శ్రీరాముడు అడవికి వెళ్ళవలసి వచ్చినప్పుడు, లక్ష్మణుడు కోపగించుకుంటాడు. అప్పుడు రాముడు లక్ష్మణుడిని శాంతింపజేస్తూ ఈ మాటలు చెబుతాడు. మనిషి జీవితంలో జరిగే మార్పులు, లాభనష్టాలు అన్నీ కేవలం మానవ ప్రయత్నం వల్లనే కాకుండా, వెనుక ఉండి నడిపించే ఒక అదృశ్య శక్తి (దైవం/విధి) వల్ల జరుగుతాయని దీని సారాంశం.
శ్లోకం 1:
సుఖ దుఃఖే భయక్రోధౌ లాభాలాభౌ భవాభవౌ |
యచ్చ కించిత్త థాభూతం నను దైవస్య కర్మ తత్ ||
అర్థం:
సుఖం, దుఃఖం, భయం, కోపం, లాభం, నష్టం, పుట్టడం మరియు గిట్టడం (మరణించడం).. ఇంకా ఇలాంటివి ఏవైనా సంభవిస్తే, అవన్నీ కూడా దైవ నిర్ణయం (విధి) వల్లనే జరుగుతాయని దీని అర్థం.
పదాల వివరణ:
భవాభవౌ: పుట్టుట మరియు మరణించుట.
యచ్చ కించిత్త థాభూతం: మరియు ఇటువంటివన్నీ (జరిగే పరిణామాలు).
నను దైవస్య కర్మ తత్: వెనుక నుంచి దైవం శాసిస్తూ ఉంటుంది (ఇది దైవ సంకల్పం).
శ్లోకం 2:
అసంకల్పితమేవేహ యదకస్మాత్ ప్రవర్తతే |
అర్థం:
మనం అనుకోకుండా లేదా ఊహించకుండా అకస్మాత్తుగా ఏదైనా జరిగితే, అది దైవ ప్రేరితమైనదే. అంటే మనం ఒక ప్రణాళిక వేసుకున్నప్పటికీ, దానికి భిన్నంగా ఏదైనా జరిగితే అది మన ప్రమేయం లేకుండా దైవం ద్వారా జరిగిందని అర్థం.
Transcript: (00:00) जस्ट 15 डेज में टाइटर वजाइना 60 प्लस एज में भी 18 अगेन वर्जन 18 अगेन वजाइनल टाइटनिंग एंड रिजूवनेटिंग जेल नाउ इन इंडिया लॉग ऑन टू www18 ag.com और परफॉर्मेंस में तो इतने वियर्ड क्लेम है कि पूछो ही मत यह है पीनस एक्सटेंडर्स और पीनस एनलार्जमेंट पंप्स आज ऐसे वियर्ड प्रोडक्ट्स इंडियन मार्केट में फ्लड हो चुके हैं [संगीत] जेनिटल ब्यूटिफुल अनअट्रैक्टिव है तो वो सर्जिकल या फिर नॉन सर्जिकल तरीकों से उसे फिक्स कर सकते हैं फीमेल्स में वजाइनल ब्यूटिफुल कहते हैं कि ज्यादातर इंडियन (00:50) मेन सर्जिकल या फिर नॉन सर्जिकल टेक्नीक से अपने पीनस साइज इंक्रीज करना चाहते हैं यूएस तो एक कदम आ गई है वहां तो ऐसे इलीगल पार्टीज का भी कल्चर स्टार्ट हो गया है जहां पे लोग एक साथ में मिलकर अपने पीनस में सिलिकॉन इंजेक्ट करवाते हैं बेसिकली ऐसे प्रोसीजर्स को कूल बनाया जा रहा है लेकिन कई ऐसे रिपोर्ट्स भी मिले हैं जहां पर ऐसे पार्टीज में ही काफी लोगों की सडन डेथ भी हो गई है आपको कई ऐसे केसेस मिल जाएंगे ऐसे रिव्यूज मिल जाएंगे जहां पर ऐसे क्रीम्स पिल्स यूज करने की वजह से लोगों का स्किन खराब हो गया है उन्हें पिंपल्स रशेस पिगमेंटेशन और वर्स्ट केस (01:23) में तो कैंसर तक हो गया है लेकिन फिर भी आप इंडिया के किसी भी मेडिकल में जाओ उसके सबसे सामने वा वाले काउंटर पे आपको ऐसे प्रोडक्ट्स दिखेंगे ही मेडिकल भी छोड़ो amazononline.in [संगीत] करवाकर ज्यादा कॉन्फिडेंट हो सकता है तो वो बात ही पूरी गलत है मेरे हिसाब से इट्स एब्सलूट फाइन आफ्टर ऑल बॉडी आपकी है द (02:08) ओनली कंसर्न इज कि ये पूरा प्रोसीजर ये टैबलेट्स ऑइल्स वगैरह बेसिकली पूरा ट्रीटमेंट ही लोग खुद से कर लेते हैं विदाउट एनी डॉक्टर्स कंसल्टेशन सो आज हम एगजैक्टली वही डिस्कस करेंगे कि फिलहाल इन ट्रीटमेंट्स के लिए कौन से ऑप्शंस अवेलेबल है उसमें से कौन से फेक या डेंजरस है उनके कॉम्प्लिकेशंस क्या हो सकते हैं और फाइनली कौन से ऑप्शंस आपके लिए सेफ एंड मेडिकली अप्रूव्ड है सो डेफिनेटली स्टे ट्यून टिल द एंड ऑफ़ द वीडियो नाउ स्टार्टिंग विद मेन प्रॉब्लम्स सो इनके ये तीनों भी प्रॉब्लम्स का पहला सो कॉल्ड सलूशन है ये हर्बल और आयुर्वेदिक ऑइल्स क्रीम्स और (02:41) पिल्स इनका क्लेम है कि अगर 2 से 4 एमए प्रोडक्ट से डेली 10 मिनट का मसाज किया जाए या फिर अगर पिल्स है तो उसे एज प्रिस्क्रुटनी ये सब कुछ सिर्फ 20 डेज में अचीव हो जाएगा अगला प्रोडक्ट है पीस एक्सटेंडर्स इसे यूज़ करने के लिए डिवाइस को ऐसे लगाना होता है और थंब स्क्रूज को आगे की तरफ खींचना होता है जिससे कि पीनस स्ट्रेच हो जाए अब उसे वैसे ही चार से 6 घंटे तक के लिए पहन के रखना होता है अगेन प्रोडक्ट क्लेम 6 महीने तक हर रोज चार से 6 घंटे डिवाइस यूज किया तो साइज डेफिनेटली बढ़ेगा लेकिन मान लो 6 महीने नहीं है और इंस्टेंट रिजल्ट्स चाहिए तो इसके लिए भी एक डिवाइस (03:23) अवेलेबल है पीनस एनलार्जमेंट पंप्स बेसिकली इस प्लास्टिक सिलेंडर को पीनस पे एडजस्ट करना होता है और फिर पंप से सारी हवा को बाहर पंप आउट करना होता है इससे पीनस में एकदम से ब्लड फ्लो बढ़ जाता है और सिर्फ 10 से 15 मिनट्स में इंटेंटली रिजल्ट मिलता है ऐसा इनका क्लेम है लेकिन सबसे वियर्ड बात यह है कि इस डिवाइस को सेक्सुअल एक्टिविटी से आधे से एक घंटे पहले ही यूज़ करना होता है एंड नाउ लास्ट प्रोडक्ट भी ऐसे ही इंस्टेंट रिजल्ट के लिए है पी नाइल इंजेक्शंस इसमें यूजुअली सिल्डन फिल सॉल्यूशंस को पीनस पे 10 ओ क्लॉक और 2 ओ क्लॉक वेसल्स पे इंजेक्ट (03:54) किया जाता है नाउ आई नो ये सुनने में काफी स्केरी लगता है लेकिन पीना इंजेक्शन थ्योरी एक्चुअली ये काफी कॉमन मेडिकल प्रैक्टिस है जो इरेक्टाइल डिस्फंक्शन को ट्रीट करने के लिए यूज़ किया जाता है इसमें जो मेन ड्रग यूज किया जाता है ना वो होता है सिल्डन फिल जिसे कॉमनली वायग्रा भी कहते हैं अब बायोलॉजिकली इरेक्शन तब होता है जब पीनस के ब्लड वेसल्स में ब्लड फ्लो एकदम से बढ़ जाता है गिविंग इट एन इरेक्शन सो इसीलिए ड्रग भी एगजैक्टली वही करता है ये पीनस में ब्लड फ्लो को इंक्रीज कर देता है बट हां ये यूजुअली डॉक्टर के ऑब्जर्वेशन में और सेक्सुअल एक्टिविटी के (04:23) अगेन हाफ एन आर या वन आर पहले ही लेना होता है मतलब इंजेक्शन लेने के कुछ ही टाइम में सेक्सुअल एक्टिविटी परफॉर्म करनी होती है नेक्स्ट हम बात करेंगे फीमेल प्रोडक्ट्स की लेकिन उसके पहले आप तो जानते ही होंगे जेनिटल्स के अलावा भी आजकल प्लास्टिक सर्जरी भी काफी ज्यादा कॉमन हो गए है मेनली ये फीमेल्स करवाती है फेस पे प्लंपनेस और लिफ्ट लाने के लिए क्योंकि एज के साथ ना बॉडी में कोलाजन प्रोडक्शन काफी ज्यादा कम हो जाता है जिस वजह से स्किन में फाइन लाइंस डार्क स्पॉट्स और पिगमेंटेशन होने लग जाता है कोलाजन बेसिकली एक प्रोटीन है जो हमारी बॉडी में (04:52) नेचुरली बनता है और जो स्किन में मॉइश्चर रिटेन करके और इलास्टिसिटी बढ़ा के उसको एक यूथ फुल ग्लो और बाउंस देता है लेकिन ऑफकोर्स अगर बॉडी उसे नेचुरली नहीं बना पा रही तो आप कोलाजन सप्लीमेंट्स भी ले सकते हो जैसे कि फाइट कास लेटेड ग्लो कोलाजन पाउडर इसमें कोलाजन तो है ही लेकिन उसके साथ और भी नेचुरल इंग्रेडिएंट्स हैं जैसे कि विटामिन सी और हैलरो निक एसिड जो स्किन को हाइड्रेट करके प्लंपी बनाता है गिविंग यू अ रेडिएंट ग्लो इसके अलावा इसमें एक प्लांट बेस्ड बायोटिन सेस्बेनिया आगाशी लीफ एक्सट्रैक्ट भी है जो बेसिकली आपके हेयर और नेल्स का थिकनेस इंक्रीज करके (05:24) उन्हें स्ट्रेंथ करता है बेसिकली डलनेस एंड ड्राइनेस ऑफ स्किन हेयर एंड नेल्स को ही ट्रीट करने के लिए ये प्रोडक्ट बनाया गया है और इसका यूज़ भी काफी सिंपल है आपको सिर्फ एक स्कूप कोलाजन पाउडर को पानी में मिक्स करके पीना है फॉर 45 डेज फॉर बेटर रिजल्ट्स इसका टेस्ट भी काफी अच्छा है मेरे पास तो पाइनएप्पल है लेकिन और भी तीन फ्लेवर्स इसमें अवेलेबल है सो डेफिनेटली कंसीडर चेकिंग आउट फटका लेटेड ग्लो कोलाजन पाउडर लिंक इज इन द डिस्क्रिप्शन एंड एक्स्ट्रा डिस्काउंट के लिए आप फका 10 कूपन कोड यूज कर सकते हो फॉर 10 पर ऑफ ऑन fc.com अब फीमेल (05:54) ब्यूटिफुल बल नहीं है क्योंकि मोस्टली इसमें क्रीम्स कैप्सूल्स ऑयल्स और वाइटिंग सीरम ही होते हैं और इनका भी क्लेम है कि इनके एप्लीकेशन के बाद ये उस एरिया को फेयरर और टाइटर बना देंगे अगेन 15 डेज में नाउ जैसे मैंने कहा था कि ये प्रोडक्ट्स बड़े-बड़े क्लेम्म से कुछ प्रोडक्ट्स के काफी डेंजरस साइड इफेक्ट्स भी होते हैं जो अगर आपको कौन सा ड्रग यूज हो रहा है कैसे उसको अच्छे से यूज करना है वो नहीं पता तो आपके लिए काफी डेंजरस भी हो सकता है चलो सबसे पहले हम मेल प्रोडक्ट से बात करते हैं अगर आप उनके ऑयल क्रीम्स एंड पिल्स देखोगे तो (06:27) उनमें काफी प्रॉब्लम्स है पहली प्रॉब्लम ये नेच र हर्बल आयुर्वेदिक होने का सिर्फ क्लेम करते हैं लेकिन आपको पता होना चाहिए कि इंडिया में जो नेचुरल प्रोडक्ट्स होते हैं उनके लिए एक आयुष सर्टिफिकेशन लगता है लेकिन अगर आप इन प्रोडक्ट्स को चेक करोगे तो इनमें से काफी प्रोडक्ट के पास वो सर्टिफिकेट नहीं होता है यानी ये इलीगली इन प्रोडक्ट्स का सेल कर रहे होते हैं अंडर आयुर्वेदिक और अंडर नेचुरल प्रोडक्ट्स दूसरी प्रॉब्लम काफी सारे प्रोडक्ट्स पर इंग्रेडिएंट्स की लिस्ट ही नहीं होती और जिन पर होती है उन पर बेसिक हर्ब्स लिस्टेड होते हैं सो पीनस लोंगे (06:55) आखिर कौन से आयुर्वेदिक हर्ब से एगजैक्टली हो रहा है यही मेजर क्वेश्चन है बट ये सब में जाने की जरूरत नहीं है यूएस एफडीए ने ऑलरेडी अपने सिटीजंस को ऐसे प्रोडक्ट से बचने की वार्निंग जारी कर दी है एक्चुअली जब एफडीए ने amazonbusiness.in यानी कि वो मेडिकल ग्रेड ड्रग्स थे जो सिर्फ एक डॉक्टर के प्रिस्क्रिप्शन पे ही आपको लेना चाहिए विद इन द प्रिस्क्रिप्शन का कंसल्टेशन आपके पास नहीं है तो ऐसे ड्रग्स को ओवर द काउंटर यूज करना अलाउड (07:42) नहीं है बट सरप्राइजिंगली amazononline.in ने तो अपने रिपोर्ट में ये तक क्लीयरली मेंशन किया कि इनमें से कई सारे प्रोडक्ट्स इंडिया से बेचे जा रहे हैं एक्चुअली इंडिया में ना ये जो हर्बल और आयुर्वेदिक प्रोडक्ट्स होते हैं उनका एक बड़ा मार्केट है क्योंकि ऑफकोर्स वो काम करते हैं लेकिन ऐसे में कई स्कैम्स भी होते हैं जिसमें लोग इन आयुर्वेदिक प्रोडक्ट्स की फेक कॉपीज बनाकर बेचना शुरू कर देते हैं नाउ इन्हीं प्रोडक्ट्स का जो तीसरा प्रॉब्लम है वो है पैसों की नुकसान 30 एए से 50 एए प्रोडक्ट की कीमत 350 सिर्फ ₹ 4400 है मतलब बस पांच शैंपू पाउज (08:27) जितना प्रोडक्ट जो हार्डली एक हफ्ता चलेगा उसकी कीमत इतनी ज्यादा है सो डेफिनेटली यह इंडिया की आम जनता के लिए काफी एक्सपेंसिव है चौथी प्रॉब्लम 2018 में वर्ल्ड की वन ऑफ़ द बिगेस्ट फार्मा कंपनीज फर ने इकोनॉमिक टाइम्स को बताया कि ऑनलाइन मार्केट में बिकने वाला 80 पर वागरा फेक है नकली है सो इवन इफ आप एक्सपेंसिव प्रोडक्ट्स खरीद रहे हो क्या गारंटी है कि वो प्रोडक्ट सेफ है अब नेक्स्ट है पीना इंजेक्शन और इसमें सिल्डन एफ यूज़ होता है जो कि मेडिकल ग्रेड ड्रग है यानी कि इस ड्रग का यूज़ डेफिनेटली होता है मेडिकल फील्ड में इरेक्टाइल डिस्फंक्शन जैसी (08:59) प्रॉब्लम प्रस को डील करने के लिए लेकिन ये स्ट्रिक्टली अंडर अ डॉक्टर्स कंसल्टेशन लेना होता है इसके पीछे का रीजन ये है कि ये नॉर्मली पल्मोनरी हाइपरटेंशन पेशेंट्स को दिया जाता है पल्मोनरी हाइपरटेंशन का मतलब होता है कि इसमें पेशेंट के लंग्स की आर्टरी काफी नैरो हो जाती है जिस वजह से पेशेंट के हार्ट को बहुत ज्यादा ब्लड पंप करना पड़ता है एंड ये सिल्डन फिल इंजेक्शंस ब्लड वेसल्स को डाइलेटर कि बड़ा करके हार्ट को इजली ब्लड पंप करने में हेल्प करते हैं सेम मैकेनिज्म ही फॉलो होता है इरेक्शन में भी और इसीलिए सिल्डन फिल इंजेक्शंस काफी कॉमनली यूज होता है है (09:30) एंड एक्चुअली अगर ये एक वेल ट्रेन डॉक्टर के सुपरविजन में लिया जाए तो ये कंपैरेटिव काफी सेफर ऑप्शन है एज कंपेयर टू अदर ऑप्शंस लेकिन इंडिया बीइंग इंडिया उसमें तो आपको भी पता है कि कई केसेस में ये सेल्फ इंजेक्ट किया जाता है व्हिच इज वेरी डेंजरस इनफैक्ट इसी रीजन के वजह से कई डेथ्स भी हुई है इससे ऐसा इसीलिए क्योंकि एक्चुअली इंडिया में ना हार्ट डिसीसेस काफी कॉमन है आप सोचो ग्लोबली 60 पर हार्ट डिजीज इंडिया में ही होता है अब इन हार्ट डिसीसेस के लिए मोस्टली पेशेंट्स को नाइट्रेट इंड्यूस्ड मेडिसिंस दिए जाते हैं अब इन मेडिसिंस भी मैकेनिज्म यूजुअली (10:00) सिमिलर होता है ये भी ब्लड फ्लो इंक्रीज कर देती है बॉडी में और इन दिस केस जब ये दोनों भी मेडिसिंस एक दूसरे के साथ रिएक्ट करने लग जाती है और ब्लड फ्लो एकदम बढ़ जाता है ब्लड प्रेशर शूट कर देता है तो इससे सडन हार्ट अटैक्स और डेथ होने के भी चांसेस बहुत ज्यादा बढ़ जाते हैं एंड इसी पे रिसर्च करने के लिए जब यूएस एफडीए ने खुद 56 केसेस की स्टडी किया तब उन्हें यही दिखा कि ऑलमोस्ट हर केसेस में जो मेल था उसको सिल्डन फिल लेने से पहले हार्ट प्रॉब्लम्स थी और उनकी डेथ का रीजन भी यही नाइट्रेट और सिल्डन फिल का रिएक्शन था नेक्स्ट प्रॉब्लम क्या पी नाइल (10:32) एनलार्जमेंट पंप्स काम भी करते हैं टाइम्स ऑफ इंडिया ने एक स्टडी पब्लिश की थी जिसमें उन्होंने यह पाया कि इसके यूज़ से 7.6 सेमी से पीनस की साइज बढ़कर 7.9 सेमी हुई थी मतलब सिर्फ 0.3 सेमी का फर्क दिखा था वो भी 6 महीने के रेगुलर यूज के बाद जो साइंटिफिकली नेगलिजिबल ग्रोथ है सो बेसिकली जो प्रोसीजर सुनने में ही इतना पेनफुल लग रहा है उसका ऑलमोस्ट नेगलिजिबल फायदा है लेकिन फिर भी आप देखोगे ना तो इसकी पेशेंट सेटिस्फैक्ट्रिली इसीलिए कई डॉक्टर्स का मानना है कि ये एक प्लेसिबो इफेक्ट हो सकता है प्लेसिबो इफेक्ट एक्चुअली मेडिकल साइंस में काफी (11:05) कॉमन फिनोमिना है जिसमें पेशेंट्स में फिजिकली तो कोई चेंज नहीं होता है पर साइकोलॉजिकली उन्हें ऐसा फील हो रहा होता है कि इंप्रूवमेंट हो रहा है क्योंकि वो ट्रीटमेंट करवा रहे होते हैं और इसी सेम चीज पर दूसरे भी कई रिसर्चस हुए हैं जो भी सेम ही क्लेम करते हैं कि इसमें हार्डली कोई इंप्रूवमेंट आती है इस प्रोसीजर से इनफैक्ट एक साइंटिफिक रिसर्च तो ओपनली ये तक कहता है कि पंप्स पीनस लोंगे कर ही नहीं सकते हैं ये प्रोडक्ट्स काम ही नहीं करते हैं एंड आखिर में पीनस एक्सटेंडर डिवाइसेज यूएस के प्रॉमिनेंट न्यूज़ आउटलेट मेडिकल न्यूज़ टुडे ने एक रिसर्च (11:34) साइट किया था जिसके अकॉर्डिंग इससे कई केसेस में एक से ती सेंटीमीटर का फर्क आया था लेंथ में लेकिन हां इसमें ध्यान देने वाली बात यह है कि जितने भी पार्टिसिपेंट्स इस प्रोसेस से गुजरे थे उनमें से कई सारे पेशेंट्स में पेरोनी डिजीज पाया गया ये एक ऐसा डिसऑर्डर होता है जिसमें पेशेंट्स का पीनस एक्सट्रीमली कर्व्ड हो जाता है जिससे बेसिकली उन्हें सेक्सुअली परफॉर्म करने में काफी दिक्कत आती है प्लस इसी रिपोर्ट में मेंशन है कि वर्स्ट केस सिनेरियो में यह डिजीज प्रोस्टेट कैंसर तक कॉज कर सकती है सो 100 बात की एक बात ये सारे सो कॉल्ड सेक्सुअल (12:04) वेलनेस प्रोडक्ट्स जितना भी क्लेम करें कि इनके प्रोडक्ट से रिजल्ट आता है सच तो यह है कि आज तक कोई भी क्लीनिकल एविडेंस नहीं है जो ये प्रूव कर सकता है कि नॉन सर्जिकल प्रोडक्ट से साइज या लेंथ या विड्थ इंक्रीज होता है नाउ फीमेल प्रोडक्ट्स की बात करें तो पद्मश्री डॉक्टर मंजुला जी ने ये क्लियर कहा है कि मार्केट के वजाइना वाइटिंग ब्लीचिंग क्रीम्स में जो स्टेरॉइड्स यूज होते हैं वो इंफेक्शन कॉजिंग होते हैं और विद रेगुलर यूज इन प्रोडक्ट से वजाइना के अराउंड का जो स्किन होता है वह काफी ज्यादा थिन और नॉन फंक्शनल भी हो सकता है और इसीलिए उनका (12:37) क्लियर कहना है कि इन ओवर द काउंटर बिकने वाले क्रीम से सेल्फ ट्रीटमेंट ना करवाए और अगर किसी को सच में स्किन लाइटन करवानी है या कोई ट्रीटमेंट करवानी है तो एक डर्मेटोलॉजिस्ट को ही कंसल्ट करें नेक्स्ट वजाइनल टाइटिंग क्रीम्स को भी लेकर डॉक्टर्स की सेम थिंकिंग है यानी यह भी साइंटिफिकली प्रूवन नहीं है कि यह रिजल्ट देंगे ऐसा कोई क्रीम नहीं है ऐसा कुछ नहीं है दिस इज ऑल क्रैप मेरी यह है और हम ये बताते हैं कि इसमें कोई साइंटिफिक बेसिस नहीं है कि किसी क्रीम को वजाइना में लगाया जाए और वो उसमें असरदार साबित हो यानी ये भी साइंटिफिकली प्रूवन नहीं है कि (13:10) ये रिजल्ट देंगे ऊपर से क्योंकि वजाइना की स्किन काफी ज्यादा सेंसिटिव होती है इन प्रोडक्ट्स का उल्टा साइड इफेक्ट भी हो जाता है जैसे कि ब्लिस्टर्स बर्निंग रशेस पिगमेंटेशन वगैरह सारे डॉक्टर्स का रिकमेंडेशन है कि इन सेल्फ ट्रीटमेंट से 10 टाइम्स बेटर है सर्जरीज जो कि साइंटिफिकली प्रूवन है सो स्टार्टिंग विद मेल्स उनमें मेजर्ली चार चार टाइप की पीनस एनलार्जमेंट सर्जरीज होती है पहली लिगामेंटोटैक्सिस जो सस्पेंसरी लिगामेंट होता है ना उसको कट कर देते हैं इससे लेंथ तो नहीं बढ़ता है लेकिन क्योंकि पीनस हैंग करने लग जाता है तो विजुअली वो लंगर दिखने (13:43) लग जाता है दूसरा है ऑटोलस फैट सर्जरी इसमें लाइपो सेक्शन का यूज करके बॉडी के किसी भी पर्टिकुलर फैटी एरिया से फैट्स को निकाल के पीनस में इंजेक्ट कर दिया जाता है इससे यूजुअली पीनस का गर्द यानी कि विथ इनलार्ज होता है तीसरी सर्जरी है डर्मल फिलर सर्जरी जिसमें पीनस को कॉस्मेटिक फिलर से इंजेक्ट किया जाता है अगेन ये सर्जरी भी पीनस का साइज और गर्द इनलार्ज करने के लिए की जाती है और इसे कंपैरेटिव डॉक्टर्स एक सेफर ट्रीटमेंट ऑप्शन मानते हैं चौथी और आखिरी सर्जरी है पेनुमा डिवाइस इंप्लांटेशन जिसमें पीनस में एक सॉफ्ट सिलिकॉन पैड ऐड किया जाता है जिससे (14:14) इरेक्शन पे पीनस और भी ज्यादा एनलार्जमेंट काफी एसिमिट्रिकल लगते हैं जिसके वजह से उन्हें वजाइना अनअट्रैक्टिव लगता है इसमें बेसिकली क्या करते हैं कि ये जो लेबिया लिप्स होते हैं उन्हें डॉक्टर्स लेजर या फिर स्कल्प के थ्रू कट करके लेबिया को सिमिट्रिकली वापस से शेप कर देते हैं दूसरी सर्जरी है वजान प्लास्टी जो बेसिकली टाइटनिंग ऑफ वजाइना के लिए की जाती है इसमें जो लूज वजाइनल मसल्स होते हैं उन्हें रेडियो फ्रीक्वेंसी या फिर लेजर के जरिए जो एक्स्ट्रा स्किन होती है उसको कट करके वजाइना को टाइट कर दिया जाता है सो बेसिकली व्हाट आई एम ट्राइम टू से इज कि (14:52) ऐसा नहीं है कि ये सारे ट्रीटमेंट्स ही गलत है या फिर ये ट्रीटमेंट करवाना ही गलत है आफ्टर ऑल हुआ वी टू जज द ओनली प्रॉब्लम विद दिस इ दि इज हाफ इंफॉर्मेशन एंड मिस इंफॉर्मेशन इन ओवर द काउंटर क्रीम्स पिल्स वगैरह में जो केमिकल्स यूज़ किए जाते हैं वो मेडिकल ग्रेड ड्रग्स है यानी कि ये डॉक्टर के प्रिस्क्रिप्शन के बिना उनके कंसल्टेशन के बिना ये यूज़ नहीं किए जाने चाहिए और इसीलिए हमेशा ऐसे ट्रीटमेंट्स को लेने से पहले डॉक्टर्स को कंसल्ट करो डीआई वाई ट्रीटमेंट्स और ओवर द काउंटर ड्रग्स को विदाउट एनी मेडिकल प्रिस्क्रिप्शन अवॉइड करो ड्रग स्टोर से और ई-कॉमर्स (15:22) वेबसाइट से खासकर कोई भी अनरेगुलेटेड प्रोडक्ट मत खरीदो और हमेशा प्रोडक्ट के इंग्रेडिएंट्स को स्टडी करो और उसमें अगर सिल्ड इन द फिल और टॉपिक स्टेरॉइड्स जैसे केमिकल्स हैं तो उसके लिए तो डेफिनेटली डॉक्टर का कंसल्टेशन लो आफ्टर ऑल आपकी सेफ्टी आपके खुद के हाथ में है आल्सो अगर आपको ऐसे सोशल इश्यूज पे वीडियोस देखना पसंद है तो हमने रिसेंटली इंडिया में राइजिंग इनफर्टिलिटी रेट्स इन वुमेन के ऊपर एक डेडिकेटेड वीडियो बना रखा है अगर आप वो देखना चाहते हो तो आप यहां पे लेफ्ट पे क्लिक करके उसे देख सकते हैं और हां ऑफकोर्स जाने से पहले डू नॉट फॉरगेट टू (15:51) चेक आउट फाटी का लेटेड गो कोलाजन पाउडर फॉर एक्स्ट्रा डिस्काउंट यूज 5ka 10 फॉर अ 10 पर ऑफ ऑन fc.com जय हिंद
Transcript: (00:00) बॉलीवुड फिल्में इंडियन लड़कियों को टॉक्सिक फेमिनिस्ट बना रही है यह है अंकिता एक 21 साल की लड़की जो शुगर बेबी है एक 49 साल के आदमी निखिल की जब उससे सवाल पूछा गया कि वह इतने बड़े आदमी के साथ रिलेशनशिप में क्यों आई उसका कहना था मैं काफी हेल्पलेस थी अकेली पड़ गई थी और मेरे पास जॉब भी नहीं था यानी कि सिर्फ पैसों के लिए मेरी फैमिली की खुशी के लिए मेरा खुश रहना जरूरी है यह जवाब था गुरुक राम के मैरिड औरत का जब उसके हुकअप पार्टनर ने उससे पूछा कि तुम शादीशुदा होते हुए भी मेरे साथ हुकअप क्यों कर रही हो अपने हस्बैंड को चीट क्यों कर रही हो (00:39) हैविंग सेक्स विद मल्टीपल पार्टनर्स हैविंग सेक्स आउटसाइड ऑफ द मैरिज हैविंग अ शुगर डैडी जो तुम्हारे सारे अयाश के पैसे भरे ये सब कुछ इंडिया में काफी ज्यादा कॉमन होते जा र है एंड द स्टैट्स आर वेरी कंसर्निंग टाइम्स ऑफ इंडिया में पब्लिश्ड एक रिपोर्ट के अनुसार 40 पर इंडियन वाइफ्स अपने हस्बैंड के अलावा बाकी मेन के साथ रेगुलर सेक्सुअल इंटरकोर्स करती है और एक दूसरे सर्वे से यह पता चला कि हर 10 में से सात मैरिड औरतें अपने हस्बैंड को बस इसीलिए चीट करती है क्योंकि वह घर के कामों में उनकी मदद नहीं करते नाउ हु इज टू ब्लेम वेल हम चाहे या ना चाहे बॉलीवुड (01:15) इंडियन गर्ल्स का ब्रेन वॉश कर रही है क्योंकि बॉलीवुड जिस तरीके से अपने मूवीज में एक स्ट्रांग इंडिपेंडेंट वुमन दिखा रही है उसमें काफी मेजर फ्लज है कितने वर्ष के थे जब आपने अपनी वर्जिनिटी से मुक्ति प्राप्त की आई वाज जस्ट 60 वन आई वाज 20 मैं जब 19 साल की थी नोबडी स्टेज वर्जिन एट दिस एज रुकल नोबडी स्टेज वर्जिन फॉर दिस लॉन्ग 2022 में रिलीज हुई मूवी वर्जिन भानुप्रिया में सिर्फ और सिर्फ एक ही मैसेज है कि यंग गर्ल्स को अपना वर्जिनिटी जितना जल्दी हो सके लूज कर लेना चाहिए भले ही फोर्सफुली क्यों ना करना पड़े नहीं मैं मजाक नहीं कर रही हूं इसमें (01:51) लिटरली एक सीन है जिसमें एक्ट्रेस मेड लीड को सेक्स करने के लिए फोर्स कर रही है सेइंग अभी नहीं तो कभी नहीं होगा अभी नहीं तो कभी नहीं अभी नहीं तो कभ क्या कर रही है आप अभी रिसेंटली रिलीज हुई थैंक यू फॉर कमिंग मूवी भी देख लो पूरी मूवी इस पे बेस्ड है कि भूमि के कैरेक्टर को ऑर्गेज्म फील करना होता है जो वो फाइनली कर भी लेती है लेकिन जब उसके फ्रेंड्स उसको पूछते हैं कि वो लड़का कौन था तब वो ये बोलती है आईम नट ो गाइ चिपकी तो ये प्रोफेसर के साथ भी थी राहुल के साथ भी थी और वो रबड़ी वाले के साथ भी थी नाउ डोंट गेट मी रंग एक (02:22) लड़की डेफिनेटली ऑर्गेज्म डिजर्व करती है और ये मैसेज इस मूवी में जो कम्युनिकेट किया गया है उसमें कोई प्रॉब्लम नहीं है लेकिन ऑर्गेज्म चाहिए तो रैंप लिए डिफरेंट डिफरेंट पार्टनर्स के साथ सेक्स करो ये मैसेज किस हद तक सही है एंड हैविंग सेक्स लेफ्ट राइट एंड सेंटर को इतना ज्यादा ग्लोरिफाई क्यों किया जा रहा है इन दोनों भी मूवीज में अगर आप देखोगे तो फीमेल लीड को एक स्ट्रांग इंडिपेंडेंट वुमेन एक ट्रू सिंबल ऑफ फेमिनिज्म बताया जा रहा है थैंक यू फॉर कमिंग का तो पूरा मार्केटिंग ही फेमिनिज्म छोड़ दो स्मैशिंग पेट्रिया की के अराउंड बेस था बेस्ट वे टू स्मैश (02:52) पेट्रिया कीी इज टू अचीव समथिंग मतलब मूवी में क्या बताया जा रहा है और स्मैशिंग पेटि आर् की इसके बीच में मेरे हिसाब से कोई रिलेशन नहीं है व्हाट डू यू थिंक अबाउट दिस कमेंट करके जरूर बताना आल्सो 2016 की हिट मूवी डियर जिंदगी भी काफी सेलिब्रेट की गई थी फॉर इट्स मैसेज ऑन मेंटल हेल्थ लेकिन उसमें भी एक काफी टॉक्सिक बिहेवियर था जिसे मेरे हिसाब से ज्यादा लोगों ने नोटिस भी नहीं किया मूवी में आलिया का कैरेक्टर कायरा अपने चाइल्डहुड लव सिड को चीट करती है हे आई स्लेप्ट विद रघुवेंद्र और रघुवेंद्र नाम के फिल्म मेकर के साथ हुकअप करके उससे (03:25) अटैच हो जाती है लेकिन फिर रघुवेंद्र जब उस परे चीट करके किसी और से श कर लेता है किसकी मंगनी हो गई रघुवेंद्र की कब पिछले हफ्ते तब ऐसा बताया गया है मूवी में कि कायरा ट्रामा में चली जाती है और फिर पूरी मूवी उसी के बारे में है कि वो अपने ट्रामा से कैसे हील करती है सो बेसिकली कायरा को विक्टिम बताया गया है जबक चीटिंग तो कायरा ने भी सिट के साथ की पर पूरी मूवी में उस पर इतना हाईलाइट नहीं किया गया क्या इसका मतलब ऐसा है कि लड़की के साथ हुआ तो इट्स कंपलीटली रंग पर वही किसी मेल के साथ हुआ तो सब कुछ ओके है एक और एग्जांपल लेते हैं लेकिन उसके पहले डोंट (03:58) यू थिंक वुमेन का ऐसा सोक कॉल्ड बोल्ड पोट्रेयर वुमन सेफ्टी पॉइंट ऑफ व्यू से भी काफी डेंजरस हो सकता है स्पेशली साइबर क्राइम एंड कॉल फ्रॉड के लिए जिसके प्राइम टारगेट्स काफी बार औरतें होती है इसीलिए अभी एक्सट्रीमली इंपॉर्टेंट है कि इंडियंस जितना हो सके स्पैम और अनवांटेड कॉल्स अवॉइड करें लेकिन वी ऑल नो इन्हें अवॉइड करना मुश्किल ही नहीं ऑलमोस्ट नामुमकिन होता है बट डोंट वरी गेट कांटेक्ट लाया है इस प्रॉब्लम के लिए काफी यूनिक सॉल्यूशन ये ऐप का सबसे इंटरेस्टिंग फीचर है कि इसमें आप देख सकते हो कि लोगों ने आपका नंबर अपने फोन बुक में किस नाम से सेव (04:31) किया हुआ है व्हिच इज द मोस्ट फन जैसे मेरा आप देख सकते हो कितने वियर्ड नेम से सेव किया है निकिता किड़ो सीएसटी बैक ऑफिस गेट सेट जॉब्स इतने फनी नेम्स क्यों यार मेरा नाम निकिता ठाकुर है बट ऑन अ सीरियस नोट यह स्पैम कॉल्स को भी ब्लॉक कर सकता है और आपके कॉल आंसर करने से पहले ही कॉल आइडेंटिफिकेशन एक और काफी कंट्रोवर्शियल वेब सीरीज का एग्जांपल लेते हैं मेड इन हेवन में लीड एक्ट्रेस तारा अपने ऑलरेडी एंगेज बॉस को सेड्यूस करती है और उस एक्ट को रिकॉर्ड करके वो बॉस को अपनी शादी तोड़ के उससे शादी करने के लिए मजबूर करती है लेकिन फिर (05:13) उसका हस्बैंड उसपे चीट करता है एंड कुछ टाइम बाद वो डिवोर्स फाइल करके एक दूसरे लड़के के साथ रिलेशनशिप में आती है बट इस नए लड़के के साथ रिलेशन में होने के बावजूद वह अपने एक्स हस्बैंड के साथ फिजिकल होती है ताकि उसे उसका एक बंगलो एलुमनी में मिल जाए और यह सब होने के बाद जब उसका करंट पार्टनर उससे जवाब मांगता है तब वो कहती है डोंट एवर थिंक यू कैन टेक दैट डिसीजन फॉर मी प्लीज डोंट थिंक यू कैन एवर मेक दैट डिसीजन फॉर मी मतलब ये कैसा फेमिनिज्म है अपने पार्टनर के लिए लाइफ कंट्रोल करना ये बेशक गलत है पर पार्टनर की गलती करने पर उससे एक सवाल पूछना ये तो (05:45) हर किसी का राइट है इसमें कंट्रोल कहां से आता है और एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर और चीटिंग को तो कितना कैजुअली दिखाया जाता है इसी साल रिलीज हुई वेब सीरीज जी कर्दा में दिखाया है कि एक्ट्रेस अपने एक वेडिंग फंक्शन के दौरान ही उसके हस्बैंड के बेस्ट फ्रेंड के साथ फिजिकल हो जाती है सेम लाइंस पे ही लिपस्टिक अंडर में बुर्खा की एक फीमेल लीड भी अपने ही एंगेजमेंट के दौरान एक्स बॉयफ्रेंड के साथ फिजिकल हो जाती है फिर फोर मोर शॉट्स में दामिनी का कैरेक्टर जो अपने अबॉर्शन के बाद अपने बॉयफ्रेंड को फिजिकल होने के लिए मना करती है बिकॉज़ शी इज नॉट रेडी लेकिन फिर वही (06:13) दामिनी अपने उसी बॉयफ्रेंड पे चीट करती है और किसी और के साथ फिजिकल हो जाती है एंड सबसे वियर्ड बात जब वो उसका बॉयफ्रेंड उससे पूछता है कि तमने मुझ पे चीट क्यों किया तो वो लड़की उसी पे चिल्लाने लग जाती है कि तुम कितने जजमेंटल हो मुझे जज क्यों कर रहे हो भाई साहब चल क्या रहा है एंड सबसे कंसर्निंग बात ये है ना कि इन तीनों भी कैरेक्टर्स को उनके इस टॉक्सिक बिहेवियर का बिल्कुल भी अफसोस करते हुए नहीं दिखाया गया है मतलब बेसिकली मूवीज के हिसाब से एक लड़की अपने फिजिकल नीड्स को सेटिस्फाई करने के लिए किसी भी एक्सटेंट तक जा सकती है भले ही उसके लिए उसे अपने (06:40) बॉयफ्रेंड या फिर हस्बैंड को चीट क्यों ना करना पड़े और 10 रैंडम लोगों के साथ क्यों ना रहना पड़े एंड देन दैट बिहेवियर इज शोन एज द पोस्टर कवर ऑफ फेमिनिज्म बट इज दिस रियली फेमिनिज्म दिस इज टॉक्सिक फेमिनिज्म टॉक्सिन है जो मेरे हिसाब से जेंडर न्यूट्रल है लड़का भी टॉक्सिक हो सकता है और लड़की भी हो सकती है मतलब चलो आप इसी जगह पे एक लड़के को रख के देखो अगर एक लड़का माइंडसूत्र स्टेज पर चिल्लाती है कि नहीं (07:31) बच्चे ऐसे नहीं पैदा होते बच्चे तो सेक्स करके पैदा होते हैं ऐसे नहीं होते बेबीज पहले बॉयज गर्ल्स ना सेक्स करते हैं फिर मूवी के एंड में भूमि बच्चों के स्कूल में जाकर स्टेज में एक बहुत ही बकवास सा स्पीच देती है जिसका बेसिक मीनिंग होता है स्मैश पेट्रिया की पेट्रिया की स्मश पेट्रिया की स्मैश पेट्रिया कीी लेकिन भूमि के इसी स्मैश पेट्रिया कीी के बकवास स्पीच से मोटिवेट होकर ऑडियंस से एक छोटी बच्ची उठके बोलती है नहीं पहननी मुझे ब्रा एक दूसरी बच्ची उठके बोलती है नहीं करना मुझे पैरी पोना दूसरा एक लड़का उठके बोलता है नहीं पढ़ना (08:07) मुझे मैथ्स नहीं पली ब्रा मुझे नहीं करना पैरी बना मुझे क्या नॉनसेंस है आप मुझे बताओ अगर ये मूवी एक कोई 12 15 साल की बच्ची देखती है बच्चा भी देखता है उसके दिमाग में क्या चल रहा है कि अगर उसे एक एजुकेटेड मॉडर्न वुमन बनना है तो ऐसे करो ब्रा पहनना और पैरी पोना करना छोड़ दो जो कि ट्रेडिशनल चीज है उसमें पेटि आर्की कहां से आती है एंड याद रख रखना आप चाहो या ना चाहो यही बॉलीवुड फिल्में में आपके सोच को कंट्रोल कर रही है हाल ही में एक प्रॉमिनेंट थिंक टैंक ऑक्सम इंडिया ने बॉलीवुड की 2009 से 2018 तक की मूवीज को स्टडी किया इन मूवीज में थ्री इडियट्स (08:44) दबंग टू स्टूडेंट ऑफ द ईयर धूम 3 चेन्नई एक्सप्रेस ऐसी कुछ प्रॉमिनेंट फिल्म्स थी जिस सर्वे में यह मालूम पड़ा कि बॉलीवुड की 88 पर मूवीज में वुमेन को बहुत ज्यादा नाइव यानी कि भोली फ्रेजा इल और अनरीजनेबल यानी कि बेवकूफ बताया जाता है इसके साथ ही इन मूवीज में वुमेन को उसके क्लोजिंग्स और एक्शन से काफी ज्यादा सेक्सुअली रिवीलिंग भी बताया जाता है अब इसके बाद वुमेन के ऐसे पिक्चराइजेशन से बॉलीवुड में जो सोसाइटी पे इंपैक्ट क्या होता है उसे जानने के लिए ऑक्सफैम ने बिहार झारखंड उड़ीसा छत्तीसगढ़ और उत्तर प्रदेश की मोस्टली रूरल एरियाज में सर्वे किया तब (09:19) उन्हें काफी शॉकिंग रेवलेशंस मिले उन्हें पता चला कि 70 पर लोगों ने एक्सेप्ट किया कि औरतों को जिस तरीके से बॉलीवुड में दिखाया जाता है औरतें रियल लाइफ में भी से ही होती है मतलब वो यह मानते हैं कि जैसे पिक्चरों में दिखाया जाता है कि लड़कियां नाइफ फ्रेजइक्सप्रेस वाकई में होता है इनफैक्ट रूरल लड़कियां तो खुद ऐसे वुमेन के पोट्रेयर को अप्रिशिएट भी करती थी दैट इज हाउ स्ट्रांग दिस मूवीज कैन फॉर्म योर पर्सपेक्टिव फेमिनिज्म छोड़ो मीडिया और मूवीज का ये इंपैक्ट अब एकदम बेसिक से बेसिक चीज है जैसे कि स्किन कलर फिगर इन सब में भी देख (09:54) सकते हो इंडिया में अनगिनत ऐसे ऐड्स बने हैं जहां पर एक गोरी लड़की को सक्सेसफुल एंड मोर डिजायरेबल और एक सावली लड़की को अनसक्सेसफुल बताया जाता है मुझे बताओ क्या इसके बाद से इंडिया में यही सेम माइंडसेट नहीं फैल गया था सेम हुआ जीरो फिगर के मामले में भी 2008 में टशन मूवी के लिए करीना कपूर ने इस ट्रेंड को शुरू किया जिसके बाद से एक माइंडसेट बन गया कि सिर्फ वो लड़कियां जिनका जीरो फिगर होता है वही ज्यादा डिजायरेबल होती है अब ऐसे में जब बॉलीवुड का इतना स्ट्रांग इन्फ्लुएंस है इंडिया की जनता पर ऐसे में अगर बॉलीवुड फेमिनिज्म के नाम पर हैविंग सेक्स विद (10:25) मल्टीपल पार्टनर्स एक्स्ट्रा मैटल अफेयर्स गोल्ड डिंग इस सब को नॉर्मलाइज करेगा तो उसका इंपैक्ट सोसाइटी पे कितना सीवियर होगा होगा क्या हो रहा है आप रिसेंटली फेमस हुए कुछ फेमिनिस्ट मूवमेंट्स ले लो फ्री द निपल्स या बर्न द ब्रा मूवमेंट जब ये मूवमेंट फेमस हुआ था कई आम लोग भी और सेलिब्रिटीज भी इस मूवमेंट को फॉलो करने लग गए थे सो यस आई एम अ बर्न द ब्रा काइंड ऑफ फेमिनिस्ट आई एम अ फेमिनिस्ट यू नो ऑनेस्टली स्पीकिंग आई कुड बर्न माय ब्रा एनी सेकंड जैसे कि दीपिका मल्होत्रा जो बर्न द ब्रा मूवमेंट को सपोर्ट करने के लिए तीन दिनों तक लगातार बिना ब्रा पहने (10:55) ऑफिस जा रही थी फिर सुनाली चोपड़ा जो पहली फीमेल सेलेब्रिटी थी जिन्होंने बर्न द ब्राव मूवमेंट को लेकर टा पे फर्स्ट पोस्ट किया था और इसके अलावा मिट जाए हम सॉन्ग की सिंगर अनुष्का मंचना ने तो अपनी न्यूड पिक्स ही पोस्ट कर दी थी और निपल फ्री रहने को खुद का फंडामेंटल राइट बताया था पर मेरे एक सिंपल से क्वेश्चन का जवाब दो इनके ब्रा लेस होने से इन्हें इक्वलिटी कैसे मिल रही है इट लिटरली मेक्स जीरो सेंस एंड दिस इज बिकॉज बर्न द ब्रा मूवमेंट जैसे आपके सामने रखा गया है वो गलत है इसका असली नाम बल्कि था फ्रीडम ट्रैश कैन मूवमेंट और उसके पीछे का रीजन (11:27) भी कंप्लीट डिफरेंट था एक्चुअली 1950 के दौरान तक यूएस में वुमेन को स्कूल कॉलेजेस में एडमिशन नहीं मिलता था वो खुद का घर भी नहीं खरीद सकती थी और फीमेल होने की वजह से उन्हें जॉब्स तक नहीं मिलता था और गलती से मिल भी जाए तो जब वो प्रेग्नेंट हो जाती थी उसे फायर कर दिया जाता था तो ऐसे ये कॉज के लिए कुछ 100 औरतों ने उस टाइम मिस अमेरिका पेजेंट का विरोध करने के लिए फ्रीडम ट्रैश कन नाम का एक प्रोटेस्ट शुरू कर दिया इसमें उन औरतों ने खुद के मॉप्स लिपस्टिक्का थी जो यूजुअली वुमेन को स्टीरियोटाइप करती थी फिर उन्हीं 100 औरतों में से एक औरत ने अपना खुद का बराव (11:58) उतार कर उस ट्रैश न में डाल दिया और तब से कुछ लोगों ने इसे बर्न द ब्रा मूवमेंट बुलाना शुरू कर दिया इसका लिटरल मीनिंग ये नहीं था कि लड़कियों को ब्रा नहीं पहनना है क्योंकि लड़के भी तो नहीं पहनते दिस लिटरली मेक्स जरो सेंस एंड जितने जल्दी आप ये समझो उतने ही जल्दी आप अपने फ्रेंड्स को अपने फैमिली को अपने आप को बॉलीवुड के इस फ्लड कांसेप्ट ऑफ फेमिनिज्म से दूर रख पाओगे एंड ऑफकोर्स जैसे हर चीज के दो पहलू होते हैं बॉलीवुड ने ऐसी भी कई सारी कहानियां बनाई है जिसमें ट्रू फेमिनिज्म दिखाया है इंग्लिश विंग्लिश चक दे इंडिया पिंक पपड़ क्वीन ये मेरे कुछ फेवरेट मूवीज (12:31) थे जिनके फीमेल लीड्स काफी ज्यादा इंस्पायरिंग थे और एक सही मैसेज लोगों को दे रहे थे इन मूवीज में जिस तरीके से औरतों को एंपावर होते हुए बताया है वो मेरे हिसाब से एक ट्रू आइडिया ऑफ फेमिनिज्म है आपका इसके बारे में क्या ख्याल है क्या बॉलीवुड के कई सारे फिल्में आउट एंड आउट टॉक्सिक फेमिनिज्म प्रमोट करती है एंड आपको पर्सनली कौन सी मूवीज कौन सा सीन या कौन सा डायलॉग पर्सनली गलत लगता है नीचे कमेंट करके जरूर बताना आल्सो सिंस वी आर स्पीकिंग अबाउट बॉलीवुड मेरे क्वेश्चन का जरा जवाब देना राख सावंत उर्फी जावेद और अभी का लेटेस्ट ओरी इनका (13:02) काम क्या है इनकी लेटेस्ट मूवी या सॉन्ग कब रिलीज हुआ था नहीं पता ना मुझे भी नहीं लेकिन आप अभी अपना instagram2 वीडियोस आ जाएंगे कैसे इंडिया का फेक पाप आजी कल्चर सीधे शब्दों में बोलूं तो इनके पिक्चर्स आपके फोन में इसीलिए आते हैं क्योंकि कई सारे सेलिब्रिटीज अपनी एक पिक्चर खिंचवाने के लिए ₹5000000 तक देते हैं यस पाप राजी की एक पूरी इंडस्ट्री है जिसमें यह काम कैसे करते हैं कितने पैसे बनाते हैं बेसिकली ये पूरी इंडस्ट्री कैसे काम करती है बहुत ही इंटरेस्टिंग है इस पर हमने डिटेल वीडियो बना रखा है अगर आप वो देखना चाहते हो तो (13:35) आप यहां पे लेफ्ट पे क्लिक करके उसे देख सकते हो और हां जाने से पहले गेट कांटेक्ट एप्लीकेशन को डाउनलोड करना मत भूलना ये जानने के लिए कि लोगों ने आपका नंबर अपनी फोन बुक में किस नाम से सेव किया है सो डिस्क्रिप्शन में दिए गए लिंक से गेट कांटेक्ट प को डाउनलोड कर लेना एंड प्लीज लोगों को बॉलीवुड के इस टॉक्सिक फेमिनिज्म से अवेयर करवाने के लिए इस वीडियो को जितना हो सके अपने फ्रेंड्स और फैमिली में शेयर करना ताकि वो भी समझे कि बॉलीवुड उनके माइंड के साथ कैसे खेल रहा है मिलते हैं अगले वीडियो में तब तक के लिए जय हिंद
Transcript: (00:00) इनफर्टिलिटी यानी कि बांझपन आज इंडिया में एक पैंडम की तरह फैल रहा [संगीत] है एंड दिस इज वेरी कंसर्निंग क्योंकि इंडिया जैसे कंट्री में इस चीज को लेकर काफी टैबूस अटैच है 2021 में यूपी के शाह जहान आपु में एक औरत शारदा देवी को उसके पति इसी बीमारी का इलाज करवाने के लिए एक तांत्रिक के पास लेके गया लेकिन उस तांत्रिक ने इलाज कैसे किया उसने शारदा देवी को बहुत ज्यादा टॉर्चर किया लाठी से पीटा सुलगते लोहे के चिमटे से जलाया जब तक उसने अपनी जान नहीं दे दी बेंगलुरु की एक 28 साल की औरत आशा ने आत्महत्या कर ली सिर्फ क्योंकि उसका परिवार उसे एक बच्चा (00:43) नहीं दे पाने की वजह से कोसते रहता था एक हस्बैंड ने तो अपने 9 साल की हैप्पी मैरिड लाइफ के बावजूद अपनी वाइफ को डाइवोर्स नोटिस भेज दिया सिर्फ क्योंकि वो इनफर्ट इल थी वो उसे एक बच्चा नहीं दे पा रही थी इनफर्टिलिटी स्पेसिफिकली फीमेल्स के केस में एक ऐसी कंडीशन है जिसमें 12 मंथ्स तक अनप्रोटेक्टेड इंटरकोर्स के बाद भी फीमेल कंसीव नहीं कर पाती है नाउ दिस कंडीशन हैज बिकम वेरी सीरियस इन इंडिया क्योंकि आज इंडियन वुमन वर्ल्ड एवरेज से भी पहले अपने लेट 20 में ही यानी कि शादी की उम्र में मेनोपॉज एक्सपीरियंस करने लग गए हैं जबकि (01:16) आमतौर पे एक औरत इसे 50 में एक्सपीरियंस करती है मेनोपॉज उस कंडीशन को बोलते हैं जिसमें एक फीमेल का मेंस्ट्रुएशन बंद हो जाता है यानी उसका नेचुरली प्रेग्नेंट होना इंपॉसिबल हो जाता है लेकिन इंडिया में ऐसा हो ही क्यों रहा है ईटी के एक रिसेंट रिपोर्ट के मुताबिक लास्ट दो से ती साल के ऑब्जर्वेशन में यह पता चला है कि ऑलमोस्ट 1 थर्ड यानी कि 30 पर इंडियन वुमेन की ओवेरियन रिजर्व यानी उनकी बॉडी में जो एकस की क्वांटिटी होती है वो फिलहाल अपने लोएस्ट पॉइंट पे है खुद टाइम्स ऑफ इंडिया ने भी फर्टिलिटी ग्राफ ट्वीट करके इंडियंस को वर्न किया कि देश (01:53) की फर्टिलिटी गिरते ही जा रही है और 2025 तक यह रेट और ज्यादा गिर जाएगा आप डाटा छोड़ दो अपने आसपास ही देख लो आज कितने सारे आईवीएफ क्लिनिक्स खुलल चुके हैं आज इंडिया पूरे वर्ल्ड में आईवीएफ ट्रीटमेंट लेने वाला थर्ड लार्जेस्ट यूजर है आईवीएफ बेसिकली ऐसा मेडिकल प्रोसीजर है जो कंसीव करने में हेल्प करता है अच्छा इसमें एक और एक काफी अनयूजुअल बात यह है कि एनएफएचएस के सर्वे के अकॉर्डिंग वर्किंग वुमेन में नॉन वर्किंग वुमेन से ज्यादा इनफर्टिलिटी का केसेस देखे जा रहे हैं एंड इसीलिए आज का ये वीडियो काफी ज्यादा इंपॉर्टेंट है (02:26) इनफैक्ट हमने पहले भी मेल इनफर्टिलिटी पे अपना एक स्पेसिफिकली वीडियो बनाया था जिसके नीचे काफी पॉजिटिव रिस्पांस भी आया था काफी लोगों ने मेंशन किया कि कई चीजें हम जो एवरीडे लाइफ में करते हैं हमें रियलाइफ पर्कशंस हो सकते हैं बिल्कुल वैसे ही आज हम फीमेल इनफर्टिलिटी के मुद्दे पर वीडियो बना रहे हैं क्योंकि इसके पीछे भी कई रीजंस है राइट फ्रॉम मेबलिन पंड जैसे ब्रांड जिनके प्रोडक्ट्स हम यूज करते हैं mcdonald's डोमिनोज पिज्जा हर्ट जैसे ब्रांड जिनका जक फूड हम खाते हैं इवन सैनिटरी पैड्स क्या आप जो सैनिटरी पैड्स यूज कर रहे हो वो आपके लिए सेफ भी है (03:00) एगजैक्टली यही आज हम यूज करेंगे कि हम इस प्रॉब्लम के लिए क्या कर सकते हैं स्पेशली इस प्रॉब्लम के आयुर्वेदिक सोलूशंस क्या हो सकते हैं ज्यादा नेचुरल सोलूशंस क्या हो सकते हैं जिससे औरतें नेचुरली इस प्रॉब्लम को सॉल्व कर पाए और इसीलिए यह वीडियो सिर्फ लड़कियों के लिए नहीं बल्कि लड़कों के लिए भी इक्वली इंपॉर्टेंट है ताकि आप इसे अपने फीमेल फ्रेंड्स फैमिली मेंबर्स के साथ शेयर कर सको और उन्हें भी सेफ रख सको चलो फर्स्ट स्टार्टिंग विद द रीजंस बिहाइंड राइजिंग इनफर्टिलिटी इन इंडिया नाउ सबसे पहले यह क्वेश्चन आंसर करते हैं कि ऐसा है कि वर्किंग वुमेन में (03:31) इनफर्टिलिटी के ज्यादा केसेस देखे गए हैं एज कंपेयर्ड टू नॉन वर्किंग वुमेन सो वेन इसके पीछे एक मेजर रीजन हो सकता है स्ट्रेस स्ट्रेस ड्यू टू वर्क प्रेशर एंड इरेगुलर वर्क टाइमिंग्स आई नो सुनने में ये चीज बहुत ही ज्यादा बेसिक लगती है लेकिन हियर मी आउट स्ट्रेस की वजह से बॉडी में ना काफी सारे प्रॉब्लम्स होते हैं जैसे कि स्किन इश्यूज हेयर फॉल गट इश्यूज लेकिन वुमेन में स्पेसिफिकली स्ट्रेस पीसीओडी और पीसीओएस कॉज कर सकता है जो नंबर वन रीजन है बिहाइंड इनफर्टिलिटी एक रिसेंट स्टडी के अनुसार एक वर्किंग वुमेन में पीसीओएस से इनफर्टिलिटी होने का रिस्क (04:05) एक हाउसवाइफ से टू टाइम ज्यादा है मेजर्ली बिकॉज ऑफ स्ट्रेस इंड्यूस्ड पीसीओएस कंडीशन अब देखो पीसीओडी पीसीओएस उन बीमारियों में से एक है जिसका इलाज आज तक इतना अच्छे से ढूंढा नहीं गया है इसीलिए एक बार किसी फीमेल को यह कंडीशन हुई तो उसका पूरी जिंदगी मेडिसिन खाना और हेल्दी डिसिप्लिन रखना बहुत ज्यादा इंपॉर्टेंट हो जाता है एंड एक वर्किंग वुमेन एगजैक्टली यहीं पर हार जाती है बिकॉज़ ऑफ 247 वर्क स्ट्रेस एंड शिफ्ट बेज जॉब्स जिसके वजह से उन्हें अपने लाइफस्टाइल पर ध्यान देने का मौका ही नहीं मिलता साइंस की भाषा में समझाऊं तो रिसर्चस कहते हैं कि इरेगुलर (04:38) शिफ्ट में काम करने से बॉडी का नेचुरल सकाय रिदम इफेक्ट हो जाता है सकाय रिदम यानी कि सिंपली सोने और जागने का कोई फिक्स शेड्यूल नहीं होना बॉडी टेंपरेचर में भी कभी भी एक सडन फ्लक्ट एशन होना ये सारी चीजें जो अगेन सुनने में काफी बेसिक लगता है लेकिन दिस इज मेसिंग विद द बॉडी ऑफ इंडियन वुमेन इसकी वजह से उन्हें बच्चे कंसीव करने में तो दिक्कत आ ही रही है लेकिन कई केसेस में बच्चा पैदा होने से पहले भी उनका मिसकैरेज हो रहा है इसके अलावा स्ट्रेस और इरेगुलर टाइमिंग्स और लाइफस्टाइल की वजह से हमारे बॉडी में काफी सारे स्ट्रेस हार्मोंस भी (05:11) रिलीज होते हैं जैसे कि एड्रीनलिन जैसे कि कॉर्टिसोल और जिन हार्मोंस का नाम ही स्ट्रेस हार्मोन है वो हमारे बॉडी में हवक ही क्रिएट करेगी कमिंग टू इनफर्टिलिटी कॉज ड्यू टू स्ट्रेस इंड्यूस्ड पीसीओडी देखो पीसीओडी पीसीओएस में होता ये है कि फीमेल्स की ओवरीज में सिस्ट यानी कि छोटी-छोटी गांठे बन जाती है जो मैक्सिमम केसेस में तो लाइफ थ्रेटनिंग नहीं होती है लेकिन इन गांठों की वजह से फीमेल की फर्टिलिटी को अफेक्ट करती है ये सिस्ट एक्चुअली हार्मोनल इंबैलेंस कॉज करते हैं जिससे एक फीमेल बॉडी में एंड्रोजन एक मेल हार्मोन हाई अमाउंट प प्रोड्यूस होने लग (05:41) जाता है और यही हार्मोन मेंस्ट्रुअल साइकिल में ओवुलेशन यानी कि एग रिलीज नहीं होने देता है जिसके वजह से इनफर्टिलिटी कॉज होती है अब यू नो प्रॉब्लम ये है कि अगर ये डिजीज जल्दी आइडेंटिफिकेशन होते हैं जैसे एक्ने वेट गेन इरेगुलर मेंस्ट्रुअल साइकल हेयर फॉल कुछ केसेस में एनमल फेशियल एंड स्किन हेयर ग्रोथ जिस वजह से मैक्सिमम लड़कियां इन सिमटम्स को नजरअंदाज कर देती है नाउ द सेकंड रीजन इज राइजिंग मेनोपॉज जब एक फीमेल को 12 महीनों तक पीरियड्स नहीं आते उसकी मेंस्ट्रुअल साइकिल रुक जाती है उसे हम मेनोपॉज कहते हैं एंड ऑब् वियस पीरियड्स नहीं तो ओवरीज (06:21) में एग्स भी प्रोड्यूस नहीं होंगे और अगर होंगे तो रिलीज नहीं होंगे यानी फीमेल चाहकर भी नेचुरली प्रेग्नेंट नहीं हो सकती है अब मेनोपॉज की वर्ल्ड एवरेज तो 45 से 55 इयर्स है बट अनफॉर्चूनेटली फॉर इंडिया एक सर्वे से यह शॉकिंग रिजल्ट्स मिले हैं कि 4 पर इंडियन वुमेन 29 से 34 की एज में मेनोपॉज के सिम्टम्स एक्सपीरियंस कर रही है एंड 8 पर औरतें 35 से 39 की एज में यानी कि ये नंबर्स वर्ल्ड एवरेज की मिनिमम एज से भी कम है नाउ इसके पीछे एक रीजन काफी ज्यादा शॉकिंग है चच इज स्मोकिंग [प्रशंसा] डिड यू नो इंडियन वुमेन दुनिया की सेकंड (07:03) लार्जेस्ट स्मोकर्स है ब्रिटिश मेडिकल जर्नल ने वर्ल्ड वाइड एक स्टडी की और स्टडी से पता चला कि ग्लोबली यूएसए के बाद इंडियन फीमेल्स सबसे ज्यादा स्मोक करती है बट अगेन स्मोकिंग से मेनोपॉज कैसे हो रहा है सो देखो एस्ट्रोजन हार्मोन फीमेल्स की प्यूबर्टी पीरियड साइकिल प्रेगनेंसी सबके लिए एक काफी इंपॉर्टेंट हार्मोन है लेकिन स्मोकिंग से भी काफी सारे हॉर्मोन जैसे कि एंड्रोजेंस इंक्रीज होते हैं जो एस्ट्रोजन की फंक्शनिंग को डिस्टर्ब कर देते हैं यानी अगेन हार्मोनल इंबैलेंस इन द वमस बॉडी नाउ मूविंग ऑन टू द नेक्स्ट रीजन व्हिच इज द थर्ड रीज़न इज सैनिटरी पैड्स (07:37) आज इंडिया में कितनी वुमेन इवन यंग गर्ल्स सैनिटरी नैपकिंस यूज़ करती है यह बताने की जरूरत नहीं है ये नंबर मिलियंस में है बट डू यू नो यही सैनिटरी पैड्स भी एक मेजर रीज़न है बिहाइंड रैपिड स्प्रेडिंग इनफर्टिलिटी इन इंडिया सो हाल ही में एक दिल्ली बेस्ड एनजीओ ने 10 अलग-अलग काफी प्रॉमिनेंट ब्रांड्स के पैड्स को स्टडी किया और उसमें उन्हें थायलेसिन ऑर्गेनिक कंपाउंड्स यानी कि ओसीज जैसे केमिकल्स मिले जो एक फीमेल की बॉडी में कैंसर तक कॉज कर सकते हैं दूसरी बात क्योंकि ये केमिकल्स पैड्स के थ्रू फीमेल की बॉडी में एंटर हो रहे हैं यानी कि वजाइना के रोड से (08:08) एंटर हो रहे हैं तो ट्रस्ट मी ये ज्यादा डेंजरस है एज कंपेयर्ड टू इन केमिकल्स को खाली ओरली इंजेस्ट कर लेना क्योंकि वजाइना के थ्रू इन केमिकल्स का एब्जॉर्ब रेट काफी हाई होता है सो 1999 में एक एक्सपेरिमेंट हुआ था जिसमें कुछ फीमेल्स को ओरली और कुछ को वजाइना के थ्रू इक्वल क्वांटिटी में एस्ट्रोजन डोजेस दिए गए थे एंड शॉकिंगली वजाइनल डोजेस लेने वाली फीमेल्स के ब्लड में एस्ट्रोजन लेवल 10 टाइम्स हायर था यानी कि वजाइना में एक टॉक्सिन का टच होना इज मोर डेंजरस देन आप उस टॉक्सिन को बस ऐसे ही ओरली खा लो बिकॉज़ वजाइना हाईली अब्जॉर्बेंट होता है एंड यू नो सबसे (08:41) शॉकिंग बात यह है कि इतने सीवियर कंसीक्वेंसेस इन केमिकल्स के होने के बावजूद इंडिया में इसके अगेंस्ट कोई रेगुलेशन नहीं है सो यही हमारे लिए एक रेड फ्लैग है कि अगली बार सैनिटरी नैपकिंस में लेट्स और ओसीज जैसे कोई केमिकल्स आपको मिलते हैं तो उन्हें प्लीज परचेस मत कीजिए आल्सो इंट्रो में मैंने बिग ब्रांड्स की बात की थी कि कैसे इन ब्रांड्स का खाना खाने की वजह से इनफर्टिलिटी बढ़ते जा रहा है स्पेशली जो जंक फूड्स हम खाते हैं काफी सारे एमएनसी फूड चेंस के उनकी वजह से ये इनफर्टिलिटी की समस्या बढ़ती जा रही है उसके पीछे भी रीजन यही थालोस ही है (09:12) एक्चुअली हाल ही में यूएस में एक स्टडी हुई थी जिसमें काफी प्रॉमिनेंट ब्रांड आउटलेट्स के डिफरेंट डिशेस जैसे कि चिकन नगेट्स फ्राइज बुट राइस इन सब जंक फूड के सैंपल्स को कलेक्ट करके उनमें 11 प्लास्टिसाइजिंग केमिकल्स के लिए उन्हें टेस्ट किया गया एंड इस टेस्ट में ऑलमोस्ट सारे सैंपल्स में थैलेटम ही डेंजरस केमिकल मिला था एग्जैक्ट नंबर की बात करें तो 80 पर टेस्टेड सैंपल्स में थैलेटम कल मौजूद था बेसिकली थाइले वो केमिकल है जिसे प्लास्टिक सॉफ्ट रखने के लिए यूज किया जाता है और यह केमिकल उस खाने में यूजुअली जो ग्लव्स वगैरह एंप्लॉयज यूज करते हैं या (09:48) फिर पैकेजिंग जिसमें खाना गर्म होके आता है उस पैकेजिंग से थाइले लीक होके खाने में जा रहा था सिमिलरली अगर हम बात करते हैं कॉस्मेटिक प्रोडक्ट्स की तो इंडिया में डव जॉनसन एंड जॉनसन वज मेबलिन पॉन्स निया जैसे जो फेमस ब्रांड्स हैं जिन्हें हर लड़की यू नो कोई भी लड़की यूज करती होगी लेकिन इनके प्रोडक्ट्स में भी काफी सारे डेंजरस केमिकल्स पाए गए हैं यू नो बहुत इंटरेस्टिंग बात यह है कि मुझे अपने रिसर्च के वक्त पता चला कि यूएस के गवर्नमेंट वेबसाइट यानी कि यूएस एफडीए ने बकायदा पब्लिक डोमेन में इन ब्रांड्स के नाम्स के साथ उसमें मौजूद हार्मफुल (10:21) केमिकल्स को पब्लिकली लिस्ट किया है बट इंडिया में किसी ने भी इन बिग ब्रांड कंपनीज का नाम तक नहीं लिया है इवन बीएस रिपोर्ट कहती है कि कई कॉस्मेटिक प्रोडक्ट्स में काफी ऐसे टॉक्सिक केमिकल्स हैं जो इंडियन वुमेन को इनफर्ट इल बना रहे हैं बट इस रिपोर्ट में भी ब्रांड्स के नाम तक मौजूद नहीं है इट्स रियली वेरी अनफॉर्चूनेटली स्टेप्स नहीं लिए गए हैं लेकिन अब आप कैसे समझोगे कि आपको किन केमिकल से बचना है सो टाइम्स ऑफ इंडिया के अकॉर्डिंग लोशंस क्रीम्स और क्लींजर्स में आपको पैराबेन केमिकल से बचना है टूथपेस्ट एंड सोप्स में आपको ट्राइक्लो जन इस केमिकल से दूर रहना (10:56) है एंड मोस्ट इंपोर्टेंट परफ्यूम्स शैंपूस और ल्स में अगेन थायलेसिन बहुत ज्यादा यूज होता है तो उन चीजों को अवॉइड करो जिनमें ये सारे केमिकल्स आपको इंग्रेडिएंट्स में मिल जाते हैं एक और एक काफी कंसर्निंग बात यह है कि कई बार हम जब खाना खाते हैं बाहर से ऑर्डर करके तो हम उसी प्लास्टिक कंटेनर में ही उसको माइक्रोवेव में हीट कर लेते हैं लेकिन ये जो प्लास्टिक माइक्रोवेव कंटेनर्स होते हैं ये गर्म खाने में 95 पर केमिकल्स रिलीज करते हैं जिसमें से एक अगेन थैलेसरी होता है नाउ आपने ऑब्जर्व किया रहेगा कि थैलेटम काफी जगह पे आया है (11:25) सैनिटरी पैड्स फूड्स इवन कॉस्मेटिक्स तो अब ये अंडरस्टैंड करते हैं कि थैले एगजैक्टली कर क्या रहा है एक फीमेल के बॉडी में देखो काफी सारे केमिकल्स नुकसान पहुंचाते हैं बट द प्रॉब्लम विद थायल इड्स इज कि ये डायरेक्टली फीमेल्स में जाकर एस्ट्रोजन लेवल को कम कर देता है और एस्ट्रोजन हॉर्मोन जैसे मैंने आपको बताया था वो वो हार्मोन है जो लिटरली एक फीमेल के पूरे रिप्रोडक्टिव साइकिल को गाइड करता है उसके लिए बहुत ज्यादा इंपॉर्टेंट है थाइले एड्स उस हार्मोन का लेवल कम कर दे रहा है जो एग फॉलिकल्स के ग्रोथ के लिए भी नीडेड है सो जब एग्स ही प्रॉपर्ली ग्रो (11:55) नहीं हो रहे तो इनफर्टिलिटी की प्रॉब्लम तो आएगी ही बट चलो नाउ लेट्स टॉक अबाउट द सॉल्यूशंस क्या इंडियन फीमेल्स को इनफर्टिलिटी से बचने का कोई ऑप्शन नहीं है वेल देयर इज होप अगर फीमेल्स अर्ली स्टेजेस में ही इनफर्टिलिटी के इन तीन बड़े सिमटम्स को डिटेक्ट कर पाए जैसे कि फर्स्ट सिमटम्स अनेबल टू कंसीव या फिर प्रेग्नेंट होने में परेशानी होना सेकंड मिसकैरेजेस और थर्ड इरेगुलर पीरियड्स अब अगर आयुर्वेदिक ट्रीटमेंट्स की बात की जाए तो फिर काफी डॉक्टर्स को बहुत ही सिंपल रखते हैं उनका कहना है कि कंसिस्टेंट स्लीप रूटीन जिससे आपको सात से 9 घंटे की (12:24) क्वालिटी स्लीप मिल रही है सेल्फ केयर करें जैसे कि मेडिटेशन योगा हॉबीज प्रैक्टिस करना जो आपको डिस्ट्रेस करें इवन आयुर्वेद में योगा भी इस प्रॉब्लम के लिए एक सलूशन बताया गया है जैसे कि सूर्य नमस्कार भ्रमरी और प्राणायाम इसके अलावा ऑफकोर्स बेसिक डाइट अच्छा होना सारे न्यूट्रिएंट्स होना खाने में और एक हेल्दी वर्कआउट रूटीन होना लेकिन ऑफकोर्स ये उन फीमेल्स के लिए है जो अभी तक जिनको ये प्रॉब्लम नहीं हुई है ये ज्यादा एक प्रिकॉशनरी मेजर है लेकिन उन फीमेल्स का क्या जिनकी फर्टिलिटी ऑलरेडी अफेक्ट हो चुकी है सो इस सिचुएशन में आईवीएफ और (12:54) आईएसआई ट्रीटमेंट्स काफी अच्छे ऑप्शंस होते हैं जो कॉस्टली भी होते हैं बट आईवीएफ का सक्सेस रेट 40 परस जितना होता है सिंपल भाषा में बताऊं तो आईवीएफ एक ऐसा प्रोसीजर होता है जिसमें वुमेन की ओवरी से एग्स और मेल से स्पर्म को लैब में एक साथ कंबाइन करके एंब्रियो बनाए जाते हैं फिर कुछ दिनों तक उस एंब्रियो को लब में ही ग्रो करने के बाद इन्हें वुमेन के यूटरस में वापस से प्लेस कर दिया जाता है बेसिकली आईवीएफ में जो प्रेगनेंसी की प्रोसीजर बॉडी के अंदर होती है उसे ही लैब में कहीं ना कहीं रिप्लिकेट किया जाता है बट इसी ट्रीटमेंट का आयुर्वेद में भी एक (13:24) सलूशन है जिसे कहते हैं बीज शुद्धि ये बीज शुद्धि ट्रीटमेंट दो फेसेस में किया जाता है जिसमें मोस्टली फोकस किया जाता है आपको स्ट्रेस फ्री करने में और आपका हार्मोनल बैलेंस को ठीक करने में सबसे पहले आता है पूर्व कर्मा जिसमें आपकी पूरी बॉडी को डिटॉक्स कर दिया जाता है देन दूसरा स्टेप है परेशन इस स्टेप में आपको कुछ आयुर्वेदिक मेडिसिन से योगा की मदद से स्ट्रेस फ्री किया जाता है आल्सो बेबी प्लानिंग करने के लिए एटलीस्ट थ्री मंथ्स पहले से ही दोनों ही पेरेंट्स का पूरा डायट क्या रहेगा इसकी भी प्लानिंग पहले से ही करवा दी जाती है नाउ अगेन क्योंकि ये (13:54) आयुर्वेदिक ट्रीटमेंट है ये मोस्टली आपके लाइफस्टाइल आपके खानपान आपके रहन सहन इस पे ही फोकस करता है लेकिन सबसे इंटरेस्टिंग बात यह है कि साइंटिफिक रिसर्च पेपर्स के अनुसार भी इन आयुर्वेदिक ट्रीटमेंट के बाद 85 पर पीसीओएस पेशेंट्स कंसीव कर पाए हैं एंड ओवरऑल अगर देखें तो इस ट्रीटमेंट की वजह से 75 पर पेशेंट्स नेचुरली कंसीव कर पाए हैं व्हिच इज एक्चुअली अ वेरी कमेंडेबल नंबर सो दैट इज इट फॉर टुडे इस वीडियो को जितना हो सके स्पेशली अपने फीमेल फ्रेंड्स और अपने फैमिली मेंबर्स के साथ शेयर करना ताकि वो भी इस इशू को समझ सके आल्सो अगर आपको ऐसे (14:28) ही सोशल इश्यूज पर वीडियोज ना पसंद है तो हमने हाल ही में एक वीडियो बना रखा है कि कैसे जनरेशन अल्फा किड्स यानी वो बच्चे जो अभी 10 12 साल 14 साल मैक्सिमम एज के होंगे उन बच्चों का जनरेशन कैसे आज बहुत ही ज्यादा सेल्फिश होते जा रहा है काफी टंट्रम्स थ्रो कर रहा है अब्यूड़ोस जो बच्चों में हो रहे हैं कैसे एक आईपैड ये सारे प्रॉब्लम्स कॉज कर सकता है इस टॉपिक पे हमने डिटेल वीडियो बना रखा है अगर आप वो देखना चाहते हो तो यहां पे लेफ्ट पे क्लिक करके उसे देख सकते हो और हां जाने से पहले अगर आपको हेयर फॉल या को कोई भी हेयर रिलेटेड प्रॉब्लम है तो आई (15:01) वुड हाईली रिकमेंड कि आप आयुर्वेदिक ट्रीटमेंट यूज करें जैसे लारी आदिवासी हर्बल हेयर ऑयल जिसे आप डायरेक्टली उस कम्युनिटी से ही खरीद सकते हो मैंने स्क्रीन प इनका ओरिजिनल नंबर और डिस्क्रिप्शन बॉक्स में इनका वेबसाइट का लिंक डाल दिया है जहां से आप खुद इनके साथ कांटेक्ट करके या फिर वीडियो कॉल करके इनसे ही पर्सनली ये तेल खरीद सकते हो जय हिंद
Transcript: (00:06) यू नो देर इज नथिंग रंग विद विद विद यूजिंग प्रोडक्ट्स लाइक दिस वेयर यू कैन कीप योरसेल्फ लुकिंग यंग सम टाइम्स इफ यू थिंक ऑफ एन एक्टर्स जॉब एज अ यू नो देर फेस एंड बॉडी आई थिंक इट्स गुड टू बी रियलिस्टिक प्लास्टिक सर्जरी आई एम नॉट अ ग्रेड फैन ऑफ बट आई डोंट कमेंट ऑन एनी वन एल्स आई मीन बॉलीवुड इज ओपनली प्रमोटिंग बोटॉक्स एंड फिलर्स netflix's लाइव्स ऑफ बॉलीवुड वाइ तो सबने सुना ही होगा इसमें एक एपिसोड में नीलम कोठारी ऑन कैमरा बोटॉक्स करवाती हैं और इसका रीजन देते हुए वह यह कहती है कि लोग इस प्रोसीजर को इतना बिग डील क्यों बता (00:40) रहे हैं इन सारे प्रोसीजर से तो करवाने वाले को अच्छा फील होता है और बोटॉक्स करने में हर्जी क्या है आई जस्ट फील यू नो पीपल मेक सच अ बिग डील ऑफ बोटॉक्स एंड यू नो ऑल दज प्रोसीजर्स और व्हाट एवर एंड आई जस्ट फील वट्स द बिग डील ऐसे ही बॉलीवुड वाइव्स और भी एपिसोड्स में कॉस्मेटिक प्रोसीजर्स को काफी प्रमोट कर कर रहे हैं सो लेट्स डू डीटॉक्स प्लस वेलनेस ओके एंड प्लस ग्लूड सो स्किन एजिंग जस्ट गिव इट ऑ प्लस इन्होंने अपने डॉटर्स को तक जो इंडस्ट्री में लॉन्च भी नहीं हुई थी उन्हें तक इंजेक्ट करवा दिया महीप की डॉटर शनाया कपूर काजोल की डॉटर नायसा देवगन और (01:17) शाहरुख खान की डॉटर सुहाना खान लेकिन अब आप बोलोगे कि ये तो फिल्म इंडस्ट्री है यहां पे ये सब होता ही होगा इसमें कौन सी नई बात है एंड आई अग्री लेकिन अब आपका इसके बारे में क्या ख्याल है आज इंडिया में लिटरली बोटॉक्स पार्टीज हो रही है दुल्हा और दुल्हन शादी के पहले ग्लो के लिए बोटॉक्स ट्रीटमेंट्स करवा रहे हैं कॉरपोरेट्स में तो प्रेजेंटेशंस और मीटिंग्स के पहले बोटॉक्स एक नया ट्रेंड बन चुका है एंड यू विल नॉट बिलीव बट नेताओं के लिए भी बोटॉक्स एक विनिंग फैक्टर बनते जा रहा है सो आखिर यह बोटॉक्स में ऐसा क्या है जो कॉरपोरेट से लेकर (01:48) पॉलिटिशियन और इवन किटी पार्टीज में तक यह जानलेवा होने के बावजूद क्यों इसे इंडिया में आज रपटली यूज़ किया जा रहा है लेकिन 1 मिनट कुछ एक्सपर्ट डॉक्टर्स के हिसाब से तो बोटॉक्स काफी सेफ है इनफैक्ट उनका यह मानना है कि इससे लोगों की डिप्रेस्ड लाइफ हैप्पी हो रही है तो आखिर इसकी सच्चाई क्या है क्या बोटॉक्स यूज करना सेफ और फायदेमंद है अगर हां तो हमें किन चीजों का ध्यान देना चाहिए बोटॉक्स ट्रीटमेंट्स करवाने से पहले क्योंकि अभी आप देखोगे काफी सारे सोशल मीडिया इन्फ्लुएंस है जो इस इंडस्ट्री से आते हैं जो इसे ओपनली प्रमोट कर रहे हैं और एक और एक बात अगर ये (02:21) प्रोसीजर इतना सेफ है तो ऐसे न्यूज़ में बार-बार क्यों आते रहता है कि किसी एक्ट्रेस ने बोटॉक्स ट्रीटमेंट करवाया या फिलर्स करवाए और उसके बाद उनकी डेथ हो गई सो आज हम इस वीडियो में इन्हीं चीजों को एकदम डिटेल में डिस्कस करेंगे इसलिए एंड तक जरूर देखना 28 यर ओल्ड दिनिया प्लेसेंसिया डिसाइडेड टू गेट अ ब्रिलियन बट लिफ्ट हर ब्रद सेज दिनिया आल्सो होप द सर्जरी वड हेल्प हर एट वर्क शी सें हर फैमली दिस फोट बफर हर सर्जरी इट वाज द लास्ट इमेज ऑफ हर अलाइव सो सबसे पहले हम ये समझते हैं कि बोटॉक्स और स्किन फिलर्स इन टर्म्स को आपने देखा रहेगा कि ये काफी बार (02:55) इंटरचेंजेबली यूज हो रहे हैं एंड ऑफकोर्स ये काफी कॉमन भी हो रहे हैं तो इन दोनों के बीच में फर्क क्या क्या है सो बेसिकली ये दोनों ही एक कॉस्मेटिक प्रोसीजर है लेकिन इन दोनों में एक मेजर डिफरेंस है जो बहुत कम लोग को ही पता है सबसे पहले बात करते हैं बोटॉक्स की जो बटलिन टॉक्सिन नाम के केमिकल से बना हुआ है जिसे बॉडी में इंजेक्ट करते ही वो एरिया माइनर पैरालाइज हो जाता है एज अ रिजल्ट वहां पे कोई भी मूवमेंट ना होने की वजह से उस एरिया में कोई भी रिंकल्स जैसे कि फाइन लाइंस वगैरह नहीं आती है लेकिन फिलर्स का यूज़ मोस्टली (03:24) उन जगहों पे किया जाता है जहां पे किसी भी फेशियल फीचर्स को थोड़ा प्लंप करना हो या फिर वहां पे आए हुए थिन लाइन या रिंकल्स के नीचे इंजेक्शन से इंजेक्ट करके वहां पे एक डर्मा फ्लूइड को फिल किया जाता है फॉर एग्जांपल ये देखो इस नॉर्मल लिप्स को डर्मा फिलर से भर के कुछ इस तरीके का प्लंप ी बना दिया गया है एंड इसके साथ ही अगर किसी को अपने राउंड फेस को ओवल शेप देना हो तो वो फिलर्स ऑफ बोटॉक्स की मदद से वैसा फेशियल शेप भी हासिल कर सकते हैं और इसीलिए फेशियल एनहांस मेंट्स में सिर्फ ये टर्म्स ही नहीं ये फेशियल ट्रीटमेंट्स भी काफी इंटरचेंजेबली यूज़ होती है (03:55) क्योंकि काफी बार ऐसा होता है कि सिर्फ बोटॉक्स या फिर सिर्फ फिलर्स नहीं अ इंजेक्ट किए जाते एक कंबाइंड ट्रीटमेंट होता है जिससे ही एक कंप्लीट लुक आता है जिस वजह से शायद आप देखोगे कि काफी सारे आर्टिकल्स वगैरह में इन दोनों टर्म्स को इंटरचेंजेबली यूज किया गया है सो नाउ कमिंग टू आवर सेंट्रल डिस्कशन कि फिल्म्स कैसे बोटॉक्स एंड फिलर कल्चर को इंडिया में पॉपुलर इज कर रही है एंड फिल्म इंडस्ट्री तो छोड़ दो एक मूवी तक इस कल्चर को कितना पॉपुलर कर सकती है आप यह बात समझ सकते हो बर्बी मूवी से लास्ट ईयर बर्बी मूवी रिलीज हुई थी और इसके साथ ही (04:30) बोटॉक्स यह एक ऐसा बोटॉक्स ट्रीटमेंट है जिसमें टॉक्सिंस के यूज से नेक के मसल्स को एक लिमिटेड टाइम के लिए फ्रीज किया जाता है एंड अल्टीमेटली ट्रीटमेंट लेने वाले की गर्दन एकदम स्लिम दिखने लग जाती है यानी एक स्वान की नेक के जैसी और इसी स्वान नेक बोटॉक्स को लोग एलोंगटेड नेक जस्ट लाइक अ बार्बी डॉल बार्बी बोटॉक्स हैज बीन रियली फेमस दीज डेज राइट इफ यू फेल्ट दैट द बार्बी फीवर इज गोइंग टू डाई डाउन सून यू विल बी अमेज्ड दैट फैंस नाउ वांट टू हैव अ नेक व्हिच लुक्स लाइक द बार्बी इसके अलावा इस (05:16) मूवी को देखने के बाद लोग डॉल फेस से भी काफी ऑब्सेस हो गए थे और कइयों ने एक डॉल जैसा दिखने के लिए फेस बोटॉक्स तक करवाना शुरू कर दिया था जिसके केस स्टडीज आपको काफी सारे मीडिया आउटलेट्स में मिल जाएंगे जैसे ये 22 साल की नेहा जैन जो बचपन से ही बबी की फैन थी बट बार्बी मूवी में मार्गो रोबी का लुक देखने के बाद नेहा को खुद एक बार्बी डॉल जैसा फेस चाहिए था और इंडिया में तो [संगीत] से हम अक्सर हमारे हेडेक्स को भी सीरियसली (06:02) नहीं लेते हैं अब देखो मेरा काम ही है रिसर्च एंड कंटेंट क्रिएशन और इसीलिए मुझे अक्सर पूरे पूरे दिन स्क्रीन के सामने बैठना पड़ता है जिस वजह से मुझे बहुत ज्यादा हेडेक्स होने लग गए थे एक्चुअली इन स्क्रीन से ना काफी हार्मफुल ब्लू रेज निकलते हैं जो हमारी आंखों को स्ट्रेन करते हैं और हेडेक्स कॉज करते हैं लेकिन लेंस कार्ड ने इस प्रॉब्लम का एक काफी स्टाइलिश सलूशन निकाला है उनके ये हसल सीरीज के ग्लासेस जब मैंने ट्राई किया तो मुझे अब स्क्रीन के सामने काम करना काफी कंफर्टेबल लगने लग गया है ये ग्लासेस आपको पावर में और रो पावर में भी मिल जाएंगे और (06:31) ये बेसिकली 90 पर हार्मफुल डिजिटल लाइट को पोलराइज कर देते हैं यानी ब्लॉक कर देते हैं जिससे आपकी आंखों को ये डैमेज नहीं कर पाए प्लस एज यू कैन सी ये काफी स्टाइलिश भी है आपने शक टैक में भी पीयूष सर को ये ग्लासेस पहने हुए देखा होगा काफी कूल लुक है इनका ये 15 अलग-अलग कलर्स में भी आते हैं और ये काफी लाइट वेटेड है ऑन योर फेस आल्सो अगर आप अभी ये ग्लासेस खरीदते हो तो लेंस कार्ट पे फिलहाल एक काफी अच्छा ऑफर चल रहा है जिसमें अगर आप कोट डालते हो ट्राय अस तो आपको लेंस कार्ड हस्लर के ग्लासेस सिर्फ 999 में मिल जाएंगे इसके अलावा अगर आप न्यू ग्लासेस खरीदते वक्त (07:03) अपने पुराने ग्लासेस को ट्रेड करते हो तो आपको अप टू ₹5000000 में कहीं ना कहीं काफी कॉमन होते जा रहा है राइट फ्रॉम शादियां कॉरपोरेट्स टू इवन पॉलिटिशियन तक सो चलो सबसे पहले बात करते हैं शादियों की अब तक आपने सुना होगा कि वेडिंग्स में ब्राइडल मेकअप के लिए सैलो प्रोफेशनल्स को बुलाया जाता है या फिर पालने वाली दीदी को बुलाया जाता है बट अब इंडिया में कई फैमिलीज ब्राइडल मेकअप के लिए (07:47) डर्मेटोलॉजिस्ट को बुलाने लग गई है सो इस आर्टिकल में पब्लिश्ड एक केस लेते हैं एक कोचिन बेस्ड 28 साल की एनी गोंजाल्विस और एंड्रू की 2023 में शादी थी सो उन्होंने तो ऑलमोस्ट शादी के 6 महीने पहले ही बोटॉक्स और फिलर ट्रीटमेंट्स लिए थे ताकि उनको परफेक्ट सेलेब्रिटी कपल्स जैसा लुक मिले इसके लिए एनी ने तो बोटॉक्स और फिलर इंजेक्ट करवा के अपने राउंड फेस को थोड़ा सा ओवल करवाया और एंड्रू ने भी अपने बियर्ड को ग्राफ्ट किया व्हिच इज ओके बेसिकली उसने अपने पैची बियर्ड को थिक करने के लिए कुछ ऐसे बियर्ड को आर्टिफिशियल ग्रो करवाया लेकिन द मोस्ट (08:17) शॉकिंग थिंग इज कि इनकी वेडिंग में इन्होंने एक वाटर थीम्ड पार्टी भी ऑर्गेनाइज की थी जिसमें गेस्ट को वैंपायर शॉट्स दिए गए थे जिन वैंपायर शॉट्स में स्किन फिलर शॉट्स थे जो इस वेडिंग पार्टी में अटेंड करने वाले गेस्ट को भी दिए जा रहे थे है नाउ ये कोई एक सिंगल केस या एक छोटी सी सिटी में हुआ कोई केस नहीं है कई कॉस्मेटिक डॉक्टर्स के हिसाब से ये देश भर के अर्बन पॉकेट्स में बढ़ते जा रहा है वो भी इतना ज्यादा कि डॉक्टर्स का खुद कहना है कि वो ये शादियों के सीजन में काफी बिजी हो जाते हैं इनफैक्ट इस सीजन में ये प्रोसीजर 25 पर तक बढ़ जाता है चलो अब बात (08:47) करते हैं लेडीज की किटी पार्टीज की नाउ आई एम श्यर आपने लेडीज की किटी पार्टी सुनी तो होंगी लेकिन वो कितने ही टाइप्स की होती है चाहे नाश्ता वाली खाने वाली या एट द मोस्ट चलो उसमें अल्कोहल होगा लेकिन इंडिया में एक और और किट्टी पार्टी का ट्रेंड कहीं ना कहीं शुरू हो रहा है जहां पे आपको स्टार्टर्स में बोटॉक्स मिलेगा आई नो आपको यह सुनने में काफी वियर्ड लग रहा होगा लेकिन टाइम्स ऑफ इंडिया ने इस मुद्दे पे एक ग्राउंड इन्वेस्टिगेशन किया और उससे हम भी काफी शौक थे उस आर्टिकल में मेंशन है कि इंडिया के नेशनल कैपिटल दिल्ली में (09:16) इस टाइप की पार्टीज अभी से नहीं काफी सालों से होती आ रही है बेसिकली रीठ सेथी नाम की एक प्रॉमिनेंट फैशन डिजाइनर बताती है कि इन पार्टीज में फीमेल्स अपनी दूसरी फीमेल फ्रेंड्स को एक स्पेशल इनविटेशन से अपने घर कोई फार्म हाउस या कोई होटल में बुलाती है जिसके बाद यहां पे बोटॉक्स को बल्क में मंगवाया जाता है और इस ट्रीटमेंट को कॉस्ट इफेक्टिव बनवाने के लिए वो सारे लेडीज एक ही सिरिंज बोटल से ही शेयर करके अपने फेस में बोटॉक्स इंजेक्ट करवाते हैं और यह प्रोसीजर कंप्लीट होने के बाद पार्टी एज नॉर्मल चलती है यानी खाना-वाना खाया जाता है डांस वगैरह किया जाता है (09:47) जैसे नॉर्मल किटी पार्टीज होती है वैसे ही चलती है नाउ इन पार्टीज के थ्रू बोटॉक्स जितना नॉर्मल बनाया जा रहा है असल में ये उतना है नहीं प्रॉमिनेंट डर्मेटोलॉजिस्ट राजीव सेखरी बताते हैं कि इन्हीं पार्टी में दो फीमेल्स ने अपने नेक के रिंकल्स को मिटाने के लिए बोटॉक्स लिया था लेकिन इसके बाद उन्हें सफोकेशन फील हुआ और उनकी मौत हो गई लेकिन इसके बावजूद भी बोटॉक्स ऑब्सेशन कंटिन्यू ड ही है इनफैक्ट उसी टीआई की रिपोर्ट में पाया गया कि कई लेडीज ओपनली यह बताती है कि उनको तो ऐसी बोटॉक्स पार्टीज काफी वो एंजॉय करती है ऐसी पार्टीज में नाउ मूविंग ऑन टू कॉरपोरेट्स (10:18) संकेत एक गुरुग्राम बेस्ड मार्केटिंग प्रोफेशनल अपने ऑफिस मीटिंग्स के लिए मुंबई आए थे लेकिन अपने मीटिंग के कुछ दिन पहले उन्होंने डर्मेट के पास जाके अपने फेस में फिलर इंजेक्ट करवा लिए ताकि उनका फेस मीटिंग में ग्लो कर सके और उनका कॉन्फिडेंस बढ़ सके यह केस स्टडी पब्लिश था फाइनेंशियल एक्सप्रेस के इस आर्टिकल में जहां पे यह मेंशंड है कि कॉरपोरेट्स में बोटॉक्स काफी ज्यादा पॉपुलर होते जा रहा है इसी आर्टिकल में साकेत के साथ शेफाली का भी एक केस मेंशन है जो कि एक फैशन ब्रांड के सीईओ है और इनके फेस पे रिंकल्स और फाइन लाइंस थी इसीलिए उन्होंने (10:48) फिलर्स इंजेक्ट करवाए ताकि उनका अपने प्रोफेशनल लाइफ में कॉन्फिडेंस बूस्ट हो सके फाइनेंशियल एक्सप्रेस ने डॉक्टर्स से भी बात की जहां उन डॉक्टर्स ने बताया कि अभी हाल ही के इयर्स में ऐसे जॉब्स जहां जहां पे विजिबिलिटी क्रुशल है यानी आप जहां पे क्लाइंट्स को फेस कर रहे हो ऑन अ डे टू डे बेसिस जैसे कि सेल्स मैनेजमेंट वगैरह उन जॉब्स में बोटॉक्स और फिलर्स यूज करना काफी कॉमन होते जा रहा है एक और सर्वे में ये भी मालूम पड़ा कि कॉरपोरेट्स में जिन लोगों ने भी ये ट्रीटमेंट लिया उनके ऐसा करने के पीछे मोस्टली दो मोटिव होते थे एक अपने वर्क प्लेस प सबसे अच्छा (11:19) दिखना और दूसरा उनको लगता है कि इस ट्रीटमेंट से उनको ऑफिस में एक कंपटिंग एडवांटेज मिलेगा जो एट दी एंड उनको सक्सेसफुल बनाएगा नाउ कमिंग टू द फाइनल वियर्ड ट्रेंड बोटॉक्स इन पॉलिटिक्स नाउ इस वीडियो से आपको यह तो समझ में आ गया होगा कि बोटॉक्स को आमतौर पे लोग यंग और अट्रैक्टिव देखने के लिए यूज कर रहे हैं बट क्या आपको पता है कि इंडिया में पॉलिटिशियन बोटॉक्स को इसलिए भी यूज कर रहे हैं ताकि उनकी इमेज करप्शन फ्री बन सके सो कई डॉक्टर्स ने मिडडे को बताया कि उनके यहां पे काफी सारे पॉलिटिशियन आ चुके हैं जो बोटॉक्स और स्किन क्लोइंग (11:50) ट्रीटमेंट्स करवाते हैं लेकिन ये ट्रीटमेंट कोई आम ट्रीटमेंट नहीं होता है क्योंकि जब भी देश में इलेक्शन आने वाला होता है वैसे ही अचानक से पॉलिटिशियन का इन डर्मेटोलॉजिस्ट के यहां पे आना जाना एकदम से बढ़ जाता है अब आमतौर पर जाहिर सी बात है इसका पीछे का रीजन यह लगता है कि इन पॉलिटिशियन को इलेक्शंस के दौरान रैली और रोड शोज करना होता है उनको कई सारे प्रेस कॉन्फ्रेंसेस अटेंड करने होते हैं तो उसके लिए करवाया जाता है बट कुछ डॉक्टर्स ने इसके पीछे एक अलग ही रीजन बताया डॉर मोहन बताते हैं कि उनके पास एक आंध्र प्रदेश के मेंबर ऑफ पार्लियामेंट आए (12:19) जिन्होंने अपना नोज जॉब सिर्फ इसलिए किया क्योंकि वो वोट मांगते टाइम एक नेता की तरह दिखना चाहते थे ना कि किसी दादा यानी कि गुंडे की तरह इनफैक्ट एक डॉक्टर ने तो ये तक बताया कि काफी लोग उनके पास पतले दिखने के लिए भी आते हैं क्योंकि उनका यह मानना होता है कि मोटे पॉलिटिशियन को देख के लोग उनको करप्ट समझते हैं सो एनीवे इस पॉइंट से मैं सिर्फ ये बताना चाह रही थी कि हमारा जो थॉट है कि बोटॉक्स फिलर्स वगैरह ये सारी ट्रीटमेंट्स सिर्फ सेलिब्रिटीज ही कराते हैं नॉर्मल लोग नहीं करवाते आई थिंक अभी वो कहीं ना कहीं इंडिया में चेंज हो रहा है काफी ज्यादा ये (12:51) सारे ट्रीटमेंट्स इंडिया में नॉर्मलाइज होते जा रहे हैं लेकिन देखो मैं ये नहीं कह रही हूं कि आपको बोटॉक्स नहीं करवाना चाहिए या फिर बोटॉक्स एक काफी ज्यादा गलत ट्रीट ट्रीटमेंट है इनफैक्ट एक प्लास्टिक सर्जन ने 100 बोटॉक्स पेशेंट्स पे एक स्टडी कंडक्ट की थी एंड ट्रीटेड पेशेंट्स ने बताया कि ट्रीटमेंट के बाद उन्होंने एक्चुअली उनकी क्वालिटी ऑफ लाइफ एंड सेल्फ एस्टीम दोनों में एक रिमार्केटिंग तरीके से दिखता है और उसके वजह से उनको अंडर कॉन्फिडेंट फील करता है तो वो एक माइनर प्रोसीजर करवा के अगर उसको फिक्स कर देते हैं तो हो सकता है कि उनका (13:22) कॉन्फिडेंस काफी बढ़ जाए एंड नॉट ओनली दिस बोटॉक्स डिप्रेशन में भी काफी हेल्पफुल है सो व्हाट आई मीन टू से इज कि बोटॉक्स ट्रीट नेसेसरीली गलत नहीं है बट जितना इस वीडियो को बनाते वक्त मैंने रिसर्च किया और इस ट्रीटमेंट को समझा उसके हिसाब से आपको बोटॉक्स करवाते समय कुछ बेसिक पर बहुत ही इंपॉर्टेंट चीजों को ध्यान देना चाहिए अच्छे से फॉलो करना चाहिए क्योंकि द प्रॉब्लम विद बोटॉक्स ट्रीटमेंट इन इंडिया इज कि इंडिया में काफी सारे इल्लीगल सैलो या फिर ऐसे छोटे-मोटे पार्लर्स वगैरह हैं जहां पे फेक डॉक्टर्स ये ट्रीटमेंट करवाते (13:52) हैं अंडर एब्सलूट अनहाइजीनिक कंडीशंस सो देखो पहली चीज तो यह है कि डू इट एट द राइट प्लेस विद द राइट प्रोडक्ट्स सो इस आर्टिकल में पब्लिश्ड रेखा चौधरी का केस लेते हैं उनको अपने आइज के पास मौजूद रिंकल्स के लिए बोटॉक्स करवाना था लेकिन रेखा ने एक्सपर्ट डॉक्टर्स जो कंपेरटिवली एक्सपेंसिव होते हैं उनके पास जाकर ट्रीटमेंट लेने की बजाय अपने पास के एक लोकल स्किन क्लिनिक में सिर्फ 8000 यानी कि बाकी सारे क्लिनिक से आधे से भी कम फीज में ये ट्रीटमेंट करवा लिया जिसके वजह से ट्रीटमेंट लेने के तुरंत बाद उनकी आईलिड्स नीचे गिरने लग गई ड्रुपिंग होने लग गई और (14:25) बोटॉक्स लेने के बावजूद उनके रिंकल्स भी नहीं मिटे इसके बाद जब उन्होंने दूसरे डर्मेट को कंसल्ट किया तब उन्हें पता चला कि उनके ट्रीटमेंट में काफी लो क्वालिटी के चाइनीज प्रोडक्ट्स यूज़ किए हुए थे कई कंपनी एक्सपर्ट्स ने बताया कि 100 यूनिट बोटॉक्स की प्राइस ₹ 16500 होती है और ओरिजिनल बोटॉक्स का ट्रायल पैक ही ₹ 6500 से स्टार्ट होता है लेकिन ऑन द अदर हैंड ये चाइनीज बोटॉक्स के 100 यूनिट्स आपको सिर्फ 3000 से 5000 में मिल जाते हैं और इसीलिए प्लीज इन नामों से बिकने वाले प्रोडक्ट से बचे जिनके लेबल पर मोस्टली मेड इन चाइना लिखा होगा और चाइनीज ने (14:59) उनमें कुछ-कुछ इंस्क्राइनॉक्स के ओवरडोज से आपको ब्रीदिंग डिफिकल्टी पैरालिसिस और रेयर केसेस में इवन डेथ तक हो सकती है इन फैक्ट इंडिया टुडे ने इस पर एक स्टिंग ऑपरेशन भी किया था जिसमें पाया गया कि चाइना से यह लो क्वालिटी बोटॉक्स अब से नहीं काफी सालों से इंडिया में चीपर रेट्स में सर्कुलेट हो रहा है जिसका आपको ध्यान देना है आप कौन-कौन मतलब डॉक्टर है को रेफ दे सकते हैं जो आप करते हैं करते यज करते हैं े डॉक्टर करते हैं नार दिल्ली में मुंबई में पुणे में हैदराबाद ब आल्सो सोशल मीडिया प रिकमेंडेशंस देखते (15:46) हुए किसी भी अनलाइसेंस्ड ब्यूटी या फिर कॉस्मेटिक साल में ये ट्रीटमेंट बिल्कुल भी मत करवाना आजकल कई सारे लोकल सालास ब्यूटी पार्लर्स ओपनली काफी सस्ते में ये बोटॉक्स ट्रीटमेंट्स ऑफर कर रहे हैं बट ये इल्लीगल होते हैं क्योंकि ये सालब बिना किसी एक्सपर्टीज के ये ट्रीटमेंट्स करवाते हैं इसीलिए बोटॉक्स ट्रीटमेंट को ऑप्ट करते वक्त उस डॉक्टर के क्वालिफिकेशन और एक्सपीरियंस का जरूर देखना सो दैट इज इट फॉर टुडे लेकिन मैं डेफिनेटली जानना चाहती हूं कि आपका इन ट्रीटमेंट्स के बारे में क्या ख्याल है क्या आपके हिसाब से ये बोटॉक्स और लिप फिलर्स हमें करवाना चाहिए (16:15) बिकॉज इससे हमारा कॉन्फिडेंस बूस्ट हो सकता है आई मीन अगर एक छोटे से सर्जिकल प्रोसीजर से अगर आपका कॉन्फिडेंस बूस्ट हो सकता है आप बेटर फील कर सकते हो अपने बारे में अ तो आपका इसके बारे में क्या ख्याल है क्या इस चीज की वजह से हमें ये ट्रीटमेंट करवाना चाहिए या फिर आप ये मान ते हो कि ये प्रोसीजर बिल्कुल भी नहीं करवाना चाहिए आफ्टर ऑल जैसी बॉडी हमें मिली है हमें उसमें बिल्कुल छेड़छाड़ नहीं करना चाहिए सो आपके जो भी ओपिनियन है प्लीज मेरे साथ नीचे कमेंट सेक्शन में शेयर करना और इस वीडियो को जितना हो सके अपने फ्रेंड्स और फैमिली में शेयर करना (16:40) आल्सो हां डू नॉट फॉरगेट टू चेक आउट लेंस कार्ड ग्लासेस अगर आप कोड यूज करते हो ट्रायस तो आपको हसला सीरीज की क्लासेस सिर्फ 999 में मिल जाएंगे लिंक इज इन द डिस्क्रिप्शन जय हिंद
Transcript: (00:00) कॉर्पोरेट अफेयर्स, यानी किसी कॉर्पोरेट कंपनी में अपने कोलीग या फिर बॉस के साथ एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर के ऐसे कई वियर्ड केसेस सुनने मिल रहे हैं। ये ओय में मैं क्या होटल में क्या करने आई हो? ऑफिस जाना था तुम्हें। क्या कर रही है तू यहां पे? किसके साथ आई? आइए किसके साथ? हाथ नीचे। किसके साथ आई है? हाथ नीचे। किसी के भी साथ आई हूं। तुझे क्या मतलब? अरे तेरे को तो मैं बैंड बजाऊंगी मैंने। तू क्या जानता है? इसके और यार इसके आधी उम्र की लड़की है ये। रात को तू इसके साथ वीडियो शूट करता है। ये सारी चीज़े क्या है पापा? आप यह सब (00:32) साल 2020 गुड़गांव में एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर ने अपने प्रेग्नेंट वाइफ को कोविड लॉकडाउन के पहले उसके घर इंदौर में छोड़ा और वो वापस गुड़गांव आ गया। लेकिन इसके बाद 2 साल तक उसने अपनी बीवी और उसके न्यूबर्न बच्चे से कोई कांटेक्ट ही नहीं किया। इससे परेशान होकर जब वाइफ वापस गुड़गांव आई तब उसे पता चला कि हस्बैंड ने तो उसके ऑफिस की ही एक लड़की से शादी कर ली। दोनों साथ में रह भी रहे हैं और उन्हें लॉकडाउन के बाद तो एक बच्चा भी हो गया था। मुझे कोविड हो गया है और मैं जल्दी मरने वाला हूं। यह शब्द बोल के मुंबई में एक आदमी ने अपने वाइफ का कॉल कट (01:07) कर दिया। कई दिन परेशान होने के बाद यहां वहां ढूंढने के बाद वाइफ ने फाइनली मिसिंग कंप्लेंट फाइल की। तब फिर पुलिस इन्वेस्टिगेशन से पता चला कि वो आदमी तो मरने का बहाना बना के अपने कोलीग के साथ इंदौर भाग गया था। उसका एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर चल रहा था और इसीलिए उसे अपनी बीवी से कैसे भी करके पीछा छुड़वाना था। लेकिन इनसे भी ज्यादा खतरनाक केसेस हो चुके हैं जहां लोगों ने लिटरली मर्डर जैसे क्राइम्स कमिट कर दिए हैं सिर्फ अपने एक्स्ट्रा मैरिटल ऑफिस अफेयर्स के लिए। चेन्नई के एक पुलिस ऑफिसर ने अपने कोलीग के लिए अपनी बीवी का मर्डर कर दिया। बेंगलुरु में (01:41) हारिणी नाम की एक औरत ने उसके कोवर्कर के साथ अपना एक्स्ट्रामाइटल अफेयर खत्म करने की कोशिश की। तो उसके कोवर्कर ने जिसका नाम यशस था उसने हरिनी का ही मर्डर कर दिया। और सोनम रघुवंशी वाला हनीमून मर्डर केस तो हम सब जानते हैं। इसमें भी राज जो सोनम का बॉयफ्रेंड था वो एक्चुअली में उसका ऑफिस एंप्लई था। जिसने सोनम के साथ मिलकर राजा का यानी कि उसके हस्बैंड का मर्डर कर दिया। एंड ऐसे सिर्फ इक्केदुक्के केसेस नहीं है। इनका ऑफिशियल स्ट्स भी काफी शॉकिंग है। इकोनमिक टाइम्स में पब्लिश्ड एक सर्वे के हिसाब से इंडिया में 34% एंप्लाइजस का ऑफिस अफेयर रह चुका है। (02:16) 34% यानी हर तीन में से एक इंसान का अपनी जिंदगी में कभी ना कभी ऑफिस में एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर रह चुका है। व्हिच इज अ वेरी कंसर्निंग फिगर। यह है ग्लैंडन जो कि टेंडर और बंबल जैसी ही एक पॉपुलर डेटिंग ऐप है। मगर सिर्फ शादीशुदा लोगों के लिए। एंड दिसंबर 2024 में ग्लैंडन ने अनाउंस किया कि इंडिया में उनके ऐप के यूज़र्स में एक मैसिव 270% का इनक्रीस हुआ है। व्हिच इज अगेन अ ह्यूज फिगर। इसी ऐप के सर्वे से पता चला कि 25% इंडियंस जो कॉर्पोरेट्स में काम कर रहे हैं वो अपने स्पाउस को चीट कर रहे हैं। एंड सबसे अनफॉर्चूनेट बात यह है कि (02:56) इन्हें इसका कोई गिल्ट भी नहीं है। सर्वे में 71% वुमेन और 61% मेल्स ने कहा कि वो एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर्स को कोई इमोरल बात नहीं मानते हैं। व्हिच क्लियरली शोज़ कि हमारी सोसाइटी धीरे-धीरे बहुत ज्यादा बदल चुकी है। एंड डाटा की क्या जरूरत है? सोशल मीडिया पे तो ऐसे वीडियोस की आपको भरमार मिल जाएगी जहां एक पार्टनर को चीट करते हुए पकड़ा गया है एंड दूसरा पार्टनर चिल्ला रहा है। घूमली घूमली देख लिया मैंने। क्या हो गया तू? पीछे हो नंगे हाथ पकड़ा ना चल चल। नंगे पकड़ेगा तुझे। क्या नंगे हाथ पकड़ेगा? हैप्पी बर्थडे। क्या कर रहे हो अंकल? बर्थडे। हैप्पी बर्थडे। (03:32) हैप्पी बर्थडे। मेरा शहर है ये। ये बच्चे का बाप है और ये आज दूसरी शादी कर रहा है। मुझे बोला। मैं तीन दिन के लिए हैदराबाद जा रहा था। हां ये दुनिया कान हो गया। खत्म हो गया। सारा कुछ खत्म हो गया। ये हमारी पत्नी है। शादी मैं पिया इनसे। एक मिनट एक मिनट। शादी हम थी इनसे और आप आ रहे हो यहां डेली। 2020 से चल रहा है। मेरे ऊपर 2020 से चल रहा है। सो आखिर इंडिया में सडनली ऑफिस अफेयर्स इतनी तेजी से कैसे बढ़ रहे हैं? क्या ऐसी कोई गलतियां हैं जो एक पार्टनर कर रहा है रिलेशनशिप में या कर रही है? जिस वजह से दूसरा पार्टनर मजबूर (04:06) हो जा रहा है एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर करने के लिए? देखो सबसे पहले तो एन अफेयर इज नेवर द स्यूशन एंड अफेयर इज नेवर जस्टिफाइड। लेकिन हां इस सब्जेक्ट पर डेज ऑफ रिसर्च करने के बाद हमें कुछ ऐसे मिस्टेक्स मिले हैं जो कपल्स जाने अनजाने में कर रहे हैं। लेकिन दीज़ मिस्टेक्स आर लिटरली किलिंग देयर मैरिज। इसके अलावा कॉर्पोरेट कंपनी के एंप्लाइजस का वर्क एनवायरमेंट भी एक मेजर रीजन है। इनफैक्ट एक सर्वे से पता चला कि मेजॉरिटी ऑफिस अफेयर्स के पीछे का रीजन है ऑफिस में होने वाली वाइल्ड पार्टीज। एस्पेशली आईटी और बीपीओ सेक्टर्स में जहां (04:44) नाइट शिफ्ट्स या फिर ग्रेवयार्ड शिफ्ट्स बहुत ज्यादा कॉमन है। सो एक्चुअली इन अनकन्वेंशनल शिफ्ट टाइमिंग्स जैसे कि रात के ग्रेवयार्ड शिफ्ट्स में होता क्या है कि टाइमिंग्स की वजह से मेजॉरिटी एंप्लाइजज़ अपने सोशल सर्कल से कट ऑफ हो जाते हैं। जिस वजह से ऐसा देखा गया है कि कई कॉर्पोरेट एंप्लाइजज़ ऐसे पार्टीज अटेंड करते हैं जिन्हें कहा जा रहा है वाइल्ड पार्टीज। अब यह पार्टीज कंपनी ने ही ऑर्गेनाइज किए हो सकते हैं या फिर कोई एक कोलीग या फ्रेंड ऑर्गेनाइज किया हो सकता है। मगर यहां सबसे कंसर्निंग बात यह है कि अक्सर इन पार्टीज में फिजिकल रिलेशनशिप्स (05:15) बनते हैं या फिर कैजुअल हुकअप्स होते हैं। टेलीग्राफ ने इंडियन मेट्रो सिटीज में एक सर्वे किया था तो उससे पता चला कि मुंबई के 89% सर्वेड एंप्लाइजस और बेंगलुरु के 74% एंप्लाइजस ने कहा कि हां वह ऐसी पार्टीज अटेंड करते हैं। एंड हां इन पार्टीज में फिजिकल रिलेशनशिप्स या फिर कैजुअल हुकप्स होते हैं। एंड लगभग 19% लोगों ने यह भी बताया कि हां ऐसे ही ऑफिस पार्टीज की वजह से ही उनके ऑफिस अफेयर्स की शुरुआत हुई थी। इनफैक्ट जनरल ऑफ मैरिज एंड फैमिली के एक स्टडी ने तो यह तक सीधा कह दिया कि नाइट शिफ्ट्स किसी भी मैरिटल रिलेशनशिप्स की लॉन्ग टर्म हैप्पीनेस के (05:51) लिए टॉक्सिक है। क्योंकि उनका ऑब्जरवेशन था कि जिन नाइट शिफ्ट करने वाले कपल्स की शादी को 5 साल से कम हुए थे और उन्हें एक बच्चा भी था वो कपल्स डिवोर्स लेने के लिए सिक्स टाइम ज्यादा लाइकली थे एज कंपेयर टू वो कपल्स जो डे शिफ्ट में काम करते थे। सोचो सिर्फ शिफ्ट के टाइमिंग्स एक अच्छे खासे मैरिज को डिवोर्स तक ला सकता है। एंड यह नाइट शिफ्ट्स एक ग्लोबल प्रॉब्लम है। हां। क्लेयर रीड जो कि यूके की एक लॉ फॉर्म में सीनियर एसोसिएट हैं। उन्होंने बताया कि उनके यहां जितने भी कपल्स नाइट शिफ्ट की वजह से डिवोर्स लेने आते थे उनमें से 80% डिवोर्स वाले कपल्स इनफिडिटी (06:28) यानी अफेयर्स की वजह से ही डिवोर्स ले रहे थे। बट ऑफ कोर्स इंडियन एंप्लाइजस का सिर्फ एक ही परसेंटेज नाइट शिफ्ट्स में काम करता होगा। मेजॉरिटी एंप्लाइजस तो नॉर्मल डे शिफ्ट्स में ही काम करते हैं। राइट? सो, ऐसे में इन एंप्लाइजस के अफेयर्स के पीछे क्या रीज़ंस हो सकते हैं? वेल, एक बहुत ही इंटरेस्टिंग डाटा सामने आया है इकोनॉमिक टाइम्स के सर्वे में। यह बात पता चली कि 55% वर्क प्लेस अफेयर्स एंप्लई और बॉस के बीच में हो रहे हैं। एंड यही है हमारा रीज़न नंबर टू। अफेयर फॉर करियर ग्रोथ। आज इंडियन जॉब मार्केट इज एट इट्स वर्स्ट। (07:03) 47% प्रोफेशनल्स उनकी करंट सैलरी से बिल्कुल भी खुश नहीं है। कई लोगों को एजुकेशन लोन भरने में तक प्रॉब्लम्स आ रहे हैं। एंड पिछले 3 सालों में इंडियन बैंक्स के स्टूडेंट्स जिन्होंने लोनस लिए लेकिन अब वो डिफॉल्ट कर चुके हैं। इनकी मात्रा 142% से बढ़ चुकी है। 50% इंडियंस को पिछले साल लिए लोन की ईएमआई भरने में प्रॉब्लम्स हो रही है। एंड द स्केरियर्स डाटा ऑफ ऑल। 75% इंडियंस के पास कोई इमरजेंसी फंड है ही नहीं। यानी अगर किसी दिन अचानक से उनकी जॉब चली गई तो उनके सर्वाइवल पर एक बड़ा क्वेश्चन मार्क आ जाएगा। 75% इंडिया जैसे एक 140 करोड़ की आबादी वाले (07:40) देश के लिए यह एक बहुत बड़ा नंबर है। वो भी एक ऐसे दौर में जहां छोटे ऑफिसिसेस से लेकर टॉप मल्टीीनेशनल कंपनीज में मास लेऑफ्स जारी हैं। ऑलमोस्ट 40,000 एम्प्लाइजस लॉस्ट देयर जॉब्स। मोर देन 10,000 आर्टिस्ट्स हैव लॉस्ट देयर जॉब्स ओवरनाइट इन इंडिया नाउ फेसिंग फाइनेंसियल डिस्ट्रेस। बिटवीन 60 एंड 80,000 वर्कर्स इन इंडिया लॉस्ट देयर जॉब्स एंड इट्स नॉट ओवर येट। सो अब ऐसे में क्या मुझे सही में प्रूफ करने की जरूरत है कि आखिर क्यों 55% वर्क प्लेस अफेयर्स एंप्लाइजस का उनके बॉसेस के साथ हो रहा है? एक रिसर्च फर्म साइनोवेट ने मुंबई, दिल्ली, पुणे जैसे मेट्रो सिटीज (08:16) के 500 कंपनीज में जब सर्वे किया उस सर्वे में 44% रिस्पॉनडेंट्स ने एग्री किया कि हां ऑफिस अफेयर उनके करियर में ग्रोथ हासिल करने का सबसे क्विकेस्ट तरीका है। इनफैक्ट 30% यानी हर 10 में से तीन एंप्लाइजस ने तो यह तक एग्री किया कि हां ऑफिस अफेयर की वजह से ही उन्हें जल्दी हक्स और प्रमोशंस मिले हैं। यह केस देखना मुंबई की एक डेवलपमेंट मैनेजर रंजना ने हिंदुस्तान टाइम्स को बताया कि उनकी शादी को 7 साल हो चुके हैं और उन्हें एक 4 साल का बच्चा भी है। लेकिन फिर भी वो अपने ऑफिस में एक जूनियर के साथ एक्स्ट्रा मैरिटल रिलेशनशिप में है। अब इस अफेयर का (08:52) जस्टिफिकेशन उन्होंने यह दिया कि वो और उसके हस्बैंड सुबह 8:00 बजे निकल जाते हैं और रात को लेट 9:00 बजे घर आते हैं। सो ऐसे में उनके पास एक दूसरे से बात करने का टाइम ही कहां है? इसीलिए उनका मानना है कि अगर उनके ऑफिस अफेयर से उन्हें इमोशनल फुलफिलमेंट मिल रहा है और उनके जूनियर को इससे करियर में ग्रोथ मिल रहा है तो उस अफेयर में गलत क्या है? अब इनका स्टेटमेंट काफी डिबेटेबल है। मेरे तो पल्ले में नहीं आ रहा लेकिन उन्होंने कॉर्पोरेट अफेयर्स का अगला इंपॉर्टेंट रीजन हाईलाइट किया जिससे आज कई इंडियंस अफेयर्स करने के लिए ऑलमोस्ट वनरेबल हो चुके हैं। व्हिच इज (09:24) ओवरवर्क। आज इंडिया में 70% एम्प्लाइजस ओवरवर्क्ड फील कर रहे हैं। इंडिया के आईटी सेक्टर का ही एग्जांपल ले लो। वहां तो हर चार में से एक एंप्लई हफ्ते में 70 आवर्स काम करता है। मतलब ऑलमोस्ट 10 से 11 घंटे एवरीडे। ऊपर से इंडिया का एवरेज ऑफिस कम्यूट टाइम भी 55 मिनट्स है। मतलब एक एंप्लई के करीब 12 घंटे तो ऑफिस के लिए ही चले जाते हैं। अब मिनिमम 7 घंटे तो किसी को भी सोना पड़ेगा। दो से 3 घंटे ब्रेकफास्ट, डिनर वगैरह के लिए निकाल लो। सो क्या इंडिया में एक कपल को आपस में ठीक से बात करने का भी कोई टाइम मिलता है क्या एक कपल को एक (09:57) दूसरे को समझने का एक दूसरे से शेयर करने का एक दूसरे को इमोशनली सपोर्ट करने का वाकई में टाइम मिलता भी है एंड नहीं मैं इसके वजह से होने वाले अफेयर्स को बिल्कुल भी जस्टिफाई नहीं कर रही हूं लेकिन जब तक हम प्रॉब्लम्स को अच्छे से समझेंगे ही नहीं तब इसके सशंस कैसे निकलेंगे अब ऑफिस स्ट्रेस ओवरवर्क एंड वियर्ड टाइमिंग्स में आप ऐड कर दो अरेंज्ड मैरिज सेटअप के एडेड इशज़ देखो हर रिलेशनशिप को स्टंग बनाने के लिए यह छह पिलर्स जरूरी है। हाई कॉर्पोरेट स्ट्रेस एनवायरमेंट, वर्क स्ेड्यूल एंड ओवरवर्क की वजह से रिलेशनशिप्स में ट्रस्ट (10:28) एंड कम्युनिकेशन इशज़ कैसे हो रहे हैं वो तो हमने डिस्कस कर लिया। मगर इंडिया के अरेंज्ड मैरिज सेटअप में यूजुअली शेयर वैल्यूस और गोल्स भी कॉम्प्रोमाइज हो जाते हैं। ऐशली मेडिसन जो भी ग्लडन की तरह ही एक एक्स्ट्रा मैरिटल डेटिंग ऐप है। उन्होंने जब अपने 75,000 इंडियन यूज़र्स का सर्वे किया तब उसमें सामने आया कि 75,000 यूज़र्स में से 80% यूज़र्स की अरेंज्ड मैरिज हुई थी। मतलब उस ऐप में जितने भी लोगों ने लॉग इन किया था एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर करने के लिए उसमें से 80% यूज़र्स की अरेंज्ड मैरिजेस हुई थी। जाहिर है यह कोई कोइंसिडेंस नहीं है। यह डाटा हमारी (11:03) सोसाइटी की सबसे बड़ी कमजोरी को दर्शाता है। नहीं, अरेंज मैरिजेस में कोई प्रॉब्लम नहीं है। आज भी इंडिया में होने वाली शादियों में से 93% अरेंज्ड ही है। व्हिच इज फाइन। प्रॉब्लम यह है कि द हिंदू की एक रिपोर्ट के हिसाब से हर 10 में से चार लड़कियों का उनकी शादी में कोई से ही नहीं होता है। वो किससे शादी करेंगे, कब शादी करेंगी, यह सब कुछ उनके पेरेंट्स उनके लिए डिसाइड करते हैं और इसीलिए 2010 के एक दूसरे रिपोर्ट के हिसाब से इंडिया में 78% लड़कियां ऐसी थी जो अपने हस्बैंड को शादी के बस 1 महीने पहले से ही जानती थी। और उसमें से भी यह ध्यान से सुनना 78% में से (11:40) भी 66% औरतें तो ऐसी थी जो अपने हस्बैंड से पहली बार सीधा शादी के दिन पे ही मिल रही थी। अब यह डाटा पुराना जरूर है लेकिन इसी के वजह से आज भी ऐसे कई कपल्स हैं जो 10 साल 20 साल से शादीशुदा तो हैं लेकिन वो एक दूसरे से बिल्कुल भी कनेक्टेड नहीं फील करते हैं। वो एक दूसरे से प्यार नहीं करते हैं। वो एक दूसरे के फर्स्ट चॉइस नहीं है। हां, इतने सालों में उन्होंने साथ रहना सीख लिया है लेकिन उनके इंटरेस्ट, उनके गोल्स एक दूसरे से बिल्कुल भी अलाइन नहीं करते हैं। अब अगर आप एक रनाउंड साइकोलॉजिस्ट डॉक्टर जॉन गॉटमैन की एक स्टडी देखोगे जिसमें (12:15) उन्होंने लॉन्ग टर्म मैरिज यानी कि 25 से 50 साल की शादी के सक्सेस को पता लगाने के लिए 156 मिडिल और ओल्ड एज्ड कपल्स को स्टडी किया। इस स्टडी में उन्होंने सभी कपल्स से पूछा कि इतने सालों तक एक हैप्पी मैरिज के लिए उनका सोर्स ऑफ हैप्पीनेस क्या था? तो ऑलमोस्ट सभी कपल्स ने मेजरली यह चीजें लिस्ट की। इस लिस्ट में अगर आप देखोगे तो ज्यादातर एक्टिविटीज वही है जो उन्होंने साथ में मिलके की थी। जैसे थिंग्स डन टुगेदर रिसेंटली प्लांस फॉर द फ्यूचर और उनके ड्रीम्स। इन्हें ही तो शेयर वैल्यूस और गोल्स कहते हैं जो दोनों भी पार्टनर्स मिलके उनके लाइफ के लिए (12:51) प्लान करते हैं। और फिर उन्हें अचीव करते हैं साथ में मिलकर। इनफैक्ट अमेरिकनंस जिनके मैरिजेस का ट्रैक रिकॉर्ड कुछ खास नहीं है। वहां पर भी जब कुछ सक्सेसफुल कपल्स को स्टडी किया गया तो उनमें से भी 64% कपल्स ने यही बताया कि उनकी मैरिज सिर्फ और सिर्फ एक ही चीज की वजह से टिकी रही। शेयरर्ड इंटरेस्ट यानी कि ऐसे कई चीजें थी जो उन्हें हमेशा साथ में करने में मजा आता था और यह उनके लिए एक दूसरे की तरफ कोई ड्यूटी या रिस्पांसिबिलिटी नहीं थी बल्कि यह उनका पैशन था। बट इंडिया में कपल्स का कॉमन इंटरेस्ट या फिर कंपैटिबिलिटी कहां देखी जाती है? शादी के (13:28) मेजर फैक्टर्स तो सिर्फ कास्ट और इनकम स्टेटस होता है। बट वहीं पे अक्सर वर्क स्पेस में क्या होता है कि सिर्फ क्योंकि नेचर ऑफ वर्क सिमिलर है तो ज्यादा चांसेस हो जाते हैं कि किसी भी इंसान का उसके कोलीग के साथ थॉट ज्यादा मैच करे। उन्हें सिमिलर काम करने में मजा आए और उनका गोल्स, उनके विज़न भी एक दूसरे के साथ ज्यादा अलाइन हो। इसीलिए एक सर्वे में 50% कॉर्पोरेट एंप्लाइजस ने बताया कि वो उनके साथ ज्यादा अट्रैक्टेड फील करते हैं जिनके जॉब्स उनके जॉब्स के साथ सिमिलर हो। बट रीजंस जो भी हो 100 बात की एक बात है कि एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर्स घर बर्बाद कर (14:03) देते हैं। परिवार तोड़ देते हैं। कपल के मेंटल हेल्थ पर असर तो पड़ता ही है। लेकिन अगर ऐसे रिलेशनशिप्स में बच्चे भी हो जाए तो अपने पेरेंट्स के ऐसे ब्रोकन मैरिजेस की वजह से बच्चों को जिंदगी भर का ट्रामा हो सकता है। स्ट्रेस, एंग्जायटी, डिप्रेशन ऐसे कई केसेस हैं जहां मां-बाप के एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर्स या फिर डिवोर्सेज की वजह से उनके बच्चों ने गलत कदम उठा लिए हैं। सो अब ऐसे में इसके सलूशंस क्या हो सकते हैं? वेल, कुछ ऐसे साइंटिफिक टेक्निक्स हैं जिस पर कई साइकोलॉजिस्ट और रिलेशनशिप काउंसलर्स की एकता है कि राय है कि हां यह (14:39) टेक्निक्स एक हेल्दी रिलेशनशिप मेंटेन करने के लिए या फिर एक ब्रोकन मैरिज को फिक्स करने के लिए डेफिनेटली काम करती है। सबसे पहला है चैटमैनस फाइव लव लैंग्वेज। 1992 में एंथ्रोपोलॉजिस्ट और मैरिज काउंसलर गैरी चैटमैन ने द फाइव लव लैंग्वेज स्टडी को पब्लिश किया जिसमें उन्होंने पांच ऐसे तरीके बताएं जिससे कपल्स अपने रिलेशनशिप के स्पार्क को मेंटेन रख सकते हैं। पहला है वर्ड्स ऑफ अमेशन यानी रेगुलर अप्रिसिएशंस करना, रोमांटिक टॉक्स करना एक्सट्रा। दूसरा है क्वालिटी टाइम एव्री वीक, एव्री मंथ एंड एव्री ईयर यानी अपने पार्टनर के साथ डेट (15:13) नाइट्स, स्टेशंस या फिर लॉन्ग ट्रिप्स प्लान करना। तीसरा है गिफ्ट्स। अब इसमें ऐसा जरूरी नहीं है कि गिफ्ट्स बहुत ही एक्सपेंसिव हो पर ऐसी चीजें जिससे आपका पार्टनर एप्रिशिएटेड फील करें। चौथा है एक्ट्स ऑफ सर्विस। यह काफी लोगों का लव लैंग्वेज भी होता है जहां एक पार्टनर दूसरे पार्टनर के लिए कुकिंग हो गया, मसाज या ऐसा उनका कोई भी काम उनके बोले बिना करके उन्हें रिस्पेक्टेड और स्पेशल फील करवाता है। एंड लास्टली फिजिकल टच। अच्छा फिजिकल टच में भी एक सर्वे ने एक इंटरेस्टिंग ऑब्जरवेशन नोट किया। कपल्स जो ऑन एन एवरेज वीक में तीन बार फिजिकली (15:46) इंटिमेट होते थे, उनके रिलेशनशिप के सक्सेस के चांसेस हायर थे, एज़ कंपेयर टू अदर कपल्स। बट अगेन इंडिया में अनफॉर्चुनेटली कई रीज़ंस की वजह से जैसे फर्स्ट ऑफ ऑल योर सेक्स इज़ अ टैबू। देन स्टेइंग विद इनलॉज़ या फिर बच्चों की वजह से या इन जनरल लाइफस्टाइल रीजंस एंड मोनोटोनी के वजह से कपल्स में फिजिकल अट्रैक्शन ओवर अ पीरियड ऑफ टाइम बहुत कम हो जाता है। इनफैक्ट यही रीज़न हो सकता है कि आज ऑफिस अफेयर्स होने का सिक्स्थ मेजर रीज़न इज लैक ऑफ फिजिकल इंटिमेसी विथ स्पाउस। अगेन यह बिल्कुल भी जस्टिफाई नहीं करता एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर को। बट दिस (16:22) इज जस्ट समथिंग टू वर्क ऑन। एक और अच्छी टेक्निक है जो कुछ डॉक्टर्स सजेस्ट करते हैं वि इज एस्टैब्लिशिंग नो फोन ज़ोंस। एक न्यूयॉर्क बेस्ड मैरिज कोच पीटर मैकफेदन ने बताया कि उन्होंने 18 सालों में 5000 कपल्स को ट्रीट किया है और बहुत सारे कपल्स का यही कहना होता है कि आई विश ही और शी वुड नॉट लुक एट द फोन व्हेन आई एम टॉकिंग टू हिम। इसीलिए पीटर के हिसाब से इसका एक ही सशन है डिक्लेअ बेड्स एस नो फोन ज़ोंस। ताकि अभी के हेक्टिक वर्क स्ेड्यूल्स में एटलीस्ट सोने से पहले कपल्स आपस में बात कर सकें। उनको कुछ पलों की प्राइवेसी मिल सके। बट हां एक चीज मैं (16:57) कहना चाहूंगी डेफिनेटली मैं कोई रिलेशनशिप एक्सपर्ट नहीं हूं। साइकोलॉजिस्ट नहीं हूं। डॉक्टर नहीं हूं। बट हां एक बात फॉर श्योर है। अगर कोई भी कपल अपने रिलेशनशिप में स्ट्रगल कर रहा है तो उन्हें कपल थेरेपीस डेफिनेटली लेनी चाहिए। हमारे देश में कई चीजों की तरह यह भी एक बहुत बड़ा टैबू है। लोग कहते हैं कि घर की बात घर में ही रहनी चाहिए। बाहर वालों को क्यों बताना है? बट अभी यह जमाना बदल चुका है। डॉक्टर्स के सामने अपने कंसर्न्स को शेयर करके रिलेशनशिप काउंसलर्स या फिर कोचेस से बात करके एक हेल्दी डिस्कशन करके आपकी मैरिज काफी हद तक इंप्रूव हो सकती है। एंड (17:31) फाइनली सबसे पावरफुल सलूशन है सही पार्टनर चूज़ करना एंड फिर उनके साथ ग्रो करना, कम्युनिकेट करना और एक मीनिंगफुल रिलेशनशिप को बिल्ड करना। देखो आपकी जिंदगी का सबसे इंपॉर्टेंट फैसला जो आप लोगे वो है कि आप किसके साथ अपना फ्यूचर शेयर करना चाहते हो। मोस्ट स्पाउस फटास्टिक क्योंकि यह कोई छोटी इन्वेस्टमेंट नहीं है। यह आपकी पूरी लाइफ का फाउंडेशन है। इसमें आप वन पर्सन का भी कॉम्प्रोमाइज अफोर्ड ही नहीं कर सकते हो। आपको अपने पार्टनर की स्ट्रेंथ ही नहीं, उनकी सभी कमजोरियां, सभी खामियां भी अच्छे से पता होनी चाहिए। एंड हां, अ परफेक्ट पार्टनर (18:17) इज अ मिथ। लॉन्ग टर्म रिलेशनशिप्स तब बनती है जब दो लोग फ्लॉस के बावजूद एक दूसरे को एक्सेप्ट करने को और एक दूसरे के लिए ग्रो करने को तैयार होते हैं। आफ्टर ऑल रिलेशनशिप्स में परफेक्शन नहीं प्रोग्रेशन मैटर करता है। होप दिस हेल्प्स। अगर आपको ऐसे वीडियोस पसंद आते हैं तो आप मेरा यह वाला वीडियो भी चेक आउट कर सकते हो। मिलते हैं अगले वीडियो में। तब तक के लिए जय हिंद।
Transcript: (00:00) ओ के इस बैग का प्राइस ₹ लाख g का यह बैग लगभग ₹ लाख फें का यह फर कोट भी 6.5 लाख और हज के स्पेशली क्राफ्टेड बैग का प्राइस सिर्फ ₹1 करोड़ इनफैक्ट दुनिया का सबसे महंगा बैग भी हर्ज बकिन का ही है जिसका प्राइस 45 करोड़ है इतने में तो मुंबई में 3 बीएच के फ्लैट आ जाएगा लेकिन माय क्वेश्चन इज ये सारे प्रोडक्ट्स इतने एक्सपेंसिव क्यों होते हैं वेल क्योंकि हम इंसानों की ही तरह इन बैग्स का भी एक टाइम पर एक दिल हुआ आ करता था जो हमारी ही तरह धड़कता था वो भी इमोशंस फील कर सकते थे उन्हें भी हमारी तरह दर्द होता था क्योंकि ये सारे बैग्स एक टाइम पर मासूम जानवर थे (00:40) जिन्हें पिंजर में हफ्तों महीनों कैद कर कर रखा जाता था सिर्फ ताकि हम में से कुछ बहुत ही अमीर लोग इनकी चमड़ से बने बैग्स पहनकर हमारे सामने अपनी अमीरिका और हां डोंट वरी अगर मेरी तरह आपका भी दिल बहुत ही कमजोर है आप एनिमल क्रुएलिटी सींस नहीं देख सकते हो तो डोंट वरी इस वीडियो में हमने कोई भी ऐसे सींस नहीं लिए है जो आपको अनकंफर्ट बल बना दे लेकिन हां आज का ये वीडियो उन सब तक पहुंचना जरूरी है जो ये लग्जरी प्रोडक्ट्स खरीदते हैं इनफैक्ट लग्जरी क्या हम जैसे आम लोग भी जब कोई भी लेदर के बेल्ट्स शूज वगैरह खरीदते हैं लड़कियां मेकअप ब्रशस खरीदती है हमारी (01:14) मम्मी आं कारपेट्स खरीदती है लेकिन हम यह नहीं जानते कि हमारे वजह से भी जाने-अनजाने में ही सही बड़ ये मासूम जानवरों की जान जा रही है हर साल रैबिट्स ब्लू फॉक्स गोल्डन जैकल्स अल्बानो क्रोकोडाइल्स पाइथन एलिफेंट जिराफ हेयर बीवर्स जैसे से 2 बिलियन जानवर इन शॉर्ट इंडिया पाकिस्तान बांग्लादेश नेपाल और श्रीलंका की कंबाइन टोटल पॉपुलेशन से भी ज्यादा जानवरों को हर साल मार दिया जाता है सिर्फ फैशन के नाम पर डिड यू नो दैट एंड प्रॉब्लम सिर्फ जानवरों की नहीं है एवरी ईयर ये प्रोडक्ट्स बनाने वाली फैक्ट्रीज में बहुत सारे इंसान भी मारे (01:51) जाते हैं आई नो वेरी शॉकिंग राइट यही एगजैक्टली आज हम डिस्कस करेंगे कि ये लेदर बैग्स ये फर कोट्स हमारे बुलेन स्वेटर्स ये सारे प्रोडक्ट्स जो लाखों करोड़ों में बिकते हैं इनकी मैन्युफैक्चरिंग की असलियत क्या है एंड ट्रस्ट मी एक बार आपने इनकी असलियत जान ली ना आप इन ब्रांड्स को कभी छुओ ग तक नहीं नाउ ऑफकोर्स हम ये भी डिस्कस करेंगे कि इन प्रोडक्ट्स के अल्टरनेटिव सॉल्यूशंस क्या है इसमें एक इंडियन स्टार्टअप ने इसका एक काफी यूनिक इन्वेंशन निकाला है जिसमें वो कोकोनट के वाटर से लेदर बनाते हैं कुछ स्टार्टअप्स तो पाइनएप्पल के लीव से भी लेदर बना रहे (02:21) हैं और इनके लेदर बैग्स में आप बिल्कुल भी फर्क नहीं बता पाओगे लेकिन ये बनते कैसे हैं लेट्स डिस्कस दैट सो इंट्रो में हमने इन सारे प्रोडक्ट्स के रेट्स डिस्कस किए थे बराबर चलो अब उसके पीछे का रीजन डिस्कस करते हैं इफ यू लुक क्लोजल ये सारे के सारे आइटम्स एग्जॉटिक लेदर के हैं व्हिच मींस ये काफी रेयर एग्जॉटिक और एंडेंजर्ड एनिमल्स की स्किन से बनते हैं पराडा के ये शूज क्रोकोडाइल की स्किन से योर का ये बैग ऑस्ट्रिच की स्किन से गुची का ये बैग पाइथन की स्किन से एंड बर्किन का ये न करोड़ का बैग क्रोकोडाइल और एलीफेंट की स्किन से बना है एंड दुनिया का सबसे महंगा (02:53) हर्ज का ये बैग रेयर अल्बानो क्रोकोडाइल की स्किन से बना है और ये डिटेल्स मैं अपनी तरफ से नहीं दे रही हूं हां ये बात तो खुद बहुत ही प्राउडली इन सारे ब्रांड्स की ऑफिशियल वेबसाइट पे प्रोडक्ट्स के साथ ही दी गई है अब चलो ये तो हुई एग्जॉटिक लेदर की बात बट व्हाट अबाउट नॉर्मल लेदर जो हम जैसे कॉमन लोग भी यूज करते हैं फ्रॉम क्लोथ्स टू आवर पसेस टू बेल्ट्स सो देखो यूजुअली दुनिया के टोटल लेदर का 65 पर लेदर यूजुअली बीफ यानी कि काउ या फिर बफेलो से बनता है एंड बाकी का लेदर पिग्स गोट्स और बाकी सारे एनिमल्स की स्किन से बनता है लेकिन एग्जॉटिक एनिमल्स के लेदर (03:24) का परसेंटेज काफी ज्यादा छोटा होता है इसलिए तो ये काफी एक्सपेंसिव भी होते हैं लेकिन हां इन सारे लेदर का प्रोसेस बिल्कुल सेम ही होता है पहले एनिमल्स को एनिमल फार्म्स में ब्रीड किया जाता है फिर वहां से इनकी स्किन निकालकर उन्हें टैनिंग फैक्ट्रीज में भेजा जाता है जहां उनके स्किन को बहुत ही हार्श केमिकल से ट्रीट किया जाता है ताकि वो डीकंपोज नहीं हो सके फिर इन टेनरी से ये लेदर चले जाता है गुची लुई विटोन डिओर और हर्ज जैसे कंपनीज के पास जहां पर फिर वो इन्हें पेंट करके सू वगैरह करके इनके प्रोडक्ट्स बनाते हैं आई नो सुनने में बहुत सिंपल लगता है ना लेकिन (03:54) इसकी मेन प्रॉब्लम है ये एनिमल फार्म्स लेदर के लिए काव जैसे और भी जानवरों को रखा जाता है कैटल फार्म्स में ज वहां पे हजारों जानवरों को एक छोटी सी जगह में भर दिया जाता है वहां चलना तो छोड़ दो ढंग से हिलने की भी जगह नहीं होती है लेकिन हद तो तब हो जाती है जब थोड़ी और जगह बनाने के लिए ना बहुत बार बिना एनेस्थीसिया दिए इनके सींग कार्ड दिए जाते हैं जो काउस के लिए बहुत ज्यादा पेनफुल हो जाते हैं एंड काफी सारे केसेस में तो ये तक देखा गया है काउस के छोटे-छोटे काफ्स को यानी बछड़ों को सिर्फ इसीलिए मार दिया जाता है क्योंकि (04:22) उनकी स्किन से ये फैशन कंपनीज एक स्पेशल काफ स्किन प्रोडक्ट्स बनाती है और महंगे दामों में उनको बेचा जाता है अकॉर्डिंग टू पेटा बहुत बार तो प्रेग्नेंट काउस को भी मारकर उनके अनबन काफ को भी लेदर बनाने के लिए यूज किया जाता है एंड काफी बार तो जिंदा रेप्टाइल्स के स्किन को ही निकाल दिया जाता है रिसेंटली पेटा ने इंडोनेशिया के एक एनिमल फार्म में एक स्टिंग ऑपरेशन कंडक्ट किया था जो फार्म गुची और लई विट को एनिमल स्किन सप्लाई करता था अगर आपने उस फार्म में एनिमल्स को कैसे ट्रीट कर रहे हैं वो देख लिया ना आपका दिल सहम [संगीत] जाएगा लेकिन इसमें सबसे बड़ी आयर नहीं है (05:00) हमारे सेलिब्रिटीज की हिपोक्रिटस आलिया भट्ट को काफी बैकल श मिला था जब उसने एक तरफ पोचर सीरीज को प्रोड्यूस किया था आई एम सेइंग दिस फर्स्ट हैंड लिटरली विटनेसिंग माय डॉटर ग्रू अप अराउंड एनिमल्स एंड शी हैज लाइक अ नेचुरल लव एंड एक्साइटमेंट अराउंड देम माय लव फॉर एनिमल्स स्टार्टेड एज अ चाइल्ड अ वेर वी यूज टू रेस्क्यू किटेंस एंड यू नो लेकिन दूसरी तरफ वो गोची की ग्लोबल एंबेसडर है जो प्राउडली एग्जॉटिक एनिमल्स की स्किन के प्रोडक्ट्स बेचता है बहुत ही प्राउड और भाई हद तो तब हो गई जब एक दिन आलिया ने स्पीक फॉर एनिमल की ये वाली टीशर्ट पहनी (05:31) थी और उसी के साथ उसने गुची का ये लेदर बैग कैरी किया था जो प्योर 100% लेदर का बना था बट देखो ऑफकोर्स ये तो एक्टर्स की पर्सनल चॉइस है कि उन्हें किन चीजों के साथ एसोसिएटेड रहना है या नहीं रहना है हम सिर्फ अपना पर्सनल ओपिनियन दे सकते हैं लेकिन गौर करने वाली बात तो यह है कि ये ब्रांड्स इतने महंगे दामों पे अपने प्रोडक्ट्स कैसे बेच लेते हैं सिर्फ आलिया भट्ट तो इसका रीजन नहीं हो सकती ना वेल इसके पीछे एक बड़ा रीजन है डेटा एंड टेक्नोलॉजी डेटा एनालिसिस एंड एल्गोरिथम्स का यूज करके ये ब्रांड्स अपनी ऑडियंस को बराबर टारगेट करते हैं और उनकी पसंद और (05:59) नापसंद दोनों को समझ समझते हैं और ये एक बहुत इंपॉर्टेंट इंफॉर्मेशन होता है कंज्यूमर्स का फॉर ब्रांड्स एंड दिस इज एगजैक्टली व्हाई ये स्किल आज का मोस्ट इन डिमांड प्रैक्टिकल स्किल है जो हमें स्कूल्स और कॉलेजेस में कभी नहीं पढ़ाया जाता लेकिन जरूरत ही क्या है आज तो हमारे पास स्केलर जैसा एक प्लेटफार्म है जहां आप उन एक्सपर्ट से सीख सकते हो जो खुद google2 मेंटरशिप भी मिलती है और वहां आपको मॉक इंटरव्यूज की तैयारी भी करवाई जाती है तभी तो आज तक ओवर 93. (06:27) 5 पर लर्नर्स को amazon's भी मिल चुकी है विथ 150 मीडियन सैलरी हाइक स्केलर आपको फ्री लाइफ मास्टर क्लास भी ऑफर करता है और इनके ऑनलाइन प्रोग्राम्स भी होते हैं जहां पे आप सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट डेटा साइंस और मशीन लर्निंग जैसे स्किल्स भी सीख सकते हो सो टू टेक अ स्टेप टुवर्ड्स ट्रांसफॉर्मिंग योर करियर आप स्केलर पे अभी ही एक फ्री लाइफ क्लास भी बुक कर सकते हो द लिंक इज इन द डिस्क्रिप्शन नाउ कमिंग बैक टू लेदर मैन्युफैक्चरिंग डिड यू नो टोटल लेदर का 65 बीफ लेदर होता है और इंडिया जिस देश में गायों को गौ माता का द दिया जाता है अनफॉर्चूनेटली वही इंडिया बीफ लेदर का (07:03) बिगेस्ट प्रोड्यूसर है एंड ओवरऑल लेदर प्रोडक्शन में भी इंडिया दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा देश है इजन दिस सो हार्ट ब्रेकिंग नॉर्मल से दिखने वाले ये लेदर बैग्स के पीछे जानवरों का इतना दर्द छुपा है एंड ये तो हुई सिर्फ एनिमल्स की बात लेकिन यू विल बी शॉक्ड टू नो कि इस एनिमल स्किन को लेदर में कन्वर्ट करने में बहुत बार इंसानों की भी जान जाती है सो एनिमल स्किन की लेदर में कन्वर्जन के प्रोसेस को टैनिंग कहते हैं जिसमें स्किन को डीकंपोज होने से रोकने के लिए काफी हैवी केमिकल्स यूज किए जाते हैं जैसे क्रोमियम एंड सोडियम सल्फाइड बट प्रॉब्लम ये है कि ये (07:44) सारे केमिकल्स कार्सिनोजेनिक होते हैं यानी कि कैंसर कॉज करने वाले लीथल केमिकल्स होते हैं इसीलिए अब समझ जाओ इन टैन में काम करने वाले ये वर्कर्स का कितना बुरा हाल होता होगा केमिकल टॉक्सिन वर्कर्स में स्किन और ब्रीदिंग इश्यूज होना तो एकदम कॉमन है लेकिन कई केसेस में तो इन वर्कर्स की इंस्टेंट डेथ भी हो गई है जैसे एक काफी दर्दनाक केस हुआ था तमिलनाडु की जिलानी टैंडी में 32 साल के रामू के साथ एक दिन रामू सुबह घर से तो टनरीडिंग रामू टनरीडिंग हो गई नेक्स्ट बात करते हैं फर बेस्ड आइटम्स की जो मोस्टली फेंडी जैसे (08:30) कंपनीज बनाती है जैसे फेंडी का ये कोट ले लो जो कि स्क्विरल फर से बना है या फिर फेंडी का ही ब्लू फॉक्स का ये फर फिर मिंग्स रैबिट्स बीवर्स और बेयर्स के भी फर्ज यूज किए जाते हैं टू मेक क्लोथ्स नाउ जैसे मैंने इंट्रो में भी बताया था कि हम मेकअप ब्रशस यूज करते हैं मैट्रेस कारपेट्स और डो मैट्स खरीदते हैं तो कई बार उनमें भी ये एनिमल फर्स का यूज होता है मोस्टली एनिमल्स जिनका फर यूज होता है वो वाइल्ड एनिमल्स ही होते हैं जिन्हें ट्रैपिंग से पकड़ा जाता है या फिर अल्टरनेट ऑप्शन ये है कि लेदर की ही तरह फर फार्म्स में इन एनिमल्स को रेज किया (08:58) जाता है इन्हें ब्रीड किया जाता है है लेकिन पहले हम बात करते हैं ट्रैपिंग की जिस क्रूअल टेक्नीक से हर साल अमेरिका में 5 मिलियन जानवरों को पकड़ा जाता है और यूजुअली ये तीन तरह के ट्रैप्स यूज किए जाते हैं पहला स्टील जॉ लेग होल्ड ट्रैप ये स्पेशली यूज किया जाता है रैबिट्स जैकल वुल्फसबर्ग करके जंगलों में छोड़ दिया जाता है जहां से नॉर्मली एनिमल्स पास होते हैं और जब वो इस पर पैर रखते हैं तो इस ट्रैप में उनके पैर फंस जाते हैं अब प्रॉब्लम ये है कि कई बार हंटर्स एंड ट्रैप्स को रखकर हफ्तों के बाद वापस आते हैं सो तब तक वो जानवर उसी में फंसे रहते (09:32) हैं और स्टार्वेशन की वजह से वो तड़प-तड़प के मर जाते हैं और कई जानवर तो इससे बचने के लिए अपना हाथ खुद ही काट कर निकल जाते हैं सेकंड ट्रैप इज स्नेयर्स लेग होल ट्रैप की तरह भी इस ट्रैप को जंगल में प्लेस किया जाता है जिसको एक तरफ से ट्री के एक बाग से बांध देते हैं और दूसरे साइड से खुला छोड़ देते हैं जब भी रैबिट बेर या कोई भी एनिमल यहां से निकलता है तो उनकी गर्दन इसमें फंस जाती है एंड जितना ज्यादा वो निकलने की कोशिश करता है ये उतना ज्यादा टाइट हो जाता है इवेंचर द एनिमल टू डेथ तीसरा है कॉनी बेड जो मोस्टली पानी में यूज होता है इसको शैलो वाटर्स में (10:02) किसी नैरो ओपनिंग पर प्लेस कर दिया जाता है एंड जब भी कोई मिंक या फिर बीवर जैसा जानवर रकून जैसा जानवर इसके थ्रू निकलता है तो ये ट्रैप क्लोज हो जाता है जिससे उस एनिमल का फेस इसमें ट्रैप हो जाता है और वो पानी में डूब के मर जाता है अब ऑफकोर्स कई सारे लेदर फार्म्स की तरह फर फार्म्स में भी एनिमल्स को फर के लिए रेयर किया जाता है लेकिन यहां की सबसे बड़ी प्रॉब्लम ये है कि इन फार्म्स में एनिमल्स को खुला नहीं छोड़ा जाता उन्हें उनकी पूरी जिंदगी सिर्फ एक छोटे से पिंजरे में रखा जाता है अब क्योंकि क्योंकि ये बीवर्स और रकून (10:31) जैसे जानवरों को खुले में घूमने की आदत होती है तो उन्हें लंबे समय तक छोटे-छोटे पिंजर में कैद रखने से वो मेंटली पागल हो जाते हैं उन्हें डिप्रेशन हो जाता है और कई केसेस में तो यह भी देखा गया है कि वो जानवर खुद को ही मारने लग जाते हैं फिर इसके बाद जब उन्हें मारने की बारी आती है तो उसमें भी काफी क्रूअल तरीकों से इन्हें मारा जाता है जैसे उनके रेक्टम से उन्हें इलेक्ट्रिक कर दिया जाता है कहीं पर उन्हें सस्ती गैसेस के थ्रू इंटॉक्सिकेट करके मार दिया जाता है और किसी-किसी केस में तो अनफॉर्चूनेटली दे आर ल् सो स्किन अलाइव एंड बहुत बार तो बर्ड्स जिनको फर या (11:03) फिर फेदर्स के लिए यूज किया जाता है उनके फेदर्स को मैनुअली बहुत ही पेनफुली प्लक किया जाता है ताकि वह वापस से रिग्रोगिग देशों में तो इन जानवरों के जगह पर डॉग्स और कैट्स को मार-मार कर उनके फर्स को दूसरे एनिमल्स के फर के नाम पर बेचा जाता है टू दीज बिग कंपनीज जो भी इससे सस्ते में खरीद लेती है टू मैक्सिमाइज देयर प्रॉफिट्स इसीलिए तो मैं आपको इंट्रो में बता रही थी कि कई बार हमें पता भी नहीं चलता है कि जो फर हम यूज कर रहे हैं वो आर्टिफिशियल है या कोई जानवर से आया है और किस जानवर से आया है लेकिन मेरी समझ में नहीं आता कि हमें ये सब चीजें करने की (11:36) जरूरत ही क्या है जब हमारे पास इनके इतने अच्छे अल्टरनेटिव्स अवेलेबल है स्पेशली लेदर के फर्स्ट अल्टरनेटिव कैक्टस लेदर जो कैक्टस से बना जाता है एंड अकॉर्डिंग टू मेनी यूजर्स वो एनिमल लेदर और कैक्टस लेदर में डिफरेंस भी नहीं पता पाते हैं बेसिकली ये लेदर बनता है कैक्टस की लीव्स से जहां लीव्स को ड्राई करके उनके फाइबर और प्रोटींस को एक्स्ट्रिया जाता है फिर इन एक्सट्रैक्टेड मटेरियल को कॉटन के साथ कंबाइन करके लेदर में कन्वर्ट किया जाता है इन फैक्ट इट इज सरप्राइजिंग कि कैक्टस लेदर इज मोर सस्टेनेबल देन नॉर्मल लेदर और मेक्सिको जैसे कंट्रीज में तो कैक्टस को (12:06) इसी के लिए ग्रो किया जाता है वहां एक पूरी इंडस्ट्री खड़ी हो चुकी है इसकी सेकंड अल्टरनेटिव मलाई जो कि एक इंडियन कंपनी ने शुरू किया है जहां पर वो कोकोनट वाटर को यूज़ करके लेदर बना रहे हैं यस कोकोनट वाटर इस प्रोसेस में कोकोनट वाटर को फर्मेंट किया जाता है जिससे उसमें सेल्यूलोज की फॉर्मेशन भी होती है व्हिच इज देन लेटर कन्वर्टेड इन टू लेदर एंड इट इज इक्वली फैशनेबल लाइक नॉर्मल लेदर थर्ड अल्टरनेटिव पीनटेक्स ये लेदर बनाया जाता है पाइनएप्पल लीव्स से जहां पे पाइनएप्पल लीव्स के फाइबर्स को यूज करके लेदर में कन्वर्ट किया जाता है एंड अभी तो पूमा और (12:35) नाइकी जैसे कंपनीज भी इस लेदर को यूज कर रहे हैं अपने शूज बनाने के लिए नाउ फर के अल्टरनेटिव्स के लिए हमारे पास फोक्स फर भी अवेलेबल होता है जो कि प्लांट्स लाइक मिल्क वुड और हेम से बनाया जाता है इनफैक्ट बहुत सारी बड़ी-बड़ी कंपनीज भी जैसे कि बंसिया भी इन फर्स को यूज करना स्टार्ट कर चुकी है व्हिच इज हाईली अप्रिशिएबल बट मा पॉइंट इज कि मुझे बताओ ये कंपनीज ये सब कर क्यों रही है हमारे लिए जब तक मार्केट में ऐसे लोग रहेंगे जो इन प्रोडक्ट्स को खरीद हैं खरीदते छोड़ो इनके लिए प्रीमियम पे करते हैं लाखों करोड़ों रुपए तब तक ये कंपनीज एनिमल (13:05) क्रुएलिटी करते रहेंगी इसीलिए द पावर इज इन आवर हैंड तो हमें सबसे पहले तो इन प्रोडक्ट्स को खरीदना अब्सोल्युटली बंद कर देना चाहिए और दूसरी बात हमें इन प्रोडक्ट्स के खिलाफ आवाज उठानी चाहिए ताकि फैशन के नाम पर मासूम जानवरों की किलिंग बंद हो सके और हां जाने से पहले डोंट फॉरगेट टू टेक अ स्टेप टुवर्ड्स ट्रांसफॉर्मिंग योर करियर आप स्केलर पर जाके अभी ही एक फ्री लाइफ क्लास भी बुक कर सकते हो द लिंक इज इन द डिस्क्रिप्शन
Transcript: (00:00) इसी साल 2024 में ही वड़ोदरा की एक लेडी हॉस्पिटल आती है क्योंकि उसके फेस पे बड़े-बड़े डार्क ब्लैक स्पॉट्स पड़ गए थे डायग्नोसिस के दौरान पता चला कि वो पिछले एक साल से एक स्किन वाइटिंग क्रीम यूज़ कर रही थी जिसने उसके स्किन को गोरा बनाने की जगह पे पैराडॉक्सिकली डार्क बना दिया एंड ये कोई इकलौता केस नहीं है किसी के चेहरे पे बर्न मार्क्स आके ब्लिस्टर्स पड़ चुके हैं तो किसी को डीप टिशू डैमेज हो चुका है कोई प्रोडक्ट में हाई लेवल्स ऑफ एसिड की वजह से किसी के स्किन पे पिंपल्स एग्रावेट्स प्रोडक्ट से कैंसर तक हो चुका है बट इन सबके बावजूद क्योंकि आजकल हमारे (00:34) इंडियन मार्केट में इतने सारे वियर्ड कॉस्मेटिक और स्किन केयर प्रोडक्ट्स आ चुके हैं कि हमें ऑलमोस्ट फोमो होने लग जाता है कि हम ये प्रोडक्ट्स क्यों नहीं यूज कर रहे हैं इसीलिए आज हम डिस्कस करेंगे कुछ ऐसे ही बहुत ही वायरल इंटरनेट ब्यूटी ट्रेंड्स के बारे में जो लिटरली आपकी स्किन को एवरी डे पॉइजन कर रहा है डैमेज कर रहा है लेकिन इसके बारे में हमें पता ही नहीं है लेट्स स्टार्ट विथ अ फर्स्ट प्रोडक्ट स्किन लाइटनिंग क्रीम्स सो इंटरनेशनल जर्नल ऑफ एडवांसेज इन मेडिसिन में एक केस पब्लिश्ड है 39 इयर्स ओल्ड की एक लेडी का जो अपने ब्यूटीशियन के (01:04) कहने पर एक 4 पर हाइड्रो क्योन बेस्ड स्किन वाइटिंग क्रीम डेली यूज कर रही थी फेयर होने के लिए लेकिन इससे पैराडॉक्सिकली उसके स्किन में डार्क ब्लैक स्पॉट्स पड़ने लग गए सेम ऐसा ही ये केस था 55 इयर्स ओल्ड वड़ोदरा की एक लेडी का जो पिछले ती महीनों से हाइड्रो किनन बेस्ड स्किन वाइटिंग क्रीम यूज कर रही थी जिस वजह से उसकी स्किन में भी ब्लैक निंग होने लग गया था आपको ऐसे कई सारे रिसर्च पेपर्स मिल जाएंगे जिनमें ऐसे सारे केसेस मैं मेंशन है लेकिन सब में एक ही कॉमन केमिकल है हाइड्रो किनो यह कंपाउंड प्रोब्लेमे िक इसके लिए है क्योंकि ये आईडियली तो स्किन (01:37) लाइटनिंग के लिए ही यूज होता है बट इसके प्रोलों यूसेज से इसका एक काफी पैराडॉक्सिकल सा इफेक्ट हो जाता है ये स्किन में डार्क स्पॉट्स डेवलप करने लग जाता है जिसे मेडिकली ऑक्रोनोसिस कहते हैं ऐसा इसलिए होता है क्योंकि आमतौर में हमारे स्किन की नेचुरल एक्टिविटीज की वजह से स्किन में एक एसिड होमो जेंटस एसिड क्रिएट होता है जिसका कलर डार्क ब्लू ब्राउन सा ही होता है लेकिन नॉर्मली स्किन में रेगुलरली होमोजेनेट सिक ऑक्सीडेस नाम का एक एंजाइम भी प्रोड्यूस होता है जो इस एसिड को न्यूट्रलाइज कर देता है जिस वजह से हमारे स्किन पे ये डार्क ब्लू डार्क (02:10) ब्राउन स्पॉट्स नहीं दिखते हैं बट प्रॉब्लम तब आती है जब कोई पर्सन हाइड्रोकल बेस फेयरनेस क्रीम्स का प्रोलों यूसेज करता है तब ये केमिकल सनलाइट की वजह से ऑक्सीडो के काफी सारे रिएक्टिव केमिकल कंपाउंड्स प्रोड्यूस करने लग जाता है ये कंपाउंड फिर स्किन में मौजूद होमो जेंटस ऑक्सीडेस को ब्लॉक कर देता है इससे स्किन में होमो जेंटस एसिड हाई क्वांटिटी में बिल्ड अप होने लगता है रिजल्टेंट स्किन में ब्लैक निंग और डार्क स्पॉट्स क्रिएट होना स्टार्ट हो जाते हैं हाइड्रो किनन के इसी डेंजरस इंपैक्ट की वजह से अप्रैल 2019 से ही इंडियन गवर्नमेंट ने इसका ओवर द (02:40) काउंटर में सेल बैन कर दिया था बट इसके बावजूद हाइड्रो क्योन बेस्ड क्रीम्स इंडिया में ओपनली बिकते हैं नेक्स्ट एक कॉस्मेटिक प्रोसीजर है कॉल्ड एज माइक्रोनीडलिंग जो भी आजकल काफी ज्यादा पॉपुलर हो रहा है विद सेलिब्रिटीज लाइक कार्डशिट डूइंग इट एट होम बट कई केसेस में ऐसा देखा गया है कि जब लोगों ने इसे ुत से घर पे ट्राई किया किया तो उन्हें स्किन में डीप टिश्यू डैमेज हो गया बेसिकली इस प्रोसीजर से माइक्रो नीडल से स्किन में कई सारे माइक्रो पंक्चर्स किए जाते हैं जिससे स्किन को लगता है ओ इतने सारे वड्स हो गए हैं तो मुझे इस एरिया में एक्सेस में (03:12) कॉलेजन इलास्टिन और ब्लड सप्लाई करना पड़ेगा ताकि वहां की स्किन हील हो सके सो इस वजह से जो न्यू स्किन सेल्स वहां पे ग्रो होते हैं वो अगेन ज्यादा हेल्दी यूथ फुल और ग्लोइंग होते हैं एज कंपेयर्ड टू द प्रीवियस डल एंड नैमेज सेल्स इस पूरे प्रोसीजर में आपके माइक्रो नीडल्स का डेप्थ काफी इंपॉर्टेंट होता है यू एफडीए ने इसे ओवर द काउंटर यानी कि होम ट्रीटमेंट्स के लिए पहले तो बैन कर रखा है दूसरी बात मेडिकली अगर आपको ये ट्रीटमेंट करवाना है तो यूजुअली डॉक्टर्स रिकमेंड करते हैं कि 5 एए डेप्थ के माइक्रो नीडल्स ही यूज़ किए जाए वो भी प्रोफेशनल क्लिनिकल (03:43) सेटअप में ही क्योंकि इससे ज्यादा डेप्थ वाले नीडल्स अगर आप बिना किसी प्रोफेशनल हेल्प के यूज़ करते हो तो आपके स्किन के ये डीपर लेयर्स में जाकर और गहरा डैमेज कॉज कर सकते हैं डीप ब्लड कैपिलरीज को भी बर्स्ट कर सकते हैं लेकिन इंडिया में 5 एए तो छोड़ दो 1.5 एए तक के डर्मा रोलर्स भी amazonaws.com पिगमेंटेशन सो नो नो (04:31) माइक्रो नीडलिंग और डर्मरोलर एट होम इट्स नॉट अ होम डिवाइस एक्चुअली जितने भी कॉस्मेटिक प्रोसीजर्स अभी तक हमने डिस्कस किए ये सब मेजर्ली ना स्किन की एजिंग को कम करने के लिए और जैसे एक हेल्दी स्किन में एक यूथ फुल बाउंस और ग्लो आता है तो वो इफेक्ट अचीव करने के लिए ऐसे हाई एंड प्रोडक्ट्स को यूज किया जाता है बट कई बार ये प्रोडक्ट्स काफी ज्यादा रिस्की भी होते हैं एंड अगर आप साइंटिफिकली भी देखोगे ना कि हमारी स्किन डल ड्राई ड्रुपी क्यों होती है तो इसके पीछे एक मेजर रीजन होता है डिक्रीज इन द क्वांटिटी ऑफ कॉलेजन कॉलेजन बेसिकली हमारे स्किन का एक स्टार (05:03) इंग्रेडिएंट्स जैसे कि बोन स्किन मसल्स टेंडेंस लिगामेंट्स इन सब में पाया जाता है एज देर मेजर बिल्डिंग ब्लॉक ये आपके स्किन के नीचे जो टिशूज की लेयर होती है ना उसे टाइटली पकड़ के रखता है जिससे स्किन टाइट और फर्म लगती है इसीलिए आप देखोगे कि जैसे-जैसे एक पर्सन की एज बढ़ती जाती है उसके बॉडी में कॉलेजन डिग्रेड होने लग जाता है इससे स्किन को वो सपोर्ट देने वाले मसल्स भी डिग्रेड हो जाते हैं और रिजल्टेंट चेहरे पे सैगिंग ड्राइनेस डार्क स्पॉट फाइन लाइंस और रिंकल्स पड़ने लगते हैं रिसेंटली एक स्टडी भी कंडक्ट की गई थी जिसमें कुछ टेस्ट सब्जेक्ट्स को कॉलेजन (05:35) सप्लीमेंट्स ओरली खाने को दिए गए थे और रिजल्ट ये मिला कि उन सब्जेक्ट्स के स्किन काफी ज्यादा हेल्दी और ग्लोइंग हो गई थी क्योंकि कॉलेजन की एक और खासियत यह भी है कि ये आपके स्किन में मॉइश्चर को रिटेन करके उसे हाइड्रेटेड रखता है जिससे उन सब्जेक्ट्स के स्किन की इलास्टिसिटी भी ड्रास्ट्रिंग स्किन डार्क स्पॉट्स या रिंकल्स वगैरह की प्रॉब्लम्स के लिए कॉलेजन सप्लीमेंट्स रिकमेंड करते हैं जैसे कॉलेजन कैप्सूल्स लिक्विड्स या फिर पाउडर्स इसमें मरीन कॉलेजन क्योंकि स्मॉलर पार्टिकल्स का बना होता है तो स्टडीज में यह भी देखा गया है (06:06) कि उसका अब्जॉर्प्शन रेट बाकी कॉलेजन सप्लीमेंट से 1.5 टाइम्स ज्यादा बेहतर होता है सो अगर आप भी मरीन कॉलेजन पाउडर को यूज करना चाहते हो तो एचके वाटल्स का कॉलेजन विद विटामिन सी ई एंड बायोटिन एक मरीन कॉलेजन पाउडर ही है जिसमें रियल कॉलेजन पेप्टाइड्स मौजूद है जो आपके स्किन में लॉस्ट कॉलेजन की कमी पूरा करके स्किन की इलास्टिसिटी इंक्रीज करता है इसके की इंग्रेडिएंट्स है विटामिन सी ई एंड हैलरो निक एसिड जो आपके स्किन को हा टेड एंड मॉइश्चराइज रखते हैं ताकि आपके स्किन में एक स्मूथ और इवन ग्लो आए एंड ऑफकोर्स इसे दोनों मेल्स एंड फीमेल्स दोनों भी कंज्यूम (06:36) कर सकते हैं मिड 20 से आप इसे अपने डाइट का एक पार्ट बना सकते हो दिस फॉर्मूला इज आल्सो क्लिनिकली प्रूवन जिस रिसर्च में ही पाया गया था कि इसे कंसिस्टेंटली 8 वीक्स तक लेने से स्किन में फाइन लाइंस रिंकल्स एंड डलनेस कम हो जाएगी जस्ट टेक वन स्कूप ऑफ पाउडर मिक्स इट इन वाटर एंड ड्रिंक इट एवरी डे एच के वाटल्स कॉलेजन का टेस्ट भी काफी अच्छा है ऑरेंज फ्रूटी सा फ्लेवर है इसका लेकिन इसमें जीरो एडेड शुगर है एंड नो साइड इफेक्ट्स सो अगर आप भी डल स्किन डार्क स्पॉट से सफर कर रहे हो या फिर आप सिर्फ एक हेल्दी यूथ फुल ग्लोइंग स्किन (07:03) चाहते हो तो डेफिनेटली कंसीडर ट्राइट एचके वाटल्स कॉलेजन विद विटामिन सी ई एंड हैलरो निक एसिड फॉर योर एवरीडे ब्यूटी पहले इसकी पैकेजिंग कुछ ऐसी थी बट नाउ इट कम्स इन अ न्यू पैक यू कैन चेक दिस प्रोडक्ट ऑन hk.co एंड यूज़ माय कूपन कोड निकता 10 फॉर एडिशनल डिस्काउंट्स लिंक इज इन द डिस्क्रिप्शन नेक्स्ट प्रोडक्ट है केमिकल पील्स ये इमेजेस देख रहे हो किसी में पेशेंट के स्किन में बर्न मार्क्स ब्लिस्टर्स पड़ गए हैं किसी के स्किन में डीप स्कार्स आ चुके हैं तो किसी को हाइपर पिगमेंटेशन हो चुका है एनसीबीआई में पब्लिश्ड एक रिसर्च पेपर में क्लियर मेंशन (07:33) है कि ये सारे केसेस केमिकल पील्स के कॉम्प्लिकेशंस के वजह से हुए हैं जो आजकल काफी ज्यादा पॉपुलर हो रहा है अगेन एट होम ट्रीटमेंट्स के लिए इन पील्स में मोस्टली ग्लाइकोलिक एसिड ट्राई क्लोरो एसिटिक एसिड साइलस क्लिक एसिड लैक्टिक एसिड या फिर कार्बोलिक एसिड जैसे केमिकल्स को डिफरेंट कंसंट्रेशन में फेस नेक और आर्म्स वगैरह में लगाया जाता है जिससे स्किन का फर्स्ट लेयर बर्न होके पील ऑफ हो जाए ताकि जो न्यू लेयर आए स्किन की वो अगेन ज्यादा सॉफ्ट यूथ फुल और ब्राइट हो नाउ अगर यह ट्रीटमेंट एक ट्रेन डॉक्टर द्वारा करवाया जाता है तो इससे फाइन लाइंस एक्ने माइल्ड (08:05) स्कारिंग डार्क पैचेज डल स्किन वगैरह में एक रिडक्शन देखने मिला है बट इसकी सबसे बड़ी प्रॉब्लम ये है कि काफी सारे केमिकल पील्स ओवर द काउंटर मिल रहे हैं जिसमें काफी हाई कंसंट्रेशन ऑफ एसिड्स है जैसे कि टीसीए ट्राई क्लोरो एसिटिक एसिड एक्चुअली केमिकल पील्स मोस्टली तीन से चार इंटेंसिटीज के मिलते हैं जिसमें से इंडियन जर्नल ऑफ डर्मेटोलॉजी में मेंशन है कि सिर्फ लाइट यानी कि सुपरफिशियल पील्स ही इंडियन स्किन टोन के लिए सेफ है मीडियम पील्स ऑफकोर्स काफी ज्यादा प्रिकॉशन के साथ प्रोफेशनल सेटअप में यूज किया जा सकता है स्पेशली डार्क स्किन पेशेंट्स में ये (08:36) अवॉइड करना चाहिए और डीप पील्स आर एब्सलूट नॉट रेकमेंडेड फॉर इंडियंस बट हमारे देश में ये डीप पील्स जिनमें टीसी एसिड की कंसंट्रेशन 50 पर से भी हाई होती है वो भी एकदम इजली ओवर द काउंटर मिल जाता है इंडियन स्किन टोन और स्पेशली डार्क स्किन टोन को इसको अवॉइड करने के लिए इसलिए कहा गया है कि जो टीसी एसिड होता है वो स्किन के हाई कंसंट्रेशन ऑफ मेलेनिन के साथ इजली रिएक्ट करके के ऐसे काफी सारे कॉम्प्लिकेशंस कर लेता है इसीलिए उसी रिपोर्ट में ये भी मेंशन है कि सिर्फ एक डॉक्टर विद अ पोस्ट ग्रेजुएट डिग्री इन डर्मेटोलॉजी ही ट्रेड है ऐसे केमिकल (09:09) प्रोसीजर्स को करने के लिए इसीलिए आपको अपने फिजिशियन के क्वालिफिकेशन पे भी ध्यान देना चाहिए और हमेशा ट्राई करो कि जितना हो सके लो एसिडिक कंसंट्रेशन के केमिकल पील्स ही यूज करो नेक्स्ट प्रोडक्ट है ड्राई शैंपूस जो सुनने में खाफी प्रैक्टिकल लगते हैं आई मीन हम सब जानते हैं लड़कियों को हेयर वॉश करने के लिए घंटे लग जाते हैं जो टाइम हमेशा निकालना पॉसिबल नहीं होता है इसीलिए ये ड्राई शैंपूस एक क्विक इजी और ऑन द गो स्प्रेज होते हैं जिससे आपको सिर्फ अपने ग्रीसी ऑयली हेयर पे स्प्रे कर देना है और उसे अच्छे से स्कैल्प पे मसाज कर लेना है (09:41) इससे विदन मिनट्स आपके बालों में एकदम हेयर वॉश जैसा इफेक्ट आ जाएगा विदाउट एक्चुअली वॉशिंग द हेयर विदाउट इवन टचिंग वाटर टू योर हेयर आई नो सुनने में काफी टेम्टिंग प्रोडक्ट लगता है लेकिन रिसेंटली यूएस के एक इंडिपेंडेंट लेबोरेटरी ने वहां पे बिक रहे कई सारे ड्राई शैंपूस को टेस्ट किया था एंड आप बिलीव नहीं करोगे लेकिन ऑलमोस्ट 70 पर शैंपू में उन्हें हाई लेवल्स ऑफ बेंजीन मिले जो कि एक कार्सिनोजेनिक केमिकल है जो ह्यूमंस में कई टाइप्स के ब्लड कैंसर्स कॉज करता है कई स्टडीज में पाया गया है कि एज लो एज इवन व पीपीएम बेंजीन भी ह्यूमन बॉडी में कैंसर (10:12) डेवलप कर सकता है लेकिन इस रिसर्च में तो उन्हें कई ड्राई शैंपू मिले जिनमें इससे 170 टाइम ज्यादा कंसंट्रेशन ऑफ बेंजीन मौजूद था 170 टाइम ज्यादा इनफैक्ट उन्होंने तो कंप्लीट लिस्ट भी इशू किया था जिसमें उन सारे प्रोडक्ट्स के नेम्स थे जिनमें बेंजीन मौजूद था लेकिन इसमें कई प्रोडक्ट्स आज भी भी इंडियन मार्केट में खुले बिकते हैं मैं पर्सनली उनके नेम्स नहीं ले सकती हूं लेकिन मैं डिस्क्रिप्शन में उसका लिंक अटैच कर लूंगी आप उसे अच्छे से रीड कर सकते हो और अगर आपको प्रोडक्ट्स अवॉइड करने हैं तो आप वो भी कर सकते हो इसके बाद य 11 ने भी अपने चार ड्राई (10:42) शैंपूस को यूएस मार्केट से रिकॉल कर दिया था स्टेटिंग कि इनमें भी बेंजीन की वजह से हाई रिस्क ऑफ कैंसर हो सकता है लेकिन अगेन इन चार ड्राई शैंपूस में से दो तो आज भी हमारे देश में खुला बिकते हैं नेक्स्ट प्रोडक्ट इज ग्लिटर इन कॉस्मेटिक्स ग्लिटर मास्क्स ग्लिटर टयर्स और अभी तो ग्लिटर स्प्रेज भी काफी ज्यादा पॉपुलर हो गया है जिसमें लोग लिटरली अपने फेस पे ग्लिटर स्प्रे कर रहे हैं यस ग्लिटर के छोटे-छोटे पार्टिकल स्प्रे करते हैं फेस पे ताकि उनके फेस पे एक शाइनिंग इफेक्ट क्रिएट हो सके बट दिस इज एक्सट्रीमली रिस्की ग्लिटर का एज सच कोई भी स्किन केर बेनिफिट तो है (11:13) नहीं लेकिन उल्टा कई केसेस में ऐसा देखा गया है कि अगर ग्लिटर का एक सिंगल स्पेक भी किसी की आंख में चला गया तो उनका कॉर्निया सीवियरली डैमेज हो जाता है और इससे कई केसेस में पेशेंट्स ब्लाइंड तक हो गए हैं नेक्स्ट एक प्रोडक्ट है जो आजकल रील्स में काफी पॉपुलर हो रहा है क्लेरिसोनिक ब्रशस यह प्रोडक्ट बेसिकली क्लेम करते हैं कि इससे आपकी स्किन एकदम स्क्की क्लीन हो जाएगी लेकिन सेंसिटिव स्किन पे यूज किया जाए तो यह स्किन के लिए काफी एब्रेजिव हो सकता है और स्पेशली एक्ने प्रोन स्किन के लिए तो यह प्रोडक्ट काफी डेंजरस हो सकता है क्योंकि इसके जो ब्रिसस होते हैं वो एक (11:48) लोकलाइज एक्ने को पंक्चर करके उसके बैक्टीरिया को आपके पूरे फेस पे स्प्रेड कर सकते हैं जिससे हाई चांसेस है कि आपका एक्ने और ज्यादा एग्रावेट्स कॉस्मेटिक प्रोडक्ट को यूज़ नहीं करना चाहिए या फिर हमें फर्क नहीं पड़ना चाहिए कि हम कैसे दिखते हैं दैट इज इंपॉसिबल बट इन ब्रांड्स को इतना पावर मत दो कि आपको रोज बताए कि आप इनके प्रोडक्ट्स के बिना कितने अगली हो डेफिनेटली आप नेचुरली जितना हो सके अपने हेल्थ एंड ब्यूटी पे ध्यान दो ईट हेल्दी गेट इन ऑल द न्यूट्रिएंट्स दैट योर बॉडी रिक्वायर्स बट अनफॉर्चूनेटली ऐसे कई केसेस में देखा गया है कि लोगों ने अपने डार्क (12:21) कॉम्प्लेक्शन अपने हेयर लॉस से अपने एक्नेस से इनसिक्योर होकर सुसाइड जैसा कदम उठा लिया है आज भी जब हम कहते हैं कि अरे हम तो मॉडर्न हो गए हम ब्रॉड माइंडेड हो गए हैं बट आज भी इंडिया में बिकने वाले स्किन केयर प्रोडक्ट्स में से 50 पर से भी ज्यादा स्किन वाइटिंग प्रोडक्ट्स होते हैं % दैट इज ह्यूज बस इसीलिए मेरा कहना यह है कि ये सब कुछ सिर्फ आपके दिमाग में है कि आप अपने आप को किस नजर से देखते हो इनफैक्ट इस पर तो एक काफी इंटरेस्टिंग एक्सपेरिमेंट भी हुआ है यूएस के यूनिवर्सिटी में एक एक्सपेरिमेंट किया गया था जिसमें 27 मेल्स और 21 फीमेल (12:53) पार्टिसिपेंट्स को यह बताया गया था कि उनके फेस पे ना एक स्कार बनाया जाएगा और फिर देखा जाएगा कि क्या लोग उनके स्कार की वजह से उनके साथ डिस्क्रिमिनेट या अलग तरीके से बिहेव करते हैं सारे पार्टिसिपेंट्स के फेस पे पहले स्कार्स बनाए गए और उन्हें मिरर्स में वो दिखाया भी गया बट जैसे ही वो पार्टिसिपेंट्स रूम के बाहर निकलने वाले थे तभी ही उनके जो ब्यूटीशियन थी उन्होंने उनसे कहा कि उनके स्कारर पे हल्का सा टचअप करना है बट टचअप के बहाने से उन्होंने उनके स्कार्स को हटा दिया इसके बाद उन पार्टिसिपेंट्स को जो ये सोच रहे थे कि उनके फेस पे अभी भी वो (13:23) स्कार है उनसे कहा गया कि बाहर रूम में जाओ और बाकी लोगों के साथ इंटरेक्ट करो अब सरप्राइजिंगली एक्सपेरिमेंट के बाद ज्यादा जतर पार्टिसिपेंट्स ने रिपोर्ट किया कि लोग उनके स्कार्स को घूर रहे थे और उनके साथ उनके स्कार की वजह से उनके फेस की वजह से रूड और अगली तरीके से बिहेव कर रहे थे जबकि उनके फेस पे कोई स्कार था ही नहीं मतलब ये सब कुछ ये सारा परसेप्शन सिर्फ उनके दिमाग में था बस इसीलिए आई रिपीट कि ये सब कुछ सिर्फ आपके दिमाग में है कि आप अपने आप को किस नजर से देखते हो आप रोज मिरर के सामने खड़े होकर अपने बारे में क्या सोचते हो इसीलिए जितना हो सके ये (13:57) सारी प्रोडक्ट्स को आप यूज कर सकते हो या नहीं यूज कर सकते हो अल्टीमेटली वो आप हो जो डिसाइड करोगे कि आप कैसे दिखते हो और उसके बेसिस पे आपका दिन कैसा जाएगा आपका कॉन्फिडेंस कैसा रहेगा दैट इज इट इस वीडियो का सिर्फ यही मैसेज था अगर आपको ये वीडियो अच्छा लगा तो प्लीज जितना हो सके अपने फ्रेंड्स और फैमिली में शेयर करना ताकि वो भी इन प्रोडक्ट्स को यूज़ करने से बच सके एंड अगर आपको और भी ऐसे वीडियोस हमारे पसंद आते हैं तो आप हमारा ये दूसरा वाला वीडियो भी चेक आउट कर सकते हो जहां हम डिस्कस कर रहे हैं कि आजकल किस तरीके से काफी काफे पंज जॉब स्कीम्स में लोगों (14:25) को फंसाया जा रहा है और उनके लाखों रुपए ऐठ जा रहे हैं ये वीडियो आप उसको के लिए चेक आउट कर सकते हो मिलते हैं अगले वीडियो में तब तक के लिए जय हिंद