This is Killing Your Brain 🤯| Exposing Food Company | Prashant Kirad
Author Name:ExpHub - Prashant Kirad
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Youtube Video URL:https://www.youtube.com/watch?v=GQGJ9rS3iOM
Transcript:
(00:00) हाय एवरीवन। आज की वीडियो कोई नॉर्मल वीडियो की तरह नहीं है। ना कोई स्ट्रेटेजी वीडियो है ना कोई मोटिवेशनल वीडियो है ना कोई साइंटिफिक वीडियो है। आज की वीडियो में मैं आपसे खुल के बात करने वाला हूं कि ये जो इंडियन फूड इंडस्ट्री है ये कितनी खराब है। आज मैं बहुत सारे प्रोडक्ट्स आपके सामने लेकर आया हूं और इन प्रोडक्ट्स को आज मैं एक्सपोज करने वाला हूं। बट फॉर सम रीज़न फॉर इंडियन कंपनीज़ द रीडिंग द फूड लेवल इज स्लाइटली मोर डिफिकल्ट देन द [संगीत] यूएस कंपनी। द मिनिमम फोंट साइज माइट बी हायर इन द यूएस। इन माई एक्सपीरियंस आल्सो आई डोंट हेव टू
(00:35) मच एक्सपीरियंस ऑफ़ यूएस। बट व्हाटएवर इट विल हैव द स्टैंडर्ड न्यूट्री लेबल हैज़ अ हायर फोंट साइज। देयर इज़ अ बिस्किट इन द मार्केट व्हिच सेस हाई फाइबर। द हाई इज़ नॉट एच आई जी एच व्हिच इज़ एच आई। सो, इफ यू टेक देम टू कोड, देल जस्ट से बी सेइंग हाई फाइबर। दे नेवर सेड हाई फाइबर। देखो इसकी स्टोरी स्टार्ट होती है आज से एक साल पहले। जब मेरा एक दोस्त जिसको एक लिवर डिसीज हो जाता है और डॉक्टर यह बताते हैं कि ये जो डेली फूड हैबिट्स हैं उसकी उसकी वजह से उसको ये लिवर डिसीज हुआ और वहीं से ही मैंने बहुत सारे प्रोडक्ट्स के ऊपर स्टडी करना स्टार्ट करा और जब मैंने
(01:09) ये स्टडी करी ना तो मैं शॉक हो गया क्योंकि ना ये जितने आप प्रोडक्ट्स देख रहे हो ना ये अपनी रियलिटी दिखाते ही नहीं है। एक-एक करके इन प्रोडक्ट्स की बात करता हूं। ये वही प्रोडक्ट्स हैं जो कि हम हर रोज अपने खाने में खाते हैं। जैसे कि सबसे पहले मैं स्टार्ट करता हूं ये फ्रूट जूस के साथ। अगर इस फ्रूट जूस की बात करूं तो यह खुद को ब्रांड करते हैं एज दी रियल फ्रूट जूस। बट अगर तुम इसके प्रोडक्ट को ढंग से पढ़ोगे इसके पीछे लेवल है। उस लेवल को अगर तुम पढ़ोगे ना तो तुम्हें रियलाइज होगा कि रियल तो इनका ब्रांड नेम है। यानी एक्चुअली में इसमें कुछ भी रियल नहीं है।
(01:41) आर्टिफिशियल कलर्स वगैरह डाले गए हैं। अगर मैं फ्रूट कंटेंट की बात करूं तो इसके अंदर 23% फ्रूट कंटेंट होता है। सिर्फ 23% बाकी क्या है? बाकी है पूरा का पूरा शुगर यानी चीनी। तो आप अगर यह पी रहे हो ना हेल्थ के नाम पे डेली अपने ब्रेकफास्ट के अंदर तो आप चीनी का पानी पी रहे हो। बाकी आप कुछ भी नहीं पी रहे हो। और भी अपने पास बहुत सारे प्रोडक्ट्स हैं। जैसे कि इस चिप्स की मैं बात करता हूं। ये वो चिप्स हैं जो कि हम स्नैक्स में खाते रहते हैं। रात को क्रेविंग होती है तब खाते हैं। क्या आपने कभी इसके पीछे ये जो इंग्रेडिएंट बताते हैं वो पढ़ा है? इसके
(02:12) अंदर क्या है? आलू के चिप्स हैं। आलू होना चाहिए। बट आलू के अलावा है पाम ऑयल। और पाम ऑयल हेल्थ के लिए बहुत ज्यादा डेंजरस होता है। सिर्फ यही नहीं और भी ऐसे बहुत प्रोडक्ट्स हैं जैसे कि यह एक ऐसी ड्रिंक है ना जो कि हमें बचपन में हमारे पेरेंट्स पिलाया करते थे और ये बोलते थे कि ये तो बहुत हेल्दी है। इससे हाइट बढ़ेगी। इससे न्यूट्रिशन मिलेगा, प्रोटीन मिलेगा, विटामिन मिलेगा। चलो इसके भी एक बार लेबल पढ़ लेते हैं कि इसके न्यूट्रिशन में आखिर है क्या? तो इसके न्यूट्रिशन में अगर आप देखोगे ना तो इसके अंदर अराउंड 46 ग्राम हर 100 ग्राम में 46 ग्राम शुगर है। यानी
(02:45) इसके आधे डब्बे में चीनी मिलाई गई है। और ये ना सात आठ साल के बच्चे को पिलाया जाता है। और सिर्फ इतना ही नहीं कलर्स भी हैं। बहुत डिफरेंट चीजें हैं। जिसकी वजह से एक बच्चे की मेंटल ये जो हेल्थ होती है इस पे बहुत इंपैक्ट आता है। और भी प्रोडक्ट्स मैं आपको दिखाता हूं। जैसे कि ये एक फ्रेश टोमेटो केचप। ये तो हम सब यूज़ करते हैं। मैं खुद बहुत बार यूज़ करता हूं। लेकिन जब मैंने डिटेल में स्टडी करी तो मुझे यह पता चला कि ये जो नाम है ना फ्रेश टोमेटो एक्चुअली में ये फ्रेश टोमेटो का नहीं बन रहा। यह ब्रांड नेम है। और पता है तुम्हें? यहां पर लिखा भी होता है पीछे कि
(03:16) ये जो फ्रेश टोमेटो है ये एक्चुअली में फ्रेश टोमेटो नहीं है। ये तो ब्रांड नेम है। कंपनी ने लिखा भी है बट हम पढ़ते ही नहीं है क्योंकि हमें कोई बताता ही नहीं है। क्योंकि हम तो इनके बस एड्स देखते हैं। एडवरटाइजमेंट देखते हैं जिसमें कि ये लोग बोलते हैं कि आप हमारा ये फ्रेश टोमेटो केचप ले लो। यह तो एकदम फ्रेश टोमेटोज़ से बन रहा है और हम उन्हीं एड्स के भरोसे इनको हम घर पे ले आते हैं। सिर्फ इतना ही नहीं मैं और दो तीन प्रोडक्ट्स आपको दिखाता हूं। जैसे कि यह फ्रेश क्रीम क्या लगता है? ये फ्रेश होगी बट ये जो फ्रेश तुम देख रहे हो ना ये सिर्फ और
(03:43) सिर्फ इसका ब्रांड नेम है। साफ-साफ नीचे लिखा गया है दिस इज ओनली अ ब्रांड नेम और ट्रेडमार्क डस नॉट रिप्रेजेंट्स इट्स ट्रू नेचर। और ये चीजें हम पढ़ते ही नहीं है। हमें तो लगता है बहुत ज्यादा फ्रेश है। अब यह देखो यह है हज़ल नट स्प्रेड। मैंने सबके ब्रांड नेम यहां पर छुपा दिए हैं क्योंकि बहुत कंपनीज़ हैं जो कि केस भी कर देती हैं। तो अगर आप देखोगे इसके अंदर क्या होना चाहिए? हज़ल नट होना चाहिए क्योंकि नाम भी हज़ल नट है। बट अगर क्या आपने लेवल पढ़ा है? लेवल में पता है क्या लिखा है? हज़ल नट एक्चुअली में इसके अंदर है ही नहीं। हज़ल नट फ्लेवर इसके अंदर डाला गया
(04:11) है। जिसकी वजह से हमें हज़ल नट का थोड़ा-थोड़ा टेस्ट आता है। बट एक्चुअल हज़ल नट तो इसके अंदर है ही नहीं। और चीज दिखाता हूं। फॉर एग्जांपल ब्राउन ब्रेड। अब ये ब्राउन ब्रेड ना मैं भी बहुत ज्यादा कंज्यूम करता हूं। क्यों? नॉर्मल ब्रेड जो होती है उसके अंदर तो मैदा होता है ना। अब पर ये ब्राउन ब्रेड में तो आटा होना चाहिए। ऑब्वियस सी बात है हम सबको यही लगता है। मुझे भी यही लगता था क्योंकि हमने कभी लेवल ही नहीं पढ़ा। हम तो मार्केटिंग देख रहे हैं ना सबकी कि ये ऐड कैसे ला रहे हैं। अब इसका लेवल पढ़ना एक बार कभी तुम कि इसके अंदर ये जो आटा है ना
(04:38) वो सिर्फ 32.8% है। यानी 32% आटा है। बाकी क्या है? बाकी वही मैदा, वही शुगर, वही कलर। और सबसे इंटरेस्टिंग बात पता है क्या है? कि जो ब्राउन ब्रेड है ना उसका कलर थोड़ा डिफरेंट बनाया जाता है। लोगों को यह स्कैम करने के लिए कि यह तो देखो ये जो आटे की बनी है इसके अंदर तो मैदा नहीं है। बट इसके अंदर भी मैदा होता है। ये कैंडी है या तो इसको चॉकलेट बोल लो। हम सब खाते हैं। इवन बच्चे बहुत खाते हैं इसको। है ना? क्योंकि नॉर्मल चॉकलेट है। लेकिन क्या तुम्हें पता है? यह [संगीत] जो कैंडी या तो ये जो तुम चॉकलेट खा रहे हो इसके अंदर
(05:11) कलर्स हैं और एक कलर नहीं अगर आप इसके पीछे इंग्रेडिएंट में पढ़ोगे तो सात अलग-अलग कलर हैं। और ये जो आर्टिफिशियल कलर होते हैं ना ये एक बच्चे के दिमाग पे बहुत बेकार असर डालता है। इन सारी चीजों के बारे में ना हमें पता ही नहीं है। और इन सारी चीजों के बारे में कोई बात ही नहीं करता। और इन्हीं डेली प्रोडक्ट्स की वजह से एक रिपोर्ट आई थी कुछ टाइम पहले जो कि ये बताती है कि एवरेज जो लाइफ स्पैन है ना नॉर्मल ह्यूमन बीइंग का वो डिक्रीज होता जा रहा है। पहले एक इंसान की जो एवरेज लाइफ स्पैन होता था वो 60 ईयर होता था, 70 ईयर होता था। अब वो 50 हो गया है।
(05:43) और नेक्स्ट जनरेशन जो कि हमारी जनरेशन है उसके अंदर ये लाइफ स्पैन 40 से 50 ईयर रहने वाला है। रीज़न क्या है? रीज़न यही फूड प्रोडक्ट्स हैं जो कि हम डेली कंज्यूम कर रहे हैं। तो सवाल ये आता है कि इसका सशन क्या है? सलूशन पे मैं बात करता हूं। बट उससे पहले तुम यह समझो कि यह जो तुम डेली कंज्यूम कर रहे हो ना जिसके बारे में तुम्हें कोई नहीं बता रहा है। इन सारी चीजों से पांच बड़ी बीमारियां हो सकती है तुम्हें। जिसमें सबसे पहली डिसीज आती है ब्रेन फॉग। यानी जब आप इतना सारा शुगर कंज्यूम करते हो ना तो ये जो आपका दिमाग है ना ये धीरे-धीरे कम होने लगता है। यानी
(06:13) इस दिमाग पे असर होने लगता है। और आपकी ये जो थिंकिंग एबिलिटी है, मेमोरी एबिलिटी है ये सब कम होती है। दूसरी बीमारी डायबिटीज जो कि आजकल बहुत कॉमन हो गई है। इंडिया एक कैपिटल बन चुका है डायबिटीज का। उसका रीज़न क्या है? उसका रीजन है यही प्रोडक्ट्स हां यही ड्रिंक्स जो कि हम बचपन से पीते आ रहे हैं जिसकी वजह से हमारी बॉडी में इतना शुगर जा चुका है कि हम 30 साल से पहले पहले डायबिटीज जैसी बीमारियों का शिकार हो जाएंगे और फिर आती है तीसरी बीमारी हार्ट डिसीज आपने देखा होगा आजकल बहुत कम उम्र के अंदर हार्ट रिलेटेड प्रॉब्लम्स यानी
(06:44) डिसीज होते रहते हैं उसका रीजन क्या है यही प्रोडक्ट्स है जो कि हम डेली कंज्यूम करते हैं। फिर एक बीमारी आती है ओबेसिटी यानी मोटापा वो तो आजकल सबको ही हो रहा है। उसका [संगीत] रीजन क्या है? उसका रीजन भी ये सब है। एंड लास्ट बीमारी फैट। ये जो आपका बॉडी है ना इसके अंदर डिफरेंट-डिफरेंट आपकी ब्लड वेसल में फैट डिपॉजिट हो रहा है। जिसकी वजह से क्या होता है? ब्लड अच्छे से सर्कुलेट नहीं हो पाता। और जब ब्लड अच्छे से सर्कुलेट नहीं होता तो उससे कई बीमारियां हो सकती हैं जो कि तुम सोच भी नहीं सकते। और हां एक रिपोर्ट ये भी बताती है कि ऑन एवरेज
(07:13) इंडिया के अंदर 25 साल से अगर आपकी उम्र ज्यादा है ना तो कोई ना कोई एक डिसीज तो आपकी बॉडी में अभी तक आ चुका होगा। क्यों? क्योंकि आप बचपन से यही सब प्रोडक्ट्स को खा रहे हो। तो सवाल ये आता है करना क्या है? इसका सशन क्या है? क्योंकि ये तो हमारी डेली लाइफ का एक पार्ट बन चुके हैं ना। तो इसके मैं आपको तीन सिंपल सलूशन बताता हूं। सबसे पहला सशन क्या है? जैसे कि ना आज से बहुत साल पहले इंडिया के अंदर ग्रीन रेवोल्यूशन आया था। जिसके अंदर ना फार्मर्स की ये जो खेती थी उसके अंदर बहुत सारे चेंजेस आए थे। वैसे ही आज इंडिया को जरूरत है इस फूड रेवोल्यूशन की। यानी यह
(07:44) जितना भी खाना होता है ना इस खाने को सही तरीके से उगाना पड़ेगा और सही तरीके से बेचना पड़ेगा। उसमें तुम क्या कर सकते हो? कोई भी प्रोडक्ट अगर तुम ले रहे हो ना तो उसका लेवल पढ़ो। लेबल पढ़ना बहुत इंपॉर्टेंट है। आजकल हो क्या रहा है ना हम कोई भी प्रोडक्ट लाते हैं जैसा हमें दिखाया जाता है हमें लगता है कि वो सच है जिसकी वजह से हम लेवल पढ़ते नहीं है और लेवल नहीं पढ़ते तो हमें ये पता ही नहीं चलता कि इसके अंदर आर्टिफिशियल कलर है। इसके अंदर आर्टिफिशियल शुगर है। इसके अंदर तो प्रोटीन है ही नहीं और भरभर के शुगर डाली गई है। यानी हमें एक मुहिम चलानी है
(08:13) जिसके अंदर हम यह सबको बोलेंगे लेबल पढ़ो। और मेरी यह गुजारिश है आप सब से कि आप सबको हर एक प्रोडक्ट का लेबल पढ़ना पड़ेगा। आज से इस चीज को स्टार्ट करो। दूसरी चीज देखो हमें क्या करना है ना क्रेविंग को कंट्रोल करना है। और क्रेविंग को कंट्रोल करने के लिए एक तुम्हें हैक मैं बताता हूं। कभी भी तुम्हें रात को क्रेविंग हो रही है, मन कर रहा है बाहर का खाना खाने का तो पानी पियो। वाटर फर्स्ट प्रिंसिपल। अब इस प्रिंसिपल के अकॉर्डिंग ना जब तुम पानी पीते हो तो ये जो तुम्हारी शुगर वाली क्रेविंग है वो 30 से 40% तक रिड्यूस हो जाती है। जिसकी वजह से आप ये
(08:46) जो खराब खाना है इसको कंज्यूम करना अवॉयड कर सकते हो। और फिर आता है सॉल्यूशन नंबर थ्री डिसिप्लिन। यानी यार देखो हमें ना एक हैबिट बनानी पड़ेगी। हर रोज एक ऐसी मील आपको लेनी पड़ेगी जो कि हेल्दी है। मैं आपको रिकमेंड करूंगा कि अगर आप ब्रेकफास्ट में कुछ भी कंज्यूम कर रहे हो तो एक ऐसी चीज उसमें जरूर कंज्यूम करना जो कि हेल्दी होनी चाहिए जिससे आपको प्रोटीन मिल रहे हो जिससे आपको गुड फैट्स मिल रहे हो जो कि आपके ब्रेन के लिए भी हेल्दी है। अब ये सारी चीजें ना एक दिन में नहीं बदलेगी। हम सबको फूड रेवोल्यूशन इंडिया के अंदर लाना
(09:15) पड़ेगा। जिसके लिए मुझे आप सबका सपोर्ट यहां पर चाहिए होगा। क्योंकि मैंने यह डिसीजन ले लिया है कि मैं तो इस फूड इंडस्ट्री को अब बदलने वाला हूं। जरूरत है हमें कुछ ऐसे ब्रांड्स की, कुछ ऐसे प्रोडक्ट्स की जो कि ट्रांसपेरेंट हो। कुछ ऐसी चीजों की जो कि कंज्यूमर को डायरेक्टली बताएं कि हमारे प्रोडक्ट के अंदर इतनी सारी चीजें हैं। हां जी हमारे प्रोडक्ट के अंदर शुगर है तो साफ बताओ कि हां इसके अंदर शुगर है। छुपाओ मत। ये चीज मैं स्टार्ट करने जा रहा हूं। यानी कुछ सरप्राइजेस आपके लिए मैं प्लान कर रहा हूं जिसके अंदर मैं कुछ ऐसी चीजें आपके लिए
(09:47) लेकर आऊंगा जिससे कि यह पूरी फूड इंडस्ट्री बदलेगी। बट हां इसमें मुझे आपका सपोर्ट लगेगा। हम सब कॉमन लोगों को जुड़ना होगा तभी जाकर यह इंडस्ट्री बदल पाएगी। और यह जो सरप्राइज है बहुत जल्द आपके सामने आएगा। ये एक साल पहले जो मेरे साथ इंसिडेंट हुआ था तभी मैंने सोच लिया था कि हमें इस चीज के अंदर चेंज लाना है और पिछले 1 साल की मेहनत के बाद हम थोड़ी सी चेंज तो शायद इंडिया के इस फूड सेक्टर के अंदर जरूर लाकर रहेंगे। तो मिलते हैं बहुत जल्द जब तक के लिए यह वीडियो अपने दोस्तों के साथ शेयर कर दो। अपने पेरेंट्स के साथ शेयर कर दो। उन लोगों के साथ शेयर कर दो
(10:23) जो कि ये प्रोडक्ट्स डेली खाते हैं और उन्हें बताओ लेबल पढ़ना बहुत जरूरी है। शुक्रिया एवरीवन। मेरा नाम है प्रशांत।
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