China Can Shut Down India in One Click? | HCL Co-Founder Explains | Ft. Ajai Chowdhry
Author Name:Neha Nagar
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Transcript:
(00:00) चाइना के पास एक क्वांटम कंप्यूटर आ गया जो इतना पावरफुल है कि हमारी सारी साइबर सिक्योरिटी को ब्रेक कर देगा। टोटल डिसरप्शन डॉक्टर अजय चौधरी कोफाउंडर ऑफ HCL जिनको फादर ऑफ इंडियन हार्डवेयर इंडस्ट्री भी कहा जाता है। Apple Google Microsoft सब बाहर से। इंडिया से एक भी नाम नहीं होता है। बहुत सालों तक गवर्नमेंट ने कोई सपोर्ट नहीं दिया इंडिया में। गवर्नमेंट ने क्या किया? WTo आईटीआई एग्रीमेंट साइन कर लिया। उसमें उन्होंने इंपोर्ट्स अलाउ कर दिए जीरो ड्यूटी। ओह शिट। तो उससे क्या हुआ कि इतनी सारी कंप्यूटर कंपनीज़ बनी थी, इतनी सारी इलेक्ट्रॉनिक्स
(00:34) कंपनीज़ बनी थी, वो सारे मर गए। व्हाई दे साइन इट? मैं एक मिनिस्टर से मिला था तो उन्होंने एक ब्लंटली मुझे बोला देखिए ऐसा है चाइना को हार्डवेयर करने दीजिए। हम सॉफ्टवेयर करते हैं। बट इंडिया को सेकंड लार्जेस्ट मैन्युफैक्चरर बोला जाता है स्पेशली फ़्स में। अरे एक तरह से सिर्फ असेंबली ही होती है मेनली। मेजर कॉम्पोनेंट्स हैं वो सारे चाइना से आते हैं। इंडिया में [संगीत] लोग बोलते हैं कि मैन्युफैक्चरिंग करना बहुत टफ काम है। अगर आप आज भी देखें तो इंस्पेक्टर्स आते हैं मैन्युफैक्चरिंग प्लांट में। बहुत सारे कंप्लायंसेस हैं और उन कंप्लायंसेस
(01:04) को करते-करते बंदा मर जाता है। अभी हम सिक्यर्ड है मतलब ऑनलाइन वर्ल्ड में क्योंकि आए दिन डाटा लीक की न्यूज़ आती रहती है। सबके घरों में आज के टाइम में Amazon का Alexa है। वो भी सुनता ही रहता है हमारी बातें। उसको सब कुछ पता है। आपके सारे हैबिट्स पता है। जब ऑफ भी होता है तो भी सुनता है आपको। आप कह रहे हो कि गवर्नमेंट फॉरेन कंपनी से प्रोडक्ट खरीद लेगी लेकिन इंडियन कंपनी से नहीं खरीदेगी। नहीं वो लोग इंडियन स्टार्टअप्स को प्रेफरेंस नहीं देते। गवर्नमेंट प्रेफरेंस नहीं देती। गवर्नमेंट नहीं देते। हेलो एवरीवन, वेलकम टू द नेहा नागर शो। और
(01:42) आज का शो बहुत ही इंपॉर्टेंट है क्योंकि काफी अनकंफर्टेबल टॉपिक्स पर हम बात करने वाले हैं। हम बात करने वाले हैं कि क्यों इंडिया चाइना से पीछे है मैन्युफैक्चरिंग में। कैसे एआई हमारी जॉब्स खाने वाला है और हम खुद को कैसे प्रोटेक्ट कर सकते हैं। ऐसे कौन-कौन से सेक्टर्स हैं अगर आप इन्वेस्टिंग के लिए चूज़ करते हो तो आपको 510 साल में काफी ग्रोथ मिल सकती है। और यह सारे क्वेश्चंस मैं पूछने वाली हूं डॉ.
(02:07) अजय चौधरी से कोफाउंडर ऑफ HCL जिनको फादर ऑफ इंडियन हार्डवेयर इंडस्ट्री भी कहा जाता है जो पद्म भूषण विनर है जो इंडिया की इलेक्ट्रॉनिक और टेक इंडस्ट्री के मेंटोर माने जाते हैं आज भी और करेंटली वह वर्क कर रहे हैं गवर्नमेंट के साथ इंडिया के सेमीकंडक्टर मिशन पर एंजॉय द शो तो सर सबसे पहले हम बात करेंगे मेक इन इंडिया इनिशिएटिव की 2014 के इस इनिशिएटिव के बाद इंडिया को काफी पुश मिला है या मिलने की कोशिश की गई है कि वह मैन्युफैक्चरिंग में आगे बढ़े। खुद का कुछ बनाए मेक इन इंडिया। राइट? एफडीआई इनफ्लोस भी बढ़ गए थे और डिफेंस में भी हम काफी आगे
(02:53) आ गए हैं। हमारा ई ऑफ डूइंग बिज़नेस भी जो 160 के आसपास हुआ करता था वो 63 आ गया है। तो क्या आपको लग रहा है कि हम सही में सर्विस ओरिएंटेड जो नेशन हुआ करता था उससे मैन्युफैक्चरिंग की तरफ हम ग्लोबल पावर हाउस मैन्युफैक्चरिंग में बन पाएंगे या उस तरफ जा भी रहे हैं कि नहीं जा रहे हैं? देखिए बहुत सारी इस तरह की बातें हुई हैं पिछले पांच सात सालों में और जो मेक इन इंडिया था उसमें एक ही ऑब्जेक्टिव था उस समय के आप जो चीजें यहां बन नहीं रही हो या इंडिया में बनाएं और एक तरह से चाइना प्लस वन वाज़ एन अट्रैक्शन कि भाई चाइना से लोग यहां आना चाहते हैं तो आप ऑप्शन दीजिए
(03:33) उनको इंडिया में मैन्युफैक्चर करने की इसलिए मेक इन इंडिया एक तरह से एक स्लोगन बहुत बड़ा स्लोगन बना पर उस स्लोगन के पीछे लोगों ने करेक्ट काम नहीं किया। हम मेरे हिसाब से हमको एक बहुत बड़ा मौका मिल रहा था जब हम अपने कंट्री में प्रोडक्ट बना सकें। तो लोगों से आपका क्या मतलब है? किसने काम किया? इंडस्ट्री ने इंडस्ट्री ने। इंडस्ट्री हमारी इंडस्ट्री जो है वो दो तरह से काम कर रही है। एक तो सर्विज में है। तो आईटी सर्विज बहुत बड़ा बन गया। अब आप देखिए मैं कुछ सालों से यही बोल रहा हूं कि आईटी सर्विज को कुछ ना कुछ इश्यूज आने
(04:10) वाले हैं हम ऑटोमेशन और एआई से तो आप सर्विज पे हम डिपेंड नहीं कर सकते। हमें अल्टरनेट बिजनेस बनाना पड़ेगा। इंडिया में 60% हमारी सर्विज हैं। बाकी कमोडिटीज हैं और प्रोडक्ट्स हैं। पर प्रोडक्ट्स बहुत कम है। तो हमें एक प्रोडक्ट नेशन बनने के लिए सिर्फ मैन्युफैक्चरिंग सफिशिएंट नहीं है। हम हमें अपने टेक्नोलॉजी बनानी है। अपना डिजाइन करना है और फिर मैन्युफैक्चर करना है। और उसमें वैल्यू एडिशन बहुत हाई होना चाहिए। हम और उसके बाद जब हम और ग्रेजुएट करें तो अपने ब्रांड्स बनाएं ग्लोबली। एक इंडिया में ब्रांड बनाएं, फिर ग्लोबली ब्रांड
(04:47) बनाएं। तब हमें रियल वैल्यू मिलेगी मेक इन इंडिया की। बट हम क्यों फेल हो रहे हैं मैन्युफैक्चरिंग में? अगर हम मैन्युफैक्चरिंग की ही बात करें तो ट्राई तो बहुत किया था और जहां आप इंडस्ट्रीज की बात करें एंटरप्रेन्योर्स का या स्टार्टअप्स का नंबर भी बहुत बढ़ रहा है। राइट? 2020 से 204 का एक ऐसा टाइम था जहां पर स्टार्टअप फंडिंग भी एक पीक हाई पे पहुंच गई थी। राइट? इतने स्टार्टअप्स डिफेंस में भी हर एक सेक्टर में। तो क्यों नहीं? नहीं मतलब क्या मेन रीज़न हो सकता है? क्या गवर्नमेंट सपोर्ट नहीं करती है? देखिए ऐसा है कि हम लोग थोड़ा सा शॉर्ट
(05:19) टर्म ज्यादा सोचते हैं। हमको आज पैसा बनाना बहुत इंपॉर्टेंट है। कल पैसा बनाना हमारे लिए थोड़ा मुश्किल होता है। तो हम क्या करते हैं? हम शॉर्टकट लेते हैं। हम मैन्युफैक्चरिंग करते हैं। उसमें वैल्यू एडिशन बहुत कम होती है। अगर आप देखें कितना आप इलेक्ट्रॉनिक्स में मैन्युफैक्चरिंग हो रही है। खूब मैन्युफैक्चरिंग हो रही है। मैन्युफैक्चरिंग हैज़ बीन अ सक्सेस। काफी मैन्युफैक्चरिंग हो रही है। पीएलआई सक्सेस हुआ है किसी बहुत सारे एरियाज में। स्पेशली इलेक्ट्रॉनिक्स में तो बहुत सक्सेस मिली है। पर उसमें एक चीज हमने अच्छे से नहीं करी
(05:52) वो ये कि हम इंडिया में वैल्यू एडिशन इनक्रीस करें। मीनिंग मतलब क्या वैल्यू एडिशन देखिए उसमें कितनी मार्जिन बनती है अगर आप उसको सिर्फ असेंबल करते हैं। तो हम आपको 6 8% की मार्जिन मिलती है। तो क्या हम सिर्फ असेंबल कर रहे हैं? मेनली यही कर रहे हैं अभी तक। अब थोड़ा सा मूवमेंट चेंज हो रहा है। गवर्नमेंट ने नई पॉलिसीज बनाई है, नए स्कीम्स बनाए हैं जिसमें वो लोग एनकरेज कर रहे हैं कि आप डिजाइन भी करिए, क्वालिटी भी लाइए, ब्रांडिंग भी करिए। तो ये ईसीएमएस स्कीम आई थी अभी इलेक्ट्रॉनिक्स के कॉम्पोनेंट के लिए। उसमें मिनिस्टर ने
(06:24) बोला है कि आप डिजाइन भी जरूर करिए। तो ये जो हमने शुरू में पीएलआई किया उसमें हमने एक एक तरह से एक गलती करी कि हमने उसमें डिजाइन के ऊपर फोकस नहीं किया। हम लोगों को शुरू से वही करना था जो हम पहले बहुत पहले करते थे। एक बहुत पहले एक स्कीम होती थी गवर्नमेंट की उसमें हम बोलते थे फेज मैन्युफैक्चरिंग प्रोग्राम। फेज मैन्युफैक्चरिंग प्रोग्राम में कौन से ईयर में? अरे ये वी आर टॉकिंग अबाउट द 70 एंड 80 तो फेस मैन्युफैक्चरिंग प्रोग्राम में हम लोग को बोला जाता था अगर आप कुछ मैन्युफैक्चर कर रहे हो तो इस साल आपका वैल्यू एडिशन 10% होना चाहिए अगले साल
(07:00) आपका 20 होना चाहिए उसके बाद 30 होना चाहिए उसका मतलब ये है कि आप लोकली कुछ चीजें खरीद रहे हैं कॉम्पोनेंट्स खरीद रहे हैं जिससे उसका वैल्यू एडिशन बढ़ रहा है आप इंपोर्ट पे डिपेंडेंट नहीं है हम अभी जो हम लोग कर रहे हैं वो बहुत सारा इंपोर्ट डिपेंडेंट है तो उससे क्या है कि हमारे को बैलेंस ऑफ़ पेमेंट्स का प्रॉब्लम होता है। आप देखिए कितना ज्यादा चाइना से इंपोर्ट बढ़ गया है। हर साल बढ़ता जा रहा है। बहुत साल पहले मैंने जब एक गवर्नमेंट को एक रिपोर्ट दी थी उसमें मैंने बोला था कि वन डे आर आवर इलेक्ट्रॉनिक्स इंपोर्ट बिल विल बी हायर
(07:36) दन ऑयल इंपोर्ट बिल। और वो हो रहा है। हो रहा है। क्योंकि हम लोग ने इसके ऊपर ध्यान नहीं दिया। हम और दूसरा मैं इंडस्ट्री को भी ब्लेम करूंगा क्योंकि इंडस्ट्री क्या कर रही थी वो जाते थे चाइना प्रोडक्ट उठाते थे यहां लाते थे उसप एक लोगो लगा के बेच देते थे क्विक मनी क्विक मनी तो शॉर्ट टर्म थिंकिंग अगर आप Apple देखें Apple इंडिया में मैन्युफैक्चर करता है। चाइना में मैन्युफैक्चर करता है। हम यहां जो Apple का मार्जिन मिलता है लोगों को वो 810% मिलता है मुश्किल से। ठीक है? जब कॉम्पोनेंट्स आने लगेंगे तो बढ़ेगा। हम अब उनकी मार्जिन खुद की देखिए।
(08:13) उनकी टोटल मार्जिन 70% है। क्यों है? क्योंकि वो डिजाइन करते हैं। उसमें कुछ यूनिक चीजें बनाते हैं। और उसमें डिज़ की वैल्यू बहुत ज्यादा है और ब्रांड की वैल्यू बहुत ज्यादा है। Apple एज अ ब्रांड इज वेरी वेरीरी बिग। तो बिकॉज़ ऑफ द नेम के नाम है Apple। उनको ज्यादा पैसे मिलते हैं। उनको प्रीमियम मिलता है। हम ये हम लोग नहीं कर रहे हैं। तो आप कह रहे हो इंडिया 7 89% मार्जिन पे खेलता है और चाइना 70% पे चाइना करीब 40 50% तक जाता है क्योंकि उन्होंने भी ब्रांड्स बना लिए हैं अपने। अब आप देखिए कितने सारे चाइनीस फोन ब्रांड्स हैं। Xiaomi और ये वो सब। तो ये
(08:52) लोग बहुत मार्जिन बनाते हैं। हम Apple उस सबसे ज्यादा बनाता है क्योंकि उनकी ब्रांड वैल्यू बहुत बड़ी है। राइट? तो वो करीब 10 15 20% तो सिर्फ ब्रांड पे ले लेते हैं वो। बट इंडिया को सेकंड लार्जेस्ट मैन्युफैक्चरर बोला जाता है फ़्स में। वो तो हैं हम लोग। अच्छा वो हम लोग उसमें हमने बहुत काफी आगे बढ़े हैं। हमने बहुत मैन्युफैक्चरिंग शुरू करी है। लार्ज वॉल्यूम मैन्युफैक्चरिंग शुरू करी है। हमको लार्ज वॉल्यूम मैन्युफैक्चरिंग सीख पड़ी है उससे। हम्म। मैन्युफैक्चरिंग से क्या मतलब है? मतलब क्या-क्या मैन्युफैक्चर कर रहे हैं? फोन पार्ट्स का अगर हम बात करें। [हंसी]
(09:25) उसमें अगर आप देखें तो एक एक तरह से सिर्फ असेंबली ही होती है मेनली। तो हम लोग सब जो मेजर कॉम्पोनेंट्स हैं वो सारे चाइना से आते हैं और हम उसको असेंबल करते हैं। कुछ-कुछ चीजें अब इंडिया में बनने लगी हैं। जैसे टाटा हैं वो उसका कैबिनेट बना रहे हैं। हम तो इस तरह से काफी चीजें बनने लगी हैं। ओके। अभी अभी तक तो मार्जिन बहुत कम थी। अब थोड़ी-थोड़ी बढ़ रही है। पर अगर हमने अपनी पीएलआई स्कीम में यह डाल दिया होता जिस तरह से पीएमपी में करते थे हम लोग कि भाई आपको 20% तो बनाना है। फिर अगले साल 30 बनाना है। तो उससे क्या होता लोगों को चैलेंज हो जाता वन से।
(10:05) हां। अब हमने क्या किया कि हम उसमें सिर्फ वॉल्यूम पे गए। हम लार्ज कंपनीज़ के पीछे पड़े। हम मीडियम कंपनीज़ को पकड़े ही नहीं। हम और हमने डिज़ाइन और आरएडी पे कोई जोर नहीं दिया। बट जो नए स्टार्टअप्स आते हैं जैसे हम स्टार्टअप इन इंडिया इनिशिएटिव है वो लोग ज्यादा फोकस नहीं करते होंगे आरएडी पर रादर देन जस्ट कुछ लोग करते हैं क्योंकि स्टार्टअप्स का तो और कोई वैल्यू बनता ही नहीं है। जी क्योंकि वो तो उनके पास तो ना तो ब्रांड है ना पैसे हैं और लार्ज वॉल्यूम मैन्युफैक्चरिंग वो कर नहीं सकते। जी तो वो लोग तो डिजाइन करके प्रोडक्ट्स बनाते हैं।
(10:37) जैसे एक हम बहुत सुंदर स्टार्टअप है जिसको मैंने मेंटर किया था उसका नाम है नोकारार्क। नो नोकारार्क नोकारक। अच्छा नोकार क्या बनाता है? मेडिकल इक्विपमेंट बनाता है वो। ठीक है? उसने जब कोविड शुरू हुआ तो वो किसी और बिजनेस में था। और जब कोविड आया तो प्राइम मिनिस्टर ने बोला कि भाई हमको इंडिया में वेंटिलेटर बनाना है। जी। तो उन्होंने क्या किया कि अपना एकिस्टिंग बिनेस को छोड़ दिया क्योंकि वो तो बिज़नेस चल ही नहीं रहा था क्योंकि कोविड आ गया था। हम तो कोविड में उन्होंने 90 डेज में एक वेंटिलेटर डिजाइन किया। ग्राउंड अप हम उसमें मैं भी इन्वॉल्व था। बहुत सारे लोग
(11:14) हम लोग उसको एडवाइस दे रहे थे। वाओ। उससे क्या हुआ कि उन्होंने 3000 वेंटिलेटर बेचे कोविड टाइम में। कुछ ही महीनों में। हां। करीब एक डेढ़ साल में। एक डेढ़ साल। एक डेढ़ साल। तो 3000 वेंटिलेटर बेचे। अब उनसे उससे क्या हुआ? और उसमें उनकी मार्जिन बहुत अच्छी थी। हम डिजाइन किया है। हां। बिकॉज़ उन्होंने खुद डिजाइन किया था। हां। तो उन्होंने उसके बाद काफी कोशिश करी कि जितने कॉम्पोनेंट वो इंपोर्ट कर रहे थे उसको कम करें और इंडिया से खरीदें। तो वैल्यू एडिशन इनक्रीस होता रहा। हां। अब जब उन्होंने देखा ग्लोबल कंपटीशन काफी आ रही है तो उन्होंने बोला कि हम अब अगला
(11:50) जो प्रोडक्ट बनाएंगे वो बिल्कुल ग्लोबल स्टैंडर्ड्स में बनाएंगे। ठीक है? वो सिर्फ कोविड के लिए नहीं बनाएंगे। उनको स्ट्रेंथ आ गई। उनको एक्सपीरियंस आ गया। उनको नॉलेज आ गया तो उन्होंने अगला वेंटिलेटर ऐसा बनाया। हम बट जब इतना अच्छा कर रहे होते हैं हमारे स्टार्टअप्स जैसे आपने अभी बताया तो क्या उनको गवर्नमेंट का सपोर्ट मिलकर और बड़ा बनाया जा सकता है? बिल्कुल बनाया जा सकता है। और उसमें एक सबसे बड़ी चीज ये है हम एक तो अगर आप देखें तो फंडिंग का प्रॉब्लम इतना नहीं है। जी फंडिंग तो मिल रही है स्टार्टअप्स को। हम एंट्री लेवल पे भी मिलती है। एंजल फंडिंग
(12:26) मिलती है। वीसी फंडिंग मिलती है। मिलती है फंडिंग। हम्। बट सबसे बड़ा प्रॉब्लम हमारी कंट्री में यह है कि हम उन लोगों को गवर्नमेंट बिज़नेस नहीं देते। हम अमेरिका में क्या हुआ जब डिफेंस में दारपा करके एक ऑर्गेनाइजेशन बनी जिसका डिफेंस रिसर्च ऑर्गेनाइजेशन थी वो। ठीक है? उन्होंने क्या किया कि वो सारे कंपनीज़ जो भी उनको प्रोडक्ट चाहिए थे डिफेंस के लिए वो चैलेंजेस देते थे। आप ये प्रोडक्ट बना के दीजिए हमको। ठीक है। अगर वो लोग प्रोडक्ट बना लेते थे और टेस्ट ये लोग करते थे और सक्सेसफुल हो जाता था। खूब सारा बिनेस उनको देते थे जिससे वो स्केल कर जाए। हम
(13:05) इंडिया में क्या है? वो बेचारे टेंडर के चक्कर में पड़ जाते हैं। और टेंडर बहुत टेंडर में वो इस तरह की कंडीशंस डाल दी जाती है जो स्टार्टअप्स को सूट ही नहीं करती। उसमें लिख देंगे आपके पिछले 5 साल का कितना रेवेन्यू था। कितना प्रॉफिट था। हां वो छ महीने पहले खुला है। नहीं कैसे देगा वो? तो हमें स्टार्टअप को सक्सेस बनाने के लिए गवर्नमेंट का मार्केट एक्सेस देना बहुत इंपॉर्टेंट है। यह अमेरिका में बहुत अच्छे से हुआ। कोरिया में होता है, इंग्लैंड में होता है। हम लोग नहीं करते। हम लोग कोई प्रेफरेंस नहीं देते स्टार्टअप्स को। तो हमें स्टार्टअप्स को सक्सेसफुल बनाने
(13:41) के लिए और इंडियन प्रोडक्ट्स को सक्सेसफुल बनाने के लिए मार्केट एक्सेस बहुतेंट है। गवर्नमेंट की। तो गवर्नमेंट में जो भी प्रोडक्ट सर्विज यूज़ हो रही है मेजरली फिर वो तो पुराने बिनेसेस के थ्रू यूज़ हो रही होगी। वो सारी पुरानी टेक्नोलॉजी या पुराने सिस्टम पुराने भी है और और चीज ये भी है कि वो लोग इंडियन कंपनीज़ को स्टार्टअप्स को प्रेफरेंस नहीं देते। गवर्नमेंट प्रेफरेंस देते गवर्नमेंट नहीं देते। गवर्नमेंट में अगर 50% से गवर्नमेंट इज द लार्जेस्ट बायर इन द वर्ल्ड। सबसे बड़ा बायर गवर्नमेंट होता है। राइट? अगर आप वेंटिलेटर देखें इतने सारे
(14:12) हॉस्पिटल्स हैं गवर्नमेंट के। सब जगह वेंटिलेटर लगते हैं। बट ये कितना गलत है। हां, यही तो प्रॉब्लम है। हम लोग मार्केट एक्सेस स्टार्टअप्स को देते ही नहीं है। और इस वीकनेस को हमें रिमूव करना चाहिए। हर स्टेट में सेंट्रल गवर्नमेंट में एटलीस्ट 50% गवर्नमेंट की जो बाइंग है वो स्टार्टअप्स को जानी चाहिए। उससे क्या होगा कि स्टार्टअप स्केल कर पाएंगे और एक बार स्केल कर गए फिर उनको इसकी जरूरत नहीं पड़ेगी। बट अ आप कह रहे हो कि गवर्नमेंट फॉरेन कंपनी से प्रोडक्ट खरीद लेगी लेकिन इंडियन कंपनी से नहीं खरीदेगी। नहीं खरीदगी जबकि प्रेफरेंस नहीं मिलता।
(14:49) बट जबकि हम ऐसे इनिशिएटिव चला रहे हैं स्टार्टअप स्टैंड अप इंडिया मेक इन इंडिया बहुत अच्छे इनिशिएटिव्स हैं। जी जी पर उन्होंने असली चीज नहीं करी है। हां। वो ये कि गवर्नमेंट का बिज़नेस देना चाहिए इनको स्टार्टअप्स को। उसमें टेंडर कंडीशंस डाल देते हैं। वो सारे स्टार्टअप्स को बोलते हैं आप टेंडर में अप्लाई करो। अब टेंडर में वो लोग लिख देते हैं फाइव इयर्स एक्सपीरियंस। हम यू मस्ट हैव इंस्टॉल्ड 5000 वेंटिलेटर्स। अब ये बच्चे लोग कहां दिखा पाएंगे? तो कोई भी नहीं सक्सेस होता। हम चाइना, यूएस या कहीं पर ऐसे लॉज़ होते हैं क्या अभी?
(15:24) मिनिमम इतने नया होना चाहिए। चाइना ने क्या किया? जब उन्होंने देखा कि वर्ल्ड में टेलीकॉम मार्केट बहुत बड़ी है। जी। तो उन्होंने एक कंपनी को बनाया एक तरह से हुवे करके कंपनी बनाई वो आज नंबर वन है वर्ल्ड में टेलीकॉम में क्यों है सारा बिजनेस जो चाइना का था वो हुवे को जाता है आज तक आज तक और इस बिनेस से हुवे बहुत बड़ा बन गया हम अब जब वो अफ्रीका गए या लैटिन अमेरिका गए किसी भी कंट्री में गए वो जाके बोलते हैं हम तो $1 बिलियन डॉलर कंपनी है मैं उस साल पहले की बात कर रहा हूं अब तो बहुत बड़े बन गए वो। जब वो जाके बोलते हैं हम 1 मिलियन डॉलर हैं। हमने इतनी सारी
(16:06) मशीनें बेची हैं। तो लोग खरीदते हैं हमसे। उसके बाद क्या हुआ? अमेरिका और यूरोप को धक्का लगा जी कि देखो भाई ये तो हुए बहुत बड़ा बन रहा है। और उन्होंने सोचा कि ये लोग तो हमारा सारा इंफॉर्मेशन लेके चले जाएंगे। तो उन्होंने बैन कर दिया इनको। अपनी कंट्री से बैन कर। अपनी कंट्री में। अमेरिका में Hu बैंड है। अपने प्रोडक्ट्स को अपनी कंपनीज़ को प्रोटेक्ट करने के लिए। यस। वाओ। तो उन्होंने Hui को बैन कर दिया। यूरोप में भी हुबे को बैन कर दिया क्योंकि उनको इसको अपने यूरोपियन कंपनीज़ को बचाना था। अमेरिका में भी अमेरिकन कंपनी जैसे Sisco
(16:41) है उसको बचाना था। तो उसके बाद चाइना ने क्या किया? हम आप देखिए उनकी स्ट्रेटजी हाउ टू सपोर्ट अ स्टार्टअप? हाउ टू सपोर्ट अ कंपनी? उसको ग्लोबल बनाने के लिए उन्होंने बोला आप जाके लैटिन अमेरिका में बेचिए। आप जाके अफ्रीका में बेचिए। हम आपको 2 साल का क्रेडिट दे देंगे। वाओ। इतना लंबा क्रेडिट लाइन दे दिया कि वो कस्टमर के जाके पास बोलते हैं आप 2 साल तक पे मत करिए। कौन नहीं खरीदेगा? तो लुक एट द सपोर्ट दैट इज प्रोवाइडेड बाय चाइना टू इट्स ऑल कंपनीज़। एंड ये एक ही है। एक बहुत सारे केसेस हैं इस तरह। अच्छा आप यह बताओ कि आप खुद मिनिस्ट्री की एडवाइज़री बोर्ड्स में रह
(17:18) चुके हैं। मल्टीपल टाइम्स एंड मल्टीपल मिशनंस पे आप काम कर रहे होते हैं। तो आप आपका कभी ऐसा कन्वर्सेशन हुआ हो कि हम अपने स्टार्टअप्स को इस तरीके से सपोर्ट करें तो कैसी कन्वर्सेशन रही है? देखिए मैंने तो इसके ऊपर एक नोट भी बना के भेजा था जी। गवर्नमेंट को कि इसमें हमको स्टार्टअप्स को अगर रियली सक्सेसफुल बनाना है तो हमें मार्केट एक्सेस देना बहुत जरूरी है। पर उस पे कोई काम नहीं हुआ अभी तक। क्योंकि गवर्नमेंट इज टक के हमारा तो गवर्नमेंट प्रोसेस है। हम इसको नहीं बदल सकते। हम अब वो प्रोसेस पे आप अटक गए तो आपको देखना पड़ेगा कि आप किस तरह से इंडस्ट्री को
(17:52) बढ़ा सकते हैं। हजारों नई कंपनीज़ शुरू कर सकते हैं आप इस तरह से। क्योंकि जितने सारे प्रोडक्ट्स आप खरीदते हैं सब प्रोडक्ट्स में अगर आप स्टार्टअप्स और लोकल कंपनी से खरीदेंगे तो सब बड़ी हो जाएंगी। राइट? वो स्केल हो जाएंगी। वो एक तरह से जो एंकर कस्टमर का रोल है वो हम लोग नहीं पे करते। हम पर एक बहुत अच्छी सी चीज हुई है वो यह के गवर्नमेंट ने अब आरएडी मनी प्राइवेट सेक्टर में डालना शुरू कर दिया। बहुत पहले नहीं होता था। हम अब आरडीआई स्कीम आई 1 लाख करोड़ की स्कीम आई प्राइम मिनिस्टर की और उसमें उन्होंने बोला है कि हम प्राइवेट सेक्टर को आरएडी
(18:30) करने के लिए प्रोडक्ट बनाने के लिए पैसे दे रहे हैं। बट क्वेश्चन यहां फिर यह है कि यह जो 1 लाख करोड़ है यह वह सिर्फ स्टार्टअप्स को दे रही है या फिर वेल एस्टैब्लिश्ड कंपनीज़ को सबको क्योंकि जो साइज्ड स्टार्टअप्स बड़ी कंपनीज़ जो भी आए बड़ी कंपनीज़ को क्या जरूरत है सर फंड्स की अरे नहीं आरएडी करते हैं ना [हंसी] उनको नच करने के लिए गवर्नमेंट ने बनाया है कि बड़ी कंपनीज़ भी आरएडी नहीं करते एक्चुअली मीडियम साइज कंपनी ज्यादा आरएडी करती है स्टार्टअप ज्यादा आरएडी करते हैं बड़ी कंपनीज़ तो करती नहीं है जी तो बहुत सारी इस तरह से गवर्नमेंट ने सोचा
(19:04) कि भाई अगर आप इंडिया में वैल्यू एडिशन इनक्रीस करना है तो सिर्फ आरडी से हो सकता है। हम और इसलिए वो स्कीम अब चल पड़ी है। उन्होंने कुछ अनाउंसमेंट्स होने वाली है कल परसों में। हम अब वी विल सर्कल बैक टू चाइना अगेन। जैसे आपने बोला कि चाइना से हम बहुत चीजें इंपोर्ट कर रहे हैं। और चाइना वर्ल्ड की मैन्युफैक्चरिंग में ऑलमोस्ट 30% का शेयर होल्ड कर। देखिए वो क्या कर रहे हैं। एक बहुत इंटरेस्टिंग चीज इन्होंने बोली थी रुचि शर्मा को। रुचिर शर्मा का नाम सुना होगा ना रुचिर रुचिर ने एक इकोनॉमिस्ट है वो तो उन्होंने एक चीज़ बोली के चाइना के पास इतनी ज्यादा
(19:41) कैपेसिटी है हर चीज की कि वो सारी चीजें दूसरी कंट्रीज में भेज रहे हैं सारी कंट्रीज में जहांजहां आप देखें डेवलपिंग कंट्रीज में जगहजगह चाइनीस प्रोडक्ट जा रहे हैं और वो इस प्राइस पे जा रहे हैं कि वो लोकल बंदा बना ही नहीं सकता उस प्राइस पे स्केल इतना बड़ा इतना बड़ा स्केल है उनके पास और सारी वैल्यू एडिशन वही होती है तो थोड़ा पीछे जाते हैं कि कैसे फिर इंडिया मतलब पपुलेशन में तो ऑलमोस्ट हम सेम है और अगर हम 40 इयर्स पहले देखें 50 इयर्स देखें तो इतना डिफरेंस नहीं हुआ करता था सर राइट तो ये 30 इयर्स का या 40 इयर्स में ऐसा क्या बड़ा चेंज हो गया कि सारी जो पावर है
(20:14) स्पेशली मैन्युफैक्चरिंग की वो चाइना के पास चली गई ऑफ कोर्स जो गवर्नमेंट का सपोर्ट आपने बताया वो इसके अलावा और क्या रीज़न हो सकते हैं? देखिए भाई वहां उन्होंने बहुत फ्लेक्सिबिलिटी से काम किया और बहुत सारे डिसीजंस लोकल मेयर्स के पास छोड़ दिए। तो अगर आप चाइना जाते हैं और किसी प्रोविंस में जाते हैं और बोलते हैं कि मैं यहां मैन्युफैक्चरिंग लगाने चाहता हूं। वो वहीं का वही डिसीजन हो जाता है। ई ऑफ़ डूइंग बिज़नेस। ई ऑफ़ डूइंग बिज़नेस तो बिल्कुल स्मूथ है। और वो एक मेयर सारे डिसीजन ले लेता है। हमारे यहां क्या है कि ईज़ ऑफ़ डूइंग बिज़नेस
(20:47) हम 60 पे तो आ गए हैं। पर अगर आप किसी भी इन्वेस्टर से पूछिए तो हम पहुंचे नहीं है वहां। जहां पहुंचना चाहिए हमें। ई ऑफ बिजनेस ऐसी होनी चाहिए कि आपको कोई तंग ना करे आके रोज। अगर आप आज भी देखें तो इंस्पेक्टर्स आते हैं मैन्युफैक्चरिंग प्लांट में। ऐसा नहीं है। और बहुत सारे रेगुलेशंस हैं। बहुत सारे कंप्लायंसेस हैं और उन कंप्लायंसेस को करते-करते बंदा मर जाता है। हम इंडिया में लोग बोलते हैं कि मैन्युफैक्चरिंग करना बहुत टफ काम है। अब धीरे-धीरे कुछ सालों में सिंपलर हो गया है। पर हमें बहुत आगे जाना है इससे। रीसेंट टाइम्स में आई थिंक 6 सात महीने
(21:23) पहले पीयूष जी की कोई स्पीच थी कि हम इंडियन स्टार्टअप्स कुकीज़ बना रहे हैं। हेल्दी चॉकलेट बना रहे हैं। क्यों हम टेक में नहीं जा रहे? तो फिर एक स्टार्टअप फाउंडर थे। उनका ट्वीट बहुत वायरल हुआ था कि कैसे उन्होंने कुछ स्टार्टअप बिल्ड किया था और जस्ट बिकॉज़ ऑफ़ पेटेंट वाला जो कॉम्प्लिकेशन होता है, जो कंप्लायंस होता है, उसकी वजह से उसका स्टार्टअप बंद हो गया बिकॉज़ वो दो साल तक उधर चक्कर काटते रहे। हां, सो यही तो है कंप्लायंसेस में बहुत टाइम लगता है इंडिया में। हम पेटेंट का काफी इंप्रूवमेंट हुआ है लास्ट दो साल में। बहुत सारे पेटेंट्स अब दिए जा रहे हैं।
(21:56) तो वो धीरे-धीरे इंप्रूवमेंट हुआ है। बट यू नो हर चीज में धीरे-धीरे नहीं चल सकते हम। राइट? हमको पेस चाहिए। हम हर चीज में हमें जो हमारा कंपेटिटर्स हैं वो हमारे से 10 एक्स फास्टर है। राइट? और देयर फॉर हमें जो डिसीजन लेने हैं वो फास्ट डिसीजन लेने हैं। हमें अर्जेंसी दिखानी है। हम क्योंकि वो जो अर्जेंसी है वो हमारे में नहीं है। मिसिंग है। हम इवन रेयर अर्थ मेटल्स रेयर अर्थ की हम बात करें तो वो भी हमारे पास रिजर्व्स तो है बट स्टिल फिर 90% जो माइनिंग या काम हो रहा है वो चाइना से हो रहा है। हर जगह हर एक टॉपिक के बारे में टेक रिलेटेड हो या
(22:31) फिर वो मैन्युफैक्चरिंग रिलेटेड हो वो सारा घूम फिर के फिर चाइना आ जाता है। उन्होंने तो उसको वेपनाइज कर दिया। जी। उन्होंने तो बोला हम किसी को नहीं देंगे। हम तो एक तरह से उन्होंने वेपनाइज किया उसको। तो देखिए ऐसा है हम के चाइना ने लॉन्ग टर्म प्लान बहुत अच्छे से बनाया है और उन्होंने डिफाइन किया है वि टेक्नोलॉजीस दे विल वर्क ऑन। हम टुडे अगर आप देखें तो टॉप 90 टेक्नोलॉजीस में 60 में 60 में चाइना नंबर वन है। वाओ क्योंकि उन्होंने बहुत पहले से ये सब सोच के आगे बढ़े। हम शुरू शुरू में चाइना भी इंडिया की तरह होता था। जी। लो लेवल मैन्युफैक्चरिंग होती थी।
(23:11) जी। उसके बाद वो प्रोडक्ट नेशन बना। हम उसने डिजाइन करना शुरू किया। उसके बाद ब्रांडिंग शुरू करी। वो एक एक स्टेज से हमें जाना पड़ता है। बेस मैन्युफैक्चरिंग से, डिजाइन से, फिर उसके बाद ब्रांडिंग से धीरे-धीरे मार्जिनस बढ़ती हैं और वॉल्यूम बढ़ता है। आपकी मार्केट्स साइज बढ़ने लगती है। थोड़ा सा रेयर अर्थ वाला जो इंडस्ट्री है उसके बारे में और बात करते हैं। आपने बोला वेपनाइज कर दिया। तो ये कैसे जियोपॉलिटिकली कैसे बेनिफिट में काम कर रहा है चाइना के? देखिए वो जितने इलेक्ट्रिक व्हीकल्स हैं उसमें बहुत मैगनेट्स चाहिए होते हैं। उसके लिए रेयर
(23:48) अर्थ की जरूरत है। वो उन्होंने बीच में बिल्कुल बंद कर दिया। अब क्या हुआ? एक्सपोर्ट ही नहीं कर रहे। एक्सपोर्ट नहीं कर रहे। अब उन्होंने वेबनाइज कर दिया उसको। तो ये एक बहुत सीरियस इशू है। इसके लिए एक बहुत अच्छा सशन भी है इंडिया में। जी वो ये कि जो आपके पास पुराने इलेक्ट्रॉनिक्स पार्ट्स हैं हम वो अगर उसको आप प्रॉपर्ली उठा लें जो पुराने रिजेक्टेड प्रोडक्ट्स हैं पुराने कंप्यूटरटर्स पुराने फ़स ये सब इसमें से आपको बहुत कुछ रेयर अर्थ मिल सकता है। ओ तो ये हम कर सकते हैं आज ऐसी कोई बात नहीं है कि हम इसको नहीं कर सकते। हमें कोई
(24:27) खोदने की जरूरत नहीं है। वाव हमें बहुत सारा रेयर रथ वहां से मिल सकता है। और कितना बड़ा एडवांटेज हो सकता है। बहुत और इंडिया सबसे बड़ा नंबर नंबर टू है वर्ल्ड में इन गिविंग थ्रोइंग इलेक्ट्रॉनिक्स। ओके? तो हम उसको रिजेक्ट करके फेंक देते हैं। क्योंकि हमारे रिपेयर ही नहीं हो पाती ये चीज़। रिपेयर हम लोग कर बहुत सारी बहुत सारी ब्रांड्स जो हैं वो रिपेयर करने ही नहीं देते आपको। क्योंकि इतना महंगा होता है रिपेयर कि आप नई चीज खरीदते हो। पुरानी चीज फेंक देते हो। सी पहले एक जमाना होता था। जी व्हेन यू मेड प्रोडक्ट्स फॉर लाइफ जी तो सारे प्रोडक्ट्स बनते थे कि 510 साल
(25:01) जरूर चले हम अब तो प्रोडक्ट्स इस तरह से बनते हैं कि डेढ़ साल से ज्यादा ना चले हम आई थिंक ये सिर्फ टेक में नहीं है हर एक सेक्टर में ऐसा है इवन क्लोथ्स में भी हर जगह यही यही होने लगा है ये एक वेस्टर्न स्टोरी है जी इंडिया में आप जो हम बचपन में मेरे कपड़े जब छोटे पड़ने लगते थे तो मेरा भाई पकड़ लेता था उसका और सालों यूज़ होते थे सालों यूज़ होते थे तो हम हम लोग जो है इंडिया में जो कल्चर था जी हम लोग ने वेस्टर्न कल्चर अडॉप्ट कर लिया है रिपेयर ना करवाने का प्रिजर्व नहीं प्रिजर्व नहीं करने का वो हम गलत डायरेक्शन में चले गए हैं
(25:37) कंप्लीटली वेस्टर्न बट वो कंसमशन के लिए अच्छा नहीं है बहुत अच्छा है बहुत अच्छा है पर वो मैन्युफैक्चरर्स के लिए बहुत अच्छा है ब्रांड्स के लिए भी बहुत अच्छा है पर कंट्री के लिए नहीं अच्छा हम ई वेस्ट जनरेट हो रहा है ई वेस्ट बहुत जनरेट हो रहा है वी आर द सेकंड लार्जेस्ट ईवेस्ट कंट्री उसका कुछ कर नहीं रहे हम ईवेस्ट के लिए क्योंकि अगर सेकंड लार्जेस्ट का टैग लग ही गया तो आई एम प्लानिंग में या कुछ करी गई है। इट्स नॉट बीन सक्सेसफुल। देयर आर अबाउट फाइव सिक्स गुड ई वेस्ट कंपनी हु आर डूइंग रिसाइक्लिंग एटसेट्रा बट नाउ क्या हो रहा है कि अब लोगों को
(26:07) रियलाइज होने लगा है कि उससे वो लोग रेयर रथ भी निकाल सकते हैं। हम तो अब कुछ लोगों ने अनाउंसमेंट्स करी है कि हम रेयर रथ निकाल रहे हैं। तो ये कितनी अच्छी अपोर्चुनिटी है किसी के स्टार्टअप के लिए। अप्चुनिटी है ये। बहुत बड़ी बट अगेन इसके लिए फिर फंड्स बहुत ज्यादा चाहिए होंगे। नहीं कुछ फंड्स की जरूरत नहीं है। एक डायरेक्शन देना है के भाई आप रेयर नथ्स यहां से निकालिए और ऐसा कुछ खास फंड्स नहीं लगेंगे। जिस तरह से आप प्रोडक्ट्स को रिसाइकल करते हैं, निकालते हैं जो भी ईवे फेंका जाता है उसको ही आप यूज़ करिए। उसमें क्या है? हम तो इस तरह से 2530 कंपनी खड़ी हो सकती हैं
(26:41) जो रेयर रस निकाले। वेरी इंटरेस्टिंग। अच्छा इसी से मेरा एक और क्वेश्चन है कि आप खुद टेक बैकग्राउंड से हो और आप बिल्ड कर रहे हो बहुत सारे स्टार्टअप्स तो एनी टॉप थ्री स्टार्टअप्स या आपके बहुत फेवरेट है जैसे अभी आपने एक मेडिकल इक्विपमेंट का बताया टेक में ई वेस्ट में या इधर मतलब जहां ट्रेंड जा रहा है धीरे-धीरे ईवी है इधर कोई आपका स्टार्टअप हो फेवरेट जो इंडिया से बन रहा है और उसके पास वो कैपेबिलिटी है ग्लोबल जाने की एथर करके है एक एथर उसके साथ मैंने अब काफी बातचीत करी है जी वो एक बहुत बढ़िया कंपनी बन रही है। बेस बेस अब वो टू व्हीलर ईवी बना रहे हैं।
(27:18) जी उन्होंने देखिए जब टू व्हीलर ईवी बनने लगे इंडिया में तो किसने शुरू किया स्टार्टअप्स ने? बड़े ब्रांड नहीं करे। जी अब क्या हुआ कि जब ये लोग टू व्हीलर ईवीस बनाने लगे तो सारे बिग ब्रांड्स वोक अप हम और फिर TVS भी घुस गया उसमें। हीरो भी घुस गया उसमें। हम पर स्टार्टअप्स ने उनको पुश किया है हम एक तरह से और अगर आप देखें वर्ल्ड में इंडिया इज नंबर वन इन टू व्हीलर ईवीस बिगर देन चाइना वाओ ओके सो हमें बहुत बढ़िया में या कंसमशन में दोनों में दोनों में दोनों में दोनों में दोनों में सो वी आर डूइंग वेरी वेल इन टू व्हीलर ईवीस एंड वी कैन
(27:56) कंटिन्यू टू डू वेल एंड कंपनीज़ लाइक एथर हैव नाउ गॉन पब्लिक सो इट्स अ पब्लिक लिस्टेड कंपनी बहुत बढ़िया कंपनी है एंड अच्छे डिज़ बनाते हैं अच्छा सॉफ्टवेयर क्रिएट करते हैं। बहुत सारा उनका जो प्रोडक्ट है वो इंडिया में बनता है। बहुत सारे कॉमोनेंट्स वो इंडिया में लेते हैं, बनवाते हैं। तो एक बहुत डीप आरएडी करके उन्होंने प्रोडक्ट बनाया। एंड प्राउडली बोल सकते हैं मेड इन इंडिया। प्राउडली मेड इन इंडिया। अब्सोलुटली सिर्फ असेंबली नहीं हो रही है। सिर्फ असेंबली नहीं हो रही। इंटरेस्टिंग। आपने अपने करियर के अपने लाइफ के 40 इयर्स टेक इंडस्ट्री को दिए
(28:28) हैं। अभी आप मेंटोरशिप कर रहे हैं। गवर्नमेंट कमिटीज की एडवाइज़री बोर्ड में हैं आप। तो इफ यू हैव टू टेल अस 40 साल पहले कैसा इंडिया था टेक को देखें तो क्या उस वक्त हम काफी आगे थे और धीरे-धीरे पीछे हो गए या उस वक्त भी ऐसा ही था तो क्या डिफरेंस है 40 इयर्स में दोनों इंडिया में देखिए उस टाइम जब एचसीएल शुरू हुआ तो टेक्नोलॉजी इंपोर्ट तो अलाउड ही नहीं था और हमारी कंट्री एकदम बंद थी और दूसरी तरह हम लोग कंप्यूटर बनाना चाहते थे तो हम हम इसलिए बनाना चाहते थे कि इंडिया में सिर्फ 100 कंप्यूटर थे 1975 में। तो जब हम लोग कंप्यूटर कंपनी शुरू करना
(29:14) चाहते थे तो हमें यह बताया गया गवर्नमेंट ने गवर्नमेंट से हम मिले जाके कि भाई हम लोग कंप्यूटर कंपनी शुरू करना चाहते हैं मैन्युफैक्चरिंग करना चाहते हैं एसेट्रा एटसेट्रा तो जब हम गवर्नमेंट के पास गए तो बोला कि आप लोग तो बहुत छोटे से लोग हो पांच छह लोग हो आपके पास तो कुछ खास पैसा भी नहीं है आपको हम लाइसेंस नहीं दे सकते उन दिनों लाइसेंस राज होता था जी तो हमें लाइसेंस लेना बहुत जरूरी था जी तो उस तरह का एनवायरमेंट था उन दिनों हम लाइसेंस एक लेना पड़ता था। डिसरेज हो जाते थे। हां। तो जो अगर नए लोग थे उनके लिए बहुत टफ था। जी।
(29:49) तो हम लोग ने क्या किया कि हम एक छोटी सी मार्केटिंग कंपनी शुरू करी जिससे हमको थोड़ा कैश फ्लो मिलने लगे। क्योंकि हम हम लोग छह लोगों ने 1.86 लाख से शुरू किया था। छोटा अमाउंट था बहुत। वाओ। अब देखिए जब हम लोग को लाइसेंस चाहिए था तो हमने सोचा कहां से लाएं लाइसेंस? अगर हमको मिल नहीं रहा डायरेक्टली तो हम कुछ और ढूंढे। हम तो हमको पता चला कि यूपी गवर्नमेंट के पास लाइसेंस है। हम तो हम यूपी गवर्नमेंट के पास गए। जी। अप्ट्रोन करके उनकी कंपनी थी। एton अपt्रोन अप्ट्रोन। हां। और हम लोग उनसे जाके मिले। जी और हमने बोला कि देखिए हम लोग को डिजाइन
(30:24) करना, मैन्युफैक्चरिंग करना आता है। जी। और हम आपका लाइसेंस लेके इसको आगे ले जा सकते हैं। और ये टाइम वो था जब ऑलमोस्ट हर सेक्टर में गवर्नमेंट थी। गवर्नमेंट थी। बहुत सारी गवर्नमेंट। इसी वजह से उनके पास लाइसेंस था। तो हमको उन्होंने बोला कि ठीक है हम बात करते रहे नेगोशिएशन हुआ फिर हमने बोला देखिए आप 26% इक्विटी ले लीजिए हमारी हम और आप 74% हम खुद लगाएंगे 26% आप ले लीजिए और हमको लाइसेंस दे दीजिए तो दे एग्रीड उस तरह से हमारी कहानी शुरू हुई और फिर हमारे पास पैसे वैसे तो थे नहीं बहुत मुश्किल था मगर एक बार जब हम गवर्नमेंट के साथ जुड़
(30:59) गए तो हमको पैसे भी मिलने लगे क्योंकि हम किसी बैंक के पास जाते थे उनकी अपनी फाइनेंसियल इंस्टीटश थी यूपी गवर्नमेंट की वो हमें पैसे दे देते थे वर्किंग वर्किंग कैपिटल मिल जाता था तो उस तरह से हमारी कहानी शुरू हुई उस टाइम तो स्टार्टअप नाम ही नहीं था हम कोई कांसेप्ट ही नहीं था कि स्टार्टअप है ये हम तो उन दिनों एक चीज थी के जो टेक्नोलॉजी इंडिया में थी वो कुछ साल पुरानी थी और बहुत सारे कंप्यूटरटर्स जो इंडिया में आते थे वो रिफर्बिश आते थे तो वो इंपोर्ट होते थे इंपोर्ट होते थे जैसे आईबीएम था आईबीएम बहुत बड़ा था इंडिया में उन दिनों।
(31:36) राइट? उनके सारे कंप्यूटर सेकंड हैंड आते थे। उसको रिफरबिश करते बेचते थे लोग। इवन बहुत रीसेंट तक भी इंडिया में वो टेक्नोलॉजी आती थी जो एकदम वहां आउटडेटेड हो जाती थी। ऐसा अब लेटेस्ट आने लगी है। अब तो बहुत कुछ शुरू हो गया है। अब ऐसा कुछ नहीं है। अब तो लोग सब लेटेस्ट टेक्नोलॉजी लाते हैं इंडिया में क्योंकि इंडिया इतनी बड़ी मार्केट बन गई है। अब तो दूसरी कहानी है। उन दिनों कहानी दूसरी होती थी कि लोगों को कंप्यूटर ही नहीं मिलते थे। तो वो आईबीएम रिफब्लिश करके एक पुराना प्रोडक्ट था। मैकेनिकल प्रोडक्ट था 14 ओवन करके उस तरह से आता था।
(32:05) बट आपका बैकग्राउंड टेक से मतलब कंप्यूटर सेंट्रिक ही था या आप स्विच किया एकदम से कहीं से? नहीं नहीं मैंने तो इलेक्ट्रॉनिक्स और टेलीकॉम किया हुआ था ना किया हुआ था। हम लोग उसी उसी बैकग्राउंड के थे बहुत सारे। जी और फिर हमने एक आरएडी शुरू करी। हमने डिजाइन करना शुरू किया। वहां से हमने प्रोडक्ट बनाए। तो हम लोग शुरू से प्रोडक्ट कंपनी थे। हम हम लोग अपना प्रोडक्ट डिजाइन करते थे और मैन्युफैक्चर करते थे। जी। और तब अगर आप देखें हमारा जो फर्स्ट प्रोडक्ट था जब हमने इंट्रोड्यूस किया 1978 में उसी टाइम एप्पल पीसी आया था तो एक तरह से वी वर प्रीटी मच वर्ल्ड क्लास
(32:39) के हम लोग उसी टेक्नोलॉजी में लगे हुए थे उनका प्रोडक्ट थोड़ा छोटा था हमारा प्रोडक्ट थोड़ा बड़ा था पर फंक्शनैलिटी तो वही थी बट यू मीन टू से कि हम एट पार थे एक तरह से एक तरह से एक इंटरेस्टिंग एक तरह से पर हम उसको आगे नहीं ले जा सके क्योंकि बहुत सालों तक हम गवर्नमेंट ने कोई सपोर्ट नहीं दिया इंडिया में टू इलेक्ट्रॉनिक्स शुरू-शुर में तो बहुत कम सपोर्ट था। धीरे-धीरे कुछ सपोर्ट आया पर कोई प्रमोशन नहीं था। कुछ ऐसा नहीं था जिससे हम लोग आगे बढ़ सकें। और उसके बाद जाके गवर्नमेंट ने क्या किया? डब्ल्यूटीओ आईटीआई एग्रीमेंट साइन कर
(33:15) लिया। उसमें उन्होंने इंपोर्ट्स अलव कर दिए जीरो ड्यूटी पे। ओ तो उससे क्या हुआ कि सारी जो इतनी सारी कंप्यूटर कंपनीज़ बनी थी, इतनी सारी इलेक्ट्रॉनिक्स कंपनीज़ बनी थी, इंडिया में सारे एसएमईस बने थे, वो सारे मर गए क्योंकि वो कमट नहीं कर पाए और बाकी कंट्रीज जैसे ब्राज़ल और चाइना में दे डिडंट साइन द डब्ल्यूटीओ। सो दे प्रोटेक्टेड देयर कंपनीज़ बिकॉज़ अगर आपकी कंपनी बड़ी हो जाती है तो कोई प्रॉब्लम नहीं है। आप कम्पीट कर सकते हो। व्हाई दे साइन इट? मतलब ऐसा क्यों किया उन्होंने? जब सिंपल सा प्रेशर फ्रॉम द वेस्ट। वेस्ट ऑलवेज वांट्स
(33:47) टू गेट के भाई हमें अपना मार्केट दे दो और उन्होंने हमें मार्केट प्लेट में दे दिया। बट उस वक्त हमारे पास अगर हम नहीं मानते तो लूज करने के लिए क्या था? कुछ नहीं। हम अपनी इंडस्ट्री बढ़ा सकते थे। हम अपने ब्रांड्स बना सकते थे। हमारा ब्रांड जो एचसीएल का था अगर आज की अगर आज की आप स्कीम्स देखें जी तो हम तो ग्लोबल ब्रांड बन जाते थे हार्डवेयर में आराम से। क्योंकि हमको सब कुछ आता था। डिजाइन आता था, मैन्युफैक्चरिंग आती थी, ब्रांडिंग आता था, मार्केटिंग आता था, सब कुछ आता था। हम एंड इमेजिन कितने स्टार्टअप्स, कितने कंपनीज़ उस वक्त कैपेबिलिटी होने के
(34:20) बावजूद भी वहीं रह गए। वही रह गए। और वो सिर्फ एक पॉलिसी रॉन्ग पॉलिसी से हुआ। और यही मेन रीज़न है कि क्यों हम बात करते हैं Apple, Google, Microsoft सब बाहर से इंडिया से एक भी नाम नहीं होता है। बट थिंग्स अभी चेंज हो रही है। काफी चेंज हो रहा है। बट काफी सपोर्ट है अब तो इलेक्ट्रॉनिक्स के लिए। जी बहुत बहुत बहुत बहुत ज्यादा सपोर्ट है। तो इलेक्ट्रॉनिक्स में तो अभी काफी प्रोग्रेस हुई है। ऐसी कोई कंपनी स्टार्टअप जिसको अभी बहुत सपोर्ट मिल रहा है गवर्नमेंट का है अभी ऐसा कुछ देखिए जितनी सेमीकंडक्टर कंपनीज़ बन रही हैं। जी होम सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग बन रहा
(34:55) है उसमें गवर्नमेंट का 50% सपोर्ट है। हम तो अगर आप फंडिंग वाइज फंडिंग वाइज कंप्लायंस वाइज बहुत बहुत सपोर्ट है गवर्नमेंट का। हम ये जो ये गवर्नमेंट है जो लास्ट पांच छ साल में इन्होंने बहुत अच्छा काम किया है इलेक्ट्रॉनिक्स में और इसीलिए इलेक्ट्रॉनिक्स अभी काफी बढ़ेगा। अभी तो नई स्कीम्स जो आई है जो इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट्स की स्कीम आई है वो बहुत अच्छी स्कीम है। उससे क्या होगा कि यहां इंडिया में वैल्यू एडिशन बढ़ेगा। हम तो वो बहुत अच्छा हो रहा है। तो अगर आप उन दिनों की बात करें और आज की बात करें हम लोग वी लॉस्ट द बस इन हार्डवेयर।
(35:28) मैं एक मिनिस्टर से मिला था करीब 15-20 साल पहले। जी। और मैंने उन मैं तो हार्डवेयर में था। हां जी। उस टाइम सॉफ्टवेयर काफी आगे बढ़ गया था। तो मैं उनसे मिला उनके घर पर जाके जब उन्होंने नया-नया पद संभाला था और नए मिनिस्टर थे तो मैंने कहा उनसे मिल लेते हैं हम तो मैंने जाके उनसे बताया कि हम लोग ये कर रहे हैं ये कर रहे हैं हार्डवेयर में हमारी ये एसोसिएशन है हमारी इतनी सारी कंपनीज़ हैं हम काम कर रहे हैं हार्डवेयर में जी तो उन्होंने ब्लंटली मुझे बोला देखिए ऐसा है चाइना को हार्डवेयर करने दीजिए हम सॉफ्टवेयर करते हैं। हमारे यहां ये
(36:02) थिंकिंग आ गई थी कि हम लोग हार्डवेयर कर ही नहीं सकते। तो ये एक गलत थिंकिंग थी हम और ये कौन सा ईयर था सर? अब मेरे को याद नहीं है 101 साल पहले साल हो गए करीब 20 साल हो गए 15 20 साल और देखिए अब क्या हो रहा है इलेक्ट्र ये सॉफ्टवेयर कंपनीज़ को तो बहुत ज्यादा एआई का इंपैक्ट पड़ रहा है तो हम सिर्फ सर्विज पे डिपेंड करेंगे तो कैसे आगे बढ़ पाएंगे हमें तो प्रोडक्ट नेचर बनना बहुत जरूरी है जैसे मैंने पहले बोला राइट और ये सब आपने अपनी बुक मेंशन किया हुआ है मैंने देखिए जो मेरी बुक है उसको मैंने एक अच्छा नाम दिया है जी जस्ट एस्पायर
(36:37) हम हम इसलिए दिया है कि एस्पिरेशन से कंपनीज़ बनती हैं। जी। एस्पिरेशन से कंट्रीज बनती हैं। एस्पिरेशन से लोग आगे बढ़ते हैं। अगर आपके पास एस्पिरेशन है आपको कुछ नहीं चाहिए। और मेरे जो टीचर थे डॉक्टर सीके प्रहलाद बड़े फेमस स्ट्रेटजीस टीचर होते थे। इंडिया में इंडिया में अमेरिका में। अमेरिका में। और वो मिशगन यूनिवर्सिटी में पढ़ाया करते थे। जी। तो उनका एक फार्मूला था। उसको बोलते थे ए इज ग्रेटर देन आर ए स्टैंड्स फॉर एस्पिरेशन आर स्टैंड्स फॉर रिसोर्सेज तो वो बोलते थे अगर आपके पास एस्पिरेशन है तो रिसोर्सेज अपने आप हो जाएंगे हम तो ये एक थिंकिंग के बेसिस पे मैंने अपनी
(37:19) किताब लिखी जस्ट एस्पायर बिकॉज़ मैं उन उनके ऊपर बहुत वो एक तरह से आई वाज़ वेरी एनामर्ड बाय हिज थिंकिंग। हम तो जब मैंने लिखना शुरू किया तो मैंने बोला कि मैं अपनी पूरी कहानी बताऊंगा और हर जगह एस्पिरेशन पे काफी फोकस करूंगा और किस तरह से कंपनी बनती है। किस तरह से एक स्टार्टअप चलता है। किस तरह से लोगों को संभाल के आगे बढ़ाना पड़ता है। हम जैसे आप देखिए किस तरह से मैं लोगों के साथ चलता था। वो ये के अगर आप न्यू ईयर देखें न्यू ईयर के दिन मैं सब लोगों से जाके पर्सनली विश करता था। ऑफिस में अपने ऑफिस में करीब 1500 लोगों से मैं मिलने
(37:57) जाता था पर्सनली सबके हैंडशेक करता था फ्रॉम फ्रॉम पियंड टू चीफ मैनेजर एंड डायरेक्टर हम सबको मैं पर्सनली विश करता था उससे क्या होता है कि एक कल्चर बनता है कंपनी का हम लोग सोचते हैं कि ये मेरी कंपनी है हम और जब लोग इस तरह से सोचने लगते हैं कि मेरी कंपनी है तो कंपनी आगे बढ़ती है बट सर जैसे हमारी भी कंपनी है डीजी विसल और उसमें अभी 20 टू 25 लोग हैं तो ऑलमोस्ट हम ट्र करते हैं हर चीज का कि सारे जो फेस्टिवल्स है साथ में मनाते हैं। हर तीन महीने में बाहर चले जाएंगे सबके साथ। सात दिन रुक के आते हैं। वहीं से काम करते हैं। तो कभी-कभी मैं सोचती हूं कि ये अभी तो
(38:35) पॉसिबल है। लेकिन अगर हमें 50 मैं तो अभी इतना ही सोच रही हूं। 1500 या लेट्स सपोज 200 की बनानी होगी। तब कितना पॉसिबल हो पाता ये? आप तो आप बात कर रहे हो 1500 और आई थिंक वो नंबर्स तो मेरे पास 7000 लोग थे। 7000 लोग थे वो। कैसे-कैसे कर लेते थे आप? देखिए। वही तो है कि पर्सनलाइज करना पड़ता है। अगर आपको जगह-जगह आप मैं जिसी जिस जिस शहर में जाता था मैं इवनिंग एक सबके लोगों के साथ बिताता था। तो ये एक तरह से कल्चर बनता है इस तरह का। रिलेशनशिप बिल्डिंग रिलेशनशिप बनती है। लोग सोचते हैं कि ये मेरी कंपनी है। मैं इसके लिए कुछ भी कर सकता हूं।
(39:12) अगर आप देखें हमारी कंपनी में हम हार्डवेयर में थे। हार्डवेयर में मार्जिन बहुत कम होता है। सॉफ्टवेयर में मार्जिन बहुत ज्यादा होता है। हम लोग मार्केट सैलरी भी नहीं पे कर पाते हम हम हमारी सैलरी जो होती थी मीडियम मीडियम रेंज पे थी। हाईएस्ट सैलरी हम नहीं पे करते थे। कोई नहीं छोड़ के जाता था। लोग छोड़ते नहीं थे। क्यों? क्योंकि एक तरह से सब लोग सोचते थे कि ये मेरी कंपनी है। हाउ स्वीट। अभी ह्यूमन रिसोर्सेज की हम बात कर रहे हैं और अगर हम करंट सिनेरियो में देखो तो देखेंगे तो एआई का भी बहुत ज्यादा डेंजर है। टीसीएस भी ले ऑफ पे ले
(39:44) ऑफ कर रहे हैं। एस्टीेटेड है कि ऑलमोस्ट 2 3% ले ऑफ हो जाएंगे एंप्लाइजज़ का विद इन जस्ट फ्यू इयर्स। तो ये जो इतने लोग ले ऑफ हो रहे हैं और सारे वेल टैलेंटेड है। इयर्स ऑफ एक्सपीरियंस है। इनको अब्सॉर्ब करने का क्या हमारे पास कैपेबिलिटी है इंडिया के पास? क्या उतनी हायरिंग हो पाएगी जितना वो ले ऑफ कर रहे बिकॉज़ ऑफ़ एआई। देखिए भाई, सबको अपने आपको एक तरह से रिपर्पस करना पड़ेगा। हम एक तरह से एक तरह से ऐसी टेक्नोलॉजी सीखनी पड़ेगी जिसकी जरूरत है। अभी आप देखेंगे कि जो एंट्री लेवल है हम इंजीनियर्स उनको ले लोगों ने लेना बंद कर दिया है बहुत सारे लोगों को। अब वो लोग
(40:27) सोच रहे हैं कि हमें एंट्री लेवल ऐसे चाहिए जो एआई कैपेबल है। हम तो देयर आर इंस्टट्यूट्स एंड कॉलेजेस जहां पर एआई पढ़ाया जाता है। जब मैंने ट्रिपल आईटी नया रायपुर शुरू किया था 10 11 साल पहले करीब छ साल पहले मैंने वहां एआई और एआई क्विक बीटेक शुरू करवाया था। वाव आई वास थिंकिंग मच अहेड ऑफ़ टाइम। दैट्स व्हाई यू आर वाचिंग। या सो देयर फॉर दोज़ स्टूडेंट्स गेम्ड बिकॉज़ ऑफ़ दैट। हम टुडे अगर आप उनके स्टूडेंट्स देखें तो लोग दे वांट दैट काइंड ऑफ़ स्टूडेंट, दे वांट दैट काइंड ऑफ़ पर्सन हु नोज़ एआई। तो ये आपको आपको रीजीनियर करना पड़ेगा। अपने आपको आगे बढ़ाने के लिए आपको एआई
(41:06) कैपेबल बनना पड़ेगा। इंटरेस्टिंग सर आप आईआईटी हैदराबाद के चेयर पर्सन रह चुके हैं। मैं अभी गई थी लास्ट मंथ। मेरा कोई लेक्चर था वहां पर। बहुत ही ब्यूटीफुल बना हुआ है। बहुत सुंदर। इंफ्रास्ट्रक्चर तो बहुत ही अच्छा है। तो वहां पर जो कोर्सर्सेस पढ़ाए जा रहे हैं ऑलमोस्ट सारे ही कोर्सेज में एआई को इंटीग्रेट कर रहे हैं अभी कि नहीं या सिर्फ अलग से कोई कोर्स लेना है? मतलब आईआईटीस में क्या हो रहा है अभी? देखिए सब लोग एआई की तरफ जा रहे हैं। हां। जो हमारे करंट को जो करंट करिकुलम बना हुआ है मॉड्यूल्स है उनके साथसाथ इंटीग्रेट कर रहे हैं या फिर
(41:40) वो अलग से पढ़ाया जा रहा है और एआई फिर बाद मुझे पता नहीं है कौन क्या कर रहा है ये तो मुझे पता नहीं है बट सब लोगों के दिमाग में एआई बहुत स्ट्रांगली है अब जी और सब लोग शुरू कर रहे हैं एआई में और आई थिंक एआई इज गेटिंग इंटीग्रेटेड इंटू कंप्यूटर साइंस कोर्सेज हम और एआई अलग से भी लोग बीटेक शुरू कर दिए हैं बहुत सारी इंस्टीटशंस ने हम आईआईटी हैदराबाद मुझे याद है एमटेक शुरू किया था उन्होंने आई एआई में करीब चारप साल पहले तो उन्होंने बहुत पहले किया था बट एक बहुत इंटरेस्टिंग चीज हमने करी थी आईआईटी हैदराबाद में जब हमने आईआईटी हैदराबाद शुरू किया तो
(42:17) मैंने डायरेक्टर को बोला कि भाई देखिए हमको ऐसे बंदे चाहिए जो कंप्लीटली कैपेबल लोग हैं जो मार्केट में जाएं। ऐसा नहीं कि उनको एक ही सब्जेक्ट पता हो। जी। तो मैं उनको बोलता था कि दे आर नर्ड्स। नर्स भी कि भाई वो सिर्फ उनकी अपनी टेक्नोलॉजी पता थी। तो हमने एक बहुत इंटरेस्टिंग चीज करी थी। हमने वहां करीब 30 फ्रैक्टल्स बनाए थे। ओके? उसका मतलब ये था कि छोटे-छोटे कोर्सेज एक-एक एक-एक दो-दो क्रेडिट्स के हमने करीब 36 इस तरह के बनाए थे। ह्यूमैनिटीज में, इंग्लिश में, एस्ट्रोनॉमी में, म्यूजिक में, ड्रामा में हर तरह के कोर्सेस थे। और हम चाहते थे कि
(42:57) बच्चे जो हैं वो पांच छह इस तरह के कोर्सर्सेस भी जरूर लें क्योंकि जब वो निकलेंगे तो उनको सिर्फ इलेक्ट्रॉनिक्स नहीं पता उनको कुछ और भी पता है। हम तो ये जो रेंज है ये बहुत इंपॉर्टेंट है और मैंने खुद अपने लिए बहुत रेंज डेवलप किया क्योंकि उस रेंज से बहुत फायदा होता है। मैं बहुत सारे सब्जेक्ट्स पे बात कर सकता हूं आपके साथ। ऑफकोर्स ऐसा नहीं कि सिर्फ मुझे इलेक्ट्रॉनिक्स पता है। मैं बहुत सारे सब्जेक्ट्स पे बात कर सकता हूं। हां जी। बट अगर हम और डीप में जाए सर कि जो यंग स्टूडेंट्स हमें देख रहे हैं उनके लिए कि अगर वो इलेक्ट्रॉनिक्स, टेक साइड,
(43:31) हार्डवेयर या सॉफ्ट सॉफ्टवेयर साइड जाना चाहते हैं तो एआई के अलावा और कौन-कौन से कोर्सेज को वो ज्यादाेंस दें ताकि आगे जो फ्यूचर इंडस्ट्रीज जो आप देख पा रहे हो अपने सारे एक्सपीरियंस से 40-50 इयर्स के कि यहां यहां ये चीजें अब ज्यादा डेवलप होगी और यहां रिसोर्सेज ह्यूमन रिसोर्सेज की ज्यादा जरूरत होगी। तो ये सीखो बच्चों आप। देखिए एआई में भी जो आज है उससे बहुत आगे जाएगा एआई। उसको बोलते हैं सुपर इंटेलिजेंस और कुछ लोग उसको बोलते हैं सिंगुलरिटी। तो हमें उसके बारे में पढ़ना चाहिए और उसके बारे में ज्ञान होना चाहिए कि ये है क्या?
(44:08) जी। अब सिंगुलरिटी जब आएगी उसका यह मतलब है कि हमारी जो कंप्यूटर है जी वो हमारे ब्रेन से जुड़ जाएगा। हम और हमको कुछ सीखना नहीं पड़ेगा। क्योंकि सब कुछ हमें मिल जाएगा। तो पर वो करीब अभी सिंगुलरिटी जो है करीब 15 20 साल दूर है। बहुत सारे फ्यूचरलिस्ट ने बोला है कि 10 साल में भी हो सकता है। जी इसको सुपर इंटेलिजेंस आएगी। पर उसका ये मतलब नहीं है कि हम कुछ सीखें नहीं। राइट? राइट? हमें खुद सीखना जरूरी है। तो एआई और डेटा साइंस जो है वो बहुत इंपॉर्टेंट हो गया है आज के लिए। तो लोगों को वो जरूर देखना चाहिए। एक बहुत बड़ा एरिया बन रहा है इंडिया में।
(44:47) मैन्युफैक्चरिंग बढ़ रही है। जी। तो लोगों को मैन्युफैक्चरिंग भी सीखना पढ़नी चाहिए। क्योंकि बहुत सारी इंस्टीटश हैं जो मैन्युफैक्चरिंग सिखाते हैं। उसमें स्पेसिफिक क्या जैसे जैसे एक इंस्टट्यूट है इंस्टट्यूट ऑफ़ एडवांस मैन्युफैक्चरिंग रांची में है। उसमें भी मैं चेयरमैन था एक टाइम। तो वहां उसको पहले उन दिनों उसको निफ्ट्ट बोला जाता था। अब उसका नाम हमने बदलवाया। उसको इंडस्ट्री 4.
(45:13) 0 पे ले गए। वहां काफी मैन्युफैक्चरिंग सिखाई जाती है। आईआईटी खड़कपुर है। इस तरह के आईआईटीस हैं जहां पर मैन्युफैक्चरिंग मैनेजमेंट भी सिखाई जाती है। तो मैन्युफैक्चरिंग एक बहुत बड़ी चीज होने वाली है इंडिया में। बिकॉज़ बहुत बड़ा रिक्वायरमेंट है इंडिया में मैन्युफैक्चरिंग का। तीसरी बहुत बड़ी रिक्वायरमेंट जो आ रही है वो सेमीकंडक्टर्स में है। जी। सेमीकंडक्टर्स में सबसे बड़ी रिक्वायरमेंट जो आ रही है ग्लोबली। जी वो है डिजाइन की। तो बहुत सारे इंस्टीटशंस ने वीएलएसआई वेरी लार्ज स्केल इंटीग्रेटेड सर्किट्स उसको बोलते हैं जिसके चिप्स बनते हैं। उस चिप डिजाइन के लिए बहुत सारे बीटेक
(45:48) प्रोग्राम्स शुरू हो गए हैं। इंडिया में वो लोगों को शुरू करना चाहिए क्योंकि वहां पर बहुत बड़ा मार्केट है। दुनिया भर में इतना बड़ा भारी मार्केट है। हम इंडिया में कहां-कहां हो रहा है? बहुत सारे इंस्टीटशंस हैं। बहुत सारे इंस्टीटश हैं जो वीएलएसआई बीटेक में शुरू कर दिए। एआईसीटी [गला साफ़ करने की आवाज़] ने 2 साल पहले अप्रूव किया था इसको। हम तो सारे बहुत सारे इंजीनियरिंग इंस्टट्यूट ने इसको अडॉप कर लिया है। तो वीएलएसआई एक बहुत ही इंपॉर्टेंट एरिया है जो लोगों को देखना चाहिए। वाओ वेरी इंटरेस्टिंग। उसके बाद अगर आप देखें तो आगे कहां जाएगी
(46:16) टेक्नोलॉजी वो देखना पड़ेगा। हां जी। तो अगर आप हार्डवेयर सॉफ्टवेयर में देखें क्वांटम एक बहुत बड़ा एरिया बनने वाला है। क्वांटम क्वांटम क्वांटम टेक्नोलॉजी जिसमें मैं अभी नेशनल क्वांटम मिशन का चेयरमैन हूं। जी तो हमने वहां पर क्या किया है कि इसको अंडर ग्रेजुएट प्रोग्राम्स में भी क्वांटम टेक्नोलॉजी सिखाना शुरू कर दिया इस साल। हम्म। तो लोग क्वांटम टेक्नोलॉजी के एक एक माइनर ले सकते हैं। तो अगर वो इलेक्ट्रॉनिक्स पढ़ रहे हैं तो क्वांटम भी पढ़ें। तो उससे क्या फायदा होगा कि दोनों टेक्नोलॉजीस उनको मिल जाएंगी बात करने के लिए और नॉलेज के लिए। उसके बाद अगर आपको
(46:51) क्वांटम पसंद है तो एमटेक करिए। जी तो वो भी प्रोग्राम शुरू हो रहा है। तो हमें इस तरह की टेक्नोलॉजीस के डायरेक्शन में जाना है। सिंगुलरिटी क्वांटम मैन्युफैक्चरिंग सेमीकंडक्टर यस क्वांटम के बारे में बात करते हैं कि ये कहां-कहां इंटीग्रेट हो सकता है डिफेंस में नेशनल सिक्योरिटी में। कहां-कहां इसके यूज़ केसेस है और कहां ग्रोथ है किस सेक्टर में पर्टिकुलर। तो क्योंकि एक सेक्शन ऑडियंस का वो है जो हमें एज अ इन्वेस्टर देखता है। तो वो अगर हमें देख रहा है तो वो देख रहा है कि मुझे ना यह बता दो कि ये वाला सेक्टर या ये वाला कंपनी या ये वाला इंडस्ट्री अभी बहुत
(47:29) ही नेसेंट स्टेज पे है और बहुत तेजी से ग्रो कर सकता है। तो क्वांटम इज वन ऑफ़ दोज़ राइट? सी क्वांटम आज वहां है जहां एआई 5 साल पहले। जी तो इस टाइम अगर जो लोग इन्वेस्ट करेंगे क्वांटम कंपनीज़ में उनको बहुत बहुत फायदा होने वाला है। अगर आप देखें जो कंपनीज़ अमेरिका में भी हैं क्वांटम कंप्यूटरटर्स की उनका रेवेन्यू होगा 200 मिलियन या 300 मिलियन या 100 मिलियन पर उनकी वैल्यू्यूएशन 10 बिलियन है। तो फ्यूचर को फ्यूचर को बहुत ज्यादा लोग अभी से मानने लगे हैं। तो एक तरह से अगर आप आज क्वांटम में इन्वेस्ट करेंगे तो अगर जैसे आप ओपन एआई था
(48:04) जी जी 15 साल पहले अगर आप इसमें इन्वेस्ट करते तो आपको बहुत फायदा होता। हम तो इसी तरह क्वांटम है आज जिसमें आप इन्वेस्ट करेंगे तो बहुत फायदा होगा। तो कहां-कहां इंटीग्रेट हो रहा है? क्वांटम टेक्नोलॉजी जो है वो करीब तीन तरह की है। जी। एक है क्वांटम कंप्यूटर। [गला साफ़ करने की आवाज़] एक है क्वांटम कम्युनिकेशन जिसमें सिक्योरिटी आता है। और तीसरा है क्वांटम सेंसिंग। ठीक है। अगर इसमें आप देखें तो सबसे बड़ा अपॉर्चुनिटी है क्वांटम कम्युनिकेशन और सिक्योरिटी में वो इसलिए के अभी तक सोचा जाता था कि क्वांटम कंप्यूटर जो पावरफुल होगा
(48:43) जी उसमें करीब 10 साल लगेंगे बनते बनते अब उसकी कहानी थोड़ी बदल चुकी है। बहुत टेक्नोलॉजी में डेवलपमेंट हो रहा है। जी और क्वांटम कंप्यूटर और ज्यादा से ज्यादा पावरफुल बनते जा रहे हैं। हम तो इसलिए अब सोचा जाता है कि क्वांटम डे है वो करीब 3 साल दूर है या 4 साल दूर है। उसका मतलब ये है कि कभी एक पावरफुल कंप्यूटर कहीं भी आ गया दुनिया में जैसे चाइना के पास आ गया। हमारा एनिमी है। जी चाइना के पास एक क्वांटम कंप्यूटर आ गया जो इतना पावरफुल है कि हमारी साइबर सारी साइबर सिक्योरिटी को ब्रेक कर देगा। तो आप सोच सकते हैं कि सारी की सारी
(49:18) फाइनेंसियल सिस्टम्स सारे के सारे इलेक्ट्रिकल ग्रिड्स, स्टॉक एक्सचेंजेस सारे के सारे डाउन हो जाएंगे। डिसरप्शन टोटल डिसरप्शन क्योंकि उनका साइबर सिक्योरिटी ब्रेक हो जाएगा और चाइना जैसे जिसके पास एक क्वांटम कंप्यूटर है वो सारा का सारा आपका डाटा ले जाएगा सिक्योर डाटा तो आपको सिक्योरिटी एप्लीकेशन के लिए क्वांटम कम्युनिकेशन क्वांटम सिक्योरिटी अभी से डालनी पड़ेगी हम और अगर आप आज से इस पे काम शुरू करते हैं दो सीन दो से तीन साल में आप तैयार हो सकते हैं सारे के सारे बैंक्स को ये करना बहुत जरूरी है। तो इंडिया कैसा कर रहा है इसमें? अभी हम
(49:50) लोग हमने एक एक टास्क फोर्स बनाया था इसके ऊपर नेशनल क्वांटम मिशन में टास्क फोर्स की पूरी रिपोर्ट बन चुकी है। हम उसको एक दो दिन में रिलीज भी कर रहे हैं। इंटरेस्टिंग तो ऐसा कोई स्पेसिफिक एरिया तो हमें सबसे ज्यादा प्रिपरेशन इसलिए करनी है कि जितने भी क्रिटिकल लोकेशनेशंस हैं फाइनेंशियल सिस्टम्स हैं, इलेक्ट्रिकल ग्रिड्स हैं, डिफेंस है, इंटेलिजेंस है, इन सब में हमको क्वांटम सिक्योर नेटवर्क बनाना बहुत जरूरी है। और हमें क्वांटम पोस्ट क्वांटम क्रिप्टोग्राफी करना बहुत जरूरी है। हम और जल्दी से जल्दी करना चाहिए। अभी आपने डिफेंस का भी मेंशन किया था। तो डिफेंस
(50:31) में इंडिया वैसे भी रैपिडली ग्रो कर रहा है। 38,000 प्लस ड्रोंस हैं हमारे पास और ट्रेनिंग इंफ्रास्ट्रक्चर भी बिल्ड हो रहे हैं महाराष्ट्र, तेलंगाना। तो अगर हम ये सारी चीजें देखें तो टेक वाइज हम क्या अच्छा कर रहे हैं इन केस ऑफ़ डिफेंस सेक्टर? डिफेंस सेक्टर या अभी बहुत ही उसमें भी लैक कर रहे हैं हम लोग। देखिए अभी आप ऑपरेशन सिंदूर को देखिए। हम उसमें हमारा आकाश था तो उसने बहुत अच्छा किया। जी हमारा ब्रह्मोस था उसने बहुत अच्छा किया। पर अब जो वर्ल्ड है वो डिफेंस में नहीं चल रहा है। अब अटैक पे चल रहा है। तो हमको सबसे पहले अटैक करना है। ऑपरेशन सिंदूर
(51:11) में हमारा सक्सेस क्यों हुआ कि हमने अटैक किया। हम हमने डिफेंस पे नहीं पड़े। क्योंकि हमारे यहां एक प्रॉब्लम आ गया था। टेररिस्ट ने वो किया। हमने उसके अगेंस्ट रिएक्ट किया। पर अगर आप देखें उस उस उसमें और यूक्रेन वॉर में सबसे बड़ी चीज क्या हुई है? ड्रोंस ड्रोन बहुत बड़े बने। तभी वो लंबा खींच गया वो। बहुत खींच गया। अभी आप पाकिस्तान के साथ भी जब हमारा हुआ था ऑपरेशन सिंदूर उनके तरफ से कितने सारे ड्रोनस आ रहे थे। चाइना ने क्या किया था कि पूरा का अपना टेक्नोलॉजी पाकिस्तान को दिया और पाकिस्तान वो यूज़ कर रहा था। अभी तो तीन
(51:42) दिन पहले चाइना ने बोला कि हम तो वहां बैठ के असिस्ट कर रहे थे उनको। तो ये बड़ा क्लियर है कि अब टेक्नोलॉजी बहुत चेंज हो रही है और हमें रैपिडली चेंज करना है। इसको वेपनाइज करना होगा। हां। और इसलिए इसी में देखिएगा जैसे मैंने पहले बोला था स्टार्टअप्स हैं। अब इतने सारे स्टार्टअप्स ड्रोन बना रहे थे। चारप साल से लोग ड्रोन बना रहे थे। उनको धंधा नहीं मिल रहा था। हम अब क्या है कि डिफेंस जो है वो अपनी रूल्स चेंज कर रहा है। वो बड़े सीरियसली देख रहा है कि वो बहुत सारे स्टार्टअप्स को बिजनेस दे। मैं यही बोलता हूं कि अगर गवर्नमेंट
(52:13) सबसे ज्यादा बिजनेस देगी तो जितनी टेक्नोलॉजी गवर्नमेंट को चाहिए वो मिलेगी क्योंकि स्टार्टअप्स के पास वो ओपननेस है और वो लोग सोच के बनाते हैं कुछ चीजें तो इसलिए हमें डिफेंस में बहुत आगे जाना है। हमें एकदम अलग ढंग से सोचना पड़ेगा क्योंकि हम अगर हमारे पास सिर्फ प्लेेंस हैं उससे काम नहीं चलेगा। साइबर सिक्योरिटी की बात करें तो कैसा परफॉर्म कर रहे हैं हम वहां पर? साइबर सिक्योरिटी में ऐसा मैंने पहले जैसे बोला आपको क्वांटम लाना पड़ेगा। हम क्वांटम साइबर सिक्योरिटी अभी हम सिक्यर्ड है मतलब ऑनलाइन वर्ल्ड में क्योंकि आए दिन डाटा लीक की न्यूज़
(52:50) आती रहती है। तो काफी मतलब डरावना होता है अपने लिए कि इस फोन का या इस ऐप का डाटा उस कंट्री के पास चला गया। देखिए आप जो भी आज यूज़ कर रहे हैं सारा डाटा आपका जा रहा है बाहर। [नाक से की जाने वाली आवाज़] आप जाके अमेरिकन एडब्ल्यूएस यूज़ कर रहे हैं। राइट? ठीक है? वो सारा का सारा डाटा Amazon के पास है। आपके पास तो कुछ भी नहीं है। तो यहां अगर बड़े-बड़े डाटा सेंटर्स भी लोगों ने लगाए डाटा तो यहां से चला जाएगा। बट कहने को लॉस है कि मिसयूज नहीं होगा। बट डू यू थिंक कि वो लॉस फॉलो होते हैं। देखिए ऐसा जैसे सबके घरों में आज के टाइम में Amazon
(53:24) का Alexa है। हम्म तो वो भी सुनता ही रहता है हमारी बातें। बिल्कुल पूरी उसको सब कुछ पता है। आपके सारे हैबिट्स पता है उसको। जब ऑफ भी होता है तो भी सुनता है आपको। ओह! तो [हंसी] तो आप Alexa है जब हो आप काम नहीं कर रहे उसको निकाल दिया करिए। ओह अच्छा प्लग से ही निकाल प्लग से निकालिए। वाव अगर आप देखें तो हर प्रोडक्ट जो है जी वो एक तरह से वेपनाइज किया जा सकता है। आपका पीसी पड़ा है आपके टेबल पे। जी। ठीक है? उसको चाइना रिमोटली कंट्रोल कर सकता है। और उसमें जो आपका स्पीकर लगा हुआ है जी। और माइक्रोफोन लगा हुआ है उससे जो भी बात आप कर रहे हैं वो उनको पता चल जाएगी। ये
(54:03) सब तो पकड़ा हुआ है लोगों ने। कनाडा में उन्होंने पकड़ा था इस पॉइंट पे। हां। तो ये जो है हर चीज जो आप यूज़ करते हैं उसमें आपका जो भी डेटा है वो इनसिक्योर है। सर जैसे तो इसलिए फ्यूचर में हमें एक तरह से क्वांटम कम्युनिकेशन बनाना है। क्वांटम सिक्योर बनाना है। क्वांटम सिक्योर इवन प्रोडक्ट्स को क्वांटम सिक्योर बनाना पड़ेगा। हम तो जैसा आपका मोबाइल है, जैसा आपका लैपटॉप है, जैसा आपका राउटर है, सब में आपको क्वांटम चिप्स लगाने पड़ेंगे जिससे आप क्वांटम सिक्योर हो जाए और एक बार आप क्वांटम सिक्योर हो जाएंगे आपका डाटा कहीं नहीं जाएगा।
(54:39) हम इंटरेस्टिंग सर, बहुत मजा आया आपसे बात करके। वी आर टुवर्ड्स द एंड ऑफ़ आवर सेक्शन, सेगमेंट। तो एक क्वेश्चन है जो हम सबसे पूछते हैं और बिकॉज़ हम फाइनेंस सेंट्रिक चैनल है। तो बहुत ही सिंपल सा क्वेश्चन है कि व्हाट इज मनी टू यू? एट दिस स्टेज व्हेयर यू हैव बिल्ड वेल्थ फॉर योरसेल्फ यू आर बिल्डिंग वेल्थ फॉर अदर्स आल्सो जो खुद के लिए वेल्थ बिल्ड कर रहे हैं उनकी आप हेल्प भी कर रहे हो। तो नाउ व्हाट इज मनी टू यू? सी मनी इज एसेंशियल बिकॉज़ यू कैन नॉट क्रिएट यू कैन नॉट लेट योर एकिस्टिंग वेल्थ गो वेस्ट सो एवरीडे आई स्पेंड अबाउट एन आर लुकिंग ऑल एट माय
(55:26) इन्वेस्टमेंट्स रियली यस बिकॉज़ यू हैव टू ट्रैक द स्टॉक मार्केट यू हैव टू ट्रैक व्हाट इज़ हैप्पेनिंग यू हैव टू ट्रैक योर म्यूच्यूअल फंड्स यू हैव टू ट्रैक योर स्टॉक्स दैट यू हैव इन्वेस्टेड इन सो इफ यू वांट इफ यू आर इफ योर वेल्थ इज़ जस्ट लंग लाइक दैट इट्स नो यूज़ वेल्थ मस्ट क्रिएट मोर वेल्थ डेफिनेटली सो देयर फॉर आई स्पेंड एटलीस्ट वन ऑवर अ डे ऑन थिंकिंग अबाउट माय इन्वेस्टमेंट्स एंड व्हाट चेंजेस आई नीड टू मेक व्हेयर मोर आई डू आई नीड टू इनवेस्ट लाइक फॉर एग्जांपल करीब पांच चार पांच सात साल 10 साल पहले मैंने इंटरनेशनल फंड्स में
(56:02) इन्वेस्ट करना शुरू किया और वो अब तो अभी तो उसकी कैपेसिटी बंद हो चुकी है और अलाउड ही नहीं है आज तक बट इंटरनेशनल फंड्स में मुझे सबसे बड़ा फायदा यह हुआ कि रिटर्न्स अच्छे आए और जितना रुपी डेप्रिशिएट कर रहा हूं उतना मुझे फायदा हो गया। जी जी वो एडिशनल फायदा एडिशनल फायदा हुआ। तो इस तरह से आपको पूरी टाइम देखना चाहिए। अच्छा एक और क्वेश्चन मेरे पास आ रहा है फिर ये कि आपका जो पोर्टफोलियो है उसका आप एलोकेशन बता सके तो कि इतना परसेंट गोल्ड है, इतना परसेंट यूएस स्टॉक्स है। एलोकेशन इफ यू आर कंफर्टेबल इफ यू कैन टेल अस। वो मैं परसेंटेज तो नहीं बताऊंगा बट मैं
(56:35) आपका ब्रेकअप जरूर दे सकता हूं। इन्वेस्ट करता हूं। तो मेरा गोल्ड में इन्वेस्टमेंट है। सिल्वर में इन्वेस्टमेंट है। फॉर एग्जांपल मैंने सोचा कि इंपॉर्टेंट कमोडिटीज में इन्वेस्ट करना जरूरी है। जैसे कॉपर है, एलुमिनियम है। हां जी। कॉपर एलुमिनियम के तो कोई ईटीएफ है नहीं। तो इसलिए उसमें नहीं कर सकते। तो मैंने कॉपर और एलुमिनियम के स्टॉक्स लिए। क्योंकि मुझे पता है कि कॉपर की जरूरत बहुत ज्यादा पड़ेगी ईवीज के लिए। बिकॉज़ आप आईटी सेक्टर से हो। नो नो। में भी आपको कॉपर की बहुत जरूरत है। तो कॉपर में और एलुमिनियम में बहुत ज्यादा इंटरेस्ट है मुझको क्योंकि मैं
(57:08) सारी चीजें देख रहा था। पहले तो मैं सिल्वर में नहीं इन्वेस्ट करता था। दो साल पहले सिल्वर में इन्वेस्ट करना शुरू किया। पहले गोल्ड में ही करता था। तो सिल्वर भी किया, गोल्ड भी किया, एलुमिनियम भी किया, कॉपर भी किया। तो इस तरह से देखना पड़ता है कि कहां मार्केट जा रही है। किस किस तरह की कमोडिटीज की जरूरत पड़ेगी और इस बेसिस पे आप इन्वेस्ट करें। तो बिकॉज़ इलेक्ट्रॉनिक्स या फिर आप उस बैकग्राउंड से हो जहां पर सिल्वर का हद से ज्यादा यूज़ हो रहा है। तो आर यू स्टिल होल्डिंग ऑन सिल्वर बिकॉज़ या आई एम होल्डिंग ऑन सिल्वर डेफिनेटली।
(57:38) इंटरेस्टिंग और दूसरी चीज है कि एक तो हमारी प्रॉपर्टीज हैं। उस उसकी वैल्यू बढ़ती जाती है। हां जी। पर वो उसके रिटर्न्स बड़े पुअर होते हैं। क्योंकि अगर उसको रेंट करें तो कुछ भी नहीं आता। लिक्विडिटी नहीं है। कुछ नहीं है। तो वो दे आर देयर जस्ट फॉर फॉर द सेक ऑफ हैविंग कपल ऑफ़ होम्स एज एन इन्वेस्टमेंट। बट आई डोंट पे टू मच अटेंशन। रियलस्टेट आपका लोएस्ट है। लोएस्ट है। लोएस्ट है। ठीक है। बट वैल्यू काफी ज्यादा है क्योंकि बढ़ गई है बहुत सारी। बिकॉज़ ऑफ़ द रिटर्न्स नहीं आते वहां। राइट राइट राइट। रिटर्न्स देख के आप इन्वेस्ट करते हैं ना
(58:08) विदाउट रिटर्न्स। आपको इन्वेस्ट करने में फायदा क्या है? इंटरेस्टिंग। फिक्स्ड इनकम प्रोडक्ट्स देखिए आप। तो फिक्स्ड इनकम प्रोडक्ट्स मैं देखता हूं। कौन-कौन से में इन्वेस्ट करना चाहिए? बोंड्स में कौन से इन्वेस्ट करना चाहिए? गवर्नमेंट बॉन्ड्स में कहां इन्वेस्ट करना चाहिए? जो स्टेट गवर्नमेंट के आते हैं स्कीम्स उसमें इन्वेस्ट करिए। तो आप फॉर एग्जांपल रीट्स में भी इन्वेस्टमेंट होनी चाहिए। तो इस तरह की चीजें मैं देखता हूं जहां फिक्स्ड रिटर्न्स होते हैं। टॉप फाइव अगर आप प्रायोरिटी वाइज बता देते हो शॉर्ट में कि सबसे सबसे बड़ा तो मेरा इक्विटी है।
(58:37) ठीक है? उसके बाद डेप्ट है। ठीक है? उसके बाद फिक्स्ड इनकम है। हम तो इस तरह से यू नो एक तरह से चैन बना हुआ है। तो ये कमोडिटीज आपका फोर्थ या फिफ्थ नंबर हां फिफ्थ और सिक्स्थ होगा कहीं जाके। गॉड बट मैं इसलिए मैं देखता हूं कि देखिए अगर आपके पास वेल्थ है उसको बढ़ाना आपका जरूरी है। आप उसको कोल्ड स्टोरेज में नहीं रख सकते। उसको बढ़ाना जरूरी है। इंटरेस्टिंग। थैंक यू सो मच सर फॉर डूइंग दिस विथ अस। आई होप किसी और टॉपिक पर हम फिर से एक बार बैठेंगे। मे बी दिस ईयर मे बी नेक्स्ट ईयर आपकी डेट हमें मिल जाए। एंड इट्स एन ऑनर टू सीट विद यू एंड टॉक टू
(59:11) यू फॉर एन आवर। एंड दिस इज द ओनली रीज़न आई एम डूइंग दिस शो। सो थैंक यू सो मच सर। ओके। इट्स अ प्लेजर मीटिंग यू। थैंक यू। सो गाइस अगर आज का यह पडकास्ट का मैं आपको टेक अवे बेस्ट टेक अवे बताऊं तो आपको अब फोकस करना है रिसर्च पर ऑन इंडस्ट्रीज लाइक सेमीकंडक्टर, क्वांटम, एआई सिंगुलरिटी और डिफेंस, ईवी, ई वेस्ट मैनेजमेंट। अगर आपको यह पॉडकास्ट पसंद आया है, आपने अभी तक देखा है, तो प्लीज इस पॉडकास्ट के साथ एंगेज करो। लाइक, शेयर, कमेंट करो ताकि मुझे और मोटिवेशन मिले और मैं आपके लिए और विज़डम देने वाले गेस्ट को बुला सकूं। सो गाइस सब्सक्राइब कर लो। मिलती हूं मैं
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