Saturday, October 17, 2026

अगर अंदर से टूट चुके हो, तो ये Podcast आपके लिए है | ft. Shatakshi | The Chitresh Soni Podcast

अगर अंदर से टूट चुके हो, तो ये Podcast आपके लिए है | ft. Shatakshi | The Chitresh Soni Podcast

Author Name:Chitresh Soni

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Youtube Video URL:https://www.youtube.com/watch?v=DhjD8lt1lFQ





Title: अगर अंदर से टूट चुके हो, तो ये Podcast आपके लिए है | ft. Shatakshi | The Chitresh Soni Podcast

Author Name: Chitresh Soni

Description: 🎙️ Ep. 68 | The Chitresh Soni Podcast

क्या आपकी overthinking, anxiety, past memories या self-doubt आपकी life को अंदर से रोक रहे हैं?

इस Podcast में mind patterns, subconscious blocks, self-worth, forgiveness, gratitude और healing को बहुत simple तरीके से समझाया गया है, ताकि आप अपनी problem की root पहचानकर life में clarity, peace और growth ला सकें।

यह episode उन लोगों के लिए बहुत useful है जो stress, emotional baggage, relationship issues, financial blocks या self-love की कमी से बाहर निकलना चाहते हैं।

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About Guest:
Shatakshi Singh एक healing और NLP field से जुड़ी expert हैं, जिन्होंने हजारों लोगों को stress, anxiety, depression और emotional blocks से बाहर निकलने में guide किया है।
@Shatakshisinghnlp


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🔥 इस Podcast में जानिए:

✔ Overthinking और anxiety की असली root
✔ Past memories life को कैसे रोकती हैं
✔ Self-worth और self-love damage क्यों होता है
✔ Forgiveness और gratitude से healing कैसे होती है
✔ घर बैठे emotional blocks release करने की simple techniques
✔ Healing और NLP में career कैसे बनाया जा सकता है

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⏱ Time Stamps

[00:00] Podcast Trailer
[01:08] Main Podcast Starts
[03:02] लोगों की Major Life Challenges
[08:26] Assumption और Psychosomatic Patterns
[13:49] Relationship Issues और Forgiveness
[16:21] Self-Worth और Self-Love Damage
[29:24] घर बैठे Healing के Basic Steps
[33:17] Shower Technique
[37:54] Catharsis और Thought Release
[45:14] Success Vision और Neuroplasticity
[58:19] Gratitude और Forgiveness का Role
[01:05:12] Real Life Healing Stories
[01:12:18] Healing/NLP में Career
[01:16:21] Final Message

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⚠️ Disclaimer

यह Podcast केवल Educational और Informational Purpose के लिए है। Mental health, anxiety, depression, healing, meditation, NLP या therapy-related किसी भी practice को अपनाने से पहले qualified doctor, therapist या mental health professional की सलाह जरूर लें।

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#healing #nlp #mentalhealth #anxietyrelief #selflove #gratitude #forgiveness #ChitreshSoni #hindipodcast #podcast #overthinking

Transcript:
(00:00) आप मुझे एकदम स्टेप बाय स्टेप बेसिक चीजें बताइए जो हर व्यक्ति अपने घर पे रह के भी कर सकता हो और उनको भी यदि ये छह सात समस्याएं हैं तो वो उससे ओवरकम कर सके एकदम बेसिक ये प्रोसेस होता है जिसमें हम आपके ड्रीमर को आपके क्रिटिक को और आपके डोनर को जिसको मोटिवेशनल स्पीकर बोलते हैं तो उसे कई बार बाहर सुनने की जरूरत ही नहीं है। अगर आपका ड्रीमर एक्टिव हो गया तो आप जिस पर्पस के लिए इस दुनिया में आए हो उसे ढूंढना आपके लिए कोई बड़ी बात नहीं रह जाती। कोई पैटर्न में ऐसा लगता है आपको कि यह पैटर्न होने के कारण भी लोग अपने जीवन में
(00:34) अबंडेंस फील नहीं कर पा रहे हैं। जब सेल्फ लव या सेल्फ वर्थ की चीजें डैमेज होती हैं तो उसके पीछे सिर्फ एक कारण नहीं होता। उसके पीछे कई बहुत से कारण होते हैं। जब भी कोई घटना आपके जीवन में घट रही है, चाहे वह पास्ट में घटी है चाहे अभी घटी है। उस घटना में पहले दिन दुख होता है। जब वो घटना कुछ दिन बीत जाती है तो वो आपके लिए एक सेल्फ टॉक के साथ ओवरथिंकिंग बनती है। नॉर्मली उस चीज को निकालने के लिए एक बहुत छोटी सी टेक्निक है जिसको नमस्कार दोस्तों एक और बहुत शानदार पॉडकास्ट लेके आज मैं आपके सामने हाजिर हूं। मेरा नाम चित्रेश सोनी है और आज के
(01:15) हमारे पॉडकास्ट के गेस्ट हैं वो जिन्होंने हजारों लोगों को अपने स्ट्रेस, एंजायटी, डिप्रेशन से ओवरकम करने में मदद की। जिन्होंने हजारों महिलाओं को उनके जीने की राह बताई। जिन्होंने हजारों लोगों के जीवन में एक बड़ा परिवर्तन लाया। कैसे केवल सोच के आप अपने जीवन में बदलाव ला सकते हो? यह आज हम इस पॉडकास्ट में डिकोड करेंगे। क्या सोच ही आपकी आपको पीछे रख रही है? क्या सोच ही ऐसी एक शक्ति है जो आपको आगे बढ़ने में हेल्प कर सकती है? क्या इंसान के ह्यूमन पोटेंशियल, ह्यूमन के ब्रेन पोटेंशियल को अब तक भी हम डिकोड कर पाए हैं। आज हम जानते हैं ये सारी चीजें कि
(01:52) कैसे आप अपने सोचने के पैटर्न को डिकोड करके अपने जीवन में हेल्थ, वेल्थ, रिलेशनशिप हर प्रकार से अबंडेंस लेके आ सकते हैं। तो आज के हमारे गेस्ट हैं शताक्षी सिंह जी जिन्होंने ना केवल लोगों को बल्कि कई बॉलीवुड की बड़ी हस्तियों को भी कंसल्ट किया है। कई बॉलीवुड के बड़े एक्टर्स को भी इन्होंने कंसल्ट किया है। तो आज हम जानते हैं सताक्षी जी से कैसे महिला पुरुष स्टूडेंट हर व्यक्ति केवल अपने सोचने के पैटर्न को चेंज करके अपने जीवन में एक बड़ा बदलाव ला सकता है। सताक्षी जी आपका बहुत-बहुत स्वागत है। थैंक यू जितेश सर थैंक यू। सर तो नहीं है
(02:26) आप तो मेरे भाई जैसे हैं। सो भाई जैसे क्या भाई जैसा ही एक कहते हैं जो प्रोटेक्शन वो आपकी तरफ से मुझे हमेशा मिला है। वो अलग बात है कि आज आप मेरा पॉडकास्ट ले रहे हैं। लेकिन जो लाइनें आपने कही हैं उसके होने में आप ही का हाथ है। तो आई एम रियली थैंकफुल कि आज आप मेरा पॉडकास्ट ले रहे हैं। जनरली मुझे पॉडकास्ट देते समय कोई घबराहट नहीं होती है। लेकिन जब बड़ा भाई सामने बैठे हो तो जो थोड़ी बहुत एक डर होती है वो है कहीं ना कहीं। बट आई एम रियली ब्लेस्ड कि आज मैं आपके साथ में पडकास्ट। थैंक यू सताक्षी जी। और शताक्षी देखिए लोग
(02:56) केवल माध्यम बनते हैं। सब परमात्मा डेस्टिनी लिखता है तो आपकी भी डेस्टिनी लिखी थी और कुछ लोगों को उसमें कुछ गिलहरी वाला सहयोग करने का परमात्मा ने अवसर दे दिया। तो शताक्षी जी आप काउंसलिंग करते हैं। आप लोगों को वन टू वन गाइड करते हैं। तो मैं सबसे पहले यह जानना चाहता हूं कि जो भी आपके कस्टमर होते हैं या वह व्यक्ति जिनको काउंसलिंग की जरूरत होती है। पांच या छह मेजर चैलेंजेस क्या आए आपको इतने सारे हजारों लोगों की काउंसलिंग करने के बाद आपको क्या लगता है कि यह टॉप सिक्स कारण हैं। यह टॉप सिक्स कारण सबसे ज्यादा लोगों के मन में प्रश्न होते हैं या सबसे
(03:27) ज्यादा वो इससे प्रभावित हैं। देखिए चित्र सर यहां पे सबसे ज्यादा जो सबसे पहले आता है। लोग आज प्रेजेंट में जी रहे हैं। मतलब 2026 में है। लेकिन उनका माइंड, उनका मन, उनकी चेतना कहीं 2000 से लेकर के 2025 तक में ही घूम रहा है। उनके जीवन में कोई घटना पहले घटी है जिसको उस उन्होंने मन पर अपने बहुत भारी रूप से लिया हुआ है। लेकिन लाइक जैसे कि उन्होंने बहुत दुख उसमें रिसीव किया हो। आज भी सब कुछ बेटर होने के बाद भी उनका जो मन है जो चेतना है वो उसी पास्ट में जी रही है। तो बेसिकली देखा जाए तो शरीर प्रेजेंट है पर उनकी जो पूरी ऊर्जा है वो पास्ट में ही है
(04:03) और उसकी वजह से वर्तमान में जो जीवन है वो उनका पूरा डिस्टर्ब हुआ है। क्योंकि आगे के जब आप प्रेजेंट में ही नहीं हो तो आप फ्यूचर को कैसे क्रिएट करोगे? क्योंकि आपके माइंड में आपके चेतन मन में हमेशा पास्ट की इवेंट्स हैं और वहां सेल्फ टॉक शुरू हो जाता है क्योंकि इवेंट तो एक बार हुआ है और वह इवेंट हो के खत्म हो चुका है। जब भी कोई इवेंट आज होता है तो उससे दुख आता है। वो दुख कुछ समय बाद दुख में ना रहकर कहते हैं ना अब तो समय बीत गया हम भूल गए। लेकिन वो दुख बीत जाने के बाद वो धीरे-धीरे ओवरथिंकिंग सेल्फ टॉक में कन्वर्ट होने लगता है। क्योंकि अब वो घटना
(04:36) बाहर नहीं रह गई। आपके अवचेतन और चेतन मस्तिष्क में रह गई। अब आप उसको अपने अंदर कई बार जी रहे हैं। ना सिर्फ मतलब लाइक आप जब सेल्फ टॉक कर रहे हैं तो कई बार मुझे जो जानने को मिला लोगों से उन्होंने कहा कि मैम मुझे ऐसा लगता है कि मैं इस वक्त उसी जगह पर हूं और मेरे लिप्सिंग होने लगती है और मैं एग्जैक्टली वैसे ही रिएक्ट कर रही होती। तो शरीर प्रेजेंट होता है। मन चेतना और एक्शन सब पास्ट में होता है। जिसकी वजह से ना तो वह प्रेजेंट जी पा रहे हैं ना ही फ्यूचर के लिए कोई प्लान कर पा रहे हैं। तो ये सबसे बड़ा चैलेंज यही है
(05:05) कि लोग आज भी पास्ट की एनर्जी के साथ कहीं कनेक्टेड हैं। पहला दूसरा यह होता है कि पास्ट के साथ-साथ लोगों हो सकता है कि लाइफ में कोई भी ऐसी घटना ना हो जो दुख में हो। लेकिन आपके खुद के माइंड में कुछ खुद के अंदर की कुछ पास्ट की जहां आपका चेतन मन एक्टिव नहीं था। लाइक जो हमारी जन्म से लेकर के लगभग 7 साल की ऐज होती है। मां के गर्भ से लेकर सात साल की ऐज उस समय जो व्यक्ति रिसीव करता है, उसके चेतन मन में नहीं होता। उसके मेमोरी में नहीं होता लेकिन उसके अवचेतन शरीर में जरूर होता है। और वह पैटर्न उसकी लाइफ में एक बड़ा इंपैक्ट डालता है। तो कई बार उनको
(05:39) अपनी पूरी लाइफ बहुत सुंदर दिख रही होती है। इसके बावजूद मानसिक रूप से वह कहीं ना कहीं परेशान हैं और उन्हें खुद नहीं समझ में आता। खुद आइडेंटिफाई भी नहीं कर पाते कि एक्सजेक्टली चैलेंज कहां है और मैं क्यों सैड फील कर रहा हूं या कर रही हूं। तो वो जो सिचुएशन होती है वो बहुत परेशानी वाली सम टाइम हो जाती है क्योंकि जब आपको समस्या का कारण पता हो तो आप स्यूशन को ढूंढने के लिए प्रयास करते हैं लेकिन आपको यही नहीं पता कि मैं दुखी क्यों हूं। मैं परेशान क्यों हूं? तो आप समस्या को ढूंढोगे कैसे? मतलब समस्या के रूट को ढूंढोगे कैसे? और रूट ही नहीं पता है तो
(06:10) आप निकालोगे कैसे? तो, उसका कारण यही होता है कि भाई आपके मेमोरी में जो कुछ आपको याद है, वह चेतन में है। जो कुछ नहीं याद है, वह अवचेतन में है। लेकिन वह ऊर्जा के रूप में आपके जीवन में तो इंपैक्ट डाल ही रहा है। तो, जब वह वहां से कुछ भी आता है, तो उनके लिए वो आइडेंटिफाई करना मुश्किल होता है, जो वन टू वन काउंसलिंग में जब हम जाते हैं और उनको उस तरह से पास्ट में लेकर जाते हैं, तो वहां की चीजें उन्हें याद आती हैं। एक छोटा सा केस उदाहरण के रूप में समझाती हूं। एक लेडी हैं जो कि अह जिन्होंने अह रिलेशनशिप को हील करने के
(06:41) लिए लिया था। सारी चीजें बेटर हो गई। पर कुछ एक जगह पे उन्होंने कहा कि पता नहीं मैं अभी भी कनेक्ट नहीं कर पा रही हूं उस चीज से। मतलब अपने हस्बैंड के साथ कनेक्ट नहीं कर पा रही हूं। मुझे वो हैप्पीनेस फीलिंग नहीं आती है। मुझे ऐसा लगता है कि मैं उन्हें हटा दूं या मुझे ऐसा लगता है कि वो मेरे से ऐसे रिएक्ट कर रहे हैं जैसे मैं हट जाऊं उस रिलेशनशिप से। जबकि हस्बैंड की वो बहुत तारीफ करती हैं कि वो बहुत केयरिंग हैं, सब कुछ है। बट फिर भी उनके खुद के मन में वो चीजें नहीं है जिससे वो रिलेशनशिप को अबंडेंस के साथ, हार्मोनी के साथ जी सकें। तो जब हम लोग
(07:08) ट्रांस में ले गए तो उनको याद आया कि एक साल की ऐज में जब वो एक साल की थी तो उनकी मां ने गोद में लिया था और किसी कारण से उन्होंने उनको अलग कर दिया एकदम से और यह उन्होंने विज़न किया। तो जब चेतन मन में कोई चीज है भावनात्मक रूप से और विज़न के रूप में लेकिन आपको याद नहीं है तो वह आपको रिकॉल होती है जब आप पास्ट में उस फेज में जाते हो तो जैसे ही वो चीज हम लोगों ने सही करी सही करने के लिए जैसे आपका ब्रेन तीन तरह से चीजों को लेता है पहला या तो वो विज़न होगा आपके पास कोई भी मेमोरी याद है तो आपको वो इवेंट एज अ पिक्चर याद रहेगा या तो किसी की आवाज याद
(07:42) रहती है कि उसने किस तरह हमसे बात करी थी क्या टोन था या फिर आप खुद उसमें इनवॉल्व हैं और आप अनुभव कर रहे हैं उस चीज को वो आपको याद है कि मैंने उसको कैसे अनुभव में लिया था? तो यह तीनों ही रूप में आपको माइंड रिकॉल करता है उन मेमोरी को जो इस वक्त आपके अवचेतन में है। जब आप उसको रिॉल्व करते हैं तो चीजें जहां आपको नहीं समझ आ रही हैं कि एग्जैक्टली चैलेंज का रूट कहां है वो आपका सॉल्व होना शुरू हो जाता है। तो ये दो बातें आपने बताई। एक बताया आपने ओल्ड पैनफुल मेमोरीज़ होती हैं जिसके कारण लोग सेल्फ़ टॉक में फंसे रहते हैं। दूसरा
(08:12) आपने बताया कॉन्शियस माइंड या सबकॉन्शियस बॉडी में कोई इमोशंस, कोई एनर्जी, कोई थॉट फंसे हुए हैं जो आपको मालूम भी नहीं है कि मैं इस एनर्जी के कारण परेशान हूं। मैं इस टॉक के कारण परेशान हूं। मैं इस पर्टिकुलर इवेंट के कारण परेशान हूं। ये हमें पता भी नहीं है। तो ये दो के अलावा और कुछ भी आते हैं। देखिए एक तो ये हो गया अवचेतन और चेतन मस्तिष्क को लेकर के। कुछ समस्याएं ऐसी होती हैं जहां हम अजंप्शन क्रिएट कर लेते हैं। तो जिसको आप साइकोसोमैटिक भी कह सकते हो। जैसे कि कई बार क्या होता है कुछ लोग किसी की घटना को सुन रहे हैं, देख रहे हैं
(08:41) या होते हुए उसमें खड़े हैं बाहर उसमें इन्वॉल्व नहीं है पर सामने वो देख रहे हैं उस चीज को। तो ऐसी स्थिति में वो अपने आप को उस जगह पर अस्यूम कर लेते हैं कि मैं उस जगह मैं अगर इस जगह का हिस्सा होता या मैं हूं तो मुझे यह समस्या हो रही है। ऐसा तो नहीं मेरे साथ ऐसा हो जाए। जैसे ऐसे बहुत से केसेस आते हैं जो लोग कहते हैं कि मैम मैं बीमार हूं। मैं डॉक्टर के पास जाता हूं। सारे टेस्ट कराता हूं और मुझे कोई रिपोर्ट में कोई भी पॉजिटिव रिपोर्ट नहीं मिलती है। मतलब बॉडी बिल्कुल सही फंक्शन सही फंक्शन कर रही है। सारे सारे पैरामीटर एकदम परफेक्ट हैं।
(09:13) परफेक्ट पर फिर भी हम अपने आप को ठीक महसूस नहीं कर रहे हैं। नहीं कर रहे हैं। उनको यहां तक फील होने लगता है कि मेरे चेस्ट में पेन हो रहा है। जैसे जिस तरह की बीमारी को उन्होंने सुना है वैसी ही बीमारी को वो अपनी बॉडी में जीना शुरू कर देते हैं। अजम के रूप में उनको सिम्टम्स फील होने लगते हैं। उनको सिम्टम्स फील होने लगते हैं। तो वह जो सिम्टम्स वो फील करते हैं उसके आधार पर वह डॉक्टर के पास भी जाते हैं। Google है चार जीपीटी है। तो एक बड़ा आजकल बीमारी कीड़ा हो गया है। कुछ हमें सिम्टम हो रहे हैं। हम तुरंत उसको सर्च भी करने लगते हैं
(09:42) कि ये जो मुझे हो रहा है क्या ये जो मैंने बीमारी सुनी है उससे रिलेटेड सिम्टम्स मुझे हो रहे हैं या नहीं हो रहे हैं। मतलब एक चीज होता है आप मुझे मुझे मार। तो वो कहीं ना कहीं हम क्रिएट करते हैं। ये मजाक का विषय मतलब जस्ट अ जोक सा पार्ट है। बट विषय यह मजाक का नहीं है क्योंकि इसकी वजह से आप अपनी लाइफ में बिना किसी कारण के एक बड़ी समस्या को आकर्षित कर रहे हैं। तो वो एक लेडी हैं जो यूएई से हैं। वो हर हफ्ते डॉक्टर के पास जाती हैं। हर रिपोर्ट उनको करवाती हैं। ब्लड टेस्ट से लेकर कोई ऐसा टेस्ट बाकी नहीं होता जो वो ना कराती हो।
(10:14) डॉक्टर इंडिया में उन्हें उन्होंने दिखाया उनको कहीं कुछ ऑब्वियस सी बात है जब बॉडी में कुछ है ही नहीं तो कैसे तो कैसे आएगा? वह टाइम पे जब उनको पैनिक सिचुएशंस आती है और उनको वह फीलिंग आने लगती है। विदिन एक सेशन के अंदर जब वह बैठती हैं और सेशन एक घंटे का होता है। 1 घंटे बाद वह कहती हैं कि अब मुझे बॉडी में कोई पेन नहीं फील हो रहा है। मुझे बॉडी में कोई बीमारी फील नहीं हो रही है। बीमारी आपको है और आपको फील हो रहा है कि आपको चेस्ट में है। आपको हाथों में दर्द हो रहा है। आपको फील हो रहा है कि मुझे हार्ट अटैक आने वाला है। रिपोर्ट नॉर्मल
(10:43) है। आप 1 घंटे के सेशन में बैठ रहे हो। अपनी ऊर्जा को रिलीज कर रहे हो। वो जो एंजाइटी आई है उसको आप रिलीज़ कर रहे हो। आप नॉर्मल हो रहे हो तो यह आपके खुद के द्वारा क्रिएट किया गया एक चैलेंज है। जिस चैलेंज का कोई रूट नहीं है। पर आपके अपने थॉट्स जिसे आपने अपने ये कहते हैं कि ख्वाबों की दुनिया में बना लिया है या ओवरसेल्फ टॉक करने की वजह से आपने क्रिएट कर लिया है। तो एक इस तरह का भी चैलेंज हमें देखने को मिला है। वन टू वन या ग्रुप में भी। लोग अपनी चैलेंजेस को खुद ही आकर्षित कर रहे हैं। मतलब प्री एजम्पशन कर लेते हैं। किसी
(11:14) दूसरे को बीमार देखते हैं और उससे मिलने जाते हैं तो उनको एक प्री एजम्पशन हो जाता है कि यह बीमारी मुझे भी हो गई है या हो सकती है और फिर वैसे सिम्टम्स आने शुरू हो जाते हैं। तीन बातें बता दी मैडम आपने और इसके अलावा चौथा ये होता है लोगों को फाइनेंशियल चैलेंजेस बहुत हैं। तो लोगों को लगता है कि जैसे बिजनेस नहीं है या हम जॉब नहीं ले पा रहे हैं। तो जब भी आप मैंने जो नोटिस किया जो मेरा एक्सपीरियंस रहा जिनके पास भी फाइनेंशियल चैलेंज है वो उन्होंने कभी भी अबंडेंस में अपनी लाइफ जी है उनके पास कभी पैसा अच्छा था बट आज नहीं है तो उसके
(11:43) पीछे उन्होंने जो अपनी स्टोरी बताई कि मेरे पास ऐसे लोग बहुत आए जिन्होंने कहा कि मैं गरीबी में जी रहा हूं और उनकी स्टोरी को उन्होंने सुना उसमें वो इनवॉल्व नहीं हुए इमोशनली कनेक्ट नहीं हुए बट वह सुन रहे थे तो सुनने की वजह से जहां ना तो विजन क्रिएट हुआ ना ही इमोशंस आए इसके बावजूद उन्होंने उस ऊर्जा को अट्रैक्ट किया। मेरे साथ बहुत सारे लोगों ने यह एक्सपीरियंस शेयर किया कि जैसे मेरे पास कोई भी व्यक्ति आया और उसने मुझे यह बता दिया कि मेरा बिजनेस इस कारण से डूब गया या मेरी जॉब इस कारण से नहीं लग रही है। तो मेरे जीवन में आगे कुछ चल के समय बाद
(12:14) वैसे ही चैलेंज मैंने अपनी लाइफ में फील किए हैं कि जिस कहानी को मैंने सुना उसी कहानी को मैं आज जी रहा हूं। यह क्लाइंट बताते हैं। ये लोग बताते हैं आपके जो भी हां ये मैंने ऑलमोस्ट अगर मैंने मान लीजिए एग्जांपल के तौर पे पांच सेशन किए तो तीन लोगों ने अगर फाइनेंशियल चैलेंज हैं पांच लोगों के तो तीन लोगों ने मुझसे यह बात शेयर करी है। तो यह जो लोग हैं जिनके जीवन में यह चीज चैलेंज सुनने के कारण आ रहा है तो आप किसी के साथ हो भले ही आप इमोशनली उसे नहीं ले रहे हो लेकिन आपका ऑडिटरी सेंसरी मोटर एक्टिव है और आपका सबकॉन्शियस
(12:47) बॉडी उस वक्त एक्टिवेट रहता है। उतना नहीं है जितना 7 साल के बच्चे का होता है। पर 7% तो जरूर होगा। और उस सेंसरी मोटर्स में से कुछ इमोशंस जो आपने लिए उन्हीं इमोशंस ने क्वांटम फिजिक्स की वेवलेंथ थ्योरी जिसको हम बुमब्रेन थ्योरी कहते हैं। जिसका मतलब यह होता है कि आप कोई भी शब्द या कोई भी ऊर्जा या कोई भी विचार अपने अंदर रख रहे हो वैसी ही वेवलेंथ जाएगी और मटेरियलिस्टिकली आपके जीवन में वैसा ही होना शुरू हो जाता है। हम सब ऐसा ही जीवन जी रहे हैं कहीं ना कहीं। तो ऐसी सिचुएशन में जो भी आपकी सबकॉन्शियसली 1 2% 7% 10% जो आपने रिसीव किया वो बिना आपकी अवेयरनेस
(13:22) के आपके जीवन में नेगेटिव पैटर्न्स को लेकर आ चुका है। यह वो समस्याएं हैं जिनका आपको कारण नहीं पता है पर आपके जीवन में हो रही है और आप उसको सॉल्व नहीं कर पा रहे हैं क्योंकि हमें पता ही नहीं है रूट कहां है। मतलब जो हमारे बड़े बुजुर्ग कहते थे बुरा मत देखो बुरा मत सुनो बुरा मत बोलो। तो यह कहीं ना कहीं इन्हीं चीजों से सोच के ही बनाया हुआ मुहावरा रहा होगा जो हमें बचपन से बोला जाता है कि बुरे लोगों के साथ या अपनी संगत को बदलो। अपनी संगत अच्छी जगह रखो। और इसके अलावा कोई चैलेंजेस? इसके अलावा सबसे बड़ा चैलेंज आता है लोगों
(13:52) के जीवन में जो रिश्ते हैं रिलेशनशिप्स को लेकर के। तो लोगों में एक्सेप्टेंस का जो चैलेंज है वो बहुत बड़ा है। जब लोग आते हैं तो कहते हैं मेरे जीवन में समस्याएं बहुत बड़ी-बड़ी हैं। बट उनके अंदर कहीं ना कहीं हील होने की चाहत तो है। पर जब मैं यह बोलती हूं कि आपको हील होने के लिए यह एक्सेप्ट करना पड़ेगा कि आपके जीवन में किसी भी व्यक्ति ने, किसी भी इवेंट ने या किसी और अदर तरीके से आपके जीवन में जो भी समस्या आई है, उस सब समस्याओं को लेकर आपको उन चीजों को लेट गो करना पड़ेगा या माफ़ करना पड़ेगा। तो लोग वहां पर माफ नहीं
(14:27) कर पाते हैं। ओके। मतलब अनफॉर्गिवनेस की भी मन में विचार जो है वो उनको कहीं ना कहीं तकलीफ दे रहा है। बहुत स्ट्रांग फीलिंग होती है उनके अंदर कि उसने मेरे साथ बुरा किया है तो मैं उसको माफ कैसे कर दूं। जबकि माफ आप उसके लिए उसको नहीं कर रहे हैं। आप खुद के लिए उसको माफ कर रहे हैं। लेकिन एक्सेप्टेंस नहीं आता। अब ये जो एक्सेप्टेंस ना आने का कारण है आप अपने बचपन में अगर जाएं तो आप देखेंगे कि बहुत सारे ऐसे सिचुएशंस में जब आप रिजेक्ट होते हैं या आप किसी चीज को स्वीकार नहीं कर रहे हैं तो आपको देखना होगा कि आपको कहां स्वीकार नहीं किया गया
(15:02) है। जब आपने कहीं से रिजेक्शंस रिसीव की है और आपके सबकॉन्शियस बॉडी में है तो किसी भी तरह की चीज को जो आपकी तरफ आ रही है नेगेटिवली आप उसको रिजेक्ट नहीं कर पाओगे छोड़ नहीं पाओगे क्योंकि आपके मन में उसी चीज का डर और उसी चीज की एंजायटी है छोड़े जाने या छोड़ देने का। कई बार हमारे पास जो चैलेंज है उसका जो एग्जैक्ट कारण है वो पर्दे के पीछे है। वो है भी नहीं। जैसे अभी एक्सेप्टेंस नहीं हो रहा है। लेकिन इसके पीछे का कारण क्या हम समझ पा रहे हैं? बचपन में कभी हमें कोई किसी टाइम पर एक्सेप्ट नहीं किया गया। इसलिए उसका रिफ्लेक्शन हमारे पास यहां आ रहा है।
(15:39) तो अब बहुत सारे लोगों के मन में यह सवाल होगा इसको देखते हुए कि यह कैसे पॉसिबल है? भाई हमारे बचपन में तो ऐसा कुछ नहीं हुआ है। जैसे मैंने कहा आपसे जो एक साल की घटना थी वो हमारे माइंड में तो नहीं थी। अवचेतन बॉडी में थी। जब आप ट्रांस में उस लेवल पर जाते हो एनएलपी के थ्रू तो आप देख पाते हो कि एक्सैक्टली वह चीज क्या है। तो जब ऐसी समस्याएं जिनका कोई रिफ्लेक्शन हमें रिसीव हो रहा है तो वो भी एक बहुत बड़ा चैलेंज है। लोग अपने अपने तरीके से सॉल्व नहीं कर पाते। फिर लोग कहते हैं कि मैं मेडिटेशन कर रहा हूं। स्पिरिचुअल प्रैक्टिस कर रहा हूं। बहुत सारे कोर्सेज
(16:10) कर चुके हैं और मैं समस्या को सॉल्व नहीं कर पा रहा हूं। क्योंकि मैं किसी हीलिंग को गलत या सही नहीं कह रही हूं। लेकिन अगर आपको रूट नहीं पता है तो आप कितनी भी चीजें कर लें आप उसे सॉल्व नहीं कर पाएंगे। तो आपने अभी पांच चीजें बताई। इन पांच के अलावा भी कोई होता है क्या सेल्फ वर्थ शैटर्ड भी लोगों के होने के कारण वो आपके पास आते हैं कि उनको लगता है कि वह कोई काम के नहीं है वो तो निकम्मे हैं तो ये पैटर्न भी उनके मन में सेल्फ वर्थ का जो कोई पैटर्न भी ऐसा लगता है आपको कि यह पैटर्न होने के कारण भी लोग अपने जीवन में अबंडेंस फील नहीं कर पा रहे हैं।
(16:44) आइडेंटिटी क्रिएशन हमारे बचपन से शुरू हो जाती है। जैसे लोग बचपन में बच्चे होते हैं तो हम बच्चों को अक्सर कभी कई बार सुनते होंगे मजाक में भी या वैसे भी तुम गधे हो। तुम तो बिल्कुल स्टूपिड हो। तुम्हें तो कुछ पता ही नहीं है। तो ये क्या है? ये आप उनकी सेल्फ वर्थ इमेज को तोड़ रहे हैं। तो ऐसे बहुत से लोग आते हैं जो यह कहते हैं कि मैम मैं बिल्कुल बेकार हूं। तो मैं खुद की हीलिंग करना चाह रहा हूं ताकि मैं कुछ काम का हो जाऊं। मैं अब उसे अपनी लाइफ को एक मीनिंग देना चाहता हूं। लेकिन प्रॉब्लम वही आती है ना कि रूट नहीं पता है कि कहां से आ रहा है। जब
(17:18) सेल्फ लव या सेल्फ वर्थ की चीजें डैमेज होती हैं तो उसके पीछे सिर्फ एक कारण नहीं होता। उसके पीछे कई बहुत से कारण होते हैं। या तो बचपन में आपकी सेल्फ वर्थ को डैमेज किया गया या तो स्कूल में डैमेज किया गया या फिर आप जब रिलेशनशिप में आते हैं उस समय भी हो सकता है पास्ट में वैसी चीजें ना हुई हो। लेकिन जब आप रिलेशनशिप में आते हैं और रिलेशनशिप बिगड़ रहा है उस समय जब आप एक दूसरे पे ब्लेम करते हैं तो बहुत सारी आइडेंटिटी आप दे देते हैं। तुम तो बहुत आलसी हो। तुमसे तो कुछ होगा नहीं। ठीक है? तुम दिन भर पड़ी रहती हो। ठीक? तो यह आइडेंट और क्योंकि वह पार्टनर
(17:55) है वहां लव एनर्जी है तो उस वर्ड्स को इंसान बहुत इमोशनली ले लेता है और वहां सेल्फ जो वर्थ है वह पूरी डैमेज होनी शुरू हो जाती है। तो ऐसे लोग भी आते हैं बहुत हद तक जहां सेल्फ लव की कमी है। लोग कहते हैं मैंने खुद के लिए बहुत मैंने खुद के लिए नहीं सोचा कभी। दूसरों के लिए मैम बहुत किया। मैं बहुत एक्सपेक्टेशन करती हूं पर लोग मेरे लिए नहीं करते हैं। तो यह भी एक बहुत बड़ा चैलेंज है कि कल हमारी बैक टू कैमरा एक बात हो रही थी और आपने एक बात बड़ी सुंदर बोली थी उस टाइम पे कि जिस कुएं से हमें मिलता है पानी हम उसी कुएं में पानी नहीं डालते हैं। तो एग्जैक्टली
(18:30) हमारी लाइफ में भी यही कहीं ना कहीं हो रहा है कि हम जहां जिस कुएं में इसको उल्टा कर दें अगर कि जिस कुएं में पानी हम डाल रहे हैं हम यह सोच रहे हैं कि यहीं कुआं में पानी दे दे। तो इसको अगर रिवर्स करके देखें कि जहां हम दे रहे हैं हम वहीं से एक्सपेक्टेशन कर रहे हैं। यह हमारा सबसे बड़ा चैलेंज है और लॉजिकली मेटलिस्टिकली भावनात्मक रूप से फंसे होने के कारण लोग इस कांसेप्ट को समझ नहीं पाते और लॉजिकली अपनी लाइफ को देखना शुरू कर देते हैं। मतलब एक्सपेक्टेशन हर उस जगह से करते हैं जहां से उनको नहीं करनी चाहिए। और इसके अलावा कोई ऐसा चैलेंज आपको लगता
(19:00) हो जो लास्ट कुछ सालों में आपने देखा हो कि ये अचानक ज्यादा तेजी से बढ़ गया। मैंने जो नोटिस किया है इस इस दौरान कि लोग के लोगों के पास पैसे भी हैं। लोगों के पास हेल्थ भी है, वेल्थ भी है, सब कुछ है। उनके पास चैलेंज लेने का कोई कारण नहीं है। लेकिन फिर भी सिर्फ इसलिए क्योंकि लोग खुद में पोटेंशियल रखते हुए भी आगे एक्शन नहीं ले रहे हैं। क्योंकि दिमाग खाली है, शरीर खाली है तो वह अपने आप को कहीं इंगेज्ड नहीं कर रहे हैं। उसकी वजह से उनकी लाइफ में एक गोल नहीं है। ठीक है? क्योंकि गोल अक्सर हम बाहर इन्फ्लुएंस्ड होके बना रहे हैं। सामने
(19:36) वाले ने क्लॉथ का बिजनेस किया तो मुझे भी क्लॉथ का बिजनेस करना चाहिए। सामने वाले ने एक्स व जेड किया तो मुझे वहीं करना चाहिए। हर इंसान की अपनी सेल्फ आइडेंटिटी है। सेल्फ एनर्जी है और सेल्फ गोल पर्पस है। ठीक है? तो लोग अपने सेल्फ गोल पर्पस पर नहीं जा पा रहे हैं। बाहरी दुनिया से इन्फ्लुएंस्ड हो के चीजें बना रहे हैं। और फिर उसमें सक्सेस नहीं हो पाते और फिर वहां पे उनको यह लगने लगता है कि मैं किसी काम का नहीं हूं या मेरे लिए कोई गोल बना ही नहीं है। मल्टीपल जगहों पर वो गोल्स ट्राई करते हो। आज यह कर ले आज ये कर ले आइए जिसकी वजह से आप बहुत समय अपना व्यर्थ
(20:10) करते हो और उसकी वजह से जब आप कई बार फेलियर अटेंड कर रहे हो तो एक फेलियर का पैटर्न भी आपकी एनर्जी में इनवॉल्वड हो रहा है और एक समय पे आकर के आप निराश हो जाते हो और आपको सोसाइटल थॉट्स आने शुरू हो जाते हैं। जो लोग मुझे बोलते हैं कि अब मुझे जीने की इच्छा ही नहीं है। तो उसका रीज़न सिर्फ इतना ही है कि आपके अंदर ही गोल है। आपके अंदर ही मतलब जो ड्रीमर पार्ट है वह हमारे खुद के अंदर है। हमें दूसरे के कार्य को देखकर अपना ड्रीम नहीं बनाना है। आपके अंदर ही क्रिटिसिज्म है। क्रिटिसाइज़ को हम लोग बहुत नेगेटिव वे में देखते हैं कि यार मेरे अंदर से ना डर आ
(20:40) रहा है। मेरे अंदर से ना डाउट आ रहा है। तो कई बार वो डाउट और डर अगर आपके किसी गोल के लिए आ रहा है वो क्रिटिसाइज़ जो आपके अंदर से आ रहा है वो आपके लिए बेनिफिशियल है। क्योंकि आपका ब्रेन सर्वाइवल मोड पे काम करता है और वो आपको खतरों से बचा रहा होता है। तो ऐसी सिचुएशन में जब लोग क्रिटिसाइज़ हो रहे होते हैं, सेल्फ क्रिटिसाइज़ हो रहे होते हैं, तो वह घबरा जाते हैं। जबकि वो क्रिटिसाइज को अगर वो हैंडल कर लें जो कि अगर मैं ऐसे कहूं कि आप ओवरथिंकिंग मत करो तो आप ओवरथिंकिंग नहीं करोगे ऐसा नहीं है वो बढ़ जाएगी। ठीक है? सेम एज आप अपने आप से बोलो कि
(21:10) क्रिटिसाइज नहीं करेंगे तो क्रिटिसाइज और बढ़ जाएगा। उसके साथ आप टॉक करना है। यह एक प्रोसेस होता है जिसमें हम आपके ड्रीमर को, आपके क्रिटिक को और आपके डोनर को जिसको मोटिवेशनल स्पीकर बोलते हैं। तो उसे कई बार बाहर सुनने की जरूरत ही नहीं है। अगर आपका ड्रीमर एक्टिव हो गया तो आप जिस पर्पस के लिए इस दुनिया में आए हो उसे ढूंढना आपके लिए कोई बड़ी बात नहीं रह जाती। ठीक है? और जब आप अपनी ही ऊर्जा के अनुसार का ड्रीम्स चुनोगे तो आपकी ऊर्जा आपको सपोर्ट करना शुरू कर देती है। ठीक है? अगर आपके अंदर का क्रिटिक आपको आपको बता रहा है कि कहां पर एक फादर की तरह
(21:46) इसको मैं एक स्टोरी से समझाती हूं। [नाक से की जाने वाली आवाज़] जैसे एक घर में एक फादर हैं। उनके दो बच्चे हैं। ठीक है? एक बड़ा है, एक छोटा है। ठीक? बड़ा बेटा घर में एंटर करता है। और एकदम उसे कहता है पापा मुझे यह वाला बिजनेस करना है। पापा ने सुना अब वो इस वक्त ड्रीमर भाव में है। ठीक है। तो पापा ने सुना अच्छा यह बिज़नेस करना है। उसने ऑलरेडी कुछ बिज़नेस कर रखे होंगे। कुछ लॉसेस कर रखे होंगे। पास एक्सपीरियंस होगा। तो इनके फादर उनसे कहते हैं, अच्छा पुराना बिज़नेस किया था और पुराने बिज़नेस में तुमने इतना लॉस किया था। अब तो फिर तुम्हें बिज़नेस
(22:19) करना है। इस बार ड्रीमर की आवाज बड़ी है। मतलब बड़े बेटे को अब एकदम से गुस्सा आ चुका है। एकदम उसके अंदर वो है कि मुझको यह बिजनेस करना है तो करना है। वाला थॉट प्रोसेस है। क्रिटिक उसको समझाता है। भाई देखो ये ये ये तुमने गड़बड़ किया था। जैसे फादर समझाते हैं और ये ये चीज़। अच्छा ठीक है। मुझे समझाओ कि यह बिजनेस किस तरीके से तुम्हारे लिए ठीक है। अब दोनों के बीच में कम्युनिकेशन हो रहा है। बड़े बेटे और फादर के बीच में जो आपके अंदर का बड़ा बेटा जो ड्रीमर है। फादर आपके अंदर का क्रिटिक है। ठीक है? जब इन दोनों के बीच में अच्छी टॉक
(22:50) होती है जब आप अपने साथ सेल्फ जो कहते हैं ना आप ब्रेन स्टार्मिंग करो। ठीक है? सो दैट इज द आप क्रिटिक और अपने ड्रीमर के साथ बातचीत कर रहे हो। इस वक्त जब यह सब कुछ हो रहा है तो आपका जो एक्शन टेकर है वो चुपचाप बैठकर के एक छोटे बेटे की तरह आप दोनों को ऑब्जर्व कर रहा है। वो कोई उसमें इंगेजमेंट नहीं है बट वो चुपचाप सुन रहा है। जब आप दोनों डिसाइड कर लेते हो कि मुझे यह बिज़नेस करना है और आप क्रिटिक के साथ में अच्छी कम्युनिकेशन के साथ एक प्रॉपर रिजल्ट निकाल लेते हैं। तब फादर छोटे बेटे को बुलाते हैं। देखो इनको यह करने का मन है। ठीक है? इसको ऐसे-से किया
(23:23) जाएगा। अब तुम देखो कि इसमें तुम इनको क्या हेल्प कर सकते हो? क्या एक्शन ले सकते हो? छोटा बेटा ज्यादा बात नहीं करता। सिर्फ एक एक्शन टेकर है। तो, वह क्या करता है? फोन मिलाता है। होता है ना घर में एक बच्चा होता है जो बड़ा पावरफुल होता है। बैठे-बैठे जस्ट 10 फोन मिलाएगा और बड़े बेटे के सारे काम हो जाते हैं। ठीक है? तो जो छोटा बेटा है वो आपका मोटिवेशनल आपके अंदर का स्पीकर है। आपके अंदर का एक्शन है। वो जिस दिन एक्टिवेट होता है तो जो ड्रीम आपने सोचा है उसके प्रति एक्शन आने शुरू हो जाते हैं। तो जैसे कुछ लोग कहते हैं ना कि मैंने मैम यह सोचा था मेरा यह
(23:56) सपना था। मैंने इसे 4 महीने, 10 महीने, 20 महीने किया और उसके बाद मैंने इसे छोड़ दिया। क्यों? क्योंकि आपने अपने अंदर का मोटिवेशनल जो पार्ट है उसको आपने एक्टिव ही नहीं किया। आपने देखा होगा कुछ लोग अपने ड्रीम के लिए अपने परिवार से लड़ जाते हैं, दुनिया से लड़ जाते हैं। इवन अपने आप से भी लड़ जाते हैं। पर उस ड्रीम को पूरा करते हैं। ये वो लोग हैं जिनका मोटिवेशनल स्पीकर इनसाइड एक्टिव है। तो इनके अलावा और कोई भी ऐसा क्लाइंट या ऐसा कोई कस्टमर आता है इन इन छह सात समस्याओं के अलावा? हां, एक एक स्पेसिफिक तरीके के लोग और होते हैं जिनमें चैलेंज यह नहीं है कि
(24:32) उनके पास कोई चीज की कमी है। ठीक है? उनके पास चैलेंज ये है कि उनके आसपास बाउंड्रीज बहुत हैं। मतलब जैसे फैमिली की बाउंड्री है, सोसाइटी की बाउंड्री है। तो इनके पास सब कुछ है, काबिलियत भी है, एक्शन भी है, सब कुछ है। बट उनके पास एक डर है कि क्या कहेंगे लोग। ठीक है? तो वो फैमिली को देख रहे हैं, एडजस्टमेंट कर रहे हैं। वो बाहर एडजस्टमेंट कर रहे हैं। जबकि ये जितने भी लेयर्स हैं जो आपको रोक रहे हैं इनकी इन सभी लेयर्स के रोकने की वजह आप खुद हैं। अगर आप यह लेयर्स रुक रही हैं तो आपको अपनी इनसाइड देखना है कि ये जितनी भी लेयर्स हैं उसमें कहां आपने खुद को कभी
(25:07) रुका हुआ महसूस किया था। जैसे ही आप उसे खाली करते हो उसे साफ करते हो। जैसे एग्जांपल मान लीजिए हम नया एक नया घर बना रहे हैं। कंस्ट्रक्शन का काम चल रहा है। मेन गेट पे ही एक मजदूर ने बहुत सारा कंक्रीट डाल दिया है। हम घर के अंदर प्रॉपर अच्छे से रह रहे हैं। लेकिन जब तक वो कंक्रीट नहीं हटेगा हम घर के बाहर नहीं जा पाएंगे। तो वो कंक्रीट कौन हटाएगा? हम हटाएंगे या तो फिर घर का मजदूर जो भी है उसको हटाएगा तभी हम बाहर जा पाएंगे ना। तो आपके अंदर गेट के अंदर ही आपकी कोई ब्लॉकेज लगी हुई है जिसको आपको ही हटाना है। जैसे ही आप अपनी इनसाइड ठीक करना शुरू
(25:41) करते हो बाहरी दुनिया अपने आपके अगेंस्ट नहीं बल्कि आपके फेवर में बात करने लगती है। एक छोटा सा एग्जांपल आज मैं यहां बैठी हूं आपके साथ आप पूछ रहे हैं कि मैं कैसे हेल्प कर पा रही हूं और मैं बहुत थैंकफुल ग्रेटफुल हूं कि इस दिशा में बढ़ी। लेकिन जब मैंने स्टार्ट किया था तो मेरी फैमिली ने भी इसके लिए बहुत सपोर्ट नहीं किया था कि यह काम आपके लिए बड़ा काम करेगा। मैं एक एलएलबी स्टूडेंट हूं तो मेरे फादर लॉयर हैं तो उनको ये था कि आप आप भी इसी दिशा में बढ़ो आगे। लेकिन उस वक्त अंदर का मोटिवेशन शायद कहीं एक्टिव था। तो उन बातों को उन्होंने ज्यादा तवज्जो मैंने दी
(26:14) नहीं। ठीक है? इनसाइड क्लीन करना शुरू किया। आज वही लोग उस चीज के लिए सपोर्ट करते हैं। तो बाहर अगर आप लड़ाई लड़ोगे कि मुझे काम करने दो या मुझे सा नॉट ओनली काम करना किसी भी वे में आप करने दो। तो वो बाहर आपको लड़ना ही नहीं है। आपको अपने इनसाइड उस पिक्चर्स को कहीं क्लीन करना है जहां से सपोर्टिव पिक्चर ब्लॉक है। तो जब आप अपने अंदर का सपोर्टिव पार्ट को पूरी तरीके से फ्री कर देते हो तो ना सिर्फ फैमिली बल्कि पूरा ब्रह्मांड आपके सपोर्ट में आकर खड़ा होगा और अनकंडीशनल आपको सपोर्ट करता है और आप बहुत आगे से आगे बढ़ते हो। तो एक बहुत बड़ा पार्ट ये भी है
(26:49) कि लोग अपने ही ब्लॉकेज के कारण अपने आप को अनसोर्टेड फील करते हैं। मतलब आपको दुनिया से लड़ने की जरूरत नहीं है। खुद के विचारों से लड़ के यदि आप आगे बढ़ गए तो फिर दुनिया भी आपको सपोर्ट करने लगती है। ऐसा बराबर मतलब मेजरली ये सात आठ पैराटर्स में लोगों को चैलेंजेस हैं। जिन चैलेंजेस को रॉल्व करने के लिए वो आपके पास तक आते हैं या वो चैलेंजेस को ओवरकम करने के लिए वो आपके जैसे और हीलर या और ट्रेनर्स के पास जाते हैं। तो सताक्षी जी अभी इस पार्ट में पडकास्ट के इस पार्ट में हमने यह समझा कि चैलेंजज़ क्या हैं। आप लोगों के मन में
(27:21) ऐसे कोई भी चैलेंज है इससे हटके भी कोई चैलेंज है जो चैलेंजज़ अभी सताक्षी जी ने बताएं। मैं सारे चैलेंजज़ फिर से आपको बोलता हूं। इनमें से आपके कोई चैलेंज है तो भी कमेंट बॉक्स में बताइए और इसके अलावा भी कोई चैलेंज है तो भी कमेंट बॉक्स में बताइए। पहला कि आपको ओल्ड पेनफुल मेमोरीज या आपके जो पुराने विचार हैं, वह आपको आगे बढ़ने नहीं देते हैं और आप एक सेल्फ टॉक के चक्रव्यूह में फंस जाते हैं। दूसरा जो पैटर्न आपकी अर्ली ऐज में बन गए हैं। मतलब जब आप मां के गर्भ में थे और सात साल तक जब आपकी परवरिश हुई जिस समय आपको समझने की इतनी क्षमता नहीं थी। फिर
(27:52) भी किसी ने आपके दिमाग में वो थॉट्स डाल दिए। वो थॉट्स आपको मालूम भी नहीं है कि क्या थॉट्स है। फिर भी वो आपके जीवन में रुकावट बने हुए हैं। यह आपको मालूम ही नहीं है। तीसरे जो अजमशन में फंस जाएं जो ऐसे थॉट्स में फंस जाएं जो केवल उन्होंने अस्यूम किया है कि किसी को बीमार होते हुए देखा तो वो अस्यूम कर लेते हैं कि क्या मैं भी ऐसा बीमार हो सकता हूं जिसको साइकोसोमेटिक भी हम बोल सकते हैं। इसके अलावा फाइनेंशियल चैलेंज वाले वो लोग जिन्होंने ऐसे लोगों को अपने जीवन में आकर्षित करके रखा है जो ऑलरेडी फाइनेंशियल चैलेंज में हैं। और जब वह उनके जीवन में
(28:24) आते हैं, तो यह खुद भी फाइनेंशियल चैलेंज में आ जाते हैं। इसके अलावा वह लोग जो अपने आपको या दूसरों को दोनों को ही माफ नहीं कर पा रहे हैं और यह अनफॉर्गिवनेस की फीलिंग उनके जीवन में उनको तरक्की करने से रोक रही है। इसके अलावा जिनकी सेल्फ आइडेंटिटी ठीक नहीं है। आइडेंटिटी क्रिएशन ठीक नहीं कर पा रहे हैं वह इसके कारण उनके लाइफ में ग्रोथ नहीं हो रही। इसके कारण उनके रिलेशनशिप ठीक नहीं हो रहे हैं। इसके अलावा ओवर एक्सपेक्टेशंस करने वाले लोग या कंपैरिजन करने वाले लोग या वो लोग जो दूसरों के बोलने पे चले या दूसरों को खुश करने के लिए काम कर रहे हैं या लोग क्या
(29:00) कहेंगे इस चक्रव्यूह में फंसे हैं ऐसे सारे लोग सब कुछ होने के बाद भी हेल्थ वेल्थ अबंडेंस इन सबको एंजॉय नहीं कर पा रहे हैं। बराबर शताज जी सर बिल्कुल सही है। तो यदि आप भी इनमें से कोई हैं और इन चीजों के स्यूशन के बारे में समझना चाहते हैं तो अब जो पडकास्ट का पार्ट है उसमें हम इन सब चीजों के स्यूशन पे बात करेंगे। वो स्यूशन जो आप खुद घर बैठे कर सकते हो और आप अपने जीवन में बदलाव ला सकते हैं। तो सताक्षी जी ये सारे चैलेंजेस जो हमने आप सभी जाने कि मेजॉरिटी दुनिया में यह चैलेंजेस हैं आज। अब इन चैलेंजेस को ओवरकम करने के लिए आप मुझे
(29:35) एकदम स्टेप बाय स्टेप बेसिक चीजें बताइए जो हर व्यक्ति अपने घर पर रह के भी कर सकता हो और उनको भी यदि ये छह सात समस्याएं हैं तो वो उससे ओवरकम कर सके एकदम बेसिक। देखिए सबसे पहले तो है कि आप खुद को खाली कीजिए। अब खाली करने का मतलब क्या है? अ जनरली आपके पास इमोशंस के रूप में आपके बहुत सारे ब्लॉकेज हैं। जिन इमोशन से रिलेटेड जैसे आपके पास डाउट है, आपके पास डर है, आपके पास कंफ्यूजन है, आपके पास इमोशनल ट्रॉमा है। अब इमोशनल ट्रॉमा आपके फ्रस्ट्रेशन के रूप में भी है और वह एक इमोशनल बैगेज के रूप में भी है। या फिर इसके अलावा आपके पास कई बार बहुत सारे
(30:15) डाउट्स सेल्फ या अदर्स चीजों को लेकर है। यह जो कुछ भी है, यह है एक इमोशंस के फॉर्म में आपके पास। अब यह बॉडी के अलग-अलग हिस्सों में हो सकता है। ठीक है? और बॉडी आपको बताती खुद है कि मैंने यह जितने भी इमोशंस आपके हैं, यह मैंने कहां रखे हुए हैं। यह बॉडी आपको खुद बताती है। बस हम उसकी भाषा को समझ नहीं पाते। इसलिए हम उस तक पहुंच नहीं पाते। तो आपके जितने भी इमोशंस हैं यही इमोशंस आपके सबसे पहले एंजायटी क्रिएशन के कारण बन रहे हैं। जैसे अगर आपने कोई काम सोचा और आपको डाउट हो रहा है या आपको डर लग रहा है तो आप क्या कहते हो? मेरी सांसे छोटी हो गई। मुझे
(30:51) चेस्ट में या पेट में अजीब सा पैलपिटेशन हो रहा है। मुझे पसीने आ रहे हैं। मुझे घबराहट हो रही है। तो यह सब जितने भी सिम्टम्स हैं, यह सारे आपके अंदर एंजायटी का एक फॉर्म है। जब भी कोई घटना आपके जीवन में घट रही है, चाहे वह पास्ट में घटी है चाहे अभी घटी है। उस घटना में पहले दिन दुख होता है। जब वह घटना कुछ दिन बीत जाती है तो वह आपके लिए एक सेल्फ टॉक के साथ ओवरथिंकिंग बनती है। ठीक है? वो कुछ समय तक एक ओवरथिंकिंग के रूप में आपके साथ चलती है। जब वो दो-ती महीने आराम से आपके पास ओवरथिंकिंग के रूप में आ गई। इस वक्त आपका सेल्फ टॉक एंजायटी में कन्वर्ट होना
(31:30) शुरू हो जाता है। ठीक है? अब जब यही एंजायटी और लंबे समय तक आप रख रहे हैं मतलब उसको अवॉइड कर रहे हैं या आपको सशन नहीं मिल रहा है तभी यह आगे चलकर के एक पैनिकिक अटैक के रूप में कन्वर्ट होती है। फिर ये आगे और ट्रॉमा और फिर आगे सिचुएशन में ये जाती है। सुसाइडल थॉट तक जाती थॉट तक जाती है। शुरू हो जाता है और कुछ लोग तो उसको पार भी कर जाते हैं। अगर इसी चीज को हम यहीं पकड़ लें जहां पहले दिन वो दुख आया या ओवरथिंकिंग आई तो उसी जगह पर अगर हम पकड़ लें और उसी जगह पर हम निकालना शुरू कर दें तो शायद ट्रॉमा तक पहुंचने की जरूरत नहीं पड़ेगी या वहां तक हम नहीं
(32:07) जाएंगे। ठीक है? तो यह जो पहला दुख आया जिससे आपको डर डाउट एंड ऑल दैट जो कुछ भी आ रहा है जिसकी वजह से सेल्फ टॉक बढ़ रहा है वह एक एंजायटी के रूप में आपकी बॉडी में मौजूद है। जब भी कोई थॉट आए जस्ट ऑब्जर्व दिस। कोई घटना आ जाए आप उसे ऑब्जर्व कीजिए। एक दृष्टा के रूप में। हमारे सभी शास्त्र भी कहते हैं कि घटना को एक दृष्टा के रूप में डिटच्ड होकर देखिए। तो आप उसे देखिए। देखने के बाद आपके अंदर जैसे घटना 10 साल पहले हुई है लेकिन 10 साल बाद भी अगर आपको ध्यान आती है तो आपके इमोशन सेम एज आते हैं। उस वक्त आप गुस्सा थे तो आज आप आज फ्रस्ट्रेट होते हैं। उस
(32:42) वक्त आप इमोशनल थे तो आज आप इमोशनल होते हैं। तो वह जो भी इमोशन आया है उसे फील करने की आप कोशिश कीजिए। जैसे ही आप फील करेंगे, आपकी बॉडी इंडिकेट कर देगी कि यह इमोशंस एग्जैक्टली आपकी बॉडी में कहां है। तो जैसे अभी मेरे साथ-साथ बोलने पे अगर कोई कर रहा होगा आपके पॉडकास्ट के माध्यम से तो उसकी बॉडी में कुछ एक जगहों पर चुभन, दर्द, अनकंफर्टेबल एनर्जी फील होने लगी होगी। जिसको लोग कहते हैं गैस्ट्रिक लग रहा है। कुछ यहां पे दबाव लग रहा है। कुछ खींच रहा है। ठीक है? तो, यह जब हो रहा है, तो उस एरिया को आप ध्यान से देखिए। नॉर्मली उस चीज को निकालने के लिए
(33:18) एक बहुत छोटी सी टेक्निक है जिसको शावर टेक्निक कहा जाता है। ठीक है? आप सभी नहाते हैं रेगुलर बेसिस पे। तो आप चाह तो अपनी रोज की रोज एंजायटी को रेगुलर बेसिस पे निकाल सकते हैं। ठीक है? तो आप जब नहाने जा रहे हैं उसी समय आप अपने आप को एक बार ध्यान से अपनी पूरी बॉडी को ऑब्जर्व कीजिए। ना सिर्फ आउटर लेयर पे इनसाइड भी। अगर आपकी बॉडी में कॉन्शियस लेवल पर या सबकॉन्शियस लेवल पर। कोई भी इमोशन है जो ट्रिगर कर रहा है या हैवीनेस के रूप में है तो वह उस वक्त बॉडी उस जगह पर हैवी फील कराएगी। आप उसे आपका जो भी नापसंद कलर हो वैसे जनरली हम ब्लैक ग्रे
(33:54) कलर बोलते हैं पर अगर मान लीजिए किसी का ग्रे फेवरेट हो तो उसको निकालने में मुश्किल होगी। ठीक है? तो आप कोई भी उसे खराब कलर दे दीजिए जो आपके लिए अच्छा ना हो। और फिर जब आप शावर ले रहे हैं तो आपको यह फील करना है जस्ट इमेजिन करना है या जस्ट थॉट डालना है कि यह जितना भी पानी है यह सिर्फ मेरे बाह्य आवरण में नहीं बल्कि इनसाइड भी एंटर करके उसे क्लीन कर रहा है। ठीक है? 5 मिनट या 2 मिनट आप अगर इसको करते हैं लगातार पानी डालते हुए कि मेरे अंदर की बॉडी की इनसाइड और आउटसाइड दोनों लेयर क्लीन हो रही है और मेरे पैरों के तलवे के माध्यम से वो सारी गंदगी बाहर
(34:28) निकल रही है। यह एक सिर्फ एक इंटेंशन डाल करके आप विजुअल कर सकते हैं। तो आप देखेंगे कि अगले एक से 2 दिन के अंदर जिस काम को करने के लिए आपको आलस आ रहा है या आपको बहुत ज्यादा डाउट आ रहा है, डर आ रहा है, आप एक्शन नहीं ले पा रहे हो, आप सडन एनर्जी अपनी बॉडी में फील करेंगे। अगर आप इस समय चार काम कर रहे हैं, तो इस प्रोसेस के करने के बाद हो सकता है कि आप बहुत एनर्जेटिक लेवल पर छ से सात आठ काम अपने निपटा सकते हैं। क्यों? क्योंकि वो जो हैवीनेस है वह बॉडी में है जो आपको एक तरीके से ट्रिगर करती है एक सही दिशा में ना जाने के लिए। आप लेथार्जिक या
(35:07) प्रोकस्टिनेट करते हो। प्रोकस्टिनेशन, लेथार्जिक होना यह सब कुछ भी नहीं है। आपकी बॉडी का मौजूद वो एक नेगेटिव इमोशन है जो आपके आपके ऊपर एक तरीके से एंजायटी रूप में बाहर आ रहा है। क्योंकि जब भी ऐसा होता है तो आपकी सांसे सबसे पहले छोटी हो जाती हैं। तो जब आपकी सांसे छोटी होती हैं तो उसमें सबसे बड़ा नेगेटिव पॉइंट होता है वो ये है कि आपकी प्राणा पूरी तरीके से सेलो हो जाती है। ठीक? मतलब जो आप सांस ले रहे हैं वो छोटी हो जाती है। छोटी हो गई। जैसे हमारा पूरा शरीर पंचभूतों से बना हुआ है। जब हम ब्रीथ करते हैं तो वायु ले रहे हैं। हमारे पेट में जो
(35:41) हमारी प्राणा है जिसको अग्नि तत्व कहा गया है यह आपके नेवल एरिया में है। इसीलिए जब भी आप मेडिटेट करते हैं तो आपसे कहता कहा जाता है कि लंबी गहरी सांस लीजिए ताकि आप प्राणा से कनेक्ट कर सकें। और हमारी लाइफस्ट ऐसी हो चुकी है कि हमारी लाइफ में हमारी सांसे जनरली बच्चों के से ही स्टार्ट हो जाती है कि वो छोटी हो चुकी हैं। ठीक है? तो जब आपका वायु तत्व आपके प्राणाया यानी अग्नि तक जाता है उस वक्त आपकी अग्नि फ्लो करती है। आज आरो लगा हुआ है तब पहले नहीं लगा था तो हम पानी उबालकर पीते थे। ठीक है? जब अग्नि हमारी बॉडी के अंदर फ्लो होती है क्योंकि यह कहा जाता है
(36:20) हमारी बॉडी के अंदर 72% पानी है। ठीक है? और पानी सबसे ज्यादा इमोशंस को अब्सॉर्ब करता है। जब अग्नि ऊपर फ्लो करती है, प्राण अंदर फ्लो करती है तो यह वाटर आपका एलिमेंट क्लीन होता है और उस वक्त जब यह क्लीन होता है तो अब आप हल्का फील करते हो, बेहतर फील करते हो और आप अपने काम को ज्यादा अच्छे तरीके से कर पाते हैं। मतलब ये आप एक बेसिक रेमेडी बता दी जो हर व्यक्ति कर सकता है। कर सकता है। और इसके अलावा क्या क्या तरीके होते हैं अपने को इन सारी चीजों से बाहर निकालने के? मतलब पहला आपने बताया कि आपको रिलीज़ करना है। ये पहला स्टेप आपने
(36:50) बता दिया। पहला रिलीज करना है। दूसरा यह कि आपने रिलीज कर लिया। लेकिन इसके बावजूद भी बहुत सारे लोगों की यह समस्या होती है कि हमने इमोशंस तो निकाल दिए पर मेरे थॉट्स पर मेरा कंट्रोल ही नहीं है। वो सेल्फ टॉक दिन भर बड़बड़ बड़बड़ चल रही है। तो अब बड़बड़ चल रही है तो आप तीन चीजें करना शुरू कर देते हो ऐसी सिचुएशन में। या तो आप खुद से बात कर रहे होते हो। या तो आप फोन मिला के किसी और को वो कहानी सुना रहे होते हो। तीसरा या तो आप ना बात कर रहे हो ना कहानी सुना रहे हो। अपने में ही अंदर घुमा रहे हो। हां। अंदर ही अंदर उसको घोल रहे हो। तो ये
(37:21) तीनों ही आपको नुकसान दे रही है क्योंकि यह तीनों ही आपकी उस नेगेटिव ऊर्जा को बढ़ा रही हैं। तो आप कम नहीं कर रहे हो। उससे रिलीज नहीं कर रहे हो। जबकि बहुत से लोग ये कहते हैं जब आते हैं कि मैम मैं बात कर लेती हूं तो मैं नॉर्मल हो जाती हूं। तो बात करने से आपने दो काम किए। एक तो आपने उस घटना को अपने अंदर वापस रिपीट किया। जितने न्यूरॉन्स हैं, जितने सेल्स हैं, जितने हार्मोंस हैं उनको वापस आपने वो इमोशन दिया। वह वापस से उसी इमोशंस में जाने की वजह से अपना एक्शन वैसा कर रहे हैं। आपकी स्टेट वैसी क्रिएट हो रही है। तो आप बराबर उसको पावर दे रहे हो। दूसरे
(37:49) को बता रहे हो तो दूसरे के साथ भी गड़बड़ कर रहे हैं आप और खुद के साथ भी कर रहे हैं। तो इसका एक बहुत सिंपल तरीका है कथार्सिस। आप एक पेपर ले लीजिए जितने थॉट्स आपको आ रहे हैं अच्छे बुरे। बहुत सारे लोग कहते हैं मैम कभी-कभी ऐसा लगता है कि सामने वाले पर्सन को मैं मार दूं। आपको यह भी थॉट आ रहा है तो आप वो भी लिख दो। ठीक है? वो सारा लिखने के बाद आपको पेपर पकड़ना है। सिंपली जलाना है। उसके एसेंस को आप कहीं भी फ्लश आउट कर दो। को पानी में बहा दो एंड ऑल दैट कुछ भी कर दो। धीरे-धीरे आप देखेंगे कि आपके अंदर जो सेल्फ टॉक है वह धीरे-धीरे कम होने लगेगी।
(38:19) पहली चीज। दूसरी चीज बहुत लोग कहते हैं कि मुझे थॉट लिखने में ऐसे लगता है कि मैं और ओवर इमोशनल हो गई हूं। मुझे और हैवीनेस फील होने लगी। तो ऐसी सिचुएशन में आपकी मानस पटल पर ही तो वो थॉट्स हैं। तो पटल यानी कि बोर्ड आप स्कूल में पढ़ते थे। आप कनेक्ट कर लोगे। आपका मैथ्स का टीचर या आपका बायो का टीचर या आपका साइंस का टीचर कोई आया जिसने कुछ थ्योरी लिखी। अभी बच्चों का काम पूरा नहीं हुआ। टीचर बाहर जाता है तो कहता है कि मैं इसे रब नहीं कर रहा हूं। बाहर जा रहा हूं। जब दूसरा टीचर आएगा तो इसे रब कर लेगा। बहुत से लोग रिलेट कर पाएंगे इससे। तो आपके जीवन में
(38:53) भी आप वही कर रहे हो कि कोई घटना हुई थी जिसने कोई कहानी लिखी है। वो रब करना भूल गया और वो चला गया बाहर। अब आपके मानस पटल पर वो कहानी लिखी हुई है। ठीक है? तो आप विजुअल कर लो कि आपके सामने एक बोर्ड है और उस बोर्ड पर वह सारी कहानी लिखी हुई है। ठीक है? आपके पास ईश्वर ने एक डिवाइन डस्टर दिया हुआ है। जस्ट विजुअल एंड आपके मन में जितना फ्रस्ट्रेशन या गुस्सा या कुछ भी है तो आप उस सारे थॉट्स को मिटाना शुरू करो। और यह आपको एक्शन में करना है। सिर्फ विजुअल नहीं करना है। आपको लिटरली अपना हाथ उठा के इसको रब करना है। इसको करने से होगा क्या? आपका ब्रेन आपको
(39:29) मैनपुलेट करके आपको पास्ट में ले जा के आपकी ऊर्जा को डिस्टर्ब कर रहा है। अब आप क्या कर रहे हो? अपने ब्रेन को मैनपुलेट करके यह बता रहे हो कि यह थॉट्स को मैं मिटा चुकी हूं। हम तो अब आपका ब्रेन सबकॉन्शियसली उस ऊर्जा के साथ कनेक्टेड ही नहीं है। तो धीरे-धीरे जब आप यह करेंगे तो आप जो लोग भी इसको करेंगे वो महसूस करेंगे कि उनके अंदर जो थॉट्स लगातार सेल्फ टॉक के रूप में चल रहा है वो उनका धीरे-धीरे उसकी फ्रीक्वेंसी कम हो चुकी है और यह बहुत अच्छा वर्क करता है। बहुत से लोग मेरे पास ऐसे आते हैं जिनके पास ना विजुअल्स होते हैं। मतलब
(40:01) उनको कोई विजुअलाइज़ेशन नहीं होता। उनके पास कोई ऑडिटरी नहीं होती। कोई साउंड सुनाई नहीं दे रहा होता है। वह कोई अनुभव भी नहीं कर रहे। कुछ फीलिंग्स भी नहीं है। लेकिन सिर्फ उनके पास एक इंटेंशन है। इंटेंशन आ रहा है कि मुझे ऐसा लग रहा है, मुझे ऐसा लग रहा है, मुझे ऐसा लग रहा है। तो यह जो प्रोसेस मैंने बताया उनके लिए यह बहुत अच्छा वर्क करता है। मतलब ऐसे लोग जिनके पास कुछ भी तरीका नहीं है इमोशंस को फील करने का वो भी इसके साथ कनेक्ट होके अपने आप को हील कर पाते हैं। ओके? तो आपने अभी तीन स्टेप बताए। पहला रिलीज़ करना। फिर उसको कथासिस से क्लीन
(40:31) करना और अच्छे इंटेंट से उस पे काम करना जिसमें आपकी फिजिकल बॉडी भी इनवॉल्व हो। मतलब जो भी काम आप कर रहे हो उसमें फिजिकल बॉडी को पूरा इन्वॉल्व करना है जिसमें आपके ब्रेन को ये मैसेज जाए कि ये चीजें सच में क्लीन हो चुकी है। तो ये तीन स्टेप आपने बताएं। इसके बाद नेक्स्ट क्या करना चाहिए? देखिए हमारे पास जो कुछ भी है तो मैंने कहा बाहर से नहीं है। सब कुछ अंदर है। तो लोग कहते हैं कि मैम पुरानी घटना ऐसे मेरे सामने आती है जैसे कोई मूवी चल रही हो। मतलब वो एज इट इज मुझे उसमें आवाजें भी आ रही हैं। उसमें मूवी की तरह मुझे पिक्चर
(40:58) भी दिख रही है या मुझे ऐसा लग रहा है कि लोग किस तरह लड़ रहे थे। किस तरह बात कर रहे थे। कुछ तो वो आपके फ्रंटल लोब पे यानी आपका विज़नरी पार्ट बहुत स्ट्रांग है। आपका ऑडिटरी बहुत स्ट्रांग है। हो सकता है कि आप एज अ पर्सनालिटी एक एनथेटिक बॉडी हो। कनेथेटिक मतलब जिसने देखा सुना और महसूस भी किया है। ठीक है? तो सर टीवी सब लोग देखते हैं। सबने अनुभव किया हुआ है। जस्ट आप विजुअलाइज कर लीजिए कि जो आपके मानस पटल यानी आपके अंदर की टीवी में चल रहा है थोड़ी देर के लिए क्योंकि यह आपके लिए आपके ब्रेन को मैसेज भेजने में आसानी होती है। आप देख लो कि सामने एक टीवी रखी
(41:29) है जिसका रिमोट आपके हाथ में है। आप चाहो तो उस समय कोई भी रिमोट अपने हाथ में रख के प्रेस भी कर सकते हैं क्योंकि वह आपके ब्रेन को ज्यादा अच्छा विजुअलाइज करने और ऑथेंटिकली इस मैसेज को कमांड करने में हेल्प करता है। तो आपने टीवी को ऑन किया। जस्ट फील कि आपके फ्रंटल लोब से वो चीज मतलब आपके मानस पटल से जो इमेज चल रही है वो उस टीवी में ट्रांसफर हो चुकी है। अब हो सकता है इसमें कुछ आवाजें हो। तो आवाजों को आप धीरे-धीरे साउंड्स को बंद कर दीजिए या आप ऐसे फील कर सकते हैं जब हम म्यूट करते हैं तो हमें टीवी पर साउंड का क्रॉस बटन दिखाई देता है। ठीक है? बहुत
(42:02) सारे लोग को विज़न आ गया होगा। तो आपको टीवी पे देखना है कि वो साउंड क्रॉस हो चुका है। यानी सारी आवाजें बंद हो गई हैं। हो सकता है पहली बार में ना बंद हो। लेकिन दो से तीन बार करने पर म्यूट आपको वो आवाज सुनाई नहीं देगी। अब आपके पास जो मूवी के फॉर्म में है उसको आप पहले तो पॉज कर दीजिए क्योंकि जब भी कोई मूवी चल रही होती है तो हम पॉज करते हैं ना तो आपको पॉज कर देना है। अब आपके पास उस घटना को लेकर या तो बहुत ज्यादा गुस्सा है या तो बहुत दुख है। यदि आपके अंदर बहुत गुस्सा है तो आप इस टीवी को हैमर से फोड़ दीजिए विजुअलाइजेशन में। लेकिन अगर आपके पास इस
(42:36) घटना पर बहुत इमोशंस हैं तो आप ऐसे फील कीजिए कि आपके हाथों में एक बहुत बड़ा शावर दिया गया है। जैसे कोई बिल्डर अपनी बिल्डिंग को जब शावर करता है तो उसका फोर्स बहुत तेज दिखता है। तो आप ऐसा ही एक शावर आपके हाथ में है। और इस टीवी की स्क्रीन को आपने पूरा धो दिया है। जब भी कोई पेंट पेंटिंग ये सब विजुअलाइजेशन में करना है। थोड़ा सा डिस्क्लेमर डाल देता हूं। अपने घर की टीवी को नहीं फोड़ना है। घर की टीवी पे शावर नहीं चढ़ाना है। [हंसी] जी। तो आपको वह जो सामने टीवी दिख रही है उस पे आपको शावर चला करके आपको जैसे एक पेंटिंग पे जब पानी डाल दीजिए तो कैसा
(43:08) उसका कलर फ्रेड हो जाता है। उसकी पेंटिंग दिखती नहीं है। बिल्कुल आपको ऐसे विजुअल करना है कि वह चीज अगर विज़ुल नहीं है तो आप इंटेंशन डाल दो कि ऐसा हो चुका है। तो वो इमेज पूरी तरीके से ब्लर हो गई। पूरी तरीके से मिट गई। पूरी तरीके से निकल गई। अब आपको स्क्रीन या तो वाइट दिख रही है या तो ब्लैक दिख रही है। यानी इस वक्त जो वो मूवी का फॉर्म है वो आपके ब्रेन के मैनपुलेशन के द्वारा बाहर जा चुका है। और एक बार में नहीं गया तो दो-तीन बार प्रैक्टिस करने से जा सकता है। कितनी भी गहरी है अगर आपने उसे तीन से चार बार फॉलो किया पांचवी बार वो होल लाइफ वो
(43:38) इमेज आपकी लाइफ में नहीं आएगी। वाह बहुत बढ़िया। तो ऐसा आपके पास्ट प्रीवियस आपके कस्टमर्स के साथ या आपके क्लाइंट्स के साथ ऐसा पास्ट एक्सपीरियंस रहा कि उन्होंने दो चार बार किया और खत्म हो गया। यस सर। अभी तो ऐसे कितने लोग होंगे सर? सभी लोग जो लोग आते हैं सबके पास विज़न है। ठीक है? और सबके साथ ये प्रोसेस हम कराते हैं। कितने ही अभी हमारा जो बैच रनिंग बैच चल रहा है। अभी 10 दिन हुए हैं उसको। दो दिन पहले ही मुझे एक बच्ची ने बताया कि मैम मतलब कोई ऐसा टाइम ही नहीं होता था 24 आवर्स में कि जब मुझे पास्ट की घटनाएं दिखाई ना देती हो। मतलब उसका
(44:12) विज़नरी पार्ट बहुत स्ट्रांग था। उसने कहा कि मैं सपना भी देखती थी ना तो भी मुझे वही घटनाएं दिखाई देती थी। और अभी 10 दिन उस बैच को हुआ है और वह उस बच्ची ने मुझे शेयर किया। मैंने उससे पूछा मैंने कहा अभी कोई विज़न दिख रहा है? कह रहा है मैम कुछ नहीं दिख रहा। सब ब्लैक दिख रहा है। तो अभी सब जो खाली हुआ है वो आपको ब्लैक दिख रहा है। जब यह पूरा कंप्लीट होगा तो यह ब्लैक ना दिख के यह आपको कहीं ना कहीं कलरफुल दिखना शुरू हो जाएगा जो आपके ड्रीमर पार को एक्टिवेट कर रहा होगा। मतलब जो भी आपके मन में पुरानी धूमिल जो भी इमेज हैं जो भी मेमोरी है जो भी स्टोरी चल
(44:45) रही है या मूवी चल रही है उसको आप धीरेधी धीरेधीरे पहले डाइल्यूट करके खत्म कर दो फिर उसके बाद आप उसमें नए कलर भी ऐड कर सकते कर सकते हैं जी देखिए इस इस प्रोसेस को कहते हैं न्यूरोप्लास्टिसिटी हमारी स्किन खराब होती है तो हम प्लास्टिक सर्जरी करते हैं हमारे ब्रेन में कोई पिक्चर है खराब हो चुकी है हमने उस पिक्चर को हटाया है अब हम यहां पर अपनी एक नई पिक्चर डाल सकते हैं जैसे बहुत सारे लोगों का एक चैलेंज होता है ना सेल्फ वर्थ नहीं आती आती है। जैसे इसमें आपने लिखा भी है। ठीक है? कि सेल्फ वर्थ नहीं है, सेल्फ लव नहीं है। अपने लिए कोई
(45:13) खूबसूरत इमेज ही नहीं है। लोगों के पास सक्सेस इसलिए भी नहीं है चित्र भैया क्योंकि लोगों के पास अपने सक्सेस की कोई इमेज ही नहीं है। बस मैं इतना चाहती हूं कोई दो कमरे का घर हो जाए। एक नॉर्मल लाइफ हम जीने लगे। ब्रह्मांड आपको अथाह देने के लिए बैठा है। आपके ब्रेन में उतनी पावर है कि आप इस पूरी दुनिया को विजित कर सकते हो। सिर्फ आपको अपने लिए एक बड़ा सोच या बड़ी थॉट रखनी है। अपने हिपोकपस को एक ऐसी इमेज देनी है जो एक ऐसी मेमोरी बनाए जो पूरे सेल्स को दी जा सके जिससे आप उन चीजों को अट्रैक्ट कर सकें जो कि क्वांटम फिजिस का एक प्रोसेस है। ठीक है? अब इसको
(45:48) सरल भाषा में समझते हैं कि आप अपने विज़न को बनाओ। अपने आप को देखो। भले ही आप आज मोटे हो, भले ही आप बहुत पतले हो। आपकी पर्सनालिटी कैसी भी है। वो आज की आपकी रियलिटी है। कल की रियलिटी ना हो। यह आपकी रिस्पांसिबिलिटी है। बदली जा सकती है। वो बदली जा सकती है। आप मोटे हो आज या आप पतले हो क्योंकि आपने अपने आपको यह विज़न दिया ही नहीं कि आप फिट बॉडी के साथ कैसे दिखोगे। तो आप अपने आपको उसी टीवी पर देखना चाहो तो देखो कि आप एक बहुत ही अच्छे फिट बॉडी के साथ एक लग्जरी कपड़े के साथ एक लग्जरी लाइफ को एंजॉय कर रहे हैं। अब इसमें कुछ लोग अपने आपको देखने में
(46:27) तुरंत से कंफर्टेबल नहीं होंगे क्योंकि उनके पास वैसे कोई एक्सपीरियंस नहीं है। ठीक है? तो आप जिस स्तर तक भी सोच सकते हैं आपका जो सबसे हाईएस्ट पॉइंट है क्योंकि मैं आपको नया विज़न दे भी दूंगी तो आपका सबकॉन्शियस उसको एक्सेप्ट नहीं करेगा। तो आप वो पहले कीजिए जो आप एक्सेप्ट कर रहे हैं। अभी प्रेजेंट मोमेंट में आपकी जो भी परिस्थिति है उससे सबसे बेस्टेस्ट परिस्थिति आपके अकॉर्डिंग क्या होगी उसके अनुसार आप अपने आपको विज़न कीजिए। जैसे ही आप करेंगे आपके चेहरे पे स्माइल आएगी। और जैसे ही वह स्माइल आएगी आपके 86 ट्रिलियंस के पास वो मैसेज भावना
(47:02) के रूप में पिक्चर के रूप में ऑडिटरी के रूप में पहुंच चुके हैं। अब यह क्या करेगा आपके अंदर के उस एक्शन पार्ट को एक्टिवेट कर देगा जो आपने अभी तक सुप्ता अवस्था में रखा हुआ था। जिसको भी पता ही नहीं था जागरूकता की कमी थी। उसको भी आपने एक्टिवेट कर दिया। कर दिया। ठीक है? जब ये एक्टिव होगा तो ऐसा नहीं है कि कोई जादू की झड़ी घुमाई। आज मैंने विजुअल्स किए। एक महीने विजुअल्स किए और कल से मेरी लाइफ, मेरी बॉडी, मेरी लाइफ सब कुछ चेंज हो गया। जब आप यह विज़न अपने फ्रंटल लोब को देते हैं तो आपके अंदर की ऊर्जा क्वांटम वेवलेंथ के साथ इस पूरे
(47:36) ब्रह्मांडीय ऊर्जा के रूप में जो अणु परमाणु से ऊपर की ऊर्जा है जो हम कहते हैं कि ऊर्जाओं से परे दुनिया है जहां हमारा माइंड नहीं जाता वहां जब ये पहुंचती है ये ऊर्जा उस ऊर्जा के साथ आपकी लाइफ में जिसको हम लॉ ऑफ अट्रैक्शन के रूप में आकर्षित करते हैं वहां से आपको वो मेटालिस्टिक चीजों के लिए रास्ते दिखने शुरू हो जाते हैं। हो सकता है अभी तक आप पतले होने के लिए रोज एक गोल बनाते हो कि मुझे कल से जिम जाना है। मुझे कल से ऑयली नहीं खाना है। मुझे कल से एक्शन लेना है। बट दो दिन करने के बाद आप वापस निढाल आ के वापस वहीं पिज़्ज़ा बर्गर में जुट जाते हो।
(48:12) ठीक है? क्योंकि आपका मोटिवेशन जीरो है। आपके अंदर का एक्टिव पार्ट जीरो है। अगर आपने उसे एक्टिव कर लिया तो आपके सामने बैठे हुए चार लोग भी अनहेल्ी खा रहे होंगे या अनहेल्ी एक्टिविटी कर रहे होंगे। पर आप उसमें इनवॉल्व नहीं होंगे। तब आपके अंदर का मोटिवेशनल, आपका क्रिटिक, आपका ड्रीमर जो आपने दिया है न्यूरोप्लास्टिसिटी के थ्रू वो आपको यह चेतना देगा कि यह आपका पार्ट नहीं है। आप अपने रास्ते बदलकर आगे चले जाओगे। और एक बहुत छोटा सा उदाहरण देती हूं। यह मैंने खुद अपनी लाइफ में अनुभव किया है। मेरी डॉटर चुकी फैमिली होती है तो बहुत सारी चीजें हम अ बच्चों
(48:49) को नहीं भी रोक पाते हैं। ठीक है? तो उसका बीच में आदत पड़ गई थी पिज़्ज़ा खाने की जो मुझे अच्छा नहीं लग रहा था। ठीक है? अभी कुछ एक दिन हम लोग बाहर थे और हम लोगों ने उसको मतलब मैं उसके साथ एक अच्छा समय बिता पाई। उस वक्त उसके ब्रेन को ट्रेंड किया गया जिसके थ्रू आज उसकी थाली में रखा हुआ खाना उसे बताया भी ना जाए कि यह अनहेल्ी है। वो पहली बाइट में समझ जाएगी कि मुझे यह नहीं खाना है। तो यह क्या है? यह आपके ब्रेन के अंदर का वो सेंसरी मोटर एक्टिव किया गया है जहां से आपको यह सेंसेस होंगे कि इट इज़ गुड फॉर मी ऑ नॉट। ठीक है? तो आप
(49:25) बहुत ईजीली अपने आपको एक्टिव मतलब लोग कहते हैं ना मेरी आदत नहीं है। मैं उठ नहीं पाता, मैं सो नहीं पाता। एंड ऑल दैट। ठीक है? तो वो आप बाहर प्रयास कर रहे हो। जबकि प्रयास करने की जरूरत अंदर है। तो जैसे ही आपका यह पार्ट एक्टिव होता है। जो चीज आप अभी तक नहीं कर पा रहे थे, वो होना शुरू हो जाएगा। उसके रास्ते खुलने शुरू हो जाएंगे। बहुत बढ़िया। कितनी एज है बच्चे की आपकी? से इयर्स कंप्लीट किया है 7 अगस्त को। मतलब सात साल के बच्चे को भी आप यह ट्रेंड करके यदि उसके दिमाग में सही तरीके से मैसेज करके उसको भी ट्रेंड कर सकते हैं।
(49:53) तो एक एडल्ट जो 18 साल से ऊपर है समझदार हो गया वो तो बहुत आसानी से ट्रेंड हो ही सकता है। तो उसको ट्रेंड करने के और क्या प्रोसेस आप अपनाते हैं जिससे आपके पास आए हुए सभी लोग इतने बदलाव महसूस करते हैं या इतना पॉजिटिव चेंज लेके जाते हैं। तो क्या-क्या और किया जाता है? देखिए इस इसके लिए ना मैं एक छोटी सी मतलब वैसे तो यह प्रोसेस थोड़ा वैसा है लंबा है बट मैं एक छोटी सी चीज बता देती हूं जिससे आप अपनी किसी भी बुरी आदत को अच्छी आदत में कन्वर्ट कर सकते हैं या किसी बैड इमोशंस को गुड इमोशंस में बदल सकते हैं। ठीक है? हमारा जो राइट हैंड होता है, यह गिवर हैंड
(50:24) है। जो हमारा लेफ्ट हैंड है, यह हमारा एनर्जी को लेने का हाथ है। टेकिंग एनर्जी है यहां पे। तो, जो गिवर हैंड है, आप उसको जस्ट अपने हैंड को पूरा सीधा रख लीजिए। ठीक है? और इस पार्ट पे अपना पूरा फोकस लेके आएंगे। क्योंकि जब जैसे ही हमारा फोकस कहीं पर भी जाता है, हमारे पूरे शरीर की ऊर्जा वहीं पर आ जाती है। अब आपके जीवन में जो भी नेगेटिव है, उससे रिलेटेड या जो भी आदत है या जो भी चीजें हैं, उसके जो इमोशंस हैं वो आप इस अंगूठे पर देखना शुरू कीजिए। तो आप थोड़ी देर बाद फील करेंगे कि आपको यहां पे हैवीनेस, टिंगलिंग, चुबन कुछ
(50:53) फील हो रहा है अगर वो नेगेटिव है तो। जैसे ही यह आए तो जस्ट फील दैट कि अब आप इसको बंद करने वाले हो अपनी बॉडी के अंदर। देन थ्री टाइम्स सेज़ दैट कि नाउ आई वांट टू स्विच ऑफ। स्विच ऑफ। ठीक? स्विच ऑफ। तो, आपने क्या किया? स्विच ऑफ। तो, यहां की जो सेंसरी मोटर है, यह जो तत्व है आपका, यह ब्रेन से सीधा कनेक्टेड है। तो, यह क्या करेगा? ब्रेन को मैसेज देगा कि आपकी बॉडी के जितने भी न्यूरल्स हैं जिनमें यह मैसेज है कि इस फीलिंग से रिलेटेड अंदर चल रहा है वो आप चार से पांच बार, 10 बार, 15 बार आप प्रैक्टिस करते हो तो आपकी बॉडी का वो
(51:25) एक सेंस पार्ट ऑफ हो जाएगा। अब कोई तो ऐसी फीलिंग होगी जो गुड होगी आपके लिए। बहुत अच्छी होगी। बहुत अच्छी आदत के रूप में होगी। उसको आप यहां पे फील करना शुरू करोगे। सेम एज इस हाथ में लेफ्ट हैंड पे। लेफ्ट में जहां से रिसीव कर रहे हैं। ठीक है? ठीक है? जब आप यहां फील करोगे तो आपको फील होगा कि ये ये पार्ट में ना आपको ठंडा या गरम फील होगा। अगर वो अच्छी इमोशंस है। जानने का तरीका है ये कि आपको यहां पे ठंडा या गरम फील होगा। ठंडा यह फील होगा क्योंकि ठंडा तब फील होगा जब आपकी लेफ्ट नस्ट्रिल चल रही होगी। गरम तब फील होगा जब आपकी राइट नस्ट्रिल चल रही होगी। तो जब आप
(51:59) ऐसा फील करो और उस इमोशंस को सोचना शुरू करिए कि जब मैं यह करता हूं यह मेरी हेल्दी आदत है और यह मुझे बहुत अच्छा आगे इनकरेजमेंट दे रही है या कभी पास्ट में रही है। देन से दैट आई एम वांट टू स्विच ऑन इन माय बॉडी। आई वांट टू स्विच ऑन ऑन माय बॉडी। आई वांट टू स्विच ऑन ऑन माय बॉडी। आई वांट टू स्विच ऑन इन माय बॉडी। अब वांट टू स्विच ऑन माय बॉडी। शब्दों की अपनी एक ऊर्जा होती है। और आपने यहां से अपनी सेंसरी मोटर को दे दिया। अब ये क्या करेगा? 86 ट्रिलियन सेल्स के द्वारा आपके सभी हार्मोन को इस मैसेज इस इमोशंस को देगा। हमारी बॉडी में जो भी
(52:29) एक्शन होता है वो एक्शन हमारे अंदर मौजूद हमारे हार्मोन के अंदर जो इमोशंस है वहीं वहीं क्रिएट करता है। हम अपने बच्चे को शरारत करते देखते हैं। भले ही हम कितने काम एंड पीस में बैठे हैं। हमें लग रहा है कहीं कुछ खतरा है। सडन हम उठ के उसकी तरफ भागते हैं। कोई चीज हमारी तरफ आई हम गुस्से में हैं। सडन हम उस पे रिएक्ट करते हैं। तो यह जो सडन चीजें होती हैं इसका कारण क्या है? क्योंकि हम कुछ देखिया महसूस कर रहे हैं। हमारा ब्रेन विदिन सेकंड के अंदर हमारे सभी एट्रिसिस न्यूरॉन्स के द्वारा हमारे हार्मोंस को उन इमोशंस को ट्रांसफर कर देता है। और वो
(53:02) ट्रांसफर इमोशंस हमारी बॉडी को एक एक्शन देते हैं जो एक स्टेट के कारण आती है। जैसे आप कहते हैं ना मैं इस वक्त थोड़े अच्छे स्टेट में नहीं हूं। खुश नहीं हूं। मैं सैड इमोशंस में हूं। तो दैट इज योर स्टेट। और जब भी कोई स्टेट आपकी बॉडी में आएगी हार्मोंस के कारण तो आप रिएक्शन जरूर करोगे उसके अनुसार। वैसे जब आपने यह बोला था तो मेरा यह हाथ गर्म हुआ। हां तो आप देखिए आपका राइट नस्ट्रिल में चल रहा है या नहीं है? बहुत अच्छा चल रहा होगा। आपकी बॉडी तभी गर्म अनुभव देगी जब मेडिटेशन आप कर रहे होंगे जब आपकी सूर्य नाड़ी चल रही होगी। ठीक है? मतलब गर्म
(53:33) नाड़ी चल रही होगी। और आपकी बॉडी मेडिटेशन में तभी ठंडा अनुभव देगी जब आपकी चंद्र नाड़ी चल रही हो। लोग मैनिफेस्टेशन करते हैं और कहते हैं कि मुझे मैनिफेस्टेशन नहीं हो रहा है या मुझे कुछ मैनिफेस्ट नहीं हो रहा है क्योंकि आप सब चीजों को ध्यान में रखकर चीजें नहीं कर रहे हैं इसलिए नहीं होता। जब भी आपकी बॉडी मेडिटेशन के दौरान या मेरिट मैनिफेस्टेशन करते समय आपको बॉडी में कहीं भी हीट फील हो रही है तो आप रुक जाइए। क्योंकि उस वक्त आप कुछ भी मैनिफेस्ट करेंगे वह सब कुछ बर्न हो जाएगा। जब भी आपकी चंद्र नाड़ी चलती है तो आपकी बॉडी का जो जल तत्व
(54:05) है वह एक्टिव रहता है और आपकी बॉडी चंद्र नाड़ी के साथ मैनिफेस्टेशन कर पाती है। वो आप रिसीव कर पाते हैं। तो सताक्षी जी जो बातें अभी आपने बताई क्या इसका कोई रियल लाइफ एक्सपीरियंस आप शेयर कर सकते हैं जिससे लोग उसको ज्यादा अच्छे से रेजोनेट कर सकें, समझ सकें? एक मेरी क्लाइंट थी कनाडा की। कनाडा की। हां कनाडा की। उनको सबसे ज्यादा चैलेंज ये था कि उनकी एक हैबिट थी कि जब भी कोई व्यक्ति उनसे मिलता था उस व्यक्ति को देखते ही उनके अंदर एक अजीब सी फ्रस्ट्रेशन होती थी जबकि उस व्यक्ति ने कुछ गलत नहीं किया अजीब सी समस्या थी उनकी
(54:39) किसी से भी मिले किसी से भी मिले मतलब उन्हें लोगों को देख के ही इरिटेशन शुरू हो जाती थी खुशी कहां मिलती थी सिर्फ अपने बच्चे के साथ तो जो इमोशन नेगेटिवली दूसरों के लिए थे वो हमने यहां पर स्विच ऑफ करा दिए जो बच्चे के साथ के टाइम के इमोशंस थे वो हमने ऑन करा दिए इस चीज को चित्रेश भैया एक महीना बीत चुका है। आज वो लेडी सोशल वर्क के रूप में काम कर रही हैं। अरे वाह बहुत बढ़िया। ठीक है। उन्होंने एनजीओ पेपर डाला हुआ है और एनजीओ के थ्रू वो लोगों को हेल्प करने जा रही हैं। और इसके लिए उन्होंने बोला था कि मेरे मन में यह थॉट तो आता है कि मैं
(55:10) लोगों की हेल्प करूं लेकिन मैम करूं कैसे? क्योंकि मुझे तो लोगों को देख के इतना भयंकर गुस्सा आता है। मतलब कोई भी व्यक्ति मेरे से मिलता है मुझे गुस्सा आता है। तो यह जो गुस्सा था यह उनके अंदर के अग्नि तत्व के डिस्टरबेंस के कारण था। उनके ब्रेन के अंदर कुछ ऐसे पॉइंट्स थे जिसकी वजह से कुछ ऐसे एक्सपीरियंस थे जिसकी वजह से यह चैलेंज आता था। लेकिन आज वह बहुत ही ईजीली अपनी लाइफ को बहुत ही खूबसूरती से जी रही हैं। अपने बच्चे के अलावा उनके सबके साथ रिश्ते अपने घर में भी अच्छे नहीं थे। आज हस्बैंड के साथ रिश्ता बहुत सुंदर है। अपनी सास के साथ उनका रिश्ता
(55:38) बहुत अच्छा है। उन्होंने बताया मेरी अपनी खुद की मां के साथ भी रिश्ता अच्छा नहीं था। इसी कारण से इसी कारण से। यह रिश्ता उन्होंने अब उनका कहना यह है कि 20-25 साल से पिछले मैंने अपनी मां को हेलो भी नहीं बोला। 25 साल से बात ही नहीं की थी। बात नहीं की थी। 25 साल बाद उन्होंने अपनी मां से बात की और बात करने के बाद आज उनकी मां मतलब पिछले हफ्ते उनकी मां इंडिया से कनाडा गई है 25 साल बाद। 25 साल बाद अपनी बेटी के पास गई हैं। गई हैं मिलने। तो कहीं ना कहीं नाराजगी दोनों साइड से थी। पर ये रिश्ता ठीक हो पाया। जबकि इस रिश्ते में एफर्ट है। बाहर ही नहीं किया
(56:09) गया। इनसाइड किया गया। एक ऐसा ही एक और केस बताती हूं आपको। मुझे याद आ गया मां को लेकर के। तो बहुत अजीब चीज है। लेकिन मैं शेयर करना चाहूंगी। नाम नहीं लूंगी। एक लेडी है जो कि यूएस में रहती हैं। शादी के बाद ही वह वहां चली गई। उनका बाहर शादी करने का जो रीजन था या कारण था उनका कारण यह था। उनकी मां की मैरिज सेकंड हो गई थी और जो सेकंड मैरिज हुई थी वो फादर ने उनके साथ नॉट गुड बिहेवियर किया था। तो उसको उन्होंने अपनी मां को बताया बट किसी भी रीजन से उन्होंने उनका साथ नहीं दिया और उनके खुद के फादर भी नहीं थे और जो सेकंड
(56:42) मैरिज मां ने की वो भी नहीं थे। मां के ऊपर बहुत कर्जा हो गया था। मतलब अथा लाखों में कर्ज। वह कर्ज वह खुद ही निपटा रही हैं। वह सैलूून चलाती हैं वहां पर और आज उसको वह खुद निपटा रही हैं। सारा पैसा देने के बाद भी मां के मन में कोई ग्रेटट्यूड नहीं है। और उनको यह है कि मैं सब कुछ करने के बाद एक अकेली सिचुएशन में खड़ी हूं आज भी। यूएस में भी जहां वो हैं वहां पे भी मतलब हस्बैंड के साथ ओकेओके है। बाकी बहुत अच्छा ऐसा कुछ ग्रुप नहीं है उनका। तो जब वह आप हमारे पास आई थी तब बहुत सारे चैलेंज अब जो कर्ज जिन्होंने लिए थे वह उनके घर भी पहुंचने लगे थे
(57:16) क्योंकि वह उन्होंने वहां से भी लिए हुए हैं। मतलब इंडिया से भी लोग वहां तक पहुंच चुके हैं उनके कर्ज को रिसीव करने के लिए। तो अब उनके चैलेंज बहुत बढ़ गए बढ़ गए थे। जब उन्होंने इस प्रोसेस को कंप्लीट किया तो जो कर्ज वो पिछले चारप सालों से निपटाने की कोशिश कर रही हैं। डेप्थ को निपटाने की कोशिश कर रही हैं। 1 महीना हो चुका है उनको मेरे साथ में। उस डेप्थ का उन्होंने 60% रिकवर किया है। यह फाइनेंशियल ग्रोथ हुई है उनकी लाइफ में। उनकी मां के साथ जो वह रिश्ता नॉट सपोर्टेब वाला था। आज उनकी मां ही उनके साथ सबसे बड़ा सपोर्ट बन के खड़ी हैं। और
(57:49) आज वो इतनी ग्रेटट्यूड में रहती हैं। इतनी हैप्पी रहती हैं कि मैम जिस दिन मैं यह डेप्थ अभी कुछ 40% उनका बचा हुआ है और अभी भी वो कोर्स हमारे साथ कर रही हैं। तो जिस दिन मेरा यह कंप्लीट होगा उस दिन मेरे पास आने वाला हर पैसा मैं 50% लोगों की भलाई में लगाऊंगी। जो मैंने पेन फेल किया है। ऐसी महिलाएं जितने भी पेन में हैं, मैं उनको हेल्प करने की कोशिश कर रही हूं। मैं आपसे सवाल भी अगला यही पूछना चाह रहा था कि वैसे तो उसका आपने थोड़ा एग्जांपल दे दिया पर मैं और चाहता हूं कि इसको थोड़ा डिटेल में आप बताएं कि इंटेंट का, ग्रेटट्यूड का और फॉरगिवनेस का इन तीनों
(58:22) का क्या रोल है किसी भी व्यक्ति के जीवन में हीलिंग से संबंधित? सबसे बड़ा और बेसिक और न्यू न्यू जितना मजबूत आधार है यह। क्योंकि लोगों के पास आज की डेट में जितना भी चैलेंज है वो पहला और पहला बेसिक यह है कि लोगों ने लोगों के लिए बहुत ग्रेजेस रखे हुए हैं। लोगों के मन में दूसरों के लिए बहुत ज्यादा गलत भावनाएं हैं। बहुत गजेस हैं। दूसरों के प्रति खिंचाव बहुत है। इससे वह नुकसान दूसरे का ना करके खुद का ही कर रहे हैं। ठीक है? लोग कहते हैं पैसा नहीं आ रहा है लेकिन दूसरी साइड ये लोग कहते हैं मुझे लोगों से चिढ़ है। ठीक है? या लोगों के साथ रिश्ते
(58:57) अच्छे नहीं है। पैसा एक बहुत सुंदर एनर्जी है। ठीक है? प्यार एक बहुत खूबसूरत एनर्जी है जो कि बिना इन चीजों को हटाए आपके पास नहीं आती है। ठीक? पैसा इसलिए आपके पास नहीं आता है क्योंकि आप बहुत मेहनत कर रहे हैं। पैसा इसलिए आपके पास आ रहा है क्योंकि आप बहुत सारा प्यार बांट रहे हैं। ठीक है? जब आप प्यार की एनर्जी को, लव एनर्जी को या आप उस फॉरगिवनेस को देना शुरू करते हैं। बहुत लोगों ने बुरा कर दिया। मान लेते हैं। बहुत ज्यादा सच में बुरा किया हो। लेकिन इसके बाद भी आपके मन में उनको माफ करने की क्षमता अगर डेवलप होती है, तभी तो आप बाकियों से बड़े और
(59:36) बेहतर है। और यह यूनिवर्स भी, यह पूरा ब्रह्मांड भी हर ऊर्जा भी आपके पास तभी आती है जब आप उसको संभालने की कैपेबिलिटी रखते हो। तो जब आप एक व्यक्ति के प्रति खराब इमोशंस को संभाल नहीं पा रहे हो तो आप इतने बड़े पावर को कैसे संभाल लोगे? पैसा इज अ वेरी गुड वेरी पावरफुल एनर्जी। लव एक बहुत बड़ी बहुत प्यारी एनर्जी है। अगर आप फॉरगिव नहीं करोगे तो आपके अंदर का प्लेस खाली नहीं होगा। तो जिस चीज को आप चाहते उसको खाली जगह बनाने के लिए आपको माफ़ करना पड़ेगा। मैंने सिर्फ माफ करके ही बहुत सारे लोगों को यह देखा है कि उनकी फाइनेंशियल ग्रोथ हुई है।
(1:00:14) मतलब केवल माफ करने से ही जीवन में फाइनेंशियल ग्रोथ होना शुरू हो गई। हां, शुरू हुई। क्योंकि आप जब माफ कर रहे हो ना तो आपके ब्रेन में किसी को कुछ गलत करने की धारणा नहीं है। हम ठीक है? जब वो शब्द नहीं है। जैसे आपकी डिक्शनरी में वर्ड्स ही ऐसे हैं जो सिर्फ पॉजिटिव ऊर्जा देते हैं तो वो आपकी तरफ नेगेटिव तो लेकर नहीं आएंगे। मान लीजिए दो बॉक्स रखे हुए हैं। एक में कोयला भरा हुआ है। एक में सोना भरा हुआ है। ठीक है? आपने अपने रूम में कोयले वाला बॉक्स रखा है और खोज खोलकर आप सोना खोजने की कोशिश कर रहे हैं तो वो आपको नहीं मिलेगा। आपको उस
(1:00:49) बॉक्स में सोना रखने के लिए उस कोयले को बाहर फेंकना पड़ेगा। तभी आप उसमें बेहतर चीज रख सकते हैं। हमने अपनी लाइफ में बहुत सारा गार्बेज बटोर कर रखा हुआ है। जब तक हम उस गार्बेज को फेंकेंगे नहीं, तब तक हमारा जीवन सुगंधित नहीं होगा। और अगर अब जीवन सुगंधित करना है, तो उस गार्बेज को हटाना पड़ेगा। और गार्बेज सबसे पहला जो आता है, वह है कि हम दूसरों के प्रति बहुत नफरत में जी रहे हैं। तो, नफरत में ना जिए उसके लिए माफी मांगना इजी है। और माफी मांगने का प्रोसेस यह नहीं होता है कि आप सामने से जाकर उसे माफी मांगे। आई एम सॉरी। जब भी फिजिकली सॉरी बोला जाता है
(1:01:20) ना, तो उस जगह ह्यूमन ब्रेन की एक साइकोलॉजी है कि सामने वाले व्यक्ति का ईगो बूस्ट होता है। ठीक है? है वो इमोशनली होता है। इस ओके वाले भाव के साथ वो खत्म हो जाता है। जबकि आध्यात्मिक रूप से वह माफी कंडक्ट नहीं होती है। लेकिन अगर यही माफी आप अपने अंदर से उस सोल के साथ माफ़ मांग लेते हैं तो आप अपने अंदर से खुद को भी खाली फील करते हैं। उस रिश्ते को भी ठीक कर पाते हैं और अपने अबंडेंस के रास्ते को भी खोल पाते हैं। तो इंटेंट का भी रोल हो गया। फॉरगिवनेस का भी रोल हो गया। और ग्रेटट्यूड का रोल थोड़ा सा और डिटेल में बता दें आप।
(1:01:54) ग्रेटट्यूड का तो रोल सर ऐसा है कि जैसे लोगों के पास ना क्या नहीं है इस पर सबका ध्यान है। क्या है इस पे हम ध्यान नहीं देते हैं। मान लीजिए कि मेरे पास आज की डेट में कुछ चीजें ऐसी हैं जो शायद बहुत सारे लोगों के पास नहीं होंगी या मेरे पास कुछ चीजें ऐसी नहीं है जो बहुत सारे लोगों के पास होंगी। लेकिन मेरा ध्यान किस पे रहता है कि जो लोग मेरे पास नहीं है। ठीक है? जबकि जो मेरे पास है उसमें जैसे एक पार्टी चल रही है। ठीक है? वो पार्टी का टाइम 9:00 बजे है। कुछ गेस्ट ऑन टाइम आ चुके हैं 9:00 बजे। लेकिन ओनर जो उस पार्टी का है वो क्या
(1:02:30) करता है? कुछ गेस्ट जो नहीं आए हैं उनका इंतजार करता है और पार्टी को डिले करता है। 9:00 बजे स्टार्ट ना करके उसे 12:00 बजे स्टार्ट करता है। अब ये जो गेस्ट आपके लिए 9:00 बजे टाइम पर पहले से आए हैं। आपके टाइम की वैल्यू आपका वैल्यू करते हुए आपके टाइम का वैल्यू करते हुए 9:00 बजे आए हैं। आपने उनको वेलकम नहीं किया। बल्कि आप उनका इंतजार कर रहे हैं जो नहीं आए हैं। तो जो आ चुके हैं वो आपके पास कितने दिन तक आएंगे और कब तक रुकेंगे। एक समय तो होगा कि वो चले जाएंगे और दूसरी बार जब आने की बात आप बोलोगे तो आपसे क्या कहेंगे कि मैं तो गया था इसने
(1:03:02) कभीेंस नहीं दी। मैं नेक्स्ट टाइम नहीं जाऊंगी। ये हर इंसान के लिए एग्जांपल दिया या हो सकता है वो दो बार आ जाए, तीन बार आ जाए। लेकिन एक समय तो आएगा कि वो नहीं आए। हमने अपने जीवन में जब पैदा हुए तो हमें खाने को रोटी मिली है। हमें पहनने को कपड़े मिले हैं। हमारी एजुकेशन हुई है। हम सब ने अपने बचपन में जैसा भी जीवन जिया है। हम उसको कभी ग्रेटफुलनेस के साथ नहीं लेते क्योंकि हम यह कह देते हैं कि यह मां-बाप की ड्यूटी तो उन्होंने किया। ऐसा क्या बड़ा एहसान किया। कितने ही बच्चे जब आप बाहर जाते हैं तो आपके सामने हाथ फैलाकर ना जाने कितना कुछ मांग रहे होते।
(1:03:31) आपको यह स्थिति तो नहीं देखनी पड़ी। तो उस स्थिति के लिए उस पैसे को और जिसके माध्यम से वह पैसा आया उसको दोनों को ग्रेटट्यूड करना आज से शुरू कीजिए। जब आप यहां से शुरू करते हैं ना बचपन से शुरू करते हैं तो यह पूरा ब्रह्मांड आपके लिए ऐसेसे लोगों को लेकर आएगा ना जिससे आपकी वो अबंडेंस बढ़ेगी और यह मैंने अपने जीवन में फील किया है। कहां आप मुंबई में कहां मैं लखनऊ? ठीक है? तो मैंने ये ग्रेटट्यूड का जो भाव है इसको मैंने अपने जीवन में महसूस किया है कि जब आप ग्रेटफुल होते हो चीजों को थैंक यू बोलना शुरू करते हो तो यह ब्रह्मांड खुद ही ऐसे लोगों को
(1:04:06) आपके साथ लेकर आता है और बहुत जेन्युइनली लेकर आता है जो आपके जीवन में अनकंडीशनल आपको आगे बढ़ा रहे होते हैं या अनकंडीशनल आपकी अबंडेंस बढ़ रही होती है या आपके जीवन में और दूसरी चीजें जिसको आप ग्रेटफुल कर रहे हो वो बढ़ रहा होता है आप प्यार को करोगे प्यार बढ़ेगा आप पैसे को करोगे पैसा बढ़ेगा लोगों को करोगे लोग बढ़ेंगे मतलब आप जिस चीज को करोगे वो चीज बढ़ेगी प्रकृति जिसका धन्यवाद करोगे वो चीज आपके जीवन में और बढ़ेगी। बढ़ के आएगा। मतलब ये आपकी ऑडियंस के लिए एक टास्क भी है कि आज से लेकर 11 डेज तक वो लगातार अपने बचपन से अब तक जो कुछ मिला है सिर्फ
(1:04:38) उसे थैंक यू करना शुरू कर दें। आप वो अपने जीवन में उस बदलाव को महसूस करना शुरू कर देंगे आफ्टर 11 डेज। जिस चीज का अनुभव अभी तक उन्होंने नहीं लिया था। तो मैडम 10 11 बोल रही हैं। मैं आपसे बोलता हूं कि 30 दिन करिए यह काम। 30 दिन वह सारी चीजों का ग्रेटट्यूड करिए जो अब तक परमात्मा ने आपको दिया है जो अब तक आपके जीवन में ऑलरेडी है और देखिए आप अपने जीवन के बदलाव में और 30 दिन बाद आके इसी YouTube चैनल पे इसी वीडियो पे आके कमेंट्स अगर करके जरूर बताएं कि आपके जीवन में क्या बदलाव आपने नोटिस किए। सताक्षी जी जाते-जाते बस एक दो ऐसे आपके जीवन से
(1:05:12) जुड़े एग्जांपल जानना चाहूंगा जो आपको लगता है कि आपके करियर के तीन सबसे बेस्ट क्लाइंट बोल लें या तीन सबसे बेस्ट रिजल्ट बोल लें जिसको देख के आपको अंदर से कॉन्फिडेंस आया कि यार मुझे इसी फील्ड में और गहराई से काम करना है और लाखों लोगों के जीवन में बदलाव लाना है तो कोई भी दो-तीन स्टोरी यदि आप बताना चाहें एक जिसने मुझे सबसे पहले इंपैक्ट डाला था और मैं बहुत ग्रेटफुल हुई थी कि मुझे इस दिशा में भेजा गया है या चुना गया ऐसे मान लीजिए आप एक लेडी थी जिनको एंजाइटटी फीलिंग थी लड़की थी लेडी मतलब मैं 22 23 साल 24 साल की रही होंगी वो तो उनको बचपन
(1:05:47) में पोलियो का अटैक आया था वो अटैक से उनके पैरों में कोई इंपैक्ट तो नहीं पड़ा था और जो लोग सिर्फ जानते थे उनकी फैमिली या फ्रेंड वही लोग यह समझ पाते थे उनके पैरों को देखकर कि यार चलने के समय में कि इनको कुछ प्रॉब्लम है क्योंकि उनके माइंड में यह था कि इनको यह अटैक आया है। अदरवाइज बाहर के लोग नहीं जान सकते थे। तो जब मेरे पास वो आई थी तो वो पैरों के लिए तो नहीं आई थी। वो अपनी एंजाइटटी के लिए आई थी क्योंकि इस कारण से उनकी मैरिज नहीं हो रही थी। इस कारण से घर में भी थोड़ी सी उनको थोड़ा अलग बिहेवियर दिया जाता था। तो
(1:06:21) जब वो आई और उन्होंने एंजायटी ठीक करनी शुरू करी अपनी तो विदिन लगभग 15 टू 20 डेज के अंदर उनका मेरे पास एक कॉल आया और वो उस वक्त इतना रो रही थी पहले तो मैंने कहा क्या हुआ? मुझे लगा शायद उनको कोई अटैक पड़ा है या कुछ परेशानी है। कहती हैं कि आज मैं सबसे ज्यादा खुश हूं और यह आंसू मेरे खुशी के हैं। सताक्षी जी जब मुझे पोलियो का अटैक पड़ा था तब से ले अब तक मैंने अपने पैरों में यह कभी महसूस ही नहीं किया कि मेरे पैर जमीन में पड़ते हैं। मुझे हमेशा अपने पैर हवा में लगते थे। हम आज वो पहला दिन है जब मैंने यह एहसास किया कि मेरे पैरों में जान कैसे होती है।
(1:06:57) तो यह जब उन्होंने बताया तो मतलब यह बताते हुए मेरे अभी भी रोए खड़े हो गए हैं। और जब उन्होंने बताया तो लिटरली वो तो रो ही रही थी। मुझे पता नहीं क्यों रोना आ रहा था। ठीक है? मतलब वो अलग बात है कि मैंने ये उनको शो नहीं किया। बट मुझे बहुत खुशी हो रही थी कि ये चम इस तरह की भी चीजें हो सकती हैं। तो उसके बाद मुझे इतनी ग्रेटफुलनेस आई थी इस करियर को लेकर के कि इसी दिशा में काम करना है। मुझे ऐसे बहुत से एक्सपीरियंस लेने हैं जहां लोगों के जीवन बदल रहे हो। एक ये पॉइंट था जिसने मुझे बहुत बड़ा इंपैक्ट डाला था। उसके ठीक होने के बाद लगभग 6 महीने के
(1:07:34) अंदर उनकी शादी हो गई थी। आज वो अपने हस्बैंड के साथ अपने बच्चे के साथ बहुत खुश हैं। बहुत बढ़िया। ठीक है। तो एक ये स्टोरी बताई आपने। एक रियल लाइफ एक्सपीरियंस है। ये रियल लाइफ एक्सपीरियंस है। और इसके बाद एक घटना थी जिसने मुझे एनएलपी की तरफ मोड़ दिया। घटना ये थी कि उन 12 साल से वो डिप्रेशन में थी। बहुत गोरी थी लेकिन डिप्रेशन की वजह से उनका पूरा शरीर काला। दक्षिण के लोग होते हैं ना बहुत ब्लैक कलर की थी हो गई थी। और उनकी आईबॉल आपको देखेंगी ना तो ऐसे लगता था कि वो आपको घूर रही हैं या डर के मारे। जैसे एक होता है ना डर लग जाए आपको ऐसा। उनके
(1:08:08) साइकोस्ट्रिस्ट जिनको जिन डॉक्टरों को उन्होंने दिखाया था उन्होंने बोला था यह होल लाइफ अब ऐसे ही रहने वाली है। गॉन केस गॉन केस है। अब ये ठीक नहीं होंगी। उस केस ने मुझे सच में बहुत बदला था। फिर जब उनको इस तरह से देखा उस समय मैं सीख ही रही थी। प्रैक्टिस ही कर रही थी। तो जब यह प्रोसेस मैंने देखा तो मैं एनएलपी में थी। मैं देखती थी कि इससे लोग बदलते हैं। तो मैंने रिक्वेस्ट करी उनकी फैमिली से कि आप इनको मेरे सामने बिठाओ। एक बार ट्राई करके देख सकते हैं। कुछ हुआ तो अच्छी बात है। कुछ नहीं हुआ तो एटलीस्ट नुकसान नहीं होगा। तो
(1:08:36) जब वो आई तो उनकी फैमिली ने जबरदस्ती ही उनको बैठाया। वो नहीं बैठ रही थी और पर्सनली मैं उनको जानती थी वेल कल्चरर्ड लड़की हैं। उन्होंने कभी किसी को मतलब बुरा वक्त बुरा वर्ड बोला ही नहीं होगा। इतना अच्छा नेचर था उनका। पर उस सिचुएशन में वो लोगों को अब्यूज करने लगी थी। इतना गंदा बोलने लगी थी। एंड मतलब मेंटली वो बहुत ज्यादा डिस्टर्ब हो चुकी थी। हस्बैंड से रिश्ता लगभग खराब हो चुका था। जब वो सामने बैठी तो उनकी फैमिली ने जबरदस्ती बैठाया। जबरदस्ती बैठती थी, करती थी। एक हफ्ता उन्होंने करा। एक हफ्ते बाद उन्होंने अपनी फैमिली से लड़ लुढ़ के बोला
(1:09:09) कि अब मुझे नहीं करना यह इससे कुछ नहीं होता। एक हफ्ते बाद वो अपने इसको छोड़ दिया। कुछ दिन में उन्होंने जो जो बदलाव आए उन्होंने महसूस करने शुरू किए। मतलब कुछ तो उन्हें ठीक लगा। तो उन्होंने सामने से आकर बोला अपनी फैमिली को कि मुझे यह प्रोसेस अब करना है। जनवरी लास्ट वीक में उन्होंने स्टार्ट किया था। पूरा फरवरी हमने उस पे काम किया। मार्च में 12 साल बाद उन्होंने अपनी फैमिली के साथ होली मनाई थी और उनकी टेबलेट्स लगभग पूरे दिन में वह 22-25 टेबलेट्स खाती थी। उनको कंट्रोल करने के लिए इतनी टेबलेट्स उनको दी जाती थी। अप्रैल आते-आते वो टेबलेट्स
(1:09:42) दो से तीन पर पहुंच चुकी थी और वो तीन टेबलेट भी उनको सिर्फ इसलिए दी जाती था कि उनकी बॉडी एकदम से वीक ना हो। प्रकॉशन के टाइम प्रकॉशन के तौर पे दे रहे हैं। विटामिनस और ये सब चीजों की थी और उनके डॉक्टर ने उनसे यह पूछा था कि कौन सा ऐसा व्यक्ति है जो आपको काउंसिल कर रहा है? उन्होंने आकर यह मेरी बात बताई थी। आज भी वह मेरे से कनेक्टेड है और आज वह उस वक्त जब मैं इनकी हीलिंग कर रही थी तो वह अपने मम्मी के घर पर रह रही थी अपने बच्चे के साथ। आज वो अपने हस्बैंड के साथ रहती हैं। उस वक्त उनका बच्चा कोई और पाल रहा था। आज उनका बच्चा 7 आठ साल का है और उस बच्चे की
(1:10:15) सारी स्टडी वो अकेले मैनेज करती हैं। मतलब कोई ट्यूशन नहीं लगाया कुछ नहीं। सब कुछ उस बच्चे का खुद देखती हैं। तब वो यह भी नहीं समझ पा रही। मतलब वो किसी के सामने जल्दी आती नहीं थी। मेरे इस सेशन के बाद उनके अंदर एक इनकरेजमेंट आया था। वो रील बनाना शुरू कर दिया था उन्होंने। अरे वाह। ठीक है। उन्होंने खुद को फेस करना शुरू कर दिया था। तो वो मेरे लिए बहुत खूबसूरत बात थी। वाह। और सबसे बड़ी चीज सर जो मुझे मिली इस जगह पर उनकी मां की ब्लेसिंग जो उन्होंने फोन करके मुझे बोली। वो एक चीज था जो मुझे लगा कि इस दिशा में अब और आगे बढ़ना है। वहां
(1:10:43) से जो मिल रहा था वो अपने आप में ही अलग ग्रेटट्यूड था। तो वह ग्रेटट्यूड इस लेवल पर आया कि एक समय बाद अपने आप ही बहुत सारे लोग ऐसे ऐसे लोग मिल गए लाइक यू पर बहुत सारी जर्नी में आगे चीजें बढ़ी और कहते हैं ना आप ग्रेटट्यूड करना शुरू करते हो तो भगवान रास्ते बनाने शुरू कर देते हैं। बहुत सारे लोग इस दिशा में प्रयास कर रहे हैं। करना चाहते हैं। पर शायद ग्रेटट्यूड की कमी के कारण वो उस दिशा में उस लेवल पर नहीं पहुंच पाते जहां उनकी सोच होती है। लेकिन मैंने ये नोटिस किया कि सिर्फ एक ग्रेटट्यूड ऐसी चीज थी जिसकी वजह से जो चीजें लोगों को बहुत प्रयास में
(1:11:19) मिलती हैं मुझे बहुत ईजीली मिल गई। मतलब ग्रेटट्यूड का आपके जीवन में इतना बड़ा इंपैक्ट रहा कि जिसको करने के लिए लोगों को बड़ा परिश्रम करना पड़ता है वो आपने खाली ग्रेटट्यूड करके ही उस परिश्रम को कम परिश्रम करके भी पाया अपने जीवन में। मतलब लोग कहते हैं ना मेरे जीवन में लोग अच्छे नहीं है। मुझे बहुत बुरे लोग मिलते हैं। मुझे मतलब दुनिया बुरे लोगों से भरी पड़ी है। ये आपको इसलिए मिलते हैं क्योंकि आप यही बोल रहे हैं। क्योंकि आप अच्छे लोगों के प्रति ग्रेटफुल नहीं हैं। मैंने यह नोटिस किया सर कि इस जर्नी ने मुझे बहुत अच्छे लोगों से मिलवाया है जो
(1:11:48) बहुत अनकंडीशनल हैं जो आपकी इस जर्नी में आपको बहुत सहायता करते हैं और बहुत खुशी-खुशी करते हैं और बहुत ग्रेटफुली बिना परिवार के एक बहुत बड़ा परिवार बना लेते हैं। मतलब यह ऐसा प्रोफेशन है जिसमें आपने लोग भी कमाए, पैसा भी कमाया और लर्निंग भी कमाई। सबसे इंपॉर्टेंट चीज़ आपने अपने आप को भी एक नेक्स्ट लेवल पर पहुंचाया। आपने लोगों के जीवन में भी वैल्यू ऐड की और आपने यह सब करते हुए एक हैप्पी मनी की अर्निंग भी लगातार की जिससे प्रोस्पेरिटी भी आपके जीवन में आई। तो सताक्षी जी आपने अपने जीवन में खुद के ऊपर भी काम किया। बहुत सारे लोगों के जीवन में
(1:12:20) भी बदलाव किया और एक एक सक्सेसफुल हीलर आज आप हैं। एक सक्सेसफुल एनएलपी ट्रेनर आज आप हैं। तो क्या आपको लगता है कि आज भी सही समय है अपने आपको ट्रेनर या हीलर बनाने का या एनएलपी कोच बनाने का आज भी सही समय है और क्या लोगों को भी इस करियर में आना चाहिए? बिल्कुल आना चाहिए। एक तो सर यह ब्लेस्ड है। मैंने अपनी लाइफ में बहुत ग्रोथ की है इसके माध्यम से। एक तो इंटरनली खुद को हील किया और एक्सटर्नली अपनी लाइफ को ठीक किया। फाइनशियली बहुत चैलेंजेस थे। तो चैलेंज इस लेवल पर थे कि जब मैंने पहला कोर्स किया था तो पहले कोर्स के टाइम में
(1:12:52) जो फीस सबमिट हुई थी वो फीस मैंने सबमिट नहीं की थी। मेरी एक फ्रेंड ने करी थी। ठीक है? उस स्थिति से शुरू होकर के आज स्थिति बहुत अच्छी है। मतलब बेटर है। एंड अगर आप अपनी लाइफ में आगे बढ़ना चाहते हैं तो लोग कहते हैं कि मेरे पास पैसे नहीं है। मेरे पास लोग नहीं है। मेरे पास मतलब एक्स व जेड चीजें नहीं है। अगर उन चीजों को आप दरकिनार कर दें और अपने मानस पटल पर यह सोच ले कि मुझे आगे बढ़ना है। तो आप बढ़ सकते हैं। इसमें करियर बनाना बहुत आसान है। बहुत इजी है। सिर्फ सीखना है और फिर सीखते-सीखते आपको सिखाना या इसको इंप्लीमेंट करना है। ठीक है? बस आप जहां
(1:13:28) पर भी हैं, जिस भी स्थिति में हैं, वहां से शुरुआत कर लीजिए। इसमें एज मैटर नहीं करती। इसमें परिस्थिति मैटर नहीं करती। इसमें कोई और दूसरी चीजें मैटर नहीं करती हैं। क्योंकि मैंने मेरे साथ 83 इयर्स की लेडी को भी सीख कर आज बहुत खूबसूरती से काम करते हुए ऑस्ट्रेलिया में हैं वो। और वो बहुत उस खूबसूरती के साथ काम कर रही हैं पिछले सात सालों से। जो मेरे साथ सीख रही थी। आज मेरे पास खुद 75 इयर्स की लेडी हैं जो 75 इयर्स में सीख रही हैं और सीखते-सीखते आज उन्होंने अपनी लाइफ में लोगों को काउंसिल करना शुरू कर दिया है। रिटायरमेंट के बाद आज उनका फाइनशियल जो
(1:14:03) सपोर्ट है वो उनकी खुद की अर्निंग है। ठीक है? तो वो बड़े गर्व से कहती हैं साक्षी आज 75 इयर्स में भी मैं खुद के लिए चीजें अर्न करके चीजें कर रही हूं। तो यह अपने आप में ही कॉन्फिडेंस भी बिल्ड करता है। फिर इसके बाद बहुत से ऐसे बच्चे हैं जो 22 साल के हैं, 23 साल के हैं। उन बच्चों ने अपनी स्टडी के साथ-साथ इस चीज को करते हुए अपने लिए अर्निंग करनी शुरू करी है। ठीक है? तो आप शुरुआत कीजिए। यह फर्क नहीं पड़ता कि आप कितने छोटे हैं, कितने बड़े हैं, मिड एज में हैं। क्या समस्या है एंड ऑल दैट? आप शुरुआत कीजिए सीखने की और अपने
(1:14:35) आपको बिल्ड करने की। फिर आप उसके लिए जरूर ढूंढना शुरू कीजिए। जो भी आपको बेटर ऑप्शन मिल जाए मेरे साथ सीख सकते हैं। अगर आपको लगता है कि कोई और बेहतर आपको मिल रहा है आपके कंफर्ट ज़ोन में है। आप वहां से शुरुआत कीजिए। पर इंपॉर्टेंट ये है कि आप शुरुआत कीजिए क्योंकि अगर आप शुरुआत आज करेंगे तो अगले कुछ टाइम में आप अपने आपको वहां प्राप्त वहां देख पाएंगे जहां आप होना चाहते थे। मैंने तो अपने आप को वहां पाया जहां मैंने सोचा भी नहीं था। ठीक है? तो अगर मैं बदल सकती हूं मेरे साथ जुड़े हुए ना जाने कितने लोग ऐसे हैं सर कि जिन्होंने सीखा और आज वो लोगों के जीवन को
(1:15:08) बदल रहे हैं जो अपनी फाइनेंशियल स्थिति को बेहतर कर रहे हैं। आज वो इवेंट्स कर रहे हैं, क्लासेस ले रहे हैं, वेबिनार कर रहे हैं और कॉन्फिडेंटली कर रहे हैं। अपनी अर्निंग कर रहे हैं तो आप भी कर सकते हैं। यह कोई बहुत बड़ी चीज नहीं है। सिर्फ सीखने के लिए तैयार होने की जरूरत है। सताक्षी जी आपको क्या लगता है? कि कोई व्यक्ति समर्पित भाव से इस करियर में आना चाहे तो लगभग कितने समय में यह काम हो सकता है या सीख सकता है या सीख के कमाने की स्टेज में पहुंच सकता है? सर देखिए ऑलमोस्ट तीन सा 3 4 महीने जैसे जो हम लोग ट्रेनर ट्रेनर करा रहे हैं वो
(1:15:41) तीन महीने का है। हम तीन महीने इसलिए लेते हैं क्योंकि आपके पास बहुत सारे ब्लॉकेजेस ऐसे हैं जहां से आप खुद को रिप्रेजेंट नहीं कर पाते हैं। ठीक है? तो आप किसी को हील करने जा रहे हैं तो ये बहुत बड़ी रिस्पांसिबिलिटी है। ठीक है? तो उसके पहले आपको खुद को हील होना, खुद में कॉन्फिडेंस होना, खुद को तैयार करना बहुत जरूरी होता है। हम इस पूरे टाइम ऑफ पीरियड में पहले खुद को आपको हील करवाते हैं। देन आफ्टर दैट आपको उस लेवल पर ट्रेंड करते हैं कि आप किसी चीज को वेबिनार कैसे लेंगे। फिर आगे मार्केटिंग कैसे करेंगे या बाकी चीजें कैसे करेंगे। तो यह सब चीजें हम इसके अंदर
(1:16:18) इंक्लूड करते हैं जिससे कि आप आगे चलकर के अपने आप को एक कॉन्फिडेंट ट्रेनर के रूप में मार्केट में ले आ पाएं। तो दोस्तों आप सब ने जाना कि लोगों को आज जीवन में समस्याएं क्या हैं? उन समस्याओं को सरलता से, सहजता से घर पर कैसे ठीक किया जा सकता है। खुद भी ठीक किया जा सकता है। और इसके साथ-साथ आप अपने आप को ठीक करके सीख के लोगों को सिखाकर या लोगों को लाइफ में वैल्यू ऐड करके उनके लाइफ में बदलाव ला सकते हैं और अपना सुनहरा करियर भी बना सकते हैं। तो यदि आप में से कोई भी व्यक्ति सीखना चाहता है, जानना चाहता है, सताक्षी मैडम के बारे में और डिटेल जानना
(1:16:54) चाहता है, तो मैं डिस्क्रिप्शन में आपको पिंड कमेंट में आपको सताक्षी जी के सारे लिंक देता हूं। आप जाइए और जरूर सताक्षी जी के फ्री प्रोग्राम्स का लाइव लाभ लीजिए। सताक्षी जी 21 डेज का फ्री मेडिटेशन अभी चलाते हैं। सताक्षी जी सताक्षी जी 21 21 डेज का एक फ्री मेडिटेशन भी सभी लोगों के लिए चलाते हैं जिसमें कोई एज नहीं, कोई कास्ट नहीं, कोई किसी के पास पैसा है नहीं। कोई भी व्यक्ति आ सकता है और इन मेडिटेशंस को करके अपने जीवन में एक इंपैक्ट फील कर सकता है। तो ये सारी चीजों के लिंक मैं आपको डिस्क्रिप्शन में देता हूं। आप शताक्षी जी तक पहुंच सकते हैं और
(1:17:26) यदि यह पॉडकास्ट आपको सच में बहुत अच्छा लगा और 30 दिन आप ग्रेटट्यूड प्रैक्टिस करके कमेंट बॉक्स में बताते हैं और आपको ऐसा लगता है कि कुछ और ऐसे सवाल हैं जो सताक्षी जी से मुझे पूछना चाहिए तो आप कमेंट बॉक्स में आकर बताइए मैं एक बार और सताक्षी जी को बुलाऊंगा। अभी मेरे और भी बहुत सारे सवाल हैं हीलिंग से रिलेटेड जो मैं सताक्षी जी से जानना चाहता हूं। तो आप कमेंट बॉक्स आके बताइए। आपके क्या सवाल बाकी हैं? हम एक बार और सताक्षी जी को बुलाएंगे। सताक्षी जी बहुत-बहुत धन्यवाद। बहुत अच्छा नॉलेज आपने दिया और मुझे लगता है लोगों को इस पॉडकास्ट से सच में एक
(1:17:55) मास्टर क्लास मिल गई है हीलिंग के ऊपर। जो भी व्यक्ति हीलिंग करना चाहता है या जानना चाहता है सीखना चाहता है आपने सभी चीजों के बारे में इसमें बड़ा बहुत अच्छे से डिस्क्राइब किया है। बहुत अच्छे तरीके से लोग यह जान पाएंगे। तो सताक्षी बहुत-बहुत धन्यवाद। थैंक यू जितेश भैया। थैंक यू यहां बुलाने के लिए और इसका पार्ट बनाने के लिए। थैंक यू सो मच। थैंक यू एवरीवच।

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