल मीडिया पे बहुत सारे स्टडी सेज़ दिस स्टडी सेज़ दैट करके आता रहता है। हम उसमें लिखा होता है कि कुछ लड़कियों को वीट बेली भी पसंद है। हम तो मुझे उससे क्या करना है? लड़कियों को क्या पसंद है? मुझे जो पसंद है वो मुझे पता है। चलो मेरे को एक बात बताओ कि आप पीसीओएस और पीसीओडी
(32:27) ये दोनों भी थोड़ी दोनों अलग-अलग बीमारी है। एक ही बीमारी है? एक ही है बट यूजुअली क्या होता है कि पीसीओडी एक डिजीज है जैसे पॉलीसिस्टिक ओवेरियन डिजीज हां और पीसीओएस पॉलीिसिस्टिक ओवेरियन सिंड्रोम हम तो जब भी सिंड्रोम होता है ना इसका मतलब है ये प्रॉब्लम आपका कनफाइंड सिर्फ ओवरीज तक नहीं है ये मल्टी सिस्टम हो गया डिसऑर्डर अब इसलिए हम इसे सिंड्रोम बोलते हैं। सिंड्रोम का मतलब ये है कि ये कॉनस्टिलेशन ऑफ़ प्रॉब्लम्स। तो पीसीओएस का मतलब हुआ कि ओवरीज का तो इशू है ही। साथ ही साथ आपके अदर मेटाबॉलिक इशूज़ भी हैं साथ में। जैसे हो सकता है
(32:58) आपका मेटाबॉलिक सिंड्रोम के और कॉम्पोनेंट्स होंगे। हो सकता है आपको डायबिटीज भी हो। हम ओबसिटी के साथ-साथ तो वो सिंड्रोम हो गया काइंड ऑफ क्योंकि अब मल्टीसिस्टम डिसऑर्डर हो गया ये। इसलिए हम इसे अब पॉलीसिस्टिक ओवेरियन सिंड्रोम बोलते हैं। अब पीसीओडी हम टर्म यूज़ ही नहीं करते। अच्छा क्योंकि पीसीओएस जो है वो अपने आप में एक मल्टीसिस्टम मेटाबॉलिक डिसऑर्डर है। ये सिर्फ ओवरीज तक कनफाइन नहीं होता। हम मेटाबॉलिक डिसऑर्डर हो गया। मेटाबॉलिक डिसऑर्डर है ये कंप्लीटली। हां। हां तो क्या ये भी नॉनवेज पीसीओएस और पीसीओडी जो आपने अभी नाम नया क्या लिया
(33:30) आपने पीसी पीसीओएस पीसीओएस यही बोलते हैं अभी तो पीसीओएस क्या नॉनवेज खाने से एकदम कंप्लीटली क्योर हो जाएगा हो जाएगा बिल्कुल हो जाएगा रिवर्स हो जाएगा बिल्कुल काफी लड़कियां खाने वो डाइट को करके प्रेग्नेंट हो रही हैं आराम से जो स्ट्रगल कर रही थी आईवीएफ फेल हो रहा था सब कुछ फेल हो रहा था अभी प्रेग्नेंट हो रही हैं आराम से कंसीव कर पा रही हैं कितने पेशेंट्स को देखा है सर अभी तक आपने मतलब टोटल अगर बात करें पांच सालों में पांच सालों की प्रैक्टिस है तो कितने पेशेंट्स को देखा है अभी तक देखिए एक्चुअली क्या होता है ना कि मेरी
(33:57) जो एडवाइस है हां अब बहुत सारे प्रैक्टिसिंग डॉक्टर्स फॉलो कर रहे हैं। अच्छा तो वो सारे पेशेंट्स अब मेरे पास नहीं आएंगे डेफिनेटली क्योंकि जो गनेकोलॉजिस्ट हैं हम पेशेंट पहले उनको जब भी कोई फर्टिलिटी का इशू होता है वो डेफिनेटली वो डॉक्टर केशिया के पास नहीं आएंगे। उनको पता है कि ये भाई इस फील्ड के डायरेक्टली है नहीं। हम तो हम फर्टिलिटी स्पेशलिस्ट के पास जाएंगे या फिर हम स्त्री रोग विशेषज्ञ के पास जाएंगे। हम जिसे हम गानेकोलॉजिस्ट बोलते हैं। तो उनके पास जाते हैं। अब बहुत सारी गायनेकोलॉजिस्ट जो हैं वो एडवाइस दे रही हैं। हम एक तो मेरी ही फ्रेंड है काफी क्लोज
(34:29) फ्रेंड है। हां। वो एडवाइस दे रही है डायरेक्टली। तो जब वो बोलती है तो उसके पेशेंट बहुत बेटर होते हैं। और वो कंसीव कर रही हैं। तो अल्टीमेटली वो एडवाइस कहां से आया? वो जो आज डॉक्टर दे रही है एडवाइस हम वो किसकी वजह से दे रही है? मेरी वजह से दे रही है। वो नहीं देती वरना अगर मैं नहीं होता उसकी लाइफ में तो वो अपने पेशेंट को वो एडवाइस नहीं दे रही होती तो अल्टीमेटली वो मेरा ही एडवाइस हुआ ना हम तो वर्क कर रहा है आप नहीं चाहते हो कि डायरेक्ट आपके पास लोग आए आपके पास आपका बिज़नेस ही बढ़ाना चाहते हो नहीं आप देखिए ऐसे समाज सेवा कर रहे हो आप
(35:00) मैं इस फील्ड में काम कर रहा हूं बहुत ऑनेस्टली हां मैं कभी भी इस फील्ड को बिजनेस स्टैंड पॉइंट से नहीं देखता हूं अच्छा कभी नहीं डेफिनेटली मैं जो काम करता हूं उस सर्विस के लिए मुझे फीस चाहिए मैं चार्ज करता हूं बट बट कभी भी मेरे माइंड में यह नहीं होता कि कैसे इसको बहुत ज़्यादा बिज़नेस की तरह इसको काम करूं और यह चलाऊं, वैसे चलाऊं, कुछ मार्केटिंग करूं। इतना मैं कभी नहीं सोचता हूं। YouTube पे भी बहुत सारे ऐसे वीडियोस हैं मेरे चैनल पे जो लोग भी देख पा रहे हैं। मुझे ऐसा लगता है फर्स्ट पॉडकास्ट के बाद मैंने जो आपके साथ किया फर्स्ट इनपर्सन
(35:30) पॉडकास्ट था मेरा आपके साथ। उसके बाद बहुत सारे लोग YouTube मेरे डायरेक्टली मेरे चैनल से कनेक्ट हुए हैं। और बहुत लोग वीडियोस देख रहे हैं। देख रहे हैं अभी। बहुत लोग देख रहे हो आपको मतलब अभी अपन ने जब बात करी तो जिन लोगों को तकलीफ होगी वो लोग आप अपना वीडियो देख के आपके पास आए और आपसे बात करने की सलाह लेने लगे बिल्कुल लेने लगे काफी ज्यादा तो बिज़नेस तो मेरा उस तरह से बढ़ रहा है तो मुझे खुशी होती है कि पहले आप कन्विंस हो लो मेरी चीजों से देख लो कि भाई मेरा ये कहना है और आपको अगर ये खाना है तभी आप आओ मेरे मेरे पास वरना मेरा टाइम वेस्ट मत करो और
(35:59) अपने भी टाइम वेस्ट मत करो आप प्लीज मेरा समय बहुत कीमती है मेरा टाइम को वेस्ट मत करो अब मुझे नहीं चाहिए आपके पैसे लेकिन जब भी आप मुझे पे करो तो पूरी तरह से फुल्ली कन्विंस्ड हो के आओ कि हां भाई मुझे मीट खाना पड़ेगा। तो उस तरह से अगर मेरे पास बिजनेस आएगा मुझे कोई प्रॉब्लम नहीं है। लेकिन मैं बिजनेस इसको बना नहीं सकता हूं इस काम को क्योंकि एज अ डॉक्टर आप कभी भी ये जो सर्विस है ना मेडिकल सर्विस ये कभी भी बिजनेस ओरिएंटेड होता नहीं है। ये तो आप मान रहे हो। आजकल थोड़ी मान रहे हो क्या सब? तो इसलिए तो मैं अलग हूं ना। इसलिए तो मैं काम भी अलग कर रहा हूं।
(36:32) हम मैं बिज़नेस करूंगा। डेफिनेटली नंबर ऑफ़ पेशेंट्स बढ़ेंगे। मेरा बिज़नेस भी बढ़ेगा। हम लेकिन इसको मैं बिजनेस बना नहीं सकता हूं इस काम को। हम मैं YouTube पे जितने कंटेंट डाल रहा हूं वो ऑलमोस्ट फ्री हैं। हम उस कंटेंट को भी देख के बहुत लोग खुद से ही डाइट को चेंज करके अपने डायबिटीज को बेटर कर सकते हैं। अपनी ओबेसिटी को रिवर्स कर सकते हैं। सब कुछ फिक्स हो सकता है। लेकिन स्टिल अगर पेशेंट को फील होता है कि नहीं डॉक्टर से मुझे एक बार बात करनी है तो वो बात करते हैं। लेकिन हां कोई अगर इल इफेक्ट होता है मेरे वीडियोस को देखकर तो मैं रिस्पांसिबल नहीं
(37:00) होऊंगा उसके लिए क्योंकि वह पर्सनल मेडिकल एडवाइस नहीं है। हम्म। मेरे YouTube के कंटेंट्स किसी के लिए पर्सनल मेडिकल एडवाइस नहीं है। तो अगर आपको कोई प्रॉब्लम होती है मेरे वीडियोस को देखकर, डाइट में कुछ चेंज लाकर तो आपने किया क्या मैंने देखा नहीं कोई प्रूफ नहीं है। तो आपने क्या किया क्या नहीं किया कोई देखने वाला नहीं है। तो आप चार्ज भी नहीं कर सकते हो कि ये डॉक्टर की डाइट पे मुझे ऐसा-सा हो गया। हम्म तो उसका प्रॉब्लम बस ये है। तो उसको मेक श्योर करने के लिए आप मेरे से कंसल्ट कर लो। मेरा प्लान ले लो। लेकिन मैं किसी को पोक नहीं करता हूं कि
(37:29) प्लीज प्लान ले लो। अरे तुमने मुझे कॉल किया था। क्या हुआ? सो गए क्या? नहीं लोगे क्या प्लान? मैं ये सब काम नहीं करता हूं। तो मेरा मेरा ध्यान नहीं रहता उन चीजों पे। मेरा लगता है मुझे काम क्या करना है? मुझे क्या नया कंटेंट बनाना है? लोगों को क्या एजुकेट करना है? किस टॉपिक पे बनाना है वीडियोस? मेरा ध्यान बस उस पे रहता है। आप अच्छा काम करोगे आपके पास बिज़नेस आ जाएगा। बिज़नेस के मैं चज़ नहीं करता हूं उस चीज को। कभी नहीं। दिमाग में नहीं है। पैसा मेरा कभी नहीं करता हूं। अगर मुझे बिज़नेस करना होता तो मैं कन्वेंशनल मेडिसिन
(37:56) प्रैक्टिस कर रहा होता। बहुत पैसा है उसमें। बहुत पैसा है। फुल पैसा कमाता है। फुल पैसा कमाता है। से कितना पैसा सर अपने करियर में अपने मेडिकल प्रैक्टिस की वजह से थोड़ी कमा रहे हैं। उनका तो कट्स और इंसेंटिव से पैसा बनता है। क्या बात कर रहे हो? सही बात कर रहा हूं। नहीं बिल्कुल आप अगर आपके पास कोई पेशेंट आता है। ठीक है। हम आपका कंसल्टेशन फीस क्या है? ₹5000 ₹5000 इतना ही होता है। ऐसा ही है डॉक्टर इतना ही चार्ज करता है। पेशेंट खुश हो जाता है कि डॉक्टर का जो फीस है डॉक्टर की फीस है बहुत कम है। मतलब ₹500 लेता है डॉक्टर बड़ा बढ़िया है। समय भी दिया ठीक-ठाक 10
(38:31) मिनट में खुश हो जाता है पेशेंट। उसको पता नहीं है कि एक डॉक्टर है डिजिटल डाइट डॉक्टर वो 1 घंटे देता है समय। हम तो 10 मिनट देकर ये खुश हो गया। और अब उसका जो पैसा है रिमेनिंग उस पेशेंट से डायरेक्टली उसके पॉकेट में नहीं आता। हम उसने प्रिस्रिप्शन बनाया डिफरेंट-डिफरेंट टेस्ट के लिए एडवाइस किया उसने। यह टेस्ट करा लो, वो टेस्ट करा लो। उसमें मैक्सिमम टेस्ट जो है तो ये फालतू के होते हैं। उसका कोई रोल नहीं है। मैं बता रहा हूं आपको। ये बात तो आप सही कह रहे हो। पता है। मैं बताऊंगा ऐसी बार। इंसिडेंट आया हूं एक। बहुत सारे टेस्ट लिख देते हैं वो लोग। और
(39:01) कुछ ब्लड टेस्ट होते हैं। कुछ स्कैन्स होते हैं। तो स्कैन्स वाले रेडियोलॉजी डिपार्टमेंट में जाता है। ब्लड टेस्ट जाता है एक सर्टेन पैथ लैब में। और यह सारे डॉक्टर्स का ना एक कोलैब होता है हम कि भाई अगर एक पेशेंट हमारे यहां से आएगा तो 40% तुम्हें मिलेगा कट्स मांगते हैं लोग नहीं ऐसा टाई अप है सिस्टम ही ऐसा है सिस्टम ऐसा है तो पैथ लैब वाले को भी चाहिए क्लाइंट उनके आपका पेशेंट जो है आपके लिए कस्टमर है डॉक्टर अगर खुद को बिनेसमैन मानता है तो उसका पेशेंट उसके लिए कस्टमर हुआ ना तो कस्टमर है तो भाई पैथ लैब वाला बोलता है कि भाई तुम्हारे पास कस्टमर आ रहा है मेरे
(39:38) पास भेजोगे तो मैं तुम्हें कट्स दूंगा 40% पर पेशेंट। तो अब डॉक्टर क्या करेगा? वो एक्स्ट्रा भी टेस्ट लिखेगा क्योंकि 40% बन रहा है तो नंबर ऑफ़ टेस्ट ज्यादा होंगे तो उसका 40% और ज्यादा अमाउंट आएगा। हम कुछ स्कैन्स लिख दिया उसने। हो सकता है कई बार सीटी स्कैन की जरूरत नहीं है ब्रेन के ही। एमआरआई स्कैन की जरूरत नहीं है। लेकिन एमआरआई डायरेक्टली डॉक्टर जो है प्रिस्राइब कर देते हैं। सिंपल हेडेक का पेशेंट आता है और बिना किसी चीज को ध्यान दिए हुए सिंपली वो बोलते हैं कि एमआरआई स्कैन करा लो तुम ब्रेन का। एमआरआई हो गया और रेडलॉजी डिपार्टमेंट से 40% अगर आएगा
(40:12) आप समझ लो अगर एमआरआई का कॉस्ट मुझे एग्जैक्टली इन सब सारे टेस्ट का पता भी नहीं है शायद 5000 6000 समथिंग होता होगा एमआरआई का हम अब उसका 40% आप लगा लो तो आपका उस पेशेंट से अल्टीमेटली कितना आ गया कितना चार्ज कर लिया उसने उस डॉक्टर ने पेशेंट को तो लगा मैंने इस डॉक्टर को ₹500 दिए हैं लेकिन अल्टीमेटली उस डॉक्टर के पॉकेट में कितना जा रहा है ये पेशेंट कभी नोटिस ही नहीं करता टेस्ट करने वाले लोग होते हैं वो लोग पर्चे को स्कैन करके डॉक्टर को ऑटोमेटिकली पैसा भेज देते होंगे। हां वो सारा उनका रिकॉर्ड होता है। हां। मन नीचे रहे हैं ऐसा करके कुछ सिस्टम
(40:42) होगा। मैं उतना डिटेल मुझे भी नहीं पता। मैं कभी काम ही नहीं किया हूं इस तरह से। फिर आपको कैसे पता? मुझे पता है ना। बाकी मेरे जो फ्रेंड है तो बताते हैं। मेरे डॉक्टर जो फ्रेंड हैं वो पता है कैसे काम होता है। मैं सिस्टम में तो रहा ही हूं। ऐसा तो है नहीं कि मैंने ऐसे ही कहीं पे भी कर लिया। मतलब मैं कन्वेंशनल सिस्टम में रह करके आया हूं। मुझे पता है ये सिस्टम में कैसे काम करते हैं डॉक्टर्स। ऐसा थोड़ी है। मुझे पता नहीं है। मैंने एमबीबीएस किया। हम देन उसके बाद डीएनबी जॉइन किया Tata Motors हॉस्पिटल में जनरल मेडिसिन में
(41:10) वहां पे रेजिडेंसी कर रहा था मुझे पता लग जाता था कैसे काम होता है हॉस्पिटल में मूवीस में बताते हैं कि दवाई डाली फिर वापस दे दी फिर घुमाया ये सब सच है कौन कौन सी वो मूवीस में ऐसे बताते थे कि आपने डॉक्टर ने प्रिस लिखा कि इतनी सारी दवाइयां फिर वो काम नहीं आई फिर वो वापस उनके पास मेडिसिनल काउंटर वापस चली गई और पैसा बन रोटेट हो गया बहुत सारी चीजें होती हैं मूवीज में भी जो दिखाते हैं ऐसा नहीं है कि सब कुछ सही है और सब कुछ गलत भी नहीं है तो बहुत सारी चीजें ऐसी होती हैं जो एक्चुअली वो मेडिकल मैल प्रैक्टिस में आता है। बट स्टिल वो
(41:40) इतना कॉमन प्रैक्टिस में है तो सभी कोई उसमें पॉइंट आउट नहीं करता। कोई क्वेश्चन नहीं करता उस पे हम होते कौन हैं? क्योंकि आपको पता होना चाहिए ना उस सिस्टम के बारे में। अब कौन सा ऐसा डॉक्टर है जो अपने सिस्टम में रहकर अपने ही सिस्टम पे उंगली उठाएगा। ऐसा तो कोई नहीं है। या तो आप सिस्टम में हो तो आप उसे बेयर करो। आराम से आप झेलो और या तो आप सिस्टम से बाहर हो जाओ। सिस्टम में रह करके आप पंगे नहीं ले सकते हो। तो मैं सिस्टम से हट गया। हम अब मुझे लगता है मैं खुल के जो भी बोल सकता हूं मैं बोलता हूं आराम से कोई प्रॉब्लम नहीं है ना
(42:11) आप मुझे क्या खतरा हो सकता है आप ये बताइए अगर मैं बोल रहा हूं इस तरह से मुझे कोई नौकरी से निकाल नहीं सकता मेरा कोई मुंह बंद नहीं कर सकता बहुत से बहुत क्या होगा मेडिकल रजिस्ट्रेशन आप कैंसिल करोगे कर दो उसके बाद ही पेशेंट आएगा मेरे पास आप मेडिकल रजिस्ट्रेशन कैंसिल कर दोगे ना उसके बाद भी पेशेंट के अंदर इतना ट्रस्ट है मेरे ऊपर मेरे कंटेंट्स को देखकर उसे पता है कि यही डॉक्टर ठीक करेगा इसके डिग्री को कैंसिल कर देने से इसके एजुकेशन को इसके विज़डम को आप छीन नहीं सकते हो। वो विज़डम मेरे साथ रहेगा। ऐसा थोड़ी है पीस ऑफ सर्टिफिकेट अगर मेरे पास नहीं है तो मैं
(42:41) डॉक्टर नहीं हूं। ऐसा नहीं हो सकता। तो डॉक्टर की उपाधि तो चाहिए ना। ना आपसे डॉक्टर की उपाधि छीन ली जाएगी। आप ऐसी बातें करोगे तो सिस्टम सिस्टम के अकॉर्डिंग मैं डॉक्टर नहीं हूं। हां। अपने पेशेंट के लिए मैं स्टिल डॉक्टर हूं। तो फिर तो डॉक्टर बोल देते ना सब लोग। पब्लिक तो यही बोलेगी ना। क्या डॉक्टर की डिग्री है ना? पढ़ाईवढ़ी कर ली, छीन ली। तो जैसे वकील ने अगर कुछ गड़बड़ कर दी तो वकील से उसका लाइसेंस रद्द कर दिया। पुलिस ने कुछ काम कर दिया तो सस्पेंड कर दिया। जज ने कुछ कर दिया तो उनको जज को हटा दिया। नेता ने कुछ काम कर दिया तो उसको
(43:08) हटा दिया। हालांकि बेल मिल जाती बाद में बट मुझे आप हटाओगे कहां से? घर से? मैं तो घर से काम करता हूं। मुझे आप कहां से हटाओगे? वही तो सवाल है। मुझे आप हटाओगे कैसे? क्वेश्चन ये है मेरा। पेशेंट के दिल से नहीं हटा सकते। मुझे मेरे घर से नहीं हटा सकते। तो अब कुछ नहीं कर सकते हो आप मेरा। काम करना तो डॉक्टर की जैसा करना। क्या बात कर दी सर आपने लाख टके की बात कर दी। मतलब अपने दम पे काम करना सारा। बिल्कुल। हैं अपनी स्किल पे काम करना। एक्सक्ट्ली। अपने आप पे कॉन्फिडेंस रखना। तभी आप जिंदगी जी सकते हो। हां बिल्कुल। मैं तो कहता ही हूं कि इस फील्ड में इस
(43:49) फील्ड में, इस मेटाबॉलिक स्पेस में, मेरे जैसा काम करने वाला इंडिया में कोई डॉक्टर नहीं है। मैं बता रहा हूं आज आपको। एक डॉक्टर भी नहीं मिलेगा। एक डॉक्टर 10-15 डॉक्टर खड़े हो जाएंगे सारे पॉडकास्ट देखने के बाद में। देख बता वो डाइट बता सकता है बट मेरी तरह काम नहीं कर सकता वो सिस्टम को छोड़ नहीं सकता है वो अपने मेन उनका जो जॉब है जो उनका मेन सोर्स ऑफ इनकम है वो स्टिल वो सिस्टम से ही आ रहा है क्योंकि वो सिस्टम में रह के वो एज अ प्रैक्टिसिंग डॉक्टर वो काम कर रहे हैं वो मेरी तरह काम नहीं कर रहे हैं घर बैठे मैंने सब कुछ छोड़ दिया है क्योंकि मुझे
(44:19) पता है कि मैं अगर ऐसे भी काम करूंगा ना तो मैं अपने लाइफ को ईजीली चला लूंगा रन कर लूंगा हां एक बार बॉडी बता दो ना सर आपकी बॉडी तो कुछ ऐसी है देखिए। पूरा अंडा बना हुआ है वो। वो 30 अंडे खाने का नतीजा है। मतलब जिम जाके ऐसी बॉडी बनाई जाए या नॉनवेज खा के ऐसी बॉडी बनाई जाए? देखिए जिम जाने वाले तो बहुत हैं। हां। बट मेरे जैसे लोग नहीं हैं। आप गुप फिर के आप तो आ जाते हो बार-बार। कहां जाऊंगा मैं फिर? खुद को छोड़ नहीं सकता। प्रॉब्लम यही तो है। मैंने खुद को ही तो पकड़ा हुआ है और किसी की चीज को मैं पकड़ता ही नहीं हूं। पर लोगों ने खुद को
(44:58) छोड़ दिया है। खुद को ही छोड़ दिया है। वही है। खुद और मैं बस खुद में ही रहता हूं। खुद को ही सोचता हूं। खुद के बारे में ही करता हूं। कुछ कुछ और किसी से मुझे ज्यादा मतलब ही नहीं होता। अच्छा मेरे को ना अपन बार-बार जब बात कर रहे थे तब बार-बार ओबेसिटी का बार-बार नाम आ रहा है। हम पहले बताओ ओबेसिटी होती क्या है? इसको मतलब कैसे पहचाना जाए कि किसी को ओबेसिटी है। क्या होती है और कैसे पहचाना जाए? या ओबेसिटी के जब आप ऑफिशियल डेफिनेशन को देखोगे ना हम तो उसमें एक बीएएमआई स्केल होता है। ठीक है? जिस पे हम बोलते हैं कि भाई आपका जो
(45:33) बीएएमआई स्केल है उसके अकॉर्डिंग हम आपका क्या है? हम वैल्यू हम अब बीएएमआई स्केल में अगर आप देखोगे तो उसमें 30 के ऊपर अगर आपकी वैल्यू आती है 30 या 30 से ज्यादा। क्या वैल्यू होती है ये? यह आपका बॉडी वेट डिवाइडेड बाय हाइट इन मीटर का होल स्क्वायर हम जैसे आपकी बॉडी वेट अगर 100 kg है हम और आपकी हाइट इन मीटर्स हम 1.
(45:59) 8 आप मान लो या कुछ भी हम तो उसका होल स्क्वायर उसका स्क्वायर अब डिवाइड कर दो 100 को मतलब 100 / 1.8 * 1.8 हम उसकी जो भी वैल्यू आएगी वो आपका बीएएमआई वैल्यू हुआ। ठीक है? विद रिस्पेक्ट टू योर हाइट। हम्। मान लो निकाल लेते हैं अपन किसी का एक डाटा निकाल लेते हैं। एक एवरेज आदमी मतलब अभिषेक व्यास का निकाल लेते हैं। हम् 80 वेट हम् बिलकुल। और मैं हूं 6 फीट का तो मतलब कितने मीटर हो गए हमें? मीटर में कन्वर्ट करना होगा। जैसे हो गया 1.
(46:28) 82 मीटर्स हां। हां। उसे हम डिवाइड करेंगे। उसे डिवाइडेड बाय 1.82 * 1.82 डिनोमिनेटर में रहेगा। 80 / 1.82 का होल स्क्वायर हम का होल स्क्वायर बस बस 80 / 1.82 का होल स्क्वायर बीएएमआई निकालना है बीएएमआई निकाल रहे हैं अपन मेरा ग्लास का निकाल रहे हैं कि क्या आ रहा है या 24.15 24.15 आया मेरा अभी बीएएमआई हम तो क्या है ये आपका ओवरवेट भी नहीं हुआ नॉर्मल टू ओवरवेट के बीच में है काइंड ऑफ़ और ओवरवेट कैटेगरी 25 से ऊपर में आता है हम्म। तो 25.5 टू 29.
(47:07) 9 के अराउंड आपका ओवरवेट कैटेगरी होता है। तो आप ना ही अभी ओवरवेट हो ना ही ओबीज हो। हम एस पर बीएएमआई वैल्यूज़ बट आपके लिए तो होगा। हां वही मैं आऊंगा उस पे अभी। मैं कन्वेंशनल डेफिनेशन के अकॉर्डिंग बोल रहा हूं। आप ना ही ओवरवेट हो ना ही आप ओबीज़ हो। हम्म। तो ओबेसिटी की डेफिनेशन एक्चुअली बीएमआई के कॉन्टेक्स्ट में देखें तो जब आपका बीएएमआई 30 से एक्सीड करेगा या 30 या 30 से ज्यादा होगा तब आप बोलोगे ये ओबीस है। ये ओबेसिटी हुआ। क्लीनिकल ओबेसिटी बोलते हैं हम उसे। लेकिन प्रॉब्लम ये है कि आप किसी भी इंसान के बॉडी कंपोजिशन को देखते हो। तो जो आपको फैट दिख रहा है उसे हम सबकटेनियस फैट
(47:48) बोलते हैं। जो विजिबली आप सिंपली देख पा रहे हो नेकेड आई से जैसे जिस फैट को हम पिंच कर सकते हैं। यह जो पिंच हो रहा है ना यह सबकटेनियस फैट है। स्किन के अंडर द स्किन जो फैट है वो सबकटेनियस फैट है। क्योंकि विसरल फैट को हम पिंच नहीं कर सकते। वो ऑर्गन्स के अंदर हैं या सराउंडिंग द ऑर्ग्स हैं। हम अब इस फैट को पिंच कर रहे हो तो सबकटेनियस फैट है। अब आपका हो सकता है सबक्यूटेनियस फैट बहुत ज्यादा ना हो। हम राइट? आप बहुत लोग देखते हो ना बहुत लोगों को देख रहे हो कि आजकल लीन है ना ही बहुत ज्यादा मसल मास है ना ही बहुत ज्यादा सबकटेनियस फैट है लीन है पेट का एरिया
(48:24) उनका थोड़ा बाहर की तरफ है हम थोड़ा बाहर की तरफ प्रोटेड बेली होता है बियर बेली भी जिसे बोलते हैं हम या वीट बेली बोलो जो भी सब कुछ एक ही है तो उसकी वजह से क्या होता है उनका विसरल फैट ज्यादा है सबक्यूटेनियस फैट लेकिन ज्यादा नहीं है और ओबेसिटी की डेफिनेशन में हमें इससे कोई मतलब नहीं है कि आपका कौन सा फैट ज्यादा हम क्योंकि उसमें टोटल बॉडी वेट को हम कंसीडर कर रहे हैं। उस बॉडी वेट में हमें नहीं पता कि एडिपोज टिश्यू में सबकटेनियस फैट ज्यादा है, विसरल फैट ज्यादा है, मसल मास कितना है, किसी का बोन मास कितना है, कुछ नहीं पता हमें।
(48:58) क्योंकि इन जनरल टोटल बॉडी वेट का 65% ऑफ योर बॉडी वेट इज़ वाटर वेट। हम तो अगर आपका 80 kg है, तो उस 80 kg का 65% ऑफ़ द वेट जो होगा वो वाटर होगा। प्योर वाटर वेट है। ठीक है? उसके अलावा अगर हम वेट की बात करें तो उसी में फैट मास वो भी ड्राई फैट मास ड्राई मसल मास का वेट होगा। तो किसी भी इंसान को अगर आप देखते हो जिसका सबकटेनियस फैट ज्यादा नहीं है, मसल मास भी ज्यादा नहीं है लेकिन पेट बाहर है थोड़ा। हम तो आप अगर उसका बीएएमआई निकालोगे तो क्या आएगा? बहुत ज्यादा आएगा या कम आएगा? ज्यादा आएगा। कम आएगा। कम आएगा। सॉरी कम आएगा। क्योंकि उनकी उनका
(49:41) जो बॉडी वेट है टोटल इन टोटिटी कम है काफी। हम्म। क्योंकि मास नहीं है। ना ही सबक्यूटेनियस फैट ज्यादा है, ना ही मसल मास ज्यादा है। बोन मास भी डेफिनेटली ज्यादा नहीं करेगा। तो उनका जो भी थोड़ा बहुत ज्यादा है वो विसरल फैट ज्यादा है जिसकी वजह से पेट उनका बाहर है। ठीक है? तो इनका जो बीएएमआई होगा वो कम हो जाएगा। तो आपका ऐसे लोगों का जो बीएएमआई होगा ना वो काफी कम आएगा। तो अब आपको अब ऐसे लोग बोलते भी हैं कि यार मेरा बीएएमआई तो सही है। मैं कहता हूं बीएएमआई मत देखो। अपना पेट देखो बस। हम पेट बाहर है। अगर पेट बाहर है तो वो प्रॉब्लम है। वो ये बता रहा है कि
(50:16) तुम्हारे पास एक्स्ट्रा फैट मास है और वो फैट जो एक्चुअली हेल्दी नहीं है। वेसरल फैट है ज्यादा। तो इसलिए अल्टीमेटली बीएएमआई अब रिलायबल है भी नहीं। अब तो मतलब जो हेल्थ ऑथॉरिटी और जो भी हेल्थ रेगुलेटरी बॉडीज है वह भी अब बीएएमआई को कैलकुलेट करने नहीं बोलती है। यह तो क्योंकि टेक्स्ट बुक में हम पढ़ते आ रहे हैं तो हम इसे फॉलो कर रहे हैं। बट इसको फॉलो करना ही नहीं होता बीएमआई को कभी नहीं। आप सिंपली यह देखो कि आपका बॉडी कंपोजशन आप मिरर में जब खड़े होते हो ना तो आपको सिंपली समझ में आ जाना चाहिए कि आपकी बॉडी कंपोजशन सही है या
(50:46) नहीं है। अगर आपका पेट बाहर नहीं है तो डेफिनेटली आपकी बॉडी अच्छी है। आपका फैट मास बढ़िया है क्योंकि सबक्यूटेनियस फैट इन जनरल हम प्रॉब्लमेटिक होता नहीं है बहुत ज्यादा। विसरल फैट है जो ज्यादा प्रॉब्लमेटिक है जो एक्चुअली बहुत सारे मेटाबॉलिक डिजीज से एसोसिएटेड होता है उसका हाई होना। तो इसलिए उसको आप कम रखो। पेट अंदर रहेगा। मसल मास कम है तो आप उसके लिए मसल्स बिल्ड करो, जिम करो, मीट खाओ, वीट छोड़ दो। दैट्स इट। तो मेरा सवाल यही है ऑफिस कि रुक क्या रात में रोटी खाने से वेट बढ़ जाता है। विसरल फैट बढ़ जाता है। मैं ये नहीं कहता हूं कि रात में रोटी मत खाओ।
(51:21) मैं कहता हूं रोटी खाओ मत ना। रात में क्यों खाना चाह रहे हो? या फिर दिन में क्यों खाना चाह रहे हो? क्यों खाना चाह रहे हो रोटी? मैं कह रहा हूं क्या ऐसा मिल रहा है रोटी से जो आपको मीट से नहीं मिल रहा है। मेरा क्वेश्चन यह है तो फिर बोलोगे कार्बोहाइड्रेट नहीं मिल रहा है। मतलब उसकी जरूरत नहीं होती है। कार्बोहाइड्रेट की जरूरत नहीं है। कार्बोहाइड्रेट की जरूरत नहीं होती बॉडी को। न्यूट्रिशनल रिक्वायरमेंट नहीं है ह्यूमन बॉडी का कार्बोहाइड्रेट। आप उसे खा लेते हो, खाते हो आप हेल्दी भी रह सकते हो। लेकिन स्टिल अगर आप उसको बंद कर दोगे
(51:49) तो ऐसा नहीं आप बीमार हो जाओगे। अच्छा दाल में प्रोटीन होता है या नहीं होता है? दाल में कार्बोहाइड्रेट होता है या प्रोटीन होता है? कार्ब्स होते हैं। प्रोटीन भी होता है नाम मात्र। ज्यादा तो कार्स ही होता है तो दाल खा के भी शुगर बढ़ता है बहुत लोगों का ऐसी हम ऐसा बोला जाता है ना दाल खाओगे रात में तो बहुत हाई प्रोटीन होता है दाल में सबसे ज्यादा आपको एनर्जी मिलती है ऐसा कुछ नहीं होता सब बेकार की बातें हैं उसे हम कहते हैं बहकी बहकी बातें हैं ये तो हम बचपन से सुनते बारे पर जो बचपन से आप सुनते आ रहे हैं वो सब कुछ गलत है अब आप बड़े हो गए
(52:18) हैं हम तब आप अपने बच्चों को ये सब बात मत बताइएगा तो मैं यही तो बात आपको समझाने की कोशिश कर रहा था कि ह्यूमन बीइंग भी इवॉल्व हो गया है ना हम मीट खा के आपने पिछली बार बात बोली थी कि भैया मीट खा के हम इवॉल्व हो गया है। तो ना अब हम चेंज हो गए हैं ना क्योंकि हमारे 50 60 सालों 70 सालों से जो भी हम खा रहे पी रहे हैं तो अब तो हम नई जनरेशन बन गए ना तो अब तो हम ये खा सकते हैं ना आगे कैसे जनरेशन बन रहे हैं वो भी तो देखो कैसे हो रहे हैं जनरेशन कैसे चार पांच सालों में ओबीज हो रहे हैं बच्चे सभी को चश्मा लग रहा है और आप कह रहे हो जनरेशन हमारा अच्छा हो रहा है कहां
(52:51) अच्छा हो रहा है जनरेशन तो खराब हो रहा है डेटोरिएट कर रहा है हेल्थ वाइज आप देखो सारे बच्चों को डायबिटीज हो रही है ओबेसिटी बहुत जबरदस्त हो रही है बच्चों में चाइल्डहुड ओबेसिटी का रेट बढ़ता जा रहा है। हम चश्मे लग रहे हैं सभी बच्चों को। आप देखो आजकल के बच्चों को चश्मे लगे रहते हैं। पहले नहीं देखते थे आप। क्या-क्या बीमारी हो रही है बच्चों में अभी? बच्चों में यही हो रहा है। विज़न का इशू हो रहा है। चश्मे लग रहे हैं। ओबेसिटी है। फैटी लिवर का प्रॉब्लम है। इवन नॉकनीज़ हो जा रहा है। जॉइंट्स अफेक्ट हो जा रहे हैं उनके। बच्चों में भी।
(53:16) हां। ऐसी स्टडी आई है। अभी स्टडी क्या आ रही है? मैं तो देख रहा हूं। स्टडी में क्या? मैं स्टडीज तो फॉलो ही नहीं करता हूं। मैं तो देखता हूं इंसान। दो चार बच्चों को देखना और लाखों बच्चों को देखना डिफरेंस है ना सर। मैं दो चार बच्चों को नहीं देख रहा हूं ना। मैं तो अभी गुड़गांव आया हूं। हम राइट? आपके साथ पॉडकास्ट कर रहा हूं। रास्ते में देखते हैं लोग। जहां रहता हूं अपने शहर में वहां देखते हैं लोग। बच्चे मीट खा पाएंगे? रेड मीट खा पाएंगे। बच्चे रेड मीट पचा पाएंगे। क्यों नहीं पचाएंगे? डेफिनेटली पचाएंगे। कहां से पचाएंगे? छोटा सा तो पेट होता है
(53:42) उनका। छोटा सा पेट होता है इसलिए मीट भी थोड़ा ही सा खाना होता है। हां। ज्यादा नहीं खाना है। एक केजी थोड़ी खाना है उनको। थोड़ा ही सा खाना है मीट। हम आप अन्नप्राशन सुने हो ना? स्वर्णप्राशन कराया जाता है। एक्सक्लूसिव ब्रेस्ट फीड के बाद जब उसे कोई सॉलिड फूड पिलाया जाता है बच्चे को उसके लिए कुछ सेलिब्रेशन भी होता है। है ना? घर पे आप अन्नप्राशन कराते हो। कुछ गेस्ट को बुलाते हो। उसमें क्या खिलाते हो आप? उसमें रोटी सब्जी खिलाते हो। वही दलिया खिलाते हो। या फिर कुछ उपमा वगैरह ये सब खिलाते हो? हां। गलत खाना खिला दिया आपने। हम अन्नप्राशन का फर्स्ट डे
(54:14) हम आपने गलत खाने को डाल दिया बच्चे में। और वह बच्चा अब उस कार्बोहाइड्रेट के लिए एडिक्टिव हो जाता है। एडिक्टिव एडिक्टेड हो जाता है। एक्चुअली उसी समय पहला दिन अन्नप्राशन का दिन ही मीट खिलाना था उसे। हम आदत बनती है उसी से हैबिट बनता है। पांच साल के बच्चे को नॉनवेज खिलाएंगे ये। पांच साल के बच्चे को नहीं छ महीने एक्सक्लूसिव ब्रेस्ट फीड के बाद जो बच्चा है ना हमारा अन्नप्राशन जब आप करा रहे हो उसको मैं कह रहा हूं मीट खिला। मैं डॉक्टर प्रशांत किशोर को सुन रहा था कुछ दिन पहले की बात। उनका एक वीडियो आ रहा था कि अच्छा आप मटन खाते हो, चिकन
(54:46) खाते हो ये सब खाते हो तो क्या आप उसको काट सकते हो? हम आप खुद काट सकते हो क्या? जब आप खुद काट नहीं सकते, खुद मार नहीं सकते तो फिर खाने के अधिकारी क्यों हो आप? अच्छा इस पे क्या जवाब दोगे आप? देखिए अगर ऐसे कोई मैं उनकी बात को रिलेट कर रहा हूं यहां पे क्योंकि अब आपका जो क्लेम है वो इस तरीके का है। तो अब डॉक्टर प्रशांत सर की बात सुनी जाए डॉक्टर किशले की बात सुनी जाए। मैं उस पर जाता ही नहीं हूं कि आप कर सकते हो या नहीं कर सकते हो या आप मैं मुझे ऐसा लगता है कि जब आपके पास एक सर्वाइवल इंस्टिंक्ट होता है। हर एक जानवर के पास ना एक
(55:23) सर्वाइवल इंस्टिंक्ट है हम कि मुझे क्या करना है और कब खाना है और अगर खाना है और मेरे पास अगर वो अवेलेबल नहीं है हम तो उसके अलावा मैं क्या खा सकता हूं और अगर वो अवेलेबल है तो मुझे क्या करना है उसके साथ ये सर्वाइवल इंस्टिंक्ट होता है और फूड के लिए डेफिनेटली वो सर्वाइवल इंस्टिंक्ट सभी जानवर के पास है हम अब एज अ हम प्रोफेशन हम आप बुचर नहीं हो हम मैं हूं डिजिटल डाई डॉक्टर हम तो मैं ऑलरेडी जब मेरे पास पता है कि मेरे पास आसपास सराउंडिंग एरिया में कोई बुचर शॉप है वो इस काम को कर रहा है जरूरत नहीं है मुझे उस काम को करने की मैं नहीं मार
(55:59) करके काट करके खाऊंगा उस तरह से क्योंकि उस काम को वो कर रहा है उसका वो जॉब है क्यों मैं सब काम मैं ही करूंगा अगर वो बंदा वो काम कर रहा है इस चीज को और वो फीड कर रहा है हम लोगों को जो भी मीट ईटर्स हैं या जो मीट खाना चाहता है तो आप उसे भी बिजनेस दे रहे हो तो उसके भी सेंटीमेंट का बिजनेस का ख्याल रखो यार। खुद खाओ, हेल्दी रहो। पर्पस क्या है? हेल्दी रहना। क्यों? तुम ही क्यों मारोगे उसे? तुम खाओ ना शांति से यार। आपने तो डॉक्टर प्रशांत किशोर की बात का भी तर्क दे दिया एक। हां। हर कुछ तुम ही क्यों करोगे? ऐसा क्यों समझते हो? आप मुझे ही करना है।
(56:34) बिठा दूंगा मैं एक बार। कौन है ये प्रशांत किशोर। डॉक्टर प्रशांत किशोर। नहीं मुझे नहीं पता। मुझे अभी याद नहीं आ रहा। एक्चुअली मुझे याद नहीं आ रहा। सही बता रहा हूं मैं। सो मैं नाम गलत बोल रहा था उनका आचार्य प्रशांत आचार्य प्रशांत की बात कर रहा था मैं यहां पे तो आपने तो उनके पॉइंट में भी तर्क दे दिया हां बिल्कुल तो आपको उन दोनों आप दोनों को सामने बिठा दिया जाए तो कौन विन होगा अब ये तो पब्लिक डिसाइड करेगी किसकी बात में लॉजिकली आर्गुमेंट कौन कर रहा है हम बट मुझे ऐसा लगता है कि आप उनके लेक्चर्स को आप सुनते होंगे YouTube पे और मेरे पास
(57:04) तो रील आता है मैं सिंपली स्क्रॉल कर देता हूं मैं एक्चुअली बियर नहीं कर पाता उनको सुन नहीं सकता हूं ज्यादा क्यों नहीं सुन सकते हैं हम उनको वो जब कभी भी की कुछ लाइंस बोलते हैं ना हम तो बहुत बहुत एशियस दिखता है मुझे एशियस हम मतलब ऐसा लगता है एकदम जल्दी-जल्दी बोलना है कंप्लीट करना है बस हम ठहराव नहीं है आप बात करते हो तो ठहराव नहीं है और मैं मतलब पेशेंस लूज़ कर जाता हूं फिर हम क्योंकि जब तक ठहराव नहीं है ना वो कामनेस नहीं है तो मुझे ऐसा लगता है कि मजा नहीं आ रहा है सुन के क्योंकि जल्दी-जल्दी बातों को बस कंप्लीट करना है उनको ऐसा
(57:37) लगता है कि कोई आर्गुमेंट है कोई डिबेट है मुझे जीतना है हम उनके उनके दिमाग में बस ये रहता है कि कोई मुझसे जीत ना सके। तो जनरल लेक्चर में भी, जनरल स्पीच में भी उनके वो दिखता है और वैसे लेक्चर्स मैं सुन नहीं पाता हूं। क्योंकि मेरा जो मेरा जो बोलने का जो कम्युनिकेट करने का तरीका है वो बड़ा सहज ढंग से मैं बोलता हूं। बहुत शांत तरीके से बोलता हूं और एक सर्टेन पेस को मैं फॉलो करता हूं। कभी जल्दबाजी में नहीं बोलता हूं। हम तो इसलिए मैं सुन नहीं पाता हूं। मुझे पता नहीं ऐसे लोगों के फॉलोवर्स कैसे हो जाते हैं। क्योंकि पब्लिक भी जो है इन जनरल वो
(58:09) एशियस है। तो एक एशियस इंसान पूरी पब्लिक एक एशियस इंसान को सुन रहा है। उसके पास भी पीस ऑफ़ माइंड नहीं है। कार्निवार कार्निवार बन रहा है ना इसलिए तो वो इसलिए हो रहा है क्या सब ये? नहीं प्रॉब्लम खाने का यही है। मैं बता रहा हूं। आपको पता है मेरे पास जनरल ए्जायटी सिंड्रोम डिसऑर्डर के पेशेंट आते हैं। कार्निवो डाइट पे अपनी ए्जायटी को फिक्स कर लेते हैं परमानेंटली। उनकी मेडिसिन बंद हो जाती है एंजाइटटी की कंप्लीटली। दुबई का एक पेशेंट है। हां। उसने कंप्लीटली बंद कर लिया। वन मील अ डे पे है। एक बार खाता है दिन में कार्निवो डाइट
(58:43) और 10 से 12 मेडिसिन चल रही थी उस पेशेंट की। कार्डियोलॉजिस्ट ने बोल दिया कि हार्ट का प्रॉब्लम है। बीटा ब्लॉकर दे रखा था उसे। बंद हो गई मेडिसिन। मैंने बंद किया। बंद करो यार अब इसको। कोई प्रॉब्लम नहीं है तुम्हें हार्ट का। टेस्टिवोल दे सकते हैं हम दो चार पांच 10 तो दिया हुआ है। सारे Instagram हर जगह मैं लगाता हूं। स्टोरीज में डालता हूं। हम राइट और मैंने अपने YouTube पे उनके साथ अपना वो अपनी पर्सनल स्टोरी को अपने शेयर भी किया मेरे साथ लाइव सेशन में तो वो हैं मेरी प्लेलिस्ट में जो जाएंगे जो भी पब्लिक है मेरी YouTube पे जाएं
(59:13) प्लेलिस्ट देखें उसमें लो काब कीटो कार्निवो सक्सेस स्टोरी करके एक मतलब एक प्लेलिस्ट है। अच्छा ओबेसिटी को खत्म करने के लिए दवाइयां हैं। कितनी मेडिसिंस है? दवाइयां अभी आई हैं। में है ओबेसिटी को खत्म करने के लिए मेडिसिन जो मेडिसन है डॉक्टर पे खत्म नहीं होता आपका वेट लॉस होता है और जब भी वेट लॉस होता है तो क्योंकि वेट लॉस जब भी होगा तो उसमें डिफरेंट-डिफरेंट कॉम्पोनेंट्स होते हैं आपके बॉडी वेट में। मसल वेट होता है, बोन वेट होता है, फैट वेट होता है। लार्जली यही तीन वेट है। तो अब आप अगर लूज कर रहे हो, वेट लूज़ कर रहे हो तो उसमें
(59:48) क्या लॉस हो रहा है? ये कोई कंसीडर ही नहीं करता। सिंपली उन्हें लगता है कि बॉडी वेट लूज कर रहे हैं। कितना बड़ा मार्केट हो गया ओबेसिटी की दवा दवाइयों का भी बहुत बड़ी मार्केट है यह तो पीसीओएस पीसीओडी डायबिटीज का कितना बड़ा कोई मेडिसिन नहीं होता पीसीओएस का कोई मेडिसिन नहीं है एक्चुअली कोई मेडिसिन नहीं है कोई मेडिसिन नहीं है मेडिसिन नहीं दी अभी तो फिर कैसे ठीक करते हैं मेडिसिन लोग दे रहे हैं प्रिस्राइब कर रहे हैं बट वो पीसीओएस में वर्क नहीं कर रहा है जैसे आप मेटफॉर्मिन देते हो पीसीओएस के पेशेंट्स में क्योंकि आप बोलते हो पीसीओएस जो है
(1:00:14) इंसुलिन रेजिस्टेंस का प्रॉब्लम है तो आप मेटफॉर्मिन दे के इंसुलिन सेंसिटाइज करते हो वो प्रॉब्लम इंसुलिन रेजिस्टेंस का एक्चुअली क्या रहेगा वो बेसिकली कार्बोहाइड्रेट इंटेक का प्रॉब्लम है। हम आप कार्ब्स लेना बंद करो। हम अल्टीमेटली इंसुलिन रेजिस्टेंस का जो प्रॉब्लम है वो अल्टीमेटली ठीक होगा। तो इंसुलिन को सेंसिटाइज करने की आपको जरूरत ही नहीं है। आप अगर कार्ब्स नहीं खा रहे हो हम तो वो सॉलशन मिल गया आपको। क्यों आपको कार्ब्स खिला करके इंसुलिन को सेंसिटाइज करना वो उससे प्रॉब्लम का हल नहीं निकलता है। कभी नहीं निकलता। इसलिए मेटफॉर्मिन दे
(1:00:44) के कोई भी पेशेंट बैठा नहीं हो पाता। पीसीओएस का पेशेंट कभी नहीं। पॉसिबल ही नहीं है। इंसुलिन को सेंसिटाइज करके ही अगर सब कुछ ठीक हो जाए तो फिर डायबिटीज भी रिवर्स हो जाए हो जानी चाहिए। मेटफॉर्मिन खिला के कहां हो रही है डायबिटीज रिवर्स किसी की। सबका ब्लड शुगर बढ़ा हुआ है। क्योंकि प्रॉब्लम सेंसिटाइज करने का है ही नहीं। वो सॉल्यूशन सेंसिटाइज करने से नहीं होगा। प्रॉब्लम है रेजिस्टेंस जब है तो आपको कार्ब्स नहीं खाना है। तो इंसुलिन जब काम नहीं कर रहा तो आप उसके पीछे क्यों लगे हुए हो कि अब हम इससे काम करवाएंगे। अरे भाई वो नहीं करना चाह रहा है आपकी बॉडी के
(1:01:14) लिए काम। राइट? हम् तो आप कार्ब्स खिलाते हो फिर बोलते हो अब हम इसको काम करवाएंगे इंसुलिन को ताकि शुगर आपका ना पड़े नहीं करेगा स्टिल मत खिलाओ ना कार्ब्स कार्ब्स क्यों खाना है आपको तो आप फिक्स किसको करोगे ब्लड शुगर को आप फिक्स करो डायरेक्टली इंसुलिन रेजिस्टेंस को छोड़ दो वो उसी तरह रहने दो क्योंकि रेजिस्टेंस है और रेजिस्टेंस रहते हुए अगर आप कार्ब्स खिलाओगे तो ही शुगर बढ़ेगा सिर्फ और सिर्फ रेजिस्टेंस के रहने से आपका ब्लड शुगर नहीं बढ़ेगा रेजिस्टेंस होते हुए आप कार्ब्स खाते हो जो अल्टीमेटली ग्लूकोस में कन्वर्ट होता
(1:01:44) तभी तो आपका शुगर बढ़ता है। करेक्ट। तो आप खिला क्यों रहे हो वो? और खिला करके फिर बोलते हो अब हम सेंसिटाइज करेंगे इंसुलिन को मेटफॉर्मिन देके। हम वो सॉलशन नहीं है। अच्छा जैसे आप आप खाते हो रेड मीट खाते हो पूरा मतलब तो फिर यहां पे तो इंटरमीडिएट फास्टिंग फास्टिंग करना तो फिर तो वो भी अलाउ वो भी खत्म हो गया कि आपको फास्टिंग भी नहीं करना है या फास्टिंग इजेंट। फास्टिंग इंपॉर्टेंट है लेकिन कॉन्टेक्स्ट आपको देखना पड़ेगा कि आपकी डाइट क्या है। हां अगर आपकी डाइट मीट है तो फास्टिंग तो ऑटोमेटिकली हो जाएगी। करनी कहां है आपको? अच्छा फिर करनी ही नहीं है। फास्टिंग भी
(1:02:15) नहीं करनी है। मैं तो दिन में एक बार खाता हूं। 22 घंटे का फास्टिंग मैं डेली कर रहा हूं। यहां लोग इंटरमिटेंट फास्टिंग वाले लोग घड़ी देख के अरे 14 घंटा 16 घंटे हो गए। चलो अब खाते हैं। टाइम आ गया खाने का। मेरे पास ये फीलिंग नहीं आती कभी कि 20 घंटे हो गए। अब खाना चाहिए मुझे। मैंने नेचुरली जब मुझे हंगर आता है मैं खा लेता हूं। आपको 6 घंटे में भी आया तो भी खाओगे। नहीं 6 घंटे में कभी नहीं आता। 6 घंटे में कभी नहीं आता। कभी नहीं आता। 15 घंटे में? 15 घंटे में भी नहीं आता। मेरा यूजली 20 घंटे के बाद ही आता है और 24 घंटे के बाद
(1:02:41) आता है तो मैं 24 घंटे बाद खाता हूं। नेचुरल हंगर आता है। अब हंगर आता है। अपने आपको भूख को पहचान लिया आपने। बॉडी ने पहचान लिया। अच्छा मैंने नहीं पहचाना है। बॉडी समझ गई है कि एक्चुअली जब इस भूख होगी तो बॉडी सिग्नल मुझे दे देगी। हां। और बॉडी उस तरह से डिज़ हो गई है। क्या सिग्नल होती है? मतलब कैसे क्या लगता है कि अभी पेट में कैसा आवाज आती है इसे गुडगड़? मुझे ऐसा लगता है रियल हंगर वो है जो आप सेम खाने को सेम इंटेंसिटी के साथ खाओ। सेम इंटरेस्ट के साथ खाओ। डेली बेसिस पे वो रियल हंगर है। जैसे मुझे कोई प्रॉब्लम नहीं है डेली एग्स खाने में,
(1:03:11) डेली मीट खाने में। ये हंगर है। मुझे कभी बोरडम नहीं होता। पर डाइट महंगी भी तो बहुत है सर। ये तो गरीब आदमी कितने कैसे खाएगा? मैं 30 अंडे खाता हूं। 30 अंडे का कॉस्ट कितना है? ₹250। हम एक ट्रे अंडे अगर आप खाते हो दिन में एक बार ₹250। ₹250 पूरे दिन आप नहीं खा सकते हो? नहीं लगा सकते हो। इन्वेस्ट नहीं कर सकते हो ₹250। कोई भी वेजिटेरियन डाइट आप बताओ जो ₹250 में आपका पूरा पेट भर दे पूरे दिन में। पॉसिबल है। तीन बार खाना पड़ता है वैसे तो। हां। तो तीन बार जब आप खाओगे तो ₹250 से ज्यादा बढ़ेगा या नहीं बढ़ेगा। ऐसा नहीं खा जाते
(1:03:42) तो बस हो गया। कौन सी महंगी? महंगी डाइट आप कर रहे हो। मुझे बोल रहे हो बहुत सर। महंगी खाना खाते हो। महंगी का डाइट है आपकी। नहीं है महंगा खाना ये। चलो फास्टिंग वाला तो सवाल ही खत्म हो गया। फास्टिंग वाली बात ही नहीं रही। इसमें स्लीप कितना इंपॉर्टेंट है? मतलब जैसे आप ये इसमें या फिर आप इसमें 2 घंटे 3 घंटे सो गए। 8-10 घंटे का स्लीप इंपॉर्टेंट है खाना खाने में भी। यह स्लीप के अराउंड भी ना बड़ा कोई ऐसा डेफिनेटिव फिगर मैं नहीं दे सकता हूं कि आपको इतना सोना ही सोना है। मुझे ऐसा लगता है यह भी चेंज होता है डे बाय डे बेसिस पे।
(1:04:11) पर यह तो बताया ना 9 घंटे सोना ही सोना है। 8 से 9 8 घंटे की नींद तो ऐसी होनी चाहिए कि वी हैव बिना डिस्टर्ब किए। हां मतलब इन जनरल आप अगर बहुत ज्यादा थके हुए हो। आप फील करोगे कभी कि वर्क लोड बढ़ गया हो। मेंटल फटीग अगर आ गया हो तो 8 घंटे 9 घंटे भी आपको कभी-कभी सोने की जरूरत महसूस होती है और आप सोते हो और अच्छा फील करते हो। हम लेकिन कभी-कभी आपको ऐसा लगता है 6 आवर्स भी इनफ होते हैं। हम तो मुझे ऐसा लगता है यह स्लीप को लेकर के इतना ज्यादा मुझे डिबेट करने का कोई मतलब नहीं बनता है। इन जनरल बस इतना जान लो कि ऑन एन एवरेज
(1:04:40) अगर आप छ से 7 घंटे की स्लीप ले रहे हो हम अलोंग विद गुड क्वालिटी स्लीप तो वो इनफ होता है मैक्सिमम लोगों के लिए। डॉक्टर किस लिए सर? राजू श्रीवास्तव, सिद्धार्थ शुक्ला, पुनीत राजकुमार, डॉक्टर हाथी जो इतना तारक मेहता का उल्टा चश्मा का जो सीरियल किया करते थे केके सिंगर और अभी तो रिसेंटली सुष्मिता सेन को भी हार्ट अटैक आया है और ये जिनका नाम लिया वो तो सब अमीर है। सब डाइट फॉलो करते हैं। सबके पास डाइटिशियन है, न्यूट्रिशन है। सबके पास सब कुछ है। फिर भी हार्ट अटैक से मर गए। कैसे? आप अगर इन सारे सेलिब्रिटीज में देखोगे तो कॉमन डिनोमिनेटर क्या है? वही
(1:05:27) डाइटिशियन न्यूट्रिशनिस्ट जिनका आप नाम ले रहे हो पैसे वाले हैं सब कुछ है। किसी भी इन सेलिब्रिटीज के पास कोई भी वैसा डाइटिशियन न्यूट्रिश है जो जो जिसके पास एक्चुअल विज़डम है विथ रिगार्ड्स टू हेल्थ न्यूट्रिशन ह्यूमन मेटाबॉलिज्म नहीं है। क्यों? क्योंकि वह सारे डाइटिशियन न्यूट्रिशनिस्ट वो उसी एकेडमिक इनडॉक्टिनेशन का शिकार हैं। जिसे बोला गया है कि कार्ब्स आर हेल्दी। कॉम्प्लेक्स कार्ब्स आपको लेना चाहिए। सिंपल कार्ब्स नहीं लेने चाहिए। वही वगैरह फालतू की चीजें हैं जो जिसके मैं अगेंस्ट हूं टोटली। तो इनमें से कोई भी डाइटिशियन
(1:06:03) न्यूट्रिशनिस्ट अपने रेस्पेक्टिव सेलिब्रिटीज को स्पीशीज स्पीशीज स्पेसिफिक डाइट नहीं दे रहा था। इनमें से कोई भी सेलिब्रिटीज का अब आप नाम ले लो। कोई भी 70 टू 80% मीट नहीं खा रहा होगा। यह मैं दावा करता हूं। अपनी डाइट में। सुष्मिता सेन तो खाते होंगे नहीं खाते होंगे। आई डोंट नो बट नहीं खाते होंगे नहीं खाते होंगे अगर वो खा रहे होते तो उनका नाम आ जाता मीडिया में कि भाई सुष्मिता सेन कार्नवो डाइट करती हैं क्योंकि कोई भी चीज जो सिस्टम के इनलाइन नहीं है हम वो न्यूज़ में आ जाता है हम राइट वो छिपता नहीं है आप देखते होंगे कीटो डाइट कोई करता है और अगर कीटो डाइट
(1:06:45) करते हुए एक महीने में डेथ हो जाए किसी की तो वो न्यूज़ में आ जाता है कीटो डाइट की किडनी फेल हो गई हम क्यों अगर हक आप डाइट पे किडनी फेल होती है तो कभी नहीं आता न्यूज़ में कि हाई कार्ब डाइट पे था हार्ट अटैक हो गया कभी आता है न्यूज़ में नहीं आता कीटो डाइट करते हुए न्यूज़ में आ जाता या कार्निवो डाइट करते हुए किसी की डेथ हो जाए तो न्यूज़ में आ जाता है तो क्योंकि न्यूज़ में नहीं आया इसका मतलब कार्निवो डाइट नहीं कर रहे थे अगर वो कार्निवो डाइट करते हुए इनका हार्ट अटैक होता तो न्यूज़ में आ जाता हम नहीं कर रहे थे वो मीट नहीं खा रहे थे 80%
(1:07:15) कोई मीट नहीं खा रहे थे कोई भी नहीं खा रहा था अगर खा रहे होते तो न्यूज़ में आ जाता और अगर उसको खाते हुए भी अगर हार्ट अटैक आता है तो मैं ब्लेम स्टिल नहीं करूंगा उस डाइट को क्योंकि क्योंकि आपने कब से शुरू किया? लास्ट के कुछ महीनों से। हम बचपन से आप क्या खा रहे हो? हाई कार्ब डाइट। तो जो डैमेज हुआ वो सालों का डैमेज है। तो अल्टीमेटली सारा प्रॉब्लम उससे आ गया था। अब आपने जब ये डाइट शुरू किया तो वो बेसिकली आप टेकिंग टाइम बम थे और वो तभी फटा जब आपने खाने में वो डाइट शुरू किया। तो कॉजलल यहां पे आप लिंक एस्टैब्लिश करते हो। लेकिन कॉजलल ये है
(1:07:46) नहीं ये डाइट। क्योंकि जो लंबे समय से आप डाइट ले रहे थे वह कहीं आपको डैमेज किया और कोइंसिडेंटली आपने शुरू किया इस डाइट को उस वक्त जिस समय आपको हार्ट अटैक होना था तो इट्स जस्ट अ मैटर ऑफ कोरिलेशन यहां पे कॉजेशन प्रूव नहीं हो सकता तो कार्निवो डाइट अगर करते हुए किसी को हार्ट अटैक हो रहा है तो आप सबसे पहले ये पूछो आप कब से कर रहे हो है ना तो हमेशा यही बात आएगी कि एक साल 2 साल हुए एक साल दो साल में हार्ट डिजीज नहीं होता किसी को अगर वो हो रहा है हार्ट डिजीज किसी को हुआ है तो डेफिनेटली वो जो बचपन से हाई कार्ब डाइट पे है
(1:08:19) जो इंसान जो सीरियल्स और ग्रेंस खा रहा है वो प्रॉब्लम है तो वो तो कभी आपने अकाउंट में लिया नहीं आप क्या ले रहे हो कि एक साल का खाने वो डाइट प्रॉब्लम कर गया किसी को ऐसा नहीं होता है तो ये सारा कॉमन डिनोमिनेटर क्या है कि वो सेम वही फालतू की बातें जो बोलते हैं कि यही चीजें खाओ फाइबर खाओ फ्रूट्स वेजिटेबल्स खाओ डेली हैंडफुल ऑफ नट्स खाओ ये सारे एडवाइस वही दे रहे हैं तो इनके पास पैसा पैसा है लेकिन विज़डम नहीं है किसी के पास भी ना ही उन सेलिब्रिटीज के पास है और ना ही उनके कोचेस के पास है क्योंकि जो सेलिब्रिटीज हैं उनका तो ये फील्ड ही नहीं है तो आप
(1:08:57) उनसे एक्सपेक्ट नहीं कर सकते उनको नहीं पता होगा लेकिन जो सेलिब्रिटीज के जो डाइटिशियन न्यूट्रिशनिस्ट हैं उनको भी कुछ नहीं पता है ना अगर आप ये दावे के साथ कह सकते हो हां नहीं पता है उन्हीं उन्हीं के सारे क्लाइंट्स तो मेरे पास आते हैं वैसेवैसे क्लाइंट्स तो आते हैं मेरे पास मैं अभी आपको बता दूं एक लाइव भी लाइव डिबेट किया हुआ था मैंने उनके साथ। उनके उनकी एक बहुत बड़ी कंपनी है। उनके पेशेंट्स आते हैं मेरे पास कि सर वेट लॉस नहीं होता है मेरा। उनकी कोचिंग में ऑनलाइन कोचिंग होती है बट वेट लॉस नहीं होता है। और मैं कंसल्ट करता हूं ऐसे-ऐसे लोगों से। तो
(1:09:37) अल्टीमेटली मैं लास्ट रिसोर्ट हूं। इसलिए वैल्यू नहीं है। बहुत ज्यादा लोगों को अभी पता नहीं है मेरे बारे में। आने वाले 5 से 10 सालों में सबको पता लग जाएगा हम कि मैं क्या चीज हूं। तो अल्टीमेटली प्रॉब्लम वही है कि उसी कन्वेंशनल चीज को आप प्रैक्टिस करते हुए आप ये एक्सपेक्ट नहीं कर सकते हम कि आपको कुछ बेटर रिजल्ट मिल जाएगा। आप सेलिब्रिटी हो या प्राइम मिनिस्टर हो, प्रेसिडेंट हो कोई फर्क नहीं पड़ता। खाना सभी वही घटिया खाना खा रहे हैं। कोई डाइट अच्छी नहीं ले रहे। कोई खा ही नहीं रहा अच्छे खाना। अच्छा खाना कोई खा ही नहीं रहा। और खाना तब तक
(1:10:07) अच्छा नहीं है जब तक आपकी डाइट में 80% 90% मीट ना हो। यही मैं हर बार कहता हूं और आखिरी सांस तक यही बात बोलूंगा। और वो भी रेड मीट। रेड मीट में भी क्वालिटी होती है क्या? अच्छा रेड मीट की क्वालिटी मतलब ये रेड मीट अच्छा है ये। वो मैटर नहीं करता बहुत ज्यादा। रेड मीट अपने आप में ही अच्छा होता है। आप उसे कुछ भी खिलाओ। चाहे वो जानवर कुछ भी खा रहा हो। वो कुछ भी खा रहा हो। उससे कोई फर्क नहीं पड़ता। वो प्लास्टिक की पॉलिथीन ही खा रहा हो। नहीं खा सकते ना। प्लासा पॉलिथीन ले खाने का तो खा लेते हैं। तो प्लास्टिक खाना उनका प्लास्टिक नहीं है।
(1:10:37) वो खाने के साथ प्लास्टिक चला जाता हो। वो स्टिल सिर्फ प्लास्टिक नहीं खा रहे हैं। समझ रहे हैं? वो अगर कचरे में कुछ खा रहे होते हैं तो उसके साथ प्लास्टिक चला जाता है। या फिर कचरे में उस प्लास्टिक में कुछ लगा होता है उसकी वजह से वो प्लास्टिक को खा लेता है। हम पर्पसफुली प्लास्टिक नहीं खाता कोई भी। ठीक है? तो जो भी खाना जो भी जानवर अगर कोई भी प्लांट बेस्ड फूड को ले रहा है जैसे कॉर्न को ले रहा है, स्वाई को ले रहा है तो उस जानवर को खिलाओ। सोया और कॉर्न और उस जानवर को फिर खा लो। आप क्या करते हो? आप जानवर को नहीं खिलाते हो और आप डायरेक्टली कॉर्न और सोया आप खा
(1:11:15) लेते हो। वो प्रॉब्लम हो गया। उससे बेटर ऑप्शन यह है कि आप उसी सोया को कॉर्न को आप या तो पिग को खिलाओ या तो किसी रेमिनेंट मैमल को खिलाओ और देन उस मीट को खाओ आप। वो उसकी बॉडी में जाकर के न्यूट्रिशन बन जाता है ह्यूमन बीइंग्स के लिए। वह डायरेक्टली आपके लिए कंप्लीट न्यूट्रिशनल प्रोफाइल तैयार नहीं होता कभी भी। मैं तो ऑडियंस से रिक्वेस्ट करता हूं कि आप लोग कमेंट करके बताओ कि वेज वेज डाइट अच्छी है कि नॉनवेज डाइट अच्छी है। क्योंकि इतना बड़ा डिबेट चल रहा है। अभी हम आचार्य प्रशांत जी की भी बात यहां पे कर रहे थे कि वो लोग वो बोलते हैं कि
(1:11:50) मारना नहीं चाहिए, खाना नहीं चाहिए। यहां पे एक डॉक्टर एमबीबीएस किए हुए चीजें बता रहे हैं कि क्योंकि इनके पास भी बहुत सारे पेशेंट आए होंगे। पांच साल से इन्होंने अभी प्रैक्टिस कर रहे हैं। तो आप लोग ही कमेंट करके बता दो कि वेज डाइट अच्छी होती है, नॉनवेज डाइट अच्छी होती है? आपको क्या खाना पसंद है? आपको अच्छा आप वेज डाइट पे हो आपको कोई बीमारी नहीं है। यह लिख देना या फिर आप नॉनवेज डाइट पे हो या आपको कोई बीमारी नहीं है। नॉनवेज डाइट पे हो और बीमारी है तब भी लिख देना और वेज डाइट पे हो और फिर बीमारी है तब भी लिख देना। अगर नॉनवेज
(1:12:19) वालों ने लिख दिया कि सर बीमारी है हम तो हार्ड कोर खाते हैं फिर क्या करेंगे बताओ। मैं तो बोल ही रहा हूं। यह हार्ड कोर नॉन वेजिटेरियन कुछ नहीं होता। हम या तो आप कार्नवोर रहो और या तो फिर वेजिटेरियन रहो। यह बीच-बीच वाला गेम मत करो कि चार पीसेस मटन का खाएंगे हफ्ते में दो से तीन बार। उसके बाद खुद को बोलेंगे हम नॉन वेजिटेरियन है फिर भी बीमार हैं। इसलिए वेजिटेरियन डाइट हेल्दी है। ये काम तो करना ही नहीं है बिल्कुल। और उसके बाद भी कुछ आएंगे लो आईक्यू वाले लोग और कमेंट में सेम कमेंट करेंगे कि मैं नॉनवेज खाता था। बीमार हो गया। अब
(1:12:47) वेजिटेरियन डाइट में हूं। बेटर फील कर रहा हूं। तो कम खा रहे थे। ज्यादा खाना था। बंद नहीं करना था उसे। कम खा रहे थे। मिक्स करके खा रहे उसकी वजह से प्रॉब्लम हुई तुम्हें। इसलिए बढ़ा दो। कभी भी ज्यादा मीट खा के कोई बीमार नहीं होता है। आप जब भी मीट खाते हो बीमार हो रहे हो इसका मतलब मीट आप कम खा रहे हो इसलिए बीमार हो रहे हो। और ज्यादा खाना क्या होता है कि जब आप मीट खाओ तो कुछ और चीज खा ना सको। वो हुआ। फ्रूट्स भी मत खाओ। ड्राई फ्रूट्स भी मत खाओ। मत खाओ ना वो सब। क्यों खाना है? ड्राई फ्रूट्स भी नहीं खाए। ड्राई फ्रूट्स
(1:13:20) तो बिल्कुल नहीं खाना चाहिए। ड्राई फ्रूट्स के अगेंस्ट तो आपके चैनल पे भी एक आए हुए थे। और आपके अगेंस्ट ड्राई फ्रूट्स मैं भी अगेंस्ट हूं। एक्चुअली वो वहां पे वो बात उनकी सही है। हालांकि बहुत सारी बातें गलत है उनकी। मैक्सिमम बातें गलत ही है। एक ड्राई फ्रूट्स वाला बात उनका सही है। क्यों सही है? क्योंकि जो नट्स होता है ना वो बेसिकली आप जो नट्स खाते हो ये बेसिकली सीड्स होता है। हम और वो रिप्रोडक्टिव ऑर्गन है प्लांट का। हम बहुत टॉक्सिक होता है वो। क्योंकि कोई भी प्लांट्स वो चाहता नहीं कि आप उसके रिप्रोडक्टिव सिस्टम को खा लो।
(1:13:52) हम प्लांट्स भी अपने जनरेशन को बढ़ाना चाहता है। हां। और इसलिए वह अपने सीड्स में टॉक्सिंस को रखता है ताकि वो डिसरेज कर सके आपकी ईटिंग हैबिट को। आप उसे खा ना सको। तो वो उस तरह से डिफेंस मैकेनिज्म है उसका वो अपना। काजू पता काजू बादाम सब कुछ एवरीथिंग किशमिश जो भी सीड्स हो नट्स हो कुछ भी हो। ये सब कुछ रिप्रोडक्टिव ऑर्गन है। आज तो ये भी चल रहा है। सनफ्लावर सीड्स खाओ और सोयाबीन नहीं। सनफ्लावर सीड्स, वाटरमलन, सीड्स ये सीड्स भी खाओ। सीड साइकिलिंग खुद खाने लग गया अभी। सीड साइकिलिंग करो। हां। नहीं नहीं मैं आप उनकी बात को मानिए
(1:14:30) जो वायरल हुए थे आपके चैनल के थ्रू। मैं मान ली उनकी बात। हां। और अब तो मैं भी कह रहा हूं। बादाम भिगोना मतलब हर घर की परंपरा बन गई है। मतलब वो परंपरा है। जैसे आप कहीं जाते हो तो तिलक लगा। परंपरा परंपरा। तो आप सुबह आपको बादाम भिगो के रात में भिगो के सुबह छिलका उतार के खाना। इट्स अ परंपरा। हम हम वो परंपरा ही धर्म है। तो आप कहो धर्म छोड़ दे। धर्म से हेल्थ नहीं आ रहा ना। अगर धर्म फॉलो करने से हेल्थ आता तो मैं भी वही धर्म फॉलो करता और मीट नहीं खाता। फिर क्या होता है मतलब बादाम में क्या है? मतलब देखिए बादाम में ऐसा कुछ नहीं है जो
(1:15:04) आपकी बॉडी को चाहिए और वो मीट खाने से ना मिल रहा हो। बादाम से दिमाग बढ़ता है सर। बुद्धि बढ़ती है। कुछ नहीं ऐसा होता है। कोई एविडेंस नहीं है ना उसका। कैसे आप इस चीज को कैसे प्रूव? पांच बादाम खाने से बुद्धि बढ़ती है। क्यों? अगर चार खाएंगे तो नहीं बढ़ेगी या छह खा लेंगे तो नहीं बढ़ेगी। नहीं पांच कहां से आया ये फिगर कहां से आया वही मेरा सवाल है कोई एक्सपेरिमेंटल डाटा है आपके पास जो ये प्रूव करती है ये तो फिर मैं भी आपसे पूछूंगा ना कि आपका एक्सपेरिमेंटल डाटा बताओ मैं मैं एविडेंस लेके नहीं मैं अपने चीजों को लेकर के एविडेंस के लिए बात ही नहीं
(1:15:32) करता हूं मैं कहता हूं आपके पास प्रॉब्लम है जब कोई चीज वर्क नहीं कर रहा तो आपको ये ट्राई करना चाहिए मैं ये नहीं बोलता हूं कि मेरे पास बहुत एविडेंस है मैं एविडेंस पे बात ही नहीं करता हूं अरे आप पेशेंट हो आप अपनी बीमारी का सॉल्यूशन ढूंढो यार मेरे से एविडेंस क्यों मांगते हो हम अब आपको रिसेंटली मैं बता रहा हूं मेरे मेरे पास एक सीनियर डॉक्टर आए डैमेटोलॉजिस्ट हम सीकेडी के पेशेंट है वो हम क्रॉनिक किडनी डिजीज के पेशेंट जो इंसान सिर्फ और सिर्फ कार्ब्स खा रहा है पूरे दिन कार्ब्स खा रहा है एवरी टू टू थ्री आवर्स कार्ब्स खा रहा है
(1:16:02) पेशेंट बेसिकली पेशेंट है वो डॉक्टर मैं हूं पब्लिक के लिए मैं बोल रहा हूं कि वो डॉक्टर लेकिन मेरे लिए वो स्टिल पेशेंट है हम तो उन्होंने मेरे से कंसल्ट किया कि उसको उनको कोई फिजियोथरेपिस्ट ने मेरा रेफरेंस दिया उसके बाद वो मेरे पास आए मेरे से कंसल्टेशन लिया फिर प्लान भी लिया उन्होंने उन्होंने और उनको ब्लड शुगर उनका बार-बार कम हो रहा था। जैसे ही वो चार से पांच घंटे का गैप देते थे अपने मील्स के बीच उनका ब्लड शुगर लो हो जाता है। हम और क्रॉनिक किडनी डिजीज के पेशेंट में कभी भी इस तरह से ब्लड शुगर लो नहीं होता है। अगर आप डायबिटिक नहीं हो तो
(1:16:34) अगर आप डायबिटीज के लिए कोई मेडिसिन नहीं खा रहे हो तो हम बट उनका लो हो रहा था। क्यों? क्योंकि वो 5 घंटे बाद खाना ही नहीं खाया उन्होंने। तो उसके लिए वो एव्री टू टू 3 आवर्स कुछ-कुछ खाते रहते थे। और यह सालों से परंपरा चल रहा था उनका जिस परंपरा की आप बात कर रहे हो वो परंपरा निभा रहे थे। तो जब वो मेरे प्लान में आए तो मैंने बोला ये क्या प्रॉब्लम है भाई कि जब भी आप खाना नहीं खाते हो तो आपका ब्लड शुगर लो हो जाता है। आप नॉर्मली सोचो क्या आपके साथ होगा कभी ऐसा कि आप अगर 6 घंटे खाना ना खाओ तो आपका ब्लड शुगर 40 हो जाए या 50 हो जाए।
(1:17:04) नहीं होगा। नहीं होगा। क्रॉनिक किडनी डिजीज के पेशेंट में भी ये नहीं होगा। हालांकि ठीक है किडनी उनकी अफेक्टेड है लेकिन क्योंकि वो मेडिसिन नहीं खा रहे हैं डायबिटीज के लिए तो स्टिल उनमें भी नहीं होता है क्योंकि क्रॉनिक किडनी डिजीज के पेशेंट के बारे में मुझे पता है हाइपोग्लाइसीमिया इतना भी कॉमन नहीं है कि आप 5 घंटे खाना नहीं खाओगे तो आपका ब्लड शुगर लो हो जाएगा लेकिन उनका लो हो रहा था तो मैंने बोला आप एक एमआरआई करवा लो हम क्योंकि क्रिएटिनिन पेशेंट का छह है ऑलरेडी किडनी फंक्शन टेस्ट का क्रिएटिनिन जो एक पैरामीटर होता है उनका सिक्स था तो
(1:17:35) क्रॉनिक किडनी डिजीज के पेशेंट है तो अब सीसीटी हो नहीं सकता डाई आप डाल नहीं सकते। तो मैंने बोला कि एक एमआरआई करा लो और एंडोक्रिनोलॉजिस्ट से आप चेक करा लो। आपको पैंकक्रिएटिक बीटा सेल का हो सकता है ट्यूमर हो जो ट्यूमर बेसिकली एक्सेसिव इंसुलिन का प्रोडक्शन कर रहा हो और जब आप खाना नहीं खाते हो एक स्पेस आता है मील के बीच में तो एक्सेस इंसुलिन की वजह से आपका ब्लड शुगर लो हो जाता है। हम अगर नॉर्मली आपका ट्यूमर नहीं होगा तो इंसुलिन कितना बनना है वो सारा कुछ आपका वेल रेगुलेटेड होता है। यहां पे ट्यूमर हो गया तो अब सिस्टम जो है अनरेगुलेटेड वे
(1:18:07) में इंसुलिन बनाए जा रहा है। और जैसे ही आप खाना नहीं खाते हो तो आपका एक्सेस इंसुलिन की वजह से ब्लड शुगर कम हो जाता है। तो मैंने बोला आप चेक करा लो। वो डॉक्टर ने डिनाई कर दिया। बोला मैं क्यों कराऊंगा? हम मेरे प्लान के तुम पैसे वापस करो। हम सोचिए इतना एोगेंट होता है मेडिकल डॉक्टर साहब। ऐसे ही मैं अगेंस्ट नहीं हूं इन डॉक्टर्स के। मैंने बोला आप पहले टेस्ट कराओ। हम और टेस्ट में अगर आता है कुछ ऐसा तो उस टेस्ट के अकॉर्डिंग जो नेक्स्ट प्लान ऑफ़ एक्शन होगा उसके अकॉर्डिंग हम फिर डाइट को कंटिन्यू करेंगे। और अगर आप टेस्ट नहीं कराओगे तो मैं यह डाइट लो कार्बोहाइड्रेट
(1:18:42) डाइट आपके लिए रेकमेंड नहीं कर सकता हूं क्योंकि इस प्लान पे आप सस्टेन नहीं कर पाओगे क्योंकि आपका ब्लड शुगर लो हो रहा है। लो कार्ब डाइट लो कार्ब डाइट क्योंकि कार्निवो डाइट अल्टीमेट लो कार्ब डाइट है क्योंकि आप कार्ब्स नहीं खा रहे हो प्लांट बेस्ड फूड नहीं खा रहे हो तो कार्बोहाइड्रेट नहीं जा रहा आपकी बॉडी में तो मैंने बोला इस डाइट पे आप सर्वाइव नहीं कर पाओगे है ना हेल्थ इंप्रूवमेंट तो दूर की बात है पहले आप कॉज को आइडेंटिफाई तो करो कि लो ब्लड शुगर क्यों हो रहा है आपका आप डॉक्टर होते हुए आपके पास यह क्लिक नहीं किया कि
(1:19:09) आपका ब्लड शुगर लो हो रहा है तो आपको इंसुलिनोमा का टेस्ट कराना चाहिए इंसुलिनोमा एक कंडीशन है पैंकक्रिएटिक बीटा सेल का ट्यूमर हो जाता है तो आप उसको रूल आउट करो पहले कंफर्म करो हाइपोग्लाइससीमिया के कॉज को आप सिंपली आप गधे की तरह आप खाए जा रहे हो दो-ती घंटे पे और जब मैं बोल रहा हूं कि आप टेस्ट कराओ आप जब भी किसी डॉक्टर से आप चेक करते हो तो डॉक्टर के एडवाइस को आपको फॉलो करना है। तो मैंने एक सिंपल सी बात बोली उनको आप डॉक्टर होगे अपनी जगह। आप मेरे पास जब आए हो तो आप मेरे लिए एक पेशेंट हो एंड आई एम योर कंसल्टिंग डॉक्टर नाउ।
(1:19:39) नहीं तो अभी आपने यहां पे कार्ब की बात करी तो कार्ब भी जरूरी हो गया ना फिर तो किसी बंदे के लिए। कार्ब जरूरी नहीं हो गया। फिर कार्ब जरूरी इसलिए हो गया क्योंकि उनकी बॉडी नॉर्मल फिजियोलॉजी को फॉलो नहीं कर रही। अभी ट्यूमर हो गया ना। अच्छा। तो आप अगर ट्यूमर हो गया तो आप उसे पहले आइडेंटिफाई तो करो। कंफर्म तो करो। तो नॉर्मल फिजियोलॉजी ये नहीं है ना कि आप अगर 4 घंटे नहीं खाओगे तो आपका ब्लड शुगर लो हो जाएगा। ये नॉर्मल चीज नहीं है। कोई भी नॉर्मल इंसान अगर 4 घंटे नहीं खाएगा उसका ब्लड शुगर 40 हो जाएगा तो ये नॉर्मल चीज है। नहीं
(1:20:06) आप कार्ब्स खाओ नहीं खाओ। आपका ब्लड शुगर लो नहीं होना चाहिए। तो आप कार्ब्स खा के उसको मास्क किए हुए हो उस प्रॉब्लम को और जब मैं टेस्ट के लिए एडवाइस कर रहा हूं तो आप अपना ईगो दिखा रहे हो मुझे। तो मैंने बोला आपका प्लान का फीस तो वापस होगा नहीं। वो तो नॉन रिफंडेबल होता है। हम आप टेस्ट कराओ। टेस्ट के बाद हम देखते हैं क्या आता है रिपोर्ट में। उसके बाद जैसा होगा आपका जो रिमेनिंग डेज होगा इस प्लान पे आप डाइट पे कंटिन्यू करना क्योंकि कॉज को अगर आप फिक्स करोगे तभी तो ये डाइट पे आप सस्टेन कर पाओगे। तो ऐसा कभी आपके साथ हुआ क्या? आपने कभी वापस किसी को
(1:20:35) वेजिटेरियन डाइट में शिफ्ट कर दिया हो नॉनवेज वगैरह। कभी नहीं करता हूं। कभी नहीं करता हूं मैं। अगर वेजिटेरियन डाइट पे मुझे लाना ही होगा तो मैं उनको लूंगा क्यों? अब इस पेशेंट कुछ बाद में कुछ बीमारी पता चली हो कि यार ये तो कार्ब्स पे जिंदा ही नहीं। मतलब अगर कार्ब्स नहीं खाएगा तो जिंदा ही नहीं रह पाएगा। हम तो वापस कुछ रिवर्स हुआ। कार्ब्स नहीं खाएगा तो जिंदा नहीं रह पाएगा। बात वो नहीं है। बात यह है कि पेशेंट का ब्लड शुगर लो हो रहा है। जिसकी वजह से दैट सिचुएशन नेसेसिटेट्स हिम टू टेक कार्बोहाइड्रेट एव्री टू टू थ्री आवर्स।
(1:21:08) हम ये बात है। तो ऐसे सिचुएशन को हम फिक्स करेंगे या हम कार्ब्स खाते रहेंगे। मेरा ये सवाल है। फिक्स करेंगे पहले। हां। तो इससे आप ये नहीं बोल सकते कार्बोहाइड्रेट उनके लिए एसेंशियल हो गया। हां। आप नॉर्मल पहले हो जाओ। पहले आप देखोगे क्यों हो रहा है आपको हाइपो? क्योंकि नॉर्मल सिचुएशन में हाइपोग्लाइसीमिया नहीं होता। इस तरह से इवन सीके पेशेंट में भी नहीं होता और इंटरेस्टिंगली अनफॉर्चूनेट इसको भी कह सकते हैं हम उस डॉक्टर का बेटा नेफ्रोलॉजिस्ट है। सुपर स्पेशलिस्ट आप सोचो ये हालत है इन लोगों की। तो आप के घर में आपका बेटा नेफ्रोलॉजिस्ट है। आप
(1:21:44) डर्मेटोलॉजिस्ट हो। आपकी वाइफ डायबिटिक है। आप खुद सीकेडी के पेशेंट हो। क्या करके रखे हो यार? कैसे तुम लोग पब्लिक हेल्थ को इंप्रूव करोगे? तुम लोग की अपनी हेल्थ कंट्रोल में नहीं है। तो जिन डॉक्टर का वीट बेली होता है, पेट बाहर निकला होता है, क्या उनको उनको दिखाना चाहिए? बिल्कुल नहीं दिखाना चाहिए। मेटाबॉलिक डिसऑर्डर के दिल बिल्कुल नहीं दिखाना चाहिए। मैं बता रहा हूं कभी नहीं। डॉक्टर्स के न्यूट्रिशनल एडवाइस को कभी नहीं फॉलो करना है। इसलिए मैं बता रहा हूं। मैंने इस प्रोफेशन को अभिषेक जी क्यों चुना? पता है? एक लाइन में बड़ा ऑनेस्टली बोल
(1:22:19) रहा हूं। एोगेंट भी साउंड करूंगा। क्योंकि मेरे जैसा कोई नहीं है जैसा मैंने बताया। इस फील्ड में काम करने वाला कोई है ही नहीं। दूर-दूर तक कोई नहीं है। तो आप उसी फील्ड में काम करना चाहोगे ना जहां पे आपका कोई कंपटीशन ना हो। हम मेरा कोई कंपटीशन नहीं है। तो मैं बहुत मुझे कभी लगता ही नहीं है कि मैं स्ट्रगल कर रहा हूं अपनी फील्ड में। क्योंकि कोई होना भी तो चाहिए उस लायक जिससे आप कम्पीट करो। कोई है ही नहीं दूर-दूर तक। बहुत सारे लोग इंटरनेट पे ओबेसिटी की बात कर रहे हैं। खुद मोटे दिखते हैं। वही मैं कह रहा हूं ना। उसमें आप देखो अब आचार्य
(1:22:50) प्रशांत जी ओबेसिटी पे बात करते हैं ये लोग कि ओबेसिटी ऐसे ठीक कर सकते हैं हम लोग हम प्लांट बेस्ड राइड करेंगे और खुद की ओबेसिटी नहीं देख रहे हैं वो मिरर में आपको क्या आचार्य प्रशांत जी नॉर्मल बॉडी वेट इंडिविजुअल लगते हैं ठीक लगते मतलब आपके घर नहीं दिखते बट हां नहीं आप डायरेक्टली आप नहीं दे पा रहे हो जवाब मैं बता दे रहा हूं नहीं है वो ओबीज हैं वो ओवरबीज आप रह सकते हो बीएमआई को ध्यान में रखोगे तो हो सकता है ओबीज नहीं हूं बट फैट वाइज जो सबकटेनियस फैट दिख रहा है चेहरे पे दिखता है पफीनेस ओबीज़ है वो क्लीनिकली ओबीज़ पर्सन ही इज़
(1:23:27) पर वो तो बताते हैं ना कि ऐसे प्लांट बेस्ड से सब सही हो जाएगा वो खुद ही नहीं ठीक है वो दूध क्यों नहीं पीना चाहिए वही मैं कह रहा हूं ना दूध पीना चाहिए नहीं पीना चाहिए उनके बाद भी बात कर लेंगे नहीं दूध को क्यों पीना है दूध आप छोड़ दो ना दूध देखिए मैं मेरा यह कहना है कि आप कभी-कभी दूध पी लेते हो तो कोई प्रॉब्लम नहीं है इन जनरल डेयरी बहुत लोगों को सूट नहीं करता हम तो मैं उसको भी फूड नहीं मानता हूं। कॉम्प्लीमेंट्री के तौर पर आप कभी दूध आपने पी लिया या इवन कर्ड खा लेते हो आप तो ठीक है। अगर आपको सूट करता है कोई प्रॉब्लम नहीं होती। कुछ लोगों को डेयरी
(1:23:59) को इंक्लूड करने से कुछ लोगों को लूज स्टूल होता है। ब्लोटिंग होती है, गैस होता है तो वैसे लोगों को डेरी नहीं कंज्यूम करना चाहिए। और वो भी आपको देखना है कि वि टाइम अगर वो सेटल हो जाता है वो प्रॉब्लम तो ठीक है। लेकिन बहुत लोगों को डेयरी लेने से प्रॉब्लम होती है और स्पेशली लिक्विड डेयरी जिस मिल्क की हम बात कर रहे हैं तो ये तो बिल्कुल नहीं लेना चाहिए। ये सूट नहीं करता बहुत लोगों को। तो मैं इसका एडवोकेट नहीं हूं लेकिन अगेंस्ट भी नहीं हूं इसके टोटली कि एकदम नहीं ही पीना है। लेकिन इसे आप जरूरत क्यों बना रहे हो अपनी दूध को? क्यों दूध
(1:24:27) पीना है? दूध पीते हुए बच्चे जब थे तब अच्छे लगते थे। अब तो बड़े हो गए हो। क्यों दूध पी रहे हो अब? छोड़ दो दूध पीना यार। कब तक पियोगे दूध? छोटी बच्ची हो क्या? क्या छोटे बच्चे हो? और छोटे बच्चे ही सर। बोल मीठा पिलाया इतना साल ग्रो अप ग्रो अप नाउ चाय पीनी चाहिए दूध में डाल के चाय भी नहीं पीनी चाहिए चाय रन कर चाय की आदत है देखिए मैं इन जनरल थोड़ा सा मैं यहां पे लीनिएंट हो जाता हूं एज अ कोच एज अ डॉक्टर मैं कहता हूं कि आपको चाय की आदत है आपको चाय अच्छी लगती है तो आप चाय दूध के साथ आप एंजॉय करो ठीक है क्योंकि बहुत लेट अमाउंट में जा
(1:25:07) रहा है और मोस्ट ऑफ द लोगों को अगर प्रॉब्लम नहीं हो रही तो मैं बोलता हूं ठीक है मैं चाय बंद करवाता नहीं हूं किसी की बहुत जल्दी हम मैं डाइट बदलवाता हूं हूं हम चाय बोलता हूं आप चाय कॉफी की आदत है आपको आप कंटिन्यू करो सब कुछ मैं अगर बंद कराने लगूंगा पेशेंट बोलेगा कि अब जिंदगी में कुछ रहा ही नहीं तो इसकी मैं बोलता हूं आप अकेले हां तो उन चीजों को मैं बोलता हूं आप एंजॉय करो बाकी खाना पे हम काम करेंगे पहले अच्छा टाइप वन और टाइप टू डायबिटीज की बात करते हैं सुपर सेलिब्रिटीज प्रियंका चोपड़ा के हस्बैंड निक जोस सोनम कपूर सोनम
(1:25:37) कपूर को सर 17 साल में टाइप वन डायबिटीज डायग्नोस्ट हुआ था समंता महब कपूर टाइप टाइप वन डायबिटीज के पेशेंट्स हैं। ऐसा इंटरनेट पे बताया है। तो ये कितनी खतरनाक बीमारी है। टाइप वन डायबिटीज होना। एक्चुअली बहुत खतरनाक है। स्पेशली अगर आप क्योंकि इंसुलिन डिपेंडेंट हो आप। अब आपको इंसुलिन लेना ही पड़ेगा। आप डाइट में कार्ब्स हां डेफिनेटली वो चाहिए। इंसुलिन रोज। रोज चाहिए और पूरी लाइफ तक चाहिए। लाइफ टाइम तो क्या इसको भी रिवर्स किया जा सकता है? नहीं रोका जा सकता है। अब नहीं इसे हम नहीं ठीक कर सकते। अब नहीं ठीक कर सकते। नहीं।
(1:26:14) यह क्योंकि आपका पनक्रियाज इंसुलिन बना नहीं रहा था। तभी तो आप बाहर से ले रहे हो तो आपको इंसुलिन डेली लेना है बट किस अमाउंट में लेना है वो डिसाइड होगा आपके डाइट में कार्ब्स कितना है हम लेना तो है क्योंकि अगर आपके डाइट में कार्ब्स नहीं भी है तो भी क्योंकि आपका पैंकक्रियाज इंसुलिन बना रहा है अदर मेटाबॉलिक प्रोसेससेस के लिए क्योंकि अमाइनो एसिड्स का हम इनकरपोरेशन मसल्स प्रोटीन सिंथेसिस सब में रोल होता है आपका इंसुलिन का तो वो चाहिए आपको अगर आप टाइप वन डायबिटिक भी हो तो तो भी वो इंसुलिन तो चाहिए आपको अगर आप कार्ब्स नहीं भी खा रहे हो तो
(1:26:49) तो किसी भी तरह से कोई ठीक करने का कोई जरिया नहीं है। कोई उम्मीद नहीं है। स्टेम सेल स्टेम सेल लेवल पे अभी काम चल रहा है। स्टेम सेल रीजनरेशन और स्टेम सेल ट्रांसप्लांट ये सब पे। हो सकता है आने वाले कमिंग इयर्स में कुछ आ जाए हमारे पास। बट अभी तो कुछ ऐसा कन्विंसिंग नहीं है हमारे पास। कोई और तो जैसे 17 साल की उम्र में सोनम कपूर को डायग्नोस्ट हुआ। तो अगर बचपन से अगर सबको मीट खिलाया जाता हम तो आप यह तो नहीं बोलते थे कि पिछले जन्म में आपने वेज खाया था तो इस जन्म में आपके वो गए तो ऐसा तो नहीं बोलते आप नहीं वो मैं इसी जन्म की बात करता हूं मैं पिछले
(1:27:22) जन्म अगले जन्म में ये सब पे मैं जाता ही नहीं हूं मैं जन्मजनम में विश्वास ही नहीं करता हूं। मैं कहता हूं इसी जन्म में जो तुमने किया है इसी जन्म में पाओगे और फिर चले जाओगे। हम तो मेरा कभी यह कहना नहीं आता कि आप मीट खाओगे तो आपको टाइप वन नहीं होगा। हम सिर्फ मीट खाओगे तो टाइप टू नहीं होगा आपको। को यह मैं कहता हूं और यह मैंने लास्ट सेशन में भी आपके साथ बात कही। कि सिर्फ आप मीट खाओगे तो टाइप टू डायबिटीज नहीं होगा आपको। टाइप टू डायबिटीज नहीं होगा। टाइप वन हो सकता है क्योंकि ऑटोइ्यून डिसऑर्डर है वो। आपके पनक्रिएटिक बीटा सेल डैमेज हो सकते
(1:27:51) हैं। आपका इम्यून सिस्टम अटैक कर सकता है। हम लेकिन उसमें भी चांसेस ज्यादा तब होते हैं जब आप मीट के साथ कुछ अदर फूड आइटम्स खा रहे होते हो जो ऑटोइ्यून ट्रिगर की तरह वर्क करता है आपकी बॉडी में। जैसे ग्लूटेन होता है एक बहुत कॉमन एक एलर्जन है प्रोटीन है जो ऑटोइ्यून डिजीज से एसोसिएटेड होता है तो जनरली लोग बोलते हैं ना ग्लूटेन फ्री आटा खाओ अगर कोई भी ऑटोइ्यून डिजीज हो तो हम तो उस तरह से क्योंकि आपकी डाइट में मीट खाते हुए आप कभी भी ग्लूटेन क्योंकि ले लेते हैं। 100% कार्निवोर तो कोई नहीं हो सकता। हम तो अगर आप 90% मीट भी खा रहे हो स्टिल आप
(1:28:25) 10% अगर आटा बेस्ड आपका कुछ ग्लूटेन वगैरह चल रहा होगा या फिर अदर कोई सोर्स होगा जो एक्चुअली आपके ऑटोइ्यून ट्रिगर को बढ़ावा दे रहा है तो उससे टाइप वन हो सकता है। तो आप ये नहीं कह सकते कि वो मीट खा रहा था 90% इसलिए हो गया। नहीं वो रीजन ऑटोइनिटी का है और ऑटोइनिटी कोई भी एलजन की वजह से आपका इम्यून सिस्टम बमबार्ड कर सकता है। आपके बीटा सेल को डैमेज कर सकता है और उसमें आपका वायरस बैक्टीरिया ये सारा कुछ आ सकता है। राइट? तो इसलिए कभी भी रियल फूड को आप ब्लेम मत करो। हम इसलिए मैं एक सिंपल सा बताता हूं। एसोसिएशन एक होता है, एक कॉजेशन होता है।
(1:29:03) ठीक है? अब आप बोलोगे ये भी आप पूछ सकते हो कि भाई आप इतना इतना मीट खाने बोलते हो कोलेस्ट्रॉल बढ़ जाएगा लोगों का। हम आपने अभी तक पूछा नहीं। हां। ये बहुत कॉमन क्वेश्चन होता है लोगों का। कि सर आप जो डाइट बताते हो माइंड ही ब्लो कर दिया। कॉमन क्वेश्चन निकल नहीं रहे ना अभी। इसलिए मुझे ऐसा लगता है कि सबसे पहला क्वेश्चन सभी के दिमाग में यही आता है। जब भी मैं अपने कंटेंट को बनाता हूं, YouTube पे डालता हूं, लाइव में भी सेशन करता हूं तो सब लोग पूछते हैं सर इस डाइट पे कोलेस्ट्रॉल बढ़ जाता है। हम तो मैं कहता हूं अगर बढ़ जाता है तो बढ़ने
(1:29:31) दो। क्योंकि हाई कोलेस्ट्रॉल से कोई बीमारी नहीं होती। हाई कोलेस्ट्रॉल से कोई बीमारी नहीं होती। तो बोलते हैं ऑइल खाओगे। हाई कोलेस्ट्रॉल है तो उसमें नहीं मर जाओगे आप। आप ऑइल खाते हो ना मैं बता दूं उस ऑयल में तो कोलेस्ट्रॉल होता ही नहीं है। अच्छा हां उसमें कोलेस्ट्रॉल होता ही नहीं है। कोलेस्ट्रॉल एनिमल डिराइव्ड सब्सटेंस है। वो एनिमल फूड में ही होगा हमेशा। और आप जो ऑयल खा रहे हो वो प्लांट बेस्ड है। वो सीड ऑयल है। और सीड ऑयल में कोलेस्ट्रॉल नहीं होता। फाइटोस्टेरोल होता है। प्लांट कोलेस्ट्रॉल और उससे कोई इंपैक्ट नहीं पड़ता। इंपैक्ट
(1:30:05) पड़ता है। ब्लड कोलेस्ट्रॉल के लेवल पे इंपैक्ट पड़ेगा। लेकिन वो कोलेस्ट्रॉल नहीं है। हम वो प्लांट कोलेस्ट्रॉल है। और अगर कोई एक्चुअली प्रॉब्लमिक है तो वो प्लांट कोलेस्ट्रॉल है। एनिमल कोलेस्ट्रॉल नहीं है। तो कोलेस्ट्रॉल बढ़ने से कुछ होता है या नहीं होता? कुछ नहीं होता। प्रॉब्लम कोई प्रॉब्लम नहीं आएगा। कोई कुछ नहीं होता। वो तो कोलेस्ट्रॉल बढ़ जाएगा तो हार्ट अटैक हो जाएगा। मैं बता रहा हूं। उसका रीज़ वहीं पे आता है यह एसोसिएशन और कॉजेशन। हम एसोसिएशन का मतलब होता है किसी दो चीज का साथ होना। हम वो एसोसिएशन है। ठीक है? अब जैसे गर्मियों में आप गोवा जाते हो या
(1:30:39) बीचेस पे जाते हो। क्यों जाते हो? स्विमिंग करने। हम और उसी गर्मी में आइसक्रीम का भी सेल बढ़ा हुआ होता है। हम ठीक है? तो आइसक्रीम सेल का ज्यादा होना और ड्राउनिंग के केसेस का ज्यादा देखा जाना। दोनों चीजें साथ में हैं। तो आप बोलोगे आइसक्रीम खाने की वजह से ड्राउनिंग हो रहा है। लोग डूब रहे हैं। नहीं। नहीं। तो अंडरलाइन जो रीजन है वहां पे क्या है? हॉट वेदर। क्योंकि हॉट वेदर की वजह से आप स्विमिंग में जाते हो। सी में जाते हो और उसी हॉट वेदर की वजह से आप आइसक्रीम खाते हो। हम्। तो, दो चीज़ें साथ में बस प्रेज़ेंट है। इसका यह मतलब नहीं है। एक चीज़ दूसरी चीज़
(1:31:14) को दे रहा है। हम्। तो, उसी तरह से हाई कोलेस्ट्रॉल होते हुए भी लोगों को हार्ट अटैक हो रहा है। लो कोलेस्ट्रॉल होते हुए भी लोगों को हार्ट अटैक हो रहा है। हम और दोनों में आप अगर कॉमन डिनोमिनेटर देखोगे तो उसमें कॉमन डिनोमिनेटर में होता है। डायबिटीज है पेशेंट को या हाइपरटेंशन है पेशेंट को। उसको कोई ना कोई मेटाबॉलिक डिसऑर्डर होता है। तभी उनको वह हार्ट डिजीज का प्रॉब्लम होता है। या फिर जो भी प्रॉब्लम होता है उसको आप उसको रिलेट करते हो उसके हाई कोलेस्ट्रॉल से। तो डायरेक्टली हाई कोलेस्ट्रॉल यहां पे मात्र एक एसोसिएशन है। क्योंकि ऐसा कोई पेशेंट
(1:31:48) मैंने नहीं देखा अपने थ्री इयर्स के डीएनबी रेजिडेंसी में जो भी पेशेंट हार्ट अटैक के साथ आया है इमरजेंसी में इवन आईसीयू में किसी भी पेशेंट का मैंने हाई कोलेस्ट्रॉल नहीं देखा है। पर डायबिटीज़ जरूर देखा। डायबिटीज था, हाइपरटेंशन था, मेटाबॉलिक डिसऑर्डर था, ओबीज़ था। तो जो मेटाबॉलिक मेल है, मेटाबॉलिक एनवायरमेंट है जो बॉडी का आपका वो मैटर करता है ना कि कोलेस्ट्रॉल का नंबर मैटर करता है। क्योंकि कोलेस्ट्रॉल का नंबर आपके जेनेटिक्स से डिसाइड होता है कि आपके ब्लड में कितना कोलेस्ट्रॉल होगा। फूड का बहुत ज्यादा रिलेशन नहीं है उससे।
(1:32:20) ऐसा मैं नहीं कह रहा हूं कि आपका फूड जो है आपके ब्लड कोलेस्ट्रॉल को इंपैक्ट नहीं करता। वो करता है। लेकिन वो मैटर नहीं करता आपके लिए। आप अगर एनिमल फूड खाकर अपना कोलेस्ट्रॉल को बढ़ा रहे हो या बढ़ गया बेस लाइन से पहले प्रीवियस लेवल से ज्यादा हो गया तो उसको रहने दो। उसको छेड़ना नहीं है। अल्टीमेटली आपका फिक्स क्या हो रहा है? सारे मेटाबॉलिक डिसऑर्डर। मेटाबॉलिक डिसऑर्डर फिक्स हो गए। कोलेस्ट्रॉल थोड़ा सा हाई आ गया। अब परेशान हो रहे हो कोलेस्ट्रॉल के लिए यार। अरे सारे चीजों को तो ठीक कर लिया तुमने। डायबिटीज ठीक हो गई। ओबेसिटी ठीक हो गया।
(1:32:46) हाइपरटेंशन ठीक हो गया। अब थोड़ा सा कोलेस्ट्रॉल बढ़ गया। अब उस जा रहे हो तुम डॉक्टर के पास। अरे उस डॉक्टर के पास तुम्हारे मेटाबॉलिक डिसऑर्डर का सॉल्यूशन ही नहीं था। अब वो कोलेस्ट्रॉल के लिए डायरेक्टली तुमको कोलेस्ट्रॉल लोअरिंग मेडिसिन लिख देगा स्टैटिनस। ये कोई मतलब है इस चीज का। अब एक और एग्जांपल मैं देता हूं एसोसिएशन कॉजेशन का। सुबह-सुबह मुर्गा करता है कुकड़ुकू। हम है ना? फिर सनराइज होता है। तो मुर्गा अगर कुकड़ुकू नहीं करेगा तो सनराइज नहीं होगा। होगा ना? और अगर सनराइज नहीं होना होगा तो नहीं होगा क्योंकि क्लाउड है
(1:33:20) तो मुर्गा के कुकड़ू को करने से कुछ नहीं हो रहा है। तो ऐसे डॉक्टर्स लोग क्या बोलते हैं कि मुर्गा कुकड़ू को करेगा तभी सूरज उगेगा। ऐसा नहीं होता है। हम तो वही बात है। एसोसिएशन और कॉजिशन को समझना है। किसी दो चीज का साथ में होना ये नहीं बताता कि उसी चीज से हमें ये चीज हुआ है। समझ रहे हैं बात को? हम अच्छा हाइपरटेंशन की बात भी कर लेते हैं थोड़ी सी। पहले तो ये बता दो कि हाइपरटेंशन की बात करेंगे इसमें। पहले तो बताओ कि अगर आप बोल रहे हो कि प्योर 90 80 90% अगर रेड मीट पे है वो मुर्गा वाला नहीं हम मुर्गा क्या है रेड मीट है कौन सा है
(1:33:51) नहीं वाइट मीट है वाइट मीट है हम तो वाइट मीट नहीं खाना चाहिए पहले तो बताओ नहीं वाइट मीट खाना नहीं चाहिए ऐसा मैं नहीं कह रहा हूं खाना चाहिए हां वाइट मीट खाना चाहिए न्यूट्रिशनली एप्रोप्रियट नहीं है वो ह्यूमन बीइंग्स के लिए तो देसी मुर्दा खाना चाहिए कि वो सफेद वाला बुर्दा खाना चाहिए सफेद ही खा लो यार फार्म वाले खा लो सस्ता है क्यों पैसे लगाओगे क्योंकि देसी वाला मुर्गा खाओगे वो मटन के कॉस्ट के बराबर होता है उससे अच्छा मटन ही खा लो हम तो मैं बोलता हूं फार्म वाले मुर्गा खाओ और मटन के पैसा तुम मुर्गा में नहीं लगाओ मटन ही खाओ। तो जितने भी चाइनीज़ लोग हैं
(1:34:19) वो तो ये डक भी खा रहे थे सांप भी खा रहे थे। रेप्टाइल्स वगैरह सब क्रोकोडाइल वगैरह सब खा रहे हैं। हम तो वो सब सही है। सब सही है। मीट है। वो अच्छे लोग हैं। अल्टीमेटली मीट है। उनको कोई डायबिटीज नहीं हो रही। वहां पे वो कोई बीमार नहीं। चाइना इज़ नॉट ए डायबिटिक कंट्री। चाइना नॉट एन ओबेसिटी कंट्री। जापान आप देख लो। हां। ये सारे कंट्री जो है मीट मतलब आई आई थिंक मीट प्रीडमिनेंटली मीट है इनकी डाइट में हम तो सब लोग हेल्दी हैं ये लोग वॉर हो जाएगी सर इंडिया वर्सेस जापान चाइना वॉर हो जाएगी वॉर नहीं होगी पहले आप अपने अंदर के खुद की लड़ाई से तो पहले आप जीतो खुद ही खुद
(1:35:00) ही लड़ रहे हो अपनी बीमारी से करो बात कर रही है अच्छा कुछ बीमारियां तो लाइफ स्टाइल में आती है कुछ जेनेटिक होती है तो मान लो जिसके दादा को है पापा को है और बच्चा प्योर वेज डाइट पे है तो क्या उसको डायबिटीज होना तय है? कौन सी डायबिटीज? टाइप वन, टाइप टू कुछ भी। देखिए वेजिटेरियन डाइट पे मैं टाइप टू के लिए तो डेफिनेटली बोलता हूं कि टाइप टू हो ही जाएगा ऑलमोस्ट। मतलब मान के आप चलो कि जिस तरह से डायबिटीज का रेट बढ़ रहा है, इंसिडेंस बढ़ रहे हैं। मुझे ऐसा लगता है इस वेजिटेरियन डाइट पे डायबिटीज होना ही होना है। सभी और उसको होने के लिए आपका लाइफ स्पैन भी
(1:35:36) ज्यादा होना चाहिए। अब कोई अगर 40 इयर्स में किसी की डेथ हो गई तो डायबिटीज तो होता उसको 60ज में तो वो रहा ही नहीं। अब तो डायबिटीज क्या होगा उसको? तो वो होने के लिए आपको लंबा जीना भी तो पड़ेगा। और लंबा कब जिओगे? जब आप अच्छा खाओगे तो आप पहले ही चले जाते हो। तो डायबिटीज होगा कैसे? है ना? ये भी एक प्रॉब्लम है। तो इस डाइट पे डायबिटीज होना आने वाले समय में बिल्कुल बंद हो जाएगा। क्योंकि आप 40 भी क्रॉस नहीं कर पाओगे। तो डायबिटीज कैसे होगी? अब दूसरे आस्पेक्ट पे हम आते हैं हम कि अगर आप 60 70 तक जा रहे हो इस वेजिटेरियन डाइट पे तो टाइप वन का भी
(1:36:09) चांसेस है। टाइप टू का भी चांसेस है। दोनों का ही चांसेस है। टाइप वन का चांसेस इसलिए है क्योंकि प्लांट बेस्ड फूड में आपको वो सारे एंटी न्यूट्रिएंट होते हैं जो एक्चुअली फूड एलोजन है आपकी बॉडी के लिए। और वो ऑटोइनिटी ट्रिगर करता है आपकी बॉडी में। आपके इम्यून सिस्टम को ट्रिगर करता है और आपका इम्यून सिस्टम अपने ही टिश्यूज़ को डिस्ट्रॉय करना स्टार्ट कर। इसे ही हम ऑटो इम्यूनिटी बोलते हैं। क्योंकि आपका इम्यून सिस्टम खुद ही के सेल्स को टिश्यूज़ को डैमेज कर रहा है। हम और वो ट्रिगर कहां है? इस प्लांट बेस्ड फूड में। एनिमल बेस्ड फूड में ऐसा कोई भी
(1:36:44) आइडेंटिफाइड एलर्जन नहीं है जो डायरेक्टली ऑटोइम को देता है। एक्सेप्ट डेयरी। हम डेली टू सम एक्सटेंट ऑटोइनिटी को ट्रिगर करता है। बट अदरवाइज आप अगर मीट को देखो टू सम एक्सटेंट एग्स भी होता है। एलर्जन एज एन एलर्जन काम करता है। लेकिन रेड मीट रियल फूड है। एक्चुअल रियल फूड है। जिसके साथ कोई एलर्जी के इंसिडेंस नहीं देखे जाते। कोई रिपोर्टेड डाटा नहीं है कि रेड मीट खाकर किसी को एलर्जी हो रही है। किसी भी तरह का कोई प्रॉब्लम नहीं है। इसलिए एक्सट्रीम ऑटोइ्यून डिसऑर्डर्स में जैसे कोई भी ऑटोइ्यून मेडिकल कंडीशन है जो टाइप वन हो, विटिलगो हो एनकायलोजिन
(1:37:25) स्पॉन्डिलाइटिटिसिस हो, सोरायसिस हो अगर आप 100% कार्नवो डाइट करते हो। प्योर रेड मीट डाइट आपका ऑटो इम्यूनिटी जबरदस्त इंप्रूव करता है क्योंकि आपने इंसल्ट देना बंद कर दिया बॉडी को जो भी फूड एलोजन के फॉर्म में आप दे रहे थे प्लांट बेस्ड डाइट पे या इवन डेरी के फॉर्म में वो आपने बंद कर दिया या इवन एग्स क्योंकि अभी प्योर रेड मीट बेस्ड डाइट की मैं बात कर रहा हूं प्योर कार्निवोर डाइट लायन डाइट बोलते हैं इसे हम प्योर रेड मीट डाइट मतलब लायन डाइट क्योंकि 100% कार्निवोर लायन और टाइगर ही हो सकता है ह्यूमन बीइंग्स क्योंकि नहीं
(1:37:59) है 100% % ऐसा नहीं है कि हम खाएंगे 100% तो बीमार हो जाएंगे। बट बाय डिज़ाइन हम नहीं है क्योंकि हम हेड ऑनेस्ट हैं टू सम एक्सटेंट। हमें कुछ-कुछ चाहिए होता है प्लेजर के लिए। लायन को नहीं चाहिए होता है प्लेजर के लिए स्वीट्स खाना। हमें चाहिए होता है। हम वैसे हैं बाय डिज़ाइन। तो हम 100% ऐसा नहीं है कि हम खा नहीं सकते और हेल्दी नहीं रह सकते। हम कर नहीं पाते। वो हमारा प्रॉब्लम है। पर्सनल प्रॉब्लम है वो। लेकिन अगर कोई बीमारी है और आप 100% अगर करते हो कार्निवो डाई तो आपका ऑटोइ्यून जो है जो ऑटोइ्यून जो फाइट चल रहा है आपकी बॉडी में
(1:38:28) हम ऑटो इम्यूनिटी का जो सिचुएशन है वो सेटल हो जाता है। अब बहुत लोग प्योर वेज हैं। लोग बहुत लंबा भी जीए हैं। कोई बीमारी भी नहीं हो रही है। तो मुझे क्या करना है उनसे? मुझे पेशेंट से मतलब है। आप ये बोल रहे हो सिर्फ पेशेंट्स की बात। मतलब अगर वेज खा रहा है। आपने बोला ना कि टाइप टू डायबिटीज हो ही जाएगी। बट नहीं हो रही है। बहुत लोगों को नहीं भी हो रही होगी। मतलब मैं ये कह रहा हूं मैं आपको अवेयर कर रहा हूं। हां, मैं ये नहीं कह रहा हूं। सभी को हो जाएगा। मैं यह कह रहा हूं कि जिस तरह से डायबिटीज का इंसिडेंस बढ़ रहा है, हम उस तरह से मैं कह रहा हूं कि आप जागो और
(1:39:03) अपनी डाइट में ज्यादा से ज्यादा नॉनवेज फूड को इंक्लूड करो। हम आप वेट क्यों कर रहे हो कि जब होगा तब हम देखेंगे तब हम मीट खाएंगे। ये काम क्यों करना है? मैं प्रिवेंटेटिव मेडिसिन को प्रैक्टिस कर रहा हूं। मैं उसे प्रमोट कर रहा हूं। तो मैं होने के बाद की चीज तो मैं बताऊंगा ही। लेकिन वो ना हो उसके लिए भी मैं तो एजुकेट करूंगा ना। और मैं वही कर रहा हूं। तो इसलिए वेजिटेरियन डाइट पे चांसेस ज्यादा है टाइप टू डायबिटीज टाइप वन डायबिटीज का। क्योंकि टाइप वन के लिए भी मैंने बता दिया कि आप वो सारे एलर्जन ले रहे हो लेक्टिस जिसमें ग्लूटेन मोस्ट कॉमन
(1:39:35) लेक्टिन होता है। वो सारा आपका प्लांट बेस्ड फूड से ही जा रहा है। हम तो सारा कॉज जो है सारे फैक्टर्स आपके वेजिटेरियन डाइट की तरफ होते हैं। और इसलिए आपको वो सारे इंसिडेंस ज्यादा देखे जाते हैं। वेजिटेरियन डाइट पे या वेजिटेरियंस में या इवन नॉन वेजिटेरियंस में क्योंकि वो भी प्लांट बेस्ड डाइट पे ही हैं प्रीडमिनेंटली। तो मेरा यह सवाल था उस टाइम पे कि कोई भी नॉन वेजिटेरियन है जो 80 90% नॉनवेज ही खाता है तो उसको हार्ट अटैक की बीमारी मतलब हार्ट अटैक से तो नहीं मरेगा वो ये गारंटी तो मैं नहीं दे सकता हूं लेकिन आप जितने भी हार्ट अटैक्स के इंसिडेंट्स
(1:40:04) से देख रहे हो क्या वो 80 टू 90% मीट खाते हुए हार्ट अटैक हो रहा है उनको कोई रिपोर्टेड डाटा तो नहीं है हमारे पास ऐसा वो क्या खाते हुए उनकी डेथ हो रही है या फिर हार्ट अटैक हो रहा है उनको 70 टू 80% प्लांट बेस्ड डाइट खा रहे हैं वो हम जिसमें रोटी चावल ही होता है अब कोई मिलेट्स खाएगा कोई भाखरा खाएगा, कोई खाखरी खाएगा, पता नहीं क्या-क्या खोता है। मुझे तो पता भी नहीं होता ना। तो हर जगह का अपना-अपना एक सीरियल्स होता है और उसी हिसाब से वो लोग खाते हैं। आपको वैसे लगता नहीं कि जैसे आप तो प्योर नॉनवेज खाते हो। एकदम एक तो बोरियत फील नहीं होती कि मैं
(1:40:35) रोज यही खा रहा हूं। दूसरी आपको कभी जैसे चाटवाट खाने का मन कर गया। कभी कुछ मार्केट स्ट्रीट फूड खाने का मन कर गया, दाल बाटी खाने का मन कर गया, दाल ढोकली खाने का मन कर गया। तो ऐसे ऐसा होता नहीं है कि आपके साथ? अभिषेक जी ऑनेस्टली आपको बताऊं ना मेरे साथ कभी नहीं होता ऐसा। कि गोलगप्पे खा लिए आज और वो उसका रीजन मैं बता रहा हूं क्यों नहीं होता वैसा क्योंकि पहले तो मुझे भूख ही दिन में एक बार लगती है। हां तो दिन में अगर आपको चार से पांच बार भूख आएगी तभी तो आपको चारप बार में दो बार कभी एक बार कभी पानी पूरी खाने का मन करेगा कभी एक बार लगेगा दाल बाटी खा लें
(1:41:07) कभी कुछ खा लें तो जब दिन में एक ही बार भूख आ रही है और आपको पता है कि आपको खाना क्या आप वो खा लेते हो तो फिर तो आप नेक्स्ट 22 20 घंटे के लिए आपका सेटल हो गया वो प्रॉब्लम सोचने वाला कि अब नेक्स्ट अब आप क्या खाएंगे हम और इसलिए मैं जब पार्टी में भी जाता हूं तो मैं घर से खाकर निकलता हूं मुझे वो चाहिए ही नहीं कि हंगर वाले स्टेट में मैं रखता ही नहीं हूं खुद को अगर आपके पास हंगर होगा तो डेफिनेटली आपको मन करेगा चाट खाऊं पानी पूरी खाऊं और मेरे साथ भी होता है। जैसे ही मेरा 22 आवर्स 24 आवर्स क्रॉस करने लगता है फास्टिंग पीरियड का तो मुझे लगता
(1:41:42) है कि कभी-कभी मैं आज आलू पराठा खा लूं या सत्तू पराठा खा लूं क्योंकि हंगर हंगर आया है अभी हां अब उस हंगर को ध्यान में रखते हुए अगर मैं अपना रियल फूड नहीं खाऊंगा तो अल्टीमेटली मैं इधर-उधर का बाहर का खाना खा लूंगा क्योंकि घर पे भी नहीं बनता वो खाना और बाहर का खाना मैं अवॉइड करता हूं तो घर पे आके फिर अंडा ही खाता हूं हम तो मैं खुद को उस तरह से बाहर का मीट नहीं खाते आप? नहीं, बाहर का मीट खाता हूं मैं। हां। मीट ही तो खाता हूं बाहर का। बस बाहर का मीट खाते हो? हां। मैं यह कह रहा हूं कि आप अपने हंगर को अगर 22 आवर्स के लिए आप ऐसे ही कंट्रोल
(1:42:16) करके रखे हुए हो तो आपको 22 घंटे तो कुछ नहीं होना है आपका। आप ना पानी पूरी के बारे में सोचोगे। फिर आपका जब नेक्स्ट हंगर आएगा तभी तो आप सोचोगे कुछ खाने का। और जब आप सोचोगे वो तभी सोचोगे जब आप हंगरी हो उस वक्त। और मेरा वो जो सिंगल हंगर का इवेंट होता है, एपिसोड होता है, उसको फिर से मैं उसी खाने से सप्रेस कर देता हूं। तो आपने तो मेरे सवाल ही बहुत सारे खत्म कर दिए कि भैया कि कौन से पांच फूड ऐसे खाए जाए जो डायबिटीज टू को कंट्रोल कर ले या सुबह उठ के कौन सा पानी पिया जाए जो डायबिटीज को कंट्रोल कर दे क्योंकि क्योंकि बहुत सिंपल है ना ह्यूमन
(1:42:50) न्यूट्रिशन एक्चुअली बहुत सिंपल है और बहुत स्पेसिफिक है आपको न्यूट्रिशन वाइज बहुत स्पेसिफिक रहना है आपको वैरायटीज नहीं चाहिए कि ये भी खाएंगे वो भी खाएंगे ये पिएंगे वो पिएंगे नहीं करना होता है ये सब काम जितने प्रोटीनंस बाहर आ रहे हैं आजकल अगर मान लो प्रोटीन बार खा ले रेड मीट नहीं खाए तो उसमें में तो हाई प्रोटीन है एकदम तो चारप बार प्रोटीन खा लिए तो क्या उस उससे तो पेट भर जाता है जैसे मैंने ट्राई किया तो ऐसा लगता है पेट भरा भरा है एकदम पूरा संतुष्टि है अभी कुछ खाने का मन नहीं कर रहा है तो उसमें तो शुगर भी होता है अच्छा
(1:43:16) खासा प्रोटीन बार आजकल तो आ रहे हैं ना अच्छे कि इसमें विदाउट शुगर सिर्फ प्रोटीन बार है वो कहने के लिए विदाउट शुगर होता है वो सब में शुगर है कंटेंट कम रहता है शुगर का वो मीठा होता है क्योंकि प्रोटीन का अपना कोई टेस्ट नहीं होता हम टेस्टलेस होता है प्रोटीन तो अगर आप प्रोटीन में अगर कुछ वैसा नहीं डालोगे तो वो टेस्ट ही नहीं होगा फिर वो कोई खाएगा नहीं पनीर खा के जिंदा नहीं रह सकते। पनीर में ही तो प्रोटीन होता है। हाई प्रोटीन। पनीर खा करके आप चीजों को इंप्रूव कर सकते हो। कर सकते हो। हैबिटीज को बेटर कर सकते हो। कर सकते हैं।
(1:43:42) हां। क्योंकि तो आए आप बट स्टिल वो लॉन्ग टर्म में वर्क नहीं करेगा आपके लिए। मैं बता रहा हूं क्योंकि मैं हूं डॉक्टर आपके पेशेंट के लिए मैं आपके लिए अगर काम कर रहा हूं। आप अगर मेरे पेशेंट हो और मैं चाहूंगा कि आपका लॉन्ग टर्म हेल्थ कैसा रहती है। मैं उसके लिए आपके साथ काम करूंगा। ये कोई 2 महीने तीन महीने की बात नहीं है कि आपका एचबीएनसी और फास्टिंग इंसुलिन ये सब दिखा दिया आपका कि ये इंप्रूव कर गया अब आप कंटिन्यू करो मुझे पता है आप नहीं कर पाओगे डेरी पे डेली डेली पनीर और कर्ड आप नहीं खा पाओगे पॉसिबल नहीं है ये पर मीट खा पाएंगे
(1:44:15) मीट आप खा पाएंगे डेली खा पाएंगे बिल्कुल खा पाएंगे आप कैसे आप कैसे डेरी खा के आपको ब्लोटिंग होगी आपको कॉन्स्टिपेशन स्टार्ट हो जाएगा बहुत सारे गट प्रॉब्लम्स आएंगे हम डेरी आप उस अमाउंट में नहीं खा सकते वो लंबे समय तक वो आपको इशू करेगा ही करेगा लेकिन मीट खा के कोई प्रॉब्लम नहीं होती ऐसी। इसलिए मैं बोल रहा हूं लॉन्ग टर्म हेल्थ को आपको देखना है। यह कोई 2 महीने 3 महीने में डायबिटीज को बेटर करके खुश नहीं हो जाना है। वो तो लोग कमेंट कर ही देंगे ना सर नॉनवेज खा के उनको क्या गैस बनती है क्या ब्लोटिंग? नॉनवेज खा के कभी नहीं किसी को होता है।
(1:44:47) मुझे कभी नहीं हुआ ब्लोटिंग। अगर आपको नॉनवेज के साथ ब्लोटिंग हो रही है तो आप जरूर उसके साथ आपने कुछ खाया है? तो नॉनवेज को कैसे खा लेना? मतलब रोटी खानी ही नहीं है उसमें। ही नहीं आप रोटी, दाल, सब्जी सलाद, पापड़ ये सब क्यों करते हो आप? इतनी वैरायटीज क्यों है आपकी थाली में? क्योंकि सिर्फ चावल न्यूट्रिशनली कंप्लीट नहीं है। सिर्फ दाल न्यूट्रिशनली कंप्लीट नहीं है। सिर्फ सैलेड न्यूट्रिशनली कंप्लीट नहीं है। हम सिर्फ वेजिटेबल्स न्यूट्रिशनली कंप्लीट नहीं है। तो आपने सब चीजों को ऐड किया थाली में और न्यूट्रिशनली कंप्लीट करने की
(1:45:20) आपने कोशिश की। हम कोशिश ही की है। वो हुआ नहीं है। स्टिल अभी भी नहीं हुआ है कंप्लीट। इतना वैरायटीज डालने के बाद भी जब आप मीट खाते हो तो वह न्यूट्रिशनली कंप्लीट है। जो भी न्यूट्रिएंट्स आपकी बॉडी को चाहिए वो आपकी बॉडी को मिल रहा है उस मीट से। हम कंप्लीटली मिल रहा है। किसी भी चीज में कोई डेफिशिएंसी आपको नहीं होगी। तो अब आपको उसके साथ क्यों ऐड करना है? मेरा ये सवाल है। क्यों रोटी आप ऐड कर रहे हो? उस डाइट पे तो आपने न्यूट्रिशन को ध्यान में रखते हुए ऐड किया। रोटी, चावल, दाल सब कुछ। यहां पे क्यों करना है आपको? हो तो गया आपका न्यूट्रिशन पूरा। हम
(1:45:53) अब आप कौन सी चीज को पूरा करना चाह रहे हो? तो एक रेड मीट में सारा न्यूट्रिशन होता है। सारा न्यूट्रिशन सब कुछ एक्सैक्ट मतलब विटामिन ए, बी, सी, डी सब हां जो भी विटामिन आप यू नेम इट सारा कुछ विटामिन डी भी होता है। हां डी भी होता है। बहुत अच्छे अमाउंट में होता है डी तो डी तो जिनका कम होता है उनको बोला जाता है कि आप अंडे और मीट खाओ ज्यादा से ज्यादा। हम और उसकी चर्बी में होता है। मैं तो बोलता हूं चर्बी खाओ। गोल्ड का सबसे सबसे सॉलिड पार्ट कौन सा होता है? मीट का हां मीट का सबसे रेड मीट का सबसे शानदार पार्ट कौन सा होता है जो कोई भी पार्ट हो
(1:46:25) सकता है जो भी आसा कार्ड सब अच्छे होते हैं। रेड मीट ओवरऑल अच्छा है। कोई भी पार्ट आप लो हम कुछ लोगों को चुई पार्ट अच्छा नहीं लगता क्योंकि मसल फाइबर थिक होता है। जो पिछला जो रान हम बोलते हैं ना मटन का रान बोलते हैं पिछला लेग को हाइड लेग को। वो रान थोड़ा चुई होता है। बट मुझे वो पसंद है। कुछ लोगों को पसंद नहीं आता। मैक्सिमम लोगों को अगला रान अच्छा लगता है क्योंकि थोड़ा सॉफ्ट होता है वो। तो जिसको जैसा पसंद है वो खा सकता है। कोई प्रॉब्लम नहीं है। पर आजकल तो बोलते हैं ना मसालों में भी बहुत बीमारियां हैं कि जब मसाले आप लेके
(1:46:53) आते हो तो मसालों में भी बीमारियां तो आप वो मसाला पका के खाते हो उसको अच्छे से तो फिर तो फिर बीमारी आप घर ले जा रहे हो। कौन सी मसाले में बीमारी है? सारे मसालों में तो बीमारियां बोलते हैं कि हर वाला मसाला बाहर का मत लो। एडल्टेशन उसमें है आप खड़े मसाले लो और घर पे बना लो उसका मसाला। मसाले से कोई प्रॉब्लम नहीं है। इन जनरल कुछ मसाले के लिए आपको एलर्जी हो सकती है। जैसे टर्मरिक के लिए बहुत लोगों को एलर्जी होती है। रेड चिल्ली पाउडर के लिए एलर्जी होती है। कुछ लोगों को ब्लैक पेपर के लिए एलर्जी होती है। बट एट लार्ज मोस्ट ऑफ़ द लोगों को एलर्जी
(1:47:20) नहीं है इन मसालों से। तो मसालों से कोई दिक्कत नहीं होती है। अच्छा अभी तो आप फाउंडर बन गए हो। डॉक्टर तो हो ही सर। फाउंडर भी हो। तो एज अ फाउंडर आपका क्या मिशन रीज़न है? मतलब मैं अभी फिलहाल तो फाउंडर मानता नहीं हूं। खुद को। मैं नहीं मान रहे हो। नहीं अभी नहीं मानता हूं। फाउंडर्स ड्रीम में आकर के फाउंडर हो जाऊंगा। मेबी ऐसा होता है। बट अभी तो नहीं है स्टिल फाउंडर बट पर आपका सपना तो है ना एज आपने फाउंड ही किया है आपने कुछ ना कुछ हां डेफिनेटली उस पॉइंट ऑफ व्यू से हां लेकिन मेरे भाषा से कोई अभी कोई प्रोडक्ट नहीं है जिसको मैं सेल करूं और बोलूं कि
(1:47:50) हां मैं फाउंडर हूं इसी चीज का हां एक डाइट है जिसको मैं सेल नहीं कर सकता उसको मैं बस एडवोकेट कर सकता हूं तो उस डाइट को अगर आप बोलोगे कि हां ये प्रोडक्ट है तो है प्रोडक्ट उसका फाउंडर हूं मैं तो हाइपर कार्निवो डाइट या फिर कार्नवो डाइट का आप फाउंडर बोल सकते हो इंडिया में जो भी है। हालांकि मैं वो सब मानता नहीं हूं। वो सब मैं जाता नहीं हूं। बस मुझे इतना पता है कि इस डाइट को मेरे से अच्छा इंडिया में प्रमोट कोई नहीं कर सकता। तो डिजिटली क्यों? फिर जब आपसे फेस टू फेस आदमी मिलेगा आप उसको देखोगे आपको और समझ में आ जाएगा कि क्योंकि उसके हावभाव भी
(1:48:20) होंगे। उसकी आंखों में आप देखोगे उसके चेहरों को देखोगे। विस्तरल फैट भी देख सकते हो थोड़ा बहुत आंखों से स्कैन करके। वैसे टच करके उसका फैट भी देख सकते हो। तो तो आपको और पता लग जाएगा कि यार इस आदमी को मैं ज्यादा अच्छा ठीक कर सकता हूं। तो व्हाई ओनली डिजिटल कंसल्टेशन? ऐसा क्यों? देखिए डिजिटल कंसल्टेशन का मैंने कभी सोचा नहीं था कि मैं सिर्फ डिजिटली काम करूंगा। लेकिन क्योंकि मैं रहता हूं पटना में। मेरा होमटाउन पटना है। और वहां रहते हुए मेरे पास कोई पेशेंट नहीं आता पटना का। पटना के लोग नॉनवेज नहीं खाते। नहीं खाते हैं बट मेरे पास नहीं आते। डर लगता है
(1:48:48) उनको। हां डर नहीं लगता। उनको लगता है कि यार ये सब में क्या रखा है? डाइट वाइट से क्या होगा? क्योंकि बिहार, यूपी और झारखंड ये तीन स्टेट हैं जहां से मेरे पास पेशेंट नहीं आता। हां। और मुझे ऐसा लगता है कि इन जनरल इन तीनों स्टेट्स में एजुकेशन का प्रॉब्लम है। बैकवर्डनेस ज्यादा है और आईक्यू वगैरह लो है थोड़ा लोगों का इन सारे स्टेट्स में इन तीनों स्टेट्स में बेसिकली ये समझते नहीं है मेरी बात को और इसलिए मैं यही मानता हूं कि मैं गरीबों का मसीहा नहीं हूं। मैं अमीरों का मसीहा हूं। अमीर लोग जो पैसा लगा करके गलत खा करके बीमार हो
(1:49:23) रहे हैं वो मेरे पास आए। जिनके पास पेइंग कैपेसिटी है। क्योंकि कुछ लोग बोलते हैं आपके चार्जेस बहुत ज्यादा हैं। मैं बोलता हूं फिर मत आओ। है ना? तो मैं समझा देता हूं। मैं बहुत ऑनेस्टली बात करता हूं। मैं नहीं मुझे नहीं करना है। सोशल सर्विस नहीं करना है मुझे। मुझे अपने काम का चार्ज चाहिए। मैं फीस आपको पे करना है। मैं जो सर्विस दे रहा हूं आपको उसके वैल्यू को ध्यान में रखते हुए आपको मुझे पे करना है। अब ये सब नेगोशिएशन मत करो आप। मेरे से मछली बाजार और सब्जी बाजार मत बनाओ इसको। कोई अमीर बाबा है आपके पास? बाबा आते हैं बाबा बाबा
(1:49:54) बाबा मींस जो कथा सुनाते हैं नहीं नहीं आए नहीं है अभी तक तो नहीं आए हैं तो इनको डायबिटीज नहीं है इनको कोई बीमारी नहीं है इनको हाइपरटेंशन नहीं है इनको लो बीपी नहीं है लो शुगर नहीं है कुछ नहीं है तो ये तो वेजिटेरियन है सब अब किसको है नहीं है आपको कैसे पता कैसे पता कि नहीं है इन लोगों को आपको वो बताएंगे कभी देख के लगता है ऐसा नहीं देख के नहीं होता देख के कुछ नहीं होता देख के आप नहीं बता सकते हो सब कुछ देखने से नहीं होता है ना कुछ चीजों को ब्लड में ही देखना पड़ता है। सिर्फ चेहरा देखने से नहीं होता। तो इसलिए ऐसा नहीं होता और इसलिए मैं बोलता हूं कि
(1:50:28) मुझे गरीबों का मसीहा नहीं बनना है। और एक्चुअली अगर आप मानते हो कि मैं कुछ एक्चुअली ऐसा कुछ काम कर रहा हूं जो एक्चुअली गरीबों के लिए है तो वीडियो सुन लो यार। वो तो फ्री में है। आपको अल्टीमेटली जो डाइट करनी है वो मैं बता रहा हूं। तो फ्री में आपको वीडियो सुनना नहीं है। क्योंकि फिर बोलते हो कि सेशन बहुत लंबे होते हैं। तो आपके पास पेशेंस भी नहीं है ना ही पैसे हैं। तो मैं क्या करूंगा आपके लिए फिर? पेमेंट के लिए आपके पास पैसे नहीं है, सुनने के लिए पेशेंस नहीं है। तो अल्टीमेटली फिर काम कौन करेगा आपके लिए? अब बताओ इसका इलाज क्या है? कह जिसका कोई
(1:51:05) नहीं है उसका तो खुदा है ही। है ना? फिर वही आप भगवान को मानते हो तो फिर भगवान भरोसा है सब कुछ। होंगे आप तो होंगे। अच्छा आपने पिछले पॉडकास्ट में बात करी थी। बहुत सारे जैन लोग भी आते हैं आपके पास। हां। किसी ने कुछ वापस कमेंट कि सर कैसे बोल रहे हो आप जैन तो किसी ने नहीं जिस मैं मैंने बोला ना जैन लोग तो नहीं खा सकते तो आज भी विश्वास नहीं करता वो मैंने चर्चा जब किया इस बात को सेशन में तो वो जैन जो पेशेंट है फीमेल पेशेंट उसने मुझे बस उन्होंने मैसेज किया कि ऐसा-सा था मुझे बड़ा मजा आया सुन के ये चीज लोग खुश हुए हैं खुश हूं मैं तो आज भी यकीन नहीं कर रहा
(1:51:39) हूं मेरे को कोई बात करा रहा ना कोई जो है जैन नॉनवेज खाता हो हां बिल्कुल कराऊंगा जरूर हैं जरूर सही में मैं आज भी यकीन नहीं कर पा रहा हूं सही में जैन लोग नॉनवेज जैन मारवाड़ी सब लोग खा रहे हैं आप तो मारवाड़ी का ठीक है वो तो उनका समझ में आता है पर जैन लोग आप विश्वास नहीं करोगे मैं बोल दूं हम वो सेम जैन हम बाहर फॉरेन ट्रिप में बीफ खाया उन्होंने आप तो प्रमोट ही कर रहे हो उस चीज को मैं कोई नहीं होता हूं बताने वाला कि आपको क्या खाना है मैं बोलता हूं आप अगर यह खाओगे तो आप बेटर हो जाओगे मैं बस ये बोल सकता हूं मैं किसी को बोलता नहीं हूं कि
(1:52:15) आप बीफ खाओ ये खाओ वो खाओ। मैं बोलता हूं आपके लिए वो फूड है। आपको खाना है आप खाओ। और अगर अल्टरनेटिव और भी हैं जैसे रेड मी और भी अल्टरनेटिव है ना। हमको बीफ ही नहीं खाना है क्योंकि गोट भी है, लैंप भी है। वो आप खा सकते हो इंडिया में होते हुए। अब बाहर जाकर के क्या खा रहे हो? मुझे उससे क्या मतलब है? आप बाहर में खाओगे तो क्या मैं आप पे थोड़ी ना केस करूंगा या मुझे क्या हक बनता है उस पे कुछ क्वेश्चन करने का? चलो ठीक है। भाई वो मेरा एरिया नहीं है ना? हां। मैं अपने एरिया के तहत भी काम कर रहा हूं। पर मैं बात करना चाहूंगा दो चार
(1:52:46) लोगों से। जरूर जरूर मैं करवाऊंगा आपको। दो चार ऋषि मुनि से भी बात करना चाहूंगा मैं। ऋषि मुनि अगर मेरे पास आएंगे तो मैं जरूर करवाऊंगा। कनेक्ट करेंगे हम ऑनलाइन। ओ ठीक है पक्का। अब मुझे बताओ कि अगर आपको आज ₹100 करोड़ कोई दे दे। ये लो ₹100 करोड़। पकड़ो। पकड़ो। ओके। पकड़ो ना। पकड़ लिया। हां आज। नहीं ऐसे नहीं पकडूंगा। सॉरी। पहले आप बताओ। क्या बात है? अरे पकड़ो ₹100 करोड़। पहले आप बताओ। ₹100 करोड़ पक पकड़ो तो सही। वो पकड़ लो। चलो मैंने देख लिया हूं। लेकिन मैंने लिया नहीं है। अभी बस पकड़ा है। ठीक है। तो आप है ना हेल्थ सेक्टर में क्या किस जगह पे इन्वेस्ट करोगे?
(1:53:23) देखिए मुझे नहीं लगता वो पैसे अभी अवेलेबल है। हां आप ले लो आप प्लीज ले लो। इसलिए मैंने बोला मैं हेल्थ सेक्टर में इन्वेस्ट नहीं कर सकता हूं। मैं एजुकेशन के रिगार्डिंग के अराउंड मैं इस पैसे को लगा सकता हूं कि ज्यादा से ज्यादा यह चीज स्प्रेड हो। ये जो नॉलेज मैं दे रहा हूं ना इसको मैं प्रमोट करूं। उस पैसे को यूज करके अगर कोई मुझे अगर फंड दे रहा है उस तरह से प्रमोट करने के लिए इस डाइट को तो डेफिनेटली मैं कभी ना नहीं करूंगा उस चीज के उस चीज के लिए लेकिन मैं हां किसी हेल्थ सेक्टर में मैं इन्वेस्ट नहीं करूंगा मुझे पता है कोई मतलब नहीं है
(1:53:57) फिर हॉस्पिटल खुलवाना फिर वही डायलिसिस ये वो करके कोई फायदा नहीं है अरे उस चीज को कम करना है ना सीकेडी के पेशेंट्स को बनने क्यों दे रहे हो सीके पता है तुम्हें सीकेडी के पेशेंट्स होंगे डायबिटिक रहेंगे तो तो आप डायलिसिस खुलवा खुलवा के क्या कर लोगे आप डायलिसिस मशीन और ये सब हॉस्पिटल मैं मेरा इंटरेस्ट नहीं है प्रिवेंट मेंटेटिव मेडिसिन पे काम कर रहा हूं। तो मैं हेल्थ सेक्टर में वो ऐसे भी नाम का हेल्थ सेक्टर है वो। वो डिजीज सेक्टर है बेसिकली तो बीमारियों का घर है। वो उसमें बीमार लोग आते हैं। मैं तो हेल्थ प्रमोट कर रहा हूं ना।
(1:54:23) तो मैं क्यों सब वो सब जगह इन्वेस्ट करूंगा? मैं तो ये चाहूंगा कि आप मेरे लिए कुछ ऐसा काम करो जिससे ये नॉलेज ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचे। हम ऐप के थ्रू हो सकता है। डिजिटली हो सकता है। मेरे लेक्चर्स हो सकते हैं। बहुत सारी चीज़ है। आप इसमें आप बोलोगे तो डेफिनेटली मैं कभी ना नहीं करूंगा। ठीक है। तो एक बात बताओ हाइपरटेंशन हम हाइपरटेंशन की कौन-कौन सी दवाई प्रिस्राइब कर रहे हैं डॉक्टर्स अभी? ब्लड प्रेशर के लिए एक सबसे पहली जो मेडिसिन यूज होती है जो प्रिस्राइब की जाती है डॉक्टर्स के द्वारा वह होती है एक कैल्शियम चैनल ब्लॉकर जिसमें एम्लो
(1:54:54) एम्लोडिपिन निफेडिपिन और फिर आता है एंजोटेंसिन रिसेप्टर ब्लॉकर जिसमें टेलमीसाटन ओलमीसाटन ये सारी मेडिसिन आती है ये सारी अलग ही मेडिसिन लो सा ये नया मेडिसिन बनाया गया मार्केट में अभी कितने सालों से आया है ये ये तो हो गया काफी साल हो गए हैं कितने साल 10 साल हां डेफिनेटली 10 15 साल 10-1 साल से हाइपरटेंशन में ज्यादा इन्वेस्ट मेंट आया है अभी। हां बिल्कुल। और हाइपरटेंशन होता क्यों है? ब्लड प्रेशर का जो प्रॉब्लम है हां वो भी आपके कार्बोहाइड्रेट के इंटेक से रिलेटेड है। वो भी खाने से रिलेटेड है। हां उसी से रिलेटेड है। बट प्रॉब्लम ये है कि आप सिर्फ कार्ब्स
(1:55:28) नहीं खा रहे हो। हम आप कार्बोहाइड्रेट के साथ फैट भी खाते हो। हम तो या तो आप फैट को पूरी तरह से हटा दो। हम कार्ब्स को खाओ। हम जो एक्सट्रीम लो फैट डाइट होता है जो पॉसिबल नहीं है उसको भी लॉन्ग रन में सस्टेन कर पाना। उस पे न्यूट्रिशनल डेफिशिएंसी हो जाएगी आपको और या तो आप कार्ब्स को कंप्लीटली हटा दो फैट को खाओ हम और प्रोटीन भी डेफिनेटली जाएगा क्योंकि प्रोटीन तो दोनों ही साइड है आप चाहे लो फैट डाइट करो या लो कार्ब डाइट करो हम तो जब भी दोनों चीजें मिक्स होती है ना उसी से क्रॉनिक इनफ्लेमेशन का बर्डन आता है ह्यूमन बॉडी पे आपके मेटाबॉलिक मशीनरी
(1:56:03) पे तो जब भी आप दोनों चीजों को नहीं लोगे किसी एक चीज को लोगे तो आपका सिस्टमिक इनफ्लेमेशन जो है वो कम हो जाएगा हम तो आपका ब्लड प्रेशर भी कम हो जाएगा। करेक्ट। लेकिन क्योंकि सिर्फ ब्लड प्रेशर को ठीक नहीं करना है। हमें तो चाहिए लॉन्ग टर्म मेटाबॉलिक हेल्थ। हम तो उसके लिए आप क्या हटाओगे? फैट को हटाओगे या कार्ब्स को हटाओगे? फिर वही बात आती है। सारा घूम फिर के पूरा पॉडकास्ट वहीं पे आके सिमट जाता है बार-बार। हां। और फिर एक और रीजन मैं बताता हूं क्योंकि कार्ब्स खाने से इंसुलिन का लेवल हाई होता है और हाई इंसुलिन से ब्लड प्रेशर बढ़ता है।
(1:56:35) ये देखा गया है कि जिसका भी इंसुलिन हाई होता है उनका ब्लड प्रेशर हाई होता है। क्योंकि इंसुलिन का काम होता है सॉल्ट को रिटेन करना किडनी के लेवल पे। जितना ज्यादा हाई इंसुलिन होगा उतना ज्यादा साल्ट का रिटेंशन होगा। सॉल्ट एक्सक्रीट आउट नहीं होगा यूरिन के थ्रू। ज्यादा से ज्यादा साल्ट आपके ब्लड में रहेगा। और हाई इंसुलिन आपके रास सिस्टम को भी एक्टिवेट करता है। एक हॉर्मोनल सिस्टम है हमारी बॉडी में। रास रास क्या होता है रास? आर डबल एएस रेनिन एंजोटेंसिन एल्डोस्टेरोन सिस्टम हम तो ये हॉर्मोनल सिस्टम है जो आपकी बॉडी में सॉल्ट इलेक्ट्रोलाइट वाटर बैलेंस को
(1:57:11) रेगुलेट करता है कि जैसे ही आपका ब्लड प्रेशर कम होने लगेगा यह रास एक्टिवेट हो जाएगा ब्लड प्रेशर को नॉर्मलाइज करने के लिए। ब्लड प्रेशर लो होगा तो साल्ट रिटेंशन कैपेसिटी आपकी बढ़ जाएगी। क्यों? क्योंकि रास एक्टिवेट हो गया। और आपका इंसुलिन अगर हाई है हम तो हमेशा आपका रास ओवर एक्टिवेटेड होता है। ज्यादा से ज्यादा साल्ट को रिटेन करता है। और जिससे ब्लड प्रेशर बढ़ता है। हम तो अगर आप कार्बोहाइड्रेट नहीं खाते हो आपका इंसुलिन का लेवल फॉल करता है। हम आपका रास जो सिस्टम है हम वो भी डाउन रेगुलेट होता है। हम और साल्ट का रिटेंशन कम हो जाता है।
(1:57:46) तो सिंपली साल्ट को रिस्ट्रिक्ट करके आप ब्लड प्रेशर को नहीं ठीक कर सकते हो। क्योंकि प्रॉब्लम इंटेक का नहीं है। प्रॉब्लम रिटेंशन का है। हम क्या आप कम भी खा रहे हो तो वो रिटेन बॉडी कर ले रही है। आप ज्यादा भी खाओगे तो जब रिटेंशन नहीं होगा तो जितना भी अनवांटेड होगा बॉडी के लिए वो एक्सक्रीट आउट कर देगी। क्यों? क्योंकि रास आपका नॉर्मल है। ये ओवर स्टिमुलेटेड नहीं है। ठीक है। थोड़ी देर अंडे पे बात करते हैं। हम सफेद अंडा अच्छा होता है कि जो पीले कलर का जो ब्राउन कलर का अंडा होता है वो अच्छा होता है? देखिए सफेद को आप ब्राउन भी कर सकते हो
(1:58:19) ऊपर से। तो उससे क्या फर्क पड़ेगा? तो इसलिए मार्केट में जो ब्राउन है वह एक्चुअली सफेद है। उसे ब्राउन कर दिया गया है। तो अंडे को लेकर के भी यह सब बहुत वो रहता है। तो अंडा अंडा है। अंडा अंडा है। आप कोई भी खाओ। देसी अंडा वाइट अंडा क्या? शेरके का कलर पे आप मत जाओ। आप सिंपली सस्ता वाला जो फार्म वाले जो अंडे होते हैं ना वही खाओ। वो बेस्ट है वो। क्या फर्क है? देसी अंडा और सफेद अंडा। फर्क थोड़े बहुत न्यूट्रिशन का फर्क होता है। कैरोटिनोइड्स होते हैं जो उसका जो आपका योक पार्ट होता है ना वो कैरोटिनोइड्स में डिफरेंस होता है। एंटीऑक्सीडेंट जिसे हम बोलते हैं वो थोड़ा
(1:58:53) ज्यादा होता है उनमें और विटामिंस और बाकी भी जितने भी न्यूट्रिएंट्स हैं वो थोड़ा कंटेंट ज्यादा होता है उसमें। बट मुझे ऐसा लगता है कॉस्ट को आप ध्यान में रखते हो तो वो देसी अंडा खाना वर्थ नहीं है। तो येलो पार्ट खाना येलो पार्ट भी खाना चाहिए और वाइट पार्ट दोनों खाने दोनों खाना चाहिए। दोनों इसमें सबसे ज्यादा न्यूट्रिशन होता है, प्रोटीन होता है, येलो पार्ट में होता है। इन जनरल अगर आप सिर्फ प्रोटीन की बात करोगे तो वाइट पार्ट में ज्यादा है। हम लेकिन ऑलमोस्ट 50-50% है। 50-50 अगर 6 ग्राम प्रोटीन है आपका होल एग में तो 3.5 ग्राम माना जाता है एग वाइट
(1:59:24) में और 2.5 ग्राम यॉर्क में है। तो ऑलमोस्ट 50-50 है। बहुत ज्यादा डिफरेंस नहीं है। अच्छा ऐसा बोला जाता है कि लड़कियों को अगर आप अंडे खिलाते हो जाते हैं तो पीरियड्स जल्दी आ जाते हैं। गर्मी ज्यादा होती है। ऐसा कुछ नहीं ये मिथ है। नहीं नहीं मिथ है पूरा। कंप्लीट मिथ है। आप श्योर हो इस बारे में? हां, मैं श्योर हूं। 500% जो जो बोल रहे हैं वो श्योर नहीं है बस। मैं तो श्योर ही हूं। कहां किसी को पीरियड? पीरियड रेगुलराइज हो रहा है सभी का एग्स वगैरह खाकर और सही हो रहा है। और सही हो रहा है। अंडे खा के? अंडे खाकर ऑमलेट खा के। बच्चे जो हैं
(1:59:55) ऑमलेट खाना चाहिए। अंडे खाना चाहिए। कोई भी किसी भी फॉर्म में आप अंडे को खा सकते हो। बॉईल खाना है बॉईल खा लो। बॉयल्ड एग्स को आप फ्राई करके खा लो। ऑमलेट खा लो। कभी स्क्रैमल्ड खा लो। कभी भुर्जी बना लो। जैसे खाना है वैसे खाओ। अच्छा वेजिटेरियन अगर अंडा खाए हम तो ओकेओके रहेगा मतलब ठीक रहेगा थोड़ा मतलब हेल्थ में इंप्रूवमेंट रहेगा बिल्कुल मैं तो यह कहता हूं कि वेजिटेरियन होते हुए मीट खाओ आप हम तो वेजिटेरियन प्लस मीट आपको पता है एक वीगन डाइट भी होता है हम है ना वीगन लोग हां वीगन लोग पीछे से फिश खाते हैं हम उसको बोलते हैं पिसको वीगन
(2:00:29) हम क्योंकि फिश भी खाना पड़ता है उनको और खाना पड़ेगा क्योंकि ओमेगा थ्री फैट उनको मिल नहीं रहा होता है वी कंप्लीट वीकन डाइट पे तो इसको अब पीछे से आप फिश ऐड कर लो और कहने के लिए आप वीकन हूं मैं तो मैं वैसे ही कहता हूं कि भाई कहना है तुमको खुद को वेजिटेरियन कह लो लेकिन मीट खाओ अरे सर अभी आई थिंक दो देखिए इसका कोई कोई मतलब नहीं है। आप वेजिटेरियन बोलते हो और फिर उसमें क्लासिफाई सब क्लासिफिकेशन लैक्ट टू वेजिटेरियन लैक्ट टू ओवो वेजिटेरियन क्यों करते हो ये सब भाई वेजिटेरियन को सिंपली बोल दो ना कि तुम्हें नॉनवेज फूड अगर जिस
(2:01:04) समय तुमने एनिमल प्रोडक्ट को लिया तुम वेजिटेरियन नहीं हो क्यों ये लैक्टो वेजिटेरियन लैक्टो वेजिटेरियन बनाते हो ये सब इमोशनल लेवल पे ही तो कहीं ना कहीं आप सेटिस्फाई कर रहे हो ना खुद को कि मैं वेजिटेरियन हऊंगा क्योंकि लैक्टो जैसे ही मीट खाता हूं मैं नॉन वेजिटेरियन हो जाता हूं मैं कहता हूं किसी भी एनिमल प्रोडक्ट को आप खाते हो आप वेजिटेरियन नहीं हो। क्लियर कट रखना है। क्यों इस तरह से आप कर रहे हो? मैं डाइस डाइस ही ज्यादा हो रहे हैं। सारा ये इंडियंस के साथ प्रॉब्लम ही यही है। देखिए रिलीजियस लोग इमोशनली इसी तरह के होते हैं।
(2:01:37) हम इमोशनल लोग होते हैं रिलीजियस लोग। इसलिए सबसे पहले आपको अपने हेल्थ पे काम करना है ना। तो आप भूल जाओ। आप किस रिलजन से हो? आपका रिलीजन, आपका धर्म क्या कहता है। सिर्फ हेल्थ पे काम करो। हेल्थ जिससे आएगा आपको वही करना है। मैं तो मानता ही नहीं हूं कि मैं किस धर्म से हूं। हम हिंदू धर्म से हूं, किससे हूं? मैं किसी चीज़ में बिलोंग ही नहीं करता हूं। खुद को मैं रखता ही नहीं हूं। किस कास्ट से हूं, किस धर्म का हूं, ना ही मैं किसी चीज़ को फॉलो करता हूं। मुझे कोई मतलब नहीं है इन चीजों से। दूर-दूर तक कोई मतलब नहीं है। अच्छा, अभी दो हफ्ते पहले एक रिपोर्ट आई
(2:02:07) है डॉक्टर की कि भैया कि कैंसर हो रहा है। मतलब एक कंपनी का नाम भी लिया है एगो एगोस एगोस करके। तो अंडे से वो उन्होंने जो अंडे बनाया उससे कैंसर हो रहा है। हो रहा है। नहीं ये गलत है स्टेटमेंट। यही तो फर्स्ट रिपोर्ट आई है उसकी बोलने मैं बता रहा हूं उसका हां आपने देखा रिपोर्ट दो महीने दो वीक पहले जो मैंने लाइव सेशन में डिटेल में बहुत वीडियो भी बनाया है उसके ऊपर बहुत क्लियर वीडियो है जो भी ऑडियंस देख पा रही है ना हमारे इस सेशन को वो मेरे चैनल पे जाके देख सकती है उस द क्लियर एक्सप्लेनेशन प्रॉब्लम क्या है उस वीडियो में ईगोस वाला जो ट्रस्टिफाइड वाला जो टेस्ट
(2:02:39) किया है देखिए इसमें एग्स में हमें पाया गया उस एंटीबायोटिक का मेटाबोलाइट नाइट्रोफ्यूरन क्लास ऑफ़ ड्रग होता है हम जिसमें वो ड्रग है फ्यूराडोन अब उस प्यूरासोलिडोन को का यूज़ जो है वह बैंड है इस फूड प्रोड्यूसिंग एनिमल्स में पोल्ट्री में हमें उसमें यूज़ नहीं करना है। हम ऐसा कुछ नहीं है कि हम इन जनरल वो बैंड है एंटीबायोटिक है। एनिमल हस्बैंड्री में हमें यूज़ नहीं करना है। उस पोल्ट्री फार्मिंग में यूज़ नहीं करना है। उसके लिए बैंड है। हम्म। अगर हम उस उसके लिए बैंड इसलिए है शायद क्योंकि डेफिनेटली एंटीबायोटिक आप दे रहे हो एनिमल्स में इंफेक्शन को प्रिवेंटेटिव
(2:03:17) अप्रोच लेते हुए कि कोई इंफेक्शन कैच ना कर ले उस और ओवरऑल ईल्ड पे ध्यान होता है। जब भी आप कोई इंडस्ट्री चलाते हो, रन करते हो तो वो जानवर मरे ना। ज्यादा से ज्यादा वो जानवर जिए ताकि आपका प्रोडक्टिविटी ज्यादा से ज्यादा हो। उसके लिए एंटीबायोटिक्स यूज़ होता है। और वो हर जगह यूज़ हो रहा है। प्लांट क्रॉपिंग में भी हो रहा है। वहां पे भी इंसेक्टिसाइड, पेस्टिसाइड, एंटीबायोटिक्स का स्प्रे होता है। कोई उस पे बात नहीं करता। बट बात हमेशा अंडे पे मीट पे हो जाती है। हां। राइट? आप पालक खाते हो, पालक में भरा हुआ है इंसेक्टिसाइड, पेस्टिसाइड,
(2:03:44) एंटीबायोटिक्स का स्प्रे जितने भी लीफी ग्रीस जो आप ठंड में खाते हो, लाल साग, पालक ये सब बना के आप टेस्ट आप जब करते हो, बनाते हो तो आपको पता लगता होगा कितना ज्यादा उस पे केमिकल्स छिड़का हुआ है। नहीं ये तो बात है क्योंकि मेरे पॉडकास्ट में बहुत लोग आते हैं और ये बात बोलते हैं कि इतना मतलब जो पेस्टिसाइड यूज़ कर रहे हैं सब लोग हर फार्मिंग के अंदर। यही तो बात करते हैं मतलब बिल्कुल बहुत जरा आम जनता को पता नहीं पड़ रहा है ये आम जनता को बस अंडे का एंटीबायोटिक दिख रहा है अंडे में एंटीबायोटिक प्लांट्स पे जो छिड़का जा रहा है उससे
(2:04:11) मतलब नहीं उनको तो हराभरा रंग बिरंगा रेनबो कलर वो सब कुछ अच्छा है आप उस पे कुछ भी डाल दो वो हेल्दी है हमेशा तो अंडे में जो एंटीबायोटिक मिला पहली बात तो वो पेरेंट एंटीबायोटिक नहीं मिला हमें उसका रेसिड्यू मिला मेटाबोलाइट मिला राइट हम और वो मेटाबोलाइट अल्टीमेटली अंडे में गया हम अंडे का पार्ट बन गया क्योंकि उस चिकन ने मेटाबोलाइज किया उस ड्रग को और अंडे में वह मेटाबोलाइट एओजी नाम से अंडे में पाया गया। उस अंडे को हम खाते हैं। उस अंडे को जब हम खाएंगे तो क्या एओजी हमारे टिश्यू में एक्यूमुलेट करेगा? नहीं। हमारा लिवर है, हमारा डिटॉक्सिफिकेशन
(2:04:51) सिस्टम है, उसको क्लियर करेगा। हम तो ओवरऑल जो एक्यूमुलेशन है, रिटेंशन है हमारे बॉडी टिश्यूज़ में उस मेटाबोलाइट का होगा नहीं हमारी बॉडी में। क्योंकि हमारा सिस्टम उसको क्लियर करना जानता है। आप इतने एंटीबायोटिक्स खाते आ रहे हो बचपन से। क्या वो एंटीबायोटिक आपके टिश्यू में रिसाइड किया हुआ है अभी तक? नहीं। कितने पैरासिटामॉल आपने खाए होंगे बचपन से? खाए तो है बहुत सारे। तो क्या मतलब आप आप अगर जंगल जाओगे और आपको शेर देख लेगा तो छोड़ देगा कि एंटीबायोटिक खाया हुआ है। जानवर है इंसान है। इस बात का कोई मतलब नहीं बनता है। आपका मीट जो है मीट में उस तरह से
(2:05:26) एक्यूमुलेट नहीं हो रहा है आपका ड्रग। इसलिए वो मैटर ही नहीं करता। और जिस लेवल में वो डिटेक्ट हो रहा है वो यह नहीं बता रहा कि वो लेवल डायरेक्टली हमारे लिए डेंजरस है। वो बस डिटेक्ट हुआ है। क्योंकि जिस लेवल में वो डिटेक्ट हुआ है उसे बस स्टैंडर्ड टेस्टिंग डिटेक्ट की है। और स्टैंडर्ड टेस्टिंग डिटेक्ट की है उसका एक सर्टेन मेथड होता है कि उस लेवल पे अगर वह पाया जाएगा तो स्टैंडर्ड टेस्टिंग उसको सेंस कर लेगी और वह डिटेक्ट हो जाएगा। तो बस उतना ही लेवल पाया गया जहां पर वो डिटेक्ट हो रहा है। अगर वो थोड़ा सा भी उससे कम पाया जाता एग में तो वो स्टैंडर्ड
(2:05:58) टेस्टिंग को बाईपास कर देता। तो आपको पता भी नहीं लगता कि उस एग में एंटीबायोटिक है या नहीं है। तो उस लेवल को जस्ट क्रॉस कर गया। इसका ये मतलब नहीं है कि वो लेवल हमारे लिए डेंजरस हो गया। वो बस ये बता रहा है कि वो स्टैंडर्ड टेस्टिंग के उस लेवल को क्रॉस कर गया जहां पे वो डिटेक्ट हो जा रहा है उस मेथड पे। समझ रहे हो बात को? समझ तो रहा हूं सरसों। कहने का यह मतलब है हम अगर हाई कार्ब डाइट पे भी होते हैं तो हमारी बॉडी फैट को यूज कर रही है। ऐसा नहीं है कि सिर्फ और सिर्फ कार्ब्स को यूज़ कर रही है। हम ओवरनाइट फास्ट में जाते हैं। हमारी
(2:06:27) बॉडी फैट को यूज़ करती है और उस समय भी कीटोंस जनरेट होता है हमारी बॉडी में। जिस कीटो डाइट की लो कार्ब डाइट की हम बात करते हैं ना वो कीटोंस आपकी बॉडी में हाई कार्ब डाइट पे भी प्रोड्यूस हो रहे हैं। क्योंकि आप ओवरनाइट फास्ट में जा रहे हो। 8-10 घंटे 12 घंटे फास्ट ऑलमोस्ट सभी लोग कर ही ले रहे हैं। और उसमें कीटोन जनरेट हो रहा है। लेकिन जब आप स्टैंडर्ड टेस्टिंग जब आप करोगे तो आपके ब्लड में कीटोनोंस आपको नहीं मिलेगा। तो इसका यह मतलब नहीं है कीटोन बन नहीं रहा। वही मैं कह रहा हूं कि अंडे में अगर ऐसे एओज़ ही रहता तो वो नहीं
(2:06:55) पाया जाता क्योंकि उसका लेवल थोड़ा बढ़ गया जिस पे स्टैंडर्ड टेस्टिंग ने डिटेक्ट कर लिया इसलिए वो एक इशू बन गया। तो वो लेवल हमारे लिए डेंजरस है। यह प्रूवन नहीं है। क्योंकि कोई ऐसा ह्यूमन स्टडी है ही नहीं जो यह बताता है कि ये लेवल हमारे लिए डेंजरस है। किसी एनिमल मॉडल पे आप एक्सपेरिमेंट करते हो और उसे बता देते हो एनिमल में अगर रोडेंट्स में अगर कैंसर हो रहा है तो आप बोल देते हो ह्यूमन बीइंग्स में भी हो जाएगा। अरे चूहा चूहा है इंसान इंसान है। उसका कोई भी स्टडी हमारे लिए कैसे इक्विवेलेंट हो सकता है? उसके रिजल्ट्स नहीं हो सकता ना। आपको ह्यूमन बीइंग्स पर
(2:07:33) कॉज एंड इफेक्ट इस्टैब्लिश करने के लिए, प्रूव करने के लिए आपको ह्यूमन बीइंग्स पर एक्सपेरिमेंट करना पड़ेगा। आप चूहे पर एक्सपेरिमेंट करके नहीं बोल सकते कि चूहे को कैंसर हो तो ह्यूमन बीइंग्स को भी हो जाएगा कैंसर। मेटाबॉलिज्म सबका डिफरेंट है। ओवरऑल इम्यून सिस्टम सब कुछ अलग है। डिफरेंट है। एनवायरमेंट अलग है। उसका कैंसर होना और हमारी बॉडी में कैंसर होना बहुत डिफरेंट है। सिनेरियो नहीं हो सकता उस तरह से। इसलिए इन चीजों को मान करके आप एक ही ऑप्शन है। अगर आपको ऐसा लग रहा है कि एग्स नहीं खाना चाहिए तो फिर कुछ मत खाओ। स्टार्वेशन में चले जाओ और
(2:08:04) डेथ को वो कर लो। एक्सेप्ट कर लो। ठीक है। सर बहुत पॉडकास्ट तो अपन ने गजब बना लिया। एक और चीज़ बता दो लास्ट इस पॉडकास्ट की कि ह्यूमन बीइंग को कैसा दिखना चाहिए? फिर मेरी में बात आ जाएगी। आप ही मुझे इंस्टा एक बार शर्ट खोल के भी दिखा देना इस पॉडकास्ट में कि कैसा दिख रहा चाहिए वो मैं देखिए ऑनलाइन सोशल मीडिया पे वो काम करता रहता हूं ना प्रोफाइल को चेक कर लें दिखाते हो हां वो तो मैं मेरा काम ही है भाई हां मतलब कुछ लोग तो बोलते भी हैं ये तो बॉडी दिखा दिखा के पेशेंट को बुलाता है हां तो यही काम है इसका हां बेहूदा डॉक्टर है ये है वो है तो ये सब
(2:08:46) चलता रहता है मतलब आपसे पॉडकास्ट देख के लोग कनेक्ट कर लेते हैं आप नंबर भी शेयर करते हो क्या कुछ नहीं नंबर तो मेरा वो लाइव जो सेशन करता हूं ना मैंने नंबर डिस्प्ले किया रहता है उसी पे तो उस नंबर को देख के मैसेज करते हैं डायरेक्टली कॉल भी करते हैं कुछ लोग तो कॉल करते हैं तो मैं तुरंत कट कर देता हूं इंडिया के बाहर के लोग ज्यादा जुड़ते होंगे आपसे एनआरआई जो है वो जुड़ते हैं हां एनआरआई जो है समझदार लोग जुड़ते हैं समझदार मतलब वैसे मैंने फाउंडर्स टीम की शुरुआत इसलिए करी थी देखो लिमिटेड ऑडियंस है बिल्कुल है ना फाउंडर्स टीम के अंदर बट है
(2:09:15) ना बहुत मैंने एक डाटा शेयर किया था कि मैंने 500 पॉडकास्ट कर लिए अभी तक एक साल में 500 या पर 500 लोग कम से कम भी 2000 करोड़ का रेवेन्यू चलाते होंगे इंडिया में हम अब सोचो है इतने सी लोग या पर काम इतना बड़ा कर रहे हैं यस तो फाउंडर्स इनकी बात ही अलग है थोड़ी सी कि थोड़ी एक समझदार ऑडियंस आती है समझदार लोग जुड़ते हैं जो समझते हैं कि अरे यार ये फाउंडर को बुला के ऐसे सवालात भी कर रहा है ताकि पूरा मैंने देखो दोनों पार्ट में डिवाइड कर दिया इस चीज को कि वेजिटेरियन वालों के लिए भी कर दिया और नॉन वालों के लिए भी कर दिया जिसको हो गई बीमारी वो आपके पास आ सकता है
(2:09:50) और जो जा रहा है वो भी बच सकता है हां एक्सैक्टली मैं स्टिल ये अपने कन्विक्शन की बात है कि अंदर से आना चाहिए कि मेरे को करना है कि नहीं करना है। या बिल्कुल मतलब मुझे ऐसा लगता है कि जिस जो भी वेजिटेरियन डाइट पे खुश हैं वो खुश हैं। मुझे क्या प्रॉब्लम है? अगर आपको ऐसा लग रहा है अभी भी आप एग्री नहीं करते हो। आपको ऐसा लगता है नहीं मैं तो यही खाऊंगा। आप खाओ ना कंटिन्यू करो। मैं कहां बोलने जा रहा हूं आपको? मेरे पास तो आपका डायरेक्ट नंबर है ना विदाउट। हां भाई कृष्क कर लूंगा। मुझे पता है आप कॉल करोगे एक ना एक दिन। आप तो मेरे को पॉडकास्ट में डरा के जा रहे
(2:10:20) हो। तो और सिस्टम में नहीं रहने का सबसे बड़ा एडवांटेज मैं बताऊं आपको कि जब भी आप एक डॉक्टर होते हो ना अगर आप समझदार हो और हो सकता है एक जूनियर डॉक्टर एक सीनियर डॉक्टर से ज्यादा समझदार हो उसका जो थॉट प्रोसेस हो बेटर हो अपने सीनियर से वो एचओडी ही क्यों ना हो तो अगर आपको ऐसा लगता है कि ये पेशेंट के लिए मेरी ये एडवाइस ज्यादा बेटर है मेरे सीनियर से या मेरे इवन एचओडी से तो आप उसको आप फॉलो नहीं कर पाओगे हम क्योंकि सिस्टम में हो आप अपने सीनियर की बात को काट नहीं सकते हो हम और यह इशू मेरे साथ आ जाता था। मुझे ऐसा लगता था यार यह सही नहीं है लेकिन स्टिल
(2:10:55) मुझे करना पड़ रहा है। तो मुझे लगा हटो यहां से अपने मन का करो और जो मैं काम करूंगा वहां का कोई मुझे उम्मीद नहीं करेगा फिर तो इसलिए मैं हट गया कंप्लीटली। चलो सर डॉक्टर किसले सर आई विश यू ऑल द बेस्ट। मन के हारे हार मन के जीते जीत हो गया ये तो थैंक यू। और मैं तो चलो वो वेज और नॉनवेज की बात तो छोड़ देते हैं। वो वाले बात भी नहीं करते। बट जो एक माइंडसेट लेके आप चल रहे हो ना कि काम करना तो मेरी तरह ही करना। बिल्कुल। और मैं जितने भी फाउंडर्स टीम में जितने भी लोग देख रहे हैं ना मैं उनको यही बोलता हूं कि इतना काम करना और अपने फील्ड में
(2:11:24) इतना बन जाना है कि भैया आपके जैसा कोई है। एक्सैक्ट चलो हो सकते हैं बट आपके माइंड में आपके आप सब श्रेष्ठ होने चाहिए। बाहर हो सकते हैं। बिल्कुल लोगों का देखने का नजरिया अलग होता है। हो सकता है कि भ वो अलग है ये अलग है। बट आपको अपना देखने का नजरिया ऐसा बनाना है कि मेरे जैसा कोई नहीं है। राइट? मुझे ऐसा मुझे भी यही फील होता है। मुझे ऐसा लगता है ठीक है आप मेरे से बेहतर होंगे। लेकिन मैं उस चीज को मानूं क्यों क्योंकि आप मेरे से बेहतर हैं। मैं तो यही मानूंगा कि मैं ही सबसे अच्छा हूं। मैं क्यों मानूं कि आप मुझसे बेहतर हो। है ना?
(2:11:54) मुझे इसमें दिक्कत क्या है? अगर मैं ही बेस्ट मानूंगा खुद को तो इसमें प्रॉब्लम क्या है आपको? और जनरल पब्लिक को ये क्यों प्रॉब्लम है? मैं वैसे ही सोचता हूं। मुझे वैसे ही सोचने का हक है। डन सर। इससे वो लोग बहुत रील बनाएंगे। चलो सर। थैंक यू सो मच। थैंक यू। फॉर कमिंग इन द शो। एंड काफी वैसे खतरनाक बातें करते हैं अपन या सेशन मतलब यह पता है ये पडकास्ट नहीं होता एक सेशन हो जाता है राइट वन ऑन वन ये चैट जीपीटी से भी बात कर सकते हैं सब कुछ कर सकते हैं पर एक ह्यूमन इंटरेक्शन जो है ना पता है वो दिमाग की नसे खोल देता है या एक्सक्टली
(2:12:25) अपने पॉडकास्ट करने से पहले मैंने चैट जीपीटी से हथेरों सवाल पूछे सर सेम सवाल कि उसके क्या आंसर होंगे किस तरह के आंसर कर रहा होगा क्या कर रहा होगा वो एक डाइसी सिचुएशन में रहता है एआई एआई कि मैं ये बोलूं कि ये नहीं बोलूं ये बताऊं या नहीं बताऊं बट एक ह्यूमन जो है वो स्टडी देख के डाटा देख के लोगों से बात करके रियल लाइफ चीजों चेक करके बात कर सकता है। एआई को नहीं पता है ना कि डॉक्टर के आने वाला है। डॉक्टर क्या बोलेगा? चलो मैं बुलाऊंगा फिर मैं आपको शेयर करूंगा उस पे जरूर। चलो सर थैंक यू सो मच। थैंक यू। थैंक यू सो मच।
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