Tuesday, August 25, 2026

Exposing India's Biggest FOOD SCAM in 12 Minutes!

Exposing India's Biggest FOOD SCAM in 12 Minutes!

Author Name:Rashmi Sawarn

Youtube Channel Url:https://www.youtube.com/@rashmisawarn

Youtube Video URL:https://www.youtube.com/watch?v=wIVLhXQ3p2Q



Transcript:
(00:00) आप जरा यह वीडियो देखिए। इस वीडियो को अचानक से देखकर आपको लग रहा होगा कि बंदा किसी मुसीबत में फंसा हुआ है। बट नहीं आपकी तसल्ली के लिए आपको बता दूं कि यह आप सबकी फेवरेट सोया चाप बनाने में लगा हुआ है और ऐसे ही इंटरनेट पर कई वीडियोस वायरल होती रहती हैं, जिनमें सोया चाप को कैसे बनाया जाता है वो देखने को मिलता है। हालत तो ऐसी है कि पैकेज्ड फूड भी सेफ नहीं है। अभी रिसेंटली एक कपल को अमूल की आइसक्रीम खाते वक्त उसमें मेटल जैसी कुछ चीज मिलती है। हेयर इज दिस? सपोज टू बी हियर? व्हाट इज दिस? स्ट्रीट फूड की हालत तो ऐसी हो रखी है कि
(00:32) लोग टॉयलेट के पानी से ठंडी शिकंजी बना रहे हैं। यह वीडियो लखनऊ रेलवे स्टेशन के बाहर बने पब्लिक टॉयलेट की है। जहां यह बंदा टॉयलेट की पानी को ठंडी शिकंजी बनाने के लिए यूज कर रहा है। आम लोगों की हेल्थ से किसी को कोई फर्क नहीं पड़ता और रेल्वेज का खाना कितना हेल्दी होता है यह तो सभी को पता है। अभी कुछ समय पहले ट्रस्टिफाइड की टीम ने किसी और ट्रेन का नहीं बल्कि वंदे भारत ट्रेन के खाने का टेस्ट करवाया और जो रिजल्ट्स आए वो सुनकर आप शॉक्ड हो जाओगे। ट्रेन में जो सिंपल दाल आप कैजुअली खा लेते हो उसमें एंट्रोबैक्टीरियसी सेफ लिमिट से 50 गुना
(01:02) ज्यादा मिला। जीरा राइस में 70 गुना ज्यादा। पनीर की सब्जी में ई कोलाई 11 गुना और बैसिला सीरियस 2.2 गुना ज्यादा था। एंट्रोबैक्टीरियसी और ई कोलाई फीकल कंटामिनेशन के इंडिकेटर्स होते हैं। और ध्यान रहे वंदे भारत की थाली थी। सोचो नॉर्मल ट्रेंस में सिचुएशन कितनी खराब हो सकती है। और अगर आपको लगता है कि लैब टेस्ट गलत भी हो सकता है तो रिपोर्टेड इंसिडेंट्स देख लीजिए। अक्टूबर 2025 में पेंट्री स्टाफ यूज्ड डिस्पोजेबल कंटेनर्स को वॉश करके रीयूज करते हुए पकड़े गए। ऐसे ही धोध के डेली करते हैं क्या? डेली डेली इसी खाने में आम देते हैं क्या?
(01:40) रिटर्न होगा। रिटर्न होगा। रिटर्न होगा। उसका क्या रिटर्न क्या मिल जाएगा? आधा मिल जाएगा। जो बच गया पीता है ना वीडियो बंद बनाइए भैया एक और वायरल वीडियो में यूज्ड फूड फॉइल्स को दोबारा वॉश करके यूज किया जा रहा था और एक केस में प्लेट्स गार्बेज से उठाकर रीयूज की गई 2018 में एक वेंडर टॉयलेट वाटर से टी बनाते हुए मतलब चाय बनाते हुए पकड़ा गया रिसेंटली वंदे भारत के कर्ड में वार्म मिला जिसके बाद ₹60 लाख का फाइन भी इशू हुआ भाई हम लोग अभी वंदे भारत में हैं। ये इन्होंने रात का भी डिनर सर्व किया था अपने को और ये दही में आप देख रहे हो
(02:17) कितने सारे कीड़े जो आपको दिख रहे होंगे देखो और ये सिर्फ एक खाने का हाल नहीं है ये सारे खाने का वही हाल है और ये वंदे भारत की ट्रेन है और मैं ये सब देख कर अगर ये बोलूं कि हाइजीन इज इललीगल इन इंडिया तो यह कहीं से गलत नहीं होगा क्योंकि इन सबको हैंडल करने वाली एफएसएसआई कहीं गहरी नींद में सोई हुई है और बाकी एडमिनिस्ट्रेशन को कोई फर्क नहीं पड़ता कि लोगों की हेल्थ के साथ क्या खिलवाड़ हो रहा है। बाहर के खाने से लेकर घर की सब्जी और फ्रूट्स तक को लोग मिलावट करने से नहीं छोड़ रहे हैं। ये देखो कैसे खुलेआम खीड़े को कलर करके ग्रीन किया जा
(02:45) रहा है और लोग सोचेंगे वाह कितना फ्रेश कीड़ा है। कहीं केले को पता नहीं कौन सा केमिकल डालकर इंस्टेंटली पकाया जा रहा है और जो फ्रूट्स ज्यादा पक जाते हैं उनको डिस्पोज ऑफ नहीं किया जाता। ये कंपनीज़ उनका भी रस निकाल लेती है। जो टोमेटो केचप खाते हालत देख लो कीड़ों की। यह खा रहे हो आप फास्ट फूड के अंदर जो केचप आ रहा है। कहां गया हमारा फूड सेफ्टी डिपार्टमेंट? इस तरह से खिलवाड़ हो रहा है आपकी जिंदगी के साथ, आपकी हेल्थ के साथ। यह टीवी चैनलों पे नहीं आएगी न्यूज़। जरा इस वीडियो में देखो कैसे सड़े गले आमों से मैंगो जूस बनाने की प्रक्रिया चल रही है
(03:14) और हाइजीन तो दूर-दूर तक नहीं दिखती। यह देखो कैसे नंगे पैर आम के जूस के साथ खेल रहे हैं और उसी का जूस बनाने में लगे हुए हैं। मतलब मोस्ट ऑफ द केसेस में हालात ऐसे हो चुके हैं कि क्या खाएं और क्या ना खाएं ये समझना मुश्किल हो गया है और सबसे बड़ी हिपोक्रेसी पता है क्या है? इंडिया में जो चीज सेफ कहकर बेची जाती है, फॉरेन कंट्रीज में उनके डिपार्टमेंट्स उसी प्रोडक्ट पर वार्निंग साइंस लगाते हैं। आप यह फोटो देखो। अमेरिका के कैलिफोर्निया में मैगी के पैकेट्स पर कैंसर कॉजिंग एंड रिप्रोडक्टिव हार्म की वार्निंग दी जाती है। लेकिन इंडिया में धड़ल्लने से सब कुछ
(03:46) बेचा जाता है एफएसएसआई का लोगो लगाकर और हमें लगता है कि यह प्योरिटी का हॉलमार्क है। बट एक्चुअली में इट्स जस्ट अ रजिस्ट्रेशन नंबर। एक बार रजिस्ट्रेशन यह लोग ले लेते हैं। बाकी बाद में किसी को कोई फर्क नहीं पड़ता कि सब कैसा चल रहा है। सही चल रहा है या गलत। अच्छा आप लोगों में से कितने लोग जेम्स खाते हो? स्पेशली कलर्स चुन-चन कर। तो जरा ये भी ध्यान से सुन लेना। जैसे इसकी इंग्रेडिएंट लिस्ट में सबसे पहले कलर 171 के बारे में जान लो। यह है टाइटेनियम डाइऑक्साइड जो जेम्स के अंदर जो वाइट हिस्सा होता है उसमें यूज़ होता है और यह पूरे यूरोप में बैंड है और
(04:17) आपके डीएनए को डैमेज करने के लिए जाना जाता है। फिर एक और कलर के बारे में जान लो और वो है कलर 102 दैट इज टार्ट्रा जीन जो पेट्रोलियम से निकले हुए केमिकल से बनता है। एक समय में नॉर्वे और ऑस्ट्रिया में बैंड था। अब वहां फूड लेबल्स पर क्लियरली लिखा होता है कि इसका एडवर्स इफेक्ट चिल्ड्रन पे हो सकता है। इसके अलावा भी बाकी सारे सिंथेटिक कलर्स के अपने-अपने हार्मफुल इफेक्ट्स होते हैं। और इससे तो साफ समझ आता है कि यूरोप और अमेरिका जैसी कंट्रीज के बच्चों के लिए यह सारी चीजें सेफ नहीं है और उनके लिए स्पेशल वार्निंग लेबल्स दी जाती है। बट
(04:46) इंडिया के बच्चे तो कोई आलौकिक ताकत लेकर पैदा होते हैं। उनको कोई फर्क थोड़ी ना पड़ेगा। आराम से यह चीजें बिना किसी वार्निंग के हमारे यहां बिकती है। अब आप एफएससीआई का नंबर्स ही देख लीजिए। 2024-25 में पूरे इंडिया में 1770535 फूड सैंपल्स एनालाइज किए गए। जिनमें 34388 सैंपल्स नॉन कंफर्मिंग निकले। यानी टेस्ट किए गए सैंपल्स में एप्रोक्समेटली हर पांचवा सैंपल रिक्वायर्ड स्टैंडर्ड्स पर खरा नहीं उतरा। 2025-26 के प्रोविजनल डाटा में भी 15, 155,000 से ज्यादा सैंपल्स एनालाइज हुए। जिसमें 27,567 सैंपल्स नॉन कंफर्मिंग निकले। उत्तर प्रदेश में
(05:22) 2024-25 के दौरान 30,300 सैंपल्स टेस्ट हुए जिनमें 16,500 रिक्वायर्ड स्टैंडर्ड्स पर फेल है। यानी आधे से भी ज्यादा। और ये सिर्फ वो केसेस हैं जो टेस्ट हुए हैं। हमारे देश के हर ठेले, ढाबे, रेस्टोरेंट, क्लाउड, किचन, डेयरी, बेकरी और फैक्ट्री का सैंपल रोज टेस्ट नहीं होता। असली स्केल कितना बड़ा हो सकता है, हम सिर्फ इमेजिन कर सकते हैं। और यह जो 10 मिनट में हम होटल से गरमा गरम पनीर की सब्जी और दाल मखनी मंगवाते हैं, कभी सोचा है कि वो इतनी जल्दी बन कैसे जाती है? एक्चुअली में वह बल्क में खाना बनाते हैं और फ्रीजर में उसको ऐसे जमा करके रखते हैं और यह मिनिमम
(05:55) चार-प दिन आराम से चल जाता है। जैसे ही आप ऑर्डर करते हो गर्म करके तड़का और बटर डालकर आपको सर्व कर देते हैं और बटर भी कौन सी क्वालिटी का आता है वो भी आपको पता है। बाहर होटलों में खाना खाने के बाद अगले दिन पेट खराब होने की वजह आपके सामने है। होटलों में जब खाना बच जाता है तो कहीं फेंका नहीं जाता बल्कि ऐसे फ्रिज में जमा देते हैं। जब आप दाल मखनी का ऑर्डर देंगे तो थोड़ा पानी डालकर घी में फ्राई करके ऊपर से बटर डाल देंगे और बस रेडी है 400 की फुल दाल मखनी और यह हाल बड़े-बड़े फूड चेन्स जैसे डोमिनोज़, पिज़्ज़ा, हट, केएफसी का भी है। इनके मेन्यू में कैलोरीज
(06:28) मेंशंड नहीं होती। अगर आप एक पिज़्ज़ा की कैलोरिक वैल्यू जानोगे तो लगभग 1500 से 2000 कैलोरीज होती है। लेकिन उनके मेन्यू में कहीं मेंशन नहीं होता। अगर यह मेंशंड हो तो लोग एटलीस्ट जंक फूड लिमिटेड अमाउंट में तो खाएंगे लेकिन नहीं इन सब चीज को लेकर कोई आवाज नहीं उठाता। ऊपर से खुद जो ऑयल यूज करते हैं वो भी कई बार रीयूज होता है। जयपुर के एक मैगडी के आउटलेट में सरप्राइज इंस्पेक्शन के दौरान यह पाया गया कि यह जो ऑयल यूज कर रहे थे उसमें टीपीसी यानी टोटल पोलर कंपाउंड परमिसिबल लिमिट से कहीं ज्यादा अमाउंट में पाए गए। टोटल पोलर
(07:00) कंपाउंड एक पैरामीटर होता है कुकिंग ऑयल की क्वालिटी जांचने के लिए। और सिर्फ कुकिंग ऑयल ही नहीं 40 केजी सड़े हुए टमाटर भी इन लोगों ने रखा हुआ था कस्टमर को परोसने के लिए। एक तो लोगों को अवेयर होना बहुत जरूरी है। कोई भी फूड प्रोडक्ट लेते समय उसका लेवल जरूर पढ़ें और उसके इंग्रेडिएंट्स जरूर देखें क्योंकि कई बार ब्रांड्स प्रोडक्ट के नाम से आपको बेवकूफ बनाने की कोशिश करते हैं। जैसे मान लो ब्राउन ब्रेड का नाम सुनकर आपको क्या लगता है यह हेल्दी होगा? बट उसके लेवल पर आप देखोगे तो आटा बहुत ही कम मात्रा में होता है। बाकी मैदा, शुगर और बहुत सारे कलर्स
(07:32) मिलेंगे। और बचपन से आपने एक एनर्जी ड्रिंक पी होगी जिसको हाइट बढ़ाने के लिए लोग बच्चों को पिलाते थे। बट आप उसके अंदर भी देखोगे तो 47% 47% शुगर मिलेगी। यानी हम बचपन से इतनी महंगी चीनी पी रहे थे। और जो मार्केट में फ्रेश जूस के नाम पर जूसेस मिलते हैं या फिर फ्रेश टोमेटो केचप मिलता है। उसमें भी कोई फ्रेश जूस या फ्रेश टोमेटो नहीं होता। फ्रेश तो बस उसका ट्रेडमार्क होता है। पैकेट के पीछे साफ-साफ डिस्क्लेमर भी लिखा होता है कि इट डज नॉट रिप्रेजेंट इट्स ट्रू नेचर और असल में उसमें भी भर-भर कर चीनी मिलाई होती है। और ऐसे ही ना जाने कितने प्रोडक्ट्स
(08:07) हैं मार्केट में जिसका लेवल हम ध्यान से नहीं पढ़ते और धड़ल्ले से कंज्यूम करते हैं। इन सबके अलावा डेली नीड्स का सामान जैसे दूध, पनीर, अंडे ये सब भी आजकल सेफ नहीं मिलते। इस वीडियो में देखो कैसे किसी केमिकल से खुलेआम दूध बनाया जा रहा है। तो दोस्तों हमारे इधर दूध बन रहा है तो देख लीजिए ऐसे दूध बनता है। बस बस रहने दो ज्यादा हो जाएगा। ऐसे ही हमारे इधर दूध बनता है। आप लोग पीते हो दूध ना ये मशीन में डाला जाता है। और यह तो किसी लोकल फैक्ट्री की बात हुई। अभी ट्रस्टिफाइड की टीम ने बड़ी-बड़ी दूध कंपनीज़ के मिल्क का लैब टेस्ट करवाया और
(08:40) जो रिपोर्ट सामने आई वो काफी शॉकिंग थी। Amul ताजा मिल्क की टेस्ट रिपोर्ट में एफएसएसआई की लिमिट से ज्यादा कॉलम डिटेक्ट हुए और Amul गोल्ड में भी सेफ लिमिट से ज्यादा कोिलीफॉर्म डिटेक्ट हुए। उसी तरह मदर डेरी काऊ मिल्क भी इनके लैब टेस्ट में फेल होता हुआ दिखा। पर इसका वन ऑफ द मेन रीजन होता है अनहाइजीनिक हैंडलिंग और लैक ऑफ कोल्ड चेन। यानी रियलिटी में इन पेराइज्ड मिल्क को फैक्ट्री से रिटेलर तक ले जाते समय प्रॉपर कोल्ड चेन मेंटेन करनी चाहिए। बट असल में कई जगहों पर इन्हें खुली धूप में ट्रांसपोर्ट किया जाता है। इवन दुकान पर पहुंचने के बाद भी आप देखते
(09:13) होंगे कि दूध का कंटेनर बाहर पड़ा होता है। जबकि माइक्रोबियल अटैक से बचाने के लिए उसे एक सेट टेंपरेचर पर रखना बहुत जरूरी होता है। आप देख सकते हो रिक्वायर्ड टेंपरेचर 4 डिग्रीज होना चाहिए। बट असल में 12 15 डिग्रीज या उससे भी ज्यादा रहता है। और इसके बाद भी अगर आप इसे बॉईल करके भी पीते हो फिर भी बैक्टीरिया की जो ग्रोथ हो चुकी होती है वो बॉईल करने पर भी खत्म नहीं होती। यह हाल है हमारे यहां की मिल्क सप्लाई का सोचो। इसी तरह आपको आए दिन मिलावटी पनीर के रिपोर्ट्स देखने को मिलती हैं। इसके बारे में मैंने ऑलरेडी डिटेल में इस वीडियो में बात की हुई है। आप इस
(09:43) वीडियो के बाद जरूर देखना। अब समझने वाली बात यह है कि जो काम एफएससीआई और लोकल एडमिनिस्ट्रेशन का है वो आज के लिए इंडिपेंडेंट प्लेटफॉर्म्स कर रहे हैं। पब्लिक की हेल्थ उनके हाथों में छोड़ दी गई है कि अपना-अपना देख लो। जो खा रहे हो खुद सोच समझ कर खाओ। इंडिया में फ्रंट ऑफ पैक वार्निंग लेवल्स पर डिस्कशन सालों से चल रही है। फरवरी 2026 में सुप्रीम कोर्ट को एफएसएससीआई से कहना पड़ा कि एक्सेसिव शुगर, सैचुरेटेड फैट और सोडियम वाले पैकेज फुट पर क्लियर फ्रंट ऑफ पैक वार्निंग्स को सीरियसली कंसीडर कीजिए और पब्लिक हेल्थ को कॉर्पोरेट इंटरेस्ट से ऊपर रखिए। सोचिए एक
(10:15) सिंपल वार्निंग लेबल के लिए भी सुप्रीम कोर्ट को इंटरवीन करना पड़ रहा है। WHO के 2026 के एस्टीमेट्स के अकॉर्डिंग अनसेफ फूड से दुनिया भर में एक साल में एप्रोक्सिममेटली 866 मिलियन इलनेस और डेढ़ मिलियन डेथ्स हुई थी। और साउथ ईस्ट एशिया में इंडिया हाई बर्डन रीजंस में से एक रहा। सोचे खाना एक इंसान की सबसे बेसिक नीड है। हम बिना सोचे दूध कंज्यूम करते हैं। पनीर को हेल्दी समझ कर खाते हैं। पैकेट पर एफएसएससीआई का लोगो देखकर ट्रस्ट कर लेते हैं और रेस्टोरेंट के बड़े नाम को सेफ्टी की गारंटी मान लेते हैं। लेकिन जब इसी ट्रस्ट के बदले हमें मिलावट,
(10:47) कंटामिनेशन और मिसलीडिंग लेबल्स मिलते हैं तो यह सिर्फ फूड स्कैम नहीं पब्लिक के हेल्थ के साथ खिलवाड़ हो रहा है। देखो हमारा काम हर चीज से डर कर खाना छोड़ देना नहीं। हमारा काम अवेयर रहना, लेबल्स पढ़ना, गलत चीजों को रिपोर्ट करना और अथॉरिटीज से अकाउंटेबिलिटी मांगना है। क्योंकि हेल्दी और सेफ फूड कोई फेवर नहीं है जो गवर्नमेंट या कंपनीज हम पर कर रही है। यह हमारा बेसिक राइट है और जब तक हम सवाल नहीं उठाएंगे तब तक एफएसएससीआई सोती रहेगी और मिलावट करने वाले हमारी प्लेट और हेल्थ के साथ इसी तरह खिलवाड़ करते रहेंगे। वीडियो अगर इंपॉर्टेंट लगा हो तो
(11:19) इसे जितना हो सके शेयर करें और चैनल को सब्सक्राइब भी कर दें ताकि मैं आपके लिए और ऐसे ही इंपॉर्टेंट टॉपिक्स पर वीडियोस बनाती रहूं। मिलती हूं बहुत जल्द नेक्स्ट वीडियो में। थैंक यू सो मच।

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