Friday, August 7, 2026

Ujjain's Hidden Mysteries- Mahakal Tantra, Human Sacrifice & Black Magic EXPOSED | Shlloka

Ujjain's Hidden Mysteries- Mahakal Tantra, Human Sacrifice & Black Magic EXPOSED | Shlloka

Author Name:SHLLOKA

Youtube Channel Url:https://www.youtube.com/@Shlloka_B2B

Youtube Video URL:https://www.youtube.com/watch?v=w7v1CRWxSXE



Transcript:
(00:00) महाकाल बाबा का शिवलिंग के ऊपर में ही साक्षात श्री यंत्र स्थापित है। यह बहुत कम लोगों को दिखाई देता है। महाकाल बाबा का शिवलिंग के अगर लेफ्ट साइड में कॉर्नर पे देखोगे तो एक खड्डा सा बना हुआ है। कैलाश से आने जाने का जो मार्ग है यह सुगम करवाता है। महाकाल तंत्र के कुछ रहस्य के बारे में बताइए। मारण मोहन यानी कि हम कुछ तंत्र के ऐसे उपाय होते हैं जिससे किसी का नाम ले लिया और उसकी डेट हो गई। नाम ले लिया और उसका वशीकरण हो गया। जो श्री कृष्ण 64 कला में महाकाल तंत्र भी सीखा हुआ है। बहुत सारे ऐसे लोग हैं कि शिव साधना के बाद में
(00:32) पिशाच वृत्ति के भी हो जाते हैं। लेकिन शिवलिंग के ऊपर में आप माथा नहीं रख सकते। सीधे-सीधे भगवान शिव का जो बॉडी का भाग गरम भाग बोला जाएगा। और अगर किसी व्यक्ति के अंदर में इतनी उग्र एनर्जी आ गई तो उसके पूरे के पूरे चक्र भेदन करके उसकी कुंडलिनी ओपन हो सकती है। उसकी डेट भी हो सकती है। अगर आप भस्म आरती नहीं करते हो तो भगवान महाकाल के शिवलिंग में से पसीना निकलेगा। मुझे अलग-अलग रुद्र अभिषेक के बारे में बताइए और उनका महत्व क्या है? पंडित जी महाकाल ज्योतिर्लिंग 12 ज्योतिर्लिंग में ऐसा ज्योतिर्लिंग है जो दक्षिण मुखी है। क्यों? भगवान के अघोर
(01:08) मुक्त और काल के ऊपर में नियंत्रण करने के वजह से भी यह मारण मोहन वशीकरण उच्छाटन संबंध ये सब चीजों के लिए दक्षिण दिशा यूज की जाती है। शिव समर्पित जी एक महाकाल साधक हैं जिन्होंने बचपन से ही पूजा साधना और स्पिरिचुअलिटी को अपने जीवन का हिस्सा बनाया। 2016 से महाकाल साधना प्रैक्टिस कर रहे हैं और 12 साल से भी ज्यादा समय से महाकाल मंदिर से जुड़े हुए हैं। कहते हैं यहां से समय की गणना होती थी। मतलब यहीं से सूर्य उदय, सूर्यास्त और पूरे पृथ्वी पर कहां कौन से समय चलेगा ये इसकी गणना होती थी। शिव महापुराण में लिखा गया है कि हर एक 12 ज्योतिर्लिंग में एक
(01:48) एनर्जी फ्लो हो रही है जो 1000 कि.मी. के रेडियस तक के जाती है। घर में जो लोग दीक्षा नहीं ले सकते वो लोग क्या कर सकते महिला स्तोत्र कर सकते हैं, लिंगाष्टक कर सकते हैं। शिव सहस्त्र नामावली कर सकते हैं। महाकाल मंदिर के आगे कोई भी बारात आती जाती नहीं है। कोई ऑस्पिशियस कार्य नहीं करा जाता। क्या कारण है इसका? करियर की रुकावट हो, शादी की रुकावट हो, प्यार की रुकावट हो, कोई भी रुकावट हो तो भगवान शिव के ऊपर में चांदी का बिल पत्र अर्पण कीजिए। सिंपल टोटका बता सकते हैं। जो लोग ये कॉम्प्लिकेटेड प्रोसेस नहीं कर सकते वो लोग क्या कर सकते हैं?
(02:22) पति और पत्नी के बीच में काफी मुश्किलें आ रही हैं। झगड़े होते हैं। उनके लिए क्या किया जाए? दोनों के नाम भोज पत्र पे लिखना चाहिए और भोज पत्र को एक शहद की शीशी में रख देना चाहिए। ये विद इन अ वन वीक आपको रिजल्ट मिल सकता है। इसमें नेगेटिव एनर्जी पीक लेवल पर जब पहुंच जाती है तब उसका उतारा किया जाता है। उतारे में मांस मदिरा का भी प्रयोग तब कर सकते हैं। कुछ चीजें हैं जो हमें श्मशान में जाकर करनी पड़ती है। उज्जैन में कई सारे राक्षसमई मंदिर हैं जिनकी राक्षस प्रवृत्ति है जो हिडन है और वहां पे ज्यादा कोई जाता नहीं है। आज वह अपनी परंपरा की पांचवी
(02:56) पीढ़ी के रूप में इस आध्यात्मिक ज्ञान और साधना को आगे बढ़ा रहे हैं और आज हम बहुत खुशी के साथ समर्पित जी को बॉडी टू बीइंग पडकास्ट पर स्वागत करते हैं। उज्जैन के महाकाल मंदिर के बारे में तो आपने सुना ही होगा महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग लेकिन यह सिर्फ एक साधारण मंदिर नहीं है जहां लोग कुछ भी प्रार्थना या मनोकामनाएं करके आ जाते हैं। यह एक बहुत ही पावरफुल स्पिरिचुअल मशीन है जिसे इस तरह से स्थापित किया गया है कि साधक धीरे-धीरे करके अपनी शून्य अवस्था या फिर नथिंगनेस की तरफ बढ़ सके। जिसे हम योगिक परंपरा में हमारा मूल अस्तित्व मानते हैं।
(03:31) ग्रेनिश मीडियन टाइम से हजारों साल पहले उज्जैन को वैदिक एस्ट्रोनॉमी में टाइम कैलकुलेशन का एक बहुत ही महत्वपूर्ण केंद्र माना जाता था। क्योंकि ट्रॉपिक ऑफ कैंसर यहां से गुजरता है। इसीलिए यहां शिव को महाकाल यानी कि द ग्रेट मास्टर ऑफ टाइम के रूप में भी पूजा जाता है। उज्जैन के बारे में एक और प्रचलित मान्यता है कि कोई भी व्यक्ति इस नगरी में रात भर विश्राम नहीं कर सकता। तो आज जानते हैं इस अद्भुत महाकाल ज्योतिर्लिंग के बारे में खुद महाकाल के ही पुजारी की जुबानी। बट बिफोर वी बिगिन मेरी आपसे एक रिक्वेस्ट है। एस अ वूमेन पडकास्टर विद एन ऑल वुमेन टीम। जी
(04:07) हां, हमारी टीम में सारी महिलाएं हैं और वह भी हर एज ग्रुप की। तो 22 साल से लेकर 65 साल तक पिछले 2 सालों में आप सब ने मिलकर इस प्लेटफार्म को यहां तक पहुंचाया है जिसकी मैं तहे दिल से शुक्रगुजार हूं आपकी। बस एक छोटी सी रिक्वेस्ट है। अगर तो आपने हमारा चैनल अब तक सब्सक्राइब नहीं किया हो तो प्लीज रिकंसीडर करिएगा क्योंकि आपका एक सब्सक्राइब हमें और भी ऑथेंटिक और इनाइटफुल वॉइसेस लाने में मदद करता है और हमारी कंटेंट को और ज्यादा विजिबिलिटी मिलती है। पंडित जी महाकाल ज्योतिर्लिंग जो उज्जैन में है सालाना यहां पांच से 6 करोड़ लोग
(04:43) विजिट करते हैं। रोजाना लगभग डेढ़ से 2 लाख यह मंदिर में विजिट करते हैं। जब हम महाकाल शिव की बात करें तो महाकाल शिव को शिव का सबसे पावरफुल स्वरूप माना गया है क्योंकि वो टाइम और डेथ दोनों के कंट्रोलर हैं। यह भी कहा गया है कि यहां जो ज्योतिर्लिंग है वो किसी ने स्थापित नहीं किया। वो जब धरती फटी थी तब वो खुद ही धरती से निकला था। तो मैं आपसे जानना चाहती हूं ऐसी अनोखी मिस्ट्रीज जो आम लोगों को नहीं पता महाकाल ज्योतिर्लिंग के बारे में। बाबा महाकाल की नगरी तो रहस्य से भरी हुई है। इसमें रहस्य की तो क्या बात करें हम लेकिन एक रहस्य है कि भूखी माता मंदिर।
(05:20) भूखी माता मंदिर में प्राचीन समय में नरबलि की प्रथा थी। जहां पे एक जीवित व्यक्ति की हर रोज बलि दी जाती थी। लेकिन आज वो प्रथा बंद हो के वहां पे एक नॉर्मल सी एक बलि प्रथा जो एनिमल्स की सैक्रिफाइस होती है इस टाइप में उसको कन्वर्ट किया गया है। ये जीवित बलि का ना बहुत लोगों को कांसेप्ट समझ नहीं आता। सनातन में क्यों किसी जीव की बलि दी जाएगी? सैक्रिफाइस का अगर एक तौर पे क्लेरिफिकेशन दिया जाए तो इस तरीके से होता है कि हमारे कर्मों को काटने के लिए हम किसी और का कर्म के व्यक्ति को भेज रहे हैं ताकि वो हमारे भोगवान भोगे और हमारी नेगेटिविटी जो है हम
(05:57) वो जीव के ऊपर में चढ़ाते हैं। ये ऐसी मान्यता है तांत्रिक और किसी किसी अघोर संप्रदाय में लेकिन इसका कोई रियल फॉर्मेशन नहीं है। और ये कौन लोग होते थे जिनकी बलि चढ़ाई जाती थी? ये डिसाइड किया जाता था राजा के तौर से। विक्रमादित्य के तौर पे यह स्टोरी आती है। लेकिन उसके बाद में फिर अह विक्रमादित्य ने अह देवी भूखी माता मंदिर में स्थापित जो देवी है उनकी आराधना की। आराधना करने के बाद में उन्हें प्रसन्न किया। प्रसन्न करने के बाद में उनका आशीर्वाद लिया कि अब से आपके पास में कोई भी बलि नहीं चढ़ी गई। लेकिन उसके बावजूद भी 2017 में वहां पे
(06:34) आफ्टरनून के टाइम पे एक लड़के की बलि चढ़ाई गई। यह यंग लड़का था। 20- 22 साल का लड़का था। उसे नहीं पता था कि क्या होने वाला है करके वो जस्ट घूमने फिरने के लिए एक टूरिस्ट के तौर पे वहां पे गया था और वहां के लोगों ने वो काम कर दिया था। इंसानों की भली प्रोसेस डायरेक्ट होती है कि सीधा सिर पे हैमर होता है या फिर गर्दन पे हैमर होता है? हैमर हां हथोड़ा हां जी और ये जो करते हैं वो कौन होते हैं जो मारते हैं? यह तांत्रिक लोग होते हैं। यह अघोर संप्रदाय के तांत्रिक संप्रदाय के लोग होते हैं जो किसी भी वैदिक संस्कृति को और वैदिक सनातन संस्कृति को नहीं मानते
(07:07) हैं। ये अलग ही निकल जाते हैं जिसके वजह से इस तरीके से काम करते हैं। अगर वैदिक सभ्यता को मानते हैं और वैदिक सभ्यता में कुलारण तंत्र को मानते हैं तो ये सब चीजें नहीं होता है। कुलारण तंत्र में सीधा-सीधा महाकाल ने भगवान शिव ने ही आज्ञा दी है कि यह सब चीजें ना हो करके और अगर ऐसा कोई करता है तो उस शिव की बहुत दुर्गति होती है। उसे नरकों की यातना भोगनी पड़ती है। यह बहुत गलत है। लेकिन फिर भी आज के दौर में यह सब चीजें होता है। और जानवरों के साथ भी मुझे लगता है गलत है। जानवरों की भी बलि चढ़। किसी भी जानवर की भी बलि देना यह बहुत गलत है कि आपके
(07:40) ऊपर की नेगेटिविटी भी आप जानवर के ऊपर में चढ़ा दोगे और वो जानवर के ऊपर में कुछ मंत्र कर दोगे और उसकी बलि चढ़ा दोगे तो ये बहुत गलत बात है। कामाख्या में अगर आप जाओगे कामाख्या में पीली सरसों के तेल से ये लेपन किया जाता है। जिस भी एनिमल का सैक्रिफाइस होने वाला है उसका। साथ में कुछ सरसों के दाने या फिर कुछ ऐसे अभिमंत्रित चूर्ण एनिमल के ऊपर में लगाए जाते हैं। लगाने के बाद में कुछ मंत्र किए जाते हैं। मंत्र करने के बाद में अब एनिमल कुछ बड़े-बड़े भी होते हैं। बड़े एनिमल होने के बाद में उतारा तो होगा नहीं उसका कि अपन ने सर से ले पांव तक के उतार दिया
(08:16) इस तरीके से। तो मंत्र के द्वारा वह उतारा किया जाता है। उतारा करने के बाद में फिर उसका सैक्रिफाइस होता है और वह सैक्रिफाइस होने के बाद में जो सबसे पहला ड्रॉप होता है ब्लड का वो देवी महामाया को ही चढ़ता है। और यहां पर कालभैरव को जी रहस्य में एक और रहस्य ऐसा है कि 64 योगिनी का मंदिर 64 योगिनी के मंदिर में अगर आपने कभी किसी देवी की साधना की है ना की है। किसी एनर्जी को महसूस किया है ना किया है। आप अगर पौर्णिमा या अमावस्या के समय देवी के मंदिर में जाते हो तो आप वहां पे एनर्जी को फील कर सकते हो। यह चौसड़ी योगिनी का मंदिर बहुत गुप्त स्थान है और
(08:54) जब उज्जैन एक तांत्रिक यूनिवर्सिटी है। आज भी है और पहले से भी रहा है। तो उस समय से 64 योगिनियां वहां पे विराजमान है। और ये 64 योगिनियां हर एक चीज आपको देने के लिए सक्षम है। लेकिन अगर आप उनके दर्शन और उनके अभिंदन करते हैं तब जाके वो आपको मिलेगा। 64 योगिनी का थोड़ा कांसेप्ट समझाइए। व्यूअर्स के लिए क्योंकि पहली बार हम इसकी चर्चा कर रहे हैं पडकास्ट में। 64 योगिनी ऐसे है कि महाकाल साधना में बैठे थे और देवी उनके बगल में विराजमान थी। उस समय देवता आते हैं। देवता बोलते हैं कि रक्तबीज और महिषासुर नामक दैत्य बहुत ज्यादा संहार कर रहे हैं और संहार
(09:33) करने की वजह से बहुत क्षति हो रही है। तो इसे हमें निजात पाने के लिए भगवान के शरण में आए हैं और भगवान को जगाइए। तो देवी बोलती है कि यह चीज तो हो नहीं सकती लेकिन मैं आपके साथ आती हूं और जो भी दैत्य हैं उनका संहार मैं अपने हाथों से करती हूं। इस स्टोरी में आगे थोड़ा फास्ट फॉरवर्ड अगर जाया जाए तो रक्तबीज का जब संहार होता है तो हर जगह पे एक ड्रॉप से रक्तबीज नामक दैत्य का उद्गम होता है और जन्म होने के बाद में वह और बड़े-बड़े होते जाते हैं। तो उस समय देवी ने अपने भद्रकाली स्वरूप को प्रकट किया है। भद्रकाली स्वरूप में जब
(10:10) देवी ने प्रकट किया है तो उनके साथ में देवियों के कुछ योगिनियां भी आती है। देवी के 64 योगिनियां हैं जो 64 योगिनियां देवी के पीछे चलती है और उनके पीछे भैरव नामक उनके पुत्र चलते हैं। तो इस तरीके से इनकी परंपरा आती है और 64 योगिनी जो है यह आपके किसी ना किसी तौर से आपके कुलदेवी और देवता से भी जुड़ी हुई है। जिसकी वजह से इनको खुश करना बहुत ज्यादा दुर्लभ माना जाता है। और अगर यह इन्होंने आपके ऊपर में नजर कर दी तो आपका मोक्ष भी हो सकता है। ओ उज्जैन में कई सारे राक्षसमई मंदिर हैं जिनकी राक्षस प्रवृत्ति है। जी हां कुछ-कुछ ऐसे राक्षसमई मंदिर है जो
(10:50) हिडन है और वहां पे ज्यादा कोई जाता नहीं है। क्यों? वो होते हैं लिंग फॉर्म में शिवलिंग फॉर्म में लेकिन उसके अंदर में बैठा होगा राक्षस। क्योंकि उसे वहां पे स्थापित किया गया है कि जब तक के उसका डेट का टाइम नहीं आता या फिर मोक्ष का टाइम नहीं आता तब तक के उसे वहां पे स्थापित किया गया है। इसलिए उसे राक्षसमई मंदिर कहा जाता है। मंदिरों में अगर तो हम जाए तो क्या हो सकता है? आपको नेगेटिव एनर्जी बहुत ज्यादा ड्रास्टिक वे में फील करने के लिए मिल सकती है। तो फिर ये मंदिर है ही क्यों? महाकाल के साधक हर कोई है। राक्षस हो, प्रेत हो, भूत
(11:23) हो, शिव के गण जो भी है, पशु हो, पक्षी हो, मनुष्य हो, हर कोई शिव की साधना कर सकता है। तो वो भी एक साधक ही है। उसके अलावा कुछ नहीं। तो आप कह रहे हैं ये जो राक्षस प्रवृत्ति के मंदिर हैं उज्जैन में, ये इंसानों के लिए नहीं है। पर ये दूसरे बीइंग्स के लिए हैं। जी हां। और उनमें इंसानों को नहीं जाना चाहिए। जी नहीं। हर एक मंदिर में नहीं जाना चाहिए। वहां पे ऐसी एनर्जी हमें फील करने के लिए बाहर से ही मिल जाती है कि यहां हमारा प्रवेश वर्जित है। लेकिन फिर भी जबरदस्ती से कुछ लोग जाते हैं तो उन्हें कभी-कभी उल्टी आ जाती है क्योंकि एक्सेस एनर्जी का फ्लो
(11:58) बढ़ जाता है। कभी-कभी कुछ और दिक्कत आ जाती है। स्वेटिंग फेल होने लग जाती है। इस तरीके से भी होता है। एक पिशाच मोचन करके जगह है। ये बहुत ज्यादा विख्यात है। अच्छा तो यहां नहीं जाना चाहिए। जी। बहुत सारे ऐसे लोग हैं कि शिव साधना के बाद में पिशाच वृत्ति के भी हो जाते हैं। क्योंकि उनकी साधना उस लेवल पर होती है। खुद का मल खाना ऐसे चीजें की तरफ में घिन आ के नहीं देखना कि जो हमें घिन आती है। इस तरीके से भी हो जाते हैं। इससे पेशा श्रुति धारण किए करके ऐसे बोलते हैं। लेकिन वो भी शिव को प्रिय ही है। शिव उसका भी त्याग नहीं करते हैं। इसीलिए तो शिव
(12:33) सबसे सर्वोपरि देवता माने जाते हैं। जो शिव की साधना करते-करते जो पिशाच प्रवृत्ति के होते हैं और ये सब करते हैं वो उस क्यों पहुंचते हैं उस प्रवृत्ति में? उस प्रवृत्ति में उनको आजू-बाजू का एनवायरमेंट और आजू-बाजू की जो एनर्जी वैसी प्रवृत्ति देती है वैसी उनको नेचर बनाती है जिसकी वजह से वो वैसे बनते हैं। जैसे अगर कोई व्यक्ति मंदिर में बैठा हुआ है उसको मंदिर की एनर्जी इंपैक्ट करेगी। लेकिन अगर कोई व्यक्ति बहुत ज्यादा अनजान जगह पे बैठा है जहां पे पता नहीं किस व्यक्ति ने कैसे साधना करके रखी हुई है तो वो उसको भी अब्सॉर्ब कर रहा है ना तो
(13:04) अब्सॉर्ब कर रहा है तो यह एक नेगेटिव वे में जाएगा। हम महाकाल के अगर मंदिर की बात की जाए तो महाकाल मंदिर में महाकाली, महालक्ष्मी और महासरस्वती ये त्रिगुणात्मका देवियों के सानिध्य में महाकाल बाबा का शिवलिंग स्थापित है। महाकाल बाबा का शिवलिंग के ऊपर में ही साक्षात श्री यंत्र स्थापित है। यह बहुत कम लोगों को दिखाई देता है और बहुत कम लोग इसके बारे में जानते हैं। लेकिन महाकाल बाबा के छत में ही श्री यंत्र स्थापित है। श्री यंत्र के ऊपर में महिमन सूत्र लिखा हुआ है। अंकित किया गया है। यह महाकाल बाबा के मंदिर को एक बहुत अलग ऊर्जा में प्रतिपादित करता है।
(13:42) तो यहां पर जो श्री यंत्र है इसका सिग्निफिकेंस क्या है? यह श्री यंत्र का सिग्निफिकेंस राजराजेश्वर स्वरूप महाकाल का और राजराजेश्वर देवी का यह दोनों का स्वरूप साथ में दिखाई देता है। बाकी अगर आप किसी भी शिवालय में जाते हो, कहीं पे भी जाते हो तो बाबा की एक शिवलिंग होती है और उसके पीछे में मां जगदंबा की मूर्ति होती है। लेकिन यहां पे बाबा और मां साथ में ही विराजमान है और एक ही आकृति में विराजमान है। ऊपर और नीचे काग भूषुंडी करके बाबा के गण आज शिवलोक से सीधे-सीधे महाकाल बाबा के गर्भगृह में प्रस्थान करते हैं। महाकाल बाबा के शिवलिंग के अगर लेफ्ट
(14:20) साइड में आप कॉर्नर पे देखोगे तो एक खड्डा सा बना हुआ है। इसमें से अगर बोला जाए कैलाश से आने जाने का जो मार्ग है यह सुगम करवाता है। जिसके वजह से इस चीज को बहुत यूनिक माना जाता है। तो आप कह रहे हैं यहां पर कैलाश मानसरोवर का आने और जाने का मार्ग छुपा हुआ है। जी ओ कागभुशुंडी करके महाकाल बाबा के गण है जिन्होंने सीता माता के पैर पे चोंच मार दी थी। चोंच मारने की वजह से वो त्राहिमाम करते हुए तीनों लोकों में भटकते फिरते थे। जिसमें कहीं पे भी उनको ठौर नहीं मिल रही थी। राजा श्री राम जी ने एक बाण अनुसंधान करके उनके पीछे में छोड़ा था। जिससे उनको
(14:58) ठौर नहीं मिल रही थी। इसी वजह से वो बाबा महाकाल के दरबार में आए। बाबा महाकाल से उन्होंने विनती की और बाबा महाकाल ने उन्हें मार्ग प्रशस्त किया था कि आप वहां जाके श्री राम जी से और सीता जी से बात कीजिए और उनसे प्रार्थना कीजिए कि वो आपको माफ कर देंगे जिसकी वजह से बाबा को यहां पे इतने प्रचलित तौर पर माना जाता है और आज भी उस चीज की वजह से काक भुसुंडी जो है वो महाकाल बाबा के ऋणी होने के वजह से आज भी वो शिवलोक से हर रोज भस्म आरती के दौरान वहां पे आना जाना करते हैं। तो आपने जो मुझे बताया कि कैलाश का एक गुप्त रास्ता है। यह एक पोर्टल जैसा होगा
(15:39) ना? जी। तो ये क्या थ्रू एनर्जी बॉडी आप जा सकते हैं या फिजिकल कोई रास्ता है? वहां पे एक होल दिया गया है। अब ये होल कितना गहरा है, कहां निकलता है? ये किसी को भी नहीं पता। सिर्फ आप उस होल के दर्शन कर सकते हैं और एक आशीर्वाद ले सकते हैं बाबा से। उसके अलावा किसी को उसके बारे में ज्यादा पता नहीं है। बहुत छोटा सा होल है जिसमें से एक कागभुंडी यानी कि कौवे के रूप में या फिर किसी प्राणी के रूप में ही वो पोर्टल से जा सकते हैं। इस तरीके से है वो। तो किसी साइंटिस्ट वगैरह ने कभी जांच करी कि वो कितना गहरा है? कहां निकलता है।
(16:12) साइंटिस्टों ने तो काफी जांच की। काफी सारे जांच तो काल भैरव में भी हुए। काल भैरव बाबा की मूर्ति स्वयं उठा के देखी गई। लेकिन वहां पे मदिरा कहां जा रही है? उसका भी मार्ग नहीं मिला और ना ही इसका मिला। आप कह रहे हैं काल भैरव में बोला जाता है कि मदिरा पिलाई जाती है काल भैरव को लेकिन उसका कोई उसका कोई होल का होल से कहां वो मार्ग से कहां प्रशस्त हो जाता है और कहां आगे निकल जाता है इसका आज तक के पोर्टल का हवाला कहीं पे भी नहीं मिला जबकि वहां पे कितने सारे आज के टाइम पे रिसर्च हो चुके हैं। मंदिर के कंस्ट्रक्शन के बारे में मैं
(16:43) आपसे जानना चाहती हूं। तीन स्टोरीड है और यह तीनों स्टोरीड हर एक लेवल को रिप्रेजेंट करता है। तो आपका पहला आ गया नागचंद्रेश्वर जो कि कुंडलिनी हिडन कुंडलिनी को सिंबलाइज करता है। फिर आपके बीच में आता है ओमकारेश्वर जो कि आपके प्राणिक वर्ल्ड प्राणिक एनर्जी को सिग्निफाई करता है और नीचे आपका आता है महाकालेश्वर जो कि प्राइमोडियल अनमैनिफेस्ट एनर्जी को सिंबलाइज करता है। इसके बारे में थोड़ा बताइए। अगर इसको सिंपल वे में बोला जाए तो महाकाल जो है महाकाल एक मूलाधार चक्र के देवता है। इस तरीके से बोल सकते हैं। और नाग चंद्रेश्वर
(17:11) जो है यह हमारे हेड क्राउन के देवता है। ये टोटल मिला के जब मंदिर बनता है तो ये हमारी टोटल ओवरऑल कुंडली नहीं बनती है। इस तरीके से बोला जा सकता है। अच्छा। तो ऐसा कुछ है कि जो लोग विजिट करने आते हैं उनको ये तीनों मंदिर में जाना चाहिए। सिर्फ दो फ्लोर्स पे आप जा सकते हो। तीसरे फ्लोर पे नहीं जा सकते। वहां पे कुछ इंसिडेंट्स ऐसे हुए थे कि लोगों ने सुन लिया था कि महाकाल के क्षेत्र में या फिर किसी भी शिवलिंग के क्षेत्र में अगर आप आत्महत्या या आत्मदाह का भी प्रकार करते हो तो उसके बाद में भी आपको मुक्ति मिल जाएगी। तो ऐसे कुछ इंसिडेंस हुए थे इसलिए
(17:47) थर्ड फ्लोर जो नागचंश्वर का है ये साल में से एक बार खुलता है। इसके अलावा कुछ नहीं। ये मैंने सुना था कि लोग साइड कमिट करते हैं ऊपर जाके। जी हां लोगों ने किए हुए हैं। क्योंकि ताकि उनको मुक्ति मिल जाए। उसके आगे में उनको मुक्ति मिल जाएगी। सेम कांसेप्ट जो है यह प्रयागराज का जो कुंभ मेला का स्थान है वहां का भी फेमस है। इस तरीके से वहां पे भी बोला जाता है। तो वहां पे भी काफी सारे लोग अटेम्प करते हैं। अच्छा भैरवी यातना के बारे में थोड़ा बताइए। सप्तपुरी है। सप्तपुरी में से एक अवंतिका पूरी है जिसमें काल भैरव भी एक देवता है। और अगर किसी की वहां पर डेथ
(18:21) होती है चाहे वो पशु हो, पक्षी हो या मनुष्य हो उसे भैरवी आता से गुजरना पड़ता है। अगर उसके पुण्य कर्म है उतने लेवल का वो मोक्ष पाना चाहता है तो ठीक है। लेकिन अगर उसके पुण्य नहीं है फिर भी उस क्षेत्र में उसने जीव छोड़ा है तो जीव छोड़ने की वजह से उसे भी भैरव या आत्मा से गुजरना पड़ता है और वो मोक्ष में ही सम्मिलित होता है और मोक्ष का ही भागी होता है। तो ये काल भैरव का एक प्रमुख सीक्रेट पॉइंट अगर बोला जाए उज्जैन का तो यह है। भैरवी यातना में जैसे किसी व्यक्ति को हजारों साल तक के दंड मिलना चाहिए था और उसे किसी अन्य योनिया में जाना था। वो सिर्फ और
(18:57) सिर्फ विदिन अ सेकंड कुछ सेकंड में ही वो सब चीजें हो जाए तो इसे भैरवी यातना कहा जाता है और भैरवी यातना में उस जीवात्मा को बहुत तकलीफ से गुजरना पड़ता है लेकिन वो आनंद में भी जाता है क्योंकि उसे एंड में मोक्ष मिलता है। हर जीवात्मा के साथ भैरवी यातना होती है। जी हां। और वो भैरवी यातना हर एक इंसान के लिए अलग-अलग होती होगी। जी हां उसके कर्मों के हिसाब से होती है। अगर किसी व्यक्ति ने साधना की है, किसी भी अलग-अलग साधना से वह गुजरा हुआ है और उसकी उतनी एनर्जी अर्जित है कि उसकी आत्मा अपवर्ड जा सकती है। डाउनवर्ड नहीं जा सकती। अगर डाउनवर्ड
(19:28) जाएगी तो वो नरक में जाएगी और नरक में उसको भेजना नहीं है क्योंकि भैरवी आत्मा से गुजरना है और श्लोक है कि सप्तपुरी में जो भी जिसकी भी डेट होती है वो व्यक्ति को मोक्ष मिलता है। तो जिसकी वजह से वो अपवर्ड जाएगा। उसकी डाउन से अपवर्ड जाने की जो स्थिति है इसे भैरवी यात्रा कहेंगे। अच्छा तो अगर तो उज्जैन में आकर किसी की मृत्यु होती है तो वह शुभ माना जाता है। जी हां बनारस से ज्यादा बनारस और उज्जैन माया अवंतिका कांची मथुरा काशी ये सब चीजें यही तो है मोक्षदायनी भस्म आरती की बात करते हैं। जो भस्म आरती महाकाल ज्योतिर्लिंग में करी जाती है। वह
(20:07) ब्रह्म मुहूर्त में करी जाती है। उसमें एक तरीके के सन्यासी या कोई विशेष वर्ग के लोग ही उसको कर पाते हैं। औरतें देख नहीं पाती। जो यहां पर राख यूज़ करी जाती है वो फ्रेश राख होती है। मुझे इसके पीछे का रहस्य या मिस्ट्री बताइए कि इसके पीछे का रहस्य यह है कि जब भगवान शिव ने हलाहल विष का पान कर लिया था तो भगवान शिव के शरीर में से एक तरीके से तरल पदार्थ यानी कि एक पसीना द्रवित हो रहा था। द्रवित होने की वजह से हनुमान जी और नारद जी ने भगवान शिव के ऊपर में सबसे पहले राख का लेपन किया था। और यह राख शमशान की थी उस समय। और श्मशान की राख होने की वजह से वो एक
(20:45) पद्धति के तौर पे महानिवाणी अखाड़ा जो 13 अखाड़ों में से एक माना हुआ है वो अखाड़े के लोग यह संचालित करते हैं। जिनके आज तक के 600 के अराउंड कुछ महंत हो चुके हैं और गाधिपति हो चुके हैं। जिन्होंने यह संचालित अभी तक के किया हुआ है। और सेकंड चीज यह है कि लेडीज़ देख नहीं सकती है। भगवान शिव उस समय अपने नग्न अवस्था में होते हैं। निराकार अवस्था में होते हैं। जिसके वजह से भगवान शिव को उस समय ना देखें तो ज़्यादा फलदाई होता है। अगर आप देखते हो तो हार्मोन का इमंबैलेंस होना या फिर किसी और तरीके का एक मूड स्विंग होना ये सब चीजें आम बात पाई जाती है लेडीज
(21:23) लोगों में। अच्छा जी भस्म आरती का सिग्निफिकेंस ये है कि अगर आप भस्म आरती नहीं करते हो तो भगवान महाकाल के शरीर में से और शिवलिंग में से आज भी एक द्रवित पदार्थ निकलता है और यह लोगों ने देखा हुआ है। पसीना ही बोला जाता है भगवान शिव का। अगर आप भस्म आरती नहीं करते हो तो पसीना निकलेगा और यह हर रोज होना जरूरी है। काफी टाइम हुआ है। क्या बात कर रहे हो? अच्छा काफी टाइम हुआ है। कपिला गाय का गोबर क्यों लिया जाता है? कपिला गाय को बहुत ज्यादा एक पूजनीय स्थल पे रखा हुआ है। लाखों करोड़ों गायों में से एक गाय कपिला होती है। तो वो कपिला गाय
(22:01) का ही काऊडन यूज़ किया जाता है। तो यह बहुत ज्यादा पवित्र और दिव्य माना जाता है। एक भस्म के लिए भी और एक आयुर्वेदिक के लिए भी यह हर तौर पे एक विशेष तरह फलदाई होता है। भस्म आरती के बारे में बताइए कि इसका प्रोसेस क्या होता है? भस्म आरती के लिए जो महानिरवाणी अखाड़े के महंत होते हैं, यह पहले दिन शाम में संध्या बंधन के समय भस्म तैयार करते हैं। पूरे के पूरे चारों पांचों चीजें लेके और एक छन्नी का कपड़ा आता है। उसे छान के विशेष प्रकार के व्यवस्था में रख देते हैं। रखने के बाद में मॉर्निंग में सिर्फ और सिर्फ महामृत्युंजय मंत्र से भगवान शिव के ऊपर
(22:39) में समर्पित की जाती है। महाकाल को खुश करने के लिए काफी चढ़ावा दिया जाता है। यह चढ़ावा का आप मुझे सिग्निफिकेंस बताइए। क्या-क्या है महाकाल को सबसे ज्यादा अगर प्रिय है तो बिल पत्र और जल जल से आपको सुख समृद्धि धन ऐश्वर्य सभी मिल सकता है। अगर आप जल विशिष्ट तरीके के मंत्रों से अभिषेक करते हैं तो अगर आप भगवान शिव के ऊपर में सिर्फ बिल पत्र अर्पित कर रहे हैं तो भी आपको वही लाभ मिलेगा जो जल से मिलेगा। बिल पत्र के साथ में अगर आप चंदन का लेपन भी करते हो तो आपको धन लाभ भी हो सकता है। इसके साथ-साथ में अगर आप बिल पत्र के साथ में
(23:16) हनी का लेपन करते हैं। धतूरा यह आपकी नेगेटिविटी को रिड्यूस करता है और पॉजिटिविटी को बढ़ाता है। गन्ना जो है यह हमें ऐश्वर्य देता है। शुगर केन का रस चढ़ाने की मान्यता है। अगर यह हम चढ़ाते हैं तो धन ऐश्वर्य देता है। बेल का फल है। बेल पत्ती का फल जो होता है अगर यह आप चढ़ाते हो और विशेष मंत्रों से चढ़ाते हो तो यह आपके मूलाधार टु स्वाधिष्ठान और अनाहत इस तरीके से एनर्जी फ्लो करने के लिए आपको हेल्प करता है। तो जब हम घर पे महाकाल की आराधना या पूजा करना चाहते तो हम क्या प्रोसेस फॉलो कर सकते हैं? भगवान शिव की और महाकाल की एक छवि ले
(23:54) लीजिए या फिर छवि आप नहीं ले सकते हैं। तो इस तरीके से आप शिवलिंग मुद्रा आप कर सकते हो। शिवलिंग मुद्रा करके आप भगवान शिव को जो भी ऑफर करना चाहते हो वह ऑफर कर सकते हो और आप प्रणाम मुद्रा जो है यह भी आप ऊपर में इस तरीके से कर सकते हो। इससे आपको भगवती और भगवान शिव दोनों की एनर्जी आपको फील हो सकती है। यह भी शिवलिंग मुद्रा ही है। नीचे का योनि आ गया और यह ऊपर का शिवलिंग आ गया और यह भी शिवलिंग मुद्रा ही है। यह मुद्रा करने के बाद में आप जो भी मंत्र या फिर जो भी यंत्र का पूजन अर्चन करते हैं अगर आप महाकाल की साधना कर रहे हो तो
(24:28) महाकाल यंत्र आप ले लीजिए। अगर आप महाकाल यंत्र लेने के लिए कैपेबल नहीं हो भोज पत्र के ऊपर में महाकाल यंत्र बना लीजिए। इस प्रकार से आप उसका लैमिनेशन करवा के उसके ऊपर में पूजन आराधन कर सकते हैं। पूजन आराधन करने के बाद में मंत्र उच्चारण कर सकते हैं। स्तोत्र पाठ कर सकते हैं। महिम स्तोत्र भगवान शिव को बहुत प्रिय है। महिम स्तोत्र का पाठ कर सकते हैं। रुद्र अभिषेक का बहुत महत्व है। स्पेशली सावन के महीने में और रुद्र अभिषेक का हर एक जो इंग्रेडिएंट होता है उसका खुद का एक महत्व है। राइट? जैसे जल अभिषेक शांति के लिए होता है। तो ऐसे मुझे अलग-अलग रुद्र
(25:00) अभिषेक के बारे में बताइए और उनका महत्व क्या है? दूध से अगर कोई अभिषेक करता है तो दूध को हम चंद्रमा से जोड़ते हैं और चंद्रमा मन का कारक माना जाता है। मन शांति के लिए दूध अभिषेक करना चाहिए। किसी के अनबन चल रही है या स्वास्थ्य में लाभ नहीं हो रहा है तो उसे दही से अभिषेक करना चाहिए। किसी को अगर धन ऐश्वर्य की प्राप्ति करनी है तो वह शहद से अभिषेक कर सकता है। किसी को अपने बीमारी से छुटकारा टोटली चाहिए होगा तो वो घी से अभिषेक कर सकता है। इस तरीके से पंचामृत से अभिषेक करने का अलग-अलग विधान है। हम घर में भी कर सकते हैं।
(25:32) जी हां। घर में शिवलिंग रखा जा सकता है। जी हां। अंगूठे से ऊपर नहीं। लेकिन अंगूठे से ऊपर जैसे बड़ा शिवलिंग लेते क्या होता है? एनर्जी ज्यादा फ्लो शुरू हो जाती है और एनर्जी ज्यादा फ्लो शुरू हो गई तो फिर वह आपको डिस्ट्रैक्ट भी कर सकती है। उसे मेंटेन करना और उसके मंत्रोारण से विधिवत अर्चन करना थोड़ा सा डिफिकल्ट होता है। इसलिए अंगूठे से बड़ा शिवलिंग घर में रखने की मान्यता नहीं है। और यह शास्त्र भी हमें आज्ञा नहीं देते हैं। शिव की मूर्ति रखी जा सकती है। शिव की मूर्ति रखी जा सकती है। कोई दिक्कत नहीं। वेर इसे वेर बोला जाता है। शिव
(26:00) महापुराण में वेर रखने का अलग महत्व होता है और शिवलिंग रखने का अलग महत्व होता है। आप वेर भी रख सकते हो। को कोई दिक्कत नहीं है इसमें तो आप रेकमेंड करेंगे कि लोग रखें फिर मूर्तियां अगर आपको रखना है तो नर्मदेश्वर शिवलिंग आप रख सकते हो उसमें कोई दिक्कत नहीं है। नर्मदेश्वर शिवलिंग पर आप भगवान शिव का अर्चन कर सकते हो। भगवान विष्णु का अर्चन कर सकते हो। भगवान ब्रह्मा का अर्चन कर सकते हो। 10 महाविद्या का अर्चन कर सकते हो। सभी देवी देवता का अर्चना आप सिर्फ और सिर्फ नर्मदेश्वर शिवलिंग पर ही कर सकते हो। कोई दूसरी मूर्ति की जरूरत भी नहीं
(26:30) पड़ेगी आपको। अह पंडित जी व्यूअर्स के लिए महाकाल ज्योतिर्लिंग में क्या करना चाहिए? क्या नहीं करना चाहिए? थोड़ा डूस एंड डोंट्स के बारे में बताइए। महाकाल ज्योतिर्लिंग की अगर बात की जाए तो यहां पे एनर्जी इतनी ज्यादा है और मैग्नेटिक एनर्जी इतनी ज्यादा है। कर्क रेशा वहीं से गुजरती है। इसलिए एनर्जी का प्रभाव बहुत ज्यादा है। तो जिसकी वजह से अगर आप एम्प्टी स्टमक रह सकते हो या फिर बहुत कम खाना खा सकते हो तो आप वह एनर्जी को ज्यादा फील कर सकोगे। महाकाल की शरण में आप जाते हो तो आप वहां पे अमावस्या या पौर्णिमा के समय जाइए। अमावस्या या
(26:59) पौर्णिमा के समय जाने के बाद में आप एनर्जी को बहुत ज्यादा फ्लो में फील करेंगे। यह बहुत ज्यादा एक एनर्जेटिक माहौल होता है अमावस्या और पौर्णिमा का। जिस समय बाबा महाकाल वहां पे अपने गनों के साथ में विराजमान होते हैं। विराजमान होने के बाद में उनके जो एनर्जी है वो वहां पे विचरण करते रहती है और वही आप फील कर सकते हो। तो जिसकी वजह से एम्प्टी स्टमक रह सकते हो तो एम्प्टी स्टमक रहिए या फिर कम खा सकते हो तो कम खाइए। आप जितना पवित्रता का ध्यान रखोगे उतना ज्यादा अच्छा। वहां जाने के बाद में नॉनवेज मत खाइए। बहुत सारा लोग नॉनवेज खाते हैं। भांग पीते हैं।
(27:34) मदिरा का पान करते हैं। अगर आप काल भैरव मंदिर में जाते हो वहां शराब चढ़ाई जाती है। शराब आपके ऊपर की नेगेटिविटी हटाने के लिए वहां पे उतारे के तौर पे चढ़ाया जाता है। लेकिन इसे मध्यपान का एक जरिया बना दिया गया है। एक प्रसाद के रूप में जो पुजारी देते हैं वो ग्रहण करना अलग होता है। लेकिन वहां पे ही बैठ के मदिरापान करना यह बहुत ज्यादा गलत चीज है। इसके वजह से आपके ऊपर में विपदा भी आ सकती है और बहुत सारे लोगों के ऊपर विपदा आई हुई है। मेरे कांटेक्ट के हैं। मैंने उनके एक्सपीरियंसेस सुने और बहुत ड्रास्टिक थे कि वो कहां थे और कहां से कहां आ गए। तो
(28:10) ये सब चीजें उस चीज की वजह से होता है कि आप नेगेटिविटी को कंज्यूम कर रहे हो। काफी यूथ जो है ना सिगरेट, बीड़ी, अल्कोहल कंज्यूम करता है क्योंकि भाई शिवजी भी तो कंज्यूम करते थे। यह बहुत गलत है। शिवजी ने तो फिर भांग धतूरा भी खाया। धतूरे का सेवन आप करके दिखा दीजिए। अगर आप में इतनी इच्छा, इतनी लालसा प्रकट कर रहे हो। आप हलाल विष उन्होंने भी पिया आप एक बूंदी ही चख के बता दीजिए। यह तो कोई नहीं कर सकता। तो फिर आप इतना उनके नाम को बदनाम क्यों कर रहे हो? यही मैं उन्हें बोलना चाहूंगा। उसके अलावा कुछ नहीं। मुझे दर्शन के बारे में बताइए। सही तरीका
(28:45) क्या होता है दर्शन लेने का? लोगों को लगता है बस भगवान की मूर्ति को देख लिया तो दर्शन है। दर्शन हम लोग योनि मुद्रा कर सकते हैं या लिंग मुद्रा कर सकते हैं। लिंग मुद्रा अगर हम लोग करेंगे शिवलिंग के स्थान में जाके उतना ही हमारे बॉडी में ऊर्जा का अतिरेक होते जाएगा। ऊर्जा का अतिरेक होते जाएगा तो हमारी कुंडलिनी उतनी जागृत होती जाएगी और उसका बेनिफिट हमें उतना ही होते जाएगा। यह योनि मुद्रा लिंग मुद्रा अगर आप दिखाते हो तो उतनी ऊर्जा आप में अतिरिक्त होते जाती है और आपका जो बॉडी का श्री यंत्र है तो यह उतनी ज़्यादा बेटर होती जाती है।
(29:14) जैसे बहुत सारे लोग आइडल वर्कशिप नहीं करते तो आइडल वर्कशिप नहीं करते तो जो बॉडी है इसे ही आइडल मान के हम इसका ही वर्कशिप कर सकते हैं। जैसे इसमें बहुत अच्छा सा फूड डाल लिया। बहुत अच्छे से प्राणायाम योग कर लिया। बहुत अच्छे से साधना कर ली। तो यही इसका वर्कशिप हो गया। तो ये बहुत ज्यादा बेनिफिट वाला काम होता है। आई एम गोइंग टू बी पर्सनली कंडक्टिंग अ क्लासिकल हठ योगा रिट्रीट [संगीत] इन लद्दाख फ्रॉम द 23 ऑफ़ अगस्त अंटिल द 31 ऑफ़ अगस्त। इफ यू लाइक टू बी अ पार्ट ऑफ़ दिस मिस्टिकल एक्सपीरियंस व्हेयर यू विल बी लर्निंग [संगीत] क्लासिकल टूल्स ऑफ़ योगा
(29:42) व्हिच आर ऑलमोस्ट 5000 इयर्स ओल्ड फॉर योर होलिस्टिक वेल बीइंग [संगीत] देन यू कैन कांटेक्ट द डिटेल्स फ्लैशिंग ऑन योर स्क्रीन। प्लीज शेयर दिस वीडियो अमंग अदर्स। आई लुक फॉरवर्ड टू सी ऑल ऑफ़ [संगीत] यू विदाउट। पंडित जी महाकाल तंत्र के बारे में बात करते हैं। यह तांत्रिक परंपराओं का सबसे उग्र इंटेंस सबसे गुप्त सीक्रेटिव तांत्रिक परंपराओं में से माना जाता है। इसके बारे में आप मुझे डिटेल में समझाइए। महाकाल तंत्र में अधिपति देवता महाकाल और भद्रकाली है। महाकाल के शिवलिंग के ऊपर में श्री यंत्र स्थापित है। वहां पर देवी भद्रकाली की स्थापना है। महाकाल
(30:17) तंत्र में हम लोग बीज अक्षर पे ज्यादा फोकस करते हैं। हमारा मोटिव यह होता है कि हमें भोग के साथ में मोक्ष भी मिले। आज बहुत कम तंत्र परंपराएं हैं जो भोग के साथ में मोक्ष भी दे रही है। अच्छा जिसकी वजह से हम महाकाल के ऐसे फॉर्म की पूजा करते हैं जो एक राजराजेश्वर स्वरूप में है जो भोग भी देता है, ऐश्वर्य भी देता है। आयु आरोग्य मोक्ष भी देता है। तो यह महाकाल तंत्र है। महाकाल तंत्र में देवी भद्रकाली है। वीरभद्र स्वामी की हम आराधना करते हैं। काल भैरव महाराज की आराधना करते हैं। हम पंचमुखी हनुमान जी की आराधना हम करते हैं। इनकी साधना करते-करते
(30:58) ये तंत्र इतना पावरफुल हो जाता है। ऐसी कभी-कभी तो कोई-कोई साधक ऐसे होते हैं कि कोई एक ही देवी देवता पे ही लटक के रह जाता है। लेकिन वो एक देवी देवता भी उसे सब चीजें देने के लिए सक्षम है। तो वो वहीं पे स्थापित हो जाता है। महाकाल तंत्र के रहस्य के बारे में बताया जाए तो इससे मारण, मोहन, वशीकरण, स्तंभन, उचाटन यह तो एक आसान मार्ग है और आसानी से किया जाता है। लेकिन हमारे गुरु ने यह सब चीजें कभी बोला ही नहीं करने के लिए और हमारे गुरु इसकी कभी आज्ञा देते भी नहीं है। मारण मोहन वशीकरण तो यह तो बहुत आम है महाकाल तंत्र में। चलते फिरते लोग कर सकते हैं।
(31:31) कोई दिक्कत नहीं है। नॉर्मल आज शर्ट पैंट में घूमने वाला इंसान अगर मारण मोहन कर देगा तो भी किसी को पता नहीं चलेगा कि वो महाकाल तंत्र कर रहा है और मारण मोहन उसने चला दिया है। मारण मोहन यानी कि हम कुछ तंत्र के ऐसे उपाय होते हैं जिससे किसी का नाम ले लिया और उसकी डेट हो गई। किसी क्या बात कर रहे हो आप? किसी का नाम ले लिया और उसका वह वशीकरण हो गया। इस तरीके से भी होता है। आप महाकाल तंत्र के उपासक हैं? जी। आप साधना क्या-क्या करते हैं? साधना में हम श्मशान साधना करते हैं। शमशान साधना में यह नहीं होता है कि भूत प्रेतों को
(32:01) बांध दिया और उनसे सिद्धि हासिल कर ली और वही चीज हम आगे बढ़ा रहे हैं और हमारे पास में सिद्धियां है करके हम लव कर रहे हैं। यह एक फ्रॉड चीज है और ये किसी भी चीज में होता नहीं है। हम सिर्फ हमारे मंत्र जो है ये एनर्जी करने के लिए हम श्मशान में जाते हैं। भगवान शिव को शमशान वासी कहा जाता है। श्मशान वासी का अर्थ यह होता है कि वो किसी ना किसी एक टाइम पे श्मशान में होते हैं तो हम अन्य-अ्य्य टाइम में जाके श्मशान में जाके हमारे मंत्र को एनर्जाइज करते हैं ताकि हमें वो एनर्जी प्राप्त हो और वो एनर्जी से हम आगे में मोक्ष के
(32:32) रास्ते पे बढ़े। उस एनर्जीशन का प्रोसेस क्या होता है? एनर्जीाइजेशन का प्रोसेस बहुत डिफिकल्ट है। अगर बोला जाए तो सबसे पहले तो हमारे शरीर में मंत्र को स्थापित किया जाता है। पहले के टाइम पे होता था कि मंत्र ले लिया। फिर उसको सिद्ध किया। सिद्ध करने में ही बहुत लंबा समय निकल जाता है। फिर उसको हमने आगे बढ़ाया। आगे बढ़ाते-बढ़ाते फिर उसको साधना में लगाया। साधना में लगा के थोड़ी बहुत सिद्धि प्राप्त हुई। बस इनफ इसे ही हम साधना कहते थे। लेकिन हमारे गुरु जो है हमारे गुरु ने हमारे शरीर में स्थापित करने के लिए हमारे जो आज्ञा चक्र
(33:04) है या आज्ञा चक्र पे बहुत ज्यादा वो वर्क करते हैं। वर्क करने के बाद में वहां पे वो स्थापित कर देते हैं वो मंत्र को। मंत्र को जैसे-जैसे हम चैंट करते हैं जैसे-जैसे हम बोलते हैं उस हिसाब से फिर वो वर्क भी करना शुरू करता है एज इट इज टाइम। तो ये मंत्र आप कितनी बार दिन में उच्चारण कितनी बार करेंगे? जितने भी समय हम पवित्र हैं। ये मंत्र का उच्चारण हम करते ही रहेंगे। हम ये मंत्र छोड़ेंगे नहीं। अभी भी आपके मन में चल रहा है वो मंत्र? जी हां, हम आज पवित्र हैं। हम वो उच्चारण करेंगे। कोई दिक्कत नहीं है उसमें और वो हमें बेनिफिट भी वैसे ही देगा।
(33:34) अगर तो महाकाल तंत्र में कोई आना चाहता है तो उसका प्रोसेस क्या है? महाकाल खुद सिलेलेक्ट करते हैं। महाकाल तंत्र में खुद कोई आ नहीं सकता। इस तरीके से ये महाकाल का आशीर्वाद होता है और ये महाकाल की आज्ञा होती है। तब जाके महाकाल के तंत्र में आप आगे बढ़ सकते हो। या फिर बहुत सारे ऐसे साधक हैं जिन्होंने बहुत समय तक के साधना की और छोड़ दिया। रातोंरात छोड़ के कहीं और चले गए और कहीं और का तंत्र सीख के कहीं और का तंत्र करने लग गए। इस तरीके से भी होता है। हम ये सिर्फ और सिर्फ महाकाल की आज्ञा और महाकाल के आदेश पे निर्भर होता है कि आप
(34:06) वो तंत्र कर सकते हो या नहीं कर सकते हो। वो बुलावा आना चाहिए। वो बुलावा जरूर आना चाहिए। हर किसी को आना चाहिए क्योंकि वो एनर्जी आप जब्सॉर्ब करना शुरू करते हो तो आपको लगता है कि यही तो सब चीजें हैं करके। इसके आगे में कुछ भी नहीं है करके। बाकी आपके भोग ऐश्वर्य सब धरे के धरे ही रह जाएंगे जब वो एनर्जी आप्सॉर्ब करने लग जाओगे। आपकी अभी अंदर की स्थिति कैसे है? ये तांत्रिक मार्ग में आप कितने सालों से हैं? 2012 से मैं वर्क कर रहा हूं इसके ऊपर मैं। 2012 से आज 14 साल करीबन। हम्म। तो अभी अंदर की स्थिति कैसे है? बस महाकाल में खोए रहते हैं हम। हमें तो
(34:40) ऐसा लगता है कि महाकाल में डूबे रहो करके। उसके अलावा कुछ नहीं है हमारे लिए। एक महाकाल तंत्र साधक का दिनचर्या कैसे होता अगर तो आपकी बात करें आपका सुबह किस टाइम पे दिन शुरू होता है? एज सच ऐसा कुछ यह नहीं होता है। कभी-कभी तो हमारी साधना ही सुबह खत्म होती है और उसके बाद में हमारी निद्रा स्थिति होती है। तो ऐसे एज सच हमारी दिनचर्या ही नहीं होती है। कभी-कभी अगर अमावस्या आ गई और अमावस्या के पहले प्रदोष पड़ रहा है तो प्रदोष से लेके महीने की शिवरात्रि आती है। मासिक शिवरात्रि आती है। उसके बाद में अमावस्या आती है। ये तीन दिन कंटिन्यू साधना होती
(35:10) है। ये तीन दिन की जो साधना है ये नाइट की साधना है। ये नाइट में कभी 9 टू 12 होता है या फिर 12 टू 3 होता है। यह डिपेंड करता है कि किस टाइम पर हम लोग साधना कर रहे हैं और कितना एनर्जी हमें ग्रास करना है करके यह कहां करना है यह भी डिपेंड करता है कि हम श्मशान में कर रहे हैं महाकाल मंदिर में बैठ के कर रहे हैं महाकाल मंदिर में किसी किसी को परमिशन दी जाती है कि रात में बैठ के वो अपनी तंत्र साधना कर सके करके लेकिन हर किसी को नहीं मिलती तो आप श्मशान में बैठ के कर सकते हो अगर शमशान आपको भयावाह लगे तो आप किसी मंदिर के ऐसे कोने में बैठ के कर सकते हो
(35:41) कि जहां पे कोई आपको डिस्टर्ब ना करे ये करके इस टाइप में भी आप कर सकते हो श्मशान कोई भी जा सकता है जिसको ही करना है जी हां, छोटा बच्चा भी जा सकता है शमशान। शमशान को आज के टाइम पे बहुत नेगेटिविटी का पॉइंट बना दिया गया है। लेकिन श्मशान तो एक पॉजिटिविटी का पॉइंट है क्योंकि वहां से लोग कहां के कहां पहुंचते हैं। तो ये बहुत गलत वे में श्मशान को प्रेजेंट किया गया है। इसके अलावा बाकी कुछ नहीं है। ये भ्रांतियां है अगर बोला जाए तो जैसे बोलते हैं औरतें नहीं जा सकती या ये नहीं जा सकती। ये बहुत गलत है। ओजन में तो औरतें भी जाती
(36:08) है। हमने देखा है। मणिकर्णिका में जाते हैं तो कोई दिक्कत नहीं है। लोग नॉर्मली जाते हैं। कोई दिक्कत नहीं है उसमें। ठीक है। फिर आपने ये स्त्रोत आप करते हैं, मंत्र करते हैं, आप बीज मंत्र तो पूरा टाइम आपका चट लगा रहता है। उसके बाद उसके बाद में हम लोग अभिषेक कभी भी नहीं भूलते हैं। अभिषेक हम मानसिक करें या फिर खुद के हाथ से करें या फिर अपने नाम गोत्र से किसी और को बोले करने के लिए इस तरीके से हो। लेकिन अभिषेक हम कभी नहीं भूलते हैं। कभी भूलते नहीं है। मेंटली आप अभिषेक कैसे करते मेंटली सूत्र अवेलेबल है। शंकराचार्य ने स्तोत्र लिखा
(36:39) हुआ है। तो वो एक बहुत बड़ी चीज उपलब्धि है आज के टाइम पे और ज्यादातर तो हम शिव क्षेत्र से बाहर नहीं जाते। शिव सत्र से बाहर जाना भी होता है। तो हमारा कुछ शिवलिंग या फिर पारदेश शिवलिंग होता है जो हम साथ में ले चलते हैं। फिर और खाना पीने में आप क्या खाते पीते हैं? सात्विक जितना भी सात्विक हो सके उतना सात्विक हम लोग लेते हैं। ज्यादातर मिर्च मसाले को अवॉइड किया जाता है। जो ब्रह्मचर्य है इसका पूरा तरीके से पालन किया जाता है। मानसिक भी और आचरण में भी अगर मानसिक हम लोग नहीं कर रहे हैं और सिर्फ आचरण में कर रहे हैं तो इसका कोई
(37:10) प्रभाव नहीं होने वाला है। यह आज नहीं तो कल आपका ब्रह्मचर्य नाश ही करने वाला है। अच्छा जब आप आचरण कह रहे हैं मतलब आप अपनी लाइफस्टाइल के बारे में बात कर रहे हैं। ये इतना जरूरी क्यों होता है लाइफस्टाइल में ब्रह्मचर्य मेंटेन करना? सेलिब्रेसी इस तरीके से वर्क करती है कि इसके जो अनु होते हैं यह आपके सहस्त्रार में जाते हैं और सहस्त्रार में जाने के बाद में एक सपोर्ट करते हैं जो आपको एनर्जी एक्टिवेट करती है। कुंडलिनी कुंडलिनी एक्टिवेट करती है और ये एक्टिवेट जैसे-जैसे होते हैं एकदम से तो नहीं होती है किसी भी व्यक्ति की धीरे-धीरे ही होती
(37:40) है और ये सेलिब्रेसी एक पालने से ही होता है। उसके अलावा तो हो ही नहीं सकता है। ये इंपॉसिबल है। अगर किसी व्यक्ति ने करके दिखाया तो बहुत बड़ी बात है। अच्छा। उसके अलावा तो आप कह रहे हैं जो इंसान गृहस्थ में है वो यह नहीं प्राप्त कर सकता। गृहस्थ में होने के बाद में सिर्फ और सिर्फ बच्चे पैदा करने के लिए आप उतना ही करो। उसके अलावा मत करो। अगर उसके अलावा आप कर रहे हो तो ये ये भोगवृत्ति में आ गया। भोगवृत्ति में आने के बाद में फिर आप में और बाकी पशु योनि में क्या ही अंतर है। और आप कह रहे फिर कुंडलिनी में वो एक्टिवेट नहीं होगा। अच्छा महिलाओं के लिए
(38:13) भी सेम प्रिंसिपल अप्लाई करते हैं क्योंकि उनका तो सीमेन होता नहीं है वैसे। नहीं उनका होता नहीं है लेकिन उनके लिए एनर्जी तो मैटर करती है ना। एनर्जी डाउन टू अर्थ ही होती है ना मूलाधार से सहसार ही जाएगी ना। तो इस हिसाब से जब वर्क करेगी तो एनर्जी कैसी वो फ्लो करेगी अगर कंटिन्यूएशन में अगर आपका मूलाधार ही कमजोर पड़ रहा है तो आपको सहसार में एनर्जी जाएगी नहीं ना। हम वहीं पे आपका एनर्जी लॉस हो जाएगा। तंत्र और ये सब चीजों को बहुत गलत वे में देखा जाता है। लेकिन तंत्र बहुत अच्छा है। आज के टाइम पे अगर बोला जाए तो कलयुग है।
(38:44) कलयुग में अगर आपने तंत्र नहीं किया तो क्या किया? तंत्र ही तो एक जरिया है जो आपको एक अच्छे मार्ग में लेके जा सकता है और एक अच्छी स्थिति दे सकता है। क्यों? सिर्फ तंत्र वही मार्ग क्यों है? तंत्र में एनर्जी आपको बहुत ज्यादा अट्रैक्ट करती है हर एक चीज में। आपको ऐसा लगता है कि देवी देवता और प्रधान स्थापित ग्रह देवता ही आपको बेनिफिट देते हैं। लेकिन कभी-कभी आपको कुछ प्रेत और कुछ राक्षस भी बेनिफिट करवा के दे सकते हैं। कुछ राक्षस और कुछ प्रेत ऐसे बन जाते हैं कि जिन्होंने पहले से महाकाल तंत्र किया हुआ है और उनको उसका बेनिफिट पता होता है
(39:14) कि अगर हमने इस व्यक्ति को बेनिफिट करवाया तो इसका बेनिफिट मुझे भी मिलेगा इनडायरेक्टली और उसकी जो योनि की आगे की दिशा है वो उस पे निर्धारित की जाएगी। इसलिए वो आपको हेल्प भी करते हैं। हम तो आपके एक्सपीरियंस में आपको ऐसे राक्षसों ने हेल्प किया है? मेरे एक्सपीरियंस में तो नहीं लेकिन मेरे गुरु जी के एक्सपीरियंस में किया हुआ है। उन्होंने देखा हुआ है और उन्होंने मुझे बताया हुआ है और वो एनर्जी मैंने फील भी की हुई है। जिसकी वजह से मुझे बहुत अच्छे से पता है कि ये सब चीजें भी होता है करके। और वो राक्षस वाली एनर्जी कैसे होती है?
(39:45) बहुत भयाव होती है। ऐसा लगता है कि आप कभी खुश नहीं रह पाओगे करके। लेकिन जब वो एनर्जी वहां से चली जाती है तब आप बहुत हैप्पी हो जाते हो। अच्छा यह भी कहा गया है कि महाकाल मंदिर के आगे कोई भी बारात आती जाती नहीं है। कोई ऑस्पिशियस कार्य नहीं करा जाता। क्या कारण है इसका? महाकाल राख लपेटे हुए एक अवधूत अगांबरी बाबा है। यह एक राजाधिराज महाराज है। राजाधिराज महाराज के आगे से एक छलिया राजा जा रहा है तो उसकी दुर्गति पक्की है। [हंसी] वो छलिया महाराज एक दिन का महाराज है। लेकिन ये तो 12 महीने के और पूरे ब्रह्मांड के राजा है। क्योंकि यह भी कहा
(40:24) जाता है देखिए यह व्यूअर्स के लिए बहुत जरूरी है क्योंकि अब जो मैं आपसे सवाल पूछना चाहती हूं वो यह है कि जब हम उज्जैन जाते हैं तो सबसे पहले हमें किस सही तरीका सही टेक्निक क्या है मंदिर विजिट करने का और क्या-क्या करा जाता है तो सबसे पहले तो मैं यह आपसे क्लियर करना चाहती हूं इंटेंशन क्योंकि हिंदुस्तान में हम भगवान के घर जाते हैं तो कुछ चीजें मांगते हैं और बार्गेनिंग होती है कि आप इसकी शादी करा दो उसकी शादी करा दो बच्चा दिला दो मैं मुंडन करा दूंगा लेकिन यह मान्यता है कि जब आप महाकाल के दरबार में जा रहे हैं तो आपको कभी कुछ छोटी-मोटी मनोकामनाएं
(40:53) नहीं करनी चाहिए क्योंकि वो डेथ और डिसोल्यूशन यानी कि वो आपको शून्य और नथिंगनेस में ले जाने की एनर्जी है। तो थोड़ा इसके बारे में बताइए। भगवान महाकाल के दरबार में आप जा रहे हो तो आप मृत्यु से परे होने के लिए ही जा रहे हो। यह मान्यता है और यह आज भी लोग पूरा इसको कर रहे हैं। काफी सारे ऐसे लोग हैं मेरे परिचित भी हैं जिनकी कुंडली में विष योग है। ऐसे व्यक्ति की ज्यादा आयु नहीं होती है। जो अल्प आयु अल्पा आयु बोल सकते हैं। अकाल मृत्यु का योग बोल सकते हैं। इस तरीके का योग है। लेकिन महाकाल ने वो भी हर लिया। तो महाकाल जब इतनी बड़ी चीज हर सकते हैं तो आप छोटी
(41:27) चीजों के लिए क्यों जा रहे हो? मांगना है बड़ा मांगिए। आप उनसे यह मांगिए कि हमें मोक्ष मिल जाए। अर्थ, काम, मोक्ष तीनों चीजें मिल जाए। तो मोक्ष की प्राप्ति के लिए आप कह रहे जाना चाहिए। ज्यादातर महाकाल से हर एक चीज मांग सकते हो लेकिन आपको वह पूरा कर दिया तो आप वह संभाल नहीं पाओगे। महाकाल यह भी एक बहुत ज्यादा बड़े लेवल पे ये देखते हैं कि मैंने इसको यह दे दिया तो यह संभालने के कैपेबल है या नहीं है। तो वो चीज आपसे छीनी भी जा सकती है। तो मांगने से पहले सब सोच समझ के ही मांगिएगा। हमने अभी इंटेंशन एस्टैब्लिश कर लिया कि आप को यूजली
(42:02) छोटी-मोटी मनोकामनाएं नहीं मांगनी चाहिए। मोक्ष से रिलेटेड कोई डिजायर होनी चाहिए और बहुत सोच समझ के चीजें मांगनी चाहिए। इंटेंशन हमने सेट कर दिया। अब जब हम उज्जैन आते हैं उस नगरी में हमें सबसे पहले क्या करना चाहिए? सबसे पहले आने के बाद में शिपरा मैया में स्नान करना चाहिए। शिपरा मैया की स्टोरी है कि पतित पावनी गंगा शिप्रा मैया में स्नान करके अपने मोक्ष की कामना करती है। शिपरा मैया मोक्ष दायनी है और गंगा जो है यह पाप नाशनी है। दोनों में बहुत ज्यादा अंतर है। जिस वजह से मोक्ष दायनी शिपरा मैया में स्नान करना चाहिए। शिपरा मैया
(42:36) में स्नान करने के बाद में सबसे पहले आप बड़ा गणेश चले जाइए। बड़ा गणेश में गणेश जी का पूजन अर्चन कर लीजिए। उसके बाद में बाबा महाकाल के दर पे आ जाइए। बाबा महाकाल के दर पर आप वीआईपी मार्ग से अगर आप जाओगे तो वीरभद्र स्वामी के आप दर्शन कर पाओगे और अवंतिका माता के दर्शन कर पाओगे। अवंतिका माता के दर्शन करना और उनके सानिध्य में रहना है और अवंतिका माता से जो भी बात करना है यह वीआईपी मार्ग से संभव हो सकता है। उसके अलावा संभव नहीं हो सकता। यह चीज होने के बाद में बाबा महाकाल के दर्शन कर लीजिए। उसके बाद में आइए हरसिद्धि माता। हरसिद्धि माता के वहां पे
(43:10) सती माता की दाई कोहनी गिर गई थी और हरसिद्धि माता मंदिर की उत्पत्ति हुई है। इस तरीके से बोला जाता है और आज भी वो एनर्जी आप फील कर सकते हो इवनिंग के टाइम पे जब वहां पे दीप जलते हैं। 726 दीप है। 726 दीप में से एक भी दीप बुझेगा नहीं जब तक कि आरती नहीं होगी तब तक के। अच्छा क्योंकि वहां पे मां राजराजेश्वरी स्वरूप में अवेलेबल होती है और उनके सानिध्य में वो दीपमाला प्रज्वलित होती है। अगर तो लाइफ में रुकावटें आ रही हैं। चाहे वो करियर की रुकावट हो, शादी की रुकावट हो, प्यार की रुकावट हो मतलब कोई भी रुकावट हो तो ऐसा क्या आप उपाय दे सकते
(43:47) हैं? भगवान शिव के ऊपर में चांदी का बिल पत्र अर्पण कीजिए। आपकी पूरी रुकावटें दूर हो जाएगी। सिर्फ और सिर्फ चांदी का बिल पत्र पे। उज्जैन में भी आप आ सकते हो। उज्जैन में नहीं आ सकते तो आप आपके घर के पास में जो भी शिवलिंग अवेलेबल है वहां पे भी आप कर सकते हो कोई दिक्कत नहीं है। तो चांदी का बेलपत्र चांदी का बेलपत्र यह अष्टमी के रात को आपको चढ़ाना है। कालाष्टमी ले लीजिए, दुर्गाष्टमी ले लीजिए महीने की जो भी आपको विशिष्ट तौर पे मिल जाए उस तरीके से ले लीजिए। आपको बहुत ज्यादा बेनिफिट मिल जाएगा इसमें। हेल्थ सही करनी है। जिसकी हेल्थ सही नहीं
(44:20) है या फिर जो ऑलरेडी अच्छी हेल्थ में है लेकिन उसको और सुधार करना है अपनी हेल्थ में तो क्या? महाकाल की भस्म यूज़ कीजिए। महाकाल की भस्म जो चढ़ी हुई भस्म आरती की भस्म है ये अवेलेबल होती है। जितने भी पूजा करता है, सेवा करता है, सब लोगों के पास में अवेलेबल होती है। आप किसी से भी कांटेक्ट करके यह चीज करवा सकते हो और महाकाल के वश में आप यूज़ करोगे आपको विद इन अ 40 डेज बहुत ज्यादा चेंजेस पता चल जाएंगे। अच्छा हर दिन यूज़ करना है। हर रोज। कहां? आप तिलक कर सकते हो। आप भोजन में ले सकते हो। आपको जैसे भी इच्छा जिस भी तरीके से आप लेना चाहो उस तरीके से आप ले लीजिए।
(44:53) बहुत ज्यादा बेनिफिट होगा इससे। बहुत ज्यादा ड्रास्टिक चेंजेस आ जाएंगे आपकी तबीयत में। बढ़िया। धन लाभ, प्रोस्पेरिटी के लिए, पैसे के लिए क्या करना चाहिए? धन लाभ के लिए सबसे बेस्ट अगर उपाय बोला जाए आज के टाइम पे शिवलिंग के ऊपर में या फिर किसी भी श्री यंत्र के ऊपर में श्री सूक्त से पाठ कीजिए 16 बार और जल चढ़ाइए या फिर देवी को अर्क चढ़ाइए। अर्क आप हल्दी का कर सकते हो, चंदन का कर सकते हो या फिर केसर का कर सकते हो। इस तरीके से आप चढ़ाइए। आपको बहुत जल्दी बेनिफिट हो जाएंगे। यह 40 दिन का टोटका है। 40 दिन के टोटके में आपको चेंजेस पता ही चलेंगे ही
(45:29) चलेंगे। बुरी नजर लगी है जो बहुत लोगों को लग रही है आजकल। तो बुरी नजर हटाने के लिए नेगेटिव एनर्जी को हटाने के लिए क्या किया जाए? नेगेटिव एनर्जी हटाने के लिए सबसे पहले तो पता करना पड़ेगा कि किस चीज की है। यह थोड़ा सा कंट्रोवर्शियल आ जाता है कि कहीं किसी भूत बाधा का दिक्कत है। कहीं किसी और तंत्र बाधा का दिक्कत है या फिर नॉर्मल चीज है। नॉर्मल चीज है तो यह आप सिर्फ और सिर्फ महाकाल के भस्म से रिमूव कर सकते हो। महाकाल के भस्म आप धारण कीजिए आपके शीश में या फिर आप लॉकेट बना के भी पहन सकते हो महाकाल की भस्म। इस तरीके से
(46:02) आप धारण करोगे तो यह चीज हट जाएगी। लेकिन अगर आपको तंत्र बाधा है या फिर किसी और चीज की दिक्कत है तो फिर वो उतारे के तौर पे जाएगा और उतारे थोड़े से फिर अलग-अलग तौर पे आते हैं। कभी किसी को खट्टे फलों का उतारा हो जाता है। कभी किसी को मांस मदिरा का उतारा हो जाता है। मांस मदिरा का उतारा करना थोड़ा कंट्रोवर्शियल हो जाता है आज के टाइम पे। लेकिन ये सब चीजें करना ही पड़ता है क्योंकि वो वर्क भी वैसा ही करता है। उतनी जल्दी उसका बेनिफिट भी मिलता है। घर पे बैठे-बैठे एक नेगेटिव एनर्जी को जैसे लोग मिर्ची वगैरह नींबू वगैरह यूज़
(46:32) करते हैं तो आप एक सही तरीका बता सकते हैं सिंपल तरीका जो आम लोग बाहर चले गए आपको लगता है नजर लग गई इसकी लग गई उसकी लग गई आ के निकालना है। पीली राई और जो समुद्री नमक होता है इसका उतारा अगर आप करते हो नौ बार सर से लेकर पांव तक के और इसको जला देते हो तो बहुत जल्दी आपको इसके रिजल्ट मिल जाएंगे। किसी ने ब्लैक मैजिक या काला जादू आप पर कर लिया है। अब उसको कैसे हटाया जाए? वो डिपेंड करता है कि ब्लैक मैजिक है या नहीं है। सबसे पहले तो लोगों को यही समस्या होती है कि सही में किसी व्यक्ति के अगर मानसिकता मंदिर में जाते समय और हॉस्पिटल
(47:04) में जाते समय सेम है तो ठीक है। वो व्यक्ति एक मानसिक रोगी है। इस तरीके से बोल सकते हैं। लेकिन मंदिर में विचित्र स्वभाव है। हॉस्पिटल में विचित्र स्वभाव है। घर पे विचित्र स्वभाव है। तो यह थोड़ा सा मंत्रवर्शियल हो जाता है। और इसमें फिर चेक करके ही और साधना करके ही फिर पता चल सकता है कि क्या रियल हकीकत है और उसे उसी हिसाब से फिर दूर किया जा सकता है। मुझे सक्सेस चाहिए लाइफ में तो क्या करा जा सकता है? जैसे एक पंचाक्षर मंत्र है। पंचाक्षर मंत्र के साथ में कुछ अगर बीज मंत्र ऐड कर देंगे तो आपको अनगिनत सक्सेस मिल सकती है।
(47:37) शिव की मूर्ति कितनी होनी चाहिए घर में रखने के लिए साइज में? शिवलिंग से छोटी होनी चाहिए। इस तरीके से बोली जाती है लेकिन मंदिर में इसका दो गुना होती है। मंदिर में दो गुना बड़ी शिवलिंग से मूर्ति से दो गुना छोटा शिवलिंग इस तरीके से बोला जाता है। तो उतनी छोटी मूर्ति होनी चाहिए और फोटो फोटो आप कितनी भी बड़ी बना सकते हो उसमें कोई दिक्कत नहीं है। उसमें कोई रूल्स एंड रेगुलेशंस फॉलो नहीं करने पड़ते हैं। आप क्यों ऐसे बोलती हैं कि एक साइज के बाद एनर्जी ज्यादा उसमें प्राण आ जाते हैं क्या उस भगवान के? प्राण प्रतिष्ठा तो हर
(48:04) किसी की होती है। जब हम एक मंत्र से या फिर किसी तंत्र से या फिर किसी यंत्र से पूजा करते हैं तो ऑटोमेटिक वो चीज में प्राण आ ही जाते हैं। आने के बाद में उसको मैनेज करना थोड़ा सा डिफिकल्ट हो जाता है। अच्छा घर की शांति के लिए क्या टोटका बताएंगे? घर के शांति के लिए सबसे बेस्ट टोटका है कि आप गोमूत्र का इस्तेमाल कीजिए पोछे में और नमक का इस्तेमाल कीजिए पोछे में। ये बहुत ज्यादा बेनिफिट देने वाला टोटका है। तो घर में झगड़े हो रहे हैं या ये सब चीजें बंद हो जाएगा। पति और पत्नी के बीच में काफी मुश्किलें आ रही हैं। झगड़े होते हैं। उन उसके लिए
(48:37) क्या किया जाए? पति और पत्नी के दोनों के नाम भोज पत्र पे लिखना चाहिए और भोज पत्र को एक शहद के शीशी में रख देना चाहिए। भर देना चाहिए। भरने के बाद में वो शीशी एक शिव मंदिर या शक्ति मंदिर के पास में रख देना चाहिए और पलट के पीछे नहीं दिखना चाहिए। विद इन अ वन वीक आपको रिजल्ट मिल सकता है इसमें। अच्छा रिलेशनशिप्स ठीक करने हो चाहे वह पति पत्नी के बीच में हो या बच्चों के बीच में हो या फैमिली में हो क्या करा जा सकता है? शिव पार्वती और शिव परिवार पूजा आराधना सबसे उत्तम आराधना है। इसमें जहां पे एक जगह पे जगदंबा का वाहन है। एक जगह पे शिव
(49:11) भगवान का वाहन है। दोनों विपरीत होने के बावजूद भी साथ रहते हैं। तो इनकी पूजन आराधना नहीं आपको सक्सेसफुल बना सकती है। इसमें बच्चों के लिए आप क्या रेकमेंड करेंगे कि बच्चे प्रगति के मार्ग में रहे। बच्चे पढ़ाई अच्छा कर सकें। डेली बेसिस पे पंचामृत से शिव अभिषेक कीजिए। आपको मिल जाएगा उससे जो भी चाहिए वो। आजकल मेंटल हेल्थ के बहुत ज्यादा इशूज़ बोले जाते हैं। डिप्रेशन तो ऐसे पहले जमाने में बोलते थे ना मैं नाखुश हूं। आज बोला जाता है कि मैं डिप्रेस्ड हूं। तो क्या उपाय देंगे? जैसे अगर किसी के पास में पीली राई है, पीली राई उतार के उसने डाल दिया। उसके
(49:42) तुरंत बाद शिव अभिषेक कर लिया तो शिव अभिषेक का टोटल बेनिफिट उसको मिल सकता है। हम्म। जब बोला जाता है कि इस इंसान का उतारा किया गया है तो उसका प्रोसेस थोड़ा बताइए। उतारा यह जब नेगेटिव एनर्जी बहुत पीक लेवल पर पहुंच जाती है तब किया जाता है। उतारे में मांस मदिरा का भी प्रयोग तब कर सकते हैं। अगर मांस मदिरा का प्रयोग नहीं किया गया तो फिर तंत्र बाधा विनर्मुक्ति वाला कुछ चीजें हैं जो हमें श्मशान में जाकर करनी पड़ती है। तो श्मशान में जाके वो प्रयोग अगर कर लिया तो उससे हो जाता है। यह डिपेंड करता है कि प्रेत है कि कोई जिन है या फिर कोई और चीज है।
(50:20) ये डिपेंड करता है हर किसी का अलग-अलग होता है। किसी का ऐसा परफेक्टली बता नहीं सकते कि ऐसी ये है करके। तो महाकाल ज्योतिर्लिंग में आते हैं ऐसे लोग बहुत ज्यादा। महाकाल ये सब चीजों के अधिपति देवता है तो महाकाल के पास में ही आएंगे। तो ऐसी अलग-अलग पूजाएं होती हैं क्या ये सारी समस्याओं के लिए? जी हां। हर किसी का बॉडी एनर्जी किस लेवल पे है? कितने चक्र उसके ब्लॉक है, कितने नहीं है? ये सब चीजें देखने के बाद में ही वो पूजाएं परफॉर्म की जाती है। तो जैसे आपके पास कोई आएगा और आपको बोलेगा कि मुझे मेंटल हेल्थ इशू है। फॉर एग्जांपल
(50:47) मैं मुझे डिप्रेशन है या कोई और है कुछ और चीज है तो आप उसके लिए एक स्पेशल पूजा रेकमेंड करेंगे। पूजा ऑर्गेनाइज करनी पड़ती है। उसका एक ड्यूरेशन होता है। वो ड्यूरेशन में वो नक्षत्र में उसकी पूजा परफॉर्म की जाती है। उसकी पूजा नॉर्मली हम लोग परफॉर्म नहीं कर सकते हैं। अच्छा। अगर उस नक्षत्र में उस ड्यूरेशन में परफॉर्म की गई तो उसकी भी पूजा 100% सक्सेसफुल होनी ही होनी है। ओह हो ज्योतिर्लिंग का मुझे कांसेप्ट समझाइए कि ये ज्योतिर्लिंग क्यों बोला जाता है और इसका हमारे सनातन में सिग्निफिकेंस क्या है? ज्योतिर्लिंग इसलिए बोला जाता है कि बाबा वहां पे ज्योति के
(51:18) स्वरूप में प्रकट हुए हैं। 12 ऐसे अन्य ठिकान हैं जहां पे बाबा ज्योति के स्वरूप में प्रकट हुए और फिर अपने पूरे स्वरूप में आए और पूरे स्वरूप में आने के बाद में उन्होंने वहां एक अपना प्रॉमिस भी किया है कि वह हमेशा वहां पे स्थापित रहेंगे और लोगों की मनोकामना और आराधना यह स्वीकारेंगे जिसकी वजह से ज्योतिर्लिंग कहा जाता है। यह कहा जाता है कि आप अपना मस्तिष्क माथा इस ज्योतिर्लिंग पे नहीं रखते हैं। क्या यह सारे ज्योतिर्लिंग के लिए यह रूल अप्लाई होता है या फिर सिर्फ इस ज्योतिर्लिंग के लिए? ये नॉर्मल शिवलिंग के लिए भी अप्लाई होता
(51:52) है। अच्छा। आपके जो शीश का भाग है ये शीश का भाग सबसे ज्यादा गर्म होता है आपके बॉडी में। भगवान शिव का जो बॉडी का भाग जो बोला जाएगा, यह भी गर्म भाग बोला जाएगा। तो अगर गरम-गरम भाग अटैच होते हैं तो यह बहुत ज्यादा उग्र एनर्जी देने वाला होता है। और अगर किसी व्यक्ति के अंदर में इतनी उग्र एनर्जी आ गई तो उसके पूरे के पूरे चक्र भेदन करके उसकी कुंडलिनी ओपन हो सकती है। कुंडलिनी ओपन होने के बाद में उसकी डेट भी हो सकती है। जिसके वजह से हाथों से स्पर्श करने का विधान किया गया है। योनि के ऊपर में आप माथा रख सकते हो। लेकिन शिवलिंग के ऊपर
(52:28) में आप माथा नहीं रख सकते। सीधे-सीधे योनि को शक्ति स्वरूपा शक्ति संचालन करने वाली शक्ति मानी जाती है जो आपके पूरे शरीर की शक्ति संचालक करते आ रही है। लेकिन महाकाल के शिवलिंग को अगर आप छुओगे तो वो तो विपरीत परिणाम भी दे सकते हैं। अगर आप शिव महापुराण की कहानी उठा के देखें तो शिव महापुराण में लिखा गया है कि हर एक शिवलिंग से 12 ज्योतिर्लिंग में के शिवलिंग से एक एनर्जी फ्लो हो रही है जो 1000 कि.मी.
(52:56) के रेडियस तक के जाती है। पंडित जी महाकाल ज्योतिर्लिंग 12 ज्योतिर्लिंग में ऐसा ज्योतिर्लिंग है जो दक्षिण मुखी है जो साउथ फेसिंग है। क्यों? हर एक देवी देवता की दिशाएं डिवाइड की गई है। अच्छा और उस हिसाब से उनके मंत्र सिद्ध होंगे। उस हिसाब से उनकी साधनाएं होंगी। जैसे अगर किसी देवी की साधना करनी है तो अगर आप पश्चिम मुखी होके बैठते हैं तो किसी और फल को प्राप्त करोगे। उत्तर मुख करके अगर आप बैठोगे तो किसी और फल को प्राप्त करोगे। दक्षिण मुखी होके बैठोगे तो किसी और फल को प्राप्त करोगे। आप बता सकते हैं कौन से फल हैं ये? दक्षिण मुखी बता सकता हूं। स्पेशली दक्षिण
(53:30) मुखी जो है यह मारण मोहन, वशीकरण, उच्छाटन, संबंध ये सब चीजों के लिए दक्षिण दिशा यूज की जाती है। अगर किसी को धन प्राप्ति की लालसा है तो धन प्राप्ति के लिए उत्तर दिशा सबसे उत्तम है। अगर आप कोई सात्विक साधना कर रहे हो तो उसके लिए पूर्व दिशा बहुत उत्तम है। इस तरीके से दिशाएं डिवाइड की गई। शिव का यह रूप महाकाल क्यों है? वो नाम क्यों दिया गया? काल के ऊपर में विजय करने वाला एक अधिपति देवता जो महाकाल कहलाता है और महाकाल की जो अर्धांगिनी भद्रकाली कही जाती है जिसकी वजह से यह शब्द महाकाल प्रचलन में आया हुआ है। आप महाकाल ज्योतिर्लिंग में एक पुजारी
(54:08) हैं। आपने ऐसी कौन सी चीजें देखी हैं जो आपको लगता है कि साइंस तो इसको एक्सप्लेन नहीं कर सकता। यह विज्ञान के तो टोटली परे है कि भगवान महाकाल के सिर्फ दर्शन और स्पर्शन से ही लोगों में इतने चेंजेस आ जाते हैं। मैं तो बिलीव नहीं कर सकता था बट बिलीव करना पड़ा क्योंकि मैंने आंखों से देखी है ऐसी चीजें जैसे उमा भारती का केस। उमा भारती वहां पे एक रात रुक गई। रुकने की वजह से बाबा महाकाल कोपित हो गए कि मैं एक राजा हूं और राजा के प्रांगण में दूसरा कोई राजा ठहर नहीं सकता। यह एक चीज आपने कैसे तोड़ दी? कोपित होने के बाद में उनकी पूरी सरकार गिरा दी। नरसिंहा राव
(54:46) नरसिंहा राव की पूरी की पूरी सरकार बाबा महाकाल ने गिरा दी। अच्छा इससे मुझे मेरा दूसरा सवाल यह है बोला जाता है कि उज्जैन की नगरी में विश्राम रात को तो कभी नहीं करना चाहिए। यह जिन लोगों का सरकारी पद पर अवेलेबल है या फिर बहुत ऊंचे स्तर पर अवेलेबल है यह उनके लिए अलाउड है जो लोग अपने आप को बाबा महाकाल के दास या भी बाबा महाकाल के बच्चे के रूप में मानते हैं। ऐसे लोगों के लिए यह चीज होती नहीं है। आज के जो मुख्यमंत्री हैं माननीय मोहन यादव जी ये बाबा महाकाल के प्रांगण में खेले और वहां पे रहने वाले व्यक्तित्व हैं। लेकिन आज ये
(55:21) वहां रहने के बावजूद इनके साथ में कोई इंसिडेंस नहीं हो रहा है क्योंकि रीज़न वही है बाबा को वो अपने पिता के स्वरूप में मानते हैं। राजा के स्वरूप में मानते हैं और राजा आप ही रहोगे ये मानते हैं। मैं राजा हूं ये नहीं मानते हैं जिसकी वजह से वो बचे हुए हैं। महाकाल का जो श्रृंगार के पीछे एक बहुत ही इंटरेस्टिंग स्टोरी है। हर दिन उनका श्रृंगार बदलता है और वो जो श्रृंगार होता है वो प्रीप्लान नहीं होता। कोई डिसाइड नहीं करता कि आज महाकाल ऐसे दिखेंगे ऐसे दिखेंगे। पर वो हर दिन अलग-अलग होता है। इसके पीछे कुछ है? यह महाकाल बाबा की कृपा
(55:51) है कि जो मन में बैठ गया वो उस हिसाब से ही बना देंगे। कभी रिपीट नहीं होता। नहीं कभी सोच के जाते हैं कि नहीं आज ये बनाना है लेकिन मन कुछ और गया। इस तरीके से भी होता है। तो वो प्रीप्लांट कभी नहीं होता है कि इस तरीके से बनेगा। आज उस तरीके से बनेगा और ऊपर से विजया जो है भांग श्रृंगार उसे संस्कृत में विजया बोलते हैं। जो यजमान होता है यजमान की जिस हिसाब से कामना होती है उस हिसाब से मोस्टली वो बनता है। इस तरीके से मान्यता है। यह यजमान ठहराते हैं कि उनको आज क्या चाहिए क्या नहीं करके। लेकिन महाकाल बाबा की इच्छा रहती है सबसे ज्यादा आगे उस
(56:22) हिसाब से वो बनता है। पंडित जी उज्जैन को पृथ्वी का नाभि केंद्र बोला गया है। यहां से ट्रॉपिक ऑफ कैंसर गुजरता है। विक्रमादित्य का विक्रम संवत कैलेंडर भी यहीं से शुरू हुआ था। तो मुझे एस्ट्रोनॉमी एस्ट्रोलॉजी और उज्जैन का कनेक्शन बताइए। यह जो पूरा टाइम और साइंस का एक कोरिलेशन बैठ रहा है यहां पर इसके पीछे की का स्टार्टिंग अगर बोली जाए तो विक्रमादित्य के काल में ही होती है। मिहिर ज्योतिषाचार्य और मिहिर नामक एक उनके नौ रत्नों में से रत्न हुए हैं। जिन्होंने एस्ट्रोनॉमी भी फाइंड आउट की उस समय और उसके ऊपर में भी लेख और विचार उनके प्रकट
(57:02) किए गए हैं। तो ये उस समय से स्टार्टिंग हुई है। पहले के जमाने में यहीं से पूरे के पूरे समय की गणना होती थी। एक फ्रेंच के ऑथर थे। उन्होंने भी अपने व्यक्तित्व प्रकट किए हुए हैं कि यहां से एक लाइन गुजरती है जिसे कर्क रेशा बोली गई है और कर्क रेखा के साथ में नॉर्थ पोल से साउथ पोल जाने वाली एक और रेशा भी है जो वहां से गुजरती है जो जिसका मिड पॉइंट उज्जैन आता है जिसके वजह से यहीं से सूर्य उदय सूर्यास्त और पूरे पृथ्वी पर कहां कौन से समय चलेगा ये इसकी गणना होती थी जो मेरे ख्याल से आज ग्रेनेज मेरीडियन टाइम है जी महाकाल के अलावा ऐसे उज्जैन में और कौन से
(57:44) रहस्यमय मंदिर हैं? भोगी माता एक मंदिर है। उसके अलावा नागचंश्वर का मंदिर है जो साल में से एक बार ही खुलता है। 64 योगिनी का मंदिर है और प्रमुख प्रमुख अन्य देवी देवता भी है। जहां पे 84 महादेव भी कहा जाता है। 84 महादेव की परिक्रमा पंचक्रोशी यात्रा भी होती है उज्जैन में। अगर कोई व्यक्ति सक्षम नहीं है कि 84 महादेव पूरे कर सके। लेकिन उसकी इच्छा है तो चित्रगुप्त यमराज मंदिर जो शिप्रा नदी रामघाट स्थित है वहां पे जाके एक शिला है जहां पे 84 महादेव की पूरी लिंग बनाई हुई है तो उसके पूजन अर्चन का और पूरे समस्त पंचक्रोशी का फल एक ही
(58:21) माना जाता है। हमारा बॉडी जो है एक श्री यंत्र का फॉर्मेशन है। श्री यंत्र के फॉर्मेशन को छेड़ना नहीं चाहिए। जिसमें एनर्जी फ्लो जैसे अगर महाकाल में कोई जाता है महाकाल परिक्षेत्र में जाने के बाद में कुछ विचित्र लीलाएं कर ली जैसे भांग पी लिया मदिरा पी ली तो इसकी विचित्र लीलाएं होती है भगवान जो उनके साथ में खेलते हैं मेरे साथ के एक ऐसे व्यक्ति हैं नाम नहीं लेना चाहूंगा लेकिन आज जेल में ओ उन्होंने ऐसी कोई चीजें छेड़ दी और छेड़ने के बाद मैं आज जेल में पहुंच गया जिसकी वजह से महाकाल के वहां पे जाके गलत आचरण गलत चीजें ना करें तो सबसे बेस्ट महाकाल
(58:57) साधक शिव समर्पित जी थैंक यू सो मच बॉडी टू बीइंग में आने के लिए और इतनी छोटी उम्र में जैसे मैं आपको बता रही थी ये सिर्फ दिमाग का ज्ञान नहीं है। ये सिर्फ नॉलेज दिमाग से सीमित नहीं है। ये ज्ञान बहुत ही डीप है और कहीं और से आ रहा है। कोई सोर्स दूसरा है जो आपके अंदर एक्टिव है। तो बहुत अच्छा लगता है। मैं जभी भी यंगस्टर्स के साथ ये पॉडकास्ट करती हूं तो मुझे दिल से इतनी खुशी मिलती है क्योंकि आज का हमारा जो यूथ है यू नो इन जनरल एक बहुत ही कंपल्सिव लाइफस्टाइल लीड कर रहा है। बट जब मैं आप जैसे लोगों के साथ बात करती हूं तो मैं इतना प्राउड फील करती हूं
(59:29) कि हमारे देश का फ्यूचर, सनातन का फ्यूचर और स्पिरिचुअलिटी ट्रूली अभी भी शाइन कर रहा है और आप जैसे लोगों के हाथ में है। तो मतलब हमारा फ्यूचर सिक्योर है। थैंक यू सो मच फॉर कमिंग। धन्यवाद। इन केस यू वुड लाइक टू बी अ पार्ट ऑफ आवर ऑनलाइन एंड इनपर्सन योगा, डाइट एंड स्पिरिचुअल प्रोग्राम्स। यू कैन जॉइ आवर WhatsApp ग्रुप बिलो वेयर वी पोस्ट ऑल आवर अपकमिंग प्रोग्राम्स एंड गिव फ्री टिप्स ऑन हेल्थ, डाइट एंड लाइफ स्टाइल। [संगीत]

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