Everything is Already Written | KARMA, Past Life, LOVE TANK & Meditation | ft.@shyammujavadiya
Author Name:Priyanka Bansal
Youtube Channel Url:https://www.youtube.com/@PriyankaBansal
Youtube Video URL:https://www.youtube.com/watch?v=g5jdpAIEFvY
Transcript:
(00:00) आप किसी से मिलते नहीं है, मिलवाए जाते हैं आपके कर्म के अकॉर्डिंग जैसे आपके कर्म होंगे। जन्म विवाह मरण गति सोई जो जस लिखा सो तस तस होई भगवान दुख नहीं देते हैं। कर्म दुख देते हैं। भगवान ने बनाया ना कर्म का सिद्धांत जो बनाया इतना बढ़िया है कि आप और अरबपति बन सकते हैं। कर्म खराबी अच्छा नहीं होता है। जो आप दे रहे हैं वो लौट आएगा। जैसे अभी मैं प्रेम दे रहा हूं तो मेरे पास प्रेम लौट के आएगा। मैं नफरत दे रहा हूं। मेरे पास नफरत लौट के आएगी। स्नान कर लेते हैं गंगा में तो आपके पाप धुल जाएंगे। हम्। तो, सिद्धांत को समझती हूं, तो पाप धोने
(00:29) का तो नहीं है वहां पे। जो आपने किया है, वह तो लौट के आएगा ही आएगा। कर्म की गागर का खेल ऐसा है कि पाप धुले पर पश्चाताप ना धुले। जब आप अपनी एनर्जी और टाइम जब गलत लोगों पे, गलत सिचुएशनंस पे वेस्ट करते हो ना, वही सबसे बड़ा लॉस है लाइफ में। जैसे ये पॉडकास्ट है, तो यह ऐसा थोड़ी हर किसी के पास पहुंच जाएगा। यह जिसके नसीब में होगा, उसके पास जाएगा। यहां पे वो नहीं मिलता आपको जो आप चाहते हैं। यहां पे आपको वो मिलता है जो आपके नसीब में होता है। तो पहले आपको अपना नसीब खुद बनाना पड़ेगा। जब मैंने अपने पिताजी को लूज किया व्हेन
(00:58) ही वास नो मोर तब मुझे फ्लैशबैक की तरह समय समझ आया कि यार इतना सारा इतना अच्छा समय मैंने वेस्ट किया इन गलत लोगों पे जब मेरे पापा थे तो मैं उनके साथ वो टाइम स्पेंड नहीं किया। रिग्रेट से बुरी फीलिंग कुछ नहीं है। है ना? हम कर्मण्य वास्ते मा फलेशु कदाचन हे प्राणी तू कर्म की जा फल की चिंता मत कर और लोग गुड वाइब्स ढूंढ रहे हैं ये तो गुड वाइब्स क्रिएट की जा सकती है क्रिएट की जा सकती है ये मार्केट में मिलती है दो पांच में ₹10 में अगर लोग अपनी लाइफ में पैसा अच्छे रिश्ते अच्छी लाइफ ओवरऑल अगर अट्रैक्ट करना चाहते हैं तो क्या हैक आप देना चाहेंगे
(01:33) कर्मा इज द रियल मैनिफेस्टेशन मैनिफेस्टेशन लॉ ऑफ़ अट्रैक्शन भी आपकी लाइफ में तभी आएगा जब आपके कर्म अच्छे होंगे ओवरथिंकिंग एंजाइटी डिप्रेशन बहुत बढ़ता जा रहा है जिसमें कर्मा भी फिर लोग भटक जाते हैं। कुछ भी करने लगते हैं अपने आपको खुशी का एहसास दिलाने के लिए। आई अट्रैक्ट मनी, आई अट्रैक्ट लव। इतना अमेजिंग है ना आप भी समझने लग जाओ अगर कर्म के सिद्धांत को तो आपको मजा आने लगेगा जिंदगी में। हाय, वेलकम टू द यूएलसी द अल्टीमेट लाइफस्टाइल चेंज। मैं हूं प्रियंका द होस्ट एंड द प्रोड्यूसर ऑफ दिस पॉडकास्ट। आज के इस एपिसोड में हम उन गहरे सवालों पर
(02:15) बात करने वाले हैं जो अक्सर आप खुद से पूछते हैं। क्या सब कुछ पहले से लिखा हुआ है? तो फिर हमारे फ्री विल का क्या रोल है? हम हमारी मेहनत का क्या रोल है? क्या रिलेशनशिप सिर्फ कोइंसिडेंस है या फिर कोई कार्मिक पैटर्न है, कार्मिक पर्पस है? क्या हर रिश्ता हमारी लाइफ में कोई लेसन के लिए आता है, पेन के लिए आता है या फिर हमारी लाइफ को ब्लिसफुल एंगल देने के लिए आता है। ऐसे बहुत सारे यूनिवर्स के लॉ को समझेंगे। क्या है यह गहरे नियम? और इसको जानने के लिए आज हमारे साथ बहुत ही स्पेशल गेस्ट हैं जिनके साथ हमने पहले भी एक एपिसोड किया और उस एपिसोड को आपने बहुत
(02:50) प्यार दिया। हमारे जो आज के गेस्ट हैं, वह स्पिरिचुअल मेंटोर हैं, लाइफ कोच हैं। जिनको आप जानते हैं। ही इज़ अ फेमस फेस एंड यू लव देम। आपकी भारी डिमांड पे हमने उन्हें आज फिर से इनवाइट किया है और आपको जल्दी ही उनसे मिलवाते हैं। उससे पहले मैं आपको बोलना चाहूंगी कि आप आराम से बैठिए। इस एपिसोड को सुनिए अच्छे से समझिए ताकि यूनिवर्स के जो लॉज़ हैं, कुछ नियम है, जब हम इन्हें जान लेते हैं ना, तो हम अपनी लाइफ को ईज़ के साथ जीने लगते हैं। एक फ्लो आ जाता है लाइफ में। तो, हम कुछ भी करते हैं, उसमें हमें मजा आने लगता है। हमें अपना पर्पस समझ आने लगता है। तो, चलिए,
(03:23) समझते हैं यूनिवर्स के गहरे नियम क्या हैं? कर्मा को जानते हैं। लॉ ऑफ़ अट्रैक्शन को भी टच करेंगे और एक खास मेडिटेशन भी आज हमने गेस्ट से रिक्वेस्ट की है कि आपको कराएं ताकि आप प्रेजेंट को एंजॉय कर सकें। प्रेजेंट को जिए ओवरथिंकिंग से बाहर आए। तो चलिए स्वागत करते हैं आज के स्पेशल गेस्ट का। मिस्टर श्याम मुजावादिया जी। बहुत-बहुत स्वागत है। थैंक यू प्रियंका जी। थैंक यू सो मच। सो हैप्पी टू सी यू हियर। ऑलमोस्ट एक साल बाद आई थिंक हम ये एपिसोड। साल भर हो गया है। और लोगों के बहुत सारे कमेंट्स हैं कि [गला साफ़ करने की आवाज़] बुलाइए जल्दी
(03:53) बुलाइए। पार्ट टू कीजिए। बहुत टाइम बाद आपसे कर्मा वाले एपिसोड को वैसे भी लोग बहुत पसंद करते हैं। हां और उसमें आपने इतनी सरलता से समझाया है सब कुछ कि लोगों को बहुत अच्छा लगा। सबके कमेंट्स हैं कि हां मैं समझ पा रहा हूं ये रिलेटेबल है। ये मेरे साथ हुआ है और ये मैं अब समझ रहा हूं कि ये क्यों हुआ था मेरे साथ। इस तरह के कमेंट्स हैं बहुत सारे। वो कहते हैं ना कि जब आप पुराने पन्ने पलट कर देखेंगे तब आपको पता चलेगा कि जो हुआ वो होना कितना जरूरी था। हम मतलब जैसे आपने अनुभव किया होगा। है ना? मुझे तो नहीं पता आपकी लाइफ कैसी। ठीक है?
(04:25) बट आप रिलेट करेंगे इस बात से कि अगर पास्ट में आपके साथ कुछ बुरा भी हुआ, चाहे कितना ही बुरा हुआ तो आज आप यहां बैठ के जब आप उस चीज को एनालिसिस करते हैं ना तो आप थैंक यू गॉड का कि अगर वो नहीं होता तो आज मैं यहां नहीं होती। सही है ना? और ये हर इंसान रिलेट करता है। कि वो ना हुआ होता तो मैं यहां इस तरीके से ना हो। यहां यहां तक नहीं पहुंचते ना। बिल्कुल। तो वही है ना कि ईश्वर जो होता है वो हमको बहुत प्यार करता है। तो क्या होता है ना सीधे तरीके से इंसान नहीं जाता है कहीं पे भी। हम आज आप देखो जितने भी स्पिरिचुअल जो लोग हो
(04:59) रहे हैं आजकल तो अगर कोई बंदा ऐसा है जिसकी लाइफ बचपन से ही बहुत बेहतरीन है। तो जब तक उसकी लाइफ में कोई प्रॉब्लम नहीं आएगी ना तब तक तो भगवान की तरफ जाएगा ही नहीं। सही बात है। क्यों जाएगा? सही बात है। उसको तो एंजॉय करना है। क्लब जा रहा है, मस्ती कर रहा है, पार्टीज कर रहा है, दोस्तों के साथ। आपने देखा होगा ना कुछ लोग अचानक से बदल जाते हैं। हां। हां। है ना? तो वो एंजॉय कर रहा है। उसको भगवान से कोई मतलब नहीं है। जैसे उसकी लाइफ में कुछ ऐसी चीज होती है जो उसके हाथ से जो उसके बस से बाहर होती है जिसको वो ठीक नहीं कर सकता। पहले उसको
(05:27) लगता है कि मैं कुछ भी कर सकता हूं। राइट? मैं बहुत खतरनाक हूं। है ना? लेकिन जब उसको एक समय ये रियलाइज होता है कि यार मतलब ये प्रॉब्लम सॉर्ट आउट क्यों नहीं हो रही है? तो फिर मरता क्या ना करता? तो भगवान के तो फिर भगवान की याद आती है कि हे भगवान अब तू ही मालिक। राइट? और भगवान में आपके गुरु हो सकते हैं। अल्लाह अकबर जो भी आपके स्पिरिचुअल पावर है जो हायर पावर में आप बिलीव करते हैं। हां वो हायर पावर एक ही एनर्जी है। वो तो अब क्या होता है ना कि जो जहां पैदा हुआ जैसे मैं जहां पैदा हुआ तो वहां मैं ये देख रहा हूं कि बचपन से मेरे जो
(05:59) माता-पिता हैं वो क्या चीज फॉलो कर रहे हैं? तो अब मेरी सबकॉन्शियस की वैसे ही प्रोग्रामिंग हो जाएगी। तो अब ऊपर वाला ये थोड़ी कि तुम ये इनको पूज रहे हो। तुमको कम शक्ति मिलेगी। तुम उनको पूज रहे हो। मतलब ऊपर वाले का एक सिस्टम है। आप कर्म करोगे आपको उसका फल मिलेगा। चाहे आप राक्षस हो तो भी मिलेगा। हां वो तो हमने देखा ही है। हमारे जो टेक्स्ट है और हम सीरियल्स भी देखते हैं अगर माइथोलॉजी भी तो उसमें राक्षस को भी आके भगवान दे देते थे ना जो भी वो मांगते थे। उन्होंने वो कर्म किए तपस्या की तो मिलता था उन्हें भी। हां। जैसे भगवत गीता में लिखा ना कि
(06:32) कर्मण्य वास्ते मा फलेशु कदाचन। तू कर्म किए जाए या फल की चिंता मत कर। अब मान लो कोई इंसान पापी है, महापापी है तो वो भी कर्म करेगा तो उसको भी फल मिलेगा। क्योंकि यह नियम है। यह सिस्टम है। सिस्टम कैसे है? जैसे मान लो हमारा लैपटॉप है तो उसको मान लो मैं चला रहा हूं तो भी वैसा ही रिजल्ट देगा जो भी उसका रिजल्ट है ना। और अगर कोई दूसरा व्यक्ति कोई ऐसा जो पापी है वो चला रहा है तो ऐसा तो वो लैपटॉप मना कर देगा भैया तू पापी है मेरे पास मत आ। सिस्टम है। हां। हां तो वैसे ही हां जैसे अच्छा टेक्निकल जैसे होता है हां जैसे टेक्निकल होता है
(07:06) तो ये यूनिवर्स का लॉ भी यूनिवर्स का टेक्निकल हां पूरा भगवान ने एक सिस्टम बना रखा है बस जो उसको फॉलो करेगा वो बढ़िया चलता जाएगा जो फॉलो नहीं करेगा उसकी लाइफ में ब्लॉकेजेस आएंगे आपकी वीडियोस में मैंने कई बार सुना है आप बार-बार बोलते हो कि सब कुछ पहले से तय है। आप ये पॉडकास्ट भी देख रहे हैं तो ये भी आपके पास भेजा गया है। तभी आप कर्मा को समझने के लिए भी बैठे हो आज तो ये भी आपकी किस्मत में लिखा हुआ है। तो ये क्या कांसेप्ट है कि सब लिखा हुआ है। आराम से बैठिए। ड्रामा एंजॉय कीजिए। हां। टेक द बैक सीट एंड एंजॉय द ड्रामा।
(07:38) देखो क्या होता है कि जैसे अच्छा इन चीजों में भी क्या होता है ना आधा जैसे बोलते हैं ना अद जल गगरी झलकत जाए। जैसे मान लो क्या होता है हमने कोई मैंने कोई एक वीडियो बनाया जिसमें मैंने बताया कि भैया सब कुछ पहले से तय है। तो उस वीडियो में मैं बहुत लिमिटेड बता पाऊंगा। हम ज्यादा से ज्यादा 15 या 20 मिनट का वीडियो हो तो उसमें मैं उसी से रिलेटेड बात बताऊंगा। तो अब होता क्या है कि जैसे मैंने कई इस टाइप के वीडियो बनाए सब कुछ पहले से तय है तो इंसान सोचता है जब सब कुछ पहले से तय है तो फिर हम कर्म क्यों करें एग्जैक्टली उसको ये भी लगता है कि सब कुछ पहले से तय
(08:07) भगवान ने कर रखा है मतलब हम तो कठपुतली हैं हां ऐसा नहीं है तभी तो भगवान को गाली देते हैं जब कुछ बुरा होता है तो हां भगवान का इसमें कोई रोल ही नहीं है मतलब कि जैसे अभी हम जो बात कर रहे थे भगवान ने आपको इस संसार में भेजा तो भगवान आपको क्या सिखाते हैं कि कुछ भी आपका आपका नहीं है यहां पे। आपको यह सीखना है। हम आपको सरेंडर करना सीखना है। आपको माया को सीखना है। माया से दूर रहना है। तो लोगों को लगता है कि भगवान ने लिख दिया मेरी किस्मत में। एक बात बताओ भगवान ऐसा अन्याय करेंगे क्या कि जैसे ऐसे बैठे-बैठे थोड़ी लिख रहे हैं कि ऐसे पेन ले लिया। हां भैया
(08:44) चलो किसका नंबर है? बोले प्रियंका जी के हां क्या लिखें? बोले इनके लिख दो एक कार लिख दो। कौन सी लिखना है? बोले ऐसे थोड़ी होता है। Mercedes लिख दो। Mercedes लिख दो। हां। चलो अब किसका नंबर है? ने बोले श्याम जी है तो इनके ऐसा करो डिफेंडर लिख दो ऐसे नहीं होता है। उन्होंने एक सिस्टम बना दिया। भगवान ने ऐसे डिसाइड नहीं किया आपकी किस्मत। पहली बात तो भगवान को इन चीजों से कोई मतलब ही नहीं है। अच्छा ये डिफेंडर ने ये ने वो नहीं। ये तो सब यहां के लोगों ने हम वैसा बना लिया। जैसे हमने कहा था ना प्राइमरी। हां। तो प्राइमरी है। तो ऐसा बोलते हैं ना कि इसकी किस्मत बहुत
(09:15) अच्छी है। इसके ऊपर भगवान का हाथ है। इसको तो सब कुछ अच्छा अच्छा मिलता ही रहता है लाइफ में। दूसरा है आदमी है वो बहुत मेहनत कर रहा है। बहुत स्ट्रगल कर रहा है। अच्छा एक बात और उसके पास में कुछ भी अच्छा नहीं हो रहा है। एक बात बताओ जो इंसान भगवान का नाम नहीं ले रहा है क्या उसके पास पैसा नहीं आ रहा है? आ रहा है। हां एथिस्ट भी तो होते हैं। कई लोग ऐसे भी तो हैं हां जो जो कभी भगवान को मानते ही नहीं है। नहीं बिलीव करते हैं। बिल्कुल बिलीव नहीं करते हैं। और उन्होंने कभी भगवान का नाम नहीं लिया। वो तो रीच हैं। बहुत पैसा है उनके पास। हम तो इसका
(09:43) मतलब कर्मा सुप्रीम है। कर्मा कर्मा सुप्रीम है। जैसे वो बोलते हैं ना कि भगवान दुख नहीं देते हैं। कर्म दुख देते हैं। कर्म ही सुख देते हैं। कर्म कर्म ही सुख देते हैं। कर्म ही दुख देते हैं। अब सब कुछ पहले से तय है। इसको मैं डिकोड करता हूं अच्छे से। जी कि सब कुछ पहले से तय हमारे खुद के कर्म से है। हमारे मेरे खुद के कर्म से सब कुछ तय हो रहा है। आगे का तय हो रहा है। तो आज मैं जैसा कर्म करूंगा वैसा कल बन जाएगा। जैसी आज मैं फसल बोऊंगा वही तो मैं कल काटूंगा। आज गेहूं बोया तो कल मक्का थोड़ी काटूंगा। गेहूं बोया तो गेहूं काटूंगा। लेकिन लोग
(10:20) क्या करते हैं? बोते गेहूं हैं। पर सोचते हैं कि हमको यहां से जो है आम निकल जाए। आम निकल जाए। वैसा नहीं होता है। तो बोया पेड़ बबूल का तो आम कहां से आए? लेकिन लोग क्या कर रहे हैं? बो रहे हैं पेड़ बबूल का लेकिन उनको चाहिए आम। मतलब कि दे रहे हैं लोगों को दुख परेशानियां। लेकिन अपने जीवन में चाहते हैं सुख बढ़िया। तो वो कैसे होगा? तो हम सब कुछ तय करते हैं हमारे कर्म से। आज जैसे एक एग्जांपल लेता हूं कि मैं अ जैसे वो एक एक एग्जांपल हमने लिया था देरानी जेठानी वाला। है ना? वो अधूरा रह गया था। जेठानी जो है वो देरानी को परेशान
(10:58) कर रही है। है ना? परेशान करती जा रही है। स्की में लगा रही है। उसको रुला रही है और उसको मजा आ रहा है। अब वो अपने लिए क्या चाह रही है? मेरे लिए अच्छा हो। अब वही चीज उसके पास लौट के आएगी ना सेम टू सेम। ओके। कर्म का नियम यही है। आप जो दोगे वो आपके पास लौट के आएगा। जो दोगे वो लौट आएगा। बस सिंपल सा लॉजिक है। तो कर्म खराब या अच्छा नहीं होता है। जो आप दे रहे हैं वो लौट आएगा। जैसे अभी मैं प्रेम दे रहा हूं तो मेरे पास प्रेम लौट के आएगा। मैं नफरत दे रहा हूं। मेरे पास नफरत लौट के आएगी। मैं किसी का खा रहा हूं। कल मेरा कोई खा जाएगा। मैं
(11:28) किसी को कुछ दे रहा हूं। किसी की हेल्प कर रहा हूं। कल मेरी कोई हेल्प कर देगा। इसमें बुराई क्या है? एक बात बताओ। बढ़िया ही चीज बनाई ना भगवान ने। हां। तो रिश्ते नाते किस तरीके से बनते हैं? जैसे किसी की वाइफ बहुत अच्छी है। किसी की वाइफ अच्छी नहीं है। ये सब कर्म से ही किसी की मदद बहुत अच्छी है। किसी की मदद अच्छी नहीं है। तो इसको कैसे समझेंगे? आसान भाषा। हां। ये बताता हूं। ये सब कर्म से ही जोड़े जाते हैं लोग आपसे। ठीक है? आप किसी से मिलते नहीं हैं। मिलवाए जाते हैं। आपके कर्म के अकॉर्डिंग। जैसे आपके कर्म होंगे। जैसे मान लो आज फर्स्ट डे से
(11:54) शुरू करते हैं। आज सुबह मैं उठा है ना? इसके पहले मान लो मेरा जीरो बैलेंस है। इसको ऐसे समझते हैं ना। आज फर्स्ट डे है और आज मैं उठा और उठ के सबसे पहले जो है मैंने मान लो सेवा करी। गाय की सेवा कर दी। हम है ना? कुत्ते को बिस्किट डाल दिए। इसके अलावा मैंने कहीं मंदिर में जाके झाड़ू लगा दिया। है ना? मेरे घर में मान लो कुछ काम मैंने कर दिया। तो अब यह मैंने जो किया चार काम किए। तो इन चार कामों का फल बनेगा आगे। अब मेरे पास में रिटर्न आएगी चीजें। मैंने माता-पिता की सेवा करी तो मेरी सेवा के लिए कोई तैयार। हम है ना? मैंने मंदिर में सेवा करी तो मेरी
(12:31) सेवा के लिए कोई तैयार हो जाएगा। अच्छा। हां। मैंने गाय को चारा डाला तो मेरे पास कहीं से पैसा आएगा। कुत्ते को बिस्किट खिलाए तो वो चीज मेरे पास लौट के। आपको ये बेसिक समझना है तो आप जो देते हैं वो वापस आता है। तो इसलिए जो आपको चाहिए वो आप देना शुरू करो। हां चाहे आपको वो लव है, रिस्पेक्ट है। हां बस ये सिंपल है। अच्छा एक बताओ गिव एंड टेक होता है कि टेक एंड गिव होता है? गिव एंड टेक। हां। तो लोग गड़बड़ यही कर रहे हैं। पहले हमको मिले तो सही। पहले आपको देना पड़ेगा। फिर आपके पास में आएगा रिटर्न। आप अगर ये चाह रहे हैं कि पहले हमको तो
(13:01) कोई दे। हमको तो कोई दे नहीं रहा है। नहीं देगा कोई। आपको शुरू करना पड़ेगा। जैसे जैसे अक्सर हमारे यहां ऐसा होता है ना शादियांवादियां होती है तो उसमें जैसे साड़ियां वगैरह आती है हमारे भी जैसे घर में है तो तीन महिलाएं तो साड़ियां बिछा के बैठ जाती है तो अब जैसे क्या हुआ मैं मेरा खुद का बताता हूं एक दिन ऐसे ही बैठे लेके और बातचीत हो रही है कि देखो ये वहां से जो है ये ऐसी ऐसी साड़ी करी हम वहां से देखो ये इन्होंने ऐसी साड़ी करी ऐसी कोई करता है क्या अच्छी नहीं है तो मैं वहीं बैठा था तो मैंने उनसे एक सवाल किया मैंने कहा एक बात बताओ आपने आज
(13:35) तक जितनी करी है तो वो क्या मार्केट से बढ़िया लाके करी आप भी तो यह चिपका ही रहे हो ना इधर [हंसी] से तो घर वाले बोले कि बेटा सब ऐसा ही करते हैं। मैंने कहा बस यही तो गड़बड़ है। सुधार मतलब अगर आपको अच्छी चाहिए आप ये एक्सपेक्ट कर रहे हो कि भाई कोई मेरे जो मेहमान कोई भी है रिश्तेदार मेरे जो साड़ी करे है ना या लिफाफे में पैसा रखे तो ₹500 रखे। जैसे कई बार ऐसा होता है ना हमारा कोई प्रोग्राम होता है तो हम लिफाफे खोलने बैठते हैं तो उसमें से देखो ये ₹50 करे इन्होंने ये देखो इन्होंने ₹100 करे हम तो एक काम करो आप आज आप शुरू करो आपको
(14:14) ₹1000 चाहिए तो शुरुआत आपको करनी पड़ेगी आप कहीं प्रोग्राम में जाओ किसी के तो उसको ₹1000 लिफाफे में रख के दो हां और ये तो बड़ा कॉमन है कि वापस वही आता है हां और ये मैंने मेरे घर वालों को बताया हां है ना मैंने कहा कि देखो ऐसा है कि आपको शुरुआत करनी पड़ेगी गिव एंड टेक होता है टेक एंड गिव नहीं होता है मैंने मैंने कहा आप एक काम करो कल से जब भी आपको साड़ी देना हो तो ये चिपकाना मत इधर की उधर उधर की इधर अच्छी सी मार्केट जाओ है ना बढ़िया लेके आओ और उसको दो और फिर देखो अगर आपके बढ़िया नहीं आने लग जाए और ये चीज करी हम है ना जब भी किसी के कुछ देने आता है तो
(14:45) मैंने कहा अच्छी चीज दो क्योंकि आप भी एक्सपेक्ट करते हो बिल्कुल बड़ा बेसिक एग्जांपल आप दे रहे हैं लेकिन ये बड़ा काम का है आपकी लाइफ को समझने के लिए कि ये यहां से लेके वहां तक अप्लाई कर सकते हैं आप किसी भी तरीके के लेवल पे मैं तो इस चीज को इतनी बढ़िया मानता हूं ये जो भगवान ने बनाया ना कर्म का सिद्धांत जो बनाया इतना बढ़िया है कि आप अरबपति बन सकते हैं। हम जैसे मेरा कोई दोस्त का बर्थडे है। हां और मैंने उसको एक शर्ट दी ₹1000 की। अब वो शर्ट मेरे पास लौट के आएगी। ₹2000 की आएगी मेरे पास। तो कितना बढ़िया है। पर लोगों के साथ हो क्या रहा है? देना है खराब और
(15:19) चाहिए बढ़िया। जैसे इसको एक और उदाहरण से समझते हैं। मान लो आपकी बेटी है। ठीक है? आपकी बेटी की शादी हो गई। अब आपने आपकी बेटी को फोन लगाया। हां बेटा क्या कर रहे हो? बोले सब बढ़िया। और जमाई साहब कहां है? बोले जमाई साहब तो किचन में खाना बना रहे हैं। अच्छा खाना बना रहे हैं। अरे वाह बढ़िया बढ़िया। चलो ये बात सुन के आपको कैसा लगेगा? आप बताओ। अच्छा लगेगा। अच्छा लगेगा ना? आपका मन खुश हो गया। अरे वाह और हमको तो जो है हां हमारा जो बेटा तो हमारा जो जमाई है वो तो राजकुमार है। बहुत बढ़िया जमाई मिला। अब आपके पास में कोई आपका पड़ोसी आएगा। बोले हमारे तो जमाई
(15:51) साहब खाना बना रहे थे। नहीं बेटी आराम से बैठी थी। बहुत बढ़िया आदमी है। और भगवान ने कितना बढ़िया करा। और इतनी देर में क्या हुआ कि खुद का बेटा जो है जैसे वाइफ अब खुद का भी बेटा है बेटा है और वाइफ है तो वाइफ का खाना बना रही है तो बेटे ने सोचा कि थोड़ी सी मैं मदद करवा देता हूं कुछ नहीं तो मैं थाली ला के बाहर जमा देता हूं इतनी देर में मम्मी ने देखा गुलाब मुंह भूल गया अब आप देखो यहां पे कांसेप्ट समझो अब ये अब आपका लड़का क्या हो गया जोरू का गुलाम क्या जरूरत थी था ये रखने की वही रख देती हो रहा है ना आप सेम चीज है वहां पे आप
(16:27) इतने खुश हुए वाह भगवान और यहां आप दुखी हो रहे हैं जब आपका बच्चा ये कर रहा है हां वही जब देने की बारी आई तो आप दुखी हो रहे हैं जब अपने यहां भी दूसरे की बेटी है ना हम उसको देना पड़ेगा ना इज्जत देनी पड़ेगी सम्मान तो वहां प्रॉब्लम आ रही है पर आप ये एक्सपेक्ट कर रहे हैं कि मेरी बेटी को खूब प्यार मिले और वो महल मतलब रानी के जैसी रहे पर यहां आप उसको सब काम करना है भैया और अगर उसने कभी कह दिया है कि थोड़ा सा आज सर दर्द कर रहा है मतलब हमारे हमारे यहां ऐसा होता है ना कि जैसे बहुएं हैं उनका सर दर्द हो रहा है तो वो बोल नहीं सकती घर में कि सर दर्द हो
(17:01) रहा है क्योंकि उनको पता है कि बोलूंगी तो बोलेंगे कि नाटक कर रही है हम बहुत सारे घर हैं अभी भी ऐसे हां बिल्कुल तो आप इस कांसेप्ट से समझो आपकी बेटी के लिए आप क्या चाह रहे हो सब बढ़िया हो इधर किसी दूसरे की बेटी है और वो उसको अगर थोड़ा सा सुख मान लो हम जैसे आपका ही बेटा है और बाजार से वो मतलब उसकी पत्नी को पसंद है आपकी बहू को पसंद है जलेबी वो बेटा उधर से आया। बोले यार चलो उसके जलेबी लेके चलता हूं। वो जलेबी लेके आ गया। वो घर वालों ने देखा हम जलेबी लेके आया बड़ा। आप समझो ना आप खुद कंफ्यूज हो। बिल्कुल बिल्कुल बिल्कुल। और ये बहुत
(17:37) छोटी-छोटी चीजें ही कर्म क्रिएट कर रही है। ये भी कर्म क्रिएट कर रही हैं। बड़ी-बड़ी चीजें तो कर ही रही है। और ये ये चीज जिसने बैठ के इस चीज को समझ ली कि यार उधर मेरा कोई इंसान परेशान है तो क्या कुछ मैं ऐसा कर रहा हूं क्या? हम करते भी जा रहे हैं लोग। अपने ही घर में लोग लोगों को दुखी कर रहे हैं और वही चीज उधर अपने ऊपर आ रही है पर रिलेट नहीं कर पा रहे हैं। अच्छा तो कैसे जैसे किसी को धोखा मिला जिंदगी में गर्लफ्रेंड ने छोड़ दिया तो उसने क्या किया होगा ऐसा? हां इसको इसको ऐसे समझाता हूं। जैसे मान लो मेरे पिताजी ने कहा कि मैं रात को घर
(18:10) से कहीं दोस्त के साथ जा रहा हूं। है ना? हम तो मैंने कहा बाबा मैं दोस्त के वहां पे जा रहा हूं। बेटा यार अभी 10:30 बज रही है। अभी कहां जा रहा है? अभी इतना लेट हो गया रहने दे। अरे यार बाबा मैं जाऊंगा। अब मैं बड़ा हो गया हूं। अब मैं मेरी मर्जी का करूंगा। यह वो आप कहीं नहीं जाने देते हो। यू करते हो। बाइक निकाल के चला गया। अब एक कर्म क्रिएट हुआ। आपके पिताजी अब आप खुद सोचो जैसे मेरे पिताजी ने मेरे को मना किया बेटा इतनी लेट हो गई मत जा। मैंने कहा अरे बाबा मैं तो जा रहा हूं और मैं चला गया। तो क्या मेरे पिताजी मेरे पिताजी
(18:37) के क्या एहसास होंगे उस टाइम पे? दुखी होंगे ना वो कि यार देखो मतलब मैं तो इसके अच्छे के लिए ही कह रहा था ना। पता नहीं किसके साथ जाएगा। वो सो पाएंगे क्या? जब तक वो बच्चा घर नहीं आएगा वो सो जाएंगे। नहीं सोएंगे। वो नहीं सो पाएंगे। हम बच्चों को क्या लग रहा है कि मेरे को फ्री आजादी नहीं दे रहे हैं। मेरे को इन्होंने जो है मतलब अभी तक बच्चा ही समझ रखा है। यह कर रखा है। अब ये तो बात उसको तब पता चलेगी जब वो खुद पिता बनेगा तब समझ में आएगा ना। अभी थोड़ी समझ में आएगा। जब उसका बच्चा बोलेगा ना पापा मैं जा रहा हूं घर से बाहर। तब उसको अपने पिताजी की
(19:07) याद आएगी कि अच्छा तब याद आएगी उसको। तो अब उसके पिताजी अब एक कर्म बना। पिताजी दुखी हो रहे हैं कि मतलब बेचैन हो रहे हैं। परेशान हो रहे हैं। कब आएगा? कब आएगा? बार-बार बाहर देख रहे हैं। फ़ लगा रहे हैं। हम अब पिताजी ने फोन लगाया। हां बेटा कितनी देर? अरे यार पापा आ रहा हूं यार। क्या आप बार-बार फ़ लगाते रहते हो यार। है ना? अब वहां वो बच्चा कनेक्ट नहीं कर पा रहा है। अब होगा क्या उसके साथ? ये कर्म बना। हां। अब ऐसा हुआ कि वो उसकी गर्लफ्रेंड से वो प्यार करता है बहुत। है ना? अब [नाक से की जाने वाली आवाज़] उसकी गर्लफ्रेंड का कॉल आया।
(19:39) अच्छा। कि मैं मेरी फ्रेंड के साथ में जा रही हूं। पार्टी में किसकी पार्टी में जा रही हूं?" बोले है फ्रेंड्स की पार्टी है। मत जाओ। आप तुम कौन होते हो? मैं मत जाओ। मेरी लाइफ है जाऊंगी मैं। चली गई। अब वही बेचैनी जो पिताजी उधर झेल रहे थे वो बेचैनी आपके पास आ गई। आपको आएगा। पर आप रिलेट नहीं कर पा रहे हो कि ये चीज मैं देके आया। मतलब मैं जो आपको दूंगा वो ऐसा थोड़ी है कि मुझे आपसे ही रिटर्न मिलेगा। वो मुझे कहीं और से मिलेगा पर मिलेगा। हां। ये इंपॉर्टेंट पार्ट है करना। हमें लगता है जहां पे हमने प्यार दिया वो हमें क्यों नहीं दे रहा। इसको हमने मदद
(20:13) की। ये हमें मदद क्यों नहीं कर रहा? जो दिया वो लौट आएगा पर सेम जगह से आएगा ये नहीं होता है। हां तो अब आपने देखो एक कर्म आपसे बना कि आपके पिताजी बेचैन पर क्योंकि वो आपसे प्यार करते थे मुझे मेरे भी जैसे मेरे पिताजी मेरे को पहले रोकते टोकते थे। है ना ये बेटा नहीं जाना वहां ये रहने दे अभी तो मैं पहले सोचता था हम कि यार ये मेरे को ये नहीं करने दे। अब धीरे-धीरे जब मेरी चीजें समझ में आई अब जैसे आज जैसे मेरे पिताजी ने कह दिया कि मत जा तो नहीं जाता हूं मैं क्योंकि मेरे को पता है कि जिससे मैं प्यार करता हूं और कल को अगर उसने मुझे कहा कि भाई ये करना
(20:45) है और मेरा मन नहीं है वो करने का ओके है ना मैं मैं मैं इस चीज से मैं रिलेट कर पा रही हूं क्योंकि मैंने ना कहीं पढ़ा भी था कि कर्म का जो आपको रिटर्न मिलता है वो मानसिक लेवल पे ज्यादा मिलता है आपको इमोशनली जो आपको फील होता है वो असली जो मतलब हिसाब किताब होता है वो इमोशनल लेवल पे होता है हां हां हां हां हां हां हां हां हां हां हां हां हां हां हां हां हां हां हां हां हां हां उस पेन को जब आप फील करते हो तब सेटल होता है कर्मा। ये सच है? हां सच है ना? ये जैसे एक बात बताओ अगर कोई आदमी आधे घंटे के लिए परेशान है हम तो दुखी तो हो रहा है ना वो विचारों से
(21:14) दुखी हो रहा है। तो ये कर्म का ही फल है किसी ना किसी मतलब सफरिंग के लेवल पे आता है वो चीज। पेन हर इंसान जो है ना वो केवल मानसिक रूप से ही भोग रहा है चीजों को। वास्तविकता में कोई चीज एक्सिस्ट कर ही नहीं रही। हां वो केवल इमेजिनेशन का जो लेवल हैव वो मानसिक वो मानसिक ही होता है। हां मतलब कुछ नहीं बैठा है और दुखी है और पर जैसे एक बात बताओ आपका किसी ने मजाक उड़ाया उसने मुंह से बोला कोई भी चीज का मजाक उड़ाया उसको मुझे लगता है कि एक मिनट लगा होगा एक 10 सेकंड लगे होंगे। उसने क्या कहा आपको? कि ये साड़ी तो मैंने Meesho पे देखी थी और यूं करके वो निकल
(21:45) गया। कितनी देर लगी उसको बोलने में? 2 सेकंड। आप कितने दिन तक परेशान हो? 2 महीने तक। कि ये तो महंगी साड़ी है। मैंने तो महंगी मंगाई थी। उसकी इतनी हिम्मत कैसे हुई? उसने समझ क्या रखा है? है ना? ये तो mnta की है। [हंसी] अब आप वो बोल के चला गया और वो तो फ्री है। राइट? आप परेशान हो रहे हो। हां मानसिक लेवल पे ही मिलता है। कार महंगे तो डेफिनेटली। ये पता है क्या हुआ? उसको निमित्त बनाया। हम आपको किसी कर्म का फल मिलना था कि आपको दो घंटे परेशान होना था। राइट? तो प्रकृति ने उसको निमित्त बनाया। हम कोई भी इंसान अपनी मर्जी से एक शब्द भी
(22:20) नहीं बोल सकता। ये जो मैं बोल रहा हूं ये जो आप बोल रहे हैं ये जो हम कर रहे हैं ये हम अपनी मर्जी से नहीं कर रहे हैं। ये हो रहा है। ये हमारे जो कर्मा है ना उन कर्मा का प्रारब्ध है कि हम ये चीजें कर रहे हैं। उसकी वजह से हो पा रहा है। नहीं तो कई लोग ऐसे हैं जो ये चीज करना चाह रहे हैं पर उनका बस ही नहीं चल रहा है। कैसे करें? समझ ही नहीं आ रहा है। अब जब योग बनेंगे तो अपने आप होगा। उनको ऐसा लग रहा है कि एक काम करता हूं मैं कड़ी मेहनत करता हूं। कड़ी मेहनत से हो जाएगा। प्रारब्ध से होगा। तो जो सुन रहे हैं ये भी कहीं बना
(22:50) योग बना है। इनका प्रारब्ध है। जैसे ये पडकास्ट है तो ये ऐसा थोड़ी हर किसी के पास पहुंच जाएगा। ये जिसके नसीब में होगा उसके पास जाएगा। उसकी लाइफ में चीजें ठीक होनी होगी। जैसे मान लो हमने आज एक एग्जांपल दिया कि पिताजी के साथ में ऐसा किया और वही चीज पत्नी से मिल गई। और किसी के साथ ये हो रहा होगा। तो उसने तुरंत रिलेट किया हां यार बात तो सही है। मैंने आज तक मेरे पिताजी की बात नहीं मानी और आज मेरी पत्नी मेरी बात नहीं मान रही है। लास्ट पडकास्ट में बहुत सारे ऐसे कमेंट्स हैं जिसमें लोगों ने लिखा है कि आपका पॉडकास्ट देखने के बाद आपकी बात समझने के
(23:20) बाद मैंने अपनी वाइफ की रिस्पेक्ट करना शुरू कर दी है। मैंने अपने पेरेंट्स की रिस्पेक्ट करना शुरू कर दिया है। क्योंकि मैं ये बात समझ पा रहा हूं कि मैं जो भी किसी को पीड़ा दे रहा हूं किसी तरीके की गलत शब्दों से या फिजिकली तो वो वापस आ रहा है मेरे पास। वो कहां से आ रहा है? उसके बस बॉस के थ्रू। हां। वह अपनी वाइफ से बदतमीजी कर रहा है। पर उसका बॉस उसके साथ ऑफिस में बदतमीजी कर रहा है। और जिनको यह कांसेप्ट नहीं पता है उनके साथ पता है क्या हो रहा है? घर पे वाइफ से बदतमीजी करी। नहीं ऑफिस गए। ऑफिस में बॉस ने कुछ कहा। अब करंट लगा। वो सब आके वाइफ
(23:49) पे निकाल दिया। ठीक है। अब वाइफ पे निकाला तो नया कर्म बनाया। अब कल बॉस उसको 2x करेगा। हां। अब आपको ये समझ नहीं आ रहा है। आप उसको रिलेट नहीं कर पा रहे हो। ये जो मैं वाइफ को देके आया ना वो फिर से आ रहा है उधर से। राइट? दिस इज द मोस्ट। आई थिंक ये सबसे इंपॉर्टेंट पॉइंट है कि कर्मा का जो रिटर्न आता है ना वो सेम इंसान से नहीं आता। तो इससे आपको बहुत सेटिस्फेक्शन मिलेगी लाइफ में। आपको समझ आने लगेगी चीज़। मैं तो चीजें रिलेट करता हूं। हां। मैं रिलेट कर कर पाता हूं। मैं मैं ये चीज़ समझ रहा हूं। मैंने कहा ना ये चीज़ बहुत बेहतरीन है। कर्मा लोगों ने कर्मा को गलत
(24:20) समझ लिया। कर्मा गलत नहीं है। इससे तो आप मैं कह रहा हूं ना कि जो चाहो वो हासिल कर सकते हो। आप दो ना। हां। आपके पास जब समझाया था लास्ट टाइम तो मैंने ना उसके बाद मैं अपनी मम्मी से बात कर रही थी फोन पे। तो उनका किसी ने नुकसान कर दिया था। कुछ 20,000 खा गया था। [हंसी] तो मैंने मम्मी को बोला अरे मम्मी कोई बात नहीं आपका तो वो बिज़नेस चल रहा है। वहां से आ जाएगा रिटर्न। तो मम्मी कह रही ये कोई बात हुई उसने खाया ना मेरा पैसा तो वो मम्मी अपना कुछ-कुछ बोल रही थी उसको कि ये हो जाए वो हो जाए। मैंने कहा मम्मी वो दूसरी शॉप का है। वहां से जुगाड़ है। वहां
(24:47) से देखना डबल आएगा। तो फिर वो आया भी एक्चुअली। तो मेरी मम्मी ने कहा तू इतनी बड़ी कैसे हो गई? मतलब मम्मी को मैं समझा रही हूं कि मम्मा ये पैसे आपके तो आ ही जाएंगे ना। आपको कोई नुकसान नहीं हुआ। तो इतना अमेजिंग है ना। आप भी समझने लग जाओ अगर कर्म के सिद्धांत को तो आपको मजा आने लगेगा जिंदगी में कोई नुकसान नुकसान नहीं लगेगा और प्रॉफिट जो है उसकी खुशी तो है ही उसको भी आपको समझ आ जाएगा कि कितने लेवल तक खुश भी होना है बहुत ज्यादा खुश होने से भी फिर दुख को भी तो आप ज्यादा ही महसूस करते अच्छा मैंने प्रैक्टिकल करके भी देखा है
(25:15) इन चीजों का जैसे मैंने आपको बता रहा था मैं साड़ी वाला मैंने मेरे घर पे मम्मी को बोला मैंने कहा एक काम करो एक शुरुआत करो आज से हम अगर किसी को कुछ भी देंगे गिफ्ट्स है ना तो जैसा हम एक्सपेक्ट करते हैं ना वो वाला उसको देंगे जैसे हम उससे एक्सपेक्ट करते हैं कि भाई ₹500 तक की तो साड़ी आए कम से कम आप 500 की लाओ बाजार से और उसको दो और अगर फिर नहीं आए वहां से या कहीं से भले वहां से नहीं आएगी और कहीं से आ जाएगी प्रकृति आप मैं कह रहा हूं आप प्रैक्टिकल करके देखो करके देखो आप लोग भी करके देखो है ना तो अभी जैसे मान लो हमारे जो बुआ जी
(25:47) आए हां घर पे ठीक है तो अब वैसे आते हैं तो कहीं से आई हुई है दूसरे से तो वो उनको चिपका दी हां मैंने कहा इस बार चिपकाना नहीं है है ना मेरा तो मन करता है मैं तो दे दूं। मेरा तो ऐसा रहता है अंदर से कि खूब लुटा दूं। ठीक है? क्योंकि मेरे को तो पता है कि जो मैं देता हूं वो लौट के आता है। लौट के आएगा। चाहे वो समझ में आ गया ना अपने हैक समझ के? हां। पर ये सब लोग नहीं समझ पाते। उनको ऐसे ये ऐसा कहां से हो जाएगा? ऐसे कैसे दे दे? ऐसे कैसे दे दे भाई? ओ उन्होंने हमको क्या दिया? और मैंने कहा ना पहले आप दोगे तो आएगा। तो अभी जैसे बुआ जी आए थे तो मैं
(26:16) उनको मार्केट ले गया। हम मार्केट जाके उनको बढ़िया सी साड़ीवाड़ी दिलाई। है ना? ₹1000 1500 तक की साड़ी दिलाई। तो उन्होंने जो है वो मतलब वो खुश हो गए। और कई लोगों को बताया देखो वहां से यह मेरे भाई की वहां से आई और यह और यह है ना तो अब मेरे फिर उसके बाद में पता है क्या हुआ मुझे गिफ्ट्स आने लग गए हम अभी हमारा एक प्रोग्राम था अब उसमें इतने गिफ्ट्स आए कि घर वालों मतलब हमने ये चीज देनी शुरू करी आप अच्छा दो कहीं किसी के यहां प्रोग्राम में जा रहे हो ना तो लिफाफे में ₹200 रखो ₹100 मत रखो ₹500 रखो जैसा आपको लगता है हां जो आपके कल्चर में है जो
(26:54) आप एक काम करो ₹10 अलग निकालो ठीक है? और इससे यह वाला प्रैक्टिकल करके देखो। समझ रहे हो? देने का प्रैक्टिकल। हां कि यार चलो एक काम करता हूं। मैं देना शुरू करता हूं। और वो ₹10,000 आपके पास खत्म होंगे ना तब तक तो एक का रिजल्ट आ जाएगा आपके पास। और आप शॉक्ड हो जाएंगे कि यार ये तो इस आदमी से तो कभी मैंने उम्मीद नहीं लगाई थी। ये इसके क्या हो गया? कर्म बुद्धि में बैठता है। अच्छा। कर्म चीजें ठीक कैसे होती है? जैसे लोग बोलते हैं कि अच्छे कर्म करने से क्या ठीक हो जाएगा? मेरी जो सासू मां है, मेरी जो सासू मां है, वो तो ऐसी है। उसकी बुद्धि
(27:25) बदल जाएगी। हम आप जब अच्छे कर्म करने लग जाओगे ना जब आप लोगों को सुख देने लग जाओगे आपको सासू मां से सुख चाहिए ना तो कोई लोग ऐसे होंगे आप उनको चुनो मतलब देखो कि कौन ऐसे लोग हैं जो आपसे सुख की उम्मीद रख रहे हैं। ओके आप उनको देना शुरू कर दो तो आपके रिश्ते सुधरने लगेंगे हम्म जैसे जैसे आप जेठानी हो और एक आपकी देरानी है और एक आपकी सासू मां है। सासू मां [गला साफ़ करने की आवाज़] आपसे ठीक बात नहीं करती। तो आप इधर देखेंगे कि कोई ऐसा इंसान होगा आपकी लाइफ में जो आपसे मतलब उम्मीद करता होगा लेकिन आप उससे ठीक बात नहीं कर रहे होंगे। हम
(27:56) जैसे मान लो आपकी देरानी है लेकिन आप उसको ऐसी बात करते हो वही चीज आपको सासू मां से लौट के आ रही है। आप बैठ के ऐसे कॉपी पेन लो अपनी लाइफ का और कनेक्ट करो कि यार जैसे ये जो चीज मेरे पास आ रही है ये मैं किसको दे रहा हूं। हम तो आप पाएंगे मैं किसी न किसी को तो दे रहा हूं। जैसे आपकी गर्लफ्रेंड आपकी बात नहीं मान रही है। आपकी पत्नी आपकी बात नहीं मान रही। आपने आपकी पत्नी को कहा कि भई अभी जो है फ्रेंड्स के साथ मत जा। उसने बोला मैं तो जाऊंगी। मेरी लाइफ है। मैं क्या यहां खाना बनाने के लिए आई क्या? मैं क्या आया बस तुम्हारा काम करने के लिए आई
(28:25) क्या? तो आप कॉपी पेन लेके बैठो कि यार यह वाली चीज मैंने किसको दी? किसको दे रहा हूं मैं अभी? तो आपको पता चलेगा कि यार मैंने मम्मी से कल बड़ी गंदी बात करी थी। मम्मी ने बोला था कि बेटा पानी का गिलास पिला दे। तो आपने वहां बोला था कि अरे यार मैं खुद उठ के पी लो यार। मेरे को काम है अभी बहुत सारा। मैं जा रहा हूं। आपको चीज पकड़ में आ जाएगी कि यार ये मैं कहीं ना कहीं तो दे रहा हूं जो मुझे वाइफ से लौट के आ रही है। ओके। अब वहां पे होता क्या है ना इंसान ऐसे देखता है यार मैं तो मेरी वाइफ को इतना प्यार कर रहा हूं। लेकिन मेरी वाइफ मेरे
(28:52) साथ ऐसा क्यों? यह मुझे प्यार क्यों नहीं करती? राइट? आप समझ नहीं पा रहे हैं। आप किसी को कोई है ऐसा आपकी लाइफ में जो आपसे एक्सपेक्ट कर रहा है कि यह मेरे को क्या हो रहा है? हो सकता है आपका छोटा भाई हो और वो एक्सपेक्ट करता हो कि यार मेरा बड़ा भाई मेरे से प्यार करे लेकिन आप उसको कुछ समझ ही नहीं रहे हो। आप उसको डांट रहे हो। तो वही चीज आपको या तो आपके पिताजी से मिल जाएगी, आपकी वाइफ से मिल जाएगी, आपके बॉस से मिल जाएगी। हां। मतलब बहुत ही इजी तरीका है ये। अगर आप समझे कर्मा को आई थिंक इससे इजी तरीके से समझाना और किसी पडकास्ट में आपने शायद ही
(29:20) सुना हो। इतना डिकोड करके इतना तोड़ के आपने जो समझाया है ना बहुत ईजी तरीके से समझ रहे हैं। हां मेरा एक दोस्त क्लासमेट था तो मतलब क्लासमेट है तो हम मतलब एट तक साथ में पढ़े हम तो एक दिन मैंने ऐसे ही Facebook पे देखा उसका बर्थडे था तो मेरे मन में आया कि चलो इसको गिफ्ट भेजते हैं। अब गांव में ये बर्थडे तो हम यहां पे मनाते हैं सिटीज में गांव में ऐसा कुछ होता नहीं है। तो मैं मार्केट गया और उसके लिए एक अच्छा सा टीशर्ट खरीदा है ना? और गांव की बस में रखवा दिया। मैंने कहा यह उसको दे देना और वहां से उस तक पहुंचा दिया। तो जैसे उसको मिला उसने
(29:55) देखा यार कहां से आया? मैंने उसमें लिखा नहीं कि कहां से आया? तो वो समझ गया कि किसने भेजा होगा। ठीक है। उसने मेरे को फोन लगाया कि भाई ये तेने भेजा। मैंने कहा हां कैसा लगा? बोले बढ़िया लगा। क्या बात है? मैंने कहा कुछ नहीं। वैसे ऐसे ही उसको बड़ा अच्छा अंदर से बहुत अच्छा फील हुआ। फीलिंग नाइस। कुछ दिनों बाद किसी ने मेरे को शर्ट भेज दिया। है ना? बिल्कुल। किसी से मैं मेरे पास गिफ्ट आ गया और ऐसे ही भेज दिया। बोले सर कुछ नहीं हम आपकी वीडियो देखते हैं। आपको शर्ट का बड़ा शौक है। तो हमने सोचा कि आपको भेज देते हैं। तो ऐसीऐसी चीजें मेरे साथ हुई
(30:29) कि मैं जो चीज दे रहा हूं वो दो गुना हो कि अनएक्सेक्टेड खुशियां भी देंगे वो आपको भी अनएक्सेक्टेड खुशियां मिलेंगी। हां। और अभी जब से मैंने ये चीजें शुरू करी जब से मैं समझा हम और जब से मैंने देना शुरू किया तो मेरे मेरे आज कभी कोई गिफ्ट भेज देता है कभी कोई भेज देता है कभी कोई भेज देता है और घर वाले शॉक्ड हो जाते हैं घर वालों को लगता है कि यार ये कोई भेज रहा है कि ये हमको बेवकूफ बना [हंसी] क्योंकि घर वालों को ये भी रहता है कहीं ऐसा तो नहीं कि ये मंगवा रहा है और नाम दूसरे का ला रहा है पर खुद जब लोग घर आते हैं लेके हम
(30:57) घर लोगों के लेके आते हैं मिठाई लेके आ रहे हैं कपड़े लेके आ रहे हैं ये लेके आ रहे हैं तो मैं घर वालों को बैठ के मैं बोलता हूं कि एक बात बताओ ऐसा कोई है आपकी नजर में जिसके इतने सारे गिफ्ट्स आ रहे हैं। हम क्यों नहीं है? क्योंकि वो दे नहीं पा रहे हैं। बिल्कुल बिल्कुल कौन दे पाता है बताओ? चाहिए सबको। तो देना शुरू करना पड़ेगा मतलब आपको। बस एक एक चीज और मुझे आपसे जाननी है कि जैसे बोला जाता है कि आप जिस चीज के पीछे भागेंगे वो आपसे और दूर जाती जाती है। तो ये क्या कांसेप्ट है? देखो जैसे आपने बचपन में मूवीज देखी होगी कि उसमें ऐसा होता है कि एक लड़का होता है
(31:35) गांव का लड़का होता है। वो शहर में आता है कॉलेज में पढ़ने के लिए। वहां पे एक लड़की होती है जो कि बड़े रईस रईस की लड़की होती है। अब वो लड़का जो है कहीं ना कहीं उसके सामने देखता है बार-बार। तो उस लड़की को पता चलता है तो उसको बोलती है कि भ आज तेरे को पता नहीं है मैं कौन हूं। ठीक है? हम और आज के बाद मेरे सामने देख ना मैं तेरे हाथ पैर तुड़वा दूंगी। तो अब वो लड़का उसका पीछा कर रहा था। एक दिन दो दिन और रोज उसको देख रही थी। अब एक दिन क्या हुआ कि उस लड़के ने सोचा अब नहीं देखना है इसके सामने। अब वो कॉलेज में आया सामने देख रहा है।
(32:09) इग्नोर कर रहा है। इग्नोर कर रहा है उसको। उस लड़की ने देखा आज ये देख नहीं रहा है यार मेरे सामने। क्या बात है? अब अब वो परेशान होने लग गई। जबकि कल ही वो कह रही थी कि तेरे हाथ पैर तुड़वा दूंगी। हां। समझ रहे हो आप? मतलब जब तक आप उस चीज के पीछे भाग रहे थे तो वो आगे आगे भाग रही हम और जैसे ही आज आपने भागना बंद कर दिया आपने सरेंडर कर दिया नहीं देखना इसके सामने अब वो आपके पीछे भागेगी अब वो उसकी सहेली को भेजगी पूछना है क्या हुआ है कल की बात से नाराज तो नहीं हो गया मेरे से बात क्यों नहीं कर रहा है तो ये नियम काम करता है कि जिस चीज के लिए आप परेशान है
(32:40) ना [गला साफ़ करने की आवाज़] तो आप नेगेटिव एनर्जी दे रहे हैं तो वो चीज आपको नहीं मिलेगी वो आपसे आगे आगे भागेगी और जहां आपने सरेंडर कर दिया आप फिर जैसे वो मेडिटेशन करते हैं ना बैठ गए शांति मिल गई भाग रहे हैं मैं मैं कैसे अपने आप को हील करूं मेरे बहुत थॉट आ रहे मैं क्या करूं? मैं पागल हो जाऊंगा। कुछ नहीं होगा। और जैसे आप बैठे शांति से सब ठीक हो जाएगा। तो इसको बोलते हैं सरेंडर। मतलब जब हम डेस्पिरेट होके कुछ बात को सोचते हैं या मांगते हैं तो वो नेगेटिव एनर्जी क्रिएट करता है। देखो यहां पे वो नहीं मिलता आपको जो आप चाहते हैं। यहां पे आपको वो मिलता है जो
(33:11) आपके नसीब में होता है। तो पहले आपको अपना नसीब खुद बनाना पड़ेगा। यह पेन आपके हाथ में है और ये डायरी आपके हाथ में है। लिखो लिखना शुरू करो अपने नसीब को। भगवान नहीं लिख रहे हैं। जो सब कुछ पहले से तय है वो आप पे ही लिख के आए हैं। आपने लिख दिया। जब लोग बुरे कर्म करते हैं ना तो उनको बोलो कभी कि अरे यार ये बुरा कर्म है मत कर। अरे कुछ नहीं होता है। भगवान ने ये बनाया ही क्यों? हम भगवान ने नियम भी बनाए हैं। क्या चीज आपको करनी है और क्या नहीं करनी है। और सबको पता है। जब आप कोई भी कर्म करने जाते हैं तो आपको पता नहीं लगता उस समय कि ये जो
(33:44) मैं कर रही हूं ये गलत है। लगता है ना आपके अंदर वो भगवान ने फिट कर रखा है। हां डीप डाउन आपको पता होता है। है ना? तो जब आप कर रहे होते हैं तब आपको पता होता है लेकिन आप उस चीज को इग्नोर कर रहे होते हैं उस समय क्योंकि आपके ऊपर वो चीज हावी होती है वासना या उसकी लालसा पाने की इच्छा वो हावी होती है तो वो वो कहती है कि आप जैसे आपने देखा होगा दो लोग बात करते हैं आप आपका दिमाग और आप अकेले जा रहे हैं बातें करते जा रहे हैं किससे बात कर रहे हो आप हम है ना तो वो कहती है अरे कुछ नहीं होता है अगर ऐसा होता तो भगवान ये बनाता ही क्यों
(34:12) हम जैसे मान लो एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर है ठीक है अब अब ये चीज करने की इच्छा हो रही है किसी इंसान की लेकिन उसको ये भी पता है कि ये गलत गलत है। लेकिन वो उसका मन उस बात को काट देता है। अरे कुछ नहीं गलत है। सब तो कर रहे हैं। आजकल कौन नहीं कर रहा है। सबके ही है। सब कोई देख लो। फिर वो उसका दूसरा मन बोलता है अरे नहीं यार ये गलत है। मान लो यही चीज अगर मेरा पार्टनर करेगा तो मेरे को कैसा लगेगा? हम ये उसके सवाल जवाब चलते रहते हैं। पर उसको पता है कि जो गलत है वो गलत है। और जो सही कौन सी फीलिंग हावी हो जाएगी? तो वो आप एक्शन फिर वैसा लेने लगे।
(34:41) हां। तो मन मन है शरीर के रथ का सारथी। रथ को चाहे जिधर ले जाए और इंद्रियां है इस रथ के घोड़े घोड़ों को विषयों की ओर भगाए और आत्मा और शरीर के मध्य में यह मन अपने खेल रचाए एक तरफ आत्मा होता है और एक तरफ हमारी बॉडी तो इन दोनों के बीच में मन जो होता है ना यह खेल रचाता है आत्मा कहती है यार ये गलत है मन कहता है अरे कुछ नहीं है क्या गलत है सब तो कर रहे हैं वो भी तो कर रहा है देख वो भी तो कर रहा है देख वो भी तो कर रहा है लेकिन आपके जो अंदर की आपने महसूस किया होगा कि अंदर से आवाज आती है एक धीरे से ये जो तुम कर रहे हो ये गलत
(35:16) पर हम उस आवाज को काट देते हैं। उसको नहीं काटना है। हम नहीं करना है। आपका मन कह रहा है नहीं करना है तो थोड़ा सा स्टंग बनना है। उसको नहीं करना है। आपकी लाइफ में चेंजेस आना शुरू हो जाएंगे। चेंज आएंगे। राइट? एक चीज और आती है जैसे पाप हमारे धर्म में एक कांसेप्ट है कि पाप धोने का है ना? जैसे एक दिन है इस पे जाके आप अगर स्नान कर लेते हैं गंगा में तो आपके पाप धुल जाएंगे। तो कर्म के जब सिद्धांत को मैं समझती हूं तो पाप धोने का कांसेप्ट तो नहीं है वहां पे। जो आपने किया है वो तो लौट के आएगा ही आएगा। तो यह पाप धोने वाला पापवाप को ऐसे थोड़ी धुलते हैं। पाप भोगने
(35:47) पड़ते हैं। पुण्य भोगने पड़ते हैं। ऐसे गंगा जी में जाने से कैसे धुल जाएंगे? हां। तो फिर वो कैसे पाप धोने का सिस्टम क्या है? वो पाप धोने पाप धुलेंगे नहीं। देखो मान लो आपसे कोई पाप बन गया तो अब वो वो कर्म बंध गया आपसे। जैसे आप कोई भी कर्म करते हैं तो एक पतला सा धागा आपसे बंध जाता है। इसको ऐसे समझो। जब तक वो धागा नहीं कटेगा ना तब तक वो पाप मुक्त नहीं होंगे आप। ना पुण्य मुक्त होंगे। हम अगर आपसे आज कोई पुण्य बन गया आज आपने मान लो किसी की ₹100 की मदद कर दी कोई किसी को बहुत आवश्यकता थी और आपने बोल दिया या किसी को खाना खिला दिया
(36:20) हां है ना अब खाना खिला दिया तो वो लौट के आपके पास आएगा अब आप कह दोगे नहीं मेरे को तो नहीं चाहिए चाहिए वाला मैटर ही नहीं है आपने जो आपने खाना खिलाया ना वो आपको मिलेगा नहीं चाहिए तो क्यों खिलाया खाना मत खिलाना था इसीलिए तो वो जो ऋषि मुनि होते हैं ना वो पहाड़ों में जाके क्यों बैठ जाते हैं वहां क्यों तपस्या करते हैं ना किसी को कुछ देना है ना किसी से कुछ लेना है कर्म कर्म बनाना ही नहीं है। अच्छा क्रिएट नहीं करना उन्हें। कर्म ही क्रिएट नहीं करना है। इसलिए वहां जाके फ्री हो जाते हैं। हम अब हम तोकि संसार संसार में हैं। अब कर्म
(36:49) तो करना पड़ता है। तो हम ऐसा करते हैं जैसे ये कर्म किया आपने। हां। तो इसको करके और भगवान को समर्पित कर दिया। तो आप इस कर्म से भी मुक्त हो जाते हैं। ओके। ओके। तो सिस्टम ये होता है कि आपने किया तो वो आपके पास आएगा। अब ये अब आपकी चॉइस यहां खत्म हो गई कि नहीं मुझे जैसे मैंने इसको खाना खिलाया लेकिन मैंने इसको इसलिए थोड़ी खिलाया कि मुझे वापस मिले अगर इसलिए नहीं खिलाया तो फिर ज्यादा मिलेगा हां इंटेंशन आपके वहां इंटेंशन बढ़िया थी ना एक आपकी इंटेंशन ऐसी थी कि एक काम करता हूं मैं इस गरीब को 100 का खाना खिला देता हूं और श्याम सर ने बताया था पडकास्ट में
(37:22) कि 100 के 200 आएंगे तो वहां पे उस हिसाब से आएगा नियत के हिसाब से आता है और आपने किसी को इसलिए खिलाया कि आपको दया आ गई कि यार बेचारा ये भूखा है यार ठीक है यार क्या फर्क पड़ जाएगा खाना खिला देते हैं तो उसका आपको चार गुना होके मिलेगा। ओके ओके जो कर्मन्य वास्ते मा फलेशु कदाचन हे प्राणी तू कर्म किए जा फल की चिंता मत कर क्यों मत कर क्योंकि फल वो हिसाब हिसाब देखा देखेंगे आपके तुम्हारे कर्म जो तुमने कर्म किया ना उसका अभी हिसाब होगा उसमें देखा जाएगा कि आपकी क्या इंटेंशन थी उस हिसाब से फल मिलेगा तो थोड़ा सा वेट करो जो लोग बोलते हैं ना कर्म का फल जल्दी
(37:55) क्यों नहीं मिलता अरे भैया हिसाब तो देखने दो आप कहीं खाने खाना खाने गए रेस्टोरेंट में है ना तो वहां पे आपका हिसाब नहीं करेगा हां भैया क्या-क्या था आपके ये इतना ये इतना इतना ये इतना ये इतना अच्छा इतना बिल बना तो ऐसे हिसाब होगा ना कर्मों का अच्छा इसको ऐसे समझो नेकी कर दरिया में डाल जो बोलते हैं वो नेकी कर दरिया में डाल वो आपको आगे रेगिस्तान में मिल जाएगा जैसे होता है ना कि इस हाथ से दो तो इसको पता नहीं चलना चाहिए हम तो वही है नेकी करके उसको दरिया में डाल दो ज्यादा बताओ मत भूल जाओ भूल जाओ अच्छा भूल क्यों जाओ जैसे आपने देखा होगा के कहीं पे किसी ने
(38:29) पंखा लगवाया मंदिर में तो पंखा लगवाया तो वो क्या करता है कि तीनों पंखुड़ियों के नीचे लिखवा देता है ना इनकी तरफ से इनकी तरफ से इनकी तरफ से अब वहां पे क्या हुआ कि जो आपने वो पंखा तो लगवाया अब उस पे जो नाम लिखा है तो अब क्या होगा कि एक आदमी आएगा वो देखेगा अच्छा ये किसकी तरफ से श्याम जी की तरफ से वाह यार श्याम जी कितने बढ़िया आदमी है तो ये आपको फल मिल गया उसका अच्छा ये फल है ओके आपकी जो तारीफ होती है ना हां वाह वही है ना ये फल होता है कर्म का फल केवल पैसों के रूप में थोड़ी मिलता है। कर्म का फल आपको हैप्पीनेस के रूप में मिलेगा। पैसा भी तो हैप्पीनेस ही
(39:00) देता है। तो वहां दूसरा आदमी आया उसने देखा वाह यार श्याम जी कितने दयालु है। तो अब आपका वह जो आपने कर्म किया ना वह तो वही बराबर हो गया। तारीफ में बराबर हो गया। लेकिन अगर आपने पंखा लगवाया कुछ लिखवाया नहीं गुप्त दान तो अब उसका रिटर्न आपको मिलेगा। जैसे निंदा जो होती है आपकी निंदा होती है ना तो निंदा किस कारण से होती है? आप निंदा भी कर्म का फल है। कहीं आपने कोई कर्म किया होगा तो उसका फल निंदा के रूप में मिलता है। ऐसे होता है। ओके। तो आपने वो जो कहा ना कि पाप धोना पाप धोने वाला मैटर नहीं है। इसमें एक चीज जरूर हो सकती है कि आपने जो कर्म किए अब
(39:35) आप चाहते हैं कि मैंने जो बुरे कर्म किए हैं वो धुल जाए तो उसके लिए ये है कि आप भगवान का स्मरण करो नाम जाप करो। अब नाम जाप से भी ऐसा नहीं है कि आपके पाप धुल जाएंगे। कर्म तो भोगना पड़ता है। ओके? पर उससे एक चीज जरूर होगी कि उसकी इंटेंसिटी कम हो जाएगी। इंटेंसिटी कैसे? कि जैसे आपको प्रॉब्लम तो आपके पास आएगी पर आपको उस प्रॉब्लम से फर्क नहीं पड़ेगा। वो आपको इतनी अफेक्ट नहीं कर पाएगी। सफरिंग कम होगी आपको। हां [नाक से की जाने वाली आवाज़] उसकी क्योंकि मेन चीज तो अभी आपने एक बात कही थी मानसिक। मानसिक यही तो सबसे बड़ी दुख मतलब आदमी शारीरिक
(40:07) भोग लेता है। हां अगर किसी के मान लो हाथ में लग गई तो पट्टावट्टा बांध के हम कोई दिक्कत नहीं है। और वो अच्छा फील करेगा ऐसा। अरे पूरी कहानी सुनाएगा। अरे ऐसा-ऐसा हो गया। बाइक से गिर गया। ऐसा-सा मजा आ रहा है। हां। हां वही अगर मानसिक दुख होता है ना कोई चीज मतलब क्लेश हो रहा है दिमाग में तो आदमी जो बता भी नहीं सकते बता भी नहीं सकते आदमी का मन करता है बस जीवन लीला ही समाप्त कर लेते हैं जीवन लीला आदमी का से समाप्त करता है मानसिक पीड़ा हां शारीरिक पीड़ा से थोड़ी भी करता है कोई नहीं करता अगर किसी आदमी के मान लो हाथ ही नहीं है
(40:38) पैर ही नहीं है लेकिन वो मस्त है कोई दिक्कत नहीं है उसको ठीक है जैसा भगवान ने दिया हम तो कोई दिक्कत नहीं है लेकिन किसी आदमी के सब कुछ है सब बढ़िया सेट है हां लेकिन उसका दिमाग खराब है। मानसिक दुख है। मानसिक दुख भी किसी कर्म का ही फल होता है। हम् तो वह अपनी जीवन लीला समाप्त कर लेता है। कई लोग ऐसे होते हैं जो चले जाते हैं लेकिन रात छोड़ जाते हैं। क्या था? क्या हुआ था इसके? ऐसा क्या था? तो ये चीज बड़ी खराब होती है। तो ये होता है कि जब आप नाम जाप करते हैं भगवान का नाम लेते हैं ना तो वो जो आपका जो पाप कर्म है वो आएगा तो सही
(41:09) लेकिन आपको प्रभावित नहीं करेगा वो। ओके। आपको उससे कोई फर्क नहीं पड़ेगा। अच्छा ऑफ कैमरा आप एक सॉन्ग की भी बात कर रहे थे कि भाई पाप धुले पर पश्चाताप ना धुले वो एक मूवी आई थी अभी कांतारा तो मैं व्यूअर्स को भी बोलूंगा कि आप YouTube पे वो सॉन्ग जरूर सुनना पूरा एक बार तो उसको मैं पूरा अभी एक्सप्लेन करता हूं तो जो सॉन्ग है उसकी लाइन ये है कि कर्म की कोख ही जन्म का द्वार है और यही संसार का सार है। कर्म की कोख ही जन्म का द्वार है। मतलब कि जैसे आप जो कर्म कर रहे हैं जैसे कई लोग बोलते हैं ना मुझे मोक्ष चाहिए तो मोक्ष चाहिए मतलब कोई कर्म मत
(41:46) करो और अगर कर रहे हो तो उसको भगवान को समर्पित करके करो कि भगवान आज जो मैं जो भी करूं कर्म करूंगा यह मैं आपको समर्पित करता हूं तो आपका कर्म नहीं बनेगा तो आप उस कर्म से मुक्त हो जाएंगे तो आपको मोक्ष मिल जाएगा तो इंसान का जन्म क्यों हो रहा है आपका जन्म क्यों हुआ मेरा जन्म क्यों हुआ क्योंकि हमारे कर्म बाकी है पुराने के अच्छे बुरे दोनों अच्छा तो कर्म ही कर्म धर्म की कोख ही जन्म का द्वार है और यही संसार का सार है और एक और बड़ी अच्छी लाइन है आगे की जो हर आदमी रिलेट करेगा कि सुख की ना ये धरा ये मजधार है जहां हम यहां सुख ढूंढ रहे हैं ना
(42:21) हम मेरे को हैप्पीनेस मिल जाए मैं पूरी जिंदगी आदमी ढूंढता है लेकिन नहीं मिल पाता है क्यों नहीं मिल पाता है मिलता भी है पर पार्शियली कभी खुशी कभी गम तो पार्शियली मिलता है उसको तो उसका रीज़न ये है कि ये जिस जगह पे आप रह रहे हैं ना जिस गोले पे आप रह रहे हैं। यहां पे आपको सुखी होने के लिए थोड़ी भेजा है। सुख की नहीं ये धरा। यह धरा सुख की नहीं है। यह मजधार है। मजधार मतलब स्ट्रीम। हां। दुख भी है इसमें और सुख भी है। दोनों है। जर्नी है। ये जर्नी है। केवल आप यहां पर सीखने के लिए आए हैं। तो कभी भी जीवन में कोई दुख आता है तो उसको इतना भी अपने माथे नहीं
(43:00) लेना। इतना भी उससे परेशान नहीं होना कि हम कुछ कर ही नहीं पाए। कर्म ही नहीं बना पाए। उसको ऐसे समझो कि यह मेरा कोई ना कोई प्रारब्ध है। आप भगवान का नाम जाप करते रहो और उसको आप एक्सेप्ट कर लो कि यह मेरा ही किया हुआ है। तो कहीं ना कहीं वो चीज आपको इतना अफेक्ट नहीं करेगी। जैसे किसी ने आपकी बुराई करी, किसी ने निंदा करी, किसी ने जैसे हमने बोला था ना कि ये तुम वो कैसे आई थी सारी? [हंसी] हां सॉरी की है। Meesho की है ना। तो आप ये सोचो कि ये मेरा प्रारब्ध था। ये जो आदमी बोल के गया ना? अब इससे मुझे हर्ट हुआ। ये मेरा प्रारब्ध था। अब इसे
(43:31) मुझे कैरी नहीं करना है। हम इसको लंबा लेके नहीं चलना है। उसकी हिम्मत कैसे हुई? नहीं तो पता चला जिस शादी में आप गए थे वहां खाना भी नहीं खा पाओगे। और फिर उसके बाद घर पे भी दो-चार दिन नहीं खा पाओगे। फिर घर में कलश करोगे वो अलग क्योंकि वो कहीं का मतलब रियल लाइफ में आप बोल रहे हो कि जो भी परेशानियां है लोगों की लाइफ में कोई डिफिकल्ट पीपल है। जैसे लास्ट पॉडकास्ट के भी बहुत सारे कमेंट्स थे कि मैं तो बहुत अच्छा करता हूं। बहुत अच्छा करती हूं। पर सब मेरे साथ ही बुरा करते हैं। एक लेडी का कमेंट मैं कल रात को इनफैक्ट पढ़ रही
(43:56) थी कि मेरे घर में सब मुझे उल्टा सीधा बोलते हैं और मैं तो किसी के साथ कुछ भी बुरा नहीं करती। तो ये कर्म वो किया हुआ है पहले। नहीं नहीं वो पुराना है। आज अगर गेहूं बोएंगे ना तो 6 महीने लगेंगे उगने में। आज मैं गेहूं बो दूं। आज जो मैं बोता जा रहा हूं और मैं सोच रहा हूं यह वाले नहीं उग रहे हैं। पुराने पुराने जो आपने 6 महीने पहले बोए थे आज वह उगेंगे। आज जो बो रहे हो वो 6 महीने बाद मिलेंगे। यही तो लोग समझ नहीं पाते हैं। जैसे आज कई लोग अच्छा कर्म करते हैं हम लेकिन उनके साथ बुरा होता है तो वो जो बुरा हो रहा है वो पुरानी फसल है। पहले का
(44:27) जो आपने किया था ना वो आपके पास लौट के आ रहा है। हम अब अगर आप उसको एक्सेप्ट कर लो कि ये मेरा ही है पुराना किया हुआ। हम लेकिन अब मेरे को ये समझ में आ गया कि बड़ा दुख दे रहा है ये। है ना? तो अब मेरे को आगे अच्छा करना है। नहीं तो फिर इनका लौट के आएगा तो कैसे संभालूंगा मैं सब। बिल्कुल। और एक सर्कल की तरह देखें तो सर्कल भी अगर जब मूव करेगा तो पुरानी चीजें पहले दिखने लगती है ना। हां। अच्छा, कई लोग एक गलती और उस तरीके से निकलेगा बाहर। कई लोग एक और गलती क्या करते हैं पता है? लोग मुझे दुख दे रहे हैं, तो मैं क्यों किसी को हैप्पीनेस दूं?
(44:55) हां। उसने मेरे साथ यह किया तो मैं क्यों ना करूं? मैं क्यों मैं भी हम भी लोगों के साथ करेंगे। जैसे जैसे मेरे पास एक थोड़े दिन पहले एक काउंसलिंग आई। तो उसमें जो है एक लेडी बहुत बढ़िया थी। मतलब बहुत बढ़िया है। मतलब स्वभाव से अच्छी है। तो उसने कहा सर मैं कभी परिवार में किसी के बारे में बुरा नहीं सोचती और किसी में सब की सेवा करती हूं। सब कुछ करती हूं। लेकिन फिर भी मेरे साससुर जो है मेरे को परेशान करते हैं। और जब मैं उससे मैं उनसे बोलती हूं कि मैं मैं तो किसी काम में कोई कमी नहीं रख रही हूं। सब कर रही हूं तो आप ऐसे क्यों कर
(45:25) रहे हो? बोले कि हमारे साथ भी ये हुआ इसलिए हम कर रहे हैं। हम वो सास बोलती है कि मैंने मेरी जो सासू मां थी ना हां वो मेरे को बहुत परेशान करती थी। तो हमारे साथ भी हुआ है तो अब हम नहीं करेंगे क्या? सोचो आप। हां ये भी है। तो आपके साथ जो हुआ वो आपके कर्म का फल था वो खत्म हो गया। फिर नया क्यों बना रहे हो? फिर अगले जन्म में फिर बहू बनोगे। हम फिर वही चलती रहेगी रोलिंग। तो ये सास बहू वाले कांसेप्ट जो है इसी में सारे जो बुरे कर्म है वो इस रिश्ते में सबसे ज्यादा मिलते हैं क्या? क्योंकि नहीं [हंसी] जिस भी टेबल पे बैठे हैं वो तो किसी भी
(45:54) रिश्ते में मिलते हैं। इनलॉस के साथ ज्यादा लोगों की प्रॉब्लम्स हैं। मम्मी पापा के साथ भी है लोगों की। हम कई लोगों मेरे को कई लोग बोलते हैं कि सर आप बोलते हो कि मम्मी पापा की सेवा करो। मेरे तो मम्मी पापा ने ही मेरी लाइफ खराब कर दी। ओके। मतलब ऐसे भी होते हैं लोग। ये सब कर्म से जुड़े हैं। मतलब ऐसा नहीं। नहीं आप ये नहीं बोल सकते कि मम्मी खराब, पापा खराब, पति खराब, पत्नी खराब। जैसे लोग क्या करते हैं कि मान लो किसी पत्नी ने किसी पति के साथ में वो होता है ना आजकल न्यूज़ आती है ना थोड़े-थोड़े दिन में एक पत्नी ने एक पति को मार के ड्रम
(46:22) में पैक कर दिया तो तुरंत लोग क्या करने लगते हैं? अरे आजकल की तो पत्नियां ऐसी हो गई। ये ये कौन सा कांसेप्ट है? वो उसका प्रारब्ध है। सब ऐसे थोड़ी है। आप ऐसे नहीं बोल सकते हो कि पिता लोग खराब होते हैं। मां जो मम्मी लोग खराब होते हैं, पत्नी खराब होती है, सास खराब होती है। ऐसा नहीं है। मैंने तो कई-कई लोगों की सास ऐसी देखी के उनकी मम्मी से भी बढ़िया। बढ़िया राइट राइट। मतलब कई-कई लोगों का मैंने ऐसा देखा है कि उनका उनका पीियर जाने का मन नहीं करता है। ससुराल में इतना प्यार मिलता है। तो फिर अगर सासू खराब तो वो अच्छी कैसे हो
(46:53) गई? सासू खराब नहीं है, ससुर जी खराब नहीं है, पति खराब नहीं है, कर्म खराब है। कर्म से आपको वैसे लोग मिलेंगे। चाहे वो पास्ट लाइफ के कर्म हो या प्रेजेंट। हां पास्ट के होते हैं। उसके पास आप जज कर पाओगे अपनी लाइफ में। आप भी शेयर करिए आपकी लाइफ में क्या स्ट्रगल्स हैं ताकि हमें समझ आए कि किस तरह के लाइफ के एरियाज में आप स्ट्रगल करते हैं या हम भी करते हैं। रियल लाइफ स्टोरीज से हमें और पता चलता है कि हमें आगे आने वाले एपिसोड्स में क्या टॉपिक लेना है। तो जरूर शेयर करिए आपकी लाइफ में क्या चल रहा है। कर्मा को आप कैसे समझते हैं? आपकी नजर में कर्मा
(47:22) क्या है? जरूर लिखिए। सो श्याम जी लास्ट एपिसोड में लव टैंक के बारे में आपने बोला था कि हम बात करेंगे पार्ट टू में। तो थोड़ा लव टैंक के बारे में बताइए क्या? तो इसके बारे में पार्ट थ्री में बात करें क्या? नहीं नहीं आज ही करेंगे। [हंसी] अभी यही वाला जो सॉन्ग है ना इसको मैं थोड़ा सा और एक्सप्लेन कर देता हूं कि हां फिर फिर लव टैंक करेंगे। अच्छा आपने अभी व्यूअर्स को बोला है कि कमेंट करके बताएं। तो एक और चीज मैं बोलना चाहूंगा कि जो हम आज बात कर रहे हैं इससे आप कितना रिलेट कर पा रहे हैं। ये भी जरूर बताएं। जरूर बताएं। हां ताकि हमको पता तो चले कि
(47:52) सारे लोगों की सेम चेतना चेतना की स्तर से होता है। तो इसमें एक लाइन और जो हमने बात करी थी कि कर्म की गागर का खेल ऐसा है कि पाप धुले पर पश्चाताप ना धुले। जैसे आप अभी पाप धोने की बात कर रहे हैं कि मान लो पाप धुल जाएंगे आपके पर। वो जो पश्चाताप रहेगा ना वो वो नहीं धुलेगा। आपको हमेशा वो चीज याद आती रहेगी। और उसको धोना है तो फिर एक चीज है नाम जाप। नाम जाप क्या होता है ना आपके पाप को काट देता है। आपको शक्ति देता है। प्रारब्ध तो आपके सामने आएगा पर आपको वो बल दे देगा कि आपको फर्क नहीं पड़ेगा। फर्क कम पड़ेगा। ऐसा होता है। है ना? तो और अभी जो आज जो
(48:26) हमने बात करी तो इसके ऊपर भी इसमें एक लाइन है कि जिस पल वो तेरा जन्म लिखे उस पल ही वह अंतिम घड़ियां लिखे जैसा सब कुछ पहले से तय है हम है ना तो वो बोलते हैं कि जन्म विवाह मरण गति सोई जो जस लिखा सो तस तस होई जन्म विवाह और मरण तीन चीजें हैं। अच्छा ये अति तीव्र प्रारब्ध ये होना ही है आपके जन्म में। जन्म का समय फिक्स है। मृत्यु की का समय फिक्स है और विवाह का समय फिक्स है। अच्छा विवाह का भी इतना तीनों जन्म विवाह मरण गति सोई जो जस लिखा सो तस तस सोई जिससे विवाह होना लिखा है। अपने समय पे सामने से आएगा और विवाह करेगा आपसे। ज्यादा परेशान होने की जरूरत नहीं
(49:04) है। अच्छा और जिससे होना है वह भी तय है। हां सब तय है। पहले से तय होता है। जोड़ियां बोलते हैं ना ऊपर से बन के आती है। आती है। तो वो सब पहले से तय होता है। अब क्या होता है ना जैसे किसी की शादी हो गई मान लो अब वो कंप्लेन कर रहा है। मेरे को तो ऐसी पत्नी नहीं है चाहिए थी। चाहिए वाला मैटर ही नहीं है यहां पे। चाहिए तो सबको राजकुमारियां चाहिए। सबको राजकुमार चाहिए। सबको पूरी मतलब कोई भी एक भी कमी नहीं चाहिए। पर किसके है? हां। [गला साफ़ करने की आवाज़] हां बताओ ऊपर से जोड़ ऐसे बनती है कि इसको भिंडी की सब्जी बहुत पसंद है और इसको बिल्कुल पसंद
(49:34) नहीं है तो वहां जोड़ी बना दो। इसको फोटो लेना बहुत पसंद है। इसको बिल्कुल फोटो लेना पसंद नहीं है। हां ठीक है इनकी दोनों की जोड़ी बना दो। ऐसे बनती है। मतलब यहां पे हर चीज परफेक्ट नहीं है। आजकल कई लोग क्या कर रहे हैं? अपने रिश्ते इसलिए खराब कर रहे हैं कि मुझे यह पसंद नहीं है। भैया वो आपका प्रारब्ध है। पसंद नहीं पसंद मैटर नहीं करता है। हम है ना? वो प्रारब्ध है। प्रारब्ध है तो उसको स्वीकार करोगे तो खुश रहोगे। ठीक है? जैसी भी है भला है बुरा है जैसा भी है मेरा पति मेरा देवता है तो शांति में रहोगे ना अगर आप कंप्लेन करोगे करते ही रहो कौन सुनने वाला
(50:06) है सही बात है कौन सुनेगा किसको सुनाएं इसीलिए चुप रहते हैं कौन सुनेगा भाई कर्म है आपका कर्म है तो सामने आ रहा है हां और आपको लगता है ठीक करना है तो फिर करो और बढ़िया कर्म ठीक हो जाएगा वो पर बढ़िया कर्म भी नहीं करना है हमको तो शिकायतें करना है नाम जाप भी नहीं करना है पर एक्सेप्टेंस आ जाती है तो आप उसमें फिर पॉजिटिविटी ढूंढने लगते हैं उस रिश्ते हां कि ये मेरा ही कोई है पुराना ये इतना बुरा भी नहीं है। ये भी अच्छा ही है। हां हां अरे क्या होता है ना कि हमारी लाइफ में बहुत कुछ बहुत अच्छी चीजें हैं। लेकिन हमारा दिमाग ऐसा है ना कि ये कमियों
(50:37) को ढूंढता है कि देख तेरी लाइफ में ये नहीं है। देख तेरी लाइफ में ये नहीं है। देख तेरे घर नहीं है। देख ये नहीं है। और जो है उनको तो ये साइड में खसका देता है। ओए हो ना है तो क्या हो गया? हम जो नहीं है उस पे फोकस करेगा ये। राइट? जैसे मान लो आपके परिवार में 10 सदस्य हैं। नौ आपको प्यार करते हैं। लेकिन एक नहीं करता है। आपकी पूरी एनर्जी वो एक खा जाएगा। हां। और आप खुद देंगे उधर। यह मेरे को प्यार नहीं करता। और जो करते हैं उनके बारे में तो आपने कभी बात ही नहीं करी कि यार यह मेरे को इतना प्यार करते हैं। ये मैंने खुद जिया है। मतलब मेरी लाइफ में
(51:07) एक ऐसा फज़ आया था जब जो इतने सारे इंपॉर्टेंट लोग हैं मैं उनके बारे में सोच ही नहीं रही हूं। वो तो फॉर ग्रांटेड हैं। वो तो है ही ना। मम्मी पापा भाई हस्बैंड वो तो अच्छे हैं ही। वो तो है ही तो ठीक है। क्या हो गया। पर ये दो इंसान जो मेरे को बहुत बुरे तरीके से ट्रीट करते हैं। मेरे से गंदी तरह बात करते हैं। मुझेेंस नहीं देते। रिस्पेक्ट नहीं देते। बस उन्हीं के बारे में बात कर रही हूं। उनके बारे में सोच रही हूं। सो वो फेस से मैं निकली हूं। मैंने देखा है कि कैसे मैंने वो टाइम इतना प्रिशियस है ना हमारे पास और मैंने समझा है कि यूनिवर्स में एनर्जी और
(51:34) टाइम यही दो चीजें लिमिटेड है। बाकी सब अनलिमिटेड है। है ना? पैसा खुशियां सब अनलिमिटेड है। सब अनलिमिटेड है। और जब आप अपनी एनर्जी और टाइम जब गलत लोगों पे गलत सिचुएशनंस पे वेस्ट करते हो ना वही सबसे बड़ा लॉस है लाइफ में। हम वही तो मैंने कहा कि आप समझो चीजों को कि कहां मुझे एनर्जी देनी है, कहां मुझे वेस्ट नहीं करना है। फालतू जब मैंने अपने पिताजी को लूज़ किया व्हेन ही वाज़ नो मोर तब मुझे फ्लैशबैक की तरह समय समझ आया कि यार इतना सारा इतना अच्छा समय मैंने वेस्ट किया इन गलत लोगों पे। जब मेरे पापा थे तो मैंने उनके साथ वो टाइम स्पेंड नहीं किया।
(52:06) मैं समझ सकता हूं। सो इट्स सो ये है कि आप लोग प्लीज इस चीज का ध्यान रखें कि टाइम इज लिमिटेड। वही तो ना हमारे पास जो अच्छी चीजें हैं उन पे तो हम ध्यान नहीं दे पाते हैं और जो एक आध खराब होता है पूरी एनर्जी उसमें मेरा यह अच्छा नहीं है अच्छा नहीं अच्छा एक बात और बोलूं वो अगर अच्छा हो जाएगा तो आपका दिमाग कुछ और ढूंढ लेगा राइट राइट ये नहीं है तेरे पास तो आप क्या करोगे उन सबको फिर फॉर ग्रांटेड बहुत सारे लोगों की लाइफ मैंने देखी उनको सब कुछ बढ़िया सब बढ़िया है पर एक चीज खराब है उसको लेके बैठे रहते हैं और दिमाग भैया जो बढ़िया है
(52:36) उनका ग्रेटट्यूड करो ना आप ग्रेटट्यूड लिखो इसीलिए तो ग्रेटट्यूड लिखवाते हैं बिल्कुल यही होता है नहीं कोई बात नहीं मैं आपकी भावनाओं को समझ सकता हूं। तो इससे क्योंकि रिग्रेट से बुरी फीलिंग कुछ नहीं है। हम है ना हम तो ये चीज हमको समझना चाहिए ना। हां कि जो अभी है वर्तमान में पता है क्या होता है? जो मिल गया वो मिट्टी हम और जो ना मिले वो सोना जो आपको मिल गया जैसे आपने अनुभव किया होगा कि मुझे मान लो घर बनाना है या मुझे कार चाहिए तो जब तक वो कार नहीं मिल रही है तब तक मेरे अंदर उसके लिए एक्साइटमेंट और पूछो ही मत। और वो कार मिली। एक महीने बाद वो मिट्टी हो
(53:16) गई। अब मेरे को यार ये इसकी वाली बढ़िया है यार। ऐसे होता है। इंसानों में भी यही होता है। हां। है ना? जब जब तक उनकी शादी नहीं होती है तब तक अगर यह मिल जाए ना तो मेरे को तो कुछ चाहिए ही नहीं भगवान जी। मेरे को तो बस ये लड़की दिला दो। मेरे को ये लड़का दिला दो। बस मेरे को उसको तो इतना पागल होता है आदमी उसके पीछे। इतना प्यार करता है और वो सामने वाले को भी लगता है कि यार यह तो भगवान है। और जैसे शादी होती है फोर ग्रांटेड। ठीक है? ये तो मिल गई। अब क्या है? ये होता है इंसान के साथ। हां क्योंकि जो जो मिल गई जो मिल गया वो मिट्टी हो जाता
(53:44) है और जो नहीं मिला वो सुना है कि यार ये कितना ही बढ़िया है यार हां वो इंग्लिश में भी बोलते हैं ना द ग्रास इज ऑलवेज ग्रीनर ऑन द अदर साइड अदर साइड दूसरे की थाली में घी ज्यादा नजर आता है दिखता है तो अगर इन चीजों को हम बैठ के समझते हैं ना तो हम खुद ही सुखी सुख अंदर है बाहर थोड़ी है बिल्कुल बिल्कुल आप जब समझते हैं तो सुखी हो जाते हैं कि यार मेरे पास इतना सब कुछ है यार हम मेरे पास इतना बहुत कुछ ऐसा है जो दूसरे लोगों के पास नहीं है नहीं है ग्रेटट्यूड इज द आई थिंक नंबर वन स्टेप जो आपको अपनी लाइफ में शुरू कर देना चाहिए। मैं अभी कल वृंदावन था।
(54:15) तो एक अनुभव बताता हूं कि वृंदावन था तो वहां पे हम लोग लस्सी पी रहे थे। तो हम चार लोग थे तो हमारे सामने दो कुत्ते आके बैठ गए। अब वो दो कुत्ते ऐसे-ऐसे देख रहे हैं सबके सामने। कोई लस्सी पिला दे उनको। अच्छा। तो मैंने वो जो मेरे साथी थे मैंने उनको बोला। मैंने कहा देखो ये जो कुत्ता है ना जैसे लोग कई लोग कंप्लेंट करते हैं ना अपनी लाइफ की मेरी लाइफ में ये नहीं है। मेरी लाइफ में वो नहीं है। मेरे वो नहीं है। ये खराब वो खराब वो खराब। मैंने कहा कि यह कुत्ता जो है अगर यह चाहे कि मैं कड़ी मेहनत करूं और मैं कड़ी मेहनत करके पैसे कमाऊं और मैं लस्सी पी लूं। यह ऑप्शन
(54:46) भी नहीं है उसके पास। वो अगर चाहे कि मैं कड़ी मेहनत करूं और एक पंखा खरीदूं उस पंखे में बैठ जाऊं। ये मतलब ऑप्शन ही नहीं है उसके पास। उसके पास यह भी ऑप्शन नहीं है कि मैं किसी से कह सकूं। भैया बहुत प्यास लग रही है। प्लीज पानी पिला दो ना। पर हमारा ध्यान वहां जा नहीं रहा है। हमारा ध्यान जा रहा है। हमारी कितनी कितना दुख है मेरे जीवन में। आप ऐसी चीजों को देखो तो आपको पता चलेगा। इस योनि में आए हो जो आपको जीवन जो स्पीशी मिली है ह्यूमन स्पीशी वो भी एक अच्छे कर्मों का ही नतीजा है कि आप मांग तो पा रहे हो पर पीड़ा बोल तो पा रहे हो आप
(55:16) फिर वो उसको करंट लेते हैं ग्रांटेड ले लेते हैं कि हां ये तो है हां है उस पे ध्यान अभी रास्ते में आते हुए देख रही थी केदारनाथ की रील आ रही थी कि एक जो खच्चर है उसका पैर टूटा हुआ है फिर भी वो उसको मार मार के चढ़वा रहा है और वो लड़की बोल रही है कि मुझे इतना दुख हो रहा है मुझे ऐसा लग रहा है मेरे को नहीं आना चाहिए था जबकि इतनी बड़ी यात्रा है उसकी और वो रिग्रेट कर रही थी कि मैं इतनी दुखी हो के जा रही हूं क्योंकि मैं एनिमल लवर हूं और वहां इतना बुरा हाल है खच्चरों को टूटे हुए पैर से वो चढ़ा रहे हैं। सो आप तो ह्यूमन है। आप तो चूज़ कर सकते हैं। उन
(55:45) बेचारों पे तो वो ऑप्शन भी नहीं है कि वो बीमार है तो वो रेस्ट कर लें। हां उन उनको भगवान ने ऑप्शन ही नहीं दिया। ऑप्शन ही नहीं दिया। अब आप देखो हालांकि वो भी पता है वो कौन है। वो वो लोग हैं जो जैसे लोग कई लोग ऐसे होते हैं ना जो पैसा पैसा ले लेते हैं। किसी का देते नहीं है। खा जाते हैं या हड़प लेते हैं या फिर वो सामने वाला जो है वो बद्दुआएं देता है। हां। हां जैसे मान लो अगर किसी ने बद्दुआ नहीं दी तो कोई दिक्कत नहीं है। पर किसी का ऐसा पैसा था जो उसकी मेहनत का था और आपने जो है स्कीम लगा के उसको हड़प लिया। तो अब वो उसके अंदर की जो निकली हुई
(56:14) बद्दुआएं हैं अब वो पैसा आपको चुकाने फिर आना पड़ेगा। अब पैसा कैसे चुकाने आना पड़ता है? ये जैसे आपने खच्चर की बात करी तो अब आप देखो कि वो खच्चर खड़ा है और वो देख रहा है कि मुझे इस आदमी को बिठा के ले जाना है और पैसे वो आदमी ले रहा है। हां भैया 5000 लगेंगे ऊपर के। बोले अरे 5 तो नहीं चार ले लो। चलो चार ले लो। बैठो इस गधे के ऊपर। जिसने पैसे लिए उसी के ऊपर बैठो ना नहीं उसके चुकाने हैं आपको। वह जो जिससे आपने पैसे लिए ना जब तक उसके चुकेंगे नहीं तब तक आप मरोगे नहीं। इसी तरह से योनियां डिसाइड होती होंगी जो जो वो लोग बोलते हैं ना अरे कुछ नहीं होता
(56:46) है कर्मवर्म। आप थोड़ा सा इसी दुनिया में भगवान ने सब आपके सामने रखा है। मतलब भगवान ने कुछ छुपाया नहीं है। वो कुत्ते आपके सामने हैं। देखो वो क्या कर रहे हैं। वो भोग ही तो रहे हैं। वो खच्चर आपके सामने है। वो खच्च खच्चर को यह भी ऑप्शन नहीं है कि मैं आत्महत्या कर लूं। सही बात है। मतलब जैसे इंसान है तो इंसान तो यह है कि वो दुखी हो गया तो चलो उसके पास तो यह भी ऑप्शन नहीं है उसके तो वो गला भी नहीं दबा सकता भाई भुगतना ही है आपको तो ये इस चक्कर में मत रहो कि कुछ नहीं होता है इंसान का जन्म मिला है ये ब्लेसिंग है आपके पास पहला ही स्टेप है
(57:17) इसलिए तो बोलते हैं कि इंसान मनुष्य का जन्म जो होता है वो देवता भी तरसते हैं उसके लिए क्योंकि यही वो जन्म है जिसमें आप मोक्ष प्राप्त कर सकते हो कर्म अच्छे कर्म नाम जाप करके बाकी जैसे देखो तीन योनियां होती है एक देव योनि, एक मनुष्य योनि और एक जानवरों की योनि। तो जो देव योनि होती है वो उनको केवल भोग योनि मिलती है। बस भोग सकते हैं। वो बढ़िया आराम से बैठे हैं और कोई टेंशन उनके वो टेंशन वाली नस नहीं होती है। टेंशन-वेंशन नहीं होगी आपको। एंजॉय करो क्योंकि आपने कर्म अच्छे किए। तो जिसके अच्छे ही अच्छे कर्म होते हैं, बुरे नहीं होते। उनको देव योनि मिलती है।
(57:50) बस आनंद है आपके। और जिन्होंने केवल खराब ही खराब किए उनको जानवरों की मिलती है। बस सफरिंग है। ढूंढते फिरो खाना, खाओ पत्थर, खाओ लाठियां और कर्म पूरा हो जाए मर जाओगे। ठीक है? और फिर एक मिलती है मनुष्य योनि। मनुष्य योनि जिसने अच्छे भी किए और बुरे भी किए। मिक्स। इसीलिए तो हमारे कभी खुशी कभी गम चलता रहता है। तो अब अब इसमें ही ये ऑप्शन है कि आप नाम जाप करके अच्छे कर्म करके भगवत चिंतन करके और इन सब चीजों से फ्री हो सकते हो कि मुझे यह इस चक्र से बाहर निकलना है। तो उसके लिए देवता देवता भी तरसते हैं। क्योंकि वो देवता देख रहे हैं
(58:25) कि यार हमारा मतलब हम कर्म ही नहीं कर पा रहे हैं। जैसे अगर वह भगवान का नाम लेंगे है ना? तो वह काउंट नहीं होगा। और वैसे यह जानवर अगर मान लो किसी जानवर को मार के खाता है इसका काउंट नहीं होगा। मारो तुम जो करो कुछ काउंट नहीं होगा। ना अच्छा काउंट होगा ना बुरा काउंट होगा। बस भोगो और खत्म। निकलो। वैसे देवताओं का है। हां। देवता देव योनि जो होती है तो उसमें बस उनको भोग अच्छा भोगना है। ओके। अब वो भी ये सोच रहे हैं कि हम मनुष्य होते तो कम से कम ये टाइम वेस्ट नहीं होता। और एक्सपीरियंस मिलता है ना? हां। लर्निंग लेसंस एक्सपीरियंस के लिए तो काफी
(58:57) कुछ कर रहे हैं लोग आजकल। कितना पैसा भी खर्च करते हैं एडवेंचर्स पे यह भी इंपॉर्टेंट है श्याम जी जैसे यह तो समझ आया कि ह्यूमन लाइफ बहुत प्रिशियस है हम लोगों को नहीं वेस्ट करना है टाइम और एनर्जी ये चीज आप भी नोट करिए कि टाइम और एनर्जी लिमिटेड है बाकी सब अनलिमिटेड है सब कुछ मेहनत से कमाया जा सकता है जैसे आपने बोला कि अगर एक डॉग है तो कितनी भी मेहनत कर ले तो वो गाड़ी नहीं खरीद सकता वो खाने का जो मन है वो नहीं खरीद सकता पर आप कर सकते हैं हम कर सकते हैं हमारे पास ये ऑप्शन है हम मेहनत करके कर सकते हैं हम [गला साफ़ करने की आवाज़] हम अच्छी तरह से
(59:25) बात करके रिश्ते भी ठीक कर सकते हैं जो हमें परेशान कर रहा है। उससे माफी मांग सकते हैं या हमने किसी को परेशान किया हम उससे माफी मांग सकते हैं। तो ये बहुत प्रिशियस लाइफ है। उसको आप यूटिलाइज कीजिए। इसको जी अच्छे से जिए। तो जैसे एक आपने लास्ट टाइम लव टैंक का कांसेप्ट आपने प्रॉमिस किया था कि पार्ट टू में बताऊंगा। तो आज आप बताइए लव टैंक क्या है? देखो लव टैंक का मतलब ये होता है ना कि हर इंसान के अंदर एक लव टैंक होता है। हर इंसान पता है क्या चाहता है? कोई मेरी तारीफ करे। अच्छा एक बात बताओ हम ऐसे रेडी क्यों होते हैं? इतने अच्छे कपड़े क्यों
(59:54) पहनते हैं? है ना? जैसे आज मान लो हम ये मैं नया शर्ट लेके आया। पुराना भी पहन के बैठ सकता था। लेकिन मैं चाहता हूं कि भाई मुझे अच्छा लगता है कोई मेरी तारीफ करता है। हां। आपको अच्छा लगता है कोई तो ये है लव टैंक। ओके। है ना? अब जब हमारा लव टैंक फुल करते हैं ना लोग। हां। तो हमें अच्छे एहसास होते हैं। अच्छा लगता है। जैसे मैं आपको कल की बात बताता हूं। मैं तो ये मैं करता रहता हूं। लव टैंक फुल लोगों के। मुझे पता है कि लोगों को क्या चाहिए? लोगों को चाहिए थोड़ी सी रिस्पेक्ट। थोड़ा सा आप उनसे अच्छे से बात कर लो। है ना? तो जैसे मैं कल वृंदावन में था तो
(1:00:27) वहां एक के वहां हम चाय पीने गए तो सुबह हमने चायवा पी और दोपहर को फिर गए हम तो मैं उसके पास गया मैंने कहा चलो इसको थोड़ा खुश करते हैं क्योंकि जो देते हैं वो लौट के आएगा तो मैं उसके पास गया मैंने कहा भैया सुबह चाय भी क्या डाला था यार बोले क्यों मैंने कहा बड़ी अच्छी बनाई थी यार हैं अच्छी बनाई थी आप कभी देखना आप कभी भी देखना किसी भी व्यक्ति की अगर आप तारीफ करेंगे तो वो दोबारा पूछेगा हैं उसने क्या बोला हैं सर अच्छी अच्छी बनी थी अरे बहुत बढ़िया बनी थी यार हां हां चार चाय और बना दो यार वैसी बना देना। अरे उससे भी बढ़िया बनाऊंगा।
(1:00:57) मैंने कहा ऐसा क्या डालते हो? बोले भैया हम प्यार डालते हैं। मैंने कहा थोड़ा प्यार ज्यादा डाल देना। उससे थोड़ा सा मुस्कुरा के बात कर ली और उसके बाद में हम आके इधर बैठे तो उसका ध्यान पूरा मेरे ऊपर वो मेरे को देख रहा है वो खुश हो रहा है। हम और हम लोग तो एनर्जी बिलीवर है हमारी कम्युनिटी भी। हम मानते हैं कि जो आपने जिस एनर्जी से बनाया तो वो अच्छा भी बनेगा और आपको भी वो फल देगा। मतलब अच्छा ही रहेगा आपके लिए पीने में भी। भाई आपको अगर आपको चाहिए लोग आपसे अच्छे से बात कर रहे हैं तो मैंने कहा ना शुरुआत आपको करनी पड़ेगी करनी पड़ेगी
(1:01:26) ओट वाले अच्छा मुझे भी याद आया अभी हम पीछे ट्रेवल कर रहे थे माउंटेनेंस में थे तो एक ढाबे पे हमने खाना खाया तो वाकई में खाना टेस्टी था गरम-गरम रोटी थी सिंपल दाल थी पनीर की सब्जी थी तो लास्ट में मैंने बेटे को बोला भैया मजा आ गया खा के बस मैंने इतना बोला भैया मजा आ गया खा के कह रहा क्या क्या कुछ गड़बड़ थी क्या बिकॉज़ दे आर सो यूज्ड टू कंप्लेंस कह रहा क्या मैडम कुछ गड़बड़ थी क्या मैं कहा नहीं भैया मैं कह रही हूं मजा आ गया खाना खा के मजा आ गया बड़ी देर से भूख लगी थी और टेस्टी कह रहा मैडम आप ना पहली मेरी करियर की ग्राहक हो जो खाना खाने के बाद
(1:01:54) तारीफ कर रही हो वरना कहते हैं दाल में यह नहीं था नमक नहीं था बोलते है ना कि हम हीलर हैं हमारा काम है ये ये चीज़ हर किसी को थोड़ी समझ में आती वही और वो इतना खुश हो गया उसने कहा मेरी जिंदगी के पहले कस्टमर हो जिसने कंप्लेन ना करके एंड में तारीफ कर दी खाने की बस अब वो तो आपको देना ही है वो आपको ब्लेस करेगा हां वो इतना स्माइल आई उसके चेहरे पे मुझे भी बहुत अच्छा लगा बोल के और जेन्युइन था वो ऐसा कोई फेक तो ये है लव टैंक हम मैं जैसे हम कल ऑटो से हमने परिक्रमा करी तो ऑटो वाले भैया ने करवा दी। मैंने उसको बोला चलो खाना खा लो। वो पास में गया
(1:02:25) थोड़ा सा कांधे पे हाथ रखा। मैंने कहा यार चलो थैंक यू। बड़ी अच्छे से करवा दी आपने। लोग क्या करते हैं? लोग कंप्लेन करते हैं। तुमने ये नहीं करवाया। अब उसने दो तीन जगह छुड़वा दी। हां दो तीन जगह छुड़वा दी ना। मेरे को भी पता है। मैंने कहा ठीक है यार हो गया कोई बात नहीं। तो भी मैं उसके पास गया। मैंने कहा यार बढ़िया बहुत अच्छी करवाई। थैंक यू यार। अरे भैया मैंने कहा चलो खाना खा लो। हम खाना खाने जा रहे थे। मैंने कहा खाना खा लो। बोले खाना तो नहीं है मेरे घर। अरे मैंने कहा खा लो आ जाओ थोड़ा-थोड़ा ले लो। अरे नहीं नहीं यार घर पे रखा है और
(1:02:49) मुस्कुरा दिया और मेरे को भी मजा आ गया उसको भी मजा आ गया तो अब वो व्यक्ति जो है ना अगले 2 घंटे तक हैप्पी मोमेंट में रहेगा उसको वो बात याद आएगी कि मेरे को ऐसा बोला अच्छा घुमाया है ना खाना खा लो तो वो मुझे वाइब्रेशन भेजेगा पॉजिटिव हां वो मतलब वो वाइब्रेशन जो छोड़ेगा ना वो वाइब्रेशन मुझे ढूंढ लेगी कि भैया श्याम भैया कहां है इस दुनिया में करोड़ों लोग हैं लेकिन आपने अगर किसी को कुछ दिया हैप्पीनेस दी तो वो जो वो जो अकेले बैठा-बठा आपको सोच रहा है जैसे मान कि मैंने वो चाय वाले को बोला है ना बहुत बढ़िया चाय बनाई यार क्या डाला था
(1:03:22) तो अब वो शाम को मान लो उसके घर गया और उसकी वाइफ से बोल रहा है कि आज एक भैया आए तो बोले यार चाय भी लोग बताते हैं हम खुद बताते हैं हम भी बताते हैं स्टोरीज अपनी हम खुद जैसे मान लो आज किसी ने कुछ अच्छा आपने जैसा व्यवहार किया आज हम आए है ना आपने जो व्यवहार किया तो ये चीज हम थोड़ा बढ़ा चढ़ा के घर वालों के सामने एक्सप्लेन करेंगे बिल्कुल समझ रहे हो आप और ये होता है हम तो अब उससे क्या होगा कि जैसे मैं तो अपने घर चला गया अब आपने मान लीजिए कि आपने मुझे गिफ्ट दिया, मेरी वाइफ को गिफ्ट दिया। अब हम यहां से उसको लेके जाएंगे ना
(1:03:53) तो एक दो बार तो उसको देख लेंगे खोल खोल के। ये होता है। राइट? आज अगर मैं कुछ खरीद के जाऊंगा ना मार्केट से तो मैं उसको वहां इतनी खुशी नहीं होती। हां इतना नहीं होगा। लेकिन वो आपने दिया है तो उसको देखूंगा और उसको वैसा लेके रखूंगा। उसकी केयर करूंगा। उसके बाद मैं घर लेके जाऊंगा और फिर घर वालों के सामने कि ये उन्होंने दिया था। वहां पॉडकास्ट करने गए थे। इसके लिए साड़ी दी। मेरे लिए ये दिया। और वो बताते समय मुझे बड़ी खुशी होगी। तो जब जब मेरे मतलब मेरे दिमाग में वो चीज आ रही है ना कि आपने मुझे ये दिया और अब वो जो वाइब्रेशन मैं चाहे यहां से 700 कि.मी.
(1:04:23) दूर चला गया वो वाइब्रेशन आपको ढूंढते हुए आपके पास आ जाएगी। ओ ये तो बड़ा अच्छा मतलब ये वाइबेशंस को समझने का भी बहुत अच्छा तरीका है। वाइब्रेशन ही पर लोग गुड वाइब्स ढूंढ रहे हैं। ये तो गुड वाइब्स क्रिएट की जा सकती है। क्रिएट की जा सकती है। ये मार्केट में मिलती है दो ₹5 में ₹10 में। हम कैसे? दूसरों को खुशी देके। जैसे मान लो चाय वाला था। कितने बने भैया? बोले 50 मैंने 60 कर दिए। अब वो ₹10 में मैंने क्या खरीदा? वाइब्स। वाइब्रेशन किसी का किसी के ₹20 मैंने 25 दे दिए। पांच रख लो कोई बात नहीं। वाइब्रेशन अभी ऑटो में आए वो केप करके आए तो उसके 590
(1:04:58) बने। उसके 600 कर दिए। ₹10 ज्यादा कर दिए। तो जैसे उसने भैया 590 कर दिया। ये तो मैंने आपसे सीख लिया है। जब हमने लास्ट पॉडकास्ट किया था। एक साल हो गया। अब कहीं भी 540 बनते हैं, 510 बनते हैं। तो वो राउंड फिगर में मैं अप कर देती हूं उसे। लोग इसका उल्टा करते हैं। हां, राउंड फिगर में लोग 500 कर देते हैं। 510 का। अब कल मैंने देखा जैसे कि हम एक ऑटो से गए थे। तो उससे हमने पूरे पैसे दे दिए और उसने जो है एक और ऑटो वाले से बात करी। तो भैया वहां ले वहां घुमाना है इनको कितने पैसे लोगे? तो उसने कहा ₹600 दे देना। बोले भैया यार ₹600 तो बहुत ज्यादा होते हैं और
(1:05:31) इतने लगा लो नहीं लगेंगे। वो चला गया। फिर वो दूसरे के पास गया। फिर वो तीसरे के पास गया। हां। उसने 20 मिनट खराब कर दिए। मैंने बोला भैया वो ₹100 मैं दे दूंगा एक्स्ट्रा। मेरे को टाइम की वैल्यू है ना यार। हां अब वह सोच रहा है कि मैं जो है कोई 500 में ले जाए तो उसको दे दूं ₹100 और बच जाएंगे। मैंने कहा मेरे से ले लेना। तो लोग क्या करते हैं? कम कम कम कम। अब वो अपनी जिंदगी में कम अट्रैक्ट करते हैं। अच्छा तो [नाक से की जाने वाली आवाज़][गला साफ़ करने की आवाज़] ये लॉ ऑफ़ अट्रैक्शन के लिए काम करेगी ये। आप जैसे हर जगह किचकिच करोगे ना तो आपको
(1:05:59) भी ऐसा ही मिलेगा सब। हम अच्छा क्विकली अगर लॉ ऑफ़ अट्रैक्शन समझाना चाहें। थोड़ा सा मैनिफेस्ट अगर लोग अपनी लाइफ में पैसा, अच्छे रिश्ते, अच्छी लाइफ ओवरऑल [नाक से की जाने वाली आवाज़] अगर अट्रैक्ट करना चाहते हैं, तो क्या हैक आप देना चाहेंगे? मैंने तो एक ही बात कही कि कर्मा इज द रियल मैनिफेस्टेशन। मैनिफेस्टेशन लॉ ऑफ़ अट्रैक्शन भी आपकी लाइफ में तभी आएगा जब आपके कर्म अच्छे होंगे। कर्मा पे ध्यान दो। सब चीजें अपने आप अच्छी हो जाएगी। हां। और दूसरी चीज ये कि जो आप देते हो वो लौट आता है। हम तो लौट आता है मतलब कि जो दे रहे हो उसका
(1:06:26) 10 गुना, पांच गुना है ना? वैसे [गला साफ़ करने की आवाज़] लौट के आएगा। तो अच्छा देना शुरू करो और अच्छा सोचो। अच्छा जब आप अच्छा देते हैं ना तो आपको एक अंदर कुछ फीलिंग होती है जब आप किसी को कुछ देते हैं तो वो वो आपके सबकॉन्शियस तक जाती है और वो आपके सबकॉन्शियस को ये बताती है कि मैंने आज अच्छा कर्म किया है मेरे साथ अच्छा होगा ये सिंपल लैंग्वेज में तो जब तक अच्छा नहीं करोगे तब तक केवल माला फेरने से कुछ नहीं होता है मन भी साफ रखना पड़ता है आप भले मालामाला में राम राम राम राम राम कर रहे हो और मन में छल कपट छल कपट ईर्ष्या दूसों से जलस वो चीज
(1:06:57) काम थोड़ी करती है बिल्कुल इंटेंशन मैटर करती है आपके अंदर क्या वाइबेशंस हैं वो मैटर वो है बिल्कुल जो आप देंगे वो लौट के आएगा। बहुत ही क्लियरली आपने समझा दिया। बहुत आसान तरीके से आपने समझा दिया है। सो श्याम जी आप एक मेडिटेशन हमने डिस्कस किया था ऑफ कैमरा भी कि लोगों को कराएंगे जिसमें प्रेजेंट में रहना सीखे लोग क्योंकि ओवरथिंकिंग एंजाइटटी डिप्रेशन बहुत बढ़ता जा रहा है। जिसमें कर्मा भी फिर लोग भटक जाते हैं। कुछ भी करने लगते हैं अपने आपको खुशी का एहसास दिलाने के लिए। तो क्यों ना कोई एक ऐसी मेडिटेशन आज आप एडिट कराएं? तो मेडिटेशन क्या होता है?
(1:07:28) कुछ हां जी। मेडिटेशन क्या होता है कि जैसे हम खुशी बाहर ढूंढते हैं। पर हम कभी अंदर गए नहीं। हम अंदर जाएंगे ना तो हमको जैसे मान लो किसी को डिप्रेशन है, ए्जायटी है तो वो क्या करता है ना रोज केवल शिकायत करता है। मेरे को ये है वो ऐसे वीडियो देखता है। डिप्रेशन में क्या होता है? ये कब ठीक हो सकता है? है ना? ये कितने दिन में ठीक हो सकता है? और उसका जवाब भी वैसे ही मिलेंगे। ये कभी ठीक नहीं हो सकता। अब उस चीज को फिर वो देखेगा और दिमाग खराब होगा। अरे यार ये मुझे क्या हो गया? ये क्या हो गया? अब इसकी जगह अगर वो सशन पे काम करे
(1:07:57) वो पहले तो एक्सेप्ट कर ले कि हां हां मैंने भी प्यार किया है। मतलब हां मुझे भी डिप्रेशन है। ठीक है? इसको एक्सेप्ट कर लिया उसने। अब एक्सेप्ट करने के बाद में अब इसका सॉल्यूशन शुरू होगा। अब आप डिप्रेशन के वीडियोस देख रहे हैं। ठीक है? तो उससे तो और बढ़ेगा आपका। रोज आपको कुछ ऐसी नई चीज मिल रही है। ये कभी ठीक नहीं हो सकता। कोई आप कमेंट्स पढ़ेंगे। उसने लिख दिया मुझे ये 20 साल से मेरी जिंदगी नरक बन गई। वो चीज आपको अफेक्ट करेगी। वो आपके सबकॉन्शियस में जाएगी और आपको लगेगा मैं कभी ठीक नहीं हो सकता। हम तो इसकी बजाय आप सशन पे काम करो। सबसे
(1:08:28) पहले एक्सेप्ट कर लो आज से वीडियो देखना बंद। और अब सशन क्या है? मेडिटेशन। रोज बैठो 15 मिनट 10 मिनट। 10 मिनट आराम से बैठो शांति के साथ और अपने भीतर जाओ। तो हम एक प्रैक्टिस करते हैं। हां। ठीक है। और नेक्स्ट एपिसोड के लिए सबकॉन्शियस माइंड और मैनिफेस्टेशन को थोड़ा डीप में समझेंगे आपसे क्योंकि कर्मा का स्टेप वन तो समझ आ गया। लेकिन अब हमें पैसा खुशियां यहां रिश्ते भी तो चाहिए ना। कर्मा तो [गला साफ़ करने की आवाज़] हम सुधार रहे हैं अपने। तो आप जरूर कमेंट करिए अगर आप चाहते हैं कि हम पार्ट थ्री करें श्याम जी के साथ तो हम उन्हें
(1:08:54) रिक्वेस्ट करेंगे फिर से बुलाएंगे जरूर लिखिए पार्ट थ्री लिखिए या फिर आप मैनिफेस्ट लिख सकते हैं तो हम उसको कंसीडर करेंगे फॉर पार्ट थ्री तो अभी मेडिटेशन के लिए हम आपसे रिक्वेस्ट चलिए एक छोटा सा हम मेडिटेशन करते हैं मतलब कि मेडिटेशन कैसा आपको अनुभव होता है कैसे क्या करना है तो अभी आपको सबको आंखें बंद करके आराम से बैठना है रिलैक्स मोड में ठीक है और मैं आपको आपके सबकॉन्शियस की गहराई में लेके जाऊंगा जैसे उसको रिप्रोग्राम करेंगे और आप देखेंगे कि अभी जब आप यह चीज करेंगे ना तो आपको बहुत अच्छा अनुभव होगा और जब आप इसको रेगुलर
(1:09:24) करेंगे तो एक दिन आएगा मतलब 21 दिन तो कम से कम लगेंगे 21 डेज 21 डेज का होता है सिस्टम कि 21 डेज में आपका जो माइंड है वो रीोग्राम हो जाता है तो 21 डेज के बाद में आपको रिजल्ट दिखना शुरू होंगे लेकिन अभी तुरंत आपको बहुत अच्छा लगेगा और आपको ये विश्वास हो जाएगा कि यार इसका मतलब ये है कि मैं चाहूं तो इससे बाहर निकल सकता हूं क्योंकि अभी अगर मुझे मान लो मैं मेडिटेशन कर रहा हूं और मुझे अच्छा फील हुआ मतलब कि इस चीज को जिया जा सकता है। जिया जा सकता है। कंटिन्यू किया जा सकता है। है ना? ओके। तो शुरू करें। जी। ठीक है। हम तो आप लोग सभी अपनी आंखें बंद
(1:09:57) कर लीजिए। आराम से रिलैक्स होकर बैठ जाइए। बिल्कुल शांत। [संगीत] अपना ध्यान अपनी सांसों पर लगाइए। अपनी आती जाती सांसों को देखते रहिए। आपकी सांस आ रही है। जा रही है। [संगीत] अपने कंधों को ढीला छोड़ दीजिए। [संगीत] जहां आपको तनाव महसूस हो रहा है, उसे रिलीज करिए। छोड़ [संगीत] दीजिए उसे। अभी आपको वर्तमान में जीना है। यह समय आपका है। यह पल आपका है।
(1:10:45) प्रकृति ने आपको बनाया है। इस संसार में आपको भेजा है खुश रहने [संगीत] के लिए। [संगीत] आप धीरे-धीरे शांत हो रहे हैं। और शांत [संगीत] अपने भीतर जाएं। अब आप अपना ध्यान अपनी दोनों आंखों के बीच में जो आज्ञा चक्र होता है वहां पर लेकर जाएं। [संगीत] अब अपनी [संगीत] बंद आंखों को देखें अपने अपनी चेतना से। आपके हंठ [संगीत]
(1:11:37) आपके दोनों कान अब आपके [संगीत] दोनों कानों पर अपनी चेतना को घुमाते रहें। गोलगोल घुमाते रहें। गोलगोल घुमाते रहें। अब आप अपने ध्यान को अपने होठों पर लेकर आए और हल्की सी मुस्कुराहट अपने चेहरे पर रखें। थोड़ा सा मुस्कुराएं। [संगीत] देखिए आप कितने खूबसूरत लग रहे हैं। और यही [संगीत] आपकी प्रकृति है। आपकी प्रकृति है हमेशा खुश रहना। लोगों को [संगीत] प्रेम देना।
(1:12:23) और इस जीवन को अच्छे से जीना। अब अपना ध्यान अपने दोनों हाथों पर लेकर जाइए। [संगीत] हाथों की उंगलियां, दोनों पैर, [संगीत] पैरों की उंगलियां। अब वापस से अपने ध्यान को अपनी सांसों पर लेकर आइए। देखते रहिए। [संगीत] आप हील हो रहे हैं। [संगीत] आप हैप्पीनेस की ओर बढ़ रहे हैं।
(1:13:09) [संगीत] आपको यकीन हो रहा है कि आप बहुत जल्दी हील हो जाएंगे। आपके भीतर [संगीत] गहरी शांति आ रही है। आप शांत हो रहे हैं। शांति। शांति। अब आप धीरे-धीरे अपने सबकॉन्शियस माइंड की ओर बढ़ रहे हैं। [संगीत] जो विचार आ रहे हैं उन्हें आने दें। जो जा रहे हैं उन्हें जाने दें। विचारों के साथ बहना नहीं है।
(1:13:56) अपना ध्यान केवल अपनी सांसों पर लगाकर रखें। अब सांसों से आपके सबकॉन्शियस माइंड पर। [संगीत] अब आप मेरे साथ दोहराएं। मैं [संगीत] शांत हूं। अपने मन में दोहराएं। मैं [संगीत] शांत हूं। मैं शांत हूं। मैं दिन-बदिन बेहतर होता जा रहा हूं। मैं दिन-ब दिन [संगीत] बेहतर होता जा रहा हूं। मुझे अपने ऊपर पूरा भरोसा है।
(1:14:46) मुझे अपने ऊपर पूरा भरोसा है। [संगीत] मेरा कॉन्फिडेंस धीरे-धीरे बढ़ता जा रहा है। मेरा कॉन्फिडेंस धीरे-धीरे [संगीत] बढ़ता जा रहा है। मैं अपने जीवन में चमत्कारों को महसूस कर [संगीत] रहा हूं। मैं अपने जीवन में चमत्कारों [संगीत] को महसूस कर रहा हूं। अब आपकी बॉडी हल्की हो रही है। [संगीत] आप धीरे-धीरे हल्का महसूस कर रहे हैं। [संगीत] अब आप ऐसा महसूस कर रहे हैं कि जैसे [संगीत]
(1:15:32) आप हवा में उड़ रहे हैं। [संगीत] आपका शरीर बिल्कुल हल्का हो चुका है। अब आप इस जीवन का आनंद ले रहे हैं। खुली हवाओं में [संगीत] आपके जीवन में शांति है और यही आपकी प्रकृति यही आपकी प्रकृति है। खुले आसमानों में उड़ना और शांत रहना ठंडी हवा। [संगीत] शांत [संगीत] बैठे रहें।
(1:16:21) अच्छा महसूस करते रहें। ओम शांति। [संगीत] कोई भी विचार अगर आता है तो उसे आने दें, [संगीत] जाता है तो उसे जाने दें। बिल्कुल शांति। [संगीत] आप आनंदित हो रहे हैं। आपको जो सुकून मिल रहा है वह अकल्पनीय है। [संगीत] आप अंदर से आनंदित महसूस कर रहे
(1:17:10) हैं। बिल्कुल [संगीत] हल्के हो चुके हैं। और आप खुश हैं। मेरे साथ पांच बार दोहराएं। मैं आनंदित [संगीत] हूं। मैं आनंदित हूं। मैं आनंदित हूं। मैं [संगीत] आनंदित हूं। अब एक बार ध्यान से बाहर आए। अपनी आंखों को देखें। अपने दोनों हाथ, [संगीत] दोनों पैर हाथों की उंगलियां,
(1:17:55) पैरों की उंगलियां। [संगीत] अब धीरे से अपने दोनों हाथों को रब करें और अपनी आंखों पर रखें और मेरे [संगीत] साथ दोहराएं। खुश रहना मेरी प्रकृति है और मैंने अपने जीवन में खुश रहने को चुना है [संगीत] और मैं दिन-बदिन खुश होता जा रहा हूं। [संगीत] मेरे सब कॉन्शियस की री प्रोग्रामिंग हो रही है। [संगीत] थैंक यू यूनिवर्स। थैंक यू फॉर एवरीथिंग। आई अट्रैक्ट [संगीत] मनी। आई अट्रैक्ट लव।
(1:18:46) आई एम वेरी हैप्पी। आई एम वेरी हैप्पी। आई एम वेरी हैप्पी। थैंक यू। [संगीत] अब आप अपनी आंखें खोल सकते हैं। अरे हम क्या फोडकास्ट कर रहे थे क्या? कहीं और चले गए थे। [हंसी] कहीं और ही चले गए। मैं भी आंखें खुली तो आपको देखा सामने अच्छा पॉडकास्ट चल रहा था। ऐसा ही होता है ऐसा। कैसा लगा? अच्छा आपको कराते हुए भी इतना डीप हां होता है ना वो अपन वो विचारों में जाता है ना इंसान अच्छा मुझे इतना अच्छा एक्सपीरियंस कब हुआ था लास्ट टाइम अभी कैसा लगा आपको मैं वही बता रही हूं कि ये एक्सपीरियंस मुझे तब हुआ था जब हम पोंडीचेरी में अरबिंदु आश्रम है
(1:19:27) वहां पे कराते हैं वो लोग और उसके लिए आपको सुबह 3:00 बजे पहुंचना होता है बहुत मतलब इसमें जैसे क्या होता है ना करके पहुंचते हैं आप फिर आपको ये एक्सपीरियंस वो लोग देते हैं एक पूरा डोम बनाया हुआ है मतलब बहुत कुछ माहौल बनाने के बाद ये एक्सपीरियंस होता है मुझे वैसा फीलिंग आज आया अभी थोड़ी देर पहले मैं टाइम देख रहा था। मुझे जाना है टाइम तो नहीं हो गया और अब मेडिटेशन में गए तो अंदर चले जा रहे हैं। चले जा रहे हैं। में चले गए। ये तो अभी जैसे हमने एक 10 से 15 10 मिनट का हुआ होगा शायद। इसको आप अगर थोड़ा सा 20 मिनट चले जाओ तो
(1:19:56) एक टाइम ऐसा आएगा कि ये मतलब जो बोलना है ये भी छूट जाएगा। हां वाइबेशंस भी होती है। हां हां जो मैं जैसे बोल रहा था ना ये मतलब कई बार मैं मेडिटेशन करवाता हूं सुबह डेली आधा घंटा 1 घंटा। मतलब 40 मिनट का डेली क्लास होती है। अच्छा। तो उसमें ऐसा होता है कि कई बार मैं जैसे बोल रहा हूं तो बोलते बोलते बोलते बोलते बोलते मैं शांत हो जाता हूं। डीप हां डीप और स्टूडेंट्स को पता चल जाता है शायद सर। [हंसी] वो हो जाता है ना? वो मजा ही इतना आता है अंदर चला जाता है। इंसान चला जाता है। आप भी बताइए आपको कैसा फील हो रहा है इसके बाद? आपको ये और करना चाहिए। ज्यादा
(1:20:33) वीडियोस इस पे बनानी चाहिए माय डिटेल में। हां इतना आपकी वॉइस में एक वो है वो इसका फर्क पड़ता है कहीं कहीं हां ये मुझे लोगों ने ग्रेन है जो आपको लेके जा रहा है उस ज़ोन में मैं बोल रही हूं ना मुझे वो आश्रम में जो कराई गई थी वो याद आई है आज मैं अच्छा आप देखो कितना मेडिटेशन करती हूं ये चीज़ हम बाहर ढूंढ रहे हैं हां बाहर कैसे मिलेगी पिज़्ज़ा बर्गर में थोड़ी मिलेगी हां बहुत शांति मिलती है एंग्जायटी डिप्रेशन से तो आप ये सब धीरे-धीरे कोशिश करें खुद ज्यादा प्रॉब्लम है डेफिनेटली लुक फॉर प्रोफेशनल हेल्प बट एक बेसिक लेवल पे जरूर अपनी हेल्प यह अगर डेली 15 मिनट
(1:21:06) सुबह 15 मिनट शाम को होगा ना तो वो जो पैटर्न बनता है ना डिप्रेशन का एंग्जायटी का वो पैटर्न ब्रेक होता है। लोगों के पैटर्न ब्रेक नहीं होते हैं। स्ट्रांग होते हैं। कैसे? दिन में एक 15 मिनट भी ऐसे नहीं निकालेंगे जिसमें वो अच्छी बात करेंगे। हां। वो डिप्रेशन के बारे में गलत है। मुझे ये हो रहा है। मुझे ये हो रहा है। मेरे तो ये हो रहा है। शिकायत शिकायत शिकायत का पैटर्न स्ट्रांग होता है। तो कहीं भी लाइफ प्रॉब्लम है। तो ये वो ब्रेक है जो आप ढूंढ रहे हो। तो कितनी बार रिपीट कर लेना चाहिए? डेली कितने दिन तक करें तो उनको असर स्टंग हो
(1:21:35) जाएगा। करते रहो ना मतलब 21 दिन कम से कम कम से कम 21 21 दिन का एक लॉजिक होता है। आपका सबकॉन्शियस है ना वो आपकी बात को 21 दिन में सुनता है क्योंकि उसको पता है कि आप बदल जाते हो मौसम की तरह बार-बार आज कहते हो मेरे को एसडीओ बनना है। कल कहते हो मेरे को तो कलेक्टर बनना है। परसों कोई रिश्तेदार आ गया। उसने बोला कलेक्टर तो अच्छे नहीं यार ज्यादा बहुत मेहनत करनी पड़ती है। ठीक है मेरे को पटवारी बनना है। परसों कोई आता है कि बोले उसका लड़के ने वो किया वो किया। अच्छा मेरे को वह बनना है। तो सम सबकॉन्शियस बोलता है कि भैया पहले क्लियर कर लो।
(1:22:02) हां तुम अपना फिर मुझे बताओ। तो जैसे आपको मेडिटेशन करना है और हैप्पी होना है। तो आपने एक दिन किया तो एक दिन में आपका सबकॉन्शियस एक्सेप्ट नहीं करेगा। बोले रिजेक्ट फाइल दूसरे दिन किया तीसरे दिन किया। 21 दिन तक किया फिर आपका सबक्वेश्चन ध्यान सबकॉन्शियस ध्यान देगा। अच्छा आपको शांत होना है। ओके मैं काम करता हूं इसके ऊपर। ओके। तो आप इसको 21 दिन तक करिए। आप वीडियो को प्लेलिस्ट में सेव कर लीजिए। आपकी जहां भी आप प्लेलिस्ट बनाते हैं इसको डेली आपको 5 या 10 मिनट देने हैं मैक्सिमम और आपको रिजल्ट्स डेफिनेटली देखने को मिलेंगे। कर्म को अगर समझ ले तो हम अपनी
(1:22:32) लाइफ में खुश होना सीख जाएंगे। इसको बस समझने की बात है पर इसमें एक और बात है कि समझ भी उसी के आएगा जिसके नसीब में होगा। बिनु सत्संग विवेक ना होई और राम कृपा बिनु सुलभ न सोई। बिना सत्संग के आपके अंदर विवेक नहीं आएगा। और सत्संग आपको लगता है जैसे आप जब छोटे थे जैसे मैं मेरे ही बताता हूं मेरी जब जो मम्मी है वो बचपन से भक्ति भाव में है तो कहीं कथा वगैरह होती थी तो वो बोलती थी मेरे को वहां छोड़ के आजा तो मैं उसको बाइक से या कहीं से छोड़ने जाता था तो वो बोलती थी कि थोड़ी देर तू भी बैठ बैठ जा सुन ले कथा है मैं क्या कथा सुन
(1:23:09) तू सुन ले मेरे को नहीं सुनना है कुछ नहीं होता है अब मेरे को कथा का क भी नहीं सुनना है उस समय मैं मस्ती करने जा रहा हूं घूमने जा रहा हूं गाय बाइक से घूमने जा रहा हूं है ना आज मैं एक एक घंटे के सत्संग सुन लेता हूं और उससे ज्यादा मजा मुझे किसी में आ नहीं रहा है। समझ रहे हो आप? राइट? मतलब कोई सत्संग चल रहा है तो मैं उसको सुन रहा हूं और जो आनंद मुझे मिल रहा है उतना और किसी चीज में नहीं मिल रहा है। तो इसीलिए बिनु सत्संग विवेक न होई। अब अगली लाइन क्या थी कि राम कृपा बिनु सुलभ न सोई। बिना राम जी की कृपा के आपको सुलभ ही
(1:23:42) नहीं होगा। राम जी भी तभी मिलेंगे जब राम जी चाहेंगे। राम कृपा बिनु सुलभ। हां वो हां वो तो यही है। राम कृपा बिन सुलभ न सोई मतलब जो सत्संग है ना वह भी आपको तभी मिलेगा जब आपके ऊपर राम जी की कृपा होगी। अब राम जी की कृपा कब होती है? राम जी कहते हैं कि निर्मल मन जन सो मोहि पावा और मोहे कपट छल छिद्र न भावा। अब मैं उसे मिलूंगा जिसका मन निर्मल होगा। है ना? जिसका मन निर्मल है तो उसको मैं आसानी से मिल जाऊंगा। तो मतलब अब शुरुआत आपको कहां से करनी पड़ेगी? मन से। खुद से। हां। राइट। तो अगर आपका मन निर्मल है और आप अच्छे कर्म कर रहे हैं तो उसके बाद में जो है
(1:24:20) ईश्वर की आपके ऊपर कृपा होगी। ईश्वर का मिलना मतलब क्या? जैसे लोग कहते हैं ना लोग भगवान को ढूंढ रहे हैं। हां। मान लो चलो कोई भगवान को ढूंढ रहा है और भगवान मिल गए। प्रकट हो गए सामने। अब क्या? फिर बात तो वही फिर मांगेगा वो। क्या करोगे? हां। भले इंसान ये बोलता जरूर है कि भगवान मुझे तो आपसे कुछ नहीं चाहिए। बस आप मिल जाओ। चलो मिल गए। है ना? मान लो आप भगवान हो। आप मेरे सामने बैठ गए। अब आदमी कहेगा क्या? मांगेगा ही तो सही। भगवान मेरे लिए ठीक कर दो ना भगवान मेरे वो ठीक कर दो ना राइट है ना तो भगवान को पाना मतलब क्या शांति मैंने अपने जीवन में अनुभव किया है आपने
(1:24:55) भी किया होगा कि आज हम यहां तक पहुंचे ना तो सबसे बड़ी जो चीज है वो है अगर मानसिक शांति मिल जाए तो उसके लिए आदमी कुछ भी देने को तैयार है। हम हर एक व्यक्ति की लाइफ में एक फज़ आता है जहां पे वो ये सोचता है कि भले पैसा नहीं मिलता चल जाता पर ये शांति अगर होती ना तो मेरे को तो भले पैसा भी नहीं जरूर की भी जरूरत नहीं है। हां वो अलग बात है कि जब शांति आ जाती है दिमाग में तब लगता है कि पैसे तो चाहिए। पैसे चाहिए लूप है। [हंसी] जैसे हां ये ये माइंड जो है ना वो बड़ा खतरनाक है। जैसे वो बोलते हैं कि जब पेट भर जाता है ना तब दूसरी समस्या शुरू होती
(1:25:30) है। शुरू होती है। बिल्कुल। उससे पहले सिर्फ भूख है। उससे पहले भूख है। जब तक पेट नहीं भर रहा है। जैसे हम कई लोगों को देखते हैं भैया खाना खिला दो, भैया ये दे दो। तो अभी उनकी एक ही समस्या है। केवल भूख भूख भले वो चल नहीं पा रहा है। वो कुछ नहीं कर पा रहा है। पर उसका ध्यान अभी केवल इस पे है। अब जैसे उसने खाना खाया हम अब यहां से शुरू होगा भगवान ने मुझे ऐसा बना दिया। भगवान ने मेरे साथ ऐसा कर दिया। भगवान ने मेरे साथ ऐसा कर दिया। कंप्लेंट्स। तो ये ये नेचर है हमारा। हम मतलब जैसे ही एक चीज से ध्यान हटा वो चीज पूर्ति हुई तो दूसरी प्रॉब्लम खड़ी हो
(1:26:01) जाएगी और यह चलता रहेगा अनवरत जब तक आप इसके ऊपर काम नहीं करेंगे ओके तो हम काम कर सकते हैं इस पे हां काम कर सकते हैं ना इसको कर्मा को समझना चाहे अगर तो क्या उसको आप डिकोड कर सकते हैं हमारे लिए कर्मा क्या है देखो एक आपने चीज नोटिस करी होगी कि जैसे ही कर्म का नाम आता है तो इंसान के दिमाग में बुरी चीज आती है कर्मा मतलब बुरा है ना कर्मा बुरा कैसे हुआ कर्मा तो कर्मा हुआ कर्मा का मतलब होता है बहुत सिंपल लैंग्वेज में बताता हूं। जो आप देते हैं वो लौट आता है। जो भी आप देते हैं वो लौट [नाक से की जाने वाली आवाज़] के आएगा। वो लौट के आएगा। जैसे आज मैं सुबह उठा
(1:26:35) अब सुबह उठ के मैंने मेरे मम्मी पापा के पैर छुए। ये क्या बना? कर्म। मैंने भगवान की पूजा पाठ करी। ये क्या बना कर्म। फिर मैंने मान लो गाय को चारा खिलाया। कुत्ते को रोटी खिलाई। ठीक है? अब ये मुझसे क्या बना? कर्म। अब कुछ नहीं। ये जो मैं दे रहा हूं ना ये सब मेरे पास लौट आएगा। तो इसमें बुराई क्या है? यह बताओ। अब यह तो मन कर रहा है। मतलब आप कर ऐसा रहे हो कि आप बाइक से जा रहे हो। रास्ते में कुत्ता जा रहा है। आपने दी उसके लात की। वो बेचारा दूर जा दूर फेंका आ गया। अब किसी ने आपसे बोला आपके पीछे कि यार ऐसे मत कर दे। कल का कल
(1:27:10) कोई तेरे भी देगा। अरे कुछ नहीं होता है। मतलब क्या होता है ना कि सीधा साल जो मैंने फंडा समझा वो ये है कि अगर मुझे प्यार चाहिए तो पहले मुझे देना पड़ेगा। अगर मैं चाहता हूं कि मुझे लोग प्यार करें, मेरी लाइफ में मुझे प्यार चाहिए तो पहले मुझे देना पड़ेगा। अच्छा मैं प्यार की एक्सपेक्टेशन किससे कर रहा हूं? किससे कर रहा हूं? भगवान से। हां। मतलब लोगों से कर रहा हूं ना। हां। या फिर मैं भगवान से मांगूंगा या मैं लोगों से मांगूंगा। मांगने की जरूरत ही नहीं है ना। क्यों मांगते हो? जैसे लोग भगवान के मंदिर जाते हैं तो लोगों को लगता है भगवान के
(1:27:46) मंदिर इसलिए जाते हैं कि हम मांग ले भगवान मेरे मुझे यह दे दो। मेरी नौकरी लगा दो। भगवान इसलिए थोड़ी है क्या? आप मंदिर जाते हैं अपने आप को हील करने के लिए। मांगने की जरूरत ही नहीं है भगवान से। सिस्टम बना रखा है क्या? आप कर्म करो मिल जाएगा। मान लो मैं कर्म कुछ नहीं करता हूं। और मैं जो है मंदिर जाके और बस भगवान से मांग रहा हूं। भगवान ये दे दो मुझे। भगवान वो दे दो मुझे भगवान। मुझे मिलेगा नहीं तो मैं भगवान को भी फिर एक दिन भगवान की पूजा करनी भी बंद कर दूंगा। भगवान की पूजा करना वह बंद करते हैं जो भगवान से मांगते हैं और उनको मिलता नहीं
(1:28:18) है। अच्छा एक चीज बताओ मान लो जो जो भगवान से मांग रहे हैं सब भगवान उनको देने लग जाता। भगवान क्या देने बैठा है? भगवान तो आपको यह बता रहा है आप शास्त्र में क्या पढ़ते हैं कि माया मतलब सरेंडर करो। हम मतलब जिस चीज को आप भगवान से मांग रहे हैं ना तो भगवान तो यह सिखा रहे हैं कि सरेंडर करना सीखो। कुछ भी आपका नहीं है। यहां आपका कुछ नहीं है। जो जो भी आप यहां पर कर रहे हैं, वह छोड़ के यही जाना है। तो भगवान इसलिए हैं हम ताकि हम भगवान के पास जाके ये समझ सके कि हु एम आई एंड व्हाई आई एम हियर पर्पस ऑफ लाइफ। हां। मेरी लाइफ का पर्पस क्या है? मैं
(1:28:56) यहां क्या लेने आया हूं? अब अमीर बनने, कमाने, खाने, भोगने ये करने नहीं आए हम। देखो, मेरे पास मतलब टाइम से पहले पैसा आ गया। जैसे एक होता है ना कि एक टाइम से पहले जो जो जरूरत होती है एक घर एक गाड़ी जो लोग करते हैं जैसे जनरली इसने घर बना लिया इसने गाड़ी ले ली इसने मतलब ये बंगला बना लिया बैंक बैलेंस है ना तो ये मेरे पास जैसे टाइम से आ गई सारी चीजें मेरा घर भी बन गया ठीक है गाड़ी भी आ गई मेरे पास जैसी मुझे चाहिए थी लग्जरी गाड़ी वो आ गई और जो मैं जो मुझे चाहिए वो सब मैं आज ला सकता हूं है ना ओके तो यह सब हो गया ना तो अब मुझे क्योंकि
(1:29:36) मैं एनालिसिस करता हूं चीजों का तो मुझे समझ में आ रहा है कि यह तो पर्पस था ही नहीं लाइफ का। यह तो यह सेकेंडरी था। और लोगों ने इसको समझ लिया प्राइमरी। मतलब ये जो मटेरियलिस्टिक जो लाइफ है हमारी वेल्थ क्रिएट करना वो पर्पस फर्स्ट नहीं है। आप बोल रहे हो प्राइमरी नहीं है वो। वो तो सेकेंडरी है। वो तो प्राइमरी को पूरा करने के लिए है ना? अच्छा। हमें तो यही लगता है वो प्राइमरी है। ये इसलिए लगता है क्योंकि पढ़ो, जॉब लगाओ, पैकेज मोटा हो जाए फिर शादी हो जाए फिर। अच्छा बताओ इस इससे कोई संतुष्ट हो गया? कोई ऐसा एक बता दो कि जो इस चीज से संतुष्ट हो गया?
(1:30:09) अभी आपने देखा होगा जो विराट कोहली है वो प्रेमानंद जी के वहां पे जा रहे हैं। नंगे पैर जा रहे हैं। राधा राधा कर रहे हैं। वहां बैठ के भक्ति सुन रहे हैं। जबकि उनके पास किस चीज की कमी है बताओ। तो फिर वो वहां क्यों जा रहे हैं? उनको समझ में आ गया कि यार ये नहीं था। अब वही है ना कि जिसके पास आ जाता है ना और वह भी अगर ऐसा बंदा हो कि जिसके ऊपर ईश्वर की कृपा है। मतलब ऐसा नहीं है कि सबके पास आ गया तो सब समझ रहे हैं। सब नहीं समझ रहे हैं। बिल्कुल कई लोग ऐसे हैं जिनके पास अथा धन है। लेकिन अभी भी उनको एक फैक्ट्री और खोल लूं। एक और ये कर लूं। एक और वो कर लूं।
(1:30:45) हम जैसे मैं मेरा ही बताता हूं। कुछ समय पहले मैं ये सब लॉ ऑफ़ अट्रैक्शन मैनिफेस्टेशन ये सब मैंने किया। है ना? अब करते-कर करतेकरते मैंने अपना घर भी बना लिया। अब उस समय क्योंकि जब मैं इस फील्ड में था तो सपने थे कि घर बनाना है। फिर इसके बाद एक गाड़ी लेनी है। फिर उसके बाद इससे बड़ी लेनी है। फिर बंगला बनाना है। फिर इसके बाद में और बड़ी लेनी है। 50 लाख की लेनी है तो 1 करोड़ की लेनी है। पर एक टाइम पे पता नहीं क्यों मुझे रियलाइज हुआ। शायद इस तरफ आना था। मैं चला स्पिरिचुअलिटी की तरफ। अब मैं नहीं चला। मैं ये नहीं कहूंगा मैं चला। आप कहीं जाते
(1:31:16) नहीं है। आपको पहुंचाया जाता है आपके कर्मों के अकॉर्डिंग। तो मेरी लाइफ में स्पिरिचुअलिटी आई। तो मैंने ये चीज समझना शुरू करी कि यह मान लो मैं कितना भी कर लूं हम तो यह कब खत्म हुआ है ना हां अमीर होने का तो कोई आना मतलब ये कब खत्म होगा कब ऐसा हो जाएगा कि आप कह दोगे कि बस बस सेटिस्फेक्शन कब आएगी कर लूंगा जमा दौलतो जर इसके बाद क्या और ले लूंगा एक शानदार सा घर इसके बाद क्या है ना शेरो सुकन की रोज सजाऊंगा महफिलें और होगा मेरा नाम इसके बाद क्या मतलब यह यह जब हो जाता है और इसमें भी मैंने दो लोग बताए एक जिनका हो जाता है और जिनको
(1:31:57) समझ आता है और एक हो जिनका होता रहता है पर उनको समझ नहीं आता है हम अब मैं मेरा ये मानना है कि कोई इंसान है वो इस संसार में आया उसने पढ़ाई करी है है ना पढ़ाई करने के बाद में उसने एक बड़ी जॉब हासिल करी खूब सारा पैसा कमाया खूब बंगले उसके पास मान लो 100 बंगले हैं 100 गाड़ियां हैं है ना और जो कुछ चाहिए सब हैं और वो सब करके और वो मर गया मरना तो सबको ही है ना एक दिन तो वो जो कुछ किया वो तो यहीं रह गया। ठीक है? है ना? और जिसके लिए आया था वो तो उसने किया ही नहीं। तो किसके लिए आए हैं हम? किसके लिए आए हैं? हम यहां पे आए हैं
(1:32:31) हमारी आत्मा का उद्धार करने के लिए। हम यहां पे लर्निंग के लिए आते हैं। सीखने के लिए आते हैं। हम अब ये बातें भी देखो क्या होता है ना अलग-अलग चेतना होती है लोगों की। अलग-अलग चेतना का स्तर होता है। कुछ लोग जो इस पडकास्ट को जो लोग देख रहे हैं उनमें कुछ लोग इस चीज से पूरा रिलेट कर रहे हैं कि हमारे भी अंदर ऐसा चलता है। जैसे मेरे अंदर ये चीज चलने लग गई एक टाइम के बाद तो मैंने कहा ठीक है आप पैसा कमाओ पैसा तो आपको खूब कमाना चाहिए क्योंकि आप जिस जहां रह रहे हैं ना तो यहां पे क्या होता है ना कि लोग पैसा देखते हैं। हां मतलब मेरे मन में भी बार-बार ये आ रहा
(1:33:06) था कि जैसे आपने कहा ना भूख से पहले और कोई प्रॉब्लम नहीं होती। भूख ही होती है। तो कहीं ना कहीं वेल्थ क्रिएशन भी एक पहली भूख है हमारी सबकी कि जैसे अब आप आज भी आप भी जब स्पिरिचुअलिटी की बात करते हो आपने एक लेवल तक वेल्थ क्रिएट कर ली। उसके बाद आपको स्पिरिचुअलिटी में समझ आ रहा है। है ना? नहीं तो उससे पहले आपका भी था कि घर बनाऊं, गाड़ी लूं या फिर था। सो एवरीबडी जो भी सुन रहे हैं उनको भी है ना कि पहले तो एक एक नाम एक लेवल तक तो पहुंच जाए। फिर पता है कि हां भाई हमारा ये सफर जो है वो प्राइमरी कुछ और है। ये सेकेंडरी है।
(1:33:36) देखो प्राइमरी जैसे मैं आपको बताता हूं भगवान ने जो हमारी बॉडी बनाई ये बॉडी कैसी बनाई आप कभी एनालिसिस करना बैठ के सोचना कि इसको भूख लगती है। ठीक है? डेली हमको भूख लगती है। डेली हमको खाना पड़ता है। राइट? तो वो आप आप मतलब खाना ववाना खा लो। है ना? उसके बाद आपका जो मेन काम है यहां का पर्पस वो ये है कि जितना टाइम आपको मिला है यहां पर कितना टाइम मिला है आपको पता है? जैसे मान लो एक इंसान 100 साल जीता है। एक साल में कितने दिन होते हैं? 365 हां। तो एक 100 साल में कितने हो गए? 36500 है ना? हां। ये दिन मिले हैं आपको। 36500 ओके। हम
(1:34:16) अब आप देखो ये कितना कम आंकड़ा है। कम लग रहा है। देखो ये लाख भी नहीं है। हां। मतलब 36500 दिन है आपके पास। तो आप सोचो कि 36,500 दिन क्या मेरे को इसलिए मिले क्या कि मैं खूब सारा पैसा कमाऊं। फिर अच्छा मैं कभी भी पैसे के खिलाफ नहीं हूं। वो ये काम तो मैं भी करता हूं हम क्योंकि हमको यहां का भी मैनेज करना है और ऊपर का भी मैनेज करना है। राइट? लेकिन ऊपर का याद तो रहे कम से कम। हम ऊपर का याद तो रहे। याद मतलब हम कि मेरे को आगे के लिए करना है इस टाइम में। जैसे हम बात करते हैं ना कि यार मेरी लाइफ में प्रॉब्लम है तो कोई बोलता है ये सब
(1:34:50) पिछले जन्म का होगा तुम्हारा। मतलब पिछले जन्म का आ रहा है इधर। तो हमको इस जन्म में ऐसे काम करने हैं कि जो हमारे साथ जाए। बिल्कुल। जैसे मैंने 10 बंगले बना लिए। एक भी साथ नहीं जा रहा है। पर मान लो मैंने एक मेरे रहने का बना लिया और भले मैंने 10 भी बनाए लेकिन उन 10 के साथ-साथ मैंने वो भी कर लिया जिसके लिए मैं यहां आया था। एक शेल्टर होम बना दिया। किसी और के लिए कुछ कर दिया। हां डोनेट कर दिया। मतलब सेवा इसको आप ऐसे समझते हैं। हम प्रकृति से जुड़े हैं। है ना? प्रकृति से जुड़े मतलब जैसे हवा है, जैसे सूरज भगवान है, जैसे चंद्रमा है, जैसे पेड़ पौधे हैं, जैसे
(1:35:27) पानी है, वैसे हम हैं। हम भी प्रकृति से बने हैं। तो अब आप देखो ये सब क्या करते हैं? एक गाना है कि बोल के बताऊं कि गा के बताऊं? गा के बताइए। [हंसी] एक गाना है कि मधुबन खुशबू देता है। सागर सावन देता है। जीना उसका जीना है। जो औरों को जीवन देता है। आप यहां पे आए हैं वो इस ये जो ऊपर वाले ने जो दुनिया बनाई है ना इसमें काम करने के लिए मतलब सेवा करने के लिए मधुबन खुशबू देता है। तो खुशबू लेता है खुद के लिए या देता है दूसरों को और सागर सावन देता है मतलब जो सागर है वो
(1:36:13) आपको सावन आपके घर पानी पहुंचा रहा है उसकी वजह से बारिश आती है हां आपको कभी ये नहीं बोल रहा है कि भैया मैं आपके वहां पानी पहुंचाऊं थोड़ी तारीफ तो कर दो वो केवल दे रहा है उसका काम है देना देना और वो जितना देगा उतना उसको और ज्यादा मिलेगा हम मधुबन खुशबू दे रहा है तो उसके फूल कम नहीं पड़ रहे हैं और खिलते जा रहे हैं है ना मधुबन खुशबू देता है सागर सावन देता है जीना उसका जीना है जो औरों को जीवन देता तो हमारा यहां पे जो पर्पस है वो है दूसरों की हेल्प करना। हमारी वजह से कोई खुश हो लेकिन कर क्या रहे हैं हम? हम हमारी वजह से दुखी कर रहे हैं लोगों को।
(1:36:47) है ना? राइट। आगे एक और लाइन आती है कि चलती है लहरा के पवन के सांस सभी की चलती रहे। और लोगों ने त्याग दिए जीवन कि प्रीत दिलों में पलती रहे। हवा चलती है किसके लिए? हमारे लिए। हम भगवान ने हमको ऑक्सीजन दे दी। कभी हमने कभी ग्रेटट्यूड करा है इसका? आप देखो ऊपर वाले ने जो आवश्यक चीजें हैं पानी अभी अगर पानी नहीं मिले एक दिन तो मर जाए ना आदमी वो फ्री है हां वो भगवान ने हर जगह अवेलेबल करवाया फ्री है हां ऑक्सीजन अभी कोरोना में देखा ही होगा लोगों ने ऑक्सीजन जब नहीं मिली थी तो भैया लाख ले लो 10 लाख ले लो लेकिन दे दो मर जाएगा आदमी
(1:37:24) तो कोरोना ने पता चली ना तो आप ये नहीं समझ रहे हैं कि भगवान ने ये चीजें आपको फ्री दी है। ये दोनों तो फ्री है। बाकी अब आपको क्या करना है? आपके पेट पालने की व्यवस्था करना है। हालांकि वह भी भगवान करता है। अजगर करे ना चाकरी, पंछी करे ना काम। दास मनु का कह गए सबके दाता राम। है ना? मनुक दास जी जो थे तो मनुक दास जी की कहानी पता है आपको? नहीं। मनुक दास मूक दास जी एक सेठ थे। तो वो व्यापार के लिए बाहर जा रहे थे। तो एक दिन एक ऐसे कहीं रुके वो। हम तो वहां पे क्या हुआ कि सुबह-सुबह का टाइम था और तीनचार वह भजन कीर्तन वाले लोग आके
(1:38:01) बाहर बैठ गए। अच्छा जैसे वह धर्मशाला में कहीं रुके होंगे तो मनुक दास जी ने कहा यार सुबह-सुबह किसने नींद खराब कर दी। वो गए उनके पास बोले कि ये क्या कर रहे हो? बोले भगवान के भजन कर रहे हैं। क्या हो जाएगा भगवान के भजन करने से? जैसे अभी हम बात कर रहे ना मेन उद्देश्य क्या है? मेन उद्देश्य है भगवान का भजन करना। जैसे अभी आपने देखा होगा नाम जाप। नाम जाप चल रहा है ना अभी। तो मेन उद्देश्य है नाम लेते रहना। उसी से उद्धार होगा। ठीक है? मतलब आप टाइम खराब मत करो। जब भी आपको मौका मिले आप भगवान का भगवान को याद करते रहो। बस इतना सा है। मतलब आपको भगवान ने
(1:38:35) यहां भेजा है कि जाओ तुम अपना उद्धार कर लो। है ना? लेकिन एक बात है परीक्षा देनी पड़ेगी क्योंकि बहुत लोग हैं नीचे। जैसे मान लो कि कलेक्टर की एग्जाम देते हैं। हम लोग कितने लोग देते हैं? लाखों। है ना? बनते कितने हैं? लिमिटेड। अच्छा। अब लाखों क्यों नहीं बन जाते? भाई उनको भाई आपको एक प्रोसेस को फॉलो करना पड़ेगा क्योंकि बनना सब चाह रहे हैं। सबको ही कलेक्टर बनना है। तो एक काम करो आप अपने आप को साबित करो। बिल्कुल है ना? आप अपने आप को साबित करो और बन जाओ कलेक्टर। कोई दिक्कत नहीं है उसमें। आपको मेहनत करनी पड़ेगी। ठीक वैसे ही इस संसार
(1:39:10) में आपको भेज दिया इस संसार में करोड़ों लोग हैं। अब आपको भेजा आपका उद्धार करने के लिए। तो भगवान ने बोल दिया ठीक है। जाओ साबित करो अपने आपको। तो भगवान क्या करना पड़ेगा उसके लिए? उसके लिए कुछ नहीं करना है। बस आपको जो कर्म करना है वो है भक्ति। भगवान की भक्ति और अच्छे कर्म। ये दो चीजें आपको करनी है। पर एक बात और है साथ में माया रहेगी। अच्छा माया रहेगी ना? हां। जैसे मान लो कलेक्टर की जो लोग एग्जाम दे रहे हैं तो उनका उनको ऐसा पेपर क्यों नहीं दे दो कि भैया ये फाइव क्वेश्चन आएंगे। ये तुम याद कर लो और कल ये आपसे पूछ लेंगे
(1:39:46) जैसे 12थ क्लास में होता है 10थ क्लास में होता है तो ऐसे फाइव क्वेश्चन क्यों नहीं दे देते भाई वो दे देंगे तो सभी सभी पास हो जाएंगे तो कलेक्टर की पोस्ट 10 है और हजारों लोग आएंगे तो फिर कैसे मैनेज करेंगे राइट तो क्या करें पेपर टफ बनाओ जो पड़ेगा वो निकल जाएगा तो वैसे ही इस दुनिया में आपको भेजा आपके साथ में क्या भेज दी माया भेज दी अच्छा कर्म का नियम भी कुछ इस तरह का है हां मतलब हम एक गेम में है इसको ऐसे समझो हम है ना और हमारा यहां आने का उद्देश्य क्या है हमारी आत्मा का उद्धार करना, लेसन लर्न करना, आगे बढ़ना। है ना? अब साथ में माया भी है जो आपको
(1:40:22) डिस्ट्रैक्ट करने का काम करेगी क्योंकि ये उसका काम है। अच्छा। हां। आप गेम में है ना? जैसे आप इसको ऐसे समझो कि 100 लोग हैं। ठीक है? अब 100 लोग एग्जाम दे रहे हैं। तो जो अच्छी तैयारी करेगा वही आगे बढ़ेगा। अब जो आदमी जो है वो निठल रहा है। वो कुछ नहीं आराम से सो रहा है। तो वो उसको कोई मतलब वो आगे बढ़ बढ़ ही नहीं पाएगा। हां। तो वैसे ही मतलब भगवान ने हमको यहां पे भेज दिया। तो माया क्या करती है? रियल लाइफ एग्जांपल में माया का काम है आपको भटकाना। मतलब जैसे दो काम है अच्छे कर्म और भगवान का स्मरण करना। तो माया को ये काम दे रखा है कि
(1:40:56) जैसे ही ये भगवान का नाम लेना शुरू करे तो इसको भटकाना है। इसको लेने नहीं देना है। समझ गए? जैसे ही अच्छे कर्म करे तो इसको भटकाना है। यह काम है माया का और यह गेम का हिस्सा है। अच्छा जो भी मतलब हमारे लाइफ में लालच आ जाता है। कोई गलत काम करने की इच्छा आ जाती है। हां हां अब आप कह दो कि सर कि भगवान एक काम करो ना। ये माया को रखा ही क्यों आपने? तो भैया माया को अगर नहीं रखेंगे तो ये सब आ जाएंगे ऊपर। सीटें कम है ना? टफ करने के लिए जर्नी को टफ करने के लिए माया को बनाया गया है। बस। अब आप माया के जाल में फंसते हो या नहीं फंसते हो वो आपकी लर्निंग के
(1:41:31) हां वो वो आपको सीखना आप कितने स्ट्रांग हो जैसे माया मतलब ऐसा होता है कि इसको ऐसे समझते हैं आज आपने नाम जाप शुरू वो मनुक दास जी की कहानी याद दिलाना मुझे हां अभी फिर से हां वो तो कंटिन्यू कर लेंगे हां आपने जैसे आपको समझ आ गया आपने कहीं सुना कि भैया नाम जाप करना चाहिए यार है ना जैसे मेरा अभी थोड़े दिन पहले श्मशान में जाना हुआ है ना कोई शांत हो गया तो वहां गए। अच्छा। तो वहां जब मैं गया तो सारे लोग थे रिश्तेदार सभी लोग और वहां पे वो बोल रहे हैं कि राम नाम सत्य है। हम क्या बोल रहे हैं? राम नाम सत्य राम नाम सत्य है। अब मैंने मैं बैठा-बठा
(1:42:12) एनालिसिस करता रहता हूं। मैंने कहा अब यहां पे ये देखो कि ये लोग जो बोल रहे हैं कि राम नाम सत्य है। कब? जब वो इंसान चला गया। वो जो इंसान है वो सुनने के लायक नहीं है। उसको लोग यह सुना रहे हैं कि भैया हम ये कह रहे थे कि राम नाम सत्य है और वो तो ऊपर चला गया। लेकिन उस इंसान को किसी भी रिश्तेदार ने या किसी भी दोस्त ने जीते जी ये बात नहीं कही। जीते जी उससे पूछा कि कितने मकान हैं आपके? हां। कितना पैसा कमाते हैं? पैकेज है आपका। हां। पैकेज क्या है आपका? यह बहुत है। और कितने शादी हो गई आपकी? हम नहीं हुई अभी तक? क्यों नहीं हुई? और
(1:42:49) बच्चे कितने हैं? बोले एक एक बेटी है। अच्छा बेटा नहीं है। ओ बेटा नहीं है तो क्यों नहीं है? अब उसको इसमें उलझा के रखेगी दुनिया। ये माया का काम है। इसको उलझा के रखो इसको। है ना? इसको क्या करो? पूछवाओ किसी से इसको। पैकेज कितना है तेरा? अब मेरे से ऐसा क्यों पूछा इसने? है ना? ठीक है। मेरे को ऐसा क्यों बोला? किसी से आपको कुछ बुलवाएगी। कुछ भी आपकी कहीं इंसल्ट करवाएगी। मतलब खुश नहीं रहने देना। हां। मतलब आपको माया का काम है आपको पीछे करना। खींचना आप वहां तक डेस्टिनेशन तक नहीं पहुंच। अब आप अगर अपनी बुद्धि लगा लेते हैं, आप समझ
(1:43:21) जाते हैं कि यह जो कुछ हो रहा है जिससे मैं अफेक्ट हो रहा हूं। किसी रिश्तेदार ने कुछ कह दिया हम ये काम माया का है। अच्छा ये बहुत अच्छा है। अगर आप इसको समझे ध्यान से तो हमारे रिश्तों में किसी से लड़ाई झगड़ा इनलॉज़ की प्रॉब्लम सास ननंद आप इसको बैठ के या तो झगड़ा हां तो ये सब माया ये सब माया है। इसका काम है आपको भक्ति से रोकना। जैसे कई लोग भक्ति करते हैं, करते करते हैं और कुछ खराब होता है उनके साथ वो छोड़ देते हैं। बोले हमने तो भगवान पहले नाम लेते थे अब छोड़ दिया। क्यों? बोले हमारे साथ यह बुरा हुआ। भरोसा नहीं रहा भगवान पे।
(1:43:51) वो माया का काम है। हम टफ करने के लिए आपकी जर्नी को। हां। मतलब कुल मिला के जैसे मैंने कहा ना आप एक गेम में हैं और आपको ध्यान से चलना है। वो एक गेम चलता है ना सबवे सफर पहले चलता था ना ऐसे ट्रेन तो वहां आपका जैसे नजर हटी दुर्घटना घटी। तो बस वैसे ही हमारे साथ हैं। आपको बिल्कुल हम ध्यान रखते हुए कदम बढ़ाना है और हर जगह आपको देखना है कि यह यहां पर मुझे यह यह माया है। यह डिस्ट्रैक्ट कर रही है। ओके? तो उसमें आपको फिजिकल पेन भी आ जाएगा। मेंटल पेन भी उसमें आ जाएगा। हां ये सब चीजें लड़ाई झगड़े। अच्छा एक बात बताओ एक दिन बाद इन इन चीजों
(1:44:24) की कोई वैल्यू रहती है क्या? जैसे एक इंसान पैदा हुआ। पैदा होने के बाद पूरा जीवन जिया और मर गया। और उसने पूरा जीवन जो है इसने मेरे को ऐसा क्यों कहा? उसने मेरे को ऐसा क्यों कहा? ये क्यों हुआ? वो क्यों हुआ? इसके पास इतना पैसा कहां से आया? इसके मकान इतना बड़ा कैसे बन गया? है ना? इसके पास तो ऐसा पैसा है। ये तो ऐसा करता है। ये तो वैसा करता है। यूं करते करते मर गया। अब इन चीजों से आपको मिला क्या? हम अब आप भगवान के सामने खड़े हो और भगवान आपसे पूछ रहे क्या किया तूने? और जो तूने किया वो तो देख माया थी। कुछ था ही नहीं वास्तव में।
(1:44:57) काफी डीप डीप वो है ये। हां। और जो तेरे को करना था वो तो तू कर नहीं पाया। अरे भगवान ये क्या हो गया मेरे से? एक बार और जाने दो ना। अब कुछ नहीं हो सकता। अब तो एक चीज हो सकती है। अब यह चीज हो सकती है। जैसे आपने सुना होगा ना पितृ दोष पितृ दोष ये पितृ दोष है ना ये सब क्या है? ये सब ये है कि कोई आदमी आया इस संसार में वो माया में पड़ा रहा माया में पड़ा रहा मर गया। अब वो ऊपर गया और ऊपर जाके उसकी आंखें खुली कि यार मेरे को जो करना था, भजन करना था, भगवान का नाम जाप करना था, मुझे अच्छे कर्म करने थे वो तो यार मैंने किया ही नहीं और पूरा जीवन मैंने इसमें
(1:45:32) निकाल दिया कि इसकी शादी में नहीं जाऊंगा। इसने मेरा पत्रिका में नाम नहीं दिया। हम है ना? यह मेरे घर पत्रिका देने नहीं आया। इसके यहां नहीं जाऊंगा। इसने इसने मेरे से पूछा नहीं। इसने मेरे से चाय की नहीं पूछा। तो ये फालतू चीजों में रह गए तो इनका तो कोई तुक ही नहीं है कहीं से कहीं तक। तो अब भगवान मेरे को नीचे जाने दो ना। बोले अब आप तो नीचे नहीं जा सकते। तो अब क्या ऑप्शन है? अब ये ऑप्शन है कि जो आपके जो बच्चे हैं उनमें से अगर कोई बच्चा ऐसा निकल जाए जो इन चीजों को कर ले जो करने तुम गए थे तो तुम्हारा उद्धार हो सकता है।
(1:46:03) अच्छा अच्छा अच्छा तभी वो बोलते हैं कि एनसेेस्टल पैटर्न्स होते हैं फैमिली में सिमिलर तरह की सिचुएशनंस आती है। जैसे आपने एक बात सुनी होगी ना कि अगर किसी परिवार में एक बच्चा स्पिरिचुअल निकल जाए तो उद्धार हो जाता है। तो वो सात पीढ़ियों को उतार देता है। सात या 21 जितनी भी होती है है ना? सात पीढ़ी सात पीढ़ी होती है तो वह सात पीढ़ियों को तार देता है। तो वो एनसेेस्टर जो होते हैं ना जैसे वो पितृदष क्या है? पितृदोष मतलब कि जैसे आप आपका ध्यान आपके ऊपर ध्यान है उनका। ऊपर से वो देख रहे हैं कि तुम क्या कर रहे हो? जैसे ही तुम कुछ गलत चीज करने जाते हो
(1:46:36) तुम्हारे अंदर गिल्ट डाला जाता है। ये क्या कर रहे हो? हां। ठीक है? ये गिल्ट क्यों होता है हमको? जैसे ही कुछ गलत करते हैं गिल्ट क्यों होता है? क्योंकि जो एनसेेस्टर्स हैं ना वो नहीं चाहते कि तुम ये करो। करो। वो गाइड करना चाहिए। हम आए थे यहां पे। हां और हम जो करना था वो नहीं कर पाए। हमने भी यही चीजें करी। तुम मत करो नहीं तो हमारा उद्धार नहीं होगा। तो वो कुछ प्रॉब्लम क्रिएट कर देते हैं। अच्छा तब क्योंकि उनको पता है कि जब प्रॉब्लम क्रिएट होगी तो फिर इंसान क्या करेगा? हे भगवान मंदिर कब जाता है आदमी? दुख में। हां। जब दुख शुरू होते हैं ना मंदिर जाना
(1:47:07) शुरू करता है। अदरवाइज मंदिर जैसे नए-नए बच्चे हैं। जब मान लो मैं खुद जब तक लाइफ में कोई प्रॉब्लम नहीं आई तब तक कौन भगवान? किसने देखा भगवान को? हम कोई भगवान वगैरान नहीं होते हैं। सब फालतू बात है। जब तक लाइफ बढ़िया चल रही है ना आपकी लाइफ में हैप्पीनेस पापा दे रहे हैं। पिताजी दे रहे हैं पैसा है ना घूम रहे हैं बाइक से। दोस्त लोग हैं पार्टी कर रहे हैं। एंजॉय कर रहे हैं। तो क्यों भगवान को याद करेंगे? अब वो एनसेेस्टर देख रहे हैं कि यार तू क्यों टाइम खराब कर रहा? हां। लिमिटेड टाइम है। हां। अब ये हमको भी पहले हमसे कुछ हुआ
(1:47:35) नहीं। तो वो क्या करते हैं कि फिर आपकी लाइफ में कोई प्रॉब्लम क्रिएट करते हैं। उनको पता है कि बिना प्रॉब्लम के ये उस रास्ते पे जाने वाला नहीं है। नहीं आएगी। राइट जितने भी स्पिरिचुअल लोग हैं ना कोई ऐसा नहीं होगा कि जो स्टार्टिंग से हां कुछ ऐसे होते हैं जिनकी पुरानी मतलब पढ़ाई होती है जैसे होता क्या है हमारे साथ दो चीजें साथ में जाती है एक जो हमारे कर्म जो भी हम कर्म करते हैं ना तो ये कर्म हमारे साथ में जाएंगे ओके ये जो हम सीख रहे हैं ना ये सब वेस्ट नहीं है ये सब नेक्स्ट बर्थ में ट्रांसफर हो जाएगा अच्छा हां सारा का सारा ट्रांसफर हो जाएगा तो कई
(1:48:10) बच्चे ऐसे भी होते हैं जो इस संसार में आते से ही भक्ति में जुड़ जाते हैं तो उनका पुराना होता है। पुराना वहां से प्लस हो जाता है। ओके। सो श्याम जी जैसे हमने काफी डीपर लेवल पे ले गए बातों को जो कि जरूरी भी है क्योंकि पार्ट टू भी है। पार्ट वन भी आप जाके देखिए। मैं उसका लिंक आपको डिस्क्रिप्शन में दे देंगे हम। तो जरूर चेक करिए। उसमें भी हमने कर्मा को बहुत अच्छे से समझाया है श्याम जी ने। श्याम जी एनीथिंग इन द एंड आप ऑडियंस के साथ कोई बात शेयर करना चाहे। वैसे तो अगर जो यहां तक रुक गया है। है ना? मतलब यहां तक अगर कोई आया है अपने साथ
(1:48:42) मतलब उसके ऊपर ब्लेसिंग है क्योंकि जैसे मैंने कहा था ना कि बिनु सत्संग विवेक न होई और राम यह सत्संग ही तो है सत्संग मतलब क्या अच्छा संग अच्छी बात अच्छी बात तो राम कृपा बिनु सुलभ न सोई मतलब राम जी की कृपा है ईश्वर की कृपा है कि ये चीजें इनको सुनने को मिल रही है ये भाग्य से मिलती है कुछ भी सुनना और सुनने के बाद वो चीज आपको समझ में आना ये भाग्य से होता है मैंने इस चीज को बहुत मैं इसको एक्सपीरियंस कर पा रही हूं हां तो यही है कि इन चीजों को फॉलो फॉलो करें। मैं उन चीजों में बिलीव करता हूं जो नहीं दिखती है। मेरे को इनमें ज्यादा मजा आता
(1:49:14) है। जो दिखती है वो जैसे लोग बोलते हैं ना भगवान दिखते हैं क्या? आपके पास वो एक्सेस नहीं है। हम आपके पास उतना ही एक्सेस है जितना भगवान आपको दिखाना चाहते हैं। जैसे आप इस चीज को ऐसे समझो कि अभी हम बात कर रहे थे कुत्ते की। हां। एक इंसान की और मान लो एक एलीिफेंट है। सबके पास जीव सबके अंदर वही है पर एक्सेस अलग-अलग है। हां। कुत्ते के पास वो एक्सेस नहीं है कि भैया वो मेहनत करके कमा के खा सकें। हम वे वैसे ही इंसानों के पास वो एक्सेस नहीं है कि आप भगवान को देख सको लेकिन भगवान है। यह शक्तियां है लेकिन आपके पास एक्सेस नहीं है कि आप उनको देख सको लेकिन है।
(1:49:47) आप यहां फोन से बैठे-बैठे आप अमेरिका कैसे बात कर रहे हो? फोन यहां है। बीच में कुछ तो होगा ना। राइट? पर वो दिख नहीं रहा है। हां। पर है। इनविज़िबल इज़ मोर पावरफुल देन। हां विज़िज़िबल। मैं तो इनमें विश्वास करता हूं जो इनविज़िबल है। और मेरे को इनमें मजा आता है। बिल्कुल। बिल्कुल। और कहा भी जाता है ट्रांसफॉर्मेशन के लिए भी आपके विज़िबल फैक्टर्स से ज्यादा आपके इनविज़िबल फैक्टर्स पे काम करना जरूरी है। तो आप अपनी लाइफ में बड़े बदलाव ले पाएंगे कर पाएंगे। बिल्कुल श्याम जी बहुत ही इबोरेट करके हमने डिस्कशन किया। आज कर्मा को बहुत रिलेटेबल तरीके से आपने हमें समझा दिया है
(1:50:22) और मेडिटेशन वाज़ द बेस्ट पार्ट। [हंसी] बहुत ही मजा आया। आप भी बताइए आपका इस पूरे कॉन्वर्सेशन में फेवरेट पार्ट क्या था? आप एक क्या चीज है जो कि अपने साथ ले जाने वाले हैं आज। श्याम जी बहुत-बहुत शुक्रिया आपका। आपका समय आपने मेडिटेशन कराई। आपने इतने अच्छे से हमें अपने लाइफ के एग्जांपल से भी समझाया। हमारी लाइफ के एग्जांपल से भी हमें समझाया। मैं चीजों को क्या है ना पर्सनली मतलब जो अनुभव की बातें हैं वो बताता हूं। हम मतलब जैसे किताब में आप कोई लिखा है उसको आप बता दोगे। उसको आपने अगर अनुभव नहीं किया तो सामने वाले पढ़ लेंगे चेहरे पे।
(1:50:55) हम मतलब हम हमारे अंदर वो इंट्यूशन होता है ना। हम पढ़ लेते हैं चीजों को। हम तो वैसा होता है। बिल्कुल बिल्कुल। और जैसे आपने कहा ना कि हम चीजें जो इवेंट होता है वो कुछ सेकंड के लिए होता है पर हम उसको लेके काफी सालों तक बैठे रहते हैं जो सफरिंग्स क्रिएट करते हैं और एक्चुअली जो आप भुगतते हो वो सफरिंग के लेवल पे ज्यादा भुगतते हो मानसिक लेवल पे ज्यादा भुगतता है इंसान फिजिकल देखो जो भी है लाइफ में प्रॉब्लम वो ठीक हो जाती है ये है मतलब ये मानो ठीक होती है वो गाना है ना कि कितनी हसरत से तकती है कलियां तुम्हें क्यों बहारों को फिर से
(1:51:31) सजाते नहीं। मतलब कई लोग ऐसे होते हैं जो उनके लाइफ में प्रॉब्लम आ जाती है और वह हार मान लेते हैं। तो उनके लिए है यह लाइन कि कितनी हसरत से तकती है कलियां तुम्हें यह प्रकृति। क्यों बहारों को फिर से सजाते नहीं। एक दुनिया उजड़ ही गई है तो क्या दूसरा तुम जहां क्यों बसाते नहीं? ब्यूटीफुल। तो चाहो तो हो सकता है। है ना? चलिए सॉन्ग कैसा लगा कमेंट करिएगा। [हंसी] हमारा भी लव टिंगफुल करिए। एक दफा आप कमेंट करते हैं ना तो हमारा लव टाइम फुल होता है। भाई हमारे भी अंदर है। भाई कोई हमारी तारीफ करता है चाहे आप लोग कमेंट लिखोगे सर बहुत अच्छा जो भी आपके मन
(1:52:08) की बात थोड़ा सा ना डिटेल में लिखिए। हां मतलब जैसे आज अभी हमने दो घंटे तो हो गए होंगे ना। हां ज्यादा ही हो गए होंगे। [गला साफ़ करने की आवाज़] दो घंटे का पॉडकास्ट किया है आपके लिए है तो थोड़ा सा समय निकालिए। उसको लिखिए। फिर हम क्या है ना अकेले बैठेंगे। उसको पढ़ेंगे फिर खुश होंगे। फिर वो वाइब्रेशन आपको ढूंढ लेंगे। अच्छी वाइब्रेशन आप तक भेजेंगे। बिल्कुल और दो लोग आपको स्क्रीन पे दिखते हैं। बहुत सारे लोग पूरी टीम होती है। हमारे कैमरामैन बैठे हैं। तनिष् के यहां बैठे हैं। बहुत सारे लोगों की मेहनत होती है। आप तक कुछ अच्छा पहुंचाने की कोशिश है।
(1:52:34) ऐसा नहीं कि सेंसेशन करके व्यूज के लिए कुछ भी बोल रहे हैं। बहुत रिसर्च की हुई है। बहुत सालों का एक्सपीरियंस है। मेरा एज अ जर्नलिस्ट है। आपका एज अ हीलर है। हां इस पे मैं एक बात और बताना चाहूंगा। जैसे कई बार क्या होता है ना हालांकि देखो जो समझता है वो समझता है। मैं ये जानता हूं। कई लोग जैसे ऐसे भी होते हैं अरे ये तो पैसे के लिए कर रहे हैं। ये तो उसके लिए कर रहे हैं। वैसे को नहीं। मतलब अभी आप देखो जैसे मैं 700 कि.मी.
(1:52:56) दूर से आया हूं। बिल्कुल। अभी तीन रात से मैं सोया नहीं हूं। अभी वृंदावन गया था ना तो पहली रात तो मैं लेट पहुंचा तो लेट पहुंचा तो सो नहीं पाए। दूसरी रात मैंने पैदल परिक्रमा करी तो सो नहीं पाए। तीसरी रात वो तीसरी रात गिरिराज जी की परिक्रमा करी और प्रेमानंद जी के दर्शन किए फिर सो नहीं पाए। अभी मेरी आंखों में हो सकता है दिख भी रहा होगा आपको। तो आज ये चौथा दिन है। फिर भी हम बैठ के पॉडकास्ट कर रहे हैं। है ना? यह है कि एक होता है मन के भीतर जैसे सबके होता है। मुझे मेरे पास कई लोग आते हैं। सर मेरी ऐसी इच्छा होती है कि मैं लोगों के लिए कुछ अच्छा करूं।
(1:53:28) वही इच्छाएं हमारे अंदर हैं। जैसे मैंने आपको कहा कि केवल हम यहां का करने नहीं आए हैं। हमको आगे का भी करना है। तो जो आप दोगे वो लौट आएगा। हम तो आपके मन की जो भावनाएं हैं आप जैसे ये है कि हमारे मन की जैसी भावनाएं हैं वैसा हमको रिटर्न मिलेगा। रिटर्न मिलेगा। तो हम नियत अच्छी रखते हैं। अच्छी नियत से मतलब हमारा यह होता है आपका है जैसे आप इतने पॉडकास्ट कर रहे हैं। तो मैं जानता हूं जैसे कि जो इस प्रकार के लोग होते हैं है ना जिनकी चेतना का स्तर ऐसा होता है कि यार मुझे लोगों तक अच्छी चीजें पहुंचानी है। पैसा तो बाय प्रोडक्ट होता है। वो तो आपके
(1:54:00) कर्म से वैसे भी आएगा। बिल्कुल। पर एक वो भावना जो होती है। है ना? हम् कि यार अगर जैसे आज इस पॉडकास्ट को मान लो जितने भी लोगों ने देखा उसमें से अगर 10 लोगों ने भी किसी चीज़ को अप्लाई किया और उनकी लाइफ में चेंज हो आ गया तो बस हम अंदर से अच्छा महसूस करते हैं। जैसे मेरे पास कई लोग आते हैं जिनकी शादी मान लो बिगड़ने वाली है और किसी ने मेरी काउंसलिंग ली और मैंने उसको समझा दिया कि यार ठीक है माफ कर दे होता है ये चीज तुमने भी गलती करी होगी हम और वो उस चीज को रियलाइज करता है कि हां यार ये मैंने भी तो करी और उनकी चीज ठीक हो जाती है और जब वो मेरे को बताते हैं कि
(1:54:33) सर मैंने आपसे काउंसलिंग ली थी और मैरिज बज गई कितना पुण्य है मतलब आपको कितना हमारी शादी हुई मेरे को मतलब अंदर से मतलब लगता है कि यार ये भी तो कमाई है वेल्थ सिर्फ मनी थोड़ी होती है यही वेल्थ रिश्ते होते हैं असली कमाई है खुशी होती है आपके परिवार होता है हां इससे पैसा अपने आप आ जाता है। आ जाता है। मतलब जब आप अच्छा करते हैं लोगों के लिए हम तो पैसा आपको ढूंढते हुए आएगा। ये मैंने अपनी लाइफ में महसूस किया है। आपको पैसे के लिए मेहनत करने की जरूरत नहीं है। अगर आपकी नियत अच्छी है, भाव अच्छे हैं तो अपने आप ये चीजें कहीं ना कहीं से
(1:55:06) पैसा ढूंढते हुए आ जाएगा। बिल्कुल। एक तो यह है तो अपना तो वही है कि नियत सा और हम तो यह चाहते हैं कि भाई ज्यादा से ज्यादा लोग और हम यह हम नहीं कर रहे हैं। ईश्वर की दुनिया है। ईश्वर ने हमको निमित बनाया आपके कर्म की वजह से। हम मतलब ये जो लोग देख रहे हैं ना इनके अच्छे कर्म रहे हैं। तो इनके अच्छे कर्म की वजह से इनको अच्छी बातें सुननी थी। तो ईश्वर ने आप ईश्वर ने आपको और मुझे निमित्त बनाया और हमसे ये बुलवा रहा है। ब्यूटीफुल। वाओ। हम आपको लगता है हम बोल सकते हैं हमारी क्या औकात है? हां सही बात है जो हम बैठ के भगवान क्या है
(1:55:42) क्या क्या कर सकते इसमें हमको थैंक यू आप लोगों का करना चाहिए वैसे भी कि आपकी वजह से कहीं ना कहीं ईश्वर हमसे ये चीजें बुलवा रहा है डेफिनेटली तो कर्म अच्छे इनके हैं इनका प्रारब्ध है कि ये सुनने को मिल रहा है तो उस चक्कर में हम भी अच्छा महसूस कर रहे हैं मतलब मैंने ये चीज देखी है कि ईश्वर की मर्जी के बिना पत्ता नहीं हिलता वो मतलब ये है कि वो चाहेगा तभी आप बोल पाएंगे हम वरना आप नहीं बोल पाएंगे मैंने कई लोगों को देखा है कि जिनके अंदर इतना टैलेंट है, सब कुछ है पर उनको रास्ता नहीं मिलता मैं क्या करूं? कैसे करूं? सही बात है।
(1:56:16) और यहां हम कुछ भी नहीं थे। हम हम मैं तो कहता हूं ना कि कुछ नहीं था। पर पता नहीं कैसे जो है ईश्वर हम बैठ के आज लोगों को ज्ञान दे पा रहे। हम हमने इतना कोई अच्छा क्या कर लिया हमने? ऐसा क्या कर लिया। पर वही है नियत अच्छी। तो और लोगों की वो वो चलो ठीक है। नहीं नहीं बताइए प्लीज। नहीं मतलब यूं कि कई बार लोग बोल लोग कुछ भी बोलते हैं पर सब नहीं बोलते हैं। जो यहां तक रुके हैं हम वो मतलब जो ऐसे वैसे लोग होंगे हैं ना वह तो शुरू के 510 मिनट में निकल गए होंगे। यहां तक वही रुखा है जो आपके और मेरे जैसी भावना रखता है और चेतना रखता है।
(1:56:52) चेतना रखता है। ये है सो थैंक यू एवरीवन। थैंक यू सो मच। थैंक यू सो मच। एक एक छोटी सी स्टोरी सुनाना चाहूंगी क्योंकि हर पडकास्ट [गला साफ़ करने की आवाज़] के मैं कमेंट्स पढ़ती हूं और मैं सारे कमेंट्स पढ़ती हूं। आप जरूर लिखिए अपनी कोई भी फीलिंग है आपको शेयर करना है। आपके साथ कोई इवेंट हुआ है, कुछ हुआ है। आई ट्राई टू रिप्लाई टू देम। एक हर पॉडकास्ट के बाद ना श्याम जी ऐसा कुछ आता है कि यार उसने मेरे साथ ये किया था 10 साल पहले 5 साल पहले तो एक छोटी सी स्टोरी है मेरे एक फ्रेंड ने सुनाई थी मुझे ऑफिस में एक मक होता है वो जा रहा
(1:57:18) होता है अपने जो मोनेस्ट्रीज होती है उससे बाहर जा रहा होता है तो उस दिन ना बहुत बारिश आई होती है और पानी भरा हुआ होता है पूरे एरिया में एक लेडी बिल्कुल सफेद साड़ी में बहुत सुंदर तरीके से तैयार सुंदर कहीं जा रही होती है पानी भरा होता है तो मॉक क्रॉस कर रहा होता है तो उस लेडी को देखता है कि ये पार क्यों नहीं कर रही है आगे क्यों नहीं जा रही है तो वो वो लेडी कहती है कि मैंने ना बहुत अच्छे वाइट कपड़े पहने हैं। आगे पूरा कीचड़ है और मैं इंटरव्यू के लिए जा रही हूं। तो मैं इसको पार नहीं कर सकती तो मेरी साड़ी खराब हो जाएगी। मैं पार करूंगी तो इंटरव्यू खराब
(1:57:46) हो जाएगा। तो वो फंसी पड़ी रहती है वहां पे। तो मॉक क्या करता है? उसको गोदी उठाता है। और इतना सा ही थोड़ा सा ही दूरी का गड्ढा था, पानी था तो उसको उठा के आगे छोड़ देता है। कि सॉल्व हो गई प्रॉब्लम। उसका इंटरव्यू हो जाएगा। उसकी साड़ी बच गई। मक ने उठा के उसको आगे रख दिया। बात खत्म हो गई। ये करते हुए दूसरा मक उसी मोनेस्ट्री का उनके आश्रम का उसे देख लेता है कि भाई तुमने मक हो के लेडी को गोदी उठा लिया आगे छोड़ दिया करके वो देख लेते हैं। अब जब तक जो मक थे पहले वाले उन्होंने वो पहुंचते हैं मोनेस्ट्री में जाके देखते हैं कि सब गसिप कर रहे हैं उनके बारे में
(1:58:18) कुछ-कुछ कानों में बात कर रहे हैं कि इसने लेडी को गोदी उठाया गोदी उठाया तो वो जिस व्यक्ति ने जाकर बताया आश्रम में बुराई की तो उनसे पूछते हैं कि भाई तुमने क्या बताया आके तो उसने कहा कि यार मैं देखा था मैंने तुमने एक लेडी को उठा के पार कराया ये तो गलत है हम तो है ना मक हैं तो उस मोंक ने एक लाइन बोली कि उस लेडी को मैंने वहां सिर्फ तीन सेकंड के लिए उठाया था और वही छोड़ आया था तुम उसको अभी तक उठाए बैठे रहे हो हां भावना की बातें जाकी रही भावना जैसी प्रभु मूरत देखी दिन तैसी उसने सिर्फ हेल्प की तीन सेकंड में वो बात खत्म हो गई और जिस व्यक्ति ने उसको देख के
(1:58:55) गसिप की आके बताया उन्होंने उसने वो बोझ एक्चुअली अभी तक उठाया हुआ है तो जस्ट वांट टू लीव यू विथ दैट स्टोरी अच्छा इस पॉडकास्ट में मैं एक बात और बताना चाहूंगा मैंने पहले भी आपके साथ पॉडकास्ट किया तो आपके साथ वाला जो पडकास्ट होता है वो पता नहीं इमोशनल होता है एक और मतलब प्रियंका जी का भी जो ओरा है वो नेक्स्ट लेवल का है। ओरा की बात होती है। सबका अपना-अपना ओरा होता है। ये महसूस किया। हां तो मैं मैंने बताया अच्छा आप इमोशनल हो जाते हैं मेरे साथ। हां हां पता नहीं क्यों हो सकता है आपका मेरा कुछ पिछले जन्म का ऐसा कुछ रिलेशन
(1:59:26) भाई बहन का ऐसा कुछ रहा होगा। एक कंफर्ट है डेफिनेटली। हां है। और शायद हम दोनों की इंटेंशन ऐसी है कि जो सुन रहे हैं उनको कुछ फायदा मिले। ऐसी नहीं है कि वायरल हो, क्लिप निकले, रील निकले, ये हो, वो हो। एक इंटेंशन बहुत मैटर करती है। वही तो है ना जैसे मैंने बीच में एक बात बताई थी कि जैसे कर्म आप करो फल मिलेगा तो हिसाब देखा जाएगा तो हिसाब कैसे देखो दो मिनट और लगेंगे हां कि तीन लोग हैं और तीनों लोग जो हैं अपने-अपने पिताजी को खाना खिला रहे हैं। तीन घर है हां है ना तीनों मान लो बराबर-बराबर खाना खिला रहे हैं। ना एक कम ना एक ज्यादा।
(2:00:03) ओके। पहले वाला जो व्यक्ति है वो खाना खिला रहा है तो वो इसलिए खिला रहा है कि इनको मैं बढ़िया रखता हूं ताकि ये अपनी प्रॉपर्टी मेरे नाम कर जाए। तो इसीलिए उनको खाना खिला रहा है। बढ़िया हो गया। दूसरा है एक और वो उनको खाना खिला रहा है ताकि मान लो उसका कोई ऐसा इंटेंशन है कि जैसे दो भाई हैं हम है ना? तो उन दो भाई में से जो है ये मेरे को ज्यादा दे दे। मैं इनको बढ़िया रखता हूं। है ना? तीसरा आदमी जो खाना खिला रहा है उसका इंटेंशन ये है कि यार मेरे भाव हैं पिताजी के प्रति और है ना? और मेरे मुझे इनके लिए जो चाहिए वो करना है और वो उनसे बड़े अच्छे उसको
(2:00:33) उसको कुछ चाहिए नहीं भले वो नहीं कर रहे प्रॉपर्टी मेरे को तो नहीं चाहिए तो अब क्या होगा कि तीनों का कर्म सेम बना ना तीनों खाना खिला रहे हैं लेकिन तीनों का अलग-अलग मिलेगा जो जिसके मन में ये है कि ये मेरे प्रॉपर्टी नाम कर दे हां उसका योग ऐसा बनेगा कि नहीं मिलेगा उसको क्योंकि उसकी भावना ऐसी थी वो मिलके भी छीन जाएगा कोई और हां हां हां और जिसके ये था कि मेरे को तो कुछ नहीं चाहिए मेरे पिताजी हैं यार वो मेरे को क्या चाहिए मैं कमा लूंगा उसको बहुत कुछ मिल मिल जाएगा। ये है सिस्टम। लोग इस चीज को समझ नहीं रहे हैं। लोगों को
(2:01:01) लग रहा है कि हम स्कीम लगा के कर लेंगे। स्कीम नहीं चलती है। आप ईश्वर को मैनपुलेट कैसे कर सकते हैं? जो आप दिमाग लगा रहे हैं वो दिमाग किसने बनाया? आप सोचो कि जो आप दिमाग लगा रहे हैं कि मैं ईश्वर को मैनपुलेट कर दूंगा। वो दिमाग बनाया कि किसने दिया आपको? तो उसको अंदर की सब सेटिंग पता है। पता है। कई बार आपके हमारे मम्मी पापा बोलते हैं ना मैंने ही तुझे पैदा किया है। ज्यादा स्मार्ट मत बन। बस वही वैसा ही है। वही बात है। चलिए श्याम जी बहुत-बहुत शुक्रिया। थैंक यू सो मच। आपने इस कॉन्वर्सेशन को यहां तक सुना है तो मुझे पूरी उम्मीद है कि आपको कुछ ना कुछ जरूर
(2:01:33) पसंद आया होगा। आपकी मदद किसी ना किसी तरीके से यह कंटेंट कर पाया होगा। तो प्लीज चैनल को सब्सक्राइब करें अभी। वीडियो को लाइक करें, शेयर करें इन्हें उन लोगों के साथ जहां आपको लगता है कि यह कंटेंट उनकी भी हेल्प कर पाएगा। प्लीज, इट्स अ वेरी बिग गिफ्ट फॉर ऑल ऑफ अस। इट मैटर्स अ लॉट। आपके लिए यह फ्री है, लेकिन हमारे लिए, हमारी टीम के लिए यह बहुत मैटर करता है। थैंक यू सो मच।
No comments:
Post a Comment