Is That "Soulmate" Feeling Even Real? | Hyper Quest
Author Name:Hyper Quest
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Transcript:
(00:00) क्या आप अपनी जिंदगी के अगले 50 साल सिर्फ कुछ मिनटों की फीलिंग के चक्कर में दांव पर लगा सकते हैं? आपने किसी को किसी शादी में [संगीत] देखा। किसी से कोचिंग में मिले और आपका दिल धड़क उठा कि यही तो वो इंसान है और फिर आप सुनते भी आए थे कि [संगीत] जोड़ियां तो ऊपर से बन के आती हैं। और जब आपका मिस्टर राइट या मिसेज राइट आपके सामने होगी [संगीत] तो आपका दिल जरूर पहचान लेगा। पर क्या सच में दिल पहचान लेता है? और ठीक यही सवाल 1986 [संगीत] में एक अमेरिकन साइकोलॉजिस्ट की नींद उड़ाए हुए था। और इसका जवाब ढूंढने के लिए उसने एक [संगीत] अजीब काम किया। उसने अपनी
(00:38) यूनिवर्सिटी की लैब को एक वीकेंड अपार्टमेंट बना दिया। और फिर अखबार में एक एडवर्टाइजमेंट छपवाया कपल्स के लिए कि आप आइए वीकेंड में इस घर में रहिए और बदले में पैसे ले जाइए। लेकिन यह अपार्टमेंट आम अपार्टमेंट [संगीत] नहीं था। दीवारों पर कैमरे लगे हुए थे और एक टू वे मिरर था जिसके पीछे रिस्चरर्स बैठकर हर पल को रिकॉर्ड करते थे और हर एक कपल के शरीर पर मॉनिटर्स भी [संगीत] लगे थे जो उनकी धड़कन और स्ट्रेस को नापता था। अच्छा कपल्स को यह सब पता था कि उन पर निगरानी रखी जा रही है। लेकिन वहां रहते-रहते वो कैमरों को भूल जाते थे और
(01:11) ठीक वैसे बिहेव [संगीत] करने लगते थे जैसे वह असल में है। और पर्दे के पीछे वो साइकोलॉजिस्ट बैठकर यह सब कुछ देखता [संगीत] था। और उसने कुछ ऐसा नोटिस किया जिसके दम पर वो बताने लगा कि किस कपल को सही पार्टनर मिला था और [संगीत] किसको नहीं। पर सवाल यह है कि उसने देखा क्या और जो उसने ऑब्जर्व किया क्या वो सच भी साबित हुआ? देखिए प्रश्न हम [संगीत] सभी के दिल के बहुत करीब है कि क्या राइट पार्टनर होता भी है या नहीं? और इसी क्वेस्ट की आज हम हाइपर [संगीत] पड़ताल करेंगे और इस क्वेस्ट पर हम ना केवल मॉडर्न रिलेशनशिप साइकोलॉजी को समझेंगे बल्कि हजारों साल
(01:46) पुराने [संगीत] इंडियन स्क्रिप्चर्स के भी पन्ने पलटेंगे। आइए मिलके देखते हैं इस क्वेस्ट का क्या अंजाम होता [संगीत] है। देखिए किसी भी रिलेशनशिप के शुरुआत के कुछ महीने ऐसा लगता है कि जैसे जादू हो गया है। लेकिन कुछ ही दिन में आती है पहली लड़ाई। वो भी छोटी सी बात पर कि मैसेज नहीं देखा और उस दिन आपका दिल बोलता है कि कहीं गलत इंसान तो नहीं चुन लिया और ठीक इसी फीलिंग को 1998 में एक दूसरे अमेरिकन साइकोलॉजिस्ट चिपनी डिकोड करना चाहते थे और इसके लिए उन्होंने एक क्वेश्चनर बनाई और उस क्वेश्चनर में उन्होंने ऐसे प्रश्न रखे जिससे वो जान पाए कि एक व्यक्ति प्यार
(02:25) को लेकर अपने मन में कौन सी छुपी हुई सोचों को लेकर चलता है और उन्हें दो डिस्टिंक्ट थॉट पैटर्न्स मिले। पहला है डेस्टिनी बिलीफ। इस बिलीफ के लोग मानते हैं कि कहीं कोई परफेक्टली कंपैटिबल इंसान है और अगर वह लाइफ में आ गया तो लाइफ सेट है। और यह जो बिलीफ है यह बिलीफ अक्सर हमको मूवीज, कहानी और हमारे कल्चर से मिलती है। और वहीं दूसरी तरफ है ग्रोथ बिलीफ। ग्रोथ बिलीफ वाले मानते हैं कि कोई भी रिश्ता, कोई भी रिलेशनशिप किसी मूवी की तरह नहीं होती बल्कि हर रिश्ते में समस्याएं आती हैं, प्रॉब्लम्स होती हैं और उन्हीं प्रॉब्लम्स को सॉल्व करने के बाद
(02:58) हमारा प्यार मजबूत होता है। गजब की बात यह है कि चिपनी इन दोनों बिलीफ्स में से किसी भी एक बिलीफ को गलत नहीं साबित कर पाए। दोनों अलग-अलग सिचुएशंस में एक दूसरे से बेहतर निकली। अब यह जानने से पहले कि किस सिचुएशन में कौन सी बिलीफ ज्यादा बेहतर थी। हम अभी एविडेंसेस को बटोरते जाते हैं क्योंकि किसी भी इंपॉर्टेंट क्वेस्ट पर ऐसे ही आगे बढ़ना होता है। देखिए आपका दिल एक ही व्यक्ति में भगवान ढूंढ लेता है और उसी व्यक्ति में दुश्मन भी और अगर यह सब शादी के बाद होता है तो आप या तो जिंदगी भर झेलते हैं या फिर डिवोर्स होता है। और हम में से ज्यादातर
(03:35) लोगों को लगता है कि शादियां समय के साथ छोटे-मोटे जो लड़ाई झगड़े होते हैं उसके कारण खराब हो जाती है। लेकिन यहीं पर 2001 में प्रोफेसर डेड हस्टन अपनी रिसर्च में कुछ और पाते हैं। वह 168 न्यूली मैरिड कपल को चुनते हैं और अगले 13 साल तक ट्रैक करते हैं और इन 13 सालों में बहुत ढेर सारे कपल्स का डिवोर्स हो जाता है। इंटरेस्टिंग बात यह रहती है बिना किसी रोज की लड़ाई झगड़े के। और इससे भी ज्यादा चौंकाने वाली बात यह थी कि शुरुआत में जिन कपल्स की रिलेशनशिप ज्यादा पैशनेट दिखती थी, ज्यादा हैप्पी दिखती थी, जिनको देखकर हर कोई कहता था कि यह मेड फॉर ईच अदर हैं।
(04:09) ऐसे लोगों के रिश्ते ज्यादा टूटे थे। पर उनका रिश्ता टूटा क्यों? क्योंकि वो इमेज टूट गई जो उन्होंने अपनी रिलेशनशिप की शुरुआत में एक दूसरे के लिए बनाई हुई थी। जैसे शुरू में तो लगा कि मेरा पार्टनर करियर के लिए कितना पैशनेट है। उसके जुनून से आप इंप्रेस्ड थे। लेकिन जब शादी हो गई और वह फिर जुनूनी बना रहा तो आपको लगने लगा कि इसके पास तो मेरे लिए समय ही नहीं है। तो इंसान नहीं बदलता है। बदलता है आपका चश्मा जिस चश्मे से आप उस इंसान को देख रहे थे। अब इसका आप उल्टा देखिए। उन 13 सालों में जो [संगीत] रिश्ते बचे रहे जो कपल्स आखिरी तक साथ में थे वो बहुत
(04:46) नॉर्मल लुकिंग कपल्स थे। उनके बीच में कोई विज़िबल फैंसी केमिस्ट्री नहीं थी। यानी जितनी कम ड्रामेटिक लाइफ थी उतने लंबे रिश्ते चले। लेकिन यहां पर मुश्किल और बढ़ जाती है। क्योंकि अगर हम नहीं बता सकते कि अगर किसी की बिगिनिंग हैप्पी है, पैशनेट है और वह यह नहीं डिसाइड कर सकते कि रिश्ता चलेगा या नहीं चलेगा तो क्या रिश्ता चलाने के लिए हमें बोरिंग और फीका होना पड़ेगा। पर फिर प्यार क्या सच्चा प्यार झूठ है? तो साथियों क्वेस्ट अब बहुत ही नाजुक मोड़ पर आ गई है। अभी और भी एविडेंसेस बटोरने होंगे। तो चलिए अगला सबूत बटोरते हैं और यह सबूत
(05:22) छिपा हुआ है उसी अजीब से अपार्टमेंट में जिससे वीडियो शुरू हुई थी। देखिए एक्सपेरिमेंट के प्रारंभ में ही जॉन गॉटमैन को यह रियलाइजेशन हो गई थी कि अगर रिश्ते की सही परख करनी है तो तब नहीं हो सकती जब चीजें अच्छी चल रही हो। रिश्ते की सही परख तब होगी जब लाइफ में स्ट्रेस हो। इसीलिए उन्होंने एक्सपेरिमेंट को वहीं बदल दिया और कपल्स से बोला कि अब आप एक दूसरे से ऐसी चीजों पर डिस्कशन कीजिए जहां पर आप एक दूसरे से डिसए्री कर सकते हो। जैसे बेबी प्लानिंग का डिसीजन है, करियर है, ग्रोथ है, फ्यूचर है। यह ऐसी जगह हैं जहां पर अक्सर कपल्स अनकंफर्टेबल हो जाते हैं।
(05:56) और इस बार केवल चेहरे नहीं पढ़े गए बल्कि उनके फिंगरपल सेंसर से यह जानने की कोशिश हुई कि उनकी [संगीत] धड़कन कैसी चल रही है और उनके शरीर में कितना स्ट्रेस है। क्योंकि अगर कोई कपल को छुपाना भी चाहता हो तो उनका शरीर उस बात को बोल दे। और फिर जब लगभग 14 साल के बाद गॉटमैन उन्हीं कपल्स के बीच में लौटे तो एक बात साफ हो गई कि रिश्ते टूटने की वजह झगड़े नहीं होते बल्कि झगड़ा करने का तरीका होता है। पहला तरीका होता है शोरशराबे वाला। लड़ाई झगड़ा होता है, ताने मारे जाते हैं, चीजें तोड़ी जाती हैं। ऐसे कपल्स का तलाक बहुत जल्दी होता है। और गॉटमैन इसे इमोशनल
(06:32) एक्सप्लोजन कहते हैं। और वहीं दूसरा तरीका बहुत खामोशी भरा होता है। वहां पर ना तो कोई गुस्सा कर रहा होता है, ना लड़ाई हो रही होती है, बिल्कुल मिनिमल इंटरेक्शन होता है। बस काम की बातें होती हैं। और इस रिश्ते में यह खामोशी धीरे-धीरे किसी दीमक की तरह रिश्ते को खा जाती है। और गॉडमैन इसे इमोशनल विथड्रॉवल कहते हैं। लेकिन आपको याद है कि पिछले चैप्टर में हम कहां पहुंचे थे? हम इस बात पर डिस्कशन कर रहे थे कि क्या अगर रिश्ते को लंबा टिकाना है तो क्या हमें बोरिंग, फीका और शांत हो जाना चाहिए? क्या यह वही इमोशनल विथड्रॉवल है जिसमें भी डिवोर्स हो जा रहा है। क्या
(07:05) यह भी वही इमोशनल विथड्रॉवल है जिसका अंजाम भी डिवोर्स है? तो गॉटमैन का आंसर है नहीं। क्योंकि इमोशनल विथड्रॉवल इमोशनल स्टेबिलिटी से अलग चीज है। क्योंकि इमोशनली स्टेबल जो कपल्स हैं वो शांत दिख सकते हैं, अनरमांटिक दिख सकते हैं लेकिन वो एक दूसरे के साथ कंफर्टेबल होते हैं। और फिर जानते हैं यहां पर क्या हुआ। यहां पर चारों ओर एक दावा घूमने लगा कि गॉटमैन 94% एक्यूरेसी के साथ यह बता सकते हैं कि किसका तलाक होने वाला है और किसका नहीं। अब ये नंबर जितना इंटरेस्टिंग है उतना ही मिसलीडिंग है। क्योंकि गॉटमैन का जो 94% फार्मूला है वो ऐसे ही कपल्स पर सही दिखता
(07:39) है जैसे कपल उनके रिसर्च में थे। अगर कोई आप नया कपल लाएंगे उस पर गॉटमैन की थ्योरी लगाएंगे तो हो सकता है कि वो थ्योरी गलत हो जाए। क्योंकि रीजन यह है कि वो 14 सालों के बाद किसका तलाक हुआ इस रिजल्ट से अपनी थ्योरी को बिल्ड करते हैं ना कि अपनी थ्यरी से तलाक को प्रेडिक्ट करते हैं। इसे साइंस में ओवरफिटिंग कहा जाता है। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि गॉटमैन पूरी तरह से गलत है। बल्कि उनकी शोध ने जो हमें दिखाया वो आज भी मॉडर्न कपल्स में उतना ही रेलेवेंट है कि झगड़ा नहीं झगड़ा करने का तरीका हमें बताता है कि रिश्ता कितना लंबा
(08:11) टिकेगा। बस प्रॉब्लम यह है कि झगड़े रोज नहीं होते। आप राइट पार्टनर के साथ हैं या नहीं है? इसको जानने के लिए आप झगड़ों का इंतजार नहीं कर सकते। लेकिन फिर प्रश्न उठेगा कि क्या कोई टूल है जो ऑर्डिनरी दिनों पर अच्छे दिनों पर किसी रिश्ते की सच्चाई बता पाए? और इस टूल को ढूंढने के लिए हमें क्वेस्ट को आगे बढ़ाना होगा। बॉटमैन देखते थे कि जब बुरा होता है तो पार्टनर कैसे रिएक्ट करता है। लेकिन वहीं पर एक दूसरी साइकोलॉजिस्ट शेलगेबल वो देखती थी कि जब अच्छा होता है तो पार्टनर कैसे रिएक्ट करता है और इसे देखने के लिए उन्होंने 79 डेटिंग कपल्स को अपनी लैब में
(08:48) इनवाइट किया और बोला कि एक दूसरे से किसी गुड न्यूज़ को डिस्कस करें और जब ऐसा होता था तो वह दूसरे पार्टनर के रिएक्शन को नोट करती थी और इस रिसर्च में उनको चार तरह के पार्टनर्स मिले। पहले वह पार्टनर्स थे जो आपकी गुड न्यूज़ सुनने पर सच में खुश होते थे। एक्साइट होते थे और चीजें पूछते थे। वहीं पर दूसरे पार्टनर उस तरह के थे जो थोड़ा सा बस मुस्कुरा देते थे। तीसरे पार्टनर बहुत इंटरेस्टिंग थे। वो गुड न्यूज़ मिलने पर उसमें कुछ ना कुछ कमी निकालते थे। वहीं पर चौथे तरह के पार्टनर्स अगर फोन चला रहे हैं तो फोन से ऊपर सिर भी नहीं उठाते थे। और इस रिसर्च
(09:23) से गेबल ने दिखाया कि आपका पार्टनर बुरे समय में कैसा रिएक्ट करता है। उससे ज्यादा आपके अच्छे समय में आपका पार्टनर कैसे रिएक्ट करता है। यह बात आपके रिश्ते के फ्यूचर को ज्यादा अच्छे से प्रेडिक्ट करता है। तो हमारे पास दो इंडिकेटर्स हैं। पहला कि आपका पार्टनर आपके बुरे समय में कैसे रिएक्ट करता है और दूसरा वही पार्टनर गुड न्यूज़ के समय कैसा रिएक्ट करता है। लेकिन समस्या यह है कि यह चीजें शादी के बाद होंगी। जब आप रिश्ते में आ जाएंगे तब सिचुएशंस होंगी और आप देखेंगे। लेकिन हमारा डर तो शादी और रिलेशनशिप के पहले का है, पार्टनर चुनने का है। तो क्या कोई ऐसा
(09:56) तरीका है कि इंसान को चुनने से पहले ही हमें पता चल जाए कि यह इंसान मेरे लिए सही होगा या नहीं होगा। साथियों, इस क्वेस्ट में हम बहुत आगे निकल आए हैं। दोस्तों, हम किसी से भी मिलने से पहले सबसे ज्यादा खुद पर भरोसा करते हैं। हमारे मन में एक लिस्ट होती है कि हमें कैसा पार्टनर चाहिए। लेकिन समस्या यह है कि हमारे मन के पास किसी भी रिलेशनशिप का रियल एक्सपीरियंस नहीं होता। इनफैक्ट 2008 में दो रिस्चरर्स ईस्टिक और फिंगल इन्होंने एक स्पीड डेटिंग स्टडी कंडक्ट की जिसमें उन्होंने लोगों से कागज पर वो चीजें लिखवाई जो उनको अपने पार्टनर में
(10:33) चाहिए थी और उसके बाद उन लोगों को अपोजिट जेंडर के स्ट्रेंजर्स के साथ बिठाया गया। बातचीत हुई और थोड़ी ही बातचीत के बाद जो चीजें कागज में लिखी गई थी वो किसी काम नहीं आई। जो लड़का सुंदर लड़की की डिमांड कर रहा था वो एक साधारण सी लड़की के साथ हंसते खेलते हुए बातें कर रहा था और जो लड़की एक रिच पार्टनर चाहती थी वो एक नॉर्मल फाइनेंशियल कंडीशन वाले लड़के की बातों में खोई हुई थी। यानी आप किसे पसंद करोगे यह आपकी चेक लिस्ट नहीं तय करती क्योंकि चेक लिस्ट भी तो मूवीज और कहानियों से बनी है और इस बात को 2020 में समंता जोल नाम की एक सोशल साइकोलॉजिस्ट ने
(11:07) 11,000 कपल्स के डेटा सेट को एक मशीन लर्निंग मॉडल में डालकर कंफर्म किया। उन्होंने बताया कि किसी इंसान की जो अपनी पर्सनालिटी है जो उसका खुद का सोचने का तरीका है वो उसके रिश्ते का केवल 21% बनाता है बल्कि जो बड़ा हिस्सा है 45% हिस्सा वो इस बात पर डिपेंड करता है कि पार्टनर्स का आपसी सपोर्ट और एक दूसरे के लिए एप्रिसिएशन कैसा है। इसलिए बहुत ढेर सारे डेटिंग एप्स जो आजकल आपकी प्रोफाइल बनाकर यह प्रॉमिस करते हैं कि आपको एक परफेक्ट मैथ्स दिलाएंगे। वो साइंस पर नहीं टिकता क्योंकि कौन किसे पसंद करेगा यह प्रोफाइल नहीं बल्कि उन दोनों के बीच का
(11:42) जो इंटरेक्शन है यह डिसाइड करता है। तो साथियों क्वेस्ट उलझ गई है क्योंकि ना तो आपका दिल बता सकता है कि कौन आपको पसंद आएगा और ना ही कोई दुनिया की स्टडी बता सकती है कि आपके लिए कौन मिस्टर राइट या मिसेज राइट है। तो शायद सही इंसान ढूंढा कैसे जाए यह गलत सवाल था। लेकिन अगर ढूंढना ही गलत है तो वो गहरा प्यार जिसकी तलाश में यह सब कुछ शुरू हुआ था। क्या वो सिर्फ सपना है? दोस्तों, एक आखिरी सबूत अभी बाकी है जो किसी लैब में नहीं बल्कि इंसान के दिमाग में मिलता है। हम सभी को यही बताया गया कि प्यार एक इनिशियल अट्रैक्शन है जो समय के
(12:20) साथ धीरे-धीरे ठंडा पड़ जाता है। और एक समय के बाद लोग जिम्मेदारियां निभाने के लिए एक दूसरे के साथ रहते हैं। लेकिन 2005 में कुछ रिस्चरर्स ने कुछ ऐसे लोगों को एमआरआई मशीन के अंदर डाला जो अभी हाल में ही प्यार में पड़े थे। और फिर जब उनको उनके पार्टनर की फोटो दिखाई गई तो उनके दिमाग का एक पर्टिकुलर हिस्सा जगमगा उठा। और फिर ठीक उसी के 7 साल बाद रिस्चर बियंका सेवेदो के साथ इन्हीं रिस्चरर्स ने इस एक्सपेरिमेंट को दोबारा कंडक्ट किया। लेकिन इस बार लोग अलग थे। इस बार ऐसे कपल्स थे, जिनकी शादी को कम से कम 21 साल हो गया था, और वह आज भी कहते थे कि उनको
(12:54) एक दूसरे से बेहद प्यार है और जब उनको उनके पति या पत्नी की फोटो दिखाई गई, तो दिमाग का ठीक वही हिस्सा जगमगा उठा जो हाल में ही होने वाले प्यार के केस में जगमगाया था। लेकिन यहां पर एक फर्क था। इस बार दिमाग में एक और हिस्सा जगमगाया था और यह हिस्सा सुकून और गहरे लगाव से जुड़ा होता है। यानी जुनून खत्म नहीं हुआ था बल्कि जुनून के साथ सुकून भी जुड़ गया था। तो यह रिसर्च बताती है कि प्यार होता भी है और टिकता भी है। और अगर देखा जाए तो अभी तक की हमारी क्वेस्ट में सबसे बड़ा सुकून यही है। तो प्यार कोई ऐसी चीज नहीं है जो अचानक होती है और खर्च हो जाती है।
(13:29) प्यार तो वो है जो बचा रहता है अगर कोई चीज उसे थामे रहती है। लेकिन यह थामने वाली चीज है क्या? इसका जवाब ना तो हमें गॉडमैन के अपार्टमेंट में मिला और ना ही 11,000 कपल्स के डाटा सेट में। इस सवाल का जवाब ढूंढने के लिए हमें लैब से निकलकर समय में काफी पीछे जाना होगा। तो दोस्तों जब हम लगभग ढाई हजार साल पीछे जाते हैं तो हमें एक किताब मिलती है कौटिल्य का अर्थशास्त्र पर ये कोई रिलेशनशिप मैनुअल नहीं है। यहां पर आचार्य चाणक्य शादी कैसे करनी है? पार्टनर कैसे चुनना है यह नहीं बता रहे। यहां पर वो एक राजा को मंत्री कैसे चुनना है? इस पर सलाह
(14:06) देते हैं और इंटरेस्टिंग बात यह है कि ढाई हजार साल का फासला है लेकिन आचार्य चाणक्य भी ठीक वही सवाल पूछ रहे हैं जो गॉटमैन ने पूछा कि अगर सब कुछ ठीक चल रहा है तो क्या सामने वाले इंसान के बिहेवियर पर भरोसा कर सकते हैं और यहां पर आचार्य चाणक्य जी का जवाब था बिल्कुल नहीं| आचार्य चाणक्य जी ने कहा कि किसी का चरित्र कैसा है? अगर इसकी परीक्षा करनी है तो आपको उस व्यक्ति को संकट में डालना होगा। बिना संकट के कोई अपना सही चरित्र नहीं दिखाता और इसके लिए उन्होंने उपदा मेथड डेवलप किया जिसमें उन्होंने बताया कि किसी इंसान को चार
(14:39) सिचुएशन में परखना चाहिए। पहला है धर्म जहां पर नियम तोड़ने से फायदा होता हो। दूसरा है अर्थ जहां पर पैसे का लालच हो। तीसरा है काम जहां पर कोई आकर्षण खींच रहा हो और चौथा है भय जहां पर सच में कोई डर हो। अच्छा यहां पर एक इंपॉर्टेंट बात कि आचार्य चाणक्य जी एक राजा को गाइड कर रहे हैं कि मंत्री को कैसे चुनना है। हम आपको यह नहीं कह रहे हैं कि आप अपने पार्टनर पर यह जाल बिछाइए और उसको परखिए। तो पहले हम कांसेप्ट समझते हैं और वैसे भी आपको यह जाल बिछाने की जरूरत नहीं है क्योंकि जो हमारा जीवन होता है यह हमेशा हमारे सामने उपधा रखता ही है। कोई भी रिलेशनशिप आप देख
(15:14) लीजिए। ये सब चीजें होती ही रहती हैं। कभी कोई बीमारी आ जाएगी। कभी कोई आर्थिक तंगी सताएगी। किसी बात का डर होगा। तो ये डर आपको क्रिएट नहीं करना है। ये सिचुएशन क्रिएट करके पार्टनर को परखना नहीं है। ये सिचुएशन होती हैं। बस उस सिचुएशन में अपने पार्टनर के रिएक्शन को देखना है। और आपको पता चल जाएगा कि आपको भरोसा करना चाहिए या नहीं करना चाहिए। लेकिन एक और इंपॉर्टेंट बात उपधा केवल इतना बता सकता है कि हम किस पर भरोसा करें या ना करें। लेकिन एक बार भरोसा हो गया तो उसको जिंदगी भर कैसे टिकाना है। यह उपधा नहीं बताता। लेकिन इसका जवाब भी इसी परंपरा में मिलता है।
(15:47) अगर आप भारत के प्राचीन धर्म शास्त्रों को देखें तो वहां पर जो विवाह है वो किसी राइट पार्टनर की होड़ में नहीं किया जाता। वहां पर जो विवाह है वो समाज को संभालने का एक दायित्व है। यानी वहां पर विवाह अपने लिए नहीं समाज के लिए किया जाता है और इसीलिए धर्म शास्त्रों में विवाह को गृहस्थ आश्रम कहा गया है। लेकिन इसका मतलब यह भी नहीं था कि प्राचीन भारतीय विवाह में प्रेम और इस्पात के लिए जगह नहीं थी। जगह थी लेकिन धर्म के नीचे क्योंकि धर्म शास्त्रों का कहना था कि धर्म ही वह चीज है जो प्रेम को टिकाए रखती है क्योंकि अगर आप अपनी इच्छाओं को देखिए तो वो ऊपर नीचे
(16:22) होती रहती है। व्यक्ति अमीर और गरीब होता रहता है। अगर हम किसी व्यक्ति को अपनी इच्छाओं के कारण या उसके गरीब और अमीर होने के कारण चुनेंगे तो वो चीजें तो बदल जाती हैं और जो चीजें पल-पल बदलती हैं वहां पर प्रेम कैसे टिकेगा? आपको याद है वो हस्टन के कपल्स जिनकी शुरुआत बहुत पैशनेट हुई थी। लेकिन सबसे पहले वही टूटे क्योंकि उनके जुनून को बांधने वाला कोई धर्म नहीं था। और अगर आप चाहे तो इंसान का पूरा इतिहास खंगाल लें। आपको कहीं भी राइट पार्टनर चुनने की कोई विधि या मेथड नहीं मिलेगा। क्योंकि रिलेशनशिप अपने आप में दो लोगों का इंटरेक्शन है। जहां पर
(16:55) ऑब्जेक्टिव के हिसाब से लक्ष्य के हिसाब से दोनों लोगों को साथ में काम करना पड़ता है। जैसे कि हमने देखा कि भारत का जो प्राचीन विवाह था वो समाज के लिए था। इसलिए विवाह की व्यवस्था में आपको ऐसे बहुत ढेर सारे नियम मिलेंगे जो उस जमाने के स्त्री पुरुष और वर्ण व्यवस्था से आते हैं। उनकी हम बात नहीं उठा रहे और ना ही हम उस धर्म की बात कर रहे हैं जो यह कहता है कि चुप रहो और मान जाओ क्योंकि धर्म शब्द का भी सदियों से गलत इस्तेमाल हुआ है। हम तो उस धर्म की बात कर रहे हैं जो धर्म इस वीडियो में इस क्वेस्ट में हमारे सामने आया है। हम उस धर्म की बात कर रहे
(17:26) हैं जो एक जिम्मेदारी है जो मूड के बदलने से नहीं बदलता। और अगर आप देखें तो आज की मॉडर्न साइकोलॉजिकल रिसर्च भी अपने अलग रास्ते से ठीक उसी जगह पर पहुंचती है। दोस्तों आपको वो चिपनी के दो ग्रुप्स याद होंगे। एक डेस्टिनी बिलीफ वाला, एक ग्रोथ बिलीफ वाला। यह जो डेस्टिनी बिलीफ वाले हैं, जब तक सब कुछ सही चल रहा होता है, यह रिलेटिवली ज्यादा सेटिस्फाइड रहते हैं। लेकिन जैसे ही कोई पहली मुश्किल आती है, तो यह डेस्टिनी बिलीफ वाले टूट जाते हैं। लेकिन वहीं पर ग्रोथ बिलीफ वाले उस मुश्किल को अपने रिश्ते का एक सामान्य सा हिस्सा मानते हैं और वहीं से काम करना
(18:03) शुरू कर देते हैं और अपने रिश्ते को और भी स्ट्रांग बनाते हैं। अब देखिए हुआ क्या? गौर कीजिए जितना हमने सीखा है वो आपको दिखने लगेगा। डेस्टिनी बिलीफ वाले क्या करते हैं? अपनी इच्छा को जज बना लेते हैं और जिस दिन उनकी यह इच्छा यह फीलिंग गिरती है क्योंकि इच्छाएं ऊपर नीचे होती रहती हैं उसी दिन उनके रिश्ते कमजोर [संगीत] पड़ने लगते हैं क्योंकि वो अपनी इच्छा को गलत नहीं बोल पाते तो सामने वाले इंसान को गलत बोलते हैं लेकिन वहीं जो ग्रोथ बिलीफ वाले होते हैं वो जानते हैं कि जो हमारी फीलिंग्स है वो ऊपर नीचे होती रहेगी रिश्ता उससे नहीं तय होगा और यही धर्म है
(18:34) वो चीज जो रोज के मूड बदलने से नहीं बदलता तो आप देख पा रहे हैं एक ढाई हजार साल पुरानी बात और एक मॉडर्न साइकोलॉजी लैब का डाटा दोनों एक ही जगह तो आपका पार्टनर कमतर है या अच्छा है यह बस आपका चश्मा है क्योंकि धर्म की निगरानी में किसी भी रिश्ते में प्रेम टिक सकता है। तो इस पूरी कष्ट से हमारे हाथ क्या आया? हमारे हाथ यह आया कि जो पहली नजर का प्यार है जो स्पार्क है वो वो चीज नहीं है। वो इंडिकेशन नहीं है कि यह सही इंसान है। बल्कि अगर उस इंसान के साथ आप सही रिश्ता चलाएंगे तो वो स्पार्क पूरी जिंदगी बचा रहेगा। और वो जो असवेदों के 21 साल पुराने
(19:10) कपल्स थे वो इस बात का सबूत हैं। तो हाइपरक्वेस्ट आपके इस सवाल को बदल देता है कि सही इंसान कैसे ढूंढा जाए? बल्कि सही सवाल यह है कि क्या आपको रिश्ता मिलता है या रिश्ते को थोड़ा-थोड़ा रोज बनाया जाता है? और इसका उत्तर मैं आपको नहीं दूंगा। यह आपकी अपनी क्वेस्ट है। लेकिन आप हमें यह जरूर बताइएगा कि वो क्या चीज थी जिसने आपको सिखाया कि सामने वाला इंसान कैसा है। क्या वो कोई ऑर्डिनरी दिन था या कोई मुश्किल वक्त था? हम आपके कमेंट्स को जरूर पढ़ेंगे और अगर आपको यह क्वेस्ट पसंद आई है तो हाइपर क्वेस्ट को जरूर सब्सक्राइब करें और इस वीडियो को अपने दोस्तों में
(19:44) अपने फैमिली मेंबर्स में जरूर शेयर करें और अगर आपके मन में भी कोई क्वेश्चन है और आप चाहते हैं किसी एपिसोड में हम उस क्वेस्ट पर निकलें तो हमें जरूर लिखिएगा और अब मैं आपको मिलूंगा हाइपर क्वेस्ट की एक नई क्वेस्ट में
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